Why Modern Relationships Are Failing | Emotional Healing ft. @Acharya Anita | Shubhankar Mishra
आपने स्पिरिचुअल हीलिंग और लाइफ कोचिंग. शुरू की।. आपको क्या लगता है कि इसकी कितनी आवश्यकता. है? सबसे ज्यादा जरूरत है इंसान को अपने आप को. जानना कि वो चाहता क्या है? खुशी की परिभाषा. खुशी एक स्थिति है। खुशी कुछ पल की हो. सकती है। कुछ दिनों की हो सकती है। ये. निरंतर आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा. देती है।. कोई व्यक्ति जो ईश्वर के करीब है। क्या वो. ज्यादा खुश या ज्यादा संतोषी रहता है? यस। एनर्जीज़ क्या होती है?
यहां पर जानना होगा कि जो डिवाइन एनर्जी. है, कॉस्मिक एनर्जी वो है क्या? हम. परमपिता परमेश्वर भी कर सकते, ईश्वर भी कर. सकते हैं। अनेकों रूप है।. क्या किसी व्यक्ति के एनर्जी से किसी और. व्यक्ति की एनर्जी पर असर पड़ता है? इसी. को स्पिरिचुअलिटी कहते हैं।. कल्चर में अक्सर सुना है बच्चे कहते हैं. कि हम रिलीजियस नहीं है। हम स्पिरिचुअल. हैं।. आपको समझना पड़ेगा रिलीजियस और स्पिरिचुअल. का क्या अंतर है? स्पिरिचुअलिटी सिखाती है. कि आत्मा का परमात्मा से कैसे मिलन हो. सकता है।. आपसी के पीछे बहुत रहते हो। वहां पर सबसे.
बड़ा स्ट्रगल है हार्ट ब्रेक का। कैसे. सेल्फ हील करें वो लोग कि आजकल सबसे बड़ी. समस्या तो हमको लगता है कि नौकरी पढ़ाई के. बाद यही है।. उस दुख को बहने दो क्योंकि दुख जब बहेगा. अपने आप उसका निवारण होने लगेगा। मतलब. बहुत सारे लोग ऐसे होंगे जो जीवन में. अच्छा कर रहे हैं लेकिन उनको समय नहीं. मिला यह बैठ के सोचने का कि वो कौन है।. पैसा आ रहा है, शादी हो गई। उन्हें लगता. है यही खुशियां है।. कोई व्यक्ति चाहता है कि मैं कंफर्ट जोन. में रहूं। मेरी न टू सिक्स जॉब रहे। मैं. संतुष्ट हूं। डिपेंड करता है मनुष्य पर कि. वो किससे खुश है।. कोई आदमी जो स्पिरिचुअली अवेक हो चुका है।.
उसमें क्या अंतर दिखाई पड़ेगा? उसके विचारों में आपको कॉन्फिडेंस दिखाई. देगा। वो कहीं भी जाएगा अपनी पॉजिटिव. एनर्जी से उस एटमॉस्फेयर को भर देगा। जैसे. आजकल शादियां सक्सेसफुल नहीं हो रही। ये. लोग जो आपके पास आते हैं इन्हें क्या सलाह. देते हो आप? एक दूसरे के प्रति समर्पण नहीं है।. विश्वास विश्वास होना चाहिए कि मैं जिसके. साथ हूं मैं सुरक्षित हूं।. कैसे दूर करें स्ट्रेस और नेगेटिविटी? स्ट्रेस हावी कब हो जाता है? लाइफ में एक टाइम ऐसा आता है जब अंदर से. ना घंटी बजती है।.
प्रारब्ध की परिभाषा क्या अगर आप इस जन्म. में कुछ अच्छा कर रहे हो और आपको अच्छा. नहीं मिल रहा है फल तो आपको परेशान होने. की जरूरत नहीं है। क्या जीवन का सबसे बड़ा. डर या दुख अटैचमेंट है? लाइफ में जब तक अटैचमेंट नहीं होगा तब तक. हम काम नहीं कर पाएंगे।. लाइफ का पर्पस क्या है? लाइफ का पर्पस है अच्छे कार्य करो। अपने. आप को जानकर परमात्मा को जानो। जीवन जीने. की कला उसी में है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति. की मदद कर रहे हो जिसको जरूरत है।. इनर पीस कैसे हासिल करें? जब इनर पीस होती. है तो लगता है कि सबका आशीर्वाद हमें मिल.
रहा है। ईश्वर हमारे साथ है।. आज पॉडकास्ट में हमारी मेहमान एक ऐसी. इंसान है जो सिर्फ आध्यात्मिक बातें नहीं. करती बल्कि लोगों की जिंदगी को असल में. बदलती है। वो स्पिरिचुअल मेंटर है, एजुकेटर है, समाज सुधारक हैं। एक मजबूत. आवाज है। देश में सैकड़ों मुफ्त हेल्थ और.
वेलनेस कैंप लगाए। ऐसी गतिविधियां चलाई जो. लोगों के मन भावनाओं, पर्यावरण तीनों को. संतुलन देती है। सर्वाह फाउंडेशन के. संस्थापक के तौर पर उनका काम जो है. प्रेरणादायक है। हम स्वागत करते हैं. आचार्य अनीता जी की।. धन्यवाद। नमस्कार।. कैसी हैं आप? ठीक शुभंकर। हमने आपको मुफ्त शिविर कैंपों. में महिलाओं युवाओं के शक्तिकरण कार्यक्रम. में पर्यावरण संरक्षण में ज्योतिष के. कार्यक्रम में कई अलग-अलग जगह देखा हमने. आपको. यस. लेकिन जो ये आपने स्पिरिचुअल हीलिंग और. लाइफ कोचिंग शुरू की.
आज के दौर में आपको क्या लगता है कि इसकी. कितनी आवश्यकता है क्योंकि हर इंसान ऐसा. लग रहा है कि रेस में भाग रहा है। शुभंकर. आपने सवाल किया कि स्पिरिचुअल हीलिंग और. लाइफ कोच शुरू की। मुझे लगता है यह एक. हिस्सा है लाइफ का। जब मैं बहुत सालों से. कार्य कर रही थी अपने सब अपने लोगों के. साथ. सामाजिक कार्य करते-करते। लगा कि सबसे. ज्यादा है कि अपने आप को जानना। सबसे.
ज्यादा जरूरत है इंसान को अपने आप को. जानना कि वह चाहता क्या है? उसको कैसे. जीना है? कैसे अपनी लाइफ को बेटर कर सकता. है? क्या उसकी जर्नी है? क्या कैसे उसको. जीना चाहिए? समझ ही नहीं पाता। कहीं उलझ सा जाता है।. जैसे आपने सवाल किया कि अपनी यात्रा में. पता ही नहीं चलता कि कहां जाना था और कहां. चला जाता।. मैंने कार्य करते-करते बहुत सालों से यह.
पाया कि मनुष्य अच्छा बनना चाहता है। है. भी अच्छा पर वो खो जाता है। उसको कोई बता. नहीं पाता कि आप अपने विचारों पर ध्यान. दें। अपने आप को स्वयं को जाने। स्वयं को. पहचाने कि आपका टेस्ट क्या है। आप क्या. पाना चाहते हो? आपको किस कार्य में करने. में खुशी मिलती है। आप कैसे बनना चाहते. हो? चाहिए क्या?
इसमें एक मुझे भाव आता है सेल्फ. एक्चुअलाइजेशन। अपने आप को जानो। अब अपने. आप को कैसे जाने? जब आपके पास एक पॉजिटिव एनर्जी होगी। आपके. आसपास एक अच्छा ओरा होगा तभी अपने आप को. जान पाएंगे ना। आप सुखी होंगे, खुश होंगे. तभी अपने आप को जान पाएंगे। जब आप रिलैक्स. रहेंगे तभी अपने आप को जान पाएंगे। अब इसी. पर मेरे कई सारे सवाल आते हैं। हम उस दौर. में जी रहे हैं जहां पर हमारे देश की.
आबादी 140 करोड़ है।. जी।. आपको कुछ भी पाना है आपको बाकी लोगों से. ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी। रोज मेहनत करनी. पड़ेगी। इस मेहनत भरी जिंदगी या जिसको. कहें कि हम सर्वाइवल की लड़ाई में. सर्वाइवल की लड़ाई में इंसान यह भूल चुका. है कि इंसान धरती पर आया क्यों था? लाइफ का पर्पस क्या है? खुशी क्या है? मकसद क्या है जीवन का? लाइफ का पर्पज है अच्छे कार्य करो। अपने.
आप को जानकर परमात्मा को जानो। अब आप. कहेंगे कि अच्छे कार्य क्या है? जिसको. करने में आपको खुशी मिलती हो। जैसे लगता. है कि हमको कई बार लगता है कि यह कार्य. क्या मेरे लिए बना था। पर वो अगर आपको. खुशी दे रहा है तो आपके लिए बना। आपको. ढूंढना होगा कि कौन सा कार्य कौन सा ऐसी. चीज जो मुझे खुशी दे रही है जिसमें मुझे. पैशन है अगर वह आप कर रहे हैं तो. ऑटोमेटिकली आपको खुशी मिलेगी उसमें कई.
घंटों आप बिता देते हैं कई दिन बिता देते. हो और आपको थकान नहीं महसूस होती आपने. अक्सर देखा होगा जब आपके अनुरूप का आपका. कार्य मिलता है तब आप उस खुशी से करते हो. पैशन के साथ करते हो और जब आपको करना. पड़ता है जैसे कई बार कहते हैं ना मुझे. नौकरी करनी पड़ती है क्योंकि के पैसे. चाहिए घर के घर चलाने के लिए मुझे चाहिए. नौकरी पर उसमें आपका मजा नहीं आता आप कर. रहे हो बस लाइफ में कई काम ऐसे होते हैं. जो करने पड़ते हैं कर रहे हो उसमें खुशी.
इतनी नहीं मिलेगी खुशी अगर अच्छी अच्छे से. अगर खोजनी है तो अपने पैशन को अंदर से. खोजना पड़ेगा अपने आपको जानना पड़ेगा कि. कौन सा कार्य करके क्या करके मुझे खुशी. मिलती है। किससे मिलकर मुझे खुशी मिलती. है। कैसा ऐसा मैं क्या करूं जिसमें लगातार. मुझे एक अच्छा भी लगे और वह कार्य करके. मैं खुश भी हो जाऊं।. मैं अगर आपसे समझना चाहूं कार्य को लेकर. जीवन को लेकर हर उम्र हर वर्ग के हिसाब से.
खुशी की परिभाषा क्या है? कैसे पता करें. कि हम खुश हैं।. खुशी एक स्थिति है। एक ऐसी अवस्था है वह. कभी भी मिलती है। एक बच्चा. क्लास में बहुत मार्क्स फर्स्ट आना चाहता. है। बहुत मार्क्स लाना चाहता है और काफी. सालों से लग रहा मगर फर्स्ट नहीं आ रहा।. कहीं ना कहीं वह थर्ड आता है, फोर्थ आता. एक दिन फर्स्ट आ जाता है। अच्छे मार्क्स. लाता उसको कितनी खुशी होगी.
वो खुशी कुछ पल की हो सकती है। कुछ दिनों. की हो सकती है।. और एक साल की हो सकती है। पर वो हमेशा. नहीं रहेगी। खुशी मिलती रहती है। लाइफ का. एक प्रोसेस है। खुशी अभी मिली फिर और कुछ. काम करना उसकी से खुशी मिलेगी। खुशी हमें. एक इंस्पायर रखती है आगे बढ़ने के लिए कि. मैं यह काम करूंगा तो मुझे उससे खुशी. मिलेगी। खुशी हमें मोटिवेशन देती है। खुशी. हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा देती है कि.
कोई कार्य को करके जब खुशी मिलती है, किसी. को पाकर खुशी मिलती है, कोई अचीवमेंट करके. खुशी मिलती है, हम करते हैं, दौड़ते हैं।. यह लाइफ का एक प्रोसेस है। खुशी हमें अंदर. से मोटिवेट रखती है। इंस्पायर रखती है।. खुशी वह है। जब किसी चीज की पाने की चाहत. हो और मिल जाए वह खुशी है।. जब हम बहुत दिनों से लगातार मेहनत कर रहे. हैं। मेहनत करते जा रहे हैं। करते जा रहे.
हैं। मिल नहीं रहा। हम परेशान है। मगर. इच्छा है रिजल्ट्स की। एक खुशी को पाने की. फिर भी हम कर रहे हैं। और उसमें हमें मजा. भी आ रहा है। दुखी भी हैं। पर. इच्छा क्या है? खुशी मिलेगी।. तो हम उससे मोटिवेट है कि यह करना है।. मुझे यह अचीवमेंट करना है। मुझे कितनी भी. बार प्रैक्टिस करनी पड़े मगर मैं यह काम. करूंगा। एक छोटी सी चीज जो हमको आगे बढ़ने.
के लिए प्रेरणा देती रहती है। वह है खुशी।. खुशी अपने जीवन को आपके जीवन को चलाती है।. निरंतर आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा. देती है। और छोटी-छोटी चीजों में आपको. खुशी मिलने लग जाती है।. ओके। कोई व्यक्ति जो ईश्वर के करीब है हम. क्या वो ज्यादा खुश या ज्यादा संतोषी रहता. है? यस जो ईश्वर के बहुत करीब है। ईश्वर उसको.
अपने आप अपनी एनर्जी से एनर्जाइज रखता है।. प्रोटेक्शन देता है। उसको ऐसी वाइब्रेशन. मिलती है। कॉस्मिक एनर्जी जिसको हम कहते. हैं। वह एनर्जी से आप आसपास एनर्जाइज रहता. है तो उसको खुशी मिलती है।. एनर्जी क्या होती है? एनर्जी हम कई रूप. में कह सकते हैं। जैसे वाइब्रेशन कहते. हैं। एनर्जी जैसे ऊर्जा है। मैं और आप. बैठे हैं। यहां भी एक एनर्जी है। हम. परमपिता परमेश्वर भी कह सकते हैं। ईश्वर. भी कह सकते हैं। अनेकों रूप है जो हम अपने.
अलग-अलग रूप में उसको पुकारते हैं।. आपको कि हमको किसने बनाया? एक एक पावर है, सुप्रीम पावर है, ईश्वर है जो हम सब जानते. हैं ईश्वर है। पर हम कई बार उसको महसूस. करते हैं अपने आसपास वो क्या है? वो एक पॉजिटिव और एनर्जी. जो परमात्मा के आसपास जो परमात्मा हमें. देता जो परमात्मा के करीब रहता है जो. स्पिरिचुअल उसकी प्रोटेक्शन अपने आप मिलती. खुश रहता हो।.
नहीं तो क्या किसी व्यक्ति के एनर्जी से. किसी और व्यक्ति की एनर्जी पर असर पड़ता. है? यस।. कैसे? जैसे अगर आप बहुत नेगेटिव एनर्जी या. ईर्ष्या हो जाती है, नेगेटिव एनर्जी मुझे. देते हैं तो मेरी एनर्जी चैनलाइज नेगेटिव. वे में हो जाएगी।. ये तो माहौल हो गया कि जैसा माहौल होता है. वैसा आप पर असर पड़ गया। जैसे हमारे छोटे. थे तो लोग कहते थे कि अच्छी संगत पे रहा. करो।. हां।. अच्छी जैसी संगत होगी वैसा तुम्हारा विचार. हो जाएगा।. यस।. अगर दारू पीने वाले साथ तो वो हो जाएगा।.
पुण्यत्मा के साथ बैठे हो तो वैसा हो. जाएगा। क्या यह संगत ही एनर्जी है? यस। संगत अच्छी होगी तो अच्छे विचार. मिलेंगे। अच्छी एनर्जी मिलेगी। क्योंकि आप. देखिए ना आप अच्छे व्यक्ति के साथ बैठते. हो। अच्छे विचार देता है। अच्छी डायरेक्शन. देता है। अच्छी एनर्जी देता है। क्योंकि. वह कहीं ना कहीं ऐसी एनर्जी से एनर्जी है. जो उसको प्रोटेक्शन कर रही है। इसी को. स्पिरिचुअलिटी कहते हैं। स्पिरिचुअलिटी. क्या है? आत्मा परमात्मा का मिलन। ईश्वर. के साथ एकीकार करना। अपने अस्तित्व में.
एकाकार होना. यही स्पिरिचुअलिटी है।. ठीक है? मैंने जेंसी कल्चर में अक्सर सुना. है कि बच्चे कहते हैं कि हम रिलीजियस नहीं. है। हम स्पिरिचुअल हैं। ये बहुत कॉमन टर्म. आजकल हो गया है। क्या स्पिरिचुअलिटी का. मतलब मन की शांति है।. आपको समझना पड़ेगा रिलीजियस स्पिरिचुअल का. क्या अंतर है।. धर्म हमें सिखाता है हमें कैसे जीना.
चाहिए। जीवन जीने की कला क्या है? हमें. अपने जीवन में कैसे अपने आप को बेहतर. बनाना है और स्पिरिचुअलिटी सिखाती है कि. आत्मा का परमात्मा से कैसे मिलन हो सकता. है। कैसे हम डिवाइन एनर्जी से एनर्जी अपने. आप को रख सकते हैं। आत्मा के कई स्वरूप. होते हैं। आप किसी भी नाम में उसको पुकार. सकते हैं। यहां पर जानना होगा कि जो. डिवाइन एनर्जी है, कॉस्मिक एनर्जी वह है. क्या? वह है ईश्वर। जिस ईश्वर ने जिस परमात्मा.
ने आप सब हम सबको बनाया है. उसको हम कोई भी नाम दे सकते हैं। कॉस्मिक. एनर्जी नाम दे सकते हैं। डिवाइन एनर्जी दे. सकते हैं। परमपिता परमेश्वर नाम दे सकते. हैं। ईश्वर नाम कोई भी नाम से हम पुकार. सकते हैं। पर है ना जो हमको सब कुछ देती. है। वह एनर्जी हमारे आसपास है। उससे हम. डेली कनेक्ट करें। मेडिटेशन के द्वारा जब.
मेडिटेशन करने बैठते हैं तो हम अपने आप. सेल्फ एक्चुअलाइजेशन करते हैं। अपने आप से. कनेक्ट होते हैं। और जब हम अपने आप से. कनेक्ट होते तो उस ईश्वर से अपने आप. ऑटोमेटिकली कनेक्ट होने लग जाते हैं। उस. एनर्जी से धीरे-धीरे कनेक्ट होने लग जाते. हैं। जो हमारे अंदर इतने विचार चल रहे थे. जो हम विचारों से भरे हुए थे धीरे-धीरे. हमारे नेगेटिव विचार रिलीज होने लग जाते. और पॉजिटिव विचार आने लग जाते क्योंकि.
हमारे साथ ईश्वर का आशीर्वाद है। हमारे. साथ वो डिवाइन एनर्जी कनेक्ट हो रही है।. हम उससे कनेक्ट हो रहे हैं।. बहुत सारे लोग ऐसे होंगे जो जीवन में. अच्छा कर रहे हैं। लेकिन उनको समय नहीं. मिला। चाहिए बैठ के सोचने का कि वो कौन है. अपनी आत्मा में झांकने का. करते रहे काम अच्छा कर रहे हैं लाइफ में. उन्हें लगता है यही खुशियां है पैसा आ रहा. है शादी हो गई घूम रहे हैं लड़के बच्चे हो.
गए सफल हो गए अब क्या जरूरत है अंदर बैठ. के झांकने की. आपको यह पता है कि शायद वह अंदर झांके. अपने पैशन को जाने अपने अंदर में कोई. व्यक्ति चाहता है कि मैं कंफर्ट जोन में. रहूं मेरी न टू सिक्स जॉब रहे। मैं. संतुष्ट हूं। मैं खुश हूं।. तो वो जान तो पाया ना अपने बारे में। अपने. अंदर जान पाया कि मेरा जो सिस्टम है वो. मेरे को सेटिस्फाइड कर रहा है। मैं खुश.
हूं उससे। जब तक जानेगा नहीं तो खुश नहीं. रहेगा वहां भी। मतलब. आपको ऊपरी. अंदर झांकने का मतलब है कि वो एहसास करना. जो आपको खुशी खुशी देता है।. खुशी देता है। वो एहसास करना कि आप किस. क्या पाना चाहते हो लाइफ में कैसे रहना. चाहते हो। कैसे आप अपने मित्र बनाना चाहते. हो। कैसे आप चाहते हो कि मैं इसको करके. मैं खुश रहूंगा। कई लोग कंफर्ट ज़ोन में. रहना चाहते हैं। ठीक है? वह अपना. एटमॉस्फेयर ऐसे बनाते हैं। जैसे आपने कहा.
कि वह अच्छी जॉब कर रहे हैं। अच्छा पैसा. पा रहे हैं और अच्छी सी फैमिली के साथ. टाइम स्पेंड करने उनका दायरा उन्होंने सेट. कर रखा है कि हां मुझे इसी में खुशी मिलती. है। कई लोग कहते हैं मुझे बिजनेस में करने. में खुशी मिलती है। मुझे रिस्क लेने में. खुशी मिलती है। डिपेंड करता है मनुष्य पर. कि वह किससे खुश है। जाना तो अपने आपको. अपने आप को जाने बगैर आप अपनी यात्रा. अच्छे से तय नहीं कर सकते। जैसे रेलवे में. सफर कर रहे हो। रेल की टिकट आपने कहां तक. लेनी है यही नहीं पता तो कैसे सफर करोगे?
कहां उतरना है यही नहीं मालूम तो कैसे सफर. करोगे? ये आपने जैसे पहले जर्नी की बात की अगर आप. किसी भी सफर में जा रहे हो उससे पहले आप. एक टिकट लेते हो। आपको पता है कि मुझे. यहां तक जाना है।. हम. और आप सफर कर लेते हो तैसी से। ऐसे ही. हमारी लाइफ है शुभांकर कि हमें यह जानना. जरूरी है कि मुझे चाहिए क्या? मुझे क्या.
खुशी दे रहा? मेरी लाइफ कैसी होनी चाहिए।. और मेरी लाइफ में कितनी मुझे रिस्क लेना. है या मैं रिस्क लेने से डरता हूं वो बहुत. जरूरी है साहब।. तो कोई आदमी जो स्पिरिचुअली अवेक हो चुका. है।. हम. उसमें क्या अंतर दिखाई पड़ेगा? एक सामान्य. व्यक्ति के मुकाबले जो अवेक नहीं हुआ है. जो स्पिरिचुअली अवयड है। वह ईश्वर के साथ. उसका कनेक्शन है।. वह अपने आप को जानकर उस परम सत्ता यानी कि.
ईश्वर को जान रहा है कि कोई ऐसी एनर्जी है. जो मुझे मदद कर रही जिसने मुझे बनाया।. उसके विचारों में आपको कॉन्फिडेंस दिखाई. देगा। उसके भाव में आपको कॉन्फिडेंस दिखाई. देगा। उसके इमोशंस में, उसके प्रेम में वह. दयावान होगा। वह करुणामय होगा। वह लोगों. की मदद करेगा। वह कहीं भी जाएगा अपनी.
पॉजिटिव एनर्जी से उस एटमॉस्फेयर को भर. देगा।. जो कम प्रैक्टिस करते हैं, वह अपने लिए ही परेशान रहेगा। अपने आप पर. ही डाउट करेगा। अपने अंदर कॉन्फिडेंस नहीं. होगा। डर होगा।. उसको फ्यूचर की चिंता होगी।. भावनाएं भी फुलफिल नहीं होगी।. इस तरह का अंतर देखने को मिलता है।.
वो अपने कार्य को लेकर भी परेशान रहेगा।. बट सामान्य जो लोग हमें मिलते हैं रोज. उनमें से अगर 10 में से मैं देखूं तो नौ. लोग तो मुझे ऐसे नहीं मिलते। जिनमें लोगों. के प्रति प्रेम हो, करुणा हो, जलन ना हो, ईर्ष्या द्वेष ना हो, दूसरे की सफलता पर. वह खुश होते हो।. वो भटक रहे हैं ना। हम इतनी देर से बातें. कर रहे हैं कि अपने आप से भटक रहे हैं।. उनको पता ही नहीं है कि कैसे मुझे करना.
है। कहां से करुणा आएगी। हम. क्या मुझे दया भी कोई पार्ट उन्होंने जब. सीखा ही नहीं होगा। जब आप वो अंदर से. कनेक्ट नहीं होंगे उस ईश्वर से कनेक्ट. नहीं होंगे जैसे स्पिरिचुअलिटी में तो. कैसे कैसे दया आएगी कैसे प्रेम आएगा कैसे. भावनाएं जागृत होंगी बस वो कर रहे हैं आगे. बढ़ रहे हैं कार्य कर रहे हैं अपनी लाइफ. में आगे बढ़ रहे हैं उनको आभास ही नहीं. क्या जीवन में खुश रहने के लिए सेल्फ लव. भी जरूरी है. यस सेल्फ लव बहुत जरूरी जब अपने इमोशन से.
प्यार करते हो अपने आप से प्यार करते हो. अपने चीजों से प्यार करते हो तो अपने आपको. अच्छे से रखने की कोशिश करते हो। जैसे आप. हो अपने आप से प्यार करोगे तो आप अच्छे से. अपनी बॉडी को रखोगे। अच्छा शरीर बनाओगे।. अच्छे मन को ठीक रखोगे। बुद्धि को ठीक. रखोगे। अपने संस्कारों को ठीक रखोगे। जब. सेल्फ लव करोगे तभी तो यह सब ठीक रखोगे।. स्पिरिचुअल अवेकिंग करने के लिए रोजमर्रा.
की जिंदगी में क्या करना चाहिए हमें? आपको प्रतिदिन उस ग्रेटट्यूड करना चाहिए. कि परमपिता परमेश्वर ने हमको सब कुछ दिया. है। धन्यवाद करें। अपने आप को जाने अपने. अपनी आसपास के वातावरण में खुशियां लाएं।. आप प्रतिदिन मेडिटेशन करें। ईश्वर से. ईश्वर के लिए 10 मिनट पांच मिनट जो भी. मंत्र से आप जिस भी मंत्र का आप प्रयोग. करते हैं उस मंत्र को जपे। अपने आप में.
बारे में जाने। 5 मिनट बैठ के अपने आप को. पहचाने कि आज मैं क्या करूंगा, कैसे. करूंगा। यह होता है अपने आप को एनर्जाइज. करना। मेडिटेशन करें। मेडिटेशन में किसी. भी मंत्र का यूज कर सकते हैं या चुपचाप. बैठ के अपने आप को देख सकते हो। बहुत. जरूरी है।. मतलब शीशे के सामने बैठ के खुद को देखते. रह।. शीशे के सामने क्यों? फिर. आप कहीं भी बैठ सकते हो। जहां पर आपको. कंफर्ट मिले वहीं बैठ सकते।.
खुद को देखना मतलब. खुद को देखना स्वयं की यात्रा करना। खुद. को देखना शिष्या नहीं बोले। आंखों से नहीं. हां आपके अंतर अंतर आंतरिक मन की आंखों से. देखना।. हां। स्वयं को देखना यानी कि अपने विचारों. को चेक करना। अपने आप को देखना। अपने. भाव को देखना। अपनी पूरी बॉडी को देखना।. अपने इंटरनल जो विचार उठ उन सबको देखना।. तो आपको एक और प्रतिदिन मेडिटेशन करें 15.
मिनट तो आपको अपने आप ऑटोमेटिकली एक. एनर्जी मिलेगी जिस एनर्जी से आप पूरे दिन. कार्य करोगे. भागदौड़ भाई जिंदगी में मेडिटेशन कीेंस. क्या है. क्योंकि आपको एनर्जी मिलती है आपको ताकत. मिलती है कॉस्मिक एनर्जी आपको परमपिता. परमेश्वर के साथ आप जब आप जोड़ते हो तो. आपको ऐसी एनर्जी मिलती है कि जैसे एक फोन. को जब चार्ज करते हो तो आप अपनी बॉडी को. अपने माइंड को अपनी बुद्धि को अपनी. इंद्रियों को भी जो चार्ज करोगे ना वो. चार्ज है आपकी बॉडी का। अगर वो चार्ज नहीं.
किया तो कुछ दिन के बाद कहीं ना कहीं आप. नेगेटिव एनर्जी से ग्रसित हो जाएंगे।. एनर्जी है मेडिटेशन है आपको एनर्जी करना. एक चार्ज करना। अपनी आत्मा को परमात्मा से. मिलाना ये. तो ये आप कह रहे हो कि स्पिरिचुअल अवेकिंग. जो है उसका पहला स्टेप मेडिटेशन ही शायद. है।. मेडिटेशन है अपने आप को सेल्फ रियलाइजेशन. है।. और ये सुकून में ही करना है या काम करते. रोजमर्रा की जिंदगी में हो सकता है।.
काम करते भी हो सकता है।. कैसे? आप कई बार आप थक जाते हो। काम करते करते. आप शांति से 5 मिनट बैठे. अकेले मत और अपने आप केवल केवल शांत मन से. बैठे अपने आप आप एनजाइज हो जाएंगे. बट मेडिटेशन से क्या होगा आपने बताया कि. जैसे बैटरी चार्ज कर लो फोन की. हां. वैसा होता है. हां मेडिटेशन से आप एनर्जाइज हो जाएंगे. आपके नेगेटिव एनर्जी जो थी नेगेटिव थॉट्स. थे वो दूर होंगे रिमूव होंगे और पॉजिटिव.
थॉट आएंगे और पॉजिटिविटी आएगी वही तो. चाहिए. शुभांकर आपको दिन में कितने थॉट्स मिलते. हैं? कितने विचार मिलते हैं? अगर आप. पॉजिटिव होंगे तो पॉजिटिव विचारों को. पकड़ोगे। अगर आप पूरे पॉजिटिव नहीं है, नेगेटिव हैं तो नेगेटिव विचार आपको पकड़. लेंगे।. और जैसे ही नेगेटिव विचार पकड़ लेंगे, आपकी सोच धीरे-धीरे नेगेटिव होने लग. जाएगी। आप जिस यात्रा में जाना चाह रहे. थे, वह यात्रा दूर हो जाएगी और जिसमें. नहीं जाना चाह रहे थे, वहां पहुंच जाएंगे।.
सेल्फ डाउट वालों को क्या समझाते हो आप? जैसे आजकल एक बहुत बड़ा वर्ग है जिससे. सेल्फ डाउट है हम. कि क्या मैं लाइफ में अच्छा कर पाऊंगा. कोई टैलेंट है. यस सेल्फ डाउट में क्या होता है कि जब. अपने ऊपर कॉन्फिडेंस कब नहीं होता जब हम. अंदर से. तैयार नहीं होते. तैयार नहीं होते डरते हैं अपने ऊपर. कॉन्फिडेंस तब नहीं होता जब हमें डर लगने. लग जाता है और हमें पता अपनी कमियों का जब. इंसान को अपनी कमियों का पता होता है वह.
उसको डाउट रहता है कि मैं कर पाऊंगा या. नहीं कर पाऊंगा और वो कमी किसी को बता. नहीं पाता. उसको खुद को ही पता और दिखाता स्ट्रांग. अपने आपको फिर वो ढूंढता है ऐसे व्यक्ति. को जिसको बता पाऊं अपनी कमियां जिससे. डिस्कशन कर पाऊं अब उसको नहीं मिलता तो. धीरे-धीरे एक डिप्रेशन में आ जाता है और. धीरे-धीरे अपने आप को एक कमरे में सिकोड़. लेता ऐसे बच्चों के लिए जरूरी है उनसे. बातें करें उनसे आपस में जब बातें उनसे जब.
बातें करते हैं तो उनके जो डाउट्स है वह. बाहर आते हैं. और जब बाहर जब वह बातें करते हैं तो उनसे. विचार मिलते हैं। उनको थॉट्स मिल जाते हैं. कि तुम ऐसा करो ऐसे रास्ता बदलो। ऐसा आपको. करना चाहिए। वो किसी से मिल जाते। तो मैं. वो काउंसलिंग करती हूं कि आपको अपने ऊपर. डाउट नहीं रखना। डरना नहीं आपको। अपने. विचारों को देखना है और ऐसे व्यक्तियों से. मिलना है जो आपको मोटिवेट करें। आपको आगे.
बढ़ाने के लिए इंस्पायर करें। आपकी कमियों. को दूर करें और अपने आप को स्ट्रांग मत. बनाओ। अपनी कमियां भी दिखाओ। अपने घर में. बात करो। अपनी फैमिली से बात करो। अपने. मम्मी पापा से फ्रेंड्स की तरह बात करो कि. मुझे यह डाउट हो रहा है। क्यों आप बात. नहीं करते? क्यों नहीं करना चाहते बात? क्योंकि आपको डर लगता है। कई बार शिकायत. करती नहीं। फैमिली के पास टाइम नहीं होता।. हमें मैं कहना चाहूंगी कि हमें टाइम देना.
चाहिए एक फ्रेंड की तरह ताकि वो अपनी बात. करें। जो डाउट्स हैं उसको क्लियर करें और. आगे बढ़ने के लिए उसको प्रेरणा मिल जाए और. आगे बढ़ जाए। जैसे आजकल शादियां सक्सेसफुल. नहीं हो रही है। हम. मैं. अधिकतर केसेस देखता हूं शादी हुई या तो. डिवोर्स हो गया या उनके एक्स्ट्रा मैरिटल. अफेयर चल रहे हैं या वो एक घर में भी. सिर्फ दुनिया समाज चलते रिश्ते चला रहे. हैं। बहुत सारे रिश्ते ऐसे हैं। मैं ये. नहीं कह रहा सारे रिश्ते ऐसे हैं। बट.
अधिकतर रिश्ते आजकल खासतौर पर मेट्रो शहर. में ऐसे दिखाई पड़ते हैं।. ये लोग जो आपके पास आते हैं। इन्हें क्या. सलाह देते हो आप? एक एक दूसरे के प्रति समर्पित नहीं है, समर्पण नहीं है, विश्वास नहीं है। और जहां. विश्वास नहीं है सुभांकर वहां पर कैसे आप. आगे बढ़ सकते हो? आपको एक दूसरे के प्रति. डडीिकेशन होना चाहिए। विश्वास होना चाहिए. कि मैं जिसके साथ हूं मैं सुरक्षित हूं।. मैं ठीक हूं।.
सुरक्षित है सर।. यानी कि मुझे कोई ऐसा नहीं है। डाउट है कि. कुछ चीज छूट जाएगा। कुछ झूठ बोल देंगे।. कुछ ऐसे ऐसे विचार उठते हैं ना कि यह मेरा. पार्टनर मुझसे झूठ बोला।. यह मेरे से धोखा तो नहीं दे देगा। मुझे. ऐसा तो नहीं होगा। ऐसे डाउट होते हैं बहुत. बार। यह मेरी प्रॉब्लम्स नहीं समझ रहा।. मैं इतनी पूरे दिन मेहनत करता हूं। मेहनत. करती हूं। यह मेरी प्रॉब्लम समझ ही नहीं. रहा। पर वो उसको यह नहीं पता। इसको पता ही. नहीं आपकी प्रॉब्लम्स। आपको समझाओ ना। वो. अपने माइंड में ही बना लेते हैं। इल्लुजन.
कर लेते हैं। अपने माइंड में पैदा। यह. क्यों नहीं समझता? यह कहीं ना कहीं मुझसे. मुझ पर विश्वास नहीं कर रहा। यहां पर. असुरक्षा की भावना आती है। जब असुरक्षा की. भावना आती है तो डाउट आने होने लगते हैं।. तब लगता है कि मैं क्यों इसके साथ रहूं? अब विश्वास डगमगाता है तो स्ट्रेस आता है, नेगेटिविटी आती है। और आज के दौर में हर. दूसरा तीसरा इंसान स्ट्रेस और नेगेटिविटी. से परेशान है।. क्यों है? क्योंकि वह अपने मन में इतनी.
कुंठाएं पैदा कर लेता है जिसको कोई मीनिंग. नहीं जिसका इतने विचार ले आता है कि ऐसा. हुआ तो जैसे मैं और आप बात कर रहे हैं मैं. अब सोच लूं कि आप कुछ भी नेगेटिव सोच लो. तो नेगेटिव है नहीं पर मन ने. बट ख्याल कैसे रुके वो तो आपके वश में. नहीं है मन. वही यहां पर आती है स्पिरिचुअलिटी अगर. ख्याल और विचारों को ठीक रखना तो अपने. आपको ठीक रखना होगा। आपको जानना होगा कि.
बार-बार विचार आ क्यों रहा है। आपको उस. ईश्वर से कनेक्ट करना होगा जो आपको एक. पावर देते हैं। एक विचारों में एक भाव. देते हैं। एक पॉजिटिव सोच देते हैं।. पॉजिटिव थॉट देते हैं।. यहां पर आप अपने विचारों को ठीक कर सकते. हैं।. तो कैसे दूर करें स्ट्रेस और नेगेटिविटी? स्ट्रेस को दूर करने का एक ही उपाय है कि. आप जब आपको किसी कार्य को मन क्या करता.
है? मन धीरे-धीरे काम लेता। एक ही साथ कई. काम आ जाते। आपको स्ट्रेस हो जाता है। आप. पहले अपने कार्य को. स्ट्रेस कई वजह से होता है। रिश्ते का. स्ट्रेस होगा, परिवार का स्ट्रेस होगा, काम का स्ट्रेस होगा, दैनिक जीवन का. स्ट्रेस होगा, शरीर का स्ट्रेस होगा। कोई. भी तनाव मैं एक किसी पर्टिकुलर बात नहीं. कर रहा हूं। तनाव कैसे दूर करें? अगर किसी. भी कारण का कारण से आपको स्ट्रेस आया तो. उस कारण को पहले जाने कारण को जाने उसको. दूर करने की कोशिश करें और जब कारण से आ.
जाएगी तो आप अपनी बुद्धि से उसको दूर कर. लोगे और दूर थोड़ी देर स्ट्रेस आएगा. स्ट्रेस हावी कब हो जाता है जब कारण के. साथ जब विचारों के साथ आप अपने इमोशंस. अटैच कर देते हो फिर क्या करते हो आपकी. अतीत की बातों में चले जाते हो आपको लगता. यह पहले भी ऐसे ही किया था इसने मेरे साथ।. पहले भी ऐसे हुआ है। और इमोशंस को अटैच कर. देते हो विचारों के साथ। जैसे इमोशंस अटैच. हुए आपका स्ट्रेस बढ़ते चला जाएगा। आप.
उससे बाहर नहीं आ पाते।. और बाहर नहीं आ पाते तो आप धीरे-धीरे. विचारों में अपने इमोशनल. इतने हो जाते हो कि उस रिश्ते से दूर हो. जाते हो या शरीर में इतना भोजन ले लेते हो. कि अपने आप ऑटोमेटिकली शरीर खराब कर लेते. हो मन खराब कर लेते हो बुद्धि में. नवीनीकरण नहीं करते यानी कि नए विचार नहीं. ला पाते और धीरे-धीरे फिर सोचते हो कि मैं.
कब रिलैक्स करूं वो स्ट्रेस इतना बढ़ जाता. है कि उसको ठीक नहीं कर पाते जिनकी वजह से. बहुत सारी परेशानियां आप अपने आप ही बना. लेते हो। स्ट्रेस दूर करने का एक ही उपाय. है कि उन किससे आ रहा है? क्या वजह है? क्या कारण है? उसको जल्दी से जल्दी दूर. करोगे तो ऑटोमेटिकली स्ट्रेस दूर हो. जाएगा।. योगा मेडिटेशन. हां।.
क्या यह मेंटल हेल्थ पर काम करता है? यह करता है योगा मेडिटेशन जैसे मैं पहले. कही कि योगा बहुत जरूरी है फिजिकल फिटनेस. के लिए आप योगा करते हैं तो आपका जो. फिजिकल फिटनेस है वह ठीक रहती है आप. एक्टिव रहते हो आप अपनी बॉडी में कोई भी. ऐसी नेगेटिविटी नहीं आती आप स्वस्थ रहते. हो और मेडिटेशन से आपके विचार स्वस्थ रहते. हैं आपके विचार स्वस्थ होंगे तो स्ट्रेस. नहीं आएगा सब कनेक्टेड है एक दूसरे से.
कनेक्टेड है। आपके विचार स्वस्थ हैं तो. आपकी लाइफ भी ठीक रहेगी। आपके रिश्ते भी. ठीक रहेंगे। आप आगे भी बढ़ पाएंगे।. मेडिटेशन बहुत जरूरी है। प्रतिदिन करना. चाहिए। भले ही ड्यूरेशन कम हो पर प्रतिदिन. मेडिटेशन जरूर करें।. क्या जो हमारे यहां मंत्र पढ़ते थे लोग यह. भी एक प्रकार का मेडिटेशन है।. यस। मंत्र. 108 मंत्र पढ़ते थे बैठ के कि आप ध्यान. केंद्र करें कुछ पढ़ते जा रहे हैं।. यह भी एक मेडिटेशन एक प्रक्रिया है। आप.
समझे मंत्र, भजन, पूजा यह सब एक प्रक्रिया. है। और उसके परिणाम मिल जाते कि हम उस. परमपिता परमेश्वर के इतने करीब हो जाते।. वो अपने आप ही ऑटोमेटिकली हमें पॉजिटिव. एनर्जी देने लग जाता। जिससे हमें कोई भी. परेशानियां नहीं आ जाती। आती।. हमें स्ट्रेस भी नहीं होता। एंजाइटटी जो. ए्जायटी होती है आजकल छोटी-छोटी बातों में. ए्जायटी हो जाती है। क्यों होती है? क्योंकि किसी भी कार्य को आते हुए देख ले. मतलब कोई भी हमारे पर प्रेशर आ जाता माइंड.
पर ए्जायटी हो जाती।. वो प्रेशर हम झेल नहीं पाते और हम पैनिकिक. हो जाते हैं। पैनिकिक हो जाते क्योंकि. हमारे अंदर वो पावर नहीं है। झेलने की. ताकत नहीं है। वो कहां से आएगी? आपके अपने. आप से ही आएगी। अपने विचारों से आएगी।. आपकी एनर्जी से आएगी। एनर्जी जब शुद्ध. होगी। विचार शुद्ध होंगे तो उसको हैंडल भी. अच्छे ढंग से कर पाओगे।. प्रारब्ध की परिभाषा क्या है? पुरुष जन्म में जो कर्म किए हैं वही. प्रारब्ध है। वो कर्म कितने हैं? कैसे.
हैं? कितने किस तरह आपका जन्म हुआ? किस घर. में जन्म हुआ वो प्रारब्ध से ही तो होता. है। सब. तो मतलब अगर आप इस जन्म में कुछ अच्छा कर. रहे हो और आपको अच्छा नहीं मिल रहा है फल. हम. तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।. नहीं।. कई बार लोग कहते हैं ना कि देखो भाई एक. आदमी बदमाशी कर रहा है। सब कर रहा है। फिर. भी तुमसे सुखी है।. कुछ अपने प्रारब्ध के कर्म उसको इतने. अच्छे मिले हैं। वो अपने प्रारब्ध के. कर्मों को कर रहा है।. और तुम सब कुछ अच्छा कर रहे हो। पूजा पाठ. करते हो। ध्यान रखते हो। फिर भी तुम दुखी. हो।. आप दुखी नहीं हो। पूजा पाठ कर्म करते हो।.
हां सही है। दुखी नहीं हो। बस इतना मिल. नहीं रहा। वो प्रारब्ध का कुछ कर रहे. इसलिए उसको इतना मिल रहा है। और आप कर रहे. हो तो अपने कर्म बना रहे हो। मिल जाएगा. आपको। भविष्य में. भविष्य बनाए भविष्य मिलेगा जरूर मिलेगा. कोई भी कर्म खाली नहीं जाता. आप जेंसी के पीछे में बहुत रहते हो वहां. पर सबसे बड़ा स्ट्रगल है हार्ट ब्रेक का. हम. दिल टूट गया ब्रेकअप हो गया आते हैं ऐसे. लोग कैसे सेल्फ हील करें वो लोग जिनका दिल.
टूटा है क्योंकि आजकल सबसे बड़ी समस्या तो. हमको लगता है कि नौकरी पढ़ाई के बाद यही. है. जब हार्ट ब्रेक होता है बहुत दुख होता है. क्योंकि आप किसी से दिल से प्यार कर रहे. हो हार्ट जिसमें नाम आ जाए वह दिल होगा।. आप दिल से प्यार कर रहे हो और वह दुख जो. होता है. वह वही जानता है जिसके साथ होता है। उस. दुख को बहने दो. क्योंकि दुख जब बहेगा अपने आप उसका निवारण. होने लगेगा।.
और उस समय. किसी ऐसे व्यक्ति से बात करो जो आपके दुख. को समझता हो। आपकी भावनाओं को समझता हो।. आपको उससे बात करके अच्छा लगता हो तो आपको. रिलीफ मिलेगा। दुख से भागो मत। जितना. दबाओगे अपने आप को स्ट्रांग बनाने की. कोशिश करोगे कि नहीं मेरे कुछ नहीं हुआ और. अंदर से आप दुखी हो तब बहुत परेशानी होती. है। तब आप डिप्रेशन में जा सकते हो।.
आप जब उस दुख से निकलोगे बाहर तब आपका. असली सशन है। दुख से निकलने का यही है कि. उसको बहने दो, बातें करो जिससे बात करके. आपको रिलीफ मिले। अपनी फैमिली को इनवॉल्व. करो। छिपाओ मत। जब फैमिली इनवॉल्व हो जाती. है तो अनकंडीशनल लव करती है। और जब. अनकंडीशनल लव करती है तो वहां पर सारी. बातें आप एक प्यार के साथ कह पाते हो।. अपनी उन सब बातों को कह डालो जो आपके अंदर.
जा रही है। तो आपको बहुत शांति मिलेगी।. आपको खुशी मिलेगी। आपको ऐसा लगेगा मेरे. पीछे कोई है। सपोर्ट मिलेगा।. आपके माता-पिता. आपको. इतना सपोर्ट करेंगे अनकंडीशनल। आप कहना. सीखो।. आज बात क्या हो रही है? हम कहते नहीं. छिपाते हैं कि कहीं ना कहीं मैं अपने. पेरेंट्स को दुख ना दे दूं और अपने जो भाई. बहन हैं उनसे भी छिपाते हैं उनसे सोचते.
हैं इनको पता ना चल जाए मैं ऐसा हूं यह है. परेशानी वो अपने विचार बना लेते हैं हम. अंदर अंदर ऐसा नहीं है फैमिली आपको बहुत. सपोर्ट करती है आप इस तरह बाहर आ सकते हैं. इनर पीस कैसे हासिल करें. जैसे कई लोग प्यार में भी है फिर भी इनर. पीस नहीं है। काम है सफल है। इनर पीस नहीं. है। परिवार है इनर पीस नहीं है। सब है. लेकिन लगता है कुछ नहीं है। कुछ कमी है।.
इनर पीस है। आत्म संतुष्टि।. आत्म संतुष्टि तभी मिल सकती है जब आप. फुलफिलमेंट. फील करते हो। आनंद की अनुभूति फील करते. हो। और आनंद की अनुभूति कब मिलती है? जब. आपको. हर कर्म में, हर कार्य में, भाव में, इमोशंस में बहुत ज्यादा परेशानी नहीं. होती। आप एक दृष्टा बनके अपनी चीजों को. देख ठीक है यह हो रहा है।.
और इनर पीस तब मिलती है जब आप अपने ईश्वर. के साथ कनेक्ट अपने आप को कर रहे हो।. वह अपने आप आत्म संतुष्टि मिलने लग जाती।. धीरे-धीरे एकदम नहीं मिलेगी। जब आप डेली. मेडिटेशन करोगे, उस ईश्वर को याद करोगे, आपको महसूस होगा कि मेरे पास आसपास डिवाइन. एनर्जी है। उसको कोई भी नाम दे सकते हो।. कॉस्मिक एनर्जी है। तो आप अपने अंदर एक एक.
कॉन्फिडेंस पैदा करोगे। एक स्ट्रांग. फीलिंग आएगी कि ईश्वर है मेरे साथ। मेरे. साथ कुछ खराब नहीं हो सकता। मैं जो कर रहा. हूं वो अच्छा है। इस तरह की धीरे-धीरे जब. भावनाएं डेवलप होने लगती है तो धीरे-धीरे. जब एनर्जी धीरे-धीरे आगे बढ़ने लग जाती है. तो आत्म संतुष्टि मिलना शुरू हो जाती है।. आत्म शांति मिलना शुरू हो जाती है और आनंद. की अनुभूति होने लग जाती है। जब आनंद की. अनुभूति जब होने लग जाती है। ऐसी अवस्था.
में मनुष्य बहुत खुश रहता है।. उसको. अपने आप मदद मिलने लग जाती है। विचारों. में, भाव में, उसके कार्य में, कहते हैं. ना पूरी डिवाइन फोर्स आपके आसपास हो जाती. और आपके कार्यों को करने लग जाती है। ऐसा. ही महसूस होने लग जाता जब आत्म शांति होती. है तो कि जब इनर पीस होती है तो लगता है. कि पूरे सबका आशीर्वाद हमें मिल रहा है।. ईश्वर हमारे साथ है।.
ऐसी महसूस कर सकते हैं। बट कई लोग होते. हैं जैसे इनको डिस्ट्रैक्शन बहुत होता है. कि पूजा कर रहे हैं बैठे दिमाग में कुछ चल. रहा है। रात को सोने जा रहे हैं। आंख बंद. कर रहे हैं दिमाग में कुछ चल रहा है। कोई. काम कर रहे हैं शारीरिक रूप से यहां मौजूद. है। दिमाग कहीं और चल रहा है। तो जब दिमाग. कहीं और चल रहा हो आपकी करंट फिजिकल. स्थिति के अलावा उस पे काबू कैसे किया. जाए? मल्टीपल थॉट्स आना एक नेचुरल प्रोसेस है।. क्योंकि हम अपने मन में आने वाले विचारों.
को रोक नहीं सकते। रोकना भी नहीं चाहिए।. यहां पर एक सूत्र याद आता है योग का। योगस. चित्त वृत्त निरोध है। योग के द्वारा अपनी. वृत्तियों को अपने विचारों पर कंट्रोल. करना। यानी कि मेडिटेशन करने से ही आप. अपने विचारों को कंट्रोल कर सकते हो।. कंट्रोल भी नहीं करना। एक अच्छे प्रोसेस. में अपने विचारों को ला सकते हो। एक अच्छी. श्रंखला में आपके विचार जब आने लग जाएंगे.
तो आप भी खुश रहेंगे। आपके कार्य भी अच्छे. होने लग जाएंगे और आप अपने जीवन में भी. आगे बढ़ते चले जाओगे। जब आप प्रतिदिन. प्रैक्टिस करते हो मेडिटेशन की प्रतिदिन. लगातार प्रैक्टिस में रहते हो तो अपने आप. विचार अच्छे होने लग जाएंगे। अपने आप. प्रोसेस में आएंगे और आपको लगेगा कि जो. विचार मुझे परेशान कर रहे थे एनएसएससी के. बहुत सारे थॉट मेरे अंदर आ रहे थे इल्लुजन.
पैदा कर रहे थे नेगेटिव मैं हो रहा था. नेगेटिव सोच हो रही तो धीरे-धीरे खत्म. होने लग जाएगी. कभी भी आप रोक नहीं सकते विचारों को यह तो. एक प्रोसेस है आप केवल अपने आपको उस फिर. मैं कहूंगी कि डिवाइन एनर्जी फ्रॉम. परमपिता परमेश्वर के साथ कनेक्ट करोगे।. अपने आप को जानोगे अपने आप वो प्रोसेस में. आने लगेंगे और प्रतिदिन सुबह या शाम को.
जरूर. मेडिटेशन करें ताकि आप मन से खुश रहे।. आपका मन में जो विचार हैं वह बैलेंस रहे।. जैसे शरीर के लिए आप प्रतिदिन एक्सरसाइज. करते हो ना ऐसे ही अपने मन के फिटनेस के. लिए प्रतिदिन मेडिटेशन करें ताकि आपका मन. खुश रहे आप संतुष्ट रहे और आनंद से भरपूर. रहे।. लाइफ का पर्पस क्या होना चाहिए?
लाइफ का जीवन का पर्पस है अपने अच्छे. कार्य करते हुए. जो आपको अच्छा लगता है। यानी कि आप कहेंगे. कि मुझे तो कुछ भी कार्य करना ही। अब जैसे. किसी को दारू पीना अच्छा लगता है। हम. उसको लग रहा है यही सुख है। कोई है उत्पात. मचाने पर खुश है। तो लाइफ का पर्पस कैसे. पता करें? क्योंकि सबने अपने-अपने हिसाब. से अपनी-अपनी परिभाषा ढाल रखी है। सही गलत. की या अपने-अपने परवरिश के हिसाब से या. अपने आस-पास के माहौल के हिसाब से जो. शराबियों के बीच में पैदा हुआ उसका सही.
गलत अलग है। जो साधुओं के बीच में पैदा. हुआ उसका सही गलत अलग है। जो गरीब घर में. पैदा हुआ उसका सही गलत अलग है। अमीरों का. अलग है। तो उन सब के बीच में अपनी लाइफ का. पर्पस कैसे पता करें? लाइफ का पर्पस है कि अच्छे कार्य करते हुए. आत्मा से परमात्मा की ओर बढ़ना। लाइफ का. असली पर्पस है कि आप अपने जीवन में अच्छे. कार्य करो और उस परमात्मा को जानो जिसने. हमें यहां पर भेजा है। उसको जानना ही लाइफ. का पर्पस है।.
तो स्पिरिचुअलिटी का अल्टीमेट पर्पस क्या. है? शांति खुशी जीवन का बैलेंस. प्रारब्ध. में और जोड़ना. शुभंकर जग अगर आप के विचार अच्छे हो गए. आपकी एनर्जी अच्छी होगी। एक दूसरे से. कनेक्टेड है तो अपने आप ऑटोमेटिकली आप. धीरे-धीरे एक ऐसी ऐसी सोल हो जाएंगे जहां. पर आपको अपने आप ऑटोमेटिकली आनंद आने. लगेगा खुशी आने लगेगी.
बट वो तो फिर साधु महात्माओं की पोजीशन हो. गई. नहीं. फिर एक आम इंसान उनमें कैसे फर्क रहा. नहीं नहीं साधु महात्माओं की पोजीशन ऐसी. नहीं हो सकती इतनी इजी नहीं है कि आप कहीं. आप लाइफ में डेली लाइफ में जी रहे हो आप. पॉजिटिविटी के साथ रहना चाहते हो ना. तो मैं पॉजिटिविटी की बात कर रही हूं।. कार्य करते हुए उसमें पॉजिटिविटी लेकर आओ।. कार्य करते हुए उसमें एक ऐसी पॉजिटिविटी. लाओ। ऐसी एक पवित्रता लाओ जो सच्चे कर्म. हो। जब सच्चे कर्म करोगे तो आपको.
ऑटोमेटिकली अपने आप शांति मिलेगी। अपने आप. ही आपको खुशी मिलेगी अंदर से। अपने आप. स्ट्रेस दूर हो जाएगा। अगर आप सच्चे हो तो. आपको कोई परेशानी नहीं होती ना। ये. कॉन्फिडेंस होता है कि नहीं मैंने कोई गलत. नहीं किया। क्यों? कहां से आता है यह. कॉन्फिडेंस कि आप सच्चे हो। आपको पता है. मैं जो कर रहा हूं वह ठीक है। अगर वही गलत. किया होता तो आपको डर लगेगा। वो डर आपको. ऐसी डायरेक्शन में ले जाएगा जहां आप जाना. नहीं चाहते।.
जहां आप चाहते हो कि नहीं मुझे नहीं जाना. और फंस जाते हो तो वापस नहीं आ पाते।. इसलिए पॉजिटिव विचार जरूरी है। इसलिए ऐसा. एटमॉस्फेयर जरूरी है जहां पर आपको खुशी. मिले। आप अपनी उस आत्मा से कनेक्ट रहें।. अपने आप से कनेक्ट रहे जहां पर आपको सही. डायरेक्शन मिलती रहे।. ईश्वर अपने आप आपका ध्यान रखेगा। एक ऐसी. कॉस्मिक एनर्जी जो आपको एनर्जी करती. रहेगी। आपके अच्छे कार्य करने के लिए,
आपको खुशी देने के लिए, आपको आगे बढ़ने के. लिए।. क्या जीवन का सबसे बड़ा डर या दुख. अटैचमेंट है? अटैचमेंट को समझना बहुत जरूरी है।. अटैचमेंट. व्यक्ति, किसी चीज, किसी से भी हो सकता है। अटैचमेंट का. मीनिंग क्या है? जब हम किसी से बहुत अटैच. हो जाते हैं। और हमसे वह दूर होने लग जाता.
है तो हमें दुख होता है।. किसी से हम बहुत ज्यादा जुड़ाव लगाव हो. जाता है और हमसे दूर हो जाता है तब दुख. होता है। क्यों? क्योंकि हम उसको पकड़े. हुए हैं। हमको लगता है यह दूर नहीं होना. चाहिए और दूर होना स्वाभाविक है। जिससे. जुड़ाव होगा कभी ना कभी वो दूर तो होगा. ना।. आत्मा के अलावा सब कुछ दूर होगा।. हां तो दूर होगा ना। वहां पर दुख देता है।. वहां पर परेशानी आती है। अटैचमेंट वहां तक.
ठीक है जहां पर हमें. खुशियां देता है। हम लगातार आगे बढ़ रहे. हैं। क्योंकि अटैचमेंट तो एक लाइफ का. प्रोसेस है। हम. लाइफ में जब तक अटैचमेंट नहीं होगा तब तक. हम काम नहीं कर पाएंगे।. तब तक कुछ भी नहीं हो पाएंगे।. नहीं कुछ भी नहीं कर पाएंगे। शुभांकर अब. अटैचमेंट किसी को अपने घर से अटैचमेंट है, अपने काम से अटैचमेंट है, अपने किसी. व्यक्ति से अटैचमेंट है तभी उसको मोटिवेट. करेगा।. हम.
जैसे मुझे अपने काम से बहुत अटैचमेंट है।. अपनी फैमिली से अटैचमेंट है तो मैं अच्छा. करूंगी। अच्छे विचार दूंगी, अच्छा कार्य. करूंगी।. अगर वही यह लगे कि अटैचमेंट नहीं होना. चाहिए। नहीं यह लाइफ एक प्रोसेस है जो. आपको आगे बढ़ाता है।. जब आप अटैचमेंट को बहुत ज्यादा आप उसके. साथ स्ट्रिक्ट हो जाते हो कि यह मेरी बात.
माने। यह पूरी फैमिली मेरी ही सुने। मेरा. ही कहना माने। जो मैं सोच रहा हूं वो सही. है। तब वहां पर गड़बड़ है।. तो अटैचमेंट और एक्सपेक्टेशंस. हां।. यह जीवन में रिश्ते में रखें या ना रखें? अटैचमेंट तो रखना जरूरी है ना। उससे. प्रोसेस होगा ना।. दोनों का रखना जरूरी है। पर जरूर से. ज्यादा गरीब की बात करूं कि गरीब करना कि. मेरे अनुसार करें। मेरे अनुसार वह नहीं.
रखे।. अटैचमेंट अगर आपका घर है बहुत अच्छा घर. है। अगर आप उससे प्यार नहीं करोगे तो कैसे. सफाई रखोगे? कैसे सजाओगे? कोई भी चीज को लो। अगर मैं किसी चीज पर. रिसर्च कर रही हूं। अगर उससे मुझे प्यार. नहीं होगा, पैसा नहीं होगा, मैं कैसे. रिसर्च करूं? फिर तो लाइफ में क्या. करेंगे? क्या पर्पस है लाइफ का? आपकी लाइफ का पर्पस क्या है? मेरी लाइफ का पर्पस है कि अच्छे कार्य. करते हुए उस परमपिता परमात्मा को जाने। सब.
खुश रहे और जितने लोगों को मदद कर पाए, सहयोग दे पाए, जितने लोगों को प्यार दे. पाए, भावनाओं से ठीक कर पाए, उतनी ही ज्यादा मुझे खुशी मिलती है। मैं. यह नहीं देखती कि इस कार्य को करने से. क्या मिलेगा। मुझे कभी विचार नहीं आता। बस. मुझे करना है। कार्य करना ही मुझे खुशी. देता है।.
मेरा परिवार खुश रहता है तो खुशी देता. मुझे।. अपने कार्य को सुचारू रूप से सत्य के साथ. और उस परमपिता परमेश्वर के साथ अटैच होकर. जो कार्य मैं करती हूं उसमें मुझे बहुत. खुशी मिलती है।. जैसे आप अंधे बच्चों के लिए काम करते हो।. आप वृद्धाश्रम में काम करते हो। आप नए. बच्चों को काउंसलिंग करते हो। हर उम्र, हर. वर्ग, हर परेशानी के लोग आपको मिल रहे.
हैं। इस पूरी यात्रा में जीवन को कैसे. समझा आपने कि जीवन क्या है? जब मेरी यात्रा की शुरुआत हुई और जो हमारी. एजुकेशन हवन वगैरह या आध्यात्मिक ज्योतिषी. जैसे भी जो भी हमारा सब्जेक्ट है वह करते. थे हम। उस बीच में हमें लगा कि ऐसे कुछ. कार्य जो हमें समाज के लिए करना चाहिए।. जो लोगों को जरूरत है कि उन्हें हम सहायक.
बन जाए।. वहां से भावना उत्पन्न हुई।. वहां से लगा. कि लोग चाहते हैं कि मेरा सही ढंग से इलाज. हो। लोग चाहते हैं मैं कुछ बन पाऊं। आगे. बढ़ पाऊं। पर उनको रास्ता नहीं पता।. सुहाकर. चाहते तो हैं। उनके पास कोई है नहीं।. तो हम बड़ा तो नहीं कर पाते। कई बार.
असुविधा हो जाती है चीजों को। पर. छोटे-छोटे जब मैंने बात की ऑफिस में टीम. के साथ छोटे-छोटे कार्य करना शुरू किए और. छोटे-छोटे कार्य से ही मैं इतना कर पाते. हम लोग। और 25 साल से कर रही हूं।. जब उनकी इच्छाओं को. पूर्ति होते हुए देखती हूं तो मुझे खुशी. मिलती है। मैं शुभंकर वृद्ध आश्रम में. जाती हूं। कभी कबभार. कुछ नहीं चाहिए। केवल उनको बात करनी होती.
है।. केवल वो एक ऐसी शांति पाना चाहते हैं।. जैसे आपने अभी शांति की बात की। वो एक ऐसी. शांति पाना चाहते हैं कि. मैं ठीक हूं। कुछ उनके पास्ट की बातें. उनको गिल्ट कराती है। मैं ऐसा नहीं करता. तो ऐसा नहीं होता।. वह वर्तमान प्रेजेंट में वह अपने आप को. ठीक नहीं रख पाते।.
कुछ लोग फ्यूचर की चिंता करते रहते हैं।. क्या होगा मेरा? अपने रिश्तों को याद करते हैं।. इतने इमोशंस उनके. भरे हुए रहते हैं। कौन बात करें? किससे. बात करें? तो मैं वहां जाकर जरूर समय देती हूं। यह. मेरा सौभाग्य है। यह उनका नहीं। यह मेरा. सौभाग्य है। भगवान ने मुझे यह मौका दिया।. मुझे ऐसा लगता है।. इसमें मेरे परिवार का बहुत सहयोग है।.
वो मुझे प्रेरणा देते हैं।. जब मैं. दिव्यांग बच्चों में जाती हूं। शारीरिक. रूप से वो कष्ट में है। एक बच्चा कई दिन. से कमरे से बाहर नहीं निकला।. तो मेरी आवाज से पहचान जाती है। मैम आ गई।. तो एक लड़का नहीं निकला तो किसी ने बताया. वह बच्चा बाहर नहीं आता। क्या हुआ? वह केवल एक ही विचार से बाहर नहीं आ रहा।.
कुछ दिन पहले उसको चोट लगी थी। पैर में. दर्द हो गया तो उसको लगने लगा कि मैं अब. चल नहीं पाऊंगा। केवल विचार था। पैर भी. ठीक हो गया। केवल विचार आ गया कि मैं चल. नहीं पाऊंगा।. पहले ही वो उसको शारीरिक रूप से परेशान. था। एक दूसरी परेशानी तो मन में इतने. इमोशंस हावी हो गए कि वो दोनों परेशानियों. को टैकल नहीं कर पाया। मैंने उसको बोला. नहीं आप आओ। गोद में उठाया। टीम भी साथ.
थी। उनके टीचर भी थे साथ और उसको ऐसे. धीरे-धीरे दो-तीन दिन तक लगातार मैं गई।. पैर रखने लगा, चलने लगा। फिर अपने आप कमरे. से टाइम देखता था कि 9:00 बजे घंटी बजेगी. तो मुझे खेलने जाना है। खेलता था. वही बच्चा फिर आगे चलकर उसने हारमोनियम. सीखा और खेलने लगा और आज वो बहुत अच्छे से. कार्य कर रहा है। यह मैं 10 साल पहले की.
बात मुझे उससे एक प्रेरणा मिली। अपने जीवन. की सार्थकता उसी में है कि आप किसी को मदद. करता हूं।. आपने पूछा था ना कि जीवन क्या है? जीवन. जीने की कला उसी में है कि आप किसी ऐसे. व्यक्ति की मदद कर रहे हो जिसको जरूरत है।. यही सार्थकता है। कभी मैंने ध्यान ही नहीं. दिया पूरे दिन में कि समय क्या है? एक.
परेशानी आई उसको उसको टैकल करते-करते पूरा. दिन बीत गया। कभी सोचा भी नहीं और कभी. बैठते हुए इतना काम कर लिया।. आज जब देखती हूं तो इतना काम हो गया।. काम को कभी भी छोटा या बड़ा मत समझो।. छोटे-छोटे कार्य एक दिन महान कार्य हो. जाते हैं।. इसलिए काम करते रहना चाहिए। यह मत सोचो कि.
इससे मेरा क्या फायदा होगा। आजकल एक और. विचार देखने को मिलता है कि लोग कहते हैं. कि मैं यह कार्य क्यों करूं? इससे मेरा. क्या बेनिफिट है? विदाउट बेनिफिट भी कार्य. मनुष्य को करना चाहिए। हर चीज में बेनिफिट. लोगे। हर चीज में आप स्वार्थ देखोगे तो. कैसे समाज का कार्य होगा? कैसे हम एक. दूसरे के से प्रेरणा दे पाएंगे। कैसे हम. समाज के लिए कार्य कर पाएंगे? जरूरी नहीं है कि किसी संस्था के तहत करो।.
आप छोटे-छोटे कार्य आपने किसी को आसपास. जरूरत है उसकी जरूरत को पूरा कर दो। वह भी. एक छोटा सा कार्य है। किसी को पढ़ना है और. उसके लिए माता-पिता के पास पैसे नहीं है।. अगर आपने अपने पॉकेट से अगर उसकी मदद कर. दी वह बच्चा पढ़ गया। कितनी खुशी मिलती. सुभांकर।. अगर आपने किसी का इलाज करा दिया. क्योंकि ऐसी स्थितियों में मैंने देखा है.
कि इलाज कराना चाहते हैं पर उनको नॉलेज. नहीं है। वह कहां जाएं, किससे बात करें? वो पहले ही डर जाते हैं कि पैसा नहीं है, नॉलेज नहीं है, कहां जाएं? हमारी सरकारों. ने बहुत सुविधा दी है। बहुत सारी ऐसी. योजनाएं हैं जो. हर जगह इलाज करा सकते हैं।. हमारे प्रधानमंत्री ने बहुत सारी ऐसी. योजनाएं. हमारे सबके लिए दी है। परंतु उनको नॉलेज.
नहीं उठना नहीं चाहते। बाहर आना नहीं. चाहते। जब मैं मेडिकल कैंप लगाती हूं तब. मुझे लगता है कि यह कैंप इसलिए लगाती हूं. वह जरूरी है जब वो पास में जब कोई डॉक्टर. आ जाता है तो उठ के भी आ जाते हैं।. किसी को बीपी हाई रहता है। किसी को शुगर. इतना हाई रहता है। उनको पता ही नहीं। और. हंसते हैं सुभांकर। अच्छा इतना बीपी हो. गया।. स्वयं का ज्ञान ही नहीं है, भाव ही नहीं.
है।. तो मैं हमारी टीम जो साथ में लगी होती है, डॉक्टर्स आते हैं अच्छे हॉस्पिटल से वो. मदद कर देते हैं।. उसमें जो मुझे आंतरिक खुशी मिलती है उसका. अंदाजा नहीं लगा सकते।. सुंदर. हमारी कोशिश रहे कि जब लोग आपको सुने तो. आपके कार्य में आपको और सहयोग करें।. कोई जाते-जाते कोई मैसेज आप लोगों को देना. चाहती है।.
शुभंकर अपने जीवन में अच्छे कार्य करते. हुए अपनी. ईश्वर का ध्यान करते हुए चाहे ईश्वर किसी. बारे में पॉजिटिव सोच के साथ अपनी लाइफ को. बिताएंगे तो आपको कभी दुख नहीं होगा। आप. हमेशा खुश रहेंगे और आसपास के वातावरण को. भी खुश रखेंगे। लोगों को मदद करेंगे तो. आपको अपने आप ही खुशियां मिलती रहेंग, दुआएं मिलती रहेंग, आशीर्वाद मिलता रहेगा।.
इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि हम एक दूसरे की. मदद करें। प्यार से, भाव से, एक दूसरे को. सहानुभूति दें ताकि हमारा समाज अच्छा रहे।. हम सब प्यार से रहें।. बहुत-बहुत शुक्रिया आपका।. नमस्कार।.
