What Really Happened in the Vikas Dubey Case? ft. Richa Dubey |Bikru Kand |Crime History |Shubhankar
आप विकास दुबे की पत्नी हैं।. [संगीत]. आप अपने आप को पीड़ित मानती हैं या सह. अपराधी मानती है। जब आपकी शादी आप जानते. थे वो अपराधी थे।. तब तो मुझे नहीं लगता विकास ने कोई अपराध. किया था। मेरी शादी के बाद ही जो कुछ हुआ।. 90 के दशक में ही विकास पर हत्या और लूट. के कई मामले दर्ज हो गए थे।. ट्रांसफर हो गया। जेल के भीतर रामबाबू. यादव पर हमला हुआ।.
उन पर गस्टर एक्ट भी लगा है।. नहीं ये सब झूठ है।. सिद्धेश्वर पांडे की हत्या 2000 में।. वो मगर विकास ने नहीं करी थी। वो उस दिन. किसी नेता की रैली में गए। वो तो. 2001 में शिवनी थाने के अंदर एक राज्य. मंत्री थे संतोष शुक्ला। आपको तो बताया. होगा ना कि संतोष शुक्ला को मारा था।. उस वक्त मेरा एक बच्चा खत्म हुआ था।.
विकास मुझे लेके जा रहा था। रास्ते में बम. चले थे। ये कभी किसी ने बताया ही नहीं आज. तक। हां वहां पर मर्डर हुआ। मगर उसमें. विकास बाइज्जत भरी हुए हैं।. क्योंकि 25 पुलिस वाले जिन्होंने पहले. गवाही दी थी वो गवाही से बाद में पलट गए।. कोर्ट ने ये नहीं कहा कि वो बेगुनाह है।. मैं पत्नी हूं। मैं कैसे कह दूं मेरा पति. गलत है।. संतोष शुक्ला की भी तो बीवी होगी ना।. बहुत सारे लोगों ने मुझसे कहा कि पिताजी. से पूछिएगा कि शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा. की बेटियों से क्या वो आंखें मिला पाएंगे?
वो अपना काम कर रहे थे। इनका इंतजार किया. जा रहा था और फिर इनको मारा गया। गोलियों. से नजदीक से फिर कुल्हाड़ी से शरीर बर्बाद. किया गया और इनके शव के साथ बर्बरता की. गई।. सामान्य अपराध नहीं है। ये आतंकवाद जैसा. है।. तो उन्हें सजा भी तो आतंकवाद वाली मिल गई।. पुलिस की चार्जशीट जो मैम आई है उसमें कि. शास्त्री नगर के घर में रात 2:00 बजे आप. सीसीटीवी फुटेज को मोबाइल से मॉनिटर कर. रही थी और वो आप फोन करके जानकारी दे रही. हैं।.
मैंने आज तक चार्जशीट नहीं पढ़ी।. क्यों? उसी के आधार पर आपका भविष्य तय हो रहा था।. वही लीगल पहलू है। आप मानती हैं विकास. दुबे ने ब्राह्मण समुदाय का नाम भी खराब. किया।. मैं ससुराल से ब्राह्मण थी। मैं कैसे मैं. कायस्त हूं। तो मेरे से उतना निकल नहीं. पाता कि मैं ब्राह्मण हूं।. ईडी की जांच में करोड़ों की बेनामी. संपत्ति निकल कर आई। पुलिस की चार्जशीट. कहती है कि दुबई में प्रॉपर्टी बैंकॉक के. होटलों में पैसा लगाने वाली थी।. रातोंरात करोड़पति बने विकास दुबे के फंड. मैनेजर की भी। अब इनकम टैक्स विभाग जांच. करेगा। दूसरे देशों में करोड़ों की. प्रॉपर्टी है। बैंकॉक के एक होटल में भी. उसने निवेश किया था।.
अब सिलाई कढ़ाई से यह करोड़ रुपया तो नहीं. आया होगा।. दुबई बेस्ड आदमी मैं यदि होती कोई ना कोई. एक शेख मेरे सपोर्ट में होता आज।. जय वाजपेयी कौन था? जय वाजपेयी. चेहरे की मुस्कुराहट काफी कुछ कह।. अच्छा ठीक। इलेक्ट्रॉनिक की छोटी सी दुकान. संचालित करने वाला जयकांत वाजपेयी करोड़ों. की संपत्ति कमाने कैसे. जय वाजपेयी ने कबूल किया है कि वो आपके और. विकास के बेनामी पैसों का हिसाब रखता. मेरे पति ने उनको ₹1 लाख दिए हैं. कितना संपत्ति है कुल मिला के जितना फसा. मामला. हमें लगता है 10 12 करोड़ 15 करोड़.
इतने ईडी नहीं पकड़ी काला वाला सब होगा तो. लीगल टीम जो आपकी है 5 साल से केस लड़ रहे. इसका फीस उसके हाथ से निकालते हो. सच बताऊं आज. बिना पॉलिटिकल मदद के यूपी में कोई कुछ कर. नहीं सकता. हां उनके संबंध थे बड़े-बड़े लोगों से. संबंध थे. किससे किससे आपने विकास दुबे से शादी. क्यों की? लव मैरिज के अरेंज की।. मेरी लव मैरिज थी। ऑनेस्ट था। नशा नहीं. करता था। लड़कियों की लत नहीं थी। मेरे. साथ तो बेईमानी नहीं करी।. नाम है खुशी दुबे।. अमर दुबे की पत्नी है खुशी दुबे।. खुशी तिवारी दुबे।. क्यों दुबे नहीं? क्योंकि उसकी ऑलरेडी पहले एक लड़के से.
शादी हो चुकी। दो लड़कों से हो चुकी है।. अगर आप दुबे तो वो दुबे क्यों नहीं? क्योंकि अमर से शादी तो हुई। आप लोग क्या. अपने आप को बचाने के लिए उसका चरित्र हनन. कर रहे हो।. जब से बाहर निकली है। सिर्फ एक नैरेटिव. सेट कर रही है कि मेरे साथ गलत हुआ।. चाबी खाली रखा हूं। नहीं बहुत बुरे कोई. बुरा मौसम. कहा गया कि गाड़ी. बंदूक निकाली पुलिस वाले फायरिंग कर दी. जिंदा तो कसाब को भी रखा गया था. ऐसे उनके लिए भी थोड़े दिन तसल्ली करके सब.
कुछ निकलवा के उनको फांसी दे दी जाती. उन्होंने लास्ट में जो किया वो रावण की. भूमिका निभा के चले गए. सत्ता थी ताकत थी तब आप लोगों ने एंजॉय. किया आप जब ताकत चली गई तब आप लोगों ने. विक्टिम कार्ड खेला या आप पर आरोप. नहीं तुम मुझे इतना गिल्ट कर दोगे हमें. लगता है कि मुझे दो-चार दिन नींद नहीं. आएगी।.
आज मेरे साथ पडकास्ट में एक ऐसी शख्सियत. हैं जिनका नाम उत्तर प्रदेश के सबसे. खौफनाक और सबसे चर्चित कांड में आया था।. अक्सर कहा जाता है कि हर सफल पुरुष के. पीछे एक महिला होती है।. यह मेरे साथ जो महिला है यह अफसोसजनक है. कि वो उत्तर प्रदेश के एक बहुत ही विवादित. व्यक्ति की धर्मपत्नी है।. इनको लेकर समाज में दो नजरिया है। एक तरफ.
समाज इनको सिस्टम की मारी एक विधवा के तौर. पर देखता है। वो विधवा जिसे प्रताड़ित. किया गया। उसके पति के कर्मों की सजा दी. गई।. लेकिन एक दूसरा पहलू भी है जिससे समाज में. कुछ लोग यह मानते हैं कि वो जो घटना हुई. थी उसमें यह भी सहभियोगी थी। सच क्या है. उसे हम तलाशने की कोशिश करेंगे। यह. पडकास्ट किसी की इमेज वाइट वाश करने के. लिए नहीं है। यह पडकास्ट इन महिला के.
गुजारिश पर है। उन्हें आज इस पॉडकास्ट में. पूरा समय दिया जाएगा अपनी बात रखने का और. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जनता. के मन में उनको लेकर जो सवाल है वो भी. उनके सामने रखे जाए। रिचा जी बहुत-बहुत. स्वागत है आपका।. नमस्कार।. कैसी हैं आप? ठीक हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़]. इस इंटरव्यू से पहले मैं एक सवाल आपसे पूछ. लेता हूं।. हां जरूर।. ये इंटरव्यू हम पूरा करेंगे? हां हां. क्यों नहीं करेंगे? इस इंटरव्यू को आप मेरे साथ क्यों करना. चाहती थी? मैं यह चाहती थी कि मैं अपनी आवाज हर घर.
तक पहुंचाना चाहूं और आपकी जो ऑडियंस है. बहुत लॉयल है। इसलिए क्योंकि जो नैरेटिव. सेट किया गया है इस प्रकरण के बाद कि हम. हमारा परिवार गलत है। उस छवि को मैं बदलने. के लिए आपके साथ बैठना चाहती थी।. आपकी छवि में दो पहलू जो मुझे बड़े नजर. आते हैं। एक विक्टिम कार्ड का, एक पुलिस. की चार्जशीट का। इनके बीच में कहीं एक सच. सच्ची कहानी हो गई। तो मैं कोशिश करूंगा. कि वो सवाल जो जनता के ज़हन में रहे हैं. उनको मैं रखूं।. आपको आपका मैं समय दूंगा।.
[गला साफ़ करने की आवाज़]. इस अपेक्षा के साथ कि ना आप सवालों से. डरेंगी और ना मैं आपके जवाबों काट छांटने. की कोशिश करूंगा।. नहीं।. ठीक है।. तो सबसे पहले सबसे पहला सवाल जो मेरे ज़हन. में आता है वो ये आता है कि आप विकास दुबे. की पत्नी हैं।. जी। विकास दुबे अब इस दुनिया में नहीं है।. एक अपराधी के तौर पर उनका नाम समाज में. लिया जाता है। उस गाड़ी पलटने के किस्से. को आज भी हर कोई जिक्र करता है। लेकिन आप. अपने आप को पीड़ित मानती हैं या सह अपराधी. मानती हैं?
देखिए मेरे मैं इसमें सह अपराधी तो हो. नहीं सकती क्योंकि मेरा इस कांड से कोई. दूर-दूर तक का लेना देना नहीं था। वो गांव. में रहते थे और मैं लखनऊ में रहती थी। यह. घर पे सबको भी पता था और पूरे समाज को भी. पता था कि मैं जिस दिन ये कांड हुआ है उस. दिन मैं लखनऊ में ही थी और मैं 15 सालों. से लखनऊ में रह रही हूं।. ये हमारे गांव के लोग भी जानते हैं। हमारे. लखनऊ के लोग भी जानते तो मैं सह अपराधी तो. हो ही नहीं सकती। जैसे कि मुझे जिस इसके. बारे में कुछ पता ही नहीं था। यदि पता.
होता तो कोई भी आज की भारतीय नारी अपने. पति को इतनी बड़ी गलती करने नहीं देती और. जो जिस रूप में मैं आज विधवा हूं उस रूप. में मैं विधवा होकर नहीं जीना चाहती। मैं. इस कांड को रोकने की कोशिश करती। मैं पहले. दिन से ये कह रही हूं। मैंने पहले भी. मीडिया पे जब पहली बार बैठी थी तब भी यह. कहा था कि मैं इस कांड को रोकती। मैं इस. कांड को होने नहीं देती। क्योंकि यह बहुत. गलत था। इसके लिए कभी मैंने यह कहा ही. नहीं कि बहुत अच्छा था। मैंने हमेशा इस.
कांड की निंदा करी है।. लेकिन पुलिस कहती है कि जब उसने आपकी कॉल. डिटेल्स निकाली हम. तो जब ये पुलिस की टीम बिकरू गांव में थी. उस वक्त आप कई प्रभावशाली लोगों से बातचीत. कर रही थी।. नहीं ये बिल्कुल झूठ है। मेरी किसी से कोई. बातचीत ही नहीं होती थी। ना ही कोई. प्रभावशाली व्यक्ति कह दे कि रिचा दुबे. मुझसे विकास दुबे के जिंदा रहने पर कभी. बात करी। मैं तो खुद ही ऐसे पजल में फंस. गई हूं कि जिसको सॉल्व कर रही हूं। मैं.
किसी को भी जानती नहीं। अब तो मैं 5 सालों. में बहुत लोगों को जानने लगी। पहले तो कोई. मुझे शक्ल से भी नहीं जानता था कि रिचा. दुबे कौन है। मेरा कभी ना निकलना होता था।. मेरी बड़ी सिंपल लाइफ थी। मैं एक हाउसवाइफ. थी पूरी तरीके से। घर का और बच्चों के. अलावा। मेरी कुछ दुनिया ही नहीं थी।. शुभांकर कि मैं प्रभावशाली लोगों से। मैं. तो यही नहीं जानती प्रभावशाली लोग थे कौन. वहां पर। होते तो कॉल डिटेल निकलती तो आज. मैं यहां क्यों बैठी? ये तो इसीलिए कहा जा रहा था कि आपने जब यह. घटनाक्रम हुआ अपना फोन आपने तोड़ दिया।.
मगर. आपने फर्जी आईडी पर सिम ले रखा था।. नहीं नहीं मेरे पति के. यहां पर आरोप लगे। इसी इन्हीं सब आरोपों. को लेकर आपको अरे. मीडिया का ये मीडिया के आरोप हैं। मैं. आपको बता रही हूं। इसकी भी क्लियर करती. हूं। विकास दुबे के नाम का सिम था वो तो. वो आज भी टूटा फोन। अभी लगता है हमारे. लखनऊ वाले घर में बंद है। वो जो ड्रास. होती है कबर्ड की उसमें वो पड़ा होगा।. एक्चुअली में ऐसा हुआ जब विकास ने मुझे. बताया कि मेरी गांव में गोली चल गई। हम. मैं इन सब चीजों से बहुत दूर रहती थी और. मुझे ये सब नहीं पसंद है। मुझे हिंसा,
लड़ाई, गोली ये सब आज कोई कहेगा कि बहुत. अपने आप को सुनने में आएगा। आपके मैं क्या. कहते हैं उसको कमेंट्स करेंगे कि बहुत अ. साधु बन रही हैं मैडम। ये मुझे कभी नहीं. पसंद था कि लड़ाई दंगा ये पुलिस या गोली।. जब विकास ने मुझे खुद बताया फोन करके करीब. 2 बजे के करीब उसका कॉल आया कि उन्होंने. मुझसे यह कहा कि गांव में गोली चल गई तब. मुझे बहुत तेज गुस्सा आई तब मैंने उनको. गुस्से में अपशब्द भी बके और वो फोन लेके.
जमीन में पटक दिया उसके बाद से मेरी विकास. की कोई बातचीत नहीं हुई वो फोन हमें लगता. है लखनऊ में ड्रास में आज भी मैं फोन भी. बता देती हूं ऐसे ही था एप्पल का ऐसे ही. वो विकास का ही फोन था. नहीं मतलब उसमें पुलिस का ये लॉजिक जो आ. रहा था या मीडिया ने जो लॉजिक निकाला या. आम लोगों ने निकाला. कि जब यह घटना हो गई, आपने फोन इसलिए. तोड़ा ताकि किससे किससे संपर्क था? पॉलिटिकल बैकिंग कौन-कौन सी थी और वो. 30-40 साल का जो इतिहास था. उसमें कुछ सफेदपश सामने ना आए। ये एक. नैरेटिव. पहली बात तो वो फोन मेरा नहीं था। ये बहुत.
अच्छी बात मैं बता दूं। विकास दुबे के नाम. से सिम था और वो फोन हो सकता हो मेरे घर. के आज भी ड्रास में पड़ा होगा। वो टूटा. वहीं का वहीं रखा होगा। ऐसी फोन है वो।. तो जब पुलिस ने आपको अरेस्ट किया था तो वो. फोन ले गई थी पुलिस जांच करने के लिए।. स्वाभाविक ही ले गई होगी। ले गई होगी तो. ले गई होगी। नहीं ले गई होगी तो क्योंकि. जब मैं घर गई हूं कह रहे हो ना पड़ा. पड़ा होगा पड़ा भी हो सकता है पुलिस भी ले. जा सकती है ये दोनों बातें हो सकती है हो. सकता है ले गई हो मुझे नहीं पता है ये भी. मैं बता दूं आपको ये कोई मैं बनावटी बात. नहीं कर रही हूं मैं रियलिटी बता रही हूं.
क्योंकि पुलिस ने जब मुझे पकड़ा था तो मैं. तो घर के बगल में ही थी बहुत दूर नहीं थी. जिस समय विकास अरेस्ट हो गए हैं तो मैं. खुद ब खुद बाहर आके चली आई थी क्योंकि मैं. गलत होती तो मैं भाग ना जाती कहीं. अब इसमें भी जो आप कह रहे हो कि आप घर पे. आपको पता नहीं था।. इस पे भी पुलिस की थ्योरी आती है क्योंकि. मैं आपका जब केस तैयारी कर रहा था तो. उसमें एक थ्योरी आई कि शास्त्री नगर के घर. में. रात 2:00 बजे आप सीसीटीवी फुटेज को मोबाइल. से मॉनिटर कर रही थी।. ये भी बिल्कुल झूठ है। आपको मैं बताऊं.
विकास 2017 से लेके 19 तक तो जेल में रहे।. जब 19 में विकास लौटे हैं तब उन्होंने. कैमरे लगवाए हैं।. हम [नाक से की जाने वाली आवाज़]. मुश्किल से कैमरे लगे। हमें लगता है चार. पांच ही महीने हुए होंगे।. वो क्या मैं मॉनिटर कर रही थी? क्या मैं. देख रही थी? ये था कि आपका जो मोबाइल फोन था. उसमें लाइव फीड में क्योंकि आजकल सीसीटीवी. कैमरा मोबाइल में देख. मैं इतनी तेज नहीं हूं। मैं आपको बताऊं. मैं इतनी टेक्नोलॉजी तेज नहीं मेरे पास. फोन होंगे पर मुझे उतनी टेक्नोलॉजी नहीं. आती जितना आज के लोगों को आती है। अब ये.
कोई मेरा समझे कि ये झूठ बोल रही है या सच. बोल रही हूं। ये मैं रियलिटी आपको बता रही. हूं। सुभांकर ऐसा कहीं कुछ नहीं था। ये एक. नैरेटिव सेट किया गया कि वो लाइव फील्ड. देख रही थी। एक बात बताइए यदि मैं लाइव. फील्ड देख रही होती शुभांकर मुझे आप यह. बताइए मेरे पति ने पुलिस को मारा था ठीक. है मैं कहां भागती कहीं भाग पाती कहीं. नहीं भाग सकती थी मैं कहीं भागती भी नहीं. आपको मैं फैक्ट बता रही हूं मुझे यह पहले. पता चल जाता कि विकास ने पुलिस पे गोली.
चलाई मैं हो सकता अपना घर भी छोड़ के नहीं. जाती. लेकिन सीसीटीवी और पुलिस की चार्जशीट जो. मैम आई है उसमें पुलिस के पास यह दावा है. कि वो एक्टिविटी उन्होंने ने रिकॉर्ड की. जहां पर आप फीडबैक फोन पे देख रही हैं फीड. लाइव. और वो आप फोन करके जानकारी दे रही हैं।. नहीं ये ये बिल्कुल झूठा नरेटिव ऐसा कहीं. कुछ नहीं हुआ। मैं आपको बैठ के बता रही. हूं एक आदमी कितना झूठ बोल सकता है ये. पहले बताइए। एक. पीड़ित क्यों मानते हो? पीड़ित इसलिए मानते हैं कि आदमी ये कहता. है विकास दुबे की पत्नी है। उन विकास दुबे.
विकास दुबे ने किया ना पत्नी का क्या लेना. देना था उसमें? यह मुझको बताइए। मैं उस. वक्त जब गोलियां चल रही थी क्या मैं उस उस. जगह पर खड़ी थी. हम. मैं वहां तो नहीं थी मैं वहां से बहुत दूर. थी और मुझे कुछ पता भी नहीं था भैया. शुभंकर कोई औरत नहीं चाहेगी कि मेरा पति. मर जाए या मेरी जिंदगी बर्बाद हो जाए उस. उनके बाद जो हम लोगों ने झेला है जो हम. लोग झेल रहे हैं आगे भी पता नहीं क्या. झेलना पड़े हम लोगों को सब कुछ तो हम लोग.
झेल रहे हैं कौन चाहेगा कि मेरा पति खत्म. हो. देखिए आपके दुख से मुझे पूरी हमदर्दी है. लेकिन मेरा आज भूमिका पत्रकार की है तो. मैं मैं वहां पर वो जनता के सवाल रखूंगा. जो शायद थोड़े असहस कर सकते हैं। थोड़े से. असंवेदनशील भी कई बार लग सकते हैं। इसलिए. मैं क्षमा मांगते हुए ये बात रखूंगा मैं. कि वो जनता लेकिन मैम ये फिर कहेगी कि. आप सच कह रहे हो कोई पति नहीं चाहेगी कि. वो विधवा हो।. लेकिन. वो जो 30 साल का एक दौर था विकास दुबे का. जहां पर लोग डरते थे। प्रभावशाली लोग उससे. जुड़े हुए थे। उसके अपराधों की संख्या. बढ़ी थी। वो कहेंगे कि उसमें मौज भी तो.
परिवार ने काटी होगी।. तो जब मौज काटी इसीलिए आप दुख काट रहे. हैं।. नहीं मौज काटने की नहीं बात है। अब जो. बताया गया है कि विकास दुबे के अपराधी की. ये इतिहास थे। देखिए मेरे हिसाब से तो मैं. आपको एक बात बताना चाहूंगी। जितना मीडिया. ने उठा के बता दिया है उतना तो मुझे नहीं. लगता और वैसे तो मैं अधिकतम अलग ही रहती. थी। जो बात बताऊं मेरा कोई साथ में रहना. नहीं था।. हम. तो मैं उतना ज्यादा भी नहीं बता सकती। और. इतना बता सकती हूं कि जैसे मीडिया ने एक.
नैरेटिव सेट कर दिया था कि वो बहुत बड़े. अपराधी बहुत बड़े यदि वो इतने बड़े अपराधी. थे तो 2020 से पहले भी तो उनकी कभी मीडिया. या फोटो कहीं भी आ सकती थी।. मैं आज एक एक हिस्सा उनके इतिहास पर रखा. है मैंने। उस इतिहास पर मैं जाऊंगा थोड़ी. देर बाद। लेकिन अभी पहले क्योंकि आपने. अपने आप को इस पॉडकास्ट में जब आपने कहा. तो आप एक पीड़ित के तौर पर अपनी बात रखना. चाहते थे।. और उस पीड़ित और आप अपनी बात पीड़ित तौर. पर रख रही है। मैं वो सवाल कर रहा हूं जो. समाज कह रहा है कि आप पीड़ित नहीं है। आप.
सहभागीदारी हैं। उसी में एक सवाल आता है. कि पुलिस की चार्जशीट कहती है कि दुबई में. प्रॉपर्टी बैंकॉक के होटलों में पैसा. लगाने वाली थी आप। अब वो कहते हैं ये. साधारण महिला कहां काम करेगी? नहीं ऐसा. कोई एक बात बताइए शुभंकर मेरी यदि दुबई. में प्रॉपर्टी होती तो मैं दिल्ली में आकर. रेंट के मकान में नहीं रहती और बच्चे जॉब. ना करते. तो ये चार्जशीट में झूठ लिखा है. भाई मैं तो इसको झूठी ही समझूंगी. मैं कैसे कह दूं कि मेरी दुबई में. प्रॉपर्टी मैं दुबई में प्रॉपर्टी होती.
अच्छा एक बात बताइए जिसके पास बहुत पैसा. लगाने वाली थी उसमें जिक्र ये. तो वो पैसा कहां गया फिर जो मैं लगाने. वाली थी वो पैसा कहां. अब दुबई में तो वैसे भी नंबर दो का पैसा. सब जाता है।. अरे तो भैया सुभांकर वो पैसा कोई तो सही. खा के हम लोगों की जिम्मेदारी ले लेता।. मैं यह कह रही हूं ऐसा कहीं कुछ नहीं है।. यह सब मीडिया का बनाया हुआ नैरेटिव है।. मेरी बात को मानिए। दुबई-उबई में कहीं. पैसा नहीं था। ना ही मेरे पास इतनी ज्यादा. कोई मेरे पति के पास प्रॉपर्टी थी।. खेतीबाड़ी थी। खेती करते थे। पूरे परिवार.
की खेती वो करते थे। ऐसा नहीं था कि वो एक. की खेती करते थे। अपने पिताजी की भी करते. थे। अपने दोनों भाइयों के भी हिस्से की. करते थे। सबकी खेती करते थे। सबकी. जिम्मेदारी लेते थे।. ठीक है। अ आप के ऊपर यह भी आ रहा है कि जो. सिम कार्ड जिसका जिक्र किया था हमने वो. नौकर और गांव वालों के नाम में थे।. अच्छा अच्छा वो तो फोन मैं अभी-अभी चला. रही हूं। नो डाउट मैं बताती हूं उसका क्या. हुआ था। वो एक्चुअली में क्या हुआ था? नौकर मेरे यहां बहुत साल से काम कर रहा. था। उसके फोन जब ये सब कांड हुआ ये बीच. में तो मैं उसका फोन यूज़ कर क्योंकि फोन. तो तब थे नहीं हम लोगों के पास। उसका फोन.
था तो उसका फोन मैं यूज़ करने लगी और उससे. बात करने लगी। जब ये कांड हुआ बीच में फिर. वो चारप महीने बाद अपने घर जाने के लिए. उसने बोला कि दीदी मैं घर जा रहा हूं तो. पता नहीं अब मैं लौटूं ना लौटूं क्योंकि. घर वाले भी मेरे बहुत खौफ खाए हुए हैं। नो. डाउट ये बहुत बड़ा प्रकरण था। तो उसने. मैंने उससे कहा कि एक काम करो ये अपना जो. फोन नंबर है ये तुम मेरे नाम पोर्ट कर जाओ. क्योंकि मेरे अब सारे रिलेटिव और सब लोग. अब इसी में कॉल करते हैं। बस मैंने वो. पोर्ट कराया था अपने नाम। ऐसा कहीं कुछ.
नहीं था शुभंकर कि मैं नौकरों के नाम से. सिम चलाती थी। वो नंबर तो मैं आज भी चला. रही हूं। वो मैंने नहीं बंद करा।. और वो सीसीटीवी में जो रिकॉर्डिंग बात वो. कर रहे हैं वो झूठ है।. वो बिल्कुल ऐसी कोई बात ही नहीं है. सुभांकर।. चार्जशीट क्योंकि पुलिस के है कि. भाई मैंने आज तक चार्जशीट नहीं पढ़ी।. मैंने नहीं देखी।. क्यों? नहीं मैंने मेरी जरूरत ही नहीं समझा।. क्यों देखना था मुझे उस चीज को जो चीज. मैंने. उसी के आधार पर आपका भविष्य तय हो रहा था।. वही लीगल पहलू है।. देखिए मैंने जो काम गलत किया नहीं है उस.
उस चीज को मैं ना देखना और पढ़ना भी नहीं. चाहती हूं। मैं शुरू से यह बात कह रही हूं. कि ना मैंने इसमें गलती करी और ना ही मेरा. इसमें कोई सहभागी थी मैं। मैं शुरू से. सिरे से नकार रही हूं इस चीज को।. तो फिर अमर दुबे प्रभात मिश्रा जी आपके. संपर्क में क्यों थे? नहीं। मेरी तो किसी से बात ही नहीं होती. थी। मेरे पास तो किसी का नंबर ही नहीं था।. नहीं जानती थी अमर दुबे।. नहीं अमर दुबे वगैरह को मैं सब जानती थी।. गांव के बच्चे थे। अमर तो विकास उसके बाबा. थे और प्रभात गांव का लड़का था घर के. सामने रहता।. उसकी नजर में वो उनके गुरे थे।.
हां कुछ भी हो नो डाउट मगर ये घर खानदानी. लोग थे।. हां लेकिन घर खानदान में ये अपराधी लोग. थे।. हां नो।. तो फिर आप इनको अगर जानते थे कि अपराधी तो. फिर आप क्यों कहते हो कि विकास का. हिस्टोरिकल रिकॉर्ड इतना अच्छा रहा।. देखिए मैं पत्नी हूं। मैं अपने हिसाब से. कहूंगी और जनता अपने हिसाब से कहेगी। मैं. मेरे लिए और समाज में थोड़ा अंतर है।. बिल्कुल सही बात है। मतलब. मैं उस चीज को नहीं कहूंगी कि मैं इस समय. चुप हो जाऊं। मैं अपनी बात रख के आपको. बताऊंगी। वो मेरे लिए पति थे और उन्होंने.
लास्ट में जो किया वो बहुत निंदनीय था। वो. एक रावण की भूमिका निभा के चले गए। मैं. आपके पॉडकास्ट में ये बात कह के जा रही. हूं। वो उन्हें नहीं करना चाहिए था। जिसका. खामियाजा मैं सबके लिए बातों को सुनती. हूं। बुरा भी लगता है। नो डाउट हर इंसान. को बुरा लगता है।. [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. फिर मैं पूछ रहा हूं रिचा जी जब आपकी शादी. हुई आप जानते थे वो अपराधी थे. मेरी शादी जब हुई तो. किस साल में हुई थी. मेरी 96 में शादी हुई थी 96 में.
हम. तब तो मुझे नहीं लगता विकास ने कोई अपराध. किया था मेरी शादी के बाद ही हुआ है उससे. पहले का मुझे कुछ नहीं मालूम विकास मेरे. भाई का दोस्त था क्योंकि उसकी बुआ रहती थी. पास में आपस में वो दोनों क्रिकेट खेलते. थे बहुत अच्छे फ्रेंड थे घर में आना-जाना. था ऐसा कुछ नहीं था और अपराधी तो भाई मुझे. तब तक तो नहीं पता था और था भी नहीं मेरी. शादी के बाद ही जो कुछ हुआ है. शादी के बाद फिर जब आप शादी के बाद कब. शुरू हुआ आपको क्या लगता है कब शुरू हुआ. होगा.
शादी के हमें लगता है. 96 में शादी हुई थी आपकी. हां 96 में हुई थी. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] 96 के. बाद मान के चलिए 2000 2003 ऐसे ही कुछ. इतना मुझे याद नहीं मगर हां हुआ उसके बाद. लड़ाईयां झगड़ा जब गांव में कहते हैं ना. जब आदमी प्रध लड़ लेता उसके बाद ही. दुश्मनियां शुरू हो जाती है। उन्होंने प्र. चुनाव लड़ा था।. आपको भी लड़वाया था? नहीं मैंने प्री नहीं लड़ी।. एक को चुनाव आपने भी लड़ा? नहीं मैंने जिला पंचायत लड़ी है और बीडीसी. लड़ी है। मैंने लड़ी है। वो वो उन्हीं का. शौक था चुनाव। उन्होंने लड़वाया था। वही.
सब देखते थे मैं कभी।. तो जब ये अपराध बढ़ने लगा जैसे आज आप कह. रहे हो कि रावण जैसा उन्होंने काम किया।. बिकरू कांड को तो जब ये सब शुरू हुआ. घटनाक्रम। आपके बच्चे पहले कब पैदा हुआ था. पहला बच्चा? मेरा बच्चा हुआ है 96 98 में. 98 में दूसरा. दूसरा हुआ है 2005 में. 2005 में. तो 98 से 98 के बाद जब वो अपराध की दुनिया. में बढ़े और खासतौर पर 2001 2003 में जब. बहुत सारी भयावह घटनाएं आई जिसने उत्तर.
प्रदेश को हिलाना शुरू किया तो एक मां के. तौर पर एक पत्नी के तौर पर आपने समझाया. नहीं कि भैया जिस रास्ते पे जा रहे हो ये. रास्ता क्योंकि अपराध की दुनिया का रास्ता. सबको पता होता है चाहे जब आए देर सवेरे. वही होता है. हां नो डाउट नो डाउट समझाया जाता है।. मैंने पत्नी के अपने जितने अधिकार थे. उन्हें समझाया पर वह बहुत आगे निकल चुके. थे। तो शुभांकर अब मुझे नहीं लगता कि. उन्होंने मेरी बात मानी होती तो आज वो. जिंदा होते।. नहीं ये सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि जब. मेरी पिछली बार आपसे बात हुई थी और आज भी. आपने कई बार ये कहा कि विकास उतने बुरे.
नहीं थे जितना समाज ने बना दिया।. वो जेल से निकल कर आए वो उतने बुरे नहीं. थे। लेकिन जब मैं स्टार्ट पढ़ता हूं 200. देखिए कुछ कुछ मैं आपकी बात काटूंगी। सॉरी. अ कुछ तो विकास ने गलतियां करी नो डाउट. मैं मानती हूं मैं मैं कहूंगी इस चीज को. कुछ गलतियां उन पे थोपी भी बहुत जाती थी. कुछ भी हुआ कुछ लोकल राजनीति मान लीजिए आप. या कुछ भी हो अब बहुत ज्यादा तो नहीं मैं. कह सकती हूं पर इतना ही है कि कुछ करते थे.
और कुछ थोप दिया जाता था। ठीक है। मैं. आपसे पूछता हूं। 2001 में शिवली थाने के. अंदर एक राज्य मंत्री थे संतोष शुक्ला।. उनकी हत्या हो जाती है। थाने के अंदर. घुसकर मारा गया था। अब ये बढ़िया आदमी. निशानी तो नहीं हो सकती है।. मैं जवाब देना भी चाहती हूं इसके इसमें और. अब इसका क्या फीडबैक जाएगा? आई डोंट नो।. मुझे नहीं पता है। मगर मैं इसका जवाब आपको. दूंगी।. देखिए ये मैं आपको फिर कह दे रहा हूं।. हम्म।. आप जिन चीजों से गुजर रहे हो इससे अच्छा.
मंच नहीं है। आप अपनी बात रख सकते हो।. नहीं नहीं मैं कहूंगी।. मैं जनता के मैं सवाल रखूंगा सारे जो सख्त. हैं। जवाब आपके हैं। आखिरी फैसला निष्कर्ष. जनता पे छोडूंगा। वो मेरा फैसला है।. नहीं नहीं मैं जवाब दूंगी। नो डाउट है।. मैं ये नहीं कहूंगी। मैं कह दूं। आपने इस. क्वेश्चन पूछा और मैं आंसर नहीं दूंगी। तो. ये होगा कि वो गलत थे। नहीं, गलत होंगे।. आप सब दुनिया की नजरों में हो सकते हैं।. मैं पत्नी हूं। मैं कैसे कह दूं मेरा पति. गलत है। मैं चाह के भी नहीं कह सकती।. शुभांकर मैं खुल के कह रही हूं इस चीज को. कि मेरे वो पति थे. वो भी किसी के बेटे थे ना.
नहीं नो डाउट शुक्ला की भी तो बीवी होगी. ना. मैं मैं बता रही हूं नहीं अब वो गुजर चुकी. है तो कभी. अभी मैं बताती हूं मेरी भी मेरी बात. कंप्लीट करने दीजिए शुभंकर. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. मैं ये बताना चाहती हूं कि संतोष शुक्ला. का जो ये कांड हुआ था. उस वक्त मेरा एक बच्चा खत्म हुआ था मैं. मतलब ये मान के चलिए कि मैं आपके पडकास्ट. में कहना चाहिए कि नहीं कहना चाहिए मुझे. बहुत ज्यादा ब्लीडिंग हो रही थी विकास. मुझे लेके जा रहा था घर से हम लोग गाड़ी. गाड़ी में कई लोग बैठे हुए थे। मेरी हालत. बहुत सीरियस थी और मैं डॉक्टर रास्ते में.
बम चले थे विकास पे। यह कभी किसी ने बताया. ही नहीं आज तक। यह कभी आपने सुना भी नहीं. होगा। न्यूज़ में भी नहीं आया। मैं बता. रही हूं बम चले और मैंने देखा इस तरीके से. बम चल रहे थे कि कोई साइकिल वाला भी बम. चला रहा था। कोई रिक्शे वाला भी बम चला. रहा था। सब्जी बेचने वाला भी बम चला रहा. था। यहां तक कि जो मेन वहां की चौपपुर की. क्रॉसिंग होती है वह क्रॉसिंग भी रोक दी. गई थी।. वहां पर बीच के गांव मेरी हालत इतनी खराब. थी कि किसी बीच गांव में मुझे उतारा गया.
और वहीं पर खटिया में लिटा दिया गया। मेरी. बहुत हालत सीरियस थी कि मतलब बॉडी में. ब्लड बच ही नहीं रहा था। इतनी ज्यादा. ब्लीडिंग हो रही थी मुझको। फिर यह मुझे. छोड़ के वहां चले गए थाने में। वहां पर. बहुत पब्लिक थी। क्या हुआ? क्या नहीं हुआ? क्योंकि मैं वहां पर नहीं थी। मैं होती तो. यह भी आपको बताती। मगर सिनेरियो यही था कि. पहले विकास पे बम चलाए गए थे। यह आज तक. पता नहीं विकास ने भी क्यों नहीं बताया।. मुझे तो यही लगता कि वह अपनी बात क्यों. नहीं रखते थे कभी।.
लेकिन थाने के अंदर घुसकर फिर संतोष. शुक्ला का मर्डर हुआ।. हां वहां पर मर्डर हुआ। मगर उसमें विकास. बाइज्जत बरी हुए हैं कोर्ट में और जनता. वहां की जो गांव की जनता थी वो उनका बहुत. समर्थन करती थी।. हां वो बरी इसलिए हुए क्योंकि कोर्ट ने ये. नहीं कहा कि वो बेगुनाह है क्योंकि 25. पुलिस वाले जिन्होंने पहले गवाही दी थी. वो गवाही से बाद में पलट गए। जिसको लेके. समाज ने माना. कि डर इतना ज्यादा विकास दुबे का उस दौर. में था कि उस डर से 25 पुलिस वालों ने.
अपने परिवार का ख्याल सोचते हुए अपने एक. सामने हुए मर्डर को भुला दिया उन्होंने।. हो सकता हो बट मैंने जो जाना उसके बाद से. तो मैं कानपुर में रह रही हूं। मैं हमें. लगता है. बट समाज तो आप भी देख रहे हो ना मैम जैसे. आज आप कहते हो कि. नहीं नहीं श्योर मैं देख रही हूं मैं सब. झेल रही हूं।. जैसे आज आप आज समय बदला है। आज आप बहुत. सारी तकलीफों में हो गए। कई बार शायद कोई. चीज आपके साथ जायज या नाजायज भी हो सकती. है। मेरी संवेदनाएं भी है। इसीलिए शायद ये. पॉडकास्ट हम कर रहे हैं। क्योंकि मैं. मानवीय पहलू पर आपके लिए संवेदना रखता.
हूं। लेकिन साथ ही एक पत्रकार होने के. नहीं आप पूछ सकते आप क्वेश्चन मैंने आपसे. क्या कहा कुछ भी मुझसे पूछिए जो मुझे पता. है वो मैं इसीलिए पूछ रहा हूं मैं कि जब. ये घटना हुई आपको तो बताया होगा उन्होंने. ना कि 25 पुलिस उन्होंने संतोष शुक्ला को. मारा था आप तो अनजान नहीं होंगे. नहीं देखिए मैं मेरा क्या है. वो उस दुनिया में नहीं है. नहीं नहीं मैं झूठ नहीं मैं शुभंकर आदमी. मुझे कितना भी झूठ समझे मैं रियलिटी बता. रही हूं मुझे झूठ बोलना नहीं आता है बहुत. अच्छे से ना मैं झूठ में बिलीव करती हूं. झूठ देखिए झूठ की एक स्क्रिप्ट होती है.
मैं कितना भी बोलूंगी बोलती ही चली जाऊंगी. और सच एक होता है. और पुराने बयानों से वो अपने आप लोग पकड़. लेंगे. स्वाभाविक है तो मैं झूठ नहीं बोलना चाहती. हूं मैं आपको बता रही हूं क्या मैटर है. मेरे मैं बीमार हुई मुझे वहां पर गांव में. छोड़ा गया मेरी डॉक्टर थी बिराना रोड में. पता लगाइएगा आप इस चीज को बिराना रोड में. एक सरकारी हॉस्पिटल है वहां पर मेरी. डॉक्टर बैठती थी मैं उनका नाम नहीं लेना. चाहती हूं वो आशा हो जाएंगी डॉक्टर. जिन्होंने मेरा इलाज करा था फिर मैं अपने. मम्मी पापा के संपर्क में रही विकास कब. हाजिर हुए विकास कब जेल गए गए मेरा उसके.
बाद से फिर मैं कभी बिकरू में नहीं रही।. मैं मम्मी पापा के साथ ही रही।. तो पति पत्नी में बात नहीं करते थे।. नहीं बात करते थे। मगर अभी जब वो कांड हुआ. था उस समय का फोन ही नहीं थे। मोबाइल ही. नहीं था।. जैसे कि आदमी निकलता भी है।. तो आदमी कहता ना मैं आज जाके मार डालूंगा।. नहीं ऐसा. गुस्से का इज़हार तो करते हैं।. विकास ने कभी मेरे सामने ये बात कही होती. क्योंकि मैं इस चीज का विरोध करती अगर आप. यह कह रहे हो कि आपकी गाड़ी में मौजूदगी. होते हुए वो बम फटा जिससे गुस्सा होकर.
उन्होंने जाकर वो कदम उठाया तो आई एम. श्योर वहां पे एक रिएक्शन भी आया होगा।. हां हां हां. क्योंकि मैं उस वक्त एकदम बेहोशी हालत में. थी सुभांकर।. मुझे ये नहीं पता कि उन्होंने क्या. रिएक्शन करा। मुझे यह मालूम है कि वो एक. गली रास्ते में थी गांव की।. वहां पर मुझको गांव वालों के पास छोड़ के. वो लोग वहां से चले गए थे। आज भी वो गाड़ी. हमें लगता हमारा जो एरिया था जो गांव का. गांव में घर के पास घोड़ा कुछ बोलते हैं. गांव वाले वहां पर वो गाड़ी खड़ी रही है।. बहुत साल तक वो जली हुई गाड़ी वहां पर थी।.
आपने विकास दुबे से शादी क्यों की? लव. मैरिज थे अरेंज? हां यस। मेरी लव मैरिज थी। भाई का दोस्त. था। अब इसमें एक्सप्लेन मैं क्या करूं? मैं. प्यार अंधा होता है।. नहीं नहीं मैं जानता हूं प्यार अंधा होता. है। हमारी जनरेशन में भी पिछली जनरेशन में. ही है।. अभी आपने किया नहीं है। जिस दिन आप कर. लोगे तो आप इस मतलब मुझसे क्वेश्चन नहीं. करना।. अभी पॉडकास्ट पूरा बदल जाएगा अगर मैं अपने. इतिहास में आऊंगा कभी और हम आपके साथ. बैठेंगे प्यार में बात कर लेंगे। लेकिन ये. सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं कि क्या अच्छा. लगा था विकास दुबे में आपको जो आपने लव. मैरिज की।.
ऑनेस्ट था। नशा नहीं करता था। लड़कियों की. लत नहीं थी।. अपने हर रिश्ते पर बहुत ऑनेस्ट था।. कभी उसने. मेरे साथ तो बेईमानी नहीं करी। दुनिया के. साथ करी हो मेरे लिए बहुत ऑनेस्ट था। अपने. बच्चों के लिए बहुत अच्छा था। अपने गांव. वालों के लिए बहुत अच्छा था। आज भी उसके. गांव वाले रोते हैं। उसके लिए मुझे फोन. करते हैं। मगर मैं वो नहीं बन सकती ना।. मैं वो हूं ही नहीं जो मैं बन जाऊंगी। बस.
और फिर एक 100 की एक बात शुभांकर प्यार. अंधा होता है। मेरा यह समझ सोच लो कि मेरा. प्यार अंधा था।. नहीं यह सवाल मैम मैंने इसलिए पूछा. क्योंकि जब मैं विकास दुबे को लेकर रिसर्च. कर रहा था तो उस रिसर्च में आया कि 90 के. दशक में ही विकास पर हत्या और लूट के कई. मामले दर्ज हो गए थे।. नहीं ऐसा कुछ नहीं था। नहीं ये सब झूठ है।. ये तो किताब में कोई है संजय मिश्रा करके. उन उन्होंने ये किताब बनाई है। वो किताब. बताना तो तुम्हारे ऑफिस भेज देंगे।. उन्होंने तो बताया था कि वो बचपन से.
बारातें लूटता था। मैं आपको बताऊं बहुत. संपन्न फैमिली का बच्चा था वो और पिताजी. उनके अब तो नहीं है वो इतने सीधे थे उनका. नाम था राम वो साक्षात राम थे मां थोड़ी. सी थोड़ी तेज है मेरी सास नो डाउट हर बहू. को अपनी सास तेज लगती है मगर सच बता रहे. हैं मां-बाप बहुत सीधे बहुत अच्छा पता. नहीं ये बच्चा कैसे बिगड़ गया. वो तो देखिए मां-बाप से हम तुलना नहीं कर. सकते मुख्तार अंसारी के नाना जी जो थे. ब्रिगेडियर उस्मान हम. वो देश के लिए शहीद हुए थे.
उनके दादाजी जो थे वो कांग्रेस में थे।. मुझे पता है मैंने पढ़ा है।. बाप दादा से पूत क्या करेगा या नहीं अब यह. नहीं बता सकते फैमिली बहुत अच्छी थी और. अपने परिवार के लिए बहुत अच्छे थे। क्यों. उन्होंने ये गलती करी थोड़ा सा भी मुझे. हिंट दे देते शुभंकर।. तो लखनऊ और कानपुर में इतनी दूरी नहीं थी. थी। मैं जाके उनको रोक नहीं सकती थी। मुझे. किसी ने बताया नहीं।. नहीं मैं आपको आप रोक सकते थे। जैसे. सिद्धेश्वर पांडे की हत्या 2000 में हुई।. जेल के भीतर रामबाबू यादव पर हमला हुआ। ये.
बाबू हत्या तो नहीं मुझे मालूम है। मैं. कानपुर कानपुर कानपुर में रहती थी। हां वो. मगर विकास ने नहीं करी थी। मैं इस चीज का. आपको कहती हूं। वो कन्विक्ट हुए उसमें सब. कुछ हुआ है। मगर उन्होंने नहीं करी थी। वो. उस दिन किसी नेता की रैली में गए हुए थे।. वो नेता का नाम मैं भूल रही हूं।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़][गहरी सांस लेने की आवाज़]. लेकिन आपने ये ये जो कॉन्फिडेंस यहां. दिखाया देश ने ये संतोष शुक्ला में आपने. नहीं कहा। नहीं तो. अब लोग कहेंगे कि इसका मतलब आप वहां जानते. हैं कि संतोष शुक्ला वाली हत्या. नहीं तो संतोष नहीं संतोष शुक्ला की हत्या.
में तो मैं बता नहीं रही हूं कि मैं बीमार. थी वहां से बम चल रहे थे. यहां आपको कैसे पता कि उन्होंने हत्या. नहीं की थी. क्योंकि वो नहीं थे उस दिन वो गए थे खा पी. के किसी नेता की रैली में गए थे कह के. तो बात करते ही नहीं थे आपस में कि. अरे मैं गांव में थी उस दिन गांव में थी. वही जब यह कांड हुआ है पहले सिद्धेश्वर. पांडे कांड हुआ है फिर संतोष शुक्ला कांड. हुआ है तब तक मैं गांव में रहती थी। ये जो. आपको इन दी है किसी ने गलत दी है पहले. सिद्धेश्वर मरे फिर संतोष शुक्ला.
मैंने कहा सिद्धेश्वर का घट्टा 2000. तो मैं उस समय मैं हूं जितनी इन रखी मैंने. वही मेरा बेटा उस वक्त मेरे मैं. प्रेग्नेंट थी मुझे मालूम है विकास किसी. रैली में गए हुए. सिद्धेश्वर पांडे 2000 में घटना हुई है और. 2001 में संतोष शुक्ला की घटना हुई. हां यस यस मुझे सन नहीं याद है. मैं इतना नहीं ये पांच सालों में तो मैं. बहुत कुछ भूल गई. इतनी इनफार्मेशन मैंने रखी. नहीं जरूर आपने. बहुत सर्क होकर रखी क्योंकि इस पडकास्ट. विकास से मेरी भी इमेज दांव पर है और मैं. चाहता हूं मैं अपना काम ईमानदारी से. निभाऊं मानवीय पहलू निभाते निभाते.
नहीं नहीं ये बात सच है विकास रैली में गए. थे और ये बात बताई भी गई है कोर्ट में कि. वो रैली में गए हुए थे विकास ने नहीं. हत्या करी थी इस चीज के लिए तो मैं खुद. कहूंगी. लेकिन उन पर गैंगस्टर एक्ट भी लगा है. अरे उनप तो बहुत सारे गैंगस्टर एक्ट लगे. हैं कितने खत्म भी हो गए मुझे तो अब पता. चला है अब तो मैं मुझे भी जाना पड़ता है. ना कोर्ट वगैरह तो मुझे पता चला है. तो अगर किसी पर गैंगस्टर का एक्ट लग रहा. हो बार-बार हत्या का एक्ट लग रहा हो। 50. से ऊपर अपराधों में उसके ऊपर एफआईआर दर्ज. हो. तो फिर उसको आप अच्छा आदमी कैसे कह सकते.
हो? मतलब आज अगर किसी मैं आपसे बताऊं कि. फलाना आदमी है। उसके ऊपर पांच इस आदमी के. मर्डर का आरोप लगा है। इसकी ये आरोप लगा. है। 50 ये है गैंगस्टर एक्ट है। आप उसको. अच्छा आदमी मानोगे।. देखिए मेरी तो शादी हो चुकी थी।. भारतीय नारी वाला भी तो फर्ज निभाना था।. मगर मगर मगर मैं यह नहीं कहूंगी। मैं नहीं. साथ में रहती थी। मैंने जब से उनकी ये सब. मैंने प्रकरण देखे संतोष शुक्ला के बाद से. मैं नहीं मगर संतोष शुक्ला की हत्या में.
बहुत बड़ा एक पॉइंट यह भी आता है कि वहां. बहुत जनता थी। बताया जाता है गांव में कि. जब मुझे होश आया मुझे बताया गया कि. ऐसा-ऐसा हो गया है। मैं जब डॉक्टर के यहां. से मैं लौटी मैं मम्मी पापा के साथ ही थी।. अब ये था कि कुछ सामने होते हैं, कुछ अलग. है। मगर वही पास में ही थी मां-बाप के तो. उन्होंने मुझे ये बताया मैं डर गई। उसके. बाद से मैं नहीं कोई बता दे मुझे आप जाइए. जो ये आप रिपोर्ट बता रहे हो यह तो मुझे.
लग रहा है कि आपने मिश्रा जी की किताब. पढ़ी हुई है. सारी मिश्रा जी की किताब में ही मैंने. देखिए अगर ये गलत है ये सारे एफआईआर है. कोटेड मामले हैं जो पुलिस में है इसको कोई. भी व्यक्ति इंटरनेट पर जाकर अगर विकास. दुबे के बारे में चार्जशीट में कौन-कौन से. मामले अपराध हैं तो वो किताब में लिखे हो. कहीं वेबसाइट पे लिखे हो उससे क्या फर्क. पड़ता है क्या इनमें कोई मामले ऐसे हैं जो. मैं आपको बता रहा हूं कि झूठे हैं फर्जी. हैं अपने मन से मैं कहानी नहीं नहीं नहीं. आप नहीं कहानी बना रहे हो शुभंकर अब आप. कहानी मैं बता रही हूं कि इसमें क्या कहते.
हैं संतोष शुक्ला कांड में मुझे बस जहां. तक मैं होश में हूं और जहां तक मैंने देखा. उसके बाद थाने में क्या हुआ ये मैं नहीं. बता रही हूं और दूसरी चीज अगर इसमें कोई. चीज गलत भी है तो ये मंच आपको है कि आप. उसे कंडेम कर सकते हो. नहीं मैं कर रही हूं जैसे आप जैसे आप अपनी. बात रख रहे हो [हंसी] मेरा काम सवाल पूछना. अगर कोई चीज से आप इत्तेफाक नहीं रखते हो. या आपका नजरिया दूसरा है आप कुछ भी आप उस. इमेज को आगे के लिए क्लीन कर सकते हो यह. सब देखेंगे। एक आरोप और लगता है कि बिकरू. गांव में विकास ने एक तरीके से अपनी ही. जेल कचहरी बना रखी थी। लोग आते थे। सच है.
यह? हां, जेल कचहरी नहीं बना रखी थी। गांव में. उनका ऐसा भी नहीं था जो बात लोग कह रहे. हैं कि दबाव बना के ऐसा कुछ नहीं था।. स्वेच्छा से लोग अपनी बात रखते थे कि भैया. मेरा यह खेत इन्होंने कब्जा कर लिया है।. भैया ये लड़की की शादी है। तो वो मदद करते. थे। कोई जबरदस्ती नहीं। कोई किसी को. जबरदस्ती कर सकता है।. अच्छा ये जितने अपराधी होते हैं इन सबके. साथ रॉबिनहुड वाली इमेज क्यों होती है? अब एक साइड अब मैं भी सुन रही हूं सबके.
मुंह से सब मैं सबके पडकास्ट वगैरह देखती. हूं। मैं भी सुन रही हूं। अब मुझे तो नहीं. इस विषय में मैं नहीं इतना नहीं बता सकती।. यूपी पुलिस एक अधिकारी का मैंने एक. इंटरव्यू किया।. हां मैंने ये शायद सुना था।. उन्होंने मुझसे मैंने उनसे समझने की कोशिश. की। मैंने कहा जितने भी अपराधी का मैं नाम. लेता हूं। वो यूपी के हो या विदेश में भी. मैं एक्सोबार तक की बात करता हूं जो ड्रग. माफिया नहीं पड़ा था. तो मैंने कहा उसको एक वर्ग समाज में मसीहा. मानता है उसके जाने पर रोता है आंसू बहाता. है. और एक परेशान होता है हम. तो उन्होंने उसप एक जवाब दिया था मुझे जो.
मैं अब समझना चाहूंगा आपसे. क्योंकि अब आप फर्स्ट हैंड एग्जांपल है. सही. इससे अच्छा कोई समझने मिलेगा नहीं मुझे तो. उन्होंने मुझसे कहा कि ये इसलिए होता है. ताकि अपराधों को ढकने के लिए मानवीय एंगल. दिया जाए कि जब कोई एक व्यक्ति उंगली उठाए. कि देखिए अपरा था तो काजल रेनी देखिए वहां. खाना भी तो खिला रहे थे बिटिया एक ब्याह. भी तो करवा रहे थे वो स्कूल खोल दिया था. क्रिकेट टूर्नामेंट हो रहा था वहां पैसा. दे दिया था वो बीमार था उसके लड़ गए वो एक. अपनी फौज तैयार करने के लिए भी कि मानसिक. तौर पर एक समर्थन मिल गया इससे इमेज वाइट.
वाश करने में आसानी होती है और यह हर. अपराधी के साथ है वो आपको घर नहीं देंगे. नौकरी नहीं देंगे उन्होंने यह भी कहा कि. अपराधियों में एक कॉमन चीज है कि वो घर. नहीं बनवाते वो आपको नौकरी नहीं दिलवाते. इसके अलावा जितने काम होते हैं शादी में. खर्चा कर देना क्रिकेट टूर्ना मेंट करवा. देना तुम्हारे लिए दो झापड़ मार देना जेल. से छुड़वा देना ये करवाएंगे इससे क्या है. आप दबके भी रहोगे क्योंकि पढ़ा लिखा देंगे. तो आप भूल जाओगे आप आगे निकल जाओगे आप. मानते हो. इस चीज को भी मैं कट करूंगी. हां बिल्कुल. देखिए मैं इसलिए कट करूंगी कि विकास अपने.
गांव वालों को घर भी देते थे सरकारी. कॉलोनियां कराना वो मेरे पास मतलब आप. कहोगे ना तो मैं आपको WhatsApp कर दूंगी. वो कागज उनको सरकार द्वारा उसमें सदस्य. बनाया गया था कि गरीबों को आप कॉलोनियां. दीजिए, घर दीजिए। बिकॉज़ 100 से 150 बच्चों. को पढ़ाई कराते थे। ये ये तो कभी कोई पता. नहीं मुझे बताना चाहिए कि नहीं बताना. चाहिए। बच्चों को पढ़ाते भी थे। गरीबों को. घर भी बनवा के देते थे। शराबियों को पीटते.
भी बहुत थे वो।. जो दारू नहीं पीते थे? नहीं नहीं नहीं। विकास में कोई नशा ही. नहीं था। एक भी नशा नहीं था। बंदा कोई भी. नशा नहीं। वो इलायची भी उसने लाइफ में. नहीं कभी खाई। उससे ज्यादा तो मैं इलायची. खा ले। इलायची खाना खराब नहीं होता बढ़िया. नहीं नहीं नशा बता रही हूं कि एक नेचर. होता है कि मुंह में कुछ पड़ा रहे वो नहीं. खाते. कभी पहाड़ पे सफर करिए हरी इलायची खाइए. आपको परमानेंट परमानेंट मैं परमानेंट जेब. में रखती हूं मैं इलायची मुझे थोड़ा सा. अनइज़ली फील होता है Facebook पर हमने एक. स्टोरी की थी सफर में जिनको उल्टी आती है.
वो इलायची अदरक खाए तो उल्टी नहीं आएगी. हम हम नहीं आपकी वही बात मैं बताना चाहती. हूं वो ऐसे नहीं थे वो लोगों की नौकरियां. भी लगवाते थे. हम. घर भी देते थे. हम. और बच्चों को पढ़ाते भी थे हम. गरीबों की मदद भी करते थे वो। ऐसा नहीं. है। आप उनके गांव में जाइए। देखिए कितने. पक्के गांव घर हैं। देखिए मीडिया कह देंगे. तो गांव वाले नहीं बताएंगे।. आप यदि एक नॉर्मल आदमी की तरह घूमने जाइए. वहां पर जाकर पूछिए तो आपको सब बताएंगे।. जितने वहां पर पक्के घर खड़े हैं आज की.
तारीख में सब विकास ने ही बनवाए हुए हैं।. सरकारी आवास और पैसा दे दे के।. ठीक है। यानी उनका एक मानवीय पहलू भी था।. हां, एक था। पुजारी भी थे और पूजा ये जो. आप भागवत इनमें भी दान करना. नहीं तो यूपी में जितने अपराधी यूपी बिहार. में हमने देखा है हमारे उस पड़ोस से लेके. जितना सबसे ज्यादा पूजा सबसे ज्यादा कथा. भागवत वही करवाते हैं एक उसमें भीड़ आती. है. नेता जी का जय जयकार लगता है. तो अब मैं तो ये भी मानता हूं कि जो. हां हो सकता हो ऐसा भी हो सकता है नो डाउट. मगर मैं इस चीज को काटूंगी कि वो नौकरी भी.
कराते थे बच्चों को पढ़ाते भी थे आज हमारे. गांव का युवा वर्ग बहुत. बेरोजगार टहल रहा हम. ऐसा नहीं है कि मुझे पता नहीं है। मैं. कभी-कभी जाती हूं।. गांव कई लड़के उनकी टीम में थे जो अपराधी. बने।. उनकी टीम में सच मैं बताऊं तो दो ही तीन. लोगों को तो मैं जानती हूं। वो छोटे-छोटे. से जो बच्चे मारे गए इस कांड में वही सब. और बहुत लोग बैठते थे वहां पर तो परमानेंट. अब जब आप पुण्य और पाप दोनों देख रहे हो. तो आपको क्या लगता है?
देखिए उस घटना को लेके तो मैं फिर शुभांकर. यह कहूंगी कि वह बहुत अशोभनीय थी, निंदनीय. थी और उसके लिए मुझे कहीं भी मैंने पहले. दिन भी जब मीडिया में बैठी थी और आज भी. बैठ के आपके सामने कह रही हूं उसके लिए. मुझे कहीं भी दंडवत करनी पड़े उसके लिए. मुझे कितना भी कुछ करना पड़े लाइफ में तो. मैं वो करने के लिए तैयार हूं कि वो गलत. था। सबके बच्चे थे और सबको जीने का अधिकार. था।. अब था।. दो विषय मेरे पास हैं। उनमें से आप बताइए. आप किस पर बात करना चाहेंगी अभी? बताइए। एक विषय है जिसके लिए आपने मुझे.
पडकास्ट के लिए अप्रोच किया था कि सारी. वित्तीय जितने फाइनेंस का डिपार्टमेंट है. वो सारा सील कर दिया गया है जिससे आपको. आर्थिक तौर पर समस्या हो रही है और दूसरा. है बिकरू कार्ड. इन दोनों विषय में पहले आप किस पे बात. करना चाहेंगी. आपको जो अच्छा लगे. मैं सब में ओपन हूं कि आज हम और आप चर्चा. कर रहे हैं और आपने मुझसे वादा किया है कि. हम सारे सवाल लेंगे तो मैं आप पे छोड़ रहा. हूं। नहीं आप आप आप क्वेश्चन जो करोगे. पहले पैसों पर बात करेंगे पहले बिकू कांड. पे. जो आपको अच्छा लगे जिसमें आप सहज हो मैं. मैं तो मुझसे तो बराबर ही सब क्वेश्चन कर.
रहे हैं मैं आंसर दे रही हूं. ठीक है तो मैं सबसे पहले फिर मैं बिकरू. कांड पे ही बात कर लेता हूं उसके बाद हम. फिर पैसों पे बात कर लेंगे क्योंकि हम. क्राइम पे बात कर रहे हैं. तो फिर आ जाएगा. आठ पुलिस वालों की निशंस हत्या हुई थी. जिस तरह से हत्या हुई थी. समाज उसे एक दरिंदगी के तौर पर देखता है. समाज का देखने का नजरिया ये है कि वो. पुलिस के इकबाल पर सवाल था क्योंकि सिर्फ. मारा नहीं गया था। मैसेज दिया गया था और. इसीलिए कईयों का मानना है सरकार प्रशासन. ना कहे कि गाड़ी पलट गई और गाड़ी पलटने को.
आज भी एक मैसेज के तौर पर दिया जाता है कि. अपराधियों के मन में डर पैदा हो जाए।. दोनों घटनाओं को आप कैसे देखते हो? देखिए आर्ट पुलिस वालों के लिए तो मेरी. पहले भी पहले दिन से मैं कह रही हूं. हमदर्दी है और जिंदगी भर रहेगी और जब तक. मैं जिऊंगी मुझे कभी मौका मिला उस फैमिली. से मिलने का तो मैं उनके पैर छू के उनकी. गलती की वैसे वो गलती नहीं थी बहुत बड़ा. अपराध था उस चीज के लिए मैं हमेशा ही. गिल्ट रहूंगी इसलिए शुभांकर मैं इस विषय.
में हमेशा कहूंगी जिंदगी में मुझे उस चीज. के लिए मैंने स्टैंड ही नहीं लिया कहीं. कभी बोला ही नहीं बस बस सिर्फ एक चीज के. लिए मैं हमेशा कहूंगी कि यदि उनको जिंदा. रख के ये जांचे होती तो ज्यादा बेटर होता।. एक अनजान आदमी से आप पूछ रहे हो जिसको कुछ. ना पता हो। मैं तो एक वो बच्चा हो गई हूं. जिसको एक पजल पकड़ा दी गई है और बस यह कह. दिया इसको यहां से जोड़ो इसको यहां से. जोड़ो। बस वही मैं जोड़ रही हूं बराबर।.
आठ पुलिस वालों की हत्या हुई थी। शायद. इसलिए एक मैसेज चाहिए था कि अपराधी कानून. की कमजोर धाराओं में शायद छूट जाते हैं।. ऐसा जनता मानना है जनता का कि छूट जाते. हैं। जब अपराध इतना बड़ा हो तो सबक भी. इतना बड़ा होना चाहिए कि नस्लें याद रखें।. शायद अतीक अहमद हत्याकांड या फिर विकास. दुबे कांड शायद जनता की निगाहों में ऐसे. हैं। मुझे इसका कानूनी पहलू नहीं पता और. ये कितना सही है ये भी नहीं पता। इसको. लेकर हमें चर्चा होती है। एक वर्ग इसे. मानता है कि हम तालिबान नहीं हैं। लेकिन.
समाज में एक वर्ग ने इन दोनों घटनाओं पर. खुशी भी जाहिर की थी कि ये हुआ दोनों. घटनाओं में। समाज को अफसोस नहीं था कि. क्यों हुआ? कैसे हुआ? किस लिए हुआ।. हालांकि जब अधिकारी बैठते हैं तो उनसे हम. सख्त सवाल करते हैं। मैंने अभी कुछ दिन. पहले एक अमिताभ जी आए थे। उनसे मैंने सख्त. सवाल पूछे। सारे सवाल पूछे मैंने। उत्तर. प्रदेश के पूर्व डीजीपी आए थे। उनसे मैंने. सख्त सवाल पूछे। लेकिन मैं आपको यह भी बता. रहा हूं कि समाज में एक वर्ग ने इस पर. खुशी भी मनाई थी। इन दोनों घटनाओं पर चाहे. वह अतीक वाली घटना हो या फिर विकास दुबे. की घटना हो।.
इस पर तो मैं यही आंसर दे सकती हूं। आम. जनता की तरह मुझे देखा जाए तो स्वाभाविक. है कि यह बहुत गलत था और एक फैमिली के तौर. पे यदि आपने एक मैसेज दे दिया था विकास को. मार के तो फिर परिवार को परेशान करने की. क्या जरूरत थी? या परिवार भी उतना ही. क्रिमिनल होता. या 5 सालों में मैंने भी कोई क्राइम किया. होता। तो तो परिवार को दंड दिया जाता है. ना। परिवार को क्यों दंड दिया गया? मेरा. बस सिर्फ यह कहना है। विकास ने गलती करी।.
आपने उसको दंड दिया। नो डाउट ठीक किया।. मैंने उसके लिए स्टैंड नहीं लिया। नहीं. लूंगी। आगे भी नहीं लूंगी। कभी-कभी मन. भरता है। दुखी होती हूं। रोती हूं। पति है. नो डाउट। सबको बुरा लगता है। मगर परिवार. को क्यों परेशान किया गया? मतलब हम लोगों. पे ये प्रॉपर्टी बंद कर देना और बच्चों की. पढ़ाई छूट जाना इससे क्या क्या मैसेज. जाएगा? आप यदि आप सुनिए आपने प्रॉपर्टी. बंद कर दी आय का जरिया बंद कर दिया बच्चों. की पढ़ाई छूट गई क्या आप क्या बच्चा.
पढ़ेगा नहीं तो बच्चा क्या करेगा मुझे यह. पहले बताइए. वो जो प्रॉपर्टी बंद की गई उसको लेके. सरकार का या जिन लोगों ने बैन लगाया उनका. यह मानना था कि ये गलत तरीके से कमाए गए. पैसे थे काला धन था गलत कमाई था किसी के. खून से किसी के डर से किसी किसान को धमका. कर उगाही का पैसा था. एक भी आज पहले आप बोलिए. बस इतना ही था. एक भी कोई सरकारी सारी जमीन नहीं है। सब. खरीदी हुई है। दादा बाबा के खानदानी लोग. थे। बाबा भी उनके जमींदार हुआ करते थे जो.
हमारे ससुर के द्वारा बताई हुई है। सास भी. एक आर्मी ऑफिसर की बेटी थी। उसको नानी की. बुआ बुआ उनकी स्वतंत्रता सेनानी थी। उनको. भी औलाद नहीं थी। उन्होंने भी सारी. प्रॉपर्टी विकास को दी। विकास ने कोई. सरकारी या गुंडई करके कोई जमीन नहीं खरीदी. थी। खुद की कमाई और खुद के पैसे की प्रॉपर. पैसे वाले पे सेगमेंट पे मैं अभी आ. जाऊंगा। इसलिए मैंने कहा था वित्तीय मामला. जो है हमने अभी थोड़ा साइड रखा है। हम अभी. इस घटना की बात करते हैं।. आप मानते हैं विकास दुबे ने ब्राह्मण.
समुदाय का नाम भी खराब किया। हालांकि कुछ. लोग हैं जो आते हैं ब्राह्मण ब्राह्मण. करके बट आप मानते हो कि ब्राह्मण समुदाय. को भी कलंकित किया गया।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. समाज पर आरोप लगे विकास की वजह से।. कहना तो बहुत कुछ चाहती हूं। मगर मैं कह. दूंगी ना तो बड़ा बैकफायार हो जाएगा। वो. आपका वर्जन इस तरह क्या बैकफ अब आपके पति. मर गए आपके प्रॉपर्टी बैन पड़ी है सब कुछ. तो जो. नहीं नहीं वो तो हो गया है देखिए कोई कुछ. लोग ऐसे होते हैं मैं आपको कह देती हूं आप.
कह रहे हो तो आप मैं कह देती हूं. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कुछ. लोग उसको बहुत पीठ पीछे अच्छा भी बताते. हैं कुछ समाज हैं और कुछ को बुरा भी लगता. है जो कैमरे और शासन प्रशासन के सामने. रहते हैं वो ढोल पीटते हैं कि बुरा लगा. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] और. वही आदमी मेरे सामने बोलता है कि बहुत. अच्छा किया तो मैं किस समाज का मानू आपका. मानू या उनका मानूं? मैं तो सिर्फ जो फैक्ट्स है अगर आप उनकी.
पत्नी नहीं होती और आप ये सारे किस्से सुन. रही होती आप इस आदमी को कैसे देखती हैं? नहीं मैंने तो आपको मैं आज बता दूं एक. सभ्य आदमी के तौर पर या वो आदमी जिसने. अपने समाज का अपने प्रदेश का अपने गांव का. नाम बदला. मैं मैं आपको एक बात और आपने आज ये बहुत. अच्छी बात पूछी मैं बताना चाहती हूं जब ये. सब प्रकरण हुआ हम हमारे बच्चे टहल रहे थे. रोडों पे परेशान थे ये पांच छ दिन हम. लोगों ने कैसे समय काटा है तो मैंने अपने. बच्चों से ये बात कह दी थी कि अब तुम्हारे. डैड के साथ हम लोग का रहना नहीं होगा ये.
अब तुमको डिसाइड करना है कि मां के साथ. रहना है कि पिता के साथ रहना है देखिए जो. चीज गलत शुभंकर मैं आपको एक बात बताना. चाहती हूं वो गलत है। उस चीज को मैं कभी. नहीं डिफाइन करूंगी कि नहीं नहीं नहीं. नहीं वो बहुत अच्छे थे। बहुत अच्छे थे। वो. गलत थे। उन्होंने वो प्रकरण गलत किया।. इसीलिए आपसे सवाल पूछा कि अब एक पत्नी के. नाते एक समाज में आप भी एक ब्राह्मण महिला. हैं। इसके नाते आपको क्या लगता है? समाज. का नाम खराब किया? उन्होंने अब तो पूरी घटनाएं हो चुकी है।. नहीं नहीं नो डाउट।.
आप देख रहे हो।. नहीं उन्होंने ये घटना बहुत गलत करी है और. इसके मैं हमेशा निंदा करती हूं इस घटना. की।. वो चीज अच्छी नहीं थी।. बहुत सारे लोगों ने मुझसे इस घटना जब. मैंने डाला कि आपसे मैं संवाद करने वाला. हूं तो मुझसे कहा कि रिचा जी से पूछिएगा. कि शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा की बेटियों. से क्या वो आंखें मिला पाएंगे? क्योंकि. उनको सिर्फ मारा नहीं गया था। उनके शव के. साथ ही बर्बरता हुई थी।. नहीं उनसे मैं कभी आंख ही नहीं मिला. पाऊंगी और जिंदगी में कभी मौका मिला तो. मैं उनसे कान पकड़ के माफी मांगना चाहूंगी.
कि बेटा मेरी गलती नहीं है और जो यदि मैं. उसमें होती तो मैं यह होने ना देती। मैं. किसी बच्चे से उसके मां-बाप को नहीं छीन. सकती। आज जैसे मेरे बच्चे अपने पिता के. बगैर हैं। मैं महसूस कर सकती हूं शुभांकर. मैं भी एक औरत हूं कि वो औरतों ने भी बड़ा. दर्द झेला होगा। इसीलिए मैं चुप होकर जो. भी कुछ मेरे साथ हो रहा है, मैं शांति से. सह रही हूं। मगर इस बीच क्या हुआ शुभांकर? मुझे तुम्हारे पास आने का सबसे बड़ा मोटिव. था। कुछ लोग इस मैटर में अपने आप को अबला.
दिखा के बहुत अपने आप को नहीं कहते हैं कि. अबला दिखा के अपनी नरिसिंग पॉलिशिंग कर. रहे हैं।. मैं उस हिस्से पे भी मैं आऊंगा जो आप खुशी. दुबे की बात मैं उस हिस्से को भी रखा है. मैंने।. तो हम आज सारे सेगमेंट कवर करेंगे। हम एक. करके. अब एक इसमें ये भी बात आती है कि देवेंद्र. मिश्रा अधिकारी थे।. वो अपना काम कर रहे थे। उन्होंने शहादत से. पहले एक पत्र भी लिखा था कि आपके पति. पुलिस की हत्या करवा सकते हैं।. इन सबके बाद भी एक कोई पुलिस अधिकारी था. जो मिला हुआ था।.
नहीं ये नहीं समझ पाई थोड़ा सा फिर से. समझाना। देवेंद्र मिश्रा ने एक पत्र लिखा. था कि आपके पति साहब जो है अपने. अधिकारियों को. वो पुलिस वालों की हत्या करवा सकते हैं।. और फिर एक एसओ हैं विनय तिवारी. उनका नाम आया कि जानकारी इधर से उधर गई और. फिर जॉइंट प्लानिंग के तहत पुलिस वालों के. कुछ लोग मिलकर उस घटना की जानकारी दी। हम. जब वो घटना जब उस गांव पहुंचे. हम हम. तो इनका इंतजार किया जा रहा था देवेंद्र. मिश्रा का और फिर इनको मारा गया गोलियों.
से नजदीक से फिर कुल्हाड़ी से शरीर पर वार. किया गया और इनके शव के साथ बर्बरता की गई. नहीं जो चीज शुभांकर गलत है उसका मैं कभी. साइड नहीं लेना चाहूंगी वो उन्होंने नो. डाउट बहुत. बट ये ये सामान्य अपराध नहीं ये आतंकवाद. जैसा है कि आप. तो उन्हें सजा भी तो आतंकवाद वाली मिल गई. हां. उन्हें सजा तो मिली मिली आतंकवाद जैसी. जैसे उन्होंने किया वैसा उनको तुरंत मिला. उसके लिए मैंने कहीं आप बता दो कभी कोई. स्टैंड लिया हो जाके.
मैंने कभी नहीं मुझे बहुत लोगों ने समझाया. कि आप ये करिए वो करिए पता नहीं मैं मेरे. अंदर जो मेरी मन की भावना थी आज मैं कहना. चाहती हूं आपके उससे माध्यम से कि मुझे. अच्छा नहीं लगा कि मैं इसके लिए इस चीज के. लिए स्टैंड ले सकूं। हो सकता हूं मैं यह. कह रही हूं आपके पडकास्ट में बहुत लोगों. को बुरा लगेगी मेरी बात मगर मैं नहीं ले. पाई क्योंकि मैं भी एक इसी दुनिया की. नागरिक हूं। मैं कहीं और की नहीं हूं। ना. मैं एलियन हूं कि मैं कहीं बना के लाई गई.
हूं कि मुझे यह बोलना है ये नहीं बोलना. है। मेरा मानना था कि जो चीज गलत है वो. गलत है। मैंने हमेशा आप गांव में जाइए।. लखनऊ में भी जाइए। मेरे बारे में पता. लगाइए। मेरा नेचर है जो गलत है वो गलत है।. मैं अपने बच्चों के साथ भी ऐसी ही हूं। जो. गलत है वो गलत है। उसमें कुछ भी बर्बाद हो. जाए उससे मुझे कोई मतलब नहीं। मगर जो गलत. है उसको गलत कहो। उसको सही नहीं कहा जा. सकता।. कई बार आपको समर्थन करने वाले या खुशी को. समर्थन करने वाले जो लोग हैं. हम. मेरा कोई नहीं मैं काटूंगी इस चीज को।.
मेरा कोई समर्थन नहीं करता। मैं अपनी दम. पे अकेले लड़ रही हूं। पूरी न्यायपालिका. की उस पे हूं। मेरा कोई समर्थन नहीं कर. रहा है।. मैं कई बार आपने भी ये जिक्र किया कि आप. ब्राह्मण है। आपने ब्राह्मण का जिक्र किया. है ना कई बार. मैंने मुझे तो नहीं लगता मैंने. करंट गवर्नमेंट में. नहीं करा। मैंने कभी करा हो तो भाई नहीं. पता याद नहीं। नो डाउट मैं झूठ नहीं बोलना. चाहूंगी या बोल दूं नहीं करा। करा भी हो. सकता हो। वैसे मैंने कभी ये नहीं करा। और. एक बात और आज आपके माध्यम से बता दूं।.
मैं ससुराल से ब्राह्मण थी। मैं कैसे समय. कायस्त हूं।. तो मेरे से उतना निकल नहीं पाता कि मैं. ब्राह्मण हूं। सॉरी।. ठीक बात है। कोई बात नहीं।. इस चीज को भी ब्राह्मण बड़ा टच मिलेगा।. मुझे बड़ी गालियां देगा।. विकास दुबे को कई लोग कहते हैं कि करंट. गवर्नमेंट जो है वो ब्राह्मणों के ऊपर इस. तरह से कर गई। लेकिन एक सच जो मैं पढ़ रहा. था वो ये था कि जब ये घटना को अंजाम दिया. गया। तो जो लोग ब्राह्मण होकर विकास दुबे. को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। समर्थन. करते हैं। मुझसे कई लोगों ने कहा कि वो.
क्यों भूल जाते हैं कि वहां पर जो शहीद. हुए थे। चाहे वह देवेंद्र मिश्रा की बात. की जाए या सिपाही सुल्तान सिंह वो सिंह. लगाते थे लेकिन झांसी के पचौरी ब्राह्मण. थे उनकी भी निर्मम हत्या हुई थी तो. अपराधियों को लेकर जातपात नहीं देखना. चाहिए क्योंकि जब वो मारते हैं तब वो जात. देखकर नहीं मारते हैं तो जब वो मर रहे हैं. तो उसमें भी लोगों को जात नहीं देखनी. चाहिए. तो मैंने समर्थन करते हो इस बात का कई लोग. हैं जो इस घटनाक्रम को लेकर मैं इस चीज को. आपके कहूंगी मैंने अपनी जात का कहीं. ढिंढोरा नहीं पीटा कि मैं ब्राह्मण हूं.
हाय मेरे साथ ऐसा हो गया। हाय मेरे साथ. ऐसा हो गया। हां जो जो चीजें थी मैंने वो. अपने स्टैंड लिए।. जब मीडिया में आने की जरूरत पड़ी मैंने. बोला 5 साल बाद आई हूं। अबकी बार मैंने. प्रेस कॉन्फ्रेंस कानपुर में करी थी कुछ. चीजों को लेके।. बाकी मैंने कभी जात का लेके ढिंढोरा तो. नहीं पीटा।. आपके बच्चे कहां पढ़ते थे? एक बच्चा मेरा मिलेनियम में पढ़ता था। एक. बच्चा मेरा पढ़ता था डीपीएस में।. डीपीएस कहां? डीपीएस एलडी को।. ओके।.
आपके एक बच्चा विदेश से पढ़ रहा था।. हां। एक जब उसने कंप्लीट कर ली थी 12th. 12th में। एक 12th तक ही पढ़ाई कर रहा था।. यही नहीं यही कर रहा था लखनऊ।. लखनऊ एलडी में. जब विकास खत्म हुए हैं तब उसने एग्जाम. दिया है हाई स्कूल का छोटे वाले ने।. ओके। तो क्या इसमें ये भी थॉट प्रोसेस था. कि हमारा बच्चा बाहर चला जाए सेफ हो जाए।. वो लोग ये भी पूछेंगे।. नहीं नहीं ऐसा नहीं था। आपको मैं आज आपने. ये बात कही तो मैं आपको बताती हूं। मेरे. बड़े वाले हर वो शको पूछो पूछो। मुझे जनता. के ज़हन में आ रहा होगा।. बहुत अच्छा लग रहा है मुझे। मेरे बड़े. बेटे को विदेश का बहुत शौक है। आज भी बहुत.
शौक है। मजबूरी में है वो यहां पर क्योंकि. हम लोगों को अब आपस में एक तीनों को एक. दूसरे की जरूरत है।. अभी साथ रहता हूं।. हां अभी सब साथ में रहते हैं क्योंकि वही. सब कुछ कर रहे हैं और तब सब चल रहा है जो. हकीकत है। कोई हम लोगों का गॉड फादर नहीं. है। हमारा गॉड फादर हमारे भगवान ही है जो. होते हैं रियलिटी में। हम लोगों को कोई. दूसरा नहीं चला रहा है। तो ये बताऊं बड़े. वाले बेटे को मेरे बहुत शौक था विदेश जाने. का। जबकि उसने नीट यहीं से क्लियर कर ली. थी।. विकास का मन नहीं था कि वो विदेश जाए।. उन्होंने बहुत उसको समझाने की कोशिश करी.
और उसको डराया भी बहुत। मगर वो कह रहा था. कि मैं नहीं जाऊं। वह वहां नहीं गया पढ़ने. तो मैं मर जाऊंगा। तो इस डर से उसको वहां. भेजा था। ऐसा कुछ नहीं था कि मेरा बच्चा. वहां चला जाएगा तो ये गोली चलाएंगे सेफ हो. जाएंगे। ऐसा कहीं कोई नहीं कुछ नहीं था।. आपने विकास दुबे की जब गाड़ी पलट गई. उसके बाद कई तीखे बयान दिए। जैसे अभी आपने. कहा कि उसके साथ आतंकवादी जैसा सलूक किया. गया। एक जहां आपने कह दिया था कि मैं खुद. मार देती। एक जहां आपने कहा वो रावण जैसा. था। रावण जैसा था। अब लोग यह सवाल पूछते.
हैं कि जब 20 साल से उसने तबाही मचा रखी. थी। 2000 की घटनाओं से तो हम नाम लेके बात. कर रहे हैं।. इधर इतने सालों में. तब आप खामोश थी। जब सत्ता थी, ताकत थी तब. आप लोगों ने एंजॉय किया। अब जब ताकत चली. गई तब आप लोगों ने विक्टिम कार्ड खेला। ये. आप पर आरोप है।. नहीं ये जिसने भी आरोप लगाया गलत है।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] अह. सत्ता थी कि नहीं थी? देखिए हर सत्ता और. हर में विकास के साथ छीछा लेदर हमेशा होती. थी। अब आप कोई कह देता है कि अखिलेश यादव.
की पार्टी में तो अखिलेश यादव बढ़ावा दिए. थे। आपको मैं आज बता दूं अखिलेश यादव की. सरकार में ही विकास की 2006 में शायद उनकी. पांच में कभी सरकार होगी। उनके पिताजी जब. मुख्यमंत्री थे तब भी मेरी प्रॉपर्टी सील. हुई थी।. तो मैं कैसे मान लूं कि सरकार के ऐसा कहीं. कुछ नहीं था। कि मजा काट रहे यहां तो. सरकारों में बदलता रहता है ना हिसाब किताब. मतलब जो 90 से लेकर 2000 2015 तक आज जो. यहां है कल वह वहां है परसों वहां है.
मैं बता रही हूं. तो जो जहां होते हैं वहां उस टाइम मजे. होते हैं जैसे वहां निकलते हैं फिर होते. ऐसा नहीं है आपको फिर मैं आपको बता दूं. मतलब मैं ऐसे 10 लोगों का नाम जानता हूं. जो सांसद विधायक हैं. और जिस सरकार में उनको परेशान किया गया. होगा उसी सरकार में मजा. नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं था उनके साथ वो जो. भी सरकार रहती थी जब वो गलती करते थे तो. उनको उनकी सजा मिलती थी ऐसा कोई नहीं. इतनी अच्छी सरकारें तो YouTube में नहीं. रही है। मैं भी. नहीं मैं अरे मैं आपको बता रही हूं 2005. की चार से लेके सात तक आठ तक प्रॉपर्टी. बंद रही है हमारी तब तो हमें लगता है.
अखिलेश की ही सरकार थी।. लेकिन उसी 2000 में 24 पुलिस वाले बयान से. मुकर गए हैं 2001 में. कि डर के मारे बदल गए हैं।. भाई मैं कोर्ट में तो नहीं थी। शुभांकर. मैं कोर्ट में होती तो मैं मैं बयान देती. कि ऐसा नहीं था। शुभांकर मैंने कभी गलत का. साथ नहीं दिया। अब कोई भी कोई कहे मगर. रियलिटी ये है कि मैं आज यहां तुम्हारे. पास बैठी हूं। अपनी सच के साथ बैठी हूं।. मैं चाहता हूं कि अपना सच. नहीं मैं झूठ नहीं बोलती हूं और मुझे झूठ. में इंटरेस्ट भी नहीं है। झूठ कि मैं फिर. तुमसे कहती हूं। झूठ की एक स्क्रिप्ट होती.
है और सच एक होता है। मैं आज एक बोल के. जाऊंगी। वो जिंदगी भर यही बोलती रहूं।. बिल्कुल सही बात है।. मैं कब ये आप अब यदि आज मैं बोल जाऊं।. नहीं नहीं नहीं वो ऐसा नहीं था। शुभांकर. ऐसा था। कल तुम मुझे बुला के पूछोगे मैं. जवाब नहीं दे पाऊंगी क्योंकि वो स्क्रिप्ट. थी। मगर ये मेरा सच है। मैं ऐसी ही हूं।. तुम मुझे 10 साल तक जिंदा बनी रही तो मैं. हो सकता हूं तुम्हें फिर भी ऐसी ही. मिलूंगी। मुझे झूठ रहोगे मस्त रहोगे। आपके. बच्चे हैं दो-दो।. वो नो डाउट है। सब अच्छा रहेगा। मगर मैं.
तुम्हें बता रही हूं। मुझे झूठ में कोई भी. इंटरेस्ट नहीं।. और आपको भी आपकी सास जैसा बनना होगा। हां. हां मेरी सास बहुत अच्छी है और मैं सास से. तुम्हारी इसी में लास्ट में कुछ कहना भी. चाहती हूं कि मेरी सास सुने तो खुश हो जाए. वो।. ठीक है। अब हम आते हैं पैसे वाले पे जिसको. आप आपने कई बार ये कहा ऑफ द रिकॉर्ड भी. यहां पर भी आपने कहा कि विकास ने गलत. किया, सजा दे दी गई।. सारी संपत्ति क्यों सील कर दी गई? ये आपका मुख्य एक वजह भी थी जिसको लेकर आप. जनता से भी समर्थन मांग रहे थे और चाह रहे.
थे कि सरकार भी आपकी बात सुने। तो सरकार. के लोग आई एम श्योर इस पॉडकास्ट को. सुनेंगे तो मैं कुछ सवाल रख देता हूं।. आपके ऊपर जो ईडी की जांच आई उस ईडी की. जांच में करोड़ों की बेनामी संपत्ति निकल. कर आई।. जिसमें मैंने एक जिक्र भी किया था कि दुबई. में संपत्तियों और बैंकॉक में निवेश के. पक्के सबूत मिले हैं। अब सिलाई कढ़ाई से. ये करोड़ों रुपए तो नहीं आया होगा।. सिलाई कढ़ाई आई डोंट नो।. अरे. नहीं नहीं मैं बात ना बैंकॉक में है बेटा।. निवेश करने की बात. नहीं कहीं नहीं है बेटा कुछ नहीं है ये सब.
झूठी खबरें बैंकॉक में होती और दुबई में. मेरे पास होती दुबई बेस्ड आदमी मैं यदि. होती रियलिटी में कोई ना कोई एक शेख मेरे. सपोर्ट में होता आज ये बात ध्यान रखना. मुझे भी बहुत कुछ अब पता लगता रहता है लोग. बताते हैं यदि दुबई बेस्ड प्रॉपर्टी होती. है तो यहां उसका सपोर्ट होता देखो मैं कह. रही हूं बाकी आप समझना कि मैं सही कह रही. हूं कि गलत कह रही हूं जितनी मुझे ज्ञान. है ऐसा कुछ कुछ नहीं है।. जय वाजपेयी कौन था?
जय वाजपेई मुझे भी पता चला है इसी से जो. बात मैं हकीकत बता रही हूं कि जय वाजपेयट. [हंसी] नहीं. अच्छा ठीक ठीक ठीक है ठीक है मैं बताऊंगी. मैं क्यों मुस्कुराई मैं ये भी बताऊंगी. मैं झूठ नहीं बोल के जाऊंगी तुम पे. बिल्कुल भी आरोप नहीं लगना चाहिए कि तुमने. रिचा दुबे की नरेसिंग करी पॉलिश करा या. उनकी वाइट वाश कर रहे थे ऐसा कुछ नहीं मैं. गलत हूं तो मुझे गलत. जैसा आपने कहा कि आप आपको लगता है आप सही. हैं आपको लगता है कि आप सच बोल रही हैं. हम्. वह वैसा ही जा रहा है।.
मैं हंसी क्यों हूं उसके नाम पे मैं आपको. वह लास्ट में बताऊंगी।. वह विकास का उसका उठना बैठना था। नो डाउट. ऐसा नहीं है कि उठना बैठना नहीं था। अब तो. सब सब जोड़ है।. जय वाजपेयी. जय वाजपेयी कोई. वो. एक बताए तो जाते हैं कि कोई छोटी सी दुकान. करते थे मगर वो अचानक काफी पैसे वाले हो. गए। नो डाउट मुझे भी ऐसा ही पता चला कि वो. अचानक बहुत पैसे वाले हो गए।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. तो ये है कि जय वाजपेयी से मेरा इतना कोई. मिलनाजुलना नहीं था। वो विकास के साथ रहते.
थे। विकास की अपना आना जाना ये भी अब आदमी. जो हैं वो कहते हैं विकास से मेरा कोई. मतलब नहीं था। हाय मैं विकास को जानता. नहीं। ये मुझे अब झूठ लगता है सबका। अब. मैं कह दूं कि मैं विकास को जानती नहीं. थी। एक बात समझना मैं विकास की पत्नी नहीं. थी। तो ऐसा नहीं हो सकता। मैं उनकी पत्नी. हूं। उनकी अच्छाइयां भी मेरे साथ जाएंगी।. उनकी बुराइयां भी मेरे ही सर पे जाएंगी।. तो वैसे ही लोग क्या हुए? वो तो दूर-दूर. थे। जिनको अब ये बात आप मलाई वाली कह रहे. हो। मलाई काटी उन सबों ने। समझना मेरी बात. को। तभी मैंने कुछ मुझे याद आ गया तो मुझे.
हंसी आ गई। मलाई उन्होंने काटी। अब कह. देते हैं कि मैं तो जानता ही नहीं था।. मैंने तो कभी देखा ही नहीं था। मेरे से. कोई लेना देना नहीं। ऐसा कैसे हो सकता है? आपको फंसाया गया इसका मतलब आप बहुत. इंक्लूड थे।. जय वाजपेयी ने कबूल किया है कि वो आपके और. विकास के बेनामी पैसों का हिसाब रखता था।. मेरे पैसे का हाय रे तो कहां मिले? तो जय. वाजपेयी आपकी कचहरी में मिला तो पूछेंगे. मेरा पैसा तो वापस कर दे। मुझे जरूरत है।. वो तो मेरा ही पैसा नहीं दे रहा है। मुझे. ही दे दे मेरा पैसा।. मनी लॉन्ड्रिंग करते थे जयवाजपीय।.
देखो इतना तो नहीं मैं जानती हूं। उनके. बारे में इतना जानती हूं कि हां वो अचानक. से अमीर हुए थे। ये मुझे सुनने में. अचानक से कैसे अब तो 5 साल से आप केस. कचहरी घूम रहे हो। थोड़ा ये वाला भी सच. निकाल दो। छिपा काहे जा रहे हो? नहीं मैं छिपा के नहीं जा रही हूं ना। मैं. उनसे डरती हूं। उनसे तो मुझे खुद ही पैसा. लेना है। अभी पता चला है। कुछ दिन पहले. मैंने जब अपना स्टेटमेंट देखा है। मेरे. पति ने उनको उनको ₹1 लाख दिए हैं। अभी. मुझे पता चला। तभी तो मैं हंसी जब तुमने. आपने जब जय वाजपेयी का नाम लिया तभी मैं. ही मुस्कुराई कि मैंने उनके घर में फोन.
करके पता लगाने की कोशिश करी कि भैया मेरा. पैसा तो दे दो। मुझे जरूरत है। पर कौन. देता है आज की तारीख में। वैसे मैं लीगल. जाऊंगी। उनका तो रिपोर्ट करूंगी क्योंकि. स्टेटमेंट में आ रहा है वो ₹1 लाख।. काला वाला सब खा पी के बैठे होंगे।. हां उसका तो नहीं पता। ये बात सच है। मुझे. पता चल जाए शुभंकर तो मैं घर जाऊंगी लेने।. मैं सबसे कह रही हूं जो जो मेरा पडकास्ट. देख जिसजिस के पास मेरे पति के पैसे हैं. वो आके मुझे इज्जत से दे जाए। मुझे पता. चलेगा तो मैं लेने जाऊंगी।. इतना शरीफ दुनिया थोड़ी ना है।. बस वही बात है ना।. आप कितने शरीफ थे ना? ना दुनिया शरीफ है जो पैसे देगा। पैसे तो.
कोई किसी के नहीं देता। मगर ये भी नहीं. कहती हूं। कहीं लिखा पढ़ी में मिल गया तो. मैं जरूर जाऊंगी क्योंकि बैंक बैंक. स्टेटमेंट जो होती है उसमें बहुत लोगों का. नाम आ रहा है उसमें आएगा तो मैं स्वाभाविक. है उससे लीगल लीगल उस पे करूंगी. तो ये लीगल टीम जो आपकी है 5 साल से केस. लड़ रहा हूं इसका फीस उसका हाथ से निकालते. हो. सच बताऊं आज सच्चाई बता रही हूं मैं. तुम्हें सब प्रोबो चल रहा है जब मेरा. खुलेगा सबको दूंगी और मैं बहुत ज्यादा. किसी को दे पाती हूं 2000 3000 4000 5000.
10 इनफ. तो मतलब सब उम्मीदों पे जी रहे सब. उम्मीदों पे जी रहे हैं।. एक दिन हम करोड़पति बनेंगे।. नहीं करोड़पति क्यों बनेंगे भाई? सच्चाई. यही है। देखो इस चीज को भी आपको देखो यदि. मैं इसमें होती तो मैं असहज हो जाती। मगर. मैंने आपको तुरंत बताया सच्चाई यही है।. तो वकील काहे मान गया फिर? वकील को भी तो. खर्चा होगा। देखिए कुछ तो ब्राह्मण है. मेरे साथ ब्राह्मण के नाते जुटे हैं।. इसीलिए मैं कहता हूं जात है कि जाति नहीं।. नहीं नहीं नहीं। कुछ तो ब्राह्मण के नाते. कुछ इस नाते कि मैं एक अकेली औरत हूं।.
मुझको इतना स्ट्रगल करते हुए देख के कुछ. दया पे जुटे कुछ तो तुम्हारे जैसे हैं. लड़के कम उम्र के बहुत अच्छे हैं जो कि. उन्हें 1000 500 में चल जाता है उनका काम. जैसे होता है सबका निपटारा. आदमी है लीगल टीम में. अब तो गिनती नहीं बता पाऊंगी है तो बहुत. सारे देखिए कानपुर में है. लखनऊ में है दिल्ली में है और कानपुर. मातीकोट में है कानपुर बहुत सारे हैं. अंधवा क्या है 50 आदमी.
50 तो नहीं होंगे 50 से थोड़े कम कर लो. 30 30. हां 30 20 30 ऐसे ही कुछ मान लो एक दूसरे. से सब संपर्क में है सब मदद करते हैं. सच्चाई है कि मदद कर. मुकदमा चल रहा है. मेरे ऊपर. एक सिम का और अभी ईडी ने चार्जशीट में. मेरा नाम दिया मैं कोई पुरानी. ईडी छोटेमोटे नहीं पकड़ती डीईडी बड़े आदमी. पकड़ती है. अरे तो ईडी ने मुझे पकड़ लिया मेरे जैसे. फकीर को पकड़ लिया उसने जिसके पास खुद में. नहीं है कुछ जेब में पैसा मेरे अकाउंट में. भी नहीं है पैसा देखो सुभांकर जो नैरेटिव.
सेट किया गया वो मैं नहीं हूं. यदि मेरे पास करोड़ों रुपए और फिर वही बात. तुम जो दुबई वाली बात कह देते हो. दुबई तक तुम्हारा सुनो सुनो सुनो चार्जशीट. पे मैं अपने मन से सुनो सुनो सुनो जो. पडकास्ट सुन रहा हो काश दुबई का वो भी सुन. रहा हो जिसके पास पैसा हो प्लीज मदद कर. जाओ मेरी मुझे बहुत जरूरत है पैसे की. मतलब. वकील भी बेचारे टूट रहे हैं कब तक उनको एक. नहीं कहते एक सहारा देते हैं 2000 दे दो. 3000 4000 बहुत लोग तो ऐसे हैं जो. बड़े-बड़े वकील हैं जो ईडी वाले वो सब.
प्रोबो हैं बहुत अच्छे क्यों मान उनको. क्या बताई आप कि जब सब खत्म होगा. हां यह स्वाभाविक है मैंने यही कहा कि सर. जब निपटारा होगा तो आप जो फीस बताओगे वो. दूंगी सच है. मतलब सब बाद में करोड़पति बनेंगे. हां अब जो कुछ भी कह लो आप. कितना संपत्ति है कुल मिला के जितना फंसा. मामला. तीन खेत हैं चार पांच तो. हम तो मोटा-मोटा रकम है थोड़ा समझाओ ना. हमको. रकम नहीं बता सकती देखिए इतनी मुझे भी. नॉलेज नहीं है इतनी मेरी मैथ अच्छी नहीं. है. पैसा सबको पता. नहीं नहीं इतना नहीं है देखो शुभंकर जैसे.
5000 करोड़ बताया था 5000 करोड़ होता आज. मेरे पास अपना चार्टर्ड प्लेन होता मैं. यहां से निकल गई होती. 500 करोड़ होगा तो भी दुबई शिफ्ट हो जाओगे. आप. नहीं 500 करोड़ भी नहीं है बहुत ज्यादा. हमें लगता है 10 12 करोड़ 15 करोड़ होगा. कितने देख के लिए ईडी नहीं पकड़ी. नहीं भाई इससे ज्यादा नहीं है प्रॉपर्टी. नहीं सर रियलिटी. काला वाला. नहीं काला वाइट कुछ मेरे को मैं तुम्हें. शुभांकर काला पैसा होता तो मेरे बच्चे जॉब. नहीं कर रहे होते तुम्हें मैं बता. रखा है ना उसने पुलिस ने. अरे तो काला मेरी बात सुन. संपत्ति सीज करके आप अपना पैसा यूज़ कर.
नहीं सकते। अब तो सब तनख्वाह चल रहा होगा. ना मामला या उधारी।. एक मिनट नहीं मैं उधार भी नहीं लेती किसी. से। मैं मेरी दादी ने और मेरे पापा ने. सिखाया था उधार ले लोगे जिंदगी खत्म हो. जाएगी। खुद करके खा लो ज्यादा बेटर है। जो. आज मैं तुम्हें सच बताती हूं। मेरा जैसे. कुछ है जैसे मैं ये मेरे दो थे। ये विकास. की लास्ट निशानी है मेरे पास। एक बेच. दिया। गले में डायमंड था। मंगलसूत्र था वो. बेचा। चैन थी वो बेची। बहुत चीजें जो जो. बॉडी में पहने थी वो सब मैंने धीमे-धीमे.
धीमे करके वकीलों को देना है। इन्हें देना. है। आज मैं तुम्हारे सामने आज जो तुमने. इतनी बात खोल दी तो मैंने ये भी तुम्हें. बता दिया कि बस अब थोड़ा बहुत बचा है। बस. काम चल रहा है।. iPhone iPhone तो आप भी इस्तेमाल करते हो. अभी भी।. नहीं iPhone नहीं करती हूं मैं।. मैं iPhone नहीं चलाती कभी। मेरा और. iPhone का बनता नहीं है। जब भी लिया तब. तोड़ दिया है। पता नहीं क्या होता है।. मुझे iPhone समझ में नहीं।. तोड़ी थी उस पर अभी तक मामला चल रहा है।. नहीं नहीं वही तोड़ा था। वही तोड़ा था। बस. और कुछ नहीं. उसमें पुलिस कहती है सब सारा छिपा ले डाटा. वटा. नहीं नहीं तो हम निकलवा ले सिर्फ निकलवा.
ले फोन हमें लगता है घर पे रखा है या. पुलिस के पास रखा निकलवा ले ना. अगर इतना बड़ा अपराधी है तो उसका कांटेक्ट. होगा ना भाई बड़ा-बड़ा कोई तो पॉलिटिकल. बिना पॉलिटिकल मदद के यूपी में कोई कुछ कर. नहीं सकता. तो अब ये आप लोगों का काम है ढूंढना. दो चार नाम. अच्छा एक मेरी बात सुनो. दो चार नाम आप बता जाओ. नहीं मैं क्यों. ईडी किसको और भी थोड़ा दे. नहीं नहीं नहीं देखो शुभांकर मैं किसी को. झूठा कैसे कह दूं कि वो वो वैसे थे वो हां. उनके संबंध थे बड़े-बड़े लोगों से संबंधित. किससे थे. मैं गांव वालों से पूछो जाके मैं नहीं. जानती ना मैं वहां रहती थी शुभंकर.
पांच साल से केस लड़ रहे हो सारा पैसा आप. लड़ रहे हो सारा खेल आपका है सह अभियोगी. आपका. लग रहा है तुम्हें लग रहा है कि मैं गलत. हूं सच्चाई है और ये मेरे हनुमान जी जानते. हैं मैं तुम्हें शुभंकर कह रही हूं मेरी. बात गलत नहीं कह रहा हूं मैं कह रहा हूं. इतना केस आप अब तो आपको 5 साल से सिर्फ. इसी यही आपका जीवन है 24 घंटा केस में. रहते होगे सुनते होगे जानते होंगे सब कुछ. करते. मैं ज्यादा पता नहीं लगाने की कोशिश करती. हूं ज्यादा पता लगाओगे दिमाग खराब होगा।. जितना है उतना ही मेरे लिए बहुत है। मुझे. माइग्रेन भी होता है। और मैं तुम्हें बता.
दूं मेरी मेंटल हेल्थ भी बहुत बीच में. खराब हो गई थी। मुझे एंजायटी स्वयं होने. लगी थी। मैंने ये मेदांता है ना हॉस्पिटल. वहां पर मैंने अपने आप को दिखाया था और. उसमें एक बार डॉक्टर ने काउंसलिंग के लिए. भी कहा था। फिर उन्होंने मुझसे काउंसलिंग. से पहले उन्होंने मुझसे बात करने की कोशिश. करी। वो भी सुनेंगे ना। वो सुनेंगे जरूर।. मैं उन्हें बताया। मैंने उन्हें अपना. परिचय दिया था। वो भी बेचारे हिल गए थे।. उसके बाद से मैं आज तक नहीं गई। मैं अपनी. बात किसी से ना कभी कहती हूं ना मुझे. मालूम है कि मेरी मेंटल हेल्थ मेरे पति के. कारण हुई है। मैं अपने हिसाब से ठीक कर.
लूंगी। और शुभांकर ऐसा कुछ नहीं है। ना. मैं किसी का पता लगाती हूं। ना मैं किसी. से मिलने की भी नहीं कोशिश करती।. लेकिन हम नहीं हिले थे आपसे मिलके।. नहीं अच्छा लगा।. ब्राह्मण हो इसलिए [हंसी]. जात है कि जाती नहीं।. नहीं मैं ब्राह्मण ब्राह्मण नहीं है। मैं. मजाक वाली बात कर रही हूं। नो डाउट ऐसा. कुछ नहीं है। मगर सुभाष. हमसे ऐश्वर्या सगर ने भी कहा जो कुलदीप. सेंगर जी की. नहीं तो आपको करना चाहिए। मैं थोड़ा देखिए. नहीं नहीं करिए मैं बताएं आदमी के अंदर का. निकलता है देखिए मैं यह बात कहूंगी ना तो. आदमी ये सोचेगा कि वो उनका गलत का पार्ट.
ले रही हूं मैं गलत का नहीं परिवार का. किसी में कोई गल गलती नहीं होती ना परिवार. चाहता है किसी का शुभांकर. उसमें होता क्या है कि थोड़ा सा तैयारी. चाहते हो जैसे आपके विषय पे मैंने थोड़ी. तैयारी कर ली. मैं उनका भी कर लूंगा मुझे मंच देने में. कोई किसी भी जाति किसी समाज को मुझे परहेज. नहीं है मेरा मैं इसीलिए आई थी आपके पास. कि आप मेरी बात सुनिए और हर के कान में. जाएगी यहां तक कि उत्तर उत्तर प्रदेश की. सरकार की भी जाएगी और जो पिछली सरकारें. हैं उनके कान तक भी जाएंगी कि एक नैरेटिव. एक और सेट किया जा रहा है कि रिचा दुबे ने. जो कानपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करी है वो.
[नाक से की जाने वाली आवाज़] भाजपा वालों. ने कराई। अरे भाजपा वालों से प्रेस. कॉन्फ्रेंस हम चार कह देंगे तो वो करा. दें। पहले मेरी प्रॉपर्टी तो खोल दो प्रभु. जिसके पीछे मैं परेशान हूं।. अच्छा आप मतलब हम आपकी जो कहानी सुन रहे. हैं तो हमको लग रहा है कि आपके पति. एक लड़कीबाज और एक सुट्टाबाज दारूबाज के. अलावा सब बुराई लिए बैठे थे। ये दो बुराई. नहीं थी उनमें।. नहीं नहीं शराब नहीं। नहीं दारूबाज नहीं. बाकी सब लिए थे अब कुछ भी कहला सकते हो. तुम अब तुम्हारा मंच है मुझे वहां भी करनी.
पड़ सकती देखिए अब लड़ाई मैं अब फिर एक. बार कह कह. मतलब ये तो अच्छाई थी उनमें आ भी गई. दो अच्छाई थी और एक बात बता दूं वो जिद्दी. किस्म का आदमी था जिद्द में वो अपना सर्वस. नाश कर सकता था और उसने कर दिया. ठीक है. वो एक जिद्दी था मैं उसको गुंडा नहीं. कहूंगी अपराधी नहीं कहूंगी वो एक जिद्दी. इंसान था मैं शुरू से यही कह रही हूं. मर्डर बहुत. जिद्दी था वो जिद्द के आगे अच्छा एक बात. आइए एक पारिवारिक आदमी को यह सोचना चाहिए. था कि जो मैं कर रहा हूं इसका खामियाजा.
मेरे बच्चे और बीवी को जिंदगी भर भोगना. पड़ेगा. देखिए कुर्सी में सबसे खतरनाक चीज यही. होती है जो सत्ता की ताकत कुर्सी की ताकत. या बंदूक की ताकत होती. तो उनको आप निकालो कि जो इनको ताकत दिए था. मैं तो उनसे मिलना चाहती हूं वो आके मेरा. क्यों नहीं सर मेरा भी तो सहयोग करें जो. इनको ताकत दे रहे थे मुझे क्यों अनाथ छोड़. दिया है. क्योंकि उगते सूरज को दुनिया प्रणाम करती. है ना जिससे नफा होता है अपरा अपराधी ये. बात भूल जाते हैं कि जिस दिन इस्तेमाल खत. काम खत्म हो गया उस दिन आपका परिवार अकेले. दरदर ठोकर खाएगा और यह संदेश उन नए लड़कों. के लिए भी है जो आज कट्टा उठा के.
और आपको एक बात आज बताऊं. आप जो मुझे मेरे घर छोड़ने गए थे पुलिस. वाले एसटीएफ वाले मैंने उनसे हाथ जोड़ के. एक बात कही थी आज तक मैंने किसी को नहीं. बताई तुम्हारे मंच में मैंने हाथ जोड़ के. उनसे कहा था कि बेटा अब कोई उत्तर प्रदेश. में दूसरा विकास दुबे ना खड़े होने देना. इसलिए ना खड़े होने देना क्योंकि उसके. पीछे जो एक रिचा चा दुबे और दो बच्चे होते. हैं। उन्हें बहुत झेलना पड़ता है। अभी तो. मेरी शुरुआत हुई है झेलने की। पता नहीं. मुझे और क्या-क्या झेलना पड़े।. एक सवाल और था कि जब विकास दुबे जेल में.
थे या फरार थे तो जो बैंक खाते थे या जो. पेपर डीलिंग होती होगी उस पे साइन कौन. करता था? [नाक से की जाने वाली आवाज़]. विकास दुबे के जितने भी मेरे साथ अकाउंट. थे. हम. जाके अब मैं शुभांकर आपसे कह रही हूं। आप. अपनी एक टीम भेजना। कभी उन अकाउंट में. मैंने साइन नहीं किया। विकास खुद ऑपरेट. करते थे। उनके अपने लोग होंगे जो वहां पर. रहते हैं। विकास अपनी चेक बुक पासबुक मेरे. पास कभी रखते ही नहीं थे। वो बहुत डरते थे. क्योंकि मैं बहुत खर्चेल थी। उनके अकाउंट. में पैसे ही नहीं छोड़ती कभी मैं।.
तो 5000 करोड़ में क्या खर्चा? अरे नहीं शुभंकर 5000 करोड़ होता तो फिर. मैं कहां होती? तुम्हारे साथ नहीं बैठ के. बात कर रही होती।. अब तो नहीं है ना इसलिए कर रहे हो। [हंसी]. जब थे तब भी नहीं शुभंकर प्लीज।. तो खाली आप वीडियो देख के खुश थे।. नहीं नहीं शुभंकर प्लीज नहीं। 5500 करोड़. बहुत होता है। इतना मैंने अपनी जिंदगी में. नहीं देखा।. हमको नहीं पता हम इतना नहीं छापे हैं।. नहीं मैंने भी नहीं देखा। इतना पैसा नहीं. है। शुभंकर 5000 करोड़ इतने जीरो हैं।. मुझे खुद नहीं जीरो की नॉलेज है। ये झूठ. है। मेरी बात मानो आप।.
आप जिला पंचायत सदस्य कैसे बने थे? पॉपुलर. थे आप या बंदूक की नौकर बने थे? नहीं नहीं विकास ने हमको चुनाव लड़वाया था. और जैसे आम जनता लड़ती वैसे चुनाव जिला. पंचायत सदस्य में शायद 85 गांव होते। एक. गांव को विकास दबा सकता था। दो पांच ठीक. है। 85 गांव को बंदूक दिखा के नहीं दबा के. चुनाव जीते जाते। उत्तर प्रदेश में सबसे. भारी जीत हुई थी मेरी।. तो हमने अतीक हम अरे हमने. मैं तो मेरे सामने तो बंदूक नहीं दिखाई गई. और ना ऐसा था।.
तो आप ये मानते हो 85 गांव के लोग विकास. दुबे पसंद करते हैं।. हां पसंद करते हैं। आप ऑफ कैमरा चले जाइए।. ऐसे तो आपको सब रो के सब दिखाएं। अभी कल. की मैं आपको बात बता रही हूं।. गांव में लड़की की शादी जो मुझसे बन पड़ता. है मैं करती हूं। जो रोता है मुझसे कहता. है। ऐसी बुरे हालात में भी मुझसे कोई दुखी. होता है तो मैं अपने खर्चों को सीमित करके. उनकी मदद करती हूं। मैं लाख तो नहीं कर. सकती ना मगर उसमें कुछ कर सकती हूं। 2000. 5000 ₹00 दे।.
आप कह रहे इतना पैसा वकील को देते हो।. पैसा नहीं है। वकील बेचारा ₹1000 काम चला. रहा है। तो आप इधर कैसे देते हैं? नहीं दे देते हैं। गरीबों के लिए हम अपने. खर्चे रोकते हैं। फिर हम चाहे किसी को ना. दे सोकर मगर. आप भी अब रॉबिन हुड वाला बात। नहीं नहीं. नहीं रॉबिन हुड नहीं बना मेरा एक एक मेरा. पॉइंट है कि कोई भी गरीब होगा अभी मैं. तुम्हें निकल के यहां से जाऊं और कोई मिल. जाए मेरे पॉकेट में है जी 2000 है तो मैं. उसको 500 दे सकती हूं. शाम कल अपना कैसे खाओ पियोगे फिर. बाबा है ना हनुमान जी का बहुत बड़ा ये भी. मैं बता के जाऊंगी आदमी कहता है भगवान.
नहीं है आज मैं बता के जाऊंगी कि भगवान है. भगवान है तभी तो उन शहीदों के परिवार. वालों को इंसाफ मिला। हां तो भगवान है यह. भी बता के जाऊंगी कि भगवान ने कहीं ना. कहीं हमारी बहुत मदद करी है और भगवान के. ही सहारे सुभांकर मैं आज आगे चल रही हूं. और ये 5500 करोड़ कोई हम लोग का किडनैप कर. देगा इस पैसे के पीछे ऐसा कुछ नहीं है. अभी भी लोग अभी भी लोग डरते हैं विकास. दुबे के नाम से जब कभी बताते हो कि विकास. दुबे की पत्नी है हमें. अरे मैं किसी को कभी परिचय ही नहीं देती. बहुत लोग नहीं जानते पहली बार मीडिया में. बैठी हूं. कहीं जैसे गलती से बताया मुझे नहीं.
अस्पताल में आपने बताया कि डॉक्टर साहब को. बताया. हां तो वो थोड़ा सा असहज हुए थे उन्होंने. कहा हां मैडम मैंने कारण सुना था। फिर मैं. दोबारा उनसे कभी भी काउंसलिंग कराने दवा. भी नहीं लेने गई। जबकि मुझे नींद आना बंद. हो गई थी और मुझे बहुत इशू हो गए थे जिसके. कारण मेरा फैट भी बहुत बढ़ गया। मेरा. कोलेस्ट्रॉल भी बढ़ा हुआ है। मेरे बहुत. सारी सब बॉर्डर लाइन पे आ गए।. जी से मिले आप? नहीं कभी नहीं मिले। मैंने कोशिश करी।. उन्हें कॉल भी करा उनके जब. [कराहने की आवाज़]. कोई सेक्रेटरी थे नाम बोल गए। मुझे नाम.
नहीं याद रहते सबके। तो. अवनीश जी, मृत्युंजय जी. किसी को मैंने कॉल किया था जब शुरू में तो. मैंने कहा था मैं उनसे मिलना चाहती हूं पर. उन लोगों ने कभी रिस्पांस नहीं दिया मुझे।. मैं तो मिलना चाहती थी क्योंकि देखिए. क्यों मिलना चाहते योगी जी से आप? अरे मैं यह बताना चाहती थी कि सर मैं तो. नहीं गलत हूं। मैं बच्चे नहीं हूं। बच्चों. को तो पढ़ने दो। इस सरकार का तो नारा ही. यही है। पढ़ो और पढ़ो। मेरे ही पढ़ाई में. रुक गए हैं। और वो पढ़ने वाले बच्चे हैं।. मेरे छोटे बेटे से तुम मिलो। इतना माइंड. का तेज है। वो पढ़ने वाला बच्चा है।.
पुश्तैनी खाली जमीन नहीं मिलती ना मैडम. पुश्तैनी पाप भी तो मिलता है ना समस्या. यही है. तो बस मगर फिर भी पढ़ रहे हैं बच्चे ऐसा. नहीं है कमा रहे हैं पढ़ाई भी कर रहे हैं. प्राइवेट कर रहे हैं बच्चों पे है कि अगर. वो काबिल काबिल बनके अपना नाम करें तो वो. दाग थोड़ा कम कर सकते हैं. नहीं नहीं करेंगे करेंगे नो डाउट वो. करेंगे. बच्चे कैसे अपने पिता को देखते हैं. अरे बिल्कुल डिफरेंट है तो कोई जान ही. नहीं सकता. पूछना बच्चे के नजरों में अपने पिता को. कैसे देखते हैं वो. वो उस दिन के बाद से चुप हैं कभी कुछ नहीं. बोलते. आपसे भी बात नहीं करते. नहीं हमसे बात करते हैं सब करते हैं पर उस.
विषय में कुछ नहीं बोलते हैं वो लोग चुप. रहते हैं हमेशा कभी नहीं कुछ भी नहीं. बोलते ना अच्छा बोलते हैं ना बुरा बोलते. हैं मैं तुम्हारे पास आई हूं उनको यह पता. है कि मम्मा सुभांकर हैं कोई पडकास्ट करते. उनके पास जा रही हूं उन्होंने यह भी नहीं. कहा कि ना जाओ उन्होंने यह भी नहीं कहा कि. जाओ वो इस विषय में कुछ भी नहीं बोलते. हैं। वो चुप है वो पढ़ने वाले बच्चे वो. खुद बड़ा स्ट्रगल कर रहे हैं पढ़ाई के. पीछे। आप ये समझिए जिस बच्चे ने तीन साल. की डॉक्टरी कर ली हो आज वो प्राइवेट जॉब.
कर रहा हो उसके लिए बहुत कठिन होता है।. बच्चों ने कभी शिकायत की? जब वापस लौटना. था या सब कुछ छीन रहा था? नहीं उन्होंने कुछ कभी शिकायत भी नहीं. करी। उन्होंने हर हालत में अपने आपको और. आपको मैं बताना चाहती हूं। एक बच्चा मेरी. मां है और एक बच्चा मेरा पिता है। एक मुझे. समझा प्यार से समझा के डांट के समझाता है।. बात कराता है। बड़ा वाला छोटा वाला मुझे. डांट के समझाता है जैसे एक पिता डांटता. है। पर वो हमेशा ये कहते हैं कि हम लोग. आगे बढ़ेंगे। अपनी मेहनत कर रहे हैं और हम.
काबिल हो जाएंगे। उन्होंने कभी यह भी नहीं. जिक्र करा कि प्रॉपर्टी खुल जाए या ना. खुले। वो सिर्फ अपनी मेहनत कर रहे हैं।. क्या अपने पिता के नाम से वो बचना चाहते. हैं? अब. कभी मैंने उनसे यह जिक्र भी नहीं करा ना।. उन्होंने मुझसे कभी जिक्र करा. जैसे आप प्रॉपर्टी की बात कर रहे हो. उन्होंने कहा आप कह रहे हो कि वो. प्रॉपर्टी की बात नहीं कर रहे. नहीं कभी नहीं किसी किसी विषय में नहीं. जैसे मैं कभी-कभी कभी-कभी शुभांकर मैं. बहुत होपलेस हो जाती हूं कि नहीं मुझसे. नहीं हो रहा है मैं थक रही हूं एक औरत. कितना कर सकती है बहुत लड़ाई है बहुत.
चीजों की जांचे बहुत ये है वो है जिन. चीजों की मुझे नॉलेज नहीं थी मैं आपके. माध्यम बताना चाहती हूं मुझे जब शुरुआत. में पहली बार मैं एक वकील से मिली थी मुझे. उसकी भाषा नहीं समझ में आ रही थी कि वो. मुझे क्या समझाना चाहता है. मैंने मैं नहीं समझ पा रही थी। बहुत दिन. बाद मुझे समझ में आई कि ये क्या समझाना. चाहते थे और क्या कहलाना चाहते थे। मुझे. नहीं समझ में आता। मगर तब तब भी बच्चों ने. नहीं मेरे बच्चे उस प्रकरण के बाद से. बिल्कुल म्यूट हो चुके हैं।. अगर विकास दुबे. बचपना चला गया उनके अंदर से। ये मान के.
चलिए।. अगर मान लेते हैं कि कहीं आत्मा होती है. और विकास दुबे की आत्मा आज आपके हालात. आपके बच्चों के हालात को देख रही हो। क्या. कहना चाहोगे? सबसे ज्यादा दुखी होंगे और. रोएंगे वो कि आज मैंने क्या कर दिया अपनी. गलती पर उन्हें जीवन भर पछतावा होगा और. होना भी चाहिए। नो डाउट. आप क्या कहना चाहोगे उनसे अगर वो सुन रहे. हो अगर कहीं. मेरे सामने तो वो आते तो मैं उनके दो. तमाचे लगाती कि तुमने क्या कर दिया बगैर. सोचे समझे मुझे तो यह लगता है शुभांकर. भगवान सबको दो थॉट देता है करूं या ना. करूं उनके मन में ना करूं का क्या थॉट आया.
ही नहीं. उस जगह से हटा भी जा सकता था सिस्टम से. नहीं लड़ के जीता जा सकता. मेरा तो यही मानना है उन्होंने मैं तो. उनको दो थप्पड़ लगाती मैं शुरू से इस चीज. को कह रही हूं. बिकरू कांड के बाद जब पुलिस ने घर की. तलाशी ली तो वहां से अधिकारियों, नेताओं. की सिफारिशी चिट्ठियां, ट्रांसफर पोस्टिंग. की लिस्ट मिली थी।. देखिए बिकरू. के घर. ऐसा माना गया कि एक समानांतर सेक्रेटरी. तो फिर क्यों नहीं पुलिस वालों ने इस चीज. को उछाल के बाहर करा?
उनको तो बैठ के बताना चाहिए कौन-कौन नेता. था। देखिए मुझे तो नहीं पता मेरे मेरे घर. से तो नेता की चिट्ठिया लेटर नहीं मिले।. ठीक है? मिले विकास के घर से ना। तो फिर. वो पुलिस वालों ने बैठ के इस चीज को क्यों. नहीं कहा? ठीक है।. उनको भी तो स्टैंड लेना चाहिए था। उन. नेताओं का नाम क्यों नहीं लिया? आपको किसी नेता के बारे में नहीं पता जो. उनका मित्र. अरे भैया कोई मित्र होता तो आज तक मेरे. पास तो आता।. काहे आएगा आपके पास? क्यों नहीं आएगा? क्यों आएगा? पाप पाप पे मजा लेने सब आते. हैं। पाप में कौन भागीदारी बनेगा? तो फिर वो भी तो गलती कभी ना कभी करेंगे।. समय का पवैया बड़ा वैसा होता है। कभी ना.
कभी चक्र घूमेगा कभी वो भी झेलेंगे।. वो तो आपके ऊपर है ना कि आप उनको झलवाती. हो। अकेले सारा पाप झेलती हो।. नहीं मैं अकेले नहीं झेलने वाली। सब. झेलेंगे। ईश्वर की लाठी में कहते नहीं है. आवाज नहीं होती। सब पड़ेगी. तो आपके ऊपर है ना कि आप चार भागीदार और. ले आते कि भैया यह भी हमारे साथ पाप किए. थे इनको. भाई देखिए हम जिसको जानते ही नहीं थे. सुभांकर मैं उसको कैसे कह दूं. तो करवाए होंगे ना. कभी नहीं किसी के बारे में नहीं पता देखो. शुभांकर ऐसी चीजों में मैं क्या पता लगाऊं. मुझसे ऐसा हुआ कि आदमी ऐसे मेरे से भागा. है जैसे वो नहीं कहते गुड़ के ऊपर से एकदम.
चींटे लगे रहते हैं लगे रहते हैं एकदम से. गायब हो जाए वो लक्ष्मण रेखा एक जो आती है. वो खींच गई थी मेरे पास तो मेरे पास कोई. नहीं आया सुबह. अब बात करते हैं उस टॉपिक पे जिस पर आप. बहुत तत्परता से बात रखना चाहते हो।. हम. नाम है खुशी दुबे।. हम क्या. खुशी खुशी तिवारी. खुशी. तिवारी. दुबे नहीं. क्यों दुबे नहीं? [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. दुबे इसलिए नहीं खुशी का सरनेम तो तिवारी. है।.
तो वो तो आप भी कायस थे। आप भी दुबे लगाते. हो।. नहीं नहीं। तो अब अभी इसी इसी संदर्भ में. मैं आपको बताती हूं। आप पूरा. हां।. बस आप मुझे आंसर देना। मैं आपको पूरा विषय. पर आपको पूरा समय है। सवाल सारे हैं। समय. आपको नहीं टोका जाएगा।. अच्छा अच्छा ठीक है। मैं बताती हूं। खुशी. को इसलिए नहीं आप तिवारी दुबे कह सकते. हैं।. क्योंकि उसकी ऑलरेडी पहले एक लड़के से. शादी हो चुकी। दो लड़कों से हो चुकी थी।. जो अपने आप को नाबालिक बताती है कि मैं. बहुत छोटी थी। मैं बहुत आस थी। मुझे. बंदूकों से उठा ले गए और मेरे साथ ऐसा हुआ.
ऐसा। ऐसा कुछ नहीं था। वो सिर्फ जब अभी ये. जब चुनाव आते हैं या साल की वो विकास के. मरने का और पुलिस वालों के मरने का टाइम. आता है तब उसका दर्द छूटता है। हर साल में. दो बार उसको दर्द आता है। अबकी बार आ गया।. अब जैसे उसकी मां बीमार हुई। नो डाउट।. किसी की भी मां बीमार होगी। सोकर आदमी. गरीब है तो मदद मांगेगा वो। आज मैं बीमार. हो जाऊं और मेरे पास मेरे बच्चों के पास. कुछ नहीं है तो वह जहां भी होगा वो गुहार. लगाएंगे कि मेरी मां को बचा लो क्योंकि.
स्वाभाविक है मैं ही हूं उनके लिए। वैसे. उसने भी अपनी गुहार लगाई और उसकी अखिलेश. यादव ने मदद करी। नो डाउट क्योंकि वो. जनप्रतिनिधि हैं। वो किसी की भी मदद कर. सकते हैं। अभी ये योगी आदित्यनाथ से भी. मांगती तो योगी आदित्यनाथ भी करते क्योंकि. वो जनप्रतिनिधि उन्हें मालूम है मेरी जनता. परेशान है। नो डाउट। तो उसने ये गुहार तो. लगाई। उसकी मां ठीक हुई। उसके बाद उसने एक. नैरेटिव सेट किया मीडिया में आके कि मुझे. बंदूक उठा लगा के मुझे उठा ले गए।. जबरदस्ती मेरी शादी कराई और.
ईगो लोगों उन जैसे मीडिया वालों ने जैसे. आप क्रॉस क्वेश्चन मुझसे पूछे उसने पूछा. कि ऐसा कैसे हो सकता है? कह वो हो सकता हो. ईगो आ गया हो। ऐसा कैसा कौन हो सकता है. जिसका ईगो आ गया हो तुम्हें उठा ले गया।. तुम ऑलरेडी पहले से दो जगह तुमने शादियां. कर रखी थी। तुम्हारे मां-बाप मेरे घर. इसलिए आए थे विकू वाले में कि जैसे वो. कहती है कि ये रिश्ता लेके आए थे। नहीं. रिश्ता ले नहीं आए थे शुभंकर। ये पहले से. किसी ठाकुर के घर में इसकी शादी हो चुकी. थी। ये दो-ती महीने से वहां से रह रही थी।.
इनके वहां पता चला इनके मां-बाप को कि. विकास दुबे नामक एक आदमी है जिसकी. ब्राह्मणों में चलता है। चल के वहां अपना. आप बात रखिए तो आपकी बेटी वहां से वो लिवा. लाएंगे। इनके मां-बाप को ले गए साथ में. गाड़ी में बैठा के और बकायदा गांव में. पंचायत बैठी 2530 लोगों की 10 20 कि.मी. तक ये बड़ा फेमस कांड है। पंचायत बैठी और. इसको वहां से लेके आया। उसी बीच में गाड़ी. में कैसे ये अमर से इसका नंबर एक्सचेंज हो. गया और यह लव कहानी शुरू हो गई और यह कहती.
है मैं तीन दिन की बहू हूं। फिर यह कहती. है मीडिया में कि उसकी सुहागरात नहीं बनी।. मुझे हंसी भी आती है और बहुत एंबरेस भी. लगता है कि कोई ऐसे कैसे कह सकता है। तीन. चार महीने से यह बंदी बिकरू में रह रही थी. तो फिर अब मुझे कहने की जरूरत नहीं है।. अब यहां दो तीन सवाल मेरे मैंने आपको पूरा. सुना।. हां. एक सवाल जो आपके विरोधी या खुशी की तरफ से. आता. हां. क्योंकि मैं आपने बात रखी तो मैं उस पक्ष. का सवाल पूछूंगा।. वो ये आता कि.
आप लोग क्या अपने आप को बचाने के लिए उसका. चरित्र हनन कर रहे हो? क्योंकि वो नाबालिक. थी। ये कोर्ट में प्रूफ हो गया है।. हां।. 16 17 साल की लड़की। तो वो तीन शादी कैसे. हुई थी? क्या उसका ऑफिशियल प्रूफ आपके पास. है? दूसरी चीज अगर आप दुबे तो वो दुबे. क्यों नहीं? क्योंकि अमर से शादी तो हुई. पत्नी का सरनेम चेंज होता है। तो फिर अब. तो वो दुबे ही है। तो उसे तिवारी कहें अगर. आपको हम आपके पुराने नाम से नहीं बुला रहे. हैं। हम हम. तो ये क्यों कि मतलब अपनी बेगुनाही के लिए. किसी और के चरित्र पर कीचड़ क्यों उछाल? चलिए आपके इस इस क्वेश्चन का आंसर देती.
हूं। यदि मैं विकास दुबे की पत्नी हूं तो. मैं किसी क्वेश्चन और किसी आंसर में यह. नहीं बताने की कोशिश करती हूं कि मैं अबला. हूं या मैं बेचारी हूं या मुझे मैं भी तो. शुरू से ये नैरेटिव सेट कर सकती थी पहले. दिन से कि विकास दुबे मुझे बंदूक लेके ये. तो एक मिश्रा जी हैं जिन्होंने किताब छापी. है। उन्होंने तो यही कहा है कि विकास दुबे. की पत्नी को तो पिता को कनपटी पे बंदूक. लगा के विकास ने शादी करी थी। मैंने तो. नहीं कहा कि विकास ने बंदूक लगा के मेरे. पिता को डरा के मुझसे शादी करी थी। या. मुझे. इश्क में हां स्वाभाविक है प्यार में.
मैंने शुरू में कह दिया कि मैं अंधा होता. ऐसे ही यह भी प्यार करके अंधी होके. इन्होंने शादी करी थी ऐसा कहीं कोई ना. आप बार-बार तीन शादी उसकी क्यों कहते हो. ये तो चरित्र हनन हो गया ना. नहीं चरित्र हनन जब वो मेरी फैमिली का भी. तो कर रही है वो ये क्यों कह रही है कि. गाड़ी से उठा ले गए बंदूक लगा के ना अमर. के पास बंदूक थी ना अमर के पास गाड़ी थी. गाड़ी अमर के विकास के पास थी बंदूकें. विकास के पास थी तो उठाया किसने विकास ने. अमर को ही तो गुर्गे तौर पे देखते रहे. अमर के घर में ढंग से खाने को नहीं था मैं. आपको बता. मार डाले वो हम. तब क्यों मार डाले गए?
तो वो उनके साथ रहते थे इसलिए मार डाले गए. क्योंकि अपराधी के साथ रहने वाला भी. अपराधी था।. जो भी आप उस चीज को कह. वहां जितने जिस घर से गोली चलाई गई आठ. पुलिस वालों को मारा गया गिड़ासा लेके काट. दिया गया. उसमें अमर का भी नाम आया है। उसी घटना के. लिए उनको भी मारा गया है।. तो फिर वो लड़की पहले उसने शादी कर ली। अब. वो ये नैरेटिव क्यों सेट कर रही है अपने. आप को अबला दिखाने के लिए कि मेरे साथ गलत. हुआ है। बाकी किसी के साथ गलत नहीं हुआ।. उसमें शुभांकर उसके अंदर अब आपको बताऊं जो. मेरे घर में काम करती थी उनकी दो बेटियां.
हैं। दोनों बेटियां पांचप साल की हो के. जेल से बाहर निकली हैं। वो भी तो एक. मार्मिक स्टोरी है। वो क्यों नहीं कभी. उसका परिवार आके बोलता। आज भी वो महिला. जेल में है। जबकि वो सिर्फ बेचारी खाना. बनाती थी और उसका पति मेरे घर में गोबर. कूड़े का काम करता था। वो लोग भी आज तक. जेल में हैं। उनकी छोटी-छोटी दो बेटियां. हैं। नाबालिग मतलब मान के चलिए जब 5 साल. के हो जाते हैं तो शायद जेल से बाहर कर. दिया जाता। उनको मां के साथ नहीं रखा। वो. दोनों बच्चियां बाहर हैं। उनके परिवार ने.
आकर कभी नहीं रो के कहा कि हमारे साथ. जबरदस्ती हुई। या हम भी तो कह सकते थे जब. पहली बार मीडिया में बैठे थे तो हम यह बात. नहीं कह सकते थे सुभांकर कि मेरे साथ गलत. हुआ था। मुझे विकास उठा ले गए थे। आप लोग. तो यही मानते कि उठा ले गए थे। भाई वो. इतना बड़ा बदमाश था तो उठा ही ले गया वो।. ऐसा कहीं कुछ नहीं था। उसी के साथ. जैसे खुशी जो आरोप लगा रही है हो सकता है. कि वह अपना आगे भविष्य बचा. हां स्वाभाविक है स्वाभाविक. शायद आप भी उस जगह होती नई-नई शादी हुई तो. आप. नहीं नहीं मैं नहीं कहती शुभांकर नहीं हो. सकता है कि. मैं इस चीज को मानूंगी. लेकिन तीन शादी का जिक्र करके ये कह के कि.
उसने अपना हनीमून नहीं मनाया ये कह के कि. ऐसा कौन होता है एक महीने एक बखरू में रही. ये ऐसा लग रहा है कि आप समाज में मैसेज. डाल रहे हो कि वो एक चरित्रहीन महिला है।. नहीं नहीं मैं किसी को किसी की लड़की को. चरित्रहीन नहीं कह रही हूं। मेरा कहना. नहीं मैं शुभांकर इस चीज का आपको आंसर दे. रही हूं। उस लड़की ने दो जब से बाहर निकली. है सिर्फ एक नैरेटिव सेट कर रही है कि. मेरे साथ गलत हुआ। हां ठीक है। तुम्हारी. मां बीमार है।. तुम जेल गई इसके लिए भी बहुत. एक 16 17 साल की लड़की. ये आप कह रहे हो ना जो ऑल ऑलरेडी.
उसके जो बोर्ड परीक्षा के सर्टिफिकेट और. कानूनी दस्तावेज हैं जो जो कोर्ट में पेश. मैं नहीं कह रहा हूं जो कोर्ट में पेश किए. गए हैं तो कानून की नजर में वो एक बच्ची. थी और 18 साल से अगर आप नीचे होते हो तो. जो फैसला आप लेते हो उसमें कानून आपको. रियायत देता है। वह यह मानता है कि आप तो. नहीं 18 साल से. अब नहीं लेकिन वो यह मानता है कि सही गलत. की फैसले की क्षमता नहीं है। अगर आज मैं. एक लड़की भगा ले जाऊं जो 18 साल से नीचे. की हो भले वो लड़की मुझसे जबरदस्ती कहे. चलो भैया भाग ले चलो.
पुलिस मुझको पकड़ेगी क्योंकि मैं. बुद्धिमान था मैं व्यस्त था वो नहीं थी वो. नाबालिक थी. तो अगर उसकी शादी कुछ दिन पहले हुई या जो. भी एक्स वाई जेड फैक्टर रहा और अब वो बालग. होकर ये कह रही है कि मैं समझदार हूं वो. शादी जबरदस्ती हुई थी तीन दिन पहले मैं गई. थी तो उसका कैरेक्टर असिस्टिनेशन क्यों. नहीं तो वो ये बात क्यों नहीं बता रही वो. दो स्टोरियों को सुभांकर मर्ज कर रही है. जो ठाकुर ठाकरों के घर से वो लाई गई। उस. स्टोरी को और विकास के घर की शादी को वो. मर्ज करके बता रही है।. हो सकता है बहुत सारे लोग होते हैं जिनको.
प्यार मोहब्बत आता है। तो पापा नाराज हो. गए। पापा नाराज हो गए। पाप बहुत सारी. घटनाएं जहां पे बाप ने मार डाला है। अभी. ग्रेटर नोएडा में एक घटना आई थी। प्यार. कहीं और तगड़ा सा ले काट डाले। बहुत सारी. घटनाएं देश में ऐसी होती हैं जहां पर समाज. में ऑनर किलिंग की जाती है। कि जातपात से. कहीं और शादी करोगे तो मार डालेंगे। बच्चे. उम्र में उनको समझ नहीं होती है। बहुत. सारे लोग हैं। हम आपके बच्चे हैं। आप उनसे. बात करेंगे उनका नजरिया अलग होगा। जितना. पिछली जनरेशन में शायद अगली में थोड़ा कम. होता है।. तो हो सकता है उसमें हुआ हो पिता ने कहा.
हो शादी करवा दी गई हो।. बट उसमें वो तीन शादी कररेक्टर से. नहीं तो वो वो पता तीन शादी होती है।. अरे हमको आप जाइए 10 कि.मी. 20 कि.मी. तक. जानते हैं। अब मैं बहुत कुछ जानती हूं। अब. मैं नहीं कुछ बातें कहना चाहती।. जैसे आप किसी की अगर चरित्र बात कर. चरित्र की बात नहीं कर रही हूं। उसने भी. तो हमारे चरित्र का हनन कर रही है। कर रही. है कि नहीं कर रही? अब इतनी बदनामी के बाद. भी शुभांकर हम इतना वैसे दंश झेल रहे हैं. 5 सालों से। हम अपने आप को एकदम सीक्रेटरी. रख के किसी से मतलब नहीं रखते हैं। हम लोग. बहुत अलग-थलग रहते हैं। उसके बावजूद जब आप.
दो तारीख आती है पुलिस वालों की हत्या का. दिन। तब आपके नाक से खून आने लगता। आप एक. स्टोरी डलवाती हैं कि मुझे एंजायटी हो. रही। मेरे नाक से खून निकल रहा है। मैं जब. सोचती हूं तब खून आ जाता है। ये सब चीजें. तो डॉक्टर को दिखाने की है कि मीडिया में. दिखाने की है? मैंने तो नहीं बताया कभी. किसी को कि मैं डॉक्टर से मिल के आती हूं. कि मुझे क्या-क्या बीमारियां हैं।. आज आपने बताया मुझे. आज आज तुम्हें बताया ना मगर मीडिया में तो. अभी उस दिन भी बैठी थी तब भी तो कह सकती. थी मगर आज तुम्हारे पास मैंने बताया. बट इस इससे ये तो अपना-अपना एक मंच है।.
नहीं देखो शुभांकर इसलिए मैं स्टैंड नहीं. लेना चाहूं। तुम्हारी बात को मैं इस चीज. पे स्टैंड नहीं मानूंगी।. स्टैंड नहीं मांग रहा हूं।. मैं ये कहूंगी उस लड़की ने गलत किया। उससे. पहले वो लड़की गलत है। फिर भी मैं यह बात. कहूंगी कि गलत है। पहले तुम ऑलरेडी दो जगह. तुम जा चुकी थी और उसके बावजूद तुम यहां. ये क्यों कह रही थी मतलब? अरे शादी कर चुकी थी।. कोई प्रूफ है आपके पास? अरे मेरे पास बहुत कुछ प्रूफ है। मगर मैं. अब बात वही है ना कि अब दूसरों का भी घर. फंस रहा है।. मैंने तो सब कुछ बता दिया मीडिया।. दावा कर दे रहे हो।. हां दावा कर रही हूं इस चीज का।.
कल को मान लो मुझसे कह दे कि शुभांकर. मिश्रा चार ब्याह। उस दिन बता दीजिएगा उसी. दिन हम WhatsApp पे गांव और घर और लड़के. के पिताजी और पूरे परिवार का नाम भेज. दूंगी।. तो हमको आप दे देंगी।. पक्का दे दूंगी।. ठीक है।. मैं इतने दावे के साथ कह रही हूं। मैं. अपनी बात और अपने पॉइंट पूरी मजबूती के. साथ रख. पडकास्ट के बाद भेज दीजिएगा ताकि हम आपके. दावे को क्लेम के हिसाब से उसमें चिपका।. हां हां और हो सकेगा तो लड़के का नंबर भी. दे दूंगी आपको। और बताइए और मैं क्या दे. जाऊं? बट इस तरह से अगर कोई दावा प्रूफ हो. जाता जैसे शादी बहुत बार लड़का.
सब जानते हैं शासन प्रशासन सब जानता है. मैं फिर आपसे कह रही हूं यही मैंने उसमें. कहा था शासन प्रशासन कोई कहना नहीं है. आप शादी क्या मानते हो वो लड़का लड़की आपस. में बैठ के फिल्मी मांग भर दी वो शादी. होती है. मगर शादी मतलब एक मेरी बात सुनिए सर मैं. जानना चाह रहा हूं जो आप शादी कह रहे हो. शादी का मतलब क्या है शादी वो जो सात फेरे. समाज के सामने लिए गए कोर्ट मैरिज उसको. शादी मानते हो या वो जो लड़का लड़की आपस. में कहते हैं निब्बा निब्बी कि हम. तुम्हारा मांग भर दिए या खून हाथ काट के. लगा दिए तो वही बताएं ना कि उन्होंने. निब्बान निब्बी शादी करी कि कैसे करी मगर. उन्होंने करी.
उस लड़के से शादी करी और उसके घर काफी. आपको क्या पता कैसे शादी की. अरे शुभांकर अब. अरे भाई आरोप दूसरा दूसरे मैं तुम्हें सब. देके जाऊंगी तुम वहां पता लगा लेना अब मैं. इसमें नहीं बोलना चाहती हूं लड़के जिक्र. नहीं करना चाहिए था. नहीं जिक्र इसलिए किया कि कोई लड़की वो. बराबर मेरे परिवार के बारे में और फिर वो. मैं मानती हूं वो पॉपुलर हो वो आगे बढ़े. हम किसी का चरित्र नहीं हरणन कर रहे सब. लड़की [गला साफ़ करने की आवाज़] है मुझे. मुझे उससे कोई चिड़ नहीं। मगर वो ये सब. क्यों कहती ईगो था मुझे उठा ले गए और मेरे.
मेरी सुहागरात नहीं मनाई गई। मैं ये हो. गई। सबकी कॉल डिटेल हैं। सब कैसे कौन कहां. है मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं। सबका सब. कुछ सामने है। और शासन प्रशासन इस चीज को. जानता है कि वो क्या कर रही थी, क्या नहीं. कर रही थी।. जी देखिए।. हां। मैं वही बता रहा हूं घूम टहलकर कि. जिस मानवीय पहलू की वजह से मुझे आपसे. सिंपैथी है. वही मानवीय पहलू आप खुशी दुबे को लेकर. क्यों नहीं दिखा रहे हो? क्योंकि वो गलत कर रही है।. और आप उसे दुबे भी नहीं कह रहे हो।. नहीं नहीं मैं दुबे नहीं कह सकती उसे. क्यों कहूं? मेरे सरनेम का तो वो नाजायज.
फायदा उठा रही है। वो कहीं भी आ जाए वो. देख अमर से शादी हुई नहीं हुई उसकी।. अमर से शादी हुई मैं तो नहीं गई थी। ना. मैं जानती हूं ना।. भाई अब आपने शुक्ला जी का मर्डर नहीं. देखा। उसके बाद थोड़ी ना मर्डर नहीं हुआ. था। हुआ था। बिकरू कार्ड नहीं देखा तो. थोड़ी ना बिकरू कार्ड नहीं हुआ था। तो आप. आप ब्याह देखिए उससे फैक्ट नहीं बदलता।. मैं फैक्ट की बात कर रहा हूं। ब्याह हुआ. था ना।. अब कहती है तो ब्याह हुआ ही होगा।. कहने से कि आपके पतिदेव थे सब करवाए. होंगे।. नहीं मेरे पतिदेव ने नहीं शादी कराई। फिर. वही शुभांकर पूरी बात पहले सुनो मेरी।. उन्होंने अपनी मर्जी से शादी करी।.
तो जबकि अमर के मां-बाप भी नहीं चाहते थे. कि शादी हो इसकी।. अरे किसी की मर्जी से नहीं वो चाहते थे।. हो गई।. अब हो गई तो भाई सरनेम तो चला गया ना. सरनेम कैसे छीन? तो एक बात बताइए। फिर उस सरनेम का गलत. इस्तेमाल क्यों? रो के क्यों बता रही हो? अरे उसको फक्र के साथ बताओ कि भाई मैं. उनके घर के. बहुत आदमी अपने जैसे आपके बच्चों ने चूज़. किया कि अपने पिता के बारे में नहीं बात. करेंगे वो उनकी चॉइस है। आपने चूज़ किया कि. आप बात करेंगी ये आपकी चॉइस है। उसकी. मर्ज़ी वो उसकी चॉइस है।. वो अपने आप को बेचारी क्यों दिखा रही है? उसकी मर्जी उसकी जिंदगी.
नहीं वो गलत है। वो चीज गलत है। बेचारी मत. दिखाओ। आप जेल गई आप बेचारी थी। आपके साथ. गलत हुआ। ठीक है। आपकी मां बीमार हुई।. आपके साथ गलत हुआ। मगर आप किसी को ये. क्यों कह रहे हो कि बंदूक और गाड़ी से. मुझे उठा। आप. चलो मैं ये मैं ये भी बात मान लेता हूं।. आप जो बात कह रहे हो कि आपको ये लग रहा है. कि आपके परिवार का गलत बात करी है। आप इस. बात पर विरोध करो। इस पे ऐतराज नहीं है।. ये आप कर सकते हो। ये आपका अधिकार है।. आपका परिवार है। लेकिन फिर आप उसके. व्यक्तिगत चरित्र पर जब हनन करते हो. नहीं तो तब आदमी को लगता है कि आप बिलो द. बेल्ट वार्नर।. नहीं बिलो द बेल्ट नहीं कर रही हूं। जब उस.
वो मेरे भी तो चरित्र का हनन कर रही है. मेरे परिवार का। कैसे नहीं कर रही है? आपको कौन उठा के ले गया? अमर के घर तो. साइकिल भी नहीं थी। और बता रही 500 मीटर. दूर था। मैं नहीं मानती अमर का घर इतनी. दूर था विकास के घर से हैं। और बता रही हो. कि जबरदस्ती मेरी शादी ये तो सच कबूल हो. कि तुम्हारी तुमने स्वेच्छा हम कह रहे तुम. जेल तुम भोग के आई हो। तुमने झेला है।. दूसरा नहीं झेला है। तो तुम ये तो कहो कि. मैं उसकी बीवी थी। ये क्यों कह रही हो झूठ. कि तुम मेरी तो जबरदस्ती शादी हुई थी।.
मेरा ये कहने का मतलब. बट इसमें अगर मान लो हम उसकी तरफ एक जहां. मैं उसकी अगर सोचता हूं अगर मेरे सामने. विकास दुबे जैसा आदमी हो जिसमें इतना. जिगरा हो कि वार्ड पुलिस वालों को मार. दिया अधिकारी गड़ास काट दिया उसके पहले. मारा तो वहां तो ना कहने का ऑप्शन भी नहीं. है मान लो अगर उसकी कहानी मान ले कि अच्छी. लग गई लड़की अमर से ब्याह करना है. हम्म. आप मना भी तो नहीं कर सकते थे बड़े आदमी. को. नहीं ऐसा कुछ नहीं था विकास कतई नहीं. चाहते थे उनकी मां ने जबरदस्ती. कहा था कि मैं ₹1 नहीं खर्चा करूंगी. क्योंकि ये अपने मन से आई है तो कई जगह. उनकी मां के यह शब्द थे ये कई जगह जा चुकी.
कलावा थोड़ी के हाथ पकड़ मस्ती बांध दिए. बिटिया. जबरदस्ती वो शादी हुई है। देखो शुभांकर. मैं आपको एक बार बेबस आदमी थे अमर दुबे और. विकास दुबे एक आदमी जबरदस्ती जबरदस्ती. शादी विकास तो पता नहीं कितनी लड़कियों की. शादी कराए होंगे।. ऐसे जबरदस्ती. जबरदस्ती नहीं प्रेम से जिनको करनी होगी. उन्हें कराई होगी। दुबे ने जबरदस्ती कर. ली।. नहीं जबरदस्ती नहीं प्रेम से। इसने प्रेम. से शादी करी बस मेरा यही कंसर्न है कि सच. बोलो यार कि तुमने शादी करी है। तो ये कहो. कि हां मेरी शादी हुई। अब बाकी जो. तुम्हारे साथ हो रहा है वो गलत है।.
ठीक है। ठीक है। चलो अब हम इसका फैसला आज. जन तक छोड़ देते हैं क्योंकि एक सवाल हमने. किया। आपका एक नजरिया है जिसमें आप अपने. परिवार को बचा रहे हो। उनका एक नजरिया है. बीच में।. मेरे परिवार को आप बदनाम मत करो क्योंकि. देखो मेरी सास भी है। उसकी भी आखिरी सांसे. चल रही है। बहुत बुजुर्ग हैं। 90 95 ससुर. लास्ट ईयर मरे। उनको बहुत बुरा लगता है।. जब वो बात करती है ना तो वो सिवाय रोने के. उनके पास कोई शब्द नहीं रहता है।. फिर मैं कहूंगा ये विकास दुबे को सोचना. चाहिए हां, तो बस वह उस चीज़ को मैं भी तो. मान रही हूं ना कि वह उन्होंने गलत किया।. वह तो नहीं कहते, ना उनकी मां कहती कि.
बहुत बाभूति का काम। वह रोती है। हम उनकी. उनकी बात सुनते। बस यह है कि अब उतना. चरित्र हनन मत करिए। देखो एक तो गलती आज. इंसान कर गया। अब उस गलती को लेके तुम. अपनी पॉलिशिंग नरिशिंग करो। ये गलत है। बस. सिर्फ मेरा स्टैंड लेना इस चीज़ को।. कांड पर कोई पिक्चर ही बन रही है? मैं बन. रही थी। हां बनी है बनी है वेब सीरीज कोई. संजय ओझा करके हैं उन्होंने बगैर मेरे. कंसर्न के जबरदस्ती उसमें विकास को. चरित्रहीन शराबी सिगरेट और बता दिया है. इनके परिवार से उन्होंने कोर्ट में एक.
अपना जवाब लगाया है अभी मुझे उसका जवाब. देना है. कि वो विकास दुबे पे बनी ही नहीं है. बिल्कुल सेम टू सेम विकास की चाल दिखाई है. देखिए सरनेम मेरा यूज किया है दुबे और नाम. बदल के विशाल कर दिया रिचा की जगह मेरा. नाम निक नेम सोनू है। यह शायद हमारे. ससुराल वालों को पता है। मुझे सोनू भी. कहते हैं, सोना भी कहते हैं, सोनी भी कहते. हैं। गांव वाले मुझे कुछ भी कहते हैं।. बाबू टोना भी कहते हैं।. कुछ भी कुछ भी कहते हैं। वो वहां गांव में. कुछ भी कह सकते हैं। वो गांव के लोग जैसे.
उन्होंने उस लड़की का नाम विकास की जो. पत्नी है उसमें विशाल की पत्नी बनाई।. उसमें उसको सोनिया कर दिया। उन्होंने बता. दिया कि विकास और विकास के परिवार में. मतलब कोई लेना ही रिलेशन ही नहीं। और फिर. फिल्म का नाम रखा यूपी 77। अरे तो बिहार. के थे तो भैया तुम बिहारी कुछ जो भी लगता. वहां का वो कर सकते थे दिल्ली के थे तो. दिल्ली का लगा लेते जो भी लगता. अपनी पॉडकास्ट करके उनका भला कर दिया अब. इसको सब देखेंगे जाएंगे पिक्चर ढूंढेंगे. नहीं तो वो तो देख रहे हैं चल रही है खूब. चल रही है वेब सीरीज. हो सकता है उतना पॉपुलर ना हो जाए हम नहीं.
देखे. नहीं नहीं नहीं नहीं आप देख लीजिएगा कुछ. नहीं है उसमें सब बकवास है वो उन्होंने जो. मीडिया में स्टोरी चली है शुभांकर उसी को. चलाया है और उन्होंने कुछ नहीं करा मगर वो. भी गलत है वो भी चरित्र हनन कर रहे हैं. हम उसके लिए मैंने हाई कोर्ट में डाला हुआ. है. और हाई कोर्ट से न्याय मिलता है मिलता है. नहीं मिलता है तो मैं सुप्रीम कोर्ट तक. जाऊंगी उनको सजा दिलाई आजकल पता नहीं क्या. हो गया है कुछ प्रोड्यूसरों को कुछ भी उठा. के कुछ भी बना देते हैं मतलब कमाने के नाम.
पे मतलब कमाना है इस पे तो बना ली स्टोरी. ऐसा नहीं करना चाहिए आओ जानो तो कि हम लोग. क्या झेल रहे हैं. अब वो कहेंगे जब कांड किया तब नहीं लगा. हां तो फिर क्यों बनाई हम भी मजा. नहीं नहीं नहीं तो क्यों बनाई जब तुमको. कांड इतना बुरा बुरा लगा था तो तुम्हें. कमाना भी नहीं चाहिए था। तो उसको तो. बिल्कुल तुम्हें तिरस्कार कर देना चाहिए. था। असली नागरिक तो उसको कहते हैं।. अब देखिए देश में कर्म बिके ना बिके कांड. बिक जाता है।. नहीं तो बस वही बात है ना शुभंकर की मैं. मेरा तो मानना है ना कि जो चीज मुझे अच्छी. नहीं लगती उस चीज को मैं किसी तरीके से. देखना भी नहीं चाहती हूं। बस तुम अपने.
रास्ते हम अपने रास्ते।. ठीक बात है। अ आप ये मानते हो कि जब विकास. का एनकाउंटर होगा तो कई नेताओं ने राहत की. सांस ली होगी।. उस वक्त तो. मैं ना सामने थी ना मुझे कुछ पता था। मेरी. अपनी ही खुद मानसिक स्थितियां ही नहीं ठीक. थी।. मैं इस विषय में क्या कहूं? मुझे तो नहीं समझ में आता कि किसने राहत. की सांस ली, किसने नहीं ली।. विकास की जो गाड़ी पलटी गई थी। विकास ने. मध्यप्रदेश में सरेंडर किया था।. मंदिर से निकल के पूजा पाठ करके सरेंडर.
किया। कैमरों के सामने सरेंडर किया ताकि. उन्हें डर था कि कुछ हो जाएगा।. वो चाहते थे जिंदा रहना। तो जिंदा रहने की. ख्वाहिश थी। लेकिन फिर रास्ते में गाड़ी. पलटी. हम. उस घटना को आप कैसे देखते हो? उस. [नाक से की जाने वाली आवाज़] इंसाफ को या. उस कहानी को जिसमें कहा गया कि बंदूक. निकाली पुलिस वालों फायरिंग कर दी।. हमने भी. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. अब इसमें मैं क्या आंसर दूं?
देखिए कहीं ना कहीं तो इतना तो मैं कहूंगी. कि यदि वह जिंदा होते तो आप कुछ और भी. निकलवा सकते थे। जो आप कह रहे हो बहुत. लोगों ने सांस ली राहत की वो भी बाहर आ. सकते थे। यदि वह जिंदा होते तो जिंदा तो. कसाब को भी रखा गया था।. कितने दिन जिंदा रखा गया था। फिर फांसी दी. गई थी। ऐसे उनके लिए भी थोड़े दिन तसल्ली. करके सब कुछ निकलवा के उनको फांसी दे दी. जाती।. ऐसा नहीं किया जा सकता था। करा जा सकता.
था। जैसे परिवार भटक रहा है, परिवार ढूंढ. रहा है चीजों को। हम लोग हर चीज का पता. लगा रहे हैं। जैसे आज आप पूछ रहे हो कि. बहुत नेताओं ने राहत की सांस ली तो हो. सकता वो जिंदा होते। सबका नाम लेते शुभंकर. वो भी राहत की सांस ना लेते। यदि जो. सपोर्ट कर रहा होगा तो वो तो दूसरा विकास. खड़ा कर लेगा कुछ दिन बाद।. हम. स्वाभाविक है जो पावर में होगा तो वो तो. दूसरा विकास खड़ा कर देगा। कहीं ना कहीं. दूसरा विकास खड़ा हो गया होगा। यदि आज. विकास जिंदा होता तो सबका नाम लेता। जब वो. फंसता तो वो सबको वही फंसाता। भाई मैं तो.
अनभिग महिला। मैं रहती 15 साल से रह रही. हूं लखनऊ में। मुझे तो कुछ पता ही नहीं।. लेकिन पुलिस की चार्जशीट में आपके नाम के. आगे साजिशकर्ता लिखा है।. चलिए मैं चार्जशीट पढूंगी। मैंने आज तक. नहीं पढ़ी। आज आपने कहा तो मैं जरूर. पढूंगी। अपने वकील से कहूंगी भैया मेरे को. WhatsApp करो। मैं पढ़ना चाहती हूं।. हम. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. तकलीफ होती है। क्या चलता है आप सब देख. के? तकलीफ भी होती है, दुख भी लगता है, परेशान. भी होती हूं। फिर यह सोचती हूं यह जीवन.
है। इस तकलीफ से हमको हमारे बच्चों को. जीने का तरीका आया कि दुनिया कैसी होती. है।. हम. हम लोग पहले बच्चों का जीवन जी रहे थे। अब. हम बड़े हो गए, एडल्ट हो गए। अब हमको पता. है कि दुनिया क्या कर सकती है। दुनिया को. क्या चाहिए? अब हम समझदार हो चुके हैं। यह मान लीजिए।. अपनी जिंदगी जी रहे हैं और आगे सबसे. निवेदन है हमारा कि जो लोग परेशान करते. हैं, उल्टे सीधे वीडियो बनाते हैं। अरे. मैंने कमेंट्स में तो शुभांकर यह भी सुना.
है। मैं आज तुम्हें बताती हूं कि अरे ये. तो उनके मरने के बाद से और सुंदर हो गई।. अरे बेवकूफ इंसान किसी औरत के दिल से पूछ. जिसके माथे से सिंदूर और बिंदी चली जाती. है। वो सुंदर होता है।. मूर्ख तेरे घर की औरतें भी उतनी सुंदर हो. जाए। मैं कह रही हूं।. देखो तो कैसे-कैसे लोग हैं दुनिया में। तो. बस मैं तुम्हारे माध्यम इसीलिए आई तुम पे. ये कहना चाहती हूं मैं खुशी को भी ये कहना. चाहती हूं कि बेटा तुमने क्या किया क्या. नहीं किया मुझे कोई मतलब नहीं मगर अब तुम. मेरे घर का सहारा लेके उन लोगों का नाम.
लेके अपनी पॉलिसिंग नरिसिंग मत करो पढ़ो. तुम्हारी जिंदगी आगे बहुत है तुम्हें बहुत. कुछ करना है आगे और मैं कभी किसी की लड़की. के बारे में नहीं गलत करती हूं मेरे भी. मेरे भी दो बहुएं आएंगी शुभंकर वो भी किसी. की लड़की होंगी जब मैं दूसरे की लड़की की. इज्जत नहीं करूंगी तो मेरे घर कैसे. लड़कियां आएंगी मुझे मुझे मालूम है ये चीज. मगर वो लड़की ने हद पार कर दी। घर मेरा घर. भी है। मेरे से जुड़े गांव वाले भी हैं।. मेरी ससुराल भी है शुभंकर। मुझे सबका दबाव.
रहता है। कोई नहीं आता है मीडिया में। मैं. ही एक हो गई हूं जो पकड़ के हर जगह बैठा. क्योंकि मुझे वो बना दिया गया है ना मेन. कि आप यह कह सकती। तो मैंने आके तुम्हारे. द्वारा सबके प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी यही. कहा था। मुझे किसी से कोई जलन नहीं है। ना. मुझे किसी से दुश्मनी है। ना मुझे किसी से. लड़ना। मैं लड़ने वाली पर्सन ही नहीं हूं।. मगर हां अपनी बात जरूर कहूंगी कि तुमने यह. नैरेटिव सेट किया। यह अच्छी चीज नहीं है।. मैं सब जानती हूं। मेरा यह नहीं है कि. तुम्हारे पडकास्ट से ये मेरे अंत है इस. बात का। अभी मैं बहुत कुछ जानती हूं उनके.
बारे में। मैं कह नहीं रही हूं। मगर अब. इतना बेबस ना करना कि मुझे अब खुल के कहना. पड़ जाए।. यही तो हमने कोशिश की थी कि वो कुछ. नहीं कहना चाहती हूं। किसी लड़की के. नहीं उस लड़की के लिए मैं यह लड़की के लिए. कहने कह के जा रही हूं. कि मैं बहुत कुछ जानती हूं बेटा मगर मैं. बहुत चीजें अभी ढक रही हूं मगर इतना बेबस. मत करना जब अब मेरे पास कुछ खोने के लिए. नहीं बचा है शुभांकर मेरा सब जा चुका है. बट आप उस लड़की पे क्यों आ जाओ इतनी. बड़ी-बड़ी लड़ाईयां. नहीं नहीं लड़ाईयां देखो वो लड़ाईयां सब.
मेरी लीगल चल रही है शुभंकर. मुझे अपनी न्यायपालिका पे शुरू से कह रही. हूं भरोसा है मेरे हक में जाएंगी मुझे. विश्वास है आज चल रही हैं 5 साल साल हो. गए। 5 साल और लग सकते हैं मगर मैं. जीतूंगी।. मुझे भगवान पे भरोसा है। तुम्हें नहीं. मालूम है। मैं तुम्हारे द्वारा बताना. चाहती हूं कि मेरे एक चाचा थे। मेरे घर के. पास रहते थे मनोज मिश्रा नाम था। उन्होंने. अपने उनके कोई एक थे ज्योतिष। उनसे मुझे. मिलाया। उनका नाम था शेखर। ऐसे ही कुछ.
मीडियाई पर्सन थे। पता नहीं कौन थे। नो. डाउट बहुत ज्यादा नहीं। बस एक बार मिली. हूं। उनके पास उन्होंने जाकर मुझे यह. सुंदरकांड बताया कि आप यदि कर सकती हो तो. रोज सुंदरकांड करो और मैं तब से बराबर कर. रही हूं।. आप हमारा भक्ति बुक चैनल देखना।. अरे मैं देखती हूं। अरे कैसी बात करते हो? मैं तुम्हें फोन दिखा जाऊंगी। सब्सक्राइब. है। एक भी. भक्ति को लेकर जितना अच्छा काम चैनल से. कहानियां बनाई जा रही है जो हम सुना रहे. हैं।. विज्ञान के साथ केवल कोरी मान्यताओं पर.
नहीं. मान्यता आस्था विश्वास प्लस विज्ञान।. नहीं मुझे विश्वास है। जब मेरे पास एक. रुपए नहीं थे सुभांकर।. तब तुम्हें बता रही हूं भगवान ने ही तो. पैसे भेजे एक फिल्म वाला भेज दिया और कुछ. पैसे दे गया मेरा बस ऐसे ही चल गया सोचो. तो ये ईश्वरी है ये हनुमान जी है आज जो. मैं बोल रही हूं बोल के जा रही हूं ये. उन्हीं की क्षमता है मैं बगैर सुंदरकांड. के घर से नहीं निकलती उनको ले चलती हूं और. जब मन घबराता है जब कहते हैं ना एंजाइटटी. लोग कहते हैं नाक से खून यहां से खून कुछ.
नहीं जब हनुमान जी की पूजा करोगे और उन पे. चित लगा दोगे तो तुम्हारी नैया यूं ही पार. लगा देगी और अभी मुझे विश्वास यही विकास. दुबे को भी सिखा गई होती आप. नहीं मानते थे शुभंकर यदि वो मेरी मानते. तो आज. कितनी महिलाएं विधवा ना होती. नहीं इस बात के लिए तो तुम मुझे इतना. गिल्ट कर दोगे हमें लगता है कि मुझे दो. चार दिन नींद नहीं आएगी मैं इस गिल्टी के. साथ बहुत सफर कर रही हूं. नहीं मैं जब देखिए गिल्ट बात नहीं है. तुम्हें मालूम है मैं बच्चों से कहती हूं. कि मैं. जैसे मैं आपकी आप मेरे पास आई आप भावुक. हुई मुझे मैंने आपको पूरा मौका दिया.
मैं हर एक व्यक्ति के बारे में सोच रहा था. जिस व्यक्ति के साथ घटनाएं घटी होंगी उनका. परिवार और वो तो वो तो भ्रमित भी नहीं हुए. थे। वो तो ईमानदारी से अपना काम. नहीं सुभांकर तुमको मैं एक बात बताना. चाहती हूं। मैं एयरफोर्स रिटायर्ड की बेटी. हूं। मैं समझ सकती हूं जो पुलिस वाले होते. हैं जो सीमा पे जवान होते हैं वो तो अपने. परिवार को यही कह के जाते हैं कि हम सेवा. कर रहे हैं। बस इसीलिए और फिर मैं 100 की. एक बात बताना चाहती हूं।. मैंने इसीलिए आज तक स्टैंड नहीं लिया।.
मैं चुप हो गई क्योंकि निशब्द हो गई। अब. मेरे पास कोई शब्द ही नहीं बचा सुभांकर।. मैं क्या करती? किसके लिए. आप एक काम कर सकते हो जो मैं चाहता हूं आप. बताओ बताओ. इस देश में बहुत सारे अपराधी बहुत सारे. वाइट कॉलर गुंडागर्दी करने वाले बंदूक के. जरिए लोगों को डराने वाले लोग होंगे. जिनकी शायद पत्नियां जिनके बच्चे. इस इंटरव्यू को देखेंगे. जो आज ताकतवर होंगे जिन्हें आज ये एहसास. होगा कि समय उनके कंट्रोल में है। ताकत. उन्हें कंट्रोल में है। वो किसी का जीवन. बना सकते हैं, बिगाड़ सकते हैं। किसी को.
बर्बाद कर सकते हैं। मैं चाहता हूं आप. उनकी पत्नियों को उनके बच्चों को बताओ कि. जो गलत काम उनके पिता आज कर रहे हैं इसका. अंजाम कल क्या हो सकता है और आज उन्हें. क्यों सतर्क होना चाहिए उन पत्नियों को आज. क्यों अपने पति को कंट्रोल करना चाहिए कि. वो अन्याय ना करें क्योंकि कर्मों का. हिसाब इसी दुनिया में होता है इसी जन्म. में होता है ये आप बता दोगे तो शायद कोई. और आपके जैसा नहीं होता. नहीं नहीं मैं ये चाहती हूं जो भी मुझे. सुन रहा है और जिसके घर में बच्चा हो. कभी-कभी लड़के भी गलतियां करते हैं. कभी-कभी पतियां भी गलती करते हैं उनको.
रोकिए आप ये गलत है क्योंकि जो मैं और. मेरे बच्चे स्ट्रगल कर रहे हैं भगवान ना. करे कोई करे और इस चीज को रोकना चाहिए. मैंने तो पहले दिन पुलिस पे हाथ जोड़ के. कहा था कि उत्तर प्रदेश में दूसरा विकास. नहीं खड़ा होना चाहिए मैंने अपने मुंह से. कहा था ये हो सकता हो बहुत लोगों को मेरी. ये बात बहुत बुरी लगेगी ये बीवी हो के ऐसा. कह रही थी मगर देखिए एक कहते नहीं एक. बनाना कि वो भोका भोकाल नहीं कहते यूपी. में कहा जाता है भोकाल बनाने वाली बात और. एक भोकाल बनाने वाली और रियलिटी जीने मैं. रियलिटी जी रही हूं शुभांकर मैंने देखा है.
इन 5 सालों का स्ट्रगल। मैं हर इंसान से. कहना चाहती हूं थोड़ा खा लो अच्छा है।. लड़ाई झगड़े में कुछ नहीं रखा है। जीवन. में लड़ाई का अंत हमेशा आप यह समझिए कि. मेरी दादी एक शब्द कहती थी कि आप गोली. रखोगे तो गोली आप अपने पास बंदूक रखोगे तो. वो गोली का शिकार एक दिन आप भी होगे। बता. दे कोई सरकार में उत्तर प्रदेश की और. पुलिस वालों ने बता दे रिचा दुबे के नाम. एक छोटी सी वो कौन सी चकू कही जाती है. रामपुरी वह तक नहीं थी कुछ नहीं थी मैं.
बहुत ईश्वरवादी इंसान हूं आज तुम्हारे. पॉडकास्ट के बाद सब नीचे कमेंट्स करेंगे. अरे ये औरत बहुत दुष्ट है ये औरत बहुत. नालायक है. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] पर यह. मेरी रियलिटी जाओ मेरे मायके की तरफ से. पूछो जाके मैं कैसी थी मेरे लखनऊ के आसपास. पूछो जा के कि रिचा दुबे कैसी थी और गांव. में आज भी पूछो जा के रिचा दुबे ने कभी. किसी से जोर से बोली बोली कभी किसी को. डांटा विकास ने कभी किसी को मारा भी होगा. मेरे सामने तो मैंने विकास को उल्टा डांट. दिया खबरदार कभी किसी के पे हाथ ना छोड़ना. वो नशा करता है वो पी रहा है वो खुद मरेगा.
तुम्हें तुम किसी के नहीं वो कहते नहीं है. तुम मंत्री ना बनो किसी के मुझे इन सब. चीजों में कोई इंटरेस्ट नहीं है और तुम. आगे भी देखना 5 सालों में जितना हम लोगों. ने स्ट्रगल किया है यदि मैं गलत होती ना. तो मैं कहीं और निकल गई होती तुम्हारे पास. ना बैठकर अपना दुखड़ा रोने आती सच्चाई. हमारी कोशिश थी कि आपकी कहानी जो है. दुनिया तक पहुंचाई जाए। उन सवालों के साथ. जो जनता के मन में चल रहे हैं ताकि एक. निष्पक्षता बनी रहे। वही निष्पक्षता जिसको. देखकर आप यहां तक आई थी।.
नहीं नहीं मैं इसीलिए आई थी कि तुम्हारी. जो ऑडियंस है बहुत लॉयल है और मेरी बात को. समझे। जैसे मैं कमेंट्स लोगों के पढ़ती. हूं वैसे कमेंट्स नहीं पढ़ने चाहिए। मगर. मैंने पढ़ा कि खुशी दुबे तो नाबालिक थी और. वो बहुत बेचारी है। बेचारी उसके साथ गलत. हुआ। हम भी जानते हैं उसके साथ गलत हुआ।. पर उस चीज को आप बताइए कि उसके साथ गलत. हुआ। मगर वो मत कहिए कि ना कि रिचा दुबे. दुष्ट थी। रिचा दुबे तो और सुंदर हो गई है. पति के मरने के बाद। किसको मैं सुंदर लग. रही हूं मूर्ख इंसान। मेरे मन से तो पूछ.
कि मैं अपने आप को शीशे में देखना नहीं. पसंद करती हूं। कौन औरत चाहेगी वो इस रूप. में रहे? मजबूरी में बना बनी हूं मैं। मैं. वो नहीं हूं। और मैं और आपके पडकास्ट भी. यह लास्ट में भी कहना चाहती हूं पर्सनली. कि खुशी दुबे खुद क्या कहती है उसका एक. मास्टर है. उसको वो नरिसिंग करता है। वह समझाता है।. उस मास्टर को आपके द्वारा भी समझाना चाहती. हूं कि भैया. इतनीस्टरी मत करो कि सामने वाले को बुरा.
लगे कि वो भी उस स्कूल का प्रिंसिपल था।. तुम जिस स्कूल के मास्टर थे। मुझे भी बहुत. कुछ मालूम है। मुंह मत खुलवाओ। आज ढक के. जा रही हूं। कल पता नहीं क्या खोल के. जाऊंगी।. चलिए हमारी कोशिश थी समझने की। आपका. बहुत-बहुत शुक्रिया। आपने वक्त दिया।. थैंक यू।. बिना सारे सवालों को सामना किया। आखिरी. फैसला हमेशा की तरह हम जनता पर छोड़ देते. हैं।. श्योर. क्योंकि लोकतंत्र है।. नहीं नहीं हर आदमी को जीने का अधिकार है।. हम भी जी रहे हैं, लड़ रहे हैं। हम छुप.
नहीं रहे हैं। सुभांकर मैंने कहीं नहीं. छुपी। जिस दिन से कुछ भी हुआ है, मैं. बराबर फेस कर रही हूं और लड़ रही हूं। और. आपकी कहानी का जब भी अगला अध्याय कानूनन. आएगा तो फिर बैठेंगे आपके साथ।. हां हां जरूर जरूर मैं हमेशा हमेशा सच. बोलने के लिए मैं हमेशा तैयार हूं। मैं. कभी ये नहीं चाहती हूं। मैं छुपना भी नहीं. चाहती हूं किसी और मैं वैसी भी नहीं हूं।. मगर हां मैं लोगों से थोड़ा दूर रहती हूं।. मुझे ज्यादा लोगों में बैठने की आदत नहीं. है। जैसे कुछ लोग होते हैं कि विकास दुबे. की पत्नी है। लाइ सेल्फी ले लेते हैं।. फोटो ले मैं आज भी मुझे बहुत कम लोग अब.
तुम लोगों के साथ बैठ गई हूं। तो हो सकता. हो जो अगल-बगल रहते हो। मुझे पहचान जाए।. बाकी मुझे कोई नहीं जानता।. इस पॉडकास्ट के बाद आप कई घरों में चर्चा. में रहेंगी। नहीं कई दिनों तक चर्चा में. मेरे को घर से निकलना थोड़ा छोड़ना पड़ेगा. क्योंकि मैं. नहीं रियलिटी मैं निकलना नहीं पसंद करती।. सोच रखा है। हमने अपने सवाल रखे हैं। इतना. हम कह सकते हैं कि इस पॉडकास्ट की चर्चा. बड़ी दूर तक होगी।. शेख तक चली जाए जो आपने बताया।. आपको 5000 करोड़ चाहिए। [हंसी]. आज ढाई तुम्हें दे जाऊंगी। शुभंकर मिले तो.
मेरा. क्षमा क्षमा।. नहीं नहीं।. हमको नहीं चाहिए हमारे घर परिवार ईडी आए।. [हंसी] हम बहुत खुश हैं। ऐसा नहीं है।. छोटी दुनिया हमारी है। छोटा दफ्तर. और ईडी तो सच्चाई है कि मेरे साथ जो जो. जांचे हो गई मुझे तो मैं तो अनभिज्ञ थी।. अभी तो भैया आगमन भी नहीं हुआ हमारा। आराम. से हमको नहीं छेड़ना चाहिए। [हंसी] आपका. नहीं नहीं कोई ऐसा कुछ नहीं है। सिर्फ ये. सब बनाया हुआ नैरेटिव है। आप मुझसे पर्सनल. मिल चुकेगे तो आप इतनी देर में समझ गएगे. कि सुकून से खाने और कमाने वाले हैं।.
मेहनत करके खाना चाहते हैं। जो है उसके. लिए भी मेहनत करेंगे। लड़ रहे हैं। पर अब. यह भी नहीं है भागना नहीं चाहते। यदि मैं. चाहती तो कहीं भाग भी तो सकती थी। बहुत. लोग भाग जाते। अब वही देख लीजिए अतीक की. पत्नी छोड़ के चली गई है। उनको कोई नहीं. ढूंढ पा रहा तो विकास दुबे की पत्नी भी तो. गायब हो सकती थी। क्यों नहीं गायब हुई? क्योंकि गलत नहीं थी। विकास दुबे की पत्नी. को हर चीज फेस करने की आदत है। मैं अपनी. लड़ाई लड़ सकती हूं। जीत सकती हूं। आज मैं. आपके पॉडकास्ट से कह के जा रही हूं। एक. दिन मैं जीतूंगी। और यह मेरा विश्वास है।.
मेरे बाबा के साथ मेरा विश्वास है। मैं. गलत नहीं हूं।. शुभकामनाएं आपको। प्रणाम।. नहीं.
