Unplugged Randeep Hooda | Life | Marriage | Jaat | Kangana| Alia Bhatt | Imtiaz Ali | Veer Savarkar
आपने वाकई में 28 दिन में 18 किलो वजन कम. किया था? जी। 28 दिन में 18 किलो। जी। हाउ. इज इट पॉसिबल? तो आपको डर नहीं लगा कि 2ाई किलो का हाथ. सामने आ रहा है या लगा कि थर से लड़ लिए थे. तो सनी पाजी से भी लड़ ही लेंगे? चड्डा ये. 2ाई किलो का हाथ जब पड़ता है ना तो आदमी. उठता नहीं उठ जाता है। 16 अप्रैल 2019. आपने आलिया भट्ट को कोट करते हुए एक ट्वीट. किया था। ये कंगना के लिए ट्वीट था? ये. हां क्योंकि वो आलिया को बहुत टारगेट कर.
रही थी। पर हाईवे की वजह से जो वो छोटी. आलिया थी उससे मेरा बहुत एक लगाव है। उसको. है नहीं है मुझे नहीं पता। हाईवे आई थिंक. इम्तियाज अली की वो फिल्म है जो सबके ज़हन. में है। जब मैं प्रमोशन देख रहा था तो. लोरी थी। लोरी पे इम्तियाज़ बैठे थे। आलिया. बैठी थी। नीचे जमीन पर एक रणबीर कपूर बैठे. थे। वो मैंने भी देखा था और मुझे समझ ही. नहीं आया। मैंने कहा भाई रणबीर कपूर का इस. पिक्चर से क्या लेना देना है? मतलब उसकी. शादी भी नहीं हुई थी।.
शायद शायद वहीं से शादी की शुरुआत हुई।. कभी हुआ अकड़ में कोई पिक्चर निकल गई? हां. बहुत हुआ है। ऐसे रंग दे बसंती। रामू जी. ने बोला यार तू मैं तेरे को डी में ल्च कर. रहा हूं। तू आमिर खान के पीछे पोस्टर में. खड़ा होगा। मेरी जाट जाट अकड़ निकल आई।. मैंने कहा बिल्कुल नहीं खड़ा. होऊंगा। फिर रॉक भी मैंने ऐसे ही छोड़ी. थी। सावरकर। सावरकर मैंने गुस्से में।. 1857 की लड़ाई है। डू यू बिलीव कि जो हमें. आजादी मिली है वो महात्मा गांधी जी ने या. पंडित नेहरू जी ने या नॉन वायलेंस के थ्रू.
नहीं मिली है? नहीं मिली है। नॉन वायलेंस. क्या आपको क्या किसी से चॉकलेट मांग के. देख लो यार तुम आजादी की बात कर रहे हो।. नॉन वायलेंस से कैसे कुछ मिल सकता है? इट्स नॉट पॉसिबल। गांधी जी का. कंट्रीब्यूशन आजादी में सबसे बड़ा है भाई।. पर सिर्फ उसी वजह से नहीं मिली। वीर. सावरकर बनाने का आपको कोई अफसोस है? ऊपर. वाले ने एक जिंदगी दी थी। फक्र है क्यों. नहीं फक्र है? जिस्म टू, मर्डर 3 या रंग. रसिया। ज्यादा रोमांस में कहां मजा है? रंगलेस यार। चलो अगर एक टीम में कहना हो. कि इस साल आई फिर जीत जाए। अरे यार यह. आरसीबी वालों को जिताओ।. इस साल ही साला कब नाम लूं? यार नहीं दो.
यार मतलब कोहली एक्चुअली डिर्व्स दैट।. हरियाणवी और मणिपुर में। क्या सिमिलरिटी. है? क्या डिफरेंसेस है? थोड़ा बताओ। क्या. दामाद हो मणिपुर के? देश के बेस्ट बॉक्सर. इन्हीं दो स्टेट से आते हैं। हमें लगता है. कि हमारा जब बच्चा होगा तो बॉक्सिंग ग्लव. पहन के पैदा होगा। आप भी डरते हो बीवी से? डरते नहीं है यार।. नाराजगी ना रहे ज्यादा लड़ाई झगड़े सबके. इसी को डर कहते हैं। इसी को डर कहते हैं।. और इस डर के आगे ही जीत है। ये रातें ये.
मौसम नदी का किनारा ये चंचल हवा।. लोग कायदे से जिंदगी जीने के लिए कुछ भी. नहीं करते। लेकिन मेरे मेहमान जो हैं वह. अपनी फिल्मों में किरदार निभाने के लिए. कुछ भी कर देते हैं। कभी-कभी तीन-ती साल. तक दाढ़ी बढ़ा लेते हैं। कभी शरीर से वजन. जो है उसे पूरी तरह गला देते हैं। या तो. इंस्पेक्टर बनते हैं या सीधे-सीधे से. गैंगस्टर बनते हैं। फिल्मों में जवानी में.
रोमांस किया और फिर जब उम्र मैच्योर हुई. तो बताया कि प्यार जो है वो सीमाओं से परे. है। उम्र से परे है। नाम रणदीप हुड्डा।. थैंक यू ब्रदर। थैंक यू फॉर द ग्रेट. इंट्रोडक्शन।. रणदीप हुड्डा या रणदीप हुड्डा देखो डिपेंड. करता है कहां पे. हो रणजीप भी होता. है और रणदीप भी होता है. और वही है कहां पे हैं कौन सा एक्सेंट में.
बात कर रहे हैं किससे बात कर रहे हैं मैं. अंग्रेज भी उतना ही हूं और देसी जाट भी. उतना ही हूं क्योंकि हमारा कुछ एजुकेशन और. माहौल और बड़े होने के इनफ्लुएं सेस कुछ. इतने डायवर्स रहे के अब जब मैं एज एन. एक्टर काम करता हूं तो वो सारे चीज बहुत. काम आती है। मां-बाप ने क्या रखा था? मां-बाप ने नाम रखा था सतनाम। हम मेरे. नाना नानी ने रखा था शायद सतनाम। फिर.
सतनाम का सत्तू बन गया। तो फिर उन्होंने. फिर रणदीप रखा और जैसे मेरे दादा का नाम. रामचंद्र है। वो सबसे बड़े थे। मेरे फादर. का नाम रणबीर है। तो फिर उन्होंने आर से. रख दिया शायद रणदीप।. ओके। आपके बारे में सबसे ज्यादा जो लोगों. ने कमेंट किया वो ये था कि यार ये आदमी. मोस्ट अनप्रिडिक्टेबल एक्टर है। कुछ भी कर. सकता है। जो मैंने इंट्रो में भी कहा कि. आदमी कायदे जिंदगी नहीं जीता। और आप. किरदार जीने के लिए किसी हद तक चले जाते.
हो। हम तो ये खुद से जंग है, साबित करना. है, लेगसी छोड़नी है।. पता नहीं खुद से जंग है। खुद से भी जंग है. और. एक. आपकी एक फ्राइडे पे बहुत बड़ी हिट पिक्चर. लोग भूल जाते हैं और आपकी कोई कहीं काम. किया हुआ आपको जिंदगी भर आपके साथ रहता. है। लोगों के साथ रहता है। तो वहीं पे कुछ. था। मैं जब शुरू में एक्टर प्रोफेशनलली.
बनने की कोशिश कर रहा था। तब मैं एनएसजी. में नसीर भाई के साथ जाया करता और फिर. प्लेस में भी तो जो भी आसपास नसीर भाई ने. मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं कराया पर आसपास. के जो भी लोग थे वो बोलते थे वो देखते कि. गुड लुकिंग है तो क्या करेगा तो शायद वहां. से कहीं मेरे अंदर यह बात बैठ गई मेरी. मसून वेडिंग और मेरा पहला प्रोफेशनल प्ले. मंटो इस वक्त हाजिर हैं सेम दिन आया और.
जिन्होंने मसून वेडिंग देखी थी वही प्ले. देखने भी आए थे। किसी को समझ में नहीं आया. कि यह सेम एक्टर है। उसमें मैंने. दाढ़ी-वाढ़ी उगा ली थी और यह सब। तो फिर. मुझे थोड़ा सा उसमें वो लगने लगा कि शायद. मुझे. अपने जाट लुक्स के आगे जाने के लिए शायद. थोड़ा बहरूपिया बनना पड़ेगा। तो उस चक्कर. में मेरा वो सिस्टम शुरू हो गया। फिर. धीरे-धीरे आपको आपके इंस्पिरेशंस ये बनने.
लग गए। डेनियल डे लुइस, क्रिश्चियन बेल. वगैरह बहुत बढ़िया काम कर रहे थे। तो मुझे. लगा कि एक वह भी एक तरीका है। शुरू-शुर. में मैंने रामू जी के साथ डी करी विश्राम. सावंत के साथ। फिर उसी के साथ रिस्क करी।. तो एक इमेजिंग बन रही थी उस टाइप की। फिर. मेरे को लगा फिर मुझे बहुत गैंगस्टर रोल. आए। पुलिस वाले रोल आए। पर मैंने फिर. रोमांटिक रूप एक पिक्चर की दो-तीन रूबरू. और लव खिचड़ी जिसके अंदर एक कॉमेडी थी तो.
वो सब मैंने सोचा कि यार एक अलग-अलग काम. करते हैं और ऐसा काम करते हैं कि एक दूसरे. से मेल ना हो। वो कहीं ना कहीं मैंने अचीव. किया है क्योंकि एक्सेप्ट फॉर मे बी वंस. अपॉन अ टाइम इन मुंबई और वैसा ही कुछ. किरदार किक में था।. आप दोनों दो किरदार आपस में आप रख नहीं. सकते हो साथ में और ये. कोशिश कहीं इतनी हद तक चली गई कि आपकी कोई.
इमेज ही नहीं बन पा रही है। हम आप कि जैसे. बहुत लोगों की पैराडी करते हैं लोग। हां. हां एक तरह की फिल्में करते हैं लोग। नहीं. पैराडी भी करते हैं ना जैसे रेडियो वीडियो. पे सुनते हैं उसी टाइप के डायलॉग हो। तो. मेरा कोई नहीं आज तक मैंने नहीं सुना है।. वो कहीं एक जीत भी है और फिर एक ये भी अब. आने लगा है जब मैंने ये जाट पिक्चर करी और. एक लार्जर दन लाइफ हीरो एक स्क्रीन. प्रेजेंस वाली पिक्चर जिसमें इतनी मगजमारी.
नहीं है। देही को तकलीफ नहीं है। इमोशनली. इतना इनवॉल्वमेंट नहीं है। और वो पिक्चर. करने में वो भी मजा आया। उसके रिटर्न भी. ज्यादा होते हैं। चाहे वह आप लोगों कितने. ज्यादा लोगों तक पहुंचती है और आपको कितना. रोकड़ा मिलता है और वो सब वो एक अलग लेवल. का वो है। तो मैं सोच रहा हूं थोड़ा सा. इतना अपने आप को तोड़ना मोड़ना बंद करूं. पर मैं कहता हूं फिर से कुछ ना कुछ हो. जाएगा। मैं कोई रोल इसलिए नहीं लेता हूं. कि मैं अपने आप को कुछ अलग प्रूव करने की.
कोशिश करूंगा। मैं वो रोल जब आता है फिर. जब मैं उसके बारे में सोचने लगता हूं।. उसके बारे में टाइम लेता हूं। तो वह टाइम. के साथ-साथ धीरे-धीरे कुछ चीजें आप अपने. अंदर उस रोल अगर रियल लाइफ रोल है फॉर. एग्जांपल या फिक्शनल रोल भी है तो आप कुछ. देखते हैं कि आपके अंदर और उस किरदार के. अंदर क्या सिमिलरिटी है और क्या अलग है।. तो उसको धीरे धीरे धीरे तराशतेराशते वो. कुछ और बन जाता है। तो शादी के बाद खर्चा.
बढ़ गया था जो जाट कर ले।. शादी के बाद खर्चा खर्चा तो खैर मेरा. हमेशा से था। भाई जिस आदमी के पास घोड़े. होते हैं ना उसका खर्चा कभी नहीं रुकता।. चाहे घोड़े पे बैठो ना बैठो उसने तो उतना. ही खाना है। पर शादी के बाद थोड़ी. जिम्मेदारी और लगने लगी। लगने लगा कि एक. अपना अच्छा मैं अपनी वाइफ को अच्छा घर तो. सनी देओल से पंगा ले लिया। मैं शादी पे. जाऊंगा। आपने दामिनी देखी थी? दामिनी देखी.
थी। हां। तो आपको याद नहीं था जो डायलॉग. था चड्ढा वाला कौन सा कि चड्ढा समझाओ इसे. ऐसे खिलौने बाजार में बहुत बिकते हैं. लेकिन चलाने के लिए जो जिगर चाहिए वो. बाजार में नहीं मिलता ये 2ाई किलो का हाथ. है पड़ता है तो आदमी उठता नहीं उठ जाता है. नहीं उठ जाता है तो या दामिनी देखी थी. मैंने बिल्कुल तो आपको डर नहीं लगा कि 2ाई. किलो का हाथ सामने आ रहा है या लगा कि थॉर. से लड़ लिए थे तो सनी पाजी से भी लड़ ही. लेंगे नहीं सनी पाजी हमारे बचपन के एक वो. थे यार हम जाटों में तो धर्म पाजी और सनी.
पाजी का ही हम ज्यादा वो लुक अप टू करते. थे। एक तो वो लुक्स और वो पर्सनालिटी और. वो फिर सनी पाजी का जो गुस्सा था। हालांकि. उन्होंने रोमांटिक रोल भी बहुत किए हैं और. अच्छे किए हैं। अ तो नहीं एक्टर हैं वो और. हम भी एक्टर हैं। तो एक्टर एक्टर आके आपस. में जब मिलते हैं तो फिर वो भी स्क्रीन के. लिए 2ाई किलो का हाथ लेके घूमते हैं ना।. ऐसे थोड़ी लोगों को घुसंड मारते घूमते. हैं। तो इतना कुछ नहीं लगा। बट ऑल आई हैड.
टू डू वाज़ कि दैट आई हैव. टू स्टैंड अगेंस्ट अ परसोना जो कि इतने 40. साल से उन्होंने बनाई है।. बट और वो भी थोड़ा सीनियोरिटी भी है. ह्यूमिलिटी से भी और थोड़ा ख्याल रख के भी. बट व्हेन यू आर डूइंग अ रोल देन यू आर. डूइंग अ रोल। सनी पाजी ने तो ऑन एयर भी कह. दिया कि नॉर्थ वाले जानते हैं। हां। हां. अब साउथ वालों की बारी है। हालांकि साउथ. वाले भी उनको बहुत जानते हैं। ऐसे जो. डायरेक्टर है गोपी उसने उनकी पिक्चरें देख. के इंस्पायर होके ही ये बनाई है। उसमें जो.
उसे अच्छा लगता था जो जब वो बचपन में वो. सनी पाजी की पिक्चरें देखता था तो उसी के. इर्दगिर्द उन्होंने ये कैरेक्टर बनाया है. और बहुत अच्छा है। आई मीन इनस्ट्रक्ट. इनस्ट्रक्टेबल हीरो कम ही लोग पुल ऑफ कर. सकते हैं। तो मुझे लगा कि अगर रणदीप. हुड्डा के स्टाइल में हम सुने कि जब 2ाई. किलो का हाथ पड़ता है तो आदमी उठता नहीं. उठ जाता है। ये कैसा साउंड करेगा? डिपेंड करता है सीन कौन सा है और किसको. यही यही वाला सीन है। हां हां तो क्या. क्या करेंगे? बस खाली इतना ही बोलना है कि.
ये 2ाई किलो का हाथ जब पड़ता चड्डा जब ये. 2ाई किलो का हाथ पड़ता है ना तो आदमी उठता. नहीं उठ जाता है चड्डा ये हाइट ये 2ाई. किलो का हाथ जब पड़ता है ना तो आदमी उठता. नहीं उठ जाता है ऐसे कुछ बोलेंगे हां. जबरदस्त जबरदस्त राणा तुंगा हां मैंने. अर्जुन राणा तुंगा सुना था हां हमने भी. वही सुना था. श्रीलंका के कप्तान थे वर्ल्ड कप जिताया. था जी जी यह वाला वो भी खतरनाक थे।.
हालांकि क्रिकेट की पिच पर खतरनाक थे।. इंडिया में आके वर्ल्ड कप जीत के चले गए. थे। हां बहुत ही शातिर शातिर आदमी थे।. बहुत अच्छे कैप्टन थे। हां। ये राणा तुंगा. कौन है? ये राणा तुंगा भी है तो उसी देश. का और उसी एरिया का आई शुड से पर थोड़ा. फिटनेस में फर्क है।. थोड़ा आवाज में फर्क है। थोड़ा प्रेजेंस. में फर्क है। बाकी तो राणा तुंगा। इट्स अ. स्ट्रांग नेम राणा तुंगा। तो वो थोड़ा सा. आई थिंक द डायरेक्टर चोज़ दैट और अच्छा.
रहा। मैं तो दो-ती साल बाद जा रहा था एक. सेट पे जहां पे मैं. अपनी जो लाइनें मैंने नहीं लिखी या जिसका. डायरेक्ट मैं नहीं कर रहा हूं वो काम करने. जा रहा था क्योंकि दो साल तो मैं सावरकर. साहब की बायोपिक में ही लगा रहा। तो मैं. बड़ा नर्वस फील कर रहा था कि मैं कहा यार. और मैं हर प्रोजेक्ट से पहले फील करता हूं. और यह एक इनसिक्योरिटी है जो कि मुझे काफी. काम आती है। वो यह लगता है मुझे कि आज इस.
बारी लोग पकड़ लेंगे कि तेरे को आता नहीं. कुछ। तो उसके चक्कर में वो होता है पर मैं. वाकई में नर्वस था और उनका जो थोड़ा नॉन. रियलिस्टिक सेटअप रहता है और थोड़ा लार्जर. सेटअप रहता है और आप मतलब किसी से हम बैठ. के बात करेंगे और अगर वो पिक्चर होती तो. मैं वहां खड़ा होके बात करता तो उस टाइप. का जो सेटअप था उसमें मैं अनकंफर्टेबल भी. फील कर रहा था तो मैंने डायरेक्टर को बोला. मैंने कहा भाई देख ये सीन है ऐसेसे 2 साल. से मेरे को यह हो रहा है और अब मेरे को. समझ में नहीं आ रहा क्योंकि जब मैं यूजली.
रोल रोल करता हूं तो मैं उसको आगड़ी. पिछाड़ी सब पी के सेट पे जाता हूं और वहां. पे आपको एक्टिंग करने की जरूरत नहीं पड़ती. क्योंकि आप कहीं ना. कहीं उसमें ढल चुके हैं उस बोलने के अंदाज. में उस थॉट प्रोसेस में और यहां पे तो. जाते ही सबसे डिफिकल्ट सीन पहले ही दिन कर. रहे हैं तो वो बोला मैं कहा क्या करेंगे. यार बोलते ठीक है सर शॉट बाय शॉट चलते हैं. और उसको करते हैं तो शॉट बाय शॉट चलते. रहे कैरेक्टर बनता रहा और वह था तो मेरे.
लिए काफी जिस तरह की मैं पिक्चरें हाल ही. में करता आया हूं। उससे काफी अलग था। तो. हरियाणा वालों ने कहा नहीं कि भाई तू तो. जाट है। जाट होकर भी जाट ना बन पाया। जाट. हो जाट मैं जाट ही हूं। मेरे को बनने की. जरूरत नहीं है। पिक्चर में तो ना बन पाए. ना। पिक्चर में जब मेरे पास पिक्चर आई तो. जाट नाम की पिक्चर है। मैंने कहा अच्छा. मैं तो बहुत राजी हो गया। कहा भाई ये तो. ईद करने आया क्योंकि मैंने जाट कैरेक्टर. किए नहीं है। एक तो मैंने लव खिचड़ी में. किया था एक जाट कैरेक्टर था। पर उसमें. आर्यन भी नहीं बोली। लाल रंग में मैंने.
किया था जो कि मेरी फेवरेट पिक्चर है। दैट. वाज़ वो मेरा एक टिप ऑफ टू हरियाणा था टू. माय ग्रोइंग अपीयर्स। तो फिर जब ये आई तो. मैं बहुत राजी हो गया। मैंने कहा यार जाट. पिक्चर में कहा अब आएगा मजा। फिर उन्होंने. कहानी सुनाते सुनाते बोला कि आप जाट नहीं. हो। अब पुराना तुम गाओ। तो इस बात में मैं. तो सबसे बड़ा मेरे लिए हर्डल यही था। हम. कि यार पिक्चर का नाम जट होता कुछ और होता. तो मेरे को कोई प्रॉब्लम नहीं थी। पर. पिक्चर का नाम जाट और मैं जाट नहीं पिक्चर.
में तो मेरे को बड़ी तकलीफ हुई हम तो फिर. मैं काफी उसके बारे में सोचा फिर मैंने. अपने पेरेंट्स से भी बात की फादर से बोला. क्या फर्क पड़ता है जाट तो तू है ही फिर. अपने स्कूल ग्रुप में मैंने डाला उनसे. वीडियो कॉल पे बात की तो बोला जाट और जाट. नहीं है तू फिर यार फिर ऐसे कैसे बनेगी. फिर जाट कौन है सनी देओल बोला तेरे तो ऊपर. एक का जाट है बोला के फर्क पड़े है तो वो. दैट वाज़ अ थिंग एंड एंड दैट देन इट बिकम.
इजी वंस यू गेट ओवर द मेंटल थिंग ना देन. इट्स एन ईजी यू आर डूइंग अ रोल टाइटल चाहे. कुछ भी हो तो उसके बाद तो बस. फिर कैमरा ऑन होने के बाद अलग कैमरा ऑफ. होने के बाद अलग जैसे सनी पाजी हैं हां ये. ये भी एक सवाल मेरे मन में है कि एक आदमी. जो रियल लाइफ में इतना शांत है सनी देओल. की आप बात कर रहे हो शांत है बॉडी हमंबली. बात करते हैं सॉफ्टली बात करते हैं वो. स्क्रीन पर आकर इतना फटके से आता है ये. क्या होता है? पता नहीं मैं तो यही बोलता.
हूं पाजी आपका कैमरा ऑन होते ही मत आ जाती. है आप. में एंड ही स्टैंड्स डिफरेंटली हिस बॉडी. लैंग्वेज इज डिफरेंट हिज आईज आर डिफरेंट. ही इज जस्ट एंड दैट्स अ समथिंग व्हिच. ऑब्वियसली वो भी काफी सालों से वो. प्रैक्टिस मैंने सुना था डर पिक्चर में. उन्होंने जेब जींस फाड़ दी थी कोई रोल हां. कुछ आगे पीछे हुआ गुस्से में ऐसे. करते-करते फाड़ दी हां हमने भी सुना था पर. वो मेरे ख्याल से आर्टिकुलेट नहीं कर पाए. अपनी बात वर्बली तो वो गुस्से में ही वो.
जींस फट गई होंगी एंड ही आपको डर नहीं लगा. राणा तंगा थे वो जाट थे नहीं पता लगे 100. 50 ग्राम इधर उधर आता नहीं अरे मंजे हुए. कलाकार हैं उन्होंने बहुत किया हुआ है. इनफैक्ट इस टाइप का जो केबल वेबल एक्शन था. हालांकि एक्सट्रैक्शन में मैंने काफी. एक्शन किया था. और हिंदुस्तानी किसी एक्टर ने ऐसा रोल. नहीं किया है वेस्ट में हमारी इमेज यूजली. 71 क्लर्क टैक्सी वाला आईटी आईटी हेड या.
वेटर वटर यही रोल्स इन हिंदुस्तानियों को. मिलते थे वहां पे क्योंकि हमारी एक नॉन. वायलेंट इमेज है बिकॉज़ ऑफ अ रीज़ तो वो तो. जब मुझे दूसरा भी रोल उन्होंने ऑफर किया. था और ये इतना रिटन रोल नहीं था। हम पर. मैंने कहा कि यार अगर इफ आई एम गोइंग टू. रिप्रेजेंट माय कंट्री ये रोल मुझे करना. है क्योंकि ये मैं कर सकता हूं और वो भी. एक जाट ने जाके एक सैम्स के साथ दो-दो हाथ.
किए थे बाकी किसी के बस की भी नहीं था ये. भी बात बता. तो वही मैंने कहा ये थर से लड़ के सनी. पाजी से लड़ने का जज्बा आ गया था कि अब तो. थर से लड़ लिए हॉलीवुड में। हां वो उसका. भी हथौड़ा ही है।. उसके बाद तो असली वाला है। हां वो तो बहुत. लंबा चौड़ा ऑस्ट्रेलियन बड़े-बड़े हाथ-वात. ये वो तो अलग ही लेवल का फिजिकली फिजिकिटी. है उसकी और उसका तो एक्चुअली मुझे पढ़ा भी. था एक दो बारी क्योंकि हम एक जो वन शॉट.
एक्शन जो किया था उसके अंदर तो उसमें एक. आधी टेक में एक तो मेरे सर पे मारता है. साइड से जब मैं उसको शटर पे लगा के घुसे. मारता हूं तो मेरे को पुश करके सर पे. मारता है एक तो वहां कनेक्ट किया था तो. थोड़ा सा मैंने कहा हां थोड़ा कड़ा रख. गर्दन और एक था उसके उसके बाद ही जब मैं. उसको चकू-वकू आ करके जबता हूं तो उसका. मुझे ब्लॉक करना था पंच वो नीचे से अपपर. कट मारता है मैं ब्लॉक करता हूं और उसके. मारता हूं तो पसीने आ गए थे पसीना में.
पसीना थे हम अहमदाबाद में शूटिंग कर रहे. थे तो मैंने वो ब्लॉक किया वो स्लिप करके. सीधा मेरे नाक पे लगा ऐसे तो मैं एक बार. तो ऐसे हुआ फिर मैंने कंटिन्यू करने की. कोशिश की पर वही रुक गया बोला नो नो स्टॉप. सॉरी ब्रो सॉरी सॉरी सॉरी मैं कोई बात. नहीं ब्रदर चल आगे सीन चेपते हैं और थोड़ा. जोश आ गया उसके बाद थोड़े नींद सी खुल गई. तो वो एक अलग वो उसमें क्या वो लोग क्या. करते हैं वो लोग जैसे मैं.
चार हफ्ते पहले शायद अहमदाबाद में क्रिस. भी आया हुआ था हम लोग चार बार उसकी दिन. में चार बार रिहर्सल करते थे फिर गन कैसे. पकड़नी है नाइफ कैसे पकड़ना है पंच कैसे. लेना है ताकि रियलिस्टिक लगे तो वो बहुत. ही एक डांस कोरियोग्राफी की तरह वो करते. थे क्योंकि क्योंकि उसमें कट्स नहीं थे।. वो करके बहुत मजा आया. और क्रिस हालांकि मुझसे काफी लंबा चौड़ा. है।. पर आई मेड श्योर दैट आई हैव दैट फेरोसिटी.
एंड एंड एंड दैट इमोशनल चार्ज टू इट जिससे. कि वो टक्कर का लगे। तो जैसा आपने कहा कि. इंडिया से इससे पहले जितने लोगों ने काम. किया था वो छोटे-छोटे रोल थे। छोटे अगर. मुझे बड़े इरफान साहब का अगर वो हटा दूं. इरफान साहब के भी बड़े रोल थे। इरफान साहब. का बड़ा रोल मुझे याद आता है। बाकी कई. सारे एक्टर्स जो पाए में उनका बहुत बड़ा. जो पहले थॉट में आ रहे हैं उनके किरदार. छोटे-छोटे हैं। बाकी इरफान साहब का मुझे. बड़े किरदार याद आ रहे हैं। कई सारे हम. इंडिया में आपको वहां वो रोल करने के बाद.
उतना एप्रिसिएशन मिला बॉलीवुड से या उस. हिसाब से काम प्रोजेक्ट्स बड़े बॉलीवुड से. तो कोई एप्रिसिएशन नहीं मिला। ना ही किसी. का फोन आया ना ही कुछ और। पर लोगों से. लोगों ने जिन्होंने एक्सट्रैक्शन देखी वो. सब फैन बॉय मोमेंट्स होते हैं मेरे कई. बारी और साउथ में जब मैं अभी तेलुगु में. इनके साथ काम किया तो काफी सारे एक्शन. डायरेक्टर्स ने देखी हुई है वो और वो उसी. को एमुलेट करना चाहते हैं। मुझसे पूछते. हैं कैसे किया? कैसे किया और आप ये वो सो.
वो एक सेंस ऑफ रिस्पेक्ट इन द एक्शन जो. इंडिया में है उसमें है। पर एज सच ना किसी. ने उसके बारे में बातचीत की। हालांकि बहुत. छोटे रोल्स के लिए बहुत बड़ी-बड़ी कैंपेन. हो जाती हैं और सब कांग्रेचुलेशन आपका. पीआर कमजोर है। आप ये मान पीआर भी कमजोर. है और अ एक पता नहीं उनको थ्रेट लगता है. या क्या लगता है। मेरे को कभी फ्रेटरनिटी.
से ज्यादा अप्रिसिएशन किसी भी रोल के लिए. नहीं आई। और मेरे को वो चाहिए भी नहीं एक. पॉइंट के बाद। आप अपना काम कर रहे हो। मैं. खुद को बीट करना चाह रहा हूं। अगर पीठ. थपथपाने की आप. एक्सपेक्टेशन अ औरों से. करोगे तो आप कहीं ना कहीं वो वांटिंग में. रह जाओगे। तो अपनी पीठ हम खुद थपथपा लेते. हैं भाई। हमारे मां-बाप यार दोस्त हैं वो. कर लेते हैं और आगे बढ़ते हैं। मुझे अपने. आपको पिछले. टाइम से जो मेरी एप्लीकेशन रही है एक.
कलाकार के तौर पे अपने रोल के लिए मुझे. उससे आगे जाना है। मुझे किसी और से कमट. नहीं करना। बट फिर भी अगर सराहना होती है. तो उससे थोड़ी इंस्पिरेशन मिलती है। अच्छा. लगता है कि कुछ अच्छा किया क्योंकि एक काम. ही ऐसा है और यही धंधा होता है कि आपको एक. काम देख के चार लोग और काम देते हैं। तो. कुछ तो फिगर आउट आपने भी किया होगा ना कि. क्यों लोग आपके पास नहीं आए। पता नहीं. क्यों नहीं आए। अ क्योंकि देखी सबने होगी।. Netflix पे है। हां देखी सबने। अभी भी कई. बार मैं देखता हूं तो टॉप पिक्स में आती. रहती है एक्सट्रैक्शन। पता नहीं क्यों.
नहीं आए और वो नहीं आए तो उसमें मेरे को. इतना गम भी नहीं है। हमने तो अपने आप अपना. जो काम करके ठान के हम जो कर रहे हैं उसी. से करते रहे। पर अगर आपकी फ्रेटरनिटी से. आपको वो मिलती है। पर्सनली सब लोग जब. मिलते हैं तो अच्छे से मिलते हैं। पर. पब्लिक में मेरे को नहीं हुआ। ये हाईवे. में भी हुआ था। मुझे बहुत लोगों के फोन. आए। पर किसी ने बात नहीं की उसके उस रोल. के बारे में पब्लिकली। व्हिच इज फाइन। ना. ही मुझे कोई बड़ी बड़ा कोई एक्टिंग का कुछ.
अवार्ड मिला है ना यह मिला है अगर मैं उसी. के अगर वो मेरा पैमाना है जिससे कि मैं. अपने आप को और प्रोत्साहित करके काम करूं. तो वो पैमाना तो खाली है तो हमने तो उसके. बारे में सोचना ही छोड़ दिया। अगर मैं. हाईवे की बात करूं जैसे अभी मैं कुछ दिन. पहले हाईवे का एक पुराना प्रमोशन देख रहा. था। हम अब आपका और आलिया दोनों किरदार. बहुत जबरदस्त था। सबको पसंद आया। हाईवे आई. थिंक इम्तियाज अली की वो फिल्म है जो सबके. ज़हन में है और इंडिया में इम्तियाज अली के. लव्स बहुत सारे हैं। बहुत है। लेकिन उसके. जब मैं प्रमोशन देख रहा था तो लोरी थी।.
लोरी पे इम्तियाज बैठे थे। आलिया बैठी थी।. नीचे जमीन पर एक रणवीर कपूर बैठे थे। आज. से 10-12 साल पुराना वो प्रमोशन है और मैं. देख रहा था और मैंने पूरा प्रमोशन देखा. बैठ के। फिर जब खत्म हुआ तो मुझे रियलाइज. हुआ कि यार हीरो तो इसमें रणदीप था। वो. प्रमोशन से भी उतना मतलब आपको प्रमोशन में. उतना नहीं रखा गया था। ये बात पता नहीं. क्यों हुई थी। इस बात का मुझे भी बहुत. बुरा लगा था क्योंकि उस वक्त अगर मेरे को. थोड़ा.
और सहारा मिलता तो शायद मेरा जीवन और. थोड़ा आसान हो जाता। मेरा करियर थोड़ा और. आसान हो जाता। वो मैंने भी देखा था और. मुझे समझ ही नहीं आया। मैं कहा भाई रणबीर. कपूर का इस पिक्चर से क्या लेना देना है।. मतलब उनकी शादी भी नहीं हुई थी।. शायद शायद वहीं से शादी की शुरुआत हुई हो. तो मैं उनको मुबारकबाद देता हूं। और इससे. अगर उनका जीवन आपस में मिला तो मैं उससे. बहुत खुश हूं। बट फिर भी मतलब आप उसके. किरदार में थे। मुख्य किरदार आपका था।.
आलिया का था। वो ट्रॉली भी इस्तेमाल हो गई. थी। मैं तो ये भी हैरान था। हाईवे पे बैठ. के प्रमोशन हुआ था। जी जी जी तो शायद. पंगावंगा हुआ था या नहीं ऐसा कोई पंगा. नहीं हुआ। शायद उन्हें लगा था कि वही नहीं. बाकी प्रमोशन में भी मेरा कुछ वो नहीं था।. वो तो बाद में लास्ट के एकद दिन में वो जब. शायद ट्रैक्शन नहीं पकड़ रही थी तो हमें. लेके गए मुझे भी लेके गए थे एक दो जगह पर. शायद उनकी स्ट्रेटजी शुरू से यही थी कि वो. आलिया के अराउंड उसको वो करेंगे और वो. पिक्चर भी थोड़ी सी एक.
फीमेल एक्सप्लइटेशन पे थी और वो सब चीजें. थी तो शायद इसलिए उसको आगे रखा था। पर. उसके बाद जब पिक्चर लोगों तक पहुंची तो. शायद उन्होंने भी रियलाइज किया होगा कि. महावीर भाटी अगर ना है तो नहीं है उस. पिक्चर में या वैसा अगर मैं रोल नहीं करता. तो शायद वो पिक्चर वैसे पकड़ती नहीं लोग. फिर इम्तियाज अली साथ काम किया दोबारा फिर. काम किया किया ना लव आजकल टू में टू में.
हां हां किया था उसमें रोल मैंने. एक पर वही है चलता रहता है यार अभी क्या. करें उसमें भी मैं प्रमोशन में नहीं था. इम्तियाज से पूछो कि क्या चक्कर ज्यादा. पैसे तो नहीं मांग लेते हो तो कहते भाई. ठीक है काम करवा लेते अरे पैसे पैसे. ज्यादा मांगने वालों को ज्यादा प्रमोशन. में लेके जाया जाता है ऐसा नहीं है पर वो. पता नहीं उनकी क्या स्ट्रेटजी थी और ऐसा. मुझे बहुत पिक्चरों में मेरे साथ हुआ है. वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई में भी मैं नहीं. था तो पता नहीं वो क्या मेरा वो संजोग बैठ.
नहीं पा रहा है पर क्या है आप अगर आप. अच्छा काम करते रहे ना तो आपको इग्नोर कर. ही नहीं सकते आप चलते रहेंगे, बढ़ते. रहेंगे और लोगों को और यह सब मेरे लिए. बहुत प्राचीन इतिहास हो चुका है। अभी आप. देखिए हर जगह जाट में हम सनी पाजी के साथ. ही हैं। कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो वो शायद. साउथ वालों को मेरी वैल्यू ज्यादा लगी।. मुझे ऐसा लगा।. मतलब हां पड़ोसी को हमेशा आदमी अच्छा लगता.
है। घर की मुर्गी दाल बराबर होती है। घर. की मुर्गी दाल बराबर तो ये बहुत सारी ऐसी. चीजें हुई है यार। पर मैं क्या है ना इन. पे बट एक शिकायत तो है आपके अंदर कई बार. आपको सुनता हूं मेरे को एक शिकायत दिखती. है कि एक टीस है जिसको आप रह रहकर. एक्सप्रेस कर पूरा नहीं कहते हो बट आप. इशारों में कह देते हो कि देखो ये शिकायत. है मेरे ज़हन में पर अभी यार इन पे क्या. जरूरत है अभी आगे बढ़ो और जिंदगी है आगे. टीस रह जाती है वो फील करता है आदमी पर आप. उसको लेके नहीं बैठ सकते ना यार सही बात. है आपको आगे बढ़ना है अगर मैं उसको लेके.
बैठा रहूंगा तो एक एक बिटरनेस आ जाती है. क्योंकि 25 साल से मैं काम कर रहा हूं।. पता नहीं किस-किस तरह का मैंने काम कर. दिया है। क्या-क्या अपने आप को किया है।. क्या-क्या रोल्स के लिए किया है। तो वह. कहीं ना कहीं आपको वो अपने अपने लिए ही और. अपने अंदर सीमित करके अपने अंदर उसको रख. के कि चल भाई तुझे करना है। तेरी कोई पीठ. ना थपथपाए तो कोई बात नहीं यार। आगे बढ़।. मेरे से बड़ा मुझे मैं मैं क्रिटिक्स भी.
जब मैं पढ़ता हूं कभी-कभी ये वो तो वो सब. लोग मुझे पता है मैंने क्या ठीक किया. मैंने क्या गलत किया अगली बारी मैं उसको. इंप्रूव करूंगा उसी में चक्कर रहता है और. ये थोड़ा सा ये है कि फ्रेटरनिटी से अगर. आपको ज्यादा एप्रिसिएशन मिले तो आप और भी. अच्छा करते हो क्या डिसपॉइंटमेंट होती है. किसी कैंप का हिस्सा नहीं हूं जैसे. बॉलीवुड में बहुत सारे कैंप्स हैं भट्ट. कैंप है अरे मैं जब अपने कैंप का हिस्सा. नहीं हूं तो मैं किसी और के कैंप का. हिस्सा क्यों बनूंगा मैंने सबके साथ काम. कर रखा है। मैंने करण जौहर के साथ काम कर.
रखा है। मैंने साजिद भाई के साथ काम कर. रखा है। बर्ड्स के साथ तो मैंने तीन. पिक्चरें कर रखी हैं। साजिद भाई. प्रोड्यूसर थे हाईवे के किक के। करण जौहर. के साथ मैंने उंगली की थी। बॉम्बे टॉकीज. की थी। अ वाईआरएफ के साथ मैंने सुल्तान की. थी। तो मैंने सबके साथ काम किया हुआ है।. तो इसमें कैंप कैंप वाला सिस्टम तो ही. बेकार है क्योंकि आप. बेस्ट सूटेबल एक्टर की बजाय आप अपने. जानकार को ले लेते हो। तो अगर बेस्ट. सूटेबल एक्टर हर पिक्चर में अगर पॉसिबल हो.
जाए तो वो पिक्चर की भी अपलिफ्टमेंट होती. है और पूरा माहौल की अपलिफ्टमेंट होती है।. तो कैंपवैंप तो मैं सभी कैंप का हिस्सा. हूं। मैं किसी कैंप का हिस्सा नहीं हूं।. मैं तो अपने इमेज का भी हिस्सा नहीं हूं।. एक टाइम था जब मैं डी और रिस्क की थी। हाथ. में बंदूक, आंख में जलन और जलन नहीं आंख. में रोश तो वो लेके आया। वो बहुत अच्छा. मेरा इमेज था और मेरे को सूट भी बहुत करता. था। पर खुद ही कीड़ा था कि नहीं मैं इधर. जाऊंगा उधर जाऊंगा। तो मैं अपना ही एक वो. इमेज जो और अपने ही उसमें नहीं अपना ही.
नहीं हो सका तो मैं कैंपों का क्या होगा. यार? मैंने विनीत का पॉडकास्ट किया था।. विनीत का एक बड़ा फेमस कोर्ट वायरल हुआ था. कि आलिया छोटी थी तब भी मैं स्ट्रगल कर. रहा था। हम वो टॉप के हीरोइन बनी तब भी. मैं स्ट्रगल कर रहा हूं। 22 साल से मैं. अपना घर नहीं ले पाया हूं। सोना तपता है. लेकिन कितना तपेगा कोई देखो तो मुझ में भी. टैलेंट है। और वो आक्रोश बड़ा दिल से. उन्होंने कहा वायरल हुआ। लोगों ने काफी. अप्रिसिएशन किया। बट ऐसे बहुत सारे. एक्टर्स हैं जिनमें जनता को दिखता है कि. बड़ा टैलेंट है यार। हम उसको देखना चाहते. हैं। बट वैसा फटने वाला किरदार उसे नहीं.
मिलता है। मिलता भी है तो उसका एप्रिसिएशन. उतना नहीं मिलता। मुझे मुझे बहुत ऐसे. किरदार मिले हैं। मैं मेरी स्ट्रगल कभी ये. रही ही नहीं। मेरी स्ट्रगल मेरी खुद से. है। मेरी स्ट्रगल मेरे को रोल नहीं मिल. रहे या मेरे पास मैं तो घोड़े रखता हूं. यार आज से नहीं कितने 20 साल से रखे हुए. हैं। और मेरे को वो सब स्ट्रगल नहीं है।. मेरी स्ट्रगल खुद से हुई है। मैंने जैसे. अगर आप देखें कि 25 साल के मेरे करियर में. मैं 11 12 साल तो एक दिन भी सेट पे नहीं.
गया हूं। हम और वो आउट ऑफ चॉइस गया हूं।. ऐसा नहीं कि मेरे पास काम नहीं था।. तो जैसे शुरू में मैं जब आया बॉम्बे आया. एक्चुअली मेरे साथ बड़ी एक अजीब सी बात. हुई वो भी एक हिस्सा है मेरा ये सब जो. मैंने एक रास्ता चुना है अलग-अलग रोल. मोड़तोड़ के करने का मसून वेडिंग पिक्चर. रिलीज हुई थी और वो लियोनो दोरो अवार्ड. जीती थी वेनिस ने वो मेरी पहली पिक्चर थी.
वहां पे सब सेलिब्रेशन में नाचवाच रहे थे. तो जैसे आप नाचतेवाचते हैं फिर साइड में. आके थक के बैठ बैठ जाते हैं। एक आधा शिप. विप लेने लग जाते हैं। तो वैसे ही एक. अमेरिकन प्रोड्यूसर था जो मुझे बाद में भी. मिला। दीपा मेहता की मैंने वो की. थी बीबा बॉयज। तो मुझे वो टोरंटो में भी. मिला था टोरंटो फिल्म फेस्टिवल में। तो. मैंने उसको बताई थी ये बात। तो वो आके. मेरे साथ बैठ गया। मगर और भाई क्या ये वो. बातें वाते तो मुझे बड़ा सोच के बोला कि. यू वर द ओनली वन हु वास नॉट एक्टिंग इन द.
मूवी। मेरी फट के हाथ में आ गई यार। मैंने. कहा सच्ची में मैं ही मैं ही हूं। उस वक्त. मुझे वो कॉम्प्लीमेंट नहीं लगा। उस वक्त. मुझे लगा यार एक्टिंग नहीं आती। तो मैंने. वो बात किसी को नहीं. बताई। बारिश में रिपटा और पुलिस से पिटा।. अगर चुपचाप निकल ही ले तो वो बेटर है। तो. मैंने वो किसी को बात नहीं बताई। मेरे दिल. में रह गई। तो जब मसून वेडिंग के बाद मैं. बॉम्बे आया था। उसके बाद नसीर साहब के साथ.
मैं उनके पीछे ही पड़ गया कि भैया मुझे तो. थिएटर करना है और मैं एक सीरियस एक्टिंग. कमर्शियल सिनेमा में लेके आना चाहता हूं।. तो उन्होंने बोला वो सब नहीं होगा। हम भी. इतने साल से ट्राई कर रहे हैं। वो एक अलग. सिनेमा है। तो मैंने कहा नहीं नहीं मैं. करूंगा। आप मैं नहीं हूं। इस बड़े जोश में. किया था मैंने।. तो वो बात मेरे जेहन में रह गई. के तो उसी की मैं फिर प्रैक्टिस करने लगा.
उसी को मैं फॉलो करने लगा और बात किस लिए. शुरू हुई थी यू वर द ओनली वन हां वो तो. एक्टिंग ही नहीं कर रहा पर बात कुछ दूसरी. कर रहा था मैं याद नहीं अभी तो वहां से. मेरा ये सिलसिला शुरू हुआ एप्रिसिएशन नहीं. मिलता किरदार नहीं मिलता विनीत की बात हम. कर रहे थे हां तो वो मेरे साथ कभी. प्रॉब्लम नहीं रही थी फिर मैं. थिएटर करने लगा तो वहां पे एक पिक्चर में. एक एक करके पिक्चर बना रहे थे रामगोपाल. वर्मा। हम उससे पहले क्या होता था? ईटीसी. चैनल आता था एक। उसमें मैं बैठ के देखता.
था और मैं उसमें प्रोमोस ये सब आते थे। तो. मेरे को फिट ही नहीं होता था मैं किसी चीज. में। मैंने कहा मैं करूंगा क्या यहां? फिर. मैंने कंपनी का ट्रेलर देखा था। मैंने. सोचा था ये आदमी है जिसके साथ काम मैं कर. सकता हूं। ये ये पिक्चर है जिसमें मैं. अच्छा बैठ सकता हूं।. तो प्ले जब कर रहे थे तो वहां पर उनका कोई. आदमी आया। उसने. मुझे बुलाया और बोला रामू जी मिलना चाहते. हैं आपसे। डी हां डी नहीं। अरे भाई डी. बहुत बाद में हुई। तो अब तक छप्पन करके एक.
पिक्चर थी जिसमें वो यंग यंग ऑफिसर का रोल. था जो उनके साथ था। तो जब उन्होंने मेरे. को बताई वो शिमित अमीना आया था। तो मैं. बोला यार मैं तो नाना पाटेकर का रोल करने. आया हूं यहां पे। मैं यह रोल करने नहीं. आया हूं। मैं नहीं करूंगा। बोला रामू जी. से मिल तो लो। तो रामू जी से मैं मिला. जाके आराम से बैठा। ये वो मैं कहा हां भाई. तो वो बोले आई लव योर एटीट्यूड लव दिस टेक. ऑफ योर शर्ट मैंने शर्ट शूट उतारी बॉडी. अपनी जाटों वाली वैसे बोला वेरी गुड तो. बोला वी विल डू अ मूवी कॉल्ड.
एक उछा उसमें भी एक मजाक हुआ मैं जाके. बैठा फिर उस वक्त मेरी जो गर्लफ्रेंड होती. थी मैंने उसको बताया बाद में कि भाई ऐसेसे. था बोलता है ऐसे क्या होगा यू सो मच सो मच. एटीट्यूड हंबल ह्यूमिलिटी नहीं है तेरे. में ये नहीं है वो नहीं है वो नहीं है तो. अगले दिन रामू ने मुझे फिर बुलाया था मैं. फिर गया और मैं जाके सर यह मेरी फोटो हैं. यह वो है। तो मेरे को देख रहा है थोड़ी. देर फोटो देख रहा है। बोलता है आई लाइक यू. बेटर. यस्टरडे। मैं एकदम से समझ गया मैं फिर ऐसे. हां बताओ दैट इज रामगोपाल वर्मा। हां तो.
फिर एक पिक्चर बना रहे थे वो एक जिसमें. मेरे को विलेन में कास्ट किया था उन्होंने. और वो कहानी थी एक एक सुसाइड बॉम्बर या. टेररिस्ट बॉम्बे आता है और वो बात फैल. जाती है और पूरा बॉम्बे खाली हो रहा है।. तो ट्रैफिक जैम ये वो क्या एक सिचुएशन हुई. होगी और उसमें आधी से ज्यादा इंडस्ट्री सब. अलग रोल्स में थी पॉजिटिव रोल्स में और. मैं अकेला था तो उन्होंने कहा था कि मुझे. इन सब बड़े दिग्गजों के स्टार्स के सामने.
एक ऐसा आदमी चाहिए जो कि इनकी टक्कर का. लगे तो वो पिक्चर फिर बनी नहीं वो बनी. नहीं तो मैं मन को बोला जाके एक दिन कि. मैं कहा मैं और काम देखता हूं तो बोले. नहीं नहीं कोई और काम मत कर मैं तेरे को. ल्च करूंगा। तो मैंने कहा घर कैसे चलेगा? तो बोले कितना खर्चा होता है महीने का? तो. मैंने कैलकुलेट किया जल्दी-जल्दी जितनी. मेरे में अकल थी वो बढ़ा चढ़ा के बोला. ₹35,000 महीना तो मुझे ₹35,000 तनख्वाह पे.
रखा उन्होंने 3 साल कि और कोई काम मत कर।. एडी से पहले डी से पहले हां कोई और काम मत. कर। तो मेरी स्ट्रगल वो नहीं थी जो बाकी. एक्टरों की होती है। मेरी स्ट्रगल थी कि. मेरे को कहां जाना है, कितना आगे जाना. है। फिर वो हर पिक्चर में मुझे कास्ट करते. बहुत पिक्चरों में मुझे उन्होंने कास्ट. किया। मैं बोलता नहीं क्योंकि बाकी. एक्टरों ने वो पिक्चर की है। वो पिक्चर. कास्ट होता मैं मैं जोश में आता ये करता. फिर कोई और कास्ट हो जाता इंडस्ट्री के ही.
लोगों में से मतलब. तो जैसे एक्स गर्लफ्रेंड ने कहा कि. ह्यूमिलिटी होना जरूरी है। बहुत सारे लोग. कहते हैं कि स्टार बनना आसान है। उसके बाद. जिस जो हंबल होता है, जो ग्राउंडेड होता. है, ह्यूमिलिटी होती है, वही सर्वाइव करता. है। अकड़ वाले गायब हो जाते हैं। हम नहीं. हमने अकड़ भी रखी वैसी बात नहीं है। अकड़. में भी बहुत रहे। पर ह्यूमिलिटी आप जब. पेड़ में फल आता है तो वो झुक जाता है। तो. वह जब जैसेजैसे होने लगा तो ह्यूमिलिटी भी. अपने आप आने लगी। नहीं तो अपने आप को मालम.
बैंडो ही समझते थे हम भी। तो कभी हुआ अकड़. में कोई पीछे निकल गई। हां बहुत हुआ ऐसे।. कोई बड़ी फिल्म. अ बड़ी फिल्मों में मैंने रंग दे बसंती. हां। वो अगर मैं करता तो शायद मैं एक अलग. क्लिक में आ जाता। कौन सा रोल मिला था? मुझे भगत सिंह का रोल मिला था। जिसके अंदर. मेरी ऑडिशन हुई बाकायदा आमिर को ऑडिशन. अच्छी लगी। अपना भाई क्या नाम है यह. डायरेक्टर वो आते थे मेरे. पास दारू पी के गाड़ी चला के पिक्चर कर ले.
कर ले और चलातेचलाते एकदम से ऐसे मैंने. कहा यार स्टीयरिंग पकड़ ले तो वो पिक्चर. मैं करना चाहता था। मुझे रोल भी अच्छा लगा. था। तो उस वक्त मैं अपने दो ही मेरे. जानकार थे जो इंडस्ट्री में थे। एक तो. मेरी गर्लफ्रेंड होती थी। एक रामू जी होते. थे। गर्लफ्रेंड ने कुछ इंटरेस्ट ही नहीं. दिखाया। बोलती है मेरे को तो पता ही नहीं. है। और वो बोलती है छोटा रोल मत करना।. मैंने कहा अच्छा रामू जी ने बोला यार तू. मैं तेरे को डी में ल्च कर रहा हूं। तू. आमिर खान के पीछे पोस्टर में खड़ा.
होगा। मेरी जाट जाट अकड़ निकल आई। मैंने. कहा बिल्कुल नहीं खड़ा. होगा। तो वो हुई। फिर रॉकन भी मैंने ऐसे. ही छोड़ी थी। तो दोनों पिक्चरें वो एक. क्या है? वो. एक मैंने बहुत सारी पिक्चरें अपने अलग. प्रोड्यूसर्स अलग उसके साथ की हैं। बहुत. मतलब वो इंडस्ट्री के जो घुलने मिलने वाले. लोग होते हैं उनसे थोड़ा अलग काम किया है।. तो शायद इसलिए भी मेरी वो ग्रोथ में वो. हुआ था क्योंकि मैं सोच रहा था मैं ही. बहुत हूं। पहले तो हां और क्या कैमरे के.
आगे खड़े हो गए। अपने आप भीड़ जड़ी भीड़. खड़ी हो जाएगी। फिर बाद में बहुत. धीरे-धीरे काफी लेट समझ में आया कि नहीं. भाई भीड़ जोड़नी पड़ती है चाहे वो इलेक्शन. की रैली हो या वो अब आपके प्रमोशन की और. आपके फिल्मों में लोगों को लाने की हो. उसमें भीड़ जोड़नी पड़ती है। बहुत कुछ. करना पड़ता है। जो कि मुझे कभी आईडिया ही. नहीं था। मैं तो एक अलग ही उसमें चल रहा. था कि कला ही सब कुछ है। पर कला सब कुछ. नहीं होती है। कला को पैकेज करना, कला को. प्रेजेंट करना, कला को एक पेडेस्टल देना,
पेडेस्टल पे रखना फिर लोगों को अच्छा लगता. है। आप आर्ट कर रहे हो कहीं पे आप चाहे. बहुत ही अच्छे आप बनाते हो, क्ले का कुछ. बनाते हो। वो एक कोई आदमी पकड़ के आपका जब. जहांगीर आर्ट गैलरी में लगाएगा ना तब आपकी. वैल्यू शुरू होगी। आप वैसे तो आर्टिस्ट. वैसे भी हैं। तो वो कहीं मेरे से मिस होता. रहा क्योंकि मैं रोल पहले पकड़ता था और. डायरेक्टर मैंने 40 टाइटल्स किए हैं। 40. 45 उसमें से 25 तो फर्स्ट टाइम डायरेक्टर. के साथ किए हैं। ये मेरा मार्टिन कोसेजी.
है। बिकॉज़ दे मार्टिन कोसेजी रॉबर्ट डिनर. कॉम्बिनेशन और फिर मार्टिनस कोसेस लियाडो. डिकैपियो कॉम्बिनेशन वो मुझे लगा कि ऐसे. करके आगे क्योंकि बहुत सुना था सनी पाजी. के साथ भी तो राजकुमार संतोषी ने कितनी. पिक्चरें की और ऐसे होता है कॉम्बिनेशंस. तो मुझे लगा वो बनेगा। हालांकि सबने काम. करके मजा आया। एक दो के साथ मैंने दोबारा. भी पिक्चरें की पर वो ऐसा ब्रेक थ्रू नहीं. हो पाया जो कि उसमें होगा। आखिर में कहा. कि यार मैं खुद ही बना लेता हूं। नहीं भाई.
अपनी सारी भसड़ मैं खुद ही निकाल लेता हूं।. यार इनके बस का नहीं है। मेरे को फाड़ना. मैं खुद फाड़ जाता हूं। सावरकर एक ऐसी. फिल्म. अ जिसके बारे में हर तरफ चर्चा हो रही है।. अभी भी जब मैंने आपका नाम डाला कि रणदीप. हुड्डा आ रहे हैं। कोई सवाल तो 70% सवाल. सावरकर को लेकर आए पिक्चर आई पिक्चर रिलीज. हुई जी जिस बौद्ध ने सिनेमा हॉल पे देखनी. थी जिसने ओटीटी पे देखनी थी वो अलग कहानी. है हम सबके मन में सवाल था सावरकर क्यों.
की अ सावरकर मैंने गुस्से में करेंगे कैसा. गुस्सा इंडस्ट्री के प्रति. नहीं जब मुझे एज एन एक्टर कास्ट किया गया. तो पहली बात तो मैं बोला कि यार मैं हट्टा. कट्टा जाट मैं कैसे करूंगा यह पिक्चर मेरी. तो शक्ल ही नहीं मिलती। अगर आप इतना बड़ा. रियल लाइफ किरदार कर रहे हैं जो लोगों के. ज़हन में है जिनकी कितनी फोटो वोटो अवेलेबल. हैं। वो मैं तो लगता ही नहीं हूं ऐसा। तो.
फिर मैंने वो उनके बारे में ऐसे ही पढ़ना. शुरू. किया। जब मैं पढ़ने लगा फिर उसके बाद मेरे. को विक्रम संपत की किताब आउट हो गई। फिर. वो पढ़ी मैंने तो मुझे लगा यार ये ये जो. मैं भी जो उनके बारे में जानता हूं जो कि. एक पब्लिक डोमेन में जो जनरल इंफॉर्मेशन. घूमती है मैंने कहा मुझे भी नहीं पता ये. सब था और जब मैं और पढ़ने लगा पढ़ने लगा. फिर मैंने इंडियन हिस्ट्री और किताबें. पढ़ी जो जनरल हिस्ट्री की किताबें थी जो.
कि. एक माइंडसेट के लोगों ने लिखी थी उसमें. सशस्त्र क्रांति तो एक पैराग्राफ में खत्म. हो जाती है तो क्या हम इतने. लोग थे कि हमने हथियार नहीं उठाए. अंग्रेजों के. अगेंस्ट सारी ये हमको नॉन वायलेंस से मिल. गई। तो फिर मैंने जब पढ़ना शुरू किया तो. मेरे को वो लगा और फिर मेरे को एक फैक्ट. मेरे ध्यान में आया मेरे मतलब मेरे पढ़ाई. में आया कि 1946 से 1950 1952 तक कोई 506.
देशों को आजादी दी अंग्रेजों ने। वो तो. नॉन वायलेंस नहीं था वहां पे। तो कैसे दी. आजादी? तो चक्कर क्या था? तो वह एक. इन्वेस्टिगेशन में मैं लग गया कि भैया. क्या था? मैंने नेशनल आर्काइव्स पढ़े, मैंने अंग्रेजों के डॉक्यूमेंट्स पढ़े, सारी चीजें पढ़ी। फिर मुझे समझ में आया कि. यार ये तो बहुत ही एक सिर्फ एक ही पहलू से. हमें हिस्ट्री दिखाई गई है। और दूसरों का. तो कहीं वो है ही नहीं। भगत सिंह साहब का. क्या था कि वो एक उसमें आ गए थे। उन्होंने.
भी वही किया था। वो बम फेंक के अरेस्ट हुए. थे ताकि मैं बातें कर सकूं। और जो उनका जो. एक जो. वो उन्होंने जो स्ट्राइक हंगर स्ट्राइक की. थी उससे भगत सिंह भगत सिंह बने थे। उसके. पहले और उसके बाद में उनकी अगर राइटिंग भी. देख लो तो बहुत अलग हो गई थी। तो वो एक. पब्लिक डोमेन में और वो भी काफी लेट आया. था। इन. 19 30 1929 के आसपास वो आए थे। तो उस वक्त.
तक हमारी और डॉक्यूमेंटेशन होने लगी थी।. जो ये 1857 उसके पहले उसके बाद जो लोग. लड़े. थे फाड़के साहब लड़े थे चापेकर बंधु ये वो. कन्हरे और कितने लोग थे खुदीराम बोस मदन. लाल धींगड़ा को लोग याद नहीं रखते यार तो. वो सब चीजें जब मैंने देखी मैडम कामा. श्याम जी वर्मा कितने लोग थे ये. लोग तब मेरे को वो गुस्सा आया पर जो पहले.
स्क्रिप्ट थी वो स्क्रिप्ट भी नहीं नहीं. थी। टूटी फूटी सी एक वो थी। उसके अंदर. शुरुआत भी गांधी जी से हो रही है। मिडिल. में भी गांधी जी हैं और एंड भी गांधी जी. से हो रहा. है। तो मैंने गांधी जी की पिक्चर दोबारा. देखी रिचर्ड एंडर की। मैं कहा इसमें तो. सावरकर है ही. नहीं। तो सावरकर जी को कितना वो लगेगा कि. अगर मैं उनकी पिक्चर ऐसी पिक्चर में काम. कर रहा हूं जो बिगिनिंग भी गांधी से तो. इंडिविजुअल आइडेंटिटी क्या है उनकी? तो.
फिर मैंने तीन दिन में बैठ के वो. स्क्रिप्ट स्क्रीन प्ले लिख दिया जो कि. मैंने काफी चाटा हुआ था। तो उत्कर्ष नैतनी. के साथ बैठ के लिख दिया। वो इतना अच्छा. लिखा कि हमारे पिक्चर के प्रोड्यूसर. डायरेक्टर बनना चाह गए। फिर तो उन्होंने. महेश मांजरेकर को मेरे कंधे पर बंदूक करके. निकाल दिया और फिर वो तो मैं बोला मुझे. बोला गया कि आप को डायरेक्ट कर. लो। आपका नाम नहीं देंगे पर। मैंने कहा. बिल्कुल यार मेरे को तो मैं 30 किलो वजन. खो चुका हूं और मेरा तो हालत खराब है।.
इसको जल्दी से करके खत्म करो क्योंकि मेरे. कॉन्ट्रैक्ट में 3 महीने का पीरियड था। वो. तीन महीने का पीरियड निकल चुका था। आप. इतना वेट लॉस में इतना लंबा टाइम नहीं रह. सकते। मेरे को तो ऑलमोस्ट डेढ़ साल मैं. रहा था उस हालत में। तो सेलुलर लेवल पे आप. बहुत वीक हो जाते हो। तो फिर जब रेकी वैकी. पे गए तो बेचारे को कुछ बेचारा तो क्या. है? उसको पता ही नहीं था करना क्या है।. अच्छी पिक्चर बनाएंगे। अच्छी पिक्चर. बनाएंगे। अरे बनाओगे क्या? तो सब लोग मेरे. पास आते थे तो उसके अंदर फिर. वो जलन बलन का एस्पेक्ट आने लगा तो मैंने.
बोला भाई तू ही डायरेक्ट कर ले मुझे बता. दे क्या करना चाहता है तू अगर हमारी बनी. तो ठीक है नहीं तो मैं छोड़ देता हूं तुम. किसी और के साथ कर लो ये मैं दोबारा वो कर. लूंगा फिर जब उनके बस की नहीं रही तो बोला. तू ही डायरेक्ट कर ले ऐसे जाके वो. डायरेक्शन मेरे पास आई और फिर जब वो मेरे. पास आई तो मेरे को लगा कि भैया ये पिक्चर. थूकाचेपी करके नहीं बनेगी इसको को यह एक. इट विल बी अ डॉक्यूमेंट और वह भी ऐसे. इंसान के लिए जिसके ऊपर लालचना वैसे भी.
बेफालतू की बहुत लगाई जा चुकी है। तो उसके. बाद मैंने उसको सीरियसली लिया और फिर. मैंने उसको एक जैसे मैं एक्टिंग करता हूं. उसी डिटेल से उसी प्रिपरेशन से मैंने वो. बनाया और उसमें काफी कुछ मैंने रिसर्च की. प्रॉपर चीजें डाली। काफ़ी सारे डायलॉग जो. हैं, 90% से ऊपर डायलॉग वह हैं जो उन. लोगों ने बोले हैं। चाहे वह अंबेडकर साहब. हो, चाहे वह श्याम जी हो, चाहे वो गांधी. जी हो, चाहे वो सुभाष चंद्र जी हो, चाहे.
वो भगत सिंह हो, चाहे. वो कोई भी उसमें जो बड़े कैरेक्टर हैं मदद. लाल ये वो बहुत सारे कैरेक्टर जिन्ना. साहब। तो वो सारी चीजें मैंने लिख के उसको. एक बैलेंस बनाया कि मैं कहानी बता रहा हूं. सशस्त्र क्रांति की। पर मेरे बताने का. मीडियम है वीर सावरकर। पिक्चर में मैं. उनको वीर नहीं बोलता हूं यार। मैंने इतना. वो अनबायस्ड होके उसको देख के बनाया। पर. ऑब्वियसली मेरे प्रोटागनिस्ट ये हैं तो. मैं उनकी तरफ से कहानी बताऊंगा ना। तो.
इतना कुछ करने के बाद फिर कोर्ट केस हुए. आईपी के पिक्चर शेल्व हो गई।. फिर जाके मैंने वह पिक्चर अपने उससे करो. और. उसको और. वह प्रोड्यूसरों ने बीच में साइन नहीं. किया तो पिक्चर डिले होती रही डिले होती. रही उसकी और मुझे पेमेंट करनी पड़ी और फिर. कहीं जाके जब सुलह पे बात आई तो वो आचार. संहिता में रिलीज हुई और उसको एक. प्रोपोगेंडा पिक्चर का तकबा दे दिया गया।.
मेरे लिए सबसे बड़ी मेरे दुख की बात उस जो. भी मैंने सफर किया देखी जाएगी। पर जो उसको. प्रोपगेंडा पिक्चर का जब उसको खिताब दिया. गया वह मेरे सब मेरे लिए सबसे दिल तोड़ने. वाली जैसे इंडिया में सावरकर जैसा आपने. कहा ना कि आपने जितना पढ़ा या जितना जनरल. कॉन्टेक्स्ट में है सावरकर की ज्यादातर. लोगों में इमेज ये डाली गई है कि वो माफी. वीर थे। वीर नहीं थे वो व्यक्ति जिन्होंने. माफी मांग ली। जब मैंने आपकी सावरकर देखी. फिल्म देखी तो उसके फर्स्ट हाफ में जो.
गांधी जी के साथ उनका संवाद है उसमें मुझे. सावरकर की पर्सनालिटी को आपने ज्यादा. बोल्ड दिखाया। बोल्ड थे वो ज्यादा बोल्ड. दिखाया। बहुत ज्यादा बोल्ड थे। गांधी जी. के ऊपर डोमिनेट करते दिखाई पड़े। उस सीन. में जो सीन दिखाया जी वो थे उसमें. डोमिनेंट। उस वक्त डोमिनेंट थे। गांधी जी. अपना अस्तित्व ढूंढ रहे थे। उस वक्त 1906. की बात है ये। हां। गांधी जी के साथ ट्रेन. वाला इंसिडेंट हो गया था और वो इंग्लैंड. आए थे बाकी रेवोल्यूशनरीज से मिलने के लिए. कि हम कैसे जुड़े पर उन्होंने एक एक बहुत.
बड़ा वो एक वो ले लिया था कि वो बुद्ध को. फॉलो. करेंगे एक नॉन वायलेंस से वो करेंगे एक. पैसिव रेसिस्टेंस जिसको बोलते हैं और यहां. पे सारे ये वो लोग थे जो बम बना रहे थे. बंदूके इकट्ठी कर रहे थे वह तो अंग्रेजों. को फोड़ के भगाने वाले थे इन लोगों की. नहीं बनी तो आप अभी थोड़ी देर पहले आपने. कहा कि 1947 के आसपास अंग्रेजों ने बहुत. सारे देशों को आजादी दी। जी। तो डू यू. बिलीव कि जो हमें आजादी मिली है वो.
महात्मा गांधी जी ने या पंडित नेहरू जी ने. या नॉन वायलेंस के थ्रू नहीं मिली है? नहीं मिली है।. नॉन वायलेंस क्या आपको क्या किसी से. चॉकलेट मांग के देख लो यार तुम आजादी की. बात कर रहे हो। नॉन वायलेंस से कैसे कुछ. मिल सकता है? गांधी जी का कंट्रीब्यूशन. आजादी में सबसे बड़ा है भाई। पर सिर्फ उसी. वजह से नहीं मिली। गांधी जी की जो इमेज थी. जिसको एक कॉमन मैन इमेज में वो जब अपने आप. को ढाला तो उससे देश जुड़ा। हम उन्होंने. पूरे देश को कॉमन मैन को इनवॉल्व किया। ये.
उनका सबसे बड़ा कंट्रीब्यूशन था। हम 1942. में जब. ये नॉन कोऑपरेटिव मूवमेंट क्या बोलते हैं. उसको? हम वो जब शुरू हुआ तो उस वक्त एक. पावर थी। कांग्रेस पार्टी सबसे बड़ी. पार्टी थी। कांग्रेस पार्टी पॉलिटिकल. पार्टी थी। हम ऐसे ही मुस्लिम लीग. पॉलिटिकल पार्टी थी। ऐसे हिंदू महासभा एक. पॉलिटिकल पार्टी थी। तो वो पॉलिटिकल. पार्टी थी वो। इतनी पार्टियों में एक. पार्टी वो भी थी। कांग्रेस ने ही नहीं.
दिलाया है। मेरा कहने का मतलब यह है।. गांधी जी का कंट्रीब्यूशन तो आप छोड़ ही. नहीं सकते।. राइट? वो तो उनका तो सबसे बड़ा. कंट्रीब्यूशन है लोगों को जोड़ने का। 1942. में जब ये नॉन कोऑपरेटिव मूवमेंट में सारे. जेलों में बंद हो गए। हम. उस वक्त पूरे देश को लगने लगा कि कांग्रेस. ही हमारे लिए लड़ रही है। हम देश के लिए. सावरकर साहब बहुत इसके अगेंस्ट थे कि भाई. सबसे बड़ी पार्टी तुम क्यों जेलों में बंद. हो रहे हो? अभी तो मौका ये वीक है। हम अभी.
करना चाहिए इन पे. हमला। वो नहीं हुआ। और जब वो जेलों में भी. गए तो यार गांधी जी आगा खान पैलेस में. रहते थे। उनको 200 क्या कितने रुपए पेंशन. मिलती थी? पेंशन नहीं बोलते हैं उसको।. उसको बोलते हैं व्हेन यू आर इन कैप्टिविटी. एंड यू कैन नॉट मे अपने अपनी व्यवसाय नहीं. कर सकते हो तो अंग्रेज उसकी पॉलिटिकल. प्रिजनर को वो देते थे। राइट? सावरकर साहब. को 5 साल में ₹60 मिले थे पहली बारी। और. उसके बाद भी उनकी पेमेंट नहीं आती थी। ठीक.
है? तो वो आगा खान पैलेस में रहे थे।. नेहरू साहब लखनऊ जेल में रहे थे। वहां पे. उनके बटलर होते थे। उनके बैडमिंटन कोर्ट. होता था। उनका रोज गार्डन होता था। और. कहां आप इनको इनसे कंपेयर कर रहे हो यार. काला पानी जिनको भेजा। कांग्रेस का एक भी. मेंबर काला पानी नहीं गया। मैं एक लास्ट. क्वेश्चन पूछ लेता हूं क्योंकि आपने कहा. कि आप कहा गया प्रोपगेंडा मूवी है। तो मैं. एक बात बोलता हूं। जब अंग्रेजों ने बहुत. बड़ा लॉस उठाया वर्ल्ड वॉर टू में। हम वो. अपनी एडमिनिस्ट्रेशन कंटिन्यू कर ही नहीं.
सकते थे। तो देश का बंटवारा भी अंग्रेजों. ने किया था और उसमें हिंदू मुस्लिम का. ज्यादा लेना देना नहीं था। उनको चाहिए था. एक बेस एलाइड फोर्सेस को क्योंकि स्टालिन. साहब कराची में पोर्ट बना रहे थे जैसे अभी. चाइना बना रहा है ठीक है तो उनको लगा था. कि अफगानिस्तान तक रशिया आ गया है यहां पे. जो कांग्रेस डिस्पेंसेशन थी वो भी. सोशलिज्म की तरफ जा रही थी तो इनको एक बेस. चाहिए था वहां पे रंगून खो गए थे और यहां.
पे यह सब चला जाने वाला था तो उन्होंने. देश का विभाजन इसलिए किया था रेडक्लिफ को. नहीं पता था क्या करना है वो चर्चिल साहब. का दिमाग था यह सारा तो रंगून की बजाय. ढाका उनका बेस बन गया और यहां पे. पाकिस्तान जो कि उसकी हिस्ट्री अगर देखो. तो वो एलाइड फोर्सेस या वेस्टर्न फोर्सेस. से हमेशा इस्तेमाल ही हुए हैं। हम उनको. इतनी ग्रांट क्यों मिलती. है? इतने पैसे क्यों मिलते हैं उनको वेस्ट. से? वो इसीलिए था। तो ये एक जिओपॉलिटिकल. था जिसमें अंग्रेजों ने एक अपने लिए. स्मार्ट मूव खेला था। अंग्रेज क्या एलाइड.
फोर्सेस की तरफ से था ये। राइट? तो उस. वक्त उनको वो लोग यहां से वो जाने ही वाले. थे। हम पर वो जातेजाते अगर यह पहले पकड़. लेते तो यह देश का विभाजन नहीं होता। लोग. कहते हैं सावरकर जी देश का विभाजन करके. गए। ऐसा नहीं है। टू नेशन थ्योरी टू नेशन. थ्योरी सबसे पहले सैयद अहमद खान साहब ने. दी थी जो कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी. के फाउंडर थे। टू नेशन थ्योरी सबसे पहले. इसलिए शुरू हुई थी क्योंकि अह जब अंग्रेज.
आए थे तो अ मुगलों का राज था। तो ऑल ठीक. है। ये हिस्ट्री के पार्ट्स हैं। मैं आपसे. सिर्फ ये समझना चाह रहा हूं कि वीर सावरकर. बनाने का आपको कोई अफसोस है या अभी फक्र. है कि आपने प्राउडली बनाई और उसके क्या. कॉन्सिक्वेंसेस रहे? फक्र है। क्यों नहीं. फक्र है? बिल्कुल फक्र है। अरे यार जान. माल सब कुछ लगा के बनाई और अच्छी पिक्चर. बनाई है। ऐसा नहीं है वो हमारी तो इंडिया. से तो इंडिया में भी इंडिया से भी जा सकती. थी वो। पर फिर एक कुछ अलग ही काम रहता है. वहां सिलेक्शन प्रोसेस में भी। पर हमारी.
तो ऑन इट्स क्वालिटी लास्ट की 200 कुछ. पिक्चरों में आ गई थी इन मेनलैंड अमेरिका. नॉट हियर वहां भी रिलीज हुई थी ना हमारी. तो हमारी तो सारी उसमें आ गई थी बट आई हैड. नो मनी कि उसको मैं कैसे प्रमोट करूं क्या. करूं और आईडिया भी नहीं था कैसे करते हैं. और फिर मुझे ये भी लगा कि ये पिक्चर. क्योंकि एक राइड विंगर के बारे में है तो. शायद वहां पे इसका फेवर नहीं मिलेगा। जैसे. किसी ने मुझसे कहा कि रणजीत पूछेगा कि अगर. आपका नाम सावरकर रख दिया जाए तो आपको गर्व.
की अनुभूति होगी? क्यों नहीं होगी? पर मेरा नाम तो रणदीप. हुड्डा है। मेरा नाम सावरकर क्यों रखोगे? मैं तो महाराष्ट्र भी नहीं हूं।. आपको आरएसएस के बंदे बहुत लोगों ने कहा. होगा इस फिल्म के बनाने के बाद। ये सब. चीजें अफेक्ट नहीं करती हमको। नहीं ये सब. चीजें क्या? देखो मैं कलाकार हूं यार।. मैंने कला बनाई है और वो कला एज इट हैप्स।. वह एक ऐसे मुद्दे के बारे में है जो कि. बहुत चर्चित रहता है पॉलिटिकल रीजंस की. तरफ वजह से पॉलिटिक्स में एक ये नाम खेला.
जाता है और आज जो कि देश. का माहौल है और जो देश जहां पे है वहां पे. आप अगर देखें तो आज सावरकर जी के ख्यालात. ज्यादा ऊपर. हैं बाकी लोगों से क्योंकि सावरकर जी. चाहते थे देश सशस्त्र हो हम अपने वेपन्स. बनाए। यहां पे खुद की हमारी ऑर्डिनेंस. फैक्ट्रीज होनी चाहिए। और जब हम बलवान. होंगे तभी हम.
पीस दो बलवान लोग आपस में तभी जब दोनों के. पास इक्वल हथियार होते हैं तो लड़ाई नहीं. होती है। रशिया अमेरिका की लड़ाई क्यों. नहीं हुई? इतने सालों कोल्ड वॉर चला।. क्योंकि टक्कर के है ना यार। तो वो टक्कर. का रह के बनना ही सावरकर जी का वो था। और. आज देख लीजिए आप क्या हो रहा है? हम खुद. अपने वेपंस बना रहे हैं। वेपंस एक्सपोर्ट. कर रहे हैं। हमारे और बड़े-बड़े देशों से. वेपंस ले रहे. हैं। यूएन सिक्योरिटी काउंसिल में कौन लोग. हैं? कौन पांच देश हैं? हम नहीं है। हमने.
तो चाइना को हमने चाइना को दे दिया था।. क्यों? क्योंकि उस वक्त हमारी वो नॉन. वायलेंस वाली वो चल रही थी ना। इमेजिंग चल. रही हम सिक्योरिटी यूएन सिक्योरिटी. काउंसिल में पांचों देश दुनिया के सबसे. बड़े वेपन मैन्युफैक्चरर्स हैं हम और वो. सिक्योरिटी काउंसिल में हैं। तो यही एक वो. होता है भैया आपको बलवान आपको सशस्त्र. होना पड़ेगा। सावरकर जी कहते थे कि वो. बुद्ध को बहुत मानते. हैं। बहुत ज्यादा मानते हैं। बुद्ध से.
बड़ा अवतार इस दुनिया में कोई आया ही. नहीं। पर उनसे सहमत नहीं है क्योंकि यह. दुनिया एक हरे पहाड़ों और नीली नदियों और. गुलाबी फूलों वाली नहीं है। इसमें खूनी. दरिंदे भी हैं। तो आत्मरक्षा कैसे आएगी. उससे? हमारा पूरा देश बुद्धिस्ट था एक. टाइम पे। हम अशोका जी के चलते। हम और हंस. और शाकाज आए। यह कबीले वाले अन एजुकेटेड.
अनकल्चर लोगों ने आके घोड़ों पे आके हमारा. देश का भट्टा बैठा दिया। तब फिर से एक कॉल. आई थी। फिर से काली मां की पूजा होने लगी।. फिर से हनुमान जी आए। फिर से शिव जी का. त्रिशूल निकला। तो वो एक हमारे इतिहास में. हमारी कल्चर में हमारे मिथोलॉजी में है।. बट जैसे आप को मैं सुन रहा हूं। मैंने. सुभाष चंद्र बोस जी के परपोते को सुना।. आपके ऊपर रिएक्टेंस दिया कि सावरकर जी और. सुभाष जी एक तरीके के नहीं थे। भगत सिंह. कैडोलॉजी जब वो बीजेपी में थे तब वो अलग.
बात करते थे। अब बीजेपी से पता नहीं अलग. हो गए हैं तो अलग बात करते हैं। तो इनका. तो उनका उनका क्या लेना था? वो तो पोते. हैं उनके यार जो भी पोते पड़पोते उनके भी. नहीं है। उनके चाचा ताऊ के हैं। उनका क्या. बयान का मतलब बनता है। ठीक है। हम आगे. बढ़ते हैं। मेरा मेरे मेरे भाई मेरे चाचा. के लड़के का लड़का अगर कुछ मेरे बारे में. बोल दे तो वो थोड़ी सत्य हो जाएगा। तो युप. सावरकर जी को ज्यादा बदनाम किया गया। उनकी. अच्छाइयों को छिपा दिया गया। उनको आपके. हिसाब से या बिल्कुल बिकॉज़ ऑपोजिंग फ़ोर्स.
थी वो हम एक कांग्रेस की ऑपोजिंग फ़ोर्स थी. वही थे जो खड़े रहते थे कांग्रेस के. अगेंस्ट इसलिए इसलिए और जब आप अगर देखें. आई डोंट नो हाउ मच यू वांट कीप दिस एंड आई. एम हियर फॉर एंटरटेनमेंट एंड मी एस एन. एक्टर डोंट मेक मी जस्ट अबाउट सावरकर आई. वा 25 ईयर ओल्ड करियर नॉट जस्ट वन आई हैव. लॉट बट बट बट. अ जब गांधी जी की हत्या हुई हम. उसके अंदर सावरकर जी का कोई लेना देना.
नहीं था क्योंकि मेन बात तो ये है कि. सावरकर जी इतने इंटेलिजेंट थे कि अगर उनका. कुछ लेना देना होता तो वो अपने हिंदू. महासभा से जो पहले जुड़े हुए लोग थे उनको. नहीं बोलते. गोडसे गोडसे जी को नहीं बोलते वो तो जब. उनकी हत्या उस भी लोग ऐतराज करेंगे हमने. गोडसे जी बोला है कई लोग भैया. मरने के बाद सब महात्मा बन जाते हैं यार।. किसी को इज्जत देने में क्या प्रॉब्लम है?
वह भी इंसान थे। तो जो उनकी जो वो. थी अ जब उनकी हत्या हुई तो पहले जो. डिक्टैट गया था होम मिनिस्ट्री से वो था. कि सावरकर जी बहुत बड़े। इनको अगर बिना. सबूत के अरेस्ट नहीं किया जाए।. फिर दोबारा एक मीटिंग मीटिंग के बाद. दोबारा डिक्टेट गया कि इनकी हिस्ट्री. देखते हुए इन पे शक जाता है इनको अरेस्ट. कर लो। वो नहीं प्रूव कर पाए कोर्ट में।. पर उससे हुआ.
क्या? सावरकर जी को अगर वो नहीं घसीटते. इसमें तो गोडसे ने गांधी जी को. मारा। पर सावरकर जी को घसीटते ही वह. हेडलाइन बदल गई। बोले हिंदू ने हिंदुओं ने. गांधी जी को मारा है।. वह एक बहुत बड़ा एक पॉलिटिकल पीआर खेल. पोजीशनिंग का उस टाइम हुआ था। उसके बाद. हिंदू महासभा खत्म हो गई। मुस्लिम लीग. पाकिस्तान जा चुकी थी। 1952 में अनअपोज्ड. जीते। अन.
अपोज्ड पहला इलेक्शन 1952 में हुआ था।. 1947 में तो सुरक्षा से बनाए गए थे लोग।. नॉमिनेटेड थे। और देखो तो सारे अंग्रेजी. अंग्रेज इंग्लैंड में पड़े हुए लॉयरों ने. ये देश संभाला। ठीक है। मैं आगे बढ़ता. हूं। आपने वाकई में 28 दिन में 18 किलो. वजन कम किया था? जी। 28 दिन में 18 किलो। जी। हाउ इज इट. पॉसिबल? पहले क्या था कि वो पहले वो पंजाब. वाले सरजीत वाले पोर्शन जो जहां पे.
पहलवानी करता था वो शूट करने वाले थे। हम. फिर पता नहीं उन पे उन्होंने एकदम बोला कि. अरे हम तो ये शूट करने वाले हैं। पर अ तो. मेरे को लगा अभी यार ये तो बोले नहीं. चलेगा चलेगा मैं ऐसे कैसे चलेगा यार जिस. आदमी को एक रोटी मिलती है पूरे दिन की वो. ऐसा कैसे हो सकता है जेल में पड़ा पड़ा. अंध अंध अंधेरी कोठरी में रखा जाता था. उसको 18 साल सरजीत हां तो मैंने फिर वो. एकदम से खाना पीना छोड़ के मैंने उसको बट.
इसका शरीर पे असर नहीं पड़ता क्योंकि बहुत. सारे लोग ये जानना चाह रहे थे वेट लूज. करने के लिए। अरे बहुत पड़ता है यार असर. बहुत पड़ता है इसके शायद। 28 दिन में 18. बहुत ड्रास्टिक हो गया। बहुत ड्रास्टिक हो. गया और वो तो एक क्विक था और फिर वो खत्म. हो गया। सावरकर में तो मुझे और भी फर्क. पड़ा बिकॉज़ मैं अढ़ साल तक अंडरवेट रहा।. मैंने देखा वो जो एंड का सीन आता है एकदम. शरीर पूरा पुला हो गया है। हां, तो डेढ़. साल तक मैं उसमें था। तो उसके बाद क्या. होता है कि फिर आपकी ना एक बिकॉज़ ऑफ़ मैल. न्यूट्रिशन। हम्म।.
बेसिकली बॉडी के अंदर मैल न्यूट्रिशन की. वजह से ही पतला होता है ना आदमी हम तो. अपने आप को मैल न्यूट्रिशन में डालना. पड़ता है हम तो उससे बॉडी को फर्क पड़ता. है यार क्यों नहीं पड़ता तो बहुत सारे. लोगों ने पूछा कि पूछ लीजिए आप तो. माशा्लाह 48 पे भी हॉट लग रहे हो हम अगर. उनको थोड़ा अच्छा लगना हो तो कैसे वेट. लूज़ करें देखिए हमारे हिंदू उसमें भी. होता है और ये रमजान में भी होता है व्रत. का हम तो आप व्रत रखिए फास्टिंग फास्टिंग. फास्टिंग से अच्छा कुछ नहीं है फास्टिंग.
आपके शरीर के लिए क्योंकि पूरी जिंदगी. हमारा डाइजेस्टिव सिस्टम नॉनस्टॉप काम. करता रहता है और हमारी सबसे ज्यादा जो. प्रॉब्लम होती है वो हमारे पेट से निकलती. हैं हम तो आप उसको आराम दे रहे हो रिकवरी. दे रहे हो तो उससे. आपके एनर्जी में आप जब खाना खाते हो तो आप. लेजी होते हो जब आप खाना नहीं खाते हो तो. और ज्यादा एक्टिव रहते हो तो वो एक हमारे. अंदर एक अलग वो समझाया गया तो आप व्रत.
रखिए एक दिन दो दिन पर उसमें यह नहीं है. कि एक व्रत भी कई टाइप के हो गए हैं। अनाज. नहीं खाना फ्रूट खाने हैं। वो सब हमारे. यहां तो लोग व्रत में ज्यादा खाते हैं।. हां तो वो गलत है। आप कुछ मत खाइए। पानी. पीजिए। कुछ मत खाइए। ब्लैक कॉफी, काली. चाय, ग्रीन टी ये सब पी सकते हैं आप।. नींबू पानी नहीं पी सकते। नारियल पानी. नहीं पी सकते। पानी और ये दो तीन चीजें।. तो उसमें आप जितना लंबा व्रत रखेंगे उससे. आपको वो होगा। वो बहुत ही एक आपके लिए. हेल्थ के लिए भी अच्छा है और आपके लुक्स.
के लिए भी अच्छा है। फिल्म बनाते बनाते. रिश्ते ही बन जाते हैं। बहुत बन जाते हैं।. सरजीत का मैंने क्योंकि सुना कि वो जो बहन. ने किरदार था उनसे आपका बड़ा आत्मिक. रिश्ता बन गया था। और मैंने फिर एक खबर. पढ़ी कि उन्होंने कहा था कि जब भी उनकी. मृत्यु होगी तो आप उनको मुखाग्नि देंगे और. आप दलबीर जी की बात कर रहे हो। मेरे को. लगा आप ऐश्वर्या जी की बात नहीं ऐश्वर्या. तो फिल्म में बहन का किरदार निभा जी जी जी. वो बहुत एक रिश्ता बन गया था उनके साथ ही. नहीं उनके बेटियों के साथ भी अ एक रिश्ता.
बन गया था अभी भी वो छोटी वाली भी शी इज़. गोइंग टू हैव अ बेबी आई एम वेरी. हैप्पी पूनम इज उसने भेजा था मुझे कि आई. एम प्रेग्नेंट एंड ऑल दैट आई सेड आई एम. वेरी हैप्पी फॉर हर तो एक वो रिश्ता बन. गया है अभी क्योंकि मैं भी व्यस्त रहता. हूं उनकी भी अपनी जिंदगी है तो बातचीत कम. हो जाती है पर एक वो रहता है कि कभी भी आप. फोन उठा के या वो कर सकते हैं। दलजी दलबीर. जी के साथ ज्यादा था क्योंकि वो ज्यादा. मिलनसार थी। वो ज्यादा एक्टिव रहती थी। तो.
ये कैसे था? क्योंकि आपने तो एक किरदार. निभाया। हम बट दलबीर जी ने आपको अपने भाई. के तौर पर ही देख लिया। और ये बहुत बड़ी. बात है कि जब मेरी मृत्यु हो तो मुखाग्नि. देने वो व्यक्ति आए जिसने किसी सिनेमा के. लिए किरदार निभाया था।. वो उनमें उनको मुझ में दिखा. सर्वजीत वो कहीं उनका बड़प्पन था और कहीं. मेरी मेहनत थी कि मैंने क्यों मैंने काफी. उन जैसा दिखने के लिए उन जैसा महसूस करने.
के लिए काफी काम किया था तो शायद वो उनको. पहली टक्कर में ही हो गया था ये वो तो उठ. के चली गई थी जब मेरे को पता नहीं था वो. आई हुई है हम वो उठ के चली गई थी तो बाद. में मैंने उनको तो रो रही थी मैं. कहा अच्छा लग रहा है बोला नहीं बहुत. ज्यादा है तो मैंने कहा मैं हूं ना यार तो. वहां पे एक हमारा एक रिश्ता बन गया था और. जब वो उनका देहांत हुआ तब मैं गया भी था. वहां पे और मैं उनकी चिता को आहुति दे के.
आया था. तो इट्स जस्ट रियल एंड रियल लाइफ. गेटिंग नेक्स्ट अप आपकी क्या इमोशन थी. क्योंकि उनको तो चलो अपना भाई दिख रहा था. आप उन वो आपको ज्यादा बेहतर तरीके से. रिलेट कर पा रही क्योंकि आप उनकी जिंदगी. को पर्दे पे दिखा रहे थे। बट जब वो. मुखाग्नि आपने दी आपके इमोशंस क्या थे? मेरी तो हमेशा जब भी मैं कोई रियल लाइफ. किरदार करता हूं तो एक सेंस ऑफ रिस्पेक्ट. रिस्पांसिबिलिटी मैं बहुत ले चलता हूं।.
तो उसको मद्देनजर रखते हुए मैंने उनके. प्यार को. अपनाया और एक भाई जैसा एक व्यवहार और एक. रिश्ता उनके साथ बनाया. ताकि वो बिकॉज़ वो दोबारा वो बच्चे और. दलबीर जी और उनकी वाइफ जो थी उनका भी. देहांत हो गया। बहुत अच्छी थी। तो उनके. उनको भी तो उनकी जिंदगी भी तो दोबारा.
क्रोधी जा रही है। वह दर्द वह दोबारा जी. रहे हैं ना तो उस चीज का एक रिस्पेक्ट मैं. रख चार्ल्स के साथ क्या रिश्ता बन गया. फिर? हमारे यहां फिर मैं आपको एक टोक देता हूं. एक सेकंड। हमारे यहां जेलर साहब आए थे. जिनको चार्ल्स ने नौकरी दिलाई थी। जी जी।. तो जेलर साहब ने कहा मैं लड़की होता तो. मेरा चार्ल्स पे क्रश हुआ था। मैं सकमका. गए थोड़ी देर के लिए कि ये क्या था? क्यों. था? कैसे था? वो बड़ा चार्ल्स से फैसनेट. थे। आपने तो किरदार निभाया। आप नेपाल तक. पहुंच गए। नेपाल मैंने एक्चुअली चार्ल्स.
से मुलाकात नहीं की। दूर से देखा चार्ल्स. की कुछ वीडियोस थी और कुछ आर्टिकल्स उसके. बारे में उनके बारे में जो काफी कुछ मैंने. पढ़ा हम. और मुझे बहुत फैसनेटिंग लगा वो कैरेक्टर. और उनके ऊपर. पिक्चर काफी सालों से आमिर खान से लेके. जैकी श्रॉफ ये वो बहुत लोगों ने उनके ऊपर. पिक्चर बनाने की कोशिश की पर उनके ऊपर.
पिक्चर बनाना नामुमकिन था क्योंकि उनकी. लॉयर. बहुत ही एक बड़ी हस्ती की वाइफ हैं डेंजरस. हस्ती की जिससे कि वो जब वो भेजती हैं. नोटिस तो फिर सबकी फट जाती है। तो मेरे जो. डायरेक्टर हैं प्रवाल रमन जिसने बनाई थी. वो उनके मित्र हैं अमोदकांत जी जो मेरे भी. मित्र हैं अभी तो वो थे इन्वेस्टिगेटिंग. ऑफिसर एट दैट टाइम। तो उनके राइट्स लेके. इसलिए पिक्चर का नाम चार्ल्स एंड मैं और.
चार्ल्स है। तो मैं उसमें अमोद खान जी का. कैरेक्टर है जो आदिल हुसैन ने प्ले किया. था। हम तो हमने उनके राइट्स लेके पिक्चर. बनाई तो कोई कुछ कर नहीं पाया। तो हमने भी. चार्ल्स वाली चाल चार्ल्स के साथ खेल दी।. तो वो सब किया हमने। फिर उसके बाद. देन उसमें करते वक्त एक बड़ी असमंजस सी आई. कि हमने पिक्चर शुरू कर दी और हर सीन में. हम ऐसे बात करके हमने किया था तो फिर मैं. उसको एक दिन पूछा डायरेक्टर से कि मैं कहा. यार चार्ल्स कौन से सीन में चार्ल्स.
है सच कौन सी सच्चाई कौन से सीन में बोल. रहा है जो इफेक्ट के लिए नहीं बोल रहा है. मैनपुलेशन के लिए नहीं बोल रहा है वो कौन. से सीन में बोलता है मुझे भी नहीं. पता तो वो फिर दैट दैट बिकम द बेसिस ऑफ. आवर कैरेक्टर जो कि एक सच्चाई शायद. चार्ल्स ने भी अपने बारे में नहीं सोची. होगी। वहां से फिर वो कैरेक्टर पकड़ा हमने. और उसको किया। उसमें सबसे बड़ी दिक्कत तो. ये हुई कि चार्ल्स इतनी हिंदी नहीं बोलते. थे और हिंदी भी फ्रेंच एक्शन में बोलना. बहुत मुश्किल था। तो वो एक चीज पकड़ के.
हमने किया और वो बहुत ही. रियल लाइफ में बात हुई कभी हां हां पहले. तो हम उसको मिलने गए अपने नेपाल नेपाल. मिलने गए पिक्चर की रिलीज के बाद हम और. वहां पे चार्ल्स मिलेंगे यानी बड़ा हमको. जद्दोजहद करनी पड़ी बड़ी अफसरों. से नेपाल की बड़ी-बड़ी हस्तियों से बात. करनी पड़ी फिर जाके दूर से उन्होंने. हाथ-वात हिलाया हमने पोस्टर खिलाया एंड ही. सेड ऑल द बेस्ट बेस्ट ऑल द बेस्ट। तो.
हमारे प्रोड्यूसर विक्रम कक्कड़ थे। वह तो. देखे चाल चाल चार्ल्स। मैं कहा तू क्यों. लड़की बन गया एकदम से? परसोना है उस आदमी. में और उसके चारों तरफ यंग नेपाली लड़के. ऐसे खड़े हुए हो। ऐसे नॉर्मल आदमी नहीं है. वो। फिर वो किया। फिर मैंने एक बुक उसको. पेश की जिसके अंदर मैंने एक पेज पर नंबर. लिख दिया अपना। तो फिर उनके फोन आए। और. काफी साल छूटने तक मेरी बात होती रहती थी।. फोन पे जेल से मुझे फोन करते थे। यह करते.
थे वह करते थे। तो काफी वो वीडियो कॉल. मेरी सेल है। मैं यह कर रहा हूं, मैं वह. कर रहा हूं। तो उसे एक अलग तरह का रिश्ता. बन गया। मैं मैं अमेरिका गया था तो तूने. हॉलीवुड एजेंट से मेरी बातें कराई कि आपको. वहां काम करना चाहिए। तुम इस टाइप के. एक्टर हो। कहां तुम वेस्ट हो रहे हो। तो. उस तरह की मित्रता हो गई चार्ल्स के साथ।. 72 साल की उम्र में आप बता रहे थे। तो. मेरे को लग रहा है कि वो रणदीप हुड्डा है।. आप कोई फैन की तरह मूवमेंट लेने आ रहे हो. आप. हो सकता है। तो हम चार्ल्स का सेकंड पार्ट.
बनाने की भी सोच रहे हैं जो कि जैसे गॉड. फादर थी फिर गॉड फादर टू बनी। वो दो टाइम. जोन में चलेगा। एक तो. चार्ल्स चार्ल्स कैसे बने? कोई भी. इंसान हम पैदा तो सब इंसान ही होते हैं।. सब अच्छे पैदा होते हैं। तो कौन कैसा कैसे. मोड़ लेता है? एक वह हिस्सा और वह नेपाल. में उनके साथ क्या हुआ? वही उन दोनों को हम ऐसे करके बट लगता नहीं.
बेहतर होगा एक वेब सीरीज बना. दें वेब सीरीज बनी है सरपेंट करके एक वेब. सीरीज देखी है मैंने वो भी हां और उसमें. हमारी पिक्चर की बहुत कॉपी की गई. है अच्छी बात है ना हम तो वेब सीरीज इवन. सावरकर जी की पिक्चर पे भी मुझे मैंने जब. लिया तो क्या था कि 53 साल की कहानी थी और. उसमें कितनी सारी चीजें मैं डाल नहीं पाया. जो कि एक और एक उनका व्यक्तित्व और बाहर. निकल के आता। तो मुझे बाद में लगा कि इसकी.
सीरीज बनानी चाहिए थी। पर अ सीरीज फिर एक. ओटीटी प्लेटफार्म पे रह के रह जाती है और. पिक्चर जो है वो एक वाइडर ऑडियंस को जाती. है। तो इसीलिए मैं चाहता था कि उनके ऊपर. पिक्चर ही बनाई जाए। देखिए सावरकर जी आप. में इतना समा गए हैं कि मैं कितना भी. छुड़ाने की कोशिश कर रहा हूं। छूट ही नहीं. रहे हैं। फिर लोग कहेंगे कि आपने पूरा. पडकास्ट ही सावरकर के बाद फिर सावरकर. देखिए यार अब मैं किया बहुत अच्छे से किया. और उनको जी के किया। उनको समझा मैं हम. उनको मैं समझने की कोशिश की मैंने। आप अगर. मैं नेहरू जी के ऊपर पिक्चर बना रहा होता.
तो उनको भी उतना ही समझ के मैं पेश करता. और मैंने उनको वाइट वाश नहीं किया है. बिल्कुल बहुत ही कड़क आदमी थे और एंड तक. सबसे बड़ी बात सबसे बड़ी बात क्या है कि. आमरण अनशन बहुत लोगों ने. किया और आमरण रक्षण आमरण अनशन से मरे. सिर्फ सावरकर जी उन्होंने एंड में लाइफ. में खाना पीना छोड़ दिया तो उन्होंने. समाधि ली। समाधि ली थी उन्होंने। तो जो.
मैन ऑफ वायलेंस नॉन वायलेंस डाइड ऑफ अ. बुलेट एंड द मैन ऑफ. वायलेंस फास्टेड अनटू डेथ। ये एक आयरननी. है जो कि लोग समझ नहीं पाते हैं उनको। ये. किसी ने इस नजरिए से देखा नहीं है। तो वो. एक नजरिया मैं लेके आना चाहता था। बात ये. बहुत ही गहरी बातें आई जो लास्ट में आपने. कही है। जी जी सही बात है। गहराई से बनाई. हुई पिक्चर है। सोच समझ के बनाई हुई.
पिक्चर है। और मैं इसमें गांधी जी को. बिल्कुल ही अ कंपैरिजन में मैं दिखाने की. कोशिश की है। गांधी जी पे मैं भी गांधी जी. की बहुत इज्जत करता हूं। पर वो क्या है? प्रैक्टिकल नहीं. है। बोलने को बहुत अच्छा है। पर वो. प्रैक्टिकल नहीं है।. ओके। मैं अब पॉलिटिक्स से आगे बढ़ता हूं।. थोड़ा इश्क मोहब्बत थोड़ा लाइट करते हैं।. इश्क मोहब्बत। बहुत सारे लोगों ने कहा कि. भाई रणदीप भाई के पास सब कुछ था। फिर शादी. इतनी देर से क्यों की? पहला सवाल तो यही. लोगों के मन में था। मेरा तो शादी करने का. मूड नहीं था क्योंकि जैसा मैं देखता था.
मैं सच्ची बात बताऊं? हां। मैं स्कूल में. बहुत दुखी रहता था यार। तो मैं चाहता नहीं. था कि मैं इस दुनिया में किसी और को लाऊं।. हम जो कि स्कूलिंग के थ्रू जाए।. तो मेरा मन नहीं था पर फिर संजोग हो गया. और मैं बहुत खुश हूं कि ऐसा हुआ। हम. और थोड़ा लेट लतीफ हो गए। तो मैं तो यही. जोक मारता हूं कि मेरी शादी आज तक इसलिए. नहीं हुई हरियाणा में क्योंकि मेरे पास.
गवर्नमेंट की नौकरी नहीं. थी। तो मणिपुर जाके करनी पड़ी। तो बहुत. सारे कमेंट्स मैंने भी पढ़े। बोले भाई. हमने तो बिहार था ही क्या पता था। तू तो. मणिपुर ले गया। मैंने कहा यार ऐसे ही होता. है। तो फिर दूसरा क्वेश्चन ये था कि भाई. नॉर्थ पे लड़कियां नहीं मिली जो नॉर्थ. ईस्ट पहुंच गए। नहीं है तो अपना ही देश।. हां। पर क्या है प्यार में और संजोग जो. बैठता है उसमें? जातपात. धर्म उम्र देश उम्र उसका कोई हिसाब ही.
नहीं रहता और हमारी बनी और एक दूसरे को. कॉम्प्लीमेंट किया तो ऐसा हुआ. शादी में सब आसान था या कुछ कॉम्प्लिकेशंस. आए थे घर परिवार क्योंकि हरियाणा था नहीं. बहुत बहुत 10 साल का उम्र गैप है हां. कॉम्प्लिकेशंस थे. मेरे मां-बाप भी चाहते हैं हर एक के. मां-बाप चाहते हैं कि उन्हीं की कम्युनिटी. में शादी हो हम इसमें कोई जाटों में तो. खास तौर पर होता है। जाटों में तो बहुत. होता है। एक्चुअली मैं पहला अपनी फैमिली.
में अपना फैमिली मेंबर हूं जिसने नॉन जाट. से शादी की है और कोई किसी ने कभी नहीं. की। हम तो वो सबको वो था प्रॉब्लम थी उससे. बट धीरे-धीरे वो प्रॉब्लम ठीक हो गई। और. जब हम शादी में गए हम क्योंकि मणिपुर में. उस वक्त प्रॉब्लम चल रही थी और मैं वैसे. भी बहुत ही पतला गंजा था सावरकर जी के रोल. में तो मैंने कहा यार शादी की फोटो तो. अच्छी आनी चाहिए बाल उगने दे थोड़ा खाने. पीने दे तो फिर उस वक्त मणिपुर में.
प्रॉब्लम काफी चल रही थी तो फिर बोला कि. शादी कहां करेंगे? तो मैंने कहा यार देखो. शादी तो लड़की के घर जाके ही होती है और. मैं चाहता था कि अपनी बीवी के परिवार को. उनके कल्चर को मैं एक सलूट करूं एक इज्जत. दूं। तो वहां जाकर शादी हुई और वहां पर. बहुत लोगों ने एक तो हमारे सीनियर ही थे. आर्मी में ब्रिगेडियर इशदीप सांगवान जो कि. वहां पोस्टेड थे आसाम राइफलल्स में तो.
उन्होंने भी काफी मदद की हमारी उन्हीं के. पास जाके हम रहे क्योंकि बोले कि बाहर. होटल होटल में रहोगे तो कुछ प्रॉब्लम हो. जाएगी और मेरी शादी में बहुत सिक्योरिटी. बहुत थी हमारी जगह सिक्योरिटी के अंडर ही. जाते थे। मेरी शादी में सिक्योरिटी पर्सनल. ज्यादा थे हम और बाराती कम थे। यहां से तो. बाराती हम 10 ही लोग गए थे क्योंकि उनके. ऊपर भी क्यों बर्डन डाला और फिर ज्यादा. माहौल भी ऐसा था तो ज्यादा धूमधाम से हमने. करने हमने एक्चुअली धूमधाम से करने की. कोशिश की नहीं थी। बहुत ही सिंपल सी.
सेरेमनी थी। हम और वो ऐसी लोगों की फैंसी. पकड़ गई वो। वहां पे तो इंटरनेट भी नहीं. था। बाद में हमें पता चला हमारी शादी लाइव. चल रही थी। भैया यह किसने जुगाड़ किया? तो. जब वो हुआ तो फिर वो जब तस्वीरें बाहर आई. तो एकदम से एक नया प्यार उमड़ के आया. मणिपुर के कल्चर की तरफ मेरी बीवी की तरफ. मेरी तरफ कि भैया ये बहुत ही एक. हिंदुस्तानी तरीके से शादी की बॉलीवुड में. होने के बावजूद और जो कि सिर्फ एक पंजाबी.
वेडिंग नहीं थी तो उससे बहुत सराहना मिली. बहुत आशीर्वाद मिला बहुत लोगों ने उसको. किया तो देखो हिंदुस्तान का आदमी क्यूरियस. होता है हम और इधर अपने दिल्ली हरियाणा का. आदमी आदमी और क्यूरियस होता है। अब आदमी. सवाल पूछ रहा है कि भाई हरियाणवी और. मणिपुर में हम क्या सिमिलरिटी है? क्या. डिफरेंसेस है? थोड़ा बताओ। क्या दामाद हो. मणिपुर के? देश के बेस्ट बॉक्सर इन्हीं दो. स्टेट से आते हैं। हमें लगता है कि हमारा. जब बच्चा होगा तो बॉक्सिंग ग्लव पहन के. पैदा होगा। नहीं काफी सिमिलरिटी है। वो भी.
काफी प्राउड लोग हैं। जैसे जाट होते हैं।. मैतई लोग बहुत प्राउड लोग हैं। अपने कल्चर. में उसमें उनके ट्राइबल गॉड्स भी हैं। और. जब उनके पुराने राजा ने. जब वैष्णविज़्म की तरह हिंदूइज़्म की तरह जब. रुख किया था तो वो. हमारे हिंदू ट्रेडिशंस को वो और भी ज्यादा. फॉलो करते हम और वहां पे जैसे होली होगी. तो वहां पे स्पोर्ट्स होंगे और कल्चरल. प्रोग्राम्स होंगे। वो रंग वंग इतना नहीं.
लगाते। हर चीज में उनका एक एक सहज और एक. बहुत ही डीप रूटेड कल्चरल वो रहता है।. भाभी से मिले कैसे थे? अम मैं प्ले कर रहा. था तो वो आई थी प्ले में हेल्प वेल्प. करने। तो वहां पे पहली बार मुलाकात हुई।. फिर सालों साल होती रही। मिलते रहे. बिछड़ते रहे। हम फिर कोविड के दौरान हम. लोग साथ रहने लगे और उसके बाद फिर वो एक. अंडरस्टैंडिंग हो गई एक जो आजकल के मॉडर्न.
उसमें कि भाई साथ रह के देख लो लिव इन लिव. इन तो वो हुआ उसके बाद फिर हमने ब्याह. किया तो जब भाभी को हरियाणा लेके आए भाभी. को उसको तो मैं शादी के बाद हरियाणा जाने. का मौका ही नहीं मिला कभी लाए ही नहीं ना. मणिपुर जाने का मौका मिला ना हरियाणा जाने. का शादी से पहले मुझे लगता है वो भी एक. अपने में किस्सा होगा जब हरियाणा लाओगे आप. और सब मिलने आएंगे नहीं उससे पहले शादी से. पहले मैं खालसा एड के लिए काफी काम करता. था। तो हमें कहीं जाना था दोनों ने तो हम.
खालसा एड पे मैं उसको भी साथ में ले गया।. तो पंजाब में जब फ्लड्स आई थी तो रिलीफ. वर्क के लिए मैंने उसको भी साथ रखा अपने. कहा चलो करके देखो तुम भी सेवा करो और. हमने मणिपुर में भी काफी जब कोविड के. दौरान काफी हेल्प करी थी। तो उसका भी सेवा. भाव बहुत अच्छा है। तो वहां ले गया तो. वहां से फिर हमें एक दिन का ब्रेक मिल. गया। तो मैं कहा चल तेरे को गांव ले चलता. हूं। अब वो जींसवं्स पहनी हुई थी। ये वो. मैं कहा यार गांव में तो ऐसे लेके जा नहीं. सकते तेरे को। तो हमने रास्ते में पानीपत. में रुके पानीपत में जाके एक स्टोर में.
से। मैं कहा तू अंदर जाए सलवार कुर्ता. सलवार कमीज और ये दुपट्टा वपट्टा खरीद के. ला और वहीं चेंज करके वैसे ही आना। हम तो. वो आई फिर उसने पल्लू कर लिया सर पे। तो. मैं कहा पल्लूवल्लू करके चल ऐसे नहीं मतलब. हमारा भी ट्रेडिशन है। हालांकि थोड़े से. कल्चर इज एग्रीकल्चर इज आवर कल्चर पर फिर. भी यार हमारे में कहा ऐसे नहीं जाएगी गांव. में। गांव में गई तो मेरी चाची वाची ने पल. निकाल दिया। बोलते हैं हम तो खुद दुखी हो. रहे हैं। इतने तू क्यों कर रही है? तो फिर.
वहां पे गए। गांव में गए। मेरे एक चाचा. गांव में रहते हैं। पहले उनके घर गए। फिर. दूसरे चाचा के यहां गए। फिर तीसरे चाचा के. यहां गए। कहा सबकी मिठाई लो। सबके घर. मिठाई दो। तो मिठाई फूलवूल घेवरवेवर हम ले. गए तो फिर सबको बहुत ही अच्छी लगी मेरे. चाचा लोग तीनों चाचा मेरे वो उनसे बॉम्बे. में मिल गए मिल चुके थे एक बारी तो. उन्होंने जो खानावाना बनाया उनके लिए बड़े. बड़े खुश हुए तो उनको कोई झिझक नहीं थी. किसी भी तरह की कोई जिंदगी आपकी आसान हो.
गई जिंदगी मेरी आसान हो गई वो तो सब तो. यही इसी बात से खुश थे कि भाई सत्तू का. ब्याह तो हो रहा है. अच्छा है दामाद लेके नहीं आए बहू लेके आया. सारी जिंदगी गए. नहीं ये भी अच्छा है ना दामाद लेके नहीं. आया वो भी लेके आया है हां ये भी अच्छा है. आजकल तो ये भी चलता है ठीक है मैंने प्यार. मोहब्बत में कुछ क्वेश्चंस रखे हैं मर्डर. 3 जिस्म 2 रगरसिया में ऑन स्क्रीन खूब. रोमांस किया लेकिन कैमरे के पीछे वाला. रणदीप कितना रोमांटिक है अ मेरा. ना कहीं ना कहीं रोमांस मेरे काम के साथ.
ज्यादा हो गया हमेशा से. तो मैं इतना रोम रोमांटिकली इंक्लाइंड. नहीं हूं जो कि एक परिभाषा रोमांस की होती. है। फूल वूल ये वो उसमें तो मेरा कुछ. ज्यादा है नहीं। पर हां बिल्कुल मैं भी. इंसान हूं तो सब थोड़े आशिक तो होते ही. हैं। तो क्या सबसे बड़ा आशिकी वाला कांड. किया? अरे भाई ढके ढकाए ढोल धरे हैं उन्हें। ढके.
रहने दे।. अरे अब तो शायद बहुत बेवकूफियां की हैं. यार जिंदगी में। बहुत बेवकूफियां की पर वो. पर्सनल लेवल पे हैं और मेरा यही मानना है. कि जो चलो ठीक है। वैसे कुछ जेनिक. क्वेश्चन पूछ लेते हैं। प्यार एक ही बार. होता है या बार-बार होता है? प्यार. बार-बार होता है जिंदगी में बार-बार होता. है प्यार और एक ही इंसान से भी बार-बार. होता है। तो प्यार तो एक.
फ्लोटिंग मैकेनिज्म है। व्हाट इज लव फॉर. यू? लव. इज लुकिंग इन द सेम. डायरेक्शन नॉट एट ईच अदर. ओके. ब्यूटीफुल अब शादी जैसे हो गई हम क्या समझ. में आता है शादीशुदा जिंदगी का फार्मूला. क्या अच्छा है फार्मूला अच्छा यही है कि. घर पे सुख शांति रखनी चाहिए नहीं तो वो.
आपकी बारी बाकी रोजमर्रा की जिंदगी में. टेंशन क्रिएट कर देती है। तो थोड़ा सा. ख्याल रखना चाहिए। आप भी डरते हो बीवी से? डरते नहीं है. यार। नाराजगी ना रहे ज्यादा लड़ाई झगड़े. सबके इसी को डर कहते हैं। इसी को डर कहते. हैं। और इस डर के आगे ही जीत. है। जिंदगी में पैसा कितना जरूरी है? जिंदगी में मैंने कभी पैसे का. इतना लोभ किया नहीं। जैसे मैंने कहीं सुना. था कि आप जब किक कर रहे थे सलमान भाई के.
साथ तो सलमान भाई ने आपको ज्ञान दिया कि. पैसे बना लो बाद में काम आएगा। हां वो. पैसे बना लो बाद में काम आएगा। मुझे तो. काम काम में ही मैं इतना व्यस्त था कि वही. मेरी पूंजी बनी हुई थी। पर हां शादी से यह. बहुत फर्क पड़ा है कि मैं अब थोड़ा. रिस्पांसिबबली सोचने लग गया हूं। हालांकि. अभी भी घोड़े, कुत्ते, बिल्लियां ये वो इन. पे बहुत खर्चा रहता है। डर नहीं लगता. घोड़े बिक जाएंगे। नहीं नहीं घोड़े तो. हमने जब नहीं बेचे जब हमने गाड़ियां. माइक्रोवेव फ्रिज तक बेच दी थी। हमने तो.
तब भी घोड़े नहीं बेचे। सावरकर जी की. उसमें मैंने अपने घरवर जब दांव पे लगा. दिया था पर घोड़े नहीं बेचे। एक अरब लोगों. की एक कहावत होती है कि भगवान मुझे खर्चे. दे। ताकि मैं और मेहनत करूं और मैं और. कमाई करूं। वो यह नहीं बोलते कि बचत करो।. और खर्चे दो ताकि और वो। तो वो मेरा हमेशा. से सिलसिला रहा है। मैंने कभी अपने लाइफ. स्टाइल में कमी नहीं छोड़ी है। मैंने. जिंदगी अपनी पूरी जी है। हम और मैं कई बार.
मजाक में कहता हूं कि आई लॉस्ट ऑल माय मनी. ऑन स्लो हॉेज एंड फास्ट वमेन। पर वो भी एक. मजाक ही है। एक कहावत है। बट दिल की बात. निकल ही जाती है। कितना भी छुपाते रहो. कहीं ना कहीं। कहावतों में कहावतों में. आती है। बट की सच्चाई होती है। हां। बट. अ मुझे जब भी जितना पैसे की जरूरत पड़ी. है, मेरे पास वो आ गया है। मैंने कोई. संपत्ति नहीं जोड़ी है। तो पैसा क्या है. आपकी नजर में? पैसा यह है कि.
आप पैसे के लिए काम ना कर रहे हो। इतना. आपके पास होना चाहिए। आपको जैसे बहुत सारी. जिंदगी अ खर्चे और रेंट खानेपीने की जब. पहली तारीख आने वाली होती है उसमें निकल. गई क्योंकि काम मैंने एक तो कम किया ऊपर. से काम भी इतना चूज़ करके किया कि उसमें. कभी बारगेन नहीं कर पाए कि मुझे पैसे. ज्यादा चाहिए हम और हमेशा हर प्रोजेक्ट.
में मैं ही सबसे ज्यादा पैशनेट होता हूं. तो मेरे को ही पड़ी रहती है तो मुझे हमेशा. शॉर्ट एंड ऑफ द स्टिक मिलता है हम पर अभी. मुझे थोड़ा लगने लगा है कि मुझे कमाना. चाहिए और थोड़ा कुछ जोड़ना चाहिए। सही. कहते हैं। बीवी आने से इंसान बदल जाता है।. इंसान बदल जाता है और वह एक सेंस ऑफ. रिस्पांसिबिलिटी एक आने लग जाती है। अपने. लिए ही नहीं एक फैमिली बनानी है मुझे भी।. तो उनके आने वाले उनके लिए और इतनी लेट. उम्र में शादी हुई है तो और थोड़ा कुछ. छोड़ के जाना पड़ेगा क्योंकि हम तो पता.
नहीं कब चले जाएं। तो वो एक थोड़ी सी एक. सेंस ऑफ रिस्पांसिबिलिटी आई है। हाउ यू. बर्न विद कंगना. रानौत? इट्स इट्स. ओके।. आई आई वर्क्ड विद हर इन अ कपल ऑफ. मूवीस। एंड इट्स इट्स ओके। आई मीन इट्स. नॉट टू क्लोज। कभी-कभी बातचीत हो जाती है।. इनफैक्ट एक दिन मुझे सपना आया था जब. इंदिरा गांधी की उनकी पिक्चर आने वाली थी.
तो मुझे सपना आया कि मैं और वो दोनों. बच्चे हैं छोटे और आपस में बातें कर रहे. हैं। हम तो मैंने उसको भेजा था मैसेज तो. बोली बहुत स्वीट है यह वो कभी मिलेंगे पर. ऐसे कुछ ना मुलाकात का कभी मौका है और ना. ही कुछ ऐसा इत्तफाक ये सवाल मैंने इसलिए. पूछा क्योंकि 16 अप्रैल 2019 आपने आलिया. भट्ट को कोट करते हुए एक ट्वीट किया था. जिसमें किसी का नाम नहीं लिखा था बट यू. कोटेड कि आई एम ग्लैड दैट यू आर नॉट. लेटिंग द ओपिनियंस ऑफ वेरी ओकेजनल एक्टर्स.
और कंगना के बहुत सारे फैंस हैं जो आज छ. साल बाद भी उसको कोट करते हुए मुझे ये डाल. रहे थे कि आपने कंगना को इसके जरिए. क्रिटिसाइज किया था। मुझे नहीं पता आपने. इसमें किसी का नाम नहीं लिखा था। बट कंगना. के फैंस को यह लगता है कि आपने उन्हें. ओकेजनल एक्टर कहा था। हम ये कंगना के लिए. ट्वीट था। यह हां क्योंकि वह आलिया को. बहुत टारगेट कर रही थी और मेरा कंगना से. कोई बैर ना था ना है पर हाईवे की वजह से. हम जो वो छोटी आलिया थी उससे मेरा बहुत एक.
लगाव है उसको है नहीं है मुझे नहीं पता पर. मेरे को उस वीरा के लिए बहुत लगाव है तो. एक तो मुझे ये अच्छा नहीं लगता कि आप. अपना तूता बजाने के. किसी और को नीचा दिखाओ। वो मुझे बिल्कुल. अच्छा नहीं लगता। ना ही मैं करता हूं और. ना ही मुझे वह अच्छा लगता है। तो वह जब. मुझे लगा कि ऐसा हो रहा था उनकी बातचीत से.
मेरे साथ भी ऐसी अनफेयरनेस बहुत हुई है।. पर आदमी उसको पी जाता है। एक डिग्निटी. मेंटेन रखता है। तो वो जब नहीं हुआ तो और. जब वो ऐसे लगा मुझे तो ही मैंने इसको ये. ट्वीट किया था क्योंकि कोशिश सभी कर रहे. हैं। किसी के प्लेट में कम है, किसी के. ज़्यादा, किसी के पहले कम है, किसी के बाद. में कम है। तो, इसमें और कंगना एक बहुत. अच्छी एक्टर है। उसको ऐसी बातें शोभा नहीं. देती। ठीक है। मैंने आपकी कुछ मूवीज के.
नाम नोट किए हैं। उसमें से आपकी फेवरेट. कौन है? मैं दो-दो नाम बता आपको चूज़ करते. चलना पड़ेगा। ओके। सारी फेवरेट है यार। तू. बोल रहा है अभी कौन सा कौन सा बच्चा मेरा. फेवरेट है। वो किससे बोलेगा? फिर भी. ज्यादा फेवरेट एक मूवी में वंस अपॉन अ. टाइम इन मुंबई या साहब बीबी और गैंगस्टर।. साहब भी और गैंगस्टर गजब पिक्चर थी। मजा आ. गया था। इनफैक्ट दोनों किरदार जी शेरगिल. का भी और तो उसमें मेरा मन करता था जब. माही गिल. अपनी वैन में से मेकअप वेकअप करके बाहर.
आती थी तो मन करता था उनके कदमों में सर. पटक पटक के मर जाऊं। इतनी मुझे जहर. खूबसूरत लग रही थी। मुझे वो रानी साहिबा. से ऐसी मोहब्बत हो गई थी। माही गिल से. नहीं रानी साहिबा। समझ गया मैं। दोनों. किरदार साहब तीनों किरदार इनफैक्ट बहुत. अच्छे थे। जी जी बहुत अच्छे जमी वाज़. सुपर्ब. है जिमी शेरगिल मेरे बहुत पसंदीदा लोगों. और एक्टरों में से एक है। सुपर्ब सुपर्ब. ये फिल्म मतलब मुझे मैंने ऐसे सारे पार्ट. देखे और अभी भी मुझे अच्छी लगती है। बड़ी. बड़े अंडररेटेड फिल्म लगती है मुझे। जी.
साहबी गैंगस्टर। ओके। साहब बीबी गैंगस्टर. या मसून वेडिंग? ओ मसून वेडिंग क्योंकि वहां से मुझे एक. स्टार्ट मिला था। मसून वेडिंग या डी? डी वहां से मुझे इन एंड एज एक कैरेक्टर. क्योंकि आप छोटे से शहर में हो रोहतक में. यार हमने भी पोस्टर लगा रखे थे अपनी दीवार. में मैं कोई लोगों से हालांकि अपने आप को. अलग समझता था पर था नहीं तो वहां पे एक ही.
सपना होता था कि एक फिल्म इंडस्ट्री में. जाएंगे और कभी इन एंड एज पिक्चर करेंगे।. हम वो मेरी पहली हिंदी पिक्चर मतलब मानसून. वेडिंग तो फॉरेन प्रोडक्शन थी। पहली. पिक्चर में यह हो गया इन एंड एस। उसके बाद. मेरे को लगा कि अब मैं क्या करूं? इसके. ऊपर इसके कहां जाऊं? तो वह एक अलग मेरी. स्ट्रगल शुरू हुई थी। पर डी डी या. हाईवे. उ हाईवे बिकॉज़ वो ज्यादा लेयर्ड कैरेक्टर.
था और उसको उस समय तक. मैं और अपने रोलों रोल्स को जीने लगा था।. हाईवे या लाल रंग लाल रंग. लाल रंग लाल रंग इज माय सलूट टू हरियाणा. एंड अ सलूट टू माय क्लासमेट्स एंड. एवरीबॉडी इट्स बहुत ही एक मेरा और उसमें. जो अपनी अपनी बोली बोलने में जो मजा आया. ना वो क्या है मैं नहीं आ सकता भाई। लाल.
रंग या मैं और चार्ल्स? लाल रंग। ओके। लाल रंग या या लाल रंग के. अगेंस्ट तू कुछ भी पूछता रहे खत्म हो. जाएगी बात।. सरजीत अ. लाल रंग। इट्स अ बेटर मूवी। लाल रंग या. सावरकर? सावरकर सावरकर या.
एक्सट्रक्शन. उफ इंटरनेशनल प्रोजेक्ट या पहला अपना. प्रोजेक्ट. सावरकर सावरकर. व्हाई सावरकर इस सो स्पेशल फील बिकॉज़ मैन. मैंने वो लिखी है। मैंने वो डायरेक्ट की. है। अपना घर बेच के बनाई है। अपनी देह की. ऐसी तैसी कर ली है और इतने लोगों से मैं. लड़ा हूं उसके लिए एक एक विचारधारा से.
मैंने एक विचारधारा से मैंने कम्पीट किया. है। एक जो उसको ब्रिंग डाउन करने की उसकी. इतनी बड़ी जो एक साजिश सी हो गई थी कि. उसने फैक्ट चेकिंग फालतू की फैक्ट चेकिंग. जो लोगों ने की है जिसको मुझे रिसोंड करना. चाहिए था पर मुझे लगा डिग्निटी से चुप रहे. पिक्चर अपनी बात बोलेगी आज नहीं तो कल तो. इसीलिए उसमें मेरी इन्वॉल्वमेंट ज्यादा. है। उसमें मेरा मतलब जी जान माल खाल सब. लगा हुआ है। ओके। घर में हरियाणवी फूड.
बनता है या मणिपुरी? ओ. [संगीत]. अ घर में तो हर तरह का ही खाना बनता है।. पर कौन सा? हां। पर मुझे मणिपुरी खाना. बहुत अच्छा लगता है। मेरी वाइफ ने एक किचन. भी खोला है। मणिपुरी फूड का नॉर्थ ईस्टर्न. मणिपुरी फूड मिक्स। अखोई करके बहुत अच्छा. चल रहा है। मैं वहां से काफी ऑर्डर कर. लेता. हूं। अगर किसी लिविंग या डेड डायरेक्टर के. साथ काम करना हो वो कौन सा होगा?
ओ ओ. ओ क्रिस्टफर. नोलन पॉल थॉमस. एंडरसन राज खोसला. साहब संदीप वगा.
विशाल. भारद्वाज और बहुत से हैं मार्टिन कोसेजी।. ओके कोई एक ऐसी बॉलीवुड या हॉलीवुड फिल्म. रिलीज्ड जिसमें आपको लगता है यार ये. किरदार मुझे लग मिलता तो और मैं मजा बांध. लेता।. देखो ऐसे असफजाई ख्वाल ज्यादा करने नहीं. चाहिए। फिर भी आता है ना आदमी इमेजिन कर. लेता है। जैसे मैं उदित जी को सुन रहा था।. वो कई सारे गानों को इमेजिन कर लेते हैं. अपनी आवाज में। में तो आई एम श्योर एज एन.
एक्टर आप भी इमेजिन करते होंगे कि यार ये. किरदार यहां मैं फिट बैठता और मैं जान डाल. देता। ऐसा नहीं है। ठीक है। हॉर्स राइडिंग. या हार्ड ब्रेक कहां ज्यादा गिरे. हो? गिरता तो आदमी इश्क पे ही है। इश्क. में ही है। तो पर गिरते से सवार ही मैदान. जंग में वो तिफिल क्या गिरे जो घुटनों के. बल चले और दोनों पे घोड़े पे ही सवार रहते. हो। शादी से पहले कितने हार्ट बैक जरूरी. है? डिपेंड करता है आपकी उम्र कितनी है। 45 पे.
अगर शादी हो तो कितने हार्ट ब्रेक होते. हैं। हां हार्ट ब्रेक तो है काफी शुरू-शुर. की जिंदगी में ज्यादा थे। हम. अ अगर एक दिन के लिए सलमान खान बन गए तो. पहला काम क्या करोगे? अ डायरेक्टर की सुनूंगा।. [हंसी]. किसी एक्टर से कभी कहा कि भाई तू. स्क्रिप्ट छोड़ दे खेती कर ले।. नहीं नाम बताने का कभी ऐसा थॉट आया किसी.
एक्टर को लेके चलो नाम मत बताना नहीं यार. सब अपनीपनी कोशिश कर रहे हैं कोई किसी का. कम कोशिश होती है किसी का ज्यादा होता है. और एक्टर भी ना. मतलब कम ऐसे एक्टर होते हैं जो हर रोल में. अच्छे होते हैं। तीन चीजें जो हरियाणवी. रोमांस में होती है।. लाड देखभाल जिम्मेदारी. थोड़ा हिंदी में एक्सप्लेन कर दो हम तो. समझ गए लेकिन कई सारे होंगे जो ना समझ पाए.
हां हरियाणवी में प्यार ना लाड मतलब दुलार. लाड मतलब पुचकारना पुचकारना क्योंकि अभी. होने लगा है अभी थोड़े क्या हर जगह लोग. मॉडर्न हो रहे हैं तो अभी भी अब थोड़ा सा. मतलब बाबू सोना का ये हरियाणवी वर्जन है. बाबू सोना का हरियाणवी वर्जन आ रही. हरियाणा में इतना प्यारव्यार का कल्चर इज. आई मीन अब तो बहुत बदल गया है यार अब तो. सभी लोग एक ही समतल हो गए हैं सोशल मीडिया. से और सबसे एक जगह आगे पर हमने तो कभी ऐसे.
देखा नहीं बचपन में कोई ज्यादा प्यार का. इजहार करते कभी ऐसा नहीं हुआ कि भाभी से. आप प्यार से कुछ कहते तो उन्होंने कहा. गुस्सा क्यों कर रहे हो आपने कहा नहीं. नहीं ये तो मेरी भाषा है नहीं हरियाणवी. हरियाणवी आपस में होंगे तो अच्छा इससे अली. के साथ नहीं उसको पता है उसको तो उसको तो. ह्यूमर भी वो भी बहुत थोड़ी हरियाणवी होती. जा रही. सुपर्ब अ सबसे अजीब अफवाह अपने बारे में. क्या सुनी. अफवाह हम क्या.
सुनी कि आई एम डिफिकल्ट टू वर्क विद. ओके सबसे बड़ी अफवाह है वो ऐसा मैं कभी ना. था ना हूं शुरू शुरू में यारी दोस्ती में. काम करते थे तो हमारी जो डायरेक्टर के साथ. बैठ बातचीत होती है ये होती है तो सेट पे. भी तू तड़ा के ये वो थोड़ा बात करने में ही. गाली आती है क्योंकि गाली नहीं दे रहे हो. तुम जैसे गाली वाली है तो बाकी लोगों को. ऐसा लगता था और उस वक्त असिस्टेंट. डायरेक्टर वगैरह जो आते थे वैन में हम मैं.
तैयार हो रहा हूं और मैं कभी लेट नहीं. होता. हूं तैयार होने में सेटवेट पे पहुंचने में. शुरू से ही मैं एक डिसिप्लिन रखा है तो. उसमें वो बार-बार आके कि सर रेडी है सर. रेडी सर तो मैं कहा इधर खोल दरवाजा कैचे. इतने तो उनको थोड़ा डांट धमका दिया करते।. उसकी वजह से एक ये बात फैल गई। आप किसी भी. डायरेक्टर से मेरे आप बात कर लो। आई एम. एक्चुअली द बेस्ट असिस्टेंट डायरेक्टर दे. कैन हैव। और डायरेक्शन के बाद तो मैं और. भी समझने लगा हूं। तो मोस्ट डिफिकल्ट टू.
वेरी डिफिकल्ट टू वर्क विद इज द बिगेस्ट. फॉलेसी अबाउट माय परसेप्शन। मगर मान लो. किसी फिल्म में आप हीरोइन बनते हो। हीरोइन. बनते हो तो हीरो किसे चुनोगे? हीरोइनें हीरो नहीं चुनती। हीरो हीरोइन. चुनते. हैं और मैंने तो आज तक वो भी नहीं किया. यार जो भी है भैया डायरेक्टर के साथ काम. करना है ना मैं किसी को रिकमेंड कर पाया. हूं ना कुछ क्योंकि वो अगर काम ठीक नहीं. किया तो डायरेक्टर मेरी तरफ देखेगा हां. भाई तूने बोला था तो मेरा उसमें कोई कभी.
योगदान ना रहा है और ना ही मुझे उसमें. इंटरेस्ट है मैं अपना रोल और अच्छे से कर. पाऊं उतना ही बहुत है। जिस्म 2, मर्डर 3. या रंग रसिया ज्यादा रोमांस में कहां मजा. आया? ऑन स्क्रीन. रंगस्या उसने तो उन्होंने तो उस लड़की को. देवी बना दिया था. यार रंगरसिया इज द मोस्ट रोमांटिक आउट ऑफ. द थ्री ब्यूटीफुल व्हाट इज द मोस्ट.
डेयरिंग थिंग यू हैव डन. चोस द पाथ ऑफ बिकमिंग एन एक्टर बिकॉज़. हमारे दूर-दूर तक फैमिली में था नहीं. हरियाणा में अब तो खैर काफी चीजें बदल गई. हैं। उस वक्त भांडगिरी ही बोली जाती थी।. एक्सक्ट्ली यही पूछना तो हमारे यूपी बिहार. हरियाणा इधर थोड़ा सा है। हां तो क्या नाच. गा रहे हो? क्या भांडगिरी कर रहे हो? तो. वो सबसे डिफिकल्ट डिसीजन वही था। पर मैं. एक्टर ऐसे ही नहीं बन गया हूं कि मैं.
एक्सीडेंटली ये बन गया हूं। मैं बचपन से. स्कूल में स्पोर्ट स्कूल राय का पढ़ा हुआ. हूं मैं। उसका एमएनएसएस राय मोतीलाल नेहरू. स्कूल और स्पोर्ट्स राय का पढ़ा हुआ हूं. मैं। तो वहां पे हमारा बहुत ही बड़ा. ड्रामेटिक्स डिपार्टमेंट होता था। उसमें. एक हेललेन लुईस करके हमारे एक टीचर होते. थे अंग्रेजी के जो कि बहुत बड़े-बड़े. प्लेस करते थे। ऐसे प्लेस करते थे कि. स्टेज पे घोड़े आते थे। हम्म। घोड़े आपकी. जिंदगी में हर तरफ चलते हैं। मोहब्बत में. घोड़ा है, घर में घोड़ा है, पिक्चर में हम. भी घोड़े पे ही बैठे हैं। तो.
वो वहां पे उनको हालांकि मुझे प्लेस से. निकाल देते थे। वो कि बोलते थे कि यू आर अ. डिस्ट्रैक्शन फॉर द गर्ल्स। अ और मुझे. काफी स्पीकिंग पार्ट्स थे जो वो नहीं कोई. और डायरेक्ट करता था डिमोट कर दिया जाता. था पर मेरी बहन बहुत अच्छी एक्ट्रेस थी. जिसको मैडम कामा जो प्ले कर रही हैं. सावरकर में वो मेरी बहन है तो उनको देख के. मैंने एक्टिंग सीखी थी और मैं नौवीं दसवीं. तक तो खुद के प्ले डायरेक्ट करने लग गया. था। तो मैं एक्टिंग से और इस चीज से बहुत. बचपन से जुड़ा हुआ था। पर फिर मैं डीपीएस.
आर केपुरम में जब आया पढ़ने यहां पे सिर्फ. पढ़ाई पढ़ाई पढ़ाई किताबी कीड़े वाला एक. सिस्टम था। तो यहां पर तो मैंने पढ़ाई. छोड़ ही थी। कैसे मेरी 12वीं हुई है मैं. ही जानता हूं। कंपार्टमेंट आया था. केमिस्ट्री में। केमिस्ट्री में. कंपार्टमेंट आया था। लो तो वो सब तो वो एक. अलग ही बन गई। पर फिर मैं ऑस्ट्रेलिया चला. गया। ऑस्ट्रेलिया जाके मैंने पांच छ साल. मैं वहां रहा। वहां पे मैंने नाइडा के लिए. कोशिश की नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ़ ड्रामेटिक. आर्ट्स कि भैया ट्राई करता हूं। और यह भी. एक किस्सा है। ऑस्ट्रेलिया में जब जा रहा.
था तो मैंने अपने बेस्ट फ्रेंड संदीप. पुनिया को ही बताया था। जाने से पहले हमने. एक दो बियरवियर मारी तो मैंने उसको बोला. कि पता है मेलगिसन कौन है? बोलता नहीं मैं. कहा एक पिक्चर आई थी मैडम मैक्स बोलता है. वो ऑस्ट्रेलिया का है। हॉलीवुड में काम कर. रहा है। तो मैं भी वहां से जाके ऐसे. करूंगा। ये छूताछूता सा मेरा एक सपना सा. था। वहां गया तो फिर वहां पे पढ़ाई. टैक्सियों वेटरी भांडे घसने में टाइम निकल. गया। फिर मैंने नायडा के लिए अप्लाई किया.
और उसमें तीन स्टेजेस होती हैं।. तीन आपको ऑडिशंस करनी होती हैं। तो हजारों. लोग आते हैं तो उसमें पहली दो ऑडिशन तो. मैंने फिर भी की थी। तो जब अगर आप लाइन. भूल जाते हो तो आपको ये करना होता है। फिर. आपको कोई बैठा होता है लाइन देने वाला तो. पहली दो ऑडिशन की मस्ती मस्त मौला है। हो. गया तो लास्ट के कुछ 30 35 लोगों में आ. गए। तो वहां पे जब मैं तीसरा वाला पार्ट. ही याद नहीं किया था तो मैं बार-बार ऐसे. ऐसे ऐसे कर ये यही यही थी मेरी ऑडिशन। तो. वहां पे जो तीन इंस्ट्रक्टर बैठे थे.
उन्होंने मुझे बुलाया और बोले ये भी एक. मेरे ख्याल से कहीं मेरे जेहन में है।. उन्होंने बोला कि. टैलेंट इज वर्थलेस विदाउट. प्रिपरेशन। गेट योर हेड राइट एंड ट्राई. अगेन। आई नेवर वेंट. बैक। ये मेरे साथ हुआ था वहां पे। इसका. इंपैक्ट कितना रहा? आई गेस देख रहे हो आप।. इंपैक्ट है, इंपैक्ट ही इंपैक्ट है। ऐसी. बहुत छोटी-छोटी चीजें हैं जो आपके जेहन.
में रह जाती हैं जो कि आप अच्छा थप्पड़. जरूरी होते हैं ना कई बार। हां यार आजकल. तो बच्चों की परवरिश में थप्पड़ ही नहीं. मारते। पता नहीं. क्या? हमारे भी कभी नहीं मारे। पेरेंट्स. ने कभी हाथ नहीं उठाया। पर हमने टीचर. कूटते थे। हॉस्टल में टीचरों ने बहुत मेरे. को तो एक बारी ऐसा कूटा था। हमारे स्विंग. स्विमिंग कोच होते थे चिकारा साहब। उनकी. डेथ हो गई। काफी पहले ही डेथ हो गई थी। एक. ट्रेन में उनका मर्डर हो गया. था। तो तो मैं स्पोर्ट स्कूल में गया तो. मैं मकरा था। मैं नानी के पास रहता था सॉस.
परामटे मक्खन खाने वाला और वहां पे लाड. प्यार में और वहां पे मोस्टली टीचरों के. और गांवों के लड़के आते थे। तो उसमें फिर. जब मैं गया वहां पे तो आपको शुरू के एक. साल आप एक स्पोर्ट्स चूज़ कर सकते हो।. सेकंड ईयर से जब आपका फोर्थ में गया था. मैं तो फिफ्थ से आपको आपकी कैपेबिलिटी. आपका इंटरेस्ट यह सब ध्यान में रखते हुए. आपको एक स्पोर्ट्स में डाला जाता है। फिर. आप वही स्पोर्ट खेलते हो 12वीं तक तो गया.
तो क्रिकेट में कोच नहीं था। वहां पे सब. अपना ऐसे ही घूम टहल के आ गए सुबह शाम तो. मैंने क्रिकेट ले लिया। मकरा था मैं। तो. क्रिकेट से फिर जब एक साल निकल गया।. क्रिकेट में भी मैं कुछ नहीं कर पाया। वो. ठंड में जब लेदर की बॉल लगती थी हाथ में. मैं कहा यार मेरे बस की नहीं है। फिर जब. फिफ्थ में जब लाइन में हम खड़े हुए थे तो. मैं तो फिर क्रिकेट के चक्कर में था।. मैंने ऑप्शन इंटरेस्ट दिखा दिया था। कौन. आपके स्पोर्टिंग हीरोज़ हैं उनमें नाम लिख. दिए थे। कपिल देव कपिल देव ये वो तो इतने.
लाइन में खड़े थे तो मेरी बहन आ गई।. स्विमिंग कोच के साथ ऐसे-ऐसे देख रही है।. मैंने कहा मेरे मैं तो नीचे पौधों वधों के. पीछे जाके छुप गया। मैं कहा मेरे को. पकड़ेगी। आई पौधे हटाए ये रहा ये रहा तो. मेरे को खड़ा किया उन्होंने ऐसे-से घुमा. फिरा के देखा और बोला चलो ठीक है स्विमिंग. में नाम डाल दो अब स्विमिंग का सबसे बड़ी. सबसे बड़ा रगड़ा स्विमिंग का लगता था. स्विमिंग स्टैमिना में सबसे आगे स्पॉट है. तो उसमें भगाते भी थे सुबह दो-द घंटा. एक्सरसाइज ये वो शाम को स्विमिंग में.
पेलते थे तो मैं उससे बहुत दुखी हो गया तो. मैं बीमार होने का बहाना करके स्पेशली. सर्दियों में सर्दियों में स्विमिंग नहीं. करते थे सर्दियों में तो मतलब रगड़ाई चलती. थी. तो मैं बीमारी का बहाना करके कि बीमार. हूं। मैं अक्सर मकरी मार जाता था और. अटेंडेंस के बाद वापस आके हॉस्टल में सो. जाता था। तो एक दिन मेरी रजाई. निकली और शिकारा साहब खड़े हैं ऊपर।. उन्होंने पकड़ी मेरी गुद्दी। पहले तो मेरा. घोंसा मारा। इतना जोर से मेरा नाक वक फूट.
गया। बोला तेरा हट। फिर मुझे साइकिल पे वो. थे। डंडा मार मार के भगाते भगाते मेरे. नकसीर निकल रही है। भगाते भगाते वहां लेके. गए और मेरे को पूरी एक्सरसाइज कराई। तो वो. मेरी मेरे ख्याल से सबसे बड़ी बीटिंग थी. बाय टीचर। इमेजिन नहीं कर सकते आजकल के. बच्चों के साथ ये। नहीं नहीं केस हो जाएगा. जेल पहुंच जाएगा। पर मैं फिर सुधर सुधरा. भी काफी। पर फिर मैं एक पॉइंट के बाद फिर. मुझे एक्चुअली तकलीफ थी मुझे ब्रोंकाइटिस. की। मुझे क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस रहता था।.
वहां पे बोले मकरी मार रहा है। ये कर रहा. है वो कर रहा है। पानी से मुझे और. प्रॉब्लम हो जाती थी। वो क्लोरीन के पानी. से मेरा पेट फूल जाता था। तो कोई उस बात. पे ध्यान नहीं देता था। तो इसलिए मैं. थोड़ा और भी कटता था। ऐसा नहीं था। मैंने. बनाया था कि ठीक है मेरी बहन करती। मैं भी. करके. दिखाऊंगा। फिर हमारे स्कूल में हॉर्स. राइडिंग इंट्रोड्यूस हुई तो फिर घोड़ों की. तरफ हम खींचे चढ़। नहीं घोड़ों पे चल रही. है। अच्छा क्रिकेट का क्योंकि आपने कई बार. जिक्र किया। किसी ने मुझसे कहा था कि पूछ. ले आपसे कि ये सीएसके के दीपक हुड्डा आपके. भाई भाई तो नहीं है? नहीं भाई नहीं है।. गुवांडी है। कल ही मुझे मिले थे जनरल.
हुड्डा साहब इंपीरियल होटल में। तो उनसे. भी बातचीत हुई। तो कह रहे थे आजकल फॉर्म. बड़ी खराब चल रही है। चेन्नई वाले हार रहे. हैं तो दीपक हुड्डा से कहो ना जोर लगाए।. हां लगाएगा जोर लगाएगा दीपक हुड्डा।. हुड्डा है कुछ ना कुछ तो करेगा ही। आईपीएल. देखते हो? आईपीएल मैं देखता हूं इस बार ही. थोड़ा सा मैं कम रहा हूं क्योंकि शूटिंग. और प्रमोशन और ये वो काफी ठीक है। वैसे. कैसे सपोर्ट करते हो किस टीम कोl को? अ मैं कोई पकड़ नहीं पाया हूं टीम। चलो दो. फेवरेट बता दो। दो फेवरेट तो सीएसके और.
मुंबई। मुंबई इंडियंस। हां।. क्योंकि बॉम्बे में रहते हैं। फिर मुझे. दिल्ली की तरफ सॉफ्ट कॉर्नर बहुत ज्यादा. रहता है। तो वह था पंत जब दिल्ली का. कैप्टन था। सहवाग था जब वहां पे तो वहां. पे रहते थे। प्लेयर्स अच्छे लगते हैं।. जैसे सहवाग मेरा बहुत फेवरेट प्लेयर होता. था। हरियाणा हरियाणवी भी है और आदमी भी. अच्छा है और सब कुछ है। फिर सहवाग धोनी. कोहली लेटर देन ये सब प्लेयर्स मेरे को. बहुत अच्छे लगते थे। तो प्लेयर्स को आप. ज्यादा फॉलो करते हो जो इंडियन प्लेयर्स. होते हैं। फिर बाहर के बहुत अच्छे-अच्छे.
प्लेयर्स होते हैं। तो इंडिविजुअल. परफॉर्मेंससेस पे और जो एक कंपटीशन बनता. है जो एक रोमांस बनता है एक एक वो बनता है. कि इतनी बॉल पे इतने तो वो इफेक्ट मेरे. लिए ज्यादा है। कौन सी टीम हारे जीते उससे. मुझे ज्यादा वो नहीं लग रहा। फिर चलो अगर. एक टीम को कहना हो कि इस साल आई फिर जीत. जाए। अरे यार ये आरसीबी वालों को जिताओ।. इस साल जीत जाएंगे भाई। जिताओ यार। सीएसके. को 17 साल बाद घर जाके हराया।. केकेआर को 3 साल बाद घर जाके हराया। कल. मुंबई को 10 साल बाद गजा के घर पे हराया।. हां कल का देखा था मैंने थोड़ा बहुत.
बढ़िया था। तो इस साल इस साला कप नाम दूं? हां नहीं दो यार मतलब कोहली एक्चुअली. डिर्व्स दैट यार। 188 उसका नंबर भी 18वा. साल भी उनकी टीम एबी डिविलियर्स फैफ. डुप्लेसी वगैरह उनकी बहुत अच्छी टीम होती. थी। उनको मैं आरसीबी को मैं भी आरसीबी को. भी फॉलो करता था। पर उनको कभी मिला ही. नहीं। तो इस बार तो वैसे ही दे देना. चाहिए। विराट कोहली की टीम को। हां दे दो. इनको यार। लॉक कर दे आरसीबी। आरसीबी लॉक. करोगे। चलो मैंने ना सुना आपकी आवाज बड़ी. अच्छी गाते बड़ा अच्छा हो आप। किसने बताया. भाई? नहीं। अभी आप आते ही आपने गुनगुनाया.
था। देखिए मैं गाता अच्छा नहीं हूं पर. मुझे गाना गुनगुनाना अच्छा लगता है। और ये. इसके और मेरे एक बार एक्चुअली ये मैं अभी. अभी करने लगा हूं कुछ टाइम से। जब मेरे को. मूड-वूड में आना होता है या कुछ करना होता. है तो मैं करता हूं क्योंकि ये चीज मैंने. पानी पी के चाय पी के मूड आता है या कुछ. मंगाए? नहीं नहीं वो तो मूड इतनी जल्दी. नहीं भाई।. तो. तो मैंने सहवाग से एक बार मैं जाके मिला. था। बॉम्बे में टेस्ट मैच हुआ था। पहली. बार ही मिला था। उससे ही गव मी ह बैट.
आल्सो। नाइस।. तो तब मैंने पूछा मैंने कहा यार तो सबसे. बड़े स्कोर तुम्हारे सबसे जल्दी भी तुम. आउट होते हो। तो क्या मतलब कैसे इक्वेशन. कैसे बनाए? क्या क्या सोचें? तो बोला भाई. जी मैं ना मैं मेरे साथ ऐसा होता है यू नो. मैं या तो फ्यूचर में चला जाता हूं या. पास्ट में मगर यार सबके साथ ही ऐसा होता. है। मैंने पिछली बॉल के बारे में सोचूंगा. तो अगली बॉल खराब हो जाएगी। अगली बॉल के.
कैसी आएगी उसके बारे में सोचूंगा थोड़ा. बोलता मैंने एक टेक्निक बनाई है। मैंने. कहा क्या? बोला मैं गाना गाता. हूं। मैं गाना गाता हूं और गाना फिर उसने. गा के सुनाया। याद नहीं मुझे कौन सा अच्छा. नहीं गा रहा था। पर बोला मैं अच्छा गाने. की कोशिश करता हूं। मैं सारे टाइम उसको. ट्यून में गाने की कोशिश करता हूं। और मैं. वही दिमाग में मैं गाना ही गुनगुनाता रहता. हूं। और फिर ये रातें ये मौसम नदी का. किनारा पे शॉट है। तो मैं कंसंट्रेट गाने. पे कर रहा हूं और उसको मैं इंस्टिंक्ट से. खेल रहा हूं। तो ये पता नहीं क्यों मैं भी.
आजकल थोड़ा गुनगुनाने। अच्छा गुनगुना दो।. बड़ा अच्छा गुनगुनाया था आपने शुरू में।. क्या? ये रातें मौसम। अब मैं भाभी को. डेडिकेट कर दूंगा। मैं काट के उनके लिए. करवा दूंगा। आप मेरा सबसे बड़ा एक रीसेंट. मेथड एक्टिंग दो रोल थे मेरे एक कैट था हम. देखिए मैंने लोग कह रहे थे सीजन टू उसका. और इंस्पेक्टर अविनाश है क्यों नहीं आ रहा. कैट का तो पता नहीं क्यों नहीं आ रहा ये. वालों का अपना कुछ सिस्टम रहता है हालांकि. वो मेरा बहुत ही वो मेरी रिप्रेजेंटेशन थी. एक एक सिख रिप्रेजेंटेशन क्योंकि मैंने.
सारागढ़ी के लिए बहुत सिख रिलीजन पे और. सिख भावनाओं पे अपने आप को बहुत ढाला था।. एक सेवा भाव केशवेश काटने छोड़ दिए थे और. मैंने कसम खाई थी गुरु ग्रंथ साहिब के. सामने के क्योंकि मैं उसके पहले म्यूजियम. में चला गया। मैंने सुना तीन साल तक शायद. आपने दाढ़ी नहीं। हां तीन साल से मैं तो. एक्सट्रेक्शन भी छोड़ दी होती उसके चक्कर. में। हां मैंने सुना। तो फिर मेरे पिताजी. ने बोला कि नहीं वो आपको डर भी लग रहा था. कोई दाढ़ी ना काट जाए। आपकी दरवाजा बंद हो. गया। हां। उनको डर लगता था कि कहीं. खुदकुशी ना कर ले। क्योंकि बहुत ही.
डिप्रेसिंग हो गया था। तीन साल आपने लगाए. इतनी शिद्दत से वो जिस पर केसरी बन गई थी. हां उसके बाद केसरी बनी थी उस पे उसके. दौरान ही शुरू कर दी थी उन्होंने व्हिच. वाज़ इन बैड टेस्ट एनीवे तो वो भी है एक. दूसरा है मेरा इंस्पेक्टर अविनाश जो आपने. जिक्र किया उसमें जो मैंने मजा लिया है. उसमें जो मैंने वो बहुत ही मतलब. हिंदुस्तान का टॉप टू वॉच शोज़ में से है. और उसमें भी मेरा जैसे आप रियल लाइफ. कैरेक्टर्स की बात कर रहे थे तो मेरा. उसमें अविनाश इंस्पेक्टर अविनाश जो असली.
अविनाश मिश्रा जी उनसे मेरा बहुत प्रेम. लगाव है। मैंने पूरी सीरीज की साइन वाइन. कर ली थी। लास्ट के दो-तीन दिन में मैं. सोचा करूं क्या करूं क्या? तो उनसे हमारी. मुलाकात हुई। उनका बोलने का ढंग ही अलग. है। तो उस उसमें जो मुझे मजा उसमें जो. हमें मजा आया है वो किसी चीज में नहीं. आया। तो उनका जो एक एक बोलने का तरीका है. एक लखनवी और उनका एक लिस्ट है और ये है और. उनके से पर्सनालिटी हम नहीं वो कैरेन आपसे. नहीं बोलते। पर वो मुझे एक बहुत ही मेरी.
लाइफ में ये दोनों रोल बहुत ही बहुत जो कि. फिल्में नहीं थी और मैंने दो ही सीरीज की. है। मुझे सीरीज में इंटरेस्ट है नहीं. ज्यादा। बहुत लंबा काम है और अंत में वो. धारावाहिक ही निकलता है। हमें नहीं. इंटरेस्ट है उसमें।. तो वो तो उनमें मेरा जैसे कैट में मैंने. कहा था कि यार सिख का एक अलग ही वो बना. रखा है। सिंग इज किंग सिंग इज किंग ये वो. यार यार सरदार मैं कहा यार मैं तो सरदारों. को जानता हूं बचपन से ऐसे तो मैंने कोई.
नहीं. देखा कोई भी नहीं देखा सरदार तो ऐसे होते. हैं यार हंबल बिल्कुल हां जी हां जी हां. जी नहीं हो जाएगा जी हां जी तुसी लोड ना. ले सब ठीक है तो वो तो बहुत ही हंबल. [संगीत]. कल्चरर्ड मत ऊंची ते मन. नीमा वो जो उनकी अरदास है ना जो कि मैंने. सारागढ़ के लिए बहुत बोलता था मैं तो. मैंने उसमें से उठाना शुरू किया तब मैंने.
यह जो कैरेक्टर था उसमें क्या नाम था कैट. में गुरनाम तो वो किया तो तब मैंने उसको. एक उस मैंने कहा यार लेट्स रिप्रेजेंट द. सिख कम्युनिटी मेरे को क्यों लग रहा है कि. सारागढ़ रिलीज़ ना होना आपकी लाइफ के बड़े. रिग्रेट्स में से एक है बिल्कुल यार. बिल्कुल रिग्रेट्स में है ना यार तीन साल. आपने मेहनत की और वो पिक्चर की शूटिंग भी. शुरू हुई वो बस लालची लोगों के लालच की. वजह से नहीं बनी क्योंकि साथ में उसमें एक. ही एक मैं अकेला ही सिख था बाकी कोई सिख.
नहीं था उसमें इतनी मेहनत की यार मैंने. बहुत उसमें वो किया जो और मेरे लिए ही. नहीं जो 20 मेरे सिपाही थे कितनी शूट हो. गई थी फिल्म. 30-40% शूट हुई थी जो मेरे 20 पलटन में जो. थे मैंने उसमें हवलदार था मैं और जो मेरी. पलटन में नायब सूबेदार और ये बाकी जो. सिपाही थे उनके साथ मैंने कितना टाइम बता. बताया मैं उनकी एक्टिंग की वर्कशॉप्स लेता. था। उनको घुड़सवारी सिखाई। उनके साथ. मार्चिंग, तलवारबाजी, गन शूटिंग मेरा.
गुड़गांव में पोलो क्लब होता था। गुड़गांव. पोलो एंड एक्वस्टियन क्लब गोल्डन ग्रीन. गोल्फ कोस में तो वहां पे हम रात को पूरा. वो बना के कैसे गश्त पे जाएंगे। सिग्नलिंग. होगी। कैसे हम लोग राइडिंग ग्राउंड से हम. लोग स्टेबल्स जाते थे। स्टेबल्स पे जैसे. तो अटैक करना है। तो फॉरमेशंस हमने. इनफेंट्री का एक आदमी हमारी हेल्प करता था. तो उसमें बहुत ज्यादा आगे जाके और सिख. सेंटीमेंट को अपनाना आप लोगों ने केसरी से. पहले शूट किया था ना शूट से शुरू किया था.
हां हां हां अनाउंसमेंट के बाद उन्होंने. शूट किया था हां उन्होंने तो एनीवे आई वुड. हैव नॉट डन इट अगर कोई और बना रहा होता तो. मैं नहीं करता वो अ क्योंकि उनकी मेहनत. लगी हुई है तुम क्या कर रहे हो सो बट लेट. दैट बी तो उसमें एक सुरा सोच पहचानिए जो. लड़े दीन के हेत पुरजा पुरजा कट मरे कबू न. छे खेत जब पिक्चर का सेंटीमेंट और. कैरेक्टर का सेंट्रल थॉट ही यह है तो मैं. कैसे अबेंडन करता वो पिक्चर दैट इज व्हाट.
आई हैड एंबाइव्ड एंड आई हैड बिकम दैट बट. अल्टीमेटली जब वो अपने अंजाम तक पहुंचने. ही नहीं वाली थी तो और मतलब घर में पैसे. की किल्लत होने लगी थी मतलब काम ही नहीं. कर रहे थे 3 साल से उसके बीच में मैंने एक. पिक्चर की थी साजिद भाई की. बागी 1 2 3 4 10 आई डोंट नो व्हिच वन इट. वास बट वन ऑफ़. दोज़ तो वो मैंने की थी। अदरवाइज कुछ काम. ही नहीं किया। तो भाई घर भी चलाना है ये.
भी करना है। तो मैं गया किक टू भी आ रही. होगी। किक टू बोल तो रहे हैं आ रही है बट. पता नहीं कब आएगी। मैंने सुना उसकी. स्क्रिप्ट तो फाइनल हो गई है। मेरे यहां. एक राइटर साहब आए थे। तो वो कह रहे थे कि. पहले उनको लिखने कहा गया था। वो लिखे नहीं. बट किसी और ने लिख दी है। तो साजिद भाई ही. ज्यादा इन्वॉल्व रहते हैं उसमें। उन्होंने. बोला था बनाएंगे पर ऐसा कोई इंटिमेशन मेरे. को नहीं आया है कि मैं उसका हिस्सा हूं या. वो बन रही है या नहीं बन रही। उन्होंने. कहा था सोच रहे हैं बस इतने तक ही पता है।. मेरा गाना रह गया अभी मैं उसको बिना सुने. नहीं छोड़ने वाला।.
ये रातें ये मौसम नदी का किनारा ये चंचल. हवा. हम. हम कहा दो दिलों ने मिलकर कभी हम ना होंगे. जुदा ये रातें. ये मौसम नदी का.
किनारा ये चंचल हवा. पहली बारी ही मैंने कहीं गाना गाया है. लाइफ में पांच गाने बता दो आखरी में. जाते-जाते जो आपकी प्लेलिस्ट पे टॉप पे. रहता है। मैं जायज बहुत सुनता हूं।. तो जायज का तो मैं नहीं बोलता हूं। पर. हिंदी गानों में अ. एक तो ये मैंने बताया आज मौसम बड़ा बेईमान. है।. आजकल मैं वो बहुत सुनता हूं धर्म जी की.
पिक्चर का ना जा कहीं अब ना. जा. दिल के. सिवा. फिर कभी-कभी मेरे वो नहीं वो हां कभी-कभी. मेरे दिल में ख्याल आता है. और ये जो हल्का हल्का. ये तो ये तो शाम वाला गाना हो गया। हां ये. शाम में हमने बहुत भंडेलागिरी करी है इसको. सुन सुन के पांचवा पांचवा एक और रह गया.
क्या. अकल तो सुनता. हूं मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो मैं. पीता नहीं हूं पिलाई गई है रोज हाथ मरोड़. के कोई ना कोई. [हंसी]. ब्यूटीफुल हालांकि सरपजीत में गाने बहुत. अच्छे थे एक आपकी फिल्म आई थी काजल की. उसमें भी गाना बहुत अच्छा था हां वो गाने. तो खैर. मर्डर थ्री के गाने भी थे। सिस्टम टू के. गाने बहुत के गाने बहुत अच्छे थे। तो मुझे.
एक टाइम पे लगने लगा यार कि जब देवानंद जी. की डेथ हुई थी शायद क्या हुआ था के टीवी. वाले गाने सुना रहे थे। मतलब गाने चलते. हैं उनके। मैं कहा यार मैं मरूंगा। मेरे. तो गाने ही नहीं है। फिर मैंने थोड़ी ये. पिक्चरें की जिसमें कुछ तो है जो नींद आए. कम। फिर दर्द चाहे मेरे अर्जित का सॉन्ग. सरजीत का सर था। मर्डर थ्री मत आजमा रे।. लाल रंग के गाने बहुत लाल रंग के गाने. अच्छे हैं।. जो राधा ने पाया श्याम में जो सीता ने.
पाया राम में जाट में गाने मेरे जैसा ना. पावे गांव में जब बांधूंगा. मोड़ तेरे पे ना कर दूं खर्च करोड़ तेरे पे. बहुत अच्छा है ना स्लो वर्जन बहुत अच्छा. है फिर उसके अंदर वो भी था बावड़ी बूच के. दिल की दिल की हाथ थाम के सिल्की सिलकी. जाट में गाने है ना एक तो गाना है वो टच. किया जिसमें आपको नचाया चैट में नहीं यार. मेरा कैरेक्टर नाचता हुआ अच्छा नहीं लगता.
तो और दबंग में हमने छेदी सिंह को नाचते. देखा था हमें लगा क्या पता राणा तुंगा भी. नाचे नहीं भैया यहां पे छेदी सिंह नहीं है. यहां राणा राणा तंगा है राणा. तो या जाट में गाने एक मजा आएगा इमेजिन. करते हुए मेरा जट भी तो गाना है एक मेरा. जट है. फिर एक और है ना. ओ रामा ओ रामा इस लाइक लाइक ऑन अ टेक्नो. बीट लाइक रियली इट्स गुड इट्स गॉट गुड. म्यूजिक बैकग्राउंड म्यूजिक थमन ने किया. ये गाने भी थमन ने किए हैं इज़ अ बिग.
म्यूजिक डायरेक्टर इन द तेलुगु इंडस्ट्री. या आपने जैसे शुरू में एक कहा था कि मैं. टाइप कास्ट नहीं हुआ हम मैं आखिरी. क्वेश्चन ही समराइज करता हूं राणा तुंगा. में ऐसा क्या है जो रणदीप हुड्डा मैम नेम. अब तक नहीं देखा. निर्दयता. ओके. निर्दयता. वो ट्रेलर देखा मैंने जो ट्रॉली में लात. के ले जा रहे थे.
निर्दयता जो कि मेरे में नहीं है हर आदमी. के अंदर एक जानवर होता है जानवर होता है. पर वो हमारे पास एवन्यू है ना जानवर के ले. आउटलेट के अच्छा जैसे ये आपने कहा. निर्दयता अभी मैं अह कई एक्टर्स को सुनता. हूं कि कहते हैं यार किसी रोल में हम गए. थे उसमें हम चले गए तीन चार साल फिर दिमाग. से निकालना पड़ा घर पे ऐसे बिहेव कर मुझे. उन एक्टरों से मिलवा दो एक बारी। मैं यह. काम करता हूं और मैं आपको कहता हूं. के फॉर.
एग्जांपल मेथड एक्टिंग की ना एक्चुअली. लोगों ने ले रखी है। उसकी बात मतलब. हवाबाजी होती है टीवी के लिए। हवाबाजी. होती है। ऐसा कोई बड़े-बड़े एक्टर्स कहते. हैं कि हमने ये रोल किया यार कई दिन रहा।. घर पे आए ऐसा रहा। मुझे उन एक्टर से मिलवा. दो। पहली बात तो मैं एक्चुअली में यह करता. हूं और मैं आपको बता रहा हूं कि आपको आप. सेट पे जाते हो। आपका लंच ब्रेक होता है, आपका मेकअप होता है। आपका कॉल टाइम होता. है। आप एक शॉट देते हो। आपको एयरपोर्ट. जाना है। गाड़ी में से निकल गाड़ी में बैठ.
के एयरपोर्ट जाना है। तो आप एयरपोर्ट. थोड़ी जाते हो। कट होता है। दोबारा गाड़ी. आती है। ऐसा कोई वो एक अपने अंदर एक बहुत. ही पर्सनल वो चल रहा होता है जो कि. स्क्रीन पर दिखता है। आप उसमें कुछ भी. करते रहो। पहले तो मैं बहुत ज्यादा करता. था और स्क्रीन पर कम दिखता था क्योंकि. मुझे वह एप्लीकेशन नहीं आती थी एक्शन पर. करनी। अब मैं इतना मुझे ज्यादा करने की. जरूरत नहीं पड़ती पर मेरी एप्लीकेशन बढ़. गई है। तो ये रोल में खो जाना हो जाना मैं. खोता हूं पर उसमें खोना नहीं होता है वो.
वो आप जैसे फॉर एग्जांपल पंजाबी बोल रहे. तो पंजाबी अच्छी बोलो यार सरदार का रोल कर. रहे हो तो आपको उसकी आवभाव उनकी भावनाएं. उनके ग्रंथ. उनके उनकी सोच उनका सोशियोइकोनॉमिक स्टेटस. वो अंदर होना चाहिए एक्सेंट होते हैं बॉडी. होती है बॉडी लैंग्वेज होती है काफी चीज. होती हैं जिसकी आप प्रैक्टिस िस करते करनी. पड़ती है और उससे वह ऐसे उभर के आता है।.
उस प्रैक्टिस का. नाम मेथड बोला जा सकता है। पर अपना वो. दूसरों पे लादना मैं खो गया मैं ये हो. गया। कुछ नहीं यार तुम खाना खाते हो करते. हो बाहर जाते हो अपनी गाड़ी में जाते हो।. रेंज ओवर में बैठ के कैसे आ सकते हैं. सावरकर साहब? यू नो तो वो सब वो मेरे. ख्याल से मेरे ख्याल से इट्स अ वेरी. अब्यूज्ड टर्म। अब मतलब हिमांशु धुलिया भी. कह रहे थे कि सब एक्टर्स की हवाबाजी होती. है। सबसे आसान काम एक्टिंग होता है। अभी. कल उनका एक इंटरव्यू हिमांशु धुलिया भी. अपने आप को एक्टर ही समझते हैं। डायरेक्टर.
डायरेक्शन कम करने शुरू कर दिए उन्होंने।. डायरेक्शन करो यार तिशु भाई। उनके साथ. मैंने अपनी सबसे पसंदीदा फिल्म वन ऑफ द. मोस्ट लव्ड फिल्म्स की है। तो हवाबाजी. होती है। हवाबाजी मुझे लगता है। मैं इसके. बारे में इतना ज्यादा बोलता नहीं हूं. क्योंकि मुझे भी लगता है अगर ज्यादा. बोलूंगा तो हवाबाजी लगेगी। पर मैं करता. हूं और ये मेरे काम में दिखता है। बढ़िया. जाट साहब को जाट के लिए बधाई। थैंक यू. ब्रदर। थैंक यू। उम्मीद है कि फिर आपसे. किसी और फिल्म में मुलाकात होगी। बिल्कुल.
बिल्कुल मजा आया आपके साथ बात करके। तब तक. आपके शादी के अनुभव को हम और सीखेंगे। हां. और सीख के आएंगे और सहजता से बात करेंगे।. बाकी तो आप इंस्पिरेशन दे ही रहे। आपने 45. में की तो हम लोग भी घर वालों को कह सकते. हैं कि दो चार साल और टाल देंगे तो क्या. फर्क पड़ता? रणदीप भाई से। भैया एक मैं. एडवाइस देता हूं। मुझे अब जाके लग रहा है. क्योंकि मेरे क्लासमेट्स के बच्चे सब 2020. साल से ऊपर हो गए हैं। अब वो अपनी जिंदगी. एक अलग तरीके से जी रहे हैं और उनके बच्चे. उनके दोस्त हैं। तो लेट ज्यादा शादी या तो.
करो मत। करनी है तो कर डालो। वेट मत करो. उस बात की। ये मैं एडवाइस आपको दे रहा. हूं। खुद भुगत के दे रहा हूं। चलो फिर कर. लेते हैं। ठीक है।.
