Unplugged Lalu Prasad Yadav | Bihar | RJD | Early Life | Controversy| Nalin Verma| Shubhankar Mishra
जब पहली बार उनके घर पर हम गए थे, हमने. मुख्यमंत्री बनने के बाद ही उनके घर को. देखा. था। झोपड़ी था ये आदमी उसमें से निकल के. इतने बड़े नेता हो कैसे सकता है? बहुत. बड़ा आश्चर्य था। लालू जी को वो दूध बेचे? लालू जी भी दूध बेचे पहुंचाते थे। लालू जी. दूध? लालू जी मिमिक्री कर लेते थे। रील्स. को लोग चलाते रहते हैं जो पार्लियामेंट. में पुराना आप देखते हो। नहीं मिला है तो. नहीं मिलेगा पगली। तो नहीं मांगा गया था. तो नहीं मिलेगा पगली। वाजपेयी जी को आपको.
तो एक ही बार जवाहरलाल जी बोले थे कि पीएम. तो दोद बार हां दोद बार बन गए कब आप. छोड़िएगा तो कब छोड़िएगा सही बात है कई. लोगों में धारणा है कि लालू जी गवार की. तरह बात करते लालू जी की भाषा है भक भुरभ. उनका नेचुरल है वो बताया है उस भाषा को. उन्होंने मरने नहीं दिया लालू जी जब अपना. शुरुआत किए थे चीफ मिनिस्टर के तौर पर तो. वो प्यून क्वार्टर में रहते थे भाई के साथ. ही सच्चा है उसी में बहुत दिन तक जाते ही. नहीं मुख्यमंत्री बनने के बहुत दिनों के. बाद तक वो रहते थे। लालू जी का बयान था.
भूरा बाल साफ करो कि भूरा बाल साफ करो अपर. कास्ट को साफ करने के लिए था कि इनको. हटाकर नीचे से उठा दो। ये बहुत बड़ा. षड्यंत्र था। जब छप गया अखबार में चारा. घोटाले में लालू जी ने आपसे अंदर का बात. क्या किया? एलिमेंट ऑफ टूथ किसी में होगा. तो फर्डर स्कैम में हो सकता है। जंगल राज. क्या था? जंगल राज का एक्चुअल स्टोरी हम. बताते हैं। 1997 में राबड़ी जी. मुख्यमंत्री बनती है। उनको कुछ मालूम नहीं. था। कि लालू जी की बिटिया की शादी थी।.
पटना किसी शोरूम में गए और जितना गाड़ी था. सब निकाल लाए। उस समय लालू जी अपने जेल जा. रहे थे। आ रहे थे। शिल्पी जैन, पारस जैन. 23 साल की लड़की मिस पटना थी। उस लड़की को. उठवाया गया। लड़की बलात्कार हुआ। दोनों को. मार के डिग्गी में डाल दिया गया। पुलिस. प्रशासन जो था उसने तुरंत कहा कि सुसाइड. कर लिया। जबकि सबको पता था किसने मरवाया, कैसे मरवाया और उसमें साधु यादव का खासतौर. पर नाम आया था। जंगल राज की सबसे बड़ी जो. पराकाष्ठा बताई जाती है कि ऐसा जंगल राज. ये लोग अच्छे लोग नहीं थे। ये लोग कुछ भी.
कर सकते हैं। लालू जी पर एक ये भी बड़ा. एलगेशन आता है कि शबुद्दीन को उन्होंने. पालपस के रखा था। फ्री फुल हैंड फ्री देखा. था कि सारा नंबर दो का जो काम होगा दबंगई. गुंडई वाला वो शबुद्दीन देखेगा और साथ. रहेगा और मुस्लिम वोट बैंक लाएगा। लालू जी. इसमें कोई डाउट नहीं है कि शबुद्दीन को. पेटनाइज करते थे। दूसरी बात शबुद्दीन का. भी दो चेहरा है। मुलायम जी को लालू जी. प्रधानमंत्री नहीं बनने देंगे। नहीं बनने. देंगे। ये सच है। हां सही बात है।.
यू मे लाइक हिम, यू मे डिसलाइक हिम। पर आप. उन्हें इग्नोर नहीं कर सकते। जैसे एक. सिक्के में दो पहलू होते हैं, वैसे ही. लालू जी की पर्सनालिटी के भी दो पहलू हैं।. एक पहलू समर्थकों का, एक पहलू आलोचकों का।. समर्थक कहते हैं कि वो एक संघर्ष नेता हैं. जिन्होंने पिछड़ों, सुचितों, वंचितों को. समाज की मुख्यधारा में ना सिर्फ लाया. बल्कि बिहार और देश की सियासत में मजबूत.
कर दिया। आलोचक कहते हैं कि व्यक्तिगत लाभ. पर ज्यादा रहे। भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द. केंद्रित रहे। लेकिन एक बात जो हम कह सकते. हैं वह यह कि वह विपक्ष के उन गिनेचुने. नेताओं में से हैं जो क्षेत्रीय दल होने. के बावजूद विचारधारा से समझौता नहीं कर. रहे। अब लालू जी की सेहत क्योंकि पूरी तरह. स्वस्थ नहीं है और वो हमको मिले नहीं है।. तो इस बात को स्वीकार करते हम उनसे मिल. रहे हैं जिन्होंने लालू जी की किताब लिखी. है। लालू जी की इजाजत से। नलन वर्मा जी.
बहुत-बहुत स्वागत है आपका। थैंक यू। थैंक. यू। ये सही कहा हमने जो इंट्रो में कहा? नहीं आपने बिल्कुल ही सही कहा। अभी उनकी. जो हालत है हम तो एक ठो तो उम्र का तकाजा. कहिए और बीमारी तो उनको है ही बहुत तरह से. ऑपरेशन हुआ है उनका कई और कई तरह की. बीमारियां हैं तो वो लगातार बोलने में. डॉक्टर की भी मनाही है कि आप बहुत नहीं. बोल सकते हैं बहुत एक्टिव नहीं रह सकते. हैं तो. इसलिए उनके पर्सनालिटी को जहां तक जानने.
का सवाल है तो वो एक किताबों में उनको. समाहित जो है मैंने किताब तो जरूर लिखा है. उनके ऊपर लेकिन लालू प्रसाद जी को एक. किताब. में बांधना जो है वो बहुत आसान नहीं है।. उनमें बहुत विशालता है। बहुत सारी चीजों. को लेकर के। पॉजिटिविटी नेगेटिविटी के. टर्म में नहीं मैं बता रहा हूं। हम. लेकिन इतना डायवर्स पर्सनालिटी उनका है।. इतने डायमेंशन उसके हैं जो बचपन से ही.
शुरू होते हैं उनके जीवन में। हम्म। तो. किताब तो चैप्टर्स में वर्ड्स लिमिट में. उसके. अपने वर्ड्स और डिक्शन होते हैं जिसमें आप. लिखते हैं। बट फिर भी हमको बहुत खुशी है. कि आप बात उन पर कर रहे हैं। तो. हम कुछ बातों को बता सकते हैं जो कि किताब. में एक्सप्लेन करने का पढ़ा लिखा आदमी ही. केवल पढ़ सकता है उसको। हम गांव में बहुत. सारे लोग बहुत सारे डायमेंशन है। लोग उनको. जानना चाहते हैं। नहीं पढ़ सकते हैं।.
जिनके पास किताबें अवेलेबल नहीं है। लालू. जी तो ऐसे. तो जा कोई भी आदमी जाके उनसे मिल सकता है।. बहुत ही सहज आदमी है। बहुत ही लोगों के. बीच में रहने वाले आदमी है। वो पसंद करते. हैं लोग मिले। लेकिन अब उनको बीमारी है तो. उसमें रेस्ट्रिकशंस फैमिली डॉक्टर्स लगे. रहते हैं कि बहुत लोग नहीं मिल पाए उससे।. लेकिन मिलने अब इतने लोगों से मिलते हैं. तो फिर भी आप मिलके आधा घंटा में क्या जान. सकते हैं? हां लेकिन हमको एक लालू प्रसाद.
जी का कहिए कि विश्वास प्राप्त हुआ कि. उन्होंने हमको इतना नजदीक रखा अपने को. लिखने के लिए तो एक तरह से उनके उनके. कहानियों को उनके बातों को हम और लोगों से. कुछ ज्यादा जानते होंगे क्योंकि मौका हमको. उन्होंने दिया अपने को देखने के लिए या. बात करने के लिए। हम नलन जी के बारे में. बता दें कि नलन जी बिहार पटना से हैं और. पेशे से पत्रकार रहे। देश के तमाम बड़े. अखबारों में काम किया। चाहे वो स्टेट्समैन. हो, टेलीग्राफ हो, हिंदुस्तान टाइम से. शुरुआत की। उसके बाद अभी किताब लिखते हैं.
और बहुत सारा किताब लिख रहे हैं। एक दो. किताब और भी आने वाला है। वो आपको फिर. मिलेंगे। लेकिन हम लालू जी वाले किताब पे. फोकस करेंगे आज क्योंकि लालू. जी इंडियन पॉलिटिक्स में वो कैरेक्टर हैं. जो बड़ा अपील करते हैं। पॉजिटिव नेगेटिव. हम दोनों बतियाएंगे। लेकिन वो आप वो अलग. से दिख जाते हैं भीड़ में। चाहे वो. पार्लियामेंट में हो या टीवी बयान आ रहा. हो वो नोटिस करते हैं। मतलब बड़ा. इंटरेस्टिंग है कि वो देहाती में बतियाते. हिंदी को भी पॉपुलर कर गए। वो तमाम दुनिया. की बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटीज में जाकर भाषण. दे आए। बड़ी सारी रोचक कहानियां है। तो हम.
शुरू से शुरू करते हैं। जी इस किताब पहली. बात तो सवाल ये किताब आपको लिखने का मौका. कैसे मिला? ये मेरे लिए भी आश्चर्य का विषय था। इसलिए. कि मैं उस समय पंजाब के एक यूनिवर्सिटी. में पढ़ाया करता था। हम जब किताब लिखने की. शुरुआत लोगों ने किया। लालू प्रसाद जी के. पास रहने वाले लोगों में जेल में थे उस. समय तो लोगों को लगा कि लोगों से मिल नहीं. पा रहे हैं। एक माध्यम होना चाहिए कि लोग. उनको जाने कि उनका क्या समाचार है उनके. कहानियों को जानने के लिए और लंबा जेल में.
रह रहे थे। तो मैं तो लिखता था तो उसमें. रूपा में किताब एक मेरी आने वाली थी। तो. ऐसे. हमको एक तरह से कहिए कि लालू जी के सजेशन. पर ही हमको पिकअप किया गया। लालू जी ने. मेरा नाम ही उन्होंने उन्हें सजेस्ट किया. कि वही मेरा बायोग्राफी लिखेंगे। उनको. इतना विश्वास था कि वही लिखेंगे तो हमको. मौका मिला तो फिर ये विश्वास काहे था सर. ये आप उनके लिए पॉजिटिव खबर किए थे ज्यादा.
या नेगेटिव मैंने उनके लिए अब आपको. शुभांकर जी बता रहे हैं कि बहुत ही. नेगेटिव खबर किया था लालू जी के खिलाफ हां. 90 के दशक में उसी समय फॉर्डर स्कैम वगैरह. का पॉजिटिव खबर भी किया था सामाजिक न्याय. के बहुत बड़े योद्धा के रूप में है और. उसको खबर हम लोग करते थे बाबरी मस्जिद का. डिमोलिशन हुआ और आडवाणी जी उन्होंने. अरेस्ट किया था कम्युनिज्म के खिलाफ थे।. तो उस पक्ष को मैं लिखता जरूर था जो उनका. सामाजिक न्याय के गरीबों को मेन स्ट्रीम.
में लाने की आवाज देने की जो था उनमें. मंडल कमीशन लागू करवाने का तो इसमें उनके. पक्ष में हम लोग थे। लेकिन जब फॉर्डर. स्कैम वगैरह ब्रेक किया तो मैंने तो उस. समय जो सोर्सेस सीबीआई के लोग जो बताते थे. तो एक सोर्स के रूप में आप देखते हैं ना।. ऑफकोर्स लालू जी क्या कहते थे बातों को हम. लोग को उतना नहीं मालूम हो पाता था तो जो. उसमें फीड करता था सीबीआई तो उस आधार पर. रिपोर्ट हम लोग बनाते थे जो उनके काफी. उनके खिलाफ जाता था हम तो मेरे दिमाग में. था कि भाई लालू जी सामने पड़ने पर चाहे उस.
तरह से बोलते नहीं थे लेकिन हमको लगा कि. जो आदमी इस तरह से लिखा है तो वो आदमी. ट्रस्ट कैसे कर सकते हैं मैंने हमको किताब. लिखने के लिए लेकिन इस सेंस में आपको मैं. बता रहा हूं कि बहुत जर्नलिस्ट के रूप में. बहुत सारे नेताओं को देखने का हमको जीवन. में मौका मिला है। बहुत लोगों से मैंने. बात किया है। हम और समय गुजारा है। भारत. में आडवाणी जी के साथ मैंने ट्रेवल किया.
है। रथ यात्रा के दौरान में करीब 20 प्रेस. कॉन्फ्रेंस अटल बिहारी वाजपेयी का मैंने. किया होगा। 20 से कम तो नहीं किया होगा।. ऐसे ही बहुत सारे नेताओं का चंद्रशेखर जी. प्राइम मिनिस्टर जो थे बलिया वाले बलिया. वाले उनके वो बहुत लगातार बहुत मैंने बात. किया है उनसे उन्होंने भी एक बहुत ही. ठेट घरेलू तरह से बात करते थे बहुत अपनापन. वाले नेता थे चंद्रशेखर जी भी तो.
लेकिन लालू प्रसाद में जी में एक बात जो. हमको भी आश्चर्य लगा जो कि बाद में लोग. कहते हैं कि. यह यह दिमाग में तो कुछ नहीं रखते हैं। आप. उनके खिलाफ कुछ भी लिखिएगा अगर तो ये. डिसाइड वो आप उनके पास जाइएगा तो वो. ट्रस्ट कैसे करते हैं ये कहना बड़ा. मुश्किल काम. है। वो उस तरह के आदमी हैं। ये नहीं कि. कुछ आपने लिख दिया था। आपके ऊपर उन्होंने. कुछ बैठा दिया या.
फिर आपको जेल भेज दिया। ईडीआई सीबीआई लगा. दिया। ये सब वाले आदमी नहीं। बिल्कुल ही. तो हमने तो लिखा था लेकिन हां सिवान के हम. रहने वाले थे और सारे पक्षों को भी लिखा. होगा लेकिन ये नहीं कि मैंने केवल उनके. पक्ष में ही लिखा था बहुत सारे नेगेटिव. ऐसे उनके खिलाफ गए थे लेकिन हमको उन्होंने. इतना विश्वास किया ये मेरे लिए भी आश्चर्य. का विषय था विश्वास ऐसे किया कि हम क्या. बताएं हम उनका ऑफिशियल बायोग्राफर हम है.
हम तो उसमें जो एक माफ करने वाला छोटा. दिमाग नहीं रखने वाला इतनी व्यापकता दिमाग. में इतना लार्ज हार्टेड नेता. मैंने हमसे पूछिएगा इंडिविजुअल्स तो मैंने. बहुत नेताओं को देखा है लेकिन लालू प्रसाद. की तरह लार्ज हार्टेड पार्डनिंग. रेयर है हो सकता है कि नहीं हो आप पंजाब. में थे जब शायद किताब लिखने का हम पंजाब. में प्रोफेसर थे आपको लवली प्रोफेशनल. यूनिवर्सिटी में हमको पता नहीं था हम पहले.
किताब हम लिखते थे कॉलम वगैरह लिखते थे. एक्टिव जर्नलिज्म हम छोड़ दिए थे. टेलीग्राफ में हम पटना के असिस्टेंट एडिटर. थे वहां पे न्यूज़ पेपर में 2017 में हम. चले गए थे. तो हमको फोन गया एक सुधीर कुमार जी थे जो. कि लालू जी के रेलवे में जब थे तो. सेक्रेटरी थे आईएस अफसर थे तो रूपा हारपर. कोलिन जितने पब्लिकेशन थे और जो लालू जी. के शुभचिंतक लोग जो थे चाहते थे कि लालू.
जी पर किताब छपे इसलिए कि लालू जी जेल में. रह रहे थे और एक एक संवादहीनता थी हम. लोगों के बीच में लोग क्यूरियस थे। आप. जानते हैं लालू जी जब जेल में थे तो इतने. दिन जेल में रहे। आप हम तो गए बाद में तो. हर सैटरडे को उनको मिलने का टाइम था तो. 500 आदमी खड़ा रहता था। 500 600 1000 आदमी. कहां से भागलपुर से तो पूर्णिया से है तो. मैंने लोग परेशान हो जाते थे। आप सोचिए कि. वो बाहर जाते होंगे तो कितना लोग जाते. होंगे उनको उनको देखने के लिए। लोग दिन भर.
खड़ा रहता था वहां पर। धूप में खड़ा रहता. था। हालांकि लालू जी को देखने के लिए वो. देखते कैसे वो तो हॉस्पिटल में थे लेकिन. फिर भी वह चला जाता था और कहीं से दिखाई. पड़ गए खिड़की से तो उतना ही में वो सोचता. था कि हमको भगवान मिल गया इस तरह का उनका. पॉपुलरिटी है जेल में रहने के बावजूद भी. इतने लोग उनको चाहते हैं इस तरह के वो. आदमी है हम ये उन्हीं के साथ जगन्नाथ. मिश्रा उन्हीं के पार्टी में बहुत सारे. लोग जेल में उस समय थे जगन्नाथ जी तो मर. गए उनका डेथ हो गया तीन-तीन बार वो भी. बिहार के मुख्यमंत्री थे राणा साहब थे और.
सारे बहुत सारे लोग जेल में रहते थे लेकिन. लालू प्रसाद. जी लगातार इतने लोग जेल का खचाखच प्रशासन. के लिए परेशानी हो जाती थी कि भाई लोग. भेंट होती नहीं आता क्यों है यहां पे और. लोग गए रहते थे अलग नजारा रहता था वहां. वहां पे तो आपको जेल बुला लिया गया पंजाब. जेल मिलने के लिए नहीं पंजाब जेल म हम हम. पंजाब में हां मतलब बिहार में हां तो. बिहार में उस समय जब किताब का प्रपोजल. मेरे पास आया था लोगों ने कहा कि लालू जी. चाहते हैं कि आप ही लिखें तो पहले तो हमको.
आश्चर्य हुआ कि क्यों हम ही को चाहते हैं. हम लेकिन बाद. में उनको पेरोल मिल गया। उनके बड़े बेटे. की शादी थी। हम आए तो हम भी पटना आ गए। तो. वहां पर राबड़ी देवी जी बैठी हुई थी। अपने. भी बैठे हुए थे। बोले कि भाई आप नलिन जी. लिखिएगा तो तभी हम ये किताब छपेगा। हम. दूसरा कोई नहीं लिखेगा। तो फिर मैंने भी. कहा कि जब जिस तरह से आप बोलेंगे आप नेता. हैं आप और और हम लोग बायोग्राफर हैं राइटर.
हैं तो उसमें ईमानदारी बरतेंगे जिस तरह से. आप चाहेंगे उस तरह से आपको अपनी कहानी को. बताने का अधिकार है। आप बताइए हम लिखेंगे।. तो उन्होंने बताया कि आप सिवान गोपालगंज. के रहने वाले हैं। मेरी बातों को समझते. हैं। आप भोजपुरी स्पीकिंग है। हम भी. भोजपुरी स्पीकिंग है। तो एक अपनापन आपके. साथ है। खुल के बात कर सकते हैं। आप मेरे. बातों को समझ सकते हैं। तो हमको भी लगा कि. अपोरर्चुनिटी है। एक राइटर के लिए क्या. होता है? ये बहुत बड़ा अपॉर्चुनिटी है।.
इतना बड़ा नेता हम तैयार हो गए और किताब. को लिखने लिखने लगे और गुड विशेस काम किया. रीडर्स का कि किताब स्मैशिंग हिट हुआ।. बहुत पॉपुलर किताब है वो। अभी भी अब हम. इतनी किताबें लिखे हैं लेकिन अब हम बात कर. रहे हैं तो फिर लालू जी की किताब पर बात. कर रहे हैं। अब हम किताब पे सवाल पूछते. हैं कि लालू जी ने आपको सब कुछ बताया. होगा। हां। गोपालगंज और रायसेना किताब का. नाम है। जी कितना उसमें आप छापे थे और. कितना छोड़ दिए थे।. देखिए ये तो बात सही है कि किताब का एक.
लिमिटेशन होता है एक राइटर का। जब किसी. चीज को आप राइटिंग में ले आते हैं तो वो. वह फ़िल्टर्ड होता ही है। क्योंकि मुंह से. आपको दिमाग से लिखना एक दूसरा कला है। तो. ठीक है। वह जो जो लिपिबद्ध किया जा सकता. हो जिस तरह से उसी को आप लिपिबद्ध कर सकते. हैं। तो अब बहुत सारी कहानियां है। कुछ. कहानियां हैं कि जिसको बता तो नहीं सकते. हैं। बिकॉज़ बहुत सारी तो जो लालू जी बताएं.
वो आप क्यों नहीं बताएं दुनिया को? नहीं. लालू जी ने बताया वो हमने बताया है दुनिया. को। नहीं नहीं जैसे आप कह रहे हैं ना कुछ. कहानियां जो नहीं बता सकते। नहीं मान. लीजिए कि जो लोगों के इंफॉर्मेशन लेने के. लायक नहीं है। आपके व्यक्तिगत जीवन में आप. जर्नलिस्ट हैं। हम कोई कोई डॉक्टर है, कोई. प्रोफेशनल है तो वो वही चीज देता है ना जो. कि जो दवा जरूरी हो पेशेंट के लिए या आप. वही बात सुनाते हैं ना जिससे फायदा. हो आपको आपके ऑडियंस को एंटरटेनमेंट हो।.
फायदा हो उसको उसको इन अच्छा हम बात नहीं. पूछेंगे लेकिन हम भी पूछ लेते हैं कि लालू. जी जो आपको बता रहे थे अपना जीवन तो कोई. ऐसा बात आए जिसमें आपने कहा अरे बाप रे. बाप या आपका दिमाग थोड़ी देर हिल गया हो. कि अरे ये भी हो गया ये तो हमको भी नहीं. पता था हम तो पत्रकार थे वहां. पे देखिए लालू जी के जो बहुत सारी बातों. में हम हमको भी कहीं-कहीं पर शौक लगा जब. पहली बार लालू जी के उन्होंने कुछ नाम. बताए थे दोस्तों के अपने हम तो हम सोचे कि.
लालू जी के दोस्त होंगे और उनके गांव में. जा। हालांकि उनके किताब लिखना तो बाद में. हम किताब लिखे लेकिन हम बहुत पहले से लालू. जी के गांव में जब पहले मुख्यमंत्री बने. थे तो हम गांव घर पर गए थे तो वहां पर जो. हम स्थिति देखे तो हमको लगा कि आदमी यहां. से कैसे वहां इतना बड़ा नेता कैसे बन सकता. है? जब पहली बार उनके घर पर हम गए थे हम. तो एक झोपड़ी था उस समय भी जब कि सीएम बन.
गए थे बाद में तो मकान बन गया लोग गए. होंगे वहां पर हालांकि उतना बड़ा मकान. नहीं है कि फिर भी बन गया तो उनकी मां थी. वहां पर और आगे एक कुआं था जिसमें आप. थोड़ा भी इधर-उधर कीजिएगा तो डूब जाइएगा. उसमें इस तरह का ठीक घर के उनके सामने आज. झोपड़ी था तो उनकी मां ने मेरे पास. एक एक गंदा सा कपड़ा चौकी पर खटिया पर ले. आ के रख दिया और उनको पता नहीं चल रहा है. कि उनके पास हम क्यों गए हुए हैं। यह हालत.
था। अब सोचिए कि लालू जी जब 40 के दशक में. 50 के दशक में वहां पैदा होंगे बढ़ रहे. होंगे तो किस तरह से हमने मुख्यमंत्री. बनने के बाद ही उनके घर को देखा था और वो. झोपड़ी था और उनके मित्र जो थे इंद्रासन. नथुनी यादव उसी तरह से उनके भाई जब हम. वहां बैठे हुए थे मर गए बेचारे गुलाब यादव. तो कंधे पर हल लेकर के और नंगे बदन आधा. लुंगी पहन करके दो बैलों को ले आ रहे थे. मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू जी के घर को.
मैंने ऐसे ही देखा था। उनकी मां थी हम. बोले कि हम आए हुए हैं। हम पत्रकार को. नहीं समझ पाती थी। तो एक चूड़ा बिना भजा. हुआ चूड़ा गुड़ लेके हमको देखिए खाइए. खाइए। हमारे बेटा के यहां से आया हुआ है।. ये लड़का जो है कैसे लालू हमसे पूछने लगी. वो तो हमको लगा कि अब देखिए 1990 की बात. जो मुख्यमंत्री बने थे। अब उनकी मां का भी. डेथ 1990 91 में ही शायद हो गया था।. लेकिन उस समय कोई लालू जी के घर को देखा. होगा तो 60 70 में कैसे होंगे? लोग बोलते.
हैं ना कि भाई हम गरीब थे ऐसे थे लेकिन. मेरे लिए अपने आप में कहानी हम भी शॉक हो. गए थे किकिकि हम भी कोई बहुत समभ्रांत. परिवार से नहीं आते थे।. लेकिन ये आदमी इसमें से निकल के इतने बड़े. नेता हो कैसे सकता है? बहुत बड़ा आश्चर्य. मेरे लिए था। उनके घर को हम जब देखें तो. इतने गरीबी गरीब परिवार के हैं। तो लालू. जी का जब आप कहानी लिख रहे होंगे और आपने. शुरू बचपन से शुरू किया हम कोई ऐसा बात जो.
आपको लगता है कि आपको दोबारा बताना चाहिए. ये वाला बात थोड़ा इंटरेस्टिंग है असहज. करने वाला है। सबसे रोचक क्या लगा आपको. उनके बचपन में? एक तो आपने घर बता दिया कि. घर बड़ा वो था। बचपन क्या था या कुछ रोचक. उसमें कोई एक किस्सा जो आप चाहो. तो जैसे उनके भाई साहब आपने कहा कि वो बाद. में भी हल चला रहे थे माता जी जो थी वो. समझती नहीं थी ज्यादा शायद पढ़ी लिखी नहीं. होंगी उतना नहीं पढ़ी लिखी थी बिल्कुल हां. तो फिर इनका कहां से अलग से निकल गया ये.
क्योंकि ये तो पढ़ाईवढ़ाई किए बाद में हेड. हेड बने कॉलेज के फिर वहां से पॉलिटिक्स. में आए तो घर में एक लड़का अलग कैसे निकल. गया बाकी लड़कों. से ये उनके मित्रों से हम बात करते थे तो. कुछ-कुछ सोचते थे कि भाई आदमी निकला कैसे? हम तो ये एक कहानी है कि उनके दोस्त ने. बताया कि हम लोग गांव में चोर सिपाही. खेलते थे। माने लुक्का छिप्पी का खेल नहीं.
होता है। चोर सिपाही। तो लालू जी जो थे वो. वो चोर सिपाही में अपने सिपाही बन जाते. थे।. हम लोग चोर जो है बनते थे उसमें और एक. स्कूल था जहां पर पढ़ने हम जाते थे हम लोग. हम तो ऐसे तो अब कुछ नैसर्गिक प्रतिभा. होती है तो मान लीजिए कि इतने छोटे लोगों. के बीच में और ये भी हमको नथनी यादव ने.
बताया था कि ये कहीं पर झंझट के बीज को. रोप देता है कहीं जाकर के कहीं पर कुछ. किसी को उकसा देगा अब मार हम लोग कर देंगे. वहां जाकर के किसी को पीटना होगा तो तो. बाद में फंस हम लोग जाते थे वह आराम से. निकल जाते थे. उस बचपन में नहीं बच्चे आपस में हल्ला. करते हैं चाहे कुछ झगड़ा कर दिया आपस में. तो नथनी यादव ने हमको बताया कि भाई ऐसे. आदमी थे कि बचपन में ही कि कहीं पर यह.
गलती कहीं ना कहीं से चालाकी यह करेंगे. कहीं पर फस जाए कोई. और मार करने में हम लोग देह से हम लोग. ताकत में ज्यादा थे तो उनके दोस्त थे तब. मारने हम लोग लगते थे वहां जाकर के तो. उसमें उस तरह से उनकी एक एक क्या कहिएगा. उनका उनको घर से भी लालू जी बहुत. नटखट बचपन में थे उनके बचपन की कहानी है. कि उनकी मां ने परेशान होकर उनको भाइयों.
के पास भेज दिया था। उनको मन नहीं था कि. यहां से जाए। बदमाशी करते थे तो कोई अब. हींग बेचने वाले गांव में एक अब पता ना आप. जानते हैं कि नहीं पहले पहले के जमाने में. हींग बेचते थे सब गांव में हम और हींग. जाड़जाड़े के दिनों में हींग का कंजमशन लोग. करते हैं तो वो बेचते रहते थे और फिर आके. बाद में उसको गर्मी के दिनों में पैसा या. अनाज उसके बदले वाटर सिस्टम में लेते थे.
लोग तो एक हींग वाला आया और उस घर पर तो. कुआं आपको हम बताए थे तो वहां वो कुआं रख. दिया वो और. लालू जी क्या किए कि उसके कुआं में पूरा. उसका हींग डाल दिया। पूरा लोग जुट गया कि. भाई तो बड़ा बदमाश आदमी इसको भगाओ यहां. से। तो ये कुछ भी थे। इस तरह से कुछ. बदमाशी नटखट किया करते थे। तो बाद में. इनके भाई लोग दूध बेचते थे आपको पटना में।. हम. तो बोले कि भाई ले जाओ इसको वहीं पर रखो.
अपना। गोपालगंज पटना से कितना दूर है? दूर. है आपको? 135 कि.मी. दूर है। 135 उतना दूर. दूध बेचते थे। नहीं वहीं पर लोग वेटनरी. में रहते थे। लोग दूध जाके बेच तेरी वाली. जो गाड़ी आती होगी। नहीं नहीं दूध गाय. भैंस लोग रखता था ना। हां। जैसे बहुत सारे. नॉर्थ बिहार के जो लोग थे वो पटना में लोग. उस समय ये पॉलिथीन ये सब दूध का सिस्टम. सुधा वगैरह नहीं था ना। तो लोग डेयरी भैंस.
गाय रखते थे और दूध को बेचते वहां जाके या. वहीं गोपालगंज वही नहीं नहीं पटना में ही. रहते थे। अच्छा पटना में रहते हैं। हां. पटना में रह के गाय भैंस पाले हुए हैं।. दूध अब अभी अभी तो हो गया है कि आपको. डेयरी का कॉर्पोरेट हां वो आता है ले लेता. है गाड़ी आता है। उस समय तो जाके भैंस गाय. रखते थे। दूध धोते थे। अब फिर घरघर पर. बाल्टी से समझ गए। पहुंचाते थे। हां जैसे. वो साइकिल से आता है डब्बा लेके। हां। तो. उस तरह से लोग पहुंचाते थे। गाय रखते थे।. तो इनके भाई लोग भी ये अहिर जाधव जाति के.
हैं लालू जी तो इन लोगों का ट्रेडिशनल काम. था गौपालक लोग हैं तो दूध का ट्रेडिशन का. जब जातीय से मिला हुआ काम था दूध को गाय. को पालना दूध को बेचना सबके घरों में दूध. की जरूरत रहती है तो उस तरह से इनके भाई. लोग दूध बेचते थे लालू जी कब दूध बेचे. लालू जी भी दूध बेच पहुंचाते थे लालू जी. दूध अपने भाई भाई बोलेंगे कि भाई जाओ दूध. देते आओ तो जाके बेचते थे कुछ वीडियो तो. हम देखे दूध धोते हुए दूध मनेकि लालू जी. गायों के बहुत शौकीन है हां और हमेशा गाय.
रखते हैं या बहुत प्यार करते हैं गायों से. क्योंकि एक तो उनका यादव जाति के लोग हैं. वो लोग गोपालक हैं ही तो उनके तो घर में. उस तरह का संस्कार है कि वो गाय से बहुत. प्रेम करते हैं तो और गायों को रखते हैं. तो उसकी बात हम नहीं अभी तो सीएम बनने की. बात नहीं हुई लेकिन पहले जो उनका जीवन था. दूध अपने जो भाई लोग बेचते थे हम तो इ भी. छोटे छोटे थे तो ये भी दूध पहुंचाते थे।. इसी तरह से इनका जीवन वहीं पर आया था। भाई. लोगों ने नाम इनके घर में कोई पढ़ा लिखा.
नहीं था। हम भाई लोग तो दूध ही बेचते थे. और पिताजी भी गाय भैंस का ही कारोबार करते. थे। अपना घर गांव में खेती करते थे लोग।. खेतीगर लोग हैं। तो आपको वहां पे भी ये. स्कूल में इ पेरिफेरल था कि स्कूल में. जाएं। दूध ही मेन काम था इन लोगों का। तो. ये भी दूध बेचने लगे। लेकिन हां लेकिन. ये था कि ये पढ़ाई लिखाई में जिस तरह से. वो बोलते हैं तो लोगों को लगता है कि वो.
कम लेकिन पढ़ाई में भी बहुत तेज थे लालू. प्रसाद जी वो काफी अच्छा कई लोगों में. धारणा है कि लालू जी गवार की तरह बात करते. हैं गवार ये गलत धारणा है नहीं बहुत ही. गलत धारणा है और बहुत ही ये आपको पेरिफेरल. उनकी उनके बारे में अब जो आदमी आप बताइए. कि आप जानते हैं कि पटना विश्वविद्य. विद्यालय में हम आपको 60 और 70ज के दशक. में आपको पास करना कोई आसान बात सही बात.
नहीं था ना सही बात है वो भी ऑक्सफोर्ड ऑफ. द ईस्ट है पटना यूनिवर्सिटी उस जमाने में. लोगों ने कहा लोग कहते हैं कि लालू जी के. आने के बाद पटना. यूनिवर्सिटी हालत खराब हो गई चाहे अब. उन्होंने ध्यान नहीं दिया जो ही कहिए लोग. बताते हैं लेकिन ये लालू जी की खासियत है. कि उन्होंने बीए पास किया एलएलबी किया. और पास किया तो बीएन कॉलेज में जो कि आसान. नहीं था एडमिशन उस जमाने में होना भी और.
आपको मालूम होना चाहिए कि पटना वुमस कॉलेज. आज से नामी कॉलेज नहीं है वैलिड कॉलेज. लड़कियों के लिए तो 6070ज में था वहां पर. इनको जब स्टूडेंट्स यूनियन का इलेक्शन लड़. रहे थे तो पटना वुमस कॉलेज में बहुत उनको. सबसे ज्यादा वोट मिला हुआ था तो वो हां अब. इनका इसको लोग बोलता है कि ग्रामीण भाषा. में बात करते हैं। आसान बात क्या होता है. कि आप बीए, एमए सब कुछ पास कर जाइए, लॉयर. हो जाइए, नेता हो जाइए। फिर भी ग्रामीण.
भाषा को उस तरह से बोलिए जिस तरह से आपके. गांव का आदमी बोलता है। ये ये लालू जी जो. की भाषा है भग बुरब ये उन्होंने. कनेक्टिविटी के लिए रखा। कनेक्टिविटी उनका. नेचुरल है। वो बता रहे हैं कि वो है कि उस. भाषा को उन्होंने मरने नहीं दिया। इससे. लोगों में उसी भाषा में बात करते हैं जिस. भाषा में अपने मां से अपने गांव के लोगों. से बचपन में बात लेकिन जैसे तेजस्वी जी है.
तेजस्वी जी हिंदी में बात करते हैं और. एकदम डिसेंट वाला बोली बोलते हैं. सीधा-सीधा तेज प्रताप जी तो फिर भी चलिए. कई बार लालू जी वाला टच दे देते हैं लालू. जी का पूरा करियर चाहे पार्लियामेंट का. भाषण हो या कहीं भाषण हो वो अपने अंदाज. में ही रहे उसको चेंज नहीं किया देखिए. तेजस्वी जो है वो जनरेशन नेक्स्ट है हम वो. क्रिकेट खेले के लिए वो वो उनका. बैकग्राउंड बिल्कुल ठीक है लालू हां. बिल्कुल अलग है वो तो बोलेंगे ही जिस तरह.
से वो बोलते हैं लेकिन लालू जी ने अपने उस. बैकग्राउंड को उस रूट्स को कभी नहीं छोड़ा. जबकि पटना यूनिवर्सिटी में पढ़े एलएलबी. में गए एलएलबी पास किया उन्होंने उसके. बावजूद भी उस लोगों की भाषा बोलते हैं. इसीलिए उन लोगों को ग्राह है पसंद है कि. उसी की भाषा में वो बोलते हैं इसीलिए. इसीलिए शायद वो इतने पॉपुलर भी हुए।. पॉपुलर हैं। ग्राउंड रूट नहीं छोड़े. उन्होंने अपना। आपको एक कहानी बताते हैं. कि एक एक जगह बारात में हम लोग बैठे हुए. थे जो किताब में नहीं है। तो एक एक क्लब.
में बैठे हुए थे तो वहां पर एक बरसात का. दिन था। जुलाई वुलाई का महीना रहा होगा।. वो कोई आदमी गया हो बचपन में. हम पियर का कहां गायब हो. का? अब देखिए अब वो मेंढक जो है पहले एक. पर्यावरण उसमें लेकिन उसी आदमी समझ गया कि. क्यों किस तरह से कंसर्न है कि वो जो. मेंढक जो फ्रॉग है जो बड़ा-बड़ा पीला पीला.
निकलता था बचपन में वो गायब हो गया तो इस. तो इस तरह से उनका ध्यान जो है रहता है वो. उस चीजों को पकड़े तो देखे उनको याद था वो. कंसर्न हो गए कि भाई ये बैंक क्यों नहीं. फेंको कर रहा है क्यों नहीं बोल रहा है वो. तो इस तरह के चीजों से जुड़े रहना उनका. रूटेड आदमी है लालू के साथ। अच्छा नेचुरल. है उनका। हर आदमी का लाइफ में एक चेंज का. एक फैक्टर होता है कि यहां से आदमी बदल. गया। जैसे सब परिवार एक तरह है। लालू जी.
आप कह रहे हैं कॉलेज जब हमने पढ़ा कॉलेज. गए, स्कूल गए, बीए किया, एलएलबी किया, छात्र संघ के चुनाव लड़े, जीते, जेपीजी के. टच पे आए। आप जब पूरा जीवनी पढ़े, आपको. क्या लगा? कहां से एक लड़का जो शरारती. लड़का था उसका डायरेक्शन चेंज हो गया? क्योंकि बाकी परिवार में लोगों का. डायरेक्शन चेंज नहीं हुआ। उनके भाई बहन. जितने थे या परिवार में लोग थे लालू जी का. जो चेंज हो गया वो कुछ तो होता है ना जहां. से आदमी कोई मिल गया या कोई घटना हो गई या. कहीं से कहां से बदल गया वो कि वो अलग. निकल गए हमको लगता है कि देखिए जब.
स्टूडेंट. यूनियन में वो एक्टिव. हुए तो और जनरल सेक्रेटरी हो गए पटना. यूनिवर्सिटी के तब तक हमको लगता था कि. बहुत बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ चुनाव हुआ. ठीक है फ्लेम बॉय पॉइंट होंगे बोलते होंगे. कुछ नैसर्गिक प्रतिभा होगी लेकिन जयप्रकाश. नारायण से मुलाकात जो उनकी हुई ये गए. जयप्रकाश नारायण के पास कि हमको गाइड. कीजिए एज ए स्टूडेंट मूवमेंट जब हुआ छात्र.
आंदोलन जिसको जयप्रकाश नारायण ने लीड के. बाद में सरकार बदली इंदिरा गांधी जी गई. हमको लगता है कि ठीक है कर्पूरी ठाकुर. उनके बड़े नेता रहे होंगे लेकिन जयप्रकाश. नारायण क्योंकि अपने बहुत ही एनलाइटन लीडर. थे तो हमको लालू जी ने कहा कि जयप्रकाश. नारायण से जब हम मिलने गए. तो जयप्रकाश नारायण से जो बात जब जयप्रकाश. जी जब बात करने लगे लालू जी से या कुछ. गाइडलाइन देने लगे हमको लगता है कि इनके.
लाइफ का टर्निंग पॉइंट जयप्रकाश नारायण से. मिलना था। अगर जयप्रकाश नारायण नहीं मिले. होते लालू प्रसाद जी को तब हमको नहीं लगता. है कि लालू लालू यादव लालू नहीं बनते नहीं. बनते वो जयप्रकाश नारायण इतने बड़े नेता. का सानिध्य होना. यही लालू जी के लिए सबसे बड़ा टर्निंग. पॉइंट था और वो बहुत कम उम्र में जो पटना. यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट यूनियन थे हम. प्रेसिडेंट थे तभी हुआ था और लोकनायक कहा.
जाता है जयप्रकाश नारायण को तो लोकनायक का. जो पदवी भी था वो लालू जी ने पहली बार. बोला था। उन्होंने ही लोग हम सारे लोग अब. लोकनायक जयप्रकाश नारायण को बोलते हैं।. लेकिन इन्होंने ही कहा था और वो बोले कि. देखो भाई तुम मेरे पास आए हुए ये लोग इन. कहानी सुनाते हैं कि जब हम लोग गए कि भाई. कुछ स्टूडेंट सब बोले कि कोई बड़ा नेता हम. लोगों को गाइड करने वाला नहीं रहेगा तो हम. लोग कहीं इतना बड़ा आंदोलन डिस्ट्रैक्ट ना. हो जाए। डिस्ट्रैक्ट नहीं हो जाए। हम तो.
उस समय स्टूडेंट थे तो जानते थे कि. जयप्रकाश नारायण 1942 को मूवमेंट के हीरो. थे। एक आदर्श हैं गांधी के बाद से तो वो. जयप्रकाश जी भी कदम कुआं में रहते थे वहां. पर वो भी बहुत उस तरह से एक्टिव नहीं रहते. थे। पार्टी पॉलिटिक्स तो पहले पहले भी. नहीं करते थे। तो जब ये बताते हैं कि जब. गए ही जयप्रकाश नारायण के यहां तो फर्स्ट. मीटिंग में ही जयप्रकाश नारायण ने हम कुछ. कहा कि आप लोग रोड पर वायलेंस नहीं.
कीजिएगा। मुंह बंद रखिएगा। जहां दाएं बाएं. कीजिएगा डिसिप्लिन में रहिएगा। तो हम उस. आंदोलन को छोड़ देंगे। तो हम लोग कमिट किए. वहां पर हम प्रोग्राम बनाएंगे। लेकिन आप. लोग डिसिप्लिन वायलेट नहीं कीजिएगा। हिंसा. का कभी सहारा नहीं लीजिएगा। तब हम जो है. आपको लीड करेंगे। अदरवाइज हम लीड नहीं. करेंगे। तो लालू जी बोलते हैं कि तब उसके. बाद से एक लाइन हम लोगों को मिलने लगा। एक. भय भी हुआ कि ऐसा नहीं हो कि हमको गाइड.
करना यह छोड़ दें। लेकिन हमको लगता है कि. जो थ्योरिटिकल लेवल पर जयप्रकाश जी ने. सोशलिज्म के जिस तरह से बताए होंगे ना. इसका प्रभाव लालू जी पर सबसे ज्यादा पड़ा. और वही टर्निंग पॉइंट मेरे समझ से. जयप्रकाश जी के बड़े चेले चपाटे हैं। हमको. लगता है कि जो नई अभी जो पीढ़ी में. बुजुर्ग नेता हैं उनमें बड़ी संख्या है जो. जेपी जी से इंस्पायर्ड है। हां वो तो. कौन-कौन नेता आपको लगता है जो जेपी जी से. इंस्पायर्ड होगा? देखिए लालू जी के जनरेशन.
में जो भी नेता हैं उस समय के चाहे शिवंद. तिवारी को कहिए नीतीश कुमार जी को. कहिए एक सुशील मोदी भी थे जो कि भारतीय. जनता पार्टी से जाते थे लेकिन ये सारे लोग. अपने को एक तरह से प्रोटेजी मानते थे. जयप्रकाश नारायण. काकि उसके आंदोलन से जेपी मूवमेंट बिहार. में जो जेपी मूवमेंट कहा जाता है हम तो ये. सारे लोगों को उनका सानिध्य प्राप्त हुआ. जयप्रकाश ने गाइडेंस प्राप्त हुआ हम तो अब.
यह तो बड़े-बड़े नेता हो गए लेकिन हजार. स्टूडेंट मूवमेंट था ना सैकड़ों लोग जेपी. से इंस्पायर्ड रहे लालू जी. का कहिए कि इन ब्लेस्ड लीडर थे या कुछ भी. तो जेपी का सानिध्य इनके ऊपर बना रहा बड़ा. बना रहा और ये भी जेपी को हम बहुत. ही इज्जत के. निगाह से देखते थे। उनके गाइडेंस को लेते.
थे। कुछ भी कमी बेसी इनके पास होता था। एक. बार की कहानी है कि इनको जेल में थे तो मि. का. ये हो गया। पैसा इनके पास नहीं रहता था।. तो गए तो बोले कि बाबूजी हमारे पास तो वो. ₹200 निकाल के इनको दिए कि तुम जाओ अपना. बाल बच्चे को ध्यान रखो। फिर आए इनके घर. पर जब मिसा हुई तो उन्होंने हिसा नाम रखा. अपना इस तरह से क्योंकि मिस में लालू. प्रसाद जी बंद थे तो मैंने इनके व्यक्तिगत.
लालू जी यही बताते थे कि वो केवल यह गाइड. नहीं करते थे कि राजनीति किस तरह से करनी. है। इ भी गाइड करते हैं। करते थे कि. व्यक्तिगत जीवन में कैसे रहना है। कैसे. रहना है। आप. पब्लिक पर्सनालिटी आप आपसे लोग इंस्पायर्ड. होंगे। आप आपके तरफ लोग देखेंगे तो आपका. कंडक्ट कैसा होना चाहिए इस सब का लालू. प्रसाद जी पर प्रभाव पड़ा दिलचस्प हमने एक.
ये भी पढ़ा लालू जी के भाई जो थे वो. वेटनरी कॉलेज में चपरासी थे हां चपरासी थे. चपरासी चपरासी ही थे और क्या थे वो चपरासी. ही इनके भाई थे बड़े भाई जो थे हम. तो वहां पर पहले दूध बेचते थे तो वेटनरी. डॉक्टर लोगों के दूध बेच पहले के जमाने. में नौकरी उस तरह से किसी के यहां दूध. बेचने जा रहे हैं, कहीं जा रहे हैं तो फिर. जो ऑफिसर लोग होता था उन लोगों को कुछ. ज्यादा ही पावर चलो चपरासी में नौकरी लगा. दिया तो चपरासी हो गए। लालू जी भी कुछ.
नौकरी किए थे। हां लालू जी भी असिस्टेंट. थे। क्लर्क थे। अच्छा बीए पास करने के बाद. से ही इनको क्लर्क का जॉब जो है हम लगा. था। लेकिन बहुत कम दिनों के लिए था। वो. लालू जी नौकरी वाले दिमाग के आदमी नहीं. थे। वह तब तक और भीड़ भड़ाका और लोग लोगों. के अभी देखिए कॉलेज में भी आंदोलन कैसे. करते थे? भीड़ में लोगों को जाना उठना. बैठना आंदोलन करते थे कि भाई इनका शुरुआत. कैसे हुआ कि बस की सुविधा नहीं थी। ई लोग. आता था आपको वेटनरी से ले बीएन कॉलेज के.
पास तो ये पैदल आना पड़ता था। पैसा नहीं. रहता था कि हम जाए तो पहला लालू जी ने. आंदोलन किया कि भाई बस शुरू करो इसका फ्री. में।. और उसके लिए धरना देना, डेमोंस्ट्रेशन. करना विद्यार्थियों को कहां-कहां हॉस्टल. उतना है नहीं अवेलेबल नहीं है तो आना. पड़ता है दूर से तो सात या आठ बस इतना. प्रेशर किया वाइस चांसलर पर प्रशासन पर कि. बस सर्विस शुरू उन्होंने कराया मेस में. खाना नहीं मिल रहा है ठीक से या खराब मिल.
रहा है तो उस पर आंदोलन शुरू किया. उन्होंने हम तो अब थोड़ा खाना ठीक मिलने. लगा या फंड उसमें ज्यादा गया होगा तो इसी. इसी तरह से इनका का जीवन शुरू लोगों की जो. दिक्कतें होती थी वहां पे उसके लिए इन सब. में मजा भी आता है एक बार जब जो इसमें घुस. जाता है हां जो घुस जाता है अब पहले ये. बोलने में ये माहिर आदमी है ये लोगों के. जुबान में बात करने में अट्रैक्ट करने में. तो ये पहले नए जब स्टूडेंट बनते थे तो कोई.
सुन ये दीवार पर खड़ा होकर बोलने लगते थे. हम चार दीवारी पर खड़ा हो के बोलने लगते. थे लोग सुनने लगता था फिर से लोहा सिंह का. नाटक सुनाते थे। उसमें बहुत पॉपुलर था. रेडियो पर लोहा सिंह का तो लोहा सिंह का. आवाज निकालते थे। गिफ्ट ऑफ गैप तो उनको है. ही। ड्रामा भी करते थे। विदूषक कम भी थे।. बहुत अच्छे। वो तो मोदी जी देखे जब नकल. निकाले थे। बढ़िया बात वो तो मोदी जी का. भी नकल लालू जी ममिक्री कर लेते. हां ये सब चीज में आपको वो बेसिकली है.
क्या कि बोलने का अपने बातों को रखने का. तो कला उनके पास है ही लेकिन एट द सेम. टाइम लोगों के जुबान में इनकडोट के साथ. बोलना किस्से कहानियों के साथ बात कर हमको. कट्टा आ रही है जो कई रैली में गए थे. बिजली आई बिजली गई. तोरी अब तो उतना बोल नहीं पा रहे हैं अभी. तक उनके रील्स को लोग चलाते रहते हैं जो. पार्लियामेंट में पुराना भाषण में आप. देखते हो ये है कि ममता बनर्जी वाला ममता.
बनर्जी बहुत सारे हैं जिसमें वाजपेयी जी. नहीं मिला है तो नहीं मिलेगा पगली नहीं. मिलेगा आप वाजपेयी जी को आपको तो एक ही. बार जवाहरलाल जी बोले थे कि पीएम तो दोद. बार दोद बार बन गए कब आप छोड़िएगा तो कब. छोड़िएगा सही बात अटल जी भी हंसने लगे जी. भी हंसने लगे उस पर इस तरह से उनका जो. अंदाज है वो अपने आप में अरे बरखा दत्त को. कह दिए थे वो कि यू आर अ स्ट्रांग लेडी. नहीं यू आर आर मैन. यू आर विल हां अरे वो बड़ा एपिक वीडियो है.
तो इस तरह से उनका है अब देखिए ना म वो. बचपन को अपने ही कहानी जो सुनाते थे हम कि. भाई इनके पिताजी गायों को लेके चले जाते. थे हम. चराने के लिए पीछे पीछे इलो जाता था भोर. में अपना हम और उनकी मां सत्तू लेके बाद. में खोजती थी कि कहां ये सब और जान जाती. थी कि इसी ऊ के पीछे उसी बगीचा में मेरे. ये बच्चा सब गाय चला चला रहा होगा तो वहां.
पहुंच जाती थी। तो ऐसेसे कहानियां उनकी. लालू जी की क्योंकि आजकल तो अब तो ऑफिशियल. हो गया कौन जात हो जीतन राम मांझी जी ने. अभी कुछ दिन पहले कहा था कि वो गडरिया में. जन्मे हैं। लालू जी आपको पूरा किस्सा. सुनाए होंगे। ये बड़ा चर्चित चलता है. क्योंकि मांझी जी कह दिया। हालांकि मांझी. जी और इनका चलता रहता है। हमारे ही. पॉडकास्ट में तेज प्रताप ने वह चूहा वाला. जिक्र किया था। बड़ा बवाल कटा था उस पे कि. उन्होंने कहा हमारे यहां से निकलता और बगल. में चलाता और ऐसा वैसा फिर वो हमको थोड़ी.
देर समझने में लगा बाद में हमको एहसास हुआ. कि क्यों कह रहे थे काहे कह रहे थे और. क्या कहानी था तो उसी में एक मांझी जी का. स्टेटमेंट आया था कि तेजस्वी जी के पिताजी. किसके जन्मे हुए हैं गडरिया के जन्मे हैं. तो वो गडरिया है या दो नहीं है ये सब. बिल्कुल ही ये सब पॉलिटिकल है अनर्गल बात. है उनके उनके गांव में कोई लालू जी ऐसे. आदमी है नहीं कि कोई जाके उनके गांव को. देख ले अब तो फ्लोरिया में रोड हो गया. आराम से जा सकता है हम तो वो किसी गांव. में जाएंगे हम तो लालू जी का घर अकेले.
जादव थोड़ी वहां पर है और भी घर है ना. इनके खानदान के लोग हैं और लोग हैं ये. यादव है गढ़रिया ये सब जो अपोनेंट कहीं पर. इस तरह से कुछ बात करने के लिए बोल मांझी. जी मौज काट काटते कर हां अपना बोल दिए ठीक. अच्छा लालू जी का जब पूरा किताब आपने लिख. लिया अब आप एक पत्रकार के तौर पर भी लेखक. के तौर पर भी आप लालू जी को पिछड़ों का. नेता देखते हो देश का नेता देखते हो. मुसलमान मतलब एमवाई फैक्टर का नेता देखते. हो कैसे देखते हो आप लालू जी को कैसे. डिस्क्राइब करोगे आप लालू जी का जो. इमरजेंस है हां एक शुद्ध रूप से वो.
मार्जिनलाइज क्लास के लीडर है. वो उनको. देखिएगा कास्ट लीडर तो बिल्कुल ही नहीं है. हम देखिए अभी भी आप उनके पास जो उनका सबसे. नजदीक जो उनके पास रहता है जिसका आपको. कांटेक्ट नहीं हुआ होगा लक्ष्मण और असगर. का असगर मुस्लिम है जो उनका कपड़ा से लेकर. हमेशा और यह लक्ष्मण जो है वह महत्व जाति.
का है। वो जाति वाले आदमी व्यक्तिगत रूप. में नहीं है। हां इसमें वो जरूर है कि. गरीब लोग जो है अधिकांशत बैकवर्ड जातियों. में होता है लोग। हम या दलितों में होता. है लेकिन वो वो डिप्र्राइव्ड सेक्शन के. गरीब आदमी के इमरजेंस उनका ऐसे ही है।. देखिए जब मंडल कमीशन भी लागू हुआ तो लालू. के पहले नारे को आप या भाषण भी देते थे कि. ऐ गाय चराने वाले बकरी चराने वाले सूअर.
चराने वाले पढ़ना लिखना सीखो। यह सब करते. थे। वह निकलते थे जाड़े के दिनों में तो. वह. जानते हैं पहली बार जब घूमते थे तो मुसरी. ट्रोली में और भैया भैया उनको सब बोलती थी. और मुसहर टोली में अपने सोनपुर में जब वो. चुनाव पहला जब लड़ते थे 1950 आपको 80 के. दशक में हम तो वो दलित बस्तियों में जाकर. के किसको बच्चा किसको औरत होने वाला है तो.
लोग बोलते थे कि दबंग आदमी है वो डॉक्टर. के पास चले जाते थे और बोलते थे देखो उसको. बच्चा होने तुमको चलना ही पड़ेगा वहां पर. और हम तुमको ठीक कर देंगे. तो घर में डॉक्टर को जबरदस्ती जो छपरा में. है तो ले जाते थे। अगर मान लीजिए कि उसके. घर में कमी बाढ़ आ गया कहीं पर तो वहां. चले जाते थे। फिर जमींदार हैं जो जमीन. वाले लोग अगल-बगल के गांव में है कि भाई. आपको देना ही पड़ेगा। वो पहुंच जाते थे. आपको ब्लॉक पर कि चल के चापा वहां गाड़ना.
पड़ेगा। वहां पर सुखाड़ आ गया है। यहां. पानी का दिक्कत हो गया। नहीं गाड़ोगे तो. तुमको कर देंगे। हम तो अच्छा अधिकारता ही. लोग डिप्र्राइव सेक्शन के लोग होते. लैंडलेस लोग होते थे। तो ये इनिशियल उनके. स्ट्रगल को देखिएगा तो वो दलित. डिप्र्राइव्ड सेक्शन जो है उसके नेता थे।. नेता थे और आप देखिए रोड पर उनके साथ चलिए. आपको पता चल जाएगा। देख लेंगे लालू प्रसाद. जी कि 20 आदमी बैठा हुआ है वहां पर और यह. जाड़े का दिन है। वो तुरंत डिस्ट्रिक्ट.
मजिस्ट्रेट बोलना शुरू करेंगे कि भाई इसको. आग जलाओ पहले। कंबल ले आओ। कंबल इसको ओढ़ाओ. वहां पे जाकर के। उनका इस तरह का मिजाज. है। अब ठीक है। इसी में घपला भी हो जाता. है। इस तरह का आदमी है। मान लीजिए कि बोले. कि कंबल ले आओ। अब उनका जो आदमी है. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट है कहां से कंबल. ले आया उसका तो हिसाब नहीं ना है। भाई तो. लाना ही है। अब जो मुख्यमंत्री है बोल दिए. तो लाना है उसको। हां। तो अब वो एडजस्ट. करेगा कहीं क्या करेगा उसमें? इसमें कुछ. गड़बड़ भी अपराधी टाइप का आदमी किसी दुकान. को कुछ कर लेगा। लेकिन वो देख लेंगे कि.
भाई यह रोड पर सोया हुआ है। इसके पास चादर. नहीं है। तो उन जो भी उनके पास. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट हो एसपी पहले. बोलेंगे कि पहले कंबल ले आओ तो यहां आग. जलाओ। हां तो एसपी कहीं जाएगा दुकान से. लाएगा दुकान से दुकान एसपी अपनी जेब से. देगा नहीं देगा नहीं जेब से देके फिर. वेलफेयर फंड एडजस्ट करेंगे उसमें लेकिन. उसमें बहुत सारा लेकिन बहुत सारा सवाल हो. जाता है ना रॉबिन हुड वाला हो गया। रबिन. हो तो उनका इस तरह का मिजाज है वो हम आपको. ये कंबल की क्या कहानी है अब लोग भी ऐसा.
है कि भाई बजाड़ा पड़ने लगा तो अब जाड़ा. पड़ने लगा तो आपके आपको पता चलेगा कि उनके. दरवाजे पर जब सीएम रहते थे या ऐसे भी 50. आदमी खड़ा है हम कि हमको कंबल मिलेगा यहां. पर अब कंबल तो लालू जी के पास कंबल का. फैक्ट किसी को बोलेंगे डिस्ट्रिक्ट में. कंबल ले आओ जी 50 को अब क्या करेगा. लेगा कहीं से हम और रोज इनका ये काम है हम. अलाओ जलाओ जी तो 20 जगह पर अलाव ताप रहे.
हैं चाहे वहां कौन लोग बैठता है तो जो. गरीबों के लिए जो बेसिकली जो दर्द होता है. उसमें कोई फार्मूला से किसी स्कीम से वो. कोई काम नहीं करते थे बात है तो ओवरऑल जब. आप उनको पूरा करियर देखते हो उनका पूरा. करियर पूरा करियर में कैसे डिफाइन करते हो. लालू जी को आप लालू जी. के भीतर जो है वो डिफाइंड नहीं है हां कि. किसी स्कीम स्कीम के तहत ये हो सकता है. कुछ नहीं स्कीम फिर भी आप लेखक हो जैसे आप. उनको वर्णन तो करोगे ना वर्णन जैसे एक आज. Google पे होता है पिछड़ों दलितों के नेता.
बहुत बहुत इंपैथी और बहुत एक कंपैशनेट एक. लार्ज हार्टेड फॉर द उनको लगता है कि हम. क्या दे दे इसको हम इस तरह के वो आदमी है. वो गरीबों के नेता है हम वो किसी कास्ट के. नेता नहीं है हां राजनीति है अब ठीक है. मंडल कमीशन लागू हुआ अब मान लीजिए कि. बैकवर्ड क्लासेस में भी जब एक एक बार. अपलिफ्टेड चाहे कुछ एमावरमेंट हो जाता है. फिर पार्टिसिपेशन के लिए लड़ाई होने लगती. है ना तो जितने जातियां हैं उसमें भी कुछ. लोगों को लगा होगा कि भाई इस जाति को.
ज्यादा मिल रहा है तो फिर नीतीश कुमार जी. उसमें आए होंगे तो फिर अपना कार्वभ आउट तो. भी बैकवर्ड क्लास के लीडर थे तो उसमें. कार्वभ आउट किए होंगे और ऐसे बटा होगा इन. जनरल लालू जी में जातपात है कि जैसे आस. आसपास यादव आदमी होना चाहिए मुसलमान होना. चाहिए वो तो भाई हमारे यहां जातीय. व्यवस्था जो है ठीक है और ज्यादा है तो. उनके पास लोग जुड़ जाएगा लेकिन व्यक्तिगत. तौर पर लालू जी कास्टिस्ट बिल्कुल नहीं. है। ये मैं दावे के साथ कह सकता हूं। हमने. एक किस्सा सर सुना कि लालू जी जब अपना. शुरुआत किए थे चीफ मिनिस्टर के तौर पर तो. वो प्यून क्वार्टर में रहते थे। भाई के.
साथ ये सच्चा है। हां हां उसी में बहुत. दिन तक जाते ही नहीं। चपरासी वाले उसमें. हां चपरासी वाले में रहते थे। मुख्यमंत्री. बने। मुख्यमंत्री बनने के बहुत दिनों के. बाद तक वो रहते थे। बाद में सिक्योरिटी. इशू होने लगा। तब लोगों ने कहा कि भाई आप. इस तरह से नहीं एम माने एमपी एमएलए भी बने. थे ना। सीएम बनने के पहले 90 तक को तो. एमएलए रहते थे ना। कभी आउट ऑफ हाउस नहीं. जब तक कोर्ट उनको बाहर नहीं किया था 2013. में चुनाव लड़ने से तो लालू जी 77 में. अपना पार्लियामेंट्री करियर शुरू किए और. एक साल भी वो आइदर दिस हाउस और दैट हाउस.
के मेंबर रहते थे कभी वो बाहर नहीं रहे हम. इन द सेंस के 77 में मान लीजिए कि मेंबर. ऑफ़ पार्लियामेंट. हुए 7980 में वो एमएलए बन गए हार गए छपरा. से तो एमएलए बन गए फिर 85 में एमएलए बन गए. फिर 89 में मेंबर पार्लियामेंट हो गए।. मतलब पटना दिल्ली दोनों चलता रहा। पटना. दिल्ली दोनों चलते रहा और कभी भी जब तक. कोर्ट ने बार नहीं किया आपको 77 यात्रा.
शुरू हुई 2013 में जब कोर्ट ने उनके कह. दिया कि चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। एमपी. नहीं बन सकते हैं आप। तभी वो हाउस से बाहर. हुए हैं। ठीक है। वो कभी हाउस से बाहर। अब. इसमें हमने जो जातपात वाला सवाल पूछा था. उस पे एक सवाल लड़का लोग हमको बहुत भेजा. क्योंकि आप किताब लिखे और आप पत्रकार भी. हैं। तो दोनों मिला से मैं आपसे पूछ सकता. हूं। वो आया एक इनका लालू जी का बयान था. भूरा बाल साफ करो बड़ा चर्चित रहा अब वो. भूरा बाल से अपर कास्ट में खराब मैसेज. क्या आप कह रहे हो कि लालू जी इंटरनली.
जातपात वाले आदमी नहीं थे एक्सटर्नली वोट. बैंक के लिए अलग-अलग नेता अलग-अलग काम. करते हैं। ये भूरा बाल साफ करो अपर कास्ट. को साफ करने के लिए था कि इनको हटाकर नीचे. से उठा दो। ये तो उस किताब में आप ध्यान. से पढ़िएगा इसकी चर्चा है। ये बहुत बड़ा. षड्यंत्र था और पत्रकारों ने कि लालू जी. ने कभी कहा ही नहीं था पूरा बाल बट तो. उनके नाम भी बहुत फेमस कोर्ट है। बहुत. फेमस कोर्ट है। वही तो बता रहे हैं कि. लालू जी हुआ क्या कि कहीं अखबार में किसी. ने छाप लिया कि भूरा से.
भूमिहार राजपूत माने अपर कास्ट को लेके. भूरा बाल साफ करो। लालू जी का नारा है।. लालू जी ने कहा ही नहीं था। जब ये छप गया. अखबार में उस समय आपको ये सब सोशल मीडिया. ये सब तो नहीं था टीवी भी नहीं था उस समय. तो किसी पेपर में इस किसी ने किसी पत्रकार. ने छाप दिया लालू जी बहुत बिगड़े उनको. बहुत खराब लगा बहुत सारे लोग जो उनके. पार्टी के जो लोग थे बुलाया लोगों ने. सजेस्ट किया कि सर मुकदमा कर दीजिए इसमें. जाकर के कोर्ट में केस कर दीजिए लालू जी.
उस मिजाज के आदमी नहीं थे कि हम किसी को. कोर्ट में केस करने जाए लेकिन लालू जी के. ही लालू जी ने खुद उस किताब में डिनाई. किया इस बात को कि बहुत थी आहत हुए थे और. लेकिन इ चल पड़ा अब भाई मीडिया में लालू. अब इसको लोग बोलने लालू जी इस तरह से बोले. हैं लालू जी बार-बार इसको डिनाई किया. किताब में तो एफेटिकली इस पर वो बहुत. एम्फसाइज करके हमको लिखा है कि इसको जरूर. लिखना हम कभी नहीं बोले हुए हैं और लालू. जी को कोई कोई टेप दिखा दे कोई कोई. रिकॉर्ड दिखा दे बोले हैं इस चीज का जैसे.
कई बार कोई बयान चिपक जाता है चिपक. सार्वजनिक मंचों पर जाकर आदमी खंडन कर. देता है और एक यह होता है कि इस बयान से. इनडायरेक्टली फायदा भी हो गया तो लालू जी. क्या अपने जीवन में इसका खंडन किए हैं. सार्वजनिक मंचों पर उसका भी कोई टेप है. लालू जी तो किताब ही में खंडन किए नहीं. किताब तो चलिए जेल गए रिटायरमेंट का टाइम. आ गया तब की बात आई नहीं लालू जी से उस. समय जो भी पूछता था वो जरूर खंडन नहीं. बोलते थे इस बार बहुत बिगड़ जाते थे इस. बार कोई पूछता था तो इसका जरूर टेप होगा. वो बोले नहीं थे बहुत बार उन्होंने खंडन.
आपने यह सवाल पूछा था उनसे या उन्होंने. खुद जिक्र किया था भूरा बाल का खुद हमने. भी पूछा था उन्होंने जिक्र भी किया था अब. पहले भी बोलते थे कि भाई कैसे कुछ. पत्रकारों का नाम लेते थे जो लेना उचित हम. नहीं समझते हैं। ये जान करके कुछ लोगों ने. इसको चसपा कर दिया उन पर। इसमें मैं मैं. इसको बहुत ही ईमानदारी से कह रहा हूं कि. लालू जी का ही बोला हुआ। हां लेकिन उन पर. सट गया और चलिए लोग बोलने लगे। जैसे अटल. जी के नाम पर एक चिपक गया था कि उन्होंने. इंदिरा जी को दुर्गा दुर्गा कहा था। वो.
बेचारे कहते रह गए जीवन भर कि मैंने कहबे. नहीं किया कौन छाप रहा है मेरे नाम पे।. देखिए उस समय दौर है कि जो देखिए हम लोगों. के यहां जातीय व्यवस्था तो है बायसनेस भी. जरूर है। तो जो मंडल कमीशन में वह बैकवर्ड. क्लासेस को लेकर बहुत एसर्टिव लालू प्रसाद. जी हुए तो आक्रोश हुआ आपको अपर कास्ट. रिजर्वेशन को लेकर के आंदोलन हुए उसमें. लोगों ने उसके खिलाफत किया तो कहीं ना. कहीं से लालू बदनाम हो हम.
उन आक्रोश लोगों में बढ़े इसमें इसको लेकर. के इस तरह के फिराक में तो लोग रहते थे हम. उसी कंस्परेसी का ही नतीजा भूरा बाल उनके. नाम पर कुछ लोगों के द्वारा वो प्रकाश के. लोग रहे होंगे था लेकिन लालू जी ने कहा. नहीं था इस तरह के आदमी देखिए जो पहला. कैबिनेट बनाए थे लालू के साथ 12 आदमी का. कैबिनेट बना था 90 बने उसमें ब्राह्मण थे. लालू जी के अपने नजदीक सर्किल में कौन-कौन. लोग थे भाई अभी भी शिवंद तिवारी हैं उसमें. जगतानंद पुराने नेता येई लोग हैं ना. रघुनाथ झा थे आपको सीपीआई के भो झा ये.
सारे लोग उनके बहुत करीबी लोग हुआ करते थे. उस जमाने में ये सब लोग अपपर कास्ट के लोग. थे अगर लालू जी का आप किताब लिखने के बाद. आपको एक बहुत बड़ा पॉजिटिव और एक बहुत. बड़ा नेगेटिव बात बताना हो। देखिए पॉजिटिव. बात का जहां तक सवाल है तो. लालू प्रसाद जी रेयर मास लीडर हैं।. जेन्युइन मास लीडर हैं। हम. और वो.
लोगों के बीच में. जनता के दुख दर्द क्या है? इसको समझने के. लिए या उसको महसूस करने के लिए हम उससे. बड़ा नेता एकिस्टिंग लोगों में मिलना बहुत. मुश्किल है। कौन क्या पदपाल या लिया अलग. बात है। लेकिन जनता का जनता का जो नेता है. लालू प्रसाद जी से नेता बड़ा नेता मिल रहा. है इस जनरेशन में उनके जनरेशन में वो. नेगेटिव बात क्या है उनके लिए.
कि जब वो मुख्यमंत्री बन गए तो एोगेंस उस. उनमें. आया एक एरोगेंस आया तो मान लीजिए कि कोई. वो काम में रहते थे. लोगों अपना काम करते थे जिस तरह से भी हो. लेकिन कुछ कोई बात बोलने. गया तो अच्छा देखते हैं देखते हैं मठिया. देते थे उसको या टाल देते थे मैंने एक. एोगेंस जो होता है सत्ता में आने के बाद.
से हम ये उनमें आया जो उनके लिए नेगेटिव. साबित हुआ इस बात को मैंने पूछा भी था. उन्होंने इसको एडमिट भी किया. था कि हम एोगेंट हो गए. थे तो उनका एोगेंस जो है तो एोगेंट जब. आदमी हो जाता है ना तो फिर से एक तरह से. बंद हो जाता है। लोगों का सजेशन सुनना या. लोगों का बात सुनना या कोई काम ही ले. जेन्युइन काम होगा उस पर ध्यान नहीं देना.
ये लालू जी में उनका सबसे बड़ा नेगेटिव. पॉइंट फिर आदमी धीरे-धीरे कटता है फिर. अंदर का आदमी बाहर जाके विभीषण बनता है।. विभीषण बनता है। जैसे हमने किस्सा सुना था. कि शरद यादव ने पहली बार मुख्यमंत्री. बनवाने में मदद की थी और बाद में उनसे. विवाद हुए। सच है यह? हां मदद तो किया था। इसमें कोई डाउट का. बात नहीं है। लालू जी एडमिट तो बहुत ओपनली. एडमिट करते हैं कि शरद जी ने मदद किया था।. इवन नीतीश कुमार अपोजिशन में जाने के बाद. भी लालू जी इस बात को अभी तक नहीं डिनाई.
करते हैं। जबकि नीतीश कुमार जी चले जाते. हैं बार-बार कि नीतीश कुमार जी ने मदद. नहीं किया। सर जी ने मदद किया ही था। हां. बाद के दिनों में डिफरेंस इन लोगों में हो. गया। डिफरेंस किस इशू पर हुआ? जनता दल के. प्रेसिडेंट थे लालू प्रसाद जी। जब इन पर. मुकदमा हुआ फर्डर स्कैम का तो फिर शरद. यादव जी चाहते थे कि हम प्रेसिडेंट हो. जाए। जबकि लालू प्रसाद जी चाहते थे भाई हम. पर मुकदमा हुआ है। तो हमारे पार्टी में.
हमको कोई क्यों हमको हटागा? पार्टी को तो. हमको प्रोटेक्ट करना चाहिए ना। हम तो इस. बात को लेकर डिफरेंस हुआ लेकिन वैचारिक. डिफरेंस उनसे नहीं था। इडलॉजिकल डिफरेंस. जी से नहीं था। अब पार्टी में जो कंपटीशन. होता है हम वो था ये हुआ। अच्छा लालू जी. पहली बार सीएम कैसे बने क्योंकि हमने सुना. था कि लोकदल कर्पूरी और लोकदल चरण इनमें. विवाद था लालू जी ने दोनों को संभाल लिया।. एक पिक्चर आई थी महारानी उसमें हालांकि.
दिखाने की कोशिश की गई लालू जी और नितीश. जी के कैरेक्टर उसमें बड़ा फेमस डायलॉग है. कि जिसमें जो नीतीश कुमार कैरेक्टर होता. है वो लालू जी वाले कैरेक्टर से कहता है. क्योंकि वो काल्पनिक है इसलिए मैं कह रहा. हूं कि दर्शाया गया है। कहता है कि सुनो. टैलेंटेड तुम सारा हम थे लेकिन तुम्हारे. पास जाति का एक्स फैक्टर था। लालू जी. नीतीश जी में क्या लालू जी पहले इसलिए. मुख्यमंत्री बने क्योंकि वह यादव समाज से. थे या उनके अंदर करिश्मा ज्यादा था और. जुगाड़ बढ़िया बैठा ले गए। देखिए आप थोड़ा. सा मुख्यमंत्री बनने के पहले के.
बैकग्राउंड में जाइएगा हम तो नीतीश जी और. लालू जी लालू जी तो स्टूडेंट मूवमेंट के. टाइम से ही लीडर थे ना हम और इन लोगों के. प्रीवियस जनरेशन के लीडर कर्पूरी ठाकुर थे. हम. वही इन दोनों के नेता इंस्पिरेशन थे. इंस्पिरेशन थे और सीनियर लीडर थे वही इनके. प्रीवियस जनरेशन में हम लेकिन जब कर्पूरी. ठाकुर का देहांत हुआ तो नेता विरोधी दल. कौन बना?
लीडर अपोजिशन जो आज तेजस्वी है वो कौन. बना? तो नीतीश जी थे वहां पर एमएलए थे। हम. लालू प्रसाद जी. बने। सीएम तो आप बोलते हैं कि जादव थे।. लेकिन जाव थे। उस समय यादवों के बड़े-बड़े. नेता हुआ करते थे। अनूप लाल यादव महावीर. यादव ये लोग नेता हुआ करते थे।. यह बड़े-बड़े यादव के नेता थे उस समय उसी. सोशलिस्ट पार्टी में। लेकिन फिर भी लालू. जी लीडर ऑफ़ अपोजिशन बने और लीडर ऑफ़.
अपोजिशन जो बनता है वो मुख्यमंत्री के लिए. दावेदारी हो जाती हम और उस समय भी जगतानंद. जी नीतीश कुमार जी उस समय के जो तत्कालीन. जो जो सीनियर लीडर में चक्रपी ठाकुर के. कंटेंपररी थे गुलाम सरवर जाबिर हुसैन ये. सारे लोग देखते थे कि लालू जी लीडर लीडर. ऑफ़ अपोजिशन बनना ही पहली कड़ी हो गया ना. हम तो ऐसी बात तो नहीं थी कि यादव नेता. कर्पूरी जगह लोकदल पार्टी में जादव बहुत.
लोग हुआ करते थे नेता भी विनायक प्रसाद. यादव अच्छे-अच्छे नेता लोग हम लेकिन लालू. जी यह आप कह सकते हैं कि प्रतिभा उनमें थी. तभी लीडर ऑफ़ अपोजिशन जब डर ऑफ़ अपोजिशन बन. जाइएगा जब फिर आगे आपको पहला फिर आपको. उसमें नीतीश कुमार को सब लोगों ने सपोर्ट. किया सब लोगों ने माना कि नेता हमारे हैं. हम तभी ना सपोर्ट किया नीतीश लालू काहे. अलग हो गए फिर महत्वाकांक्षा. ये तो 9495 में अलग हुए ना पहले तो कोई. अलग नहीं हुए थे ना 9495 में हां अब जो.
कहिए लालू जी का यही एोगेंस वाला. वाला पार्ट उनका एंबिशन का पार्ट दोनों. जुड़ा है। उनको बोला कि हम भी बराबर के. आदमी को भाव नहीं दे रहा। उनको भाव. नहीं दे रहा है। तो जो हां अब उस समय लालू. जी डिप्लोमेटिक होते अगर तो नीतीश कुमार. उनके बहुत ही नजदीकी नेताओं में थे ना और. प्रतिभाशाली जैसे नीतीश जी के सुशील मोदी. रह गए। हां सुशील ये तो दूसरे पार्टी में. थे ना। मतलब मैं कह रहा हूं अगर. डिप्लोमेटसी से खेल जाते तो शायद नीतीश जी. साथे रह जाते। अगर वो एगेंस वाला पार्ट.
नहीं होता। नहीं होता तो नहीं ये अगर. डिप्लोमेटिक रहते तो उनको समझा लेते ना कि. भाई तुम रहो यहां पर या उनको सेटिस्फाई. करते ना अब एोगेंट होने के चलते हो सकता. है कि भाव नहीं देते हो वही मैं कह रहा. हूं वो एंबिशियस थे ये एोगेंट हो गए तो. उनको लगा यार हम दोनों बराबरी थे या मैं. बन सकता हूं मैं इनको मदद किया हूं हमको. हम हम कुछ बन सकते हैं या अपने. मुख्यमंत्री बनने का उनके पास ये एंबिशन. होगा तो अब उसमें तो आपको एडजस्ट करना था. लालू जी का काम था वो नहीं कर पाए लालू.
प्रसाद जी जब और क्या कहिएगा इसको? अच्छा. यह यह छोटी-छोटी घटनाएं जो होती हैं यह. बाद में बड़ी हिस्टोरिकल हो जाती हैं।. हां। अगर लालू जी उस टाइम वह एोगेंस पार्ट. नहीं होता, नीतीश जी को साथ रख लिए होते. तो नीतीश कुमार इतना लंबा मुख्यमंत्री. नहीं होते और नीतीश कुमार ने ही एक्चुअली. लालू जी की पॉलिटिक्स को बाद में बहुत. साइड लाइन करवा दिया कि वो जिधर जाते हैं. अब वो वही सरकार हो गया। हां, नेता बन गए।. तो देखिए तो पहले तो ये लोग एक देखिए वही. एंबिशन देखिए देखिए सुभांकर जी एक बार पी.
चिदंबरम में पार्लियामेंट में बोला था कि. भाई पॉलिटिकल लीडर जो होता है पॉलिटिकल. लीडर्स और फिलथ्रोपिस्ट सेंट में क्या. फर्क है हम सेंट जो होता है वो. कंप्लीट ह्यूमैनिटी के लोगों के लिए वो. सेंट होता है। पॉलिटिशियन आप तभी होते हैं. जब आप में फिलथ्रोपी और पर्सनल एंबिशन. दोनों जब कंबाइन करता है तब आप पॉलिटिशियन. बनते हैं तब लीडर बनते हैं तो नेता के. उसके बनने में ही दोनों बातें हैं ना वो.
कंप्लीट फिलथ्रोपिस्ट और साधु नहीं है वो. हम उसको उसको सीएम सीएम बनना पीएम बनना. मिनिस्टर बनना पद. लेना ये उसका पार्ट है तो नीतीश कुमार जी. भी तो पॉलिटिशियन है ना लीडर है ना हम. एंबिशन तो रहेगा ही कि लालू जी बने हैं तो. हम भी बने हैं इसमें। हम भी इस मुकाम पर. पहुंचे हैं। प्रतिभा तो है ही। 2005 तक. लगभग लालू जी का एरा था। अगर हम देखें 90. के दशक की शुरुआत से 2005 तक लालू जी इन.
एंड आउट चाहे राबड़ी जी हो या लालू जी हो. इनका एरा चलता रहा।. लालू जी का शुरुआत का फेस फिर राबड़ी जी. का ये पूरा कैसे देखते हो आप? कहां पे. कहां से इन्होंने गलतियां करनी शुरू हुई? क्योंकि एक तो बड़ा एरा है जिसमें दलितों. का, पिछड़ों का, शोषितों का और एक एरा है. जो खाली कंट्रोवर्सी से भरा पड़ा है। ये. खाली विवाद है। ये आपको देखिए 1989 में. लोकसभा का चुनाव हुआ था जिसमें लालू जी भी. मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट बने थे और विश्वनाथ. प्रताप सिंह की सरकार बनी थी। हम 1990 का.
असेंबली का चुनाव हुआ। उसमें लालू जी. मुख्यमंत्री बन गए और काफी पॉपुलर सीएम. थे। 5 सालों के बाद 1995 में फिर बने शायद. 97 तक थे सीएम वह म 95 में चुनाव हुआ. लैंडस्लाइड लालू प्रसाद जी को विक्ट्री. हुआ हम इट मींस कि ही डिडट स्पेंडर व्हाट. ही हैड ग ही बिल्ट ऑन इट 90 में जो उनकी. जितनी सीटें आई थी उससे बहुत ही ज्यादा. सीट 95 के चुनाव में आया हम तो पॉपुलर. लेवल पर इनका हरास नहीं हुआ लेकिन 9697. आते-आते 95 96 में ही बन गए जनता दल का.
प्रेसिडेंट बन गई नेशनल प्रेसिडेंट हो गए. लालू प्रसाद जी. 9697 में यह फडर स्काइम जो. है ये ब्रेक होना शुरू हुआ हम और लालू. प्रसाद जी लोगों के बीच में अनपॉपुलर उतने. नहीं हुए हम क्योंकि 95 का इलेक्शन उसका. टेस्टिमोनी है 2000 में भी चुनाव जीते. लेकिन ये जो उसमें जेल जाना दाग लग गया. दाग लग गया इनके ऊपर तो हमको लगता है कि.
लालू प्रसाद जी का पॉलिटिकल पॉपुलरिटी के. लेवल पर पतन नहीं हुआ। लेकिन जो करप्शन का. जो दाग लगा यहां से एक तरह से उनके. डिक्लाइन शुरू हो गया। जबकि देखिए होता. क्या है कि ये भी एक भाग्य है। हम भाग्य. क्या है कि अब लालू प्रसाद जी पहला. मुख्यमंत्री बने हम जो कि जिनको छोड़ना. पड़ा और जेल जाना पड़ा। हम. उसके पहले ऐसी बात नहीं कि लोगों के ऊपर.
एलगेशन नहीं लगा हो। फॉर्डर स्कैम को भी. देखिएगा तो यह लालू जी के टाइम में शुरू. नहीं हुआ था। रिकॉर्ड है सब सीबीआई भी. जानती है इस बात को कि बहुत पहले से चलता. आ रहा हुआ कि उसमें से एक्सेस विड्रॉल. होता था फॉर्डर में जगन्नाथ मिश्रा. तीन दिन बाद चीफ मिनिस्टर थे वो भी जेल गए. उसमें हम लेकिन हां अभी अभी देखिए नरेटिव. इस तरह का बना कि जब चारा घोटाला का नाम. आता है तो आप भी सुनते हो कि लालू यादव. चारा चौक सुनते हैं ना लेकिन जेल तो.
जगन्नाथ मिश्रा भी गए वो भी सीएम थे ना. उनको भी कन्विक्शन हुआ ना हम तो आई जब. पहले के दशक से चलते आ रहा था ना इसमें. कटिंग अक्रॉस पार्टी जो भी लोग पावर में. थे ब्यूरोक्रेट्स पांचप छह आईएएस. पदाधिकारी इसमें जेल गए थे ना हम और ये. ट्रेजरी का एक स्टैंड था जिसमें एक्सेस. बिल बना के ट्रेजरी विड्रॉल था लेकिन तब. है कि अब येकि फोर फ्रंट में थे राजनीति. के बहुत पॉपुलर थे तो जितना बड़ा नाम उतनी. बड़ी बदनामी तो फिर अपोजिशन को उसी को ना.
बदनाम करेगा जो उसके रास्ते में चैलेंज. उसको जगन्नाथ मिश्रा को बदनाम करने करके. क्या फायदा मिलेगा सुशील मोदी को या इनके. अपोनेंट को तो जितना बड़ा आपका पॉपुलरिटी. है उसको इसी से डेंट किया जा सकता था तो. लोगों ने इनके अपोनेंट जो थे तो जब आप आप. लालू जी के साथ बैठे थे और चारा क्योंकि. इसका कानूनी पहलू सबके पास है और उनको. चारा चोर के नाम से बड़ा बदनाम किया जाता. है और सार्वजनिक टैग है क्योंकि वो गरीबों. के नेता थे तो उसमें अक्सर उन पर एलगेशन.
आता है कि गरीबों का चारा खा 11 चारा सब आ. गया चारा घोटाला में लाल लालू जी ने आपसे. अंदर का बात क्या किया? अंदर का बात देखिए. मतलब एक होता है ना एक तो हो गया कि टीवी. अखबार वाला खबर हो गया। एक होता है आदमी. अंदर का अपना कुछ सुनाता है कि यार मेरा. भी ये वर्जन है। देखिए लालू प्रसाद जी अगर. हमसे पूछिएगा हमने बहुत स्टोरी लिखा है।. उसके उनके अगेंस्ट स्टोरी लिखा है। हम. लेकिन पूरा रिकॉर्ड को देखने के बाद से. लालू जी को सुनने के बाद से लालू जी ने. कोई गलती किया होगा उसमें। तो देखिए वो.
डायरेक्ट गलती नहीं है। बताते हैं कैसे. हुआ है। हम होता क्या था कि आपको 1980 में. इसको समझ लीजिए कि मामला किस तरह का है।. अभी आप भी हम कह रहे हैं आपको लोग कुछ लोग. फैन भी कह देंगे लालू जी का। नहीं कह. देंगे तो लोगों का काम है। हम केवल लालू. जी के किताब में आप देखे हुए हैं कि हम. बहुत तरह किताबों को लिखते रहते हैं।. हमारा काम है। ना हम आपको सिर्फ ये. सावधानी कोट करते चल रहे हैं। क्योंकि हम. भी पत्रकार हैं तो हम चाहते हैं कि इ रहे।. हां। हमने तो आपको बताया ना कि लालू जी का. दाग कब से लगना शुरू? लालू जी एोगेंट है।. यही भी तो मैं बात आपको सही बात है। सही.
बात है। अब अब हम भी बोल रहे हैं कुछ लिख. रहे हैं तो लोगों को भी अधिकार है। बिलकुल. सही बात है। जैसे आपका एक नजरिया है सर. उनका भी होगा। नजरिया होगा तो उसमें कुछ. भी कहे हमारा भाई सराखों पर या बोलिए कि. लेकिन हम है नहीं उस तरह से आप अपना स्लेट. आदमी अपने अंतरात्माओं को क्लियर रखना है।. सही बात है। बस इतना ही इतना ही मायने. रखता है। इतना ही मायने रखता है ना।. तो देखिए हुआ क्या कि वो पहले से देखिए. लालू जी में एक कमी है। हम वो पेपर वगैरह. को वो ठीक से नहीं देखते हैं। वो एक एक.
मुखिया एक गांव का एक एक आदमी रोबिन हुड. कैसे आपने नाम लिया उसी तरह के आदमी है वो. वो ऑफिशियल बहुत पेपरपर के आदमी नहीं है।. वो नहीं जानते हैं बहुत सारी चीजों को हम. तो आपको यह रांची उस समय बिहार झारखंड. पार्ट था तो वहां के ट्रेजरी वहां ज्यादा. झारखंड में जो मवेशियों के लिए स्कीम. ज्यादा था तो फॉर्डर उसमें से बहुत एक्सेस. विड्रॉल एक्सेस विड्रॉल का नियम होता है.
कि आपको एडजस्ट करना होता है असेंबली में. जितना भी बजट से ज्यादा विड्रॉल हुआ उसमें. 50 तरह के पदाधिकारी और ठेकेदार वगैरह सब. मिलकर के जो फीड फर्डर देने वाले थे. एनिमल्स के लिए उस सब पैसा ज्यादा निकालते. थे। ऑब्वियसली जब पैसा निकालते थे तो. नेताओं के नेक्सेस में निकालते होंगे वो. ये 80 के दशक से ही चलते आ रहा था।. कांग्रेस के टाइम से चलते आ रहा था। तो वो. नेताओं को इलेक्शन में चाहे जो भी जिस काम. के लिए वो वो पैसा पहुंचाते होंगे। अब फिर.
नेता लोग आंख कूद लेते होंगे। अपना काम. करते होंगे वो. लेकिन इसके रिप नेता अपने फंस जाएगा।. इसमें यह किसी को उतना मालूम नहीं नहीं. होता होगा। लालू जी के जब टाइम में यह बात. आई लालू जी ने जो हमको जो बताया जो बीएस. में भी बताते हैं उसमें चीफ सेक्रेटरी थे. कि भाई देखिए अब मान लीजिए कि कोई वाउचर. अच्छा वही आदमी जो है जो रीजनल डायरेक्टर. है तो चाहेगा हमारा पोस्टिंग यहां पर. ज्यादा रहे तो वो पहुंच गया लालू जी के.
पास कि भाई हमारा एक्सटेंशन होना चाहिए तो. कोई चार्ज तो उसके ऊपर है नहीं एक्सटेंशन. जैसे ठीक है ठीक है और हो सकता है कि. पार्टी के फंड पर नाम किसी पैसा पहुंचाता. है उस तरह से होता हो लेकिन लेकिन इस. ट्रेजरी से एक्सेस विड्रॉल इस तरह का हो. रहा है। ये पेपरकि ये मॉनिटर नहीं करते. थे। इसलिए इस टेक्निकल चीज को ये समझ नहीं. पाते। फैक्ट है। मैं टेक्निकल साइड करता. हूं। मैं इमोशनल पे आता हूं। बहुत सारे. लोग जब मैं बिहार से पूछा या पुराने.
पत्रकारों से पूछा उन्होंने कहा कि जैसा. आपने कहा कि लालू जी पहले नेता हैं जो. कन्विक्टेड हो गए। कन्विक्टेड हो गए। और. कईयों ने कहा कि उनके आसपास के लोगों ने. ही सारे सबूत सीबीआई तक पहुंचाए थे। ये. सारी जानकारी हो जाती है। तो लालू जी कुछ. तो बताएंगे कौन-कौन उनको धोखा दिया या. कहां से निकाला गया या क्यों हुआ? जैसे. उन्होंने कहा कि मैं एोगेंट हो गया था। तो. एगेंसी का साइन होता है कि आपके दोस्त जो. है वो विभीषण बनने लगते हैं। इनके ये. क्यों मामले क्योंकि करप्ट तो इस देश का. हर नेता है। पैसा हर नेता छाप रहा है।. देखिए डिटेल में हम नहीं लिखे हैं लेकिन.
लेकिन एक बात लालू जी ने के दिमाग में. जरूर है जो कि हम दुनिया के सामने ही. बताना चाहते हैं। हालांकि वो मर गए हैं. जॉर्ज फर्नांडिस नहीं है इस दुनिया में।. लेकिन जब एलगेशन लगा जब लालू जी ने. चीफ सेक्रेटरी को बुला के जांच आर्डर 148. उसमें एफआईआर करवाया लालू जी ने पहले उनको. जब पता चला कि अरे तो विड्रॉल हो रहा है. तो पहला एफआईआर लालू जी ने नहीं करवाया जब. सीएम थे वो हम लेकिन अपोजिशन इस सीबीआई का.
जांच हो इस पर कोर्ट इसको मॉनिटर करे. इसमें लग गया तो पेपरों पर इकट्ठा करने. में चाहे इसका बुद्धि बताने में वो जॉर्ज. फर्नांडिस. थे जिसको लालू जी पहले नेता मानते थे. मुजफ्फरपुर में जाके कैंपेन किया था जो. समता पार्टी के बात बने नीतीश जी के भी. गुरु हां नितीश जी के भी गुरु लालू जी के. दिमाग में इ बात अभी भी है कि नीतीश को. हमसे इतनी दोस्ती थी हमसे अलग करने में या.
हम पर ये इस तरह के इल्जाम खड़ा हो जाए. इसका दिमाग जो था वो जो फ्रांडिस का था. हम वो. बहुत मर गए सामने नहीं है इसलिए हम भी. हिचकते हैं। लेकिन अगर एक आदमी के बारे. में लालू प्रसाद जी को भीतर से बहुत ही म. अरे ये टू ब्रूटस वाली बात है। हां यू यू.
टू ब्रूटस। मान लीजिए कि देखिए जॉर्ज. फर्नांडिस ठीक है। अपने बड़े सोशलिस्ट. लीडर थे। और लेकिन आप यह भी जान लीजिए कि. जॉर्ज फर्नांडिस को मुजफ्फरपुर में 1990. वगैरह में जो चुनाव जीतते थे 91 में. पार्लियामेंट का तो लालू प्रसाद जी अगर. नहीं होते तो जॉर्ज फर्नांडिस मुजफ्फरपुर. से एमपी बनते क्या आपको एक कहानी हम बता. रहे हैं कि भाई जॉर्ज फर्नांडिस क्योंकि. नेता तो लालू प्रसाद जी थे ना वहां के जो.
बैकवर्ड दलित के नेता तो लालू प्रसाद जी. थे ना जॉर्ज फर्नांडिस तो जीतिएगा तो भाई. सर मैंने कहीं कोई जीत बाद में नीतीश. कुमार जी के चलते जीतने लगे चुनाव को तो. देखिए इनको लगता था कि जॉर्ज को इतना हमने. किया है हमारा सीनियर लीडर जरूर है लेकिन. चुनाव उसको हम जीतवाते हैं ला के तो. मुजफ्फरपुर में उनके खिलाफ नाम हम भूल रहे. हैं एक भूमिहार कोई नेता थे जो कि. स्ट्रांग मैन थे जो लड़ते थे तो इ लालू जी.
जाकर भाषण देते थे और बोलते थे कि ये जो. है बस का बस का कंडक्टर भूमि रहे होंगे. पहले ये बस का कंडक्टरी करता था और ये ये. पड़कावड़का लोगों को फेंकता होगा यहां पर. और जॉर्ज साहब डायनामाइट चलाते हैं। इसलिए. इनको तुम लोग वोट दो गरीबों इस तरह से. कैंपेन जितवाने के लिए जॉर्ज को बहुत मदद. करते थे लालू प्रसाद लेकिन लालू प्रसाद जी. को लग गया कि जो ये बाद में ललन सिंह चाहे.
समता पार्टी के लोग जो भिड़ गए पेपर जो. जिसकी बात कहते हैं तो दिमाग जो लगता है. उन लोगों को देने वाले पहली बुद्धि जॉर्ज. फर्नांडिस ने लगाई उसके बाद कई लोग. धीरे-धीरे देने लगे हां देने लगे इकट्ठा. हो गए तो हर का विभीषण होता ही है ना. लेकिन मेन. लालू जी का क्योंकि ललन जी का नाम शिवंद. जी का भी कुछ लोग धीरे अंदर कई सारे नाम. आते शिवानंद जी तो फिटिशनर में नाम है. उनका लेकिन फिर शिवंद जी का उस तरह से. भिड़ने वाले वो भी लालू तक के मिजाज के. आदमी है वो हां फिर लालू के पार्टी में भी. चले गए वो सोशलिस्ट है बेसिकली वो ये सब.
इतना. लेकिन दिमाग जो बड़की बुद्धि जो थी वो. फर्नांडिस. और वही नीतीश जी को भी हां वो पिटिकल लीडर. तो थे ही उनका एक पहचान था और दिमाग उनके. पास था इस तरह का. हमको लग रहा है वो जो एगेंस वाला पार्ट था. उसमें फर्नांडिस साहब से कुछ हुआ होगा तो. वो बन गए चाणक्य कि इसको लेके हम निकलते. हैं अब तुमको हम बताते हैं वो अपनी जगह. अपना वो सियासत खेल गए हां सियासत खेल गए. हां लेकिन लालू जी को किसी के लिए आपको.
दर्द नहीं होता है किसी नेता के लिए मही. नहीं कि कुछ पाल के नहीं रखते हैं अगर कुछ. पाले होंगे अगर हम भीतर तो जॉर्ज के लिए. ही पाले होंगेकि जॉर्ज को लालू जी ने. जिताया था जिताया था बहुत म उनको उनके. उनके फैन थे लालू जी अपने हां वो होता था. ना कि हमारा एक टाइम पे हीरो था ये हां. हमारा हीरो था ये हम ही पर इस तरह से भिड़. गया लेकिन जॉर्ज जी भी बाद में बहुत तकलीफ. में बेचारे रहे अकेले जो उनका लास्ट चुनाव. था जिसमें नीतीश जी ने टिकट नहीं दिया था. अब फिर वो अकेले प्रचार कर रहे थे और वो.
भीड़भाड़ नहीं थी वो भी दौर लोगों ने देखा. मतलब वो तस्वीर से लेकर इमरजेंसी की जॉर्ज. साहब की हां हां राइज एंड फॉल पूरा देखा. है हमने पूरा देखा है तो उसमें वही है कि. लालू जी अगर एक आदमी को माफ़ नहीं करेंगे. अगर जबकि माफ़ करने का उनका प्रवृत्ति है।. कोई पहुंच जाए तो भोला बाबा टाइप आदमी है।. लेकिन जॉर्ज. कोकि बहुत मदद किए थे उनको जॉर्ज को ना. आपने जो कह दिया ना YouTube ब्रूटस उससे.
हम भावना समझ गए। जुलियर सीज़र जिसने देखा. वो समझ गया होगा। सबका झटका बर्दाश्त कर. लिया। बाकी लोग मारे ठीक है। तुम कैसे मार. दिया? कैसे भाई? तुमसे हम नहीं उम्मीद किए. थे। घाव जख्म अपनों के गहरे लगते हैं। वही. बात है। गजब। लेकिन सर चलो ये तो चलो एक. एक कहानी हो गई। इसमें कई लोग बाकी लोग का. भी नाम लेते हैं मिश्रा जी का भी कि वो. उनकी वजह से आ गया। जगानंद जी का है बाकी. सबका। लेकिन इसके बाद भी लालू जी पर. करप्शन का खूब आरोप लगा। जैसे रेलवे को. लेकर लगा। लैंड फॉर जॉब्स, आईआरसीटीसी,
मनी लॉन्ड्रिंग बड़ा सारा आया। तो लालू जी. से आपने सब करप्शन बारे में बात की। क्या. लालू जी आपका रेलवे का एक तरफ तो बड़ा. पॉजिटिव इमेज आता है? कि आपने कुल्हड़ लगा. दिया, सस्ता कर दिया, रेलवे को प्रॉफिट कर. दिया। इसके बारे में स्टडी हो रहा है जब. आप रेल मिनिस्टर बने। 2004 से 9 वाला. कार्यकाल। लेकिन पैरेलली बड़ा मुकदमा है. जिस पर अभी भी तेजस्वी पर भी मुकदमा आ. गया। तेज प्रताप पर भी नाम आने लगा। लालू. जी पर तो है ये है। तो ये इतना करप्शन. लालू जी की इमेज करप्शन वाली हो गई कि. लालू मतलब करप्शन। देखिए अगर कोई एलिमेंट.
ऑफ हम बिल्कुल नहीं उनका कन्विक्शन हो गया. है। अगर एलिमेंट ऑफ ट्रुथ किसी में होगा. तो फर्डर स्कैम में हो सकता है। बाकी जो. केसेस जो 2014 के बाद के जो केसेस केसेस. उन पर हुए देखिए रेलवे के केसेस को तो. हमने स्टडी. किया वो एज अ रेलवे मिनिस्टर बहुत ही. सक्सेसफुल रेलवे मिनिस्टर थे। 90,000. करोड़ का मुनाफा जो कि रेलवे के रिकॉर्ड. में है। कोई भी देख सकता है। हम उन्होंने. अपने टाइम में कोई भाड़ा नहीं बढ़ाया, माल.
भाड़ा नहीं बढ़ाया और कुल्हड़ वगैरह तो. ठीक है। एक स्पेक्टिकल है, एक शो पीस है।. लेकिन मूल चीज है कि हर साल पैसेंजर किराए. को एक वो कम करते. थे। और उसके बाद भी ₹0000 करोड़ में रेलवे. को मुनाफा हुआ। अपने जगह पर जाकर के अपने. छपरा में उन्होंने रेल व्हील फैक्ट्री. बैठाया। रेलवे का डेवलपमेंट भी उनके टाइम. में हुआ। मुख्यमंत्री के इसको छोड़ दीजिए।. यह जो घोटाला वाला जो बात है ना ये.
फैब्रिकेटेड केस है। फॉर्डर स्कैम को हम. अभी कह रहे हैं फैब्रिकेटेड केस नहीं।. लेकिन जो रेलवे जॉब लैंड फॉर जॉब स्कैम और. क्या आईआरसीटीसी स्कैम जो चला हुआ है।. देखिए ये कम इनके अपोनेंट जब थे 2009 में. ये मैटर ऑफ रिकॉर्ड है। सीबीआई ने उसको. बंद किया था। हम मैं यह 2009 में एविडेंस. लेके कुछ पहुंचे थे मुकदमा करने के लिए।. 2011 में सीबीआई ने उसको ड्रॉप कर दिया।. अब लोग कहते हैं कि भाई सरकार मनमोहन सिंह. का था तो इन्होंने मैनपुलेट कर दिया। अरे.
मनमोहन सिंह के सरकार देवगोड़ा के सरकार. से प्रचार सीट हुआ था। सी उसी सीबीआई ने. देवगोड़ा और गुजराताल के सरकार के टाइम. मैंने लालू जी प्रचार सीट हुआ था। भाई. पर्स का मैं कहां मैनेज हो पाया? हम तो. सीबीआई ने उस केस उसमें कोई एविडेंस नहीं. उसमें लिखा हुआ है कोई एविडेंस नहीं है. बाद में 2014 में जब प्रधानमंत्री मोदी जी. बन जाते हैं हम उसके बाद से जो क्लोज किया. हुआ केस है जिसको लैंड फॉर जॉब इसको. आईआरसीटीसी स्कैम करते हैं फिर से 2017 और.
167 में ये अवतरित होता है और चल रहा है. लेकिन जहां तक पेपर का एक्सेस हमको है. समझदारी है अब देखिए अब भूरा बाल करप्शन. ये सब चसपा कर दिए तो भाई नरेटिव का भी. बात है। लेकिन ये सब केसेस का हमको लगता. है कि कोई बेसिस वगैरह नहीं है। ठीक है? अब क्योंकि आप बिहार से हैं, आप बिहारी. हैं और एक टैग चलता है बिहार को लेकर 90. से लेकर 2005 तक का जिसको नीतीश कुमार जी. या बिहार के बाहर जो लोग टीवी देखते हैं.
वो बहुत सुनते हैं और बड़ा फेमस है जंगल. राज आप बिहार में रहे हैं आप पत्रकार रहे. हैं। नहीं देखिए एक म आप जो स्कैम का बात. बोले इस इसके ऊपर हम लोग बोलते हैं कि भाई. जमीन लिखवा लिया जमीन ले लिया और नौकरी. दिया जमीन लिखवाने के बाद अरे भाई आप लालू. जी गोपालगंज है हम पटना में लालू जी रहे. हैं आप कोई पांच आदमी को खड़ा कीजिए जो कि. जमीन पर रहता हो बोले कि हमसे हमारा हमको. हमको नौकरी लालू जी ने दिया है और हमको.
जमीन लिखा हो कोई खोजिएगा ना भाई एविडेंस. होना चाहिए ना. ऐसा आपको इसीलिए मैं कहा कि जाली केस है. ये सब। ठीक है। वो कानूनी पहलू है। हम. क्योंकि हम किताब के पहलू पर आप पत्रकार. हैं। आप ना वकील है ना जज है ना पुलिस है।. तो हम आपसे केवल परसेप्शन लेना चाह रहे. हैं। हम उसको खोद लालू जी से करें तो. खोदते भी हम। हम तो आपसे परसेप्शन ले रहे. हैं कि किताब के बारे में क्या-क्या बातें. जो आई क्या उन्होंने कहा दिल से क्या आपने. सुना आपकी समझ क्या क्योंकि उनको हम सुन.
नहीं पा रहे तो हम आपको सुन ले रहे हैं और. एक जर्नलिस्ट का भी उसप टच ले ले रहे हैं।. नहीं ठीक है। अब जैसे जंगल राज वाला सर है. जंगल राज बड़ा कोटेड चलता है। हम लोग खूब. हम बॉलीवुड वाले फैन हमने प्रकाश झा खूब. पिक्चर देखी है। हमने अपहरण देखी है। हमने. खूब साधु यादव का नाम सुना। हमने खूब सारा. कर्मकांड प्रकाश झा की पिक्चर से देखा है।. फिर हमने तेजस्वी कहते हुए भी सुना कि. प्रकाश झा हमारे टाइम में तो खूब पिक्चर. बनाते थे। आप नहीं बनाते हो इतनी सारी. पिक्चर जंगल राज से कई बार तेजस्वी जी. बचते भी नजर आते हैं। वो कहते हैं पिताजी. का शासन था। तो हमको लगता है कि वो. एक्सेप्ट भी कर रहे हैं कि उस टाइम कुछ. ऐसा था जो गड़बड़ाया था। फिर जो बिहार का.
आदमी बाहर निकलता है वो कहता है पुराना. वाला आदमी कि भाई साहब बड़ा खतरनाक था उस. टाइम अब बदल गया है। इसीलिए शायद नीतीश. कुमार जी इतना बने हुए हैं। इतनी सारी उन. पर भी बातें आई सब कुछ आया। जंगल राज क्या. था जिसने लालू की इमेज इतनी खराब कर दी।. लालू जी की इमेज जंगल राज का एक्चुअल. स्टोरी हम बताते हैं। हम 1997 में राबड़ी. जी मुख्यमंत्री बनती है। वो किचन से निकल. कर के मुख्यमंत्री बन गई थी। उनको कुछ.
मालूम नहीं था।. उसी समय लालू जी जेल चले जाते हैं। कोर्ट. में सिविक इशू को लेकर के जुलाई का महीना. होता है। पानीनी कहीं जम जाता है और पूरा. पटना का हालत खराब हो जाता. है। ट्रैफिक जाम हो जाता है। सड़कों पर. पानी लग जाता है। गंदगी फैल जाता है। तो. कोई पीआईएल फाइल करता है पटना हाई कोर्ट. में। आपको एग्जैक्ट एक्चुअल स्टोरी हम बता. रहे हैं।. तो उसमें उस पीआईएल पर कि भाई न्यूसेंस हो.
गया है। सरकार नाम की कोई चीज है कि नहीं. है। ऑब्वियसली राबड़ी जी 10 दिन पहले. मुख्यमंत्री बनी है। तो आप सोच सकते हैं. कि एक किचन अभी तो कुछ दिन रही तो अब. लोगों में भी आ जाती है। उसमें तो बिल्कुल. अब आप सोच कैसी रही होगी? सारा चीज. पदाधिकारी तो तो समन किया चीफ सेक्रेटरी. से लेकर के आपको. ये म्युनिसिपल कॉरपोरेशन के सेक्रेटरी और. सारे ऑफिशियल कोर्ट ने समन किया हाई कोर्ट.
में और वहीं पर ओरल ऑब्जरवेशन बोला कि ये. जंगल राज है क्या यहां पर कोई सरकार है कि. नहीं है पता अधिकारियों पर बोला वो बात ये. मैटर ऑफ रिकॉर्ड है और ये ओरल ऑब्जरवेशन. बोला अब अब लालू जी अपने बहुत बोलने वाले. आदमी है तो जो जेल में है राबड़ी जी कुछ. बोल नहीं सकती थी अब पदाधिकारियों को ये. बात कही गई है बिकॉज़ वही वही सिंबोलाइज कर. रहे थे जंगल कोर्ट ने उन्हीं को कहा चीफ. सेक्रेटरी को कहा मुनिसिपल सेक्रेटरी को. कहा अब है कि ये रिकॉर्ड में भी नहीं है.
लेकिन सुशील मोदी अपने काफी म पॉपुलर लीडर. भी थे बोलने भी उनको आता था इशू बनाने आता. था इस चीजों को आपको एक्चुअल कहानी हम. बताएं उसके बाद से जंगल राज जंगल राज जंगल. राज जंगल राज छपने लगा और लोग बोलने लगे. इतना ही कहानी है जंगल राज की जो एक्चुअल. स्टोरी मीडिया को भी अच्छा लगने लगा. मीडिया को भी अच्छा आप लोग भी खूब छापे. होंगे में जंगल हां छापे छापे हम लोग. लेकिन स्टोरी इतना ही है हम तो ये राबड़ी. जी वाला जो कार्यकाल था ये खतरनाक.
कार्यकाल था नहीं राबड़ी जी का कार्यकाल. देखिए राबड़ी राबड़ी उसमें लालू जी जेल. होता क्या था. कि कोई कुछ भी कहे हम उसमें लालू जी को. बेल होता था उसमें कन्विक्शन नहीं होता था. जब लालू जी आते थे तो सारा ऑफ. ब्यूरोक्रेसी जो था पार्टी के प्रेसिडेंट. भी थे तो रिपोर्ट लालू जी को पड़ता था हम. लालू जी हैंडल करते थे। अधिकारी जानते थे।. हां इसमें एलगेशन लगा सकते हैं। हां रिमोट. से चलता था। इफ नहीं इसमें तीन घटनाएं सर.
आती है जिसको कई बार सोशल मीडिया पे जब. लिखा आता है सुनकर हम लोग भी यकीन नहीं. करता और इसी के आधार पर जंगल राशि की. कल्पना की जाती है। मैं एक-एक करके बात. करता हूं तीनों। पहला एक होता है कि लालू. जी की बिटिया की शादी थी। हम और गाड़ी. फर्नीचर ज्वेलरी पटना किसी शोरूम में गए. और जितना गाड़ी था सब निकाल लाया गया और. बहुत सारे पत्रकार इसको वेरीफाई करते हैं. कि ऐसा हुआ था इसी को जंगल राज कहते हैं. कि कोई मतलब मतलब नहीं इसीलिए बिहार में. फिर कारखाने नहीं लगे बड़ा आदमी वहां.
इन्वेस्टमेंट नहीं किया क्योंकि खुला था. कि दबंगई है जाओ शोरूम मालिक दरवाजा खोलो. सब निकालो वापस कर देंगे कुछ वापस हुई कुछ. खुर्चा मार दी गई यह सच घटना है ये शोरूम. वाली घटना में एलिमेंट ऑफ ट्रुथ है। बता. रहे हैं आपको। यह घटना करने वालों में जो. सबसे महत्वपूर्ण लोग थे हम वो साधु और. सुभाष यादव थे। राबड़ी जी के भाई राबड़ी. जी के भाई लोग थे। उस समय लालू जी अपने. जेल जा रहे थे। आ रहे थे तो इन लोगों ने.
मिसयूज किया लालू जी के उस नाम को उस अपने. संबंध होने का। एमपी एमएलए भी लोग। इनके. नाम पे बहुत बहुत सारा कर्मकांड है। बहुत. सारा कर्मकांड है इन लोगों के नाम पर। जो. गाड़ी ले आने का जो बात करते हैं ना ये सब. करने का यही लोग करता था। जिसका खामियाजा. लालू प्रसाद जी को भुगतना पड़ा। अब तो. पार्टी में भी लोग नहीं बाद में लालू जी. समझ गए होंगे निकाल दिए होंगे। आप राबड़ी. जी भी समझ गए होंगे। लेकिन लालू जी के. रेलवे के टाइम में भी राजधानी को रुकवा. देना तो ऐसे चढ़ जाना पांच आदमी को लेकर.
के या उसका प्लेटफार्म नंबर चेंज कर देना. जो. भी आपको ये बदमाशी जिसको अब हमको नहीं. लगता है कि लालू जी इस तरह के आदमी होंगे. कि भाई जाओ ज्वेलरी लेके चले आओ 77 से. मेंबर ऑफ पार्लियामेंट थे चीफ मिनिस्टर. रहे हुए थे उनको ज्वेलरी का इस तरह इतने. लोग उस शादी में गए होंगे बट लड़े तो जीते. नाम सरदार का है। हारे तो नाम सरदार का।. अब सरदार वही थे। सरदार वही उनके नाम पर. लेकिन यह आगे बढ़कर के एक गुंडागर्दी के.
तरह के करने वाला जिसमें कि हम लोग मान. सकते हैं कि उस काल में लालू जी इन लोग. अक्षम रहे इन लोगों को रोकने के लिए। इन. लोगों को नहीं इनकरेज करना चाहिए था।. इसीलिए शायद दाग लगा। इसीलिए दाग लगा। ये. घटना सच्ची भी लेकिन ना सर ये छपी हुई है।. एक ये घटना आती है। दूसरा एक आता है जो. बहुत खतरनाक मामला है शिल्पी जैन वाला।. शिल्पी जैन, पारस जैन 23 साल की लड़की मिस. पटना थी। उस पर साधु यादव पर खास तौर पर. वो इल्जाम लगता है कि उस लड़की को उठवाया.
गया। डॉक्टर साहब विदेश में थे। उनका. लड़का था आया और उसके बाद लड़की से. बलात्कार हुआ। दोनों को मार के डिग्गी में. डाल दिया गया। पुलिस प्रशासन जो था उसने. तुरंत कहा कि सुसाइड कर लिया। बाद में. सीबीआई जांच हुई। सीबीआई जांच में भी. उसमें कर दिया खुद मरे। जबकि सबको पता था. कि किसने मरवाया, कैसे मरवाया। आज भी. हजारों अखबार हैं जिन्होंने खुलकर छाप रखा. है और उसमें साधु यादव का खासतौर पर नाम. आया था शिल्पी जैन वाले में और इसी जंगल. राज की सबसे बड़ी जो पराकाष्ठा बताई जाती.
है कि ऐसा जंगल राज कि 23 साल की लड़की को. बुलाकर मल्टीपल लोगों ने रेप किया ये. शिल्पी जैन तो आप कवर भी किए होंगे मेरे. ख्याल से उस टाइम आप ही लोग के टाइम पे. रहा होगा जर्नलिस्ट थे तो हम लिखे होंगे. उसमें लेकिन आपको वास्तव में बताते हैं कि. देखिए अब साधु और सुभाष के बारे में हम. जिसे जैसे हम जर्नलिस्ट भी हम लोग थे तो. बहुत इन लोगों से हम लोग हम नजदीक नहीं. रहते थे। हम जानते थे कि ये लोग अच्छे लोग. नहीं है। हम अब रेप या ये सब तो आदमी तो.
सामने नहीं देख सकता है। हम लेकिन ये लोग. अच्छे लोग नहीं थे। हम. यह लोग अपने बहन के. या ब्रदर इन लॉ का जो उसको मिसयूज करने के. लिए ये लोग कुछ भी कर सकता. था और किया भी होगा ये लोग इसको हम गलत. नहीं मानते हैं। अब रेप तो कोई देख नहीं. सकता है। पूरे कहानियों को तो. भाई मैंने इमेजिन तो हम नहीं करके बोल.
सकते हैं। आपने लालू जी से चर्चा की थी. साधु यादव या इनकी या जंगल राज को लेकर जब. चर्चा हुई होगी या रावण जी के कार्यकाल को. लेकर लालू जी से हम चर्चा जब हम किताब जब. लिख रहे थे तो लालू जी इतना खिन्न थे कि. इस पर बात नहीं करना चाहते थे लोगों उस. समय तक पार्टीवटी से लोग निकल गया था घर. से भी निकल गया था आपसी संबंध भी इन लोगों. का उतना नहीं है लेकिन जब हम बात कर रहे. थे तो हमने बात करने की कोशिश की थी लेकिन. लालू जी को इतना खराब लगता था कि अपने लोग.
थे ना छोटे रह रहे होंगे उस टाइम में एक. साला क्या संबंध होता है बहन के वाइफ के. भाई लोग था जिसको उन्होंने. एक उस समय पेट्रोनाइज किया होगा इस तरह से. हम लेकिन वो बात भी नहीं कर रहे इतने वो. खीस में इतने क्रोध में रहते थे कि वो. नहीं बात करना चाहते थे इन लोगों के ऊपर. ओके एक नाम शबुद्दीन का आता है आप तो. सिवान से हैं अब आपसे बेहतर तो हमको लगता. नहीं शबुद्दीन मतलब शबुद्दी हम तो कई बार.
कहते कहते हैं जैसे हम बाहर कहते हैं कि. कोई लड़का मिलता है हमसे कि आप सिवान से. हम कहते हैं शबुद्दीन तो कहते हैं डॉक्टर. राजेंद्र प्रसाद का ही नहीं कहते आप लोग. आप लोग खाली मीडिया वाले नेगेटिव नाम लेते. हैं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भी आपके यहां. से थे शबुद्दीन को लेकर भी क्योंकि बड़े. कई सारे किस्से हैं तेजाब जलाने वाला. काफिला जब वो लौटे तो नीतीश जी को. उन्होंने भी कहा नीतीश जी नेता थोड़े नेता. तो लालू जी हैं वो काफिला गया मीडिया ने. दबंगई देखी. लालू जी पर एक ये भी बड़ा एलगेशन आता है. कि शबुद्दीन को उन्होंने पालपस के रखा था.
फुल हैंड फ्री देखा था कि सारा नंबर दो का. जो काम होगा दबंगई गुंडई वाला वो शबुद्दीन. देखेगा और साथ रहेगा और मुस्लिम वोट बैंक. लाएगा। ये भी एक एलगेशन है। ये तो. डायरेक्ट एलगेशन है। चलो साधु यादव वाला. बच गए वो आप कह रहे हो कि उधर थे अलग हो. गए। शबुद्दीन को तो लास्ट तक होल्ड भी रखे. थे वो और नीतीश जी के साथ जब सरकार बनी तो. शबुद्दीन बाहर भी आए थे तो वो और. प्रत्यक्ष को प्रमाण मिल गया।. नहीं लालू. जी इसमें कोई डाउट नहीं है। हम कि. शबुद्दीन को पैटनाइज करते थे। वो करते.
थे। पहली बात हम दूसरी बात कि. शबुद्दीन का भी दो चेहरा है। हम. शबुद्दीन का भी दो चेहरा है। एक चेहरा है. कि वो क्रिमिनल थे। अपराधी था। इसमें कहीं. से कोई डाउट नहीं है। वो गैंगस्टर थे, शार्प शूटर थे. और. वो एट्रोसिटी अपने एनिमी पर कर सकते थे।.
लेकिन उसका दूसरा चेहरा है कि उन. निशछान कहिएगा उसको कि शुद्ध रूप से वो. अपराधी और गैंगस्टर थे। यह मुस्लिम हिंदू. कम्युनल नहीं था वो आदमी।. ओके वो कम्युनल नहीं था। उसके शूटर्स में. आपको मिल जाएंगे राजपूत से ले जितने. बड़े-बड़े शूटर थे राजपूत अब मुसलमानों को. भी बहुत उसने मरवाया.
जैसे श्री प्रकाश शुक्ला ने 35 ब्राह्मण. बनवाया हां उसी तरह से था वो दुर्गा पूजा. करवाता था सिवान में आपको तो दुर्गा पूजा. का सारा कमेटियों का वह जाकर टीका लगाता. था आगे आगे चलता था तो उसकी जो बेसिकली जो. लड़ाई थी ना वहां पर देखिए सीपीआई एमएल का. इमरजेंस यह थे था तो गैंगस्टर इसमें कहीं. से डाउट नहीं था वो हथियार भी चलाना जानता. था और देह से भी मजबूत आदमी था। इसमें कोई. डाउट नहीं है। हम लेकिन वो उसका इमरजेंस. कैसे हुआ कि सीपीआईएमएल लिबरेशन उस समय.
अंडर ग्राउंड हुआ करता था और ये ये लोग जो. थे एक तरह. से वायलेंट स्ट्रगल तो होता ही है ना जो. जमींदारों के खिलाफ में जमीन पर कब्जा. करना जाकर के झंडा गाड़ना हम तो सिवान के. जो जमीन वाले लोग थे जिस जाति के हो. शबुद्दीन में अपना सेवियर मालिक एक एक. अगेंस्ट देखने. लगे। इसी में.
उसका राइज हुआ। उसने मारा तो सबसे बड़ा जो. हत्या वो किया था जो कि हर तरह से कंडेम. चंद्रशेखर का किया था जो कि स्टूडेंट. यूनियन का लीडर जेएनयू में वहां हां वो. बड़ा. पोटेंशियल वाला लीडर वाला लड़का था।. ईपीडब्ल्यू में उसके रिसर्च पेपर छपते थे।. तेज लड़का था वो। एक. इडलॉजिकल तो वो बेसिकली अपने जो शार्प. शूटिंग जो है वो माले के अगेंस्ट यूज़ करता.
था जिससे जमींदार लोग जो है ब्राह्मण. राजपूत जिसके पास जमीन था वो लोग उसमें. सेवियर देखता था वो लोग जो है चंद्र. चंद्रशेखर या एमएल मूवमेंट वाले लोगों में. अपना दुश्मन देखता था इन लोगों के तरफ हुआ. हम तो हां अब लालू प्रसाद. क्योंकि अब तो अपने कम्युनिटी में हीरो बन. गया तो मुस्लिम में तो तो हीरो बन ही गया. लेकिन उसके पास एक इस तरह का वोट बैंक हो. गया ना जो कि जमीन वाले लोग जो थे दबंग.
लोग जो थे उसका उसके पास वोट था चुनाव. नहीं हारता तो तो अच्छा लालू प्रसाद उसको. मानते थे इसमें कहीं से राष्ट्रीय जनता दल. के प्रेसिडेंट के रूप में व्यक्तिगत रूप. में और वो भी लालू प्रसाद जी को अपना बहुत. ही ज्यादा इज्जत करता था हम तो लालू जी के. सामने ने बहुत ही अदब से रहता था वो और जो. कहते थे उनका वो करता था उसमें और लेकिन. हां लेकिन वो गैंगस्टर था इसको कहीं से.
डिनाई लालू जी से आपके बात हुई थी. शबुद्दीन पे हां बात हुई थी तो लालू जी. उसके लिए प्रेम रखते हैं अभी भी रखते हैं. उसके परिवार के लिए हम नहीं नहीं ठीक. लड़का था लालू जी उसके उसके उसके परिवार. के लोग उसके मरने के बाद पहले कुछ बिगाड़. वाड़ा भी होता था अरे घर का लड़का है लालू. जी उसको बहुत मानते थे।. हम अब इसको लालू जी का कमजोरी का हम हम. हां ठीक है। सिफाई नहीं करते। आदमी का. अलग-अलग रिश्ता होता है। उनका उनसे रिश्ता. होगा। ये तो भाई बहुत ये तो हर नेता का.
होता है। मैं तो केवल एक पर्सन देना चाह. रहा हूं कि लालू जी उनको प्यार करते थे।. प्यार करते थे उसमें और वो भी लालू जी को. इज्जत करता था। अब सर जैसा हमने कहा था एक. पिक्चर आई थी अपहरण। अजय देवगन की पिक्चर. थी। प्रकाश झा ने बनाई थी और बड़ा उसमें. दिखाया गया कि कैसा ऑर्गेनाइज्ड अपहरण जो. है बिहार में होता था। फिर हमने इस बारे. में पढ़ना शुरू किया। तो 92 से लेकर 2004. में बिहार में 3285 मामले अपहरण के दर्ज. हुए। 2001 से लेकर 2005 के बीच में 20,000. लगभग हत्याओं का जिक्र हुआ और कहा गया कि. बहुत बड़ी संख्या और भी होगी जो सामने.
नहीं आई। फिर इसमें हमने और जब पढ़ना शुरू. किया तो इसमें सुभाष यादव ने कहा कि उनके. और उनके भाई को बदनाम कर दिया गया। यह. अपहरण की सारा डीलिंग विलिंग जो था सीएम. के घर पे होता था और यह ऑर्गेनाइज रैकेट. बनाया गया था। प्रकाश झा की पिक्चर जो है. वह भी कमोबेश यही दर्शाती है कि एक. ऑर्गेनाइज बनाया गया था रैकेट जिसके जरिए. फिरौती पैसा आता था और यह भी जंगल राज का. एक बहुत बड़ा चेहरे के तौर पर आया इस. सिलसिले में बात हुई आपकी हम क्या कह रहे.
थे लालू जी जब ये अपहरण का जिक्र हुआ. क्योंकि ये बड़ा चर्चित है और ये तो सब. पिक्चर है और प्रसारित भी है। देखिए. शुभांकर जी पिक्चर बनना या उसमें तो हमने. अपना-अपना स्किल है और अपना तरीका है. प्रेजेंट करने का। हम. लेकिन एक बात तो है जैसे मान लीजिए. कि ऐसा दौर था जबकि आपको पावर शिफ्ट हो. रहा था जिससे पहले किडनैपिंग अपहरण बूथ.
लूट ये बिहार में कामदेव सिंह से शुरू हुआ. था। पहला बूथ लूट की घटना औरंगाबाद में. सत्य नारायण सिन्हा कॉनस्टीट्यूएंसी में. हुई थी। हम. मैसकर भी आपको लालू जी आए थे उससे. बड़े-बड़े आपको दलचक बहरा से लेकर मैशकर. हो चुके थे। एक चलती आ रही प्रक्रिया थी।. हम हां इसमें पावर शिफ्ट हुआ। जैसे मान. लीजिए कि पहले हेमंत शाही और छोटन शुक्ला. ये सारे लोग जो अपराधी आनंद मोहन का जमाना.
रहा होगा जब करते रहे होंगे तो न्यू. एमावर्ड क्लास जो. है बैकवर्ड क्लासेस का ज्यादा लोगों जो. कोई है या कुर्मी है चाहे कोई दूसरे. जो अपर कास्ट नहीं है तो उन लोगों के पास. जब पावर है तो दोनों तरह के पावरशिप्स. होते हैं ना वो पॉलिटिकल पावर राजनैतिक. अपराधिक दोनों अपराधिक पावर भी तो वो इन. लोगों में शिफ्ट हुआ हम अब देखिए पप्पू.
यादव के पहले जो अभी भी है राजनीति में. पप्पू यादव के. पहले गैंगस्टर कौन था वो उस इलाके का. दिनेश सिंह थे ना आनंद मोहन थे ना हम अभी. भी मुकामा के एरिया में आनंद सिंह है ना. हम तो बाद के दिनों में जैसे आपको बहुत कम. बैकवर्ड क्लास के अपराधी मिलेंगे. 90 के पहले हम इसलिए कि पावर उनके पास है. तो पेट्रोलज भी उनके उनको उस उस पावर से. मिलेगा हम और राजनीति.
और क्राइम का जो नेक्सेस है इंडिया में ये. आपको ये है। इसमें कहीं से कोई डाउट नहीं. है। हम आज आप देखते होंगे कि जिसके पास. पैसा है तो कहीं कॉर्पोरेट क्राइम का और. क्रिमिनल का और पॉलिटिशियन का नेक्सेस है।. कहीं पर फ्यूडल व्यवस्था है तो वहां पर. बंदूक धारियों का किडनैपरों का रिश्ता है।. हां लालू प्रसाद जी को इसमें हम क्लीन चिट. उस सेंस में नहीं देंगे हम यह तो.
मानना मेरे लिए संभव नहीं कि मुख्यमंत्री. के घर में बैठकर के जहां पर चीफ सेक्रेटरी. होम सेक्रेटरी डीजीपी बैठता हो जैसे. मीटिंग होती हो वहां पर किडनैपिंग प्लान. हो रहा हो ये तो फिल्म में दिखा सकते हैं. ये तो संभव नहीं है नहीं हो सकता है इस. तरह से ऐसा नहीं होता है क्योंकि सीएम का. जो अपेरेटस आप देखिएगा तरीका देखिएगा तो. इसमें फिट नहीं बैठता उसमें क्रिमिनल से. जाके बात करना रहेगा किसे कंसरेसी करना है. वह सब नहीं होता होगा। हां लालू जी की. असफलता इसमें रही है कि जो चलते आ रहा हुआ.
एक लॉलेसनेस है जो शिफ्ट क्राइम जो कर रहा. था जो नए क्लास इमर्ज क्रिमिनल के कर रहे. थे उसको कंटेन करने में लॉ एंड ऑर्डर के. आधार पर उसमें कामयाब नहीं रहे। ये आपने. जिक्र किया उनसे कि लालू जी इतना मतलब. 32,000 मुकदमा दर्ज हो गया और मुकदमा तो. ये दर्ज हो गया। जो नहीं हुआ उसका तो. बतिया नहीं होगा और हम जानते हैं बड़ी. संख्या उनकी होती नहीं दर्ज होता तो उनका. क्या टेक था यह अपहरण वाले पे क्योंकि. पिक्चर बना तो बदनामी तो लालू जी की हुई. बदनामी तो हुई और खुलकर हुई कि उनके उसमें.
अपहरण होते थे जैसे गाड़ी वाला गया कि. डॉक्टर साहब की एक नई-नई गाड़ी आई थी कोई. डॉक्टर साहब थे किसी ने कहा भिजवा देंगे. और फिर ले चले गए वो गाड़ी नहीं लौटी बड़ी. चर्चित किस्सा है मतलब हमको ऐसा कई सारा. किस्सा मिला जो बिहार के लोग ही डालते. रहते हैं तो ये अपहरण वाले में भी ऐसी. कहानी थी तो लालू जी का क्या टेक था इसमें. लालू जी का टेक यही था कि देखिए लालू जी. एक तो उनकी कमी कहिए या अच्छाई कहिए वो. ऑफिशियल आदमी नहीं थे वो हम वो दिन में. निकल जाते थे किसी मुसार टोली में तो किसी.
गरीब टोली में हेलीकॉप्टर लेकर के वहीं पर. खाना बनने लगा तो लोगों के पास डांस नाच. होने लगा ये सब कामों में उनको लगता था कि. हम लोगों को किसी के घर में नहवा रहे हैं. तो उसको कपड़ा पहन पहन रहे हैं तो वो हंस. रहा है तो सीएम जिसके किसी दलित के घर में. चला गया तो उसके यहां म आश्चर्य लोगों को. होने लगता। इसी सब काम में वो ज्यादा रहते. थे। मैं जितना आपको सुन के समझ पा रहा हूं. वो गरीबों फोकस थे। लेकिन उसके चलते जो. पीछे नुकसान हो रहा था। हां उसको वो ध्यान.
नहीं देते थे कि क्या हो रहा है। तो वो. करते देखिए उनका रूटीन क्या था। मॉर्निंग. में. उठेंगे शुरू कर देंगे। जगन्नाथ मिश्रा. बोलते थे ना लीडर अपोजिशन थे तो कि भाई ये. बैलगाड़ी बना दिए हैं लालू जी जो है. हेलीकॉप्टर को। उनका काम था कि भाई सीएम. का काम ऑफिशियली क्या होना चाहिए कि ऑफिस. में बैठेंगे। डीजीपी से मीटिंग करेंगे होम. सेक्रेटरी से और पेपर को देखेंगे कहां. क्या हो रहा है इसको लालू जी से कोई मतलब. नहीं था तो उठेंगे मॉर्निंग में और किसी. दलित बस्ती में किसी हरिजन बस्ती में. गरीबों के घर हेलीकॉप्टर उतार देंगे अब.
वहां डीएम जा रहा है तमाशा जुट गया लोग. जुटा हुआ है और वो खा रहे हैं तो उसको. बड़ा अरे हमारे यहां भगवान आ गए हैं वो. अपना हंसी खुशी मना रहा है दिन भर अपना उन. लोगों के बीच में रहे तो एक तरह से उनको. लालू जी को लगता था कि इस लोगों के बीच. में हम जाते हैं तो इसका उत्साह बढ़ जाता. है इसके दर दरवाजे पर तो कोई गांव का. मुखिया नहीं जाता है। हम जाते हैं तो जाके. बोलते थे कि तुम हमारे पास जितने लोगों को. हम ले आए हैं ये डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट. एक ये कलेक्टर ये तुम लोगों के नौकर हैं।. ये इनके पास जाके अपना अधिकार को मांगो।.
बोलो कि हमारे यहां ये चीज नहीं है।. चापाकल नहीं है। ये ये काम ये हमको तुम. लोगों ने बनाया है। तो हम आप लोगों ने. बनाया है। आप जनता हमारे मालिक हैं। मालिक. तो आप लोग हो ना। आई जैसे घर में कोई नौकर. रखता है वैसे ही हम लोग अपने को यह नौकर. रखें। वो संवाद जरा था इसमें प्रशासन वाला. काम कम हो उसके चलते हां संवाद वो लोगों. से बात करते थे और उनका उत्साह बढ़ाने के. लिए क्योंकि बहुत डिप्राइव लोग थे पहले ना. इस तरह से रात दिन इसी फेरा में रहते थे।.
इनका ध्यान जो था इस चीजों पर उससे कम हो. गया। हां उसके चलते अपराधिक घटने जैसे यह. जो गया वाला किस्सा है अब यह मुझे आपकी. बात सुन के समझ में भी आ रहा है। गया में. विधायक साहब थे। वह डॉक्टर वहां एक हैं. एसए नारायण। उनके घर गए और उनकी नई-नई. गाड़ी आई थी। तो कहे दे दीजिए शाम तक लौटा. देंगे। तो वो गाड़ी ले चले गए। शाम तक. गाड़ी नहीं लौटी। फिर वो विधायक जी के पास. गए 10 दिन बाद कि साहब वो नई वाली गाड़ी. आई थी हमारी आई थी उठा ले गए। फिर किसी ने. डॉक्टर साहब को कहा कि डॉक्टर साहब आप तो.
लालू जी से मिल लो। आप तो मिल लोगे। लालू. जी की शिकायत करो। तो लालू जी के पास गए. और बताया कि लालू जी मेरी अच्छा जब डॉक्टर. साहब लालू जी के यहां गए तो पता लगा वो. गाड़ी वहीं खड़ी थी तो लालू जी से कहे कि. सर वो गाड़ी तो कहे कि एक काम करो इसको. पैसा दे दो. ₹ लाख भिजवा दिए और गाड़ी वही रह गई और ये. डॉक्टर साहब का कोर्ट है कि हम लालू जी के. पास गए वो कहे कि अपने आदमी से कि एक पैसा. दे दो तो 3 लाख पा गए तो ये गरीबों में. उनका एक रहा अलग कि उनको देते जाओ लेकिन.
उसके चलते शायद मिडिल क्लास या अपर जो. क्लास था वो शायद उनसे नाराज होता भी चला. गया। हां बहुत देखिए इसके कारण थे। इसके. कारण थे कि वो उनके उस समय के जो काम थे. वो एक मिडिल क्लास को जो जिंदगी जीते आ. रहा. था उसको लगता था कि ई एनआर की है। फॉर. एग्जांपल गोल्फ क्लब में गवर्नर साहब जाते. थे गोलफ खेलने के लिए। एलिट जो पटना का थे. चीफ सेक्रेटरी आईएएस ऑफिसर्स वो जाते थे.
उसमें। पटना क्लब में वह लोग जाते थे। अब. लालू जी अब भले वो इंप्लीमेंट नहीं हुआ है. लेकिन जाकर बोलते थे कि भाई यह सब जो. मुसरहर टोली में जो शादी ब्याह करता है तो. पुलिस भगा देता है रोड पर से ये अपना सूअर. ओवर क्लब में आकर बनाएगा. भले अपना उत्सव यहीं पर बनाएगा उसको जगह. नहीं है गोल्फ क्लब में ये मुसहर घुसेगा. उसमें हम फिर जो पहले इंदिरा आवास योजना.
में बहुत सारे घर गांव के बाहर बाहर सब. पदाध अधिकारी लोग बना देते थे। इश इलाके. में जो है भोला पासवान शास्त्री भवन बनवा. देते थे। बगल में एक्साइज इंस्पेक्टर और. सुपरटेंडेंट का क्वार्टर रहता था।. राजेंद्र नगर में जहां पर इरिट लोगों का. था वहां पर बनवा दिए। अब बोलने वाले तो है. ही कि अरे इसमें क्या है अपना अपना बाल. झाड़ू अब फेंक दो उसमें उधर उधर ही इनों. का इलिटिजम खत्म हो जाएगा। तो इस तरह से. लालू जी का मैंने उनको लगता था कि इन सब.
को हम एमावर कर रहे हैं। मन बढ़ा रहे हैं. कि बहुत दबा हुआ है सब और उन लोगों को. बताने का कोशिश करते थे एक तरह से इसको अब. ये सही बात नहीं है लेकिन बताने का कोशिश. करते थे कि वो तुम्हारे बराबरी का. है। तो ये नागवार लगता था लोगों को। इसमें. कई तरह के अपरेंटली तो एनआरकी तो है। अब. वुल्फ क्लब में पांच गो लेके अपना घुस गया. बनाने लगा वहां पर। तो किसी को तो अच्छा. नहीं लगेगा ना खास करके मैंने अभिजात्य.
वर्ग जो था एक तरह से कहिए एलिट इस पर. लालू जी का एक. एनार्किक हैंडलिंग था उसका इसमें कोई डाउट. नहीं. है वो यही वर्क था जो लिखता पढ़ता था यही. वर्ग था जो लिखता पढ़ता था इंप्रेशन बनाता. था कुछ करता था उसको लगता था कि बताओ क्लब. में. हां मतलब ये जायज भी नहीं कि अपना बाल. वहां फेंक दो। अब आप उनको एमावर कर रहे हो.
तो इनको परेशान करने लगो। हां परेशान करने. लगो।. अच्छा बट बट वोट बैंक में उनको वो आदमी. जिसके लिए करवा रहे थे वो तो खुश होगा।. लेकिन लालू जी ताकत फायदा लोग उठा लेते थे. ना। मान लीजिए कि जो नहीं भी फेंका है। हम. लेकिन उसमें जो बदमाश टाइप के एलिमेंट है. तो कुछ और कर देगा ना। उसका मन बढ़ जाएगा।. तो क्राइम भी करने लगेगा ना। अरे हमारे. दरवाजे पर तो लालू जी आए हैं। उसको दिखा. कहीं बहुत जमा सकता है। किसी की गाड़ी उठा. सकता है। कुछ भी कर सकता है। हुआ होगा।. ठीक बात। अब लालू जी के पर्सनल पर आते.
हैं। लालू जी अपने परिवार में जब उनकी. पीढ़ी थी उसमें पहले व्यक्ति थे जो पढ़े. लिखे रहे। इतना पढ़ लिख लिए। उनके भाई. साहब ने भी पढ़े थे और वो इतना पढ़ लिए।. लालू जी की बेटियां जो है वो भी एमबीबीएस, बीटेक, एलबी सब कर ली। लालू जी के बेटे. क्यों नहीं पढ़ पाए? क्योंकि बेटों को. लेकर बड़ा मजाक उड़ता है कि नौवीं फेल, आठवीं फेल, फलाना फेल। जबकि बिटिया देखता. हूं मैं तो बिटिया सब पढ़ी लिखी है और. अच्छी-अच्छी डिग्री है। जैसे मैंने कहा. एमबीबीएस है, बीटेक है, एलएलबी है। तो. बिटिया पढ़ ले आमतौर पर यूपी बिहार में. होता है। बिटिया नहीं पढ़ पाती है। लड़के.
पढ़ाते हैं लोग। यहां उल्टा कैसे हो गया? नहीं उल्टा देखिए तेज प्रताप का जहां तक. सवाल है वो तो मैट्रिक पास किया अपना। हां. अब आगे का पढ़ाई हम देखिए एक इंडिविजुअल. में आप बीटेक करके जर्नलिस्ट हो गए हम. शुभंकर तो एक इंडिविजुअल मेरिट भी हो होता. है होता है. और बहुत सुविधा मिल जाने के बाद से हो. सकता है कि तेज प्रताप जो हैं हम आगे के.
पढ़ाई करने के लिए वो अपने कैपेबिलिटी को. नहीं बढ़ाए हैं। हम तेजस्वी के बारे में. बहुत ही गलत धारणा लोगों के बारे में है।. हम तेजस्वी अध्यावसाय अब ठीक है क्लास पास. नहीं किए हैं। हम लेकिन वो फैक्ट है कि वो. क्रिकेट खेलता था लड़का शुरू से ही। हम और. क्रिकेट में आईपीएल रणजी ट्रॉफी बहुत सारे. गेम्स को खेल चुका है। हम तो उसका क्रिकेट. में इन रुझान जो था वो ज्यादा था। हम.
इसलिए अब बहुत सारे क्रिकेटरों को देखिएगा. जो केवल खेल में इन्वॉल्वड है वो नहीं. पढ़ाई करते हैं सब हम तो उसमें और सब कमी. नहीं है वो तेज आदमी है हम बातों को भी. समझते हैं वो एज ए मिनिस्टर उसमें कोई आप. एज ए लीडर ऑफ़ अपोजिशन उसको कहीं आप बात. कीजिएगा तो पता नहीं चलेगा समझदारी उसके. पास ज्यादा है हम लेकिन हां वो पढ़ाई नहीं. कर पाया लेकिन उसका मूल कारण था कि ही वास. टू मच इनवॉल्वड इन द क्रिकेट हम और कोई. बात नहीं है। तेज प्रताप को हम मानते हैं. कि बोर्ड पास करने के बाद से वह या तो.
मेरिट कम रहा होगा या अपने को पिताजी के. इन्फ्लुएंस का उसमें खो गए। पिताजी के. इन्फ्लुएंस में या एक बड़े बाप के बेटे. वही लालू जी अपने वैसे नहीं थे। तो. उन्होंने बीए पास की एलएलबी पास किया। वही. मैं कह रहा हूं क्योंकि वो गरीबी से आए. थे। जैसे दोनों दोनों चीज़ आश्चर्यजनक करती. है। एक तो ये होता कि लालू जी ना पढ़े होते. तो ये ना पढ़ते समझ में आता। लालू जी गरीबी. में पढ़ाई की अहमियत को समझे थे। हां समझे. थे। मैं इसलिए थोड़ा इसलिए और बड़ा विषय.
और दूसरा उनकी सारी बिटियां पढ़ ली गई।. हां पढ़ गई। हां। लेकिन वही ये कहिए कि. लापरवाही किए होंगे। हां। लेकिन तेजस्वी. के बारे में हां वो तो एक जा तेजस्वी ने. कहा भी है क्रिकेट खेलने के चलते हैं कि. कई सारे खिलाड़ी आप तेजस्वी से बात कीजिए।. आप इवन लालू प्रसाद जी आपको थ्योरेटिकल. बात नहीं बता सकते हैं। लेकिन तेजस्वी का. समाजवाद का. कांसेप्ट सोशलिज्म मंडल कमीशन ऑफिशियल. फाइल एज ए लीडर अपोजिशन हमारा क्या रोल.
है? एज ए चीफ मिनिस्टर रोड कंस्ट्रक्शन. मिनिस्टर उसमें हमारा क्या रोल है? यह. पूरी परिपक्वता इतने कम उम्र में उनको है. और जहां तक मेरी समझदारी है वह बहुत. ही तेजस्वी जो हैं आपसे मुलाकात होगी तो. आपके बातों को बहुत ध्यान से सुनेंगे हम. मेजर्ड जवाब देंगे उसका और व्यापक. अंडरस्टैंडिंग उनको राजनीति की हम है. इसमें कोई डाउट नहीं अब फिर इसमें आता है.
मेरा परिवार पे सवाल लालू जी के परिवार. में कई सारे बच्चे हैं हालांकि वो हर चीज. में खुद ही अपना मजाक उड़ाते थे। कांग्रेस. कह रही थी नसबंदी कराओ हमने ढेर सारा. बच्चा उसने क्या था राजू श्रीवास्तव उनके. सामने मजाक किया थे वाला और लालू जी हंस. रहे थे। इनफैक्ट तेजस्वी का भी क्रिकेट. वाला वीडियो है कि बताइए जी हम दिल्ली के. लड़का हमारा पानी पिला रहा था और खुद मजाक. उड़ा रहे थे और ये उनके कैरेक्टर की एक. अच्छी बात भी है कि वो चीजों को बड़े. लाइटली देते हैं। आजकल के नेता बड़ी जल्दी. बुरा मान जाते हैं। लालू जी बुरा नहीं. मानते थे। लेकिन सीरियस पॉलिटिक्स में.
मीसा जी थी। बाद में रोहिणी आई। तेज. प्रताप बड़े बेटे थे। तेजस्वी यादव क्यों. चुने गए? कई लोग क्योंकि मीसा को मानते थे. कि मीसा उत्तराधिकारी हो सकती थी। तेज. प्रताप बड़े बेटे थे। तेज प्रताप और. तेजस्वी भी चलता रहता है। पटना जाओ मैं जब. जाता हूं तो बड़ी सारी किस्से कहानी सुनाई. पड़ती है कि अभी तो सब ठीक है। बाद में ये. पोस्ट लालू जी ये ये हो जाएगा। दिमाग घूम. जाता है मेरा। आप क्योंकि पत्रकार भी हैं, लालू जी से मिले भी हैं। तेजस्वी को क्यों. चुना उन्होंने अपना उत्तराधिकारी?
देखिए ई भी एक परिस्थिति जन्य है। हुआ. क्या कि पहले सबसे बड़ी बेटी मा थी हम जब. मौका देने की बात आई तो मौका दिया. उन्होंने मिा को मिनाव हार गई या मैंने. फिर बाद में बहुत दिनों के बाद में. राज्यसभा वगैरह में गई अभी तो लोकसभा भी. जीत गई है वो ऐसे ही नेक्स्ट लाइन में जो. लड़का था रामकृपाल जी वाला चुनाव. पहला चुनाव राम कृपाल जी 2009 में जो लड़ी.
थी हम. तो मौका तो उनको पहले दिया गया उसके बाद. से आपको तेज प्रताप हैं तो. [संगीत]. वो बाद के 20101 के बाद से वो एक्टिव हुए. अपना जब ये क्रिकेट खेलते थे दिल्ली में. और लालू जी जेल चले गए उनकी मां एक तरह से. पावर में भी नहीं थी अकेली पड़ गई. तो वह आ गए देखने के लिए कि भाई मैंने.
लालू जी ने घर के लोग रघुवर प्रसाद सिंह. जिंदा थे। उसमें लोगों ने कहा होगा कि भाई. थोड़ा देखो आकर के कि इसमें क्या हो रहा. है। तो इस तरह से वो क्रिकेट छोड़ के और. आकर के देखना शुरू किया। आप तेज तेज. प्रताप के पहले के दिनों का आप वीडियो. क्लिप्स वगैरह देखिएगा। ही वास नॉट वेरी. वोकल ही वास नॉट वेरी नॉट प्रताप है।. तेजस्वी तेजस्वी हां तेजस्वी हां. लेकिन तेजस्वी इनहेरेंटली तेज आदमी है। वो.
म ज्यादा समझ क्विक लर्नर है। क्विक लर्नर. है. और लर्न करने का कोशिश करते हैं। तो अब. राजनीति में तो सारे लोग हैं। लेकिन. तेजस्वी को चुन होता क्या है कि उनमें. दिखाई पड़ा। पूरे पार्टी तो ठीक है लालू. जी प्रेसिडेंट है अकेले नहीं ना है उसमें. जगत बहुत लोग हैं ना आज मनोज झा जी हैं. बहुत सारे लोग हैं वहां पे तो पार्टी के. लोगों के बीच में हम जब इंटरनल मीटिंग.
होती थी तो इनका एक्सेप्टेंस तेजस्वी का. बढ़ने लगा इनकी बातों पर लोगों. को लगने लगा कि यह ठीक है तो फिर लालू जी. को भी उसमें क्या है कोई भी आदमी आगे बढ़. रहा है अगर तो वो थोड़े तेज प्रताप को. नहीं चाहते मानते सबको बराबर है। लेकिन. तेजस्वी वाज़ एबल टू टू मेक ह स्पेस इसलिए. क्योंकि तेजस्वी में थोड़ी गंभीरता है।. हां गंभीरता है। जैसे तेज प्रताप को कई. बार हल्की चीजों में जोड़ दिया जाता है कि. वो भक्ति और अपना उनकी एक अलग दुनिया है।.
अलग दुनिया है। जबकि लाल जबकि लालू जी का. जो रियल स्टाइल है बात करने का या वो. अंदाज है। वो तेज प्रताप में ज्यादा है।. तेजस्वी थोड़ा सोबर और लालू प्रसाद जी में. दोनों बातें हैं। ना ठीक है। वो वाजपेयी. जी को भी हंसा देते हैं। चंद्रशेखर जी को. हंसा देते थे। आडवाणी जी को हंसा देते थे।. लेकिन लालू बहुत ही हार्ड कोर मजे हुए. पॉलिटिशियन है ना। बोली से केवल नहीं ना. हो गया है। सही बात है। लालू एक राजनेता. है। दोनों चीजों का मिश्रण था। दोनों.
चीजों का मिश्रण है ना। अब केवल मजाक लालू. जी का स्टाइल आप बोल दीजिएगा। तो लालू जी. ऐसे ऐसे लालू के फैन है कि एकदम लालू की. तरह आपको तेज प्रताप से भी ज्यादा वो हर. गांव में इस तरह के लालू का फैन मिल. जाएंगे। लालू का आवाज निकालते हैं क्योंकि. लालू एक एक आइदर हां शाहरुख खान तक पहुंच. गया तो पहुंच गया तो लेकिन. राजनीतिक अपना एक्सेप्टेंस अमंग द. सोशलिस्ट कैडर्स अमंग द पार्टी कैडर्स.
इसमें. तेजस्वी का मेरिट है जो उसमें एक्सेप्टेंस. उनका बढ़ते चला गया और तब लोगों के बीच. में ही पढ़ते लोगों के बीच में जाते हैं. तो ही इज़ क्वाइट पॉपुलर अमंग द पीपल आल्सो. भगवान करे लालू जी भी लंबी आयु जी हैं और. खूब सारे साल रहे। बट एक जर्नलिस्ट के तौर. पर आप पोस्ट लालू आरजेडी का भविष्य क्या. देखते हो? पोस्ट खास करके तेजस्वी के आने. के बाद से देखिए 2020 का. चुनाव लैंडमार्क चुनाव है। हम.
आपको आरजेडी के हेल्थ जनरल हेल्थ के पॉइंट. ऑफ व्यू से। कौन सा? 2020 का इलेक्शन।. 2020 असेंबली इलेक्शन। 2020 वाला? हां।. हां इसलिए कि देखिए 2010 में सबसे बड़ी. पार्टी बन गए थे। सबसे बड़ी कब बने थे जब. लालू जी जेल में थे हम और पार्टी की हालत. अच्छी नहीं थी। नीतीश कुमार छोड़ के चले. गए थे। मुकदमा लग गया था तेजस्वी के ऊपर. भी और लालू जी जेल में थे उनके पास। उनको.
कोई कैंपेन करने वाला नहीं था। प्राइम. मिनिस्टर ने 32 सभाएं की थी वहां जाकर के।. नीतीश कुमार जी तो विरोध में थे तो घूम ही. रहे थे। हम वह उसमें एंप्लॉयमेंट का नारा. कि 10 लाख नौकरी हम देंगे। एक. अनइंप्लॉयमेंट के लिए सिंचाई दवाई पढ़ाई. ये सब जो जनता से रिलेटेड जो इशू है उसको. उठाना अलायसेस को करना सीपीआई एमएल से. लेकर के जो लालू जी तो एब्सेंट है। अपने इ. कर रहे हैं इस तरह चीजों को तो एक बगैर.
राजनीति बनाना और उसको सक्सीड करवाना यही. शो कर देता है कि इन्हीं के हाथों में. कंटिन्यू रहेगा। इन्हीं के हाथों मेंकि. 2020 का इलेक्शन जो है वह तेज सरकार नहीं. बना पाया लेकिन सबसे बड़ी पार्टी आई थी और. उससे तेजस्वी कई लोग तो कहते भी हैं कि. नीतीश कुमार जी ने तेजस्वी को नेता बनवा. दिया बनवा दिया फैक्ट है देखिए अगर नीतीश. कुमार जी अलग नहीं हुए होते तो तेजस्वी को. लीडर ऑफ अपोजिशन के रूप में जो भाषण पहला.
उन्होंने दिया लीडर अपोजिशन के रूप में वो. भी लैंडमार्क भाषण था नीतीश कुमार को चुप. हो जाना पड़ा था जो जवाब नहीं दे पाए थे. इतने टू द पॉइंट भाषण उन्होंने दिया. तेजस्वी ने तो वहां से इमर्ज किए उसके बाद. से आपको चुनाव जितवाया लोगों के बीच में. तो अब अब आरजेडी के भविष्य के बारे में हम. ये चिंता जेडीयू कई लोग कहते हैं कि तेज. प्रताप है या बाकी जो भाई बहन हैं वो हो. सकता है धीरे-धीरे बीजेपी इधर-उधर सेटल्ड. हो जाए। नहीं यहां सिंगल डोमिनेंस रहेगा.
जब तक क्योंकि वहां कई धड़ों की बात होती. है कि परिवार एकजुट नहीं है। ताकत जो है. तेजस्वी जी के पास है लेकिन परिवार एकजुट. नहीं। कई अलग-अलग खेमे इस वक्त आरजेडी में. है। देखिए. अगर ऐसा होगा ना कैसे तेज प्रता ये आपको. चले गए साधु और सुभाष तो कोई पूछने वाला. नहीं है। हम आपस का देखिए एक जेलसी होना. कंपटीशन होने में दोनों में फर्क है। हम. उन लोगों को समझना पड़ेगा कि तेज तेजस्वी. यादव जो है ये नहीं कि लालू यादव ने उनको.
बना दिया है। वह लीडर बन गए हैं। तो अब उस. पार्टी में रहना है तो उनके भाई तो हैं. लेकिन उनके लीडरशिप को भी एक्सेप्ट करना. पड़ेगा। तो उसी में आपका भी भलाई है।. पार्टी का भी भलाई है। ये तो हो गया. प्रोफेशनल। प्रोफेशनल। अब मैं क्योंकि आप. पांच छ दिन लालू जी के साथ रहे थे। हां।. तो लालू जी का व्यक्तिगत झुकाव लगाव. पर्सनल के तौर पर। प्रोफेशनल तो चलो. तेजस्वी जी हो गए। अपने बच्चों से फर्क. किस पर है? नहीं लालू जी का हमको लगता है.
कि वो जहां तक व्यक्तिगत फादर के रूप में. वो कोई डिफरेंशिएट नहीं करते हैं। वो बेटी. को भी उतना ही मानते हैं। बेटा को भी उतना. ही मानते हैं। इसमें उनमें प्रॉब्लम नहीं. है। तेजस्वी आगे निकल रहा है। नहीं वो तो. प्रोफेशनल बात हो गई। मैं प्रोफेशनल बात. पर्सनल लेवल पर भी वो मानते हैं इन सबों. को अब उनके मुंह पर जो नाम रहता है इनों. का वही उसी नाम से पुकारते हैं आप बराबर. मानते हैं वो डिफरेंट एक और बड़ा मैंने. इंटरेस्टिंग चीज देखा सर लालू जी ने.
रिश्तों के माध्यम से राजनीतिक गठजोड़. बड़ा अच्छा किया है जैसे रागिनी यादव जो. है उनकी शादी जो है राहुल यादव से हो गई. वो समाजवादी पार्टी में है हेमा यादव उनके. पति विनीत यादव है दिल्ली के राजनीतिक. परिवार से अनुष्का यादव वो चिरंजीवी राव. जो है हरियाणा वाले उनसे जोड़ दी. राजलक्ष्मी यादव अह तेज प्रताप जी जो यहां. पर है मुलायम सिंह के भतीजे जो है पोते. हैं उनके यहां हो गई तो बड़ा इंटरेस्टिंग. रहा है कि शादियां भी राजनीतिक घराने में. कराई ताकि पॉलिटिकल पावर जो है मतलब उस.
शादियों में भी वो राजनेता वाला दिमाग चल. रहा है एक तेजस्वी जी की शादी मुझे लगता. है खाली अलग हुई थी या तेजस्वी ने अपना. किया था या तेज प्रताप का भी ऐश्वर्या जो. था वो भी राजनीतिक गठजोड़ था उस टाइम पे. नहीं देखिए होता क्या है ना कि जब आप किसी. भी प्रोफेशन में होते हैं ना आप जर्नलिस्ट. कोई डॉक्टर है, कोई सिविल सर्वेंट है। हम. तो उसके जो ताल्लुकात होते हैं ना उस तरह. के आदमियों से ज्यादा होते हैं। हां ये भी. बात ठीक है। यही मैंने असली बात है आपको।. तो तेजस्वी ने तो अब कोई शादी अपने कर.
लिया तो लालू जी ने उसमें एनकरेज किया और. उसको एक्सेप्ट कर लिया। लेकिन जहां लालू. जी को अपने खोज खोजना था अपने बेटियों के. लिए तो फिर अपने ही सर्किल में ना. खोजेंगे। सही बात है। अगर लालू जी खुद चले. जाए किसी सिविल किसी जज के यहां किसी. सिविल सर्वेंट किसी डॉक्टर के यहां तो. उसको वो हो सकता है कि उसका बात करने का. तरीका उनको वो लिंगो जो है वो बहुत नहीं. मिले उसमें। हां वो आदमी जिस दोस्ती आ रही.
कंफर्टेबल भी होता है। कंफर्टेबल होता है।. सर मुलायम सिंह से लालू. को हर फंक्शन में जाना है। हर जगह बैठना. है। पार्लियामेंट में एक साथ रहना है। अब. बारात में भी एक साथ जाना है। मिजाज भी. मिल रहा है। लेकिन मुलायम मुलायम जी को. लालू जी प्रधानमंत्री नहीं बनने दिए। नहीं. बनने दिए। ये सच है। हां सही बात है। ये. वाला जिक्र हुआ था आप लोगों की चर्चा में।. क्या पूछा था आपने मुलायम जी को? क्यों. नहीं बनने दिए? क्योंकि मुलायम जी ने भी. इसका जिक्र किया और लालू जी शायद बिल्कुल. एकदम वो हो गए थे कि नहीं नहीं अगर यह बन. गया तो मामला गड़बड़ा जाएगा। इसको यह बात. नहीं बताते हैं। होता क्या है कि उस समय.
देखिए यादवों का बड़ा नेता फिर मुलायम जी. बन जाते हैं देश में। इस तरह से लोग नहीं. बोलते हैं। नहीं ये तो हमारा हम तो. एनालाइज कर सकते हैं। हम तो पत्रकार हैं।. देखिए पत्रकार हैं। हुआ क्या था कि ये. इसका बीजारोपण जो हुआ था वो 90 में हुआ. था। हम 1991 में मुलायम सिंह जी जो थे वो. जनता दल से हट गए थे। उन्होंने अपना. समाजवादी जनता पार्टी चंद्रशेखर के बाद. में चंद्रशेखर से अपना पार्टी इन्होंने. बना लिया तो पार्टी के रूप में तो यह. पार्टी से अलग हो गए थे ना हम.
और 96 में आपको याद होगा कि पहले इन लोगों. ने कोशिश किया कि वीपी सिंह ही पीएम बन. जाए नहीं बने बीमार पड़ गए थे भाग गए वहां. से हम ज्योति बसु का चला कि इनको बन जाना. चाहिए वो तो उनकी पार्टी वाले सत्यानाश कर. दिए सत्यानाश कर दिए और उस कालक्रम में. लालू प्रसाद जी जनता दल के नेता थे और. देवेगोड़ा भी जो थे वह जनता दल के नेता. थे। चीफ मिनिस्टर थे वह कर्नाटका के हम तो. जनता दल के नेता थे तो और मुलायम सिंह.
नेबरिंग स्टेट में एक अपोजिशन माने इस. पार्टी में नहीं थे ना। ये बात तो रहा ही. होगा कि भाई दोनों यादव छत्रप थे। बिहार. में थे और उत्तर प्रदेश में थे। उनके. खिलाफ वो लड़ते थे। उनके खिलाफ यहां पर. एमएलए में चाहे चुनाव में वो भी खड़ा करते. थे तो फिर अपने अपोनेंट को कैसे बनाते वो. हमने दो किस्सा सुना सर एक किस्सा था कि. वीपी सिंह जो थे वो पसंद नहीं करते थे. मुलायम को मुलायम के थ्रूउ खिलाफ है वो.
उत्तर प्रदेश में भी जब चौधरी चरण सिंह के. साथ वो गए उस टाइम तो क्योंकि वो मुलायम. को मानते थे कि गुंडे मिले हुए हैं और. बड़ा मैंने पूरी स्टोरी की थी जो रिकॉर्ड. स्टोरी है तो उसमें वीपी सिंह का बड़ा. विरोध रहा है मुलायम का वीपी सिंह से वीपी. सिंह का इनसे तो वीपी सिंह मुख्यमंत्री. बनने देना नहीं चाह रहे थे लेकिन बन गए वह. फिर जब प्रधानमंत्री का नाम आया तो वीपी. सिंह उस टाइम क्योंकि थे तो उन्होंने रो. एक लगाया और दूसरा जो लीवर नीचे खींचा गया. वह लालू जी की तरफ से था क्योंकि ये दोनों. उसी पार्टी के मजबूत थे तो मुलायम जी बनते. बनते बिल्कुल ये था कि ये बन जाएंगे सीट.
भी ठीक-ठाक थी रोक दिया गया और मुलायम जी. इस बात को लेकर किलसे भी बहुत दिन तक थे. कि लालू ने हमको नहीं बनने दिया नहीं बनने. दिया तो देखिए लालू जी. टेक्निकली इसलिए नहीं बनने दिया कि भाई. उनके पार्टी में देवगोड़ा थे ना हां हां. उनके पार्टी के चीफ मिनिस्टर थे तो अपने. पार्टी के आदमी को उन्होंने प्रमोट किया।. मुलायम सिंह दूसरे पार्टी में थे। हां. लेकिन उनके जाति के तो नेता थे ना। वही. बात है ना कि बड़ा बन जाते। हां बड़ा बन. जाते थे। ये इंटरप्रिटेशन हो सकता है।. लेकिन बात यही थी कि देवगोड़ा उनके पार्टी.
के थे और नहीं बनने दिए। दूसरी बात है कि. देखिए उस समय भी दो धड़े थे। चंद्रशेखर और. वीपी सिंह इनिशियल डेज में चंद्रशेखर. उत्तर प्रदेश के थे। उत्तर प्रदेश के. विश्वनाथ प्रताप सिंह भी थे। हम लेकिन. चंद्रशेखर और मुलायम. सिंह ज्यादा नजदीक थे। तो ऑब्वियसली जब जो. चंद्रशेखर के नजदीक था वो वीपी सिंह से. दूरी था और दोनों यूपी में राजनीति करते. थे ना तो एक कंपटीशन भी रहा होगा तो जितना. लालू से कंफर्टेबल वीपी सिंह होंगे उतना.
मुलायम सिंह नहीं मुलायम के तो पूरे पूरे. जर्नी खिलाफ थे। मैं तो यहां तक पढ़ा था. कि मैं जब कहानी उसको कवर कर रहा था कि. मुलायम सिंह उस टाइम बहुत सारे डकैतों का. एनकाउंटर कर रहे थे वीपी सिंह जब. मुख्यमंत्री बने तो मुलायम के पीछे पुलिस. लगा दिए थे। फिर मुलायम यहां से चले गए।. क्या नाम है? दिल्ली चौधरी चरण सिंह जी के. पास गए। फिर चौधरी चरण सिंह जी ने उन्हें. यूपी स्टेट का हेड बनाया। हेड बनाया फिर. उनको शायद एमएलसी बनाया। उसके बाद जाके. पुलिस मिली उनको। तब जाके उनकी अपनी. सिक्योरिटी हुई। वरना वह मुलायम जी के. पीछे इतना पड़ गए थे वीपी सिंह। लेकिन बाद.
में वीपी सिंह की चली नहीं। इनफैक्ट जब. मुख्यमंत्री बनना था, तो वीपी सिंह ने. अपना वीटो लगाया था। वह तो जो ऑब्जर्वर था. उसको मुलायम जी ने टाइट किया कि तुमको. सबका वोट लेना पड़ेगा। वोट मुलायम जी के. फेवर में गया। मुलायम जी बन गए। लेकिन. वीपी सिंह ने भी उनको प्रधानमंत्री नहीं. बनने दिया था। उसमें लालू जी के साथ मिलके. हां हां तो ये दो आदमी खुराफात किए वरना. मुलायम जी प्रधानमंत्री रक्षा मंत्री जगह. प्रधानमंत्री होते हैं। हां होते हैं।. इसमें कोई डाउट नहीं है। मुलायम सिंह ने. इंटरव्यू में कहा है इस बात को कि हमको. लालू ने नहीं बनने दिया। आई फैक्ट है कि. उस उस कालक्रम में अगर लालू प्रसाद जी.
बहुत पावरफुल थे। इतने मेंबर ऑफ़. पार्लियामेंट थे। वो चाहते अगर तो वो बन. जाते। लालू जी काहे नहीं बन पाए कभी. प्रधानमंत्री? लालू क्या उनकी महत्वाकांक्षा थी? आप जब. बात उनसे किए लालू जी से तो कहीं अंदर. खाने महत्वाकांक्षा थी कि कोई ऐसा दौर था. जहां उन्हें लगाओ लालू जी को कि वो. प्रधानमंत्री बन सकते थे। बन सकते थे वो. वो आपको. लेटर हाफ ऑफ 1995 के बाद लालू जी की. स्थिति थी।.
लेकिन उसी टाइम में आप देख उसी 90 से 95. से लेकर के और 2005 के बीच में लालू जी के. जो फर्डर स्कैम था ना इसमें उनका पूरा. करियर एकदम करियर को अदरवाइज वो बन सकते. थे तो फाडर स्कैम अगर फर्नांडिस साहब ने. फॉर्डर स्कैम नहीं करवाया होता तो शायद. लालू जी भी लालू जी भी बन सकते थे बिलकुल. बन सकते थे मतलब फिर फर्नांडिस साहब से ना. गुस्सा जायज है बिलकुल जायज है अह अ लालू.
जी नीतीश जी इनका अभी कैसे संबंध है या. आखिरी के दिनों में कैसे देखते हैं. क्योंकि अलग होते रहते हैं साथ होते रहते. हैं पता नहीं चलता कब वो कहते हैं कि. नीतीश के पेट में भी दांत है नहीं पेट में. ये सब बोलने की बात है व्यक्तिगत जहां तक. संबंध है हम वो लालू जी को अब नीतीश जी के. को तो हम नहीं जानते हैं लेकिन लालू जी को. व्यक्तिगत जो संबंध है हम वो नीतीश कुमार. से कभी खराब नहीं है। पर्सनल लेवल पर बता. रहे हैं आपको।. हां अब नीतीश कुमार की जो मानसिक स्थिति.
है, हेल्थ का जो स्थिति है, अब लोग बताता. है कि भाई उनको पता ही नहीं चलता है कि वो. क्या कर रहे हैं। हां, कई सारा वीडियो. वायरल हुआ है। वीडियो वायरल हुआ है और. इंटरनली लोग भी बताते हैं कि ही इज नॉट इन. हिज. सेंसेस। तो इसमें कहना तो बड़ा मुश्किल. काम है। लेकिन व्यक्तिगत जो संबंध. है पॉलिटिक्स को थोड़ा सा किनारा कर दीजिए. इसमें। हम्म तो वो लालू प्रसाद जी लालू. प्रसाद जी से तो हम मिलते रहते हैं। उनसे.
तो मिले हमको पांच छ साल हो गया नीतीश. कुमार जी से परिस्थितियां ऐसे पहले तो. बहुत मिलते थे. हम तो पर्सनल इलविल लालू के लिए के दिमाग. में तो कभी नहीं है. नीतीश जी को लेकर के ये बात फैक्ट है। ठीक. है सर आखिरी सवाल तेजस्वी जी विरासत आगे. ले जा रहे हैं वो डिजिटल युग वाले हैं बट. लालू जी पर्सनल वाले थे जैसा आपने कहा. जितना महज साहब सुना कि हेलीकॉप्टर उठाओ. चलते हैं आज फलाने गांव में मिलते हैं मजा.
आएगा लोगों से मिले तेज प्रताप कई बार वो. एक्टिंग को कोशिश भी करते हैं कि जाते हैं. कोरोनाम में चले गए भैंस वाले को बुला. लिया लो पिताजी से हमारे बात करो हमने तेज. प्रताप से पूछा भी बोले हमारे पिताजी ऐसे. ही मिलते थे ऐसे मिलते थे कि कोई भैंस. नहला रहा उसको उससे बतिया लिए उससे ठोक. दिया वो हमारा अपना हो गया तेजस्वी डिजिटल. वाले. ये. समय की मांग एक तरफ चली जाएगी। आपको लगता. है लालू जी की जो लेगेसी है वह तेजस्वी जी.
नए सिरे से बढ़ा ले जाएंगे. या वो जो मीडिया कई बार टर्न देती है लालू. के लाल उसका बैगेज रहेगा अभी कई सालों तक. देखिए ये बैग लालू लालू का जो पॉलिटिकल. लिगेसी है हम वो बैगेज नहीं है हम वो तो. इनका एसेट है वो रहना भी चाहिए हां उन पर. जो जो एक्सटर्नल तरीके से या पॉलिटिकल. अपोनेंट के द्वारा लगाए हुए एलगेशन है.
उसको छोड़ दीजिए तो उस मैंने वो बैगेज भी. पॉजिटिव सेंस में कहा था कि जैसे बैगेज. मतलब जैसे जैसे उदाहरण देता हूं आदित्य. नारायण आदित्य नारायण है तो उदित्य नारायण. बहुत बड़े सिंगर है तो बेटा भी अच्छा गाता. है लेकिन हर बार तुलना बाप से हो आती है. तो वो बाप के नाम का बैगेज कि मतलब. तुम्हारा बाप बहुत बड़ा आदमी है तो एक. तुलना हो आती है तो तुम कुछ अच्छा करोगे. तुरंत लालू जी से तुलना हर चीज में लालू. जी से तुलना उसकी बैगेज की बात कर रहा हूं. मैं नहीं तो वो वो वो तो वो बैगेज को हटा. नहीं सकते.
हैं पूरे जीवन हां. तेज तेज प्रताप हम वो बैगेज को एसेट में. ही इनको बदलना होगा लालू लालू प्रसाद जी. से बड़ा नेता सोशल जस्टिस और सेकुलरिज्म. के फ्रंट पर आईडियोलॉजी को नहीं. कंप्रोमाइज करने वाला हम कोई दूसरा हो. नहीं सकता है इसको जिस दिन ये डिसोन. करेंगे उस दिन अपने बहुत परेशानी इनको हो. जाएगी इसको तो लेके इनको चलना पड़ेगा हम. और ई हो सकता है कि चले भी इस पर हां लालू.
का जो अंदाज है लोगों से मिलने वाला हम जो. लोगों के बीच में चले जाना भैंस वालों से. बात करना किसी से खनी मांग के बन बनवा के. खाने लगना या देगा तो उसको ले लेना ये. सब जनरेशन उतना उतना सहज तो होना हां मतलब. वो शाहरुख खान को भी डोमिनेट कर देते थे. हमने वो वीडियो देखा जहां शाहरुख खान भी. बेचारा उनके सामने शाहरुख खान में से बहुत. वोकल आदमी है। लेकिन लालू जी उनके सामने. भी जी हमारा स्टाइल है। कंख ऐसे बरवा से.
झार लेते हैं। छोटे आर्मी कट रखे हैं। तो. वो तो ये तो नैसर्गिक है। हां तो अब वो तो. नहीं हो सकता है। लेकिन लालू जी का हमको. लगता है कि बैगेज नहीं है। वो वो लालू जी. एसेट है. और उनको फॉलो अप करना पड़ेगा तेजस्वी को।. ठीक है। और ये जो आखिरी चीज ये जो. परिवारवाद का एक आरोबा जैसे मैं प्रशांत. किशोर का बहुत सुन रहा था आजकल तो कहते. हैं कि लालू जी कहते हैं कि यादवों का. लड़का आगे बढ़ा। अरे यादवों का नहीं बढ़ा.
जी परिवार का बढ़ा। परिवार का सारा लड़का. लड़की सबको सेटल कर दिया। सब पॉलिटिक्स. में आ गया है। लालू जी से पूछे ना कभी. लालू जी के अलावा या कभी इनके परिवार के. अलावा कोई आरजेडी का अध्यक्ष बन सकता है? नहीं बन सकता। प्रशांत किशोर खूब कहते हैं. और एक परसेप्शन ही बना। जैसे मुलायम जी के. परिवार को, लालू जी के परिवार को जिसको. सेंट्रल भी करता है और इनके विरोधी भी. कहते हैं कि इन्होंने पिछड़ों, दलितों, शोषितों, वंचितों का विकास तो किया लेकिन. आखिर में एक करप्शन और दूसरा परिवारवाद।.
इसका इन पर नेगेटिव बैगेज। अब मैं यहां. नेगेटिव बैगेज बात कर रहा हूं। वो बहुत आ. गया। जिसने इनकी जो लार्जर देन लाइफ हो. सकती थी, अगर ये परिवारवाद से निकलते, तो. बच जाते। आप मानते हो कि अगर परिवारवाद. नहीं होता, तो लालू यादव की छवि और बड़ी. होती? नहीं। नहीं मैंने इसको मैं दूसरे. रूप में देखता हूं। आप दक्षिण से लेकर के. और ये उत्तर की राजनीति को आप नॉर्थ साउथ. सब जगह देखिए। वो चाहे स्टालिन हो चाहे. कहीं पर भी चाहे उत्तर प्रदेश में मुलायम.
सिंह यादव उसी एनडीए में आप देखिए कि. रामविलास पासवान जी के बेटे चिराग पासवान. है ये इस दशक में परिवार अब राहुल गांधी. को लोग बोलते हैं कि भाई ठीक है हम इसमें. तो कुछ नहीं ये अब रविशंकर प्रसाद जी जो. है उनके पिता बहुत बड़े नेता थे पटना के. हां तो ये देखिए होता क्या है ना कि एक. कल्चर होता है हर फैमिली. तो अभी इजादे हो गया है कि जिस फैमिली का.
जो कल्चर आपका है उसी में लोग आगे बढ़ने. लगते हैं। यह एलगेशन लगाना केवल अपने बाल. बच्चों को ही आगे बढ़ाया। ऐसे ऐसे जादों. में नेता लालू जी ने पैदा किया जो कुट्टी. राम राम अभी राम कृपा अभी ना बीजेपी में. लोग देख रहा है ना कि कुट्टी काटते थे. किसी चिरिया टांड में कहीं पर एक दूसरे. यादव के घर पर ये एक तरह से सर्वेंट का. काम करते थे उनको लालू यादव ने उठा के और. मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बना दिया आप.
रविंद्र चरण यादव को 1990 में वो जो मंडल. वीपी मंडल वीए नारायण मंडल जो जहां पर. अभिजात यादव का घर वहां. पर नए यादवों को उन्होंने बच्चे तो बाद. में ना हुए हैं ना बहुत छोटे 90 में तो. बने थे तो बहुत सारे नेक्स्ट जनरेशन यादव. लीडरशिप उन्होंने पैदा किए जो डिफरेंट. पार्टियों में है आज के तारीख में तो लालू. ने आपको भगवतिया देवी तो पत्थर तोड़ती थी.
ना भाई अभी सोशलिस्ट जमाने में 69 में. कहीं पर लोहिया जी के टाइम में लड़ी थी. उसके पूरे परिवार को एक बार दो बार करके. एमएलसी से एमएलए तक उन्होंने बना. बच्चे तो बाद में बड़े हुए हैं। आए हैं।. ठीक है? साधु सुभाष उसमें बढ़े। परिवार के. लोगों को बढ़ाया। लेकिन यह हम मानते हैं. कि हां परिवार उनका बढ़ा है।. लेकिन प्रशांत किशोर जी केवल परिवार को. बढ़ाया। तब आप आप इसको डिनाई कैसे डिनाई.
कीजिएगा? राम कृपाल अगर लालू नहीं होते तो. राम कृपाल कहां होते? आज कुटी काट रहे. होते कहीं ना कहीं पर ना इनको कौन बढ़ाया? क्यों बढ़ाया? वह परिवार के थे। रविंद्र. चरण यादव कौन थे? मधेपुरा. के वो कहीं राजनीति करते थे। बहुत सारे. जाधव नया-नया जादव लीडरशिप लालू यादव ने. पैदा किया. है। आज भोला यादव के कोई फोन करता है। आप. लालू से मिलने का पहले बताइए क्या करते थे. वो? उनके परिवार का है वो।.
एमएलए बने ना दो दो बार एमएलए बने और अभी. लालू जी के सेक्रेटरी हैं वो भोला यादव. कौन. है कैसे जान पहचान लालू को हुआ उनको वो तो. आज उसी टाइम में है जब परिवार है उनका ऐसे. ही जान पहचान हुआ कि लालू जी को जब स्कैम. में फंसे तो किसी वकील के जूनियर वकील थे. आगे पीछे अपना फाइल वो लेके जाते थे अपना. दस्तखत कराने के लिए नजदीक हो गए लालू को.
लगा कि भाई ट्रस्टेड आदमी बढ़ा दिया आगे. उसको तो केवल परिवार को लालू ने परिवार को. बढ़ाया है लेकिन बहुत बड़े तादाद में ऐसे. ही लोग उनके पीछे नहीं रहते हैं आखिरी. सवाल सर इस साल चुनाव है बिहार में. लालू जी बाहर हैं। अभी तबीयत थोड़ी नासाज. है लेकिन स्वस्थ हैं। तेजस्वी जी हैं।. नीतीश जी की भी तबीयत खराब है। लोग कह रहे. हैं कि ये वाला चुनाव बड़ा इंटरेस्टिंग. होगा। हां यह चुनाव बिहार को अगले एक दशक.
के लिए नई दिशा देगा।. क्या क्योंकि क्या लालू नीतीश की. पॉलिटिक्स से इस बार बिहार आगे निकलेगा या. अभी भी नीतीश जी रहेंगे लालू जी का भी. इफेक्ट रहेगा इस चुनाव में या इस चुनाव. में दोनों का इफेक्ट नहीं रहेगा यह नए. सिरे से चुनाव होगा? नहीं ये देखिए आप. हिस्टोरिकली एज मान्यता को देख के चलिए।. यह फैक्ट है कि जो 70 के दशक में जो जो 70. के पार किए हुए जो लोग हैं वह टॉईलाइट ऑफ.
देयर लाइफ में है। वो चाहे प्रधानमंत्री. हो चाहे नीतीश कुमार हो चाहे कोई भी हो. चाहे लालू प्रसाद जी हो। अब इन लोगों का. एज जो है वो खत्म जिस रूप में खत्म. हो अब ये पराभव की तरह ही है। सूरजास के. लाइफ में अपने हैं। तो नीतीश कुमार जी रहे. अब हो सकता है कि सीएम बन जाए। लेकिन अब. वह 5 साल 4 साल 8 साल की कि एक साल अब. इसको दिखाई पड़ रहा है कि इन लोगों का. डिक्लाइन का ही टाइम है। 75 ईयर एज हो गया.
ना लालू. जी फॉर ऑल प्रैक्टिकल पर्पस जो बैकग्राउंड. में. है तो चुनाव तो इंटरेस्टिंग होगा और जहां. तक क्राउड विज़डम का सवाल है तो उसमें. लोगों के दिमाग में तो बात है ही कि नीतीश. कुमार जो है अब ये प्रैक्टिकली अभी काम. करने के लायक काम उन्होंने किया लोग. एक्सेप्ट भी करता होगा लेकिन लोग जानता है. कि ही ही नो लगर.
गोइंग टू बी टू लीड द स्टेट द वे ही यूज. टू लीड तो यह चुनाव तो महत्वपूर्ण तो है. ही रहा सवाल पार्टियों का तो इसमें एज. देना आज के तारीख में बहुत ही मुश्किल काम. है कि हां मोदी जी जाएंगे तो जगजीत लाए. पहला बार बीजेपी का सीएम बन जाएगा तेजस्वी. जी नहीं नहीं मैं ये ये पूछ ही नहीं रहा. हूं मैं प्रेडिक्शन तो जा ही नहीं रहा हूं. तो मैं पत्रकार हूं मुझे पता है कि आखिरी. महीनों तक खेल बदलता है आखिरी दिन तक खेल. चलता है वोटिंग के दिन भी सुबह क्या हो.
गया शाम को वह भी मायने रखता है। मैं खाली. इतना पूछना चाह रहा हूं कि यह जो चुनाव इस. साल 25 में है इसमें लालू जी का नीतीश जी. का इफेक्ट होगा इन पर भी चुनाव रहेगा. मोटा-मोटा या इस बार का चुनाव जो है बीते. दो-तीन दशक के बाद लालू नीतीश फैक्टर पर. उतना निर्भर नहीं होगा। अब दूसरे फैक्टर. ज्यादा इंपॉर्टेंट होंगे। इनसे बिहार की. पॉलिटिक्स मूव ऑन करेगी। देखिए लालू जी का. जहां तक सवाल है अब तो तेजस्वी फैक्टर है।. हम वो तो ऐसे ही एक तरह से अपने को. विलिंगली हम हेल्थ ग्राउंड कहिए एज कहिए.
या हमारा सेकंड लाइन तैयार हो गया तो अब. उनका उस तरह से नहीं है। हां हिस्ट्री है. उनका तो उनके इमोशन जुड़ा हुआ है तो लोग. उनके जो वोटर्स हैं वो ठीक है लालू जी का. नाम लेते हैं। नीतीश कुमार जी का ये अंतिम. चुनाव होगा जिस जिस रूप में हो इस नीतीश. कुमार इसके बाद जो है नीतीश का एरा जो है. वो नहीं चलेगा।. ओके। इस चुनाव में नीतीश फैक्टर रहेंगे।. फैक्टर तो रहेंगे क्योंकि चीफ मिनिस्टर है.
वो। फैक्टर तो रहेंगे। उनकी पार्टी अभी भी. है जिंदा है वो। हम. जिस भी कंडीशन में है बीजेपी को लगता है. कि भाई इसको किसी तरह से चुनाव में अलायंस. करके साथ में लड़ने का है तो फैक्टर तो. रहेंगे वो। चलिए इंटरेस्टिंग रहेगा। कभी. और नीतीश जी पे भी आपसे मुलाकात करें।. किताब नितीश जी पे भी लिखिए। जरूर. लिखेंगे। लगता है बड़ा इंटरेस्टिंग. कैरेक्टर वो भी है। हां हां बिहार के. पॉलिटिक्स में अद्भुत कैरेक्टर उनका है।. कि अकेले कभी नहीं जीते लेकिन जिसके साथ. रहे वही जीता।.
लालू जी से पीछे हो गए शुरू में लेकिन जब. आगे बढ़े इतना आगे बढ़े कि लालू जी से. ज्यादा टाइम चीफ मिनिस्टर रह गए। सही बात. है। नहीं मौका मिलेगा जरूर करेंगे। हम. लोगों का काम क्या है? थैंक यू सर। लवली. टॉकिंग टू यू। थैंक यू। वी आर माय प्लेजर।. और जाते-जाते कोई बात अगर आप कहना चाहे. लालू जी पर कुछ एक बताना चाहे जो लोग ना. जानते हो कोई एक उनकी जिंदगी का हिस्सा. लालू जी के बारे में इतना होली बड़ा अच्छा. खेलते हैं हम सुने हैं और गाना ववाना बड़ा. सुनते हैं लालू जी बहुत ही कलरफुल आदमी. हैं बहुत ही आत्मीय आदमी है उनको किसी का.
सुनकर के इंप्रेशन बनाइएगा कहीं देख के. इंप्रेशन बनाइएगा टीवी पर नैरेटिव पर मैं. इतना ही कह सकता हूं कि एक बार उनसे मिल. लीजिएगा आपकी पूरी धारणा बदल. जाएगी। इंटरेस्टिंग।. बहुत हृदय आदमी है। आप व्यक्ति के रूप में. बहुत ही अच्छे आदमी हैं।.
