Unplugged Islam Through Heart & History with Dr. Illyasi | Ramzan Meets Navratri| Eid | Navratri
रमजान का महीना सिर्फ एक पाक महीना नहीं. होता रमजान की मुबारकबाद भी आपको शुक्रिया. मैं भी आपको नवरात्रि की शुभकामना देता. हूं इस्लाम की शुरुआत 1400 साल पहले हुई. थी इस्लाम जब से सृष्टि रची गई है तब से. इस्लाम है क्रिश्चियनिटी जजम और इस्लाम. इनका क्या कॉमन कनेक्शन है आपस में सब. कजंस हैं जूस और मुस्लिम्स क्लोजेस्ट कजंस. हैं आपस में एक रिलीजन बनने वाला है उस. रिलीजन का नाम ही है इब्राहिम फेथ हजरत. मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम साहब जो.
है ये पैगंबर है पग अवतार है ये कुरान के. अकॉर्डिंग अब कोई नबी नहीं आने वाला हैरी. एक फ्रेंड है पाकिस्तान में आप प्रोफेट. मोहम्मद के जहां कहिए हजरत मोहम्मद. सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम शी सेड यह सही. कोट है तो मुझे ये क्यों टोका दरअसल. उन्होंने जो हमने हमने जो कहा इंग्लिश में. पीस बी अपॉन हिम उन्होंने उसको अरबी में. कह दिया सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओके अगर. वो आपको अच्छे अंदाज में वो समझा देती हां.
पीस बी अपन हिम तो आपको ज्यादा समझ में आ. जाता 11 मैरिजस में से 10 मैरिजस में. विधवा थी वो महिलाए इसके पीछे क्या. कांसेप्ट सर हो सकता है मिश्र जी बहुत. अच्छे सवाल कर रहे क्या मक्का में शिवलिंग. है मुझसे भी पूछते हैं मेरे जो मेरे से जो. जुड़े लोग हैं हिंदू हिंदू शमी का एनर्जी. ड्रिंक पीना क्या वह गलत था नुपुर शर्मा. प्रकरण में जो कुछ कहा गया था वह कितना. सही था कितना गलत मस्जिद का कांसेप्ट क्या. है वेरी गुड क्वेश्चन नमाज मैंने कहीं. सुना कि संस्कृत शब्द है हां यकीनन नमा.
माने झुकना अज माने ईश्वर ईश्वर के सामने. झुकना ईश्वर के सामने सरेंडर होना उसे. नमाज कहते हैं इस्लामिक टीचिंग में नॉन. मुस्लिम्स को यानी स्पेशली हिंदू उस को. कैसे देखा जाता है कुरान के अंदर कि इन. काफिरों से अपना रिश्ता मत रखो जो नॉन. बिलीवर्स थे भारत के लोग आस्तिक हैं जिहाद. का जिक्र होता है जिहाद माने नेगेटिव कर. दिया लश्कर तैयबा जो उसका मायना है. मोहम्मद साहब की सेना जेशे मोहम्मद.
मोहम्मद की सेना लश्कर यह सारी जो. ऑर्गेनाइजेशन है यह इस्लाम के मानने वाले. हो ही नहीं सकते इस्लाम में यह हराम है. क्या क्या इस्लाम में हराम है इस्लाम में. कुछ ऐसा है या कुरान में जिसको लगता है कि. समय के साथ थोड़ा सा अपडेट करने की जरूरत. है या जो है वह परफेक्ट है जो गल्फ कंट्री. का मुसलमान वो अलग है वो अरब है और. हिंदुस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश का. मुसलमान है इसमें क्या डिफरेंस है ये सरात. मुसलमान है वो अरबी मुसलमान है.
नमस्कार आपके साथ मैं हूं शुभंकर और रमजान. के इस पाक महीने की हमारे सभी दर्शकों को. बहुत-बहुत मुबारकबाद खुशियां रमजान जैसा. कि हम सभी जानते हैं इस्लाम में सिर्फ एक. महीना नहीं है बल्कि खुदा से इबादत करने. का अपने आप को बेहतर करने का एक जरिया है. इसीलिए हमें लगा कि आज इस्लाम को लेकर बात. की जाए और हमारे साथ एक खास मेहमान है. डॉक्टर इमाम उमेर अहमद इलियासी साहब चीफ. इमाम है और कहा जाता है कि तकरीबन आधा. मिलियन जो इमाम है व की ऑर्गेनाइजेशन के.
अंदर आते हैं तो इनसे बेहतर शख्सियत. इस्लाम को समझने के लिए आज हमें नहीं मिल. सकती थी बहुत-बहुत स्वागत है सर रमजान की. मुबारकबाद भी आपको शुक्रिया उम्मीद करता. हूं कि आपके रोज अच्छे जा रहे होंगे. अल्हम्दुलिल्लाह शुक्र है कैसे हैं आप. बहुत अच्छा हूं आनंद है हमने जैसे शुरुआत. की सर कि रमजान का महीना सिर्फ एक पाक. महीना नहीं होता है हमें थोड़ा बताइए. हमारे दर्शकों को जो नहीं जानते मुझ जैसे. लोग और आज हमारे सवालों में अगर कोई. गलतियां हो तो उसके लिए माफी भी कर. दीजिएगा क्योंकि नियत अच्छी.
सवाल कम जानकारियों की वजह से कुछ आगे. पीछे हो सकते. हैं मैं भी आपने जिस तरह से मुझे रमजान की. बधाई दी शुभकामना दी मुबारकबाद दी इसी तरह. से मैं भी आपको नवरात्रि की शुभकामना देता. हूं नवरात्रि बहुत जल्द आने वाले हैं. जी नवरात्रि हो या रमजान हो य इबादत है एक. पूजा. है यह वह इबादत होती है जो आत्मा को परमा.
से कनेक्ट करती है जोड़ती. है रोजा खाली भूखा रहने से मकसद नहीं. है. रोजा आत्मा को पवित्र करती है पाक करती. है जिस तरह से रोजा रोजा रखा जाता है 30. दिन का जब हम रोजे रखते हैं तो रोजे के. अंदर हमारी जो पूरा शरीर है बॉडी है जो. डिटॉक्स हो जाती है.
रोजा के बहुत सारे नियम. हैं उस नियम के अंदर जो सबसे ज्यादा. महत्वपूर्ण है वह है कि आप अपने अंदर की. सफाई करते हैं आपके शरीर की भी सफाई हो. रही है अंदर की जो बुराइयां है उनकी भी. सफाई होती है अब बेसिकली अपने आप को पाक. करना. है पाक करने का एक तरीका है जिस तरह से हम. थोड़ी थोड़ा खाना है लिमिट में और दिनों.
के मुकाबले कम खाना. है. और जब हम कम खाते हैं तो हमारी जो पूरी जो. बॉडी है वह डिटॉक्स हो जाती है तो सेहत. तंदुरुस्ती हमारे शरीर को होती है इसी तरह. आत्मा की भी तंदुरुस्ती होती है आत्मा की. भी पाकी कीी होती है जब हम बुराइयों को. निकाल देते. हैं रोजा रखने सेक उसके बहुत सार नियम में.
एक नियम है कि आपको कोई गलत काम नहीं करना. है आपको झूठ नहीं बोलना है किसी को तकलीफ. नहीं देनी है किसी के बारे में बुरा सोचना. भी नहीं है बुरा देखना भी नहीं. है यह. बेसिकली रूह की. पाकीजा से नवरात्रि भी है नवरात्रि भी लोग. जो रखते हैं व्रत रखते हैं उसके अंदर भी.
अपनी आत्मा और शरीर को पाक करने के लिए. वैसे तो हर धर्म में जी आप किसी भी धर्म. में जाएंगे किसी भी रिलीजन के अंदर आपको. देखेंगे कि सबके यहां व्रत का कांसेप्ट है. ूस में जाइए उनके यहां 10 दिन का होता. है क्रिश्चियंस में जाइए उनके यहां भी 20. दिन का होता है तो सभी धर्मों के अंदर. नवरात्रि नौ दिन के होते हैं हर धर्म के. अंदर यह है.
तो यह सबके लिए अच्छा है तो जब आत्मा और. परमात्मा एक दूसरे से मिलती है तो उसके. अंदर एक नया बदलाव पैदा आता है तो 31 को. ईद है हां 31 तारीख को चांद दिक जाएगा जी. और डिपेंड करता है चांद के ऊपर तो चांद. दिखने के बाद ईद हो जाएगी यानी उसके बाद. हमको हमारी ईदी मिल जाएगी यकीनन ईद यकीनन. मिलती है यही इसका नाम इसी का नाम ईद है. ईद खुशियों का नाम है हम पूरा महीना जब. रोजे रखते हैं.
और पूरे रोजा रखने के बाद पूरे महीना जब. हम जब ईद का दिन आता है वह तवार वो. खुशियों का त्यौहार है वो जो नमाज पढ़ी. जाती है वही हमारी ईदी होती है जो नमाज. पढ़ते हैं ईद की और फिर हम उसमें जो. मांगते हैं एक दूसरे के. लिए उससे जो खुशियां मिलती है वही ईद है. आपने अभी एक जिक्र किया कि जस में. क्रिश्चियनिटी में भी फास्टिंग का कल्चर. है मैं जब पढ़ता हूं अ.
तो इब्राहिम शब्द का जिक्र हर जगह नजर आता. है मुझे एक क्यूरियस क्यूरिसिटी मेरे अंदर. पैदा होती है एक जैसे चर्चा होती 1400 साल. पहले इस्लाम आया कुछ लोग कहते हैं कि नहीं. इस्लाम शुरू से था 1400 साल पहले उसे. स्प्रेड किया गया पावरफुल तरीके से. स्प्रेड किया गया क्रिश्चियनिटी जजम और. इस्लाम इनका क्या कॉमन कनेक्शन है पहला. सवाल तोय एंड सेकंड क्वेश्चन इस्लाम की. शुरुआत 1400 साल पहले हुई थी या शुरू से. इस्लाम था.
बहुत अच्छा सवाल है और यह सवाल मुझे लगता. है. कि लोगों को सही बात जानी चाहिए कंफ्यूजन. बहुत सारा है लोगों को मालूम होता नहीं है. आधा ज्ञान होता है और फिर उस आधे ज्ञान से. काम करते हैं तो ठीक आधा ज्ञान अच्छा नहीं. होता देखिए पहला सवाल तो चकि आपने. इस्लाम कब से है उसके लिए इस्लाम जब से. सृष्टि रची गई है तब इससे इस्लाम है पहले. जो प्रॉफिट आए पहले जो अवतार आए वो आए आदम.
अल सलाम हजरत आदम बोलते हैं हमारे यहां. क्रिश्चन में उसमें और जूस में उसको एडम. कहते हैं हम लोग आदम कहते हैं आदम से. आदमी मनु आए मनु से मनुष्य वही आदम है वही. मनु है वो मनु से मनुष्य हो जाता है इधर. आदम से आदम ही हो जाता है तो जब से सृष्टि. रची गई है तभी से इसका.
इस्लाम वहां से चलता है समय समय पर. अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग स्थानों. पर अवतार आते. गए और वो अवतार समय अनुसार आते गए. क्योंकि पहले आदम आए फिर उसके बाद उनके. बच्चे थे फिर अलग-अलग नबी नबी नबी नबी नबी. बोले तो अवतार अवतार बोले. तो रसूल जी जी रसूल. यह आते गए समय समय के अनुसार और इस तरह.
से बहुत सारे. नबी हर देश में अलग-अलग समय पर आए. बुराइयां जो फैलती थी जो सत्य का मार्ग था. जो सही बात थी बताने के लिए अवतार आते थे. तो इस तरह से अवतार आए तो उसम एक अवतार जो. आपने इब्राहिम की बात की जिसे क्रिश्चन. जूज अब्राहम कहते हैं हम लोग उसको. इब्राहिम कहते हैं आदमी एक ही है लेकिन. नाम का जो उच्चारण है अरबी में और जूज में.
और अदर लैंग्वेज अब्राहम इधर इब्राहिम तो. इब्राहिम अल सलाम एक प्रोफेट थे एक नबी थे. जो. अ अपने समय पे. आए उन्हीं से जो वो एक बड़े राजा. थे उनकी बहुत उम्र होने के बाद मतलब बहुत. वो बुजुर्ग हो गए थे काफी उनकी कोई औलाद. नहीं होती थी तो उनकी जो बीवी.
थी उसका नाम था. सायरा जूस के अंदर उसको बोलते हैं सारा. हमारे य उसको बोलते हैं सायरा सेम है. लेकिन नाम का थोड़ा सा बोलने. का उनसे रानी थी उनसे कोई औलाद नहीं हो. रही थी बुजुर्ग हो चुके थे. काफी इब्राहिम अल सलाम तो उनके एक. बच्चा नहीं होने की वजह से बड़ी दिक्कत थी. तो उन्हीं की. जो उनकी रानी थी उनकी एक दासी थी जिसका.
नाम हाजरा था तो हाजरा के साथ उनकी शादी. होती है और उस दासी से एक बच्चा पैदा होता. है जिस बच्चे का नाम है हजरत इस्माइल अल. सलाम हजरत इस्माइल पैदा होते हैं वह भी. नबी है होने के बाद खुशियां मनाई जाती हैं. और बहुत बच्चा डेवलप होता है उसी दौरान. कुछ टाइम के बाद जो उनकी रानी थी सारा.
सायरा उनको भी एक बच्चा पैदा हो जाता है. जिसका नाम हजरत इक अल. सलाम तो बाद में. इक हजरत इस्माइल तो उनसे जो जो लोग निकले. हैं अलग-अलग नबी टाइम टाइम पर आते रहे तो. बेसिकली सबके जो दादा हैं जो बुजुर्ग हैं. जो बड़े हैं वह इब्राहिम के मानने वाले. हैं और इब्राहिम को मानने वाले सभी लोग. इब्राहिम को मानते हैं ज भी हो क्रिश्चन.
भी हो मुस्लिम्स भी हो आपस में सब कजंस. हैं जूस और मुस्लिम्स क्लोजेस्ट कजंस हैं. आपस में ओके आपस में कजंस है और इस तरह से. एक सिलसिला चलता है आपको मालूम होगा कि हज. के दौरान जब हज आता है हज के दौरान जो हज. किया जाता है तो उसमें एक प्रक्रिया चलती. है कि कुर्बानी होती है जो हज करते हैं तो. वो सिलसिला हजरत इस्माइल अल सलाम से ही है. कि जब उनको हजरत जोकि इनकी बहुत उम्र में.
यह बच्चा पैदा हुआ था हजरत इस्माइल और यह. बच्चा 12 1 साल का हो गया फिर उसके बाद. उनको एक ख्वाब आता है एक ईश्वर का ईश्वर. कहते हैं अल्लाह ताला उनसे कहते हैं हजरत. इब्राहिम से कि देखो ये तुम्हारा जो बच्चा. है तुम्हें इसकी कुर्बानी देनी होगी. तो बहुत परेशान हुए लेकिन कहा कि अगर खुदा. की राह में अगर बच्चे की मेरी कुर्बानी. देनी है उसी का दिया हुआ है तो मैं. कुर्बान करने के लिए तैयार हूं तो वो.
सिलसिला वहां से चलता है तो कुर्बानी देने. के लिए उस बच्चे की जब वो चलते हैं और. उनकी. जो बीवी होती है हाजरा साथ में होती है. उन्होंने कहा कि तैयार करो बच्चे को मैं. इसको लेकर जा रहा हूं कहां ले जाना है तुम. छोड़ो इसको नहला धुला हो तैयार करो हम. इसको लेकर जाएंगे क्योंकि उनको खुदा का. हुकम था अल्लाह का हुकुम था रब का हुकुम. था ईश्वर का हुकुम था कि तुम इसकी. कुर्बानी करो इस बच्चे की तो उनके ऊपर.
सोचिए कि एक पिता इतनी उम्र में एक बच्चा. होता है वो जवान हो गया है जिससे वो बहुत. प्यार करते हैं और लेकिन ईश्वर का हुकम. आया कि जाओ तुम उसकी कुर्बानी दो तो उसको. उन्होंने कहा कि ठीक है तोव लेकर चले तो. रास्ते में शैतान ने उनको बरगलाया बच्चे. को कि भाई देखो यह तुमको कहां ले जा रहे. हैं मालूम है ये तुमको लेके जा रहे हैं. तुम्हारा कत्ल करने के लिए तुमको काट. देंगे उन्होने कहा ठीक है कोई बात नहीं तो. जगह-जगह पे शैतान ने उनको बहका या बहरहाल.
वह एक पूरा एक सिलसिला है तो वहां से यह. सब चीजें चलती हैं तो इब्राहिम को मानने. वाले सभी लोग मानते हैं. और और सब लोग जो है उनकी अ इबादत मतलब. उनका जो वह जो उन्होंने कुर्बानी दी बच्चे. को लिटाया लेटा के बाद उन्होंने चाकू लिया. और उसकी गर्दन पर चलाने लगे तो हुकुम आया. चाकू को रोकने के लिए वहां दुंबा आ गया. उसकी जगह हुकुम आया तो बच्चा नहीं था. दुंबा था तो मतलब ईश्वर ने कहा अल्लाह ने.
कहा कि तुम्हारी कुर्बानी कबूल हो गई सफल. हो गई तो वो सिलसिला वहां से हज का. सिलसिला चलता है तो यह सब हजरत इब्राहिम. के मानने वाले हैं इसीलिए शायद जो पलेटी. में 35 एकड़ जमीन को लेकर होता तीनों की. मान्यताएं उस जगह को लेकर क्योंकि रूट्स. सिमिलर है हां वहां पर जो जगह है जो. मस्जिद अकसा है जी और जो बैतल लहम है अल. खलील है वो जो जेरूसलम पूरा वो तीनों के.
लिए ही है आप मैं चूंकि वहां जा चुका हूं. मुझे वहां का सारा मालूम है वहां पर जब. जाते हैं तो एक गेट खुलता है तो सारे जूज. रहते हैं दूसरे साइड गेट खुलता है तो. क्रिश्चियंस रहते हैं तीसरा गेट खुले तो. सारे मुस्लिम्स रहते हैं तो सब लोग मिलके. ही रहते हैं क्योंकि जड़े कॉमन है सब जड़े. कॉमन है इसलिए लेकिन अभी आपके पोड कास्ट. के जरिए से एक चीज मैं बताना चाहता हूं जो. शायद ये सवाल की अहमियत और बढ़ जाएगी आने.
वाले वक्त में एक रिलीजन आने वाला है एक. रिलीजन बनने वाला है जिसके तैयारी ऑलमोस्ट. हो चुकी है उसका नाम उस रिलीजन का नाम ही. है इब्राहिम एक. फेथ ओके क्योंकि सबकी कमलि है सबके रूट्स. एक है फादर एक है तो ये जो आपस में जो आपस. में जो झगड़ा है इसको झगड़े को कैसे खत्म. किया जाए इसको झगड़े को खत्म करने के लिए. एक ही रास्ता है कि ये तीनों एक हो जाए और.
एक होने के लिए एक कॉमन एक जगह आने के लिए. तो अब चकि मुस्लिम है अपने आप को मुसलमान. कहते हैं जूस कहते हैं जूस क्रिश्चन कहते. हैं मैं क्रिश्चन से तो कहीं ना. कहीं यह एक रिलीजन जो आने वाला है अब कब. होगा कैसे होगा मुझे नहीं मालूम हैय आपको. एहसास क्यों आया रमजान के महीने में रमजान. के महीने में इसलिए आया कि रमजान से पहले. की बात है मुझे मालूम है क्योंकि इस तरह.
की चीजें एक एक आवाज उठना शुरू हो गया है. कि इनको कॉमन एक करने का एक ही माध्यम है. क्योंकि क्रिश्चियन जूज मुस्लिम आपस में. लड़ते हैं और जबकि आपस में कजंस है भाई है. तो इनको एक करने का एक ही तरीका है कि. इनका एक ही रिलीजन होना चाहिए वही. इब्राहिम फेथ और इब्राहिम फेथ जो रिलीजन. आने वाला है उससे पूरी दुनिया के अंदर ये. सब एक हो जाएंगे और एक होने के बाद ठीक है. सबका अभी इसका एक एग्जांपल है जो आपने कहा. ना कि रमजान में आपको. जैसे ये ख्याल आया ख्याल आया ये ख्याल.
नहीं है ये एक सच्चाई है आप कभी आप कभी. अबू दबी जाएंगे दुबई की तरफ तो आप वहां. कभी जाकर देखिएगा वहां एक सेंटर बना दिया. गया है और उसका नाम ही है अब्राहम अब्राहम. फेथ सेंटर उसके अंदर तीनों रिलीजन को बना. के बनाया गया है एक मॉडल है और उससे लोगों. को समझ में आ जाएगा कि आने वाले वक्त में. क्या होने जा रहा है तो वो ब्राहमम फेथ. सेंट जो अबू दबी में उसका भी वही सेम.
कांसेप्ट है क्योंकि हम सबकी कॉमनलित की. एक है इबादत करने के तरीके जरूर हैं लेकिन. है सब एक एक करने का एक प्रयास जो पूरी. दुनिया में चल रहा है वो यही चलने वाला है. आने वाले वक्त में ये आएगा कब देखेंगे हम. आने वाले समय में लेकिन होगा ओके हजरत. मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम साहब जो. है इनका कौन सी ऐसी टीचिंग थी जो मॉडर्न. डे में बहुत इंपैक्टफुल है और थोड़ा सा. इनके बारे में हमें बताइए ये पैगंबर है. पैगंबर अवतार हैं यह हर समय अनुसार.
समय-समय पर अवतार आते गए सबसे पहले हजरत. आदम अल सलाम इस जिनको हम मनु कहते हैं वो. आए और उसके बाद से समय समय पर अवतार आते. गए जब लोग बढ़ते गए खानदान बढ़ते गए घर. बढ़ गए आबादिया बढ़ गई लोगों के अंदर. गुमराही हो गई तो कैसे मालूम होगा कि. ईश्वर है जिसने तुम्हें भेजा है तुम्हें. सत्य के मार्ग पर चलना है यह कौन बताएगा. वो बताने के लिए जो आते थे व तार आते थे. रसूल आते थे वो ईश्वर.
की बताई हुई बातों को लोगों तक पहुंचाते. थे इसी तरह से जो आदम आए आखरी नबी वो आए. मोहम्मद रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अ वसल्लम. पीस बी अपॉन हिम आखरी नबी अब वो आए कुरान. के अकॉर्डिंग हमारी मान्यता के मुताबिक अब. कोई नबी नहीं आने वाला है नबी अवतार आखिरी. अवतार मोहम्मद साहब आ चुके हैं समय समय पर.
किताबें आई बहुत सारी और किताबें भी आई. जूस पर आई जो जो नबी थे क्रिश्चन हजरत ईसा. अल सलाम पे आई है ना तो वो बहुत सारी और. किताबें भी आई तो लेकिन अब लास्ट में जो. किताब आई वह किताब है उसका नाम है कुरान. पहले जुबू. आई इंजील आई इंजील आई यह सारी किताबें. समय-समय पर आई है अलग-अलग अब यह किताब. मुकम्मल होके मोहम्मद साहब आखरी नबी अब. कोई नबी आने वाला नहीं अब ये आखिरी किताब.
कुरान अब ये कोई और किताब एक ईश्वर वाणी. अब कोई आने वाली नहीं है जो कुछ होना था. मुकम्मल होके अब हो गया है अब इसमें. अमेंडमेंट भी नहीं हो सकता कयामत तक जब तक. दुनिया है और जब तक दुनिया है कोई नबी भी. नहीं आ सकता यह हमारी मान्यता है कुरान के. अकॉर्डिंग तो उसके मुताबिक मोहम्मद साहब. को जब भेजा गया इस धरती पर अरब की धरती पर. वह आए और इस अरब की धरती पे आने के.
बाद यहां पर बहुत जुल्म जाती होती थी बहुत. ज्यादा यहां अरब में लड़कों को तो जिंदा. रख लेते थे लड़कियां पैदा होती थी तो उनको. जिंदा गाड़ देते थे जब बच्ची पैदा हुई. लड़का तो उनको जमीन में गाड़ दिया तो इतनी. नफरत करने लगे थे और अत्याचार बढ़ चुका था. जुल्म बहुत ज्यादा था डाक डाकू मतलब चोरी. और गलत गलत काम शराब और यह तमाम सारी. चीजें गुनाह के काम बढ़ गए जब बढ़ गए तो. आखरी मोहम्मद सलाला सलम इस धरती पर आए.
उन्होंने इस बुराई को लोगों को बताया कि. यह बुराई है तुम ये क्या कर रहे हो ये. लड़की है इसके साथ तुम ऐसा कर रहे हो. क्योंकि एक लड़की एक जीवन में मां भी है. हम पत्नी भी है बहन भी. है और उससे आगे सृष्टि भी चलनी है तो ये. तुम क्या कर रहे हो ये जुल्म है ये जुल्म. मत करो उन्होंने आके लोगों को समझाया तो. तो लोगों ने उनकी बात को मानना शुरू करा.
कि नहीं अब ये लड़कियों को साथ जुल्म नहीं. करना इन लड़कियों के साथ इन महिलाओं के. साथ अत्याचार मत करो यह हमारी है ये हम. इनके साथ इनको सम्मान देना है औरतों को. सबसे ज्यादा सम्मान मैं महिला को सबसे. ज्यादा सम्मान मोहम्मद सल्लल्लाहु वसल्लम. पीस बी अपऑन हिम उनके जमाने से ही शुरू. हुआ मैंने मेरी एक फ्रेंड है पाकिस्तान. में तो मैं उनसे प्रोफेट मोहम्मद साहब को. लेकर सवाल पूछ रहा था तो उन्होंने कहा कि. नहीं नहीं आप ये मत कहिए आप कहिए आप. प्रोफेट मोहम्मद की जहां कहिए हजरत.
मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जी शी. सेड यह सही कोट है तो मुझे ये क्यों टोका. उन्होंने पहले आप ये समझाई दरअसल उन्होंने. जो हमने हमने जो कहा इंग्लिश में पीस बी. अपॉन हिम उन्होंने उसको अरबी में कह दिया. सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ओके अगर वो आपको. अच्छे अंदाज में वो समझा देती कि पीस बी. अपॉन हिम तो आपको ज्यादा समझ में आ जाता. लेकिन हमारे यहां चूंकि हम जब उनका नाम. आता है मोहम्मद साहब का तो हम उनका पूरा.
नाम लेने के साथ पीस बी अपऑन हिम उनके साथ. हम लगाते हैं रेस्पेक्ट है उनके लिए हमारा. तो ये है मैं कई सारी स्टोरीज पढ़ा था. हिस्ट्री ऑफ इस्लाम पे तो उसपे आया कि जिस. जमाने में वो आए थे सिक्सथ सेंचुरी में उस. वक्त बुध पूजा होती थी अरब में तो जैसे. आपने कहा कि इस्लाम शुरू से था कुछ लोग. कहते हैं कि फर्स्ट प्रोफेट मोहम्मद थे. कुछ लोग कहते हैं वो लास्ट थे जैसा कि. जिक्र आया इसका नहीं फर्स्ट कोई नहीं. बोलेगा लास्ट ही है लास्ट प्रोफेट तो उस. वक्त अरब में कौन सा रिलीजन चल रहा था जिस.
वक्त आप कह रहे हैं ना कि महिलाओं को गाड़. दिया जा रहा था या बहुत सारे जुल्म हो रहे. थे क्योंकि मैंने यह भी सुना कि उनको भी. काफी परेशानी अपनी बर्थ प्लेस से उन्हें. विरोध का सामना करना पड़ा जाना पड़ा फिर. कई सारे युद्ध लड़े उन्होंने उसके बाद. इस्लाम का प्रचार प्रसार तेजी से फैला तो. उस वक्त क्या डायनेमिक्स थे वर्ड सिचुएशन. में और वहां पर कौन सा रिलीजन चल रहा था. कोई रिलीजन ही नहीं था समझ लो अगर रिलीजन. होता तो रिलीजन तो धर्म तो एक आचरण है हम. धर्म य आचरण है आपको सही रास्ता दिखाता है.
अगर वह सही कोई धर्म होता वहां पर उस वक्त. में मानने वालों में तो व इस तरह के गुनाह. थोड़ी कर रहे होते दरअसल क्या है कि वो. बुराइयां वो जहालत पन वो गुनाह बढ़ चुके. थे व चकि इंसान इंसान को मार रहा था उसे. तो कुछ पता ही नहीं था सब चीजें अब वो कौन. सा रिलीजन अगर वह रिलीजन को मानने वाले. होते तो इस तरह की गुनाह थोड़ी करते तो. इसलिए उस वक्त में बहुत से लोगों का कहना.
यह है कि वह व अपनी अपनी मूर्तियां बनाते. थे और उनकी वह पूजा करते थे क्योंकि हजरत. इब्राहिम खलीलाह का जो वाकया है राजा थे. और. उन्होंने उनके यहां उस वक्त में मूर्ति. पूजा का सिलसिला चलता था मक्का के अंदर भी. आपको मालूम है हरम बैतुल्लाह जो है उसके. अंदर भी मूर्तियां होती थी बाद में वहां. से उनको मूर्तियों को निकाला गया उस पे. बड़ी धारणा बनी हुई है आमतौर पे मुझसे.
बहुत सारे हैं मेरे हा मतलब कई बार लोग. पूछ रहे थे कि क्या मक्का में शिवलिंग है. मुझसे भी पूछते हैं मेरे जो मेरे से जो. जुड़े लोग हैं हिंदू हिंदू मेरे से पूछते. हैं इमाम साहब आप मक्का गए हैं मैंने कहा. हां बेटा मैं गया हूं कहता है कि वहां पर. ना हमारा शिव जी को ना उसमें ताले में बंद. कर दिया है अच्छा मैंने कहा शिव जी को. ताले में बंद किया जा सकता है कह लगा हां. हां ऐसा मानना है कि वो जो बैतुल्लाह है. उसके अंदर शिवजी को कैद कर दिया है तो.
मैंने कहा नहीं बेटा वह अंदर कुछ नहीं है. व एक कमरा है सिर्फ जो कि साल के अंदर. बादशाह दो बार जाते हैं बादशाह को इसलिए. सऊदी अरब के जो बादशाह है उनको बादशाह. नहीं कहा जाता उनको खादिम उल हरमन शरीफ. कहा जाता है मोहम्मद मोहम्मद साहब की जो. जहां मदीना है और यह जो यह जगह हैं इनके. वह कस्टोडियन है तो उनको खादिम कहा जाता. है खादिम उल हरमैन शरीफ तो बादशाह सलामत.
जो भी वक्त का बादशाह होता है व साल में. दो बार मतलब वहां जाता है सीढ़ी लगती है. अंदर जाते हैं अंदर जाने के बाद एक कमरा. है और उस कमरे के अंदर वह जाकर उसकी सफाई. करते हैं खुशबू लगाना सफाई करना साल में. दो बार तो वहां उस कमरे में कुछ नहीं है. वो एक इबादत की जगह है आपने क्या डिस्कवर. किया कि ये सवाल क्यों आया कि मक्का के. अंदर शिवलिंग है हां मुझसे क्योंकि क्या. हमारे यहां क्या ना बता तो नहीं कि सोशल. मीडिया पर ना एक बात को डाल दिया जाए तो. लोग उसको बगैर पढ़े बगैर समझे उसको मान.
लेते हैं हमारे यहां बड़ी ऐसी धारणा बनी. हुई है काट काट के भी वायरल कर देते वायरल. कर देते हैं वहां पर कुछ नहीं है वो खाली. है व सारी एक परिक्रमा करते हैं लोग उसकी. परिक्रमा करते हैं और इबादत करते हैं बस. वहां पर कोई मूर्ति नहीं है पहले हां होती. थी ये बात सही है ये बात सही है उस जमाने. में क्योंकि 35 प् हां 365 मूर्ति मतलब.
365 दिन है तो 365 मूर्तियां वहां होती थी. बहु उस पहले तो वहां से फिर उनको वो हटा. दिया गया था उसके बाद से खाली उस जगह का. हुकम आया कि इसको क्योंकि उसको जो. बैतुल्लाह को बनाने वाले वह भी हजरत आदम. अल सलाम जो पहले प्रॉफिट थे जो इस दुनिया. में आए तो सबसे पहले जगह उसी को कहा गया. कि आप एक एक कमरा तामीर करो एक हुकुम आया. था तो उन्होने हजरत आदम अल सलाम जो थे. प्रॉफिट थे उन्होंने उसको तामीर किया उसको.
बनाया वो सिलसिला वहां से चलता आ रहा है. वो हमेशा से उस जगह की बड़ी मान्यता है तो. लोग हज के दौरान उमरा करने लोग जाते हैं. मतलब तो वहां जाकर उसकी परिक्रमा करते हैं. दुआएं मांगते हैं उसको बैतुल्लाह कहते हैं. अब जैसे आपने जिक्र किया 365 वहां पर बुध. थे और मक्का की भी हमने कहानी सुनी की. शायद इनिशियली वहीं पर सबसे सारा विरोध. हुआ था उस जमाने के जो शेख लोग थे. उन्होंने विरोध किया बाद में मक्का फतेह. की पूरी कहानी अपनी नहीं आती है तो ये उस.
वक्त वहां पर जैसे मैंने पूछा 365 बत आप. जिक्र कर रहे हैं ये किसकी पूजा होती थी. अपनी किसी कोई रिलीजन था जैसे कई लोग. हिंदू जम में भी हो सकता सोच ले कि हमारे. देवी देवताओं को शायद उस टाइम पूछते मुझे. ऐसा ही लगता है कि जिस तरह से हमारे भारत. में क्योंकि भारत से ज्यादा समझ में कई और. ये समझा नहीं पाएगी बात भारत के अंदर. क्योंकि क्या होता है कि हम कहते हैं ना. कुल देवता है कुल देवी कुल देवता मतलब. उनके अपने अपने हम हम सबके अलग अल सबके. अपने अपने अलग-अलग उसी तरह का शायद ये. कांसेप्ट रहा होगा लेकिन अभी वहां पर इस.
तरह का कोई कांसेप्ट नहीं है वहां सिर्फ. जो है एक ईश्वर की इबादत होती है और वो. ईश्वर जो निराकार है ठीक है मस्जिद का. कांसेप्ट क्या है ट वेरी गुड क्वेश्चन. मस्जिद का कांसेप्ट जो है जमा के माने. जहां सब एक जगह आके इकट्ठे होकर इबादत. करें उसको मस्जिद कहते हैं और इसकी. स्टार्टिंग कब हुई थी देखिए स्टार्टिंग से. मुराद इसका मस्जिद नबवी मतलब जो मस्जिद. नबवी मतलब. मदीने की जो मस्जिद है प्रोफेट महम्मद.
सलाम की जो मस्जिद है वहां से इसकी शुरुआत. को हम मान के चलेंगे सच के मतलब हां ये. सिलसिला चलता है वो सिलसिला चलता है. मस्जिद पहली मस्जिद तो और भी है लेकिन. मस्जिद का कांसेप्ट जो है आपने जो सवाल. किया जो आपका मकसद है जहां एक जगह सब. इकट्ठे होकर मिलकर इबादत करें उसको मस्जिद. कहते. हैं नमाज एक होता है जामा मस्जिद जी हमारे. य पांच टाइम के नमाज का कांसेप्ट है हम तो.
यह मस्जिद का जमा मस्जिद का ईदगाह का एक. कांसेप्ट है पांच टाइम जब हम अपनी मोहल्ले. की मस्जिद में नमाज पढ़ते हैं तो मस्जिद. से मतलब कनेक्ट रहो कनेक्ट का मतलब एक रहो. एक का मतलब एक दूसरे का ख्याल रखो एरिया. वाइज पांच वक्त नमाज पढ़ते हैं तो हम एक. दूसरे से मिलते हैं पांच वक्त नमाज में. मस्जिद में एक दूसरे से रिश्ता बनता है. रिश्तेदार आं बनती है एक होने का कौनसे है. मस्जिद से मकसद एक रहो यह कांसेप्ट है तो.
हम एरिया वाइज पांच वक्त की नमाज हुई तो. हम एक दूसरे से मिलते हैं फिर हुकम आया कि. हफ्ते में एक बार जामा मस्जिद जाओ नमाज. पढ़ने के लिए तो उसका कांसेप्ट था कि अब. अपने चारों तरफ के एरिया से निकल के एक. बड़े एरिए में जाओ जहां बड़ी मस्जिद हो. जामा मस्जिद हो वहां पूरे आसपास के लोगों. को एक हुकुम आया कि फ्राइडे के दिन आओ. यहां नमाज पढ़ो वहां आपस में एक दूसरे से. कनेक्ट हो एक दूसरे से मिलो हम एक दूसरे. से रिश्तेदार यां करो एक दूसरे के अच्छे.
में साथ रहो सुख दुख में साथ रहो अब दायरा. बढ़ गया इसी तरह से फिर साल में ईद का. नमाज आई अब व जामा मस्जिद को छोड़कर अब. आया कि सारे इलाके के लोग एक जगह इकट्ठे. हो ईद की नमाज के लिए ईदगाह में ईदगाह में. वहां जाएं सब इकट्ठे होके नमाज पढ़े अब एक. दूसरे से मुलाकात करें एक दूसरे से कनेक्ट. हो जाओ फिर साल में फिर एक बार आया हज का. समय बैतुल्लाह फिर पूरी दुनिया को कहा गया.
तुम अब एक जगह यहां इकट्ठे हो जाओ तो ये. मोहल्ले से स्टार्ट होते होते ये पूरा एंड. तक जाता है सारी दुनिया के लोगों को एक. करने के लिए बेसिकली एक हो रहो मिल के रहो. टस ब्यूटीफुल कांसेप्ट कि लोगों को कैसे. मिला के रखो मिल के रहना है कनेक्ट रहना. इसी तरह हमारे यहां एक बर्तन में एक बड़ा. तश्तरी में खाना खाते हैं सब मिलके क्यों. खाते हैं एक रहो मिलकर खाना खाया करो एक. साथ खाया करो एक साथ रहा करो ये कांसेप्ट. है ओके नमाज मैंने कहीं सुना कि ये.
संस्कृत शब्द है हां यकीनन इस परे क्योंकि. मैंने इस पर पहले भी बात रखी थी हालांकि. पूछने पहले मैं डर रहा था कि मेरे. पाकिस्तान से फ्रेंड्स जो है नाराज ना हो. जाए कि आप हर चीज को संस्कृत से जोड़ देते. हैं नहीं नहीं पाकिस्तान वालों को समझाने. की जरूरत है असल भारत का मुसलमान तो समझा. समझाया हुआ है उन्हीं को असल जरूरत है एक. तो बांग्लादेशियों को समझाने की जरूरत है. और एक पाकिस्तानियों को समझाने की जरूरत. है ये जिस दिन ये समझ जाएंगे ना तो उस दिन. सब कुछ बढ़िया हो जाएगा अब आते हैं नमाज. की तरफ हम नमाज क्या है बेसिकली नमाज जो.
है फारसी का भी एक शब्द है लेकिन असल शब्द. ये संस्कृत का शब्द है देखिए नमाज को तो. वह पहले भी जानते हैं क्योंकि य सब भारत. के हिस्सा है वह जो आज पाकिस्तान एक. बॉर्डर एक लाइन खींच गई है ना वो एक अलग. बात है ना लेकिन है तो सब एक ही. बांग्लादेश एक लाइन खींच गई है लेकिन है. तो सब एक ही और एक है ना हमारी हमारे. संस्कार हमारी संस्कृति तो एक ही है ना. हमारी संस्कृति एक ही है अलग नहीं है तो. हमारा रहना खाना पीना चलना एक जुबान वो सब.
एक ही है. तो अरबी में कहते हैं सला अरबी में कहते. हैं. सला संस्कृत में कहते हैं नमाज नमः नमः. माने झुकना हम अज माने ईश्वर ईश्वर के. सामने सरेंडर होना ईश्वर के सामने झुकना. उसको नमाज कहते हैं नमा माने झुकना अज. माने ईश्वर ईश्वर के सामने झुकना ईश्वर के.
सामने सरेंडर होना उसे नमाज कहते हैं वैसे. तो आप भी नमाज पढ़ते हैं नमाज तो हर. आस्तिक पढ़ता है जो आस्तिक है किसी भी. फॉर्म के सामने आप झुक रहे हैं यकीनन उसी. को तो नमाज कहते. हैं आप भी अपने तरीके से पढ़ते हैं नमाज. दूसरे भी लोग अपने अपने तरीके से पढ़ते. हैं लेकिन पढ़ते तो नमाज है ना झुकते तो. आप किसके सामने है ईश्वर के सामने मेरा और. आपका बेस एक ही है. बेसिकली जुबान का फर्क हो.
गया इस्लाम का जो बेस है वो तौहीद है. तौहीद बोले तो एक ईश्वर को मानना हम एक. ईश्वर को मा एक ईश्वर को. मानना ला इलाहा इल्लल्लाह क्या बोलते हैं. ला इलाहा इल्लल्लाह हां आपने उसको मिश्रा. जी ने आप भी यही तौहीद के साथ जुड़े हुए. हैं आपका भी बेस वही है आप उसे संस्कृत. में पढ़ते हैं बस एकम ब्रह्मम द्वितीय. नास्ति आपने उसको कर दिया एकम ब्रह्मम.
द्वितीय नास्ति संस्कृत में मैंने कर दिया. उसको ला इलाहा इल्लल्लाह नहीं है कोई और. उसके अलावा माबूद सिवाय एक ईश्वर के वो. निराकार है. हम उसका कोई रूप कोई आकार नहीं है आप. वेदों में देखेंगे ना वेदों में अगर आप. जाएंगे वेदों में आपको. उसको पाएंगे वो निराकार है दुनिया के अंदर. कोई भी आदमी कोई भी आदमी यह नहीं कहता कि. ईश्वर का कोई आकार.
है सब बोलते हैं निराकार है व अजन्मी है. वह जन्म नहीं लेता हा हमारे ओम ओम से. ब्रह्मा विष्णु महेश नीचे देवता नहीं वो. वो तो मैं उसकी व्याख्या तो आपको गॉड से. कर दूंगा शुरुवात में वहां गॉड हां द. फर्स्ट डिवाइन पावर हां गॉड व्हाट्स द. मीनिंग ऑफ गॉड जनरेटर ऑपरेटेड. एकली जनरेटर ऑपरेटर य एंड. डिस्ट्रॉयर. विष्णु महेश हां ब्रह्मा विष्णु महेश.
ब्रह्मा जनरेटर ब्रह्मा इज द जनरेटर. विष्णु जी इ ऑपरेटर ऑपरेटर एंड शिवजी इ. डिस्ट्रॉय डिस्ट्रॉयड जी ओडी गॉड दुनिया. के अंदर कोई भी आदमी ऐसा नहीं है जो यह. कहता. हो कि ईश्वर दो. है सभी क्या बोलते हैं एक ही है क्या. बोलते हैं ऊपर. वाला दुनिया में कोई नहीं कहता नीचे वाला. हर आदमी बोलेगा ऊपर वाला और बोलेगा एक ही.
है सभी बोलते हैं लेकिन कॉन्फ्लेट है मैं. भी कह रहा हूं एक है आप भी कह रहे एक है. वह भी कह रहा एक है सब कह रहे एक है. कॉन्फ्लेट कहां आ गया कन्फ है जो मेरा. वाला है ना वह सही है ये कॉन्फ्लेट है. हमारे अंदर ना इस ज्ञान की कमी है हमें. समझना चाहिए जब ईश्वर एक है उसके अलग अलग. नाम है उसको कुरान के अंदर अल्लाह भी कहा. गया उसको रब भी कहा गया रब है वो रब्बुल.
आलमीन उसको खुदा भी कहा. गया उसको अलग अलग नामों से जानते हैं. लेकिन है कौन वो तो एक ही. है हम लोगों ने अपने मैं अक्सर एक बात. कहता हूं कि हमारी सबकी जातियां जरूर अलग. हो सकती. हैं हमारे पूजा पद्धति सबकी जरूर अगल हो. सकती. है इबादत करने के तरीके जरूर हमारे सबके. अलग हो सकते हैं लेकिन हमारा जो सबसे बड़ा.
जो धर्म है इंसान और इंसानियत. है हमें उस पर काम करना चाहिए मैं सबसे. पहले एक अच्छा इंसान. बनूंगा सबसे पहले मुझे सबसे अच्छा इंसान. बनना है उसके बाद में एक अच्छा मुसलमान. बनूंगा एक अच्छा हिंदू बनूंगा तो सबसे. पहले इंसान है हमारी पहचान क्या है पैदा. होते ही हमारी शनास से आती है एक इंसान से. होती है एक इंसान. उसका इंसानियत उसका एक जो करैक्टर है उसे.
हमें निभाना चाहिए और उसका जो करैक्टर है. इंसानियत वह क्या कहता है एक इंसान है. उसका एक धर्म है एक आचरण है एक करैक्टर है. इंसानियत तो इस्लाम की नजर में सही इंसान. कौन है इस्लाम की निगाह में नहीं हर धर्म. के आप जनरल बात करिए सही इन अ अच्छा इंसान. कौन होता है अच्छा इंसान जो अच्छे कर्म. करता है अच्छा इंसान वो है जो दूसरों की. भलाई करता है वह अच्छा इंसान होता है जो.
दूसरों के लिए अच्छा भाव रखता है. अच्छा बात करता है लोगों की भलाई करे. गुनाह से बचता है पाक रहता है बुराइयों से. दूर रहता है दूसरों की मदद करता है करुणा. जिसके अंदर हो दया जिसके अंदर हो माफ करने. का करैक्टर जिसके अंदर हो व अच्छा इंसान. होता है अच्छा उसी को तो कहते हैं जो. दूसरों के लिए अ य यही तो इंसानियत है इसी. का नाम तो इंसानियत कहते हैं. आपकी आस्था जिसमें है मिश्रा जी आपकी.
आस्था है आप एंजॉय करिए मुझे से कोई फर्क. नहीं पड़ता मेरी आस्था जिसमें मैं अपने. एंजॉय कर रहा हूं लेकिन मैं यह अधिकार. मेरे पास नहीं है कि मिश्रा जी आप जिसकी. आस्था है वो ठीक नहीं है मेरी आस्था ठीक. है ये ठीक नहीं है अगर मैं ये कहूं कि. तुम्हारा गुरु ठीक नहीं है मेरा गुरु ठीक. है मेरी किताबें दुरुस्त है तेरी किताब. ठीक नहीं है ऐसा बोलना यह तो दुरुस्त नहीं. है तो ये जो जो काफिर शब्द का इस्तेमाल. होता है क्क मैं आपकी बात सुन रहा हूं कि. अच्छा इंसान वो जो अपनी इबादत करे और. दूसरे का भी सम्मान करे.
सनल इस्लाम में हिंदुओं कैसे देखते हैं. दरअसल समझने की बात यह है कि सिंधू से. हिंदू होता है हां ये तो अंग्रेजों वाला. कांसेप्ट है नहीं अंग्रेजों वाला कांसेप्ट. नहीं है बिल्कुल सही वाला कांसेप्ट है ये. कि सिंधु घाटी को उन्होंने सिंधू से हा. भाषा का बोलने का जो तरीका था वो सिंधु से. हिंदू हो गया इस रीजन है एक हिंदू रहने. वाले सब हिंदू तानी है जो भारत में रहते. हैं.
हिंदुस्तानी अगर आस्था से आस्था हिंदू. नहीं है. आपकी सनातन हा करेक्ट सनातन आर्य समाजी. क्योंकि आमतौर पर क्या हमारे यहां लोगों. को धर्म का बारे में ज्ञान नहीं मालूम हो. रहा है उनको देखिए मैं कहता हूं कि जिस भी. धर्म में आप रहिए आपका अपना फेथ है वो. एंजॉय करिए मैं किसी को खराब कहने का. अधिकार मेरे पास है ही नहीं. मुझे अपना अपना फेथ है आपका अपना फेथ है.
तो वही मेरा समझाने का मकसद यही है इस पोड. कास्ट के जरिए से कि हर आदमी अपने अपने. फेथ पर रहे और ईमानदारी से रहे नहीं जैसे. और दूसरे के फेथ पर कट साइज ना करें दूसरे. के गर्व को दूस धर्मों को क्रिटिसाइज करने. का अधिकार सवाल जैसे मैं आपने कहा ना. ब्राह्मण हिंदू हूं तो हर व्यक्ति की अपनी. सोच होती होगी मेरी नजर में मेरा रिलीजन. जो है व मेरे और मेरे ईश्वर का विषय है. करेक्ट बात है. जिसमें मैं उन से संवाद करता हूं मेरा एक. उसको मानने का उसे पूछने का एक तरीका है.
जिसमें मैं राम जी की पूजा करता हूं शिव. जी की पूजा करता हूं और मेरे लिए रिलीजन. उतना ही वही है बट जैसे मैंने जोस शब्द का. इस्तेमाल किया काफिर कई बार यह सुनने में. आता है कि या इसलिए मैं आप इस पॉडकास्ट के. माध्यम से हम समझना चाह रहे हैं कि इस्लाम. में दूसरे धर्मों के लोग कैसे थे जैसे. आपने कहा कि जूस और क्रिश्चियन ये आपके. कजिन हो गए या आपके जड़े जो है मिली हुई. है क्योंकि जिस देश में हम रहते हैं यहां. पर हिंदू मुस बहुत ज्यादा होता है और कई. बार गलत धारणाएं आती रहती हैं आप इस्लाम.
के जानकार इसलिए मैं आपसे बेहतर समझ सकता. हूं इस्लामिक टीचिंग में नॉन मुस्लिम्स को. यानी स्पेशली हिंदू को कैसे देखा जाता है. कई बार इसको लेकर बहुत सारी गलत धारणा आती. है आज आपकी पोस्ट कास्ट से य गलतफहमी जरूर. दूर हो जाएगी क्योंकि लोगों को मालूम ही. नहीं है हमारे य एक प्रचार शुरू हुआ काफिर. का पहली बात तो हम यहां से स्टार्ट करेंगे. जो काफिर का जो शब्द है ना यह शब्द अरबी.
का शब्द है और यह शब्द है काफिर काफिर. बोले तो नॉन बिलीवर नॉन बिलीवर बोले तो जस. की आस्था नास्तिक ना नास्तिक नास्तिक को. काफिर कहा जाता है हिंदू को काफिर नहीं. कहा जाता सनातन को सॉरी मैं भी हिंदू. हिंदू करने लगा हूं है ना हम सब. हिंदुस्तानी हैं हिंदू सब ही हैं हम बात. कर रहे हैं सनातन की आप सनातनी है मैं. इस्लाम के मानने वाला हूं ठीक है इस्लाम.
के. अंदर नास्तिक को काफिर कहा गया और कहा गया. जो बार-बार जो शब्द आया कुरान के अंदर कि. इन काफिरों से अपना रिश्ता मत रखो इनसे. दूरी बना के रखो उस वक्त में उस कांटेक्ट. में जंग के दौरान जो नॉन बिलीवर्स थे आज. भी हम भी कह सकते हैं कि नॉन बिलीवर से. दूर रहिए आ जो नास्तिक हैं भारत के लोग. नास्तिक नहीं है आस्तिक लोग होते हैं भारत.
के. लोग नास्तिक हैं मालूम है कहां है नास्तिक. कहां होते हैं कहां पर चाइना में चीन के. लोग नास्तिक हैं भारत के लोग आस्तिक हैं. चाइना के लोग नास्तिक है वो उनको काफिर. कहा जा सकता है लेकिन भारत के रहने वालों. को किसी को भी काफिर नहीं कहा जा सकता. क्योंकि ये बिलीवर्स है ईश्वर में आस्था. रखते हैं तो इसलिए आज से ये क्लियर हो. जाना चाहिए आपके लिए भी और आपके इस पोड. कास्ट के जरिए से.
भी हां कि इसे हटा देना चाहिए ये काफिर. नॉन बिलीवर्स के लिए नंबर एक दूसरी बात. आपका एक बहुत अच्छा सवाल था आपने कहा ना. इमाम साहब कुरान के अंदर. तो क्रिश्चियंस की और जूस की बात हो रही. है बाकी की बात बाकी भी तो बहुत सारे हैं. उनके बारे में यकीनन कुरान के अंदर कहीं. पर भी जो बात ईश्वर कहता है अपने बंदों को. मुखातिब करके वो खाली मुसलमानों को लिए. नहीं कर रहा है वो वहां मुसलमान नहीं है. हम वहां या. अनास हे.
इंसानों बार-बार ईश्वर में ईश्वर वाणी में. कुरान में कहां मुखातिब किया ईश्वर ने. बंदों को मुसलमान हिंदू नहीं किया इंसान. के तौर पर हे इंसानों या अनास हे इंसानों. मतलब उनको सही दिशा देना सही बात का बताना. ये ईश्वर ने हमको सबको ही बताया है देखिए. मैं अभी महाराष्ट्र के दौरे पर था हम और. वहां पर कोल्हापुर गया था तो कोल्हापुर.
में मेरे अलग-अलग प्रोग्राम्स लगे हुए थे. तो उसी प्रोग्राम के दौरान मुझे वहां पर. एक बहुत प्राचीन मठ है आप जीवन में कभी. कोल्हापुर अगर जाए तो कोल्हापुर के पास एक. कनेरी मठ है बड़ा प्राचीन मठ है बहुत. पुराना बहुत पुराना प्राचीन और उसको देखने. लायक है तो उस मठ में स्वामी जी हैं बहुत. पवित्र आत्मा. उनको पता चला कि चीफ इमाम साहब कोल्हापुर.
आए हुए हैं उनको खबर लगी उनके लोग अनुयाई. ने बताया तो मुझे खबर भेजी उन्होंने लोगों. के जरिए कि इमाम साहब को अपने मठ में दावत. दीजिए बुलाने के लिए तो मेरे पास खबर आई. तो मैं कनेरी मठ गया बहुत बड़ा मठ है और. आपको बता दें स्वामी जी वैसे तो गुरु सबके. होते हैं संत सबके होते हैं खाली संत किसी. एक समाज का नहीं होता गलतफहमी मत रना. लोगों को समझाना है कि संत किसी एक का. नहीं होता किसी एक समाज का नहीं होता संत. सबके लिए होते हैं गुरु सबके लिए होते हैं. क्योंकि सत्य का मार्ग सत्य की बात बताता.
है गुरु तो स्वामी जी ने मुझे बुलाया. स्वामी जी के बारे में इसलिए मैं आपके. सामने इस पोड कास्ट बता रहा हूं कि जो. अच्छे लोग होते हैं उनके बारे में जिक्र. करना चाहिए स्वामी जी पूरा उ उनका पूरा. नाम मुझे ध्यान नहीं है लेकिन स्वामी जी. बड़े स्वामी जी सब लोग जानते हैं कनेरी मठ. और कोल्हापुर पूरा महाराष्ट्र जानता है. उनको स्वामी जी ने 60 गांव अडॉप्ट किए हुए. हैं 60 गांव अडॉप्ट किए हुए हैं और उसमें. मुसलमान भी रहते हैं उन गांव के अंदर.
लेकिन उनके अंदर कभी यह भाव नहीं आया कि. यह मुसलमान है यह क्रिश्चियन है य अदर. रिलीजन है उनके मन में सब एक भाव आता है. इंसान तो वह लोगों की भलाई करते हैं राशन. किसी को चाहिए या किसी को जो जरूरत है वह. पूरा करता है वह आश्रम तो स्वामी जी ने. मेरा वेलकम किया बड़ा भव्य वेलकम किया. उसमें बच्चे जो तैयार हो रहे थे जो वहां. पर गुरुकुल एक बड़ा बहुत बड़ा गुरुकुल और. उस गुरुकुल के अंदर बहुत सारे बच्चे तालीम. हासिल करते हैं वेदों की अपने रिलीजन की.
तो उन्होंने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम मेरे. लिए किया कि चीफ इमाम साहब आए भव्य. कार्यक्रम सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ फिर. बच्चे सब बैठे हुए थे तो जब बच्चे बैठे. हुए थे तो उनमें से उन्होंने सब बात होने. के बाद तो स्वामी जी बोले इमाम साहब इन. बच्चों से आप कुछ प्रश्न करना चाहेंगे तो. मैंने कहा नहीं स्वामी जी कह लगे नहीं आप. करिए ना हमारे बच्चे से कोई प्रश्न कर. लीजिए तो हमने कहा चलिए स्वामी जी आप कह. रहे तो तो मैंने बच्चों से पूछा मैंने.
बच्चों यह. बताओ कि भगवान में और ईश्वर में क्या अंतर. है आई थिंक ईश्वर इ सुप्रीम पावर जिनसे. भगवान है भगवान से देवता है. तो यह तो आपके बहुत दिमाग में चलता रहा कि. इस साल में इमाम साहब बात कर रहे इसमें. आपने दिमाग लगाया कि जल्दी से जवाब देना. है ईश्वर सत्य है ईश्वर यकीनन सत्य है तो. उसके बाद तो मैंने उन बच्चों से पूछा. मैंने बच्चों ईश्वर में और भगवान में क्या. अंतर है तो आप ही की तरह मिश्रा जी जैसा.
ही बच्चे थे ज्यादातर उन्होंने कहा कि. नहीं नहीं इमाम साहब कोई फर्क नहीं है. ईश्वर में और भगवान में वह एक ही है कोई. अंतर नहीं है तो सबका सबका मिलाजुला एक. आता रहा लास्ट में जब बहुत देर हो गई तो. एक बच्चा खड़ा होता है कहता है इमाम साहब. बड़े कॉन्फिडेंस के साथ हाथ किया उसने. इमाम साहब मैं बोला मैं जवाब दूंगा मैंने. कहा यस उस मैंने कहा मैंने कहा बताओ ब. कॉन्फिडेंस था उसम तो मैं समझ गया कि इसको. ज्ञानी है यह तो बच्चा बोलता है कि इमाम.
सा कोई सवाल किया आपने कोई प्रश्न बड़ा. इतना आसान सवाल आपने कर दिया हम लोगों से. मैंने कहा बेटा आप बताइए फिर कह लगे इमाम. साहब बड़ा अंतर. है पूरा अंतर है भगवान में ईश्वर में. भगवान ज जो कोई जन्म. लेगा क्योंकि ईश्वर अजन्मी है ईश्वर जन्म. नहीं लेता किसी से वो निराकार है उसका कोई.
रूप कोई आकार नहीं है वह निराकार है वो. अजन्मी है हमेशा था हमेशा है और हमेशा. रहेगा भगवान उसे कहते हैं जो जन्म लेगा जो. जन्म लेकर आया और ईश्वर के लिए सत्य की. बात को बताने के लिए ईश्वर का जो पैगाम. लेकर आया ईश्वर की बात को पहुंचाने वाला. जो आया वह भगवान हो सकता है अवतार हो सकता. है लेकिन व. नहीं हो सकता तो मुझे बात उस बच्चे की. इतनी अच्छी लगी क्योंकि हमारे यहां भी यही.
है बिस्मिल्लाह रहमान रहीम कुल हु अल्लाह. अहद अल्ला समद लम यद वलम यूद वलम यक लहु. कुद सेम थिंग वो निराकार है ईश्वर उसकी. कोई रूप कोई आकार नहीं है व अजन्मी है वह. हमेशा का है ना वो सोता है ना वो जागता है. तो ये बात सच है तो फिर इतनी मार काट. क्यों म दुनिया में हिंदू मुसलमान को को. लेकर पॉलिटिक्स.
मैं जब आपके पॉडकास्ट की तैयारी कर रहा था. तो मैं पढ़ रहा था कि क्या-क्या चीजें. इस्लाम में हराम. है कन्वर्जन अलाउड है. नहीं आपके फोरफादर्स मैंने पढ़ा हिंदू थे. हां तो वो खुद से कन्वर्ट हुए थे या. फोर्सफुली कन्वर्ट हुए थे नहीं वो खुद से. हुए थे फोर्सफुली वाले नहीं थे मुझे तो. मैं मेरे जो मेरे जो फोर फादर्स हैं जो.
जहां से स्टार्ट होता है बेसिकली मैं. कृष्ण वंशी हूं मैं चीफ माम तो हूं भारत. का लेकिन कृष्ण वंशी हूं मुझे गर्व है. बताते में फख्र है मुझे बताते में मैं. कृष्ण वंशी हूं मेरे जो जो मेरे पूर्वज थे. समर पाल सिंह राजा समर पाल फिर वही राजा. नाहर सिंह फिर वहां से जो आज आपने सुना. होगा कि जिन्होंने मुगलों से मुगलों के.
खिलाफ बाबर के खिलाफ जंग लड़ी थी हसन खान. मेवाती वह मेरे पूर्वज है तो मेरे. पूर्वज हमेशा एक बात कहता हूं मिश्रा जी. मैं कि. हमारे कभी पूर्वज नहीं बदल सकते और ना ही. हमारा वंश बदल सकता सही बात आस्था बदल. सकती है आज आप मिश्रा जी हैं आपकी कोई. बच्चा हो जाए और आपका बच्चा को इस्लाम में. चला जाए फिर उसके बच्चे हो जाए फिर उसके. बच्चे हो जाए तो लेकिन पिता तो वही.
कहलाएगा तो आप आपने कभी अपने दादा परदादा. से सवाल किया कि ये कन्वर्ट क्यों हुए थे. क्या वजह हो सकती है उस दौर में. वो उनका जो अ जो एक सिस्टम था उन्होंने जो. जो इस्लाम को कबूल किया था अ उसके पीछे एक. पूरी एक बड़ी कहानी है एक पूरी बड़ी बात. है क्योंकि पॉडकास्ट के जरिए से बहुत टाइम. कम है बताने में लेकिन वो फोर्सफुली वाले. नहीं थे. इस्लाम को फोर्स फोर्स क्योंकि मैंने बहुत.
सारे बड़े लोगों को सु पाकिस्तान सखन. मुस्ता क्रिकेटर थे उन्होने जिक्र किया कि. उनके पूर्वज आपको. बताऊ 99 पर हमारे पूर्वज सब यही के तो है. सब यहीं के तो है और कहां के हैं तो जो. गल्फ कंट्री का मुसलमान है वो अलग है व. अरब है और हिंदुस्तान पाकिस्तान. बांग्लादेश का मुसलमान है इसमें क्या. डिफरेंस है य सरानी मुसलमान है व अरबी. मुसलमान. है भारतीय मुसलमान है अब जब हम अरब में. जाते हैं तो अरब में जाते ही सब हम लोगों.
को क्या कहा जाता है ये हिंदी है अरब के. लोग हमको क्या बोलते हैं मुसलमान बोलते. हैं लेकिन क्या कहते हैं हिंदी हिंदी हम. लोगों को हिंदी करके मशहूर है हम लोग. बिकॉज अंडरस्टैंड कि यहां लोग कन्वर्ट हुए. थे हां हिंदू मुसलमान है हिंदी है ये लोग. हिंदी है हिंदुस्तान से आए हैं तो फिर एक. सवाल मेरे मन में और आता है जैसे अरब का. मुसलमान है वो आज के टाइम में बहुत लिबरल. हो रहा है समय के साथ बहुत सारी चीजों को. बदल रहा है हमारे इंडिया पाकिस्तान. बांग्लादेश में देखता हूं कि यहां पर अब. वह धर्म को लेकर बहुत सख्त हो गया है.
कट्टर हो गया है य परसेप्शन बन गया है इन. कंपेरिजन टू वहां के मुसलमान वहां पर कई. चीजें लिबरल हो रही है हमने देखा मंदिर भी. बनाए गए वहां पर उन कंट्रीज में महिलाओं. को ले काफी लिबर्टी दी जा रही है यहां पर. अभी भी बड़े ओल्ड स्कूल वाले रिलीजन. कांसेप्ट चल रहे हैं तो यहां इतना सख्त. क्यों है जबक स्टार्टिंग तो वहां से हुई. थी दरअसल य कट्टरता किसी भी समाज के लिए. किसी व्यक्ति के लिए समाज के लिए धर्म के. लिए अच्छा नहीं होता हमें कटर नहीं बनना.
है कट्टरता आदमी को नेगेटिविटी की तरफ ले. जाएगी बेसिकली हम कटर है ही नहीं हमारा जो. जो भारतीय संस्कार हैं ये जो भारतीय. संस्कृति है वह. हमें क्या बताती. है सर्वे भवंतु सुखी ना सर्वे संतु. निरामया सब सुखी हो सब सुखी हो हा सब.
निरोगी हो वसुदेव कुटुंब कम की बात करता. है दुनिया एक संसार है एक एक परिवार है ये. बात करते हैं ना ये हमारा कल्चर है ये ये. भारतीय कल्चर है भारतीय संस्कार है भारतीय. संस्कृति है वसुदेव कुटुंबकम की बात करती. है भारत एक अध्यात्म है भारत जहां से बहुत. सारे धर्म अलग-अलग निकले तो यही एक भारत. है जहां से अध्यात्म निकलता है सारे लोग. यहां का जो मानने वाले जो लोग हैं वो हो. ही नहीं सकते यह लोग नरम दिल के होते हैं. आप किसी सनातनी को.
देखेंगे मंदिर के सामने जाएगा झुकेगा. मंदिर मस्जिद के सामने से भी अपने करेगा. दरगाह के सामने भी जाके झुकेगा आज आपको. मालूम. है वहां भी झुकेगा वो सनातनी. है वह सबका रिस्पेक्ट करता. है और अजमेर दरगाह में आपका जाना हुआ नहीं. हुआ मुझे मालूम नहीं लेकिन आप जाके देखें. अभी गौतम अडानी जी अपने परिवार को लेकर. अभी अजमेर शरीफ दरगाह गए थे मुकेश अंबानी.
जी मुझे तो लगता व हिंदू जदा जाते हैं वही. मैं बताना चाह रहा हूं कि मेजॉरिटी जो है. दरगाह शरीफ अजमेर में या दरगा हों पर. मेजॉरिटी हमारे सनातनी हों की है ल हिंदू. की बात नहीं कर रहा हूं सनातनी हों की है. अदर रिलीजन भी है जो वहां जाते हैं तो. मेरा कहने का मकसद यह कहने काहा कि यह. सनातन सबका है सबको ले स सर मैंने इसलिए. पूछा आपके पॉडकास्ट के लिए कई लोगों ले. रहा था कई सारे पढ़े लिखे लोगों से भी तो.
उसमें एक पार्टी की एक महिला नेता मैं नाम. कोट नहीं करूंगा उन्होंने कहा कि एक सवाल. पूछेगा कि मौजूदा दौर में जो नई पीढ़ी के. बच्चे. हैं वह कई बार इस्लाम को लेकर कंफ्यूज हो. गए हैं और उन्होंने मुझसे कहा वह अपने. बच्चों का जिक्र कर रही थी कि कई बार वह. वो जो प्राउड इस्लामिक होता वह नहीं रख पा. रहे वोह अपनी आइडेंटिटी बचने कोशिश कर रहे. हैं अब इसके पीछे वजह दुनिया में. इस्लामोफोबिया का जिक्र हो सकता है या यह. हो सकता है कि जो उन्होंने इस्लाम के बारे. में सुना पढ़ा और जो वो देख रहे हैं या.
जिस तरह से उसे प्रेजेंट किया जा रहा है. शायद उसमें डिफरेंस नजर आ रहा हो इसलिए वो. थोड़ा सा हेसिटेशन कर रहे हैं उनका ये. कहना था कि नई पीढ़ी इवॉल्व होना चाह रही. है जो पुरानी पीढ़ी है वो वहां से बिल्कुल. हटना नहीं चाह रही है तो इसके बीच का. बैलेंस कैसे बनाए ताकि नई पीढ़ी के जो. बच्चे हैं वो इस्लामिक रिचुअल्स को लेकर. उतने ही अच्छे से कैरी कर सके देखिए मुझे. लगता है कि यह खाली इस्लाम के मानने वालों. में ही दिक्कत आ रही है ऐसा मुझे लगता. नहीं हां बक ये मुझे हर समाज में नजर आ. रहा है सकता है मुझे ये जो बुराइयां जो.
नजर आ रही है जो जो देखिए समय अनुसार. चीजें बदलती हैं ईयर भी बदला समय भी बदला. लोग भी बदले हालात भी बदले मामलात भी बदले. तो समय अनुसार चीजें बदलती रहती है जो. हमारी जनरेशन थी जो पुरानी थी मेरे पिताजी. की उनके पिताजी की और थे वो कुछ और थे आज. मैं कुछ और हूंगा आप कुछ और होंगे हमारी. बच्चे कुछ और होंगे दरअसल ये कि पहले. जमाने में सोशल मीडिया नहीं था डिजिटल. दुनिया नहीं थी थी लेकिन आज डिजिटल दुनिया. है इस डिजिटल दुनिया में लोग जो है ना जो.
कंफ्यूजन ज्यादा है वहां जो जो इस्लाम को. जो मिल रहा है जो समझा जा रहा है कहीं ना. कहीं वह अधूरा ज्ञान है हम पहले गुरुओं के. पास जाते थे शिक्षा लेने के लिए है ना. इमाम के पास गुरुओं के पास वहां से इस. धर्म की शिक्षा मिलती थी हमको पूरा ज्ञान. मिलता था हमको लेकिन आज हमारा जो ज्ञान. मिलने लगा वो सोशल मीडिया से मिलने लगा. है य और यहां हर आदमी ज्ञानी ज्ञानी है.
कोई अपने आप को अज्ञानी नहीं कहता वैसे तो. मैं हमेशा अपने आपको को तो य कहता हूं कि. हम तो विद्यार्थी हैं हम हमसे जो सवाल कर. रहे हो हम तो कोशिश करेंगे उसको बताने की. कोशिश करेंगे लेकिन हम विद्यार्थी हैं हम. सीखने में हैं लेकिन हर आदमी आप किस आपको. कोई प्रॉब्लम आ जाए आप किसी के सामने. डिस्कस करिए कि मेरे को यह बीमारी हो रही. है तो आपको सब डॉक्टर बन जाएंगे सारे. डॉक्टर कोई हकीम बन जाएगा कोई डॉक्ट डटर. बन जाएगा आपको नुस्खे दे देंगे तो इस तरह. से अभी क्या है कंफ्यूजन है उस कंफ्यूजन.
को दूर करने के लिए मुझे लगता है कि उसकी. सही समझ दीन की दीन बोले तो अपने मजहब की. अपनी अपनी जिसमें आस्था है उसका पूरा. ज्ञान होना चाहिए अब मैं बहुत सारे लोगों. से ना सवाल करता हूं हिंदुओं से मतलब. सनातनी हों से तो बहुत से सनातनी हों से. सनातन के बारे में पूछता हू तो उनको सनातन. के बारे में नहीं मालूम है तो यही तो मैं. अक्सर कहता हूं कि गीता को तो मानते हैं. हम लेकिन गीता की नहीं मानते अल्लाह को. मानते हैं मगर अल्लाह की नहीं मानते.
मोहम्मद सल्लल्लाहु अ वसल्लम पीस ब अपन. उनकी मानते हैं मगर उनको मानते हैं उनकी. नहीं मानते तो हमें राम को मानते हैं राम. की नहीं मानते अभी क्या हो रहा है मालूम. है आपको मिश्रा जी एक बड़ा एक मैसेज पूरी. दुनिया में जा रहा है जय श्री राम लगाओ और. दूसरों को मार डालो यह उद्घोष लगाना ये. धर्म धर्म का उद्घोष है विजय का उद्घोष है. जय का उद्घोष है जय श्री राम लग का नारा. लगता है लगाना चाहिए क्या क्या किसी को.
मारने के लिए लगाया जाता है बकुल नहीं तो. क्या धारणा बनी अब मेरा मकसद कहने का यह. है कि आम मुसलमानों में ये धारणा बन गई कि. जय श्री राम का नारा लगाने का मतलब यह है. कि मार डालो इनको काट डालो यह इसका नारे. का तो अब इसको सही कौन करेगा यह तो इसको. धर्म के लोग ही तो ठीक करेंगे इसी तरह से. हि मुसलमानों में भी सेम थिंग कि अल्लाह. हू अकबर का नारा लगा देना नारा तकबीर. अल्लाह यह तो नारे वह नारे हैं जो आपके. धर्म से आपको जोड़ते हैं आपकी ताकत को.
जोड़ते हैं ना कि किसी को तकलीफ पहुंचाने. के लिए जोड़ते हैं आपको दूसरे के फायदा. पहुंचाने के लिए अब जय श्री राम का नारा. लगना चाहिए दूसरे के फायदे के लिए आप. अच्छे काम करिए और नारा लगाइए जय श्री राम. आप अच्छा काम करिए अल्लाहू अकबर अल्लाह. कबीरा बोलिए नारा तकबीर अल्लाह अ बोलिए. अच्छा काम करके बोलिए तो मेरा मकसद कहने. का है कि अभी यह जो कंफ्यूजन है ना जो जिस. ने भी ये सवाल किया मुझे लगता है कि सवाल. उसका दुरुस्त है इस बच्ची का क्योंकि.
बच्चे समझ पा नहीं रहे हैं चाहे वह किसी. भी धर्म के जो धर्म गुरु है ना किसी भी ध. किसी भी धर्म के अब उनकी जिम्मेदारी. ज्यादा बनती है कि इन कन्फ्यूजन को दूर. करें लोगों को जोड़ने का काम करें जिससे. कि आपस में मिलकर हम एक रहे जिससे कि हम. एक दूसरे की भावनाओं का एक दूसरे की. हमदर्दी का एक दूसरे का ख्याल रख सके मैं. जैसे बलीवुड की फिल्म भी देखता तो उसमें. दिखाते हैं कई बार कि रमजान का महीना अभी. तेरे साथ कुछ नहीं करूंगा या जिहाद का.
जिक्र होता है तो जिहाद का मतलब एक तरह से. माइंडसेट में डाल दिया गया है कि वो लोग. जो जाकर वो लोग जाकर जो बंदूक उठा लेते. हैं या बम फोड़ देते वो जिहाद माने. नेगेटिव कर दिया जबक जिहाद एक पॉजिटिव. शब्द है जिहाद का ये अरबी शब्द है इसका. जिहाद का माने जद्दो. जहद स्ट्रगल नहीं तो क्या जिहाद मैं जिहाद. कर रहा हूं इस पॉडकास्ट के जरिए. मिश्रा जी और इमाम साहब एक जिहाद कर रहे. हैं इस पॉडकास्ट के जरिए से कि लोगों को.
एक अच्छी बात पहुंचाने के लिए ये जिहाद कर. रहे हैं मैं और आप ये जिहाद है एक जिहाद. अंदर का जो अपने आप को प्योर करे वो जिहाद. करना है जिससे कि मैं एक सच्चा बनू मुझे. वह जिहाद करना है कि बुराइयां मैं अपनी. बाहर निकालू बुराइयों से लड़ने का नाम. मुझे खराब चीजों से लड़ने का नाम उस जिहाद. पर मुझे जाना है तो मकसद कहने का यह है कि. लेकिन आज जिहाद को लोगों ने ने उसको नजर. या गलत दे दिया जबकि जिहाद पॉजिटिव शब्द.
है मैं मैं इस बात को कोट करते हुए सवाल. पूछूंगा कि हर धर्म में अच्छे लोग हैं हर. धर्म में बुरे लोग हैं कोई भी धर्म दुनिया. का कोई धर्म मुझे नहीं लगता कि मारकाट. सिखाता होगा या हिंसा सिखाता होगा सारे. धर्म में सारी किताबों में चाहे वो गीता. हो बाइबल हो या कुरान हो सब में अच्छी. टीचिंग दी गई होगी. लेकिन जैसा कि आपने कहा कि जिहाद का मतलब. गलत परसेप्शन बना दिया गया जिहाद माने. जद्दो जहेद है तो ये जो धर्म के नाम पर. लोग हथियार उठा लेते हैं धर्म के नाम पर. लोग बम फोड़ देते हैं या धर्म और वह भी.
अपने आप को रिप्रेजेंट करने की कोशिश करते. हैं कि हम इस्लाम को बचाने की कोशिश कर. रहे हैं अलग-अलग जगहों पर अफगानिस्तान से. लेकर कुछ जगह जायज जुल्म होंगे कुछ जगह. नाजायज जुल्म. होंगे क्या इसको लेकर एक कोशिश आप लोग को. नहीं करनी चाहिए कि एक इसका पॉजिटिव मैसेज. स्प्रेड हो ताकि जो नया बच्चा है जिसे हम. कहते हैं ना कि जल्दी ब्रेन वॉश कर देना. आसान होता है उसे समझाया जाए कि धर्म. हिंसा नहीं सिखाता धर्म तो या जिस कहते. हैं कि मजहब नहीं सिखाता हमें आपस में बैर. रखना ट्रू दरअसल मैं वही कहना चाह रहा हूं.
कि मैंने इस काम को शुरू किया था भारत के. अंदर सबसे पहले ये मेरा इनिशिएटिव है हम. 26 से मैं जब फ्रांस गया था उस समय. प्रेसिडेंट थे सरकोजी वहां पर यह सवाल. मेरे सामने फ्रांस 24 चैनल की एक लेडी ने. लाइव लिया था मुझसे कि इस्लाम क्या है. इस्लाम के बारे में क्या है मोहम्मद साहब. पीएसबी क्या हैं आप शांति की बात कर रहे. हो इस्लाम शांति का मजहब है लेकिन यह सब.
क्या है तो यही सवाल जो आपने किया हां. क्यों यह सवाल आया ये जो आपने कहा अभी. ब्लाइंड कोट की कि इस्लाम शांति का प्रतीक. है लेकिन इस्लाम को मानने वाले जो हैं. उनकी अशांति से जुड़ी बड़ी खबरें आती है. हां तो वही मेरा मकसद है कि इसकी. जिम्मेदारी मेरी ज्यादा है मैंने इस अपनी. जिम्मेदारी को अपना लिया मैंने 2006 में. इसको स्टार्ट किया चूंकि मैंने कहा दूसरा. करेगा नहीं पहले इसको मैं शुरू करूंगा. क्योंकि मैं चीफ इमाम हूं तो मेरी. जिम्मेदारी ज्यादा. तो मैंने इसको शुरू किया तब मैंने सबसे. पहले भारत में आते ही सबसे पहले मैंने कहा.
था कि लश्क तैयबा जो उसका मायना है. मोहम्मद साहब की सेना लश्कर त मोहम्मद. साहब की सेना उसका मतलब मीनिंग है जेश. मोहम्मद मोहम्मद की सेना लश्कर यह मोहम्मद. के नाम से पीस बी अपऑन हिम इस्लाम के नाम. से यह सारी जो ऑर्गेनाइजेशंस हैं यह. इस्लाम के मानने वाले हो ही नहीं सकते. क्योंकि इस्लाम बचाने का नाम नाम है. इस्लाम पीस का सलामती का मजहब है इस्लाम. बचाने का नाम है मारने का नाम नहीं है.
इस्लाम आज अनफॉर्चूनेटली ये जो नाम रख के. जो जिहाद कर रहे हैं या ये हूरे हासिल. करेंगे या या वो जो वो वाला जिहाद जो उसने. करना चाहिए था असल में बचाने वाला उस उस. उस शब्द को भूल गए उस जिहाद को वह दूसरा. जिहाद उन्होंने पकड़ लिया मारने वाला. नेगेटिव शैतान वाला तो बेसिकली वो लोग. मुझे मेरी निगाह में शैतान है मेरी निगाह. में इस्लाम के मानने वाले हो नहीं सकते. क्योंकि इस्लाम पीस का मजहब है इस्लाम. नीचे निगाह करके हुकम जमीन के नीचे निगाह.
करके चलो तुम्हारे पैर से कोई चीटी चीटा. ना मर जाए आप किसी को तकलीफ ना दें जमीन. को तकलीफ ना पहुंचे ये इस्लाम है इस्लाम. बचाने का नाम है लेकिन ये आज इनोसेंट. लोगों को बम लगाते हैं इनोसेंट लोगों को. उड़ा देते हैं कहां से साबित करेंगे. इस्लाम के मानने वाले या पीस बी अपऑन. मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पीस बी. अप नीम कैसे हो सकते हैं इस्लाम मोहम्मद. तो बचाने के लिए आए थे इस दुनिया में. इंसानियत को और इंसानों को इस्लाम. इंसानियत की बात करता है तो कैसे मारने की. बात हो सकती है तो मुझे लगता है कि आज.
जितने भी इस्लाम के मानने वाले जो धर्म. गुरु है ना जितने भी इमाम हैं इस पोड. कास्ट के जरिए से खास तौर पर. पाकिस्तानियों को मैं कह रहा हूं खास तौर. पर बांग्लादेशियों को भी बोल रहा हूं कि. सबसे ज्यादा आतंकवाद बांग्लादेश में और. पाकिस्तान में ही है तो हमारे यहां से तो. कम से कम हमारे यहां यह चीज तो नहीं है य. लश्करे तयबा जैसे मोहम्मद और ये जितनी. भी ल मुजाहिदीन ये सारी ऑर्गेनाइजेशन. आतंकवाद के जो अड्डे हैं पाकिस्तान में है.
इन पाकिस्तानियों से कह रहा हूं कि ये. इनको अब आवाज उठानी चाहिए इनके इमाम को. उठना चाहिए और हक बात बोलनी चाहिए रमजान. का महीना है इनोसेंट लोगों को मार रहे हो. बमों से मार रहे हो कौन सा इस्लाम हो सकता. है ये इस्लाम के मानने वाले हो ही नहीं. सकते तो इसलिए इसकी आवाज को उठाने की. जिम्मेदारी सबकी है धर्म के लोगों की. ज्यादा है इसको जो प्रचार प्रसार हो गया. है जो बदनामी हो रही है उसको खत्म करने के. लिए जी थोड़ी आएंगे तो इमाम साहब को ही. आना होगा तो इसलिए हमारी अपनी. जिम्मेदारियों को निभाएं और इस जो.
बुराइयां हैं इन बुराइयों से बचाएं जो. सत्य का मार्ग है जो सत्य की रास्ता है. वही सबको बताएं ठीक है इस्लाम को लेकर एक. और सर बड़ा कंफ्यूजन रहता है कि इस्लाम. में ये हराम है हम सुनते हैं ये हराम. क्या-क्या इस्लाम में हराम है देखिए हराम. और हलाल दो चीजें हैं हराम किसको कहते हैं. मतलब जो नाजायज हां. और हलाल जो पाक हो ह. हलाल जो पाक है पाक हो पाक से मुराद आप. खाना पाक खाना चाहते हैं नापाक खाना चाहते.
हैं ओबवियसली पाक एब्सलूट तो वही वही एक. नजरिया है हराम और हलाल हराम बोले तो गंदी. चीजों को नहीं खाना चाहिए गंदी चीज वह. हराम नापाक है उनको नहीं खाना चाहिए पाक. चीज. है साफ सुथरी वह खाना चाहिए तो इसलिए. इस्लाम के अंदर शराब नापाक है व आदमी को. बुराइयों की तरफ ले जाती है हराम. है सूद का निजाम इंटरेस्ट पर पैसा लेना. देना ये एक इंसानियत को बर्बाद कर देता है.
लोगों को बर्बाद कर देता है इसलिए सूदी. निजाम को हराम कर दिया इसमें मत जाओ. बैंकिंग सिस्टम जो है ये ये भारतीय नहीं. है ये जूज वाले कांसेप्ट है आज लोग हर. आदमी बैंक से चक्कर में घुस गया बर्बाद हो. गए. लोग इसलिए हमारे यहां मना किया गया उन. चीजों के लिए कि जिससे इंसान को किसी भी. इंसान को उस तकलीफ पहुंचे उस बुराइयों से. उसको रोकने के लिए उनको बचाने बैंकिंग.
सिस्टम तो आज आजकल जरूरी मजबूरी दोनों हो. गया है बैंकिंग सिस्टम तो जरूरी मजबूरी. दोनों हो गया है नहीं मजबूरी का नाम. मजबूरी नहीं कह सकते आप अपने अपने आपकी. अपनी आसानी के लिए तो आप कुछ भी कर लेते. हो मजबूरी किसको कहते हैं मजबूरी का नाम. नहीं होना चाहिए आपको सूदी निजाम से कोई. बड़ा आदमी बनते देखा आपने सूदी निजाम से. कोई बड़ा नहीं लोन लेने की बात कर र जीको. सूदी निम कहते बाकी बैकिंग ट्रांजैक्शन. के अंदर एक बड़ी शख्सियत है जिनकी कंपनी. इंफोसिस है और नारायण मूर्ति उनका नाम है.
उनकी दुनिया में कितनी बड़ी कंपनी है. उन्होंने सबसे पहले जब अपनी कंपनी को. स्टार्ट किया था अपनी वाइफ से ₹ लिए थे और. लिए थे और एक पार्टनर था सुधा जी और सुधा. जी से और एक उनका पार्टनर था पुना में. वहां से उन्होंने स्टार्ट किया था लेकिन. उन्होंने एक संकल्प लिया था दे आर सनातनी. उन्होंने संकल्प लिया था कि देखिए हम अपनी. कंपनी के अंदर इंटरेस्ट वाला सूदी निजाम. को अपनी कंपनी में नहीं जोड़ेंगे और आज तक. इंफोसिस कहां से कहां पहुंच गई उन्होंने.
अपने आप को सूरी निजाम से नहीं जोड़ा तो. मजबूरी नहीं है जो आप कह रहे हो ना मजबूरी. का काम नहीं करना चाहिए उनसे बचना चाहिए. मतलब गुनाह से बचना बुरी चीजों से बना. म्यूजिक भी हराम है नहीं म्यूजिक का मतलब. म्यूजिक से मुराद हराम कहां हो जहां आप. झूमने लग जाए अब आज क्या म्यूजिक आपको देख. रहे हैं कपड़े कैसे पहन के और कैसे-कैसे. काम हो रहे हैं बोतल हाथ में लेकर नाइट. क्लब में जाके झूमना क्या ये आप अपने. अच्छा मानेंगे आप इसको मतलब नहीं मैं आपसे.
पूछ रहा आप करेंगे इस काम को मतलब मैं. नहीं करता लेकिन नहीं तो आप अच्छा मानेंगे. उसको अब सर जिस देश में हम रहते नहीं तो. क्या मतलब कुछ भी कर लेंगे हम इस देश में. रहते हैं तो गुनाह कर लेंगे गलत काम कर. लेंगे अरे हमारे अपने संस्कार और संस्कृति. है भाई अभी वैलेंटाइंस डे मनाते फिर रहे. हो ये हमारा कांसेप्ट है क्या ये हमारे. भारतीय संस्कार है क्या नहीं है बट वो. फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के नाम नहीं वो अलग. बात है आप कुछ भी करते. रहिए वृद्ध आश्रम हमारे संस्कार नहीं है. सही बात है हमारे भारतीय संस्कार क्या है. हमें उसको प्रमोट करना चाहिए.
अनफॉर्चूनेटली. हा यहां वेस्टर्न वाले हो गए हम एक परिवार. नहीं रहेंगे हम अलग रहेंगे दादा दादी नाना. नानी ये कांसेप्ट है ये जो जोड़ता है. बच्चों को संस्कृत संस्कार मिलते हैं कौन. देता है संस्कार पापा चला गया मम्मी चली. गई जॉब पे बड़े बूढ़े बुजुर्ग दे देते हैं. लेकिन आपने बुजुर्गों को कहा नहीं हमें. आपकी जरूरत नहीं है हम अकेले बहुत हैं. हमें प्राइवेसी चाहिए समाज के अंदर आज के.
वक्त में इतनी बुराइयां हो गई हैं मिश्रा. जी शादी छ महीने से ज्यादा क्रॉस नहीं हो. रही है मैं हर समाज की बात कर रहा हूं. खाली आप मुझसे इस्लाम की बात मत करिए मैं. सनातनी की बात नहीं कर रहा हूं मैं इस. भारत के हर समाज की बात कर रहा हूं कि. लोगों के अंदर इनटोलरेंस इतना हो चुका है. कि शादी 6 महीने क्रॉस नहीं कर रही है 99. पर आप करोड़ों रुपए खर्च करके शादियों के. अंदर और छ महीने क्रॉस करके सब कोर्ट के.
अंदर खड़े हैं. इनटोलरेंस और सबसे बड़ी बात हमने अपने. संस्कार और अपनी संस्कृति को छोड़ दिया. जिसकी वजह से आज हमें यह मिल रहा है तो. मुझे लगता है कि वापस हमें अपने भारतीय. कल्चर के साथ जुड़ना चाहिए जो हमारा असल. कल्चर है जिससे कि यह जो बुराइयां दिख रही. हैं जो खराब यां दिख रही हैं जो परिवारवाद. खत्म हो रहा है व वास से जुड़ेगा कुछ कॉमन. क्वेश्चन लोगों ने सर दिए थे अभी रमजान के. महीने में एक इंडियन क्रिकेटर है मोहम्मद.
शमी वो गेंदबाजी कर रहे थे तो गेंदबाजी. में उन्होंने कोई एनर्जी ड्रिंक पीते हुए. एक तस्वीर वायरल हो गई अब उसको लेकर एक. वर्ग आया जिसने बड़ी क्रिटिसाइज किया शमी. को कि तुम रमजान के महीने में कैसे. सार्वजनिक तौर पर मुसलमान होकर पी रहे हो. शमी का एनर्जी ड्रिंक. पीना क्या वो गलत था इतना गलत कि उनको इस. तरह से इस्लाम के जो मानने वाले वो. क्रिटिसाइज करें हालाकि कई लोगों ने. सपोर्ट भी किया कहा उसके भी रूल रेगुलेशन. बताए कि बाहर जाते वक्त इजाजत होती है देश.
को रिप्रेजेंट कर रहे हैं देश पहले आता है. लेकिन कई लोगों ने कहा कि शमी का इस्लाम. के ऊपर देश को प्रायोरिटी देना भी खराब था. यह ऐसी चर्चाएं आई आपका उस पर क्या टेक था. अगर आपको मामला नोटिस देखिए मैं तो सबका. अपना अपना मामला है मिश्रा जी आपको अपना. जवाब देना होगा ईश्वर के मुझे अपना जवाब. देना होगा सबको अपना अपना जवाब देही है यह. समय में ना हम बस यही फ़िक्र में लगे हैं. कि दूसरे की कमियां हम तलाश कर रहे हैं. अपनी फिक्र किसी को नहीं है हमें अपने.
फिक्र में लगना है कि मुझे अपने आप को. कैसे दुरुस्त करना है मुझे कैसे अपने आप. को सही रखना है मुझे दूसरे की फिक्र में. नहीं चलना चाहिए अब जहां तक सवाल आपने. उनके ड्रिंक पिया है रमज़ान का समय है तो. वह देश भी तो अरबी है कोई भारत थोड़ी था. वह जहां पर उन्होंने दुबई था या कहां था. अरब देश था जहां उन्होंने वह किया है अब. उनका अपने मामलात हैं अब उनके लिए जो उनको. आसानी लगी ठीक है उन्होंने जो किया है. क्योंकि यह बात ठीक है. इस्लाम कट्टरता नहीं बताता इस्लाम एक.
फ्लेक्सिबल मजहब है जो कि आपको आसा नियां. देता है मिसाल के तौर पर मैं नमाज है नमाज. मुझ पर फर्ज है लाजिम है मतलब फर्ज माने. लाजिम लेकिन मैं इस सिचुएशन में कि अगर. कहीं पे मुझे लेट हो रहा है तो मैं दो. नमाज को एक साथ पढ़ सकता हूं ये. फ्लेक्सिबल है मैं जो चार रकात नमाज होती. है मैं दो कर मुझे पढ़नी है कसर वो मेरे. लिए फ्लेक्सिबल हो गया अब मैं कहीं कहीं. पर जगह नहीं मिल रही है तो नमाज कजा हो. जाएगी वो मेरे लिए फ्लेक्सिबल हो गया इसी.
तरह से रोजे भी होते हैं कि बहुत से लोग. बीमार हैं इस हालत में कि वो कुछ भी नहीं. रख सकते तो उनके लिए छूट है रमजान में. लेकिन उनको लिए एक रास्ता दिया है कि वो. छुप के खाना खाए एक दूसरों के सामने खुल. के ऐसा काम कृत्य ना करें कि जो दूसरों को. तकलीफ हो अब मेरा रोजा है ठीक है लेकिन. मैं मुझे भी अपने उसी साह से रहना चाहिए. जैसे हमने कहीं पढ़ा क ना मतलब खाना खाए. छुप के खा ले जी ककेट कहा जो इस्लाम को. फॉलो करते थे कि इजाजत शायद बाहर अगर आप. ट्रेवल करते तो आपको इजा इजाजत है इजाजत.
है ट्रेवलिंग के टाइम ट्रेवलिंग टाइम. ट्रेवलिंग के टाइम क घर पर छूट है कि वो. रोजा लेकिन उसको जाहिर ना करें कोशिश करके. लोगों को जो जिस बात से सवाल बने तुम्हारा. रोजा नहीं है तुम्हारा रोजा है जब भी. जाहिर मत करिए और रोजा नहीं है जब भी. जाहिर मत करिए अपने आपको बिल्कुल रहना. चाहिए रोजा एक ऐसी इबादत है जो आपको आत्मा. और परमात्मा से कनेक्ट करती है बेसिक लिए. इसमें इंसानों का कोई दखल नहीं है लेकिन. हमें चाहिए कि हम रोजे के समय में रमजान.
का महीना है नवरात्र आने वाले हैं सबसे. पहला हक अदा करिए अपने पड़ोसी का पड़ोसी. आपका पड़ोसी है हिंदू है सिख है व्हाट एवर. कोई भी इंसान है आप अपने पड़ोसी का ख्याल. करिए कि वो कहीं भूखा तो नहीं है हैं कहीं. वो तकलीफ में तो नहीं है आप ईद मनाते हैं. खुशियां मनाइए लेकिन अपने पड़ोसी का पहले. ख्याल करिए कि आपका पड़ोसी के पास कपड़े. हैं या नहीं है उसकी खुशियां है या नहीं. है तो दूसरे के दर्द को समझना दूसरे की. तकलीफों को को एहसास करना उसी का नाम तो. इत अच्छा जो छोटे-छोटे बच्चे जैसे शमी की. बच्ची की एक घटना और आई थी होली के दिन.
रंग लगी ई तस्वीर वायरल हुई थी और बड़ा. उसको लेकर भी क्रिटिसाइज किया गया. अब संस्कृति सबकी है चाहे वह हिंदू हो या. मुसलमान हो इसी तरह से हम आपके यहां शामिल. होते हैं जैसे अभी आप ईद पर बुलाएंगे तो. हम आपके यहां से आंगे हो सकता है हमारे. यहां होली पर हमने मित्र बुलाए हो किसी ने. प्यार से दो रंग लगा दिया छोटी बच्ची को. रंग लगाना क्या वो हराम में था बड़ी बड़ी. क्रिटिसाइज किया गया शमी की डॉटर को कि. आपको रंग कैसे लगा दिया गया यह तो गैर. मजहबी है भाई यह रंग लगा देना यही तो.
अफसोस की बात हो रही है मैं अक्सर यही बात. कह रहा हूं कि हम क्यों हिंदू मुसलमान हैं. हम क्यों पहले इंसान क्यों नहीं बन पा रहे. हम हम हमारी इंसानियत क्यों नहीं जिंदा. रहती है भारत में रहते हैं सारे धर्मों का. आदर सम्मान करते हैं ईद पर आप हमारे यहां. आते हैं हम होली प दिवाली पर आपके यहां. जाते हैं यही तो भारत की विष अनेकता में. एकता जहां हम सब एक साथ खाना पीना सब एक. दूसरे की इज्जत करते हैं लेकिन क्या हो.
रहा है कि अनफॉर्चूनेटली. एक सियासत होती है अपनी राजनीति होती है. जो लोग अपने तौर से उसकी व्याख्या करते. हैं मैं अक्सर एक बात कहता हूं मिश्रा जी. और आपके पॉडकास्ट के माध्यम से कहना चाहता. हूं क्योंकि यूथ देखता है आपको देखो भाई. हिंदू मुसलमान बिल्कुल नहीं बनना चाहिए.
हमें मेरी आस्था इस्लाम में मैं मुसलमान. हूं आपकी सनातन में आप आप एंजॉय करिए. लेकिन यह मेरी अपनी पर्सनल बाहर निकलने के. बाद एक हो जाओ हम सब भारतीय बन जाए मेरी. पहचान हिंदू से नहीं चाहिए हिंदू मुसलमान. नहीं चाहिए एक भारतीय बनना है. हमें आज को मैं एक बात बताऊं ना आपको मुझे. दुख लगता है मैं सच कहता हूं मुझे तकलीफ. आती है सब बातें सुनने के बाद कि आज हम. इतने पढ़े लिखे हो गए कि पूरी दुनिया में. आज आईटी में हमारा पूरी दुनिया में नाम है.
हम आज भी पता है क्या हो रहा है मिश्रा जी. कि केसरिया रंग तो हिंदू का हो गया और हरा. रंग मुसलमान का हो गया है ना नारियल हिंदू. का हो गया खजूर मुसलमान की हो गई गाय. हिंदू की हो गई बकरा मुसलमान का हो गया. अरे बेवकूफ हो कहां है तुम्हारी अकल कहां. गई तुम्हारी अकल चाइना आज कहां से कहां. टेक्नोलॉजी में कैसे आगे चला गया वहां तो. हिंदू मुसलमान नहीं हो रहा वहां तो अपने. काम पर अपने करियर पर फोकस पर देगा. क्या-क्या सूरज भी बना दिया आर्टिफिशियल. अभी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अंदर कितनी.
कितनी चीजें डेवलप कर दिए उन्होंने. टेक्नोलॉजी के अंदर जापान टेक्नोलॉजी में. कितनी आगे चला गया सारी दुनिया टेक्नोलॉजी. में आगे जा रही है और हम हिंदू मुसलमान. में लड़ रहे हैं हम यह हिंदू है यह. मुसलमान है यह रंग लगाएगा यह नहीं लगाएगा. इसका हरा रंग इसका गेरवा रंग यह कहां तक. इन सब चीजों से दूर उठकर हमें एक अच्छा. इंसान बनना है हम एक अच्छा इंसान बन. जाएंगे तब हम एक अच्छे मुसलमान और एक. अच्छे हिंदू बनेंगे तो हमें सबके आदर. सम्मान करो मिल के रहो इस भारत को मजबूत.
करो इस समय राष्ट्र सर्वोपरि है अगर मन. में आपके राष्ट्र है ना तो मुझे लगता है. कि हम हमारी ताकत को कोई नहीं रोक पाएगा. मैं कुछ कुछ इंपोर्टेंट क्वेश्चन पूछ लेता. हूं जैसे आपने शुरुआत की कि इस्लाम की. शुरुआत इसलिए हुई कि महिलाओं पर अत्याचार. हो रहा था और य आपने बहुत ब्यूटीफुली कोट. किया कि उस जमाने में महिलाओं को जिंदा. गाड़ दिया करते थे बच्चियों को छोटी-छोटी. अब एक परसेप्शन यह भी इस्लाम को लेकर बनता. है कि इलाम में महिलाओं को उतनी इजाजत. नहीं है या पुरुषों को ज्यादा ताकतवर बना. दिया गया महिलाओं को कम अब फिर मेरे मन.
में ख्याल आता है कि महिलाओं के उत्थान से. ही तो शुरुआत थी तो फिर यह परसेप्शन क्यों. बना यह कहां है यह एक कॉमन परसेप्शन आता. है जैसे जैसे बुर्के का जिक्र होता है तो. वो क्या मेरे ये मुस्लिम कई सारे फ्रेंड्स. ने क्वेश्चन भ थे कि गल्फ कंट्रीज में रेत. होती है वहां कांसेप्ट अलग थे आपने उसे. इंपोज कर दिया शादियों में चार शादियों की. इजाजत पुरुषों को दे दी गई या कि महिला के. साथ आपको अगर हज भी करवा साथ परिवार का. लेकर जाना इन कंपेरिजन महिलाओं से ज्यादा. पुरुषों को इजाजत दी गई है एक य परसेप्शन.
कुछ कहती है मैं आपसे समझना चाहता हूं. य देखिए यह अपना अपना नजरिया. है इस्लाम की दृष्टि से अगर मैं. देखूं अगर भारतीय संस्कृति के हिसाब से भी. देखूं तो औरतों का बड़ा सम्मान है एक बात. आपको आपके पोड कास्ट के जरिए से बड़ी. अच्छी बताना चाहता हूं ये वाली बात भी मैं. डिटेल में रखूंगा लेकिन एक बात मेरे जहन. में आई है तलाक को लेकर और निकाह को.
लेकर हमारा जो इस्लाम के जो तरीका है जो. आपने कहा ना औरत का अधिकार और मर्द का. अधिकार मैं इस अधिकार के तौर पर आज आपके. पोस्ट कास्ट के जरिए से लोगों को. बताऊंगा जितना अधिकार औरत के पास. है उतना मर्द के पास अधिकार है मिसाल के. तौर पर मर्द औरत लड़का लड़की की शादी हुई. और शादी हो ने के बाद मिसाल के तौर पर. मर्द में कोई कमी है कोई भी कमी हो सकती. है उस लड़की को वो आदमी पसंद नहीं हुआ.
उसमें कमी है व पहले तो वो उसको कहेगी कि. देखो इस कमी को ठीक कर लो आपको बहुत से. लोग गुटका खाते हैं मालूम है बदबू आती है. मुंह से फीमेल को पसंद नहीं है शराब पीता. है एक आदमी और फीमेल को पसंद नहीं है तो. उसे छोड़ देनी चाहिए कोई गलत काम करता है. वो उसे छोड़ देना चाहिए तो वो वार्निंग. देगी पहले कि देखो तुम ये गलत काम करते हो. तुम छोड़ दो हम एक बार बोलेगी दो बार. बोलेगी तीन बार बोलेगी उसकी समझ में आ गया. ठीक है नहीं तो वो दो गवाह बुलाएगी एक.
लेटर लिखे गी कि देखो ये मेरे गवाह हैं. तुमने तुमके तुम्हारे अंदर यह कमियां है. मैंने तुमको तीन बार वार्निंग दी अब मैं. तुमसे खुला लेती हूं जिस तरह से मर्द को. अधिकार है तलाक देने का कि अगर कोई औलाद. गलत है या उसके अंदर कोई बहुत सारी कमियां. हो सकती है औरत में तो मर्द को अधिकार है. ना तलाक लेने का कि तीन बार बोल देगा तलाक. दे देगा लेने का इसी तरह से औरत को भी. अधिकार है खुला लेने का. हम औरत भी खुला ले सकती है मर्द भी तलाक.
ले सकता है तो हमारे यहां इस तरह से कोई. भी किसी तरह से औरतों के साथ कोई अन्याय. नहीं है यह समझने की बात है हां औरतें घर. की जीनत होती हैं औरतें घर में रह अपने. परिवार को अपने बच्चों में देखें यह. भारतीय संस्कार है हम ट्रू है ना पहले. पहले पहले पहले हमारे बुजुर्गों ने औरतें. काम करने नहीं जाती थी हमारी बुजुर्ग. औरतें थी घर में रहती थी हम और परिवार को. देखती थी मर्द कमाने जाता था वो कमा के. लाता था ये कांसेप्ट है अब वो कांसेप्ट.
चेंज हो गया दुनिया बदल गई अब बदलने से तो. चीजें भी बदल गई तो जब चीजें बदल गई तो सब. चीज बदल गया अब बदल गया तो सब कुछ बदल गया. बदलने का मतलब यह परिवार ही नहीं रहा अब. यह कोर्ट कचहरी में खड़ी रहती हैं. लड़कियों को आप यकीन मानना मैं इनको शादी. होने के बाद 1010 साल तक उसको कोर्ट में. खड़ी है वो बच्ची उसको तलाक नहीं मिल रही. है और वो आदमी भी 10 10 साल कोर्ट में. धक्के खा रहा है तो दोनों की जिंदगी खराब. हो रही है तो कोई भी बात को समझने का मकसद.
यह है कि या तुम शादी क्यों कर रहे हो फिर. जब तुम तुम्हारे अंदर इतनी टोलरेंस है तो. और अगर तुम्हें एक दूसरे से नहीं रहना. इस्लाम में चूंकि शादी हमारे यहां जो शादी. होती है कांट्रैक्ट है इस्लाम में शादी. कांट्रैक्ट होता है निकाह कांट्रैक्ट होता. है जीवन भर का जन्म जन्म का बंधन नहीं. होता इस्लाम में एक शादी कांट्रैक्ट है. भाई तुम्हें जब तक मेरे साथ रहना है आप. खुशियों से रहो मेरे साथ तुम नहीं रहना. तुम्हारी आजादी के अधिकार है तुम दोनों को. लेकिन जिंदगी तो नहीं खराब होगी जिस तरह. से कोर्ट में 1010 साल पेंडिंग पड़ी है.
लड़कियों की जिंदगी खराब हो रही है लड़कों. की जिंदगी खराब हो रही है परिवार टूट रहा. है बच्चे बर्बाद हो रहे हैं तो समाज को. दुरुस्त करने की जिम्मेदारी किसके पास है. सरकार तो करेगी. नहीं कौन करेगा समाज सुधार कौन करेगा धर्म. गुरु तो ये समाज के अंदर ये जो बुराई आ. रही है ना मुझे लगता है कि इसकी ज्यादा. जरूरत है जो समाज के अंदर जो बुराइयां है. उसको धर्म के सारे धर्म गुरु अपनी अपनी. मस्जिदों से मठों से गुरुद्वारों से.
चर्चों से सिनगॉग से ज्यादा से ज्यादा. समाज को कथावाचक होते हैं वह अपने लोगों. को एक अच्छा मैसेज दे सकते हैं समाज को. सुधार करने के लिए धर्म के लोगों की अब. जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि ये. समय कौन सा चल रहा है मालूम है कौन सा काल. है ये कलयुग कलयुग कलयुग में क्या-क्या. होगा आपको मालूम है अन्याय होगा अत्याचार. होगा ऐसी ऐसी चीजें सुनने री जो हमने कभी. सुनी भी नहीं बाप बेटे का नहीं बेटा बाप. का नहीं हो रहा मां बाप के नहीं एक दूसरे. की इज्जत नहीं कर रहे तो समय इसलिए हमें.
सबको धर्म जो है ना धर्म एक आचरण है अगर. हम धर्म के साथ जुड़े रहेंगे तो मुझे लगता. है कि बुराइयों से बच पाएंगे रिलीजन बड़ा. होता है सर या देश बड़ा होता है क्योंकि. ये सवाल मैं धर्म गुरुओ से पूछता हूं और. अब कई बार मैं डिपॉट भी होता हूं नहीं. नहीं देखिए इसको ये कोई बहुत बड़ी बात. समझने की नहीं है इसके लिए धर्म आपकी अपनी. आस्था है. मैं घर में हूं मेरा धर्म है मेरी आस्था. है वो मेरे लिए है मैं घर से निकलने के.
बाद मेरा राष्ट्र है मेरा देश है आज हम. यहां सब इकट्ठे होते हैं एक राष्ट्र आपको. मालूम है कि जब हिंदुस्तान से बाहर जाते. हैं ना हम लोग कभी भी या आप भी कभी अब्रॉड. जाइए तो आप सबसे पहले ना वहां क्या. ढूंढेंगे आप कोई इस्लाम के मानने वाले. हिंदू मुसलमान नहीं ढूंढेंगे देख यार कोई. देखो भारतीय रेस्टोरेंट देखो यार जरा या. कोई इंडिया भारती पाकिस्तान भारतीय को. देखो यार तलाश करो या कोई भारतीय. कम्युनिटी कहां रहती है य देखो भारतीय. रेस्टोरेंट या चेक करो वहां हम सब भारतीय.
हो जाते हैं मगर भारत में आते ही हिंदू. मुसलमान हो जाते हैं उसके बाद जात बढ़. जाते फर जात पात में बढ़ जाते हैं फिर. मतलब हमारे यहां क्या बड़ी अजीब सिस्टम चल. रहा है इसको सुधारने की जरूरत है हमें. बटने का शौक है बटना नहीं चाहिए ये बटने. का काम नहीं है आज भारत जो तरक्की कर रहा. है भारत विश्व गुरु बनने की अग्रसर है तो. मुझे लगता है कि हम सबको एक होना चाहिए यह. तुम लड़ाई मत करो नौजवानों से मेरी. नफरत का पैगाम मत दो किसी को भी खराब मत. कहो सब मिलकर चलने का समय है यह और यह समय.
अब यह चूंकि यह जो बहुत समय दोबारा लौट के. नहीं आएगा हमें समय बदलता है आज का जो समय. भारत का समय है मैं आज आपको बता रहा हूं. पूरी दुनिया में जाता हूं और देखता हूं कि. आज भारत की तरक्की भारत किस तरह से विश्व. गुरु बनने के लिए अग्रसर है तो सबको एक. होना चाहिए ऐसा मेरा मानना है मान एक सर. बहुत ही कंट्रोवर्शियल टॉपिक था मैं चाहता. हूं उस पर आप प्रकाश जा क्योंकि बेहतर. समझा सकते हैं इस देश में दो साल पहले. घटना हुई थी नुपुर शर्मा प्रकरण की और वो.
बहुत विवादित हो गई उस के चलते इस देश में. कई लोगों की जिंदगी चली. गई वोह एक ऐसा विषय है जिससे जैसे आपने. कहा ना कि क्या मक्का मदीना में शिवलिंग. को छुपा कर रखा है ऐसी एक धारणा है जिस पर. दबी जुबान से चर्चा होती है कई बार उपहास. उड़ाने के लिए होती है कई बार कुछ लोग. कहते हैं तथ्यों के साथ है मुझे नहीं पता. मैं इस विषय में शून्य जानकारी रखता हूं. मेरे मन में सिर्फ एक सवाल है नुपुर शर्मा. प्रकरण में जो कुछ कहा गया था वो कितना.
सही था कितना गलत था उसकी व्याख्या सही. थोड़ा समझा दीजिए ताकि एक बार के लिए विषय. फिर परमानेंटली बंद हो जाए मुझे मुझे याद. दिलाएंगे उन्होंने कहा क्या था उन्होंने. शादी को लेकर जिक्र किया था 9 साल जो. प्रोफेट मोहम्मद साहब की शादी हुई थी उनकी. 11 शादियों में से शायद जो आखिरी शादी थी. आयशा के साथ शायद अगर मैं सही कोट कर रहा. हूं तो उनकी उम्र को लेकर था 9 साल की. बच्ची का जिक्र करते हुए दरअसल दरअसल. इसमें थोड़ा सा अलग-अलग राय है एक राय.
नहीं है इसके. अंदर उसमें कहीं पर 14 साल की भी जिक्र है. 19 साल का भी जिक्र है लेकिन सही बात नहीं. है लेकिन मैं किसी के लिए भी मेरा मानना. यह है मेरा अपना मानना है यह मेरी जाती. बात. है कि मुझे यह अधिकार मेरे पास नहीं है कि. मैं किसी के बारे में कोई अब्द शब्द किसी.
के बारे में कहूं किसी के प्रॉफिट अवतार. के बारे में या किसी धर्म के बारे में या. किसी के बारे में बुरा कहना ग्रंथों के. बारे में खराब कहना ये अधिकार मेरे पास. नहीं है मेरे पास किसी को अच्छा कहने का. अधिकार अगर नहीं है ना कोई बात नहीं लेकिन. किसी को खराब कहने का अधिकार भी मेरे पास. नहीं होना चाहिए मैं तो कहता हूं कि जो. प्रोटेस्ट भी हुए जिस तरह से हुए तो. मुसलमानों को क्या करना चाहिए था. मुसलमानों को यह करना चाहिए था कि मुसलमान.
अगर किसी बच्ची ने नूपुर शर्मा हमारी. बच्ची मैं तो उसको बच्ची कहूंगा अपनी बेटी. भी कह सकता हूं कोई बात नहीं बच्ची हमारे. सब बच्चे हैं मेरे अगर उन्होंने बात कह भी. दी तो हमारा तरीका यह नहीं होना चाहिए था. मार काट का हमारा तरीका यह होना चाहिए था. कि जो जो जो मोहम्मद साहब की जो जीवनी है. उस पर जो किताबें लिखी गई है वो उनकी. जीवनी वो किताब उनको भेज दी जाती कि बेटा. आपने जो सुना दुनिया सोशल मीडिया पर आपका.
ज्ञान ठीक नहीं है आप इसको पढ़ लीजिए उसको. प्यार से भी कही जा सकती थी मतलब. कॉन्फ्लेट को बढ़ाने के बजाय हम प्यार से. भी कर सकते हैं ना मिसाल के तौर पर एक. एग्जांपल देता हूं आज आपको क्या हुआ कि. जमुना पार में राम नवमी की शोभा यात्रा. निकलनी थी चा साल पहले और बड़ा हंगामा हो. रहा था चार मस्जिदें आ रही थी उस समय में. और नमाज का का समय शुरू हो रहा था तो मेरे. पास वहां की जो इमाम है सारे और वहां के. लोकल लोग मेरे पास मिलने के लिए आए कहने.
लगे इमाम साहब हम बड़ी दुविधा में है कि. नमाज का समय है और शोभा यात्रा राम नवमी. की शोभा यात्रा निकलनी है और वह जय श्री. राम के नारे लगाते हैं क्या-क्या करके. जाएंगे तो हम नमाज का समय है तो हम मस्जिद. को बंद करें या क्या करें आप हमें रास्ता. बताइए तो मैंने कहा वेरी सिंपल तुम कुछ भी. मत करना जैसे मैं बोलू वैसे कर लेना कहने. लगे बताओ लेकिन मैंने कहा करना वैसे ही जो. मैं बोल रहा हूं कहने लगे ठीक है इमाम. साहब तो मैंने कहा कि जब मस्जिदें बंद मत. करो मस्जिदें खुली रखना चार मस्जिदें बीच. में आ रही थी और मस्जिदों के बाहर आपने.
टेबल लगानी है पानी की बोतलें रखनी है. फ्रूट रखने हैं और मस्जिदों के छतों पर. फूल लेकर जाने हैं तो जब शोभा यात्रा. निकलेगी तो आपको फूल बरसाने हैं और नीचे. लोगों को जो जो शोभा यात्रा में निकलेंगे. उनको पानी पिलाना है भाई ये काम मेरे कहने. से कर देना इसमें चेंज मत करना कहने लगे. ठीक है इमाम साहब जैसा आप फरमाएंगे. उन्होंने वही किया चारों मस्जिद के लोगों. ने दरवाजे खोल दिए सबील लगा दी पानी का. ऊपर से फूलों का इंतजाम कर दिया शोभा. यात्रा गई तो फूल बरसाने शुरू कर दिए और. वहां लोग पानी पी रहे तो वह जितने भी.
सनातनी थे वह इन लोगों से गले मिल मिल के. जा रहे थे और आज ये 4 साल हो गए आज तक वो. टेंशन खत्म हो गई तो मकसद कहने का यह. है संवाद डायलॉग ये कंटिन्यू रहना चाहिए. मैं संवाद का आदमी हूं मैं कहता हूं कोई. भी प्रॉब्लम हो संवाद के जरिए से करो अब. हरियाना में जो झगड़ा हुआ था वहां पर जो. नल्ह पर यह मुसलमान ज्यादा मेजोरिटी में. थे वो वहीं पर सीले लगा देते पानी लगा. देते पला दे आप प्यार से हैंडल कर सकते थे.
हर जगह हैंडल हो सकता है बट मैं इस पे आता. हूं ये टॉपिक मैंने इसलिए छेड़ा क्योंकि. आप धर्म के जानकार है मैंने जितना पढ़ा. क्योंकि मैं भी इस बारे में पढ़ रहा था. फर्स्ट मुस्लिम महिला खदीजा जी. थी खदीजा जी मुस्लिम बोले तो मतलब प्रॉफिट. साहब की वाइफ फर्स्ट वाइफ जो खदीजा जी. अच्छा एक मैंने बड़ा इंटरेस्टिंग फैक्ट और. पढ़ा कि जो 11 क्योंकि पुराने जमाने में. लोग ज्यादा शादियां करते भी थे 11 मैरिजस. में से 10 मैरिजस में विधवा थी वो महिलाएं. इसके पीछे क्या कांसेप्ट सर हो सकता है. क्या बात तुमने कही बड़ा मिश्रा जी बहुत.
अच्छे सवाल कर रहे हो आप आप रमजान का. महीना मेरा मुह तो तुमने सुखा दिया लेकिन. ये भी इबादत है जो मैं आज कर रहा हूं मैं. सचमुच में इबादत है मेरे भाइयों की. गलतफहमियां दूर हो जाएंगी ना मेरी आज की. पूजा पूरी हो जाएगी ये रोजे की रोजे में. बुलवा रहे हो मुझे मजा आ रहा है बात करने. में भी क्योंकि सत्य की बात हक बात बोलना. भी चाहिए आपको बताऊं ये शादी कांसेप्ट चार. करने का पीछे ना समझने की जरूरत है ये शौक. शादी करने का हुकम नहीं है लोगों को मालूम. नहीं है कि चार शादी करने का हुकम है. लेकिन शौक में नहीं है आपको शादी मेरी हो.
गई मान लो मेरी बीवी के बच्चे नहीं हो रहे. हैं तो अब मैं मजबूरी में कोई दूसरी शादी. भी कर सकता हूं अपनी बीवी से इजाजत ले लो. कि भाई देखो ये बच्चे बच्चे नहीं हो रहे. तो हम एक बीवी को ले आते हैं जिससे बच्चे. भी हो जाएंगे वो इजाजत दे देगी हां जी हो. गई बहुत सी ऐसी बहने हैं हमारी बेटियां है. हमारी जिनकी उम्र निकल गई शादी हो नहीं. रही है आप उनको सम्मान देने के लिए आप. निकाह करिए उनसे उनको दर्जा दीजिए बीवियों.
का पत्नियों का उन्हें अपने घर में लाइए. उनसे बच्चे पैदा होंगे उनको खुशियां दीजिए. उनको सम्मान दीजिए क्योंकि बहुत सी बहने. शादिया नहीं हो रही है वो तड़प रही है तो. उनको सम्मान दीजिए निकाह करिए ऐसी विधवा. औरत हैं जिनको विधवा होने के बाद क्या. इसका मतलब व सती सती तो होगी नहीं अब वो. तो राजा राम मोहन राय इस इस प्रथा को खत्म. कर गए कि पहले शादी होती थी चिता के साथ. सती जल जाएगी अब तो वो कांसेप्ट ही नहीं. है प्रथा बदल गई तो आज की जो प्रथा में तो. अब औरतों को सम्मान कैसे देना है जलाना तो.
है नहीं अब उसकी शादी हो गई मिसाल के तौर. पे एक बच्ची थी एक्सीडेंट हुआ भी उसकी. शादी हुई उसका आदमी मर गया तो क्या वो. पूरा जीवन भर ऐसे ही गुजारे गी उसको शादी. करनी चाहिए तो अब ऐसी बच्ची जिसका कोई. देखने वाला नहीं है तो मैं सक्षम हूं मेरे. पास पैसे भी हैं मेरी ताकत भी है और मौका. भी है तो मैं उस बच्ची को कहूंगा मैं. निकाह कर सकता आपके साथ या मैं अपने. बच्चों से निकाह करर हूं मकसद मेरे से. मुराद जनरल बात कर रहा हूं कई लोग पोड.
कास्ट से मुझे समझले कि इमाम साहब शादियों. की बात कर रहे हैं तो मैं उस लिहाज से कह. रहा हूं कि मतलब बच्चों की शादियां लोगों. की शादियां उनसे हो जो बेवाए हैं जिससे कि. उनका घर बसे और बेसिकली इसके पीछे. कांसेप्ट औरतों को सम्मान देना है औरतों. को अधिकार देना है औरतों की अपलिफ्टमेंट. की बात है उनको अधिकार दो उनको साथ रखो. देखो एक बात याद रखना जो अपने औरतों को. प्यार करते हैं ना उनके घर में बरकत होती. है सहमत बात हो मैं गारंटी दे रहा हूं. क्योंकि औरत घर की लक्ष्मी भी होती है.
आपका मिक्स आपकी शादी हो गई नहीं अभी नहीं. हुई अच्छा मैं दुआ करूंगा आपकी शादी जल्दी. हो जाए क्योंकि भाग्य औरत से जुड़ता है. आपका अपना कोई भाग्य नहीं है जिस दिन शादी. होगी ना उस दिन आपका भाग्य जुड़ेगा तो. भाग्य जुड़ेगा तो आपका दायरा बढ़ेगा तो. मकसद का मर्द का कोई भाग्य नहीं होता पहले. उसका भाग्य होता है उसके मां-बाप से फिर. उसकी शादी होती है तो उसकी बीवी आती है. उसका भाग्य चमकना शुरू होता है फिर उसके. परिवार बच्चे पैदा होते हैं तो भाग्य चलना. शुरू होता है तो इसलिए औरतों को प्यार. करोगे औरतों को सम्मान करोगे घर में बरकत.
रहेगी औरतों को तकलीफ दोगे तुम्हारे घर की. बरकत चली जाएगी तो औरतों को प्यार करो. औरतों से बच्चियों से मोहब्बत करो उनका. आदर सम्मान करो चाहे वो बेटी के रूप में. उसका पूरा अधिकार हक अदा करो मां के रूप. में उसका अपना सेवा करके उसका रूप अदा. उसका हक अदा करो अगर वह तुम्हारी मतलब. पड़ोस में है तुम्हारी रिश्तेदार हैं बुआ. है फूपी है खाला है जिस रूप में भी है. उसका वही सम्मान करोगे तो मैं बरकत होंगी. तो ये बेसिकली इसके पीछे य कांसेप्ट है.
एंड के कुछ छोटे सवाल बचे हैं उसके बाद. मैं सराइज कर दूंगा आप चाहे तो ब्रेक लेना. चाहे थोड़ा ब्रेक भी ले सकता हूं मैं नहीं. मैं चलूंगा ठीक है अ जैसे आपने जिक्र किया. सती प्रथा का हिंदुओं में सती प्रथा थी कई. और भी चीजें थी जिनको समय के साथ बदला गया. वक्त आपने भी कहा कि वक्त से चीजें बदलती. रहती है हमारी पिछली पीढ़ी अलग थी आप अलग. हैं आपके जो पोते होंगे वो अलग तरीके से आ. रहे. होंगे इस्लाम में कुछ ऐसा है या कुरान में. जिसको लगता है कि समय के साथ थोड़ा सा. अपडेट करने की जरूरत है या जो है वह. परफेक्ट है देखिए आपको मैं बताऊं कि कुरान. मुकम्मल हो गया अब उसको अमेंडमेंट का.
अमेंडमेंट हो ही नहीं सकता उसमें और. प्रॉफिट भी नहीं आ सकता अब सुधार तो हमें. अपने देखिए कुरान के हिसाब को पहली बात तो. एक बहुत बड़ी गलतफहमी है मुझे लोग लोगों. को समझाने की जरूरत है कि अल्लाह जो है ना. ईश्वर जो है वो खाली मुसलमानों का नहीं है. ईश्वर सबका है हर बंदे का है अल्लाह सबका. होता है प्रोफेट जो है जितने भी प्रॉफिट. आए वो खाली मुसलमानों के लिए नहीं आए वो. सारे इंसानों के लिए आते हैं समाज के अंदर. सुधार गुरु आता है संत आते हैं वो समाज के.
लिए आते हैं सबके लिए आते हैं तो एक कॉमन. बात करिए कॉमन समाज के अंदर जो बुराइयां. है खत्म हो उसके लिए हम सबको मिलकर कॉमन. बात करनी चाहिए क्या सवाल था अी सवाल ये. था कि जैसे मौजूदा दौर में क्या कोई ऐसी. चीज है जो रूल रेगुलेशन हम समझ गए तो. कुरान जो है वह जब से आया है और जब तक. कयामत है रहेगा आपको उसे समझने की जरूरत. है. कुरान मुसलमानों के लिए नहीं आया सबके लिए. आया है मोहम्मद सल्लल्लाहु वसल्लम पीज ब.
अपन हिम वो रहमतुल लिल आलमीन उनका उनके. नाम के साथ लगता है रहमतुल लिल आलमीन मतलब. पूरी रहमत आलम की पूरे ब्रह्मांड की रहमत. के लिए बनके आए हैं वो सबके लिए खाली. मुसलमान के लिए नहीं आए गीता खाली मुसलमान. के लिए नहीं. आई ये वैद सारे मुसलमानों के लिए ये सबके. लिए आए सारे ग्रंथ होते हैं ना सब अब मैं. जो बहुत सारे ऐसे लोग है ना जिनसे मैं बात. धर्म की करता हूं जो बहुत ज्यादा धार्मिक.
होते हैं जो जय श्री राम के नारे लगा केर. लोगों को मार देते हैं मैं उनसे पूछता हूं. कि तुमने सनातन को पढ़ा है तुमने भगवान. राम को पढ़ा है उनके च रामचरित मानस को. पढ़ा है आपने रामायण पढ़ी है गीता पढ़ी. है एब्सलूट क्योंकि उन्होंने पढ़ा ही नहीं. है वही मैं कह रहा हूं कि धर्म एक आचरण है. जिसे अपनाने की जरूरत है प्यार से रहो. मोहब्बत से रहो सबका आदर सम्मान करो इसी. में तुम एंजॉय करोगे तुम्हारी कामयाबी. उसमें है ठीक है सर इस्लाम में भी मैं जब.
पढ़ना शुरू किया मैंने तो सिया सुन्नी. कादियानी अहमदिया सूफी खारदी ये इतने. क्यों आ गए और इनमें भी कई बार मैं देखता. हूं कि आपस में यूनिटी नहीं है अलग-अलग. चीजें हैं तो जैसे आपने कहा कि इस्लाम तो. यह था यूनाइट करने का मस्जिद इबादत असल थी. यूनाइट करने की फिर कई बार आपस में भी. क्रिटिसिजम सुनाई पड़ता है धर्म गुरुओं को. लेकर मैंने आपको लेकर ही पोस्ट डाली कुछ. लोगों ने लिखा हम तो मानते ही नहीं कि वो. भी इस्लामिस्ट है ये विरोधाभास क्यों होता. है और इस्लाम में इस्लाम में कितने डिवीजन. है देखिए इस्लाम में कोई डिवीजन नहीं है. इस्लाम इस्लाम है वो एक ही है प्रोफेट एक.
ही है जिनको सब मानते हैं कि आखिरी सारे. नबी आए सब ने माना. 124000 अवतार आए सब ने माना आखरी प्रोफेट. मोहम्मद सल्ला वसल्लम आए माना उसके बाद. आखिरी किताब सारी किताबें आई आखरी किताब. कुरान आई मुकम्मल हो गई अब कोई किताब नहीं. इसको माना एक अल्लाह को मानते हैं हम तो. डिफरेंसेस कहां है डिफरेंसेस हैं. हमने अपने अपनी अपनी आसानी के लिए अपने. अपने मुताबिक बनाने के लिए सबने अपना अपना.
मनगण कहानिया कर दी जबकि प्रोफेट मोहम्मद. सल्लल्लाहु वसल्लम पीस बी अपन आखरी खुतबा. हज्जतुल विदा का आखिरी खुतबा जब वो दिया. था पहाड़ पर खड़े होकर उन्होंने कहा था कि. देखो तुम सब एक रहना तुम बटना नहीं तुम एक. रहना नॉन अरब अरब नॉन अरब यह फर्क मत. डालना अमीर गरब का काला गोरा ये फर्क मत. डालना सब एक रहना लेकिन ये फर्क डाल दिया. जब प्रॉफिट कह रहे हैं मत करो वही तो मैं.
बोल रहा हूं कि मोहम्मद को मानते हैं. मोहम्मद की नहीं मानते अल्लाह को मानते. हैं अल्लाह की नहीं मानते राम को मानते. हैं राम की नहीं मानते यही तो दिक्कत हो. रही है किसी को तो समझाने के लिए पोड. कास्ट हो रहा है ये इसी को तो बताने के. लिए कि सब सही हो जाओ सही रास्ते पर आओ. सत्य के मार्ग पर चलो अच्छा इसमें भी. कंफ्यूजन कुरान और हदीस का जिक्र आता है. तो उसमें आता है कि हदीस में लिखा गया और. सबकी अपनी अपनी व्याख्या है अब कई बार. मुझे लगता है कि शायद हो सकता है कोई चीज. अच्छी नियत से कही गई उसकी व्याख्या. समझाने वाला जो व्यक्ति है उसने अलग तरीके.
से समझा दिया क्योंकि जिनका ब्रेन वॉश. करते होंगे वो भी तो ही करते होंगे तो. कुरान और हदीस में डिफरेंस क्या है और. इसका एक्सप्लेनेशन जो है देखिए कुरान उसके. लिए कोई ऑथराइज व्यक्ति है या कोई भी आदमी. जो ज्ञानी है वो एक्सप्लेन कर सकता है. नहीं नहीं देखिए क्या होता है कि आपको. समझने की जरूरत है एक होता है हाफिज हम जो. कुरान कंटेस्ट करता है हम जहां से चलते. हैं नीचे से एक होता है आलिम जो ग्रेजुएट. होता है जो इस्लामिक स्टडीज में ह ठीक है. फिर एक होता है मुफ्ती जो स्कॉलर होता. है पीएचडी हम ठीक है उसको मुफ्ती कहते हैं.
तो मुफ्ती को अधिकार होता है क्योंकि वो. स्कॉलर है उसका हम देखिए कुरान है एक. कुरान को की व्याख्या हम उसका तर्जुमा. अपने अंदाज में अलग-अलग तौर पे की हम. लोगों ने लेकिन कुरान तो एक ही है कुरान. एक ही है कुरान में कोई नहीं है कुरान की. जो जो उसकी अनुवाद है वो अपने अंदाज में. किया तो कुरान तो नहीं बदला अनुवाद करने. वाले ने अपने तरीके से अपने अंदाज में. उसको बात करने का तरीका पेश कर दिया वो. उसका अपना तरीका हो सकता है लेकिन कुरान.
तो वही है ना इसी तरह से हदीस हदीस किसको. कहते हैं कुरान ईश्वर वाणी जो ईश्वर का. संदेश है उसको कुरान कहते हैं हदीस उसको. कहते हैं जो प्रोफेट सल्लल्लाहु अल वसल्लम. पीस बी अपऑन हिम उन्हो जो उनका आचरण था जो. उन्होंने जीवन में किया जो बताया वह हदीस. में कि रसूल ने यह किया ऐसा खाया ऐसा पीते. थे ऐसा चलते थे ऐसा बोल थे वो हदीस से. उसके कोड है हदीस में भी अलग-अलग किताबें. भी है जैसे सही मुस्लिम है सही बुखारी है.
इस तरह से अबू अबू दाऊद है ये किताबें हैं. तो मकसद ये है लोग उनके हिसाब से चलते हैं. हमारे लिए मॉडल जो है प्रोफेट मोहम्मद. सल्ला वसल्लम है हम किसको फॉलो करेंगे. ईश्वर को तो मैंने देखा नहीं आपने क्या. कहा आपसे मैंने पूछा ना मिश्रा जी आपको. कैसा एहसास होगा ईश्वर का तो ईश्वर ने कहा. तो ये ईश्वर ने उनको भेजा इन्होंने जो. बताया हमने उसको माना हम उसके अकॉर्डिंग. चलते हैं तो मेरे लिए जो मॉडल है वो. मोहम्मद सल्लल्लाहु वसल्लम पीस ब अपन.
हिम. ओके जैसे आपके यहां जन्नत जाने का. कांसेप्ट है तो यह केवल मुसलमानों के लिए. या गैर मुस्लिम जा ससे हमारे स्वर्ग. कांसेप्ट है कि हम स्वर्ग जाते हैं आपके. यहां जन्नत का कांसेप्ट है तो ये ओनली फॉर. मुस्लिम्स आप लोग का थॉट है या य जनरल है. मेरा सवाल मिश्रा जी से है हां पंडित जी. आप बताएंगे कि स्वर्ग में कौन जाएगा अच्छा. हम मानते कि हम जाएंगे ऐसे आप क्यों. जाएंगे आप आपका अधिकार है क्या आप ही. क्यों जाएंगे मतलब सब जो जो अच्छा काम. करेगा इंसान वो जाएगा क्या बाकी सब टपक. गया बारिश में जो अच्छा काम करेगा वो.
जाएगा करेक्ट यही जवाब है मेरा अच्छे कर्म. करो जो अच्छे कर्म कर मुझे आपकी बात सुनकर. लग रहा है कि सारे धर्मों का कांसेप्ट एक. ही है हम सबने अपने अलग-अलग तरीके से उसको. थॉट प्रोसेस कर दिया है अलग-अलग व्याख्या. हो गई करेक्ट बात है और आपस में सब लड़ मर. रहे हैं करेक्ट बात है जबकि एक है हम सब. सारी चीज एक तरीके से सब एक है कोई फर्क. नहीं. है हमने कहा ना. कंफ्लेक्स यही हो रहा है कि जो मेरा है ना. वही सही है मेरा गुरु वही सही मेरी किताब. यह सही मेरा मानना जो सही जहां ये.
कॉन्फ्लेट आता है ना वो ठीक नहीं होता. हमें कॉमन बात करनी चाहिए मेरी आस्था मेरी. पर्सनल है ना मैं एंजॉय कर रहा हूं आप. अपनी एंजॉय करिए लेकिन हम कॉमन प्लेटफॉर्म. पर एक जगह इकट्ठे होते हैं तो हमें कॉमन. बात करनी चाहिए इंसानियत की बात कॉमन तो. इंसानियत की बात करेगा ना तो इंसानियत की. बात करने के लिए हमें एक दूसरे के साथ. मिलके जुल के प्यार से मोहब्बत से रहना. चाहिए दया का भाव आना चाहिए हमला अंदर ब. है मैं वैसे तो सभी धर्मों में भी है जैन. धर्म है ना जैन धर्मों के अंदर साल के. अंदर एक कांसेप्ट आता है क्षमावाणी जैन.
समाज है ना सन जैन धर्म उसके जो लोग हैं. साल में एक धर्म में क्षमावाणी. तो कितनी अच्छी बात है यह लेकिन यह. कांसेप्ट हमारे यहां डेली का है हमारे. यहां रोज रात को सोने से पहले सबको माफ. करना है सबको माफ करके सोना है लेकिन. अफसोस तो यह हो रहा है कि हम रोज नमाज पढ़. रहे हैं दुआए मांगते हैं पूजा करते हैं हे. ईश्वर मुझे माफ कर दे मुझे माफ कर दे अरे. तुझे कैसे माफ करेगा तू तो माफ कर नहीं. रहा दूसरे को तो दुआ में हमेशा दुआ दूसरे.
के लिए मांगी जाती है अपने लिए नहीं मांगी. जाती लोगों को कांसेप्ट नहीं पता लोग दुआ. मांगते हैं ना लोग अपने लिए मांगते हैं जब. कि अपने लिए दुआ मांगी नहीं जाती दुआ तो. हमें कांसेप्ट है दूसरों को मांगने के लिए. मैं दूसरे के लिए मांगूंगा मेरा अपने आप. हो जाएगा ये कांसेप्ट है सही बात है हां. तो दुआ मांगनी है सबके लिए आप यकीन माने. जब आप दुआ मांगेंगे ना जब निस्वार्थ दुआ. मांगेंगे. आप यकीन माना वो दुआ लगती है अर्श पर जाती. है सीधी जाती है और उसका असर होता है.
लेकिन दुआ दूसरे के लिए मांगी जाती है. दूसरे के लिए मांगना शुरू करो आपका अपना. हो जाएगा दूसरे को माफ करना शुरू करो आप. माफ हो जाओगे दूसरों का अच्छा करना शुरू. करो आपका अच्छा हो जाएगा एक बार. मैं एक बार मैं आ रहा था अमेरिका से तो. मैंने फ्लाइट ली कतर की दोहा वाशिंगटन से. तो एक सरदार जी थे मैं फ्लाइट में बैठ गया. सरदार जी को लेके उठा के लाए और बिठा दिया. सीट प मेरी वाली आगे वाली पे मैंने देखा.
कोई बात नहीं फ्लाइट चली गई जब फ्लाइट ऊपर. चली गई बहुत ऊपर चली गई तब वो सरदार जी जो. थे मेरे सिख भाई वो रोने लगे चिल्लाने लगे. बहुत दर्द होने लगा तो अनाउंसमेंट शुरू. हुई कोई इस फ्लाइट में डॉक्टर्स हैं कोई. मेडिसिन के आदमी हैं कोई नर्स हैं तो कोई. भी नहीं है अब वो दर्द के मारे चिल्ला रहे. थे मेरे सिख भाई बहुत तकलीफ थी उनको पूरा. फ्लाइट डिस्टर्ब हो गया अब फ्लाइट नीचे भी. नहीं आ सकती अब हमने क्या किया हमने अपना. काम शुरू करा हमने ईश्वर से मांगना शुरू.
करा उनके लिए मैं लीन हो गया अपनी इबादत. में और ईश्वर से मांगना शुरू करा मैंने. उनके लिए दुआ मांगनी शुरू करी मैंने हे. ईश्वर हे परमात्मा इसको ठीक करना उसकी. सेहत के लिए मैं दुआ करना उसकी तकलीफ को. मुझे वो ऐसी लग रही थी वो तकलीफ मुझ पर आ. रही हो और हमेशा दुआ ऐसी मांगनी है कि. जैसे वो तकलीफ आप पर आ गई हो. मैंने उनके लिए मांगना शुरू करा विदन 15. मिनट 15 मिनट के बाद वह ठीक हो गए आप यकीन. माना मैंने उनको जब देखा ना आंख खोली वह.
वाश रूम जा रहे थे मेरी आंखों में आंसू. निकल गए खुशी के मेरी प्रार्थना मेरी दुआ. कबूल हो गई फिर मैंने उनको दोहा में देखा. फिर और खुशी हुई फिर इंडिया उतरे फिर और. खुशी हुई तो मेरा मकसद कहने का यह है कि. आज मैं आपके इस पोड कास्ट से एक नसीहत भी. करना चाहता हूं चीफ इमाम हूं भारत का तो. मेरी जिम्मेदारी भी है एक अमल अपने जी. जीवन में उतार लो दुआ का आप यकीन मानना. आपके अंदर बहुत बदल जाएगा जब भी एंबुलेंस. देखें आप जैसे भी चाहे गाड़ी में बैठे हैं.
घर पर बैठे एंबुलेंस एंबुलेंस साउंड दे. रही है रो रही है कि इस एंबुलेंस में कोई. भी जा रहा तकलीफ में इसका मतलब यह है कि. कोई तकलीफ में जा रहा है वो रो रही है. एंबुलेंस शायर जल्दी इसको रास्ता दो सबसे. पहले उसे रास्ता दे दो और रास्ता ना भी दो. तो एकदम अगर दूर है आप तो उसके लिए दुआ. मांगना शुरू करो हे ईश्वर हे परमात्मा जो. भी इस एंबुलेंस में जा रहा है मुझे नहीं. मालूम यह हिंदू है मुसलमान है औरत है मर्द. है मुझे नहीं मालूम जो भी जा रहा है ईश्वर.
हे तेरा बंदा इसको शिफा कुल्ली अता फरमा. दे सेहत और तंदुरुस्ती अता फरमा दे आप. यकीन मानना यह जब दुआ मांगते हैं ना आप. क्योंकि यह दुआ आप मांग रहे हो निस्वार्थ. जिसके लिए मांग रहे हो उसका पता ही नहीं. है वह है कौन काला है गोरा है हिंदू है. मुसलमान है कुछ नहीं मालूम ईश्वर से. प्रार्थना मांग रहे हो दुआ कर रहे हो उसकी. सेहत के लिए आप यकीन मानना ये मेरा दावा. है य अमल करके देखना वह गारंटी से जरूर. ठीक हो जाएगा और उसके बदले आपको नेकियां. मिलेंगी एक दिन हो सकता है आप भी मिश्रा.
जी मैं भी कोई भी उस एंबुलेंस में अगर हम. जा रहे हो और उस एंबुलेंस में जाते वक्त. कोई हमारे लिए दुआएं मांग रहा हो हमारे. लिएना से हमारे अपन हमारा कोई अपना जा रहा. इससे अच्छा क्या कर्म हो सकता है तो धर्म. तो आचरण है नेकियां है सबके लिए अच्छा. सोचो सबका भला सो करो इसी तरह हॉस्पिटल. जाया करो या हॉस्पिटल से गुजर भी जाया करो. दुआ कर करो हे ईश्वर हे परमात्मा हे. अल्लाह जो भी इस अस्पताल में बीमार है. इनको सेहत दे तंदुरुस्ती दे इन्हें.
खुशियां दे आप यकीन मानना वह तकलीफ में है. उनको बड़ी तमन्ना है कि मैं ठीक हो जाऊं. तो मैं यह काम करूंगा मैं वह करूंगा उनकी. बड़ी उम्मीदें हैं तो मैं सभी से कहना. चाहता हूं कि बीमार के पास जरूर जाया करो. बीमारी वालों के लिए दुआएं जरूर किया करो. अच्छा काम करो तुम्हारे काम आएगा सेकंड. लास्ट क्वेश्चन न रिलीजन सर इस्लाम के. पांच टीचिंग जो सबको जा चाहिए जी बस. इस्लाम की जो पांच टीचिंग है पहली पहला है. तौहीद पहले तौहीद में एकम ब्रह्मम द्वितीय.
नास्ति ला इलाहा इल्लल्लाह मतलब एक ईश्वर. के अलावा किसी और को नहीं मानना है उस. ईश्वर को मानना है नहीं ये तो आपे बता रहे. कि इस्लाम को फॉलो कर बेस है उसका पांच. चीजों का यहां से स्टार्ट होता है पहला. दूसरा नमाज जो हर मुसलमान के ऊपर फर्ज है. कि उसे फाइव टाइम नमाज अदा करनी है किसी. सिचुएशन में भी आपको नमाज पढ़नी पड़ेगी. चाहे कुछ भी हो प्रायोरिटी नमाज है अदर सब. सेकेंडरी है तो हमको सबसे पहले हुकुम आया.
नमाज अदा करो नमाज ईश्वर के लिए है आपके. लिए है सबके लिए है उसके बाद जकात % की. जकात दी जाती है साल में आपने जो प्रॉफिट. कमाया जो आपका पास आमदनी है उस आमदनी में. से आपको % गरीबों में बांटना है हिंदू. मुसलमान नहीं है उसमें इंसानों को बांटना. है गरीबों को बांटना है कोई भी हो सकता है. 2 पर गरीबों को तकसीम करो यह जकात फिर है. हज अगर आप साहिब हैसियत है आपके पास इतना. माल है कि आपने अपनी शादियां कर दी बच्चे.
फारिग हो गए कर्जा नहीं है आपके पास पैसे. जो बचे हुए हैं अब आप हज करने जाओ आप पर. फर्ज है इसी तरह से रोजा अगर आप सेहतमंद. हैं अच्छे हैं कोई बीमारियां नहीं है आप. रख सकते हैं रोजा तो आपको पांच रोजा साल. का ती रखना पड़ेगा तो ये पांच चीजें हैं. जो इस्लाम का बेस है यह बेस आपको आत्मा और. परमात्मा से कनेक्ट करती है अच्छाइयों को. अच्छाइयों की तरफ आती है बुराइयों को दूर. करती है बेसिकली ये कांसेप्ट होता है कोई. भी धर्म है धर्म अच्छी बातें करता है.
अच्छी तरफ लेकर जाता है सत्य के मार्ग पर. लेकर जाता है कोई भी धर्म हो तो इसीलिए. सबका धर्म का आदर सम्मान करो सबका भला करो. इंसानियत सबसे अच्छी है एक बात निकल के. आती है पूरा नाम क्या है आपका शुभंकर. मिश्रा शुभंकर मिश्रा पंडित जी पंडित जी. आपका नाम सुभंकर मिश्रा मेरा सवाल होगा अब. आपसे आपके जो माता है पिता जो आपको मिले. शुभंकर मिश्रा आपको नाम मिला ब्राह्मण. जाति कुल मिला और देश मिला भारत ये आपकी.
चॉइस थी कि हे ईश्वर मेरा नाम शुभंकर दे. देना मेरा मेरा कुल ब्राह्मण देना पिताजी. यह देना माताजी नहीं सेम थिंग मेरे साथ. सेम थिंग सबके साथ हमारी किसी की चॉइस ही. नहीं है हम अपनी चॉइस प आए ही नहीं है. ईश्वर ने हमको भेजा है इसीलिए तो मैं कहता. हूं कि आपने कहा था ना इस्लाम में कन्वर्ट. तो मैं आपके पोड कास्ट से बता दूं कि. इस्लाम में कन्वर्जन है ही नहीं हमारे. यहां मना किया गया कन्वर्जन को कोई खुशी. से आता है वह एक्सेप्ट है लेकिन किसी को.
लालच देके पैसे देके उसको डरा के धमका के. यह इस्लाम में आना है इस्लाम में बिल्कुल. मना है पाकिस्तान में क्रिकेटर है सर. मोहम्मद रिजवान कन्वर्जन नहीं है. पाकिस्तान में क्रिकेटर है मोहम्मद रिजवान. अच्छा क्रिकेट खेलते हैं बड़ी जबरदस्त. कीपिंग करते हैं बट वो किसी से मिलते हैं. तो उनको इन्फ्लुएंस करने की कोशिश करते. हैं कि हमारे आ जाओ वरना तुम्हें इस आग. में जाना पड़ेगा यह होना मतलब मतलब वो. जितने भी क्रिकेटर से मिलते हैं वो उनको. जिक्र करते रहते हैं कि कई सारे वीडियो भी. आते हैं और भी कई क्रिकेटर्स है देखिए मैं.
तो इज इट गुड कि आप लोगों को ये बताओ कि. हमारे धर्म में आओगे तो जन्नत मिलेगी धर. जाओगे तो उस आग में जाओ मैं तो ये कहता. हूं कि मैं तो किसी क्रिकटर हो या फिल्म. स्टार्स हो इनसे मैं इन्फ्लुएंस नहीं होता. हूं यह इनके पास जितना ज्ञान है विचारों. के पास उतना ही ज्ञान बोलते हैं मेरा कहने. का यह है कि सबका आदर सम्मान करो कन्वर्जन. हमारे इस्लाम में बिल्कुल नहीं है और होना. भी नहीं चाहिए क्योंकि जो अब जो पैदा हो. के आ रहे हैं हिंदू सॉरी सनातनी आर्य.
समाजी य क्रिश्चियंस जूज बध जैन सिख ये. टपक गए क्या बाकी खाली ये इस्लाम के मानने. वाले रहेंगे बाकी सब पानी में आए क्या टपक. के बारिश में अरे ऐसा नहीं है भाई यह सब. डेस्टिनी है हम एवरीथिंग इज डेटाइन मेरी. पाकिस्तान डेस्टिनी के हिसाब से सब लोग आ. रहे हैं अपना कर्म कर रहे हैं और जा रहे. हैं सब मेरी पाकिस्तान में एक फ्रेंड है. तो उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम इस्लाम. में आते हो तो अल्लाह तुम पर ज्यादा. मेहरबानी करेगा तो मैंने क्यों आप तो डेली.
पांच बार नमाज पढ़ते हो आप यह करते हो मुझ. पर मेहरबानी क्यों होगी तो उन्होंने कहा. कि नहीं नहीं अल्लाह जो गैर मुसलमान होते. हैं उन पर ज्यादा मेहरबानी दिखाता है इन. कंपेरिजन टू जो उसके अपने हैं क्योंकि आप. बाहर से आए हुए थे सो आई फेल्ट इट्स अ गुड. थॉट कि मुझे इधर अट्रैक्ट करने का भी. जिसको हम कन्वर्जन का जिक्र करते हैं मैं. उनको सुन रहा था काफी तो ये मुझे समझना है. कि ज्यादा उन पर मेहरबानी होती है जो नॉन. मुस्लिम्स होते हैं जो उनका थॉट ैया वो. मुझे कन्वर्ट करना सोच रहे होंगे इसलिए. उन्होंने मुझे इन्फ्लुएंस करने की कोशिश. की देखिए कन्वर्जन तो है ही नहीं कन्वर्जन.
तो कर कैसे सकते हैं बट इट वाज अ. ब्यूटीफुल थॉट कन्वर्ट करने के लिए ले. लेकिन लेकिन देखिए लेकिन समझने की बात कि. है अच्छे कर्म करो हम वो किसी भी धर्म का. हो अच्छा काम करो मैंने कहा नाना कि ईश्वर. ने आपको जो भेजा है ना हम हे कुरान हे. इंसानों की बात कर रहा है हमें इंसान बना. के भेजा हम और इंसान की जो इंसानियत है ना. जो उसका धर्म है जो उसका करैक्टर है हमें. उसे निभाना चाहिए वही सबसे बड़ा धर्म है.
और उसे निभाना चाहिए आप बार-बार पाकिस्तान. की बात करते हो ना मैं आपको यकीन मानना ये. जो विभाजन हुआ ना मैं इसके बहुत सख्त. खिलाफ हूं 1947 चलिए ये भी मैं जिक्र करता. हूं आप तो मुसलमान है 1947 नहीं मुझे. भारतीय कहिए ना भारतीय मुसलमान आप भारती. भारतीय कह क्या जरूरत है मुझे क कि ये. हिंदू मुसलमान ये सनातनी और आर्य समाजी. मुझे भारतीय कह दो ना आप बिल्कुल सही बात. है आप इंडियन है हां 1947 भारती कए इंडियन. भी मत कहिए मुझे आप भारतीय कहता हूं आपको. भारत का भारतीय है य ठीक है आप. हिंदुस्तानी आप भारतीय भारतीय कहिए ना आप.
मुझे केवल भारतीय. कती ल भारत और भारतीय अच्छा लगता मु आप. भारतीय व्यक्ति है 1947 में हमारा बटवारा. होता है हां हुआ अब बहुत सारे थॉट इसको भी. ले क्लासेस चलते हैं मतलब आप आप बंटवारे. हो कैसे देखते हो मैं आपको आप तो चीफ इमाम. हो एक अच्छा नजरिया हमारे दर्शको को मिल. जाएगा अर्ट फ्रॉम रिलीजन भी आप यकीन माने. मुझे तकलीफ होती है ये विभाजन का नाम आते. ही विभाजन माने तोड़ना विभाजन माने ही. नेगेटिविटी है ये जोड़ने का नाम नहीं है.
तोड़ने का नाम विभाजन है भारत अखंड भारत. मैं हमेशा अखंड भारत की बात करता हूं. विभाजन होना ही नहीं चाहिए था आज अगर. विभाजन नहीं होता तो मैं आपको पंडित जी. सही बता रहा हूं कि पाकिस्तान भी नेपाल भी. अफगानिस्तान भी ईरान तक बांग्लादेश सब. अखंड भारत है और आज भी है अखंड भारत और ये. आज इसकी ताकत कितनी हो नहीं नहीं उसे कोई.
नहीं होगा उनके सच बात को देखो रमजान में. ना आज आपने मुझे बुलाया भी रोजे में आप सच. बात बुलवा है ना मैं झूठ बोल नहीं सकता. वरना मेरा रोजा मकरू हो जाएगा मुझे जो. बोलना है सच बोलना है हक बोलना है रोजे से. हूं आप चालाक आदमी है क्योंकि आप ब्राह्मण. है ना ज्ञानी है आपने मुझे बुलाया भी. रमजान में नहीं मैंने मना कर रहा था आपको. कि मुझे मत बुलाना रमजान में मेरा रोजा है. मुझे बोला नहीं जाएगा लेकिन आपने माना. नहीं आप आपने बोला नहीं नहीं मुझे रोजे. में चाहिए क्योंकि आप जानते थे आप ज्ञानी. हो ना मुझे मालूम है नहीं नहीं मुझे मालूम. है आप ज्ञानी है ब्राह्मण ने आपको यह पता.
है कि इमाम साहब आएंगे सच बोलेंगे रोजे. में झूठ बोल नहीं सकते हक बात बोलेंगे तो. चलो अब आपने विभाजन की बात करी है तो हम. आज कर ही देते हैं सच से और हक बात से कभी. डरना नहीं चाहिए सत्य मेव जायते हमेशा याद. रखो सत्य मेव जायते सत्य की हमेशा जीत. होती है हक की बात होती है किसी को बुरा. लगे तो लगने दो मैं राम मंदिर गया था मेरे. खिलाफ अब भी बहुत सारे मुसलमान है फतवे. जारी हो चुके हैं मेरे खिलाफ मेरा सर कलम.
करने के लिए हिंदुस्तान पाकिस्तान. बांग्लादेश इंग्लैंड अमेरिका सारे फतवे. जारी हो चुके हैं मुझे काफिर इन्होंने कर. दिया नास्तिक बना दिया इस पर कुफ्र का. फतवा इसकी गर्दन कलम कर दो और सर कन से. जुदा कर दो मेरे खिलाफ लगे पड़े मगर इन. बातों से मैं डरता नहीं मैं राम मंदिर में. गया हूं तो इस वजह से गया हूं कि आपसे. सौहार्द मेरा बने रहे मैं इंसानियत के. नाते भारतीयो के नाते एक करने के लिए गया. हूं इस तरह से फतवे मेरे पास आते रहते हैं. क्योंकि वो कहते हैं कि इमाम साहब मंदिरों. में जाते हैं गुरुद्वारों में जाते हैं. चर्चों में जाते हैं इमाम साहब सारे.
धर्मों के गुरुओं के साथ मिलक रहते हैं. इमाम साहब का तो यह काम है तो बहाल विभाजन. नहीं होना चाहिए था विभाजन कुछ लोगों ने. अपने फायदे के लिए इस भारत को विभाजित. किया सिर्फ अपने फायदे के लिए और आज आपको. मालूम है कि कोई भी पाकिस्तानी है जो आपको. मिलेगा कोई भी पाकिस्तानी सबसे पहले आपसे. पता है क्या कहता है भारत में आने की. तमन्ना रखता है हर पाकिस्तानी की एक. तमन्ना है कि वो भारत आए अपने पूर्वजों को.
जगह को देखें अपने पुराने घरों को देखें. अपने देश को देखें आप यकीन मानना मैं. चाहता हूं कि भारत इसी तरह से अभी जिस तरह. से अगर हम विभाजित ना हुए होते तो आज. पाकिस्तान हिंदुस्तान का झगड़ा ना होता. अगर पीओके का झगड़ा ये सारे जो झगड़े हो. रहे थे ये झगड़े तो नहीं होते ना आज. बांग्लादेश के अंदर झगड़ा हो रहा है जबकि. ये सब हमारे ही हम सब एक ही हैं कोई हम. में फर्क नहीं है हमारा कल्चर एक है हमारी. संस्कृति एक है लेकिन एक दीवार खींच गई कि. भाई यह मुसलमान का हो गया यह हरा रंग.
मुसलमान य इस्लामीकरण हो गया इनका यह भारत. इनका हो गया यह नहीं होना चाहिए था भारत. भारत बन के रहना चाहिए और अखंड भारत बन के. रहना चाहिए और अखंड भारत बनेगा पॉसिबल हो. सकता है ये तो केवल एक कांसेप्ट लगता है. नहीं नहीं मुझे नहीं ल इतने सारे देश बट. गए कैसे अखंड भारत बने मैं आपको इसका. कांसेप्ट आपके पोड कास्ट प पहला आदमी होगा. चीफ इमाम होने के नाते आज जो दे रहा हूं. कि अखंड भारत कैसे बनेगा हम आज मेरे इस. पोड कास्ट से किसी को अंदाजा हो जाएगा ो. मैं कहता हूं कि जब यूरोप एक हो सकता है.
यूरोप ईस्ट बर्लिन वेस्ट बर्लिन एक हो. सकते हैं यूरोप सारे देश मिलके एक बन गए. यूरोप उनकी करेंसी बन. गई यूरो हम हमारा जो भारत है असल भारत. अखंड भारत पाकिस्तान. बांग्लादेश नेपाल म्यामार भूटान. अफगानिस्तान ईरान जितना भी खंड भारत का जो. हिस्सा है वह एक रहे हमारा देश का नाम हो.
सबका अखंड भारत हमारा वीजा दीवारें हो. लेकिन दरवाजा हो उस दरवाजे पर वीजा ना हो. जिस तरह से यूरोप में आप कहीं भी जाइए. आपको एक वीजा लेने की जरूरत है पूरा यूरोप. जाइए इसी तरह से अखंड भारत के भी एक ही. मतलब भारत में कोई आए तो हम कहीं भी जा. सकते हो हमें आजादी हो हमारा एक ही रुपया. हो जिसका अखंड भारत का एक रुपया अखंड भारत. का एक देश आना जाना सब जगह हो तिजारत एक. जगह हो कारोबार एक जगह से हो एक दूसरे के.
साथ हो वीजा ना हो एक हो जाए तो ये. कांसेप्ट मुझे लगता है कि हो सकता है जब. यूरोप हो सकता है तो अखंड भारत भी हो सकता. है क्या इंटरेस्टिंग थॉट लेकिन कैसे होगा. सर यहां तो एक लड़ाई चलती है कि और कुछ के. हीरो औरंगजेब हैं कुछ के लिए विलन औरंगजेब. है तो आप एक कैसे करोगे आपके लिए औरंगजेब. कौन है नहीं नहीं मेरे लिए तो औरंगजेब एक. उन्होंने. जो भारत में आए और उन्होंने क्या-क्या. किया वो तो सबको पता है मेरे लिए. [संगीत]. तो वह एक बादशाह थे जो भारत में आए आक्रमण.
किया और भारत में जो लूटपाट की मैं तो उस. निगाह से देखता हूं उन लोगों को मेरे लिए. जो मॉडल मेरे लिए जो इस्लामिक अगर दृष्टि. से अगर कोई आदर्श है तो मोहम्मद सला सल्लम. और अगर भारतीय के नाते से अगर मेरे लिए. कोई आदर्श हो सकता है मेरे लिए आदर्श मुगल. नहीं हो सकते भाई मेरे लिए आदर्श मेरे. पूर्वज हो सकते हैं जिन्होंने बाबर के. अगेंस्ट लड़ाई लड़ी समर पाल सिंह राजा. नाहर सिंह हसन खान मेवाती जिन्होंने बाबर.
के अगेंस्ट विरोध में जंग करी है मेरे लिए. तो मॉडल मेरे लिए तो आदर्श हो सकते हैं. मैं तो जिक्र उनका कर सकता हूं ना कि. औरंगजेब का औरंगजेब ने क्याक किया अपने. साहिब साहिबजादे के बच्चों के सर कलम कर. दिए दीवारों में चुनवा दिया ये इस्लाम है. इस्लाम इजाजत देता है क्या मुझे आप ये बता. दीजिए कि तेल तेल है तेल के अंदर कड़ाव. में भर दिया तेल और तेल भरने के बाद सिख. साहिबान के साहिबजादे को उसके अंदर डाल. दिया ये इस्लाम कहता है इस्लाम के मानने. वाला कर नहीं सकता यह मैं कह रहा हूं.
इस्लाम के मानने वाले हो ही नहीं. सकते इस्लाम के मानने वाले बचाने का नाम. है इस्लाम मारने का नाम इस्लाम नहीं है जो. जुल्म जाति की उन्होंने क्याक आक्रमण किए. मंदिरों को लूटा जगहों को लूटा दहशत फैलाई. यह काम किया तो मेरे लिए आदर्श मेरे. पूर्वज है जो यहीं के. हैं मतलब इसमें इला उसमें कई लोग आपके. अपने भी शायद आपके खिलाफ बोलना शुरू करें. वो कह कि मेरे खिलाफ तो बोलते रहते हैं. मेरा काम है मैं जो हक बात बोलता हूं सत्य.
की बात बोलता हूं और हक बात बोलने से मैं. डरता भी नहीं हूं ये मुगल थे ना मेरे. थोड़ी थे ब जैसे और नहीं यहां आ मुगल आए. क्यों थे लूटने के लिए उनका काम क्या था. इनका काम क्या था ये आए क्यों थे महमूद. गजनवी क्यों आया था हैं भाई ये नादिर शाह. क्यों आए थे क्याक लेके गए यहां से भाई. इनको क्या मानेंगे आपन लिए आदर्श हो सकते. हैं क्या नहीं जो जस्ट मैं तो मैं सवाल. पूछ रहा हूं मैं आपसे पूछ र कैसे हो सकते. हैं जो जस्टिफाई करते हैं इनको वो ये कहते. हैं कि जैसे शाह जहान थे अकबर थे वो ही.
पैदा हु वो उनके वंशज होंगे जो उन उनकी. उनकी तरफदारी कर रहे यही प वो उनके वंशज. हो सकते हैं जो उनकी तरफदारी कर रहे हैं. मेरे वंशज यहां के हैं जिनकी मैं तरफदारी. कर रहा हूं जिनको मैं अपना मॉडल मानता हूं. हसन खान मेवाती जो बाबर से जंग लड़ी है. जिन्होंने वह मेरे पूर्वज. है ओके इंडिया में मुसलमानों को उनका हक. मिल रहा है क्योंकि पाकिस्तान में कई लोग. मानते हैं कि बिल्कुल यहां प्रताड़ित किया. गया हालांकि उनको समझाना पड़ता है मुझे कि. भाई तुम्हारे यहां टोटल 25 करोड़ है हमारे. यहां 40 करोड़ तो मुसलमान हमारे भाई हैं.
मुझे बड़ा बड़ा हैरानी होती है. हां कि आमतौर पे जो गलत फहमिया है ना हम. ये सोशल मीडिया के जरिए से वो बहुत ज्यादा. फैली हुई. है मैं तमाम स्पोर्ट कास्ट से. पाकिस्तानियों को ये कहना चाहता हूं कि घर. वापसी कर ले उनको घर वापसी इसलिए करनी. चाहिए कि चकि भारत में वापस आ जाए हम तो. सुख से रहेंगे आज भारत के अंदर अभी चीनी. रमजान में खत्म हो गई थी पाकिस्तान के. अंदर तो भारत को थोड़ा सा हमदर्दी आई चलो.
कोई बात नहीं रमजान का महीना है इनकी चीनी. खत्म हो गई है इनको शरबत पिलाना है तो. भारत ने उनको चीनी के ट्रकों के ट्रक चीनी. भेज दिए कभी उनकी प्यास खत्म हो जाती है. कभी उनका पास पानी खत्म हो जाता है कभी. उनको कभी तो भारत को देना पड़ता है. क्योंकि बड़ा भाई है ना वो कहता है है तो. मेरे ही कोई बात नहीं चलो ठीक है आगे से. गलती मत करना हम तुम्हें ये भेज रहे हैं. भेज देते हैं भारत तो भारत है यह हमेशा. इसने यही काम किया है हमदर्दी करी है तो. इसलिए मैं कह रहा हूं कि वह सुकून से है. नहीं हर पाकिस्तानी किसी भी पॉलिटिशियन से.
छोड़कर पॉलिटिशियन और और वहां के जो नेता. लोग हैं उनके इसको छोड़कर किसी भी आप किसी. आम पाकिस्तानी से पूछ लीजिए वो कहता है कि. हम विभाजन गलत हुआ हम सब भारत में रहते तो. अच्छे रहते क्योंकि आज भारत का नाम बहुत. ऊंचा है आज भारत की बहुत वैल्यू है तो व. बांग्लादेशी अपने में दुखी है वहां वहां. झगड़ा हो रहा है फसाद हो रहा है. पाकिस्तानी यहां आपस में झगड़ा तो ये सब. एक रहना चाहिए था विभाजन होना ही नहीं. चाहिए था एक होके रहते तो आज हमारा भारत.
जिस तरह से बहुत ये आज विश्वगुरु बनने की. अग्रसर है लेकिन और बहुत पहले हमारा भारत. विश्वगुरु बन जाता हमें एक रहने की जरूरत. है तो इन पाकिस्तानियों को मेरी सलाह है. कि वह अपने नेताओं को और अपने मजहबी. रहनुमाओं को और अपने आतंकवाद को वहां खत्म. करें उसकी आवाज उठाएं बुराइयों को खत्म. करें और एक सच्ची सच्चे जो मार्ग है. इस्लाम का सत्य का मार्ग. सिराल मुस्तकीम जो बार-बार नमाज में पढ़ा. जाता उस पर चलेंगे तो सही रास्ता मिल. जाएगा और मुझे लगता है कि सही रास्ता.
मिलेगा सही दिशा मिलेगी और तो सब बेहतर हो. जाएगा सर लास्ट क्वेश्चन आपसे. अ इस्लाम के बारे में पांच ऐसे मिथ जो. लोगों को मन में लगता है सच है जो गलत है. आप क्लेरिफाई कर दीजिए कोई पांच ऐसे झूठ. जो इस्लाम को लेकर लोग आम लोग मानने लगे. हैं कोई भी पांच मिथ बड़े मतलब झूठ मानने. मतलब मतलब जैसे कोई भी गलत प्रचार जो हो. गया है क्याक जैसे बताऊ ना जैसे आपने एक. तो जिक्र कर दिया था जिहाद का ग बकुल ऐसे. चार पांच चीजें और कौन है जैसे काफिर वाला.
भी हो गया काफिर वाला जिक्र हो गया और. क्या बताइए ना और वहां पर बैतुल्लाह में. भगवान शिव जी को बंद नहीं किया हुआ है वो. भी बता दिया मैंने वहां उनको बंद नहीं. किया हुआ है हम वो खाली कमरा है. और इसके अलावा महिलाओं को लेकर जैसे एक. बुर्के वाला सवाल मेरेन में कई लोग ने. पूछा कि बुरका उनके हिसाब से था क्योंकि. वहां रेत होती है हम यहां पर उसको क कुछ. लोग ये मानते हैं कि उसको जबरदस्ती कर. दिया गया पदा पर्दा डिफरेंट है असल क्या. हिजाब का एक कांसेप्ट है एक कांसेप्ट है.
चादर का मकसद एक ढका हुआ औरत का शरीर ढका. हुआ होना चाहिए मकसद यह कि उसकी खूबसूरती. उसके ढकने में है है ना औरत की खूबसूरती. ढकी हु हो अच्छी हो ढकी हुई हो मकसद उनका. मकसद यह है पर्दा पर्दे से मुराद ढकी हुई. हो मतलब उसको. मतलब बाजार के लिए नहीं है आपकी घर की. जीनत है वो ढकी अच्छी हो हमारे भारतीय. संस्कार भी है ना आप राजस्थान में जाइए ना.
आज भी बड़े-बड़े पल्लू होते हैं हमारे. यहां औरतों के बूढ़ी औरत आज भी देखेंगे आप. है ना वो क्या है उसके पीछे ये पर्दा ही. है संस्कृति का संस्कृति का है संस्कृति. का असर है ये पर्दा करना ठीक है वंदे. मातरम हिजाब एक मतलब थोड़ा मतलब दूसरे से. मतलब बाल ढके हुए हो. मकसद वंदे मातरम या भारत माता की जय बोलना. मुसलमानों में जायज है बड़ा गहरा सवाल कर. दिया आज तुमने पंडित जी आज तो तुम मुझे. पूरा रमजान में बिल्कुल सच बुलवा के पूरी.
एक एक बात निकलवा होगे आपका बहुत अच्छा. सवाल है ये हम मुसलमान चकि एकम ब्रह्मम. द्वितीय नास्तिक का ऐलान करता है एक ईश्वर. को मानता है और उस ईश्वर के अलावा किसी को. नहीं मानता पूजा भी वो करता है सिर्फ. ईश्वर की जो निराकार है और किसी के सामने. झुकता नहीं है तो वंदे. मातरम वंदे मातरम मतलब हम वंदना करते हैं. वंदना माने पूजा के होते हैं ब वंदना माने.
पूजा परस्तिश पूजा परस्तिश पूजा करना. परस्तिश करना वंदना करना किसकी मात्र. मातृभूमि की हमारे यहां इसको कहते हैं. मादरे वतन जिंदाबाद कोई फर्क नहीं है. लेकिन वो पूजा वाला जो शब्द है वंदना वाला. जो शब्द है उसको वो कहता है कि ये नहीं है. जिंदाबाद है जय जयकार है भारत की जय जयकार. है मातृभूमि की जय जयकार है लेकिन वंदना. नहीं है क्योंकि वो ईश्वर को मानता है. उसका एक कांसेप्ट है ना कि मैं ईश्वर के.
अलावा किसी की और पूजा नहीं करूंगा इसलिए. वंदना नहीं करता है जय जयकार करता है इसी. तरह से उ चकि उद्घोष है जय का जय का. उद्घोष. है हम ऐलान है है ना जय जयकार है तो इसलिए. हम भारत की जयजयकार करते हैं मातृभूमि की. जय जयकार करते हैं क्योंकि कोई भी व्यक्ति. इस्लाम का मानने वाला अगर वह मातृभूमि की. देश की जयजयकार नहीं करेगा तो वह इस्लाम. का माना नहीं जाएगा इस्लाम का हिस्सा है.
अपने मुल्क से अपने वतन से मोहब्बत करना. अपने मुल्क की इज्जत करना अपने मुल्क के. साथ मिलकर चलना अगर किसी ने अपने देश के. साथ किसी भी ने मुसलमान ने गद्दारी कर दी. वह इस्लाम से हट जाएगा ठीक बात है कोई भी. इस्लाम का मानने वाला अपने देश से गद्दारी. नहीं कर सकता यह. ठीक ये मैं एक्स्ट्रा एक क्वेश्चन कर दे. रहा हूं जाते थे बस य लास्ट क्वेश्चन है. आप राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में गए. थे मोदी जी भी वहां मौजूद. थे कई मुसलमान यह कहते हैं कि मोदी जी.
मुसलमानों को नापसंद करते हैं हालांकि कई. तस्वीरें आती हैं जहां पर हमने देखा विदेश. में बड़े उनके अच्छे मित्र हैं मोदी जी और. मुसलमानों का रिश्ता चीफ इमाम होने के. नाते समझ जाते हैं कैसा रिश्ता है मेरा. उनके साथ पुराना रिश्ता. है जब वो चीफ थे जब के जमाने से मेरा. रिश्ता. है और मोदी जी का एक नारा है दरअसल य.
नारा व उन्होंने अंदर से है उनके अंदर. सबका साथ सबका विकास सबका प्रयास सबका. विश्वास उसको लेकर चलते हैं कभी भी. उन्होंने अपने अपने कभी भी अपने मंचों से. कभी उन्होंने य नहीं कहा कि मेरे हिंदू. भाइयों हमेशा उन्होंने कहा 10 देश के. कितने 146 करोड़ देशवासियों य कितना 146. अभी फिलहाल ही 14650 हमेशा उन्होंने क्या. मुह से बोलते हैं 146 करोड़ के देशवासी और.
उनका हक भी है ब जैसे कहते हैं लोग टोपी. नहीं लगाते मोदी जी देखिए टोपी लगाना. लाजिम नहीं है बड़ा चलता है शॉल तो पहन ली. थी टोपी नहीं लगाई ी लगानी भी नहीं चाहिए. उनको टोपी लगाना किस लिए है कौन सी कौन सी. टोपी लगाना चाहते हैं टोपी पहनाना चाहते. हैं टोपी पहनाना है लगाना अभी इसमें बहुत. सारी राजनीति है दरअसल. वो उनका जो अपना तरीका है वो ठीक है. मुसलमानों के बिल्कुल अगेंस्ट नहीं है और. जितने सुविधाएं जितने मामलात अगर आप. देखेंगे मुसलमानों को इस समय मिल रही है.
जो भी स्कीम्स हैं सबसे ज्यादा मुसलमान तो. फिर ये परसेप्शन क्यों है कि मोदी जी कुछ. भी कर दे मुसलमान वोट नहीं देगा मुसलमान. ने पहले भी वोट दिया अभी और दिया अभी और. दिया 15 पर वोट दिया हर बार वोट ब वोटिंग. बढ़ रही है मुसलमान पढ़ लिख चुका है. मुसलमान समझदार हो चुका है मुसलमान की समझ. में आ चुकी है कि हमको कौन टोपी पहनता था. कौन रुमाला लगवाता था और कौन इफ्तार. पार्टी करवा के हमारा इस्तेमाल करता था यह. मुसलमान अब समझ चुका है मुसलमान पढ़ लिख. चुका है मैं आज आपको बता रहा हूं सिविल. सर्विसेस में सबसे ज्यादा मुसलमान निकल के.
आ रहे हैं इस समय में सिविल सर्विसेस में. जहां मुसलमान पढ़ता नहीं था आज मुसलमान. पढ़ लिख गया बच्चे पढ़ लिख गए अपने वोटिंग. राइट्स को समझ गया अच्छे बुरे को समझ गया. मुझे किसे वोट करना है अब उन लोगों की. राजनीति वालों के लोगों की बहकावे में. नहीं आता जो हमारा वोट का इस्तेमाल करते. थे जिन्होंने हमें निचले स्तर का बना दिया. मैं चाहता हूं कि मुसलमान सभी हिंदू सिख. एक मुख्य धारा से जुड़े सब एक हो और भारत. को मजबूत करें भारतीयता को मजबूत करें. राष्ट्र सर्वोपरि है इस मिशन को लेकर हमें.
बढ़ना होगा हिंदू मुस्लिम दंगे शुभा. यात्रा रामनवमी यात्रा में मस्जिदों के. सामने कॉन्फ्लेट या कई जगह पर और नई पीढ़ी. के मुसलमानों को आप क्या कहेंगे मैं मुसल. आप हिंदू मुसलमान की बात कर चलिए आप सही. बात है आप आप नई पीढ़ी के नई पीढ़ी के. नौजवानों को आप क्या क हां ये आप ये कहिए. कि भारतीयों को आपका क्या संदेश है मैं. चीफ इमाम हूं भारत का हं तो मैं किसी एक. कम्युनिटी के लिए. नहीं जो आजकल जैसे माहौल टेंशन बना हुआ है. हिंदू मुसलमानों के बीच में नई पीढ़ी के. जो.
नौजवान रोज सर खबरें आती हैं कि लड़ाई हो. गई झगड़ा हो गया एक दूसरे पर दोनों साइड. से अलग-अलग आरोप लगते हैं सियासत होगी. ओबवियसली किसी को अपने चमकाना होगा लेकिन. जो बच्चे बहते इसमें जिनका करियर बर्बाद. होता है वोह नौजवान होते हैं दोनों तरफ के. तो आप चीफ इमाम है और जैसा आपने कहा कि सन. सूफी यह जो होते हैं यह किसी एक के नहीं. होते हैं आप सबके हैं आप हिंदुओं के भी है. मुसल के भी तो आप नौजवान पीढ़ को क्या. मैसेज देंगे मैं तमाम भारतीय तमाम. नौजवानों को भी और तमाम हर एक भारतीयों को.
यही कहना चाहता हूं कि हमें सबको मिलकर एक. रहना है और एक रहने का कॉमन तरीका यही है. कि मैं हम एक दूसरे की हमारी आस्था एं. अपनी अपनी है लेकिन हम सब एक दूसरे के. धर्मों का सम्मान करें एक दूसरे के गुरुओं. का सम्मान करें एक दूसरे के ग्रंथों का. सम्मान करें और और सब मिलकर चले तो मुझे. लगता है कि यह कॉन्फ्लेट जो है वो सब खत्म. हो जाएंगे हमें एक होना है एक होने के लिए. भारतीय बनना है एक होने के लिए इंसान बनना.
है और इंसानियत उसका जो धर्म है उसे. निभाना है तो मुझे लगता है ये बुराइयां. खत्म हो जाएंगी और इस ये समय नौजवानों के. लिए खास तौर पर यह है कि ये आपका कीमती. समय है ये जीवन दोबारा नहीं मलता ये. मनुष्य एक बार आया है दोबारा नहीं आएगा ये. जीवन आपका दोबारा नहीं मिलेगा मेरे इन. बच्चों से नौजवानों से खास तौर पर ये है. कि ये आप अपना करियर बनाइए अपने मां-बाप. का नाम रोशन करिए अपने देश का नाम रोशन. करिए इस तरह से काम करिए जिससे कि सबका.
भला हो सबकी भलाई में हमारी भलाई है इसी. को आगे बढ़ाना चा और राम जी को सुनिए. प्रोफेट जी को सुनिए उनकी भी सुनिए सबकी. सुनिए और सबका आदर सम्मान करिए सर मेरे मन. में एक सवाल बार-बार आता है कि कई बार जो. मौजूदा हालात है वो परेशान करते हैं मुझे. जी मुझे लगता है. कि बिना कहे देश में उबाल चल रहा है हिंदू. मुसलमान दोनों जगाने लग रहे हैं कुछ. हिंदुओं को जगा रहे हैं कुछ मुसलमान को. जगा रहे हैं और इस जगाने में मुझे कई बार. नौजवानों का या हमारे आने वाली पीढ़ियों.
का भविष्य बड़ा खतरनाक महसूस होता है. क्योंकि संत हो या आप जैसे इमाम हो या. किसी एक धर्म के नहीं होते हैं आपको सुनने. वाले भी लाखों में लोग होते हैं सत्य है. इस नई पीढ़ी को आप क्या बताओगे क्योंकि. इनको ब्रेन वाश करना आसान होता है इनको. लगता है कि धर्म को जगाने जा रहे हैं. लेकिन यह वहां चले जाते जहां से खुद की. जिंदगी बर्बाद करते हैं और आने वाली. पीढ़ियां और दोनों धर्मों के बीच में भी. तनाव पैदा करते हैं यकीनन मिशा जी मुझे. तकलीफ होती है कि अब आपको यकीन माने मैं.
किसी का नाम नहीं ले रहा हूं किसी भी किसी. धर्म का या विशेष धर्म का लेकिन मैं एक. इंसानियत होने के नाते में बात करता. हूं मैं 84 का वाकया आपको सुनाना चाहता. हूं 84 के अंदर हां सिखों के दंगे हुए आप. यकीन माने क्योंकि मैंने उस दंगे को खुद. अपनी आंखों से देखा मैं कस्तूरबा गांधी. मार्ग पर कनाट पस में रहता हूं मेरी. मस्जिद माम हाउस कस्तूरबा गांधी मार्ग पर. है मैंने वह वाकया जो देखा कि जिंदा लोगों. को जला रहे थे सिखों को हमारे सिख भाई थे.
उनको बूढ़े बूढ़े लोग थे उनको जला रहे थे. उनकी गाड़िया में ब बिठा के जला रहे थे. उनके उनके गले में टायर डाल के आग लगा रहे. थे आप यकीन माने मुझे बहुत तकलीफ है इस. बात की मैं कहता हूं कि दंगा फसाद कहीं भी. हो मैं कहता हूं कहीं भी. हो किसी के साथ भी हो किसी का मकान जल. जाता है किसी की दुकान जल जाती है किसी के. मां-बाप जल जाते हैं किसी का कोई भाई जल. जाएगा मर जाते हैं जिस पर बीती है ना वही.
जानता है दंगे फसाद कराने वाले तो करा. जाते हैं आप यकीन मानना जिन पर बीती है ना. उनके लिए तो कयामत आ जाती है आज हजारों. लोग जेलों के अंदर पड़े हैं बहुत से लोग. बेघर हो गए बहुत से बच्चे अपने मां-बाप से. दूर हो गए मर गए तो वो तकलीफ है हैं तो. मैं कहता हूं कि इंसानियत को बरकरार रखना. चाहिए प्यार से रहना चाहिए दंगा फसाद नहीं. करना चाहिए दूसरी बात यह है कि मैं एक. वाकया सुनाना चाहता हूं एक बात बताना.
चाहता हूं कि हमें करना क्या चाहिए आपका. एक सवाल था कि हमें क्या करना चाहिए संतों. को क्या करना चाहिए तो मैं एक वाकया याद आ. गया मुझे कि संवाद हमें करना चाहिए संवाद. एक ऐसी प्रक्रिया है डायलॉग कक मैं डायलॉग. का आदमी हूं मैं पसंद करता हूं कि कहीं भी. संवाद हो कोई भी मिसअंडरस्टैंडिंग है हम. गलतफहमियां है वो कैसे दूर होंगी संवाद से. आज आपने मुझे अपने पॉडकास्ट में बुलाया और. आपने पॉडकास्ट में बुलाकर हमने संवाद किया. है ये डायलॉग किया है तो ऐसे हजारों लाखों.
लोग होंगे पाकिस्तान बांग्लादेश. हिंदुस्तान में जो आज चीफ इमाम को सुनेंगे. उनकी गलत फहमिया दूर हो जाएंगी गलत उनकी. जो धारणाएं हैं जो परसेप्शन है वो बदल. जाएंगे तो वही करना चाहिए संवाद दूसरी बात. यह है कि मैं एक एक्सपेरिमेंट किया मैंने. जो आपको सुनाकर अपनी बात को खत्म करूंगा. मैंने. स्वामी चिदानंद जी महाराज है ऋषिकेश के अ. परमार्थ निकेतन वो मेरे मेरे बहुत क्लोज. है जी वो मुझ पर भी बड़ा आशीर्वाद है वो.
पवित्र आत्मा है मेरा उनके साथ 30 साल का. संबंध है मतलब वो समझ लीजिए दुनिया जानती. है कि स्वामी चिदानंद जी और इमाम साहब वो. एक ही है हम दोनों भाई हैं आप मेरे यहां. आते हैं मैं उनके यहां जाता हूं तो हम एक. दिन ऋषिकेश जाने का प्रोग्राम तय हुआ उनका. जन्मदिन था मैंने सोचा कि चलो कुछ हम तो. जाते ही हैं लेकिन कुछ नया करना चाहिए तो. मैंने एक एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू किया. मेरे मन में भाव आया तो मदरसे के दारलूम. देवबंद और अलग-अलग मदरसों के मैंने सीनियर. बच्चों को लिया और कुछ इमाम को लिया कुछ.
मुफ्ति हों को लिया मैंने उनसे कहा कि मैं. तीन दिन के लिए आपको कहीं ले जाना चाहता. हूं लेकिन अ शर्त योगी कि मैं आपको आप. मुझसे पूछेंगे नहीं मैं लेकर कहां जा रहा. हूं और जहां ले जा रहा हूं आप नाराज नहीं. होंगे मुझसे इस शर्त पर तो उन्होंने कहा. ठीक है इमाम साहब आप तय करते हैं तो मैं. 100 बच्चों को लेकर यहां से बड़े और इमाम. को लेकर मुफ्ति हों को लेकर मैं स्वामी. चिदानंद जी के आश्रम चला गया आश्रम में हम. तीन दिन रहे वहां इन्होंने इमामो ने. बच्चों ने वहां एक गुरुकुल है स्वामी जी.
का तो मैंने जो गुरुकुल के जो बच्चे थे. मेरे 100 मदरसे के उनको तालिब इल्म कहते. हैं और जो गुरुकुल के बच्चे थे उनको कहते. हैं ऋषि कुमार तो ऋषि कुमार और तालिब इल्म. दोनों को मैंने कहा कि जो सेम एज के बच्चे. हैं आपस में दोस्ती कर लो तीन दिन हमको. यहां रहना है तो वो बच्चे पहली बार किसी. आश्रम में गए थे और इमाम लोग भी पहली बार. गए थे और वहां पर शाम को आरती होती है. गंगा आरती स्वामी जी की सुबह हवन होता है. तो तीन दिन जब वहां रहे तो तात्पर्य कहने.
का मेरा यह है कि मैंने एक एक्सचेंज. प्रोग्राम शुरू करा अपने समझने के लिए और. कि हम हो सकता है कि इससे हमको एक बेहतरी. हो जाए तीन दिन वहां रहे और आप यकीन माने. स्वामी जी ने और गुरुकुल ने आश्रम ने बहुत. सेवा करी सबकी और सब बहुत खुशी से रहे तो. यह हमारा प्रोग्राम था एक्सचेंज प्रोग्राम. साहब कि मदरसा गया गुरुकुल आश्रम और आश्रम. अब गुरुकुल के मदरसा बुलाने का हमारा. प्लान है ये एक्सचेंज प्रोग्राम तो इसका.
मकसद मैं बताना यह चाह रहा हूं कि उसमें. हमको निकल के क्या आया कि जब तीन दिन हो. गए और यह बच्चे आपस में दोस्त बन गए जो. गुरुकुल का बच्चा ऋषि कुमार जो पुजारी. बनेगा आने वाले वक्त में और यह तालिब इल्म. ये इमाम बनेगा इन दोनों में दोस्ती हो गई. तीन दिन में इन्होंने अपने मोबाइल नंबर. एक्सचेंज कर लिए और तीन दिन साथ रहे और. इतनी पक्की दोस्ती हो गई इन तीनों की इन. दोनों सब लोगों में आचार्य में इमाम में. दोस्ती हो गई सब मिलके तीन दिन रहे एक समझ.
में आया कि हमद आश्रम में क्या होता है. लोग कैसे होते हैं तो उससे एक मन के अंदर. एक जो गलतफहमी थी दूर हुई मोहब्बत में. तब्दील हुई हम जब निकल रहे थे विदा कर रहे. थे स्वामी जी हम सबको सब बच्चे बसों में. बैठ रहे थे तो मैं खड़ा था एक तरफ देख रहा. था जी एक तरफ खड़े होकर देख रहे थे तो जो. बच्चे थे गुरुकुल के ऋषि कुमार और यह. बच्चे थे मदरसे के तालिब इल्म यह जब हाथ.
मिलाकर जब गाड़ी में बैठ के व बस में से. जो रो रहे थे ना यं बाय बाय कर रहे. थे मतलब जैसे दो सगे भाई आपस में जुदा हो. रहे हो आंसू से रो रहे थे यह चाहिए अपने. को यह. समन्वय. संवाद यह होना चाहिए गलतफहमिया दूर हो. होंगी जब हम एक दूसरे के आएंगे जाएंगे तो. मस्जिद वालों को मंदिर में आना चाहिए. मंदिर वालों को मस्जिद में जाना चाहिए. इमाम बनेंगे या लोग जो पुजारी बने हमेशा. की दोस्ती कभी भी एक दूसरे धर्म को लेकर.
इतने कट्टर नहीं होंगे कट्टर नहीं होंगे. तो यही मेरा तात्पर्य था कहने का कि हमें. इसी तरह से काम करने चाहिए जिससे कि हम. आपस में गलतफहमियां दूर हो नफरत खत्म हो. मिल के रहे यही हमें मिलकर चलना है यही. इंसानियत है इसी पैगाम को हमको आम करना है. यही हमारा धर्म है जिसे हमें निभाना चाहिए. ब्यूटीफुल ठीक है सर सर ये जो गेटअप आपका. जैसे है एक आखिरी सवाल मैं पूछ ले रहा हूं. और इसमें ऐड करके अ एक मुसलमान को यह. गेटअप कहर दाढ़ी दाढ़ी रखनी चाहिए या मुसे.
मछ नहीं रखते आप दाढ़ी रखते हैं यही गेटअप. रखना चाहिए या साधारण जिंदगी मॉडर्न डे. में भी अगर यह नहीं रखते तो भी आप उतने ही. मुसलमान है आजकल तो दाढ़ी फैशन में आ गया. है हां आजकल तो सभी लोग राजपूत हमारे यहां. राजपूतों में तो सब दाढ़िया रखते हैं मछे. भी रखते हैं तो दाढ़ी लोग रखना एक धर्म के. हिसाब से सिखों के अंदर दाढ़ी रखी जाती है. हमारे हिंदू धर्म में भी है सना सनातन के. अंदर भी देखें दाढ़िया रखते हैं औरतों को. थोड़ी दिए दाढ़ी मर्दों को दी है अब तुम.
ना रखो ये तुम्हारी प्रॉब्लम है हमको दिए. हम रखते हैं दाढ़िया तो चेहरे के नर इसका. रिलीजन कांसेप्ट है या ये शौकिया होता है. नहीं नहीं शौकिया तो कोई काम नहीं होना. चाहिए ये जो ईश्वर ने ये नेचर है जो हमको. दिया है नेचर में दाढ़ी है ना हमको दी है. अब जो नहीं रखता उसकी मर्जी चेहरे का नूर. होता है ना दाढ़ी तो तो इसलिए मेरा मकसद. है कि दा रखनी चाहिए जहां तक मुछ की बात. है जिसको जो कोई लोग मुछे रखते हैं बहुत. से लोग मछे नहीं रखते हैं तो यह कांसेप्ट. इसलिए इसका धर्म से कोई ताल्लुक नहीं है.
ये आपकी अपनी आसानी के लिए है दाढ़ी का. रखना वैसे इस्लाम में दाढ़ी का कांसेप्ट. है क्योंकि सुन्नत है फर्ज नहीं है सुन्नत. है मतलब प्रॉफिट ने रखी है तो इसलिए लोगों. को रखना चाहिए उसको सुन्नत कहते हैं जो. प्रॉफिट ने किया तो इसलिए लाजिम नहीं है. तो बहुत से लोग रखते हैं बहुत से लोग नहीं. रखते हैं जो रखते हैं उनको अच्छा है जिनको. नहीं रखते उनके लिए भी अच्छा है जिसको. जैसा अच्छा लगता है जिसका वैसा ठीक है ठीक. है सर बहुत-बहुत शुक्रिया सर आपसे बात की. हमने आपको बहुत परेशान किया हमने क्योंकि. रमजान का महीना चल रहा है आपका रोजा चल.
रहा है उसके बावजूद आपने इतना समय दिया. हमें मुझे खुशी इस बात की कि इस महीने में. आपने इतना वक्त निकालकर लोगों को इतनी. सारी टीचिंग्स दी और उम्मीद करता हूं कि. इसका जो पॉजिटिव असर है वो लोगों पर जाए. मुझे भी मुझे भी लगता है कि पॉजिटिव ही. जाएगा मेरा ईमान है मेरा यकीन है क्योंकि. हमने जो भी कुछ किया हमने जो एक बात रखी. है जो एक है सही बात रखी वो रखी है आपने. जो सवाल किया आपके भी सत्य सवाल थे आज के. हालात में तो मुझे लगता है कि इस तरह के. पॉडकास्ट की निहायत सखत जरूरत है और मैं.
नौजवानों को कहूंगा इस पॉडकास्ट को पूरा. देखें अधूरा ज्ञान आधा पॉडकास्ट भी ना. देखें लेकिन पूरा पॉडकास्ट को देखें जब. इस्लाम समझ में आएगा इस्लाम के मानने वाले. समझ में आएंगे इमाम समझ में आएंगे तो. इसलिए उसको ज्ञान को पूरा ज्ञान होना. चाहिए अधूरा ज्ञान किसी के लिए कहीं भी. अच्छा नहीं होता है सबके लिए अच्छा हो सब. खुशहाल हो सब तंदुरुस्त हो रमजान का चकि. महीना है इस महीने में मैं सबके लिए दुआ. मांग रहा हूं रोजे से दुआ मांग रहा हूं कि. हे ईश्वर हे परमात्मा हे अल्लाह जितना भी.
जितने भी दुनिया के अंदर जहां जंगे चल रही. है वह बंद हो सब शांति हो जितने इंसान. जितने भी इंसान जहां-जहां परेशान है सबकी. परेशानियां दूर हो जो इंसान बेरोजगार है. उनको रोजगार हो जो कर्जदार है उनकी कर्ज. की अदायगी हो जितने भी इंसान जहां बीमार. हैं उन सबको शिफाई कुल्ली अता फरमा सेहत. और तंदुरुस्ती अता फरमा सब खुशहाल हो सब. कामयाब हो सबको बुलंदी हो सबके बच्चों को. तरक्की मिले और खास तौर पे आज हमारे.
मिश्रा जी पंडित जी के इस ऑफिस में भी. बरकत हो इनकी टीम को भी बरकत हो जो सुन. रहे हैं उनको भी बरकत हो जो सुनेंगे उनको. भी बरकत हो सब खुशहाल हो सब कामयाब हो. सबको बुलंदी मिले भारत हमारा खूब तरक्की. करें भारत में रहने वालों में आपस में. मोहब्बत हो भारत में रहने वालों में. खुशहाली हो भारत में हमारा इसी तरह से. मिलकर भारत हमारा विश्व गुरु बने इन सब. दुआओं के साथ बहुत-बहुत शुक्रिया नमस्कार. स.
