Unplugged ft. Vivek Agnihotri | The Bengal Files | Anurag Kashyap| Deepika | Mamta Banerjee |
विवेक अग्निहोत्री राइड विंग कैन राग. कश्यप क्योंकि मैं शराब नहीं पीता हूं. लेकिन देखिए मैं वो सब नहीं करता हूं।. बंगाल फल बनाने का आपका मकसद क्या है? इफ. कश्मीर हर्ट यू बंगाल विल हंट यू।. क्या विवेक अग्निहोत्री की बंगाल फाइल्स. इस देश में मुसलमानों को लेकर नफरत पैदा. करेगी? हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं. लेकिन सूरत तो बदलनी चाहिए। कि आपकी फिल्म. में ₹350 करोड़ कमाए बट उससे कश्मीरियों. को क्या मिला? एक सेकंड यह सवाल आप किसी.
भी कश्मीरी पंडित को बुला लीजिए। उसे यहां. बैठा लीजिए। उसे पूछिए आपको क्या मिला? जेएनयू अब आप मानते हैं कि जेएनयू के. प्रोडक्ट जो है वो भी देश हित में काम कर. रहे हैं। अच्छा काम कर रहे हैं या समाज. में असर डाल रहे हैं। कैसे जिनकी हम बात. कर रहे हैं वो तो सब पॉलिटिक्स में चले. गए। तो देश हित कहां रह गया? अभिजीत. बनर्जी साहब नोबेल प्राइज जीत कर आए।. हमारे यहां पर जयशंकर जी हैं, निर्मला जी. हैं। अरे वो एक्सेप्शनंस वो जो मानसिकता. है वो एक बच्चों को एक तरह से आप कल्चरली. हैंडीकैप कर रहे हैं। आप ही क्या दीपिका. पादुकोण गई थी वहां पे बॉलीवुड से सपोर्ट.
करने के लिए। आई कैन गारंटी कि दीपिका को. पता ही नहीं होगा कि क्यों क्या वहां की. पॉलिटिक्स क्या है। आप उन समझते हो? सर. भास्कर वाला इंसिडेंट जिसमें हैशटग मी टू. प्रोस्टट्यूट नन। ये ट्वीट को लेके मैं. कभी जिंदगी में अपोलजेटिक नहीं हो सकता. हूं। ये बिल्कुल परफेक्ट ट्वीट था। आपकी. फिल्में जब आती हैं अगर सत्य ही दिखाना है. तो सत्य तो गुजरात में भी था। सत्य तो अभी. हाल फिलहाल में मणिपुर में भी हो रहा है।. वहां क्यों जो सरकार को सूट कर रहा है? पहली बात तो ये देश को मैं नहीं बांट रहा. हूं। ये तो सवाल पूछने वाले बांट रहे हैं.
कि तुम्हारा कश्मीर और मेरा मणिपुर।. चॉकलेट काफी क्रिटिसिज्म हुआ। हिट स्टोरी. एक अलग तरह की फिल्म थी। वहां से जो ये अब. राष्ट्रवादी देशभक्त पहले मैं वो फिल्में. बना रहा था जो लोग सुनना चाहते थे। अब. फिल्में मैं वो बना रहा हूं जो मैं चाहता. हूं लोग सुने। क्यों आपको लगता है कि. बंगाल कश्मीर बन? वेस्ट बंगाल में दो. कॉन्स्टिट्यूशनंस हैं। एक हिंदुओं का, एक. मुस्लिम्स का। टीएमसी 90% तो गुंडों की. पार्टी है। फिल्म आएगी जैसा आप कह रहे हो. कि दिस विल ह्ट यू। और जब आप ये शब्द कोट. करते हो मैं तो कहता हूं दिस विल. डिस्ट्रॉय यू। इसके बाद आपको इस बात का डर. नहीं कुछ इसमें दंगा फसाद विवाद हो सकता. है। आपको लगता है कि वो जो स्कार वहां लगे.
थे पहलगाम में जिस थोड़े भरने को कुछ थे।. वो बढ़ेंगे हिंदू मुस्लिम की चर्चा और. बढ़ेगी। हेट एक दूसरी कम्युनिटी को लेकर।. सोशल मीडिया बाकी जगहों पर देखिए वो. दुष्यंत कुमार कहना है इस दीवार पे इतने. इश्तहार चिपके हैं कि कोई दरार नजर नहीं. आती। मैं उन लोगों में से जो कहता हूं. सारे इश्तहार फाड़ के फेंको। पहले दरार को. एड्रेस करो। विवेक अग्निहोत्री एंटी. मुस्लिम है। अगर कश्मीर फाइल में मुस्लिम. वर्जन दिखाना हो तो वो कौन सा बॉलीवुड का. डायरेक्टर है जिसे आप रिकमेंड करो कि इससे. बनवाइए अच्छा दिखाएगा। विवेक रंजन. अग्निहोत्री बॉलीवुड के अंदर भी कोई. माफिया है? बॉलीवुड ही माफिया था। आप. मानते हो अभी भी सरकार उनकी है लेकिन.
सिस्टम हमारा है। हां।. हां। मेरी फिल्म को अगर कोई बैन करेगा, चैलेंज करें ममता दीदी को।. ये कहते हैं कि फिल्में समाज का आईना होती. हैं। लेकिन मेरे मेहमान की फिल्म इतिहास. का आईना है। इनकी फिल्म देखने के बाद मैं. गारंटी नहीं ले सकता कि आप एंटरटेन होंगे.
या नहीं होंगे। लेकिन इतना जरूर कह सकता. हूं कि आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे और इस. बार यह दावा कर रहे हैं कि कश्मीर फाइल ने. अगर आपको हर्ट किया था तो नई वाली पिक्चर. जो है वो ह्ट करेगी दोनों तरफ लोगों को।. विवेक अग्निहोत्री जी बहुत-बहुत स्वागत. है। थैंक यू शुभांग। थैंक्स अ लॉट। सच कहा. मैंने। कश्मीर हर्ट कर रही थी तो इस बार. ह्ट करने का इरादा है। हां, आपने थोड़ा. पोलाइटली बोला। अगर मुझे बोलना हो तो मैं. कहूंगा इफ कश्मीर फाइल्स डिस्टर्बड यू द. बंगाल फाइल्स विल डिस्ट्रॉय यू। मैंने टीज़.
देखा उसका और बहुत सारे सवाल मेरे मन में. आए।. इन सवालों को लेकर मेरे मन में सबसे पहला. सवाल तो यही आया कि आप ऐसी फिल्में क्यों. बनाते हो? मैंने वैक्सीन वॉर देखी, मैंने. कश्मीर फाइल्स देखी और मुझे लग रहा है कि. अब जिस माइंडसेट में आप हो जितनी फिल्में. आपकी आ रही हैं या मैं इमेजिन कर सकता. हूं। ऐसी फिल्में क्यों बनाते हो आप? अब. लहरों से कभी पूछो जाके कि आप उठती क्यों. हो? चट्टानों से टकराती क्यों हो? टूटती. क्यों हो? बनती क्यों हो? फिर क्यों बनती. हो? ऐसा नहीं है। देखो ऐसा है.
हम सब इसी समाज में बड़े हुए हैं। तो कोई. ऐसा नहीं है कि तुम्हारे और मेरे समाज को. लेकर दर्शन में कुछ फर्क है। लेकिन मैं. मेरा ये दृष्टिकोण में सारा परिवर्तन आया. जब मैं इंडिया से अमेरिका गया था पढ़ने के. लिए। और मुझे वहां पे जब मैंने देखा कि जो. भारत को लेके जो एक इमेज थी इंडिया की वो. जो हम चाहते हैं जो होनी चाहिए वो नहीं. थी।. तो वहां से मेरे को भारत को लेकर एक अलग.
चिंतन चालू हुआ दिमाग के अंदर और जब मैंने. फिल्मों का अपना दौर जब चालू किया देयर. केम अ टाइम व्हेन आई हैड टू चूज़ कि. देखो दो चीजें होती हैं। एक है आप लोगों. से वो बोलें जो लोग सुनना चाहते हैं। और. एक आप वो बोले जो लोग नहीं सुनना चाहते. हैं। लेकिन सुनने के बाद कहें कि हमें. आपने ये पहले क्यों नहीं बताया। कई बार. बच्चे होते हैं ना मां-बाप से कहते हैं. आपने पहले क्यों नहीं बताया। तो मैं जब. बॉलीवुड का पार्ट था तो आई वास मेकिंग बिग. कमर्शियल फिल्म्स जहां पे ग्लैमर है, पैसा.
है, सब कुछ है बस मां नहीं है। तो तो. फिर एक टाइम आया जब 2010 में एंड दैट्स. व्हेन आई सेड कि ये इतने सारे हमारे टैबू. सब्जेक्ट्स हैं इंडिया के जिनके बारे में. कोई बात नहीं करता है। बात इसलिए नहीं. करता है लोग डरते हैं। कभी सरकार से डरते. हैं, कभी अपोजिशन से डरते हैं, कभी गुंडों. से डरते हैं, कभी जिहादियों से डरते हैं, कभी लेफ्टिस्ट लोगों से डरते हैं। ये पैसे. वालों से डरते हैं। इस देश का आदमी इतना. डरा हुआ है कि पुलिस स्टेशन जाने से डरता.
है। जस्टिस मांगने से डरता है। घर में. बेटी पैदा हो जाए तो डरता है। बुड्ढे. मां-बाप हो तो सड़क पे निकलने से डरता है।. इतना डरा हुआ कॉमन मैन है यहां का और वो. इसलिए है कि उसको लोग डराते हैं तो मैं. क्या कर सकता हूं एज अ फिल्म मेकर? मैं उस. डर को निकाल के फेंक सकता हूं। और मैं वो. कहानियां सुना सकता हूं जिसको सुनाने से. लोग डरते हैं। तो मैंने शुरू ही की थी. 2010 में बुद्धा इन अ ट्रैफिक जैम अर्बन. नेक्सल है। राइट? उसके बाद फिर हमने. ताशकंद फाइल बनाई जिसको लेके तो मेरी तो.
सारी फिल्मों में यानी लोग चाहते ही नहीं. थे रिलीज हो, अटकी रही बहुत सब कुछ हुआ।. तो मैं ये फिल्में इसलिए बनाता हूं. क्योंकि मुझे ऐसा लगता है मैं बना सकता. हूं और मैं नहीं बनाऊंगा तो पहले बनती. नहीं थी और आगे मुझे पता नहीं कोई बनाएगा. कि नहीं बनाएगा इसलिए मुझे ऐसा लगता है ये. बहुत आवश्यक है मेरे लिए बनाना ये मेरे. जीने के लिए ये मेरे दिस इज माय क्रिएटिव. ऑक्सीजन आपको लगता है अभी भी समाज डरा हुआ. है मौजूदा दौर में जो हम 2025 में बैठे. हैं या अब नहीं डरा हुआ है नहीं डरा तो.
हुआ है डरता है आप बताइए आप आप पे कोई केस. कर दे आप पहला ख्याल क्या आता है आपके. दिमाग में आप चलो मैं लड़ता हूं जाके समाज. क्या सोचेगा क्या होगा मेरा परिवार का. क्या होगा राइट और दूसरा आप कहते हैं यार. कोर्ट में जाओ फंस जाएंगे पुलिस स्टेशन. जाने से आप नहीं डरते हैं क्या सब डरते. हैं डरते हैं लोग अस्पताल बचना चाहते हैं. डरने से ज्यादा बचना चाहते हैं कि क्यों. इन चक्करों में फंसे हैं हम हां तो एक तो. वो बात है दूसरी बात है टैबू सब्जेक्ट्स. में लोग बात करने से बहुत डरते हैं आपकी. आंखों के सामने चोरी चल रही है और आप डरते. हैं बोलने से आपकी आंखों के सामने एक आदमी.
बैठ के वहां पे आपकी आंखों के सामने एक. झूठा अ चाहे वो धर्म का हो, चाहे राजनीति. हो, चाहे फिल्म हो, चाहे कुछ हो दिखा रहा. है। लेकिन आप डरते हैं। आपको पता है ये. इंडस्ट्रियलिस्ट ये बिजनेसमैन जो है ये. गलत कर रहा है। ये देश को गलत माल बेच रहा. है। लेकिन आप डरते हैं। तो जो इसीलिए. मैंने ये ये जो मैं फिल्में बना रहा हूं. ये ट्रिलॉजी है। राइट? दुनिया में बहुत ही. कम डायरेक्टर्स ने ट्रिलॉजी बनाई है। और.
आप जानना चाहेंगे मैं क्या कर रहा हूं? हां हां अच्छा यानी ये एक इंटरेस्टिंग. किस्सा मैं तुम्हें बता रहा हूं। एक दिन. मैं एक सरकारी दफ्तर में बैठा था और ये. 2011-12 की बात है। मेरी फिल्म अटक गई थी।. बुद्धाना ट्रैफिक जैम अर्बन ने एक्सल्स. वगैरह तब यानी इतना लोग नहीं बोलते थे।. हमारी किताब लिख रहा था मैं। किसी काम से. बैठा था तो मिल ही नहीं रहा था बंदा जो. अफसर था और मैं बड़ा गुस्से में था और. सामने वहां पे वो तीन शेर लगे थे भारत का.
जो एंबलम है। तो मैं कह रहा था ये हमने. शेर क्यों चुने हैं? इतने सारी चीजें मोर. चुन लेते, कुछ भी चुन लेते। यह शेर ही. क्यों हमने उठाए तीन और शेर का क्या लेना. देना है डेमोक्रेसी से हर जगह लगे हुए. हैं। शेर तो एक आक्रामक बच्चे को क्या. बोलते वहां नहीं जाओ वहां शेर है। तो शेर. क्यों चुने? तो मैंने कहा तो एक क्रिएटिव. माइंड है। मेरे दिमाग में एक थॉट आया। तो. मैंने कहा कि ये शेर जो है ये हमारी. डेमोक्रेसी के रक्षक है। कि सामने कोई आए. नहीं। तो किस चीज की रक्षा कर रहे हैं? तो.
मैंने अपने दिमाग में ऐसा सोचा कि यह जो. डेमोक्रेसी में कौन से तीन पिलर्स हैं जिस. पर सब खड़ा है? तो पहला पिलर है ट्रुथ।. हम लोग डेमोक्रेसी की इतनी बातें करते. हैं। आज का जो मीडिया है उसने कुछ. डेमोक्रेसी की ऐसी डेफिनेशन कर दी है कि. लोगों को समझ में नहीं आता ये डेमोक्रेसी. की वैल्यू क्या है? डेमोक्रेसी की सबसे. बड़ी वैल्यू हिंदुस्तान और पाकिस्तान में. जो सबसे बड़ा फर्क है मूलता। वो ये है कि. पता नहीं है कि नहीं पर होना तो चाहिए। वो. यह है सत्य। अगर सत्य नहीं है तो.
डेमोक्रेसी नहीं है। क्योंकि सत्य नहीं है. तो जस्टिस नहीं मिलेगी। तो वो है दूसरा. शेर। पहला शेर है राइट टू ट्रुथ।. दूसरा दूसरा शेर है राइट टू जस्टिस।. और सत्य और जस्टिस जहां पे होता है वहीं. पे लाइफ की डिग्निटी है। लाइफ की वैल्यू. है और राइट टू लाइफ है। तो इसलिए तीसरा. शेर है राइट टू लाइफ। तो ये सोच के मैंने. कहा चलो तीन फिल्में बनाऊंगा। ट्रिलॉजी. वहां से आईडिया निकला। इंडिया में सत्यजीत. रे ने बनाई है एक ट्रिलजी अप्पू के ऊपर।.
तो पहली फिल्म मैंने कहा अगर भारत के. दूसरे प्रधानमंत्री के मृत्यु का सत्य आज. भी संदेहास्पद है। तो फिर ट्रुथ कहां है? आप बोल दीजिए लाल बहादुर शास्त्री की डेथ. हार्ट अटैक से हुई थी। गवर्नमेंट एक साइन. करके एक वाइट पेपर निकाल दे। कहे केस. क्लोज्ड। मामला खत्म। लेकिन नहीं हुआ। अभी. भी नहीं हुआ और होगा भी नहीं। तो अगर वही. सत्य नहीं है तो फिर जस्टिस कहां है? तो. फिर हमने दूसरी फिल्म बनाई राइट टू जस्टिस.
पे। उसका नाम था तो पहली थी द ताशकंद. फाइल्स। दूसरी बनाई द कश्मीर फाइल्स।. कश्मीर फाइल्स में मुद्दा ये था कि भाई. अगर भारत के जो मूल निवासी हैं और जो भारत. की एक सांस्कृतिक धरोहर जिसको बोलते हैं।. अगर वहीं के मूल निवासियों को 35 साल से. आज तक न्याय नहीं मिला, जस्टिस नहीं मिली. तो क्या ये शेर जस्टिस को प्रोटेक्ट कर पा. रहा है? तो राइट टू जस्टिस पे बनी द. कश्मीर फाइल्स और अब जो तीसरी फिल्म आ रही. है द बंगाल फाइल्स ये राइट टू लाइफ के ऊपर.
है। तो ये एक ट्रिलॉजी बनी लेकिन एक चौथा. शेर भी है। आपको पता है सारी दुनिया सोचती. है तीन शेर हैं। एक्चुअली शेर चार हैं। तो. वो चौथा शेर कौन है? आप जानते हैं कौन है? वी द पीपल ऑफ भारत।. वो है चौथा शेर जो हमेशा छुपा रहता है। अब. मैं आपकी जब बात सुन रहा हूं सर ये सुनने. में बहुत अच्छी लग रही है मुझे और जैसे. कहते हैं ना हर सिक्के के दो पहलू होते. हैं। जी. मैंने जब एक जिक्र किया कि आप मेरे. पॉडकास्ट में आने वाले हैं तो मेरे एक.
मित्र ने मजाकमजाक में मुझसे कहा कि विवेक. अग्निहोत्री राइड विंग एंड राग कश्यप है।. हम क्योंकि मैं शराब नहीं पीता हूं। लेकिन. देखिए मैं वो सब नहीं करता हूं। मैं. ऐसा ये तो आपने गोल पिक्चर वाली बात कह दी. उसप एक अलग चर्चा हम कर लेंगे आगे लेकिन. उन्होंने ये कोट किया कि जो बातें आपने. कही एक्सैक्टली ये बातें वो भी कहते हैं. लेकिन उनका सत्य को देखने का नजरिया अलग. है वो फुले जैसी पिक्चर बना रहे हैं जिसके. जरिए वो कह रहे हैं ये फुले उन्हें नहीं. बनाई उसको उन्होंने सपोर्ट किया उसपे काफी.
बातें उन्होंने की फुले को मैंने भी. सपोर्ट किया जी जी और उस पे काफी जिक्र. किया और वो इसी इन्हीं बातों को वो भी कोट. करते हैं बट उनका एक अपना नजरिया है एक. नजरिया आपका है सत्य की परिभाषा क्या. क्योंकि आपकी फिल्में जब आती हैं तो इस. देश में बहुत एक दो वर्ग है। एक बड़ा वर्ग. है जो कहता है कि बिल्कुल कश्मीर का सच. नहीं बोला गया। हम बोलने से डरते थे। ये. स्वीकारा हमने भी खूब सपोर्ट किया। लेकिन. एक दूसरा वर्ग आकर उसमें आवाज लगाता है कि. अगर सत्य ही दिखाना है तो सत्य तो गुजरात. में भी था। सत्य तो अभी हाल फिलहाल में. मणिपुर में भी हो रहा है। वहां क्यों जो.
सरकार को सूट कर रहा है। हम्म। ये आप पर. एक एलिगेशन आता है। हां। तो देखिए ये यानी. आप मुझे एक बात बताइए कि आप पॉडकास्ट ही. क्यों करते हैं? आप कोई दूसरा धंधा क्यों. नहीं करते हैं? एक आदमी अपनी चॉइस है।. उसकी जो आवाज है वो जानता है। मैंने आपको. बताया मैंने एक ट्रिलॉजी को डिसाइड किया. था। तो मैं ट्रिलॉजी बना रहा हूं। ये पहले. से डिसाइडेड है 2010 से। गुजरात के ऊपर. तमाम डॉक्यूमेंट्रीज बन चुकी हैं। गुजरात. के उस पहलू के ऊपर जिसकी बात करते हैं. 2002 के दंगों के बारे में। दंगों के ऊपर.
तमाम डॉक्यूमेंट्रीज बन चुकी हैं। फिल्म. बन चुकी है, परजानियां बन चुकी है। इतना. लिखा गया है उसके ऊपर। तो वो कोई छुपी हुई. चीज नहीं है। वो टैबू सब्जेक्ट नहीं है।. ऐसा नहीं है कि उस सब्जेक्ट पे बात नहीं. हुई। आप कभी हमारे प्रधानमंत्री से अगर. मिले मोदी जी से तो उनसे पूछिएगा उनको. कैसे मीडिया ने बॉयकॉट किया था। सब तो. उसका देखा सारा पहलू बाहर आ चुका है उसका।. ठीक है? तो उसके बारे में मैं फिल्म बनाने. में बिल्कुल मैंने मैं ईश्वर साक्षी है।. यानी मेरे को मैं बहुत खुशी से उस फिल्म. पे फिल्म बनाना चाहूंगा। लेकिन उसमें कोई. नई बात कहने के लिए बची नहीं है। तो लाल.
बहादुर शास्त्री पे कोई और क्यों नहीं. सोचा किसी ने? अब सवाल ये भी उठता है कि. जिन विषयों पे मैं फिल्म बना रहा हूं उस. पे पूछने वाले क्यों नहीं बनाते हैं? ये. तीन फिल्में मेरी डिसाइडेड थी। ये 2010 से. ऑफ कोर्स ये तो मैंने कब से अनाउंस कर रखा. है। ये तो 2011 में अनाउंस किया था मैंने।. मैं ट्रिलजी बनाऊंगा। नहीं तीनों फिल्मों. का बंगाल चैप्टर तक का। हां। यानी. एक्सैक्टली मुझे ये नहीं पता था कि मैं. बंगाल पे बनाऊंगा। पर मैंने ये अनाउंस. किया था कि मैं तीन फिल्में बनाऊंगा। तो. तो ये बना रहा हूं। हो सकता है इसकी चौथी.
भी निकल आए। मैंने आपको बताया चौथा शेयर. भी है तो हो सकता है चौथा पार्ट भी निकल. आए जो यानी मोस्ट प्रोबेब्ली होगा ही। तो. इसका कोई ऐसा लेना देना नहीं है। मणिपुर. में मैं डेफिनेटली अगर कभी मौका मिलेगा. बनाऊंगा लेकिन अभी मैं यानी आज की तारीख. में मैं कैसे तीन फिल्में बना सकता हूं? मतलब ये क्वेश्चन ही मूर्खता भरा है। तो. मैं इसका कैसे जवाब दूं? यानी आप आप बोलिए. कि अच्छा आप आईपीएल खेल रहे हैं। विराट. कोहली आप वन डे भी क्यों नहीं खेल रहे? वहां भी क्यों नहीं जा रहे? कैसे कर सकता. हूं मैं? मतलब मेरे मेरे लिए पॉसिबल भी. लेकिन परहेज नहीं है। क्यों परहेज होगा? मेरा ही तो देश है। ये पहली बात तो ये देश.
को मैं नहीं बांट रहा हूं। ये तो सवाल. पूछने वाले बांट रहे हैं कि तुम्हारा. कश्मीर और मेरा मणिपुर। मैंने तो कभी ऐसा. नहीं बोला। मणिपुर पे तो मैंने कविता लिखी. थी जिसको पढ़ के लोग रो पड़े। तो मणिपुर. से कोई मेरे मणिपुर भी तो मेरा ही है।. बंगाल भी मेरा ही है। केरला भी मेरा ही. है। महाराष्ट्र भी मेरा ही है। तो ऐसा. नहीं है। लेकिन देश में कुछ भी होता है।. लोग लिखते हैं विवेक जी इसके ऊपर फिल्म. बनाओ। तो मैं कहता हूं भाई जो लोग कह रहे. हैं सब कुछ आप थोड़ी ना और भी तो जो. डायरेक्टर्स हैं उनसे बोलो वो भी तो बनाएं. और जब मौका मिला था बड़े-बड़े दिग्गज. डायरेक्टर्स और स्टार्स को कश्मीर पे. 10-12 फिल्में जब बनी है तो वो पहलू वो.
दिखा सकते थे जो मैंने दिखाया और ऐसा नहीं. है कि वो गलत थे या मैं गलत हूं। एक. नजरिया है। आप किस नजरिए से देख रहे हैं।. मैं भारत को एक सिविलाइजेशन की तरह से. देखता हूं। मैं जहां पैदा हुआ, जिस घर में. हुआ, मैं जहां पढ़ा, जो मैंने देखा, मैं. उस दृष्टिकोण से देखता हूं। उस दृष्टिकोण. से मुझे भारत पे अलग लेवल पे गर्व है। हम. मैं भारत की इतनी फौल्ट लाइंस को नहीं. देखता हूं जितनी ये लोग देखते हैं। आपने. अनुराग का नाम लिया। वो लोग सिर्फ फॉल्ट. लाइंस पे फोकस करते हैं। मैं भारत की.
महानता पे फोकस करता हूं और मैं लोगों को. ये बताना चाहता हूं कि व्हाट हैव वी. लॉस्ट? हम एंड हाउ वी कैन प्रोटेक्ट इट? मैंने इससे एक बड़ा सेगमेंट रखा है। मैं. आऊंगा उधर। लेकिन एक थोड़ा सा आपको समझने. के लिए जाना चाहता हूं मैं। जी। चॉकलेट. हेट स्टोरी इज ज़िद। हम जिद मैंने नहीं. बनाई। जिद नहीं बनाई। चॉकलेट हेट स्टोरी. गोल गोल गोल और हेट स्टोरी जिसमें गोल भी. तो बवाल काटा था आप लोगों ने।. तो चॉकलेट हेट स्टोरी ये अह हालांकि. चॉकलेट काफी क्रिटिसिज्म हुआ। हेट स्टोरी. एक अलग तरह की फिल्म थी। वहां से जो ये अब.
राष्ट्रवादी देशभक्त विवेक अग्निहोत्री का. जो बदलाव हुआ है और जिसमें आप बहुत बोल्ड. तरीके से अपनी बातें रखते हैं। फिल्में. बनाते हैं और बहुत स्ट्रांग सब्जेक्ट. चुनते हैं। जिन सब्जेक्ट को क्रिटिसाइज. करने वाले भी पूरी तरह क्रिटिसाइज नहीं कर. पाते। क्योंकि कश्मीर फाइल के भी ज्यादातर. सब्जेक्ट ऑलरेडी YouTube पर थे हम कि ये. फैक्ट है इनको लेकर एक फिल्म बनाई गई। ये. बदलाव क्यों हुआ? क्योंकि आमतौर पर जो. डायरेक्टर प्रोड्यूसर्स होते हैं वो इस. तरह की फिल्में बनाते हैं। अच्छी हीरोइन. हो गई। सुंदर खूबसूरत गाना होगा। अरजीत. सिंह से गाना गवा दिया। एक अच्छा हीरो हो. गया। अनिल कपूर जैसा फिल्म आ गई, हिट हो.
गई, फ्लॉप गई। वो अलग कहानी है। ये. बिल्कुल सब्जेक्ट बेस्ड फिल्में क्यों आने. लगी? कुछ ऐसा पहली पहली बात तो मैं पता. नहीं पहली बात तो मैं देशभक्ति की फिल्में. नहीं बनाता हूं। हम्। मैंने कोई भी फिल्म. बुद्धाना ट्रैफिक जैम देशभक्ति की फिल्म. नहीं है। वह नेक्सलिज्म और लेफ्टिस्ट. आइडियोलॉजी के ऊपर थी। अह अह ताशकंद. फाइल्स का देशभक्ति से कोई लेना देना नहीं. है। उसको राष्ट्र राष्ट्रवादी विचारधारा. राष्ट्रवादी भी नहीं है। कैसे राष्ट्रवादी. है? ताशकंद फाइल्स कैसे राष्ट्रवादी है? एक आदमी के मर्डर मिस्ट्री है वो तो। और. उसके बाद कश्मीर फाइल्स तो एक जेनोसाइड.
फिल्म है। उसका राष्ट्रवाद से क्या लेना. देना है? बंगाल फाइल्स में एक एलिमेंट आप. देख सकते हैं कहीं पे। पर वो राष्ट्रवाद. नहीं है। वो एक देश को लेके चिंता है। एक. देश को लेके एक दुख है। देश को लेके एक. कंसर्न है कि जो पहले हुआ था 1946 में. पार्टीशन कहीं हम उन्हीं हालातों में तो. फिर से नहीं खड़े हो रहे धीरे-धीरे। कहीं. ऐसा तो नहीं बंगाल फिर से कश्मीर बनता जा. रहा है। तो वो कंसर्न है। उसका राष्ट्रवाद. मत जिंगोइज़्म की मेरा भारत महान वैसी. फिल्में मैं बनाता भी नहीं हूं। मैं बना. नहीं सकता क्योंकि मैं उस तरह से सोचता.
नहीं हूं देश को लेके। राइट? तो ये. राष्ट्रवादी नहीं बनाता हूं। हां भारत की. जमीन से जुड़ी फिल्में भारत के प्रॉब्लम्स. पे फिल्में बना रहा हूं मैं। नहीं. राष्ट्रवाद से मेरा मायना ये था जैसे इस. देश में आमतौर पर दो विचारधारा बड़ी मानी. जाती है। एक वामपंथी विचारधारा जिसमें मैं. सेंटर लेफ्ट इंक्लाइंड दोनों लेके चल रहा. हूं। रहा हूं मैं तो खुद ही लेफ्टिस्ट था. तो और एक विचारधारा जो राइट साइड वाली. होती है तो जो सब्जेक्ट आपके हैं वो राइट. साइड वाले उन विषयों को उठाते रहते हैं।. चाहे वो शास्त्री जी का सब्जेक्ट हो, बंगाल का सब्जेक्ट हो, कश्मीर का सब्जेक्ट.
हो वो जो राष्ट्र जो लोग आज देश में अपने. आपको राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित. बनाते हैं वो इन सब्जेक्ट पे ज्यादा बातें. करते हैं। उस कॉन्टेक्स्ट में तो तो इसमें. कोई गलत बात नहीं है। उसमें यानी कोई ये. कोई लांछन नहीं बन सकता है किसी के ऊपर।. नहीं मैं सिर्फ जानना चाह रहा हूं कि ये. मैं देखिए मैं फ्रीडम फाइटर्स का बेटा. हूं। हम्म ओके। तो मैंने देश की और मैं. बड़ा ही हुआ हूं। बहुत राष्ट्रवादी और. साहित्य मेरे नाम के बीच में जो नाम है. रंजन वो रामधारी सिंह दिनकर ने रखा हुआ. है। ठीक है? तो मैं उनकी गोदी में खेला. हूं। मैं बड़ा ही ऐसे लोगों के साथ हुआ.
हूं। मेरा बचपन ही वहां बीता है। तो मैंने. मैंने देश को और मैं छोटे शहर का लड़का. हूं। 21 साल तक मैं अंग्रेजी नहीं बोल. पाता था। ग्वालियर। हां ग्वालियर फिर. भोपाल यूपी के हम लोग मेरे रूट्स यूपी के. हैं। तो मैंने जैसे मिडिल क्लास इंडियन. देसी लोग होते हैं वैसे हम हैं। तो उससे. आप भी और हम में कोई बहुत ज्यादा फर्क. नहीं है एक्चुअली। तो अ तो मैंने उस नजर. से देखा है। पर क्या होता है कि. हिंदुस्तान में जब आप बड़े होते हैं तो एक. कॉम्प्लेक्स के साथ बड़े होते हैं। यू. वांट टू बिलोंग टू अ सर्टेन ग्रुप और वो.
जो ग्रुप है वो सेकुलरिज्म के नाम पे ना. तो सेकुलर है ना लेफ्टिस्ट है। सबसे अधिक. जातपात मैंने देखी यही लोग मानते हैं।. यहीं पे ब्राह्मण जो ब्राह्मणिज्म है वो. सबसे ज्यादा लेफ्टिस्ट लोग ही फॉलो करते. हैं। आप देखिए राइट विंग वाले इतना नहीं. करते हैं। यह उनके ऊपर लांछन लगता है। मैं. सच मैं ब्राह्मण हूं। मैं बता रहा हूं. आपको। और यह जो थोड़ा और डिटेल में सुनना. चाह रहा हूं मैं। इसलिए मैं ऐसा नहीं ये. लेफ्ट आप बताइए सारी कम्युनिस्ट पार्टियों. के सारे जितने बिग विग्स हैं सारे ये.
ब्राह्मण ही तो हैं। नहीं ये भी सच है कि. लेफ्ट आईडियोलॉजी के जो जर्नलिस्ट भी हैं. बड़े वो भी सारे ब्राह्मण ही हैं। और आप. देखिए इनके घरों में आपको छोटी जात वाले. लोगों के लिए छोटियां नहीं वो बोलते हैं।. आपको अलग ग्लास मिलेंगे इनके यहां। ये सब. बहुत मानते हैं ये क्लास और कास्ट को। तो. जो मेरा तजुर्बा नहीं है। मैं मैं आंखों. देखी बात बता रहा हूं। मैं रहा हूं उसके. अंदर। मैं तो आधा नक्सल ही पूरा ही नक्सल. था। मेरे ही घर वालों ने मुझे घर से बाहर. निकाल दिया कि घुसता नहीं घर के अंदर। तो. ये इतनी जो बातें करते हैं ये लोग ये सबसे.
अधिक धर्म के बेसिस पे यही लोग हैं जो. कहते हैं कि ये कम्युनल है वो कम्युनल है।. तो ऐसा नहीं है। लोग अपनी निजी जिंदगी में. जिस वातावरण में बड़े हुए हैं वैसे ही. बिहेव करते हैं। जिन स्कूल कॉलेज में पढ़े. हैं जो संघर्ष किए हैं वैसे बिहेव करते. हैं। आपकी पॉलिटिकल आईडियोलॉजी कुछ और हो. सकती है और आप पॉलिटिशियन है तो आप कुछ भी. बोल सकते हैं क्योंकि आप वोट्स के लिए लड़. रहे हैं। यू आर मार्केटिंग। आप वोट. मार्केट में है तो मेरे साथ यह हुआ कि मैं. और उसके बाद मैं एडवरटाइजिंग में चला गया।. हम जिस वक्त मैं एडवरटाइजिंग में आया वहां.
पे दून स्कूल के लोग पढ़ते थे। ऑक्सफोर्ड. कैमरेज सिर्फ अंग्रेजी और पाइप पीने वाले. लोग थ्री पीस सूट बहुत ही बहुत ही चिप ऑन. द शोल्डर बिज़नेस था वो। हम फिर मैं हार्व. में पढ़ा। फिर यहां आया। तो मैं एक. इनफीरियरिटी से ग्रस्त कि अरे यार यहां. बिलोंग करना है। उसी चक्कर में जब उस. रास्ते पे मैं निकला चलते-चलते सीधे मैं. बॉलीवुड में जब पहुंचा तो अगेन बड़ी. फिल्में बिग स्टार ये वो चॉकलेट एंड नामी. चॉकलेट है देखिए आप गोल तो यू वांटेड टू.
बिलॉन्ग आप भी पांच गाने और. हालांकि मैंने गोल और चॉकलेट अच्छी फिल्म. है मेरे मैं मानता हूं उनको कि वेरी वेल. क्राफ्टेड ब्यूटीफुल फिल्म बहुत गंदा. क्रिटिसाइज किया गया था चॉकलेट को नहीं आप. आपकी नजर है आप जानते मतलब मैं मैं जो कई. लोगों ने उसे वर्स्ट रिमेक कहा था. अंग्रेजी फिल्म का हां कहा होगा रीमेक उस. वक्त सभी फिल्में रीमेक ही थी। उस वक्त. अलाउड ही नहीं था उस बिना रीमेक के। यानी. हीरो को साइन करना है तो पहले आपको डीवीडी. दिखानी पड़ती थी। ये जितने लोग बड़ी-बड़ी. बातें करते हैं ये सब वही किया हुआ है। आप.
जिन लोगों की बात करते हैं जो मुझे. क्रिटिसाइज करते हैं उन सब ने वही फिल्में. बनाई हुई हैं। तो ये वो हमाम है जिसमें सब. नंगे हैं। तो इसमें ज्यादा बहस करने की. जरूरत नहीं है। कोई म्यूजिक डायरेक्टर. बोले 80 और 90 के दशक का या 2000 के दशक. का कि नहीं साहब मैं तो ओरिजिनल गाने. बनाता था। तो उसने कहा यार ठीक है। जो. बोलना है बोलो लेकिन झूठ अब तो सारा. YouTube पे पड़ा है किस हां तो सब ये सब. बकवास है मैं मैं मेरी पहली फिल्म थी. नसीरुद्दीन शाह के साथ हम और उसका नाम था. आरम जो बोफर्स के ऊपर मैं बना रहा था फिर.
उसका फाइनेंस लास्ट मिनट पे भाग गया वो. मेरी पहली फिल्म थी अगर वो हो गई होती तो. शायद मैं उसी डर्रे की फिल्में जो अभी बना. रहा हूं उसी उसमें चलता लेकिन जब आपके पास. खाने को पैसा नहीं होता आपका बच्चा पैदा. हुआ है और उसी दिन आपकी फिल्म बंद हो गई. है और अब आपको यह नहीं पता है बंबई जैसे. शहर में आप कहां रहेंगे टीचर के बेटे हो. आपको यह भी नहीं पता गेम खेला कैसे जाए? तो आप बनाते हैं। कहते हैं बड़ी हॉट हूं. मैं। मम्मी को नहीं है पता। हां। तो तो आप. आप वो बनाते हैं। क्यों? क्योंकि आप. स्ट्रगल कर रहे हैं। एक्टर्स के लिए कोई. नहीं मिल रहा। सडनली आपको एक कोई बहुत. बड़ा स्टार मिल जाता है और आप वो कहता है.
यार ये फिल्म देखी इंग्लिश की बहुत अच्छी. थी यार। ये बना। आपने कहा अरे कल क्यों? आज बनाते हैं और आपकी फिल्म 15 दिन में. शुरू हो जाती है। तो इट कट्स शॉट योर दिस. थिंग। बट सुबह का भूला शाम को घर आता है।. अगर आप इंटीग्र इंटेग्रिटी वाले लोग आदमी. हैं तो। तो मैंने जब ये दो तीन फिल्में. बनाई तो मुझे मुझे ये समझ में आ गया कि ये. दिस इज नॉट माय सॉन्ग. और मैंने फिर छोड़ दिया। ऐसा नहीं है कि. मैं एकदम चेंज हो गया। छोड़ दिया। फिर मैं.
पढ़ाने लगा, लेख लिखने लगा। कुछ-कुछ करने. लगा अपना और कुछ ऐसी नियति हुई कि 2010. में मैं आईएसबी में कोर्स कर रहा था। आई. एम बुद्धा के नाम से। और वह आई एम बुद्धा. का मतलब यहां बुद्ध गौतम बुद्धा से नहीं. है। आई एम बुद्धा का मतलब एनीबडी हु बुद्ध. बुद्धि जानते हैं आप जिसको आईडिया है जो. क्रिएटिवली एनलाइट है सीईओस का कोर्स था. तो वहां से वो एक डॉक्यूमेंट्री बना रहे. थे तो मैं कीड़ा तो था ही फिल्म का मैंने. कहा डॉक्यूमेंट्री क्यों बनाते हो फिल्म. बनाओ और करते-करते बुद्धाना अ ट्रैफिक जैम.
बन गई। फिर बुद्धाना अ ट्रैफिक जैम अटक. गई। तो मैंने यह डिसाइड किया दो तरीके हैं. जिंदगी जीने के। इदर यू कैन स्पेंड योर. लाइफ इंप्रेसिंग अदर्स और यू कैन स्पेंड. योर लाइफ एक्सप्रेसिंग योरसेल्फ। तो 2010. में मेरा पुनर्जन्म हुआ और मैंने कहा नाउ. आई विल एक्सप्रेस मायसेल्फ। और जो मैं. बोलना चालू किया मैंने वहीं से किया। अब. मैं जो चाहता हूं वो लिखता हूं। जो चाहता. हूं जो बोलता हूं और जो चाहता हूं वो. बनाता हूं। ये मेरी फील्ड है। यहां पे कोई. बॉलर नहीं है। मैं ही बैट्समैन हूं। एक. बॉल आ रही है। मैं जैसे चाहूं मारता हूं।.
जब जो होता है। तो दैट्स व्हाट आई एम. डूइंग। तो मैंने आपको बता दिया पहले मैं. वो फिल्में बना रहा था जो लोग सुनना चाहते. थे। अब फिल्में मैं वो बना रहा हूं जो मैं. चाहता हूं लोग सुने। ठीक है? एक कॉमन पर्स. मैं कई सारे लोगों को सुनता रहता हूं। मैं. पीयूष मिश्रा जी को एक दिन सुन रहा था। एक. पडकास्ट एक इंटरव्यू में सुन रहा था। तो. वो भी पहले वामपंथी विचारधारा से बड़े. इन्फ्लुएंस थे। और वो उन्होंने कहा कि. मैंने अपना आधी जिंदगी वहां गुजारी। फिर. मुझे लगता है मैंने बर्बाद कर दिया। ना. कुछ कमाया ना कुछ किया। अभी आपने खुद. जिक्र किया कि आप लेफ्ट आईडियोलॉजी से.
बड़े इन्फ्लुएंस थे और आपके घरवाले भी. आपसे तौबा तौबा कर रहे थे। तो ये पीयूष. मिश्रा या विवेक अग्निहोत्री जैसे लोग एक. आम सवाल अब मेरे मन में आ रहा है कि इनका. हृदय परिवर्तन कैसे हो गया? क्योंकि 2014. में देश भी परिवर्तन हुआ। काफी चीजें. बदली।. ये आप लोग कैसे शिफ्ट हो गए? क्योंकि आप. लोग हार्ड कोर वामपंथी थे और सडनली अब आप. लोग एक्सट्रीमली राइट हो गए हैं। नहीं ये. देखिए मेरा तो क्रोनल पीयूष जी का मैं. जानता हूं 2014 से कोई लेना देना नहीं है।. यानी मुझे मैं जानता हूं इस बात को लोग और.
मेरा भी कोई लेना देना नहीं 2014 से। हुआ. ये कि 2010 में मैंने आपको बताया मेरी तो. फिल्म की डेट है सेंसर अप्रूव्ड तो उसमें. कोई ऐसी बात नहीं है। तो तब तो कोई 2010. में कल्पना भी नहीं कर सकता था कि ऐसा कुछ. होगा। कोई सरकार आएगी या ये होगा वो होगा।. मैं लाइमलाइट में इसलिए आ गया और लोगों एक. एक वैचारिक रूप से एक लेटर बनाया बॉलीवुड. के लोगों ने कि नरेंद्र मोदी जी को प्राइम. मिनिस्टर बनने से रोकना है। हम. तो मेरे दिमाग में तब यह विचार आया कि.
क्यों रोकना है? किसी को भी क्यों रोकना. है? अगर उसका मौलिक अधिकार है। कोई भी जो. आदमी है इलेक्शन में खड़ा हो बशर्ते वो. लीगल है। और अगर वो लीगल है तो हम कौन. होते हैं किसी को रोकने वाले? भारत के 140 करोड़ लोगों के बिहाफ पर. बॉलीवुड के चंद मुट्ठी भर लोग कैसे डिसाइड. कर सकते हैं किसको खड़े होना चाहिए और. नहीं और हम इनफ्लुएंस करते हैं लोगों को।. हमारी आवाज देख के लोग फैशन करते हैं। लोग. बाल कटवाते हैं, लोग कपड़े पहनते हैं। लोग. उस बात को सोचते हैं और लोगों के दिमाग. में ये धारणा है कि ये क्रिएटिव लोग हैं।.
जब उसमें बड़े नाम जुड़ते हैं तो लोग ऐसा. मानते हैं कि शायद इसमें कोई बात है। तो. आप बिना बात के एक डाउट क्रिएट कर रहे. हैं। अगर आपको इतना प्रतिरोध है तो आप उतर. के खुद लड़िए।. आ जाइए राजनीति में। देवानंद साहब को था।. वो आए राजनीति में उतरे। उन्होंने पार्टी. बनाई।. जिसजिस को था वो राजनीति में उतरा। लेकिन. आप पीछे से बैठ के वार करें। तो मैंने कहा. भाई मैं तो इसके अगेंस्ट हूं और मैंने. बोला उसके कि यह गलत काम है इसके अगेंस्ट.
हूं। उस चक्कर में फिर इन लोगों ने चालू. किया बोलना कि अरे ये तो जरूर राइट विंक. है। मैं तो कभी संघ की शाखा में नहीं गया।. मेरा कोई लेना देना नहीं उससे और हां मेरे. मां-बाप जो थे वो दोनों फ्रीडम फाइटर थे।. दोनों जेल में रहे सालों सालों।. शादी के तीन महीने बाद मेरी मां 17 साल की. थी। जेल चली गई। कहीं दो-ती साल तक जेल. में ही रहे वो लोग अलग-अलग कहीं एक वर्धा. नागपुर जेल में एक कोलकाता कहीं उस एरिया. में यूपी में तो मैं उस हिसाब से राइट ही. विंग हूं नहीं फ्रीडम फाइटर्स चाहे राइट.
ही विंग हो सकता है सेंटर हो सकता है. लेफ्ट हो नहीं राइट विंग का मतलब ये है कि. आप नेशनलिस्ट हैं प्राइमरीली पहली तो वहीं. से शुरुआत होती है ना आप तो नहीं भी रहे. हो ऐसा नहीं है लेकिन मेरी तो सोच देश के. ही साथ जुड़ी हुई है अगर आपके देश की. पॉलिटिक्स चेंज हुई और ऑब्वियसली मैं. डेफिनेटली सेकुलरिज्म के अगेंस्ट था। ओके? तो जब आप एंटीसेकुलरिज्म हैं तो लोग आपको. वहां लेबल करेंगे ही। और जिस दौर में हम. जी रहे हैं वहां पे सेंटर नाम की कोई चीज.
है नहीं। राइट? पूरे वर्ल्ड में ही नहीं. बची है तो और कहां घरों में ही नहीं है. सेंटर तो आज की तारीख में आप कहां जाएंगे? तो तो इसलिए ये सवाल उठ सकता है और मुझे. कोई उसको लेके कोई अपोलॉजी अभी भी मैं. समझना समझ नहीं पाया पूरी तरह से कि एक. होता है ना कि ये हिटिंग मूवमेंट था कि. मुझे लगा यार ये जैसे पीयूष मिश्रा ने कहा. कि मैं अपने कमाता था सारे पैसे दे दिया. करता था फिर मुझे रियलाइज हुआ उधर ऐश हो. रही है मैं अपनी लाइफ बर्बाद कर रहा हूं. मुझे लगा भाई मैं जीता हूं एंड उन्होंने. अपने को चेंज कर लिया कि अब ये विचारधारा. जो है ये बातें ज्यादा है ये वो नहीं है. जो मैं सोच रहा था हां मेरा ये मूवमेंट.
समझ लीजिए 2010 के आसपास आया है ऐसा हम तो. कुछ एक होता है ना हिट करता है यार. रियलाइजेशन होता है कि इसलिए इसलिए हम इधर. के नहीं इधर के थे। हां क्योंकि आप बिलोंग. करते हैं किसी जगह में जैसे आप शराब पीते. हैं ना जब नए बच्चे होते हैं आपको शराब. पीते हैं लेकिन सडनली यू रियलाइज कि यार. ये शराब से तो मुझे कुछ फायदा नहीं हो रहा. है। इतना ग्लोरिफाई किया गया था। सारे. दोस्तों ने कहा था बड़ा मजा आता है। इसके. बाद मुझे तो नहीं आ रहा है। तो इसी तरह से. आई कुड सी द हिपोक्रेसी। मैंने आपको बताया. ना जो लोग अब मुझे एक बात बताइए कि ये. लेफ्टिस्ट लोग इनकी तो पूरी आईडियोलॉजी जो. है वो एक कॉमन पुअर मैन के साथ जुड़ी हुई.
है। हम और सारे लेफ्टिस्ट लोग 100-100. करोड़ के बंगलों में क्यों रहते हैं? राइट? तो यानी हिपोक्रेसी इस लेवल की है. कि आप सोच ही नहीं सकते। मैंने अपनी आंखों. से जब इतने करीब से देखा तो मैंने एक आदमी. अच्छी बातें करता है इसका मतलब यह नहीं कि. वो अच्छा आदमी हो सकता है। ये कोई अच्छा. कलाकार है इसका मतलब ये नहीं कि वो अच्छा. आदमी हो। मैं अच्छे आदमी की तलाश कर रहा. था और मेरे को बहुत अच्छे-अच्छे. आईडियोलॉजिस्ट मिल रहे थे। तो वो अच्छा.
आदमी मुझे नहीं मिल रहा था। एंड देन आई. स्टार्टेड ट्रेवलिंग इंडिया। मैं इतना. घुमा हूं। मेरी किताब अर्बन नेक्सल्स. लोगों ने पढ़ी नहीं है। इसलिए समझ जिनने. पढ़ी है वो बोलते हैं। लेकिन जिनने नहीं. पढ़ी है वो क्रिटिसाइज करते हैं। वो मैं. भारत जो घुमा हूं पूरा का पूरा उसके ऊपर. लिखी हुई है।. ओके। एक-एक शहर के ऊपर है वो। और उस शहर. में मैंने क्या देखा वो किताब एक भारत के. मिडिल क्लास स्मॉल टाउन लोगों के बारे में. है। और मैंने जब देखा यह जो व्यक्ति है. इसकी आवाज कोई सुनने को ही तैयार नहीं है।.
सब बड़े लोग बातें कर रहे हैं। आपकी मां. मेरी मां की आवाज कौन सुनता है इस देश. में? उसकी आवाज ही नहीं है। जब आप कहते. हैं भारत के लोग बताइए उसमें क्या वो माओं. को हम लोग शामिल करते हैं? उन बहनों को. शामिल करते हैं। आपके घर में जो लोग काम. करते हैं क्या वह लोग शामिल है उसमें? आपके घर जो बर्तन धोने आती है उसको शामिल. है क्या उसमें? जब हम भारत की आवाज की बात. करते हैं। हम किसकी आवाज की बात कर रहे. हैं? हम तो वही चंद लोग जो टीवी स्टूडियो. में बैठते हैं या फिल्मों में बनाते हैं. या मीडिया में आते हैं जिनके इंटरव्यू.
छपते हैं। हमें लगता है ये देश का ट्रेंड. है। लेकिन देश का ट्रेंड आज की तारीख में. क्या है? ये कौन जानता है? तो वो जो है. आवाज और चूंकि मैं उस घर से आया हूं। आप. भी एक मिडिल क्लास स्मॉल टाउन के लड़के. हैं। कहीं ना कहीं आपकी उम्र आएगी। 40 45. साल में आदमी थोड़ा मिडिल एज में आके. थोड़ा हिलता है। तो जब बच्चे भी होने लगते. हैं तो आपको लगता है ये बच्चे किसके बच्चे. हैं? क्या ये भी कल को बड़े हो के कहेंगे. मेरे पिताजी भी हिपोक्रेट हैं। बातें. बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन उतरते ही साथ. ड्राइवर को चार गालियां देते हैं और ये. करते हैं। एंड दैट स्टार्टेड चेंजिंग मी।.
तो कहीं शायद मैं अपने रूट्स में वापस. जाने लगा। एंड दैट्स हाउ आई सेड आई मेरा. कंक्लूजन इसमें ये आ रहा है कि अगर. वामपंथी लोग देश भर घूमने लगे तो उनकी. विचारधारा बदल जाएगी। ऐसा मुझे विक्रांत. मैसी ने भी कहा था। मैंने विक्रांत मैसी. का इंटरव्यू किया तो मैंने पूछा भाई तुम. तो एक्सट्रीम लेफ्ट थे राइट कैसे हो गए? तो ही सेड यार मैंने देश भर ट्रेवल किया।. ऑफकोर्स आप भारत को घूमेंगे ना तो आपके. पास ऑप्शन ही बदल गया। ऑप्शन ही नहीं. बचेगा आपके पास। विक्रांत मासी ने इसी. कुर्सी पे बैठ के कहा था कि जब मैं पूरा. भारत घूमा तो मुझे रियलाइज हुआ कि जिन.
चीजों को मैं गलत मान रहा था वो गलत नहीं. थी उतनी। मेरी किताब अर्बन नेक्सल में एक. लाइन है दैट पीपल कम टू इंडिया विद. क्वेश्चंस एंड गो बैक विद आंसर्स। दैट्स. व्हाट इंडिया इज। और ये सत्य बात है। कुछ. ऐसी मिस्टिक बात है इस देश के अंदर आप. देखो क्या है प्यार एक ऐसी चीज है ना वो. दुनिया की हर चीज को काट देती है। प्यार. की ताकत। और मैंने देखा है लोगों में घरों. में आप एक छोटे गरीब मिडिल क्लास घर में. जाइए। वहां आप देखिए माएं कितना प्यार. करती है। दोस्त की मां होगी। किसी की आप. चलिए मुझे अपने घर ले जाइए। आपकी मां ना.
प्यार करे। में मुझे मैं शर्त लगा सकता. हूं। शर्त लगा सकता हूं। लेकिन सम्मान. मिलेगा आपको। सही बात है। लेकिन आप एक. अच्छे लेफ्टिस्ट के घर जाइए। लेफ्टिस्ट. मतलब जो वक्ता हैं लेफ्टिस्ट आईडियोलॉजी. के तो पहले आपके जूते देखे जाएंगे। आपकी. शक्ल देखी जाएगी। आपका ओहदा, आपकी औकात. देखी जाएगी और उसके बाद आपको जज करके. कितना प्यार बांटना है, ये तय किया जाएगा।. ये मैंने अपनी ये मेरा अनुभव है। मैं ये. नहीं कह रहा हूं सब ऐसा ही होगा। पर ये. मेरा अनुभव है। ठीक है। एक क्योंकि. बॉलीवुड का क्वेश्चन आपने जिक्र कर दिया. था तो मैं क्योंकि बॉयकॉट बॉलीवुड ने शुरू.
किया था। अभी तो देश में बॉयकॉट बॉलीवुड. चलता है। बट क्या मैं ये कह सकता हूं कि. बॉलीवुड का अपना दीन ईमान नहीं है और जिधर. वजन उधर वजन है। क्योंकि आज जो लोग बॉयकॉट. कर रहे थे वो लाइन लगाकर मिलने जाते हैं।. सारी तस्वीरें आती हैं। मैंने देखा है कि. पूरा पूरी फैमिली आती है। मैं किसी एक. फैमिली को या किसी एक व्यक्ति को कोट नहीं. करूंगा। बट उन्हीं प्रधानमंत्री को लेकर. जिनको आप कह रहे थे कि बॉयकॉट मुहिम चलाई. गई थी। उन्हीं बड़े परिवारों के लोग आज. कतार में लग के मिल रहे हैं, बातें कर रहे. हैं, तारीफें कर रहे हैं। हर एक इवेंट पे.
पोस्ट कर रहे हैं। हर जगह मौजूद है। होली, दिवाली, दशहरा सब कुछ ट्वीट कर रहे हैं।. पोस्ट कर रहे हैं। सो ये जिधर वजन उधर भजन. पर ये शुभांकर ऐसा नहीं लगता ये सवाल तो. बहुत सारे लोगों से पूछा जा सकता है।. सिर्फ बॉलीवुड वालों से क्यों? बिल्कुल. सही बात। यह सवाल तो इंडस्ट्रलिस्ट लोगों. से कोई क्यों नहीं पूछता मीडिया वालों से. भी तो पूछा जाता 100% 200% लेकिन क्योंकि. आपने अभी कोट किया ना कि बॉयकॉट की बात. चली थी जहां से आपका ट्रेंड चेंज हुआ तो. उस कांटेक्ट से मैंने ये बात पूछ ली. क्योंकि मुझे जब आप वो बात कह रहे थे तो. मुझे ये तस्वीर याद आ रही थी अभी हाल. फिलहाल वाली कि वक्त बदल गया जज्बात बदल.
गया हालात बदल गए एक आदमी को लेकर तो. बदलता ही है वक्त तो बदलता ही है और देखिए. ऐसा है कि अल्टीमेटली हर चीज धंधा ही है. धंधा ही है हर चीज धंधा है तो आदमी कब तक. अम्मी जान सही कहा करती थी तो कब तक कब तक. लड़ेगा आदमी तूफान से तो लेकिन लेकिन. सिर्फ बॉलीवुड को चुन के लाना भी सही नहीं. है। अब जिसको जितनी शोहरत मिलती है सवाल. भी उसी पे खड़े होते हैं। नहीं शहरत तो. देखिए आजकल मीडिया वालों को भी बहुत मिलती. है। इंडस्ट्रिस्ट लोगों को भी बहुत मिलती. है। क्रिकेटर्स को भी मिलती है। और सवाल.
ये नहीं सवाल ये पूछा जाना चाहिए कि लोग. घरों में बैठ के गाली क्यों देते हैं? और. बाहर जाकर तस्वीरें क्यों खिंचवाते हैं? जैसे कि समर्थक हैं। सवाल वो है किसी मैं. कहता हूं जर्नलिस्ट लोगों को इस पे शोध. करना चाहिए। ये जो हिपोक्रेसी है इसको. तोड़ना चाहिए। आपने क्यों जर्नलिज्म नहीं. किया? एमसी पढ़ाई तो आपने भी की थी। ये. मैं जर्नलिज्म ही कर रहा हूं। जो चीज. जर्नलिस्ट नहीं कर पाए वो मैं कर रहा हूं।. तो मैं फिल्मों के जरिए कर रहा हूं। वो. लोग नहीं कर रहे हैं तो मैं कर रहा हूं।. ये मैं जर्नलिज्म ही है। ये कश्मीर का काम. उन्हें कर बंगाल पे जो मैं काम कर रहा. हूं। 4 साल 5 साल हो गए हमें करते हुए। वो.
काम जर्नलिस्ट लोगों को करना चाहिए था। हम. कर रहे हैं। फिल्म आएगी आप देखिएगा। ये. काम हमें हमें हम कर रहे हैं उस काम को।. क्यों लिखा आपने? कश्मीर ने हर्ट किया था. तो यह हंट करेगा। क्या ऐसा है? मैं ऊपर. ऊपर समझ नहीं तो पिक्चर देख कर आएंगे लोग. लेकिन ऊपर ऊपर क्या ऐसा जिसको लेकर आप कह. रहे हो कि कश्मीर ने हर्ट किया था यह ह्ट. कर देगा. देखिए मैं दिल से फिल्में बनाता हूं और. दिल से ही बोलता हूं मैं सोच ज्यादा सोचता. नहीं हूं उस विषय में मैं जब गया वहां पे. रिसर्च करने के लिए बंगाल में मैं 104 107. 102 साल के जो डायरेक्ट एक्शन डे के.
सर्वाइवर्स हैं 30-40 ही हैं। दो-तीन लोग. की मृत्यु भी हो गई अभी। अ उनके जो मैंने. इंटरव्यूज किए और जो हालात समझा मैं. डायरेक्ट एक्शन डे क्यों हुआ था? क्या. नहीं हुआ था और जो हमने पढ़ा भी है तमाम. किताबें और वो सब तो जो हालात उस वक्त थे. नोवा खली जेनोसाइड जो जिस कारण से हुआ जिस. कारण से बांग्ला देखिए यहां थोड़ा गहराई. की बात है तो इसको हल्के में नहीं कर सकते. आपसे मैं एक सवाल पूछता हूं इम्तिहान नहीं. ले रहा हूं ऐसे ही पूछ रहा हूं जब मैं.
बोलता हूं पार्टीशन तो आप सबसे पहली इमेज. आपके दिमाग में क्या आती है दंग के फसाद. लड़ाई झगड़े ट्रेन में लोग आ रहे हैं एक. दूसरे को मारा जा रहा है ट्रेन में मरे. हुए लोग आ रहे हैं और पंजाब दिखता है हम. कभी बंगाल क्यों नहीं दिखता जबकि भारत के. पार्टीशन की जड़ तो सारी बंगाल में बंगाल. ही थी सही बात है बंगाल बंगाल एकमात्र ऐसी. स्टेट है जिसका तीन बार पार्टीशन हो चुका. है और चौथी बार फिर होगा 1905 में सबसे. पहला हुआ 1947 में दूसरा हुआ 1971 में हुआ. और एक और होने वाला है उसका होगा अगर हमने.
रोका नहीं अभी उसको तो इसलिए ये फिल्म. बनाई है तो जो हालात बंगाल में जिस कारण. से पार्टीशन डायरेक्ट एक्शन डे कोक में. इसीलिए तो हुआ बिकॉज़ मुस्लिम लीग को बंगाल. चाहिए था। पंजाब के कारण थोड़ी हुआ. डायरेक्ट एक्शन डे। हम मतलब वहां पे उनकी. सरकार थी। वो पावरफुल थे। नहीं इसलिए नहीं. हुआ। इसलिए नहीं हुआ बिकॉज़ भाई सबसे रईस. जगह थी। सबसे कल्चरली सबसे एडवांस जगह थी।. इंडस्ट्रियलिस्ट सबसे एडवांस थी।. फाइनशियली सबसे एडवांस थी। एक स्पिरिचुअल. सेंटर था इंडिया का। एंड इट्स अ लाइक. बंगाल का कंट्रीब्यूशन कोई कल्पना भी नहीं.
कर सकता कितना बड़ा है हिंदुस्तान की. हिस्ट्री में। तो इसलिए बंगाल चाहिए था।. नोवा खली। नोवाखली नाम क्या है? हिंदी का. नाम है नया गांव नो आई न्यू और आज कहां है. वो वो एक इस्लामिक कंट्री में है ये सारे. जो है सारे हिंदू सेंटर्स थे लेकिन. धीरेधीरेधी जो अंडरवर था उसको कॉन्ट्रैक्ट. देके धीरे-धीरे वहां की डेमोग्राफी इंच. बाय इंच चेंज की गई और जब बंगाल 47 में. वहां गया पाकिस्तान में तो उन्होंने.
अनाउंस किया कि दिस पार्टीशन इज़ एन. अनफिनिश्ड प्रोजेक्ट और आज आप इंडो. बांग्ला बॉर्डर पे जाइए मैं गया हूं इसलिए. मैं रिसर्च करके आया आपको लगेगा 1946 के. पाकिस्तान में रह रहे हैं। 47 के. पाकिस्तान में आप. कोलकाता के जो मेयर हैं पाकिस्तान का एक. डेलीगेशन आया प्रेस का. बॉबी साहब हैं। उन्होंने ले जा के उनसे. कहा आइए हम आपको कोलकाता में मिनी. पाकिस्तान दिखाते हैं। उन्होंने ले जा के. मिनी पाकिस्तान दिखाया। अगर यकीन नहीं. करते हैं अभी Google कर लीजिए। पाकिस्तान.
के डॉन पेपर में पढ़ लीजिए हेडलाइंस, टाइम्स ऑफ इंडिया में टेलीग्राफ सब जगह. छपा हुआ है ये। उन्होंने मिनी इन. पाकिस्तान दिखाया। ये अभी एक दो साल. पुरानी बात है। बट इस देश में कई इलाके. हैं जहां पर मुस्लिम आबादी घनी है और मैं. पाकिस्तान मैं कई बार जाता हूं तो कई बार. लोग मजाक में छेड़ने में या अपनी एक. विचारधारा में जैसे मैं जूनागढ़ भी गया था. तो वहां पर एक इलाका था जिसमें मुझे मेरे. एक मित्र ने कह दिया कि इस इलाके में. घूमोगे तुम्हें ये एहसास होता है जो. वर्ल्ड आपने कोट किया तो वो हां नहीं नहीं. पर मेयर एक सिटी का मेयर एक पाकिस्तान के. प्रेस डेलीगेशन को ऑफिशियली दिखाने ले जाए.
और कहे देखिए ये मिनी पाकिस्तान है आपका. ये ये तो एक कॉन्स्टिट्यूशनल पोस्ट पे वही. तो मैं आपसे कह रहा हूं। ये तीन शेर में. से एक शेर की ओथ ली है उन्होंने। तो ये. बात सरकार नहीं समझती कि आपको यह बात कहनी. पड़ती थी। यही तो मुझे आश्चर्य है। यही तो. मुझे आश्चर्य है कि हम कैसे इस पे बैठे. हुए हैं। आज मुर्शिदाबाद में जो कुछ हुआ. है हम राइट? ये आपको लगता है तो वफ तो एक. कारण बन गया। कैटलिस्ट बन गया उसका। वफ का. जो एजिटेशन था उसका कारण बन गया। ये रोज. होता है वहां पे।.
वो रोज होता है। मैं आपको इतनी एक दर्दनाक. बात बताता हूं प्रेजेंट की। आप जाइए बंगाल. में आपको यंग लोग नहीं मिलेंगे। ऐसा नहीं. कि बिल्कुल नहीं मिलेंगे। पर सब अपने. बच्चों को बाहर भेज रहे हैं वहां से। और. यही कश्मीर में हुआ था।. बंगाल में भी सबसे पहले लोगों ने अपनी. बेटियों को भेजना बाहर शुरू कर दिया।. कश्मीर में अपनी बेटियों को पढ़ने जम्मू. भेज देते। आप ये कह रहे हैं बंगाल में. लड़कियां बिल्कुल सेफ नहीं है।. बिल्कुल सेफ नहीं है। ये अतिशयोक्ति हो. जाएगी। आप कह रहे हैं ना? पर हां पर.
पेरेंट्स फील लाइक क्योंकि कश्मीर में जो. बाहर भेजा गया था वहां रीज़न अलग था। सवाल. पेरेंट्स कि आप आपकी लड़कियों को रोका. जाएगा। मर्द जा सकते हैं। लड़कियां रुक. जाएंगी। रेप होगा बलात्कार होगा। आप आप. मुर्शिदाबाद ये बहुत बड़ा स्टेटमेंट है. सर। बड़ा नहीं मैं बड़ा स्टेटमेंट नहीं. है। बिल्कुल सत्य स्टेटमेंट है। आप. मुर्शिदाबाद की किसी हिंदू फैमिली की. लड़की को बुलाइए। हिंदू के मैं तो आप. मुस्लिम कुछ मुस्लिम लड़कियों को भी बुला. लीजिए। आप उनसे बात करिए ना पडकास्ट में. बैठ के। वो जवाब देंगे आपको। एट्रेंडम. किसी को भी बुलाइए। सो यू सेइंग देयर इज. नो डेमोक्रेसी इन वेस्ट बंगाल। वेस्ट. बंगाल में दो कॉन्स्टिट्यूशन है। एक.
हिंदुओं का, एक मुस्लिम्स का।. दो कॉन्स्टिट्यूशन है वेस्ट थोड़ा इसे. एक्सप्लेन करेंगे आप देखिए ऐसा पर उसके. लिए फिर आपको समझाना पड़ेगा मुझे क्योंकि. ये हां मैं मैं सुन रहा हूं पॉडकास्ट का. फायदा यही होता है हां तो यानी लोग भी. समझेंगे इस बात को बंगाल की पॉलिटिक्स को. समझने की कोशिश करिए. 1946 में जब डायरेक्ट एक्शन डे हुआ तो. जिन्ना ने ये अनाउंस किया कि या तो अब. डिवाइडेड इंडिया होगा या डिस्ट्रॉयड. इंडिया होगा हम करेक्ट और रमजान के 16वें.
दिन में जो कि आठवें दिन में जो कि 16. अगस्त को पड़ा वो बैटल ऑफ भद्र का दिन था. और उस दिन उन्होंने कहा डायरेक्ट एक्शन डे. होगा। बैटल ऑफ भद्र मतलब जिस दिन इन लोगों. ने काफिरों को हराया था 313 लोगों ने।. चार दिन के अंदर 400 लोग मारे गए। जिनमें. मूलता अधिकतर सारे हिंदू थे। इसलिए सोहरा. वर्दी का नाम पड़ा बुचर ऑफ बंगाल जो वहां. का चीफ मिनिस्टर था। अब ये कैसे हुआ? 4ज़.
लोगों को मारना आसान बात है क्या? पूरा. होलो कॉस्ट इसलिए तो फेल हो गया. अल्टीमेटली जाके कि लाखों लाखों लोगों को. मारे कैसे? 4ज़ लोगों को कौन मारेगा? आपको. लगता है कोई मुस्लिम मिडिल क्लास का आदमी. जो है वो तलवार लेके लोगों को मारने निकल. जाएगा कोई टीचर. या कोई बेचारा प्लमबर है तो जब मारने निकल. जाएगा तो किसको इन्होंने ठेका दिया अंडरवर. के लोगों को जो वहां का माफिया था बहुत. अंडरवर्ड वहां तब भी था। जेब कतरे चोर. उचक्के ये जितने लोग थे और वो चलाती थी. पूरी मुस्लिम लोग उसको मुस्लिम लीग ने.
ठेका दे दिया उन लोगों ने लोगों को मारा. मुस्लिम लीग के जो यूथ विंग था मुस्लिम. गार्ड्स जो उनके जो गार्ड्स थे वो लोग उतर. आए पुलिस ने उनका साथ दिया. इसलिए 400 लोग मारे गए।. फिर गोपाल पाठा जैसे लोग जो थे उन्होंने. खड़े हुए और उन लोगों ने आकर फिर हिंदुओं. को बचाया और अल्टीमेटली इन लोगों को. सरेंडर करना पड़ा और उसका बदला लेने के. लिए उन्होंने नुवाखली में जेनोसाइड किया।. तो जब भारत आजाद हुआ तो ये पूरी जो गुंडा.
फोर्स थी गुंडों की टोली अंडर वर्ल्ड. जिसको हम बोलते हैं ये कहां जाती है इसको. चस खून लग चुका था ब्लड लग चुका था. पॉलिटिक्स का ये पूरी की पूरी ऑन मास. कांग्रेस के साथ निगोशिएट करके कांग्रेस. में शामिल हो गई और सारा जो क्या बोलते. हैं उसको प्रांत लेवल पे जो डिस्ट्रिक्ट. लेवल पे बूथ लेवल पे वो सारी पॉलिटिक्स जो. है अब उनको टोलीबाज बोलते हैं ये सारी. गुंडों के हाथ में चली गई गुंडों ऑन रेंट. समझ लीजिए लीजिए कांग्रेस से जब. कम्युनिस्ट लोग आ गए तो ऑन मास ये सारे.
गुंडे वहां शामिल हो गए. और जब वहां से वो टीएमसी आई तो सारे गुंडे. यहां शामिल हो गए।. टीएमसी 90% तो गुंडों की पार्टी है।. अब ये बोलकर आप एक्सपेक्ट करोगे कि ममता. दीदी आपको मैं नहीं कह रहा हूं। रिलीज. करने नहीं मैं नहीं कह रहा हूं। सुप्रीम. कोर्ट ने अभी दो दिन पहले बोला है। नहीं. वो तो फटकार लगाई। वहां की पुलिस को भी. लगाई थी कि उन्होंने ढंग से काम नहीं. किया। नहीं नहीं अभी उन्होंने बोला है कि. देखिए आप ये टीएमसी के लोग हिंदुओं को. मारते हैं। टीएमसी असॉल्ट ऑन क्या कमिंग. डाउन हैवली ऑन टीएमसी वर्कर्स फॉर.
वायलेंटली टारगेटिंग हिंदू फैमिलीज एंड. देयर वीमेन फॉर सपोर्टिंग बीजेपी ड्यूरिंग. द 2021 असेंबली इलेक्शन सुप्रीम कोर्ट ने. फटकार लगाई है। फटकार लगाई होगी कुछ. इंसिडेंट पर्टिकुलर इंसिडेंट को दिमाग में. रखते हुए कितने बात कही गई होगी। लेकिन. आपने डायरेक्टली कोट किया कि 90% टीएमसी. वाले 90% देखिए मैं कोई ऐसा मैं. स्टैटिस्टिशियन नहीं हूं पर एक मैनर ऑफ़. स्पीच है। कहने का मतलब ये है भ ये तो. टीएमसी वाले भी जानते हैं तो बच्चा बच्चा. जानता है। बंगाल की पॉलिटिक्स हिंसा. हिंसावादी हमेशा से ऐसा लगता है कमल से. पढ़ती है किल वायलेंस हमेशा खून खराबा रहा. है। कोई भी सरकार रही हो कैसा भी रहा हो।.
आप बताइए फांसी पे लटके हुए लोगों की. पेड़ों पे दो इमेजेस एज अ फिल्म मेकर अगर. कोई बोले आंख बंद करके अच्छा दो इमेजेस. बताओ कौन सी आती हैं? एक आपको याद होगा. कुछ कई कुछ साल पहले कांग्रेस के वक्त में. फार्मर्स इन महाराष्ट्र जो लटके रहते थे. पेड़ों पे और दूसरी आपको लड़कियां और आदमी. बंगाल में पेड़ों पर लटके हुए मिलेंगे. फांसियों में. बंगाल. इतनी ज्यादा कम्युनल जगह है कि पेपरों में. क्या बंगाली पेपरों में आता है हम पढ़ते.
नहीं है किसी को पता नहीं चलता है कभी कुछ. नेशनल न्यूज़ हो जाती है तो आ जाती है खबर. इलेक्शन के वक्त में थोड़ी ज्यादा हाईलाइट. हो जाती है लेकिन वो है वायलेंट जगह। तो. इसकी इसकी रिसर्च आपने कैसे की है? इसकी. रिसर्च और इसकी शूटिंग कहां की है फिल्म. की? बंगाल में की है या बाहर की है? बंगाल. में करना चाहते थे लेकिन संभव नहीं हो. पाया। मैं सब मेरे साथ तो थोड़ा हमारा एक. कोर्ट केस भी चल रहा है ममता जी के साथ।. पता नहीं किस लेवल पे। आपको लगता है रिलीज़. होगी फिल्म बंगाल में। अरे बंगाल अब देखिए. मैंने कहा था ना दो कॉन्स्टिट्यूशन है।.
ऐसा सवाल हम करते ही क्यों हैं? अगर एक. कॉन्स्टिट्यूशन है तो कैसे नहीं होगी. बंगाल में? अरे इस देश में सर इस देश में. सरकारों को कोई भी सरकार हो जिसको समझ में. नहीं आता वो आज आज़ादी के बाद से ही वो. अपने-अपने हिसाब से फिल्में बैन करती रहती. हैं। हां तो कि जिनका एजेंडे को सूट करता. है वो रिलीज़ होती है। जिनको नहीं होता वो. नहीं होती है। या आप किसी भी स्टेट में. चले जाओ ये मैं जनरलाइज़ स्टेटमेंट दे रहा. हूं। हां पर पता नहीं उनका अभी तक किससे. पाला पड़ा है। पर मेरी फिल्म को अगर कोई. बैन करेगा सीबीएफसी के सर्टिफिकेट के. बावजूद तो मेरे लिए तो ये फिल्म अब मैंने.
मैं रण में उतर चुका हूं। चैलेंज कर रहे. हैं ममता दीदी को आप। ममता दी नहीं मैं. मैं मैं खुद को ही चैलेंज कर रहा हूं कि. कैसे कोई एक सत्य की आवाज को दबा सकता है. वो मैं भी टेस्ट करना चाहता हूं और अगर. ऐसा है तो फिर. थोड़ी निराशा वाली बात है इस देश के लिए. बट वो जैसे जैसे आपकी फिल्म आएगी जब ये. ट्रेलर रिलीज होगा आई एम श्योर कमेंट. सेक्शन से लेकर सोशल मीडिया पर हर जगह. शुरू हो जाएगा कि प्रोपगेंडा फिल्म है. उन्हें बदनाम करने की फिल्म है। ममता दीदी. जो है वो डेमोक्रेटिक तरीके से चुनी गई.
हैं। इस बार तो ज्यादा सीटें आई थी उनकी।. उनके हिस्ट्री की सबसे ज़्यादा सीटें इस. बार वह लेकर आई थीं और एक चुनी हुई सरकार. को आप तानाशाह कह रहे हो, गुंडों की. पार्टी कह रहे हो। कुछ एक इंसिडेंट को. उठाकर मैंने तानाशाह नहीं बोला। मैंने. गुंडों की पार्टी है। ये मैं खुल के बोलता. हूं। मुझे कोई डर नहीं है इस बात में कहने. में। जो घटनाओं का जिक्र आप कर रहे हो।. जिस दो कॉन्स्टिट्यूशन की बात कर रहे हो. वो तानाशाही की तरफ ही जाता है कि दो. नजरिए से देखा जा रहा है। नहीं मैं. तानाशाह शब्द को नहीं यूज करूंगा। एज अ. वेरी करप्टेड वर्ड पर हां. दो कॉन्स्टिट्यूशन चलते हैं बंगाल में और.
हमारा दुर्भाग्य है कि हम उसे रोक नहीं. पाते हैं और इसीलिए मैंने ये फिल्म से ये. आवाज उठाई है। मैं जानता हूं मैं मैं. देखिए मुझे कोई शौक नहीं मेरे भी बच्चे. हैं मेरा भी घर है और मैं आज अभी चाहूं तो. फिर से कमर्शियल फिल्में बनाऊं तो जिंदगी. आप जानते हैं कितनी हसीन हो जाती है और. वाकई में वो जिंदगी बहुत अच्छी भी है।. क्या करना आपको दुनिया भाड़ आग लगे दुनिया. में। आप मौज करिए। सबको आराम नहीं चाहिए. होता है ना। कुछ लोग कुछ लोगों को मजा. आया। हां यहां पे तो ना तो पैसा है ना कुछ. है। स्ट्रेस इतना ज्यादा है। लेकिन ये तो.
मैं मैं आप मैं एक बात कहना चाहता हूं।. लोग तमाम तमाम बात करते हैं। प्रोपेगेंडा. है। आप करके बताइए ऐसा प्रोपेगेंडा।. आज मैंने जब बुद्धाना ट्रैफिक जब बनाई. सारे लेफ्टिस्ट मेरी जान के पीछे पड़ गए।. आज तक मेरे को चैन से जीने नहीं देते हैं।. जाधवपुर में मेरा कंधा तोड़ा गया था किसी. और का नहीं। राइट? आज भी मैं पूरी तरह से. एक्सरसाइज नहीं कर पाता हूं। उठा के फुल. यह वाला लेफ्ट हैंड।. जब मैंने वो बनाई द ताशकंद फाइल्स. कांग्रेस ने मेरे ऊपर इतने केस कर दिए उठा. के राइट और आज तक मेरे को गाली देते मेरा.
उनसे कोई लेना देना भी नहीं है मेरा उनसे. क्या लेना देना है कांग्रेस से और लाल. बहादुर शास्त्री तो कांग्रेस के ही प्राइम. मिनिस्टर थे अगर उन्हीं की मौत का सत्य. पता चले तो कांग्रेस को खुश होना चाहिए इस. बात से उस टाइम तो पूरा देश ही कांग्रेस. था लगभग हां तो वो वो क्यों गुस्सा है. मुझसे फिर मैंने कश्मीर फाइल्स बनाई तो आप. देख रहे हैं लोग खड़े हुए हैं यानी मैं. मैं अपने बच्चों के साथ पिछले तीन साल से. एक साथ कहीं गया नहीं हूं कहीं जाते ही ही. नहीं हम एक गाड़ी में कभी बैठ ही नहीं. सकते हैं। तो मैं घिरा ही रहता हूं। तो. मेरे ऊपर सारे इस्लामिस्ट लोगों ने फतवे. निकाल दिए। नहीं कश्मीर फाइल्स को लेकर. राइट विंग ने भी बहुत सारे सवाल भेजे.
मुझे। हां ठीक है। उन्होंने एक सवाल जैसे. मुझसे कहा गया कि आपकी फिल्में ₹350 करोड़. कमाए। एक सवाल जो मेरे पास आया वो ये था. कि आपने उसे फिर दोबारा रीरिज किया और कहा. कि ₹100 में दिखाओ। तो आपने क्यों किया? आप उसको मैंने नहीं किया। वो जी की फिल्म. है। जी जो चाहे करे मेरा कोई उससे लेना. देना नहीं है। तो कॉर्पोरेट हाउस है। जी. कैन डू एनीथिंग व्हाटएवर दे वांट वि द. फिल्म। तो लोग गलतफहमी में क्या लोग समझते. ही नहीं है फिल्म का बिनेस कैसे चलता है. राइट तो आम आदमी को ये लगता है वो फिल्म. मतलब ये सवाल आया था कि फर्स्ट टाइम आपने.
एक पैसे कमा लिए सेकंड टाइम में अगर उसे. आप सोशल मीडिया YouTube पे डाल देते तो. शायद और देश की बड़ी आबादी देख लेती लेकिन. उसको कांग्रेस केजरीवाल ने बोला था कि. फ्री में डाल दीजिए YouTube में वो तो. पहली बार कहा था उन्होंने हां पर ये देखिए. ये सवाल इनका जवाब कैसे कोई दे यानी अब आप. यानी वो ये ऐसे ही सवाल है तो अच्छा तुम. बताओ आजकल किसी कोई पूछे कि अच्छा आजकल. अपनी बीवी को तुमने पीटना बंद कर दिया है. कि नहीं? क्या जवाब दे इसका? हां बोले तो. मरे, ना बोले तो मरे। मतलब इसका क्यों. अपनी बीवी को मारना बंद कर दिया? क्या. बोला? बट ये एक इसमें एक पार्ट और जो अभी. भी ट्रेंड होता है ना आई एम श्योर आपके.
कमेंट सेक्शन में भी बहुत आता होगा ये. सवाल कि एक फिल्म ने मोटा पैसा कमाया बट. उससे कश्मीरियों को क्या मिला? कश्मीरियों. से अग्निहोत्री नहीं नहीं एक सेकंड। ये. सवाल आप किसी भी कश्मीरी पंडित को बुला. लीजिए। हम उसे यहां बैठा लीजिए। उसे पूछिए. आपको क्या मिला? आप जानना चाहते हैं क्या. मिला? मैं बताता हूं। आपने फिल्म देखी है।. हम देखी है मैंने। फिल्म में आपने देखा था. लास्ट का सीन गिरजा देवी का मैंने सारे. पूरी फिल्म देखी है मतलब राइट तो उनके. उनकी उनकी मुझे उनकी फैमिली से उनकी बहन. का ईमेल आया.
और उसमें उन्होंने लिखा कि 30 साल से. हमारे घर में किसी ने दीदी के बारे में. बात नहीं करी थी शब्द ही नहीं लिया था वो. आपकी फिल्म देखने के बाद हम सब लोग ज़ूम. कॉल पर इकट्ठे हुए और हम पूरी रात रोते. रहे और उनकी बात करते रहे फॉर द फर्स्ट. टाइम वी हैव हील्ड एस अ फैमिली।. किसी कश्मीरी पंडित से पूछिए उन्हें क्या. मिला? एक बात। दूसरा पूछिए भारत को क्या. मिला? क्या मिला? भारत को ये मिला इस ये फिल्म.
कैपिटल में, यूके पार्लियामेंट में, जर्मनी में दुनिया भर में एक जो नैरेटिव. था लेके कि कश्मीर भारत ने इललीगली. ऑक्युपाई कर रखा है। फॉर द फर्स्ट टाइम, एक अल्टरनेट पर्सपेक्टिव दुनिया को मिला।. इंडियन कॉकस के जो चेयरमैन थे उनको पता ही. नहीं थी ये बात कि इंडिया ने इललीगली नहीं. ऑक्यूुपाई कर रखा है अमेरिका में ही कॉल्ड. अस आई मेट हिम आई मेड द प्रेजेंटेशन ही सो. द फिल्म आज आपने देखा होगा वो अटलांटा के. जो. कांग्रेसमैन है उन्होंने अभी जब पहलगांव. हुआ था तो उन्होंने कश्मीर फाइल्स का.
जिक्र किया था जू कम्युनिटी जो जानती ही. नहीं थी कि ऐसा कुछ हुआ है कश्मीरी. पंडितों के साथ वो जुड़ी इंडो जू. पूरी की पूरी कमेट है ब्लैक सा है हमारे. साथ एक जो अवेयरनेस हुई जो जगह-जगह फ्री. फ्री कश्मीर फ्री कश्मीर के नारे लोग ऐसे. लगा देते हैं जैसे बच्चों का खेल है वो. आपने सुना है फिल्म आने के बाद कहीं पे. उसके बाद यसीन मलिक आज जेल के अंदर है. गवर्नमेंट ने एक ट्रिब्यूनल बनाया है कि. कश्मीरी पंडित आके अपना वो दर्ज करें आज. कश्मीर को लेकर अवेयरनेस खड़ी हो गई है. मजाल है आज कोई कश्मीरी पंडितों के बारे.
में ऊटपटांग बात करके दिखाए. तो उस फिल्म में ऐसा नहीं है कुछ किया. नहीं है उस फिल्म ने एक बहुत बड़ी चेतना. बदली है देश की और यह प्रूफ करके दिखाया. है और उसके अलावा बॉलीवुड के लिए क्या. किया उस फिल्म ने उसने यह प्रूफ करके करके. दिखाया कि बिना स्टार्स के, बिना किसी चीज. के, बिना किसी ग्लैमर के, बिना किसी. सपोर्ट के अगर ताकत है आपके सत्य के अंदर. तो वह चीज लोगों तक जा सकती है। तो ऐसा. नहीं है कि आप पैसा कमा लिया। ये कोई ऐसा. कमर्शियल फिल्म नहीं बनाई है। और दूसरा. सवाल यह है हम पिछले 2010 से मैं पेनी.
पेनी के लिए मोहताज तरीके से फिल्म बना. रहा हूं। सिर्फ पैशन के कारण। हमसे तो. किसी ने कभी ये नहीं पूछा कि भाई तुम कैसे. खाते हो? क्या करते हो? कहां जिंदगी कैसे. चलाते हो? किस तरह से हमने वो फिल्म बनाई. है और वो जो फिल्म जो आई है हम थोड़ी 350. करोड़ 350 करोड़ तो ये अ एक फिगर आता है. लेकिन वो पैसा कहां जाता है जी की फिल्म. है और प्रोड्यूसर्स हैं उसके अंदर हम. लोगों के पास जो पैसा आया उस पैसे से हम. बंगाल फाइल्स बना रहे हैं। इसमें तो कोई. स्टूडियो नहीं है।.
मैंने वैक्सीन वॉर बनाई। वो किस किसके. पैसे से बनाई और वो फिल्म बॉक्स ऑफिस में. तो नहीं चली तो उसका पैसा तो किसी ने. मुझसे नहीं पूछा कि अच्छा विवेक यार उसका. पैसा तुम्हें नहीं आया चलो हम कुछ दे देते. हैं। सवाल वो नहीं है। मैं अच्छा काम कर. रहा हूं। उसमें इस तरह मूर्खता भरे सवाल. और ये सवाल कौन उठाता है? ये सवाल कश्मीरी. पंडित तो नहीं उठाते हैं। नहीं ये तो राइट. वालों ने उठाए राइट वो तो ठीक है। राइट का. मतलब देखिए हर कोई जो भारत माता की जय या. अयोध्या की फोटो लगाता है इसका मतलब ये. नहीं राइट है। अगर राइट विंग का जेन्युइन.
राइट है तो ये सवाल उठा ही नहीं सकता।. उठा ही नहीं सकता वो कैसे उठा सकता है? फिर तो हर मंदिर वाले से सवाल पूछना. चाहिए। मंदिर में पैसे क्यों कमाए जाते. हैं? या मस्जिद में पैसे क्यों कमाए जाते. हैं? फिर तो हर पॉलिटिशियन से पूछिए कि आप. साहब आप तो समाज सेवा करने आए थे। आपकी. कोटियां क्यों है करोड़ों की? फिर मीडिया. वालों से पूछना चाहिए। तुम तो सत्य की. आवाज ले आए थे। तुम्हारे 100-100 करोड़ के. बंगले क्यों हैं? तुम्हारे बच्चे क्यों. पढ़ते हैं हार्व में? फिर तो ये सवाल फिर. तो हर आदमी को आप खड़ा कर दीजिए। मीडिया. वालों से मेरे को आपसे ऑफ द रिकॉर्ड से.
लेकर ऑन द रिकॉर्ड पे लग रहा है। बड़ी. शिकायतें हैं विवेक जी को। नहीं नहीं. शिकायतें नहीं है। मतलब एक ही वर्ग के ऊपर. फिर इंडस्ट्रिस्ट लोगों से भी तो पूछ. पूछना चाहिए ये बात कि वो देश जहां पे 100. करोड़ लोगों को सरकार पैसा देती है खाने. का। वहां पे ये वैभव है। क्यों? गरीबों का. खून चूस के बेचारों को बेवकूफ बनाके यानी. मैं सोशलिस्ट बात नहीं कर रहा हूं लेकिन. सत्य बात है मेरा मतलब यह है कि देन यह. सवाल जो है ये एक जनरल क्राइटेरिया होना. चाहिए स्टैंडर्ड होना चाहिए फिर हम हर.
किसी जो इसमें जो उनका लॉजिक आता है. शाहरुख खान साहब ने इतना पैसा बनाया हॉकी. टीम के लिए क्या किया बता रहा हूं क्यों. ये सवाल आता है ये सवाल इसलिए आता है एक. आपकी फिल्म को टैक्स फ्री किया गया कई. स्टेट्स में सेकंड ये लोगों की मुहिम का. असर था जैसे ये फिल्म शुरुआ शुरुआत में जब. आई उससे ज्यादा मुझे लगता है इससे वर्बल. जो पब्लिसिटी मिली मैं कि इसने देखी उसने. उसको बताया उसने उसको बताया और फिर इस देश. में एक मुहिम की तरह इसकी शुरुआत हो गई कि. लोगों को कश्मीरी हिंदुओं का सेंटीमेंट. देखना था लोग डबल डबल बार गए अपने परिवार.
को लेकर गए और तब इस वजह से एक वो स्टार्स. जो फिल्मी दुनिया में बहुत बड़े स्टार. नहीं थे उसके बावजूद बहुत बड़ी फिल्म गई. और जबरदस्त गई तो लोगों का ये मानना था कि. इससे उनका ही भला होना चाहिए कि कौन लोग. एक मुहिम की तरह लोग मतलब कौन लोग जिन जो. भी कौन लोग कितने लोग कहां से यानी. Twitter में लिखने वाले 100 50 लोग यानी. यह क्राइटेरिया तो नहीं हो सकता। आम आदमी. ठीक है आपका भी एक पॉइंट ऑफ़ व्यू जो ठीक. है मैं इतना घूमता हूं मेरे को तो कभी. किसी ने यह सवाल नहीं पूछा मैं उस बात से. भी हां मुझसे जिस दिन कोई पूछेगा आई विल.
बी कंसर्न अगर मुझसे कोई जेन्युइनली आदमी. है जैसे मैं आपके घर आऊं आप कहे विवेक. साहब ये बताइए कि आपने यार इतना किया ये. क्यों नहीं तब मैं समझूंगा या मेरी जिंदगी. बदल गई हो या मैंने भी एक ब्रिज कैंडी में. बड़ी सी बिल्डिंग बना ली हो 10 मंजिल की. तो ऐसा तो कुछ नहीं है मैं तो वही आपके. सामने बैठा हूं इस बार तो कोई प्रोडक्शन. हाउस नहीं है हां फिर इस बार कोई नहीं है. ओके ये फिल्म फिल्म दो हिस्सों में आ रही. है सर। हां दो हिस्सों में मतलब दो पार्ट. में आएगी। देखिए हम शुरू में क्या था कि. दिल्ली फाइल्स हम दो दो चैप्टर्स हैं.
इसके। वो कहानी घूम के पहुंचती है एक जगह।. तो दूसरा मैं बता नहीं सकता आपको अभी. लेकिन बताऊंगा टाइम आने पे। तो पहला बंगाल. चैप्टर था। दूसरा दूसरा चैप्टर था। लेकिन. मैं जब अभी निकला अमेरिका दौरे पे गया. भाषण देने अपनी फिल्म से भी रिलेटेड। तो. मुझसे सब लोगों ने बोलना शुरू किया कि अरे. आपकी पूरी फिल्म तो बंगाल के बारे में तो. दिल्ली फाइल्स तो मुझे लगा कम्युनिकेशन. में कहीं पे प्रॉब्लम आ रहा है और हॉलीवुड. की तरह से इंडिया में लोग द डेली फाइल्स. बंगाल चैप्टर नहीं समझेंगे और जो हमारी जो. ऑडियंस है वो अलग तरह की ऑडियंस है वो. इतनी हॉलीवुड ओरिएंटेड ऑडियंस नहीं है जो.
मेरी फिल्म जो देखने जाएगी तो मेरे को ऐसा. तो फिर मैंने एक मतलब इसका इनिशियली जो. मतलब मैंने बाद में समझ में आया मुझे. लेकिन इनिशियली ये था ऐसा लगा कि शायद सिख. दंगों की बातें होने वाली है। हां, फाइल्स. का आपने जिक्र किया तो आप सिख दंगों पे एक. फिल्म बना रहे हैं। फिर बाद में जब बंगाल. चैप्टर आया तो मुझे लगा कि वो देश की. राजधानी दिल्ली देश की सियासत से जोड़कर. आपने वहां से शायद जोड़ा होगा। हां तो फिर. ऐसा लगा कि नहीं कंफ्यूजन वाली स्थिति है. ये। हां तो उस कंफ्यूजन को हटाने के लिए. तो मैंने फिर एक वीडियो बना के डाला। ओ. बाप रे तो लाखों लोगों ने उसमें रिप्लाई.
किया कि नहीं ये होना चाहिए होना चाहिए।. तो इसलिए उसका नाम बदल के फिर बंगाल. फाइल्स। बट ये सिखों के जो नहीं ये फिल्म. पूरी 100% बंगाल के बारे में। हिंदुओं के. नरसंहार पर हां. जो कम्युनल पॉलिटिक्स है जो वायलेंट. कम्युनल वायलेंस जो है बंगाल की जिसके. कारण हमने बंटवारा हुआ और जिसके कारण अभी. आपने मुर्शिदाबाद में देखा और जिसके कारण. आने वाले वक्त में जो 1946 में जो हिंदुओं. पर नरसंहार हुआ था 2025 में जो नरसंहार. हुआ दोनों को मिलाकर एक फिल्म बन रही है।.
या समथिंग लाइक दैट या तो इसमें हिंदुओं. का वर्जन एक तरीके से होगा। ऑफकोर्स अच्छा. कभी आपको लगा कि इसका एक दूसरा वर्जन नहीं. बनना चाहिए जैसे कश्मीर फाइल बिल्कुल बनना. चाहिए 100% और मैं सच्ची बता रहा हूं अगर. कोई बनाना चाहे तो मैं सच्ची उसको बहुत. सपोर्ट करूंगा लेकिन मैं मुझे लगता है कि. मैं डिसऑनेस्ट हो जाऊंगा मुझसे कश्मीर के. बारे में कई लोगों ने बोला कि अरे आपने. उसमें मुस्लिम लोगों का क्यों नहीं बताया. खैर लोग समझते नहीं है इस बात को पहली. फिल्म के पहले ही सीन में मुस्लिम लड़का. एक हिंदू लड़के को बचाता है आखिर तो ऐसा. नहीं है हम कोई वो थोड़ी है कि हम इन.
ह्यूमन टाइप के हैं लेकिन मुझे मुझे नहीं. लगता है कि मुझे इस बात का क्रिएटिव हक है. या ये ईमानदारी होगी कि मैं मुस्लिम लोगों. के बिहाफ पे बोलना लगूं बोलने लगूं। फिर. तो मैं सेकुलर जैसी बात करने लगूंगा। आप. सेकुलर नहीं है मैं हिंदुस्तान में जिसको. सेकुलर बोलते हैं वो सेकुलर नहीं हूं।. वरना मैं नेचर से सेकुलर हूं। क्या है. सेकुलरिज्म आपकी नजर में? हिंदुस्तान में. जो सेकुलरिज्म आपका सेकुलरिज्म क्या है? मेरा सेकुलरिज्म यह है कि जो भी आदमी एक.
पीसफुल अच्छा आदमी जो देश की तरक्की में. भारत को भारत समझता है और देश की तरक्की. में अपना योगदान देता है अपना जीवन करता. है। मैं उस आदमी को सेकुलर मानता हूं।. मेरी ये डेफिनेशन है। मैं ये मुस्लिम की. साइड में इसलिए सेकुलर है या वो है एक गलत. बात है। गलत बात है। मैं भोपाल में बड़ा. हुआ था।. भोपाल में हर फ्राइडे को दंगा होता था और. हमको ओल्ड भोपाल से जाना अलाउड नहीं होता. था। मेरा स्कूल भी वहीं था, कॉलेज भी वहीं. था। तो उस इलाके में इसलिए क्योंकि.
फ्राइडे को वहां पे दंगा होता ही होता था।. चाहे कुछ भी हो जाए और वो जब नमाज खत्म. होती थी तो वो लोग आके मारापीटी करा करते. थे। करेक्ट। उस वक्त में जब हम उसके. अगेंस्ट आवाज उठाते थे तो कभी मुझे नहीं. याद है कि कोई हमसे बोलता था तुम सेकुलर. नहीं हो। हां तो हो ही रहा है। दिख रहा है. आंखों के सामने जो चल रहा है। लेकिन आज की. तारीख में आप बोल नहीं सकते।. आपको बोल दिया आप तुम कम्युनल हो। तो. हिंदुओं को कम्युनल बना दिया गया और जो.
मुस्लिम अपीज़मेंट को बिलीव करते हैं उनको. सेकुलर बना दिया गया। ये जो एक बहुत. स्ट्रांग सेकुलरिज्म और बहुत स्ट्रांग ये. जो हिंदूज्म या हिंदुत्व जो भी आप बोले ये. जो वक्त से हम गुजर रहे हैं इन दोनों का. कन्वर्जेंस हो रहा है। ये जनरली पॉजिटिव. चीजों का कन्वर्जेंस होता है या नेगेटिव. चीजों का होता है। पहली बार ये दो चीजों. का इंडिया में और पूरे वर्ल्ड में हो रहा. है। इंडिया में नहीं हो रहा है। हम ये. पूरे वर्ल्ड में हो रहा है। अमेरिका में. आप देखिए क्या घट रहा है। फ्रांस में क्या. घट रहा है? ब्रिटेन में क्या घट रहा है?
अभी ब्रसल्स कुछ दिन पहले गए थे हम लोग. वहां घट रहा है। ये पर इंडिया में बहुत. स्ट्रांगली हो रहा है। मतलब बहुत तेज ये. धाराएं आ रही हैं और ये कन्वर्जेंस हो रहा. है और ये एक इतना डिसाइसिव क्रिटिकल. मूवमेंट है इंडिया की हिस्ट्री में। इसलिए. बंगाल फाइल्स इतनी इंपॉर्टेंट है।. मैंने आपका टीजर देखा। उसमें एक लाइन थी. कि बंगाल कश्मीर बनता जा रहा है या और. कश्मीर का दृश्य जब मैं सोचता हूं जो. मैंने एज अ जर्नलिस्ट कवर किया वो बहुत.
भयावह रहा है। 90 के दशक में वो सारी. पॉलिटिकल पार्टीज अक्रॉस की आइडियोलॉजी है. वो सब मानते हैं। हम वो किसी भी धर्म का. वोट लेने वाले लोग हो। क्यों आपको लगता है. कि बंगाल कश्मीर बन रहा है? इसलिए बना बहुत बहुत बोल्ड स्टेटमेंट है. और हां तो कश्मीर देखिए कश्मीर 100% हिंदू. स्टेट थी 100%. धीरे-धीरे इंच बाय इंच पर्सन बाय पर्सन. एक-एक एक-एक जनसंख्या चेंज वैसे तो यहां. से ईरान तक सर हम ही थे हां अगर इस.
कॉन्टेक्स्ट में जाएंगे तो ईरान तक तो हम. ही थे बाद में चीजें बदलती गई हां या हम. तो मानते हैं कि सबसे पहले सनातन ही था. पूरी दुनिया में कुछ नहीं था. या लेकिन लेकिन एक जगह जो क्योंकि हिंदू. संस्कृति का एक गढ़ था। बनारस है। जैसे. फॉर एग्जांपल कल को अगर बनारस आज से 100. साल के बाद में अगर. डेमोग्राफी चेंज हो जाए और हिंदू वहां पे. 20% रह जाए 80% दूसरी पपुलेशन हो जाए तो. चिंता की बात है। आज बंगाल के बहुत सारे.
एरियाज जहां पे धीरे-धीरे दूसरा क्या हो. रहा है? जो इललीगल माइग्रेंट्स हैं उनको. जिस तरह से लीगलाइज किया जा रहा है वहां. पे टू क्रिएट अ वोट बैंक। 71 के बाद हां. टू क्रिएट अ वोट बैंक और वो दोनों. गवर्नमेंट्स में कुछ फर्क नहीं हुआ। ऐसा. नहीं है कि कुछ चेंज हो गया। वो जो क्रिएट. किया जा रहा है वो एक बहुत डेंजरस पैटर्न. है। मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है कि एक. शहर है वहां पे 70% मुस्लिम रहते हैं।. मुझे उससे प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन जब वो. डेलीबेटली एज अ डिज़ाइन क्रिएट किया जाता. है। तब ये बहुत चिंता की बात होती है। और.
कश्मीर में एज अ डिज़ किया गया। बंगाल में. एज अ डिज़ किया जा रहा है। इट्स अ. कॉन्सिक्वेंस ऑफ पॉलिटिक्स।. इट्स नॉट अ नेचुरल डेमोग्राफिक चेंज। ठीक. है? एक जगह में हो सकता है किसी कारणवश. किसी एक समुदाय कहीं जैन लोग ज्यादा बस गए. या धीरे-धीरे वहां पे होता क्या है? ऐसा. अमेरिका में कुछ शहर हैं जहां पे तेलुगु. लोग बहुत ज्यादा हैं। कुछ जहां पे बंगाली. एक गया उसने चार को बुलाया, चार ने आठ को. बुलाया। वो एक नेचुरल डेमोग्राफिक शिफ्ट. है। लेकिन जब भाई डिजाइन हो इसी पर्पस से. हो कि यहां पे लोगों को बैठाल के एक अपना.
वोट बैंक क्रिएट किया जाए। मैं आप कभीक. जाइए। एक हेरिटेज बिल्डिंग है और हेरिटेज. होटल है इंडिया का मतलब हिस्टोरिकल होटल. है वो उसका नाम है ओबेरॉय होटल हम राइट. यानी दुनिया की किसी भी कंट्री में किसी. भी शहर में ऐसा अगर होटल होगा तो उसके. आसपास आपको 1 किलोमीटर दूर से समझ में आ. जाएगा हम कोई हेरिटेज बिल्डिंग देखने जा. रहे हैं। आप ओबेरॉय होटल के गेट पे खड़े. होंगे आपको नहीं समझ में आएगा कि हम वहां. पे आ गए हैं। क्यों? क्योंकि वहां जमीन पे. सिर्फ वो बैठे हुए हैं। लोग बैठे हुए हैं.
सामान बेचने। एक-ए घंटा लग जाता है। कई. बार गाड़ी में आप फंस जाओ तो वहां पे किसी. की मजाल है वहां से हटा के दिखा दे। उनको. वहां बैठाया गया है। बाय डिजाइन बैठाया. गया है। मुझे आपसे बात करके ऐसा लग रहा है. कि जो चिंता अमित शाह जी की होनी चाहिए वो. विवेक अग्निहोत्री जी की चिंता हो गई है।. आप ज्यादा मुझे बोल्ड स्टेटमेंट देते नजर. आ रहे हैं बंगाल को लेकर। वो जो सेंट्रल. गवर्नमेंट से शायद मैं सुनता तो उसकी. गंभीरता को मैं ज्यादा उससे लेता। सेंट्रल. गवर्नमेंट भी कहती है बट इलेक्शन के टाइम.
में ज्यादा कहती है पॉलिटिकल व्यू ज्यादा. आते हैं। बट जैसे आपने ये बोल्ड. प्रेडिक्शन कह कि बंगाल कश्मीर बन रहा है।. ऑफ कोर्स मैं भाई मैं तो ओपनली कह रहा. हूं। मैं तो अपनी फिल्में कह रहा हूं। कोई. मैं छुपी बात नहीं है। मैं तो दो ढाई साल. से कह रहा हूं। मैं तो लगातार सोशल मीडिया. में लिखता आया हूं 2 ढाई साल से। अब. पॉलिटिशियनंस भी उस लाइन को यूज़ करने लगे. हैं। लेकिन ये एक तो ये आपने इसलिए लिखा. है ताकि इलेक्शन में यूज़ हो जाएगी ये. लाइन। ये मुझे क्या पता? मैं तो दो 2ाई. साल पहले मुझे ये भी नहीं और इलेक्शन तो. मार्च में है। मेरी फिल्म तो अभी आ रही है. अगस्त सितंबर में। पर मैं यह कहना चाह रहा. हूं कश्मीर देखिए इमेजरी है। मैं स्टोरी.
टेलर हूं और एज अ स्टोरी टेलर मुझे लगता. है कि ये ऐसी स्टोरी है जो भारत के बच्चे. बच्चे को सबसे खतरनाक बात क्या है? मैं. बताऊं क्यों कश्मीर बनता जा रहा है। आप भी. बड़े हो रहे होंगे तो कश्मीर आपको हमेशा. लगता है कोई एक ऐसी जगह जो हमसे कटी हुई. है। कई लोग ये भी बोलते थे अरे दे दो ना. यार पाकिस्तान को झंझट खत्म करो। कश्मीर. को हमने कभी उतना इंटीग्रल नहीं माना. जितना हम लोग यूपी को, मध्य प्रदेश को, बिहार को, महाराष्ट्र को मानते हैं। इस. देश का। ये सत्य है। इसको अच्छा लगे। ठीक. है। सही है। ये सत्य है। सच कह रहे हैं।.
हम कश्मीर के बारे में हमेशा थर्ड पर्सन. में बात करते हैं। हमेशा हां थोड़ा सा अलग. तरीके से देखते हैं। नजरिया अलग था। वैसे. नहीं था जैसे हम यूपी, बिहार, बंगाल, महाराष्ट्र को ऐसा नहीं अप्रोचेबल कि अभी. गल गए और पकड़ लिया। राइट? क्योंकि कश्मीर. हर आदमी जाता है। पोचाशा का लड़का लगता. था। हां। राइट। आज हम बंगाल के बारे में. भी वैसे ही बात करने लगे। आप ध्यान से. देखिए सब्लिमिनल लेवल पर अगर आप देखें हम. वैसे ही बात करते हैं। हम कहते हैं ममता. जी का बंगाल। हम बंगाल की बात ममता के. बिना करते ही नहीं है। हम बंगाल के सामने. ममता जी बहुत छोटी हैं। बट कैसे जैसे.
कश्मीर में सर आर्टिकल 370 था वो हिसाब. किताब अलग था। चलिए मैं आपसे चार सवाल. पूछता हूं। बंगाल में मैं आपसे चार सिंपल. सवाल पूछता हूं। आप किसी ऐसे आदमी को. जानते हैं? कभी मिले अपने जिंदगी के। आप. तो बहुत यंग हैं। पर आप कभी किसी से मिले. जो कहता है यार मैं सोच रहा हूं एक घर एक. सेकंड होम मैं बंगाल में चल के बनाता हूं।. मेरे बहुत सारे मित्र हैं बंगाल में. कोलकाता में रहते होंगे। पर आप कभी आप. लोगों को दिल्ली में रहने वालों से ही. सुना होगा यार गोवा में चल के रह लेते. हैं। बोर में चल के रह लेते हैं। आप आपसे. ही मैं कहता हूं। कैन यू थिंक अबाउट कैन.
यू थिंक अबाउट मेकिंग अ सेकंड राजधानी थी।. उस हिसाब से डेवलप नहीं हुई। एक समय पे वो. हमारी बौद्धिक राजधानी थी। देश की राजधानी. थी। लेकिन जब राजधानी दिल्ली ऑफिशियली. शिफ्ट हुई उसके बाद उस तरह से डेवलप नहीं. हुई। वहां बिहार भी तो नहीं हुआ। मध्य. प्रदेश भी नहीं हुआ। बिहार भी सर आज आज. देश में महाराष्ट्र में या यूपी में बैठकर. कोई ये नहीं कहता कि हम बिहार जाके अपना. गांव बसाएंगे। नहीं क्यों जो बिहार का. रहने वाला जो बिहार का रहने वाला वो कहता. होगा यूपी का बंदा नहीं कहता कि हम बिहार. या गांव और ट्रेवल करने के लिए आप कभी. सोचते हैं कि चलो यार बच्चों को लेकर. बंगाल पौराणिक जगहों पर हम बिहार में भी. जाते हैं घूमने। पौराणिक जगहों पर मैं गया.
था भाई काली माता के दर्शन करने वहां पर. इतना दर्शन करने गए थे। वो सब ठीक है। पर. आम आदमी से कभी पूछिए कि अच्छा हां भाई. चलो एक काम करते हैं। चलो बंगाल में बंगाल. का मतलब सिर्फ कोलकाता समझते हैं लोग। हां. राइट कभी आप पूछिए ना चलो मैं कहता हूं. चलो टैक्सी बंगाल में चलके चार होटल देख. लेंगे आप तो पीली टैक्सी भी नहीं हो रही. हां बंगाल पर यह सत्य है कि लोग बंगाल को. उस नजरिए से नहीं देखते हैं जिस नजरिए से. बाकी स्टेट्स को सेफ समझते हैं। लोगों की. साइकोलॉजी में बंगाल इज नॉट जस्ट अनदर सेफ.
स्टेट ऑफ इंडिया और बंगाल को भी हम लोगों. ने आइसोलेट कर दिया। बंगाल हैज़ बिकम लाइक. ममता बनर्जी स्टेट और वो मैं तोड़ना चाहता. हूं। ये हमारी स्टेट है। भारत का रेनेसोंस. जो है फ्रांस में आया है और भारत में आया. है। भारत में बंगाल में आया है। ऐसी हर. चीज आप देख लीजिए। चाहे वो साहित्य हो. चाहे कला हो वेदांत। चलिए हिंदू लोगों की. बात करते हैं। पूरा पुनर्जन्म जो है. वेदांत का कहां पर हुआ? जो नई आग लगी है एक हिंदूज़्म चेतना की. कहां लगी रामकृष्ण परमहंस सभी वहीं से थे.
वही हुआ कला एक ही तो एक ही तो प्रदेश है. हमारे यहां जहां से वंदे मातरम भी निकला. जन गण मन भी निकला और बांग्लादेश की भी. एंथम निकली नेशनलिज्म पूरा वहां के वहां. पे झंडा गाड़ा नेशनलिज्म का हमने हमने. वहां पे आजाद हिंद फौज भी बनाई एक क्रांति. लाने वाली और वहीं पे हमने बंकिमचंद जैसे. लोगों ने भी लिखा वहां पे पूरा भारत का जो. हिंदू दर्शन है हिंदू दर्शन क्या मैं कहता. हूं ह्यूमैनिटी का सबसे बड़ा जो दर्शन. दार्शनिक वहां से निकले। श्री अरबिंदु. वहां से निकले।. सम ऑफ़ द ग्रेटेस्ट फिल्म मेकर्स, पोएट्स,
आर्टिस्ट, शेफ्स इंडिया के वन ऑफ़ द बेस्ट. शेफ्सफ आर फ्रॉम बंगाल। म्यूजिशियन सारे. वश जीत गांगुली, मिथुन प्रीतम, अर्जित. सिंह चलिए आपल. आप जर्नलिज्म से जुड़ जर्नलिज्म से जुड़े. हुए हैं। मैं आपको एक एग्जांपल बताता हूं।. और ये बात आपके लोगों को पता चलनी चाहिए।. क्योंकि ऐसी कहानियां कोई सुनाता नहीं है. आजकल। 1905 में जब भारत का बांग्ला बंगाल. का विभाजन कर दिया। इन लोगों ने उसकी पावर. को खत्म करने के लिए तो आपने नरम दल नरम. दल नरम दल सुना होगा तो बिपिन चंद्र पाल.
ने और श्री अरविंदो हम एक पेपर चालू किया. वंदे मातरम राइट वंदे मातरम में श्री. अरविंदो ने अरविंदो जो अपने फिलॉसफर. अरविंदो घोष उन्होंने आर्टिकल लिखना शुरू. किया एज अ जर्नलिस्ट रोज आर्टिकल लिखते थे. उस आर्टिकल ने देश में ऐसी चेतना जगाई लोग. वेट करते थे कि उसको को पढ़े यंग लोग जो. थे चाहे महाराष्ट्र में हो कहीं हो ले. उसके इतने ट्रांसलेशन होने लगे उसने इतनी. चेतना जगाई कि सिर्फ जर्नलिज्म के कारण.
अंग्रेजों को वापस बंगाल को जोड़ना पड़ा. ये जर्नलिज्म की ताकत थी उस वक्त की ये. कहां ये वहीं हुई कोई जब बंगाल की महानता. की बात करते हैं कभी किसी ने जर्नलिज्म की. बात करी है दी आर द थिंग्स व्हेन आई. अंडरस्टुड इतना बड़ा हेरिटेज मुझे दुख. इसलिए होता है व्हाट हैव वी लॉस्ट. वो चेतना वो पूरा माइंडसेट बंगाल भारत का. लाइट हाउस था।. भारत को राह दिखाने वाली वो जगह और आज हम.
बैठ के डिस्कस कर रहे हैं। मैं कह रहा हूं. दो कॉन्स्टिट्यूशन है। गुंडों की पार्टी. है। ये सब बातें कर रहे हैं हम उसके बारे. में। उसको तो भारत का एक जब दुनिया से कोई. आए तो उसको तो कोलकाता जाना ही चाहिए।. क्यों नहीं जाते हैं टूरिस्ट कोलकाता? भारत के ही लोग क्यों नहीं जाते हैं बंगाल. में टूरिज्म के लिए? बंगाल टाइगर है ना. वहां पे? पर बंगाल टाइगर कहां है? ठीक है। तो मतलब मैं यह मान के चलूं कि. जैसे कश्मीर फाइल्स में काफी कंट्रोवर्सी. हुई थी। बंगाल फाइल्स में भी होने वाली. है। आपकी बात को सुनकर कंट्रोवर्सी तो.
शब्द नहीं यूज़ करूंगा पर मेरा पर्पस है कि. इस फिल्म से कन्वर्सेशन तो होना ही चाहिए।. बातचीत तो होनी चाहिए। हंगामा खड़ा करना. मेरा मकसद नहीं लेकिन सूरत तो बदलनी. चाहिए।. इंटरेस्टिंग। वॉल टू के साथ रिलीज हो रही. है सर ये। नहीं वॉर टू के साथ नहीं कर रहा. हूं। ये आएगी 5 सितंबर को। कोई क्लैश नहीं. हो रहा फिल्म किसी का? नहीं नहीं ये फिल्म. तारीख से ज्यादा बड़ी है तो इसलिए तारीखों. में नहीं लगना चाहता हूं। 5 सितंबर को कर. रहा हूं। हम कर भी नहीं पाएंगे। एक्चुअली. 15 अगस्त तक काफी काम भी चल रहा है और मैं.
उस माहौल में करना भी नहीं चाहता हूं।. इसकी कास्टिंग में मतलब कुछ स्पेशल ध्यान. दिया था या क्योंकि कई सारे पुराने आपने. कास्ट वापस भी लिया है। कुछ नए आए होंगे।. तो कास्टिंग कैसे करते हो इसमें? ये ये. देखते हो कि आइडियोलॉजी वाला सेम बंदा है. या अलग आइडियोलॉजी से भी लेते हो। आधे से. अधिक तो बंगाल के ही लोग हैं। कई तो. लेफ्टिस्ट ही लोग हैं। ऐसा नहीं है। मैं. ऐसा नहीं करता हूं। ताशकंद फाइल में नसीर. साहब थे। कश्मीर फाइल में भी कई लोग थे जो. यानी मेरे से जुड़े हुए नहीं थे।. आइडियोलॉजिकली ऐसा मैं मैं उस तरह से.
फिल्म देखिए आदमी घोड़ा घास से दोस्ती. नहीं करता। मैं फिल्म के साथ ये सवाल मैं. इसलिए पूछ रहा हूं। मैंने अनुभव सिन्हा का. पॉडकास्ट किया था। हां। तो अनुभव सिन्हा. से मैंने एक सवाल पूछा। मैंने कहा कभी. कंगना के साथ काम करोगे आप? हम् तो ही सेड. वैसे तो नहीं सोचते हम लोग ऐसा लेकिन अगर. आदमी ही ना पसंद हो तो काम कैसे करेंगे. क्योंकि जब आप फिल्म बनाते हो तो आपको. बहुत समय देना पड़ता है सेट पे और अगर कोई. आदमी ही आपको बर्दाश्त ना हो तो आप कैसे. करोगे क्योंकि आपको साथ में खाना होता है. पीना होता है वो सोचती है मेरे को ऐसा. नहीं मैं आई एम टू वाइस फॉर दैट मैं आई. कैन ड्रॉ अ लाइन मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता.
तो इस फिल्म में कोई ऐसा है जिसकी. पॉलिटिकल आइडियोलॉजी अलग ऑफ कोर्स ऑफ. कोर्स ऑफ कोर्स ऑफ कोर्स आप फिल्म देखें. आपको खुद समझ में आ जाएगा उसमें 90% तो. बंगाली है यार उसमें पूरी फिल्म में ही. बंगाली एक्टर्स र्स हैं और आप देखेंगे. उसमें कुछ एक टीएमसी से भी जुड़े हुए लोग. हैं। उनका कन्विक्शन था इसमें। देखिए या. दे आर हाईली प्रोफेशनल प्रोफेशनल एक्टर्स. हैं और अगर बट ऑफ द रिकॉर्ड तो आप बात आप. कह रहे हैं ना इतना मैं नहीं करता मैं बात. नहीं करता। मैं सेट पे किसी से पर्सनल बात. वो सिर्फ पैसा देके साइन कर सकते हैं।. नहीं पैसा हमारे पास है ही नहीं हम देने. के लिए। हमारे हमारी फिल्म तो आदमी तब आता. है जब वो स्क्रिप्ट पढ़ता है। देखिए जो.
अच्छे एक तो पहली बात मेरी फिल्म में आधे. से अधिक नेशनल अवार्ड विनिंग एक्टर्स होते. हैं और तुर्रम खान एक्टर्स होते हैं। ये. आप हर बार इसको अच्छे से हाईलाइट करते हो।. मैं इसलिए करता हूं, मैं इसलिए करता हूं, इसलिए करता हूं क्योंकि हमारे यहां ना जिन. लोगों को फिल्म फेयर खरीद खरीद के मिलते. हैं, उनको हम लोग बहुत दिखते हैं सब जगह. पे। नेशनल अवार्ड विनिंग एक्टर्स इतने. अच्छे एक्टर्स होते हैं उनके बारे में बात. नहीं करते। इसलिए मैंने उसको हाईलाइट करता. हूं मैं हर बार। तो मेरे में तो तीन-तीन. चार मेरे में तो दादा साहब फाल्के अवार्ड. विनर हैं। मथुन चक्रवर्ती हैं। हम तो तो.
मेरी फिल्म में तो तीन चार तीन-तीन दो-दो. तीन-तीन नेशनल अवार्ड मिले हुए हैं सबको।. ओके। जेएनयू. हम. भाई बहुत साल पहले हो गया खत्म कब तक भाई. जेएनयू को लेकर क्या नजरिया आपका. देखिए मैं एक बात मैं अब दो बातें बोलना. चाह बड़ा वायरल हुआ था वीडियो आपका जेएनयू. वाला हां. पर मैं बताऊं कुछ एक ऐसे इंस्टट्यूट्स. रहने भी चाहिए जो. ठीक है देखिए जीवन में ना सब चीजें होनी.
चाहिए थोड़ा अचार भी होना चाहिए पापड़ भी. होना चाहिए हर चीज होनी चाहिए उनके. अगेंस्ट लड़ने में लड़ना भी चाहिए हमको. जिसको लड़ना है वो लड़ भी लेकिन पूरी तरह. से आप ये बोल दो कि इनको खत्म ही कर दें. वो भी सही बात नहीं है। एक कुछ जवान ऐसे. लड़के होने भी चाहिए जो कि रिबेल विदाउट. कॉज हैं। उससे क्या होता है कि वो भी आपको. सोचने पे मजबूर करते हैं। थोड़ा सा होना. चाहिए इस समाज के अंदर। अगर सब एक ही चीज. बोलने लगेंगे, सब एक से ही दिखने लगेगा, एक से ही सोचने लगेंगे तो वो नीरस हो.
जाएगा समाज। फिर वो समाज वो अच्छी बात. नहीं है। नहीं पिछली बार जो किस्सा मशहूर. हुआ था वो ये हुआ था कि यहां से निकल कर. बौद्धिक बौद्धिक शक्ति वाले लोग समाज में. कुछ असर नहीं डाल रहे हैं। अब आप मानते. हैं कि जेएनयू के प्रोडक्ट जो है वो भी. देश हित में काम कर रहे हैं। अच्छा काम कर. रहे हैं या समाज में असर डाल रहे हैं।. कैसे जिनकी हम बात कर रहे हैं वो तो सब. पॉलिटिक्स में चले गए। तो फिर देश हित. कहां रह गया? अरे अभी बिकॉज़ मिस में नाम. अभिजीत बनर्जी साहब नोबेल प्राइज जीत कर. आए। हमारे यहां पर जयशंकर जी हैं, निर्मला. जी हैं। अरे जेएनयू के तो जो लोग हैं आप.
लिस्ट देखिए इट्स लाइक अ लॉन्ग लिस्ट ऑफ. सम ऑफ़ द बेस्ट। फिर आपको क्यों लगता है कि. वहां का जो टॉप कॉलेज है कि वहां का बच्चा. जो है वो देश में उतना असर नहीं कर रहा।. अभी भी जो आप तारीफ कर रहे हो कि होना. चाहिए। जब आप कहते हैं की तरह होना चाहिए।. आप कहते हैं भारत में गरीबी बहुत है। जब. आप कहते हैं भारत में गरीबी बहुत है तो. इसका मतलब ये थोड़ी है कि हमारे आपके जैसे. थ्री पीस सूट पहनने वाले लोग नहीं है या. रईस लोग नहीं है। एंटीला नहीं है भारत के. अंदर। वो एक्सेप्शनंस है पर जनरल जो. पॉलिटिक्स है जेएनयू की जो जनरल पॉलिटिक्स. थी जैसे जापुर की जो जनरल पॉलिटिक्स रही.
है वो जो मानसिकता है वो एक बच्चों को एक. तरह से आप कल्चरली हैंडीकैप कर रहे हैं।. उनको इस समाज में जीने लायक ही नहीं रख. रहे हैं। क्यों ऐसा मतलब अगर वो है एक. लेफ्टिस्ट उनका ये मानना है कि हम सवाल. पूछ रहे हैं। सवाल पूछने से तो अच्छी बात. है। डेमोक्रेसी में कि वो बच्चा सवाल पूछ. रहा है। बाकी यूनिवर्सिटी में लोग लड़के. लड़कियां आपस में खाली खेल कूद रहे हैं।. भाई सवाल पूछना अच्छी बात है। लेकिन जवाब. मिले तो वो भी तो सुनना चाहिए ना कि सवाल. ही थोड़ी पूछते रहेंगे आप कि जवाब मिले. जवाब की चिंता ही नहीं सर सवाल पूछ रहे. हैं फिर तो वो मीडिया जैसा हो जाएगा देखिए.
जेएनयू से जयशंकर साहब निकल के देश भर में. नाम रोशन कर रहे हैं निर्मला जी फाइनेंस. मिनिस्टर बनी हुई है उसके अलावा तमाम. लिस्टें. दिग्गज लोग हैं वहां से फिर भी आपको क्यों. थोड़ी सी ये मैं समझना चाहता हूं ये टीस. क्यों है क्योंकि. आप मुझे लगता है आपने बिल्कुल जेएनयू को. टाइप कास्ट कर दिया कि आपके आप जेएनयू नाम. आते हैं मैंने ऐसा नहीं किया मैंने. बिल्कुल ऐसा नहीं किया क्योंकि बीच में. मीडिया का भी बहुत बड़ा रोल है मैंने अभी. सुधीर जी के पॉडकास्ट किया था तो उसमें. वहीं से शुरुआत हुई थी टुकड़े-टुकड़े गैंग. की। और मैंने उस पे भी काफी संवाद किया. उनसे। तो वो इंडिया में एक कॉमन परसेप्शन.
बना दिया गया लोगों के दिमाग में। टीवी और. ये नजरिए से की जेएनयू मतलब टुकड़े-टुकड़े. गैंग या आपने ऐसा नहीं की तरह होने चाहिए।. मैं मैंने कभी ऐसा नहीं कहा। जब देश की. टॉप यूनिवर्सिटी मैंने कभी भी ऐसा नहीं. किया। जिसको हमेशा अवार्ड्स मिलते हैं।. मैंने मैंने टुकड़े-टुकड़े वर्ड में यूज़. भी नहीं करता हूं। मैंने किया भी नहीं।. हम्। मैं अर्बन नेक्सल्स वर्ड यूज़ करता. हूं। और जो बिल्कुल करेक्ट वर्ड है और. पकड़े गए। तो आप वही प्रोफेसर्स पकड़े गए।. आप बताइए आप उसको वो हिंदी का वर्जन है।. आप उसको अंग्रेजी नहीं कैसे नहीं मैं अपने. जारन को छोटा नहीं करना। मैं अपने जारन को.
छोटा नहीं करना चाहता हूं। अर्बन ने. एक्सेल और टुकड़े-टुकड़े में जमीन आसमान. का अंतर है। टुकड़े-टुकड़े के पीछे कोई. थॉट नहीं है। कोई कुछ बस टुकड़े-टुकड़े. गैंग है। एक सेंसेशनल वर्ड है। ब्रेकिंग. योर ओन कंट्री। नहीं अर्बन ने एक्सेल्स. वर्ड तो देखिए भारत सरकार मनमोहन सिंह की. सरकार ने जितने एफिडेविट दिए हैं सुप्रीम. कोर्ट में उन्होंने अर्बन मोइस्ट वर्ड यूज़. किया है। मैंने अर्बन नेक्सल वर्ड यूज़. किया है। दैट्स द ओनली डिफरेंस। आप ही. यहां से दीपिका पादुकोण गई थी वहां पे. बॉलीवुड से सपोर्ट करने के लिए। उनको पता. भी नहीं था वो कहां जा रही हैं। आई कैन. गारंटी कि दीपिका को पता ही नहीं होगा कि.
क्यों, क्या वहां की पॉलिटिक्स क्या है।. आप उन्हें इतना डम समझते हो? नहीं डम की. बात नहीं है। अगर पता होता तो नहीं जाती. वो। वो तब से राइड विंग से बॉयकॉट दीपिका. का सामना कर रही हैं। अब दैट्स अब ये अब. ये गेम है। अब पॉलिटिक्स को आप टच करोगे. तो यह ऐसी आग है कुछ तो जलाएगी। अभी भी. उनकी एक संदीप वांगा रेड्डी की फिल्म में. उनको शायद रिप्लेस किया गया था। तो उसमें. भी लोगों राइट विंगर्स में मैं कमेंट पढ़. रहा था कि अब जो नई हीरोइन आई है उससे हम. बॉयकॉट नहीं करेंगे। अच्छा हुआ ये रहा वो. रहा वो रहा। हां वो सब मैं उसमें पढ़ता. नहीं हूं। वो सब मेरा विषय भी नहीं है।.
लेकिन हां पॉलिटिक्स मैं सबको बोलता हूं।. तो आपको लगता है मतलब अगर मैं दीपिका की. चलो एक सवाल कर रहे थे क्योंकि आपने. स्ट्रोंगली कहा वो जाती नहीं दीपिका पर एक. लेबल शी इज़ अ वैरी स्मार्ट दीपिका पर एक. लेबल लगा हुआ है कि वो लेफ्ट आईडियोलॉजी. वाली है और वो उसी जेएनयू वाली विचारधारा. को समर्थन देती है। मैं उनको जानता नहीं. हूं। मुझे पता नहीं उनकी क्या कहा कि वो. वहां नहीं नहीं मैं इतना जानता हूं कि शी. इज़ अ स्मार्ट पर्सन एंड शी इज़ अ. इंडिपेंडेंट वूमेन वेरी स्मार्ट वेरी. इंटेलिजेंट। अगर उनको ये पता होता कि ये. पॉलिटिकली सेंसिटिव जगह है और इससे मेरे.
करियर में फर्क पड़ेगा। आई एम श्योर आई. अस्यूम शी वुड हैव गॉन देर। मुझे ऐसा लगता. है कि वो फिल्म जब प्रमोट होती है तो. 10-12 दिन में लोग कहते हैं यहां चलो वहां. चलो ये पॉडकास्ट कर लो वो कर लो। आदमी कुछ. भी बोल जाता है। फिर दो लाइन उसकी उठाते. हैं। फिर उसकी फिल्म फंस जाती है। फिर. प्रॉब्लम होता है। दैट्स ऑल बड़ी तैयारी. से ले जाया था। मुझे याद है मैं कवर करने. ड्रेस प्रॉपर उस उस इवेंट के हिसाब से थी।. शाम का टाइम था और बड़ा टीवी पे उसकी. चर्चा हुई थी उसके। देखिए पॉलिटिक्स में. तभी आप घुसिए जब आप उसे फेस करने के लिए.
तैयार हैं। आप टच एंड गो नहीं कर सकते कि. गए छुई और बाहर निकल गए। वो नहीं कर सकते।. किसी चीज का अफसोस है आपको लाइफ में? मुझे बस एक एक चीज का मुझे यह अफसोस रह. गया कि कश्मीर फाइल्स के वक्त में मुझसे. एक गलती हो गई। वो जो सारा रिसर्च हमने. किया था वो हमें फिल्म के पहले रिलीज करना. चाहिए था। राइट? जो प्रोपगेंडा के आरोप. लगे आप पर हां तो पहले वो बाद में आया जी5. में कश्मीर अनरड के नाम से वो पहले मुझे.
करना चाहिए था। तो इस बार मैं वो गलती. नहीं कर रहा हूं। तो मैं बंगाल फाइल्स के. पहले मैंने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई है। वो. सारे जो डायरेक्ट एक्शन डे के सर्वाइवर्स. हैं मैंने उनके इंटरव्यूज लिए हैं। सारा. है। आप गोपाल पाठा का भी देखेंगे। आप. राजेंद्र लाल रॉय चौधरी जो हैं इन सबका जो. है इतिहास मैं पहले ही रख दूंगा लोगों के. सामने ताकि कल को कोई ये ना बोले कि अरे. भाई ये अपने मन से मैं अपने मन से फिल्म. कैसे बना सकता हूं। इतनी बड़ी मैं थोड़ी. गांधी के ऊपर कुछ अपने मन से बना सकता. हूं। तो चूंकि वो रिकॉर्डेड है, डॉक्यूमेंटेड है इसलिए मैं दिखा रहा हूं. उसको। ठीक है। अ आप कॉन्ट्रोवर्सी में.
पढ़ते हो या कॉन्ट्रोवर्सी अपने आप आपके. आगे पीछे घूम के पहुंच जाती है? अभी आप. क्योंकि मैंने बहुत सारी लिस्ट रखी है।. नहीं मुझे पता है आप इसका जिस तरह से. प्रोमो काटेंगे कुछ ना कुछ कॉनंट्रोवर्सी. आप कराएंगे। देखिए कॉन्ट्रोवर्सी नहीं मैं. तो सीधा-सीधा सवाल पूछ रहा हूं। आपको पूरा. मौका दे रहा हूं कि आप हर बात को अपने. सिरे से अपने नजरिए समझा दें। जो आपको. लेकर छपती है लिखी जाती है। देखिए. कॉन्ट्रोवर्सी जो चीज है वो कैसे होती है? मैंने मैंने जब बोला अर्बन नेक्सल मैंने. एक बुक लिखी अर्बन नेक्सल तो कुछ एक हजार. लोग खड़े हो गए बोले ये आप कैसे बोल सकते.
हैं कंट्रोवर्सी चालू हो गई मैंने तो नहीं. बोला किसी की दाढ़ी में तिनका रहा होगा तो. उसी ने आवाज उठाई ताशकंद फाइल्स में. कांग्रेस ने मुझ पर लीगल केस कर दिए उनका. प्रॉब्लम था कश्मीर फाइल्स में यहां पर. यहां पर तो आपको समर्थन विरोध दोनों मिल. जा रहा है दोनों आप जस्टिफाई भी कर ले कुछ. चीजें हैं जिस पर हम चाहते हैं कि आप. प्रकाश डालें जैसे 2013 में एक ट्वीट आपका. बड़ा चर्चा चर्चित होता है और उसको अक्सर. समय-समय पर जब भी आपका कुछ होता है तो लोग. पोस्ट कर देते हैं। वो पोस्ट था नैनो कार. में गैंग रेप नहीं हो सकता। हम और 2011.
में निर्भया हुआ था। कार्टून था हां वो. कार्टून था जिसको आपने फन वे में लिखा. लेकिन लोगों ने कहा ये बैड टेस्ट में था।. हम पर मैं यहां एक बात बताना चाहता हूं।. उस वक्त के आप किसी के भी पोस्ट उठा के. देख लीजिए उस पीरियड के। राइट? 2008 से. लेकर 2014 तक हम शाम को लोग शराब पी के. मैं नहीं पीता हूं। पर शराब पी के एक अलग. चीजें लिखते थे। तो उस वक्त म्यूजिक. Twitter पे बहुत चलता था। जोक्स चलते थे।.
खाने पीने की बात चलती थी। लाइफ की बात. चलती थी। लोग अपनी पर्सनल बातें करते थे।. फिल्म इंडस्ट्री के सारे लोग वहां पे थे।. स्टैंड अप कॉमेडियंस भी थे। म्यूजिश एक. अलग माहौल था। और वो जो माहौल था वो अभी. अभी जैसा पोलराइज नहीं था। इतना पोलराइज. नहीं था कि तुमने कुछ भी बोला तो लोग गाली. ही देने वाले हैं तुमको। आप गुड मॉर्निंग. भी लिख दो तो लोग कहते हैं आज क्या गुड है. भाई आज की मॉर्निंग में आप कैसे लिख सकते. हैं ये ऐसा नहीं था मतलब डाटा फ्री नहीं. था ना पूरा हां तो इसलिए लोग किया करते थे. और इस तरह के औरकि उसमें एक अलग तरह के.
लोग थे मोर अर्बन. एक अलग तरह के लोग थे इसलिए उस वक्त थोड़े. से सेक्सुअल जोक्स चलते थे उस जमाने में. लेकिन फिर टाइम बदला टाइम बदला लोग. सेंसिटिव हो गए चीजों को लेके. चेंज हो गया सब कुछ ठीक है एक आपकी फिल्म. की हीरोइन थी तनुश्री दत्ता। उन्होंने कहा. कि आप उन्हें स्कर्ट पहना के दिन भर बिठाए. रखते थे। काम करवाते नहीं थे और वो दो. मिनट लेट हो जाए तो आप डांट दें। आप बहुत. रूट थे, एोगेंट थे। हालांकि उन्होंने उनके.
कई स्टेटमेंट इस बीच में आए जो वायरल रहे. हैं। जैसे उन्होंने इमरान हाशमी को भी. अपना भाई बता दिया था कि भाई जैसी फीलिंग. आती है। देखिए क्या है? देखिए मैं आपको. बताऊं। बट चॉकलेट में क्योंकि वो एक्ट्रेस. हैं और काफी एलगेशन आप पर लगाए देखिए. देखिए क्या यह फिल्म इंडस्ट्री ऐसी चीज है. कि एक्टर एक्ट्रेसेस पे इतना प्रेशर होता. है हर समय टू बी सक्सेसफुल और जब आप. सक्सेसफुल नहीं रहते हैं आपकी जिंदगी तो. आप कई बार ऐसे फ्रस्ट्रेट हो जाते हैं कि. आप यू डोंट नो व्हाट स्टेट ऑफ माइंड यू आर. इन राइट और वो सेनिटी में आप नहीं रह पाते.
हैं। आप रैशन नहीं रह पाते हैं। आपको. चीजें समझ में नहीं आती हैं। ऐसे वक्त में. मेरा ये प्रिंसिपल है क्षमा बड़न को. चाहिए। ये छोटन को बात माफ़ कर देना। लोग. लोग बोलते रहते हैं तरह लोग बोलेंगे ही. कुछ ना कुछ बोलते रहते हैं। पर उसको बहुत. ज्यादा सीरियसली लेना उस बात में घुसना. उसको तवज्जो देना वो शायदकि हम सेंसेशनल. वर्ल्ड में रहते हैं तो ठीक है लेकिन एक. इंसानियत के नाते देखिए तो हमें नहीं करना. चाहिए वो काम। लीव देम अलोन लेट देम बी।. ऑक्सफोर्ड और कैंब्रिज में आपके भाषण रद्द.
किए गए ये आपने कहा यह. हर व्यक्ति की आजादी पर एक तरीके से रोक. थी। कुछ लोगों ने विरोध किया। आपको बुरा. लगा था? हां या ना मैं बॉक्स पहुंचा और तब वो मुझे. मुझे बुरा सुनने आएगा। नहीं मुझे बुरा इस. बात का लगा था कि वो जो सारे पाकिस्तानी. जो लड़के थे और कुछ इंडियन लड़के भी थे. उसमें ऐसा नहीं है कि मुस्लिम थे हिंदू. लड़के भी थे। प्रॉब्लम ये था कि वो सारा. जो मुद्दा था मेरे बारे में नहीं था। अगर.
मुझे बैन करते कि मैंने यह बात करी या मैं. ऐसा हूं या मेरी फिल्म खराब है। मेरे को. एज अ फिल्म मेकर रोकते तो मैं समझ में आता. या मेरे को एज एन ऑथर रोकते तो समझ में. आता। वो पूरा का पूरा जो उनका प्रोटेस्ट. था वो ये था क्योंकि मोदी जी के साथ मेरी. एक फोटो थी और उन्होंने उस फोटो को अपने. मेमोरेंडम में लगा के उनको दिया था. यूनिवर्सिटी को और जो यूनिवर्सिटी अपने आप. को इतनी लिबरल क्रिटिकल थिंकिंग वाली. यूनिवर्सिटी बोलती है उसने भी उसी का. संज्ञान लेके उस फोटो का अच्छा ये मोदी जी.
के साथ खड़ा है रोक दो एक बात दूसरी बात. जो लोग कहते हैं उनका तो मोटो ही सत्य. सबसे बड़ी चीज है दुनिया में जो ट्रुथ की. इतनी ललका कार लगाते हैं ऑक्सफोर्ड वाले।. उन लोगों ने मुझसे झूठ बोला। उन्होंने. मुझसे झूठ बोला। अरे हमारा कुछ यह खराब हो. गया, वो खराब हो गया। इस तरह की बहुत ही. बहुत ही जो बचपन और वो पकड़े गए उसमें। तो. मैंने कहा कि ये क्या बात है? ये तो फिर. तो हिपोक्रेसी यही मेरा प्रॉब्लम है। ये. बातें बहुत बड़ी-बड़ी करते हैं और बात.
हिपोक्रेसी की सारी की सारी होती है।. इसलिए जब अब इस बार उन्होंने मुझे बुलाया. और इस बार जो बुलाया वो वर्ल्ड की सबसे. प्रेस्टीजियस डिबेटिंग प्लेटफार्म है।. मतलब वहां पे मंडेला, गांधी. बेनजीर भुट्टो भी यानी वर्ल्ड के. बड़े-बड़े लोगों को वहां बुलाया जाता है।. दिस टाइम दे इनवाइटेड मी देयर। मैंने कहा. अच्छा अब आओ। और मैं इसलिए नहीं कि मुझे. ऑक्सफोर्ड से लड़ाई है। मैं उस टाइप का. आदमी नहीं हूं। उसका जो सब्जेक्ट था वो था. शुड कश्मीर बी इंडिपेंडेंट।.
तो मैंने प्रिंसिपली फिर मैंने करनी जाऊं।. मैंने एक लेटर लिखा आपने देखा होगा बहुत. वायरल भी हुआ वो लेटर एंड दैट्स व्हाई आई. डिनाइड गोइंग देयर। ठीक है। यहां पर आपके. भाषण को बैन किया गया। Twitter पर भी बैन. हुआ। सारा भास्कर वाला इंसिडेंट जिसमें. हैशटग मी टू प्रोस्टट्यूट नन। अगेन मतलब. ठीक है। ये तो पुराना नहीं था। चलो. सेक्सुअल जोक था। एक जमाने में हो गया। ये. ये एक्चुअली ये ट्वीट को लेके मैं कभी. जिंदगी में अपोलजेटिक नहीं हो सकता हूं।. ये बिल्कुल परफेक्ट ट्वीट था। क्यों? वो.
इसलिए था उसका मकसद क्या है कि एक तो. अच्छी भाषा नहीं है लोगों की। लोग समझते. नहीं है अंग्रेजी। वो एक चीज और स्वरा ने. क्या किया? देखिए स्वरा ने जो किया एक दिन. उसको ह्ट करेगी ये बात। उसने उसको गलत. रेफरेंस में एक लाइन उठा के उसका गलत. फायदा उठाया फॉर इंस्टेंट पॉलिटिक्स।. वो मैं यह कह रहा था कि वहां पर बस्तर में. दिन रात लड़कियों का रेप होता है. और तुम उन लोगों की मसीहा बनती हो नेक्सल. की जो लोग रेप करते हैं और यहां पे एक नन.
का एक केस कुछ चल रहा था आई इफ आई रिमेंबर. करेक्टली और उसको लेके तुम एक्टिविज्म कर. रही हो सारी दुनिया की और वहां मैं उसकी. हिपोक्रेसी को मैंने एक्सपोज किया लेकिन. वो हैशटग जो था वो यस इट वाज़. डिप्लोमेटिकली नॉट करेक्ट मुझे पता नहीं. था कि उसको ऐसा मिसयूज करेंगे। मैंने ऐसा. अस्यूम किया था कि वो भी प्रिंसिपल लोग. हैं और लड़ाई को बराबरी से लड़ेंगे। एक. वैचारिक लड़ाई है। उसको बराबरी से लड़ो. आके तुम सामने। लेकिन उसको उसने औरत होने.
का फायदा उठा के उसको एक फेमिनिज्म उसमें. घुसा के एंड देयर वाज़ नो वे आई कुड हैव वन. दैट। बिकॉज़ आई एम अ मैन।. एंड शी इज़ अ वूमेन। तो वो गलत भी है। तो. भी मेरे को ही गलत माना जाएगा। इस हैशटग. को लेकर आपको शर्मिंदगीगी अपोलॉजी नहीं. मैंने कुछ गलत नहीं किया। मैंने सही बात. लिखी।. बस्तर में कितनी औरतों का रेप करते हैं ये. लोग। कितनी बच्चियों का करते हैं। 60 साल. से कर रहे हैं ये काम। क्यों हम नेक्सल्स.
को मार रहे हैं गोली? अगर इतने दूध के. धुले हैं। एंड स्वरा फौज फाइट्स फॉर देम।. वो उनके साथ खड़ी है। जो लोग मार रहे हैं।. वो टेररिस्ट लोगों के साथ खड़ी है। जिन. लोगों ने गिरजा देवी को काटा है।. यह सटायर है। अब प्रॉब्लम यह है कि देश को. इतना डम डाउन कर दिया गया है कि लोग इसको. समझते नहीं है। लोग नंस लैंग्वेज उसके बाद. से मैंने नंस लैंग्वेज में लिखना बंद कर. दिया। मैं भी समझ गया कि नहीं यू कांट आज. एक अच्छा पोएट अगर एक एक नवांस पोएट्री.
लिखेगा तो मरेगा ही वो। उसको कोई समझेगा. ही नहीं आज की तारीख में क्योंकि सब ब्लैक. एंड वाइट हो गया है। गाली गलौज करो तो लोग. बड़ा एप्रिशिएट करते हैं। आप गाली दे दो. किसी को तो लोग बड़ा एप्रिशिएट करते हैं।. लेकिन आप एक अच्छी एक एक पढ़े लिखे. व्यक्ति की तरह से भाषा में एक नवांस्ड. बात करिए तो लोग गलत समझ सकते हैं। बिकॉज़. इट्स ओपन टू इंटरप्रिटेशन।. राइट? तो वो हो गया। बीच में कई सारी. घटनाएं सर आई जिसमें बॉलीवुड की तख्तियां. सामने आई। हम अभी कश्मीर के पहलगाम में एक.
घटना हुई जिसने पूरे देश को जगझोर जिया और. उसमें यह सवाल बार-बार उठ रहा था कि. बॉलीवुड से वैसा प्रोटेस्ट नहीं हुआ जैसा. होना चाहिए था। जितना शोर जितना आक्रोश. पूरे देश में था इस बार तो अक्रॉस पार्टी. लाइन भी हमने जम्मू कश्मीर उमर अब्दुल्ला. को देखा। हमने ओवैसी साहब को देखा।. कांग्रेस से शशि थरूर आए। पॉलिटिकल लोगों. ने अपने बैरियर तोड़ के पार्टी लाइन से. आगे निकलकर इस बार देश के लिए आवाज उठाई।. जी। बट बॉलीवुड पर यह एलगेशन इस बार भी. आया और कुछ आवाें बॉलीवुड से भी आई। एक.
टीवी एक्ट्रेस थी उन्होंने मुस्लिम. एक्ट्रेस को लेकर कहा कि यहां पर तुम्हारी. खामोशी चुभती है। शक पैदा करती है। सवाल. पैदा करती है। बड़े सितारों में जिनकी. फिल्में आ रही थी उन्होंने तो लास्ट में. एक दो ट्वीट किए। बाकी खामोश रहे। मजबूरी. में किए होंगे।. देश की बात भी हो तो भी बॉलीवुड में वो. आक्रोश नहीं आता और वो तख्ती या वो विरोध. अगर आता बड़े सितारों से तो शायद उसका. इंपैक्ट अलग होता दुनिया में उनके सुनने. वाले लोग ज्यादा थे। पेलेस्टीन को लेके तो. सब उतरे ही थे। तख्तियां वक्तियां लेके.
मुझे अच्छे से याद है एक बार या कहीं वो. ब्लैक लाइव्स मैटर में भी उतरे ही थे।. देखिए मैं व्यक्तिगत रूप से मैं इसे गलत. मानता हूं। इसलिए कि देश के साथ सबसे पहले. जो लोग देश की जनता के कारण जिंदा हैं हम. उन लोग को खड़े होना चाहिए। एक बैंक का. मैनेजर अगर नहीं खड़ा होता है मुझे कोई. शिकायत नहीं है। हम लेकिन जो लोग इस देश. के ही कारण हैं जो कुछ भी हैं उनको और जो. इन्फ्लुएंसर्स हैं जिनकी बात से फर्क.
पड़ता है उन लोग को तो खड़ा ही होना. चाहिए। और इसमें आपने तो बॉलीवुड वालों को. एक ग्रुप बना दिया। पर मैं कहता हूं. बॉलीवुड वालों को भी आवाज उठानी चाहिए थी।. सारे इंडस्ट्रियलिस्ट लोगों को भी खुल के. सामने आवाज उठानी चाहिए थी। क्यों नहीं. उठानी चाहिए थी? सुबह उठ के अगर मैं ब्रश. करता हूं आपके मंजन से. अगर आप देश की. इकॉनमी का 70% हिस्सा आप ही के हाथ में है. तो आपको भी तो आवाज उठानी चाहिए इन. इंडस्ट्र जो इंडस्ट्रियलिस्ट हैं हमारे इन.
लोगों ने क्यों नहीं आवाज उठाई? क्यों. नहीं आके खड़े हुए ये सामने? तो आवाज कई. सेक्शंस को उठानी चाहिए। पर जो. इन्फ्लुएंसर्स हैं उनका ये मौलिक ये उनका. ये मोरल ड्यूटी है कि वो सामने आकर खड़े. हो देश के लिए और हम अमेरिका नहीं हैं। हम. भारत हैं। भारत जैसे देश के लिए जो कि एक. कहीं पे एक दरार है इस देश के अंदर। उस. दरार से हम कभी भी गिर सकते हैं। इसलिए हम. लोग अभी ग्रोथ पीरियड में अमेरिका ग्रोथ.
पीरियड में नहीं है। वो स्टेबलाइज है। वो. नीचे ही जा सकता है और जा ही रहा है। भारत. ग्रोथ फेस में है। इसलिए इसको पकड़ के एक. बेल की तरह सहारा देने की बहुत आवश्यकता. है। और ऐसे में इन लोगों का ये डरे हुए. लोग हैं। और क्यों डरते हैं? मुझे आश्चर्य. ये मालूम किससे डरते हैं। ये डरते हैं।. कोई Twitter में कुछ ना लिख दे हमारे लिए।. कहीं ये इमेज को ले इतना फंस गए हैं कि. अपनी इमेज के ही गुलाम हो गए हैं। क्या ये. जीते जागते लोग हैं भी? ये भी सवाल कभी.
इनको खुद ही पूछना चाहिए। क्या मैं वही. हूं जो मैं हूं या मैं एक इमेज का गुलाम. हूं। ये डरे हुए लोग हैं। ये सांस लेने से. भी डरते हैं। मैं आपको जैसे एक एग्जांपल. देता हूं। आमिर खान साहब हैं। ठीक है? मैं. उनकी कला की बहुत कदर करता हूं। बहुत और. भारत में जितना इनोवेशन सिनेमा में आमिर. खान लाए हैं उसके ऊपर किताबें लिखी जानी. चाहिए। मतलब पहला सिंग साउंड लिगान के साथ. उन्होंने शुरू किया। ऑल एंटायर फिल्म. लोकेशन शूटिंग हर आदमी किरदार में म्यूजिक.
पोएट्री लिटरेचर हर चीज लेके आए। अलग-अलग. फिल्में बनाई, दंगल बनाई। इतनी देशभक्ति. की फिल्में की है। लगान की है। रंगदे. बसंती की है। सरफरोश की है। सत्यमेव जयते. बनाया है।. अब टर्की टर्की को लेके अगर समझिए उनकी. ट्रोलिंग हो गई।. मुझे लगता है कि आमिर खान को खड़े होकर. कहना चाहिए कि मैं कितनी बार अपना. और कितनी फिल्में ऐसी बनाऊं। जब आप नहीं. बोलते हैं व्हेन यू चूज नॉट टू स्पीक तो.
आप बहुत लोगों को मौका देते हैं कि वो. अपने हिसाब से जो चाहे धारणा बना ले उसको।. बट ये सवाल इसलिए नहीं क्योंकि वो आमिर. खान है। जैसे वो आमिर खान उनके नाम को. लेकर ही एक परसेप्शन बन जाता है।. जैसे बकरी ईद बीती अभी। हम अच्छा मुझे पता. नहीं बकरी ईद का क्या मैं सोशल मीडिया पर. पढ़ने लगा। कई लोगों ने लिखा कि अभी. पहलगाम हुआ था और अब तुम बकरी ईद की. मुबारकबाद दे रहे हो। तो आमिर खान को लेके. मुझे ऐसा लगता है कि जैसे आपने कहा ना कि. इतनी सारी फिल्में बनाई मैं सोच रहा हूं.
लेकिन लेकिन आमिर खान को लेकर दो ही नजर. अच्छा भारत का 100 साल का फिल्म का इतिहास. है करेक्ट पर भारत का नाम किस एक बंदे ने. किया है पूरे इंटरनेशनल लेवल पे सिर्फ एक. ही तो फिल्म गई है अभी तक ना मिलने और कौन. सी फिल्म गई है हमारी बात है जो आगे तक गई. थी शर्म की बात नहीं है 100 साल के इतिहास. में बॉलीवुड की कोई फिल्म को कोई. इंटरनेशनल रिकॉग्निशन नहीं मिली आज तक. देशभक्ति से लबरेज थी रंगदेव बसंती सरफरोश. जैसी फिल्म में जो टॉपिक था इतना सेंसिटिव. टॉपिक उठाया गया था बताइए. लेकिन उसके बावजूद आमिर खान की इमेज. सत्यमेव जयते की सत्यमेव जयते और उसके.
बावजूद आमिर खान की इमेज केवल दो चीजों के. लिए है। एक वो टर्की वाली फोटो वायरल हो. आती है। वहां के राष्ट्रपति है और दूसरा. कि उन्होंने दो-दो हिंदुओं से शादी की वो. लव जिहाद से जोड़ दिया जाता है। यही दो. इमेज आमिर खान की नहीं मैं सोशल मीडिया. टॉक बात कर रहा हूं। हिंदुओं में भी. क्योंकि मैं उठता बैठता हूं। एक आम. कन्वर्सेशन में चर्चा यही होती है कि आमिर. खान की यही दो इमेज है। आमिर खान एज अ. फिल्म मेकर आमिर खान एज अ नेशनलिस्ट बातें. नहीं करते लोग। देखिए आमिर खान पर्सनली. क्या है मुझे उससे मतलब नहीं है। आमिर खान. इज अ फिल्म मेकर इज अ गाइडिंग फोर्स ऑफ़.
बॉलीवुड। इस बात को कोई वर्ल्ड में डिनाई. नहीं कर सकता है। दंगल जैसी फिल्म बनाने. की हिम्मत उनकी थी। तारे जमीन पर बनाने की. हिम्मत उस आदमी की थी। हम हां, सही बात. है। लापता लेडीज उसने बनाई है एज अ. प्रोड्यूसर। राइट? कौन बनाता है इस तरह की. फिल्में? कौन बनाता है आप मुझे बताइए? बट ही मेड ही एक्सपेरिमेंटेड। हर वक्त. एक्सपेरिमेंट किया। नए तरीके से मार्केट. करना। नई टेक्नोलॉजी को लाना। अभी मैंने. सुना है कि आमिर खान सितारे जमीन पर जो है. वो ओटीटी को देने से मना कर दिया है और.
डायरेक्ट YouTube में रिलीज कर रहे हैं।. ऑफ आई मीन किसकी हिम्मत है ये काम करने. की? एंड व्हाट अ ब्रिलियंट डिसरप्टिव. आईडिया। तो ये फिल्म इंडस्ट्री को समझनी. चाहिए ये बात। पर उनको भी समझानी चाहिए. ऑडियंस को ये बात। तो कहीं कम्युनिकेशन का. लैग है कहीं पे और डरना नहीं चाहिए। ये. लोग अपने घरों में बंद हो जाते हैं और बस. आके बाहर यूं यूं हाथ हिला के चले जाते. हैं। मेरे ख्याल से ये आई आई पर्सनली डोंट. लाइक दैट। यूं यूं करके हाथ हिला रहे हैं।. लाखों लोगों को बुला के वहां पे कर रहे. हैं। आप शहंशाह नहीं है। आप राजा नहीं.
हैं।. राइट? तो ये राजाओं की तरह बिहेव करना और. लेकिन जब देश की बात होती है। अरे आगे. खड़े ट्वीट क्या है? आगे खड़े हो जाओ।. आपने जो शहंशाह बादशाह कहा आपको एक. स्टेटमेंट याद आ गया शाहरुख़। सॉरी नहीं. नहीं नहीं मैं मैं किसी मैं किसी की बात. नहीं कर रहा हूं। नाना पाटेकर आपने एक. स्टेटमेंट दिया था पहले। नाना पाटेकर वेंट. कारगिल के वक्त में ही वेंट टू द बॉर्डर।. मैंने काम किया उनके साथ एक फिल्म में. उन्होंने बताया मुझे सब। हां ये सच है। आप. पूछ लीजिए अजीत डोभावाल जी से। आप किसी. आर्मी के उससे पहले हां हम और पहले होता.
था। आप देखिए तुम तो शायद बहुत छोटे उम्र. में बच्चे ही रहो। पैदा भी नहीं हुए होगे।. भारत का जब 71 का वॉर हुआ था 65 में तो. मुझे नहीं पता। पर मैंने सुना है जो जितने. फिल्म इंडस्ट्री वाले थे ट्रकों में. निकलते थे। चंदा इकट्ठा करते थे देश के. लिए। बाढ़ आती थी चंदा इकट्ठा करते थे।. कितनी फोटो है आप देख लीजिए। पूरी फिल्म. इंडस्ट्री आती थी। क्रिकेट मैचेस खेलते. थे। चंदा इकट्ठा करते थे। बाढ़ आ जाए, भूकंप आ जाए, देश लड़ाई लड़ रहा है हमेशा?
सुनील दत्त ने देखिए कश्मीर से. कन्याकुमारी तक यात्रा की थी पूरी। पैदल. चलके पद यात्रा की थी। राहुल गांधी जी तो. अभी आए हैं। कांग्रेस के सबसे सीनियर. पदयात्री तो महात्मा गांधी के बाद वही. हैं। सुनील दत्त साहब फिल्म इंडस्ट्री. हमेशा फोर फ्रंट में खड़े हो के देश में. कोई भी आंधी तूफान में खड़े हो के करती. थी। आज सब चार्टर्ड प्लेन में घूमने लगे. हैं। इसीलिए आपने कहा था कि देश बर्बाद कर. दिया।. ऑफकोर्स।. यस। शाहरुख खान। नहीं मैं नाम नहीं लेता.
हूं किसी का। बॉलीवुड को बर्बाद कर दिया. गया। या बॉलीवुड को आप काट सकते हैं।. बॉलीवुड इंडस्ट्री को शैंपू कंडीशनर. इंडस्ट्री बना दी गई। बिल्कुल शम यानी. आपने उसको अल्टीमेटली लाके ग्लैमर और. सेक्स के साथ जोड़ के खड़ा कर दिया। बस ये. अस्तित्व आपने बॉलीवुड का कर दिया है।. आप ऐसा नहीं है। आज जो लोग कहते हैं सब. लोग कि भारत में अच्छी नहीं फिल्में बनती. है। क्यों? चलिए आपसे मैं दीवार की बात. करता हूं। वो देश की चेतना से जुड़ी है कि.
नहीं? रोटी कपड़ा मकान जुड़ी है कि नहीं? आप 80 के दशक की सारी फिल्में देखिए।. गोविंद दलानी की फिल्में देख लीजिए। मनोज. कुमार आप अरे आप सलीम जावेद की फिल्में. देखिए। सही बात है। हां सही बात है। कौन. सा देश का ऐसा मुद्दा है जो उन्होंने नहीं. उठाया? बट उस पे तो आरोप लगते हैं कि व. रहीम चाचा को हमेशा हां वो ठीक है। वो वो. एक अलग विषय है। लेकिन जुड़ी तो कहीं ना. कहीं देश की जमीन से है ना। है तो हीरो तो. क्लर्क का बेटा या किसान का बेटा या मजदूर. का बेटा जो कि एक शोषण करने वाले के खिलाफ. आवाज उठाई। सारी ऐसी बनती थी। हां। अब. क्या हुआ? अब क्या है? कौन किससे लड़ रहा. है? हीरो हीरो किसका बेटा है? एनआरआई का.
बेटा है। और लड़ किससे रहा है? लड़की के. बाप से. आपने इतना डम डाउन कर दिया सिनेमा को आपने. जो चीजें एक. चीजें छुप के जो बातें होती थी उसको आपने. अपने शोज़ में लाके ड्राइंग रूम में लाके. रख दिया है और. आई डोंट एग्री विद दैट ये मेरा पर्सनल. पॉइंट ऑफ व्यू है। मुझे ऐसा लगता है कि जो. फिल्में हैं वो जमीन से निकलनी चाहिए और. जमीन से निकल नहीं रही है क्योंकि लोग जो. है वो जमीन पे है ही नहीं है। आपके पॉइंट. जमीन पे नहीं है। आप लेफ्ट में या राइट.
में ये सवाल तो बाद में उठता है। पहला. सवाल यह आपके पांव जमीन पे है कि नहीं? जब. आपके पांव ही जमीन पे नहीं है तो लेफ्ट. राइट तो बाद में आता है।. ठीक है? बंगाल में सर हिंसा का एक इतिहास. रहा है। ये फिल्म आएगी जैसा आप कह रहे हो. कि दिस विल ह्ट यू। और जब आप ये शब्द कोट. करते हो मैं तो कहता हूं दिस विल. डिस्ट्रॉय यू। डिस्ट्रॉय यू। अब डिस्ट्रॉय. यू। आप बहुत क्योंकि आप हैवी शब्दों का. इस्तेमाल कर रहे हो जो मुझे ये बताती है. कि इसमें कुछ ऐसा दिखाया जाएगा जो हमारी. रूह कपा देगा। जी।. अगर इसके बाद माहौल बिगड़ता है।.
क्योंकि चर्चा होगी। मैं आपके शब्दों को. सुन के इमेजिन कर सकता हूं। कश्मीर फाइल. के दौरान मैंने वो एक महसूस किया था कि. देखने का नजरिया, बात करने का नजरिया हमने. अलग तरीके से शुरू किया था। इसके बाद आपको. इस बात का डर नहीं कुछ इसमें दंगा फसाद. विवाद हो सकता है। देखिए, मैं तो दंगा. करने जाऊंगा नहीं। ना मैं विवाद करने. जाऊंगा, ना फसाद करने जाऊंगा। राइट? जब आप. कहते हैं चोर आया, चोर आया, चोर आया तो. सबसे पहले कौन सतर्क होता है और भागता है।. चोरी ही भागता है ना? तो अगर दंगा कोई.
करेगा तो चोरी तो करेगा तो मेरी फिल्म को. ही तो साबित करेगा वो। वही तो मैं कहना. चाह रहा हूं। वही तो मैं कहना चाह रहा हूं. कि जब मैं भारत के कॉन्स्टिट्यूशन की बात. करता हूं तो ये लोग दंगा करते हैं. क्योंकि इनको अपना कॉन्स्टिट्यूशन चलाना. है। बट आपको लगता है नहीं जैसे अभी पहलगाम. में हिंदू मुस्लिम डिवाइड बहुत ज्यादा हुआ. कि पहलगाम में जिनको मारा गया था नाम. पूछकर मारा गया था। पट खोलकर मारा गया था।. कलावा चेक करके कलमा पढ़वाकर मारा गया था।. और इस देश में बड़ी चर्चा चली कि वो मजहब.
का कोई आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता. लेकिन धर्म पूछकर ही मारा गया और हिंदू. मुस्लिम डिवाइडेंस बहुत ज्यादा हुआ। फिर. कई अच्छी कोशिशें हुई जिसमें कर्नल सोफिया. कुरैशी आई ओवैसी साहब आए, उमर अब्दुल्ला. आए और काफी हद तक चीजें बेहतर हुई और पूरा. देश एक साथ आया। अब ये फिल्म फिर आ रही. है। अभी उस जख्म से पूरी तरह हम आए नहीं. है और इसमें हिंदू मुस्लिम दंगों का एक. लंबा दौर दिखाया जाएगा। हम आपको लगता है. कि वो जो स्कार वहां लगे थे पहलगाम में. जिस थोड़े भरने की कोशिश किए थे वो.
बढ़ेंगे हिंदू मुस्लिम की चर्चा और बढ़ेगी. हिंदू मुस्लिम फसाद दंगे या चर्चा या. हेट्रेड एक दूसरी कम्युनिटी को लेकर सोशल. मीडिया बाकी जगहों पर हालांकि इसका मतलब. ये भी नहीं कि ना सच पुराना सच ना दिखाया. जाए फिर भी मैं क्योंकि अभी एक जख्म लेकर. हम देश से आ रहे हैं और इस बीच में एक. यूनिटी के तौर पर हम आगे बढ़ रहे हैं।. देखिए वो दुष्यंत कुमार कह है ना इस दीवार. पे इतने इश्तहार चिपके हैं कि कोई दरार. नजर नहीं आती। मैं उन लोगों में से जो. कहता हूं सारे इश्तहार फाड़ के फेंको।. पहले दरार को एड्रेस करो। आप जब तक उस. दरार को एड्रेस नहीं करेंगे भारत के अगले. 100 साल भी आप हिंदू मुस्लिम दंगे में.
फंसे रहेंगे। सबसे पहले सवाल ये उठता है. ये और सबसे इंपॉर्टेंट क्वेश्चन ये है. सारी पॉलिटिक्स तो हिंदू मुस्लिम पे होती. है। हम सारा मीडिया हिंदू मुस्लिम पे होता. है। अब तो क्रिकेट भी हिंदू मुस्लिम होने. लगा है। आतंकवाद सारा हिंदू मुस्लिम पे हो. रहा है। बंगाल सारा हिंदू मुस्लिम पे हो. रहा है। तो फिर एक स्टोरी टेलर को कोई. कैसे बोल सकता है ये बात कि तुम उस विषय. को ना उठाओ जो दिख रहा है मुझे मैं वो उठा. रहा हूं। आप बंद कर दो। मैं भी बंद कर. देता हूं। एक बात यह है। दूसरी बात यह है. कि जब तक यह मसला एड्रेस नहीं होगा हम.
भारत तरक्की नहीं कर पाएगा। हमारी सारी. प्रोडक्टिविटी सिर्फ इसी में बंटी हुई है।. यह राष्ट्र है क्या? आप कहते हैं गंगा. जमुना तहजीब। मैं भी कहता हूं बहुत अच्छी. बात है। जमुना भी है, गंगा भी है। लेकिन. और ध्यान से सुनना शुभांग इस बात को।. लेकिन जब जमुना गंगा में मिलती है तो उसके. बाद जमुना नहीं रहती उसका अस्तित्व खत्म. हो जाता है फिर वह गंगा बन जाती है तो अगर. भारत गंगा है तो कल को कोई भी नदी नाला उठ.
के कहने लगे नहीं साहब मैं गंगा में. मिलूंगा लेकिन अपना अस्तित्व भी बना के. रखूंगा यह मसला सॉर्ट आउट होना चाहिए और. जब तक यह मुद्दा सॉर्ट आउट नहीं होगा तब. तक आप लिख के ले लीजिए मैं रहूं ना रहूं. आपका ये डिजिटल इंटरव्यू रहेगा मेरी बात. लिख के ले लीजिए भारत कभी तरक्की नहीं कर. पाएगा कोई राष्ट्र तब तब तक तरक्की कर ही. नहीं सकता जब तक पूरा समाज एक ऑब्जेक्टिव. के साथ ना चले।. बटा हुआ समाज क्या करेगा?
और जो समाज बट रहा है उसको बांटने वाले तो. हजार खड़े हुए हैं। या तो हर आदमी दुकान. लगाने के लिए तैयार खड़ा हुआ है। क्यों. नहीं खड़ा होगा? आज देश को जाने का वक्त आया है। आपको इस. वक्त एआई के पीछे भागना चाहिए। आपको. इनोवेशन के पीछे भागना चाहिए। दुनिया की. ग्रेटेस्ट ऑफ द फिलॉसफी इस देश में. इन्वेंट हुई। आज पूरी साइंस से जाके वो. विलय हो रहा है उसका। आज पूरी साइंस और वो. दोनों जुड़ रहे हैं। कन्वर्जेंस हिंदू. फिलॉसफी और लेटेस्ट मॉडर्न साइंस दोनों अब.
एक हो रहे हैं। और इस वक्त में अगर इस देश. का अस्तित्व ही नहीं क्लियर होगा। हम हैं. कौन? आप आइडेंटिटी के बिना कैसे रह सकते. हैं? क्या मकसद है आपका बंगाल फाइल? जैसे. आपने कश्मीर फाइल का कहा कि आप मुझे डर है. भारत हासिल क्या हुआ? तो बंगाल फाइल बनाने. का आपका मकसद क्या है? सबसे पहली बात यह है कि भारत में जो लोग. बैठे हुए हैं सारे उनको यह समझ में आएगा ओ. माय गॉड यह तो हमारा है बंगाल इसको बचाना. हमारा कर्तव्य है ये मेरा प्रदेश है ये.
मेरी आइडेंटिटी है ये मेरा इतिहास है ये. मेरे मेरे बुजुर्गों की कहानी है ये मेरे. बुजुर्गों मुझे पता ही नहीं था कि मैं. मेरे वंश में ये हुआ है भाई ये मेरा वंश. इतने महान है हम लोग अब मैं इसको आपको. नहीं लगता कि बंगाल को हम अपना मानते हैं।. नहीं. नहीं हम लोग बंगाल को एक साइकोलॉजिकल लेवल. में पीछे वाले कंपार्टमेंट में बैठाल चुके. हैं। बंगाल को हमने एक कश्मीर की तरह से. आइसोलेट किया। नॉर्थ ईस्ट को भी करते हैं. हम। मणिपुर का भी यही प्रॉब्लम है।.
मणिपुर का भी आज महाराष्ट्र में बंगाल. जैसी स्थिति करके दिखाइए आप।. नागपुर में कुछ लोगों ने जाके वो. खुदाई-वुदाई कर दी कुछ अभी एक फिल्म के. चक्कर में पूरे देश में हंगामा हो गया। आप. क्यों नहीं मच करते बंगाल के ऊपर हंगामा? मैं वही आपसे पूछ रहा था कि जैसे छावा. फिल्म आई और छावा फिल्म का असर ये रहा कि. देश में औरंगजेब को लेकर एक नए सिरे से. नफरत शुरू हो गई। औरंगजेब गालियां भी दी.
गई। वो जो आप जिक्र कर रहे हैं खजाना. खोजने का वो भी चल गया। मेरी फिल्म वो सब. नहीं मेरी फिल्म लोगों को ये बताएगी कि. तुम चौथे शेर हो। तुम हो वी द पीपल। जो. कुछ इस देश में है, जो कुछ भी है, यह. पार्लियामेंट, यह सुप्रीम कोर्ट, ये. मिलिट्री, एयर फोर्स हर चीज वी द पीपल ऑफ़. भारत। मैं इसको फ्रेम अलग करता हूं। थोड़ा. ब्रूटल फ्रेम करता हूं आपको। क्या आप. ब्रूटल तरीके से रखते हो? क्या विवेक मेरे. प्रोग्राम का नाम ही ब्रूटली ऑनेस्ट है।. क्या विवेक अग्निहोत्री की बंगाल फाइल्स. इस देश में मुसलमानों को लेकर नफरत पैदा.
करेगी? नहीं।. नहीं बिल्कुल नहीं।. लेकिन. कम्युनल वायलेंस को ले इतनी बड़ी अवेयरनेस. क्रिएट करेगी कि कम्युनल वायलेंस ने भारत. की सबसे बड़ी धरोहर भारत की सबसे बड़ा. प्राइड जो है उसका क्या हाल कर दिया और. भारत के जनजन को अवेयर करेगी कि कहीं हम. फिर से डायरेक्ट एक्शन डे की पॉलिटिक्स को. तो नहीं जिंदा कर रहे हैं। उसे सींच तो. नहीं रहे हैं पानी डाल के। कहीं ऐसा तो.
नहीं है हम इंच बाय इंच एक जो गेम है. इललीगल इमीग्रेंट्स का डेमोग्राफी चेंज का. गुंडा राज का कहीं हम ऐसा तो नहीं है कि. आज जो 20 साल का लड़का है जब वो 50 60 साल. का हो तब शायद बंगाल जो कश्मीर के बारे. में हम सोचते हुए बड़े हुए कहीं वो ऐसा ना. सोचे ऐसा तो नहीं है। विवेक अग्निहोत्री. एंटी मुस्लिम है? बिल्कुल नहीं।. आपसे कभी किसी ने कहा कि आप सिर्फ हिंदुओं. की बात करते हैं। मेरी तो फिल्म का जो.
फर्स्ट मेरी कश्मीर फाइल का तो प्रोड्यूसर. ही मुस्लिम था। मेरी जो यह बंगाल फाइल्स. के तो आधे से अधिक लोग कश्मीर फाइल के तो. डायलॉग तक मुस्लिम लड़कों ने लिखे हैं. कश्मीर के जो कि मिलिटेंसी में इन्वॉल्व. रहे हैं। मेरी तो ये जो फिल्म है इसमें. मेरा फर्स्ट एडी तो मुस्लिम लड़का है।. बंगाल फाइल्स हां कितने मुस्लिम लोगों ने. काम किया। इसमें कितने मुस्लिम है? आधे से. यूनियन मुस्लिम है। मतलब मुस्लिम से क्या. लेना देना? मेरे दोस्त है मुस्लिम। मैं. भोपाल में बड़ा हुआ हूं।. मेरे घर में कई लोगों ने शादी यही.
प्रॉब्लम है। प्रॉब्लम यह होता है हम ना. एक बहुत बड़ी बात को छोटा बना देते हैं।. यह है पॉलिटिक्स का खेल। इसका मुसलमान एक. मुसलमान आदमी अगर कहीं पर टीचर है तो वो. उसका उस पॉलिटिक्स से क्या लेना देना है. आप मुझे बताइए? वो बेचारा वो भी तो उतना. ही असहाय है जितना दूसरा एक हिंदू टीचर. असहाय है। पुलिस में जाने से वो मुस्लिम. आदमी भी उतना ही डरता है जितना एक हिंदू. आदमी डरता है। क्या हिंदू ऐसा है कि हिंदू. कहता है नहीं मैं जाऊंगा पुलिस में तो. पुलिस मेरी हेल्प कर देगी। ये सवाल सर. इसलिए आया होगा क्योंकि जैसे कश्मीर फाइल.
आपने बनाई। आपने खुद जिक्र किया कि हां पर. मैं इस्लामिस्ट पॉलिसी के अगेंस्ट जैसे. आपने खुद जिक्र किया कश्मीर फाइल्स आपने. बनाई उसमें कुछ लोगों ने कहा कि इसका. मुस्लिम वर्जन आना चाहिए नहीं आना चाहिए।. कश्मीर के कई मुसलमान है वो उनका भी एक. दर्द है। उनकी भी एक कहानी होगी कि उनका. भी एक पहलू होगा। एक एक्सट्रीमिस्ट वाला. होगा एक शायद नार्मल मुसलमान का भी कहानी. होगी। टीएमसी तो पूरी फिल्म वालों की. पार्टी है। इतने फिल्मी लोग उनके यहां भरे. पड़े हैं। तो बनाएं? हमने कम बनाए। भई. दोनों बनने चाहिए। आप डिबेट नहीं करते। आप. टीवी में थे तो डिबेट होती है दोनों तरफ. से। आप दोनों तरफ के लोगों को बुलाते हैं।. अगर आपने एक पंडित को बुलाया तो मुल्ला को.
भी बुलाते हैं। इसीलिए आज मैं उधर के सवाल. में आप पे दाग रहा हूं। हां बिल्कुल। वो. कोई दूसरा व्यक्ति होता शायद मैं आपके. सवाल उसको दाग रहा हूं। बिलकुल बिल्कुल तो. बनाए ना। भाई मैं मुझसे लोग ये क्यों. उम्मीद करते हैं कि मेरे कंधे इतने इसलिए. दो सवाल पूछा फिर कि आप एंटी मुस्लिम है? नहीं नहीं बिल्कुल। मैं कुछ एंटी नहीं. हूं। मैं हिंदुओं में भी जो गलत चीज होती. है मैं उसके अगेंस्ट भी बोलता हूं। मैंने. बोल दिया तो फंस गया था। मेरे को लोग बहुत. गाली भी देते हैं। इसलिए मुझ पे शक भी. करते हैं कई। सवाल वो नहीं है। सवाल ये है. मैं मैंने एक बार लिखा था Twitter में आप. देखिए Twitter की पॉलिटिक्स कैसी अजीब सी.
है। मैं से किसी ने पूछा मैंने कहा नीदर. आई एम लेफ्ट विंग नर राइट विंग आई एम. इंडिया विंग। ऐसे ही हां एक पढ़ा मैंने. हां आप यकीन नहीं करेंगे उस रात को मुझे. कम से कम 5 10 राइट विंग के लोगों ने. अनफॉलो कर दिया।. तो मैंने कहा भाई इंडिया विंग से भी. शिकायत है लोगों को। तो इसका मतलब उनकी. कोई पॉलिटिक्स ही नहीं है। मैं मेरा इस. देश के हालात इसीलिए बर्बाद है क्योंकि इस. देश में अगर कुछ गलत हो रहा है और आप सवाल. उठाओगे तो उस गलत जिसकी तरफ से हो रहा है.
उसके सपोर्टर आपको गाली दे देंगे। हां। ये. मैंने खुद भी झेला खूब है। आप देखिए हिंदू. मुस्लिम मैं सवाल आपसे ये पूछता हूं कि हम. हिंदू हैं मुस्लिम है। पर क्या हम भारतीय. होना भी भूल गए? मैंने ये सवाल पूछा था क्या आप इंसान होना. भूल गए? 1 लाख आदमी अनफॉलो कर दिए थे।. हां, कर देंगे आप। तो मैं कह रहा हूं क्या. हम भारतीय होना भूल गए? क्या भारतीय होना. भी एक गलत शब्द हो गया है? तो अगर हम. भारतीय हैं तो बंगाल की पॉलिटिक्स, पॉलिटिशियंस, बंगाल के लोग उनको वो भारतीय.
हैं। वो बंगाली नहीं है। ठीक है। दिस, दिस. इज व्हाट माय फिल्म टॉक्स अबाउट। मेरी. फिल्म यही मुद्दा उठा रही है। ठीक है। अब. लाइटर सेगमेंट पे आते हैं सर। अह एक बड़ा. इंटरेस्टिंग सवाल ऐसे मेरे मन में आ रहा. था। अगर कश्मीर फाइल में मुस्लिम वर्जन. दिखाना हो तो वो कौन सा बॉलीवुड का. डायरेक्टर है जिससे आप रिकमेंड करोगे कि. इससे बनवाइए अच्छा दिखाइए। विवेक रंजन. अग्निहोति. मैं बनाऊंगा। मैं मैं एक एक मेरे को. फुर्सत मिले। मैं बहुत देखिए चारप साल हम. रिसर्च करते हैं। बहुत टाइम लेते हैं।.
स्लो करते हैं। मैं मैं आपको एक बात बताता. हूं जो आम आदमी नहीं जानता होगा। जानते भी. नहीं आम आदमी।. इंडिया को लेके सबसे ज्यादा लॉयल पुलिस. कौन सी है? आप जानते हैं? कौन सी? जेएन की. पुलिस।. इतनी ज्यादा मैं जानता हूं इस बात को लेके. कई लोग गाली देंगे क्योंकि वो समझते नहीं. है पर मैं कह रहा हूं तो उस पर रिसर्च. करें। उस बात को समझें और जानेंगे नहीं है. तो फोन लगाएं किसी को जो जिस पे भरोसा. करते हैं। अगर कोई हिंदू को बुरा लगता है.
तो कट्टर हिंदू से पूछो वहां के। जिसको. जिस पे भरोसा है मेरी बात को भूल जाओ।. शाम को वह रात को खाना खाएगा। राइट? एक एग्जांपल दे रहा हूं हाइपोथेटिकल।. इंडिया पाकिस्तान मैच चल रहा है। हो सकता. है कि वही इंस्पेक्टर पाकिस्तान को सपोर्ट. कर रहा होगा घर पे बैठ के। पर अगले दिन. वो लड़ जाएगा उस टेररिस्ट से जान दे देगा।. आप जेएन के पुलिस के बारे में शायद ही.
रेयरली आप सुनेंगे कभी डिसलॉयल्टी का केस।. और ये बात आप वहां के कमि जितने रिटायर्ड. कमिश्नर हैं पुलिस के उनसे पूछ लीजिए।. इंटरेस्टिंग जितने रिटायर्ड डीआईजीस हैं. उनसे पूछ लीजिए। आप जिस पे भरोसा करते हैं. उससे जाके ये बात पूछ लीजिए। मैं खुद. आश्चर्यचकित रह गया भाई कि पाकिस्तान को. सपोर्ट करेगा मैच में लेकिन हां पाकिस्तान. के आतंकवादियों को ठोक देगा। ठोक देगा. अगले दिन सुबह उठ के।. ये बात तय है। कितने हिंदू ऑफिसर्स की.
जाने बचाई है उन लोगों ने। अपनी जान बचा।. क्या लॉजिक इसके पीछे आपको मिला? वही मैं. आपको बताना चाह रहा हूं कि हम ना हम क्या. करते हैं? डेंजरस क्या चीज है? एक एक ऑटो. चला रहा है समझिए एक मुस्लिम आदमी। अब. उसको लोग पीट दें। अब वो असहाय आदमी वो. क्या करे? वो तो उसको तो उसको बच्चे हैं. दो पाल रहा है। कर रहा है। उसको तो उसने. तो कुरान भी नहीं पढ़ी होगी। समझ में भी. नहीं आती होगी उसको। उसको कुछ लेना देना. नहीं। ठीक है? वो मुस्लिम है। जुड़ जाता. होगा उस वक्त। अब आप उसको मार दोगे तो. जुड़ जाएगा। लेकिन खतरनाक चीज क्या है?
खतरनाक चीज है। ये जो इस्लामिस्ट. पॉलिटिक्स है जो ग्लोबली जो चल रही है जो. यह कहती है कि सिर्फ हम ही को जीने का हक. है जो उमा की बात करती है वो खतरनाक है और. वही अमेरिका उससे लड़ रहा है, यूके लड़. रहा है, फ्रांस लड़ रहा है। सारी दुनिया. डायरेक्टली इनडायरेक्टली किसी ना किसी. तरीके से उसी से लड़ाई लड़ रही है।. और ये जो ट्रंप अभी गए थे सऊदी अरेबिया ये. उसी से लड़ाई लड़ने गए ये उसी स्ट्रेटजी. का एक लार्जर थिंकिंग का पार्ट है कि.
अच्छा इनसे लड़ नहीं सकते तो इनको अपने. साथ करो. वो गलत है और भारत मेंकि इतना अनएजुकेशन. है इतनी अवेयरनेस का एक प्रॉब्लम है. पॉलिटिकल अवेयरनेस इतनी डमडाउन है हमारे. देश में शुरू से ही उसका फायदा उठाया जाता. है आप मुझे बताइए मैंने फिल्म बताई मेरे. मेरे को क्यों फतवा इशू करने की जरूरत है. 10 फिल्में बन चुकी है कश्मीर के ऊपर. जिसमें उनका पॉइंट ऑफ व्यू दिखाया गया है. तो किसी ने तो नहीं कहीं बैठ के मंदिर में. या किसी जगह पे फतवा इशू कर दिया उनके.
अगेंस्ट। और क्यों टोलरेट किया जा रहा है. इसको? और दूसरी बात यह है जो टेररिज्म. होता है उसके खिलाफ पढ़े लिखे मुस्लिम. मॉडरेट मुस्लिम्स क्यों नहीं बोलते हैं? या तो वो डरते हैं मतलब अब जैसा अब इसी. में कहूंगा आमिर खान ने दिखाया था. टेररिज्म को सरफरोश पे। जस्टिफाई किया. उसको वो कौन सी फिल्म में? सरफरोश। हां।. सरफरोश एक्सपोज किया था। हां। पर वो. कश्मीर का नहीं था। मैं कश्मीर के. कॉन्टेक्स्ट में बात कर रहा हूं। कश्मीर. के कॉन्टेक्स्ट में आप देखिए बंगाल पे भी. जितनी फिल्में मिलेंगी आपको वो सारी की. सारी गरीबी के ऊपर बना दी गई है।.
पर वहां का सबसे बड़ा प्रॉब्लम है वहां का. श्राप है कम्युनल वायलेंस।. ठीक है। सर एक रैपिड फायर है। बायोपिक्स. हमेशा सच्ची होती है। रियल या रियल. एक्सजेजुरेटेड होती है।. ही होती है। बॉलीवुड के अंदर भी कोई. माफिया है? बॉलीवुड ही माफिया था। यानी अब. है कि नहीं मुझे पता नहीं। बॉलीवुड अब. दिखता ही नहीं। बचा ही नहीं। फिल्में ही. नहीं है तो। लेकिन हां बॉलीवुड अपने आप. में ही एक माफिया है। बॉलीवुड में अ जो ये. आजकल नंबर्स आते हैं बड़ा एक वो चलता है.
कि ये ये सब फ्रॉड है। इनका कोई सिर पैर. ही नहीं है। वो हम भोपाल में बड़े हुए थे।. भोपाल में लोग ऐसा बोलते हैं कहने लगा यार. पता है तुमको भोपाल से बड़ा तालाब मियां. पूरी दुनिया में कोई नहीं है। तो एक लड़का. कहता मियां कैसी बात कर रहे हो यार? इससे. बड़ा तालाब तो हमारे नाना जी का हमारे. गांव में हम दिखा देते हैं आपको। तो इस. तरह की बेसिर पैर की बातें भोपाल में. पटियाबाजी बोलते हैं उसको पटिए पे बैठ के. कुछ भी बोलना ये नंबर्स टोटली फ्रॉड है।. ये इतना बड़ा स्कैम है जिसकी आप कल्पना.
नहीं कर सकते। बॉलीवुड में अपनी पिक्चर को. खरीद के टिकट खरीदवा के हाई बनवाई जाती. है। ऑफकोर्स. ऑफकोर्स मतलब. ऑफकोर्स. उसके रेट कार्ड्स हैं। रेट कार्ड्स हैं. उसके कि इतना इतने पैसे दो तो इतनी बुकिंग. दिखाएंगे। इतना पैसा दो तो इतनी बुकिंग. दिखाएंगे। ये सब फ्रॉड नंबर्स हैं। ये. स्टार्स के ईगो को सेटिस्फाई करने के लिए. किया जाता है ताकि उनका वर्चस्व लगे कि. हां हम जिंदा हैं। अभी अभी कंट्रोवर्सी. क्योंकि ओपन हुई थी इसलिए मैं कोट कर दे. रहा हूं वरना कोट नहीं करता मैं। दिव्या.
घोसला ने आलिया भट्ट की फिल्म को लेकर. किया था। अच्छा ये मुझे नहीं पता। शी. पब्लिकली पोस्टेड कि ये नंबर गेम की. होशियारी की गई। नहीं ये तो ये तो कोमल. नाटा साहब जो की इतने सीनियर क्रिटिक हैं. उन्होंने तो खुल के किसी मैंने देखा है. पॉडकास्ट में खुल के ये बात एक-एक नंबर तक. बताया है और ये तो ओपन ट्रुथ है हमने ओपन. लाए है तो सबको पता है कि ये झूठ है ये तो. आदमी लेके आता है ताकि एक माहौल बन जाए. लोग टिकट खरीद लें माहौल बनाने का सारा. गेम वही है नहीं वो भी नहीं है टिकट कौन. खरीदता है आपको क्या फर्क पड़ता है उससे. आप टिकट खरीदते हैं क्या देख बट एक होता. है ना कि सब जा रहे हैं देखने भाई चलो देख.
कर आते हैं यार क्या नहीं नहीं लोग फिल्म. देखने तब जाते हैं जब आपका पड़ोसी बोलता. है मैं देख के आया बड़ी अच्छी आपका दोस्त. बोलता है मैं देख के आया बड़ी अच्छी आपकी. मौसी बोलती है आपकी बहन बहन बोलती है।. आपके बचपन का दोस्त पान वाला बोल देता है।. कभी पेट्रोल पंप वाला बोल देता है। तब आप. जाते हैं देखने। नंबर देख के कोई नहीं. जाता इस दुनिया में। लोग इतने मूर्ख नहीं. है। ये नंबर सिर्फ स्टार के ईगो को. सेटिस्फाई करने के लिए किया जाता है। और. दूसरा ओटीटी का प्राइस लेने के लिए।. दैट्स द गेम। ये गेम है सारा।. ओके। अच्छा अगर ये फिल्म आपकी सुपरहिट.
होती है कश्मीर फाइल्स की तरह आपको बहुत. सारी शुभकामनाएं।. बट कभी सोचा है आपने कि इसको हम ओटीटी पे. शिफ्ट करेंगे। जैसे यह बहुत बड़ा चैप्टर. ये है। ओटीT पे तो जाएगी अल्टीमेटली। नहीं. नहीं ओटीटी पे मतलब वेब सीरीज के माध्यम. से कि आधे घंटे 2 घंटे में समेटने वाली. कहानी नहीं वो मेरे पास तो 10 12 घंटे की. कहानी हो। मैं तो मैं तो अगले 5 साल तक. इतना मटेरियल कश्मीर और इसका इकट्ठा हो. गया मेरे पास कि उनको जोड़ के मैं अगले 5. साल तक वेब सीरीज बना सकता हूं। क्या. प्रोजेक्ट्स हैं आपके अगले? मैं देखिए अभी. तो एक तो मैं महाभारत का जो एक.
इंटरप्रिटेशन है पर्व डॉक्टर एसएल बरप्पा. का तो उन्होंने मुझे फोन कहा था फोन करके. कहा था कि भ इसको तुम बनाओ तो उसके मैंने. राइट्स लिए थे उस पे काम चल रहा है कई. दिनों से वो कर रहा हूं और ये जो फिल्म थी. इसको दो पार्ट में बना रहे थे तो इसका. दूसरा पार्ट जो है कुछ थोड़ा शूट भी हो. गया है और उसका अगला पार्ट करूंगा ओके एक. ओवरटेड फिल्म जो सबको पसंद है पर आपको मजा. नहीं आया ऐसे बहुत सारी फिल्में हैं यार. कोई जो आपको लगा सब बड़ी तारीफ कर रहे थे।. मैं नाम नहीं लूंगा यार। फिर एक तुम बहुत.
विवाद खड़ा करवा दोगे। बट ये बहुत सारे. लोगों ने बहुत सब नाम लिए कि यार ये फिल्म. सबको पसंद आई। वो मेरी अपनी चॉइस है। मैं. मैं उसमें नहीं पढ़ना चाहता। सच्ची कह रहा. हूं। अच्छा कोई एक ऐसी फिल्म जो लोगों ने. कहा यार अच्छी नहीं है। आपने देखी आपने. कहा क्या कमाल की फिल्म है यार। नहीं ऐसी. बहुत सारी फिल्में हैं। मैं मुझे लापता. लेडीज बहुत अच्छी लगी। ये तो नाम ले सकते. हैं। हां वो ले सकता हूं। बट लापता लेडीज. सबने तारीफ कर दी थी। उसकी माउथ पब्लिसिटी. अच्छी हुई थी। मैंने भी मैंने मैंने जब. देखी थी तब कोई जानता भी नहीं था उस फिल्म. को। तो मैंने तभी कहा था ये बहुत अच्छी. फिल्म है और बड़ी प्यारी फिल्म है। बहुत. ही हुनर से बनाई गई है और बहुत सारी. फिल्में आती हैं। देखिए छोटी-छोटी मराठी.
की कई अच्छी फिल्में आती हैं। मलयालम की. बड़ी अच्छी फिल्में आती हैं। उनकी तारीफ. होती है। पर प्रॉब्लम ये है कि इंडिया में. पता नहीं क्यों हम सिनेमा को आर्ट फॉर्म. की तरह से नहीं देखते हैं। हमें अभी भी. वही गाना बजाना वैसा लगता है। पर इतनी. अच्छी इतना अच्छा काम हो रहा है। एक बात. मैं आपको बताऊं। आप जैसे निकले ना एकदम से. अचानक से और आपने क्रांति ला दी ना इस तरह. से ऐसा ही होने वाला है। यही होगा।. कोई निकलेगा मैं तो अलग हटके अलग उसमें.
हूं। लेकिन कमर्शियल सिनेमा जो बॉलीवुड है. वो मर नहीं सकता। एक कोई निकलेगा और कोई. अचंभा करेगा और फिर सब उसकी उसी की तरह से. मी टू करने लगेंगे। जैसे आपकी नहीं नकल. करते हैं कई लोग आजकल। तो मैं आया था।. मुझे कोई बता रहा था कि पहले यहां पे आप. करते थे और अब यहां पे इतने सारे लोग. पॉडकास्ट करने लगे नोएडा में बुकिंग नहीं. मिलती है स्टूडियो की। दिल्ली नोएडा में. दिल्ली नोएडा में पॉडकास्ट कल्चर पहले. नहीं था वो हमारे बाद शुरू हुआ है। इसको. हम प्राउडली कह सकते हैं। और अब मैंने. सुना है हर स्टूडियो गली-गली में होने लगे. हैं यहां पे। ठीक है अच्छी बात है। पर. अच्छा है। चलिए आपने एक इंडस्ट्री को खड़ा.
कर दिया है। बधाई हो आपको। हालांकि अब हम. वापस टीवी की दुनिया में भी जा रहे हैं।. चलिए बहुत अच्छी बात है। उसके लिए भी वो. भी एक नया कल्चर है। अभी तक टीवी में. कल्चर नहीं था कि आप इंडिपेंडेंट काम करते. हुए एक संस्थान से एसोसिएट हो जाए। टीवी. संस्थानों ने बैन कर रखा था कि आप अपना. YouTube यूज़ नहीं कर सकते। अपने व्यूज आप. नहीं सकते। आप अपनी मर्जी से ट्वीट नहीं. कर सकते। अपनी मर्जी से अपनी राय नहीं रख. सकते। हम अब ये पैटर्न भी मुझे लगता है कि. शुरू कर रहे हैं। शुरू करना है। ये. पॉडकास्ट जब आएगा तो शायद तब तक ऑफिशियल. हो जाएगा। अरे वाह क्या बात है। बताइए. एडवांस। तब तक कहानियां ऑफिशियल हो.
जाएंगी। कभी सोचा सर आपने यशराज की फिल्म. या जैसे आदित्य चोपड़ा बनाते हैं, करण. जौहर बनाते हैं वैसी भी फिल्म बनाओगे आप. कभी? मैंने इसलिए नहीं कि मुझे कोई उनसे. प्रॉब्लम ऐसे फिल्म बनाने की नहीं नहीं. मैं पर मैं बना नहीं पाऊंगा आई एम नॉट. कॉम्पिटेंट फॉर आप नहीं बना पाऊंगा कभी. खुशी कभी गम मैं नहीं बना पाऊंगा मैं नहीं. बना पाऊंगा मैं उस लेवल का प्यार नहीं. समझता हूं मैं मुझे उतना प्यार करना नहीं. आता है तो नाम सुनेंगे तो काफी नाराज हो. जाएंगे नहीं वो बड़े पल्लवी प्यार उनका भी. पैसा लगा प्यार के इम्तहान में पल्लवी फेल. नहीं कर सकती हमको लेकिन उतना मीठा प्यार. मुझे नहीं आता है यानी मैं वैसी फिल्में.
नहीं बना पाऊंगा मैं बना नहीं सकता इसलिए. आई एम नॉट कॉम्पिटिटेंट हर आदमी की अपनी. स्ट्रेंथ होती है तो और वो मेरे जैसी. फिल्में नहीं बना सकते हैं। आप मानते हो. अभी भी कि सरकार उनकी है लेकिन सिस्टम. हमारा है। हां. हां यस सही। अभी भी यस अभी भी उस उसके. पीछे बहुत स्ट्रांग रीज़ंस हैं। अभी एक. घटना आई थी शर्मिष्ठा एक लड़की थी। कौन. मैं? एक लड़की थी जिसने प्रॉफेट मोहम्मद को. लेकर कुछ कह दिया था और काफी कंट्रोवर्सी. हुई। गलत शब्दावली का इस्तेमाल किया था।.
उसने माफी मांगी। फिर ये आया कि इस देश. में हिंदुओं को आप गाली दे सकते हैं। किसी. और रिलीजन पे आप बोलेंगे तो आप जेल में. चले जाएंगे। बट अगर आप हिंदूज़्म बोलते हैं. तो आप बोल सकते हैं। और फिर कुछ लोगों ने. आपका डायलॉग को चिपकाया कि सरकार उनकी है. लेकिन सिस्टम अभी भी देखिए गाली तो किसी. को भी देनी नहीं चाहिए। नहीं तो एक एक एक. आप ही का ये तो आपको निर्धारित खुद सोचना. है कि आप गाली दे ना दें। पर जनरली सोशल. मीडिया में पब्लिक में किसी को देनी नहीं. चाहिए। और ठीक है अगर जिन जिस पे किसी का. फेथ है चाहे किसी कोई भी हो। मुझे अपने.
पिताजी पे फेथ है तो आप गाली ना दें उनको।. लेकिन अगर मेरे पिताजी ने कोई बात कही है. और जो लिखी है और जिसको हजारों वर्ष से. माना जाता है कि उन्होंने ये लिखी है. उन्होंने ये कही है। उसके बारे में अगर. बोला जाए तो उसमें क्या हर्ज है और क्यों. नहीं बोल सकते उसके बारे में? ऐसा क्या है. कि उसको बोलने में कोई सबके समस्या क्या. है उसके बारे में बोलने में? ये जो है कि. नहीं आप आप नहीं बोल सकते साहब इसके बारे. में।. राइट? आप तो लिबरल लोग हैं। आप अपने.
भगवानों के बारे में जो बोलना है बोल।. यहां नहीं बोल सकते। यही मैं कह रहा हूं।. ये चीज जब तक निर्धारित नहीं होगी इस देश. में। नपुर शर्मा पे आपने सपोर्ट किया था. और आप जो बात कह रही है उसी तरफ इशारा कर. रही है। जो नपुर शर्मा ने कहा था. शर्मिष्ठा ने भी उसको कमोबेश वही बातें. कही थी। देखिए मैं मेरी आ रही है फिल्म।. मैं किसी का नाम वाम लेके बात नहीं करना. चाहता हूं। मेरा उद्देश्य इस मुझे अर्जुन. की तरह मछली की आंख दिख रही है। मैं बहुत. बड़ा काम कर रहा हूं। मेरे लिए यज्ञ है और.
यह मैं इस राष्ट्र के लिए समाज के लिए एक. बहुत बड़ी चीज समर्पित करने जा रहा हूं।. मैं छोटी चीजों में उलझ के उसको खराब बड़े. गेम को खराब नहीं करना चाहता हूं। लेकिन. ये बात सत्य है कि ऐसा क्या है? ऐसा क्या. है कि हम हम उस बारे में बात ही नहीं कर. सकते।. अगर अगर पूरे राष्ट्र के 80 100 करोड़. लोगों को एक बात गलत लगती है तो उसके बारे.
में क्यों नहीं बोल सकते? एक बार बोलने दो. ना दिल की बात निकलने दो ना। आप कब तक. नासूर की तरह उसे अंदर रखें? उसका अपमान. के तौर पर देखते हैं कि उनके मैं अपमान. नहीं कर रहा हूं। मैं सवाल कर रहा हूं।. इसमें अपमान क्या हो गया? राम और सीता को लेकर सवाल नहीं उठते हैं. कि राम ने सीता के ऊपर ऐसी बात क्यों करी? क्यों सीता को धरती में समाना पड़ा? क्यों. एक धोबी की बात मान ली? सवाल उठते हैं कि. नहीं इसके ऊपर? तमाम लोगों के ऊपर उठते. हैं। कृष्ण के ऊपर कितना कहते हैं? अरे. लीला करते थे वो तो बिना समझे हुए लोग.
बोलते हैं। उसका पोएटिक मीनिंग बिना समझे. हुए बोलते हैं। खजुराहो की जो पेंटिंग, खजुराहो की जो स्टचूस है, जो स्कल्पिंग है. वहां की उसके ऊपर कितनी बात की जाती है? आप मुझे बताइए। खजुराहो में 5% भी जो है. एरोटिक नहीं है वहां पे और जो है वो सारा. इतना हाई लेवल फिलॉसफी है उसको ब्रिटिशर्स. ने आगे कामसूत्र की तरह से फेमस कर दिया. फोटो छाप छाप के उसके ऊपर सारा वर्ल्ड. समझता है खजुराहो एरोटिका है वहां पे. टूरिज्म इसलिए नहीं डेवलप हो पा रहा है कि. फैमिलीज आती नहीं है बच्चों को लेके वहां.
पे जबकि मैं कहता हूं भारत के हर मां-बाप. को अपने बच्चों को ले जाके वो जगह दिखानी. चाहिए उनके बच्चों को समझ में आएगा महानता. क्या होती है भारत की महानता क्या है. लेकिन लेकिन बदनाम कर दिया गया तो हम क्या. उसको लेके मारते हैं किसी को? गाली देते. हैं क्या? ये तो एक अच्छा बिहेवियर है. पढ़े लिखे। अच्छा भाई आप आज से कई 100 साल. पहले एक जगह में कुछ कबीले में रहने वाले. लोगों ने कोई लॉज़ बना दिए। जहां पानी भी. नहीं था, खाना भी नहीं था। लोग ऊंट पे.
चलते थे। तो आज आप आज आज दुनिया कहीं की. कहीं पहुंच गई है। आपकी बेटियां प्लेन. उड़ा रही हैं। आपकी बेटियां रॉकेट में जा. रही हैं। आपकी बेटी अभी बेटियां बैठ के. भारत के डिफेंस में लड़ाई लड़ रही हैं।. आपकी बेटियां मिनिस्टर बन रही हैं। मेयर. बन रही हैं। साइंटिस्ट बन रही हैं। भारत. की जो वैक्सीन बनी उसमें उनका हाथ था और. आप इस तरह की दयानुसी बातों में अटके हुए. हैं कि आप एक चीज पर बात नहीं बात करिए।.
आप बात करेंगे तो समाज में जुड़ेंगे, मिलेंगे। लोग कहेंगे हां यार हम बातचीत कर. सकते हैं इनसे। आप ही ने तो दीवार खड़ी कर. दी है इतनी बड़ी। आप ये नहीं कर सकते, वो. नहीं कर सकते, हम यही करेंगे, वैसे ही. करेंगे। ये हमारा तो मजहब अगर इतनी बड़ी. चीज है तो उसी मजहब के कारण तो भारत का. पार्टीशन हुआ। उसी मजहब की रिजिडिटी के. कारण कश्मीर का ये हाल हुआ। उसी की. रिजिडिटी के कारण तो पहलगाम में लोगों के.
साथ यह हुआ और वही रिजिडिटी है जिसके कारण. 80 साल से ये देश सांस नहीं ले पा रहा है. खुल के 80 साल से वही कम्युनल वायलेंस चल. रही है. ये आपका पॉइंट ऑफ व्यू है आपने इसको अच्छे. से एक्सप्लेन किया अपने हिसाब से बाकी वो. बात होनी चाहिए समझने वालों पर छोड़ देते. हैं ये आपने क्यों कहा लेकिन सरकार उनकी. सिस्टम हमारा. वरना बात हो सकती है सरकार तो कहती है खुल. के बात करो।.
तो राइट ये तो है राइट टू स्पीच क्रिटिकल. थिंकिंग लिखा हुआ है कॉन्स्टिट्यूशन में. क्रिटिकल थिंकिंग और ये सवाल क्रिटिकल. थिंकिंग का है। ये सवाल क्रिटिकल थिंकिंग. का है। किसी भी पढ़े लिखे डेवलप्ड सभ्य. राष्ट्र में ये सवाल उठना चाहिए। अमेरिका. में उठता है तब क्यों नहीं मारते ये लोग? अमेरिका में दिनरा ये सवाल उठता है। यूरोप. में ये सवाल उठता है। भारत में ही क्यों. इस सवाल को दबा दिया जाता है? और तो कहीं. कुछ नहीं होता।.
डू यू सपोर्ट नपुर शर्मा स्टिल? मैं हर आदमी की फ्री स्पीच को सपोर्ट करता. हूं। मुझे किसी की फ्री स्पीच से कोई धर्म. पर की गई हो। मुझे किसी से कोई डर नहीं. है। क्या तो बात ही तो है। शब्द ही तो है।. यहां से निकले खत्म हो गए। मत सुनो कौन सी. बड़ी बात है। तुम्हें एक बात बताओ आज आप. मेरे ऊपर कुछ कमेंट कर दें तो क्या मैं. क्या करूंगा? मैं ठीक है। आप स्पीच का कोई. दायरा नहीं होना चाहिए। मतलब जैसे ये. चर्चा अक्सर होती है कि व्यक्ति की आजादी. की भी एक एक समय से एक दायरा होना चाहिए।. आप अगर फ्री स्पीच के दायरे बनाने लगेंगे.
ना तो हर आदमी वही जो हो रहा है वही होगा।. जिसकी सरकार होगी वो कहेगी ये मेरे दायरे. में नहीं आता मैं पकड़ लेता हूं। कोई. कहेगा ये मेरे दायरे में नहीं आता मैं. पकड़ लेता हूं। कोई कहेगा मेरे दायरे में. नहीं आता। मैं ये जाके तोड़ देता हूं. रेस्टोरेंट को। आदमी कहेंगे तो अच्छे नहीं. लग रहे तो देखने में क्या कपड़े पहन रखे. हैं मारो साले को पकड़ के तो मेरे दायरे. में नहीं आता। अगर हर आदमी को आप फ्रीडम. देंगे दायरे निश्चित करने के तो वो अपनी. इंटेलिजेंस, अपनी डमनेस के हिसाब से, अपनी. धूर्तता और अपने. बुद्धा के हिसाब से दायरे इकट्ठा करने.
लगेगा। बुद्धा के ऊपर एक बुड्ढ औरत ने आके. थूक दिया। बुद्धा कुछ नहीं बोले। लोगों ने. बोला भाई क्यों नहीं बोला आपने इसको कुछ? कहने लगे उसने उसके पास जो देने को था. उसने दिया। मैं कैसे मना करता? उसको मैं. क्या करूं? मेरे पास बदले में देने को कुछ. नहीं है। बुद्धा ने इस तरह से उसको कर. लिया। कोई दूसरा आदमी होता तो बुड्ढ को. मार डालता।. तो दायरे बुद्धा ने दायरा बड़ा किया ना।. लेकिन हर आदमी तो बुद्धा नहीं हो सकता।. मेरी कंपनी का नाम आया बुद्धा है। मैं. बड़े दायरे के साथ चलता हूं।. ओके। आपकी फिल्म में गानावाना कोई नहीं.
रखते सर आप। इस फिल्म में गाने नहीं रखता. हूं। पर इस फिल्म में बाउल जो वहां का फोक. म्यूजिक है वो गाना है। पार्वती जी का अगर. आपने नाम सुना हो। बहुत ही प्रसिद्ध बहुत. ही वर्ल्ड की यानी जैसे पंडित रविशंकर. वगैरह है उस तरह से बाउल की हमारी धरोहर. हैं। वो किसी के लिए गाना नहीं गाती हैं।. पर उनको पता नहीं क्या फिल्म की कहानी. अच्छी लगी या विषय अच्छा लगा। उन्हें लगा. ये फिल्म बननी चाहिए। तो वो फ्लाई करके. बम्बई आई हैं और उन्होंने हमारे लिए गाना. गाया है। आप सुनेंगे तो अद्भुत मतलब आप.
दीवाने हो जाएंगे। सच्ची कह रहा हूं मैं।. तो वो है उस इस फिल्म के अंदर। मैं आपके. टीज़ की लास्ट अगर विवेक अग्निहोत्री खुद. एक्टर होते। अरे नहीं भैया बचाओ खुद एक्शन. श्राप मत दो मुझे ये जो लास्ट डायलॉग आपके. टीजर में आता है इफ कश्मीर फाइल मैं चाहता. हूं मैं चाहता हूं कि उसे आप एक अपने. अंदाज में बोलिए अरे भाई देखो मैं एक्टिंग. एक्टिंग अरे फिर भी एक लाइन आपने उसको. सबसे ज्यादा महसूस किया है और उसमें जो. आपने ऐड ऑन भी किया था मैं उसको अपने टीजर. में लगा लूंगा. तो मैं यही कहता हूं कि इफ कश्मीर हर्ट यू.
बंगाल विल ह्ट यू या उससे आगे कहे तो. सेव इट बिफोर इट्स टू लेट।. लेट्स सी। ऑल द बेस्ट सर। मुझे उम्मीद है. कि इस पर चर्चा होगी।. बाकी फिल्म देखने जाएंगे। यही मेरा मकसद. है। चर्चा होनी चाहिए। मैंने कहा ना. हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं। बस अब. ये सूरत बदलनी चाहिए।. डर नहीं लगता आपको। एक एक कंधा टूटा है।. अभी यार हमारे कंधे मजबूत है। ऐसा नहीं.
है। हम उठा सकते हैं। डर नहीं। अब नहीं डर. लगता।. डर लगता है इस बात का कि सच्ची डर लगता है. मुझे। बस सच्ची डर लगता है कि. ऐसा ना हो कि मेरा बेटा जब तक बड़ा हो तो. वो भी एक दिन कहीं ये ना बोल दे अरे छोड़ो. बंगाल एक जमीन का टुकड़ा तो है जाने दो. क्या फर्क पड़ता है। आप समझ नहीं रहे हैं।. हम पाकिस्तान में जब तक उलझे हुए थे बंगाल. चाइना ने अपना सबसे बड़ा डेलीगेशन पूरी.
हिस्ट्री का बंगाल भेजा। पाकिस्तान बंगाल. का कोई ट्रेड नहीं हुआ। इतने सालों से. बंगाल और पाकिस्तान ने हाथ मिला के फिर से. ट्रेड चालू कर दिया। भारत का अगला खतरा. वेस्टर्न बॉर्डर नहीं ईस्टर्न बॉर्डर पे. है। और अगर वो है तो उसके लिए. कौन जिम्मेदार होगा? एंड सवाल फिर से पूछ. लेता हूं। पूछना नहीं चाह रहा था मैं।. फिल्मों का असर चुनावों में होता है।. रत्ती भर नहीं होता। अगर लोगों के सोचने.
पर फिल्में थोड़ी लोगों को राशन देती हैं. फ्री का। नहीं अगर सोचने पर असर पड़ता है. तो लोग सोच कर भी तो वोट डालते हैं। सोचने. वाले लोग वोट ही नहीं डालते हैं। इस देश. में सोचने वाला आदमी वोट नहीं डालता है।. इंटरेस्टिंग. थैंक यू सर। लवली डॉक्टर। थैंक यू, शिवंकर।.
