Unplugged ft. Vipul Shah | The Kerala Story 2 | Anubhav Sinha | Love Jihad | Conversion
केरला स्टोरी के मेकर्स एंटी मुस्लिम है।. इंशाल्लाह. अगले 25 साल में पूरा भारत एक इस्लामिक. स्टेट होगा।. पिक्चर का टाइटल चाहे प्रोमो में हो, पोस्टर्स में हो, उसका इस्तेमाल हरे रंग. से किया गया है। क्या दिमाग में नहीं डाल. दे रहे हैं कि पहले से विलन समाज कौन सा. है? केरला स्टोरी वन का भी टाइटल ग्रीन. कलर में ही था।. वही तो सारा मैसेजिंग का खेल है सर। केरला. इज नोन फॉर इट्स ग्रीनरी। क्या मासूमियत. से आपने ग्रीनरी को केरला? नहीं नहीं मैं. कह रहा हूं और इस फिल्म के जो विलिंस हैं.
वो भी मुस्लिम है। तो मुसलमानों के ही. इर्द-गिर्द सोच के रखा जाता है। कि आपने. अपनी पिक्चर के ट्रेलर में बताया कि कहानी. जो है राजस्थान की है। एक कहानी मध्य. प्रदेश की है। फिर मध्य प्रदेश स्टोरी कर. देते। राजस्थान स्टोरी कर देते। लव जिहाद. स्टोरी कर देते। केरला स्टोरी से रिटेंशन. ज्यादा मिलता है। या केरल में क्योंकि. चुनाव है। लोग कह रहे हैं कि भाई साहब. चुनाव में इंपैक्ट डालना चाह रहे थे आप।. केरला स्टोरी जैसी फिल्म बनाने जा रहे. हैं। हम कभी नास्तिक नहीं होते हैं। और. अगर आप सोच रहे हैं कि आपके ऊपर कोई. आक्षेप या अटैक नहीं होगा तो फिर आप बहुत. बड़े मूर्ख हैं। [हंसी].
किसी ने फोन करके कहा कि क्या. पिक्चर बने जैसे अनुराग कश्यप ने कहा।. मूवी इज शिट।. नहीं अभी तक तो नहीं कहा है। अनुराग ने एक. फिल्म बनाई थी। गर्ल इन येलो बूट्स। उसमें. उन्होंने दिखाया कि एक पिता और पुत्री के. अंदर फिजिकल रिलेशनशिप हुई है। तो अगर ऐसी. मानसिकता के साथ आप पिक्चर बना सकते हैं. तो फिर आपको केरला स्टोरी तो खराब लगेगी।. अब मान लीजिए अगर आपकी कोई डॉटर होती और. उसका कोई मुस्लिम फ्रेंड होता तो क्या आप. भी उससे कहते कि तुम्हारा वाला भी अब्दुल. अलग नहीं है मैं ध्यान तो जरूर करता।.
अब्दुल अलग होते हैं या अब्दुल एक ही. तरीके के होते।. तुम्हारा वाला सीधा सो नहीं है।. मां फैजान ऐसा नहीं है। मेरा सलीम ऐसा. नहीं है।. मैं ऐसा मानता हूं कि आपको ध्यान रखना. चाहिए। अगर आपका मकसद जागरूकता था तो हाल. फिलहाल में एक हक जैसी फिल्म आई थी। उसे. मुस्लिम मर्दों ने भी अप्रिशिएट किया।. इसीलिए की फिल्म अच्छी है।. बट आप जो बता रहे हैं उसपे पूरा देश आपके. पीछे क्यों पड़ गया? आपके खिलाफ तो हिंदू. भी पीछे पड़े हैं।. या ईटिंग बीफ वी डू कुक बीफ वी लव ईटिंग. बीफ।. काइंड ऑफ़ अ प्रोपेगेंडा।. केरला स्टोरी वन में फैक्ट्स को लेकर बहुत.
चर्चा। इस बार लोग ये पूछ रहे हैं कि ये. जो बीफ खिलाने वाली कहानी है, यह आपने. कहां से उठाई? WhatsApp फॉरवर्ड से या. फेक्चुअल? ऐसे 20 से ज्यादा टेस्टीिमोनीज. हैं लड़कियों के जिनको इस तरीके से बीफ. खिलाया गया है। वीडियोस हैं भैया आपने रखे. हैं।. जी जी बिल्कुल. उसकी बहन मेरा मुंह पकड़ के गौ मांस. जबरदस्ती खिलाती थी कि [संगीत] चिकन है।. वहां पे मुझे गौ मांस तक खिलाया गया। मेरे. को इतना गौ मूस भी मेरे को खिला दिया।. आपकी पहली फिल्म का टीजर जब आया था तो. 32,000 लड़कियों का दावा हुआ था।.
लेकिन जो कोर्ट में मानी गई बात वो ये थी. कि 32,000 नहीं तीन लड़कियों का डाटा है।. नहीं नहीं नहीं अगर मैं आपकी बात मान लूं. कि 3,000 लड़कियों के साथ केरला में ये. बड़े पैमाने पर लव जिहाद प्रोपेगेंडा हुआ. तो क्या एक भी केरल में सच्चा मुसलमान. नहीं था जिसने लड़कियों की हेल्प की? इतनी खैर घटना ने केरला के रूह तक को हिला. दिया।. जस्ट कम बैक यू आर नॉट सेफ। शालिनी प्लीज. कम बैक।. हमें तो कोई नहीं मिला। लेकिन दूसरा वर्ग. है जो कह रहा है कि पिछली बार केरला. स्टोरी के जरिए आप लोगों ने समाज में दरार. पैदा की थी।.
केरारा फाइल्स नो आई डोंट सपोर्ट द सीपीएम. पीपल इंस्टेड ऑफ़ मी इट वाज़ देयर ड्यूटी टू. क्रिटिसाइज।. इस बार आप लोग दंगे करवाना चाह रहे हैं।. लेकिन नहीं खाऊंगी।. लांगूर नाम का आदमी कितनी सारी लड़कियों. कीिंदगियों से खिलवाड़ कर. या मोहम्मद गौतम से उनको कोई तकलीफ नहीं. होती। मैं मुस्लिम बनना चाहता हूं। अगर. आपको केरला स्टोरी बनानी थी तो आप साउथ की. एक्ट्रेस लेते। कई साउथ की लड़कियों को. अप्रोच किया था और उनमें से कईयों का जवाब.
यह था कि सर ये फिल्म मैं करूंगी ना तो. मेरे ऊपर करियर पे बैन आ जाएगा। मेरी जान. पे खतरा हो जाएगा। सबरीमाला सब वहां जाते. हैं तो वावर स्वामी मुस्लिम संत थे। उनके. यहां पर मत्थ टेकते हैं। कईयों ने कहा कि. वो जो साझा खूबसूरत संस्कृति थी। उसको भी. कहीं केरला स्टोरी में जगह दिखनी चाहिए. थी। सिर्फ नफरत वाली देश भर में केरला. स्टोरी क्यों? नारा तकबीर अल्लाहू अकबर. जब तक केरल का एडमिनिस्ट्रेशन ये मानेगा. नहीं कि ये प्रॉब्लम है।. सबसे ज्यादा केसेस तो यूपी से आए थे सर जो.
सामाजिक सब्जेक्ट्स होते हैं जो अनुभव. सिन्हा बनाते हैं आप बनाते हैं। ये आपके. घर तक जाते हैं। ऐसे में जब ये लाइन आप. डाल दे रहे हो कि अगले 25 साल में. इस्लामिक स्टेट बन सकता है।. क्या अगले 20 साल में केरला इस्लामिक. स्टेट बन जाएगा? क्या सुप्रीम कोर्ट ने यह. कहा कि यह मौलिक अधिकार है कि आप किसी भी. लड़की का धर्म परिवर्तन करके उसकी जिंदगी. बर्बाद कर सकते हैं? केरला स्टोरी के. मेकर्स ने केरला स्टोरी वन से ₹300 करोड़. कमाया। अब वो जरा यह बताएं कि जिनकी कहानी. बेचकर पैसा कमाया था उनका क्या भला हुआ? और जिन दो लड़कियों पर मुख्यता ये फिल्म. थी वो तो अफगानिस्तान की जेल में आज भी.
सड़ रही है। मैं कभी ऐसा बोलना नहीं चाहता. था। लेकिन क्योंकि लोग यह पूछ रहे हैं। एक. तरीका वो था जो आपने नमस्ते लंदन में समझा. कर बताया।. इमरान खान आई एम सॉरी। आई विल नॉट चेंज. माय नेम ओवर रिलजन एंड इफ दिस रिलेशनशिप. इज अबाउट चेंजिंग माय नेम और रिलजन देन आई. एम सॉरी आई डोंट थिंक इट्स व्हाट द. एक तरीका जो केरलेस स्टोरी में आप दिखा. रहे हो. मैं कन्वर्ट नहीं हूंगी. और वैसे भी मैं इन सब चीजों में बिलीव. नहीं करती हमारा काम है हिंदू लड़कियों को. अपना बनाना।. क्या केयरलेस स्टोरी की कहानी को बताने का.
यही तरीका था? तो जितनी कड़वी सच्चाई है. उतनी ही कड़वी फिल्म आपको दिखानी पड़ेगी।. जो रिलजन में बिलीव ही नहीं करता था। मुझे. आपका शो करने की इच्छा इसीलिए थी क्योंकि. मुझे पता था कि मुझे कड़े सवालों का सामना. करना पड़ेगा।. ये कहते हैं कि सिनेमा जो है वह सिर्फ. मनोरंजन नहीं करता। आज के दौर में सिनेमा.
सोच बनाता है, बहस छेड़ता है और कभी-कभी. समाज को आईना भी दिखाता है। बीते कुछ. सालों में कई ऐसी फिल्में आई जिसने समाज. को दो हिस्सों में सोचने पर मजबूर कर. दिया। एक हिस्सा. जो उस पे एक ऐसा सच दिख रहा था जो जुबान. से बोलने में लोग कतरा रहे थे। और दूसरा. वर्क जो उस तरह की फिल्म को एक. प्रोपेगेंडा कहकर आगे बढ़ रहा था। मेरे.
साथ जो मेहमान है उन्होंने एक फिल्म बनाई. थी द केरला स्टोरी। अब पार्ट टू सामने है।. पिछली बार की तरह इंटरनेट जो है इस बार भी. बटा हुआ है। इस बार भी दो धड़ों की दो राय. है। एक राय जो कह रही है कि ऐसा सच मेन. स्ट्रीम मीडिया में पहले कभी नहीं कहा. गया। फिल्मों में दिखाया नहीं गया। यह. बोलने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए। यह अगली. पीढ़ी को बचाने वाला है। दूसरा कह रहा है. कि यह नफरत फैलाने वाली फिल्म है।. प्रोपेगेंडा है। पैसा कमाने का जरिया है।. सच क्या है? हम उन्हें समझ लेते हैं।.
विपुल अमृत लाल शाह साहब बहुत-बहुत स्वागत. है। थैंक यू।. शुरुआत यहीं से कर दे रहा हूं मैं।. इंटरनेट द केरला स्टोरी 2 पर बटा पड़ा है।. एक तरफ वो कह रहे हैं कि यह फिल्म वो है. जिसका सच पहले कभी मेन स्ट्रीम फिल्मों. में नहीं कहा गया। लेकिन दूसरा वर्ग है जो. कह रहा है कि पिछली बार केरला स्टोरी के. जरिए आप लोगों ने समाज में दरार पैदा की. थी। इस बार आप लोग दंगे करवाना चाह रहे. हैं, लड़ाई लड़वाना चाह रहे हैं। आप चाह. रहे हैं कि हालत यह हो जाए कि एक दूसरे को.
देखना ना पसंद करने लगे हम। अ देखिए ये हर. एक इंसान को अपना एक नजरिया रखने का हक. है। लेकिन मुझे कई बार जब मैं यह सब देखता. हूं तो मुझे थोड़ा ताज्जुब भी होता है।. आपको याद होगा आपने रिपोर्टिंग भी की होगी. शायद।. डेढ़ दो साल पहले या एक डेढ़ साल पहले. जलालुद्दीन उर्फ़ जांगूर बाबा पकड़ा गया. और.
जो पुलिस की इन्वेस्टिगेशन थी उसमें पता. चला कि हजारों हजार लड़कियों को और लोगों. को कन्वर्ट करने का एक षड्यंत्र चल रहा. था। फिर एक मोहम्मद गौतम को कोर्ट ने लाइफ. इंप्रजनमेंट की सजा सुनाई।. उसके ऊपर भी कथित रूप से 1000 से ज्यादा. लड़कियों को कन्वर्ट करने का आरोप था। अभी. पीछे कुछ 15 20 25 दिन पहले प्रिंस नाम का. एक आदमी पकड़ा गया जो हिंदू आइडेंटिटी के.
साथ समाज में घूम रहा था। 300 से ज्यादा. लड़कियों को जबरन कन्वर्ट करने का कथित. रूप से उस पर आरोप है। फिर बीच में एक जिम. जिहाद नाम का एक कासेप्ट एक्सपोज हुआ था. कि जिम में लड़कियों को ट्रैप करने की एक. साजिश चल रही है। तो आए दिन ऐसे किस्से. आते ही रहते हैं। और मुझे ताज्जुब होता है. कि जब यह किस्सा आता है तो यह जो आउटरेज. आज जो लोग दिखा रहे हैं इंटरनेट पे तब वह.
कोई आउटरेज नहीं दिखाते। उनको गुस्सा नहीं. आता कि एक कोई जांगुर नाम का आदमी इतनी. सारी लड़कियों कीिंदगियों से खिलवाड़ कर. रहा है या मोहम्मद गौतम से उनको कोई तकलीफ. नहीं होती।. नहीं बट यहां दो चीजें आती है सर एक ये. आता है कि. जो आपकी फिल्मों को प्रोपेगेंडा कह रहे. हैं उनका आरोप यह है कि प्रोपेगेंडा. फिल्में भी सच होती है। जैसे किसी ने एक. उदाहरण दिया मुझे कि उसने कहा कि कठुआ में. एक घटना हुई थी जम्मू में। वहां पर आरोप. लगा एक बच्ची के साथ गलत घटना हुई। अब.
उन्होंने कहा कि अगर उस बच्ची की फिल्म को. बनाकर आप पूरे हिंदू समाज को बदनाम कर दो. कि हिंदू ऐसे होते तो क्या यह जस्टिफाइड. है? उन्होंने कहा कि नाजी भी हिटलर भी जब. उस दौर में करता था तो नाजियों की बातों. को रखता था। सच को सामने रखकर एक परसेप्शन. लाता। वो ये कह रहे हैं कि 140 करोड़ की. आबादी में जो घटनाओं का आप जिक्र कर रहे. हैं उसमें कानून कारवाई कर रहा है। कानून. की नजर में अब तक लव जिहाद जैसा कोई शब्द. नहीं है। इसके बावजूद आप यह दिखाने की. कोशिश कर रहे हैं कि देश के सारे मुसलमान. जो है वो लव जिहाद ही करवा रहे हैं।.
देखिए ये पहली बार भी हमने बहुत क्लियर. कहा था कि हम किसी धर्म या किसी समाज के. अगेंस्ट नहीं है। पर अगर वो अगर मैं एक. सामने एक काउंटर सवाल पूछता हूं कि अगर. मुझे हाफिज सईद के को एक कैरेक्टर की तरह. दिखाना हो तो मैं कैसे दिखाऊंगा? वैसा ही. दिखाऊंगा जैसा वो है।. तो जिन लड़कों की हम ये कहानी बता रहे हैं. जो पहली बार भी हमने लड़के बताए थे और इस. बार भी जो इस इस फिल्म में जो ये गलत काम.
कर रहे हैं या ये क्राइम कर रहे हैं उनको. मैं उसी तरह दिखाऊंगा जैसा उन्होंने किया. है।. ठीक बात।. मैं उनको कैसे एक सॉफ्ट पैडल करके एक. मीडियम रास्ता लेके कैसे दिखा? बिल्कुल ठीक बात है कि जो जैसा है उसको. वैसा दिखाया जाएगा। अब यहां भी दो सवाल. आते हैं। एक कईयों का कहना था कि अगर आपका. मकसद जागरूकता था तो हाल फिलहाल में एक हक. जैसी फिल्म आई थी जिसमें जागरूक करने के. लिहाज से बनाया गया था और एक मैसेज पोट्रे. किया गया ट्रिपल तलाक को लेकर जो बड़ी. खूबसूरती से चला गया कि मुस्लिम मर्द कैसे.
महिलाओं का शोषण कर रहे थे। उसे मुस्लिम. मर्दों ने भी अप्रिशिएट किया। बट आप जो. बना रहे हैं उसप पूरा देश आपके पीछे क्यों. पड़ गया? आपके खिलाफ तो हिंदू भी पीछे. पड़े हैं।. अनुराग कश्यप ने कह दिया क्या. पिक्चर है। [हंसी]. देखिए क्या है कि. मेरे जो डायरेक्टर हैं ना कामाख्या जी. उन्होंने अनुराग की बात को बहुत अच्छे से. जवाब दिया है। मैं वही रिपीट कर देता हूं।. मैं व्यक्तिगत रूप से किसी के अगेंस्ट. कमेंट नहीं करता। मुझे लगता है जिसको जो. सही लगता है वो बोलने का उनका हक है।. अनुराग का अपना हक है। लेकिन वो कामाख्या.
जी ने बहुत अच्छी बात बोली के अनुराग ने. एक फिल्म बनाई थी गर्ल इन येलो बूट्स।. उसमें उन्होंने दिखाया कि एक पिता और. पुत्री के अंदर एक फिजिकल रिलेशनशिप हुई. है। ऐसी कोई एक फिल्म थी। तो अगर ऐसी. मानसिकता के साथ आप पिक्चर बना सकते हैं. तो फिर आपको केरला स्टोरी तो खराब लगेगी।. मुझे उससे भी ज्यादा दिक्कत उस बात से हुई. जब उन्होंने कहा कि यह बीफ क्या ऐसे तो.
कोई खिचड़ी भी नहीं खिलाता।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] मुझे ताज्जुब. हुआ कि हम क्यों इतने इनसेंसिटिव हो जाते. हैं? क्या लड़की की मर्जी का कोई मायने. हैं कि नहीं है? सब समझिए एक सेकंड के लिए. कि किसी एक लड़की को जबरदस्ती इसी तरह. बांध के लड्डू खिलाया जा रहा है।. क्या लड्डू खिलाया जा सकता है? अगर वो लड़की खाना नहीं चाहती तो पानी भी. नहीं पिला सकते।. करेक्ट।. तो मुद्दा यह है कि आप एक लड़की की मर्जी. की कोई वैल्यू नहीं कर रहे हैं।.
और इनसेंसिटिविटी अब हमारे अंदर यह हो गई. है कि हम बोल रहे हैं कि अरे बीफ क्या है? ऐसे तो कोई खिचड़ी भी नहीं खिलाता। तो. आपको फर्क नहीं पड़ता कि लड़की के साथ. अत्याचार हो रहा है। वो आपके लिए मायने. नहीं रखता। उसकी मर्जी को खत्म किया जा. रहा है। वो मायने नहीं रखता। लेकिन ऐसी. चीजें मायने रखती हैं क्योंकि आप एक लॉबी. के को बिलोंग करते हैं या एक लॉबी में. विश्वास रखते हैं तो आपको लगता है कि. बट विपुल जी वो ये कहना वो शायद इसलिए कह.
रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता हो जो आप. दिखा रहे हो सच ही नहीं हूं।. अभी जैसे जैसे बहुत सारे लोगों का ये. मानना है कि वो जो बीफ वाला सीन है जो इस. वक्त इंटरनेट पर भरा पड़ा है जिसको देखकर. मैं भी हिल गया था। जी वो उस आपके ट्रेलर. का सबसे खतरनाक हिस्सा है। जहां पर उसका. मुंह पकड़ा आता है, ठूंसा आता है और फिर. पैर खींच कर अंदर चला जाए।. अब केरला फाइल केरला स्टोरी वन जब आई थी. तो केरला स्टोरी वन में फैक्ट्स को लेकर. बहुत चर्चा हुई थी। इस बार लोग ये पूछ रहे. हैं कि ये जो बीफ खिलाने वाली कहानी है ये.
आपने कहां से उठाई? WhatsApp फॉरवर्ड से. या फ़क्चुअल? और अगर फ़क्चुअल उठाई तो आप. उसको कोट कहां से कर रहे हैं? क्योंकि. केरला पुलिस कह रही है कि ऐसी कोई घटना. नहीं आई है उनके पास और अगर नहीं आई है और. कहीं गलती से एक स्टोरी सुनाई पड़ी तो. क्या उसके आधार पर एक परसेप्शन बना देना. कि मुसलमान ऐसे ही बीफ खिलवाता जबरदस्ती. देखिए आपको एक किस्से को आप ये तो नहीं कह. सकते कि हर लड़की के साथ ऐसा ही हुआ होगा।. हम. हमने जो हमारी रिसर्च की हमारे पास कम से. कम पूरे भारत के ऐसे 20 से ज्यादा.
टेस्टीिमनीज़ हैं लड़कियों के जिनको इस. तरीके से बीफ खिलाया गया है। वीडियोस हैं।. तो. ये आपने रखे हैं।. जी जी बिल्कुल और मैं इसीलिए आपके. पॉडकास्ट पर बोल रहा हूं। मुझे पता है. करोड़ों लोग देखेंगे इस बात को। कल हम पे. यह सवाल भी खड़ा किया जाएगा। मैं आपको भी. दिखा सकता हूं। कोई प्रॉब्लम. पिछली बार 30,000 केसेस का दावा बड़ा. कोर्ट में गड़बड़ पड़ गया था। नहीं देखिए. आप अह मैं फिर कह रहा हूं। 32,000 का. आंकड़ा था।. 6 जून को मैंने 32,000 के आंकड़े का. वीडियो बनाके YouTube पे डाला हुआ है। आज.
भी पड़ा हुआ है। 17 मिनट का वीडियो है।. हमने इंस्टिटशंस के नामों के साथ और. व्यक्तियों के नामों के साथ वो 32,000 का. आंकड़ा जोड़ के दिखाया है। अब देखिए बात. क्या हुई कि केरल में लव जिहाद है ही. नहीं। यही एक आर्गुमेंट सब जगह से वो. टॉपिक मैंने। नहीं मैं मैं कह रहा हूं कि. आपने जो 32,000 का आंकड़ा बोला मैं उसी के. मतलब वो आंकड़ा चर्चा इसलिए आई क्योंकि. 32,000 के दावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में. आपने अपना स्टैंड चेंज किया और ये कहा कि.
फिर बाद में फिल्म में आया कि ये कहानी जो. है ये काल्पनिक है और उसमें तीन लड़कियों. की जिंदगी पर आधारित है। वो लड़कियां जो. अफगानिस्तान की जेलों में बंद है। जिन्हें. भारत ने लेने से ही मना कर दिया है।. नहीं भारत ने लेने से मना नहीं किया था।. बहुत रेडिक्लाइज हो चुकी है।. उनको देखिए अगेन सुप्रीम कोर्ट का जो मैटर. था वो यह था। कि हमने उसके अंदर बहुत सारे. और भी कैरेक्टर्स थे और अगर हम ये क्लेम. कर रहे हैं कि ये 100% ट्रू स्टोरी है तो. हमारे पास उन हर आदमी की एनओसी होनी चाहिए.
जो नहीं थी। वो मौलवी या जो कैरेक्टर्स. हमने दिखाए थे या वो जो तीन लड़के थे उनकी. एनओसी तो वो हमें देने वाले नहीं थे कि आप. जाइए हमारी फिल्म बनाइए। तो हमें उसे वो. लीगल पॉइंट ऑफ व्यू से वो हमें बदलना. पड़ा। उसमें कोई हमारे को अगर सुप्रीम. कोर्ट उस वक्त यह सोचता कि यह फिल्म झूठी. है तो वो तो बैन कर देता। फिल्म को बैन. करना सुप्रीम कोर्ट के कंट्रोल में था।. पावर में था। उन्होंने ऐसा नहीं किया था।. फिल्म इनफैक्ट वो एक ऑल्टरेशन के साथ.
उन्होंने फिल्म को विदाउट एनी चेंज टेल. रिलीज होने दिया पूरी दुनिया में। तो ये. एक फक्चुअल पोजीशन है। रहा सवाल अगेन अगर. आपने बीफ खाने की जो बात कर रहे हैं। अभी. कल हमने एक 50 विक्टिम्स को हमने प्रेस से. रूबरू कराया कल और उनमें से छह लड़कियों. ने अपनी कहानी स्टेज पर खड़े रह के बताई. और उन छह की छह लड़कियों ने कहा कि मुझे. जबरदस्ती बीफ खिलाया गया है। मैं कल की. बात कर रहा हूं। पुरानी नहीं और वो एएनआई.
पे पड़ा हुआ है। छह नहीं तो एटलीस्ट चार. लड़कियों ने ये बात कही कि उन्हें. जबरदस्ती बीफ खिलाया गया है। तो ये कह. देना कि नहीं ऐसा कुछ होता ही नहीं है। वो. हम चीजों को बहुत ज्यादा सिंपलीफाई कर. देते हैं। देखिए हजारों जब केस होते हैं. उनमें से कई चीजें बाहर आना भी बहुत. मुश्किल होता है। कई लड़कियां ऐसी भी हमें. मिलती हैं जो हमें कहानी बताती है और फिर. बोलती है कि हम हाथ जोड़ते हैं प्लीज. हमारी हमारा नाम कहीं ना आए। हमें प्लीज. पब्लिक के सामने मत लाइएगा क्योंकि फिर.
हमारा जीना और भी मुश्किल हो जाएगा। तारा. सचदेव नेशनल शूटर रही हैं। हम. उन्होंने कल अपनी पूरी कहानी बताई है। आप. सुनिए उनकी कहानी और अगर इतनी विक्टिम्स. की खुद की जुबानी सुनी हुई कहानियों के. बाद तारा जी का जो केस था एक वो झारखंड का. केस था। दूसरा उस केस में तुरंत आजीवन. कारावास की सजा सुना दी गई।. नहीं झारखंड के स्टोरी को उठाकर केरला. स्टोरी केरला वाले कह रहे हैं कि भाई साहब.
आपकी स्टोरी झारखंड की है राजस्थान की है।. नहीं नहीं हमारी हम हमने पहली बात तो तारा. सचदेव जी की कहानी का केरला की कहानी से. कोई लेना देना नहीं है।. अब उसमें किरदार जो आपने दिखाया वो उसके. आसपास दिख रहा है। लोग महसूस कर रहे हैं।. नहीं वो केरला वाली लड़की जो है वो. बिल्कुल अलग है। जो एक स्पोर्ट्स पर्सन की. जो कहानी है वो वो ग्वालियर की है। तो ऐसा. नहीं है कि वो केरला की कहानी है। लेकिन. हमें केरला में भी ऐसी लड़कियां बहुत मिली. है [नाक से की जाने वाली आवाज़] जिन्होंने. जिनके ऊपर ये जबरदस्ती बीफ खिलाने की बात.
और अगेन मूल मुद्दा यह है कि सवाल बीफ. खिलाने का नहीं है। सवाल उन लड़कियों की. मर्जी को खत्म करने का है।. ठीक बात है। अगर हमारा मुद्दा सिर्फ ये. है। उसका एक मेटाफोर होता है। सिनेमैटिक. एक्सप्रेशन होता है। आप ड्रामा क्रिएट. करके लोगों तक एक मुद्दा पहुंचाने की बात. करते हैं। क्योंकि वो लड़की का जो. कैरेक्टर है वो यह बहुत क्लियरली बोलती है. कि आप मेरे स्पिरिट को तोड़ नहीं सकते और. एक स्पिरिट को तोड़ने का एक सिस्टमैटिक.
एफर्ट हुआ उस वजह से वो सीक्वेंस है। तो. उसका कॉन्टेक्स्ट खैर ट्रेलर में नहीं समझ. आएगा। जब लोग फिल्म देखेंगे तो उनको समझ आ. जाएगा। सही बात है। विपुल अमृत लाल शाह या. केरला स्टोरी के मेकर्स जो हैं वो एंटी. मुस्लिम है। बिल्कुल भी नहीं है। मेरी इस. फिल्म के यूनिट में भी कम से कम 30%. मुस्लिम लोग काम करते हैं।. वो सहज थे जब ये शूट. बिल्कुल और सबको बोल के कहा गया था कि यह. फिल्म है। आपको ऐतराज है तो कोई बात नहीं. आप हमारे साथ 15 10 12 साल से काम कर रहे.
हैं। मत करिए बाद में कोई और फिल्म कर. लेंगे। और उनमें से कई लोगों ने हमें कहा. कि नहीं सर हमें पता है यह गंदगी है इस. हमारे समाज में और हम इस फिल्म से जुड़ना. चाहते हैं। इस फिल्म को आप जरूर लाइए।. लोगों को एक्सपोज करना बहुत जरूरी है। अब. ये सवाल मेरे ज़हन में इसलिए भी आ रहा था. कि आपने कहा कि मेरा मकसद जागरूकता फैलाना. है। सबाश का एक बड़ा हिस्सा केरला स्टोरी. मेकर से सवाल पूछ रहा है कि अगर जागरूकता. फैलाना मकसद था तो फिर पिक्चर का टाइटल. चाहे प्रोमो में हो, पोस्टर्स में हो उसका.
इस्तेमाल हरे रंग से क्यों किया गया? क्योंकि रंगों की पॉलिटिक्स इस देश में. बड़ी बखूबी हम समझते हैं। रंगों के मायने. हम समझते हैं। तो जब आप हरे रंग में लिख. रहे हैं तो क्या दिमाग में नहीं डाल दे. रहे हैं कि पहले से विलेन समाज कौन सा है. और उस हरे रंग में अब कई और है जो लपेटे. में आ रहे हैं या बड़ा धर्म जो है वो. टारगेट हो रहा है? नहीं आप देखिए अगर आप पिक्चर देखेंगे मैं. आपको अगर आप पिक्चर देखने के बाद धर्म या. पूरी कम्युनिटी के अगेंस्ट. अगर एक लाइन भी पिक्चर में आपको मिले.
मैं पब्लिकली आपके प्लेटफार्म पर आकर माफी. मांगूंगा। यह मेरा आपसे वादा है। आप मुझे. जिस दिन फिल्म देख के कहेंगे कि विपुल. आपकी यह एक लाइन आप समाज को टारगेट कर रहे. हो या यह एक लाइन जो धर्म को टारगेट कर. रही है, मैं उसी दिन पब्लिकली माफी. मांगूंगा और वो लाइन फिल्म से हटा दूंगा।. यह मेरा आपसे वादा है। मुझे पता है कि. हमने फिल्म बनाते वक्त किन चीजों का ध्यान. रखा है। मेरे अपने बहुत सारे मुस्लिम. दोस्त हैं। और कोई भी समाज जिसके अंदर कुछ.
बुरे लोग हो उस वजह से पूरे समाज को. टारगेट करने जितनी छोटी समझ हमारी नहीं. है। तो अगर आप इतने न्यूट्रल हैं और इतने. शानदार फिल्म मेकर आपने आपकी फिल्में हमने. पहले देखी है तो फिर वो हरे रंग वाली. चालाकी हम अवॉयड नहीं कर सकते थे। उसको हम. वाइट कर देते। कोई और कलर का. केरल स्टोरी वन का भी टाइटल ग्रीन कलर में. ही तो. वही तो सारा मैसेजिंग. तो वो वो सीक्वल का एक एक्सटेंशन है और. कुछ नहीं है। उसको उस नजरिए से देखना. हम. वो एक देख सकता है देखने वाला। ये तो ये.
बात हो गई कि अगर मैं भगवा लिख देता तो आप. कहते कि देखो अब आप आप ये कह रहे हो कि आप. आप पूरे मुस्लिम समाज को भगवे में रंग. देंगे। देखिए जिसको ढूंढना यह सवाल इसलिए. है सर जो पुरानी फिल्मों में आज के दौर. में आरोप लगते हुए लगते हैं कि पहले पंडित. जी को टीका ला के रेप करवाते थे।. जी. ऐसी बहुत सारी बॉलीवुड की फिल्में हैं. जहां पर टीका लगवा के पंडित जी को ये बुरा. दिखाते थे। उस वक्त राइटर कौन थे? उस वक्त. लिखते कौन वो आज का दौर जानता है और वो यह. समझता है कि इस कलर के जरिए क्या मैसेजिंग.
कर रहे हैं। अब क्योंकि निजाम बदला है, दौर बदला है, फिल्म मेकर बदल रहे हैं। अलग. तरह की फिल्में बन रही हैं तो वो जो देख. दूसरी आंख है उससे लोग उधर की बारीकी वो. करीबी समझ रहे हैं। नहीं ऐसा है नहीं और. ना हमने ऐसा सोचा था कि हम एक सिंबॉलिक. तरीके से ग्रीन कलर को यूज करेंगे। ऐसा. बिल्कुल भी हमारी कोई सोच में नहीं था।. ठीक है।. हमारा एक क्योंकि हम पहली वाली फिल्म हमने. केरला में बनाई थी। एंड केरला इज नोन फॉर. इट्स ग्रीनरी। और ऑफ कोर्स जो इस फिल्म के.
विलंस हैं वो मुस्लिम साहब ने ग्रीनरी को. नहीं नहीं मैं कह रहा हूं और इस फिल्म के. जो विलिंस हैं वो भी मुस्लिम है।. जो कैरेक्टर्स हैं वो मुस्लिम लड़के ही. हैं।. वो जो तीन लवर बॉयज जो इनकी जिंदगी में. आते थे. इसलिए [नाक से की जाने वाली आवाज़] भी. शायद हमारी जो मार्केटिंग टीम होगी उसको. लगा होगा कि ग्रीन कलर देते हैं।. तो मुसलमानों के ही इर्द-गिर्द सोच के रखा. गया था।. मुसलमान मैं नहीं कहूंगा क्योंकि देखिए. फिर वो आर्गुमेंट आ जाता है।. अब आप विक्टिम विक्टिम को तो मुसलमान की. तरह देख रहे हैं ना आप फिर। नहीं नहीं. नहीं मैं यह कह रहा हूं कि जैसे हम हर बार. कहते हैं ना कि टेररिज्म का कोई धर्म नहीं.
होता। यह तो एक स्टेटेड लाइन है पूरे. पॉलिटिकल सिस्टम में। आप सब नहीं कहते ये. अब फिर भी 90% लोग यही कहते हैं कि. टेररिज्म का कोई धर्म दे देता हूं क्योंकि. मैं 40% Twitter पे पढ़ता हूं कि जब मैं. लिख देता हूं तो मुझको गाली पड़ती है।. होता होगा। मैं ना नहीं कह रहा हूं। लेकिन. मेरा यह कहना है कि चलो 60% ही सही। पर. अभी भी मेजॉरिटी यही मानती है कि टेररिज्म. का कोई धर्म नहीं होता। पर जब हम ग्रीन. कलर देते हैं तो उसे आप धर्म से. धर्म भी नहीं कहते वो कहते हैं कि. टेररिज्म का कोई मजहब बोलो बोलिए एक बड़ी.
आबादी अब इस पे भी ऐतराज करती है कि आप. धर्म क्यों कहते हैं आप बोलिए कि टेररिज्म. का कोई मजहब नहीं होता अब हम समाज के तौर. पर इतने आगे बढ़ चुके हैं अब ये देखना सही. है ये मुझे नहीं पता. देखिए अगर जो भी टर्म लोग यूज़ करते हैं. मैं यह मान रहा हूं कि ये एक बहुत ही वेल. नोन वेल एस्टैब्लिश्ड था नॉर्म था कि अगर. कोई टेरर अटैक होता है तो उसे हम पूरी. पूरी कम्युनिटी से नहीं जोड़ेंगे। ये एक. एस्टैब्लिश स्टेटेड नॉलेज. लेकिन हरा रंग यूज़ कर सकते हैं।.
मुझे उसमें कोई मुझे ऐसा नहीं लगता कि आप. क्योंकि हरा रंग यूज़ कर रहे हैं तो आप. उन्हीं को टारगेट कर रहे हैं। ऐसा मेरा. अपना व्यक्तिगत मैं इससे आगे एक सवाल. पूछता हूं।. हर चीज का एक क्लिक मूवमेंट होता है। आपके. लिए वो कौन सा क्लिक मूवमेंट था कि आपने. डिसाइड किया केरला टू स्टोरी हम बनाएंगे।. क्या इसलिए कि पिछली वाली ने 300 करोड़. कमा लिए थे। [हंसी] तो पैसा मोटा आ गया था. तो ये लगा यार उसका नाम लेके आगे बढ़ जाते. हैं या कोई ऐसी घटना थी जो आपको इतनी हिट. कर गई कि यार ये दिखाना चाहिए क्योंकि जो. दिख रहा है ये थोड़ा अनकंफर्टेबल है।.
देखिए मैं आपको होता क्या है कि जब आप एक. ऐसी फिल्म बनाते हैं ना उसके बाद हर. प्लेटफार्म का एआई ऐसी स्टोरियां आप तक. पुश करते ही रहता है। यह आपको भी पता होगा. कि अगर आप आधा घंटा केरला स्टोरी पर सर्च. करेंगे और फिर अगर फोन रख देंगे और 10. मिनट बाद उठाएंगे तो एआई आपको 10 15 20 और. वीडियो भेज देगा केरला स्टोरी रिलेटेड तो. केरला स्टोरी वन बनाने के बाद निरंतर ऐसे.
वीडियोस आते रहे ऐसी न्यूज़ हमारे तक आती. रही और एक आर्गुमेंट बहुत बड़ा हमने सुना. लोगों ने कहा कि अरे. [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये तो केरल. में होता है यार ये पूरे भारत में थोड़ी. है आईसीस का मॉड्यूल तो सिर्फ केरल में है. हम [नाक से की जाने वाली आवाज़]. और जब बाद में हमने जब रिसर्च करना शुरू. किया तो हमें और फिर आप देखिए यह जांगुर. जैसे केसेस आने लगे सामने तो हमें लगा कि. इस मुद्दे पर लोगों का नॉलेज बहुत कम है।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] या तो जानबूझ. के इन बातों का अंडर द कारपेट डाल दिया.
जाता है या ज्यादातर लोगों का ध्यान इन. बातों पे पड़ता नहीं है। तो हमने एक बहुत. रिसर्च किया छ आठ महीने और हमें जो डाटा. मिला उससे हमें लगा कि यह प्रॉब्लम पूरे. भारत भर में है और जितना हम सोचते हैं. उससे बड़ा है। तो फिर एक हुआ कि इस फिल्म. को बनाना चाहिए। मैं आपको एक ईमानदारी से. एक बात बताता हूं। हम्।. जब आप ऐसी केरला स्टोरी जैसी फिल्म बनाते. हैं,
तो बहुत संघर्ष करना पड़ता है। बहुत. ज्यादा। इतने जितनी जितना संघर्ष इस फिल्म. में हमें करना पड़ता है, उतने में मैं तीन. कमर्शियल फिल्में आराम से घर बैठे बना. सकता हूं। तो ये फिल्में बनाना छोड़ दिया. आपने। आप इतनी बढ़िया पिक्चर नमस्ते लंदन. बना रहे थे। अभी बना रहा हूं। मैंने. ऑलरेडी दो फिल्में और बनाई। मजा आ रहा था. देख के। क्या मेरी मेरी फेवरेट फिल्मों. में से नमस्तेन है। आज भी उसके गाने या. फिल्में देखता मुझे लगता है क्या बना दिया. था।. थैंक यू सो मच। नहीं अभी मैंने दो और. फिल्में हमारी शूटिंग जस्ट कंप्लीट हुई. है। एक फिल्म का नाम है हिसाब बैंक रॉबरी.
की फिल्म है। जयदीप एहलावत और शेफाली ये. बहुत यूनिक एक कॉमिक थ्रिलर है। एक फिल्म. हमने बनाई है मनोज वाजपेई जी के साथ।. गवर्नर नाम है उस फिल्म का। तो. [नाक से की जाने वाली आवाज़] दो फिल्में. शूट हो चुकी हैं। अब पोस्ट प्रोडक्शन के. अलग-अलग स्टेजेस पे हैं। तो ऐसा पिछली. केरला स्टोरी से काफी पैसा आ गया था। पैसा. तो जरूर आया था लेकिन उससे जो हमने समाज. में जागरूकता देखी थी और जितना लोगों को. हमने देखा था कि लोगों कीिंदगियां बदली और.
पिक्चर रिलीज से लेके आज तक हमें खत आते. हैं। लोग हमारे तक किसी ना किसी जरिए से. पहुंचते हैं और बताते हैं कि उस फिल्म को. देखने के बाद उनकी किसी ना किसी की जिंदगी. उनके आसपास संभल गई। आपको तो खत आ रहा है. अदा शर्मा को मैसेजेस आते थे कि तुम्हारा. रेप कर देंगे मार डालेंगे जी. तो वो वही लोग. फोटो गंदी गंदी वायरल कर रहे थे लोग तो. देखिए वो. आपको तो पैसा मिल गया उनको धमकी मिल रही. है अदा शर्मा को. नहीं धमकी तो हमें भी मिली थी लेकिन उसे. हमने इतना सीरियसली लिया नहीं क्योंकि हम.
ऐसा भी मानते हैं के भारत देश एक बहुत. सहिष्णु देश है और जस्ट बिकॉज़ आपने एक. अनकंफर्टेबल ट्रुथ दिखाया है इसलिए कोई. ऐसा काम करेगा ऐसा मैं मानता नहीं हूं। तो. ये पिछली वाली का रिएक्शन था जो अदा शर्मा. इसमें नहीं है।. नहीं ऐसा नहीं था। ये तीन नई कहानियां. हैं। तीन बिल्कुल नई स्टोरीज हैं। और अगर. हम अदा को लेते तो लोग कहते अरे पर ये तो. वो थी तो ये यहां क्या कर रही है वाला. कंफ्यूजन क्रिएट होता। हमें चाहिए था कि. लोग बिल्कुल इन लड़कियों को उस कहानी की.
सच्चाई के तरीके से देखें और वो उनको. कहानियां बिल्कुल सच्ची लग. सच्चाई ये है सर कि आपकी पिक्चर आई है और. मुसलमान छोड़िए केरला स्टोरी टू देखने के. बाद हिंदू लड़के लड़कियां हिंदू मैरिड कपल. सोशल मीडिया पर बीफ खाते वीडियो डाल रहे. हैं। केरल में एक बीफ पार्टी ऑर्गेनाइज की. गई है। वो कह रहे हैं कि हमारे यहां तो. कल्चर है पराठा और बीफ खाने का।. अनुराग कश्यप कह रहे हैं कि इससे बेहतर तो. कुछ है ही नहीं। क्या लजीज है? प्रकाश राज. कह रहे हैं कि इससे लजीज क्या है? ये. हमारे कल्चर का हिस्सा है।.
जी जी। तो या तो आप जमीन से कटे हैं या वह. आपको नहीं समझ रहे हैं। कुछ तो गड़बड़. मामला है क्योंकि मुसलमान विरोध करे समझ. में आता है। आपका विरोध तो हिंदू भी कर. रहे हैं।. बिल्कुल वो जो डिनायल मोड में रह रहे हैं. और जिनको लग रहा है कि अगर ये देखिए ये. कैसी बात है ना कि अगर मैंने एक किस्सा. बता दिया तो मैंने जो लोग मेरा विरोध करना. चाह रहे हैं या जो लॉबी हमारे अगेंस्ट. खड़ी हुई है उनको लग रहा है कि हमने. जनरलाइज कर दिया। जब आप एक स्पेसिफिक. किस्सा बताते हैं तो उसको आप जनरलाइज तो.
नहीं कर सकते ना। फॉर एग्जांपल अगर मैं यह. दिखाऊं कि कोई एक पिता है वो अपनी बेटी को. चांटा मारता है। फॉर एग्जांपल तो क्या आप. यह कहेंगे कि पूरे भारत में क्या हर बाप. चांटा मारता है? आप तो यह नहीं कहेंगे ना. यही कहेंगे कि यह एक बाप है जो गलत काम कर. रहा है। उसे अपनी बेटी को चांटा नहीं. मारना चाहिए। पर हुआ इस क्योंकि ये फिल्म. इतनी संवेदनशील बन जाती है तो लोगों को. लगता है कि ये हम एक किस्से के थ्रू हम एक. जनरलाइजेशन कर रहे हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] तभी वो आरोप.
लगता है कि हम किसी धर्म के या समुदाय के. अगेंस्ट हैं। पर हम वो कह रहे हम बार-बार. कह रहे हैं कि हम सिर्फ वो स्पेसिफिक. किस्से की बात कर रहे हैं। उसे पूरे. समुदाय के साथ ना जोड़ा जाए। और देखिए. [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं आपको एक. और बात बताता हूं और लोगों को यह बात बुरी. भी लगती है। लेकिन अगर आप आपको लगता है कि. आपको बीफ खाना है। मुझे उससे ऐतराज हो. सकता है लेकिन मैं आपको रोकूंगा तो नहीं।. हम. मेरी अपनी एक भावना हो सकती है। हो सकता.
है आपको मेरी उस भावना की कोई कदर ना हो. और आप अपनी जिंदगी अपने प्रिंसिपल के. हिसाब से जीना चाहते हैं। ठीक है? हमने तो. कभी सोशल मीडिया पे जाके इन लोगों के. अगेंस्ट कि आप बीफ पार्टी कर रहे हैं।. उसके अगेंस्ट हमने तो कोई पोस्ट नहीं की।. हम तो कह रहे हैं कि आपको अगर विरोध करना. है और आप सिविल तरीके से विरोध कर रहे हैं. प्लीज करिए।. लेकिन एक बात याद रखिए इस पूरी फिल्म में. दो पक्ष हैं। एक विक्टिम का पक्ष है और एक. क्रिमिनल का पक्ष है। हम.
[नाक से की जाने वाली आवाज़] विक्टिम्स के. साथ खड़े हैं और हो सकता है कि आपको हमारे. इस कहानी के कहने के जरिए पे कोई. ऑब्जेक्शन हो सकता है। लेकिन जब आप यह सब. करते हैं तो आप कहीं ना कहीं उन. क्रिमिनलों की हौसला अफजाई कर रहे हैं। आप. उनको सपोर्ट कर रहे हैं। आप विक्टिम्स को. इग्नोर कर रहे हैं। इस बात को भी आपको. सोचना चाहिए। बट बहुत सारे जैसे मैंने. लड़कियों को सोशल मीडिया पे मैंने वीडियोस. देख रहा था मैं। कई वीडियो आपके समर्थन. में भी आए हैं। और कई वीडियो केलाइट्स ने.
बनाए हैं जिसमें लड़कियां जो हिंदू. लड़कियां थी और जिन्होंने मुस्लिम से शादी. की है। मैंने कई वीडियोस देखे जिसमें उसने. कहा कि सी आई एम अ हिंदू गर्ल। आई मैरिड. टू अ मुस्लिम गाय बट सी आई डोंट वियर अ. बुर्का। आई एम नॉट फोर्स टू ईट दिस। वो ये. कह रही है कि आपने आपने एक डर पैदा कर. दिया है मां-बाप के ज़हन में अब लोगों के. कि मां-बाप जैसे ही लड़की किसी मुसलमान. दोस्त से बात करेगी वो उसको चाटा और रापटा. देना शुरू करेंगे कि ये तो लव जिहाद कर. देगा।. अरे देखिए अगेन आई एम सेइंग कि हर शादी के. ऊपर कमेंट करना यह फिल्म का काम नहीं है।.
ना हम यह कहते हैं कि किसी हिंदू को किसी. इंटर रिलजन मैरिज नहीं करना चाहिए। हम कौन. होते हैं भाई? हम एक फिल्म मेकर हैं।. हमारे सामने कुछ फैक्ट्स आए। हमने उस. फैक्ट्स को एज इट इज दिखाने की एक बोल्ड. और ऑनेस्ट तरीके से दिखाने का फैसला किया।. फिर इतना हंगामा क्यों हो गया? क्योंकि जब. आप एक बोल्ड और अनसेटलिंग ट्रुथ की बात. करते हैं. तो लोगों को वो हजम करना मुश्किल हो जाता. है।. बट ये इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि आपकी. फिल्में जो है वो घूम टहल कर एक ही समुदाय. पर जाती हैं। लोग ये भी कह सकते हैं कि.
अगर आपको जागरूक करना था तो ऑनर किलिंग भी. होती है। हमारे देश में जातपात का इतना. बड़ा विषय है। अनुभव सिन्हा जैसे लोग. जातपात पे आर्टिकल 15 बनाते हैं। आप भी. जातपात को हाईलाइट करते। आप मुसलमान. मुसलमान मुसलमानें पकड़े बैठे हैं।. अब आप आपने अनुभव सिन्हा को तो यह कभी. नहीं कहा होगा कि तुम जातपात पे क्यों. फिल्म बना रहे हो? पूछा है। मेरा काम मेरा काम यही है जो. बैठे उसका उल्टा पूछा है।. आप आपसे मेरा मतलब है उन लोगों से कि वो. तब तो यह नहीं होता ना कि तुम ने हिम्मत. कैसे की? अब मैं आपसे एक सवाल पूछना चाहता. हूं। अभी एक फिल्म आई है जिसको हमने ऑस्कर.
तक भेजा है होमबाउंड। हम. तो होमबाउंड का तो विरोध नहीं हुआ कि भाई. आपने ऐसा कैसे दिखा दिया कि एक मुस्लिम और. दलित को नौकरी नहीं मिलती क्योंकि उनका. रिलीजन या उनकी जात यह है लोगों ने उस. पिक्चर को जिसको अच्छी लगी उसने देखा बहुत. कम लोगों ने देखा लेकिन जिनको अच्छी लगी. देखा जिनको नहीं अच्छी लगी उन्होंने नहीं. देखा. तो विपुल शक्ति उसमें खुश होते हैं. और फिर भी कम अच्छी लगी कम लोग देखें कम. विवाद हो कम लोग देखें या ज्यादा लोग. देखें ज्यादा विवाद हो चलेगा. मैं यह मानता हूं कि अगर हम.
एक फिल्म के आने से अगर जैसे केरला स्टोरी. वन के बाद हमें कई हजारों लोगों ने. बधाई दी कि हम उनकी वजह इस फिल्म की वजह. से उनकी जिंदगी में कुछ पॉजिटिव बदलाव आए. उनके आसपास के कुछ लोगों की गलत रिलेशनशिप. से जान छूटी तो मेरे लिए वो सबसे बड़ा. सेटिस्फेक्शन है।. केरला स्टोरी की वजह से आपके रिश्ते खराब. हुए बॉलीवुड में पुराने दोस्तों में? नहीं।. किसी से नहीं।. नहीं हुए। ऐसा पहले मुझे लगता था कि शायद. लोग थोड़े नाराज़ हैं। बट ओवर अ पीरियड ऑफ़.
टाइम कुछ भी नहीं हुआ।. दे आर हाईली प्रोफ़ेशनल्स। अह प्रोफ़ेशनल से. भी ज़्यादा मुझे लगता है कि जैसे उनको वो. फ्रीडम है, जो फिल्म वो बनाना चाहे वो. बनाते हैं। वैसे वो भी मेरी उस फ्रीडम को. रिस्पेक्ट करते हैं कि अगर मुझे यह सही. लगता है तो मैं यह. [नाक से की जाने वाली आवाज़] बना रहा हूं. और मैं और भी फिल्में बना रहा हूं। तो ऐसा. भी नहीं है कि मैं सिर्फ इसी टाइप की. फिल्में बनाता रहूंगा। मैं. [नाक से की जाने वाली आवाज़] हर हर तरह की. फिल्म बनाता हूं और मेरी उस फ्रीडम को वो. अप्रिशिएट करते हैं। ये मेरे लिए बहुत. इंपॉर्टेंट है। किसने आपको अप्रिशिएट. किया? किन लोगों ने जैसे आपने अक्षय कुमार.
साथ नमस्ते लंदन की। कैटरीना के साथ. नमस्ते लंदन की। कौन-कौन लोग हैं जिनके. साथ आपने कभी काम किया हो या काम ना भी. किया हो। उन्होंने केरला स्टोरी या केरला. स्टोरी टू जब आया है अभी उसका ट्रेलर. देखकर आपको फोन किया कि विपुल जी क्या बना. दिया? काफी लोगों का फोन आता है लेकिन नाम. लेना ठीक नहीं होता। बिकॉज़ फिर क्या होता. है कि उनको भी उस ब्रैकेट में लेबल करने. वाले लोग खड़े हो जाएंगे कि देखिए यह लोग. भी वही हैं। छुपके छुप के यही काम करने. वाले लोगों की कमी नहीं है।. किसी ने फोन करके कहा क्या पिक्चर. बने जैसे अनुराग कश्यप ने कहा।.
नहीं अभी तक तो नहीं कहा है। लेकिन. हो सकता है किसी को ऐसा लगा भी हो। मैं. देखिए अगेन वो उनकी फ्रीडम है। अगर उन्हें. मेरी फिल्म पसंद नहीं आती।. जो ये सोशल मीडिया पे आपको लोग गालियां दे. रहे हैं या आपको कह रहे हैं कि आप पोलराइज. करवा रहे हो। देखिए अगर आप कोई फिल्म. केरला स्टोरी जैसी फिल्म बनाने जा रहे हैं. और अगर आप सोच रहे हैं कि आपके ऊपर कोई. आक्षेप या अटैक नहीं होगा तो फिर आप बहुत. बड़े मूर्ख हैं। [हंसी]. है ना?
आई लाइक दिस क्लेरिटी। हां, वह तो होना ही. है।. आपको चॉइस यह होती है कि आप इतने सारे. विक्टिम से मिलते हैं। क्या वह विक्टिम के. साथ आप खड़े रहना चाहते हैं या. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. आप इस क्रिटिसिज्म के डर से पीछे हट जाना. चाहते हैं।. हमने तय किया कि हम विक्टिम्स के साथ खड़े. रहेंगे और हम इस स्कैम को उजागर करेंगे।. किस विक्टिम की कौन सी कहानी थी जिसने. आपको अंदर तक हिला के रख दिया? आप चाहो तो. नाम मत बताना। बट फिर मैं कहना चाह रहा. हूं ट्रिगर पॉइंट क्या था कि जब जो तीन.
कहानियां इस फिल्म में हैं वो तीनों ऐसी. लड़कियों की कहानियां है जो हमने. उनके उनकी बहुत सारी चीजें हमने देखी पढ़ी. उनके कुछ लोगों से भी मिले. [नाक से की जाने वाली आवाज़] जो क्योंकि. वो लड़कियां कई बार मानसिक रूप से उतनी. परिस्थिति उनकी वो होती है कि वो बोल नहीं. पाती तो उनके रिश्तेदारों से मिले कुछ. कोर्ट के ऑर्डर्स हमने देखे देखे कुछ. एफआईआर्स देखी. [नाक से की जाने वाली आवाज़].
आपका मैं आपको बता रहा हूं कि यह फिल्म जो. दिखा रही है वह 50% भी नहीं है जो उन. लड़कियों के साथ हुआ है। एक्चुअली ऐसे ऐसे. सीन थे उनकी जिंदगी में जो नरेट किए गए. हमें जो हमें निकाल देने पड़े क्योंकि. हमें लगा कि यह सीन ऑडियंस अंदर थिएटर में. बैठ के देख नहीं पाएगी। हम सुनते प हम सुन. नहीं पा रहे थे। तो दिखाने का तो सवाल ही. पैदा नहीं होता। तो ऐसीऐसी घटनाएं हुई हैं. इन लड़कियों के साथ। तो इसीलिए वो तीन. कहानियां हमने.
ये तीनों रियल कहानियां हैं।. जी जी. या जो 2025 कहानियां थी उनका सार है ये।. नहीं देखिए कहानी मोटी-मोटी वही होती है. लेकिन कई और लड़कियों के किसी लड़की की. जिंदगी में कोई एक बहुत भयानक किस्सा हुआ. होता है. जो इस विषय के लिहाज से बहुत इंपॉर्टेंट. होता है तो हम उनको वो किसी ना किसी. स्टोरी लाइन में मिक्स करते हैं।. तो 100% स्टोरी लाइन उस लड़की की नहीं. होती पर हर किस्सा हर एपिसोड हर सीन सही. होता है।.
वो कहीं ना कहीं से आया है। एक आप पर आरोप. या सवाल यह भी उठ रहा था कि आपने केरल की. कहानी को नॉर्थ के चश्मे से दिखाया है। वो. कह रहे हैं कि आपने नॉर्थ की लड़कियां ली।. अगर आपको केरला स्टोरी बनानी थी तो आप. साउथ की एक्ट्रेस लेते, केरला की लेते, कोई मलयाली एक्ट्रेस ले लेते जिसकी टोन. अच्छी होती या पिछली बार भी ये आरो सवाल. उठा था कि हमने पिछली बार भी और इस बार भी. कई साउथ की लड़कियों को अप्रोच किया था और. उनमें से कईयों का जवाब यह था कि सर यह. फिल्म मैं करूंगी ना तो मेरे ऊपर करियर पे.
बैन आ जाएगा। मेरी जान पे खतरा हो जाएगा।. मैं नहीं कर सकती। और मैं आपको यह भी बता. दूं कि हमने एक साउथ की आर्टिस्ट को. मुंबई बुला के साइन भी कर लिया था। उसके. बाद वो डर गई और हम हमने कहा आप डरिए मत. नहीं करेंगे कोई बात नहीं आप जाइए। तो ये. भी हुआ है। ये हकीकत है। तो एक्ट्रेस. जी मना कर दिया।. वो डर गए हैं। उनको लगता है कि उनके सामने. एक कैंपेन चलेगा। उनका करियर खत्म कर दिया. जाएगा। यह तो हम कभी.
[नाक से की जाने वाली आवाज़] भी नहीं. चाहेंगे। चाहेंगे कि हमारी फिल्म की वजह. से किसी को तकलीफ हो। तो हमने उनको रिलीज. कर दिया।. यही रीजन था नॉर्थ की एक्ट्रेस को लेने. का।. पर कोई अगर साउथ से करेगा ही नहीं तो आप. क्या करेंगे? और दूसरी बात यह भी है कि जब. हमने उल्का का ऑडिशन देखा तो हमें लगा कि. ये सबसे शानदार ऑडिशन था। इनफैक्ट. ये हमारी पहली चॉइस होनी चाहिए थी और हम. बहुत खुश थे कि उल्का ने वो रोल किया और. [नाक से की जाने वाली आवाज़] वैसे मुझे यह. लगता है कि ये ये कहना बहुत ही एक नैरो.
एक चश्मे से हम देख रहे हैं कि अरे भाई आप. नॉर्थ की आर्टिस्ट को साउथ का रोल क्यों. करवा रहे हो? तो फिर तो हेराफेरी में परेश. रावल जी को बाबूराव नहीं करना चाहिए। वो. तो गुजराती हैं और बाबूराव तो मराठी. आर्टिस्ट मराठी कैरेक्टर है और मराठी में. तो एक से एक शानदार एक्टर पड़े हुए हैं तो. फिर परेश रावल को क्यों करना चाहिए वो रोल. सारे काउंटर लेके बैठे हो आज काउंटर नहीं. है सर ये हकीकत है ना हमारी इंडस्ट्री की. हमारी इंडस्ट्री की खूबसूरती क्या है जैसे.
उसका फर्क ये पड़ता है कि मराठी फिर भी. क्योंकि काफी एक्टिव रहते हैं बॉम्बे में. लोग इसलिए पकड़ लेते हैं टोन साउथ वाली. टोन में या मलयाली टोन में कई बार कहते. हैं कि थोड़ा सा डिक्शन का अंतर आता है. पकड़ में थोड़ा सा फर्क दिख दिख जाता है।. जैसे एक बिहारी एक्टर बिहारी करेगा और. ऋतिक रोशन बिहारी करेगा तो दोनों में सर. जी दिखता है ना देखिए वो हो सकता है कि वो. थोड़ी कमी रह गई हो। हम. हमने एक महीना लैंग्वेज की ट्रेनिंग की।. हमने एक महीने तक उनके साथ लैंग्वेज कोच.
के साथ डिक्शन से लेके हर चीज पे काम. किया। तो कोशिश तो यही रहती है कि आप. बिल्कुल 100%. एक्यूरेसी अचीव करें। पर कभी होता है कि. बहुत इमोशनल सीन में आर्टिस्ट का वहां पे. शायद उतना 100% नहीं आ पाता। तो ये गलती. हो सकती है। चलिए लैंग्वेज वाले लॉजिक को. हम फिर भी मान लेते हैं कि सही बात है।. कोई भी एक्टर कहीं का भी रोल कर सकता है।. ही और शी शुड बी गुड एक्टर। बट एक और सवाल. उठता है सर कि आपने अपनी पिक्चर के ट्रेलर. में बताया कि कहानी जो है राजस्थान की है।.
एक कहानी मध्य प्रदेश की है। अब लोगों ने. कहा कि भाई साहब फिर मध्य प्रदेश स्टोरी. कर देते। राजस्थान स्टोरी कर देते या लव. जिहाद स्टोरी कर देते। केरला स्टोरी से. रिटेंशन ज्यादा मिलता है। अब दो सवाल है।. या तो पिछले वाले को भुना चाह रहे थे या. केरल में क्योंकि चुनाव है। लोग कह रहे. हैं कि भाई साहब चुनाव में इंपैक्ट डालना. चाह रहे थे आप। देखिए केरल स्टोरी का यह. एक स्पिरिचुअल सीक्वल है। केरल स्टोरी वाज़. टॉकिंग अबाउट मैनपुलेटिव कन्वर्जन और उसका.
एक आईिस का मॉड्यूल था। इसमें भी बात. मैनपुलेटिव कन्वर्जन की है और मैनपुलेटिव. कन्वर्जन का एक बहुत ही अलग मॉडल पूरे. भारत में चल रहा है। तो अ जो सेंट्रल थीम. था वो कॉमन था। तो इसलिए फिल्म का टाइटल. है केरला स्टोरी टू गोज़ बिय्ड। गोज़ बिय्ड. इसीलिए हमने टाइटल में ऐड किया है। सो दैट. वी कैन टेल देम कि ये केरल से आगे जा रही. है कहानी। हम्।.
एक कहानी केरल की भी है. हम्।. और दो कहानियां बाक़ी भारत के हिस्सों की. है। सवाल इलेक्शन का तो मुझे ये बड़ा मतलब. बड़े समझदार लोग हैं जो ये आक्षेप लगाते. हैं। अगर मुझे इलेक्शन को ही भुनाना होता. तो मैं बंगाल की एक कहानी ले लेता। उसके. लिए विवेक अग्निहोत्री जी लगे हैं।. नहीं वो तो जो भी है पर एक बंगाल की कहानी. ले लेता, एक आसाम की कहानी ले लेता। मैं. मध्य प्रदेश और राजस्थान की कहानी क्यों. लेता जिसमें ला पिछले ही साल एक इलेक्शन.
हो चुका है और वहां पे कोई पॉलिटिकल. बेनिफिट किसी पार्टी को नहीं है। मैं वो. कहानियां दिखाऊं या ना दिखाऊं।. ये थ्योरी हो सकती है। लेकिन लोग ये कह. रहे हैं कि आपने नाम मध्य प्रदेश स्टोरी. या राजस्थान स्टोरी नहीं लगाया क्योंकि. वहां बीजेपी की सरकार है। और आपकी फिल्म. आखिर में टैक्स फ्री तो बीजेपी वाला ही. करेगा। अह पहली बात तो अगर मुझे बीजेपी के. लिए ही फिल्म बनानी होती तो मैं कर्नाटका, बंगाल, हिमाचल कई स्टेट हैं जहां बीजेपी. की गवर्नमेंट नहीं है। मैं वहां की. स्टोरियां लेता। उल्टा हमने जानबूझ के दो.
बीजेपी स्टेट की स्टोरियां ली हैं। सो दैट. वी कैन टेल देम कि देखिए अगर हमारा ऐसा. कोई इंटेंशन होता या हम किसी एक पॉलिटिकल. आईडियोलॉजी से अलाइंड होते. हम. तब तो हम ये करते ही नहीं ना। हम यह. कहानियां दिखाई इसीलिए. फिर आपकी स्टोरीज जो आती है वह एंटी. बीजेपी स्टेट में बैन क्यों होती है और. बीजेपी स्टेट्स में टैक्स फ्री क्यों होती. है? बीजेपी स्टेट में देखिए केरला स्टोरी. वन कुछ स्टेट्स में टैक्स फ्री हुई थी और. आपको हमने वो टैक्स फ्री लेने से मना कर. दिया था।. हम. हमने कहा था कि नहीं ये टैक्स गवर्नमेंट.
को जाना चाहिए। हमें. [नाक से की जाने वाली आवाज़] खुशी है कि. गवर्नमेंट उसको इस नजरिए से देखती है और. बाकी जो बीजेपी एंटी बीजेपी स्टेट्स हैं. उन्होंने अपनी विज़डम अब देखिए पॉलिटिक्स. मैं उतना समझता नहीं हूं कि अगर बीजेपी दे. रही है तो शायद इसीलिए वो लोग नहीं दे रहे. हैं।. ठीक है चलिए हम पॉलिटिक्स तो वो मैं छोड़. देता हूं।. एक कॉमन इंसान के तौर पर आता हूं मैं।. विपुल जी वो हैं जिन्होंने कई फिल्में. बनाई है। आप जानेमाने डायरेक्टर हैं। आप. मुझे बताइए आपके परिवार में कौन-कौन है?
मेरी मां है, मेरी बीवी है, मेरे बच्चे. हैं। कितने दो बेटे हैं? दो बेटे आपके हैं। अगर आपका मान लीजिए अगर. आपकी कोई डॉटर होती और उसका कोई मुस्लिम. फ्रेंड होता तो क्या आप भी उससे कहते कि. तुम्हारा वाला भी अब्दुल अलग नहीं है। मैं. 100%. उसको यह कहता कि एकदम क्लेरिटी कर लो कि. कोई गलत रिलेशनशिप में तुम नहीं जा रहे।. बट ये आदमी कैसे. ये ये मैं किसी भी लड़के के लिए कहता।. ये कैसे? क्योंकि जब मैं आपके पिक्चर का. ट्रेलर देख रहा हूं तो उसमें वो लड़कियां.
कन्विंस्ड है। उनके पिताजी या माताजी कह. रहे होंगे पर वो कह रही है कि नहीं पापा. मेरा वाला अब्दुल अलग है। अब इसीलिए पूछ. रहा हूं मैं आपको स्पेसिफिक क्योंकि मैं. पर्सनल होना नहीं चाह रहा था। बट क्योंकि. ये कहानी बहुत पर्सनल है और जिसको दिखा. रहे हैं आप वो सब व्यक्ति इसे पर्सनल ले. रहे हैं। इसलिए पर्सनल सवाल पूछ रहा हूं. मैं कि अगर विपुल शाह जी की डॉटर होती और. वो एक मुस्लिम लड़के से दोस्ती रखती तो. क्या वो उससे कहते कि बाबू तेरा भी अब्दुल. अलग नहीं होगा। आपको चेक तो करना ही. पड़ेगा ना। और मैं आपको एक सिंपल सवाल. पूछता हूं कि हर बार यह उम्मीद क्यों की.
जाती है कि हिंदू लड़की धर्म बदले? मुस्लिम लड़का क्यों धर्म नहीं बदल सकता? या तो वो कन्वर्ट ना करें लड़कियों को और. या तो वह खुद भी कन्वर्ट हो सकता है ना? बिल्कुल हो सकता है।. आपने कितने किस्से सुने जिसमें मुस्लिम. लड़के ने कन्वर्ट होकर हिंदू बनके शादी. की? मैंने नहीं सुने। मैंने यह सुना है कि. जहां पर दोनों अपनी-अपनी पहचान के साथ जी. रहे हैं।. बस अगर अपनी. जैसे मेरे मीडिया में मित्र हैं समीर. अब्बास उनकी वाइफ है नेहा वो दोनों अपनी. पहचान से जी रहे हैं। पूजा पाठ भी कर रहे. हैं और अपना वो भी कर रहे हैं।.
तो ऐसी बहुत सारी शादियां हैं जिनका. स्वागत है।. हम. हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो फिर वो. डिसाइड कैसे करें कि मेरा वाला अब्दुल अलग. है या मेरा वाला अब्दुल भी वही है। आपको. हम तो सिर्फ यह कह रहे हैं कि यह इन. लड़कियों के साथ हुआ और ऐसे बहुत सारे. किस्से और हो रहे हैं। आपको तय करना है कि. आप अपनी जिंदगी ये देखने के बाद आप इसे. इग्नोर कर सकते हैं? नहीं आपने इससे आगे भी कहा है। आपने कहा. है कि अगले 25 साल में इस्लामिक स्टेट बन. सकता है।. ये तो उनके डॉक्यूमेंट पकड़े गए। मैं नहीं. कह रहा हूं।. पीएफआई के ऑफिस में जब रेड हुई थी तो ये.
एनआईए के डॉक्यूमेंट्स हैं।. वो तो भगवा क्या नाम है कि हम देश को क्या. नाम है? अखंड भारत बनाएंगे। वो भी कहीं. डॉक्यूमेंट्स छपेंगे। तो बट जब इस फिल्म. की कहानी को दिखाकर आपने डेमोग्राफी चेंज. होने की बात जो हम करते हैं। क्योंकि मैं. मीडिया वाला हूं। ये सारी खबरें मैंने. पढ़ी है छंगुर बाबा से लेके सब बट जब एक. फिल्म में आती है उसका इंपैक्ट बड़ा होता. है और जब आप ये कह रहे हैं कि हो सकता है. अगली बेटी आपकी हो अगला नंबर आपका हो तो. फिर वो माता-पिता के ज़हन में क्या आपने. डाल नहीं दिया कि जैसे मुस्लिम लौंडा दिखे. तुरंत भगाओ कि ये भी वही अब्दुल है जो बाद.
में बीफ खिलाएगा। देखिए ये हर एक मां-बाप. के अपने अपने विवेक पे है और हर लड़की के. अपने विवेक पे है। हम पहले तो जो डिनायल. मोड में रह रहे हैं उनको ये बताना चाहते. हैं कि ये हो रहा है और. [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये सच्चाई. है। अब आप उसे इग्नोर करना चाहे ये आपकी. मर्जी है। आप उसे कितना सीरियसली लेना. चाहे. चलो मैं इसको और इजी रिफ्रेम करता हूं। इस. पॉडकास्ट को कोई एक माता-पिता देख रहे हो. या आपकी पिक्चर केरला स्टोरी 2 को एक. माता-पिता ने देखी हो। अब उनको पता था कि.
उनकी बेटी का एक फ्रेंड है जिसका नाम. अब्दुल या एक्स व जेड कोई भी है। अब वह. क्या करें? क्योंकि उसने पिक्चर आपकी. देखी। आपने उसे अंदर तक हिला दिया। अब वो. क्या करें? कल से बैन करवा दे, WhatsApp. पे ब्लॉक करवा दे। नजर मत आना एफआईआर करवा. दूंगा या बच्चे हैं खेलते कूदते हैं।. देखिए हर एक मां-बाप को हर सिचुएशन को. इंडिपेंडेंटली इवैलुएट करना पड़ता है।. इसका कोई थंब रूल तो है नहीं के एक ही तो. अगर आप एक एक ही कॉमन ब्रश से सबको पेंट.
करेंगे फिर तो वही बात हो जाएगी कि हम. समाज को. फिर भी एक जनरिक एक आप. ये हर मां-बाप खुद तय करें कि उनकी क्या. सिचुएशन है और इस सिचुएशन में उन्हें क्या. कदम उठाने चाहिए। ये हर एक का इंडिविजुअल. टेक होता है। हर एक के अपने सोचने के. तरीके होते हैं। हर एक के अपनी जिंदगी. जीने के असूल होते हैं। हम उसमें इंटरफेयर. करने वाले कोई. आपका परसेप्शन क्या है इसको लेके? मेरा परसेप्शन सिर्फ और सिर्फ इतना है।. अब्दुल अलग होते हैं या अब्दुल एक ही. तरीके के होते हैं।. मैं ऐसा मानता हूं कि आपको ध्यान रखना.
चाहिए और कोई भी रिश्ता हो उसको थोड़ा. गहराई से समझ के आगे बढ़ना चाहिए। ये अ. क्योंकि आपको नहीं पता कि आपकी जिंदगी में. आने वाला जो आदमी है क्या वो उस मॉड्यूल. का हिस्सा है या नहीं है वो आपको पता नहीं. चलेगा. फिल्म में जितना खुलकर आप बोल रहे हैं. यहां आप नहीं बोल रहे उतना खुल के इसलिए. मैं आपसे खुल के सुना चाह रहा हूं फिर से. कि. मेरा वाला अब्दुल अलग है। ये सोशल मीडिया. पर एक. नहीं आपको मैं मेरी फिल्म का ये सोशल. मीडिया पे नैरेटिव चलता था। मैं पिछले.
चारप साल से Twitter पे मैं एक्टिव हूं।. वहां ये बड़ा चलता था कि जैसे कोई हिंदू. लड़की लव जिहाद का शिकार हो या सूटकेस में. पैक हो के मिलती थी। तुरंत Twitter पे आता. था कि इसने भी सोचा था कि मेरा वाला. अब्दुल अलग है। इसी के आसपास आपकी फिल्म. का ट्रेलर जब मैं देख रहा था तो मुझे. रिलेट हो रहा था। आपने वो इंटेंशनली किया. अनइटेंशनली मुझे नहीं पता। अब मैं समझना. आपसे स्पष्टता से ये चाह रहा हूं कि प्रथम. दृष्ट्या में मेजॉरिटी ऑफ़ द अब्दुल। चलिए. मैं जनरलाइज भी नहीं कर रहा हूं। हिंदू. लड़कियां जो है वो ये माने कि मेरा वाला. अब्दुल अलग है या माने कि नहीं अब्दुल.
अब्दुल ही है। नहीं ये अब जनरलाइज ही हो. गया ना अगर हम ये कहें कि हर लड़की या ऐसा. सोचे या वैसा सोचे हम कह रहे हैं कि यह. हकीकत है यह हो रहा है। एक तो पहली बात आप. इसके डिनाइल में मत जिए कि नहीं नहीं ऐसा. कुछ होता ही नहीं है। अगर ऐसा आप सोच रही. हैं तो हमारी फिल्म आपको कुछ सच्ची घटनाएं. दिखा रही हैं। इसके बाद आप अपनी जिंदगी के. फैसले कैसे करेंगी यह आपके ऊपर है या आपका. [गला साफ़ करने की आवाज़] खुद का.
इंडिपेंडेंट फैसला है। हम उस फैसले में. कोई हमारा कोई रोल नहीं है।. पर [नाक से की जाने वाली आवाज़] हम आपको. सिर्फ आईना दिखा सकते हैं।. देखिए आप हम एक फिल्म बना के हम एक. जनरलाइज स्टेटमेंट कभी नहीं कर सकते. कि हर अब्दुल ऐसा ही है। ये तो कोई नहीं. कर सकता। और हम तो यह पहले से कह रहे हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेकिन बाद. में हर इंसान को अपनी इतनी तो सोच उसे यूज़. करनी होगी। और हर एक का किस्सा अलग होगा।. हर रिलेशनशिप अलग होगी। अब्दुल को शक की. नजर से देखना चाहिए।.
मैं ऐसा वो आपके ऊपर है। आप कैसे देखना. चाहते हैं? आप देखते मैं कैसे देखूं? मैं आपकी बेटी. होती तो आप देखते।. मैं ध्यान तो जरूर करता।. मैं जरूर उसका एक प्रॉपर जिसको कहते हैं. कि उसकी छानबीन करता। उसके बाद ही मैं आगे. बढ़ता। तो यह केवल अब्दुल्ला केस में करते. या राम रहीम कुछ भी होता. कोई भी हो कोई भी हो मेरी बेटी अगर किसी. से भी प्यार करे तो मैं उसके लिए छानबीन. तो पूरी करता हम बस यही कह रहे हैं।. ठीक है। केरल के बारे में सर मैं पढ़ रहा. था बहुत सारी चीजें क्योंकि जब मैं रिसर्च.
कर रहा था मैं केरला इतना घूमा नहीं हूं. तो मैं पढ़ ही सकता हूं। तो पढ़ते-पढ़ते. मुझे ये एहसास हुआ कि केरल की भी एक साझी. संस्कृति है। केरल वो जगह है जहां पर. मलपुरम में एक शिव मंदिर है जहां मुस्लिम. परिवार आते हैं दिया जलाते हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] सबरीमाला हम. सब वहां जाते हैं तो वावर स्वामी मुस्लिम. संत थे। उनके यहां पर मत्थ टेकते हैं।. कईयों ने कहा कि वो जो साझा खूबसूरत. संस्कृति थी उसको भी कहीं केरला स्टोरी. में जगह दिखनी चाहिए थी। जो एक केरल है वो. भी केरला स्टोरी है। सिर्फ नफरत वाली देश.
भर में केरला स्टोरी क्यों? क्योंकि आज जो. नॉर्थ में बैठा है मेरे जैसा आदमी जब वो. ये स्टोरी देख रहा है तो उसके ज़हन में आ. गया कि भैया केरल में तो यही सब होता है।. लड़की जाएगी फंसा ली जाएगी। एक एक. परसेप्शन आता है। एक स्टेट जहां पर लोग. ट्रैवल करने जाते थे वहां को लेकर एक गंदा. परसेप्शन बना दिया। ऐसा केरलाइट साहब पर. आरोप लगाते हैं।. देखिए मैं वही कह रहा हूं। मैंने पहले भी. कहा था कि जब तक केरल का एडमिनिस्ट्रेशन. यह तय मानेगा [गला साफ़ करने की आवाज़]. नहीं कि यह प्रॉब्लम है। छोटा है, बड़ा. है। मैं कोई नंबर बोल रहा हूं। आप कोई अलग.
नंबर बोल रहे हैं। लेकिन आप अगर यह कहते. हैं कि नहीं ये केरल में होता ही नहीं है।. बट सबसे ज्यादा केसेस तो यूपी से आए थे. सर। जब मेरी रिसर्च कर रहा था मैं सबसे. ज्यादा केसेस क्योंकि लव जिहाद कोई टर्म. नहीं है। जबरन धर्मांतरण. नहीं लव जिहाद को देखिए तीन कोर्ट केसेस. में लव जिहाद नाम के साथ तारा सच सहदेव भी. उन्हीं में से एक हैं। जजमेंट में भी आया. है और वो बात अब धीरे-धीरे क्योंकि ये. बहुत ग्रे एरिया है।. यूपी में 850 के आसपास केस पिछले कुछ. सालों में देखे मैंने। यह आप जो कह रहे.
हैं, इसका कोई पक्का डाटा नहीं है क्योंकि. जब यह इतना ग्रे एरिया है कि इसके ऊपर और. इसीलिए शायद विवाद भी ज्यादा होता है।. क्योंकि ये ग्रे एरिया है। आप इसको कैसे. डिफाइन करेंगे कि ये इस इस लड़के का मोटिव. जब तक आप उसे हाथों पकड़ेंगे नहीं तब तक. उसका मोटिव तो आप एस्टैब्लिश नहीं कर. पाएंगे। तो ये बहुत ग्रे एरिया होने की. वजह से आपको पता नहीं चलता। जैसे मैं अभी. भी कह रहा हूं के वी. [गला साफ़ करने की आवाज़] एस अचुतानंदन जो. वहां के सीएम थे केरल के.
उन्होंने दिल्ली में ही प्रेस कॉन्फ्रेंस. की थी। उन्होंने कहा था कि मैंने प्रेस. कॉन्फ्रेंस. आप तो आपको पता है कि उन्होंने खुल के कहा. था कि केरल को इस्लामिक स्टेट बनाने की ओर. बहुत तेजी से बढ़ जैसे शशि थरूर जो आजकल. काफी देश दुनिया में देश का नाम रोशन कर. रहे हैं। उन्होंने भी कहा कि आपने बहुत. बढ़ा चढ़ा कर दिया है। 30 केस आए हैं। यही. शशि थरूर कहना था।. अभी यही शशि थरूर साहब थे। मैं इनकी बहुत. इज्जत करता हूं। बहुत इंटेलेक्चुअल आदमी. हैं। केरला स्टोरी वन के टाइम तो वो कह. रहे थे कि तीन भी केस नहीं है। चलो तीन से.
30 पे तो आ गए।. तब वो. धीरे-धीरे अब वो धीरे-धीरे राइट में भी तो. आ रहे हैं।. नहीं वो जहां भी आ रहे हैं वो उनकी अपनी. चॉइस है और उनकी अपनी मर्जी है। पर मेरा. कहने का मतलब ये है. तो हो सकता है जब कंप्लीट राइट में आए तो. एक जीरो और बढ़ा दे। आप असेंबली में जो आप. केरल की असेंबली के फ्लोर हाउस ऑफ द फ्लोर. पे रखा हुआ डॉक्यूमेंट है।. अवेलेबल है इंटरनेट पे 7,000 से ऊपर. ज्यादा केसेस का उसके अंदर. सीएम ने खुद मेंशन किया। अब देखो आपने.
डॉक्यूमेंट की बात कर दी।. आपकी पहली फिल्म का टीजर जब आया था तो. 32,000 लड़कियों का दावा हुआ था। लेकिन. फिर केरल हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट. मामला पहुंचा। कोर्ट ने सबूत मांगे तो. आपके वकील ने स्वीकार किया कि हम हम तीन. डिस्क्लेमर देकर तीन लड़कियों की कहानी पर. जा रहे हैं। जो डिस्क्लेमर लगाया गया. पिक्चर पर आप बाद में YouTube पर कुछ भी. रिलीज़ करते रहे। लेकिन जो कोर्ट में मानी. गई बात वो ये थी कि 32,000 नहीं तीन. लड़कियों का डाटा है।. नहीं नहीं हमने कभी यह नहीं कहा। ये. डिस्क्लेमर हमने वॉलंटरीली दिया हुआ. डिस्क्लेमर था। हमने सुप्रीम कोर्ट को कहा.
कि अगर लोगों को इतना गुस्सा है, इतनी. तकलीफ है तो हम यह डिस्क्लेमर में ऐड करते. हैं। आप प्लीज कोर्ट का जजमेंट पढ़िए।. तो अगर 32,000 तो क्यों तीन पे ऐड किया. आपने? हमने तीन पे ऐड नहीं किया। हमने यह कहा उस. डिस्क्लेमर में कि ये एक सच्ची घटना से. प्रेरित फिल्म है और ये सच्ची घटनाओं का. एक फिक्शनलाइज़्ड वर्जन है। वो. फिक्शनलाइज़्ड वर्जन है। वो कहने से बाकी. लोग लोगों ने कहा ठीक है। हमें फिर. एक्सेप्टेबल है। फिर आप पिक्चर रिलीज़. करिए। हमें कोई प्रॉब्लम नहीं है। तो इतना. ही फर्क हुआ। इस बार भी सच्ची घटनाओं से.
फिक्शनलाइज़ पिक्चर है। स्टोरी. अभी तो हम ऐसा कुछ कह नहीं रहे। हम तो कह. रहे हैं कि इंस्पायर्ड बाय ट्रू इवेंट्स. हैं। देखते हैं आगे क्या होता है। मैटर. कोर्ट में चल रहा है। मतलब क्योंकि फिर आप. हजारों की बात कर रहे हैं इस बार भी। तो. इस बार कोई डाटा आपने पक्का रखा है। पिछली. बार सब. इस बार आप देखिए हमने पिछली बार मैंने. आपको रिग्रेट करते हुए देखा था कि मैंने. बाद में YouTube पे डाला। पहले डाल देना।. नहीं बाद में नहीं डाला। मैं आपको उसका भी. एक रीज़न बताता हूं।. के वो डाटा हम जब फिल्म रिलीज हुई हम वो. डाटा देने वाले थे तब ऐसा कुछ एक वाक्या. हुआ कि एक सर्टन नंबर हम.
एक इन्वेस्टिगेशन में चला गया।. कुछ संस्थाएं और वो उनके हम नाम नहीं ले. पा रहे थे। हम. इसलिए हमें थोड़ा वक्त लगा क्योंकि 32,000. का डाटा देना बहुत ही ज्यादा जरूरी था।. इसलिए हमें थोड़ा वक्त लगा। हमने वो पूरा. डाटा जुटाया और हमने वो डाटा के ऊपर. वीडियो बना के रखा।. सिंपल। अब जिसे आप मुझे इतना कह रहे हैं. ना आप देखिए जिन लोगों ने इतना विरोध किया. ध्रुव राठी जैसे बहुत सारे लोग थे. उन्होंने उस 32,000 के वीडियो पे रिएक्ट.
नहीं किया। क्यों? करना चाहिए था ना। आप. तो कह रहे थे कि फिल्म झूठी है तो आप कहते. यह 32,000 का आंकड़ा या यह जो नाम आपने. दिए हैं या यह जो संस्थाएं आपने दी हैं या. यह जो अब देखिए ध्रुव राठी ने अपने वीडियो. में बोला मेरी बड़ी शानदार रिसर्च टीम है. और उसने यह असेंबली का पेपर निकाला जिसमें. नंबर दिया गया है ₹00 और हमने वीडियो में. कहा एक पन्ना पलटते तो आपको दिखता कि वो. एक साल का नंबर था और पीछे 7500 का नंबर. था। तो आपकी रिसर्च टीम इतनी वीक क्यों है.
कि एक पन्ना नहीं पलटती। उन्होंने तो. तो वो अब देखिए बात क्या है वो एक एजेंडा. पे झूठ बोल रहे थे तो 32000 के वीडियो पे. इनमें से किसी का भी रिएक्शन नहीं आया. क्यों नहीं आया हमने हर न्यूज़ चैनल को. अप्रोच किया कि डिबेट करिए अभी इसके ऊपर. दो दिन के बाद हर न्यूज़ चैनल वाले ने कहा. सामने वाला कोई आना नहीं चाहता तो अब. डिबेट करने का कोई मतलब नहीं रह गया है और. यह बातें बाहर नहीं आती लोगों को यह बातें.
पता नहीं चलती तो लोगों को लगता है कि. अच्छा वो 32,000 का क्या हुआ? अरे वह तो. शायद कोई झूठ था। तो एक सिस्टमैटिक तरीके. से एक फिल्म को मलाइन करने के लिए झूठ को. फैलाया गया फिल्म के अगेंस्ट। लेकिन. ऑडियंस ने उसके थ्रू देख लिया। इसीलिए. ऑडियंस ने बहुत बड़े नंबर में उस पिक्चर. को देखा।. बट क्या व्यक्ति विशेष से आप लोगों को. फर्क पड़ता है? भाई एक इंसान जो इतना आगे. बढ़ के बात कर रहा है और उसके पीछे एक. पूरी लॉबी खड़ी है।. तो उसकी भी तो जवाबदारी बनती है ना। जब.
अगर मेरी जिम्मेदारी है कि मैं कोई बात. बोल रहा हूं तो उसका मैं प्रमाण दूं तो वह. भी तो प्रमाण दें। जिन्होंने खुलेआम हमारी. पिक्चर को झूठी फिल्म बता के एक. प्रोपोगेंडा क्रिएट किया। एक एजेंडा चलाया. अपना वो क्यों नहीं जवाब दे रहे? उनसे कोई. जवाब क्यों नहीं मांग? एजेंडा बाजू द्रव राठी है।. बिल्कुल है। वो तो मैं तो उनको कहता हूं. कि वो एक पॉलिटिशियन है जो सिर्फ एक ओपनली. पॉलिटिक्स में है नहीं। वो एक पार्टी और. एक एक सिस्टम को प्रमोट करते हैं। आपने हर.
आप तो स्टडी करेंगे तो पता चल ही जाएगा और. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है। उनको खुल के. पॉलिटिक्स करनी चाहिए। कोई बुरी बात नहीं. है। पॉलिटिक्स में आना बहुत अच्छी बात है।. उसमें क्या प्रॉब्लम है? लेकिन आप क्या. कहते हैं कि नहीं नहीं मैं किसी से जुड़ा. हुआ नहीं हूं। मैं एक इंडिपेंडेंट वॉइस. हूं। तब मेरी उम्मीद आपसे सच्चाई की है।. उन्होंने तो एलॉन मस्क को भी कह दिया कि. वो भी खत्म आदमी है।. अब तो अब क्या है? तो मेरी उम्मीद ठीक है।. अपनी राय है मुझ में चार कमियां हो सकती. है। उनमें होंगी वो मैं उन पर. नहीं मैं मैं कम्युनिटी के ऊपर है तो आप.
कर सकते हैं।. मेरी मेरी सिर्फ इतनी अपेक्षा है कि या. अगर आप पॉलिटिशियन है तो मैं आपसे कोई. जवाब एक्सपेक्ट नहीं करता हूं। लेकिन अगर. आप पॉलिटिशियन नहीं है और आप एक प्रॉपर. प्रो पॉडकास्टर हैं ट्रू सेंस में. तो आपको भी. कंटेंट क्रिएटर है वो।. कंटेंट क्रिएटर हैं तो आपको भी अपने. वीडियो की सच्चाई को साबित करना चाहिए।. जैसे आप उम्मीद करते हैं कि हम करें।. ठीक है? तो मान. आक्षेप करके भाग जाने से कुछ नहीं होता।. ठीक है? केरल नाम जो है सर वो आपके लिए एक.
अच्छा ब्रांड बन गया है। मतलब 300 करोड़. पिछली बार आए थे इसलिए मेरी बार-बार. निगाहें जा रही हैं कि देखिए एक ही बड़ा. रीज़न हो सकता है कि लगा दिया हमने। अगर. अगर वो मैंने पहले भी कहा कि वो एक. स्पिरिचुअल सीक्वल है।. जो मेन मुद्दा है वो मैनपुलेटिव कन्वर्जन. का मेन मुद्दा है और हम मेन मुद्दे को. एक्सपेंड कर रहे हैं। इसीलिए केरला स्टोरी. टू गोज़ बिय्ड ये टाइटल हमने रखा है। और. ऐसा हर क्या बुराई है मानने में कि एक. ब्रांड बन गया था। उससे पहले. ब्रांड तो है। ऑब्वियस सी बात है कोई नया.
नाम रखते उतनी एक्साइटमेंट नहीं होती।. पिछला वाला नाम था ज्यादा क्यूरोसिटी. होती। पिछले वाले बवाल ज्यादा किया था।. मैं आपको ऑनेस्टली बताऊं नाम कोई भी रखा. 25 साल बाद गदर आई अश्वनी देओल ने बीच में. भी ऐसी बहुत फिल्में की थी नहीं चली गदर. के नाम पे गदर टू चल गई नहीं देखिए बॉर्डर. के नाम पे बॉर्डर टू चल गई मैं ब्रांड है. उसमें तो कोई डाउट नहीं है ये बहुत बड़ा. ब्रांड है लेकिन मैं इसका नाम कुछ भी रखता. [गला साफ़ करने की आवाज़]. इस ट्रेलर के बाद लोग इस पे कमेंट करते ये. चैटर ये डिस्कशन होना ही था क्योंकि टॉपिक.
बहुत सेंसिटिव है। हम. लेकिन आप क्योंकि वही मैनपुलेटिव कन्वर्जन. लेके चल रहे हैं. इसीलिए आपने उसका नाम केरला स्टोरी टू रखा. है।. ट्रेलर की शुरुआत में जो स्टेटमेंट आया कि. अगले 25 साल में भारत इस्लामिक स्टेट बन. जाएगा।. ये सच है शंगुर बाबा वाले केस में ये आया. था। बट जिस तरह से आपने रिप्रेजेंट किया. ये देश के मन में डर पैदा करता है और मैं. जब पॉलिटिकल जर्नलिस्ट के तौर पर जनता के. बीच में जाता हूं तो मैं 2014 से हर चुनाव. सुनता हूं। भैया अबकी बार वोट दे दो नहीं. तो देश में सब मुसलमान आ जाएंगे। यूपी. बिहार में चर्चा बहुत आम होती है। आपकी.
फिल्म का नाम भले केरल स्टोरी है लेकिन. देखने वाले यूपी बिहार में बहुत लोग. होंगे। क्या एक मैसेज नहीं जा रहा है कि. मुसलमान केवल कन्वर्जन करवा रहे हैं।. ज्यादा बच्चा पैदा कर रहे हैं और यह बात. बीजेपी कई नेता बोलते रहते हैं। देखिए हम. एक फैक्ट को लोगों के सामने रख रहे हैं कि. ये हुआ. और हम ये कह रहे हैं कि ये एक पर्टिकुलर. आदमी है जिसने ये जो ये फिलॉसोफी में. बिलीव करता है। हम ये नहीं कह रहे हैं कि. देखिए पूरा मुस्लिम समाज खड़ा हो के कह.
रहा है कि हम हर हिंदू को कन्वर्ट कर. देंगे। हम यह नहीं कह रहे पर हम ये कह रहे. हैं कि ये एक ग्रुप है जिसका ये डिजाइन. है।. मान लेता हूं सर बट जैसे ये आ रहा है कि. अगले कुछ सालों में ये हो जाएगा। ये एक. मुस्लिम व्यक्ति को लेकर एक आम व्यक्ति. जिसके ज़हन में नफरत नहीं है उसको कुछ डाल. देता है। जो कुछ रह जाता है। जैसे मैं. हमेशा कहता हूं दो तरह की फिल्में होती. है। एक जिसको आप मजा लेके लौट जाते हो। आप. गए सिनेमा हॉल में ताली पीटी दिमाग घर. छोड़ आए और एक जिसमें पिक्चर देखने के बाद. कुछ साथ लेके जाए। ये वो सब्जेक्ट है जो.
सामाजिक सब्जेक्ट्स होते हैं जो अनुभव. सिन्हा बनाते हैं आप बनाते हैं ये आपके घर. तक जाते हैं। आपकी सोच का हिस्सा बनते. हैं। ऐसे में जब ये लाइन आप डाल दे रहे हो. कि अगले 25 सालों में भारत इस्लामिक स्टेट. बन जाएगा। मुसलमान कन्वर्जन कर देंगे।. ऑलरेडी परसेप्शन है कि वो चार शादी करते. हैं। 36 बच्चा पैदा करते हैं। उसमें अगर. ये आ जाएगा लव जिहाद ये चीजें। तो फिर. आपको लगता नहीं कि एक नार्मल हिंदू अपने. कोलीग पर डाउट करना शुरू करेगा। एक पड़ोस. में जो रहने वाला व्यक्ति डाउट करेगा और. समाज एक बड़े गैप में चला जाएगा।. देखिए मुझे नहीं लगता कि ऐसा होता है। अगर.
ऐसा होता मैं तो इस पे इतना रिसर्च कर रहा. हूं तो मैं ही सारे मेरे मुस्लिम दोस्तों. से दूर हो जाता या मेरी यूनिट में मैं. किसी मुस्लिम आदमी के साथ काम ही नहीं. करता। मेरी टीम क्रिएटिव टीम में मुस्लिम. लोग हैं।. कौन-कौन मुस्लिम है? नाम लेके बताइए. थोड़ा। आप इनका तो नाम ले ही सकते हैं ना. आप।. बिल्कुल ले सकता हूं। मेरा मेरी पूरी जो. मार्केटिंग डिजिटल एजेंसी है वो एक. मुस्लिम लड़का चलाता है उसका नाम है. मुर्तजा ठीक है. डिजिटल एजेंसी में चलिए. मेरे नहीं क्रिएटिव पार्ट. मेरे साउंड मेरे साउंड डिजाइनर जो लोकेशन.
पे साउंड रिकॉर्ड करते हैं वो मुस्लिम थे. और उन्होंने तो हर डायलॉग बिल्कुल कान में. लगा के सुना है पूरी पिक्चर का उसके अलावा. 30-40% हमारा यूनिट जो होता हमको उनके ही. फेशियल एक्सप्रेशन देखने चाहिए थे जब हमने. उनको बोला था अगर आपको दिक्कत हो तो आप इस. पिक्चर से अलग हो सकते हैं. हम. क्योंकि उन्होंने हमारे साथ आगे पीछे भी. काम किया है और उन्होंने कहा नहीं हम करना. ज्यादा पैसा तो नहीं. तो अगर अगर मेरा अगर मैं जो इस सब्जेक्ट. में इतना डीपली इन्वॉल्वड हूं. अगर मेरे दिल में पूरे मुस्लिम समाज या.
मेरे आसपास के जो मुस्लिम्स हैं. उनके लिए कोई ऐसी गलत फीलिंग नहीं पैदा. होती और मैं उतना ही कैजुअली काम कर सकता. हूं जितना मैं पहले करता था. तो मुझे नहीं लगता कि हमें ऐसा डर पालना. चाहिए. लेकिन मुझे एक बात बताइए के जब यह लोग. पकड़े जाते हैं हम. तो आप कितना आक्रोश देखते हैं मुस्लिम. इंटेलेक्चुअल्स में उनके अगेंस्ट क्या कोई. स्टेटमेंट पढ़ते हैं आप? मैंने तो नहीं.
पढ़े। तो क्या यह जिम्मेदारी उस समाज की. भी नहीं है कि वो उनको ऐसे हर एलिमेंट को. एक्सपोज करें और उनको जेल में डलवाएं या. उन्हें उन उनका यह काम रुकवा दें। ये तो. उसी समाज की भी जिम्मेदारी बनती है कि. नहीं बनती? हां बट जैसे मैं अपने दफ्तर की. बात कर लेता हूं। मेरे दफ्तर में 10 से 12. मुस्लिम लोग काम करते हैं।. जी।. मैं दिल्ली में आतंकवादी घटना भी देखता. हूं। जहां पर एक पढ़ा लिखा डॉक्टर बम फोड़. लेता है। मैं लव जिहाद और छांगुरी घटना भी. देखता हूं। बट मेरे दफ्तर में जो लोग हैं.
उनके साथ में बड़ा सहज हूं। वह अच्छे लोग. हैं। वह मेरे सुख-दुख में काम आते हैं।. आधी रात तक मेरे लिए काम करते हैं। कोई. जरूरत हो वह मेरे लिए खड़े रहते हैं।. परिवार में उनके परिवार भी मेरे जैसे ही. साधारण परिवार के लोग हैं। जिनके मां-बाप. मुझे दुआएं देते हैं। लाड प्यार करते हैं।. मैं घर जाऊं खाना पीना आता है। वो ईद में. हमको खाना भेज देते हैं। हमारे यहां होता. है कुछ त्यौहार। हम उनको दे देते हैं। वो. अपनी प्रक्रिया पालन कर रहे हैं। शुक्रवार. को नमाज़ पढ़ लेते हैं। मैं अपना पूजा पाठ. करता हूं। मेरे यहां ऑफिस में पूजा पाठ. हुई। उनको समस्या नहीं है। उनको अपना कहीं. क्रोमा में जाके अगर वीकेंड पे नमाज पढ़.
लेना मुझे समस्या नहीं हुई है। बट यही. सवाल बार-बार. एग्जैक्टली यही जिंदगी मैं भी जी रहा हूं. जो मैंने अभी कहा कि मेरे साथ लोग काम. करते हैं।. बट सवाल यही आ रहा है सर कि हम और आप तो. जी रहे हैं लेकिन जो आप फिल्म के जरिए दे. रहे हैं उससे जो बाकी लोग जी रहे हैं।. वो शायद नजरिया बदलने लगे। वो शायद इनसे. बचने लगे। वो शायद इनसे दूरियां बनाने. लगे। हम ऐसा कह के ना हमारे समाज के विवेक. के ऊपर बहुत बड़ी शंका कर रहे हैं। हमें. लग रहा है कि हमारे समाज के लोगों में सही.
और गलत की परख करने की समझ नहीं है। ऐसा. नहीं है।. बट एक कहावत होती है ना ना हसो ना देखे।. जैसे ये कहावत होती है कि ना हंसो ना दाद. देखे। अब जब दोस्ती ही नहीं करेंगे तो उधर. तक बात ही नहीं जाएगी। तो आदमी दोस्त से. कतराने लगेगा कि जैसे लड़कियों के दिमाग. में डाल दिया जाएगा बचपन से ही कि भाई. मुस्लिम लड़का मतलब ये तुमको ना लव जिहाद. करवा।. ऐसा ऐसा मैं नहीं मानता। मैं ऐसा मानता. हूं कि जब ऐसी कोई समस्या सामने आती है।. देखिए मैंने एक फिल्म बनाई थी कमांडो 3. हम. मैंने देखी अच्छी फिल्म थी।. हां उसमें मेरा क्लाइमेक्स क्या था कि जब.
हिंदू फेस्टिवल दशहरा का है उस पे. टेररिस्ट अटैक करने वाले हैं तो मुसलमान. आके साथ में खड़े हो जाते हैं और. [नाक से की जाने वाली आवाज़] वो उन. टेररिस्टों से लड़ने में हिंदुओं का साथ. देते हैं। ये पिक्चर का मैसेज था। तब तो. मुझे किसी ने नहीं कहा कि अरे यार तुम तो. बड़े सेकुलर आदमी हो यार। तुम तो दिखा रहे. हो। तुमने यह नहीं दिखाया कि मुसलमान तो. बुरा ही होता है। पाप जल्दी माथे पे लगता. है। पुण्य मैंने पहले भी कहा कि मैंने. मनोज जी के पॉडकास्ट में लाइन कही थी कि. पाप जल्दी माथे पे चढ़ता है। पुण्य जाने.
के बाद लोग याद रखते हैं।. करेक्ट। तो अब ठीक है। हम तो मैंने हर. किस्म की फिल्म बनाई। मेरी नमस्ते लंदन. में भी यही ट्रैक था कि एक पाकिस्तानी. लड़का जो यूके में रह रहा है। उसको वहां. की गोरी लड़की बहुत पैसे वाली है। जो बोल. रही है शादी कर ले मेरे से कन्वर्ट हो जा।. और अक्षय कुमार का कैरेक्टर उसको मिलता है. और बोलता है कि बेटा अपना धर्म नहीं. छोड़ते और [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तेरा बाप टैक्सी ड्राइवर है तेरे को पैसे. की लालच है उसके लिए तू धर्म छोड़ देगा और. वो अपने फोल्ड में वापस आता है. तो लोग बोलते थे अरे यार तो कमाल है मतलब.
तुमने तो क्या ही हिंदू मुस्लिम यूनिटी. इंडिया पाकिस्तान यूनिटी पे क्या ही कर. दिया. बट वो एक्चुअली है ना थी मैं अभी भी अभी. कहूंगा कि. तो आप देखिए. एक पार्ट और बना दो उसका. जरूर मैं भी बना. म्यूजिक हिमेश से करवा. जरूर और बहुत शानदार म्यूजिक म्यूजिक. हिमेश करता है।. मतलब. अब देखिए मेरी मेरी मेरी दो फिल्मों में. मैंने यह बातें भी कही। अब मैं यह फिल्में. एक क्राइम को उजागर कर रहा हूं।. हम. है ना? अब क्राइम को उजागर करने में लोग. उसे जनरलाइज क्यों कर रहे हैं? मैं कह रहा.
हूं हम सब साथ में आए।. हम. 90 95%. जो मुस्लिम समाज है जो बहुत अच्छा है. वो भी साथ में मिले और इस मैनेज को खत्म. करने में सबकी मदद करें। क्या प्रॉब्लम है. उसमें? ठीक है? बट जैसे आप लगातार कह रहे. हो कि हम सच्ची घटना फिल्म बना रहे हैं।. तीन लड़कियों की कहानी मैंने सुनी। ये. केरला स्टोरी टू की कहानी रियल में और. ज्यादा खतरनाक थी। हम 50% दिखा पाए। बट. अगर डिस्क्लेमर में आया कि ये काल्पनिक. कहानी है जो केरला स्टोरी वन में आया.
तो जनता को क्यों डाउट नहीं करना चाहिए कि. हम कह तो रहे हैं कि सच है बट आखिर में. हमने लिख दिया कि फिक्शनल कहानी है जो. अभी इंस्पायर हो सकती है।. एज ऑफ टुडे ऐसा डिस्क्लेमर में कुछ भी. नहीं है।. डिस्क्लेमर में हमने लिखा हुआ है कि ये. इंस्पायर्ड बाय ट्रू इवेंट्स हैं।. हम. इंस्पायर्ड बाय मेनी ट्रू इवेंट्स हैं। और. वही रखने की हमारी कोशिश रहेगी। सोशल. मीडिया के दौर में बहुत सारे. अंतरराष्ट्रीय भी रिपोर्ट्स आती हैं जो. केरल में लव जिहाद या धर्मांतरण के मामलों.
को उतने बड़े पैमाने पर नहीं मानती कि सच. है। यूपी में तो फिर भी घटनाओं को लोग. मानते हैं। केरला को लेकर ऐसा नहीं मानते. हैं या ऐसी बड़ी स्टोरीज नहीं आती हैं।. ऐसे में केरलाइट्स का बार-बार ये सवाल है. कि व्हाई यस सर? व्हाई अस? बिकॉज़ दैट इज. वेयर इट द होल थिंग स्टार्टेड। देयर इज़ नो. वो कह रहे हैं सर हम तो सबसे लिटरेसी रेट. में सर टॉपर सर। अच्छा लिटरेसी रेट में. अगर आप सबसे ज़्यादा टॉपर हो तो इस देश में. ICIS का बेस सिर्फ केरला में ही क्यों है? आईस का बेस केरला के अलावा कहीं है? क्यों.
है? और आपने क्या कदम उठाए उन आईसीस वालों. को यहां से खदेड़ने के लिए? बताइए। चलिए।. तो आप ये कह रहे हो कि देखिए मैं ये कह. रहा हूं।. आज के दौर में पढ़ा लिखा मुसलमान उसकी. जरूरत है।. मैं यह कह रहा हूं कि हर स्टेट में बहुत. अच्छी बातें होती है और बहुत बुरी बातें. भी होती है।. तो हम हम केरला को गॉड जोोन कंट्री कहते. हैं। हम केरला को सब लोग प्यार करते हैं।. हम सब कई बार केरला छुट्टियां मनाने गए. हैं। खूबसूरत प्रदेश है। लेकिन अगर आप यह.
कहें कि बस यहीं पे आप रुक जाओ और जो बुरी. बात है वो मत दिखाओ। क्योंकि उससे हमारी. भावना आहत होती है। तो मैं कहता हूं कि. भाई आप खुद ऐसा काम कर लो। आईसी को खत्म. ही कर दो। मुझे केरला स्टोरी 3 बनाने का. मौका ही मत दो। मतलब थ्री बनाओगे आप? अगर. आप ऐसी कहानी आई तो बनाऊंगा। लेकिन अगर. आपने खत्म ही कर दिया तो बात ही खत्म हो. जाएगी।. इट इज़ ओनली केरला। अगेन इट इज बिकॉज़. ब्रांड।. मैं यह कह रहा हूं कि केरला ये तो एक. आर्गुमेंट के लेवल पे कहा। मैं कोई केरला.
स्टोरी 3 का कोई प्लॉट भी नहीं है ना कोई. आगे की बात है। मैं ये कह रहा हूं. वो रेवेन्यू देखकर तय होगा।. मैं सिर्फ इतना ही कहना चाह रहा हूं कि आप. आईिस को खत्म कर दीजिए। अपने स्टेट में।. यह मैनेज जो चल रहा है उसे खत्म कर दीजिए।. बट जैसे बात ही खत्म।. बट जैसे यूपी में है। यूपी में बहुत सारी. समस्याएं होंगी। अब मैं एक नॉर्मल यूपी. वाला हूं। मैं देश भर में अगर अपने प्रदेश. की बुराई सुनूंगा मुझे तकलीफ होगी। भाई. मेरे हाथ में नहीं खत्म करना। क्यों नहीं. है? आप यह आप पूरा कलेक्टिव सोसाइटी आके. जितने आप लोग जमा हो के मेरी पिक्चर के.
सामने खड़े हो उतने लोग खड़े हो के कब गए. आप आईसी वालों के पास और कहा कि देश छोड़. के निकल जाओ। या ये रास्ता छोड़ दो। कब. गए? सर वो आप भी जानते हो कि वो एक. पॉलिटिकल पार्टी है लेफ्ट जिसके लोग थे. बड़े पैमाने पर जो आए थे। उसमें भी वहां. के जो मुस्लिम संगठन कई सारे उन्होंने ये. भी खबरें पढ़ी कि केरला के अंदर कई. मुस्लिम संगठनों ने इस बीफ पार्टी का. विरोध भी किया ये कहते हुए कि भैया बीफ जो. है वो हिंदुओं की उससे गाय से आस्था जुड़ी. हुई है। आप एक पॉलिटिकल आदमी का या एक.
फिल्म का या एक ट्रेलर का विरोध करने के. चक्कर में अपने केरला के हिंदुओं का विरोध. मत करो। इनफैक्ट शायद कांग्रेस से भी कुछ. लोग निकल कर आए थे जिन्होंने इस बात का. विरोध किया कि लेफ्ट जो कर रही है वो. इलेक्शन के कॉन्टेक्स्ट में कर रही है। तो. मैं इसको पॉलिटिकल उस पे नहीं जा रहा हूं।. मैं एक कॉमन केयरलाइट्स के जहन में जाकर. बात कर रहा हूं कि वो अगर एंबैरेस फील कर. रहा है कि उसके स्टेट को आप देश भर में. स्पेशली नॉर्थ इंडिया में जब वो दिल्ली. में जॉब कर रहा है। आप दिखा रहे हो कि. यहां पर केवल यही सब होता है। लव जिहाद, कन्वर्जन और केरला की कोई खूबसूरती नहीं. है। अब एक परसेप्शन बन रहा है बिकॉज़. फिल्म का इंपैक्ट बड़ा होता है। सलमान भाई.
ने बीच में से बाल निकाले तो आधा देश घुमा. लिया था बाल। तो वही वो सवाल पूछ रहा है. कि आप हमें एम्बैरेस कर रहे हो। भाई अगर. आपको ए्बरेसमेंट फील हो रहा है तो आप क्या. कर रहे हो उस एंबरेसमेंट को दूर करने. वो दिल्ली में नौकरी कर रहा है सर तो आप. कुछ नहीं तो जैसे आप सोशल मीडिया पे लिख. रहे हो ना 25 चीजें मेरे अगेंस्ट आप 25. चीजें गवर्नमेंट को बोलिए कि ये बंद कराइए. आप वो करना नहीं चाहते क्यों. अगर आपके स्टेट में कोई बुरी बात हो रही. है तो क्यों आप उसके सामने नहीं लड़ना.
चाहते और एक फिल्म को ही लड़ना चाहते हो. ठीक है विवाद मार्केटिंग का हिस्सा होता. है सर मजा आता है क्योंकि मेरे पास कई. डायरेक्टर्स ऐसे ऐसे हैं जिनकी पिक्चरें. आई बीते समय में मतलब साल 2 साल तीन साल. जब से पॉडकास्ट कर रहा हूं मैं तो कईयों. को कुछ इच्छा भी होती है थोड़ा हो जाए. मार्केट में बस बन जाता है। आप केरला. स्टोरी टू के लेकर जो विवाद है उससे आप. खुश हैं? देखिए विवाद कभी भी मुझे पर्सनली विवाद. कभी भी खुशी का कारण नहीं हो सकता।. क्योंकि कुछ लोग जब आपके अगेंस्ट होते हैं. तो आप उनको दुख भी पहुंचा रहे हैं।.
आप उनकी भावनाओं को ठेस भी पहुंचा रहे. हैं। तो हम तो कभी ऐसा नहीं चाहेंगे। हम. लेकिन मुझे हमेशा एक चीज़ यह फील होती है. कि जो लोग इतने नाराज हैं. क्या उनको इन विक्टिम्स के लिए कुछ फील. नहीं होता? होना चाहिए। ठीक है।. तो मैंने उनके ट्वीट में यह कहीं नहीं. पढ़ा कि विपुल शाह तो बकवास आदमी है। यह. है वो है। लेकिन अगर ऐसा किसी लड़की के. साथ हुआ है तो यह इमीडिएटली बंद होना. चाहिए। यह मैं सेकंड हिस्सा ट्वीट में.
कहीं देखता नहीं हूं।. तो मुझे यह बुरा लगता है कि आप क्यों उन. लड़कियों के साथ खड़े नहीं होना चाहते. जिनकीिंदगियां खत्म हो रही है, बर्बाद हो. रही है।. ठीक है। मैं आपकी बात से बिल्कुल सहमत हूं. और मैं खुलकर ये कह रहा हूं कि अगर एक भी. लड़की के साथ ये हो रहा है तो इसको. बिल्कुल बैन होना चाहिए। इस पर सरकार को. कठोर से कठोर कदम उठाने चाहिए। इस पर. कानून बनना चाहिए और ऐसी सजा देनी चाहिए. जिससे नस्लें याद रखें।. और क्योंकि आप किसी के चॉइस के अगेंस्ट. नहीं जा सकते।. बिल्कुल ये मैं मान लेता हूं। बट जब ये. फिल्म आप बना रहे थे क्या आपको कोई ऐसा.
मुस्लिम व्यक्ति मिला कोई पड़ोसी कोई. सामाजिक कार्यकर्ता जिसने इन्हीं लड़कियों. को हिंदू लड़कियों को बचाने में भी हेल्प. की रेस्क्यू करवाने में हेल्प की. अनफॉर्चूनेटली हमें अभी तक ऐसा कोई. कैरेक्टर मिला नहीं है और मिलेगा तो. ट्रस्ट मी हम. रिसर्च में कहीं नहीं आपको मिला कोई भी एक. मुस्लिम व्यक्ति. नहीं मिला हमें नहीं मिला हो सकते हैं मैं. यह नहीं कह रहा हूं कि कोई नहीं होगा और. जिस दिन हमें मिलेंगे ट्रस्ट मी मैं उनको. हीरो की तरह हेल भी करूंगा मैं उनके लिए. आवाज भी उठाऊंगा कि यह है सच्चा मुस्लिम।.
इसको फॉलो करिए। तो केरल में आपको एक भी. सच्चा मुस्लिम नहीं मिला। इतनी लड़कियों. का आपने पिछली. नहीं देखिए पिछली बार आपने 300 केस कहे. थे। अगर मैं आपकी बात मान लेता हूं। मैं. अपना कुछ कोट नहीं कर रहा हूं। अगर मैं. आपकी बात मान लूं कि 3000 लड़कियों के साथ. केरला में ये बड़े पैमाने पर लव जिहाद या. आईसी वाला प्रोपेगेंडा हुआ। तो क्या एक भी. केरल में सच्चा मुसलमान नहीं था जिसने. लड़कियों की हेल्प की? जो क्रिश्चियन. लड़कियां थी, हिंदू लड़कियां थी, दलित. लड़कियां थी। जब हमने हर लड़की का जो. इंटरव्यू किया. हम. उस हर इंटरव्यू में हमने यही सवाल पूछा था.
और उन लड़कियों का जवाब था कि नहीं हमें. तो कोई नहीं मिला. हम. तो फिर हमें लगा कि अगर किसी लड़की को. नहीं होते ही होंगे अच्छे मुस्लिम बहुत. सारे हैं. हम. पर इनकी जिंदगी में कोई नहीं आया तो हमें. इनकी जिंदगी को रिप्रेजेंट करना है तो हम. उस अच्छे मुसलमान को इस फिल्म में जगह. नहीं देंगे। हम बोल्डली जो उनके साथ हुआ. है वो पूरी सच्चाई से दिखाएंगे। आपकी. फिल्मों की तुलना विवेक अग्निहोत्री की. फिल्मों से भी की जाती है। उन्होंने. कश्मीर फाइल्स बनाई थी और समाज का एक बड़ा.
तबका है जो लेफ्ट आईडियोलॉजी का है। आपकी. विचारधारा लेफ्ट नहीं कहूंगा मैं जो राइट. विंग आईडियोलॉजी का नहीं है। उसके बाद. जितनी विचारधाराएं होंगी उसमें सम्मिलित. कर लीजिएगा। वो ये कहता है कि विवेक. अग्निहोत्री और विपुल शाह जो डायरेक्टर. हैं वो केरला स्टोरी कश्मीर फाइल बनाते. हैं और ऐतिहासिक दर्द को नोट छापने की. मशीन बना चुके हैं। इस पर क्या टेक है. आपका? तो फिर तो शेंडलर्स लिस्ट भी स्टीवन. स्पिलबर्ग ने इसीलिए बनाई होगी कि वह नोट. छापना चाहते थे। अभी एक अह न्यूमम.
न्यूमबर्ग या ऐसी कोई एक फिल्म आई है रसेल. क्रो की वो भी शायद इसीलिए बनी होगी।. होलोक कॉस्ट पे बनी हुई हर फिल्म शायद इसी. पर्पस से बनी होगी कि नोट को छापा जाए।. देखिए इतना अगर आप हल्के हल्का कर देंगे. एक इशू को तो वो इशू का स्यूशन आने ही. वाला नहीं क्योंकि आप उस इशू को ही. बिल्कुल खारिज करना चाहते हैं कि यार ये. तो सिर्फ पैसे बनाने के लिए है। है ना? तो. इसको इतना हल्का करना यह गलत है।.
स्टीवन स्मिलबर्ग की फिल्म को ऑस्कर भी. मिला और पूरी दुनिया में ऐसे हर काम की. सराहना वक्तव पे होती रही है। एक हमारे. देश में एक प्रॉब्लम है कि जब हम एक ऐसे. इशू को लेके एक बिल्कुल बोल्ड और सच्ची. फिल्म बनाते हैं तो लोगों को बहुत. अनसेटलिंग फील होता है। लोग बर्दाश्त नहीं. कर पाते। तो इसलिए इस तरीके के आक्षेप. होते हैं।. ठीक है? 23 फरवरी 2026 को केरला बीजेपी.
अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर वो कहते हैं कि. उन्हें इस फिल्म में कोई दिलचस्पी नहीं. है। अब बीजेपी वो पार्टी है जिसने केरला. स्टोरी वन को देश भर में कई राज्यों में. टैक्स फ्री किया था। बट अगर बीजेपी का. स्टेट प्रेसिडेंट जिसे आमतौर पर यह माना. जाता है कि वो इन सब्जेक्ट पर आपका समर्थक. होना चाहिए था। वो आपसे किनारा कर रहा है।. तो क्या यह फिल्म की क्रेडिबिलिटी पर. क्वेश्चन नहीं है? सर यह तो मैं मानता हूं. कि हमारी जो पहले दिन से लड़ाई है कि हम. कोई बीजेपी फंडेड फिल्म कंपनी नहीं है या.
हम बीजेपी के फंड पे पिक्चर नहीं बना रहे. हैं। उसका वैलिडेशन है। आप कैसे देखते हैं. इसको? मैं तो ऐसे देखता हूं कि जब बीजेपी. के नेता खड़े हो के बोलते हैं कि इस फिल्म. से हमारा कोई लेना देना नहीं है और हम यह. फिल्म देखना भी नहीं चाहते हैं तो वो इसी. बात को साबित करता है कि हमारा बीजेपी से. कोई इसके अंदर पार्टनरशिप या कोई लेना. देना नहीं है। हम इंडिपेंडेंट फिल्म. मेकर्स हैं।. तो हमारे क्लेम को ये इनका स्टेटमेंट. बिल्कुल अंडरलाइन करता है। और मैं उनसे भी.
रिक्वेस्ट करूंगा कि वो इस फिल्म को जरूर. देखें। उनको चाहे कितनी भी तकलीफ हो वो. फिल्म देखेंगे तो उनके दिमाग की बहुत सारी. गलतफहमियां शायद दूर हो जाएंगी।. हदिया केस जो था उसमें सुप्रीम कोर्ट ने. धर्म बदलने को मौलिक अधिकार माना था।. बहुत सारी लड़कियां अपनी मर्जी से खुशी से. कन्वर्ट होती होंगी, शादी करती होंगी और. एक रिश्ता जी रही होंगी। क्या. जिस चीज को अदालत ने मौलिक अधिकार माना?
इस फिल्म के बाद आप समाज को एक मौका दे. रहे हैं कि उन पर क्वेश्चन करें? क्या. सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि यह मौलिक. अधिकार है क्या आप किसी भी लड़की का धर्म. परिवर्तन करके उसकी जिंदगी बर्बाद कर सकते. हैं नहीं कहा वो मौलिक अधिकार तो सुप्रीम. कोर्ट हमारे संविधान के अंदर लिखा हुआ है. कि मैं कोई भी धर्म की प्रैक्टिस कर सकता. हूं तो हर लड़की को हर इंसान को छूट है वो. जिस रिलीजन को बिलीव करता है जहां उसे. शांति मिलती है उसे अच्छा फेथ आता है वो. करें बट नहीं. हमारा उससे कोई लेना देना नहीं.
ये सवाल इसलिए मैंने पूछा क्योंकि बहुत सी. लड़कियां जिन्होंने बाय बाय चॉइस नॉट बाय. फोर्स किसी मुस्लिम लड़के से या किसी गैर. रिलीजन वाले लड़के से शादी की होगी और. अपना रिलजन चेंज किया होगा। उनमें से कई. के पेरेंट्स सामने आ सकते हैं और कहेंगे. कि देखिए हमारी लड़की को बेवकूफ बनाया. गया। इस फिल्म में भी ऐसा जो ट्रेलर में. देख रहा हूं मैं राजस्थान वाले केस में।. कह रहे वो तो बच्ची है। उसे सही गलत समझ. नहीं है। क्योंकि मां-बाप तो यही मानते. हैं कि बेटी हमारी मासूम है। लड़के ने. बहला फसला लिया होगा। तो वो जो बाय चॉइस.
वाले हैं वो उसकी लकीर खत्म नहीं हो. जाएगी। नहीं क्यों खत्म होंगी? क्या आप यह. कहना चाहते हैं कि सिर्फ बाइनरी होती है. या इस तरफ या उस तरफ कोई बीच में एक स्पेस. नहीं होती।. होती है। हर हर समाज में होती है। तो हम. इसको एक बाइनरी में ना देखें कि या तो सब. अच्छे हैं या सब बुरे हैं। हम ऐसा कह भी. नहीं रहे हैं। हम यह कह रहे हैं कि आप. सिर्फ थोड़ा देखिए, परखिए और जो बुरे हैं. उनको समझिए, उनको एक्सपोज करिए। हम बस.
इतनी सी बात है। हम फिर वही जो एक सवाल. आपने कहा था चलिए मैं समझता हूं कि 91 पर. फिल्में बनी आप ही आप जिक्र कर रहे थे।. होलो कॉस्ट पर बनी ताकि इतिहास दोबारा खुद. को ना दोहराए। उन फिल्मों को दुनिया में. सराहा गया। भारत में जो रियल लाइफ फिल्में. बनी हैं जिसमें कश्मीर फाइल मैं अगेन. जिक्र कर दे रहा हूं। कश्मीर फाइल में भी. बहुत सारे इंसिडेंट मैं पढ़ रहा था जो सही. थे। मैंने उसके YouTube वीडियोस देखे हैं।. आपकी ये फिल्म आई केरला स्टोरी आई। केरला. स्टोरी टू मुझे नहीं पता कितनी सच है।. मैंने देखी नहीं है। आपको लगता है कि यह.
जो हिस्टोरिकल फिल्में इंडिया में बनती. हैं उनको इंडिया में इज्जत नहीं मिलती? नहीं नहीं इज्जत बहुत मिलती है। विरोध भी. होता है। पर आप आप ऐसा देखिए कि केरला. स्टोरी वन कितने लोगों ने देखी। हम्।. अगर वह आंकड़ा आप जोड़ेंगे और कितने लोगों. ने उसको पसंद किया और कितने लोगों ने यह. कहा कि यह सच्ची है। आज भी आप Twitter या. Instagram पे क्योंकि हम. हम एक एक डिस्कशन में बैठे हैं तो नेगेटिव.
बातें ज्यादा हमेशा आगे रहती हैं। पर अगर. आप Twitter या Instagram पे आज भी देखेंगे. तो जितने लोग विरोध कर रहे हैं. उससे बहुत ज्यादा लोग इस फिल्म का समर्थन. भी कर रहे हैं। अच्छा आपका कोई कांटेक्ट. है सेंसर बोर्ड में? नहीं मेरा कोई. कांटेक्ट नहीं है। नहीं क्योंकि बहुत सारे. डायरेक्टर्स एक्टर्स से जब बात कर रहे थे. हम तो ये कह रहे थे कि भाई हमारे सीनंस. काट देते हैं। विपुल जी ने टांग पकड़ के. मुंह पकड़ के मुंह खुलवा के बीफ मुंह में. ठुसवाने वाला सीन डाला और सेंसर बोर्ड ने. पास कर दिया।. तो उसमें कोई.
मतलब कई सीन ऐसे हैं जो बड़े आपत्तिजनक हो. सकते थे। जो बाकी डायरेक्टर्स की फिल्मों. पे कैंची चल जाती है।. विपुल जी का जो था वो कहा ग्रीन सिग्नल. है। जाइए आगे। [हंसी] नहीं नहीं ऐसा नहीं. है। देखिए हमारी फिल्म में सेंसर बोर्ड ने. 16 मॉडिफिकेशन किए तब जाके सर्टिफिकेट. दिया है। तो यह आक्षेप. भी खतरनाक खतरनाक सीन थे। खतरनाक थे या. सेंसर बोर्ड को लगा कि यह फिल्म में इसकी. जरूरत नहीं है।. इसके बिना भी आपकी फिल्म जो मैसेज कन्व. करना चाहती है वो हमारी एक्सपर्ट पैनल के. हिसाब से वो कन्व हो रहा है।.
और उन्होंने मॉडिफिकेशन करवाया। कहीं. डायलॉग कटवाए, कहीं कुछ सीन छोटे करवाए, कहीं बहुत कुछ कट किया और वो 16. मॉडिफिकेशन के बाद ये फिल्म को सेंसर. बोर्ड ने करीब-करीब एक से सवा महीने की. स्क्रूटिनी के बाद सर्टिफिकेट दिया है।. इतना स्क्रूटनी हुई है आपकी फिल्म? बिल्कुल क्योंकि लोग तो मानते हैं कि वहां. भी अपने ही हैं। अरे अगर अपने ही होते तब. तो फिर 16 मॉडिफिकेशन की भी क्या जरूरत. थी? या वो या वो कश्मीर फाइल वाला कि. सरकार भले अपनी है सिस्टम उनका है।. नहीं नहीं ऐसा नहीं है। देखिए सेंसर बोर्ड.
को मैं आपको एक बात बताता हूं के सेंसर. बोर्ड जो है उसकी एक धारणा है लोगों के. दिमाग में कि ये एक गवर्नमेंट का बाबूशाही. वाला डिपार्टमेंट है। पर आप यकीन मानिए जब. वो लोग एक एक्सपर्ट पैनल बिठाते हैं।. पर्टिकुलरली केरला स्टोरी जैसी फिल्म होती. है जब तो वो जो एक्सपर्ट होते हैं वो अपने. फील्ड के अपने डोमेन के बहुत सुलझे हुए. बहुत ही शानदार करियर वाले लोग होते हैं. और वो केरल से भी एक्सपर्ट को बुलाते हैं.
अगर उन्हें जरूरत लगे तो। सो ऐसा नहीं है. कि वो गए डाल दिया एप्लीकेशन और उन्होंने. दे दिया। बहुत थरस स्क्रूटिनी के. जुगाड़ तो देश में हर जगह चलता है ना सर।. जुगाड़ चलता ही होगा। मैं ना नहीं कह रहा. हूं। लेकिन सेंसर बोर्ड. जो सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष बनता है वो भी. तो जुगाड़ पे आता है ना। नहीं नहीं ये मैं. आप ऐसा कहके प्रसून जोशी जैसे एक बहुत ही. संपन्न और बहुत ही आर्टिस्टिक इंसान पे. कमाल मैं उनकी कला का बहुत बड़ा प्रशंसक. तो लेकिन लेकिन लेकिन मैं एक पत्रकार भी. हूं और मैं जानता हूं इस देश में कुछ भी.
इत्तेफाक करने लेकिन प्रसून जोशी को ऐसी. कोई पोस्ट लेने के लिए कोई जुगाड़ करना. पड़े ऐसी उनकी कोई ना जरूरत. मैंने उनके भी तारीफ वाले इंटरव्यूज देखे. हैं।. नहीं नहीं वो बहुत ही बहुत ही बेहतरीन. इंसान भी है। एक राइटर के तौर पर 10 आउट. ऑफ 10 वो है। उसमें कहीं कोई सवाल नहीं. है। मैं उस पर क्वेश्चन नहीं कर रहा हूं।. मैं उनका बहुत बड़ा प्रशंसक हूं। मुरीद. हूं। लेकिन जब मैं एक पत्रकार के चश्मे. देखता हूं तो मुझे इस चश्मे से काफी कुछ. दिखाई पड़ता है।. देखिए वो क्योंकि वो एक ऐसा धारा बन चुका. है कि इस देश में सब जुगाड़ से चलता है।.
तो हम व्हिच इज ट्रू। कई बार हम. व्हिच इज ट्रू होता होगा। लेकिन इस देश. में मेरिट है ही नहीं। इस देश इस देश में. राष्ट्रपति से लेकर हर देश हर प्रदेश के. राज्यपाल हर प्रदेश का आपका डीजीपी बनता. है। आपके हर जगह पर आप बिना इनफैक्ट. इंडियन क्रिकेट टीम अ कैप्टन तक हर चीज पर. कहीं एक किसी का लगाव होता है, झुकाव होता. है। कोई एक अपना इक्वेशन होता है, नफा. नुकसान होता है जिसको आप ऑर्गेनिक दिखाने. की कोशिश करते हैं। बट नहीं ये तो होता तो.
है।. देखिए ये फिर ऐसी बात. और जो ना माने वो बहुत मासूम है। ये मेरा. मानना है। नहीं यह ऐसी बात हो जाएगी कि. फिर तो मेरिट की कोई वैल्यू ही. है वैल्यू बस मेरिट वालों में मेरिट वालों. में फिर वो बिना टैलेंट के तो बात ही नहीं. हो रही. देखिए वो फिर व्यक्तिगत चॉइस भी हो जाती. है कि मुझे आपका काम किसी और से ज्यादा. अच्छा लगता है।. हां ये इसको आप जुगाड़ नहीं कह सकते।. या मुझे ये पता है कि आप थोड़ा मेरे लिए. सॉफ्ट रहेंगे।. पर ये जुगाड़ नहीं है। ये मेरिट की बात है. कि मेरी और मेरी चॉइस गलत हो सकती है।. हां।. लेकिन मेरी चॉइस की ईमानदारी पे शक नहीं.
करना चाहिए। मैं ईमानदारी से चॉइस कर. या ऐसा हो सकता है कि आपने मेरे लिए अच्छा. किया हो तो मैंने आपको रिवॉर्ड दे दिया. हो।. ये तो अब ये तो हमें सीबीआई इंक्वायरी. बिठा के चेक करना पड़ेगा। लेकिन मैं ऐसा. मानता हूं कि प्रसून जोशी बहुत ही बहुत ही. नहीं नहीं मैं उनके कॉन्टेक्स्ट में नहीं. आ रहा। प्रसून जी विथ ऑल ड्यू रिस्पेक्ट अ. ग्रेट।. तो और सेंसर बोर्ड की. और ये आज से नहीं है। ये पहले भी रहा है।. हमेशा रहा है और मुझे लगता है कि जब तक. इंसान रहेगा। चलिए, होगा आपका यह व्यू. पॉइंट है। मेरा व्यू पॉइंट ऐसा है कि हर.
पोजीशन या हर हर पोस्ट प्योर पहचान के या. जुगाड़ के बेसिस पे नहीं होती। और मुझे यह. लगता है कि जो मूल मुद्दा है कि सेंसर. बोर्ड के प्रोसेस इसको प्रसून जी ने बहुत. अच्छे से ईमानदारी से काम किया है। नहीं. तो मेरी फिल्म में 16 कट आते ही नहीं।. मेरी फिल्म ऐसे ही निकल जाती। फिर क्या. दिक्कत थी? एक सवाल सर फिर मैं रिपीट कर देता हूं कि. जो आया कि इस बार केरल में चुनाव चुनाव. है। केरला स्टोरी वन जब आई थी, तब शायद. कर्नाटक में चुनाव था। केरला स्टोरी टू जब.
आई है, तो केरल में चुनाव है। लोग कह रहे. हैं कि यह कोरा इत्तेफाक बार-बार दोहराया. जा रहा है। मैं तो कहता हूं वन नेशन वन. इलेक्शन ले आइए क्योंकि क्या है? इस साल. देश में पांच छह इलेक्शन होंगे।. अगले साल भी चार पांच होंगे। फिर लोग. बोलेंगे अरे अब तो 2029 आ रहा है। तो. इलेक्शन का साइकिल तो इस देश में कभी खत्म. ही नहीं होता।. कौन सा ऐसा 6 महीने का पीरियड होता है जब. हमारे देश में इलेक्शन नहीं होता। इलेक्शन. तो लगे ही रहते हैं और अगर मुझे इलेक्शन. के लिए ही पिक्चर.
हां आपका इंपैक्ट बंगाल में भी दिखाई. पड़ेगा अभी तो दो महीना बंगाल में भी. हां तो मैं यही कह रहा हूं अगर मुझे. इलेक्शन के लिए पिक्चर बनानी होती किसी. पार्टी के साथ मिलके तो मैं पहले तो बंगाल. की स्टोरी लेता वो तो बड़ा स्टेट है ना. केरल के मुकाबले बंगाल बहुत बड़ा स्टेट है. बिजनेस वाइज भी और नेशनलेंस वाइज भी किसी. पार्टी के लिए हो सकता है तो मैं वो पहले. करता ना मैं एक कहानी बंगाल की ले आता और. इस फिल्म का नाम बंगाल स्टोरी रख देता।. ठीक है? अनुराग कश्यप का एक दोस्त दो बड़े.
लोगों का नाम मैं ले रहा हूं। एक नसीर. साहब का नाम। नसीर साहब ने केरला स्टोरी. वन के बाद उनका एक बयान मैं कहीं पढ़ रहा. था कि ऐसी फिल्में नाजी दौर के. प्रोपेगेंडा की याद दिलाती हैं। और अनुराग. का कि जब सिनेमा का इस्तेमाल किसी समुदाय. के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए हो जाए तो वो. कला की हार होती है। ये बॉलीवुड से. रिएक्शन आना इस पर आप क्या काउंटर है? देखिए यह व्यक्तिगत रिएक्शन है और मैं. उनके दोनों के ओपिनियन की अपनी जगह इज्जत. करता हूं।. रहा सवाल मैंने अनुराग के ऊपर मैंने बता.
दिया आपको जो मेरे डायरेक्टर ने जो कही थी. बात और मेरा अपना जो टेक था वो मैंने बता. दिया। नसीर भाई हमारे बहुत सीनियर हैं और. [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमारी थिएटर. की परंपरा है कि जो हमारे सीनियर होते हैं. वो हमें थप्पड़ भी मार दें तो हम उनके. अगेंस्ट बोलते नहीं है। तो नसीर भाई के. अगेंस्ट बोलना या इस इनके इस स्टेटमेंट को. रिएक्ट करना मेरे लिए पॉसिबल ही नहीं है।. ठीक है। मैं इसको हटा देता हूं।. नहीं नहीं आप बिल्कुल. नहीं नहीं ठीक है। आपने कह दिया मैं आपकी. बात का सम्मान करते हुए मैं उस पे आगे.
बढ़ाता हूं। वो आप कुछ चीजें व्यक्तिगत भी. होती हैं। कुछ अपनी दोस्तियां भी होती हैं. और कई बार सम्मान. विरोध ज्यादा जरूरी होता है। वो होता है. ना कि मेरी खामोशी ने हजारों जवाबों की. लाज रखी।. तो वो जो एक लाज आपने रखी है मैं उसका. सम्मान करता हूं। बट एक सवाल मेरे ज़हन में. आता है कि एक 15 साल का बच्चा कोई भी. लड़का लड़की कोई भी हो जो ये सब देख रहा. होगा। आपको लगता है कि वो अब दोस्तों के. बीच भी शक की दीवार पैदा हो सकती है। वो. क्या सोचेगा जब ये फिल्में देख रहा है वो।. नहीं देखिए या उसका दोस्त अपने घर आएगा तो.
अपनी बहन को लेकर अनकंफर्टेबल हो जाएगा।. आपको लगता है ये शक तो कम से कम पैदा हो. गया एक जो. देखिए अगर ये फिल्म उतनी मास सक्सेसफुल. होती है।. मैं ऐसा मानता हूं कि आप जब किसी से. दोस्ती करते हैं तो आप उसमें कोई गुण. देखते हैं इसीलिए दोस्ती करते हैं।. हमारी फिल्म के आने के बाद क्रिमिनल्स को. ढूंढने के लिए थोड़ी पैनी नजर रखिए। यही. हमारा मैसेज है। हम ये नहीं कह रहे कि आने. वाले हर इंसान पे शक करो। वो हर इंसान. लेकिन एक फिल्म आपको कुछ दिखा रही है।.
उसके बाद आप अगर थोड़ी पैनी नजर रखें कि. कोई क्रिमिनल आपकी जिंदगी में ना घुस जाए. तो इसमें कोई बुराई की बात तो नहीं। हम तो. यह बात अपने बच्चों को वैसे भी फॉरगेट. अबाउट मुस्लिम। क्या हम अपने दोस्तों अपने. बच्चों को जनरली नहीं कहते कि भाई दोस्त. जो है वो थोड़ा समझ के करना। आजकल जो. दोस्त होते हैं वो बड़े तो सोच विचार के. दोस्त बनाना। ये तो एक जनरल एडवाइस होती. है। बट ये कहते हैं ना हमने भी बचपन में. कि शक का इलाज नहीं होता। नहीं होता। अब. अगर शक पैदा हो गया चाहे वो पतिप में हो.
या दोस्त में हो या मित्र में हो तो फिर. आदमी उसी हिसाब से दिमाग सोचने लगता है।. उसकी हर चीज में वही घूम टहल के दिमाग. जाता है। देखिए अगर कोई इंसान इतना. प्रभावित हो जाता है और अपना. [नाक से की जाने वाली आवाज़] विवेक खो. बैठता है कि फिल्म क्या कहने की कोशिश कर. रही है तो वो बड़ा दुखद प्रसंग होगा।. फिल्म सिर्फ यह कह रही है कि अपने विवेक. को जागरूत रखिए और अपने आसपास जो लोग आपकी. जिंदगी में आ रहे हैं उसमें थोड़ा सा आप. ध्यान दीजिए। दैट इज ऑल वी आर सेइंग। भारत.
में मां-बाप जो है अक्सर बेटी अगर मर्जी. खिलाफ शादी कर ले तो लड़के वालों पर केस. ठोक देते हैं। और ये बहुत कॉमन है। इसीलिए. शायद देश भर में लड़कियों को स्टेटमेंट. जारी करना पड़ता है कि नोन रोटी खाएंगे. लेकिन इन्हीं के साथ रह जाएंगे। यह जात. में भी होता है, यह धर्म में भी होता है।. क्या ऐसे में मां-बाप को अब और एक. एक्स्ट्रा मौका नहीं मिला कि समाज का. उन्हें और साथ मिलेगा। मैं कानून की भाषा. में नहीं कह रहा हूं। बट कम से कम सामाजिक. तौर पर मां-बाप को एक बड़ा हिस्सा मिलेगा. साथ का। जहां समाज मां-बाप साथ खड़ा हो कि.
नहीं नहीं गलत हो रहा है। खासतौर पर हिंदू. मुसलमान केस की बात कर रहा हूं मैं।. नहीं ऐसा होना नहीं चाहिए। क्योंकि अगेन. मैं कह रहा हूं कि अगर आप एक फिल्म देख के. तो फिर तो आप इसी लॉजिक को अगर एक्सटेंड. करें तो अ अगर बेंडिट क्वीन जैसी एक फिल्म. बनी जिसमें आपने दिखाया चंबल में डाकू हैं. तो क्या उस पूरे समाज जिस जहां से भी सारे. डाकू बनते थे क्या पूरे समाज के सामने. लोगों को विरोध हो गया. क्या लोगों ने उन शहरों में उन गांव में.
उन कस्बों में उस समाज के लोगों का. बहिष्कार कर दिया. हम. ऐसा तो कभी नहीं हुआ. तो एक फिल्म एक लिमिटेड पॉइंट लेके आती है. उससे समाज में अगर इतना परिवर्तन हो जाए।. इतनी ताकत अगर एक फिल्म में हो कि वह पूरे. समाज का पूरा कलर ही बदल दे तब तो इस देश. में बहुत कुछ बदल जाता आज तक। हालांकि ये. सवाल बड़ा वाहियात सवाल है अगला। लेकिन आप. ये क्योंकि मैं सोशल मीडिया पे लोगों से. सवाल लेता हूं जब मैं किसी मेहमान को. बुलाता हूं और ये ऐसा विषय है जहां पर.
कठोर सवाल मैं ज्यादा लेने की कोशिश कर. रहा हूं ताकि वो नजरिया आपको लेकर आपका. वर्जन जो है वो क्लेरिटी से जाए। बिलकुल. बिलकुल। तो एक सवाल मेरे पास किसी ने भेजा. कि केरला स्टोरी के मेकर्स ने केरला. स्टोरी वन से ₹300 करोड़ कमाया। अब वो जरा. यह बताएं कि जिनकी कहानी बेचकर पैसा कमाया. था उनका क्या भला हुआ? किसी पीड़िता की. मदद की उस ₹300 करोड़ से और जिन दो. लड़कियों पर मुख्यता ये फिल्म थी वो तो. अफगानिस्तान की जेल में आज भी सड़ रही. हैं। उनकी माएं लगातार रिक्वेस्ट कर रही. हैं उनको भी कोई कानूनी हेल्प नहीं दिलवाई.
गई। इनफैक्ट भारत सरकार ने कहा दे आर टू. रेडिक्लाइज। हमको चाहिए ही नहीं। तालिबान. हमारे यहां आगे घूम गया लेकिन वो लड़कियां. हम नहीं घुमा सकते वो नहीं आ सकती क्योंकि. आपकी फिल्म ने दिखा दिया कि भाई यह बहुत. ओवर रेडिकलाइज्ड लड़कियां हैं। वो सिंपैथी. खत्म हो गई। पहली बात तो हमारी केरल. स्टोरी में कोई भी लड़की को हमने ओवर. रेडिकलाइज नहीं दिखाया। हमने उनकी जर्नी. दिखाई और वो एंटरपमेंट फील होने के बाद. उनके साथ क्या-क्या होता है वो दिखाया।. हमने कहीं नहीं दिखाया कि वो लड़की अपने.
बॉडी पर बम बांध के उड़ने गई या कोई किसी. टेरर एक्ट में वो शामिल हुई। रादर वो तो. भागने की कोशिश कर रही थी जो शालिनी उन्नी. कृष्णन थी और यहां वाली जो लड़की थी वो तो. उस लड़के को जब शादी के लिए मना करती है. तो उसने उसके वीडियो और फोटो जो है वो डाल. दिया। उसने खुदकुशी कर ली। तो हमने तो. पहली वाली में यही था कि उनका विक्टिम. कैसे उनको विक्टिम बनाया गया। उसकी बात. शालिनी उन्नी कृष्णन की बात कर लेते हैं।. अफगानिस्तान की जेल में हुआ है।. उसके बाद जब तालीबान ने टेकओवर किया तब तक.
गवर्नमेंट की कोशिश चल रही थी उन्हें वापस. लाने की। तालीबान की गवर्नमेंट आने के बाद. उस लड़की का शायद किसी को भी नहीं पता कि. वो कहां है। उसकी. [नाक से की जाने वाली आवाज़] खोज चालू थी. और हमने भी उसके लिए पूरी कोशिश की। ऐसा. नहीं है। दूसरी बात मैं कभी ऐसा बोलना. नहीं चाहता था। लेकिन क्योंकि लोग यह पूछ. रहे हैं जिन [नाक से की जाने वाली आवाज़]. केरला की लड़कियों को हम बंबई में हमने एक. इवेंट किया था और 26 केरला की विक्टिम. लड़कियों को हमने लोगों के सामने ले आए. थे। हम. वहां पे एक संस्था है। वह एक आश्रम बनाना.
चाहती है।. ताकि ऐसी जो लड़कियां हैं जो इस रास्ते पे. जाके वापस आई हैं और अब उन्हें अपने घरों. में जाने से दिक्कत हो रही है क्योंकि. उनको जान की धमकी मिल रही है उनको उनके. परिवारों को और अब उन्होंने डेडिकेट की. हुई है अपनी लाइफ को के हम इस मैनेज को. देश भर में घूम के लोगों को समझाएंगे।. हम. ये एक्चुअल विक्टिम लड़कियां हैं।. हम. और ये एक संस्था है आशा विद्या समाजम। वो. एक आश्रम बनाना चाहते थे। उसमें एक बहुत.
सब्सटेंशियल अमाउंट का डोनेशन हमारी फिल्म. में से हमने किया। वह आश्रम अब ऑलमोस्ट बन. के रेडी है। [नाक से की जाने वाली आवाज़]. हम उन उनके साथ आज भी संपर्क में हैं। हम. उनके लिए आज भी जो बन पड़ता है वो करते. हैं। तो [नाक से की जाने वाली आवाज़] ये. एक फिल्म के लेवल पे पैसे कमा के निकल. जाने का कोई एंगल नहीं था। ये बातें मैं. कभी बोलना नहीं चाहता था। बट क्योंकि हम. पे ये आक्षेप लगाया है किसी ने? हम्म मतलब. आई एम श्योर ये सवाल आप तक भी आता होगा. क्योंकि ये सवाल हर उस डायरेक्टर पे आता.
है जो सामाजिक विषय फिल्म बनाता है। कि आप. समाज के एक इमोशनल टॉपिक को बना रहे हैं. तो आपने क्या पेबैक उसे किया उस समाज को? तो मैंने आपको इसीलिए उसका एक खुलासा दे. दिया।. हम्म। फिर एक सवाल पूछ रहा हूं सर कि आप. क्योंकि हम धीरे-धीरे एंड में जा रहे हैं।. बस पांच मिनट में आपसे लूंगा।. फिल्में समाज का आईना होती हैं। समाज पर. इंपैक्ट डालती हैं। समाज चर्चा करता है, बहस करता है।. अब जो लोग कह रहे हैं कि पिछली बार केरला. स्टोरी के मेकर्स ने दरार पैदा की थी इस.
पर दंगे करवा देंगे। कईयों ने कहा कि अगर. कुछ हो जाता है इस घटना के बाद। नैतिक. जिम्मेदारी जैसा भारीभरकम शब्द आपको एहसास. है।. ऐसा कुछ नहीं होगा। यह मेरा विश्वास है।. हम. जागृति [नाक से की जाने वाली आवाज़]. बढ़े यही हमारा सिंगल मोटिव है और. क्रिमिनल्स की पहचान हो. [नाक से की जाने वाली आवाज़] और जांगुर. बाबा तीन चार 5000 लड़कियों को कन्वर्ट. करें उससे पहले पकड़ा जाए यही हमारा आशय. है। अगर जांगुर पहले पकड़ा जाता तो यह.
3000 लड़कियों का धर्मांतरण नहीं होता।. उनकी आज शायद बेहतर होती। तो क्या हमारी. फिल्म देखने के बाद आप जांगुर को पहले ही. पकड़ लेंगे? हम. एक्सपोज कर देंगे. हम. नजर रखेंगे कि आपके एरिया में कोई जांगर. पैदा हो रहा है और उसको एक्सपोज बस इतना. ही हम चाहते हैं और हमारी कोई इससे ज्यादा. उम्मीद नहीं है। मैं एक लास्ट क्वेश्चन. पूछ लेता हूं। ये मेरा सवाल है। मैंने. आपकी नमस्ते लंदन देखी और मैं बार-बार. इसकी तारीफ कर रहा हूं कि उस वक्त देखिए.
एक फिल्म का मेरे ज़हन पर आज तक इंपैक्ट. है। कमाल की एक्टिंग, कमाल का म्यूजिक, कमाल की जिस कहानी कहने का तरीका, सेंसिटिव इश्यूज को बताने का तरीका भी. कमाल का था जो आपने बताया कि पाकिस्तानी. लड़के वाली कहानी।. एक तरीका वो था जो आपने नमस्ते लंदन में. समझा कर बताया कि देखो धर्म परिवर्तन मत. करो। वह जरूरी चीज है। भले वह तुमको पैसा. ऑफर कर रही है। एक तरीका जो केयरलेस. स्टोरी में आप दिखा रहे हो। क्या केरलेस. स्टोरी की कहानी को बताने का यही तरीका था.
या नमस्ते लंदन की तरह वो एक समझदारी से. समझाकर लॉजिक देकर अगर हम करते तो उसका. समाज में इंपैक्ट ज्यादा होता।. देखिए नमस्ते लंदन एक फिक्शनल स्टोरी थी. जिसमें मेरा अपना एक बिलीफ सिस्टम था और. [नाक से की जाने वाली आवाज़] उस बिलीफ. सिस्टम को मैंने एक कहानी में एक रोमांटिक. लव स्टोरी के जरिए कहा था। अब आप मुझे. बताइए कि अगर. केरला स्टोरी में अगर एक.
लड़की की जान ले ली जाती है बिकॉज़ वो आपकी. बात नहीं मान रही या आप उसे कंट्रोल नहीं. कर पा रहे हैं तो उसे कैसे दिखाया जाए उसे. दिखाने का मुझे कोई और तरीका समझ में नहीं. आता। मुझे यह समझ में आता है कि मैं इसको. बिल्कुल सच्चाई के साथ और पूरी. [नाक से की जाने वाली आवाज़] ईमानदारी के. साथ लोगों के सामने रखूं।. लोग अपना निर्णय इसके बाद खुद करें। जब. ब्रूटिटी का लेवल इतना ज्यादा होता है तो.
आप उस ब्रूटिटी को कैसे सॉफ्ट पैडल कर. पाएंगे? कोई तरीका ही नहीं है ना। तो. जितनी कड़वी सच्चाई है उतनी. [नाक से की जाने वाली आवाज़] ही कड़वी. फिल्म आपको दिखलानी पड़ेगी। नमस्ते लंदन. के वक्त मेरी जो इनर बिलीफ है जिसको मैं. विश्वास करता हूं जो कमांडो थ्री में है. कि इस देश का मुसलमान जो है वह भारत के. साथ ही खड़ा है।. यह मेरी इनर बिलीफ है। वह उन फिल्मों में. झलकती है। लेकिन यह भी एक सच्चाई है जिसे. मैं इग्नोर नहीं करना चाहता। मैं दोनों.
पक्ष देख सकता हूं। मैं वो पक्ष भी देख. सकता हूं जो मैंने नमस्ते लंदन या कमांडो. थ्री में रखा। मैं यह पक्ष भी देख पा रहा. हूं। और दोनों. [नाक से की जाने वाली आवाज़] को मैंने. पूरी ईमानदारी और पूरी सच्चाई के साथ रखने. की कोशिश की है। मैं यही चाहता हूं कि. पूरे देश के लोग दोनों पक्षों को देखें।. दैट इज ऑल। इतनी सिंपल बात है। लेकिन. क्योंकि बात हार्ड हिटिंग होती है तो लोग. बड़े सेंसिटिव हो जाते हैं।. सब्जेक्ट बहुत हार्ड हिटिंग है।. सब्जेक्ट हार्ड हिटिंग है। ट्रीटमेंट. हार्ड हिटिंग है और भारत में ऐसी फिल्में.
बनती बहुत कम है।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] 10 20 साल. में एक फिल्म बनती है।. और इस इस लेवल इस लेवल पर तो शायद नहीं कि. जिन्होंने इस बड़े लेवल फिल्में बनाई हो।. नमस्ते लंदन जैसी बनाई हो केरला स्टोरी आई. हो जिस पर आईबॉल्स इतनी ज्यादा हो।. नहीं आप. देखिए शेखर कपूर साहब ने बेंडिट क्वीन. बनाई तो इंटरनेशनल रेपुटेशन के डायरेक्टर. हैं [नाक से की जाने वाली आवाज़] और आप. देखिए वो फिल्म कितनी बोल्ड है। मैं आपको. वादा करता हूं आज आज आप वापस वो फिल्म.
देखिए। केरला स्टोरी आपको उसके सामने बहुत. फीकी लगेगी।. समाज भी तो बदला ना सर। अब मैं आज सोशल. मीडिया आ गया तब तब तो सोशल मीडिया. मैं मेरा कहने का मतलब यही है के आपको. फिल्म को तो सच्चाई से दिखाना पड़ेगा।. भारत में क्या होता है? हर 510 साल में. ऐसी कोई एक फिल्म बनती है। इसलिए लोगों को. शौक ज्यादा लगता है। पर मैं कह रहा हूं कि. मैंने दोनों तरफ की फिल्में बनाई हैं। आप. भी दोनों पक्ष देखिए। इतनी सिंपल बात है।. इसमें ज्यादा कोई कॉम्प्लिकेशन नहीं है।.
चलिए आपको आपकी फिल्म को बधाई, शुभकामनाएं। हमारी कोशिश थी कि जितने भी. तीखे सवाल हो सकते हैं जो जनता के ज़हन में. थे, आपके आलोचकों के ज़हन में थे। वो सवाल. जो आपके समर्थक भी सुनना चाह रहे थे. क्योंकि वो जानना चाह रहे थे कि जब इतना. कठिन विषय है तो नजरिया क्या है? और कई. बार नजरिया समझने के लिए सवालों की धार. बढ़ानी पड़ती है। तो अपनी तरफ से हमने. कोशिश की। आपने अच्छी बातें कि सवाल हमसे. पूछे नहीं थे और सारे सवालों के जवाब दिए।. सो इसके लिए हम शुक्रगुजार हैं। बाकी. शुभकामनाएं आपको सर। थैंक यू वेरी मच और.
मुझे आपका शो करने की इच्छा इसीलिए थी. क्योंकि मुझे पता था कि मुझे कड़े सवालों. का सामना करना पड़ेगा। आपसे यही उम्मीद थी. और मैं बहुत खुश हूं कि हमने यह बात की।. थैंक यू सर। एंड आई होप टू सी अगली फिल्म. में आपके लोगों के साथ।. थैंक यू सो मच।. अगली बार मोहब्बत की बातें कर लेंगे।. जी बिल्कुल करेंगे।. थैंक यू सो मच।. थैंक यू।. नहीं.
