Unplugged ft. Viineet Kumar Singh | Life Struggle | Chhaava | Vicky Kaushal | Pawan Singh | Keshari
23 साल हो गया इस इंडस्ट्री में काम करते. अब तक मैं अपना घर नहीं बना पाया हूं लोग. कहते हैं सोना तपक निखरता है कितना तपे. सोना हमेशा तपता ही रहे तो किस काम का. क्या बदल. [संगीत]. गया महाराज हमने कहा था हम नमक जा रहे हैं. आपके शत्रुओं की चोट पर लगने अब तो नहीं. बताना पड़ेगा नाम ना उनको लिटरली गाली दे. रहे अक्षय खन्ना को कि औरंगजेब है साबा की. चीख तान में गूंजे गी काम के प्रभाव की.
वजह से अगर यह दर्शक के भीतर आता है ये. कॉम्प्लीयंट. राजा मेरा अब भी सब सब पे भारी है गैंगस. वासे वन पसंद है या गैंगस वासप टू पसंद है. तेरी. मेहरबानिया मुझे फैसल खान मिल जाता तो. मतलब मजा आ जाएगा मजा आ जाएगा अपने आप. लेटे का तो मर जाएगा अपने आप लेट है मर. जाएगा तो बिजली कहां है अरे हम थोड़ी लगाए.
पीछे लाइट पछ लाइट थोड़ी लगाए गोली लग गया. हम ठीक है ठीक है आई कम इन क्या य न यू मे. न मे आई कम इन यू मे नॉट स्ट्रीट लाइट जला. के हम पढ़ाई करते थे आप ट्यूबलाइट के नीचे. बैठ के पढ़ते थे तो उसकी सजा हमको कहे दे. रहे हैं अरे तो कौन सा खेल के तुम देश को. बदल दि हो आपने कौन सा बैठ के भारत को. अमेरिका बना दिया है खेल के कौन सा देश को. किसने बदल दिया पढ के कौन सा बड़का आपने. भारत को अम बना आपको क्या लगता है अम्मा.
में है जब आप दोनों लोग शून्य है तो हम. कहां से आ रहे भट्ट पैदा हो जाएंगे आपने. खादिमा अम्मा में है आप दोनों लोग शून्य. है तो हम कहां से आ रहे भट्ट हो जाएंगे. क्या सफलता और असफलता का पारिवारिक. रिश्तों पर असर पड़ता है राज कपूर साहब ने. एक बड़ी अच्छी बात बोली उन्होंने बोला था. जो फिल्में नहीं चलती उनसे ज्यादा प्यार. होता है पिताजी ने भी ये बोला हारि यो ना. हिम्मत बिसारियो ना हरि नाम हमारी आपकी. पीढ़ी के जो पिताजी लोग हैं ये. एक्सप्रेसिव क्यों नहीं है अम्मा कह देती. है अम्मा के थ्रू पापा का वो इमोशन भी पता. चल जाता है पापा कभी ना बोल पाए कबो हकी.
है पापा हां ना मन करता है उनका लेकिन वो. कहीं है नहीं आई लव यू तो ऐसा शब्द हो गया. कि नारायण के दर्शन हो. गए पिताजी के मुंह से अगर सुनलो तो कौन. फेवरेट है आपका पवन सिंह. केसारी आप भी मन्नत उन्नत गए थे ये जो. मन्नत है ये घर नहीं है ये मन्नत हम जैसों. की हिम्मत है ये मन्नत भरोसा दिलाता है कि. शहर में हमारी भी एक छत हो सकती है. क्रिकेट का क्या मतलब होता है हिंदी में. लंब दंड गोल पिंड र पकड़ प्रतियोगिता.
महेंद्र सिंह धोनी का मैं जबरा फैन हां. जबरा मतलब जबरा बोल्ड लेटर में लिखि वैसा. वाला फैन विराट कोहली भी मुझे बहुत पसंद. है चिकू चिकुवा रे हो चिकू चिकुवा छोला. भटूरा मंगवे चिकुवा लेकिन के बहुत रीवे. चिकुवा किन के बहुत रीवे चिकुवा.
15 साल की उम्र में सचिन तेंडुलकर इंडिया. के लिए क्रिकेट खेलने लगे थे लेकिन हमारे. मेहमान जो हैं इनका स्ट्रगल दो दशक से ऊपर. चला पिताजी कहते रहे कि देखो बेटा हम गणित. पढ़ाते हैं पढ़ लो पढ़ लो पढ़ लो लेकिन य. कहते रहे कि भैया डेस्टिनी नाम की कोई चीज. होती. है लोगों ने कहा जब मौका दिया कि तुम नमक. हो यार थोड़ा-थोड़ा फिल्मों में सेटल हो. जाओगे लेकिन अपने अभिनव से इन्होने बताया. कि यह नमक नहीं है यह बॉलीवुड में एक्टिंग. के माथे का तिलक है नाम है विनीत सिं.
धन्यवाद मतलब यह ऐसा. परिचय ना कभी सोचा था ना कहीं सुना था. मतलब कैसे जोड़ा है आपने शुरुआत से लेके. अभी की रिसेंट फिल्म छावा. को क्या बात है हमने जब देखा तो हमको य. एहसास हुआ यह लाइन हमको कि नमक नहीं है आप. जो सबके साथ घुल मिल जाएंगे चंदन है आप जो. अपनी एक्टिंग से बॉलीवुड की शोभा बढ़ाएंगे. थैंक यू सो मच.
लेकिन उससे पहले कई और चीज हमारे जहन में. आई और हमारे मन में जो पहला सवाल था विनीत. को लेकर वो यही था क्या बदल गया छावा के. बाद बहुत. कुछ मैंने कभी भी अपने पूरे जीवन में ऐसा. अनुभव नहीं किया जो छावा के बाद रोज हो. रहा. है फिल्म करते समय यह पता था कि कुछ एक.
बहुत अलग चीजें हैं जो मैं कर रहा हूं और. हिस्टोरिकल फिल्म कभी नहीं की थी कोई शो. भी नहीं किया था. हिस्टोरिकल बिल्कुल मेरे लिए नया था स्पेस. एकदम नई. थी फिल्म रिलीज के. बाद ऐसा लग रहा है. कि यह जो हुआ है यह सपने के जैसा. है मैं. ना बिकॉज छावा के दो वीक के बाद ही अ सुपर.
बॉयज ऑफ मालेगांव रिलीज हुई है 28. फरवरी और आज 3 तारीख है 3. मार्च अभी भी उसके प्रमोशन से जुड़ी चीजें. हो रही हैं तो वक्त नहीं मिला उन चीजों को. सोच पाने का प्रोसेस कर पाने का लेकिन. चलते फिरते जब भी कहीं थोड़ा वक्त मिलता. है तो मैसेजेस वगैरह देख रहा हूं ज्यादा. टाइम तो नहीं मिला लेकिन एक चीज बड़ी कॉमन.
मैं नोटिस कर रहा हूं जो मुझे इमोशनली. बहुत छू के जा रही मुझे काफी समय तक ऐसा. लगा था कि मेरे काम को बहुत कम लोग देख. रहे हैं काफी समय तक छावा आने के बाद एक. बड़ी कॉमन सी चीज हुई है कि बहुत बड़ी. संख्या में लोग यह लिख रहे हैं कि मैंने. आपका वह काम देखा था 12 साल पहले आपका वो. काम देखा था 8 साल पहले. आपका दूसरा कोई काम देखा था जैसे गैंग स.
वासेपुर और वो एक सीन में ही मुझे यह लगा. था कि आप किसी दिन कुछ करोगे कमाल हमें इस. बात की बेचैनी थी मतलब जो जो लोग कब करोगे. कि इतना वक्त क्यों लग रहा. है और सब में यह कॉमन है कि मेरी जो यह. सक्सेस है वो लिख रहे हैं लोग कि विनीत. भाई आपकी ये जो सफलता है हमें ऐसा लग रहा. है कि हम सफल हो गए यही यहीं से मैं आपको.
टोकू और रुकूंगा एक वीडियो मेरे मोबाइल. चला रहा था मैं और एक वीडियो मेरे पास आता. है कि 23 साल हो गया इस इंडस्ट्री में काम. करते हुए अब तक मैं अपना घर नहीं बना पाया. हूं लोग कहते हैं सोना तपक निखरता है. कितना तपे हमेशा तपता है क्या कहा था एक. बारको बताइए एक्चुअली मैं मेरा पूरा वो. कहने का भाव यह था कि जब समय पे काम मिल. जाता है तो एज एन. एक्टर सिर्फ एक्टिंग की बात कर रहा हूं.
लागू सब पे होता है जब समय पे काम मिल. जाता है तो एज एन एक्टर आप बहुत सारा. एक्सपेरिमेंट कर पाते हो अपने जीवन में. काम फिर इसलिए आप नहीं करते हो कि अगले. महीने का बिल कैसे दिया. जाए फिर आप काम इसलिए करते हो क्योंकि आप. और निखर सको अब. जैसे मैं सपोज पाछ महीने कहीं जाके अपने. ऊपर कुछ काम करना चाहता हूं मैं फिल्म की. बात नहीं कर रहा हूं समझ र की बात मैं.
अपने. ऊपर विनीत के साथ मैं कुछ काम करना चाहता. हूं मे बी कोई लैंग्वेज मे बी कोई कोई ऐसी. चीज जो मैंने नोटिस की है एस एन एक्टर कि. यह यह वह स्पेस है जहां पर मुझे खुद के. ऊपर काम करना है और मैं कहीं जाकर किसी के. साथ खुद. को एस एन एक्टर डाइस सेक्ट करना चाहता. हूं मेडिकल वाला हूं तो यह टर्म यूज कर. रहा. हूं मैं मेंटल करके देखना चाहता हूं कि यह.
चीज वैसी क्यों नहीं होती या वह चीज मैं. ऐसे कैसे कर सकता हूं तो वह काम करने की. आजादी मैं कमाना चाहता हूं कि पैसा टेंशन. ना हो कि यह ना हो कि मैं निकला तो लेकिन. एक ही महीने में फिर पता. चला के मकान मालिक का नोटिस भी आ गया है. और जो दूसरी जिम्मेदारियां है वो मुंह बाए. खड़ी हैं तो उनके मुंह में जो आहुति चढ़ा. है वो आहुति के इंतजाम में मैं लगू तो.
उसके लिए मैं कोई ऐसा काम करूं जो शायद. दिल मान नहीं रहा है तो वो जो जब जद्दोजहद. बहुत लंबी हो जाती है तब एक पीड़ा जो है. छटपटाहट. वहीद इसलिए जैसे मैंने आलिया भट्ट का नाम. लिया मैं काम पसंद करता हूं आलिया भट्ट. रणवीर कपूर के काम को मैं पसंद करता हूं. इनफैक्ट रणवीर कपूर को जब भी काम मुझे. अच्छा लगता है यह शुरुआत रणबीर ने की उसके. लिए मैं धन्यवाद देना चाहता हूं बहुत कम. लोगों को पता है उ उन्होने जब अगली देखी.
थी तो मुझे एक कॉल आया और यह हुआ कि विनीत. मैं रणवीर बोल रहा हूं तो मुझे लगा कौन. क्योंकि यह तो कभी हुआ ही नहीं ना अपने. जीवन में अगली की बात बता 2013 की. बात देन फाइनली य हुआ कि नहीं ओ रणवीर. कपूर इज ऑन कॉल और खुद के ही नंबर से किया. था रणवीर ने देन फिर हमारी बात हुई और तब. से वह सिलसिला है कि जब भी मुझे रणबीर की. कोई चीज अच्छी लगती है मैं मैसेज करता हूं.
एंड ही इज फैंटास्टिक एक्टर फैंटास्टिक. एक्टर तो. जब आप किसी को पसंद करते हो किसी भी एक्टर. को तो जहन में भी होते हैं तो उसमें जो. मैंने कहा. कि सी आलिया भट्ट को जब टाइम प चीजें. मिलते तो आलिया भट्ट की फिल्मोग्राफी देखो. कितना एक्सपेरिमेंट किया. है एक कलाकार कितना निखर सकता है एंड शी. इज स्टिल डूइंग नॉन स्टॉप मेरे साथ क्या. हुआ.
कि मतलब 23 24 साल छावा के बाद तो मुझे. नहीं लगता लेकिन उसके पहले. तक तपने में ही निकल गया था तो मुझे तब वो. निकला था कि सोना तप के निखरता है ये बात. सही है हमेशा तपता ही रहे तो किस काम का. सही बात है कौन उसका क्या बनाएगा और क्या. पहने का तब ते सोने का तो पीड़ा वो थी मैं. चाहता हूं अच्छे डायरेक्टर्स के साथ काम. करना अच्छे प्रोड्यूसर्स के साथ काम करना.
अच्छी कहानियों का हिस्सा बनना चाहता हूं. खुद को चैलेंज करना चाहता हूं एस एन एक्टर. लेकिन वो फ्रीडम तो जिन डायरेक्टर्स ने. मुझ पर भरोसा किया हमेशा उनके लिए दिल से. ना ऐसा धन्यवाद निकलता है अच्छा लोग कहते. हैं कि जब दिल से कहो तो बात दिल तक छू. जाती है मुझे लगता है वह एक ऐसा मूमेंट था. जिसने इस देश के बड़ी आबादी में व बात. पहुंचा दी मैं. भी घर करके वो पीड़ा जो आपकी थी जो अंदर.
से फ्रस्ट्रेशन निकल रहा था कि हम. टैलेंटेड हैं हम जानते हैं लेकिन तुमको. क्यों नहीं दिख रहा कि हम टैलेंटेड और दिख. रहा है तो काम काहे नहीं दे रहे हो अब मैं. एक बात बताहा हूं प्रार्थना में कितनी. शक्ति होती है लोगों ने ना. ऐसा मैसेजेस मुझे भर भर के भेजे हैं कि. विनीत भाई उनको लगा मैं टूट गया हूं ऐसा. कुछ नहीं है मैं टूटने वाला आदमी नहीं हूं. मेरे बहुत सारे एग्जांपल ऐसे हैं बात अगर. उस दिशा में गई तो शेयर करूंगा के मैं यह. मानता हूं कि अगर रोने का दिल कर रहा है.
रो लो मैं यह मानता हूं कि अगर पीड़ा है. तो उस पीड़ा को जल्दी से जल्दी. निकालो ताकि जब आप हल्के रहोगे लाइट रहोगे. इंटरनली अगर आपके अंदर वो ऊर्जा जो है. संचारित होती रहेगी तो आप कुछ कर पाओगे वो. पीड़ा को दबाए बैठे हो और बट आदमी कह नहीं. पाता ना उसको लगता है कि कह देंगे तो लोग. जज करेंगे नहीं मुझे लगता है ईमानदारी से. अगर अगर आप बात कहते हैं तो वो बात कहीं.
ना कहीं लोगों तक प मैंने नहीं सुना इस. तरह की बातें इसीलिए शायद मुझे वो वो. वीडियो परेशान कर रहा था मुझे भी परेशान. किया मैं कह रहा हूं कि मैंने उस वीडियो. को लेकर चर्चा की अपने लोगों में अपने. बैठा में और वो ईमानदारी मुझे लगा कि यार. कई बार ऐसा होता है कि जब आप बड़े बन जाते. हो तो आपको लगता है कि मर्यादा कैरी करनी. है आप नहीं कहते हो बातें या आप कहते हो. तो उसको अलग तरीके से पेश करते हो उस बात. में ईमानदारी थी हां और शायद वही लोगों तक. पहुंची और मैं बता रहा हूं जो कहना चाह. रहा हूं ना के प्रार्थना में जो शक्ति.
होती है सच्चाई में जो शक्ति होती है उस. शक्ति का अंदाजा लगाना मुश्किल है और मैं. सच बता रहा हूं हुआ क्या था मैं एक फिल्म. कर रहा था और वह मुझे लगता है 9 या 10. जनवरी 2025 की बात है मेरे पास खबर आई. किसी ने लाकर बोला विनीत भाई अक्रॉस. मुंबई 15 स्क्रीन नहीं. है मैं एकदम से हिल गया क्योंकि मुझे कुछ. बताया गया था नहीं अच्छी लीज यह होगा वो.
होगा बट ठीक है हर आदमी की अपनी प्रॉब्लम. होती है प्रोड्यूसर की अपने ब 15 स्क्रीन. में डर. गया मैं बोला यार इतनी मेहनत. की य तो कुछ होगा ही नहीं 15 स्क्रीन में. फिर मैंने तुरंत टाइम देखने शुरू की तो शो. एक दिख रहा है 10 बजे का कोई दिन में कोई. दिख रहा है 11 11:30 बजे का बो यह तो वीक. डेज पर सब खत्म हो जाएगा कोई जा ही नहीं. पाएगा लोग ऑफिस जाएंगे फिल्म देखने आए और. वीकेंड में भी वो 151 स्क्रीन में मैंने.
खूब अच्छे से मतलब मैंने देखा था मुझे. जहां तक याद है मुझे लगता है वो 6 बजे के. बाद का व 16 में 600 नहीं. थे छ शो नहीं थे मैं ना अंदर से हिल गया. था सब इंटरव्यू नॉर्मल गया जस्ट वो जो. पीड़ा थी कहीं दूसरी तरीके से कि मुझे यह. लगा कि अभी भी ये ना चलेगा सिलसिला कब तक. जाएगा क् मुक्काबाज के बाद भी एक उम्मीद. बंधी थी थी चीजें उस तरीके से नहीं हो पाई.
मिला मुक्काबाज के बाद काफी. मिला लेकिन मुक्काबाज के बाद 2024 तक की. अगर बात करूं ठीक है 25 मतलब जिस समय वह. हुआ था 16 स्क्रीन की. कहानी किस पिक्चर की बात है एक फिल्म थी. मैच फिक्सिंग. तो मुक्काबाज के बाद मुक्काबाज की. कैपेसिटी में एज एन. एक्टर कोई दूसरी फिल्म मेरी उस तरीके की.
ऐसे किसी प्रोडक्शन हाउस की ऐसे बड़े. डायरेक्टर के साथ एस अ लीड नहीं हो पाई. कोई थिकल रिलीज नहीं मिल. पाई सब मेहनत करते हैं नो डाउट यह काम ही. मेहनत का है फिल्म बनाना बहुत मेहनत का. काम है जो लोग यह कहते हैं अरे हटाओ तो. फिल्म वाले हैं मुझे इस बात को सुनक पीड़ा. होती मैं उनको आमंत्रित करना चाहता हूं आप. मेरे सेट पर आइए दो तीन दिन हमारे साथ बस. रहिए आपको विशेष स्थान देकर बिठाए अच्छी. जगह बिठाए बस आप देखिए तो समझ में आएगा कि.
कैसे जान झोक के हम लोग काम करते हैं. राजस्थान में भी काम करते हैं उस गर्मी. में जिस गर्मी में वहां के भी लोग अपने घर. में चले जाते हैं थोड़ा सूरज कम हो जाए हम. उसमें रेगिस्तान में काम कर र होते है. क्योंकि सनलाइट में ही हमें काम करना है. ऐसी कड़कड़ाती ठंड में हम लोग काम करते. हैं जिस ठंड में लोग अपने घरों में रजाई. में जाकर बैठते हैं और चाय की चुस की लेते. हैं हम उस ठंड में खुले आसमान के नीचे सब. लोग एक साथ मिलके बहुत मेहनत का काम है. सब मेहनत करते उसमें कोई शक नहीं है.
मुक्का बास के लिए क्या हुआ था कि बहुत. ज्यादा मैं दिन की चार ट्रेनिंग करता था. मैं आऊंगा मुक्का बाज मैंने रखा सेगमेंट. रखा ना वो चीजें वैसी नहीं हुई अब वो मैं. हमेशा य बोलता हूं कि सी यह मैं हमेशा. बोलता हूं दर्शकों को बोलता. हूं आज भी मुक्काबाज के लिए मैसेज आते हैं. कि सर हमने कल रात को फिल्म देखी अरे हम. आपको ले जाएंगे उधर हमारे हमको लोगों ने. अलग चीज क हमने जब छावा में देखा का और.
आया कि हम तो नमक. हैं दुश्मनों पर लड़ेंगे उसके बाद फिर आया. कि नहीं नहीं तुम नमक नहीं तुम तिलक हो और. वो सीन आया और फिर तालिया हां पढ़ ही देता. हूं मन के जीते जीत है मन के हारे हार हार. गए जो बिन लड़े उन पर है धिक्कार उन पर है. धिक्कार जो देखे ना सपना सपनों का अधिकार. असल अधिकार है अपना अपनों की खातिर करना.
है कुछ आज हमें अजर अमर कर देना है स्वराज. हमें तू माटी का लाल है कोई कंकड़ या धूल. नहीं तू समय बदल के रख देगा इतिहास लिखेगा. भूल नहीं तू भोर का पहला तारा है परिवर्तन. का एक नारा है यह अंधकार कुछ पल का है फिर. सब कुछ तुम्हारा है महाराज हमने कहा था हम. नमक जा रहे हैं आपके शत्रुओं की चोट पर.
लगने तुम नमक नहीं चंदन हो कोई तुम तिलक. हमारे माथे का तो यह सीन आपको गुस बम देता. है और फिर आपने जो कहा ना कि एक पर्सनल. सेटिस्फेक्शन हर व्यक्ति को हो रहा था कि. हमें इसके लिए बुरा लगर था अब अच्छा लग. रहा है कर लिया और उसके दो सवाल लोगों ने. हमको भेजा तो मैं वो जो चीज आई एम सॉरी. मैं बीच में टोक रहा हूं तो प्रार्थना में. ऐसी शक्ति है वो जब वीडियो गया था तो पता.
नहीं क्या हो गया था उस वीडियो को पंख लग. गए थे या अलादीन के कालीन पर था वो वीडियो. क्या हो रहा था मुझे समझ नहीं आ रहा था हर. कोई भेज रहा है बहुत लोगों को ये लगता था. यार विनीत ऐसा तो नहीं कि ब्रेक हो गया या. विनीत गिव अप कर देगा या छोड़ देगा ऐसा. नहीं था मैं हमेशा बोलता हूं दिल में है. कुछ तो मर्यादा के साथ उस बात को. कहिए लोगों को सच जो है छू के जाता है. और 10 तारीख की यह बात है 9 या 10 जनवरी.
की 14 फरवरी को फिल्म आती है. छावा मैं वह अनुभव कर रहा हूं एक महीने. चार या पाच दिन के बाद मैं वह अनुभव कर. रहा हूं जो मैंने अपने जीवन में आज तक. नहीं किया था हमको लोगों ने दो सवाल भेजा. इसी को लेके क्योंकि आप भस्ता भूल गए हो. कहके लेकिन लोग नहीं भूले लोग दो चीज कहे. एक कहे घर खरीदे कि नहीं खरीदे अब अभी. नहीं खरीदूंगा लेकिन अब वो घर मेरा जो है. वो भी मेरी सब सफलता की तरह सिर्फ मेरा.
नहीं है लोगों के लिए पर्सनल है तो घर जिस. दिन भी लूंगा अब उस दिशा में बढ़ गए ना घर. लेने की हां उस दिशा में बढ़ चुका. हूं लेकिन घर खरीदने के लिए कोई फिल्म. साइन नहीं करूंगा मैं हमेशा एज पर डांस. किया हूं इसलिए कि कोई ऐसी फिल्म ना कर. बैठूं कि मैं नहीं चाहता कि मेरे करियर. में छह सात ऐसी फिल्म आ जाए बी ग्रेट जैसी. जिस फिल्म को जिक्र करने में मुझे भी. शर्मिंदगी. हो क्योंकि मैं यह मानता हूं कि अगर. मुट्ठी बंद है तो वो लाख की है हम खुल गई.
और कुछ नहीं निकला तो खाक की हैम तो. मुट्ठी बंद रखो और लोगों को यह भरोसा दो. एज एन एक्टर कि ठीक है मैं जिस कैपेसिटी. में आज काम कर रहा हूं जहां भी काम कर रहा. हूं लोग जब भी इस मुट्ठी से मेरा मतलब इस. कलाकार को देखें तो यह बोले यार ये लड़के. में दम है जबरदस्त दूसरा सवाल लोग कहे अब. तो नहीं बताना पड़ेगा नाम ना अब तो लोग. जान गए हैं ना यस यस लोग खुद आके मुझसे. पूछ रहे हैं सर आपका नाम नहीं पूछेंगे. क्योंकि हमें पता.
है सी लोग कितना भावनात्मक तौर पर जुड़. जाते हैं एक एक एक महीना चार पांच दिन में. यह जादू हुआ थैंक्स टू लक्ष्मण उत्तेकर सर. उन्होंने ये मौका दिया और उन्होंने मेरा. ऑडिशन नहीं लिया छावा के. लिए जो फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर हैं. वैभव विशांत उन्होंने मेरा ऑडिशन नहीं. लिया लक्ष्मण सर ने बोला कि विनीत जी आपके. अंदर मुझे मतलब जब मैं कवि कलश जी को सोच. रहा था मुझे आप ही दिखते थे यह वही इसीलिए. हो पाया कि मैंने अपनी मुठी बंद रखी थी.
मैं वो एज पर डांस कर रहा था मैं चाहता तो. घर खरीद लेता चार फिल्में करके दो ही. फिल्में हो जाता लेकिन मैं अगर उन फिल्मों. को करता तो शायद लक्ष्मण तेक सर चाहते भी. लेकिन मेरी फिल्मोग्राफी में मैंने ऐसा. कुछ कर रखा है फिर मुझे शायद यह मौका नहीं. मिल पाता क्योंकि मैंने ऐसे कुछ काम कर. दिए हैं ऐसी फिल्मों का जाकर हिस्सा बन. गया हूं कि मुझे खुद ही अब मुड़ के ऐसा लग. रहा है क्या ही फिल्में मैंने की. तो वो जब आप मजबूती से पकड़ के रख मैंने.
ना अपनी ईएमआई बहुत कम. रखी. मुझे यह बात समझ में आ गई थी मुझे किसी ने. कहा भी था कि विनीत जब मुक्काबाज हुई कि. ऐसा मत करना कि जाकर तुरंत घर खरीद लेना. गाड़ियां खरीद लेना क्योंकि वह फट से हो. जाता है बहुत सारी फिल्में आती हैं आप. धड़क से खरीद सकते हो फिर पता चलेगा आपकी. ईएमआई बड़ी हो गई अब ईएमआई बड़ी हो गई तो. फिर आप कैसे भी करके व ईएमआई को मीट करने. की कोशिश करते हो ई को मीट करने की कोशिश.
करते हो तो मैं मेरा काम क्या है मैं एक. ही तो काम करता हूं और कोई दूसरी चीज नहीं. मेरे पास मैं अभिनय करता हूं तो जो आना है. दाल रोटी का पैसा जो भी मेरी. जिम्मेदारियों का निर्वाह मुझे करना है वो. मेरे काम से ही होना है हम अब अगर मैंने. ईएमआई खोल दी तो यह काम मुझे ऐसी ऐसी. चीजों से. जुड़वाएं वो ईएमआई आगे खड़ी हो जाने वाली. है मैंने खोला ही नहीं मैंने घर नहीं लिया. मैंने बहुत बड़ी गाड़ी नहीं.
ली बहुत हंबल तरीके से और उसी तरीके से. चला यहां से यात्रा क्या एक सुपरस्टार. बनने की यात्रा या बेहतरीन अदाकार बनने की. यात्रा बेहतरीन अदाकार बनने की यात्रा एक. यह सारी जद्दोजहद मेरी इसलिए थी कि मैं वो. आजादी कमा सकूं कि अगर मैं खुद के साथ कोई. काम करना चाहता हूं तो मुझे इस बात का. दबाव ना झेलना पड़े. कि अगले महीने कुछ फाइनेंशियल. जिम्मेदारियां है उसको मुझे पूरा करना है. मैं खुद के साथ एज एन एक्टर बहुत सारे. प्रयोग कर चाहता हूं जैसे मैं बता रहा हूं.
कि मैंने जब मुक्काबाज की थी तो मुक्काबाज. के पहले कोई भी ऐसी फिल्म मेरे करियर में. नहीं. है जो कहीं से भी मुक्काबाज की कोई झलक. देती हो मैंने कभी बॉक्सिंग का ग्लव्स हाथ. में नहीं डाला था लेकिन अच्छा लगता है कि. जब मुक्काबाज देखने के बाद लोग यह कहते. हैं कि विनीत अब उस रोल में हमें कोई और. दिखता. नहीं यह है मेरी कमाई मैंने क्योंकि उसका. एक सेगमेंट रखा इसलिए मैं बार-बार कंट्रोल. कर रहा हूं कि मैं मुक्का बाद को थाम लू. अपने आप. अब जैसे ये कवि कलश जी का किरदार है तो.
लोग कहते हैं कि अब मतलब कवि कलश जी का. किरदार जिस तरीके से पर्दे पर लक्ष्मण तेक. सर ने उकेरा है टीम ने मिलकर बनाया है तो. वो नाम आते ही यह चेहरा आ जाता है जनता का. तो कॉल आया डायरेक्टर प्रोड्यूसर कॉल आ. रहा है हां आ रहा है बढ़ रहा है हां आ रहा. है बहुत सारे ऐसे भी कॉल्स हैं मैं पिछले. कई साल से चेज कर रहा था तो दो चार जो. भावुक लोग है आपके लिए भावुक हो गए तो. उनको बताओ ना क्या क्या हो सकता है अब आगे. अच्छा आगे बहुत सारे प्रयोग होंगे वो मुझे.
दिख रहा है और इस सा इस साल मतलब अब तक के. करियर में यह जो साल है मुझे लगता है ऊपर. वाले. ने खास कलम से जो है स्क्रीन प्ले लिखा है. अदर वाइज मेरी कोई से नहीं है कि. अ 14 फरवरी को छावा आए और 28 फरवरी को. सुपर बॉयज ऑफ मालेगांव और आने वाले ही. महीने में मतलब मार्च अप्रैल में कबीर खान. सर का एक शो जो उन्होंने प्रोड्यूस किया.
है अन प्राइम के लिए एस अ लीड वो आए मलब. एक दो महीने जब भी आए इसी साल है और 10. अप्रैल को जाट आए हमारा बर्थडे उस दिन. हैप्पी बर्थडे अभी. से तो ये जो है दोनों प्रमोशन हो गया ये. मैं तो 10 अप्रैल को शुभंकर भाई का बर्थडे. है 10 अप्रैल मतलब एक नंबर है ना मेरा लकी. नंबर है तो. अभी से हम सब लोग 10 अप्रैल का इंतजार.
करते हैं मैं तो मुझे मौका मिला है हैप्पी. बर्थडे मैंने अमित सियाल का इंटरव्यू किया. था और अमित सियाल ने मुझसे कहा कि देख उ. जिक्र करने लगे पंकज त्रिपाठी जी का मनोज. जी का और कई सारे एक्टर्स का बोले यार. देखो शुभंकर ये नवाज भाई का ये लोग 202 25. 2 साल स्ट्रगल किए फिर बहुत बड़े-बड़े. स्टार बन गए मैंने अभी 19 साल किया है तो. मैं कॉन्फिडेंट हूं कि मेरा. फटेगा अभी मैं वेट कर रहा हूं सा बेस्ट. अमित अमित इज वेरी गुड एक्टर और ही सेड आम. गुड एक्टर तो ही सेड ही वा वेरी.
कॉन्फिडेंट कि देखो मेरा भी 19 साल हुआ है. तो मैं टेंशन नहीं ले रहा हूं मैं ये मान. रहा हूं कि 20 पार होगा तो मेरा फट जाएगा. वो जो फटने वाला था ही सेड आई एम डूइंग. वेरी गुड अच्छा काम कर रहा हूं मैं लेकिन. फटा नहीं हूं मैं फटने का वेट कर रहा हूं. अमित अमित के साथ मैंने एक फिल्म की थी. इसक हम लोग अच्छे दोस्त बने तो आज भी अमित. मुझे बिहटा के नाम से बुलाता है कमाल के. ूमर किरदार था. वो मजेदार मजेदार बंदा अच्छा छावा में. अक्षय खन्ना सर को भी मैंने देखा ही अगेन. वन मोर एग्जांपल पेशेंस यस इस फिल्म को.
लेकर चार तरह की चर्चाएं चल रही हैं एक अ. वो हीरोज अनसंग हीरोज जिनकी बातें हमने. नहीं की उतनी इतिहास में कम पढ़ा औरंगजेब. वाला पाडव कंट उसमें चर्चा करेंगे हम. सेकंड विकी कौशल अगेन राइज आप कहां से. शुरू होती है यात्रा और कहां आकर किस तरह. किरदार एक आपकी और एक अक्षय खन्ना जी की. लोग उनको लिटरली गाली दे रहे हैं अक्षय. खन्ना को कि औरंगजेब है. काम के लिए अगर गालियां काम के लिए अगर.
काम के प्रभाव की वजह से अगर ये दर्शक के. भीतर आता है ये कंप्लीमेंट है बट हाउ यू. से हिम एज एन एक्टर क्योंकि आई एम श्यर वो. आप लोग के लिए भी इंस्पिरेशन होगा कि वो. अक्षय खन्ना के बारे में बड़ा ट्रेंड चल. रहा है कि वो आते हैं छाते हैं गायब हो. जाते हैं फिर आते हैं फिर छाते हैं फिर. गायब हो जाते हैं तो इस बार तो फिल्म का. नाम ही छावा था. छावा बट कमाल की मतलब आई एम शर आप तीनों. में सबसे जदा किस किसको लग रहा है इस. फिल्म को लेकर कि यार फीडबैक जो आप लोग को. भी आ रहे होंगे कैसे-कैसे फीडबैक्स आप लोग. के पास आ रहे हैं सभी के लिए सभी के लिए.
लोग बहुत पसंद कर रहे हैं लोगों को फिल्म. बहुत पसंद आ रही है और हमेशा एक मलाल था. कि कोई ऐसी फिल्म करियर में नहीं हो रही. जिसका बड़ा बॉक्स ऑफिस आ जाए क्योंकि. बॉक्स ऑफिस का मतलब यह होता है हां हां. 500 हां के लोगों तक आपकी फिल्म पहुंची है. और बॉक्स ऑफिस का मतलब यह होता है कि. लोगों ने फिल्म को जाके थिएटर में देखा है. तो उसका जो इंपैक्ट है वह तुरंत का तुरंत. पता चलता है आपको तो वो कहीं ना कहीं मैं.
महसूस कर रहा हूं ट्रेवल कर रहा हूं मुझे. पता चल रहा है हां मतलब ठीक है लोगों ने. फिल्में देखी अभी तो ऐसा लग रहा है कि. मेरी सारी फिल्में जो मैंने की उनमें से. कुछ एक फिल्में तो ये लोग लग रहा है पिछले. पांच सात दिन में देख गए फिर से और छावा. देखी इस वजह से जाके देख रहे हैं और आके. जब बात कर रहे हैं तो पुरानी फिल्मों के. भी डायलॉग सुना रहे हैं कवि और चंदन और. नमक को के साथ तो बहुत ट्रेंड हुआ ये. क्लाइमेक्स वाला सीन तो इतना ज्यादा वायरल. हुआ है कि उसकी इंतिहा है वो भी वो भी बत. बत चल रहा है हाथी घोड़े तोप तलवारें वो.
भी बहुत चल रहा है हाथी घोड़े तोप तलवार. फौज तेरी भारी है हाथी घोड़े तोप तलवारें. फौज तो तेरी सारी है पर जंजीर में जकड़ा. राजा मेरा अब भी सब पर भारी सब भारी है. जियो शेर तो खूब खूब लोगों ने मतलब. कविताएं खुद रील्स बनके मतलब ये कैसा है. जब हम लोग फिल्म कर रहे थे तभी नो डाउट. मतलब मेरा फेवरेट सीन विक्की का फेवरेट.
सीन हम दोनों को ब बेसब्री से इंतजार था. कि यह सीन किस दिन शूट होने वाला है. लक्ष्मण सर के साथ कई बार रीडिंग मेरी और. विक्की की हुई ब हमारे कई सारे सीन. तो मन में एक यह रहता था कि छत्रपति. संभाजी महाराज ने 127 लड़ाइयां. लड़ी तो जब ये फिल्म बनेगी तो जो. सीक्वेंसेस है बहुत सारे वर के सीक्वेंसेस. हैं एक ऐसी फिल्म में क्लाइमैक्स के पास.
कविताएं होंगी पब्लिक कैसे रिस्पांडर वाली. लेकिन जिस समय यह हुआ था तो जो रेफरेंसेस. हैं कि कविताओं में ही बात हुई. थी सिनेमेट लिबर्टी लेके यह कह के यह किया. जा सकता था कि अ अगर हम कवि सम्मेलन में. लोगों को बुलाते हैं तो संख्या वो नहीं. होती जितना एक रॉक बैंड की के कंसर्ट में. हो जाती तो थिएटर में एक ऐसी फिल्म में.
जिसमें लड़ाइयां हो रही हैं वॉर चल रही है. बार-बार हो रही है उसके क्लाइमेक्स के. पास पोएट्री में बात होगी तो ऑडियंस क्या. रेस्पों करने वाली है तो एक काम करते हैं. नहीं करते उसको हम कह देंगे कि भाई कविता. की बजाय हमने डायलॉग कर लिया लेकिन यह. लक्ष्मण सर का वो है कि नहीं मेरे को पोयम. में ही करना है और इरशाद कामिल सर ने कमाल. की पोएट्री. लिखी तो एक डर यह. था तो उस चीज को ठीक से ही करना था और वो.
ऐसी जगह पे है जहां सीन जब ऑडियंस देख रही. है तो ऑडियंस को पीड़ा होती है लोगों की. आंख से झरझर आस अरे मीम्स बने इस पे कि. मर्द रोते नहीं और कई सारा मीम बना कि. देखो मर्द रोते नहीं और फिर लास्ट का सीन. आया यहां लोग रोते हैं रो रो मर्द भी रोते. हैं लोग रोते हैं बच्चे रो रहे हैं. महिलाएं रो रही हैं आदमी रो रहे हैं और वो. उसके बाद मतलब जयकारे लग रहे हैं ऐसी. फिल्म देखी जा रही है. और लोग वो लेकर निकल रहे हैं तो एक डर था.
कि पता नहीं कैसे होगा उस समय लक्ष्मण सर. ने जो डिस्क्रिप्शन दिया था रीडिंग में कि. मैं सीन को ऐसे देख रहा हूं बज वो डीओपी. इस फिल्म के डीओपी सौरभ गोस्वामी है लेकिन. लक्ष्मण सर एस डीओपी कई फिल्में उन्होंने. की है सिनेमेट ग्राफर कैमरामैन के र तो वो. देखते हैं विजुअल में सीन को हर डायरेक्टर. देखता है लेकिन डीओपी है तो उनका एक अलग. लेवल पर चला जाता है तो उन्होंने.
डिस्क्राइब किया था कि इधर लोग खड़े होंगे. मुगल सेना के लोग और अंकी सेना के लोग इधर. होंगे और ऐसे ऐसे बधे हैं और कवि जी को. लेकर जा रहे हैं तो इधर बैक है छत्रपति. संभाजी महाराज की और कवि जी की बैक है और. दूर जा रहे जैसे जैसे दूर जाएंगे वॉल्यूम. बढ़ेगा तो जब पर्दे पर सीन देखा तो मुझे. उनका सारा डिस्क्रिप्शन याद आया तो वो. उनका कहीं एक एक बहुत अलग तरह का टच रहा. फिल्म को और विक्की के साथ एक बॉन्डिंग कि.
गैंगस वासेपुर में विक्की ही वाज. असिस्टेंट डायरेक्टर मैं एज एन एक्टर था. विक्की अक्सर क्लैप देता था तो मुझे मेरा. पास्ट याद आता था कि मैं असिस्टेंट. डायरेक्ट था मैं हमेशा क्लैप देता था काम. सारा आता था लेकिन उसके बाद भी मेरी कोशिश. होती थी वो सब करके क्लैप की तरफ बन व्ट अ. फेसिनेटिंग जनी वि कौशल की आप बता रहे हो. बताओ कैमरे के पीछे से फ्रंट हीरो तक तो. वो मुझे याद आता था कि मैं क्लैप इसलिए. देता था कि डायरेक्टर और एक्टर के बीच में.
जो हो सकता है. एडी वह सहज तरीके से सेट का डिजाइन ही ऐसा. होता है कि वह कहीं आसपास ही होगा क्योंकि. उसे तुरंत क्लैप देना है तो जो समझाते हैं. डायरेक्टर एक्टर को उसे अगर कोई सुन पाता. है तो क्लप वाला लड़का मसान टू छावा मसान. टू छावा मतलब कमाल की जर्नी है क्या कमाल. की हमारे बीच में एक रहा है कि जब भी. मैंने विक्की को किसी भी फिल्म में. पर्सनली हमारी बातचीत होती है मसान भी हुई.
जुबान भी हुई उसके बाद राजी संजू उरी तो. हमेशा जब भी मुझे होता कॉल करके तो वो एक. था यह नहीं पता था कि हम ऐसे एक फिल्म में. आने वाले हैं और मित्र बन के आने वाले. हैं तो वो कहीं ना कहीं बहुत निखर के आया. अब ये जब फिल्म आई तो एप्रिसिएशन तो. दुनिया भर में चल ही रहा है सोशल मीडिया. भरा पड़ा है एक चर्चा शुरू हो गई कि ये. फिल्म पूरी तरह से रियल है या इसमें. मौजूदा हालात को देखते हुए एक्स्ट्रा.
लिबर्टी ली गई है और एक नई कहानी चल रही. है आई एम शर यह भी आपके पास पहुंचा तो. होगा. ही सी मैं क्या है कि जब किसी फिल्म के. लिए हां कर देता हूं तो मैं पूरी तरीके से. खुद को सरेंडर कर देता हूं जो गैंग सवासी. पुर की लाइन है सरेंडर करने आए दानस हां. तो बस मैं सरेंडर कर देता हूं मेरे. डायरेक्टर को फिर जो उसमें लिखा है उसको. मैं मान लेता हूं यही महावाक्य है मेरे. लिए और फिर पूरी तैयारी उसके अराउंड करता. हूं फिर जो भी इंप्रोवाइज करूंगा उसके. आसपास करूंगा उसके परे नहीं फिर सोचता.
नहीं मैं यह मान के चलता हूं मेरे दिमाग. खुद को ये मैसेज देता हूं कि दुनिया का. सत्य यही है खुद को ऐसा एक ऐसे स्टेट में. मैं रहता हूं कि यही सत्य है ताकि उस कुछ. भी मैं बोलूं तो मेरी सच्चाई के साथ. निकले चाहे फिल्म में मैं झूठ भी बोल रहा. हूं मेरा मतलब मेरा किरदार अगर झूठ भी बोल. रहा है तो वो भी एक कन्वे के साथ रहता है. वो मेरे लिए वर्क करता आप लोग को रिसर्च. दी गई थी इसकी या. क्. थे नहीं मैंने एक बार हां किया तो फिर मैं.
सवाल जवाब जो मेरे अंदर होता है मेरे अंदर. जो जो चीजें आती हैं वह मैं डायरेक्टर से. पूछता हूं लेकिन वह ज्यादातर चीजें मेरे. किरदार के लिए होती है कोई सीन क्यों है. ऐसा मुझे नहीं समझ में आ रहा है तो मैं. पूछता हूं मेरे अंदर कुछ और आइडियाज अगर आ. रहे हैं तो वह मैं शेयर करता हूं मैं. मानता हूं. कि मेरे अंदर कोई ऐसा थॉट ना बचे जो जो. मैं मेरे डायरेक्टर को ना शेयर करूं और वो.
इस इस अप्रोच को अब तक थैंक गॉड आई एम लकी. मेरे डायरेक्टर्स इस अप्रोच को समझ आप. नहीं करो तो आप काम भी नहीं कर पाओगे उस. कन्वे से लेकिन आपके अंदर तो एक कवि रहा. है ना कवि कलश से पहले भी तो कवि रहा है. आपके अंदर अ मतलब छोटी-मोटी कविताएं लिख. लेता. हूं गाने वाने छोटे लिख लेता हूं कहां. मतलब दिल ल टूट गया था बचपन में क्या कहां. लिखना शुरू किए थे दिल टूटने की वजह से. कविता कभी नहीं लिखी अब रॉकस्टार में तो. यही दिखाए थे. आदमी कटता है तो आदमी लिखना पढ़ना शुरू.
बोलना शु दिल टूट के जब कोई लिखता है तो. बहुत बड़ा वाला बन जाता है हम छोटे मोटे. वाले हैं तो दिल टूटने की वजह से नहीं हु. मैं बनारस का रहने वाला हूं बनारस अपने आप. में एक अद्भुत शहर है हा क्या है बनारस. बताओ थोड़ा बनारस मतलब आप सारी दुनिया घूम. लीजिए बनारस नहीं गए तो क्या घुमा एक शहर. जहां हर कोई गुरु कोई नहीं चेला बस अब आप. य सेंटेंस की गुता को समझ तो हम समझते हैं. ना आप बहु बहुत आदमी ना जानते बनारस में. लोग मौज में रहते हैं है ना सबका रस बना.
हुआ है वहां हर कोई वहां गुरु है कोई चेला. नहीं है और हर कोई वहां चेला है. क्योंकि वह शहर ही कुछ ऐसा है आपको कोई. आपको रिक्शे वाला भी सिखा के जाएगा आपको. लस्सी वाला सिखा के. जाएगा यही नहीं रुकती वहां कई बार सा भी. सिखा देते. हैं सन्यासी तो ठीक है सिखाता ही सिखाता. है तो वहां की हर सीढ़ी पर जो छोटी मोटी. चीज आपको नजर आ रही है उसके पीछे भी एक. कहानी है कुछ इत्तफाक नहीं है वहां प ना.
वहां हर चीज के आप आप काशी विश्वनाथ का. दर्शन करते हैं और अचानक आप निकल जाते हैं. फिर आपको कभी किसी दिन यह पता चलता है कि. अरे उसी के थोड़ा पहले तो मां अन्नपूर्णा. का जो है वो था और फिर जब आप मां. अन्नपूर्णा के बारे में पढ़ते हैं तो आपको. लगता है अरे छूट गया है ना और वह हो जाता. है फिर किसी दिन आपको पता चलता है कि आप. आपने काशी गए और काल भैरव का दर्शन नहीं. किया तो आपको लगता ओ यह क्या हो गया तो और.
अगर आप मुगालते में तो मण कणिका घूम लीजिए. हां फिर उसके पहले वहां भी तो जाइए संकट. मोचन मंदिर जाइए जहां पर तुलसीदास जी ने. रामचरित मानस लिखी तो अद्भुत ही है शहर यह. तो मैं सारी पुरानी चीजें चाट खाने के. शौकीन है दूध दही लस्सी मैं खुद हां मैं. खुद मेरे बहुत सारे लो फेज में मण कणिका. स्मशान घाट पर जाकर बैठता था क्यों रीजन. उसका यह था कि बंबई में तभी बमबे. था अब मुंबई है उस समय जब कुछ नहीं होता.
था कि पता पाच महीने हो गए एक दिन काम. नहीं. मिला मब मडर रहे हैं ऑफिस ऑफिस के बाहर घर. पर हैं तो खिड़की से बाहर देख रहे हैं वही. पेड़ है कौवे जो है व कौआ कबूतर बहुत है. बे में नया नया कौवा आ रहा है उसी को देख. रहे कबूतर को देख रहे हैं घंटों देख रहे. कितना देखे क कॉल आई दौड़े कपड़ा पहन के. चलो ऑडिशन दे के आते हैं तो ऐसे जब बहुत.
लंबा चलता है तो अंदर से एक वो होता है कब. होगा क्योंकि सवाल दक्ष प्रश्न तो खड़े. हैं जिस जगह से मैं आ रहा हूं वहां मैंने. बताया बनारस में सब गुरु हैं तो गुरुओं के. सवाल मतलब व सीधा ऐसा लगता भाले की नोक पर. सवाल खड़ा है और उसी पर आपको बिठाए तो ऐसे. ऐसे सवाल आते थे परिवार के सामने उसका. जवाब नहीं होता था मेरे. पास यह होता था कि लोग पिताजी हैं. सामाजिक लोग हैं सब लोग तो शादी विवाह.
तमाम फंक्शन में आना जाना होता. है तो नुकीले कटीले सवालों के साथ कोई ना. कोई आ ही जाता है और पूछ ही लेता है अरे. डॉक्टर साहब इतना साल हो गया क्या कर रहा. है भी तो उनके पास इसका जवाब नहीं होता. था तो जो चेहरा पापा का उतरता. था उसकी खबर भाई मुझे देता था कि पापा से. चार पांच लोगों ने यही पूछा और य शादी में. पूछा जाता. था तो म रिटेबल कहानी है मेरी मम्मी ने एक.
टाइम मुझे बताया 12थ के बाद जब थोड़ा. डाउनफॉल च था कि हम लोग ने थोड़ा फंक्शन. में जाना कम कर दिया. है य मेरे यहां भी हुआ है पापा कई बार बैक. टू लगन आती है ना तो लगन आती है तो रोज. तीन चार पांच जगह जाना होता है समाज बड़ा. है. तो जब बहुत ज्यादा वो सवाल छू जाते थे. क्योंकि हर कोई. इतने अ चुने हुए शब्दों के साथ सवाल नहीं.
पूछता कई लोग बहुत नुकीले और तिरछे शब्दों. के साथ सवाल पूछते. हैं तो भारी पड़ जाता है तो पापा कहते थे. कि बेटा अ यह जो अगले दो-तीन दिन तुम लोग. चले जाओ क्योंकि उनको लगता था कि कई ऐसे. लोग आने वाले हैं जिन्होंने पिछले साल भी. ऐसे सवाल पूछे थे हमारे यहां छोटे शहरों. में बहुत बहुत इंटरेस्ट भी होता है लोगों. को कि आप क्या कर रहे हैं बहुत ज्यादा हो. और उसको आपको जलील कराते हैं एहसास कराते. हैं मतलब कैसे अब सोचिए ना कि यह सवाल.
पूछा जा रहा है कि अरे डॉक्टर साहब यह. हमारी बहू. है विनीत के साथ ही तो था. ना एवरी मिडिल क्लास गाय कैन रिलेट फिर. वही वही चीज जब आगे बढ़ती है दो साल तीन. साल फिर यह होता है ये हमारा नाती है या. पोता है रिश्तेदारों में जो लोग अच्छा कर. रहे होंगे वही समझिए कि नीत के साथ ही तो. था ना तो जब बहू शादी होकर आई थी तब भी उस.
परिवार से सवाल आया. था जब उनका परिवार अगली जनरेशन में गया तब. भी वही सवाल आया था विनीत उसी स्टेशन पर. खड़ा था हां उसके पास कोई ट्रेन नहीं कोई. जवाब नहीं खड़ा हूं आज भी और तो वो कहीं. ना कहीं जब तोड़ता था वापस आता हूं सवाल. पे मण तो मण कणिका घाट जाता था घर आता था. तो मण कणिका घाट प जाता था बैठ जाता. था वहां आग कभी बुझती नहीं लाशें आती रहती.
हैं चुपचाप बैठ जाता देखता रहता था जो राख. उड़ती थी वहां की कुछ राख आके आपके ऊपर भी. कय हवा चल रही है. तो देखता था वो देखता था चिता जलती देखता. था लोग आए अंतिम संस्कार किया लोग चले गए. दूसरी चिता जल रही है तो सब चुपचाप देखता. था फिर मन में एक ना भरोसा पैदा हो. कि जीवन में कितनी बताता थैया हो जाए.
कितनी बताता थैया हो जाए आना यही. है तो जब फुल सर्कल होकर आना यही है तो. डरना किससे. है अगर जीवन इसी का नाम. है कि सांस जब आखिरी लूंगा और छोडूंगा. उसके बाद यही सच्चाई है तो इसके पहली सांस. जब खींची थी धरती पर और आखिरी सांस जब. छोडूंगा धरती पर उसके बीच में जो कुछ भी.
होना है उससे क्या डरना जो गीता की लाइन. है ना कि इस सृष्टि. में मेरी इच्छा मतलब प्रभु जो कहते हैं. मेरी इच्छा के बिना इस सृष्टि का एक पत्ता. तक नहीं हिलता तो जब एक पत्ता के हिलने को. भी प्रभु ने संभाल रखा. है तो मैं तो ठीक ठाक पा फीट 10 इंच का. हूं रहे होंगे तो मैं सच्चाई को पकड़ के.
चल रहा था तो बार-बार ऐसा हुआ मैं बार-बार. आता था स्मशान घाट में जब भी बनारस आ खुद. को रिचार्ज करता था और वहा बैठता था आपको. तो बदर करता नहीं होगा लोग क्या कहते हैं. जैसे मैंने जब मैं जब घाटों पर जाता हूं. कई बार ऐसे तो मैं देखता हूं कि जब लाश. जलनी शुरू होती है तो लोग भावुक होते हैं. थोड़ी देर में चार कट लेते हैं कुछ पीछे. बैठ के कुछ पानी चाय शुरू ते कुछ ढूंढना. शुरू कर देते हैं आखिर में 1015 आदमी बचते.
हैं फिर पाच बजते हैं जो दो घंटा रहते हैं. कई बार पूरा भी शरीर नहीं जलाते जानवर लोग. निकल जाते हैं मैंने तो कई अयोध्या में कई. जहां देखा कि जानवर आते. थे मणिकर्णिका में वो चीज नहीं हो तो. अयोध्या में भी इलेक्ट्रिक सिस्टम आ गया. बट एक भावना की बात कर रहा हूं कि आप इतना. भी समय नहीं था कि पूरी लाश भी जल जाए आप. ठहर कर रहे उसके बाद घर परिवार में एक साल. तक याद रखते हैं अगले साल तस्वीर पर उसके. बाद वही जो आपके डायरेक्ट रिलेशन में एक. दो लोग है फिर वो भी 10 साल पा साल.
निर्गुण है ना और पूरी जिंदगी हमारी यही. चलती है कि हा निर्गुण है ना मतलब. भवरवा के तहरा संग जाई. भवरवा के तहरा संग. जाई यह जो भवरवा है सोल के. लिए कौन तुम्हारे साथ जाएगा तो इस पूरे. निर्गुण को सुनिए तो फिर पूरी जिंदगी काहे. हम लोग इसम परेशान जैसे अभी आप कहे कि. पिताजी शादी में इसलिए नहीं गए क्योंकि.
वहां दो लोग कह देंगे सत्य तो यही है ना. कि कोई नहीं रहेगा साम बिल्कुल वैसे तो. देखिए कबीर दास जी भी बनारस में हुए हां. ठीक लेकिन हर बनारसी कबीर दास नहीं है हां. तो जरूरी नहीं है कि हर. व्यक्ति एक होता है किसी चीज को जानना और. एक होता है उसका अनुभव करना दोनों में. बहुत फर्क है बात होगी तो अनुभव करने वाला. भी वही बोलेगा. जो जानने वाला बोल रहा है उस घटना के बारे.
में लेकिन जानने. वाला उसकी गहराई और अनुभव करने वाले की. गहराई में बहुत. फर्क जिसको बोलते हैं ना कि जाके पैर ना. फटी बवाई ते का जाने पीर पराई बवाई का. मतलब जो पैर में जो लोगों को लगता होगा वह. वाले क्रैक्स है ना जो पैर में होता है. एड़ियों. में तो एक्चुअली जब बवाई फटती है ना. उसमें बहुत दर्द होता है बहुत बहुत ज्यादा.
दर्द होता है ठीक से अगर फट जाए ना किसी. का पैर इसलिए यह कहा गया जाके पैर न फटी. बवाई ते का जाने पीर पराई कहने का मतलब यह. है कि अगर आप उस पीड़ा से कभी गुजरे नहीं. है तो आप दूसरे की उस पीड़ा कोभ समझ नहीं. पाते जानते हैं आप कि वह तकलीफ में है. लेकिन उसको महसूस आप तब कर पाते हैं जब आप. उससे गुजरे होते. हैं तो जरूरी नहीं है कि हर आदमी जो इस.
जीवन में. है वह जीवन को इसी तरीके से अप्रोच करें. कि घूम फिर के तो यहीं आना है लोग तो इस. तरीके से संचय कर रहे हैं कहा तो यह भी. गया ना पूत कपूत का धन संचय पू सपूत तो का. धन संचय सबको मालूम है लेकिन फिर भी संचय. इतना हो रहा है शायद पूरे जीवन बीत जाए. फिर भी उसका 10 पर का उपभोग वो नहीं कर. पाएंगे मैं इसको ऐसे देखता. हूं जो मैंने बोला मुझे सिर्फ उसकी आजादी.
चाहिए कि मैं काम करना चाहता हूं तो हो. सके बस प्रभु मुझे इतना दे कि मैं दाता की. स्थिति में रहूं मैं इतना मांगता हूं कि. अगर किसी को जरूरत है और मैं देना चाहूं. तो मेरी मुट्ठी में कुछ रहे मैं प्रभु से. इतना मांगता हूं. तो वो उतना मुझे. चाहिए. अब मैं इस सारी चीजों को ऐसे देखता हूं कि. अगर आप पुनर्जन्म में विश्वास रखते.
हैं तो आज हम जो हैं कल फिर आएंगे किस रूप. में आएंगे मालूम. नहीं तो ऐसे. समझिए कि आपने अपने घर के चारों तरफ बड़ी. चाहर दीवारी बनाई अंदर एक बड़ा सुंदर मकान. बनाया और इतनी ऊंची चाहर दीवारी कर दी कि. लोगों का आप पाना मुश्किल है बहुत मुश्किल. है तो लोग दूर से देख के जाते हैं भाई. क्या बड़ा घर है किसका आलिशान कहानिया भी. सुनाई जाती है क्या पता पुनर्जन्म में आप.
उसी चहर दिवारी के बाहर दरबान बने बैठे. हो जिस चर दिवारी को आपने खड़ा किया था आप. अब उस चार दिवारी के उस पार है तो ऊपर. वाले की लीला बड़ी अजीब है तो इतनी भी. ऊंची चार दिवारी मत कर दीजिए कि कहीं ये. स्थिति आ जाए तो चार दिवारी के इस पार. पाना आपके लिए संभव हो जाए सवाल हम घुमा. पूछते हैं जैसे भी सफलता आई है छावा के. बाद दुनिया मैसेज कर रही हैरो डायरेक्टर्स. को कॉल कर रहे हैं मैसेजेस आ रहे हैं. सफलता भीड़ लाती है असफलता में आदमी अकेला.
होता है दुनिया जानती है लेकिन क्या सफलता. और असफलता का पारिवारिक रिश्तों पर असर. पड़ता. है जैसे आपकी वाइफ आपके साथ रही है आपकी. शादी हुई आपके पिताजी से रिश्ता वो जो. सफलता का दौर था उसमें पारिवारिक रिश्ता. कैसा होता और असफलताओं का परिवार पर कितना. असर पड़ता. है असर तो पड़ता है पड़ता है हां असर. पड़ता है मैं ऐसे बता रहा हूं किसी मैं इस.
मामले में बहुत भाग्यशाली रहा हूं और मैं. यह मानता हूं कि वह सफलता भी किस तरीके की. सफलता है कि जब आपकी सफलता में आपके अपने. ही छूट. जाए क्योंकि मुझे मालूम है जब मेरे पास. कुछ नहीं था जब मैं मुंबई भी नहीं आया था. तो मेरी बहन मुक्ति मेरा छोटा भाई. कार्तिकेय यह मेरे साथ खड़े थे जब मुझे. किसी तीसरे का भरोसा नहीं मिला था तो यह. दो लोग का भरोसा. था किसी का आपके अंदर भरोसा होना आपको.
बहुत ताकत देता. है इन्होंने तब भी भरोसा किया. था जब लाइंस तो बोलने की बात छोड़ देते. हैं खड़े होने का भी मौका नहीं मिला था. कैमरे के आगे इनको तब भी भरोसा था और यह. आज से मतलब 30 साल पहले की बात बता रहा. हूं उनको तब भी भरोसा. था 27 28 साल पहले आज भी उनको भरोसा है. छाबा के पहले भी उनको भरोसा था कुछ तो. बदलता है ना जैसे मैं कई बार देखता हूं कि.
परिवार में दो लड़के हैं एक अच्छा कर रहा. एक 19 कर रहा प्यार दोनों से है एक कि. थोड़ा अलग व्यवहार दिख जाता है एक और चीज. राज कपूर साहब ने एक बड़ी अच्छी बात बोली. उन्होंने बोला था कि जो फिल्में नहीं. चलती जो फिल्में नहीं चलती उनसे ज्यादा. प्यार होता. है उन्होंने बहुत अच्छी बात बोली थी. फिल्में बच्चों की तरह होती है वो फिल्म. उस बच्चे की तरह होती है जो बच्चे के साथ. कुछ कुछ ऐसा हुआ कि थोड़ा कमजोर रम कमजोर.
रह गया किसी वजह से तो उससे ज्यादा आप. उसके साथ जुड़े होते हो बाकी जो बच्चा चल. पड़ा है वह तो पता ही है कि उसको कोई. दिक्कत नहीं है लेकिन यह बच्चा जो कहीं. पीछे रह गया मां-बाप को डायरेक्टर को. बच्चा प्यारा होता है आपके लिए मुक्का बाज. भी होगी हा हा बिल्कुल तो होता और परिवार. मैं बता रहा हूं इस मामले में बहुत लकी. रहा कि जब मेरा कठिन समय था तो. पिताजी ने भी यह बोला हारि यो ना हिम्मत. बिसारियो ना हरि.
नाम मुझे ताकत देता था अटल जी ने व कविता. सुनाई थी. का काल के कपाल पर लिखता मिटाता हू काल के. कपाल पर लिखता मिटाता हूं गीत नता हार. नहीं मानूंगा रार नहीं ठानूंगा काल के. कपाल पे लिखता मिटाता हूं गीत नया गाता. हूं गीत नया. गाता तो उनकी कविता का जो हिस्सा है मेरे. साथ हमेशा रहा टर्मिनेटर में एक विलन था. जिसको जब मारते हैं तो टूट जाता था बिखर.
जाता था छोटे-छोटे पीसे में मेल्ट करके. चला जाता था फिर वो छोटे पीस भी ना धीरे. धीरे इकट्ठे होते थे फिर उसमें से इमर्ज. होता था तो वो विलन भी मेरा जो है ना अल. जी ने कहा था संसद में कि वो जो हम पर. सवाल खड़े कर रहे हैं उन्हें हम बता दें. रातों रात कुरमे की तरह नहीं जन्म 45 साल. का संघर्ष है इस संसद में दो दो सीटों. वाली पार्टी सरकार बनाई है इस सदन ने मेरा. आचरण वि देखा अरे क्या हो गना मोटिवेशनल. बड़ी स्पीच थी तो वो कहीं ना कहीं आप अपने.
लिए क्योंकि लो तो होगा आप टूटो ग आप. बिखड़ ग सवाल ही नहीं है ना हो लोग बोलते. हैं कभी कोई ऐसा फेज आया जब आपको लगा अब. नहीं होगा बार-बार आता है अक्सर आता है. आपको जोड़ना पड़ता है खुद को फिर से आप. इसीलिए मैं कहता हूं रोने का दिल कर रहा. है रो लो पिताजी से कैसा रिश्ता है पिताजी. के साथ हमेशा अच्छा था बस बात इतनी थी कि. मैं कुछ और करना चाहता था वो कुछ और कह थे. कहने के पीछे जो कारण था उसको मैं समझता. था उन्होंने कहीं ना कहीं यह जो यह चीज.
मुझे बाद में समझ आई उनको यह लग गया जैसे. होता है ना बाप अपने बेटे को पहचानता है. उसकी कमियां भी उसकी स्ट्रेंथ भी सब समझता. है. बाप बाप डरता मां-बाप डरते इस बात से हैं. कहीं ऐसा ना हो कि यह जो जिद्द में जो. करना चाह रहा है इसका कुछ हो ही ना समवन. कोटेड अ ब्यूटीफुल लाइन कि मां-बाप आपके. सपनों के विरोधी नहीं होते हैं बस वो आपको. गरीब दिखना नहीं चाहते एटली वो आप को. संघर्ष करते ही जीवन बीत जाए ऐसी स्थिति. में नहीं देखना चाहते वो चाहते हैं कि.
मेरा बच्चा जो. है सफल हो कभी कहा उन्होंने कि आई एम. प्राउड ऑन यू हां वो कमाल हुआ जब उन्होंने. रंगबाज मेरी रिलीज हुई थी तो मैं कभी सोच. ही नहीं सकता था कि पापा ऐसा कर सकते हैं. तो उन्होंने मेरे भाई को बोला कि विनीत की. होल्डिंग्स लगी हैं बहुत लोग कह रहे हैं. मुझे जरा चलो दिखाओ. तो भाई लेकर गया उसको भी लगा यह क्या हुआ.
आज वो गए और बड़ी मेरा भाई भी वहां लेके. गया जो बड़ी डिंग थी और उन्होंने देखा फिर. बोले मेरी एक फोटो. लो तो उनके उ हमेशा यहां जब भी बाहर निकले. कलम रहती है उनके इसम वो तो सुबह 5:00 बजे. से मैं सुबह 5:00 बजे से क्या सॉल्व करते. रहते मेरे को मालूम नहीं पूरे उनके बेड प. पन्ने रहते हैं हर पन्ने कुछ लिखा हुआ. पढ़ा रहता है किताबें कुछ खुली रहते. पुरानी पुरानी किताबें वो क्या कर रहे हैं. मुझे आज तक नहीं समझा लेकिन मैं बचपन से.
देख रहा हूं आज भी यही है और उनको मैं कभी. इमेजिन नहीं कर सकता मेरी होर्डिंग के आगे. खड़े होकर उन्होंने तस्वीर खिंचाई और ऐसे. आशीर्वाद उनको पोज देना तो आता नहीं ये और. उन्होंने बोला ये विनीत को भेजो मैं जब वो. देखा. ना मुझे लगा आज पापा कन्वींस है बहुत बड़ी. बात है कहे तब भी नहीं होंगे नहीं वो वो. वाली जनरेशन है कि मैं यही सवाल मेरा है. आई लव यू बो बोला नहीं कभी उन्होंने यही य. यही पूछ रहा हूं कि हमारी आपकी पीढ़ी के.
जो पिताजी लोग हैं ये एक्सप्रेसिव क्यों. नहीं क्योंकि मौजूदा पीढ़ी के पिताजी बड़े. एक्सप्रेसिव हैं जितने हमारी जनरेशन के. लोग फादर बन रहे हो वो बहुत एक्सप्रेसिव. है ऊपर वाली जो हमारी जनरेशन है उसमें. मां-बाप एक्सप्रेसिव नहीं है वो आपसे कभी. नहीं कहेंगे तु तुमने अच्छा काम गर्व है. तुम पर या आई लव यू अम्मा कह देती है. अम्मा कह देती हैं अम्मा के थ्रू पापा का. वो इमोशन भी पता चल जाता है हां पापा. अम्मा तो मेडिएटर होती है हां पापा कभी ना.
बोल पाए कबो हक है पापा हां. ना कभी ऐसा हुआ ही नहीं कि आ जाओ अब मैं. जाके लग लेता हूं गले ऑ ऑकवर्ड वो फील. करते होंगे हां मतलब उनको लगता है ये क्या. कर दिया ये बट मैं लग लेता हूं लेकिन मैं. भी थोड़ा असहज महसूस करता हूं गले नहीं हो. पाता कोशिश की मैंने वो करने की लेकिन वो. जिस तरीके से थोड़ा असहज मन उनका करता है. हम मन करता है. उनका लेकिन वो कहीं है नहीं कि बेटे को.
गले लगा ले या बहुत अच्छा लगा तो आई लव यू. तो सवाल ही नहीं है आई लव यू तो ऐसा शब्द. हो गया है ना कि नारायण के दर्शन हो. गए पिताजी के मुंह से अगर सुन लो तो तो वो. नहीं अच्छा कल्पना भी नहीं कर सकते मैं. उनको बोलते देख ही नहीं पाता हूं देख ही. नहीं पाता. हूं तो वो है. लेकिन महसूस करता हूं उनके प्रेम को उनके.
लगाव को और वो बहुत गहराई तक है तो वो था. कि उनको यह था कि ये फिल्म लाइन के लिए. सोच पहले तो उन्होंने मना ही कर दिया था. सीधे बोल दिया तुम्हारे छोटे भाई बहन मैं. हम तीन भाई हैं दो बहने तो मुझसे बड़े हैं. जमाने में लोग मेहनती भी तो थे. हां पुराने जमाने में वो भी था कि अ. परिवार जो है पता नहीं कितने बच्चे.
क्योंकि स्वास्थ्य की सुविधाएं और यह सारी. चीजें ऐसी थी कि कई बार ऐसा होता था कि. अगर एक ही बच्चा है कोई मतलब हमारे पिताजी. को हम दो ही लोग हैं लेकिन हमारे दादा जीी. के 10 थेस तो वो वैसा ही था और हर परिवार. में 10 बच्चा बच नहीं पाता था हा उसम भी. दो तीन लोगों की डेथ हो गई एक दो लोगों की. हा तो वो भी होता था कि बहुत सारी. बीमारियां ऐसी थी जो आज की डेट में बहुत. आसानी से ट्रीट हो जाती हैं उस समय नहीं. हुआ करती थी फॉर एम मैं मेडिकल का हूं तो. ट्यूबरकुलोसिस जब तक उसकी किट नहीं आई थी.
तब तक ट्यूबरकुलोसिस होने के बाद कम लोग. बचा करते थे है. ना आयुर्वेद में बहुत सारी चीजें थी है ना. जैसे अब यह आ रहा है तो मुझे याद आ रहा है. के बहुत सारी चीजों को बहुत डिटेल में. डिस्क्राइब किया गया लेकिन अनफॉर्चूनेटली. वह चीजें आगे नहीं बढ़ पाई है ना जैसे. आयुर्वेद के लिए टीवी के लिए बोला गया. अंपा भी तापस संताप करपा दियो ज्वर. सर्वांग गश्ती लक्षण ति राज्यक्षमा.
राज्यक्षमा ट्यूबरकुलोसिस बहुत करेक्ट. डिस्क्राइब किया गया है कि अंश और पार्श्व. में ताप. होगा और संताप करपा दियो कर और पैर के. तलवे में हल्का ताप होगा ज्वर सर्वांग शति. तो ताप के लिए कुछ अलग है संताप के लिए. कुछ अलग है ज्वर के लिए कुछ अलग है हर चीज. को बहुत वैसे डिस्क्राइब किया गया. है जर सर्वांग गश्ती लक्षण ति राज्यक्षमा.
तो अगर यह चीजें हैं इसका मतलब है यह. राज्यक्षमा के लक्षण है हेल्थ की डेफिनेशन. सॉरी मैं कहीं अलग ही जा रहा हूं हेल्थ की. डेफिनेशन महर्षि सुश्रुत ने बहुत पहले दी. थी एलोपैथ में आई थी वह चीज बाद में उसमें. संशोधन भी हुए थे एलोपैथ में यह था कि. हेल्थ इज अ कंप्लीट स्टेट ऑफ फिजिकल मेंटल. सोशल वेल बीइंग एंड नॉट मेली सेंस ऑफ एनी. डिजीज एंड इंफरमिटी बाद में उसमें. स्पिरिचुअल भी ऐड हुआ कुछ शब्द इधर उधर हो.
सकते हैं एंड हेल्थ इज कंप्लीट स्टेट ऑफ. फिजिकल मेंटल सोशल एंड स्पिरिचुअल वेल. बीइंग एंड नॉट मेली द अब्सेंस ऑफ एनी. डिजीज एंड इंफरमिटी बट महर्षि. सुश्रुत यह दुर्भाग्य है हमारा जिसे फादर. ऑफ सर्जरी पूरी दुनिया कहती है मैं. आयुर्वेद का स्टूडेंट रहा हूं मुझसे यह. पूछा जाता है बिकॉज मैंने एमएस आयुर्वेद. की मेरी डिग्री. जिसमें आई और नटी अभी भी कंबाइंड पहले. एलोपैथ में भी कंबाइंड था आई एनटी बाद में.
सेपरेट हुआ लोग य बोलते आयुर्वेद में. सर्जरी होती. है बोता हा क्या बात कर रहे हो आयुर्वेद. में सर्जरी होती है बो हा क्या सर्जरी. होती है आप बताइए महर्षि सुश्रुत इस देश. में हुए पूरी दुनिया उनको फादर ऑफ सर्जरी. बोलती है और इसी देश के नागरिक पूछते हैं. आयुर्वेद में सर्जरी होती है कुछ अटपटा. नहीं है उन्होंने हेल्थ की डेफिनेशन दी थी.
सम दोष समाग निश सम धातु मल क्रिया. प्रसन्न आत्म इंद्रिया मन स्वस्थ विधि हर. शब्द हर शब्द इतना कुछ छुपाए बैठा है सम. दोष तीन दोष है हमारे शरीर में वात पित्त. और कफ हर दोष के पांच प्रकार है वात प्राण. उदान ब्यान समान अपान पांचों जो यह वात के. प्रकार हैं सबका अलग-अलग डिस्क्रिप्शन है. पित्त रंजक भ्रा आलोचक साधक पाचक यह पांच.
पित्त है एक शब्द में कैसे कवर. किया सम दोष एक शब्द भी बोला सम दोष समाग. निश्चय मतलब सम से मतलब बैलेंस होना चाहिए. दोष आपके समाग निश्चय अग्निया 13 है पांच. भूता अग्नि सात धातु वाग्नि और एक जठर. अग्नि आज बोला जाता है ना कि डिजीज वो गट. से स्टार्ट होती है उस समय बोल दिया था. उसमें भी एक अग्नि की आप सिर्फ जठर अग्नि. की बात कर रहे हो जो गट में होती है.
उन्होंने 13 अग्निया बताई है पांच भूता. अग्नि सात धात वाग्नि और एक जठर अग्नि अभी. दो शब्द हुए सम दोष समाग नि सम धातु मल. क्रिय सात धातुएं होती है रस रक्त मांस. मेद अस्थि मज्जा. शुक्र सम धातु मल क्रिय मल आंख का मल कान. का मल नाक का मल बाल में आने वाला मल. यूरिन स्टूल प सीना नाखून सब कवर होता है. अभी एक लाइन हुई है सम दोष समाग निश सम.
धातु मल क्रिया अब वो गए दूसरे लेवल पर. उनको पता था कि इन विजुअल कुछ चीजें और. हैं जो मेंटल हेल्थ को भी कवर कर किया. उन्होंने प्रसन्न आत्म इंद्रिया अथ मन. स्वस्थ विधते उसको स्वस्थ बोलते हैं. प्रसन्न. आत्म इंद्रिया अथ इंद्री और इंद्रियों के. अर्थ प्रसन्न आत्म इंद्रिया. आज मेंटल हेल्थ की हम बात करते हैं ना.
3000 साल पहले बोल के गए प्रसन्न आत्म मना. स्वस्थ विधि उसको स्वस्थ कहते. हैं आज बोलते हैं ना लाइफ स्टाइल की बात. उस समय बोला गया था त्रयो उप स्तंभ आहार. निद्रा ब्रह्म. चरम होता है ना फूड आपका खाना कैसे है. उससे तय होता है आपका स्वास्थ तब बोल दिया. था सिर्फ खाना ही नहीं बोला था आहार. निद्रा नींद. की को कितनी वैल्यू दी थी उन लोगों.
ने तो दे सो मेनी थिंग्स क्या बोलूं ये. कहीं अलग ही चला जाएगा तो दे सो मेनी. थिंग्स अभी ठीक है कुछ याद रह गया क्योंकि. मैं धक्का मार के पढ़ता था मैं इतना अच्छा. नहीं था पढ़ाई में लेकिन हां ठीक. है जो टारगेट आ जाता फिर उस परे लग लेता. था तो ये अजीब सी बात है हमारे यहां बहुत. सारी चीजें. हैं लेकिन ना जाने. क्यों बोलते हैं ना लोग हमारे यहां एक वह.
चक्कर है कि जब लोग जब कोई लैंड करता है. ना ऊपर से बाहर से तो लोग लेंड ले खड़े. रहते हैं हमारे बीच से जब कोई निकलता है. तो लोग टांग पकड़ लेते हैं उनको लगता है. जो भी बड़े लोग होंगे अवतरित. होंगे जिस दिन हमारी मानसिकता यह बनेगी कि. हमारे आसपास के लोगों में ही वो लोग भी. हैं जो कुछ कमाल करेंगे. तो और बदल सकता. है तो वो हमेशा जब समाज इस नजर से देखेगा.
कि जो बच्चा आज हमारे बीच में है इसको. यहां वही य यहां वाला बच्चा किसी दिन कुछ. कर सकता है आपको तो याद आ गया वो गुड्डू. भैया क्या अब हम वो गुड्डू नहीं जो लिब. लिब किया करते थे अब हमको चाहिए फुल इज्जत. हम ये कभी ये वाला थॉट हुआ आपके साथ कि. कभी गांव देहात में गए हो या कहीं गए हो. और आपको लगा बस हो गया अब हम वो नहीं. विनीत है मेरा. मेरा ये था मुझे ना एक वो रहता था या किसी. डायरेक्टर के साथ कभी किसी सेट पे मैं.
बोलता नहीं हूं मुझे हमेशा ये होता है. अपने काम से जवाब दो हा तो कभी मन में चला. मन में तो बहुत कुछ आता है अब हमसे लेबल. लेबल मत करो मन में तो ठीक है मन में तो. आता ही आता है लेकिन मतलब वो एक डिसेंस. रहती है कि मुझे लगता वो भी ठीक है वो. इसलिए ठीक है क्योंकि वो जिस तरीके से. जीवन को समझते हैं वो उनका सच है बेइज्जत. होना कितना जरूरी है. आप पर डिपेंड करता है कि आप बेइज्जत होकर. अपनी वैल्यू करेंगे या बिना बेइज्जत हुए.
आपको अपनी वैल्यू पता है ये आप पर डिपेंड. करता है चीजें दुनिया में समाज में ना. बहुत सारी चीजें आप पे डिपेंड करती है कई. बार कोई थप्पड़ खाके जगता है कोई दिल. तुड़वा के राइटर बनता है प्रेमचंद का दिल. थोड़ी टूटा. था सही बात है और 4:00 बजे उठ के डिबरी. जला के लिखा करते थे डिबरी म मतलब उनकी एक. फोटो वायरल होती है जिसमें उनका जूता फटा. है. तो ये जरूरी नहीं है. कि मतलब आप बेइज्जत हो और तभी हो कोई घटना.
ट्रिगर कर जाती सही बात है कई बार हा जो. आप कह रहे मैं सहमत हूं नजरिया बदला कोई. घटना हो सकता है आपको उड़ती चिड़िया. ट्रिगर कर जाए सही बात है है ना हो सकता. है आपको आप रिक्शे में कहीं जा रहे हैं और. रिक्शे वाला ने कुछ ऐसा कह दिया और आप. ट्रिगर हो गए आप आपको ज्ञान देगा गुरु बन. गया वो आप इसका मतलब ये भी कि असफल होकर. ही सफल बनना जरूरी नहीं है और क्यों हो. सकता बिल्कुल मतलब.
क्यों ठीक. है आपको इतना संघर्ष तो करना पड़ेगा कि आप. अगर सपोज आप किसी नई फील्ड में एंटर करते. हो तो ऐसा नहीं है कि आप एंटर किए और सारे. लोग तैयार बैठे आपको आपके अंदर क्या है. उसको कहीं ना कहीं अपने काम के थ्रू लोगों. तक पहुंचाना पड़ेगा तो जब तक वो नहीं होता. तब तक आपको वो सतत रूप से चालू रख. पहुंचाने के बाद और परिश्रम करना है बने. रहने के लिए तो जीवन का अर्थ ही है.
परिश्रम और वो प्रकृति भी हमें सिखाती है. अगर आप नजर आपके अंदर है तो. दिखेगा पेड़ है हरा भरा है है ना जैसे. पतझड़ आता है सारे पत्ते गिर जाते हैं अब. अगर आप पड़ में उसको दर्शन करके गए तो. आपको यही मेमोरी रहेगी सूखा पेड़ है लेकिन. जब आप सावन में आओगे तो लहरा रहा है तो हो. सकता है कभी आप अपने जीवन में किसी ऐसे. फेज से गुजर रहे हो जहां पतझड़ के तरीके. की फीलिंग अपने आसपास के लोगों को दे रहे.
हो इसका मतलब यह नहीं है आप सूख. गए हो सकता है जीवन में किसी किसी पड़ाव. पर आपकी किसी से मुलाकात हुई हो और आप. बहुत लो फेज में है तो हो सकता है उस समय. जो आपसे वाइब गई हो वो वाइब ऐसी हो कि यार. बहुत नेगेटिव. है लेकिन ऐसा नहीं है कि उसके अंदर ऊर्जा. का फिर से पुनः संचार नहीं हो सकता हो. सकता यह हमें कर जीवन दर्शन किया आपने ये. हमें तय करना है.
और बोला है ना प्रकृति सिखाती है. परिवर्तन आज हम बोलते हैं ना 2.0 प्रकृति. तो हमेशा से चीक चिक के बोल रही है चारों. तरफ बोले पेड़ पौधों में बोल रही है खेतु. बोल र कलियान बोल र 2.2 की. बात हमने आज टर्म. दिया हम देर से समझे हां मतलब हम तब समझे. जब चीजें लैंड हुई हां हमारे बीच में नहीं. न गैंग्स ऑफ वासेपुर प. आते गजब का सीन था वो वाला कि अपने आप.
लेटे का तुम्हारे लेटा. इसे अपने आप लेटे तो मर जाएगा मनोज भाई. खूब इंप्रोवाइज करते हैं बिजली कहां है. बिजली लेके आओ बिजली अरे हम थोड़ी लगाए. पीछे लाइट पछ लाइट थोड़ी लगाए गलत होगा तो. तुम्हारा गला काट. देंगे उसके साथ और भी कोई शब्द है नहीं. बोल हम नहीं बोल सकते ना वो. [हंसी]. न गोली लग गया वाला सीन वो ऐसे नहीं लिखा.
हुआ था सब कुछ लिख अमरा कश लिखते कनेना. लिखते हैं नहीं लिखते हैं काफी सारी चीजें. लिखते हैं और बहुत तेज लिखते हैं पियूष. मिश्रा कह रहे थे कि सब आधा तो. इंप्रोवाइजर कराते रहते उनके सीन में हुआ. था अच्छा जो उनका किरदार था उनके किरदार. में हुआ था कि वो बनते बनते बनते बनते बन. गया और यह अनुराग सर के हर फिल्म में एक. दो किरदार ऐसे होते हैं जो बनते बनते बनते. बनते कमाल बन जाते हैं लेकिन कहीं ना कहीं. चीजें लिखी रहती है तो इसमें कितना. इंप्रोवाइज होता है ये बिजली लेके आओ अपने.
आप नहीं लेटे का बहुत सारी चीजें लेटे का. तो मर जाएगा टेगा तो मर जाएगा कौन पेशेंट. है ये है ये तो खड़ा है ये तो खड़ा है वो. उस पे भी नाराज हो जाते हैं तो क्या हुआ. तो वासी आपु में तो भरभर के इंप्रोवाइज. हुआ था इवन वो जो सीन है गोली लग गया हां. है ना तो पूरा सीन ऐसे था ही नहीं उधर ही. हुआ अब कुछ नहीं हुआ कुछ नहीं हुआ है कुछ. नहीं हुआ. कु वो भी सीन प्लस वो जो सुहागरात का सीन.
है सुहागरात वाला सीन इतना था कि जो मेरे. किरदार दानिश का सुहागरात का सीन है. के जब तुमको सनरा की दुकान पर देखे थे तब. य फैसला कर लिए थे कि कुछ भी हो सोमा. प्रवीन. हमारी तो सीन इतना ही था और फिर यह था जवा. आप के उसके पहले वो सब लाइंस थी. जो अरिता की लाइन है जो मेरे अपोजिट थी. अनुरीता झा. के आप जानते.
हैं शादी की वजह से हमारे अम्मी अब्बू. बहुत खुश है तो ये सब बातें होती हैं फिर. यह दानिश जो बोलता है जो मैंने बोला उसके. आगे का ऐसे ही हुआ कैनरा सर को लिख के. दिखाया आगे और भी था लंबा था तो बोले बहुत. अच्छा लग रहा है यह बाद वाला छोड़ दो तो. बाद वाला आज बता देता हूं. वो ऐसा हुआ. कि जब सनरा की दुकान पर देखे थे तब यह.
फैसला कर लिए थे कि कुछ भी हो समा प्रवीन. हमारी हमारी होगी तो प्रवीण नहीं परवीन. फिर ट्राई मारता है प्रवीण परवीन ए भाई. संतरा को सेफ कहने से संतरा सेफ थोड़ी ना. हो जाएगा संतरे नहीं रहेगा वही सुनारा रंग. भीनी भीनी खुशबू हाथ रखता अंदर से रसेदार. य यहां तक है फिल्म में आगे और था मतलब ये. भी इंप्रोवाइज हुआ था फिर आगे और बोले कि.
ये लंबा हो जाएगा आगे ये था कि अच्छा ये. बताओ संतरा को छील के खाते हैं कि बिना. छीले देखती है हां छील के तो त बत्ती बुझा. दे कि. चलेगा इतना लिख दिया अनुराग सर के साथ मजा. आता है वो मतलब फन में तो वही वाला पर्टी. नवाज वाला था परमिशन मना थोड़ी ना कि हां. वो भी उनकी लाइफ से आया था हां मना नहीं. किया लेकिन परमिशन तो लेना चाहिए ना लेना. चाहिए वो नवाज भाई के साथ घटना घटी थी तो.
ऐसे चीजें बन जाती हैं तो नवाज भाई की. अनुराग जी से दोस्ती थी आप आप पैसा दारा. मांग रहे थे जो आपको मरवा दी बीच में वो. नहीं वो कहानी वैसे ली मैं तो पहुंचा था. जब मुझे ये फिल्म मिली थी तो मैं तीन चार. दिन बहुत बेचैन था स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद. कि मुझे लगा मुझे फैसल खान मिल जाता तो. मतलब मजा आ जाता प जाता मजा आ जाएगा मतलब. मजा आ जाएगा मैं बेचैन तो मेरा क्या होता. है जो मन में होता है मैं जा नहीं लगा. थोड़ा बटरिंग मटरिंग नहीं नहीं नहीं मैं. साफसाफ जाके कह देता हूं मैं पहुंच गया. ऑफिस स्क्रिप्ट पढ़ने के तीन चार दिन तक.
बेचैनी रात को नींद नहीं आ रही है बो यार. नहीं यार मैं बोलता हूं मुझे नहीं पता मैं. किसी को नहीं जानता था जो मैंने बताया ना. कि मैं मतलब एनएसडी से नहीं हूं एफटीआई. ऐसे नहीं हूं तो मैं जानता नहीं था लोगों. को पूरा वासी आपु के लोग जितने हैं मुझे. लगता है करीब-करीब सब सब फट गए नहीं मैं. किसी को जानता नहीं था किसी एक्टर के साथ. कोई अमो दफ्त नहीं थी किसी के साथ उठना. बैठना नहीं नहीं. था क्योंकि मेरा मुंबई में कोई दोस्त मेरे. या डॉक्टर थे या प्लेयर्स थे तो कहीं से.
भी किसी को इस तरीके से जानता ही नहीं था. कि उठना बैठना हो तो वासी आपु में हमेशा. यह होता था कि सबको यह था कि कौन. है तो ये यह जो है यह लाल घोड़ी लाल लगाम. करेगा क्या सबको कहीं ना कहीं वो था मेरा. पहले दिन का शूट था पेट्रोल पमप का. क्योंकि मैं कैसा एक्टर हूं किसी ने कुछ. देखा नहीं है सामान्य सी बात है अंदर एक क. होती है क्योंकि बड़ा किरदार है दानिश खान. का खैर जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ ली थी तो.
मुझे बेचैनी यह थी कि मुझे करना है फैसल. खान मैं जानता नहीं था नवाज भाई को किसी. को नहीं जानता. था मैं पहुंच गया. ऑफिस तो अनुराग सर ऑफिस में अंदर बैठे. थे गया अंदर कुछ लोग थे वो चले गए जाकर. बैठा सामने बैठा हूं व लगे हुए हैं कुछ कर. र है बोले हां हा बोलो बोलो तो बोला मुझे. फैसल खान करना. है तु को समझा नहीं कि क्या बोला. ये हां क्या बोला मुझे फैसल खान करना है.
मेरा ऑडिशन करवा. लीजिए देखिए बोले तुम तो दानिश खान कर रहे. हो ना बोला हां मैं दानिश खान कर रहा हूं. लेकिन मुझे फैसल खान करना है उसके लिए. मेरा ऑडिशन करवा. लीजिए तोव. उठे यह तीन चार बार हुआ देन एकदम से उनको. स्ट्राइक किया ये बोल क्या रहा है और मेरे. आंखों में सच्चाई भर भर. के है ना वही ईमानदारी के साथ सेंटेंस. निकला उसी फ्रीक्वेंसी के साथ गया जो दिल. को छूता है उठे आए और उन्होंने पकड़.
लिया क्योंकि अनुराग सर को मैं मिला हूं. अपने जीवन में 2009. में पहली बार वो मामी फिल्म फेस्टिवल में. मिलना हुआ और अनुराग सर ने मुझे वासी मेरे. भाई ने उनको बनारस जब वो गए थे तो मेरे. भाई ने उनको मेरी सीडी दिखाई थी क्योंकि. मैं लोगों को मतलब मेरे में वो नहीं है कि. मैं आपसे मिलूंगा पार्टी वार्टी में और. मैं फिर अपना वो नहीं हो पाता मुझसे. पार्टी में जो कोने के अंदर भी कोई कोना. होगा मैं वहां मिलता. हूं मैं सहज नहीं हो पाता तो वन टू वन अगर.
है तो फिर चीजें खुल के आते हैं फिर मैं. सामने वाले को समझता है कि क्या आ रहा है. विनीत का कहां से आ रहा है तो मैं वोह. क्रैक नहीं कर पाता था मीटिंग्स करके कुछ. क्रैक कर लू सबने मैं डंबो टाइप का नजर. आता रहा हूंगा लोगों को तो कार्तिके जो. मेरा भाई है अनुराग सर जब बनारस गए मामी. जब उनको मिला तो जाने वाले थे बनारस तो. मैंने उसको बताया उसने सव मैनेज करके उनको. पकड़ के मेरी सीडी.
दिखाई और मेरे भाई को मेरी बहन ने बार-बार. बोला कि देखो यह फोटो देख लो ग पर जितनी. फोटो है अनुराग सर की सारी फोटो की यही. अनुराग कश्यप है यही अनुराग कश्यप है यही. अनुराग कश्यप है मेरा भाई दिन भर उन्ही. फोटो देखा उसके बाद गया एयरपोर्ट प आए. उनके साथ और वो एक अलग कहानी है फर लगे त. उसने वो दिखाया था तो खैर जब वो गले लगे. उन्होंने बोला कि विनीत यह जो तुम्हारी.
सच्चाई. है इसको मत छोड़ना इस बार नवाज कर रहा है. नवाज कर रहा है फैसल खान नवाज कर रहा है. तुम्हारा. होगा लेकिन मेरा कोई ऐसा काम उन्होंने. देखा नहीं तभी एक सिटी ऑफ गोल्ड मेरी. फिल्म आई थी तो होल्डिंग्स वगैरह लगी थी. तो उसकी वजह से ग्राउंड बन पाया था अदर. वाइज आ आठ एक साल तक तो न साल तक तो कोई. ऐसा काम ही नहीं था कि मैं दिखा के मुझे. काम मिल जाए जो लोग काम क्योंकि छोटे-छोटे. एक सीन दो सीन कभी दिल में आया नहीं किया. जैसे नवाज भाई इसके बाद फट गए थे नवाज भाई. यहां से फिर हीरो बन गए नवाज भाई को हमने.
मैंने पॉडकास्ट किया था यहीं थे तो सरफरोश. में पिट रहे थे और वहां से गैंगस ऑफ वासर. में फैसल खान गाने वाने आ गए सैया काला रे. चश्मा लाके अरे स्वग हो गया नवाज भाई का. वहां से और उसके बाद हम सब देख रहे हैं कि. नवाजुद्दीन फ्रॉम कौन नवाज से टू दी. नवाजुद्दीन सिद की ये जर्नी उनकी हो गई. कमाल की चीजें कभी दिल में आया नहीं यार. उस दिन अगर किस्मत हमारी साथ रती और हमको. क्या नाम दानिश के यहां फैसल मिल जाता. नहीं उस तरीके से नहीं सोचता मेरे अंदर.
क्या है ना शुभंकर भाई की जो भी चीज होगी. मैं कह देता हूं उसका मलाल नहीं पालता मैं. यह मानता हूं कि जब मैं सोऊ तो मुझे यह. रहे कि मैंने यह बात बता दी जैसे मैं जिस. फिल्म को देखता हूं तो मुझे लगता है कि दो. किरदार को बड़ा देर से ड्यू मिला हालांकि. जब मिला तब वो भी छा गए एक जयदीप जी एक. आपको इस गैंगस वासेपुर में दोनों थे जयदीप. का किरदार शुरू में आता है खत्म हो आता है. और मेरे को लगा क्या क कमाल का एक्टर है. यार मतलब उतने से सीन में ही थोड़ा सा सीन. जो था वेरी गुड एक्टर हां कि सर दरवा का.
बाप जो है रर जब कहते हैं हमको लगा क्या. बढ़िया यार इसका है ट्रेन आगे जाएगा तो. भिता रामपुर चले जाए फिर वो वो गायब हो. आते हैं फिर कई आप देखता हूं मैं कि आप. जयदी अलावा त काम जो है वो दिल को छू जाता. है एक आपका ऐसे निकला देर से राजकुमार. उसमें छोटा सा रोल था फट गए बाद में होता. है किसी किसी के. साथ थोड़ा वक्त लगता है व मैं मान लेता. हूं चलिए मैं खुद को ना कोई ना कोई उदाहरण. दे मैंने बताया ना कभी किसी की कविता से.
कभी किसी के बात से कभी किसी के इंटरव्यू. से अपने हिस्से का एक टुकड़ा लेकर अपने को. जोड़ लेता हू फेवरेट कक्टर कौन था आपका इस. ग पहले बताओ फेवरेट पार्ट कौन सा था गस. पसंद है ग पसंद. है दोनों मुझे पसंद. है एक अगर बताना है तो वन ज्यादा पसंद थी. [संगीत]. वन एकदम नया था व दुनिया एकदम ई थी बाद. में मैं उन किरदारों को जान गया था टू के. लिए मे मुझे यह पता था कि हां मैं जानता.
हूं फैसल खान कौन है मैं जानता हूं. डेफिनेट कौन है मैं जानता हूं परपेंडिकुलर. कौन है. नाम मैं मैं सारे किरदार ना सिर्फ कौन. परपेंडिकुलर परपेंडिकुलर परपेंडिकुलर तो. मुझे पता था कि रध सिंह कौन है मुझे पता. थी कहानी क्या है मुझे पता थी कि दुनिया. क्या है तो वन क्या कुछ मालूम नहीं ना. आपको. एकदम से ऑल ऑफ सडन एक नई दुनिया में आए तो. उसकी वजह से एक असर आता है.
और एक्टर तो सभी कमाल थे में भी टू में भी. या या या तो वो मतलब कौन सोचेगा कि मयत है. और गाना बाहर. बजेगा तेरी. मेहरबानिया तेरी कदर कौन सोचेगा कि दरवाजे. पे ऐसे बट वो ट्स द मैजिक ऑफ फर्स्ट में. कैरेक्टर कौन सा फेवरेट था आपका सरदार खान. सरदार खान नाम है हमारा इसकी अम्मा जो है. ना हमको चाहे तो कड़ाही तल दे यस यस मेरे. ही साथ था वो तो.
वो होता है मतलब हम कहते हॉस्टल में हम. लोग कॉलेज में थे पिक्चर आई थी तो रात को. रोज मतलब एक पिक्चर आप कितनी बार देख सकते. हो हम रोज रात को लगाते थे और हम सब मतलब. इसके पहले मुझको उतनी मेरी अवधि या. भोजपुरी भाषा में उतनी पकड़ नहीं. थी यहां से क्योंकि मेरी मम्मी शुरू से. ध्यान रखती थी कि आप हिंदी बोलो माता जी. मेरे हिंदी की टीचर है हम तो हिंदी पर. विशेष ध्यान रखती थी यहां से मेरा झुकाव. जो है वो शुरू हुआ था और उसके बा देसी.
उसके बाद अवधि भोजपुरी सब थोड़ा-थोड़ा. हमको रटने लगा तो मम्मी हमारी क आया कहां. से तुमको तो बचपन से हमने संभाल के रखा था. गंग रोज देख वासेपुर का प्रताप है और अभी. भी सारा एक किरदार रटा हु हम लोग बहुत लोग. हां बहुत लोग मिले हैं जो आज भी मतलब. स्टूडेंट्स आईआईटी में मेडिकल में बहुत. सारे हैं कि वह दो सीन देखते हैं और फिर. अपने काम प उनके लैपटॉप में गैंगस आसपुर. रहती है मतलब एक फिल्म में एक बड़ा स्टार. हो सकता है दो हो सकता है सारा सीन.
आइकॉनिक है पल्प तुल भी मजा आ रहा है वो. साला वो सांप लपेट रहा है तो वो भी. डेफिनेटली भी मजा देता है हां डेफिनेटली. मजा देता है और बहुत सारे सीन हैं अनगिनत. हां कि आप एक सीन को आप चेरिश कर सकते हो. ऐसे ना जाने कितने सीन अनगिनत अनगिनत और. लोगों ने मतलब वासी आपु तो आज के जमाने की. आप कह सकते हैं शोले और बहुत कम शायद पैस. में बनी थी. बहुत कम और मैंने सुना पियूष मिश्रा जी. पहले रामाधीर का किरदार मांग रहे थे हमको.
धीर का दे दो या प प भाई ने मैंने भी वो. सुना है खैर पता ही था हम लोगों को और वो. बनते बनते पीज भाई का किरदार फिल्म बनते. बनते ये सीन में कुछ करा लेते हैं यह सीन. में तो वो है अनुराग सर इस तरीके से काम. करते इसका डू मु बाज में आपको मिला हा. मतलब फिर जब यह हुआ तो वापुर. हुई तो. जो चीजें सबके साथ हो रही थी मतलब जो भी.
ऐसे किरदार थे जो प्रॉमिनेंट थे उस तरीके. की चीज मेरे साथ नहीं पंकज त्रिपाठी बड़े. स्टार बन गए यहां से नवाज भाई का नवाज भाई. लार्जर देन लाइफ हो गए मनोज जी का दोबारा. रा पियूष मिश्रा रिचा च रि हुमा सही बाश. धुलिया शु भाई तो एकदम से म्यूजिक. डायरेक्टर स्नेहा खान मिलकर बहुत सारी. चीजें ऐसे पटी. मेरे साथ कुछ ऐसा हुआ नहीं तारीफ खूब मिली. बहुत अच्छा अच्छा व कंपेयर किया गया शोले.
के साथ यह सब कुछ हुआ काम उस तरीके का. नहीं आता था काम मतलब वैसे ही के कहीं. गुंडा बन जाओ है ना वैसी चीज तो अंदर एक. फिर बम्बे टॉकीज हो गई अगली हो गई थैंक्स. टू अनुराग सर की उन्होंने दो ऐसी फिल्में. दी जो बिल्कुल अलग है तीनों फिल्में. मुक्का गैंगस वासेपुर बम्बे टॉकीज अगली. तीन अलग-अलग किरदार कि अगर आप बम्बे टॉकीज.
देखते हैं तो आप अगली में कास्ट नहीं कर. पाएंगे ऐसे किसी रोल में लेकिन उन्होंने. वह भरोसा रखा तो थैंक्स टू हिम कि. उन्होंने कुछ नया मुझे मेरे अंदर भी नया. ढक्कन खुल जाता है जब उनके साथ कोई काम. करता हूं तो मुझे भी पता चलता है अच्छा ये. भी है तो कोई वीडियो बना लिया था आपने. उनका या फिर कुछ नहीं कोई वीडियो नहीं. बनाया था मुझे ल आपको बैक टू बैक वो काम. देते जा रहे थे उन्होंने पता नहीं. उन्होंने देख लिया था. और मैं बहुत बेचैन रहता था और उनको कहीं. वो जब मैंने बोला ना.
कि जो कोई पीछे रह जाता है हां जो राज. कपूर साहब की लाइन है तो मुझे लगता है. शायद उन लगा उन्होंने वो नोटिस किया कि. मुक्काबाज के बाद सबका हुआ है ना गैंगस. वासेपुर का हां सॉरी गैंगस आसपुर के बाद. सबका हुआ यह कुछ एक लड़के पीछे रह गए तो. उन्होंने उस समय 100 ईयर ऑफ इंडियन सिनेमा. के ट्रिब्यूट के लिए एक फिल्म बन रही थी. उनके पास जो कहानी थी वह कहानी ऐसी थी कि. इलाहाबाद से एक लड़का आता तो जो भी लोग थे.
सर्कल में तो सबसे करीब मुझे लगता है उस. किरदार के उनको मैं लगा क्योंकि मैं बनारस. का हूं तो कास्टिंग इस हिसाब से करते हैं. तो वह मिल गया और उसकी भी शूट हो गई और. उसी के पैरेलल उन्होंने अगली जो है उनको. करना था. एकदम अब उनको ऐसा किस तरीके से वह देखते. हैं मुझे नहीं मालूम तो यह यह मेरे लिए. अगली रिलीज हुई 2014 दिसंबर में लेकिन. मेरे लिए अगली खत्म हो गई थी.
20003 जनवरी फरवरी मार्च के आसपास क्योंकि. अगली और बम्बे टॉकी दोनों फिल्में 2013. में कैन फिल्म फेस्टिवल में थी आप अगर. सर्च करेंगे तो मिलेगा एस एन एक्टर मेरे. लिए फिल्में खत्म हो गई 2012 में वासी पुर. रिलीज हुई थी 2013 में यह दोनों फिल्में. मेरे लिए कंप्लीट हो गई मेरे पास कोई चीज. आती नहीं थी तो मैंने मुक्काबाज लिखी और. लिखने के पीछे जि यह थी मैंने और मेरी. सिस्टर मुक्ति जो हमेशा मैंने बताया जिक्र. किया कि मुक्ति और कार्तिक ने हमेशा मेरा.
साथ दिया तो मैंने मुक्ति नहीं सोच के. लिखा था कि यह फिल्म यह वह किरदार है जो. मुझे करना है तो मुक्काबाज इस इंटेंट से. लिखी और फिर पिच करता रहा अनुराग सर के. पास इसलिए नहीं जा रहा था कि उन्होंने यह. बोला था कि तुम्हारा हो गया तुमको जितना. निचोड़ था निचोड़ लिया एज एन एक्टर तुम. जाओ तोब संकोच यह होता था कि. मैं ये. है कि जो मैंने बोला ना मुझसे वोह वाला. नहीं हो पाता अब फिर भी ठीक है बिकॉज अब.
लोग पहचानते हैं तो अपनी बात कह पाता हूं. तभी चुप हो जाता था क्योंकि सामने वाला. खुद ही इंटरेस्ट नहीं ले रहा मेरे में तो. मैं कैसे बोलू अपने बारे में नहीं हो पाता. था तो मैं उनके पास नहीं जा पाता तो उनको. कभी पिच नहीं किया लेकिन. फैंटम जो प्रोडक्शन हाउस था उसके अंदर. डायरेक्टर्स बाहर से हायर किए जाते तो. मुझे यह आया कि क्योंकि भी जाता था लोगों. को कहानी पसंद आती थी लोग करना चाहते थे. लेकिन हीरो आप नहीं हा ये होता था कि.
विनीत या तो एस राइटर आ जाओ और या फिर कोई. दूसरा रोल कर लो उनकी मजबूरिया में समझता. था तो कभी भी यह नहीं हुआ कि किसी ने यह. बोला तो मैं बाहर नहीं खुश रहता था खुश इस. बात के लिए रहता था सी मैं कोई प्रोफेशनल. राइटर तो नहीं हूं मजबूरी में लिखा है. थोड़ा मोड़ा लिख लेता हूं टाइप से. तो मैं इस बात के लिए खुश होता था कि उनको. मेरी कहानी पसंद आई नहीं तो यह बोलने का. कोई मतलब नहीं ना कि विनीत करते हैं यह. फिल्म तुम कोई दूसरा किरदार कर लो या ए.
राइटर आ जाओ अपने लिए कुछ और लिख लेना यह. बनाते हैं इसको बड़ा बनाते हैं मेरा यह. होता था कि सर यह बनेगी तो मेरे साथ यह. कंडीशन नॉन नेगोशिएबल. है मेरी जिद यह थी कि नहीं बनेगी तो जला. दूंगा लेकिन बनेगी बनेगी तो मेरे साथ मेरे. दोस्तों को पता था यह जिद्द प आ गया एकदम. तो मैं खुश इस बात के लिए होता था कि इनको. पसंद आई है ये अपने आप में एक प्रमाण है. मुझे लगता था किय सर्टिफाइड हो गया कि कुछ. तो है इसमें तो मैंने जो लिखा है उसके.
अंदर कुछ तो है जो लोगों को अपील कर रहा. है टच कर रहा है बस मुझे उस दरवाजे तक. पहुंचना है जिस दरवाजे के अंदर बैठा इंसान. यह बोले तुम्हारे साथ. बनेगी तो उस हर मीटिंग से मुझे हिम्मत. मिलती थी और कई लोगों को कहानी पसंद आई. बहुत लोग उनकी जो प्रॉब्लम है उसको मैं. समझता. हूं हा मेरे ऊपर पैसा लगाए े अच्छा मेरे. फिल्मोग्राफी में कोई फिल्म नहीं ऐसी. जिसमें बॉक्सर दिखू कि बॉडी बॉडी ऐसी दिखे.
या बॉक्सिंग करते दिखू. तो वो अपना काम करने के. लिए चीजें देख रहे हैं वो मेरा करियर. बनाने के लिए अपना काम नहीं कर रहे तो मैं. उस चीज को समझता था इनको कैसे मनाया फिर. अनुराग कश्यप को मनाने नहीं गया था मैं तो. मेरा एक वो है स्वभाव कि अगर मैं किसी को. आपके थ्रू जानता हूं तो उस किसी को जब मैं. अप्रोच करता हूं तो मैं आपको बता दूंगा कि. मैं उनको अप्रोच कर रहा हूं जिससे आपने. मिलवाया था इस इंटेंट से मैंने अनुराग सर.
को बोला कि आपकी कंपनी में मैं मेरी. स्क्रिप्ट पिच करने वाला हूं तो आपको जस्ट. इफॉर्म कर रहा हूं उन्होंने बोला क्या. लिखा है क्योंकि वह सुन रहे. थे मैंने भेज दिया मेरी लालच यह थी कि अगर. अनुराग सर यह स्क्रिप्ट पढ़ते हैं तो उनका. फीडबैक मुझे मिल जाएगा वो फीडबैक मैं अपनी. स्क्रिप्ट में इनकॉरपोरेट कर लूंगा बिकॉज. उससे मुझे हेल्प होगी क्योंकि वह अपनी. कंपनी को मुझसे बेहतर जातने में तो छ.
महीने में कभी फैंटम चला गया तो चला गया. वाली हालत होती. थी तो वो यह जानते हैं कि उनकी कंपनी की. जो क्रिएटिव टीम है किस तरीके की चीजें. देख रही है या अनुराग सर और उनके जो दूसरे. पार्टनर्स हैं व लोग क्या सोच रहे हैं तो. वो फीडबैक मेरे काम आ जाएगा यह मेरी लालच. थी मुझे थोड़ी पता था कि वो फोन कॉल पर. मैं यह सुनने वाला हूं और मैं रोज. ट्रेनिंग करता ढाई साल त य सिलसिला चला था. रोज ये मान के ट्रेनिंग करता था मैंने. कामम बंद कर दिया था कि अब होगी तो यही. होगी या कोई वो फिल्म करता था.
जो मुंबई में ही शूट हो या फिर बहुत लंबा. आउटडोर का शेड्यूल ना. हो कि कोई प्रोड्यूसर बुलाए कि विनीत कहां. हो कल आ जाओ तो मैं कल पहुंच जाऊं मैं ये. नहीं चाहता तो कोई बुला रहा है मैं बोलू. कि 20 दिन के बाद आऊंगा सर मैं शूट कर रहा. हूं मैं नॉन सीरियस साउंड नहीं करना चाहता. और मुझे लगा था छ एक महीने में कोई मिल. जाएगा लेकिन वो सिलसिला लंबा खिंच गया तो. अनुराग सर और मैं ट्रेनिंग करता था रोज यह. मान के किसी दिन बनेगी अनुराग सर का फोन.
आया मैं ट्रेनिंग करके आया था सुबह. की बोले विनीत मैंने. पढ़ा बोला हां कैसी. लगी बोले मैं बना रहा हूं मेरे बोले क्या. सुन रहा. हूं मुझे एक्चुअली मुरे को बोल मैं गलत. सुन लिया. क्या बोला क्या क्या क्या बोले मैं. डायरेक्ट कर रहा हूं और तुमको लेके बना. रहा हूं एक डेढ़ मिनट बात हुई थी बस. बस मैं डायरेक्ट कर रहा हूं तुमको लेके. बना रहा. हूं मैं बोला भाई यह क्या हो.
गया लेकिन मेरी दो शर्त है बोला हां. बोलिए मैं तुम बॉक्सर नहीं बनोगे तो. पिक्चर नहीं बनाऊंगा और स्क्रिप्ट में मैं. मेरे हिसाब से चेंजेज. करूंगा हां पक्का डन ले जाओ यार जो करना. है करो जो बनाना है. बनाओ उस समय फिल्म का नाम था. फाइटर और फाइटर वो चझ गया मैं ये नाम कहां. से आया अब हां हां वो जो आदमी सलमान खान.
की छाती बाल लवाना चाहता हो वो अंग्रेजी. नाम ले कैसे जाएगा हां तो वो फाइटर की. स्पेलिंग वो वाली नहीं थी हा है ना. क्योंकि जो फाइटर की स्पेलिंग होती है. मैंने अलग पी एच आई टी ई आर कि वो जहां से. आया है वो किरदार श्रवण वो उसके लिए फाइटर. की स्पेलिंग क्या है जैसे पुष्पा में होती. है फीलिंग को फिलिंग्स कर हां तो वो फाइटर. मतलब पी एच आई टी ई आर ऐसा लिखा था हां.
हां फाइटर तो वैसा था वो तो आज भी उसकी. उसका पोस्टर भी बनाया था मैंने वो भी रख. के कहीं कहीं जाता था कि ऐसा सोच रहा हूं. मुक्का बाद नाम बाद में आया था तो बस यह. हुआ जो चेंज करना है करिए हार्ड कॉपी है. आपके पास ओपन फाइल भेज रहा हूं आई कम इन. फिर जो करना. करिए आई कमन क्या न यू मे.
नट स्ट्रीट लाइट जला के हम पढ़ाई करते. थे तो आप पढ़ते आप ट्यूबलाइट के नीचे बैठ. के पढ़ते थे तो उसकी सजा हमको कहे दे रहे. हैं अरे तो कौन सा खेल के तुम देश को बदल. दिए हो आपने कौन सा बैठ के भारत को. अमेरिका बना दिया. है बहुत देर से देख रहे इसको क्या काम आता. है ना इसम चाय पी सकते हैं. उठाइए ढक्कन उठाइए मुंह पर लगा ले बकवास. बंद पीछे लगा ले तो आवास.
बंद. आगे मल्टीपर्पज. है भाई दिक्कत क्या है आपको. हमसे आइकॉनिक सीन क्या था दिक्कत क्या. आपको कम से कोशिश तो कर रहे कम से कम. कोशिश तो कर रहे है ना गली के लौंडो के. जैसे सड़क पर आवारागर्दी तो नहीं कर रहे. हैं. पढ़े मने नहीं. लगता हां हमको. मतलब हमारे लिए काला अच्छर नहीं गया ध्यान.
पढ़ाई पर नहीं समझता हमको यही आता है आप. से यही आता है क्या चाहते हैं आप गली का. गुंडा बन जाए और आप ही से तो मिला है. दिमाग आपको क्या लगता है अमा में है जब आप. दोनों लोग शून्य है तो हम कहां से आ रहे. भट्ट पैदा हो. जाएंगे ओ मायड याद. है सबसे आइक सीन मतलब कोई भी मिडल क्लास. लड़का जो संघर्ष कर रहा हो और उसके पिताजी. उसको टोक रहे हो वो ये सीन चिपका दो भाई. आप ही से मिला है ना हमको नहीं समझता हमको.
तो ये है ये सीन पर हर वो बच्चा जो जवान म. अपने दिखाया दिल प ले ली वो ऐसा नहीं है. इनके बच्चे भी आरट निकलते हैं आपको लगा. पार्ट टू बना लो. अ जब कोई कोई भी लड़का या लड़की संघर्ष कर. रहा होता है तो उसको अपनी बात क्योंकि ये. सब आपने लिखा था हा हां यह सीन जब लिखा था. तभी बहन को मतलब हम लोगों ने लिखा तभी ये. हो गया था ये सीन फटे बहन भी वैसे हस रही.
होसे उस ह वो तो स्पोर्ट्स में ही उसने. पीएचडी की थी है ना तो वह स्पोर्ट्स टीचर. असिस्टेंट प्रोफेसर रही छोड़ दिया सात आ. साल से मुंबई में ही है तो आईडिया ही वही. था कि जो हमने देखा है वह कहानी कहनी है. और य हर घर कहानी है एक्चुअली हुआ यह था. कि मैं बास्केटबॉल खेलता था तो क्योंकि. जहां. पन बीता है कॉलेज कैंपस है 100 एकड़ का तो. कॉलेज कैंपस में मुझे लगता है 20 साल से.
ज्यादा हम लोग रहे. हैं. तो घर से बारादे में आते थे तो सामने. ग्राउंड था 150 मीटर दूर अा बरामदा भी. हमारे य ही बोलते हैं मुंबई दिल्ली में. नहीं बोलते वो शब्द आप भी ऐसे यूज कर रहे. हैं कि हवा उधर बह बह के जा रही है इवन. टोन भी वो वाली आ रही है लोगों को लगे ऐसे. ही बात करता है तो होता है ना आप जब अपने. दलान में आके बैठ जाते हैं तो वही सारे.
शब्द अपने आप प्रकट होने लगते हैं जो उस. दालान में आपने सुने थे तो ये वो दालान है. जो मुझे खींच के वहां ले जा रही है तो. लिंगो भी वो आ रहा है बीच-बीच. में शब्द भी आ रहे हैं शब्द भी वो आ रहे. हैं एकदम ठेठ धीरे धीरे बस यह बचल लो कि. हम जाकर भोजपुरी में मथियाई और सबके बताई. क्या भोजपुरी जो ना भोजपुरी का हम सीरियल. भी क ले हमरे बार तोध बोला है या तो हम तो. अवतन हम खैर न अवधी भोजपुरी सब साथे वाली. है हां मतलब समझ में आती है अगर आपको अवधी.
आती है तो आपको भोजपुरी समझती है भोजपुरी. आती है तो औधी भी आती समझ लेंगे. हां मामा मौसी वाला कहानी हां वैसा ही है. वैसा ही है मामा मौसी वाला कहानी है मामा. मौसी वाह एक साथ जोड़ के कुछ बन सकता है. हां फिर आपका आगे घर का सीन था ये आपका. बास्केटबॉल वाला हां मैं ना जब खेलता था. तो बहुत सारे सीनियर्स ऐसे थे जो बहुत. कमाल खेला करते थे उस ग्राउंड में जब. निकलते थे हम लोग रांदे से तो कहीं जाता.
नहीं था शाम मतलब ग्राउंड सुबह ग्राउंड. वहां स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया का. सेंटर था तो शेड्यूल दिल्ली से बन केता था. तो हम लोग उसको फॉलो करते थे हमारे कोच थे. अमरजीत सिंह सर बास्केटबॉल के कोच. थे मेरे साथ के लड़के इंडिया टीम में खेले. मेरे जूनियर्स व इंडिया टीम का कैप्टन भी. रहा तो उस लेवल का स्पोर्ट्स था वहां और. वीक में एक दिन शफलिंग होती है तो.
बास्केटबॉल के लोग जाकर वॉलीबॉल खेल रहे. हैं या फुटबॉल खेल रहे हैं या कोई दूसरा. गेम खेल रहे हैं हॉकी खेल लिया और हॉकी. वाला बास्केटबॉल में आया है वॉलीबॉल वाला. फुटबॉल में आया है तो शफलिंग होती है इसकी. इसकी वजह से बहुत सारा गेम नेचरली बचपन से. खेला तो वहां ओलंपियंस भी खेलते थे. मोहम्मद शाहिद भाई विवेक. सिंह राहुल सिंह ये सब ओलंपियंस के नाम. है उनको मैंने खेलते देखा एक साथ एक ही.
समय में. तो कुछ एक ऐसे लोगों को भी मैंने देखा. जिनको हमेशा मैंने ऐसे देखा अखबार में. तस्वीर छपी है मेडल है और जो शील्ड मिलती. थी वह. है उनके नाम के साथ कि इन्होंने यह जीता. वो जीता मैं जब मेडिकल कॉलेज में चला गया. था तो एक बार रेलवे स्टेशन में तो ट्रेन. से जाता हरिद्वार में था मेरा मेडिकल. कॉलेज तभी उत्तराखंड और यह अलग नहीं हुए. थे उत्तर प्रदेश तो मैंने हरिद्वार चुना.
इसलिए था कि मैं दिल्ली के सबसे करीब वो. था तो मैं एनएसडी भाग के जाता था वहां से. खैर तो रेलवे स्टेशन पर बनारस में मैंने. मेरे उस सीनियर को देखा था जिसको हमेशा. मैं ऐसे देखता. था वोह गार्ड का बक्सा अपने सर पर लेकर जा. रहे. थे एक होता है ना कि नजर से मिली और मैंने. नजर छु मैं वो देख नहीं पा रहा था मैंने. नजर छुपा ली उन्होंने भी नजर छुपा.
ली क्योंकि उनको मालूम है य बच्चा. मुझे क्योंकि मेडिकल कॉलेज में बाद में. गया था तो मेडिकल में होता है ना कि अ ऐसी. जगहो पर बड़ा वैसा हो जाता कि फलाने का वह. जो है बेटा जो है डॉक्टरी पढ़ रहा. है और खेल में भी ठीक ठाक था नेशनल्स खेले. मैंने मिनी और सब जूनियर के लेवल पर तो. थोड़ा सा जानते भी थे लोग उन्होंने नजर. छुपा ली मैंने नजर छुपा ली और वो दृश्य. मेरे अंदर से कभी गया.
नहीं तो जो सच्चाई थी वह सच्चाई मुक्काबाज. जो हिट मारी थी व वहां से आई. थी ऐसी बहुत सारी चीजें ऑल ऑफ सडन फ्लोट. करने लग गई सिस्टर के भी दिमाग में मेरे. दिमाग में तो आईडिया ही यह था कि हमें यही. करना ब्यूटफुल कभी भोजपुरी फिल्म करने. सोचा है मैं तो डायरेक्ट करने के लिए. पहुंच गया था एक बार नि कहानी भी सुनाई थी. कभी निरहुआ से पूछिए दिनेश लाल यादव दिनेश. लाल यादव निरहुआ हीरोइन नाम रूपाली हां.
मैं उनको गया था कहानी सुनाने और फिल्म. अमरपाली जी हमारा कान पकड़ लेंगे. क फिल्म का नाम था तनी ढकलिया भैया अच्छा. मैंने मनोज तिवारी जी को भी एक कहानी. सुनाई थी गजब मनोज तिवारी मृदुल मनोज. तिवारी मृदुल उस सम उस समय सांसद नहीं थे. वो तब तो आपके बनारस के घाट प गाना गाते. थे वो हां य पूरब का बेटा जो उनका सीरीज. आई थी उस समय बड़े स्टार भोजपुरी के बन. चुके थे उनको एक मैंने दूसरी कहानी ऐसी.
तीन दिन में बना लिया. था उनको जाकर सुना उनको बहुत अच्छी लगी. बोले रवा य कहानी कहल जाए बहुत निमन बाई. कहानी बड़ा नीक लगाता जैसे सुनली बानी. ना ऐसे ही अगर एक 4 पर बन जाए ना तो बहुत. बड़ा हिट. बा दिनेशलाल. यादव जी जो है उन्होंने भी जब कहानी उनको. दूसरी कहानी सुनाई थी एक मराठी फिल्म थी.
दे धक्का. तो उसका हिंदी में किया था दे धक्का तनी. ढकलिया. भैया उसका हिंदी भोजपुरी में नाम मैंने. रखा तनी ढकलिया भैया तो पूरी कहानी लिख दी. थीरा स्टोरी स्क्रीन प्ले डायलॉग मब थी. मराठी फिल्म तो पूरा डायलॉग लग सब लिख. दिया था भोजपुरी के हिसाब से कुछ समझ नहीं. आया करके तो पैसा कमा हमेशा एक्टर ही था. लेकिन किन्ही कारणों वश हीरो भी तैयार हो. गए थे इन लोगों को मनाना अपने आप बहुत.
कठिन काम है मेरे पास ना प्रोड्यूसर ना. कुछ ना कुछ वैसा वाला हाल था उस. सम महेश जी ने बोला था कि बनाओ क्योंकि दे. धक्का उनके पास थी तो मैं लिख विख के च. क्या करना है जाकर बना के आ जाएंगे अब. लगता है जो होता है अच्छे के लिए होता. है नहीं तो मैं पता नहीं अगर वो हो गया. होता और कहीं चल चली गई होती है ना. पता नहीं कितनी फिल्में कहां चला गया होता. जबक मुझे कभी डायरेक्शन नहीं करना था बट.
ऐसी ऐसी जगह पहुंच गया था यह बातें मैंने. नहीं कभी आज जिक्र निकला मुझे याद आ. गया उसर में यही बड़े स्टार थे हां मतलब. उस सम समझ नहीं आ रहा था अजीब से फेज में. था कुछ होता नहीं था आपका भी मन नहीं है. करने मैं मतलब पता. नहीं एस एन एक्टर भूख हमेशा से रही है अब. वो एक वक्त आया है और जो ने प्यार दिया है. मैं चाहता हूं कि बड़ी जिम्मेदारी के साथ. और अच्छे-अच्छे काम करूं तो गाना सुनते हो.
कोई भोजपुरी जपुरी का जैसे पवन सिंह है. खेसारी है हां मतलब बनारस में तो ऐसे भी. आप घूमेंगे तो आपको सुनाई पड़ जाता है पान. की दुकान पर बसते हुए चाय समोसे की दुकान. पर बसते हुए कौन फेवरेट है आपका पवन सिंह. खेसारी में बड़ा कंपटीशन है वहां जैसे इधर. विराट कोहली रोहित शर्मा उधर पवन सिं मतलब. इतना डीप में जाके मतलब मैंने कभी नहीं. सोचा कि मेरा फेवरेट कौन है कौन गाना सुने. दोनों लोग का पवन सिंह खेसारी का ठीक. [हंसी]. वाह ठीक है वाला गाना है ना हां ठीक है.
ठीक है अरे अभी बॉलीवुड में गाए थे पवन. सिंह रि काटी रात खेतों में तू आई नहीं. हां हां वो तो पवन सिंह ने ही गाया. राजकुमार के लिए दोदो गाना गाए एक और भी. भी आया था कोई दोनों मतलब ओ मेरी क्यूटी. हां ओ मेरी क्यूटी तेरे फोटो कुछ ऐसा था. किस करू चुम्मा तेरा समथिंग लाइक दैट तो. गाने दोनों लोग मतलब. पवन सिंह के भी गाने सुपर हिट हुए हैं है. ना और सभी के मैंने देखा मनोज मनोज भाई के.
भी गाने सुप ट रहे तो वो गाना हम लोग ने. अस से बीए करके बबुआ हमार कंपटीशन देता. ना वो भी सुना है हम लोगों ने तो शाहरुख. खान त खले जबरा फैन वासीर में उन्होंने. गाया वापुर में गा बिहार के लाला तो मतलब. मनोज वाप के लिए भी गाना आया था कौन सा वो. था जकर बाग के करेजा. बाग के कर. जा तो पंचायत में राजा जी तो है मतलब.
एक मासी सुनते रह सुनना मतलब बनारस में जब. भी चलेंगे तो आप सुनेंगे लेकिन हमको जबरा. फैन से शाहरुख खान याद आया शाहरुख खान से. हमको याद आया आप भी मन्नत उन्नत गए थे. शाहरुख खान क्या कनेक्शन था कैसे मन्नत. पहुंच गए थे बा पहले ने सुना बाहर फोटो. खवाए थे कभी मैं बता रहा हूं मन्नत ना. मतलब जाना तो बाद में हुआ मैंने जैसे बोला. ना अटिल जी की कविता मेरे पिताजी का वह. कहना हरियो ना हिम्मत बिसारियो ना हरि नाम.
टर्मिनेटर का व विलन जो टूट के बिखर जाता. है उसके बाद फिर से जुड़ जाता है जानी. दुश्मन में भी था हमारे इंडियन में सब. लिखो जानी दुश्मन याद नाक को मारते हो फैल. जाता है फिर जुड़ जाता है इकट्ठा होता है. तो मुझे टर्मिनेटर का याद है कि वो विलन. जो है जो जुड़ के खड़ा हो जाता है मैंने. उसकी उस चीज को अपने जीवन में तो कभी अटल. जी की कविता से कभी टर्मिनेटर के विलन के. उस शक्ति से कि बिखर जाओ ठीक है लेकिन. समेट लो और फिर से खड़े हो जाओ तो या.
पिताजी के सेंटेंस से उसमें मन्नत भी. है क मैं कुछ नहीं मैं चला जाता था बाहर. बैठता था साइकिल से आते हैं चायवा देने. चाय ले लेता था देखता. रहता और मन में यही चलता था यह जो मन्नत. है यह घर नहीं है यह मन्नत हम जैसों के. हिम्मत यह मन्नत भरोसा दिलाता है कि शहर. में हमारी भी एक छत हो सकती है. यह मन्नत भरोसा दिलाता है कि अपने भरोसे. का हाथ छोड़ो मत लगे रहोगे तो कुछ हो.
जाएगा ऐसे देख साक्षात उदाहरण है ना. सामने बफ साक्षात उदाहरण है ना ऐसा भी. नहीं था. कि हमेशा से मन्नत. था कोई गया जिसने मन्नत बनाया. है तो एक भरोसा मिलता है कि मुंबई एक एक. शहर है जो जादुई शहर है कोई आउटसाइडर जो. मुंबई गया और आज बॉलीवुड की काउंटिंग जब. शुरू होती तो नंबर वन से वहां से शुरू. होती तो इतने लंबे समय तक बॉलीवुड में.
किसी भी एक्टर एक्टर क्या इतने बड़े स्टार. का इतने लंबे समय तक ऐसी खुद को रिलेटेबल. रख पाना अपने आप में एक रिसर्च का विषय हो. सकता. है तो कुछ तो. है तो मैं अपने हिस्से का एक टुकड़ा ले. लेता हूं. कि मन्नत मेरे जैसे की हिम्मत ब अगर यह. मन्नत. है तोय मन्नत बता रहा है भरोसा मत छोड़ना.
तो कई बार बोल कभी अटल जी की कविता से कभी. टर्मिनेटर के विलन को सोच के छोटे शहर में. यही खास होती है लोग सबस प्रे कहीं से ले. लो ना कहीं से कुछ करके आगे बढ़ते रहो और. बाद में जब मुक्काबाज. हुई तो उस मन्नत में जाने का निमंत्रण आया. और अंदर गया तो मैं भूल नहीं पाता हूं. मेरे साथ मेरी बहन भी थी मुक्ति और मेरी ग. निमंत्रण शाहरुख खान ने बलाया था हां मतलब. मुक्काबाज हुई थी तो अनुराग सर थे और हम.
लोग तो मेरे साथ मेरी बहन और मेरी. गर्लफ्रेंड जो अब हम लोग पति पत्नी है. रुचिरा हम लोग गए अंदर बहुत खास ही लोग थे. बहुत बड़ी संख्या नहीं थी मुझे लगता है. 253 लोग ही होंगे उसमें तीन हम थे है ना. तो गए उन्होंने. देखा मैं भूलता नहीं और यह उनकी खासियत. है यह किसी व्यक्ति का वह व्यक्तित्व है.
जिस व्यक्तित्व को आप कभी भूल नहीं सकते. क्योंकि शब्द भूल सकते. हैं लेकिन जो अनुभव आपको होता है वह अनुभव. नहीं बोलता अनुभव की उम्र बहुत लंबी होती. है एहसास की उम्र बहुत लंबी होती है कि. किसी ने आपको पीड़ा दी है आप भूल नहीं. पाते हो किसी ने आपको खुशी दी है आप भूल. नहीं पाते हो शब्द भूल सकते हो सेंटेंस हो. सकता है इधर उधर हो जाए एहसास वही रहता है. तो उन्होंने जो कराया ना वो एहसास बहुत.
खास है क्या करा था मेरी बहन मेरी. गर्लफ्रेंड हम कौन. थे उन्होंने हमें अच्छा खासा मुझे लगता है. उस पूरी पार्टी में सबसे ज्यादा वक्त. उन्होंने हमारे साथ बिताया और यह बोला इन. लोगों से मैं मिलता रहता. हूं तुम लोगों से पहली बार मिला. मतलब मुझे याद है कि मोबाइल पर अभी हम. लोगों को लगता है कि भाई सेल्फी ले रहे. हैं और काउंटिंग शुरू हो जाती है ना तो ये.
होता है कि जल्दी से जीरो आया और फोटो. खींचे तो उस समय बहन के मोबाइल में वो लगा. हुआ था और चले जा रहा है और काउंटिंग बट. हा ठीक है ठीक है चलेगा चलेगा अभी चल रहा. है पांच चार तीन दो हां ले लो एक एक फोटो. नहीं अच्छी आई हां ले लो ले लो मालूम है. वापस से पांच से काउंटिंग होगी तो वो आप. भूल नहीं पाते हो. और उन्होंने कहानी बताई कि. कैसे मन्नत बना जिस मन्नत को मैं हमेशा.
ऐसे देखा करता था आप सोचो मेरे लिए कैसा. होगा वह खुद यह बता रहे हैं. कि कैसे मैं सोचता था फिर यहां आया था फिर. इस पर नजर मेरी पड़ी थी फिर कैसे मेरे मन. में आया वह सारी चीजें इन डिटेल उन्होंने. बताई तो मुझे ऐसा लगा अच्छा उसके साथ मेरी. वाइफ रुरा व हमेशा एक रुचिरा को ऐसा था कि. एक ड्रीम. था ऐसा लग रहा है उन उसका ड्रीम पूरा करना.
है अब मुंबई तो जाता है अगर आप बॉलीवुड से. जुड़े हो तो आप वहां दर्शन करने जरूर जाते. हो हां मतलब वो वैसा ही हो गया ना तो वो. सारी चीजें वो ऐसे हुआ. और मतलब शाहरुख सर जब सामने तो उन्होंने. यह वाला पोज लिया और मैंने यह वाला पोज. लिया क्योंकि उनके सामने मैं पोज देने के. लिए वैसे नहीं खड़ा हो. पाता सम्मान है ना मैं मैं उनसे मिला नहीं.
बट मैं जितने जितने लोगों मैंने पॉडकास्ट. के इंटरव्यूज किए सबने कहा कि अगर आप. शाहरुख से मिलते हो तो शाहरुख आपको अपना. बना लेते हैं यस और ऐसा लगता ही नहीं ऐसा. लगता ही नहीं. कि उनका कद इतना बड़ा है आपको एहसास नहीं. होने देते हो ऐसा लगता है को बड़ा भाई. हमसे बात कर रहा. है अच्छा. बहुत बड़ी बात है बहुत बड़ी बात है यह. करिश्मा है. उनका नहीं तो बड़े लोग अक्सर बड़े बनकर.
मिलते हैं नहीं मतलब कोई जरूरत ही क्या है. कौन विनीत कौन मुक्ति कौन रुच रा आए मिल. लिए हां काफी था ना वो भी उतने में भी आप. खुश रहते हा बिल्कुल खुश अंदर गए थे हम आप. कहते शाहरुख खान साथ मिलकर आए मुलाकात रही. उन्होंने वो हक दिया कि आप दूसरी और तीसरी. फोटो जिसमें पाच सेकंड से काउंटिंग चल रही. आप कह पा रहे हो. और उनको बिल्कुल बुरा नहीं लगा इस बात. बोला उन्होने इन लोगों सबसे मिलता हूं. बड़े-बड़े नाम है जो लोग वहां थे तुम.
लोगों से पहली बार मिलाओ ब्यूटीफ. ब्यूटीफुल कुछ मैंने क्वेश्चन रखे हैं. रैपिड फायर टाइप तो है मतलब बहुत बहुत. बुरा हूं मैं रैपिड फायर में वैसा कोई. रैपिड फायर नहीं है ब ठीक है देखते. हैं चलो रैपिड फायर अा लाइफ बेस कुछ कर. लेता हू ड सब करते क्योंकि आपने जीवन का. रस ज्यादा लिया है तो जीवन से कुछ कहानी. पूछ. कभी कोई रिजेक्शन जो आपको परेशान कर गया. एक फिल्म थी काय पोछे उसका ऑडिशन देना.
चाहता था मुझे वह मौका नहीं. मिला सुशांत राजकुमार हां मतलब मुझे पता. चला कि तीन दोस्तों की कहानी है तो बहुत. कोशिश की थी कि उसका ऑडिशन हो जाए लेकिन. नहीं हो पाया कि. नहीं रिक्वायरमेंट कुछ अलग. है तो वो नहीं मिला मौका का बाद में फिर. मानो कोल का जो किरदार था म ये हुआ कि. नहीं एज हम कम एज में देख रहे हैं.
सबको पता नहीं मुझे कहानी तो पता नहीं थी. फिर. जब पता चला एक दूसरा भी किरदार है मामा का. उसकी जज थोड़ी सी है तो उसके लिए भी कोशिश. की बट उसका भी ऑडिशन देने का मौका नहीं. मिला तो वो थोड़ी सी बट ठीक है अभी निकल. गया उस रेस्ट पी सुशांत सिंह. राजपूत कभी कोई ऑडिशन देने के बा पर. गुस्सा. आया हां एक बार तो. मतलब एक बार ऐसा हुआ था कि ऑडिशन मैंने.
दिया था और वो ऑडिशन ही पता चला मॉक टाइप. का कुछ ऑडिशन है किस वजह से हो रहा था. मुझे मालूम नहीं तो खुद पे भी गुस्सा आया. उन लोगों पे भी गुस्सा आया कि भाई हम लोग. पहले ही परेशान हैं ऐसे तो मत करो बाकी कई. बार ऐसा हुआ है कि ऑडिशन देने गए हैं और. वो वैसा नहीं निकला जैसा मैं सोच रहा था ज. होता ना कि एज ए एकटर क्या होता है आप. सोचना एक अलग चीज होती है आप सोच पाते हो. कि आप यह कर लोगे उसको करना एक अलग चीज. होती है क्योंकि आप जब करने जाते हो तो.
पता चलता है कितने पानी में हो क्या सुर. लग रहा है बॉडी लैंग्वेज क्या है क्या हो. रहा है क्या नहीं हो रहा है तो ऐसा कई बार. होता है कि आपने कुछ कोशिश की और वह कोशिश. वैसी नहीं गई कई रीजन होते हैं कई बार. हमसे कुछ कमियां रह जाती हैं और ऑडिशन में. यह भी होता है कि बंद कमरे में होता है और. आप नॉर्मली जो घर से पहन के गए हो उसी में. ऑडिशन दोगे सामने कैमरा होता है अब उसके. सामने आपको परफॉर्म करना होता है तो कई. बार सीन ऐसे होते हैं जिसमें क्यूज भी आ. रहे हैं तो क्यू देने वाला जो भी दूसरे की.
लाइन है वह बोलने वाला कई बार क्योंकि. उसकी भी अपनी समस्या है दिन भर यही बोल. रहा है पिछले पाच सात दिन से तो कई बार वह. अपने जीवन में वो भी तो परेशान है तो कई. बार व ऐसे ही लाइन पढ़ देता है कि हां ठीक. है आपने कर दिया तो हां ठीक है ना तो हम. हम क्या करें तुम जाओगे कि नहीं जाओगे तुम. बताओ वैसे ही पढ़ देता है तो उसी सुर प आप. रिस्प कर जाते हो बाद में ज आप देखते हो. यार गलत हो गया है तो तो कई बार होती है.
चीजें कई चीज होती है बंद कमरे में है आप. खड़े होकर स्टैटिक ऑडिशन दे रहे हैं अब जो. है ऐसे वाले ऑडिशन होते हैं जो अच्छे से. होता है ना कि थोड़ा एक डिजाइन करके मूव. कर लो जगह बड़ी है जो करना है कई बार तो. बाहर भी लोगों ने ऑडिशन लिया तो मजा आता. है टैलेंट है किस्मत बॉलीवुड में सक्सेस. में ज्यादा भूमिका किसकी टैलेंट नहीं होगा. तो किस्मत आपको जितने दिन चला रही है चला. रही है लेकिन कभी भी फॉल आ सकता है किस्मत.
अगर नहीं होगी तो अपने टैलेंट का प्रमाण. पत्र लेकर सोसाइटी में झंडा गाड़ने निकले. हो दांत चियार के टाइम बोल जाओगे पहले सही. व्यक्तित्व के समक्ष दांत निपोर ना सीखो. ज्यादा इंपॉर्टेंट है तुम किसको जानते हो. किसको पहचानते हो कौन तुमको जानता है कौन. तुमको मानता है और बड़े घर की कन्या पटाने. वाला फंडा तो ही है इसे कहते हैं पत इसके. साथ आप किस्मत भी डाल दो बिना किस्मत. के बिना किस्मत.
के लंबी छलांग जो है मुझे लगता है उसम. किस्मत का बहुत बड़ा योगदान है आपके. प्रारब्ध का बहुत बड़ा योगदान है आपके मां. मां-बाप के आशीर्वाद का बहुत बड़ा योगदान. है आपके चाहने वालों की जो प्रार्थना है. उसका बहुत बड़ा योगदान है प्रार्थना में. शक्ति बहुत होती है तो कहीं ना कहीं है यह. पृथ्वी लोक है इसे कर्म लोक कहा जाता है.
तो कर्म का फल आता है लेकिन कितना आएगा वह. आपके प्रारब्ध पर भी निर्भर करता है ब उसे. किस्मत कहिए या जो शब्द दीजिए किस्मत अगर. चान है है ना तो समझ लीजिए आप सा. है दुनिया का सबसे बड़ा दुख. क्या दुनिया का सबसे बड़ा दुख. वैसे तो ठीक है बड़ा क्लिश स लाइन है कई. चीजें हैं एक चीज तो नहीं है सबसे बड़ा. दुख मैं यह मानता हूं विश्वास का.
खोना थोड़ा सा और विस्तार. समझाओ जो विश्वास है ज व विश्वास टूटता है. बहुत पीड़ा देता. है वैसे तो बहुत सारे दुख हैं. आपके किसी अपने का जिस को आप बेहद चाहते. हो उसका. जाना. आप जिनके साथ बहुत सारी चीजें आपने सोची.
थी उसके पहले व अधूरी रह जाती हैं वो भी. पीड़ा देती है तो ये सब बड़े दुख हैं और. जो कहा जाता है. कि बेटे के जनाजे को कंधा. देना इससे बड़ा कोई भार नहीं होता एक पिता. के लिए यह चीजें हैं ऐसी कई चीजें हैं. जो मतलब इसको यह नहीं कहा जा सकता कि यही. सबसे बड़ा दुख है बट कई सारे ऐसे दुख. हैं जिसका बोझ जो है उसमें मैं यह भी.
मानता हूं विश्वास का टूट. जाना कभी किसी अनजान शख्स की तारीफ ने दिन. बनाया बड़े परेशान थे लेकिन कोई मिला किसी. ने एक लफ्ज कह दिया और हमें लगा होता है. होता है बहुत फर्क पड़ता है कुछ याद है. बहुत सारे लोग हैं पता ही नहीं चलता कि वो. कब कहां उसको बोल कि कब कहां नारायण किस. रूप में मिल जाएंगे पता नहीं पता नहीं किस. रूप में नारायणय मिल जाए तो अगर आप उस भाव.
को मानते हैं हमारे राजन जी महाराज से. गुरु जी का हुआ है अच्छा. तो अगर आप इस भाव को मानते हैं तो प्रकृति. किस तरीके से आपको क्या संदेश देना चाहती. है यह रहस्य. है कौन. व्यक्ति के दिमाग में क्या डाल के कुदरत. कुछ आपको अनुभव करा देती. है यह क्यों होता है वह क्यों का किसी को. पता नहीं मुझे तो नहीं है हो सकता है कोई.
जानता हो तो अलग बात है लेकिन जब आप डूबने. की स्थिति में होते हैं तो कहा गया ना. तिनके का सहारा भी काफी होता. है तो कई बार मैं हमेशा य मानता हूं कि. बहुत सारे लोग इसी समय जीवन में किसी ऐसी. जगह होंगे जहां उन्होंने यह गाना गा रहे. होंगे आप लौट. चले तो जीवन कुछ इस प्रकार जीए कुछ ऐसा. छोड़िए कि वो जो यह गाना गाने वाले हैं आप. लौट चले वो यह गाना गाएं चल कुछ कदम और.
चले ब्यूटीफुल द बेस्ट एडवाइस आज तक जो. मिली हो कोई एक ऐसी सलाह जिसने आपका. नजरिया बदल दिया अनुराग सर ऐसा वर्कशॉप कर. रहे थे तो वही ये भी वही है कि वो कह किसी. और को रह थे मैंने वो ले लिया तो वर्कशॉप. थी बहुत सारे लोग. थे मैं गया था वहां पे तो वर्कशॉप चल रही. थी तो ऑफिस में जा नहीं पाया उधर ही खड़ा. हो गया कोना पकड़ के तो उन्होंने ऐसा बोला. ये बात सबको कि जीवन में बहुत कुछ होता.
रहेगा मतलब लाइफ में बहुत कुछ व जैसे. बोलते हैं है ना बहुत कुछ चलता रहेगा. हमेशा ये होगा दिल टूटेगा ब्रेकअप हो. जाएगा है ना करियर में कुछ नहीं होगा या. कुछ भी होगा बस एक बात याद रखना काम करना. मत. छोड़ना तो ये मैंने धर लिया ये सच है कि. कुछ भी हो जाए आपके जीवन में कैसी भी जो. भी करना है दिन दो दिन मातम मना लो और. वापस आ जाओ काम करना मत छोड़ो तो यह मैंने.
पकड़ लिया कि कुछ भी हो जाता है कितना भी. हो जाता है काम करना नहीं छोड़ता हूं और. दूसरी एक और एडवाइस एक डॉक्टर बीपी. सिंह पापा के कलीग. हैं उन्होंने कहा था कि बेटा जब अच्छा समय. आए तो इतना काम करो कि एक दिन में सात दिन. का काम कर दो. क्योंकि जब अच्छा समय आया है उस समय ना. कुछ भी. करोगे तो अच्छा ही.
होगा और जब खराब समय आ जाए तो नई चीज शुरू. करने से बचो और जो बचा है बस उसको बचाने. की कोशिश करो काम तब भी करो कितनी कह र हो. बड़ी बात है तो जब अच्छा समय आ आ गया ना. तो मैं यही बोलता हूं कि भाई मेरे को इस. समय पहाड़ों पर जाकर चाय की चुस्की नहीं. लेनी मेरे को बताओ किधर काम करना है मुझे. बताओ कि कितनी बात रिलेटेबल भी है आप ये. सब करते रहते हो आपको एहसास नहीं हो तो. यही कर रहे हो आप. या बैट प बॉल लग रही है तो खेलो क्रिकेट.
खेलो मारो फिर निकलो क्रस से बाहर निकलो. लो रिस्क सब ट्राई कर लो आगे पीछे छ बल पे. छह लगते देखे हैं हां और तीन बॉल प. तीन विकेट गिरते भी देखा है और जब खराब. समय तो बैक टू बेसिक आ जाओ यस खराब समय आ. गया तो जो बेसिक्स है उसको पकड़ के उतना. ही खेलो रिस्क मत लेना क्योंकि रिस्क लोगे. तो हो सकता तुम्हारी बैट से बॉल लग के. विकेट में घुस जा जा रही थी. बाहर है ना वो भी होते देखा है वो भी होते. देखा है क्रिकेट की बात करता हूं वो भी.
होते देखा है कि आपने रन की कॉल. दी आपने रन की कॉल दी और आप दो कदम दौड़. के आप ही रुक गए सामने वाला आउट हो. गया कॉल आपने दी थी वो दौड़. लिया आपको लगा कि नहीं और आप भाग लिए और. वो आउट हो गया तो उसका जब सामने वाले के. खराब समय आया था तो ऐसा हो गया ओके और. बड़े प्लेयर से गलतियां हो जाती हां हां. सबसे हुई है सबसे हु यू नेवर नो मैंने. बड़े से बड़े खिलाड़ी के हाथ से कैच छूटते.
देखा जिसके हा से लगा अब तो आउट ही है. क्योंकि जो खड़ा है नीचे वो छोड़ता नहीं. उसके हाथ से छूट. गई और वह कैच भी देखे कि तो जा रहा. था भाई यह लिया जंप उसने और वह हवा में. गया बॉल हवा में फेंक दी पीछे से कोई. प्रभु आग पकड़ लिए. आट तो जब अच्छा समय आ जाए ना टेक रिस्क. वर्क मोर व जो बीपी सिंह अंकल ने बोला था. एक दिन में सात दिन का काम.
करो ठीक है भैया सब. लोग हां क्योंकि पता नहीं कब तक कैसे. चलेगा तो उसमें एक्सपेंड कर लो बड़ा कर लो. और लोगों के पास तक. पहुंचो क्यों अच्छा समय आपको लोगों तक. पहुंचाता है तो उस समय शांत म बैठिए. कोशिश इसको लेकर हम लोग भी कर रहे क्रिकेट. बड़ा पसंद है आपको हां क्रिकेट पस क्रिकेट. का क्या मतलब होता है हिंदी में लंब दंड.
गोल पिंड धर पकड़. प्रतियोगिता और मतलब इसके पीछे भी कहानी. है. के एफएम पे मतलब महेंद्र सिंह धोनी का. मैं हां जबरा मतलब जबरा बोल्ड लेटर में. लिखे वैसा वाला फैन हूं पूरा व्यक्तित्व. जो है कमाल लगता है. और वह जब खेलते हैं तो हमेशा यह लगता है. कि इफ ही इज देयर हम कुछ भी इंपॉसिबल को.
पॉसिबल कर ले जाएंगे माही है तो मुमकिन है. या माही है तो मुमकिन है तो एक गाना था. मैंने ऐसा लिखा क्या था एक्चुअली एफएम प. क्विज चल रही थी कि क्रिकेट को हिंदी में. क्या बोलते हैं तो यह जो था यह किसी ने. जवाब दिया मेरे को लगा यार यह बहुत बढ़िया. है मैंने गाड़ी कहीं साइड में लगा दी और. रिकॉर्ड किया. तो महेंद्र सिंह धोनी के व्यक्तित्व. का कहीं ना कहीं एक असर हमेशा रहा तो.
उन्हीं को ध्यान में रखकर पूरा गाना लिखा. था लंब दंड गोल पिंड धर पकड़ प्रतियोगिता. लंब दंड हो प्रच विमान सा है मारता धोनी. है रे भैया धोनी है हेलीकॉप्टर शॉट था ना. उसको विमान डाला धोनी है रे भैया धोनी है. धोनी है तो जीत होनी है. शांत चित्त हर परिस्थिति में जो खड़ा रहे. हर धरा पर अंगद के पांव सा अड़ा रहे. नीतियों के जोड़ तोड़ हर घड़ी विचार आता.
मौके पे तरकश से राम बाण मारता गोल पिंड. हुर हर दिशा में देखो उड़ चली लंब दंड है. गदा सभा जता महाबली हर हवा को काटता है. संकटों को छाट है प्रतिद्वंदी के हृदय में. मच गई है खलबली ओ माय गॉड. द धा धा धा धोनी है रे भैया धोनी है धोनी. है तो जीत होनी.
है युद्ध की हुंकार है रे ऊर्जा अपार है. मंद मंद मुस्कुरा के तोड़े अहंकार है. विश्व भर की जीत है रे फिर भी जो विनीत है. कीर्ति हों का केंद्र है रे नाम ही. महेंद्र है नील वस्त्र धारित कर जो विज. ध्वज फहराए श्वेत हरित केसरिया दस दिशा. में लहराए भारत की ख्याति जनजन तक. पहुंचाना है आज फिर इस भूमि. प आज फिर इस भूमि पर ध्वज को लहराना. है ये मैंने लिखा था धोनी है धोनी है अरे.
भैया धोनी है मिले धोनी से कभी. नहीं अबकी पहुच देंगे. ध अदभुत कौन सी दो टीम आईएल में देख रहे. हो एक तो मुंबई की टीम को देखता हूं एक. चेन्नई की टीम को देखता हूं. चेन्नई बिकॉज ऑफ महेंद्र सिंह धोनी मुंबई. बिकॉज मैं मुंबई में हूं विराट कोहली भी.
मुझे बहुत पसंद है और मैंने एक भोजपुरी. टाइप का कुछ लिखा है क्या क्या क्या बट. पता नहीं वो कैसे लेंगे लोग अरे बढ़िया. लेंगे हा चिकू चिकु आ रे हो चिकू चिकुवा. चिकू चिकु आ रे हो चिकू चिकुवा छोला भटूरा. मंगवे. चुआ ला भटूरा मंगवे चिकुवा गंगा में डुबकी. लगावे चिकुवा चिकु चिकुवा हो चिकू चिकुवा.
चिकू चिकुवा रे हो चिकू चिकुवा ऐसा करके. लिखा था बय पता नहीं लगता लोग कैसा ले. लेंगे इसलिए मैं इसको बाहर नहीं निकाल बि. लेे. इसको वारल. हो 10 मिलियन कहीं नहीं गया इस वाली रील प. नहीं हुई थी तभी यह किया था उसम एक लाइन. यह भी था लेकिन के बहुत. चिकन के ब जावे चवा लरा ऐसा करके.
पूरा च. भाई ये लिखा था तभी शादी भी नहीं हुई तब. डेट कर रहे. होंगे उसके भी मुझे लगता है पहले की बात. रही लिख के छोड़ दिया ना. सि धोनी का गाना मैंने लिखा होगा मुझे. लगता 12 14 साल. पहले लेकिन कभी यह नहीं था कि गाना बनाऊ. बन गया ऊपर वाले ने दे दिया लिख दिया रख.
दिया एज एन एक्टर वाली भागदौड़ में बहुत. सारे गाने ऐसे लिखे जो बहुत पहले लिखे. पड़े हुए हैं तब आपकी तमन्ना लगती जैसे. [हंसी]. तो बहुत सारी डिबेट देख के ना ऐसा लगा था. अब मेरे घर में टीवी नहीं है बट अभी लूंगा. क्योंकि उसी समय जो बिकी थी मुक्काबाज के.
वक्त तब से खरीदी नहीं मैंने क् डिबेट हां. मतलब मतलब मतलब जब भी मुक्काबाज का वो हुआ. था अनुराग सर ने बोला था कि बॉक्सर नहीं. बनोगे तो पिक्चर नहीं बनाऊंगा तो मुझे. लगता था कि भाई इसके पहले कि मैं यह बोलू. कि मैं ट्रेनिंग के लिए जाना चाहता हूं. पंजाब है ना तो मेरा फाइनेंस और यह सब कर. दो मैं वो सब मौका किसी को देना नहीं. चाहता था कि थोड़ा रुको बताते हैं मैं. बोला भाई इनकी मुंह से निकल गया अब इनके.
वाक्य को जो. है ऐसा कर दो कि वह खुद भी सोचे कि भाई ये. तो पंजाब पहुंच गया ट्रेनिंग करने इसको. क्या. बोले दैट दैट डे आई सोल्ड एवरीथिंग बिकॉज. आई वाज रनिंग आउट ऑफ मनी काम नहीं थे मतलब. मैंने ढाई साल में बहुत कम काम किया था. तो चीजें नहीं थी तो मैं ये मौका किसी को. देना नहीं सोल्ड एवरीथिंग उसी रात निकल. गया था रुच के साथ पंजाब बाय रोड निकले. तीन दिन. लगा तो सब टीवी भी बिक गई थी म्यूजिक.
सिस्टम काफी तपा है सोना हां मतलब ठीक है. काम आता है एस एन एक्टर कई बार होता है. किसी किसी फेज में जो चलो आप ही की. फिल्मों का नाम लेते हैं आप बताना इनमें. से आपकी फेवरेट कौन है अगली या गैंगस ऑफ. वासेपुर हा दोनों अच्छी हैं अगली के लिए. मैं यह बोलूंगा यह वही वाली बात है जो राज. कपूर साहब बोलते हैं के एक बच्चा जो कहीं. पीछे रह जाता है है ना उससे मोहब्बत. ज्यादा होती है बिकॉज अगली बहुत खूबसूरत. फिल्म थी लेकिन सम हाउ कुछ चीजें हैं जो.
मैं यहां नहीं बोलूंगा अचानक से रिलीज. करनी पड़ी और वह रिलीज भी फेस्टिव सीजन. में एक बहुत सीरियस फिल्म रिलीज हुई ना एक. बड़ा कांड हुआ था तो वो अचानक. हुआ एक्चुअली फिल्म लीक हो गई. थी और. एकदम मतलब. फुटेज एकदम वैसी वाली फुटेज जो बेस्ट ऑफ द. बेस्ट क्वालिटी एकदम ऐसा था तो अब होल्ड.
करने जैसा कुछ नहीं था तो एकदम से सारा. प्लान बना. और क्या हुआ क्यों हुआ कैसे. हुआ तो एक धड़ाधड़ एकदम से मेरे पास कॉल. ऐसी ही आई थी कि हम हफ्ते 10 दिन के बाद. रिलीज कर रहे तो मुझे लगा था ये क्या हुआ. क्योंकि पहले कई बार हुआ था रिलीज हो गई. रिलीज हो गई बट आगे जा रहा बट ये एकदम से. हुआ कि. हम द एक दिन में ही रिलीज करने वाले अगली. आप चूज कर रहे हो अगली या बेपर है कमाली.
है बट वापुर को लोग मिले इसलिए मैं बोलता. हूं कि उसके साथ खड़े होते हैं जिसको लोग. इतने नहीं मिल अगली बमबे. टॉकी दोनों फिल्में अच्छी है बमबे टॉकी तो. 100 यर ऑफ इंडियन अब एक चूज करना म रेपिड. फायर को अग टेस्ट मैच नहीं बनाते ठीक है. अगली अगली ओके अगली या फिर बॉलीवुड डायरीज. अगली अगली पिता अगली अगली सांड की आंख. अगली अगली सिया अगली अगली बाड ऑफ ब्लड.
अगली ओके अगली या फिर मुक्का. बास मुक्का. बास य तो घर दिल जान सब कुछ इसमें ओके. मुक्काबाज या फिर रंगबाज मुक्काबाज. रंगबाज बहुत पसंद की गई मुक्काबाज. बाद में बहुत देखा लोगों ने थिएटर में जब. फिल्म रिलीज हुई थी तो उतनी बड़ी संख्या. नहीं गई लोग गए देखी फिल्म लोगों ने फिल्म.
को खूब तारीफ मिली सारी चीजें लेकिन. सी मेरा अपना व्यक्तिगत अनुभव है कि आज भी. मुझे वह लोग मिलते हैं ऐसे मैसेजेस आते. हैं कि. सर कल रात को मुका बज देखिए तो उसका सनम. तेरी कसम हो गया हा तो मुक्काबाज को मुझे. लगता है 90 पर य है जिसने थिएटर में नहीं. देखी ठीक है तो वो कहीं एक अंदर एक रहता. है मुक्का बास या छावा आप बताओ अस.
वा छावा ने बहुत कुछ दिया है है ना छावा. ने मुझे बहुत बहुत ज्यादा लोगों तक. पहुंचाया लेकिन छावा का मिलना कहीं ना. कहीं मुक्काबाज से जुड़ा है अगर मुक्काबाज. ना हुई होती तो शायद छवा ना मिली होती. तो बेस तो वही है मुक्काबाज मुक्काबाज के. लिए रहता है मेरे अंदर के लोगों ने अगर एक.
टिकट खरीद के जाकर उस समय मुक्काबाज थिएटर. में देखी होती जो 90 पर से ज्यादा लोगों. ने बाद में देखी तो ऐसा ना हुआ होता. कि 2018 में मुक्काबाज हुई और आज 2025 में. खड़ा हूं मेरी सोलो थिकल रिलीज छावा के. बाद तो सब बदल गया है हम उसके पहले छावा. के पहले तक कंसीडर कर लेते 2024 31 दिसंबर. तक कंसीडर कर लेते. हैं 18 12 जनवरी को रिलीज हुई तो पूरा साल. पकड़ लेता हूं 18 19 20 21 22 23 24 सा.
साल एक एक्टर साल में तीन फिल्में. इत्मीनान से कर सकता है सा 21 21 फिल्मों. में मतलब मुक्का बास के बाद मुझे मेरी. थिकल सोलो रिलीज ऐसे बड़े प्रोडक्शन हाउस. और एक स्ट्रंग डायरेक्टर के साथ थट कल. सोलो रिलीज मुक्काबाज की कैपेसिटी. में मतलब आई होप मैं सही तरीके से कह पा. रहा हूं मैं कहना ये चाह रहा हूं.
मुक्काबाज में जिस कैपेसिटी में मैंने काम. किया था एज एन एक्टर और इतना ही स्ट्रांग. कोई बड़ा डायरेक्टर और इतना ही स्ट्रांग. बड़ा प्रोडक्शन हाउस मेरे साथ कोई ऐसी. सोलो थिकल रिलीज नहीं हो. पाई अगर आप मुक्काबाज दर्शकों से कहना. चाहता हूं अगर आपने मुक्काबाज जो बाद में. देखी. है ना कई प्लेटफॉर्म्स पर देखी या डाउनलोड. करके देखी अगर आप थिएटर में गए होते आपने.
जो भी टिकट है एक टिकट खरीदी होती तो मुझे. लगता है कम से कम आठ 10 ऐसी फिल्में में. किया. होता हां आप जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं. आपको यह कहने का मौका नहीं मिलता कि यार. विनीत क्या कर रहा है. उ लेकिन आपके ना देखने की वजह ठीक है मतलब. मेरा कोई वो बनता नहीं कि का दायित्व नहीं. बनता कि आप मेरी पिक्चर जाकर देखें लेकिन. हां अगर आप शिकायत करते हैं कि मुझे काम. क्यों नहीं मिला तो मैं दर्शकों को बोलता.
हूं कि अगर आपने मुक्काबाज थिएटर में जाकर. देखी होती. तो बहुत सारी फिल्में में और कर पाता मैं. क्यों यह कह रहा हूं क्योंकि आपकी जो एक. टिकट है वह एक टिकट किसी कलाकार. के बनते हुए करियर को अगर मकान मान लू तो. आपकी एक टिकट उस बनते हुए मकान ईट के जैसा. होता आप तय करते हो कि कैसा बनेगा मैं तो. काम हर फिल्म में दिल लगाकर करता. हूं मैं दर्शकों से यह भी कहना चाहूंगा.
मैं आपसे पूछता हूं शुभंकर भाई कि अगर. आपको यह पता हो आप जो भी समझिए कि आप ऐसे. कोई 25 लोग हैं सामने आपके खड़े जिनको आप. जानते हो. और आपको यह पता हो कि भाई यह आदमी पा लाख. रुपए मांग रहा है आपको पता नहीं लौट के. आएगा तो कितने लोग हैं आपको लगता है जो पा. लाख रुप दे देंगे बराबर उ एक दो है ना तो.
आप यह बताइए. कि जिनको आप जानते हो उन 25 लोगों में से. कोई एक आदमी जिसने चार पा लाख रुपए की. आपसे उम्मीद रखी जिसको आप जानते हो. व्यक्तिगत संबंध की बात कर रहा वहां पर जब. आपको पता होता है लौट के नहीं आएगा. तो रेयर हो जाता है कि आप वो पैसा दे. पाएंगे मैं हर दर्शक से सवाल पूछता हूं तो. कोई प्रोड्यूसर जो बिजनेस करने बैठा है वह. किसी विनीत पर क्यों पैसा.
लगाए जब उसको पता है कि इसकी पिछली. [संगीत]. फिल्म या इसके ऊपर में पैसा लगाऊ तोय पैसा. लौट के आएगा कि नहीं लौट के आएगा इसका. डाउट है तो फिर जो यह कई सारे नेपो किट. इनकी 12 फिल्में फ्लॉप हो रही है मेल. फीमेल दोनों की बात नाम नहीं लूगा लेकिन. उनको मिल रही है बैक टू बैक एक फ्लॉप हुई. दो फ्लॉप हुई ठ 10 12 15 मैं उसको ऐसे देख. मैं नेपोटिज्म में बिलीव नहीं करता शुभंकर. भाई मैं आता हूं उस बात प अपने आप छेड़.
दिया तो मैं कहूंगा बट मैं यह पूछ रहा हूं. कि कोई भी प्रोड्यूसर जो बिजनेस करने के. लिए और ऐसा भी नहीं है कि दो चार पा लाख. ही वहां लगता है और प्रोड्यूसर ऐसा भी. नहीं है मैं तो बोला था कि आप उन 25 लोगों. को जानते हो उनमें से किसी एक ने मांगा. पर्सनल रिलेशन है वहां प्रोफेशनल है सब. कुछ तो क्यों वो कई करोड़ रुपए किसी विनीत. के कंधे प लगाए अगर उनको ये लगता है कि. पैसा लौट के नहीं आएगा तो आप कर च बै हां. तो हम उनको कैसे बोले आप नहीं गए देखने. फिल्म मेरी ही नहीं किसी भी कलाकार तो जब.
वह आता है तो उनको भरोसा आता है कि नहीं. विनीत के साथ हम करेंगे या विनीत जैसे. किसी के साथ करेंगे तो संभावना है लोग. आएंगे क मेरा इसमें वि भाई आपने जो सॉरी. आप कह. बो जो दूसरी चीज है उसको मैं ऐसे देख मैं. नेपोटिज्म में बिलीव नहीं करता मैं मानता. ही नहीं इस चीज को क्योंकि मैं बनारस से. हूं मैंने देखा है. मेरे आसपास मेरी जानकारी में जिनके पिता. इंजीनियर थे उन्होंने बच्चे को मैं. नेपोटिज्म बात नहीं कर रहा हूं मैं कह रहा. हूं एक बड़े स्टार का बेटा या एक बड़े.
डायरेक्टर का बेटा अ उसकी एक फिल्म फ्लॉप. जैसे आपने कहा कि एक फिल्म फ्लॉप प दूसरा. पैसा नहीं लगा बट जो बड़े स्टार है या. बड़े उनके पिताजी बड़े रहे हैं या उनके. खानदान में कोई बड़ा रहा है या खानदान की. लेगासी रही है कई एक्टर्स ऐसे हैं जिनकी. फिल्में फ्लॉप हुई है पर्दे पर उनकी. ट्रोलिंग हुई है सोशल मीडिया भी ट्रोल कर. रहा है बट उनकी फिल्में आ रही है बैक टू. बैक बैक टू बैक बैक टू बैक बैक टू बैक आ. रही है अगली वाली फ्लॉप हो रही है पर फिर. भी आ रही है विनीत की नहीं आ रही है तो ये. क्यों पैसा तो उनके पीछे मैं बता रहा हूं. मैं बता.
रहा सी मैं थोड़ा सा समय लूंगा मैंने बोला. ना कि मैंने बनारस में देखा कि. कई मित्र या जान पहचान में ऐसे लोग थे कि. जिनके पिता इंजीनियर थे बेटे को इंजीनियर. बनाया जिनके पिता डॉक्टर थे बेटे को. डॉक्टर बनाया जिनके पिता पॉलिटिक्स में थे. उन्होंने बच्चे को पॉलिटिक्स में आगे कि. किया जिनके पिताजी गल्ले पर बैठा करते थे. कोई भी दुकान हो रेस्टोरेंट हो कपड़े की. हो या सो ऑन या मंडी हो मसाले की हो कुछ. भी मैंने उसी घर के बच्चे को उस गल्ले पर.
बैठते देखा है बल्कि वो बच्चा ये बोलता था. यार मेरे को ये नहीं करना यार लेकिन वो. बोलता था कि पापा मानेंगे नहीं तो भाई हम. तो कहां ही जाएंगे हमारे लिए यही ठीक है. करना यही है तो इतना क्लियर मैंने देखा है. लेकिन फिल्म इंडस्ट्री प ये सवाल उठता है. इसलिए क्योंकि सबको सबकी नजर रहती है राइट. अब समझिए कि अगर किसी के पिताजी डॉक्टर. हैं इसको चलिए ऐसे लेते हैं एलजी मैंने. मेडिकल पढ़ाई की है तो मैं उस हिसाब से. बोलता हूं बच्चा इतना अच्छा डॉक्टर नहीं.
है राइट अगर आप बोलते हैं कि फिल्म नहीं. चलती या जो भी मैं उसको ऐसे देखो मैं ऐसे. देखता हूं मैं किसी को नहीं बोलता आप भी. देखो कि बच्चा इतना अच्छा डॉक्टर नहीं है. फिर. भी पेशेंट को उसके पास मैंने देखा है. के पेशेंट को वह देखता है और धीरे धीरे. धीरे धीरे करते करते निखर भी जाता है सब. निखर जाए य जरूरी नहीं मेरा सवाल अल हा.
मैं आता हूं उस आता हूं आप चाहो तो मैं. स्पेसिफिक हो सवाल पूछ लेता हूं स्पेसिफिक. हो जा रहा ताकि थोड़ा और क्लेरिटी हो. जाएगी एक एक्टर है अर्जुन कपूर मुझे उनकी. श जदा अच्छी लगी थी मैंने हाफ गर्लफ्रेंड. को एंजॉय किया मैंने नोबल नहीं पढ़ी थी. मैंने टू स्टेटस एजॉय. की बट एक बड़ा वर्ग है जो कई बार उनकी. एक्टिंग की ट्रोलिंग कर लेता है या इधर कई. सारी फिल्में उनकी फ्लॉप आई उने कुछ. फिल्में मुझे बहुत अच्छी लगी है और मैं. उसको कह रहा हूं कि मुझे ए एन एक्टर वो. उनकी कई फिल्में अच्छी लगी है बट बैक टू. बैक बैक टू बैक फिल्म फ्लॉप जा रही है अभी.
भी एक ट में फिल्म आई फिर फ्लॉप. गई उनको काम मिल रहा है विनी तो काम नहीं. मिल रहा हा मैं बोल रहा हूं ना सबसे पहले. तो बोलता हूं शहजादे लोगों ने पसंद की. अर्जुन को भी लोगों ने पसंद किया कई बार. क्या होता है ना हम जो चूज कर रहे होते. हैं वो चूज करने में हमें लगता है कि यह. करेक्ट है लेकिन ऑडियंस कहीं उस चीज से. रिलेट नहीं कर पाई और वह गलती बारबार हो. गई राइट जैसे ही सही फिल्म मिलती है तो.
चीजें बदलती हैं अब अर्जुन के लिए बोलूंगा. कि स सबसे पहले तो यह बोलता हूं अर्जुन. कपूर उन एक्टर्स में है अर्जुन कपूर. ने. पर्सनली मेरा कोई इंटरव्यू देख. के ही फाइंड आउट थिंग्स एंड ही अप्रोच मी. टू. एक्नॉलेज मेरे लिए मायने रखता है ना कोई. जरूरत नहीं है अर्जुन को ये एक्नॉलेज करने.
की कि विनीत भाई मैंने यह देखा एंड आई. फेल्ट दिस थिंग्स एंड उसके बाद हमारे बीच. में खूब सारी बातें हुई. और बहुत सारे काम पर बात हुई हम मिलेंगे. भी यह ना कहीं ना कहीं शो करता. है कि हु द पर्सन इज कोई जरूरत नहीं. अर्जुन को मुझे अप्रोच करने की कोई जरूरत. नहीं है अर्जुन को यह बोलने की आई एम. फीलिंग समथिंग फॉर यू है ना एज अ पर्सन एज. अ ह्यूमन बीइंग एज एन एक्टर लास्ट वाले.
वीडियो पे हां तो. सी कहीं ना. कहीं ये सारी चीजें मायने रखती होता क्या. है का मैं काम के डिफरेंस वो जवाब नहीं पा. रहा समझ पा रहा शुभंकर कि अगर अगर जैसे. आमिर खान ने एक बहुत अच्छा इंटरव्यू है. कुछ फीमेल एक्ट्रेस बैठी होती है वो कहती. हैं कि पुरुषों के बराबर महिला को भी पैसा. मिलना चाहिए और आमिर खान मु फट होके जवाब. देते हैं कि जिस दिन बॉक्स ऑफिस से खिड़की. आपकी वजह से खुलने लगेगी या 100 करोड़ की. कूपनिंग आपको मिले आपको भी मिलेगा बट.
क्योंकि सेटअप ऐसा है कि एक्टर का नाम. सुनकर हो रहा है इसलिए एक्टर ज्यादा चार्ज. कर रहा है बिकॉज उससे कंधे बाहर ज्यादा है. और वो जवाब काफी वैलिड लगा मुझे जिसमें. इक्वलिटी की कहानी खत्म कर दी कि अगर आप. जिसके चेहरे की वजह से ब्रांडिंग हो रही. है फिर वो चाहे लड़का हो या लड़की हो या. कोई भी हो कोई लेग ऑटोमेटिक ऑटोमेटिक सारी. चीजें उसके हिसाब से तो कहीं ना कहीं ब आप. उसके साथ ही तो आगे बढ बट अगर प्रोफेशनल. रिश्ते में दो की फ्लॉप जा रही है तो. विनीत को सा साल में एस अ लीड एक्टर नहीं.
मिला बट अर्जुन को मिला विद ऑल ड्यू. रिस्पेक्ट टू अर्जुन अगेन आई एम से कि मैं. अर्जुन की फिल्में कई पसंद है आई एज. बिल्कुल मुझे भी कई फिल्में पसंद है कई. फिल्में ऐसी भी है जहां प बहुत अच्छा काम. हुआ लेकिन फिल्म नहीं चली और ये सब कलाकार. के साथ होता सब कलाकार के साथ नहीं उनको. क्यों मिल र सीधी सी चीज है कि मैं मेरी. अगर एक फिल्म फ्लॉप होती है ठीक तो मेरे. आसपास. इस तरीके की रूटिंग नहीं हैय सता राइट आप. ऐसा समझो ना कि कई पॉलिटिशियन. के बच्चे ऐसे हैं जो मतलब शायद उतना अच्छा.
पहली बार नहीं कर पाए लेकिन दूसरी बार. मौका मिला आपका फ्रेंड सर्किल उनका फ्रेंड. सर्कल डिफरेंस है मल्टीपल टाइम भरोसा कर. सकते हैं किसी के मां बाप. ने शायद दो जनरेशन से एक मेहनत की. है मेहनत करके कुछ न किया है राइट तो जो. कमाया है वो अगर उस चीज को अपने बच्चे के. करियर को आगे बढ़ाने के के लिए अगर वोह. जोर लगा रहे हैं तो क्या बुरा है क्या गलत.
है भाई सीधी सी चीज है मुझे या किसी को भी. मां-बाप अगर दुनिया में लाते हैं तो ऐसा. नहीं होगा ना कि भाई बहुत सारे लोगों के. पास पढ़ने के लिए नहीं है तो हम अपने. बच्चे को नहीं पढ़ाएंगे ऐसा कौन सोचता है. बच्चे की मेरे तबीयत खराब है तो बहुत सारे. बच्चों का इलाज नहीं हो पा रहा है तो अपने. बच्चे का भी हफ्ते भर इलाज नहीं करते हैं. कौन मां-बाप ऐसा करता है कौन मां-बाप यह. सोचता है कि यार मैं अपने बच्चे को इतनी. फैसिलिटी नहीं देता हूं हमारे यहां तो यह. कहा जाता है ना मां-बाप पेट काट के बच्चे. को पालते पोस्ते हैं हमारे यहां ये कहा.
जाता है ना अपनी नींद काट के मां-बाप. बच्चे को सुलाते हैं और बड़ा करते हैं तो. मां-बाप जो भी बेस्ट उन्होंने अपने जीवन. में अनुभव किया है और पाया है कमाया है वह. सारी चीजें बच्चे पर लगाते ही हैं ना तो. मेरे मां-बाप के पास वह स्ट्रेंथ नहीं है. इसके लिए मैं उनको क्यों. उसमें उस बच्चे की क्या गलती है वो अगर. किसी बड़े घर में पैदा हुआ किसी बड़े. स्टार के घर पर उसकी क्या गलती है मैंने. थोड़ी अर्जी दिया था मैं प्राउड फील करता.
हूं मेरे बाबा लेकिन मेरी जो सच्चाई है. मैं जिस एक हंबल फैमिली से आता हूं मेरे. पिताजी मैथमेटिशियन है वो मैथ्स ही पढ़ाते. रहे उन्होंने पीएचडी मैथ्स की की है. किताबें लिखी है बहुत कुछ है लेकिन उससे. मैं एक्टर बन. जाऊं ये तो नहीं होता ना हा उस अगर गणित. में होते तो आपको शद फायदा उने मुझे भी. बोला हा ये बोला उन्होंने कि बेटा. मैथ्स छोड़ दी जब मैंने बायो लिया मुझे तो. भागना था उनके उस चक्रव्यू से मैं शुरू से. लगा हुआ था उस दिशा में जब मैथ्स छोड़ी तो. उस परे सवाल खड़े हो गए तुमने क्यों छोड़ा.
फिर जब मैंने साइंस भी छोड़ी और भागा इस. तरफ क्योंकि मैंने कल्चर ऑनर्स ले लिया था. बीएचयू में तो फिलॉसफी वगैरह पढ़ रहा था. हिस्ट्री फिलॉसफी क्योंकि मुझे एनएसडी. जाना था तो उनके समझ ही नहीं आ क्या कर. रहा है तब बात खुली थी कि मैं एक्टर बनना. चाहता हूं तब उन्होंने बोला था ये क्या चल. रहा है तुम्हारा लेकिन तब ये सीपीएमटी. क्रैक हो गई तो मेडिकल कॉलेज में चला गया. फिर प्लान खैर उधर नहीं जाता हूं उन्होंने. भी तो बोला था ना मुझे कि एकेडमिक्स में. रहोगे तो कम से कम यह रहेगा कि मैंने जो. कुछ भी जाना समझा है तुम्हारी कुछ तो.
हेल्प कर पाऊंगा तुम ऐसी जगह चले गए जहां. मैं किसी को जानता ही नहीं तो वो भी क्या. बोल रहे थे कोई गांव देहात का लड़का आता. वो आपको प्रिविलेज मानता बिल्कुल तो ये. इसके लिए किसी को मैं क्यों बोलू भाई. मां-बाप के पास अगर रिसोर्सेस है वो अगर. उस रि मैं उधर जा ही नहीं ता सवाल कुछ और. कॉन्टेक्स्ट में था बट ठीक है आखरी. क्वेश्चन आपसे सफलता क्या है सफलता के. मायने क्या है के लिए अलग-अलग होता है. मेरे लिए है सफलता के मायने आजादी. आजादी बेहतर काम कर पाने की. आजादी इस बात की कि मैं अगर खुद के साथ.
प्रयोग करना चाहता हूं तो वह प्रयोग करने. के पूरे प्रोसेस में मुझे दूसरी तीसरी. छोटी मोटी चीजें जो बहुत ज्यादा समय मेरा. इन चीजों में गया उसमें ना उलझा रहा हूं. तो मेरे लिए यह बहुत खूबसूरत बात है कि. मुझे यह फ्रीडम मिले कि मैं मन का काम. मेरे हिसाब से कर. बाकी चीजें बाय प्रोडक्ट है आ जाती है. इसीलिए मैंने कभी ई ज्यादा नहीं रखी अपनी. लाइफ में मैं हमेशा एज पर डांस किया इसकी.
वजह से बच पाया हमेशा य होता तीन महीने का. चल गया तो मैं बड़े से बड़ा डिसीजन ले. लेता था जो लोग मेरे दोस्त बोलते भाई ये. कैसे कर लिया लेकिन मुझे हमेशा होता था. अगर मैं घर के पीछे भागा उस समय जिस समय. इतना कुछ मेरे पास नहीं है तो मैं क्या. करूंगा कि घर ले लूंगा बहुत बड़ी गाड़ी ले. लूंगा इधर उधर इन्वेस्ट कर दूंगा और. क्योंकि एक फिल्म आ गई ऑल ऑफ सडन बहुत. बड़ा पैसा आ गया अब वो जो फिल्म मैंने की. है वो फिल्म की क्वालिटी अच्छी नहीं है वह.
लोग फिल्म बना रहे हैं बट उनको इतना अनुभव. नहीं है तो उनका जोर कहां है पैसे के साथ. तो पैसा फेंक रहे हैं अब मैंने पकड़ लिया. पैसा तो मैंने अगर एक कर लिया तो सारी. चीजें बुक बुक कर दूंगा बड़ी सी एमआई खड़ी. हो जाएगी हर महीने वो ईमा की घंटी बजाए गी. दरवाजे का तो जब वो होगा तो मुझे फिर कोई. फिल्म करनी पड़ेगी छ आठ महीने के बाद तो. ये एक चक्र भी होता ऐसा मैं मानता हूं. सबके लिए ऐसा नहीं मैं मैं अपनी बात बता. रहा हूं तो फिर क्या होगा कि मैं ऐसे ना. चार पांच फिल्में अगर कर.
गया तो मेरे साथ कोई मुक्काबाज नहीं करेगा. मेरे साथ कोई छाबा नहीं करेगा मेरे साथ. कोई सुपरवाइजर मालिका नहीं करेगा तो ये हो. सके मेरे साथ कि ऐसी फिल्में मैं कर सकूं. डायरेक्टर्स मेरे साथ अगर सोच रहे हैं तो. वो आगे बढ़. सके उसकी पॉसिबिलिटी को जिंदा रखने के लिए. मैंने कभी भी ई का फटक नहीं खोला छोटी सीई. थी एक डिसेंट सी गाड़ी लेकर चल लवली. टॉकिंग ट मजा आया मुझ उमीद है आपको भी.
ठीकठाक ल हो बहुत बढ़िया था बहुत बढ़िया. था मतलब पता नहीं कितनी देर चला है मुझे. भी नहीं मालूम तनी देर भी. चला पता तो नहीं. चला. उठाया बट आप बहुत कमाल करते हो शुभंकर भाई. मैंने कई पॉडकास्ट पॉडकास्ट आपके देखे हैं. इतना लंबा पॉडकास्ट चलता है लेकिन यह नहीं. लगता कि बंद कर. दे वही वाली बात की दिल से कही गई बात थी. दिल से चर्चा हुई पहु जाती है नियत साफ.
रहती. है शायद लोग सुन लेते हैं शायद नहीं लोग. सुनते हैं सुन रहे हैं व जो आपके पिताजी. के दोस्त ने कहा था करते रहो यस अच्छा समय. जब है तो एक दिन को इतना काम करोगे ऐसा. लगे सात दिन का काम कर दिया चलिए बेस्ट. विशेस टू यू और उम्मीद करते हैं कि अगली. बार नए ऑफिस से मुलाकात करेंगे तब दी. स्टार विनीत सिंह से मुलाकात होगी हमारे. जिसे कई सोलो फिल्में रिलीज हो चुकी होंगी. यू थैंक यू सो मच बिल्कुल आपकी अगली नई. ऑफिस के लिए अभी से शुभकामना देता हूं.
क्योंकि जिस तरीके से चीजें हो रही. हैं वो तो पक्का ही है ऐसा मुझे लगता है. और बाकी 10 तारीख को आपके पिक्चर है हमा. जन्मदिन पर यस आपको जन्मदिन की बधाई मैं. दे चुका हूं 10 तारीख को आप मुझे मेरी. फिल्म के लिए बधाई दे धन्यवाद बहुत-बहुत. धन्यवाद.
