Unplugged ft. Umpire Anil Chaudhary | MS Dhoni | Rohit Sharma | Virat Kohli |About DLS Method
अंपायर ने आउट दिया। पीछे से धोनी ने ऐसे. किया।. हां।. और यह बड़ा वायरल होता है सोशल मीडिया पर. कि धोनी ने अगर रिव्यु ले लिया इसका मतलब. मामला मैच पलट। अंपायर कॉल पलटेगी। मुझे. वो धोनी का एक डीआरएस साह याद आया। युवराज. बैटिंग कर रहा था। वो बॉल लगती है और सबको. लगता है विकेट की बात सीधे गई।. अरे मैं ही था यार। टप्पा पड़ के गई थी. वो।. मेरा ही मुझे सुना रहे हो। तो ही इज क्लोज. टू एक्यूरेसी। उसको आईडिया बहुत है गेम. का। पीयूष चावला होता है कान खा जाता है।. उसको लेग में इतनी बात करता है। मैंने कहा. बंद हो यार। शिखर का भी यही हाल है। रोहित.
आपको लगता है कैजुअल है। पूरा स्मार्ट. प्लेयर है। आपकी बैटिंग से नहीं आईडिया. आता आपको। वो बैटिंग करता लगता है कि 120. पे बिंग हो रही है। दूसरा बैटिंग करे वो. 160 लगने लग जाती है।. मेरे को सहवाग की कंट्रोवर्सी याद आती है।. क्या. कि उन्होंने एक दिन असद रऊफ को ले गए साथ. में घुमाया टहलाया। बढ़िया सनग्लासेस. दिलाए, शूज दिलाए, टी-शर्ट वश दिलाई। उसके. बाद अगले दिन मैच हो रहा था। बॉल आई, ठग. से आवाज आई। उन्होंने असद रऊफ को देखा कहा. नहीं। असद राहु ने नॉट आउट दे दिया।. और ये सहवाग ने खुद बताया है।. पता नहीं कितना ठीक है। लेकिन सहवाग जब. कुछ बोले तो आप उसका 30 40% कट कर लिया.
करो जीएसटी वो भी मजाक बहुत करता है। मैच. से लेना देना नहीं होता। ज्यादा अंपायर को. बता दूं। अंपायर को रहता है अपना काम ठीक. निकले बस ये खत्म हो मैं जाके होटल में. सोऊं। लोग कहते हैं यार अंपायर परफाइन. क्यों नहीं? आप लोगों ने पांच मिनट लेट. किया। रोहित शर्मा पे लगा दिया। ऋषभ परीl. में एक मैच का बैन लगा दिया। एक. बांग्लादेश के खिलाफ मैच था।. विराट कोहली साहब बैटिंग कर रहे थे।. रिचर्ड साहब ज्यादा अंपायर थे। वाइट बॉल. जाती है. और वाइट नहीं दी जाती है। एंड रिचर्ड साहब. की हल्की सी मुस्कुराहट वाली तस्वीर जो थी. वायरल हो गई। अंपायर से लोग कई बार.
एक्स्ट्रा दोस्ती करने आते हैं।. बहुत सारे लोग आते हैं आते ही कहेंगे सर. ये जूता कहां से लिया? मैंने कहा मेरे. तेरे पास तो मेरे से भी अच्छा है। मैंने. कहा ये छोड़ दे पुराने स्टाइल हो गए हैं।. तो जब तीन दिल्ली वाले एक साथ हुए. उसके बाद दोनों ने हाथ मिला लिए। सब ठीक. बता।. उसके बाद फिर 10 साल बाद बैठ गए।. वो तो पार्किंग में लड़ाई हुई।. पाकिस्तान वाला? हां वो तो अभी आप भी. एशिया कप की बात कर रहे हो। तो बाहर हमें. तो पता लगा कुर्सियां चल रही है धाड़ धाड़. धाड़ और अगले दिन देखा कि इतने लोग पकड़े. गए इतने गिरफ्तार हुए लोगों ने झंडे के. झंडे का डंडा बना दिया.
आपने अंग्रेजी का जिक्र किया मेरे को. रिंकू सिंह वाला किस्सा याद आ गया. अच्छा जो आईपीएल में हुआ था तो अगले दिन. फिर मिले तो मैंने कहा यार तू लेना है तो. पहले ले ले बताने से यार भाई साहब. अंग्रेजी क्यों बोल रहे थे आप अरे मैंने. कहा इंग्लिश ही बोलनी पड़ती है ऊपर अंपायर. ओवरसीज अंपायर बैठा है टीवी पे यार. एमएस धोनी जब ग्राउंड पे वॉक करते हैं इस. बार बड़ी चर्चा चली कि भाई साहब शोर बहुत. होता है मैंने एक तस्वीर भी देखी रसेल के. कान में उंगली डाल. खासकर पिछले 2 साल से तो बहुत ज्यादा शोर. हो रहा है।. बट हमने ऐसे भी किस्से देखे रिकी पोंटिंग. ने अपील करी बॉल टप्पा खाए गई थी।. रिकी पोंटिंग ने कहा आउट. अंपायर ने कहा आउट बाबर रिजवान का.
रिज़वान ने अपील करी आपने आउट दे दिया बाबर. कह रहा है भाई साहब कैप्टन में हूं। फिर. बोल के नेक्स्ट डे मेरे को मिला. लिफ्ट में. हां लिफ्ट में कहता है जी वो मैं खेल रहा. हूं कल जनाब में जनाब में खेल रहा कल ऐसे. बोलते हैं ना जनाब मैं कल खेल रहा. विराट कोहली गौतम गंभीर की लड़ाई से लेकर. पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच में हुए. सुताई तक रिंकू सिंह की अंग्रेजी से लेकर. बाबर रिजवान के बीच डीआरएस को लेकर विवाद.
तक कोई अगर एक इंसान कॉमन था तो वह था. अंपायर क्रिकेट की दुनिया में अक्सर आपने. बल्लेबाज, गेंदबाज या विकेटकीपर का. इंटरव्यू देखा होगा। लेकिन आज पेश है. अंपायर। अनिल चौधरी सर. क्या हाल है आपके? ठीक है।. बढ़िया सर। खैरियत अंपायर अक्सर बड़ा. खामोश रहता है। क्रिकेट की पिच पर भी. इशारों से काम करता है। लेकिन अभी सडनली. दिखाई पड़ रहा है। Instagram खोलिए। अनिल. चौधरी सर छाए हुए हैं। ये स्क्रॉल कीजिए।. ये इधर कीजिए अनिल चौधरी।. ज्ञान बांटते चलो। जो काम आता है उसको.
समझाना चाहिए अपनी अच्छी भाषा में। और. कॉम्प्लिकेटेड होते हैं लॉज़ एक्चुअली।. आपको ऐसे एक्सप्लेन करना चाहिए कि जो उसका. इंपैक्ट है वो सारे स्टेक होल्डर्स पे. जाए। प्लेयर को भी समझ आए, एंपायर को भी. समझ आए। और रूल्स में क्या है ना अब रूल्स. तो सब लोग पढ़ सकते हैं। आप बटन दबाओ आप भी. पढ़ लोगे। उसको अप्लाई कैसे करें? उसके की. पॉइंट्स कौन से हैं? वो थोड़ा मैंने शुरू. किया है। मुझे भी मजा आता है। और जब आप. जैसे लोग भी देख रहे हैं तो अभी तो मैं. डॉक्टर अभी मेरा मेडिकल हुआ तो डॉक्टर. बोला कि मेरा कुछ देख रहा था वो। कहता है. बीपी थोड़ा ज्यादा है। और कहता है लेकिन. नोबॉल मैंने आप देखी। आपने अच्छी बनाई है।.
मैंने कहा यार मेरा बीपी देख रहा है कि. मेरी नोबॉल देख रहा है। तो मैंने कहा फिर. क्या करूं? कहता है नहीं नहीं आप थोड़ा. वकव करो। बस इतना ही कुछ।. नहीं तो जैसे हमारे ज़हन में जो अंपायर की. मेमोरीज है मैंने बिल्ली बॉर्डन को. अलग-अलग एक्सपेरिमेंट करते देखा कि वो. अपने इशारों से फेमस होते थे।. वीडियोस से फेमस होते अंपायर को मैंने. नहीं देखा। तो ये वाला थॉट कहां से आया? और किसी ने आपको टोका नहीं, रोका नहीं। और. क्या रिएक्शन आए जब आप Instagram पर. लगातार फ्लड हो रहे हैं।. मैं एक्चुअली एक दो वर्कशॉप मैंने अटेंड. करी ना इधर-उधर जाता था एज अ फैकल्टी। तो. उन्होंने कहा यार आपका समझाने का तरीका. बड़ा सिंपल है यार। आप बड़ी जल्दी समझा.
देते हो। तो मेरे को लगा फिर घर पे बात. की। मेरा बेटा वो जो भय उसने बोला कि डैडी. बना के देखो।. हम. बनाया उनको खुद ही समझ आया। मैंने कहा तुम. बताओ पहले कि तुम्हें कैसा लग रहा है।. हम. क्योंकि जो क्रिकेट खेलता है वो तो अलग. एंगल से देखता है। जो कभी-कभी क्रिकेट. खेलता है ना उसको समझ आना चाहिए। वही तो. लोग क्रिकेट देखते हैं ज्यादा। जो रोज. खेलते हैं उनको तो अपने से फुर्सत नहीं. है। तो इनको पसंद आया और हमने डाला एक 4.4. आया सीधा।. हाय शाबाश।. मैं तो पूछा इनसे ये कितने होते हैं? कहते. हैं ये तो बहुत ज्यादा होते हैं डैडी। मैं. ठीक है। जबरदस्त। आज इसीलिए हमने जो.
क्वेश्चन तैयार किए हैं उनमें कई सारे. क्वेश्चन अंपायरिंग वाले हैं।. कई सारे कर्मकांड वाले हैं और कुछ आपसे. ज्ञान लेने वाले हैं। तो शुरुआत हम ज्ञान. से ही करते हैं। सबसे पहला सवाल तो आदमी. के मन में आता है कि भाई अंपायर बनता कैसे. है? क्या होता है कि जितने भी खिलाड़ी है ना. वो ही धीरे-धीरे अंपायर देखो कोई अंपायर. बनने नहीं आता। अंपायर का तो आप खुद भी. सोचो कोई अंपायर के लिए थोड़ी तैयारी. करेगा कि आज मैं अंपायर बनूंगा लाइफ में।. जो लोग खेलते हैं उन्हें भी किसी का किसी. का इंटरेस्ट बन जाता है। आदमी थोड़ा टफ. होना चाहिए और स्किल होनी चाहिए अंपायरिंग. की। गेम की समझ होनी चाहिए। नहीं तो किताब.
पढ़ के तो बहुत घूम रहे हैं। अंपायरिंग की. एक अलग वो है। आप उसको जैसे-जैसे. अंपायरिंग करते हो पॉलिश होता जाता है।. कोई भी अंपायर बन सकता है क्या? आपको. थोड़ी एजुकेशन लेवल ठीक हो आपका। क्रिकेट. की अंडरस्टैंडिंग अच्छी हो और खेल भी आपको. अच्छा लगना चाहिए क्योंकि थोड़ा सा बोरिंग. है। मतलब लोनली वाला काम है। आप अकेले ही. होते हो। प्लेयर तो बहुत सारे होते हैं।. बात करते रहते हैं। अंपायर जनरली अकेले. घूमते रहते हैं वो और. मतलब हम अपनी टीम से डिस्कस कर रहे थे कि. चलो टी20 में तो चलो फिर भी मौज कटती रहती. है। कुछ ना कुछ हैपनिंग है। टेस्ट मैच में. अंपायर को धूप में खड़ा कर दिया गया। पूरे.
दिन खड़े रहना है।. मेरे से बहुत सारे लोग पूछते हैं धूप में. कैसे खड़े होते हैं? मैं सच बताऊं धूप में. खड़ा होना तो याद भी नहीं आता। जो बाकी जो. प्रेशर है ना वो है मुश्किल काम। धूप में. खड़ा होना तो हम जब छोटे थे मेरा ध्यान. है। 26 जनवरी देखने जाते थे। मैंने कहा ये. राष्ट्रपति जी कैसे खड़े रहते हैं इतने. टाइम। हमें क्या पता यही वाला इससे भी. ज्यादा काम हमने करना है। खड़े होने का. नहीं है इतना।. टेस्ट मैचेस में अंपायरिंग तो काफी बोरिंग. होती होगी ना कि यार पूरे दिन बैठना है।. अब राहुल त्रिवेदी जैसा कोई बैट्समैन है।. शब अख्तर आ रहा है 150 की स्पीड से वो. टक्कर दे रहा है। फिर बेचारा फ्रस्ट्रेट. हो के बॉल लेके जा रहा है। आप पर भी कुछ.
नहीं आ रहा। पूरे दिन देखना है। या पुजारा. ने 250 गेंद पे 30 रन बना दिए।. नहीं अगर आपको क्रिकेट अच्छी लगती है तो. फिर मजा आता है आपको। फिर आप दूसरी चीजों. में मस्त हो जाते हो ना। कहां पड़ी बॉल? कहां गई? और फिर जो आदमी जो काम करता है. ना वो सारा ध्यान तो अपने ही उसको मैच से. लेना देना नहीं होता ज्यादा अंपायर को बता. दूं अंपायर को रहता है अपना काम ठीक निकले. बस यह खत्म हो मैं जाके होटल में सोऊं. हम. अंपायर को बिल्कुल आज बता दूं कोई लेना. देना नहीं कौन हारा कौन जीता इंटरेस्टिंग. हो गया बोरिंग हो गया उसकी तो अपनी लड़ाई. चल रही होती है इधर बॉलर आया उधर डब डब. बॉलर की पैरों की आवाज सुनी पिचिंग हिटिंग. मिसिंग बस इधर ही ध्यान रहता है और अपना.
छह बॉल गिनी दूसरे एंड पे. और सैलरी टाइम से क्रेडिट हो जानी चाहिए. हां टाइम पे खत्म हो जाके होटल पे. एक्सटेंशन ना हो बिल्कुल भी वो जो आधा. पौना घंटा बढ़ता है ना बाद में कई बारी वो. बड़ा कि. पोस्ट मैच जो होता है. नहीं कभी-कभी एक्सटेंशन हो जाती है ना. ओवरहेड स्लो है. पता लगा और आधे घंटे खड़े हैं बीच में. इंटरप्शन आ गया पता लगा पूरा एक घंटा और. हो गया. फिर सुबह जल्दी भी उठना होता है तो इसीलिए. मेरे को तो डे नाइट बहुत अच्छा लगता. तो जैसे बैट्समैन होता है अब किसी मैच में. आउट हो चला गया फर्स्ट एट है या बॉलर है. गेंद नहीं पड़ी. उनकी गलती होती है तो उनको खूब गालियां.
पड़ती है. अंपायर एक ऐसा शख्स है जिसको डायरेक्टली. गालियां पड़ती भी है लेकिन वो बचा रहता है. लोग कहते हैं यार अंपायर परफाइन क्यों. नहीं है आप लोगों ने 5 मिनट लेट किया।. रोहित शर्मा पे लगा दिया। ऋषभ परीl में एक. मैच का बैन लगा दिया। अब लोग कहते हैं. अंपायर ने चार फैसले गलत दिए।. नहीं मैच पलट गए लेकिन अंपायर पे कुछ नहीं. होता।. अंपायर की भी तो बेचारे की रिपोर्ट होती. है ना। उसके भी तो नंबर कटते हैं।. ये किसने कह दिया? तो कैसे अंपायर का क्या होता है? अंपायर. की गलती पे क्या होता है? अंपायर गलती पे आपके जितने आप डिसीजन देते. हो उसमें आपके पॉइंट मिलते हैं ना ये ठीक. है या गलत है। उसी हिसाब से रेफरी आपको. पॉइंट देता है। वो आपकी रिपोर्ट जाती है. आगे। है ना?
उस हिसाब से आगे मैचेस में आपको मौके. मिलते हैं।. मोस्ट ऑफ़ द टाइम।. बट मान लीजिए कोई ऐसा फैसला है कि आपने. नॉट आउट दिया और उसने डीआरएस लिया वहां से. आउट हो गया।. हां होता है।. तो आपका जैसे मैंने कई सारे प्लेयर से. पूछा कि कैच छूटता है तो वो फिर कुछ देर. स्क्रीन देखना पसंद नहीं करते हैं। उन्हें. लगता है भाई कैमरा मेरे से दूर कर लो। तो. अंपायर का भी होता है कि यार कुछ देर नीचे. देखेंगे आप।. होता है लेकिन साथ में ये मैं इसको ऐसे. देखता हूं कि जब प्लेयर ने लिया और मेरा. ठीक निकला तो वही है ना।. परसेंटेज आपकी ठीक होनी चाहिए। ये ना हो. कि हर बारी ऐसे ही चल रहा है। ये कभी-कभी. होना चाहिए। फिर ठीक रहता है लेकिन आपकी.
अगर परसेंटेज अंपायरिंग ठीक है यार आप. अच्छी कॉल देते हो तो डीआरएस बैक भी तो कर. रहा है आपको. हम. नहीं तो पहले क्या था प्लेयर ने एक्टिंग. करी बड़े प्लेयर ने आप गए तो जो उसने कह. दिया वही अब तो सीधा दिखता है टीवी पे तो. डीआरएस का फायदा भी तो है. ट्रू ट्रू. क्या. डीआरएस ने आपकी लाइफ इजी की है टफ नुकसान. कर दिया. दोधारी तलवार है जी जिसको काम आता है उसको. तो मजा आ गया जिसको नहीं आता फिर वो इसमें. लगा हुआ है बार-बार दोधारी तलवार है हर. चीज के दोनों फायदे हैं. हां मतलब कई लोग कहते हैं कि अगर डीआरएस. अनिल कुंबले या वसीम अकरम के जमाने में. होता तो और विकेट होते। कई कहते हैं शायद.
कम भी हो सकते थे।. कम भी हो सकते थे। यू नेवर नो। कुछ लोगों. का बॉल जिनको अब लग रहा है कि सीधी जाती. थी उनका कैरी भी तो अच्छा होता। ऊपर से. निकल जाती आधे टाइम तो।. लेकिन तेंदुलकर के रन ज्यादा होते।. हां कई बार वो बेचारे फंस गए हैं। हां ये. तो है।. उनका तो बकनर से रिश्ता अजीब था।. तो ये भी ये भी होता है। कई बार ये खुन्नस. आती है कि यार क्योंकि. गलती हो जाती है। ऐसे नहीं होता।. बट स्टीव बकनर तेंदुलकर का बैक टू बैक हुआ. है।. हो जाता है कई बारी। कई बारी. मुलाकात हुई कभी बकनर साहब से आपकी? मैं. डीडीसी कभी-कभी वो जब टेस्ट मैचेस में आते. तो मैं लियाजन होता था। लियाजन कहते हैं.
जो नए-नए अंपायर नहीं होते तो चाय पानी. पिलाने में रहते हैं।. तब मैं देखता था तो शांत थे काफी और अलग. स्टाइल था उनका काम करने का। लेकिन काफी. फेमस भी थे। बाद के शायद दो-तीन साल और. हमारी ना एक और बात है ना हम अपने ही. प्लेयरों को देखते हैं। बाकी भी तो मैच. करते होंगे ना। क्या पता वो अच्छे करते. हो।. हम्म।. तो. अच्छा मान लीजिए किसी प्लेयर को आपने आउट. दे दिया।. अब डीआरएस नहीं था। डीआरएस दो ही दे रहे. हो आप। खत्म हो गया। अब वो आउट हो के चला. गया।. हां।. अब हो तो आप खाना पीना सब साथ में खाते.
होगे।. सब साथ ही होता है।. लिफ्ट पे मिलते होंगे। होटल कमरा एक साथ. होगा।. ब्रेकफास्ट एरिया सेम। ब्रेकफास्ट एरिया. सेम होता है।. किसी ने पकड़ा कि अनिल भाई यार क्या तरीका. है यार। भाई हर बार मेरे पे कर लेते हो. यार। तुम. नहीं वो ऐसे नहीं कहते थे। कहते हैं यार. कभी-कभी तो छोड़ दिया करो।. पर आपके ना जनरली जब आप काम करते हो आपका. परसेप्शन क्रिएट हो जाता है।. आपकी इमेज बन जाती है कि कौन सी कैटेगरी. के अंपायर हो। तो लोग ऐसी बात नहीं कोई. जेन्युइन मिस्टेक होती है तो ठीक है सर. हमसे भी तो छूटता है तो इतना जितना आप समझ. रहे हैं उतना खराब है नहीं अगर आपको आपकी.
इमेज ठीक है तो और इमेज काम करके बनती है. अच्छी बुरी जो भी है. हमने तो किस्से सुने जैसे एक किस्सा मैंने. अनिल कुंभले साहब से सुना था. कि कुंभले साहब एक अंपायर को ले गए. और नेट्स पे ले गए क्योंकि दिनभर बॉलिंग. की आउट दे नहीं रहे थे वो. तो उनको नेट्स पे ले गए कि आओ थोड़ा घुमा. के लाते हैं तुम्हें घूमने गए तो उन्होंने. बॉल करके दिखाया कहा देखो भाई मेरा मेरा. स्पिनर अलग हिसाब किताब है मेरी बॉल टपका. के सीधे जाती है. तो फिर वो अंपायर भी ऐसे हुए जो चला भी. गया साथ में देखने।. हां।. सब नहीं जाएंगे।. एंड ही सेड कि फिर अगले दिन बहुत मुझे. बहुत सारे विकेट मिले। सो आई वाज़ हैप्पी. कि ये हो गया। मैंने इनको दिखाया कि मेरी.
बॉल बाकी स्पिनर की तरह नहीं है।. मेरा थोड़ा अलग हिसाब किताब. वो काफी एक्यूरेट है वैसे बाय द वे. हम. थे मतलब हो सकता है। पता नहीं पर कौन. अंपायर जो साथ चला गया।. ऑफ द रिकॉर्ड बात होती है प्लेयर से।. हो जाती है। डिस्कशन होता है। ट्रेजेक्टरी. पे बात हो जाती है। किसी पर्टिकुलर पिच के. बारे में बात हो जाती है। लेकिन उसका मैच. में कोई फर्क नहीं पड़ता। जी। उनका अपना. काम है। हमारा अपना काम है। जो लिपट जाए. लिपट जाओ। ना लिपटे वो तो तुम कितना भी. चक्कर चलाओ नहीं लिपटेगा और उनको पता होता. है प्लेयरों को कौन लिपटेगा कौन नहीं वो. अब आने से पहले बहुत सारे प्लेयरों को पता. होता है कौन से हैंड से बॉलिंग करनी है. हम. जैसे हम जब टीवी में काम करते थे तो हमसे.
हमेशा कहा जाता था कि आप कैमरा पर्सन से. और साउंड वाले से दोस्ती करके रखना. हम. अगर इनसे दोस्ती नहीं है और मेकअप वाले से. तीन आदमी से जरूर दोस्ती रखना मेकअप साउंड. कैमरा. हम. क्योंकि आपने कुछ बाल-बाल करने लगे कैमरा. उसने आपको काट दिया आप अच्छे फ्रेम में थे. उसने कैमरा मूव कर दिया. तो तो आप एक एंकर के तौर पे इस्टेब्लिश. नहीं हो पाओगे। हमेशा आप शेकी शेकी रहोगे।. हम. अंपायर से लोग कई बार एक्स्ट्रा दोस्ती. करने आते हैं।. बहुत सारे लोग आते हैं। आते ही कहेंगे सर. ये जूता कहां से ले? मैंने कहा मेरे तेरे. पास तो मेरे से भी अच्छा है। मैंने कहा ये. छोड़ दे पुराने स्टाइल हो गए हैं। लेकिन.
अंपायर को ना कीपर से अच्छे रिलेशन लगने. चाहिए। मैं आपको सलाह दूं सारे अंपायरों. को।. क्योंकि कीपर और अंपायर मुझे हमेशा बेचारे. दोनों एक जैसे ही लगते हैं। पूरे दिन खड़े. रहते हैं। अच्छा काम करें तो तुम्हारा काम. था ही। विकेटकीपर भी कितनी मर्जी कैच. पकड़े, विकेटकीपर वो तो बोलेंगे जी बॉलर. का विकेट है। छूटते ही पकड़ लेंगे तूने. कैच गिरा दी मेरी। अरे दिन में 10 पकड़ी. वो तो देख लो। तो कीपर अंपायर भी ऐसा ही. है। पूरे टाइम अंपायरिंग करेगा। एक वाइड. हो जाए गलत। और टीम हारे 150 रन से उसके. पीछे पड़े रहते हैं। यहां पे वाइड गलत दे. दिया। भाई 150 कहां से बने वो तो देख लो।. तो बेचारे कीपर और अंपायर मुझे एक जैसे.
दोनों भाई लगते हैं। तो दोनों को बातचीत. करते रहना चाहिए।. मेरे को संजू सैमसन की याद आ गई। अभी. श्रीलंका दौरे पर बेचारे से एक कैच ड्रॉप. हुआ था।. हो जाता है।. ज़ीरो उसने बनाए थे और सारा पूरा Twitter. जो था बेचारे उसे एक कैच जब पड़ा था। एंड. आई वाज फीलिंग सो बैड फॉर हिम कि यार छोड़. दो भाई बख्श दो। ऑलरेडी रन नहीं बने हैं।. हो जाता है यार। देखो सब अपने एफर्ट मारते. हैं। लेकिन यही अंपायर का काम है। यह. प्लेयर का गलती हो जाती है कभी-कभी। मशीन. थोड़ी ना है।. अच्छा जैसे बड़े खिलाड़ियों का हिसाब. किताब अलग होता है। कई बार हमने देखा जैसे. एक बांग्लादेश के खिलाफ मैच था।. विराट कोहली साहब बैटिंग कर रहे थे।.
रिचर्ड साहब शायद अंपायर थे। बांग्लादेश. का मैच चल रहा था और 99 या 98 वो खेल रहे. थे और एक वाइड बॉल जाती है।. और वाइड नहीं दी जाती है। एंड रिचर्ड साहब. की हल्की सी मुस्कुराहट वाली तस्वीर जो थी. वायरल हो गई। और लोगों ने कहा यार यह तो. थोड़ा फैन मूवमेंट हो गया। यह वाला इंडियन. इंडियंस ने मौज काटी। लोगों ने कहा कि. इनको आधार कार्ड दे दो। अब. मैंने भी देखा था वो वीडियो।. तो ये कैसे मूवमेंट्स होते हैं सर? क्योंकि ये एज अ इंडियन हमें तो बड़ा मजा. आया क्योंकि हमारा खिलाड़ी था। बट ये वाइस. वसा होता तो शायद हमारा दिमाग खराब होता. कि यार ये क्या तरीका था?
मेरे ख्याल अंपायर को तो अंपायरिंग करते. रहना चाहिए। उसको इन सब क्रों में पढ़ना. नहीं चाहिए।. एंड ही स्माइल्ड आल्सो द बेस्ट पार्ट. रिचर्ड साहब ने हल्की सी स्माइल दे दी।. क्योंकि ऑलरेडी इंडिया वाले पीछे पड़े. रहते हैं उनके।. तो ये खबरें आप तक भी पहुंचती है।. दिखती तो ना जो रीला आप लोग बनाते हो हम. हम कौन सा फोन थोड़ी बंद करेगा हमारे पास. भी आती है।. मतलब रिचर्ड साहब एक्चुअली वो हां मतलब. मनूसियत वाले बड़े चल रहे थे यार. कुछ इंसिडेंट ना मैच में ऐसे होते हैं कई. बारी वो फिर याद रहते हैं उनको कोई बहुत. मतलब नहीं होता उसने कुछ ऐसा नहीं कि. बेचारे ने कुछ सोचा होगा मन में होगा वो.
हो जाता है बस हो जाता है कुछ चीजें ऐड ऑन. हो जाती है फिर वो किस्से बन जाते हैं और. क्या. नहीं 2023 वर्ल्ड कप में शायद फाइनल में. भी वो थे और जब फाइनल में उनका नाम आया तो. हम लोगों ने सबने माथा पकड़ लिया हमने कहा. नहीं नहीं इज अ गुड अंपायर यार।. नो ही इज़ अ वै गुड अंपायर।. ही इज़ अ वै गुड अंपायर। इंडियंस को लेके. अब तो इंडियंस मानते हैं कि हमारे ही. अंपायर हैं।. नहीं नहीं अच्छे अंपायर है वो।. लेकिन उसके बावजूद. वो कई बारी टोटका बन जाता है ना।. 2019 वर्ल्ड कप बैक टू बैक जितने बड़े. टूर्नामेंट हुए 19 से 23 के बीच में. अनफॉर्चुनेटली अनफॉर्चुनेटली हर बार वही. खड़े होते थे।. वो फिर इंसिडेंट ऐसे बाय चांस बैक टू बैक.
हो जाते। हम नहीं होता कि एक बार घर से. निकले यार राइट खोलें कि लेफ्ट खोलें वो. फिर ऐसे ही है।. तो आप लोग तो मौज काटते होगे ना आपस में।. मस्ती लेते हैं। हम भी तो तुम्हारी तरह ही. हैं यार।. तो कभी आपने रिचर्ड साहब से कहा ऐसे कोई. बात. डायरेक्टली तो नहीं कहा पर मस्ती चलती. रहती है।. अच्छा अंपायर बड़ा सीरियस किरदार दिखता है. ग्राउंड पे।. तो बाहर आके हम सब बराबर कर लेते हैं।. सारे अंपायर सीरियस नहीं होते। कौन कह रहा. है सारे सीरियस होते हैं।. हम. तो ग्राउंड पे कभी आपने मौज काटी? ग्राउंड में ऐसे कुछ इंसिडेंट नहीं आते. ना। एक्चुअली हम जहां अगर हम मस्ती करेंगे. तो फिर कंट्रोल चला जाएगा मैच का। फिर तो.
प्लेयर तो और ऑलरेडी मस्ती के मूड में. होते हैं। पता है छोटी-मोटी स्माइल. हल्काफुल्का यू नो आइस ब्रेकर चलता रहता. है। अच्छा रहता है मैच के लिए वो। वो वो. अच्छा रहता है स्विच ऑफ स्विच ऑन के लिए. नहीं तो पागल हो जाएंगे सारे प्लेयर भी. पागल हो जाएंगे अंपायर भी पागल हो जाएगा. नहीं तो जैसे आपने कहा ना कि ब्रेकफास्ट. टेबल लीक होती है आपकी. अब आप साथ बैठे खा रहे हो. हम. साथ में घूम रहे हो कई बार ऑफ द रिकॉर्ड. भी कहीं बाहर गए अब एक शहर में हो तो आप. इंडिया गए तो आप भी घूम रहे हो वहां पे तो. दोस्ती आ रही है तो हो ही गई WhatsApp. नंबर चेंज हो गया Facebook या इंस्टा पे. जोड़ लिया एक दूसरे को. हां. अब मैच के बीच में चल रहा है ऑफ द रिकॉर्ड.
आपकी दोस्ती है. कभी ऐसा हुआ कोई खिलाड़ी धीरे से आके आपको. कुछ मतलब छेड़ के चला गया हंसीज़ाक में या. आप छेड़ गए. खूब होता है कोई किस्सा याद है आपको? ऐसा. कुछ बताओ मुझे। किसी के साथ आपकी दोस्ती. बॉन्डिंग ऐसी हो कि आपने हल्का सा हंसी. में. ऐसा वो है ना ऋषभ ने एक दिन मैं पता नहीं. कहां पे था ऋषभ ने मेरे पीछे से हाथ घुमा. के देखा मैं कौन है तो ऋषभ पंत है। एक. बारी वो टेस्ट मैच में कुछ हुआ क्या स्पिन. हुआ बॉल उसने स्टंप किया। स्टंप था नहीं।. उसको भी पता था वो विकेट लगाने लगा तो. क्या होता है? स्क्वायर लेग वाला अंपायर. चल के आता है। तो नितिन मैनन स्क्वायर से. आने लगा था। तो इसने इतने में लगा लिया।.
तो मैंने बोला थैंक यू। कहता जी पैसे दो. मेरे।. तो फिर बराबर से निकला था। मैंने कहा. ज्यादा मस्ती रहता नहीं नहीं भैया मजा आ. रहा है वहां ठीक है वो मैच शायद दो दिन. में ही खत्म हो गया था इंडिया इंग्लैंड. टेस्ट मैच था पिंक बॉल टेस्ट मैच तो वो. चलता रहता है वो दिल्ली वाले हैं दिल्ली. वाले आपस में थोड़ी ज्यादा कर लेते हैं. स्टाइल एक होता है ना बॉडी लैंग्वेज आई. कॉन्ट्रैक्ट वो चलता रहता है लेकिन उसका. मैच से कोई लेना देना होता नहीं है और मैं. बताऊं हम जनरली जो बात करते हैं लोग पता. नहीं क्या सोचते होंगे हम क्रिकेट की बात. ही नहीं करते. फिर क्या मैदान में बातें. मस्ती ट्रेवल की बात कर ली शॉपिंग कहां.
अच्छी हो रही है. ये मैदान पे चलता है. हां चल जाता है और क्या अरे वो भी तो. प्रेशर में है उनको भी तो कुछ और बात करने. को. किससे आपने बात की शॉपिंग कहां करने वाले. बहुतों से बात पीयूष चावला होता है कान खा. जाता है स्क्व इतनी बात करता है मैंने कहा. बंद हो यार शिखर का भी यही हाल है गप्पे. मारते रहते हैं नहीं तो खेलतेखेलते पागल. हो जाओगे यार 24 घंटे क्रिकेट थोड़ी. बट यहां तो हम तो ऐसे बैठ के देखते हैं. ऐसे ऐसेसे उंगलियां चबातेचबाते कि यार. क्या चल रहा है ऐसा हो रहा है वैसा हो रहा. है. और आप कह रहे हो शॉपिंग की बात कर रहे हो. हां एक बार जैसे हम दुबई में थे ये जब. कोरोना चल रहा था. तो तब तो दर्शक तो थे ही नहीं तो विराट ही.
था स्क्वायर लेग पे तो कोई था ही नहीं कह. रहा जी मजे मजा ही नहीं आ रहा बिना. आदमियों के तो ऐसे ही था हम भी पूरा है ही. कोई नहीं एक खाली एक वैन खड़ी हुई थी जो. मेडिकल वाली होती है सात आठ आदमी वो बस. बाकी कोई भी नहीं बस हम ही थे आर्टिफिशियल. आवाज चल रही थी तो बोला जी कोई है ही नहीं. तो क्या मतलब सेम फीलिंग होती है सबकी. हमें भी तब पहली बार कि बिना भीड़ के भी. मैच हो रहा है तो विराट ने बोला बिल्कुल.
कोई है ही नहीं जी मजा ही नहीं आ रहा सच. बात है. वैसे विराट कोहली के आसपास कई बार आप रहे. हैं. हम हम लोग दिल्ली के ही हैं। बातचीत करते. रहते हैं। पंजाबी, हरियाणवी, हिंदी चलती. रहती है।. तो जब तीन दिल्ली वाले एक साथ हुए. हां जी हां जी।. हालांकि अब तो भाईचारा ऑन टॉप चल रहा है।. तब भी टॉप ही था यार ये तो आप लोग. हां सही कह रहे हो सर। हमने ही तो लड़वाया. था जा के वहां पे।. नहीं उसके बाद दोनों ने हाथ मिला लिए। सब. ठीक तो था।. उसके बाद फिर 10 साल बाद भिड़ गए।. वो तो पार्किंग में लड़ाई हुई।. पार्किंग की लड़ाई क्या होती है आप? ग्राउंड के बाहर।.
आप पार्किंग बता लोग सोचेंगे कि बेसमेंट. जा कहीं मारपीट कर रहे थे मैच में. वो क्या था वहां इतने सारे आदमी थे यह भी. नहीं पता था कौन किसको क्या कह रहा है तो. मेरे से कोई पूछता मैंने कहा पार्किंग में. गाड़ी पार्क करने पे कौन किसकी गाड़ी किधर. कुछ कहां पता क्या आवाज आ रही है वो तो. मैच के बाद उनकी उसमें बहुत सारे लोग थे. 50 आदमी थे वहां पे. चलो ये वाला हटा देते हैं. पिछला वाला उठाते हैं. जी. एकदम 2013 आई थिंक. तब तो दोनों जवान बचे. दोनों जवान थे विराट कोहली गौतम गंभीर. दोनों अग्रेसिव क्रिकेटर वर्ल्ड कप जीत कर. दोनों आए थे केकेआर आरसीबी तब से राइवलरी.
जो शुरू हुई अब तक खत्म नहीं हुई। इस बार. भी गंभीर ने कह दिया था कि हराने में मजा. आता है।. नहीं. तो 2013 में क्या उस आपको कुछ याद है उसकी. मेमोरी? आई एम श्योर याद होगी सर।. मेरे को ऐसा कुछ ध्यान है कि किसी ने शॉट. मारा, दूसरे ने कैच पकड़ा और नॉर्मल. सेलिब्रेशन टाइप था। एक तो वहां इतनी नॉइज़. होती है ना कई बारी आपको एग्जैक्ट नहीं. पता लगता क्योंकि हम लोग अपने उसमें रहते. हैं और वो थोड़ा क्लोज आए फिर हम लोगों ने. हटा दिया। फिर वो चले गए।. बट आप लोगों को तो मजा आता होगा ना ऐसे. कररेक्टर्स के आसपास रह के।. नहीं है बल्कि. थोड़ा फन लविंग ऐड अब एक्चुअली जनरल हमें.
आईडिया रहता है कि अब क्या होने वाला है।. बहुत क्योंकि क्या होता है कि अचानक तो. बड़े कम काम होते हैं। धीरे-धीरे बन रहा. होता है। माहौल बनता है धीरे धीरे-धीरे तो. हल्का सा आईडिया आना शुरू होता है कि भाई. उधर ही रहो और अंपायर को ना जल्दी से ऐसी. जगह चले जाना चाहिए खुद पर्सनली। क्योंकि. क्या होगा वहां विज़िबल रहोगे ना प्लेयरों. के बीच में तो एक लिमिट से ज्यादा होती. नहीं है।. और यार थोड़ा बहुत तो अग्रेशन होता ही है. ना क्रिकेट।. तो जैसे ये लखनऊ वाला कांड जो हुआ था लखनऊ. में फिर बोर में खूब आईपीएल में चला था।. एलएसजी और आरसीबी के बीच में तो पूरे मैच. इंपॉप हुआ था। इसमें अंपायर इसमें आप लोग. रोक चाहते तो रोक सकते थे.
क्योंकि वो तो थ्रू आउट द मैच भी चल रहा. था लेकिन. यार देखो आप आप बॉलिंग करोगे अपील करोगे. बैट्समैन है वो भी शॉट मार के थोड़ा बहुत. तो रहता ही है कोई कैरम बोर्ड थोड़ी खेल. रहे हैं इतना अग्रेशन तो होना भी चाहिए ना. वरना क्रिकेट देखेगा कौन हां एक एक. गाइडलाइन है उसका आगे मत जाओ थोड़ा तो. अग्रेशन से खेलोगे नहीं तो बहुत सारे. प्लेयर हैं अगर वो अग्रेसिव नहीं खेलेंगे. वो परफॉर्म भी नहीं कर पाएंगे बता रहा हूं. आपको मैं वो हर एक का स्टाइल है खेलने का. भाई. अब जैसे दिल्ली वालों को लेके मशहूर है कि. दिल्ली वाले उनके लिए गालीगाली नहीं होती. दिल्ली नहीं जब आप दिल्ली कहते हो तो मैं. इसको नॉर्थ कहता हूं।. हां।.
यह नॉर्थ और सेंट्रल का बिहेवियर ही ऐसा. है। सारी लड़ाईयां तो हमारी साइड ही हुई. हैं। बाकी जगह तो हम तो फिर वैसे ही रहता. है ना उनका। अप्रट भी होते हैं। साफ बोलते. हैं। अंदर कुछ रहता नहीं। तो उसको कोई. लड़ाई कह ले या उसको साफ बोलना कह लो। वो. तो हमारे कल्चर में ही है।. तो जैसे रोहित शर्मा वाला हुआ कि कोई. गार्डन में नहीं घूमेगा।. ठीक है ना? मैच में तो रहना चाहिए ना यार. ऐसे। अब अगर आप सीरियस नहीं हो तो फिर. कैसे होगा? अगर आप मैच में इन्वॉल्व्ड हो. तो थोड़ी बहुत रिएक्शन तो आएगी ना आपकी।. आप आपने इंडियन प्लेयर्स में जो अभी. इंडियन लॉट है जब आप अंपायरिंग करते हो. आईपीएल में या इंटरनेशनल क्रिकेट में बटरल.
सीरीज में आपने इनमें सबसे एंजॉय किया वो. विराट कोहली वाला दिल्ली वाला या रोहित. शर्मा का बॉम्बे वाला कल्चर क्योंकि कई. लोगों को बड़ा ऑकवर्ड है जैसे नितीश राणा. का इंटरव्यू देख रहा था मैं ही सेड जब. मैंने पहली बार इतनी गाली सुनी मैंने कहा. ये झेल कैसे लेते हैं देन आई रियलाइज कि. नहीं नहीं ये इनका कल्चर है जिसमें सब खुश. हैं. पर बॉम्बे का स्टाइल ही ऐसा है एक्चुअली. बॉम्बे में ना तू करके तो बात करते हैं. नॉर्मल स्टाइल है. तो जो जाता रहता है ट्रेवल करता है उसको. आईडिया है ऐसे ही जैसे दिल्ली का कोई होगा. तो एक दो चीज तो हमारे मुंह से शुरू में. निकल जाती है सुबह उठ देखो वो कह के देखो. क्या धूप निकली आज यार वो तो फिर क्या. करें उसको कोई गाली कह ले अच्छा अंग्रेज.
जब कोई बोलता है वो जो वर्ड बोलते हैं वो. ठीक है. बिल्कुल नहीं ठीक. ये गलत है तो फिर उनके लिए अलग पैरामीटर. इनके लिए अलग हर एक का अलग कल्चर है यार. कोई साउथ में अलग तरीके से बोलते हैं. हम. उधर बॉम्बे में महाराष्ट्र में अलग तरह से. बोलते हैं नॉर्थ में अलग तरह से बोलते हैं. हर एक का अपना है ना बस सबको ये पता होना. चाहिए कि कब कहना है और किसी का मीनिंग. चेंज ना हो गलत टाइम पे यूज़ ना करो बस. इतना ही है बाकी आदमी जब नेचुरल होता है. तो जो जो उसकी मदद टंग है वो निकलता ही है. ना मुंह से अब वो नकली जिंदगी जीनी तो. जीते रहो उससे ना तो आप प्लेयर अच्छे.
रहोगे और दिखावटी एक्टिंग करके आप थोड़ी. ना शरीफ हो जाते हो और किसी ने कोई साफ. बात कह दी तो क्या है बस सबको एक चीज. ध्यान रखनी चाहिए हमेशा मैं कहता हूं हर. एक चीज का बॉर्डर है उससे आगे मत जाओ और. आउटडोर गेम है भाई थोड़ा अग्रेशन तो रहता. ही है. नहीं तो फिर टाई लगा के तो खेलेंगे नहीं. कह रहे लो सर मैं आ गया आप बॉलिंग करो मैं. बैटिंग करूंगा फिर वो बैटिंग करेगा सर. अच्छा मैं बॉल उठा लेता ऐसे थोड़ी क्रिकेट. होगी आउटडोर गेम है भाई पसीना बहाते हैं. लोग 150 पास बॉल आती है। फिर आदमी शॉट. खेलता है। 1 लाख आदमी चिल्ला रहे होते. हैं। सब मशीनें थोड़ी खेल रहे हैं। आदमी.
खेल रहे हैं। बस सबको मैं हमेशा कहता हूं. कि ठीक है ये लिमिट से आगे नहीं। दैट्स. इट।. आपके अंपायरिंग में सबसे मेमोरेबल मोमेंट. कौन सा रहा? किस सेंस में मतलब बहुत सारे हैं। जी।. चलो पहले शुरू करते हैं वेस्ट जैसे। मुझे. ये एजाज पटेल वाला।. 10 विकेट? हां मेरे एंड से थी। अभी बॉम्बे जो टेस्ट. मैच था इंडिया न्यूजीलैंड। हां।. 10. धीरे-धीरे बाद में याद आई कि हां 10 हो गई. यार। 10 हो गई। दोस्तों मेरे एंड से थी और. मैं ये वाले एंड पे था व्हिच इज़ फार एंड. जिसको बोलेंगे पवेलियन के अपोजिट वाला।. आपने भी कार्ड में छपवाया? नहीं जी नहीं।.
अनिल चौधरी 10 विकेट दे।. किसी ने छपवाया था क्या? इसका मतलब किसी. ने आपको पता सारी है ना आपने पूरी अपडेट. रखी हुई है अंपायरों की। नहीं मैंने नहीं. छपवाया और. मतलब दो ही तीनों और वो. उससे पहले दो ही लोगों ने लिया है।. हां वो मेरी विकेट नहीं थी। वो सारी बॉलर. की थी जी। तो मैं क्यों छपवाऊं? किसी ने छपवाई थी सर।. अब आप जब कह रहे हो तो आपको पता होगा मेरे. मुंह से क्यों खिलवा रहे हो। बट वो आई. थिंक ये इन सब चीजों से बचना चाहिए।. कुमले साहब के टाइम पे एक किस्सा हुआ था।. बचना चाहिए। ये सब कार्ड छपवा के बैठ जाओ।. अच्छी बात नहीं है।. तो ये क्या शो ऑफ शो ऑफ के लिए क्या कि या.
हिस्ट्री के लिए या एक्साइटमेंट अंपायर की. भी. शायद तब पहली बार हुआ था ये भी रीज़न है।. नहीं दूसरी बार था। उससे पहले भी एक बार. हो चुका है।. अच्छा हो चुका था क्या? हां।. तो मुझे तो नहीं पता था।. हां। उससे पहले भी इंग्लैंड के शायद एक. बॉलर ने लिया था। जितने स्टेट. मेरा यह मानना है कि मतलब बहुत पहले मेरे. को ध्यान है पता नहीं मैं किसी वर्कशॉप. में था या किसी टूर्नामेंट के शुरू में तो. बिन सिंह बेदी थे उनका बड़ा सेट स्टाइल था. टूर्नामेंट से सेल ट्रॉफी होती थी मीटिंग. होती थी पहले सब दो-दो टिका लो फिर वो फिर. डिस्कशन शुरू होती थी पर उन्होंने इतनी. अच्छी बात की मेरे को हमेशा याद है.
उन्होंने कहा अंपायर के आउट देने का तरीका. ऐसा होना चाहिए कि लगे कि वो खुद आउट नहीं. हुआ और जब वो आउट दे यह भी ना लगे कि उसने. आउट कर लिया तो बैलेंस होना चाहिए तो यह. सब बिहेवियर ना अंपायर के बड़े बैलेंस. होने चाहिए क्योंकि आपने मैच कंडक्ट करना. है। हंसीज़ाक ठीक है। लेकिन आप किसी ऐसे. तरीके के किसी एक्शन में लग जाओ कि लोग. कहें यार यह क्या मजाक चल रहा है। उससे. बचना चाहिए। काम सारे करने चाहिए। लेकिन. आपको अपने बॉर्डर अपनी लिमिट और उस जॉब की. जिस जॉब में आप हो उसका जो आपका कंडक्ट है. ना उसी हिसाब से होना चाहिए। यू गॉट टू बी. स्विच ऑन स्विच ऑफ।.
नहीं तो फिर आप नहीं तो आप प्रोफेशनल कैसे. हुए थे? ट्रू। ये तो हो गया 10 हिस्टोरिकल पॉइंट. ऑफ व्यू से। जी जी. कर्मकांड के हिसाब से. वो क्या जी. मतलब जब सबसे सारा ग्राउंड पे बवाल हुआ. आपके हिसाब से करियर में. ऐसा क्या हुआ वो तो एक लोकल टूर्नामेंट. में. पाकिस्तान वाला. हां वो तो अभी आप इसकी एशिया कप की बात कर. रहे हो. हां वो जिसने क्या नाम है नाम भूल जाता. हूं मैं जो उसने मारे. तो बाहर हमें तो पता लगा कुर्सियां चल रही. है धाड़ धाड़ धाड़ और अगले दिन देखा कि. इतने लोग पकड़े गए इतने गिरफ्तार हुए.
लोगों ने झंडे के झंडे का डंडा बना दिया. मतलब एक टीम वाले झंडे लेके आए थे तो उसका. झंडा निकाल क्रिकेट दूसरी टीम ने डंडा बजा. दिया उनसे बाहर बहुत ममारी अफगानिस्तान का. मैच चला. हां जी हां जी शारजा में मैच था बहुत. ममारी बाहर हुई तो मतलब. मैच के बाद हमें मैच के बीच में ही पता. लगना शुरू हो गया था करीब दो तीन ओवर पहले. शुरू हो गया था बाहर खींचातानी चालू तो. स्क्वायर लेग पे थे तो थोड़ा ध्यान जाता. था मैच बहुत टाइट था लेकिन आपके बिल्कुल. शारजा क्या छोटा ही है ग्राउंड ना. हम. और जो क्राउड है बहुत पास है तो बिल्कुल. पास में ही हो रहा होता था ये क्या चल रहा.
है तो वो बड़ा अजीब था मैंने कहा लग रहा. है ये भाई. और नेक्स्ट डे तो फिर और भी बवाल हुआ। फिर. फिर आई थिंक फाइनल के लिए अलग से पूरे. सिक्योरिटी जजमेंट थे क्योंकि मेरी वाइफ. भी मैच देखने गई थी। वो बोल रहे कि लाइन. है इतना लंबा मतलब वीआईपी टिकट के बाद भी. बहुत देर से अंदर गए और उन्होंने नेक्स्ट. डे टीशर्ट्स पे भी कुछ रखा हुआ था कि मतलब. जो टीम खेल रही हैं सिर्फ उन्हीं की. टीशर्ट होनी चाहिए। इंडिया वाला कोई पहन. के ना आए या कोई अफगानिस्तान का ना आए। तो. ऐसे कुछ अगले दिन बहुत सिक्योरिटी थी वहां. पे।. एक जमाना था सर कि इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया.
की राइवलरी थी।. हम. इंडिया पाकिस्तान ही चलती थी। अब आप मानते. हो कि नहीं एशिया में भी डायनामिक्स चेंज. है ना श्रीलंका पाकिस्तान देखो आप नहीं. सॉरी श्रीलंका बांग्लादेश. श्रीलंका बांग्लादेश नागिन डांस. और बांग्लादेश और पाकिस्तान जब मैंने. एशिया कप किया था उधर बांग्लादेश में तो. आई कुड मेक आउट कि क्या उनका है और अभी एक. नया शुरू हुआ है पाकिस्तान अफगानिस्तान. इनके मैच भी बड़े टाइट होने लगे हैं ये. मैदान के अंदर भी या बाहर भी. अंदर का ही पता है बाहर का तो आप लोगों को. ज्यादा पता है अंदर भी टाइट रहता है मतलब. मैच करने में मजा आता है कि हां आज मैच है.
तो जैसे अफगानिस्तान पाकिस्तान मैच का. आपने जिक्र किया। अब ये भी तो हिंदी बोलते. होंगे।. हां, सेम लैंग्वेज. इनकी लैंग्वेज आपको समझ में भी आती होगी. अच्छे से। तो क्या. इनफैक्ट इन्ह कुछ ज्यादा इंग्लिश बोलो तो. बस ऐसे कहते हैं यस। हम समझ जाते हैं नहीं. समझ आया फिर दोबारा बोलना पड़ता है।. तो जब वो कोई आदमी ना बिना अभी सेंटेंस. पूरा नहीं हुआ बीच में कहते हैं यस।. तुम्हारा हो गया काम। फिर दोबारा बताना. पड़ता है।. [संगीत]. ये पाकिस्तान अफगानिस्तान वाली जो सीरीज. थी बड़ी लाइमलाइट में आई थी। बिकॉज़. दो-तीन क्लोज मैचेस हुए थे। अफगानिस्तान.
हार गया था। क्या इंटेंसिटी होती है? क्या. लाइक आपस में एक दूसरे पे कैसे फूल बरसाए. जाते हैं? इनके यहां तो ये सेम गाली देते. हैं जो हम लोग देते हैं।. सेम सेम हमारे वाले ही हैं।. वो भी बें स्ट्रोक्स को याद करते हैं।. हां बिल्कुल बिल्कुल ज्यादा वाली बल्कि. पूरा पर वो एक टाइम पे आके फिर अगर वही ना. मैं बोला अंपायर दो तीन चला जाए ना बीच. में तो रुक जाते हैं फिर।. वो नहीं मैं कुछ नहीं कह रहा सी जी। तो. मैं कहा मैं भी कुछ थोड़ी कुछ कह रही सी।. आपने अंग्रेजी का जिक्र किया। मेरे को. रिंकू सिंह वाला किस्सा याद आ गया।. अच्छा जो आईपीएल में हुआ था।. हां। रिंकू भाई है। क्या हुआ था सर वो?
कुछ नहीं वो आई थिंक आउट दिया उसको अनंता. पद्माना ने आउट दिया। तो उसको डाउट था कि. मैं ले लूं। वो दूसरा बैट्समैन नाम भूल. जाता हूं मेरा बड़ा प्रॉब्लम है। वो वो भी. गोरा ही था। तो ये लोग लगे हुए थे इधर से।. क्या होता है जब दो-ती सेकंड बचते हैं तो. हम लोग जाके बताना शुरू करते हैं कि ले लो. भाई नहीं तो वो खत्म हो जाएगा। जस्ट टू. अवॉयड कंट्रोवर्सी। तो मैं निकला ऐसे. मैंने भी बोला उनको पता नहीं क्या उनको. समझ ही नहीं आया।. हम. वो खत्म हो गया। फिर वो कहता है जी मेरे. को चाहिए। वो तो 3 मिनट ऊपर चले। मतलब तीन. चार सेकंड सेकंड चले गए आगे। मैंने कहा अब. नहीं ले सकते आप लोग। मना कर दिया वो चला.
गया। ही वास नॉट हैप्पी।. हम. वो अलग बात है कि रिप्लाई आया तो जो उसने. अनंता ने दिया था वो ठीक ही निकला। तो. अगले दिन फिर मिले तो मैंने कहा यार तू. लेना है तो पहले ले ले बताने से। यार भाई. साहब अंग्रेजी क्यों बोल रहे थे आप? अरे. मैंने कहा इंग्लिश ही बोलनी पड़ती है। ऊपर. अंपायर ओवरसीज अंपायर बैठा है टीवी पे. यार। तो बड़ा मजा आया। वो भी बड़ी जोर से. हंसा। तो मैंने कहा तेरा पार्टनर भी तो वो. था। कहता मेरे को तभी तो समझ नहीं आया ना।. उधर का समझ आ रहा ना। इधर समझ आ रहा।. हालांकि मजे ले रहा था उसके इतनी इंग्लिश. तो आती थी। ये बड़े बदमाश होते हैं। बच्चे. सब आते हैं। अरे सब आते हैं। इनको इंग्लिश. भी आती है, हिंदी भी आती है। जब सुनना हो. सुन लेते हैं। जब नहीं सुनना नहीं सुनते।.
बड़ा अच्छा लड़का है। वो गुड प्लेयर. रिंकू सिंह।. मैं तो उसके फील्डिंग का बड़ा फैन हूं।. व्हाट अ प्लेयर. एंड आई हैव हर्ड ही अ वै इंटरेस्टिंग. कैरेक्टर आल्सो।. वै गुड। नेचुरल आदमी है। ऐसे ही रहना. चाहिए।. बड़े. जब तक ऐसे ही रहेगा अच्छा खेलेगा।. विराट भैया बैट दे दो।. हां वो तो अच्छा लड़का है। अभी तो बहुत. सारी रील व्हील भी डालता है वो।. हां।. तो इसका मतलब अच्छा मैनेजर है उसका कोई।. अभी तो सारे क्रिकेटर्स के मैनेजर अच्छे. हैं।. होना नहीं चाहिए यार। बहुत इतना सारा होता. है कि अगर आप नहीं रखोगे ना तो आप गेम पे. फोकस नहीं कर सकते। आई थिंक होना ही चाहिए. इनके पास। सब कुछ होना चाहिए। नहीं तो. खेलेंगे कि ये सब करेंगे। तो मैनेजर अपना.
काम करता है। अच्छी बात है। इज़ वेरी गुड. एक्चुअली।. ये स्ट्रेस होता है इन मैचेस का। आपके. अंपायरिंग की तैयारी कैसे होती है? होता. है। हम लोग हालांकि क्या करते हैं जब आप. काम करते हो तो आपको काम करना आ जाता है।. आपकी बॉडी अपने आप कर लेती है कब कितना और. अच्छे मैच में मुझे हमेशा कंफर्ट रहती है. क्योंकि आप ना फिर 100% की तरफ जाते हो. क्योंकि यू आर ऑन द टोज़। यू आर क्लोज टू. एक्यूरेसी बिकॉज़ आपको पता है कि आज वो फिर. बॉडी को आपको ज्यादा तैयार करने की जरूरत. नहीं। अच्छी स्लीप होनी चाहिए। आपका खाना. आपको पता होना चाहिए। आपने क्या खाया।.
पार्टी से बचना चाहिए रात को। यू नो कि. हैंगओवर में ही चल रहा है काम। तो वो सब. चीजें हैं। हालांकि जितने प्रोफेशनल लोग. हैं सब इन चीजों का ध्यान रखते हैं। चाहे. वो प्लेयर हो या एंपायर हो।. हां हो जाता है कई बारी। कई बारी क्या. होता है ना रात को नींद खुल जाती है 3:00. बजे। फिर आदमी फंसता है सुबह। होता है ना. कई बारी कुछ ऐसा खाना खा लिया जो या कभी. कुछ और किसी फैमिली प्रेशर में आप हो। वो. फिर बैक फायर करता है कई बारी। वो जो आप. 4:00 बजे उठ गए, 3:00 बजे उठ गए, फिर. दोबारा सोया आधा घंटा। फिर वो नींद में तो. ऐसे होता है कई बारी।.
अंपायर भी तो इंसान है।. हो सकता है ना? शौकीन तो आप लोग भी होते होंगे। बिल्कुल. हो सकता है।. बहुत सारे आपके. नहीं नहीं घर के प्रेशर बहुत होते हैं।. शादीशुदा लोग तो घर के प्रेशर से परेशान. रहते हैं।. शादीशुदा लोग शौकीन नहीं होते।. नहीं उनके अपने ही नहीं काम खत्म हो गए. देते बेचारों के। वो इतना ही ड्यूटी लगी. होती है ना शादी वाले की उसका बाकी तरफ. ध्यान ही नहीं जा पाता। वो उसकी सारी उम्र. उसी काम में निकल जाती है। नम नमस्कार. सेवा में।. अच्छा कभी ऐसा नहीं हुआ किसी अंपायर आपकी. बात नहीं कर रहा हूं। मैं जनरल ऐसे बात कर. रहा हूं। कभी-कभी आप देखा हो कि शाम को. थोड़ा टाइट हुए या रात को जग गए। आप सुबह. मैच या नींद हुई नहीं। अब दिन में चल रहा.
है। हां नहीं इंटरनेशनल में तो मैंने नहीं. देखा लेकिन हां डोमेस्टिक में एक दो लोग. हैं उनको समझाते हैं यार ऐसे ना करो। वह. अंपायर के रेफरी भी होते हैं। उनको बोलना. पड़ता है भाई थोड़ा ध्यान रखो अपना।. हालांकि कभी-कभी होता है ऐसे।. क्योंकि खिलाड़ियों में भी कई सारे. क्रिकेटर्स में भी आया था।. पहले होते थे। अभी तो नया कोई लड़का है. नहीं ऐसा नए तो एकदम सब मैंने किसी को. देखा नहीं नए लड़के को। पुराने लोगों के. किस्से मैंने बड़े सुने हैं।. कि. सारी रात ताश खेले सुबह। लेकिन साथ में ये. भी सुना है कि सुबह 200 भी करे। वो भी बता. दूं आपको। तो ये भी था उनमें। वो पुराने. प्लेयर जो खेलते थे ये करते थे वो जिद्दी.
भी बहुत थे और वो परफॉर्मर भी बहुत तगड़े. थे।. हां मतलब दुनिया फिटनेस फिटनेस कहती है।. मुझे याद था इंज़माम भाई कितने रन बना जाते. थे। आउट ही नहीं होते थे वो।. अपने इंडियन प्लेयर थे। बड़े-बड़े किस्से. हैं उनके कि सारी रात नहीं सोए। ताज खेला. ये करते रहे वो करते रहे। और सुबह अगले. दिन आए तो 200. नहीं किसका किस्सा था।. बहुत बड़े प्लेयर हैं।. 200 बनाए तो तो आप तारीख बता सकते हैं।. बहुत ही बड़े प्लेयर हैं। जैसे विष सर के. लिए कई बार लोग बोलते हैं कि वो लेटा नाइट. सोते थे। लेकिन अगले दिन रेल बना देते हैं. दूसरी टीम की। वो फिर क्लास होनी चाहिए ना. आप में। पर पहले इतना फिटनेस कल्चर भी. नहीं था। पहले गेम और तरह का था। पहले.
इतने मैचेस भी नहीं थे। रिकवरी टाइम बहुत. था। अभी इतने बैक टू बैक मैचेस होते हैं. तो इन प्लेयर को आप ब्लेम ना करें तो. अच्छा है।. क्योंकि इतने तरह के मैच हो गए हैं। वन डे. टी20 ट्रैवल भी बहुत है बीच-बीच में। बैक. टू बैक इतना रहता है कि आप इनको ज्यादा ना. ब्लेम करें तो अच्छा है। अभी मिलाना ना. इसलिए कई बार मेरे को लगता है कि किशोर. कुमार को और बाबा सहगल को क्या मिला रहे. हो आपस में। अलग-अलग एरा के लोग हैं या. बादशाह को मोहम्मद रफी से क्या मिलाना। ये. अपनी जगह है। वो अपनी जगह अलग-अलग टाइम. है। आजकल ये पसंद करते हैं लोग तब वो करते. थे। तो मिलाने का क्या फायदा?
जैसे इंडियन टीम है तो उसमें तीन चार. कैटेगरी में पैसे मिलते हैं।. हम. ए प्लस ए बी सी ऐसे पैसे आते हैं।. जी जी. अंपायरिंग में भी होता है कि इंटरनेशनल. क्रिकेट में इतने सारे या सबका बराबर है।. हमारा है डोमेस्टिक में ना जो ए ग्रेड में. वो लोग 40,000 पर डे लेते हैं। बाकी सब. 30,000 है। में भी है।. इंटरनेशनल क्रिकेट में अंपायर को कितना. पैसा? वहां एलट वालों के अलग पैसे हैं। मुझे पता. नहीं कितना. एलट मतलब उसमें कुछ अलग. एलट में 11-12 लोग होते हैं जो जनरली सारे. इंटरनेशनल इवेंट्स जो होते हैं वो करते. हैं और बाकी इंटरनेशनल पैनल होता है हर. कंट्री का और एक मैच में तो एक जैसी फीस.
होती है। एक मैच में दो अंपायर हैं तो. अलग-अलग नहीं होती इंटरनेशनल में सेम ही. होता है।. उसके अलावा क्या-क्या फायदे होते हैं. अंपायर बनने के? आपको लोग जानने लग जाते हैं। आपकी आपकी. सोसाइटी में जो. नहीं बीसीसीआई मतलब जो आईसीसी की तरफ से. क्या फायदे होते हैं? उनका कॉन्ट्रैक्ट होता है एनुअल। एक लमसम. अमाउंट होता है जो अगर मैच में नहीं भी कर. पाए बाय चांस अनफिट है तो मिलता है उनको।. दैट कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम इज देयर। सो दे आर. सेफ इन अ वे सो दैट इज देयर. तो ये मैच पर फीस होती है मतलब ऐसा मंथली. सैलरी कोई नहीं है.
आई थिंक इट्स लाइक आपको 60 दिन करने हैं. 60 दिन से ज्यादा करोगे तो पैसे मिलेंगे. वरना 60 दिन के तो मिलेंगे मिलेंगे BCCI. में कॉन्ट्रैक्ट अभी नहीं है अंपायर्स का. हम तो जितने मैच करते हैं उतने पैसे मिलते. हैं. ओके. डकवर्ड लुईस नियम थोड़ा समझाइए सर मुझे. अ पहली बात तो ये डीएलएस हो गया एक और आ. गया मैथमेटिशियन और मिस्टर डकवत की अभी. डेथ हुई है पीछे शायद एक महीना हुआ है. हम. इट्स अ प्रोग्राम व्हिच इज़ लाइक रिसोर्सेज. बेस्ड आपकी जितनी विकेटें कम गिरेंगी उतना. आपको इजी हो जाएगा। जितनी विकेटें ज्यादा. गिर जाएंगी उतने रन बढ़ जाते हैं।. फार्मूला है उसमें हम लोग डालते हैं कितने.
ओवर होने हैं, कितना मैच शुरू होना है. उसमें डालो। सॉफ्टवेयर निकाल के आपको. रिजल्ट दे देता है। अगर विकेटें ज्यादा. गिर जाए तो रन ज्यादा बनाने पड़ते हैं। ये. फार्मूला है।. बड़ा अजीबोगरीब होता है। कई बारिश हो गई. यार। पूरा मैच जीता है। मैच जो है डीलर्स. ने खा लिया।. नहीं पर पहले वाले सिस्टम से अच्छा है।. आपको ध्यान है पहले साउथ अफ्रीका को एक रन. पे एक बॉल पे 22 रन चाहिए थे। हम. उससे बहुत बेटर है।. इनफैक्ट हमारा इंडिया का भी है वीजेडी. व्हिच इज़ आल्सो वैरी गुड।. बल्कि काफी लोग तो बोलते हैं कि डीएलएस. एट पार ही है वो। मतलब पीछे नहीं है।. वीजेडी नाम है वो। इंडिया में हम लोग.
डोमेस्टिक में वही यूज़ करते हैं।. बट इंटरनेशनल मैचेस में डीएलएस। इट्स नॉट. डीएल इट इज़ डीएलएस।. तीन मैथमेटिशियन है जिन्होंने फार्मूला. बनाया। क्लोज टू एक्यूरेसी और सब जगह यही. चल रहा है। सबको आदत पड़ गई है।. ठीक है।. ठीक है।. जब तक कोई नई चीज ना आ जाए।. ओके। अ इंटरनेशनल मैचेस जो बड़े आईसीसी. टूर्नामेंट होते हैं वहां तो शायद सेम टीम. में अंपायरिंग नहीं कर सकते आप अगर आप. इंडिया में नहीं कर सकते. इवेंट में सेम कंट्री. बटरल में कर सकते हैं. बटरल कर सकते. तो मान लीजिए इंडिया पाकिस्तान का बटरल. मैच चल रहा है और ये हमसे कई लोगों ने. हाइपोथेटिकल क्वेश्चन भेजा कि इंडिया. पाकिस्तान का मैच चल रहा है.
अब क्रिटिकल कंडीशन है. हां. छह बॉल पे 11 रन चाहिए. इंडिया मैच हार रही है. हां. कहीं ऐसा होता है कि देशभक्ति भावना जगह. को कमेंटेटर्स के जग जाती है कमेंटेटर्स. एक टाइम के बाद क्लियर हो जाता है कि ये. कमेंटेटर इंडिया का है ये पाकिस्तान इंसान. का है। भाड़ में ये कमेंट्री पर्सनल व्यूज. निकल कर आ रहे हैं। अंपायर इंसान तो आप भी. है।. नहीं वो अंदर नहीं होता क्योंकि अंपायर को. अपनी लड़ाई लड़ रहा होता है बेचारा। उसने. अपनी परफेंस की पढ़ी होती है कि मेरा गलत. ना हो जाए। वो इस चक्कर में पड़ता ही. नहीं। मैंने तो कई बार पहले भी बोला है कि.
कई बार ताली बजती है। मुझे ये नहीं पता. होता इसका 50 हुआ कि 100 हुआ।. हम. वो अपनी ही इतनी जद्दोजहद लगी रहती है ना।. इतना तगड़ा रूटीन रहता है। बॉल आई गई. पकड़ी दी फिर डेड बॉल।. फिर ओवर फिर इधर जाना। वो इस सब पे ध्यान. नहीं जाता।. इनफैक्ट जबजब जाता है तब और अच्छी. एंपायरिंग होती है क्योंकि आप क्लोज टू. एक्यूरेसी आ जाते हो। आपको पता लगता है कि. आपकी जरा सी इससे गड़बड़ ना हो जाए मैच हम. तो जो प्रेशर लेते हैं उनका उल्टा काम हो. जाता है। जिनको मजा आता है वो अच्छा करते. हैं। तो प्रेशर तो अच्छी बात है।. मेरे को सहवाग की एक कंट्रोवर्सी याद आती. है।. क्या आपके अंपायर इन्फ्लुएंस नहीं होते.
हैं। वीरेंद्र सहवाग ने रिटायरमेंट के बाद. एक शो में बताया था असद रऊफ को लेकर कि. उन्होंने एक दिन असद रऊफ को ले गए साथ में. घुमाया टहलाया।. इसके बाद अगले दिन हो रहा था. सबको सुनाई पड़ा. जब. उन्होंने असद राउ को देखा कहा नहीं असदत. राव ने नॉट आउट दे दिया और ये सहवाग ने. खुद बताया है. पता नहीं कितना ठीक है लेकिन सहवाग भी जब. कुछ बोले तो आप उसका 30 40% कट कर लिया. करो जीएसटी वो भी मजाक बहुत करता है सहवाग.
मजाक बड़ी करता है हमें पता है. ये तो शब अख्तर वाली बात आपने कह दी शब्द. शब अख्तर उसने भट्टा मारने का था।. हां।. नहीं सहवाग जब कुछ बोले 30- 40% कट कर. लिया करो। वो मस्ती के मूड में रहता है. आधे टाइम।. वो जाट आदमी है वो ऐसे ही।. बट अंपायर में तो इंसान है कहीं थोड़ा बहुत. तो इन्फ्लुएंस आता होगा ना सर कि अगर किसी. बहुत दोस्ती हो गई।. हां।. जैसे कई बार आप बहुत अच्छे दोस्त बन गए।. जी जी।. और उसके बाद थोड़ा 50-50 फैसला आया। यार 55.
45 है। तो, कहीं ना कहीं तो आता होगा ना. थोड़ा बहुत।. नहीं आता जी अंपायर की अपनी जान फंसी होती. है अंपायर को ऐसा ध्यान नहीं आता। अंपायर. को तो कई बारी मैं बता रहा हूं यह नहीं. पता होता खेल कौन रहा है। बस कपड़ों का. पता होता है। नीला रंग और पीला रंग।. इतनी जद्दोजहद रहती है। इतना प्रेशर होता. है अंदर। आप आप कभी मैच देखते हो ना आप? अरे सारे. देखो मेरे जरा आप। वहां अंदर जान फंसी. होती है अंपायर की। भाई आप ये सब चीजें. ध्यान ही नहीं आती। चांस ही नहीं है।. और जो जो इस चीजों में ध्यान में होगा फिर. वहां पहुंचेगा नहीं वो।. बट. वो नीचे ही काम हो जाएगा।. जैसे पाकिस्तान से एक बहुत एलगेशन लगे थे।. वो जो आठ बॉल पे 28 रन चाहिए थे।.
और. कितने साल पहले? 2022 में शायद वो मैच था। इंडिया वर्सेस. पाकिस्तान का मैच था 2022 में. और टी20 वर्ल्ड कप की बात कर रहा हूं।. आठ पे 28 चाहिए थे। एक बॉल विराट को आती. है। विराट मारता है और विराट फिर अपील. करता है नो बॉल है नो बॉल वो इशारा करता. है।. पहले अंपायर ने नो बॉल नहीं दी होती है।. विराट के कहने पर फिर अंपायर नो बॉल देते. हैं। बाबर से लेकर सब भिड़ जाते हैं।. बाद में पाकिस्तानी मीडिया में बड़ी चर्चा. चली. कि यार विराट कोहली के इन्फ्लुएंस की वजह. से अंपायर ने नो बॉल दे दी। और ये. पाकिस्तानी मीडिया ने काफी कवरेज किया था।.
तो जब इतना बड़ा प्लेयर जब सामने से अपील. करे या प्रेशर बनाए क्योंकि प्रेशर तो. प्लेयर ही बनाते होंगे अपने लिए. और उस छ नो बॉल का असर है यार इंडिया मैच. जीत गई आठ पे 28 बिल्कुल इंपॉसिबल था. हालांकि विराट ने फिर दो बड़े. क्लासी लगाए थे आरिस रफ को एक लेग पे सीधे. लेकिन उस बॉल का बड़ा असर था. लेकिन आप अगर वो दोबारा से रिप्ले देखोगे. तो नेकडा आई से वो नो बॉल ही लग रही है. भाई. हां बट वो पहले. टेक्नोलॉजी कुछ एमएम में नीचे ऊपर कर दो. वो अलग बात है. बट पहली बार भी नहीं दिया गया था वो विराट. ने फिर. नहीं वो रेस का मुझे याद रेस का स्टाइल ही.
ऐसे वो आराम से ही देते हैं।. वो टाइम लेके देते हैं। वो उनका जो पल्स. रेट है बड़ा स्लो है। 70 से कम है।. ही इज़ अ वै गुड टीवी एंपायर आल्सो बिकॉज़. उनका जो पल्स रेट है वो कम है। वो बहुत. आराम आराम से बोलते हैं।. अच्छा आप लोग का बीपी का इशू तो होता रहता. होगा ना ऊपर।. हां रहता है ना। चेक होता है ना हर बारी. हमारा। बीपी चेक होता है, आईसाइट चेक होती. है, रिंग चेक होती है, सारी फिटनेस होती. है। दो-द साल में एक बार होती है।. अच्छा जो लोग अंपायरिंग करके रिटायर होते. होंगे उनका बीपी तो ऊपर नीचे थोड़ा होता. रहता है ना।. उनका ठीक हो जाता होगा बल्कि वो अंपायरिंग.
के टाइम भी बड़ा रहता है। बाद में ठीक हो. जाता है।. यार आप सोच के देखो ना 1 लाख आदमी चिल्ला. रहे हैं। ऊपर से 20-22 आदमी अंदर चिल्ला. रहे हैं। बाहर बैठे हैं। तीन चार ऐसे करके. बैठे हैं। पता नहीं क्या लिखते रहते हैं. भाई। वो ऐसे ही लिखते रहते हैं। तो जो. आदमी बेचारे दो अंदर हैं। कुछ तो प्रेशर. होगा उनपे।. बट अंपायरों को गाली हर मैच में से पड़ती. होगी।. ऐसा नहीं है। लोग तारीफ ही तो करते हैं. यार। थैंक यू बोलते हैं मैच के बाद।. वो तो जो आप सामने पढ़ रहे हैं। टीवी. ब्रिज से मान लीजिए कोई भी मैच चल रहा है।. रैंडम मैच चल रहा है। अब एक टीम का क्लोज. था।. हम. आपने उंगली उठा दी।.
हां वो तो होगा तो उठा दी।. हां।. नहीं मतलब दोनों केस में है। कई बार. अंपायर्स कॉल आती है।. अब एक टीम तो अपोजिट हो गई। उसको लग रहा. होगा यार। इसने ना उठाई तो मैच फल आ जाता. है हमारा।. दुनिया में 100% काम तो कोई भी नहीं है. ना। कई बार गाड़ी निकालते हो तो निकल जाती. है ना वो। अंपायर्स कॉल तो ऐसा है वो. थोड़ी ना पता होती है पहले कि अंपायर कॉल. आएगी। अगर वो पता लगनी शुरू हो जाए तो. भगवान ना हो जाए हम। फिर हम भी वो खोल के. बाबा जी वाली दवाई बांटनी शुरू करें। बट. अगेन आई आस्क व्हेन देयर आर पीपल लाइक. एमएस धोनी जैसे धोनी का अपना एक डीआरएस. चलता है। अंपायर मैं फिर से पूछता हूं।.
अंपायर ने आउट दिया। पीछे से धोनी ने ऐसे. किया।. हां।. और ये बड़ा वायरल होता है सोशल मीडिया पर. कि धोनी ने अगर रिव्यु ले लिया इसका मतलब. मामला मैच फल। अंपायर कॉल पलटेगी। उस टाइम. अंपायर को ए्बरेसिंग होता है यार कि यार. नहीं नहीं उल्टा भी होता है मेरे तो कई. मतलब कई मेरे ठीक निकले हैं कई बार। बट वो. ही इज़ क्लोज टू एक्यूरेसी। उसको आईडिया. बहुत है गेम का।. हां।. अभी ऋषभ पंत भी अच्छा हो गया। वैसे बता. दूं आपको ऋषभ को भी शुरू-शुर में आया था. तो नहीं था। अभी काफी इंप्रूव किया है और. वो ना सीख-सख के आता है यार। क्योंकि आप.
रीप्ले देखते हो। फिर आपने क्या मांगा, क्या नहीं मांगा? तो प्लेयर को भी आईडिया. आना शुरू हो जाता है। और कीपर ना सबसे. अच्छी जगह पे होता है। एक तो स्टिल रहता. है पीछे। पीछे ही तो है। सब कुछ तो देख. रहा है। बैट्समैन को भी देख रहा है। बॉल. की ट्रेजरी भी देख रहा है। किधर जा रही. है। इनफैक्ट जो अच्छे अंपायर हैं वह तो. कीपर की मूवमेंट से आउट देते हैं। कई बारी. कीपर का पैर लेग स्टंप पे निकला तो छूटते. ही मिसिंग लेग बिकॉज़ कीपर फॉलो करता है ना. बॉल पूरी। अच्छा कीपर तो हेल्प करता है. अंपायर की। अच्छे कीपर की मूवमेंट से. अंपायर को आईडिया हो जाता है कि लगे कि. लेग क्योंकि कीपर ही लेग स्टंप पे आ गया. तो साफ पता लग गया बॉल किधर जा रहा है।.
मुझे वो धोनी का एक डीआरएस याद आया।. युवराज बैटिंग कर रहा था। वो बॉल लगती है. और सबको लगता है विकेट के बाद सीधे गई।. अरे मैं ही था यार वो टप्पा पड़ के गई थी. वो. मेरा ही मुझे सुना रहे हो वो मैं ही था वो. वो वन बाउंस था इधर ही बैट पे लगा. और वो फर्स्ट साइड पे लगता है कि बॉल. वा दैट वाज़ माय फर्स्ट डीआरएस गेम इट वाज़. इनक आई थिंक मैं और रुचिरा थे मेरा पहला. डीआरएस मैच था। तो मेरे को क्या हुई थी कि. डीआरएस है गलत ना आज हो जाए। उस गलत गलत. के चक्कर में मैंने खड़ी कर दी उंगली। बाद.
में मैंने सोचा यार इसको तो मैं रेफर ही. कर सकता था। बिकॉज़ बंप कैच में तो हम. दोनों अंपायर मिलके दे सकते हैं। तो यही. तो होता है प्रेशर मेरा पहला डीआरएस गेम. में।. नॉन स्ट्राइक पे आप थे धोनी भी थे।. हां धोनी इधर था ना? हां. धोनी इधर था ना क्या वो डिफरेंट एंगल पे. खड़ा था।. जब सामने से आप देखोगे तो वो नहीं पता. लगता 3D थोड़ी इधर से दिखता है। उसने कटाक. से ऐसे किया। उसके करती है। युवराज ने. किया क्योंकि बैट्समैन ने ही लेना होता ना. डीआरएस। मैं ही था जी। वो खूब चल रही है।. अभी भी मेरे को मैं थोड़ा रील डालता हूं. ना एक छके से कोई यह भी डाल देता है। ये. ले भाई सर मजा आता है खूब देख के।.
अच्छा ये लोग ये लोग भी याद दिलाते होंगे. कमेंट सेक्शन में घूम घूम के।. हां हां पूरा वो जैसे कुछ अभी जैसे मैंने. 4.4 मिलियन उसमें आया तो साथ में किसी. कहता है ये भ ये भी देख ले. ठीक है. ठीक है मजा आता है यार कुछ यही तो मोमेंट. होता है मैच के ट्रू. लाइफ तो आती जाती रहती है यही तो जो आपने. काम किया है तो ठीक रहना चाहिए ना दोनों. फ्लेवर होने. सही सही बात है बिल्कुल सही बात है अच्छा. आपने ढूंढ के निकाला आपको पता था मेरा ये. मेरे को ही चिपका दिया सही है.
बट वो एक्चुअली वो आपकी बुराई नहीं वो वो. धोनी के फैंस जो है. मेरे को पता है वो ऐसे ही करके भेजते हैं।. वो थाला फॉर अ रीज़ आता रहता है कि अब तो. डीआरएस का नाम भी दे दिया था बाद में कि. धोनी रिव्यु सिस्टम. ही इस क्लोज टू एक्यूरेसी अगर आप उसकी. परसेंटेज निकालोगे तो आई थिंक वो टॉप पे. निकलेंगे।. बहुत बार तो अपील कर रहा है। वो कहता है. रुक जा भाई चल।. सो एमएस धोनी बहुत अच्छे अंपायर बन सकते. हैं।. हां अगर चाहे तो आप. और उनप इतना टाइम है तो कि वो 7 घंटे अंदर. रह सकें।.
बट अगर वो बनते हैं तो आप लोग की नौकरी. खतरे में आ सकती है।. नहीं नहीं एक ही एंड पे तो करते दोनों एंड. थोड़ी करते हैं। दूसरे एंड पे खड़े हो जाते. हैं।. और कौन सा खिलाड़ी ऐसा है जो आपको लगता है. बहुत क्लोज है जिसका है. अभी इसने इंप्रूव किया है और कौन है? दिनेश कार्तिक नहीं वो तो कंफ्यूज रहता. है। और कौन है यार अब आप लड़ाई कराओगे मेरे. प्लेयरों से? संजू सैमसन. संजू ठीक है। हां संजू संजू ठीक है।. संजू तो. उसका स्टिल हेड है वो ठीक है।.
काफी लोग हैं ऐसे काफी लोग ये रोहित को. बड़ा आईडिया है। ये कवर से आगे बोलता है. रहने दो बैट लगा है।. हां. रोहित आपको लगता है कैजुअल है। पूरा. स्मार्ट प्लेयर है। बहुत अच्छा आईडिया है।. कितना भुक्कड़ है भूल जाता।. ना ना ना ना ना ना चक्कर में ना पड़ना आप।. ही इज़ वै स्मार्ट।. कैसे थोड़ा बताइए ना।. क्रिकेटिंग आईक्यू बहुत अच्छा है उसका।. इसको बोलते हैं क्रिकेटिंग आईक्यू। गेम की. समझ वो बहुत अच्छी है उसकी।. लोग कहते हैं टॉस कराने आते हैं कैमरा भूल. जाते हैं।. ठीक है? ऑड इंसिडेंट उसको लेकिन बहुत. तगड़ी समझ है। आपकी बैटिंग से नहीं आईडिया. आता आपको। वो बैटिंग करता लगता है कि 120.
पे बॉलिंग हो रही है। दूसरा बैटिंग करे वो. 160 लगने लग जाती है। बहुत अच्छा उसको. बड़ी सेंस है। वो तो बहुत सारी अपीलों में. आ जाता है। रहने दे।. वो उसको बहुत आईडिया है। वो लगता है. कैजुअल है। कैजुअल नहीं है वो।. गुड गुड इंटेलिजेंट प्लेयर। सो जब कोई. रोहित शर्मा जैसा बैट्समैन क्योंकि एक. आपने ये फैन मोमेंट वाला मुझे भी लगा कि. रोहित शर्मा बैटिंग कर रहा है। ये 120 की. बॉल जैसे श्रीलंका में था. व्हेन रोहित शर्मा वास प्लेइंग वो 10 ओवर. में 70 80 90 जा रहे थे। बाकी पूरी टीम पे. 40 रन पे आ रही है।. मैं आपको एक और बता दूं रोहित को तो रोहित.
जैसे प्लेयर के लिए तो अंपायरिंग करना. बड़ा इजी है। या तो आउट होता है या नॉट. आउट होता है। सीधा-सीधा काम है उसका। उसका. कुचर पुचुर खेलता ही नहीं वो। वो तो आउट. है या नॉट आउट है। इनफैक्ट ऐसे प्लेयर को. अंपायरिंग करना इजी है। वो देखना कभी साफ. आउट होगा साफ नॉट आउट होगा। उसका ये है ही. नहीं कि कुट कुट कुट करके वो सीधा-सीधा. गेम है वो तो बढ़िया है अंपायर के लिए. एक्चुअली. रोहित शर्मा में क्या स्पेशल है जो आपने. कहा ना कि वो नेचुरल है 120 की बॉल दिखती. है. नेचुरल है यार वो और उसका फुटवर्क बहुत. अच्छा है और वो बहुत जल्दी आगे नहीं भागता. पीछे रहता है बॉल का वेट करता है और इसको.
ना एक एक चीज होती है क्रिकेट में बॉल. सेंस उसका जबरदस्त बॉल सेंस है उसको पता. है किस बॉल पे आगे जाना है उसका शॉर्ट. आर्म पूल देखो जो मारता है बाप है बाप. उफ ओफ मैं एक मैच में टीवी अंपायर था. स्कोर आई थिंक 200 प्लस यार वो बोलें जो. ओवर के लिए यॉर्कर है उससे मार रहा. था वो आई थिंक में मैच था तो वो डिफरेंट. ही क्लास है वो एकदम लगता है लेजी है. लेकिन बहुत आईडिया है उसको स्विंग का भी. आईडिया है और अगर वो अपने फ्लो में जिस. दिन होगा वो वन मैन आर्मी है.
अच्छा रोहित शर्मा दी कैप्टन और रोहित. शर्मा दी बैट्समैन आपको ज्यादा है. मेरे को तो बैटिंग में तो क्लास मतलब. बैटिंग वो कर रहा हो तो बड़ा अच्छा लगता. है. कैप्टेंसी में क्योंकि आप तो रिकवर करते. हो पांचप जीता है अभी वर्ल्ड कप भी. नहीं सब ठीक है कप्तानी भी ठीक मना नहीं. कर रहा लेकिन एक होता है ना एक किसी आदमी. का जो उसकी बैटिंग तो ही इज़ लाइक म्यूजिक. आप मतलब बाहर बैठे हो कोई मैच चल रहा है. तो वो बैटिंग कर रहा है तो देख लेता है. आदमी देख लो यार कितना शॉट ऐसे ही मारता. है वो कवर्स में है इधर-उधर और अंपायरिंग. भी बड़ी इजी है यार मैं बोला ना आउट या नॉट. आउट वो कुछ-पुच का चक्कर ही नहीं इधर लगी.
उधर लगी उसके में अल्ट्राइच की भी जरूरत. नहीं पड़ती साफ ही जाती है स्लिप में. या वो सिर पे खड़ी कर देता है एकदम मिड. विकेट में तीन आदमी लेके ले लो कोई भी या. फिर सीधी बाउंड्री के बाहर उसका ये. कुछ-कुछ वाला है ही नहीं आप निकाल लो उसके. सारे डिसमिसल मुश्किल से 2% मिलेंगे कुछ. वाले वरना सीधा उसका क्लीन क्लीन बैटिंग. आई दिस वे और दैट वे. कोई ऐसा बैट्समैन जिसके आने पे यार थोड़ा. फोकस ज्यादा करना पड़ता हो. हां कई लोग लेफ्ट ही होते हैं ना ऐसे. आधाआधा खेलते हैं वो राणा का नाम ले रहा. हो ऐसे ही है. नितीश राणा. हां वो कुछ पता नहीं कहां लगी.
हम लोग भी ध्यान रखते हैं वो वो सुनेगा. कहेगा भैया देखो क्या कह रहा है पर हम लोग. को ज्यादा मतलब आगे भी जरा ध्यान रखो ये. लोग खासकर जो लेफ्ट हैंडर होते हैं ना ये. लोग लोग एक तो आधे वॉकिंग वॉकिंग जैसे. बैटिंग करते हैं। 50% आप बैट्समैन निकाल. लो। ऐसे इतनी जल्दी खेलेंगे अक्रॉस द लाइन. बहुत जल्दी खेलता है लेफ्ट हैंड अपर। तो. लेफ्टी को थोड़ा ज्यादा एक क्या होता है. लेफ्ट ही पे आपको पिचिंग टाइट हो जाती है. आपकी। अब ओवर द विकेट बॉलिंग कर रहा है।. वो पिचिंग अंदर है कि बाहर है। अंदर है कि. बाहर है। आधी एनर्जी उसी में लग जाती है. पिचिंग में। तो लेफ्ट ही बहुत तंग करता.
है। या राइट खेल रहा हो तो उसको लेफ्ट ही. बॉलर आ जाए। देन यू आर इन यू नो यू नीड. डबल फोकस। बस पिचिंग का बड़ा इशू आता है।. अच्छा अंपायर के तौर पर एक आईडिया तो लगता. होगा ना कि यार इस बैट्समैन में पोटेंशियल. तगड़ा है।. हम. तो कौन सा भी बैट्समैन आपको लग रहा है कि. जो अभी बहुत एक्सपोज्ड एक्सपोज़र नहीं मिला. है। लग रहा है कि यार इसमें दम है. बहुत सारे टैलेंटेड है। एक तो मैं ये. सुंदर को बहुत बड़ा बैट्समैन मानता हूं।. वाशिंगटन सुंदर. मेरे हिसाब से टेक्निकली इज़ वै साउंड। वो. गलत नंबर पे बैटिंग करता है। उसको जो. टीम्स जो भी खिलाती हैं अच्छे नंबर पे. खिलाना चाहिए। साईं सुदर्शन इज़ वैरी गुड।. बड़ी क्लीन बैटिंग.
ये भी तो हो चुका है उनका नहीं अच्छा. प्लेयर है वो तीनों फॉर्मेट का अच्छा. प्लेयर है देखना आप जब भी हालांकि एक तो. अपनी इंडियन टीम ना इस टाइम ओवरलोडेड है. इतना टैलेंट है इतना टैलेंट है बड़ा. मुश्किल है यार किसी का नाम. ऊपर तीनों तो भरे पड़े हैं पूरी टीम में. भरे पड़े. मतलब 50 आदमी है इस टाइम भाई. आप इसको निकालो उसको डालो पता ही नहीं. लगता किसको डालें किसको निकालें इतना. टैलेंट है ये तो ये मामले में तो BCCI को. आपको पूरा नंबर देने चाहिए कि इतना तगड़ा. सेटअप बना दिया है कि इतने प्लेयर हो गए. हैं हर डिपार्टमेंट में मतलब ये तो बड़ी. मुश्किल होती होगी सिलेक्टर को किसको लें. किसको ना लें हां मतलब अभिषेक शर्मा जैसा. लड़का जो 45 पे शतक मार आते ही दूसरे शतक.
मारा।. यार अब लेफ्ट के पता लगा 10 लेफ्ट ही. लाइंस हैं। राइट की नो 10 राइट ही लाइंस. हैं। कीपर के नो पांच कीपर बैठे हैं।. फास्ट बॉलर की नो 10 दिखते हैं। तो बहुत. टैलेंट है भाई। बहुत टैलेंट है। आईपीएल का. फायदा बड़ा हुआ है। आईपीएल से बहुत लड़के. आए हैं। कॉन्फिडेंस बहुत बढ़ गया है उनका।. बड़े प्लेयरों के साथ खेल रहे हैं। जिनको. कभी टीवी पे देखते थे या डरते थे। उन्हीं. की बॉल पे मार रहे होते हैं।. सो ये जो पिछले 10 20 साल में जो ये. प्रोग्रेस बड़ी जबरदस्त है। जी. आउटस्टैंडिंग। अच्छा सर एक बड़ा इंपॉर्टेंट. इशू है अंपायर्स कॉल डिबेट. हम.
बहुत सारे प्लेयर्स ऐसे हैं जिन्होंने. बार-बार कहा कि भाई अगर टेक्नोलॉजी है. हम. तो यार पूरा टेक्नोलॉजी को दे दो। ये. अंपायर्स कॉल बीच में रख के ना ये जो इधर. भी दुखता है इधर भी दुखता है मतलब हर बार. एक आदमी का मन खट्टा हो जाता है।. आप मुझे एक चीज़ बताइए जब कई बार टाइट. बाउंड्री कॉल होती है तो होता नहीं। आधे. कहते हैं आधे कहते हैं नहीं है।. हम. कई बार टाइट नो बॉल होती है लैंडिंग की।. आपको होता है ना कि अंदर है कि बाहर है।. अंदर है कि बाहर है। ऐसी अंपायर कॉल भी और. टेक्नोलॉजी है ना एक्सेप्टेड बाय एवरीवन।. जब तक है जो उसके रूल है वैसे ही माना. जाएगा। जिस दिन लोग चेंज करेंगे चेंज में. तैयार हो जाएंगे लोग। अभी तो वैसे ही है।.
नहीं बट जैसे मान लो आपने थर्ड अंपायर को. रिव्यु दे दिया।. हां।. तो उसके बाद फिर ऑनफील्ड अंपायर पे वापस. आना. सारी प्रोबेबिलिटी चेक करने के बाद वो. उनको लगता है ना कि जो दिया वो ठीक है।. हम्म।. बस इतना ही है।. मैंने बोला ना आपको कि अगर बाउंड्री नहीं. होती। आप 50 रिप्ले देख लो। पता ही नहीं. लगता कि चार दूं कि छह दूं, चार दूं कि छह. दूं। वहां भी तो सारी टेक्नोलॉजी है ना तो. हर चीज़ की लिमिट है ना बट आप यह तो मानोगे. कि जब से डीआरएस आया है तो आपके मेजोरिटी. ऑफ़ कॉल्स ठीक हो गए. यू आर ऑलमोस्ट 90% सॉरी 99.99%.
तो व्हिच इज़ वैरी गुड ना तो आप एक्यूरेसी. के पास आए हो कि दूर गए हो डीआरएस से. पास आए हैं. तो फिर. ओके एक और बड़ी कंट्रोवर्सी सर होती है. मैनकेट को लेकर बहुत चर्चाएं होती हैं जी. एथिक्स पे है नहीं है क्या है आपका इसपे. टेक क्या होता है. पहली बात तो बताइए कि मानकट नाम कैसे है. इसका. वो तो जिन्होंने आउट किया था उनके नाम पे. तो फिर वह जो नो बॉल है अंडर आर्म वाली. उसका नाम चैप्पल बॉल क्यों नहीं है? उसका. नाम क्यों नो बॉल है? अंग्रेज अंग्रेजों. को उस टाइम उनके चलती थी तो उन्होंने लगा. दिया. इधर तो मांट चिपका दिया उधर भी चप्पल बॉल. चिपकाओ यह तो सिंपल रन आउट है यार और रन.
आउट ठीक है ना वो बैट्समैन क्यों भाग रहा. है अनफेयर इतना आगे. जो 22 यारार्ड है. उसका तो बैट्समैन ने 17 बना दिया 16 बना. दिया वो फेयर है. वो ठीक है. मतलब स्पिरिट ऑफ द गेम के खिलाफ नहीं है. ये क्या बात हुई अगर लॉ में है कोई आउट तो. आउट है ना यार. तो फिर अश्विन को इतनी गालियां क्यों पड़ी. पता नहीं क्यों दे रहे हैं गलत बात है. बहुत सारे इंडियन के लोगों ने कहा नहीं. नहीं जी अगेंस्ट स्पिरिट. नहीं गलत उसको रोको ना फिर बैट्समैन को. मेरे को तो लगता का रूल आना चाहिए कि वो. कोई बैट्समैन अगर बार-बार भागे तो उसको. वार्निंग देके पांच रन का आ जाएगा देखना. थोड़े टाइम बाद। टी20 में तो अगर आप इतना.
आगे पहले ही निकल गए वो आदमी पहले ही तीन. चार कदम आगे रहता है। आजल देखा बैटिंग. स्टाइल. तीन चार कदम वो तीन जो बचे कितना 15 यार्ड. का बच गया बीच में बॉलर कहां जाए यार. फिर तो अभी तो कितने बन रहे हैं 200 बन. रहे हैं ना. 400 बनेंगे 20 ओवर में ये क्या बात हुई. दैट इज अनफेयर. ही शुड नॉट बी अलाउड टू गो लाइक दिस. अच्छा इस बार आईपीएलl में 260 270 275 बन. रहे थे मैंने इंटरव्यू किया आशुतोष का. हर्षित राणा का उन्होंने कहा कि भैया इस. बार सड़क बनवा दी थी. सड़क बनवा दी थी.
आशुतोष वास लाइक कि मैं बाउंड्री लाइन पे. खड़ा था अगर चार गेंद खेलो दो भी मिस हो. जाए तो लगता है कैसा बैट्समैन हूं मैं. पंजाब वाला मैच जो उनका था ही वास लाइक कि. यार सारे बॉल ऊपर जा रही थी कोलकाता से. मैच था सब देखो सब सर के ऊपर से तो ये इस. बारl में अलग से सड़क बनी थी या हर साल. बनती. नहीं ऐसा नहीं है देखो क्या होता है कि है. ना गेम आजकल एनालाइज बहुत होने लगा इतने. सारे वीडियो सब देखते हैं बॉलिंग के. स्टाइल पता लग गए हैं बैट बहुत अच्छे हैं. भाई. और लोग गेम इंप्रूव कर रहे हैं अब रूल्स. भी तो है ही ना फिर विकेट तो. जाके बना 120 नहीं बन रहे थे.
वो तो वैसी विकेट थी ना वो वो पिच तो सेटल. ही नहीं हुई थी। आई थिंक और टाइम देता तो. सेटल होती वो। वो तो नई पिचेस थी लाके. डाली और शायद वो तो पिचेस वो तो बहुत खराब. थी। बैटिंग में तो बहुत बुरा।. श्रीलंका गए वहां हमसे चार बॉल नहीं खेली।. स्पिन हो रही थी तो वो तो उसका तो इलाज. निकाला है ना अभी कि थोड़े ज्यादा ओवर के. मैच भी खेलेंगे तो क्योंकि बहुत दिन से 50. ओवर खेला ही नहीं था।. और एक और रीज़न था। आई थिंक इंपैक्ट प्लेयर. से भी फर्क पड़ा क्योंकि एक बैट्समैन. एक्स्ट्रा आपके पास हो जाता था।. हम्म।. आपकी टीम ही आउट नहीं हो रही थी ना।. आपको जब इंपैक्ट प्लेयर आप बुला सकते हो।. जिसका भी लगता था कम स्कोर बन रहा है वो.
इंपैक्ट प्लेयर यूज़ करता था।. तो वो भी एक था और शायद पिचेस भी अच्छी थी. क्योंकि कई बारी क्या होता है कि पिच. बनाने का स्टाइल ऐसा होता है उतनी गर्मी. नहीं थी शायद उतना विकेटों में उतना. ड्राईनेस नहीं आई तो ये भी रीज़न रहा और एक. शाम को ड्यू आती है। ड्यू से भी बहुत रन. बनते हैं भाई।. हम. ड्यू से एकदम बैटिंग के लिए हो जाता है. क्योंकि ड्यू से भी बॉल का ग्रिप थोड़ा. फर्क पड़ता है।. वर्ल्ड कप में यही होता है।. ड्यू से 30- 40% फर्क पड़ जाता है किसी. किसी मैच में। वर्ल्ड कप 2023 फाइनल. हां डू से बहुत फर्क पड़ता है। ब्यूस तो.
आपको बाद में जो बैटिंग कर उसको बहुत. फायदा है।. वही तो हुआ था वर्ल्ड कप में जो हम हार गए. थे।. हां जो भी मतलब इट इज़ वन ऑफ़ द रीज़. मैंने आपकी एक फोटो देखी आप पेड़ पे चढ़ के. कहीं कॉल कर रहे थे।. हां मेरे गांव में तब वो नहीं थे। कनेक्शन. नहीं थे कोरोना के टाइम पे। तो फिर वो मैं. कर रहा हूं। किसी ने क्लिक कर लिया वो छप. गया। वो छपने से फिर थोड़ी. बता नहीं था कि वो किसी ने खींच ली।. नहीं वो किसी ने सेल्फी ली थी मेरे कजन ने. शायद।. बट आप एक फोटो ऊपर बैठे हो आप प्रॉपर ऊपर।. ऊपर ही था ना पेड़ पे ही था। अकेले दिख रहे. हो।. पेड़ पे ही था मैं।. हां।. वो सिग्नल नहीं आते थे और वो सब हमारी जो. होती थी मुझे ट्युएल पे जाना पड़ता था गांव.
में।. हां।. वो फोटो आ गई। फिर वो गांव के लड़के होते. थे।. तो मैं अंदर बाहर कभी इधर, कभी उधर तो वो. बोले ये तो लगवाओ जी टावर चढ़ा दिया मुझे।. अब जाट लोग चढ़ते बहुत जल्दी हैं। चढ़ गए तो. फिर हमने हाथ पैर खोले। फिर टावर लगा जी।. 20 दिन में टावर लगा।. टावर तो उस फोटो के बाद तो बनता भी था. वहां।. मेरे गांव में. इंटरनेशनल अंपायर जो है पेड़ पर चढ़कर. सिग्नल।. अब तो मेरे गांव में तीन टावर हैं। जी। अब. तो मतलब दीवार में भी सिग्नल आ रहे हैं।. बढ़िया वाईफाई। वेरी गुड। सब लोग खुश हैं. गांव से।. सारे रिप्ले देख लेते हो।. नहीं वो बहुत अच्छा काम हुआ। उसके बाद कोई. कोरोना में पढ़ाई का चक्कर पड़ा बच्चों.
का। तो वो तो बहुत दुआएं दी लोगों ने। वो. मतलब वो अच्छा काम हो गया मेरे से एक।. मतलब अंपायरिंग के बाद चुनाव ना लड़ेंगे. तो मामला बन जाएगा।. चुनाव तो नहीं पर काम अच्छा हो गया ना? गांव में जाता हूं तो याद करते हैं लोग।. कि हां बढ़िया काम करा भाई।. मैं तो कह रहा हूं कभी अंपायरिंग से. रिटायरमेंट का चुनाव नाव करने का मन हुआ।. वैसे भी आपको योगी जी मोदी जी काफी पसंद. है।. काफी लोग पसंद है जो अच्छा काम करते हैं।. अभी अन्नामलाई अच्छे लगते हैं। मेरे को. अच्छे दोस्त हैं। बात होती रहती है।. क्रिकेट खेलते हैं वो भी. हम. गुड मैन। अच्छे पुलिस वाले हैं।. जबरदस्त। अब तो छोड़ दिया उन्होंने। अब तो. बीजेपी जॉइन कर ली।. खेल रहे थे एक दिन नेट देखा था मैंने.
पीछे।. पार्टी से मतलब नहीं। अच्छा आदमी होना. चाहिए। बहुत सारे लोग हैं ऐसे जो मेरे. दोस्त हैं दूसरी पार्टी में। बहुत बढ़िया. लोग हैं। अच्छा जो आदमी अच्छा काम करे और. आजकल आ रहे हैं लोग पॉलिटिक्स में। ऐसे जो. अलग-अलग प्रोफेशंस हैं व्हिच इज़ वैरी गुड।. हां तो बट इट्स अ क्रिकेटर पॉलिटिक्स में. आते हैं।. हां। क्या बुराई है? और अच्छा भी कर रहे. हैं. और क्या. कई सारे फिर लौटते थे गंभीर फिर लौट आए. हां तो जो अच्छा काम करे कई बार क्या कई. बारी क्या होता है आपको लगता है कि ये आई. थिंक ये आपको उतना सूट नहीं कर रहा काम. हम. तो वो एक अलग है. अच्छा अभी रिसेंटली सर एक कंट्रोवर्सी हुई. थी अ सना नेवाल ने कह दिया था कि क्रिकेट.
पर ही सारा फोकस हमारा है। अगर इसका थोड़ा. फोकस ही बाकी गेम्स में जाए तो ओलंपिक्स. में हम भी बेहतर कर सकते हैं। हाउ यू सी. दैट स्टेटमेंट? देखिए आई थिंक किसी को. ब्लेम करना और क्रिकेट से यह देखिए सब. फेडरेशन एसोसिएशन कभी एक टाइम पे साथ ही. शुरू हुई होंगी।. आप यह तो क्रेडिट दीजिए कि. एडमिनिस्ट्रेटर्स ने कुछ अच्छा किया होगा. क्रिकेट में। तभी क्रिकेट आज यहां पे है।. डिमांड एंड सप्लाई है। पीसीआई तो बाकी. लोगों को भी पैसा दे रहा है। कौन सा गेम. है? किसको. बट जैसे. यार आप चैंपियन बनते हो तो पैसे मिलते हैं. ना।. जैसे मैंने आपके बारे में पढ़ा। आपके फादर.
शायद वॉलीबॉल प्लेयर।. वॉलीबॉल प्लेयर थे।. तो कुछ वहां गड़बड़ रहा होगा वॉलीबॉल में।. क्रिकेट में अच्छा रहा होगा। आप इधर शिफ्ट. हो गए।. मेरे स्कूल में शायद थी। पता नहीं मैं. क्रिकेट में वो तो कोई रीज़न था नहीं. वॉलीबॉल वाला। नहीं ऐसा तो क्रिकेट में. इतना पैसा भी तब उतना तो ममारी नहीं थी।. हम्।. पर यह तो डिमांड एंड सप्लाई है ना। जिस-. जिस आप देखिए ना उनकी फेडरेशन जैसे करेंगी. गेम को अच्छा सेल करो, अच्छी मार्केटिंग. करो। इंडिया भी तो ऐसे ही था पहले। जब. वर्ल्ड कप जीते तो कहते नहीं लता मंगेशकर. जी ने गाना गाया था तो पैसे मिले थे।. हां जो जीत कर आएंगे।. ओवर द पीरियड।. ट्रू ट्रू।. ओवर द पीरियड एडमिनिस्ट्रेटर्स ने अच्छा. काम किया होगा। वो क्रेडिट देना चाहिए ना. उनको। ये थोड़ी ना कि इससे पैसे मांगने.
जाते हैं। खुद ही तो लोग लेके आ रहे हैं।. लोगों का इंटरेस्ट है भाई। अच्छे से. डिजाइन किया गेम। आप किसी भी इंटरनेशनल. इवेंट में चले जाओ. क्रिकेट के हम. और इंटरनेशनल मैच आप देखना उनकी वहां पे. जो फैसिलिटी देते हैं वो देखना और आप किसी. रंजी ट्रॉफी में देखना एट पार है वी गेट. ऑलमोस्ट फाइव स्टार होटल्स वी गेट. एक्सीलेंट ट्रेवल सिक्योरिटी लिया एंड. ऑफिससेस आप देखिए तो BCCI का जो डोमेस्टिक. स्ट्रक्चर है जो फैसिलिटीज़ हैं प्लेयर्स. को आप कंपेयर करना दूसरी कंट्री के.
इंटरनेशनल से आई थिंक हम लोग आ गए हैं. उनसे तो ये क्रेडिट क्यों नहीं दे रहे आप. रिटायर्ड प्लेयर को पैसे मिलते हैं उनके. ट्रीटमेंट का देख अभी आपने सुना होगा. गायवाड़ जी का था तो तो यह सब वो आप यह. क्रेडिट क्यों नहीं देना चाहते. एडमिनिस्ट्रेटर्स को उनकी फेडरेशन में लोग. नहीं काम कर रहे इसका मतलब ऐसे. वो करेंगे तो वो भी डिपेंड करता है जितना. अभी आपके लोग जो जीत के आते हैं. चोपड़ापड़ा जीत के आते हैं कितना बढ़िया. है यार कितने बढ़िया लोग हैं कितना बढ़िया. उनको ऑनर करते हैं मना करता है वही. तो आपकी फेडरेशन क्या कर रही है यार किसी. को बुरा कहने से अपनी अपनी लाइन लंबी करो.
ना दूसरे की लाइन छोटी करने से क्या मतलब. है. अच्छा अंपायर भी नर्वस होते हैं डेब्यू. में।. होते हैं जी। इनफैक्ट मैं तो हर मैच में. शुरू की दो तीन बॉल में नर्वस रहता हूं।. आज भी. हम. शुरू का जो ओवर होता है वो टाइम लगता है. आपको। जो कहता है मैं नर्वस नहीं होता वो. झूठ बोलता है।. तो ये आईपीएल में भी होता है खाली. इंटरनेशनल में।. मेरे को क्लब का मैच कर रहा हूं। मेरे को. शुरू की दो तीन बॉल स्टार्ट होने में लगती. है भाई। व्हिच इज वेरी गुड। अगर नहीं लगती. तो इसका मतलब आपका मन ही नहीं है काम में।. आप कैजुअल हो। जो बोलता है नर्वस नहीं. होता वो झूठ बोलता है। नर्वस होना जरूरी.
है अच्छे काम के लिए। हर बैट्समैन को दो. तीन बें रहती है भाई शुरू की कितना भी. बड़ा प्लेयर हो. हर बॉलर को रहता है कि मेरी बॉल लाइन पे. पड़े. इसका मतलब यह नहीं कि पहली बॉल में दिखता. नहीं है सब दिखता है लेकिन रिदमम आने में. टाइम लगता है रहना चाहिए नर्वस. आईपीएल इज अ मनी मेकिंग प्रोसेस. गुड एक्सपोज़र फॉर एव्री प्लेयर ना पैसा तो. अपने आप आएगा ना. बट जैसे कई सारी वेब सीरीज बनी जिसमें. बताया गया कि आप कई सारी मूवीस बनी कि चलो. इंटरनेशनल क्रिकेट हालांकि इंटरनेशनल. क्रिकेट में मैन्युफैक्चिकिंग बहुत सारी. कहानियां आई हैं जो हमने पढ़ी जानी बट. आईपीएल में कई बार लोग मानते हैं कि यार.
ज्यादा चीजें रही होंगी, छिप जाती हैं।. देखिए क्या होता है टी20 गेम ना बहुत. जल्दी-जल्दी एक तो मैच होते हैं। बहुत. इसमें बड़े अपसेट भी होते हैं। बिकॉज़ एक. गेम ही ऐसा है यार। अब कोई कुछ भी बोले. किसी का मुंह तो आप पकड़ नहीं सकते।. हम. ये सब बेकार की बातें हैं।. बट जैसे धोनी की सीएसके को दो साल बैन. किया गया था। राजस्थान दो साल बैन हुई थी।. वो उस डिटेल्स का मेरे को कुछ पता नहीं।. लेकिन ये सब मैं हमेशा मुझे लगता है बेकार. की बातें हैं। मुझे कभी नहीं लगा अपने. आसपास कभी भी।. ये सारी इंसाइडल आप लोगों को भी नहीं पता. लगती।. कभी भी नहीं। ये सब पता नहीं कहां से. स्टोरी आती है। अब स्टोरी लिखने को तो मैं. स्टोरी में किताब में लिख.
तो फैक्ट है ना सर कि सीएसके दो साल बैन. हो गई थी।. वो तो है नहीं पता।. वो तो है उन लोगों ने जो ठीक लगा हो वो. किया होगा उस टाइम। वो उस डिटेल का हम लोग. हम उसमें कहां जाए अपने नियम कानून में. फंसे रहते हैं। हमको ये सब का टाइम कहां. मिलता है? आपको सबसे कठिन क्या लगता है? टेस्ट ओडीआई. टी20 ज्यादा प्रेशर कहां होता? टेस्ट मैच टेस्ट मैच।. बिकॉज़ ऑफ़ फोकस एक्यूरेसी।. लगर ड्यूरेशन ऑफ़ फोकस। और उसके बाद सीधा. टी20। T20 में क्या होता है? इट्स लाइक आप खाली सड़क पे गाड़ी चला रहे. हो। कोई नहीं है और एकदम से मोटरसाइकिल आ. गई। T20 में कुछ नहीं होता लेकिन जब होता.
है तो एक ही बारी में सारा गेम चेंज हो. जाता है। तो T20 में ये भी खराब बात है।. अच्छा वाला बैट्समैन बैटिंग कर रहा है और. खट से रिवर्स भी मार देगा। याद करो ऑफ. स्टंप किधर है। सो दोनों बातें हैं। T20. भी और T20 में पेस ऑफ़ प्ले भी पकड़ना पड़ता. है आपको। इसकी भी डिमांड डालेंगे भाई। सम. टाइम इट्स डिफिकल्ट टू कंपेयर। T20 है. छोटा गेम लेकिन पूरा जूस निकाल देता है. प्लेयर का अंपायर का भी। कभी कोई ऐसा मैच. हुआ सर कि आपने कोई फैसला दिया मैच पलट. गया लास्ट में लौटते वक्त प्लेयर ने कहा. कि यार अनिल भाई यार आपके चक्कर में चला.
गया मैच यार. नहीं राइट वे में हुआ है जैसे मैंने आउट. दिया तो एक रन से टीम जीत गई करेक्ट निकला. उल्टे साइड तो मेरे को ध्यान नहीं आ रहा. हां ये हुआ है कभी एक आध बीच में कभी गलत. हो गया पर मैच मेरी वजह से चेंज हुआ ऐसा. मुझे ध्यान नहीं आ रहा. एक किस्सा है आरपी सिंह वाला जडेजा आरपी. सिंह. हां नो बॉल की बात करेंगे आप पर वो तो ठीक. निकली नो वो तो बहुत बड़ी नोबल थी. एक्चुअली मैं मिस करता तो मैं मर जाता. अच्छा वो मैंने देख ली. जडेजा को आरपी सिंह ने आउट किया।. जडेजा वास बेटर एक्चुअली जडेजा सिंह हां. थर्ड मैन पे कैच हुआ तो दोनों टीमें अंदर. भागी. जीत गए वो लोग. मतलब जिसने मेरा हाथ देखा वो वैसे भागे कि.
नो बॉल हो गई है। जिन्होंने कैच देखा वो. वैसे भागे वो तो नो बॉल थी। शुक्र है मैं. देख रहा था।. नहीं तो मेरा लेंटर लग जाता।. अच्छा कई बार हमने देखा है कि अंपायर जैसे. कोई शॉट गया या एलबीडब्ल्यू हुआ तब फिर. फ्रंट फुट की नो बॉल चेक होती है।. हां। और कई बार ऐसा होता है कि नो बॉल. निकल आती है। तो हमारे मन में सवाल आता है. कि भाई ये क्या लॉजिक है? मतलब अंपायर का. काम यही देखने का। अब अगर. उस एलबीडब्ल्यू के टाइम में नो बॉल निकल. आई तो ऐसे तो कई बार हो सकता है कि मिस भी.
हो गई हो तो फिर या तो हर बॉल पे थर्ड. अंपायर को नजर रखनी चाहिए।. अभी तो आ गया ना। इसीलिए शायद जो आपकी बात. है ठीक तभी तो ऑटो नो बॉल आ गया ना अब। अब. तो नो बॉल टीवी अंपायर ही देखता है। अब तो. इन फैक्ट फ्रंट फुट की नो बॉल ऑन फील्ड. अंपायर देता ही नहीं है।. हम्. ही इज़ नॉट अलाउड टू गिव एक्चुअली। और वो. दे भी दे तो उसको ओवरलूल कर सकता है टीवी. एंपायर।. सो इट इज जो आप कह रहे हैं आपकी आपकी मांग. पूरी हो गई है। जी. आप ही की बात सुनी होगी।. अच्छा किसके ज्यादा मजे होते हैं? जो. ग्राउंड पे खड़ा होता है जो अंदर बैठा. होता है अंपायर।. मेरे को तो अच्छा लगता है अंदर अंदर। यू.
आर पार्ट ऑफ़. खाते पीते।. पार्ट ऑफ़ एक्शन ना। यू आर पार्ट ऑफ रियल. एक्शन। टीवी तो बहुत बिजी हो गया आजकल।. बहुत काम है टीवी वाले को। इनफैक्ट टीवी. में तो ये हालत हो गई कि दो अंपायर होने. चाहिए उधर। हर बॉल पे ऑटोनोबल पे नोबॉल. देखना। फिर आपको आईपैड यूज़ करना।. फिर वो प्रोटोकॉल याद रखना और अभी तो. आईपीएल में तो वो वाइड और नोबॉल पे भी. आपको डीआरएस काउंटर चलाना है। एव्री. डिलीवरी यू हैव टू प्रेस आईपैड।. हम. सो टीवी एंपायरिंग टाइम हैज़ कम कि दो. बैठने चाहिए।. चलिए हम उम्मीद. ऊपर से बारिश वारिश हो गई तो बारिश वारिश.
हो गई तो मैथमेटिक्स भी इन्वॉल्वड है।. कैलकुलेशंस करो।. उधर दो लोग होने चाहिए।. हां। जैसे एक अफगानिस्तान का मैच मुझे याद. आया। वर्ल्ड कप में शायद था जिसमें कुछ. कैलकुलेशन जनाथन ट्रॉट नहीं कर पाए थे।. उनकी टीम मैच हार गई थी। तो जैसे मान. लीजिए कुछ बारिश वारिश हुई तो जो कई सारे. नियम कायदे कानून आते हैं ये आप लोग जाके. दोनों टीम को बताते हो या अपना तो. अफगानिस्तान में तो यही हुआ था उनसे कुछ. गलती हो गई थी वो था कि उन्हें रूल नहीं. पता था. ये कब हुआ मेरे को. जोथन ट्रस्ट 2023 वर्ल्ड कप में शायद था. 23 हुआ नहीं मैं मिस कर गया. दे सेड कि वी वर नॉट अवेयर ऑफ रूल्स. हो सकता है किसी कैलकुलेशन में कैलकुलेशन.
तो नहीं फिर वो किसी फॉर्मेट में कुछ चीज. मिस हुई होगी. तो मतलब कोई भी घटना तो आप लोग जाके बताते. हो दोनों टीम. हां दोनों टीम्स को बताना होता है कि कब. शुरू करेंगे कितने ओवर का मैच होगा फिर वो. टारगेट अपने आप आ जाता ऊपर जो आप डीएलएस. की बात कर रहे थे वो एक अलग टीम होती है।. डीएलएस मैनेजर होता है अलग से। एक. हम. डीएलएस अंपायर नहीं करते। वो अलग से. मैनेजर है। वी जस्ट टेल हिम कि ओवर और. टाइम ये सब वो कैलकुलेट करके बताता है। वो. हम नहीं करते।. ठीक है।. दैट इज़ हैंडल्ड बाय अ सेपरेट गाय।. अगर कोई प्लेयर अंपायर के खिलाफ गुस्सा. करता है उसप आप लोग फाइन लगवा देते हो।. जी हां।.
अंपायर पर फाइन क्यों नहीं लगता? आप तो. खाली पॉइंट्स पे बच जा रहे हो अपने। अपने. में तो पॉइंट्स पे बच गए।. फाइन का मतलब जीएल करवाना चाहते हो मैं।. तो प्लेयर के पे फाइन। हर्षित राणा बेचारा. पप्पी दे रहा तो उसका आप लोगों ने फाइल. लगवा दिया सबने।. नहीं वो कुछ प्रोटोकॉल लिखे हुए हैं ना तो. वो तो फॉलो करने पड़ते हैं ना। अब कुछ-कुछ. खेल के कायदे कानून है वो तो आपको अगर. नहीं करेंगे तो गेम टीवी पे जा रहा है ना. अगर आप ऐसा काम करें जिससे गेम की अच्छी. पिक्चर नहीं जा रही। तभी तो क्रिकेट आगे. है। ये सब रूल फॉलो करते हैं ना बहुत. ज्यादा स्ट्रिक्ट हम लोग।. ना बट जब मैं हर्षित से पूछ रहा था तो. हर्षित कई लोगों ने कहा कि भाई कैमरा. ग्रीन और विराट कोहली की पप्पी में क्या. था? उनकी पप्पी पे तो फाइन नहीं लगाया.
आपने।. मेरे को नहीं पता।. हर्षित वाले पे एक मैच का बैन लगा दिया. था।. वो फॉलो लाइक उसका ट्रेंड होगा ना। पहले. भी कर रहा होगा। उसको बोला होगा किसी ने. पहले कि भई ऐसे मत कर। फिर शाहरुख खान ने. जीतने के बाद सबको पप्पियां दिलवाई कि सब. पप्पी दोगे आज।. वह सब चलता रहता है वो। लाइटर मूड में हुआ. होगा।. अच्छा उसमें भी होता है कि यार इस तरह से. जश्न मनाओगे तो नहीं करेंगे। आप नोटिस. करते हो ऐसा कुछ? देखो सेलिब्रेशन में तो कोई प्रॉब्लम नहीं. है।. लेकिन वो दूसरे को अगर आप यू नो ऐसा कोई. काम करें कि वो फिर ना रिएक्शन दे दे। वो. काम रोकना होता है।. अब जैसे मैंने श्रीशांत का मुझे. रोक ना करे किसी को वो।.
जैसे श्रीशांत का मुझे याद है।. ऑस्ट्रेलिया के सामने जमीन पर अटकने लग. गया था। फट फट फट। स्टाइल था वो तो लेकिन. हर बार करता था वो ऐसे वो किसी पर्टिकुलर. टाइम नहीं करता था. बहुत सारे लोग हैंडपंप चलाते हैं वेस्ट. इंडियन यू नो आउट होने के बाद. अब वो जो जूता निकाल के करने लगते हैं. ऐसे-ऐसे. हां वो शायद वो साउथ अफ्रीकन एक प्लेयर है. वो करते हैं. वेस्ट इंडज के खिलाड़ी नहीं करते. हां वो स्टाइल बना देते हैं कोई कोईको फिर. वो भी चलता है शिखर धवन पहलवानों की तरह. करता है. हम्म और वो जो कहते हैं बाउंड्री लाइन के. बाहर ऐसे-ऐसे इशारा करते हैं निकलो कट लो. बेटा. वो गड़बड़ है वो जो इशारा करते हैं ना. बैट्समैन को वो गड़बड़ है वहां फिर हम. उनको फाइंड करते हैं.
दैट इज रोंग वो सेलिब्रेशन नहीं फिर वो. दूसरे को प्रवोक करना. उससे झगड़ा होने के चांस होते हैं। फिर. सामने वाला भी लड़ेगा। वो रोकना होता है. हमको।. अच्छा अंपायर भी इंसान है।. जैसे मान लीजिए ऋषभ पंत जैसा. शुक्र आपने माना तो सही।. ऋषभ पंत जैसा कीपर है।. अब ऋषभ पंत काफी कुछ बोलते रहते हैं।. या रोहित शर्मा का बोलते रहते हैं। कई बार. ऐसा होता है कि आप कहते हैं अरे भाई बस कर. दे यार।. नहीं नहीं इतनी दूर तक वो उतनी जैसे आपको. तो माइक से आवाें आती है ना। इतनी बहुत. हल्के में बोली उतनी पूरी आती नहीं। ये तो. पता लगता है कुछ कह रहा है। क्या कह रहा. है इतनी आती नहीं आवाज।. तो आपके बगल वाला कोई कह रहा हो।. हां पता नहीं जाता।. तो कभी ऐसा हुआ नहीं कि आपने कहा भाई.
थोड़ा बस कर ले यार। हो गया भाई। अब कान. दर्द हो रहा है मेरे. बोलते पीयूष चावला को मैंने नाम लिया था. वो लड़ेगा मेरे से उसको बोलना पड़ता है. रुक जा यार मस्ती करता है वो अच्छा लड़का. है लेकिन अच्छा वो कुछ ना कुछ स्टोरी. चुटकुले कुछ चालू रहते हैं उसके. हम. एक और किस्सा आया था मुरलीधरन साहब को. अंपायर ने बार-बार नो बॉल दिया था अच्छा. आप जैसे अभी. चेकिंग का आता है. आपने मेरा वीडियो देखा था. आपका वीडियो देखा था मैंने कमेंट भी किया. था मैंने तो ये आप हर बॉल पे नोट करते हो. या किसी को कह दिया गया कि वाइस पे ध्यान. रखना इसको अलग से नोट कर रहे हो. क्या होता है कि आपका ध्यान चला जाता है.
कुछ भी एब्नॉर्मल होता है फिर दोनों दोनों. अंपायर देखते हैं। फिर उधर टीवी पे जो. बैठा होता है उसको कहते हैं भाई तू भी देख. जरा।. कभी-कभी किसी पर्टिकुलर बॉल को देखते हैं।. ऐसे बहुत से बॉलर हैं जो सारी बॉल ठीक. करते हैं। लेकिन कोई एक खास बॉल है जो. कभी-कभी करते हैं। उस पे ध्यान रखते हैं।. लगता है तो फिर रिपोर्ट करते हैं बस यही. है।. तो अंपायर को डर नहीं लगता कभी। जैसे मेरे. को याद है 1999 का किस्सा था। रॉस इमर्सन. वाला मुरलीधरन को बार-बार नो दे रहे थे।. राणा तोंगा ने कहा तुम्हारी ऐसी तैसी सब. वापस चलो। आज अंपायर हमारे ही खिलाफ खेल. रहा है। हम नहीं खेलेंगे।. तो उसमें उसमें अंपायर ने क्या डरना? उसका. काम है भाई।.
बट वो बैक टू बैक नो दे रहे थे।. वो लग रहा होगा उनको उनकी ओपिनियन है।. तो यह आप चेक करते हो। फिर मैं कह रहा हूं. कि ये नोटिस होने के बाद चेक करते हैं या. हर बॉल पे आते हैं।. नहीं हर बॉल पे ही करते हैं। वो देख रहे. होंगे शायद उनको फीडबैक भी आ रहा होगा. टीवी अंपायर का जो भी उस उन दिनों रूल अलग. रहा होगा। अभी तो आजकल रिपोर्ट करना होता. है।. हम. आप इतनी जल्दी नहीं कर सकते। पहले तो आजकल. तो बहुत प्रोसेस है। वो देख के रिपोर्ट. करते हैं। फिर उसका टेस्टिंग होता है. प्लेयर का। एंड ही हैज़ टू क्लियर देयर. टेस्ट। नहीं टेस्ट क्लियर करेगा तब तक. खेलता नहीं है वो। आजकल तो लैब बनी हुई. है। पूरा वहां जाकर पूरा सेंटर होते हैं. जहां पर पूरा सब लगा के उनका कितना बैंड.
हो रहा है, कितना स्ट्रेटनिंग हो रही है।. मैंने बताया था अपने वीडियो में बैंड होना. प्रॉब्लम नहीं है। बैंड होके सीधा होना. प्रॉब्लम है।. वंस यू रीच अ शोल्डर हाइट उसके बाद अगर. बैंड है तो बैंड ही रहे आखिर तक। बैंड. होने से नो बॉल नहीं है। बैंड को सीधा. करना नो बॉल है। दैट शुड नॉट बी मोर देन. 50°। दैट इज द लॉ।. कोई बॉलर आपको लगा जो भट्टा मारता हो पहले. बट खेल गया।. बहुत सारे हैं। अब तो बहुत पकड़े गए। पीछे. चारप साल पहले तो इतने पकड़े गए इतने बैन. हुए वो सब है ही नहीं कहीं. नहीं इंटरनेशनल का कोई बड़ा बॉलर. आपको सारे नाम पता है मेरे से क्यों पूछवा.
रहे हो मैं मेरा नाम मैं खराब हूं ना. मैंने आपको बताया था नाम भूल जाता हूं. वैसे मेरे को अख्तर का याद है शब अख्तर के. बारे में शवाग ने कह दिया था अब फिर आपकी. बात याद आ रही 30% काट देना. बट शोएब अख्तर के बारे में सहवाग ने कहा. कि उसने तो आधा करियर है भट्टा मारा है. पता नहीं वो लोग आपस में खेले उनको पता. होगा मैं तो अंपायरिंग करता नहीं था. पहले तो मेरे मैच की मेरे मैच की बात करो. आप. हम एक और क्वेश्चन मेरे मेरे मन में आता. है। ये आप बता सकते हो ज्यादा बेहतर। एमएस. धोनी जब ग्राउंड पे वॉक करते हैं इस बड़ी. चर्चा चली. कि भाई साहब शोर बहुत होता है। मैंने एक.
तस्वीर भी देखी रसल के कान में उंगली डाल।. खासकर पिछले दो साल से तो बहुत ज्यादा शोर. हो रहा है। बहुत ज्यादा शोर हो रहा है। तो. वो वो है ना उनका विसलपोडू। वो सिटी जैसा. एक है। बाप रे।. इसीलिए वो कम टाइम बॉल के लाते हैं। चार. पांच बॉल के लिए आते हैं ताकि लोग।. नहीं नहीं बहुत तेज आवाज है मजाक एक तरफ. वो बहुत ही वो जो लेवल है ना नॉइज़ का वो. डिफरेंट है बट ठीक है वो भी मजा है ना यार. तो मतलब बैठ का स्नेक लगे तो आपको पता. नहीं चलेगा. नहीं हमें तो लग जाता है पता.
अब इतना शोर वो कान में उंगली डाले बैठा. है वो डीबी डीबी दिखा इतना डीबी आवाज आ. रही. तभी तो हम अंपायर हैं हम अंपायर नहीं हो. ना वही तो हमारे में है ना गट फीलिंग वी. कैच द डेविएशन. बॉल लग के हिलती भी है ना. हां हमें जब नहीं सुनती तो लगी हुई कवर पे. भी नहीं सुनती जब सुनती है तो स्लिप में. भी सुन जाती है वो. ऐसा क्या होता है बॉल बॉल की आवाज कई बार. बॉल कौन से हिस्से पे लगी है ना बैट के. इससे फर्क पड़ता है अगर आप बहुत खासकर जो. कोका बॉल हैं इनकी अच्छी आवाज आती है एसजी. चेस का नहीं आता इतना सेम कॉर्ड बिहाइंड.
एस चेस में यू विल स्ट्रगल टू गेट इट बट. कोका बुरा वाइड बॉल यू विल गेट इट बॉल का. हार्डनेस ज्यादा है या तो जो भी है जब बॉल. लगती है बैट के ये वाले हिस्से पे तब नहीं. आती आवाज तब कम आवाज आती है लेकिन जब एज. लगता है तो आ जाती है और फिर डेविएशन भी. तो होता है ना बॉल की बॉल की डायरेक्शन. चेंज होती है मोस्ट ऑफ़ द केसेस कभी-कभी. नहीं होती तो गलती हो जाती होती है हमसे. अंपायर भी कभी गाली देते हैं. जैसे किसी ने बड़ा ईजी कैच छुड़ा के निकला. अबे. वो तब होता है वो हमारे एक अंपायर हैं कमल. जी ने दिल्ली में क्या हुआ कि मैं किस्सा.
सुनाता हूं आपको बड़ा मजा आएगा लोकल मैच. था तो उनके करीब ना दूसरी टीम के सात आउट. हो गए. और वो बहुत रन पीछे 200 रन पीछे मतलब इस. टाइप से थे. तो वो बोला भाई पकड़ के खेलना आराम से. आराम से कहता हम बेवकूफ खड़े हैं क्या. यहां पे धूप में तो ऐसे भी होते हैं लेकिन. वो पहले होते थे किसे अब नहीं होते पहले. के तो बहुत फेमस अंपायर थे हमारे उनके. बड़े थे कि जब बाद के दो तीन को तो कहते. चल निपटाओ तुम क्या करोगे जब पहले वालों. ने कुछ नहीं किया पर वो सब टीवी आ गया तो. वो सब नहीं है पर वो भी पता नहीं कितनी. स्टोरियां सच हैं कितनी झूठ है पर ऐसे. कहते थे लोग कि पहले ऐसे था कि चलो यार.
बाद के तीन वाले ये कहां 200 रन बना के. जाओ अपने घर तो बड़े फेमस अंपायर थे. इंडिया के उनके बारे में काफी जब वो लोकल. मैच को दिल्ली में करते थे बाद के तीन तो. जाओ यार तुम जब पहले वालों ने कुछ नहीं. किया तुम क्या करोगे. अंपायर का कभी डू डोंट आता है कि यह मत. करना यह मत करना ज्यादा बातें मत करना. नहीं ऐसा तो नहीं है लेकिन आपको अपने काम. का पता होना चाहिए। मजाक बैठ के बात करने. की मजाक है। लेकिन जब काम करते हो तो. दिखना चाहिए कि आदमी काम कर रहा है। मन से. पता लग जाता है। वैसे. उन्होंने सुना आप थाईलैंड गए थे अंपायरिंग. करने।. बहुत दिन 10 साल 10 साल मेरी अंपायरिंग.
मैच शुरू हुई। तभी तो मेरे को प्रेशर का. ज्यादा फर्क नहीं पड़ता इधर। मैंने अर्ली. स्टेज में झेल लिया।. सारा प्रेशर थाईलैंड में ले लिया।. हां जी। हां जी।. तो वो जो जो लोग कि ये मत करना वो मत. करना। वो वो स्टेज मैंने करने के बाद में. इधर आया।. तो. तो फर्क नहीं पड़ता। घर परिवार ज्यादा फोन. आता था उस टाइम. तब मेरी शादी कहां हुई थी तब 24 साल का था. जी मैं. सही टाइम पे था. शॉपिंग करने जाता था अंपायरिंग करने हो. शॉपिंग करने. सही बात है मनोज तिवारी ने हमसे कहा था. रामकथा करने गए थे आप शॉपिंग करने थाईलैंड. अच्छा वो गए थे अच्छा मिलते रहते हैं वैसे.
गाना बहुत अच्छा गाते हैं. खूब क्रिकेट के शौकीन है वो बड़ी तगड़ी इन. स्विंग करते हैं अच्छी इन स्विंग करते हैं. हां देखा है मैंने उनको. हां. उनके साथ भी खेला है आपने. पीछे एक मैच खेला उनकी बॉल मेरे भाई चांस. पैडवेड में घुस के विकेट में लग गई. उन्होंने जान ले ली फिर हमने डिसाइड. हम दो प्लेयर ऐसे रखेंगे इधर कप्तान आप. इधर मैं हमारा मतलब ऐसे डाला हुआ है हमने. कि हर हमारी टीम में कोई एक प्लेयर को दो. बार खेलने का चांस होगा। मैंने कहा बोले. आप तो आप हो ही आपकी टीम इधर में हो जाता. हूं फिर तो हम दो-दो बार बैटिंग करते हैं।. मैं भी ऑफिस के मैचेस से तो हम भी यही.
करते हैं।. नहीं इस बार बुलाएंगे आपको।. हां पक्का हम आएंगे।. अ थाईलैंड तो आप गए ही थे। फिर मैंने कहीं. सुना कि आपने कहा शादी करने का मन नहीं. था। तो ये थाईलैंड के बाद ही आया था? शादी नहीं? नहीं ऐसा तो नहीं था लेकिन वो क्या हुआ. था? मेरी फ्लाइट उधर अटक गई ऐसे लग गया था. कि मैं पहुंच पाऊंगा कि नहीं। मैं 15 को. वहां से निकला और 17 को मेरी शादी थी। तब. ना वो बहुत कम इंडियन एक तो इंडियन लाइंस. जाती थी और एक जाती थी थाई एयरवेज. हम. तो हमारी टिकट नहीं हो पा रही थी। तो हाथ. पैर जोड़े मैं कर दो नहीं तो घर में पहले. ही ये है कि शादी करें कि नहीं करें। ऊपर. से थाईलैंड। तो बड़ी मुश्किल लटकते हुए हम.
दो प्लेयर उन्होंने चढ़ा दिए इंडियन. एयरलाइंस में और पहुंच गए। नहीं तो कांड. हो जाता।. लड़का. वो होता कांड फिर।. लड़का सामने बैठा सोच रहा होगा मेरे. भविष्य पे सवाल खड़े कर रहे हैं। ऐसा. वो नई वाली जनरेशन बहुत तेज है। इनको कुछ. नहीं फर्क पड़ता।. सुपर्ब सुपर्ब। अभी एक और इशू हुआ था।. दिनेश कार्तिक का एलबीडब्ल्यू का बड़ा इशू. हुआ था।. अच्छा वह अभी हां नहीं उसमें साहब क्या था. कि मैंने बोला भी कमेंट्री में बैट हिट द. बैट एंड बैट हिट द बॉल हिट द बैट आल्सो. दोनों साथ में लगी थी।. हम. पता नहीं फिर कोई कमेंट्री में क्या शुरू. हुआ तो मुझे तो पता नहीं। आप अभी निकाल लो.
ज़ूम कर लो। बॉल का सीन भी चेंज होता दिखा।. दोनों चीजें लगी थी एक साथ।. हम. मैंने बोला था आपने।. तो ये दोनों अगर एक साथ लगता है। बैट और. पैड. यार बैट तो है ही ना फिर।. नहीं बैट लगा पैड में पहले।. हां। बॉल यहां से निकली तो बैट से लग के. गई तो फिर कैसे अलबी दोगे? मैंने वही तो बोला।. एक और कंट्रोवर्सी हुई थी। विराट कोहली को. एक बॉल आई थी हर्षित राणा की।. बड़ी चर्चा हुई थी। वो हल्का सा आगे थे।. कहा गया।. अच्छा उसमें मैं नहीं था। नहीं वो क्या. हुआ है? इस बारी आईपीएल में आईपीएलl में. बड़ी अच्छी टेक्नोलॉजी यूज़ की है।.
अब जितने भी इस तरह के बॉल हैं वो बॉल. ट्रैकर आ जाता है। जैसे डीआरएस होता है तो. हमको उसी को फॉलो करना होता है ब्लाइंडली।. तो ट्रैकर शॉट इज डाउन ना। सो व्हाट्स? लाइक व्हाट वी कैन डू।. तो वो आउट था. टेक्नोलॉजी थी ना टेक्नोलॉजी बॉल नीचे. दिखा. वाइट वाइट नाप. हां वो तो कुछ नहीं कर सकते अब डीआरएस. आएगा डीआरएस में आपको हिटिंग दिखा रहे है. तो हिटिंग है मिसिंग है तो मिसिंग है. तो वी हैड दैट बॉल ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी. पहली बार हुआ हर प्लेयर को खड़ा किया उसका. वेस्ट नापा फिर वो ट्रैकर यूज़ करते थे तो. तो पूरा टेक्नोलॉजी उसके हिसाब से बॉल. नीचे था तो नीचे ही माना गया.
अच्छा अंपायर की फ्लेक्सिबिलिटी कितनी. जरूरी होती है. बहुत जरूरी है आजकल तो वरना आपको बॉल लग. जाएगी गेम इतना तेज हो गया इतना तेज हो. गया और खासकर डे नाइट मैचेस में. इतने अच्छे इक्विपमेंट है आजकल बॉल आपको. कभी कभी भी लग सकती है अगर आप अलर्ट नहीं. है तो. तो वो आपने आप गार्ड नहीं लगाते. नहीं गार्ड नहीं मैं जंप कर लेता हूं जी. मेरा जंप काफी फेमस है मैं जंप कर लेता. हूं फिर भी लेकिन जब लगेगी ना बॉल तो. पूछेगी नहीं कि जंप की. पूछ वो उसको मैंडेटरी नहीं करना. विजिबिलिटी का प्रॉब्लम है ना जिसको आदत. नहीं है वो जैसे बैटिंग में कई लोग हेलमेट. पहले नहीं लगाते तो अब अगर मैं हेल हेलमेट. लगा लूंगा मुझे कहीं बॉल ना दिखी तो वो.
आदत डालनी पड़ेगी ना बट हां आने वाले टाइम. में अंपायर लगा लें तो कोई बड़ी बात नहीं. है. सेफ्टी में कोई बुराई नहीं है पर बॉल लग. सकती है आजकल क्रिकेट ऐसा हो रहा है. हम मैंने धोनी का एक किस्सा मुझे आता है. कि एक बार अंपायर के फैसले से बहुत नाराज. हो गए थे वो बीच में आ गए थे।. हां में बहुत पहले हां. हां कुछ कंफ्यूजन था आई थिंक देन इट वास. सॉर्टेड. तो उसीलिए पूछ रहा हूं मैं जब बड़ा प्लेयर. होता है थोड़ा तो अंपायर को भी लगता होगा. फाइन हुआ था ना उस टाइम जो हुआ था फाइन. हुआ था ना जो जो कानून है सबके लिए बराबर. है जी.
बट हमने ऐसे भी किस्से देखे हैं कि रिकी. पोंटिंग ने अपील करी. हम. बॉल टप्पा खाए गई थी. रिकी पोंटिंग ने कहा आउट. अंपायर ने कहा आउट. उसमें हमारा तो कोई आदमी नहीं था ना. नहीं हमारा आदमी. वी आर फाइन ना. तो इंडियन इंडियन अंपायर्स आर स्किल्ड. अंपायर्स. इंडिया से बैठा।. फिर मेरे को सहवाग याद आ गए।. तो गिलकिस ने उनसे पूछा कि आप लोग बाहर. क्यों नहीं खेलते? वो बोले वी आर रिच. पीपल।. बोलता तो ठीक है वो। बस वो 40% जब भी वो. करे उसका 40% लेस मार दो। बाकी पूरे नंबर।.
प्रवीण कुमार से आपकी दोस्ती कैसे चल रही. है? ठीक है जी। तो दोनों हम एक ही जैसे हैं।. मतलब एक ही जैसे का मतलब एक ही जगह के. हैं। वो एक जैसे नहीं है।. पीते सब हैं बदनाम प्रवीण।. नहीं नहीं वो हम लोग एक ही तरफ के हैं।. गन्ने वाले हैं और बातचीत करते रह। देखो. बॉलिंग का तो मास्टर है वो।. हम. उसमें तो कोई डाउट ही नहीं है। जो मर्जी. आप उसके लिए हंसिए, मजाक कीजिए। बॉलिंग का. इंसान भी दिल है।. वो अपना अपना वो थोड़ा ध्यान रखें। इट कैन. बी वै यूज़फुल फॉर एनी टीम। एज अ कोच, एज अ.
गाइड वो जो कैपेबिलिटी उसमें है वो तो. मैंने पर्सनली देखी है। वो बॉल का. सिलेक्शन, बॉल का स्विंग का आईडिया जो बॉल. की नॉलेज उसको डालने की और सेलेक्ट करने. की बहुत कम लोगों को है। वो क्वालिटी है।. मिलते रहते हैं हम लोग। मेरठ में जाता हूं. तो मिलता हूं। हां।. उन्होंने हालांकि एक्सप्रेस किया कि. उन्हें किसी ने अप्रोच नहीं किया। कोचिंग. के लेकर ही वास डिसपॉइंटिंग।. वो मेरठ रहता है। वो शांति से रहता है।. वैसे वो ज्यादा भागदौड़ करता नहीं है। वो. अपने में मस्त है। तो मैं जब मेरठ जाता. हूं हम मिलते हैं खूब।. हमें भी हम भी गए थे मेरे साथ। से बिंदास. आदमी बढ़िया एकदम. एक और किस्सा याद आ गया सर मुझे बाबर.
रिज़वान का. जी. रिज़वान ने अपील करी आपने आउट दे दिया. बाबर कह रहा है भाई साहब कैप्टन मैं हूं. ये एशिया कप की बात है हुआ क्या है कि आई. थिंक छह सात रन चाहिए थे. एक तो दाढ़ी का बड़ा चक्कर है सबने तो. दाढ़ी रखी हुई है वो कुछ हुआ अपील हुई और. सब तीन चार एक साथ हुए किसी ने ऐसे किया. मैंने सोचा इनमें से कोई होगा. मैंने इशारा कर दिया वो इधर मिड ऑफ से आया. निकल के अरे मैं तो यहां हूं मेरे से पूछा. नहीं मैंने कहा तो वापस कर लूं कहता नहीं. अब ले लिया तो ले लिया फिर बोल के नेक्स्ट. डे मेरे को मिला लिफ्ट में. हां लिफ्ट में कहता है जी वो मैं खेल रहा. हूं कल जनाब में जनाब में खेल रहे हैं कल.
ऐसे बोलते हैं ना जनाब में कल खेल रहा मैं. ठीक है तो ये ये होते हैं फनी मोमेंट ये. अच्छा याद दिलाया आपने ये नेचुरल होते हैं. और ये इसको बोलते हैं कॉमेडी बाय एरर या. क्या बोलेंगे आप सही वो अगले दिन. फोटो-वोटोो सब चलाकू. अच्छा जैसे अंपायर भी बहुत सारे अब अंपायर. की पहचान उनके आउट देने के तरीकों से होती. है कोई नीचे बैठ के आउट देता है कोई उंगली. टेढ़ी करके. नीचे बैठ के कौन आउट देता है यार. बिल्ली हमने बिल्ली जी को देखा कई बार बैट. मोड़ के नीचे से बैठ के हां थोड़ा शुरू. करते सिक्सर देते हां हां हां.
हमने भी देखा है सर. नहीं नहीं पूरा देख लिया मैंने आपको. आईडिया है. तो कुछ आप लोग भी सोचते हो कई बार यार. थोड़ा इनोवेटिव हो कैमरे पे अलग से दिखाते. हैं फिर. नहीं सबका नेचुरल होता है कोई कोई झटके से. आउट देता है कोई आराम से आउट देता है कोई. ऐसे छुपा के आउट देता है कि कोई देख ना ले. ऐसे देते हैं कई लोग ऐसे दे बस इतना सा ही. और मैं ऐसे घुमा के आउट देता हूं स्लो डेथ. शुरू से ऐसे ही है जैसे मैंने चेंज नहीं. किया. जैसे 2ाई पौने रन बनते हैं आजकल. हां जी. अब बार-बार चौका देना पड़ता है बार-बार. देना पड़ता है हाथ तीन तक. ना एक मैच में पीछे अभी 270 बने थे मेरे.
मैं ही तब वो 25 रन से वो दूसरी टीम में. चेस भी कर लिए होते ऑलमोस्ट. हां. हां मतलब देते रहो. आप घर रखे तो नहीं यार आज बहुत हो रहा है. इतना भी नहीं होता जितना आप कर रहे हो पर. हां. अरे. हां नहीं नहीं होता है भाई खूब लोग बोलते. हैं भाई आज थक गएगे तुम तो मैं चलो आज. पैसे वसूल हुए पूरे आज सैलरी जस्टिफाई करी. आज काम करवा लिया. हां नहीं इशारे ज्यादा करने पड़ते हैं भाई. और इशारे में क्या होता है कि टीवी के. मैचेस में आपको फिर थोड़ा रुकना भी पड़ता. है पॉज करना पड़ता है एक दो कदम निकलना. पड़ता है आप जल्दी दे दो तो उधर डायरेक्टर. का आ जाता है कि एंड यू नीड टू स्लो डाउन.
अ बिट बिकॉज़ यू आर गिविंग अ बाउंड्री एंड. आई कुड नॉट कैप्चर इट। सो यू डू इट अगेन।. सो देन यू टू स्लो डाउन। तो बार-बार करना. बार-बार उसी पॉज में खत्म करना काम तो है।. कोई एक ऐसा क्रिकेटिंग रूल जो आपको लगता. हो ये चेंज होना चाहिए।. अ. आई थिंक ये जो अभी हम नो बॉल चेक करते हैं. ना आउट होने पे ही ये जो अबव वेस्ट वाला. है ये हर बॉल अलाउड हो जाना चाहिए।. क्योंकि क्या होता है कि 140 150 पे ना. मुश्किल होता है खासकर ये जो अबव वेस्ट. वाली को चेक करना। आई थिंक एव्री व्हिच इज़.
क्लोज अंपायर शुड बी अलाउड टू चेक।. जैसे ऑटोनोबल आई है ना उधर भी ऑटोनोबॉल. जैसा आ जाना चाहिए क्योंकि बाउंस और. बाउंसर फिर आपको आईडिया आता है जो अबव. वेस्ट आती है क्योंकि बॉल ना डिप करता है. कई बारी। सो ये भी ऑटोनोबॉल की तरह आ जाना. चाहिए कि जो भी बॉल है वो टीवी अंपायर को. अलाउड हो चेक करना और सिंपलीफाई हो जाएगा. गेम और थोड़ी एक्यूरेसी भी आ जाएगी और. प्लेयरों को भी थोड़ा अच्छा लगेगा। कोई एक. रूल जो चेंज हो गया आपने कहा भला हुआ भाई. ये नो बॉल वाला ही पहले हमें देनी पड़ती. थी अब उधर पहले से हो जाता काम क्योंकि ना. आप देखो आप रन आउट तो इधर से दे रहे हो नो.
बॉल आप इधर से दे रहे हो लाइन तो सेम ही. है मुश्किल था ना यार तभी कितनी गलतियां. हो रही थी अच्छा रूल आया ये अब सीधा देखो. अपना आराम से इधर का चक्कर ही खत्म. थैंक यू सो मच सर लवली टॉकिंग टू यू मजा. आया अंपायरिंग का एक पहलू होता है देखने. का. आई एम श्योर दर्शक भी काफी एन्जॉय करेंगे. नहीं नहीं लोग क्रिकेट का इसको ड्राई. पार्ट समझते हैं ड्राई नहीं है जिसने मजा. लेना होता इसमें ही मजा ले लेता है वो. आदमी बस आदमी को मजा. बड़ी खबरें बनेंग सर आप इस पॉडकास्ट में. बहुत सारी खबरें देके जा रहे हैं. अखबारों में आप छाने वाले हैं.
कोई नहीं. फिर से तस्वीर बनेगी सर के ऊपर नहीं. जेल में हो तो छुड़वा देना. थैंक यू सो मच सर. थैंक यू थैंक.
