Unplugged ft. Sudhir Chaudhary | News Anchor| सुधीर चौधरी । Podcast| Life Decode| Shubhankar Mishra
आपके ये बाल असली है सर? नमस्कार, मैं हूं सुधीर चौधरी। आपका. बहुत-बहुत स्वागत। बहुत लोग ये पूछते हैं. कि सुधीर चौधरी के बाल जो है वो असली है. या अन्य लगाते हो? पर ये सवाल मुझे बड़ा. अच्छा लगा। मुझे पसंद आया। आज तक मैं आराम. जा रहा था लेकिन लोग कह रहे हैं डीडीओ से. पैसा बहुत ज्यादा है। ₹16 करोड़. ये सच है। मतलब सरकारी चैनल से इतना पैसा. लेना कैसे पॉसिबल हो गया? वो 15-20 करोड़. रुपए लोगों को कितना चुभ रहे हैं? यही. पैसा अगर एक एक्टर कमा 16 की जगह 20 भी हो.
सकता है। मतलब जितना भी है लेकिन ये पैसा. कितना चुभ रहा है लोगों को। मैंने एक बार. आप तक में आपसे पूछा था कि सर अपना कमेंट. सेक्शन आप देखते हो तो आपने कहा नहीं. शुभांकर मैंने छोड़ दिया अब काफी चमड़ी. मोटी हो गई है। तो आई रियली वांट टू नो ये. चमड़ी कैसे मोटी हो गई। कुछ लोगों की नजर. में खटकने का मजा ही कुछ और है। आपने सोशल. मीडिया पर अपने परिवार की तस्वीरें नहीं. डाली है। मेरे परिवार की इतनी ट्रोलिंग की. गई। मेरे परिवार को इतनी धमकियां मिली उस. दौरान जान से मार देने की धमकी। ओ हां भी.
डीएनए सुना कि ठोकागे। आप बाहर निकलोगे. आपका एड्रेस सार्वजनिक कर देने की धमकी।. अभी भी पता है कि तू कित्थे जाने और. कित्थे रहने? एक पिता के लिए आप सोच सकते. हैं कितने दर्द की बात है कि वह बता नहीं. सकता कि उसके परिवार में कौन-कौन है। आपके. बच्चे सोशल मीडिया पर फादर्स डे पर विश. नहीं कर पाते। आपके बच्चे आपकी फैमिली एक. नॉर्मल जिंदगी नहीं जी सकते। तिहाड़ एक. वीडियो का आना जिसमें 100 करोड़ की डिमांड. होना पर मैं मानता हूं। बहुत बुरा मामला. है। बहुत कंट्रोवर्शियल केस हुआ है और. बहुत सारे लोगों ने कहा कि आपसे पूछा जाए।. आपकी प्रोफाइल में भी नीचे वो कमेंट आता. रहता है तिहाड़ तिहाड़।.
जी। 2007 स्कूल टीचर उमा खुराना एक. स्ट्रिंग ऑपरेशन आता है जिसमें कहा जाता. है कि स्कूली छात्राओं को सेक्स के लिए. ग्राहकों को पेश करते दिखाया गया। इसके. बाद भीड़ जाती है। उनके साथ मिस हैंडलिंग. होती है। बाद में खबर आती है कि वो. स्ट्रिंग ऑपरेशन फेक था। ये एक स्टिंग. ऑपरेशन ये एक स्टोरी थी जो हमारा एक. रिपोर्टर कर रहा था। एक खबर आती है देश. में नोट की। मैं तो टीवी का पार्ट हूं।. मैं भी ये समझना चाहता हूं कि 2000 के नोट. में नए छिप आएंगे। ₹2000 के करेंसी नोट को. बनाने के लिए नैनो टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल. होगा। बड़ा इंटरेस्टिंग किस्सा है। ये मैं. बड़े रोचकता से जानना चाहता हूं। आपसे.
किसी लड़की ने कहा यू डोंट लुक 53 बहुत. सारी लड़कियां कहती हैं। आपका रिश्ता कैसा. था रोहित सरदाना से और वो आपके लिए कितना. बड़ा डेंट था? रोहित के ऊपर मुझे याद है. मैंने पूरे एक आधे घंटे का शो किया था। वो. शो मैंने बड़े दिल से किया था। बट शो खत्म. करने के बाद मैं बहुत रोया उस दिन।. [संगीत]. तो मोदी जी का पहला इंटरव्यू कब किया था. आपने? पहला इंटरव्यू तो मैंने उनका तब. किया था जब वो बीजेपी में पदाधिकारी थे।. इतना पुराना मैंने उनका इंटरव्यू किया था।. 90 में। 90 में तो वो स्टूडियो में ही आते. थे तब टाइप्स ऑफ जिहाद तो आपने मैप बनाया.
था ये जिहाद ये जिहाद ये जिहाद ये जिहाद. ये जिहाद और उसी के ऊपर मेरे ऊपर केरल में. एक एफआईआर भी हो गई थी तो आर एंटी मुस्लिम. नमस्कार मैं हूं सुधीर चौधरी और आज सबसे. पहले हम आपको यह बताएंगे कि भारत और. पाकिस्तान के बीच यह जो युद्ध चल रहा है. इस युद्ध के बाद भारत में कितने बदलाव आए. हैं और कौन-कौन सी नई चीजें हमें देखने को. सर ये पडकास्ट है सर ये मेरा पडकास्ट है.
जहां आपने माना है ये आपका डिकोड शो नहीं. है. सॉरी शुभंकर मैं जहां भी कैमरा देखता हूं. वहां मैं अपना शो शुरू कर देता हूं और. मुझे लगा कि आज मैं डिकोड का कोई नया. एपिसोड कर रहा हूं। एनीवेज वेलकम सुधीर. चौधरी जी। थैंक यू सो मच। मुझे जब यह शो. प्लान कर रहा था तो मुझे लगा क्या इसकी. थीम होनी चाहिए? तो मुझे लगा कि यह होना. चाहिए कल आज कल। बिल्कुल। कुछ ऐसी कहानी. पत्रकारिता के कल से लेकर आज और आज से. लेकर कल की दास्ता जो है मुझे लगता है इस. एपिसोड में हम कर सकते हैं। लेकिन कैसे.
हैं आप? मैं बहुत अच्छा हूं और एक नई. चुनौती मैंने ली है। मुझे हमेशा यह शौक. रहा है कि लाइफ में बार-बार नई चुनौती आनी. चाहिए ताकि आप अपने आप को शेक कर सको।. अपने आपको अपनी जो लिमिट्स हैं उसे दोबारा. से आप टेस्ट कर सको। तो एक बहुत मुश्किल. चुनौती मैंने इस बार ली है और मैं बहुत. एंजॉय कर रहा हूं और एक बार फिर से मैं. देखना चाहता हूं कि मेरे अंदर कितना दम. अभी बचा हुआ है। मैं बहुत सारे लोगों से. बात कर रहा था सोशल मीडिया पर और कई सारे. लोग मिलते हैं। कईयों का नजरिया है कि.
सुधीर चौधरी जी का जो पीक था आप कह रहे हो. कि आपने एक नई चुनौती ली है। बट कई ऐसा. मानते हैं कि आपका जो पीक था वो हो गया।. अब ये रिटायरमेंट प्लानिंग की तरफ डीटी. है। इज इट अ चैलेंज और रिटायरमेंट प्लान. डीडी? नहीं वो उल्टा सोच रहे हैं। देखिए. एक तो आप ये समझिए कि इससे पहले आप किसी. भी मैं बहुत हमंबली ये बात कह रहा हूं।. मैं ये नहीं कह रहा कि मैं बहुत बड़ा हूं. या मैं उनके जैसा हो गया हूं। लेकिन कोई. भी व्यक्ति जो अपने करियर के शीर्ष पर. होता है। बार-बार उसके बारे में यही कहा.
जाता है कि अब इसका हो गया। अब ये इसका. पीक समाप्त हो चुका है। अब ये ढलान पर है।. अब इसे रिटायर हो जाना चाहिए। तो हर बार. आपकी ये स्क्रूटनी तो होती है। आप याद कर. लीजिए सचिन तेंदुलकर की भी ऐसे ही होती. थी। अमिताभ बच्चन की भी ऐसी ही होती थी।. हर एक जिसने भी कुछ अच्छा किया है वो. हमेशा उसकी ऐसे ही स्क्रूटनी होती है और. निंदा भी होती है। और मैं मानता हूं कि जब. तक आप जिंदा हैं निंदा तो होगी ही। तारीफ. तभी होती है जब आप मर चुके होते हैं। तो. तारीफ सुनने के लिए मरना पड़ता है। जब आप.
चले जाते हैं तब लोग कहते हैं कि आदमी. अच्छा था। ट्रू। तो मुझे लगा कि देखिए. जैसा मैंने आपको कहा कि डीडी पर आना ये एक. कंफर्ट ज़ोन नहीं है। ये एक रिटायरमेंट जॉब. नहीं है। यह बहुत बड़ा चैलेंज है। मैं. चाहता तो मैं किसी भी प्राइवेट चैनल में. अच्छा पैसा कमा रहा था। इतना कमा रहा था. जो मेरे लिए काफी है। मैं बहुत आराम से. वहां रह सकता था। बहुत अच्छा परफॉर्म कर. रहा था। ऐसा भी नहीं है कि लोग यह कहें कि.
भाई शो चल नहीं रहा था इसलिए जाना था या. आपका परफॉर्मेंस बहुत खराब है। परफॉर्मेंस. बहुत अच्छा था। और मुझे ऐसा लगता है कि आप. जब भी आप जाएं या जब भी आप रिटायर हो तो. लोग यह ना कहें कि रिटायर क्यों नहीं हो. जाते? लोगों को यह कहना चाहिए कि अरे अभी. तो और कर सकते थे। तो मैंने जो यह चेंज. किया है, यह तब किया है व्हेन आई वास एट. माय टॉप।. और दूरदर्शन में जाने के बाद अब मैं यह. देखना चाहता हूं कि क्या दूरदर्शन भी.
व्यूअरशिप के मामले में प्राइवेट न्यूज़. चैनल्स को टक्कर दे सकता है या नहीं? और. वो भी अच्छा कंटेंट लगा के। नहीं बट इस. देश में कॉमन सवाल रहा कि सुधीर चौधरी ने. आज तक क्यों छोड़ा? आज तक देश का सबसे. बड़ा चैनल है, पुराना चैनल है, भरोसेमंद. है। रात को 9:00 बजे सबसे प्राइम टाइम में. आप थे। अ लोग पसंद कर रहे थे ब्लैक एंड. वाइट। उसकी चर्चा देश भर में हो रही थी।. सडनली लोगों को शौक लगता है व्हाई डीडी. न्यूज़? एक डेड चैनल है। सरकारी चैनल है।. बहुत सारी खबरें आती हैं कि बहुत मोटा.
पैसा मिला है। मैं उधर भी आऊंगा। लेकिन. पहला सवाल तो यही कि आज तक छोड़ने का रीज़न. क्या था? कुछ और चुनौती लेना चलो एक अलग. चीज आई। बट वो छोड़ने का थॉट क्यों आया? आज तक क्यों आप आज तक छोड़ देते हो? देखिए उसका मेरा एक मैं पहले भी इसका एक. जगह जवाब दे चुका हूं। अब मुझे मेरे करियर. में 30 साल हो चुके हैं। जहां मैं पहुंचा. हूं इस देश की वजह से इस देश के लोगों की. वजह से पहुंचा हूं।. 30 साल काम करते-करते मुझे अब ऐसा लगने. लगा कि जहां मैं हूं वहां अब मुझे इस. सोसाइटी को वापस देना चाहिए कुछ। इस देश.
के लिए कुछ और करना चाहिए। मतलब मैं यहां. तक आया। इस देश के लोगों ने मुझे यहां तक. पहुंचाया। अब मैंने उनके लिए क्या किया? क्या मैं एक शो करता रहूंगा? उस शो की जो. सक्सेस है, वह इस बात पर नापी जाएगी कि. इसकी टीआरपी कितनी है? यह कितना पैसा. कमाता है? इसके व्यूज कितने हैं? क्या बस. यही है? मेरी जिम्मेदारी सिर्फ इतनी होनी. चाहिए कि मैं एक सुपरहिट शो बनाऊं जिसके. व्यूज अच्छे हो, जिसके लाइक्स अच्छे हो जो. TRP में बहुत ऊपर हो। लेकिन उससे देश को.
क्या फायदा हो रहा है? एक कंपनी को फायदा. हो सकता है। हम्म।. मुझे भी हो सकता है फायदा हो उसका क्योंकि. मुझे अच्छे पैसे मिलते रहेंगे। लेकिन. हमारे देश को और हमारी सोसाइटी को उसका. क्या फायदा हो रहा है? तो ये ब्लैक एंड. वाइट से डिकोड में देश का फायदा कैसे. होगा? देश का फायदा ऐसे होगा कि मैं उन. सारे दबाव से अपने आप को मुक्त करना चाहता. हूं। जो दबाव या आप कह लीजिए कि जो. कंपल्शंस होती हैं एक सिर्फ एक व्यूअरशिप. लाने के लिए।. मैं यह चाहता हूं कि मुझे अब इतनी आजादी.
और इतना एक मेरा मुझे एक दायरा मिलना. चाहिए। जहां मैं यह सोच सकूं कि देश के. लिए क्या अच्छा है। हमारी सोसाइटी के लिए. क्या अच्छा है। जहां मुझे यह दबाव ना हो. कि आज आपको एक मसालेदार खबर से ही शुरू. करना है। क्योंकि इस पर रेटिंग आएगी और इस. पे नंबर्स आएंगे। ओके। मैं यहां ये नहीं. कह रहा हूं कि आप मुझे रेटिंग और नंबर से. मुक्त कर दीजिए। सही बात है। ये भी नहीं. कह रहा हूं मैं। मैं ये नहीं कह रहा हूं. कि मैं एक अलग छोटा प्लेग्राउंड लेकर बैठ. जाऊंगा जहां मैं इस सब से मेरी मुक्ति हो. जाएगी। लेकिन तो भी मैं ये चाहता हूं कि.
अब मैं जो जो मैंने आपको कहा कि जो मैं. प्रयोग करना चाहता हूं वो ये है कि क्या. आप एक अच्छे कंटेंट के साथ भी नंबर्स ले. सकते हैं? क्या आप एक अच्छे कंटेंट के साथ. जिसमें एक फैमिली का फायदा हो सकता है, समाज का फायदा हो सकता है? क्या ऐसी खबरें. लेने के बाद आप अपने इस देश को कुछ वापस. दे सकते हैं? क्या मैं कुछ खबरों को मना. कर सकता हूं कि मैं यह खबर नहीं करूंगा. क्योंकि मेरा मेरा मन नहीं है इनको करने. का। मेरा मन नहीं कर रहा। तो, मैं अब उस.
स्थिति में उस ज़ोन में मैं आना चाहूंगा।. ये आजादी आपको पहले नहीं थी। यह आजादी. मेरे शो में मुझे ऐसा कभी लगा नहीं कि. किसी ने कभी मेरे ऊपर यह कहा हो कि यह खबर. लेनी है या नहीं लेनी है। यह कभी नहीं था।. लेकिन एक प्रेशर जरूर होता है। जब हर. हफ्ते टीआरपी आती है, जब बार्क का डाटा. आता है तो आपकी जो टीम है या आपका जो. मैनेजमेंट है चैनल का वो डाटा एक बार ऐसे. आपको दिखाता जरूर है और बिना कहे संदेश.
होता है। बिना कहे एक संदेश होता है और वो. ये बताता है कि देखिए पिछली बार के. मुकाबले थोड़ा गिर गए हैं। ये जो दूसरे. कंपनी है या दूसरा चैनल है ये थोड़ा सा उठ. गया है। तो जरा देखिए ये क्या कर रहा है।. तो फिर आप देखते हैं कि वो क्या कर रहा. है। तो आप देखते हैं कि वो बहुत सस्ता. कंटेंट लगा रहा है। आप देखते हैं कि वो. आपसे ज्यादा मसालेदार खबरें दे रहा है। आप. देखते हैं कि वो आपसे ज्यादा चिल्ला रहा. है गला फाड़ के। आप देखते हैं कि वो अपने. स्टूडियो में किसी का और ज्यादा अपमान कर.
रहा है। अब आप उस दौड़ में कब तक दौड़ते. रहेंगे? और कहां तक आप जाएंगे और क्या. आपका जीवन सुबह, शाम, रात इसी चिंता में. घुलेगा कि मुझे टीआरपी चाहिए और कुछ भी. करके टीआरपी चाहिए और मैं मुझे टॉप पर. रहना है और उसके लिए मैं कुछ भी अपने. सिद्धांतों के साथ पसंद नापसंद के साथ. कॉम्प्रोमाइज कर सकता हूं तो अभी तक मुझे. कॉम्प्रोमाइज करने की आवश्यकता नहीं पड़ी. लेकिन आगे भी ना पड़े प्रत्यक्ष तौर पर.
नहीं पड़ी नहीं पड़ी ओके डीडी न्यूज़. क्योंकि सरकारी चैनल है सर आपने कहा आप. लोगों को रिटर्न करोगे अब इस देश में कॉमन. आदमी के मन में सवाल होगा सरकारी चैनल है. तो सरकार के खिलाफ तो कुछ जाना नहीं है वो. तो बिल्कुल आपको बैन होगा क्योंकि पैसे. वही दे रहे हैं। चैनल उन्हीं का है। तो. फिर यह हेल्दी डेमोक्रेसी के लिए डीडी. न्यूज़ से आप कैसे कंट्रीब्यूट कर पाओगे? एक और शुभांकर मैं आज बात कहना चाहता हूं।. हमारे देश में जो एक पॉलिटिकल माहौल है वो. इतना टॉक्सिक हो गया है। इतना जहरीला हो. गया है। उसको लोगों ने बिल्कुल दो हिस्सों. में बांट दिया है। प्रो गवर्नमेंट और एंटी.
गवर्नमेंट। मैं आपको यह बताता हूं। आप और. सारे दर्शकों से भी मैं यह बात पूछना. चाहता हूं। आप जब सुबह उठते हैं और रात तक. आप अपने काम पर निकलते हैं, वापस घर आते. हैं। आपके जीवन में जितनी भी घटनाएं होती. हैं, जितनी भी चुनौतियां आपकी होती हैं, क्या अब उन सबको आप ऐसे ही करके देखते हैं. कि यह प्रो गवर्नमेंट है और ये एंटी. गवर्नमेंट है। ये बीजेपी है और ये. कांग्रेस है। आपके जीवन में किस समस्या का. समाधान कांग्रेस और बीजेपी के नाम से होता.
है? कि यह मेरी समस्या है कांग्रेस, यह. मेरी समस्या है बीजेपी। ये समाधान. कांग्रेस है। ये बीजेपी है। ये समाजवादी. पार्टी है। कितनी बार आप सोचते हैं जब. आपको अपने बच्चे की फीस देनी होती है।. आपके बच्चे को स्कूल में जाकर कोई बुली. करता है। आपके आसपास मिलावटी दूध आ जाता. है। आप जब अदालत में जाते हैं तो आपके पास. इतना पैसा नहीं है कि आप महंगा वकील कर. सकें। जब आपको टूटी फूटी सड़कें मिलती हैं. या और बहुत सारी चुनौतियां होती हैं. जिंदगी की।. आपको कोविड हो गया। आप अस्पताल में हैं और.
उस समय आपको कोई ऐसा दोस्त चाहिए जो कि. आपका मनोबल ऊपर कर सके। अब इसमें कांग्रेस. बीजेपी कहां से आ जाएगी? क्या कांग्रेस ये. काम करेगी? क्या बीजेपी ये काम करेगी? तो. मुझे ऐसा लगता है कि ये खासतौर पे जो सोशल. मीडिया पे जो ट्रोल आर्मीज़ हैं, इन्होंने. हमारे पूरे जीवन को पॉलिटिकल बना दिया है।. एक आम आदमी का जीवन पॉलिटिकल नहीं है। वो. पॉलिटिक्स के हिसाब से नहीं सोचता। एक आम.
आदमी सुबह उठ के क्या सोचता है? सुबह एक. अच्छी चाय मिल जाए। मॉर्निंग वॉक पर जाएं. तो अच्छा माहौल, साफ सुथरी हवा मिल जाए।. एक अच्छे स्कूल में बच्चों का एडमिशन हो. जाए। बच्चे पढ़ लिख के कुछ अच्छा काम कर. लें। मैं जब घर से निकलूं तो सही सलामत. अपने दफ्तर पहुंच जाऊं। हर साल मेरा एक. प्रमोशन हो जाए। थोड़े से पैसे बढ़ जाए।. और जीवन में वीकेंड पे अपने दोस्तों के. साथ कुछ अच्छा समय बिता लूं। कहां अच्छा.
खाना खाना है, कहां से अच्छे कपड़े पहनने. हैं, कहां वेकेशन पर जाना है? बच्चों के भविष्य के बारे में आगे क्या. सोचना है? यह भी तो बहुत सारी चीजें हैं।. आपकी मेंटल हेल्थ के बारे में कौन सी. पार्टी सोचती है? आज आपको तनाव है और आप. सो नहीं पा रहे हैं। आज आप बहुत अकेलापन. महसूस कर रहे हैं। सब कुछ है आपके पास पर. नींद नहीं आ रही। आप अकेलापन महसूस करते. हैं। आप आपका कोई दोस्त नहीं है। आपके. रिश्ते कमजोर होते जा रहे हैं। यह सब वो.
चीजें हैं जिनके बारे में मेन स्ट्रीम. मीडिया बात ही नहीं करता। और इसीलिए मैं. आपको बताता हूं। इसीलिए ज्यादातर लोग. न्यूज़ नहीं देखते। क्योंकि न्यूज़ में. होता क्या है? सारे दिन कांग्रेस, बीजेपी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, फलाना ढिमकाना. इसने यह कह दिया, इसने यह कह दिया, इसने. यह कह दिया। पर मैं आपको आज भी बताता हूं. और मुझे लगता है ज्यादातर लोग इस बात से. एग्री करेंगे कि जीवन राजनीति से कहीं. ज्यादा बड़ा है। जीवन चुनाव से कहीं. ज्यादा बड़ा है। ट्रू जीवन बीजेपी,
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी वो क्या कर रही. है? उसने कितनी सीटें जीती हैं? कौन. मुख्यमंत्री बनेगा, कौन मंत्री बनेगा? किसने क्या कह दिया? इससे कहीं ज्यादा. बड़ा है। बट जैसे राजनीतिक पार्टियां जो. पॉलिसीज बनाती है उनका असर जीवन पर भी. पड़ता है। जैसे डोनल्ड ट्रंप अभी कुछ आजकल. काफी बयान दे रहे हैं। तो उन चीजों का असर. आम लोगों के जीवन में पड़ता है। तो एक. सवाल अब मेरे दो सवाल यहां पर आ गए। वो. आपके जीवन का एक हिस्सा है। आपको उसके. बारे में जरूर जानना चाहिए। जैसे आपको. अपनी मेंटल हेल्थ के बारे में जानना. चाहिए। जैसे आपको अपने स्वास्थ्य के बारे.
में जानना चाहिए। जैसे आपको यह जानना. चाहिए कि आपके बच्चे को अच्छा वजीफा कहां. मिलेगा? अच्छे स्कूल में एडमिशन कहां. मिलेगा? कॉलेज में क्या करना चाहिए? वैसे. ही आपको पॉलिसीज के बारे में जानना चाहिए।. पॉलिटिकल पार्टीज की नीतियां क्या है? उनके बारे में जानना चाहिए। कौन सा नेता. आपके लिए अच्छा है? कौन सा नेता खराब है? उसके बारे में जानना चाहिए। मैं बिल्कुल. एग्री करता हूं। सो व्हाट्स योर थॉट अबाउट. डिकोड? डिकोड एक तरीके से हुआ कि आप उसको. ओपन करके दुनिया के सामने रख दोगे। एक खबर. को सच को। तो आप पत्रकारिता में डीडी में. जाने के बाद आपका पत्रकारिता को लेकर क्या. नजरिया है एंड डिकोड क्या करने वाला है?
देखिए ये मेरा तीसरा शो होगा। सबसे पहले. मैंने डीएनए शुरू किया था। वह भी एक बहुत. बड़े प्रयोग के साथ शुरू किया था। उस समय. डीएनए जैसा कोई शो नहीं था। ट्रू वो बहुत. बड़ा प्रयोग था। बहुत रिस्की था। लोगों ने. पहले बहुत मजाक उड़ाया मुझे और कहा बहुत. प्रीची है। उपदेश देते हो। रेडियो शो जैसा. लगता है। इसमें कोई विजुअल्स नहीं क्योंकि. उस समय मसालेदार खबरों जो वीडियोस का. जमाना था। कोई तालिबान के लड़ाई के. विजुअल्स चल रहे हैं। कहीं कहीं नर्थ. कोरिया के चल रहे हैं। नागनागिन भूत प्रेत.
ये सब जो चलता था और उस समय आप डीएनए जैसा. एक शांत शो लेकर आ गए तो लोगों को लगा कि. बहुत ठंडा है। तो एक बहुत बड़ा प्रयोग था. लेकिन लोगों को वो अच्छा लगा और आपको याद. होगा उस शो में मैं वही खबरें लेकर आता था. जो आपके जीवन से जुड़ी हुई है। उसके बाद. मैंने ब्लैक एंड वाइट शुरू किया। ब्लैक. एंड वाइट का थोड़ा सा फ्लेवर अलग था।. डीएनए से थोड़ा हम और आगे गए और ज्यादा. हमने उसको ब्लैक और वाइट में डिफरेंशिएट. करने की कोशिश की। लेकिन डिकोड में जब मैं. इस बार मैं अपने को सोचता हूं तो मुझे ऐसा.
लगता है कि यह शो पुराने दो शोज़ से आगे की. बात इसको करनी चाहिए। यह तो मैंने हमेशा. से कहा है कि आप को आज भी एक फैमिली. न्यूज़ शो की आवश्यकता है जिसको पूरा. परिवार देख सके। तो मेरा पहला जो थॉट है. वो तो यह है कि इसको मैं ऐसा शो बनाना. चाहता हूं जिसे पूरा परिवार एक साथ मिलके. देख सके। तीन जनरेशंस दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे क्या कोई ऐसा शो हो. सकता है जिसको ये तीनों पीढ़ियां एक साथ.
मिलके देख सकें और उसमें पूरे शो में हर. एक के लिए कुछ ना कुछ होना चाहिए। ओके। तो. मैंने ये तो इस बार जो जो डिकोड का मैंने. जो थीम रखा है वो यही है। टाइम वेस्ट नहीं. करना है किसी का। अगर यूथ है तो उसको मैं. बताना चाहता हूं कि यूथ के काम की क्या. चीजें हैं। आगे आगे 5 साल के बाद किस तरह. की जॉब्स आएंगी। आपको अपने आप को इस एआई. के दौर के लिए कैसे तैयार रखना है? नए. इनोवेशंस क्या होंगे टेक्नोलॉजी में? अगला. स्मार्टफोन कैसा आएगा? अगली बार गाड़ी आप. लेंगे तो पेट्रोल डीजल वाली गाड़ी लेनी.
चाहिए या इलेक्ट्रिक गाड़ी लेनी चाहिए? इलेक्ट्रिक गाड़ी में क्या समस्या हो सकती. है? ये सारी बातें होनी चाहिए। पीछे की. जनरेशन में जाएंगे तो आपको हो सकता है. मेंटल हेल्थ के बारे में बात करनी पड़ेगी।. देश की कुछ चुनौतियां हैं। जैसे आज हमारा. देश कितनी बड़ी चुनौती से गुजर रहा है। इस. समय आपको पता होना चाहिए कि राष्ट्रवाद. क्या है? नेशनलिज्म क्या है? आपको मैंने. अभी कल अपने शो में कहा कि इस. भारत-पाकिस्तान युद्ध में मेड इन इंडिया. हथियारों की तो लाइव टेस्टिंग हो गई कि ये. कैसे चलते हैं। लेकिन हमारे देश में जो.
लोग रहते हैं उनकी भी विचारधारा की लाइव. टेस्टिंग हो गई कि कितने लोग आपके अपने. देश को प्यार करते हैं और कितने लोग आज भी. आपके देश को बेचने के लिए तैयार बैठे हैं।. ये एक लाइव टेस्टिंग हो गई इस बार। एक ऐसी. अच्छी स्थिति आई जिसमें आपको समझ में आ. गया कि कौन हमारा है और कौन पराया है। तो. ये कुछ नए चैलेंजेस ले मैं चल रहा हूं।. प्रयोग के बारे में मैं आपको बताता हूं।. देखिए क्या होता है। जब आप प्रयोग करते. हैं शुरू में तो लोग आपका मजाक उड़ाते. हैं। जब मैं डीएनए में था तो मैंने लास्ट.
में आज के दिन इतिहास में क्या हुआ था? ये. मैंने शुरू किया। हम लोग देखते थे उसे। आप. देखते थे। उसमें जानकारी मिलती थी। शुरू. में लोग कहते थे अरे ये न्यूज़ थोड़ी है।. ये क्या न्यूज़ है? लेकिन लोगों को वो. अच्छा लगा। जब मैं ब्लैक एंड वाइट में आया. तो मुझे लगा कि अब इसका समय हो चुका है. क्योंकि मैं उस इतिहास को बार-बार ना जाने. कितनी बार बता चुका हूं हर साल। तो मुझे. भी थोड़ा लगने लगा था कि मैं रिपीट कर रहा. हूं अपने आपको। उस समय मुझे क्या लगा? कोविड के तीन साल खत्म हुए थे। 2022 में.
हमने शुरू किया था। कोविड के बाद हर इंसान. अकेला महसूस करता है। रिश्ते टूट रहे हैं।. आपकी जो मेंटल हेल्थ है वो भी बहुत कमजोर. होती जा रही है। लोगों को जीवन के बारे. में जानना है। अलग-अलग स्थिति के बारे में. क्या आप मुझे 10 सेकंड में कुछ बता सकते. हैं। तो मुझे लगा कि इस समय एक पॉजिटिव. कोट अगर आप लाइफ के बारे में लोगों को. देंगे तो लोगों को शायद अच्छा लगेगा। वो. मैंने शुरू किया अपने शो के आखिर में। तब. भी लोगों ने मजाक उड़ाया कि ये ये तो. न्यूज़ नहीं है। ये तो आप कोई मोटिवेशनल.
कोर्ट्स दे रहे हैं। बाबा जी बनने की. कोशिश कर रहे हैं। प्रीची बन रहे हैं।. प्रोफेसर बन रहे हैं। आज शुभांकर आप देखिए. हर चैनल पर आप 9:00 बजे का शो देखिए। हर. न्यूज़ एंकर उसी तरह का पॉजिटिव कोट लेकर. आ रहा है। सर हमने यह काम 2020 के अराउंड. किया था Instagram पे और बड़ा मजाक उड़ाया. गया था हमारा। बिल्कुल कि आप इंस्टा को. लेके इस तरह से कर रहे हो और उसके बाद. धीरे-धीरे बहुत सारे टीवी चैनल्स में आज. 30-30 40 लोगों की टीम है जो Instagram पे. यही काम करती है। यही काम करती है। आप अब.
आप सोचिए ट्रू तो ये जो हमारी न्यूज़. इंडस्ट्री है इसमें कितनी नकल होती है? इसमें कितनी कॉपी होती है? कैसे लोग एक. सक्सेसफुल मॉडल का पहले तो उसका मजाक. उड़ाते हैं। फिर जब वो सफल हो जाता है तो. चुपचाप बेशर्मी से उसकी कॉपी कर लेते हैं. और फिर खुद भी उस गंगा में हाथ धो लेते. हैं और फिर सारे लोग एक ही तरफ चलते चले. जाते हैं। इसलिए इस इस इंडस्ट्री में. मैंने खासतौर पे देखा है बहुत ही कम लोग. हैं जो कि बोल्ड एक्सपेरिमेंट्स करना.
चाहते हैं। जो नए प्रयोग करना चाहते हैं।. जो यह रिस्क उठाने के लिए तैयार हैं। बाकी. के सारे फॉलोअर्स हैं। वो पहले इंतजार. करते हैं कि कोई और प्रयोग करें। रिस्क. कोई और ले ले। फिर जब वो मॉडल चल जाता है. फिर वो उसको कॉपी करके अपने ऊपर ढाल लेते. हैं। तो बार-बार जो आप मुझसे सवाल पूछ रहे. हैं उसका एक ही थीम है। मुझे बार-बार. प्रयोग करना अच्छा लगता है। मुझे बार-बार. अपने आप को झकझोरना अच्छा लगता है। मुझे. बार-बार अपने आप को मेरे कंफर्ट ज़ोन से. बाहर निकालना अच्छा लगता है कि मैं फिर से. एक बार एक नई इनिंग्स खेलूं और फिर से एक.
नई टीम पे एक नए पिच पे एक नए स्टेडियम. में एक नए टूर्नामेंट में मैं जाकर खेलूं. और अपने आप को टेस्ट करूं कि क्या अभी भी. मेरे अंदर वही दमखम है क्या अभी भी मैं वो. कर सकता हूं। कई लोगों की प्रवृत्ति होती. है। वह एक सेनापति की तरह होते हैं। तो. मैं अपने आपको जो राजा की तरह नहीं देखता।. मैं सेनापति की तरह देखता हूं। सेनापति को. क्या चाहिए होता है? उसको प्रैक्टिस के. लिए युद्ध चाहिए होता है। हर बार उसको एक. नया युद्ध चाहिए। तो मैं हर बार मैंने.
मेरे जीवन को मैंने देखा तो हर तीन-चार. साल के बाद मुझे ऐसा लगता है कि जीवन में. युद्ध मतलब मैं कोई लड़ाई की बात नहीं कर. रहा। बट एक एक और चैलेंज होना चाहिए जो. आपको कुछ नया दे सके। जिसमें आप कुछ खुद. भी नया सीख सके ताकि आप अपने उस कंफर्ट. ज़ोन से बाहर निकलें। वरना देखिए सबकी. दुकानें चल ही रही हैं। शोज़ चल रहे हैं।. आपको ज्यादा कोई एफर्ट करने की जरूरत नहीं. होती। एक टाइम के बाद आप जाओ अपना शो करो. अच्छे से ईमानदारी से करो और शो चल ही रहा. है। बना बनाया एक सेटअप है। बना बनाया एक. चैनल है। उसका एक बिजनेस मॉडल है। सब.
अच्छा चल रहा है। तो आराम अगर आप देखेंगे. तो मुझे आराम वहां ज्यादा था। ट्रू। ये तो. मैंने अपने आप को उस आराम के ज़ोन से बाहर. निकाल के फिर से मैं संघर्ष कर रहा हूं।. नहीं अब इसप एक सवाल आता है। आज तक में. आराम ज्यादा था। लेकिन लोग कह रहे हैं. डीडी न्यूज़ से पैसा बहुत ज्यादा है। ₹16. करोड़ मिले। ये सच है। बड़े अखबार में. आर्टिकल छपे हैं कि सुधीर चौधरी को ₹16. करोड़ मिल गए। मतलब सरकारी चैनल से इतना. पैसा लेना कैसे पॉसिबल हो गया? किसी ने. छापा कि एक अलग बिल्डिंग जो पूरी है उनके. लिए अलॉट कर दी गई है। अब बड़ी खबरें आ.
रही है। क्या सच्चाई है? 16 करोड़ है।. देखिए इस बार जो सबसे ज्यादा दिलचस्प बात. है वो ये कि मुझे ऐसा लगा कि ये जितने भी. लोग ये सवाल पूछते हैं ये पत्रकार को और. जर्नलिस्ट को पैसा कमाते हुए नहीं देखना. चाहते। व्हिच इज ट्रू? हां वो चाहते हैं. झोला। आपने आपने देखा होगा अखबारों में. क्या खबरें छपती हैं।. सबसे अमीर उद्योगपति कौन है? सबसे ज्यादा. टैक्स पेयर कौन है? हम कितना फक्र से. बताते हैं कि ये टॉप 10 बड़े उद्योगपति.
हैं। इसने इतना पैसा कमाया, इसने इतना. पैसा कमाया। उसके बाद फिल्म स्टार्स की. लिस्ट आती है कि देखिए इस बार ये सबसे. ज्यादा पैसा कमाने में पिछली बार ये पहले. नंबर पे थे। इस बार पांचवें नंबर पे आ गए।. क्रिकेटर्स के बारे में आप कहते हैं इसकी. ये ब्रांड वैल्यू है। इसकी ये ब्रांड. वैल्यू है। ऐसा-सा सबके बारे में करते. हैं। लेकिन अगर कोई टीवी एंकर है शुभांकर।. अगर कोई न्यूज़ एंकर है तो क्या उसे अपनी. मेहनत से और अपनी ब्रांड वैल्यू के हिसाब. से पैसा कमाने का अधिकार नहीं है? पूरा हक. है। यह पैसा कोई बेईमानी से तो नहीं कमा.
रहे हैं। अपनी मेहनत से कमा रहे हैं। और. हमेशा याद रखिए कि जो पैसा बाजार में कहीं. से भी आपको मिलता है। चाहे प्राइवेट चैनल. से मिले, चाहे सरकार से मिले, चाहे कहीं. से भी मिले। अगर आपकी एक कैपेसिटी होती है. बाजार में उतना बिजनेस क्रिएट करने की, उतना काम लाने की, उतना रेवेन्यू जनरेट. करने की उसके हिसाब से आपको पैसा दिया. जाता है। बहुत सारे लोग ये कहते हैं कि. यहां मुझे इतना पैसा मिल रहा है। लेकिन. मेरे पुराने संस्थानों में जहां मैंने काम.
किया है, उन्होंने कभी वहां मेरे पैसे के. बारे में बात करने की कोशिश नहीं की। वहां. भी मुझे अच्छा पैसा मिल रहा था। ऐसा नहीं. है कि वहां मुझे कोई खराब पैसा मिल रहा. था। वहां 6.5 करोड़ के आसपास थे। मैं हमेशा. एक चीज सोचता था अपने लाइफ में शुभांकर।. जब मैं छोटा था आई एम वेरी हैप्पी फॉर दिस. बिकॉज़ आप बेंचमार्क बढ़ा रहे हो। ये हम. जैसे लोगों के लिए जो नए लोग हैं जैसे इस. बार मुझे बहुत सारे टीवी चैनल से कॉल आ. रहे हैं। तो मेरी तनख्वाह कुछ लाख के डबल. डिजिट की शुरुआत में थी। बट इस बार जब कॉल. आने शुरू हुए टीवी चैनल से तो वो सीआर में. जाने लगे। तो ये मुझे रियलाइज़ हुआ कि जो. आप पैरामीटर बढ़ा रहे हो उसका फायदा पूरी.
जनरेशन को हो रहा है। अदरवाइज मीडिया वैसे. कहां है? 10,000, 5,000, 15,000 बड़े नेशनल. चैनलों में 5,000 से 80,000 1 लाख ये. डिसेंट सैलरी है और अगर आप 1 लाख के ऊपर. गए तो आपको वर्क परफॉर्मेंस का दिन भर. बंदूक लगी रहती है। एकदम। सो उसमें सीआर. जाना इस लाइक गुड थिंग फॉर जनरेशन। बट ये. काफी चर्चा में है। ये देखिए ये ये हमें. भी एक चीज सोचनी पड़ेगी कि आज आप एक फिल्मी. एक्टर को आराम से एक फिल्म का 10, 15, 20, 25 करोड़ दे देते हैं। 50 करोड़ भी दे देते. हैं। तो 100 करोड़ ले रहे हैं सर। 100-100.
करोड़ लोग साउथ में लोग हां लोग ले रहे. हैं। तो अगर एक फिल्मी एक्टर. 50 करोड़, 100 करोड़, 30 करोड़ जो भी है. जिसके हिसाब से ले सकता है। मुझे ऐसा लगता. है कि एक न्यूज़ एंकर का जो प्रभाव है. लोगों के दिमाग पर उसका जो इन्फ्लुएंस है. वो एक फिल्मी एक्टर से कहीं ज्यादा है।. ट्रू। हम जितने लोगों के जिंदगी को छूते. हैं उनके सोचने समझने के तरीके को. प्रभावित करते हैं उसके हिसाब से हमारा जो.
इन्फ्लुएंस है हमारा जो प्रभाव है वो एक. फिल्मी एक्टर से ज्यादा है तो अगर एक. फिल्मी एक्टर से ज्यादा नहीं कम से कम. उसके बराबर तो हमें पैसा मिलना चाहिए और. हम एक फिल्म एक्टर से मुझे ऐसा लगता है कम. से कम 50 से 100 गुना ज्यादा मेहनत करते. हैं। एक फिल्म के एक्टर को 1 महीने की. शूटिंग के लिए ही 30 40 50 करोड़ मिल जाते. हैं। छोटे एक्टर को भी 10-15 करोड़ मिल. जाते हैं। अगर आप बॉलीवुड में नंबर दो. नंबर तीन श्रेणी के भी एक्टर्स को देखेंगे. ना तो कोई 10 15 20 करोड़ से कम नहीं है।.
और एक फिल्म की जो इफेक्टिव शूटिंग होती. है वो एक से डेढ़ महीना होती है। 40 दिन. 50 दिन तो 50 दिन के आपको 10 से 2025. करोड़ मिल गए और हमारे यहां तो हमारे यहां. जो आपको पैसा जो मिल रहा है साल के 365. दिन लगातार बिना छुट्टी लिए बिना ऑफ लिए. रोज अपना सोशल लाइफ खत्म करके फैमिली लाइफ. खत्म करके सर्दी गर्मी बरसात आप बीमार हैं. आपको कोई और चुनौती है आपका मन नहीं कर. रहा है तो भी आपको शाम को जाके अपना शो. करना ही होगा और उसके बाद यह सुबह से.
प्रोसेस शुरू होता है यह रात के घंटे के. लिए यह भी एक बार बता साथ लोगों को लगता. है कि आप आते हो एक घंटा पढ़ के निकल जाते. हो। यह बहुत बड़ी गलतफहमी है कि कोई भी. एंकर या मैं भी रात में आया 9:00 बजे एक. शो करके चला गया। देखिए इसकी जो प्लानिंग. होती है सुबह 9:00 बजे से शुरू हो जाती. है। और अगर मेरे जैसे आदमी से अगर आप. पूछें तो मैं तो 24 घंटे मैं अपने शो में. जीता हूं। मैं अपने शो में ही रहता हूं।. मैं अपने घर में नहीं रहता। मैं अपने शो. में रहता हूं। और मैं लगातार सोचता रहता. हूं कि कल क्या करना है, परसों क्या करना. है? और सुबह-सुबह से हमारी जो मीटिंग शुरू. हो जाती है, प्लानिंग शुरू हो जाती है। और.
एक बात शायद शुभांकर आपने मेरे बारे में. सुनी होगी।. अपनी पिछली नौकरी में मैं ढाई साल तक. मैंने वो शो किया। लगभग ढाई या पौने तीन. साल मैंने वो शो किया। मैंने एक दिन भी. छुट्टी नहीं ली। एक भी शो मैंने मिस नहीं. किया। अगर आप मेरा इससे पहले डीएनए का. ट्रैक रिकॉर्ड देखेंगे तो शायद एक बार. मुझे कोविड हुआ था। उस समय मैंने छुट्टी. ली थी। वरना मेरे दर्शक मुझे याद करके आप. देखिए। आपको कभी ऐसा दिन याद आता है जब. सुधीर चौधरी अपने शो करने के लिए स्टूडियो.
में ना पहुंचा हो। हमेशा सर्दी, गर्मी, बरसात चाहे मैं बीमार रहा, चाहे मुझे. स्टिक लेके मेरे कमर में बीच में कई बार. दर्द हो जाती है तो मैं वो स्टैंड लेके वो. स्टिक लेके स्टूडियो में जाता था और तब भी. अपना शो करता था। तो इतनी मेहनत करने की. कुछ तो आप कुछ तो कीमत देंगे।. कुछ तो आप हमारा बाजार का जो दाम है वो तय. करेंगे। ये आप मैं आपसे पूछ लेता हूं ये. क्यों मीडिया में सैलरी जो है वो इतना.
बड़ा इशू है क्योंकि मीडिया मुझे लगता है. मीडिया बहुत ही लेस पेड इंडस्ट्री है और. शायद इसी वजह से लोग शॉक हो रहे हैं जबकि. संस्थान जो है बहुत पैसे कमाते हैं।. इंडिविजुअल हमने भी शुरू किया हमें समझ. में आया कि चीजें बहुत अलग होती है। एंड. आई एम श्योर बड़े लेवल पे तो और ज्यादा. अलग होती होंगी जब आप फुल फ्लेजेड टीवी की. बात करते हैं। तो जो पैसा आ रहा है. मालिकों के पास वो बहुत ज्यादा आ रहा है।. बट जो पे हो रहा है जैसे आप लोग टॉप एंकर. हो। ए लिस्ट के एंकर्स को भी वो सैलरी है. जो बॉलीवुड में या टीवी सीरियल में एक. एवरेज इंसान भी कमा रहा है और वो कुछ. महीनों में कमा रहा है जो आप साल भर में. कमा रहे हो और हमें आपका ज्यादा लग रहा.
है। देखिए वही मैं वो कह रहा हूं कि वो. 15-20 करोड़ लोगों को कितना चुभ रहे हैं।. यही पैसा अगर एक एक्टर कमा 16 की जगह 20. भी हो सकता है। मतलब जितना भी है। लेकिन. ये पैसा कितना चुभ रहा है लोगों को और. शायद वो इसलिए भी चुभ रहा होगा। मेरा एक. सपना था। मैं जब इस इंडस्ट्री में आया था. तो यह तो था ही कि एक दिन मैं लोग मेरा शो. देखें और मैं एक बड़ा एंकर बनूं, एक बड़ा. पत्रकार बनूं। ये सबका सपना होता है।. लेकिन मैं तब भी एक बार ये सोचता था कि वन.
डे आई वांट टू बी द हाईएस्ट पेड एंकर हम. जो मैं बन गया।. लेकिन उसके बाद मुझे ऐसा लगा कि मैं दूसरे. लोगों के लिए क्या कर सकता हूं। जैसे अभी. हम बात कर रहे हैं। मैं आज भी ये बोलता. हूं कि हमारे इंडस्ट्री में जो सबसे. टैलेंटेड. एंकर्स हैं। सबसे टैलेंटेड जर्नलिस्ट हैं।. उनका बहुत एक्सप्लइटेशन है। अब आप देखो आप. अपना उदाहरण देखिए। आप अपनी कैपेसिटी. देखिए टू जनरेट रेवेन्यू एंड टू गेट.
व्यूअरशिप। आप अपनी सोशल मीडिया पर. फॉलोइंग देखिए कितनी जबरदस्त है। लेकिन. किसी भी चैनल के मैनेजमेंट ने आपकी उस. क्षमता को पहचाना नहीं और उस क्षमता के. हिसाब से आपको पे नहीं किया। कुछ भी नहीं. था। मतलब महीनों आप अब आप सोचो तो आपको. लगता है क्या कर रहे थे आप? या इतना इतना. भेदभाव क्यों है? बिल्कुल वो तनख्वाह ना. के बराबर थी। और मुझे अभी भी याद है मैं.
आपको देखता था क्योंकि हम दोनों ने साथ. में काम किया है और मैं आपको देखता था दूर. से कभी-कभी मैं आपको मिलता भी था मैं आपके. Instagram पे रील्स मैं देखता था तो मैं. सोचता था कि शुभांकर के साथ अगर कोई चैनल. पार्टनरशिप कर ले और बोले कि यू नो आप. हमारे साथ रहिए वी विल शेयर आप भी पैसा. कमाइए हम भी पैसा कमाते हैं और उस पैसे को. हम शेयर करेंगे तो जब तक आप अच्छे टैलेंट. को स्पॉट करके उसे प्रमोट करेंगे। प्रमोट.
नहीं करेंगे और जब तक कि आप उसे अपना. पार्टनर नहीं बनाएंगे तो आगे यह धंधा नहीं. चलने वाला। तो आज मैं मैंने अपने साथ भी. जो किया है और मैं बाकी लोगों को भी यही. कहना चाहता हूं कि न्यूज़ चैनल्स को अच्छे. टैलेंट को पहले तो प्रमोट करना चाहिए और. फिर उनके साथ पार्टनरशिप करनी चाहिए।. उन्हें अपना नॉलेज पार्टनर बनाना चाहिए।. उन्हें अपना रेवेन्यू पार्टनर बनाना. चाहिए।. मैं अगर उस चैनल में होता और आप मेरे साथ.
अगर काम कर रहे होते या आज आप मेरे साथ. काम कर रहे होते तो मैं आपको अपनी कंपनी. बनाने से रोक देता और मैं कहता कि आप अपनी. कंपनी मत बनाइए। आप मेरे साथ रहिए। आपको. जो करना है करिए। मैं करता हूं आपके लिए।. ये सारा सेटअप मैं करूंगा आपके लिए। आप. मेरे लिए ही काम करते रहिए और आपको जो. पैसा कमाना है उसमें से हम शेयर करते. रहेंगे। सर मेरी अचार थी। मैं नाम नहीं. कोट करूंगा। उन्होंने मुझे बाद में कोट. किया कि उन्होंने किसी से कहा कि क्या. फर्क पड़ेगा रोक ले तो कहा गया कोई फर्क. नहीं पड़ेगा बोला डिसली तो पड़ेगा बोला.
नहीं नहीं कोई फर्क नहीं पड़ेगा बट समटाइम. यू हैव टू प्रूफ हमने प्रूफ किया तो चीजें. बदली आज हर व्यक्ति दोबारा मिल बैठ रहा है. तो मुझे लगता है कई बार आपको प्रूफ भी. करना चाहिए बट हमारी इंडस्ट्री में ये. प्रॉब्लम है बड़े-बड़े चैनल्स को ये घमंड. होता है कि जो व्यूअरशिप आ रही है वो. हमारे नाम से आ रही है। हमारे हमारे. ब्रांड नेम के नाम से आ रही है। इसीलिए. आपके और हमारे जैसे लोगों को कई बार बाहर. निकलना पड़ता है। दोबारा से यह प्रूव करने. के लिए कि भाई आपके नाम से नहीं आ रही है।. हमारे नाम से आ रही है। देख लीजिए। नाइस।. आई मीन ये इंस्पायरिंग है। अभी नए जनरेशन.
में सर कोई बच्चे निकली क्यों नहीं? क्योंकि बीते 10-15 सालों में जब मैं बात. करता हूं लोगों से तो मुझे नए लोग दिखाई. नहीं पड़ते हैं। खासतौर पर मेरी जनरेशन. में या मुझसे चारप साल पहले मैं पिछली. जनरेशन में देखता हूं। आपकी जनरेशन जो है. या आपके आसपास जो जनरेशन आई उसमें बहुत. सारे नाम है जो 15 साल, 20 साल 25 साल से. काम कर रहे हैं। बट 10 सालों में मुझे कोई. ऐसा एंकर नहीं याद है जो घर-घर पहुंच गया. हो। इसकी वजह क्या है? जबकि चैनल्स तो. बड़े हैं। रीच भी बड़ी रही है। मीडिया का. बीच में दौर भी बहुत बड़ा था। एक भी चेहरा. अपनी पहचान क्यों नहीं बना पाया? तो इसमें.
नए टैलेंट की गलती नहीं है। जो नए लोग हैं. उनका दोष नहीं है इसमें। इसमें दोष किसका. आप मानेंगे? इसमें दोष आप मानेंगे उन. चैनल्स का। इसमें दोष आप मानेंगे मेन. स्ट्रीम मीडिया का। वो सारे बड़े-बड़े नाम. जो न्यूज़ चैनल्स अभी चला रहे हैं। यह. उनका दोष है। इसका क्या मतलब हुआ? कि. पिछले 10 साल में हमारी जो टीवी न्यूज़. इंडस्ट्री है उसने कोई ऐसा बड़ा प्रयोग. नहीं किया। उसने कुछ नया नहीं किया। वो.
नया करना भी नहीं चाहता। वो प्रयोग नहीं. करना चाहता। एक्सपेरिमेंट नहीं करना. चाहता। नए टैलेंट में विश्वास नहीं रखना. चाहता। वो सेफ खेलना चाहता है। और 10 साल. में जो आप बात कर रहे हैं सोचिए कि टीवी. न्यूज़ इंडस्ट्री 10 साल में कोई बड़ा नाम. नहीं दे पाई। लेकिन सोशल मीडिया ने इस. दौरान कितने बड़े-बड़े नाम दे दिए। इस. दौरान कितने बड़े-बड़े यूर्स आ गए जिनके. नाम आप सबको पता है। इसका क्या मतलब है? जो यूर्स हैं, सोशल मीडिया है, इट्स अ मच.
मच मोर वाइब्रेंट प्लेटफार्म जो नए टैलेंट. को. पसंद भी करता है, नए टैलेंट को मौका देता. है, जगह देता है और फिर सबके लिए एक लेवल. प्लेइंग फील्ड है कि आप आइए अपना हुनर. दिखाइए, अपना टैलेंट दिखाइए और यह दर्शक. के ऊपर है कि वो किसको पसंद करेगा। लेकिन. न्यूज़ चैनल्स में वो लेवल प्लेइंग फील्ड. अभी नहीं है। और यह न्यूज़ चैनल्स की सबसे. बड़ी नाकामी है कि इतने बड़े-बड़े सेटअप, इतनी बड़ी-बड़ी व्यवस्थाएं होने के बावजूद. 500 लोग एक न्यूज़ चैनल में काम कर रहे.
हैं। आप घर-घर में जा रहे हैं। इतना बड़ा. पुराना आपका ब्रांड नेम है। लेकिन आप कोई. एक नया नाम, एक नया न्यूज़ एंकर, जर्नलिस्ट पैदा नहीं कर पा रहे हैं। मुझे. कम से कम चार से पांच चैनलों ने कहा कि. अपने पडकास्ट को दे दीजिए। हम टीवी पर. यूज़ करेंगे। और मुझे रियलाइज हुआ कि फिर. टीवी के इंटरव्यूज क्यों नहीं चल रहे हैं? क्यों ऐसा हो रहा है कि वही इंटरव्यूज वही. शख्स जो टीवी से निकल रहा है वो जब हमारे. प्लेटफार्म पर आ रहा है या मेरे जैसे जो. और लोग काम कर रहे हैं उनके यहां पर. ज्यादा व्यूज लेकर आ रहा है ज्यादा दे रहा. है और फिर टीवी को मांगना पड़ रहा है. डिस्पाइट कि उनका सेटअप बड़ा है। उनकी.
टेक्नोलॉजी बड़ी है। उनकी लाइटिंग हमसे. ज्यादा खूबसूरत होगी। कैमरे हमसे ज्यादा. बेहतर होंगे। इसकी वजह क्या लगती है आपको? क्योंकि न्यूज़ रूम में हर न्यूज़ रूम में. पॉलिटिक्स है। हर न्यूज़ रूम में एक. राजनीति है। मैं अक्सर मजाक में ये बात. कहता हूं कि जो राजनीतिक पार्टियां हैं वो. राजनीति वो तो राजनीति में है ही। तो मैं. नेताओं को कई बार यह बोलता था कि आप. न्यूज़ चैनल्स के न्यूज़ रूम में आइए।. तो आपको आपकी पार्टी से भी ज्यादा.
पॉलिटिक्स यहां मिली। मुझे आपकी जॉइनिंग. याद आ गई।. तो आप देखते हैं ना पॉलिटिकल पार्टीज में. कैसी महीन एक राजनीति होती है। वो आपको. मौका भी देते हैं और लेकिन साथ में छीन भी. लेते हैं। है ना? आपको एक सुसाइड मिशन में. भेज भी देते हैं ताकि आप फेल हो जाए। तो. बहुत एक महीन राजनीति होती है। लेकिन. न्यूज़ चैनल्स की जो राजनीति है वो उससे. भी एक दर्जे ऊपर की है। तो मैं तो कई बार. ये कहता हूं कि पॉलिटिकल पार्टीज को अपने. नेताओं को इंटर्नशिप करने के लिए.
न्यूज़ चैनल के न्यूज़ रूम में भेजना. चाहिए। मैं और आप जी में काम करते थे। तो. जब आप आज तक में आए तो मैंने आपको लेके. आते ही ट्वीट कर दिया। मेरे लिए. एक्साइटमेंट थी कि मेरे पुराने कोलीग हैं. सीनियर हैं। वो ज्वाइन कर रहे हैं यहां. पर। मुझे भी ये बातें याद आ रही है सारी।. तो आप एक आदमी को लेकर भी आ रहे हैं और. फिर भी आप यह चाहते हैं कि उस आदमी को. प्रमोट ना किया जाए। आप उसको उतना पैसा भी. दे रहे हैं। आप उसको करोड़ों रुपया देकर. अपने चैनल में ला रहे हैं और फिर ये भी. कोशिश करते हैं कि कहीं इसके शो की रेटिंग. ना आ जाए। तो ये एक जो राजनीति ये शिकायत.
आपको रही आज तक में ये सब जगह क्योंकि आप. 9:00 pm तक बंधे थे। मतलब ये कई कई सारे. जो क्वेश्चंस मैंने क्योंकि पब्लिक. प्लेटफार्म पे डाला था मैंने कि सुधीर. चौधरी जी से क्या पूछना चाहेंगे? तो उसमें. एक कॉमन क्वेश्चन बार-बार आ रहा था कि. सुधीर जी बड़े दिनों पर आज तक में सुबह. नजर नहीं आते थे या बाकी दिन वो रात को. 9:00 बजे तक सीमित थे और कई बार दिन में. बड़ी घटनाएं होती हैं। वहां बड़े एंकर्स. आते हैं तो आपको 9:00 बजे तक रखा गया था. जो आप बात कह बाद से मुझे याद आया लेकिन. इससे मैं डिसएग्री करता हूं। मैं आपको. बताता हूं कि मैं दिन में क्यों नहीं आता. था। वो मेरी इच्छा थी। इसमें मैं किसी को.
ब्लेम नहीं करूंगा। वो मुझसे पूछते भी थे. कि आपको दिन में कब आना है? आप बताइए अगर. आप दिन में आना चाहते हैं, आप कोई शो करना. चाहते हैं। ये मेरी चॉइस थी और मुझे ऐसा. लगता था कि दिन में मान लीजिए जैसे चुनाव. का ही टाइम है। तो धीरे-धीरे मैं अपने. अंदर क्या बदलाव लेकर आ रहा हूं। एक टाइम. था जब हमें बहुत एक्साइटमेंट होता था कि. रिजल्ट वाले दिन, चुनाव के नतीजों वाले. दिन सुबह-सुबह बैठ जाइए। फिर रिजल्ट जब आ. रहा है तो उस समय आपको होना चाहिए।. लेकिन फिर मैंने देखा कि जब नतीजे वाले.
दिन जिस तरह की कवरेज होती है चैनल्स में. चीखा चिल्ली हो रही है, कहीं सायरन बज रहा. है, कहीं घंटा बज रहा है, कहीं कुछ और हो. रहा है, ड्रामेबाजी हो रही है, नाटक हो. रहा है। फिर उस पे चिल्ला-चिल्ला के लोग. बता रहे हैं कि अब ये हो रहा है। तो मैं. नहीं चिल्ला सकता। ईवीएम और बैलेट खुलने. के पहले सरकार बन जाती है। उससे पहले. सरकार बन जाती है। अभी पहला रुझान भी नहीं. आया और न्यूज़ चैनल आपको ये बता रहा है कि. 100 पार हो गया। 100 पार हो गया। एक रुझान. नहीं आया अभी तक। एक बैलेट बॉक्स खोला. नहीं है। उससे पहले आपने बता दिया कि 100. नतीजे आ भी गए या रुझान आ गए। तो भाई ये.
अपने बस का नहीं है। सर मैंने तो देखा है. मतलब मैं तो अलग-अलग चैनलों में काम किया. है। मैंने कि अच्छा फलाने के 80 हो गया. है। एक काम करो 100 कर दो। 100 कर दो।. उसने 100 कर दिया 150 कर दो। इसमें कई बार. जो अगर मान लीजिए 240 सीट है या 545 सीट. है तो 550 हो गया बढ़ाते-बढ़ाते। देखिए एक. मैं आपको सफलता का एक नया डेफिनेशन भी. बताता हूं। लोग सोचते हैं सफलता क्या है? सफल होना क्या है? सफल होना लोग सोचते हैं. कि आपका एक बड़ा फैंसी डेजिग्नेशन हो जाए।. कमरा मिल जाए आपको। आपको 9:00 बजे का. स्लॉट मिल जाए। पैसे अच्छे मिल जाए। यह.
सफलता है। लेकिन कई बार मुझे ऐसा लगता है. कि शुभांकर जो असली सफलता है वो तब है जब. व्हेन यू हैव द फ्रीडम टू चूज़। जब आपको. अपने हिसाब से काम करने की आजादी मिलती है. ना वो सबसे बड़ी बात है। पैसे से भी ऊपर।. किसी भी चीज से ऊपर बात यह है कि क्या. आपको वह आजादी है कि आप अपने हिसाब से काम. कर सकें और जब आपको ठीक ना लगे तो ना कर. सकें। ये बात मैंने यहां महसूस की और मुझे.
ऐसा लगा कि ये जो दिन में. इलेक्शन रिजल्ट के दौरान जो दिन का जो. पूरा ये होता है माहौल होता है कवरेज होता. है ये मैं नहीं कर सकता। मेरा मन नहीं. मानता कि मैं चिल्ला-चिल्ला के ये बात. करूं। रुझान गलत आ रहे हैं तो फिर मैं. बताता रहूं। फिर कोई आके मुझे चैलेंज भी. कर देगा कि देखिए अभी तो यह हो रहा है।. फिर मैं चैनल की तरफ से उसका जवाब दूं।. मैं यह नहीं करना। पहलगाम को लेके आपको तो. लगा होगा कि भगवान ने बचाया। फिर इस पर भी. मैं आऊंगा। तो इसीलिए मैं आपको जो बता रहा. था वो ये है कि धीरे-धीरे मैंने वो दिन.
वाली कवरेज से अपने आप को निकाल लिया।. यहां भी मैंने अपने लिए एक चुनौती रखी और. वो यह कि अगर चुनाव के नतीजे दिन भर में आ. चुके हैं तो भी अगर किसी को मेरा विश्लेषण. सुनना है और वो चाहता है कि वो मेरी नजर. से उसको देखे तो भाई आपको रात में 9:00. बजे आना चाहिए तो क्या लोग 9:00 बजे. आएंगे? तो मैंने यह सोचा कि मैं मैं अपनी. जो क्वांटिटी है मतलब अपनी सप्लाई वो. बिल्कुल लिमिट कर दूंगा और मैं सिर्फ 9:00. बजे ही आऊंगा। अगर किसी को मुझे सुनना है. तो वो 9:00 बजे आए। मतलब टीवी में जो.
अपॉइंटमेंट व्यूइंग खत्म हो रही थी मैंने. उसको कुछ हद तक बरकरार रखने की कोशिश की. कि वो अपॉइंटमेंट व्यूइंग रहे कि 9:00 बजे. अगर किसी से मिलने के लिए आना है तो आए तो. ये कारण था कि मैं फिर दिन में से मैंने. अपने को हटा लिया और मैं रात में सिर्फ. 9:00 बजे ही आता था और मैं सोचता था कि. 9:00 बजे अगर मैं कुछ अलग बात कह रहा हूं. अगर लोगों को मुझ में कुछ अलग बात दिखाई. देती है तो लोग आएंगे वरना लोग नहीं आएंगे. एंड आई हैव बीन वेरी लकी और दर्शकों का. बहुत-बहुत धन्यवाद उन्होंने मेरी लाज रखी.
रखी मेरी नाक कटने नहीं दी कभी और मैं आप. देखिए कि 9:00 बजे ज्यादातर समय में दिन. में जिस समय नतीजे आ भी रहे होते थे 9:00. बजे उससे भी ज्यादा व्यूअरशिप होती थी. क्योंकि लोग एनालिसिस के लिए आते थे और. लोगों को चीखना चिल्लाना. छोड़ के वो चाहते थे कि शांतिपूर्वक तरीके. से वो एक घंटा एक-एक चीज समझ लें। अब हम. आते हैं पहलगांव वाले मामले में। मुझे ये. जानना है कि जो पहलगाम की मीडिया कवरेज. हुई जो इंटरनेशनलली काफी चर्चित रही।.
बिल्कुल क्योंकि मेरी मेरा आपका पॉडकास्ट. प्लान था। मैं दर्शकों को बता दूं मेरा सर. का पॉडकास्ट जो था वो प्लान था उस दिन. पहलगाम में एक दुर्घटना हो गई। जिसने देश. को झकझोर दिया हम सब सहम गए और हमने सर ने. फैसला किया कि हम पॉडकास्ट नहीं करेंगे. क्योंकि हम भी उस मेंटल स्टेट में नहीं थे. कि उस वक्त शो कर सकते हैं। फिर थोड़े समय. बाद हमने कहा एक प्लान करते हैं। जिस दिन. हम करने वाले थे हमने शाम को बात की उस. दिन ऑपरेशन सिंदूर हो गया। हां तो हमने. फिर कैंसिल कर दिया। फिर तीसरी बार जब. प्लान हो रहा था तो सर ने कहा कि ऑपरेशन. सिंदूर में शायद आपने कॉल किया था कि. शुभांकर आज मैं अपना शो ल्च करने वाला.
हूं। लेकिन वो ल्च नहीं हुआ। तो मैं आपको. बताता हूं पहलगाम वाले दिन मैंने आपको कॉल. किया और मैंने ये कहा कि मैं इतना हम. दोनों ने ये बात की थी कि हम इतने मैं. इतना दुखी था उस पूरे इंसिडेंट से कि मेरा. मन नहीं कर रहा था कि मैं कुछ भी बात. करूं। देखिए ये जो बातचीत होती है ना ये. मन से होती है। ट्रू और मैं फिर से आपसे. वही कह रहा हूं कि आगे चलके भगवान आपको एक. ऐसी ऐसी स्थिति में लाता है कि आप अपने मन. के हिसाब से अगर कर सके तो इससे बढ़िया और. क्या बात हो सकती है। तो उस दिन मन नहीं. था। ट्रू मन दुखी था। तो उस दिन इसलिए.
कैंसिल हो गया। फिर अगले दिन रखा तो वॉर. शुरू हो गया। फिर मैंने सोचा कि अभी वॉर. शुरू हो गया है। तो पहले मैंने कोशिश की. कि मैं अपना शो पहले ही ल्च कर दूं। मुझे. याद है आपने कहा था मुझसे कि आज रात से. 9:00 बजे से ल्च हो रहा है। लेकिन वो. तैयारी पूरी नहीं हो पाई और वो नहीं हुआ।. उस दिन मैं बहुत निराश था और मुझे पहले. दिन यह लग रहा था कि यह ऐसा समय है जब. मुझे टीवी पर होना चाहिए था। मेरे जितने. भी दर्शक हैं वो सब मुझे लिख रहे थे कि हम. आपको मिस कर रहे हैं। आपको आज आपको आज. टीवी पर होना चाहिए था। और ये जो पूरा दौर. था चारप दिन का लोगों ने मुझे बहुत लिखा.
कि हमने आपको मिस किया। तो पहले एक दो दिन. तो मुझे भी बड़ा मायूसी थी कि देखिए मुझे. ब्रेक भी लेना था तो ऐसे टाइम पर लेना था।. आगे पीछे हो जाता तो इसको भी किस्मत कहते. हैं कई बार। पर जो उस दौरान हुआ जिस. प्रकार से और जिस प्रकार से जो कवरेज हुई. तो मुझे कई बार ऐसा लगा कि मैं उस वक्त. टीवी पर नहीं था तो भगवान ने एक प्रकार से. मुझे बचा लिया और अगर मैं होता और मैं भी. किसी प्राइवेट चैनल में काम कर रहा होता.
तो उस समय जब लाइव सिचुएशन होती है आप. जानते हैं कि आपके कान में एक. पीसीआर से आवाज पीसीआर से आपको आवाज आती. है और पीसीआर से आपको इंस्ट्रक्शन मिलते. हैं क्योंकि लाइव सिचुएशन है एंकर तो. स्टूडियो में है और पीसीआर को आउटपुट दे. रहा है आउटपुट का असाइनमेंट दे रहा एंकर. प्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार नहीं होता।. क्या चल रहा है लेकिन सारी गालियां उसी के. हिस्से आप न्यूज़ आप न्यूज़ स्टूडियो में. हैं। आपको क्या पता कि भारतीय सेना ने. कराची में हमला कर दिया है या इस्लामाबाद. में हमला कर दिया है या किससे हमला किया? आपको कैसे पता चलेगा? आपको बार-बार. इंस्ट्रक्शन आता है कि अब ये हो गया है, अब ये हो गया है, ये हो गया है। अब इसको.
बोलिए। तो आपको वो बोलना पड़ेगा। तो इसलिए. मैं बहुत बार बहुत एंकर्स का भी इसमें दोष. नहीं मानता क्योंकि जब इस प्रकार की लाइव. सिचुएशन होती है तो चीजें आपके कंट्रोल. में नहीं होती। उस समय वेरीफाई करना किसी. भी खबर को बहुत मुश्किल होता है। अब लोग. हमारी तुलना करते हैं पश्चिमी देशों से।. पश्चिमी देशों में चाहे वॉर चल रहा हो। आप. सीएनएन का आप उदाहरण लीजिए। हमने जब पहला. वॉर कवरेज देखा था जो इराक में था तब. सीएनएन ने सबसे बड़ा वो वॉर कवरेज किया.
था। सीएनएन के कवरेज को आप देखिए। क्या. उसमें कोई भी चिल्ला रहा था? क्या उसमें. कोई भी चीख-चीख के बता रहा था कि अब यह हो. गया, यह हो गया। उसमें उन्होंने एक कैमरा. लगा के छोड़ दिया और तब उन्होंने पहली बार. देखा कि मिसाइलें जल इधर से आ रही हैं, उधर से आ रही हैं। ये हमने देखा। उनकी जो. वॉर कवरेज होती है वो बहुत डिग्निफाइड. होती है। आप देखिए 91 की भी जो कवरेज है. यूएस में जब ये हुआ वो भी बहुत डिग्निफाइड. थी। उसमें उसमें ऐसा नहीं कि एंकर. चिल्ला-चिल्ला के पागल हुए जा रहा है। पर. हमारे देश का मुझे ऐसा लगता है कि या तो.
मूड कह लीजिए या हमारा पूरा जो बिजनेस. मॉडल है वो ऐसा है कि जब तक एंकर चिल्ला. चिल्ला के वो बात नहीं कहेगा तब तक शायद. वो बात रजिस्टर नहीं होगी। फिर यह कहा. जाता है कि नहीं दूसरा वाला जो कॉम्पिटिट. चैनल है वो वहां का एंकर ज्यादा चिल्ला. रहा है तो आप और ज्यादा चिलाइए। उन्होंने. मिसाइल कराची तक पहुंचा दीजिए। अब आप. इस्लामाबाद तक पहुंचाइए। तो यह तो एक ऐसी. अंधी दौड़ है। नहीं बट ये कोई प्रूवन. फैक्ट नहीं है। जैसे मैं आपने कहा कि अभी. राइट नाउ यू आर द हाईएस्ट पेड एंकर आप.
टीआरपी में भी आई डोंट थिंक कोई आपके. आसपास हिंदी में तो कोई नहीं रहा।. अंग्रेजी का दर्शक ही छोटा है तो उससे. तुलना कोई मतलब ही नहीं बनता। तो अगर एक. एंकर स्थापित है उसका शो नंबर वन है और वो. नहीं चीख रहा। हमने उसको उदाहरण नहीं. बनाया। हमने उन टीवी चैनल को बनाया जहां. कहा गया ड्रग दो ड्रग ऐसेसे चिल्ला-चिल्ला. के ये किया गया। तो वो एग्जांपल क्यों. बना? यह क्यों नहीं बना? इसका एनालिसिस. क्यों? इसका एनालिसिस यह है कि एक बहुत. बड़ी लॉबी है जो हमारे मीडिया को बदनाम.
करना चाहती है, डिसक्रेडिट करना चाहती है. और उसमें भी कुछ खास एंकर्स को सबके लिए. नहीं है ये। तो मैं आज यहां आपको यह बताना. चाहता हूं कि कुछ यूर्स को अगर आप ध्यान. से देखेंगे कुछ फैक्ट चेककर सो कॉल्ड जो. अपने आप को फैक्ट चेककर कहते हैं कि मैं. तो जी फैक्ट चेक करता हूं। सवाल दिए. उन्होंने आपके लिए। तो ये जो फैक्ट चेक. करने वाले लोग हैं ये सिर्फ वही 510 लोगों. का फैक्ट चेक क्यों करते हैं? सिर्फ दो. चार इन्हीं गिनी चुनी पार्टियों का फैक्ट. चेक क्यों करते हैं? सबका फैक्ट चेक कैसे. नहीं करते ये? तो इसका मतलब कहीं ना कहीं.
आपकी मंशा में भी मिलावट है। खोट है। आप. एक खास एजेंडे पे अगर कोई चीज आपको सूट. करती है तो आप उसके बारे में लिखेंगे। जो. चीज आपको सूट नहीं करती उसके बारे में. नहीं लिखेंगे। आज भी मैं कई ऐसे लोगों को. जानता हूं जो भारत को लेकर उल्टे सीधे. वीडियोस बनाते हैं। जो एक मौका नहीं. छोड़ते हमारे देश को बदनाम करने का। उनका. कोई फैक्ट चेक नहीं करता। उनके बारे में. कोई नहीं कहता कि देखिए इन्होंने ये गलत. जानकारी दी। उनकी कोई स्क्रूटनी नहीं.
करता। उनको कहते हैं यही सच्चे पत्रकार. हैं। और अगर कोई पत्रकार आज यह कह दे मान. लीजिए मैं तो ये ये भी कहता हूं कि हमारे. देश के मीडिया ने चलिए किसी भी टोन में. बताया हो। पर यही तो बताया कि भारत जीत. रहा है और पाकिस्तान हार रहा है। यह तो. सही है। इतना तो सही है। आप मान सकते हैं. कि इस युद्ध में भारत बहुत भारी पड़ा और. पाकिस्तान हार गया। टीवी मीडिया ने कम से. कम ये बताया। टीवी मीडिया ने ये बताया। ये. तो सही है। डिजिटल में तो कुछ लोग थे।.
लेकिन अब आप उल्टी कहानी देखिए। ऐसे भी तो. लोग हैं जो पाकिस्तान के नुकसान बताने में. इंटरेस्टेड नहीं है। वो ये जानना चाहते. हैं। ये बताओ भारत का कितना नुकसान हुआ।. और जब यह पता चलेगा कि भारत का इतना. नुकसान हो गया तब वो यह प्रूव कर देंगे कि. भारत हार गया।. उनकी कोई स्क्रूटनी नहीं है। उनका कोई. फैक्ट चेकिंग नहीं है। कोई यह जानने की. कोशिश नहीं कर रहा कि यह आदमी ये यूर्स, ये फैक्ट चेकर्स यहां रह के क्यों इस बात. पे तुले हुए हैं कि ये हर चीज में.
पाकिस्तान का साथ देना चाहते हैं। सर मैं. आपको एक एग्जांपल दूंगा इसमें। आप फैक्ट. चेक की बात करें। उनका कॉन्फिडेंस देखिए।. देश में एक बहुत बड़ा अखबार है द हिंदू।. उसके एक जर्नलिस्ट ने एक खबर छापी। वॉर के. ऑपरेशन सिंदूर के सुबह-सुबह खबर छापी शायद. ने से छापी थी और वो काफी चर्चित खबर चली. थी कि इंडिया के इतने राफेल गिरा दिए गए।. बाद में वो खबर डिलीट हुई। द हिंदू ने. अपोलॉजी की कि ये खबर कोई वेरीिफाइड नहीं. थी और उस खबर को ग्लोबल टाइम्स ने और. दुनिया भर के तमाम अखबारों ने छाप दिया।. हमारे हिंदुस्तान के मीडिया कोट करते हुए. कि देखिए जी ये तो खुद कह रहे हैं। जबकि.
ये सब सोर्सेस सोर्सेस खेल रहे थे और वो. मुझे उस वक्त लगा कि यार आप अपने देश के. खिलाफ ये कैसे लिख सकते हो? हमने एक. वीडियो बनाया। उस जर्नलिस्ट ने मुझे कॉल. किया और कहा कि तुम मेरे खिलाफ फेक न्यूज़. क्यों चला रहे हो? मैंने कहा फेक न्यूज़ तो. ये थी कि पांच राफेल आप कह रहे हो गिरा. दिए गए। ये किसने कहा आपसे? ही सेड मना भी. तो नहीं किया। तो मैंने गिरा दिए गए।. हमारी इंडियन एयरफोर्स कह रही है, आर्मी. कह रही है कि हमने जो मिशन था वो. एकम्प्लिश कर दिया। हमारा टारगेट वो था।. कह रहे तुम मेरा नाम खराब करो। मैंने कहा. आपको देश का नाम खराब करने की कोई चिंता. नहीं। एंड देन शी इस लाइक कि देशभक्ति मत.
सिखाओ मुझे। आई एम लाइक सीखना चाहिए आप. जैसे लोगों को कि वॉर चल रही है। हमारे. लोगों को कोट करके पाकिस्तान में खबरें. दिखाई जा रही है। हमारे लोग कोट कर रहे. हैं। ग्लोबल टाइम्स डाल रहा है। और आप. इसको प्राउड फील कर रहे हो। बिल्कुल बिना. फैक्ट के किस आधार पर आपने छापा कोई अता. पता नहीं तो बड़ी बात शुभांकर अभी लेकिन. बदनाम जो है वो बाकी लोग कर दिया जाएगा. बाकी लोग कर दिए जाएंगे तो अभी अगर कोई. कहता है कि भारत के पांच विमान नष्ट हो गए. तब तो लोग उस पर तालियां बजा रहे हैं और. अगर अब ये कहते हैं कि नहीं नष्ट हुए हैं.
पाकिस्तान के 10 गिर गए तो वो आपका फैक्ट. चेक करो तो अभी यह हो रहा है तो देश के. लोगों को यह पहचानना पड़ेगा और मैं आपको. फिर से ये बात कहता हूं सबसे बड़ा बड़ा. अपराध मेरी नजर में वो है जब कोई अपनी. मातृभूमि को बेचता है। सहमत हूं मैं इस. चीज पे। है ना? कितने से बड़े से बड़ा. चोर, बड़े से बड़ा अपराधी, बड़े से बड़ा. फ्रॉड अपनी मां को कभी नहीं बेचेगा। वो. दुनिया भर में कुछ भी करके आएगा। अपनी मां. को कभी नहीं बेचेगा। अपनी मां के बारे में.
खराब बात ना करेगा और ना सुनेगा। बड़े से. बड़ा खतरनाक से खतरनाक अपराधी की भी आप. बात कर लो। अब उस आदमी के बारे में सोचिए।. मातृभूमि मतलब हमारे संस्कारों में. मातृभूमि हमारी मां है। है ना? हमारा देश. हमारी मां है। जो व्यक्ति अपनी मां को. बेचने को तैयार हो जाए। जो व्यक्ति अपनी. मां का अपमान करके पैसा कमाए। जो व्यक्ति. अपनी मां को अपनी मातृभूमि को बाहर निकाल. के बेइज्जत करे। सिर्फ इसलिए क्योंकि उसको. कहीं से पैसा मिल रहा है। उस व्यक्ति के.
बारे में आप क्या सोचोगे? आपकी क्या राय. है? बस इतना सोचिएगा। और यह जितने भी लोग. हैं जो पाकिस्तान की मदद करते हैं ऐसे. टाइम में भी यह सब वही कर रहे हैं।. पता नहीं क्यों हमारे देश के लोग इन इन. लोगों को अभी भी समझ नहीं पा रहे हैं. लेकिन उन्हें समझना पड़ेगा और इससे उनका. चरित्र आपको समझ में आएगा कि ये बार-बार. हर बार अपनी मातृभूमि के ही पीछे क्यों. पड़ते हैं? अपने ही देश को नीचा क्यों. दिखाते हैं? इस वॉर ने एक चीज अच्छी की है. सर। कम से कम चेहरे सामने रखें। बिल्कुल।.
जैसे मैं इस बार उमर अब्दुल्ला साहब हुए, ओवैसी साहब हुए, शशि साहब हुए। बड़ी. रिस्पेक्ट बढ़ी देश में इनकी और बड़ी. चर्चाएं चली कि पॉलिटिक्स चलती रहेगी।. हमारे अपने मसले होंगे देश के। हम सरकार. पे सवाल उठाएंगे, लड़ेंगे, झगड़ेंगे, एज अ. जर्नलिस्ट भी हम करेंगे। बट जब देश की बात. है तो युद्ध 140 करोड़ लोगों का है। सही. बात है। तो शशि थरूर जिनका अभी आपने नाम. लिया। ओवैसी हैं, उमर अब्दुल्ला हैं।. इन्होंने दिल जीत लिया लोगों का। इन्होंने. बताया कि देश यानी हमारे मातृभूमि सबसे. ऊपर है। अब आप उन यूर्स को सोचिए। जो इस.
दौरान भी बाज नहीं आ रहे हैं। उन फैक्ट. चेकर्स को देखिए जो इस दौरान भी बाज नहीं. आ रहे हैं। आज भी वह यही बताने में लगे. हुए हैं कि कैसे भारत को कमजोर करना है।. कैसे दुनिया को यह बताना है कि भारत की. सरकार झूठ बोल रही है। इंडियन एयरफोर्स. झूठ बोल रही है। भारतीय सेना झूठ बोल रही. है। कैसे ये साबित कर दें कि हमारा हमारे. देश की जो सेना है वो पिट गई पाकिस्तान. से। अब आप अंदाजा लगा लीजिए कि ऐसे लोगों. को आप कैसे उन पर विश्वास करेंगे।.
ठीक है। इसका फैसला मुझे लगता है देश की. जनता में छोड़ देना चाहिए। सर टीवी में. एंटी मोदी स्पेस बचा है क्योंकि एक जनरल. परसेप्शन जो लोगों में है वो यह है कि. टीवी मतलब सरकार की तारीफ और सोशल मीडिया. डिजिटल मतलब सरकार के खिलाफ सुनना। ये. सेटल्ड हो गए हैं। लोग भी धीरे-धीरे. इधर-उधर सब सेटल्ड हो गए हैं। जो YouTube. पे है वो ज्यादातर बुराई कर रहे हैं और जो. टीवी पर है वो तारीफ कर रहे हैं। ये. नजरिया सही है देखने का जनता का? नजरिया. मैं इसको इस तरीके से देखता हूं कि सोशल. मीडिया पे जो आप बात कर रहे हैं ना सोशल. मीडिया का जो स्पेस है पॉलिटिकल स्पेस वो.
अब आम आदमी के हाथ से निकल चुका है तो आम. आदमी की जो राय है वो तो सोशल मीडिया पर. है ही नहीं और अगर है भी तो नेगिजिबल है. क्योंकि आम आदमी के कितने फॉलोवर्स होंगे. 50 100 वो लिख भी देगा कुछ तो वो कभी आप. तक पहुंचेगा नहीं सोशल मीडिया पॉलिटिकल. स्पेस हैज़ टोटली बीन कैप्चरर्ड बाय आईटी. सेल्स ऑफ डिफरेंट पार्टीज जिसका जितना. आईटी आईटी सेल मजबूत जिसका जितना आईटी सेल. मजबूत है किसी भी पार्टी का वो अपनी. विचारधारा आगे बढ़ाता है। यह आईटी सेल. दूसरे के आदमी को ट्रोल करेगी। वो आईटी.
सेल इधर के आदमी को ट्रोल करेगी और यही सब. हो रहा है और आप उसको पढ़ते हैं तो हम एक. थर्ड पार्टी की तरह उसको पढ़ते हैं जो देश. की जनता है और उसको पढ़ने के बाद जिसकी. संख्या जिसकी संख्या बल जिसकी सेना ज्यादा. बड़ी नजर आती है उसको सही मान लेते हैं और. फिर लोग जिधर हम थोड़ा इंक्लाइंड होते हैं. उधर थोड़ा बह जाते हैं। हम एक्चुअली. एक्चुअली आम जनता पेंडुलम बन गई है।. पेंडुलम बन गई है। क्योंकि आम जनता की तो. राय वो है ही नहीं। आज भी आप जो देखेंगे.
मान लीजिए भारत पाकिस्तान पर भी जो कुछ हो. रहा है और जो सोशल मीडिया पर आता है वो आम. जनता की राय है ही नहीं। आम जनता की राय. आपको चुनाव में पता चलेगी। इसलिए आपने. देखा होगा कि सोशल मीडिया का जो मूड है और. जो जनता का मूड है उसमें जमीन और आसमान का. फर्क होता है। और इसीलिए चुनाव के नतीजे. अक्सर वैसे आते हैं जो कि जनता जो सोशल. मीडिया कुछ और कह रहा होता है और चुनाव के. नतीजे कुछ और आते हैं। मान लीजिए मोदी की. पॉपुलैरिटी के बारे में अगर आप बात करें।. अब प्रधानमंत्री की जो पॉपुलैरिटी है अगर. आप सोशल मीडिया देखेंगे तो आपको लगेगा कि.
वह तो बिल्कुल ही नीचे चली गई। लेकिन जब. आप चुनाव में जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि. ही इज स्टिल द टॉललेस्ट लीडर। तो यह फर्क. है। तो मुझे ऐसा लगता है कि सोशल मीडिया. पर तो अब आईटी सेल्स का पूरा कब्जा हो गया. है। अलग-अलग पार्टी की। टीवी की जहां तक. बात है मुझे ऐसा लगता है कि टीवी में. आप प्रो मोदी और एंटी मोदी की जो आप बात. करते थे अब धीरे-धीरे धीरे-धीरे. कुछ चैनल्स ऐसे थे जो अपने एजेंडा की वजह.
से एंटी मोदी कंटेंट चलाते थे। ये उनका. एजेंडा था। उनका उनका डीएनए ऐसा था। हम. उससे आप ऐसे समझिए कि उस चैनल में किसका. पैसा लगा हुआ है। उस चैनल का प्रमोटर कौन. है? उस चैनल के पीछे जो लोग हैं वो किस. विचारधारा के हैं? अब मान लीजिए अगर कोई. चैनल एक ऐसे व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा. है जो कि कांग्रेस पार्टी का नेता है तो. वो चैनल क्या करेगा? यही तो करेगा. पर बट ये तो दोनों साइड चले गए। हाई एंड. लार्ज जो मुझे लगा जो इस तरफ के भी जो. चैनल्स हैं मुझे ऐसा लगता है कि न्यूज़.
चैनल्स अब वो चलाते हैं जो जनता सुनना. चाहती है। जो जो जनता को पसंद है। न्यूज़. चैनल्स में मुझे नहीं लगता उनके अंदर इतनी. समझदारी है कि वो कुछ इसके अलावा आगे. सोचेंगे। वो ये सोचते हैं कि टीआरपी. किसमें ज्यादा है। जो बिक रहा है जो बिक. रहा है। अगर उनको लगता है कि मोदी बिक रहा. है तो वो मोदी के ऊपर कंटेंट चलाएंगे। कुछ. और आएगा तो और मोदी के ऊपर चलाएंगे। जिस. दिन उन्हें लगेगा मोदी नहीं बिक रहा कोई. और बिक रहा है उस दिन उसको चलाएंगे। सीमा. हैदर चलती रही। बीच में रूस यूक्रेन वॉर. चल रहा था। मैंने महीने भर पढ़ा। मैं सुबह.
6:00 बजे मैंने ब्रेकिंग पढ़ी है सर। अब. मुझे लगता था 6:00 बजे ब्रेकिंग का रूस. यूक्रेन क्या मतलब था? अच्छा और ये महीनों. तक चली है। उस हमारा ना लेना ना देना। हम. एक थर्ड कंट्री हैं। हमारे ऊपर कोई उसका. फर्क नहीं पड़ रहा। लेकिन क्यों करते थे. लोग? सर आर्मेनिया अज़र भाईजान मैंने पढ़ा. है। मुझे नाम तक नहीं मिला था कि इस इस. ग्लोबल मैप पे कहीं आर्मेनिया है। अज़र. भाईजान उसके उस वॉर के बाद मैंने जाना था।. तो ये सिर्फ शुभांकर सिर्फ टीआरपी है।. सिर्फ और सिर्फ टीआरपी है। आज उन्हें पता. चले कि राहुल गांधी पर टीआरपी मिलने लगेगी.
तो वो राहुल गांधी चलाने लगेंगे। वो उसको. चलाएंगे। तो सो इट्स अ बिज़नेस। ये इट्स अ. फॉर न्यूज़ चैनल्स इट्स अ बिज़नेस। उनको. अपनी टीआरपी दिखानी है। हर हफ्ते की TRP. आती है। उस बंधन से बेचारे सब बंधे हुए. हैं। और आपने जो कहा कमिंग बैक टू द सेम. क्वेश्चन वो वही है कि क्या आप कुछ ऐसा. करना चाहते हैं जो कि TRP के बंधन से आजाद. हो? जो ऑर्गेनिक व्यूअरशिप के बारे में. सोचे कि ठीक है भाई जिन घरों में मीटर्स. लगे हुए हैं उन घरों को आप इग्नोर करिए. लेकिन जिन घरों में वो करोड़ों घर जहां. मीटर नहीं है क्या उनकी पसंद नापसंद आपके.
लिए कोई मायने नहीं रखती आज भी अगर आप. देखेंगे हमारे देश में 500 लाख लोगों के. घर में टीआरपी वाले मीटर लगे होंगे तो. क्या वही हमारे भगवान हैं उन्हीं को खुश. रखें जो बाकी के जो लोग हैं करोड़ों जो. परिवार हैं जिनके घर में मीटर नहीं है. उनके उनके बारे में बात ना करें। उनको. क्या अच्छा लगता है, क्या नहीं अच्छा लगता. है वो आपकी कंसीडरेशन में ही नहीं है. क्योंकि वो रेटिंग में तब्दील नहीं होगा।. तो अभी मुझे उनके लिए काम करना है।.
दूरदर्शन जिन घरों में जाता है खासतौर पर. जो ग्रामीण घर हैं क्योंकि कहा जाता है कि. दूरदर्शन आज भी गांव में देखा जाता है।. लेकिन गांव के लोगों की से क्या है? हमारी. पूरी व्यवस्था में है ही नहीं कुछ। तो. क्या उनके बारे में सोचना बंद कर दें हम? तो मैंने सोचा कि ठीक है वहां तक पहुंचते. हैं। उनको मजबूत बनाते हैं। उनको सशक्त. बनाते हैं। और यह प्रूव करते हैं कि अगर. आप गांव में देखे जाते हैं और अगर आप गांव. ग्रामीण भारत के बारे में भी बात करते हैं.
तो भी आप कमर्शियली वायबल हो सकते हैं। और. आप जो डिकोड के नंबर्स आ रहे हैं वो मैंने. देखा 60 6000 लोग लाइव देख रहे थे। अब अब. आप सोचिए मैंने अभी दो-तीन दिन पहले देखा. था आपको तो अच्छा लगा मुझे नंबर वो देखकर. कि डीडी प्लेटफार्म पे 60 आदमी देख रहे. हैं और जीरो पब्लिसिटी है। जीरो. मार्केटिंग है। कोई होर्डिंग नहीं है। कोई. अखबार में बड़े-बड़े विज्ञापन नहीं है।. कोई प्रोमोस नहीं है। मैं आपको यह बताते. हुए बहुत फक्र हो रहा है। ₹1 भी मैंने इस.
शो की मार्केटिंग में खर्च नहीं किया है।. ₹10. पैसे भी खर्च नहीं किए। अब लोग कहेंगे ओवर. बजट हो गया था देने में ही। वो अलग बात. है। पर पर मैं यह देखना चाहता था कि क्या. ये सारे मार्केटिंग टूल्स हैं? क्या यह भी. झूठ हैं? और मैं इस बार मैं जबरदस्ती ये. प्रूव करना चाहता था कि जितनी भी जो चीजें. लोग करते हैं होर्डिंग्स लगाते हैं, अखबारों में विज्ञापन देते हैं। चाहे कोई. पढ़े या ना अखबार कौन पढ़ता है? कौन. बिल्कुल और करोड़ों रुपए के विज्ञापन दिए.
जाते हैं। खर्चा किया जाता है। तो इस बार. मैं इसीलिए मैं आपको कह रहा हूं कि. शुभांकर मैं कुछ नया करने के लिए निकला. हूं। कुछ पुराने जो हमारे मिथ हैं जो. हमारी पुरानी कुछ परंपराएं जो एक तरीके से. बन गई हैं मैं उनको तोड़ने के लिए निकला. हूं और धीरे-धीरे कर कर के मैं उनको एक-एक. करके तोडूंगा। व्हिच इज ट्रू। सर ये सोशल. मीडिया जर्नलिज्म जो निकला है डिजिटल. जर्नलिज्म जैसे हालांकि जैसे अभी ध्रुव. राठी हो गए, अभिनव हो गए, नितीश राजपूत हो. गए, अ फैक्ट चेकर जुबेर जैसे हो गए, और. बहुत सारे लोग हैं। राइट लेफ्ट दोनों मिला. के, हाउ यू सी दिस पीपल? यह देखना पड़ेगा.
कि इनके काम में मिलावट कितनी है। क्या ये. न्यूट्रल है? अ क्या यह अपने काम में. ईमानदार हैं? यह देखना पड़ेगा। और ईमानदार. और न्यूट्रलिटी कैसे दिखाई देगी? क्या आप. पक्ष और विपक्ष दोनों को एक नजर से देखते. हैं? क्या जिन यूर्स के आपने नाम लिए हैं, उनमें से वो ठीक है। वो बीजेपी की बड़ी. आलोचना करते होंगे। प्रधानमंत्री मोदी की. बड़ी आलोचना करते होंगे। हर वीडियो में.
कहते होंगे कि बीजेपी हार रही है, मोदी जी. हार रहे हैं। उनकी एक भी वीडियो में कभी. उन्होंने यह कहा है कि कांग्रेस हार रही. है। कभी उन्होंने ये कहा है वो तो आम आदमी. वाले हैं कि राहुल गांधी के अंदर यह कमी. है। उनके नेतृत्व की शैली में यह कमी है।. कभी उन्होंने दूसरे पक्ष के लोगों का. फैक्ट चेक किया है। तो जितने भी नाम आप ले. रहे हैं ना, इन सब में मुझे एक मिलावट नजर. आती है। एक एक बेईमानी नजर आती है। और वह.
अह जो सारे इनके सिद्धांत हैं, वह कुछ. सीमित लोगों पर लागू होते हैं और बाकी. लोगों को यह जाने देते हैं। जिनको जाने. देते हैं, इसका मतलब उनसे इनके रिश्ते. हैं, अवैध रिश्ते हैं, पैसे के रिश्ते हो. सकते हैं। कोई और अवैध रिश्ते हो सकते. हैं। कहीं और से कुछ सपोर्ट आ सकता है।. क्योंकि आप ऐसा कैसे हो सकता है कि आप अह. आधी व्यवस्था पे तो बिल्कुल चुप रहें। और. आधी व्यवस्था पे रोज आप टीका टिप्पणी. करेंगे। तो बाकी के 50% पे जहां आप चुप. बैठे हैं उस पर कैसे आप चुप बैठे हैं? वो.
आपको नजर क्यों नहीं आ रहा है? इसका मतलब. आपने एक आंख बंद की हुई है और उस एक आंख. को बंद करने की कोई कीमत होती होगी जो. आपने ली है। बट उनके भी जैसे नंबर्स अच्छे. आ रहे हैं। एक दिन मैं अखिलेश यादव जी को. सुन रहा था। उन्होंने कहीं पर कहा कि टीवी. से ज्यादा अब यूटर्स को नंबर मिल रहे हैं।. जो बता रहा है कि देश का मूड जो है मिजाज. किधर है वो किधर जा रहा है? तो वो भी. नंबर्स दिखा रहे हैं। जैसे आप नंबर्स की. बात कर रहे हो तो फिर डिफरेंशिएट जनता. कैसे करे कि हम कौन सही इंसान है? नहीं. जैसा मैंने आपको कहा कि ये तो आईटी सेल्स.
में पूरा वो बंट चुका है। नंबर्स में अगर. आप ये देखें तो हर विचारधारा के लिए एक. नंबर है। मान लीजिए कि अगर मेरे जो आलोचक. हैं मेरे आलोचक क्या मेरे दर्शक भी अगर. कोई यह कहता है कि आज मैं सुधीर चौधरी के. बारे में कुछ खराब बताने वाला हूं।. तो. जो नेगेटिविटी है उसकी एक अलग मार्केट है।. उसकी उसका एक अलग बाजार है। और ये सारा जो. बाजार चल रहा है वो इसी बिजनेस मॉडल पे चल. रहा है कि आप आप नेगेटिविटी बेच रहे हैं।.
आप भारत के प्रति नेगेटिविटी बेच रहे हैं।. भारत की सेना के प्रति नेगेटिविटी बेच रहे. हैं। आप इस देश के जो भी आपको बड़ा आदमी. दिखता है जिसके कुछ फॉलोअर्स हैं उसके. बारे में उसका अपमान करो और नंबर्स ले लो।. ये तो हमारे देश का भी आपने देखा होगा कि. एक ये एक ह्यूमन टेंडेंसी है। अगर मैं. शुभांकर की तारीफ करूंगा तो कोई नहीं. देखेगा। बट अगर मैं शुभांकर की आलोचना. करूंगा। अगर मैं एक थंबनेल डालूं कि.
शुभांकर की पोल आज रात को खुलेगी तो देखिए. अपने आप आ जाएंगे लोग। आपका थंबनेल तो. काफी हमारे एंकर्स भी यूज़ करते हैं। बहुत. यूज़ रिटायर हो गया है। तो मुझे कई बार बड़ा. अच्छा लगता है कि मेरी वजह से बहुत सारे. लोगों की दुकान चल रही है। मैं चाहते हुए. या ना चाहते हुए बहुत सारे लोगों को आज भी. उनके घर चलाने में मदद कर रहा हूं। है ना? मेरा नाम लिख के वो लोग कुछ भी उल्टा सीधा. YouTube पे डाल देते हैं। आप जानते हैं. मैं कई बार हैरान होता हूं। मैंने अपना. अपना भी मेरा एक YouTube चैनल है जिसमें.
मैं कभी-कभी मैं इनएक्टिव हूं। पर दो चार. महीने में 6 महीने में एक वीडियो डाल देता. एक फिल्म का रिव्यु कर देता हूं। कभी एक. फिल्म का रिव्यु कर देता हूं। जिसको उस पर. भी लोग उसको करते हैं कि इन्होंने उस. फिल्म का रिव्यु किया था और उसकी तारीफ. क्यों की थी? तो जैसे अभी मैं कोई सज्जन. है जो कह रहे थे कि इन्होंने शाहरुख खान. के फिल्म की तारीफ की थी। तो इस देश में. शाहरुख खान की तारीफ करना कहां से अपराध. हो गया? कहां से गुनाह हो गया? अगर कोई. फिल्म अच्छी है तो अच्छी है। यहां उनको. मेरी न्यूट्रलिटी नजर नहीं आ रही। तो मैं. जो आपको बता रहा था वो ये था कि मेरा जो.
असली YouTube चैनल है उसके सब्सक्राइबर्स. तो बहुत ही कम है और जो मेरे नाम पे नकली. मेरे नाम पे जो चैनल्स चल रहे हैं हम उनके. मुझसे 10-10 गुना ज्यादा सब्सक्राइबर्स. हैं। वो आज पैसा भी कमा रहे हैं मेरे नाम. पे। मेरे को एक चीज और जाननी है सर इसी. बात से क्योंकि हमने क्रिटिसिज्म की. शुरुआत कर दी। मैंने एक बार आप तक में. आपसे पूछा था कि सर अपना कमेंट सेक्शन आप. देखते हो तो आपने कहा नहीं शुभांकर मैंने. छोड़ दिया अब काफी चमड़ी मोटी हो गई है।. तो आई रियली वांट टू नो ये चमड़ी कैसे.
मोटी हो गई और क्यों मतलब क्या आपको ये. बोदर नहीं करता कि आपके कमेंट सेक्शन के. नीचे लाइन से कुछ भी लिखा जा रहा है या. आपने पढ़ना छोड़ दिया है। इतनी नेगेटिविटी. कैसे मतलब आप करोगे कि मुझे जब मेरे खिलाफ. कमेंट कोई वीडियो खराब चला गया या किसी. मुद्दे पर कुछ चीजें डिफर हुई तो वो बोदर. करता है। अभी भी बोदर करता है। सारे कमेंट. सेक्शन पढ़ता हूं। हर रिव्यु पढ़ता हूं. मैं कि लोगों ने क्या नजरिया दिया। आप ये. मोटी चमड़ी इतनी कैसे हो गई? तो जब सोशल. मीडिया नया-नया आया था और इसमें इतनी.
बेईमानी नहीं थी और ये ऑर्गेनिक था। तब. मैं पढ़ता था और कोई मेरे बारे में खराब. लिखता था तो मुझे अ वो बोदर करता था। मैं. अपना शो खत्म करके जब घर जाता था तो जाके. सोशल मीडिया पे देखता था कौन आदमी क्या. लिख रहा है। और फिर रात भर उसके बारे में. सोचता रहता था। अच्छा लिखा तो बहुत खुश हो. जाता। किस साल की बात है? यह होगी 2014-15. के आसपास की बात होगी और खराब लिखता था तो. मैं निराश हो जाता था और वो चीज मेरे. दिमाग में घूमती रहती थी। उसके बाद सोशल. मीडिया पूरा आईटी सेल्स ने ले लिया। हम.
अभी तो बस मैं इतना कहता हूं कि कुछ लोगों. की नजर में खटकने का मजा ही कुछ और है।. तो अब जब मैं देखता हूं. इतने वर्षों से जब आप ये सब कर रहे हैं तो. मुझे समझ में आ जाता है कि कौन सा फीडबैक. असली दर्शक का है और कौन सा फीडबैक ट्रोल. का है। अब समझ में आने लगा है मुझे। तो. अगर असली दर्शक कुछ कह रहा है तब तो मैं. उसको बहुत सर आंखों पर उसका फीडबैक लेता.
हूं। पर अगर ट्रोल कुछ कह रहा है, किसी. आईटी सेल का कोई आदमी कुछ कह रहा है, किसी. पार्टी का कोई मेंबर मुझसे कुछ कह रहा है, तो मैं यह समझ जाता हूं कि ये आदमी मुझे. डीरेल करना चाहता है। पर Twitter पे तो आई. थिंक अब सबको पता है कि कौन क्या लिखने. वाला है। बिल्कुल मुझे तो लगता है कि मुझे. पहले से ही पता है कि इस विषय पर ये जो 10. बड़े पेजेस हैं ये ये लिख देंगे। ये वाले. ये लिख देंगे और कुछ लोग जो इससे जुड़े या. नाम बहुत इजीली मतलब प्रेडिक्टेबल है। हां. जैसे टीवी, YouTube या टीवी के जर्नलिस्ट. या सोशल मीडिया के जर्नलिस्ट प्रेडिक्टबल.
है कि आपको पता होता है कि इनका वीडियो. ओपन करोगे तो क्या सुनने वाले हैं। ऐसे ही. Twitter के पोस्ट भी हैं। बिल्कुल ऐसा ही. है। तो वो पोस्ट जो है मिलावटी हैं। वो. पोस्ट बेईमानी है। तो जब आपको पहले से पता. है कि ये मिलावटी है। ये बेईमानी है। ये. ₹2 वाला ट्रोल है। इसको इसीलिए नौकरी पर. रखा गया है क्योंकि आपकी ट्रोलिंग करनी है. तो आप उसको क्यों भाव देंगे? आप यह. सोचेंगे कि यह आपका मनोबल तोड़ने के लिए. आया है। आपको उसका मनोबल तोड़ना है और. उसका मनोबल कैसे टूटेगा जब आप उसको इग्नोर. करेंगे। ये देखिए जितने सारे यूट्यूबर्स.
हैं और ये फैक्ट चेकर्स हैं ये मेरे बारे. में लिखते ही रहते हैं। वीडियोस बनाते ही. रहते हैं। बनाते हैं तो बिकते भी हैं।. इनको नंबर्स भी मिलते हैं। सब कुछ मिलते. हैं। और ये सब चाहते हैं कि मैं रिएक्ट. करूं। मैं कभी रिएक्ट नहीं करता। यही इनकी. सबसे बड़ी सजा है कि जब कोई आदमी आपको इस. तरह की आलोचना देने लगे ना तो आप उसको. तोहफे में सिर्फ खामोशी दीजिए। वो उसकी. सबसे बड़ी सजा है। इसलिए आई नेवर एवर. रिएक्ट। लेकिन अगर एक 10 फॉलोअ वाला एक.
दर्शक मुझे कुछ लिखता है कि आज आपके चेहरे. पर लाइट ठीक नहीं थी। आज आपका सूट ठीक. नहीं था। आज आपका ऑडियो ठीक नहीं था। आज. आपकी यह खबर मुझे पसंद नहीं आई। आज आपने. इसमें क्यों बोला? ऐसा क्यों कहा? तो मैं. उसका जवाब देता हूं और नहीं भी दे पाता. हूं तो उसको अपने दिमाग में रखता हूं और. सोचता हूं कि कल इसको ठीक करूंगा।. इंटरेस्टिंग बहुत सारे आपके कोलीग्स. पुराने जिन्होंने आपकी टीम में काम किया।. आमतौर पर सुधीर चौधरी की एक इमेज है कि. बहुत ही सरल सहज शांत व्यक्ति हैं। बट कई.
आपकी टीम के लोग मिले मुझे मुझसे कह रहे. थे यार बहुत गुस्सा करते हैं। एकदम शो में. मतलब एकदम पैनिकिक वाली सिचुएशन रहती है।. हर आदमी के हाथपांव कांपने लगते हैं जो. उनकी कोर टीम में। कोर टीम के बाहर की बात. नहीं कर रहे हैं। कोल टीम में. ये ये सच है कि आप बहुत गुस्सैल इंसान है. अंदर टीम में। देखिए कोई भी इंसान अगर वो. बहुत पैशन से काम करता है। मैं शुरू से ही. मैंने कभी अपने काम को एक नौकरी की तरह. नहीं लिया कि यह मेरी नौकरी है या ये मैं. काम पैसे के लिए करता हूं। मैंने हमेशा एक.
मिशन की तरह उसको लिया है। मेरे लिए 24. घंटे में 1 घंटे का एक मौका आता है इस देश. के लोगों से करोड़ों लोगों से मिलने का।. वो एक घंटे में मैं ना तो कोई गलती करना. चाहता हूं ना समय बर्बाद करना चाहता हूं. ना एक भी शब्द ऐसा ऊपर नीचे करना चाहता. हूं जो मैं नहीं बोलना चाहता और मुझसे. बुलवा लिया जाए या जो मैं करना चाहता हूं. वो ना हो. तो अक्सर आप यह देखिएगा कि जो लोग थोड़े. ज्यादा पैशनेट होते हैं अपने काम में जो. अपने बहुत ज्यादा शिद्दत से काम करते हैं.
उनको गुस्सा भी जल्दी आ जाता है। मेरी टीम. वाले एहसास कर रहे होंगे। हां तो या तो आप. देखिए आप भी नौकरी कर रहे हैं और बाकी सब. भी नौकरी कर रहे हैं। तब कोई समस्या नहीं. है। 99% लोग मीडिया में नौकरी ही कर रहे. हैं। चाहे बॉस हो या उसके नीचे उसके. सबोर्डिनेट्स हो। सब नौकरी करने के लिए आए. हैं। कोई ज्यादा टेंशन वाली बात नहीं है।. कल ठीक हो जाएगा। पर मैं हमेशा अपने शो. में ऐसा देखता हूं कि जैसे यह मेरा आखिरी. शो है। मैं उसको इस प्रकार से लेता हूं।. और अपना शो करने के बाद अगले 24 घंटे में.
अपने अगले शो का इंतजार करता हूं कि मैं. अगले शो में क्या करूंगा। यह मेरे लिए. मौका है। मतलब मैं उसको एक मैं उसको भगवान. की तरह लेता हूं। वरशिप इट वरशिप है ये।. तो जब आप इतने शिद्दत से काम करते हैं और. आपको लगता है कि आप तो अपना पूरा जीवन. उसमें झोंक के आए हैं. और कोई व्यक्ति ऐसा है जो लापरवाही कर रहा. है।. गलतियां भी दो तरह की होती हैं। एक होती. है अनजाने में हो जाती है गलती। उसमें कोई. बात नहीं है। लेकिन कई गलतियां मैंने देखा.
है कि लापरवाही से होती है। आपका काम में. ध्यान नहीं है। आप चाय के ब्रेक के लिए. आपको जाना है 15 मिनट के लिए लेकिन आपने. कर लिया 45 मिनट। आप वापस नहीं आना चाहते. क्योंकि वापस आने के बाद आपको ज्यादा काम. करना पड़ेगा। काम चोरी कर रहे हैं, ध्यान. से अपना काम नहीं कर रहे हैं तो आपको. गुस्सा आता है। और जैसे-जैसे शो का समय. करीब आता जाता है, मेरा ब्लड प्रेशर हाई. होता चला जाता है और वो एक घंटे मेरा ब्लड. प्रेशर मतलब शुभांकर जब मैं वो शो खत्म.
करता हूं 10:00 बजे तो मेरा दिमाग बिल्कुल. फटने के जैसा होता है क्योंकि उस समय मेरे. इतने हाथ-पांव फूले होते हैं कि कहीं कोई. गलती ना हो। कहीं कोई ऐसी चीज ना हो जो जो. प्लान किया है सब वैसा होना चाहिए। तो वो. एक घंटा मेरी जो नसें हैं ना वो बिल्कुल. ऐसे रहती हैं कि अब फटी और अब फटी और उस. समय अगर कोई गलती हो जाए तो मेरी नसें. फटने लगती है। मेरे को याद है मैं एक टीवी. चैनल में था तो जितने प्रोड्यूसर आसपास थे. हर दूसरे दिन कॉल आए कि डीएनए के लिए एक.
प्रोड्यूसर चाहिए और लोग जाने से बचे। तो. मैं कहूंगा यार इतना बड़ा शो है। लोग. ज्यादा पैसे भी मिलेंगे, बड़ा शो भी है, नाम भी होगा। फिर डर क्यों रहे हैं? देन. आई रियलाइज कि उस शो को लेके इंटेंस माहौल. है। बट आई कैन अंडरस्टैंड व्हेन यू आर. वेरी पैशनेट आप चाहते हो चीजें परफेक्ट. हो। अगर कोई नॉन सीरियस है तो वो आपको. फ्रस्ट्रेट करता है कि यार तुम कैसे. गंभीरता नहीं ला रहे हो। एक और मैं आपको. बात बताता हूं। शो के अलावा कभी भी मैंने. कभी आज तक किसी के ऊपर चिल्लाया नहीं है।. कभी भी शो के अलावा अगर हमारी कोई भी बात. हो रही है तो आप मेरा एकदम एक अलग व्यवहार.
देखेंगे। कितने लोग ऐसे हैं जो आज मेरी. टीम में काम नहीं करते। जब मेरी टीम में. थे तो रोज मुझसे डांट खाते थे और वह सोचते. थे कि कैसे मैं इस आदमी के चंगुल से बाहर. निकलूं। फिर बाहर निकल गए चले गए। आज जब. वो मुझे मिलते हैं सब मेरे दोस्त हैं।. मेरा कभी उनसे कोई लड़ाई झगड़ा नहीं होता।. कभी कोई ऐसी कटुता की बात नहीं होती। एक. बार अगर हम अलग-अलग हुए फिर तो कोई वजह ही. नहीं है कि उसके बाद से एवरीबडी फाइंड्स. मी वेरी गुड। तो इस शो को अगर आप निकाल. लें तो मैं कभी किसी के ऊपर नहीं.
चिल्लाता। अपने शो में सबसे ज्यादा. फ्रस्ट्रेट कब हुए लाइफ में आप? इतना लंबा. करियर रहा। कोई एक इंसिडेंट अगर आप चाहो. तो कोई एक इंसिडेंट तो कि मतलब आपने आपा. खो दिया फिर आपको लगा यार ये मैं कैसे. जैसे मेरे साथ आजकल होने लगा है। कई बार. मैं खो देता हूं फिर मुझे लगता है ये मैं. नहीं हूं। काम डाउन शुभांकर इतना गुस्सा. नहीं करूंगा मैं कभी ये ये मेरे साथ अक्सर. ही होता रहता है। इसलिए मैं कोई एक शो तो. पिन पॉइंट नहीं किस लेवल तक गुस्सा निकला? लेकिन बहुत बार ऐसा होता है कि शो के. दौरान गुस्सा आ जाता है कि अब तू नू नजर. मत आना कुछ देर मेरे सामने। तो कई बार ऐसा. होता है कि उसी शो के बीच में ही आपका. चिल्लाने का मन करता है या आप आपने शो.
शुरू किया और 10वें मिनट ही कोई बहुत बड़ी. चीज ऐसी हो गई जो आपको अच्छी नहीं लगी। 40. मिनट का शो बचा हुआ है। लेकिन पूरे 40. मिनट आपका जो चेहरा है वो तमतमाया हुआ है।. आपका कोई इंटरेस्ट नहीं है अब शो में। आप. सोच रहे हो कि बस मैं किसी तरह ये शो खत्म. करूं और उस आदमी को ढूंढूं। पहले सीधे. स्टूडियो से निकलूूंगा। पहले उस आदमी को. ढूंढूंगा और फिर उससे बात करूंगा। तो. दर्शक को भी समझ में आ जाता है। कितने लोग. मुझे बाद में मिलते हैं। सोशल मीडिया पे. लिखते हैं और कहते हैं कि आज आपका मूड ठीक. नहीं था। हमें समझ में आ रहा था। आज आपका.
चेहरा तमतमा रहा था। ऐसा तो ऐसा होता है. कि और ये भी देखिए हमारी इंडस्ट्री का एक. पार्ट है। अगर आप इतना ज्यादा इन्वेस्टेड. हैं किसी एक चीज में और वो चीज आपके हिसाब. से नहीं होगी तो आपको गुस्सा आ रहा है।. मैं डीडी देख रहा था। अभी आपकी ईपी निकल. जा रही थी शायद। जी बिल्कुल। देखिए मैंने. नोटिस कर लिया। अब देखिए वहां मैंने सब. कुछ फिक्स कर लिया। लेकिन जो कान में ईपी. लगता है वो मैं फिक्स नहीं कर पाया। वो. उसकी डुप्पी अलग होती है। कई बार निकल. जाती है वो। निकल जाती है और वो भी वो. फिक्स नहीं कर पा रहे और बहुत इरिटेटिंग. होता है वो क्योंकि ऑडियो कमांड आती नहीं. सही से और वो निकल रही है। आपको सुनाई.
नहीं पड़ रहा। आपका पूरा गैप हो गया. कम्युनिकेशन का। अब आप इंटरेस्टिंग बात. देखिए कि आपको एक तो समझ में नहीं आ रहा. आपका कम्युनिकेशन गैप टूट गया। दूसरा आपको. गुस्सा आ रहा है। आपको इरिटेशन हो रही है।. ठीक है? और दर्शक के सामने हंसते हुए. बताना है। तो देखिए कितना बड़ा चैलेंज है।. पर ये सब करना पड़ता है। उसके बाद भी आपको. अपने गुस्से पर काबू रखना है। आपको बिना. उस सपोर्ट के ही फिर पूरा शो निकालना है।. तो ये है और ये लाइव सिचुएशन है। इसीलिए. शुभांकर हमारे दर्शकों को ये समझने की.
जरूरत है कि जो लाइव शोज़ है ना ये एक अलग. ही डिफरेंट बॉल गेम है। लाइव शो करना आसान. नहीं है। लाइव शो में आपको उस दिन समझ में. आएगा जिस दिन कोई एंकर लाइव शो करते-करते. वहीं हार्ट अटैक आ जाएगा किसी को। वहीं. स्टूडियो में ही कोई एंकर मर जाएगा। उस. दिन प्रेशर होता है। इतना प्रेशर होता है. लाइव शो में। नसें फटने को हो जाती है। सर. अब तो चलिए टेली प्र्पों्टर हाथ में रिमोट. होता है। पहले तो एक इंटरनल चलाता था।. मैंने पुराने दौर में देखा है कि जब मैं. नया-नया आया था तो इंटर्न चलाते थे छोटे. चैनलों में खासतौर पर। तो अगर इंटर्न ने. वो रिमोट के बॉल को थोड़ा तेज कर दिया तो.
पूरा टीपी ऊपर ऊपर। अब आप फंस गए आप पढ़ो. आप। बिल्कुल। तो ये ये हमारे लोगों को समझ. में नहीं आता कि टीम ये जो टीवी है ये. बहुत बड़ा टीम गेम है। इसमें 50 100 लोग. उस चैन में होते हैं। उसमें से एक व्यक्ति. भी अगर गलती कर देता है तो ऐसा लगता है कि. ये गलती एंकर ने की है क्योंकि आप फेस हो. उस शो का आप उस चैनल का फेस हो। लोग आपको. देख रहे हैं। बहुत बार ऐसा होता है आपने. देखा होगा वीडियो गलत चल जाता है। अब.
वीडियो जब गलत चलता है कोई तो वो एंकर ने. थोड़ी गलत चलाया है। मैंने थोड़ी गलत. वीडियो चलाया लेकिन बहुत बार प्रोडक्शन. कितनी लंबी टीम है। उसमें अगर किसी का एक. एरर आ गया किसी एक आपके एक छोटे इंटर्न से. जो कि अभी नया बच्चा आया है। सपने लेके. आया है। उसको भी एक दिन बड़ा बनना है।. लेकिन शुरुआत में गलतियां होती हैं। सबसे. गलतियां होती है। हमने भी की थी। अब उसने. अगर मान लीजिए एक एक गलत वीडियो जो कि. टोटली अनइटेंशनल है और वो वीडियो गलत चलने.
से भी ऐसा नहीं किसी का कोई फायदा हो गया. है।. उसको लेके लोग आपके ऊपर टूट पड़ते हैं। और. लोगों को लगता है कि वो गलती मैंने की है।. जबकि इतनी बड़ी टीम में किसी भी प्रकार की. कोई भी गलती कर सकता है। आपका माइक वाला. अगर ठीक काम ना करे तो आपका ऑडियो उड़. जाएगा। आपके ईपी वाले ने यहां ठी ठीक से. काम नहीं किया तो आपका ये खराब हो जाएगा।. स्टूडियो में लाइटिंग वाले ने ठीक से नहीं. किया। प्रोडक्शन वाले ने ग्राफिक्स अगर. गलत बना दिया कोई स्पेलिंग मिस्टेक कर दी. पीसीआर लापरवाह हो गया। कितनी बार ऐसा.
होता है कि आपने बहुत अच्छी चीज बना के. रखी है। अच्छा ग्राफिक कोई अच्छा एनिमेशन. बना के रखा है और पीसीआर वाला उसको फायर. नहीं कर पाता। बहुत बार ऐसा होता है कि आप. कुछ बोल रहे हैं और पीसीआर से उसने वीडियो. कुछ गलत चला दिया। कोई ग्राफिक्स गलत फायर. हो गया जो सही समय पर ना होकर गलत समय पर. फायर हो गया वो सारी गलतियां होती हैं और. यह बहुत बड़ी टीम है सर छोटे चैनल्स में. और गलतियां होती है मेरा एक अपना. एक्सपीरियंस था मेरे एक पीसीआर में पैनल. प्रोड्यूसर थे तो पान खा के बैठते थे करे.
मुझे समझी ना आए फिर छोटे चैनल्स में बड़े. चैनल्स में बड़े शोज़ में फिर भी सीरियसनेस. ज्यादा होती है मुझे एक घटना याद है. हरियाणा में कुछ एक दुर्घटना हुई थी रोड. एक्सीडेंट और पीसीआर में गाने चल रहे थे. तो वो ऑफ कर देते हैं आपको एपी सुन ही ना. पड़े। तो जब वो घटना चल रही थी, मैं पढ़. रहा हूं कि बड़ी गंभीर खबर है। दो लोगों. की मौत हो गई। ऐसा हो गया, वैसा हो गया।. और मेरे कान में गाना चल रहा है तेरी आंख. काजल। एंड आई एम लाइक आप क्योंकि आप विंडो. में कटे हुए हो या फटाफट आप पढ़ रहे हो और. आप कटे हुए आप आप बस ये सोच रहे हो कि भाई. ये बंद कर दे। मैं सीधे जाके ऐसा कॉलर.
पकड़ लूं।. तो ये बहुत सारी घटनाएं जो लोगों को दिखती. नहीं है और आप रिएक्ट करते हो आप बैठते. हो। लोगों को लगता है सब आप ही कर रहे हो।. सब आप ही कर रहे हैं। बिल्कुल। जैसे मुझे. लगता है टीवी आप ही के जैसे बहुत लंबे समय. तक इस देश में लोगों की एक धारणा थी कि. Zee न्यूज़ सुधीर चौधरी का चैनल है।. बिल्कुल बहुत सारे लोग ऐसा सोचते थे। अब. देखिए कि जिन यूर्स ने और जिन फैक्ट. चेकर्स ने आपकी सुपारी ली हुई है वो तो आप. ही के पीछे पड़ेंगे। ऐसा नहीं कि वो यह. बात नहीं जानते। वो भी जानते हैं लेकिन. उन्होंने आपकी सुपारी ली हुई है। जैसे.
मुझे याद है राहुल गांधी ने एक बार कहा था. कि मेरी छवि खराब करने के लिए हजारों. करोड़ों रुपए का बजट रखा गया है और पैसा. खर्च किया जा रहा है ताकि मेरी छवि खराब. हो सके। ये राहुल जी के साथ जो उनका दर्द. है ना यह सबका है। मतलब मुझे लगता है कि. मेरी छवि खराब करने के लिए भी हजारों. करोड़ नहीं लेकिन करोड़ों रुपए की सुपारी. तो अलग-अलग लोगों ने ले ही रखी है। जो रोज. दिन रात 10 बार मेरा शो चला चला के देखते. हैं और देखते हैं कि इसके अंदर क्या गलती. निकल जाए तो हम इसको.
इसके ऊपर पिक करें। फिर उसके ऊपर वीडियो. बनाए और फिर यह कहें कि देखिए कि यह. इन्होंने क्या कितनी बड़ी फिर वो परसेप्शन. बन जाता है और फिर वो आदमी रोज गलती करता. है। यही करता है। यह इकोसिस्टम है। ये. आपके मनोबल को तोड़ने के लिए है। ये आपके. कॉन्फिडेंस को खत्म करने के लिए होता है।. तो अगर आप इनको गंभीरता से लेने लगे आप तो. काम ही नहीं कर पाएंगे अपना। आपके तो हाथ. पैर फूल जाएंगे। आप सही फैसले नहीं ले. पाएंगे। ये आपके फैसले लेने की क्षमता को. प्रभावित करने लगेंगे। इसलिए इन लोगों का. एक्सपोज होना जरूरी होता है। चोरी यह लोग.
कर रहे हैं। बेईमानी यह लोग कर रहे हैं।. सुपारी लेके खास लोगों को अपना निशाना ये. लोग बना रहे हैं। और हम जैसे जो लोग हैं. वो डिफेंसिव हो जाते हैं। हम सोचते हैं कि. देखिए ये हमारे हमारे बारे में क्या बात. कर रहा है। इसलिए मैं तो कभी इनकी तरफ कोई. ध्यान देता ही नहीं हूं। ट्रू। दो सेगमेंट. है सर। एक इंस्पिरेशनल सेगमेंट है। एक. कंट्रोवर्शियल सेगमेंट है। आप किस पे जाना. चाहेंगे? मैं नेगेटिव जो है उस पे जाना चाहूंगा।. नेगेटिव. ओके आपके बहुत सारे फैंस हैं। उनमें से एक.
फैन का मैं कोट पढ़ रहा हूं जो उन्होंने. लिखा था। उन्होंने लिखा कि ये मेरे बहुत. पसंदीदा पत्रकारों की श्रेणी में आते हैं।. लेकिन सुधीर जी पर एक आरोप है जो मुझे. अक्सर विचलित करता है और मैं चाहता हूं इस. पर वो सफाई दें। वो आरोप है 2012 जिंदल. एक्सटॉर्शन केस का जिसमें उन पर तिहाड़. में जेल जाने का फोटो आता है। वो कहते हैं. मुझे इस बारे में जानकारी नहीं थी। जब मैं. तारीफ करता हूं उनकी और मैं स्टैंड लेता. हूं तो यह बातें आती हैं जो मुझे विचलित. करती हैं। तिहाड़ एक वीडियो का आना जिसमें. 100 करोड़ की डिमांड होना बहुत.
कंट्रोवर्शियल केस हुआ है और बहुत सारे. लोगों ने कहा कि आपसे पूछा जाए आपकी. प्रोफाइल में भी नीचे वो कमेंट आता रहता. तिहाड़ तिहाड़ जी अगर ये सवाल आप मुझसे. कुछ वर्ष पहले पूछते तो शायद मैं इसका. बहुत लंबा सा जवाब देता और बहुत इमोशनल. होकर मैं जवाब देता। लेकिन धीरे धीरे धीरे. मुझे ऐसा लगता है कि मेरे मन में भी वही. बात है कि हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी. खामोशी। तो मैं भी खामोश रहना सीख गया. हूं। लेकिन ये जो सवाल आपने किया है इसका.
मैं जवाब बिना इमोशनल हुए सिर्फ फैक्ट्स. के आधार पर देना चाहता हूं। और आज शायद. पहली बार जब आपके पॉडकास्ट में अच्छा यू. एक्सपेक्टेड कि ये सवाल पूछा जाए। मुझे. पता था कि आप ये सवाल पूछेंगे तो मैं मैं. कुछ पेपर्स लेके आया हूं और वो मैं वहां. से मैं कोट करूंगा। तो पहली बात तो ये है. जो हमारे सब दर्शकों को ये समझनी है कि. आरोप लगाना तो बहुत आसान है। आरोप तो किसी. के ऊपर कोई भी लगा सकता है लेकिन इस देश.
में कभी भी किसी भी लीगल केस में या यह हो. या कोई और हो मुझे किसी भी अदालत में दोषी. नहीं पाया गया है। तो मैं बिल्कुल साफ. हूं। अब आते हैं इस केस पर। आज मैं यह. 2012 में केस रजिस्टर हुआ था, एफआईआर हुई. थी और आज मैं उस केस की क्लोजर रिपोर्ट. अपने साथ लेकर आया हूं। ओके? क्योंकि यह. केस 2022 में बंद हो गया था। और जो.
इन्वेस्टिगेशन की एजेंसी है दिल्ली पुलिस. उसने कोर्ट में एक क्लोज़र रिपोर्ट डाली।. और उस क्लोज़र रिपोर्ट की सर्टिफाइड कॉपी. आज मैं आपके सामने ले आया हूं। यह देखिए. यह उसकी सर्टिफाइड कॉपी है उस क्लोज़र. रिपोर्ट की जिसमें ये केस औपचारिक रूप से. लीगली बंद हो गया। इसकी कुछ लाइन आपको. सुनाना चाहता हूं मैं।. यह जज ने लिखी हैं। ये केस को बंद करते. हुए। इसमें लिखा है इन द प्रेजेंट केस.
सप्लीमेंट्री चार्जशीट वाज़ फाइल्ड बाय दी. इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर। आफ्टर दी लर्नड. प्रीडसेसर ऑफ दिस कोर्ट। मतलब जो मेरे से. पहले के जो जज थे दिस कोर्ट हैड ऑर्डर्ड. फॉर फर्दर इन्वेस्टिगेशन वाइड ऑर्डर डेटेड. 139 2013. 2013 में एंड डायरेक्टेड द. इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी टू प्रोसीड विद. फर्दर इन्वेस्टिगेशन ऑफ़ द केस अपॉन अ. फाइंडिंग टू दी इफेक्ट दैट मटेरियल इशूज़.
हैड नॉट बीन इन्वेस्टिगेटेड एंड रिपोर्टेड. विद कंसीक्वेंट फाइंडिंग देयर ऑन बाय दी. इन्वेस्टिगेटिव िंग एजेंसी. द कोर्ट हैज़ नॉट येट टेकन द कॉग्निजेंस ऑफ. एनी ऑफेंस ऑन द पुलिस रिपोर्ट प्रेजेंटेड. ऑन 307 2013 एंड द ऑर्डर डेटेड 13.9 2013. वाज मेड आफ्टर हैविंग कंसीडर्ड द सेड. पुलिस रिपोर्ट।. इसका मतलब आप समझ रहे हैं कि कोर्ट ने यह.
कहा है कि जो चार्जशीट. 2013 में दिल्ली पुलिस ने फाइल की थी, कोर्ट ने उस चार्जशीट का संज्ञान नहीं. लिया और पुलिस को कहा कि आप इसमें आगे और. फर्दर इन्वेस्टिगेशन करिए क्योंकि अभी की. इन्वेस्टिगेशन हमें अधूरी लग रही है और. हमें ठीक नहीं लग रही है। आगे कहते हैं, दी आईओ हैज़ फाइल्ड अ क्लोज़र रिपोर्ट इन द. फॉर्म ऑफ़ सप्लीमेंट्री चार्जशीट ऑन 4.522।.
तो, इसमें हुआ यह था कि 2013 में पुलिस ने. पहले एक चार्जशीट फाइल की। उस चार्जशीट को. अदालत ने वापस कर दिया। यह कहते हुए कि. इसमें मुझे जो इन्वेस्टिगेशन आपने की है, उससे हम सेटिस्फाइड नहीं है और आपने. धाराएं भी गलत लगाई है। इट नीड्स मोर. इन्वेस्टिगेशन। तो आप एक सप्लीमेंट्री. चार्जशीट के बाद दोबारा से फ़ाइल कीजिए और. उसमें बताइए कि आपने आगे क्या पूरा. इन्वेस्टिगेशन किया है। यह अदालत ने 2013. में कहा।. तो सप्लीमेंट्री चार्जशीट पुलिस ने कब.
फाइल की? 2013 के बाद 2022 को।. ठीक है? और 2022 में दी आईओ हैज़ फाइल्ड अ. क्लोज़र रिपोर्ट इन द फॉर्म ऑफ. सप्लीमेंट्री चार्जशीट ऑन 4.522।. एस पर दी सप्लीमेंट्री चार्जशीट अक्यूज्ड. समीर आलूवालिया, सुधीर चौधरी, सुभाष. चंद्रा, पुनीत गोयनका एंड जवाहर गोयल हैव. बीन केप्ट इन कॉलम नंबर 12 फॉर वांट ऑफ. एविडेंस।. इसके बाद वो आगे लिखते हैं कि जो सामने.
वाली पार्टी थी यानी जो शिकायतकर्ता जिसने. शिकायत की थी द कॉन्टेस्टिंग पार्टीज दी. एफआईआर वाज़ लेवल्ड ड्यू टू जो जो. कॉन्टेस्टिंग पार्टी है उसने यह लिख कर. दिया. क्या लिख कर दिया कि एफआईआर वाज़ लेवल्ड. ड्यू टू सम कन्फ्यूजन कम्युनिकेशन गैप. मिसकंसेप्शन फ्रॉम बोथ साइड्स।.
ठीक। फिर आगे मैं आपको बताता हूं। उसके. बाद इसमें लिखा है फर्दर मोर ऑन 194 2017. अ लेटर एड्रेस टू कमिश्नर ऑफ पुलिस वाज़. रिसीव्ड फ्रॉम श्री रवि मुथ्रेजा वेयर इन. ही स्टेटेड दैट द एलिगेशन लेवल्ड बाय हिम. अगेंस्ट अक्यूज़्ड पर्संस वर एट द इंस्टेंस. ऑफ़ मिस्टर नवीन जिंदल एंड सेम आर नॉट. ट्रू। यह उसने चिट्ठी लिखी जो जिसने. एफआईआर कराई थी। उसके बाद इसमें लिखा है. इट आल्सो मेंशंड इन द सप्लीमेंट्री.
चार्जशीट द सेक्शन 4251 एंड 384 / 511 ये. दो सेक्शंस उन्होंने लगाए थे वर रिवोक्ड. एंड सेक्शन 385 ऑब्लिक 2001B. वाज़ इनवोक्ड ऐसा करके और फिर इसमें लिखा. है कि इन द व्यू ऑफ द अबव डिस्कशन. सफिशिएंट मटेरियल इज़ नॉट अवेलेबल एंड हेंस. द क्लोज़र रिपोर्ट इज़ हियर बाय एक्सेप्टेड. बाय द कोर्ट फाइल बी कंसाइन टू रिकॉर्ड.
रूम आफ्टर ड्यू कंप्लायंस। यह उसकी क्लोजर. रिपोर्ट है। अब मैं आपको एक चीज और बताना. चाहता हूं जिसमें आपको समझ में आएगा। यह. क्लोजर रिपोर्ट तो है 2022 की। लेकिन 2013. में जब चार्जशीट फाइल हुई थी उसमें मैं. आपको उस समय अखबारों में क्या छपा था उसी. की एक कॉपी मैं आपको लेकर जाता हूं। और. उसमें लिखा है दिल्ली कोर्ट हैज़ रिफ्यूज्ड. टू टेक कॉग्निजेंस ऑफ द चार्जशीट फाइल्ड. अगेंस्ट जी एडिटर्स सुधीर चौधरी, समीर. आलूवालिया एंड सुभाष चंद्रा। द कोर्ट.
डायरेक्टेड डिप्टी कमिश्नर ऑफ दिल्ली. पुलिस क्राइम ब्रांच टू गेट द मैटर. इन्वेस्टिगेटेड बाय एन ऑफिसर नॉट बिलो दी. रैंक ऑफ एसीपी एंड फाइल बिफोर इट फर्दर. फाइनल रिपोर्ट एट दी अरर्लियस्ट सेइंग. देयर वर मटेरियल ल्यूके इन द. इन्वेस्टिगेशन। यह कोर्ट कह रहा है। आगे. कोर्ट क्या कहता है? द मैटर रिक्वायर्स. फर्दर इन्वेस्टिगेशन ऑन दी मटेरियल. एस्पेक्ट्स एज़ डिटेल्ड अबव इन दिस ऑर्डर।. ऑल द अबव मेंशंड सरकमस्टेंसेस पॉइंट आउट.
दैट दी मैटर हैज़ नॉट बीन प्रॉपर्ली एंड. फुल्ली इन्वेस्टिगेटेड बाय दी आईओ एंड. रिक्वायर्स फर्दर इन्वेस्टिगेशन। कीपिंग. इन द व्यू द फैक्ट ऑफ़ द केस एंड. इन्वेस्टिगेशन डन इन द मैटर। इट सीम्स दैट. द मैटर शुड बी फर्दर इन्वेस्टिगेटेड बाय अ. पुलिस ऑफिसर नॉट बिलो दी रैंक ऑफ़ एसीपी।. यानी इस बार आप सीनियर ऑफिसर से इसको. कराइए।. द डीसीपी क्राइम ब्रांच इज डायरेक्टेड टू. गेट द मैटर फर्दर इन्वेस्टिगेटेड बाय अ. पुलिस ऑफिसर नॉट बिलो दी रैंक ऑफ एसीपी. एंड फाइल अ फर्दर फाइनल रिपोर्ट इन दिस. मैटर एट द अर्लियस्ट। ऐसा कोर्ट ने कहा.
2013 में कि फाइनल रिपोर्ट आप पेश कीजिए।. और वो फाइनल रिपोर्ट कब पेश हुई? 2022 में. जिसमें पुलिस ने यह कहा कि हमें कुछ नहीं. मिला और हम इसको बंद करना चाहते हैं। अब. इसमें क्या है? ऑर्डरिंग फर्दर प्रोब इन द. केस द कोर्ट सेड देयर आर ग्लेयरिंग एंड. मटेरियल ल्यूकेना इन द केस विद रिस्पेक्ट. टू इन्वेस्टिगेशन और मतलब उसका लबो लबाब. कुल मिलाकर ये कोर्ट किया है इट इज़ दस. एविडेंट फ्रॉम द बेयर डेफिनेशन ऑफ़ बोथ द.
प्रोविज़ंस दैट बोथ दीज़ ऑफेंसेस आर. म्यूचुअली एक्सक्लूसिव जो उन्होंने हमारे. ऊपर लगाए थे कि कोर्ट ने ये कहा कि ये. इसमें लागू नहीं होते या नहीं हो सकते।. फर्दर फ्रॉम द चार्जशीट द बेसिक. इंग्रेडिएंट्स ऑफ चीटिंग आर एब्सोलुटली. नॉट मेड आउट बिकॉज़ देयर इज़ नो एलिमेंट ऑफ. डिसेप्शन और फ्रॉड बीइंग प्लेड बाय द. एक्यूज़्ड पर्संस अपॉन द कंप्लेनेंट। दिस. एस्पेक्ट आल्सो रिक्वायर्स फर्दर इन्वेस्ट. इन्वेस्टिगेशन बाय द पुलिस। और आगे फिर. उन्होंने लिखा है कोर्ट ने इट इज़ अ वेरी. मटेरियल लेक्यूना इन्वेस्टिगेशन बाय दी.
एआई बाय दी आईओ एट दिस स्टेज एंड इट इज़. एविडेंट दैट दी प्रेजेंट मैटर रिक्वायर्स. फर्दर इन्वेस्टिगेशन। यह इसमें लिखा है।. तो हिंदी में मैं आपको बताता हूं कि 2013. में पुलिस ने जो चार्जशीट फाइल की उस. चार्जशीट का संज्ञान अदालत ने नहीं लिया. और कहा कि हमें इसमें इन्वेस्टिगेशन में. बहुत कमियां और बहुत सारे लूप होल्स दिखाई. दे रहे हैं। आपने जो सेक्शंस इनके ऊपर. लगाए हैं वो सेक्शंस भी इनके ऊपर बनते. नहीं है। आप फर्दर इन्वेस्टिगेशन कीजिए और. ठीक से इन्वेस्टिगेशन करके लाइए। इसके लिए.
उन्होंने डीसीपी को आदेश दिया कि कम से कम. एसीपी रैंक के आदमी को लगाइए जो. इन्वेस्टिगेट करे। यह 2013 की बात है और. उसके बाद पुलिस इन्वेस्टिगेट करती रही और. 2022 में पुलिस ने कोर्ट में आकर कहा कि. हम इस केस को बंद करना चाहते हैं और यह. उसकी क्लोजर रिपोर्ट है। यह केस अब बंद हो. चुका है और इसमें कौन-कौन लोग थे एफआईआर. में? मैं था मेरे कलीग थे समीर आलूवालिया।. जी के जो ओनर हैं सुभाष चंद्रा सुभाष. चंद्रा के जो बेटे हैं पुनीत गोयनका और.
सुभाष जी के जो भाई हैं लक्ष्मी गोयल मां. माफ जवाहर गोयल ये सारे लोग उनका नाम था. इस पूरे इसमें लेकिन ये जो पूरा जो टैग. चिपका ये सिर्फ मेरे नाम पे चिपका. ये भी आप देखिए सबसे पॉपुलर फेस आप थे तो. ये उसका समझ लीजिए कि एक ट्रोल आर्मी पूरी. की पूरी थी जो कि मेरे पीछे उस वक्त लगी. और दुख की बात ये है कि जब ये केस चला जब. जब ये एफआईआर फाइल हुई तब तो सारे अखबारों. ने पूरे मीडिया ने सोशल मीडिया ने इसके.
बारे में सब कुछ लिखा। लेकिन जब ये केस. बंद हुआ जो मैंने आपको पढ़ के सुनाई. क्लोजर रिपोर्ट तब इसके बारे में किसी ने. भी रिपोर्टिंग नहीं की और आज भी लोग उस. एफआईआर के. नाम पर यह सारी बातें लिखते हैं। लेकिन उस. क्लोजर रिपोर्ट को जब ये केस बंद हो गया. उसके बारे में कभी बात नहीं करते। बट ये. क्यों है? क्योंकि आप कहीं चैनल ज्वाइन. करते हैं तो आपको लेके हजारों खबरें छप. जाती है। इंटरनेट पे भरीभरकम बातें होती. हैं। कई बार आप अपने शो में भी एक्सप्लेन. करते हैं कि देखिए पुरानी खबर ये थी नई. खबर में हम इसको बेहतर ये कर रहे हैं तो.
फिर ये खबरें हाईलाइट क्यों नहीं हुई? क्योंकि अभी भी लोगों के दिमाग में. परसेप्शन यही है कि मैं फिर कोट कर रहा. हूं सर। वो एक वीडियो अभी भी लोगों के. दिमाग में और वो कमेंट सेक्शन में आपकी. प्रोफाइल में आता रहता है। बिल्कुल।. तो इसके पीछे मुझे ऐसा लगता है कि एक बहुत. बड़ी जिसको कहते हैं ना कि एक बहुत बड़ी. लॉबी थी जिसने शायद मेरे नाम की सुपारी ली. होगी और वो आज तक उसी चीज को खा रहे हैं।. उसी चीज को भुना रहे हैं और एक दुष्प्रचार. है ये। उस दुष्प्रचार का मैं शिकार हुआ. हूं। उन्होंने सिर्फ एक आदमी को टारगेट. किया। सिर्फ मुझे पिक किया और पूरी कोशिश. की कि मेरी छवि खराब की जाए। जहां-जहां.
मैं जाऊं वहां वहां यह सब चीजें मेरे नीचे. वो लगातार यह कमेंट सेक्शन में डालते रहे।. इससे आप यह समझ सकते हैं कि कितनी बड़ी. लॉबी होगी और उनकी मंशा क्या होगी कि वो. यह सब बातें कर रहे हैं। मैं भी गया था. पंजाब में मैच देखने। मुझे वहां पे कुछ. लोग मिले जो पहले हमारी फील्ड से थे और अब. वहां काफी सीनियर पदों पर हैं। तो. उन्होंने मैंने ऐसे जिक्र किया। उन्होंने. पूछा किसका पॉडकास्ट किया? तो मैंने जिक्र. किया कि हम प्लान कर रहे थे आपके साथ। और.
इस घटनाक्रम में उन्होंने मुझसे यह कहा कि. एक टाइम था जब मीडिया में कैंपेन चला था. बॉयकॉट सुधीर चौधरी और कई बड़े संपादकों. ने एक साथ ये कदम उठाया था कि आपको इस. इंडस्ट्री से या तो बाहर कर दिया जाए या. अलग किया जाए। इज इट ट्रू? बिल्कुल। उस. वक्त एक बहुत बड़ी लॉबी थी जो चाहती थी कि. मैं इस इंडस्ट्री में ना रहूं या रहूं भी. तो बहुत ही बिल्कुल एक साइड लाइन होके. रहूं। मेरा कद जो है वो एकदम छोटा कर दिया. जाए। देखिए शुभांकर मैंने एक चीज देखी है।.
जब तक आप बहुत ज्यादा सफल नहीं होते तब तक. सब आपके दोस्त होते हैं। क्योंकि किसी से. आपको इनसिक्योरिटी नहीं है। लेकिन जब आप. बहुत सफल होने लगते हैं तो वही जो दोस्त. हैं आपसे ईर्ष्या करने लगते हैं। वो चाहते. हैं कि किसी ना किसी तरीके से आपको फंसाया. जाए। और मैं आज भी मैं यह कहता हूं कि इस. मामले में लोगों ने बहुत जल्दबाजी से काम. लिया। लोगों ने सिर्फ सोशल मीडिया पे अपना. फैसला सुना दिया। इन्वेस्टिगेशन का इंतजार. नहीं किया। अदालत ने क्या फैसला दिया उसका.
इंतजार नहीं किया। तो मैं तो आज यही कहना. चाहूंगा कि मेरे जो लोग ट्रोल करते हैं. उनसे तो मुझे कोई लेना देना नहीं है। वो. जो चाहे वैसा कर सकते हैं। बट मेरे जो जो. मेरे सच्चे फैंस हैं जो दिल से मेरे साथ. जुड़ते हैं उनको मैं यह कहना चाहता हूं कि. आपको बैकफुट पर आने की आपको इसके बारे में. जरा भी कोई चिंता करने की बिल्कुल. आवश्यकता नहीं है। क्योंकि यह जो केस है. जिसके जिसको लेकर मुझे बदनाम किया जाता. है। यह केस समाप्त हो चुका है। मैं इसमें.
दोषी नहीं पाया गया था और क्लोज़र रिपोर्ट. मैंने आपको अभी आपके सामने दिखा दी। यह. ठीक है सर। लेकिन एक एक लास्ट क्वेश्चन इस. पे मैं कर लेता हूं क्योंकि ये बहुत सारे. फैंस के मन में सवाल आता भी होगा क्योंकि. एक परसेप्शन भी एक चीज होती है। उस वीडियो. में 100 करोड़ का जिक्र होता है। वो. वीडियो क्या था? और वो क्या उतना ही बड़ा. वीडियो था या और बड़ा वीडियो था? क्योंकि. वो 10 सेकंड की जो क्लिप आती है शायद उसी. ने इस परसेप्शन को इतना बड़ा किया और. क्योंकि समीर आलूवालिया फिलहाल इंडस्ट्री. का हिस्सा नहीं है। सुभाष जी या गोयल जी. जो है वो डायरेक्टली जवाहर जी इन्वॉल्व. नहीं है कैमरे में। आप पॉपुलर फेस इसमें.
कभी आप ये सोच के देखिए कि अगर ये केस ऐसा. होता तो इसमें सुभाष जी को इनवॉल्व करना, उनके पूरी फैमिली को इनवॉल्व करना, बेटे. को इनवॉल्व करना, भाई को इनवॉल्व करना, मुझे इनवॉल्व करना, मेरे कलीग को इन्वॉल्व. करना। आप सोचिए कि कितनी बड़ी कांस्परेसी. और कितनी बड़ी ये साजिश रही होगी और जिस. टेप की बात होती है मेरे ख्याल से मुझे. अभी ठीक से याद नहीं है लेकिन वो टेप कई. घंटों का था मतलब वो जो मीटिंग थी हां वो. कई घंटों की थी और उस मीटिंग में आमतौर पे.
समीर के साथ वो लोग बात किया करते थे और. वो पूरी जो उन्होंने रिकॉर्डिंग की थी. समीर के साथ की थी मेरे साथ मैं सिर्फ एक. ही बार उस मीटिंग में गया था समीर के साथ. वो वो भी इसलिए कि समीर ने मुझे कहा कि. चलो ले चलो उस टेप को भी टोटिटी में कभी. किसी ने नहीं सुना कि भाई आप पूरा टेप तो. सुन लीजिए कि पूरे टेप में हो क्या रहा. है। यू नो जैसे हम और आप अभी इस शो से. पहले हम लोग बात कर रहे थे। हमारा 15 मिनट. हमारा ऑफ द रिकॉर्ड जो बातचीत हो रही है. अगर उसको भी कोई रिकॉर्ड कर ले तो मुझे.
लगता है कि उसमें से भी एक दो मिनट तो. बहुत ही मसालेदार चीजें निकल आएंगी और हम. मैं और आप अभी से ट्रोल होने शुरू हो. जाएंगे। बहुत क्रांतिकारी हो जाएगा। वो. बहुत क्रांतिकारी हो जाएगा। तो आपने देखा. होगा कि जैसे ही माइक बंद होता है और जब. वो रिकॉर्ड हो जाता है कोई भी ऑफ द. रिकॉर्ड बातचीत अपने आप मसालेदार बन जाती. है। वो बहुत क्रांतिकारी हो जाती है।. लेकिन उसमें आपको ये देखना चाहिए कि मंशा. क्या है और हो क्या रहा है। तो लोगों ने. क्या किया कि एक छोटी सी क्लिप निकाली और. वो 5 10 सेकंड की क्लिप और उस 10 सेकंड की. क्लिप के ऊपर उन्होंने वो 10 घंटे के पूरे.
टेप को उस क्लिप ने उस वो उस पर हावी हो. गई। सो इट वास आई वुड से दैट यह एक बहुत. बड़ा षड्यंत्र था, साजिश थी, एक बहुत बड़ा. प्लॉट था कि मुझे इंडस्ट्री से बाहर कर. दिया जाए। Zee न्यूज़ को उस समय बंद कर. दिया जाए। Zee न्यूज़ का लाइसेंस उस समय. खत्म कर दिया जाए। एक पूरे ग्रुप को. टारगेट करने की कोशिश थी। मैं आज ये. कहूंगा पूरा की पूरा जो ग्रुप है वो उसको.
निशाना बनाने की कोशिश थी।. और वह कोशिश हम उसमें लड़े और हम जानते थे. कि हम सही हैं और हम यह भी जानते थे कि. कोर्ट में जीत हमारी होगी। हमने इंतजार. किया 10 साल मेरे जिंदगी के जरूर उसमें. निकल गए लेकिन 10 साल मैंने इंतजार किया।. हमारा जो प्रोसेस है वो ऐसा ही है कि आपको. उसमें से गुजरना पड़ेगा। उस दर्द से आपको. गुजरना ही पड़ेगा। उससे पहले कुछ हो नहीं. सकता। लेकिन दुख इस बात का है मुझे. बार-बार मैं यही कहता हूं कि जब यह केस. शुरू हुआ था तो सब ने इसके बारे में लिखा।. लेकिन जब यह केस बंद हुआ और जब इस केस में.
क्लोजर रिपोर्ट आई पुलिस की तब किसी ने. इसके बारे में बात भी नहीं की और आज भी. ज्यादातर लोग यही समझते होंगे। आप. डेफिनेशन क्यों नहीं मारते उन बड़े लोगों. पर जो अभी भी आपको ट्रोल करते वक्त लिखते. हैं। बहुत सारे बड़े एंकर्स हैं, फैक्ट. चेकर्स हैं जो अभी भी लिखते हैं। डिस्पाइट. द फैक्ट कि आप कह रहे हो कि सामने क्लोजर. रिपोर्ट रखी है हमारे जिस पे केस बंद कर. दिया गया है। तो आप डिफेमेशन करिए। मैंने. आपका जो जवाब दिया तो सबसे पहले मैंने यही. कहा कि हजारों जवाबों से अच्छी है मेरी. खामोशी। अगर आज से कुछ साल पहले मैं कुछ.
साल पहले का सुधीर चौधरी होता तो शायद यही. करता। लेकिन धीरे-धीरे धीरे जिंदगी ने भी. मुझे यह सिखाया और मैं आपको इसका उदाहरण. देता हूं। कितने लोग हैं जो मुझे ट्रोल. करते हैं। आपत्तिजनक बातें मुझे लिखते. हैं। मैंने कभी भी किसी को ब्लॉक नहीं. किया। आज भी मेरी सोशल मीडिया की टाइमलाइन. पर मेरे ही ट्र्स जो हैं वो सब लिखते हैं. और मैंने कभी किसी को ब्लॉक नहीं किया। तो. डिफेमेशन की बात वहां से शुरू होती है जब. किसी को आप ब्लॉक करना शुरू करते हैं ना. वो उसका पहला चरण है। मैंने तो अभी तक.
किसी को ब्लॉक भी नहीं किया। मैं चाहूं तो. इतने सारे लोगों को ब्लॉक कर सकता हूं। बट. आई डोंट डू दैट। और यह सब अ जब होता है. किसी के साथ शुभांकर तो थोड़े दिन के बाद. आदमी क्या होता है? स्पिरिचुअल हो जाता. है। उसको लगता है कि इसके पीछे हो सकता है. कोई एक लार्जर डिजाइन होगा। हो सकता है कि. मेरी किस्मत में यह रहा होगा कि मुझे एक. एक सजा अदालत ने सजा नहीं दी है। किसी. लीगल सिस्टम ने सजा नहीं दी है। किसी जज. ने नहीं दी है। लेकिन फिर भी एक सजा है जो.
आपको भोगनी है जो आपको भुगतनी है। मे बी. मैं उसको ये सोचता हूं कि यह किसी ना किसी. चीज की एक सजा होगी या एक एक दौर होगा ये. जो पेन है यह मेरे जीवन में लिखा होगा। तो. मैंने सोचा कि इसको बचने की बजाय इसको. भोगो और ठीक है और आगे बढ़ो। तो इसलिए. मैंने किसी के ऊपर डिफेशन नहीं किया और. आपने तो मुझसे यह बात पूछ ली। लोग तो. पूछते भी नहीं है। तो इसलिए मैं कह रहा. हूं कि मेरी नजर से भी देखिए कि मेरे लिए. वो 10 साल मेरी जिंदगी के आपने ले लिए।.
मेरे परिवार की जिंदगी से वो 10 साल आपने. एक तरीके से काट के फेंक दिए बाहर। और वो. 10 साल कैसे बीते होंगे। मैं देखता हूं. आपने सोशल मीडिया पर अपने परिवार की. तस्वीरें नहीं डाली है। सिर्फ इसलिए और. मैं आप आज आप मुझसे पूछ ही रहे हैं। मेरे. परिवार की इतनी ट्रोलिंग की गई। मेरे. परिवार को इतनी धमकियां मिली उस दौरान जान. से मार देने की धमकी आप बाहर निकलोगे आपका. एड्रेस सार्वजनिक कर देने की धमकी आपके हर. डिटेल बाहर कर देने की धमकी कि मुझे उसी. समय में यह समझ में आ गया था कि चलिए मेरा.
तो जो हुआ सो हुआ लेकिन मुझे मेरे परिवार. को तो प्रोटेक्ट करना चाहिए और यही कारण. है कि मैंने आज तक अपने परिवार के बारे. में अपने बच्चों के बारे में कभी सोशल. मीडिया पर नहीं डाला मैंने कभी उनका नाम. नहीं कहीं लिखा कहीं उनकी फोटो नहीं डाली. एक. एक पिता के लिए आप सोच सकते हैं कितने. दर्द की बात है कि वह बता नहीं सकता कि. उसके परिवार में कौन-कौन है। सिर्फ इसलिए. क्योंकि मुझे पता है जैसे ही मैं डालूंगा. ये सारे के सारे जो व्चर्स हैं ये सारे के. सारे जो गिद्ध हैं ये मेरे बच्चों के पीछे. पड़ जाएंगे। ये मेरी बेटी के पीछे पड़.
जाएंगे। मेरे बेटे के पीछे पड़ जाएंगे। और. जो बातें ये मुझे लिखते हैं उनको भी लिखना. शुरू कर देंगे। इसलिए आज उनको भी यह. फ्रीडम नहीं है कि वो सोशल मीडिया पे जाके. कुछ कर सकें, कुछ लिख सकें। अपनी कोई फोटो. डाल सकें। वो सोशल मीडिया पे यह बता सके. कि मैं सुधीर चौधरी का बेटा हूं। आपके. बच्चे सोशल मीडिया पर फादर्स डे पर विश. नहीं कर पाते। नहीं करते। आप कभी भी देख. लीजिए। नेवर या दिवाली पे फोटो, होली पे. फोटो आपको मेरे बच्चों की या मेरी कभी.
सोशल मीडिया पे कोई फोटो नहीं मिलेगी। और. यही कारण है कि जितने लोग हैं जो मेरे. बारे में लिखते हैं या जो आपको लिख रहे. हैं कि उनसे यह पूछिए। ये सारे के सारे. लोग उनके पीछे पड़ जाएंगे और पड़े थे।. तो कहने को आप यह समझिए कि यह कितना बड़ा. लाइफ का कॉम्प्रोमाइज है कि आप अपनी एक. फैमिली लाइफ ठीक से एक नॉर्मल जिंदगी आप. जी नहीं सकते। आपके बच्चे आपकी फैमिली एक. नॉर्मल जिंदगी नहीं जी सकती। अगर आप कहीं. जा रहे हैं बाहर वेकेशन पे या आप दिवाली. पे, होली पे या कहीं मिल रहे हैं डिनर पे. आप अपनी एक फोटो नहीं डाल सकते। और जिस.
दिन डाली अभी बीच में कुछ ऐसा हुआ था कि. मेरे एक बच्चे ने किसी को पता चल गया और. कि मेरी बेटी जो है वो कौन है कहां रहती. है वो बाहर रहती है तो कुछ लोगों ने उसको. लिखना शुरू कर दिया ऑलरेडी. डायरेक्ट मैसेजेस करने शुरू कर दिए. इंक्वायरी करनी शुरू कर दिए कि आप उनकी. बेटी हो और फिर उसके बाद वो ट्रोलिंग शुरू. हो गई और मुझे उसको यह बताना पड़ा कि आप. अपना अकाउंट बंद कर दो नहीं तो यह बढ़ता.
चला जाएगा. तो यह सब हमारी जिंदगी में पीछे जो चलता. रहता है यह तो लोगों को पता ही नहीं है।. लोगों को आईडिया ही नहीं है कि आरोप लगाने. वाले उल्टा सीधा लिखने वाले तो लिख ही. देते हैं। फैमिली का बहुत सैक्रिफाइस होता. है। बहुत सैक्रिफाइस होता है फैमिली का।. बहुत एक तो काम के लिए भी होता है कि हम. समय नहीं दे पाते। हम 365 दिन काम करते. हैं। मैंने मेरे माता-पिता को लेकर मैं. इतना प्रोटेक्टिव रहता हूं। एक बार मैंने. गलती से मेरे माता-पिता की फोटो एक ही बार. डाल दी थी। वह भी आउट ऑफ इग्नोरेंस पता. नहीं कैसे डाल दी। उसके बाद लोगों ने मेरे. फादर को ट्रोल करना शुरू कर दिया। उनके.
उल्टी सीधी बातें रखनी शुरू कर दी। अच्छा. मेरे फादर सोशल मीडिया के डायनामिक्स को. समझते नहीं है। उनको आज भी यही लगता है कि. सोशल मीडिया पर अगर किसी ने उन्हें कुछ कह. दिया तो वो सच ही होगा। सर मैं अपने फादर. को समझा समझ के थक चुका हूं कि मत डाला. करो मेरे साथ फोटो। किसी दिन कोई कांड. होगा। अभी तो तारीफ ले रहे हो आप। किसी. दिन कोई कांड होगा या कोई ऐसी चीज आएगी जब. आप किसी को लेकर वीडियोस बनाओगे और वो एक. आईटी सेल आएगा। सो वो चीजें आपको बोदर. करेंगी। वो आप उसे वैसे नहीं झेल पाओगे. जैसे हम झेल सकते हैं। क्योंकि हमें पता. है ये कैसे कहां से करवाया जाए। हम इन.
लोगों का चरित्र जानते हैं। इन लोगों के. चरित्र को हम समझते हैं। इनको कैसे डील. करना हम समझते हैं। लेकिन हमारे माता-पिता. नहीं समझते। हमारे बच्चे, हमारे परिवार वो. नहीं समझते। क्योंकि वो इस सिस्टम का. पार्ट नहीं है। उन्हें नहीं पता ये. इनसाइडल कैसी चीजें होती है। तो इन ये तो. इन लोगों को शर्म आनी चाहिए। लेकिन सोचिए. उसके लिए भी कोई शर्मिंदगी नहीं है। कि आप. चलो ठीक है आप ₹2 वाले ट्रोल हो। आपको भी. रोजी रोटी कमानी है। लेकिन किसी के परिवार. को तो डिस्टर्ब मत करो। ट्रू ट्रू। सो ये. है ये इस केस में। हालांकि जो मैं केस.
जिक्र करने वाला हूं। इसमें मैंने. हिंदुस्तान टाइम्स में एक आर्टिकल पढ़ा. आपका जिसमें आपका एक वर्जन था जो मैंने. पढ़ा हुआ है। लेकिन आई एम श्योर कि 10ों. हजारों लोगों ने नहीं पढ़ा होगा क्योंकि. ये काफी ज्यादा कमेंट सेक्शन में था। 2007. एक स्कूल टीचर उमा खुराना एक स्ट्रिंग. ऑपरेशन आता है जिसमें कहा जाता है कि. स्कूली छात्राओं को सेक्स के लिए ग्राहकों. को पेश करते दिखाया गया। इसके बाद भीड़. जाती है। उनके साथ मिसह हैंडलिंग होती है।. बाद में खबर आती है कि वो स्ट्रिंग ऑपरेशन. फेक था और वो बाइज्जत बरी हो जाती हैं। आप. पर ये एलिगेशन आता है कि एक स्कूल टीचर की.
एक साधारण सी महिला की जिंदगी आप लोगों ने. बर्बाद कर दी। तो देखिए उस समय मैं उस. चैनल का सीईओ था और उस चैनल का एडिटर इन. चीफ था। यह एक स्टिंग ऑपरेशन ये एक स्टोरी. थी जो हमारा एक रिपोर्टर कर रहा था। इसके. बारे में इसलिए मैं थोड़ा सा कम बोलूंगा. क्योंकि इसमें एक महिला का नाम है। और. अभी मैं उस महिला की लाइफ को बिल्कुल. डिस्टर्ब नहीं करना चाहूंगा। हम बिल्कुल. यह नहीं चाहेंगे कि अभी वो जहां भी रह रही. हैं वो ठीक रह रही हो उनको लेके कोई विवाद.
होना भी नहीं चाहिए। बट क्योंकि अगर आपने. पूछा है तो उसमें भी मैं आपको यह बता सकता. हूं कि इस केस की भी पूरी स्क्रूटनी हुई. थी। लीगल स्क्रूटनी हुई थी। इस केस की भी. पुलिस ने जांच की थी और मेरा नाम उस केस. में कहीं भी नहीं आया था। हां, उस चैनल का. सीईओ होने के नाते एक मेरी नैतिक. जिम्मेदारी बनती थी कि मेरे चैनल में एक. ऐसा एक्सीडेंट हुआ।. अब आप सोचिए कि इसके पीछे हमारी क्या मंशा. हो सकती है? क्या इस स्टोरी को चला चला के.
हमें कोई फायदा हो रहा था? क्या कोई पैसे. का फायदा हो रहा था? किसी और प्रकार का. फायदा हो रहा था? कुछ नहीं था। ये एक बहुत. सामाजिक रूप से चिंतित करने वाली खबर थी।. और हमारे सामने जब हम इस तरह की खबर करते. हैं तो हम देखते हैं कि उसका सोशल इंपैक्ट. क्या है। इसमें एक तरफ एक महिला है जिसके. बारे में मैं कह रहा हूं कि अभी उनकी लाइफ. को डिस्टर्ब नहीं करना चाहिए और दूसरी तरफ. स्कूल में पढ़ने वाली छोटी बच्चियां हैं।.
और जब आपको यह पता चलता है कि छोटी. बच्चियों के साथ इस तरह का एक सेक्सुअल. एक्सप्लॉयटेशन हो रहा है। तो आपका आप क्या. कहेंगे? यह तो एक बहुत चिंताजनक बात थी उस. समय और उस समय रिपोर्टर ने जो हमें सारी. जानकारियां दी ये खबर सच थी ये क्योंकि. आपने भी कोट किया कि बच्चियों के साथ. एक्सप्लटेशन हो रहा था ऐसा रिपोर्टर ने. ऐसी खबर दी जी और रिपोर्टर ने हमें आके. बताया ये सारी चीजें हो रही हैं और मैंने. उसमें देखा लेकिन उसमें रिपोर्टर ने एक.
उसका जो एक पार्ट था वो जानकारी हमसे. छुपाई. अब जब वो जानकारी उसने छुपाई तो इसके बाद. हमने भी इसको इन्वेस्टिगेशन में मैंने ने. खुद पूरी मदद की और वो केस अदालत तक गया. और आज मैं यही कहूंगा कि जो लोग मुझे उस. केस में भी फंसाने की कोशिश करते हैं. उन्हें एक बार फिर से उस केस की फाइल खोल. के देखनी चाहिए और देखना चाहिए कि उस केस. में क्या हुआ? क्या उस केस में मेरा कहीं. कोई नाम था? क्या मेरी कोई ऐसी मंशा थी? क्या मैं डायरेक्टली कहीं इनवॉल्वड था?
बिल्कुल नहीं।. और मैंने मेरी पूरी जिम्मेदारी के साथ जो. उस समय मुझे करना चाहिए था, मैंने बिल्कुल. वही किया। मैं इसके बारे में इसलिए और. ज्यादा डिटेल्स आपको नहीं देना चाहता. क्योंकि वो एक मामला खत्म हो चुका है और. उस मामले को दोबारा उठाने से हो सकता है. मैं अपने आप को सही प्रूव कर लूं लेकिन. किसी और की कॉस्ट पर और जैसा मैंने कहा कि. अब मैं. महिलाओं को तो वैसे भी बिल्कुल उनको पूरा. अधिकार है कि अब अगर उनकी जिंदगी ठीक चल.
रही है तो मैं अब उस मैं सिर्फ इस कारण. अपने आप को रोक रहा हूं क्योंकि मैं नहीं. चाहता कि किसी भी महिला की जिंदगी अब उससे. दोबारा से प्रभावित हो। उसको लेकर भी मुझे. जितना अपयश मिलना था, मेरी जितनी बदनामी. होनी थी, सब हो चुकी। हालांकि उसमें मेरे. ऊपर ना तो कोई केस था, ना अदालत में कभी. मेरा कोई नाम था, कुछ नहीं। और वो केस भी. समाप्त हो गया। उसमें भी मेरा नाम कहीं. नहीं है। लेकिन यह है कि आपका आपको निशाना.
बनाने के लिए लोग उसमें आपको. बार-बार आपके नाम के साथ जोड़ते हैं। लाइव. इंडिया बंद होने का अफसोस है आपको? इसमें. भी देखिए बड़ी इंटरेस्टिंग बात है। उस समय. कांग्रेस की सरकार थी। एक पूरा माहौल बना. दिया गया कि ऐसा हुआ और उस सरकार ने लाइव. इंडिया के ऊपर 1 महीने का बैन लगा दिया।. यह भी जांच करने का एक विषय है। लेकिन उस. बैन को सरकार ने 10 दिन में वापस ले लिया।.
तो मुझे जो याद है शायद एक हफ्ता या 10. दिन वो बैन रहा और उस बैन को उस प्रतिबंध. को सरकार ने बीच में ही वापस ले लिया और. वह चैनल फिर से चल पड़ा। अब यहां मैं आपके. सबके दिमाग में यह बात छोड़ के जा रहा हूं. कि वह जल्दी क्यों वापस ले लिया।. 30 दिन का बैन अगर रहा था तो वह एक हफ्ते. में कैसे हट गया? तो उसमें भी कुछ ना कुछ. रहा होगा। लेकिन जैसे मैं हमेशा अभी भी.
मैंने कहा कि हजारों जवाबों से अच्छी. खामोशी होती है कई बार। तो इस पे मैं बस. खामोशी रहना चाहता हूं। महिला का जिक्र. है। आप कह रहे हैं महिला का जिक्र है तो. उसमें और ज्यादा अंदर जाने की जरूरत नहीं. है। और मैं किसी भी महिला की कीमत पर अपने. आप को सही साबित करने की कोशिश कभी नहीं. करूंगा। शायद केस उमा जी ने खुद ही वापस. ले लिया था और वो वापस भी ले लिया था।. उन्होंने वापस ले लिया था वो केस। बिल्कुल. बार-बार मैं यही कहता हूं जो लोग यह आरोप. लगाते हैं वो ना तो इन्वेस्टिगेट करते हैं.
ना पुलिस की फाइल को पढ़ते हैं ना कोर्ट. के आदेश को पढ़ते हैं और उसमें से जो चीज. मेरी ओर इशारा कर रही होती है सिर्फ उसको. पिक कर लेते हैं और बाकी चीजों को मैं तो. यह भी कह रहा हूं कि जो लोग कहते हैं ये. पूछिए वो आकर यहां नहीं बैठ सकते. क्योंकि अपनी थाली में छेद होते हैं उसको. आदमी छिपाना चाहता है तो ये तो मैं जिन. लोगों ने सवाल ही पूछे थे चाहे वो जुबैर. मैं नाम ले कह रहा हूं। मैं तो उनको भी. आमंत्रण दे रहा हूं कि आपने मुझसे कहा. मैंने सवाल पूछा। अब आप भी अपने आप को. देशभक्त कहते हैं। आप भी आइए। मैं खुले.
मंच से मंत्रण दे रहा हूं। जो सवाल मुझसे. दुनिया कहेगी मैं आपसे भी पूछूंगा। और अगर. आप नहीं पूछ सकते हैं सवाल तो फिर आप. सिर्फ क्रिटिसाइज मत कीजिए सेलेक्टिव. होकर। और अगर आप में हिम्मत है तो विथ ऑल. ड्यू रिस्पेक्ट जिस सम्मान से मैं सर से. सवाल पूछ रहा हूं। उसी सम्मान से मैं आपसे. भी पूछूंगा। आप भी आइए बैठिए। हम भी आनंद. लेंगे। देश को भी इस बारे में आपसे जो. सवाल आपको लेकर है क्योंकि आपको लेकर भी. धारणा है वो भी जानने का हक है और मुझे. लगता है यह भी वाजिब होगा कि अदर वे राउंड. भी होना चाहिए। देखिए इन लोगों में खास. बात ये है कि ये लोग कहीं नहीं जाएंगे. क्योंकि ये लोग छिप के वार करने वाले हैं।.
इसीलिए मैंने आज आमंत्रण किया सर ये कहीं. नहीं जाएंगे। ये ऐसे लोग छिप के वार करते. हैं। पीछे से पत्थर मारते हैं। सामने कभी. नहीं आते। मैं तो देखिए मैंने इनमें से. किसी को भी ब्लॉक नहीं किया है। हम बहुत. सारे लोग तो इनको ब्लॉक कर देते हैं।. मैंने भी कर दिया। मैं पढ़ता हूं मुझे। तो. आपने इनको ब्लॉक कर दिया। हां मैंने इनमें. से किसी को ब्लॉक नहीं किया है। ये सारे. दिन भर मुझे गालियां देते हैं। मेरे बारे. में उल्टे सीधे लेख छापते हैं। मुझे ही. भेजते हैं। इनको मेरे परिवार का पता चल. जाए तो उनको भी टैग करके उनको भी भेजने. लगेंगे। बिकॉज़ तो मैंने किसी को ब्लॉक.
नहीं किया कभी भी। तो ये मेरा एक वो है कि. ठीक है सबकी जो धारणा है वो स्वतंत्र है. अपनी धारणा बनाने के लिए। तो इनमें से कोई. भी मेरी टाइमलाइन पे ब्लॉक नहीं है।. अब आपको भी आनंद आ रहा है। नहीं नहीं मुझे. कोई आनंद मुझे आनंद नहीं आ मुझे इनके ऊपर. तरस भी आता है कई बार और कई बार यह भी. लगता है कि वी आर वेस्टिंग टू मच टाइम ऑन. देम। ये इस काबिल नहीं है। और जब हम इनके. बारे में बात करते हैं तो ये सफल होते. हैं। यही तो चाहते हैं ये कि हम और आप बैठ. के इनके बारे में बात करें। हमने अगर इनके. लिए बात कर ली इनकी लाइफ बन गई। इनका.
करियर बन गया। इनको चार पैसे और मिलेंगे।. एंड वी हैव इंश्यर्ड दैट।. ठीक है? आपने कहा था सबका भला होना चाहिए।. एक आखिरी सर कंट्रोवर्शियल सेक्शन में. क्वेश्चन है जो बड़ा जो हमारे दिमाग में. भी आया और इस देश के दिमाग में भी रहा। एक. खबर आती है देश में नोट की और फिर उसमें. चिप वाली खबर आती है और देश के दो बड़े. पत्रकारों ने उस बारे में अपने-अपने. प्राइम टाइम में खबर की कि 2000 के नोट. में नए चिप आएंगे। वो ऐसा दौर था जब देश.
बड़ा परेशान था। लाइनों में लगा था। उस. बीच में खबर आई और उसको बड़े अच्छे से. एक्सप्लेन किया गया। एक तो होता था खबर. बताना। एक होता है उस पे काफी डिटेल्ड. बताई गई। कहां गलत हो गया? बिकॉज़ मैं तो. टीवी का पार्ट हूं। मैं भी ये समझना चाहता. हूं एंकर होने के नाते भी कि वो कहां गलत. हो गया कि अलग-अलग चैनल्स में वो चर्चा हो. गई। आप और श्वेता जी दो बड़े चेहरे थे। तो. इसलिए आप दोनों के नाम पे ज्यादा चिपक गया. वो और आप लोग कुछ भी करते हो तो उसमें दो. हजार का नोट आ जाता है। ये कहां से आया था. ये? तो देखिए ये बड़ा इंटरेस्टिंग किस्सा. है। और जब आप ये मैं बड़े रोचकता से जानना.
चाहता हूं। इसको इसको भी बड़ा बनाने वाले. सिर्फ ट्रोल्स हैं। बाकी जो आम जनता है वो. इसको इतना उन्होंने बड़ा नहीं बनाया। इसको. बड़ा बनाया है वही ₹2 वाले ट्रोल्स ने।. हां। तो. आपको याद है ये डीममनेटाइजेशन वाला भाषण. मोदी जी ने कितने बजे दिया था? 8 बजे।. 8:00 बजे दिया। ये भाषण 8:30 बजे खत्म. हुआ। 8:30 बजे मैं तैयार होने के लिए चला. जाता हूं। मैं कपड़े बदल रहा हूं और तैयार.
हो रहा हूं।. आमतौर पर हम लोग 10 मिनट पहले स्टूडियो. में पहुंच जाते हैं। तो मैं पौ:45 बजे. 8:50 पे मैं स्टूडियो में पहुंच गया। 8:30. तक तो भाषण ही चल रहा था। 8:30 के बाद. उसकी स्टोरी की स्क्रिप्ट लिखनी शुरू हुई।. उन्होंने क्या-क्या बोला। नई-नई सारी. खबरें आ रही हैं। पता नहीं कहां-कहां से. वेरीिफाइड और अनवेरिफाइड। दोनों खबरें आ. रही हैं। उस समय खबरों का फ्लो ऐसे ही. जैसे अभी भारतपाकि युद्ध में हो रहा था।. सही बात है। बिल्कुल ऐसा ही और जो आ रहा.
है वो जा रहा है ऐसे करके। तो मैं. स्टूडियो में हूं और स्टूडियो में मेरे. कान में लगातार बातें आ रही हैं कि अब ये. हो गया है। अब ये हो गया। अब इसने ऐसा कह. दिया अब इसने ऐसा कह दिया। उसी दौरान एक. खबर अचानक मेरे सामने ये भी आ गई लिख के. कि. इस नोट में चिप है। वो लिख के बाकायदा. मेरे सामने आ गई जो मुझे पढ़नी है। मेरे. पास और मैं लाइव हूं। मेरे पास उसे. वेरीफाई करने का या ना करने का कोई मौका. ही नहीं है। इनफैक्ट मुझे अब मेरे सामने आ. गया तो मुझे वो पढ़ना ही है। और मैंने.
उसको पढ़ लिया। पढ़ने के बाद मुझे एहसास. हुआ कि यार थोड़ा हो सकता है। अब हो भी. सकता है क्योंकि नई-नई चीज आ रही हैं। उस. समय क्या कह सकते हैं। लेकिन जब शो खत्म. हो गया तो धीरे-धीरे ये समझ में आया कि ये. शायद जो है खबर सही नहीं है। इसके अंदर. त्रुटि है। अगले दिन उसी शो में मैंने. उसका स्पष्टीकरण दिया। उसी शो में अपने ही. शो में नेक्स्ट डे कि कल मैंने आपको यह. खबर सुनाई थी। यह खबर गलत है। ऐसी कोई बात.
नहीं है। लेकिन उस समय खबरों की इस तरह का. फ्लो था खबरों का और लाइव सिचुएशन थी कि. यह खबर आ गई और मैंने इस इस खबर को पढ़. दिया। तो यह खबर गलत है और मैं इसमें आपसे. माफी मांगता हूं। अगले दिन मैंने कहा. लेकिन वो माफी आज तक कहीं नहीं चली। उसके. वीडियो भी कहीं दिखाई नहीं पड़ते। एक. वीडियो नहीं है उसका। लेकिन जो पहले दिन. पढ़ा वो सब जगह है। तो ये उसकी कहानी है. और यह किसी भी एंकर के साथ हो सकता है।. किसी के साथ भी हो सकता है। किसी के साथ. भी हो सकता है। क्योंकि लोगों को ये जानना. पड़ेगा कि जो टीवी पर हम पढ़ रहे हैं हर.
बार वो एक तो हम वो मन से नहीं पढ़ रहे।. हम देख कर पढ़ते हैं। स्पेशली शुभांकर. क्या होता है। मेरे शो में आमतौर पर तो. यही होता है कि जो मैं बोलता हूं वो मैंने. वो मुझे पता होता है मैं क्या बोल रहा. हूं।. सारे स्टोरीज, सारी स्क्रिप्टिंग, सब कुछ. मेरे नजर के सामने से जाती है। मैं प्लान. करता हूं। मुझे हर चीज पता होती है। आई एम. इन टोटल कंट्रोल। बट जब आप लाइव सिचुएशन. में हैं जैसा मैंने अभी हम थोड़ी देर पहले. कह रहे थे कि अभी भारत-पाकिस्तान युद्ध. शुरू हो गया। आप स्टूडियो में हैं और आपके. पास सारी इंफॉर्मेशन अब पीछे से आ रही है।.
क्योंकि आप आप थोड़ी बाहर जाकर देख रहे. हो। सही बात है। तो ये वैसी सिचुएशन थी जब. जो लाइव सिचुएशन में खबरें आ रही हैं और. वो खबरें पहले से लिखी हुई नहीं है। जो आ. रहा है वो फटाफट लिख के आपके पास आप आपको. आपके पढ़ने के लिए आ रहा है। तो ये उस ये. दीज़ आर दी हज़र्ड्स ऑफ लाइव टीवी और कई बार. उसमें इन एक्यूरेट खबरें चली जाती। ये जो. आपने कहा था टीवी एंकर किसी दिन हार्ट. अटैक आ जाएगा तभी लोग समझेंगे कि कितना. इंटेंस काम होता है वो। कितना इंटेंस काम. होता है। और ये एक ऐसी त्रुटि थी जिसमें. मुझे नहीं लगता कि मैंने किसी की जिंदगी.
खराब कर दी। किसी की किसी को बहुत करोड़ों. अरबों रुपए का नुकसान मैंने कर दिया। ये. एक अनइटेंशनल. गलती थी जिसके पीछे कोई इंटेंशन नहीं था।. और नेक्स्ट डे अगर क्लेरिफिकेशन हो गया तो. मैंने उसको क्लेरिफाई भी किया। लेकिन जिस. इसीलिए मैं कहता हूं कि जो ट्रोलिंग के. पीछे जो मंशा है उस मंशा में बेईमानी है।. मैं सर हम एक देसी भाषा में हमने कोट लिखा. था कि विद द ग्रेटर द नेम, द ग्रेटर द. भोसड़स। सो जितना बड़ा नाम होता है उतनी.
छोटी-छोटी चीजें आपकी पिक होती है। आई. थिंक यह भी उसके एक नुकसान है। स्टारडम का. कीमत है जो आपको चुकानी पड़ती है। हां कि. आप अगर बड़े हैं तो फिर आपकी जैसे आपका. इंपैक्ट बड़ा है ऐसे आपकी छोटी बुराइयां. भी ज्यादा बड़ी हो जाएंगी। बिल्कुल आपके. बाल असली है सर।. बिल्कुल आप देख सकते हैं। उखाड़ के भी आप. देख सकते हैं। खींच के देख सकते हैं। ये. बहुत लोग ये पूछते हैं कि सुधीर चौधरी के. बाल जो है वो असली है या अन्य लगाते हो? पर ये सवाल मुझे बड़ा अच्छा लगा। मुझे. पसंद आया। ऐसे सवाल पूछा करो।.
तो मुझसे भी बहुत सारे लोग पूछते हैं कि. भाई आपके बाल असली है या नकली? इनफैक्ट. इसका जवाब देने के लिए एक बार मैं हेयर कट. ले रहा था। मुझे उसका वीडियो डालना पड़ा।. हां कि भाई देखिए मैं बाल कटवा रहा हूं।. मेरे असली बाल हैं और उसमें मैंने लिखा भी. कि ये बाल सारे असली हैं। अब आप खुद देख. सकते हैं। तो ये बाल बिल्कुल असली हैं। तो. ये वाली हेयर स्टाइल आपने कब से रखनी शुरू. करी? क्योंकि आपके पुराने वीडियोस देखता. हूं आप भी थोड़े जैसे मेरे भी चीक्स निकले. ऐसे आपके चीक्स निकले थे। आपने लेट मुझे. लगता है लेट 30ज में आपने फिटनेस वाला काम. किया। हां। तो मैं पहले इतना फिटनेस.
कॉन्शियस नहीं था और लेट 30ज तक मेरे बाल. छोटे होते थे। हां मैंने देखा है वो Zee. न्यूज़ की जो रिपोर्टिंग आपने की है। तब. वाले बाल होते थे। उसके बाद फिर धीरे-धीरे. थोड़ा जैसे-जैसे समझ बढ़ी और जैसे-जैसे ये. अकल आई कि एक पर्सनालिटी ग्रूमिंग क्या. होती है? मुझ पर क्या अच्छा लगता है तो. फिर धीरे मुझे एक बार शायद यह कुछ ऐसे हुआ. होगा कि बहुत टाइम हो गया होगा मैंने बाल. नहीं कटवाए किसी कारण से। अलग-अलग कई बार.
हो जाता है ना कि आप नहीं बाल कटवाए। लंबे. बाल हो गए बहुत। तो किसी ने बोला कि भाई. लंबे बाल आपके ऊपर अच्छे लगते हैं और. मैंने भी देखा मुझे लगा कि लंबे बाल अच्छे. लगते हैं। तो मैंने बालों को थोड़ा लंबा. रखना शुरू कर दिया। फिर ये जो फिटनेस का. जो कॉन्शियसनेस है यह कभी भी आ सकता है।. इसका कोई टाइम नहीं है। किसी एक दिन आपको. सडनली एक रियलाइजेशन होता है कि मैं फिट. नहीं हूं एंड आई नीड टू बी फिट। वो वो. कैसे भी आ सकता है। तो मुझे भी एक यह. रियलाइजेशन आया कि फिटनेस बहुत जरूरी है।.
खाना पीना आप जो खा रहे हैं यह हर रोज. नाश्ते में पराठे रोज नहीं चलेंगे।. मतलब ये एक मेरे लाइफ में एक दौर था जब. मैं कभी सोचता भी नहीं था कि मैं क्या खा. रहा हूं? कितने बजे खा रहा हूं। सुबह उठते. ही परांठे खा लिए। रात में 11:00 बजे आप. पूरी सब्जी खा रहे हैं। कुछ भी फ्राइड खा. रहे हैं। समोसे खा रहे हैं। शाम हो गई. समोसे खा लिए। इतना तो जी में तो शाम को. मिलते भी थे। और शाम को समोसे आते थे। अब. समोसे सामने रखे हैं शाम को कौन छोड़ेगा? सही बात है। तो ये जो लाइफ को एंजॉय करने. का टाइम था तो मैंने बहुत एंजॉय किया। फिर.
एक दिन ऐसा लगा कि अब इसके बाद यू नीड टू. बी फिट। वहां से मेरे ख्याल से मेरी वो. जर्नी शुरू होती है जब मैंने मेरी लाइफ. में डिसिप्लिन को बहुत इंपॉर्टेंट बना. लिया। और फिर मेरी लाइफ में डिसिप्लिन. सबसे ऊपर आ गया। तो आज भी मैं आपको यह बता. सकता हूं कि मेरी लाइफ में अगर आप एक वर्ड. में मैं अगर अपनी लाइफ को देखता हूं तो. मेरे उस एजेंडा में सबसे ऊपर रहता है. डिसिप्लिन। आई लीड अ वेरी वेरी डिसिप्लिन. लाइफ इन टर्म्स ऑफ़ सो लाइक व्हाट्स योर. रूटीन अगर आप देखिए पहली चीज मैं शराब.
नहीं पीता और मैं सिगरेट नहीं पीता।. स्मोकिंग नहीं करता। ओके? चाहे चाहे मैं. कहीं भी जाऊं। कितने भी लोगों के बीच में. बैठा रहूं। कितने भी लोग इमोशनल बातें कर. रहे हैं। कितने भी स्कूल के पुराने. दोस्तों के साथ आप बैठ जाओ। कितने भी. पुराने जमाने को याद कर लो। लेकिन मैं. शराब नहीं पऊंगा। तो फोर्स नहीं करते भाई. यार मेरे नाम पे। बिल्कुल। ऐसे मेरे बहुत. सारे लोग हैं कि भाई आज मेरे मेरे लिए तो. पी ले। इसीलिए मैंने कहा कि कितने भी. स्कूल के दोस्त मिल जाए पुरानी बातें याद. करें। इमोशनल हो जाओ। आंसू निकल आए।. गर्लफ्रेंड की बातें। हां। लेकिन तो भी.
मैं शराब नहीं पऊंगा। मैं पूरे होशो हवास. हवास में ही उस पल को एंजॉय करना चाहता. हूं। तो यह दो चीजें मैंने मेरी जिंदगी से. बहुत पहले ही निकाल दी थी। धूम्रपान और. शराब। तो एक तो यह है। सेकंड यह है कि अब. धीरे-धीरे आप अपने खाने-पीने पे क्या खाते. हो, क्या पीते हो उस पे अगर आप कंट्रोल. रखते हैं क्या आपके मित्र अक्षय कुमार का. इंपैक्ट तो नहीं है? अक्षय. कुमार इस अ गुड फ्रेंड। ही इज अ गुड. फ्रेंड। और जब मैं देखिए आप जिन लोगों के.
साथ मिलते हैं ना उनसे अगर आप अच्छी चीजें. सीखते हैं तो आपकी जिंदगी में अच्छे बदलाव. आने शुरू होते हैं। तो अक्षय को जब मैं. देखता हूं तो मैं देखता हूं कि मुझसे मेरे. खयाल से उम्र में दो-तीन साल बड़े ही हैं।. लेकिन क्या फिटनेस है? आप भी 50 में हो।. मैं आई एम 53. ओके। मैं 53 का हूं। इंटरेस्टिंग थोड़ी सी. शर्म आनी चाहिए हम लोगों को।. तो अक्षय मुझसे मेरे खयाल से तीन एक साल. बड़े होंगे। तीन- 3 साल या चार साल बड़े. हैं मुझसे। नाइस। आपसे किसी लड़की ने कहा.
यू डोंट लुक 53। बहुत सारी लड़कियां कहती. हैं. और ये एक ऐसी चीज है जो सब सुनना चाहते. हैं। हर लड़की और हर लड़का ये सुनना. चाहेगा दैट यू डोंट लुक योर एज। हम ये तो. एक बहुत अच्छा कॉम्प्लीमेंट है। नहीं मैं. कई जगह कैसे कई पार्टीज में इस बीच हम लोग. भी कई बार बाहर मिले तो मैं अपने अगल-बगल. लड़कियों को खुसफुसाते आपके आने पे देखता. था। अच्छा। सो आपके पास आते हैं अभी भी. प्रपोजल्स लड़कियों के? या डरते डरते भी. अलग से इजहार कर दिया। अब आप मुझसे क्या.
बहुत एम्बरेसिंग सवाल पूछ रहे हैं आप. मुझसे। बट इट्स गुड टू गेट कॉम्प्लीमेंट।. मैं कॉम्प्लीमेंट के उससे पूछ रहा हूं।. हां नहीं कॉम्प्लीमेंट के हिसाब से तो. अच्छा है। कॉम्प्लीमेंट तो देखिए सबको. अच्छे लगते हैं कि अगर आपके कोई बहुत. एक्सप्रेस करना चाह रहा हो और आपको लगे. अरे मैं तो काफी बड़ा हूं तुमसे। नहीं ऐसा. भी कई बार होता है जब ऐसे कुछ लोग आ जाते. हैं या आप कह लीजिए कि वो फैंस हैं तो. बहुत सारे लोग आके अपने मन की बात कह देते. हैं बट ठीक है वो इसका मतलब ये नहीं है कि. आप उसको सच ही मान लें और आप उसमें.
भावनाओं में बह जाएंI चलिए मैं इसको. दोबारा रिफ्रेम करता हूं। आपको आपके चाम. का फायदा हुआ है कभी? अ. चाम का मतलब कई बार ऐसा लगता है कि अगर आप. टीवी पे अच्छे दिखते हैं हम तो लोग रुक के. आपकी बात सुन लेते हैं। सो मतलब आपको जैसे. हम स्कूल में जब. परीक्षा में लिखते थे तो पांच नंबर सफाई. के एक्स्ट्रा मिलते थे।. तो अब ये पांच नंबर आपको एक्स्ट्रा मिल.
जाते हैं सफाई के। आप इसको ऐसे कह सकते. हैं। तो ऑब्वियसली अगर आप अच्छा दिखते. हैं, आपने अपनी फिटनेस पे काम किया है, तो. आपको हर जगह एडवांटेज मिलता है। कितने बजे. सोते हो रात को आप? देखिए मैं रात को बहुत. देर से सोता हूं। पिछले 30 साल से मैं रात. में कभी भी 11 12:00 बजे से पहले घर ही. नहीं पहुंचता। तो पहले क्या होता था? मैं. घर जाने के बाद खाना खाता था। तो जो मैंने. सबसे बड़ा बदलाव किया अपनी लाइफ में वो था. कि अब मैं अपना शो करने से पहले डिनर कर.
लेता हूं। मतलब मैं 7:30 बजे या 8:00 बजे. डिनर कर लेता हूं अपने शो से पहले और उसके. बाद फिर कुछ नहीं खाता। तो ये जो आप आज तक. से बीच में गाड़ी से वापस जाते थे। जी. बिल्कुल ये क्या था ये? लोग कहते थे कि आप. डिनर करने आते थे कि नहाने धोने आते थे? मैं तो बड़े रमर थे कि सुधीर चौधरी जाते. नहा के फिर लौट के आगे उल्टे पढ़ते हैं।. तो मेरा जो शो है वो मेरे लिए पूजा के. जैसा है। जैसे आप मंदिर में जा रहे हैं ना. बिल्कुल ऐसा है। तो इतने साल मेरा रूटीन. ये रहता था कि मैं अपना पूरा शो प्लान कर. लिया मैंने। और मैं 7:00 बजे के आसपास एक. तो पूरे जीवन मेरा जो घर है वो ऑफिस के.
बिल्कुल 10 मिनट की दूरी पे था मेरा घर. ऑफिस से तो मैं 7:00 बजे के आसपास घर. जाऊंगा। घर जाने के बाद आई विल टेक अ. शावर। उसके बाद मैं एक कप चाय पऊंगा। मुझे. चाय एक चाहिए होती है शाम को। चाय पीने के. बाद मैं डिनर कर लूंगा 7:40 के आसपास। और. उसके बाद में 5 या 10 मिनट अपने शो को सब. चीजें छोड़ के फोनवोन बंद करके सिर्फ अपने. शो के बारे में सोचता हूं 10 मिनट और 8:00.
बजे फिर मैं वापस ऑफिस आ जाता हूं और फिर. 8:00 बजे के बाद अपना शो करता हूं। यह. मेरा रूटीन रहा है शुरू से और मुझे ऐसा. लगता है कि मेरे शो की सक्सेस में यह बहुत. बड़ा कंट्रीब्यूशन इस चीज का है क्योंकि. मैं अपने रूटीन को दो हिस्सों में तोड़ता. हूं। एक शाम 7:00 बजे से पहले का और 7:00. बजे के बाद मुझे ऐसा लगता है जैसे अब सुबह. हुई है। तो व्हेन आई गो बैक एट 8 ओ क्लॉक. आफ्टर टेकिंग शावर एक कप चाय पांच या 10.
मिनट का चिंतन और. डिनर तो 8:00 बजे जब मैं ऑफिस जाता हूं. रात को तो मुझे लगता है जैसे मैं सुबह. सोके उठा हूं। रिफ्रेश बड़ा यूनिक सा है. क्योंकि आमतौर पर लोग इस टाइम पे और पीक. करते हैं डरते हैं कि यार और प्रेशर बढ़ाओ. और देखो क्या ग्राफिक बने नहीं बने और मैं. आपको रोज देखता था कि आप रिलैक्स हो के. गाड़ी से बाहर निकल रहे हैं फिर आ रहे. हैं। आई एम लाइक तो ये ये मेरा एक एकदम. अलग ही एक वो है। परीक्षा से आधा घंटा. पहले बस आप जितना हो गया वहां पे लॉक कर.
दीजिए और उसके बारे में बिल्कुल मत सोचिए।. फिर आपका शांत रहना बहुत जरूरी है।. क्योंकि जब शांत आप रहेंगे ना फिर आपका. परफॉर्मेंस बहुत अच्छा आएगा। तो मैं 8:30. बजे अपने शो से बिल्कुल हट जाता हूं। उसके. बाद ना मैं किसी का कॉल लेता हूं, ना किसी. से बात करता हूं। कुछ नहीं करता। सिर्फ. अपने दिमाग में शो के बारे में सोचता रहता. हूं। बट एक रिलैक्स्ड माइंड से मैं सोचता. हूं। और वैसे अगर आप देखें तो देखिए 9:00. बजे हम लोग शुरू करते हैं सुबह अपनी. प्लानिंग। और रात को 9:00 बजे आपको. परफॉर्म करना है। मतलब आपको 12 घंटे हो.
चुके हैं काम किए हुए। एक आम आदमी जो सुबह. से काम शुरू करता है वो 9:00 बजे खानावाना. खा के बिस्तर में चला जाता है। मतलब उसको. नींद आने लगती है। तो जब हमारे दर्शक को. नींद आने वाली है तब आपको अपने पीक पे. रहना है। मतलब आपको फ्रेशनेस भी दिखानी. है। आपको आपका दिमाग भी उतना ही फ्रेश. होना चाहिए। मूड अच्छा होना चाहिए। और आप. पूरी ताकत लगा के मतलब दैट इज योर टाइम. वेयर यू हैव टू पीक। मैक्सिमम ताकत आपकी. होनी चाहिए। तो वो तब होता है जब आप अपने.
रूटीन को बीच में तोड़ो। तो यह मैंने हमेशा. से किया है। एंड इट हैज़ ऑलवेज वर्क्ड फॉर. मी। ऑलवेज. इंटरेस्टिंग। इस देश में एक बहुत बड़ी. आबादी है सर जो आपको एक राष्ट्रवादी. पत्रकार के तौर पर देखती है। वो ये मानती. है कि नेशनलिस्ट पत्रकारों में सबसे बड़ा. चेहरा आप हैं। पर ये सिक्के का एक पहलू. है। एक दूसरा पहलू है जो आप पर एलिगेशन. लगाता है कि आप एंटी मुस्लिम है और जी का. जो मेन दौर रहा जो बहुत पॉपुलर रहा उसमें. एक प्रोग्राम मुझे वायरल याद है बहुत आपने.
किया था जो बहुत चर्चित था। टाइप्स ऑफ. जिहाद जिसको अभी करंट जनरेशन में काफी लोग. करते हैं। सो आर यू एंटी मुस्लिम? और उसी. के ऊपर मेरे ऊपर केरल में एक एफआईआर भी हो. गई थी नॉन बेलेबल धाराओं पे क्योंकि मैंने. ऐसा डिफरेंट टाइप्स ऑफ जिहाद के बारे में. हां मुझे याद है वो आपने मैप बनाया था ये. जिहाद ये जिहाद ये जिहाद ये जिहाद ये. जिहाद. तो ऐसा बिल्कुल नहीं है अ. मैं राष्ट्रवाद को आपको एड्रेस करता हूं. अगर आप देखेंगे पूरा जी का या मेरा करियर.
तो राष्ट्रवाद को सबसे पहले उठाने वाला जी. था राष्ट्रवाद को सबसे पहले राष्ट्रवाद के. बारे में बात करने वाला अगर कोई पत्रकार. था तो वह मैं था और तब तक राष्ट्रवाद फैशन. में नहीं था। आपको याद होगा यह वह दौर था. जब धर्मनिरपेक्षता फैशनेबल थी। मैं बात कर. रहा हूं जब यूपीए की सरकार थी। उस वक्त जो. फ्लेवर ऑफ द मंथ ईयर एंड डेकेड वो था. धर्मनिरपेक्षता। सेकुलरिज्म सेकुलरिज्म उस.
दौर में राष्ट्रवाद की बात करना तो हमने. किया और वह इसलिए नहीं किया था कि हमें. उससे कुछ चाहिए था। हमें लगा कि मैंने यह. महसूस किया कि लोगों के अंदर एक दबी हुई. भावना है ये जिसको वो व्यक्त नहीं कर पा. रहे हैं। तो मैंने सिर्फ इतना किया कि. मैंने उन्हें एक आवाज दी। उसके बाद लोगों. को यह बात बहुत पसंद आई। लोगों ने वो चैनल. देखना शुरू कर दिया। लोगों ने मुझे देखना. शुरू कर दिया। डीएनए एक बहुत बड़ा सक्सेस. बन गया। हमारे बाकी के जो हमारी इंडस्ट्री. में लोग हैं उन्होंने देखा कि इस पर तो.
व्यूअरशिप आ रही है। ये तो एक तो उन्होंने. इसको एक बिजनेस मॉडल टीआरपी मॉडल की तरह. देखा और अब फिर आपने देखा होगा कि. राष्ट्रवाद जो है वो हर चैनल की टैगलाइन. बन गया। हर एंकर राष्ट्रवादी बन गया और आज. अगर आप देखें तो सभी लोग उसी बिजनेस मॉडल. को फॉलो कर रहे हैं। ट्रू तो तो कंपटीशन. है। कौन सबसे ज्यादा बड़ा राष्ट्रवादी. सबसे बड़ा राष्ट्रवादी है। तो तो ये इसकी. शुरुआत तो ऐसे हुई थी।. दूसरी जो बात थी तो मैं बिल्कुल एंटी. मुस्लिम नहीं हूं। आपको यकीन नहीं होगा कि.
मेरे निजी जिंदगी में मेरे आसपास कितने. सारे मुस्लिम्स हैं जो मेरे साथ काम करते. हैं या मैं उनके साथ काम करता हूं या मैं. उनकी सेवाएं लेता हूं या जो मेरे करीबी. हैं मेरे इनर सर्कल में जो लोग हैं बहुत. सारे लोग हैं। मैं सिर्फ एक ही सवाल उठाता. था कि हिंदू और मुसलमान. सिख या ईसाई कोई भी है। बराबरी पे होना. चाहिए। अगर आप कहते हो कि यह सेकुलर देश. है तो सबके बराबर के अधिकार होने चाहिए।. आप माइनॉरिटी कार्ड मत खेलो। यह किसी को.
नहीं खेलना चाहिए। है ना? अगर आपकी संख्या. 20 से 25 करोड़ है इस देश में जो कि. पाकिस्तान की जनसंख्या के बराबर है। तो. आपको भी वैसे ही नागरिक के अधिकार प्राप्त. हैं जैसे किसी और धर्म के लोगों को. प्राप्त हैं। आप वैसे ही रहिए।. तो हमारे देश की जो राजनीति और इसमें मैं. हमारे देश के जो मुस्लिम हमारे जो दर्शक. हैं या भाई हैं उनसे मेरा कोई दिक्कत नहीं. है। अलग-अलग नेताओं ने और पॉलिटिकल. पार्टीज ने जिस तरीके से इसको अपना एक.
बिजनेस मॉडल बनाया ये मेरी आवाज उनके. खिलाफ थी कि आप सबको एक. समान रूप से आप उनके साथ व्यवहार क्यों. नहीं करते? आप अगर मैंने एक यह उदाहरण भी. दिया था कि आप एक हाईवे पर जा रहे हैं।. सिक्स लेन हाईवे है। हर धर्म का एक-एक लेन. है और आप गाड़ी चला रहे हैं। और अगर आपसे. ये कह दिया जाए कि मान लीजिए एक हिंदू. धर्म के लोग गाड़ी चला रहे हैं और आपसे ये. कहा जाए कि अब सारी लेसन्स में सबसे स्लो.
गाड़ी आप चलाएंगे। और आपकी जिम्मेदारी है. कि वो गाड़ी इधर से उधर ना जाए। आपकी. जिम्मेदारी है कि बाकी सारी गाड़ी पहले. निकलें और बाद में आप निकलें और सबसे. ज्यादा टोल भी आपको देना पड़ेगा। बाकियों. को फ्री देना पड़ेगा क्योंकि उसकी छोटी. गाड़ी है। हमारा कहना यह है कि यह एक. हाईवे की लेन है जिसमें हर धर्म की गाड़ी. चल रही है। हर धर्म को सीधे अपनी लेन में. रहना चाहिए। उनके ऊपर बराबर के नियम लागू. होने चाहिए। बराबर का टोल लागू होना चाहिए.
और उनको बताना चाहिए कि आप सबको बराबर की. जिम्मेदारी से गाड़ी चलानी है। अब यह बात. लोगों को चुभ जाती है, खराब लग जाती है और. जितना भी मैंने इसमें काम किया है वो एक. जागरूकता पैदा करने के लिए किया है कि भाई. यह बात ठीक नहीं है कि आप एक ही ऑफिस में. काम करने वाले अगर पांच लोग हैं और वो. पांच अलग-अलग धर्म के हैं तो उनको पांचों. को आप अलग-अलग तरीके से उनके साथ व्यवहार. करेंगे। इट इज ट्रू। ये मेरा सिर्फ मानना. इतना है। नहीं ये तो अच्छी बात है या जो.
आप कह रहे हैं मुझे लगता है इस देश में. शायद ही कोई मुसलमान भी होगा जो इसको अपोज. करेगा। ज्यादातर लोग मानते हैं। बट वो जो. एक इमेज बनी है आपकी जैसे मैंने कहा ना वो. एक कार्ड का जिक्र किया मैंने। तो जब. मैंने भी सवाल पूछा तो बहुत सारे लोगों का. परसेप्शन था। जबकि आप कह रहे हो कि आपके. आसपास बहुत सारे मुस्लिम लोग हैं। इनफैक्ट. मैं भी जानता हूं कई सारे मुस्लिम्स को. एंकर्स को जिन्होंने जिनको आपने बनाया है।. बहुत सारे अपॉर्चुनिटीज दी है और उनकी. ग्रोथ में आपकी बहुत बड़ी भूमिका है।. क्योंकि मैं मीडिया में रहा हूं तो मैं. जानता हूं इस बात को बहुत करीब से। मैंने. कभी किसी को ऐसे नहीं देखा कि उसके धर्म. के आधार से मैं देखूं कि ये मुस्लिम है या.
ये हिंदू है या ये इस जाति का है। हम. सिर्फ यह देखते हैं कि ये अपने काम में. कितना अच्छा है। और उसी के हिसाब से हम. आगे बढ़ते हैं। व्हिच इज ट्रू? यह सामने. इसलिए मैं इसको जिक्र भी कर रहा हूं। बट. कुछ खबरों को लेकर जो जैसे केरल में आपने. कहा एफआईआर हो गई तो ये खबरें एंटी. मुस्लिम थी या माइंडसेट थी या जरूरत थी या. जागरूकता पैदा इस खबर के पीछे क्या सोच थी. इस खबर के पीछे ये सोच थी कि और ये वाली. एफआईआर खत्म हो गई नहीं ये अभी चल रही है. तो केरल गवर्नमेंट को मैं बता चुका हूं कि.
ऐसी बहुत सारी एफआईआर मेरे ऊपर हैं।. अलग-अलग राज्यों में चल रही हैं। देखिए. पॉलिटिकल एफआर पॉलिटिकल एफआईआर हैं। ये सब. पॉलिटिकल केस हैं। आप किसी भी शक्तिशाली. व्यक्ति शक्तिशाली नेता के अगेंस्ट कुछ. ऐसा कह देंगे या फिर किसी को ऐसा लगता है. कि इस मुद्दे को उठा के उसे कुछ फायदा हो. सकता है तो लोग ऐसा करते हैं। नहीं इस देश. में तो कॉमन चीज है। अभी जैसे शमिष्ठा. वाले केस में हमने देखा मैंने भी उसको ले. स्टैंड लिया था कि टीएमसी के दो नेताओं ने. शिवलिंग को लेकर कहा और उन पर कोई केस. नहीं हुआ। लेकिन एक 19 20 साल की लड़की को.
जेल में डाल दिया गया और उसने अपोलॉजी की।. बहुत सारे मुस्लिम लोग भी हैं। मैंने देखा. हमारे मीडिया के भी जो कह रहे थे कि. अपोलॉजी शायद इनफ हो सकती थी। या अगर इस. हिसाब से आप जेल में डालोगे तो बहुत सारे. लोगों को और जेल में डाल सकते हो आप।. क्योंकि हिंदूज़्म पर बोलना इजी होता है इन. कंपैरिजन। आप ऐसे ही देख लीजिए ना आज अगर. आप किसी हिंदू देवी देवता का अपमान करते. हैं। उसके बारे में कुछ आपत्तिजनक भाषा. में लिखते हैं तो शायद कुछ नहीं होगा।. शायद लोग दो चार लोग होंगे जो कुछ आपत्ति.
जताएंगे और कहेंगे कि ऐसा नहीं होना. चाहिए। पर अगर आप किसी और धर्म के बारे. में आप ऐसी आपत्तिजनक बात लिख देंगे तो. आपके खिलाफ एफआईआर भी हो सकती है। आप. अरेस्ट भी हो सकते हैं और आपकी जान भी जा. सकती है। ये फर्क है।. मतलब तो ये क्यों है सर? ऐसा क्यों है? हमारा बिजनेस मॉडल हमने राजनीति का शुरू. से 1947 से जब से हम आजाद हुए हैं हमने. इसी को अपना राजनीति का बिजनेस मॉडल बनाया. है और हमने ये कोशिश की है कि जो.
माइनॉरिटीज में हैं उन्हें हमेशा हम एक. कमजोर की तरह महसूस कराएं और वो हमेशा. कमजोर बने रहे।. जैसे अगर आप देखिए कि हिंदुओं में भी जो. पिछड़ी जातियां हैं मैं हमेशा एक बात कहता. हूं कि जो आरक्षण है कमजोर वर्ग को आपने. आरक्षण दिया. आपका. लक्ष्य यह होना चाहिए था कि आज मैंने. आरक्षण दिया देश के मान लीजिए 30 करोड़. लोगों को हमने आरक्षण दिया।.
उस आरक्षण का फाइनल डेस्टिनेशन क्या है कि. आप मुख्यधारा में आ जाएंगे। आप आप कमजोर. वर्ग नहीं रहेंगे। अब आप बाकी के जैसे हो. गए। कभी आपने यह देखा कि भाई मैंने 30. करोड़ को दिया। आज. उसमें से 10 करोड़ ठीक हो गए। तो अब मैं. 20 करोड़ को दूंगा। उसमें से भी 10 करोड़. को मैंने मुख्यधारा से जोड़ दिया। आज वह. बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। अब मैं सिर्फ. 5 करोड़ को दूंगा। और एक दिन ऐसा आएगा जब. मैं पूरा आरक्षण समाप्त कर दूंगा। क्यों. समाप्त कर दूंगा? ऐसा नहीं कि किसी का हक. मारना है। किसी को जरूरत ही नहीं है। किसी.
को आवश्यकता ही नहीं है। आपने सबको इतना. सक्षम बना दिया कि अब उस परिवार को आपसे. किसी भी प्रकार की सब्सिडी की या आरक्षण. की या मदद की जरूरत नहीं है। लेकिन मैं. देखता हूं कि इस इसके ऊपर कोई काम ही नहीं. करता। बट वो कहते हैं कि आर्थिक आधार पर. तो है ही नहीं। यह तो सामांशिक अधिकार पर. है। बिल्कुल। तो मैं तो कहता हूं दोनों पर. आपको काम करना चाहिए कि आज आर्थिक आधार पर. आपको लगता है कि आपके देश में 80 करोड़. लोगों को अनाज की आवश्यकता है। एक टाइम.
ऐसा आना चाहिए जब 80 नहीं सिर्फ 50 करोड़. लोगों को जरूरत होगी। एक टाइम ऐसा आना. चाहिए जब सिर्फ 25 करोड़ आप देखिए जैसे. एलपीजी सिलेंडर है। कितने सारे लोगों ने. सरेंडर किया कि नहीं कि हमें सब्सिडी नहीं. चाहिए। ट्रू वो जो स्थिति है वो हर वर्ग. में पैदा होनी चाहिए। चाहे वो आरक्षण हो, चाहे वो एलपीजी हो, चाहे वो सब्सिडी हो, कोई भी चीज हो। बट इज इट पॉसिबल? क्योंकि. इस देश में तो मतलब मुझे लगता है वोट बैंक. जाति के आधार पर थम जाता है, गिर जाता है।. बस तो आपने वो एक ही शब्द में कह दिया वो.
वोट बैंक। ये सब कुछ वोट बैंक की वजह से. और फिर हमारे आप पर भी सवाल आ जाएगा कि. बीइंग शुभांकर मिश्रा, बीइंग सुधीर चौधरी. इट्स इजी टू क्वेश्चन हां बिल्कुल सही कह. रहे हैं आप। तो. उसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ खास लोग हैं. जिनकी प्रेजेंस ज्यादा है वो आपको ट्रोल. करेंगे और जो लोग और ये भी मैं आपको बताता. हूं ये सिर्फ एक प्लेटफार्म है एक्स जो. पहले Twitter होता था वो इतना टॉक्सिक है. मैं देखता हूं कि Instagram पर मैं हूं.
मैं Facebook पर हूं मैं और सोशल मीडिया. प्लेटफॉर्म्स पर ट्रू कहीं कोई ट्रोलिंग. नहीं है। कोई ज़हर नहीं है। कुछ नहीं है।. लोग लिखते हैं अच्छी बातें लिखते हैं। लोग. आपसे इंटरेक्ट करते हैं। कुछ नहीं है।. सिर्फ एक प्लेटफार्म है वो है एक्स। सर. मैं तो इतना टॉक्सिक और जहरीला हो चुका. है। मैं तो एक्स के बारे में कहता हूं कई. बार कि आप वहां आप लिख दीजिए लाल। आपको. कहेंगे तुम वामपंथी हो साले। आप लिख दीजिए. भगवा। तुम कट्टरवादी हिंदू हो। आप लिख. दीजिए नीला। आपको वो जय भीम बना देंगे।. आपको तुरंत आप एक रंग का नाम लिख दीजिए.
केवल। मैं तो कह रहा हूं आप गुड मॉर्निंग. लिख दीजिए। हां। उस पे भी आपको सुबह उठिए. और लिखिए गुड मॉर्निंग।. उस पर भी चार लोग आ जाएंगे आपको ये कहने. के लिए कि आप अंग्रेजी में क्यों गुड. मॉर्निंग लिख रहे हैं? आपने सुप्रभात. क्यों नहीं लिखा? आपने उन लोगों के बारे. में क्यों नहीं सोचा जिनकी मॉर्निंग आज. बहुत खराब थी। आप तो यानी कुछ भी और जब से. एक्स ने पैसा देना शुरू किया तो और गंदा. लिखने की इंतहा शुरू हो गई है। तो ये ईलॉन. मस्क को देखना चाहिए। नहीं नहीं मैं अरे. मैं आपको एक इससे अच्छा उदाहरण देता हूं।. एक बड़े मेरे मित्र हैं और बड़े देश के.
प्रसिद्ध टीचर हैं खान सर। पटना वाले खान. सर मेरे बड़े अच्छे मित्र हैं। खान सर को. मैं सॉरी बोलूंगा। उनकी रिसेप्शन में जा. नहीं पाया मैं। खान सर की रिसेप्शन थी। तो. उनकी जो वाइफ थी वो उन्होंने हल्का सा. घूंघट कर रखा था। अब उस घूंघट उन्होंने. सबको बुलाया लेकिन उनकी रिसेप्शन की वायरल. फोटो पे सारी चर्चा घूंघट पर हो गई और मैं. आत्म मंथन कर रहा था कि ये क्या वजह हो. सकती है। सो मेरे को दो वजह निकल कर आई।. एक तो जो लोग लिख रहे थे कि प्रोग्रेसिव. नहीं है। खान सर दुनिया कह रहे हैं। लेकिन. एक दूसरी वजह जो मुझे क्लिक की और जब हम.
भी संवाद कर रहे थे पिता और बेटी का पिता. पुत्र का आई रियलाइज कि अगर वो फोटो वायरल. होती खान सर की वाइफ की पूरी फोटो तो सोशल. मीडिया के मिसयज का भी डर होता। हाउ यू सी. मतलब खान सर ने जो ये फोटो रही और वो बहुत. चर्चा केंद्र में सर ये है। देखिए खान सर. के बारे में तो मैं कोई टिप्पणी नहीं करना. चाहता। बट सोशल मीडिया का जो प्रेशर है. आपके ऊपर, आपके फैमिली के ऊपर, आपकी. पर्सनल लाइफ के ऊपर वो जरूर है। तो बहुत. सारे लोग ऐसे हैं हो सकता है उनमें वो भी.
हो कि जो आप आज आप सोशल मीडिया पर कुछ भी. तस्वीर डालने से पहले हजार बार सोचते हैं. कि मैं डालूं या मैं यह तस्वीर ना डालूं. और किसी भी चीज पर आपकी ट्रोलिंग हो सकती. है।. खास बात यह है कि जब आप किसी ऐसी चीज को. डालते हैं जो कि आपकी फैमिली से जुड़ी हुई. है या जो आपकी किसी पर्सनल लाइफ से जुड़ी. हुई है चीज तो आप ना चाहते हुए भी अपनी. फैमिली को भी उस विवाद में घसीट लेते हैं. और लोग फिर आपकी फैमिली को भी टैग करके.
लिखना शुरू कर देते हैं जो कि. बहुत एक खराब स्थिति बन जाती है। तस्वीरों. का दुरुपयोग भी सर बहुत ज्यादा होता है।. इसीलिए आपने देखा होगा कि मैं मेरी फैमिली. की कभी कोई तस्वीर सोशल मीडिया पर नहीं. डालता क्योंकि मेरा भी इससे यही अनुभव रहा. है कि जब आप तस्वीर डालेंगे कुछ भी आप. लिखेंगे तो यह जो ₹2 वाले ट्रोल हैं ये. उनके बारे में आपत्तिजनक बातें लिखेंगे और. उनका पूरा बिजनेस मॉडल उनका पैसा वहीं से. आता है। उनकी जो अटेंशन उनको जो मिलती है.
वह भी वहीं से आती है। तो हर जगह एक. अलग-अलग वर्ग बन गया है। एक खास वर्ग है. जो आपको. ट्रोल करेगा।. आपको भी पता होता है कि जब आप कुछ करेंगे. ऐसा तो आपको वो सोशल मीडिया के हैंडल सब. याद हो चुके होंगे कि यहां से आएगा या सर. कई बार तो बिना कुछ किए होता है। मैं. पंजाब का मैच देखने गया था। मेरे बगल एक. आरजे थी वो मित्र थी मेरी वो बैठी थी।. बेवजह उनको ट्रोल कर दिया गया। वो बेचारी. परेशान होने लगी कि ये क्या चल रहा है और. इतना ट्रोल किया गया। इतना ट्रोल किया गया. कि मुझे समझ नहीं आया कि मैं रिएक्ट करूं।.
रिएक्ट करूंगा तो वो आग में घी डालने जैसा. होगा। और चुप रहोगे तो एक्सेप्टेंस होगा।. दिस इज़ आई गेस शुभांकर। सर दिस इज द. प्राइस ऑफ स्टारडम। ये जबकि सिर्फ चुपचाप. आप बैठ के मैच देख रहे थे। कुछ नहीं था. उसमें। वो एक तस्वीर आती है और पूरा. इंटरनेट राइट लेफ्ट सेंटर Instagram, Facebook उस पे कुछ भी कैप्शन बना के कुछ. भी डाके चलिए मैंने उसको उतना वैसे नहीं. लिया। मेरा परिवार समझता था। लेकिन कई बार. ये असाहस करने वाली स्थिति हो सकती है।. परेशान करने वाली। कितने असहज हो जाते हैं.
कि सोशल मीडिया आपको कितना ज्यादा एक. बैकफुट पे लेके आ जाता है। मुझे कितनी बार. ऐसा लगता है कि मैं जैसे मेरे साथ हमेशा. यह होता है फ्राइडे को अगर मैंने अपना एक. शो किया और सैटरडे संडे मेरा कभी-कभी ऐसा. होता है जब थोड़ा रिलैक्स्ड है खाली है तो. मैं सोचता हूं कि चलो ये वीकेंड पे मैं. थोड़ा आराम करूंगा सोऊंगा या कुछ भी. रिलैक्स करूंगा लेकिन. सुबह उठता हूं तो मेरा रिलैक्सेशन यह रहता. है कि दो-चार घंटे फोन ना देखूं तो फोन.
नहीं देखा दोपहर में फोन देखा और देखा कि. मैं ट्रेंड कर रहा हूं. तो इस वक्त एक टाइम था जब शुरुआत जब थी तो. ऐसा लगता था कि ट्रेंड का होना अच्छी बात. है। आज ये आपका सबसे बड़ा डर है कि कहीं. आप ट्रेंड तो नहीं हो रहे हैं। अभी मैं. सुबह उठ के जब अपना सोशल मीडिया देखता हूं. तो सबसे पहले ये देखता हूं मैं ट्रेंड तो. नहीं हो रहा हूं। कल रात को मैंने शो में. कुछ ऐसा तो नहीं कह दिया जिसको किसी ने. उठा दिया हो और उसको उसको बड़ा बना दिया.
हो या उस पे ट्रोलिंग शुरू कर दी हो। यह. एक आपके दिमाग में रहता है और यह आपके साथ. इसलिए होता है ताकि आप अपना काम ठीक से ना. करें ताकि आप जब भी वह बात करने जाएं तो. अब आप डरे उस बात से अब आप खुल के अपनी. बात ना कह पाएं आपके जो तेवर हैं वो हल्के. पड़ जाए आप सफाई देने में फंस जाए ढीले. पड़ जाएं आप दिन भर सफाई देते रह जाए ये. इसलिए होता है और जितनी सफाई उतना आपको और. जाएंगे और उतना आजाद आपको घेरा जाएगा और.
वहीं से आप फिर एक परसेप्शन बन जाएगा। अरे. ये तो झूठा आदमी है। बिल्कुल। तो ऐसा बहुत. सारे लोगों के साथ हो रहा है। हिट एंड रन।. हिट एंड रन है और ये सुपारी दी जाती है. लोगों के लिए कि भाई बाकायदा कि इस आदमी. को खत्म करना है, डिस्ट्रॉय करना है। इस. आदमी के बारे में ये लिखना है। इस आदमी की. ये छवि बनानी है। तो हमारे नाम की भी ना. जाने कितने लोगों ने। सो ईजी मतलब आज के. दौर में अगर आपको एक्स पे अपने को ट्रेंड. करवाना हो। आप ₹2000 दीजिए। आप शाम को 2. घंटे ट्रेंड कर जाएंगे। आपको जितने बड़े. हैंडल है लेफ्ट या राइट। मतलब मैं तो.
रेट्स भी जानता हूं। मेरे पास लिस्ट पड़ी. हुई है दोनों साइड की जिसमें आप ₹4 लाख. खर्च करेंगे तो आपको दोनों साइड के आप जो. ट्वीट चाहते हैं वो करवा दिए जाएंगे। सो. पॉलिटिकल पार्टीज के लिए तो चलिए अच्छी. बात है। बट इंडिविजुअल आदमी अगर सुकून से. काम करना चाहे और उसकी कोई सुपारी दे दे. तो आप उसे ₹1 लाख में बर्बाद करने के लिए. एक प्लान बना सकते हैं आराम से। अब बहुत. आराम से हो सकता है। लेकिन मैं सब लोगों. को यही कहना चाहूंगा कि यह जो ट्रोलिंग. होती है स्पेशली जो एक्स पे होती है यह. टोटली इनऑर्गेनिक है। इसका कोई फर्क नहीं.
पड़ता। ये आप ये समझ लीजिए पूरे देश में. 500 लोग मिलके कुछ कर रहे होते हैं। बाकी. के जो हमारे देश के 145 करोड़ लोग हैं वो. इससे दूर है। तो मैं जब देखता हूं कि एक्स. पे मान लीजिए इतनी ट्रोलिंग हो रही है या. मेरी एक खास छवि बनाने की कोशिश की गई है।. लेकिन जब मैं बाजार में जाता हूं शुभांकर. जब लोगों से मिलता हूं. छोटे बच्चे स्कूल के बच्चे मेरे पास आते. हैं और कहते हैं कि हम आपको देखते हैं। हम. आपके साथ फोटो खिंचवाना चाहते हैं। कॉलेज. के जो यंगस्टर्स हैं, वह मेरे पास आते.
हैं। उनके माता-पिता आते हैं। उनके. दादा-दादी मेरे पास आते हैं। और इतना. प्यार मिलता है मुझे जब मैं बाहर जाता हूं. तो मैं सोचता हूं कि देखिए असली भारत तो. ये है। इनको कोई मतलब नहीं है कि आज सोशल. मीडिया पे आपके बारे में कौन क्या लिख रहा. है। ना वो पढ़ते हैं ना उन्हें कोई मतलब. है। तो इसलिए कई बार मैं तो यही कहना. चाहता हूं कि यह सारी चीजें आपके मन को. प्रभावित नहीं करनी चाहिए और आपके फैसले. लेने की क्षमता इनसे प्रभावित नहीं होनी. चाहिए। सर मैंने इसीलिए अपना एक्स का.
नोटिफिकेशन ऑफ कर दिया। अभी ऑपरेशन सिंदूर. और पहलगाव में जो घटना है उसके बाद हमने. जिस तरह से काम किया हमें देश में 1000. मिलियन प्लस लोगों ने देखा था उस एक महीने. में। और Twitter पे हम एक भी पोस्ट नहीं. करते। देख लीजिए। आई रियलाइज जब मैं पंजाब. में मैच देखने गया था जब भीड़ आ रही थी तो. मुझे एहसास हुआ कि वो Twitter वाली दुनिया. को हमने अपने दिमाग में शगूफा बना रखा है।. क्योंकि वो हमारे आसपास काम करने वाले 40. लोग हैं। उसका जो. धेय है वो यही है कि वो आपके दिमाग में घर. करके बैठ जाए। आपको डरा दे और हम वही.
बार-बार खोलते रहते हैं। हम वही चेक करते. रहते हैं। बट एक्चुअली अगर आप इंस्टा, Facebook, YouTube आप चेक कीजिए तो वहां. या रियल लाइफ में लोगों से मिलिए। बहुत. अलग नजरिया आता है जो आपको एक्स पर मिलता. है। बिल्कुल। तो एक्स तो अब उसका तो. दुरुपयोग हो रहा है। तो उसके बारे में तो. अभी बात ही नहीं करनी चाहिए। हम जो असली. लोग हैं जो इस देश में रहते हैं वो. बिल्कुल अलग हैं। वो आपको प्यार करते हैं।. मैंने आपके पुराने वीडियोस देखे। मैं एक. दिन बैठ के गोधरा पे देख रहा था। आपकी. रिपोर्ट अच्छी रिपोर्टिंग आपने की थी वहां.
पर और दिखाया था। वो सुधीर चौधरी के सुधीर. चौधरी बहुत फर्क दिखता है मुझे। बीच में. हमने कुछ कंट्रोवर्सीज की बात की कि बहुत. सारे उतार-चढ़ाव आए।. टीवी में बहुत सारे रिपोर्टर्स हैं जो. जिंदगी भर रिपोर्टर रह गए या बहुत सारे. रिपोर्टर हैं जो रिपोर्टिंग में बहुत नाम. कमाए लेकिन जब एंकरिंग में स्विच हुए तो. लोगों ने कहा यार तुम रिपोर्टर ज्यादा. अच्छे थे तुम एंकर वाली तुम में बात नहीं. आई उतनी अच्छी और ऐसे बहुत सारे नाम है कि. संपादक बन गए रिपोर्टर अच्छे थे बट एंकर. इतने सक्सेसफुल नहीं रहे ये सुधीर चौधरी. टू दी सुधीर चौधरी टीआरपी किंग वाली जो. जर्नी थी ये कहां पर आपको लगा ये.
ट्रांसफॉर्म हो गई डीएनए क्योंकि बीच में. कंट्रोवर्सीज बहुत सारी हैं नेगेटिविटी. बहुत है जेल बहुत सारी चीजें फिर सडनली एक. अलग लीग पर आप चले गए जहां से आपकी फैन. फॉलिंग अलग हो गई। नजरिया अलग हो गया, पैसा भी आया, नाम भी आया, शहरत भी आई।. आपकी नजर में वो ट्रांसफॉर्मेशन कहां पर. हुआ? इसके दो पहलू हैं। एक तो ये कि मेरी. जो ग्रोथ है बहुत ही ऑर्गेनिक है। मैं ऊपर. से पैराशूट लगा के मैंने पैराड्रॉपिंग. नहीं की कि कहीं से ऊपर से आके बैठ गया और. मुझे टीवी पे कोई शो गिफ्ट में मिल गया।.
मैं किसी बहुत बड़े आदमी का बेटा हूं।. किसी पत्रकार का बेटा हूं। पैसे वाले का. आदमी का बेटा हूं। ऐसा कुछ नहीं है। तो जब. मैंने अपना करियर शुरू किया, मैंने भी एक. इंटर्न के तौर पर शुरू किया। मैंने. बड़े-बड़े रिपोर्टर्स के उस समय जो फुटेज. आती थी उसको मैं लॉक करता था। जो मेरी. पहला जो मुझे काम दिया गया था बड़े. रिपोर्टर्स ने अपना टेप भेजा शूट का। अपने. इंटरव्यूज भेजे। मैं उस इंटरव्यू को लॉक. करता था। पूरा लिख के ले जाता था। ओके।. हमें लॉक करना पता नहीं है मुझे। तो लॉक.
करने का मतलब है कि मान लीजिए शुभांकर एक. बड़ा रिपोर्टर है और शुभांकर ने एक. इंटरव्यू किया किसी का हम और आप इंटरव्यू. करके आपने टेप वापस ऑफिस भेज दिया और आप. आगे निकल गए। आपके आप इतने बड़े आपके पास. टाइम नहीं है ये सब करने का। तो मेरे जैसा. एक जो इंटर्न होगा वो पीछे बैठा है।. संपादक उसको बोलेगा कि ये जो इन्होंने टेप. भेजा है इसको पूरा ट्रांसक्रिप्ट करके लिख. के लाइए कि उस पूरे इंटरव्यू में क्या. लिखा है। ओके। तो मैं पूरा इंटरव्यू आपका.
सुनूंगा और उसको लिख के ले जाऊंगा अपने. बॉस के पास। उस 10 मिनट के इंटरव्यू में. वो शायद 30 सेकंड की एक बाइट लेंगे। तो. लेकिन मुझे पूरा 10 मिनट लिखना है हम और. फिर वो मुझे बताएंगे कि ये वाला जो पोर्शन. है इसको आप एडिट करवा के इसमें लगवा. दीजिए। ये मेरा काम है। तो मैंने बहुत समय. तक बड़े-बड़े रिपोर्टर्स, बड़े-बड़े. एंकर्स के इस तरीके के जो टेप्स थे उनको. सुन-सुन के उनको लिखा और यह काम किया।. सिर्फ मेरा काम होता था कि उन्होंने क्या. भेजा है उसको कागज पे लिखना और संपादक को.
बनाना कि इसमें इस तरह के वीडियोस हैं ये. ये है और ये लिखा है ये मैंने यहां से. मैंने शुरू किया बट ये आई एम श्योर अब आप. इससे बहुत हेल्प किया होगा इसने इसने मुझे. बहुत हेल्प किया क्योंकि ये ऑर्गेनिक. तरीका है टीवी प्रोडक्शन का मैं बहुत सारे. बच्चों से कहता हूं आज के जमाने में लोग. फुटेज देखते भी नहीं है भाग जाएंगे सर अगर. आप बच्चों से करवाओगे वो कहेंगे हम ये. करने थोड़ी ना आए थे बिल्कुल तो ये मैंने. किया है उसके उसके बाद जब मैं ये करता था. तो मेरा सपना था कि क्या एक दिन मैं जिस. आदमी का टेप मैं यहां ट्रांसक्रिप्ट कर.
रहा हूं क्या मैं इसकी जगह बनूंगा कभी तो. यही सपना था कि मैं भी एक दिन रिपोर्टिंग. पे जाऊं तो वो दिन आया एक दिन और मैं. रिपोर्टिंग पे गया ब्रेक मिला आपको आई. थिंक मुझे ब्रेक मिला होगा 95 96 के तब. मैं जी में ही था और जी नया-नया शुरू हुआ. था और शुरू में जो मुझे रिपोर्टिंग का. मौका मिला तो मुझे शुरू में उन्होंने. क्राइम बीट दी जो अपराध जो छोटे-मोटे. अपराध वगैरह होते थे मर्डर हो गया कहीं. ऐसी चीज हो गई चोरी चकारी. लोकल पुलिस स्टेशन में जाओ एसएओ का एक.
इंटरव्यू कर लो ये सब किया आपने ये सब. मैंने किया है तो मैंने ये सब किया. धीरे-धीरे यहां से करते करते फिर मैंने. पॉलिटिकल रिपोर्टिंग शुरू की फिर पॉलिटिकल. रिपोर्टिंग करके फिर जितने बड़े. इंसिडेंट्स हुए मैंने कारगिल वॉर कवर किया. पार्लियामेंट पे जो हमला हुआ था उस वो. मैंने कवर किया गुजरात के जो दंगे थे वो. मैंने कवर किए बहुत मैंने मैंने बहुत. रिपोर्टिंग की है एंड रिपोर्टिंग इज स्टिल. माय फर्स्ट लव. तो रिपोर्टिंग में मुझे बहुत मजा आता था. और रिपोर्टिंग करते-करते फिर अ फिर मैंने.
एंकरिंग शुरू की। तो अगर एंकरिंग करते समय. आपके पास ग्राउंड का अनुभव है तो वो आपको. एक एक्स्ट्रा एज देता है। तो आज बहुत सारे. ऐसे एंकर्स हैं जो रिपोर्टिंग नहीं करते. या जिन्होंने रिपोर्टिंग एंकर बनने के बाद. शुरू की है। देखिए वो रिपोर्टिंग को मैं. रिपोर्टिंग नहीं मानता। जब आप बड़े एंकर. बन गए फिर आप जा रहे हैं। अगर आपने एक. रिपोर्टर के तौर पे धक्के नहीं खाए. बिल्कुल जमीनी स्तर पर आपने काम नहीं किया. है तो फिर उस रिपोर्टिंग का आपको कभी. करियर में फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए मैंने.
वो सब किया।. उसके बाद मैं एंकर बना और फिर जी में जी. में मैं एंकर बन गया था और धीरे धीरे धीरे. फिर मैं संपादक बना। फिर उसके बाद धीरे. आगे बढ़ता चला गया। फिर मैं संपादक के बाद. सीईओ बना। जिस संस्था में मैं एक इंटर्न. के तौर पर आया था, उस संस्था का सीईओ एक. दिन मैं बन गया। यह मेरा एक हिस्सा है।. उसके बाद 2012 में जो आपने मुझे किस्सा. बताया जिसके बारे में अभी हमने चर्चा की. वो मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी नाइंसाफी थी।.
मेरे साथ जो सबसे नहीं ये जो ये जो ये जो. जेल वाला जो मामला था ओके ये मेरी लाइफ की. सबसे बड़ी नाइंसाफी थी। जिसमें मुझे कभी. समझ में नहीं आया कि भगवान ने इसके लिए. मुझे क्यों चुना और मैं मेरी कोई गलती. नहीं थी। देखिए वही मैं आपको कहता हूं अगर. गलती होती तो आप चुपचाप सह भी लेते और आगे. बढ़ जाते। लेकिन जब गलती नहीं होती तो. आदमी अपने आप से हजार सवाल पूछता है।. भगवान से हजार सवाल पूछता है कि इसके लिए. आपने मुझे क्यों चुना इस सजा के लिए? और. वो बहुत बड़ी सजा थी। उसके लिए मैंने देखा. बहुत ह्यूमिलेशन होता है। सबसे ज्यादा जो.
चीज दुख देती है वो यह है कि आपने अपनी. वजह से अपने परिवार को कितना दुख दिया।. आपने अपने माता-पिता को कितना दुख दिया।. वो गिल्ट जो होता है तो मुझे लगता है कि. इस इंसिडेंट के बाद मेरी लाइफ चेंज हुई. है। उससे पहले की लाइफ अलग थी। वो राइस था. राइज बढ़ता गए। तब तक मैं एक आम. जर्नलिस्ट था। हैप्पी गो लकी काम करो वापस. घर आ जाओ। फैमिली लाइफ बिताओ। बच्चों के. साथ रहो। सैटरडे संडे को कहां जाना है?
जैसे मोस्ट ऑफ़ द जर्नलिस्ट कैसी फिल्म. देखनी है, कहां खाना खाना है। बस यही है. एक एक आम जिंदगी। एक ऐसा जर्नलिस्ट जो. अच्छा है, टैलेंटेड है, अच्छा कर रहा है, लाइफ में राइज़ कर रहा है। एंड दैट्स इट।. लेकिन वो अपनी जिंदगी भी जी रहा है। फिर. उसके बाद जब यह हुआ तो जिंदगी खत्म हो गई।. उसके बाद. एक जैसा होता है ना कि आपके शरीर में अब. एक आग लगी हुई है और वो आग है प्रतिशोध की.
आग कह लीजिए। अपने आप को सही प्रूव करने. की आग कह लीजिए। फायर है, गुस्सा है, नाराजगी है। तो बाद में मुझे. ऐसा महसूस हुआ कि अगर आपको लाइफ में कुछ. एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी करना है जिंदगी में तो. उसके लिए आपके अंदर यह नाराजगी, यह गुस्सा. और यह आग होना जरूरी है। अगर यह आग नहीं. है आपके अंदर तो आप एक लेवल से ऊपर नहीं. जा पाएंगे। क्योंकि यह जो आग है यही आपका. फ्यूल है। आपने रॉकेट लॉन्च तो कर दिया.
लेकिन वो आगे जाकर गिर जाएगा। अगर उससे. ऊपर आपको जाना है अंतरिक्ष में तो फाय. एक्स्ट्रा फायर आपको चाहिए होगी जो हर. हमेशा आपके मन में लगी हुई है। और वो. एक्स्ट्रा फायर कैसे आती है? या तो फायर. हो गरीबी की. किसी प्रकार के अभाव की कि आपकी जिंदगी. में कोई चीज है अभाव है जिस जो आपको जीने. नहीं दे रहा है कोई बहुत बड़ा दुख कोई. बहुत बड़ा अपमान अगर ये चार पांच चीजें. आपको फायर देती हैं आग लगाती हैं आपके मन.
में जो आपको प्रेरित करती हैं कि यहां से. मुझे निकलना ही पड़ेगा देयर इज़ नो अदर. ऑप्शन तो ये मेरे केस में अपमान जो था. मेरा जो अपमान हुआ जो मेरे साथ जो यह. नाइंसाफी हुई इसकी जो जो फायर थी यह जो आग. थी इसने मेरे लिए काम किया और मैंने उसके. बाद उस इसीलिए उसके बाद मैंने कभी नौकरी. नहीं की। मुझे सिर्फ अपने आप को प्रूव. करना था। मुझे यह प्रूव करना था आई एम द. बेस्ट।.
जो लोग मेरे मुझे बदनाम करने के लिए निकले. थे उनको गलत साबित करना था। और जिन लोगों. ने बिल्कुल मेरे करियर को खत्म कर दिया. था। माय करियर वाज ओवर दैट टाइम। मतलब. मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी. ऐसा कर सकता हूं। दोबारा से मैं यह मेरा. पुनर्जन्म है। एक ऐसा जर्नलिस्ट जिसके ऊपर. इतने बड़े-बड़े आरोप लग जाएं उसको वहां की. सरकार जेल तक पहुंचा दे और उसके बाद वो. वापस आके इतना अच्छा करे। यह तो चमत्कार. ही है। मैंने खुद नहीं सोचा था कभी मेरे.
साथ ऐसा होगा। मैं सोचता था कि इसके बाद. मैं शायद शहर छोड़ के कहीं चला जाऊंगा।. कोई और काम कर लूंगा। मीडिया से बाहर. निकलना पड़ेगा। जो हुआ अभी आपके साथी उतनी. हिम्मत नहीं करते। किसी और फील्ड में चले. गए। बिल्कुल। तो मुझे ऐसा लगता है कि वो. जो फायर थी ना अपने आप को प्रूव करने की. वो मुझे यहां तक लेके आई और मेरे अंदर वो. हमेशा एक नाराजगी बनी रही और मैं उस उस. अपमान को मैं भूल नहीं पाया कभी। वो हर. दिन हर सुबह हर शाम वो अपमान मेरे साथ. रहता था। 2022 तक वो लगातार मेरे साथ रहा.
जब तक वो केस खत्म नहीं हो गया।. सरप्राइजिंगली. मैं सोचता था कि जब ये केस खत्म होगा तब. जाके मैं राहत की सांस लूंगा। लेकिन जिस. दिन वो केस खत्म हुआ और जब मेरे पास वो. कोर्ट का आर्डर आया कि केस खत्म हो गया उस. दिन मुझे कोई खुशी नहीं हुई जरा भी खुश. नहीं था मैं इनफैक्ट मैं ये कहूंगा उस दिन. मैं ज्यादा दुखी था और मेरा दुख उससे भी. खत्म नहीं हुआ फिर मुझे लगा कि मतलब मुझे. उससे कोई आराम नहीं आया आराम आ जाता तो.
शायद मुझे ऐसा लगता है कि मैं 2022 के बाद. भी थोड़ा रुक जाता ठंडा पड़ जाता पर मैं. रुका नहीं तो दैट फायर इज स्टिल देयर इन. मी। तो मेरे वो जो 10 साल गए हैं ना अभी. मुझे उसका उसका बदला लेना है। अभी और लेना. है। अभी करना है। अभी बहुत काम बाकी है।. अभी बहुत सारी चीजें प्रूव करनी है अपने. तरीके से। तो इसलिए मैं चलता जा रहा हूं।. फिर 2022 के बाद फिर मैंने ब्लैक एंड वाइट. वाला चैप्टर लिखा। ये चैप्टर्स हैं। ये एक. वेब सीरीज है मेरी जिंदगी। उसके अलग-अलग. चैप्टर्स हैं। अब यह जो अब नया आ रहा है,
यह नया चैप्टर है। अब यह नया चैप्टर शुरू. होगा। यह भी मेरा एक तरीका है लोगों को. बताने का कि मैं क्या हूं। आपने मुझे क्या. समझा था पर मैं बिल्कुल अलग हूं। एक होता. है एंड गोल सोचना कि आप सबके एक थॉट होते. हैं कि क्या करना है जिंदगी में। जैसे. डीकोड आपने आप हर चीज प्लान करे करो। आपकी. लाइफ में कुछ भी ऐसा नहीं है। मैं देख रहा. हूं कि जो यूं ही हो रहा है। नहीं। चाहे. वो डीएनए में था, ब्लैक एंड वाइट में था, डिकोड में था या जिंदगी में मैं देख रहा. हूं। हर चीज के पीछे एक सोच है। आगे की. सोच क्या सोचा है आपने? कि क्या करना है. जिंदगी में?
आगे की सोच मैंने कभी ऐसा नहीं अपना. टारगेट रखा था कि मुझे इतना पैसा कमाना है. या मुझे यहां मकान लेना है या मैंने कोई. कोई फाइनेंसियल गोल्स नहीं वो तो छोटी चीज़. है वो तो एक टाइम में छुट्टी बात है या. कोई डेजिग्नेशन सोचा हो कि कि एक दिन मेरा. चैनल होगा ऐसा भी मैंने सोचा नहीं है बट. मैं हमेशा ऐसा सोचता हूं कि मैं अब मेरा. कंट्रीब्यूशन क्या हो सकता है अपने देश के. लिए मतलब. जब बच्चे तो मेरे बड़े हो गए अभी लेकिन. लेकिन जब जब मेरे ग्रैंड चिल्ड्रन आएंगे.
और वो मुझसे ये पूछेंगे कि दादा जी आप. इतने साल से 30 साल 40 साल 50 साल आपने. काम किया आपने इतना पैसा भी कमाया आप इतने. बड़े पर आपने देश के लिए क्या किया. सोसाइटी के लिए क्या किया व्हाट इज योर. कंट्रीब्यूशन ये बात मेरे दिमाग में बहुत. पीछे कई टाइम से आ रही थी और यह जो मैंने. नया दूरदर्शन में जो काम लिया वो इसीलिए. लिया कि मेरे पास इस बात का जवाब होना. चाहिए कि जब मैं यहां तक पहुंच गया तो. वापस फिर मैंने व्हाट इज माय.
कंट्रीब्यूशन? तो मैं अभी उस जवाब की तलाश. में हूं। व्हाट कुड बी माय कंट्रीब्यूशन. टू दिस कंट्री एंड टू दिस सोसाइटी। अभी. मैं जब मिलता हूं अलग-अलग कभी कोई फैमिली. मुझे मिल जाती है। छोटे बच्चे मिल जाते. हैं। वो मुझे बताते हैं कि कैसे मेरी किसी. एक बात ने उनके जीवन में कोई प्रभाव डाला।. मुझे कितने सारे लोग मिलते हैं जो कहते. हैं कि कोविड के टाइम पे हम आपका शो देखते. थे और कोविड के टाइम में जो आप मेंटल. हेल्थ की बात करते थे। कोविड के समय में.
जब हम बिल्कुल अकेले थे। आप हमें रोज. उम्मीद से भरी कोई बात बताते थे। और ये. मैंने देखा कोविड के समय में मैं लोगों को. रोज कुछ ना कुछ पॉजिटिव बताता था। उनको. कहता था कि क्या करना चाहिए? जीवन दर्शन. के बारे में बताता था। यह जीवन क्या है? ये जो बीमारी है, यह अकेलेपन की बीमारी. है। रिश्ते ऐसे समय में कहां चले जाते. हैं? जिसने रिश्ते में इन्वेस्ट किया है, वह आदमी कोविड के इस दौरान सर्वाइव करेगा।. जिसने रिश्तों में इन्वेस्ट नहीं किया वो.
आदमी निकल जाएगा। तो रिश्ते आपको यहां पता. तो ऐसी कोई चीज प्राइम टाइम में कोई बताता. ही नहीं है। ना रिश्तों के बारे में बताता. है ना परिवार के बारे में बताता है ना. मेंटल हेल्थ के बारे में बताता है ना. अकेलेपन के बारे में बताता है। तो मैंने. ऐसा सोचा कि हाउ कैन आई हेल्प फैमिलीज़? हाउ कैन आई हेल्प दीज़ यंगस्टर्स? बड़ी खुशी. होती है मुझे जब स्कूल के बच्चे मेरे पास. आते हैं जो कि हम सोचते हैं न्यूज़ देखते. ही नहीं कभी। बट स्कूल के बच्चे मेरे पास. आते हैं और कहते हैं मैं आपकी न्यूज़ देखता. हूं। तो मुझे वो करना है। मुझे एक एक. साइलेंट ट्रांसफॉर्मेशन लाना है सोसाइटी.
में फैमिलीज में जिसमें आप उनको सही बात. बता सकें क्योंकि जिस रास्ते पे अब हम चल. पड़े हैं जहां पे कितने एंटीनेशनल लोग हैं. वो सब अच्छे-अच्छे वीडियोस बना के लोगों. को गुमराह कर रहे हैं। वहां पे अगर कोई एक. आदमी एक अलग. एक वैक्सीन बना के जब तक नहीं लगाएगा ना. देश में चाहे वो वैक्सीन कितनी भी कड़वी. लगे तो फिर काम नहीं चलेगा। एंड वी नीड. मेनी मोर पीपल लाइक दिस। तो मुझे वो.
वैक्सीन बनना है कि आप उसको नेगेटिविटी को. खत्म करके वापस पॉजिटिविटी के साथ अपने. देश के लोगों की मदद करो, हेल्प करो। जिस. भी तरीके से हेल्प कर सकते हैं। जैसे अभी. मैं सोशल मीडिया पर जब रहता हूं भाई आज. हमारे मिलियंस ऑफ फॉलोअर्स वी हैव। पर हम. उन मिलियन फॉलोअर्स की ताकत का क्या करते. हैं? मैं कई बार अपने से पूछता हूं कि. करोड़ों लोग मुझे फॉलो करते हैं। फायदा. क्या है? ज्यादातर 99% लोग उससे पैसा कमाते हैं कि.
भाई आप मुझे पैसा दे दीजिए। मैं आपके. प्रोडक्ट को एंडोर्स कर दूंगा। तो मैंने. इसका एक तरीका ये सोचा कि हमारे देश में. जो टैलेंटेड लोग हैं जो अच्छे हैं जिनको. मौके नहीं मिल रहे। जैसे आज सुबह ही एक. कोई छोटा बैंड है अयोध्या का। उसने मुझे. अपना एक वीडियो भेजा। मुझे बहुत अच्छा. लगा। वेरी टैलेंटेड पीपल। बट कुछ नहीं है।. तो मैंने उसको रीपोस्ट कर दिया। कोई और. कोई. आदमी है जो बहुत अच्छा काम कर रहा है।. ही वांट्स टू रीच आउट टू डिफरेंट पीपल।.
उसको मैंने रीपोस्ट कर दिया। लोगों को. थोड़ी मदद कर दी इसी ने। ये तो दिस इज द. मिनिमम यू कैन गेट यू कैन डू। तो मैंने. अभी ये सोचा कि भाई पैसा नहीं चाहिए हमें।. पर हमारे जो इतने करोड़ों फॉलोअर्स हैं इस. रीच को हम इस्तेमाल करके कैसे और लोगों को. मदद कर सकते हैं और सारे लोगों को खड़ा कर. सकते हैं। जैसे जब मैं मीडिया में था. शुभांकर और जब मेरे हाथ में जब चीजें थी. तो लोग बहुत सारे जब आप संपादक होते हो या. किसी चैनल के सीईओ होते हो कोई पूछे आपसे.
कि आपने मीडिया से इतना कुछ लिया? आपने. मीडिया को क्या दिया? बताइए कोई नाम आपने. दिया हो मीडिया को? आपने अपने चैनल में. किसी को ग्रूम किया हो तो मुझे बहुत शौक. है इस बात का। बहुत मुझे अच्छा लगता है कि. मैं मेरी टीम में लोगों को ग्रूम करूं।. मैं उनको बड़ा बनाऊं। एक दो नाम तो मुझे. याद आ रहे हैं। मैं चाहूंगा आपने किसको. किसको ग्रूम किया अपनी लीडरशिप में? नहीं. अब देखिए. जिनको ग्रूम किया उनके नाम लूंगा तो वो अब. वो बुरा मान जाएंगे।. क्योंकि अब वो बड़े हो गए हैं। अब वो बड़े.
हो गए हैं। तो मैं नाम तो नहीं लेना चाहता. अब उनका क्योंकि जी न्यूज़ में काफी लोगों. को आपने लेकिन मैंने मेरी टीम में जब मैं. जी में था तो मैंने कभी ये नहीं किया कि. ये एक वन मैन शो है। आज भी अगर आप देखेंगे. ना न्यूज़ चैनल्स ज्यादातर न्यूज़ चैनल्स. वन मैन शो हैं। जो चैनल के मालिक भी बन गए. हैं वो अपने अलावा किसी को प्रमोट नहीं. करते। संपादक अपने अलावा किसी को प्रमोट. नहीं करता। पर मैंने अपने साथ जितने भी. लोग रहे हैं मैंने बहुत लोगों को प्रमोट. किया है। मैंने सो बहुत लोगों को मदद की.
है कि वो भी बड़े स्टार्स बने और जो लोग. मीडिया को अच्छी तरह समझते हैं वो जानते. होंगे बिना नाम लिए मैं नाम नहीं लेना. चाहता इसलिए नहीं कि इसलिए कि शायद उनमें. से किसी को बुरा लग जाएगा क्योंकि बड़े. होने के बाद सब लोग भूल भी जाते हैं ना. बहुत जल्दी। देखिए सक्सेसफुल जो आदमी होता. है ज्यादातर लोग मानते हैं कि जो सफलता है. वो उनकी अपनी है और जो असफलता है वो दूसरे. की वजह से आई है। तो ऐसा होता है। इसी. प्रकार से जो लोग मेरे साथ मेरे शो में. जुड़े हुए हैं उन लोगों को मैंने बहुत.
बड़ा बनाने की कोशिश की है। आज वो सब लोग. इंडस्ट्री में अच्छी-अच्छी जगह पे सेट. हैं। ये ये कह के कि भाई हमने इनका शो. बनाया ये करके। एंड आई हैव रियली रियली. मैंने काम किया है उन लोगों के साथ। आपने. काम किया होगा। वो सब लोग अच्छी-अच्छी जगह. पे अच्छा वो वो कर रहे हैं। तो मैंने कभी. इस बात को डिनाई नहीं किया कि ये लोग आगे. ना बढ़े। इन लोगों को कोई अच्छी नौकरी ना. मिले। सबको मैंने यही सोचा कि ठीक है जो. जितना जो ग्रूम हो सकता है और कई लोग ऐसे. हैं जो शुरू से मेरे साथ जुड़े रहे हैं और. आज भी मेरे साथ काम करते हैं। एंड आई.
रियली वांट टू टेक केयर ऑफ देम। अब मेरी. अपनी कंपनी है। अब मेरी अपनी कंपनी मेरा. शो बनाती है। हां। अच्छा ये जो आपका ये. डिकोड शो है अब ये मेरी कंपनी जो है अब ये. मेरी कंपनी मेरा शो बनाती है तो अब वो सब. लोग मेरे साथ हैं तो ये जितना प्रोग्राम. लाइव जा रहा है ये मेरी डीडी से नहीं हो. रहा ये आपकी कंपनी ये डीडी से ही हो रहा. है बट आपकी कंपनी ने कॉन्ट्रैक्ट किया वो. इट्स इट्स अ प्लग एंड प्ले क्या आपने पूरा. रिकॉर्ड किया एडिट किया सब कुछ किया वो.
चला गया इंटरेस्टिंग कितने लोग आपके साथ. हैं अभी मेरे साथ होंगे लगभग 30-40 लोग एक. शो के लिए एक शो के लिए 30 करीब 30 तो हैं. ही अभी तो ये जो टीम जब पूरी बन जाएगी अभी. तो क्योंकि 15 दिन ही हुए हैं तो अभी टीम. इज स्टिल इन प्रोसेस बट जब ये पूरी टीम. मेरे पास आ जाएगी तो देयर विल बी अराउंड. 40 पीपल जिसमें कितने प्रोड्यूसर्स होंगे. अब वो तो अलग-अलग ब्रेकअप की बात है लेकिन. हां काफी प्रोड्यूसर्स होंगे राइटर्स. होंगे उसमें ग्राफिक्स के लोग हैं वीटी.
एडिटर्स हैं प्रोडक्शन के लोग हैं उसमें. मार्केटिंग के लोग हैं सोशल मीडिया के लोग. हैं सेल्स के लोग हैं तो इट्स अ टोटल. इंडिपेंडेंट यूनिट इंटरेस्टिंग एक नाम सर. बहुत जिक्र होता है आपके साथ जब आते हैं. और उस नाम को आई एम श्योर आप भी काफी. रिलेट करोगे कोविड में आपकी तस्वीर वायरल. हुई थी जब आप बीमार हुए थे वो बहुत. अनफॉर्चूनेट टाइम था उसी बीच में हमारे एक. सीनियर थे आपके कोलीग रोहित सरदाना. बिल्कुल और क्योंकि जब मैंने आज तक ज्वाइन. किया तो मुझे उन्हीं की सीट दी गई थी आप. भी आज तक में रहे वो आपके साथ जी में थे.
रोहित सर जी में हमने भी देखा उन्हें आपके. लीडरशिप में उन्होंने बहुत काम भी किया. और और जब मैं आज तक गया तो मुझे रियलाइज. हुआ कि कितने लोग उनको भी प्यार करते थे. क्योंकि वो चिट्ठियां वो खत मेरी कुर्सी. पर आए वो छ महीना मैं लोगों को बता दूं कि. छ महीना उस कुर्सी पे कोई बैठा नहीं था तो. सुप्रिया सर ने ये सोचा कि ये लड़का नया. आया है इसको यहां बैठा लेते हैं क्योंकि. कोई वहां बैठने को तैयार नहीं था लोग उनसे. इतना प्यार करते थे और अपने बीच में कोई. इंसान चला जाए तो लोगों की हिम्मत नहीं. होती तो मैं नया आया था मैं बैठा मैं सो. मैं अक्सर वो चिट्ठियां आती थी मैं परमिला.
मैम से मिला अभी मैं और उन्होंने मुझसे. बहुत सारी बातें की आपका रिश्ता कैसा था. रोहित सरदाना से और वो आपके लिए कितना. बड़ा डेंट था क्योंकि वो बहुत बड़ा नाम था. रोहित सरदाना और मुझे लगता है वो एक ऐसा. किस्सा था जिस पे सबको अफसोस हुआ। वो और. बहुत कंट्रीब्यूट कर सकते थे इंडियन. जर्नलिज्म में। रोहित के साथ मेरा बहुत ही. एक आत्मीयता का रिश्ता था। तो जब मैं जी. में आया रोहित जी में मेरे से पहले से था।. और रोहित उस समय शायद मॉर्निंग के. बुलेटिनस करता था जब मैं आया। तो जैसे.
बाकी एंकर्स थे वैसे ही था। लेकिन जब हम. एडिटोरियल मीटिंग करते थे तो मैं मेरी. एडिटोरियल मीटिंग में सबको बोलता हूं कि. भाई अच्छा बहस होनी चाहिए। वाद-विवाद होना. चाहिए। अगर तुम किसी चीज से डिसए्री करते. हो तो बोलो खुल के बोलो। क्योंकि जब आप. वाद-विवाद करते हो ना तब उसमें से कुछ नया. आईडिया निकल के आता है। तो रोहित बहुत. वाद-विवाद करता था। बताता था कि नहीं ऐसे. नहीं ऐसे होना चाहिए। तो हमारी काफी बहस. होती थी।. यह वह समय था जब मुझे पहली बार यह समझ में.
आया कि रोहित के अंदर बहस करने का एक गुण. है।. यह लड़का बहस बहुत अच्छी कर सकता है। इसके. पास तर्क होते हैं और वो सारे इंफॉर्मेशन. को स्क्रीनिंग करके उसमें से तर्क निकाल. लेता है. लाइक पर्ल्स ऑफ विज़डम। तो मैंने रोहित को. सजेस्ट किया कि रोहित तुम्हें बहस का शो. करना चाहिए. और उस समय 6:00 बजे आज तक पे बहस का शो. आता था तो हमने सोचा कि हम इस अपना रूल.
बनाते हैं नया हमने कभी किसी को कॉपी नहीं. किया 5 तो हमने 5:00 बजे शो लाया ताल ठोक. के हमने कहा कि वो 6:00 बजे से पहले ही हम. गेम खत्म कर देंगे बाकी सबका हम 5:00 बजे. ही सब खत्म नया शो शुरू करते हैं। तो 5:00. बजे हम लेके आए ताल ठोक के। उसका नाम हमने. रखा ताल ठोक के। वो रोहित की पर्सनालिटी. से बिल्कुल मैच करता था। इसलिए हमने उसका. नाम रखा। यहां तक शर्ट फोल्ड करना। और. रोहित उसके बाद हम दिन में चर्चा करते थे. कि आज क्या करना है और हमने उसको बहुत. सपोर्ट किया उस शो को। मतलब कि इसको चलाना.
ही है। और उस शो ने बहुत कम समय में सफलता. हासिल कर ली। वो अपने टाइम बैंड में नंबर. एक शो बन गया। और धीरे-धीरे धीरे रोहित. पॉपुलर होता चला गया। 5:00 बजे टीवी ने. कॉपी कर लिया। आज सब सब 5:00 बजे डिबेट आ. गई। तो देखिए इसका श्रेय जो है यह रोहित. को जाता है कि उसने इस पूरे बैंड को खोल. के वो पीछे 5:00 बजे तक ले गया। तो 5:00. बजे के बैंड को क्रिएट करने का जो श्रेय. है वो रोहित को जाता है।.
तो हमने उसको शो को बनाया और वो शो. सुपरहिट हो गया। रोहित की लोकप्रियता. बढ़ती चली गई और रोहित बहुत अच्छा करने. लगा। फिर रोहित शाम को 8:30 बजे भी प्राइम. टाइम शो भी करने लगा। तो इस दौरान रोहित. के साथ बहुत अच्छे संबंध हो गए। धीरे-धीरे. रोहित एक दोस्त जूनियर था लेकिन रोहित के. साथ एक दोस्त वाले संबंध हो गए। मतलब हर. चीज में एक दूसरे के बारे में आउटसाइड. ऑफिस भी जानना हालचाल पूछना कि भाई किसकी.
जिंदगी में क्या चल रहा है और मेरी एक आदत. रही थी उस समय मैं जो मेरी जो टीम थी कोर. टीम मैं एडिटोरियल मीटिंग ऑफिस में नहीं. करता था. मैं उनको कॉफी पे ले जाता था बाहर मैं तो. आपको वियन में देखता था मैं हां हां नहीं. वियन वियन तो बहुत बाद में आया वहां कैफे. एरिया अच्छा वहां कैफेरिया वहां भी हम. करते थे लेकिन लेकिन वियन का कैफिटेरिया. बनने से पहले हम हमारे ऑफिस के सामने एक. सीसीडी था। तो मैं अपनी टीम को सीसीडी ले.
जाता था। ओके। और वहां बैठ के हम कॉफी. पीते थे और एडिटोरियल डिस्कशन करते थे।. कभी-कभी हम स्टारbक्स चले जाते थे। तो कभी. आप देखना मेरी रोहित की और हम बाकी सब. लोगों की एक पुरानी फोटो चलती है जब हम. स्टारbux में बैठे हैं। तो हमारी मीटिंग. चल रही है वहां पर। ये गार्डन गैलेरिया. में। हां। तो वहां हम बैठ के क्योंकि भाई. आज की मीटिंग जो है स्टारbक्स में है तो. सारे लोग वहीं पहुंचो ऐसा करके तो बहुत. अच्छा रहा बहुत बढ़िया चल रहा था और फिर.
अचानक मुझे अभी भी याद है कोविड के दौरान. हमारा एक कलीग था जितेंद्र शर्मा जो रोहित. का भी बहुत करीबी दोस्त था और मुझे याद है. सुबह-सुबह उसने मुझे कॉल किया एंड ही वास. क्राइंग और उसने कहा कि रोहित इज नो मोर. अब विश्वास नहीं हुआ कि ऐसा हो सकता है. मतलब कई चीज ऐसी होती हैं जो आपको लगता है. कि आप बार-बार सोचते हो मैं कोई सपना तो. नहीं देख रहा हूं। रोहित के जाने के बाद. मुझे कई बार-बार ऐसा लगता था कि मैं सुबह. उठूंगा और मैं मुझे लगेगा कि यार मैंने. बहुत बुरा सपना देखा और मैं रोहित को फोन.
करूंगा और मैं बोलूंगा कि यार आज मैंने यह. सपना देखा और मैं तेरे बारे में ऐसा देखा।. पर इनफैक्ट मुझे याद है रोहित पीछे जब. बीमार हुआ था तो मैं उसको हॉस्पिटल भी. देखने के लिए गया था।. वो भी कई चीजों में मेरी तरह ही था। वो. बहुत पैशनेट था। उसको भी छोटी-छोटी बातों. पर बहुत गुस्सा आ जाता था। नाराज हो जाता. था वो। तो. वो एक एक ऐसा वो था जिसने हम सबको हिला.
दिया बिल्कुल और मतलब हम उससे निकल नहीं. पाए। मतलब मैं उनसे कभी मिला नहीं। मैंने. एक चैनल में वो खबर पढ़ी और मेरी आंख में. आंसू थे। बिकॉज़ आई यूज्ड टू वाच हिम एंड. यू फील अ कनेक्शन। जब वो गया तब वो मेरे. साथ काम नहीं करता था। तब आज तक तब वो आज. तक में आ गया था। करते थे और मैं जी में. था. तो कहने को तो हम राइवल चैनल्स में हैं और. यही मैं आपको कई बार मैं सोचता हूं कि कुछ.
करने की आजादी जो होती है तो वो राइवल. चैनल में है। किसी दूसरे चैनल का ब्रांड. है, किसी दूसरे चैनल का चेहरा है। और मैं. किसी दूसरे चैनल में हूं और मैं उसके ऊपर. शो करना चाहता हूं।. तो. अलग-अलग तरह के राय आती हैं कि भाई अब आप. कैसे कर सकते हैं किसी दूसरे चैनल के एंकर. के बारे में आप अपने इस चैनल में कैसे. करेंगे तो हमने कहा कि नहीं हम करेंगे तो. मैंने रोहित के ऊपर मुझे याद है मैंने.
पूरे एक आधे घंटे का शो किया था उस दिन और. उस शो को करते हुए मैंने उसमें रोहित के. साथ अपनी पुरानी फोटो निकाली आई सीन दैट. उसके उस हमने कैसे उसके कितने कितने. जन्मदिन हमने एक साथ मनाए? मेरे जन्मदिन. कितने एक साथ मनाए। Zee न्यूज़ नंबर वन. हुआ तो एक साथ मिलके केक काटे। वो सब. मैंने तस्वीरें लगाई और. वो शो मैंने बड़े दिल से किया था और. शो को करते-करते कई बार ऐसा हुआ जब मुझे.
बिल्कुल ऐसा लगा कि मैं रोने लगूंगा और. मैं किसी तरह अपने आंसू रोक के वो शो करता. रहा। बट शो खत्म करने के बाद मैं बहुत. रोया उस दिन और मतलब. बहुत दुख हुआ जिंदगी में एक दो बार ऐसा. हुआ है जब मेरे बहुत करीबी लोग निकल गए और. यह समझ में नहीं आया कि मतलब मौत आती है. और हमारे बीच में से किसी को ऐसे उठा के. ले जाती है हमें समझ में भी नहीं आता।. एक दो बार हुआ है मेरे साथ ऐसा लाइफ में.
कि मेरे बगल में बैठा हुआ कोई व्यक्ति और. एकदम अगले ही पल निकल गया और आपको आप देख. ही नहीं पाए ऐसे मौत आई और ऐसे उठा के ले. गई और आप देखते रह गए और आप इतने असहाय. हैं इतने हेल्पलेस हैं आप कुछ नहीं कर पाए. सिर्फ आप मातम बना सकते हो आप जब कोविड. में आपकी तबीयत खराब हुई थी और रोहित के. जाने के दो-तीन दिन के बाद ही मुझे कोविड. हो गया था और वो तस्वीर हां हां मतलब फिर. वो तस्वीर आई सीरियस तस्वीर थी वो बहुत.
मैं 15 दिन अस्पताल में था और आप जानते हो. जब मैं अस्पताल में था तो मैं अकेले कमरे. में कोविड तो बीमारी अकेलेपन की है तो 15. दिन आप अकेले कमरे में बंद हैं दो दिन. पहले रोहित गया है या तीन दिन पहले गया है. और. बार-बार मुझे ऐसा लगता था कि अभी अब मेरी. बारी है और मैं पूरे मैंने 15 दिन यह सोच. के बिताए कि शायद रोहित ये चाह रहा है कि. मैं भी आ जाऊं और वहीं मिलके कुछ मजा.
करेंगे हम. क्योंकि वो टाइमिंग ऐसा था और दो चार. लोगों ने मुझे लिख भी दिया ऐसा. तो मैं पूरे टाइम ये सोचता रहा कि शायद अब. यह गया और अगली बारी मेरी है एंड आई वाज़. एक्चुअली लिटरली वेटिंग।. तो शुभांकर यह जो फीलिंग होती है ना जब आप. सरेंडर कर देते हो और आपको ऐसा लगता है कि. भाई अब मैंने स्वीकार कर लिया अब मैं. तैयार हूं जाने के लिए तो यह मेरा कोविड. का वो टाइम था जब मैंने सोच लिया था कि.
अभी मैं तैयार हूं जाने के लिए अभी ठीक है. आई एम मेंटली प्रिपयर्ड टुमारो आई कैन गो. ऐसा करके तो उस माइंडसेट में मैंने 15 दिन. निकाले और मैं गया नहीं बच गया मैं बट इट. गव मी अ न्यू लाइफ अ न्यू थिंकिंग. और यह 15 दिन में ही मैंने यह तय किया था. उस दिन कि अब मैं जी में नहीं रहूंगा। अब. मैं जी छोडूंगा।. आज आपको यह भी मैं बता रहा हूं। मैंने ये. 2021 की बात है। जून की बात और एग्जैक्टली.
2022 जून में मैंने जी छोड़ दिया था। बट. ये 15 दिन में उस कमरे में बैठे-बैठे. मैंने ये सोचा था कि अब मैं नौकरी नहीं. करूंगा। अब मैं यहां से निकल जाऊंगा। मेरा. टाइम यहां हो गया पूरा। और उस समय ऐसा. लगता था कि मैं इतना सफल हूं, सीईओ हूं, एडिटर इन चीफ हूं। हूं सब कुछ जितने सारे. चैनल चलाता हूं यही जिंदगी है। एक पल को. ये लगा ये तो कुछ भी नहीं है। और मैं. बिल्कुल गलत जा रहा हूं। यही मैं जानना. चाह रहा था कि लाइफ को लेके क्या नजरिया. बिकॉज़ पावरफुल है, इंपैक्ट हो रहा है, जोश. है। किसी को बना सकते हैं, किसी को खराब.
कर सकते हैं। एवरीथिंग इज देयर। फिर जब. बिस्तर पर पड़े हैं, असहाय हैं, अकेले. हैं, 15 दिन है। वहां से क्या जिंदगी. एहसास कराया आपने? क्या बदला जिंदगी ने? तो बड़ी चीज जो बदली है वो यही है। क्या. आपके अंदर हिम्मत है कि आप अभी के अभी सब. छोड़ दो। जो चीज आपको सबसे ज्यादा प्यारी. है और जो आपको बांध के रखती है। जिस चीज. के लिए आप इतनी राजनीति करते हैं, जिस चीज. के लिए आप इतना मैनपुलेशन करते हैं उस चीज. को आप छोड़ सकते हो क्या? तो वहां बैठ के.
मुझे मुझे लगा कि मेरी जिंदगी में मैं. सबसे ज्यादा एफर्ट किस चीज को लेके मार. रहा हूं? शायद चैनल में मेरी पोजीशन को. लेके, मेरे स्टारडम को लेके, मेरे शो को. लेके यही तो मेरी ताकत है। इस कुर्सी को. लेके मैं इस कुर्सी से मैं चिपका हूं। यही. मेरी ताकत है। और यह कुर्सी चली जाए तो. मैं क्या हूं? मैं यह जानना चाहता था। और. मैं इस कुर्सी के लिए काम नहीं करना. चाहता। अब मैं मेरे लिए काम करना चाहता. हूं। तो सबसे बड़ा चैलेंज था कि क्या आप. यह त्याग कर सकते हो? तो मैंने सोच लिया. कि मैं इसको अब मैं इसको त्यागूंगा।.
तो मैंने उसे त्याग दिया। बहुत सारे लोगों. को यह समझ में नहीं आया कभी भी कि मैं. वहां से क्यों नहीं और सब ठीक चल रहा था।. ये न्यूज़ क्यों छोड़ा आपने? सब अच्छा चल. रहा था। कुछ भी ऐसा नहीं था कि जिसमें मैं. ये बोलूं कि यार ये एक मुझे परेशानी है।. बट मुझे अचानक से ये लगा कि मुझे मुझे अब. एक-एक करके चीजों को छोड़ना है। मुझे मेरे. ऊपर ध्यान देना है। ये पीछे जो कुर्सी है. इस पर नहीं। तो मैंने छोड़ दिया। और मैंने. ये सोचा कि नाउ आई विल बी ऑन माय ओन। बस. मैं ही हूं। और उसी अरेंजमेंट के साथ मैं.
आज तक मुझे याद आज तक में मैं एक बार आपके. पास आया था। मैंने कहा कि आप मिस नहीं. करते हो बॉस होना। हम तो आपने कहा यार. शुभांकर रात 12:00 बजे तक काम करना होता. है और सुबह 6:00 बजे से शुरू होता है। सो. मॉर्निंग 6 टू 12 इन द नाइट पूरे दिन हम. अपने को इसी में खपाते रहते हैं। किस लिए? थोड़े से पैसे बढ़ जाएंगे। थोड़ी सी और. चीजें हो जाएगी। अब इससे मुक्त होना है।. तो मैंने ये सोच लिया था कि इससे मुझे. मुक्त ये बंधन है। ये आपने मुझसे कहा था।. मुझे कन्वर्सेशन याद है तो मैंने उसको.
उसको ये देखो ये सब छोड़ना आसान नहीं है. और मैंने उसको एक झटके में छोड़ दिया उसके. बाद मैं आज तक मैं आया और मैंने अपने आपको. एक नया. नई लाइफ मैंने जीने की कोशिश की जिसमें. मेरे पास कुछ नहीं है। सो आई वाज लिविंग. लाइक अ सेंट देयर अगर उस हिसाब से देखो. तो। फिर वो मुझे मिल गया। उसके बाद अब. ब्लैक एंड वाइट से चिपक गए। उस व्यूअरशिप. से चिपक गए। सबसे बड़े चैनल पर सबसे बड़ा. शो मैं मैं मैं.
अब उसको त्यागने का समय उसको त्याग सकते. हो आप तो फिर मैंने अपने आपको यह चैलेंज. किया कि अब इसको त्यागना है तो अब उसको. त्याग कर दिया तो ये जो चीज है ना. कांस्टेंटली. छोड़ते चले जाओ कास्टेंटली त्याग करते चले. जाओ ये आपको आपके लिए अच्छा है और आपको. समझ में आएगा कि ये जो स्ट्रिंग्स अटैच्ड. हैं आपके आसपास जिनमें आप उलझे हुए हो ये. बेकार के हैं आप पार्टीज में क्यों नहीं. जाते हो मैंने टीवी की जितनी पार्टीज होती. है क्योंकि मैं नहीं जाता हूं। बट मैंने. नोटिस किया और हो शायद मैं गलत भी हूं। बट. मैंने ये नोटिस किया कि मैंने आपको नहीं.
देखा। जिस तरह बाकी लोग गैदरिंग करते हैं।. बाकी एंकर्स साथ में खाते हैं, पीते हैं, घूमते हैं या बैठ के बातें करते हैं।. सुधीर चौधरी को हमेशा मैंने अलग-अलग. अलग-अलग देखा। मैंने वियन में भी देखा. अपना एक दुनिया थी आपकी। आप अपनी दुनिया. में थे। आज तक में भी जो मैंने आपको देखा. वहां तो क्योंकि मैं आपके कैबिन में आता. था मिलने आपसे कई बार। उन रेयर एंकर्स में. था जो आपके पास ज्यादा आते थे बात करने के. लिए। ये आप अलग-अलग अलग-अलग क्यों थे? क्योंकि मैं भी बहुत अलग रहा हूं। उसके. लिए बड़ा क्रिटिसाइज किया गया मुझे कि तुम. बहुत जेल नहीं होते हो। हालांकि मेरे एक. अपनी दुनिया थी। स्पेस था और फिर मुझे एक.
फ्री टाइम चाहिए होता था।. तो उसका एक छोटा जवाब तो आपने दे ही दिया. कि अगर आपका एक मेंटल स्पेस अलग है। अगर. आप एक अलग ज़ोन में हैं तो आपको ये पार्टीज. वगैरह की आवश्यकता नहीं पड़ती। मैं. पार्टीज में पहले भी नहीं जाता था और. मीडिया की पार्टीज में तो मैं बिल्कुल भी. नहीं जाता। क्योंकि मैं मीडिया की पार्टीज. में जो होता है मैं उससे अपने को रिलेट. नहीं कर पाता। मतलब जब मैं बॉस था तब भी. मैं मीडिया की पार्टीज में नहीं जाता था।. जो पार्टीज मैं खुद थ्रो करता था चैनल में. अपने बाकी लोगों के लिए उसमें भी आधा घंटा. जाके मैं निकल आता था और बाकी लोग पार्टी.
करते रहते थे। तो मैं और आज भी मैं. पार्टीज में नहीं जाता। मुझे पार्टीज समझ. में नहीं आती। आई फील वेरी लोनली इन अ. पार्टी क्योंकि मैं वो नेटवर्किंग वाले. कल्चर से आता नहीं हूं। मुझे नेटवर्किंग. आती भी नहीं है। पार्टी में. आप पूरी नकली बातें, नकली लोग, नकली. कॉम्प्लीमेंट्स तो आपको क्यों समय बर्बाद. करना है? तो इसलिए मैं कभी भी उस रास्ते. पर मैं गया नहीं और मीडिया में मेरा कोई. दोस्त नहीं है। मेरे जितने भी दोस्त हैं. सारे मीडिया के बाहर के दोस्त हैं। मैंने. मीडिया में कभी दोस्त नहीं बनाए। ये भी एक.
बात है। रोहित मेरा दोस्त था। मेरा कलीग. था और उसके बाद मुझे नहीं लगता कि मेरा. कोई और इतना करीबी कोई दोस्त रहा होगा. मीडिया में कि मेरे घर पे कोई आए। मैं. किसी के घर पे जाऊं। हम साथ मिलकर कहीं. पार्टी करें। तो मैं थोड़ा सा अलग ही रहा. हूं। अलूफ ही रहा हूं। अकेला ही रहता हूं।. ये मतलब ये मैं यहां मैं काफी रिलेट करता. था कि कई बार आपको समझ में नहीं आता है।. लोग अच्छा सर आप यह मानते हो जो नए बच्चे. होते हैं कई बार उनसे लोग कहते हैं कि आप.
जाओ लोगों में पार्टीज में जाओ नेटवर्किंग. होती है। ये हेल्प करता है या अपने ऊपर. काम करते रहो तो चीजें ऑटोमेटिकली होती. जाती है। आपके ऊपर डिपेंड करता है। अगर आप. बहुत. ईमानदारी से अपनी अपनी मेहनत कर रहे हैं. तो वो मेहनत का आपको फायदा होगा। लेकिन. ज्यादातर लोग आज भी पार्टीज में इसलिए. जाते हैं ताकि नेटवर्किंग हो जाए। पार्टीज. में जाने के बहाने काम मिल जाए। और ये जो. इंडस्ट्री है ये चलती भी ऐसे ही है। लोग. अपने लोगों को लाना चाहते हैं। जिनके साथ. वो कंफर्टेबल हैं उनके साथ लाना चाहते.
हैं। जो उन्हें अच्छी-अच्छी बातें बता. सके। जो ये एक एक मैंने फ्रेज सुना है. यहां बार-बार जब मैं लोगों के इंटरव्यूज. करता था नौकरी के लिए लोग आते थे। तो एक. चीज हर आदमी बोलता था। सर मुझे रख लीजिए. मैं आपका आदमी बन के रहूंगा।. जो भी आएगा सर मैं आपका आदमी बन के. रहूंगा। तो मैं कहता था कि भाई मैं अपने. लिए आदमी नहीं ढूंढ रहा हूं। तुम चैनल का. आदमी बन के रहो। तुम चैनल के लिए काम करो।. मुझे आदमियों की आवश्यकता नहीं है। ये. हमारे आई थिंक इंडस्ट्री की बहुत गंदी. बीमारी है कि आप कितने भी टैलेंटेड हो एक.
नया बॉस आएगा पूरी टीम साफ कर देगा। हां।. ये भी आपने मेरे लिए सुना होगा कि मैं. कहीं भी जाता हूं तो मैं कभी ऐसा एज सच. अपनी टीम लेके नहीं जाता हूं। एक चैनल से. दूसरे चैनल में गया, दूसरे से तीसरे में. गया। हर चैनल की एक अलग स्थिति होती है।. एक अलग इकोसिस्टम होता है। अलग चैलेंज. होता है। तो आप मेरिट के हिसाब से आप. लोगों को लेके जाओ। ना सिर्फ इसलिए. क्योंकि ये मेरा आदमी है। मेरे साथ बहुत. टाइम से काम कर रहा है। कुछ चीजें ऐसी. होती हैं। जैसे मान लीजिए मेरे शो का. राइटर है या मेरे शो का जो प्रोड्यूसर है. वो मेरे माइंडसेट को समझता है। वो जानता.
है कि मैं कैसे काम करता हूं। तो मैं उसको. लेके जाऊंगा। लेकिन बाकी जगहों पे शायद. मैं नए लोगों को ट्राई करना चाहूंगा। तो. आपका फेवरेट अब तक कौन सा इंटरव्यू रहा? आपने बहुत सारे इंटरव्यूज लिए जैसे मुझे. आपका अरविंद केजरीवाल वाला इंटरव्यू बड़ा. अच्छा लगता है। पार्लियामेंट के बाहर आप. लोगों ने अरविंद केजरीवाल का इंटरव्यू. बहुत अच्छा था। उसके बाद उन्होंने मुझे. कभी दोबारा इंटरव्यू नहीं दिया।. बट मैं एक्सपेक्ट कर रहा हूं कि मेरे. इंटरव्यू के बाद मुझे इंटरव्यू मिलेगा।. आई एम एक्सपेक्टिंग। नहीं नहीं नहीं इट. वाज अ और इस बार हम उनकी तरफ से भी आवाज.
उठाएंगे। नई सरकार उखेरने के लिए।. नहीं आप तो बहुत अच्छा इंटरव्यू करते हैं।. मुझे नहीं लगता आपको कोई मना करेगा। बट. मुझे समझ में नहीं आया उनको कौन सी ऐसी. मेरी बात बुरी लग गई। लेकिन उसके बाद. उन्होंने दोबारा कभी मेरे साथ इंटरव्यू. नहीं किया। लेकिन मोदी जी के मैंने जितने. भी इंटरव्यूज किए हैं वो बहुत चैलेंजिंग. थे। तो अगर आपको कभी ये देखना हो कि एक. ऐसा इंटरव्यू जो आपके लिमिट्स को चैलेंज. करे जिसके लिए आपको बहुत ज्यादा तैयारी. करके जाने की जरूरत है। वो प्रधानमंत्री.
का इंटरव्यू। मोदी जी का पहला इंटरव्यू कब. किया था आपने? उनका पहला इंटर एक्चुअली. पहला इंटरव्यू तो मैंने उनका तब किया था. जब वो बीजेपी में पदाधिकारी थे। उतना. पुराना किया था। इतना पुराना मैंने उनका. इंटरव्यू किया था। 90ज में 90 में तो वो. स्टूडियो में ही आते थे तब तो मुझे अभी भी. याद है। मैं आपको कभी दिखा दूंगा। वो. क्लिप्स मेरे पास अभी भी हैं। जिसमें वो. स्टूडियो में हैं। मेरे ही साथ बैठे हैं. और जब वो बीजेपी के प्रवक्ता होते थे, पदाधिकारी होते थे तो वो स्टूडियो में आते.
थे और बहुत अच्छे तरीके से अपनी बात कहते. थे। इंटरेस्टिंग। फिर जब वो मुख्यमंत्री. बने तब मैंने उनका इंटरव्यू किया। जब जैसे. ही बने थे फिर जब गुजरात दंगे हुए उस. दौरान भी मैंने उनका एक इंटरव्यू किया था. और उसके बाद जब वो प्रधानमंत्री बने उसके. बाद तो कई बार मैंने इंटरव्यू किया है। तो. क्या बदलाव देखा आपने उस व्यक्ति में जो. स्टूडियो में आता था तो उस टाइम शायद वो. इन्वॉल्व्ड होते होंगे कि मुझे थोड़ा. स्पेस और दीजिएगा क्योंकि मैं जानता हूं. अंदर कैसे फंक्शन होता है। दोस्ती करते. हैं। फिर वो चीफ मिनिस्टर बने। एंड नाउ ही. प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया। एक चीज मैंने.
नोट की हर फेज में जब वह बीजेपी के. पदाधिकारी थे तब भी बाकियों से आगे सोचते. थे और बाकियों से अलग सोचते थे। जब. मुख्यमंत्री बने तो भी बहुत आगे का सोचते. थे और बाकियों से बहुत अलग सोचते थे। और. जब प्रधानमंत्री भी बने तब भी मैंने यह. देखा वो बहुत आगे का सोचते हैं और बहुत. अलग सोचते हैं और उनकी जो सोच हम हमारी. सोच वहां जा ही नहीं सकती जहां वो जहां से. वो शुरू करते हैं। यह मुझे उनकी बात अच्छी.
लगती है कि मतलब ही हैज़ रियली रियली. एक्सपेंडेड हिज लिमिट्स। कैसे आप अपनी. लिमिट को अपने बढ़ाते चले जा रहे हैं। तो. जब मैं कई बार सोचने की भी कोशिश करता हूं. कि इस सिचुएशन में वो क्या करेंगे तो आप. अंदाजा नहीं लगा सकते क्योंकि जहां आपकी. क्षमता खत्म हो जाएगी उनकी शुरुआत वहां से. होती है। ये बात मुझे उनकी बहुत अच्छी. लगी। प्रेशर होता है उनका इंटरव्यू लेने. में। हमारे ऊपर तो बहुत होता है। वो इसलिए. क्योंकि वो मतलब एक होता है कि सेल्फ. प्रेशर हमने लिया कि प्रधानमंत्री हैं. ज्यादा तैयार होंगे। एक होता है जो आता है.
प्रेशर। वैसा प्रेशर होता है या अपना. सेल्फ आपने प्रेशर नहीं यार जितने तैयार. हैं वो नहीं एक सेल्फ प्रेशर तो है ही. क्योंकि आप इतना बड़ा देश क्या शायद. दुनिया का सबसे बड़ा इंटरव्यू करने आप जा. रहे हैं तो एक प्रेशर होगा आपके ऊपर लेकिन. दूसरा प्रेशर ये है कि वो ही इज नॉट अ इजी. पर्सन टू इंटरव्यू क्योंकि हर आंकड़ा. उन्हें याद है। उनके फिंगर टिप्स पे एक-एक. चीज है। उनकी याददाश्त इतनी तगड़ी है कि. अगर आप 25 साल पुरानी भी बात अगर आप करोगे. तो वह शायद आपसे बेहतर उनको याद होगा और.
वह आपको करेक्ट कर देंगे। तो जब आप उनका. इंटरव्यू करेंगे ना आपने जरा भी कुछ कोई. स्टेटमेंट दिया तो वो आपको करेक्ट कर सकते. हैं। आपने कोई आंकड़ा दिया तो आपको करेक्ट. कर सकते हैं। इसलिए आपको पूरी तैयारी के. साथ उनके साथ सामने बैठना पड़ेगा कि आपका. हर आंकड़ा हर स्टेटमेंट बिल्कुल सधा हुआ. हो जिसमें आगे पीछे होने की गुंजाइश ना. हो। अच्छा आई थॉट अमित शाह इज अ टफेस्ट. पर्सन। नो ही इज़ आल्सो ही इज़ आल्सो लाइक. दैट बिकॉज़ ही रिसोंड्स वो आपको मुंह पे.
जवाब देंगे। बिल्कुल अमित शाह का भी ऐसा. ही है। उनको भी पूरा होमवर्क उन्होंने. किया हुआ है। देखिए कुछ लोग तो ऐसे होते. हैं जो होमवर्क एक्स्ट्रा करते हैं कि भाई. इंटरव्यू से पहले थोड़ी तैयारी कर ली। ये. ऐसे लोग हैं जो ऑलरेडी तैयार रहते हैं। 24. घंटे उसी मोड में हैं। उनको एक्स्ट्रा ना. पेपर पढ़ने की जरूरत है, ना कोई आंकड़े. देखने की जरूरत है, ना कोई रिसर्च मंगवाने. की जरूरत है। दे आर रेडी। आप मतलब उनसे. अभी जाके अभी इंटरव्यू कर लो। दे विल. रिमेंबर ईच एंड एवरीथिंग। हर आंकड़ा उनकी.
फिंगर टिप्स पे होगा और आपको बता देंगे कि. यह ऐसे है, यह ऐसे है, यह ऐसे है। और हर. फैसले के पीछे आपको ऐसा कन्विंसिंग लॉजिक. भी देंगे कि आप उसका नहीं निकाल पाएंगे।. तो अपार्ट फ्रॉम पॉलिटिक्स पॉलिटिक्स के. लिए एक पार्ट हो गया क्योंकि आप मोदी जी. को तब से जान रहे हो 90 से। हम नहीं. जानते। मैंने उनको इवॉल्व होते हुए देखा. है। उनके ड्रेसिंग सेंस बेहतर होते देखा।. अपने ग्रूमिंग पर काम करते हुए देखा, अंग्रेजी सीखते हुए देखा। मैं कई बार कहता. हूं कि मुझसे बेहतर वो हिंदी बोल लेते. हैं। जो पर्सनालिटी पे काम कर रहा है जिसे. हम कहते हैं और एक एंकर के तौर पर हम ये. चीजें नोटिस करते हैं। आपने अपार्ट फ्रॉम.
पॉलिटिक्स उनमें क्या है ऐसा जो हम सीख. सकते हैं।. अ. संगठन की उनकी जो क्षमता है।. टीम बनाने की जो उनकी क्षमता है। आप यह. देखिए कि उन्होंने हर जगह जहां भी वो रहे. हैं जिस भी पद पर रहे हैं। उन्होंने अपनी. जो एक टीम बनाई है, कितनी सशक्त टीम बनाई. है। यही व्यवस्था इस देश की जिसको हम यह. कहते थे कि बड़ी लचर है। इसमें कुछ नहीं. हो सकता। उसी व्यवस्था में उन्हीं अफसरों. के साथ उन्हीं हालात में उन्होंने रिजल्ट.
निकाल के आपको दिया है। और उनको पता है कि. इसी सिस्टम में से बेस्ट लोगों को निकाल. के टीम कैसे बनानी है। आज आप पीएमओ की टीम. देखिए। कितनी जबरदस्त टीम है वो और इसी. व्यवस्था में से उन्होंने बनाई है। ऐसे. लोगों को ले आए हैं। वहां आप देखेंगे. एक-एक आदमी 2020 घंटे काम कर रहा है। एंड. दे आर डिलीवरिंग लाइक एनी. वर्ल्ड क्लास मल्टीीनेशनल कंपनी।. इस तरीके से वो काम करते हैं। आप कभी जाके. देखिए उनके ऑफिस में। आपको ऐसा लगेगा कि.
आप किसी बहुत बड़ी मल्टीीनेशनल ग्लोबल. कंपनी के ऑफिस में गए हैं। जहां पर एकदम. हर आदमी का जो किरे है वो एकदम फिक्स्ड. है। एवरीबॉडी इज सो प्रोफेशनल। और हर आदमी. को ब्रीफ है पूरा कि उसको क्या करना है।. दूसरे आदमी को क्या करना है। एंड एवरीबडी. इज वर्किंग टुवर्ड्स द नेशन एंड टुवर्ड्स. द गवर्नमेंट एंड दे आर रिस्पांसिबल टू दी. प्राइम मिनिस्टर।. ऐसा डिसिप्लिन और ऐसी वेल ऑइल्ड.
ऑर्गेनाइजेशन और एक मशीनरी यह सीखने की. बात है। तो जब हम कंपनीज़ बनाते हैं जैसे. मैंने मैंने बड़ी-बड़ी कंपनीज़ चलाई है। मैं. जी का सीईओ रहा हूं। अब मैं अपनी कंपनी. चला रहा हूं। आप अपनी कंपनी चला रहे हैं।. ये कंपनीज़. आपका मैनेजमेंट का जो हुनर है वो क्या. होना चाहिए? कैसे लोगों को आप अपनी टीम. में लेके आएंगे? चूज़ कैसे करेंगे कि मैं. इस आदमी को लेके आऊंगा। फिर उस आदमी को. ग्रूम करना। फिर उस आदमी को यह बताना कि. आपका केआरए यह है। आपको यह काम करना है और. ऐसे परफॉर्म करना है। एंड देन दे ऑल.
स्टार्ट परफॉर्मिंग आल्सो। यू आर अचीविंग. ऑल योर गोल्स एंड कीप देम मोटिवेटेड ऑल द. टाइम। आज के टाइम में आप किसी से 15 18. घंटे काम करवा के देखिए। कोई नहीं करेगा।. भाग जाएंगे लोग। हमारे साथ भाग जाते हैं।. बट मैंने देखा कि लोग शौक से दिल लगा के. खुश होकर उनके साथ काम करते हैं और. रिजल्ट्स ला के दे रहे हैं। ये मैंने मतलब. एक बाकी लोगों से मैंने देखा लोग कहते हैं. कि यहां यहां तो हो ही नहीं सकता कुछ।. भारत सरकार में तो कुछ नहीं हो सकता।.
सरकार ऐसे ही चलती है। अ हिंदुस्तान का. कुछ नहीं हो सकता। ये हम सुनते हुए आ रहे. हैं। बट उसी सिस्टम में काम करते हुए. उन्होंने कितने अच्छे रिजल्ट्स दिए हैं।. ओके। क्योंकि एंड सेगमेंट पे हम आ गए।. अपोजिशन में कोई एक नेता जिसका इंटरव्यू. लेने में आपको लगा हो कि यार ये बड़ा वेल. प्रिपयर्ड था। ये अच्छी तैयारी के साथ है।. देखिए अपोजिशन के लोगों ने तो बहुत समय से. मुझे कोई इंटरव्यू दिया ही नहीं। कोई लगता. हो कि यार ये बड़ा अच्छा है। इसका. इंटरव्यू करेंगे तो मजा आएगा। तो आपको पता. है ना कि अपोजिशन ने इंडिया गठबंधन ने. मुझे बैन किया हुआ है। उन्होंने जो लिस्ट.
निकाली थी जर्नलिस्ट की उसमें मैं भी था. कि इनके साथ हम कभी बात नहीं करेंगे। इनके. शो में हम कभी नहीं जाएंगे। और तो अब तो. मुझे लगता है कि जमाना हो गया जब अपोजिशन. का कोई जैसे मैंने अखिलेश यादव जी का. इंटरव्यू किया। मुझे बड़ा मजा आया। मैंने. उनसे सब पूछा जैसे मैं आपसे पूछ रहा हूं।. ऐसे मैंने उनसे पूछा वो मेरे टुवर्ड्स. सम्मानित मैं उनके टुवर्ड और हमने बहुत. सारी कंट्रोवर्शियल चीजें अच्छी चीजें बात. की और मुझे आनंद आया कि ऐसे संवाद होना. चाहिए। तो कोई ऐसा अपोजिशन का नेता तो मैं.
आपको बताता हूं। अभी मैंने कई साल से. अपोजिशन के तो किसी नेता का इंटरव्यू नहीं. किया। देखा हो आपको लगता है कि वो मुझसे. बात नहीं करते। लेकिन मैं पर्सनली उनको. जानता हूं। अखिलेश यादव को पर्सनली जानता. हूं। अखिलेश यादव को मैं जब वो. मुख्यमंत्री बने थे या शायद नहीं बने थे. उससे पहले से जानता हूं। एज अ ह्यूमन. बीइंग बहुत अच्छे आदमी हैं। बहुत अच्छे. इंसान हैं। मैं उनके घर कई बार गया हूं और. बहुत दोस्ताना. व्यक्ति हैं। आपका पूरा सम्मान करते हैं।.
आज भी हम कभी भी मिलते हैं। ही इज अ वेरी. गुड ह्यूमन बीइंग। अब पॉलिटिक्स में. विचारधारा है, पॉलिटिक्स है। वो आप कोई. स्टैंड लेते हैं वो अलग बात है। बट. अदरवाइज एज अ पर्सन आई रियली रियली लाइक. एंड रेस्पेक्ट अखिलेश यादव। असदुद्दीन. ओवैसी मैं कभी उनको अभी मैं एक दिन खान. मार्केट में किसी कॉफी शॉप में था और वो. अकेले बैठ के कॉफी पी रहे थे। अब कहीं वो. नाराज ना हो जाए मुझसे। अच्छा एक और ये. सीक्रेट मैंने बता दिया बट वो एक दिन कॉफी. पी रहे थे और मैं जाके खड़ा हो गया एंड.
देन वी स्पोक फॉर 10-15 मिनट्स। कितने. बढ़िया आदमी हैं। आप उनसे बात करके देखिए।. ही सच अ नाइस मैन। मैं एक बार हैदराबाद. उनके घर गया था बहुत साल पहले उनका. इंटरव्यू करने के लिए। काफी पहले की बात. है। उन्होंने इतनी बढ़िया मेहमान नवाजी की. मेरी और इतने अच्छे से वो मेरे साथ पेश. आए। तो. इससे पहले जब मैं रिपोर्टिंग करता था शरद. पवार साहब का इंटरव्यू करता था। वेरी नाइस. मैन वेरी शरद पवार से मैंने ये सीखा कितने. डिसिप्लिंड हैं। सुबह 6:00 बजे से काम.
शुरू कर देते थे उस टाइम। मैंने 2019. इलेक्शन में पहला इंटरव्यू उनका किया था।. तो बट नेक्स्ट टाइम प्लीज मीट ओवैसी जी।. तो उनसे कहिएगा मुझे अनब्लॉक कर दे और. मुझे एक इंटरव्यू दे। जरूर मैं बोलूंगा।. मुझे भगवान जाने उन्होंने दो दो तीन साल. मैंने मैंने बिना इंटरव्यू के जो मैं. अलग-अलग इन लोगों से मिला हूं पर्सनल लेवल. पे एज अ ह्यूमन बीइंग वही खराब कॉन्क्लेस. में मैं मिला हूं कई बार इन लोगों से. अच्छे हैं और बहुत ही दिली से मिलते हैं।. राहुल गांधी को मैं 2008 9 10 रेगुलरली. मिला करता था क्योंकि हम एक हेल्थ क्लब.
में जाते थे जहां वो भी आते थे वर्कआउट. करने के लिए और मैं भी जाता था और मैं. अक्सर उनसे वहां जिम में मिलता था। मतलब. जिस तरीके से वो बात करते थे बहुत अच्छी. तरीके से कोई उनके अंदर मैंने उस समय कोई. अहंकार नहीं देखा जब जबकि उस समय उनकी. सरकार थी तो अगर आप उनसे नॉन पॉलिटिकल. बातचीत करो दे आर ऑल वेरी नाइस सब बहुत. अच्छे हैं लेकिन जैसे ही तेजस्वी यादव से. मैं कई बार मिला मैं मिलता हूं वेरी नाइस. पर्सन लालू यादव इतने अच्छे इंसान है लालू.
यादव मुझे यह याद है कि जब यूपीए सरकार ने. मेरे ऊपर यह झूठा केस लगाया था। लालू यादव. उस समय यूपीए के पार्ट थे और मंत्री भी. थे। लालू यादव और शरद यादव दो लोग ऐसे थे. जिन्होंने खुल के मेरे पक्ष में आवाज उठाई. थी और कहा था कि यह गलत हुआ है और. उन्होंने पूरी मदद की थी मेरी। उस टाइम. पूरी कोशिश की कि मुझे न्याय मिले। आप. सोचिए सरकार में बिलीव नहीं करेगा। सरकार.
में रहते हुए उन्होंने मेरी पूरी मदद की।. और मैं उनके घर गया। शरद यादव साहब के घर. गया। लालू यादव के घर गया और मैंने दोनों. का धन्यवाद किया और मैंने कहा कि देखिए. मैं जानता हूं आपकी लिमिटेशंस हैं क्योंकि. आप सरकार के साथ हो और सरकार की लड़ाई. मेरे साथ चल रही है। बट उन्होंने एक बार. भी यह छुपाया नहीं। उन्होंने कभी मुझसे यह. नहीं कहा कि भाई दिन में मेरे घर पे मत. आना। उस समय कई लोग ऐसे थे सरकार में. मंत्री जो कहते थे कि दिन में हमारे घर मत. आना। अगर हमारे बड़े नेताओं ने आपके साथ.
देख लिया तो हमारे नंबर कट हो जाएंगे। पर. इन्होंने कहा कि नहीं आप कभी भी आ सकते हो. कोई दिक्कत नहीं है। आप बताओ मैं आपके साथ. कहां चलूं? चलने को तैयार हूं। तो लालू. यादव उस हिसाब से आप देखें बहुत बेहतरीन. इंसान है। शरद यादव तो अब इस दुनिया में. नहीं है। बट वेरी गुड पीपल। मैं लालू जी. पे एक वीडियो बना उससे कैसे आप जरूर. बताइएगा। और लालू जी को याद होगा। मैं. लालू जी के घर गया था इमीडिएटली और मैंने. उनका बहुत धन्यवाद दिया था उस टाइम।. इंटरेस्टिंग। अच्छा एक सवाल मेरे मन में. और आ गया सर खान मार्केट से। बहुत सारे. लोगों ने कहा कि सुधीर जी अक्सर अपने शो.
में कहते हैं खान मार्केट गैंग खान और. सबसे ज्यादा वो खान मार्केट में मिलते. हैं। किसी को सुधीर चौधरी से मिलना हो तो. खान मार्केट ढूंढ लो उन्हें। तो खान. मार्केट मैं इसलिए जाता हूं क्योंकि वो. खान मार्केट को हमें रिकैप्चर करना है।. देखिए खान मार्केट पे वर्षों से दशकों से. खान मार्केट गैंग का वर्चस्व रहा है और. खान मार्केट गैंग ये समझने लगा था कि ये. हमारा ही है और यहां कोई आ नहीं सकता। तो. मैंने अभी ये इंश्योर किया है कि ये खान. मार्केट को खान मार्केट गैंग से छीन लेना. है। उसके लिए वहां जाना जरूरी होगा और. धीरे धीरे धीरे आप सबको जान के बड़ी खुशी.
होगी कि हमने उस खान मार्केट गैंग को वहां. से अब लिटरली बाहर निकाल दिया है। तो अब. वहां वो खान मार्केट गैंग अब बचा ही नहीं. है। अब सिर्फ हम ही लोगों का गैंग है. वहां। आपने इस देश में कई सारे गैंग दिए. हैं। टुकड़े-टुकड़े गैंग, खान मार्केट. गैंग। हां ये देखिए जब आप अपनी स्क्रिप्ट. के बारे में सोचते हैं ना ध्यान से सोचते. हैं तो नई-नई चीजें देखने को मिलती हैं।. नए-नए शब्द आपको आते हैं। जैसे आपने कहा. कि टुकड़े-टुकड़े गैंग ये उस समय हम जब.
बात करते थे तो यह बहुत अच्छा एक शब्द आ. गया और वो शब्द सुपरहिट हो गया और बाकी. लोगों ने भी उसको अपना लिया। इसी तरीके से. अगर आप देखें तो ये जो पॉजिटिव कोट्स जो. हमने शुरू किए ये शुरू तो मैंने किया था।. लोगों ने उस समय बड़ा बेवकूफ कहा कि ये. क्या है? ये तो न्यूज़ नहीं है। आप देखिए. सब ने ले लिया उसको। तो अच्छा लगता है कई. बार ऐसा कि ठीक है इंडस्ट्री में आपने कुछ. कुछ चीजें ऐसी की जो आपने पहली बार की नए. प्रयोग किए और लोगों ने उसको अपना लिया तो. अगर मैं समराइज करते हुए कहूं कि सफलता. क्या है अब आपकी नजर में अब आपने कई.
उतार-चढ़ाव देख लिए. कौन सफल है अपने जीवन को चुनने की आजादी. यह सफलता है सबसे बड़ी क्या आप अपने जीवन. में क्या करना चाहते हो आप यह चुनने के. लिए आजाद हैं कैसे करना चाहते हो क्या यह. चुनने के लिए आजाद हैं। किसी चीज को ना. कहने के लिए आजाद हैं। अपना जीवन अपनी. शर्तों पर जीने के लिए आजाद हैं। यह सबसे. बड़ी आजादी है। सबसे बड़ी सफलता है। जब तक.
आप उस मोह में पड़े रहते हैं या जब तक आप. एक कमजोर स्थिति में होते हैं। आप नौकरी. को ना कहने की स्थिति में नहीं होते। हम. आपका चैनल आपसे कुछ कहे कि यह करना है, आप. ना कहने की स्थिति में नहीं होते। आपका. दिन का स्ेड्यूल आपका चैनल तय करेगा। आप. शो कौन सा करोगे आपका चैनल तय करेगा। कब. आओगे, कब जाओगे, मार्केट फोर्सेस तय करती. हैं। धीरे-धीरे धीरे-धीरे जब आप निकलते. हैं, एक बेड़ी को तोड़ा, फिर दूसरी को. तोड़ा, फिर तीसरी को तोड़ा। फाइनली.
अगर आप पूरी तरह स्वतंत्र हैं अपना जीवन. जीने के लिए मेरे ख्याल से वो सबसे बड़ी. सफलता है। और इसीलिए अगर आप देखेंगे आखिर. में जो दुनिया के जो बड़े से बड़े लोग हैं. देखिए रुपया पैसा तो एक एक लिमिट के बाद. मायने नहीं रखता। कितना ही खा लेंगे आप, कितने के ही कपड़े पहन लेंगे, कितने के. मकान में रह लेंगे, कितने की गाड़ी ले. लेंगे? उसके बाद क्या है? उसके बाद है. फ्रीडम टू चूज़ योर लाइफ। वो नहीं है लोगों. के पास। और जिसके पास वो आ गई मेरे ख्याल. से सबसे सुखी इंसान वही है। और मैं जीवन.
में अपने जीवन में उसी तरफ बढ़ने की कोशिश. कर रहा हूं। इसीलिए धीरे धीरे-धीरे पहले. एक बेड़ी को तोड़ता हूं। फिर दूसरी बेड़ी. को छोड़ता हूं। फिर तीसरी को छोड़ता हूं।. और यह सोच के चल रहा हूं कि एक दिन ऐसा. आएगा जब मैं अपने जीवन में कुछ भी चूज. करने के लिए स्वतंत्र रहूंगा कि मैंने. मुझे ऐसे जीना है। अब देखिए यह जो जीवन है. या तो सेंट्स जीते हैं ऐसे जो सन्यासी है. उसने तो सभी छोड़ दिया। तो वो स्वतंत्र.
है। वह कुछ भी कर सकता है। कहीं भी जा. सकता है। कहीं भी बैठ जाएगा, कहीं भी सो. जाएगा। एक तो वह है। लेकिन हम लोग तो. सन्यासी नहीं बन सकते।. काम करते रहते हुए. इन्हीं सांसारिक बंधनों के बीच में इन्हीं. ट्र्स के बीच में रहते हुए ₹2 वाले. ट्रोल्स यह फैक्ट चेकर्स. ये सारे नेता ये सारी राजनीति ये सारे. बाजारवाद ये सब कुछ इसमें रहते हुए भी. क्या आप एक अच्छा जीवन जी सकते हैं? साफ. सुथरा जीवन जी सकते हैं। और अपनी मर्जी से.
अच्छा साफ सुथरा कंटेंट बना सकते हैं जैसा. आप चाहें। और इसीलिए मैंने दूरदर्शन को. चुना क्योंकि दूरदर्शन में आपको. यह नहीं सोचना कि मसालेदार खबर होनी चाहिए. या बाजारवाद से जुड़ी हुई खबर होनी चाहिए।. वो एक चैनल ऐसा है जो कि नेशनल कॉज से. जुड़ा हुआ है। देश के लिए राष्ट्र के लिए. और अगर मुझे भी देश के लिए कुछ करना है तो. दूरदर्शन से अच्छा और कोई प्लेटफार्म नहीं.
हो सकता। और मैं वो वाली जो ग्लोरी थी. दूरदर्शन की उसको वापस ले आना चाहता हूं।. एंड होपफुली आई विल बी एबल टू डू दैट जब. हर घर में दूरदर्शन चला करता था। अगर वैसा. हो जाए दोबारा तो देखिए उससे अच्छी बात. क्या हो सकती है। विश यू लक एंड सक्सेस. एंड लास्ट क्वेश्चन सर क्योंकि आज तक. छोड़ने के पहले मैंने आपसे संवाद किया था. और आपने तब मुझसे कहा था कि इतनी. जल्दी-जल्दी चैनल नहीं छोड़ते हैं। सी आई. टूक 10 इयर्स सी में धीरे-धीरे लोग जानते. हैं। एंड आई सेड सर अब दौर चेंज हो रहा. है। सोशल मीडिया आ रहा है और आज हम और आप.
पॉडकास्ट कर रहे हैं। हमारे जैसे लोग जो. नया स्टार्टअप कर रहे हैं, नया सेटअप कर. रहे हैं। एक अपने तरीके से कोशिश कर रहे. हैं या स्पेशली अगर हम अपने बारे में बात. करें। आप कैसे देखते हैं एक नजरिए से? प्लीज बी वेरी ऑनेस्ट नहीं शुभाकर इफ आई. स्पेसिफिकली लुक एट यू तो पहली चीज ये है. कि कुछ नया करने की हिम्मत होनी चाहिए. वरना किसी भी बहुत बड़े चैनल में एक. ठीक-ठाक सी सैलरी पर हमेशा काम कर सकते हो. और धीरे-धीरे आप आगे भी बढ़ सकते हो. धीरे-धीरे लेकिन दूसरे की मर्जी से दूसरे.
की शर्तों पर दूसरे के बताए रास्ते पर और. दूसरे के बताए हुए कंटेंट को दिखा के. इस चक्र को तोड़ने के लिए बहुत हिम्मत. चाहिए। तो आपने पहली चीज तो दिखाई आपके. अंदर हिम्मत है। 99% लोग तो यही फेल हो. जाते हैं। वह हिम्मत ही नहीं दिखा पाते।. सेकंड चीज यह है कि कुछ नया करने का. प्रयोग करने की इच्छा वो भी आपके अंदर है।. अब थर्ड आता है कंटेंट कि आप. कंटेंट में कौन सा स्पेस उपलब्ध है और आप.
किस स्पेस के लिए लड़ाई कर रहे हो। तो. मुझे ऐसा लगता है कि आपको देखना चाहिए कि. कौन-कौन से कंटेंट में कमियां हैं, खामियां हैं। गैप्स कहां-कहां पर हैं।. जैसे मैंने यह कहा कि हमारे देश में. ग्रामीण भारत ऐसा है। वो कहीं एजेंडा. सेटिंग में है ही नहीं। तो क्या उनके लिए. कुछ कर सकते हैं? तो आई थिंक आप आपकी जो. जर्नी है वह बहुत अच्छी है और बहुत अच्छे. से आपने स्टार्ट किया है। बहुत अच्छा आपने. एक्सपेंड किया है और धीरे-धीरे आप जब.
डायवर्सिफाई करोगे तो और ज्यादा आप आपका. पेनिट्रेशन और डीप होगा। जैसे हमारी कोशिश. थी जैसे आपने कहा ना कौन सा स्पेस खाली है. तो हमने ये सोचा था कि इस देश में अक्सर. पत्रकारों को टैग दे देते हैं लोग। हम. चाहते थे कि हम सबसे संवाद कर सके। हर एक. पार्टी के लोग आ सकती है जानते हुए कि ये. हमसे टफ सवाल पूछेगा लेकिन नियत खराब नहीं. होगी हम और बीते कुछ समय में हमें खुशी है. कि बीजेपी और कांग्रेस सपा या बाकी आरजेडी.
और कई अलग-अलग पार्टियों के लोगों ने अब. तक हम पर वो भरोसा रखा है और जनता ने भी. वो उस चीज का लुत्फ उठाया कि हम सबकी बात. कर रहे थे। आपको पता है आपकी अच्छी बात ये. है कि आप सारे सवाल पूछ लेते हैं।. एक्चुअली किसी को भी सवाल से समस्या नहीं. होती। आप किसी भी नेता को बुलाइए और ऐसे. सवाल पूछिए जो उसके लिए अनकंफर्टेबल हो वह. जवाब देगा। आपने मेरे से भी इतनी सारी. चीजें पूछी जो मुझे अनकंफर्टेबल कर सकती. थी। पर आप जानते हैं कि मुझे विश्वास क्या. था? मैंने उन सब सवालों का जवाब क्यों दे. पाया वो भी दिल से वो इसलिए क्योंकि मुझे.
आपकी मंशा के ऊपर शक नहीं है। अगर मुझे. आपकी मंशा के ऊपर अब यही सवाल मुझसे कोई. ऐसा व्यक्ति पूछता है जिसके मन में खोट. है। मिलावट है। मंशा ठीक नहीं है। तो शायद. मैं वो बात ना करता। मैं जवाब ही नहीं. देता। तो आपकी जो सबसे अच्छी बात है जो. आपको आगे तक बनाए रखना है वह यह है कि जो. आप करो ईमानदारी से करो और अपनी मंशा जो. है वो अच्छी रखो। वो पॉजिटिव होनी चाहिए।. देखो गलतियां तो सबसे होती है। हम इंसान. हैं। 100% रोज गलती ऐसा नहीं हो सकता कि.
गलती ना करें। आप लोग हम लोग रोज टीवी पे. आते हैं। लाइव होते हैं। ऐसा कैसे होगा कि. किसी दिन गलती ना हो। होगी। क्यों नहीं. होगी? बट वो गलती क्यों की जा रही है? उसके पीछे कोई मिलावट है, मंशा है? क्या. वो गलती किसी से पैसे ले कर रहे हैं हम. लोग? या वो एक अनजाने में की गई गलती है।. फॉर्मेट ऐसा है कि गलती हो ही सकती है। तो. ये तो है ही। आप हर रोज अगर रेस दौड़ते. हैं, हर रोज अगर मैच खेलते हैं आप तो मैच. में आउट तो होंगे किसी ना किसी दिन। किसी.
दिन आपका शॉट ठीक नहीं लगेगा। किसी दिन. विकेट जल्दी गिर जाएगी। रोज सेंचुरी नहीं. बना सकते। बट मंशा इज़ वेरीेंट। व्हाट आई. लाइक अबाउट यू इज़ दैट आई सी अ पॉजिटिविटी. इन एवरीथिंग व्हाटएवर यू डू और आप जो सवाल. पूछते हो उसके पीछे मंशा खराब नहीं होती. तो फिर आप चाहे सत्ता से पूछो विपक्ष से. पूछो मुश्किल सवाल पूछो उससे कोई खास फर्क. नहीं पड़ता। सो आई थिंक इफ यू कीप गोइंग. ऑन दैट पाथ तो ऑनेस्टी इज़ वेरीेंट। यह. ऑनेस्टी जो है ना यह हमारे इसके बारे में.
कोई बात ही नहीं करता। ऑनेस्टी इज़. वेरीेंट। और ऑनेस्टी इज़ पार्ट ऑफ़. डिसिप्लिन ऑफ योर लाइफ। तो जैसे आप. डिसिप्लिन लाइफ जीते हो, सुबह उठते हो, आपने मेरे रूटीन के बारे में पूछा, मैं. सुबह उठता हूं। उठते ही मुझे चाय चाहिए. होती है। और मैं पूरी ऑनेस्टी के साथ 10. अखबार पढ़ता हूं। जिसमें मैं एक भी दिन. मिस नहीं करता। रोज रोज 10 अखबार पढ़ता. हूं। मेरे टेबल पर जब मैं आता हूं चाय. पीने के लिए ऐसे सामने, तो 10 अखबार रखे. होते हैं। ये अखबार क्यों पढ़ते हैं? और. अखबार पढ़ने कितना समय होता है? मतलब सुबह.
कब तक अखबार पढ़ना चाहिए? तो यह 10 अखबार. पढ़ने में मुझे एक से डेढ़ घंटा लगता है. और यह 10 अखबार पढ़ने के बाद फिर मैं अपनी. मीटिंग में और कितने में पढ़ते हैं अखबार? आप समझ लीजिए मैं शुरू करता हूं 10 बजे के. आसपास अखबार पढ़ना शुरू करता हूं। तब तक. तो नई खबरें आती होंगी तो फिर अखबार क्यों. पढ़ता है? 10 से लेके 11:30 तक मैं अखबार. पढ़ता हूं। नहीं उससे कोई फर्क नहीं. पड़ता। लेकिन आप नई खबरें तो आ रही हैं।. तो नई खबरें जो आ रही हैं वो आप अपने सोशल. मीडिया पे देख लीजिए। अपने फोन पे देख. लीजिए। लेकिन अखबार लॉन्ग रीडिंग है। तो.
एक है आपकी शॉर्ट रीडिंग। आजकल जो खबरों. में जो जान निकलती जा रही है वह यह है कि. लोग डिजिटल प्लेटफार्म पे सिर्फ एक. हेडलाइन पढ़ लेते हैं। अंदर नहीं पढ़. पाते। अखबार इज लॉन्ग रीडिंग। अगर आपने 10. अखबारों के 10 संपादकीय पढ़ लिए। 10. अखबारों में जो अलग-अलग लेख छपे हैं आपने. पढ़ लिया। एक ही खबर को 10 अखबारों ने. कैसे अलग-अलग तरीके से रिपोर्ट किया है. अगर आपने वो पढ़ लिया तो आपका दिमाग खुल. जाता है। और ये मीडिया के सारे बच्चों को. करना चाहिए। और ये मीडिया के और इसीलिए. मैं कहता हूं डिजिटल नहीं फिजिकल अखबार.
क्योंकि फिजिकल अखबार में आपको ये समझ में. आता है कि अगर आपके पास एक अखबार के अंदर. 25 पेज में 250 खबरें हैं उन 250 खबरों को. किसको फ्रंट पेज पर लेना है किसको पेज. नंबर दो पे लेना है किसको बॉक्स में लेना. है किसको बॉटम में लेना है वोेंस. पत्रकारिता के जो छात्र हैं उनको उनको यह. बात पता होनी चाहिए जो कि वो शायद नहीं कर. पा रहे हैं तो ये तो पहला लेसन है कि अगर. आपने अखबार नहीं पढ़ा शुरुआत तो एक अखबार. से फिर दो फिर तीन फिर चार फिर पांच.
जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते जाओगे और मैं आपको. बताता हूं कि जब आप बहुत आगे निकल जाओगे. आपका पांच छह अखबार से भी काम नहीं चलेगा. यू विल फील लाइक रीडिंग मोर. जिस दिन मैं बिना अखबार पढ़े घर से निकलता. हूं आई डोंट फील कॉन्फिडेंट मुझे ऐसा लगता. है कि आज मैंने बेईमानी की है आज शॉर्टकट. मारा है आज अपने कोच को बोल दिया कि मैंने. पूरी रनिंग कर ली और तब मैं आया हूं. वर्कआउट कर लिया लेकिन किया नहीं झूठ बोल. दिया अपने आप से ऐसा लगता है कि आज. बेईमानी की है और उस दिन रात हद तक वो. कॉन्फिडेंस की कमी मेरे अंदर रहती है।.
इंटरेस्टिंग आई मीन ये मैं शुरू में आता. लोग कह रहे थे अखबार का अखबार इज वेरीेंट. हमारे लिए तो अखबार ही बाइबल है। सारे नॉट. जस्ट वन बट ऑल ऑफ देम।. थैंक यू सो मच सर। लवली टॉकिंग टू यू।. आपको भी शायद एहसास नहीं होगा। ढाई घंटे. से ऊपर हो चुके हैं।. ये बहुत लंबा शो हो गया। बट मुझे लगता है. लोग सुनेंगे। लोग कहते हैं कि 30 सेकंड की. सोशल मीडिया रील पे लोग देखते हैं। बट आई. एम श्योर जब यह पॉडकास्ट आएगा तो आपको. बहुत सारे कमेंट मिलेंगे जो कहेंगे कि 2ाई.
घंटे हमने देखा। देखिए मुझे उम्मीद है कि. लोगों को पसंद आएगा। बस मैं आपको यही बता. सकता हूं कि पूरी ऑनेस्टी से ईमानदारी से. मैंने जवाब दिए हैं। उसमें भी किसी को अगर. कुछ खोट नजर आए तो मैं कह नहीं सकता। बट. इतना दिल खोल के मुझे नहीं लगता मैंने कभी. किसी से इससे पहले बात की है। उनके लिए आप. जवाब नहीं दे रहे हो। आप उनके लिए जवाब दे. रहे हो जो मैंने एक कमेंट पढ़ा था।. बिल्कुल। वो उन लोगों के लिए ये पडकास्ट. था। सो मुझे लगता है कि वो शायद आप आपके. साइड से जो इंटेंशन थे वो वहां तक पहुंचने. चाहिए और मुझे लगता है शायद वो पहुंचेंगे. भी। बिल्कुल मैं भी उम्मीद करता हूं। लवली.
टॉकिंग टू यू एंड बेस्ट विशेस फॉर डीक. कोड। थैंक यू। थैंक यू। थैंक यू। लाइन में. आपको फिर से यस। और मैं सबसे एक बार अपील. भी कर देता हूं भाई। मेरे लिए भी थोड़ा सा. सोचिएगा आप कि आप अब दूरदर्शन पर मेरा नया. शो देखिए। रात में 9:00 बजे डी कोड और अगर. आपने अभी तक नहीं देखा है तो आप जरूर. देखिए और देखने के बाद मुझे फीडबैक दीजिए।. बताइए कि आपको कैसा लगा। अगर उसमें और कुछ. सुधार की आवश्यकता है तो फिर हम उसमें और. नए चेंजेस करेंगे पर देखिएगा जरूर।. बिल्कुल। मैं भी हम भी अपील करेंगे कि जो. हमको फॉलो करते हैं एक बार फिर दूरदर्शन. में चलते हैं। लेट्स सी एंड देन लेट्स जज।.
बिल्कुल। थैंक यू सो मच सर। थैंक यू. शुभांकर। थैंक यू।.
