Unplugged ft. Sudhanshu Trivedi | BJP | Hinduism
सुधांशु जी जैसी याददाश्त के लिए क्या. करना चाहिए क्योंकि वो ना सिर्फ किताब. बताते हैं जाके किताब पढ़िए डॉक्टर. अंबेडकर की हु वर शूद्र फिर चैप्टर बताते. हैं फिर बताते हैं चौथी लाइन प जाके पढ़. लेना चैप्टर नंबर वन पेज नंबर वन. पैराग्राफ नंबर तीन तो इतना मेमोराइज कैसे. होता विकीपीडिया ऑफ इंडियन पॉलिटिक्स. सुधांशु त्रिवेदी जी का ऐसा हुआ कि आप. किसी डिबेट में गए कुछ गलत निकल गया और. फिर आपको लगा कोई बात नहीं इनको कौन सा. पता है हमारे वेदों में क्या-क्या लिखा है. क्योंकि दुनिया में जो जो प्रूफ होता है. सुधांशु जी कहते हैं हमारे वेदों में लिखा. हुआ है तो एक बार सुधांशु जी बता दें कि.
ये ये रह गया ताकि पेटेंट करवा बहु अच्छा. प्रश्न किया है नेहरू जी ने और कितनी गलती. की थी कु भी होता है तो होता है नेहरू जी. पर डाल दिया गया उन्होंने ये किया था. नेहरू जी ने हिटलर की झलक दिखती शून्य वोट. मिले नेहरू जी को वो नेता जिसको उसकी. पार्टी में किसी ने नेता नहीं माना नेहरू. जी और मोदी जी में बराबरी नहीं हो सकती. तक्षशिला या नालंदा जैसी यूनिवर्सिटी आप. लोगों ने क्यों नहीं बना अब तो 11 साल हो. गए बार-बार ये कहा जाता है कि मुगलों ने. भी इस देश को बहुत कुछ दिया लाल खला. ताजमहल तो मीनार दिया है रेगिस्तान वालों. को रहने वालों को बाढ़ से बचने की. टेक्नोलॉजी पता थी.
बाकी मैं दर्शकों के विवेक पर छोड़ता हूं. जहां एक बूंद पानी नहीं होता था उन्हें यह. पता था कि बाढ़ से कैसे बचाई जा सकती है. और आपन उसकी लकड़ी भी पता चाणक्य ओरिजिनल. में थे या काल्पनिक थे अब ये भी बड़ा चलता. है आज वो कहते सब का राम सेतु काल्पनिक है. चाणक्य काल्पनिक है जो कहते हैं देश कभी. था ही नहीं ये तो अंग्रेजों के आने के बाद. हुआ है तो यह वो लोग कहते हैं जिनको कहते. थे यूबीआई अनफॉर्चूनेटली बर्न इन इंडिया ए. बी सी डी अमेरिकन ब्रेन कंफ्यूज देसी तो.
मेरे विचार से इंडियन ब्रेन से समझिए. बौद्ध इंडिया से गायब क्यों हो गए बाबा. साहब को कोट करके कह रहा हूं देर इज नो. डाउट अबाउट इट दैट द डिक्लाइन ऑफ. बुद्धिज्म वाज बिकॉज ऑफ द ब्रूटल इनवेजन. ऑफ मुसलमान आजकल चल रहा है कि मस्जिद खोदो. नीचे मंदिर मिलेगा वो कहते हैं थोड़ा और. खोद बौद्ध मठ मिलेंगे भारत आजाद हुआ 47. में उस समय दुनिया का सबसे बड़ा बुद्धिस्ट. कंट्री कौन था चाइना चाइना से बौद्ध धर्म. को किसने नष्ट किया कम्युनिस्टों ने या. हिंदुओं ने तिब्बत किसने तबाह किया सबसे. बड़े धर्म गुरु कौन है बौद्धों के दलाईल.
उनको जान से मारने की कोशिश किसने की. भगवान बुद्ध की सबसे बड़ी प्रतिमा कहां थी. अफगानिस्तान के बामियान में तोप लगा के. किसने उड़ाई जो मत संप्रदाय पंथ रिलीजन. मजहब है वहां एक ही बुक है तर्क करने का. कोई स्कोप नहीं है एक कहता है कि अगर तर्क. किया तो नर्क में जाओगे दूसरा कहता है. तर्क किया तो सर्तन से जुदा हो जाएगा. हमारे यहां कहा गया आओ बैठो शास्त्रार्थ. करो उर्दू मुसलमानों की भाषा थोड़ी ना. क्यों इसको अब ये बना दिया गया मैं आपको. भी सुन रहा हूं मुझे ऐसा लग रहा है कि ये. उनकी भाषा है हमारी अलग है जब मैंने पढ़ना. शुरू किया सर तो दिखाई पड़ा ब्रज नारायण. चक बस जी पंडित हरिचंद अख्तर साहब संपूर्ण.
सिंह काल अभी गुलजार साहब हमारे 76 के बाद. का पैदा हुआ कोई व्यक्ति बताइए अरे अभी. हमारे मनोज मनोज शुक्ला मुंतशिर हो गए थे. हालांकि वापस शुक्ला हो गए. [संगीत]. वो भारत के लोगों से यदि पूछा जाए कि भैया. दुनिया में सबसे बुद्धिमान व्यक्ति कौन है. तो जो ज्यादा पढ़ा लिखा होगा वो आइंस्टीन. का नाम ले लेगा उसके बाद जो लोग होंगे वो. चाणक्य जी का जिक्र कर लेंगे किससे किताब.
पढ़ने वाले शायद बीरबल का जिक्र कर दे. लेकिन मौजूदा दौर में अगर आप पूछेंगे तो. एक ही नाम आएगा व ऐसा नाम है जिसमें आप. अगर कुछ भूल जाते हैं तो गल करने की जगह. उनको फोन करके पूछ लीजिए सर इसका जवाब. क्या होगा और वह आपको ग से पहले दे देंगे. नाम है सुधांशु त्रिवेदी. जी यह मिस्टर ग वाली इमेज आपको पता है. आपकी बन गई है हां बहुत से लोग कहते हैं. परंतु हमसे लड़का लोग कहे कि कुछ भूल. जाइएगा सर तो सीधे ग की जगह सुधांशु जी से.
पूछ लीजिएगा उनका रिस्पांस टाइम जल्दी है. हां परंतु मैं मानता हूं. कि कोई यह कहे हम कि मुझे बहुत ज्ञान. प्राप्त हो गया है. हम तो वह भारत में पैदा होकर तो कभी यह. नहीं सोच. सकता भारत और हिंदू धर्म में हम इतना गहरा. ज्ञान है कि जो जो आपको ज्ञान प्राप्त. होता जाएगा आप विनम्र होते जाएंगे जैसे. रामचरित मानस में तुलसीदास जी ने क्या. लिखा है बरस ही जलद भूमि नियरा आए यथा नव.
ही बुधि विद्या पाए अर्थात पानी से भरे. हुए बादल धीरे-धीरे उतने झुकते चले आते. हैं भूमि के निकट यथा नव ही बुद्धि विद्या. पाए जैसे बुद्धि और विद्या जो जो बढ़ती. जाती है व्यक्ति को अपने अंदर की अज्ञानता. का अनुभव होता जाता और वह भी उतना विनम्र. होता चला जाता है वैसे ऑन द लाइटर नोट में. इसमें एक और बात बोलूं जी इस चौपाई में. शब्द है बरस ही जलद भू नियर.
आए नियर का अर्थ है नजदीक यह अंग्रेजी का. नियर ओरिजनली यहां से आया है आपको यह तो. नहीं कह सकता ना कि तुलसीदास अंग्रेजी. पढ़े होंगे इसलिए नियर आए आया है इसीलिए. मैं कह रहा हूं बहुत सी ऐसी चीजें हैं. जैसे एग्जांपल के लिए बंकर शब्द है अब लोग. सोचते हैं बंकर तो अंग्रेजी का शब्द है और. यूरोप का शब्द नहीं साहब दुर्ग जो बहुत ही. मजबूत होता है उसके लिए बंक शब्द संस्कृत. में आता है और देखिए सुंदर कांड में लिखा.
है कि जब हनुमान जी लंका जला के आते हैं. तो क्या कहते हैं कहु कप केहि विधि पालि. लंका केही विधि दह दुर्ग अति बंका ये इतना. जो पालिक लंका थी इतनी सुदृढ़ लंका थी. इतना दुर्ग जो बंक था यानी मजबूत था उसको. कैसे तुमने जला दिया इसीलिए मैं कहता हूं. जो जो आप पढ़ते जाएंगे त्यों त्यों आपको. उस चीज के बारे में ज्ञान होता और अपनी. अज्ञानता का अनुभव होता चला जाएगा तो मुझे. लगता है भारत का तो नाम ही क्या है भा.
अर्थात ज्ञान का प्रकाश रथ अर्थात उसमें. लगा हुआ तो भारत क्या है वि इज इन द परप. चुअल परस्यूट ऑफ द लाइट ऑफ नॉलेज देखिए हम. लोग तो खाली एक लाइन में पढ़े थे कि भैया. भरा जो भरा हुआ पेड़ हो झुका होता है उसकी. 200 शब्दों की व्याख्या आपने की है वो. आपके ज्ञान को दर्शाता है लेकिन हमसे आपके. आलोचक कई कहे कि सुधांशु जी से पूछ. लीजिएगा कि हमारे वेदों में क्या-क्या. लिखा है क्योंकि दुनिया में जो जो प्रूफ. होता है सुधांशु जी कहते हमारे वेदों में. लिखा हुआ है तो एक बार सुधांशु जी बता दें.
कि यह यह रह गया ताकि पेटेंट करवा बहुत. अच्छा प्रश्न किया है यह कुछ कुछ वैसा ही. प्रश्न है जैसे सेकंड क्लास का बच्चा कहे. ह कि भाई वह पीएचडी किताब में क्या-क्या. लिखा मुझे अभी बता दो हम वो इसलिए नहीं. बताया जा सकता कि भाई जब आप पढ़ोगे चौथी. में पढ़ोगे छठी में पहुंचो के आठवीं में. पहुंचो ग दसवीं में पहुंचो ग त्यों तो. तुम्हें समझ में आने लगेगा कि पीएचडी की. बुक में लिखा क्या था ठीक बात यानी. लाइब्रेरी थी पूरी हमारे यहां एक किताब. नहीं है हमारे यहां लाइब्रेरी है और. लाइब्रेरी को समझने के लिए ज्ञान का स्तर. भी विकसित होना चाहिए जैसे मैं उदाहरण के.
लिए मैं ये पहले भी बोल चुका हूं हम सबने. क्लास सेकंड थर्ड में जब वो एडिशन. सबस्ट्रेक्शन देखा होगा तो 4 - 3 = 1 अगर. गलती से कोई बच्चा 3 - 4 लिख दे तो टीचर. से डांट खा जाता था ये तुम्हें इतना भी. नहीं पता है कि तीन में से चार नहीं घटाया. जा सकता सही बात है मगर जब आप बीएससी. मैथमेटिक्स करते हैं तो 3 - 4 = -1. नेगेटिव इंटी जर्स की एक पूरी मैथमेटिकल. सीरीज है और -1 का जो स्क्वायर रूट है. जिसे आ क हैं वो बैलेस्टिक इक्वेशंस का.
इंसेपरेबल पार्ट है तो जब डॉक्टर कलाम के. लेवल पर पहुंच के जाएंगे तो -1 और उसका. बैलेस्टिक इक्वेशन में क्या रिलेशन है वो. समझ में आएगा और फिर जब आप नेगेटिव में. जाएंगे तो एब्सलूट टेंपरेचर क्या होता. -273 डिग्री सेंटीग्रेड हम जिसको 0 डिग्री. केल्विन कहते हैं तो इसलिए मैं कह रहा हूं. वो ये ना पूछे कि वेदों में क्या लिखा है. जो जो वेदों के जो जो ज्ञान का विस्तार. होगा तब आपको समझ में आएगा जो आदि. शंकराचार्य जी कह गए वेदा निकलो धर्मो.
मूला यानी संपूर्ण ज्ञान का उद्भव जो है. वो वेदों से होता है तो आप समझ पाते हैं. बाद में यह नहीं है कि उसमें लिखा नहीं था. अब जैसे एग्जांपल के लिए मैंने य चलिए तो. आपको बता अब लगम अब लॉक बुक तो किसी ने. पढ़ी नहीं तो जब पढ़ेंगे नाइंथ में. पहुंचेंगे तब समझ में आएगा ना अच्छा ये. बताइए कोई बच्चा यह कहे कि मैंने इंग्लिश. सीख ली ए बी सीडी सीख ली ठीक तो 27. अल्फाबेट सीख लि पूरा शेक्सपियर का.
साहित्य मुझे पता नहीं भाई ये 27 लेटर पढ़. लेने से शेक्सपियर का पूरा साहित्य नहीं. समझ सकते इसलिए मैं कहता हूं कि ये जो. आपने प्रश्न किया है ना यह जानते हैं कहां. से संबंधित है माननीय प्रधानमंत्री जी ने. जो कहा है कि जो अमृत काल है हम इस अमृत. काल में उन्होंने पांच प्रण कहे उसमें एक. है भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है दूसरा. है गुलामी की मानसिकता के हर प्रभाव से. अपने को मुक्त करना है और तीसरा है कि. अपनी विरासत पर गर्व करना यह मैं सेकंड और.
थर्ड और चौथा है खैर कि सबके लिए हमको. कर्तव्य करना और पांचवा है कि कर्तव्य. सामूहिक रूप से करना अब यही मैं कह रहा. हूं यह अमृत काल में जो विष है ना कि. गुलामी की मानसिकता के प्रभाव से अपने को. मुक्त करना जैसे मैं उदाहरण दे रहा हूं. महाकुंभ चल रहा है समाप्ति की तरफ. है महाकुंभ बृहस्पति ग्रह के रोटेशन पर. होता है 12 साल के बाद इस बार आपने जितना. सुना है 2013 में सुना है किसी ने कि 12. साल के जुपिटर के रोटेशन पर इतना मीडिया. में किसी ने सुना था या अखबारों में चली. आप कहेंगे मीडिया नहीं था इलेक्ट्रॉनिक. चैनल्स तो थे कितने इलेक्ट्रॉनिक चैनल्स.
पर बात आती. थी 2001 में अरे अखबार तो थे इलेक्ट्रॉनिक. चैनल 2001 में भी थे 1989 में हम लोग. बच्चे थे इलेक्ट्रॉनिक चैनल नहीं थे अखबार. तो थे मैगजीन तो खूब निकलती थी कभी सुना. ना यह तो सदा सर्वदा से होता रहा था परंतु. अब जों जो वो अज्ञान का पर्दा हट रहा है. त्यों त्य समझ में आ रहा ऐसा नहीं कि कुंभ. के होने के आयोजन की प्रक्रिया में कोई. परिवर्तन आ गया हमारे समझने की प्रक्रिया. में परिवर्तन आया है यह समझने की बट जैसे.
कुंभ का जिक्र आपने कर दिया अब आपके आलोचक. इस पे भी कहते हैं कि 144 साल वाला तो हर. बार आता है पिछली बार भी जब हुआ था तब भी. 144 कह दिया गया था इसका कोई प्रमाण नहीं. है ये अखिलेश जी से लेकर तमाम लोग लगातार. आरोप लगा रहे हैं अब देखिए एक बात तो मैं. ये कहूंगा ये वही लोग हैं जो हर चीज में. हिंदू धर्म और सनातन धर्म की आलोचना करते. रहते इसका कोई प्रूफ है 144 साल का देखिए. बहुत सिंपल सी बात है 12 साल में एक बार. होता है वैसे वो 72 वें के बाद 83 व वर्ष. में आता है जुपिटर की साइकिल 12 साल.
तो 12 साल की साइकिल के बाद य ज वो 12. साइकिल पूरी करेगा तो 144 इयर्स होंगे अ. ये जानते हैं क्यों लोगों को नहीं समझ में. आता लोगों के अंदर क्या हो गया कि. वेस्टर्न इन्फ्लुएंस ऑफ नॉलेज की जड़ता. इतनी ज्यादा है जैसे मैं बताता हूं. वेस्टर्न थ्योरी यह कहती थी धरती चपटी है. और धरती स्थिर है और सूर्य पृथ्वी के. चारों ओर घूमता है यानी जिसको कहते थे. ये अर्थ सेंट्रिक मॉडल फिर आया हिल मॉडल. कि सूर्य के चारों ओर सारे ग्रह घूमते हैं.
सूर्य भी स्थिर है क्या नहीं है ना व भी. तो मिल्की भी के चारों तरफ घूमता है और. उसमें वाबल भी करता है तो. इसीलिए दुनिया की बाकी सभ्यताओं में. ज्यादा से ज्यादा कांसेप्ट है ग्रह का. नक्षत्र का सिर्फ हमारे यहां कांसेप्ट है. ठीक है एंट ग्रीक्स और उनमें था वह हमारा. ही इन्फ्लुएंस था नक्षत्र दिखाता है कि. बैकग्राउंड का कांस्टेलेशन क्या है जैसे. तो इसका मतलब 144 साल के बाद जब जुपिटर 12.
साइकिल पूरी करेगा तो एक तरीके से अपना. नया चक्र प्रारंभ करेगा तो उस समय उसकी. हमारे सोलर सिस्टम की स्थिति बदल चुकी. होगी तो जुपिटर की स्थिति एक प्रकार से नई. स्थिति में वह प्रवेश कर रहा होगा तो. इसलिए हम कहते हैं कोई इसमें ऐसी बात नहीं. मगर मैं तो सिर्फ यह कहता हूं मेरे भाई. हमसे पूछने वाले यह तो बता दें कि धरती. स्थिर है सूर्य चारों तरफ घूमता है इस पर. कभी चू बोले हैं आज तक आपको एक बात पता है. कि 16 3 में गैलीलियो को इस बात के लिए.
फांसी की सजा सुना दी गई कि तुमने कैसे कह. दिया कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर नहीं. घूमता है पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती. है उसने माफी मांगी सजा तो माफ हो गई मगर. दौर की बात है नहीं दौर आपको बता रहा हूं. दौर दौर कितना बड़ा है उसके बाद उसका नाम. लिख दिया गया कनविक्टेड क्रिमिनल्स इन द. आइज ऑफ चर्च यानी चर्च के अपराधी की सूची. में उसका नाम और आपको पता है किस ईयर तक. उसका नाम रहा है किस ईयर तक 1992. 1992 पोप जॉन पॉल सेकंड ने उसका नाम.
हटवाया यानी जब मनुष्य अंतरिक्ष में पहुंच. गया. 1957 जब आदमी चांद प पहुंच गया मतलब पहला. सेटेलाइट 57 में स्पूतनिक पहुंच गया 61. में यूरी गगरी स्पेस में पहुंच गए 69 में. आदमी चांद प पहुंच गया सेटेलाइट्स पहुंच. गए फिर भी उसका नाम. कन्विंसेस हैं व वहां पे एकदम चुप्पी साद.
के बैठ जाते हैं यह गुलामी की मानसिकता का. विष है जो हमारी पीढ़ियों दर पीढ़ी हमारे. दिमाग में भरा हुआ है उसको निकालने की. आवश्यकता है और हमारा जो जो था सब कुछ सच. होता जा रहा है अब एग्जांपल के लिए कुंभ. हो रहा है तो क्या हम लोग हमारी जनरेशन के. जो लोग थे जो 80 के दशक में बच्चे थे क्या. पढ़ाया जाता था तब तक कि कुंभ इज ऑन दी. प्रयाग इज ऑन द कॉन्फ्ल एंस ऑफ गंगा जमुना. एंड द मिथकल सरस्वती गंगा जमुना और.
काल्पनिक सरस्वती आखिर में क्या हुआ लेट. 80 में नासा की सेटेलाइट पिक्चर में. सरस्वती नदी का ट्रैक दिखा अब जो. जियोलॉजिकल डाटा आया है वो यह भी बता रहा. है अब तो सारे सिमुलेशंस वगैरह भी आने लगे. और चिंता मत करिए एआई आने के बाद सब. सिमुलेशन बहुत आसान हो जाएंगे अब उसमें यह. भी बताया गया कि सरस्वती नदी आज से तकरीबन. पाच चा साल पहले सूखी थी यानी एगजैक्टली. वही जो महाभारत का काल है या कलयुग का. प्रारंभ का समय माना जाता है तो जंजों. साइंस ऊपर बढ़ रही है त्यों त्यों वह सारी.
की सारी चीजें सत्य होती जा रही हैं मगर. कुछ लोग ऐसे हैं जिनके लिए हम य कह सकते. हैं उनके प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए. और उनसे यह अपील करते हुए कि अपने मन के. ऊपर से वह हटाई है जिसे कहते ना तोरी गठरी. में लागा चोर मुसाफिर मन की आंखें खोल. उनके लिए मैं कहना चाहूंगा अपने वतन पर. सदियों तक है रही हुकूमत गैरों की लेकिन. कुछ चेहरों पर अब तक धूल है उनके पैरों की. कोई भी और दूसरा देश होता गर्व करता कि.
देखिए साहब हमारे यहां हमारे य 10 लोग कूद. पड़ते सोशल मीडिया नहीं नहीं हमारे यहां. कुछ अच्छा नहीं था बहुत खराब था अरे कैसे. कह दिया ये साइंटिफिक था और एक एक चीज. प्रूव होती चली जाती है उसके बाद वो एक और. चीज को लेकर खड़े होते हैं जब नॉलेज बेस. आपका और बढ़ता है तो वो चीज और बेहतर. तरीके से आती है त्यों त्यों आपको समझ में. आता मैं एक एग्जांपल देना चाहता हूं. क्वांटम कंप्यूटर का जमाना आ गया आज. डिजिटल टेक्नोलॉजी प है मतलब इंटरफेस प. आना शुरू हुए हैं क्वांटम प डिजिटल. टेक्नोलॉजी में बाइनरी सेटअप पर चलता है.
0101 तो ऐसी लैंग्वेज जिसमें मात्रा पाई. है ही नहीं तो उसमें इंटरफेस की तो जरूरत. नहीं है ए बी सी डी अंग्रेजी में कोई. मात्रा पाई नहीं है तो बाइनरी सेटअप के. लिए बहुत अच्छी है 01 01 ए और नॉट बी और. नॉट तो डिजिटल एरा में उनको लग रहा है कि. वह तो बहुत अच्छा है पर जिंदगी भर क्या. टेक्नोलॉजी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगी. नहीं अब अगली क्या आ रही है वॉइस कमांड की. शुरुआत हो रही है आप बोलते हैं फोन पे.
टाइप हो जाता है वॉइस कमांड से क्या होगा. अब डिस्क्रीट बाइनरी डाव डायवर्सिफिकेशन. नहीं होगा 01 अब इसके साथ सिंक्रॉनिक. है वो लैंग्वेजेस की इंपॉर्टेंस समझ में. आनी शुरू होगी जब मात्रा पाई के साथ आएंगे. तो उनकी जो फोनेटिक वाइब्रेशंस हैं वो. लोगों को समझ में आनी शुरू होंगी फिर उन. फोनेटिक वाइब्रेशंस की जब सोनोग्राफिक. रिसर्च होगी तो आने वाले कुछ दशकों के बाद. यह समझ में आएगा कि इस इस वाइब्रेशन का.
इंपैक्ट शरीर पर क्या होता है तो उन लोगों. से कह दीजिएगा ना जो बताते हैं वेदों में. क्या है वह अभी से समझ ले कि अभी जो. लेटेस्ट डिस्कवरी है साइंस की वो 2012 में. जो हिक्स बोजन खोजा गया व क्या है हि एक. फील्ड है अब आज यह माना जाता है कि जिसको. आप पार्टिकल कहते हैं इट्स नॉट रियली अ. पार्टिकल इट इट इज अ क्लैप्स ऑफ वेव. फंक्शन यानी मूलतः वेव है और दो वेव्स. जहां पर. एनर्जी का पैकेट बन जाता है जो आपको.
पार्टिकल की तरह बिहेव करना शुरू दिखाई. पड़ता है तो इसलिए अगर देखें तो संपूर्ण. संसार तरंगों का है इसीलिए हमारे कहा गया. संपूर्ण संसार लय में स्थित है इसीलिए. डूम्स की हिंदी या संस्कृत क्या है प्रलय. है यानी जहां लय समाप्त इसीलिए हमारे सारे. मंत्र लय पर हैं हमारे ग्रंथ छंद में है. सारे वेद छंदों में लिखे गए हैं वहां से. लेकर रामचरित मानस भी छंद में लिखी गई है. हमारे यहां भजन भी छंद में गाए जाते हैं. इसीलिए फिर उस पे आता हूं इंडियन मूवीज.
में गाने ज्यादा होते हैं अंग्रेजी मूवीज. के मुकाबले क्योंकि हमारे यहां मात्रा पाई. भी है और छंद हमारी परंपरा में है और. ज्यों ज्यों आप इस इंटरफेस पर आगे बढ़ेंगे. त्य त्य वो छंद उभर कर आता हुआ आपको दिखाई. पड़ेगा वेदों के जो छह अंग है शिक्षा कल्प. नि निरुक्त छंद व्याकरण ज्योतिष उसमें एक. छंद भी है इसीलिए मैं कहना चाहता हूं मेरा. मानना है युवा पीढ़ी से पूर्वाग्रह से मत. देखिए डोंट गेट कैरिड अवे बाय द. मार्क्सिस्ट एंड मैले स्कूल ऑफ थॉ चले गए. वो निपट गए वह अब एक नए तरीके से देखिए और.
बिल्कुल ईमानदारी से देखिए बिल्कुल. एब्सलूट मैं कहता हूं पूरी ईमानदारी से जो. क्वेश्चन पूछना है पूछे मगर वो मैकाले और. उसका वो डब्बा अपने दिमाग से हटा दीजिए. उसके बाद आप पूछिए तो समझ में आएगा अब. इसीलिए मैंने कहा ना पार्टिकल और वेव. दोनों को समझिए अब यह मैं आपको बताना. चाहता हूं मेरे मन में तो बचपन से थॉट आया. लाइट देख रहे हैं मैं उन सारे लोगों से. पूछता हूं ना जो कहते हैं कि साहब पहले. बता दीजिए अब उनको पहले बताता हूं. पार्टिकल है जिसने थोड़ी भी फिजिक्स पढ़ी.
होगी उसे पता होगा कि लाइट जो है जब आप. पानी में लाइट जाती है तो आपको डेप्थ कम. दिखाई पड़ती बिकॉज रिफलेक्शन होता है बेंड. हो जाती है लाइट इसका मतलब लाइट इ. पार्टिकल क्योंकि मीडियम में प्रवेश करने. के बाद वह पार्टिकल की तरह बिहेव करती पर. अगर पार्टिकल हो तो स्पेस में चलते हुए. सूर्य से आ नहीं सकती लाइट की वेलोसिटी. से तो इसका मतलब स्पेस में वो वेव नेचर को. रिफ्लेक्ट कर रही है और मीडियम में. पार्टिकल नेचर को अगर मैं उन्हीं से कहना.
चाहूं जरा इसको और ईमानदारी से सोचो कि. आत्मा अंतरिक्ष में अव्यक्त है और माध्यम. में व्यक्त है जब यह कहते थे तो यह तो. बकवास है यह तो फिलासफी है और लाइट स्पेस. में वेव है और मीडियम में पार्टिकल है यह. साइंस है बस वह कटोरा हटा दो भाई मार्क्स. और मैकाले का उसके बाद ईमानदारी से देखो. तो सब कुछ समझ में आएगा अच्छा किसी एक. विषय का विशेष आपको टोक भी नहीं सकता आपको.
टोकने के लिए भी मतलब आज हमको लगता है हम. सुनते रहे बस आपको आप कह रहे थे नहीं नहीं. हमारे यहां भी देखिए एक और बात बता द जो. कहते हैं वेद में क्या बता दीजिए एक मात्र. धर्म ग्रंथ है जो कहता तर्क करो मैं. चैलेंज करके कहता हूं दुनिया में जितने. बड़े-बड़े बड़े-बड़े धर्म है जो जो भी. धर्म तो भारत एक ही है हिंदू धर्म जो मत. संप्रदाय पंथ रिलीजन मजहब है वहां एक ही. बुक है और कहते नो इफ एंड बट. चू पू नहीं बोल सकते जो कह दिया गया वह.
सुन लो केवल सर्मन होगा परसेप्ट होगा. तकरीर होगी और सिर्फ सजदा करना है तर्क. करने का कोई स्कोप नहीं है एक कहता है कि. अगर तर्क किया तो नर्क में जाओगे दूसरा. कहता है तर्क किया तो सरत से जुदा हो. जाएगा हमारे य कहा गया आओ बैठो. शास्त्रार्थ करो हमारे छह वेदांग में एक. न्याय शास्त्र है गौतम ऋषि का न्याय. शास्त्र जैसे तर्क शास्त्र प्रमाण शास्त्र. भी कहते हैं बाकायदा दो लोग बैठते थे भाई. इसका इंटरप्रिटेशन मेरे हिसाब से ये आपके. हिसाब से यह खुली बहस करो और उसके बाद मैं.
यह भी नहीं कहता कि एक ही बात मान लो. द्वैत वादियों का अलग इंटरप्रिटेशन है. अद्वैत वादियों का अलग इंटरप्रिटेशन है. रामानुजाचार्य का अलग इंटरप्रिटेशन है. मधवा चार्य का अलग इंटरप्रिटेशन है. निंबार्काचार्य का अलग इंटरप्रिटेशन है. शंकराचार्य का अलग इंटरप्रिटेशन है सबको. स्वतंत्रता है अब कोई कहे नहीं नहीं नहीं. होनी तो एक ही चाहिए जो हमारे यहां कहा. गया एक है तो सही उनसे पूछता हूं मेरे भाई. दुनिया में आप स्पेस में खड़े हो जाइए. अलग-अलग पॉइंट स्पेस को देखेंगे अलग अलग.
व्यू दिखाई पड़ेगा कोई यह कहे कि य स्पेस. में एक ही व्यू है इसका मतलब उसने सिर्फ. एक कमरा देखा है कमरे में एक व्यू नजर. आएगा दुनिया देखी होती विराट ब्रह्मांड. देखा होता तो कभी य बोलता ही नहीं कि एक. ही व्यू है और वह एक ही पॉइंट पर. कंप्रिहेंड किया जा सकता है मैं क्वेश्चन. का पूरा प्लेलिस्ट चेंज करता हूं शास्त्र. का जिक्र आपने किया मंडन मिश्रा. शंकराचार्य जी हमको याद आ गए मेरे मन में. दो सवाल है पहला सवाल बौद्ध इंडिया से यब. क्यों हो गए क्योंकि कई बार कहा जाता है.
कि हिंदुओं ने ही उन्हें प्रतारक गायब. किया खासतौर पर. इसमें दो बातें सुनी है पहले तो लोग कहते. हैं संस्कृत आम भाषा नहीं थी तो जब.
शंकराचार्य जाते हैं महर्षि में और वो. मंडन मिशर के घर का पता पूछना चाहते हैं. तो कुछ स्त्रियां पानी भर रही होती हैं. तो वो कहती. हैं कि वो पूछते हैं कि मंडन मिश्र का घर. कहां है तो उनसे कहा जाता है कि ऐसा है. जाना जिस गली के बाहर लोग बैठे हुए जो. सफाई भी कर रहे होंगे वो भी यदि वेदों.
उपनिषदों के मंत्रों का गुण अर्थ सहज में. बोलते हुए दिखाई पड़े समझ जाना इसी गली. में कहीं मंडन मि का घर और उसके बाद जब. उसमें जाना तो जिस दरवाजे के छजजे जिस घर. के छजजे पर तोता और मैना वैदिक मंत्रों का. सस्वर पाठ कर रहे हो समझ जाना यही उनका घर. है. मैं व मुझे संस्कृत का लोक थोड़ा व यह. कहते है स्वतः प्रमाणम परत प्रमाणम कींग. यत्र गिरो गिर. और जानी स निरुद्ध.
जानियन मिश्र धाम मतलब यदि कहीं पर तोता. मैना जिस छज्जे पर बैठ के यह बोल रहे हैं. स्वतः प्रमाणम परत प्रमाण यानी उनकी आवाज. आए कि वेद स्वतः प्रमाणित है कि प्रमाणित. करने की आवश्यकता है यह किराना यत्र गिरो. ग्रंथ गिरा कहते आवाज को यह आवाज जैसे ही. आए तो समझ जाइएगा मुड़कर कि बस यही मंडल. में इसका मतलब संस्कृत आम जनमानस की भाषा. थी पानी भरने वाले से लेकर सफाई करने वाले. से लेक इवन वो इतनी बोली जाती थी कि तोते.
भी उसको रिपीट करते थे पहला पॉइंट दूसरा. दो विद्वानों के बीच में शास्त्रार्थ हो. रहा है और उसका जज कौन था उनकी पत्नी उनकी. पत्नी उभय भारती तो चैलेंज करके पूछता हूं. दुनिया में पहले कोई ऐसा धर्म सभ्यता. रिलीजन मजहब बताइए जहां धार्मिक पुस्तक पर. पहली बात तो बहस करने की गुंजाइश हो नंबर. टू दो पुरुष बहस करें तो जज बनने का. अधिकार एक महिला को उसके ज्ञानदेव पाण ने. हमको समझाया है कि हमारे महिलाओं को पढ़ने.
थोड़ी दिया जाता था कालिदास की पत्नी. विद्योत्तमा इतनी विद्वान थी कि कालिदास. उनके आगे गलानी से भर गए फिर जाकर तपस्या. किए पढ़ाया थोड़ी जाता था गारगी अपाला लोप. मुद्रा मैत्री 20 से 22 रक्षिका हैं और. पढ़ाया थोड़ी जाता था यह है गुलामी का विष. जो दिमाग में आना है अब आइए बौद्ध धर्म के. ऊपर तो मैं यहां सिर्फ कोट करना चाहूंगा. डॉक्टर बाबा साहब भीमराव.
अंबेडकर ने लिखा है और यह सोर्स है. राइटिंग्स एंड स्पीस ऑफ बाबा साहब अंबेडकर. पब्लिश्ड बाय महाराष्ट्र गवर्नमेंट इन. 1987 देन रि पब्लिश बाय सेंट्रल गवर्नमेंट. मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट. जनवरी. 2014 उसमें बाबा साहब ने पूरा एक चैप्टर. लिखा है चैप्टर नंबर नाइन जिसका शीर्षा का. डिक्लाइन ऑफ बुद्धिज्म उस चैप्टर का पहला. दो पेज जाकर पढ़े उसमें मैं बाबा साहब को. कोट करके कह रहा हूं फिर मैं कह रहा हूं.
राइटिंग्स एंड स्पीस ऑफ बाबा साहब अंबेडकर. पब्लिश्ड बाय बोथ महाराष्ट्र गवर्नमेंट इन. 87 एंड सेंट्रल गवर्नमेंट इन जनवरी 2014. यूपीए गवर्नमेंट के समय में ऑथेंटिक उसमें. खुद बाबा साहब लिख रहे हैं देयर इज नो. डाउट अबाउट इट दैट द डिक्लाइन ऑफ. बुद्धिज्म वाज बिकॉज ऑफ द ब्रूटल इनवेजन. ऑफ मुसलमानस आप किसी को कोई इसमें बहस की. गुंजाइश हो तो कह ले और फिर यह भी बताता. हूं आपको अगर इसमें से कुछ गलत होगा ना तो. सोशल मीडिया पर छका देंगे आके नहीं होगा. तो जाकर पढ़ेंगे तो शांति से बैठ जाएंगे.
यह प्रोपेगेंडा है और मैं आज की बात कहने. का प्रयास करता हूं जो लोग कहते हैं देखिए. मैं इतिहास की भी उन सारी चीजों में जा. सकता हूं उसमें बहुत लंबा समय लगेगा फिर. वो कहेंगे इतिहास में यहां पर यह लिखा है. वहां वो लिखा है इसलिए मैंने बाबा साहब को. कोट किया है हम जिनके नाम पर लोग सबसे. ज्यादा राजनीति करने का प्रयास करते हैं. पर बाबा साहब ने खुद क्या लिखा है मैंने. बताया अब आप छोड़िए कोई कहेगा मुझे तो. हिस्ट्री की इतनी जानकारी नहीं है कि वो. कितने बौद्ध ग्रंथ थे त्रिपिटक में क्या. लिखा है मज्ज निकाय में क्या लिखा है या.
और भी उनके बहुत. से बौद्ध ग्रंथ है उनमें क्या लिखा है. मुझे इतनी नहीं पता तो कोई पुष्यमित्र का. उल्लेख करेगा तो कोई अशोक का उल्लेख करेगा. यह सारी चीजें बहुत सारी. चीजें जैसे तो अब मैं बताना चाहता हूं हां. जैसे आप पूछ लीजिए जैसे ये भी चलता है कि. आप आजकल चल रहा है कि मस्जिद खोद नीचे. मंदिर मिलेगा वो कहते हैं थोड़ा और खोद दो. बौद्ध मठ मिलेंगे मंदिरों के नीचे कई सारे. मंदिरों कहते हैं कि बौद्ध मठ है हां तो. अब यही बताना चाह चाते हैं कि जो जो. टेक्नोलॉजी आगे आती जा रही है सारी बातें.
सामने आती जा रही है तो मैंने बाबा साहब. को कोट कर दिया अब आगे बताता हूं चलो भाई. ठीक है जो इतिहास में हुआ आज का जवाब दो. भारत आजाद हुआ 47 में उस समय दुनिया का. सबसे बड़ा बुद्धिस्ट कंट्री कौन. था चाइना चाइना चाइना से बौद्ध धर्म को. किसने नष्ट किया कम्युनिस्टों ने या. हिंदुओं ने कम्युनिस्टों ने अब आइए आफ्टर. चाइना वच वाज अ बिगेस्ट बुद्धिस्ट कंट्री. इन द वर्ल्ड तिब्बत किसने तबाह किया फिर. उन्होंने कम्युनिस्टों ने या हिंदुओं ने. सबसे बड़े धर्म गुरु कौन है बौद्धों के.
दलाईलामा उनको जान से मारने की कोशिश. किसने की कम्युनिस्टों ने या हिंदुओं ने. अब आप आइए आफ्टर तिब्बत सबसे बड़ा बौद्ध. कंट्री कौन था वियतनाम किसने तबाह किया. कम्युनिस्टों ने या हिंदुओं ने अब आइए. उसके बाद आज सबसे बड़ा बौद्ध देश कौन है. बर्मा वहां बौद्ध बहारों पर कौन अटैक कर. रहा है रोहिंग्या. मुसलमान या हिंदू अब आ जाइए और लेटेस्ट. हिस्ट्री में आइए बिल्कुल लिविंग जो हम. लोग देख रहे हैं भगवान बुद्ध की सबसे बड़ी.
प्रतिमा कहां थी अफगानिस्तान के बामियान. में किसी को कोई परेशान नहीं कर रही तोप. लगा के किसने उड़ाई 2001 में तालिबान ने. या हिंदुओं ने आइए 2013 बोध गया मंदिर में. ब्लास्ट किसने करवाया कट्टर पंथी. मुस्लिमों ने और अगर समय रहते वो डिफ्यूज. कर लिए गए थे अन्यथा मंदिर का एक हिस्सा. डैमेज हो जाता य 23 की बात है यूपीए सरकार. कट्टर पंथी मुस्लिमों ने या हिंदुओं ने. मेरे भाई वो बहस करते रहना पुराना यह वह.
अपना किसी को कोई व्यू लेना है किसी को. कोई व्यू लेना है जो आंखों देखा है उसका. जवाब दे दो आज तब समझ में आएगा कि ये. किसने किस प्रकार का विष भरने का प्रयास. किया और मैं फिर कोट कर रहा हूं बाबा साहब. अंबेडकर ने जो किताब लिखी है उसमें जो. चैप्टर लिखा है डिक्लाइन ऑफ बुद्धिज्म मैं. विनम्रता से कहता हूं और जो लोग इन मुद्दे. पर राजनीत कर रहे हैं जाके पढ़ लें ये. मेरे लिए भी ज्ञान मतलब नई बात थी आई वाज. नॉट नोइंग दिस फैक्ट मैंने जब बाबा साहेब. अंबेडकर का व आर्टिकल पढ़ा तो मेरे को समझ.
में आया जानते हो उसमें क्या. है फारसी में ओरिजनली अरबी का शब्द नहीं. है स्टैचू क्या कहते हैं बुत बुत परस्ती. और बुत शिकन यह वर्ड आपने खूब सुना होगा. बुत परस्ती मतलब बुध की पूजा करना मूर्ति. पूजक यही हिंदी बताई जाती है उर्दू में. अरेबिक में पर्शियन में वर्ड यूज होता है. और बुत शिकन मतलब बुत को तोड़ने वाला ये. मैं नहीं कह रहा हूं डॉक्टर अंबेडकर ने. लिखा है कि जब इस्लाम फैलना शुरू हुआ तो.
पूरा सेंट्रल एशिया और यह उन्होंने गलत. नहीं लिखा है प्रायर टू एडवेंटो इस्लाम. सेवंथ सेंचुरी में जब फाहियान आया है तो. वह चाइनीज यात्री तो वह मंगोलिया से होते. हुए सेंट्रल एशिया तजाकिस्तान किर्गिस्तान. उज्बेकिस्तान. इराक सीरिया अफगानिस्तान होते हुए भारत. आया सब जगह उसने बौद्ध विहार का वर्णन. किया है उस समय जब वह शुरू हुआ आगे बढ़ना. तो अगर सबसे ज्यादा उनको मूर्तियां किसी. एक देवता की दिखी तो भगवान बुध की देखी और.
उनके लिए बुद्ध की पूजा करना बुध परस्ती. थी यह बुध शब्द बुध शब्द का अपभ्रंश य हम. नहीं कह रहे हैं डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी. उसी किताब आप कहिए मैं पेज नंबर भी दे. दूंगा राइटिंग्स एंड स्पीस ऑफ बाबा साहब. अंबेडकर पब्लिश बाय गवर्नमेंट ऑफ इंडिया. डॉक्टर अंबेडकर हिमसेल्फ रिटन इट और उनका. कहना था यह बुत शब्द ओरिजनली अरेबिक का. नहीं है पर्शियन में आया यह बुद्ध से. अपभ्रंश आया बुध परस्ती मतलब बुद्ध की. पूजा करना बुध शिकन मतलब बुद्ध की.
मूर्तियों को तोड़ना और लेटेस्ट एग्जांपल. अभी जो हम लोगों की लिविंग मेमोरी में यह. बताइए जिस समय तालिबान ने कब्जा किया था. 95 में मैं सारे दर्शकों से कहता जा चेक. कर लिए तो अभी वेरीफिएबल है काबुल में. कितनी वहां के म्यूजियम में भगवान बुद्ध. की मूर्तियां रखी थी सब डिस्ट्रॉय की गई. कि नहीं फोटो अवेलेबल है उनके आगे मशीन गन. लिए हुए और एक 47 लिए हुए हैं सबसे बड़ी. प्रतिमान. इवन लोगों को शायद नहीं याद हो इराक तक.
में 1960 और 70 तक म्यूजियम में कुछ चीजें. रखी हुई थी जब इस ढंग का वह आया रेडिकल. इस्लाम सबको डिस्ट्रॉय किया मेरे भाई. आंखों देखा है बाबा साहब का पढ़ा है मगर. क्या बताएं व मैकाले और मार्क्स ने जो. इतिहास गड़ा है हमें उसी के अनुसार चलना. है और इसलिए मैं कहता हूं कि इन सारी. बातों पर समझिए बहुत अच्छी तरीके से जो इस. देश को अब एक और बात समझिए श्रीलंका में. बौद्ध बहारों पर कौन अटैक कर रहा.
है कौन डिस्ट्रॉय कर रहा है अब. आइए अगर आज की डेट में सबसे बड़े बौद्ध. गुरु हैं तो दलाईलामा उनके मुंह से आपने. कभी य नहीं सुना होगा सबसे बड़ा बौद्ध. किंग कौन है थाईलैंड इज द बिगेस्ट. बुद्धिस्ट कंट्री च इ किंगडम ठीक उसका. राजा क्या उपाधि धारण करता. है उनका क्या नाम महा वज्र लोंग कोंग किंग. रामा द इससे पहले जो उनके पिता थे उनका.
क्या नाम था भूमि बल अतुल तेज किंग रामा द. नाइंथ अगर आप उसको शब्द कहे वो थाई भाषा. में भूमि बल अतुल तेज कहा जाता है मेरे. भाई भूमि बल अतुल्य तेज किंग रामाद नाइंथ. य किसका टाइटल है द ओनली बुद्धिस्ट किंग. इन द वर्ल्ड पूरे भारत में कहीं कोई. समस्या नहीं है कंबोडिया के अंकोरवाट से. लेकर सब जगह एक साथ दिखाई पड़ते हैं भारत. में सिर्फ यह राजनीति और दुख की बात ये है. यह आजादी से पहले उनी समस्या नहीं थी पहले. अंग्रेजों ने इसको लड़ाने के लिए प्रयोग.
किया और दुख के बाद आजादी के बाद उससे. ज्यादा वामपंथियों ने इसका प्रयोग किया है. इसीलिए मैं कहता हूं करो भाई इतिहास जिसने. पढ़ाओ पढ़ाओ मुझे आंखों देखा आज का बता दो. इराक के म्यूजियम के डिस्ट्रक्शन से लेकर. काबुल के म्यूजियम के डिस्ट्रक्शन से लेकर. बामियान के डिस्ट्रक्शन से लेके चाइना और. तिब्बत की तबाही से लेके और जो कुछ आज. बर्मा में हो रहा है उसकी तबाही तक और बोध. गया के विस्फोट तक बता दो उसके बाद बहस कर. लो ब्यू हमारे सनातन या हिंदू धर्म से. कितने कितने धर्म निकले सर देखिए और क्यों.
निकले हैं कुरीतियों की वजह से नहीं देखिए. मैं बताना चाहता हूं धर्म एक ही होता है. धर्म शब्द जानते कैसे बना ध धातु से जिसका. अर्थ होता है धारण करना और धर्म की. परिभाषा भी धारणात इति. धर्मा इसीलिए देखिए बहुत अंतर है इसको. गहराई से समझना चाहिए धरती शब्द भी ध धातु. से बना है धरती सबको धारण करती है ठीक. धर्म के जो 10 लक्षण कहे गए हैं वो क्या. है त क्षमा दमो निग्रह ध विद्या सत्यम. क्रोध दशक धर्म पहला ति धैर्य धारण करना.
फर्स्ट यू हैव टू सस्टेन यू हैव टू कंटेन. समथिंग देन य विल बी एबल टू रिलाइज अब आप. यह. समझिए धर्म धारण करने से बनता है वह धरती. की तरह है धरती ई नहीं बनती धरती के ऊपर. रास्ते बनते रहते हैं इसीलिए जिसको आप. संप्रदाय कहते हैं उसके लिए पंथ शब्द है. और पंथ शब्द रास्ते के लिए भी है संस्कृत. में दोनों पर्यायवाची है रास्ते धरती बनते. रहते हैं उनका एक डेस्टिनेशन होता है उनकी.
एक पहचान होती है उनकी एक लिमिटेशन होती. है उनकी एक एज होती है बनते हैं खत्म हो. जाते हैं फिर बनते हैं खत्म हो जाते हैं. धरती यथावत रहती है तो धर्म शाश्वत रहता. है पंथ मत संप्रदाय युगा अकू परिस्थितियों. के अनुसार बनते रहते हैं उनके अंदर विकार. आते रहते हैं फिर उनके अंदर परिष्कार होता. रहता है और समाप्त होकर उनके नए पंथ जैन. बुद्ध सिख. देखिए इनको हिंदू धर्म से कहा जाता है कि.
ये तो हिंदू फैमिली क ही है इसमें कहीं. किसी प्रकार का कोई वो नहीं है और इवन आप. यह भी देख लीजिए कि इन सारे ग्रंथों के जो. इस जो मूल कनेक्शन है सब एक दूसरे से. कनेक्टेड है मगर बड़ी मजेदार बात क्या है. बड़ी मजेदार बात यह है कि हम उस यथार्थ को. समझने को तैयार ही नहीं होते अब मैं छोटी. सी एक बात कहूं जो लोग अलग आइडेंटिटी की. बात कहते हैं जब बात आती है ना कि. माइनॉरिटी चैन भी माइनॉरिटी है बुद्धिस्ट. भी माइनॉरिटी है पूछना चाहता हूं भारत के.
इतिहास में माइनॉरिटी अफेयर्स का मिनिस्टर. कोई बुद्धिस्ट हुआ है नहीं सिर्फ आज मोदी. जी की सरकार में है श्री किरण रिज्जू. चैलेंज करके पूछता हूं बताओ मेरे भाई य तो. रियल माइनॉरिटी है ना सबसे छोटी वाली आधा. परसेंट एक परसेंट वाली उससे मतलब नहीं. माइनॉरिटी कमीशन का चेयरमैन कभी सिख हुआ. है अटल जी की सरकार के समय से हुए थे. सरदार त्रिलोचन सिंह चलिए कभी किसी स्टेट. में माइनॉरिटी कमीशन का चेयरमैन ईसाई को.
भी बनाया है तो भाई साफ कहो ना कि मुझे. माइनॉरिटी की चिंता नहीं है मुझे एक. समुदाय की चिंता उसको लेकर मुझे बौद्ध जैन. सबका दुरुपयोग करना है इन शब्दों का कि. कैसे लड़ाने में प्रयोग हो यही अंतर है. सामंजस्य नहीं ढूंढना है लड़ाने के पॉइंट. देखने कि कहां कहा पर लड़ाया जा सकता है. आपके फैंस बहुत सारे थे क्योंकि आपके फैंस. ज्यादा है आमतौर पर नेताओं के इतने फैन. नहीं होते तो उन्होंने हमसे कहा कि दो. सवाल जरूर पूछेगा एक सुधांशु जी ने कई. किताब पढ़ी है. एक अब सब रटा है तो यह भी पता होगा नहीं.
देखिए वो देखिए बहुत समय नहीं मिलता. राजनीति में रहते हुए और बचपन से बहुत. सारी चीजों में इंटरेस्ट था फिर भी अंदाज. क किताब पढ़ ली होगी आप नहीं नहीं बहुत. किताबें नहीं पढ़ी है कुछ किताबें पढ़ते. हैं थोड़ा तो उसको लेकर मेरे मन में किसी. भी चीज को देखने में थोड़ा डेप्थ में जाने. की टेंडेंसी ज्यादा है तो पढ़ते हैं फिर. सोचते रहते हैं तो इसलिए वो चीजें दूसरा. सवाल सुधांशु जी जैसी याददाश्त के लिए. क्या करना चाहिए क्योंकि वो ना सिर्फ. किताब बताते हैं फिर चैप्टर बताते हैं फिर. बताते हैं चौथी लाइन पे जाके पढ़ लेना तो.
इतना मेमराइज कैसे होता है ये याददाश्त. कैसे इसकी ट्रेनिंग प्रैक्टिस कैसे की जाए. देखिए इसके लिए मैं बचपन में तो देखिए. आपकी वो भी हंस रहे हैं वहां. से ये बचपन में मैंने पढ़ा था ये प्रश्न. स्वामी विवेकानंद की एक पुस्तक में. उन्होंने इसका बड़ा अच्छा उत्तर दिया. उन्होंने कहा कि एक कमरे में हम ज्यादा. नहीं एक 100 200 किताबें भरी हो और तुमसे. कहा जाए किताब खोजो तो पा सात आठ मिनट लग. जाएगा खोजने में. वही 500 किताबें हो जो एक लाइब्रेरी में.
हो कैटलॉग के साथ रखी हो दो मिनट में आप. जाकर उस किताब को निकाल लेंगे बात है तो. यह अंतर है कि आप अपनी इंफॉर्मेशन किस. पैटर्न पर सेटल करते हैं यह स्वामी. विवेकानंद की एक पुस्तक में तो पहला तो यह. है. कि हम अवांछित इंफॉर्मेशन को ज्यादा ना ले. दूसरा हमारी हमारा चित्त किसम लगा जब मैं. पढ़ाता था यूनिवर्सिटी में तो कई बार. हमारे स्टूडेंट हमसे पूछते थे सर ये चीजें. याद कैसे रहती तो ये बात मैं 30 साल पहले.
की बता 25 साल पहले की बता रहा हूं तो मैं. कहता था भाई तुमने अगर 10 साल पहले भी कोई. फिल्म देखी हम और फिल्म में कोई गाना देखा. जो गाना अच्छा लगा तो उसकी दो लाइन आज भी. याद है कि नहीं है तो ये रजिस्टर प बैठ के. लिखे तो थे नहीं और अगर ज्यादा अच्छा लगा. तो क्या पता चार लाइने भी याद होत है और. फटाफट फिल्मी गानों पे अंताक्षरी करने को. बच्चे सब तैयार हो जाते हैं कह दो कविता. पे अंताक्षरी इतना कहां याद रहता है. क्योंकि कविता सिलेबस में पढ़ते हो उसे. बोझ मान के पढ़ते हो गाना आनंद से पढ़ते. हो तो उसमें क्या देखिए हमारे क्या कहा.
गया है मन बुद्धि चित्त. अहंकार तो चित्त जिस चीज में लगा रहता है. मन उस दिशा में अधिक तेजी से सक्रिय होता. है और बुद्धि उसको ज्यादा तेजी से ग्रस्प. करती है तो इसलिए मेरा सिर्फ यह कहना है. कि चित्त लगाइए उसके बाद कुछ करने की. जरूरत ही नहीं अपने आप ही होता चला जाता. आपका जो धार्मिक ज्ञान है यह किसी गुरु की. कृपा या परंपरा से अर्जित है या स्वाध्याय. से देखिए मुझे थोड़ा बचपन से इ चीजों में. इंटरेस्ट था मेरी टेंडेंसी इसी प्रकार की. थी और बचपन में बहुत बड़े विद्वानों और इस.
ढंग के लोगों के साथ उठने बैठने का बहुत. बच्चे थे घर पर भी लोग आते थे लखनऊ में हा. और बड़े बड़े साहित्यकार भी घर पर आते थे. नवाबों के शहर हां मगर एक लेक्चर सीरीज. हमारे पिताजी कराते थे उसम हम लोग बहुत. बच्चे थे तब मैं बात कर रहा क्लास सिक्स. सेवंथ ए तो सुनते थे तो ऐसा नहीं मैं कहू. हर चीज समझ जाते सुनने से आपको ग्रस्प हुआ. फिर आप बड़े होते तो उसको एनालाइज कर लेते. हैं तो इसलिए मेरा मानना है कि जो लोग भी.
मां-बाप हैं जिनके बच्चे छोटे हैं उनको कम. से कम बच्चों को पॉजिटिव चीजें ग्रस्प. करवाना शुरू करना चाहिए अब आप ही अगर. सिर्फ घर में बैठ के फिल्मी गाना गाएंगे. और वो टीवी के ऊपर केवल हंसी मजाक के. सीरियल देखेंगे इसमें कोई बुराई नहीं है. पर अगर सिर्फ यही रहेगा तो बच्चे का मन. बहुत शार्प होता है उस चीज को ग्रस्प करने. में जैसे मिट्टी जब गीली होती है तो वह. बीज को उगाने के लिए बहुत एप्रोप्रियेट. उसमें डालना क्या है यह चीज ध्यान रखनी. चाहिए तो अगर आप उसमें अच्छे सीट डालेंगे.
बड़े होकर वो उस ढंग का डेवलपमेंट हो. जाएगा तो यह मेरा मानना है कि उस ढंग से. एक और हर आदमी की एक टेंडेंसी भी होती है. आप यंगे सूचना सलाहकार ही बने थे 35 साल. की उम्र में राजनाथ सिंह जी के नहीं 30 30. साल की उम्र वाप रे तो आप मैकेनिकल. इंजीनियरिंग से यहां कैसे आ गए फिर अब वो. तो बिल्कुल अलग क्षेत्र था वो ऐसा था कि. हम संघ में बहुत सक्रिय थे और उसके बाद जब. हम पास उट करके आए तब तक वो 92 वाली सरकार.
आ चुकी थी तो संघ के माध्यम से लखनऊ में. कई संघ के बड़े पदाधिकारियों से परिचय हुआ. वहां के माध्यम से भाजपा के कई नेताओं से. परिचय हुआ वरिष्ठ लोगों से अब उसमें एक. ब्रह्मदत्त द्विवेदी जी होते थे. जिनकी डे गई कलराज मिश्रा जी थे फिर. राजनाथ जी थे डॉक्टर जोशी से भी उस. दरमियान ही परिचय हुआ तो फिर राजनाथ सिंह. जी से बहुत नजदीकी होती चली गई और फिर वह. पता ही नहीं लगता है. कि कब आप.
कहां चले जाते हैं मतलब जिसे एक जोक का. शेर है जोक का नाम सुना होगा ना शेख. मोहम्मद इब्राहिम जोक बहुत बड़े उर्दू के. शायर है उनसे पूछा गया कि भाई तुम जिंदगी. में यहां आ कैसे गए तो जोक ने कहा जौक. दुनिया के समंदर में यह कश्ती उम्र की जिस. जगह पर जा लगी वही किनारा हो गया जबरदस्त. अब इस पर देखिए सवाल हमको आ गया कई लोगों. ने भी कहा कि जैसे आप आप शायरी बहुत करते. हैं अभी योगी जी ने कल परसों कह दिया कटम. की भाषा है और बड़ी चर्चा चल रही थी उसकी.
कि उर्दू जबान तो हमारे भारत की ही है तो. इसको फिर कटम की भाषा क उस भाषा से क्यों. नफरत करना भाषा तो सबकी होती है और उर्दू. तो हमारे त बहुत अच्छी बात कही है जो योगी. जी ने कहा है लोग उसका मतलब नहीं समझ पाए. देखिए उर्दू हम शायरी की भाषा. थी अब उर्दू उर्दू भी तो रामायण भी है हां. बता रहा हूं वो चकबस्त रामायण अब उर्दू. कट्टर पंथ की भाषा हो गई कब से जब यह देश. सेकुलर नहीं था 1976 से पहले जब यह 4.
सेकंड अमेंडमेंट नहीं हुआ था तब मुस्लिम. समाज और उर्दू के प्रतीक उर्दू के. पोस्टर्स में क्या दिखाई पड़ता था साहिर. लुध्याना हसरत जयपुरी मजरू सुल्तानपुरी. जिगर मुरादाबादी जोश मलिया बादी शकील. बदायूनी यह होते थे उर्दू के कैफी आजमी यह. होते थे उर्दू के प्रतीक यह होते थे. मुसलमान नों के प्रतीक उस्ताद बड़े गुलाम. अली उस्ताद अमजद अली खान उस्ताद जाकिर.
हुसैन जिनकी अभी डेथ हुई ठीक ये थे. मुस्लिम आइडेंटिटी के प्रतीक अब क्या हुआ. देश हो गया सेकुलर तो एक ऐसी भाषा जो. आर्टिस्टिक और क्रिएटिविटी का एंगल जिसमें. दिखाई पड़ता था अब वो किसकी प्रतीक माने. जाने लगी अब उसको सबसे ज्यादा यूज करने. वाले में कौन असदुद्दीन ओवैसी बदरुद्दीन. अजमल मौलाना मदनी और अब उस भाषा में.
तकरीरें किनके पक्ष में दी जाती हैं एक. दौर था कि उर्दू में शायरी भगवान कृष्ण के. पक्ष में भी लिखी जाती थी आपने शायद सुना. हो वो बिहारी का बड़ा फेमस दोहा है ना. मेरी भव बादा हरो राधा नागर सोय जा तन की. झाई परत श्याम हरित दुति होय ठीक अब इसको. ठीक उर्दू में लिखा गया मेरी अफक दुनिया. दूर कीजिए राध के रानी कि इनके साय तन से. हरे हो श्याम नूरानी मगर आज वही उर्दू.
भाषा में किसके लिए तकरीर होगी अफजल गुरु. के लिए याकूब मेनन के लिए बुरहान वानी के. लिए जाकिर नायक के लिए इशरत जहां के लिए. आज बताइए कौन सा भाषा कैसे ख और जब मैंने. पढ़ना शुरू किया सर तो दिखाई पड़ा बृज. नारायण चक बस जी पंडित हरिचंद अख्तर साहब. संपूर्ण सिंह काल अभी गुलजार साहब हमारे. 76 के बाद का पैदा हुआ कोई व्यक्ति बताइए. और वो 76 से पहले कोई आतंकवादियों का. समर्थन करता हुआ बताइए तो भाषा से रत कर. ना ना भाषा नहीं आपने भाषा को परव कर दिया.
हम आपने भाषा का सिंबल दूसरा कर दिया बट. हम आपने उस भाषा का यूज ही वो अलग करना. शुरू कर दिया मैंने बोला ना आज आप बताइए. ऐसे लोगों के लिए अगर आप ऐसी भाषा अरे अभी. हमारे मनोज मनोज शुक्ला मुंतशिर हो गए थे. आपने लीजिए नाम. लिया बिल्कुल जो आपने कहा वही तो मैं कहने. का प्रयास कर रहा हालाकि वापस शुक्ला हो. गए वो. एक इंटरेस्टिंग फैक्ट है हा कि.
ये भाषा बनी कैसे उर्दू हा मतलब ये मैं. ऐसा नहीं कि कोई मैं इस पर बहुत अथॉरिटी. रखता हूं मैंने ऐसे बुजुर्गों के द्वारा. एक बात सुनी थी मुस्लिमों की तो भाषा. फारसी थी तो फिर उर्दू की जरूरत क्या. थी हमको नहीं नॉलेज हम आपकी तरफ से देख. रहे हैं देखिए उर्दू भाषा ऐसे बनी. स्क्रिप्ट ली गई अरेबिक से हा वर्ड्स लिए. गए अरेबिक और पर्शियन के और ग्रामर ली गई. हिंदी सेट्स हाउ उर्द लैंग्वेजेस.
क्रिएटेक हैं कि वह फारसी और अरबी के. मिक्सचर से बन गई मगर मैंने एक. इंटरेस्टिंग थ्योरी पढ़ी थी जिस पर मैं. क्लेम नहीं करता हूं कि ये सच है या गलत. है इस परे कोई वो नहीं कह सकता जस्ट एक. मैंने डिस्क्लेमर के साथ बोल रहा हूं. फारसी मुगल कोर्ट्स की भाषा थी और फारसी. पढ़े लिखे का मतलब सबसे पढ़ा लिखा होता था. पुराने जमाने की कहावत है ना पढ़े फारसी. बेचे तेल यह देखो किस्मत के खेल ठीक ये. नहीं तो हाथ कंगन को आरची क्या पढ़े लिखे. को फारसी क्या फिर ये बात आई फारसी कहां.
की थी ईरान की ईरान क्या था शिया तो फारसी. तो प्रेडोमिनेंटली शियाओं की लैंग्वेज है. तो देयर हैज टू बी सम लैंग्वेज व्हिच शुड. हैव अ सुन्नी इलस आल्सो तो मैंने यह भी एक. थ्योरी सुनी थी कि भाई पर्शियन वास. कंसीडर्ड एज अ इस्लामिक लैंग्वेज बज मोर. प्रिडो मिनेट अ शिया शिया लैंग्वेज तो. देयर हैज टू बी सम अदर लैंग्वेज जिस परे. थोड़ा सुन्नी इन्फ्लुएंस ज्यादा हो अब ये. सच नहीं है मैं नहीं कह सकता बट ये भी एक. ब हमने भी कहीं पढ़ा कि गाली जो आई है.
इसका आविष्कार भी मुगलों के साथ हुआ था. पहले हमारे य गालिया अलग थी फिर उनके य. सूअर का बच्चा शुरू हुआ कि या हराम जो हम. बोलते हैं और फिर हमने उनको उनके जो उनके. रिलेशंस होते उस आधार पर गाली देना शुरू. किया नहीं नहीं आप एक और बात देखिए यहां. पर मैं एक बात में जो मुस्लिम शायर है. उनकी तारीफ. करूंगा वह लोकप्रियता के चक्कर में नहीं. पड़े वो अपनी लैंग्वेज के ऊपर स्थिर रहे. 60 और 70 के दशक में जितने फिल्मी गाने. लिखे गए आप देखिए सब में क्या खालिस उर्दू.
के शब्द हैं जिहाले मुस्किन मुगम बरन जिस. बहार हिजरा में सारा दिल है और लोगों ने. पढ़े इब्तिदा इश्क में हम सारी रात जागे. अल्लाह जाने क्या होगा आगे अब जा बलबू. शिद्दत दर्दे बया से मैं वाकिफ हूं आज. इश्क के अर्जे बयां से मैं और लोगों ने. गाने सुने हमारे लोग कन्वर्ट होना शुरू हो. जाते हैं नहीं नहीं सिंपल हिंदी लिखो. सिंपल हिंदी लिखो छोड़ दो ये अंतर होता है. क्या आप दता के साथ अपने विषय पर खड़े अब. कोई यह कहे कि साहब शेरो शायरी है ये.
चीजों के लिए बहुत से लोगों ने आपको याद. हो मुझे याद नहीं है वो उन्होंने. शायद कौन शायर थे मुझे याद नहीं है तो. नीरज से उन्होंने कहा कि साहब गोपालदास. नीरज उनसे उन्होंने कहा कि साहब उर्दू. जबान के अलावा तो अच्छी शायरी का गीत लिखा. ही नहीं जा. सकता तो फिर नीरज ने वो गाना लिखा और व. खूब हिट भी हुआ बादल बिजली चंदन पाय पानी. जैसा अपना प्यार लेना हो का जन्म हमें कई. कई बार इसमें कहीं उर्दू नहीं है फिर भी.
गाना हिट हुआ इवन ऐसे भी गाने हम लोग ने. बचपन में सुने चंचल शीतल निर्मल कोमल. संगीत की देवी स्वर सजनी सुंदरता की हर. प्रतिमा से रूप में तोत सुंदर सजनी ये भी. हिट हुआ सत्यम शिवम सुंदरम का था लेकिन. फिर भाई उर्दू मुसलमानों की भाषा थोड़ी ना. क्यों इसको अब ये बना दिया गया मैं आपको. भी सुन रहा हूं मुझे ऐसा लग रहा है कि ये. उनकी भाषा है हमारी अलग है हां बता रहा. हूं यह क्यों हुआ जैसे कर्नाटक गवर्नमेंट. ने अभी शायद चिकमंगलूर जिले में हम वो. जिला मुझे थोड़ा सा वो हो रहा है उसमें एक. ऑर्डर निकाला है कि जो आंगनवाड़ी वर्कर है.
उनको कन्नड़ के अलावा वो भी आनी चाहिए. उर्दू क्योंकि उस इलाके में 90 पर मुस्लिम. रहते हैं तो किसने जोड़ा उर्दू को मुस्लिम. से बट हमारी भी बोलचाल भाषा में तो योगी. जी ने जब क्रिटिसाइज किया उसमें भी 10. वर्ड उर्दू के थे वही तो बात कह रहा हूं. आप कह रहे हैं और किस इंटेंट से कह रहे. हैं तो उसको आप चेंज कर सकते हैं सरकार. आपकी है अब तो बता तो रहे हैं इसीलिए तो. अब परिवर्तन ने शुरुआत सिर्फ सरकार का ही. विषय नहीं था याद करिए एनडी तिवारी जब थे.
तो उन्होंने उर्दू को तीसरी राजभाषा के. रूप में इंक्लूड किया किसलिए कहा गया. माइनॉरिटी का ध्यान रखना है कौन जोड़ रहा. है अरे तो आप उ आपने छीना ना आप सरदार. पटेल को छीन लाए नहीं नहीं विषय ये नहीं. है आप आजाद जी को छीन लाए पहला आपका सवाल. य था सुभाष चंद्र बोस जी को छीन लाए तो. उर्दू क्यों नहीं छीन ले रहे आपकी नहीं. नहीं भाई ये तुम्हारी नहीं है ये सबकी. भाषा है बता रहा हूं पहले आपने यह प्रश्न. किया कि मुस्लिमों से किसने जोड़ा हां. मुस्लिमों से सेकुलर दलों ने ने जोड़ा ठीक. है ठीक अब मेरा मानना है यदि आप उसमें से.
मुस्लिम एंगल हटा देते तो फिर उसके बाद वो. चीजें अपने आप क्लियर हो जाती तो इसलिए हम. यह कहना चाहते हैं ऐसा तो नहीं है आपको. पता है एक से एक बड़े से बड़े हिंदू शायर. भी हुए हां हां रपत सहाय फिरा गोरखपुरी. राम प्रसाद बिस्मिल और आपको एक बताए एक थे. विश्वनाथ प्रसाद माथुर लखनवी जिन्होंने एक. ऐसी बात कही है जो किसी मुस्लिम के लिए भी. बड़ी वो हो जाएगी उन्होंने कहा खुदा का. शुक्र है हम हिंदुओं में कोई शब्बीर का. कातिल नहीं है शब्बीर समझ रहे हैं ना.
मोहम्मद साहब के नवासे जो कर्बला के मैदान. में जिनको कत्ल किया गया था बहुत और जो. उर्दू में रामायण लिखी है चकबस्त रामायण. तो बृज नारायण चकबस्त है तो यही तो मैं कह. रहा हूं तो आप आप वापस खींच क्यों नहीं ला. रहे विषय इसका नहीं हम खींचने की बात ही. नहीं क रहे हैं हम कह रहे हैं जो आपने. उसके अंदर प्रवर्धन कर दिया पहले उसको. आइडेंटिफिकेशन. [संगीत]. जितने भी यहां पर एक अच्छी बात भी आपको. समझनी चाहिए उत्तर से दक्षिण तक.
देखिए कभी आपने सुना भारतीय समाज में कहा. जाएगा भाषा की विविधता है विविधता को फिर. ले जाओ विभाजक तक और फिर उसमें लड़ाई. लड़ो भाई साहब तमिल हिंदी पर लड़. जाओ मराठी हिंदी पर लड़ जाओ बंगाली पंजाबी. पर लड़ जाओ भाषाओं को लेकर आपस में लड़. जाओ पर यह बताइए यह मैं कह रहा हूं फूड फ. थॉट सबको सोचना चाहिए कभी आपने सुना है. असदुद्दीन. कहे वो तो हैदराबाद के रहने वाले मुझे. तेलुगू में बोलना है कभी महबूबा मुफ्ती के.
मुंह से सुना है कि मुझे कश्मीरी में. बोलना है कभी बदरुद्दीन अजमल के मुंह से. सुना है कि मुझे असमिया में बोलना है कभी. मौलाना मदनी के मुंह से सुना है कि मुझे. तमिल में बोलना है सोचिए विचार करिए उसके. बाद इन प्रश्नों के उत्तर आपको स्वयं. मिलना शुरू होंगे कि एक तरफ कहा जाता भाषा. की विविधता का सम्मान करो नहीं वह तो अलग. बात है विविधता का सम्मान ही मत करो भाषा. पर घमासान करो और दूसरा वर्ग इतनी समझदारी. से चलता है वो कहता कभी कोई भाषा पर मुझे.
लड़ा नहीं सकता ठीक है मैं गहरी बात आपने. कही है इसको हम ध्यान भी देंगे चाल चरित्र. चेहरा यह तीन शब्द थे जो बीजेपी को में. शुरुआती दौर में सुनाई पड़ते थे अभी. बीजेपी वैसी ही. है अटल जी से मोदी जी के दौर में चिंतन. वही है चाल तेज हो गई है चरित्र और प्रखर. हो गया. है और चेहरा और मुखर हो गया है चार चीजें. थी चाल चिंतन चेहरा चरित्र ह यह सवाल मैं. इसलिए पूछा क्योंकि अभी दिल्ली के. मुख्यमंत्री के नाम का अनाउंसमेंट हुआ.
रेखा गुप्ता जी का बहुत सारे पॉजिटिव. पॉइंट सामने आए जो आप लोगों ने भी सामने. रखे कि क्या-क्या वजह थी तो उसको मुझे. बताने की जरूरत नहीं है लेकिन उनके पुराने. ट्वीट्स बहुत सारे आए और उसमें जो भाषा थी. वह बड़ी चिंताजनक थी क्योंकि आप ही की. सरकार इस देश में कई सारे यूट्यूब पर. कारवाई कर रही है और पूरे देश ने विरोध. किया उसमें हम भी शामिल थे बड़ी मुखरता से. हमने विरोध किया फिर वह भाषा हमने देखी तो. लोगों ने कहा यार बच्चों को तो हम कह रहे. हैं लेकिन य नेताओं में तो उससे प्रो लेवल. की भाषा है और वो भी शर्मसार करने वाली.
भाषा थी जिन शब्दों का इस्तेमाल मैं नहीं. कर सकता वो ट्वीट्स डिलीट कर दिए गए तो. क्या इन चीजों का ध्यान नहीं रखते आप लोग. जब नेता चुनते हैं देखिए भाषा की मर्यादा. सभी को ध्यान रखनी चाहिए और राजनीति में. शब्दों का चयन बहुत सोच समझ के करना चाहिए. परंतु कभी-कभी भाषाओं के कोई शब्द किसी. संदर्भ और प्रसंग विशेष में प्रयोग होते. हैं परंतु मेरा मानना है किसी भी संदर्भ. प्रयोग में भी संयम का पूरा ध्यान रखना. चाहिए आपकी पार्टी रखती है ऐसे लोगों को. हां जी बिल्कुल हम लोग तो इस बात का पूरा. ध्यान रखते हैं अगर आप देखें एक छोटा सा.
उदाहरण देता हूं जो लोग इधर-उधर की बातें. कोट करते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. जी के लिए हम किन शब्दों का प्रयोग हुआ मर. जा कब्र खुदे गी फलाने की मौत इस तरह की. मौत और बोटी बोटी काट डालूंगा मैं चैलेंज. करके कहता हूं हमारी पार्टी के किसी भी. नेता ने कभी विपक्ष के किसी भी नेता की. बोटी बोटी काट डालूंगा कब्र. और विद ड्यू अ कैविएट कुत्ते की मौत ऐसे.
शब्दों का प्रयोग किया इवन जब इमरजेंसी. लगी थी लोकतंत्र की मौत हो गई थी तभी. इंदराज जी के लिए इन शब्दों का प्रयोग. नहीं किया और जो लोग कहते थे इमरान मसूद. बोटी बोटी काट डालूंगा वो सपा में थे. राहुल गांधी जी 2014 के चुनाव में अगले. दिन कोई जाकर वेरीफाई कर सकता है नेक्स्ट. डे चुनाव प्रचार करने का भाई कांग्रेस के. कैंडिडेट नहीं थे फिर आप क्यों गए और उसके. बाद इतना उनके प्रति प्रेम पैदा हो गया कि. उन्हें कांग्रेस में ले आए और आज वो. कांग्रेस मेंबर ऑफ पार्लिमेंट है ठीक है. आप जो बात कर इसमें और भी बहुत सारी. मणिशंकर अया जी का बयान है और बहुत सारे.
और बयान मौत का सौदागर वगर. वग लेकिन सर ये तो आपकी साइड से भी आता है. जैसे 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड वाला डायलॉग. था या सोनिया जी को लेकर कई बार बहुत. अच्छा आपने कहा 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड. में किसी का नाम था बट एक महिला को उस तरह. से पैसों से जोड़कर नाम आपने क्यों जोड़ा. जैसे प्रधानमंत्री ने कहा पार्लियामेंट. में हसते हुए मुझे आज उसकी याद आ गई तो. भाई उड़ता तीर तो आपने पकड़ लिया अच्छा. मेरे लिए कहा जा रहा है जबकि मोदी तेरी. कबर खुदे गी किंतु परंतु का गुंजाइश नहीं.
है मोदी को बोटी बोटी काट डालेंगे जितने. आप उदाहरण बता रहे हैं यह सब थर्ड पर्सन. के हैं यानी किसी का नाम लेकर नहीं बोला. गया है समझने वाले ने अपने आप समझ लि आपने. कर दिया सर ये तो इतने मासूम ना आप है ना. वो लोग है तो मैं यही कह रहा हूं मगर. उन्होंने तो कोई खोजा मतलब छोड़ा ही नहीं. मोदी की मौत मोदी की कबर मोदी ये होगा मर. जा मोदी ये वर्ड मत उसमें तो स् नहीं ना. गलत की बात है मैंने कहा मतलब मरने का कभी. हमने किसी के लिए बोला मरने का नहीं क अ.
मरने का नहीं कहा आप तो ऐसे कह रहे हैं कि. मतलब किसी में कहा सुनी हो गई दूसरे ने. गोली चला दी उने मतलब अपराध तो दोनों को. हां सही बात है आप ये कहेंगे उसने भी कुछ. कहा था और उसने भी वो बात कही अच्छा महिला. सम्मान की बात है तो कौन सी ऐसी पार्टी थी. जिसके नेता ने अपनी पार्टी की महिला. नेत्री के लिए टंच माल शब्द का प्रयोग. किया था चलिए बाहर तो छोड़ आप कानपुर वाली. घटना का जिक्र कर रहे हैं अपनी पार्टी के. नेता ब य आप में भी तो कई सारे लोग ऐसे. हैं वो किस स्तर के नेता थे हमारा कोई. स्तर का नेता बताइए य बड़ी मजेदार बात है. आप कंपैरिजन शुरू करते हैं और ये सारा का.
सारा प्रॉब्लम शुरू कहां से हुआ जब सोनिया. जी ने 2007 में मौत का सौदागर शब्द प्रयोग. किया था सोनिया जी उस समय रूलिंग पार्टी. की चीफ थी उस समय भारत के सबसे पावरफुल. नेता थी उनके स्तर से बात शुरू हुई और तब. ये बात यहां तक पहुंची और बाकी छोड़िए. चलिए आप व्यक्ति की बात कह रहे हैं ये. बताइए यहां तो पूरी की पूरी कम्युनिटी के. लिए इरेडिकेशन ऑफ सनातन धर्म हिंदू धर्म. का समूल नाश. फिर क्या है यह कोरोना है वायरस है डेंगू.
है मलेरिया है फिर एक और मंत्री बोलता है. नहीं डेंगू मलेरिया वायरस मत कहिए देयर. हैज टू बी सम सोशल स्टिग्मा अटैक टू इसको. एचआईवी कहिए पूछिए भाई यह तो भारत की. अस्मिता के प्रतीक के लिए इतने घटिया. शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं और व्यक्तिगत. कमेंट के ऊपर लेकर बचने का प्रयास कर रहे. हैं इसे कहते हैं तिनके की वोट में पहाड़. छुपाने ठीक है मेरे पास सवाल क्योंकि बहुत. लंबे है इसलिए मैं क्रॉस क्वेश्चन आज कम. करूंगा अ कुंभ को लेकर मैंने ने बागेश्वर. जी का इंटरव्यू किया उन्होंने कहा कि अगर. सेना को सौंप देते तो यह कलंक नहीं लगता.
ये मेरे पॉडकास्ट में उन्होंने कहा मैंने. आपकी तस्वीर भी देखी अभी आप उनसे मिलकर आए. हैं कुंभ में कलंक लगा मुझे लगता है कि इस. पे जो जांच गठित की है उत्तर प्रदेश सरकार. ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में उस जांच. की रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा करनी चाहिए. उसके बाद किसकी गलती थी कहां पे चूक हुई. यह बात साफ हो जाएगी और उसके अनुसार जो. युक्ति सम्मत विधि सम्मत कारवाई होगी वो. सरकार करेगी दिल्ली में भगदड़ हुई उसको. लेकर भी कहा गया कि अब. किसी पर जिम्मेदारी तय नहीं होती है यह. पता लग जाता है कि 50 करोड़ लोगों ने.
स्नान किया लेकिन भगदड़ क्यों हुई बिना. ट्रेन लगे बिना ट्रेन लड़े लोग मर कैसे गए. बिना अनाउंसमेंट हुए इसकी अकाउंटेबिलिटी. नहीं होती है पुराने जमाने में जैसे नितीश. जी आपकी सरकार में थे या लाल बहादुर. शास्त्री जी का जिक्र होता है या अटल जी. के टाइम पे कम से कम सामने आते थे होता था. यह जिम्मेदार व्यक्ति है इस्तीफे होते थे. अब इसको दो तरीके से बता देता हूं पहली. बात जांच गठित हुई है यह जांच की रिपोर्ट. आने से पहले जिम्मेदारी गठित करना चाहते. हैं मर मैं इतना आश्वस्त करना चाहता हूं. हमारे यहां जो गलत हुए हैं उनको इतना लंबा. इंतजार नहीं करना पड़ेगा कि 40 साल बाद.
सज्जन कुमार को सजा. हो कितना दो पीढ़ी के बाद इसलिए मैं कहना. चाहता हूं जांच की प्रतीक्षा करिए और. दूसरा एक और फ मात्र दो तीन हफ्ते पहले की. तो बात है जब यह विपक्ष के नेता बोल रहे. थे इतने लोग थोड़ी आ रहे हैं य तो एक्टेड. फिगर अखिलेश जी भी बोले थे कांग्रेस के. नेता ही बोले थे अब वही कह रहे इतना जाम. हो रहा है इतना व्यवस्था क थे ड्रोन दि. खाइए कितना है अखिलेश जी ने कहा था अब तो. सेटेलाइट से देख लीजिए प्रयागराज आने वाली.
सड़कें वाराणसी की तरफ से भी पूरी पूरी. सड़कें जाम है घंटों लग रहे हैं लखनऊ से. आने वाली सड़क मध्य प्रदेश से सतना रीवा. और चित्रकूट की तरफ से आने वाली सड़क. जौनपुर और मिर्जापुर से आने वाली सड़क. सारी सड़कें देख लीजिए अब तो भाई सेटेलाइट. से देखिए तो मेरा मानना है वह इनके इन. आरोपों को हम ईमानदारी से स्वीकार करेंगे. पहले अपना पहला आरोप विड्रॉ कर ले लोग तो. आ ही नहीं रहे हैं सब सन्नाटा है है फिर. साहब इतनी भीड़ है दो में से एक तो तय कर.
लो ना जानते क्या है कोई भी मुद्दा मिल. जाए बस अपने मन की खुन्नस निकालनी है. क्योंकि हम एजेंडा फुलफिल करना है. इरेडिकेशन ऑफ सनातन धर्म हां ठीक है ले आप. लोगों ने बुलाया था जो डेथ हुई है उसको. लेकर भी एक संवेदना लोग एक्सपेक्ट करें उस. पर का हो चाहि बिल्कुल आपने सही कहा तो जो. लोग यह कॉन्फ्रेंस कर रहे थे और उससे पहले. 2021 में वैश्विक स्तर पर अमेरिकन. यूनिवर्सिटी में कान्फ्रेंस हुई. डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व उसके बाद जो. लोग हिंदू धर्म को कोरोना वायरस एचआईवी कह.
रहे थे जो रामचरित मानस की प्रतियां फाड़. रहे थे जो अनेक प्रकार के गंदे अभद्र शब्द. प्रयोग कर रहे थे हिंदू शब्द गंदा है यह. कर्नाटक का एक मिनिस्टर बोल रहा था वो लोग. जब यह कहते हैं हम ईमानदारी से कह रहे हैं. यह मृत्यु जो हुई हैं यह दुखद है. दुर्भाग्यपूर्ण है कष्टदायक है पर जब वो. लोग इस पृष्ठभूमि में आप देखेंगे तो साफ. समझ में आता उनमें संवेदना नहीं संतुष्ट. का ठीक है अ मणिपुर में क्या आपकी सरकार. फेल हो गई क्योंकि फुल मेजॉरिटी गवर्नमेंट.
थी उसके बावजूद राष्ट्रपति शासन लगा. मणिपुर का एक भी व्यक्ति सामने नहीं आए कि. मैं चीफ मिनिस्टर बन जा रहा हूं संभाल. लूंगा अमित शाह जी पहले गए भी थे. प्रधानमंत्री जी पर आरोप लगता है कि वो. वहां नहीं गए एक बहुत संवेदनशील विषय है. क्योंकि पहले सरकारें थी मणिपुर का इशू. काफी कॉम्प्लिकेटेड है लेकिन आप लोगों ने. क्योंकि दावा किया था और आपकी सरकार ने. किसान आंदोलन जाटों का आंदोलन मराठा. आंदोलन बहुत सारे आंदोलन को संभाला है. मणिपुर नहीं संभाल पाए देखिए मणिपुर का. विषय बहुत संवेदनशील है और आप ने जो कहा. बिल्कुल यह पिछले 50-60 वर्षों का कैडर. इफेक्ट है हमारे जो पहला शासनकाल रहा हम.
वो मणिपुर में बहुत शांति और विकास का रहा. हम वो पहला मौका था जब मणिपुर में दो दो. साल तक ब्लॉकेड नहीं रहा आज की स्थिति पर. सरकार पूरी सतर्कता और संवेदनशीलता से उस. परे नजर रखे हुए हैं और उसको नियंत्रित. करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र है बहुत. सारी उसके अंदर संवेदनशीलता एं हैं और. उसके अंदर एक सामाजिक भावनात्मक. संवेदनशीलता भी जुड़ी हुई है तो सरकार उन. सारी चीजों. बहुत सतर्कता और प्रामाणिकता से काम कर.
रही है परंतु जो लोग राजनीति कर रहे हैं. मैं सिर्फ एक उदाहरण देना चाहता हूं. केंद्र सरकार के विरुद्ध अविश्वास. प्रस्ताव आया मणिपुर को लेकर मणिपुर. विधानसभा में क्यों नहीं आया अविश्वास. प्रस्ताव प्रदेश का मुद्दा है चल रहा था. कि आने वाला. उस की बात कर रहा अब आइए प्रस्ताव आया. मणिपुर को लेकर आज तो डिजिटल डाटा का. जमाना है जाकर चेक कर लीजिए 5 पर भी. मणिपुर पर नहीं बोला. गया प्रस्ताव लाया गया मणिपुर पे विपक्ष.
के सारे वक्ताओं का स्पीच जाकर कोई. डिजिटली चेक कर ले 5 पर नहीं बोला गया. मणिपुर के ऊपर सब इधर-उधर की तमाम बातें. बोली गई जिसमें राहुल गांधी जी हिंदुत्व. भी समझाते रहे वा अडानी भी लाते रहे फलाना. लाते रहे सब कुछ इसका मतलब साफ है मणिपुर. को एक मुद्दा बनाकर दिल्ली में राजनीति. करनी है मणिपुर के प्रति संवेदना के साथ. समाधान के लिए नहीं सोचना है ठीक है एक कई. बार तंज में लोग सवाल पूछते हैं आपको कि. नेहरू जी ने और कितनी गलती की थी मेरे.
विचार से कुछ भी होता है तो होता है नेहरू. जी पर डाल दिया गया उन्होंने यह किया था. नहीं नहीं सिलेक्टेड वर्स ऑफ जवाहरलाल. नेहरू जो लोग पढ़ ले उ इतने सारे वॉल्यूम. है दर्जनों तो वॉल्यूम है अगर लोग पढ़ ले. तो उनको समझ में आएगा. कि गलतियां जो है वोह उनकी श्रंखला कितनी. बड़ी है अब जैसे मैं सिर्फ दो उदाहरण देना. चाहता हूं जो बहुत कम लोगों को पता होगा. 1950 में के एम पकर जब चीन तिब्बत में घुस.
गया था के एम पकर. सस एंबेसडर इन चाइना व भारत सरकार की तरफ. से एक लेटर लिखते हैं जिसमें लिखते हैं. इंडिया. एक्सेप्ट चाइना ने डिमांड यह की थी कि. भारत तिब्बत पर चीन की सुजर निटी एक्सेप्ट. कर ले अर्थात तिब्बत के ऊपर चीन का. स्वायत्त शासी शासी शासन को स्वीकार कर ले. भारत सरकार ने लिख दिया वी एक्सेप्ट द. चाइनीज सोवर निटी ओवर तिब्बत यानी हम. तिब्बत पर चीन की संप्रभुता को स्वीकार.
करते हैं और उसके बाद जब संसद में यह विषय. उठा तो उस समय विदेश राज्य मंत्री एक. महिला थी उनका मुझे नाम नहीं ध्यान है. उन्होंने जवाब में ये कहा कि नहीं नहीं. नहीं जो लिखा गया है वो राजदूत के द्वारा. वो सरकार का ऐसा विचार नहीं है राजदूत ने. बाद में अपनी किताब में लिखा है के एम पकर. ने बिल्कुल हमने सरकार के निर्देश प किया. और यदि सरकार कह रही है ऐसा विचार नहीं था. तो ऐसे राजदूत को तो डिस्मिस कर देना. चाहिए था कारवाई कर देनी चाहिए थी ये है. दूसरा 21 जून 1952 को जवाहरलाल नेहरू से. पूछा गया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कि आपने. क्या चीन के सैनिकों को रसत दी है जब वह.
चीन तिब्बत में अत्याचार कर रहे थे. उन्होंने कहा हां हमने उनको थोड़ा सा राशन. पहुंचाया है ताकि वह जीवित रह सके और वो. थोड़ा सा राशन हजारों टन चावल था और उसकी. बगैर चीन की सेना भूखों मरने लगती और उसे. वापस जाने की जरूरत पड़ती क्यों क्योंकि. लासा से जो नियरेस्ट शहर था चीन का वो था. चेंगदू वो 2000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर. था और उस जमाने में तिब्बत में ऐसी सड़कें. नहीं जैसी आज है बड़ी टूटी फूटी सड़कें थी.
भारत से 250 प 300 किलोमीटर के दूर में था. तवांग से और भारत की तरफ सड़कें अच्छी थी. क्योंकि शताब्दियों से तिब्बत से व्यापार. होता रहा था तो आप ये सोचिए आप किसकिस को. गलती क्या-क्या गिनाए इसीलिए मेरे विचार. से हमें कोई जवाहरलाल नेहरू जी की गलतियां. बताने में रुचि नहीं है परंतु क्या करें. जब आप एक चीज बोलते हैं तो लिंक वहीं से. निकल आती है ठीक है और वो भी आप ये समझिए. जब आप उन्हीं के खानदान को लेकर च चल रहे. हैं तो गलतियां तो फिर निकलेंगी ही. निकलेंगी मैं कुछ धर्म को लेकर सवाल थ.
लेकिन एक सवाल मेरे मन में सर ये आया कि. तक्षशिला या नालंदा जैसी यूनिवर्सिटी आप. लोगों ने क्यों नहीं बनाई अब तो 11 साल हो. गए जेनयू पर सवाल उठे बाकी सवाल उठे आप. लोगों ने ऐसी कोई यूनिवर्सिटी क्यों नहीं. बनाई जिसमें जो गलतियां बताते हो कि हमारा. एजुकेशन सिस्टम चेंज किया गया उसको आप. वहां डाल देते ताकि हमारी आने वाली. पीढ़ियां उस हिसाब से ग्र होती देखिए आपने. बहुत अच्छी बात कही है हमारी सरकार ने आने. के बाद 2020 में पहली बार नई एजुकेशन. पॉलिसी लेके आई जिसमें आमूल चूल परिवर्तन. एजुकेशन की फील्ड में किया गया जैसे मैं.
एक उदाहरण देना चाहता हूं इससे पहले क्या. होता था तीन इयर्स का डिग्री कोर्स है 2. साल के बाद कोई बच्चा तीसरा साल नहीं कर. पाया तो उसका पूरा बेकार हो गया हमने उसका. बिल्कुल अलग-अलग स्टिफैन कर दिया है केवल. फर्स्ट ईयर करके हट जाएगा तो सर्टिफिकेट. मिल जाएगा सेकंड ईयर करके हट जाएगा तो. डिप्लोमा मिलेगा थर्ड ईयर करके हटेगा तो. डिग्री मिलेगी और फोर्थ ईयर भी कर लेगा तो. ऑनर्स की डिग्री मिल जाएगी फिर हमने. रिसर्च के लिए एक अलग व्यवस्था की है और. ताकि इस ढंग की यूनिवर्सिटीज को डेवलप हो. सके हमने करीब 600 700 यूनिवर्सिटी और. एक्स्ट्रा बनाई है जहां तक आप नालंदा के.
बनाने की बात कह रहे हैं उस पैटर्न की बात. कर पैटर्न प देखिए पहले भारत के. अंदर जो जागृति और स्वाभिमान उभरना शुरू. हुआ है वह आत्मविश्वास एक बार आ तो जाए. उसके बाद नालंदा की यूनिवर्सिटीज या. तक्षशिला की यूनिवर्सिटी कोई राज्य के. द्वारा संचालित नहीं थी यह पूरा समाज के. द्वारा संचालित थी इवन अगर आप ये भी ध्यान. करें तो महाभारत में जब युधिष्ठिर के जुए.
वाला उल्लेख आता तो वो कहता है. विश्वविद्यालयों मंदिरों और उनकी संपत्ति. को छोड़ के सारा राज्य दांव पे लगाता हूं. तो दे वर नॉट कंसीडर्ड द स्टेट सब्जेक्ट. तो वो चीजें उभर गगी सरकार निश्चित रूप से. उसकी भी व्यवस्था करेगी और अगर आप देखें. तो. एंसटिटाइट करने के लिए इसी बजट में एक. मैनु स्क्रिप्ट वाला व्यवस्था की गई है यह. सब शुरुआत है ताकि हम पहले उनको डिजिटाइज. करके उनको ट्रांसलेट करके उस नॉलेज सिस्टम. अब आप एक छोटी सी बात देखिए डब्ल्यू एओ. में एक सेंटर बनवाया सेंटर फॉर ट्रेडिशनल.
मेडिसिन और उसका केंद्र भारत के जामनगर. में बना क्योंकि सबसे स्ट्रक्चर्ड. ट्रेडिशनल मेडिसिंस का अगर डॉक्यूमेंट्री. एविडेंस है तो आयुर्वेद के रूप में हमारे. पास है तो अगर आप देखें तो यह धीरे-धीरे. धीरे-धीरे ये चीजें उभरती हुई आके दिखाए. और चूंकि ये सिविलाइजेशनल चीज है इट विल. टेक वन और टू जनरेशन टू एस्टेब्लिश ठीक है. अब मैं चाहूंगा छोटे-छोटे आप जवाब दीजिए. क्योंकि आपका भी समय है मैं उसका ख्याल. रखते कह रहा हूं. अ धर्म का पालन करने के लिए भगवान ने. विश्वास होना जरूरी.
है संशय आत्मा विनश्यति. अगर संशय होता है हम तो आत्मा का विश्वास. अब मैं छोटी सी एक बात कहूं बाकी तो छोड़. दीजिए हम अगर आप अच्छे प्लेयर बनना चाहते. हैं तो अपनी एक्सरसाइज करने वाली मशीन से. लेकर कोच पर विश्वास करते हैं कि नहीं कि. हर मुद्दे पर तरकी करते रहते हैं करते हैं. विश्वास तो फिर तो यदि फिजिकल स्ट्रेंथ के. लिए चाहिए तो मेंटल स्पिरिचुअल स्ट्रेंथ. बगैर विश्वास के आ जाएगी ठीक है राम मंदिर. के निर्माण से भारतीय समाज में क्या बड़ा. बदलाव.
हुआ भारतीय समाज में पहला बदलाव यह हुआ कि. सदियों से दबे कुचले भारतीय समाज में एक. स्वाभिमान का विषय आया हम दूसरा मानव. सभ्यता के श्रेष्ठतम मूल्यों को जो सिर्फ. हिंदू समाज में थे उसे स्थापित किया. दुनिया का इतिहास बड़ा भरा पड़ा है इन. उदाहरणों से कि भाई भाई का गला काट के. गद्दी पर बैठा बेटा बाप को मार के गद्दी. पर बैठा. उसके कंट्रास्ट में राम मंदिर उस उदाहरण. का प्रतीक है कि पिता के एक वचन पर कोई.
जंगल जाने को तैयार हो और भाई खड़ाऊ रख के. शासन करने को तैयार हो दूसरा उदाहरण समझिए. आज रशिया यूक्रेन की किस बात की लड़ाई है. कि एनेक्सेशन कर ले चाइना ताइवान में किस. बात की लड़ाई है इजराइल हमास में किस चीज. की लड़ाई है तो दुनिया में क्या है जिओ. पॉलिटिक्स क्या है एनेक्सेशन सबजुगेशन एंड. डोमिनेशन या तो मिला लो या अपना डेप्युटी. वहां बैठा दो या उसके साथ कांट्रैक्ट करके. सबजूगेट कर लो जब भगवान राम ने लंका जीता. तो क्या एनेक्सेशन किया नहीं क्या अपना. डेप्युटी बैठाया कि लक्ष्मण से कहा तुम.
यहां के वॉइस राय बन के मेरे बिहाव प. करोगे नहीं उनका सबजुगेशन किया नहीं तो यह. श्रेष्ठतम मूल्य दिखाया गया एंड. लास्ट एक लाइन में आपको समझ में आएगा भारत. में पर्यटन हम मैं यदि कोई एक डेस्टिनेशन. था हम जहां सबसे ज्यादा लोग हर साल जाते. थे वो था आगरे का ताजमहल म 2024 पहला वर्ष. बना है हम जब सबसे ज्यादा अगर टूरिस्ट. किसी एक स्थान पर गए हैं तो वह अयोध्या का. श्री राम मंदिर जहां 1 करोड़ 80 लाख लोग ग. यानी एक मुर्दे के मकबरे पर बनी वह इमारत.
जिसके बारे में यह कहानी है कि बनाने वाले. कारीगरों के हाथ काट दिए गए थे उससे हटकर. भारत के आत्मीय सम्मान का केंद्र वह प्राण. प्रतिष्ठित मंदिर बना है जो श्रेष्ठतम. मूल्यों का प्रतीक है और जिसको बनाने वाले. कारीगरों पर प्रधानमंत्री ने पुष्प वर्षा. की है दिस इज अ पैराडाइम शिफ्ट इन द. थिंकिंग प्रोसेस ऑफ द इंडियन सोसाइटी अब. मैं अभी गया था कर्णक सन टेंपल पे दो दिन.
पहले मैं उड़ीसा में था वहां पर गया और. वहां की कहानियां सुनी कैसे उस दौर में. समय देखा आता था महीने पता लगते थे सारी. चीजें थी हिंदू धर्म को लेकर कई बार आप. कहते हैं कि बड़ा साइंटिफिक टच है कई. मंदिरों का भी आप जिक्र करते हैं अब एक. तरफ जिसे आपने अभी ताजमहल का जिक्र किया. बार-बार ये कहा जाता है कि मुगलों ने भी. इस देश को बहुत कुछ दिया लाल किला ताजमहल. तो मीनार दिया है आप लोगों ने वैसी चीजें. क्यों नहीं बना ली थी पहले और बनाई थी तो. प्रचार क्यों नहीं किया. अब मैं छोटी सी एक बात बताता हूं जो ये. कहा जाता है इन्होंने ये दिया उन्होंने. दिया मैं एक छोटी सी बात कहता हूं कोई भी.
जाके चेक कर सकता है अगर आप ताजमहल कभी गए. बाहर तक गया था डोनाल्ड ट्रंप जब आए थे. रिपोर्टिंग कर अंदर नहीं जा पाया था अंदर. जाइए तो जब गाइड आपको दिखाता है तो एक. बड़ी मजेदार बात बताता है कहता है साहब ये. इतना बढ़िया कंस्ट्रक्शन है कि जमुना के. किनारे बना है कभी जमुना में बाढ़ आ गई तो. क्या होगा ताजमहल तो धस जाएगा पूरी. बिल्डिंग ही खराब हो जाएगी तो क्या किया. गया उसके बेस में आबनूस की लकड़ी लगाई गई. ताकि अगर पानी आ जाए. तो लकड़ी की वजह से वह प्लेटफॉर्म को. थोड़ा तैरता रहेगा वह नीचे नहीं जाएगा अगर.
ह्यूज फ्लड आ जाए तो और आबनूस की लकड़ी. इसलिए लगाई गई है क्योंकि आबनूस की लकड़ी. एक मात्र लकड़ी है जो भीगने के बाद जब वो. सूखती है तो उसकी स्ट्रेंथ बढ़ जाती है. कमजोर होने की वजह यह जाएंगे तो गाइड आपको. बताएगा पर य बताइए रेगिस्तान वालों को. रहने वालों को बाढ़ से बचने की टेक्नोलॉजी. पता. थी बाकी मैं दर्शकों के विवेक पर छोड़ता. हूं जहां एक बूंद पानी नहीं होता था. उन्हें यह पता था कि बाढ़ से कैसे बचाई जा. सकती है और आबन उसकी लकड़ी भी पता थी गजब.
है जहां चित्रकारी का निषेध था वहां सुंदर. चित्रकारी बना लेते थे मेरा मानना है. जिन्होंने वृहदेश्वर का मंदिर बनाया. जिन्होंने मीनाक्षीपुरम का मंदिर बनाया. जिन्होंने कोणार्क का सूर्य मंदिर बनाया. जिन्होंने अजंता लोराय की गुफाएं बनाई. जिन्होंने कालिंजर का किला बनाया. जिन्होंने चित्तौड़ दुर्ग का किला बनाया. ये लॉजिकल लगता है कि वो लोग लाल किला भी. बना सकते थे वो ताजमहल भी बना सकते थे ना. कि वो वो जहां से आए थे वहां तो कोई ईट का.
टीला नहीं है और आके यहां पर बना दिया ये. सर्फ कॉमन सेंस की बात है इसीलिए मैंने. कहा बहुत सारी दिमाग में भरी हुई चीजें. हैं जरा सा अगर नई पीढ़ी कॉमन सेंस से. सोचेगी तो अब जैसे एग्जांपल के लिए कुतुब. मीनार मेरी जहां तक जानकारी है संभवत कि. शायद किसी ने कोई चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के. प्रोफेसर थे उन्होंने आरटीआई लगाई थी. कुतुब मीनार कुतुबुद्दीन बबक ने. बनवाई इस परे कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्री. एविडेंस है तो एनसीआरटी ढंग से दे ही नहीं. पाई थी और आप मजे की बात सोचिए जहां से आप.
आए थे वहां तो बांस की मीनार भी नहीं है. और कुतुब मीनार यहां बना ली और उसके बगल. में मेहरोली का लौ स्तंभ है जो. मेटालर्जिकल सुप्रीमेसी का प्रतीक है आज. भी कोई ऐसी मेटल अवेलेबल नहीं है जो 2300. साल खड़ी रहे खुले आकाश के नीचे और उसमें. जंग ना लगे और ऐसा ही कर्नाटक के कुल्लूर. में भी स्तंभ है और वो ट्राइबल एरिया में. है जिसके बारे में कहा जाता ट्राइबल ने वो. बनाया था कब जब शंकराचार्य उनके गांव में.
आए थे मगर साहब हमारी साइंटिफिक. सुप्रीमेसी का प्रतीक महरोली का लॉ स्तंभ. नहीं दिखाया जाएगा ठीक उसके बगल में खड़ी. हुई कुतुब मीनार व साहब जहां से आए थे व. हजरत वहां पर खप की मीनार भी नहीं बना पाए. हैं मगर यहां पर वो उन्होंने बना दिया तो. आप क्यों नहीं एजुकेशन मिनिस्टर बन जाते. मोदी जी से कहो आप कि ये सब पढ़ाया जाए. मैं आपको बहुत सी बातें बताऊं जैसे हम पढ़. रहे थे अभी संभा जी का पढ़ रहे थे हमको. उसमें नहीं पढ़ा उतना डिटेल में हमको जो. पढ़ाया गया बच्चों को व उसी को आप शिकायत. करते हो तो पहले आप लोगों ने पढवा या उसके.
बाद उस टाइम अटल जी की सरकार थी जब हम. स्कूल में पढ़ रहे थे आपको पता है अटल जी. की सरकार से पहले क्या-क्या लिखा हुआ था. एनसीआरटी की बुक्स में 98 से पहले कि गुरु. तेग बहादुर को इसलिए एग्जीक्यूट कराना. पड़ा क्योंकि ही वाज ही. क्रिएटेडॉक्युमेंट्सफ्रैगमेंट. असुरक्षित कर दिया था और ठीक उसी किताब. में जानते क्या लिखा था पठानों के लिए. खैबर दर्रे के पास खेती करना वो जानते.
नहीं थे व्यापार करना उन्हें आता नहीं था. इसलिए आने जाने वाले कारवा को लूटकर गुजर. बसर किया करते थे देखिए वर्ड्स कैसे यूज. हो रहे हैं वहां और रही यह सब जब अटल जी. की सरकार आई तो उन सारी चीजों को अलग किया. गया मगर मैं एक और बात कहना चाहूंगा. इतिहास सिर्फ किताबों से नहीं आता है आपने. कितनी रामायण महाभारत की कहानियां सिर्फ. किताबों में पढ़ी है कितनी आपने सिर्फ. अपने उसमें पढ़ी ये यह समाज संस्कार भी. देता है मां-बाप संस्कार देते हैं दादा.
दादी नाना नानी देते थे इसीलिए हर चीज वो. कितना भी झूठा इतिहास लिख ले जिसे कहते. हैं एक लाइन में हटा दो यह इतिहास झूठे. तुम्हारे यहां जर्रे जर्रे पर सच है लिख. ारे जो कोई किताबे ना बानी कहेगी तो यह. माटी सभी की कहानी कहेगी और अब माटी में. जागृत आ रही है और वह कहानियों के माध्यम. से इसमें छत्रपति संभाजी राजे का भी. उदाहरण अब सामने आ रहा है ठीक कॉलेज लाइफ. में कभी इश्क मोहब्बत प्यार हुआ था आपको. वैसे मैकेनिकल में लड़किया तो होती नहीं. है हमने भी की इसता बता आपको जो कोई भी.
बच्चे आज उनसे कहना चाहता हूं किसको प्रेम. होता है. भाई मैं पहले भीय बात कह चुका हूं हा इस. झूठे प्रपंच में मत. फस जिसको प्रेम हो जाता है तो उसमें. ब्रेकअप नहीं होता है जो ब्रेकअप हो प्रेम. नहीं होता उसको कहिए. अट्रैक्शन अट्रैक्शन में कौन ये फीलिंग. होती है कि मुझे कुछ चाहिए और मुझे तुझसे. कुछ चाहिए. नहीं पूरा हुआ तो फिर देख लूंगा या देख. लूंगी ये जो मोहम्मद शमी युजवेंद्र चहल.
हार्दिक पांड्या शिखर धवन शादिक बहुत. डिवोर्स हुआ इन सबका ये क्या था देखिए वो. मैं किसी के व्यक्तिगत जीवन पर नहीं कर. डिवर्स बहुत बढ़ गया अभी देश में देखिए. उसका भी एक और कारण है कि वास्तविकता में. प्यार तो दश एक प्रतिशत में नहीं होता. बहुत बड़ी चीज है प्यार. जिसे बताता. हूं उसको आप ऐसे समझिए जो वसीम बरेलवी. साहब का एक बड़ा प्रसिद्ध शेर है कि माना. मुझे अपना हाल बयां करना नहीं आता हम तुझे.
भी तो उसे एहसास करना नहीं आता वो दिन गए. जब मोहब्बत हुआ करती थी जान की बाजी अब. कोई बिछड़ जाए तो कोई मर नहीं. जाता तो आप ये समझिए अब तो उल्टा यह कहता. है मैं मार के काट के सूटकेस में भर दूंगा. यह प्यार नहीं होता सब यंग बच्चे बच्चियों. से कहूंगा प्यार एक बहुत एसोट किस्म की. चीज है ये जस्ट एक एक मियर फिजिकल. अट्रैक्शन को मार्केटिंग फोर्सेस और वो. सारी फोर्सेस जो भारतीय परिवार को तोड़ना.
चाहती हैं आपके मन में प्यार के रूप में. भरने का प्रयास करती हैं प्यार एक अलग. अनुभूत और प्यार भारत में मल्टी डायमेंशन. है यह प्यार सिर्फ एक लड़का लड़की के बीच. में क्यों होगा. जी हमारे यहां प्रेम इतना बहु यामी है. मुझे अपनी मिट्टी से भी प्रेम होता है. मुझे अपने देवता से प्रेम है मां-बाप से. प्रेम है श्रवण कुमार मित्र से प्रेम है. कृष्ण सुदामा. अगर देखा जाए भाई भाई का प्रेम है राम. लक्ष्मण भरत का भाई के प्रति प्रेम है वह.
देखिए राम और भरत पति पत्नी का प्रेम है. अनेकों उदाहरण है सावित्री. सत्यवान साहब यह इतना और साहब सिर्फ भगवान. का भक्त के प्रति प्रेम नहीं है भक्त का. भगवान के प्रति क्या प्रेम है कि जब. सुदामा पहुंचे फटी धोती पहन के और उनके. पैरों में भी व बवाई पड़ी हुई थी भगवान. कृष्ण क्या कह कहते हैं ऐसे जो हाल ब वाइन. के पग कंटक जाल लगे पुनि जोए हाय महा दुख.
पायो सखा तुम आय इते न किते दिन खोए और. देखि सुदामा की दीन दशा करुणा करी के. करुणा निधि रोए पानी परात को हाथ छुए नहीं. नैनन के जल सो पग दोए अरे प्रहलाद को. बचाने के लिए भगवान आते हैं अरे प्रेम. इतना व्यापक है इसे एक लाइन में अञ की. पंक्ति में कहूंगा क्या आज लोगों ने उसको. इतना. मतलब वैसा बना दिया है बड़े हल्के स्तर के. ऊपर लोग कहते हैं ना बड़ी शेरो शायरी और.
ये सारी चीजें अरे जरा अञ की कविता सुनिए. कि वे मुर्दे होंगे प्रेम जिन्हें अनुभव. रस का कटु प्याला है वे रोगी होंगे प्रेम. जिन्हें सम्मोहन कारी हाला है मैंने. विदग्ध हो जान लिया विदग्ध मतलब जलकर. मैंने विदग्ध हो जान लिया अंतिम रहस्य. पहचान लिया मैंने आहुति बनकर देखा यह. प्रेम यज्ञ की ज्वाला और मैं फिर मैं कहना. चाहता हूं जो लोग लव कहते हैं तो उसके लिए. क्या वर्ड यूज होता है एवरीथिंग इज फेयर. इन लव एंड वर ना इसका हिंदी क्या है मैं. पहले भी बोल चुका हूं जंग और इश्क में सब.
कुछ जायज है ना लव हिंदी का शब्द है ना. वॉर हिंदी का शब्द है ना जंग हिंदी का. शब्द है ना इश्क हिंदी का शब्द है किसी भी. भारतीय भाषा या संस्कृत में आपने ऐसी कोई. कहावत सुनी है प्रेम और युद्ध में सब कुछ. अनुचित उचित है ना हमारे यहां प्रेम का एक. त्याग है और युद्ध की मर्यादा है इसलिए इस. इस मैं कह रहा हूं इस लावे में मत आइए य. इसीलिए आज कल झगड़े डाइवोर्स और एक दूसरे. के प्रति अनेक प्रकार के जो बहुत जल्दी.
कटुता का भाव क्योंकि जब आप सिर्फ. अट्रैक्शन है तो रिपल्शन भी होगा प्रेम. में तो क्या होता है अमलगम मेशन हो जाता. है तो फिर रिपल्शन नहीं होता ये प्रेम. वाला आपने सब कहां पढ़ा सीखा चलो हमको वो. आ गया कि धर्म के रुचि थी किताबें पढ़ ली. प्रेम आपने कहां अनुभव कि ये भी हमको. थोड़ा अपना कारण क्या है आप ज्ञान योग. भक्ति योग और कर्म योग पढ़िए तो भक्ति. क्या. यह प्रेम का एक वल्ड स्वरूप है जैसे.
चाहे जिसे कहते हैं सेवक भाव की भक्ति या. सखा भाव की भक्ति सेवक भाव की भक्ति जो. तुलसीदास की है और सखा भाव की भक्ति जो. सूरदास की है तो उसमें भी एक अलग प्रेम है. जैसे मैं उदाहरण बताना चाहता हूं शायद आप. में से बहुत लोग हिंदी साहित्य पढ़ा हो तो. पढ़ाओ पद्माकर बहुत बड़े कवि पद्माकर ने. बहुत अच्छी कविताएं बृज भाषा में लिखी तो. उनसे पूछ पूछा गया कि आपके जीवन का सबसे. अच्छा छंद कौन सा था उन्होंने एक से एक. अच्छी लिखी है तो अब उन्होंने उसका वर्णन.
दिया है कि जब भगवान कृष्ण की चिट्ठी लेकर. उधव पहुंचते हैं गोपियों के पास तो उनकी. प्रतिक्रिया है वो बृज भाषा में थोड़ा वो. कहते हैं भेजे मन भावन के उधव के आवन की. सुनी बृज गावन व आवन सब लगी यानी जैसे पता. चला कि मन भावन का पत्र लेकर उधव आए भेजे. मन भावन के उधव के आवन की सुनी गावन व आवन. सब लगी सारी बकाए आने लगी और उझ की उझ की.
पद कंजन की अंजनी पे पेकी पेकी पाती छाती. चोहन सब लगी यानी अपने पंजों पर उछलकर वह. चिट्ठी को अपने हृदय से लगाती हैं और हमको. लिखो है कहा हमको लिख्यो है कहा हमको लिखो. है कहा कहन सब लगी और एक और आपको बात बता. दें यह सारी चीजों में अल्टीमेटली यह सब. कुछ आपके अंदर घटित होता है इसीलिए मैंने. कहा कि ये ये चीजें बहुत हाई लेवल के हैं. भारत में आइए भारतीय संस्कृति को समझिए तो. समझ में आएगा बाहर के मतलब एक लास्ट में.
मैं एग्जांपल देना चाहता हूं जिन बच्चों. ने केमिस्ट्री अगर पढ़ी हो हम और नहीं. पढ़ी तो जाके ये चेक कर लें दो प्रकार के. बॉन्ड होते हैं ह दो एटम्स हैं तो एटम्स. में एक न्यूक्लियस होता है और उसके दोनों. चारों तरफ इलेक्ट्रॉन चल रहे होते हैं तो. दो एक होता. कोवलेंको जिसमें एक ने इलेक्ट्रॉन दे दिया. तो जिसने दे दिया उसपे पॉजिटिव चार्ज हो. गया जिसने ले लिया उसपे नेगेटिव चार्ज हो. गया तो बिकॉज ऑफ द इलेक्ट्रोमैग्नेटिक. फोर्स दोनों एक हो जाते हैं तो. इलेक्ट्रोवेलेंट बॉन्ड इज मोर स्ट्रांग.
कोवलेंको शेयरिंग की ही नहीं तो बॉन्डिंग. ही नहीं हुई इसका अर्थ क्या हुआ प्रकृति. भी बताती है जब आप त्याग कर देते हैं तो. बॉन्डिंग बहुत स्ट्रांग होती है साझे की. बराबरी की बॉन्डिंग हल्की होती है और एकदम. इंडिपेंडेंट रहेंगे तो बॉन्डिंग होती नहीं. है अच्छ फेलर कैसे हैंडल करते हैं फेलर. फेलर क्या अगर हार रहे हैं जीवन में निराश. हो रहे हैं निराशा से कैसे ओवरकम करें आप. तो पॉलिटिशियन है कई बार मनोकामनाएं नहीं.
पूरी होती होंगी होता ना कि मेरी तपस्या. में कुछ कमी रह गई देखिए उसका कारण यह है. मेरा मानना है भगवान पर भरोसा रखिए विधि. का विधान जान लाभ हानि सहिए और जाही विधि. राखे राम ताही विधि रहिए सुंदर ठीक है ये. मतलब मैं आपको बात बताता हूं कि ईश्वर. में यदि आपका विश्वास है आप आत्मविश्वास. है तो आप धोखा खा सकते हैं आत्मविश्वास. में गलती हो सकती है ईश्वर के विश्वास में. गलती नहीं हो सकती जो होगा जो हमको हमारे.
साथ भगवान करेंगे वो वो सही होगा हां यह. बात ठीक है उस फिर अगर आप उस स्थिति में. तो परीक्षा भी लेंगे और वैसे ऐसा भी नहीं. कह सकते जब बुरी स्थिति आती तो मन पर. विपरीत प्रभाव पड़ता है परंतु अगर आप इस. प्रकार के भावों के साथ अपने को जोड़े. रखें तो वह. प्रभाव काफी कम हो जाता है और आप जीवन में. दूसरा रास्ता या नया रास्ता खोजने के लिए. तैयार होने की मना स्थिति में बन सकते हैं. ठीक एक सेगमेंट है यस या नो का आपको सिर्फ.
हां ना मैं जवाब देना बस छोड़ दूंगा खत्म. क्या कभी ऐसा हुआ कि आप किसी डिबेट में गए. कुछ गलत निकल गया और फिर आपको लगा कोई बात. नहीं इनको कौन सा पता है नहीं अच्छा वैसे. तो एक और बात आप बता द आज के जमाने में तो. आदमी तुरंत मोबाइल पर चेक करता रहता है और. आजकल तो ऐसे ट्रोलर्स की फौज ही बैठी रहती. है ना जरा सा गलत हो तो आपको लेक भी आजकल. ं प बहुत फैक्ट चेक करने लगे लोग और और. मजे की बात ये है वो ऐसी ऐसी चेक करते. मुझे बड़ा आश्चर्य लगता है यार मतलब ये. सिंपल सी चीजें नहीं समझ पा र जैसे. एग्जांपल के लिए मैंने एक बात कही कि.
चंद्रमा की गति से धरती के पानी पर असर. पड़ता है तो हमारे शरीर में धरती पर 70 पर. पानी है और 30 पर लैंड है हमारे शरीर में. भी 70 पर पानी है और 30 पर सॉलिड है और मन. में 90 पर पानी है ब्रेन में तो इस पर असर. नहीं पड़ता होगा तो क र व साहब वो. ग्रेविटी की इक्वेशन देखिए ये और वो तो. उसके हिसाब से अरे मेरे भाई विज्ञान की उस. दृष्टि से समझो ये ग्रेविटी की इक्वेशन से. नहीं चलेगा जैसे मैं एग्जांपल देता हूं जब. तक रिमोट नहीं आया था आज से 100 साल पहले.
तो कोई कह सकता था कि एक रिमोट से क्या. निकलता है एक इलेक्ट्रॉन निकलता है. इलेक्ट्रॉन का वेट इतना कम है कि वो एक. दीवाल हिला सकता है ना जब तक तुम फिजिकल. फिजिक्स के सिद्धांत पर चलते रहोगे नहीं. होता है इलेक्ट्रॉन क्या करता है उसमें. प्रवेश करता है और जो इंटर मॉलिक्यूलर. स्पेस के बीच के इलेक्ट्रॉन से उनको. एक्टिवेट करता है उससे करंट जनरेट होती है. फिर करंट से एक डायनेमो क्रिएट होता है और. उससे मैकेनिकल फोर्स जनरेट होता है और. रिमोट के द्वारा चीज खुल जाती है तो भाई.
यह चंद्रमा का जो इफेक्ट आ रहा है सिर्फ. ग्रेविटेशनल प नहीं ये इंटरनल लेवल पर. जाकर समझो तब समझ में आएगा इसलिए मैं किसी. के प्रति कोई अनथा भाव नहीं रखता हूं. सिर्फ मैं कहता हूं थोड़ी डेप्थ में जाइए. तब आपको समझ में आए जैसे मैं एग्जांपल. देना चाहता हूं एटम बम बना था ये. प्रोजेक्ट. मैनहैटन उस समय जब प्रेसिडेंट ट्रूमैन थे. तो उनके जो एडवाइजर थे मिलिट्री एडवाइजर. हिज नेम वास एडमिरल वि लेई उन्होंने कहा. कि आई एम सेइंग विद फर्म.
कन्विंसिबल प्रूवन कि दिस टाइप ऑफ. प्रोजेक्ट विल नेवर टेक अप दिस बम विल. नेवर बम विल एटम बम विल नेवर कम इन. रियलिटी दिस आई एम सेइंग एन एक्सपर्ट ऑन. एक्सप्लोसिव यह सच था वह गलत थोड़ी थे. एक्सप्लोसिव जो होता है जिसको विस्फोटक है. वह केमिकल एनर्जी के लेवल पर काम करती है. यानी मॉलिक्यूल के बीच के रिएक्शन के ऊपर. एटॉमिक एनर्जी इनसाइड एटम काम कर रही थी. तब तक उनके नॉलेज के पैरा व था ही. नहीं ठीक है कभी अपनी पॉलिटिकल पार्टी का. कोई स्टैंड जिससे आप डिग्री की.
हो ऐसी तो कोई किसी विषय पर कभी ऐसा नहीं. हुआ जैसे बहुत सारे आपके पॉलिटिकल पार्टी. के लोग अनपुर शर्मा वाले को लेकर स्टैंड. नहीं करते कि उ लगता है कि स्टैंड ले सकते. थे यहां जो आपने बात की एक बात समझिए जो. लोग हमारी पार्टी पर आरोप लगाते हैं. भक्त हमारे यहां यह अंतर है आप कांग्रेस. और किसी दूसरी पार्टी पार्टी में एक कोई. उनका ऑर्गेनिक सपोर्टर दिखाइए जिसने किसी. मुद्दे के ऊपर गांधी परिवार की इतनी भी. आलोचना कभ की स्टैंड यू चेंज हो जाता है.
और उसके बाद जयजयकार होती रहती है मतलब. राहुल गांधी जी 2014 में एक यंग बॉय वाली. इमेज लेकर आए जिसको बाबा ब्रिगेड उस जमाने. में कहते थे और उन्होंने हिंदी में ईश्वर. के नाम की शपथ ली तब भी जय जयकार थी फिर. 2019 का चुनाव आया अब वो जनेऊधारी हिंदू. हो गए कुर्ते के ऊपर जने पहन के तब भी और. अपना गोत्र तक बताने लगे जाति के साथ तब. भी जय जयकार थी फिर अब वो कार्ल मार्क्स. वाली दाढ़ी बढ़ाकर और अंग्रेजी में ईश्वर.
के नाम की शपथ ना लेकर सोलली अर् होके और. एकदम वो अल्ट्रा नक्सल वाली विचारधारा. कहने लगे तो भी जय जयकार थी तो भाई असली. भक्त तो वो हैं जिनका की कोई दीन ईमान ही. नहीं है जो नेता ने कहा वो भक्ति हमारे. यहां तो कई ऐसे अवसर आए जब आपने सोशल. मीडिया पर देखा होगा हमारे ऑर्गेनिक. सपोर्टर्स ने हमारा क्रिटिसाइज किया है. पार्टी नपुर वाले पे तो खुल कर अभ भी कर. और क मु और प्रियंका गौतम को टिकट दे दिया. कई मुद्दों को त ये दर्शाता है कि हमारे. लोग फिर भी हमारे यहां वास्तविकता में.
किसी विषय पर आप साइड हुए कि पार्टी की. विचारधारा से कुछ ना कुछ तो होगा ना सर. नहीं नहीं कहना चाह रहे होंगे नहीं नहीं. ऐसी कोई बात नहीं पार्टी के साथ तो कभी. कोई ऐसी कोई विचारधारा नहीं र हां कुछ एक. हमारे अपने विचार थे वो कभी ठीक है ऑफ द. रिकॉर्ड हम पूछ. लेंगे राजनीति में युवा नेता कब तक रहते. हैं देखिए यदि आप. विपक्षी दल में है हां तो आप 54 55 साल. में युवा नेता रहते हैं आप बचपन के ही.
माने जाते हैं कि उम्र 55 की दिल बचपन का. एक कहावत भी है और 70 साल की बंगाल की. बेटी हो सकती है. और 68 69 साल की दलित की बेटी हो सकती. है और वैसे युवावस्था में हमारे यहां यह. रहता है कि 35 साल तक युवा माने जाते हैं. युवा मोर्चा का पदाधिकारी बनना है तो 35. साल से कम उम्र होनी चाहिए उसके आगे नहीं. माने जाते मगर विपक्ष में य अपनी सुविधा. के अनुसार तय होता है ठीक है कि कौन युवा. है और कौन नहीं युवा है मगर मैं यहां और.
बात करूं सोच युवा होनी चाहिए जैसे. प्रधानमंत्री मोदी जी हैं अब इसी बजट में. अगर आप देखें न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के. लिए अलग मिशन पिछले वाले बजट में. हाइड्रोजन एनर्जी के लिए मिशन सोलर एनर्जी. का उन्होंने आने के साथ ही शुरुआत की जो. फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी है और यह टारगेट. रखा है कि हम इस समय 180 गगा वाट या 100. गगा शायद सोलर से कर चुके हैं 180 शायद और. 204 7 तक न्यूक्लियर एनर्जी से 100 गगा.
वाट का टारगेट है तो आप सोचिए यह होती है. फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी और अब आप यही. देखिए एआई पे ग्लोबल समिट को को चेयर करने. प्रधानमंत्री जी गए यह फ्यूचरिस्टिक. टेक्नोलॉजी यह है युवाओं के लिए सोचना और. जिस अमृत काल की बात कर रहे हैं. 207 तो आज का युवा जो है यही तो 22 23 साल. के बाद किसी इंपोर्टेंट पोजीशन पर बैठ के. देश में कोई ना कोई योगदान दे रहा होगा और. यह बाकी लोग क्या कर रहे हैं व पुराना. मार्क्स मैकाले वाले में भाई वो 21. सेंचुरी के पीछे जा अबे लड़ आपस में लड़. क्यों नहीं रहे हो उत्तर दक्षिण में लड़ो.
जैसे व एक कहते ना कर्नाटक के मंत्री कि. देखिए साहब उत्तर वालों से ज्यादा. रेवेन्यू कलेक्शन दक्षिण से आता तो. पत्रकार क्या आप अलग होने सोचेगा हां जी. भाषा प लड़ो भाई कैसे नहीं लड़ रहे हो वो. देखो तमिलनाडु वाले और तेलंगाना वाले. मंत्री ने कैसा बोला बिहार वालों के लिए. लड़ो लड़ो लड़ो फिर वह मराठी और उत्तर. भारती पर लड़ो अरे लड़ क्यों नहीं रहे हो. कायदे से लड़ो फिर उसके बाद लड़ो किस पर. भगड़े पिछड़े में लड़ भाई फिर उसके बाद. लड़ो सामान्य वर्ग और दलित के बीच में. लड़ो और फिर इतना ही मत लड़ो ऐसे ऐसे.
वातावरण बनाया है बच्चों का दिमाग ऐसा. बनाया जा रहा है धीरे-धीरे कि हर बात के. ऊपर लड़ जाओ अपने मां-बाप से लड़ जाओ भाई. बहनों से लड़ जाओ फटाफट कोर्ट में चले जाओ. लड़ने के लिए जिनको कहा जाता है कि मेरी. अपनी कोई सेल्फ स्टीम है मेरे मां-बाप ने. कैसे कह दिया मेरे बारे में मैं अपना. डिसीजन खुद लेता हूं और उसी बच्चे को यह. बताया जाता है कि जब प्रोफेशन में जाओ तो. देर आर टू लॉज ऑफ प्रोफेशन नंबर वन बॉस इज. ऑलवेज राइट नंबर टू इफ देर इज एनी. कंफ्यूजन रिफर टू रूल नंबर वन बॉस डांटता.
रहे दोम हिलाते रहना वहां कोई सेल्फ. एस्टीम मत आने देना इससे कांट्रैक्ट मिलना. है फटकार रहे दम हिलाते रहना कोई स्टीम मत. आने देना सारी सेल्फ एस्टीम घर में आकर. अपने मां-बाप और भाई बहनों पर दिखाना सोचो. मेरे भाई पूरे देश को राष्ट्रीय स्तर से. उत्तर दक्षिण प्रांत सारी चीजों को लेकर. और परिवार के अंदर तक कैसे कैसे बीज बोए. जा रहे हैं इस पर विचार करने की जरूरत है. इसीलिए मैं लास्ट में कहूंगा महाकुंभ के.
लिए प्रधानमंत्री ने क्या बोला महाकुंभ का. यह संदेश एक रहेगा भारत देश गंगा की अविरल. धारा ना बटे समाज हमारा तो हमारा लक्ष्य. क्या है एक्सटेंडेड वर्जन ऑफ एक रहेंगे तो. सेफ रहेंगे हमारा वर्जन क्या है जाति प्रं. जाति प्रांत और वर्ग भेद के भ्रम को दूर. भगाता है सबके मन का भाव एक है सबकी भारत. माता है. अते अनेकता में एक के मंत्र को जनजन फिर. अपनाता है धीरे धीरे देश हमारा जात प कहां.
वोट पड़ रहा भाई अपनी जात के किसी व्यक्ति. को कोई सत्ता दिए हैं क्या अब मैं उधर. बहुत उसके लिएल पॉडकास्ट करूंगा स क्योंकि. आपका समय कम है मेरे पास तो बहुत समय है. वन वर्ड एक नाम लूंगा मैं आपको उस व्यक्ति. के बारे में एक लाइन में जो आप कहना चाहे. कह सकते हैं नरेंद्र मोदी. जी मैं मधु से अनभिज्ञ आज भी जीवन भर. विषपान किया है किया विध्वंस विश्व का. आजीवन निर्माण किया है सन्यासी हूं दीन. दुखी मानव के मन में रहता हूं सन्यासी हूं.
पर वैभव से दुनिया की झोली भरता हूं शूल. भरे कंटक पथ पर जीवन भर अभियान किया है. मैं मधु से अनभिज्ञ आज भी जीवन भर विषपान. किया अमित. शह अमित शाह जी के लिए मैं यह कहना. चाहूंगा कि आज की परिस्थितियों में कितनी. भी विपरीत परिस्थिति. हो कि जटिल से जटिल परिस्थिति दिखाई पड़.
रही हो परंतु उनके दृढ़ निश्चय को कोई व. नहीं कर सकता तो महादेवी वर्मा जी की. कविता है ना व थोड़ा स्त्रीलिंग में है. मगर उसका भाव अमत शाह जी पर बिल्कुल फिट. बैठता है अन्य होंगे चरण हारे और हैं जो. लौटते दे शूल को संकल्प. सारे चिर वृति निर्माण उन्म यानी निर्माण. के लिए जिनके अंदर एक माद है यह अमरता. नापते पद बांध देंगे अंक संसृति से तिमिर.
में स्वर्ण बेला पंथ होने दो अपरिचित. प्राण रहने दो अकेला कुछ भी हो मगर दता के. सा पत्रकारों को डांटते क है व इतना बाकी. कोई नहीं डांटता आपकी पार्टी में लोग उनसे. डरते हैं पत्रकारों भी लोग डरते हैं थोड़ा. डपट देते हैं भैया हो गया बस नहीं देखिए. क्या है वो आपको केवल सत्य का साक्षात्कार. कराते हैं हां भैया हो गया बस पीछे आता है. मयु. डि वीडियो वायरल हुआ नहीं नहीं देखिए क्या. आप डरते हो अमित शाह जी से अरे हमसे तो. बहुत अच्छे ढंग से बात होती है आज से नहीं. जब वो जनरल सेक्रेटरी थे उस जमाने से बहुत.
अच्छी बातचीत होती थ मैं एक और बात बताऊं. अमित शाह जी का एक पक्ष आप में से बहुतों. को नहीं पता होगा अमित शाह जी ने हिंदू. धर्म संस्कृति का इतना गहरा अध्ययन कर रखा. है मतलब रियल अध्ययन है और ये मैं बोल रहा. हूं आपको उनसे व्यक्तिगत वार्ता के आधार. पर मैं एक उदाहरण बताना चाहता हूं यह बात. है 2013 की त वो जनरल सेक्रेटरी थे. पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक हो रही थी. तब राजनाथ जी राष् अध्यक्ष प्रधानमंत्री. मोदी जी पीएम के कैंडिडेट थे ये 14 के. चुनाव से पहले की बात है 2013 में तो. पार्टी ऑफिस में एक मीटिंग हो रही इसमें.
जनरल सेक्रेटरी को बैठना रहना था और जब. विषय आपको बुलाया जाएगा तो अंदर जाना था. जनरल सेक्रेटरी के अलावा हम भी बैठे थे हम. जनरल सेक्रेटरी नहीं थे वहां पर बातचीत. होनी शुरू हुई पानीपत का तीसरा युद्ध फिर. मराठा साम्राज्य कैसे हुआ फिर वहां से. भारत की प्राचीन संस्कृति तब मुझे पहली. बार आभास हुआ कि अमित शाह जी ने कितना. गहरा अध्ययन कर रखा जो उनकी प्रेजेंट. परसेप्शन से थोड़ा कंट्रास्ट नजर आता है. लोगों को लगता है जैसे वो सिर्फ. हार्डकोर जिसको आप कहते हैं ना कि वो. चाणक्य वाली पॉलिटिक्स करते नहीं उसके.
अनुसार उनके अंदर बहुत गहराई से उन्होंने. अध्ययन भी कर रखा है चाणक्य ओरिजिनल में. थे या काल्पनिक थे अब य भी बड़ा चलता है. आज अब देखिए हम यहां पर एक बात कहना. चाहेंगे वो कहते हैं सब राम सेतु काल्पनिक. है चाणक्य काल्पनिक है मतलब ये भी आजकल नई. पीढ़ी के बच्चे बड़ा सवाल करते हैं जिनके. लिए पूरा देशी काल्पनिक था अब उनके लिए. क्या बताया जा सकता है जो कहते हैं देश. कभी था ही नहीं ये तो अंग्रेजों के के बाद. हुआ है तो यह व लोग कहते हैं जिनके लिए हम. कह सकते हैं हम लोग बचपन में एक वो कहते.
थे जिनको कहते थे. यूबीआई अनफॉर्चूनेटली बोर्न इन इंडिया फिर. जाया हम लोग जिसको दूसरे शब्दों में कहते. थे ए बी सी डी अमेरिकन ब्रेन कंफ्यूज देसी. तो मेरे विचार से इंडियन ब्रेन से समझिए. और मैं लास्ट में इसमें एक और बात कहूंगा. विथ फैक्ट ये तो चलिए मैंने मजाक में कहा. न द लाइटर नोट वी एस नायपॉल एक बहुत बड़. बड़े राइटर हुए जिनको 2003 में पुरस्कार. मिला है नोबल प्राइज लिटरेचर का उन्होंने. किताब लिखी इंडिया ए वुडेड.
सिविलाइजेशन उसने कहा है भारत दुनिया का. इकलौता देश है जहां राष्ट्रवाद को बढ़ाने. वाला नहीं राष्ट्रवाद को डैमेज करने वाला. इतिहास पढ़ाया जाता है उसने कहा दुनिया का. इकलौता देश है जो अपने लिखे इतिहास को. प्रमाणिक नहीं मानता है दूसरों के लिखे. इतिहास को प्रमाणिक मानता है तीसरा दुनिया. का एकमात्र देश है जो विदेशियों में भी. जिन्होंने इसके बारे में अच्छा लिखा उसको. प्रमाणिक नहीं मानता है लुटेरों के लेक. इतिहास को प्रमाणिक नहीं मानता मेरा मानना. है मेग सनीज ने क्या-क्या लिखा है भारतीय. समाज के बारे में थर्ड सेंचुरी बीसी में. अपनी किताब इंडिका में जो पूरी अवेलेबल.
नहीं उसके रेफरेंसेस अवे मैं साफ-साफ लिखा. भारतीय समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव. नहीं है यूनान के समाज के समान यहां पर. कोई ऐसा वर्ग नहीं जिसका शोषण किया जाता. हो नहीं नहीं वो लिखा होगा उसका मीनिंग तो. ये होगा फिर देखिए फाहियान आता है फोर्थ. सेंचुरी में क्या-क्या लिखता है ट्रेवल्स. ऑफ फाईन पब्लिश बाय कॉलोनियल प्लस लंडन. कोई वो दिखा रहा है कि किस ढंग की सामाजिक. समरसता का वर्णन करा फोर्थ सेंचुरी में. गुप्ता काल में वेन सॉन्ग आता है सेवेंथ. सेंचुरी में हर्षवर्धन के समय में. हर्षवर्धन ने किस प्रकार का मतलब वो आके.
दान किया प्रयाग में आकर उसका वर्णन करता. है अलबरूनी थ सेंचुरी में मार्को पोलो वो. मत पढ़ो वो मत पढ़ो मत पढ़ो क्या पढ़ो व. जो अंग्रेजों और मुगलों ने लिखा जो हम पर. हुकूमत करने के लिए आए थे जो हमको तोड़ने. के लिए आए थे जैसे एग्जांपल के लिए सबसे. पहले तमिल रेश शब्द जिसने यूज किया है. उसका नाम है जी यू पोप जॉर्ज उलो पोप उसका. पूरे मेमर्स पढ़ ने उसने लास्ट में शायद. 1905 या 6 में उसकी डेथ हुई तब उसने यह तक. लिखा है कि अगर हमें दुश्मन पर अटैक करना. है तो उसी भाषा में जाके करना.
पड़ेगा इसलिए मैं कहना चाहता हूं हम. इकलौते विचित्र देश हैं और इसलिए हमारे जो. यह बच्चे इस तरह की बात कह रहे हैं उन. बच्चों से भी हम यह बात कहना चाहेंगे कि. आप उसके प्रभाव में और लास्ट में एक और. बात मैं कहना चाह बच्चे कहते हैं बड़ा. लॉजिकल बड़ा रेशनल धर्म के बारे में बहुत. प्रश्न करो उनसे पूछना चाहता हूं. भाई अगर तुमने फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ. नहीं पढ़ी तो तुम इंजी का क्वेश्चन सॉल्व. करने के बारे में पूछोगे नहीं तुमने जजी. बॉटनी केमिस्ट्री नहीं पढ़ी तो मेडिकल का. पूछोगे नहीं धर्म के बारे में डी भी नहीं.
पढ़ा है प्रश्न पूछो कोई बात नहीं और कभी. इस पर भी तो तर्क करके देख लो ईमानदारी से. कि अगर बाहर के लोगों ने अपने कपड़े घिस. कर पहनना शुरू कर दिया तो तुमने घिस के. पहनना शुरू कर लिया व्ट इ लॉजिक कपड़े. फाड़ के पहनना शुरू कर लि तो मैंने कपड़े. फाड़ के हम लोग बचपन में कहते थे अबे कोई. अपने कपड़े फाड़ लेगा तो तू भी अपने कपड़े. फाड़ लेगा क्या रेशनल लगाओ वही बच्चा जो. कहता है कि शंकर जी पर जल क्यों चढ़ाया. जाता है शंकर जी पर दूध क्यों चढ़ाया जाता. वो नहीं पूछता है मैं फटे हुए कपड़े क्यों.
पहन रहा हूं यह है आइडल जिकल सबजुगेशन. दिस इज होता है मेंटल ब्लॉकेड जो आपके. दिमाग में ऐसा भर दिया जाता है कि फिर. आपको जो समझाया जा रहा है वही सही लगता है. और सत्य के इसीलिए प्रधानमंत्री जी ने कहा. है गुलामी की मानसिकता के हर विष को. निकालना है तब आप विरासत पर गर्व कर पा. ठीक है योगी आदित्यनाथ नेक्स्ट. नेम योगी आदित्यनाथ जी तो राम काज कीने. बिनु मोई कहा विश्राम इज देर एनी रिफ्ट.
टवीन अमित शाह योगी आदित्यनाथ बड़ा चलता. है मीडिया वालों में बड़े चकल्लस से. चर्चाएं होती है कि हां वो इस प्रकार की. भाजपा के बारे में काल्पनिक बातें करना. यूपी मीडिया वालों को ये है यह दर्शाता है. कि इसका अर्थ ये हो गया कि वो भाजपा से. सीधे लड़ने की अपनी क्षमता खोकर हार मान. चुके हैं तो अब काल्पनिक कयासों के बीच. में अपने ख्वाबो ख्यालों के पुलाव पका रहे. कुछ तो होगा ना सर तभी तो. आप भी जानते हो कि कुछ होता है अंदर आप ही. के सूत्र होते हैं देखिए यहां बड़ी समस्या.
क्या है हमारी पार्टी में अच्छा ये बताइए. जितने चीफ मिनिस्टर बने कितनी बार सूत्र. सही निकले वहां तो जो आदमी चुप रहता है जब. प्रूवन है कि सूत्र नहीं बता पाते इसीलिए. उन सूत्रों के चक्कर में मत पड़िए पूरी. पार्टी एक सूत्र ऐसे बनी हुई है म सर्व. मधम प्रतम सूत्रे मणि गणय जैसे भगवान. कृष्ण ने कहा है गीता में कि जैसे एक. सूत्र में सारी. मा वैसे ही हमारे सारे नेता उस माला के. समान है जो भारत माता के चरणों के लिए है.
और उसमें सब एक सूत्र में ब अपोजिशन का. नाम लेते हैं ममता. जी ममता जी देखिए बड़े प्यारे प्यारे. मैंने सुना आम भेजती हूं अमित शाह जी के. लिए देखिए एक संघर्ष से निकलकर आई हुई. नेता जिन्होंने वामपंथियों के विरुद्ध. बड़ा दुर्द संघर्ष किया था परंतु आज उनके. विचारों पर तुष्टीकरण की राजनीति इस सीमा. तक आ गई कि मैं कहना चाहूंगा कि वह पश्चिम. बंगाल जो अपनी कला संस्कृति और साहित्य के.
लिए जाना जाता था बंगाली भद्र लोग वह आज. जिस प्रकार की चीजें वहां पर आती हैं मतलब. संदेश खाली से लेक और आरजी कर कॉलेज जैसी. घटनाओं तक मुझे लगता है ममता जी को इसके. बारे में विचार करना चाहिए तो मैं कह सकता. हूं कि एक बहुत संघर्षशील और अच्छे. उद्देश्य से शुरू हुआ नेता किस ढंग से. पवर्ड होकर वोट बैंक की पॉलिटिक्स में. कहां पहुंच जाता है मता जी उसका प्रमाण. अरविंद. केजरीवाल मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो. पीता नहीं हूं पिलाई गई है और जिधर बेखुदी.
में कदम डगमगाए वही राह मुझको दिखाई. गई फिर जिल जाएंगे. वो. अब यह तो कानून तय करेगा इसमें हम क्या कर. सकते हैं मगर इतना जरूर है कि केजरीवाल. आपका फ्यूचर क्या दिख रहा है देखिए. केजरीवाल जी के लिए मैं एक लाइन ये कहना. चाहूंगा क्योंकि दिल्ली का रिजल्ट आ चुका. है तो ये पहले शेष मुस्कुराहट आती है. बीजेपी वालों पे केजरीवाल जी का नाम ले लो. ये ये तो मैं पहले भी बोल चुका हूं परंतु. अब इस पे मैं ये कहना चाहूंगा अ देखिए.
कहां से शुरू हुए थे अन्ना हजारे वहां से. अलग होने शुरू हुए प्रशांत भूषण शांति. भूषण योगेंद्र यादव और ये किरण बेदी कुमार. विश्वास सब अलग होते चले गए और अब आखिर. में जनता भी उनसे अलग हो गई तो एक लाइन. केजरीवाल जी के लिए पुराने गीत की पंक्ति. बहुत एप्रोप्रियेट. एक हाथ से देती है दुनिया 100 हाथों से ले. लेती है यह खेल है कब से जारी बिछड़े सभी.
बारी बारी देखी जमाने की आरी बिछड़े सभी. बारी बारी क्या भविष्य देख रहे उनका कई. लोग कह रहे पार्टी टूट जाएगी बीी भारतीय. जनता पार्टी का को इससे कोई सरोकार नहीं. है कि केजरीवाल जी का क्या भविष्य होगा. हमारी जो नई सरकार दिल्ली में आई उसका. लक्ष्य दिल्ली को विकास के उस उच्चतम. पैमाने तक पहुंचाना है जो उभरते हुए भारत. और विकसित भारत के राष्ट्रीय राजधानी. क्षेत्र को होना चाहिए ठीक है हिंदू.
हिंदुइज्म हिंदुत्व सब एक ही. है जैसे मनुष्य और. मनुष्यवकाशा हिंदु जम सब एक ही हैय जैसे. हम ये कहते हैं. मनुष्यवकाशा.
हैं वो कहते हैं कि वो हिंदू को समझते हैं. हिंदुत्व को नहीं समझते उनके लिए हिंदू. सही है हिंदू तो गलत है मैं बताना चाहता. हूं जब उनकी लंबे समय सरकार रही 40-50 साल. तो भारत की ग्रोथ रेट कितनी होती थी 2 पर. के आसपास उसे क्या कहा जाता था हिंदू. ग्रोथ रेट और रेट ऑफ इंफ्लेशन कितनी रहती.
थी 10 12 15 16 18 फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व. कितना रहता था दो बिलियन 4 बिलियन 5. बिलियन 7 बिलियन 1980 में 7 बिलियन 1991. में एक बिलियन रुपए का दो बार डिवेलु एशन. 67 91 डि वैल्युएशन अब हिंदुत्व समझने. वालों की आई है तो ग्रोथ रेट क्या है ब. रुप की कीमत तो. सुनिए रेट ऑफ इंफ्लेशन अब डब्लू होलसेल. प्राइस इंडेक्स में 2.3 पे आ गई है अब अगर. आप देखें इसके बाद बस एक अंतर समझिए जब.
उनको हिंदू समझ में आता था तो ये 1970 का. दौर था वो दशक का दौर था जब भारत के लिए. क्या कहा जाता था याद है पूर्व पश्चिम. फिल्म का गाना जिसमें जब जीरो दिया मेरे. भारत ने उससे पहले प्राण का डायलॉग मारता. है कहता है इंडिया का कंट्रीब्यूशन क्या. है दुनिया में इंडियाज कंट्रीब्यूशन टू द. वर्ल्ड इज जीरो जीरो एंड जीरो ये उन लोगों. की सरकार थी जो सिर्फ हिंदू समझते थे. आज इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की चीफ. क्रिस्टीना जॉर्जिया कहती है इंडियाज. कंट्रीब्यूशन टू द ग्लोबल ग्रोथ इज गोइंग.
टू बी 15 पर इट इज गोइंग टू बी मैक्सिमम. एंड इंडिया इज गोइंग टू इमर्ज एज अ ग्रोथ. इंजन ऑफ द ग्लोबल ग्रोथ यह है जब हिंदुत्व. समझ ये टेक्निकल बात हो गई जो देसी आदमी. आम आदमी वो सुनता है कि मोदी जी ने कहा था. कि डॉलर के मुकाबले जब रुपया गिरता है तो. प्रतिष्ठा गिरती है अब इधर रुपया काफी. गिरा है हां उसमें कारण क्या है कि वो लोग. इस समय वर्ल्ड के पूरे पैरामीटर्स को समझ. नहीं पा. भारत तमाम करेंसीज के मुकाबले में मजबूत. बेहतर स्थिति में है भारत का रुपया यूरो. के मुकाबले स्टर्लिंग पाउंड के मुकाबले.
चाइनीज करेंसी के मुकाबले जैपनीज न के. मुकाबले ड्यूट मार्क के मुकाबले और डॉलर. के मुकाबले जितनी करेंसीज डाउन गई हैं उन. सब में रुपया सबसे बेहतर स्थिति है मगर. डॉलर की अपनी एक अलग समस्या है आज अमेरिका. जिस चैलेंज से गुजर रहा है मैं सिर्फ एक. एग्जांपल देना चाहता हूं कोई भी जाकर चेक. कर सकता 7 जून 2023 को यूएस कांग्रेस में. डिस्कशन हुआ कि डी डॉलराइजेशन नहीं होना. चाहिए यह अमेरिका की अथॉरिटी के लिए. चैलेंज है डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा कि डी.
डॉलराइजेशन अगर होगा तो बक्स कंट्रीज प हम. यह कर देंगे वो कर देंगे मैं विनम्रता से. पूछना चाहता हूं इससे पहले कभी डी. डॉलराइजेशन वर्ड सुना. था वर्ल्ड का डायनेमिक्स चेंज हो रहा है. आज हमारा सबसे बड़ा जो फॉरेन से निर्यात. होता है वह पेट्रोलियम में होता है जिसका. एक बड़ा हिस्सा हम रशिया से ले रहे हैं जो. रूपी रूबल में ले रहे हैं आठ देशों के साथ. सात आठ देशों के साथ रुपए में ट्रांस वो. हो रहा है हमारा ट्रांजैक्शन हो रहा है.
शायद बहुतों को नहीं पता हो चीन क्या बहुत. वो लोग गुणगान करते हैं ना राहुल गांधी जी. उन्हें नहीं पता जब उनकी सरकार थी 2013. में तो चीन का 84 पर जो विदेशी व्यापार था. वो डॉलर में था अब चीन उसको 44 पर तक ले. आया है यानी डॉलर का प्रभाव कम हो रहा है. और यह मैं हवा में नहीं बोल रहा हूं कभी. यूएस कांग्रेस में डॉलर की को आने वाले. चैलेंज के लिए डिस्कशन हुआ हो तो बता. दीजिएगा और 2023 में ही एक और भी हुआ. क्यों दो अमेरिका के बैंक बैंकट हो गए. सिग्नेचर बैंक और सिलिकन वैली बैंक कभी.
ऐसा चैलेंज आया था क्या अमेरिका में डॉलर. के सामने समस्या क्या है कि दो तिहाई डॉलर. अमेरिकन सिस्टम के बाहर है उन्होंने 2023. में दो बार अपनी वो बढ़ाई रेट ऑफ इंटरेस्ट. ताकि डॉलर उनके पास आए इस वजह से डॉलर का. प्रभाव बढ़ता है मगर आप खुद समझिए आज. अमेरिका के सामने देखिए मैं इसलिए कह रहा. हूं जरा इसको थोड़ा विचार करना चाहिए जो. कुछ अमेरिका स्टैंड ले रहा है तो अगर देखा. जाए तो जो ग्लोबलाइजेशन का प्रीमाइज था वह.
चेंज होता हुआ नजर आ रहा है अब तो व भी. वही कहने लगा ना कि हम फर्स्ट यूरोप कह. रहा पहले अपनी चिंता करो अमेरिका कह रहा. है पहले अपनी चिंता करो तो वह जो था ना कि. हम ग्लोबलाइजेशन की तरफ जा रहे हैं इसे एक. आप ऐसे समझिए 91 में जब सोवियत संघ का. विघटन हुआ और ऐसा लगा अमेरिकन सुप्रीमेसी. एस्टेब्लिश हो गई कि ग्लोबलाइजेशन मार्केट. इकोनॉमी एंड डेमोक्रेसी नाउ इट बिकम द. फाइनल ऑर्डर ऑफ द वर्ल्ड नाउ इट इज फाइनली. सेटल फॉर ऑल टाइम्स टू कम इन द हिस्ट्री. तो फ्रांसिस फुकु यामा ने किताब लिखी एंड.
ऑफ द हिस्ट्री एंड द लास्ट मैन उसमें एक. लाइन थी नाउ द वेस्ट हैज प्रूवन ट इट इज द. बेस्ट नाउ इट इज बेस्ट फॉर द रेस्ट टू. फॉलो द. वेस्ट केवल 35 साल हुए क रहे पहले अपना. देखो तो आप. समझिए उपनिवेशवाद कॉलोन जम का कार्यकाल. 200 साल से कम में निपट गया कम्युनिज्म 70. साल से कम में पट गया और ग्लोबलाइजेशन पर. चैलेंज 35 साल में आ गया दुनिया का. डायनेमिक्स चेंज हो रहा है और यह लोग उस. दौर में पड़े हुए हैं जैसे हमारे यहां.
लखनऊ में कहते ना अमा मिया वो दिन लद गए. जब उस्ताद लल्लू का फकते उड़ाया करते थे. तो मैंने मैं ये कहना चाहूंगा उनसे अमा. मिया वो दिन लद गए जब रुपया डॉलर की लैला. हुआ करती थी कि मजनू के एक पड़ता था पीठ. पर बेत तो लैला के पीठ के ऊपर उसकी छापा आ. जाया करती थी अब वो दौर नहीं है एक अलग. प्रकार का वर्ल्ड उभर रहा है इसलिए आप. प्री 2013 के दौर के डॉलर से और आज की.
सिर्फ डॉलर सेंट्रिक अब ग्लोबल पॉलिटिक्स. अभी आप देखिए लेटेस्ट गोल्ड सबसे ज्यादा. खरीदा जा रहा है. क्यों तमाम मैं कोई इकोनॉमिक्स का इतना. बड़ा विशेषज्ञ नहीं हूं पर जितना मैंने. पढ़ा है गोल्ड का एक्यूमेन होने में एक. बहुत बड़ा कारण यह भी है कि लोगों को लग. रहा है कि अग करेंसीज को लेकर ज्यादा. उथल-पुथल हुई इन दैट केस गोल्ड रिजर्व शुड. बी देयर ठीक लास्ट क्वेश्चन मेरा धीरें. शास्त्री जी क्या 251 कन्याओं की शादी हो. रही है और संभवत मेरी नजर में पहला मौका. है जब किसी पर्सनल इवेंट पर देश के.
प्रधानमंत्री और देश के राष्ट्रपति जो. दोनों जा रहे धीरेंद्र शास्त्री और वह. कार्यक्रम इतना खास क्यों है कि देश के. प्रधानमंत्री जी और महामहिम राष्ट्रपति जी. दोनों वहां जा रहे हैं देखिए यदि वहां पर. कन्याओं का विवाह हो रहा है और मेरी. जानकारी में शायद एक अस्पताल भी खोला जा. रहा कैंसर हॉस्पिटल तो अगर कोई कैंसर. हॉस्पिटल और वो भी कोई संगठन अपनी. व्यवस्था के द्वारा वर्ल्ड क्लास कैंसर. हॉस्पिटल व भी उस बुंदेलखंड के उस रीजन.
में आदिवासी इलाके में हां जो कि उस. क्षेत्र में जो अभी उतना डेवलप्ड नहीं. माना जाता है तो एक सकारात्मक चीज है और. सकारात्मक चीज में उत्साहवर्धन करना सरकार. का कर्तव्य है तो यदि माननीय प्रधानमंत्री. या राष्ट्रपति महोदय जा रहे हैं तो. निश्चित रूप से उसका समर्थन कर आपकी. दृष्टि में कोई ऐसा और अवसर है जहां पर. प्रधानमंत्री जी राष्ट्रपति जी दोनों गए. हो मुझे याद नहीं आ रहा था निजी कार्यक्रम. इस तरह से अब इस ढंग से अगर हम कहे निजी. कार्यक्रम क ऐसे बहुत सारे कार्यक्रमों. में उद्घाटन में अगर आप देखें दोनों नहीं. जाते एक जाते हैं आमतौर पर कांची.
शंकराचार्य ने जो नेत्र का बहुत बड़ा वो. खोला था हॉस्पिटल उसमें प्रधानमंत्री जी. गए थे अभी बात है एक डेढ़ साल पहले की है. वाराणसी और भी कई ऐसे या तो प्रधानमंत्री. जी गए होंगे या राष्ट्रपति जी गए होंगे. मगरों नहीं गए मगर हम यहां ये कहना. चाहेंगे सवाल वो लोग पूछते हैं जो. आतंकवादियों की मिजाज पुर्सी में भी चले. जाते थे नहीं नहीं मैं उधर जा ही नहीं रहा. हूं मैं तो बड़ा इंप्रेस्ड था कि वो. आदिवासी इलाके में जो काम हुआ था इसलिए कह. रहा हूं जो कंस्ट्रक्टिव पॉजिटिव एंगल की. चीजों पर सवाल वो उठाते हैं जिन्होंने.
डिस्ट्रक्टिव एलिमेंट्स के साथ हमेशा हना. नहीं नहीं मैं ये सवाल इसलिए आपसे पूछ र. हूं कि मैंने आपकी तस्वीर देखी बागेश्वर. धाम जाते हुए मैं भी गया था अभी पॉडकास्ट. करने के लिए उन्होंने बुलाया था मुझे बहुत. घूमा टहला में और मैं बड़ा इंप्रेस था कि. वो भीड़ में नहीं गए भीड़ को उन्होंने. अपने पास बुला लिया था उनकी अ धीरेंद्र. शास्त्री जी की चार चीजों पे मैंने सवाल. उठाए लेकिन एक चीज जिसकी मैंने तारीफ की. वो ये थी कि उन्होंने अपने इलाके का विकास. कर दिया उस इलाके में जो आदिवासी इला ये. बात सही है जब मैं भी गया तो वहां मुझे. देख के महसूस हुआ कि वो इतना बैकवर्ड. इलाका था और वहां पर जो विकास का नया.
स्वरूप उभरा है तो मैं तो कह रहा हूं जो. लोग डेवलपमेंट की बात करते हैं कम से कम. उनको बाकी सारी चीजें किनारे रखनी चाहिए. उनकी धीरेंद्र शास्त्री जी के प्रति जो भी. राग द्वेष ईर्षा मत्सर भाव जो भी हो वह. अलग रखिए हिंदू धर्म सनातन धर्म के प्रति. जो आपके मन की घृणा नफरत हिकारत है अलग. रखिए अरे डेवलपमेंट तो देखिए ये लोग डेवलप. के भी अगेंस्ट में रहते हैं आप याद करिए. अब एक छोटी सी बात पुन कह दूं इतना सब कुछ. कहा जा रहा है और कुंभ के मेले के बारे. में कहा जा रहा है जो कन्फेडरेशों.
का कंट्रीब्यूशन केवल कुंभ से इंडिया की. इकोनॉमी में होने जा रहा है जो छोटे-छोटे. राज्यों की कुल अर्थव्यवस्था के साइज से. ज्यादा बड़ा है तब वो भी नहीं देखना चाहते. हर चीज में नेगेटिव चीज देखना तो एक. संस्कृत का श्लोक है खल सरप मात्राण परछ. द्रा पश्यंति आत्मन बिल्व मात्राण पश्न. पिन पश्न मतलब जो लोग थोड़े नेगेटिव. प्रवृति के होते हैं वो तिल जैसी. छोटी-छोटी चीजों को ढूंढने का प्रयास करते.
हैं और अपने अगर बेल जैसे आत्मन बिल्व. मात्राण बेल जैसे बड़े-बड़े दोष हो पश्न. पन पस उसको देखते हुए भी कभी देख नहीं. पाते ठीक है सर एक बड़ा अच्छा शेर था कि. इंसान की ख्वाहिश कोई इंतिहा नहीं होती दो. गस जमीन चाहिए दो गस कफन के बाद आपकी कोई. इच्छा यहां से है जीवन. में मेरा मानना है कि जो कुछ तो. मेनिफेस्टेशन आप भी करते होना. यह लक्ष्य होना चाहिए जीवन का हम सिर्फ यह. कहना चाहते हैं कि जो लोग यह कहते हैं कि. हम यह तय करते हैं जो लोग हमारी उम्र तक आ.
गए होंगे 40 के भी हो गए होंगे उनसे पूछे. जिंदगी में सब कुछ जो आपने सोचा वैसा ही. हुआ. है ऐसा नहीं हुआ है जो जो परिस्थितियां. बनती जाती हैं त्यों त्यों आप आगे बढ़ते. चले जाते. हैं और इसमें आप कितने भी इंटे हो कितने. प्रतिभाशाली हो कितने पावरफुल हो वो नहीं. चलता जैसे एक वो शेर है कि नाजा न हो खिरत.
पर जो होना है सो ही हो नाज नाजा शब्द नाज. से बना नाज करना ना गर्व डोंट बी प्राउड. ऑफ योर एक्ट्स एंड डीड नाजा ना हो खिरत प. जो होना है सो ही हो दानिश तेरी ना कुछ. मेरी दानिश वरी चले राहे फना में दुनिया. ने किसका दिया है साथ तुम भी यूं ही चले. चलो जब तक चली चले और ठीक यही भाव रामचरित. मानस की उस चौपाई में है कि बोले बहसी. महेश तब ज्ञानी मूढ़ न कोय जही छन रघुवर.
जस करे तहीन तैसे हो विश्वास के साथ आगे. बढ़ के कर्तव्य करिए जो अपने निष्काम कर्म. करिए कर्तव्य पूरा करते रहिए बाकी देने. वाला इने तजुर्बे से अगर आप नई पीढ़ी में. जो 30 साल के नीचे बच्चे कोई एक सलाह जाते. आते देना चाहो हा उनसे मैं यह कहना. चाहूंगा नए बच्चों से कि आप एक चीज ध्यान. रखिए आप जीवन में जो भी डिसीजन. ले इस गलतफहमी में मत रहिए कि हम जो सोच. रहे हैं वह सही है अपने मां-बाप को.
कॉन्फिडेंस में लीजिए अपने बड़े भाई बड़े. बहन को लीजिए अपने टीचर्स को कॉन्फिडेंस. में लीजिए कहां से सीखिए भगवान राम के. विषय में रामचरित मानस में लिखा उनकी. दिंजन कैसे शुरू होती थी प्रात काल उठ के. रघुनाथा मात पिता गुरु ना वही माता तो बस. इसी सीक्वेंस में ध्यान रखिएगा जब आपको. जरा भी प्रॉब्लम महसूस हो सबसे पहले माता. फिर पिता फिर गुरु से डिस्क देन यू फाइनली. डिसाइड डिसाइड य बाय योर ओन बट डोंट गेट. कैरिड अवे बाय दैट आईडिया कि मुझे किसी से.
कोई कंसल्ट करने की जरूरत ही नहीं है और. जो 30 के भी हो गए उनसे पूछूंगा क्या तुम. जब 25 के थे उसके मुकाबले आज तुम बेटर. मैच्योर नहीं महसूस करते हो या तुम 20 के. थे उसके मुकाबले आज ज्यादा मैच्योर नहीं. महसूस करते हो कभी यह मत समझो कि यह मेरी. जो मैच्योरिटी लेवल है दिस इज. फाइनल यह एक सीखने के प्रोसेस में है और. मैं लास्ट में यह भी कहना चाहूंगा कि. सीखने के प्रोसेस में जो लोग यह कहते हैं. हम तो स्मार्ट है अपने आप सीखेंगे नहीं.
साहब स्मार्ट वो नहीं होता जो अपने आप. सीखे अपनी गलतियों से सीखते सीखते तो उमर. निकल जाएगी स्मार्ट वो होता है जो दूसरों. की गलतियों से सीख रहे दूसरों को गलती से. कौन सिखाता है आपके बड़े बुजुर्ग बताते. हैं इसके आगे मत जाना इसके आगे गलती है वो. उनका एक्सपीरियंस बता रहा है जैसे मैं. उदाहरण दूं दो बच्चे चल रहे हैं छोटे. बालक गर्म दूध रखा हुआ है एक किसी. भगवाने में मेटलिक पॉट में दोनों की मां. ने कहा बेटा छूना नहीं जल जाओगे एक बच्चे. ने क ऐसे कैसे इनके कहने से मान जाएंगे. मैं तो.
इंडिपेंडेंट मैं तो इंडिविजुअल हूं मैं तो. रेशनल थिंकिंग की बात करता हूं मैं छूंगा. छुआ जल गया चिल्लाया फिर उसकी मां आई उसने. उसके ऑइंटमेंट लगाया ठीक दूसरा बच्चा वो. समझदार था उसने कहा अगर मेरी मां ने कहा. है कि इसको मत छूना मैं नहीं छूंगा जब तक. वो बेचारा ऑइंटमेंट लगाया फिर चलने लायक. हुआ तब तक पहला वाला बच्चा बहुत आगे निकल. गया स्मार्ट वो है जो दूसरों के. एक्सपीरियंस से सीख ले मात पिता गुरु के. एक्सपीरियंस से सीख ले स्मार्ट वो नहीं है. जो हर जगह दीवार प सर मारता हुआ चले लवली.
सर ब्यूटीफुल लवली टॉकिंग टू सर मजा आया. थोड़ा वक्त और ज्यादा चाहिए था मुझे. क्योंकि आपके पास बहुत सारा अलग-अलग विषय. है उम्मीद करते हैं फिर कभी आपसे मुलाकात. होगी और विस्तार से अगली बार विषय अनुसार. चर्चा करेंगे नमस्कार.
