Unplugged FT. Sri Pundrik Goswami| About Radha Rani, Thakur Ji , Karma, Vrindavan, Ramlalla, Karma.
वो लोग जो जहां खड़े हो जाए तो 152 हजार. आदमी इकट्ठा हो जाए ऐसे 152 हजार लोग राम. जी के चरणों में उस दिन उपस्थित थे 22 से. पहले राम जी ने स्वभाव दिखाया था उसके बाद. अपना प्रभाव दिखाया है कैसा अनुभव था आपका. अयोध्या में मैं कहता हूं हमसे बड़ा. सौभाग्यशाली इस समय देवता स्वर्ग में जो. रहते हैं ना वो उनसे भी ज्यादा हमारा. सौभाग्य है वीडियो देख रहा था आपका जो. बहुत वायरल हुआ तमराज जी के साथ मैंने ही. कहा कि मां आप नृत्य कर रही थी मन तो मेरा. भी हो रहा था तो बोले मन हो रहा था तो. क्यों रोकते हो आज मन मन बहुत वर्षों से.
रोक लिए हम लोगों ने कम से कम चार पांच. पक्षी चारों तरफ वो पांच सात पाच सात बार. घूमे जा रहे थे और हम लोग ऑब्जर्व करके थे. वाह लगता है राम आए गरुण जी स्वयं श्री. हरि को लेकर के यहां पधारे इंद्रेश जी का. नजरिया इस पर अलग था उनका कहना था कि यहां. से कलयुग के अंत होने की शुरुआत हो रही है. राम जी आ गए विराजमान हो गए एक लंबी. स्ट्रगल के बाद आए पर बस अब यह नहीं होना. चाहिए जिन कारणों से राम जी वहां से हटा. आए गए थे राम जन्मभूमि एक बहुत बड़े.
इतिहास में हुई घटना को सुधारने की. संभावना राम मंदिर से क्या मिलेगा अगर. इतना हम बीते कुछ सालों में अच्छे स्कूल. कॉलेजेस आईआईटी या अस्पताल में लगाते तो. शायद देश और ज्यादा विकास करता पूरा देश. मंदिर मंदिर में लगा पड़ा है आप इन सवालों. को कैसे देखते हैं आज पूरे वृंदावन को. बिहारी जी रोटी देते हैं राधा रमण जी रोटी. देते हैं सही बात है स्वागत है विदाई है. जन्म है राम नाम सत्य है सब कुछ राम ही. में डूबा हुआ है भारत को दो अक्षर में.
लिखना हो तो राम लिख दीजिए राम को तीन. अक्षरों में लिखना हो तो भारत लिख दीजिए. जैसे चावल दूध और चीनी घलते हैं तो खीर. बनता है ऐसी सत्य दया और प्रेम को घो तो. एक चीज बनती है उनका नाम है श्री राम. नाथूराम वालों के भी राम है गांधी जी के. भी राम है दोनों तरफ से राम है सब तरफ राम. है फिर राम जी इतने उपेक्षित क्यों हो गए. हम लोग शास्त्रों से दूर रहे हैं जैसे. जैसे श दूर रहे या दूर कर दिए गए केनिया. में शिवजी का मंदिर अब ये थोड़ा अचंभित.
मेरे लिए बात है वहां लोग ओम नमः शिवाय भी. कह रहे हैं वहां पर हमें नंदी भी नजर आ. रहा है जो सबसे हैरानी की बात मैं ली थी. शिवलिंग पर दूध क्यों चढ़ाना. रुद्राभिषेक में दूध चढ़ाना क्यों जरूरी. है क्या यह पैसों की बर्बादी है और यह जो. सवाल लोगों के मन में है इसका आप लॉजिकल. प्लस आध्यात्मिक जवाब क्या दे सते राम. सेतु को देखा जाए तो यह भी जो राम सेतु उस. राम सेतु का अंश है और यह लंका भी उस लंका. का अंश है तो लंका गई कहां पर वो जो सोने. के लंका का जिक्र हम करते थे मंदिर जाना.
क्यों जरूरी है भगवान तो कड़कड़ में है. कहना आसान है दिस जस्ट अ कूल स्टेटमेंट टू. गिव कि कण कण में भगवान ने मंदिर जाने की. क्या जरूरत है क्या वीवीआईपी. कल्चर एक सवाल नहीं पैदा करता मैं तो. खुलेआम बोलता हूं सनातन धर्म उस दिन आपको. मजबूत लगेगा जिस दिन मंदिर को पेड एंप्लॉई. ना रखने पड़े भगवान ने एक प्रॉमिस किया है. गीता में आप मुझको जैसा भजो ग मैं आपके. सामने भी बिल्कुल वैसा ही आऊंगा प्रेम. क्या है इंसान से हो जाए तो उसको भी भगवान.
बना देता है मेरा ऐसा मानना है कि ये शरीर. डिस्पोजेबल प्लेट है यूज कीजिए उसके बाद. इसको छोड़ दीजिए भगवान अपनी प्लेट है लिव. इन रिलेशनशिप आपने भी सुना होगा आपका क्या. सोचना इस पर ये सही है जब कभी भी शादी हो. तो लड़के और लड़की दोनों को एक नए घर में. जाना चाहिए गुस्सा बहुत आता है आजकल लोगों. को. नेगेटिविटी किसी ने कुछ कहा हमारे आसपास. का वातावरण बहुत दिल पे ल लेते हैं हमारी. अपने अंदर अपनी एक इमेज होती है और तब तक.
हम कंगा चलाते हैं जब तक वो इमेज अचीव. नहीं हो जाती वृंदावन से इतने कथावाचक. इतने महापुरुष क्यों निकलते हैं क्या उस. भूमि में खास है कि वृंदावन साधारण भूमि. नहीं है श्री कृष्ण जी में वो क्या एक्. फैक्टर है जो इतना ज्यादा प्रचार प्रसार. हो गया वो केवल प्रेम है दुनिया में प्रेम. ही सबको आकर्षित करता है बीते कुछ सालों. में सोशल मीडिया के दौर में धार्मिक. स्थानों पर युवाओं की संख्या बहुत बढ़ गई. है ये सही आपको लगता है गलत लगता है. दिखावा है आज आप बैठे एक वीडियो डालते हैं.
10 10 5050 3030 मिलियन तक पहुंच जाता है. कई लोग ऐसे हैं जो बहुत पॉपुलर है. एक्सट्रीम पॉपुलर है लाखों लाखों लोग भीड़. आती है वो प्रसिद्ध है सिद्ध नहीं है आप. चमत्कार पर यकीन रखते हैं ये सवाल मैं पूछ. रहा था बाबा बागेश्वर को लेके. हा नमस्कार आपके साथ मैं हूं शुभंकर. मिश्रा और अनप्लग विद शुभंकर का आज का. एपिसोड खास खास इस लिहाज से है क्योंकि आज.
हम बहुत सारे वह सवाल करने वाले हैं बहुत. सारे उन सवालों के जवाब लेने वाले हैं जो. हमारे मन मस्तिष्क में घूमते हैं लेकिन कई. बार लॉजिक ना होने की वजह से हम संदेह कर. लेते हैं इन सवालों का जवाब देने वाले हैं. गौड़ीय परंपरा के वंश में अण महाराज. पुंडरीक महाराज जी पुंडरीक गोस्वामी जी. आपका बहुत-बहुत स्वागत है वक्त देने के. लिए और बड़ा मन प्रसन्न है कि अयोध्या में. आपको नाचते गाते झूमते हुए देखा जी आपके. चेहरे पर वो मुस्कुराहट देखी आपके पिताजी. को हम सब सुनते रहे थे मेरी माता जी सुनती.
र थी हम सब सुनते हैं लेकिन वहां से जब. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होती है और. साधु जी के साथ आप नृत्य करते नजर आते हैं. तभी से मन में कल्पना थी कि आपसे बात. करेंगे संवाद करेंगे आपसे भी जानेंगे कि. वह क्या अनुभव था और कई और भी बातें जो. आपसे करते रहेंगे जी मिश्रा जी अब मैं. स्वयं अत्यंत प्रसन्न हूं आपसे मिलकर और. वहां आपके द्वारा किए गए अलग-अलग. रिपोर्टिंग और क्रिया कलाप की सूचनाएं भी. मुझ तक पहुंचती रही और एक प्रकार से राम.
ने मिलने की उत्कंठा 22 तारीख को पैदा करी. थी और आज यहां पूरी हो रही है अच्छा यह भी. दिलचस्प है कि हमारा आपका मिलन अयोध्या. में होना था हमारा आपका मिलन वृंदावन में. होना था नहीं हो पाया नोएडा में मिल रहे. हैं लेकिन यह वादा है कि अयोध्या भी. चलेंगे साथ में वृंदावन भी चले अरे पूरे. भारत दुनिया में चलेंगे हम कैसा अनुभव था. आपका अयोध्या में 22 तारीख को क्योंकि एक. बहुत बड़ा वर्ग है महाराज जी आप तो हमारे. हम उम्र के हैं जो हमसे पिछली पीढ़ी है जब. मैं उनसे बात करता हूं तो कई लोग ऐसे हैं. जिनकी आंखें भर आती है वो कहते हैं हमें.
यकीन नहीं होता कि हमारी आंखों के सामने. सब कुछ हो गया आप गए आपने दर्शन किया. कितने सौभाग्यशाली हम लोग हैं जिन्होंने. वो दर्शन किया मैं कहता हूं हमसे बड़ा. सौभाग्यशाली इस समय देवता स्वर्ग में जो. रहते हैं ना वो उनसे भी ज्यादा हमारा. सौभाग्य है क्योंकि निश्चित रूप से मेरा. यह सौभाग्य बना था जब मैं भूमि पूजन पर था. तब भी उस दिन गया था और उस दिन भी यह. विश्वास नहीं था कि तुरंत ही इतनी जल्दी. दर्शन का भी सौभाग्य बन जाएगा बाल्यकाल से.
अयोध्या के विषय में चर्चाएं वहां की जो. भी कुछ घटनाक्रम हुए हम लोग उसके विषय में. सुनते आ और एक बहुत बड़ी पीढ़ी प्रतीक्षा. करते करते चली गई और हमारी वह प्रतीक्षा. कैसे उन सबके आशीर्वाद से पूरी हुई उसकी. कोई कल्पना नहीं कर सकता मैं आपसे सच बात. कहूं तो मुझे तो ऐसा प्रतीत हुआ कि त्रेता. आ गया वापस सतयुग आ गया द्वापर आ गया जाने. क्या-क्या आ गया मैंने उस दिन जो अनुभव. किया एकांत में अपनी साधना में बैठने की.
बात एक अलग है पर सार्वजनिक इतनी बड़ी. भीड़ में आनंद या जो जिसको आज की भाषा में. डिविली कहते हैं जिसको स्टेट ऑफ एक्ससी. कहते हैं इनलाइटनमेंट जो भी शब्दों को. देना हो समाधि की उच्चतम स्थिति इतनी बड़ी. भीड़ में मैंने जो उस दिन अनुभव किया इससे. पहले कभी अनुभव नहीं किया ऐसा ही लगा कि. साक्षात प्रभु श्री राम आ गए और एक हम हम. सबका इतना सौभाग्य जिसकी कोई कल्पना नहीं.
कर सकता कि हम इस समय धरती पर है जब राम. जी आ गए एक बड़ा अच्छा गाना वायरल हुआ था. राम आएंगे में कि नैना भी भीगे जाए मैं एक. वीडियो देख रहा था आपका जो बहुत वायरल हुआ. तरा जी के साथ जी. और आप दोनों मुस्कुरा रहे थे वो भी. मुस्कुरा रही थी लेकिन उनकी आंखों में. खुशी के आंसू भी मुझे झलक रहे थे आपने वो. संवाद किया क्योंकि मैं यह मानता हूं कि. तरा जी उन गिने चुने लोगों में रही. जिन्होंने हमेशा उस बात को ओन. किया बाकी लोगों ने टिकली करेक्ट होने के.
लिए दाए बाए स्टेटमेंट दे दिया लेकिन वो. हमेशा उस पर अड़क रही तब वोकल थी अब वह. खामोश रही सिर्फ तस्वीरों में नमस्कार. करते हुए आंखों में आंसू लिए ज हम चाहते. हैं बताइए क्योंकि उनकी भावनाओं को समझना. बड़ा जरूरी है वो अरे वह मेरी बिल्कुल मां. ही है और बहुत समय से मैं उनसे मिलता रहा. हूं सौभाग्य की बात यह कि भूमि पूजन वाले. दिन भी मैं और वो एक प्रकार से एंट्री के. समय आगे पीछे ही थे और उस दिन भी हम लोगों. के बीच में कुछ बात हुई थी मैं बोला मां.
आज प्रारंभ हो गया श्री हो गया वो बोली. श्री हो गया राम भी होने वाला है और. श्रीराम मतलब पूर्ति हो गई और फिर उसके. बाद उस दिन मैं आपको सच बोलूं मि श्रव्य. तो मैंने उस दिन दो ही लोगों को प्रणाम. किया था या तो अंदर जब मैं सौभाग्यशाली था. जो प्रथम पंक्ति में प्रवेश कर सका श्री. राम के चरणों में मैंने प्रणाम किया और. वहां से निकल के हालांकि सभी संत पूज्य. हैं पर मैंने अगर दंडवत माथा रखकर प्रणाम.
किया तो दूसरा दीदी मां को प्रणाम किया. क्योंकि मुझे ऐसा लगा जैसे भगवान का जब. प्रतिष्ठा होती है तो राम जन्मभूमि है. जन्मभूमि में एक बच्चे के आने पर दुनिया. में सब प्रसन्न होते होंगे पर शायद जैसी. मां खुश होती है ना ऐसा कोई नहीं हो सकता. यह मैं भी जान सकता हूं आप भी जान सकते हो. उस पूरे राम लला के आयोजन में लला तो सबको. देख रहे थे पर अगर कोई मां थी जिसने उसका.
आनंद लिया वो हमारी दीदी मां थी थोड़ा सा. बताए ना उनके योगदान को हम चाहते कक आप. उन्हें करीब से जानते हैं आपके पिताजी भी. जानते हैं आप लोगों ने जाना है और ऐसे. लोगों के बारे में हमारी नई पीढ़ी को भी. जानना चाहिए कि क्या भूमिका उनकी थी जो आप. उन्हें मां कह रहे हैं और आप कह रहे हैं. कि मैंने इतने सारे साधु संत इतने सारे. नेताओं के बीच में इतने सारे गणमान्य. लोगों के बीच में सिर्फ दो लोगों को. प्रणाम किया एक रामलाला को और दूसरा उनको. देखिए ऐसा नहीं है कि उन्होंने मेरे साथ. कोई एकांत में बैठकर कोई बहुत पर्सनल अपनी. एक्सपी से शेयर किए हों निश्चित रूप से.
मेरा उनका परिचय बहुत पुराना है वो मूल. निवासी तो वृंदावन की नहीं है कुछ वर्षों. पहले आपने वहां वात्सल्य ग्राम की स्थापना. की तब से सार्वजनिक कार्यक्रमों में. दूर-दूर से एक बार मुझे घटना याद है मेरी. कथा चल रही थी और वो इतनी श्रेष्ठ हैं कि. वो आई उनकी निमंत्रण था पर क्योंकि कथा चल. रही थी इसलिए वो एक डेढ़ घंटा चुपचाप. गाड़ी में पीछे बैठी रही और जब कथा की. पूर्ति हुई तो वो मंच पर आई इस यह स्वभाव. देख के मेरा उनके प्रति श्रद्धा बड़ी फिर. मैं समय-समय पर मिलता रहा पर जो एक बिंदु.
आपने कहा मैं सार्वजनिक रूप से वो बिंदु. कहता रहा जिसने मेरे हृदय में उनके प्रति. अटूट श्रद्धा दी कि जब आवश्यकता थी तब वह. मुखर थी और जब परिस्थिति थी तोत वोह मौन. थी उन्होंने कोई मांग नहीं करी उन्होंने. कोई महत्व नहीं मांगा हालांकि मुझे पता है. क्योंकि मेरे वह परिचित आयोजक भी थे. जिन्होंने किसी जमाने में उनके आयोजन किए. उत्सव किए कथाएं की और बीच-बीच कथा में. उनको केस लड़ने के लिए जाना पड़ता था मेरे. परिचित में कुछ लोग कैसे हैं दो या तीन.
दिन बाद व्यासपीठ और मंच छोड़कर उनको. कोर्ट में प्रस्तुत होने जाना पड़ा. निश्चित रूप से कई बार भीतर भी रही कई. लोगों से उलहाने भी लिए कई लोगों ने उनको. एक्सट्रीमिस्ट कह दिया एक वो जमाना भी आया. था कि इस पूरी क्रियाकलाप को आतंकवाद तक. ले जाया जा रहा था उस परिस्थिति से निकलती. हुई वो साधु उस दिन जिस करुणा में थी ऐसा. हुआ मिश्र वय कि वह एक तरफ जैसे ही दर्शन. खुले तो वह नृत्य करती नहीं वो अकेली पहले. ही वहां नाच रही थी अच्छा मैं चैतन्य.
महाप्रभु की परंपरा का हूं तो हमारे यहां. तो संकीर्तन मूल ही भाव है और अब वो सब. संत बैठे थे मैं इधर बैठा था तो निकलते. निकलते वो वाहन की प्रतीक्षा कर रही थी. चुपचाप और मैं भी कर रहा था तो मैंने दीदी. मां को उस समय प्रणाम किया ये जो वीडियो. हां वो निकासी द्वार का एग्जिट डोर का तो. मैंने उस समय जाके माता को उनको प्रणाम. किया और बोले और भैया आज तो आन वो बड़ी उस. सम उस दिन उन्मत थी आनंद में थी एक प्रकार. से सच में एक मां को एक लंबे प्रतीक्षा के.
बाद कोई पुत्र मिला हो लाला मिला हो जैसे. यशोदा को नंदोत्सव में सुख हुआ होगा तो. मैंने तब उन्हें दंडवत प्रणाम किया और. बोले मैंने ही कहा कि मां आप नृत्य कर रही. थी मन तो मेरा भी हो रहा था तो बोले मन हो. रहा था तो क्यों रोकते हो आज मन मन बहुत. वर्षों से रोक लिए हम लोगों ने अब वो मन. रोकने के दिन समाप्त हो गए और उन्होने. शुरू किया मेरा हाथ पकड़ा और फिर तो हम. लोग बहुत देर तक वीडियो तो शायद छोटा होगा. पर बहुत देर तक हम लोग वहां फिर सब संत और. भी आ गए एक प्रकार से ऐसा संकीर्तन हुआ.
वाल्मीकि रामायण में संकेत है मशवरे कि. राम जब आते हैं उसका यह प्रमाण है कि पूरा. विश्व राम राम करता है 22 तारीख ऐसी ही. तिथि थी ना किसी ने नमस्ते भेजा ना हेलो. भेजा केवल राम राम भेजा और राम का उस दिन. आगमन हो गया अच्छा उस दिन सभी का एक अलग. रूप दिखाई पड़ रहा था सभी के चेहरे पर एक. अलग सी मुस्कुराहट थी आप लोग को भी हमने. सुना है कथा करते हुए बाकी लोगों को भी. सुना है लेकिन उस दिन का जो अनुभव था वो. अलग था बहुत अलग था गजब की चीज मैंने देखी.
जी ऐसा हुआ कि जब इवन हेलीकॉप्टर जो फूल. वर्षा करी उससे ठीक पहले मैं और मेरे. आसपास जो कुछ संत और बैठे थे हम लोगों ने. ऑब्जर्व किया मेरे ठीक बगल में जैन परंपरा. के गुजरात के बहुत बड़े महापुरुष जिनके जो. गुरु जी थे वह जिनके गुरु श्री महात्मा. गांधी की जो गुरु गद्दी है श्री राम की वो. परंपरा के वो महापुरुष थे मेरे साथ ही. बैठे थे कई और लोग थे तो हम लोगों ने. ऑब्जर्व किया कि जब.
अंदर का क्रम शुरू हुआ मोदी जी ने प्रवेश. करना शुरू किया वह क्रम था कम से कम चार. पांच. पक्षी जो दूर से देखने में य चील जैसे. प्रतीत हो रहे थे वो पूरे मंदिर के शिखर. के चारों तरफ अगर किसी ने वीडियो बनाया हो. तो जरूर मैं उस दिन देख के अचंभित था तो. मैं अपने फोन से ही बनाता चारों तरफ वो. पांच सात पांच सात बार घूमे जा रहे थे और. हम लोग ऑब्जर्व करके थे वाह लगता है राम. आए गरुण जी स्वयं श्री हरि को लेकर के.
यहां पधारे ऐसे ऐसे घूम रहे थे फिर जब. ऑफकोर्स हेलीकॉप्टर आया तो उसका एक. इंटरप्शन था तब वो वहां से चले गए पर ऐसे. घूमते ऐसा सात्विक. वातावरण ऐसे मैं समझता हूं वो लोग जो जहां. खड़े हो जाए तो 15-2 हज आदमी इकट्ठा हो. जाए ऐसे 15-2 हजार लोग राम जी के चरणों. में उस दिन उपस्थित थे ये राम मैं तो एक. बात कहूंगा मिस्टर वरी 22 से पहले राम जी. ने स्वभाव दिखाया था उसके बाद अपना प्रभाव. दिखाया.
है क्या इसका असर क्योंकि मैं अभी आपके एक. मित्र है इंद्रेश जी हां उनसे मेरा संवाद. चल रहा था ठीक तो इंद्रेश जी ने कहा कि अब. इसको इसको भी देखने के दो दो. प्रोस्पेक्टिव आते हैं एक प्रोस्पेक्टिव. आता है कि एक ऐसे युग की शुरुआत हुई है जो. बहुत सालों से जैसे आपने कहा ना कि बहुत. सालों से रोक रखा था अब खुलकर हम आ रहे. हैं और अब राम राज्य में देश जा रहा है या. राममय देश हो जा रहा है इंद्रेश जी का. नजरिया इस पर अलग था उनका कहना था कि यहां. से कलयुग के अंत होने की शुरुआत हो रही है.
वो जैसे दिया बुझने के पहले एक लौ तेज. करता है ये वो तेज लौ थी जिसके बाद. धीरे-धीरे अ समापन की तरफ शुरुआत हो जाएगी. कलयुग के खत्म होने की बात आ जाएगी और. चीजें हो जाएंगी एक वर्ग है कई साधु. महात्माओं से मिलता हूं वो कहते हैं कि. यहां से एक नए प्रकाश की शुरुआत हो रही है. जो शायद आगे काशी जाएगी और देश के वातावरण. को और बेहतर करेगी नई पीढ़ी जो धर्म से. दूर हो गई थी वो वापस आएगी जिसका असर भी. दिख रहा है सोशल मीडिया से लेकर तमाम. जगहों पर कर रहे हैं आपका इस पर नजरिया.
क्या है देखिए एक चीज को हर व्यक्ति अपनी. अपनी भावना से परिभाषित करता है कि ठीक है. मैं तो ये कहता हूं कि मेरा अपना मानना यह. है काशी तक जाए मथुरा तक जाए बहुत ही. अच्छी बात है कलयुग कांत हो रहा है ये भी. एक भावनात्मक पक्ष हो सकता है क्योंकि. शास्त्रीय दृष्टि से देखा जाए तो कलयुग की. एक अपनी आयु है और भगवान तो. युगातील से मतलब है ना सतयुग से कलयुग में. तुलसीदास जी ने प्रत्यक्ष राम का दर्शन. किया ये एक भिन्न भिन्न अपनी अपनी भावनाएं.
हैं मेरा मूल कारण मैं इस चीज को इस नजरिए. से देखता हूं कि राम जी आ गए विराजमान हो. गए एक लंबी स्ट्रगल के बाद आए पर बस अब यह. नहीं होना चाहिए जिन कारणों से राम जी. वहां से हटाए गए थे जो भी परिस्थिति बनी. थी जिस कारण से इतनी बड़ी स्ट्रगल आई अब. इसके बाद वो ऊर्जा बनी है राम के विग्रह. के स्थापित होने से जिस कारण से ये बिन. किसी और स्थान पर भिन्न स्थान पर कहीं भी.
ऐसी परिस्थिति ना बने कि फिर से किसी. दूसरे के धर्म किसी की मान्यता किसी की. आस्था किसी की भी मर्यादा किसी के भी. सम्मान को हानि पहुंचाई जाए आज एक प्रकार. से राम जन्म भूमि किसी के आत्म सम्मान की. स्थापना है राम जन्म भूमि एक बहुत बड़े. इतिहास में हुई घटना को सुधारने की. संभावना राम की स्थापना एकम सद् विप्रा. बहुदा वदंति है राम की स्थापना यत्र.
नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता है. राम की स्थापना मैं कहूंगा परहित सरिस. धर्म नहीं भाई है यह सब जो पॉजिटिव. सकारात्मकता समाज के अंदर व्याप्त होनी है. वो राम के स्थापित होने से पूरी दुनिया. जानना चाह रही है मैं अभी आपके पास सीधा. यूरोप से ही आ रहा हूं यूके था दो दिन. पहले किसी से संवाद हो रहा था जस्ट मैं एक. अंडरग्राउंड में दो मिनट के लिए ट्रेवल कर. रहा था उस समय मेरी वेशभूषा को देखकर एक.
ब्रिटिश व्यक्ति ने पूछा यू फ्रॉम इंडिया. तो मैंने कहा यस तो वी यू जस्ट गट अ न्यू. टेंपल ऑफ लॉर्ड राम सो मैंने कहा हां तो. हु एक्चुअली इज राम वाज आई ट्राइड टू गगल. अबाउट हिम देन वो कुछ मतलब 12 14 साल बन. में रहे ऐसे रहे तो मैंने जब दो चार. चरित्र उसको बताए तो ही वाज अटोनिक इज्ड. कि वाह ऐसा भी चीजें हो सकती हैं तो तो ये. जो राम की जिज्ञासा समाज में जागृत हुई है.
ये एक प्रकार से समाज में जो डेमोक्रेटिक. बिहेवियर है स्वीकार करने की क्रियाएं हैं. एक दूसरे को सम्मान देने की क्रियाएं. निषाद और शबरी से लेकर के बड़े से बड़े. ऊंचे पदवी तक बैठने वाले लोगों को जोड़ने. की जो क्रियाएं ये राम के माध्यम से. स्थापित होने वाली है एक सवाल नई पीढ़ी के. मन में खास तौर पर आता है क्योंकि प्रभु. श्री राम का मंदिर बन रहा है धार्मिक विषय. है लोग खुश हैं एक बहुत बड़ा वर्ग है. लेकिन भारत की खूबसूरती है कि भारत में हर.
प्रकार के लोग हैं सवाल उठाने वाले भी हैं. आस्तिक भी हैं नास्तिक भी हैं वो है. जिन्हें मतलब भी नहीं है उसमें एक वर्ग कई. बार यह सवाल पूछता है कि पूजा पाठ ठीक है. हम सब अपने घर पर करते हैं प्रभु श्री राम. का मंदिर भी है ठीक है लेकिन पूरा देश एक. मंदिर के पीछे पड़ गया उससे क्या मिलने. वाला है यह सवाल उठ रहा था कि राम मंदिर. से क्या मिलेगा जितना हमने जोर जितनी हमने. ताकत लगाई अगर इतना हम बीते कुछ सालों में. अच्छे स्कूल कॉलेजेस आईआईटी या अस्पताल. में लगाते तो शायद देश और ज्यादा विकास.
करता हम हमारे लोगों को अमेरिका इंग्लैंड. नहीं जाना पड़ता वहां नौकरी के लिए संघर्ष. नहीं करना पड़ता देश की उन्नति होती. जीडीपी बेहतर होती पूरा देश मंदिर मंदिर. में लगा पड़ा है आप इन सवालों कैसे देखते. हैं देखिए सबकी अपनी सोच है देश स्वतंत्र. है कुछ भी सोच सकते हैं पर अगर आप एक. रैशनल एक तर्कवा दीता से विचार करें सबसे. पहली बात यह है कि एक रोल मॉडल एस्टेब्लिश. करना जरूरी होता है ये केवल मंदिर नहीं है. एक संपूर्ण देश किस विचारधारा से विकसित.
होना चाहता है राम भगवान है पूजा है मंदिर. है यह तो एक सबसे ऊंची बात है पर एक. विचारधारा भी है राम एक संपूर्ण विचारधारा. का नाम है जहां की एंपावरमेंट है जहा वुमन. रिस्पेक्ट की बात है यह जो एक रोल मॉडल जब. कैरेक्टर क्योंकि गोस्वामी जी ने क्या. लिखा राम चरित्र मानस चरित्र का मतलब होता. है कैरेक्टर जब तक कोई रोल मॉडल नहीं होगा. तब तक कैरेक्टर नहीं होगा और जब तक.
कैरेक्टर नहीं होगा तब तक डेवलपमेंट कहां. ले जाएगा हॉस्पिटल बड़े होंगे पर. हॉस्पिटैलिटी नहीं होगी तो क्या करोगे. बिल्डिंग का स्कूल बहुत बड़े होंगे पर. टीचर के भीतर अगर एक सम व्यवहार नहीं होगा. तो क्या करोगे तो सबसे पहली बात है कि. मंदिर की स्थापना के भावना से पूरे देश को. एक कैरेक्टर मिला है जिसने बालक से लेकर. बूढ़े तक व्यापारी से लेकर राजा तक गरीब. से लेकर अमीर तक हर व्यक्ति के जीवन में. कुछ ना कुछ एक रोल मॉडल दिया है इसके.
साथ-साथ जो डेवलपमेंट का बिहेवियर है वह. केवल मटेरियल नहीं होगा व अर्थवा दिता से. युक्त नहीं होगा वह वास्तव में भारत को. विश्व गुरु बनाने की स्थिति तक ले जाएगा. और ऐसा नहीं है कि अस्पतालों पर विचार. नहीं हो रहा है स्कूलों पर विचार नहीं हो. रहा है वह सब अपनी गति से बढ़ रहे हैं और. बढ़ने चाहिए और हम सब कौन सा ऐसा आश्रम. नहीं होगा देश का विकसित जो स्कूल ना. चलाता जो हॉस्पिटल नहीं चलाता मैं नहीं.
समझता कि कोई भी देश की बड़ी धार्मिक. संस्था इस समय नहीं होगी खास सनातन धर्म. से जुड़ी दसियों नाम में और आप जानते हैं. कहीं ना कहीं छोटे या बड़े रूप में. गुरुकुल स्कूल चिकित्सालय कन्या शिक्षा. कन्या विवाह ऐसे अनेक अनेक कार्य कर एक. मंदिर जब स्थापित होता है तो क्या कर सकता. है इस समय बदली हुई अयोध्या को देखकर हो. सकता है आपने फोट डा पर देख कर आया हम भी. देख कर आए आप भी देख कर आए आपने फोटो मुझे. दिखाई थी पुरानी और नई अयोध्या आप विकास. की बात कर आज टूरिजम अट्रैक्ट हो गया.
अयोध्या के लैंड प्राइस देखिए उस पूरे. एरिया का आप खुद उसके पास के निवासी हैं. वहां होने वाले चेंज एक केबल मंदिर की वजह. से इतना बड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आ गया. टूरिजम एस्टेब्लिश हो गया एजुकेशन सेंटर. भी वहां धीरे-धीरे ऑलरेडी योजना में है कि. बनना आवश्यक है तो धीरे धीरे धीरे धीरे आप. एक चीज विचार कीजिए भारत कैसे विकसित हुआ. है भारत के हर बड़े शहर के मूल में मंदिर. है हर बड़े शहर के मल में एक जगन्नाथ पूरी.
उड़ीसा को चला से मुझे याद है कोविड के. टाइम पर कोविड के टाइम पर एक मेरा टैक्सी. ड्राइवर से मेरी बात हुई उसने कहा बद्री. और केदार आधे हिमालय को रोटी देते हैं. महाराज जी बिल्कुल सही बात है तो कित. जितने भी हमारे यहां के मूल मुंबा देवी. हैं सिद्धि विनायक बैठे हैं जो कहीं ना. कहीं उस सभ क्योंकि एक मंदिर एपीसेंटर ऑफ. कम्युनिटी था जहां केवल वरशिप नहीं थी. म्यूजिक भी था आर्ट भी थी एक मंदिर. एंप्लॉयमेंट से से जुड़ी प्रत्येक वस्तु. का प्रयोग करता है यह बात तो मैं खुलेआम.
बार-बार कहता रहता हूं आपको वहां दर्जी भी. चाहिए आपको वहां मिस्त्री भी चाहिए आपको. वहां ज्वेलर भी चाहिए आपको वहां अन्य. क्षेत्र चलाने के लिए भोग भी लगाना है सब. कुछ इस पूरे समाज में जितने व्यक्ति मौजूद. हैं पुराने से पुराने काम करने वाले और हम. आपके जैसे सोशल मीडिया पर काम करने वाले. हर व्यक्ति रामलला को हर आदमी चाहिए आप भी. वहां जाक वीडियो बना रहे हैं मैं भी वहां. जाकर कथा कर रहा हूं और वो छोटा व्यक्ति. जो वहां पे थोड़ा सा बीज लगा के पेड़ उगाए.
एक जो केवल गार्डनिंग का काम करेगा वहां. तक उस आदमी एक मंदिर सबको टैप कर रहा है. पूरे भारत के मूल में जितने विकसित शहर है. कहीं ना कहीं उसके मूल में एक मंदिर बैठा. हुआ है आज पूरे वृंदावन को बिहारी जी रोटी. देते हैं राधा रमण जी रोटी देते हैं सही. बात है अगर आज वहां आप अभी घोषणा कर दीजिए. कल से बिहारी जी राधा रमण के मंदिर बंद हो. जाएंगे तो मैं समझूंगा वृंदावन में जो. डेवलपमेंट है समाप्त हो जाएगा हां कोई. क्यों जाएगा वहां पर क्यों जाएगा सही बात. है क्यों जाएगा और एजुकेशन को लेकर जरूर.
काम होना चाहिए राम जी के विषय में जानना. भी एजुकेशन ही है व पार्ट ऑफ एजुकेशन है. पार्ट ऑफ गुड कैरेक्टर है किस प्रकार से. एक राज्य को राम जीतते हैं जहा आतताई रावण. बैठता है पर उसके बाद भी उसको रूल नहीं. करते टेक्निकली व सीट पर बैठ सकते थे पर. उन्होंने विभीषण को पहले बिठा दिया इधर. सुग्रीव को पहले बिठा दिया पॉलिटिकल मूव. प्रोफेशनल मूव फैमिली मूव एज अ हस्बैंड एज. किसी भी कैरेक्टर में राम इस देश का.
मॉर्निंग है राम इस देश की इवनिंग है. स्वागत है विदाई है जन्म है राम नाम सत्य. है सब कुछ राम ही में डूबा हुआ है पूरे. देश के कैरेक्टर को मैं तो कितनी बार. मिश्वर वहां और यहां आपसे रिपीट करके बात. बोलूंगा कि भारत को दो अक्षर में लिखना हो. तो राम लिख दीजिए राम को तीन अक्षरों में. लिखना हो तो भारत लिख दीजिए बहुत सुंदर. आपने कहा गांधी जी के विराम थे जो मान रहे. हैं सबके अलग-अलग हां मतलब कई बार मैं.
सियासत में देखता हूं नाथू राम वालों के. भी राम है गांधी जी के भी राम है दोनों. तरफ से राम है सब तरफ राम है फिर राम जी. इतने उपेक्षित क्यों हो गए यही इस देश का. दुर्भाग्य यही इस भूतकाल में आई जो भी. हमारे ऊपर की परिस्थितियां थी मैं एक मूल. बात आपसे कहूं मैं जिस क्षेत्र का मैं हूं. उस क्षेत्र के अनुभव से कह सकता कोई. पॉलिटिकल व्यक्ति होता तो वह अपनी. पॉलिटिकल बात कहता मेरे मन में ऐसी समझ है. आती है कि कहीं ना कहीं जो एजुकेशन सिस्टम. था हमारे हम लोग शास्त्रों से दूर रहे.
जैसे-जैसे शास्त्र दूर रहे या दूर कर दिए. गए दोनों चीज क्योंकि मैं कई बार जब. हिस्टोरियंस को पढ़ता हूं तो उनका यह कहना. है कि आप क्रिश्चियनिटी से जब उठाते हैं. कि जब कभी वो कहीं हमला करते थे तो उनके. चर्च को टेंपल को या धार्मिक जो खी थी. वहां पर पहला हमला था कि अगर आपकी वैचारिक. चीज को तोड़ दिया गया सांस्कृतिक चीज को. तोड़ दिया गया तो वो जो पूरी जनरेशन है वो. ऑटोमेटिक स्पॉइल्ट हो जाएगी उनको बा होल्ड. कर रखने वाली चीज जो है व खत्म हो जाएग. दोनों चीज मूल तो वहीं से शुरू हुआ और अभी.
भी एजुकेशन सिस्टम कहां अपग्रेड हो पाया. है इंडस्ट्रियल रेवोल्यूशन के टाइम से जो. स्कूल का स्टैंडर्ड होता था वही घंटी बजती. थी जो लेबर ट्रेनिंग की प्रोसेसेस होती थी. व स्कूली प्रोसेसेस में हमने अडॉप्ट करके. तैयारी की है उस कारण से जो हमारी भारतीय. सभ्यता है विज्ञान है हमारे यहां क्या. नहीं मौजूद है मैं कहता हूं अगर आप. संस्कृत लैंग्वेज जान लीजिए तो आप आज. हमारे यहां लिटरेचर साइंस एस्ट्रोलॉजी. एस्ट्रोन. जो मौजूद है सब कुछ आज आप दुनिया से अपने.
आप को 100 150 साल एडवांस अनुभव करेंगे. केवल अगर आप लैंग्वेज जान लीजिए नॉट एज अ. रिलीजस एस्पेक्ट कैसे आज क्या नहीं मौजूद. है आज आप कालिदास के जैसा लिटरेचर मतलब. ऑफकोर्स मैं विलियम शेक्सपियर को भी पढ़. चुका हूं थोड़ा बहुत टोल्स टॉय को भी. मैंने थोड़ा बहुत देखा है महाकवि मिल्टन. का द पैराडाइज लॉस्ट वन ऑफ द बेस्ट. इंग्लिश लिटरेचर को भी देख चुका हूं थोड़ा. बहुत बेन मीज हुआ है बड़े-बड़े इंग्लिश. साहित्यकार है पर कालिदास मेघे माघे गतम.
भय लिटरेचर पॉइंट ऑफ व्यू से कालिदास की. कला है वो एक शब्द को जिस एक ग्रंथ में एक. बार यूज करता है दोबारा उसने अपनी पूरे. लिटरेचर में उस वर्ड को यूज नहीं. किया लिटरेचर के पॉइंट ऑफ व्यू से आज आप. राम जी की आरती गाते हैं रामायण जी की कथा. करते हैं गांव-गांव में रामायण की आरती. होती है वहां एक शब्द आता है वाल्मीक. विज्ञान विशारद आरती रामायण जी की की ज हर. राम जी के पाठ के बाद य आरती होती है सबसे.
बड़े वैज्ञानिक आज आप साइंस और टेक्नोलॉजी. के हिसाब से देखिए तो जो महर्षि वाल्मीकि. ने रामायण के भीतर एस्ट्रोलॉजी का वर्णन. किया जो पूरी पूरी पूरी की पूरी स्टेबलिंग. आज एयर एन स्पेस म्यूजियम वाशिंगटन में. राइट ब्रदर्स जो साइकिल बनाते थे उनके. द्वारा बनाया हुआ हवाई जहाज रखा है ठीक. उसी लॉबी में आप जाकर देखेंगे तो पास में. गैलीलियो गैलीली का एक नोबल रखा है जिसमें. सबसे पहली बार उड़ने वाली चीज का वर्णन.
किया गया था और गैलीलियो गैलीली हाईली. इंस्पायर्ड था इंडियन फिलोसोफी से इस पूरी. दुनिया में पुष्पक विमान ऐसा है जो प्रथम. बार किसी उड़ने वाली चीज का वर्णन करता है. तो कहीं ना कहीं इंस्पिरेशंस पूरी भारतीय. साहित्य में पूर्ववत मौजूद है मैं तो यहां. तक भी एक परिभाषा कई बार देता हूं कि यह. दिवाली के दिन हम लोग दिया जलाते हैं ना. तो यह लैंड करने की एयर स्ट्रिप है. अयोध्या में तो कोई प्लेन था नहीं लंका से. आया था शाम के समय दिए दिखाकर एयर स्ट्रिप.
दिखाई अयोध्या वासियों ने कि कहां से लैंड. अगर आप ऐसे सोचना शुरू कीजिए तो एवरीथिंग. सज अ वेरी वेरी वेरी डीप लॉजिक केवल. संस्कृत जान ले तो आज आप पूरी दुनिया से. अपने आप को 100 वर्ष एडवांस अनुभव करेंगे. फिर एक सवाल मन में आता है कि जैसे आपने. प्रभु श्री राम को लेकर कहा जब हम. वाल्मीकि जी के रामायण का जिक्र करते हैं. या हम तुलसीदास जी के रामायण का जिक्र. करते हैं या हम पढ़ते हैं तो पता लगता है. कि दुनिया में और भी बहुत जगह पर प्रभु. श्री राम की कथा है कहानियां है किस्से.
हैं इंडोनेशिया आप जाएंगे वोह कहते हैं. हमारे यहां राम थे नेपाल में भी कई. कहानियां चलती है व कहते हैं सीता जी. हमारे यहां कुछ लोग कहते हैं बिहार में. हुई दुनिया कई देशों में कहानिया है य एक. ही श्री राम की कहानियां सारी जगहो पर है. या अलग अलग कहानियां है क्य कई लोग मानते. हैं कि प्रभु श्री राम एक राजा थे वो भी. एक कहानी चलती है उनके ना मानने वाले की व. भगवान नहीं थे एक राजा थे जो आए जिन्होंने. बहुत सारी चीजें की प्रभु श्री राम कौन है. एक सवाल यह और जो दुनिया के अलग अलग में. भी कहानियां है रामायण से मिलती जुलती.
कहानियां वही उनकी अपनी अपनी रामचरित मानस. रामचरित मानस कई है सैकड़ों की संख्या में. तो वो कैसे अलग है हमारी रामायण से या. कैसे प्रभु की लीला अलग अलग है देखिए सबसे. आदि रामायण तो वाल्मीकि रामायण ही है. फर्स्ट जब राम जी इस धरती पर लीला कर रहे. हैं उस टाइम महर्षि वाल्मीकि ने सबसे पहला. श्लोक ही है नारद जी से पूछा स्पिन साम. प्रतम लोके इस समय इस धरती पर कौन ऐसा महा. व्यक्तित्व भगवान है इसके विषय में मैं. कुछ लिखूं तो नारद जी ने बताया और.
वाल्मीकि जी ने रामायण लिखी तो वन ऑफ द. एसिंट एंड ओल्डेस्ट तो वही इस समय मौजूद. है और सर्व सर्वजन स्वीकार भी है अब आपने. पहला प्रश्न किया कि राम कौन है मैं कहूं. वेद भी सब कुछ कहने के बाद जिसको नीति कह. देता है जो अव्यक्त है जो अचिंत है जो. अनहद है जो सद चद आनंद है यह तो सब एक. शास्त्र की ऊंची ऊंची बातें हो गई फिर भी. अगर बिल्कुल नम्र भाषा विनम्रता से आपसे. निवेदन करूं तो इस पूरी दुनिया में जितना.
सत्य है इस पूरी दुनिया में जितना दया है. और इस पूरी दुनिया में जितना प्रेम है ये. तीन चीज को घोली जैसे चावल दूध और चीनी. घोल हैं तो खीर बनता है ऐसे सत्य दया और. प्रेम को घोली तो एक चीज बनती है उनका नाम. है श्री. राम व श्री राम को जो टेस्ट कर लेता है. उसके जीवन में सत्य आ जाता है कंपैशन आ. जाता है उसके जीवन में प्रेम आ जाता है वो. प्रेम के अस्तित्व को समझ लेता है चरित्र. आ जाता है ये सब राम है अब आपने बात कही.
कि अलग-अलग रामायण क्यों क्योंकि रामायण. खुद ही कहते है रामायण सत कोट और अलग-अलग. समय काल में भी हां मेटा वर्स आज आप मेटा. वर्स की बात कर रहे हैं हमारे वैदिक. शास्त्र मेटा वर्स की बात हजारों साल पहले. कर चुके अ स्कंद पुराण में वर्णन आता है. यह तो सब जानते हैं कि देर आर मेनी. प्लेनेट इन सोलर सिस्टम परट नोबडी नोज द. एग्जैक्ट नंबर ऑफ इट स्कंद पुराण. स्पेसिफिकली सेज साढ़े करोड़ ब्रह्मांड. दुनिया. में साढ़े करोड़ ब्रह्मांड में हर जगह का.
टाइम और स्पेस अलग-अलग है आज मेटा वर्स भी. यह बात करता है लेटेस्ट कोई एक मूवी भी आई. है मैं नाम भूल रहा हूं मैं फ्लाइट में था. तब मैंने उसका थोड़ा सा आधा देख पाया फिर. फ्लाइट लैंड कर गई एंड देन आई गट बिजी तो. फ्लाइट में थोड़ा बहुत मैं देख लेता हूं. जो इस मेटा वर्स की मल्टी पर्सनेलिटीज की. बात करती है कि एक ही व्यक्ति अलग-अलग. पेनेट्स प अलग-अलग टाइम और स्पेस में. मौजूद है हॉलीवुड की मूवी है अभी नाम मैं. भूल रहा हूं. न नॉट द डॉक्टर स्ट्रेंज अभी अभी मैं सर्च.
करके बताऊंगा तो वो आधुनिक मूवी है तो. इसको हमारे शास्त्रों में कल्प भेद कहा. गया है कल्प भेद इसका इसलिए शब्द लिखा है. कल्प भेद कल्प भेद का एक और मतलब यह समझिए. कि सतयुग त्रेता द्वापर बदल बदल के आता है. तो जब जब त्रेता आता है समय समय पर तब तब. राम जी अलग-अलग रूपों में अवतार लेते. हैं इसी लोक में फिर से जब आगे त्रेता आए. फिर से अवतार लेंगे तो उस समय फिर से.
रामायण लिखी जाएगी कहीं ना कहीं कहीं ना. कहीं डिफरेंसेस इस हिसाब से आते और दूसरी. एक चीज और कहूंगा इसी टाइम पर मैं और आप. बात कर रहे हैं ना तो किसी दूसरे सोलर. सिस्टम में की दूसरी पृथ्वी पर वहां अभी. त्रेता चल रहा है और मैं मिश्रा जी आपसे. बात कर रहा हूं और वहां राम शबरी के बेर. खा रहे. हैं बिल्कुल यही है जैसे मैं इसका एक. एग्जांपल ऑलवेज देता हूं इस टाइम. सनसेट भी है इस टाइम पर सनराइज भी है इस.
टाइम पे मिड सन भी है इस टाइम पे मिडनाइट. भी है एवरीथिंग इज देयर बट लोकेशन डिफरेंट. है आप इसी टाइम पर अभी अमेरिका चली जाइए. तो सनराइज हो रहा है इसी टाइम पर अगर अभी. आप अभी आप एप्लीकेशन में चेक कीजिए तो. कहीं सन सेट हो रहा है तो टाइम इज सेम बट. द लोकेशन इज डिफरेंट तो टाइम और स्पेस के. हिसाब से जो आज मेटा वर्स आज बात कर रही. है दुनिया हमारे शास्त्रों ने उस समय बात. की है एक चीज और समझने की है सूरज से.
हमारी आंख तक लगभग रोशनी पहुंचने में. साढ़े तीन मिनट लग जाते हैं अनुमानित. थोड़ा बहुत कम ज्यादा होगा तो मैं विज्ञान. का विद्यार्थी नहीं हूं फिर भी मतलब जो. चीज हम देख रहे हैं वह साढ़े मिनट बासी. सूरज है हमारी आंखों तक उसकी लाइट पहुंचने. में इतना समय लग गया तो जब व्यक्ति कांश. अस होता है उसकी चेतना जागृत होती है जब. वो अवेक होता जब उसकी अप्रोच बढ़ती है जब. वह यूनिवर्स के साथ कनेक्ट करता है जब.
यूनिवर्सल कनेक्ट उसके अंदर आता है जब. उसकी कॉन्शसनेस उसके भीतर से विकसित होकर. प्रकृति के साथ होती है तब सूर्य की रोशनी. उस तक साढ़े तीन मिनट में पहुंच रही पर. उसकी चेतना अगर सूर्य तक आगे पहुंचेगी तो. वह साढ़े मिनट से ढाई मिनट पर एक्सपीरियंस. कर सकता है डेढ़ मिनट पर एक्सपीरियंस कर. सकता तो ऐसा समझिए कि आज से 500 साल पहले. किसी फोर्थ सोलर सिस्टम में राम जी जन्म. लेकर लीला कर रहे हैं और उस समय इस धरती.
पर यहां तुलसीदास जी मौजूद है उनकी चेतना. साधना के द्वारा वहां कनेक्ट करिए और वहां. पर जो राम जी लीला कर रहे हैं उसको. उन्होंने रामचरित्र मानस के रूप में लिख. दिया. है अ थोड़ा साइंस और टेक्नोलॉजी का. विद्यार्थी मेरी बात ज्यादा समझ पाएगा पर. ये मेटा वर्स की जो आज विवेचना है वो. शास्त्रों के भीतर उस समय से मौजूद है. इसको कहते हैं कल्प भेद हमारे यहां जी आप. अभी हम और आप चर्चा कर रहे थे शिवलिंग की.
साउथ अफ्रीका केनिया में केनिया में हा. केनिया में शिवलिंग था अब कई बार हिंदी. फिल्मों में मजाक में से कर दिया एक फिल्म. आई थी बजरंगी भाईजान हा तो उसमें जो हीरो. होता है वह पाकिस्तान में जाता है और वहां. पर एक बंदर दिखाई पड़ता है तो उसको प्रणाम. करता कता जय हनुमान जी तो कहता हनुमान जी. पाकिस्तान में भी मतलब क्या पाकिस्तान के. बंदर भी हनुमान. जी केनिया में शिवजी का मंदिर अब ये थोड़ा. अचंभित मेरे लिए बात है क्योंकि आमतौर पर. जितने हमारे देवी देवताओं के किस्से.
कहानियां या चीजें हैं वो भारत या भारत के. एशियाई महाद्वीप में ही मिल जाते हैं. श्रीलंका पाकिस्तान अफगानिस्तान नेपाल. यहीं के आसपास के लीलाए हैं और हम मानते. हैं कि यही हमारी दुनिया है बाकी जगहों पर. दूसरे धर्म के लोग अपनी अपनी आस्था अपनी. अपनी चीजें रखते हैं वो शिवलिंग क्या है. कैसे है मतलब मेरे लिए बड़ी आश्चर्य चकित. वाली बात थी वो मैं सुनकर थोड़ा हैरान भी. था कि ये कैसे संभव है क्योंकि जिस तरह वो. शिवलिंग की बनावट है वो शिवलिंग ही है. वहां लोग ओम नमः शिवाय भी कह रहे हैं वहां.
पर हमें नंदी भी नजर आ रहा है जो सबसे. हैरानी की बात मैं ली थी कि जहां शिव वहां. नंदी वहां नंदी भी बनाए हुए हैं समुद्र भी. है तो यह थोड़ा बताइए आप गए भी शायद वहां. पर हैं जी मैं आज से लगभग 15 वर्ष. पहले वहां गया था 2010 में मेरी एक कीनिया. मुंबा सा एक शहर है बहुत प्रसिद्ध है. टूरिस्टिक प्लेस है वहां मेरी कथा थी तो. वहां के लोग मुझे पहली बार ले गए पहली. बारी मैं गया था तो उनका नाम नाम था बड़ी. अद्भुत सी जगह थी आप जाइए समुद्र का.
किनारा केनिया किस लिए गए थे आपसे मैं. मेरी कथा थी वहां केनिया के अंदर केनिया. के अंदर वहां कई भारतीय हैं बल्कि पुराने. भारतीय ब्रिटिश काल के समय ब्रिटिशर्स कई. इंडियन यहां के गुजरात के और कई लोगों को. वहां डेवलपमेंट के लिए ले गए थे बिकॉज. थोड़ी अफ्रीकन कम्युनिटी से ब्रिटिशर्स. डरते थे या जो भी रीजन था तो और टैलेंट तो. इंडिया में शुरू से ही था इसलिए फीजी भी. आप जाइए तो आपको बिहार और गुजरात के ढ़ डे. स साल से बसे हुए लोग मिलेंगे फीजी में. ऐसे बहुत सारे साउथ अमेरिका में भी ऐसे. क्षेत्र हैं तो ऐसे ही कीनिया में बहुत.
ब्रिटिश काल से बसे हुए लोग हैं जो किसी. माध्यम से प्रचार की वजह से हम लोगों से. परिचित है तो उन्होंने मुझे 2010 बुलाया. था वहां तो वही लोग मुझे लेकर के गए और. बड़ा अद्भुत समुद्र का तट है मुंबा सा वन. ऑफ द फाइनेस्ट्राइड. इंडिया में जैसे गोवा है तो गोवा को और आप.
फाइनेस्ट्राइड. बीच और ऐसा वो और मुझे वहां ले गए बोले. आपको एक बताया नहीं बोले एक जगह दिखाते. हैं मैं गया तो बिल्कुल ऐसी केव्स और. गुफाएं जैसी बनी हुई थी पुराने समय में. जैसे कोरल्स होते हैं कोरल्स भी चारों तरफ. प्रतीत हो रहे थे और मैं जैसे ही थोड़ी. गुफा से में उतर के अंदर पहुंचा तो एक तरफ. पूरा ऐसा दीवाल खुली थी समुद्र का अद्भुत. नजारा और मैंने अपने लेफ्ट हैंड साइड में.
देखा तो भोलेनाथ आनंद से समाधि में अमरनाथ. की गुफा का छोटा फॉर्मेट जैसा कर ले ऐसा. स्वरूप वहां था फिर मुझे यह बताया गया. इनका नाम गोंबे शवर है गोंबे सुहेली भाषा. में गाय को कहते हैं तो ऐसा बताया गया 100. 200 साल पहले कोई वो गैया चराने वाला. अफ्रीकन ही वहां का व्यक्ति था जो उस. क्षेत्र में बड़ा एक प्रकार से गो चालक था. तो वो यह देखता था कि व गाय. अफ्रीका में भी भारतीय जोसको हम वेद.
लक्षणा गाय कहते हैं गाय की भी एक पहचान. है जिसका हंप है जिसके गले में कंबल है हर. पशु गाय नहीं है उसकी भी एक नस्ल है तो जो. वेदों में वर्णित नस्ल है गायों की वह. अफ्रीका में भी पाई जाती है ऑस्ट्रेलिया. में भी कई स्थानों पर पाई जाती है तो वोह. नसल की गाय वहां जाए और ऊपर खड़े होकर और. उनके खड़ी रहे बहुत देर तक उनके थन से भी. दूध निकले ऐसा बहुत समय तक चलता रहा तो वो. व्यक्ति अच हुआ कि यह तो हदी हो गई तब. उसने वहां देखा तो उसको ऐसी गुफा दिखी.
अंसको लगा कोई जगह होगी कोई रेस्ट एरिया. होगा तो बताते हैं कि वह व्यक्ति जब यहां. से भारतीय लोग गए और वह किसी माध्यम से. उसकी भारतीय से पहचान हुई और जब वह वहां. गया और उसने गाय वाली चीज दिखाई तब सबसे. पहले भारतीयों ने वहां रुद्राभिषेक किया. और बताया गया कि यहां पर यह शिव महादेव इस. अफ्रीकन कॉन्टिनेंट में यहां रहकर अफ्रीका. की रक्षा कर रहे हैं सही बात तो यह है. हमारी मूल शास्त्रों को देखा जाए मिश्र. व्य तो भारत तक सीमित नहीं है भारतीय धर्म.
हमारे यहां इजिप्ट का बहुत डीप वर्णन है. मैं आपसे कहूं साउथ अमेरिका का भी डीप. वर्णन है जैसे श्री कृष्ण के साथ में काली. यवन नाम का एक व्यक्ति आता है जो युद्ध. करता है व काली यवन का लोकेशन देखा जाए तो. वह इजिप्ट से आया था उस जमाने में तो. हमारे यहां ऑफकोर्स दूसरी जगह भिन्न-भिन्न. रूप से धर्मों का विस्तार हो गया बात तो. थोड़ी सी कंट्रोवर्शियल है पर किसी.
रिसर्चस ने यह भी बात निवेदित की है कि जब. श्री कृष्ण मथुरा से माइग्रेट किए और. द्वारिका चले गए तो देर वाज अ कम्युनिटी. स्मल कम्युनिटी यादवों की यदुवंशियों की. जिन्होंने यह विचार किया कि हमें नहीं. जाना और वो कुछ छो थोड़े से लोग वहां रह. गए बट बिकॉज पूरी कम्युनिटी माइग्रेट कर. गई तो डेवलपमेंट रुक गया सब कुछ रुक गया. उनको ट्रबल हुई और उन्होंने वि विचार किया. कि हम लोग यह अब स्थान छोड़ के कृष्ण को.
खोजने चलते हैं वो पैदल लोग वहां से चल. दिए कहते वो रास्ता भटक के बेथलेहम पहुंचे. सुदर्शन चक्र ने इस विषय में कुछ कुछ लिखा. है और जब वह पूरी पद्धति वहां तक पहुंची. उनको वहां धीरे-धीरे धीरे धीरे जनरेशन भी. बदली क्योंकि एक जगह रुके कुछ दिन फिर. खोजा फिर खोजा फिर खोजा तो क्राइस्ट जो है. वो व भी उपाधि है जीसस जो है वो गड द सन. है तो ईश्वर का पुत्र रूप में स्वीकार. किया जाता है तो वह कहीं ना कहीं चक्र इस.
बात को कनेक्ट करते हैं कि वह यदु जो थे व. यहूदी रूप में कनेक्ट करके और श्री कृष्ण. और क्राइस्ट की कहानी बहुत एक से स्तर पर. चलती है आप अगर विचार करेंगे वह भी एक गरड. या के उस क्रम में पैदा हुए मदर उनके साथ. थी धीरे-धीरे आगे बढ़े बाद में ऊंचा तक. पहुंचे श्री कृष्ण भी एक गोषट में पैदा. हुए गौशाला में रहे इस प्रकार से उन्होने. वर्णन किया है तो भारतीय परंपरा में देखा.
जाए तो हमारे यहां सप्त द्वीपों का वर्णन. है पलक्ष दीप सालम द्वीप भागवत में आप. देखिए सात के सात कॉन्टिनेंट्स का. एक्सप्लेनेशन है सारे समुद्रों का बे ऑफ. बंगाल से लेकर हिंद मखा अरब महासागर तो. नाम नए दिए इनके पुराने संस्कृत के नाम भी. वैदिक साहित्य में मौजूद है आश्चर्य की. बात है कि भारत विश्व को खोज चुका था पर. मुश्किल यह है कि हम स्कूल में वो पढ़ते. हैं मिश्रा जी जो वास्को गामा ने खोजा है. जो कोलंबस ने खोजा है तो हम वो पढ़ते हैं.
जो यूरोप ने भारत को देखा था हम वो नहीं. पढ़ते जो भारत ने दुनिया को देखा था इतना. सा पढ़ना शुरू कर देरा को लेकर भी अलग-अलग. कहानिया आती है बिल्कुल आती है वो कहते. हैं एडम का है हम कहते हैं श्री राम जी ने. बनाया है हां राम सेतु को देखा जाए तो यह. भी जो राम सेतु उस राम सेतु का अंश है और. यह लंका भी उस लंका का अंश है मूल तो वो. 100 योजन थी 100 योजन से देखा जाए तो 1200. किलोमीटर. हुए रामेश्वरम से 100 योजन का पुल बनाया. राम जी ने तो रामेश्वरम से 1200 किलोमीटर.
दूर है लंका यह जो एसिस्टिंग श्रीलंका है. यह उस लंका का एक पिलर टाइप उसका कनेक्शन. है उसका ही पार्ट है परंतु जो मूल लंका जो. पुल बना था वो तो हम आप रामचरित्र मानस. वाल्मीक किसी भी ग्रंथ को पढ़ ले तो बात. प्रसिद्ध है हनुमान जी 100 योजन छलांग मार. के गए इट वास 1200 किलोमीटर अराउंड 12. किलोमीटर एक योजन में होते 100 यो 30 योजन. चौड़ा 100 योजन.
लंबा और वाल्मीकि जी ने पूरे आर्किटेक्चरल. का वर्णन किया है कैसे कैसे पुल को जो. कैसे कैसे स्टोंस को आप देखिए आर्किटेक्चर. में कैसे स्टोंस को कैलकुलेट किया जाए तो. एक सिमेट्री के पत्थर लिए उसके ऊपर लिखा. श्री दूसरे सिमेट्री के पत्थर लिए जो. बिल्कुल एड जॉइन करें जिसके बीच में गैप. नहीं रहे उसमें लिखा रा और तीसरे सिमेट्री. के पत्थर लिए जो कि इससे बिल्कुल जॉइन. करें क्योंकि पत्थर के साइज तो अलग-अलग. होते हैं तो नल नील आर्किटेक्ट होकर यही.
छाट रहे थे कि कौन सा पत्थर किससे बिल्कुल. एड जॉइन करेगा और उसमें लिख दिया मां तो. श्री राम ऐसे करके एक तीन पत्थर की कौड़ी. बनाई फिर यह तीन इस तीन से कैसे एड जॉइन. करेंगे उसके ऊपर लिखा श्री फिर तीन पर. लिखा र फिर तीन पर लिखा म ऐसे कर कर के. धीरे धीरे धीरे धीरे 30 योजन चौड़ा और 100. योजन लंबा पुल. बनाया इतनी डीप आर्किटेक्चरल पॉइंट ऑफ. व्यू का हमारे य वर्णन है पर मुश्किल यही.
है कि शास्त्र देखने की किसी को रुचि. नहीं तो फिर कई बार जैसे लोगों के मन में. सवाल व लंका गई कहां पर व जो सोने की लंका. का जिक्र हम करते थे अब मैं अगर बिल्कुल. शास्त्र की दृष्टि से जाऊ तो वह मानव के. लिए अगम्य है इसलिए वानर ग थे व मिस्टिकल. है व मिस्टिकल है जैसे अमेरिका में. कैलिफोर्निया में एक लैंड है मैं उसका नाम. भूल रहा हूं जहां से आप फ्लाइट भी ऊपर से. नहीं ले जा सकते कहते हैं वहां एक्स्ट्रा.
टेरिटोरियल एक्टिविटीज है इट्स वेरी फेमस. ऑन द इंटरनेट आप गल करेंगे आपको एकदम. देखने को मिलेगा उसी प्रकार. से वो लंका के लिए यह वर्णन है कि वह. समुद्र के भीतर थी 1200 किलोमीटर दूर है. ये श्रीलंका उसका एक पोर्ट कह सकते हैं हम. छोटा सा पोर्ट था हां जो मौजूदा देश है. क्योंकि यह तो कोई शायद 26 या 30 किलोमीटर. की दूरी पर है इतना ही है रामेश्वरम से. और वो 1200 किलोमीटर दूर पहुंचे मुझे लगता.
है मालव और उसके आगे जाकर वो क्षेत्र. पड़ेगा पर यह भी वाल्मीकि रामायण में लिखा. है कि वह मानव के लिए अगम्य है मानव वहां. नहीं प्रवेश कर सकता था ऐसा मुझे किसी. सिद्ध महात्मा ने बताया कि विभीषण जब राम. जी से मिलकर निकले तो विभीषण बोले कि. भगवान अब मैं आपके साथ कैसे आपके वियोग. में रहूंगा आप तो मेरे पास है नहीं तब. भगवान श्री राम ने अपना ही एक नारायण का. विग्रह जिसको हम श्रीरंगम कहते हैं जोभी.
भी तृष्णा पल्ली के पास विद्यमान. है पूरा एक विग्रह विभीषण को राम ने दिया. कि आप इन्हें ले जाओ मैं भी इनकी सेवा. करता हूं यह मैं ही हूं इस रूप में मैं. तुम्हारे पास रहूंगा तो विभीषण उन्हें. लंका ले जा रहे थे और जब व दक्षिण में इस. तट पर पहुंचे तब विभीषण ने उस विग्रह को. वहां रख दिया और कहते हैं कि वह विग्रह. डायरेक्ट लंका को देखता है और अभी भी. विभीषण श्री रंगनाथ की रोज सेवा करते हैं. तृष्णा पल्ली के पास है और वहां.
रामानुजाचार्य जी का अभी भी स्वरूप है आज. की भाषा में कहूं तो ममी वन ऑफ द एशियन. रामानुजाचार्य का शरीर वहां मौजूद है लेप. करके रोज जिसकी सेवा होती है रंगनाथ जी. में तो वह रंगनाथ भगवान की जो आईलिड है वह. जिस डायरेक्शन में है उस डायरेक्शन को. देखकर रामेश्वरम से 1200 किलोमीटर मेजर. किया जाए तब एग्जैक्ट लोकेशन लंका की खोजी. जा सकती. ये आपने शिवलिंग की कहानी में.
बताई अफ्रीका में भी शिवलिंग हमने देखा. मैंने एक तस्वीर गंगेश्वर महादव को दिखाई. जो वैसे ही ल हुबहू है कई और भी ऐसे जगह. है जैसे मैंने जम्मू के पास शिवखोड़ी का. जिक्र किया जहां पर आप जाएंगे हम साथ. चलेंगे अद्भुत शिवलिंग. है ज्यादातर शिवलिंग एक तरह से उनकी रूप. रेखा एक तरह से है कुछ कुछ अलग भी है जैसे. केदारनाथ का शिवलिंग है वो थोड़ा त्रिकोण. में आता है अलग-अलग जगह पर है. लेकिन एक सवाल आजकल के बच्चों के मन में. बहुत आता है वो सवाल है कि शिवलिंग पर दूध.
क्यों. चढ़ाना सब पैसों की बर्बादी होती है आप. लोग रुद्राभिषेक करवाते हैं और पाच पा छछ. लीटर दूध जो जढ़ देते हैं इतना घी तेल घी. या फिर आप बाकी चीजें जो उसम डालते हैं. शहद. रुद्राभिषेक में दूध चढ़ाना क्यों जरूरी. है क्या यह पैसों की बर्बादी है और यह जो. सवाल लोगों के मन में है इसका आप. लॉजिकल प्लस आध्यात्मिक जवाब क्या दे सकते.
मैं तो मिव कहूंगा आपने सबसे पहले इसका. जवाब ऐसा दिया था इवन मैंने भी सुना कि. पूरी दुनिया उसको देखकर खुश हो गई और जब. आपसे यह प्रश्न पूछा गया था सबसे लॉजिकल. और बेस्ट आंसर बड़े-बड़े धर्म गुरुओं ने. उसको स्वीकार किया था तो उसके लिए सबसे. पहले तो थैंक यू आपने बहुत अच्छा जवाब दे. दिया था फिर भी मैं अगर उसको उससे कुछ. उसमें जोड़ना नहीं चाहता उसको और परिष्कृत. करके कहूं तो आपकी बात से मैं पूर्ण रूप. से सहमत हूं भाई सबका अपना अपना संबंध है.
एक छोटी सी शादी में करोड़ों रुपए के फूल. और खाना बुफे जो कि लोग खाते भी नहीं है. और उसको भी हम जस्ट टू शो ऑफ दिखा देते. हैं जस्ट टू शो आवर इमोशन ऑफ हॉस्पिटाल. फॉर आवर गेस्ट तो इसलिए ये भावनात्मक चीज. है शिव दुग्ध से ही प्रसन्न होते हैं यह. उसके लिए यह उनको अर्पण करने वाली चीज है. जैसे कृष्ण माखन से प्रस प्रसन होते हैं. जैसे गणपति लड्डू से प्रसन्न होते हैं या.
हनुमान जी प्रसन्न होते हैं सबका अपना. अपना एक एक पूजा की विधि है इसके पीछे. तंत्र में मंत्र में यंत्र में सब चीज की. एक विधि का पूर्ण रूप से वर्णन किया उसमें. शिवलिंग के ऊपर दुग्ध चढ़ाने का भी एक. बहुत गंभीर तम विधान है एक और बात इसमें. आती है कि जल एक सामान्य चीज है ऐसा मैं. तो यह समझता हूं कि शब का पोषण जल से होता. है का पोषण दूध से होता है हम जैसे सब श.
है हमारे लिए जल ही जीवन है शिव दुग्ध से. प्रसन्न होते हैं दुग्ध से इसलिए भी. प्रसन्न होते हैं कि अगर हम शिव के भक्त. हैं तो दूध चढ़ाना है दूध तब मिलेगा जब हम. गैया की सेवा करेंगे तो इसके पीछे गोरक्षा. का भी एक बहुत बड़ा उद्देश्य है शिव से. जुड़ा कि दूध ही तबा सकता है घी ही तबा. सकता है इसलिए इस देश में गो को धन कहा है. घृत को धन कहा है गो कृषि को आगे बढ़ पया. गया है गो आयुर्वेद का गो में यज्ञ का गो.
में कितना गंभीर प्रयोग है यह भी चीज. जुड़ी है तो बहुत सारे आध्यात्मिक तार्किक. संदर्भ मौजूद है एक चीज जो आपने भी अपने. वीडियो में कही थी मैं उसी से एक चीज जोड़. केर कहूंगा पुराण का उल्लेख करके कि जब. शिव ने विष पिया समुद्र मंथन में और उस. समय उनको कंठ में एकदम वह नीलकंठ महादेव. के रूप में उपस्थित हो गए तब उनको दुग्ध. दिया गया और ऋषि मुनियों ने और उससे शिव. का का वो जो तेज विष का ताप था वो समाप्त.
हो. गया इस चीज को अगर मैं थोड़ा आज की. परिभाषा में एप्लीकेशन के रूप से अगर कहूं. पूजा तो है ही उससे बिलक करके कहूं तो एक. मेडिकल साइंस में अगर आयुर्वेदिक दृष्टि. से देखा जाए तो आपके भीतर जब एसिड. रिफ्लक्स होता है तो सबसे पहले आपके गले. पर ही लगता है नीलकंठ है ना आपकी आवाज. आपकी गले में ही आता है कभी आप सोते सोते. भी एसिड रिफ्लेक्स हो तो आपके गले को सबसे. ज्यादा इंपैक्ट करता है दादी नानी पुराने.
लोग इसी चीज को संकेत करते थे कि कच्चा. दूध अगर कोई पिए तो बेस्ट रेमेडी फॉर एसिड. रिफ्लक्स होती है तो हमारे ऋषि मुनियों के. द्वारा इस परंपरा से इस तरीके से भी इस. चीज की कहानी को समझाया गया कि आपके. स्वास्थ्य के लिए आपके आपके नाभि में. जठराग्नि है आपके जीवन का सबसे पहला विकास. आपकी नाभि से सारा अन्न आपकी नाभि में. अन्न ब्रह्म है और अगर वो अन्न ब्रह्म जब. अमृत का मंथन करता है आपका पेट घूम घूम के.
उसमें से अमृत निकालता है उसमें से ऊर्जा. निकालता है उसमें से चेतना निकालता है. उसमें से प्रोटींस निकालता है फैट निकालता. है कार्बोहाइड्रेट निकालता है पर उसमें. कोई एक ऐसी चीज होती है उसको पचाने में जो. विष है एसिड की तरह आपके चेतना को आपकी. छाती को जलाती है आपके कंठ को जलाती है तब. दूध का आस्वादन करने से आपके भीतर का जो. ये एसिड रिफ्लेक्स है जो विष है उसकी. समाप्ति होती है ये इसका एक आयुर्वेदिक. तर्क है जी दूसरी बात है कि हम ये भी बात.
प्रसिद्ध से कही गई है कि जब किसी पत्थर. के ऊपर दूध को विसर्जित किया जाता है घृत. को विसर्जित किया ये पंच अमृत है केवल दूध. ही नहीं है इसको पंचामृत कहा गया है दूध. दही घी शहद और शक्कर ये जब पांचों चीज. मिलती है तो उसमें अमृत का तत्व आ जाता है. तो अमृत का तत्व जब शिव के ऊपर समर्पित. किया जाता है तो जो हमारी आस्था का वोह. हमने स्वरूप शिवलिंग का बनाया उसका.
संरक्षण होता है उसका पोषण होता है उसकी. ग्रीसिस की सेवा और एक और बात ध्यान. दीजिएगा जब आप श्रृंगी से रुद्राभिषेक. करते हैं तो आपकी भृकुटी तीव्र हो जाती है. क्योंकि आप कंसंट्रेटेड हो जाते हैं आप. कभी हाथ में श्रृंगी लेकर के जल चढ़ाई है. तो वो एक ही धारा में जाता है और अब जब वो. धारा में जाता है ना आप इधर उधर भी कई बार. नहीं देख कोई दूसरा आदमी बात भी करेगा तो. भी नहीं हिले गे एक पोचर ऐसा आता है. डायरेक्टली बिंदु के ऊपर उसको बिल्कुल. केंद्रित हो जाते बिल्कुल केंद्रित हो.
जाते हैं केंद्रित होने से जैसा वो फैल. रहा होता है वह आपके भीतर भी उसी प्रकार. से ऊर्जा को विकसित करके आपको ध्यान का. कंसंट्रेशन का अभ्यास कराता है जबरदस्त. बहुत बढ़िया जवाब दिया आपने एक सवाल और. लोगों के मन में आता है कि मंदिर जाना. क्यों जरूरी है यह भी कई बार आता है कि. भगवान तो कड़कड़ में है हमारा बैठे हमारे. मन में भी हमने यहां याद कर लिया भगवान है. तो फिर अलग से मंदिर क्यों जाना. देखिए य तो सबकी अपनी अपनी भगवान कंकण में. हर कंकण में शंकर है इसमें कोई बात नहीं.
सियाराम में सब जग जानी करहु प्रणाम जोरी. जग पानी गोस्वामी तुलसीदास जी ने यह बात. बड़ी सिद्धि से कही है कि सब जगह भगवान है. बस एक ही फर्क है और जगह देखना होता है. मंदिर में दिखता. है और जगह देखना पड़ेगा इस इस पत्ती में. मुझे देखना पड़ेगा आप में मुझको खोजना. पड़ेगा आप में भगवान है मुझे इसमें कोई. संदेह नहीं पूरा भगवान है आपके अंदर पर. आपके अंदर भगवान को मुझे देखना पड़ेगा.
चारू उपरी सतहों को हटा कर के पर मंदिर. में हमें भगवान को देखना नहीं पड़ेगा नहीं. देखने वाला व्यक्ति भी जाएगा तो भी उसको. देखेगा क्योंकि वह एक ऊर्जा का पूर्ण रूप. से केंद्र है एक प्रकार से मंदिर जाने की. प्रक्रिया सब में भगवान देखने की. प्रक्रिया सिखाती है सबसे पहले मंदिर का. बाहरी परकोटा है वो आपका शरीर है आप जब. अंदर जगमोहन में जाते तो आपका अंतःकरण है. उसके भीतर गर्भ ग्रह जो आपकी चित्त के.
भीतर बैठी आपकी आत्मा का कोष है और उसके. भीतर परमात्मा बैठा है तो जब आप मंदिर के. अंदर जाते हैं तो मन के अंदर जाना सीखते. हैं बाह्य प्रक्रिया से अंतस प्रक्रिया का. अभ्यास होता है और फिर सब जगह उसका सहज. सहज अनुभव होने लगता है सब जगह सहज सहज. अनु. होने इस बात को यं भी कहा जा सकता है पंखा. चला कर के हवा का अनुभव होता है हवा इस.
रूम में बहुत पर्याप्त है और पंखा जब चलता. है तो उसका अनुभव होने लगता है उसी प्रकार. से भगवान कण कण में है पर मंदिर में देख. कर के उसका अनुभव होने लगता है भगवान की. तीन प्रकार की परिभाषा ब्रह्म परमात्मा और. भगवान इसमें भी थोड़ा सा कंफ्यूजन हो गया. जो कण कण में है वह मंदिर में है और जो. मंदिर में है वह भी कण कण में है पर फिर. भी उसकी ऊर्जा उसके गुण उसकी व्यवस्था इन. सब में अंतर है ब्रह्म कौन है जो सब जगह.
है परमात्मा कौन है जो मेरे आपके भीतर है. भगवान कौन है जो एक आकार लेकर के मंदिर. में बैठा है एक चीज की ही तीन प्रक्रियाओं. के विकास है एक दूध है एक घृत है एक दही. है और तीसरा माखन है ये तीन चीजें अलग-अलग. है इसको हमें कनेक्ट करने की आवश्यकता. नहीं है अगर आपके अंदर इतनी साधना पक्की. हो गई कि आप कण भगवान देख सकते हैं तो फिर. मुझे नहीं लगता कि आप झूठ कैसे बोल लेते.
हैं मुझे नहीं लगता कि हम धोखा कैसे दे. देते हैं मुझे नहीं लगता कि हम किसी. प्रकार के गलत कृत्यों को इतनी आसानी से. कैसे करय कहना आसान है जस्ट कूल स्टेटमेंट. टू गिव कि कण कण में भगवान ने मंदर जाने. की क्या जरूरत है पर यह प्रैक्टिकल. एप्लीकेशन नहीं हो सकती इस चीज की कण कण. में भगवान है वेल सेड वेल से एक सवाल मेरे. मन में या बहुत आता है आप अभी अयोध्या गए. होंगे आपके पास भी फोन कॉल्स आई होगी कि. गोस्वामी जी अयोध्या है दर्शन करवा देंगे.
आप भीड़ बहुत है कुछ हो जाएगा जुगाड़ या. कहीं से हो सकता. है मैं जब यह सवाल में लगभग हर धर्म गुरु. और हर व्यक्ति से पूछता हूं धर्म का थोड़ा. भी जानकार है कि जब मैं बाकी रिलीजस को. देखता हूं तो वहां मैं देखता हूं जैसे हम. मैं जहां से आता हूं अयोध्या के बगल में. कुंडा जिला से वहां पर स्वामी नारायण. भगवान का जन्म. स्थान जिनका अक्षरधाम मंदिर दिल्ली में है. और अभी अबू धाबी में खुला है हां हर जगह.
पर वो विस्तार उनका हो रहा है वहां मैं. देखता हूं गुजरात के एक से एक धन्ना सेठ. है वो आते हैं काम करते हैं उनकी महिलाएं. जो है लोगों के झूठे बर्तन साफ करती हैं. वो सेवा भाव से आते हैं और ये करते हैं. मैं मुसलमानों में देखता हूं तो वो जब. जाते हैं नमाज परिसर में सब एक हो आते हैं. सिखों में देखता हूं सेवा भाव से आते हैं. एक हमारे यहां एक्स्ट्रा वीवीआईपी कल्चर. है बांके बिहारी आप जाइए दो दरवाजे हैं एक. दरवाजे से या तो पैसा देके या जुगाड़ देक. एंट्री हो आती है एक जहां पर लोग भीड़. जाती है देश के तकरीबन हर बड़े मंदिर में.
पैसा लेकर अलग से एंट्री हो जाती है कुछ. विशेष परिस्थितियों को हटा दे जहां पर. जरूरी होना चाहिए ये लेकिन क्या वीवीआईपी. कल्चर एक सवाल नहीं पैदा करता कि आस्था को. लेकर क्योंकि आप दर्शन करने जा रहे हो वो. जो एक्स्ट्रा आपने बेनिफिट ले लिया क्या. दोनों को एक ही सौभाग्य प्राप्त होगा या. इसमें भी अलग होगा क्योंकि एक व्यक्ति. जिसके पास पैसा नहीं है भगवान तो उसके भी. उतने ही है जितने उसके पा जिसने कमा लिया. है या जिसने जुगाड़ लगा लिया है देखिए ये.
व्यक्ति की अपनी अपनी परिभाषा है भगवान के. लिए तो बिल्कुल दोनों बराबर है उन्होंने. तो गिलहरी को भी उतना ही महत्व दिया था जो. बड़े से बड़े बानर जो बड़ा पर्वत लेकर आया. था राम के लिए उसको भी उतना ही महत्व दिया. था गिलहरी को भी उतना ही महत्व यह व्यक्ति. की अपनी अपनी व्यवस्था है कि व जुगाड़. खोजता है मेरा तो ऐसा मानना है कि भगवान. के सामने जितना सहज होकर जाए जाता है. भगवान आपके जीवन में आपको उतनी ही सहज. प्राप्त होते हैं अयोध्या में था पब्लिकली. आपसे सच बोलू मि शवरी तो मैं लगभग मैंने.
उसके बाद पहली भागवत की कथा करी अयोध्या. में पहला उत्सव हुआ रामलला की स्थापना के. बाद और मैं रोज राम जी के दर्शन करने गया. तो शुरू के दो दिन परिचय होने की वजह से. कथा था यह था हमें भी लगा पता नहीं क्या. होगा तो कोई संपर्क साधन से जो वहां कुछ. एक विशेष व्यवस्था अभी बनी नहीं थी वो भी. क्योंकि व्यवस्था तो बन रही थी उस कुछ. विशेष साइड वाली व्यवस्था से जो कुछ दिन. पहले हमने देख अमिता बच्चन साहब दर्शन. करने गए या सदगुरु दर्शन करने गए उस वाली.
व्यवस्था से मैं जाकर एक बार दर्शन करके. आया तीसरे दिन मेरे मन में इच्छा हुई और. हम लोग चैतन्य महाप्रभु की परंपरा की तो. नगर कीर्तन निकालते हुए कीर्तन करते हुए. वो भी वीडियो खूब गया और करते हुए पहुंचे. और सामान्य पंक्ति में लग गए मैं आपको सच. बताऊं जैसा दर्शन मुझे उसमें हुआ जैसे ही. आप मंदिर में प्रवेश करते हनुमान जी के. पास से राम जी दिखना शुरू हो जाते हैं ऐसा. लगता है साइड में तो साइड से भगवान निपटा. देते पर जब सामने गए तो सबसे पहले दूर से. उनका मुकुट देखा जो दर्शन की परंपरा फिर.
मैं थोड़ा और आगे गया तो मुझे उनकी आंखें. दिखी फिर मैं थोड़ा और आगे गया तो नाक और. प्रसन्नता दिखी फिर उनके अलंकार दिखे फिर. कटी दिखे और फिर सामने देखे चरण और सामने. जब पहुंचा तो उसका कहना ही क्या था तो. दर्शन ये यह लोगों की बनाई हुई व्यवस्था. है भगवान का इस व्यवस्था से कोई मतलब नहीं. एक बार तिरुपति की तो व्यवस्था सब लोग. जानते हैं वहां तो ये कितनी चलती है यह तो. मैं जानता ही हूं जबरदस्त मैंने एक बार. तिरुपति में एक व्यक्ति से व्यवस्था करी.
कि मुझे दर्शन करने है मुश्किल यह हुई. मिश्वर मैं वहां पहुंचा और मैंने उस. व्यक्ति को फोन किया उसके यहां कोई गुजर. गया अब ऐसी परिस्थिति में उससे क्या बात. करूं हम 10 15 लोग थे हम बोले चलो अब. पहुंचे तो दर्शन करो हम सामान्य रूप से. पंक्ति में लग गए मुझे याद है कि मैं सात. आठ घंटे लाइन में रहा बिल्कुल ऐसे ही लाइन. में रहा उसके बाद में तिरुपति के दर्शन. किए लेस देन टू सेकंड और बाहर निकल गया.
शायद मैं 50 बार तिरुपति के दर्शन कर. चुकाऊंगा पर 49 टाइम्स मैंने क्या दर्शन. किए मुझे याद नहीं है पर एक टाइम जो लेस. देन टू सेकंड मैंने दर्शन किए मुझे अभी तक. जब तिरुपति का स्मरण करता हूं तो वही. दर्शन स्मरण में आते हैं आप सामान्य होकर. जाइए यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमने मंदिर. में से सेवा मैं तो खुलेआम बोलता हूं. सनातन धर्म उस दिन आपको मजबूत लगे जिस दिन. मंदिर को पेड एंप्लॉय ना रखने पड़े सफाई. के लिए व्यवस्थाओं के लिए क्रम के लिए.
किसी स्थान पर नहीं यह हम लोगों का स्थान. है हम लोगों को चल करके जाना चाहिए. सूर्यवंश के राजा हुए भक्त अमरीश जो राजा. अमरीश थे राम के पूर्वज उनको भगवान की. प्राप्ति भक्तों में सबसे ऊंचे भक्त है. अमरीश उनकी क्या सेवा थी राजा होते हुए भी. वह करौ हरेर मंदिर मार्जन आद अपने हाथ से. मंदिर का मार्जन कर अपने हाथ से करते थे. और उस प्रभाव से उन्हें भगवान की प्राप्ति. हो गई यह हम लोगों का परम दुर्भाग्य.
व्यवस्था का दुर्भाग्य विशेष परिस्थिति हम. आप सभी समझते हैं कोई मेडिकल परिस्थिति हो. कोई ऐसी परिस्थिति हो तो मुझे ऐसा लगता. सटी कंसन हो कोई ऐसा हो समझ में आता है. भगवान को जो जितना वीआईपी से मिलता है. भगवान उसको भी उतने व रपति आपने बताया. मैंने कई खबरें पढ़ी कि 10 10 15 प हज. रुपए लोग देते हैं वहां पर हा और उसके बाद. भी कई बार विवाद की कहानिया हमने सुनी. लड़ाई झगड़ों की एक एक्ट थी मेरे दोस्त थी. गई थी काफी विवाद हो गया था तो यह सारी.
कहानियां मन थोड़ा दुखी करती है कि हम. दर्शन करने जाते हैं ईश्वर के और वहां पर. एक नई तरह की परंपरा हो गई है ऐ में ऐसी. चीजों के छिलका य व्यवस्था के छल जब आप. अल्फेज मैंगो खरीदते हो तो आप छिलके और. गुठली का भी उतना ही दाम देते हो जितना. उसके पल्प का देते हो पर उस छिलका गुठली. को डस्ट विन में फेंक देते हो उसका उसको. जाकर वापस नहीं करते कि भाई 700 ग्राम तो. यही निकला पल्प 300 प्राम था ऐसे मेरा तो. ऐसा एक और मानना है कि यह जो कई अव्यवस्था.
हैं य छिलका घटली होती प्रभु परीक्षा लेते. इन छिलका गुठलियों को उतार देना चाहिए और. दर्शन का आनंद करना चाहिए बिल्कुल. सामान्यत से कहीं ऐसी परिस्थिति है तो. भगवान ने एक प्रॉमिस किया गीता में ये यथा. माम प्रपद्यंते तम सव भज आप मुझको जैसा. भजो मैं आपके सामने भी बिल्कुल वैसा ही. आऊंगा इक्वल एंड अपोजिट रिएक्शन है आप. जितने तामझाम के साथ भगवान के सामने. जाएंगे भगवान भी उतने ही तामझाम के साथ.
आपके पास आने वाले हैं यह ध्यान रखिएगा. उसके बाद जो मर्जी करें उसकी कोई समस्या. नहीं है जो मर्जी आपकी इच्छा हो सो करिए. सनातन धर्म में अर्थ को घृणा से नहीं देखा. गया है अर्थ बड़ी ऊंची चीज है हम श्री. सूक्त का पाठ करते हैं विदुर ने विदुर. नीति में जो छह सुखों का वर्णन किया है. उसमें अर्थ परम सुख है श्रीमद् भागवत अर्थ. के पांच विभाजन का वर्णन करती है अर्थ का. कहां दुश्मन है हमारे यहां पर उस अर्थ को. अगर हम प्रदर्शन के लिए प्रयोग में लेते.
तो वो अर्थ का दुरुपयोग है उस अर्थ को. दर्शन के लिए प्रयोग में लेते हैं तो कई. बार उस अर्थ का भी सदुपयोग है पर फिर यह. अव्यवस्था के छिलका गुठलियों को उतारिए और. भगवान के दर्शन का आनंद लिए अच्छा एक और. सवाल मेरे मन में बहुत आता है जैसे ये. मोबाइल फोन हमारे पास है बीते कुछ सालों. में सोशल मीडिया के दौर में धार्मिक. स्थानों पर युवाओं की संख्या बहुत बढ़ गई. है. आप केदार नाथ ले लीजिए आप मथुरा वृंदावन. जाइए आखिरी बार हम लोग भी गए थे तो हमें.
तो पुलिस वाले ने कहा कि आपको वीकें प. नहीं आना चाहिए इतनी भीड़ होने लगी है. इतनी भीड़ होने लगी है ये भक्ति है ये. सोशल मीडिया का ट्रेंड है जिसके चक्कर में. लोग कर रहे हैं कि आप जाइए तो बढ़िया सा. वो राधे-राधे लिख देंगे गाल प लगा देंगे. राधे-राधे एक अच्छी सी रील आ जाएगी सोशल. मीडिया पर फॉलोअर बढ़ जाएंगे क्योंकि अब. भक्ति का भी ट्रेंड चला हुआ है लोग सोशल. मीडिया के भक्ति बहुत है या ठीक है इन. सबके बीच में भी एक अच्छी शुरुआत है कि. चलिए जैसे मैं एक बार परमार्थ गया था तो.
वहां पर उन्होंने बताया कि श्री कृष्ण की. भक्ति कैसे विदेशों में बढ़ी ये मैं. किस्सा आपको थोड़ा सुना दे रहा हूं तो. उन्होंने कहा कि हमने विदेशों में कुछ ऐसे. स्थान खोले जहां पर कल्चरल प्रोग्राम करने. लगे डांस सिखाने लगे खेल खिलाने लगे. स्विमिंग पूल बना दिया हमने तो विदेशी आते. थे या वो लोग जो विदेश में रहते थे. हिंदुस्तानी वो आते थे खेलते कूदते थे फिर. बगल में मंदिर था तो जब मंदिर घंटियां. बजती थी या वह हमारे धार्मिक कार्यक्रम.
होते थे तो हम यह मानते थे कि 100 में से. चार तो ऐसे होंगे जो धर्म से जुड़ जाएंगे. बिल्कुल सही है तो उनको व आकर्षित करने के. लिए हमने स्विमिंग पूल और चार चीजें बनाई. थी फिर वह चार ही हमारे लिए थे जो धर्म का. प्रचार प्रसार करेंगे और ऐसे करते करते आज. चाहे वो स्कन हो या बाकी लोग हो उन्होंने. विश्व में अलग-अलग जगहो पर धर्म का प्रचार. प्रसार कर दिया कि जिसके अंदर भगवान होंगे. वह पता नहीं किस रूप में नारायण मिल जाते. हैं तो वो हो गया तो यह सोशल मीडिया को ले. लेके इसलिए मेरे मन में सवाल आता है कि ये. सही आपको लगता है गलत लगता है दिखावा है.
या चलिए इसके बहाने से सही एक बड़ी पीढ़ी. जो है वो धर्म को जान रही है वहां जा रहे. हैं कुछ तो सीख कर आ रहे हैं क्या आप कैसे. देखते हैं स मैं इसको इसके दोनों साइड है. पॉजिटिव नेगेटिव दोनों साइड है बहुत अच्छा. देखिए सदा ही कुछ ना कुछ चीज ट्रेंड करती. है आज सोशल मीडिया है आज से हमारी आपकी जो. पिछली जनरेशन थी उसके लिए टीवी था. अंग्रेजी का एक शब्द बन गया काउच पोटेटो. शेक्सपीयर वर्ड है कि काउच पर बैठे-बैठे. टीवी देखते रहो उससे पहले मैगजीन था बुक. वर्म ज इंग्लिश वर्ड कॉल्ड बुक वर्म कि.
भाई किताबों में के कीड़े बन गए हो क्या. तो समय के साथ में प्रचार के साधन सदा सदा. बदलते रहे ऑलवेज बदलते रहे अगर यह जरूरी. नहीं होता तो हमारे व्यास देव जी इतने. शास्त्रों का ही निर्माण नहीं करते. उन्होंने द्वापर के समय अंत में यह सब. स्थापना की सनातन धर्म तो सनातन है सदा से. तो सोशल मीडिया के माध्यम से अच्छी चीजें. अगर जा रही हैं आज हम आप भी की भी माध्यम. उसी माध्यम का प्रयोग कर रहे हैं तो क्या. जबरदस्त बात है आज आप बैठे हैं एक वीडियो.
डालते हैं 10 10 5050 30-30 मिलियन तक. पहुंच जाता है करोड़ों रुपए खर्च करके भी. ऐसा आयोजन नहीं किया जा सकता कि एक बार. में 30 मिलियन आदमी वहां फिजिकली मौजूद रह. सके तो इसका ये सब गुड चीज है और बिल्कुल. करना चाहिए क्यों नहीं करना चाहिए आइए. वृंदावन का दर्शन कीजिए सब कीजिए बढ़िया. राधे-राधे भी लिखिए कोई ना कोई तो असर. पड़ेगा मैं भी इस चीज को मानता हूं और हम. लोग भी दुनिया भर में निमाई पाठशाला और कई. ऐसे साधनों से से अपने भी कई प्रकार के. प्रकल्प से यह सब प्रयोग में करते रहे हैं.
करते आए हैं शुरू से ही यह विधान है. चैतन्य महाप्रभु ने कहा नगर कीर्तन निकालो. निकल पड़ो गली और कचों से मृदंग और करताल. लेकर और वह निकल पड़े कि किसी ना किसी के. कानों में तो भगवान का नाम जाएगा तो. प्रचार और संचार के माध्यम से सदा हमारे. यहां यह विधान वर्षों वर्षों से वर्षों. वर्षों से संदेश देने का चलता है एक दूसरी. चीज मैं इसमें साथ में सिखाऊंगा भक्ति भी. भक्ति है इसलिए भक्ति ट्रेंड कर रही है. अगर भक्ति नहीं होती मन में तो वह ट्रेंड.
भी ऑटोमेटिक तो ट्रेंड नहीं करती चीजें. बहुत सारे समूह के साथ जब कोई व्यक्ति एक. जगह डालता है चीजों को तो वो ट्रेंड करती. है तो बहुत सारे लोगों की इसके प्रति रुचि. जागृत हुई है तभी वह ट्रेंड करना शुरू किए. तो बहुत अच्छी बात है एक ही चीज इसमें एंड. में जोड़ना है कि एक जैसे आपने. स्वामीनारायण मंदिर की बात कही सिख धर्म. की बात की मूल प्रॉब्लम हमारे यहां की. एजुकेशन का ही झंझट है आज सनातन धर्मी को. जब वो मंदिर में जाए उसको ये नहीं पता कि.
मंदिर में कैसे जाया जाता है और दूसरी. प्रॉब्लम ये है कि वो ऐसा हो गया कि वो. सीखना भी नहीं चाहता बोले मैं तो जैसे. चाहूंगा मैं वैसे जाऊंगा जैसे मुझे जल. चढ़ाना होगा मैं चढ़ाऊ मेरी भावना मेरी. भक्ति मेरी आस्था ऐसे नहीं होता आज हम लोग. एक 500 वर्ष पुराने राधार मंदिर से जुड़े. हैं हमारे यहां पुराने आने वाले व्यक्ति. को मालूम है आप भगवान के दर्शन खुले हो आप. नहीं बैठ सकते. आप अभी भी जाइए मिश्रा जी और अगर भगवान के. ठीक सामने वाली देहरी पर पैर ऐसे लटका के.
बैठ जाइए आपको कोई ना कोई लोकल आदमी आके. बोलेगा पैर ऊपर कीजिए भगवान के सामने पैर. खोल कर क्यों बैठे हैं आप कहां पर घंटी. बजानी है प्रणाम किस तरीके से करना है. हमारे यहां एक लखड़ी की चौकी रखी हुई है. अगर आपको अंदर कुछ समर्पित करना और आपने. अगर भूमि पर रख दिया तो व अंदर नहीं जाएगा. उस लकड़ी के ऊपर हर मंदिर का एक इस प्रकार. का कल्चरल ट्रेंड है एक मंदिर में प्रवेश. करने की पद्धति सब जगह लिखी है वो क्योंकि. शास्त्रों के माध्यम से हम लोग इतना नहीं. जुड़ सके और केवल एक लोक गत परंपरा देखते.
हुए आए जिसमें हमने यही देखा कि बस जाना. है फूल चढ़ाना है और वापस आ जाना है. गुरुकुल सिस्टम में भी जो प्रीस्ट की एक. विद्वत एजुकेशन है आप देखिए राम मंदिर के. समय कितने एग्जामिनेशंस लिए गए कितनी. चीजें वो सोशल मीडिया पर आ रही थी एक लॉबी. बिठाई गई बाकायदा पुजारी किसको रखना है वो. कौन सा वेग जानता है कौन से विभाग का है. क्या उसका वेद है क्या उसकी शाखा है सब. कुछ परिचय करके नियुक्त किया गया इन सब. पद्धति से जब हम समझेंगे तो हमें मंदिर का.
भी अनुभव होगा मंदिर में दर्शन कैसे करना. यह भी अनुभव होगा और क्या सेवा उसमें की. जा सकती है तभी सेवा की भावना उसमें. धीरे-धीरे कल्चरल फॉर्म में तैयार होनी. शुरू होगी आप गुरुद्वारे जाते वहा कुछ. नहीं कर सकते आप जाएंगे केवल दर्शन ही. करें मथा ही टेकना है करना है तो क्या. करिए बोले आप बर्तन साफ कीजिए सेवा कीजिए. लंगर सेवा कीजिए पोंछा लगाइए सफाई कीजिए. इस चीज के कल्चर को एजुकेशन के साथ वहां. की चीजों में सिखाया गया है उस सेवा से.
वहां पुण्य बना है आज अगर हम लोग भी इस. पद्धति के साथ में धीरे-धीरे हर मंदिर में. इस उसके कल्चर को समझ के अपने अभिमान को. थोड़ा सा सामान्य करके चीजों को सीखना. शुरू करेंगे तो आज यह सब निकले तो सनातन. धर्म से ही है तो मूल ना मूल कहीं ना कहीं. अब उस मूल भावना को हम लोग पहचान सकते अब. एक सवाल मेरे मन में और आता है ये सवाल. उन लोगों को लेकर आता है जो कथा करते हैं. ठीक है जनता को लेकर तो बड़ा आसान होता है. कि आप सवाल पूछ.
लीजिए कई बार यह भी आरोप लगता है कि ना. सिर्फ आम जनता बल्कि जो कथावाचक है वह भी. सोशल मीडिया के जबरदस्त प्रभाव में पड़ गए. अच्छा उनका. भी जैसे एक जमाना था कि आप कितने विद्वान. है आप कितने धर्म के जानकार हैं उस विषय. पर आपकी लोकप्रियता या आपको सुनने वालों. की संख्या तय होती थी अब सोशल मीडिया के. दौर में चीजें बदल गई कई बार ऐसे आरोप. लगते हैं कि कई लोग ऐसे हैं जो बहुत. पॉपुलर है एक्सट्रीम पॉपुलर है लाखों.
लाखों लोगों की भीड़ आती है लेकिन जब आप. उनसे बैठेंगे साथ में तो आप कुछ अतिरिक्त. ज्ञान नहीं ले. पाते या अब आपकी भी सोशल मीडिया नंबर जो. है मैनेज करते हैं कि आपकी प्रोफाइल कितनी. अच्छी मेंटेन की जा रही है उस हिसाब से. आपके कथा का रेट भी तय होता है आपकी. पॉपुलर के हिसाब से आपको लगता है ये. इन्फ्लुएंस सही है और यह जो है कुछ चीजें. इस पर एक कह चिंतन करने की जरूरत है. हालाकि कई लोग ऐसे हैं जिन्होंने बिल्कुल. दूर रखा अपने आप को जैसे मैं मुरारी बापू. को देखता हूं तो कई बार मुझे लगता है सब. कुछ होकर भी बड़े शांत अपनी अलग उनकी. दुनिया है जहां पर वो नहीं है लेकिन कई.
जगह ऐसा लगता है कि आप जैसे किसी के यहां. कोई सितारा पहुंच गया तो सडन बाबा जी को. बहुत लोग सुनने लगे फिर एक ट्रेंड चल गया. हर आदमी उन्हीं के यहां जा रहा है फर्क. नहीं पड़ रहा क्या सीख रहा है क्या कहानी. क्या कहानी है तो ये सोशल मीडिया ने क्या. धर्म गुरुओं को लेकर भी या जो. हमारे धर्म से जुड़े जानकार लोग हैं उनको. लेकर भी हमारी सोच को ढाल दिया है देखिए. दो तीन चीजें इसमें आपने कहीं. पहली बात यह है कि धर्म गुरु सोशल मीडिया. को इन्फ्लुएंस कर रहे हैं मैं इसको यूं.
कहूंगा दूसरी बात इसमें यह कहूंगा कि इसके. मानक तय होना बहुत आवश्यक है एक नॉर्मल. जनता की बात वह फॉलोअर्स नंबर्स और. वेरिफिकेशन देख कर के किसी को बड़ा समझ. रहा होगा यह सामान्य जनता की बात है पर. मैं आपको अगर अंतरंग संतों की बात कहूं तो. कोई भी खास व्रज की बात भी कहू या कोई एक. जो महत्त्वपूर्ण इस देश के विद्वान. महात्मा वो किसी की प्रसिद्धि से उसको. बड़ा नहीं समझ रहे अभी भी चाहे वह हो.
कितनी भी उसकी सोच वो तो खरीदी भी जा सकती. है सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस वह कोई बड़ी. बात नहीं है परंतु हमारी हम लोग जो बचपन. में ट्रेंड हुए मिश्रा जी तो हम लोग कथा. की सफलता कैसे देखते हैं जो मेरी ट्रेनिंग. है मेरे जो गुरुओं ने मुझे सिखाई मैं तो. आपको बता सकता हूं कि भीड़ कितनी आई ना. पंडाल कितना हुआ ना उल्टा चलता आती तो. अपने भीड़ इकट्ठी कर लेता है. यहां से सीढ़ सीधा हाथी जाएगा तो कोई. पत्रकार भी फोटो नहीं खींचेगा उल्टा जाएगा.
तो कल न्यूजपेपर के फ्रंट पेजेस पर आ. जाएगा भीड़ लगती है सब्जी मंडियों में. सुनार की दुकान पर औकात वाला आदमी आता है. 1000 सब्जी मंडी का और एक सुनार की दुकान. का बराबर होता है यह सब चीजें हमें बताई. गई है कथा की सफलता ना भीड़ है ना पंडाल. है ना उसमें व्यूअरशिप है कंटेंट है यह हम. लोगों को बचपन से सिखाया गया पर कोई राइट. कंटेंट राइट जानकारी राइट ज्ञान सोशल. मीडिया के प्लेटफार्म से दे रहा है और फिर.
उसकी फॉलोअर शिप धीरे धीरे धीरे धीरे बढ़. रही है तो वेरी गुड मैं उसके सपोर्ट में. हूं और हमें वह कार्य करना चाहिए पर जस्ट. बिकॉज कि वह प्रसिद्ध है सिद्ध नहीं है यह. दो शब्द है सिद्ध होकर प्रसिद्ध हो रहा है. कि केवल प्रसिद्ध हो रहा है और सिद्ध नहीं. हो रहा इसमें मानक तय होने की आवश्यकता. निश्चित रूप से बहुत सारी जगह आपकी बात से. मैं सहमत हूं कि केवल सोशल मीडिया के. इन्फ्लुएंस. में बहुत सारे लोग प्रभावित हो रहे हैं. फिर बाद में उनके मन भी खराब हो रहे हैं. इसलिए ठीक गुरु को देखिए जिसके दो ही आधार.
है खूब जान के परक के शास्त्रों में विधान. है आपको जिसको गुरु बनाना है कम से कम एक. डेढ़ दो साल उसके सानिध्य में रहिए ऐसे. नहीं भीड़ में जाके गले में डाल ली माला. की आज से आप मेरा चेला और तू मेरा गुरु. क्योंकि बहुत सारी भीड़ आ रही है कोई बहुत. सारे गुरु उसको नहीं कहते जो दुख दूर करता. है गुरु उसको कहते हैं जो सुख से भी ऊपर. उठाता है दोनों चीज से मुक्त करे क् जब तक. सुख है तब तक दुख होने की संभा सही गुरु. कैसे पहचाने हम किसकी कथा सुन रहे हैं. कैसे हम पहचाने. क्योंकि जनता तो भीड़ देख करर ही चलती है.
जि जिस दिन आप नहीं वो अब अब यही बात है. कि जनता भीड़ देख के चलती है इसके वीडियो. कितने वायरल हो रहे हैं अब अगर बात है. किसी की किसी का वीडियो हमारी प्रोफाइल पर. बार-बार आ रहा है और पता लगा उसका पंडाल. यहां लगा है तो दुनिया अपने आप पहुंच जाती. है निश्चित बात है नहीं अगर आज मैं और आप. संवाद कर रहे हैं हमारा आपका संवाद का कोई. वीडियो आगे घूम जाता है और अगर वहां मेरे. किसी कथा के आयोजन में वहां बहुत सारी. भीड़ आ जाती है यह स्वाभाविक क्रिया है. इसको हम नहीं रोक सकते इसको ना आप रोक.
सकते सड़क चलते लोगों के साथ ये हुआ है एक. प्लेटफार्म के ऊपर एक लेडी गाना गा देती. है और वो टीवी के रियलिटी शोज तक पहुंच. जाती है जैसे वायरल होने की बड़ी जैसे मैं. पत्रकार हूं अब पत्रकारिता छोड़कर मैं. पीछे जय श्री राम या फिर एक तो है कि मेरा. आस्था है जब मैं जन्मभूमि में जा रहा हूं. तो मैं जय श्री राम कर रहा हूं जो भी कर. रहा हूं वो मेरा अपना निजी विषय है मेरी. आस्था है दूसरा है कि मैं हर विषय में. पीछे एक पोस्टर लगा. दूं एक लाइन बोले तो मुझे पता है कि जो. श्री राम को मानने वाले हैं वो अपने आप.
मुझे उठा देंगे जल्दी वायरल हो जाऊंगा. जिसको हम लोग कहते हैं सोशल मीडिया में. निंजा टेक्निक कई बार या आप साधु महात्मा. है आपने कठोर कठोर वचन बोल दिया किसी और. धर्म को लेकर तो एक वर्ग आपको उठा देगा तो. उसमें वायरल होना ज्यादा आसान भी होता है. कई बार यह सवाल मेरे मन में कई बार आता है. नहीं वो मैंने उसका आपको जवाब दिया कि. उल्टा चलता हाथी तो भीड़ इकट्ठी कर लेता. है पर आप जेनन व्यक्ति को इस हवा से मत. देखिए इस हवा से च तारे बहुत होते हैं टूट. जाते हैं चंद्रमा एक ही होता है एको चंद्र.
स्त मोहंती एक ही चंद्रमा रात का अंधेरा. दूर करता है तो मैं जो एक बात अपनी आगे कह. रहा था कि ठीक है मेरी आपका वीडियो वायरल. हुआ और कल मेरी कथा बहुत सारे लोग आ गए पर. अगर मैं जो ज्ञान दे रहा हूं वो कंटेंट. सही दे रहा हूं तो कोई समस्या नहीं है. बढ़िया से बढ़िया बड़ी क्या भीड़ इकट्ठी. होती होगी जब सूत जी ने जंगल में कथा की. थी आज से 5000 साल पहले पहली भागवत जी की. तो आपको जान आश्चर्य होगा उस समय. 88000 ऋषि बैठ के कथा सुनी थी आज तो सोशल.
मीडिया के कितने बड़े-बड़े प्रमोशन भी. 88000 लोगों को कथा में बड़ी मुश्किल से. लाते उस समय तो बोर्ड भी नहीं लगा था कोई. कोई फु ा भी नहीं था सीकर तो अपने आप. खिंचा चला आता है ना आपके पास सच्ची अगर. विषय वस्तु है तो सही गुरु को पहचानने का. स्वरूप आपने मुझसे पूछा जिस दिन आप अपने. आप को सही से पहचान लोगे आपका उद्देश्य. ईश्वर होना चाहिए आप मदरा जाओगे आपको. रास्ते में चार शराबी मिलेंगे आप जुआ घर. जाओगे रास्ते में चार ज्वारी मिलेंगे आप.
भगवान की तरफ बढ़ो ग तो आपको सच्चे संत. स्वार्थ की तरफ बढ़ो ग उपायों की तरफ बढ़ो. ग इधर से उधर जाओगे इधर से उधर करोगे तो. आता है रावण भी वेश बदल करके जब सीता जी. राम से बिलक कुछ मांगती है तो सीता का हरण. हो जाता है सीता जी जब तक राम को मांगती. थी भरे जंगल में इतने वर्षों तक रहने के. बाद भी सीता का हरण नहीं होता आपकी भक्ति. जब प्रभु से अलग कुछ मांगती है तो आपकी. भक्ति का हरण हो जाता है एक सवाल मेरे मन. में और भी आता हालाकि मन तो सवालों से भरा.
पड़ा सबका रहता है और यह सवाल में कोशिश. करता हूं वो सवाल पूछू जो लोग पूछना चाहते. हैं क्योंकि वो सवाल जरूरी भी होते हैं आप. चमत्कार पर यकीन रखते हैं एक चमत्कार तो. जैसे हमने मन में महसूस किया जैसे मैंने. आपको आते ही बताया कि मेरे प्रभु मुझे. अपनी तरफ खींच लेते हैं या मैं वृंदावन. गया मुझे एक एहसास हुआ अयोध्या गया मुझे. एक एहसास हुआ वो एहसास अपने आप में. चमत्कार है कि मैं मन में पीड़ित था मेरा. मन इतना फ्रेश या गंगा स्नान जब आप करते. हैं तो आपके शरीर में चमत्कार महसूस होता. कितनी भी थकान हो दूर हो जाती है यह तो एक.
महसूस करने वाली बात है वो जो प्रमाणिक. चमत्कार दिखाए जाते हैं आप उस पर यकीन. मानते हैं. देखिए एक टेक्नोलॉजी का लेवल है एक होता. है चमत्कार की ट्रांसलेशन मिरेकल जो कि. जनरली हो गई तो मिरेकल और चमत्कार को हम. एक सा मान लेते हैं मिस्टिसिजम को नहीं. समझ पाते जो चमत्कार है वो मिरेकल नहीं है. जो चमत्कार है वो मिस्टिसिजम है. उसके पीछे की एक प्रक्रिया छुपी हुई है. अगर आप टेक्नीक को जानते हैं तो आपके लिए.
कोई चीज चमत्कार नहीं है आप टेक्नीक को. नहीं जानते तो आपके लिए सब कुछ चमत ठीक ये. आपने अच्छी बात बताई अब ये सवाल मैं पूछ. रहा था बाबा बागेश्वर को लेके हा बाबा. बागेश्वर जी के मैं गुरु जी से मिला राम. भद्राचार्य जी से मिला और उनसे भी मैंने. यह सवाल पूछा उन्हीं के गुरु जी वो है. मैंने कहा बाबा आप चमत्कार पर यकीन रखते. हो कहे नहीं रखते हैं बहुत ब्लंटली. उन्होंने कहा तो मैंने कहा लेकिन लेकिन. आपके शिष्य के चमत्कार की बात तो दूर दराज. देशों में हो रही है और बड़ा भीड़ लगती है.
लाखों लाखों लोग आ रहे हैं ने कहा अच्छा. लड़का है मैंने कहा अच्छा लड़का वो अलग. बात है लेकिन हम आपसे थोड़ा जानना चाहते. हैं तो उन्होंने स्पष्ट कुछ नहीं कहा. मुझसे सिर्फ इतना कहा कि देखो शक्ति उसमें. है क्योंकि वो एक ऑनेस्ट शिष्य है हम. ईमानदार शिष्य है मेरा ईमानदार भक्त है. अच्छा लड़का है ठीक लेकिन इसके आगे पीछे. दाए बाएं नहीं उन्होंने कुछ कहा मुझसे और. जो मेरा सवाल था वो मेरे मन में वैसा ही. रह गया गुरु शिष्य का रिश्ता एक अलग. रिश्ता है लेकिन जब एक समाज प्रभाव की बात. आती है जैसे मैं आपको सुन रहा हूं बहुत.
सारी बातें मैं सीख कर चल रहा हूं उनके. बहुत बड़े फॉलोअर्स हैं कई बार वो मुझ परे. भी सवाल खड़े करते हैं अ लेकिन मेरे मन. में जिज्ञासा है और ये सवाल मैं उन पर. सवाल करने के लिए नहीं जिज्ञासा के लिए. पूछता हूं क्योंकि आपने कहा ना अगर आप वो. टेक्निक आप समझ गए मैं टीवी में काम करने. वाला व्यक्ति हूं जिसने सुहानी शाह जैसे. एक लड़की को भी देखा जिसने वही चीज मुझे. करके दिखा दी ठीक तो मेरे मन में सवाल आ. कि दोनों में डिफरेंशिएबल. एक हल्का पन भी होता है एक मस्ती मजाक भी. होता है एक मुझ जैसे लड़के का वो जो बालपन.
होता वह भी नजर आता है लेकिन भीड़ जब मैं. देखता हूं तो वह जितने भी उनके गुरु हैं. या उनके समकक्ष लोग हैं उनसे कहीं ज्यादा. भीड़ नजर आती है और उनको लेकर विश्वास भी. लोगों में बहुत ज्यादा है तो फिर मेरे मन. में सवाल आता है कि कौन सही कौन गलत कैसे. माने क्या समझे क्या जाने क्या हम किसी को. सही और गलत केवल उसकी चमत्कार की वजह से. देख रहे हैं और उसके इर्दगिर्द ज्ञान क्या. लिया मैंने देखो एक एक चीज समझने की है कि. पूरी बात तो जगतगुरु श्री रामभद्राचार्य. जी कह सकते उनका विषय तो मैं नहीं कह सकता.
और धीरेंद्र शास्त्री जी कह सकते हैं खूब. मिला और तब से जानता हूं जब कोई भी नहीं. जानता था तब से जानता हू तो मैं एक निवेदन. आपसे. करूं देखो जो है उनके पास व चमत्कार नहीं. है वह प्रसाद है एक चीज समझिए एक बीज हमने. लगाया पहली बार किसी ने कोई एक न क्या. टाइप का बीज लगाया ध्यान से सुनिए कहानी. अभी अभी बनाई आपका प्रश्न सुनते सुनते बीज.
लगाया और उसमें ना एक पहली कोपल निकल के. आई उस समय एक व्यक्ति आया अधीर हो के उसने. उस कोपल को तोड़. दिया खत्म हो गया थोड़े दिन में दूसरे ने. उसी बीज को दोबारा से फिर से लगाया और. उसने सब्र किया तो कोपल से फिर एक आगे और. चीज निकला एक फूल निकल कर उसने को तोड़. दिया तीसरे ने और लगाया वो फल तक ले गया. तो ऐसे एक चीज समझिए अष्ट सिद्धि नव निधि.
के दाता अश्वर दीन जानकी माता हनुमान. चालीसा या तो गलत है या जो उनके पास है वो. गलत है अब सिद्धियों में एक सिद्धि यह भी. होती है कि आप किसी के मन की बात को जान. सकते हैं आज आप यूएस के इमीग्रेशन के पास. जाइए इंडियन इमीग्रेशन के पास जाइए आज आप. पुलिस के इन्वेस्टिगेशन के पास जाइए वह भी. आपकी माइंड रीडिंग करते हैं आप कितनी बार. ब्लिंक कर रहे हैं आपका ब्लड फ्लो कैसा चल. रहा है लाइट डिटेक्टर आपका केवल ब्लड.
प्रेशर बता देता है सत्य बोल रहे झूठ बोल. रहे हो तो वह एक यंत्र गत सत्य और झूठ. जानने की प्रक्रिया है किसी को बेहोश करके. वो भी तो एक टेक्नीक है तो उन्हीं. सिद्धियों में एक सिद्धियां भी होती होंगी. मैं उस तरफ का व्यक्ति नहीं हूं क्योंकि. मनुष्य जीवन का उद्देश्य सिद्धि नहीं है. मुक्ति है हम मनुष्य जीवन का उद्देश्य कभी. सिद्धि नहीं है उसकी प्रसादी है मेरे मेरी. परंपरा में वाक की सिद्धि है हम लोग वाणी. की सेवा कर रहे हैं आपकी परंपरा में एक.
वाक की सिद्धि है कि आप पत्रकारिता की तरह. ये भी सिद्धि है ये भी सिद्धि भोजन चार. लोग बनाते हैं मां बनाती है उसकी वाक में. सिद्धि है उसको भी सिद्धि का मतलब होता है. पकना कोई चीज पक जाती है तो उनके भीतर वह. एक हनुमान जी का उनके मूल गुरु जो सन्यासी. बाबा जिसको वह कहते हैं दीक्षा आपने. संप्रदाय में जगतगुरु जी से शिष्य गत ली. है त्र से लिए और वह सन्यासी बाबा की उनके. ऊपर कृपा है क्योंकि वह एक इस प्रक्रिया.
में कोई सिद्धि प्रसाद रूप में उनको. प्राप्त हुई है जो कि वो बड़ी आसानी से. दूसरे के मन की बात दूर की बात पास की बात. जान लेते मैंने कमरे में बैठ के देखा है. निजी रूप से आप क्योंकि कह रहे आप उनसे तब. से जानते हैं सोशल मीडिया पर फेमस नहीं थे. नहीं थे तब से बिल्कुल आसानी से मैं आपको. पांच सात आठ वर्ष पुरानी बात बता रहा हूं. आपने महसूस किया अलग से आपके साथ कोई ऐसी. घटना हुई कभी कि उन्होंने आपके दिल की बात. जानी बताई. देखिए मेरे साथ वो बड़ा बड़े भाई वाला. जैसा कृत्य रखते हैं बड़े भाई वाला एक.
छोटी सी घटना जरूर थी कि मैं एक दिन तुलसी. की माला अच्छी वाली पहन कर गया था अंदर. दबा के तो मैंने यह कहा था कि देखो मेरे. पास अच्छी माल मैंने मन में ऐसा कि आज मैं. बड़ी अच्छी माला पहन के गया हूं उन्हीं के. कार्यक्रम में गया था कथा चल रही थी जो. अभी वो विवाहों के प्रोग्राम करते हैं. मुझे उसमें मैंने प्रवचन भी किया था तो जब. मैं जाने लगा तो मुझसे बोले बड़े भैया. दादा माला मैंने भी अच्छी पहनी है और उतार. के मुझे दिखाई तो बोले मैं आपसे मेरा.
स्नेह है पर वो चीज मैंने उनसे कही नहीं. थी मैंने बस पहनी थी और मैंने मन में सोची. कि आज मैं बड़ी अच्छी माला पहन के आया हूं. तो उन्होंने मुझे बोला कि आप दादा मैंने. मुझे बड़े भैया कह के कहते हैं मैंने भी. अच्छी माला पहनी है तो अवश्य पर मेरे लिए. यह कोई आकर्षण का विषय नहीं है नहीं लेकिन. क्या उन्होंने भी वेद की ज्ञान की या धर्म. को लेकर उतनी पढ़ाई की है देखिए भागवत जी. कथा कर रहे हैं जगतगुरु गुरु जी उनके. गुरुदेव हैं वो उनकी जिम्मेदारी गुरुदेव. के मैंने कई इंट मैं गुरुदेव से खुद भी. मिला मैंने सवाल पूछा मैंने कई सारे उनके.
इंटरव्यूज भी देखे जहां पर उनसे सवाल पूछे. गए एक टीवी चैनल को भी उन्होंने इंटरव्यू. दिया था जिसमें एक बड़े सीनियर जर्नलिस्ट. ने पूछा था छोटी बात कह मिश्रा जी मैं. कहूं कि मैंने भी सारे वेद शास्त्र पढ़. लिए हो तो मैं भी नहीं कह सकता सबके पढ़ने. का एक अपना अपना स्तर है सबका अपना अपना. अनुभव है इस वाली वो उन्होंने इस सिद्धि. को प्राप्त किया व दूसरे के मन की चीज बता. रहे होंगे उससे ही उनकी प्रसिद्धि कथा तो. वो और भी पहले से कर रहे हैं उस चीज ची को. ही वो आगे लेकर के आ रहे हैं बहुत ज्यादा. लोग उनकी कथा को ध्यान से सुने मुझे पूरा.
विश्वास है कि भागवत जी पढ़े लिखे व्यक्ति. हैं मेरे कई संतों की कथा वो सुनते हैं. कराते हैं जानते हैं कि कौन ठीक बोलने. वाला है कौन ठीक नहीं बोलने वाला है तो यत. किंचित अनुभव तो सबके पास धीरे-धीरे. धीरे-धीरे प्राप्त होता य नहीं तो सब कुछ. कहने के बाद भी वेद नीति नेति नहीं मैं. कहू आप मुझसे क आप सारे वेद पुराणों के. ज्ञाता तो मैं तो नहीं कह सकता कि मैं वेद. पुराणों का ज्ञाता हूं मुझे जो अपनी. परंपरा से प्राप्त हुआ है वो मैं आपसे कह. रहा हूं उनको जो अपनी परंपरा से प्राप्त. हुआ होगा वह अपनी परंपरा कई चीजों में ऐसी.
एक चीज और भी है जैसे अभी आप प्रश्न कर. रहे थे कई बार हल्की बात कर दो बहुत सारी. बात में एक हल्की बात कर दो तो वो लोग. ज्यादा निकाल कर के घुमा देते हैं पूरा. सुना जाए तो शायद कई बार बात हल्की नहीं. भी होंगी यह बात हल्की कई बार हो भी सकती. है उनका अपना मैं इस विषय में ज्यादा उनके. विषय में कह नहीं सकता उन पर संदेह मुझे. वो आकर्षित करते हैं कि एक 26 27 साल की. उम्र में इतना प्रताप कैसे फैल गया वो ब.
देखत सारे लोगों के पास सिद्धि है पर. भाग्यम फलत सर्वत्र न विद्यान पौरुष. शास्त्री की यह भी बात है उनके कोई पूर्व. जन्म संचित कर्म का प्रभाव है कि वह उनके. जीवन में पुण्य रूप में प्रसिद्धि भी साथ. में ला रहा है सिद्धि भी ला रहा है और. प्रसिद्धि भी ला रहा है मैं चाहूंगा कि एक. दिन उनका इंटरव्यू मैं करूं कभी लाइफ में. और उनसे मैं पूछूं समझू जानू क्योंकि कि. मैं विश्वास करने में यकीन रखता हूं मैं. उन लोगों में से हूं जो अगर जैसे मैंने. आपसे भी कहा कि हम कई सारे सवाल ऐसे करें.
जो लोगों के मन में जो शायद मेरे मन में. भी नहीं क्योंकि जब हम लॉजिक दे देते हैं. तो शंकाएं वहां खत्म हो जाती है और. विज्ञान के इस दौर में अगर आपको धर्म सा. साथ लेकर चलना है तो आपको धार्मिक चीजों. के साथ-साथ लॉजिक भी देते रहना चाहिए. बिल्कुल देते अब वो चीज है 40 दिन का. अनुष्ठान है हनुमान चालीसा का करिए. सेलिबेसी को अटें कीजिए मैं ये आपको पेड़. पौधे वाला जो दृष्टांत दे रहा था यही समझा. रहा था कि एक आ उसने केवल पौधे थे काट. लिया पेड़ आगे नहीं बढ़ाया थोड़ा सा और. आगे बढ़ाता तो फूल मिलता और आगे बढ़ाता तो.
फल मिलता आज शास्त्रों के भीतर अथर्ववेद. को खोल कर के देखिए यह क्या बात है हमारे. ऋषि मुनियों ने भूत और भविष्य जाना है एक. हम हम जब शास्त्र को पढ़ते हैं तो हम. लोगों के लिए चमत्कार नहीं लगता क्योंकि. वहां इस प्रकार की पद्धति लिखी है इस. मल्टी डायमेंशन विजन जो है एक चीज देखिए. इस रूम में कोई इंटीरियर डेकोरेटर आएगा हम. तो वो कुछ नहीं देखेगा वो ये देखेगा. डेकोरेशन कलर क्या है इसी रूम में कोई. आपका कैमरामैन आएगा वो कुछ नहीं देखेगा वो.
लाइट बैकग्राउंड देखेगा इसी रूप में कोई. साउंड इंजीनियर आएगा तो वो ये भी नहीं. देखेगा केवल एकको का इंपैक्ट देखेगा इसी. रूप में कोई वास्तुशास्त्री आएगा तो केवल. लोकेशन और डायरेक्शन देखेगा इस रूम में आप. और हम आएंगे तो केवल सोफा कितना आराम से. बात कर सकते हैं केवल इतना ही देखेंगे हर. आदमी के देखने का एक अपना अपना डायमेंशन. बिहेवियर है तो जब आपके भीतर थोड़ी सी. जागरूकता आती है और थोड़े से डायमेंशन. होते हैं तो आप मन की तंद्रा को भी समझने. लग जाते हैं 335 प्रकार से स्त्री चलती है.
75 प्रकार से पुरुष चलता है आपको जानकर. आश्चर्य होगा लगभग 22 प्रकार से व्यक्ति. हंसता है आपको जानकर आश्चर्य होगा लगभग 46. प्रकार से आपकी पलक झपकते है जब भीष्म बोल. रहे थे द्रौपदी मुस्कुराई और भीष्म प्रवचन. देना रुक गए क्यों. मुस्कुराई यह मुस्कुराहट तेरी कटाक्ष वाली. थी प्रसन्नता अल्लाद की प्रसन्नता अलग है. एक अभिमान की प्रसन्नता अलग संतुष्टि की. प्रसन्नता अलग है उपलब्धि की प्रसन्नता.
अलग है एक शाई नेस की प्रसन्नता अलग है एक. हारने की स्माइल एक अलग है जब व्यक्ति हार. जाता है यह सब हमारे य लक्षण ग्रंथ इसको. कहते हैं इन लक्षण ग्रंथों का अभ्यास करके. यो मन की लंक हनुमान जी घुसे मसक समान रूप. कवि धर वाल्मीकि रामायण वर्णन करती है. लंकिनी देख के चौक गई इतने ही नहीं कि. वानर आया है वाल्मीकि जी लिखते क्यों आया. कब आया किस लिए आया इस समय इस समय इसके. लक्षण ग्रंथ यह बता रहे हैं कि इसके इसके.
शुक्र हावी है और शुक्र से देखा जाए तो इस. समय इसका इसका लक्षण देख के यह नाम होगा. तो इस समय यह ग्रह चल रहा होगा यह ग्रह चल. रहा तो लंका का यह ग्रह चल रहा है इसलिए. शायद इसलिए लंका का अहित करने के लिए यहां. प्रवेश कर रहा है लक्षण ग्रंथ ज्योतिष. वास्तु फिर एस्ट्रोनॉमी सबके गणित बिठा के. साइंस बिठा के लंकिनी ने रोक दिया हनुमान. जी को हनुमान जी तो चौक गए ये कौन से. दरवाजे पर मिल गया मुझे तो सब एक टेक्निकल. बिहेवियर है और दूसरी बात है वह बड़े सरल.
है आप पवित्र रहिए अच्छी कीजिए बढ़िया से. बढ़िया काम कीजिए उसके अगर लोगों को जीवन. में किसी भी बहाने से थोड़ी संतुष्टि मिल. रही है शांति मिल रही है अगर उनके रोगों. का निवारण हो रहा है तो ठीक है हॉस्पिटल. में भी इतना पैसा खर्च कोई भी डॉक्टर 100%. इलाज की बात तो करता ही नहीं है उसके बाद. अगर धीरे-धीरे लोग इसको को लाभ नहीं. पहुंचेगा चीजें नहीं होंगी तो बहुत सारी. चीजें आती है चली जाती हैं यह भी आएंगे. चले जाएंगे सच्चे होंगे तो सदा स्थापित.
रहे सही बात है बेहतर य है एक सवाल. क्योंकि नई जनरेशन के काफी लोग आपको सुनते. हमें सुनते हैं प्रेम क्या. है आधी दुनिया प्रेम में दुखी. है नहीं जहां दुख भी आनंद देने लगे उसी का. नाम प्रेम. है अब उसको तो परिभाषित आपकी बात में आगे. बढ़ाई मेरे हिसाब से मैं का खो जाना प्रेम.
है जहां मैं है तो तू नाही जहां तू है तो. मैं नाही प्रेम गलि अति साकरी वा में. दू प्रेम शारीरिक स्तर पर नहीं. होता प्रेम मानसिक स्तर पर नहीं होता. प्रेम बौद्धिक स्तर पर नहीं होता प्रेम. केवल आत्मिक स्तर पर होता है और मेरे से. यह सवाल क्योंकि पिछला महीना ऐसा था पांच. सात लोगों ने पूछा और मिश्रा जी मैंने एक. जवाब दिया प्रेम वो है जो केवल भगवान से.
होता है और अगर इंसान से हो जाए तो उसको. भी भगवान बना देता. है. ओ गहरी बात. है तो फिर हम जिसको अट्रैक्ट दुखी तब है. क्योंकि वो प्रेम नहीं है आकर्षण है आप. स्वीकार कीजिए ना इट्स एन. अट्रैक्शन इट्स इट्स इमोशनल रिलैक्सेशन. इमोशनल पीस. इंटेलेक्चुअली वी थिंक लाइक की वी फाउंड. समवन वी मचली अंडरस्टैंड ईच अदर यह सब.
प्रेम के स्तर नहीं. है दूस हम किसी भी स्तर पर दूसरे की. प्रसन्नता को महत्व दे दे वो प्रेम है. बहुत सुंदर आपने डिफाइन कि अब इसी से. जुड़ा एक सवाल और. है प्रेम से बाहर कैसे कई बार होता है कि. जीवन में आप किसी भी चीज से ल किसी. व्यक्ति सामान चीज जानवर या इंसान आपका.
लगाव हो जाता है कई बार गलतियों की वजह से. कई बार जीवन लीला उतनी ही होने की वजह से. या किन्हीं और परिस्थिति ज से चीज आप चले. जाते फिर आप मानसिक तौर पर बड़े परेशान हो. ते और आजकल जिसे हम डिप्रेशन कहते हैं नई. पीढ़ी में लोग बहुत. जते अब वो आपने आपने एक बड़ी अच्छी बात क. इमोशनल अटैचमेंट था मैं की जगह हम आ गए या. तुम आ गए या तुम्हारी खुशी में हम खुश. होने लगे अब वो नहीं. है देखिए जो आप कह रहे वो प्रेम से बाहर. होना नहीं है उसका नाम मोह है दोनों चीजों.
में अलग-अलग बहुत फ फर्क है प्रेम में मोह. नहीं होता मोह यह समझाता है कि आपके बिना. मैं कैसे रहूंगा यह मोह है प्रेम से और. ऊपर की चीज है इसलिए प्रेम से तो मुक्त. होने की आवश्यकता ही नहीं है जो मोह होता. है उसका परिणाम शोक होता है कृष्ण ने साफ. गीता में पहले ही बात कह दी श्री कृष्ण ने. कोई भी चीज से मोह होगा तो उसके साथ थोड़ी. देर बाद शोक यह पेड़ से मुझे मोह हो गया. थोड़ी देन बाद सूख जाएगा तो मुझे इसका शोक.
होने लगेगा तो जोसको आप कह रहे हैं आज की. परिभाषा में जिसको मेंटल स्ट्रेस कह देते. हैं मेडिकली उसको शास्त्र की परिभाषा में. शोक कहते हैं मोह और शोक मोह और शोक जीवन. में दूर करना है तो मैं आपसे एक सहज सहज. उपाय कह सबसे बड़ी चीज यही है कि जीवन. को थोड़ा सा अभ्यास लाइए किसी भी चीज में. हम फंस गए तो बेटर अटैचमेंट कीजिए ऊंचा.
अटैचमेंट कीजिए थोड़ा सा अपनी चेतना को और. अपलिफ्ट कीजिए कहने का मतलब है कि अगर. स्टील का ग्लास है तो थोड़ा सा चांदी का. ग्लास के प्रति हम अटैच होंगे तो फिर लोअर. अटैचमेंट अपने आप लूज होते जाएंगे तो इसी. प्रकार से यही स्पिरिचुअल प्रोसेस आकर. खड़ी होती है कि हम मटेरियल चीजों से. स्पिरिचुअल चीजों की तरफ अटैच होना शुरू. हो धीरे धीरे धीरे भगवान की तरफ केंद्रित. होना शुरू कीजिए तभी जीवन का शोक दूर हो. सकता है नहीं तो थोड़ी देर का पेन किलर.
मिल सकता है और एक नए शोक की तैयारी हो. सकती है यही होता है नहीं जैसे कोई नया. लड़का जसे जो बातें आप क रहे एक तो इन. बातों को समझने की भी उम्र होती जो आपको. समझ आती है अब एक लड़का है जिसकी उम्र 17. साल है 18 साल है 20 साल है 22 साल है वो. जीवन में किसी के तरफ आकर्षित हो गया जैसे. आप ही है आपका विवाह हुआ अब आपको अपनी. पत्नी से प्यार हो गया अब ईश्वर से तो. प्यार है ही लेकिन पत्नी के साथ भी रोज. उठते बैठते रहे प्यार हो गया बच्चे हुए. उनसे लगाव हो गया ऐसे ही कोई छोटा बच्चा. जिसे आकर्षण हुआ किसी ने चार बातें प्यार.
से कह दिया आप साथ रहने लगे आदत लग गई. अच्छे लगने लगे तो फिर उसमें तो उसे बात. समझ ही नहीं आएगी कि चांदी के गिलास अगर. है आप स्टील का ग्लास चांदी ग्लास पढ़ो. इसमें तो एक उम्र लग जाएगी जब तक वो. समझेगा लेकिन उस दौर में फिर कैसे निकले. वो उस चाहे किसी भी दौर में क्यों नहीं हो. दवाई तो यही है दवाई मूल में यही है चाहे. उसको जब समझ में आ जाए वो 17 साल का है. चाहे 15 साल का है चाहे 6 साल का है चाहे. 5 साल का है व्यक्ति अगर मोह और शोक से.
दूर होना चाहता है तो उसे हरि से प्रेम. करना पड़ेगा वो जब मर्जी कर ले मैं आपसे. आप बड़े और छोटे की बात कर मुझे तो कई बार. बच्चे ज्यादा इजी लगते हैं बड़े बूढ़े. ज्यादा फसे हुए लगते हैं घर में कोई. सम्मान नहीं दे रहा कोई पूछ नहीं रहा फिर. भी उसी जगह उलझे पड़े कई है कि भाई पति को. कोई पूछ नहीं रहा घर वाली भी उल्टा बोल. रही है बच्चे भी उल्टा बोल रहे हैं पड़ोसी. भी नहीं फिर भी वो उसी में चीटी की तरह. चिपका हुआ है तो उसको कॉन्शियस होने की.
आवश्यकता है तब जब जागे तब सवेरा क्या. करें घर छोड़ कहां चला नहीं मैं घर छोड़ने. की बात नहीं कर रहा देखो समझिए पहले यह. समझना होगा कि यह दुनिया क्या है यहां के. संबंध क्या है आपको थोड़ा सा टेक्निकल समझ. में आ गई तो सब कुछ समझ में आ जाएगा आप. होटल के कमरे को घर नहीं कह सकते वो होटल. का ही कमरा है ये दुनिया एक पड़ाव की तरह. मिली है द वर्ड इ अ स्टेज एंड वी आर मरली. प्लेयर्स विलियम शेक्सपियर ने लिखा है द. सेवन एजेस में एक बहुत अच्छा किरदार आपको. मिला है जमकर कीजिए थोड़ी देर धीरे-धीरे.
धीरे-धीरे समय व्यतीत होगा एक नाटक चल रहा. है उसका आनंद लीजिए आप अटैच भी हो गए तो. थोड़ी देर उसकी भी आप ऑडियंस बन जाइए. थोड़ी देर रो लीजिए कोई समस्या नहीं है जो. किसी के चले जाने पर नहीं रोए वो पत्थर है. पर जितनी देर आवश्यकता है उतनी देर ही रो. लीजिए फिर आगे बढ़ी थोड़ा सा आगे बढ़ कीप. ऑन ये दुनिया कोई नहीं रुक रही मैं तो एक. बात कहता हूं आपसे फिर से रिपीट करके कहता. रहूंगा कोई भी हम प्रोग्राम करते तो तीन.
प्रकार की चीजें मंगते हैं कुछ घर से लाते. हैं कुछ डिस्पोजेबल यूज करके फेंक देते. हैं और कुछ टेंट वाले से रेंट पर मंगाते. हैं जो व वापस ले जाता है यह तीन चीज. दुनिया को समझने के काम में आती है मेरा. ऐसा मानना है कि शरीर डिस्पोजेबल प्लेट है. यूज कीजिए उसके बाद इसको छोड़ दीजिए यह जो. जितने भी दुनिया के संबंध है यह सब किराए. के एक दिन आपसे वापस ले लिए जाएंगे आपको. ले जाकर छोड़ना पड़ेगा या कोई छोड़ देगा.
और भगवान अपनी प्लेट है यह मान के आगे जिस. दिन यह समझ में आएगा शोक तो उसी दिन दूर. होगा मोह उसी दिन दूर होगा यह चीज मैंने. समझी कि हो सकता है रियल इलाज तो यही है. हो सकता है कि ठीक है अभी 17 में उसको समझ. में नहीं आई तो वो एक अटैचमेंट से छूटेगा. तो दूसरा अटैचमेंट कर लेगा तीसरा अटैचमेंट. कर ले इस फंडामेंटल को समझना पड़ेगा आपने. एक होटल रूम में चेक इन किया आपको खूब.
आनंद आया आपको मालूम है कि आपको दो दिन. बाद उसको छोड़ना है अब अगर आपको आप छोड़. रहे हो या कोई आपको निकाल रहा है और फिर. आप फूट फूट के रो रहे हो तो आपको जागने की. आवश्यकता है सही बात है आपको ही जागने की. आवश्यकता है यह पद्धति चलती रहेगी ठीक है. दुनिया में अलग-अलग लोग टकराते हैं मिलते. हैं साथ में रहते हैं आगे बढ़ते हैं और. फिर अलग-अलग हो जाते हैं मेरे पास एक. सिंगर आए थे अभी हाल फिलहाल में गुरु. रंधावा उनका नाम है यही जहां बैठे वहीं वो. बैठे थे हम शो कर रहे थे शादी को लेकर.
उन्होंने मुझसे एक बात की मुझे लगा आपसे. सवाल पूछ लेता उन्होने मुझसे कहा कि जब. कभी भी शादी हो तो लड़के और लड़की दोनों. को एक नए घर में जाना चाहिए अच्छा चाहे. पड़ोस वाले घर में ले लो लेकिन नए घर में. जाओ उससे क्या होता है कि दोनों को जीरो. से शुरू करना पड़ेगा केवल लड़की को असहज. नहीं होना पड़ेगा आपका क्या टेक है उन्हो. बात जोने क मुझे बाद में रिलाइज काफी गहरी. बात थी कि एक लड़की नए लोगों के परिवार. में आती है जीरो से शुरू करना होता है पति. साथ कई बार 19 20 हो जाए या लड़के कई बार.
मां की तरफ आकर्षित होते तो उतना स्टैंड. नहीं ले पाते उन्होने कहा जीरो से शुरू. करो घर के बगल में घर ले लो बट ऐसा रहे. जहां सब कुछ जीरो से है तो दोनों बड़े. कंफर्टेबल रहोगे उसके बाद चाहे फैमिली में. शिफ्ट कर जाओ आप क्या सोचते ये स्टेटमेंट. यूनिवर्सल नहीं हो सकता ये वेरी. इंडिविजुअल है दो जनों का संबंध कैसा उसके. ऊपर निर्भर करता है कोई भी चीज फंडामेंटल. नहीं तैयार की जा सकती कि अब शादी होगी तो. बगल वाला घर ही लेना चाहिए मेरा ऐसा मानना. है कि दो जन किस रूप से संबंध शादी केवल.
दो ही जनों की चीज नहीं है दो पूरे परिवार. ही जड़ फिर तो शादी भी दो जन को जाक कर. लेना चाहिए फिर तो व्यवस्था भी सभी दोही. जनों को जाके कर लेनी चाहिए ये वेरी. इंडिविजुअल प्रोसेस है मां-बाप को भी इस. चीज में समझ रखे उनको पूरी फ्रीडम देनी. चाहिए कई लोगों को घर में बगल में लेने की. सुविधा भी नहीं हो सकती बड़ी चीज यह नहीं. है कि कौन को जीरो से हर व्यक्ति अपनी ला. में जीरो से ही शुरू करेगा हर का जीरो. अलग-अलग है जीरो सबका एक मत. करिए मेरा ऐसा मानना है लड़के का जीरो.
अपना जीरो है जब मां सास बनती है तो वो. सास के जीरो से शुरू करती है बाप जब ससुर. बनता है तो वह ससुर के जीरो से शुरू करता. है लड़की जब पत्नी बनती है तो पत्नी के. जीरो से शुरू करती है फिर जब वो पत्नी मां. और बाप बनते हैं तो वो मां-बाप के जीरो से. और बच्चे बच्चे के जीरो से सबका अपना अपना. अपना अपना अपना अपना जीरो है और सबके जीरो. को अपनी अपनी स्वतंत्रता होनी चाहिए. निश्चित रूप से दो परिवार इस तरीके से आपस.
में बैठ कर के आनंद से रह सकते हो अलग रह. सकते हो तो बहुत अच्छी बात है आज के समय. को मैं देखूं तो केवल दो ही लोग अपने ही. आकर्षण के स्तर पर अपने शादी और वैवाहिक. जीवन को आगे चला सके ये कठिन है कोविड ने. बताया कि एक परिवार के समूह किस प्रकार से. जीवन में प्रभाव लेकर के आते हैं जब सारा. परिवार एक साथ एकत्रित होता है हमने ऐसे. कई घर देखे पति-पत्नी के जब थोड़े से.
क्लैश हो जाते हैं उस समय दोनों तरफ की. मां या सास या ननद या जेठानी या देवरानी. किस प्रकार की अच्छी भूमिका बना के उन दो. चीजों को टूटने से रोक लेती हैं दोनों चीज. के प्रोज ऑन कॉनस है इसलिए मैं मिश्र व्य. ये कहूंगा ये बड़ी इंडिविजुअल प्रोसेस है. इसको फंडामेंटल नहीं बनाया जाता. आजकल एक बड़ा और कांसेप्ट चक आप थोड़े. युवाओं वाले क्वेश्चन हमने रखे हैं लड़के. लोग बहुत सुनते हैं आप लोगों को वो धर्म. से जुड़ रहे हैं लेकिन उनके एक लाइफ.
स्टाइल भी उनकी है लिविन का लिविन. रिलेशनशिप आपने भी सुना होगा कि शादी से. पहले साथ रहना ताकि एक दूसरे को बेहतर. तरीके समझ लो कई बार उसमें लोग कंटिन्यू. कर जाते हैं कई बार रिजेक्ट कर देते हैं. कि यार और उनका यह मानना होता है कि जब. व्यक्ति साथ रहता है तब आपको व्यक्ति की. मूल पहचान अलग होती है जो इसके विरोध करने. वाले वो कहते हैं कि संस्कृति खिलाफ है जो. समर्थन करने वाले वो भी एक बड़ा वर्ग आ. गया कई सारे मां-बाप भी अब इजाजत देने लगे. हैं कि ठीक है चलो एक महीना साथ रह के देख. लो कि जीवन कट सकता है नहीं कट सकता बड़ी.
गलती करने की हां ट्राई कर लो आपका क्या. सोचना इस पर ये सही है गलत परंपरा. है मेरे अनुसार मैंने जिस पद्धति और उसका. विचार किया है देखिए एक और शब्द होता है. हमारे यहां अंग्रेजी का ही शब्द है वो भी. उसको बोलते हैं कोर्टशिप. आई थिंक जब दो चीजें किसी रूप में निश्चित. हो जाती हैं तो लिविन से बेटर कोर्टशिप हो. होता मैंने भी लिया था अपने जीवन में. क्योंकि मैं एक परिवार की परंपरा से था. मेरी पत्नी भिन्न परंपरा से थी हमारे पहले.
परिवार ने एक दूसरे की सहमति बताई और हमने. पहले यह निर्णय किया कि हम विवाह करेंगे. उसके बाद अपने दूसरे को समझने का हम रहे. और फिर विवाह करेंगे एक ये विचार है हम. विवाह करेंगे और फिर आपस में समय व्यतीत. करें यह दूसरा विचार है तो भारतीय. परंपराओं के अनुसार और जो हमने आसपास की. पद्धति देखिए है हम वो लिविन कहीं कुछ. जाने वाला है नहीं वो केवल संघ में. रहते-रहते थोड़ी देर के सब आकर्षण होते. हैं फिर एक दूसरे के साथ रहने का अभ्यास.
हो जाता है और वो चीजें आगे चल पड़ती है. फिर कहां जाती हैं क्या जाती हैं बहुत अगर. अगर बिल्कुल ग्राफ से डिसाइड किया जाए तो. मैं तो ये विचार करूंगा पूरी दुनिया का. पूरा ग्राफ रख लिया जाए पूरा वेस्टर्न. वर्ल्ड एक लिविन इन के बाद मैरिज में जाता. है और वहां कितने मैरिज ब्रोकन होते हैं. और एक भारतीय परंपरा जहां पत्नी प्रेयसी. बनती है. प्रेयसी पत्नी बनना और पत्नी प्रेयसी बनना. यह दो अलग अलग प्रकार के मूड है तो मेरी.
कोई परामर्श माने तो मैं तो यह कहूंगा. कोर्टशिप टेक अ लंगर कोर्टशिप रदर देन. टेकिंग अ लंगर लिविन आई थिंक यू विल गेट. बेटर कंक्लूजन. गुस्सा बहुत आता है आजकल लोगों को आपने. सड़कों पर देख होगा आप जा रहे हो गाड़ी. हल्की स ठुक गई लड़ाई झगड़ा करने लगे. मंदिर में भी गए कुछ हल्का सा हुआ वहां भी. नाराजगी एकदम भरी पड़ी है. यह कैसे कंट्रोल कि जाए क्योंकि बहुत हर. वर्ग प हर लेवल पे बच्चों को बड़ों को. बूढ़ों को सबको गुस्सा बथा आजकल हां.
एजिटेटर ऐसा हो गया कि गुस्सा बहुत कैजुअल. हो गया है हम गुस्सा को बहुत ज्यादा. दिखाया जाता है गुस्सा बहुत इजी कर दिया. गया है ये इतनी इजी प्रोसेस नहीं है इसको. इसको सम्मान दीजिए आपका गुस्सा अगर कैजुअल. है ना तो आपकी रिस्पेक्ट गुस्से को भी. थोड़ा रिस्पेक्टफुल बनाइए कि भाई बंदे को. जब गुस्सा आता कहते ना राम जी को जब. गुस्सा आता तो प्रलय आ जाती है ऐसे गुस्सा. करते नहीं है पर हमने गुस्से को इतना. कैजुअल बना लिया कि कोई गुस्से को महत्व.
ही नहीं देता यार ये तो दिन भर ही चढ़ा. रहता है दिन भर ही मुंह बना के बैठ तो मैं. ऐसे लोगों को सलाह दूंगा कि थोड़ा गुस्से. को भी इंपॉर्टेंट बनाइए गुस्सा एक एनर्जी. है देखिए क्रोध एक एनर्जी है ठंडे दूध को. स्टोप पर चढ़ाते हैं रेगुलेटर घुमाते हैं. वो उबलने लगता है पर बिल्कुल बंद नहीं. करेंगे तो बल्कि फैलने लग जाएगा य साइफ. में सिचुएशन हो रही है कई बार डिसिप्लिन. के लिए क्रोध बहुत अच्छा है कई बार. अनुशासन के लिए क्रोध बहुत अच्छा है बहुत. वो भी मन का एक स्वभाव है पर उसको जब आप. विवेक के द्वारा नियंत्रण रखेंगे तो अच्छ.
मेरा ऐसा मानना है ये है ना जैसे समुद्र. में लहर आती है काम हुआ क्रोध हुआ ये सब. एक लहर की तरह आते हैं और अगर आप थोड़ा सा. एक्सपर्ट हो गए थोड़ा सा प्रैक्टिस के साथ. ऐसे नहीं एक दिन में हो जाए कुछ भी क्रोध. भी आदमी एक दिन में नहीं कर सकता. धीरे-धीरे एजिटेटेड होते होते होते होते. स्टेज तक पहुंचता है थोड़ा वो कॉन्शियस हो. जाए और थोड़ा सा चीजों को डिले करना शुरू. करें डिले रिस्पांस देना शुरू करें थोड़ा. सा धैर्य जीवन में लाए जैसे लहर उठती है.
ना ऐसी लहर उठती है तो लहर उठते उठते उठते. उठते वो वहां तक पहुंच जाती है थोड़ा सा. पेशेंस लाए थोड़ा सा धैर्य लाए थोड़ा सा. भगवान में भरोसा लाए प्रभु में भरोसा होता. है तो इतनी आसानी से गुस्सा नहीं आ सकता. आदमी सोचता है कि यह गुस्सा भी कोई भगवान. की कृपा होगी इन सब प्रयोगों को करके वो. धीरे धीरे धीरे धीरे आगे बढ़ सकता है जीवन. में प्रेम लाइए थोड़ी शांति लाइए थोड़ा. ध्यान लाइए थोड़े अपने आप को परखने की. कोशिश कीजिए तो आप धीरे-धीरे एजीटेशन से.
दूर होना शुरू हो जाएंगे गुस्से को कैजुअल. मत बनाइए बड़ा इंपोर्टेंट बना ये अच्छी. बात एक इंपोर्टेंट सवाल मेरे मन में और नए. लोगों को लेकर उसके बाद फिर हम कुछ और. पूछेंगे आपसे. नेगेटिविटी किसी ने कुछ कहा हमारे आसपास. का वातावरण बहुत दिल पर लोग लेते हैं सो. ये नेगेटिविटी से कैसे. बचे देखिए सेंसिबली सेंसिटिव. होइए सेंसिबली सेंसिटिव होना बहुत जरूरी. है आदमी सेंसिटिव है पर सेंसिबल नहीं है.
इसलिए तुरंत तुरंत तुरंत तुरंत चारों तरफ. से क्योंकि अंदर उसने खाली रखा है मेरे तो. आप कोई भी भावना कहिए मेरा तो एक ही जो. मैंने अपने जीवन में अनुभव किया है आपके. साथ भी और हम लोगों के साथ भी तो एक दो. नहीं दसियों हजार अपनी लोग समस्या लेकर. आते हैं खूब नेगेटिविटी से भी भरे रहते. हैं सब कुछ से भी भरे रहते हैं आपके पास. अगर आनंद का दिया है तो आपको कोई परेशान. नहीं कर सकता तो आप अपने भीतर इतनी. पॉजिटिविटी को रेज कीजिए कि नेगेटिव.
वातावरण आपको कैसे प्रभावित करेगा जो. थोड़े से सेंसिटिव होते हैं जिनके भीतर. भरोसे की कमी होती. है उन्हीं को य नेगेटिव वातावरण प्रभाव. डालते हैं जिनके भीतर कॉन्फिडेंस होता है. जो क्लेरिटी ऑफ थॉट्स रखते हैं जो दण. एक्शन पर विश्वास रखते हैं वो इन सब चीजों. से प्रभावित नहीं होते पर हर आदमी अलग अलग. होता है तो मुझको ऐसा लगता है कि जो थोड़ा. सा सेंसिटिव होता है चारों तरफ नेगेटिव. वातावरण उसको ज्यादा प्रभावित करते हैं. उसको अपनी लाइफ में थोड़ा सा.
स्पिरिचुअलिटी की तरफ बढ़ना चाहिए जिससे. वो अपने अंदर धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे. धीरे एक स्पिरिचुअल एय क्वेश्च आपसे ड. करता हूं दो सवाल है एक तो है कि. स्पिरिचुअल होना और रिलीजियस होने में. क्या डिफरेंस है हां और इसका व्यक्ति पर. क्या असर पड़ता है उस व्यक्ति की तुलना. में जो नहीं है क्योंकि कमा खमा कमा खा तो. व भी रहा है और बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो. कहते हैं थििस्ट हैं बढ़िया चल रही जिंदगी. तो क्या डिफरेंस होता है देखो मैं इसमें.
तीन चीजें कहूंगा रिलीजन और धर्म एक तो. अलग है धर्म शब्द के अलग एक अर्थ होता है. स्वभाव धर्म शब्द का एक अर्थ होता है. दायित्व यह सब धर्म शब्द के अर्थ है. क्योंकि आपने अंग्रेजी में रिलीजन शब्द. पूछा है तो रिलीजन शब्द की हिंदी में कोई. परिभाषा नहीं है यह ट्रांसलेशन का एरर है. मिश्र व्य जब रिलीजन को धर्म की तरफ. ट्रांसलेट किया गया ये वन ऑफ द बिगेस्ट. लिंग्विस्टिक एरर है व्हाट आई पर्सनली. बिलीव धर्म शब्द रिलीजन शब्द बिल्कुल अलग.
है तो स्पिरिचुअलिटी का सीधा सा अर्थ यह. है एक प्रकार से कोई भी चीज साधारण नहीं. है नथिंग इज ऑर्डिनरी यही स्पिरिचुअलिटी. इस धरती में कुछ भी साधारण नहीं है सब कुछ. असाधारण है स्पिरिचुअलिटी का सीधा अर्थ है. थोड़ा सा अपने अंदर की तरफ बढ़ना थोड़ा सा. अपने अंदर स रखना थोड़ा सा अपने आप अपने. अपने अंदर की क्रियाओं को देखना मतलब बिकम. अ सीकर ऑफ योर ओन.
एक्जिस्टेंस जैसे आप शीशे के सामने खड़े. होते हैं तो आप ध्यान दीजिएगा मिश्रा जी. कि हमारी अपने अंदर अपनी एक इमेज होती है. और तब तक हम कंगा चलाते हैं जब तक वह इमेज. अचीव नहीं हो जाती तब तक हम चेहरे पर. क्रीम लगाते हैं जब तक वह इमेज अचीव नहीं. हो जाती उसी प्रकार से वो जो आपकी अपनी एक. इमेज आपने एज्यूम की है मिरर के सामने. अचीव करने के लिए ऐसे ही आपकी एक और अंदर. इमेज है जो आपकी डिवाइन स्पिरिचुअल इमेज.
है जो कि आप आप केवल शरीर नहीं है आप केवल. आत्मा नहीं आप केवल शरीर नहीं है आप केवल. मन नहीं है आप केवल बुद्धि नहीं है आप. आत्मा है जिसको थ्रू मेडिटेशन के द्वारा. जप के द्वारा इस धर्म की विविध अब इसको. अचीव करने के जो रास्ते हैं वो धर्म है ये. जो रास्ते हैं वो धर्म है यहां तक पहुंचने. के जो अलग-अलग रास्ते हैं वो अलग-अलग. रिलीजन है जिसमें कुछ ना कुछ प्रोसीजर्स. भी है कुछ ना कुछ रिचुअल्स भी है जैसे एक. छोटी सी चीज कहूं फूल देना एक रिचुअल है.
और उसके अंदर एक इमोशन भी जुड़ा हुआ है. लाल फूल दूंगा तो इसका मतलब कुछ और है. सफेद फूल दूंगा तो इसका मतलब कुछ और है तो. वो जो वो जो फिलोसोफी है वो स्पिरिचुअलिटी. है फूल देना एक रिचुअल है तो रिचुअल और. स्पिरिचुअल मिलके रिलीजन बनता है जो केवल. उसकी भावनात्मक पक्ष है वो बीइंग. स्पिरिचुअल है हम आज के समय में ना योगा. को स्पिरिचुअलिटी समझने लगे हम या आंख बंद. करके ध्यान करते हैं अलग-अलग प्रकार का. पोचर करते हैं तो देन यू से आई एम नॉट.
रिलीजस आई एम स्पिरिचुअल नो योग इज आल्सो. वन ऑफ द रिलीजस. प्रैक्टिस ये भी दर्शन का एक विभाग है. पतंजलि एक ऋषि हैं जिन्होंने योग और. जिसमें शिव से लेक पूरी परंपरा उतर के आर. हमारे शहर में जन्म हुआ उनका हां गोंडा. जिले में गोंडा जिले में फिर देखिए कहां. से कहां तक उसकी परंपरा उतर के आ रही है. तो आप इसमें भी कंफ्यूज मत होइए. सीधा स्पिरिचुअलिटी का मतलब यही है सीधी. बात स्पिरिट शब्द का एक और अर्थ होता है. खूब.
उत्साह लाइफ में खूब एक्साइटेड रहना हर. चीज के लिए खूब एक्साइटेड रहना हर चीज को. पॉजिटिव नोट में देखना बुरी से बुरी चीज. को पॉजिटिव नोट में देखना कोई भी चीज को. ऑर्डिनरी नहीं देखना यह सब स्पिरिचुअलिटी. जो धीरे-धीरे डिफरेंट टाइप ऑफ प्रैक्टिसेस. से जिसमें ज्ञान योग भी है क्रियायोग भी. है भक्ति योग भी है मेडिटेशन भी एक है. इनट्यूशन भी एक है जप भी एक है यह किसी भी. माध्यम से उस तक अचीव किया जा सकता है वो.
वो ताला खुल जाता है एक्सेस का जिससे फिर. अपने आप अपने भीतर उत्साह दने लगता. है समापन की तरफ हम चल रहे हैं क्योंकि आप. वृंदावन में आप आते हैं दो सवाल मेरे मन. में एक सवाल तोय कि वृंदावन से इतने. कथावाचक इतने महापुरुष क्यों निकलते हैं. क्या उस भूमि में खास है क्योंकि ज्यादातर. लोग का कहीं ना कहीं कनेक्शन वृंदावन से. निकल आता है हां वृंदावन जैसे भाई अब आगरा. के पेठा प्रसिद्ध है मथुरा के पेड़ा. प्रसिद्ध है ऐसे ही वृंदावन में तो कथा ही.
प्रसिद्ध है इसका अर्थ यही है कि वृंदावन. साधारण भूमि नहीं है वृंदावन साक्षात श्री. कृष्ण का ही एक धाम मय स्वरूप है वहां जो. चला जाता है उसकी चेतना को कथा स्पर्श. करने लग जाती धीरे धीरे धीरे धीरे वहां से. वहां के वातावरण वहां की हवा वहां का पानी. वहां की वायु यह सब चिन्म है साधारण नहीं. अब अगर किसी गर को हीरा भी मिल जाए भेड़. चढ़ाते हुए तो उसको कांची समझेगा सुनार.
जानता है जो लोग जानकार है वह जानते हैं. कि वृंदावन साधारण नहीं है जैसे किसी. पर्वत की परछाई धरती पर पड़ती है ऐसे. नित्य भगवान के वैकुंठ गोलोक की परछाई इस. धरती पर जहां पड़ती है उस जगह को वृंदावन. कहते हैं और जैसी परछाई पड़ती है वैसे ही. प्रभाव पड़ता है इसलिए वृंदावन में रहने. वाला व्यक्ति भक्ति का अनुभव करने लगता है. और जब भक्ति का अनुभव होता है तो कथा. फूटने लगती है अपने आप धीरे-धीरे कथा का. प्रवाह आने लगता है ऐसा वृंदावन रस की.
भूमि है तो कथा करने वाले तो सब जगह से. होते हैं पर जब वो वृंदावन में रह लेता है. तो उसकी वाणी में उसकी कथा में उसके अनुभव. में रस घुल जाता है क्योंकि कृष्ण रस है. उससे उसका प्रभाव आकर्षण और तेज हो जाता. है इसी भावना से पूरे विश्व में वृंदावन. की कथा करने वाले राज करते हैं इसी से. दूसरा सवाल मेरा आखरी सवाल जुड़ा हुआ है. कि जैसे आपने कहा ना कि वृंदावन में कथा. वाच कों का विश्व में प्रभाव है हमारे. जितने भी भगवान देवी देवता या जिने भी. आराध्य हैं अगर हम सांसारिक तौर पर देखें.
दुनिया की आबादी को देखते हुए तो सबसे जदा. लोकप्रिय हमारे भगवान श्री कृष्ण हो गए. हैं बिल्कुल दुनिया के संसार के किसी भी. देश में जाइए श्री कृष्ण के भक्त आपको. वहां मिल. जाएंगे ऐसे ऐसे देशों में जहां पर लोग. कल्पना भी नहीं कर सकते ठीक तो ये श्री. कृष्ण जी में वो क्या एक् फैक्टर है जो. इतना ज्यादा प्रचार प्रसार हो गया और इतना. ज्यादा वो आकर्षण है वो उनकी लीलाओं की. वजह है या उनकी तरफ आकर्षण है मतलब ये कई.
बार मन में सवाल रहता है वो केवल प्रेम है. दुनिया में प्रेम ही सबको आकर्षित करता है. प्रेम आपकी ओरिजिनल फॉर्म है बिल्कुल. ओरिजिनल उससे कोई लैंग्वेज नहीं है ये भी. बात सही है बिल्कुल सही है नारद जी ने कहा. है परम अनिर्वचनीय प्रेम स्वरूपम भक्ति. सूत्र में ऐसा जैसे चांदी की ओरिजिनल. फॉर्म है ना चमक उसके ऊपर लेयर चढ़ती है. काला थोड़ा पीला फिर थोड़ा पूरा तो ये जो. मो यह जो शोक है जोय ऊपर की लेयर है. ओरिजिनल जब पूरा घिस दिया जाए ना. कॉन्शसनेस को तो वो प्रेम में विकसित होती.
है एक मात्र कृष्ण ऐसे ऐसे हैं जिनके लिए. प्रेम सबसे प्रधान है जो ईश्वर होते हुए. भी अर्जुन की घोड़े चलाने को तैयार हो. जाते हैं द्रौपदी उस समय खड़ी थी और कहते. हैं कि वह मासिक धर्म में थी उस समय तो. ऐसी हाइजीन की प्रोसेसेस भी नहीं थी उसको. किसी ने नहीं स्वीकारा यहां तक कि धर्म भी. एक तरफ खड़ा हो गया होगा धर्म के नियम. कायदे भी उसके लिए थे पर उस स्थिति में भी. कृष्ण ने उसको थाम लिया प्रेम जिसके लिए. सबसे बड़ा हो वह कृष्ण है और प्रेम दुनिया.
को सबसे ज्यादा आकर्षित करता है इसलिए. श्री कृष्ण जगत गुरु है जगत ईश्वर है और. सबके मन को आकर्षित कर लेते हैं बहुत. शुक्रिया आपका मैंने कई और सवाल श्री. कृष्ण जी को लेकर मेरे मन में है अब वो. कृष्ण की नगरी में इसीलिए मैंने कहा कि उन. सवालों को मैंने कृष्ण जी पर आधारित नहीं. रखा क्योंकि अभी हम. प्रतिष्ठा से आए हैं मैंने वहां से शुरुआत. की और वो सवाल मैंने बचा के इसलिए रखे हैं. कि श्री कृष्ण जी को लेकर राधा रानी को. लेकर मीरा को लेकर कलयुग को लेकर ये तमाम.
सवाल जो हैं इनको हम सेकंड पार्ट में. रखेंगे इसलिए शुक्रिया कहने से पहले ही. दर्शको को बता दे रहे हैं कि वो सवाल. बांके बिहारी की धरती से होगा वृंदावन की. धरती से होगा जन्मभूमि से होगा कहीं ना. कहीं एक आध्यात्मिक जगह से होगा जहां उस. वातावरण को हम भी महसूस करेंगे और फिर. भगवान के बारे में चर्चा करेंगे लेकिन. अच्छा लगा आपसे बात करके बहुत बहुत अच्छा. लगा बहुत बहुत शुक्रिया वक्त देने के लिए. धन्यवाद धन्य आपका मंगल जय श्री कृष्णा.
