Unplugged ft. "Shri Prakash Shukla"| UP Gorakhpur Gangster Who ‘Enjoyed’ Killing | IPS Rajesh Pandey
[संगीत]. श्री प्रकाश शुक्ला गोरखपुर का लड़का है. लेकिन अब देश का बड़ा क्रिमिनल बन चुका. है श्री प्रकाश शुक्ला को मानने वाले कई. लोग य कहते हैं कि कल्याण सिंह जी वाली. खबर उड़ाई गई. थी शायद हिंदुस्तान के इतिहास में पहली.
बार एक क्रिमिनल को को डील करने के लिए एक. यूनिट बनाई गई दैट इज नोन एज एसटीएफ. एसटीएफ कितने मर्डर किए थे उस उसे किसी. साधु सन्यासी या अघोरी ने बता दिया कि तुम. 101 हत्याएं कर लोगे तो तुम अजय हो जाओगे. तुम्हें कोई मार नहीं पाएगा और उस समय तक. वो कोई 86 या 87 मर्डर कर चुका था पहला. ब्राह्मण अपराधी था वो स कभी किसी ने. पर्सनली कहा शिकायत की क्यों मार दिया. आपने वो ब्राह्मण ठाकुर कह सकते मुझे भी. कहते हैं लेकिन अपराधी की सच में कोई जात.
नहीं क्या श्री प्रकाश शुक्ला ने. ब्राह्मणों को नहीं मारा 35 ब्राह्मणों का. मर्डर किया है उसने वो ये कहते हैं सिस्टम. की मार ने उसे अपराधी बना दिया जैसे एक. पीछ आए थी मिर्जापुर. हम उसमें एक डायलॉग है कि शुरू मजबूरी में. किए थे बाद में मजा आने लगा क्या ये. डायलॉग श्री प्रकाश शुक्ला पर सटीक बैठता. है बिल्कुल सटीक बैठता है 100 फीसद सटीक. बैठता है शुरू जब भी किया उसने मजबूरी में. किया 30 मार्च की बात है ये 98 जैसे ही वो. एक कदम आगे निकला सटा के उसे.
पिस्टल से गोली मार द सिर प पांच छ और. मारी फिर मैगजीन बदली फिर स्टेन निकाली. फिर पैर से उसको सीधा किया बोले साला बहुत. खराब नजर से देखता पांच गोलियां इसमें. पांच गोलिया आंखों में फिर कंफ्यूज हो गया. कि यार ये इसका वो हार्ट किधर है तो पांच. गोली इधर पांच गोली उधर श्र प्रकाश शुक्ला. को लोगों ने देखा नहीं था एक फोटो आती है. जिसको भी कहा था मुंडी उसकी नीचे सुनील. शेट शायद थे मैंने बनाया था उसका अभी. पुलिस ने भी उसे पकड़ा उसने गाड़ी का शीशा. खोला और यहां पर गाड़ी में एक 47 पड़ी हां.
हां उसने कहा शशा नीचे करो वो बगल में. यहां रखा हुआ था उसको बस ऐसे उठाया कि बस. वो दरोगा जी अबाउट टन क्विक. मार्च फिर आप लोगों ने किस दिन ठोका. प्रकाश को ये 23 सितंबर 98 की. बात ये जो बाहुबली होते हैं जो अपराधी. होते हैं ये लोगों को इतने फेसिनेट क्यों. करते इतना मजा क्यों लोगों को आता है. देखिए उसका एक ट्रेंड है हर बाहुबली का. शादी करवा देंगे टूर्नामेंट पैसा दे देंगे. जेल जाओगे छुड़वा देंगे छुड़वा देंगे. शहाबुद्दीन से शुरू करिए उद्दीन है अतीक.
अशरफ है यह है मुख्तार अंसारी हैं हरिशंकर. तिवारी हैं वीरेंद्र शाही हैं किसका नाम ल. सब. [संगीत]. [प्रशंसा]. बाहुबली सबसे कठिन जिला कौन सा था जहां आप. काम किए क्राइम के मामले में सबसे टफ मुझे. मेरठ. लगा कितने परसेंट एनकाउंटर सही होते हैं. अगर दिल प हाथ रख के बताना 50 फीसद से. ज्यादा एनकाउंटर पर कोई टिप्पणी टीका नहीं. आई बाबा सिद्दकी अतीक अहमद अशरफ अहमद आपके.
पंजाब में सिद्धू मूसेवाला या लखनऊ में. जीवा इन सारी घटनाओं के पीछे एक आदमी. मास्टर माइंड हो सकता है लॉरेंस बिष्णु. क्या लॉरेंस बिश्नोई को अगला दाऊद. इब्राहिम बनता हुआ देख रहे. हैं इज्जत शोहरत उल्फत चाहत सब कुछ इस. जहां में रहता नहीं आज जहां मैं हूं वहां. कल कोई और था यह भी एक दौर है वो भी एक. दौर था एक दौर था यूपी में जब दब था.
बाहुबलियों का वर्चस्व था बाहुबलियों का. लेकिन फिर एक अधिकारी आया एक टीम बनाई और. व वर्चस्व टूट गया आज कहानियां सुनाएंगे. हम आपको कई सारे लोगों की श्री प्रकाश. शुक्ला की लॉरेंस बिश्नोई की दाऊद. इब्राहिम की अंडरवर्ल्ड फंक्शन कैसे करता. है और सुनाएंगे वह व्यक्ति जिन्होंने. वर्चस्व को तोड़ा है राजेश कुमार पांडे जी. बहुत-बहुत स्वागत है आपका बहुत धन्यवाद. शुभंकर जी आपको बहुत धन यूपी एसटीएफ के. गठन करने में जो आप लोग की भूमिका रही. मुझे लगता है कि इतिहास के पन्नों में आप. लोग भी अजर अमर हो गए बिल्कुल दर्ज तो हुए.
ही अजर अमर का तो आगे देखेंगे जब जब जिक्र. होगा वर्चस्व का बाहुबली का तब तब आप जैसे. किसी अधिकारी को लोग याद करेंगे कि आपने. किया था वो भी करेंगे जी जी चार कहानी. हमारे पास सर आज है जी हमने मुंबई के. किस्से सुने हैं हमने लॉरेंस से किस्से चल. रहे हैं श्री प्रकाश शुक्ला की कहानी रही. है मुन्ना बजरंगी अतीक अशरफ को हमने देखा. लेकिन मेरे मन में इन कहानियों को शुरू. करने के पहले एक सवाल आता है जी कि ये जो. बाहुबली होते हैं जो अपराधी होते हैं.
लोगों को इतने फेसिनेट क्यों करते इतना. मजा क्यों लोगों को आता है कि इनको हीरो. की तरह इन कहानियों को सुनते हैं देखिए. इसके लिए आपको थोड़ा सा पीछे जाना होगा 85. से 90 और 90 का पूरा. दशक इलेक्टोरल प्रोसेस हमारा पेपर बैलेट. से होता. था और जब जब इलेक्शंस होते तब तक यह छपता. था कि 50 बूथ वहां ल लूटे गए 20 वहां लूटे. गए मतपत्र लूटे गए फलाना हुआ कोई तो करता. होगा इसको उस समय के जो भी ति लोग रहे.
होंगे उन्होंने इस तरह के गुर्गों का. इस्तेमाल किया कि साहब आप 10 बूत आप देख. लीजिए 20 आप देख लीजिए 25 आप देख लीजिए और. वह जीत. गए जीतने के बाद जिन लोगों ने जिताया जिन. लोगों ने बूत कैप्चर किया जिन लोगों ने. बैलेट पेपर में पानी डाला जिन लोगों ने. बैलेट पेपर में स्याही डाली जो लोग बैलेट. बॉक्स उठाकर ले गए कुए में डाल आए उनको. लगा जब हम इनके लिए कर सकते हैं तो हम. क्यों नहीं कर सकते ऐसा और वह सब मैदान. में आ गए और यही शुरू हुआ था अपराध का.
राजनीतिकरण और राजनीति का अपराधीकरण और जब. वह काफिले में निकलते. थे आप भी शायद उत्तर प्रदेश से हैं उत्तर. प्रदेश में जब कोई इस तरह का नेता काफिला. लेकर निकलता है तो एक कलर की एक नंबर की. 50 गाड़िया और काली गाड़ियां शीशा उतरा. हुआ और राइफल की नालें बाहर निकली हुई. स्कूल जाते हुए बच्चों के सामने से अगर ये. काफिला गुजर जाए तो बच्चों की धड़कने तेज. हो जाती थी डर जाते थे रिक्शे को रोक देते. थे.
तो उस दौर को आप याद करेंगे कि यह लोग. आखिर यहां से वहां पहुंचे कैसे मैं शुरुआत. करूंगा शहाबुद्दीन से शहाबुद्दीन के आतंक. का आपको पता. होगा एसिड से जला दिया आंखें एसिड से फोड़. दी सरेआम किसी को मार दिया तो आदमी. अच्छा एक एग्जांपल इसके बाद का है कि जैसे. अतीक प 50 से ज्यादा मर्डर के मुकदमे थे.
मोर देन. 50 लेकिन अभी से पहले जब वह बंद हुआ था एक. भी मुकदमे में सजा नहीं हुई थी हमने तो. यहां त सुना कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज. लोग हाथ खड़ा कर लिए थे इसकी जमानत के. प्रार्थना पत्र में हाई कोर्ट के 11 जज ने. रिक्यूज किया उसको टेक्निकल वर्ड में. रिक्यूज कहते हैं पास ऑन कर दिया कि हम. नहीं करेंगे हाई कोर्ट के 11 जजों बवे जज. ने सुना और जमानत दे.
दी ना तो जज ने यह बताया कि वह क्यों नहीं. सुनेगा ना हमारे आप तक यह बात पहुंची कि. वह क्यों नहीं सुनेगा लेकिन जानते सब लोग. हैं कि जमानत नहीं हुई तो तुम्हारा यह. होगा कौन जो बैटरी ऑफ लॉयर्स व रखे हुए. हैं कि सर एक मिनट बात करनी है चेंबर में. वह सर जमानत लगी. है सर हो जाए तो अच्छा रहेगा नहीं तो सर. आप समझ ही रहे हैं. बस हाई कोर्ट की बात कर रहा हूं मैं लोअर.
कोर्ट की बात नहीं कर रहा हूं जो बेचारे. मजिस्ट्रेट नए-नए आए हैं वह तो वह बेचारे. कहां इतना लोड ले. पाएंगे इतने जजों ने मना किया और 12वें ने. सुना और तब उसकी जमानत देख की अपने पिंड. छुड़ाई अपना पिंड छुड़ाया कि भाई चलो इसकी. जमानत हो. गई और जब इसका काफिला निकला था इसके. काफिले का आपको अंदाज है कानपुर में एक. बार शायद वह नॉमिनेशन करने आया था 450. गाड़ियां आई थी इलाहाबाद से.
और हर गाड़ी में बंदूक की नाल बाहर निकली. हुई तो जो फेन सिटर बच्चे हैं जो. यंगस्टर्स हैं 12 साल 15 साल 20 साल वह. देख रहे हैं कि जब वह काफिला आ रहा है तो. साइकिल वाला बेचारा खाई में गिरा जा रहा. है साइकिल छोड़ के भागा जा रहा है. मोटरसाइकिल वाला स्टैंड पर खड़ा करके पीछे. हो जा रहा है यानी इस काफिले मात्र से ही. आदमी नहीं दिखाई दे रहा है उसमें इतना. दहशत हो गई वो फेसिनेट करता है यंगस्टर्स. को नई उम्र को वो फेसिनेट करता है माफिया.
से शुरू ही फेसिनेशन से हां दबदबा जलवा. पुलिस अधिकारी को हड़का दिया हां जज साहब. डर गए जज साहब डर गए भाग गए. और सड़क पे एक आदमी की पूरी स्किन उतार के. पूरी स्किन उतार के सड़क पर फेंक के. और उससे एसओ से एसएचओ से कहा कि एक आदमी. की लाश पड़ी हुई है उठा ले जाओ उठा ले गया.
पंचायतनामा हुआ पोस्टमार्टम हुआ एफआईआर. कराने वाले नहीं. मिले जिन्होंने कहा कि मैंने किया है लाश. उठा ले जाओ उनके खिलाफ एयर नहीं है उस. मुकदमे. में विरोधियों ने मान लिया विरोधी की. हत्या हुई. चार गवाह तैयार हो गए गवाह अदालत तक नहीं. पहुंचा या तो कंप्रोमाइज किया हो स्टाइल. हो गया कि साहब हम तो उस समय कोलकात्ता. में थे फर्जी लिखवा दिया गया हमको गवाही. में या फिर मारा गया तो जब आप अपनी कंटस.
कह ले अपने इलाके या अपने जिले के 10 20. 50 लाख लोगों की जानकारी में यह है कि यह. फला आदमी ने चौराहे पर 20 गोलियां मारी. उसे और वह मर गया और अदालत में कुछ नहीं. हुआ तो फेसिनेट तो वही करेगा रियल हीरो तो. वही है रॉबिन हुड तो वही है और चार लोग के. भला कर देते हैं हां चार लोगों का भला. नहीं भला क्या देखिए उसका एक ट्रेंड है. गरीब की शादियों में पैसा देंगे बहुत.
अच्छी बात है इससे अच्छी बात कोई नहीं हो. सकती जो हर बाहुबली का हर बाहुबली का आप. किसी का देख लीजिए ये वो जनता सुने जो इन. बाहुबलियों को हीरो बनाती है हां कि गरीब. की शादी में ठीक है गरीब है बेचारा बेटी. की शादी नहीं कर पा र बहुत अच्छा है लेकिन. एक गरीब की शादी की तो हजार लोग वाह वाह. करने वाले हो देख क्या बात है सारे. बाहुबली. लाइनस फिर कोई अगर जैसे कोरोना जैसी. महामारी आ गई तो उन्होंने कहा साहब.
एक तीन दिन का खाना हमारी तरफ से बनेगा हम. खाना खिला. देंगे किसी का मकान बनवा दिया गया हो यह. मैंने आज तक नहीं. सुना आपने सुना हो आप भी बहुत देश विदेश. ढूंढे हो कि किसी का मकान बनवा दिया जमीन. प कब्जा सुना जमीन पर कब्जा सुना होगा. आपने लेकिन किसी को उसका मकान बनवा दिया. कि किसी भाई बोली ने नहीं किया वो कहते. हैं कि सांप को कभी पालना नहीं. चाहिए अभी हम आज इसको मकान बनवा देंगे कल.
यही हमारे खिलाफ गवाही देगा आपने सुना हो. तो बता. दीजिए ट्रेंड है एक शादी करवा देंगे शादी. करवा देंगे टूर्नामेंट होगा पैसा दे देंगे. जेल जाओगे छुड़वा देंगे छुड़वा देंगे. लेकिन मकान नहीं बने डेवलप नहीं होने. देंगे ना ना ना मकान बनने देंगे ना अपने. यहां कोई फैक्ट्री लगने. देंगे रोजगार जैसे छोटी मोटी फैक्ट्री मान. लिया आप शुगर की जो प्रोसेसिंग छोटी यूनिट. आजकल वेस्टर्न यूपी में लगी हुई है उसमें. 50 60 लोगों की 100 लोगों आसपास के लोगों.
की नौकरी लग जाती है वो नहीं लगने देंगे. हमारे इलाके में नहीं लगेगी या तो इतना. पैसा दो वो नहीं लगने देंगे भाई ऐसा भी तो. करिए कि जो गरीब है उसके यहां एक कमाने. वाला हो जाए तो पूरा परिवार अपने आप उसका. चलने लगे फिर दरवाजे पाव कौन पकड़ेगा फिर. दरवाजे पर सलाम करने कौन आएगा गाड़ी में. राइफल लेकर कौन. बैठेगा तो यह सब जगह किसी का आप देखिए कोई. बाहुबली देख लीजिए शहाबुद्दीन से लेकर. शहाबुद्दीन से शुरू करिए साबुद्दीन है.
अतीक अशरफ है यह है मुख्तार अंसारी हैं. हरिशंकर तिवारी हैं वीरेंद्र शाही हैं. किसका नाम ले लाइन है पूरी लिस्ट है सब. बाहुबली हैं और सब राजनीति में गए सब पे. 100 100 5050 मुकदमे हैं किसी मुकदमे में. कन्वे नहीं हुआ अनलेस वो जेल नहीं पहुंच. गए सरकार ने कोई दम नहीं दिखाया पॉलिटिकल. विल नहीं हुई कोई सजा नहीं हुई और ये बात. सारे अधिकारी भी जानते हैं सारे नेता भी. जानते सब लोग जानते हैं पब्लिक भी जानती. है पब्लिक आज की तारीख में सब जानते.
हैं वही बाहुबली है तो ये सिस्टम सबको पता. भी है सबको दिक्कत भी है लेकिन चल भी रहा. है चल भी रहा है चला आ रहा है देखिए भला. हो इलेक्ट्रॉनिक एज. का कि हम ईवीएम पे शिफ्ट हुए नंबर वन बहुत. बड़ा चेंज किया उसने कि इस तरह के लोग जो. बूत कब्जा करके वहां पहुंचते थे उनकी. संख्या खत्म तो नहीं हुए लेकिन धीरे-धीरे. उनकी संख्या कम हो हम दूसरा भला हो मोबाइल.
फोन. का आपको पता है कि मर्डर के केस में एलबी. साबित करने के लिए जैसे सब सारी दुनिया ने. देखा कि हम मर्डर में शामिल थे शाम को हम. टीटी के पास गए पहले वह गत्ते वाला जो. टिकट होता था खट्ट खट वाला तो वो आपसे आते. समय ले लेता था घर पे जब रेड होती थी तो. वो उसमें रबर बैंड में रखे रहता था जुलाई. का यह अगस्त का यह अ पंजाब मेल का का ये. फलाने उसका ये वकील ने कहा कि टिकट ले.
आओ कोलकाता में होने का फला तारीख का टीटी. के पास जाइए आप सौदा करिए वह आपको टिकट दे. देगा जिसमें तारीख की मोहर लगी हुई है और. अदालत में सबमिट होगा कि साहब मैं तो उस. तारीख को कोलकाता में था बज गया बज गए यह. सब वही मैनेज कराते हैं जिन्हें आप. बाहुबली कह रहे हैं व मैनेज कराते हैं हो.
ही नहीं सकता बता दो किसकी किसको सजा हुई. नहीं. हुई आपको अस्पताल में भर्ती दिखा देंगे. लेकिन अब भला हो इस ट्रांसपेरेंसी का और. सब चीजें ऑनलाइन हो. गई सब चीजें फिंगर टिप्स प. होंगी एविडेंस जो नए वाले एक्ट आए उसमें. सारे इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस को एविडेंस की. तरह माना जाएगा एविडेंस की जो परिभाषा. लिखी गई उसमें ये.
मेल की स्टंपिंग जितने इलेक्ट्रॉनिक. एविडेंस पहले यह नहीं था शुरू शुरू में जब. एसटीएफ बनी तो हम लोग सीडीआर को केस डायरी. में सबमिट नहीं करते थे जज कह देता था इट. विल नॉट बी ट्रीटेड एविडेंस य कहां लिखा. हुआ है सीआरपीसी में एविडेंस एक्ट में. कहां लिखा हुआ है वह केवल अपनी संतुष्टि. के लिए तो दूसरा सबसे बड़ा चेंज हुआ. मोबाइल फोन और तीसरा सबसे बड़ा चेंज हुआ. सीसीटीवी आज की तारीख में जितने बड़े.
मामले क्राइम के सुलझाए गए हैं उनमें से. 65 से 70 फीसद सीसीटीवी फुटेज देख के हुए. हैं 65 से 70 फीसद कहीं ना कहीं तो गाड़ी. निकली होगी कहीं ना कहीं गाड़ी निकली चलिए. यहां ऑफिस के सामने मान लिया कोई ऑफेंस. हुआ यहां कोई आपने भी नहीं लगाया सामने. वाले ने नहीं लगाया लेकिन आएंगे तो आप इसी. तरफ से या इस तरफ से वहां जरूर मिलेगा. आपको आने जाने के रास्ते पर देखा और पहचान. गए कि साहब ये ये थे ये गाड़ी नंबर था. पकड़ ग.
यह रेट हो गया है सॉल्व करने का 65 टू 70. पर इनका भला हो हर चीज में तारीख का है. जैसे अब आप साइड प चले जाए हाई कोर्ट की. सुप्रीम कोर्ट की अब तो लोअर कोर्ट में हो. गया अभी पिछले साल भर में लोअर कोर्ट्स. में आप अपने मुकदमे की तारीख देख सकते हैं. क्या ऑर्डर हुआ है ये देख सकते हैं नहीं. तो पहले मुंशी जी को बिना 00 रप दिए आपको. ऑर्डर की नकल मिल ही नहीं सकती. थी आपको थाने पर आपकी एफआईआर की कॉपी नहीं.
देते थे वह जब तक 50 रप उनके पास नहीं दे. दीजिए आदमी इसलिए थोड़ी यह करता है शिकायत. करता है आदमी की पीड़ा क्यों होती है जहां. वह ऑफिस में घुस जाए बस यही है लेकिन भला. हो इस टेक्नोलॉजी का इस टेक्निक का मोबाइल. फोन पर. अपनी वह प्रोग्रेस देख लेते हैं दवाइयां. मोबाइल फोन पर मिल जाती हैं आपको दवाई जो. दी गई है व बहुत महंगी तो नहीं दी गई है.
यह भी मिल जाती है तो अब यह धीरे-धीरे इस. टेक्निक का इस्तेमाल पहली बार 90 के दशक. में आप लोगों ने सबसे पहली बार 90 के दशक. में हुआ था नाम था श्री प्रकाश शुक्ला. कारण उसका देखिए ऐसा है उस जमाने में जब. बहुत प्रेशर हुआ और जब यह हल्ला हुआ कि. कल्याण सिंह जी को मारने की सुपारी ले ली. देखिए तब भी हम लोगों ने सुना था लेकिन यह. तब तक नहीं माना गया जब तक अजयराज शर्मा. साहब ने अपनी किताब वाइटिंग द बुलेट में. पूरे प्रकरण का जिक्र नहीं किया कि कैसे.
उनको कल्याण सिंह जी ने बुलाया कैसे वह. रेस्टस होक टहल रहे थे और कैसे उ सच्ची. खबर है सर ये ये जो उस उन्होंने जो लिखा. है क्योंकि श्री प्रकाश शुक्ला को मानने. वाले कई लोग ये कहते हैं कि कल्याण सिंह. जी वाली खबर उड़ाई गई थी इसलिए उड़ाई गई. थी कि मारने की वजह मिल जाएगी वरना श्री. प्रकाश शुक्ला को इतना जोर फोर्स के साथ. नहीं ढूंढते और नहीं खत्म कर नहीं नहीं. ऐसा नहीं है देखिए अजय राज शर्मा साहब. बहुत ही वेल मीनिंग अफसर है. हम दिल्ली के हमारे यहां एडीजी एलो थे.
उसके बाद दिल्ली के पुलिस कमिश्नर हुए. बीएसएफ के डीजी हुए उन उनकी बात पर या. उनकी कही हुई बात पर या उनकी लिखी हुई बात. पर डिसबिलीव करने का कोई आधार नहीं है. उन्होंने पूरा वाकया लिखा मुझे बुलाया गया. मैं सीतापुर के ट्रेनिंग सेंटर में. पोस्टेड था और उन्होंने कहा कि भाई शर्मा. जी मेरे मारने की सुपारी ली गई है वो. लिखते हैं कि हमें यह पूछ भी नहीं पाए. साहब किसने ली है ना हम पूछ सकते थे और.
जैसे उन्होंने बताया कि सुपारी ली गई है. और ऐसा करिए कि एक टीम बनाइए डेडिकेटेड. टीम हो और इस गैंग के खिलाफ काम करना है. उन्होंने कहा ठीक है सर बोले आपको लखनऊ. फिर से पोस्ट करने का आदेश आज हम जारी कर. देंगे ऐसा उन्होंने लिखा है और ऐसा हुआ भी. था क्योंकि हम लोग उस समय पोस्ट ही थे. वहां लखनऊ में वह आए फिर एक जिओ आया और. शायद हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार. एक क्रिमिनल को को डील करने के लिए एक. यूनिट बना. ट इज नोन एज एसटीएफ बाद में विरप के लिए.
भी बनाई गई स्पेशल टास्क बाद में विपन के. लिए भी बनाई गई उसमें कई स्टेट्स के जो जो. अफेक्टेड स्टेट थे उनके सबके अधिकारी. कर्मचारी लेकिन पहली अगर स्पेशल टास्क. फोर्स बनी थी तो वह सिर्फ एक क्रिमिनल के. लिए बनी थी और 6 महीने के लिए बनी थी द. टाइम गिवन वास सिक्स मंथ्स. ओनली कि छ महीने में आप यह काम कर दीजिए. सरकार भी नहीं चाहती थी कि हम किसी को आज. भी नहीं कोई सरकार नहीं चाहती कि किसी एक. यूनिट को हम इतना पावरफुल कर दें कि वो.
मार काट करने लगे तो छ महीने के लिए हमने. बना दिया छ महीने में आप ये काम करिए और. उसके बाद और ये इंडिया में पहला व्यक्ति. श्री प्रकाश शुक्ला थाला पहला व्यक्ति था. जिसको जिसके अकेले के लिए एक यूनिट बनी वो. भी देश के सबसे बड़े राज्य में ना तो इससे. बड़ी पुलिस कहीं है किसी राज्य में और यह. राज्य की ही अगर आप 80 सीट हां 80 सीट है. ना ये राज की सरकार एक्चुअली यूपी से चलती. है चलती है देखिए इसकी जनसंख्या से अगर. देखें तो सिर्फ छह देश ऐसे हैं जो उत्तर.
प्रदेश की जनसंख्या से अधिक हैं देश की. बात मैं कर रहा हूं और ऐसे में एक आदमी के. लिए एक यूनिट बनाई गई अब मैं श्री प्रकाश. प थोड़ा शुरू से चलता हूं सर चलें अ श्री. प्रकाश शुक्ला को बहुत लोग हीरो भी मानते. हैं मानते हैं वो ये कहते हैं कि भैया एक. लड़का था अच्छा खासा पढ़ने लिखने में था. सिस्टम की मार ने उसे अपराधी बना दिया वो. अपराधी पैदा नहीं हुआ था ठीक बात है वो. पढ़ने लिखने वाला था और फिर जैसे एक पीछे. आई थी मिर्जापुर उसमें एक डायलॉग है कि. शुरू मजबूरी में किए थे. हम क्या ये डायलॉग श्री प्रकाश शुक्ला पर.
सटीक बैठता है बिल्कुल सटीक बैठता है 100. फीसद सटीक बैठता है कि शुरू मजबूरी में कि. देख शुरू जब भी किया उसने मजबूरी में किया. लेकिन उसके बाद जिसको कहते हैं मुंह में. खून लगना शुरुआत उसने की देखिए किस तरह. सिस्टमिकली. उसने अपने अपने लिए एक नया अंपायर खड़ा. करने की कोशिश की देखिए उस जमाने में केबल. टीवी हुआ करते थे एक केबल टीवी का ओनर. होता था हर शहर में बड़े शहर में एक से. ज्यादा होते थे दबदबा था वो भी हां बहुत.
बड़ी बात थी किसी को अगर अपना चैनल चलवा. है तो जब तक आप उनको पैसा नहीं देंगे वो. आपका चैनल चाहे जितना बड़ा चैनल हो न्यूज. चैनल व लगेगा नहीं वो नंबर एक पे नहीं. आएगा 50 पे आएगा आप ढूंढते रह जाएंगे इतना. दबदबा था अच्छा साहब उन्होंने कनेक्शन. बांट दिए झोपड़ पट्टी में भी बांट दिए. बहुत खराब जगह जहां अच्छे लोग नहीं रहते. वहां भी बांट दिए अब उनसे 50 00 या 00. महीना जो वसूलना है उसके लिए फिर उनको. गुंडे रखने पड़े जैसे आज की तारीख में ये.
जो इंश्योरेंस कंपनी वाले गाड़ी खिंचवाने. के लिए गुंडों की एक फौज रखते हैं कि भाई. इन्होंने एक किस्ट दी है छह किस्ट नहीं दी. गाड़ी खींच लो अब आपकी पत्नी बैठी है बेटा. बैठी है बेटा सबको मार के बाहर कर देंगे. गाड़ी खींच के अपने यार्ड में खड़ी कर. देंगे ठीक उसी तरह से यह पैसा वसूलने के. लिए यह जो केबल वाले थे इनसे पैसा वसूलने. के लिए लोकल गुंडे तैयार किए गए ये. गोरखपुर की बात है कि साहब इस मोहल्ले का. तुम कलेक्ट करोगे इस मोहल्ले का तुम करोगे. इस मोहल्ले का तुम करो. और जितना कलेक्ट करके लाओगे उसका 25 पर या.
20 पर तुम्हारा जो व्यापारी है उसको तो. पैसे से मतलब है उसका व जो कनेक्शन उसने. दिया है 50 भी देगा तो भी ठीक है 500 देगा. तो भी ठीक है एक बार उन्होंने सेटप लगा. दिया है साल भर में उसका पैसा निकल आना है. तो उसमें इस तरह के गुंडा एलिमेंट को. लगाया गया ज्यादातर यूनिवर्सिटी के लड़के. थे और वो लड़के जो. बहुत हां उत्साही थे दबंग जिसे कहते हैं. दबंग टाइप के. थे उन्होंने मार काट कर शुरू की पैसा दोगे. कैसे नहीं उन्हें पैसा वसूलना था उसमें से.
पैसा निकलना था श्री प्रकाश ने देखा कि यह. काम जो है वह सबसे बढ़िया है एकएक करके. ऐसे आठ वसूली करने वालों को गोली मार दी. उसने मार दिया अपने लौंडो को लगा दिया जो. उसके साथ रहते हैं भैया भैया भैया यहां तो. भैया कहने का चलन है जो भी बड़ा है दबंग. भैया भैया तो भैया भैया वो वाला हमको दे. दो वो वाला हमको दे दो और उसकी छवि ऐसी बन. गई कि अगर किसी को कोई कांट्रैक्ट गोरखपुर. में लेना है या देना है तो बिना श्री.
प्रकाश के नहीं हो सकता क्योंकि देखिए. पूरा का पूरा केबल का व्यवसाय उसने एक बार. में कब्जा कर लिया वो भी छ आठ महीने में. आठ बड़े मर्डर किए उसने. बापरे तो ये ये आप भी जानते होंगे शुरुआत. में आपके यहां भी केबल लगा होगा हमारे. यहां भी लगा था केबिल और वो हर महीने वो आ. जाता था कि भैया 50 हुआ या ₹ जो. भी दिया है सब जगह दिया जाता ये तो भला हो. डीटीएस का कि उसके आने के बाद से ये गांव. गांव की घर-घर की गुंड खत्म हो गई नहीं तो.
ऐसे रोब से कहते थे भाई हम तीन बार आ चुके. हैं पैसा दे. दीजिए यह था आलम उस. समय तो यह जो जो सिस्टमिक वो हुआ गुंडई का. जैसे ये उसकी गुंडे अच्छा इससे पहले जो एक. कहानी आती है कि उसकी बहन जा रही थी. वीरेंद्र शाही किसी आदमी ने छेड़ दिया था. फिर इसने मार दिया वो मर गए गलती से वो. सच्ची है वो भी फर्जी कहानी है देखिए. कहानी तो उसमें एक मर्डर तो तब हुआ था. इसने किया था कि नहीं किया था लेकिन यह इस. घटना के बाद जब पुलिस इसे ढूंढने लगी तो.
यह थाईलैंड भाग गया बैंकॉक भाग गया तो यह. माना गया कि यह उस मर्डर में शामिल था और. काफी दिन बाद वो लौट के आया वहां से तो. इसलिए ये मान के चलते हैं कि इसने ऐसा. किया था इसीलिए भाग गया था वरना वहां. भागने का कोई उस समय कारण नहीं था नहीं तो. वो मजबूरी में हुआ था मर्डर या मजबूरी का. ही मान ले आप हां पहला वाला मर्डर तो अगर. किसी की बहन के साथ कोई छेड़खानी करेगा तो. ये ये होना ही है उसका और खासकर वो जब वो. पहलवानी भी करता है पहलवानी का शौक भी है.
उसको अच्छी बॉडी रखता है और छोटी-मोटी. गुंडई भी कर लेता है तो वह तो मारेगा ही. तो वहां से लौटे वीरेंद्र शाही का दबदबा. चलता है इनको शरण कौन देता है देखिए. क्योंकि बिना शरण के तो यह अकेले वीरेंद्र. शाही के दबदबे की बात मत करिए वो रेलवे का. एक हेड क्वार्टर है गोरखपुर का मुझे ध्यान. नहीं कि नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे का है. नॉर्दर्न रेलवे का एक हेड क्वार्टर है. उसका कैचमेंट एरिया पार्ट ऑफ बिहार और. उत्तर प्रदेश का वह पार्ट है उस जमाने में. भी टेंडर ऑनलाइन हुआ करते थे पेपर टेंडर.
होते थे सूरज भान सिं सूरज भान सिंह तो. पेपर टेंडर आपको टेंडर का फॉर्म ले जाना. है एक उत्तर. प्र रेलवे विभाग की तरफ से एक नोटिस. निकलती थी कि इतने करोड़ का एक टेंडर इसका. फार्म फल इतने 10 से 5 बजे तक फला. कार्यालय में बिकेगा तो साहब लोग खरीद के. ले जाने लगे खरीद के कौन ले जा रहा है. इसको देखने के लिए एक तरफ हरिशंकर तिवारी. एक तरफ वीरें शाही किसका आदमी कौन ले जा. रहा है और जो जो ले जा रहा है उस सबका नाम. नोट किया. गया जब जमा करने की तारीख हुई तो कौन-कौन.
जमा करने आ रहा है अगर वोह उसके मुखालिफ. पार्टी का है रास्ते में मिल गया तो उसका. छीन के टेंडर फॉर्म फाड़ दिया. जाएगा जबरदस्ती करता है या उधर से कहा गया. है कि कैसे भी घुस के जमा कर देना तो गोली. मार दी जाएगी. ठीक सूरज बान भी उसमें एक अच्छा टेंडर इन. चाहे इनको मिले चाहे इनको मिले मिलेगा. इन्हीं दोनों के बीच क्योंकि यही दो. पार्टी थी यही बाहुबली थे यही लोग इकट्ठा. रखते थे यही जो टेंडर आता था उसमें अपने.
लोगों को काम देते थे रेवड़ी की तरह. बांटते थे तुम यह कर लो तुम यह कर लो तुम. वो कर लो वह भी आया उसको यह लगता था और वह. जमाना तब था जब रेलवे मिनिस्टर सब बिहार. के हुआ करते थे आप नीतीश जी को देख लीजिए. पासवान जी को देख लीजिए लालू जी को देख. लीजिए उस समय उस पीरियड में 90 में सारे. रेलवे मिनिस्टर बिहार के हुआ करते इसीलिए. मांगते भी थे वो इसीलिए सूरज भान आते थे. कि भाई देखिए हम हमारा इलाका है काम हमें. कराना है आप यहां से जाकर वहां नहीं कर.
सकते काम काम हमें कराना है इलाका हमारा. है हमें टेंडर मिलना चाहिए लेकिन ये दोनों. लोग हरिशंकर तिवारी के लोग भी और शाही के. लोग भी वीरेंद्र शाही के और हरिशंकर. तिवारी के लोग मार के भगा देते थे अब. दूसरे की जमीन है बहुत कुछ वो कर नहीं. सकता था जब ये तल्खी बहुत ज्यादा बढ़ी. दोनों के बीच में और ऐसा लगा कि वीरेंद्र. शाही का दबदबा बढ़ता जा रहा है तब हरिशंकर. तिवारी ने सूरज भान से कहा कि कि उसको आगे. करके तुम चलो हम देखते हैं कैसे मना करते.
हैं सब अपने अपने दिमाग का खेलते थ तुम. चलो एकाद बार उसने ट्राई किया उसके लोगों. के साथ मारपीट हो. गई फिर उसने कहा कि और आदमी लोकल हमको दे. दीजिए तो हम टेंडर तो डाल ही देंगे और ले. भी. लेंगे तब बताया गया कि श्री प्रकाश एक. लोकल लौंडा है जो इस समय बिल्कुल उरूस पर. है उफान पर है उसको साथ कर देते हैं व काम. करते लाया गया सूरज भान से वहीं मिलवाया.
गया और फिर यह कहा गया कि भाई इनको टेंडर. अबकी बार लेना है टेंडर दिलाओ किसी तरह त. आपने इसका जिक्र किया उरूज प फान पे है. मैं यहां एक छोटा सा क्रॉस क्वेश्चन करता. हूं श्री प्रकाश शुक्ला को लोगों ने देखा. नहीं इतना एक फोटो आती है जिसको भी कहा था. मुंडी उसकी थी नीचे सुनील शेट्टी शायद थे. हां चलता है आपने क्योंकि सामने से मैंने. बनाया था उसको हां एनकाउंटर किया सब कुछ. किया आप लोगों ने सारी चीजें क्या. पर्सनालिटी थी थोड़ा बताइए आप जैसा बता. रहे हैं कि कहा गया हरिशंकर तिवारी तरफ से. कि उरूस पर उफान पर है तो एक होता है ना. कि आदमी की पर्सनालिटी देख के बता लग जाता. है कि देखिए पर्सनालिटी एक तो बहुत.
स्मार्ट था पहली बात श्रीप्रकाश शुक्ला. श्री प्रकाश शुक्ला उसकी बिल्ट बहुत अच्छी. थी जैसे चौड़े कंधे होते हैं उस तरह से. होते हैं और हम लोगों की जो आदत पड़ी है. चिरकुट बदमाशों को देखने की वो उस तरह का. नहीं था जैसे हमेशा जींस की पैंट पहनता था. टीशर्ट ज्यादा पहनता था और कभी-कभी. रेडीमेड शर्ट्स भी पहनता था और सब चीजें. वो ब्रांडेड पहनता था जूते से लेकर और. चश्मे तक सब ब्रांडेड पहनता था तो एक तो. शरीर उसका ठीक था दूसरे वो कपड़ा पपड़ा जब.
पहन लेता था तो वो स्मार्ट लगता था उसका. भी कुछ प्रभाव उसके फॉलोअर्स पे या उसके. गैंग गैंग मेंबर्स पे अभी भी है अब तो. क्या होगा 278 साल जब आप वीडियो बना दीजिए. श्री प्रकाश शुक्ला पे तो एक वर्ग है बड़ा. फेसिनेटिंग सुनता हू आई एम श्यर आपको. गालियां भी पड़ती होंगी हां हां गालियां. भी पड़ती हैं कि आप लेकिन उस लाइन पे. गालियां पड़ती हैं कि आप ब्राह्मण और वो. वही मिला था आपको मारने के लिए अब देखिए. सोसाइटी का जो डिवीजन हुआ है उसका हम. में रहकर कुछ नहीं कर सकते और आप टीवी पर.
बैठक कुछ नहीं कर सकते य सोसाइटी है एक एक. एक डिवीजन है सोसाइटी में वहां उस तरफ. वहां पर हिंदू मुस्लिम ज्यादा नहीं है है. कुछ पॉकेट्स है पूर्वांचल और अवध में हा. हिंदू मुस्लिम बहुत ज्यादा नहीं है. ब्राह्मण ठाकुर का विवाद. ज्यादा और इसी विवाद के जनक ये दो लोग थे. हरिशंकर तिवारी और रें शाही पूरा. पूर्वांचल इसी लाइन पर डिवाइड हो गया था. बिहार का भी कुछ पार्ट और इन दोनों के आपस. के झगड़े से तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर.
बहादुर सिंह साहब इतना परेशान हो गए थे. क्योंकि अब व किसको ना करें किसको हां. करें सब गोरखपुर के ही तो उन्हें गुंडा. एक्ट लाना पड़ा था गुंडा एक्ट उन्हीं का. लाया हुआ है जो आज भी चल रहा है कि भाई. एक्ट के हिसाब से कारवाई करी गुंडा एक्ट. उन्हीं को दोनों लोगों हां एक डेमोक्रेटिक. कारवाई करने के लिए नाम देख के नहीं कर. रहे हैं तो ये. ये वो जो डिवीजन था वो डिवीजन का आधार वो. था अब एक सवाल मेरा यहां था फिर मैं श्री. प्रकाश पर लौटूंगा गोरखपुर की जो यह बेल्ट.
है इसी के अगल बगल मऊ आ गया मुख्तार. अंसारी निकल गए बाकी और धनंजय सिंह या ये. सिंह वो सिंह ये सब भी फैजाबाद और उसके. आसपास आ गए जनपुर आ गए और भी आए कृष्णानंद. राय के साथ कई लोग और थे जिनका जिक्र आ. इसी बिल्ट में ये सारे माफिया कहे निकले. देखिए यह बिल्ट जो मेरी समझ है यह बहुत. उपेक्षित बिल्ट आप बजेश सि. बि बजेश सि बश सि भी मुखर की का जो झगड़ा.
है वो भी बिल्कुल वर्टिकल डिवीजन वाली. लाइन का है यही यही इसी बेल्ड के आसपास तो. इस बेल्ड सेय चार पांच बड़े-बड़े जो. बाहुबली निकले देखिए एक तो यहां पर जो. खेती है वह उतनी उन्नत नहीं है जो प्रदेश. के पश्चिमी भाग में है ठीक खेत की जोत कम. हो गई है बड़े परिवार हो गए छोटे-छोटे. वो हो गए छोटी-छोटी कास्ट हो गई उनके पास. बहुत. ज्यादा जमीन रह गई कि वो लंबी-लंबी फसल. एक-एक बार से ले सके थोड़े लोगों को छोड़.
के य लगभग लगभग वहां पर और उतना विकास. नहीं हुआ कि लोगों की ये समझ में आया कि. पढ़ाई मेरे लिए जरूरी है भाई अगर हम ये. कहते हैं कि उस इलाके में छह आठ बड़ी-बड़ी. मिल होती हम तो जो ये तमंचा लगा के घूम. रहे हैं इनके घर वाले कहते कि जाओ नौकरी. करो हम लेकिन नहीं था ऐसा कुछ और फिर एक. दूसरे को देख के फेसिनेट करते गए हां. फैसटिकट. सब में सबसे पहला नाम श्री प्रकाश शुक्ला. का था हां मतलब बृजेश वीरेंद्र साही और.
आपके हरिशंकर तिवारी जी के वर्चस की लड़ाई. और इसमें पहला बड़ा अपराधी पहला बड़ा. अपराधी जो कूदा सूरज भान की तरफ से. हरिशंकर तिवारी की तरफ से वो श्री प्रकाश. शुक्ला और इस टाइम मुख्तार और इन लोग का. तना दबदबा ये इन लोगों का सब देखिए. मुख्तार की फील्ड थी कल फील्ड कोयले का. चंदौसी की मंडी है ये लेटर ऑन शायद ये ये. सब सब नहीं ये लोग अपना काम करते रहे ये. अपना अपना अपना काम करते रहे इनका देखिए. मुख्तार का झगड़ा. बृजेश सिंह के गैंग से कौन ठेका वहां पर.
कोयले का ले रहा है इसको नहीं मिलेगा उसको. मिलेगा बड़ा भारी काम था उस समय कोयले का. पास में सब नेशनल कोल फील्ड की ओपन कोल. फीड थी सोनभद्र में आएंगे उधर आए तो वो. कोयले प थेय रेलवे वाले य रेलवे वाले ठीक. है अब मुक्ता इनको हरिशंकर तिवारी ने. प्रपोज कर दिया सूरज भान सिं इस लड़के से. मि जी अब उन्होंने शुरू किया पहली बार. सूरज भान के पास एक 47 देखी श्री प्रकाश. वो असलह का बड़ा शौकीन था 45 की पिस्टल.
उसके पास थी 9 एएम की थी महंगी ब्रांड वो. ढूंढ के जिसके पास भी हो गोली मार के छीन. लिया करता था तो उसने कहा दादा एक एक 47. दो एक 47 लेके आ आता था वो जो काफिला आता. था उसका दो एक 47 तो उन्होने कहा दादा एक. एक 47 हमको दे दीजिए तो उसने छूटते ही कहा. कि दो दूंगा शाही को मार. दो दो एक 47 दूंगा शाही को मार दो उसने. कहा ठीक है दादा ट्राई करते हैं लेकिन.
हमारे साथ रहिए चलाएंगे हम तय हो गया सब. गोल मार्केट में ये जाते हुए ये भी देखिए. कितनी फिल्मी फेसिनेटिंग कहानिया है 47. चाहिए तू मार दे हां उन्होने कहा ठीक है. बू हा हमें बंदूक चाहिए फिर गोल मार्केट. या जो भी नाम है उसका वहां का जो सेंट्रल. लोकेशन है गोरखपुर की वहां भेंट हो गई. इनसे एक 47 से बस निकली इनका गनर मारा गया. यह भी चटक थे इन्होंने सिर जो है सीट के. नीचे रख दि दिया पैर का हिस्सा ऊपर कर. दिया गोलियां सब पैर पे जांग पे लगी बच गए.
बच गए तो इसने कहा कि दादा देखिए काम हमने. पूरा किया बच गया उसका मुकद्दर था. उन्होंने कहा नहीं उन्होंने कहा इसको दे. दीजिए तब जाइए मुकाम उन्होंने कहा नहीं. नहीं मार दोगे दो दूंगा अच्छा वो भी वो भी. हां सूरज भान देखिए वो बड़ा एक तो आप कभी. बात करिए तो इतना नम्रता से इतना अच्छे से. वो आदमी बात करता है कि आपको एक बार लगेगा. कि यार ये इसके लिए लोग क्यों गलत कहते. हैं लेकिन अब तो.
कंविद के लिए मुझे लग रहा था मैंने एक. उनका शो देखा मैं तो बड़ा शरीफ सा आदमी. हूं जी मुझे क्या पता क्यों होता है मेरे. साथ-साथ मैं तो कुछ नहीं करता हथियार तो. पुछत नहीं मेरे घर पे है ये ऐसा है मुझे. लगा या कितना शरीफ आदमी आप उससे भी बात. करें सूरज भान से वो तो उससे ये तो लॉरेंस. का इंटरव्यू दे के हमको लग रहा था इससे. शरीफ तो लड़का ही नहीं शरीफ कोई नहीं है. सब ऐसे ही करते हैं आपने मुख्तार से कभी. बात नहीं की आप मुख्तार से बात करते अरे. साहब क्या चीनी उसके जेवा पे है और क्या.
उर्दू शब्दों के साथ वो ऐसा बोलेगा कि. लगेगा भाई सटी कोई आदमी नहीं है सब बोलने. की कला में सब माहिर हैं बुलवा लीजिए इनसे. जिसके सामने चाहिए उनके सामने बुलवा. लीजिए इतने माहिर हैं ये तो सूरज भान ने. कहा कि नहीं हम दोनों दे देंगे यह काम तुम. कर दो यह बहुत जरूरी है नहीं तो हम यहां. घुस नहीं पा रहे हैं ये यहां इस समय 20. पड़ रहा है और हम घुस नहीं पा रहे हैं यह. हमारे लिए दिक्कत है तो उसने कहा ठीक है. बार देखते हैं तब से उसने वीरेंद्र शाही.
का पीछा करना शुरू किया कि हम मारेंगे हम. मारेंगे हम मारेंगे एक वाकया उसका हम और. बताए वह वहां से ट्रेन से चला लखनऊ के लिए. विधायक रहा था तमाम काम उसके यहां पड़ते. थे पब्लिक का काम लेकर आना था तो ठीक है. वह वहां से. चला उस ट्रेन में इन्होंने. दूसरे डिब्बे में अपने चार छह आदमी बिठा. दिए कि जहां मौका मिलेगा इसको मार देंगे. वह बीच में कहीं पर उतर गया तीन आदमियों. के.
साथ अब पूरा खाली गाड़ी वहां से यहां तक. चली आई और जो लोग गाड़ी में बैठे थे वो. डिब्बों में स्टेशन में उतर गए दूसरे. देखते रहे तो कहा साहब ये तो कहीं उतर गया. पता करते करते पता लगा कि वहां उतरा है. अंदाज जब लगा है कि वहां उतरा है तो वहां. किसी लोकल लड़के से कह कि गाड़ी से इसका. पीछा कराया गया ये आया और जो वो है. वीवीआईपी गेस्ट हाउस है उसमें जो ढलान पे. है एक पहले का राज्य अतिथि के लिए उसमें.
घुस गया. भीतर ये वहां से भागते हुए आए तीनों. मारुती कार थी इनके पास ये ऊपर एक गुलमोहर. का पेड़ है उसी के नीचे गाड़ी खड़ी कर दी. और वहां से सीधे उसका गेस्ट हाउस का गेट. दिखाई पड़ता है अतिथि ग्री का गेट दिखाई. पड़ता है कि जब भी ये बाहर निकलेगा हम एक. के उनके पास थे आएगा तो हम मार. लेंगे पिस्ट स्टेन थी उसके पास उस समय एकए. के लिए ही तो परेशान था वो एक स्टन थी 9. एए की पिस्टल थी एक 45 की पिस्टल लगता था.
एक बंदूक केलिए हु हा तो वो वहां से आएंगे. उसकी तबीयत खराब हो गई वह दिन भर निकला ही. नहीं यह दिन भर उसी गाड़ी में बैठे रहे इस. बीच में सुधीर को नेचुरल कॉल होती है कि. मैं दो मिनट हो उन करनाना खाली बोतल जो. बिसलेरी के है इसी में बाहर कोई नहीं. निकलेगा बड़ा मतलब आप उसका देखिए जैसे अगर. गाड़ी से कहीं जा रहा है तो गाड़ी में.
बैठे हुए आपको पान मसाले को थूकना नहीं है. दरवाजा खोल के सबकी आदत है मैं भी जैसे ता. हूं तो दरवाजा खोल के आदमी कहां करेगा. थूकना है तो वह कहता है कि आप निकल जाइए. बाहर कोई मुंडी नहीं. निकालेगा पीछे पता नहीं कौन पीछा कर रहा. है वय देख ले कि पिछली सीट पर तुम बैठे हो. कि यह बैठे हैं इसलिए सिर नहीं निकालना है. और आजीवन अपने किसी भी मेंबर को उसने चलती. हुई गाड़ी में से नहीं निकालने.
दिया तो देखो बहुत पढ़ा लिखा तो नहीं था. ऐसा नहीं था कि बहुत पढ़ा लिखा हो लेकिन. जो एक उसका और हम बताए हम यह जब फोटो वाली. बात हुई. हम जिसका जिक्र आपने किया तो फोटो बनी. उसमें नीचे सुनील शेट्टी की थी ऊपर उसकी. फोटो थी ये सच्ची कहानी है एकदम सच्ची. कहानी मेरी की हुई है मैंने किया था उसको. श लगा द. थ ऐसा हुआ कि एक लॉटरी व्यवसाई थे विवेक. श्रीवास्तव.
उनका लाटूश रोड पर दिन धड़े मर्डर हुआ 50. 60 गोलियां मारी इसने तो अब देखिए उस समय. तो मोबाइल के सीडीआर वैसे नहीं मिलते थे. मुखबिर से ही सूचना आती थी बिल्कुल जैसे. वो कहते ट्रांजीशन फेज था कि सीडीआर. निकलना शुरू हुई लेकिन पढ़ना किसी को नहीं. आता था कि कौन सा आउट गोइंग है कौन सा. इनकमिंग है क्या लोकेशन है इसकी वो सब. चीजें उसमें नहीं आती थी वो बिजनेस पर्पस. से था कि एक मिनट बात हुई है तो आपको. उस समय ₹ आउट गोइंग थी पर मिनट और र पर.
मिनट इनकमिंग थी यह चार्जेस थे मोबाइल के. जब मोबाइल शुरू हुआ था याद है मुझे ठीक है. बहुत छोटे हम लोग थे हा तो. उसने मुखबीर ने यह बताया कि साहब इसका एक. बनोई यहां रहता है उसने श्री प्रकाश को यह. कहा था कि विवेक श्रीवास्तव से कह दे तो. एक पर्टिकुलर एरिया में लॉटरी लगाने का. मतलब वो एरिया उसको आबंटित कर दें कि हम. वहां वाला लॉटरी काम उस समय लॉटरी बिल्कुल. एकदम शबाब पे थी हम हम पूरे प्रदेश में.
लॉटरी लॉटरी लड़के बर्बाद हो रहे थे उने. कहा साब तो इसने कहा हम भाई उनको क्यों दे. दें हम किसी को क्यों दे दें हमारे आदमी. काम कर रहे हैं वही काम करेंगे दो बार. शायद कहा उसने नहीं माना तो लाटू शूट प. उसे गोली मार दी गी तो बातचीत में किसी. कांटेक्ट ने बताया कि साहब इसका एक बहनोई. है आप लोग वहां देखिए आखिर लखनऊ आता है तो. कहां रुकता है वो होटल में रुकेगा नहीं वो. तो आप वहां देखिए कि हो सकता है उनके यहां. मिल जाए चार से 10 दिन बाद फिर हल्ला हुआ. मुखबीर लोग बताते थे जो कांटेक्ट के लोग. साहब आज लखनऊ में देखा गया है व तो यह हुआ.
कि आज सबसे पहले इसके बनोई के यहां देखते. हैं प्रेशर भी बहुत था अखबारों में निकलता. था कि नाकाम अधिकारियों की फौज है यह कुछ. नहीं कर पाएगी अखबारों में निकलता था कि. इतने दिन हो गए अभी तक इनको इनके पास फोटो. ही नहीं है यह क्या मारेंगे या ये क्या. पकड़ेंगे तो साहब वो हम सब लोग अरुनकुमार. साहब थे मैं था सब लोग उसके बनोई के यहां. गए बालू अड्डा एक जगह है हजरतगंज में कोने. की तरफ घर गए घेरा गया चढ़े ऊपर उसके बहन.
बहनोई से पहले तस्दीक की यही लोग हैं उ क. हा साहब यही है बातचीत की उसने उसे पूछा. गया कि तुम ही लॉटरी का काम करते हो. तुम्हारे लिए ही विवेक श्रीवास्तव को मारा. गया तो चुप हो गया इसका मतलब आदमी सही था. जहा हम लोग पहुंचे थे तो उससे पूछा कि भाई. यहां कब कब आया था आज आया था क्या आज नहीं. आया था कब आया था बोले साहब यहां दो साल. पहले एक बार आया था यह कहक उनके पति पत्नी. बहन बहन हुई वो टालने लगे तो अब चूंकि. एसटीएफ की पूरी टीम थी साथ में सिपाही भी.
थे एक दो थप्पड़ किसी ने मार भी दिया होगा. कि सही बताओ झूठ मत बताओ नहीं नुकसान होगा. तुम्हारा इसी बीच में जब थप्पड़ पपड़ पड़ा. वह चिल्लाने लगी उसकी मां तो बगल वाले. कमरे में उसकी दो बच्चियां थी एक हमारे ल. से 1415 साल की होगी एक 78 साल की होगी यह. दोनों रोने लगी तो हम में से कुछ लोग गए. बेटा काहे रो रहे हो बोले आप लोग जो है. मम्मी पापा को मार रहे हैं तो उन्होने कहा. नहीं नहीं मार नहीं रहे हैं पूछ रहे हैं. कि मामा यहां कब आए थे आज आए थे क्या.
उन्होने क मामा आज नहीं आए थे छ महीने. पहले मेरी बर्थडे पर आए थे तो उन्होंने. कहा फोटो भी होगी बोले हा अंकल फोटो है. हमारे पास उसने किताब में से निकाल के चार. पांच फोटो दी बताया कि देखिए यह हमारी. मौसी है य मामी है मामा और यह मामा है तो. बांछें खिल गई हम लोग इतने आरोप लगे थे. समय इतनी पेपर कटिंग मेरे पास आज भी है कि. साहब ये कुछ नहीं कर पाएंगे य तो. रिजेक्टेड जिलों के रिजेक्टेड. एसटीएफ में गए हैं ये क्या कर पाएंगे तो. खैर सब लोग आ गए फोटो मिल गई फो मेरे मन.
में सवाल आ रहा आप स्कूल में एडमिशन लिए. होंगे घर में फोटो खिंचवा जाती है कॉलेज. में वो लड़का पढ़ा तब तक तो शरीफ लड़का था. हा यहां तक एक भी फोटो नहीं मिली आप लोग. इसकी देखिए फोटो के बारे में वो इतना. सेंसिटिव था हा कि उसने कह दिया कि अगर. किसी ने फोटो हमारी दे दी तो मैं मुझसे. मार डालूंगा और एक फोटोग्राफर को उसने वही. गोल बाजार या गोल मार्केट पास गोली मार दी. मर गया वो. हुआ यह था कि वह किसी फंक्शन में उस समय.
वह बड़े वाले वो वीडियो चलते थे शादी. ब्याह में वही आदमी अपना रिकॉर्ड कराता था. किसी फंक्शन में यह गया हुआ था वह. वीडियोग्राफी उस फोटोग्राफर ने की. थी तो पुलिस पर भी बहुत दबाव था हम लोग भी. गोरखपुर से ही मांगती तो भाई यहां तो उसका. कुछ था नहीं कि यहां हम घर-घर छाने उसकी. कि भाई उसके घर जाओ भाई के पास जाओ बहन के. पास जाओ कहीं ना कहीं तो मिलेगी यह लोग सब. जगह छान आए थे कहीं मिली नहीं थी गलती से. उसी में से कोई सब इंस्पेक्टर या सिपाही. उस दुकान प च चला गया कि फला आदमी के यहां. तिलक था उसमें ये आया था वो उतना निकाल के.
उसको स्टील करके एक फोटो दे दो यार बड़ा. दबाव है उसने कहा अच्छा हम देखेंगे पहले. ढूंढेंगे तो हम फिर बताएंगे यह बात उसको. पता लग गई किसी तरह शाम को 4:00 बजे उसने. दुकान से खींचा और गोली मार दी सड़क प और. कहा कि और दे फोटो पुलिस वालों को फिर ऐसी. दहशत हो गई कि उसकी फोटो देने की मतलब अगर. किसी के पास है भी और जरूर होगी सबके पास. होगी जो. जिसके अगल बगल रहा होगा बड़ा होगा तो सबने.
मना कर दिया जब उस लड़की ने फोटो दे दी तो. इसी बीच में उनके मां बाप भी आ गए पैर. पकड़ लिया उन्होने कहा साब वो कल तक परसों. तक मार. देगा तो यह हुआ कि भाई तुम्हारा सगा साला. है तुमको मार देगा तुम्हारा भाई है कैसे. मार देगा बोले साहब उसके लिए कोई साला. बहनोई नहीं वह जरूर मार. देगा तो अरुण कुमार साहब फिर वहां से लेकर. हम लोग चले तो रास्ते में उन्होने कहा राश. ऐसा करो कि कुछ ऐसा करो कि ये.
आइडेंटिफिकेशन. बुक डिपो है और उसके बगल में कैफे कॉफी डे. है और फिर वो रास्ता अपने आप मुड़ जा जाता. है तो उस कॉर्नर में खंभे पर तार लगा के. उसी में उस जमाने में हीरो हीरोइन की फोटो.
लगाई जाती थी पोस्ट कार्ड वाली हम लड़के. जो है उसमें पा पांच पैसे का या 10 पैसे. का स्टैंप लगा के विशेष अपना भेजा करते थे. तो एक लाइन से उसने सबकी तो वो फोटो हमने. देखी तो हमने कहा ये किसम फिट होगी अब. चांस की बात थी कि सुनील शेट्टी भी उसी. तरफ देख रहा था और इसमें भी हमने कहा ये. काम हो सकता है सुनील शेट्टी की फोटो मुझे. ध्यान है उस समय रप की उसने हमें वो पोस्ट. काड दिया था पैसा दिया इस आप लोग पैसा.
देते थे उस टाइम अरे बिल्कुल पैसा देते. कोई हम वर्दी में थोड़ी रहते थे कि वो. नहीं. मांगेगा या हम हा मतलब एसटीएफ से पैसा. मांगेगा हां नहीं नहीं तो हम लोग उसको. क्या पता ये कौन है सादे में जैसे एसटीएफ. में तो हम कभी वर्दी में नहीं रहे हम तो. सादे में रहते थे र दिया गया और हम चाहते. नहीं थे कि हम आइडेंटिफिकेशन. इनका भी सिर निकाल के उसको आप देखिए वही. एक फोटो निकली थी आज भी वो मिसमैच है हम.
वो अगर आप देखें तो उसका कॉलर डेनिम का है. ये कॉलर इधर है यही वाली फोटो हां यही. वाली नहीं नहीं और भी फोटो हैं इसमें. देखिए ये तो पूरी नहीं है और और भी बहुत. ढेर सारी फोट देख तो वो इतना जो हिस्सा है. ना वो डिसलोकेटेड है तो लगा के सफेद कागज. चिपका काम तो चल जाएगा अमर फैक्स वहीं ठीक. थाने के बगल में है कलर्ड प्रिंटर उसी के. पास था उस समय लखनऊ में नहीं था किसी के. पास बंडी भाई के पास गए हमने कहा बंटी भाई. इसकी फोटो निकल जाएगी अरे बिल्कुल निकल. जाएगी तो कहने लगी ये कटा पिटा का है हमने.
कहा वो अपने वाले आदमी से कह दो जो. कंप्यूटर प थोड़ा इसको हल्का सा ऐसा करते. कि बोले हो जाएगी अच्छा ना उसने पूछा. किसकी है ना हमने बताया मित्र आदमी था वो. 50 फोटो उसने निकाल द कितने हमने कहा 50. दो 50 उने निकाल मैं दौड़ते भागते अरुण. कुमा साहब केने साब ये लीजिए फोटो क बड़ी. गजब बनी है फोटो ये तो तो प्रेस बुलाई की. तुरंत शाम को और प्रेस में बोले आप लोग. चिल्ला रहे लीजिए फोटो ये फोटो मिल गई है.
और अगले दिन देश के सारे अखबारों में छपी. वही फोटो सारे टीवी चैनल्स पर छपी वही. फोटो सुनील शेट्टी का असली में पता तो हाथ. पाव फूल जाते हां तो वो वो छपी वहां पर. फोटो किसी ने इसको फोन करके बताया कि भैया. आपकी फोटो बोले सवाल ही नहीं है मेरी फोटो. इनको मिलेगी नहीं कहीं से कहां से मिल. जाएगी तो उसने कहा नहीं कि भैया फोटो तो. आप ही के है पूछा उन्होंने क्या पहने. उसमें उन्होने कहा भैया उसमें डेनिम की. शर्ट क या तुम मूर्ख आदमी किसी और की फोटो. डीम की शर्ट मैंने आज तक पहनी ही नहीं कभी.
मैं टीशर्ट पहनता हूं फिर भी ऐसा करो. कटिंग काट के और फला आदमी को दे आओ वह कल. तक हमारे पास पहुंच जाएगी सवेरे देखा तो. वह भी हैरत में पड़ गया कि फोटो तो हमारी. ही है लेकिन यह क्या हुआ है इसमें देखिए. उस समय तक ये फोटोशॉप इन सबका कोई जब. मोबाइल ही नहीं था जब आपका एंड्राइड ओएस. नहीं था तो उस समय इसका कांसेप्ट नहीं था. या लोग दिमाग वहां तक नहीं चलाते थे कि यह. ऐसा भी हो सकता है तो वह मरते समय तक वह.
इसी चक्कर में रहाय फोटो कहां से मिली है. नहीं पता लगा उसको और वही एकलौती अब तो. बहुत से लोगों ने कोई उसके घर से बचपन की. फोटो निकाल रया है यही एक फोटो तब से लेकर. आज तक इंटरनेट पे है शिव प्रकाश की गजब. कहानी इसकी है अब यहां पर हम वापस लौटते. हैं वीरेंद्र शाही पे वीरेंद्र शाही पर. पहली बार अटैक व बच गए मैंने सुना दूसरी. बार भी शायद बच गए थे तीसरी बार में शादी. हां दूसरी बार तो उस तरह का अटैक नहीं था. पहली बार जब अटैक हुआ था तो उसमें उनके. गनर की भी मृत्यु हो गई थी हम और यह बच गए. थे इन्हे दो तीन गोलियां लगी थी फिर उसके.
बाद जब इससे बात ये धमका आता था फोन करके. इसकी दो आदतें हैं एक तो किसी को भी फोन. कर ले खुद खुद खुद करता था य किसी तीन ही. लोग थे खुद टेलीफोन पर बात करता था धमका. था और दूसरा कुंडली निकालना एक वो कुंडली. निकलवा आता था जो आप होता है ना कि किसी. आदमी की रैकी आप इंगश हां रिसर्च करना उस. आदमी की कुंडली निकालो इसकी अच्छी अच्छी. कुंडली निकालना किसी ने अच्छी कुंडली. निकाली फला आदमी के पास चले जाओ 000 ले. लेना उससे तेल पानी का काम हो गया लड़के.
वहां पढ़ रहे हैं गोरखपुर के उनका इसी में. वो खुश हो जाते थे तो एक ये कुंडली. निकालना दूसरा फोन करना किसी को भी फोन कर. देना तो यह फोन पर कहता था तब उसने यह कहा. था कि हम तुमको होली से पहले मार. देंगे पहले भी कहा होगा कि नए साल से पहले. मार देंगे लेकिन नहीं हो पाया उसने कहा था. होली से पहले मार देंगे तो बहुत जोर से. हसा इस बात को उसने अपनी फैमिली में बताया. थे कि साला फिर फोन किया था और क रहा था.
होली से पहले मार देंगे उने कहा अरे साहब. कहते रहते हैं लोग ये कौन सी बात हुई 30. मार्च की बात है ये. 98 30 मार्च को स्प्रिंग डेल स्कूल था. इंदिरानगर में उसका रिजल्ट डे था रिजल्ट. डे उस दिन बहुत छोटे बच्चों का स्कूल है. बच्चे अपना रिपोर्ट कार्ड लेने आए थे साथ. में मदर या फादर या दोनों तो आप ये समझिए. करीब 3400 लोग वहां पर उस स्कूल के सामने. थे. इसने भी आदमी लगा रखे थे वहां पर उनकी एक.
महिला मित्र थी जिनसे वह मिलने कभी-कभी. आते थे गाड़ी 1 किलोमीटर दूर खड़ी करके. ड्राइवर और गनर को वहीं से भेज देते थे व. अपना दाहिने बाए से होके उनके यहां पहुंच. जाते थे सवेरे गाड़ी वहीं मंगवा लेते हैं. और फिर वह उसी से चले जाते. थे तो यह वहीं पर जमे रहे गेट के ठीक. सामने कि अगर वापस जाएंगे गाड़ी खड़ी होगी. तो दिखाई पड़ जाएगा निकलेंगे यहां से तो. दिखाई पड़ जाएगी लेकिन मारेंगे आज इतनी. देर में वह उनकी महिला मित्र एक छोटा.
बच्चा यह तीनों लोग अपने घर से निकले और. स्कूल के उस तरफ एक कोई नया मकान उसको. खरीद के देना था उस मकान को देखने के लिए. जा रहे थे यह तीनों उसी अभिभावकों की भीड़. में खड़े हो गए इन्होंने देखा आ रहा है. जैसे ही वह एक कदम आगे निकला सटा के उसे. पिस्टल से गोली मार द अति अशरफ टाइप हां. सटाक एकदम म धे मु गिर गया उसके बाद फिर. वो. सिर पर पांच छ और मारी फिर मैगजीन बदली. फिर स्टेन निकाली फिर पैर से उसको सीधा.
किया बोले साला बहुत खराब नजर से देखता था. पांच गोलियां इसमें पांच गोलिया आंखों में. फिर कंफ्यूज हो गया कि यार ये इसका वो. हार्ट किधर है तो पांच गोली इधर पांच गोली. इधर दोनों तरफ मारी और जब तक पूरी मैगजीन. मतलब जसे पागलों की तरह और यह पूरा वाकया. 500 आदमी जिसमें दो 250 बच्चे वो देख रहे. हैं दिन में 11 बजे की बात. आप दहशत का आलम और जब उनको यह पता कि. वीरें शाही था जो पहले तो उनको लगा कि एक.
बदमाश है किसी को गोली मारे हैं शाम होते. होते सब जगह आ गया कि साब तो वीरें शाही. को गोली मार दी उनकी हत्या हो गई एंट्री. एग्जिट मिला के 110 अर्चर थे उनकी बॉडी. में इस कदर वह अब फिर दहशत हो गई एक बार. जब किसी ने वीरेंद्र शाही को मार दिया तो. फिर यह लगता है कि अब कोई सेफ नहीं है. बापरे यह हुआ. था यहां से फिर फिर यहां से वो चैप्टर. अपना मैंने एक और किस्सा सुना था कभी.
पुलिस ने भी उसे पकड़ा तो उसने गाड़ी का. शीशा खोला और यहां पर गाड़ी में एक 47 पड़. हां हां ऐसा है लोग ढूंढ तो रहे ही थे. लेकिन वही है कि मैनुअल इनपुट पर उसको. ढूंढा जाता था किसी ने बताया कि सबब इस. तरह की गाड़ी है घूमती बैराज प य गाड़ी एक. हमारे एसओ थे उन्होंने सब जगह चेकिंग लगा. दी जाती थी वो गाड़ी रोकी गई और कलर उसका. जो बताया गया था शायद गाड़ी का कलर वही था. लेकिन नंबर डिफरेंट था तो उसने कहा वो. नीचे करो शीशा नीचे करो शीशा नीचे करो तो.
जब उसने जब उसने शीशा नीचे कर लिया और फिर. तब तक वो बगल में यहां रखा हुआ था उसको बस. ऐसे उठाया कि बस वो दरोगा जी अबाउट टन. क्विक. मार्च हां आप जिंदगी प्यारी हर हां हां. सबको प्यारी है निकल गया हल्ला मच गया. क्योंकि और पुलिस वाले थे वहां पर पब्लिक. के लोग थे जिसकी गाड़ी रोकी गई थी उसके. पेपर चेक किए जा रहे थे सभी लोग थे वहां. पर तो हल्ला मच गया कि साहब दरोगा जी भाग. गए वहां से गर्लफ्रेंड के चक्कर में उसकी. डेथ हुई हां देखिए ऐसा है ना लड़कियां.
उसकी बहुत बड़ी कमजोरी थी और लड़कियों के. चक्कर में देखिए वो हमेशा तीन से अधिक कभी. उसके गैंग में लोग नहीं रहे तीन ही मेंबर. हमेशा रखता था पहले आनंद पांडे सुधीर. त्रिपाठी श्री प्रकाश फिर आनंद पांडे से. इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ ये लोग नेपाल. हां ये लोग नेपाल में थे तो पीसीओ से बात. करने जाते. थे शि प्रकाश निकला पीसीओ से बात किया और. उसके बाद फिर वापस आ गया होटल के कमरे में.
उसके बाद आनंद आए पहले यह होता था कि. पीसीओ पर आप जिस फोन से बात करेंगे पीसीओ. वाला वह नंबर नोट करेगा और 90 पर केसेस. में वो मिला के देता था कि आप पता नहीं. कहां मिला ले कितना याद है तो वो आप. रजिस्टर मेंटेन करता था वो मिलाता था और. जो नंबर उसने मिलाया है वो लिखता था और. फिर उसके बाद उसका कितना चार्ज हुआ ₹10 ₹. ये लिखता था सो दैट कि लड़का बैठा है तो. अपने बाप को बताना है तो मेंटेन करते थे. दूसरा इसलिए भी कि इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी.
के पास इसके सिवा दूसरा कोई चारा नहीं था. अगर फोन आया लोकेट हुआ कि पीसीओ से हुआ है. तो कौन आया था क्या हुलिया था कहां बात की. किस नंबर पर बात की इसलिए वह लिख के रखते. थे पुलिस तंग करती. थी तो जैसे ही आनंद वहां पहुंचा तो उसने. देखा कि यार ये मेरे घर का नंबर लैंडलाइन. नंबर ये कौन मिला के चला. गया तो बदमाश आदमी तो नेगेटिव पॉजिटिव सब. सोचता है ना कि ऐसा तो नहीं कोई मेरे घर. की मुखबिरी कर रहा हो तो उसने उससे पूछा.
कि बताओ ये नंबर कौन बोले भैया एक सज्जन. अभी आए थे वही मिला के गए हैं क्या उनकी. हुलिया थी तो जब उसने हुलिया बताई सब तो. इसको समझ में आ गया कि श्री प्रकाश था. लेकिन यह परेशान हुआ कि मेरे घर क्यों फोन. करेगा ये मेरे घर कैसे किया उसने तीन चार. दिन बाद फिर श्री प्रकाश पहले. निकला इसने पीछा कर लिया और यह कह के. निकला जा रहा हूं जरा जरूरी बात करनी है. घर में भाई साहब से बताना है ये वो कह के. अपना गया वहां फिर इसने वही नंबर मिला. दिया दूसरे पीसीओ प और जैसे ही वह निकला.
वैसे ही यह पीछे पीछे पहुंच गया देखा उसी. नंबर पर बात हुई आग बबूला हो गया घर के उस. नंबर पर नंबर मिलाया मां से बात की सबसे. बात की और यह उसने वर्कआउट कर लिया कि. उसकी बहन से इसकी बात हो रही. है फिर वह तुरंत वापस लौट के गया अपना. सामान पैक किया सुधीर ने कहा भैया क्या. बात हुई भया क्या बात कुछ नहीं हम चल रहे. हैं समझ तो ये भी गया कि क्या बात है वहां. से ये सीधे सूरज भान के पास आया और उसने. कहा कि भैया देखिए यह हुआ है 24 घंटे हम.
साथ रहते हैं इनके हर अच्छे बुरे में साथ. रहते हैं और यह मेरे घर में ही सेंध लगा. दिया इन्होंने और ये ये वाकया है बैठ गया. उन्होंने कहा साब ऐसा है कि जितना सब. लोगों के पास जितने हथियार थे यहीं पर. उसको बांट दीजिए. आप कौन हमको ले जाना है कौन इनको ले जाना. है य आप बांट दीजिए अब हम इनके साथ रह ही. नहीं सकते जा ही नहीं सकते उसी में दो एक. 47 का बंटवारा हुआ था एक उसको मिली थी एक. शी प्रकाश को मिली थी कारतूस वो सब दोनों. लोगों को अलग-अलग बैक किया गया सूरज भान. ने समझाया कि तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए.
था यह कौन सी बात हुई बरल व अलग हो गया. उसे उसने सबसे बड़ी किडनैपिंग उस समय की. कि पहले हम इकोनॉमिकली क्योंकि पैसा तो सब. वही ले जाता था गैंग लीडर वही था कभी कोई. क्वेश्चन भी नहीं करता था जो पैसा मांगते. थे इन लोगों को मिल जाता था घर के खर्च के. लिए. तो उसने एक सबसे बड़ी किडनैपिंग की आनंद. ने. अकेले जो वृंदावन बटलर नॉर्थ इंडिया के. सबसे बड़े कोक और उसके बॉटलिंग प्लांट लढा.
उनका लड़का नया नया कनाडा से पढ़ के आया. था विवेक लढ़ाई उसका नाम था और महानगर में. इन लोगों का सेंट्रल ऑफिस है आज भी उनसे. बड़ा बॉटलर कोई नहीं है कोक का और इसका. नॉर्थ इंडिया में वह ऑफिस में बैठा हुआ था. आनंद पांडे गया दो तीन लड़के इसके जो इसके. पुराने सहयोगी थे गोरखपुर के उनको लिया और. गाड़ी में बिठाया किडनैप कर लिया ले जाके. दिल्ली में रखा और फिर उसके बाद डील की और.
हमारे ख्याल से ढाई करोड़ रुपए में उस. जमाने में उस जमाने में ढाई करोड़ उसको. मिल गया तब उसको छोड़ दिया. उसने लढा निस की किडनैपिंग बड़ी किडनैपिंग. थी व्यापारियों की आप समझ लो व्यापारी. बहुत बड़ा प्रेशर ग्रुप है किसी भी. एडमिनिस्ट्रेशन या किसी भी पॉलिटिकल. पार्टी के लिए सरकार को पैसा देते हैं उ. हर पॉलिटिकल पार्टी को तो तो इतना प्रेशर. था उसके लिए तो यह हुआ कि अच्छा ठीक है. पता करेंगे पता करेंगे नंबर ट्रक किए गए. उस लड़के से बात करनी वो तो किसी कीमत में. जो छूट के आता था वह तो कभी एक लाइन बताता.
नहीं था कभी नहीं बताता था नहीं नहीं भैया. वो तु हमको अंधेरे में रखे थे हम तो किसी. को देखे नहीं इस तरह की बातें तो खैर हम. लोग ट्रैक करते करते दिल्ली के नंबर. मिले दिल्ली पहुंचे पूरी टीम गई वहां पर. और फिर पता करते करते करते करते यही नंबर. जो उसके पीसीओ में जो डिटेल्स लिखते थे. इसी से पता करते करते हम लोग वहां पहुंच. गए जहां इसको रखा गया था और उसके बाद जब.
इसको विदा कर दिया तो उसके बगल वाले फ्लैट. में पूछता में पता लग गया कि वह लोग आते. हैं अभी भी घर में उसकी मदर और वह सब रहती. थी और रात में वह वहीं उस कमरे में सोता. था फिर उसके बाद रास्ते में मुठभेड़ हुई. उससे और एक थी उसके पास मार दिया हम लोगों. ने उसे आनंद पांडे को. मार दिया तो उसके जैसे एसएफ ने एसटीएफ ने.
मार दिया या एसटीएफ का पहला एनकाउंटर आनंद. पांडे था हा आनंद पांडे एसटीएफ के और तमाम. देखिए एक तो मुन्ना बजरंगी से सबसे पहले. हम लोगों की जिंदा लेकिन रह गया था हां. लेकिन वो जिंदा रह गया था दूसरा वाला हम. लोग ही नहीं जानते थे कि मुन्ना बजरंगी है. ये सोच के नहीं हुआ था वो एक गुज्जे लड़का. था सत गु पहले हां बहरहाल ये उसको आनंद को. हम लोगों ने आनंद पांडे आनंद पांडे चले गए. इसके बाद सुधीर या फिर श्री प्रकाश हां. आनंद पांडे चले गए फिर उसके साथ वो आ गया.
ना वो कौन सिं नाम था लड़के का उसके हटते. ही तीसरा आ गया अनुज सिंह अनुज सिंह तीन. वो रखता था तो उसके तुरंत बाद अनुज के. फादर सब इंस्पेक्टर थे फैजाबाद में. पोस्टेड थे अनुज सिंह आ गया पुलिस वाले. लड़का हां तो अनुज सिंह आ गया तो रहे तीन. ही आदमी आनंद पांडे को नूला उस समय एसटीएफ. का गठन हमारे ख्याल से नहीं हुआ था नहीं. हुआ था ये जिला पुलिस में रह के ये. किडनैपिंग थी तो हम लोग लेकिन हम लोग चेज. कर रहे थे पिछले आठ महीने से क्योंकि.
दिलीप होटल का कांड हो चुका था कई एक कांड. वहां हो चुके थे और अरुण कुमार साहब. एसएसपी थे मैसी हजरतगंज था अ सत्यवीर सिंह. साहब वो एसपी सीटी थे तो यही टीम लगाई गई. थी जिसको बाद में ए सच अजयराज शर्मा साहब. ने एसटीएफ में डॉट किया था तो बहरहाल उसको. मार दिया गया अगले दिन इसका तुरंत सबको. फोन करके छपा का रोग था इसको अखबारों में. फोन कर देखो मैंने मरवा दिया मुझसे जो अलग. होगा उसका यही हश्र होगा अा हम लोग जानते. हैं उससे कोई मतलब नहीं है वो तो हम लोग.
ट्रैक करते करते वहां तक पहुंचे और अपनी. मौत मारा गया वो लेकिन उसने यही हल्ला. मचाया सब जगह प्रेस में बात करता था यह. कैसे छाप दिया ये फलां का काम नहीं ये तो. मैंने किया था कैसे लिख दिया आइंदा से. ठोंक बजा के लिखना नहीं तुम भी समझ लेना. लोगों ने लिखना बंद कर दिया था दहशत का वो. माहौल. था तो 90 का दशक उफ ऐसा नहीं उत्तर प्रदेश. में था सब जगह ही था. फिर श्र प्रकाश ठोका आप लोगों ने कैसे प. लगा फिर नहीं अब उसके बाद तो फिर शुरू हो.
गए एक हम लोगों को एक के 47 मिली एक 47. पुरलिया ड्रॉप की थी ये कैसे पता लगा जब. दिल्ली में इसका एनकाउंटर किया तो अगले. दिन अखबारों में छपा कि साहब ये एक 47. मिली इसमें तो लोकनाथ बेहरा साहब अभी वो. डीजी प केरला होकर रिटायर हुए हैं उस समय. वो सीबीआई में थे और पुरूलिया ड्रॉप. इन्वेस्टिगेट कर रहे थे आप कभी मिले हैं. उनसे नहीं मिले बहुत ही मतलब थोरो. जेंटलमैन नंबर वन और 101 पर प्रोफेशनल मैन.
100% वो पहली मेरी उनकी मुलाकात थी तब से. अब तक मैं बराबर उनके कांटेक्ट में हूं. मुझे आदमी जो है प्रोफेशनली बहुत अच्छा. लगता है तो थाने पर आ गए उन्होंने कहा भाई. हमको एक 47 देखनी मैं इस इस तरह से सीबीआई. में एसपी थे या डीआईजी थे उस समय तो वो. लाई गई उन्होंने वो उसपे से चाक वाक लगा. के उसका नंबर देखा और अपने डॉक्यूमेंट. देखे बोले ये पूलिया ड्रॉप की है और यह. बताओ क्या इसका बिहार से कोई कनेक्शन है. इस क्रिमिनल का कहा बिहार से ही है.
कनेक्शन इसका सूरज भान बोलो ओ केस अब पूरी. चेन मेरी समझ में आ गई दिस इ पुलि ड्रॉप. 47 यह उन्होंने बताया था तो खैर बहरहाल हम. लोग आगे बढ़ते रहे य एक एक पे एक. किडनैपिंग बड़ी बड़ी किडनैपिंग की इसने तो. अब इसको ढूंढना बहुत जरूरी था जब ज्यादा. दबाव यहां पड़ा जैसे यहां से निकला है. दुकान से 10 मिनट बाद हम लोग पहुंच गए अब. आदमियों को लगा कि आनंद पांडे को जब.
इन्होंने मार दिया तो ये लोग इसका मतलब. कुछ कर रहे हैं तो सूचनाएं भी ज्यादा आने. लगी फोन पर सूचना आती थी सूचनाएं मिलने. लगी फिर यह दिल्ली चला गया एक सब. इंस्पेक्टर को इसने मारा था हां एक सब. इंस्पेक्टर को जनपथ एक हजरतगंज की मेन. मार्केट में जनपथ है उस समय भी यही सूचना. देखिए एक इसकी आदत थी जिसकी हम लोग जिसको. एक्सप्लोइट करना चाह रहे थे वो आदत यह थी. कि शेव खुद नहीं कर सकता था देखिए बहुत सी. चीजें हैं किसी क्रिमिनल को छूने के लिए. पकड़ने के लिए मारने के लिए उसकी लाइफ.
स्टाइल भी कभी-कभी बड़ा काम करती है तो यह. सेव खुद नहीं कर सकता था इसे हर हाल में. सेविंग कराने के लिए कहीं जाना था तो लखनऊ. में जब होता था तो ये ताज होटल के सैलून. में जाता था 00 तो उसको बार्बर को देता था. और जो उसका चपरासी उपरा जोवा 10000 उनको. बांट के आता था सब इसका इंतजार करते थे कब. आएगा वहां पुलिस के आने का ताज उस समय. सबसे बड़ा होटल और सबसे प्रतिष्ठित होटल. था लखनऊ. का दूसरा यह लड़कियों के चक्कर में.
कभी-कभी जनपद मार्केट जब आता था इन द. हार्ट ऑफ सिटी हजरतगंज में ही जनपद मार्. शिंग स्ट्रीट शॉपिंग हा स्ट्रीट शॉपिंग तो. वो अपना घूमते घूमते लड़कियों को देखता था. वहां एक बम्बे हेयर कटिंग सैलून था यह. वहां जाता था यह दोनों बाहर खड़े हो जाते. थे वहीं अपना बाल कटाया कुछ भी कराया उसके. बाद फिर निकल के लड़कियां देखी बाजार बंद. होने के समय फिर य अपनी गाड़ी से निकल. जाया करते थे तो हम सतवीर सिंह साहब एक रण. केंद्र था उनका गनर था और आर के सिंह जो.
उनके रीडर थे एसपी सिटी के ये सब लोग बैठे. थे तो आदमी ने आके बताया कि सर आज है वह. और तीन चार दिन से वह वहां नहीं गया है. ताज वाले सैलून में तो कहीं ना कहीं जाएगा. दूसरा ठिकाना इसका ही है तो देख लिया जाए. चलो देख लिया जाए वर्दी हम लोग पहने हुए. थे उतारे वहां प सादा पहने और उनकी एक. प्राइवेट मारुती कार थी लाइट ग्रीन कलर की. हम लोग सब उसमें बैठे और यह तय हुआ कि भाई. एंट्री पर और एग्जिट प जो लोग बैग लिए हुए.
हैं यह पता था कि यह बैग में के 47 लगता. है तो जो लोग बैग लिए हुए हैं उनको चेक. करेंगे और जिसके पास एक 47 मिलेगी फिर. उसको घेर के पकड़ा जाएगा और वही होगा. दूसरा कोई होगा नहीं आर के सिंह एंट्री. वाले रास्ते पर चबूतरे के ऊपर थे अगर आपको. जरा सा भी आईडिया हो जनपद के मार्केट का. तो किनारे किनारे तो वो है फिर उसके बाद. सीढ़ियां आप चढ़ तो टी कॉफी शॉप्स है ऊपर. ऑफिसेज हैं तोव ऊपर खड़े हुए थे ताकि बाहर. से जो लोग आ रहे हैं उन पर उनको स्पष्ट.
देखा जाए और गैलरी में हम थे और सत्येंद्र. वर सिंह साहब थे बाकी रण केंद्र वो जो है. वो उस तरफ खड़े हुए थे जहां एग्जिट है तो. इतनी देर में एक लड़का छोटी छोटे कत का वो. बैग जो क्रिकेट वाला बैग होता है उसको ऐसे. लटकाए हुए आ रहा था सतवीर सिंह सामने टोक. दिया बैग में क्या है वो कुछ नहीं बोला. थोड़ा आगे चला गया तो हो गया हां आउट हो. गया तो उन्होने कहा इसमें क्या है तो वो. भागने लगा फिर हम दोनों लोगों ने गिरा के.
उसके पटक दिया वहीं पर एक उसकी दुकान. है लखनवी साड़ी जो चिकन की होती है वहां. पटक दिया तो उसने अचानक उसके चेन को खोलने. की कोशिश. की तो सत्यवीर सिंह साहब जाट आदमी बहुत. जबरदस्त उनकी फिजिक भी थी बहुत अच्छी तो. उन्होंने कहारे राज संभालो साला इसमें है. कुछ ना कुछ खैर तब तक उन्होंने खोला एक 47. बाहर निकली उस समय यह मारने के चक्कर में. था क्योंकि हम लोग उसको दुकान के भीतर ले.
गए थे कि कोई कैजुअलिटी ज्यादा ना हो कोई. अगर एक वो चलाएगा नहीं चलाया वह अलग बात. है लेकिन अगर चलाया होता तो बहुत से लोग. मारे जाते और यह वहीं सीढ़ी पर इसने देखा. कि जब हम लोगों ने एक बैग वाले आदमी को. घेर लिया इधर ले आ रहे हैं तो पीछे से तीन. आदमी वह बहुत तेजी से भाग रहे हैं इसने. अपनी पिस्टल निकाली आर के सिंह ने और इसने. भी पीछा कर लिया तो पीछे की तरफ एक पहले. पार्किंग हुआ करती थी जिसमें पतले तार की. बाउंड्री दो तार की बाउंड्री बना दी गई थी.
भागते समय इसका ध्यान नहीं गया ये तार में. इसका पैर उलझ गया और ठीक सामने दारुल शफा. का मेन गेट है दारुल शफा जो विधायक आवास. है वहां का उसका मेन गेट है वो मेन गेट की. तरफ घुसे ही थे इसको गिरा हुआ देखा वापस. लौट आए इसके गर्दन पे सिर रखा पिस्टल इसकी. छीन ली कॉर्ड से उसको अलग कर दी और इन फुल. व्यू ऑफ पब्लिक. नौ गोलियां उसकी पिस्टल से ही इसके सिर पर. मार दी इंस्पेक्टर साहब के इंस्पेक्टर.
साहब के इस बीच में यह भागने की जुगाड़ कर. रहा था तो यह हुआ कि हाथ ना लगाने पाए. छोटी सी जगह थी जहां पे दुकान में तो इसने. फिर हाथ लगा दिया तो फिर यह हुआ कि इसको. मार ही देना उचित है नहीं तो अगर हाथ. लगाया तो हम लोगों का जो होगा होगा पब्लिक. बहुत मारी. जाएगी एक मैगजीन अगर चल जाए वहां पर तो. सोचो आप कितने कितना नुकसान होगा तो खैर. बहर उसको इस परपस से कि यह हाथ ना लगाए. परेशान ना करे मारा गया थोड़ी देर में वह.
तब तक पब्लिक भाग के आई कि साहब एक बदमाश. उधर भी मार दिया किसी ने तो हम लोग बहुत. खुश हुए कि लगता है क्योंकि यह श्री. प्रकाश नहीं था ये बहुत ही छोटे कद का था. श्री प्रकाश नहीं था हम लोग भाग के जब. सामने गए देखा आरके सिंह पड़े हुए हैं सिर. में गोली लगी हुई ताजी ताजी बल्कि उस समय. वो जो झटके जो आते हैं हल्के हल्के वो भी. आ रहे थे अब काटो तो खून नहीं फौरन अपनी. गड़ी मिला अस्पताल लेके गब तो नो मोर उसकी. डेथ हो गई बहुत एमेंट आप लोग बहुत.
एंबेरेसमेंट हुआ बत पड़ी इतनी गालिया. अखबार ही थे आप उस समय के अखबारों की. कटिंग देख लीजिए कि यह हैं बहादुर पुलिस. वाले जब इनको पता था कि शी प्रकाश आने. वाला है जबकि हम लोग कम से कम 50 बार जा. चुके थे जब भी ऐसा लगता था कि आ सकता है. तो एक बार जाकर रकी करते थे जब इनको पता. था तो फोर्स क्यों नहीं ली इन्होंने उस. समय पीएससी जाने कितनी कंपनी बताई कितनी. कंपनी थी वो यहीं पर थ पीएसी लेकर तलाशी. लेनी चाहिए भाई एक बात तो यह भी है ना.
पब्लिक को डिस्कंफर्ट हम वो भी तो रोज करो. जा पब्लिक खड़ी हो जाए क्या तमाशा है आपका. आपकी स्पेसिफिक सूचना हो तब आप आइए क्यों. रोज कर रोज आप पीएसी घुमा रहे हैं बहुत सी. चीजें हैं जो पुलिस को देखनी होती है तो. ये सब चीजें लिखी गई आई थक दिस वाज द. पॉइंट जहां पर जो इतिहासकार कहानिया. सुनाते हैं उधर जानने वाले ये पॉइंट पर. डिसाइड हो गया था कि अब श्री प्रकाश को. जिंदा नहीं पकड़ जाएगा देखिए वही सु कुमार. सिह स्वर्गीय सु बेश कुमार सिंह अभी उनका. देहांत हुआ है.
और हम लोग साथ साथ बैठते थे बहुत बढ़िया. आदमी था साथ साथ बैठते थे जब इसको डिस्कशन. करते थे जब उसका सीडीआर का विश्लेषण करते. थे तो यही आर के सिंह उसको बताया करता साब. इसमें पांच बार बात हुई चार बार बात हुई. वो भी मौके पर आए नाथ ऑफ सितंबर 1997 घटना. की घटना है एक महीने बाद हम लोगों ने इस. एक साल बाद इसको मार दिया था और उस समय. इसको वहां ले गए हम लोग पुलिस लाइन बड़ा. आक्रोश पुलिस में बॉडी रखी जाती है गर्ड.
ऑफ ऑनर दिया जाता है सब लोग सलाम करते हैं. उस समय सुबे कुमार सिंह साहब रो पड़े 6. फीट का बंदा जवान रंगबाज टाइप का हमारा. एसएसपी था वो और वह रो पड़े तो पब्लिक थी. पुलिस थी वहां पर तो तुरंत गाड़ी में बैठ. गए और बोले बंगले प आओ गए वहां पर बैठे तो. रोते ही रहे राजेश आज बड़ा दुख हो रहा है. मुझे इस लड़के ने इतनी मेहनत की अच्छा वो. उसके बच्चे नहीं थे कोई तो कभी-कभी जिक्र. करता था हम तो मस्त हैं हमारे तो कोई.
दिक्कत नहीं है तो कहने लगे कि लेकिन आज. हमने कसम खाई. है कि जब तक वो मारा नहीं. जाएगा हम लोग शांत नहीं बैठेंगे पुलिस. वालों में क्या कोई ये अनसेट एक नियम होता. है कि अगर पुलिस वाले को मार दिया तो हम. भी मार ही देंगे नहीं अनसेट नियम तो नियम. ऐसा कुछ नहीं है लेकिन एक देखिए आप अगर यह. चाहते हैं कि आपकी इज्जत बनी रहे आप अगर. यह चाहते हैं कि आप को लोग देख के ये समझे. कि नहीं भाई नो नॉनसेंस टाइप का आदमी है.
या इसके सामने हम कुछ करेंगे तो गलत होगा. अगर लगातार आप ही मारे जा रहे हो तो फिर. आपका तो चौराहे पे खड़ा होना मुश्किल हो. जाएगा खाकी का एक बाल बल खाकी का बाल. बुलंद हो तभी बुलंद होगा जब खाकी खाकी को. समझे और खाकी यह समझे कि खाकी पर हमला वोह. आदमी पर हमला नहीं है खाकी पर हमला है वो. आपने अपना डेथ फरेंट साइन हां अपना डेथ. फरेंट साइन तो उसी दिन ये तय हो गया था. कहा मुझसे कि पुलिस वाले तो इतने ही होते. हैं पब्लिक हजारों होती है वो डर बनाने के. लिए ये इकबाल जरूरी है हां इकबाल पुलिस का.
पुलिस इकबाल से ही चलती है नहीं तो अब तो. गांव में बीट का सिपाही बेचारा साइकिल से. भी जाता है अपनी साइकिल से बहुत दुर. क्षेत्रों में अकेला जाता है पूरे गांव के. बीच में होकर जाता है जब चाहिए दो थप्पड़. मार के मार दीजिए आप उसे लेकिन उसका. कंसीक्वेंस लोग जानते हैं कि क्या होगा. अगर छू दिया हां तो क्या होगा उसी को. इकबाल कहते हैं वो कुछ लोग कहते हैं भय है. कुछ लोग कहते हैं दहशत है कुछ लोग कहते. हैं लोग बहुत डरते हैं पुलिस इस तरह से.
रिटेल ऐसा कुछ नहीं है ये पुलिस का इकबाल. है और होना भी चाहिए सही बात है 9 सितंबर. 97 की घटना हुई इसके बाद आप लोगों ने. बीएसएनएल से मदद मांगी हां बीएसएनएल से हम. लोगों ने मदद मांगी कि ये हमको बताइए आप. कि किस टावर पे देखिए उस समय जो सीडीआर. आता था मैंने आपको बताया कि वो कमर्शियल. इंपॉर्टेंस में कि साहब इतने मिनट बात हुई. तो इतना पैसा लगा हम इनकमिंग थी कि आउट ग. क्योंकि दोनों के अलग-अलग चार्जेस लगते थे. लेकिन वो किस टावर से जुड़ा हुआ वो सीट पे.
नहीं आता था वो उनके सिस्टम में रहता था. तो फिर बीएसएनएल से हम लोगों ने मदद मांगी. कि हमें. आप जो आपके लैंडलाइन के नंबर हैं पहले तो. आप उसके हमें वो दीजिए सीडीआर दीजिए. किसकिस पे एसटीडी कॉल हुई है किसकिस पे. मदद मांगी फिर उसके बाद हम लोगों ने उस. समय पैरेलल लिसनिंग का व नहीं था तो जिस. जगह पे होने की सूचना होती थी जिससे तो. सड़क पर उसका डीपी बॉक्स होता था टेलीफोन.
के खंबे होते थे डीपी बॉक्स होता था उसमें. से तार उसके निकाल के उस पेयर के बीएसएनएल. वाले जाते थे साहब इस नंबर का पेयर ये है. और वहीं पर एक टेंट लगता था पब्लिक जानती. थी कि कुछ लाइन खराब है तो बना रहे हैं. टेलीफोन वाले उसके नीचे हम लोग बैठते. थे और वही जो क्रेडल वाला फोन होता है. उसके माउथ पीस की तरफ काला टेप लगा देते. और. उसमें या तो कोई फोन करेगा या रिसीव करेगा.
दोनों स्थितियों में वो घंटी बजती थी और. उठा के उसे सुनते थे कि क्या बात हो रही. है गर्मी में भीषण गर्मी में सर्दी में एक. आदमी कोई ना कोई दिन में भी और रात में भी. उस टेंट में बनाते ऐसा चार जगह टेंट. लगवाया था हम लोगों ने श्री प्रकाश शकला. के लिए शी प्रकाश शकला के लिए सुनने के. लिए क्योंकि और तरीका हमारे पास नहीं. था लेकिन बीएसएनएल ने पूरी मदद की हमें. कॉलर आईडी लगाने में मदद की कि साहब अगर. हम किसी को जानना चाहते हैं कि वह किस-किस. नंबर से बात कर रहा है तो हमें कॉल आईडी.
लगाने की या आप लगवा दीजिए हमको उसकी. प्रिंट निकाल के दे दीजिए तो कॉल और आईडी. लगाने तमाम चीजें खैर उन्होंने सारी मदद. की हम लोगों की और खैर इसकी जरूरत नहीं. पड़ी दिल्ली में क्योंकि दिल्ली में तब तक. मोबाइल की इंटरसेप्शन की का तरीका आ गया. था हमारे यहां तो था ही नहीं वो यूपी में. यूपी में दो ही उस समय मोबाइल ऑपरेटर थे. एक उषा फोस दूसरा एसआर फस और दोनों प यह. कॉल ट्रांसफर करने की सुविधा नहीं थी कि. कॉल ट्रांसफर करके आप उसको पैरेलल में सुन.
ले दोनों में नहीं थ बृजेश श्रीवास्तव और. ब्रज बिहारी प्रसाद दो लोग को उसने. एनकाउंटर और किया हां एनकाउंटर दोन की. हत्या दोनों की हत्या की उ हत्या की एक को. 25 गोली मारी और एक बिहार सरकार के मंत्री. थे एक बिहार सरकार के मंत्री थे उनको. आयुर्विज्ञान संस्थान के लन में उनके 20 2. प्राइवेट गार्ड और 202 सरकारी गार्ड के. बीच में गुली मार दी मैं समझ नहीं पा. एक लड़का है जिसके पास तीन लोग का गैंग है. ठीक है वो बिहार सरकार के बड़े आदमी को.
कैसे मार देता है देखिए मैंने आपको बताया. कि जब के के रस्तोगी को मार दिया गया. कुणाल को किडनैप कर लिया गया कुणाल की अभी. डीलिंग चल ही रही थी रसम की इसी बीच में. बृज बिहारी प्रसाद ने कहा कि सब काम छोड़. दो तुरंत चले आओ यह जो है वह हम लोगों के. खिलाफ मुकदमा कायम करा के जेल भिजवा देगा. हम लोगों को बृज बिहारी प्रसाद ये चले आए. तो बताया गया कि ऐसे ऐसे वहां प भर्ती बज. बिहारी किसी ने क्या लड़ाई थी दुश्मनी थी.
बृज बिहारी की दुश्मनी इससे कोई नहीं थी. बृज बिहारी की दुश्मनी थी सूरज भान सेर. पिकल दुनी सूरज भान से भी उसकी लड़ाई शुरू. हो गई थी बीच में किसकी इसकी श्री प्रकाश. शुक्ला की नहीं नहीं सूरज भान से लोग कह. रहे थे सूरज भान चाहते थे कि मर जाइए नहीं. नहीं नहीं नहीं ये कहते थे कि साहब पैसा. उसके पास था तो ये चाहते थे कि मर जाए ये. सब बात की आफ्टर थॉट की कहानियां है कभी. इसकी कोई उसी के यहां हां अरे उसी के यहां. रहता था हमेशा जब भी गया है उसी के यहां. रुका है वो अच्छा तो ये फर्जी खबर थय फ.
क्योंकि बीच में आया कि इन्होने प्रॉपर्टी. इन्वेस्ट कर नेपाल में होटल ख ये है कि ये. जब बाद में लोग लिखने लगते हैं तमाम. बड़े-बड़े विद्वान हैं उसी में दिमाग. लगाते हैं कि साहब यह तो यह भी चाहता था. कि मर जाए तो पैसा हमारा हो जाएगा तो वैसे. भी पैसा उसका हो गया लेकिन कभी ना तो उससे. नाराजगी हुई ना कभी उससे विवाद हुआ ना कभी. उन दोनों में मतक हुआ कभी डिफरेंस ऑफ हु. कभी नहीं हुआ नेवर ये जो बात बताई एकदम. गलत कभी नहीं हुआ तो उस ब्रिज बिहारी जी. को सूरज भान चलते हां सूरज भान के चलते. वाला था नंबर दो बिहार सरकार में नंबर दो.
सीबीआई ने किसी मामले में उनको इंडिक्ट. किया था या चार सट लगाई थी तो मजबूरन उनको. मंत्री पद से हटाया गया था और गिरफ्तारी. से बचने के लिए उनको वो इंदिरा गांधी. प्रतिष्ठान जो भी है 13 जून साल 1998 में. अस्पताल के सामने ठोक दिया था अब देखिए. इसमें क्या हुआ अभी लेटेस्ट इसमें एक. सुप्रीम कोर्ट का भी डिसीजन आया इसमें जो. लोग थे सूरज भान एंड कंपनी वो भी थे.
लॉजिस्टिक्स की सपोर्ट उन्होंने की थी ना. गाड़ियां बाहर लगाई थी लोग कूद के उससे. भागे उसमें दो लोगों को शायद सजा हुई और. बाकी सब बरी हो गए सूरज भान जिंदा गए हैं. अभी बरी हुए हैं एक हफ्ते पहले हैं जिंदा. है सूरज भान जिंदा है सूरज भान की पत्नी. मेंबर पार्लियामेंट हुई. थी सूरज भान की सूरज भान का इंटरव्यू करने. लायक है हां करने लायक है कहानी बहुत वो. मुश्किल है मुझे नहीं लगता ऑफ रड बता हा. ऑफ द रिकॉर्ड तो सब बता देंगे कहानी बहुत.
अरे बिल्कुल कहानी इतनी है कि आप जाएंगे. तो सारी कहानी वो सरवाइव कैसे कर ग हम तो. ये हैरान है अब देखिए ऐसा है ना एक तो. अपना अपना दिमाग है उसने सब कराया [ __ ]. या बिड़वा मरवाया सब कराया उसके ऊपर कुछ. नहीं हुआ खैर किसी मामले में उनको एक 47. कास मिलती थी किनको सूरज भान को पुरलिया. ड्रॉप में जब लोग बीन के ले गए भाई वो. एक्स को भी मिला वाई को भी मिला जड को भी. मिला सरज भान मिला हां तो जब पता लग गया. कि साहब इस गांव के आसपास बहुत से लोगों.
के पास है यह बहुत बड़ा बाहुबली था वहां. का आज का नहीं है बट कहीं से तो इन्होंने. बाहर से म होगा नहीं बाहर से नहीं उन्हीं. लोगों से जिस गांव में पता लगा कि यहां. गांव वाले बीन के रखे हुए हैं वहीं आपने. आदमी भेज के उनको डरा के धमका के वो गांव. वालों के पास कैसे थी किले अरे साहब वो. ऊपर से गिरी थी ना पुरुलिया ड्रॉप में ये. एक बहुत बड़ा एक वो है कि ये जो इनका. था वो कौन सा संगठन था जो बैन हुआ उनके. हेड क्वार्टर पर उन्हें एके 47 सब देनी थी.
लड़ाई करने के लिए सिमी उमी तो नहीं था ये. नहीं सिमी उमी नहीं है अरे वो जो वहां का. वेस्ट बंगाल का वो नहीं बड़ा ऑर्गेनाइजेशन. है बाद में बन किया गया लेफ्ट का है. ऑर्गेनाइजेशन वो तो उनको बंदूक दी जा रही. थी उनको ऊपर से बरसाई गई थी कि कलेक्ट कर. लो उनके हाथ में लेकिन वो गिराने में. थोड़ा गड़बड़ हुआ थोड़ा गड़बड़ हुआ और वो. आगे पीछे गिर गई सूरज भान ने बटर वा लिया. हां सब लोगों के पास आ गई थ केफ जिसको. जहां पता लगा फला गांव में है वो चार लाठी. मारी उससे छीन के ले आए या पैसा देक ले आए.
उसे सारी अभी भी रिकवर नहीं हुई अभी भी है. वहां पर आनंद मार्गी की बात है य गजब. कहानी है भाई आनंद मार्गी को हेल्प करने. के लिए उस समय आनंद मार्गी शायद बैन था. अभी भी बैन ही होगा ना बन बैन है तो व. उनको स्ट्रांग करने के लिए य सीबीआई ने. किया इसमें जो इसका मेन था पकड़ा गया अभी. वह छूट गया है और बहरा सा इसकी इसके आईयू. थे बड़ी इंटरेस्टिंग है पुरलिया आर्म्स.
डॉप केस करके ढूंढेगा बड़ी इंटरेस्टिंग. कहानी. है आप पढ़ना शुरू करेंगे तो पढ़ते ही रह. जाएंगे आगे मतलब उसको बीच में ड्रॉप नहीं. कर सकते सच पुरलिया आम् ड्रॉप केस ना होता. तो सूरज भान को वो ना मिलती कि सूरज भान. को 47 ना मिलती तो वीरेंद्र शाही को मारने. का मौका ना मिलता मिलता श्री प्रकाश. शुक्ला श्री प्रकाश शुक्ला ना बनता श्री. प्रकाश शुक्ला मरता नहीं नहीं. अब देखिए ना बहुत सी चीजें अब सबसे बड़ी. बात यह है कि उस जमाने में इतना फेमस केस.
था गवर्नमेंट एजेंसीज को कैसे भी करके. सारी एक 47 जो गिराई गई थी और भी असलहे. गिराए गए थे वो सब अकाउंट फॉर करनी चाहिए. थी किसी के पास फुर्सत नहीं थी और सब गलत. हाथों में पहुंच. गई अकाउंट फॉर हुई कुछ लोगों ने विलफुली. दे दिया कि साहब यह गिरी हुई थी ले लीजिए. लेकिन वह पूरा एक. जहाज भर के जो एक प्राइवेट ये बड़ी बहुत. बड़ी बात है कि आप हिंदुस्तान के हिस्से.
में आप एक 47 गिरवा दे रहे बहुत बड़ी बात. है आप उस उसका जो डिटेल देखेंगे ना सीबीआई. के इन्वेस्टिगेशन का इट्स अ वेरी. इंटरेस्टिंग डिटेल इतनी इतनी स्लस कि आप. पूरा एक शहर बर्बाद कर सकते हां एक शहर. बर्बाद कर सकते हैं लेकिन अब वो एक. मूवमेंट उस समय चल रहा था उस मूवमेंट को. अ स्ट्रांग करने के लिए ये गिराई गई थी. फिर आप लोगों ने किस दिन ठोका श्री प्रकाश. को ये 23 सितंबर 98 की बात होगई.
2238 सितंबर 98 ओके यानी जून में इन साहब. ने अ मंत्री जी को मारा था हम जुलाई अगस्त. सितंबर कैसे पता आप लोग को पता था क्या कि. ये आने वाला है नहीं दिल्ली में तो ये. सुविधा मैंने आपको बताई ना कि पैरेलल प. लिसनिंग लेने की सुविधा थी हम अरुण कुमार. साम ने वहां कमिशनर पुलिस से बात की और तब. तक सबको पता लग गया था कितना ये अ भारी. बदमाश है. फिर सिम ये बार-बार बदल रहा था 50 सिम थे.
इसके पास तो आईएमआई पैरेलल पे लगवाया गया. कि उस अच्छा उस टाइम ही आप लोगों ने. आईएमआई पकड़ लिया था हां आईएमआई पकड़ लिया. था उस बेसिक चीजें थी जो बताई गई थी हम. लोगों को तो आईएमआई आपको फोन कैसे पता लगा. आप लोग को कि ये फोन इस्तेमाल करता है. नहीं आप जब कॉल डिटेल इसकी निकालेंगे जैसे. अपना आपका आईएमआई इसका निकालना कॉल डिटेल. निकल निकालेंगे तो आईएमआई आपको मिल जाए तो. आपने एक एक नंबर पकड़ा होगा उस एक नंबर से. आई पकड़ लिया और उस आमाई के थ्रू जितने. सिम लग रहे हैं जितने सिम लग रहे हैं तो. आईएमआई को ही पैरेलल में नए लड़के तो पता. नहीं जानते जरूर होंगे जो एक्सपर्ट है वो. जानते होंगे लेकिन उस समय के लिए बहुत ही.
क्योंकि जब आईएमआई लगवाने हम लोग कलकाता. गए एक ऑपरेशन में तो वहां कमांड टेलीफोन. था उनको पता ही नहीं था कि यह कैसे लगेगा. कभी वहां कोई फोन पैरेलल पर लिया नहीं गया. था ना तो वहां पुलिस को पता था जब यहां हम. लोग भी इस्तेमाल किए तो धीरे-धीरे पता कोई. हम लोग इस जानकारी के साथ पैदा नहीं हुए. थे लेकिन धीरे-धीरे पता लगा तो आईएमआई और. सबको जानना चाहिए जैसे आप अपने मोबा का ले. आए हैं जान वैसे तो आपके डिब्बे पर लिखा. होता है खो जाए या गिर जाए तो सबसे पहले.
कहते डिब्बा लाइए पुलिस कहती डिब्बा लाइए. उसमें आईएमआई लेकिन आपको भी रखना चाहिए. स्टार हैश 06 हैश यह डालिए तो 15 डिजिट का. आईएमआई आपके स्क्रीन पर आ जाएगा कहीं नोट. कर लेना चाहिए क्य इसलिए कहते जब फोन चोरी. हो जाए पुलिस वाले चाहे तो फोन ढूंढ सकते. हैं हां ढूंढ सकते हैं बकल ढ चाहे तो. पुलिस चाहे तो कुछ भी हो सकता है कोई. अपराध खुल सकता है चाहे तो जिसका फोन चोरी. हो पता लग. हां कि अब इस समय कौन सिम लगा है तो वो. आईएमआई जब किया तो वो कॉल्स ज्यादातर हम.
लोगों को मिलने लगी मूवमेंट का पता लगने. लगा इसी मूवमेंट से हम लोग वहां तक पहुंचे. और फाइनली वो क्या थोड़ा बताइए ना कैसे आप. लोग गए क्या सीन था लास्ट वाला देखिए. लास्ट वाला सीन तो पहले तो ये पता लगा कि. वो जिस तारीख को उसे जाना था रांची गाबाद. के पास क आप लोगों नेउर किया था. इंदिरापुरम में पहले तो जिस तारीख को उसे. जाना था उस तारीख को वो सोक उठ नहीं पाया. लड़कियों के चक्कर में कहीं था तो उठ नहीं. पाया दोन दोनों लोग जगाते रहे नहीं उठा जब. उठा तब तक देर हो गई थी वोह छूट गया फिर. यह लोग उस टिकट को तीनों टिकट को दूसरे.
फ्लाइट में ट्रांसफर कराने के लिए. रिक्वेस्ट करने के लिए गए हम लोग भी थे. लेकिन हम चूंकि पहचानते नहीं थे शिव. प्रकाश नहीं आया था उसमें उसमें आनंद आया. था तो जरा सा भी आईडिया नहीं थ आया और. चेंज करा के चला गया फिर डॉक्यूमेंट से. पता लगा क्योंकि उस दिन हम लोगों ने जिस. फ्लाइट से जाना था सब लोग एयरपोर्ट के. बाहर लगे हुए थे लेकिन जब फ्लाइट उड़ गई. तो कि आया ही नहीं क्या बात हुई तब पता. लगा कि चेंज करा लिया है उन लोगों ने अब. फला तारीख को जाएंगे तो यह इतनी जानकारी.
हो गई कि अब यह फला तारीख को वहां से. निकलने वाले हैं इसी बीच में उसने और एक. जिन गाड़ी से उसने अपने सारे असलहे पीछे. वाली सीट को बीच से फाड़ के सारे असलहे रख. के वेल्ड करा के सीट कवर लगा दिया था एक. आदमी को लगा के भेज दिया था कि रांची लेकर. पहुंचो हम आ रहे हैं. वो उसके बाद फिर इसने. कॉल करनी शुरू की एक आरिफ बिल्डर्स अब तो. उनका देहांत हो गया अ हाल में आरिफ कैसल.
आरिफ. होटल दुबई में आ रही फटल उस चेन के मालिक. हैं कंटोनमेंट में वहां लखनऊ में रहते हैं. उनको फोन करना शुरू किया कि किसी ने पैसा. उससे मांगा था तो उस केस में जो स्टेन. स्टेन इसकी सब मिल गई थी जब उनको आर के. सिंह कुमार के भागे थे तो उसमें जिसके पास. से मिली थी उसे जेल भेज दिया गया था तो. उसके उनके के लिए पैसे का इंतजाम करने के. लिए आरिफ को इसने फोन किया और ये कहा कि. भई ये तुम्हारे इतने फ्लैट बन गए हैं 00.
हज रुप फ्लैट के हिसाब से फला आदमी को जेल. में दिया हो तो उसने कहा ये साब नहीं कर. पाएंगे जेल में नहीं जा पाएंगे फिर वो कहा. गया अ मुस्लिम फेलो थे तो उनके बोलने का. लहजा दूसरा था अरुन कुमार सामने बाकी. लोगों ने कहा यार किसी मुस्लिम कांस्टेबल. को लगाओ तो उन्होंने कहा साब अब हम बात. नहीं करेंगे उससे बहुत बदतमीजी करता है. गाली देता है मैं कोई बात नहीं करू कि भाई. ये बात चलती रहे तो एक हमारे यहां मुस्लिम. हेड कांस्टेबल था उसको आरिफ बन के बात. करने के लिए उसको लगाया गया वह बात कर ही.
रहा तब तक इसने अपनी फेनसी से गोरखपुर बात. की तो गोरखपुर में एसन सिंह साहब ने उस. फोन को लगा रखा था तो उन्होंने बताया कि. यह इस नंबर से मुंबई से बात हो रही है. यहां हम लोगों को तो एक ही नंबर मिला. उन्होंने भी वही नंबर बताया हम लोगों ने. भी वही नंबर बताया जो यहां टीम थी तो यह. हुआ कि पहले चलो इसको देख लिया जाए. नवरात्र का दिन था दूसरा दिन था कि पहले. इसको देख लिया जाए क्योंकि हल्ला बहुत था. कि उसने प्लास्टिक सर्जरी करा ली है दाढ़ी. बढ़ा लिया है बाल बड़े-बड़े कर लिए हैं.
पहचानना मुश्किल है फोटो जैसा नहीं है. तमाम तरह के फेंकने वालों की तो कोई कमी. नहीं है तो अपना यही सब तो इस पर्पस से हम. लोग गए कि चलते हैं पीसीओ वाले से यह पूछ. लेंगे कि हां क्या शक्ल रही है क्योंकि. वही बात किया है दोनों जगह यह कंफर्म है. कि उसी पीसीओ प तो वो बता देगा भाई क्या. पहने हुए हैं दाढ़ी बढी शकल यही है कि. नहीं है शक्ल यही है कि नहीं ये सब पूछने. के गरज से हम लोग गए लेकिन वो उस समय आरिफ. से फिर बात कर रहा. था जब तक हम लोग कॉल सुन रहे थे कि बात कर.
रहा है जब फोन कटा है तब तक हम लोग पाच या. 6. किलोमीटर दूर थे उस ग्रेटर क्लास टू के. पीसीओ से हम लोग भाग के पहुंचे तो फोन. करके जा चुका था फोटो दिखाई उसने कहा साहब. ये थे इन्होंने बात. की उसने यह भी बताया कि नीले रंग के सीलो. से य लोग आए थे बिल्कुल जहां जो जीके टू. का जो गेट है जो पीसीओ था वो ठीक सामने ही. था जहां आप गाड़ी पार करी वो दिखाई पड़ेगा. तो फिर यह हुआ भागो सीलो का पता.
करो य बात पता लग गई किस तरफ गई है फिर. उसके बाद अंदाजे से हम लोग जहां जहां जा. सकते थे यह गाजियाबाद के थोड़ा पहले मिल. गई स तब फिर इसको इसने भी देखा कि कहीं ना. कहीं से डर तो गया ये कि क्योंकि ऐसा लगता. है कि जब हम लोग वहां पहुंच गए हैं उस समय. यह कहीं शॉपिंग कर रहा था क्योंकि वहां से. तो निकल गया था और नीली सिलो भी वहां नहीं. थी और जब हम लोगों ने पीछा किया तो बहुत. दूर नहीं निकला था य तो फिर पीछा किया.
इंदिरापुरम में वहां जहां निकलने का. बिल्कुल रास्ता नहीं था वहां तक पीछा किया. गोली. चलाई उस दिन उसके पास उस दिन एक के 47. उसने जिन में पैक करा के रांची भेज दी थी. इसके पास सिर्फ एक ना एमएम की पिस्टल थी. केवल और बाकी टेड गोलिया और लिमिटेड. गोलिया थ आप लोग कितने थे हम लोग उस समय. ड्राइवर से मिला के टाटा सु में 10 11 लोग. थे हम लोग फिर कभी एक दो आदमी कभी गए नहीं.
जब से आर के सिंह मारे. गए पूरी टीम जो जितनी है वह सब जाती थी. साथ साथ मैंने सुना मरने के पहले बड़ी. गाली वाली दी थी इसने अब देखिए ऐसा यह सब. भी किस्से कहानी है अब जिसको पता है कि. गोली दोनों तरफ चली तो गाली नहीं देगा. वो कितनी देर बचेगा कितनी देर में. एनकाउंटर खत्म हो आमने सामने आमने सामने. एनकाउंटर खत्म हो गया सात आ मिनट में सात. मिनट ऑप्शन आप लोग नहीं होगा कि सरेंडर. देखिए ऐसा ना वो चाहेगा ना. दोगे हमें तो यह था कि वो अगर असला उसके.
पास ना होता तो ना मारते हमें बहुत सी. चीजें उसे पता करनी. थी अगर उसने गोली ना चलाई होती तो ना. मारते उसे बहुत सी चीजें उसी के साथ दफन. हो गई पता ही नहीं लगी जैसे तमाम ऐसे. मर्डर हैं जिनका आज तक पता नहीं. लगा कुछ गोरखपुर के मर्डर है एक मर्डर. बहुत इंपॉर्टेंट है डीपी सिंह के डीपी. यादव के भाई का मर्डर है सि मारा गया था. और उस मर्डर का जो चंगू मंगू इनके बताते.
हैं कि शी प्रकाश ने मारा था उसे. गाजियाबाद दिल्ली के बीच में कहीं हुआ था. बहुत सी मतलब शादी ब तो हुआ नहीं इसका. शादी शादी ब कुछ बहुत दसियों ऐसे मामले. हैं जो तो कोशिश तो यही थी कि किसी तरह से. लेकिन अब वहां तो यह है ना कि पहले जान. क्योंकि जितना बेरहम था ये जितने लोगों को. 100 100 दो दो स गोली तो आप समझ सकते हैं. ना दूरी मेंटेन की गई कि अगर एक ही पिस्टल. थी बाकी कुछ था नहीं इसके पास पिस्टल की. मार 30 फीट से ऊपर होती नहीं हम लोगों ने.
कहा करो फायर कितना करोगा कितना. भागोगे गाड़ी में कट्टा भी था. उसके क्योंकि सामान सब भेज दिया तो ये लोग. तो बिना असलहे के अन कंफर्टेबल हो जाते. हैं. ना हम बिना असलहे के एक पिस्टल थी और आप. लोग को आईडिया था कि असलहा कम है इस बार. भाई उसको बाय एयर जाना है तो अगर हम. एयरपोर्ट के भीतर पकड़ते तो तो बिल्कुल. एकदम रुमाल के साथ ही मिलता वो क्या मिलता.
उसके पास क्योंकि वह तो चेक करके भीतर. जाने देंगे और यह रिस्क भी नहीं लेगा कि. हमें चेक होना है वहां पर तो हम असला लगाए. तो यह तो हम लोग जानते थे कि आज और जिस. दिन यह एयरपोर्ट पर था उस दिन पर तो हम इस. पर भी तैयार थे कि हम इसे वहां गेट पर. पकड़ लेंगे अगर पहचान गए सही से ही तो और. फिर रिमांड पर करके ले आएंगे वहां से उसे. लेकिन उस दिन गया ही नहीं. भाई एयरपोर्ट कोई जाएगा तो बड़ा नेचुरल है. कि सामान सब अपना गाड़ी में. छोड़ेगा श्री प्रकाश शुक्ला के मारे जाने.
से क्या बदला यूपी में नहीं देखिए श्री. प्रकाश शुक्ला के उस समय मारे जाने से एक. तो पुलिस के प्रति पब्लिक में का. कॉन्फिडेंस बहुत बढ़ा कि नहीं साहब ऐसा. नहीं है कि वह जो कर रहा था वही राजा है. वही बादशाह है ऐसा नहीं है सबका यही हश्र. होता सबसे बड़ी बात तो यह है कि वो. कॉन्फिडेंस लोगों के अंदर. दूसरे एसटीएफ को काम करने का मौका मिला और. इसीलिए उसके बाद छ महीने के लिए और बढ़ाई.
गई फिर छ महीने के लिए बढ़ाई गई फिर. परमानेंट की गई तब से बढ़ते बढ़ते बढ़ी गई. बढ़ी गई बढ़ते बढ़ते बढ़ अब फिर कई और. स्टेट में बनाई गई बहुत हम ही लोगों से सब. यह जिओ ले जाकर कलकाता में बनी राजस्थान. में बनी कई स्टेट में बनी हालाकि उस टाइम. कई और किरदार भी थे जैसे मुख्तार अंसारी. जी मुन्ना बजरंगी जी शाहबुद्दीन आपने. जिक्र कर ही दिया इधर इलाहाबाद साइड में. अतीक अहमद जी अतीक अशरफ ये बढ़ रहे थे हां.
इसके बाद बाकी अपराधियों के एनकाउंटर. क्यों नहीं हुए नहीं बाकी अपराधियों के. एनकाउंटर भी हुए और एक दो के नहीं इस इस. लेवल के इस लेवल के नहीं इस लेवल के नहीं. हुए नहीं इसले देखिए ऐसा है ना कि इस लेवल. के अपराधी आप इनको पॉलिटिकल अपराधी कह. सकते हैं ये सब राजनीत में थे सब विधायक. और सांसद हो सब सरकारों से जुड़े हुए थे. और सब सरकारों से जुड़े हुए थे तो और ये. ऐसा मौका कभी देंगे भी नहीं कि पुलिस. दिखाई पड़ेगी तो ये गोली चला देंगे ऐसा. मौका तो नहीं देंगे कभी तो जो पुलिस कर.
सकती थी बंद हुए सब बंद हुए और लंबे-लंबे. समय के लिए बंद हुए कुछ आज भी बंद है तो. जो ऑप्शन है वही तो आदमी कर श्री प्रकाश. शुक्ला ने जो पुलिस वाले को मार दिया था. वो ना मारा होता तो शायद वो भी अरेस्ट. होता नहीं ऐसा नहीं है देखिए उसके आतंक की. तो एकदम सारी लिमिट क्रॉस हो गई कितने. मर्डर कि थे उस अरे वो करीब-करीब जो मैंने. इसमें लिखा है उसे किसी साधु सन्यासी या. अघोरी ने बता दिया कि तुम 101 हत्याएं कर.
लोगे तो तुम अजय हो जाओगे तुम्हें कोई मार. नहीं पाएगा और उस समय तक वह. कोई 86 या 87 मर्डर कर चुका था जो जो उसने. बताया कितने बोले अब निकल जाओ और 101 पूरा. कर लो तो यह जो काली मां के मुंड की माला. 101 है वो जिस दिन तुम तुम्हारे ऊपर चढ़ी. उसके बाद से तुम्हें कोई मार नहीं पाएगा. उससे पहले थैंक यू हां उसके पहले टाटा बाय. बाय थैंक यू हो. गया तो जो लोग आपसे कभी किसी ने पर्सनली.
कहा शिकायत की क्यों मार दिया आपने नहीं. पर्सनली कोई पहला ब्राह्मण अपराधी था वो. या बड़ा अपराधी जो लार्जर देन लाइफ वाला. अपराधी हुआ क्योंकि आमतौर पर बाकी सबके. अपराधी हैं और अपराधियों को लेकर भीय. हिंदुस्तान में एक है कि हमारी जात का है. शिवांकर भाई देखिए अपराधी हमेशा अपराधी. हुआ आप वर्दी के उस तरफ बैठ के उसको. ब्राह्मण ठाकुर कह सकते हैं या जो लोग भी. कह रहे वो जो मुझे भी कहते हैं वो. ब्राह्मण ठाकुर कह सकते हैं लेकिन अपराधी. की सच में कोई जात नहीं जै ती अशरफ का हुआ.
था अभी हा हालाकि बहुत अनफॉर्चूनेटली. आप. बताइए क्या सपोर्ट है भाई अपरा रो मानते. अभी भी तो अपराधी देखिए हमेशा अपराधी है. क्या श्री प्रकाश शुक्ला ने ब्राह्मणों को. नहीं मारा. 35 ब्राह्मणों का मर्डर किया उसने. 35 और बातचीत में कहता है साब वर्चस्व के.
रास्ते में जो भी आएगा मारा जाएगा चाहे. वही ब्राह्मण ठाकुर लोग कहते हैं कि क्यों. मार दिया ब्रह 35 ब्राह्मण. 35 तीन भाइयों को तो एक ही दिन मार दिया. था दुबे ब्रदर्स. को जिसके नेक्स्ट डे मायावती की समीक्षा. बैठक थी आप समझ लो उस जमाने में. मुख्यमंत्री जब समीक्षा बैठक करने किसी. डिवीजन में जाती थी तो अब चोरी भी हो जाए. तो लोग सोचते थे कि अब सस्पेंड हुए वो. जलजला था और एक दिन पहले मार दिया तो यह.
सब देखे अपराधी की कोई जाति नहीं होती है. वो बाद में कोई कुछ भी कहे कि आप ब्राह्मण. थे वो ब्राह्मण था ये था वो ठीक अब मैं. वहां से आ रहा हूं 2.2 पे मेरा एक टॉपिक. और है उसके मैं पड़ूंगा हालांकि आपसे मैं. पूरे दिन बात कर सकता हूं लेकिन एक टॉपिक. मैं और पकडू लॉरेंस बिश्नोई जी यह सारा. अपराध हुआ अब नया दौर चल रहा है ये सब 90. की आप बात बता रहे तब हम बच्चे थे अब हम. लोग सब लोग जवान हो गए ठीक बात है हमारी. जवानी में हमको एक नाम सुनाई पड़ता है. लॉरेंस बिश्नोई ठीक बात है कुछ भी घटना. होती है लॉरेंस बिश्नोई बाबा सिद्दीकी को.
सरेआम मार दिया गया लॉरेंस बिश्नोई सलमान. खान के तगत 50 आदमी खड़े हैं डर क्यों है. लॉरेंस बिश्नोई एक नेता जी है बयान वापस. लिए लॉरेंस बिश्नोई और बहुत कहानियां चल. रही है उड़ते उड़ते लोग यह भी कह रते हैं. कि अतीक अशरफ से लेकर जितना देश में. घटनाएं हो रही है जितने मुसलमानों को मारा. जा रहा है जो अपराधी वर्ग मुसलमान थे उनके. पीछे लॉरेंस पड़ा इंडिया से लेकर कनाडा तक. यह बीच में अपराध का डाउन होना गायब होना.
बीच में काफी सालों तक डाउनफॉल एंड देन. राइज ऑफ लॉरेंस बिश्नोई हाउ यू सी देखिए. लॉरेंस. बिश्नोई के बारे में यह तब नाम इसका या. आपने भी सुना हमने भी सुना लोगों ने सुना. पंजाब के बाहर जब सिद्धू मूसेवाला का. मर्डर. हुआ उसके पहले इन लोगों की आपस की जो गैंग. राइवल थी कुछ राजस्थान में कुछ पंजाब में. कुछ इधर उधर यह सब होती. रही लेकिन सिद्धू मूसेवाला के मर्डर के.
बाद इसको सब लोग जान गे कि यह कोई अपराधी. है जेल में है जेल से इसने मूसेवाला को. भरवा. दिया लेकिन इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज ने आज. तक इन्वेस्टिगेशन के ट्रेल को वहां तक. नहीं जोड़ा नहीं जोड़ पाए या नहीं जोड़ना. चाहते जो भी आप समझ ले कहीं यह नाम खुला. नहीं कि लॉरेंस से कैसे शुरू कैसे शुरू. हुआ ये सब हवाबाजी में चल रहा है हां अभी. तक. फिलहाल मैं जिन घटनाओं के उत्तर प्रदेश की.
घटनाओं के बारे में कहूंगा जैसे अतीक अशरफ. का कैमरे के सामने मर 50 पुलिस वालों के. बीच में तीन-तीन चारचार लाइव कैमरे चल रहे. थे मैं टीवी बैठ के लाइव पढ़ रहा था लाइव. पढ़ रहे थे और एक आदमी एक डमी कैमरा लेकर. और एक हाथ में जो आपका माइक होता है जो. आईडी होती है वो लेके भीतर की तरफ घुसता. है और फिर जो देख सब सारी दुनिया ने देख. गुू मुस्लिम और तब तक ठ ठ बात यह है कि.
गुड्डू मुस्लिम भी नहीं कहा था गुड्डू और. तब तक शुरू हो. गया दो मिनट के बाद पिस्टल जमीन पर और एक. सिपाही उनको टांगे हुए चला जा रहा है यह. भी सब सारी दुनिया ने देखा ये भी बड़ा. हैरान कर इतने खतरनाक लोग सिपाही पकड़ चला. गया सिपाही पकड़ के चला. गया बरामद क्या हुआ. जिगाना की. पिस्टल जिगाना की पिस्टल टर्किश मेड. पिस्टल. है आपको यहां दर्शन करने की मेरे इतने.
लंबे करियर में मैंने जिगाना की पिस्टल. नहीं देखी है मैंने सारे मेक की के हथियार. देखे जो बड़े अपराधियों के पास क्या होता. है जिगा थ जिनक का मार्क होता है देखिए. जैसे ये कहते हैं ना कि एक फट सेन यह है. कि आप फायर करिए तो उसका जो जो थ्रस्ट है. जो उसका झटका है वो. बहुत ज्यादा नहीं लगता है यानी उसको देशी. भाषा में लोग कहते हैं सब पानी की तरह. चलती है मक्खन की तरह चलती है साहब इतनी.
गजब की है एक 47 यही जिगाना के. साथ कि अब जैसे बाकी पिस्टस में कभी-कभी. एक शिकायत होती है कि वह उसकी जो जो उसकी. बुलेट है कभी-कभी वह चेंबर में फंस जाती. है कभी-कभी वह मैगजीन में फंस जाती है. स्प्रिंग है उसमें जंग लग गया या प्रॉपर. ऑयलिंग नहीं हुई प्रॉपर फंस गई और फंस गई. तो फिर फंस गई. फिर उस दिन मुकद्दर ही खराब है चलाने वाले. का जिस दिन वो फस उल्टी लग जाएगी हां नहीं. उल्टी तो नहीं लगी लेकिन अगर वो डिफेंस कर.
रहा है या मार रहा है तो नहीं मार. पाएगा जिगाना की पिस्टल अफगानिस्तान में. पाकिस्तान में व मिलिटेंट्स के पास है. लेकिन यहां ना तो किसी को लेने की औकात है. उसकी और ना ही यहां आसानी से उपलब्ध है. औकात का मतलब बड़े वाले हैं तो उनके पास. होगी तभी यहां तक आई. होगा उन्होने लेकिन इन तीन लोगों के पास. जो उसमें आपको कैमरे के फ्रेम में दिखाई.
दे रहे थे इन तीनों की कंबाइंड प्रॉपर्टी. अगर जोड़ दी जाए तो वो उतनी नहीं है जितनी. दो जिगाना पिस्टल की कीमत है ब्लैक. मार्केट में एक जिगाना 6 से 7 लाख की. मिलती हैं दो जिगाना का मतलब 14 15 लाख. रप और इनकी कंबाइंड प्रॉपर्टी भी बहुत. होगी 4 लाख 5 लाख 10 लाख होगी मैक्सिमम. कहां से आई देखिए इट इज पार्ट ऑफ. इन्वेस्टिगेशन कि आला कतल यानी जिस चीज से.
कत्ल हुआ है उसको आला कत्ल कहते हैं पुलिस. की लैंग्वेज में आला कतल उसके पास तक कैसे. पहुंचा किसने दिया किसी और का क्या रोल है. यह सब चीजें. उसमें इन्वेस्टिगेटिंग अफसर को पता करनी. होती है लेकिन इतना दिन हो. गया अभी तक पता नहीं हो सकता कोर्ट में. सबमिट किया गया हो लेकिन पब्लिक डोमन यपी. एसटीएफ में आप तीक अशरफ को किसने मारा तक. क्लेरिटी नहीं है ना नहीं जिन लोगों ने. मारा वो तो है वो तो तीन गोली चलाने वाले. गोली चलाने वाले उनको किसने भेजा था वो ये.
क्लेरिटी नहीं है वो तो बाबा सिद्दीकी को. भी मारा हा अब लोरेंस का नाम आ गया नाम. आया यहां भी नाम ही आया वैसे बहुत घटनाए. हो रही है देश में इधर उधर कि नाम आ रहा. है जो पीछे था सिद्धू मूसे वाला किया आपने. इसमें भी पछ नाम आया. बस एक और घटना. है संजीव उ जीवा इसको लखनऊ की एक भरी. कोर्ट में पचास पुलिस वालों.
पचास वकीलों के बीच में एक आदमी आया और. वकील की कोट पहने हुए और जैसे ही नद सटा. के मार दिया और यह आदमी सरेंडर भी कर दे र. है और तुरंत वहीं हाथ उठा दिया उन्होंने. एक पुलिस वाले उसको भी टांग के ले बाबा. सकी केस में भी ही हुआ था पट देखिए नए. लड़के जिनका कोई अपराधिक इतिहास नहीं है. बाबा सिद्दीकी में तो एक की उम्र बताते. हैं 16 1 साल ही है इतने कम उम्र के हैं. अतीक अशरफ वाले में सब 21 2 साल के हैं एक.
को चोरी री का छोड़ के बाकी कोई अपराधिक. इतिहास नहीं है जीवा को जिसने मारा है. उसकी भी उम्र 2021 साल. है उसका भी कोई अपराधिक इतिहास नहीं है तो. क्या इशारा करता है य नहीं इशारा यह करता. है कि यह एक सिस्टमैटिक तरीके से एक ही. आदमी से वो लॉरेंस बिश्नोई भी हो सकता है. कभी ना कभी तो यह बात खुलेगी ऐसा तो है. नहीं कि ये हमेशा बंद रहेगी कि यह एक ही. ओरिजिन. का एक ही मोटर्स ऑप इंडि.
का एक ही जगह. से बताए बताए हुए काम अगर मैं इसको और. थोड़ा सा सराइज करूं तो क्या हम यह कह. सकते हैं कि बाबा सिद्दीकी अतीक अहमद अशरफ. अहमद आपके पंजाब में सिद्धू मूसेवाला या. लखनऊ में जीवा इन सारी घटनाओं के पीछे एक. आदमी मास्टर हो सकता है जिसने इंस्ट्रक्शन. दिया हो जिस तरह से डेथ हुई या मारा गया. नहीं वही तो मैं कह रहा हूं कि ये जो मोड.
ऑपी वो एक जैसा है ऐसा कैसे हो सकता है. पहले जो हा जो जो ठेके पे मर्डर दिए जाते. थे जो पैसा देके जो मर्डर कराए जाते थे. जनरली उनका अपराधिक इतिहास हुआ होता होता. था लोग कहते थे भाई जो कर चुका है उसी प. पैसा इन्वेस्ट करो ऐसे करने से कोई फायदा. नहीं है आप देख लीजिए पुराना इतिहास जो भी. है जिनके मरने से एक वर्ग खुश हुआ एक वर्ग. सवाल कि हां जैसे बाबा सिद्दीकी वाले में. भी देखा मैंने तो उस आदमी को प्रेस. कॉन्फ्रेंस करवाई गई हां ठीक बात है वो.
लड़का कह रहा है प्रेस कॉन्फ्रेंस में कि. कोई साधु आदमी थोड़ी ना था हां और मैंने. पहली बार देखा कि अपराधी डर नहीं रहा वो. कैमरे के सामने बेखौफ बैठा बग पुलिस वाले. खड़े हैं और कह रहा है अरे साधू आदमी. थोड़ी ना था बहुत कब्जा किया था ये किया. था वो किया था मार दिया मार दिया अतीक. अशरफ में भी यही हुआ था यही हुआ था अब. देखिए ऐसा है ना कि अब ये तो. इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज पर ही छोड़ देना. चाहिए चा हम आप कयास ही लगा सकते हैं. हमारा कयास सही भी हो सकता है गलत भी हो. सकता है आपको लगता है लॉरेंस.
बिश्नोई उतनी बड़ी शख्सियत है जितना बड़ा. उसका नाम हो गया अभी भाई 10 साल से वह एक. जेल के भीतर बंद है और कहा तो यह भी गया. है कि उसने कभी बेल के लिए अप्लाई ही नहीं. किया हां ये सच बात है नहीं किया उसने. अप्लाई उसने नहीं किया आप उसको उस जेल से. बाहर पूछता के लिए नहीं ले जा सकते आपको. जो पूछताछ करनी है वहीं जाकर करिए आप किसी. दूसरे केस में भी आप वारंट बनवा के नहीं. ले आ सकते वो वही रहेगा इसका मतलब बाहर से. उसका फिजिकल कनेक्ट नहीं है तो अगर यह सब.
कर रहा है तो कोई ना कोई कनेक्शन है. मोबाइल उपलब्ध है वहां पर कुछ न कुछ तो है. जब वो वहां से यह कर रहा है मतलब देन इट्स. नॉट ओनली अबाउट लॉरेंस बिश्नोई हां हम. कैसे कह सकते हैं या कोई कैसे कह सकता है. लेकिन मानना यही है अब उनके जो अब देखिए. कहते हैं कि एनआईए की रिपोर्ट में बताया. था कोट किया गया है किसी पेपर में कि साहब. 700 शूटर है उसके. और किसी ने किसी को धमकाया और ओन कर लिया. कि साहब ये हम तो लॉरेंस बिश्नोई के आदमी. हैं 100 आदमी कह देंगे लेकिन अल्टीमेटली.
इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज को वहां तक. पहुंचना पड़ेगा नहीं तो ये जो हमारी. एजेंसीज है वो इतनी हेल्पलेस फिर क्यों है. कि लॉरेंस बिश्नोई देखिए मैं यह नहीं कह. रहा कि हेल्पलेस होंगी सर आप खुद सोचो. लॉरेंस बिश्नोई टीवी पर इंटरव्यू दे लेता. है 10 साल से जेल से बाहर निकला नहीं कोई. पुलिस उससे जाकर पूछताछ नहीं कर सकती कोई. उसे बाहर निकाल नहीं सकता वह जो चाहे वो फ. पर डलवा सकता है वह जहां चाहे जिसको मरवा. सकता है लेकिन बाहर से कोई कुछ नहीं कर. सकता उसका नाम का डंका कैनेडा में बज रहा.
है अमेरिका में भी चर्चा हो रही लॉरेंस. बिश्नोई और इंडिया में भी चल रहा है अब या. तो वह पैरेलली सरकार ज्यादा पावरफुल है या. कोई इतना पावरफुल है जिसने लॉरेंस को. पावरफुल कर दिया है देखिए यह विवेचना करना. तो शुभंकर जी आपका काम है मैं आपको. बताऊं कि यह ट्रेंड बहुत खतरनाक है मैं. इतना ही कह सकता हूं आप देखिए जैसे. कॉर्पोरेट कंपनी होती है विंडोस खुली हुई. है एक विंडो पर कि साहब आपका टारगेट क्या.
है दूसरे पर रैकी करने वाला कौन है तीसरे. पर आपको आम्स कहां मिलेंगे चौथे पर आमस. चलाने वाले कौन है एक बड़ा एक जैसे ना. सिस्टमैटिक एक वह बना हुआ है और फिर व. एक्सक्यूट कर देते. हैं इन सब मामलों में एग्जीक्यूट हुआ जो. नाम के आया जो प्रेस ने बताया जो पब्लिक. डोमेन में है व लॉरेंस नहीं है एजेंसीज. वहां तक पहुंच नहीं रही है या एजेंसी.
डिक्लेयर नहीं कर रही है या एजेंसी बताना. नहीं चाहती हैं अच्छा क्या ऐसा भी हो सकता. है कि य जितने मर्डर हुए हैं जी जिसमें. सिद्धू मूसेवाला चलिए केस अलग कहानी रही. है सिद्धू मूसेवाला के अलावा अतीक अशरफ. बाकी जितनी कहानी हो रही है या लॉरेंस के. नाम पर जितनी बातें आती लॉरेंस ने करवाया. वो लॉरेंस ने करवाई ही ना हो. नहीं यह देखिए दोनों ही ऑप्शन में जब तक. कोई चीज सामने ना आए कौन कह.
देगा कल को इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज कहती. साहब हमें कॉल मिल गई है मैंने कॉल कनेक्ट. कर ली है लॉरेंस ने करवाया है तो कौन कह. देगा साहब इसने नहीं करवाया लेकिन हमारा. सिर्फ ये कहना है कि अब तक किसी नतीजे पर. पहुंच जाना चा जेल से इंटरव्यू कैसे हो. गया लॉरेंस विश् का मैं कह रहा हूं इसीलिए. मैं कह रहा हूं कि अब तक किसी नतीजे पे. इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज को पहुंच जाना. चाहिए आपसे समझना चाह र आप तो एसटीएफ के. अधिकारी रहे हैं एक आदमी जिसको आपने हाई. सिक्योरिटी जेल में रखा जिससे पुलिस वाले. भी नहीं मिल सकते इन्वेस्टिगेशन एजेंसी को. भी आप कहते हो कि आपको वीडियो.
कॉन्फ्रेंसिंग प मुलाकात करनी है वो आदमी. जेल में बैठ के आराम से कह रहा सर जी. देखिए ना मोबाइल फोन रखे हुए हैं हां सर. वो उसने गलत किया इसलिए मैंने मरवा दिया. हां सर ऐसा हमारे साथ भी गलत हुआ है बॉडी. लैंग्वेज से भीना डर बहुत देखिए ये ये. पहली बात तो जन मैनुअल के हिसाब से ये. प्रोहिबिटेड चीजें हैं जो भीतर नहीं जा. सकती अतीक अहमद ने देवरिया जेल में रहते. हुए एक या किसी जेल में रहते हुए देवरिया. के किसी आदमी को बुलवाया जेल के भीतर उसे.
पिटवा और फिर उससे रंगदारी मांगी पैसा. मांगा गया फिर मुकदमा कायम हुआ बहुत दिन. बाद अभी शायद उसमें सजा भी हुई इसके मरने. के पहले तो आप कहेंगे कि जेल में ये कैसे. हुआ लेकिन हुआ नहीं ये तो यूपी बिहार की. जेल में तो कॉमन है हमारे भी अभी हम बिहार. गए थे वहां पर नाम नहीं लेंगे हम लेकिन एक. बाहुबली के परिवार वाले मिले उनको दिखा थे. 36 फोन रखा है बगल में मौज काट रहे थे. हंसी मजाक उड़ा रहे थे कि हमारे यहां तो. ऐसा होता है ये होता है तो वहां तो चलिए.
यूपी बिहार में समझ में आता है लेकिन. लॉरेंस का मामला तो पुलिस से आगे बढ़ गया. है नहीं तो अब ये मैं तो कह रहा हूं जेल. तो किसी ना किसी के अंडर में ही रहती है. ना भाई यूपी की जेल यूपी जेल प्रशासन के. अंडर है बिहार की बिहार जेल प्रशासन के. गुजरात की जहां साबरमती में ये बंद है वो. रा ऑफ लोरेंस बिश्नोई का नेगेटिव इंपैक्ट. क्या हो सकता भविष्य जैसे आपने कहा ना कि. जब यह चलता था नेता लोगों ने श्री प्रकाश. शुक्ला या मुख्तार इन लोग को साथ में रखा.
इसका इंपैक्ट हमने देखा बाद में अगले 152. साल क्या दिखाई पड़ा अभी जो ये घटनाएं हो. रही है कि अतीक अहमद को ऑन द स्पॉट मार. दिया जा रहा है इंसाफ के नाम पर बाबा. सिद्दीकी को मार दिया गया इंसाफ के नाम पर. या सिद्धू मूसेवाला को मार दिया गया इंसाफ. के नाम पर या जीवा को मार दिया गया इंसाफ. के नाम पर मुन्ना बजरंगी को जेल में ठोक. दिया गया इंसाफ के नाम पर तिहाड़ में. हत्या कर दी गई ऐसे लोगों को जिनका. अपराधिक छवि है उनको अब लोग खुलकर मार दे. रहे हैं क्योंकि एक वर्ग समर्थन भी करता. कि य बहुत घटिया आदमी था गिरा हुआ आदमी था.
अच्छा हुआ मर गया यह जो पैटर्न शुरू हुआ. है इसका क्या कॉनस देखिए ये पैटर्न बहुत. डेंजरस है अभी तो यह एक डायरेक्शन में चल. रहा है यह जरूरी नहीं है कि यह पैटर्न जो. भी कंट्रोल कर रहा है वह उसके कंट्रोल में. ही चले जिस दिन वह कंट्रोल के बाहर हो गया. फिर वह बहुत बहुत सी दिक्कतें होंगी और इस. तरह के एक्शंस के रिएक्शंस भी होते हैं. पास्ट में भी हुए हैं और आगे भी होंगे.
पुलिस वालो को लोग पैसा देते हैं कि इसको. ठोक दो नहीं देखो प जैसे मुंबई में हमने. बहुत सारी फिल्में देखी अब तक 56 और ों. फिल्म आई है शागिर्द आई थी और बहुत सारी. फिल्में आई बहुत सी फिल्में हैं बहुत सी. फिल्में हैं और बहुत सी ऐसे मुकदमे कायम. हुए बहुत से पुलिस वाले इसी आरोप में जेल. में है एनकाउंटर करने वाले इसी आरोप में. जेल में है कि आप पहले साउथ के साथ थे फिर. आप जाक ठोकने लगे हां हां तो ये यूपी में. भी तो आया होगा आता होगा ना कि सामने वाले. गैंग को आप मार दीजिए मैं कह तो रहा हूं.
ये सब जगह हुआ है आप लोग तक भी आता था. नहीं हम लोगों पे ये नहीं आता हम लोगों के. समय में ये सब देखिए अब तो ये तो जब. टेक्नोलॉजी बहुत आगे हो गई हम लोगों के. यहां ऐसा कभी ये आरोप कभी लगे भी नहीं. जहां आरोप लगते हैं वो बराबर आरोप लगते. हैं लेकिन इस तरह के आरोप हम लोगों की. यूनिट पे हम लोगों पे कभी बट चलो मैं एक. और फ्रेम करता हूं क्या मुस्लिम. बाहुबलियों को जो एक साथ डेथ हो रही है. शहाबुद्दीन. जो अपराधिक किस्म के बाहुबली थे जिनका एक. जमाने. में डराने वाला इतिहास रहा है कप कपाने.
वाला इतना घिनौने अपराध जि जिनके ऊपर आरोप. लगे कई साबित हुए अतीक अहमद मुख्तार. अंसारी इनका जो सडन सडन एक के बाद एक डेथ. होती जा रही है ये कोइंसिडेंट लगती है. आपको या लगता है कि नहीं नहीं नहीं खाली. इन्हीं की नहीं हुई सिद्धू मूसेवाला को भी. बताइए ना देखिए ये मैं फिर कह रहा हूं कि. अपराधी को कभी जाति और धर्म से म तो उसका. सिद्धू मुसेवाला का भी तो मैंने नाम लिया. शुरू में कि उनको भी इसमें रखा गया उसका. तो एक्सेप्टेंस आ से वाला और जीवा और बहुत. मैं बार-बार कहता हूं देखो आप जिस चश्मे. से देखना चाहेंगे वो देख सकते हैं लेकिन.
अपराधी की कोई जाति नर कभी रही अपराधियों. में आपस में जाति धर्म होता है आपस में भी. नहीं होता अपराधी अपराधी है चाहे इनके लिए. अपराधी है तो अपराधी है ग्रुप में है उसी. ग्रुप में जब दो फाड़ हो गए या तीन फाड़. हो गए आपस में झगड़ा शुरू हुआ तब वह कहने. लगे नहीं साहब वो फलाना था इसलिए ऐसा हो. गया लेकिन जब एक साथ क्राइम कर रहे हैं. दाऊद का पूरा गैंग क्या अकेले मुस्लिम थे. उसमें क्या छोटा राजन क्या था मैनेजर था. उसका राइट हैंड था बबलू शवास क्या था तो.
जब आप अपराध कर रहे हैं मौज कर रहे हैं तब. तो एक है वाले में बाद में हिंदू मुसलमान. हुआ वो हुआ वो तो बाद की बात हो गई ना हुआ. जब ये मुंबई ब्लास्ट हुआ उसके बाद तो. बिल्कुल सीधा दो फाड़ हो गए हिंदू एलिमेंट. अलग हो गया मुसलमान एलिमेंट अलग हो गया. लेकिन अभी भी इनके साथ मुस्लिम एलिमेंट के. साथ भी हिंदू हैं और हिंदू एलिमेंट के साथ. भी मुस्लिम है तो देखिए खाली मुसलमान. टारगेट हो रहे हैं या खाली हिंदू ये अभी. कहना ठीक नहीं है सर क्या लॉरेंस बिश्नोई. को अगला दाऊद इब्राहिम बनता हुआ देख रहे.
हैं आप ये कहता बड़ा खराब ट्रेंड है अगर. इसको चेक नहीं किया गया नतीजे तक नहीं. पहुंचा गया कि आखिरकार यह सब हो कहां से. रहा है तो ये ट्रेंड बहुत खराब है क्योंकि. लॉरेंस के नाम से हर आदमी डर रहा हां ये. ट्रेंड बहुत खराब है भाई देखिए 12 साल 13. या 14 साल से मुंबई अंडरवर्ल्ड खाली हो. गया था एक दूसरे को मारा खत्म कर दिया जो. बचा वो पुलिस ने मार के खत्म कर दिया सब. सन्नाटा हो गया था अचानक एक घटना ऐसी हुई. कि जो वही हफ्ता वसूली वही चीजें वो फिर.
शुरू हो जाएंगे नहीं इसको पता है इसके लोग. वहां पर धमका के पैसा ले लेंगे जो हमेशा. होता आया. है उसके नाम पर धमका के पैसा मतलब टेरर तो. हो ही गया तो इसलिए जल्दी से जल्दी इसके. नतीजे पर पहुंचना जरूरी है अभी देश में. कौन-कौन बाहुबली है आपके हिसाब से. बड़े-बड़े हैं अभी कोई बाहुबली बचा या उस. टाइप का जलवा जैसे पहले था ना नहीं तो ऐसा. बाहुबली उस तरह जैसे सरज भानन लोग अभी. जिंदा है इनका जलवा है नहीं देखिए ऐसा. नहीं ज पल हो गए रास्ता दूसरा पकड़ लिया.
ठंडे हो गए लोग. नहीं ऐसा कुछ नहीं एक आदमी कोई ऐसा नाम. बताने लायक नहीं है जिसका एक तरफा. डोमिनेंस तरफ डम या सब पॉलिटिकल हो गए हा. सभी लगभग पॉलिटिकल हो ग एक तरफा डोमिनेंस. वाला कोई नहीं लोकल लेवल पर तो हर जगह. मौजूद. है हर जिले का और हर का एक कोई ना कोई डॉन. है लेकिन ऐसा जो सर्व व्यापत व्याप्त डॉन. हो ऐसा नहीं रह गया अगर पूर्वांचल में डॉन. लोग बाहुबलियों की लिस्ट बनानी हो सबसे.
पहला नाम किसका रखेंगे. आप सबसे ज्यादा खौफ इस आदमी का था अगर. आपको बताना हो पूर्वांचल या यूपी के यूपी. बिहार के अगर डॉन की लिस्ट बनानी हो आप. अपने पुलिस का यूपी बिहार की अगर बनानी हो. तो देखिए शहाबुद्दीन से ज्यादा खौफ किसी. का नहीं रहा नंबर एक पर शहाबुद्दीन नंबर. एक का उसके उससे ज्यादा कोई किसी का खौफ. नहीं रहा उसके बाद अ. ये जो झगड़ा था इनका मुख्तार और बृजेश का. फिर तीसरी जनरेशन जब आई मतलब तीसरी टुकड़ी. आई या तीसरा आया वो आया इनका वीरेंद्र.
शाही और हरिशंकर तिवारी ह शंकर तिवारी का. फिर उसके बाद तो बहुत से आ ये सिंगिल आया. इसका किसी से. कोई झगड़ा. टंटालूम के साथ विदा भी ले लेते हैं हम तो. अब वो जो पुरानी जनरेशन है उसकी तो विदाई. हो गई वो तो खत्म हो गई उसमें तो कोई बहुत. कोई दम रह नहीं गया है नई जनरेशन में इका. दुक्का अपराध लोग करते हैं अब आगे के. भविष्य के लिए कौन जानेगा कि अभी ये आगे.
चलके बड़ा अपराधी बनेगा कि नहीं बनेगा हम. पुलिस प्रशासन अगर चाह ले क्या ऐसे अपराधी. पनप सकते हैं नहीं चाहने से नहीं होता है. पुलिस की लापरवाही से. ऐसे अपराधी पनप सकते हैं लेकिन अब मैंने. बताया ना कि बहुत इतने इलेक्ट्रॉनिक गजट. इतने फॉरेंसिक टूल्स इतना इन्वेस्टिगेशन. में फॉरेंसिक साइंस का इस्तेमाल कि अब ऐसा. नहीं होगा कि 4040 मर्डर है और किसी में. कन्वे नहीं हुआ है और 50 साल से अभी तक.
कुछ नहीं हुआ ऐसा नहीं होगा सबसे कठिन. जिला कौन सा था जहां आप काम किए ये आ कि. इस जिला में नरक कर दिया लोगों ने यूपी. में नहीं ऐसा तो कोई फिर भी कोई एक तो. होगा जहां आपको कंपेरिजन में थोड़ा टफ लगा. हो कि यार ये थोड़ा यहां के लोग थोड़ा. ज्यादा ठेट जैसे आपने कई जुल्म काम किया. मेरट बरेली लखनऊ गोंडा हां किया है बहुत. जगह किया है बहुत किया है हमारे शहर में. जलवा है बज भूषण शर सिं. पडित सि पहले हां थे मैं जब वहां एसपी था. डा में तो पंडित सिंह का जलवा था व खूब. जलवा था मंत्री भी थे वो स्वास्थ्य मंत्री.
नहीं नहीं कोई और आप किस साल में थे मैं. अभी था वहां 16 में 15 16 में तो पंडित. सिंह थे उस समय मंत्री विभाग का तो नहीं. पता लेकिन मंत्री थे दबदबे वाले मंत्री. जैसे कहते हैं रे हमने जलवा देखा है आप तो. वहीं के रहने. वाले वैसे बहुत टफ क्राइम के मामले में. सबसे टफ मुझे मेरठ लगा. हम कि क्राइम हर वैरायटी का क्राइम है और. बड़ा टफ क्राइम है अरे मेरठ में घटना हुई.
थी जब अभी सी एनआरसी वाले टाइम चल रहा था. हां पुलिस वालों की 101 गाड़ी रात हो गई. हां और पीछे हम मीडिया वाले गाड़ी लगा लिए. हां और आगे गए थोड़ा अंधेरा था और एक साथ. ढेला आना शुरू हुआ पुलिस पर भी पड़ा था. हमारी गाड़ी पड़ा दो पत्थर हम लेके भी आ. गए थे कि उस दिन बचे थे मरते मरते टफ है. वो जिला थोड़ा सा हम टफ है की छवि इतनी. खराब क्यों होती है आर्मी वाले को आदमी. सलूट मार देता है पुलिस वाले कहता है. ठुल्ला मामू ये सब क्यों अब देखिए ऐसा काम. तो आप लोग भी जनत के लिए कर रहे हैं आर्मी.
का जो पब्लिक से मिलना जुलना है वो. बिल्कुल नगन है कम है है ना उनका काम जहां. पे है उससे उनको सलाम किया हमेशा किया. जाता है ह पुलिस का जो इंटरफेस पब्लिक से. है हम वो बहुत ज्यादा है हम तो आप काम. करेंगे तो भी आपकी खिंचाई होगी और नहीं. काम करेंगे तो भी खिंचाई होगी तो इसलिए वो. अ ऐसा पुलिस के बारे में कहा जाता. हैरी कहानी हम आपसे सुन लेते हैं मुन्ना. बजरंगी की मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय.
हत्याकांड को अंजाम दिया था ठीक पूरा यूपी. बिहार देश जो है वह डर गया था ठीक है बहुत. खतरनाक कांड था वो 2005 29 नवंबर हां 2005. में फिर हमने सुना मुन्ना बजरंगी पर भी आप. लोगों ने खूब गोली चलाई थी और कुछ गोली. शायद उसके दिल कहीं शरीर में रह गई थी ये. जब एसटीएफ बनी थी तो उस समय यह हुआ था कि. साहब पहले तो लिस्ट हम लोग बना ले कौन-कौन. है पूरे प्रदेश की एक तो जो टारगेट दिया. गया वह अपनी जगह है फिर पश्चिमी उत्तर. प्रदेश के एक तो सतेंद्र वर सिंह साहब थे. और दूसरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तेवतिया.
थे इंद्रजीत सिंह तेवतिया त हो. गया तो तभी यह पता लगा कि सत्यंद्र गुर्जर. करके है बड़ा अपराधी है वेस्टर्न यूपी का. और उस परे सरकार का इनाम भी है. 000 उनको कहीं से इसकी सूचना मिल. गई कि फला जगह से निकलेगा और फला जगत तक. वो जाएगा रास्ते में इंटरसेप्ट किया गया. पेट्रोल पंप. पे इसने छूटते ही गोली चला.
दी पुलिस ने गोली मारी तीन तो लगी. सत्येंद्र गुर्जर को नौ लगी मुन्ना बजरंगी. को हॉस्पिटल ले जाया गया नौ गोली लगी थी. मुन्ना न गोली ल किस साल की बात है ये ये. बात है 98 की ही बात होगई और फिर भी सरा. जिंदा रहा हां लगी वहां पर और वो अ. उसको ले जाया. गया वो तो दोनों मर्चरी में ले जाए गए. खत्म हां कि खत्म हो गया मामला थोड़ी देर.
बाद जो मर्चरी का केयर टेकर है वह लाश को. उस ट्रॉली पर लाता हुआ इमरजेंसी में ले. बोले साहब इसने जान. है और फिर उसका दवा इलाज हुआ तब तक. मुख्तार के सारे बड़े वकील जितने बड़े. वकील थे सब अस्पताल आ गए उका कोई डॉक्टर. हाथ नहीं लगाएगा. हाई कोर्ट से सुनवाई कराई उन्होंने. उन्होंने कहा साब जो भी इसको दवा दी जाएगी. जो भी इसका ऑपरेशन किया जाएगा जो वह सब.
रिकॉर्डिंग होगी. उसकी यह हल्ला हो गया कि साब यह लोग लगे. हैं ज ना दिलवा दे इसको या डॉक्टर ही ने. इसको डिक्लेयर कर दिया बाद मुखता की खुद. की साथ आरोप लगता है मुख्तार को धीरे धीरे. जहर दे मरवा दिया फिर उसको अगर एक टेबलेट. भी दी जानी थी तो उसने तमाम मुकदमे दाख बट. नौ गोली कहां-कहां लगी थी जिंदा बच गया वो. कुछ तो कंधे पे लगी थी एक उसमें जो उसके. हार्ट के पास लगी थी वह डॉक्टर चाहते थे.
कि इसको निकलवा दे तो उसने कहा नहीं यह. डॉक्टर सब मिले हुए हैं इसको जहां. इन्होंने खोला तहां फिर यह हार्ट हमारा. पंचर कर देंगे उसने नहीं निकलवाई आठ. गोलियां तो निकाली गई पेट में थी कुछ इधर. थी कंधे पे थी तीन दो या तीन गोलियां उसको. नहीं निकलवाया गया जब बागपत जेल में वह. मारा गया व मारने ने के बाद जब. पोस्टमार्टम हुआ तो एक बुलेट वो जिस परे. मसल सब चढ़ गई थी बन गई थी इतने सालों में. 20 साल पहले 25 साल पहले वो बुलेट भी.
निकली है वही जो अंदर बुलेट जहर नहीं बनती. नहीं नहीं जहर नहीं बनती देखिए फॉरेन. मटेरियल है वो और दूसरे 100 डिग्री से. ज्यादा का टेंपरेचर उसका रहा होगा तो. उसमें सब खत्म हो गया होगा मेटल है. ज्यादातर वो रांगे तांबे की होती हैं वो. भीतर पहुंच गई उसमें वायरस या बैक्टीरिया. तो लगा नहीं होगा आग की तरह जलते हुए. निकली है तो वह भीतर जहां गई वहां पड़ी. रही फिर धीरे-धीरे उसके ऊपर मसल्स उसको. इनसर्किल कर देती हैं ऐसी मिली थी हालाकि.
बड़ी दर्दनाक मत मुन्ना बजरंगी की भी हुई. थी बहुत दर्दनाक मौत हुई थी उस लोग कहते. हैं कि मुख्तार का दबदबा जब कम हो रहा था. तब मुन्ना बजरंगी ने उसको दोबारा दोबारा. उसको खड़ा किया ू पॉइंट टक बना दिया. बिल्कुल कराया था मुन्ना उसका सबसे. ट्रस्टेड लेफ्टनंट था सबसे ट्रस्टेड अ. बजेश सिंह को जो भगाया गया था उसके पीछे. मुन्ना बजरंगी मुन्ना बजरंगी था और आज भी. नहीं पता लगा कि मुन्ना बजरंगी को मारा.
किसने या कहे कि सबको पता है. लेकिन पता ही है गजब कहानी नहीं लेकिन एक. बात है ना हमारे आपके पता लगने से कुछ. नहीं होता. ना अ लेकिन कागज प आना चाहिए ना कागज प. आना चाहिए चाट सबमिट होगी जेल में आके मार. दिया जा रहा है विवेचना होगी विवेचक उसको. बताएगा कि जेल में कैसे मार मारा किसने. मारा सब चीजें जो चीज अदालत में जानी है. वो तो इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसीज करेंगे ना. हम आपको ये कई बार बड़ा ड्रामा नहीं लगता. आपको कि सबको पता है जैसे अभी मैं एक. पिक्चर देख रहा था.
अ कौन सी आ हर्षद वारसी की पिक्चर आई ी. जॉली एलएलबी हां अरे क्या पिक्चर है वो भी. तो जवाली एलएलबी में जो सौरभ शुक्ला जज है. वो कहते हैं कि जिस दिन मुकदमा कोर्ट में. आता है उस दिन जज साहब को पता होता है कि. कौन अपराधी है कौन अपराधी है और कैसे. अपराध हुआ है लेकिन जज बैठा रहता है कि. सबूत अब आएगा अब आएगा अब आएगा अब आएगा और. फिर सबूतो के भाव में छोड़ दिया जाता. है एक आदमी जेल में जाता है बंदूक सामान. उसमें क्या नाम है नीचे डाल दिया आता है.
सारी चीजें शायद गटर गटर में बंदूक ाल दी. गई थी पहली हत्या जेल में थोड़ी हुई है. बनारस जेल में हुई हत्या बड़ी-बड़ी. हत्याएं हुई जेलो में हत्या पहली बार. थोड़ी. हुई बहुत हत्या लेकिन बिना इवॉल्वमेंट के. तो होती नहीं पुलिस प्रशासन अब वो देखिए. ऐसा है ना कि हम तो उस परे जाएंगे कि. इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसी कह क्या रही वो. कहां तक पहुंची हैं वो क्या बताती हैं. कहां से सबूत उनको मिले हैं किस सबूत के. आधार पर किसका इवॉल्वमेंट बताती हैं हमारे. आपके कहने से क्या होगा बताओ कल्याण सिंह.
हम मुलायम सिंह यादव. मायावती योगी आदित्यनाथ बीच में मायावती. राजनाथ सिंह अखिलेश यादव ये सब आपके. कार्यकाल में रहे होंगे सबसे सख्त आदमी. कौन रहा कि जो जीरो मतलब एकदम आपको लगा कि. नहीं यार इसकी सरकार में कंपेरिजन में मैं. बुरा नहीं पूछ रहा हूं कौन था नहीं सबसे. ज्यादा अपराध पर कंट्रोल करने वाला और. बिना पार्शियल्टी के. कौन जिस कालखंड की मैं बात कर रहा हूं जिस.
समय अपराध सब अपने चर्म प था अगर उसको. देखें तो कल्याण सिंह साहब जैसा. सख्त चीफ मिनिस्टर अन बायड जीरो टोलरेंस. वाला उस समय के हिसाब से कोई नहीं था वो. भी पहले टर्म में दूसरे टर्म में वो भी. नहीं रह गए लेकिन पहले टर्म में. उसी तरह का शासन प्रशासन हो. तब या फिर सेकंड आपने एक ही ऑप्शन पूछा तो.
व सेकंड जो वर्तमान में कम से कम क्राइम. पर योगी जी ने प्रहार किया है बहुत ही. तगड़ा प्रहार किया है बट यह एनकाउंटर जो. चलन है पुलिस पर बड़े आरोप लगते हैं कि. एनकाउंटर हो गया अब य आता है कि एनकाउंटर. से क्या अपराध रुक जाएगा नहीं देखिए यह तो. बहुत आप जैसे कहते हैं ना कि इस. किसी चीज से कंपेयर करने वाली बात नहीं है. एनकाउंटर कोई ऐसा नहीं है कि जानबूझ के. कोई कर रहा है जानबूझ के गोली मार दे रहा. है देखिए.
कंट्रोवर्सी करना कंट्रोवर्सी में लाना. कौन सा एनकाउंटर ऐसा हुआ जिसमें कोई. कंट्रोवर्सी नहीं हुई है अरे बहुत बढ़िया. बढ़िया अभी कौन सा हमने देखा एक अभी कोई. आप आनंदपाल का एनकाउंटर देखिए अरे बहराइच. वाला जो था उसमें जब वो अपराधी भाग गए और. पुलिस वाले पकड़े तो कह रहे तुझे हम समझा. रहे थे मत जाना तो कहता गलती हो इतनी. मासूमियत से कन्वर्सेशन चल रही थी पुलिस. वालों के बीच में मैं कह तो रहा हूं कौन. सा एनकाउंटर इसमें कंट्रोवर्सी नहीं होती. सब में होती है उत्तर प्रदेश की बात आप. करते हैं किसी भी स्टेट में देख लीजिए अभी.
वो तमिलनाडु में एक बच्ची के साथ एक महिला. के साथ डॉक्टर के साथ पांच लोगों ने वो. किया और सार्वजनिक ठोक दिया गया हां उसी. जगह पे वो मारे गए एनकाउंटर ही था ना तो. क्या. बड़ा उसको सरने वालों ने सराया लेकिन आज. क्या है सबके खिलाफ मुकदमा कायम हो. गया तो कंट्रोवर्सी तो हर एनकाउंटर फिर जब. पुलिस वाले पता रहता है कि एनकाउंटर में. उसे पकड़ लिया जाएगा अब बाद में ह्यूमन. राइट वायलेशन या कोर्ट कचहरी चक्कर या. सस्पेंशन आपका होगा हां किसने करवाया वो.
तो अलग आओ तो बचा नेता कुर्सी बची है पा. साल जाएगी फिर लौट आएगी किसने करवाया ये. नहीं तभी मैं देश भर की बात कर रहा हूं कि. जिसने भी जिस राज्य में करा क्यक ये एक. अच्छा कितने परसेंट एनकाउंटर सही होते हैं. अगर दिल पे हाथ रख के बताना हो नहीं. ज्यादा मैं देश भर की बात कर रहा ह मैं. देश भर की बात कर रहा हूं देखिए 50 फीसद. से ज्यादा एनकाउंटर पर कोई टिप्पणी टीका. नहीं आ देखिए आप हम कहते हैं कि नहीं साहब. ये एनकाउंटर बिल्कुल सही है लेकिन 100 लोग. खड़े होकर उसको क्रिटिसाइज कर रहे हैं या. उसमें तमाम टीका टिप्पणी कर रहे हैं तो.
कैसे सही मानेंगे तो ऐसे 50 प्र से अधिक. एनकाउंटर हैं जिन पर कभी कोई उंगली नहीं. उठी कभी कोई दर्खास्त तक नहीं पड़ी लेकिन. तमाम पे उठे हैं जबकि हम लोग जानते हैं कि. वो सही हैं सही थे सही एनकाउंटर है लेकिन. उंगलिया उठी है तो देखिए समाज है लोकतंत्र. में किसी को फिर भी एक अगर आपको परसेंटेज. देना कि इतना परसेंट फर्जी हो सता है इतना. सही होता है नहीं मैंने बताया ना कि 50 पर. तो कोई उंगली नहीं उठती है 50 में ही 30. 40 पर फर्जी बनाया था नहीं अब कितने पर.
फर्जी देशर की बात कर रहा मैं देश भर की. ही बात कर रहा हं मैं यूपी आपको कटघरे में. नहीं ला रहा नहीं नहीं कटघरे वाली बात ही. नहीं है मैं तो जैसे जब इलाहाबाद में कांड. हुआ था अतीक के लड़के की जो तस्वीर आई थी. तो करंट गवर्नमेंट के स्टाइल देखकर मुझे. ना जाने क्यों लग गया था अति का लड़का. बचेगा नहीं क्योंकि सार्वजनिक तौर पर एक. गवाह को आपको अकेले ही थोड़ी लगा था हां. आपको अकेले नहीं लगा और फिर वो हो गया वही. हुआ अतिक वाला हालाकि मुझे नहीं लगा था कि. अतीसा हो जाएगा वो मेलिए शॉकिंग था जिस. तरह से. हुआ लेकिन फिर उसम लोग कहते हैं कि.
सार्वजनिक परेड कराई गई सार्वजनिक तौर पर. व घूम रहा. था देखिए ऐसा है ना आप मैंने तो बारबार यह. कहता हूं. कि सारे एनकाउंटर्स पर लोग कुछ ना कुछ. टिप्पणी टीका टिप्पणी करते हैं लेकिन 50. फीसद ऐसे साफ सुथरे एनकाउंटर जिस कभी किसी. ने टीका टिपड़ी नहीं की और बाकी में लोग. तंत्र है आपको अधिकार है घर वाले तो कभी. किसी एनकाउंटर को सही नहीं कहेंगे कौन से. एनकाउंटर को उनके घर वालों ने कह दिया कि. नहीं साहब बड़ा अच्छा हुआ मार दिया अपने.
बहुत कम ऐसे हैं रेयरेस्ट ऑफ रेरस हैं. लेकिन पुलिस वाला ठोका तो पक्का मारा जाए. जैसे विकास दुबे था वहां भी पक्का था कि. गाड़ी प ये जो अब तो यूपी तो एक पैटर्न बन. गया गाड़ी पलट जाएगी हां हालांकि उसके बाद. गाड़ी पलटी. नहीं अरे अब तो मीडिया एकदम पीछे पड़ी. रहती है अतीक अहमद को तो पेशाब करते लोगों. ने वीडियो बनवा के डवा दिया अ देखी थी. आपने ख देखी थी देखी क्यों नहीं कि वो. किनारे पेशाब कर रहा था उसका भी लाइव. रिकॉर्डिंग चल रहा है देखिए अतीक अहमद. यहां पे पेशाब कर रहे. हैं क्या हो गया समझ में नहीं आ पुलिस की.
नौकरी बड़ी कठिन है बहुत कठिन है बहुत. कठिन है पुलिस की नौकरी से कठिन कोई मतलब. एक ही दिन में ठंडा गर्म सर्दी गर्मी. बरसात सब एक ही दिन में पुलिस अधिकारियों. को झेलना पड़ता है चाहे जिस रैंक का हो तो. ये मेंटल पीस पुलिस वाले मेंटल पीस कैसे. करते हैं मेंटल पीस कोशिश करते हैं. हेल्थ सबसे बड़ा हेल्थ ग्राउंड इस समय. आपको पता है कितने सर्विंग पुलिस ऑफिसर्स. की डेथ हो रही.
है परेशानी से और यह कह ले तनाव से बहुत. डेथ हो रही है लेकिन इस पर किसी का ध्यान. नहीं है ध्यान ये आता है कि साब ये. एनकाउंटर आपने गलत कैसे कर दिया ये भी. देखिए आप. ह्यूमन जो फेस है किसी पुलिस वाले का यूपी. कर कहीं के भी उसको भी लोगों को. ध्यान में रखना चाहिए उसको भी देखना चाहिए. कि यह भी आदमी है यह भी समाज के हिस्से. हैं किसी गांव के होंगे किसी घर के होंगे.
इनकी भी पत्नी है बेटी बहन होगी यह क्यों. ऐसा करेंगे लेकिन अब जब आदमी नाराज होता. है तो कोई आरोप ऐसा नहीं बचता जो ना लगाए. आखरी सवाल आपके एक्सपीरियंस के हिसाब से. अभी लॉरेंस का नाम बहुत चल रहा है चारों. तरफ खबरें आ रही है हर घटना में उसका नाम. तो एक लड़का है वो अभिनव अरोड़ा वो भी कह. दिया कि हमको लॉरेंस बिष्णु धमकी दिया था. मैंने कहा कि वो नाम चल पड़ा जिसका तो यही. मैं कह रहा हूं तो क्या लॉरेंस का सच आपके. एक्सपीरियंस से कभी सामने आ सकता है या.
लॉरेंस को लेकर भी एक दिन से खबर आई. लॉरेंस का एनकाउंटर हो गया नहीं ऐसा नहीं. होगा सच तो सामने आएगा एनकाउंटर हो गया तब. भी सच सामने आएगा टस का बिल्कुल सच सामने. आएगा 100%. आएगा आप भी रहेंगे यहां हम भी रहेंगे. लॉरेंस का सच सामने आ आपकी किताब कब आरही. अगली अगली किताब एक तो कल आ रही है क्या. उसमें खास बज एंड बुलेट्स वो डिफरेंट काम. जो हमने अपनी सर्विस के दरमियान की है वो. है और एक दो महीने बाद दो महीने बाद एक और.
किताब लिख रहा हूं हिंदी में और इंग्लिश. वाली किताब तो राकेश गोस्वामी के साथ लिखी. गई ये जैसे वर्चस्व मैंने लिखी एक और. किताब मैं लिख रहा हूं वो अंडरवर्ल्ड के. डिवीजन से रिलेटेड है जितना एटीएस में रह. के हम लोगों ने जानकारी इकट्ठा की है. एसटीएफ में रह के इकट्ठा की है उस हिसाब. से और आप पर भी काफी हां. [संगीत].
youtube3 की हड्डी बिल्कुल सीधी थी कौन. ऐसा नहीं था यह कल को कौन बताएगा मेरे. बच्चों में इसका कोई इंटरेस्ट नहीं है तो. मुझे ऐसा लगा कि जो कुछ भी आपने किया है. क्योंकि हम ने वो दौर देखा है हमने दोनों. दौर देखा है. एक 90 के दशक और उसके पहले का और एक अभी. का दोनों दौर देखा है अगर हम नहीं बता. पाएंगे लोगों को तो कल को लोग जानेंगे.
कैसे इसीलिए वह किताब भी लिखी और इसीलिए. मैं अपने समय के सारे इंसीडेंट्स को और. उसके बाद जो अब होते हैं लगभग रोज होते. हैं ऐसे सच्ची घटनाओं को जो हुए हैं उसको. एक दिन में 35 मिनट 40 मिनट का एपिसोड. करते हैं लेकिन लास्ट में हम उसमें यह. जरूर बताते हैं कि इसमें क्या कमी थी क्या. गड़बड़ी थी क्या गलत हुआ पुलिस ने गलत. किया तो उसको भी बताते हैं इसमें पुलिस की. ये गलती थी पुलिस को ऐसा नहीं करना चाहिए. था घर वालों में किसकी क्या गलती थी यह.
अपराध हुआ क्यों किसकी गलती से हुआ यह सब. करीब 10 मिनट में उसकी विवेचना भी करते. हैं हर एपिसोड में आपके पास फोन नहीं आता. कि यार ये वाला पोल मत करना अगली किताब. में ये मत छाप देना नहीं नहीं फन फोन. क्यों कर रहे हो तो देखिए छपने के बाद ही. जिसको करना हो वो करेगा अपनी तरफ से तो वो. सब फैक्ट्स के हिसाब से करता हैं थैंक यू. सो मच सर लवली ट बहुत बहुत बहुत धन्यवाद. आपका आम शोर लोगों को भी आनंद आया होगा और. लोग भी आपके ड़ आपके किस्से कहानियों को. सुनते रहे हमने काफी आनंद लिया उम्मीद.
करते हैं इतना आनंद दर्शकों को भी आएगा. सबको आएगा आनंद थैंक यू शुभंकर जी. बहुत-बहुत धन्यवाद आपका.
