Unplugged ft. Sher Singh Rana | Phoolan Devi | Tihar | Prithviraj Chauhan | Pappu Yadav | Politics
कर्म और कांड दोनों में इन्होंने कोई कसर. नहीं छोड़ी है शेर सिंह राणा. [संगीत]. साहब असली मजा आपने लिया जिंदगी का. डेस्टिनी थी तो व ऊपर वाले के आशीर्वाद से. हुआ बड़े-बड़े कांड है साहब फूलन देवी का. कांड अफगानिस्तान जाके पृथ्वीराज चौहान की. अस्थिया लाने कांड तिहाड़ जेल में गिने. चुने लोग भागे उसमें आप कांड वो दोस्त लोग. कहते नहीं है कि शेर सिंह यार तुम फौज में. आते देश का नाम होता तुम कांड कर गए. डेस्टिनी बहुत बड़ी चीज है क्यों ठोक दिया.
आपने फूलन देवी बहुत लोग आपको माफ नहीं. किया अभी भी आपने ठगरा के चक्कर में ठोक. दिया आप ये कह रहे हो कि फूलन देवी के साथ. वो जो घटना दिल दहलाने वाली हुई जहां पर. कहा गया कि फूलन देवी के साथ गलत हरकत हुई. थी फूलन देवी ने जिन 20 लोगों को मारा. उनमें कोई डाकू था या वो सभी 20 लोग ठाकुर. थे भई कांड में तो आप उसे एक करोड़ रुप दे. देंगे मैं उसको एक करोड़ रुपए दूंगा आया. है कि आपको सुगाह हो गई थी कि फूलन देवी. के नाम पर फांसी हो सकती अच्छा फिर आपको. एक जबरदस्त आईडिया आया क्या रिवेंज पूरी. खराब है इस देश में देशभक्ति खूब चलती है.
और आपने पृथ्वीराज चौहान का नाम लिया उसका. असर ये हुआ कि जिस व्यक्ति को हत्या का. आरोपी लोग मान रहे थे वो देश का एक बड़ा. हीरो बन बताओ जेल से भागे कैसे क्या कैसे. ये आईडिया आया कि भाग जाते हैं मैंने किसी. को धोखा नहीं दिया मैंने किसी को धक्का. नहीं दिया मैंने किसी को हानि नहीं. पहुंचाई मिसयूज ना मासूम अपराधी आप नहीं. ऐसी मासूमियत कि जेल में किसी को परेशान. नहीं करेंगे मार के हम जाएंगे नहीं नशा हम. कराएंगे नहीं और जा रहे तो कंसर्न है कि.
भविष्य में ऐसे गलतियां और नहीं होनी. चाहिए मैं एस्केप था तो मेरे पास. अंडरवर्ल्ड. में बिल्कुल सुप्रीम ताकत बनने का एक बहुत. ही स्पष्ट रास्ता था किसने आपको अरवड ऑफर. दिया था आपके जेल के कार्यकाल में कौन-कौन. से बड़े नाम थे पूरा ूजी स्कैम वाले थे और. आपका सहारा साहब तो थे ही पप्पू यादव जी. थे और अगर टेररिस्ट में पूछे तो अफजल गुरु. था धनंजय सिंह थे जलवा था पप्पू यादव का. लोग कहते दबदबा था दबदबा है अंदर बनवाए थे.
ऐसा कहीं सुना हमने हां बिल्कुल पप्पू. यादव जी ने जो है जेल के अंदर जिम बनवाया. था सियाने वो क्या है सियाने व्यक्ति हैं. क्या है कि इसी कुर्सी बैठे थे पॉडकास्ट. किए थे पप्पू प्यारा शब्द है इसका मतलब. जेलर ला पैसा बहुत होता होगा पैसा डीजी. जेल पास तो एकदम राजा आदमी होगा हर आदमी. अंदर बड़ा बैठा है निकल के पहला काम क्या. किया कहीं चाय पिए थे या सीधे कहीं भाग गए. थे कॉलेज के टाइम में आपने अपनी किडनैपिंग. करवाई थी नहीं वो तो मतलब क्रांतिकारी थे. आप कहा जाता है कि नेतागिरी चक्कर में. आपको जानने वाले कहते हैं नहीं वो णा ने.
अपनी पॉलिटिक्स चमकाने के चक्कर में नहीं. नहीं वो तो तो आपके अंदर हम यूपी बिहार. में कहते हैं एक अलग से चुल्ल थी आपके. अंदर कि फेमस हो जाए यार जितनी. जल्दी बड़े बूढ़े कह गए हैं कि दुनिया में. आए हो तो कर जाओ कुछ ऐसा काम कि लोग शक्ल. पहचाने ना पहचाने लेकिन चलता रहे जलवा. तुम्हारे नाम का आज जो मेरे साथ मेहमान है. उनका भी नाम जो है वो जबरदस्त है और नाम.
अलग-अलग कामों की वजह से नाम फूलन देवी से. जुड़कर आता है नाम अफगानिस्तान तक रोशन. होकर आता है कर्म और कांड दोनों में. इन्होने कोई कसर नहीं छोड़ी है शेर सिंह. राणा साहब जी नमस्कार कैसे हैं सर आप बहुत. ही अच्छा हूं जैसे हमने कहा कर्म और कांड. दोनों नहीं छोड़ा आपने तिहाड़ से लेकर. तिहाड़ का. कांड और अफगानिस्तान ने. कर्म जिंदगी में सब असली वजा आपने लिया. जिंदगी का नहीं मुझे ऐसा लगता है कि शायद. ये मेरी डेस्टिनी थी हम तो कर्म और कांड.
जो है वह मेरी डेस्टिनी में ही था तो अब. वह किसी को अच्छा लगा किसी को बुरा लगा बट. यह बात सही है कि ईश्वर ने ऐसे रास्ता एक. बना के दिया कि उससे कुछ चीजें ऐसी जीवन. में हो पाई जो शायद लोगों को असंभव लगती. थी हम तो मेरी तो कोई इतनी हैसियत नहीं है. कि मैं वो सब कर पाता लेकिन क्योंकि के.
डेस्टिनी थी तो वो ऊपर वाले के आशीर्वाद. से हुआ इतने मॉडेस्ट बनके आप बोल रहे हो. और आपका कांड सुन ले तो हम शेर याद आता है. कि अगर मैं सुना दूं अपनी जवानी के किस्से. ये लौंडे जो नीचे कमेंट कर रहे हैं ये. पॉइंट. में नहीं देखिए क्या है कि मतलब सबकी अपनी. अपनी सोच है अरे बड़े-बड़े कांड है साहब. फूलन देवी का कांड अफगानिस्तान जाके. पृथ्वीराज चौहान की अस्थिया लाने कांड. तिहाड़ जेल में गिने चुने लोग भागे जी.
उसमें आप कांड तिहाड़ क्या जबरदस्त जेल है. तो शेर तो सही है ना कि अगर मैं सुना दूं. जवानी किस्से तो ये लौंडे जो कमेंट करते. हैं मेरा पैर दबाने लग जाए नहीं अभी भी. जवान ही हूं मैं बूढ़ बूढ़ा मत बनाइए अभी. और कांड बाकी है नहीं देखिए मैंने बताया. ना यह तो सब डेस्टिनी है अगर ईश्वर ने कुछ. लिखा होगा तो हो सकता है कोई इससे भी बड़ा. काम मेरे भाग्य में लिखा हो तो वो भी होगा. बाप रे तो हम तो पिछला सोच रहे आगे और.
क्या कर दोगे आप नहीं देखो मेरा ऐसा मानना. है हम कि पूरे धरती पर हम जो सबसे बड़ा. काम है किसी भी फील्ड में वह है अपना. राजनीतिक झंडा स्थापित करना जब से धरती. बनी है जिन लोगों ने भी राज सत्ता में. अपना झंडा स्थापित किया है वह सर्वश्रेष्ठ. और सबसे महान लोग कहलाए हैं चाहे वो. चंद्रगुप्त मौर्य रहे हो है ना जिन्होंने.
एक इतना बड़ा राजनीतिक झंडा अपना तो पहले. क्या था कि तलवार के दम पर राजनीतिक सत्ता. हासिल होती थी आज डेमोक्रेसी है तो उसका. तरीका बदल गया लेकिन आज भी अगर हम मुलायम. सिंह यादव जी को देखें या ममता बनर्जी को. देखें या जो भी इस तरह के जो लोग हैं. जिन्होंने. राजनीतिक सत्ता अपनी स्थापित की अपनी. पार्टी झंडा बना के तो मुझे लगता है कि वह. ग्रेटेस्ट हैं आपको पॉलिटिकल बहुत दिलचस्प. आपने पार्टी बनाई आपको दिलचस्पी है.
मुख्यमंत्री बनना आपको नहीं मुझे कुछ बनना. नहीं है हमारी एक आइडल जीी है एक. विचारधारा है तो हम सोचते हैं कि भाई उस. आइडल को लेकर काम करें अब जो काम करने का. जो मौका है आप देखेंगे चाहे आप किसी भी. फील्ड में काम करते हो चाहे आप भारत के. सबसे बड़े क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर हो चाहे. आप सबसे बड़े बिजनेसमैन. हो चंद्रा साहब हो या मित्तल जी हो या फिर.
आप बहुत बड़े पत्रकार हो तो किसी भी फील्ड. में जब आपका जो लास्ट स्टेज है वह है. पॉलिटिकल लाइन में जाना और वो भी पॉलिटिकल. लाइन में कैसे जाना कि आप किसी राजनीतिक. दल के एक सिर्फ अंग बन पाओगे तो आप सोचो. कि जिसने वो पूरी एस्टेब्लिश की है तो वो. कितना बड़ा बंदा होगा कितना भाग्यशाली. होगा तो आप देखेंगे जब मुलायम सिंह जी ने. समाजवादी पार्टी बनाई तो तो उसमें जय.
प्रदा भी उनके माध्यम से लोकसभा में गई जय. प्रदा जी भी लोकसभा में गई जो कि एक. इंडस्ट्री की अपने हाईएस्ट पीक पर काम कर. चुकी तो आप किसी भी फील्ड के व्यक्ति हो. आपका लास्ट जो स्टॉपेज है वोह. पार्लियामेंट है और वो भी किसी एक. पॉलिटिकल पार्टी के माध्यम से तो जो उस. ऑर्गेनाइजेशन को बना रहा है तो उसकी. महानता आप खुद ही इमेजिन कर सकते हैं तो. मेरा ऐसा मानना है कि और फिर आपका लास्ट. जब.
अपनी लाइन में सर्वोच्चता हासिल करने के. बाद जब आप वहां पर जाकर नमस्तय हो तो इट. मींस वही सर्वोच्च है और वहीं से ही पूरा. देश चलता भी है प्रैक्टिकली हां अगर. उत्तराखंड जल्दी बंटवारा हो गया होता जी. तो शायद इस सब ना कहते आप तब यूपी में था. जब आप पैदा हुए थे हां बिल्कुल मैं इसीलिए. सियासत इतना बोल रहा है वरना उत्तराखंड के. लोगों से हमको फौजी वाली खुशबू आती है. पॉलिटिकल थोड़ी कम आती है लेकिन तब शायद. बंटवारा नहीं हुआ था 17 मई 1976 बाय बर्थ.
तो जो आपकी खुशबू है वो फौजी वाली ही. खुशबू है मुझ में एक्चुअली क्या है जो. मेरी स्कूलिंग हुई हुई है वो था सेंट. गेब्रियल अकेडमी तो मेरे स्कूल का नाम तो. वो एक्चुअली क्या है कि जो हमारा रुड़की. में जो बीजी सेंटर है बंगाल इंजीनियरिंग. ग्रुप तो वो उसके कंपाउंड में. था अंग्रेजों ने तब उसको बनाया था अपने. आर्मी ऑफिसर्स के बच्चों को हम पढ़ाई के. लिए और एक आईआईटी भी है रुड़की में तो. उसके प्रोफेसर्स के बच्चे भी हमारे साथ.
पढ़ते थे तो क्या है कि मेरा जो पूरा. स्कूलिंग हुई है वो उसी आर्मी के ही अ. लाइन पर हुई है तो मेरे जो क्लासमेट थे वो. अधिकतर आर्मी ऑफिसर्स के बच्चे थे बल्कि. मेरा जो क्लास थी मेरे क्लास के 12 बच्चे. एनडीए में निकले आप सोचो कि पूरे इंडिया. से कुछ 100 बच्चे निकलते हैं एक ही स्कूल. से 12 बच्चे कहते हैं कि उत्तराखंड की. मिट्टी में फौज की खुशबू है हां नहीं. दोस्त लोग कहते नहीं है कि शेर सिंह यार.
तुम फौज में आते देश का नाम होता तुम कांड. कर गए नहीं देखो अभी भी मुझे ऐसा लगता है. देखो मैंने पहले ही बताया कि भाई डेस्टिनी. बहुत बड़ी चीज है अब म मन में हां मन में. वही विचार है देश के लिए काम करने का. अलग-अलग तरीका होता है जैसे आप भी देश के. लिए ही काम कर रहे हैं बस उसका जो रास्ता. है रास्ता है वो अलग-अलग है एक इंसान इनकम. टैक्स देके देश के लिए काम कर रहा है एक. आदमी आर्मी में रहकर एक आदमी किसानी करके.
है ना कोई तो हर का अपनी अपनी फील्ड है और. वह उसमें काम कर रहा है तो मेरा भाग्य. नहीं था कि एज ए आर्मी पर्सनल मैं देश की. सेवा कर पाता बट जज्बा या मन या दिल वैसा. ही है कि भाई देश के लिए कुछ करें ठीक बात. आपके जीवन में तीन चार चीजें बड़ी हाईलाइट. होती है शेर सिंह राणा का नाम गगल करो तो. एक आता है फूलन देवी के साथ कांड फिर आता. है तिहा से भाग जाना अफगानिस्तान जाना.
वहां से अस्थिया लाना और भी बीच-बीच में. कई सारी चीजें आती है अब क्योंकि शुरुआत. जो है वो फूलन देवी से होती है जी क्यों. ठोक दिया था आपने फूलन देवी को बहुत लोग. आपको माफ नहीं किया अभी भी कहते हैं कि वो. सुधर गई थी मुलायम जी ने उनको मेंबर ऑफ. पार्लियामेंट बना दिया था आगे जाती पिछड़े. गरीबों के लिए काम करती लेकिन आपने ठक के. चक्कर में ठोक दिया नहीं देखिए मैंने किया. कि नहीं किया क्योंकि अभी नरेल हाई कोर्ट. मेंस स्पेंडिंग है तो उस पर तो मैं हां उस.
पर तो मैं बहुत डिटेल में नहीं जा. सकता लेकिन जो आप बता रहे हैं कि कुछ लोग. नाराज हैं देखिए मैंने किया नहीं किया यह. तो एक डिफरेंट स्टोरी है बट जो लोग फूलन. को अच्छा मानते हैं जो उनके फॉलोअर्स हैं. अगर शायद उनको जो सच्चाई है वह उनको मालूम. पड़े तो हो सकता है कि उनका. जो नजरिया उनके प्रति थोड़ा सा चेंज हो जा. चलो हम आपका नजरिया समझते हैं फूलन देवी.
को लेकर जो हमारी जान पहचान है या जितनी. हमारी जानकारी है क्यक हम मिले तो उनसे थे. नहीं जी हमने एक पिक्चर देखिए बैंडिट. क्वीन और हमने उनके बारे में किस्से. कहानियों में पढ़ा अब किस्से कहानियों में. जो पढ़ा वो ये था कि एक लड़की जिसको उसके. पति ने छोड़ दिया था बाद में उसे गांव के. ठाकुरों ने उसके साथ गलत काम किया गंदी. हरकत की परेशान किया बाद में उसने बदला ले. लिया जी एक औरत अपने इज्जत मान सम्मान के. लिए उठी और उसने कर दिया बाद में मुलायम. जी ने उसको पॉलिटिक्स में शामिल करा दिया. और एक सही रास्ते ये एक मोटी मोटी कहानी.
है हां देखिए आपकी कहानी क्या है फूलन. देवी कौन थी आपकी नजर में देखिए अगर जो. आपने बताया है लोगों की भी यही विचार है. कि ऐसा हुआ बट रियलिटी क्या है कि यह कहते. हैं कि भाई उनकी छोटी उम्र में शादी हुई. हम और उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया. उनके उनको फिर डाकू उठाकर ले गए और फिर. डाकू गिरह ने उनके साथ गलत हरकत की यह सब. उनके जो सिप फत जाइजर हैं वो ऐसा विचार.
रखते हैं तो मेरा आपसे क्वेश्चन यह है कि. उनकी छोटी उम्र में शादी हुई तो वो शादी. तो उनके माता-पिता ने की दूसरी बात है कि. उनकी छोटी उम्र में शादी हुई आपकी अगर मैं. पूछूंगा कि आपकी जो ग्रैंडमदर थी उनकी किस. एज में शादी हुई तो मुझे लगता है आप भी. कहेंगे कि 13 साल में 14 साल में तो हां. तो ये बहुत ही कॉमन प्रैक्टिस थी ऐसा नहीं. है कि ऐसा सिर्फ फूलन के साथ हुआ था आज से. 50 साल पहले ये बड़ी कॉमन चीज थी उस समय.
कि छोटी उम्र में शादी होती थी आपको बता. दूं कि फूलन ने जो बेई कांड में जिन लोगों. की हत्या की है उसमें दो वीडो ऐसी हैं. जिनकी उम्र खुद उस समय 1414 साल थी और. उनके हस्बैंड जो है वो 15 साल और 16 साल. के थे तो जब वो वो जो वीडियो हुई है 15 16. साल हां उसमें जो मरने वाले लोग हैं उसमें. दो व्यक्ति 161 साल के लड़के हैं 22 लोग. जो हां जो 20 लोग हां 20 लोग तो उसमें एक. की जो विडियो है मैं तो कहता हूं कि उनका.
भी आपको इंटरव्यू लेना चाहिए कि इंडिया. में ऐसी महिलाएं भी हैं हम कि जो 14 साल. में मैरिड हुई एक 16 साल के बच्चे से उसका. पति मर गया और उसने पूरा जीवन जो है. उन्हीं के नाम पर जो है बिता दिया आज उनकी. एज जो है वो 60 प्लस हो रही है और वो एज ए. वडो जो है उनका नाम लेकर अपना पूरा जीवन. उन्होंने स्पेंड कर दिया तो ऐसा नहीं है. कि यह फूलन के साथ हुआ ऐसा बहुत लोगों के. साथ उस समय होता था ये तो आपने बताया.
जिनके साथ फूलन ने किया फूलन की कहानी. क्या थी जो आप कहना चाह रहे हो कि अलग है. हां देखिए क्या है कि हम हम ये कहते हैं. कि भाई उनको डाकू उठाकर ले गए उनकी जमीन. पर कब्जा कर लिया तो जो जमीन का जो. डिस्प्यूट था वो उनकी फैमिली प्रॉब्लम थी. जो उनके सगे रियल चाचा के जो बच्चे थे. मैया दन उसके साथ उनका डिस्प्यूट था उसी. डिस्प्यूट में जो है उसके ऊपर पहला मुकदमा. दर्ज हुआ फूलन के ऊपर और वह एक महीना जेल. में रहकर आई और जिस डाकू गिरोह के साथ.
उनका अटैचमेंट पुलिस ने दिखाया था वो था. विक्रम मल्ला विक्रम मल्हा जो है उनका. रिलेटिव था क्लोज रिलेटिव था फूलन देवी का. फूलन देवी का तो विक्रम मल्ला ही जो है. वोह उनके घर गए और जाकर जो है फूलन को. अपने साथ गिरह में डाकू गिरह में लेकर गए. तो जब डाकू गिरह में लेकर वह चले गए तो. फिर तो उनका डाकू वाला जीवन शुरू हो गया. तो यह जो आप बैंडिट क्वीन जो फिल्म का जो. स्टोरी बना रहे हैं बता रहे हैं शेखर कपूर.
हां एक्चुअली क्या है आप इसको हमेशा देख. लेंगे जो भी फिल्म किसी के ऊपर बायोपिक. बनेगी तो उसके ऊपर सिंपैथी तो दिखाई जाएगी. उसमें बहुत सारी चीजें ऐसी दिखाई जाएंगी. जो कि वास्तविकता से बहुत दूर हो फिल्म को. थोड़ा कमर्शल करने के लिए बेचने के लिए. हां भाई अगर मान लीजिए आप उनकी नेगेटिव. इमेज दिखा देंगे तो फिल्म कौन देखेगा या. कौन उस पर कमाई कर पाएगा तो जो उसमें. दिखाया है अ म आप आप ये कह रहे हो कि फूलन. देवी के साथ वो जो घटना दिल दहलाने वाली.
हुई जहां पर कहा गया कि गांव के ठाकुरों. ने एक साथ कई दिनों तक जमीन कब्जा किया और. उनके साथ चीर हरण किया या गंदी हरकतें की. वो नहीं हुई थी बिल्कुल नहीं हुई थी और. मैं आपके दर्शकों को आपके माध्यम से ये. देखिए शेर सिंह राणा या कोई भी व्यक्ति. इतना घटिया नहीं है कि अगर किसी महिला के. साथ कुछ गलत हुआ है और अगर वो बदला लेने. के लिए उनको सबक सिखाती है तो हम उनको जो. है उनकी तरफदारी करें या उनको.
एडमायरीन हो मतलब कैसे इन द सेंस आप आप. उनको कैसे जानते थे सारी कहानी क्योंकि आप. बता रहे हो आप इसमें कैसे इव थे हां देखिए. जब मैं जेल से छूटा तो मैं बाकायदा उस. गांव में गया और जो पुलिस की स्टोरी है वो. भी मैंने रीड आउट करी उस गांव में जो लोग. यह जो 20 पलन देवी की हत्या के आरोप में. आप जेल गए वहां से छूटे फिर गांव गए हां. तब मैं वहां गया और पूरा मैंने जो है पूरी.
उसको जो वास्तविकता थी उसको जो है बहुत ही. मतलब जो सरकारी पेपर्स हैं उसमें भी और जो. वहां पर जो सच्चाई है उस लोगों से बात. करके मैंने सब जानी सच्चाई क्या है कि एक. तो यह बोला जाता है कि भाई फूलन ने. ठाकुरों को लाइन में लगा के मार दिया तो. यही सबसे बड़ा झूठ है क्योंकि जो उस बेई. कांड में मरने वाले लोग हैं उसमें दलित. समाज के व्यक्ति भी हैं पिछड़े समा समाज. का व्यक्ति भी है मुस्लिम भी है ठाकुर भी.
है और मैं बाकायदा आपको नाम बता देता हूं. जो दलित समाज का व्यक्ति है उसका नाम है. राम अवतार कठेरिया व धानक समाज से है जो. पिछड़े समाज का व्यक्ति है उसका नाम है. तुलसीराम मौर्य हम जो मुस्लिम है उसका नाम. है नजीर खान इन लोगों ने अभी लास्ट ईयर जो. है अपने अपने जो आयोग हैं उसमें. एप्लीकेशंस भी लगाई थी कि भाई करीब 41 42. साल हो गए और ऐसे-ऐसे हमारे फैमिली. मेंबर्स को हमारे पिता को हत्या करी गई.
डाकुओं के गिरह द्वारा और हमें किसी तरह. का मुआवजा नहीं मिला कुछ नहीं मिला जबकि. जो डाकू थे उन लोगों को जो है जमीन भी दी. गई और नौकरियां भी दी गई लेकिन जो. विक्टिम्स थे हमें कुछ नहीं मिला तो यह. लोग मरने वालों में सभी जाति और धर्म के. लोग थे एक तो यह बात एकदम हम क्लियर है तो. ये ये वहां के अखबारों ने वहां के लोगों. ने इस बात को इतनी प्रमुखता से उठाया. क्यों नहीं क्योंकि देश के जितने भी अखबार. हैं हां या जितने भी फूलन देवी पर. कहानियां बनी है फिल्म बनी है.
डॉक्यूमेंट्री बनी है अ मैगजीन छपी है सब. में तो वही कहानी है वो जो कहानी आप बता. रही तो कहीं नहीं है हां देखिए यही. दुर्भाग्य है देश का कि यहां पे हर चीज को. खासकर जो इंटरनेशनल मीडिया है उसको इंडियन. मीडिया जो है एक जैसे भेड़ नहीं होती उसको. फॉलो करने लगता है और इंटरनेशनल मीडिया जो. है वोह हमारे देश को हमेशा बदनाम करने के. लिए यहां पे एक अपर कास्ट और लोअर कास्ट. का गेम खेलता ही है हम और अगर इसमें भी वह.
एंगल नहीं घुसाया जाए तो फिर कोई स्टोरी. नहीं बनती कुछ बात नहीं बनती तो हमारे देश. को भी बदनाम करने के लिए यह चीज चलाई जाती. है मैं आपके माध्यम से मतलब वो एक आता है. ना कौन बनेगा करोड़पति मैं आपके माध्यम से. आपकी जनता को इंक्लूडिंग आपको भी आप तो. मतलब मेरे ब्रदर की तरह चैलेंज तो नहीं. मैं बोलूंगा बट यह मेरा चैलेंज है पूरे. देश की जनता को जो बात मैं बता रहा हूं. अगर कोई उसको झूठा साबित कर दे तो मैं.
दोबारा इस चैनल पर आऊंगा आपके सामने उसको. एक करोड़ रुपए अपने पास से दूंगा क्या बात. है कि मरने वालों में दलित व्यक्ति भी है. पिछड़ा भी है मुस्लिम भी है भे मई कांड. में जिस कांड को भेम कांड बोला जाता है और. दूसरी बात यह है कि यह जो 20 लोग मरे हैं. इनमें एक भी व्यक्ति डाकू नहीं था वो लोग. साधारण किसान थे और मजदूर थे उनमें एक भी. डाकू नहीं था देखिए मतलब शेर सिंह राणा ये.
चैलेंज कर रहे हैं कि अगर कोई व्यक्ति ये. साबित कर दे कि फूलन देवी के साथ गलत हरकत. हुई थी जी या फूलन देवी ने जिन 20 लोगों. को मारा उनमें कोई डाकू था जी या वह सभी. 20 लोग ठाकुर थे जी भेम कांड में मैं मैं. तो आप उसे एक करोड़ रुप दे देंगे मैं उसको. एक करोड़ रुपए दूंगा जो यह साबित कर दे कि. मरने वालों में दलित पिछड़ा और मुस्लिम. नहीं थे जो यह साबित कर दे कि जो मरे हैं. उनमें से कोई डाकू था और वो.
जो हां जो फूलन के साथ जो गलत हुआ है वो. दूसरे एक डाकू गिरह ने किया है वो यह जो. लोग मरे हैं उन्होंने नहीं किया तो जो. मतलब फूलन देवी के साथ हुआ था नहीं तो आप. अच्छा मुझे यह बताइए कि आपके साथ कोई गलत. कर दे और आप ये ये दो अलग बातें आप दो. बातें मिक्स कर रहे हैं मैं उसको बात नहीं. कर रहा हूं मैं कह रहा हूं शुरू में. क्योंकि हम चर्चा कर रहे थे कि फूलन देवी. के साथ घटना नहीं हुई थी उनके साथ. बलात्कार हुआ था उनका देखिए बड़े पैमाने. पर नहीं नहीं बड़े पैमान देखिए क्या है एक.
श्रीराम लालाराम का गिरोह था हां यह पहले. उसी गिरोह की सदस्य थी तो उसमें कुछ. कॉन्फ्लेट हुआ उस कॉन्फ्लेट की वजह से जो. विक्रम मल्ला था उन्होंने जो गैंग लीडर था. एक उसको मार दिया उसको मार दिया तो यह जो. दोनों भाई थे इन्होंने बदला लेने के लिए. विक्रम मल्ला को मार दिया और फूलन देवी को. पकड़ लिया किडनैप कर लिया हां पकड़ लिया. जब किडनैप कर लिया पकड़ लिया तो जो इनके. साथ जो इस ग्रह में दूसरी भी महिलाएं थी.
जैसे कुसमा नाइन थी इसी ग्रह में तो कुसमा. नाइन ने और जो डाकू थे इन लोगों ने फूलन. के साथ बदतमीजी करी बट वो डाकू गिरोह में. आपस की बदतमीज यां थी बदला लेने वाली हां. तो वो फूलन अगर मान लीजिए श्रीराम लालाराम. को या कुसमा नाइन को या गैंग के दूसरे. लोगों को मारती तो मैं मानता हूं कि वो. बहुत अच्छा करती है अगर उनके साथ उन्होंने. गलत किया था लेकिन ये कहां का जस्टिफिकेशन. आपके पूरी कहानी ट्विस्ट कर दी गई डाकुओं.
गैंग में उनके साथ गलत काम हुआ लेकिन जो. जिनको उन्होंने मारा वो निर्दोष लोग थे आप. बिल्कुल निर्दोष लोग थे यह हुआ यह उस दिन. जिस दिन यह कांड हुआ बेहमई कांड कि उनको. यह पता चला फूलन गिरह को कि यह जो श्रीराम. लालाराम है जिनको वह थो मतलब अपने हां. बदला लेना चाहती थी यह उस गांव में है. मौजूद हैं किसी प्रोग्राम में गए हुए हैं. तो जब वह लोग वहां पर आए तो पता चला कि. भाई वोह लोग यहां पर नहीं है आए थे लेकिन.
चले गए सब लोग तो वह उसने पूरे गांव के जो. लोग थे उन लोगों को पूछताछ करने के लिए एक. जगह इकट्ठा किया और इकट्ठा करने के बाद जो. है फिर एकदम से गोलियां चलानी शुरू कर दी. आप मुझे यह बताइए 20 लोग अगर वो डाकू होते. फूलन के गिरोह में उस दिन जिस दिन यह. हत्याकांड हुआ है जो पुलिस की चार सीट में. भी है 40 लोग थे तो वह 20 लोगों की बंदूक. कहां थी वह डाकू थे चलिए मान गया मैं आपकी. बात तो वो 20 लोग मतलब वहां पर क्या कर. रहे थे बंदूक रख के कैसे डाकू थे भाई वह.
कि अपनी बंदूकें रख के फूलन के सामने क्या. नाच रहे थे वोह अरे भाई 40 आदमी जो फूलन. के गिरो के थे उसमें किसी के खरोच भी नहीं. लगी और इधर सामने के अगर वह डाकू थे तो वह. 20 लोग मर गए मतलब यह कैसा डाकुओं का आपस. में लड़ाई हुई वो लोग आम लोग थे उनका कोई. लेना देना नहीं था वो लोग किसान लोग थे. साधारण लोग थे इसीलिए उनके पास ना कोई. हथियार था फूलन के गिरो के पास सभी लोगों. डाकू थे 40 लोगों के पास बंदूक राइफल थी.
और बेगुनाह लोगों को मारा गया और यह मेरा. चैलेंज है हम अगर कोई इस बात को झूठा. साबित कर दे तो मैंने आपसे बताया कि मैं. एक करोड़ एक करोड़ रुपया उसको पुरस्कार. दूंगा अगर यह कोई साबित कर दे कि वह मरने. वालों में एक भी व्यक्ति डाकू था वो लोग. साधारण लोग थे और शेखर कपूर जी ने फिल्म. को इस तरह से ट्विस्ट किया कि ऐसा महसूस. होता है कि भाई यह लोग. वही लोग थे जिन्होंने किया था हरकतें और.
उन्हीं से बदला ले लि हां किया था या फिर. यह लोग उनकी डाकू गिरोह की हेल्प करते थे. तो मैं देखिए वहां का जो माहौल था वह इस. तरह का था कि जैसे हर डाकू गिरोह. गांव-गांव में घूमता था हम तो पुलिस के. पास जाते हुए भी लोग डरते थे क्योंकि इतने. पुलिस के पास भी उस समय साधन नहीं थे कि. पुलिस उनकी कोई मदद कर दे तो वो सब लोग. डाकू गिरोह से डरते थे उनके ऊपर डिपेंडेंट. थे तो. अगर मान लीजिए किसी ने खाना पानी दे दिया.
किसी गिरह को तो वह उनका साथी नहीं बना ना. वह तो डर के मारे कर रहा है वो डर है अब. मान लीजिए यहां पर आपके ऑफिस के बाहर जो. है कोई किसी का पर्स छीन ले और जिसका पर्स. छीन के कोई भाग जाए और फिर जिसका पर्स. छीना गया हो वह सभी लोगों को जो आसपास. शॉपकीपर्स है आपका ऑफिस है सबको पीटने लगे. मारने लगे कहे कि भाई तुमने मुझे बचाया. क्यों नहीं अरे भाई अगर उनमें इतनी हिम्मत. होती है अपने आप को बचाने की तो वो अपने.
आप को ही ना बचाले मतलब आपकी कहानी सुनकर. मुझे जो सार समझ में आ रहा है वो ये जी कि. फूलन देवी ने सामने वाले डाकू से बदला. लेने के लिए उनसे प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष. तौर पर जुड़े लोगों को मार दिया नहीं. जुड़े मैंने कहा प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष. दोनों शब्द हो सकता है आप क्या आप. प्रत्यक्ष कह रहे हो उनको प्रत्यक्ष लग. रहा होगा उस शक में मार दिया और वो वो लोग. नहीं थे जिनसे एगजैक्टली बदला लेना था. नहीं नहीं फूलन को पता था कि ये वो लोग. नहीं है भाई फूलन को तो पता था ना वो भी. कोई वो भी काफी दिनों से डाकू गिरोह में.
शामिल थी उसको मालूम था कि मेरे जो विरोधी. लोग हैं वह कौन थे आप मुझे बताइए उसी भेम. कांड में फूलन ने एक सीता नाम की बच्ची थी. जो कि अपने मां के गोद में थी जब व अपने. हस्बैंड को बचाने के लिए आई तो उस सीता को. गोद से लेकर नीचे जमीन पर पटक दिया हम. सीता की ऐज जो है वो डेढ़ साल दो साल थी. उस समय हम वो जमीन पर गिरने से अपाहिज हो. गई. और फिर अपाहिज हो के वो करीब 18 20 साल की.
साल की बच्ची बचाने आई उसकी मां बचाने आई. मतलब मां के गोद में थी बच्ची तो मां को. धक्का देक उस बच्ची को उसने नीचे गिर दिया. फूलन ने तो उस बच्ची का क्या कसूर था तो. और फर वो बाद में अपाहिज हुई और फिर 20 2. साल तक जीवित भी रही लेकिन जब उसकी उम्र. 25 के आसपास हुई तो वह उसका देहांत हो गया. और यह सब लोग जानते हैं कई न्यूजपेपर्स. में यह स्टोरी भी आई बट क्या है कि लोगों.
को सही जानकारी ना होने के कारण अब उस. बच्ची ने तो कुछ किया नहीं था या उन 20. लोगों ने तो कुछ किया नहीं था तो मैं. सिर्फ यह कह रहा हूं कि फूलन अगर उन लोगों. को मारती जिन लोगों ने उनके साथ गलत किया. तो उसको हर आदमी को एडमायब्रांड. ये हमारा आपकी नजर में फ ने भी दूध की रे.
धुली थी नहीं मैं कुछ नहीं बोल रहा हूं. मैंने सच्चाई आपसे बता दी दूसरी बात आपने. एक क्वेश्चन और भी किया था देखिए वो जब. मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बनी और जब उनकी. हत्या हो गई जब वो डेथ हो गई उनकी तो करीब. 20 करोड़ के आसपास की संपत्ति जो है उनके. पास थी जो कि फूलन देवी हत्याकांड की चार. शीट में लिखी हुई है क्योंकि मैं उसमें. एक्यूज बनाया गया था तो वो चार शीट मेरे. पास अवेलेबल थी तो 20 करोड़ रुपए की. संपत्ति उनके देहांत के समय उनके पास थी.
जिसके लिए डिस्प्यूट भी हुआ फैमिली. मेंबर्स में बल्कि वह उनकी माता जी को. मिलनी चाहिए थी सिस्टर्स को मिलनी चाहिए. थी लेकिन जो उनके थर्ड नंबर का जो पति था. वह सारी उसने प्रॉपर्टी उनके पास चली गई. तो आप मुझे बताइए कि मेंबर ऑफ. पार्लियामेंट बनने के बाद ऐसा क्या हुआ कि. 20 करोड़ रुपया की संपत्ति आपके पास आ गई. आप एक अगर ईमानदार नेता थे आप एक अच्छे आप. बता रहे कि वोह इन फ्यूचर जो.
है वैसे तो वह दलित समाज से नहीं थी जो. फूलन जो थी वो दलित समाज से नहीं थी वो. ओबीसी वर्ग से आती थी तो जिस भी वर्ग से. वो आती थी बट देखो वर्ग तो सारे अच्छे ही. होते हैं है ना तो हम तो सबको बहुत अच्छा. मानते हैं लेकिन वो कैसी सेवा करती जो कि. मतलब 20 करोड़ रुपए की संपत्ति 5 साल में. बन गई तो अपनी अप होता है हां तो वो मैजिक.
कौन सा मैजिक है उसमें फिर अपनी सेवा हुई. ना फिर समाज की सेवा तो मुझे नहीं लगता कि. हुई होगी ठीक है आप हमको यह बताइए कि ये. रुड़की से चंबल का कनेक्शन क्या है नहीं. रुड़की से चंबल का कोई कनेक्शन नहीं है. एक्चुअली आप कहां सीन में आ गई ये तो. लड़ाई उनकी थी डाकू की थी वो लड़ रही थी. उनका गांव था हां इसमें शेर सिंह राणा की. एंट्री का वो तो आप रुड़की में थे हां. देखिए उत्तराखंड हां देखिए क्या है कि मैं. तो जब मुझ पर यह केस लगा तो मैं देहरादून. में अपनी ग्रेजुएशन कर रहा था थर्ड ईयर का.
एग्जाम दिया ही था मैंने तो हुआ यह कि. हमारे शहर की ही एक हस्बैंड वाइफ थे तो वो. लोग जो है. पॉलिटिकल पॉलिटिकली इनसे जुड़े हुए थे. फूलन से दूसरे नेता नेताओं से भी जुड़े. हुए थे तो वह क्या है कि मुझे कभी-कभी. अपने साथ में लेकर चले जाया करते थे मुझे. भी थोड़ा शौक था क्रांतिकारी पॉलिटिक्स का. वही क्रांतिकारी थे आप हां तो मैं उनके. साथ चले जाया करता था तो यह दुर्भाग्य है.
कि जिस दिन हम लोग वहां पर गए तो जो 44. अशोका रोड है जहां फूलन का उस दिन मर्डर. हुआ तो हम लोग जो है अंदर बैठे हुए थे. ऑफिस में तो एकदम से गोलियों की आवाज आई. तो उनकी जो फूलन की जो रियल सिस्टर है. मुन्नी देवी जी और जो उनके पीए थे काली. चरण जी जो कि इसमें आई विटनेस भी बने थे. केस में और उन्होंने भी इस ब को एक्सेप्ट. किया कि जिस समय गोलियां चली तो शेर सिंह.
जो है वह हमारे पास बैठा हुआ था और फिर हम. लोग सब लोग बाहर गए एकदम से गोली की आवाज. सुनक तो हमने देखा कि कुछ नकाब पोश लोग जो. है वह फूलन और जो उनके बॉडीगार्ड भी थे. साथ में दिल्ली पुलिस के. एक पुलिसमैन थे उनके साथ तो वो अपनी जो. पुलिस वाले थे व अपनी जो पिस्टल थे उससे. फायर कर रहे थे और वो जो नकाब पोश लोग थे.
वो उन लोगों के ऊपर फायर कर रहे थे तो यह. बात कोर्ट में भी उन्होंने एडमिट करी अपने. बयानों में और यह बात रियलिटी भी है यही. चीज हुई भी है आप कह रहे हो आपने नहीं. ठोका था नहीं मैं क्या कह रहा हूं विटनेस. कह रहे हैं या कोर्ट में केस इस बारे में. बात ना करें अभी इंतजार करें कोर्ट क्या. फैसले दे हां देखो क्या है मेरा ऐसा मानना. है कि जो नरेल हाई कोर्ट है जब तक मामला च. चल रहा है वो एक भगवान का रूप होते हैं तो. जब वो अपनी चेयर पे है ना हम भगवान के. किसी डिसीजन प.
कोई अ हम इसको क्वेश्चन मार्क प छोड़ देते. हैं कि आपने ठोका या नहीं ठोका वो जन जनता. नहीं कोर्ट तय करेगी उससे हम लेवल लगा. देंगे ठीक है अब इसमें यह सारी घटना हो गई. आपने सारा. किया एक किस्सा और भी आता है कि कॉलेज के. टाइम में आपने अपनी किडनैपिंग करवाई थी. नहीं वो तो मतलब यह नहीं कह सकते. किडनैपिंग कराई थी वो तो क्या है कि एक. मिसअंडरस्टैंडिंग थी तो वो मिस अंडाकारी. थे. कहा जाता है कि नेतागिरी के चक्कर में. आपको जानने वाले कहते हैं नहीं वो श सि.
राणा ने अपनी पॉलिटिक्स चमकाने के चक्कर. में नहीं नहीं वो तो तो आपके अंदर एक जिको. यूपी बिहार में कहते हैं एक अलग सी चुल्ल. थी आपके अंदर कि फेमस हो जाए यार जितनी. जल्दी नहीं ऐसा नहीं है मैंने आपसे बताया. देखो यह तो आपके सोचने से जीवन में कुछ. नहीं हो हम तो पूछ रहे हैं आपसे हम तो वो. जो लोग ख पूछेंगे लोगों के मन में. जिज्ञासा होगी क्योंकि आपकी शख्सियत बड़ी. रोमांचित करती है लोगों को हां देखो हम जब. मैं स्टूडेंट था तो हर व्यक्ति का एक सपना. होता है लाइफ को लेके है कॉलेज लाइफ में. तो लड़के और जोशीले होते हैं हां जोशीले.
होते हैं जोशीला तो मैं था. बट हमेशा जैसे मैंने आपसे बताया कि जब मैं. 12 तक था तो मेरी इच्छा थी भाई एनडीए पास. करना है और आर्मी ऑफिसर बनना है क्योंकि. हमारा सर्कल वही था बट मेरे भाग्य में. नहीं था वह फिर कॉलेज में चले गए कॉलेज. में जाने के बाद फिर यह सोचा कि भाई हम एज. ए पॉलिटिशियन अपनी लाइफ को आगे बढ़ाएंगे. तो फिर कॉलेज में जाक चुनाव भी लड़ा चुनाव. भी लड़ा और फिर मेरा उससे भी दिल जो है.
थोड़ा सा साइड हुआ जो पॉलिटिकल हरकतें. शायद देखी तो उसमें मैं एडजस्ट नहीं हो पा. रहा होगा तो फिर मैंने सोचा कि भाई हमें. तो बिजनेस करना है लेकिन फिर कुंडली में. लिखा था कि जेल जाना है तो तिहाड़ जेल. जहां पे मतलब कभी इमेजिन नहीं कर सकते थे. एक दिन अपने घर पे बेड पर सो रहे थे तो. अगले दिन जो है तिहाड़ जेल के आपके ऊपर जो. पिक्चर बन आप एक डायलॉग उसम रख ना जी जी. शेर है मैं नहीं पुष्पा के स्टाइल में.
नहीं देखो वो कायर नहीं फायर है मैं नहीं. नहीं देखो मैं ना कायर हूं ना फायर हूं. फायर नहीं हो आप नहीं नहीं बिना फायर के. तिहाड़ भाग सहाड़ भाग गए नहीं मैंने बताया. देखो मेरी उतनी कोई हैसियत नहीं है मैं आज. भी जब दिल्ली में घूमता हूं ना मेरे पास. अभी आए थे गुप्ता जी जेलर थे सुनील कुमार. गुप्ता जी जी जी उन्होंने कहा एक चार्ल. शुभराज था जी जो लड्डू खिला के भाग गया था. जी सा सात या आठ आदमी भागे टोटल आज तक. तिहाड़ से तिहाड़ से जी जेनयू कांड जिन्ने.
पूरी घटनाक्रम बलाई हां तो उन आठ महान. लोगों में आप भी है हां नहीं मैंने देखो. मेरा ऐसा मानना है और आपको मैं रियलिटी. बता रहा हूं ये अपने दिल से आवाज है मेरे. मैं आज भी जब उधर की तरफ जाता हूं ना. तिहाड़ के बड़ी-बड़ी ऊंची दीवारों को. देखता हूं तो मैं खुद अंदर से मेरे आता है. क्वेश्चन यार तू यहां से कैसे निकल गया तो. यह तो एक इत्तफाक बोल लीजिए या फिर मेरे.
ईश्वर की मुझ पर कृपा बोल लीजिए जेल तोड़. के भाग गए हा देखो जब यह यह बना कैसे जब. मैं जेल में था तो एक दिन मैंने न्यूजपेपर. पढ़ा मैंने पढ़ा कि भाई जो हमारे आखिरी. हिंदू सम्राट है पृथ्वीराज चौहान जी उनकी. समाधि अफगानिस्तान में है और जूते चप्पल. उनकी समाधि पर मारे जाते हैं गौरी की कब्र. पर जाने से पहले तो इसको लेकर जो है जो. आरएसएस है उसने स्शन वगैरह किया था तो. उसकी न्यूज़ जो है अखबार में छपी तो हम.
लोग सब इकट्ठा होकर न्यूज़ पेपर जो है वो. पढ़ते थे मैंने पढ़ा तो मैंने कहा देखो अब. सरकार इसको लेकर आ जाएगी क्योंकि अटल जी. प्रधानमंत्री हैं और वो भी इसको चाहते हैं. कि यह चीज हो हम तो क्योंकि उसमें यह भी. लिखा था कि भाई जब अटल जी विदेश मंत्री थे. तो उन्होंने तब यह प्रयास किया था तो. मैंने कहा अब तो प्राइम मिनिस्टर है अब तो. ले आएंगे तो जो मेरे साथ जो टेररिस्ट थे. कुछ ह नाम भी मुझे याद है ताजा खान और.
गयूर खान तो वो बोले कि भाई राणा जी आप तो. आलू खाने वाले लोग हो यह तो हम ही है जो. अफगानिस्तान से आकर कुछ भी कर सकते हैं और. आपके देश में इतनी हिम्मत नहीं है और अगर. ऐसा होता तो 800 सालों से तो कोई ले आता. तो मैंने कहा चलो अगर दे मतलब हमारी सरकार. नहीं करेगी तो वो हमारे पूर्वज है मैं. वहां पे जाऊंगा अब इसमें भी देखो मैं आपसे. किस्सा पूरा सुनूंगा जी जी एलिगेशन ये आता. है कि हरिद्वार में शायद पेशिया कहीं पेशी.
थी आपकी उससे जी जी जी जब आप भागे थे वहां. से और आया है कि आपको सुगाह हो गई थी कि. फूलन देवी के नाम पर फांसी हो सकती है. अच्छा ये जो दूसरा वर्ग कहता है कि फूलन. फांसी हो सकती है फिर आपको एक जबरदस्त. आईडिया आया क्या रेमश पूरी खराब है इस देश. में देशभक्ति खूब चलती है और आपने. पृथ्वीराज चौहान का नाम लिया उसका असर ये. हुआ कि जिस व्यक्ति को हत्या का आरोपी लोग. मान रहे थे वो देश का एक बड़ा हीरो बन गया. और आज भी आपको इस देश में कई लोग नायक के.
तौर पर देखते हैं और बहुत सारे लोग ये मैं. आपसे भी कह रहा हूं जो आपको बहुत प्राउड. फील करते हैं शायद शकल से ना पहचाने लेकिन. अगर पता लग जाएगा शेर सिंह राणा है तो आ. जाएंगे सेल्फी खिंचवाने की भैया नमस्ते जी. जी नहीं देखिए क्या है कि जो जिस वर्ग की. आपने बात की है देखिए आप सबको तो. सेटिस्फाई कभी कर नहीं सकते इस थ जा हां. मतलब सबके अपने अपने एजेंड हैं या अपनी. विचार है बट मैं आपको बता दूं कि जिस समय. में से एस्केप हुआ 2004 में तब तक हमारे.
कोर्ट की जो प्रोसीडिंग्स थी वह भी ठीक से. स्टार्ट नहीं हुई थी मेरे केस में करीब. 200 गवाह थे और सिर्फ दो तीन गवाह हुए थे. तब तक जब मैं 2004 में स्केप हुआ तो इस. तरह का तो मतलब केस का केस किस तरफ जा रहा. है यह तभी पता चलता है जब आपके आई. विटनेसेस हो जाए मतलब य आपको लगता है कि. फासियो से कोई सीन नहीं था नहीं नहीं अरे. भाई केस किस दिशा में जा रहा है यह भी तब.
तक कुछ नहीं हुआ था क्योंकि तब तो चाजी. फ्रेम हुआ था तो केस किस दिशा में जाएगा. यह भी तब नहीं पता था आप सोचो ना 2004 में. और केस का जो फैसला आया वो आया है 2014. में तो 10 साल के बाद आया उसके तो उस समय. कुछ भी केस का क्या फैसला आएगा इस तरफ. मतलब मुझे नहीं पूरे देश में किसी को भी. नहीं मालूम च बा अब हमको बताओ जेल से भागे. कैसे क्या कैसे यह आईडिया आया कि भाग जाते. हैं नहीं देखो आईडिया तो क्या है उस समय.
तो जब एक घटना हुई आपने बात की अफगानी हों. से अब अब वो क्या है मुंह से निकल गया हां. अब मुंह से निकल गया तो जेल एक ऐसी जगह है. एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी तो. कमिटमेंट कर नहीं दी अगर आप आप जेल में. क्या माहौल होता है आपस में क्योंकि एक. दूसरे के ऊपर टाइम पास करना है तो जेल में. आप ऐसा नहीं कि कुछ बोल के और निकल जाओ. अपना मोबाइल ऑफ कर लो वो तो उन्हीं की. शक्ल देखनी है सुबह अगले दिन भी और शक्ल.
आपको देखनी है 10-10 साल 20-20 साल हम तो. अगर आपने कोई बात ऐसी बोली है जिस पर वो. आपको छेड़ सकते हैं मजा ले सकते मजा ले. सकते हैं तो वो वहां पे आपका स्टार्ट हो. जाएगा अब मेरे मुंह से ऐसी बात निकल गई कि. भाई मैं तिहाड़ से निकलूंगा और. अफगानिस्तान जाऊंगा पुष्पा हूं मैं फ्लावर. नहीं फायर हूं मैं तो तो ये तो बहुत बड़ी. छेड़ने की बात हो गई हां तो नेक्स्ट. मॉर्निंग क्या है कि जैसे ही सुबह 6:00. बजे गिनती खुलती है जेल की तो 7:00 बजे.
जैसे मतलब 600 बजे लोग बाहर आ जाते हैं. आपस में बातचीत करते हैं तो अगले दिन ही. जो है हा जी भागे नहीं तुम हां नहीं अरे. भाई राणा जी आप तो यही हो हम तो सो थे. अफगानिस्तान चले गए होंगे तो उन्होंने जो. है वो अपना छेड़ना जो है वो शुरू कर दिया. मजाक करने. लगे तो एक जो माइंड है वो मेकअप होता चला. गया मन बनता चला गया होता गया आपका हां और. आप यकीन नहीं करेंगे जब मैंने ऐसा इजिन. करना स्टार्ट किया कि अब मेरे को जेल से.
निकल के वहां पर जाना है अफगानिस्तान तो. मैं जैसे रात को जब सोता था तो इमेजिनेशन. करता था कि वह कब्र जो है वह ऐसी होगी और. ऐसे मैं निकल जाऊंगा और आप मतलब यकीन नहीं. करेंगे मैंने अफगानिस्तान जब मैं पहुंचा. तो मैंने बहुत सारी कब्रों के पास जाकर. छानबीन करी और लास्ट में जो रियलिटी वहां. बहुत दूर पहुंच गए अभी हम अभी हम आराम. आराम हां मतलब मैं यह बता रहा हूं कि जो. मेरे को एक तरीके से जो इमेजिन करता था ना.
हम बिल्कुल वैसा ही अ जो जगह थी ना वो. मुझे वहां पर देखने को मिली मैं जाऊंगा. वहां तक इमेजिन करूंगा मैं अब आपको छेड़. दिया गया आपका ईगो हर्ट हो गया आपने कहा. सब कुछ करने का लेकिन ईगो हर्ट नहीं करने. का अब ईगो हर्ट होना अलग चीज है लेकिन. तिहाड़ की दीवारें लंबी है जी प्रैक्टिकल. सिचुएशन अलग है इतिहास अलग है प्रिपरेशन. अलग है सिक्योरिटी अलग है जी कैसे कट लि. वहां से. कैसे कट लिए देखिए जो चार्ल शुभराज को तो.
जानते वो पैसे वाला आदमी था उसका एक्सेस. था उसने जेलर साहब को नौकरी दिलाई थी. गुप्ता जी को देखो जो चार्ल शोभराज हैं. उनकी जो एस्केपिंग है उसमें क्या है कि. धोखा है धोखा कैसे है कि जेल के जो. ऑफिशल्स. थे उनके दिमाग में उनकी बहुत हाई इमेज थी. और वह जेल की जो डूडी थी जहां पर सभी का. एक्सेस नहीं होता तो वहां पर उनकी इज. एक्सेस थी प्लस वो लोग अपने मतलब इतना.
कॉन्फिडेंट थे कॉन्फिडेंस इतना आपस में. बना हुआ था कि वो मतलब उनके लिए खाने पीने. की चीजें और उनके द्वारा खाने पीने की. चीजें एक्सेप्ट कर लेते थे तो उन्होंने. क्या किया वो कॉन्फिडेंस जीता हुआ था और. जब भरोसा तोड़ के भाग गए हां मतलब हां. मतलब चीजें दए खाने पीने के लिए और वो. बेहोश हो गए लेकिन जैसे कि जब मैं एस्केप. हुआ तो मैंने एक डिबेट देखी थी उसमें किरण. बेदी मैडम थी सीबीआई के एक पूर्व. डायरेक्टर थे जोगेंद्र सिंह जी वो भी थे.
और भी कई लोग डिबेट कर रहे थे तो किरण. बेदी मैडम ने एक बात बोली कि भाई जो शेर. सिंह की जो एस्केपिंग है वो दूसरों से. थोड़ी अलग है इसमें क्या है उसने किसी को. मैंने किसी को धोखा नहीं दिया मैंने किसी. को धक्का नहीं दिया मैंने किसी को हानि. नहीं पहुंचाई जो एक सिस्टम बना हुआ था. सिस्टम के अंदर एक जो कहिए कि जो एक चूक. थी लू फुल हां लूप होल था उसको लूप होल को. जो है क्या लूप होल था लूप होल यह था कि.
देखो पहले उससे पहले मैंने दूसरी भी. अलग-अलग तरीके से प्रयास किए क्या क्या. भाई पहले तो मैंने यह सोचा कि मेरे को. मतलब बाय फोर्स जाना चाहिए जो लोग कांड कर. रहे हैं वो सुन ले. हां नहीं मैंने पहले सोचा कि भाई बाय. फोर्स जाना चाहिए बट फिर मैंने उसको हटा. दिया माइंड से क्योंकि बाय फोर्स जाने में. क्या है कि आपको सामने वाले को हानि करनी.
पड़ सकती है जो कि मेरी इंटेंशन दूर-दूर. तक थी ही नहीं वैसे डबल मामले में जेल फ. सोगे भागोगे भी फिर इसके लिए भी पकड़ेंगे. एक और चार्ज फ्रेम हो जाएगा हां नहीं देखो. वो तो भागने का तो फ्रेम होएगा ही बट आपका. एक मन भी होता है ना लेकिन पुलिस वाले मार. के भागोगे तो फिर पुलिस वाले बिल्कुल ही. पीछे पड़ जाएंगे नहीं वो देखो पीछे पड़े. या ना पड़े लेकिन क्या है कि आपकी. मेंटालिटी भी होती है ना भाई आप नहीं हानि. करना चाह रहे हम हम किसी को मार पीट के. लिए जा रहे अपने फायदे के लिए क्यों किसी. की लाइफ लेले या किसी को नुकसान कर दे तो.
वो उससे लाइन से ही हटा दिया क्योंकि वो. वैसे पॉसिबल नहीं हो पा रहा था तो बाय. फोर्स में नुकसान हमें नहीं करना तो फिर. एक और दूसरी एक मतलब जो यह शोभराज जी का. तरीका था लड्डू हां लड्डू या कुछ भी चीज. वो भी हैप्पी बर्थडे बना के खिला के भाग. जाओ मतलब वो भी उसमें भी पॉसिबिलिटी कम थी. दूसरी बात है कि उसमें भी सामने वाले को. नुक नुकन हो सकता था क्योंकि जब आप सामने. वालो को कुछ दोगे जैसे शोभराज जी ने दिया.
होगा या मान लीजिए हम भी किसी को देंगे. अगर नशे की तो उसमें कई बार जो है इंसान. मर भी जाता है क्योंकि आप जो डोज दोगे. उसमें तो वह कभी-कभी हैवी हो जाती है और. मर सकता है तो वह भी फिर हमने नहीं चाहा. कि भाई किसी को कोई हानि हो जाए तो फिर यह. जो सिस्टम में जो लूप होल था यह क्या लूप. होल था क्या है कि जब यह लोग जो दिल्ली. पुलिस है उसकी एक बटालियन है जिसका काम है. जेल के अंदर जो भी लोग हैं उनको जो कोट.
डेट्स है उस पर प्रस्तुत करना तो क्योंकि. काफी समय से मैं कोट डेट्स पर जा रहा था. तो यह मैंने वच किया कि भाई यह लोग किस. तरीके से आते हैं और कैसे जो है जेल वाले. जो है उसको सुपुर्द करते हैं किसी पुलिस. वाले हां. किसी हां हियरिंग पर तो मैंने देखा कि जो. जेल अधिका. वह कोई भी जो डॉक्यूमेंट हैं मतलब वह देख.
नहीं रहे हैं है ना जो कि देखना चाहिए तो. जब मुझे लगा कि भाई इस तरीके से अगर कोई. पुलिस वाला बन के आ जाता. है असली पुलिस वालों से पहले तो यह जेल. वाले हमें उसके हैंड ओवर कर सकते हैं तो. फिर कुछ बंदों को. मैंने इसके लिए प्रिपेयर्ड किया और जिस. दिन मेरी एस्केपिंग हुई. 17 फेब 2004 की यह बात.
है तो क्या हुआ कि जो असली पुलिस वाले हैं. व देर से आए हां वो एक्चुअली क्या हुआ कि. उनकी गाड़ी पंचर हो गई इसीलिए मैं आपसे. बोल रहा हूं कि यह ईश्वर की भी इच्छा थी. कि मैं जेल को से स्केप हो जाऊ आपको. मजेदार बताऊं कि एक दिन पहले क्या हुआ कि. मेरी मुलाकात आई तो मैं मुलाकात से जा रहा. था तो एक जब जा रहा था मतलब मुलाकात करने. के लिए जा रहा था तो एक जेल के अंदर साधू. सन्यासी एक बंद थे और वह जेलर से बात कर.
रहे थे अंदर की साइड में जेल के अंदरूनी. हिस्से में तो जब मैं जा रहा था तो. उन्होंने मुझे आवाज देकर बुला लिया तो. मैंने कहा स्वामी जी प्रणाम क रे आशीर्वाद. है ज्यादा दिन तक जेल में नहीं रुकोगे आप. तो मैंने अपने मन में सोचा मेरी तो थी एक. प्लानिंग तो मैंने अपने मन में सोचा कि कल. ही निकल जाऊंगा लग रहा आपका आशीर्वाद जो. है बहुत तो क्या हुआ जब उन्होंने मुझे ऐसा.
कहा मेरा आशीर्वाद है ज्यादा दिन जेल में. नहीं रहोगे तो जो ऑफिसर था वह हंसने लगा. तो वह कहने लगा आपको पता है किस केस में. है ये तो कहने लगे कि हां सब पता है लेकिन. मैंने आशीर्वाद दे दिया तो वह कहने लगे कि. यह दिल्ली है स्वामी जी यहां पर कुत्ते का. भी मर्डर लग जाए ना किसी के ऊपर तो पा साल. जेल में रहना पड़ता है इसके ऊपर तो सांसद. का मर्डर केस लगा हुआ है यह तो पैक्ड है. कई साल के लिए यहां पर तो मैंने अपने मन. में सोचा कि इस ऑफिसर की बात सच होगी या.
फिर ये बाबा की बात सच होगी तो वह अगले. दिन जब स्केप हो गया तो बाबा की बात सच हो. गई तो क्या है जो असली पुलिस वाले हैं वह. तो टाइम पर ही आ जाते लेकिन क्या हुआ कि. उनकी गाड़ी पंचर हो गई जब पंचर हो गई तो. वह और आधा पौन घंटा लेट हो गए अदर वाइज जो. हमारे जो बंदे थे जो आ रहे थे वो भी बंदा. बाहर से सेट किए कि भैया तुम वर्दी पहन के. आना सेम टू सेम वर्दी मिल गई नहीं वर्दी.
तो आपको पता है कि बड़ी कॉमन चीज है वो तो. आप लो अर सिलवा लो कहीं से भी तो यह तो. कोई खैर बड़ी चीज नहीं है बट वो. कॉन्फिडेंस कहां से आया हां ये जो. कॉन्फिडेंस वाली जो बात है कि यार मतलब ये. तो अवद उझा के स्टाइल में कहे तो राजा. बनने की टेक्निक है नहीं ये एक्च तिहाड़. जेल में नकली पुलिस बनकर जाएंगे और असली. कैदी को उठा के लेके रफू चक्कर हो जाएंगे. देखो ये ये जो है ये एक्चुअली क्या है ये. इसके अंदर एक बहुत बड़ी बात है जो कि मैं.
कहीं पर डिस्कस मजबूरी में नहीं कर पाता. क्योंकि क्या है कि यह जो मतलब यह जो लाइन. है. ना यह हम अगर ओपनली यहां पर डिस्कस करेंगे. तो उसमें क्या है कि सुधार नहीं हो सकता. अब सुधार नहीं हो सकता तो फिर कोई उसका. भविष्य में उसका दुरुपयोग कर सकता है तो. इसलिए उसका कोई मिसस अपराधी आप नहीं ऐसी. मासूमियत कि जेल में किसी को परेशा न नहीं. करेंगे मार के हम जाएंगे नहीं नशा हम. कराएंगे नहीं और जा रहे तो कंसर्न है कि.
भविष्य में ऐसे गलतिया और नहीं होनी चाहिए. हा देखिए क्या है मैं ढाई साल जेल से. एस्केप. रहा 2004 से. 2006 आप यकीन मान लीजिए कि जब मैं एस्केप. था तो मेरे पास अंडरवर्ल्ड. में बिल्कुल. सुप्रीम ताकत बनने का एक बहुत ही स्पष्ट. रास्ता था लेकिन मैंने उस रास्ते पर मैं. नहीं गया तो नहीं जाने का जो कारण है वह.
सीधा-सीधा यही है कि मैं उसी मेंटालिटी का. हूं ऐसा नहीं है कि मेरे को लाइफ में मौका. नहीं कैसे आप कह रहे हो कि आप अंडरवर्ल्ड. किसने आपको अंडरवर्ल्ड से ऑफर दिया था सभी. मेरे तो पूरा एक बात सुनिए मैं हाई. सिक्योरिटी वर्ड में था जेल में तो ऐसा. कोई हमारे देश में कोई माफिया डॉन है जो. मेरे साथ जेल में ना रहा होवर्ड में किसे. जानते सभी लोग ऐसा इब्राम से बात हुई नहीं. उनसे तो नहीं हुई और उनके किसी और गुर्ग. से दुबई वाला हां हां जो भी लोग थे काफी. मेरे साथ थे ना दाऊद का ही एक बंदा था.
तारीख तो वो मेरे साथ था उसने मेरी. एप्लीकेशन लगा दी थी डीजी के पास कि यह. जेल से भाग सकता है मेरी सिक्योरिटी जो है. अपग्रेड करा दी थी उसी ने एप्लीकेशन लगा. के तो सभी इस तरह के सभी लोग थे वहां भी. कंपटीशन होता है कि भाग ना जाए देखो जेल. एक ऐसी जगह है हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी. लेके डूबेंगे जेल एक ऐसी जगह है जहां पर. एक दूसरे से लोग इतना मनी मन मतलब मब. जेलेसी रखते हैं आपको पता है अगर आपकी.
रिहाई आ रही होगी ना तो लोग किसी को बताते. नहीं है डर के मारे कि कहीं नजर ना लगा दे. कहीं कोई गड़बड़ बाजी ऐसी ना कर दे कि आप. जो है कुछ और गुप्ता जी तो कह रहे थे कि. पैसा वाले लोग हो तो जेल में आराम है. सहारा श्री कह रहे थे कि लड़किया वकिया. बुलाते रहते थे गुप्ता जी ने बड़े किसे. सुनाए यहां पे देखो जो सहारा श्री है. सहारा श्री आप लोग के टाइम में लोग थे हा. मेरे वो उसी जेल में ही था मैं जेल नंबर. एक में सहारा श्री अच्छा आप गुप्ता जी भी.
स साथी रहे होगे नहीं गुप्ता जी एक्चुअली. क्या है गुप्ता जी कभी भी जो जेल का जो. फ्रंट वर्क. है करीब 20 2 साल से उसमें गुप्ता जी. इवॉल्व नहीं रहे गुप्ता जी जो है वह डीजी. ऑफिस में पीआरओ थे और लीगल ऑफिसर थे तो जो. जेल जो है तिहाड़ जेल एक्चुअली क्या है कि. आठ जेलों का समूह है जिसका अलग-अलग. एडमिनिस्ट्रेशन एक सुपरिटेंडेंट के.
नेतृत्व में चलता है और उसमें फिर दो से. चार जो है वो डीएस रैंक के लोग होते हैं. डिप्टी सुपरिंटेंडेंट. तो इनका अ किस्सा मैं आप मैंने इनसे पूछ. किसका गुप्ता जी का बताने जा रहा जी अच्छा. मैंने आपको सवाल बता देता हूं मैंने सवाल. पूछा था गुप्ता जी से कि कौन सा व्यक्ति. था जिसके लिए जेल में सबसे ज्यादा. सुविधाएं दी गई थी जी जी उन्होंने कहा ऐसे. तो सारे नेताओं को या कोई पैसा वाला होता. सबको सुविधा मिल जाती है सबके लिए आराम है.
खाली गरीब आदमी परेशान करते हैं अंदर बाकी. तो बड़ा आदमी पैसा दे देता है हम लोग को. भी लेकिन मैंने कहा एक्सट्रीम तो. एक्सट्रीम उन्होने नाम लिया सुब्रत राय. सहारा का जी अब आप बताओ कि सुब्रत राय. सहारा और जेल में क्या-क्या होता था नहीं. देखो क्या होता है तिहाड़ जेल में ईश्वर. उनकी आत्मक शांति ी हां तिहाड़ में क्या. है सुविधाओं का. एक मतलब एक लिमिट है हम है ना क्योंकि भाई. देश की राजधानी है और सबकी जो निगाह हैं.
वह तिहाड़ पर रहती हैं तो क्या है कि जेल. ऑफिशल्स अपने लेवल पर एक लिमिटेड किसी की. मतलब सहायता कर सकते. हैं जो सहारा साहब हैं तो क्या हुआ कि जो. सुपरिटेंडेंट थे आप याद कर करके मुस्कुरा. रहे हो नहीं मैं एक्चुअली क्या है कि. उसमें उन ऑफिसर्स के ऊपर अभी आ ऑफिसर नाम. नहीं लेना बता दिया जब जेलर साहब बता. लेंगे उन्हो उने हमसे क्या बताया उन्होंने.
कहा कि सहारा श्री ने कोर्ट से परमिशन ले. ली थी कि हमको वहां ना रखा जाए जहां रात. क्योंकि पैसा बाहर से मंगाना था उनको. लौटाना था तो रात जेल में अंदर रात में. बंद कर देते हैं तो रात को उनको एक्सेस. रहे फोन के एक्सेस रहे उनसे लोग अनलिमिटेड. मिलने आए तो उसी में उन्होंने कहा कि खूब. यार हस्ट आती थी उनका कैंप अलग था घूमने. टहलने की आजादी उनको थी नहीं नहीं मैं. बताता हूं वो उन्होंने अपनी जेल को कैसे. काटा सहारा साहब जो है वो जेल नंबर एक में. थे और.
एक शायद नौ या 10 नंबर वार्ड है वो उसको. वीआईपी वार्ड बोलते हैं उसमें थे लेकिन वह. क्या करते थे वह बंद तो उसी में होते थे. बट वह सुबह जब जेल खुलती थी तो 7:8 बजे के. आसपास जो है वह सुपरिटेंडेंट के रूम में आ. जाते थे और रात के 8 बजे तक या 9:00 बजे. तक वह सुपरिटेंडेंट के रूम में रहते थे. उसके बाद जो है वह उसी ब्लॉक में जाकर. उनको लॉक अप किया जाता था और रात को वहां. पर सोते थे अब ये क्योंकि सुबह वो आ जाते.
थे सुपरिटेंडेंट के रूम में तो. सुपरिटेंडेंट के रूम में क्या सुविधा है. कि एसी वगैरह लगा हुआ है और जो खाना है वो. बाहर से सब आ जाता था सबका बाहर से आता है. नहीं सबका नहीं मतलब जितना जितना आदमी. खर्चा कर सकता है हां वो तो बहुत ही आपको. बता दूं जेल में खाना आना डडी तक तो देखो. आ जाएगा डडी तक खाना आ जाएगा अगर. सुपरिटेंडेंट की इच्छा है तो लेकिन डीडी. से अंदर जो है ना थोड़ा सा और. सुपरिटेंडेंट के लिए भी थोड़ा मुश्किल हो. जाता है और जब सहरा जी थे तो तब भी वहां.
पर क्या है कि सीसीटीवी कैमरे वगैरह लग. चुके थे लेकिन इसमें मजेदार बात यह है. क्या हुआ कि जिनसे उनकी अंडरस्टैंडिंग थी. तो क्या हुआ कि वह सुपरीटेंडेंट जो हैं 15. दिन की छुट्टी पर चले गए जब चले गए तो. जिनको उस जेल का 15 दिन के. लिए इंचार्ज बनाया वो बहुत ही ने पर्सन थे. चाहो तो मैं उनका नाम भी बता सकता हूं. मानदार आदमी ब हरीश त्यागी जी उनका नाम था.
हरीश त्यागी जी बड़े ऑनेस्ट पर्सन थे तो. क्या हुआ कि जब हरीश त्यागी जी आए जैसे वह. क्या एक घंटे के लिए दो घंटे के लिए अपनी. जेल से उस जिसका चार्ज एक्स्ट्रा मिलता था. उसमें भी जाते थे क्योंकि साइन वगैरह करने. पड़ते थे एस सुपरिटेंडेंट तो जब वो आए 111. बजे के आसपास इधर वाली जेल में अपनी जेल. से तो उन्होंने देखा कि सहारा साहब ऑफिस. में बैठे हुए हैं तो व आए तो वह एकदम.
अनजान बन गए उन्होंने कहा हां उन्होंने. अपने जो अर्दली था सिपाही उससे कहा कि हां. कैसे बैठे हैं ये तो उन्होंने कहा जी. बताइए क्या काम है तो उन्होंने कहा. कि मैं तो यहीं बैठता हूं रोज तो उन्होंने. कहा कि ठीक है आप बैठते होंगे बट अभी तो. जो है 15 दिन तो मैं हूं यहां पे तो आप. अपने वॉर्ड में जाइए. वापस तो उन्होंने जो है उनको. वापस वर्ड में भेज दिया तो उसी उसी जब.
वर्ड में गए तो उन्होंने तुरंत ही अपने. चैनल के थ्रू जो है जो पहले वाले थे उनको. कॉल करवाया भाई अपनी छुट्टी कैंसिल करा के. तुरंत आ जा व अगले दिन जो है वह अगले दिन. आकर फिर उन्होंने जवाइन किया जो है. उन्होंने कहा यह तो जो है 15 दिन में मेरे. को पूरा बड़े सूटकेस गए होंगे हा नहीं. मतलब देखो जो सूट अब आपके सामने वह नहीं. आए सूटकेस के बहकावे में है ना उन्होंने.
उनको बोल दिया देखो वह देश के इतने बड़े. इंडस्ट हैं और उनके लिए इतनी बहुत बड़ी. बात है कि वह उनको कहे कि हां बिना काम के. आप यहां मत बैठिए अपने वर्ड में जाइए वापस. लेकिन बोलने वाले हा बोलने वाले ने बोल. दिया तो क्या है कि हर तरह का ऑफिसर देखिए. होता है ये किस्सा सुनाया था उन्होने कि. हस्ट आथ थी यह सही था फर्जी था हा देखो. मैंने बताया डडी तक जो उनसे मिलने. वाले जो लोग थे क्योंकि यह सुप्रीम कोर्ट.
ने ही उनको अलाउड किया हुआ था कि जो अपने. बिजनेस से रिलेटेड चीजें हैं जो उनके. ऑफिशियल हैं वो उनसे मिल सकते हैं तो वह. तो लीगली था डीडी तक मिलना उनका है ना. बट वह ऐसे नहीं था कि भाई आप पूरा हर समय. जम के वहां पर बैठे रहोगे अगर कोई आया तो. एक जो सिस्टम है उसके अनुसार उसकी मुलाकात. कराओ ग और फिर उसके बाद वो वापस वर्ड में. जाएंगे बाकी जितना अंडरस्टैंडिंग हो गई. हां तो फिर अंडरस्टैंडिंग उनकी भाई बन गई. थी उस वाले से तो वो अपना उस चीज को करते.
थे यूज विटामिन एम में पावर होती है हां. देखिए क्या है कि कई लोग मजाक बनाते हैं. भाई यूपी में ठाकुरों की सरकार है हम तो. मैं उसको यह बोलता हूं भाई यूपी हो चाहे. पूरा देश हो कहीं पर किसी की सरकार नहीं. है अगर किसी थाने में जाओगे किसी भी. सरकारी ऑफिस में जाओगे तो सिर्फ एक ही चीज. की सरकार है वो है गांधी जी कीट हां. विटामिन एम तो विटामिन एम से ही मैंने कहा.
कि भाई एक थाने में जाओ किसी की चप्पल. टूटी हुई है कपड़े फटे हुए हैं वो कहे जी. मैं ठाकुर साहब हूं और एसएचओ सर यह मेरा. काम है तो उसको कहेगा बाहर जाके बैठ जा और. एक आदमी कहे कि जी मैं दलित समाज से हूं. लेकिन एक ₹ लाख का पैकेट भी साथ में सरका. दे तो उसको ज्यादा इज्जत मिलेगी जल्दी. उसका काम होगा तो कोई भी जाति या धर्म से. ऊपर जो है वो विटामिन एम है जो आपने बताया. गांधी जी भी सोच रहे क्या कर दिया मेरे. देश का इन लोगों ने मेरे ही नाम पर सब गचा.
बैठे नहीं गांधी जी तो देखो उस समय भी. ताकतवर थे आज भी सबसे ताकतवर वही हैय गुरु. गजब जेल में गांधी जी कितने ताकतवर है. नहीं जेल में क्या पूरी दुनिया में देखो. जेल और यह जो पुलिस डिपार्टमेंट है यह. थोड़ा ज्यादा बदनाम हो जाता है दूसरे. डिपार्टमेंट के कंपैरिजन में इसका रीजन. क्या है कि यहां पर जो आदमी पैसे देता है. वह देता है बिना किसी काम के मजबूरी में.
जबकि जो दूसरे डिपार्टमेंट है मान लीजिए. आप अपने घर का नक्शा पास कराने गए अब आपने. वहां पर कुछ चरणा चढ़ाया तो आपके मन में. यह तसल्ली है कि मेरा कुछ काम हुआ है. लेकिन यहां पे जो पैसे दिए जाते हैं वहां. पर इस बात के लिए पैसे दिए जाते हैं कि. यार यह मुझे तू करके बात ना कर दे ये मेरे. थप्पड़ ना लगा दे मतलब कुछ मिलेगा नहीं. सिर्फ आपको एक डर से पैसे मिलेंगे जेल में.
होता है ये सोशल सिक्योरिटी कि इतना भिजवा. दो तुम सिक्योर रहोगे नहीं देखो ये तो एक. पिक्चर आई थी क्रिमिनल जस्टिस उसमें. दिखाया कि नए नए लौंडो को उठा ले आते हैं. रात. को यह काफी हद तक हो जाता है जेल में हां. देखो क्या है कि देखो दो तरह से जेल चलती. है एक है सरकारी ऑफिशल्स लोग और एक है जेल. में जो गैंग लीडर्स हैं तो अब क्या है कि. एक रस्साकशी सी होती है भाई किस समय किसका.
प्रभाव ज्यादा चल रहा है तो जो एक साधारण. मुलजिम है जेल में उसकी भलाई तो इसमें है. कि. भाई सरकारी जो अधिकारी हैं वह ज्यादा ताकत. में चल रहे हो क्योंकि सरकारी अधिकारी का. फिर भी एक जो है लिमिटेशन है आपको परेशान. करने की पैसे वह लेगा बट एक लिमिट उसम. लेगा रिस्पेक्ट एक स्तर तक परेशान करेगा. हां लिमिट तक हां लेकिन जो सामने है उनकी.
कोई लिमिट नहीं है ना वो तो सीधा एक ही. बाय फोर्स ही लेना है उनको पैसे है ना वो. जेल में भी आपके ऊपर फोर्स यूज करेंगे और. आपके फैमिली मेंबर्स को भी बाहर बाय फोर्स. ही डराने की कोशिश करेंगे तो उसमें क्या. है कि आदमी जो है मतलब अपने आप को कमजोर. महसूस करता है तो लेकिन जेल में ये चीज. चलती है ठीक बात और जेल वालों का क्या. मानना है हम जैसे कभी जेल ऑफिसर से बात.
करते हैं तो जेल का और पुलिस का आपको बता. दूं एकदम क्लियर मेंटालिटी होती है वह. कहते हैं यह जो जैसे आप देखते हो ना कि. भाई अंदर से गैंग चल रहे हैं व कहते हैं य. पैसे कमाते किसलिए यह कमाई हमारे लिए रहे. हमें ही देके जाने हैं सारे पैसे इन्होंने. और यही रियलिटी. है जो भी. व्यक्ति इस क्रिमिनल एक्टिविटी से पैसे. कमाने की कोशिश करता है जिसमें प्योर मतलब.
जिसमें गन का यूज हुआ हुआ है है ना जिसमें. जिसको ब्लड मनी हम बोलेंगे आपको बता दूं. ब्लड मनी से कोई भी पनप नहीं पाया कोई भी. आप गलत काम कर रहे हो अगर उसमें बिजनेस का. इवॉल्वमेंट नहीं है जैसे दाऊद है दाऊद ने. बहुत पैसा कमाया लेकिन दाऊद ने क्या है. व्यापार किया चाहे वह सोने की स्मगलिंग की. हो चाहे वो ड्रग्स की स्लिंग स्मगलिंग कि. हो बट उसने व्यापार किया लेकिन जो लोग.
क्लियर जो है मतलब एज ए शूटर कि भाई आपने. किसी के पैसे ले लिए या उगाही करने वाला. हां उगाही कर ली है ना तो ये जो स्टाइल है. ये कभी ख का पैसा घर में नहीं फलता नुकसान. दे हां किसी को मतलब उससे कोई भी अपना जो. है लाइफ को अपग्रेड कर नहीं पाया ठीक है. आपके जेल के कार्यकाल में कौन-कौन से बड़े. नाम थे साथ में कौन-कौन बड़े आदमी साथ में. थे अ वो बड़े किसी भी सेंस में पैसा के. सेंस में हो सकते हैं अपराधी के सेंस में. हो सकते हैं किसी भी सेंस में जिनका नाम.
लोग जानते हो बाकी लोग जानते हो सोशल. मीडिया पे हां देखिए मेरे साथ पूरा टूजी. स्कैम वाले थे और आपका सहारा साहब तो थे. ही इसके. अलावा बहुत सारे समय समय प जो पॉलिटिकल. लीडर्स हैं वो लोग भी काफी लोग आए हैं. जैसे पप्पू यादव जी थे और अगर टेररिस्ट. में पूछे तो अफजल गुरु था है ना और आपका. जो जो है. ये धनंजय सिंह थे जो मेंबर ऑफ.
पार्लियामेंट थे उस सम तीन फेसिनेटिंग. कक्टर तीन कहानी हमको मिल गई पप्पू यादव. शुरू करते हैं जी जलवा था पप्पू यादव का. लोग कहते दबदबा था दबदबा है अंदर जिम. बनवाए थे ऐसा कहीं सुना हमने हां बिल्कुल. देखिए पप्पू यादव जी ने थोड़ा ठीक से जेल. काट ली ठीक से मतलब मतलब क्या है कि एक तो. वो खुद मेंबर ऑफ पार्लियामेंट थे उस समय. उनकी वाइफ भी एमपी थी उस समय तो उनकी जो. डीजी था उससे एक अंडरस्टैंडिंग बन गई थी. एक्चुअली क्या है तिहाड़ जेल में क्या बात.
है सिर्फ यह तिहाड़ में ही है यह प्रॉब्लम. तिहाड़ में आप जल्दी से सुविधा क्यों नहीं. ले सकते इसका रीजन क्या है यह जेल जो है. दो पावर्स के बीच में बटी हुई है यहां पर. जो डीजी प्रिजन है उसकी नियुक्ति तो करता. है केंद्रीय गृह मंत्रालय और जो इससे जो. नीचे के अधिकारी हैं जो डीआईजी है आईजी है. हां सुपरिटेंडेंट उसकी नियुक्ति करती है. दिल्ली सरकार तो अगर मान लीजिए जैसे अभी.
आम आदमी पार्टी अगर डबल इंजन की सरकार है. तो तो बल्ले ब एक जगह पैसा भेजना पड़ेगा. लेकिन अगर सिंगल इंजन की सरकार है तो आपको. दो जगह भवाना पड़ेगा हां हा कैसे कह रहे. हम लोग भुवाना पड़ेगा नहीं तो मतलब मतलब. आपको हां दोनों को अप्रोच करना पड़ेगा है. ना क्योंकि भाई डीजी प्रिजन बॉस है जेल का. तो उसकी निगाहो से कोई चीज छुपे गी नहीं. और व पनिश कर सकता है सुपरिटेंडेंट को और. जेल मैनुअल के अकॉर्डिंग सुपरिटेंडेंट जो. है जेल का बॉस है अब वो मान लीजिए कोई.
दिल्ली सरकार का कोई मिनिस्टर है या कोई. अध बड़ा पॉलिटिशियन है उसकी बात को सुन. लेगा बट डीजी नहीं सुनेगा तो अब लेकिन. आफ्टर ऑल लास्ट पावर तो डीजी है अब जैसे. मान लीजिए केजरीवाल जी जेल में रहे या आम. आदमी पार्टी के जो अलग-अलग लोग जेल में. रहे अब डीजी ने कई चीजों पर मतलब सताई जो. है वो बरत वाई होगी मेरे सामने की बात है. कि चौटाला साहब थे जेल नंबर दो में के.
हॉस्पिटल में थे वोह तो उस समय जो डीजी थी. विमला मेहराज जी थी तो विमला मेहरा जी को. कुछ पता नहीं पर्सनल प्रॉब्लम थी या क्या. था लेकिन वह जानबूझ के चौटाला साहब को. परेशान करवा करवाया करती थी तो जितने भी. जो जाट समाज के हमारे भाई हैं जो उनके. सिपाही थे मतलब जो ऑफिसर्स थे जेल के उनको.
चुन चुन के जो है उस जेल से उन्होंने. ट्रांसफर कर दिया कि भाई यह कोई वैसी फेवर. कर हो जाएगा इनको लेके हां मतलब ये लोग. फेवर करते हैं या फेवर ना कर पाए तो डीजी. के हाथ में भाई सब चीज है यह चीज है ना तो. ऐसे ही जैसे अब यह लोग रहे आम आदमी पार्टी. के लोग जेल में रहे तो आम आदमी वाले मौज. काटे होंगे या परेशान रहे होंगे नहीं देखो. जितना अब आपका अनुभव क्या कहता है मेरा.
मेरा अनुभव यह कहता है कि एक लिमिटेड उनको. फैसिलिटी मिली होंगी एक्चुअली फैसिलिटी. जेल में है ही क्या मैं आपको बता द मज. करवा सकते हैं मसाज तो आप भी करा सकते हो. मैं आपको बता दूं जेल के अंदर 80 पर. लोग बिचारे बहुत ही गरीब है बहुत ही. साधारण फैमिली बैक ग्राउंड से हैं हम मतलब. जेल में अधिकतर लोगों की ऐसी हालत होती है.
कि उनके पास समझिए कि 000 भी महीना खर्च. करने का अ हिसाब किताब नहीं होता हम तो. उनको भी भाई पकोड़े खाने हैं उन्होंने भी. बढ़िया भोजन करना है उनको भी तेल साबुन और. चीजों की जरूरत है तो वो नीड जो है वो. कैसे पूरी होगी किसी बड़ मने की पकड़ के. उसकी सेवा करके तो वो नीड ऐसे ही पूरी. होगी कि अगर आपके पास आर्थिक संपन्नता है. कि आप कुछ पैसा खर्च कर सकते हो तो आपको व.
अगर आप हजार 000 000 किसी एक्यू उस के ऊपर. खर्च कर सकते हो तो आपको ऐसे काफी लोग. वहां पर मिल जाएंगे तो वो पैर भी दबा. देंगे आपके सेवादारी भी कर देंगे अब आते. पप्पू जी प वापस तो पप्पू जी का कैसा जेल. में सेटअप था पप्पू यादव जी ने जो है जेल. के अंदर जिम बनवाया था और एक बल्कि. उन्होंने जो है यह जो म्यूजिकल. इंस्ट्रूमेंट है ना उनको शौक था ड्रम. बजाने का है तो वो इतने हेल्दी हैं तो जब.
मैं उनसे मिला एक बार तीन नंबर जेल की बात. है तो उन्होंने कहा शेर सिंह जी आइए सेल. में उन्होंने क्या तीन सेल ले रख भी. मिलनसार है लेकिन हां बहुत ही मिलनसार है. मस्त मौला आदमी है कोमेडी ओमेडी करते ते. हैं मस्त मौला एक्चुअली वो भी वो. काफी जिसको बंबईया भाषा में बोलेंगे ना. सियाने वो क्या है सियाने व्यक्ति है क्या. है कि इसी कुर्सी बैठे थे पॉडकास्ट किए थे. अच्छा तो क्या है कि जेल के अंदर उस समय.
एक बंदा था जिसको कि हमारे एजेंसी ने. अरेस्ट करवा रखा था वो अपना आईएसआई का. एजेंट था मतलब र का भी एजेंट था आईएसआई का. भी तो क्या है कि वो जो आप बोल रहे थे ना. कि भाई खर्चा करने के मामले में मुझे लगता. है वो सहारा साहब से भी ज्यादा खर्चा करता. था वो जो बंदा था उसके टावर वगैरह है दुबई. के अंदर तो उसका. मतलब. वो करोड़ों में खर्च था उसका तो वह क्या.
है कि पप्पू जी ने उसको जो है कैप्चर कर. लिया अपने शागिर्द में ले लिया अच्छा वो. भी इजली शागिर्द में आ गया क्योंकि उससे. डायरेक्ट पैसे लेने में ऑफिसर्स जो है वो. डरते थे क्योंकि भाई वो एक व वच लिस्ट में. था डबल एजेंट था देशद्रोह में फसा होगा. हां हां तो इनके मार्फत जो है ये इन्होंने. मब म जेल वालों के भी मजे कटवाए और अपने. जो वहां प जो दूसरे एक्यूज लोग थे जैसे वो.
क्या करते थे रोज जैसे 500 लोगों का खाना. स्पेशल बनवा दिया अब वो बिल उसके हिस्से. में जाएगा लेकिन फ्रंट चेहरा जो है पप्पू. जी आओ भाई खाओ पप्पू जी तो बाहर भी खूब. बांटते हैं दबा के पैसा हां नहीं भाई. पप्पू जी मैंने आपसे बताया ना पप्पू जी एक. समझदार व्यक्ति है अपना भी बांटते होंगे. क्योंकि जब आप अपना बांटो ग तभी आपको कोई. दूसरा भी देगा हम लेकिन क्या है कि वो. जैसे तो ये जेल के अंदर भी उनका नेचर था.
कि आज चलो भंडारा है पप्पू यादव की तरफ से. हां लेकिन उसका जो बिल है वो कहीं और. फटेगा तो उन्होंने म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट. बना मंगवाए जिम का सामान मंगवाया और भी. जेल के अंदर काफी जैसे जेल में. प्रोग्राम्स वगैरह भी होते रहते हैं है ना. तो वो भी उसके माध्यम से करवाते पप्पू. यादव हां स्पंस कर देते थे मतलब स्पंस ये. सब फर्स्ट हैंड इंफॉर्मेशन बता रहे हो ना. आप सही सही हां हां देखिए भाई जो हमने. देखा हा है ना जो मेरे को अच्छे से मालूम.
हां तो इसमें मतलब लेकिन पप्पू यादव जी ने. एक अच्छी जेल काटी. और पूरा जो है सबको मजा करवाया जेल के. अंदर और मजा कराया मतलब थोड़ा इसको. भी भाई जेल के अंदर एक साधारण जो प्रिजनर. है उसका बिचारे की खानपान मज मस् हां बस. ये खानपान मौज मस्ती ही उसकी वो रह और ये. दुम दडम दुम दुम जो बजा ये हां वो जिसको. आता हो बजाने के लिए वो बजा लो मैं तो गया.
इतने फैटी हैं तो वो कहने लगे शेर सिंह जी. देखो तो वो ड्रम के ऊपर बैठे और मैं कहता. हूं इतना जबरदस्त उन्होंने ड्रम बजाया. मैंने कहा मैंने अपने मन मन में सोचने लगा. यार ये इतने मतलब मोटे हैं और इतनी फुर्ती. है इनमें तो उनको शौक था फिर उधर ले गए जो. जिम था जिम के बाहर जो है तो ये जिम अलाउ. जा है बनवाना नहीं भाई अच्छा गांधी जी विट. हां तो ये अब उनके जाने के बाद जो है वो.
जिम खत्म हो गया जब तक वो थे तो अपना जब. जब तक विट मम लगता रहा तब तक जेलर साहब ने. कहा चलो जिंदाबाद जब कम होगा तो नहीं नहीं. भाई नियम तो नियम है हां बस देखो जेल. अथॉरिटी के पास ना इसका मतलब जेलर पैसा. बहुत होता होगा पैसा जी जेल पात तो एकदम. राजा आदमी होगा हर हर आदमी अंदर बड़ा बैठा. है नहीं बट दो दिन खाना रोक दो हां लेकिन. लेकिन क्या देखो डीजी जेल को हर कोई जो है. वो अप्रोच नहीं कर सकता है ना जो डायरेक्ट.
अप्रोचेबल ऑफिसर 10 लोग से लेने का मतलब. क्या एक आदमी से दबाग ले लो हां अगर उस. तरह के सहारा शी टाइप का आदमी हो बता रहे. हो आप दुबई वाला नहीं देखो देखो अब मैं. समझ में नहीं आ रहा मुझे यहां पे. इस कह सकते हो कह सकते हो हमारे कोई लक्षण. नहीं जेल जाने के नहीं देखो जेल में जेल. का मामला कैसे चलेगा हम. भाई जैसे कि जो कमर्शियल क्राइम वाले लोग.
हैं तो उनका एकदम स्पष्ट होता है कि वोह. कौन है जैसे आज के आज के समय में आपको चेक. करना है तो अब यह डीजी साहब के हाथ में है. क्या है उन्होंने जैसे कि जो ईडी के. प्रिजनर हैं उनके लिए एक अलग जेल नियुक्त. कर दी कि भाई जो भी ईडी का केस का होगा वो. इसी जेल में आएगा होगा भाई ये तो. अंडरस्टूड बात है ईडी किसी गरीब के पीछे. तो लगती नहीं तो अब उन्होंने जैसे कि ये.
एक कागज पर लिख दिया भाई ईडी का कोई भी. केस का मुलजिम होगा वो इस नंबर की जेल में. आएगा हम और उस नंबर की जेल में अपना प्रिय. सुपरिटेंडेंट जो उनका खास चेला है उसको. वहां पर नियुक्त कर दिया तो अब उसका काम. है ना अब उसका काम है हम कि वो विटामिन अ. सी की मतलब चार दिन थोड़ा टाइट करो पचवे. दिन सामने से खुद आएंगे भाई साहब कैसे. मैनेज हो सकता है नहीं देखो आपको मैं एक.
बात बता देता हूं मैंने क्या है कि जो. कमर्शियल क्रिमिनल होगा व चाहे कोई. मिनिस्टर हो चाहे वह सरकारी ऑफिसर हो चाहे. वो प्योर गन पॉइंट पर पैसे कमाने वाला एक. अपराधी हो सबकी मेंटालिटी एक होती है क्या. है वह वो पैसा लाइफ में क्यों कमाना चाहते. हैं मजा करने के लिए उन्होंने बाहर भी भाई. वो क्यों जब वह साइन मारता है और उसको पता.
है कि अब साइन मारूंगा तो एक करोड़ रुप आ. जाएगा तो वो क्यों चाह रहा है कि इस एक. करोड़ से मैं अपने लाइफ को अपग्रेड कर. लूंगा और एक आदमी गन लेकर जा रहा है उसको. गन ही चलानी आती है वह रिवॉल्वर से गोली. मार रहा है या डरा रहा है आपको कि एक. करोड़ दे दो अब दोनों का मकसद यही है कि. हमें इस पैसों से अपना खुद का और परिवार. को मजाक करना है कराना है तो जब ऐसा बंदा. किसी भी घटना वस जेल में चला जाएगा तो वो. वहां पर भी वो सोचेगा अब इस पैसे से मैं.
अपना मजा लेने का प्रयास करूं तो कुछ लोग. प्यार से दे के मजा लेते हैं कुछ लोग जो. है वह सोचते हैं कि डिमांड ज्यादा है तो. उतना मैं ना करूं तो उसमें जो है अपनी जब. वह कंजूसी दिखाते हैं तो फिर थोड़ा सा. अच्छा हमको गुप्ता जी ने एक और कहानी. सुनाई थी गुप्ता जी ने कहा कि जेल के अंदर. जेलर का पैसा लेना मजबूरी भी है नहीं लेगा. तो उसके खिलाफ इतनी अर्जी डाल देते हैं जी. इतने तरह से उसको परेशान करने लगते हैं कि.
वो बेचारा फ्रस्ट्रेट हो जाएगा उसके ऊ. जांच बैठ जाएगी तो उसको कोई टर्म भी दिया. था उन्होंने. कि क्या टर्म था काना करना हां काना करना. काना कर दिया वो जेल में जो मतलब जो. एक्यूज पसन इमानदार पुलिस वाले को जेल में. काना करवा देते अपराधी कि अब हो गया भैया. हमारा हां मतलब वो वो उनकी जो जेल की भाषा. है जेल की भाषा में मलब मतलब उनके इशारे. हैं कि भाई यह काना है मतलब काना मतलब ये. जो है म सेट है य पैसा ले दे काम हो सकता.
है हां ले दे के काम हो सकता है जो देखो. मजबूरी टेक्निकल वर्ड है क्या बढ़िया. टेक्निकल मजबूरी की तो मैं आपको बात बता. दूं मैंने जेल के. अंदर दो तीन ऑफिसर्स बड़े ऑनेस्ट देखे हैं. और मतलब कम होते हैं बट ऐसा नहीं है कि. ऑनेस्ट ऑफिसर्स जेल में नहीं आए या अभी. नहीं है ऐसा नहीं है हर तरह का व्यक्ति इस.
दुनिया में और जेल में और हर सर्विस में. गुप्ता जी ईमानदार थे मैंने आपसे बताया कि. जो गुप्ता जी हैं गुप्ता जी ने कभी मतलब. पिछले 20 2 साल से फ्रंट की जॉब नहीं करी. मतलब एज ए डीएस ठीक बात वो लॉ वाले तो आते. थे ठीक नहीं उनका उनका कभी किसी लीगल. मामलो में आते थे थ उनका जो जेल चलती कैसे. है जैसे तिहाड़ जेल है उसमें आठ जेलें हैं. उसमें एक जेल का जो सबसे बड़ा ऑफिसर है वह.
है सुपरिटेंडेंट हम इससे जो ऊपर के लोग. हैं डीआईजी आईजी और डीजी ये लोग हेड. क्वार्टर में बैठते हैं और गुप्ता जी वहां. पे हेड क्वार्टर में एज ए पीआरओ पब्लिक. रिलेशन ऑफिसर और तिहाड़ जेल के लॉ ऑफिसर. तो ये डीजी ऑफिस में इनका चेयर है इनका. डायरेक्ट किसी प्रिजनर से कांटेक्ट नहीं. रहेगा इधर आखिरी के 20 साल पे हां मतलब यह. तो आप सोचो मुझे तो लगता है कि बस शुरू.
में कभी फ्रंट उसमें रहे होंगे मुझे लगता. है पिछले 202 साल से वह जेल के पीआरओ ही. थे तो कभी उनका जो मुलजिम है उनसे. डायरेक्ट वास्ता नहीं पड़ेगा उनकी सीरीज. आई है ना एक सीरीज आई है काफी कहानियां. उसमें सुनाई इन्होंने हां. जो अभी फर्स्ट पार्ट है उसका वो तो हां वो. 80 के टाइम का है 90 का उस समय वो फ्रंट.
डेस्क की तब तो आप भी हा प घूम रहे होंगे. हां बच्चा होगा मैं तो तब हां लेकिन जो. मुझे नॉलेज है जैसे मैं 2001 में जेल गया. था तो तब वह जेल के पीआरओ थे और मतलब किसी. जेल में पूरे 202 साल में वो मेरे सामने. ठीक है कभी फ्रंट उस पर नहीं आए अब दूसरा. नाम धनंजय सिंह जी सोशल मीडिया जब तुम. जलवा देखते हैं बढ़िया रील बनती है जी. हमारे मित्र हैं पवन सिंह उनके साथ वो. घूमते हैं जी जी व लोग भैया भैया कहते हैं.
डरते भी है खौफ भी है दबदबा है दबदबा था. दबदबा रहेगा अंदर क्या था. देखो इत्तेफाक से हम जिनका मैं अभी बता. रहा था हरिश त्यागी जी वो उसी जेल के. सुपरिटेंडेंट. तो वो बहुत दुख गया होगा फिर तो वो वो जो. हरिश त्यागी जी थ वो जेल नंबर चार के ही. सुपरिटेंडेंट थे जहां धनंजय सिंह थे हां. धनंजय सिंह को जेल में छ दिन नहीं तो वो. 15 दिन के लिए सिर्फ एक नंबर का चार्ज भी.
उनको मिला था तो अब आप सोच सकते हो जो. सहारा साहब को यह कहेंगे कि भाई आप अपने. उसमें जाइए वर्ड में यहां पर नहीं बैठना. है तो फिर उनका अपनी जेल में जिसके वो. परमानेंट सुपरिटेंडेंट है तो वो कैसा वहां. तो मोहब्बत केमता बच्चन होंगे परंपरा. प्रतिष्ठा अनुशासन हां तो वो क्या है कि. वैसे जो धनंजय भाई हैं वो क्या है एक मतलब. भले ही उनको आप कुछ भी नाम से पुकार लो बट.
वो बड़े एजुकेटेड पर्सन है बहुत ही सॉफ्ट. स्पोकन है बड़े इंटेलिजेंट भी है. और जो देखो जो जेल में कुछ चीजें ऐसी है. कि वह जैसे मान लीजिए बैडमिंटन खेलना है. तो वह सबके लिए अलाउड है तो वह भी खेलते. थे तो और जैसे जो सेल है है ना सेल आपको. प्रोवाइड होगा तो वो इतने सारे लोगों को. मिलता है तो वो उनको भी मिले मिलेगा और. मिला हुआ था है ना और मान लीजिए जो टीवी. है सेल के अंदर वह सभी लोगों को प्रोवाइड.
है वो उनको भी मिलता था सिर्फ क्या है कि. जो जैसे एक बाहर ऐसे घूम लेना फ्रीली तो. जब वह सुपरिटेंडेंट जेल में मौजूद हैं. बाहर घूम लेना खाना मंगवा लेना श्वा आराम. काट लेना हा तो थोड़ा उसके लिए जो है. प्रवेश रहती थी लेकिन क्या है कि जेल के. अंदर उस समय तक जेल में कैंटीन भी थी तो. कैंटीन के एक. लीगली कैंटीन पर जो आप चाहे व खाना बनता.
था. तो खाने की भी ऐसी कोई बहुत बड़ी प्रॉब्लम. नहीं रही जैसे पप्पू यादव में आपने कहा कि. उनका बड़े मजे में दिन कटे धनंजय जी के. मजम नहीं कटे शायद उतने नहीं कट पाए होंगे. लेकिन धनंजय भाई में और पप्पू जी में. थोड़ा नेचर वाइज भी अंतर है पप्पू यादव जी. थोड़े चुलबुले टाइप के व्यक्ति हैं है ना. और ये थोड़े से सीरियस नेचर के रिजर्व. नेचर के हैं तो इनकी वैसी नेचर भी नहीं है. जदा जल्दी घुल मिल जाते होंगे प यादव हां.
पप्पू जी तो पूरी जेल में घूमते रहेंगे. सबसे बात करेंगे. सबसे और वो थोड़े से रिजर्व नेचर के. व्यक्ति है है ना तो मेरे से तो काफी उनकी. बातचीत होती थी तो बल्कि मुझे याद है. मंदिर था वहां पर एक तो जैसे मंदिर में वो. मेरा मेरे साथ बैठ जाते थे हम लोग आधा. घंटा 15 मिनट एक दिन याद है मुझे एकदम. सुपरिटेंडेंट आ गए अचानक ही तो वो आया.
सिपाही जो है तो वो कहने लगा कि भाई साहब. आ रहे हैं यार तुम जो है अपने अपने वॉर्ड. में चले जाओ. तो मैंने कहा यार अभी दो मिनट और कह रहा. नहीं नहीं भाई मेरी नौकरी खराब करना चाह. रहे तो बैठ जाओ तो फिर आप इतना हम आपस में. भी लिहाज दारी करनी पड़ेगी लेकिन आप यकीन. नहीं. करेंगे मतलब मेरे से खुद उन्होंने कहा कि. यह जो सुपरीटेंडेंट है यह आपकी बात इतनी.
मान मतलब मेरी जो काफी बात है वोह मानते. थे क्योंकि मेरा हरीश जी ब सभी बात मानते. थे करब करीब जो है क्योंकि क्या हुआ. कि जो आ रहा कह दीजिए जज नहीं करेंगे क्या. हुआ. कि एक बुक मैंने लिखी थी तो मैंने बुक. लिखी थी तो उसकी मेरे को जो स्टार्टिंग एक. रॉयल्टी मिली तो ₹ लाख रुप मेरे को एडवांस.
में मिले उसके जेल डायरी तिहाड़ से काबुल. कंधार तक तो मैंने मन बनाया कि यार यह जो. एक लाख रुप मुझे मिले हैं यह मैं किसी को. डोनेट करूं तो मैंने जो है सबसे पहले डीजी. साहब को एक लेटर लिखा कि भाई यह मैं डोनेट. करना चाहता. हूं तो उन्होंने मेरे को बाकायदा वहां से. लेटर आया कि भाई जो जेल के अंदर एक्यूज्ड. है एक्यूज पर्सन को यह हम अलाउड नहीं करते.
हैं कि वो किसी तरह का डोनेशन दे डायरेक्ट. जेल अथॉरिटी को तो वो लेटर क्योंकि उनके. माध्यम से आया था तो मैंने कहा सर बताओ यह. तो लिए नहीं तो वह जो है बांके बिहारी जी. के बहुत तगड़े वाले भक्त थे पंडित जी. त्यागी जी त्यागी जी हा हरीश त्यागी वो. ऐसे थे वो जेल में भी घूमते रहते थे ना तो. माला अपनी एक वो थैले में माला जपते रहते.
थे चझ गया और हर समय जेल के अंदर बस भक्ति. के गीत चलवा के रखते थे लोग जैसे जेल में. रेडियो भी है मतलब तिहाड़ रेडियो तो वो. अपनी जेल में कोई फिल्मी गाने नहीं चलाते. थे लोग परेशान हो जाते थे सिर्फ जो है वो. भजन भजन बस तो वो कहते थे यार ये भजन ही. सुना के रखते हैं हर समय तो क्या है कि. फिर मैंने उनसे बात करी मैंने कहा सर. मैंने ऐसा पढ़ा न्यूजपेपर में कि वृंदावन. में जो कुछ हमारी माताएं हैं वो बिना.
वस्त्रों के मतलब घूमने के लिए मजबूर हैं. क्योंकि उनके इतनी गरीबी है कि उनके पास. साड़ियां भी नहीं है फटी हुई कपड़े पहनते. हैं तो मैंने कहा मेरी रिक्वेस्ट यह है कि. भाई इन्होंने तो लिए नहीं. तो मैं कुछ इसमें से देना चाहता हूं जो. काम सहारा श्री करणम कर रहे थे वो आपने एक. लाख में करवा लिया नहीं मैंने कुछ देखो. मेरी कोई डिमांड तो थ हर आदमी कमजोर नस. होती है हर आदमी पैसे में नहीं बिकता आपने. एकदम एकदम सही नस पकड़ी तो त्यागी जी का. भजन चल रहा है एकदम पकड़ के भजमन राधे.
नहीं मतलब लेकिन मैंने कोई कभी मेरी कोई. डिमांड भी नहीं थी और मेरा कभी वो भी नहीं. था ब बट वो क्या है कि उन्होंने उन्होंने. कहा यार शेर सिंह काम तो ये बहुत अच्छा है. मैंने कहा सर देखो मैं तो जा नहीं सकता. आपके माध्यम से हो जाए तो जो है बहुत. अच्छा हो जाएगा बुद्धि तो बहुत जबरदस्त है. आप तो कहने लगे कि हम पैसे देखो कैश नहीं. लेंगे तुम साड़ियां दिलाओ ग तो हम दे. आएंगे ह तो मैंने कहा ठीक है सर हमारा तो. मतलब आपकी इच्छा सर हमको तो आपको इंप्रेस. करना है नहीं मतलब इंप्रेस करने की इसमें.
कोई बात नहीं जबरदस्त बुद्धि लगाई गजब बट. नेता अच्छे बनोगे आप नहीं देखो यह मेरे. दिल मेरी तो दिल से इच्छा ही थी अगर वो. डीजी साहब एक्सेप्ट कर लेते लीगली तो भी. हमें उसमें कोई आपत्ति तो थी नहीं अब जब. नहीं लिया तो फिर जब इस माध्यम से हेल्प. करने की कोश ब पढ़ा था सियासत इस कदर आवाम. पर एहसान कर जिनसे आंखें ीनती उ चश्मा दान. करती है नहीं देखो क्या है कि शायद मेरी.
मन की भावना पवित्र थी तो इसीलिए मतलब वो. हमारी बात को मान लेते थे ऐसा मानते थे कि. भाई यह अच्छा व्यक्ति है समझ धनंजय सिंह. फसे थे आपका काम बन गया था नहीं वो भी फसे. हुए तो नहीं बोल सकते बट वो क्या है उ एक. दिन मेरे को उन्होंने बता वो अपने रहे हो. प नहीं पाए आपटा लेस थे जब धनंजय भाई जेल. से छूट गए तो एक दिन हरीश त्याग जी ने ही. मुझे बताया हम कहने लगे यार वो जो. है मेरे को तो कुछ दे नहीं पाया कह रहा ये.
जो मेरे अर्दली थे ड्राइवर थे इनको जो है. उसने टीशर्ट और जो है कपड़े और पता नहीं. क्या-क्या दिए हुए थे तो मैंने कहा अच्छा. सर अच्छा मुझे तो यह बात पहले ही पता थी. तो कह रहे कि यार यह मैं कह रहा मैं यह. सोचता था कि ये जो मेरे अर्दली हैं ये. 55000 की और 101 हज के कपड़े कहां से पहन. रहे हैं यार मैं अपने लड़के को 000 की. शर्ट दिलाई तो पांच बार सोचना पड़ता है कह. रहा यह मेरा ड्राइवर और अर्दली जो है 5. पाज की शर्ट और टीशर्ट पहन रहे थे कह र.
मुझे पता चला कि वोह जो है वो देते थे. इनको गिफ्ट के रूप में तो मैंने कहा सर. चलो सर आपने तो कोई फेवर तो नहीं आपके मन. पर तो कोई बोझ नहीं है कह रहा नहीं लेकिन. इन्होंने तो कुछ कुछ करा ही लिया होगा ना. एक दिन क्या हुआ था कि जैसे धनंजय भाई ने. पूरी जेल के लिए खाना. बनवाया है ना एक बार का पूरी जेल के लिए. अगर खाना बनेगा तो आप समझिए कि करीब एक से. डेढ़ लाख रुपए का बिल आएगा क्योंकि.
एप्रोक्सीमेटली आठो नहीं नहीं एकल एक जेल. का वो एक सुपरिटेंडेंट के हाथ में एक ही. जेल है तो क्या है कि जैसे अगर बढ़िया. खाना जैसे पूरी जेल के लिए बनेगा करीब दो. से ढाई हजार लोग हैं तो जैसे मटर पनीर है. ना पूरी खीर तो उन्होंने एक दिन बनवाया तो. उसमें वही लाख डेढ़ लाख का बिलाया तो वह. उसको ही बता रहे थे वह कह रहे थे यार मुझे. बाद में पता चला कि वह पैसे जो है.
उन्होंने. धनंजय उन्होंने दिए थे और कह रहे इन्होंने. मेरे को बेवकूफ बना दिया मेरे ड्राइवर और. अर्दली ने इन्होंने कहा कि. सर क्या पता नहीं कोई त्यौहार था कि वो. कैदी लोग मिलके जो है बनाना चाह रहे हैं. तो कह रहे मैंने अलाउड कर दिया था यार और. मुझे बाद में पता चला कि यह तो ऐसे हुआ तो. मैंने कहा कोई बात नहीं सर खा लि कुछ. लोगों ने क्या प रज सिंह के पॉडकास्ट. के लिए काफी कंटेंट हो गया हमारे. पास ठीक इसके बाद अफजल गुरु हा अफजल गुरु.
भी क्या है कि रिजर्व नेचर का ही व्यक्ति. था आपको लगता है दोषी था वो देखो यह इस पर. तो मेरा कमेंट करना ठीक नहीं है क होता आप. जब मिलते हो आप संवाद करते हो एक गट. फीलिंग तो आ जाती है जैसे जेलर साहब आए थे. तो जेलर साहब कहे कि मैं रोया था जब उसकी. डेथ हुई थी और बहुत सारी बातें उने बताई. अपनी रखी और वो ह्यूमैनिटेरियन पॉइंट पर. कह रहे थे कि मेरी आंखों में देखता रहा या. वो या वो आप क्योंकि उसी जेल में शायद.
पहले आप थे उसी बैरक में हां नहीं वो मेरे. साथी थे हम अफजल गुरु और बल्कि आपको बताऊं. कि शुरू में अफजल गुरु को फांसी देने के. लिए तिहाड़ जेल को कोई जल्लाद नहीं मिला. हम तो मैंने क्या किया एक लेटर जो है डीजी. प्रिजन को लिखा कि भाई अगर लेटर लिखने का. बड़ा शौक है आपको हां भाई जेल में काम. क्या है खाली बैठे हुए हैं तो मैंने कहा. यार इनको जेलर मतलब इनको जल्लाद नहीं मिल.
रहा तो मैंने जो है एक डीजी प्रिजन को एक. एप्लीकेशन लिखी उसको एप्लीकेशन बोलो जेल. की भाषा में एक एप्लीकेशन लिखी कि भाई अगर. कोई जल्लाद अवेलेबल नहीं है तिहाड़ के पास. तो मैं इसको फांसी देने के लिए तैयार. हूं तो क्या हुआ कि वह जो लेटर अफजल गुरु. से इतनी मोहब्बत थी आपको क्या आपने कहा कि. मैं ही जल्लाद बन जाता हूं नहीं अब बता. रहा हूं तो क्या हुआ कि वो जो लेटर था वो. हो गया लीक उधर से तो डिनायल आ गया उधर से.
वो मना आ गया कि भाई ऐसा पॉसिबल नहीं है. तो लेकिन क्या हुआ कि वो इनको पता चल गया. कश्मीरियों को हां कश्मीरी जो टेररिस्ट थे. इन लोगों को पता चल गया तो यह लोग इकट्ठा. होकर मेरे पास आए वो कहने लगे कि अखबार. में छप गया तो वो न्यूज़पेपर की कटिंग. लेकर आए मेरे पास तो वो कहने लगे कि यह. क्या है राणा जी तो मैंने कहा क्या है तो. कहने लगे कि भाई यह तो बात ठीक नहीं है आप. हमारे साथ रहते हो हमारे हम लोग साथ में.
घूमते हैं तो आप अफजल को फांसी देने के. लिए जल्लाद बनने के लिए तैयार हो तो मैंने. कहा देखो भाई साथ में घूमना या फिर आपस. में अच्छा व्यवहार करके रहना यह एक अलग. चीज है सियासत अपनी जगह पर ब हां बट नहीं. सियासत नहीं आप अपने जो मिशन है उसके. प्रति वफादार हो और जो हमारे देश का जो एक. पॉइंट ऑफ व्यू है जो लाइन है मैं उसके. प्रति वफादार हूं हम लोग यहां पर एक साथ.
हैं तो हम आपस में अच्छे से बात करेंगे. आपको इज्जत देंगे आप भी हमें इज्जत दो. लेकिन मैं इस बात पर तो कभी तैयार नहीं हो. सकता कि भाई कश्मीर को एक पाकिस्तान में. मिला दो या फिर जो है आपका मूवमेंट ठीक है. हमारे मीडिया में एक टर्म यूज करते थे हम. लोग छपा स और दिखा स की. बीमारी नहीं देखो क्या है कि ये हर सही. मौके पर शेर सि राणक के पास कुछ ना कुछ था. नहीं जो आपकी भावना होगी तो उस भावना को.
आप किसी भी प्रकार से व्यक्त तो करेंगे. 200 हज आदमी तिहाड़ में महाराज आप आप पे. चढ़ा था जाके हम अफजल गुर को फांसी दे. देंगे कित आदमी तिहाड़ में हां इतने ही. होंगे 20 25 हजार बट एक करोड़ 135 करोड़. लोग हमारे देश में हैं तो तिहाड़ से फरार. हो के कोई अफगानिस्तान भी तो नहीं गया ना. बात सही है हां तो देखो यह तो आपकी अपनी. ठीक बात की देशभक्ति भावना की आपको कन्वे. था वो दोषी था देखो क्या है मैं आपको एक. बात बता देता हूं सन 2001 में मतलब ये.
सवाल मैं करता नहीं था मेरी नजर में देश. की सुप्रीम कोर्ट की जो टिप्पणी है वो. सर्वोच्च है व आतंकवादी था उसको फांसी दी. गई लेकिन जब सुनील गुप्ता जी का मैंने. पॉडकास्ट किया और उनसे मैंने बातें की तो. उन्होंने थोड़ा सा शक सुबह पैदा मेरे. दिमाग में कर दिया आप क क्या आप फर्स्ट. हैंड इसलिए पूछ ले रहा हूं देखिए मैं आपको. बताता हूं क्या है कि फर्स्ट डे पार्लिया. अटैक के बाद जब यह करीब पांच छ एक्यूज थे. इस केस में पार्लियामेंट अटैक में पांच छ.
एक्यूज थे तो उसका जो एक वन ऑफ द जो. एक्यूज था इनका को. एक्यूज सबसे पहले दिन जब वो जेल आया तो व. मेरे ही सेल में रखा गया जेल नंबर एक के. हाई रिस्क में तो वो मेरे सेल में उसको. रखा गया वो था वो व्यक्ति जो एक मैरिड कपल. नहीं था हस्बैंड वाइफ थे ना तो उसका नाम. मुझे ध्यान नहीं आ रहा तो वो जब पहले दिन. मेरे साथ सेल में रखा गया तो एक वो बहुत.
डरा हुआ था उसकी थोड़ी कुटाई भी हो रखी थी. जेल में जेल वालों ने जो कैदी होते हैं. उन्होंने कुटाई करके ही लाए थे तो जब उसको. मेरे साथ अ उसको आया तो हमने जैसे अगले. दिन उससे पूछा बातचीत करी कि भाई क्यों. किया क्या प्लानिंग. थी तो उसने मेरे को तब यह बताया कि भाई अब. यह बात उसने सच बताई कि झूठ बताई मुझे. नहीं मालूम बट उसने मुझे बताया कि हमारी.
यह था कि भाई हम लोग पार्लियामेंट में कुछ. लोगों को मतलब बंदी बनाएंगे नहीं कर हां. बंदी बनाएंगे मतलब जो लोग आए थे वह लोग. बंदी बनाएंगे और कुछ लोगों की फिर रिहाई. कराई जाएगी और यह जो लोग हैं उनको ऐसा. सपना दिखाया गया था कि भाई फिर यह देश से. बाहर पता नहीं कौन से देश में बता रहे थे. भारतीय जहाज. में वो जो टेररिस्ट जिनको छुड़वाया जाएगा.
प्लस वो जो वहां पे आए थे हम तो वो सब. लोगों को कौन सा देश बताया था तो वहां पे. जो है इ उसम अफजल गुरु को भी ले जाएंगे. नहीं अफजल गुरु तो उस समय मतलब टेररिस्ट. के रूप में सामने आए नहीं थे ना जो ऑलरेडी. उससे पहले बंद थे हां तो उस अफल जाना चा. रहा हूं मैं अफजल हां तो क्या है कि देखो. ये उनका एक को एक्यूज के ऐसा वर्जन था. उसके बाद. जो एसए आर गिलानी जी हैं वो भी इसमें एक.
वन ऑफ दी को एक्यूज थे जो कि इसमें. प्रोफेसर हैं हम वो भी मेरे सेल में बहुत. सालों तक रहे हैं हम मेरे सेल के अंदर ही. जबकि एक बार उनके ऊपर अटैक हो रहा था तो. मैंने ही बल्कि उनको बचाया भी तो क्या है. कि जैसे बातचीत से ऐसा महसूस होता है. क्योंकि मैंने बताया कि जो अफजल है वो. रिजर्व नेचर का व्यक्ति था अफजल भी हमारे. साथ घूमते थे बात भी करते थे बट बल्कि जब.
यह जो फांसी जहां पर हुई है वहीं पर ही जब. लास्ट टाइम था ये आखरी के जो छ महीने आप. बोल लीजिए तो हम लोग वहां पर जेल नंबर तीन. में थे हाई सिक्योरिटी वर्ड में वहीं. फांसी कोठी है तो वहीं पर ही जो मकबूल. भट्ट थे उसकी भी जो कब्र है वो वहीं पर ही. है तो यह कब्र के आसपास घूमते रहते थे हम. लोग इनसे मजाक करते रहते थे अरे भाई वहां. मत घूम ज्यादा वहीं दफना देंगे जेल वाले. तो क्या है कि अब देखो उनका कितना.
इवॉल्वमेंट था या नहीं था यह मुझे नहीं कह. सकता लेकिन मेरे को अपनी जो नरे बल कोर्ट. है उसके ऊपर विश्वास है कि उसने अपना. फैसला सही दिया है ठीक बात हम है और उस पर. डाउट करना भी गुनाह है हां अब हम आगे. बढ़ते हैं अफगानिस्तान जी जेल से आप निकल. आए जी व में लड़का लोग को बुलाए साथ में. थैंक यू सो मच हो गए निकल के पहला काम. क्या किया कहीं चाय पिए थे या सीधे कहीं.
भागे थे नहीं पहला काम यह किया मैंने अपनी. सबसे पहले शेविंग कराई तो शेविंग कराई तो. जिस समय शेविंग करा रहा था तो उस बार्बर. की शॉप में जो है मेरी ही न्यूज़ चल रही. थी और उसमें अलग-अलग होलिया मेरा जो है. दिखा रहे थे तो जब मैं उसकी चेयर पे बैठा. हुआ था तो उसने मेरे क्रीम लगाई हुई थी वो. कहने लगा देखना भाई साहब यह तो आप ही की. तरह शक्ल लग रही है तो पीछे जो है आपस में. व चर्चा कर रहे थे अरे भाई यह.
तो बड़े लोग तो जेल से भाग जाते हैं और. जरूर सरकार ने इनको भगवा है मतलब इस तरह. के आपस में जो कमेंट्स है वो करने लगे तो. मैंने कहा भाई. शक्ल तो आजकल किसी की भी किसी से मिलती है. तो मैंने कहा यार यह कहीं मतलब यह ना सोचे. कि यही व्यक्ति है फिर शेविंग कराते हुए. जो मूछे थी कहला मछ काट दूं कह रहा आप. मैंने कहा हां काट दे भाई तो कह रहा है लग. रहा है पहली बार कटवा रहे हैं मैंने कहा.
यार तू इतने प्यार से पूछ रहा तो काट ही. दे भाई तो सबसे पहले तो आप भी मासूम ही. लगते हो ये थो लगता कि तिहार से भागे होगे. नहीं. भाई ये तो ईश्वर की देन है बट तिहार से. बाहर से गोविंदा अंदर से. बच्चन नहीं तिहाड़ से देखो जो भागने की जो. बात है ना मैंने आपसे बताया यह मेरी. डेस्टिनी में था मैं सच बता रहा हूं यह. काम ईश्वर ने ही कराया है मेरी इतनी.
हैसियत नहीं थी घर में कौन-कौन आपके भी है. मेरी मदर है हां मेरे दो छोटे भाई है जैसे. माता जी आपकी है तो माता जी को जब पता लगा. होगा कि तिहाड़ से आप भागे हो उनसे बात की. हो गए तो क्या कहीं वो क्या हुआ कि मैंने. सबसे पहले उन्हीं को कॉल किया कि मम्मी आज. बहुत बड़ा कांड किया मैंने क्या कियो बेटा. तिहाड़ से भाग लिए नहीं क्या हुआ कि जब. मैंने कॉल किया उनको ह तो उस दिन मेरी कोट. डेट थी तो कोट डेट पर क्या है कि घर के जो. मेरे घर के लोग हैं वो घर से बना हुआ खाना.
लेकर आते थे हम तो उन्होंने सोचा कि भाई. शायद कुछ बता रहा होगा कि भाई खाने में या. ये चीज ले आना तो उन्होंने कहा हां. क्या-क्या लाना है तो मैंने कहा कुछ नहीं. लाना और मैं. तो जेल से एस्केप हो गया. हम तो वो रोने लगी आपको बताऊं फोन पे रोने. लगी कहने लगी कि यह तो बहुत खराब किया भाई. जेल से भागने की क्या जरूरत थी तो मैंने. कहा देखो अब तो मैं भाग गया वापस तो अब जा.
नहीं सकता तो कह रही भागने की जरूरत क्या. थी मैंने कहा मुझे अफगानिस्तान जाना है कह. रही तेरा दिमाग खराब है अफगानिस्तान जाना. है अफगानिस्तान जाकर क्या करेगा और पुलिस. पकड़ लेगी पुलिस मार देगी और यह तुमने. बड़ा गलत करा तो मैंने उनको बताया मुझे. अफगानिस्तान से अपने जो हमारे पृथ्वीराज. चौहान है सम्राट उनकी मेरे को स वापस लेकर. आनी है और मुझे कुछ पैसों की जरूरत है तो. उन्होंने मुझसे कहा देखो कोई गलत काम मत.
करना कोई ऐसा मत करना कि हमें यहां पर. मतलब शर्मिंदा होना पड़े पैसे मैं दे. दूंगी लेकिन कोई गलत काम अगर कुछ किया तो. फिर अच्छा नहीं होगा तो मैंने कहा गलत काम. नहीं करना भाई यही काम करना है जब हो. जाएगा तो वापस आ जाऊंगा ठीक बात तो फिर. कहां रुके थे. ये मुरादाबाद की बात है तो फिर पैसे आ गए. मेरे पास फिर मैं अकेले जर्नी स्टार्ट.
किया जिससे मान लो यहां से अफगानिस्तान. जाना हो हमको अब मैं सोचूंगा कैसे. अफगानिस्तान. जाऊंगा क अफगानिस्तान निकले फ हां देखो. इसके इसका जो रीजन है जो मेरे को थोड़ी सी. रास्ता जो थोड़ा सा था क्लियर वो ये इसलिए. था कि मेरे साथ जो वर्ड में लोग थे उसमें. अफगानिस्तान के भी ठन का बच्चा भी था हां. पाकिस्तान पाकिस्तानी भी थे बांग्लादेशी. भी थे तो मुझे दूसरे देशों की भी.
थोड़ी-थोड़ी बातचीत से नॉलेज थी हम तो. मैंने सोचा यार सबसे पहले तू अपने आप को. सेव कर क्योंकि मेरे लिए रेड कॉर्नर नोटिस. जारी कर दिया था उस समय जो है एक इनाम. घोषित कर दिया था रेड रेड अलर्ट कर दिया. था है ना तो मैंने सोचा पहले अपने आप को. सेफ करूं तो फिर मैं सबसे पहले उसके लिए. गया बांग्लादेश. और बांग्लादेश बांगलादेश कैसे घुसे. पासपोर्ट से ही गया पकड़े नहीं गया अच्छा.
नकली पासपोर्ट बनवा लि होग हा सबसे पहले. पासपोर्ट जबरदस्त टैलेंट भाई साहब ये नकली. पासपोर्ट कहां बनता है नहीं कहां बनता है. दिल्ली बनता है नहीं नहीं मैंने खुद बना. ली नहीं नहीं नहीं वो वैसे वाला पासपोर्ट. नहीं था जैसा आप फिल्मों में जैसे फिल्मों. में देखते हैं ना वैसे वाला नहीं था फिल्म. में य दिखता है ना कि आप गए ऐसे खड़े हो. गए बनाया उ ठप्पा लगा दिया इधर कुछ कि बना. दिया पासपोर्ट के लिए बड़ा पापड़ बेलना. पड़ता है आप वाला पासपोर्ट कैसे बना मेरा. असली वाला था बट नाम उसमें नकली था जो जो.
हम सम हां मे पास नाम है आपका कहां गया. नाम संजय गुप्ता अा संजय गुप्ता भी आपका. नाम था हां संजय गुप्ता के नाम से. पासपोर्ट ब पंकज सिंह पुंडीर कौन है नहीं. पंकज तो क्या है कि एक एलाइज रख दिया था. पुलिस ने जब बिल्कुल शुरुआत में एक्चुअली. ये जो बहुत सारे जो नाम ऐड हो जाते हैं ना. आप हर जो भी कितना पासपोर्ट है आपके पास. बस वही था बड़ी मुश्किल से बना कितना. पासपोर्ट अरे भाई अभी असली वाला कोशिश कर.
रहा हूं बना दे तो बना नहीं रहे तो एक जना. मजाक भी कर रहा था के भाई राणा जी नकली. वाला बनवा लिया और नखली बनवा लो अब मैंने. कहा भाई नखली वाला जब जरूरत थी बनवा लिया. था अभी असली बन जाए तो जो है फिल्म की. शूटिंग से रिलेटेड जो है मेरे को बाहर. उनके साथ जाना है मतलब कजाकिस्तान. रकी करने के लिए तो अब उसके लिए एनओसी की. जरूरत है ठीक है आएंगे वहां पे फिल्म प तो.
यहां से संजय जी चले गए बांग्लादेश फ्लाइट. पकड़ के हां नहीं फ्लाइट नहीं बाय रोड गया. मैं ये बेना पुल बॉर्डर पड़ता है. बांग्लादेश इंडिया का तो उधर बैना पुल है. बांग्लादेश साइड में और इधर कुछ दूसरा नाम. है तो उस बॉर्डर को क्रॉस करके मैं वहां प. खुलना एक सिटी है वहां पर गया तो फिर वहां. जाके मेरे को अपने आप को एक. पहचान छुपा के रहना था तो फिर मैंने क्या. किया वहां पर एक नॉर्दर्न यूनिवर्सिटी है.
वहां पर मैंने एडमिशन ले लिया कॉलेज में. तब तो मैं स्टूडेंट ही लगता था तो वहां पर. इंग्लिश ऑनर्स में एडमिशन ले लिया एडमिशन. ले लिया तो फिर मैंने जब अपने आप को एक. मतलब सेव कर लिया फिर मैंने अफगानिस्तान. जाने के लिए रास्ता इंडि स्टूडेंट एडमिशन. लिया हां उसी पासपोर्ट के बिफ पर ही बल्कि. कि बड़ा मजेदार किस्सा है जब मैं स्टूडेंट. वीजा लेने के लिए गया तो वीजा काउंसलर. मेरे से बोला कि भाई हमने आज तक देखा है.
बांग्लादेश से लोग इंडिया पढ़ने आते हैं. तुम पहले मेरे पूरे करियर में बंदे हो जो. कह रहा है कि मैं हायर स्टडीज के लिए. इंडिया से बांग्लादेश जा रहा हूं तो मैंने. कहा कि सर उसके पीछे राजा बनने की ट. किस्सा है नहीं तो किस्सा है वो कहने लगे. कि क्या है हमें बताओ भाई अच्छा वो जो. वीजा काउंसलर था बहुत ही स्ट्रिक्ट था. वीजा नहीं देता था किसी को भी तो मैंने. कहा सर मेरी एक क्लासमेट थी यहां पे स्कूल.
में पढ़ती थी तो वो बांग्लादेश की थी अब. उसकी स्कूलिंग पूरी हो गई तो वो वापस चली. गई और उसने वहां एडमिशन ले लिया तो मैं. चाहता हूं कि मैं उसके साथ ही जाके कॉलेज. में फर्द स्टडीज करूं तो कहने लगे कि. अच्छा प्यार का मामला है तो कहने लगे कि. लड़की हिंदू है कि मुस्लिम है तो मैंने. कहा सर हिंदू है कह रहे अच्छा चलो ठीक है. जाओ तो जब शाम को पासपोर्ट रिटर्न करते. हैं और तो कम से कम. भी 100 लोगों को वहां पर आ गया अपना अपना.
पासपोर्ट लेने के लिए आप यकीन नहीं करेंगे. उसने मतलब मेरे को ही मल्टीपल एंट्री के. साथ जो है एक साल का वीजा दिया हुआ था. सबके रिजेक्ट रिजेक्ट रिजेक्ट रि आता है. ना गजब टप पा. आदमी वो वीजा मिल गया ग टोपी पहना दिया. आपने आशकी के नाम प इससे मजेदार किस्सा है. कि जब अफगानिस्तान का वीजा लेने गया तो. क्या हुआ कि फिर मैं जब बांग्लादेश में. अपने आप को एक सेटलमेंट कर लिया फिर मैं.
गया वहां पे बांग्लादेश में जो. अफगानिस्तान एंबेसी थी उसमें. गया एज ए बांग्लादेशी बन गए तो वहां पे आप. भी नकली पासपोर्ट बन वाले थे नहीं पहले. मैंने कहा कि पेपर वर्क पूछता हूं ना कि. एज ए बांग्लादेशी अगर कोई जाए अफगानिस्तान. तो क्या-क्या रिक्वायरमेंट्स हैं पासपोर्ट. तो बना लेंगे वहां का भी पहले. रिक्वायरमेंट तो पता चल जाए अा उन्होंने. इतने सारे पेपर वर्क बता दिया ना कि वो. पॉसिबल नहीं था क्योंकि जैसे इनकम टैक्स.
रिटर्न दो अब 4 साल का न साल का तो व कहां. से ले आए बांग्लादेश में एकदम से क्योंकि. वह तो पूरा सिस्टमैटिक है तो फिर मैं एज ए. इंडियन जो है गया पाकिस्तान एंबेसी में जो. कि बांग्लादेश में थी तो जब मैं वहां गया. तो पहले तो व लोग मुझसे बात ना करें जब. मैंने उनको बताया भाई मैं इंडिया का हूं. तो की जो है एकदम चेहरा खेल गया उन्होंने. कहा आजा भाई तो उन्होंने मेरे को पहले एक. उसमें बैठा दिया तो एक छोटा सा रूम था.
वहां बैठा दिया एक डेढ़ घंटा बैठा रहा मैं. वहां प तो फिर वीजा काउंसलर जो थे वो आए. कहने लगे कि जी संजय जी पासपोर्ट कहां है. आपका मैंने कहा सर ये रहा तो उसने. पासपोर्ट दे दिया एक बैल बजाई एक बंदा आया. उसको दे दिया तो मेरे से पूछने लगे कि. अच्छा आप इंडियन है मैंने कहा सर कह रहे. कि हिंदू हैं आप मैंने कहा हां सर तो उसको. उसने कहा अच्छा क्या पाकिस्तान क्यों जाना.
है तो मैंने कहा सर मैं अफगानिस्तान जाना. चाहता हूं तो मैं वाया इस्लामाबाद जाना. चाहता हूं क्योंकि वहीं से फ्लाइट है कह. तो दिल्ली से चले जाओ तो मैंने कहा सर मैं. सोच रहा हूं यहीं हूं मैं ढाका में तो. क्यों ना यहीं से चला जाऊं बेवजह दिल्ली. जाऊंगा तो उसको शक हो गया शक तो जायज था. उसने मेरे को अलग-अलग तरीके से वो कहने. लगा नहीं हम दिल्ली से वीजा दिला देंगे. आपको और अगर आपको एंबेसी में जाने में. प्रॉब्लम है तो हमारे कुछ एजेंट्स हैं.
ट्रेवल एजेंट्स वहां पर अपना पासपोर्ट दे. देना यह इंडियन पासपोर्ट और वहीं वीजा. लगवा के आपको दे देंगे क्योंकि हमने यह. रूल्स एंड रेगुलेशन बनाए हुए हैं कि जिस. देश का नागरिक है वह अपने देश से ही हमारी. एंबेसी से वीजा अप्लाई करें तो आप इंडियन. हो तो इंडिया से अप्लाई करो तो मैंने कहा. सर क्यों परेशान कर रहे हो मैं यहीं से. चला जाता हूं तो इतने में वह मेरा. पासपोर्ट जो जिसको दिया था वोह ले आया तो. मेरे को हैंड ओवर किया तो वो थोड़ा गर्म.
हो रहा था तो मैंने कहा सर इसकी क्या. जेरोक्स कराई तो उसने उसको देखा कराई उसने. कहा हां तो उसने कहा भाई शेर सिंह जी क्या. वो सॉरी संजय जी क्या जासूस वगैरह हो क्या. भाई तो मैंने कहा सर नहीं ऐसा तो नहीं तो. मैंने कहा ऐसा क्यों कह रहे हैं कह रहे. नहीं पासपोर्ट हाथ में लेते ही बता दिया. भाई जेरोक्स कराई मैंने कहा सर ये गरम हो. रहा था इसलिए बोल दिया तो फिर मतलब कहने. लगे कि अभी ना रमजान चल रहे हैं तो इन.
बंगालियों से बच के रहना यह धोखेबाज है. हमें भी 71 में इन्होंने धोखा दे दिया और. कह रे आज बड़ी खुशी हुई कह रे हमारी उर्दू. और हिंदी तो एक जैसी है बोलने में कह रे. बड़े दिनों के बाद किसी से अपनी भाषा में. बात करने में मजा आ रहा है और रमजान के. बाद आप आओ तो हम लोग जो है डिनर वगैरह. करते हैं और आप इंपोर्ट एक्सपोर्ट का. मैंने कहा था कि मैं बिजनेस करता हूं तो. मैंने कहा इसी सिलसिले में अफगानिस्तान.
जाना है तो कह रहे कि आप बांग्लादेश से ही. काफी सारे बिजनेस हैं हमारे कई परिचित हैं. तो यहीं पर इंपोर्ट एक्सपोर्ट का हम आपका. काम जमवा देंगे तो मैंने कहा सर नहीं वहां. पर भी जाना ही है खैर उसने कहा चलो मैं एक. बार उधर इस्लामाबाद आपका केस जो है वो भेज. के देख लूंगा आप 15 दिन के बाद दोबारा से. हमारे से संपर्क कर लो मैंने कहा ठीक है. फोन नंबर चेंज करा दिए अब 15 दिन के बाद. जो है मैंने उनको कॉल किया तो उन्होंने.
कहा कि आपका केस जो है वह हमने वहां पर. सेंड किया हुआ है तो आप जो. है अगले हफ्ते आ जाओ ढाका और फिर हम जो है. आपसे को बताते हैं कैसे हो पाएगा मैंने. कहा ठीक है तो इतने में क्या हुआ कि मैंने. सोचा यार इनके ऊपर पूरी तरह से डिपेंडेंट. होना कोई ठीक नहीं है तो मैं आ गया मुंबई. तो मैं मुंबई आया तो मैंने सोचा यहां से. ट्राई करके देखता हूं अपने इंडियन. पासपोर्ट पर ही और तो मैं मुंबई काउंसलेट.
में गया काउंसलेट अफगानिस्तान की थी वहां. पर तो मैं गया तो ऐसा एकदम माहौल क्रिएट. कराया ईश्वर ने कि उन्होंने मेरे को कहा. कि चलो ठीक. है हम आपके केस को अफगानिस्तान काबुल. भेजते हैं और आपको हम 14 दिन के बाद. बताएंगे कि आपको वीजा मिलेगा कि नहीं. मिलेगा एक्चुअली वहां पर हुआ. क्या वहां पर कोई बंदा नहीं वीजा लेने के. लिए पूरा पूरा जो काउंसलेट था वो खाली.
पड़ा था मैं जब. गया तो मैं सुबह जल्दी पहुंच गया तो उस. समय तक उनके जो ऑफिसर्स वगैरह थे आए नहीं. थे तो वहां पर दो तीन लोग खड़े थे. मोटरसाइकिल पर बैठा था एक तगड़ा सा लड़का. और दो लोग ऐसे खड़े हुए बातचीत कर रहे थे. मैं भी उनके साथ बातचीत करने लगा तो वो. मेरे से कहने लगे कि भाई तू अफगानिस्तान. जाकर क्या करेगा हम खुद अफगानी है खुद ही. वहां से भाग के आए हुए हैं हम मुंबई में. रहते हैं और यह है वो है मतलब इस तरह की.
बात करने लगे तो अब जब मैं अंदर गया जब. वीजा ऑफिसर आ गया काउंसलर आ गया तो उसने. मेरे से पहला क्या वो फॉर्म दिया उन्होंने. मुझे जो रिसेप्शन पर थे कि फॉर्म भरो अब. उस फॉर्म में जो सबसे डिफिकल्ट क्वेश्चन. था कि आप अफगानिस्तान क्यों जाना चाहते हो. अब वहां पर वॉर की सिचुएशन बनी हुई थी अब. आप क्या भानना मारोगे उस देश के लिए आप यह. नहीं बोल सकते भाई मैं वहां पढ़ने जाना. चाहता हूं या घूमने जाना चाहता हूं या. बिजनेस करने जाना चाहता हूं कोई बात नहीं.
चलेगी हम अब मैंने सोचा यार तो मैंने उसको. ब्लैंक छोड़ दिया तो मैंने क्या है कि. ब्लैंक छोड़ के वो पासपोर्ट जो है अपना. डिपॉजिट कर दिया तो उन्होंने कहा लंच के. बाद आना तो मैं जब 2 बजे के बाद गया तो. ईश्वर ने मेरे दिमाग में एक ऐसी बात डाली. कि उल्टा वो जो काउंसलर थे वो मेरे ऊपर वो. हो गए कि भाई नहीं जाना ही है तो हुआ क्या. कि जब मैं गया तो मैंने कहा जी आप मेरा. पासपोर्ट वापस दे दो जो रिसेप्शन पे थी.
लेडी कह रही क्यों तो मैंने कहा नहीं नहीं. आप मेरा वापस दे दीजिए पासपोर्ट ना तो. उन्होंने कहा वो तो पासपोर्ट तो सर के पास. है तो उसने अंदर जाके बताया तो उन्होंने. कहा इसको भेजो अंदर हम तो मैं गया तो उसने. कहा कि यस मैंने कहा सर मैं आई डोंट वांट. टू गो आप प्लीज मेरा पासपोर्ट रिटर्न कर. दीजिए हम कह रे क्यों नहीं जाना चाहते. मैंने कहा सर वो बाहर कुछ लोग खड़े थे कह. रहे थे कि वहां तो रोज बम फटता है किस देश.
में जा रहा है बेवकूफ आदमी और जो है वो तो. इतना खतरनाक देश है कोई वहां जाता नहीं है. और बिल्कुल बेकार है तो वो कहने लगे कौन. कह रहा था मेरा देश बहुत अच्छा है और आपको. वहां जाना चाहिए और जाके देखना चाहिए कि. वह सब झूठ बोल रहे हैं हमारे देश में इतने. मतलब अच्छा माहौल है और मतलब इतने अच्छा. खान पीन है इतना अच्छा मौसम है मैंने कहा. नहीं सर मेरे घर वाले भी अब मना कर रहे. हैं मैंने कॉल करके पूछा वो कह रहे हैं कि.
भाई खतरनाक देश है वहां नहीं जाना तो वो. उल्टा मिल गया आपको हां मेरे ऊपर ही वो हो. गए तो जिस क्वेश्चन का आंसर नहीं मिल रहा. था उस क्वेश्चन ने ही जो है उनको प्रेरित. कर दिया कि नहीं जाना ही है ठीक तो वो. कहने लगे 14 दिन के बाद आना हम आपको. बताएंगे और देख के आओ देख के आओ तो मेरे. को थोड़ा विश्वास हो गया कि शायद यह मेरे. को अब मिल जाएगा यहां से वीजा तो फिर मैं. वापस बांग्लादेश चला गया यहां पर अप्लाई. करके उन्होंने कहा 14 दिन बाद आना अब जब.
मैं वापस गया तो उधर जाके क्योंकि वोह तो. बांग्लादेशी टेलीफोन था मेरा उधर में बंद. करके आया हुआ था तो उधर जब मैंने. उसको जाके खोला तो धड़ाधड़ उसमें बहुत. सारी मिस कॉल उनकी तो. मैंने कॉल बैक नहीं किया तो एक दो दिन के. बाद दोबारा से कॉल आई तो कहने लगे कि अरे. भाई इतनी सारी कॉल कर रहे हैं इतने दिन से. और आप आ जाइए ढाका. और सर भी आपसे बात करना चाह रहे हैं तो. आपका काम होगा मैंने कहा हां जी हां जी.
आऊंगा तो मैंने कहा मैं थोड़ा बिजी हूं. मैं आ जाता हूं दो-तीन दिन में कह र आ जाओ. दो-तीन दिन के अंदर मैं नहीं गया दो-तीन. दिन के बाद फिर कॉल आया फिर से मैंने उनको. गोली दे दी फिर कॉल जब आया तो वह एकदम. गुस्से में कॉल किया कहने लगे कि मिस्टर. संजय कहूं या शेर सिंह राणा कहूं आते. क्यों नहीं हो यहां पे तो कैसे पता. एक्चुअली वो जो मेरा पासपोर्ट था वह.
उन्होंने जेरोक्स कर लिया था अब तो. उन्होंने छानबीन करी होगी भाई यह कैसा. बंदा है कि यह जो है इस्लामाबाद से. अफगानिस्तान जाना चाहता है ये है कौन और. हिंदू पर्सन है तो इसको क्या वहां पे मतलब. जाने की व है आई ने अपना काम कर दिया हां. मतलब एजेंसी है उसके पास तो सब साधन है ही. तो मुझसे कहने लगे कि देखो आओ यहां पर और. बात करते हैं आपके फायदे की बात है मैंने.
सर आपके मेरे कुछ फायदे की बात नहीं आप. लोगों का काम तो बम फड़वा है वो मेरा क्या. इसमें फायदा कह रहे नहीं नहीं यार सबसे. थोड़ी ना बम फड़वा हैं क रे पाकिस्तान में. रहो बेवजह दोबारा जाओगे तिहाड़ में जीवन. खराब होएगा हमारे बहुत गेस्ट बनके हमारे. बहुत लोग रहते हैं आपके इंडिया. के हमारे देश करा मैं और वहां मैंने कहा. सर देखो मैं तो मुझे आप माफ कर दो फिर वो. कह रहे नहीं यार हम बिजनेस में तुम्हारी.
सहायता करेंगे और यह करेंगे मैंने कहा सर. देखो मैं नहीं आऊंगा फिर थोड़ी हॉट टॉक हो. गई तो मैंने वह फिर मोबाइल जो है. डिस्ट्रॉय कर दिया उने कहा तुम्हारी ऐसी. तैसी तो उठाले जाएंगे ऐसा वैसा हां मतलब. वो कहने लगे कि फिर ठीक है वहीं भिजवाए गे. तेरे को जहां से आया था तो मैंने कहा सर. अब जो भी है कहीं भी भिजवा हो लेकिन मैं. नहीं मिल रहा हूं आपसे और मैं मैंने सोचा. कहीं बीच में अड़ंगा ना लगा दे मैंने कहा. मैं तो अब जा भी नहीं रहा हूं अफगानिस्तान. भी नहीं जा रहा हूं तो कह रहे चलो देखते. हैं कहां जाते हो तुम तो वहीं जाओगे वापस.
फिर मैंने थोड़ा टाइम स्पेंड किया वह. मोबाइल तोड़ दिया फिर मेरे को यहां पर. वापस आया मैं. मुंबई तो मेरा वीजा आ गया था आ गया था तो. फिर मैंने यहां पर स्टैंप लगवाई तो शुरू. में 14 दिन का वीजा मिला अफगानिस्तान का. फिर मैं वापस बांग्लादेश गया क्योंकि उस. समय सिर्फ तीन ही देशों से फ्लाइट जाती थी. दिल्ली से इस्लामाबाद से और दुबई से अब. इस्लामाबाद वाली प्लानिंग फेल हो गई.
दिल्ली से मैं जा नहीं सकता था यह हाथ धोक. पीछे पड़े थे आए तो इसको पकड़े क्योंकि. पीछे पीछे भाई पुलिस भी ढूंढ रही थी. पकड़ने के लिए तो फिर मैंने एक बंदोबस्त. हुआ एक मेरे किशोर भाई एक परिचित हैं तो. उनके माध्यम से किशोर भाई के माध्यम से. मैंने एक कनेक्टिंग फ्लाइट ली दुबई से तो. इन्होने ने ढाका वालों ने कहा एमिरेट्स. वाले थे यह कहने लगे कि भाई या तो दुबई का. वीजा लेकर जाओ या फिर कनेक्टिंग फ्लाइट का.
जो है टिकट मंगाओ तो हम आपको यहां से टिकट. इशू कर देंगे ढाका से दुबई का तो फिर काम. एयरलाइंस चलती थी तो काम एयरलाइंस का टिकट. मैंने कोरियर से दुबई से वो आया मेरे लिए. और फिर मैं वाया दुबई जो है. का काबुल पहुंच कैसे पता लगा पृथ्वीराज. चौहाण की. इसके लिए क्या है कि जो मेरे पर फर्स्ट. इंफॉर्मेशन थी वह यह थी कि भाई यह कंधार. में है क्योंकि जब हमारा प्लेन हाईजैक हुआ.
था 1999 में तो जो जसवंत सिंह जी जो विदेश. मंत्री थे सबसे पहले मतलब ओपनली उन्होंने. ही खुलासा किया था कि भाई हमारे जो आखिरी. सम्राट है पृथ्वीराज चौहान जी उनके जूते. चप्पल मारते हैं उनकी समाधि पर तो मैंने. सोचा यार कंधार से हवाई जहाज छुड़वा के. लाए थे तो कंधार ही होगा तो मैं क्या किया. कि काबुल पहुंचने के नेक्स्ट डे जो है वह. कंधार पहुंच गया अब कंधार पहुंच गया तो.
कंधार में मैंने खोज भीन करी कैसा माहौल. था कंधार में कंधार का माहौल मुझे लगता है. पूरे विश्व में सबसे खतरनाक माहौल का शहर. कंधारी होगा 2004 में की पांच की बात है. चार की बात है कंधार में एक भी ऐसा घर. नहीं था जिसके ऊपर गोलियों के निशान ना हो. या रॉकेट लांचर से किसी का छज्जा ना गिरा. हुआ हो किसी की दीवार ना टूटी हो किसी. दीवार में सुराग ना हुआ हो एक भी घर नहीं.
था पूरे शहर में तो कंधार का माहौल बहुत. ही मतलब खतरनाक टाइप का था क्योंकि पूरा. तालिबानी जो ग्रुप है वह तो वहीं से ही. उसकी रूट्स वही है कंधार है तो वहां पर एक. डॉक्टर थे वो हिंदू थे पूरे कंधार में. सिर्फ एक ही मतलब बाय बर्थ जो अफगानी थे. और हिंदू थे वही थे सिर्फ तो पहले मैंने. इधर-उधर खोजबीन करी नहीं मिली तो फिर मैं.
डॉक्टर साहब के पास गया तो डॉक्टर साहब. पहले तो खुले ना बात ना करें तो फिर जब. मैंने उनको विश्वास में ले लिया मैंने. अपना पासपोर्ट वगैरह दिखाया तो डॉक्टर. साहब ने मेरे से बात करनी शुरू करी तो. उन्होंने कहा कि भाई हमारी जो फैमिली है. वो तो सब जर्मनी चली गई जब यहां पर. तालिबान का राज आया और जो दूसरे भी हिंदू. लोग थे वो चले गए तो यहां पर को जो कुछ. मंदिर हैं तो उसमें क्या है कि छोटे-छोटे. मंदिर थे उनमें ताले लगे हुए थे तो वो बंद.
है और तो मैंने कहा आप क्यों रुक गए तो वो. अकेले डॉक्टर थे और बुजुर्ग थे काफी. उन्होंने कहा देखो मैं तो यहीं पैदा हुआ. हूं और यहीं मैं मरूंगा और इन्होंने भी. मुझसे जो लीडर है इन्होंने बोल दिया आपको. कोई कुछ नहीं कहेगा आप लोगों का इलाज करो. बस तो अ मैंने फिर उनसे पूछा क्या यहां पर. ऐसा है कुछ के पृथ्वीराज चौहान जी की. समाधि है जिस पर जूते चप्पल मारते हैं तो. वह कहने लगे देखो.
मैंने यहां पर तो नहीं है ऐसा मैंने कभी. नहीं सुना लेकिन मैंने ऐसा सुना है कि. गजनी के पास वह है. तो मैंने कहा अच्छा अच्छा वहां का माहौल. कैसा है कि अगर आप कंधार में पैदा हुए हो. तो आपको कंधार से बाहर की कोई जानकारी ही. नहीं है इस तरह तरह का माहौल है. अफगानिस्तान का तो लोगों को कुछ दूसरे 200. किलोमीटर में क्या हो रहा है कुछ नहीं पता. जहां पैदा हुए वहीं पर ही पूरा जीवन आप.
व्यतीत कर दोगे तो फिर मैं गजनी गया तो. गजनी में स्टार्टिंग में कोई इंफॉर्मेशन. मिल नहीं पाई फिर मैं हेरात गया हेरात जो. है वो ईरान बॉर्डर पर एक शहर है हम तो. वहां पर जब मैं गया तो वहां से मुझे पता. चला वहां पर इंफॉर्मेशन एंड कल्चरल. डिपार्टमेंट था. तो उनके माध्यम से मुझे पता चला कि जो. मोहम्मद शहाबुद्दीन गौरी. हैं उनकी जो कब्र है वह गजनी के पास एक.
स्थान है देक तो वहां पर. है तो फिर मैं जो है देयक आया फिर देयक. में मुझे जो चीज में खोज रहा था वह मैंने. देखी तो. कैसे चौहान की कब्र है वो क्या है कि वो. इंफॉर्मेशन एंड क डिपार्टमेंट ने इस बात. की पुष्टि कर दी कि भाई जो शहाबुद्दीन. गौरी है उनकी कब्र यहां पर है और जो वो. कब्र बनी हुई है उस पर जो है उनकी पूरी जो.
तारीख है वह पूरी डेट जो है मतलब लिखी हुई. है बोर्ड भी लगा हुआ था कि भाई ये उस पर. लिखा हुआ था फारसी में. कि ना ऐसा शेर कभी पैदा हुआ है ना कभी. पैदा होगा यह गाजी और शहीद है और उसकी फिर. बर्थ और डेट डेट डेथ की डेट लिखी हुई थी. उसके बाहर ही जो दो कब्र थी जो उसके पैरों. की तरफ कच्ची कब्र थी वह जो.
है जो वहां के लोग थे उन्होंने बताया कि. यह वह काफिर लोग हैं जिनके द्वारा यह गौरी. जो. हमारे वहां पर तो बाबा बोलते थे पता नहीं. कौन से बाबा बोलते थे उनकी ऐसी मान्यता थी. कि इन बाबा के कारण इस पूरे एरिया में कोई. चोरी वगैरह नहीं होती है तो जब उन्हीं ने. ही इस बात को कंफर्म करा कि भाई यह वही. काफिर लोग हैं जिन्होंने इनकी हत्या करी. थी और ये उन दो में कैसे आपने वेरीफाई. किया कि ये पृथ्वीराज चौहान की है हां वो.
वो भी उन्होंने जो है एक छोटा सा उस पर वो. लगाया हुआ था मार्क किया हुआ था लेकिन. मैंने दोनों की ही खुदाई करी क्योंकि. जितना इंपॉर्टेंस पृथ्वीराज चौहान जी रखते. हैं इतनी ही इंपॉर्टेंस जो उनके कवि थे. चंद्र बरदाई जी वो भी रखते हैं क्योंकि. बिना चंद्र बरदाई जी अगर यह दोहा ना बोले. कि चार बास 24 गज अष्ट अंगुल प्रमाण ता. ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान तो इसके. बिना तो पृथ्वीराज चौहान जी अधूरे थे तो. हमारे लिए तो दोनों ही बहुत रिस्पेक्ट.
रखते हैं तो मैंने दोनों ही कब्रों की. खुदाई भी करी तो कब्र के अंदर से ई रोका. नहीं आपको वहा सन्नाटा था नहीं उस दिन. नहीं उस दिन तो मैंने सिर्फ एक वीडियो बना. लिया और मैं वहां पर पाकिस्तानी बन के गया. मैंने बताया कि भाई मैं पाकिस्तान से आया. हूं शादाब खान मेरा नाम है और मेरी जो. अम्मी है उन्होंने एक ख्वाब देखा था कि. भाई मैं यहां पर आके जियारत करूं मतलब. प्रेयर करूं तो मैं पाकिस्तान से आया हूं. तो फिर मैं दो-तीन दिन के बाद दोबारा से.
उस गांव में गया मैंने कहा कि भाई मैंने. जो फोटोग्राफ्स और वीडियो लिया था वोह. अलाउड नहीं कर रहे थे पहले वीडियो बनाने. के लिए बट मैंने उनको बताया कि भाई मेरी. अम्मी की ऐसी इच्छा है मैं भेजूंगा वहां. पे तो उन्होंने अलाउड कर दिया फिर मैं. दो-तीन दिन के बाद गया मैंने कहा कि भाई. मेरी अम्मी ने देखा तो बड़ी परेशान हुई कि. इतने बड़े हैं ये गौरी साहब और इनकी जो यह. मुसल्लम बना हुआ है तो यह इसकी एक हालत. खस्ता है तो मैं इसको रिनोवेशन कराना.
चाहता हूं तो उन्होंने कहा यह तो बड़े. शबाब का काम है तो मैंने वो कहने लगे कि. मैंने कहा कि मैं ठेकेदार और मजदूर ले. आऊंगा तो आप अलाउड कर दो तो मैं इसको. रिनोवेट करा देता हूं प्लानिंग यह थी भाई. जब रिनोवेशन कराएंगे तो तभी अपना खुदाई. करा. देंगे तो मैं एक बंदे को ठेकेदार बनाकर. अपने साथ ले गया तो वो गांव वालों ने यह. शर्त रख दी कि भाई हमारे ही. बंदे मजदूरी करेंगे इनको रोजगार मिल जाएगा. और रिनोवेशन भी हो जाएगा तो मैंने सोचा.
चलो शुरू में इनसे कराते हैं फिर इनके काम. में कुछ कमी निकाल के अपने बंदों से करा. लेंगे तो क्या हुआ कि दो दिन तो काम चला. थर्ड तीसरे दिन जो है वो वो काम उन्होंने. रुकवा दिया अब जब रुकवा दिया तो वह जो. ठेकेदार था जो मेरा बंदा था वह आया गजनी. वापस गजनी से करीब 30 किलोमीटर दूर था वो. ये एरिया मैं गजनी में ही रुक गया तो वोह. वापस आया दिन में ही तो उसने कहा भाई काम. तो रुकवा दिया तो मैंने कहा क्या बात हुई.
वह कह रहे कि नहीं यह तो होगा नहीं और यह. बंदा ठीक नहीं है जो यह है तो कहने लगा. आपको गांव में चलना पड़ेगा अगर काम कराना. है तो तो जब मैं गांव में पहुंचा मतलब शाम. हो गई तो बर्फ वाला एरिया है वो ना बहुत. ज्यादा स्नो फॉल होता है वहां पे तो पकड़. लिया मुझे तो क्या हुआ कि गांव में दो. पार्टी बन गई एक वो जिन्होंने हमें अलाउड. किया था और एक उनकी अपोजिशन पार्टी तो.
अपोजिशन पार्टी ने गांव में घुसते ही पकड़. लिया दोनों को पकड़ लिया और पकड़ के जो है. मस्जिद में ले जाने लगे कि इसको पूछताछ. करेंगे तो क्या हुआ कि जैसे ही वो मेरे को. मस्जिद के बस हम मतलब चढ़े ही थे उसके. दरवाजे पर इतने में अंदर से जो जिन्होंने. मुझे अलाउड किया था हाजी साहब ने वो आ गए. बुजुर्ग थे वो तो उन्होंने कहा छोड़ो. छोड़ो भाई क्यों पकड़ के ला रहे हो तो.
उन्होंने मुझे उनके चंगुल से छुड़वाया और. वह अपने घर की तरफ मुझे लेकर चलने लगे वह. कहने लगे कि इससे नमाज पढ़वाओ हमें शक है. कि यह काफिर है तो वो कहने लगे नमाज का तो. टाइम पूरा हो गया अभी तो नमाज का टाइम. नहीं है तो वो मुझे अने अच्छा वो नमाज ही. पढवा कुछ और नहीं चेक. किए तो अरे भाई वो वो चेक करने की जरूरत. नहीं थी मेरे ये जो ऊपर वाली पॉकेट है इस. पॉकेट में जो है हनुमान चालीसा रखी हुई थी. तो क्या हुआ कि जब हमें वो आपकी भी समाधि.
वही बन जाती है हां वो बननी थी देखो कई. लोग मुझसे पूछते हैं यह काम आपने कैसे कर. दिया तो मैं आपको बता दूं मैं अपने आप को. डेड बॉडी ही समझता था इसीलिए ऐसे इंटीरियर. एरियाज में चला जाता था मैं सोचता था तू. मराहु ही है या तो ये काम होगा या तो तू. यहीं पर दफनाया जाएगा खुदा कैसे फिर आपने. तो फिर वो ले गए वहां पे फिर उन्होंने. मेरे से पूछताछ वगैरह करी और जितना मतलब. हाजी साहब ने अलाउड किया उनको पहले तो.
उनकी आपस में खूब लड़ाई बजी फिर मेरे को. वली के पास ले गए वली वहां पर बोलते हैं. जैसे हमारे यहां डीएम होता है ना. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट फिर वली ने मेरे. को वार्निंग देके कहा अब अगर बनवाना है. इसको तो पैसे हमारे पास जमा करना तो मैंने. कहा कि ठीक है फिर मेरे को उन्होंने यह. मैसेज करा दिया कि भाई यह आमी जासूस है. अगर अब आगे से कभी दिख जाए तो इसको पकड़. लो तो फिर मेरे जब सारे रास्ते बंद हो गए.
फिर मैंने एक और प्लानिंग करी वह भी फेल. हो गई उसमें भी पकड़ लिया गया फिर लास्ट. में यह बचा भाई अब तो तेरे को डायरेक्ट. खुदाई चोरी करनी पड़ेगी मतलब रात को बे. टाइम जाना पड़ेगा जब गांव वाले सो जाए और. इसकी खुदाई करनी पड़ेगी तो फिर इसके लिए. मैं जब फर्स्ट टाइम गया तो एक बंदा मैंने. बड़ी मुश्किल से तैयार किया कोई व्यक्ति. मेरे साथ चलने के लिए वहां तैयार ना हो तो. एक हुआ उससे कुछ डील हुई मेरी तो वह चला.
गया मेरे साथ अब चला गया तो जब गांव में. एंटर हुए तो वह जगह ना. मिले रा हम पहुंच गए थे करीब 7:8 बजे अब. वो कुत्ते भोकने लगे कभी मतलब हर तरह की. प्रॉब्लम्स आने लगी और रात के 1 बज गया. आसपास वो जगह नहीं मिली ऊपर से बर्फ बारी. होने लगी तो जब हम उसके नजदीक जा रहे थे. तो वो जगह दूर मतलब मिल नहीं पाई तो वापस. आए जब गांव के थोड़ा बाहर की साइड में तो. फिर से वो बड़ा सा गुंबद दिखने लगा तो. मैंने जो मेरे साथ था मैंने कहा यार एक.
बार और चलते हैं इस बार इसको देखते हुए ही. जाएंगे तो वो कहने लगा भाई मैं तो अब नहीं. जाऊंगा थोड़ी देर में सुबह होने वाली है. यह लोग उठ जाएंगे तो हम लोग जो है दोबारा. से कल आ जाएंगे तो मैं तब तक इतना ज्यादा. रिस्क ले चुका था इतनी मेहनत कर चुका था. मैं वहां खड़े हो गए ना रोने लगा मेरे. आंसू आ गए वहां पर और ऊपर से बर्फ बारी हो. रही और वह मैं उसको देख रहा हूं कि वह तो. दूर जा रहा है और मैं वहीं खड़े होकर उसको. देखते हुए निहारते. हुए मल आंसू आने लगे फिर खैर मैं अब अकेले.
में कुछ कर नहीं सकता था क्योंकि मेरी. लैंग्वेज प्रॉब्लम थी मुझे वहां पर फारसी. और पश्तो चलती है और अकेले खुदाई भी नहीं. कर सकता था खैर मैं फिर वापस गया भागते. हुए उसके पास मैंने कहा वादा करो भाई कल. आओगे कह रहा हां आएंगे तो हम लोग वापस चले. गए उस दिन हुआ नहीं अब नेक्स्ट डे जो है. उसका एक बंदा मेरे पास आया पैसे लेने के. लिए कह रहा पैसे दे दो उसने भेजा तो मैंने. कहा भाई काम तो हुआ नहीं किस बात के पैसे. तो कहने लगा कि नहीं वो तो कह रहा है कि.
मैंने कहा आज फिर जाएंगे तो पैसे मिल. जाएंगे तो कह रहा नहीं वो तो मना कर रहा. है जाने के लिए मैंने कहा नहीं उसने. प्रॉमिस किया मैं गया वहां पे तो कहने लगा. कि भाई अगर मुझे पता होता कि वहां जाना है. तो अगर तुम एक करोड़ भी दोगे तो भी नहीं. मैं जाऊंगा पैसे का करूंगा क्या अगर. उन्होंने देख लिया तो मार देंगे तो तू तो. पागल आदमी है आ गया हिंदुस्तान से यहां. मरने के लिए मैं क्यों जाऊं तो खैर वह. तैयार नहीं हुआ किसी भी तरीके से फिर एक.
दो दिन मेरे और बंदा दूसरा सेट करने में. मेरे को टाइम लग गया फिर एक बड़ी मुश्किल. से एक तैयार हुआ वो मेरे साथ गया फिर हमने. उस दिन हम लोग पहले से ही क्योंकि मैं कई. बार जा चुका था तो उस दिन सब चीज अपने. टाइम पर बिल्कुल ठीक ठीक होने लगी तो हम. पहले ही जाके जो है एक बाग था वहां पर ना. पास में वहां पर जाकर छुप गए तो जब मैंने. देखा कि अब अंधेरा हो गया 9 बज गए उसके. बाद फिर हमने उसकी खुदाई शुरू करी करीब.
तीन चार घंटे तक हम लोगों ने उसकी खुदाई. करी बल्कि वह जो मेरे साथ गया था वह क्या. हुआ कि गौरी की कब्र के पास जाकर उस पर. हथोड़ा मारने लगा मैंने कहा भाई हम इसको. तोड़ने थोड़ी ना आए भाई हमारे लिए तो यह. भी बहादुर हैं और यह हमारे पूर्वज हैं तो. हम किसी को को बेइज्जत करने के लिए नहीं. आए हम तो सिर्फ अपने पूर्वज की वहां से. क्या निकाला आपने रिस्पेक्ट देखो जो कंकाल. है वो तो नहीं थे हम करीब मैंने पांच के.
फुट के आसपास की खुदाई करी होगी तो जब. कंकाल नहीं मिले तो उनकी जो मिट्टी थी वह. प्लस जो दूसरे जो साइंस थे चीजें थी जैसे. कब्र के आगे जो पत्थर लगा हुआ था और जो. कुछ दूसरी चीजें थी वो सारी चीज मैं वहां. से वापस लेकर आया फिर हम और लाकर फिर जो. जो उनकी जो मिट्टी थी वो उसका कुछ अंश. मैंने गंगाजी में प्रभावित किया कोलकाता. के अंदर ही और जो कुछ अंश था वह मैंने एक.
सामाजिक संगठन के सुपुर्द किया तो. उन्होंने क्या हुआ कि वह सारी चीज एक. चबूतरे के रूप में वोह बनाया उसमें वो. सारी चीज रखी और एक स्मारक जो है उन्होंने. बनाया यहां पर जो मेनपुरी जिला पड़ता है. उत्तर प्रदेश में वहां पे जिस तरह से आप. इसको प्रचार प्रसार किया गया फिर हां बस. मैं फिर वापस आ गया फिर वापस आने के बाद. जो है तो मिट्टी उटी लेके कैसे आए फ्लाइट. में मिट्टी तो क्या हुआ कि जो वहां पर जो. चेकिंग सिस्टम था वहां एयरपोर्ट प काबुल.
के एयरपोर्ट प चेकिंग सिस्टम बहुत ही दे. देसी स्टाइल का है मतलब हार्ट चेकिंग है. वैसे तो इंडिया से ज्यादा है लेकिन हुआ यह. कि जब मैं जैसे मेरे पास तीन बैग थे तो जो. एक लोहे का बोर्ड था जिस पर की फारसी भाषा. में तारीख लिखी हुई थी तो क्या हुआ कि एक. जो पत्थर था ना उनकी कब्र का वो पत्थर. उन्होंने सबसे पहले क्या हुआ कि जो पहला.
बैग खोला तो उसमें सबसे ऊपर पत्थर था तो. उसने कहा कि यह तो एंटीक पत्थर है और यह. तो नहीं ले जा सकते आप तो मैंने कहा कि. भाई इसको तो मैंने परचेस किया है तो. उन्होंने कहा कि परचेसिंग स्लिप दिखाओ तो. मैंने कहा वो तो नहीं है तो कहने लगे फिर. तो अलाउड नहीं है तो उसने कहा कि मैंने. कहा भाई ये तो मैंने जब खरीदा है तो मैं. लेके जाऊ तो उसने कहा कि ठीक है आप हमारे. सर से बात कर लो तो क्या हुआ कि जैसे मेज. पर वो बैग रखा था दो बैग नीचे रखे थे तो.
वो उस वाले बैग को उठा के अंदर जाने लगा. तो मैंने उसके पीछे पीछे अपने दोनों बैग. उठाए और उसके पीछे पीछे चल दिया तो इतनी. देर में ही मतलब पाच सात मिनट के अंदर ही. अंदर से एक ऑफिसर आया तो उसने ऑफिसर से वो. चला गया ऑफिसर आया मेरे पास उसने कहा यस. तो मैंने सर यह मैंने परचेस किया प्लीज दे. दीजिए मुझे तो उसने मेरे को बिल्कुल एकदम. स्पष्ट कहा कि यह अलाउड नहीं है और.
परचेसिंग स्लिप है तो दो अदर वाइज अलाउड. नहीं है जाओ तो मैंने कहा कह रहा कि. ज्यादा बहस नहीं वरना मैं आपका पासपोर्ट. जप्त कर लूंगा तो मैंने कहा यार यह इसके. चक्कर में सारी चीज गड़बड़ हो जाएंगी तो. खैर मैंने उसको वहीं छोड़ दिया मैं अंदर. चला गया तो जो एक्सरे मशीन. थी तो मैंने क्या किया जो एक्सरे मशीन पर. जो जो बंदा खड़ा था जो चेकिंग कर रहा था. तो मैं जाकर उसके चेप हो गया तो मैंने कहा. कि वो जो पत्थर रखा है ना वो मेरा है और. वोह जो बॉस है तो उसने वो पत्थर उससे मेरे.
को दिलवा दो कह रहा मैं कैसे दिला दूं तो. मैंने कहा कि देखो ये सब चीज तो उसने. अलाउड कर दी लेकिन वो पत्थर नहीं दे रहा. तो उसने सोचा कि मिटटी बट्टी अलाउ कर दी. थी हां उसने सो एयरपोर्ट प मिट्टी अलाउ कर. दी हां उसने कहा कि ये क्यों ले जा रहे हो. मैंने कहा कि मैं आपके वतन की मिट्टी. यादगार के लिए ले जा जा रहा हूं तो और भी. चीजें थी उसमें वो बोर्ड भी था जिसमें. फारसी भाषा में लिखा हुआ था उसको मैंने. मोड़ा हुआ था मैंने कहा कहीं ये सीधा ना. कर ले इसको तो वो मोड़ के रखा हुआ था तो.
उसने कहा कि यह अलाउड नहीं है तो मैंने. कहा कि भाई यह जो वो जो बॉस खड़े हैं आपके. उन्होंने अलाउड कर दिया और वह पत्थर नहीं. अलाउड करा तो उसने सोचा कि यह सही कह रहा. है क्योंकि वह मुझे बाहर बात करते हुए. उनसे देख रहा था क्योंकि शीशा था बीच में. सिर्फ जो है तो उसने मतलब उसने कहा भाई. मैं उससे दिला नहीं सकता लेकिन उसने बोल. दिया तो चलो ले जा लो फिर उसके बाद उससे. पास हो गया फिर एयरलाइंस वाले खुद फिर. अपनी चेकिंग करते हैं हम है ना तो.
एयरलाइंस वाले चेकिंग करने लगे तो मैंने. कहा कि भाई ये तो उस एक्सरे मशीन वाले ने. अलाउड कर दिया और बॉस ने उनको कहा था तो. कह रहा अच्छा ठीक है कह रहा किसलिए मैंने. कहा ये यादगार ले जा रहा हूं इतना अच्छा. देश है तो उसकी यादगार में ये चीजें हैं. तो क्या है कि अगर आप लगेज में कोई सामान. रख दोगे फिर तो कोई प्रॉब्लम नहीं है मान. लीजिए आपके पास कोई ऐसी चीज भी है जो. एयरप्लेन में अलाउड नहीं है लेकिन अगर आप. साथ में कैरी करोगे तभी तो अलाउड नहीं है. अगर आपके पास मान लो कोई ऐसी चीज है तो आप.
उसको अपने लगेज में रख दोगे तो वो तो आपके. मतलब उसमें नहीं है ना अप्रोच में नहीं है. तो उन्होंने अलाउड कर दिया फिर जब मैं. यहां पर आ गया आने के बाद जो है अच्छा उस. दौरान वहां पर हंगामा हो गया जब वो लोग. सुबह उठे तो उन्होंने देखा यहां खुदाई हुई. हुई है तो वहां पे उन्होंने जो है हो. हल्ला करने लगे तो पुलिस भी शायद जो है. मेरे ख्याल में एफआईआर भी शायद दर्ज हो गई. वहां पर तो पुलिस वगैरह ढूंढने लगी.
क्योंकि मैं सेम डे निकल के आया अगर शायद. रुकता तो फिर आ भी ना पाता तो बस वहां पे. समझिए वहां पर एक्टिविटीज हो रही होंगी. गरमा गरमा हो रहा होगा और मैं इतने में. वापस इंडिया आया फिर यहां पहुंचने के बाद. जब यह मेरा हो गया काम जो है ईश्वर ने. बिना खरोच लगाए यह काम करा दिया फिर जो है. मैं एक बार म्यानमार भी गया वहां से. बहादुर शाह जफर जी की भी मिट्टी लाने की. मेरी इच्छा थी फिर मैंने देखा यह तो. बिल्कुल सुरक्षित और अच्छे तरह से रखी हुई.
है खुदाई करूंगा तो उल्टा और खराब हो. जाएगी तो वो मैंने फिर प्लानिंग जो. है छोड़ दिया और फिर एक अरेस्टिंग कम. सरेंडर आप इसको कह लीजिए फिर वह मेरी हुई. वो अरेस्टिंग भी बोल सकते हो और सरेंडर भी. बोल सकते हो तो फिर मैं सन 2006 में में. तिहाड़ वापस इधर जेल में आ गया और उसके. बाद आपकी सजा माफ कर दी गई नहीं नहीं सजा. का हम माफ कर दी मैंने 13 साल में जेल में.
रहा कम कर दी गसा नहीं कम क्या एक जो लाइफ. इसका रिवर्ड नहीं मिला आपको इन सब चीजों. का कहते हैं जज साहब पे या बाकी लोगों पे. इंप्रेशन अच्छा बन गया था आपका देखो क्या. है कि एक मतलब लोगों का विचार तो बदला. क्योंकि देखो जैसे जब मेरे को पुलिस. कस्टडी में लाया गया तो जो मेरा सबसे पहला. जो वास्ता पड़ा हम उससे हम समझ सकते हैं. कि लोगों के नजरिए में एक पॉजिटिव चेंज. आया सबसे पहले मेरा वास्ता जैसे जो स्पेशल.
सेल के उस समय जॉइंट सीपी थे कर्नेल सिंह. जी हम बहुत ही अच्छे ऑफिसर थे और बहुत ही. डेकोरेटेड ऑफिसर रहे वो दिल्ली पुलिस के. फिर बाद में ईडी के भी डायरेक्टर बने वो. तो उन्होंने मुझसे कहा कि शेर सिंह. अफगानिस्तान गए थे मैंने कहा सर गया तो था. तो उन्होंने कहा कि जो उनके बगल में ऑफिसर. बैठे थे तो उन्होंने कहा कि इसका जो. पासपोर्ट है वो रिकवर हुआ है तो उन्होंने. कहा दिखाओ जरा तो उन्होंने लाकर दिखाया तो. तब तक जो है मेरे को हथकड़ी बेड़ी और पूरा.
जंजीरों से जकड़ रखा था तो उन्होंने. पासपोर्ट देखा अराइवल. और डिपार्चर का वो देखा जो मैंने वीजा का. जो एक्सटेंशन कराई थी एक बार काबुल से. कराई थी एक महीने की फिर तीन महीने की. कंधार से कराई थी तो वो सारे उन्होंने. देखा तो उन्होंने कहा यार वाकई में ही तो. उन्होंने कहा देखो शेर सिंह मैं इस बात से. इंप्रेस हूं तुम्हारे कि तुम ढाई साल बाहर. रहे और तुमने जो है कोई क्राइम नहीं करा.
और जैसा भी है तुमने देश के लिए कुछ विचार. तो रखा ही चलो तो तुम्हारे ऊपर कोई हम गलत. केस नहीं लगाएंगे तो वरना तो तुम्हारे ऊपर. इतना अनाम इनाम है तो अरेस्टिंग में कम से. कम एक पिस्ते ही लेकिन हम तुम्हारे ऊपर. कुछ नहीं दिखाएंगे तो उन्होंने कहा कि और. केस भी हम तुम्हारा क्लब कर देते हैं. पासपोर्ट वाला तो फिर उनका मतलब और भी. उन्होंने बड़ी अच्छी बात रखी वहां पे तो.
जिससे आपको राहत मिल गई हां मतलब राहत तो. देखो कुछ नहीं मिली कस्टडी तो उतना ही. स्पेंड करनी पड़ी लाइफ इंपिजमेंट का जो. आजीवन कारावास जिसको हम बोलते हैं वो 14. साल की है सीआरपीसी के अकॉर्डिंग मतलब 14. साल के बाद आप छूटने के लिए मान्य है वैसे. 25 साल शायद है नहीं नहीं. आफ्टर 14 इयर्स आप जो है जेल मैनुअल के. अकॉर्डिंग छूटने के हकदार हैं लेकिन वैसे. शायद टोटल 25 साल है नहीं नहीं नहीं 14 ही.
साल होते हैं होता यह है कि जब आपके 14. साल हो जाते हैं जेल के अंदर तो आपकी एक. फाइल जाती है रिव्यू के लिए हां बोर्ड के. पास एक बोर्ड होता है तो वह हर छ महीने. में बोर्ड की मीटिंग होती है तो आपके जेल. के कंडक्ट को देखकर तो वह उस पर विचार. करते हैं तो अगर वो आपको नहीं छोड़े इन. केस तो फिर फाइल आपकी वापस आ जाएगी फिर छ. महीने बाद दोबारा से जाएगी तो कोई 14 साल. में ही छूट जाता है कोई 15 साल में छूट.
जाता है कोई साढ़े साल में छूट जाता है तो. जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव जाती है तो जब तक. वो रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं जाएगी तब तक वो. नहीं छूटेगा फिर चाहे 20 साल हो जाए चाहे. 25 साल हो जाए चाहे कितने लेकिन 14 साल के. बाद आप छूटने के हकदार हैं तो 14 साल ही. मानी जाती है वो ठीक है अब आखरी सवाल आपसे. लकी बिस्ट के साथ क्या बा आपका नहीं किसी. के साथ दिया कमजोर है व वो दिल पर लेकर. बैठे हैं कि र एजेंट रहे वो इतना देश के. लिए उन्होने काम किया और आपने कह दिया कि.
सेल रो रहे थे नहीं नहीं देखो क्या है थे. आप उनको मनाने गए मजबूती देने गए नहीं. नहीं देखिए क्या है बच्चा कह दिया आपने उ. नहीं मैं बताता हूं ऐसा नहीं है देखिए. रोने की और आंसू निकलने में एक अंतर है जब. हम किसी भी हालात से परेशान होते हैं और. हमें ऐसा लगता है कि हम यहां पर बेबस हैं. हम तो बेबसी में भी लोगों के आंसू निकल. जाते हैं देखिए जेल एक ऐसी जगह है बट वो. तो रॉक बेडिंग से गए थे मेंटली टफ होंगे.
नहीं नहीं देखिए आप अच्छा एक बात बताइए. अगर आपको जेल में किसी ने धक्का दे दिया. हम आप कितने भी बड़े बाहुबली हैं हम कितने. भी बड़े माफिया हैं तो क्या आप उसको क्या. मर्डर करा देंगे अगर करा देंगे तो आपके. ऊपर केस लगेगा ना एक और हम तो ये एक जेल. एक चक्र भी के साथ रहे हो. देखो मुझे तो ऐसा ही विश्वास है कि जेल. नंबर चार में वह कुछ समय मेरे साथ में रहे. हैं और मैं तो जैसे उनके कुछ वेल विशर्स.
बोल रहे थे कि. भाई एनएसजी कमांडो रहे और ब्लैक बेल्ट और. मतलब बहुत स्नाइपर शूट में और 3 सेकंड में. मार देंगे लेकिन बात यह है कि मारने के. बाद जो केस जेलना पड़ता है क्या उसके लिए. कोई तैयार है हम दूसरी बात यह है कि देखो. वह खुद इस बात को एडमिट करते हैं मैं तो. उनके वेल विशर्स से यह रिक्वेस्ट करूंगा. कि हमें उनके लिए आवाज उठानी चाहिए.
क्योंकि देश में वोह अकेले ऐसे व्यक्ति. हैं जो अपने मुंह से यह बताते हैं कि वह. 100 से ज्यादा उन्होंने हेड शूट किए हम आप. मुझे यह बताइए कि कोई. व्यक्ति देश के लिए अगर किसी देश विरोधी. व्यक्ति को शूट करेगा हम तो उसको कोई मेडल. कोई प्रेसिडेंट मेडल. कोई किसी तरह का पुरस्कार किसी तरह का.
प्रमोशन कुछ तो मिलना चाहिए वो बंदा खुद. रिक्वेस्ट मतलब खुद एडमिट करते हैं कि 10थ. क्लास के बाद जो है वो फौज में भर्ती हुए. हम उसके बाद वो डेपुटेशन पर एनएसजी में गए. फिर मोदी जी की और दूसरे लोगों की. सिक्योरिटी में रहे न महीने तक और फिर वो. वापस अपने जो जिस भी बटालियन में होंगे. आर्मी के या पैरामिलिट्री फोर्स में वो. उसमें आ गए क्योंकि एनएसजी में कोई. डायरेक्ट तो जाता नहीं एनएसजी में जाते. हैं आदमी डेपुटेशन प चाहे वो पैरामिलिट्री.
फोर्स का हो चाहे वो आर्मी से हो तो इट. मींस कि वो इनमें से किसी में रहे हैं. यानी कि वह इन्हीं सर्विसेस में से. डेपुटेशन पर गए हैं फिर एजेंसी में तो. एजेंसी अपने जो काम है उसको डिस्क्लोज. नहीं करती लेकिन ऐसा तो था नहीं के भाई वो. गन उठाते थे और जाके किसी को भी मार देते. थे कोई बोलता होगा ना कि भाई उसका हेड शूट. करना है उसका हेड शूट करना है तो यानी कि.
सरकार को तो काबिलियत मालूम है ना हम तो. जब सरकार को काबिलियत मालूम है तो फिर. क्यों हमारे भाई को कोई पुरस्कृत नहीं करा. वह सिपाही से भर्ती हुए और सिपाही से ही. वह जॉब उनकी जो है वह खत्म हो गई क्यों. एजेंसी ने जो जब उनको मर्डर केस में जब. अरेस्ट किया हम वो एक जगह बोल रहे थे कि. भाई आप अपराधियों को क्यों बढ़ावा दे रहे. हैं हम तो ऐसा उन्होंने क्यों बोला. क्योंकि हम जेल में थे तो वह भी तो जेल.
में थे उनके ऊपर भी तो मर्डर केस था भाई. आप उससे पहले क्या करते थे जेल जाने से. पहले तो वो तो हम भी एक अच्छे परिवार के. एजुकेशन ले रहे थे बढ़िया तो बाद में जब. आप भी जेल चले गए आपके ऊपर भी मर्डर केसल. सु मुझे लग रहा है कि आपको लकी विश् की. सारी कहानियों पर यकीन नहीं है नहीं मैं. मुझे यकीन की बात नहीं है मैं चाहता हूं. कि मुझे पूरा यकीन है सरकार यकीन करके. उनको उनका जो हिस्सा है वह मिलना चाहिए बट. जो हमारे जैसे रॉ में होते हैं या बाकी. एजेंसी होती है वहां तो नहीं निकलता ना.
सारी कहानियां नहीं मैं वही कह रहा हूं. कहानी बाहर नहीं निकलेगी लेकिन अगर कोई रॉ. के अंदर भी कोई ऐसा काम करेगा जिससे देश. का कुछ फायदा हुआ है तो वो अपने. डिपार्टमेंटल तो उसकी जो है उसको प्रमोट. करेंगे ना उसको शाबाशी देंगे ना उसको. रिवर्ड करेंगे ना भले ही व पब्लिक में. नहीं बताएंगे कि क्यों हमने रिवर्ड किया. है ऐसे मेरे कुछ लोग हैं परिचित जो कि. डेपुटेशन पे एजेंसी में गए उन्होंने वहां.
पर कुछ गुड वर्क किया वहां पे उ उनको भले. ही उस समय प्रमोट नहीं करा लेकिन जब वह. अपने वापस मूल कैडर में आए है ना तो उनको. मूल कैडर में जो अच्छी पोस्टिंग मिली उनको. प्रमोशन भी मिला कि भाई कहीं पर इन्होंने. अच्छा काम किया क्योंकि आपका गु आपका. सरकारी आप कर्मचारी हो तो आपका कंडक्ट. रिपोर्ट तो साथ साथ चलती है तो नहीं बोल. दिया आपने क् सोशल मीडिया बहुत वायरल हो. रहे थे लकी बस्ट नहीं नहीं देखो मैं लकी. बस्ट कहते कि मैं मैं आप वो आपसे मिले. नहीं है और जिस टाइम वो जेल में थे उस.
टाइम आप जेल में नहीं थे वो आप दोन लोग. साथ-साथ जेल में नहीं थे नहीं देखो क्या. है कि वो मैंने यह कहते सुना था कि आरटीआई. डाल लो हां तो आप बताओ मैं उनको आपके. दर्शकों को बता दूं कि जो आरटीआई है वह. जेल विभाग पर इस सब्जेक्ट के ऊपर लागू. नहीं होती अगर आप जेल में यह आरटीआई. डालेंगे कि कौन सा प्रिजनर किस जेल में है. अभी या क रहा है तो उसका सुरक्षा के ध्यान. के रखते हुए उनका जवाब आएगा कि यह हमें.
इसमें सुरक्षा की दृष्टि से इसमें छूट है. यह जानकारी हम आपको प्रोवाइड नहीं करा. सकते तो उनको शायद इस बात की नॉलेज नहीं. होगी इसीलिए उन्होंने बोल दिया कि भाई. आरटीआई डलवा लीजिए तो आरटीआई से यह आपको. प्राप्त नहीं हो सकता दूसरी बात यह है. देखो वह रहे हैं नहीं रहे हैं बहुत लोग. हमारे साथ रहे चाहे वह टेररिस्ट रहे हो. अंडरवर्ल्ड डॉन रहे हो पॉलिटिशियन रहे हो. इंडस्ट्रियलिस्ट रहे हो तो हम लोग सब. लोगों के लिए पॉजिटिव विचार रखते हैं अगर.
कोई जेल से बाहर आने के बाद जो है एक. अच्छी लाइफ जी रहा है प्रोग्रेस कर रहा है. तो उसकी हमें खुशी है तो इसीलिए मैं कहता. हूं कि भाई अगर हमारे किसी भाई ने देश के. लिए अच्छे काम करें हैं तो उसको रिवार्ड्स. मिलने चाहिए थे दूसरी बात है कि जो रोने. की आपने बात बताई जेल में आप कितने भी. बहादुर हो कितने भी जो है शक्तिशाली हो. पहले तो इस बात को अंडरस्टैंड करना चाहिए.
आपको कि शारीरिक शक्ति से आदमी कमजोर नहीं. होता आपने कोई भी ट्रेनिंग ले रखी हो. शारीरिक शक्ति की जरूरत नहीं होती आंसू. आने के लिए आंसू आदमी के तब निकलते हैं जब. आप यह सोचो कि यार मेरे अंदर सारी शक्ति. है सब चीज है लेकिन मैं चाह के भी इसने. मुझे कुछ उल्टा शब्द बोल दिया मुझे धक्का. दे दिया और मैं इसको कुछ बिगाड़ नहीं पा. रहा हूं क्योंकि आप ये तो चक्रव्यू है ना. आपको किसी ने धक्का दिया तो क्या आप उसका. मर्डर कर देंगे मर्डर कर देंगे तो और 10.
साल जेल में रहेंगे फिर तो आप कभी छूट ही. नहीं पाओगे तो आपको अपने आप को छूटना भी. तो है ना जेल से तो आपको कभी-कभी अपनी. बेइज्जती का जो घूट है वह जब पियोगे तो वह. आंसू के रूप में ही बाहर आएगा और मैं तो. ऐसा हूं दिल से आपको बताऊं मैं तो फिल्म. देखता हूं ना तो फिल्म में अगर कुछ ऐसा. सीन आता है तो भी मेरे आंसू निकल जाते हैं. तो यह आंसू निकलने का मतलब यह नहीं होता. कि आप डर गए हैं आंसू निकलने का मतलब यह. भी होता है कि आप बहुत बहादुर हैं लेकिन.
मजबूर है ठी हम आप दोनों की दोस्ती करवा. दें नहीं अरे भाई वो दोस्ती की बात नहीं. है देखो सब हमारे भाई हैं और कोई भी मैंने. आपसे बताया मेरे तो पूरा जो फ्रेंड सर्कल. है वो आर्मी ऑफिसर्स का ही है और मैं खुद. वही आर्मी में ही जाने का मेरा मन था और. अगर मैं शायद उस लाइन में जाता तो आज. एटलीस्ट कर्नल वगैरह रैंक पर होता क्योंकि. मेरे सब साथी वही हैं तो कोई सी ने देश के. लिए काम किया है तो वह हमारे लिए बहुत. रिस्पेक्ट रखता है लेकिन हम देश को गुमराह.
भी नहीं होने देंगे क्योंकि हमारे देश के. सम्मान की भी बात होती है ठीक है. बहुत-बहुत शुक्रिया आपका शेर स राणा जी. तकरीबन ढाई घंटे का हमने पॉडकास्ट किया जी. सारे विषय लगभग हमने छुए जी हमारे कैमरा. पर्सन कह रहे हैं कि उनकी बैटरी खत्म हो. जाए इससे पहले जी उनको हम फ्री कर दें बट. आनंद आया उम्मीद करते हैं दर्शको को भी. इतना आनंद आएगा बहुत-बहुत धन्यवाद आपका भी. और आपके सभी दर्शकों का भी थैंक यू थैंक. यू.
