Unplugged ft. Shankaracharya Nischalananda Saraswati | First Podcast of Puri Shankaracharya |
आपका नीलांबर झा नाम था? सुना है हमने भी।. कोई शंकराचार्य कैसे बनता है? असली. शंकराचार्य कौन है? नकली शंकराचार्य कौन. है? प्रधानमंत्री बनके कोई घूमे जो. प्रधानमंत्री नहीं है या तो विक्षिप्त. गिना जाएगा अथवा अराजक गिना जाएगा। एक. हमारे शंकराचार्य जी हैं. अभिमुक्तेश्वरानंद जी। आपके होंगे ना? आपके होंगे ना।. तो फिर समाज लोग शंकराचार्य क्यों कहते. हैं? वही कोई सपाई संत हैं, कोई बसपाई संत.
हैं, कोई भाजपाई कोई कांग्रेसी वो लोग. कहते हैं, कहते रहे। अभी असली शंकराचार्य. कौन-कौन है? हमारे धर्म में जो सर्वोच्च. स्थान आपका है, प्रयागराज कुंभ में या. बाकी जहां कुंभ होते हैं, प्रथम स्थान में. आप लोग को वरीता क्यों नहीं देते? फिर ये. ना दे हम सरकार के मोहताज हो रहे हैं।. सरकार हमारे धर्म पर कंट्रोल कर रही है।. अभी आदित्यनाथ योगी तो दो बार मेरे पास आए. थे। प्रयाग में मैंने चर्चा की तो. उन्होंने कहा आप निश्चिंत रहिए। वरदान. दिया मालूम। कल जब मैं जगन्नाथ जी को लेकर. पढ़ता हूं। ध्वज जो है वह हवा के विपरीत. लहराता है। शिखर की परछाई जमीन पर नहीं.
दिखती। मंदिर के ऊपर पक्षी विमान नहीं. गुजरते। समुद्र की लहरों की आवाज मंदिर के. अंदर नहीं सुनाई पड़ती। इस देश में कई. बड़े मंदिर हैं जहां पर वीआईपी दर्शन बहुत. ट्रेंड चलता है। 1000 समस्याएं हैं। इतने. व्यक्ति आपके पास है। 1000 मूर्ति सब मूल. को देखना चाहिए। कहां भूल है? तो मूल. समस्या आपको क्या नजर आती है? अभिनेता. नेताओं से दूर रहें। बनारस ले लीजिए। वहां. कॉरिडोर बना। उज्जैन में कॉरिडोर बन गया।. केदारनाथ में दोबारा से निर्माण हुआ। कई. लोग कहते हैं कि अब अच्छा दौर चल रहा है।. भोगस्थली बना लेना, तपस्थली, कोई विकास.
हुआ या हरास? आप मोदी जी को डांट देते हैं. कई बार कई विषयों पर। ऐसा सुना होगा आपने।. तो मोदी जी ने कभी कहा नहीं कि महाराज जी. हमसे आपस में बात कर लिया करो हम ठीक कर. दिया करेंगे। आप सार्वजनिक रूप से डांट. देते हो। हमसे एक काम में बात करके काम. करते हैं क्या? खुलम खुल्ला काम करते हैं।. हम खुलम खुला खंडन करते हैं।. जो नए हमारे अभी कथा वाचक आ रहे हैं। जैसे. बागेश्वर जी हैं। उन्होंने क्या कहा? जातपात की करो विदाई। हम सब हिंदू भाई भाई. हमने कहा कि मनुष्य पशु की करो विदाई गधी. से अब करो सगाई.
मुरारी बापू पत्नी मर गई फिर भी असौच नहीं. मेरे पास आए थे हमारी डांट भी सह लेते हैं. हंसते रहते हैं आपने कुछ समय पहले कहा था. कि हम हिंदू राष्ट्र बनाएंगे कि वो समय. सीमा तो निकल गई मोदी जी हिंदू राष्ट्र का. खंडन करते हैं क्या मोहम्मद साहब के. पूर्वज कौन थे ईसा मसीह जी के पूर्वज कौन. थे उसका महाराज जी कुछ आधार मक्का में भी. शिवलिंग था मक्केश्वर महादेव थे मैं सुबह. उठ के नौकरी चलाता हूं। शाम को वहां से. लौटते हैं। और ऐसे बहुत सारे लोग हैं। ऐसे. लोग क्या पूजा पाठ या क्या करें? 24 घंटे.
में 24 मिनट भी भजन नहीं करेंगे तो जन्म. लेना ही बैठते हैं।. प्रार्थना सच्चे मन से की जाए तो ईश्वर. जरूर सुनते हैं। वैसे ही शिकायत में अगर. ईश्वर को लेकर भक्ति हो तो भगवान वो. शिकायत भी सुनते हैं। चंद महीने पहले की. बात है। हम जगन्नाथ पुरी गए थे। दर्शन. हमें हो नहीं पाए थे और भारी मन से हम.
लौटे थे शिकायत करते। लेकिन भगवान ने सुना. ऐसा कि अपने सबसे प्रिय शिष्य सबसे प्रिय. बच्चे पूरी पीठाधीश्वर श्रीमद जगतगुरु. शंकराचार्य स्वामी निशानंद सरस्वती जी को. हमारे समक्ष पेश कर दिया। 145वें. शंकराचार्य हैं। सनातन धर्म के प्रखर. प्रचारक हैं। प्रखंड विद्वान हैं। और. हमारा सौभाग्य महाराज जी कि जो भगवान हमको. वहां दर्शन नहीं दिए थे और हम शिकायत लेकर. आए थे वो आपको हमारे समक्ष खड़ा कर दिया. है। वाह. बहुत-बहुत स्वागत है आपका। आप मानते हैं.
कि भगवान सुनते हैं शिकायत? अगर बच्चा. सच्चे मन से शिकायत करके आए भगवान के दर. पे? बिल्कुल।. मिश्र की बात तो सबसे पहले सुनते हैं।. हां। मिश्री खवा के।. हम गए थे उस वक्त भगवान शायद वहां पर. कपड़े बदले जा रहे थे और हमसे कहा गया कि. अभी थोड़ा समय लगेगा आज दर्शन नहीं हो. पाएंगे और भारी मन से हम लौटे थे और देखिए. आज आप हमारे समक्ष हैं तो यह मौका हमें. मिला है। कई सारे सवाल महाराज जी हैं। एक. भक्त के तौर पर भी कुछ सवाल पत्रकार के.
तौर पर भी और कुछ सवाल जनता के तौर पर भी. समाज में जागृति पैदा करनी है। लेकिन सवाल. पर जाएं उससे पहले आपसे शुरू करते हैं।. आपका बिहार में जन्म हुआ और हम ये जानना. चाहते हैं महाराज जी कि अध्यात्म और सनातन. की तरफ आपको क्या प्रेरणा मिली जो आप इस. तरफ आए? हमने सुना है एक ही दो झांकी याद. है पिताजी. जब मैं चार साल का था चल बसे। बहुत बड़े. विद्वान थे। दरभंगा नरेश के यहां राज.
पंडित थे। उन्होंने जनपद बनाई।. उसमें राजा और भिखारी दोनों का योग था।. सोचा राजा होगा तो भिखारी कैसे? भिखारी. होगा तो राजा कैसे सन्यासी दोनों ही होते. हैं। शंकराचार्य हो गया। अद्भुत. भिक्षुक भी हैं और राजा भी हैं।. बहुत सुंदर महाराज जी। आपका नीलांबर झा. नाम था। सुना हमने भी।. तो नीलांबर झा से स्वामी निश्चलानंद. सरस्वती जी बनने की यात्रा में सबसे.
यादगार और प्रेरक लम्हा कौन सा था? ऐसा है कि. मेरा जन्म भी सन्यास के लिए हुआ था।. प्रवृत्ति मार्ग हमको रुचकर नहीं।. मैं दिल्ली से भागने लगा। मेरे बड़े भाई. दिल्ली में रहते थे। एक व्यक्ति पकड़ करके. दिल्ली ले आए। दिल्ली से भगा। पद यात्रा. करते करते घूमते घूमते।.
नेमसारण पहुंचा।. नारदानंद सरस्वती जी महाराज दंडी स्वामी. के संपर्क नौ वर्षों तक रहा। उसके बाद. वृंदावन आ गया।. धर्म सम्राट स्वामी करपाती जी महाराज से. अध्ययन किया। उनका शिष्य बना कहां पर? वाराणसी में।. पूर्वाचार्य महाभाग. हमारे पूज्य गुरुदेव को गुरुदेव ही मानते. थे। उन्होंने हमारा अभिषेक करना चाहा। ढाई.
वर्षों तक हम भागते रहे। अंत में उन्होंने. पत्र लिखवाया मैं बीमार हूं। मानव बाधिकार. की सीमा में आके मुझसे मिला। पांच साल. मैंने उनसे भी पढ़ा था। जब वहां से. उन्होंने घेर के मुझे शंकराचार्य बना. दिया।. तो जो आपके गुरु जी थे कर कृपा महाराज. उनकी सबसे बड़ी सीख क्या आपके जीवन में जो. आज भी आप जिसको मानते हो पालन करते हो या. नए बच्चे जो आपको सुनेंगे आप उन्हें देना. चाहोगे।. धर्म नियंत्रित पक्षपात भी शोषण मुक्त.
शासन तंत्र. धर्म नियंत्रित पक्षपात विन शोषण शासन. तंत्र की स्थापना उनका लक्ष्य था धर्म संघ. रामराज परिषद की स्थापना की उनसे हमने. चातुर्मासी के दिनों में पढ़ा सन 58 से. लेकर 82 तक उनके संपर्क में था. और एक बार एकांत में उन्होंने मुझसे कहा. कि स्वास्थ्य अपने लिए कहा कि ठीक नहीं.
है।. जिन ग्रंथों को मैं पढ़ा नहीं पाया।. मुझे कष्ट है लेकिन एक मिनट मौन रहने के. बाद उन्होंने कहा आशीर्वाद तो दे ही सकता. हूं। जिन ग्रंथों को मैं पढ़ा नहीं पाया. वो ग्रंथ भी तुमको लग जाए। उनकी कृपा. अद्भुत. जगतगुरु कोई शंकराचार्य कैसे बनता है? हम. ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हो एक दंडी हो. और जो पद पर आसीन रहते हैं.
वे उसको वर्णन कर लें। कदाचित पद खाली है. तो पीठ जो शंकराचार्य की गद्दी से संबद्ध. विद्वान होते हैं या बाकी तीन शंकराचार्य. होते हैं वो जिसको बनाना चाहे ब्राह्मण को. उत्पन्न दंड स्वामी को शंकराचार्य बना. देते हैं। लेकिन जैसे आजकल एक बड़ी चर्चा. चलती है कि असली शंकराचार्य कौन है? नकली. शंकराचार्य कौन है? क्रिश्चियनों ने भारत. पर शासन किया। मुसलमानों ने शासन किया।.
कोई नकली तो नहीं थे। शासन तंत्र की. विडंबना है। दिशाहीनता का परिचय है।. प्रधानमंत्री बनके कोई घूमे जो. प्रधानमंत्री नहीं है या तो विक्षिप्त. गिना जाएगा अथवा अराजक गिना जाएगा।. तो फिर समाज में उसे लोग शंकराचार्य क्यों. कहते हैं? वही. कोई सपाई संत है, कोई बसपाई संत है, कोई. भाजपाई कोई कांग्रेसी वो लोग कहते हैं, कहते रहे कुंभ के अवसर पर देखिएगा. देखा होगा आपने प्रयाग में हम 50ों तो.
जगतगुरु के बोर्ड लगे थे। 10 लगभग. शंकराचार्य थे। यह शासन दल की दिशाहीनता. का परिचय है। तो जगतगुरु मेरे मन में एक. सवाल आता है जैसे हम बाकी धर्मों में. देखते हैं। एक सर्वोच्च आवाज आती है। वो. जो कहते हैं उससे पालन क्या आता है। हमारे. धर्म में जो एक नौजवान होने के नाते सबसे. बड़ी परेशानी मुझे लगती है कि जितने मुंह. उतनी बात हर व्यक्ति की अलग-अलग आवाज है।. एक आवाज नहीं आती है। जैसे आपने कहा. शंकराचार्य भी 10 हमें दिखाई पड़ गए।. जगतुगुरु कई सारे दिखाई पड़ गए। कथावाचक.
वो अब ज्यादा धर्म के बारे में प्रचार. प्रसार करते नजर आते हैं तो ये एक आवाज. क्यों नहीं आती? इससे भ्रामतियां बहुत. फैलती है। वो नकली मजनू अलग होते हैं।. असली मजनू की पहचान मुर्चे पर हो जाती है।. या सफाई संत है। सपा जब आज्ञा देगी है।. हाईकमान तब कुछ करेंगे। वाजपेय हमें तो. आज्ञा की जरूरत नहीं है। हम लोग जो कहते. हैं हम सरकार उसका अनुगमन करती है। दर्शन. विज्ञान व्यवहार में सामंजस साधकर बोलते. हैं। देश काल परिस्थिति में सामंजस साध कर.
बोलते हैं। हमारे पास अमित शाह जी आए थे।. हमने कहा था 370 धारा निरस्त होनी चाहिए।. बहुत असंभव है लेकिन हो गई या नहीं।. तो जैसे आज आप मेरे सामने बैठे हैं और देश. में तमाम लोग आपको सुनेंगे। अभी असली. शंकराचार्य कौन-कौन है? आपकी दृष्टि में मैं आपकी दृष्टि जानना. चाह रहा हूं। आप मेरे आप तो जगतगुरु है।. और कौन है जिन्हें हम असली मान सकते हैं? जिन्हें हम सुने कि ये वेरीिफाइड है।. नकल्चर से सावधान रहे।.
आप निर्णय कर लीजिएगा। जी ठीक।. जगतगुरु. कथा वासों को लेकर भी जैसे कई सारी जैसे. हमारे धर्म में कई तिथियां आती है. त्योहारों पर भी आता है एक मत नहीं आता है. तो इसके लिए कोई कोशिश आप लोग करते हैं या. कोशिश की जानी चाहिए ऐसा है कि विदेशी. पंचांग का नकल की नकल करते हैं लोग. ज्योतिष का तो अध्ययन सब कोई है नहीं और. शासन तंत्र का प्रशय ऐसे होता है व्यापार.
तंत्र में अभी व्यापार तंत्र चल रहा है. राजनेताओं की क्षम क्षम ता नहीं कि शासन. कर सके हम देसी विदेशी कंपनियां ही शासन. करती हैं। इस पर आपका ध्यान गया होगा। हम. देसी विदेशी कंपनियों को ठेका देने की. क्षमता राजनेताओं में है। तो क्षमता नहीं. रहेगी तो अंत में दिशाहीन व्यापार तंत्र. के हाथ में ही पूरा विश्व आ जाएगा।. जैसे आपकी पूरी की भी हम बात करें। हमसे. कई लोगों ने कहा कि पूरी में भी एक शंकरा.
एक व्यक्ति है जो अपने को शंकराचार्य कोई. ऐसा नहीं का दावा कर रहे हैं। कोई नहीं. है।. दावा क्या करेंगे? पूर्वाचार्य जी महाराज. ने अपने जीवन काल मुझे शंकराचार्य बनाया।. पूरी में तो ऐसा कोई व्यक्ति नहीं। पूरी. पीठ पर है तो प्रधानमंत्री बनके कोई घूमे. तो विक्षिप्त गिना जाएगा या राजा गिना. जाएगा। प्रधानमंत्री क्या कर रहे हैं? उनका कर्तव्य है कि ऐसे तत्व को दबोचे. तो आप तो सनातन के प्रधानमंत्री हैं। आप.
हम स जो कुछ है वो तो हैं। समय आने पर सब. दिखाई पड़ेगा। आपको क्या होता है? शंकराचार्य की भूमिका क्या होती है? पहले. तो ब्राह्मण कुल में उत्पन्न हो। विधिवत. उन्होंने सन्यास लिया हो और प्रतिष्ठित हो. शंकराचार्य के पद पर। उनका काम होता है।. जीवन को संयत रहना रखना पहला काम होता है।. काल क्रम से विलुप्त ज्ञान विज्ञान को. तपोबल से प्रकट करना विकृत ज्ञान विज्ञान.
को विशुद्ध करना सूत्र शैली में प्राप्त. ज्ञान विज्ञान को विषद करना विषद ज्ञान को. समाज शैली में प्रकट करना और व्यासपीठ में. शासन तंत्र में कोई भी संगति हो दूर करके. उस धर्मराज रामराज की प्रतिष्ठा का मार्ग. प्रशस्त करना इतना है। लेकिन जैसे आपने. व्यासपीठ का जिक्र किया इस बीच में कई. सारे लोग ऐसे आए हैं जो व्यासपीठ पर बैठते. हैं। लेकिन कई ऐसी हरकतें करते हैं जिससे. एक सनातनी को अपने आप में सवाल उठता है या.
कई सारे लोग सवाल उठाते हैं जिससे. शर्मिंदा होना पड़ता है। पहले ही मैंने कह. दिया कि ये दिशाहीनता की पराकाष्ठा है।. अभी अगर चार पांच व्यक्ति प्रधानमंत्री. बनके घूमे तो क्या होगा? तो इस पर कंट्रोल. कैसे होगा महाराज जी? हम इस पर रोग कैसे. होगा? अभी तो आप युवक यहां देखते रहिएगा।. इसके लिए आप लोग कुछ सोच रहे हैं? आप लोग. क्या मैं तो सोच ही रहा हूं होना ही है।. देखिए मैं देश का विभाजन. हो ऐसा पक्षधर नहीं हूं और समानांतर. सरकारी भी बनाने का पक्षधर नहीं हूं और.
अन्याय श्रेष्ठ नहीं हूं। तो आप ये कल्पना. कीजिए मैं क्या करने वाला हूं। भगवान. मुझसे क्या कराने वाले हैं? मैं तो आदि गुरु शंकराचार्य को अपने दिमाग. में रखकर सोच रहा हूं कि उन्होंने धर्म की. स्थापना के लिए कैसे एक सेना का निर्माण. किया था। आपको लगता है इस दौर में सेना का. निर्माण उन्होंने नहीं किया था। उस समय. बौद्ध. जो थे उनके प्रभाव में क्षत्रिय आ गए थे।. उन्होंने यथावत क्षत्रियों को धर्म की. शिक्षा दी। कालांतर में जो शंकराचार्य हुए.
उन्होंने सेना का निर्माण किया। परिड़ा. परिषद सब का निर्माण किया। उस समय तो. भगवान शंकराचार्य के समय क्षत्रिय खानदानी. वो शासन करते थे।. आदि गुरु शंकराचार्य की महिमा के बारे में. अगर कुछ आप हमें बता पाए कुछ ऐसा जो लोग. ना जानते हो. विषद ग्रंथ उनके ऊपर लिखा है 10 60. पृष्ठों में या कितने पृष्ठों में फिर भी. कोई एक एक किस्सा कोई एक बात उनके बारे. में जीवन में क्योंकि उन्होंने जिस तरह से. धर्म को एकजुट किया मुझे लगता है कि आज के.
दौर में उसकी कल्पना करना भी बड़ा मुश्किल. लगता है कि उस उम्र में उस भगवान शिव के. अवतार थे इसलिए उन्होंने जो करना चाह करके. दिखा दिया. भारतवर्ष है ना इसको भगवान दिशाहीन नहीं. होने देते। यहां कारक कोटि के मनुष्य जन्म. लेते हैं और समय-समय पर ऋषि मुनि जन्म. लेते हैं। साक्षात भगवान भी अवतार लेते. हैं। इसलिए भारतवर्ष को कोई दिशाहीन करने. में समर्थ नहीं होता। जब अंग्रेजों का काल.
चल रहा था या मुगल काल चल रहा था। उस दौर. में शंकराचार्यों के जरिए कोई महान कार्य. अगर ना हुआ होता तो उनकी गद्दी लुप्त कर. दी जाती।. अंग्रेजों ने मुसलमानों ने अपने शासन काल. में शंकराचार्य पर कटाक्ष नहीं किया।. शंकराचार्यों ने अपनी गद्दी की रक्षा कर. दी। परंपरा की रक्षा कर दी। ये भी बहुत है. और वो भिड़ जाते तो कई मुसीबत उत्पन्न. होती और भगवान में जिसमें वो क्षमता देते. हैं उसी में वो क्षमता होती है कि वो भिड़.
भी जाए सफल भी हो जाए।. लेकिन जगतगुरु जब अभी हम प्रयागराज में. कुंभ देख रहे थे वहां मैं भी गया तो वहां. पर तमाम लोग स्नान करने आते हैं। हमारे. धर्म में सर्वोच्च स्थान आपका है। लेकिन. प्रथम स्थान जो होता है स्नान का वो उसमें. चर्चाएं आपकी नहीं होती। बहुत सारे लोग अब. महामंडलेश्वर बनते जा रहे हैं। हमने देखा. हीरो हीरोइन जो है अभी एक हीरोइन थी उनको. भी बना दिया गया था। तो हमारे धर्म में जो. सर्वोच्च स्थान आपका है प्रयागराज कुंभ. में या बाकी जहां कुंभ होते हैं प्रथम. स्थान में आप लोग को वरीता क्यों नहीं.
देते फिर यह? ना दे हम सरकार के मोहताज. थोड़े हमको जब स्नान करना होता है जहां कर. ही लेते हैं क्या. सरकार के अनुगामी हम बने तब हमको आदर मिले. ऐसा हम चाहते नहीं तो सरकार हमारे धर्म पर. कंट्रोल कर रही है सरकार धर्म पे कंट्रोल. करने के हम अभी आदित्यनाथ योगी तो दो बार. मेरे पास आए थे हम. प्रयाग में मैंने चर्चा की तो उन्होंने. कहा आप निश्चिंत रहिए वरदान दिया मानो.
इसका अर्थ क्या है कि कालांतर में राजनेता. अपने अस्तित्व को खो देंगे और हम लोग जैसा. चाहेंगे हम जैसा चाहेंगे वैसे शासन तंत्र. होगा। इन सब की अराजकता अधिक समय नहीं. चलेगी। चाहे मोदी हो, चाहे योगी हो, चाहे. और कोई हो, चाहे आप ही क्यों ना हो।. अच्छा एक सवाल जो बहुत सारे आम लोगों के. मन में आता है। जगत गुरु वो यह है कि जैसे. अभी. आपका बनारस ले लीजिए वहां कॉरिडोर बना।. उज्जैन में कॉरिडोर बन गया या केदारनाथ.
में दोबारा से निर्माण हुआ। कई लोग कहते. हैं कि अच्छा दौर चल रहा है। यह मौजूदा. दौर जो है स्वर्णिम दौर चल रहा है। जहां. सनातन की चीजों को दोबारा से रिस्टोर किया. जा रहा है। अभी जैसे आपने टिप्पणी की तो. कई लोग ये कहते हैं कि ये शिकायत फिर. क्यों आपको है? तपस्थली को भोगस्थली. पर्यटन का केंद्र बनाना विकास है या. रासनाथ. है ना झारखंड में? जी वहां पर केंद्रीय. शासन तंत्र ने पर्यटन का केंद्र बना दिया।.
दो जैन संत अनशन करके मर गए। उसके बाद. केंद्रीय शासन तंत्र को वापस लेना पड़ा।. भोगस्थली बना देना। तपस्थली को विकास हुआ. या रास? गहरी गहरा सवाल पूछा आपने। रास ही हुआ ना? तो इस इसके लिए भी कोई कदम आप लोग उठाते. हैं? आप लोग की बात हमने हम अपनी बात करते. हैं। जी। बाकी किनसे मिले जाके कि आपका ही. साथ दीजिए। आप साथ दीजिए।. मेरे पास तो सवा करोड़ मधुमक्खियों की.
सेना है। उसको अरेस्ट कौन करेगा? उसको. कितनी धारा लगेगी? आप पर नहीं छोड़ रहा।. बचपन मेरे पास सर्पों की सेना थी। क्या जो. जहां समीक्षा करता व सर्प प्रकट होकर काट. लेती। एक पड़ोसी चाची थी। तालाब सरोवर में. जाकर स्नान कर रही थी। हंसते हुए उसने कहा. मेरा बहुत बड़ा लाडला प्यारा है। लेकिन. मैं मुस्कुरा करके. बनावटी ढंग से उसकी आलोचना करती हूं। मुझे.
क्या होता है? सर्प ने प्रकट होकर काट. लिया। उसने भेजा कि मर रही हूं बचा दो। उस. समय मेरे पास सर्पों की सेना थी जन्मभूमि. में। अब मेरे पास सवा करोड़ मधुमक्खियों. की सेना है। आप निश्चिंत रहिए।. अभी कईयों को लगाया नहीं। मधुमक्खियां लग. गई। लगी या नहीं और नकल किया नहीं।. अमेरिका ने यांत्रिक विधा से मधुमक्खी. तैयार की है और सेना जहां पर हमारी सीमा. है वहां पर मधुमक्खी पाले गए हैं। जब बाहर.
से आक्रमण की संभावना होती धुआंध दिखा. उड़ा देते हैं। किसके देन हम तो कहा था कि. मधुमक्खियों की सेना होनी चाहिए। मेरे पास. सब आक्रमण मधुमक्खियों की सेना है। मुझे. कहने की जरूरत नहीं। वो घूम करके जहां. जरूरत पड़ता है धावा बोल देते हैं।. मधुमक्खियां बोल देती है। आप निश्चिंत. रहिए। अब जैसे आप विद्वान व्यक्ति हैं।. आपने वैदिक गणित पर 11 पुस्तकें भी लिखी. है। 11 हैं या कितने हैं? 23 पुस्तकें. हैं। चलिए मैं दुरुस्त कहता हूं। 23. पुस्तक 180 ग्रंथ में 175 प्रकाशित हो.
चुके हैं। कुल मिला के और पांच कंप्यूटर. पर तैयार हैं। 225 ग्रंथ लिखने की भावना. है। गणित का विज्ञान हमको भगवान सूर्य से. प्राप्त हुआ था। तत्वज्ञान भगवान सुर से. प्राप्त हुआ और भविष्य. वरदान दिया तत्काल प्राप्त हो गई विद्या. भविष्य के लिए उन्होंने एक वरदान दे रखा. है कालक्रम भी प्रकट होगा. स्वस्तिक गणित सबसे पहला गणित है प्रसिद्ध.
कौन थे वो उड़ीसा के गणितज्ञ त्रिक्रम. हां वो प्रयाग विश्वविद्यालय के कुलपति भी. रह चुके थे उनको हमने दिया कि सम्मति. दीजिए उन्होंने कुछ समझ में नहीं आएगा। आप. लिख दीजिए मैं हस्ताक्षर कर दूंगा। गणित. के ग्रंथ है बहुत। अभी 1 लाख पष्ठों की. सामग्री गणित के मस्तिष्क पर है। मस्तिष्क. में सन्नहित है। लेकिन वो गणित का विज्ञान. मुझे सूर्य से प्राप्त हुआ है।. अब जैसे आप इतने विद्वान व्यक्ति हैं। आप.
जो कह रहे हैं मैं आपकी बातों में पूरी. तरह समर्पित हूं। लेकिन हो सकता है नई. पीढ़ी में कुछ बच्चे हो जिन्हें कहें कि. ये 1 लाख मक्खियों वाली बात जो है उनके. लिए कल्पना से परे है। वो इसको उस तरह से. ना लें। तो यह विज्ञान और धर्म क्योंकि आप. दोनों को साथ लेकर चलते हैं। उन्हें कैसे. समझाएंगे हमारे धर्म के बारे में? फिर. उनको समझाने की क्या जरूरत है? हम. मधुमक्खियां लगा देंगे। वो समझा देंगे. मधुमक्खियां।. अरे वो भी हमारे हमें लगाने की जरूरत नहीं. पड़ती। समझ गए? वो सब क्या है? तत्व है।.
वो मधुमक्खियों के रूप में है। जहां उनको. जरूरत मालूम पड़ता है। यहां लगना चाहिए।. लगा दिया। अभी एक. पदाधिकारी को लगाया।. धर्म और राजनीति दोनों साथसा ऐसा है ना कि. राज धर्म को ही राजनीति कहते हैं। राजनीति. राज धर्म छात्र धर्म दंड नीति अर्थनीति. पांचों एक्थक है। पर्यायवाचक हम महाभारत. में राज धर्म पर है या नहीं?
राज धर्म, छात्र धर्म, दंड नीति, अर्थनीति. यह सब पर्यायवाचक है। तो आपके हिसाब से. जैसे अगर हमारा जो हमारे सपनों का युग आना. चाहिए भारत में वो अभी मौजूदा राजनीतिक. दृष्टिकोण में कोई दिखता है आपको? कोई कम. हुआ। मतलब कोई पॉलिटिकल पार्टी स्वयं को. देख ही रहा हूं। मैं तो स्वयं को देख ही. रहा हूं। आप राजनीति में प्रत्यक्ष तौर पर. प्रत्यक्ष तौर पर ना मुझे राष्ट्रपति बनना. है ना प्रधानमंत्री बनना है उससे ऊंचा पद.
हमको है जी लेकिन शासन को पलटने की क्षमता. है. लेकिन वो बिल्कुल सहमत हूं मैं आपकी बात. से लेकिन जैसे महाराज जी नीति निर्धारित. जो लोग करते हैं रोज की व्यवस्था वो देखते. हैं तो सक्रिय व्यवस्था में कोई आपको नजर. आता है आप ही आते हैं नहीं हम तो अपनी. भूमिका पत्रकार के तौर पर कर रहे हैं। हो. सकता है आप राजनेता बन जाए। आपका आशीर्वाद. रहा तो क्या पता. अब आपको सूर्य जी का आशीर्वाद प्राप्त है।. आप हमसे खुद कह रहे हैं तो क्या पता? हां. हो ही सकते हैं।.
अच्छा आप चारों शंकराचार्य जी कभी मिल. बैठकर किसी विषय पर ऐसा है कि पहले जो. शंकराचार्य थे तारों बोर में हम लोग मिले. भी थे। जी और हम तो जब ब्रह्मलीन. शंकराचार्य उस समय थे श्रृंगेरी में उनके. पास 87 दिन रह चुके हैं। जी उस समय. वर्तमान जो वरिष्ठ शंकराचार्य श्रृंगेरी. के विद्यार्थी थे रात में भोजन हम लोग एक. साथ करते थे। उस समय हम मिल चुके हैं। अब. डॉक्टर शंकराचार्य बनकर घूमे। उनसे मिलने.
की मुझे क्या जरूरत है? लेकिन इस धर्म का नुकसान नहीं है। धर्म का. नुकसान क्या है? उनका नुकसान जो धर्म को. नहीं मानता है उसका पतन होता है या धर्म. का क्या पतन होता जैसे वो कुछ भी कह देते. हैं यदा यदा ही धर्मस ग्ला भवती भारत धर्म. को अधिकारी ना मिले पालन करने वाले यही. धर्म के ग्लानी है ना वास्तव में तो जो. धर्म को नहीं मानते उनकी दुर्दशा होती है. हमने कहा ना किसी वस्तु की सत्ता उपयोगिता. जिस पर निर्भर है उसी का नाम धर्म है ना.
धर्म सिद्ध कोटि का है पृथ्वी के जितने. कार्य भिक्षा आदि पार्थिव उनकी सत्ता. उपयोगिता पृथ्वी पर निर्भर है। पृथ्वी की. सत्ता उपयोगिता जल पर निर्भर है। जल की. सत्ता उपयोगिता अग्नि पर निर्भर है। अग्नि. की सत्ता उपयोगिता वायु पर निर्भर है।. वायु की सत्ता उपयोगिता आकाश पर निर्भर. है। आकाश की सत्ता उपयोगिता अव्यक्त पर. निर्भर है। अव्यक्त परमात्मा की शक्ति है।. उसको प्रधान या माया भी कहते हैं। उसकी. सत्ता उपयोगिता ब्रह्म पर निर्भर है। इसी.
प्रकार से हम एक संकेत करते हैं। प्यास. लगने पर पानी क्यों पीते हैं? पानी अपने. गुणधर्म का त्याग नहीं करेगा। सर्दी में. छिछता हुआ व्यक्ति अग्नि जो प्रज्वलित है. उसके पास क्यों बैठता है? आग अपने धर्म का. त्याग नहीं करेगी। प्रज्वलित अग्नि में. हाथ क्यों नहीं डालता? आग जलाए बिना नहीं. रहेगी। किसी भी वस्तु की सत्ता उपयोगिता. जिस पर निर्भर है उसका नाम धर्म है।. धर्मनिरपेक्ष शब्द ही है या अर्थ भी कोई. है।. बंध्या पुत्र शब्द ही है या कोई बंध्या.
पुत्र होता भी है। खरगोश के सिंह सिंह. शब्द ही है ना शब्द ज्ञानुपाती शून्य. विकल्प योग दर्शन के अनुसार धर्मनिरपेक्ष. केवल शब्द है तो वस्तु और व्यक्ति. धर्मनिरपेक्ष हो जाए संभव है क्या? आंख. धर्मनिरपेक्ष हो जाए तो अंधे हो जाए। ना. कि धर्मनिरपेक्ष हो जाए तो क्या हो जाए? धर्मनिरपेक्ष कोई वस्तु नहीं, कोई व्यक्ति. नहीं। ठीक है। आपने कुछ समय पहले महाराज. जी कहा था कि हम हिंदू राष्ट्र बनेंगे।.
बनेंगे या बनाएंगे। बनाएंगे। एक आपने. डेडलाइन भी दी थी। इस समय सीमा तक। अब. आपके ही चाहने वाले कई बार ये पूछते हैं. कि वो समय सीमा तो निकल गई। क्या निकल. रही? 3 वर्ष। 3 वर्ष का मतलब क्या हुआ? उस. समय से क्रम चल रहा है। आगे चल रहा है या. नहीं? अब मोदी जी हिंदू राष्ट्र का खंडन करते. हैं क्या? आदित्यनाथ जी खंडन करते हैं. क्या? विश्व में कितने देश हैं? 204 देश. हैं। 54 55 देशों में हिंदू रहते हैं।.
सबके पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिंदू थे।. इस तथ्य का कोई खंडन करता है क्या? मोहम्मद साहब के पूर्वज कौन थे? ईसा मसीह. जी के पूर्वज कौन थे? गुलाम नबी आजाद ने. कहा ना हमारे पूर्वज कौन थे? उन्होंने कहा. कश्मीरी पंडित। बिल्कुल सत्य है। सबके. पूर्वज सनातनी वैदिक अधिकारी हिंदू हैं।. हिंदुओं का जो विज्ञान है सर्वोत्कृष्ट. आजल विद्या और कला में कोई पार नहीं पा. सकता है। उत्पत्ति स्थिति संहार निग्रह. अनुग्रह का जो विज्ञान वेदाद शास्त्र है.
उसका खंडन कौन करेगा? बुस महोदय जिनके. पिता भी अमेरिका के राष्ट्रपति रह चुके. थे। बुस महोदय स्वयं भी एक बार अमेरिका के. राष्ट्रपति रह चुके। दूसरी बार पद पर. प्रतिष्ठित होने जा रहे थे। उन्होंने. अंग्रेजी में कुछ वाक्यों को कहा। हिंदी. में अर्थ होता है मैं क्रिश्चियन हूं।. बाइबल में आस्था है। लेकिन. सृष्टि संबंधी जो जानकारी बाइबल की है, आधुनिक विज्ञान और वैज्ञानिकों के द्वारा. तिरस्कृत है। इतने हम समय में बाइबल को.
नहीं मानता। वैदिक वांगमय छोड़ दीजिए।. नालंदा विश्वविद्यालय आदि में ग जलाए गए. काठमांडू में प्रचंड. पागल ने ग्रंथों को जलाया फिर भी हम एक. संकेत करते हैं कोई भी घटना घटती है तो. वेदादशास्तक विदा से ही घटती है उत्पत्ति. स्थिति संहार निग्रह अनुग्रह का विज्ञान. वेदाधिद शास्त्र सम्मक विदा से ही प्राप्त. होता है। गणित का विज्ञान कौन पार पाएगा?
नहीं जैसे आपने बात कही कि फारूक. अब्दुल्ला हुए या गुलाम नबी आजाद हुए या. पाकिस्तान में भी जिन्ना को मान ले इनके. पूर्वज हिंदू थे। जिन्ना के भवन को तोड़ा. यानी पाकिस्तानियों ने अभी अब देश का. विभाजन करवाया जिन्ना उनकी बेटी पाकिस्तान. में रही या मुंबई में रही है बताइए। मुंबई. में? फिर? हां। तो इनके पूर्वज हिंदू थे. क्योंकि यह यहीं से लोग आए। वह भी मानते. हैं कि हमारे पूर्वज अभी पाकिस्तान में. बहुत लोग हैं। जो कहते हैं कि हमारे फोर. फादर्स जो थे वो हिंदू थे। लेकिन अरब. देशों में तो अलग कल्चर था तो आप उनको.
कल्चर का उसे था ये तो बताइए ईसा मसीह की. आयु कितनी उनके नाम पर जो सिद्धांत चल रहा. है मैं तो कितने वर्ष पूर्व ईसा मसीह की. समाधि कहां है ईसा मसीह दफनाए कहां गए थे. बोलिए. फांसी की सजा दी गई लोगों ने समझा कि मर. जाएंगे. आरएसएस के सर संचालक थे सुदर्शन जी. उन्होंने हमको बताया अंत में उतर आए ईसा. मसीह पैदल चलते चलते गए आज भी कश्मीर में.
ईसा मसीह की समाधि या कब्र है. कहां पर? कश्मीर में जम्मू कश्मीर।. चलिए ठीक। एक जो साधारण सनातनी है उसका. अच्छा और रोम में ईसा मसीह के जो प्रतिमा. है वैष्णव तिलक से युक्त है या नहीं? ईसा मसीह के जो प्रतिमा है रोम में है वो. वैष्णव तिलक से युक्त है या नहीं? उनका. जीवन चरित्र पढ़िए। 10 साल वो कहां रहे? अज्ञातवास में मैंने यह सुना था आपने कहा. था कि 10 साल वो हिंदुस्तान में रहे थे।. हां तीन साल पूरी में रहे.
भगवान शंकराचार्य का प्रादुर्भाव ईस्वी सन. से 507 वर्ष हुआ पूर्व तो 10 साल तक. अज्ञात वास में भारत में ही रहे ना ईसा. मसीह. आ गए आप भी तो हैं ही भारत में हम तो यहीं. के हम तो आपके ही हैं. अच्छा एक साधारण जो सनातनी है महाराज जी. जो शादीशुदा है या दैनिक दिनचर्या में काम. करता है उसे कौन से पूजा पाठ या कर्म करने. चाहिए ताकि उसका धर्म के प्रति भी जो. रिश्ता है वह बरकरार रहे।.
नमाज कितने बार पढ़ते हैं मुसलमान? पांच. बार।. पांच बार। हिंदुओं के यहां विदा उसी की. नकल है या नहीं? सूर्योदय से पूर्व. सूर्योदय काल में, मध्यान काल में, सायं. काल में और अंत में रात्रि में पांच बार. क्यों भूल गए भगवान का भजन? हमारे यहां तो. तदर्थ किल चषितम भोजन बनता है भगवान को. भोग लगाने के लिए। नहीं हम भोजन करते हैं. भगवान को भोग लगा के हम स्वयं करते हैं. भगवान को योग निद्रा लाभ करा के हम जागते.
हैं भगवान को योग निद्रा से जगाने के लिए. स्वतंत्र तो कोई चेष्टा अपने यहां है ही. नहीं. तो वही निवेदित भोजन कर ही. आगे. अच्छा कौन सा ज्ञान विज्ञान जिसको कोई. चुनौती दे दे. सृष्टि की आयु कितनी है अभी पृथ्वी की आयु. कितनी है गीता का आठव अध्याय के अनुसार एक. अरब 97 करोड़ 29 लाख 49 126 वर्ष.
इसको तो आजकल का विज्ञान भी मानता है 31. दिन 10 कर 40 अरब वर्ष तक पूरी सृष्टि की. आयु है। गणित की दृष्टि से देख लीजिए।. व्यवहार की दृष्टि से देख लीजिए। दर्शन की. दृष्टि से देख लीजिए। विद्या कला की. दृष्टि से देख लीजिए। हमारा विज्ञान. सर्वोत्कृष्ट है। उसको समझने की विकसित. करने की आवश्यकता है।. रोज मंदिर जाने की जरूरत है जगतगुरु या. फिर आप जहां पर है वहीं पर अपने घर में यह. हृदय भवन प्रभु तोरा भगवान की अभिव्यक्ति.
का स्थान हृदय. ईश्वर सर्वभूतान हृदय से. अभिव्यंग की अभिव्यक्ति अभिव्यंजक के अधीन. होती है। अभिव्यंजक के तारम से अभिव्यंग. की अभिव्यक्ति में तारतम होता है। विद्युत. की अभिव्यक्ति बल और बादल के अधीन होती. है। बलब बादल के तारतम से विद्युत की. अभिव्यक्ति में तारतम्य होता है।. पुंडरिकाकार. कमल की आकृति का यह यह हृदय है अति तष्ठा. दशांगुलम उसमें ऐसा मामस पिंड है.
पुंडरिकाकार कमलाकार उसमें सुश जो छिद्र. है उसमें परमात्मा को प्रत्येक आत्मा के. रूप में व्यक्त करने की क्षमता है ईश्वर. भूत हृदय से व्यापक ईश्वर की अभिव्यक्ति. हृदय में होती है ज्योति ज्योति तमसा. परमते ज्ञान ग ज्ञान गम सर्वसितम. हृदय भवन प्रोरा तुलसीदास ने लिखा यहां आए. बसे बहुत चोरा माने नहीं मोर निरा से करें. बल जोरा विनय पत्रिका आगे.
महाराज जी मैं फिर से एक बार जैसे मैं. नौकरी पेशा व्यक्ति हूं मैं सुबह उठ के. नौकरी चला हूं शाम को वहां से लौटते हैं. और ऐसे बहुत सारे लोग हैं ऐसे लोग जो. सनातनी है वो बेसिक दैनिक क्रिया में क्या. पूजा पाठ या क्या करें क्योंकि आपसे बेहतर. कोई व्यक्ति है नहीं हर आदमी अलग-अलग. समझाता है। मैं तो समझता हूं आप बहुत. बेहतर हैं। जी. फिर भी अगर आपको बताना हो कि 24 घंटे में. जी. 24 मिनट भी भजन नहीं करेंगे तो जन्म लेना.
ही व्यर्थ है। ठीक बात जीविका है जीवन के. लिए जीवन जीविका के लिए थोड़ी है जीविका. है जीवन के लिए जीवन है जीवन धन जगदीश्वर. की अभिव्यक्ति के लिए प्रत्येक अंश के. आकर्षण केंद्र अंश से ही होता है या नहीं. वृक्ष में फल फूल पत्ते लगे हैं जब उद्गम. स्थान से छुत होते हैं पृथ्वी की ओर गिरते. हैं या नहीं हम इसका अर्थ है प्रत्येक अंश. अपने अंश की ओर आकृष्ट होता है। जीव की. चाह का विषय क्या है? हम चाहते हैं ऐसा. जीवन जहां मौत की छाया ना पहुंच सके। सत.
होकर रहना चाहते हैं। ऐसा विज्ञान जिसको. अज्ञान छू ना सके। हित होकर रहना चाहते. हैं। ऐसा आनंद जो दुख के रूप में परिणत ना. हो सके। हम सर्वज्ञ और शक्ति संपन्न होना. चाहते हैं। हमारी चाह का जो विषय है वही. हमारा मौलिक स्वरूप है। उसी का नाम. जगदीश्वर है।. ठीक है। वर्ण व्यवस्था एक बड़ा सवाल है कि. अक्सर कहा जाता है कि हिंदुओं को बांटने. के पीछे इसकी बड़ी भूमिका है। जाति धर्म. कुल धर्म शाश्वता कुल धर्म सनातन गीता का.
पहला अध्याय जाति धर्म कुल धर्म के स्वरूप. स्वभाव प्रभाव को समझने की आवश्यकता है. मिटाने की। आप मिटा भी देंगे मनुष्य तो एक. जाति है या नहीं अनुकम अनुगत जाति है या. नहीं है और दूसरी बात यह है कि जाति धर्म. मानेंगे तो शिक्षा रक्षार्थ सेवा के. प्रकरण संतुलित रहेंगे या नहीं मातृ शक्ति. का सिर सुरक्षित रहेगा या नहीं हर व्यक्ति. के जीव का जन्म से सुरक्षित हर व्यक्ति का. जीवन दूरसन मुक्त रहेगा या नहीं अभ्यदय.
निशयस का भोग और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त. होगा या नहीं हम इसको नहीं मानेंगे तो. दुर्दशा ही होगी नहीं तो यह एक और विचित्र. भौतिकवादी किनको कहते हैं? जितने. भौतिकवादी हैं उनको पंचभूतों का भी ज्ञान. है क्या? पंचभूतों का भी ज्ञान नहीं है। दूसरी बात. है इंद्र तादात्म अपन व्यक्ति भौतिकवादी. होता है। चेतना विषय शरीर को आत्मा मानता. है। लेकिन इंद्रियों की गति केवल वर्तमान.
तक है। मन की गति भूत भविष्य वर्तमान. तीनों कालों में है। कालातीत परमात्मा में. भी है। इसलिए तैत्री उपनिषद के अनुसार मन. में परमात्मा की अभिव्यक्ति होती है।. मनोमय कोष में तो जितने भौतिक वादी है. इंद्रिय तादात्मपन्न है। भौतिकवादियों का. पंचभूतों का भी ज्ञान नहीं. रहने के लिए भौतिकवादी हैं। नहीं तो ये. कर्म से होती है जाति व्यवस्था या जन्म से. पूर्व कर्म के अनुसार जन्म होता है। जन्म.
नियंत्रित वर्ण होता है। वर्ण नियंत्रित. आश्रम होता है। वर्णाश्रम नियंत्रित कर्म. कर्म से संपुटित तो जैसे कोई व्यक्ति मान. लीजिए ब्राह्मण कुल में पैदा हो गया. पुनर्जन्म के अच्छे कर्मों की वजह से. लेकिन इस जन्म में वो कोई भी पालन नहीं कर. रहा है तो वो भी ब्राह्मण कहलाएगा।. विशेष्य नहीं बदलेगा। विशेषण बदलेगा।. ब्राह्मण ब्राह्मण ब्राह्मण है। ब्राह्मण. कुल में जन्म हुआ। ब्राह्मण उचित आचार. विचार है। ब्राह्मण ब्राह्मण गाय अगर. लंगरी भी है उसको कोई मार देगा तो गौ. हत्या का पाप लगेगा नहीं। लंगरी गाय को भी.
गाय कहेंगे नहीं। कहेंगे। क्षत्रियचित. आचार विचार है लेकिन ब्राह्मण कुल में. जन्म हुआ है क्षत्रिय ब्राह्मण वैश्य उचित. आचार विचार है वैश्य ब्राह्मण शूद्रोचित. आचार विचार शद्र ब्राह्मण विशेष से बदल. रहा है या विशेषण बदल रहा वाल्मीकि जी. पहले क्या थे ब्राह्मण कुल में उत्पन्न. हुए थे जन्म मात्र सद्गुज थे कालांतर में. संस्कार उधरा उभरा और ब्राह्मण ब्राह्मण. हो गए लेकिन जैसे हमारे यहां पर बहुत. खासतौर पर दलित समुदाय हो या पिछड़ा.
समुदाय हो वो छिटक दलित नाम बनती जा रही. दलित नाम किसने दिया मायावती ने किसने. दिया हमने तो अंतज कहा था छोटा भाई. अग्रजवाने बड़ा भाई दलित शब्द किस किसने. कहा था हम लोगों ने कहा था मायावती की देन. है चलिए हम शब्द हर महात्मा गांधी जी ने. हरिजन कहा हरिजन ब्राह्मण नहीं होते क्या. हरिजन जाने प्रीति अति बाढ़ है या नहीं. हरिजन भगवत भक्त वही गांधी जी ने क्या. किया संकोच किया या नहीं ब्राह्मण क्षति. वैसे हरिजन नहीं हो सकते क्या.
अच्छा आजकल हरिजन शब्द का प्रयोग करेंगे. तो हीन दृष्टि से लोग देखेंगे ब्राह्मण. क्षति वैश्य या उत्कृष्ट देखेंगे पहले. हरिजन कहते थे तो उत्कृष्ट समझा जाता था. हरिजन कहेंगे तो आजकल अपकृष्ण बना जाएगा. गांधी जी ने उत्कर्ष किया अपकर्ष कर दिया. उन लोगों का. नहीं नाम से बड़ी समस्या वो जो एक भेदभाव. की थी जिसकी वजह से वो लोग शायद बौद्ध. धर्म में चले गए अभी भी ये ऊपर है ये नीचे. है जी फिर ऊपर है ये नीचे है भेदभाव हटा. दीजिए ये ऊपर है फिर ये नीचे है। फिर ऊपर.
है फिर नीचे है। शरीर में जो भेदभाव पहले. उसको उठा के देखिए क्या होगा? भेद का. उपयोग निर्भेद परमात्मा की अभिव्यक्ति में. होना चाहिए। भेद निसर्ग सिद्ध है। नहीं. उंगलियों में छोटे बड़े का भेद घटा के. दिखा दीजिए।. कट जाएंगे तो फिर इसके अनुसार करेंगे।. इसके अनुसार करेंगे। इसके कहां कट जाएगी? तो भेद जो है निर्भेद परमात्मा तक. पहुंचाने के लिए है। भेद का नाम ही सृष्टि.
है। महाप्रलय में तो सजाति विजाति सुगत. भेद शून्य देश कृत कालकृत वस्तु कृत. परिच्छेद मुक्त सद्घन चघन आनंद घन. परमात्मा ही शेष रहते हैं। उनमें प्रकृति. और प्रपंच एक ही भूत होकर शेष रहता है।. जगने पर फिर भगवान के द्वारा सृष्टि की. रचना होती है। मुगल पर अपनेप कर्म अनुसार. भगवान क्या करते हैं? जीवों को जन्म दे. देते हैं। केवल ब्राह्मण ही हो तो काम. चलेगा क्या? बिल्कुल नहीं। केवल क्षत्रिय.
हो, केवल वैश्य हो, केवल शूद्र हो चारों. में तालमेल चाहिए या नहीं? हम शिक्षा. रक्षार्थ और सेवा के प्रकल्प को. क्रियान्वित करने के लिए तालमेल बिल्कुल. सहमत है। लेकिन जैसे भेदभाव वाली कहानी. आती है। भेदभाव तो आंख और कान में भेद है. या नहीं? भेद जो है उपयोगिता का द्योतक है. या अपकर्ष का द्योतक है। नाक और कान में. भेद है या नहीं? यह भेद जो है भेद का नाम. ही सृष्टि है। अभेद का नाम ही प्रलय है।. उपाय स्वताय भेद का उपयोग करना चाहिए।.
निर्भेद परमात्मा की सिद्धि के लिए। अच्छा. जैसे आप तो हमारे सर्वोच्च व्यक्ति हैं तो. सनातन को जोड़ने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी. आपकी है। अच्छा ऐसा हम मानते हैं कि अगर. आप कहेंगे तो सब एकजुट हो जाएंगे। आप. कहेंगे तो एकमत हो जाएंगे। तो वो लोग जो. हिंदुत्व से थोड़ा भटक रहे हैं या बहुत. सारे लोग हैं खासतौर पर पॉलिटिकल दुनिया. में जो यहां से निकलकर बौद्ध धर्म में जा. रहे हैं। पहले भी आदि शंकराचार्य जी के. दौर में भी यह हुआ था। अभी भी वो कहते हैं. इस चीज को। तो उनको एकजुट करने के लिए आप. क्या संदेश देंगे? पानी जो है ऊपर या आंतरिक विधा से.
पहुंचाया नीचे लुढ़कना स्वाभाविक. के अब सुनो. एक थी टेरेिसा थी यानी हम उसके शिष्या का. नाम निर्मला हुआ वो कहां की थी नेपाल की. थी बाल विधवा थी हम और वो उत्तराधिकारी. बना दी गई हमने अपना प्रतिनिधि भेजा हम. उसने कहा हमारे बिरादरी वालों ने हमारा. अपमान किया हम हमने कहा तुम तो अब हिंदुओं. की हत्या मत करो। उसने कहा बस आज से.
त्रिसा के अनुयाई नहीं सारा काम बन गया।. इसको मालूम निर्मला ने हमारा सारा काम बना. दिया। दूसरी बात है कि. जिन व्यक्तियों को मान लीजिए जिसको आपने. हरजन कहा, किसी ने दलित कहा उनको बना दिया. गया। क्रिश्चियन क्या कहते हैं? विशेषण. क्या लगाते हैं? धर्म मतलब दलित क्रिश्चियन कहते हैं ना हम. तो भेदभाव तो रह ही गया वहां भी परंपरा.
प्राप्त क्रिश्चियन दलित क्रिश्चियन में. भेद है या नहीं बहुत भेदभाव है जाहिर सी. बात है तो मुसलमानों में भी अभी भी चल रहा. है कि अरब का मुसलमान हिंदुस्तान के. मुसलमान एक सैयद मुगल पाठ चार तो है ही हम. और भी बहुत से भेद हैं। क्रिश्चियनों में. तो 100 से ज्यादा भेद हैं। वो लोग अपने. यहां के भेद को मिटा के दिखावे। हमारे. यहां जो भेद है निर्भेद परमात्मा तक. मनोवत्ति को पहुंचाने के लिए शिक्षा. रक्षार्थ और सेवा के प्रकल्प को संतुलित. करने के लिए हाथ पांव में जो भेद है वो.
भेद क्या सब मिलकर काम करते हैं या नहीं. आंख के द्वारा हम देखते हैं पांव के. द्वारा गंतव्य तक पहुंचते हैं या कान के. द्वारा सुनते हैं वाणी के द्वारा बोलते. हैं तालमेल है या नहीं ज्ञानेंद्र कर्म. इंद्री में तालमेल है या नहीं मन में. तालमेल है या नहीं तालमेल बैठाने की जरूरत. है या भेदभाव मिटाने की आवश्यकता. दूसरी प्रेमलाल दासो. हम आजकल देखते हैं जैसे जाकिर नायक हैं. मुसलमानों में वो हमारे धर्म को लेकर बहुत.
कटाक्ष करते हैं और हमारे यहां भी बहुत. सारे लोग अब स्लोली ग्रेजुअली उनको समर्थन. कई बार कर देते हैं। क्या हमारे धर्म में. भी एक आवाज नहीं आनी चाहिए। जैसे उनके. यहां एक आवाज है। उनके यहां जाके देखिए. महिलाओं की क्या दशा है। हमारे यहां जगत. जननी है। उनके यहां महिलाओं की क्या दशा. है? हम देख लीजिए जाके।. अच्छा है कि आपने उन लोगों के यहां के. शादी कर ली आपने? नहीं अभी नहीं की. महाराज। वहां से शादी मत कीजिए।. [हंसी].
उनके यहां मातृ शक्ति का सम्मान है क्या? हम हमारे यहां हमारे यहां है सम्मान कितना. है बहुत ज्यादा सुलभा कौन थी गार्गी कौन. थी मैत्री कौन थी झांसी की रानी ब्राह्मण. की थी घर की थी या नहीं हम खूब लड़ी. मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी. अहिल्याबादी बाई का कम सम्मान है क्या. कितने मंदिरों को बनवाया मातृ शक्ति मातृ. देवो भव हमारे यहां कहा गया इसलिए हमारे. यहां मातृ देवो भव पितृ देवो भव आचार्य.
देवो भव अति देवो भव माताओं को कितना. सम्मान. जग गुरु जी जो घूम देखिए मैं शंकराचार्य. पद पर हूं। कल्पना कीजिए मेरी माता जी कदा. जीवित हो। वैसे शरीर नहीं है। तो अगर माता. जी आ जाए तो मैं शंकराचार्य गद्दी से उठ. के उनको प्रणाम करूंगा। हम इतना आदर. माताओं का हम जो केवल पृथ्वी आयुषता तो. जरी माता कौशल्या जी ने कहा अगर तुम्हारे.
पिता ने राम जी तुम्हारे पिता ने केवल. वनवास भेजा हो वनवास की आज्ञा दिया हो तो. मैं बीटे बीटो पावर विशेषाधिकार का प्रयोग. करती हूं उनकी अपेक्षा मनु जी के अनुसार. 10 गुना अधिकार तुझ पर में मेरा मत जाओ. कदाचित संकेत था विमाता के सहित तुम्हारे. मेरे पिता ने आदेश दिया हो तो मेरे. अपेक्षा उस बेटे पर मेरे बेटे पर विमाता. का अधिकार है। कौन फूट डाल लेगा?
यह है या नहीं? सनातन धर्म में जगतगुरु कोई ऐसी चीज है. जिसे समय के साथ बदलने की जरूरत है? आपातकाल में क्या करना चाहिए? मनुस्मति है. या नहीं? अब आदिनाथ में डुबकी लगाएंगे।. गंगा जी में तो बीमार पड़ेंगे या नहीं? हम. है देश काल परिस्थिति के अनुसार चलने की. आज्ञा है।. पति शूद्र वचरित मार्ग में उतना नियम नहीं. निभ सकता है। सब कुछ है अपने यहां क्या. नहीं है। अच्छा जिन शासकों की हम प्रशंसा.
करते हैं। जिनके शासन की प्रशंसा करते. हैं। वैदिक संविधान मनुस्मृति को. क्रियान्वित किया या नहीं? जब से. मनुस्मृति के प्रति अनास्था उत्पन्न कर दी. गई। तब से हमारा पतन हो रहा है या विकास. हो रहा है।. आ गए। इस देश में कई बड़े मंदिर हैं हमारे. यहां पर जहां पर वीआईपी दर्शन बहुत ट्रेंड. चलता है। जिसके पास पैसा है वो जल्दी. दर्शन कर सकता है और यह परंपरा कई बार जब.
हमें सहूलियू देती है तो हमें तो आनंद आता. है। लेकिन जब बाकी लोगों को हम देखते हैं. तो कई बार मन में आता है कि भगवान के दर. पर अलग-अलग क्यों? जगन्नाथपुरी में ऐसा. नहीं है लेकिन कई बड़े मंदिर हैं जहां पर. बहुत मोटी मोटी रकम भी लग जाती है। तो इस. पर आपका क्या सोचना है? मंदिर का दोष है. या व्यवस्था करने वालों का व्यवस्था करने. वालों का दोष है। इसके खिलाफ मुहिम चलनी. चाहिए। इसके खिलाफ मुहिम चलनी चाहिए। 1000. समस्याएं हैं। इतने व्यक्ति आपके पास है।. 1000 मोर्चे सब मूल को देखना चाहिए। कहां.
भूल है? मूल पर लक्ष्य होना चाहिए। क्या. होना चाहिए? देखा नहीं कहां देख रहे हो यह लगाओ निशाना. कहा था हम इसलिए एक एक समस्या का समाधान. करेंगे कितने व्यक्ति हैं मान लो एक. गृहस्थ को चार साल के लिए जेल में डाल. दिया गया या एक गृहस्थ को हम कहीं जंगल. में जाकर के छोड़ दिया गया हो बेचारा तो. दोबारा नाम नहीं लेगा इसलिए हर मोर्चे पर. युद्ध करने की आवश्यकता नहीं मूल में भूल.
है कहां पर निशाना करें तो काम बन जाएगा. सबसे लड़ने भिजने की जरूरत नहीं ठीक है।. तो मूल समस्या आपको क्या नजर आती है? नेता. नेता अभी आप नहीं बने हैं। उसका समाधान. क्या है? अभिनेता नेताओं से दूर रहें. तो वो तो ठीक है। उसका मूल समाधान क्या. है? फिर थोड़े दिनों में देख लीजिएगा।. कुछ हम ऐसा बड़ा प्लान कर रहे हैं क्योंकि. बहुत सारी छोटी-छोटी समस्याएं जैसे कथा. वाचक आजकल कुछ भी कह देते हैं। व्यासपीठ. के इर्द-गिर्द नाच गाना बहुत चीज हो गया।. बहुत सारे हिंदू धर्म खाने के.
दूध पीने के मजनू अलग होते हैं। रक्त देने. के मजनू अलग होते हैं। हम क्या वो सब कोई. काम आएंगे देश के आ रहे हैं क्या? हम कोई. नहीं उनका सम्मान भी क्या है? हम. आरक्षण पर आपकी सोच क्या है? हमारे यहां. हर व्यक्ति को आरक्षण प्राप्त था या नहीं? बीपी सिंह की बात है ना? हम मैंने कहा था. बीपी सिंह ने लागू किया था या नहीं? मंडल. कमीशन हां बीपी सिंह के देन है आरक्षण वो.
सोचते थे आरक्षण के द्वारा हम अंतिम सा. प्रधानमंत्री रहेंगे उनका मनोरथ तक पूरा. नहीं हुआ उस समय मेरठ में था मैंने कहा था. प्रतिभा की हानि प्रगति की हानि प्रायोगिक. की नहीं प्रशोध की भावना परत तंत्रता पांच. दोष. वर्तमान आरक्षण में पांच दोष है प्रतिभा. की हानि प्रगति की हानि प्रायोगिक नहीं. प्रतिशोध की भावना अंत में परतंत्र देश का. विखंडन हमारे यहां आरक्षण था यानी हर. व्यक्ति की जीविका से सुरक्षित थी इससे.
बढ़िया आरक्षण क्या होगा दूसरी बात है कि. सारे जो कुटीर उद्योग उद्योग लघु उद्योग. थे वो कौन चलाते थे शोध चलाते थे या नहीं. हम जिनको कुचला गया उनको सोचना चाहिए हमने. कुचला क्या अंग्रेजों ने कुचला मुसलमानों. के शासन में कुचले गए चप्पल कौन बनाता था. वस्त्र कौन सिलते थे सारे कुटीर उद्योग. अर्थ के स्रोत जिनको पकड़ा दिया गया उनको.
आर्थिक दृष्ट से विपन बनाया गया क्या. हरिश्चंद्र को खरीदा किसने था काशी जैसी. नगरी में हजारों वर्ष पहले का इतिहास है. कौन किसने खरीदा था डोम राजा ने उस समय की. भाषा में डोमराज आज भी होते हैं तो डोम. राजा ने खरीदा था अगर विपन बनाया गया होता. तो हरिश्चंद्र को खरीदने की क्षमता उनमें. कैसे. शद्र लोग उत्पादन करते थे। उचित मुनाफा. लेकर वैश्यों को दे देते थे। वैश्य उचित.
मुनाफा लेकर सामग्री वितरण कर देते थे।. ₹25 केजी की सामग्री ₹27 में लगभग वैश्यों. के पास चली जाती थी। 28 ₹29 में वह बेच. देते थे। ₹25 केजी की सामग्री आजकल ₹250. पहुंच जाती। महंगाई के कारण यह है जितने. माध्यम बनाएंगे बीच में उतनी महंगाई. बढ़ेगी तो इसका समाधान क्या है समाधान यह. है कट्टी. पहले है निरूपण निरूपण करेंगे कि विकास के. नाम पर रास क्यों है क्योंकि अब तो यह.
बढ़ता जा रहा है 10% ब्राह्मण ईवीएस के. लिए भी कर दी ईडब्ल्यूएस के लिए अब वो कह. रहे हैं प्राइवेट क्षेत्र में भी आना. चाहिए और इसको लेकर तर्क आता है कि यह. सामाजिक आधार पर है आर्थिक आधार पर नहीं. सामाजिक आधार पर क्या है वो कहते हैं कि. हमारे पुरखों के साथ बहुत लंबे समय तक गलत. हुआ। इसलिए सामाजिक आधार पर भी चलना. चाहिए। हां गलत हुआ। यह बतावे ना पहले. भेदभाव का जिक्र करते हैं। वही जो हमने तो. शरीर में भी है। भेदभाव जो है निर्भेद. परमात्मा परमात्मा तक पहुंचने के लिए था।.
भेदभाव भेदभाव में ही था। भेदभाव हमने कहा. ना हजारों वर्ष पहले का इतिहास आया नहीं।. रोम राजा कौन थे? हरिश्चंद्र को खरीदा या. नहीं। भेदभाव क्या? भेदभाव आज नहीं होता।. शरीर में नहीं होता। भेदभाव नहीं करते. हैं। राजा 16 माता के तब कोई भोजन करेगा।. भले अपनी माता ही क्यों ना हो। भेदभाव के. भेद का नाम ही संसार है। भेद का सदुपयोग. होना चाहिए। दुरुपयोग नहीं। इस विषय में. आपने अमित शाह जी से बात की जैसे 370 में. बात की थी। हम 370 में आपने बात की थी।.
आपने भी जिक्र किया। 370 धारा निरस्त हो. गई या नहीं? हां वो आपने जिक्र किया। तो. और कुछ विषय है जहां पर आपने जिक्र किया. अमित शाह जी से या मोदी जी से? किसी से. नहीं किया। वो हमारे पास आए थे अमित शाह. जी उन्होंने कहा ये संभव नहीं है असंभव हो. गया. हम लोग हम अभियान चलाते हैं मार्ग प्रशस्त. करते हैं ना चाहने पर भी अनुगमन करते हैं. क्या. हमारा काम है प्रकल्प तैयार करना मार्ग.
प्रशस्त करना उनका काम माने या ना माने. मानना पड़ता है प्रेम पूर्व अनुगमन कर रहे. हैं वही मैं कर रहा हूं मोदी जी से और. अमित शाह जी से कैसे रिश्ते हैं आपके. रिश्ता हमारा किसी के साथ नहीं है। सब. परिचित हैं। राष्ट्रपति महोदया अभी परिचित. हैं। उड़ीसा के यहां परिचित हैं। जी. राज्यपाल थी तब भी मेरे सभा में थी। मोदी. जी शपथ ग्रहण करने के पहले मेरे पास 45. मिनट तक बैठे थे। अमित शाह अभी भी आए थे।. कहां पर? प्रयाग में। आदित्यनाथ योगी भी.
आए थे। ये सब परिचित हैं। किसी राजनेता से. लाभ नहीं उठाता। आप मोदी जी को डांट देते. हैं कई बार। कई विषयों पर ऐसा सुना होगा. आपने।. तो मोदी जी ने कभी कहा नहीं कि महाराज जी. हमसे आपस में बात कर लिया करो हम ठीक कर. दिया करेंगे आप सार्वजनिक रूप से डांट. देते हो आपसे एक काम में बात करके काम. करते हैं क्या खुलम खुला काम करते हैं हम. खुलम खुला खंडन करते हैं. आप कैसे देखते हो उन्हें प्रधानमंत्री के.
तौर पर कैसा काम कर रहे हैं देखिए उनकी. पत्नी 25 किलोमीटर दूर से यात्रा करके. मिलने आई थी भले उनको संपर्क नहीं. लेकिन उनकी पत्नी को तीन सुरक्षा कर्म. कर्मी दिए गए। मोदी जी की पत्नी होने के. कारण ना भाई बंधु उनके भाई लोग भी हमारे. परिचित हैं। उनका परिवार से संपर्क नहीं. है और अपना कोई कमरा भी नहीं है। हम और. भोजन वस्त्र के अलावा कुछ है नहीं। इसलिए. कम लोग उन पे लट्टू हैं। और क्रिश्चियनों.
को उनके शासन काल में छूट है। मुझे प्रणाम. करते रहो। हाथ जोड़ते रहो और सेवा के नाम. पर हिंदू क्रिश्चियन बनाओ। इसलिए. क्रिश्चियन पर लट्टू है। गोरक्षा गुंडे कह. चुके इसलिए मुसलमानों पर लट्टू है। आरएसएस. के राय हैं इसलिए हिंदुओं पे लट्टू है।. महाराज जी सनातन बोर्ड का बड़ा जिक्र कई. इस बीच में हम साधु संतों से मिले। वो कई. बार कहते हैं कैमरे पर। चार शंकराचार्य. परंपरा से हैं। सनातन बोर्ड की क्या. आवश्यकता है? हमको शंकराचार्य परंपरा से.
हो। उनकी गद्दी को विकसित ना किया जाए।. सनातन बोर्ड की क्या आवश्यकता है? हमारे. यहां तो आरंभ से ही है।. श्रीमन नारायण के बाद में शंकराचार्य का. स्थान था दवां। हम भगवान शंकराचार्य के. बाद मेरा कितना स्थान है? 145वां तो 155वा. स्थान श्रीमन नारायण से है। 1 अरब 97. करोड़ 29 लाख 49 हजार वर्षों की हमारी. परंपरा है। सनातन बोर्ड की पृथक से क्या. आवश्यकता है? तो फिर यह जो फिर मेरा वही. सवाल आ जाएगा कि जो अलग-अलग आवाजें आती.
हैं यह जो सनातन को मानने वाले लोग हैं. जैसे आप तो चलिए हमारे बड़े बुजुर्ग हैं. बट जो आम लोग हैं उनमें एक कंफ्यूजन पैदा. हुआ है कि किसको सुने हम किसको ना सुने. कहां तक आवाज आए क्योंकि हर व्यक्ति. अलग-अलग बात कर रहा है. ऋषणा पुनरा नाम वामर्थो विधा. अगर ऋषि लोग महात्मा लोग व्यवहार में तो. घट को घड़े को घड़ा कहते हैं पट को वस्त्र. को वस्त्र कहते हैं अगर चंडी चे जाए तो. अहिल्या को कहा कि पत्थर हो जा अहिल्या.
पत्थर हो गई या नहीं इसलिए जब चंडी चेतेगी. तो सबकी बोलती बंद हो जाएगी आपकी बोलती. रहेगी. एक हमारे शंकराचार्य जी हैं. अभिमुक्तेश्वरानंद जी आपके होंगे ना उनको. टीवी सोशल मीडिया पर उनको आपने सवाल भी. खड़ा किया था कि उन्हें शंकराचार्य क्यों. कहा गया और टीवी अक्सर टीवी पर सोशल. मीडिया पर शंकराचार्य जी के तौर पर उनके. स्टेटमेंट बहुत आते हैं। मैं कई सारे कथा. वाचकों और लोगों से मिला। वो कहते हैं हम. बहुत कुछ कहना चाहते हैं लेकिन उस पद को.
देखकर छोड़ देते हैं। तो वो भी उनके पद का. जिक्र कर देते हैं। आपने कहा कि वो. शंकराचार्य नहीं है और ये सार्वजनिक तौर. पर आपने कहा था। अच्छा ये क्यों कहा था. आपने? हम थोड़ा चाहते से बताइए और उन्हें. शंकराचार्य क्यों ना माना जाए? आप मान ले।. नहीं मैं आपसे मैं तो वो मानूंगा जो आप. कहेंगे। उनकी गद्दी इनकी गद्दी है।. रूपानंद सरस्वती जी महाराज हम हमारे. गुरुदेव के गुरु भाई थे। हमारे गुरुदेव से. उन्होंने विद्या अध्ययन भी किया था। जिनसे. मैंने विद्या अध्ययन किया उनसे पूर्व हमसे. पूर्व उन्होंने किया। हमारे बहुत परिचित.
वो थे। उन्होंने अंतिम सांस तक किसी को. शंकराचार्य बनाया क्या? नहीं बनाया। हम उनको मालूम था बीमार हैं।. शरीर छूटना है फिर भी नहीं बनाया। लेकिन. दो व्यक्ति को उन्होंने दंडी स्वामी बना. दिया। शायद उनकी कल्पना रही होगी कि एक. शंकराचार्य बनके घूमेंगे। एक बार उनके. जीवन काल में उनके पत्नी बनकर घूम रहे थे।. उन्होंने डांट दिया वक्तव्य दे दिया मेरा. कोई पत्नी नहीं उत्तराधिकारी नहीं। अब. उनसे पूछिए स्वरूप महाराज कहीं मिलते हो.
तो उन्होंने अंतिम सांस तक बीमार रहने पर. भी उत्तराधिकारी क्यों नहीं बनाया? तो फिर जब उन्हें मीडिया यह लिखती है. शंकराचार्य के तौर पर तो एक आप लोग की तरफ. से एक खंडन ऐसा क्यों नहीं होता कि इनको. अगर लिखा जाए जिसका बार-बार खंडन होता है. उसका प्रचार हो जाता है।. क्या जिसका बार-बार खंडन होता है उसका. प्रचार हो जाता है। लेकिन कानूनी. प्रक्रिया आप लोग ले सकते हैं। जैसे बाकी. धर्मों में होता है। अगर कुछ कहा जाए तो.
वो धर्म के तौर पर एक कानूनी प्रक्रिया. लेते हैं। कोर्ट की प्रक्रिया हम. अपनाएंगे। लोअर कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से लोअर कोर्ट यही हमको. कहते हैं। आप. धन हम खर्च करें और उनको नकली सिद्ध करना. चाहे। मैंने पहले कह दिया कि दूध पीने. वाले मजमा अलग होते हैं।. लेकिन जो भ्रामकता फैली है वो अंदर से सब. जानते हैं कौन असली कौन नकली। मोर्चे पर. कौन काम देगा ये भी जानते हैं। असली के तो. ताकत नहीं है। सुनिए हम मैं सिंगेरी में.
रहा हूं। शंकराचार्य होने के पहले 83. दिनों तक उस समय जो शंकराचार्य थे. ब्रह्मलीन शरीर नहीं है। उन्होंने कहा उन. दिन मेरा नाम ध्रुव चैतन्य था ब्रह्मचारी. उन्होंने कहा मेरी नीति सुन लो चार पांच. घंटे अपने साथ मुझे रखते थे. शासन तंत्र के विरुद्ध चलूंगा धनमान खो. बैठूंगा शास्त्र के विरुद्ध चलूंगा तो नरक. में जाऊंगा ना मैं शास्त्र के विरुद्ध जा. सकता ना शासन तंत्र के विरुद्ध मैं तो.
छोटी आयु का था बहुत वर्ष पहले की बात है. मैंने कहा जहां आपको मुंह खोलना चाहिए. वहां मौन रहते हैं कहां जाएगा? ऐ नरक में. भेजता है मुझको।. उन्होंने वक्तव्य दे दिया था। वो कहने की. आवश्यकता नहीं।. बैल की हत्या अनुचित नहीं है। गाय की. हत्या बहुत अजीहत हो गई थी।. इसलिए उन्होंने हमसे कहा था शासन शंगेरी. की परंपरा चल पड़ी है। शासन तंत्र के.
विरुद्ध जाएंगे धनवान खोलेंगे। अब तो यह. भी हो गया कि ब्राह्मणतर को भी दंडी. स्वामी बनाने लग गए। हम अब तो शास्त्र की. भी मर्यादा तोड़ दी गई।. हम मैं उम्मीद करूंगा समाधान आपने आपने. कहा कुछ बड़ा करने वाले आप हैं। तो मैं. उसी उम्मीद में हूं। मैं एक एक जगतगुरु. सवाल मेरे मन में आता है। जैसे आपने कहा. वृंदावन गए थे। आपने कई बहुत समय वहां. गुजारा। वृंदावन जब हम जाते हैं तो वहां. पर खानपान को लेकर बहुत व्यवस्थाएं की गई. हैं कि यहां पर आप नॉनवेज नहीं खा सकते।. मेरे दो सवाल हैं। एक सवाल यह है कि सनातन.
में खानपान को डिस्क्राइब किया गया कि यह. खाना आप नहीं खा सकते हैं और दूसरा जो. हमारे धार्मिक स्थल है अभी भी हम देखते. हैं कि देश में अधिकतर धार्मिक स्थलों पर. नॉनवेज बैन नहीं है। मथुरा वृंदावन में. है। बड़े धार्मिक स्थलों पर नहीं है। जबकि. अगर हम धर्म की बात करें तो वहां पर ये. नहीं माना था। तो दोनों सवालों का जवाब. मैं चाहता हूं आपसे। क्या चाहते हैं? यही. जवाब कि क्या यह बैन होना चाहिए? धार्मिक. स्थलों पर नॉनवेज खाना. शाकाहार हां मांसाहार बैन होना चाहिए।.
बिल्कुल होना चाहिए।. लेकिन देश के अधिकतर बड़े धार्मिक स्थलों. पर चल रहा है। वो धार्मिक व्यापार केंद्र. हो गए।. व्यापार केंद्र हो गए। जैसे मैं अभी काशी. में तो बकरे की हत्या होती है। काशी का. क्षेत्रफल देखिएगा। हम बकरे की हत्या होती. है। मुसलमान लोग भी होते हैं। क्या उनको. मचा देंगे क्या? हटा देंगे क्या? तो यह सही है क्या? गलत होने पर भी प्रवाह है।.
ठीक है। जगन्नाथ पुरी की महिमा पर मैं कुछ. थोड़ा बहुत आपसे जानना चाहता हूं क्योंकि. हम अक्सर पढ़ते हैं कई सारी जब हम मीडिया. में ये न्यूज़ डालते हैं तो आता है कि. ध्वज जो है हवा के विपरीत लहराता है। हां. सच्ची बात है। तो हम चाहते हैं थोड़ा. जगन्नाथ पुरी की महिमा के बारे में हमें. बता दीजिए। आपसे बेहतर कोई साक्षात. ब्रह्मा जी ने अपने चिन्मय कार्य कर कमलों. से दारू ब्रह्म जगन्नाथ आदि की प्रतिष्ठा. की थी। हम. और ब्रह्मा जी ने कहा था स्कंद पुराण के. अनुसार 3 करोड़ हम ब्रह्मा हैं। हम 3.
करोड़ ब्रह्मांड हो ही गए हम जगन्नाथ के. हाथ को जगत पसारे हाथ निराला जी ने कहा था. तो वहां दारू ब्रह्म है। काष्ट से बनते. हैं। जब अधिक मासता मुक्त. भगवान तो भगवान ही है। यहां पर कोई दिव्य. वस्तु डाली जाती है। उसको बताना नहीं।. उसके बाद पुराने जगन्नाथ जी भूमिगत कर दिए. जाते हैं। नए जगन्नाथ जी की फिर प्रतिष्ठा. होती है। हम तो जैसे हम ये सुनते हैं कि.
आज भगवान की तबीयत खराब हुई। इसके मायने. क्या होते हैं? एक दिन स्नान करते हैं. स्नान पूर्णिमा जी लोकवत्त लीला केवल फिर. उनको बुखार हो जाता है। जी फिर. उनको उपचार होता है। उपचार करने वाले होते. हैं वैद्य। वैद भी हमारे परिचित रहे हैं।. वह काढ़ा देते हैं। फिर भगवान स्वस्थ भी. हो जाते हैं। तब लोगों को दर्शन होता है।. ये तो इसकी महिमा क्या है? इसकी व्याख्या.
थोड़ी समझा दीजिए कि इसके पीछे का भाव. क्या है? लोकवत्तु लीला कैवल्यम लोक लीला. का अनुग करना।. एक व्यक्ति थे काशी में हम ब्राह्मण 50. वर्षों तक स्नान नहीं किया था। हम एक दिन. स्नान किया इतना बुखार हो गया मर गए।. जगन्नाथ जी के जब प्रतिमा है, दारू भ्रम. है ना एक बार स्नान करते तो उनको जुकाम हो. जाते हैं। सीधे तो स्नान रोज कैसे. कराएंगे? शालिग्राम को करा सकते हैं। हम.
ठीक है। जैसे वहां पर मंदिर है। मंदिर में. गैर मुस्लिमों और अंग्रेजों को जाने की. मनाही है। क्या शास्त्र के अनुसार हर. हिंदू जा सकते हैं? स्कंद पुराण के अनुसार बोल रहा हूं। हम. मर्यादा का अतिक्रमण करके हम फल चाहते हैं. सासमत हम और विधि से सास मत नहीं मानते हम. तो क्या लाभ होगा तो क्या ये परंपरा हमें. देश के बाकी मंदिरों में भी करनी चाहिए. कौन सी परंपरा यही कि जैसे हम जगन्नाथ.
पुरी जब जाते हैं तो वहां होता है गैर. मुस्लिमों को इजाजत नहीं है अंग्रेजों को. नहीं है तो क्या देश के बाकी मंदिरों में. भी यही परंपरा का निर्वाह होना चाहिए. दक्षिण भारत में क्या है सिलाए हुए कपड़े. पहन के भी नहीं जा सकते हम है या नहीं. सिले हुए कपड़े पहन के नहीं जा तक वहां तो. इतना नियम है पहले हम. दक्षिण भारत में और कठोर नियम है. आ गया ओके ये अभी महाराज जी एक ध्वजा का. एक तस्वीर वीडियो वायरल हुआ था कि चील ऊपर.
जो पताका था उसको लेकर चली गई थी और वहीं. से लोग ये मान रहे थे कि देश में काफी कुछ. अपशकुन हो सकता है। ऐसा है कि सुप्रीम. कोर्ट का निर्णय है हम शंकराचार्य पूरी. पीठ के शंकराचार्य से परामर्श लेके काम. होना चाहिए तो वो लोग हमारे पास आते नहीं. मुक्ति मंडप के स्थाई अध्यक्ष हम हमारे. दृष्टि तो पूरे ब्रह्मांड पर है हम पूरे. भारत पर है हमें क्या कि मान ना मान मैं. तेरा मेहमान वो चाहते हैं शंकराचार्य के. दायित्व नेतृत्व से हम लोग मुक्त रह जो.
करते हैं वो करें हम हस्तक्षेप नहीं करते. साल में एक बार केवल रथ यात्रा के समय. जाते हैं। जगन्नाथ आदि का दर्शन करते हैं।. अकाल मृत्यु क्या होती है? काल का अर्थ. होता है मार्ग। गीता का आठवां अध्याय. उत्तरायन दक्षिणायन दोनों में कोई भी. मार्ग ना मिले। अधोगति हो जाए तो अकाल. मृत्यु। हम शास्त्री मर्यादा यह है। दूसरी. मर्यादा होती है कि.
हमने कल्पना की कि आजकल आयु 70 75 तो कम. से कम होनी चाहिए। छोटी आयु में कोई मर. गया तो कहते अकाल मृत्यु हो गए या. दुर्घटना के द्वारा मर गए। तीन अर्थ हो गए. ना। अकाल मृत्यु का एक अर्थ हो गया. दुर्घटना के द्वारा मर जाना। एक अर्थ है. कि छोटी आयु में मर जाना। दो अर्थ हो गए।. तीसरा अर्थ है काल माने उत्तरायन. दक्षिणायन तत्वज्ञ है नहीं तत्वज्ञ ना. होने पर भी ना उत्तरायण मिला ना दक्षिणायन.
ना सतकुल में जन्म हुआ और दुर्गति हो गई. तो अकाल मृत्यु माने काल माने मार्ग जिससे. अधो. उत्कृष्ट नहीं हुआ अधोगति को प्राप्त हुआ. तो अकाल मृत्यु अकाल मृत्यु के तीन अर्थ. हो गए. हमारे यहां पाखंड क्या होता है शास्त्र. गतिविधि का नाम पाखंड. जिन पाखंड विवाद हो लिप्त लुप्त हो सद. ग्रंथ दम भिन्न निज मत कल्प प्रकट किए.
बहुपंथ पाखंडवाद. पाखंडवाद का क्या होता है स्नान तो किया. नहीं. एक दिल्ली में उन दिनों ये सब गर्म पानी. आदि व्यवस्था नहीं होती थी एक दिल्ली में. एक पिता ब्राह्मण ने अपने बेटे से कहा. सहन किया हां झूठ बोला यानी वो दिखा. तो गीले नहीं थे तूने स्नान नहीं किया. उसके बाद इतना चतुर निकला सबसे गीला कर. लेता.
काल का अर्थ हुआ मार्ग यात्र काल टोना. मृत्यु काल का अर्थ उत्तरायण दक्षिण मार्ग. भी होता है काल का अर्थ असमय में मृत्यु. भी है काल का अर्थ यह भी अकाल मृत्यु का. दुर्घटना से मौत कल्पना की जाति का दोगति. होगी. जो नए हमारे अभी अभी कथावाचक आ रहे हैं. जैसे बागेश्वर जी हैं। उन पर क्या सोच. रखते हैं आप? कौन आ रहे हैं?
क्या कहते हैं? धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री. वो क्या कहते हैं? काफी चर्चित हैं। काफी. भीड़ उनके पीछे इकट्ठा होती है। कहते क्या. है वो? वो तो आपको झुक कर प्रणाम करते. हैं। लेकिन उनके उनको देखने के दो नजरिए. इस देश में। उनकी माता ने भी हमारे लिए. भोजन बनाया था। जी उनके घर में लेकिन वह. जो है भाजपा के प्रचारक हैं या नहीं. करीबिया तो है उनकी प्रचारक भी हैं हम. दूसरी बात है कि धीरेंद्र है ना धीरों में.
धैर्य टूट गया या नहीं एक राजनीता. राजनीतिक दल के प्रचारक हो गए दूसरी बात. उन्होंने क्या कहा जातपात की करो विदाई हम. सब हिंदू भाई भाई हम हमने कहा कि. मनुष्य पशु की करो विदाई गधी से करो सगाई. गधी से सगाई कर लो वो भी तो प्राणी है ना. आपका आशीर्वाद लेने कभी वो आए तो आए थे. हां आए थे कई बार आए.
कई बार आए उनके पीछे भी भीड़ आती है। लोग. कहते हैं कि वह भी काम कर रहे हैं। आप हम. किसी की निंदा नहीं करते हैं। मान लोग. कब्र की पूजा नहीं करवाते हैं। मुल्लाओं. के रूठे बर्तन का पानी नहीं पीते उससे तो. अच्छा ही है या उससे तो अच्छा ही है बुरा. क्यों कहे और बदल भी सकते हैं अवसर के. अनुसार. और कोई कहने में और सरकार हो जाए तो उसका.
भी अनुगमन कर सकते हैं धीरे तो नाम है ना. पर धैर्य तो स्खलित हो जाता है ना तो नाम. उनका बदलवा दिया जाए आप जो नाम रखे वही हो. जाएगा अब आप बड़े हमारे बुजुर्ग हैं आप. बता दें कि जो हम उनको उनसे कहा जाए अपने. नाम के अनुकूल व्यवहार कीजिए। ठीक है? बदलवा क्यों नहीं? ठीक है। नाम जो आपको. रखा गया है धीरों में इंद्र श्रेष्ठ हम. धैर्य मत तोड़िए। धैर्य का फल मीठा होता. है। ठीक है। मुरारी धर्म का पहला अक्षर. धरते हैं। धैर्य वह पत्नी मर गई फिर भी.
असौच नहीं। हां वही मैं मुरारी बापू आ रहा. था क्योंकि आपने जिक्र किया। उन्होंने एक. बार मंच शैली मौला भी किया था। मैंने उनका. भी पडकास्ट किया था। उन्होंने अपना एक. वर्जन दिया। लेकिन अभी एक घटना को लेकर वो. चर्चा में है कि उनकी पत्नी की मृत्यु हो. गई और उसके बाद वो कथा कर रहे थे। आप कैसे. देखते हैं मुरारी बापू को? जैसे आप देखते. हैं अंदर से. जैसे आप अंदर से देखते हैं। क्या राय है. आपकी? उनको सब पर राय व्यक्त करना उचित. नहीं है। उनका हृदय क्या कहता है? हम वो.
फिर कभी सन्यासी कह देते हैं मुझ पर नियम. नहीं लागू होता।. यह भी तो कहते हैं मैं सन्यासी हूं फिर. कुछ कहते तो अब हर व्यक्ति की समीक्षा. हमसे करवाना उचित नहीं मेरे पास आए थे आए. थे ना आते हैं हमारी डांट भी सह लेते हैं. हंसते रहते हैं उनकी विशेषता यह है कि हम. अगर आलोचना भी कर दें तो आएंगे हमारे पास. बैठे रहेंगे मुस्कुराते रहेंगे हम तो हम.
सोचते हैं अब क्या निंदा करें क्या आलोचना. करें. महाराज जी जैसे बाकी धर्म है बौद्ध धर्म. हुआ मुस्लिम धर्म हुआ ईसाई धर्म हुआ हमारा. धर्म उनमें से कैसे अलग कैसे श्रेष्ठ है. थोड़ा इस बारे में हमें और बताइए. वो लुढ़क गए हम लुढ़के नहीं इसलिए श्रेष्ठ. है. लुढ़क गए लुढ़कन हम लुढ़के नहीं इसलिए. श्रेष्ठ है धर्म कोई धर्माभास होता है.
धर्म सब तो नहीं होता हम सूता में लिखा. धर्माभास धर्म के लक्षण से रहित हो धर्म. से लिखा पर लक्षित. अच्छा इससे क्या कहीं ना कहीं तो पकड़े. हुए हैं ना कोई लिंक जी पूर्व जन्म. पुनर्जन्म को मानते या नहीं मानते हैं. परलोक को मानते हैं नहीं इतने अंशों में. तो कुछ पकड़े हुए हैं ना उसको छोड़ के. देखें कौन पूछता है. किसी अंश में धर्म को पकड़े इसलिए तो पूजा.
जाते हैं पूर्व जन्म को पुनर्जन्म को. परलोक को मानते. पूर्व जन्म ना माने पुनर्जन्म ना माने. परलोक को ना माने तो क्या होगा? ठीक है महाराज जी सेकंड लास्ट सवाल जब मैं. जगन्नाथ जी को लेकर पढ़ता हूं इंटरनेट पर. क्योंकि जानकारी हमें उसी माध्यम से मिलती. है तो कई बातें आती है जो मैंने लिखी है. आप बता दीजिएगा ये कितनी सच है जैसे एक. आता है कि ध्वज जो है वो हवा के विपरीत. लहराता है। ठीक है और शिखर की परछाई जमीन. पर नहीं दिखती है। देख लीजिए जाके आगे. मंदिर के ऊपर पक्षी विमान नहीं गुजरते।.
इसके अलावा एक ये चलता है कि समुद्र की. लहरों की आवाज मंदिर के अंदर नहीं सुनाई. पड़ती। हमेशा वहां पर जो भोग है रसोई वो. चलता रहता है। ये सारी बातें सत्य है।. हमेशा भोग चलता रहता है। समय. मक्का में भी शिवलिंग था। हम मक्केश्वर. महादेव थे।. मक्केश्वर महादेव मूल में नाम है ना हम. शिव जी का तीर्थ अच्छा जितने मुसलमान हैं.
मक्का को पवित्र मानते हैं। वहां जाकर. शिवलिंग लाते या नहीं? शिवलिंग लाते हैं। अपने घर में आरती भी. दिखाते हैं। धूप भी दिखाते हैं। बाहर से. कहते हैं हम हिंदू नहीं है। हिंदू नहीं है. तो मक्केश्वर महादेव शिवलिंग क्यों लाते. हैं? घर में आरती दिखाते हैं या नहीं? अंदर की फूल पट्टी है। मैं मुसलमान नहीं. मुझे अंदाजा नहीं है। मैं कौन मुसलमान. हूं? जानकारी रखने के लिए मुसलमान होना पड़ेगा.
क्या? मक्का में जाते हैं जरूर शिवलिंग. लाते हैं। जी और वो अपने घर में रखते हैं।. आरती उतारते हैं। बाहर से कुछ भी कहे वो. भगवान शिव के उपासक तो होते ही हैं। ठीक. है। चैतन्य महाप्रभु का जिक्र कर लेता. हूं। पूरी में कई साल रहे और बाद में. उनको लेकर भी मुझसे कई लोगों ने कहा कि. आपसे थोड़ी चर्चा करें। नामी सन्यासी थे।. गौरी संप्रदाय को कहां लाकर रख दिया. दनामी सन्यासी थे ना दंडी स्वामी थे कौन.
नाम था क्या नाम था श्री कृष्ण चैतन्य. भारती भारती से दशनामी सन्यासी थे. जगतगुरु जैसे अभी स्कॉन हो गया या बाकी. परंपराएं हैं वो विश्व भर में सनातन का. प्रचार प्रसार कर रही हैं. ये उनके जरिए प्रचार कई लोग ये कहते हैं. कि यह मुख्य काम जो था यह स्कॉन वालों के. जो शिष्य हैं अपने को स्कॉन वालों का. शिष्य बोलते या हिंदू बोलते स्कॉन वालों.
का शिष्य हूं हम हम तो जब वो व्यापारी बन. के आए थे तब तो बादशाह बन गए और लाखों. हिंदुओं के शिष्य गुरु हो गए हैं। अब क्या. होगा हिंदुओं का इस पर सोच सकते हैं।. दूसरी बात अभी बांग्लादेश में हम उनके. संप्रदाय के संत थे। उनको हिंदू मान के. खदेड़ा गया या नहीं? खदेड़ा गया। भले वो. अपने को हिंदू ना कहते हो। हमला हुआ हमला. हुआ या नहीं इस कौन मान के हुआ या हिंदू. मान के हुआ? हिंदू मान के हिंदू मान के.
अपने को कहे या ना कहें दूसरे लोग तो उनको. हिंदू ही मानते हैं। जिससे कई परंपराएं. निकली है स्वामी नारायण भगवान की या वह. हमारे जिले जते हैं जहां मेरा गोंडा में. जन्म हुआ है स्कॉन का आप जिक्र कर रहे हैं. तो ये सनातन के लिए ठीक है प्रचार प्रसार. हो रहा है या ये एक समस्या. ऐसा है कि अपने पंथ ये सब चलते रहते हैं. उसमें क्या है. पंथ किसको कहते हैं प्रशस्त राजमार्ग तक. ले जाए पगडंडी भी हम और राजमार्ग पर ना ले.
जाके भटका दे उसका पंथ नाम नहीं. दमभ निज मत कल कल्प कर प्रकट किए बहु पंथ. पाखंड विवाह विवाह हो लुप्त हो सद ग्रंथ. पंथ का अर्थ है सचमुच जो पंथ है जैसे कबीर. पंथ है दादू पंथ है ये सब क्या पंथ है. प्रशस्त राजमार्ग तक ले जाने वाली पगडंडी. वो तो ठीक है भटकाने वाले तो पंथ अलग होते. हैं पंथ के दो भेद हो गए. कबीर पंथ नानक पंथ ये सब क्या है.
मार्ग तक ले जाने वाले. जगे धर्म हिंदू कहा था या नहीं गोविंद. सिंह ने क्या कहा था खालसा पंथ है हिंदू. धर्म है हम पंथ का मतलब हुआ कि जो पगडंडी. प्रशस्त राजमार्ग तक ले सके खालसा को पंथ. कहा था हिंदू धर्म कहा था गोविंद सिंह जी. ने. कार्यक्षेत्र उनका महाराष्ट्र जन्म बिहार. में हुआ था हम आगे किसको सुने किसको ना. सुने जिसको आप सुनते हैं समीक्षा के लिए.
या आचरण के के लिए हम. उनको स्वतंत्रता समीक्षा के लिए या आचरण. के लिए तो ये कैसे तय हुआ एक आम व्यक्ति. तो अगर कोई भगवा चोले में है उसे ये मान. रहा है कि वो गुरु है तो कैसे माने कि यह. सही गुरु है या गलत गुरु है सही गलत का. फर्क कैसे करें रावण किस रूप में आया था. सीता जी के पास. दंडी स्वामी त्रिदंडी एक दंडी नहीं हम. सीता जी ने कहा लेकिन जब उसने मर्यादा का.
पालन किया बाद में भगवा कपड़ा हटा के मैं. रावण हूं। उसने भी यह ध्यान रखा कि वेष को. लज्जित ना करो। बेश का उपयोग तो किया. लेकिन समय आने पर बता दिया मुझे सन्यासी. मत समझिए।. सुभद्रा हरण में अर्जुन त्रिदंडी स्वामी. बन गए थे। एक दंडी नहीं।. सुभद्रा को ले लिया। क्योंकि उन्हीं का. अधिकार था। लक्ष्मी जो है नारायण के पास. ही जा सकती। लेकिन फिर क्या हुआ? लक्ष्मी.
को हो गया। अर्जुन क्या हो गए? अर्जुन. अर्जुन ही हो गए। कभी-कभी अच्छा काम करने. के लिए अपहरण भी हो जाता है। सुभद्रा का. अपहरण हुआ था।. आखिरी सवाल महाराज जी क्या विरासत आप देना. चाहते हैं इस देश को? सुसंस्कृत सुशिक्षित. सुरक्षित संपन्न सेवा प्रण स्वस्थ सविता. प्रद व्यक्ति और समाज की संरचना. बस आपका आशीर्वाद चाहिए। हम.
आपको प्रणाम। आपने इतना समय दिया। अच्छा. और हम चाहते हैं अगर कोई संदेश आप. जाते-जाते देश को भी देना चाहे जो दे दिया. पर्याप्त आशीर्वाद तो हमको दे दीजिए कम से. कम भगवान की ओर से. जय. बढ़िया.
