Unplugged ft. Sanjay Singh | Arvind Kejriwal | Swati Maliwal | Dhruv Rathee | Aam Aadmi Party
कि संजय सिंह टिकट बेचते थे ब्लैक में. क्या कहानी कहां से ये उठा कम से कम तीन. 350 लोगों ने एक ही सवाल पूछा मुझसे कि. संजय सिंह जी से जरूर पूछेगा कि क्या कभी. जीवन में उन्होंने शुभम टाकेश के बाद टिकट. बेची मतलब इन लोगों के कहने से ना तो. अखिलेश जी चोर हो जाएंगे ना उनके. कहने से मैं कोई टिकट ब्लैकिया हो जाऊंगा. इस पे एक सीबीआई की जांच करवाइए मैं तो कह. रहा. हूं एक ईडी सीबीआई इनकम टैक्स डिपार्टमेंट. जाकर शुभम टाकीज पे हमला कर दे और रिकॉर्ड. उठाए देखे.
मैं तो ये कह रहा हूं क्या जेल से सरकार. चलाना की एक परंपरा शुरू करना सही है. क्योंकि ये लॉन्ग टर्म में हर पॉलिटिकल. पार्टी को एक फायदा देगी और नैतिकता. सियासत से खत्म हो जाएगी अरविंद केजरीवाल. इस्तीफा दे देंगे इस पार्टी को तोड़ने की. प्रक्रिया और तेजी से जुट जाएगी बीजेपी ये. भी एक खतरा है हां ये ये एक लॉजिकल पॉइंट. आपका है कि पार्टी ना टूटे इसलिए केजरीवाल. मुख्यमंत्री है फिर दूसरा क्वेश्चन इस पे. तो फिर क्या सुनीता केजरीवाल जी को हम. रावड़ी देवी कह सकते हैं अन्ना हजारी जी. से रिश्ते हैं अभी रह रह को बहुत कोसते.
हैं आप लोग को स्वाति मालीवाल जहां बैठे. यहीं बैठी थी उन्होंने कहा कि मुझे इस. पार्टी ने शेरनी कहा था संजय जी सामने आए. बोले गलत तो हुआ फिर उसके बाद सन्नाटा हो. गया आम आदमी पार्टी में एक जमाने में. वॉलेटर रहे ध्रुव राठी उन्होंने नाम लेकर. बोला यही कि व आम आदमी पार्टी के वॉलेटर. थे अभी भी वो जुड़े हुए हैं ध्रुव राठी से. कोई काहे ऐसे मामले में क्यों बात करेगा. सिसौदिया आतिशी में क्या ऐसा है जो संजय. सिंह में नहीं कि बीजेपी नहीं देख रही. भैया य कोशिश कर कौन फायदा नाना दिल्ली की. पानी की समस्या कब ठीक हो रोंगिया. मुसलमानों को लेकर बड़ा आरोप लगता है कि.
आप लोगों ने बसवा दिया वोट बैंक के लिए. भाई हमारे मोदी जी बांग्लादेश की आजादी के. योद्धा हैं हमने जनहित में और जनता की. अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए अनुकरणीय. काम किया है हॉस्पिटल में मोहल्ला क्लीनिक. में बिजली फ्री देने में पानी फ्री देने. में बजट मुनाफे लाने में तो गवर्नेंस की. अगर आप बात देखें एक आंख का अस्पताल थोड़ा. और अच्छा करवाना चाहिए किस बात के. लिए अगर कभी राघव चड्ढा ने बीजेपी जवाइन. की क्या संजय सिंह को डिसपिटर निश्चित. होगी सिंह ने मोदी जी को नमस्ते किया मोदी.
जी ने जवाब भी नहीं दिया एक बार मैंने. नमस्ते करने की कोशिश 6 साल में की थी. जिसको उन्होंने बड़ी दृढ़ता के साथ. अस्वीकार किया आप लोग हर बार विधानसभा. जीतते हैं लोकसभा हार जाते हैं ये येको. क्यों नहीं क्रैक कर पा रहे आप लोग फिर. विधानसभा जीतेंगे फिर विधानसभा. जीतेंगे तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम. गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे यह दावा. किताबी है.
नमस्कार मेरा नाम शुभंकर मिश्रा है मैं. अवत से आता हूं यह शेर जो मैंने आपको. सुनाया यह भी अवत के मशहूर शायर थे अदम. गुंडी साहब उनका शेर है और मेरे जो मेहमान. है वह भी अवत से हैं क्योंकि शेर सियासी. था तो शख्सियत जो है वह भी सियासी है संजय. सिंह जी बहुत-बहुत स्वागत राज्यसभा सांसद. आपके दर्शकों को. नमस्कार सुल्तानपुर वहां से यात्रा शुरू. होती दिल्ली आती है पहले तो हम अवत से. सवाल शुरू करते हैं बाकी सियासत तो करते. रहेंगे ये जो शेर था इसी शेर के इर्दगिर्द.
आपकी सियासत की शुरुआत हुई थी. सुल्तानपुर लोग जानते नहीं बहुत. बैकग्राउंड के बारे में बड़ी दिल्ली की तो. सबने देखा कि संजय सिंह बे बाकिस बोलते. हैं डरने वालों में से नहीं है अन्ना. आंदोलन से लेकर शुरुआत कहां से हुई थी. सियासत कहां से आ गई शुरुआत ऐसे हुई कि जब. मैं 94 में आया सुल्तानपुर तो मैंने एक. छोटी सी संस्था बनाई आजाद समाज सेवा समिति. के नाम से और इसके पीछे क्या सोच थी. क्योंकि आमतौर पर जिस इलाके से हमर आप आते. हैं वहां पर लोग सरकारी नौकरी देखते हैं.
या तो रुतबा देखते हैं या सरकारी नौकरी तो. सरकारी नौकरी पिताजी की भी इच्छा थी कि. मैं सरकारी नौकरी करूं मैंने माइनिंग. इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया उड़ीसा से. उसके बाद वो चाहते थे कि मैं कहीं जूनियर. इंजीनियर बन जाऊं किसी कोल माइंस में उनकी. तो इच्छा थी और परिवार के लोग भी यही. चाहते थे लेकिन फिर नौकरी की ओर ध्यान गया. नहीं यह था कि कुछ समाज के लिए देश के लिए. कुछ करना बहुत अच्छे नहीं थे कितना नंबर ब.
कितना नंबर आया था तो मुझे लगता है कि. सेकंड क्लास ही रहा है हमारा हमेशा नकल. हुई थी उस साल नकल हुई थी नहीं नहीं नकल. लोकल नहीं हुई थी नकल लोकल से मैं पास. नहीं हुआ हूं तो हम लोग छोटे थे बड़ी. चर्चा चलती थी कि कल्याण सिंह के जमाने. में नकल नहीं होती थी उसके अलावा इनकी. सरकार में खूब नकल होती थी इनके में खूब. होती थी आप किसकी सरकार में पास किए थे. मैं पास किया था 87 में तो आप समझ लीजिए. उस समय कांग्रेस की सरकार रही लेकिन नकल.
मैंने किसी भी सब्जेक्ट में कभी नकल नहीं. किया चाहे वो अपनी डिप्लोमा की पढ़ाई की. या कॉलेज की हां वो तो सेकंड डिवीजन बता. खुद ही आप बता रहे हैं सेकंड डिवीजन हा. तो आया तो नौकरी में तो मन नहीं था कि. नौकरी करना है और फिर कोल माइंस की नौकरी. अपने घर से दूर रहकर पढ़ाई की थी मैंने. उड़ीसा में क्योंझर में मैं पढ़ाई की थी. मैंने तो जब वहां से आया तो यह लगा कि अब. सुल्तानपुर में ही रहे माता-पिता जी के. पास.
वहां हमने एक संस्था बनाई आजाद समाज सेवा. समिति उसमें तमाम वह लड़के जो ज्यादातर. उसमें. कोई सिविल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा होल्डर. था. कोई बीए पास था कोई एमए पास था ऐसे कुछ. नौजवान लोगों ने हम लोगों ने बनाई व. संस्था और उसमें सबसे पहले हमने हॉस्पिटल. में काम करना शुरू किया सुल्तानपुर का जो. डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल है वहां पर गरीबों. की सेवा. करना मुझे याद है एक लड़का था जस्सू वो.
करीब दो साल तक हॉस्पिटल में एडमिट रहा तो. रोज जाके उसका और मानसिक रूप से विक्षिप्त. था रोड एक्सीडेंट में वहां पर एडमिट हुआ. फिर वहीं रह गया दो साल तक और फिर उसकी. खूब सेवा की हम लोगों ने फिर उसके घर ले. गए उसको पहुंचाने के. लिए इसके. बाद गर्मियों में पौसा चलाते. थे ठंड में इन सबके बीच में वो नेता वाला.
कहां नेता वाला कहीं नहीं था वही मैं आपको. बताने की कोशिश कर रहा हूं जब शुरुआत की. तो राजनीति से बिल्कुल िड़ थी मतलब यह. लगता था कि यार दुनिया में सबसे बुरे लोग. अगर होते हैं तो राजनीति वाले होते यह. आपसे मैं बिल्कुल ईमानदारी से बता रहा हूं. यह लगता था कि सब कुछ जिंदगी में करना है. राजनीति नहीं करना. है तो हॉस्पिटल में जाते थे वहां झाड़ू. लगाना है सफाई करना है मरीजों की सेवा. करना है करतार के यादव जी थे एक शहीद.
स्मारक सेवा समिति के हमारे एक साथी थे. अशोक सिंह जी एक शमशाद भाई थे तो हम लोग. जो लावारिस मरीज होते थे उनकी सेवा करना. कि खर्चा पानी कता था इसमें इसमें लोगों. का ही कंट्रीब्यूशन लेके संस्था के लिए. दान देते थे लोग और 16 साल तक मैंने रेड़ी. पटरी वालों के लिए काम किया उससे फिर जो. रेड़ी पटरी के लिए लोग काम करते थे पूरे. देश भर में वह कनेक्ट हुए यूपी में जिस. दौर की आप बात करें 80 के एंड की इस दौर. में बीजेपी के विचार धारा बड़ी तेज पॉपुलर.
हो रही थी नहीं ये 97 के आसपास मेरी. मुलाकात उनसे हुई हां ये मैंने शुरुआत. वहां से की जब आपने अपना सफर शुरू किया कि. अब चलो आंदोलन शुरू करते हैं धरना. प्रदर्शन वहां से धीरे-धीरे बीजेपी का. राइज हो रहा था इनफैक्ट लेट 90 में बीजेपी. अपने तरफ बढ़ रही थी 99 तक वो पीक पर गई. थी अपने उस दौर में बाद में फिर डिक्लाइन. शुरू हुआ था जिस कास्ट से आप आते हैं. आमतौर पर यूपी बिहार में इसमें बड़ा. बीजेपी की तर इंक्लिनेशन होता है क्या. मेजर डिफरेंस था कि संजय सिंह को समाजवादी. सोच की तरफ झुकाव गया और बीजेपी की जो सोच. उस दौर में थी क्योंकि दता ठाकुर के नेता.
मनाता है कि बीजेपी और सपा दोनों बराबर है. अलग-अलग नेता अलग-अलग दौर में तो आप उधर. क्यों नहीं गए इधर क्यों चले गए जो आप कह. रहे हैं मेरी बिरादरी का सवाल ठाकुर. बिरादरी का सवाल नहीं मैं जानना चाहता हूं. कि काे सा इंक्लिनेशन क्यों नहीं हुआ मैं. बता रहा हूं जब मैंने पढ़ा इन लोगों को हा. तो मुझे लगा कि नहीं यह विचारधारा ज्यादा. अच्छी है हम और बीजेपी जिस तरीके से समाज. को बांटने का काम करती है वो मैं मैंने. पसंद नहीं किया ठीक है और मेरी शिक्षा.
दीक्षा मैं आपको बता दूं शिशु मंदिर में. हुई मैं पढ़ाई शिशु मंदिर से मैं किया हूं. आरएसएस के स्कूल आरएसएस के स्कूल में. पांचवीं तक मैंने वहां पढ़ाई की तब मुझे. पता ही नहीं था कि भाई ये आरएसएस है कि ये. शिश मंदिर है और वहां कभी किसी ने नफरत की. बात नहीं की मैं यह फ्रैंकली कहना चाहता. हूं हां शिश मंदिर को लेक एक बड़ी धारणा. है कि आरएसएस का स्कूल है विद्या मंदिर. ऐसा कुछ वहां नहीं हुआ एक घटना मुझे जरूर. याद है कि गांधी जी की जयंती वहां पे नहीं. मनाई गई थी तो मेरे पिताजी मुझे साइकिल प. बिठा के लेकर गए और प्रिंसिपल से उन्होंने.
बहस की अब उनका कहना था कि हमने गांधी. जयंती मनाई और पिताजी ने कहा कि नहीं फिर. यह बच्चा घर कैसे आ गया और इसको लेके एक. घटना मुझे याद है बाकी मुझे कभी याद नहीं. है कि वहां कोई हमें नफरत की शिक्षा दी गई. हो पांचवीं तक मैं वहां पढ़ा अब की शिशु. मंदिर के बारे में मैं नहीं कह सकता लेकिन. जिस शि मंदिर में. ब और उस उस जमाने में हमारे यहां दो स्कूल. होते थे एक कॉन्वेंट होता था एक शिशु. मंदिर होता था जो बाद में विद्या मंदिर बन. जाता था जो बाद में विद्या मंदिर बन. विद्या मंदिर में पढ़ा नहीं तो मैं फिर.
महात्मा गांधी स्मारक इंटर कॉलेज है वहां. का वहां फिर चला गया तो उसी में हमारे. पिताजी पढ़ाते थे फिजिक्स के लेक्चरर. थे तो. यह धारणा थी कि भाई बाद में जैसे जैसे. समझदार हुआ बड़ा हुआ कि भ ये तो नफरत की. बातें करते हैं समाज में आपस में ब बा. बीजेपी प आएंगे सर हम अब अब शुरुआत करते. हैं एक बड़ा अच्छा आपको शेरो शायरी का शौक. आपको भी है एक बड़ा अच्छा शेर हमने कहीं. सुना था कि नहीं अवधी का एक शेर मैं भी. आपको सुना.
तो हमारे रफीक सादा साहब थे अयोध्या के. फैजाबाद के तो उनकी एक लाइन है कि बरखा मा. विद्यालय ढगा हा और वही के खाले टीचर रगा. और तोरन पूत के ठेकेदारी जियो बहादुर. खद्दर धारी तो जो जो खद्दर धारी लोगों पे. नेताओं प कटाक्ष हुए हैं वो सब हम लोग उस. समय बड़ा याद कर कर के नेताओं को टारगेट. करते थे और फिर बाद में जब उस एक शेर हम. भी आपको सुनाते हैं शेर है कि सियासत कदर. आवाम पर एहसान करती है पहले आंखें छीन है.
फिर उन्हीं को चश्मा दान करती है क्या बात. है अब ये शेर इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि. संजय सिंह जब ये कहते हैं कि मैं जिस. व्यक्ति से इंस्पायर हुआ वो जनरल कोच से. आया उन लोगों से इंस्पायर हुआ जो इक्वलिटी. की बात कर रहे थे लेकिन सादगी में जीवन जी. रहे थे संजय सिंह की शुरुआत भी आम आदमी. पार्टी से ऐसे हुई पूरा देश आपके साथ आया. इंस्पायर्ड हुआ लेकिन बीते कई सालों के. बाद जब ये आरोप लगते हैं कि एक शीश महल. बना है जिसमें फलाने इतने लाख रुपए के. शीशे लगे हैं टाइल्स जो है इस देश है.
बाथरूम में इतनी फैसिलिटी है यह बटन दबाइए. वो होता है तो आपको लगता नहीं कि यार कहां. से शुरू किया था किसको देख के इंस्पायर. हुआ था और अब जो आरोप लग रहे हैं यह तो. वही है जिसका हम विरोध करते आए थे नहीं. बिल्कुल मैं यह कहूंगा कि जब आप पद की. जिम्मेदारियों पर जाते हैं अलग-अलग. जैसे आज मैं एक सांसद हूं हम सांसद के तौर. पे हमसे बहुत सारी अपेक्षाएं हो जाती हैं. लोगों की राजनीत की यह जो व्यवहारिक. दिक्कतें हैं जब आप उस पद पर पहुंचते हैं.
तब आपको पता चलती है आपके पास लोग आते हैं. कि भाई यह छ यह काम है यह काम है इसके लिए. हमें चंदा चाहिए घर में शादी है उसके लिए. मदद चाहिए 13वीं है उसके लिए मदद चाहिए. आपको 20 लोग 25 लोग आ गए आपके गांव से. आपको उनको रुकने का इंतजाम करना है खाने. का इंतजाम करना है यह सब व्यवहारिक. दिक्कतें हैं राजनीति की जिसके कारण. आपको यह मैं कह रहा हूं कि आप ईमानदारी से. भी पूरी ईमानदारी से भी राजनीति करेंगे तो.
वो सारे संसाधन आपको इकट्ठा करने होते हैं. भले लोगों से एक बड़ा महीन अंतर होता सर. कि ये जरूरी है एक होता है जरूरत का सामान. एक होता है मजबूरी एक होता है ऐशो आराम का. सामान जैसे आपने कहा कि अब एक वो जनरल कोच. से आए हो सकता है स्लीपर से आते हो सकता. है थर्ड एसी से आ जाए यहां तक समझ में आता. है लेकिन अगर कोई नेता फर्स्ट एसी से निकल. कर आ रहा है तो फिर उसमें वो बहाना लगने. लगता है कि यार आप थोड़ा सा बेमानी कर रहे. हैं क्योंकि ये बार-बार मैं कह रहा हूं आम. आदमी पार्टी का नाम ही ऐसा है आम आदमी. पार्टी अब आप देखिए आपने पूछा तो बता द और.
क्योंकि आप उससे इंस्पायर्ड हुए मैं आपकी. कहानी को सुन रहा था तो मैं अपने आप को. संजय सिंह इमेजिन कर रहा था कि एक आदमी. आया जिसने जो जनरल कोच था और मैं हैरान हो. गया मैं इसी डब्ब में खड़ा था बाहर स्वागत. करने के लिए और अब मैं उसके साथ हूं जिस. पर ये आरोप लग रहे हैं नहीं देखिए बड़ा. विरो थ व्यक्तिगत रूप से आज भी आप अरविंद. केजरीवाल जी के बारे में बात करेंगे वो. 100% ईमानदारी से अपनी राजनीति करते हैं. उनके ऊपर कभी कोई आर्थिक भ्रष्टाचार का. आरोप नहीं है आरोप लगा सकते कहीं.
कोई जैसे आरोप तो मेरे ऊपर भी भ्रष्टाचार. का लगा ना सिर है ना पांव है यह बात उनके. साथ भी लागू होती है 100% या मनीष. सिसौदिया के ऊपर जो आरोप लगे आप देखिए. राजनीतिक रूप से टारगेट करना फसाना आपके. ऊपर आरोप लगाना और सत्यता में बहुत बड़ा. फर्क होता है यही शराब घोटाले की अगर आप. दिल्ली की बात करिए 60 करोड़ रुपए की. रिश्वत इलेक्टोरल बंड के जरिए शरद रेड्डी. को मिली. यह एक सर्वविदित तथ्य है आज की तारीख में.
लेकिन उनसे सवाल नहीं पूछे जाते बीजेपी के. खिलाफ ईडी सीबीआई की कारवाई नहीं होती और. राजनीतिक रूप से अगर हमको टारगेट करना है. तो एक-एक आदमी को पकड़ करके आप जेल में. डाल रहे हैं ये तो ये तो संजय जी ने अपने. गुरु से पूछा ही था कि फलाना नेता ऐसा है. धमाका नेता ऐसा और आपके गुरु जी ने कहा था. ऐसा ही है ऐसा ही चलेगा इसमें आपको ठीक. करना है हां दोनों तरह से है देखिए हम ये. भी हुआ है इस देश में इसलिए पूछ रहा हूं.
आपको आप बोलिएगा सर ये मैं इसलिए पूछ रहा. हूं आपसे मैं क्योंकि जब मुझे हम लोग. छोटे-छोटे थे स्कूल कॉलेजेस में थे और. बड़ा कैंपेन चलता था आम आदमी पार्टी का और. हम लोग आप लोग को सुनते थे केजरीवाल जी को. आप लोग को उस टाइम शीला दक्ष जो आज बीजेपी. आप पर आरोप लगाती है एगजैक्टली कट कॉपी. पेस्ट आरोप आप लोग शीला जी पे लगा दे थे. ये अटैची है इसमें बड़े आरोपों की पूरी वो. है जेल जाएंगे सारे नेताओं को जेल भेजा. जाए ना भेजा जाए अब वही बीजेपी लगाती है. तो प्रॉब्लम ये है कि या तो आप उस टाइम. गलत थे या अभी गलत है मतलब ट्रस्ट वाला. इशू जो आ रहा है विरोधाभास बातों का दोनों.
टाइम पे अलग-अलग है एक आम ऑडियंस की बात. कर रहा हूं मैं मेरा कोई पॉलिटिकल एजेंडा. नहीं है नहीं मैं आपको उसका भी जवाब दे. देता हूं एक सरकार के तौर पर एक राजनीतिक. पार्टी के तौर पर आपसे क्या लोग अपेक्षा. करते हैं एक सरकार जो बेहतरीन तरीके से. जनता के लिए काम करें ट्रू और मैं अगर आप. मुझसे पूछेंगे आपके स्टूडियो से लेकर किसी. भी मंच पे इस पर दिन रात बहस करने के लिए. तैयार हूं कि चाहे हमारी दिल्ली की. केजरीवाल जी की सरकार हो पिछले 10 साल से. चल रही है और चाहे पंजाब की सरकार हो हमने.
जनहित में और जनता की अपेक्षाओं को पूरा. करने के लिए अनुकरणीय काम किया है स्कूल. के क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में. क्रांतिकारी परिवर्तन किया है हॉस्पिटल. में मोहल्ला क्लिनिक में बिजली फ्री देने. में पानी फ्री देने में बजट मुनाफे लाने. में तो गवर्नेंस की अगर आप बात देखें आंख. का अस्पताल थोड़ा और अच्छा करवाना चाहिए. किस बात के. लिए तो. मैं नहीं तो मैं ये कह रहा बड़ा लंबा टाइम. लग जाता है लोगों को बाहर इलाज कराते.
कराते चलिए वो उनसे आप सवाल पूछिए मैं ये. कह रहा हूं कि आपको अ दिल्ली के अंदर एक. ऐसा गवर्नेंस का मॉडल हमने दिया जिसको लोग. क्रिटिसाइज करते भी हैं और फॉलो भी करते. हैं ट्रू जैसे सबने कहा साब बिजली फ्री. केजरीवाल जी दे रहे हैं यह बड़ा बिल्कुल. फ्री फ्री कर दे रहे हैं और बहुत गलत. फैसला है और पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो. जाएगी बजट डूब जाएगा अरे ये तो पानी फ्री. कर दिया तीर्थ यात्रा कर दी इससे तो अब ये. बिल्कुल चौपट हो जाएगी दिल्ली की. अर्थव्यवस्था 9 साल से लगातार हम मुनाफे.
का बजट दे रहे हैं क्यों क्योंकि एक एक. पैसे का ईमानदारी से जनता के लिए उपयोग हो. रहा है अगर आप पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर. गवर्नेंस के तौर पर अगर आप पूछेंगे मुझसे. तो आम आदमी पार्टी से जो अपेक्षाएं लोगों. की थी वो हमने पूरा करने का काम किया ये. आप जो कह रहे हैं ये कॉमन परसेप्शन भी रहा. है आपके स्कूल और आपके हस्पिटल हॉस्पिटल. की तारीफ एक समान वर्ग में हमने भी. रिपोर्टिंग करते बहुत सुनी है लेकिन फिर. मेरे मन में एक सवाल अब फिर आता है कि इस. देश में किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के काम.
करने का पैमाना जो है वह वोटर तय करता है. बाकी नेता तो हर आदमी अपनी तारीफ करता है. कि हमसे अच्छा कोई हैय नहीं है अभी हाल. फिलहाल में लोकसभा चुनाव हुए अब दो चीजें. आप पर आरोप आ र है एक आरोप आ रहा है कि. अगर आपके नेता पाक साफ है आप कट्टर. ईमानदार है तो जो बात संजय जी टीवी डिबेट. में समझाते हैं यह बात जज साहब को का नहीं. समझा पाते काहे कि मनीष जी एक साल हो गया. एक साल से ऊपर हो गया स बहुत अच्छा सवाल. सतेंद्र जी को बहुत लंबा समय हो गया और. दूसरा सवाल यह आता है कि अगर आपने काम. वाकई में किया और केजरीवाल वाल जी आए थे. कि जेल के बदले वोट से जवाब दो सात की.
सातों सीट चली गई सर जबकि आप लोग तो कह. रहे थे कि सात में सातों निकालेंगे और आप. इकलौती पार्टी हैं जिनको सहानुभूति नहीं. मिली है अमृत पाल पंजाब में सहानुभूति पर. जीत गया इंजीनियर राशित जेल में रहकर. गंभीर गंभीर आरोप है जेल में जीत गया. वाईएसआर को हराकर चंद्रबाबू जी आ गए जेल. गए थे आम आदमी पार्टी इज द ओनली पॉलिटिकल. पार्टी जिसके मेन नेता और सारे टॉप नेता. जेल में है लेकिन जनता ने उनको समर्थन. नहीं दिया ना काम पे ना नाम पे एक-एक चीज. का बताते हैं. पहले तो आपने कहा कि भाई यह बात जज साहब.
को क्यों नहीं समझ में आती यह बहुत अच्छा. सवाल है आपका. देखिए हमारे खिलाफ एविडेंस क्या है यह. जानना बहुत जरूरी है मैं अपने केस के बारे. में नहीं बोल सकता क्योंकि कोर्ट ने मुझे. मना ही किया. हैना अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चार लोगों. ने बयान दिए मंगुटाउन. हम अब जो मंगुटाउन.
दिए बाप बेटों ने 10 बयान में आठ बयान में. कहीं भी अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं. है यह मैं आपके चैनल पर पूरी जिम्मेदारी. से कह रहा. हूं पूछा केजरीवाल को जानते हो नहीं. केजरीवाल से मिले हो नहीं कोई पैसे दिए. हैं नहीं अच्छा नहीं दिए हैं चल तेरे बेटे. बेटे को अंदर करते हैं राघव रेड्डी अंदर.
चला गया छ महीने अंदर रहता है अंतिम के दो. स्टेटमेंट उसके आते हैं केजरीवाल को हम. जानते हैं और यह किया जो भी उन्होंने. कहानी लिखवाई उसके बाद उसकी बेल हो जाती. है 12. स्टेटमेंट शरद रेड्डी के आते. हैं 12 स्टेटमेंट में 10 स्टेटमेंट में वह. ना केजरीवाल को जानता है ना केजरीवाल से. मिला है ना केजरीवाल को कोई पैसा दिया है. ना कोई रिश्वत दी है कभी एक मुलाकात भी.
दिया है तो अपने कोई एनजीओ या उसके लिए. आधिकारिक रूप से ऑफिशियल टाइम लेकर मिला. है अब उसके बाद अंतिम के दो बयान में वह. केजरीवाल के खिलाफ बोलता है उसको बेल मिल. जाती है यह हो गई इन तीन लोगों की कहानी. सी अरविंद का स्टेटमेंट क्या है वह कहते. हैं साहब मैं मुख्यमंत्री के घर पर बैठा. हुआ था और उसी टाइम पर वहां पर मनीष सि. सौदिया जी आए और मैंने उनको एक ड्राफ्ट. दिया सर विद ऑल ड्यू रिस्पेक्ट विद ऑल.
ड्यू रिस्पेक्ट ये आप जो बातें बता रहे हो. आगे की बात नहीं बताऊंगा तो पूरी बात नहीं. जाएग आप बताइएगा लेकिन मैं एक बात इसपे ऐड. करना चाह रहा हूं विद ऑल ड्यू रिस्पेक्ट. इलेक्शन कैंपेन में भी आपकी पॉलिटिकल. पार्टी के सभी नेताओं ने ये सारी बातें. टेक्निकल बात रखी दोनों बात में कह रहा. हूं लेकिन अगर जो एक आम जनता बैठी है वो. केवल मैं एक बहुत ही नॉर्मल क्वेश्चन कर. रहा हूं आम आदमी वाला क्वेश्चन आम जनता. कोई बात समझ में नहीं आई जिसकी वजह से वोट. नहीं आया और ये टेक्निकल बात जज साहब को. भी समझ में नहीं आ रही है तो कुछ तो. गड़बड़ हो रहा है आप जो समझा रहे हो या तो. आपके वकील नहीं समझा पा रहे या तो आगे बोल. पाता तो इसलिए आपने रोक दिया मैं कह रहा.
हूं ये बात जज साहब को अब समझ में आ रही. है कैसे मैं वो बता रहा हूं मार्च के. महीने में पहली बात तो 385 दिन ईडी ने. लगाए अन रिलाइड अपॉन डॉक्यूमेंट की लिस्ट. देने में उन्होंने पूछा भाई जितने. डॉक्यूमेंट आपने इकट्ठा किए हैं उस परे. कितने पे आप रिलाई कर रहे हो कितने पे. रिलाई नहीं कर रहे हो कितने पे आप भरोसा. कर रहे हो कितने पे भरोसा नहीं कर रहे हो. कितना आपने अदालत के सामने दिखाया और. कितना छिपाया हम तो ये लिस्ट उन्होंने दी. मार्च के महीने 385 दिन के बाद फिर हमारे.
वकीलों ने कहा भाई सेक्शन 207 के तहत हमें. इसकी जांच करनी है हम और मार्च के महीने. में हमें इंस्पेक्शन का ऑर्डर मिला है. मार्च के महीने में वहां से यह सारी चीजें. पकड़ के सामने आई है आप देखिए पहली बेल कब. होती है 2 अप्रैल को हम मैं अपने केस के. बारे में नहीं बोलूंगा सिर्फ टाइमिंग के. बारे में बोल रहा हूं अब यह सारे तथ्य. अदालत के सामने हैं धीरे-धीरे करके सामने. आएंगे इसमें कोई भी चीज ईडी साबित नहीं कर.
पाएगी ट्रायल में आप जानते हैं पीएमएलए का. कानून. इतना ऐसा कानून बनाया गया है जिसमें बेल. मिलना अपने आप में बहुत मुश्किल का काम है. मैं बिना किसी दोष कि बिना. किसी सबूत के खाली स्टेटमेंट के आधार पे. रह के आ गया छ महीने तो बस ऐसे ही समझ. लीजिए का केजरीवाल जी ने एक स्टेटमेंट. दिया था अगर यह कानून इतना सख्त है तो. उन्होंने एक स्टेटमेंट दिया था कि अगर. बीजेपी की सरकार नहीं बनी तो हो सकता है 5.
तारीख को मैं बाहर निकल आऊं और सरकार रह. गई तो मोदी जी तय करेंगे मैं कब बाहर. जाऊंगा क्योंकि इसमें ईडी को विरोध करना. होता है इसमें विरोध ही ईडी को करना होता. है तो यह कानूनी प्रक्रिया प सवाल नहीं है. मतलब ईडी अगर विरोध करेगी तो आपकी बेल. नहीं होगी ईडी अगर विरोध नहीं करेगी तो. आपकी बेल होगी ये कानून में लिखा ये बात. आप जनता को क्यों नहीं समझा पाए फिर ये. पॉलिटिकल क्वेश्चन सात सीट सातों हारे आप. जबकि आपका गठबंधन भी था आमतौर पर ये माना. था कि भाई कांग्रेस का वो डिवाइड हो जाएगा. यह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय और इसकी.
हम समीक्षा करेंगे ईमानदारी से हम इस बात. को निश्चित रूप से निराशा हुई इसमें कोई. छिपाने वाली बात नहीं आपकी पॉलिटिकल. पार्टी के एक बड़े मंत्री है सौरभ जी हमने. देखा कि वो दीवार पर केजरीवाल जी की. तस्वीर लगी थी पोस्टर उसको लड्डू खिला रहे. थे कब जिस दिन इलेक्शन का रिजल्ट निकला है. सातों हारने के बाद ल खिला रहे थे पूरे. देश के परिणाम को लेकर होगा क्योंकि उसकी. जरूर हमें खुशी है जो पूरे देश का परिणाम. आया उससे जो 400 पार का नारा दिया जा रहा. था प्रधानमंत्री जी के द्वारा 160 सीटें.
उनकी कम हुई 240 अपना घर 303 अपना घर जलने. का गम नहीं है देश का घर है देश एक बड़ा. घर है देश एक बड़ा घर है और उस बड़े घर. में जो सियासत पिछले 10 साल से चल रही थी. नफरत का जहर घोलने की सियासत हिंदू. मुसलमान को बांटने की सियासत पहले मुसलमान. को गाली दो फिर सिखों को गाली दो फिर. ईसाइयों को गाली दो फिर जाटों को गाली दो. फिर मराठों को गाली दो फिर किसानों को. गाली दो फिर पहलवानों को गाली दो अब उद्या.
वालों को गाली दो तो है किसके सगे आप भाई. बताइए ना अब हिंदुओं को गाली दे रहे हैं. अच्छा आम आदमी पार्टी किसकी सी एक सवाल. फिर मेरे मन में क्योंकि आपकी बात से मुझे. एक सवाल याद आया इसलिए पहले पूछ ले रहा. हूं ये आम आदमी पार्टी किसकी सगी है आम. आदमी पार्टी सबकी सगी है हम किससे बैर. रखते हैं बताइए आप एक मैं सवाल पूछता हूं. आपसे जब मैं टीवी पर एक्टिव था तो एक. स्टेटमेंट मुला है जिसमें कहा गया कि मेरी. नानी ने मुझसे कहा था कि ऐसे जगह पर मंदिर.
नहीं होना चाहिए मेरा राम ऐसी जगह पर नहीं. बस सकता है उसके बाद फिर जब दिल्ली का. दंगल मैं कर रहा था एक चैनल पर और मैं. आपके इलेक्शन चल रहे थे एमसीडी के तो मैं. कई आपके विधायकों से मिला तो उन्होंने कहा. यार पहले हमारे यहां थिंक टैंकर अलग लोग. थे फिर हमने समझाया कि हम घर में कन्वेंस. नहीं कर पा रहे अब थॉट प्रोसेस चेंज हो. गया मैं नाम नहीं लूंगा क्योंकि कई सारे. लोग था नानी ने कहा उस ऐसी अयोध्या में. मेरा राम नहीं बच सकता ऐसी जगह पर वहां से. अयोध्या के लिए ट्रेन आम आदमी पार्टी ने. चला दी सबसे कटर हिंदू आप गए तो हिंदू. मुसलमान की पॉलिटिक्स तो आप भी कर रहे हो.
आपने भी अपना स्टैंड चेंज कर दिया एक चीज. बताइए अयोध्या दर्शन करना जाना और अयोध्या. के नाम पर नफरत फैलाना इन दोनों चीज में. आपको फर्क जमीन आसमान का फर्क है जमीन. आसमान का फर्क है तो हम अयोध्या दर्शन. करने को बिल्कुल बुरा नहीं मानते अच्छा. मानते हैं जाइए आप दर्शन बरो राम नहीं. बिल्कुल अगर कानून के आधार पे कानून के. फैसले के आधार पे एक मंदिर वहां पर बना. हमने उसका स्वागत किया तो वो स्टेट हमारी. बात वो जो स्टेटमेंट पहले था कि ऐसी जगह.
में राम नहीं बस सकता नहीं नहीं देखिए ऐसा. है कि आप कोई एक विषय को उठा के यह धारणा. बना ले कि हम कोई भगवान श्री राम के. विरोधी थे या उनके मंदिर के विरोधी थे वो. शायद ठीक नहीं होगा वो न्याय नहीं होगा. ठीक एक एक शाहीन बाग में भी क्योंकि मैंने. कवर किया था बहुत ज्यादा उस टाइम में आपने. हिंदू मुसलमान का कर रहा हूं मैं शाहीन. बाग में मैं ज्यादातर आता हूं कवर करने के. लिए तो कई बार वहां से य आरोप लगते थे कि. केजरीवाल जी इज अ वेरी स्मार्ट पॉलिटिशियन. ही नोज कि मुसलमान बीजेपी को वोट नहीं. देगा तो शाहीन बाज प हमने मंच साझा नहीं.
किया बड़े नेताओं ने उस टाइम हम हिंदुओं. को डिवाइड नहीं होने दिया हमने और एक. स्मार्ट पॉलिटिक्स कर दी डू यू बिलीव कि. यह भी एक तरीका था आम आदमी पार्टी का. देखिए ऐसा है शाहीन बाग का मुद्दा क्या था. शाहीन बाग का मुद्दा था भारत के गृह. मंत्री से शाहीन बाग का मुद्दा था बीजेपी. से और शाहीन बाग को लेकर हमारा बार-बार. स्टेटमेंट यही रहा कि गृह मंत्री को वहां. जाना. चाहिए अगर नेता चले जाए तो कहते हैं साहब. ये पॉलिटिक्स कर रहे हैं इन्होंने ही करा. आपको पता है क्या आरोप मेरे ऊपर लगा क्या.
एक व्यक्ति ने वहां जाकर कट्टे से गोली. दाग. दी और उसकी फोटो मेरे साथ चलाई कि साहब यह. तो आम आदमी पार्टी का इसकी जॉइनिंग संजय. सिंह ने कराई. थी ठीक है फिर दूसरा आरोप लगाया यह शाहिन. बाग को फंड करते हैं तो मैंने कहा भाई दो. में से एक ही बात तो सच होगी या तो वहां. पर गोली चलाने वाले का मैं संरक्षक हूं जो. भाजपाई समर्थक है और या फिर फिर मैं शाहिन. बाग के आंदोलन को फंड कर रहा हूं दो में.
से एक ही बात सच होगी तो कुछ भी आरोप. लगाना है कुछ भी कहना है भाई शाहिन बाग का. जो मुद्दा था उसका समाधान किसको करना था. भारत के प्रधानमंत्री को भारत के गृह. मंत्री को भारतीय जनता पार्टी को बहुत. सारे ए डर हमारे पास बहुत सारे ऐसे इश्यूज. हैं सर जहां पर समाधान गृह मंत्री करना था. बट आम आदमी पार्टी के बड़े नेता वहां जाते. हैं मंच साझा करते हैं आपका शीर्ष नेतृत्व. शाहीनबाग में नहीं गया इसको लेकर ये था कि. डर था कि अगर वहां जाएंगे तो हिंदुओं का. वोट छिटक सकता है और मुसलमानों के मन में. थॉट आया यह सवाल उस टाइम शाहीन बाग से.
अंदर से पूछा गया था मुझसे क्योंकि आपने. जिक्र किया हिंदू मुसलमान का इसलिए. फ्लैशबैक में चला गया मैं तो शाहीन बाग. में ना जाना स्ट्रेटजी का पार्ट था या. आपको लगता है कि समझदारी थी शाही क्यों कई. लोग यह मानते हैं कि अखिलेश जी यही गलती. करते थे और यूपी में व हार जाते थे आम. आदमी पार्टी नहीं की तो रिकॉर्ड पर. रिकॉर्ड बन रहे थे और जीत रहे थे देखिए. शाहीन बाग का मुद्दा हम लोगों ने बार-बार. यह कहा कि यह केंद्र से जुड़ा हुआ मुद्दा. है और इसका समाधान केंद्र की सरकार को. करना चाहिए यह हमारा स्टैंड था शुरू से. लेकर अंत तक और चाहे.
अत्याचार मुसलमानों के साथ हो दलितों के. साथ हो पिछड़ों के साथ. हो हाथरस में मैं गया मेरे ऊपर स्याही. फेंक के हमला किया अब देखिए फिर यही लोग. कहेंगे आप हाथरस पहुंच गए शाहीनबाग नहीं. पहुंचे नहीं नहीं मैं यह कह रहा हूं कि आप. अगर यह सवाल उठाते हैं तो बहुत सारे ऐसे. मसले हैं जहां पर हमने आवाज उठाई हा शाहीन. बाग को लेकर वो एक गलत गत दिशा की राजनीति. कर रहे थे आप बताइए प्रधानमंत्री 22.
बार लाल किले से स्पीच देते हैं कहते हैं. हमारी मुस्लिम बहन हमारी मुस्लिम बहन उनके. साथ तीन तलाक के नाम पर अत्याचार हो रहा. है और साहिन भाग में उनके नाक के नीचे. बैठी हुई है मुस्लिम महिलाएं धरने पर वहां. नहीं जाते प्रधानमंत्री उनकी तो स्टाइल ऑफ. पॉलिटिक्स है ना सर ये तो यही तो. चते वो तो एक्सेप्ट करते जैसे अभी अभी. केंद्रीय मंत्रियो. अब पहली बार आजादी के बाद ऐसा हुआ कि कोई.
मुस्लिम व्यक्ति जो है वो मंत्री नहीं बना. अब ये उनके लोग जो और वो कहते हैं सबका. साथ सबका विकास अब ये उनका एक पॉलिटिकल. स्टैंड है जिस उन्होंने एक आदमी को टिकट. दिया बाकी किसी को टिकट वो कभी टिकट नहीं. देते तो ये बीजेपी का स्टैंड है बीजेपी. इसको एक्सेप्ट करती है चाहे तभी जुबान से. ही सही या बड़े नेता नहीं कहते बट वो अपनी. स्ट्रेटजी में दिन दंगे चले दिल्ली में. देश के गृह मंत्री नहीं गए हम लोग गए. हमारे मुख्यमंत्री गए हम लोग गए हमने अपील. की शांति की चलिए ठीक है बीजेपी आग लगा. ठीक हम दर्शक को शाहीन बाग वाला मसला छोड़.
देते हैं क्योंकि दर्शक भी समझदार है. लेकिन लेकिन ये सवाल है बार-बार कि आप. थोड़ा अलग पॉलिटिक्स करने आए थे तो उसमें. कैलकुलेटिव पॉलिटिक्स पर सवाल हो गया. कैलकुलेटिव नहीं है ये मैं समझता हूं कि. आपको जब जिस पार्टी को हिट करना चाहिए जिस. पार्टी से सवाल पूछना चाहिए उसके बजाय अगर. आप चाहते हैं कि विपक्ष उन सवालों का जवाब. दे जिसका समाधान सीधे तौर पर उ पा स मेरे. साथ मनोज तिवारी जी बैठे थे तो मैंने उनसे. पूछा. आपका मतलब सिर्फ आपको पिकल नहीं रहा मैं.
ओवरऑल कह रहा हूं कि सवाल उस समय जो बनता. था वो बनता था सिर्फ और सिर्फ भारत की. सरकार और मोदी जी और ग्री मं वो तो पूछे. गए थे लेकिन उसके साथ एक सवाल और निकल कर. आया था उनको ही समाधान कर और अगर हम चले. जाते और तीन ईट चल जाते तो फिर यह होता कि. यही लोग दंगा करा रहे हैं ठीक है वो फैसला. मैं छोड़ दे हूं दर्शकों पे कि आप हाथरस. गए वहां नहीं गए क्या वजह थी जो आपने वजह. बता दी अब उनको तय करने दीजिए नेक्स्ट. क्वेश्चन एक जवाब चल रहे थे तिहाड़ से आ. रहे थे तो एक बड़ा रूमर निकला था और बड़ा.
अफवा चल रही थी कि संजय जी बीजेपी जवाइन. कर सकते हैं और चारों तरफ चल रहा था कि. भाई बस बीजेपी ने ही निकलवा दिया है कुछ. कुछ चैन वहां टीवी मास्टर स्ट्रोक तो कुछ. चैनल पे वो खबर चल रही थी बेल के पीछे. क्या है खेल मुझे आज भी ये तो रा हम लोग. करते टीवी वाले तो आपने देख ही लिया खेल. मैं निकलने के बाद फिर आप जो भाषण आपने. दिया मैंने उन चीजों प तुरंत विराम लगा के. और अपना आगे का सफर मैंने ने तय किया. देखिए क्या है आपको ऑफर नहीं आए आपको मुझे.
ऑफर नहीं करेंगे वो क्यों क्योंकि जानते. हैं निराशा होनी है कुछ हाथ नहीं लगना है. अरे बट हेमंत शर्मा आ सकते हैं अजीत पंवार. आ सकते हैं हर पॉलिटिकल पार्टी में नंबर. दो नेता जो है संजय संजय सिंह नहीं आ सकते. इसको बीजेपी के लोग जानते हैं क्यों आज तक. 6 साल में प्रधानमंत्री जी और हम कई बार. मिले पिछले कार्यकाल में कभी नमस्ते तक. नहीं हुई और एक बार मैंने गलती से नमस्ते. कर दी उन्होंने जवाब भी नहीं दिया तो आप. आपने ऐसा क्या कांड कर दिया कि मोदी जी. आपको जवाब दे बोलते हैं इनके खिलाफ बोलते.
हैं बट मोदी जी बाकी लोगों से लगाते. वैचारिक रिश्ता तो रते अनी भाई भाई देश. बेच के खाई मलाई ये नारा लगाते हैं ये कौन. देश का प्रधानमंत्री और वो भी मोदी जैसा. प्रधानमंत्री प नाडू जी ने कितना कुछ बोला. कितना बढ़िया हक कर लेते हैं फोटो नीतीश. जी के साथ हक कर लेते हैं संजय सिंह में. क्यों ऐसा है वो मुझे कोई कोशिश भी नहीं. करेगा अम भाजपा वाले रूमर फैला रहे थे. देखिए बहुत शातिर पार्टी है मैं कहता हूं. बीजेपी को इसीलिए कि उन्होंने एक पूरा. भ्रम फैलाया एक दो दिन लग गया मुझे बाहर.
आने में बेल जब मिली उसके बाद तो उन्होंने. भ्रम फैलाया कि अभी संजय सिंह आएंगे और. बीजेपी में शामिल हो सकते हैं और सरकार. गिरा सकते हैं और यह करेंगे और वो करेंगे. मैं आपको यकीन बताऊं जैसे ही मैं जेल से. बाहर निकला मैंने जेल का दरवाजा पीछे मुड़. के देखा आसमान को देखा 200 300 कदम जो. बाहर आने तक का था उस बीच में ही मैंने तय. कर लिया आप तो जॉर्ज फर्नांडिस स्टाइल में. स उन्होंने जैसे ही मैं बाहर आया मैंने. उसी दो 300 कदम के चलने में मैंने तय कर. लिया था मुझे इनके खिलाफ जम कर बोलना है.
और आज आपको बता रहा हूं छ महीने जब तक मैं. जेल में रहा हर दिन ये सोचता था जिस दिन. निकलूंगा इनके खिलाफ पूरी ताकत से बोलूंगा. और वही काम मैंने किया तिहाड़ में आपको. सुविधा मिली थी सुविधा जो आम कैदियों की. थी वही वही सुधा सतेंद्र जी को मिल रही. थोड़ी वीआईपी वाली थी वो मसाज मसाज बढ़ था. कोई मतलब नहीं है हम तो आप तो देसी गांव. का आदमी निकले वहां पहुचे हमारे साथ तीन. लोग थे मैं तो तीन लोगों के साथ कितनी. बड़ी बैरक थी. आपकी ये जहां प आप आप बैठे हैं इसको लेके. इतना ही इस तरफ मिला लीजिए और ये सो हा.
इतना बड़ा और बर्तन बर्तन खुद सफना पड़ता. था या बर्तन खुद साफ करते थे बाथरूम. बाथरूम बाथरूम खुद से साफ करते थे झाड़ू. खुद से लगाते. थे लेकिन हंसते भी थे तो लगता नहीं था कि. मां बाबू जी सोचे थे लका हमारा सांसद बन. गया है अवत से और नाम रोशन कर रहा है यहां. बैठ के जेल में बाथरूम सफा रहा है तो जवाब. उस रास्ते प है तो आपको मतलब नेता के तौर. पर आपको ताली भी मिलती है कई बार गाली भी.
मिलती है जेल भी मिलते हैं मुकदमे भी. मिलते ल आपके दो लड़के हैं ना दो बच्चे. हैं हां तो घर परिवार डरता नहीं था कि यार. कहां चले गए हो देखिए जेल जाने के बाद. सबसे पहले अा बीजेपी जुड़ जाओ सबसे पहला. काम मैंने किया नहीं कभी मेरे घर में किने. ना कभी नहीं कभी भी नहीं. कहा क्योंकि वह जानते हैं वह कहेंगे भी तो. मैं पलट के ऐसा जवाब दूंगा जो उनको पसंद. नहीं गांव घर में किसको वोट देते हैं लोग. जी गांव घर में किसको वोट देते हैं हमारे. पूरे परिवार में कभी किसी ने बीजेपी को. वोट नहीं दिया अच्छा सुल्तानपुर कभी भी.
नहीं ठीक है कभी भी नहीं. तो यह बीजेपी वाले भी जानते हैं कि इन परे. समय बर्बाद करने से कोई फायदा है नहीं. इसलिए ना मुझे कभी कोई ऑफर आता है ना कभी. कोई कोशिश करता है बट आपके यहां जैसे. आतिशी जी उन्होंने कहा ऑफर आ रहा था. सिसौदिया जी ने कहा ऑफर आरहा. था सिसौदिया आतिशी में क्या ऐसा है जो. संजय सिंह में नहीं कि बीजेपी नहीं देख. रही पता नहीं वो उन लोगों से पूछिए मुझे. तो नहीं आया कभी ऑफर मुझे कभी नहीं ऑफर स.
आपने कभी मंथन नहीं किया कि यार इन दोनों. में दिख रहा है मुझे सबसे ज्यादा वो हो. सकता है उद्दंड मानते हो या समझते हो कि. भैया य कोशिश करे कौन फायदा नाना छोड़ दो. इनका तो भाई मेरे मैं जितना उनके ऊपर. खुलकर हमला करता हूं उसको कैसे बर्दाश्त. कर लेंगे मैंने भारत के गृह मंत्री के. सामने बताया कि वो कैसे जमानत जप पार्टी. है. मैंने प्रधानमंत्री के सामने नारा लगाया.
कि मोदी अडानी भाई भाई देश बेच के खाई. मलाई ऑल पार्टी मीटिंग होती थी वहां जाता. था तो ना उन्होंने कभी आपको का काफी बाहर. भेजा गया है पालि ना कभी ठीक से देखा ना. पूछा ना मैंने कभी उनकी तरफ कोशिश की एक. बार मैंने नमस्ते करने की कोशिश 6 साल में. की थी जिसको उन्होंने बड़ी दृढ़ता के साथ. अस्वीकार किया और तब मुझे अपनी गलती का. एहसास हुआ कि यह भी मुझे नहीं करना चाहिए. मोदी जी को नमस्ते कर सेंट्रल हॉल में. जैसे अभी और मैं हमेशा इस बात के लिए.
सावधान रहता था उस दिन मता पता नहीं किस. मूड में था मैंने सोचा भाई आज कोशिश करके. देखते हैं लेकिन मुझे असफलता ही हासिल हुई. तो यह है प्रधानमंत्री जी का वो अहंकार है. ये बड़ी खबर जाएगी ये लोगों अहंकार संजय. सिंह ने मोदी जी को नमस्ते किया मोदी जी. ने जवाब भी नहीं दिया नहीं वो तो कैमरे पे. है वो तो टीवी चैनल्स प दूरदर्शन ने लाइव. भी किया था उसको हो सकता है बिजी रहे हो. देखे ना हो या देखे थे आपको नहीं नहीं. मतलब आई कांटेक्ट हुआ था वो बिल्कुल. मोदी जी को इस मामले में कभी आप यह मत.
समझिए कि व एक एक निगाह में पहचान लेते. हैं कौन कहां खड़ा है किसको इग्नोर करना. है किसको एहसास दिलाना है हमारी मुलाकात. अभी हमारे मुख्यमंत्री के साथ देखा नहीं. आपने उनको एहसास कराया उन्होंने योगी जी. के साथ तो अच्छा ये योगी जी वाला कांसेप्ट. एक बड़ा आरोप लग रहा है कि आम आदमी पार्टी. और बाकी पॉलिटिकल पार्टी जो बड़ी होशियार. हैं वो मोदी और योगी में ना एक रिफ्ट पैदा. कर रही हैं अभी वहां मुख्तार जी के भाई ने. अफजाल जी ने भी कह दिया कि मोदी जी चुनाव. हार जाते योगी जी ना होते आप लोग बड़ी. महित खेल रहे हैं नहीं नहीं देखिए.
आप योगी जी के समर्थकों से जाकर पूछ लीजिए. अच्छा योगी मोदी में बेहतर कौन है संजय. सिं योगी जी के समर्थकों से जाकर पूछ. लीजिए ना. देखिए व्यक्तिगत तौर पर मैं किसी की लड़ाई. की बात नहीं कर रहा लेकिन अगर आप मुझसे. पूछेंगे तो मेरा शुद्ध रूप से विरोध. भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा से है और. वो विचारधारा है नफरत की विचारधारा. हम ना तो पाकिस्तान हैं ना हम तालिबान हैं.
हम हिंदुस्तान है और हम मिलक रहना चाहते. योगी मोदी में बेहतर नेता तो नहीं ये ये. बहस का विषय ही नहीं है आप पूछिए कि इस. पार्टी की कौन-कौन सी आइडल जीी आपको पसंद. है कौन सी ना पसंद है तो मैं उसपे बात कर. दूसरे तरीके से कान घुमा के पकड़ते हैं. अगर जैसे आप कह रहे हैं कि योगी मोदी जी. में रिफ्ट चल रहा है मान लीजिए रिफ्ट हो. जाता है अलग हो जाते हैं और योगी जी अपना. अलग पॉलिटिकल पार्टी बनाते हैं आम आदमी. पार्टी सपोर्ट करेगी कहे हम सपोर्ट करेंगे. भाई अरे आप कांग्रेस को सपोर्ट कर सकते आम. आदमी पार्टी. है योगी जी की अपनी विचारधारा है मोदी जी.
की अपनी विचारधारा है बट कांग्रेस की. विचारधारा से उनकी विचारधारा हैम हु वो. विचारधारा से ही हमारा विरोध है ना भाई हम. नफरत की बुनियाद पर हिंदुस्तान को नहीं. बनाना चाहते और कांग्रेस की विचारधारा से. वह किसी के लिए नहीं सगे हैं वह मुसलमानों. को भी गाली देंगे हिंदुओं को भी गाली. देंगे अब अयोध्या वालों को गाली दे रहे. हैं एक दलित समाज का व्यक्ति अयोध्या से. सांसद बन गया आप गालियां देंगे अयोध्या के. लोगों को वहां घर आप तोड़ रहे हैं पुरातन. मंदिर आप तोड़ रहे हैं आपने मंदिर का.
उद्घाटन अधूरे मंदिर का उद्घाटन कर दिया. शंकराचार्य के विरोध के बावजूद और अब जब. प्रभु श्री राम ने आपको संदेश दे दिया कि. हमने रावण का अहंकार बर्दाश्त नहीं किया. मोदी जी आपका भी अहंकार बर्दाश्त नहीं. करेंगे और हराए राम पथ गमन मार्ग तो जानत. हो गया ना आप हम अच्छे. सुल्तानपुर प्रतापगढ़ प्रयागराज कौशांबी. चित्रकूट अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक. एकको सीट ना जीता है आप पूरा अवधार हैं. खाली कैसरगंज खाली जीत गोंडा कैसरगंज तो.
आप सोचिए ना जिस जिस रास्ते से भगवान श्री. राम गुजरे वह पूरा का पूरा चुनाव हार गए. यह लोग गाना क्या बनाया चुनाव में जो राम. को लाए हैं हम उनको लाएंगे आप प्रभु श्री. राम को लेकर आ सकते हैं इतना अहंकार आपके. मन में आपने फोटो जारी की जिसमें मोदी जी. इतने बड़े हैं श्री राम जी इतने छोटे हैं. उनको हाथ पकड़ के लेकर जा रहे हैं यही सब. तो ठीक है य तो मुझे लगता है और और मैंने. मेरी उन बातों का उस समय बहुत विरोध हुआ. लेकिन मैं आज फिर पूछना चाहता हूं 5 करोड़.
की 5 मिनट के अंदर दो कर करोड़ की जमीन ढ़. करोड़ रुपए में खरीदी गई उसकी जांच होनी. चाहिए कि नहीं होनी चाहिए उसके. डॉक्यूमेंट्री एविडेंस है ये आपने. इंपोर्टेंट सवाल उठा और यही सारे जो विषय. बता रहे हैं यही हार की वजह भी मोटा-मोटा. बने है लेकिन एक सवाल और नहीं हार की वजह. संविधान और आरक्षण भी बना अब वो तो आप पता. कीजिए बकुल जाहिर बात है ये बिल्कुल जाहिर. बात है गांव देहात में ये वाला मैसेज भी. जो था ल गया ये गया अहंकार बहुत सारे और. इशू थे लेकिन जीतने के बाद एक क्लिप वायरल.
हुई सर अयोध्या के सांसद से एक इंटरव्यू. में पूछा गया कि जय सियाराम तो मुस्कुरा. दिए फिर कहा गया जय सियाराम तो फिर. मुस्कुरा दिए तो वह बड़ा बच रहे थे देखि. आडलज को लेकर संजय सिंह तो नहीं बचते जय. सियाराम से मैं तो मैंने तो नारा लगाया तो. भाजपाई नारा नहीं लगा रहे थे कौन सा यही. उन्होंने एक बार क्या हुआ मुझे चिढ़ाने के. देखि इन बड़ी दिक्कत की बात क्या हो जाती. है कि आप भगवान का जयकारा भी चिढ़ाने के. लिए लगाने लगते हैं तो एक बार भाजपाइयों.
ने पार्लियामेंट की घटना है विपक्ष के और. सत्ता पक्ष के भी कुछ सांसद अगर आप अकेले. में पूछेंगे तो बताएंगे तो उन्होंने मुझे. देख के कहा जय श्री राम हम मैंने कम से कम. 10 बार जय सियाराम बोला एक भाजपाई नहीं. बोला यह सत्य घटना बता रहा हूं आपको फिर. मैंने कहा वंदे मातरम फिर नहीं बोला फिर. मैंने कहा भारत माता की जय फिर नहीं बोला. मैंने कहा देखो यह है है इनका चरित्र असली. तो सब फिर हंसने लगे यह घटना पार्लियामेंट.
के अंदर की है तो आप चिढ़ाने के लिए क्यों. नारा लगाते हैं भाई चिढ़ाने के लिए क्यों. जयकारा लगाते हैं आपके मन में है आप. बिल्कुल जयकारा लगाइए दिल से. लगाइए और संजय सिंह अगर लगाएंगे तो आप. नहीं. लगाएंगे अच्छा देखिए ये कितनी अच्छी बात. है इन लोगों ने कैसे बदनाम किया पहुंच गए. चार लोग कार्ड लेके हां भाई शुभंकर मिश्रा. जी को आज हम काट देके आए और देखते हैं कि. वो मंदिर के शिलान्यास में आते हैं कि.
नहीं उद्घाटन में आते हैं नहीं और आप राम. विरोधी हैं और फलाना है और ढिमरा है हमारे. घर के आगे वैष्णो मंदिर है हम क्लास नाइंथ. में मैं पढ़ रहा था तब से चंदा इकट्ठा. करके हमने उस मंदिर का निर्माण करवाया और. अब वहां का संचालन हमारे बगल के एक. श्रीवास्तव जी की फैमिली है वो करती है. मैं अगर कल को कहूं कि भाजपा वाले आइए. वैष्णव मंदिर का भंडारा है आएगा कोई. भाजपाई एक भी भाजपाई आएगा क्या बताइए आप. नहीं बट वैष्णव तो नहीं नहीं मैं नहीं. नहीं नहीं मैं आपसे कहना क्या चाह रहा हूं.
कि आप राजनीतिकरण क्यों करते हैं इन. मुद्दों का अगर आपके मन में ईमानदारी थी. तो शिलान्यास के मौके पर आनंदी बेन पटेल. जा सकती हैं भागवत जी जा सकते हैं आपके. योगी आदित्यनाथ जी जा सकते हैं. प्रधानमंत्री उसका शिलान्यास करेंगे. राष्ट्रपति जी क्यों नहीं जाएंगे कई. चर्चाएं सर श्री रामनाथ को जी क्यों ये जो. आप बातें क रहे इसलिए नहीं गए क्योंकि वो. दलित समाज से हैं वो मन में भेद है रहे. आपके ये मेरा आरोप है ये तो बीजेपी वालो. अब आ जाइए फिर आइए फिर दोबारा आइए जब.
उद्घाटन होता है मंदिर का उस समय भी भागवत. जी जाते हैं आनंदी बहन पटेल जी जाती हैं. योगी आदित्यनाथ जी जाते हैं उद्घाटन खुद. मोदी जी कर रहे हैं मौजूदा राष्ट्रपति. श्रीमती द्रोपदी मुरमू जी नहीं जाएंगी. क्योंकि वह आदिवासी समाज से हैं देखिए यह. ये ये इंपॉर्टेंट लिगेशन विपक्ष ने लगाए. थे उस दौर में भी और उसके बाद तो मैं आपसे. ये कह रहा हूं नहीं ये मैं आपसे ये कह रहा. हूं कि पा साल अगर एक आदमी मुख्यमंत्री है. उत्तर प्रदेश का और अपना घर खाली कर रहा.
है उसका घर आप गंगाजल से धु लेंगे अपनी. पत्नी के साथ कन्नौज में अखिलेश यादव जी. अगर दर्शन करने चले गए मंदिर से बाहर. निकलते हैं तो भाजपा के लोग गंगाजल से. मंदिर लेंगे डू यू रियली होता ये होता है. आप मानते हो पूरे यकीन से अरे वो तो कैमरे. पे आके बोले बीजेपी के लोग वो रिकॉर्डिंग. आपके पास होगी नहीं तो अपने चैनल में देई. उसकी नहीं बिल्कुल बिल्कुल किया नहीं ब ये. जैसे अयोध्या वाली बात आप कह रहे हो आपको. लगता है वहां कोई समाज से नहीं था वहां तो. मुसलमानों को भी जगह मिली थी वो कहते दो.
तीन दाढ़ी वाले भी देख राष्ट्रपति को. क्यों नहीं बुलाया फिर आप अ ये तो पूछेंगे. उनसे हम जब मिलेंगे सामने से ठीक है एकरू. मैं अयोध्या वाले विषय पर जरूर पूछूंगा जब. भी मेरा संवाद होगा मैं आपको टैग भी. करूंगा एक सवाल आपके समर्थकों ने हमसे. पूछा और ये सवाल अगेन बहुत इंपॉर्टेंट. मुझे लगता है सपा बसपा या आरजेडी जैसी. पॉलिटिकल पार्टी पर परिवारवाद के आरोप. लगते आए हैं कि वो फैमिली की पार्टी है कि. आज फलाना आदमी हेड है कल धमाका होगा उसके. नीचे ऐसे ऐसे वही रहेंगे और और प्रशांत. किशोर जी बिहार में कहते हैं कि यह. पिछड़ों की लड़ाई नहीं है यह परिवार की.
लड़ाई है आम आदमी पार्टी एक थॉट प्रोसेस. से निकली थी अच्छा चल रहा था संजय सिंह ने. कहा कि बीजेपी मुझे स्वीकार नहीं करेगी कई. लोगों के मन में सवाल आया कि जब स्वीकार. भी नहीं करेगी और मैं जाऊंगा भी नहीं कभी. भी ये दोनों तो गलत हो जाएगी बात. ठीक वो ये जानते हैं कि इस आदमी से कोई. प्रयास करही नहीं करने का फायदा नहीं है. ठीक है आप नहीं जाएंगे आप बीजेपी विरोधी. आती है अब सवाल मेरा यह है कि मनीष. सिसौदिया जेल जाते हैं तो उनका. रिप्लेसमेंट हो जाता है सत्येंद्र जैन जेल. जाते हैं उनका रिप्लेसमेंट हो जाता है.
जबकि मनीष सिसौदिया भी एक तरीके से. इरिप्लेसेबल थे अरविंद केजरीवाल जेल जाते. हैं उनका रिप्लेसमेंट नहीं होता और लोगों. के मन में सवाल आता है कि जब उनकी वाइफ. बैठ के प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है पीछे वो. झंडे वाले उसमें कि यार अब ये भी वही बन. गए हैं जिन पर ये आरोप लगा रहे थे क्योंकि. संजय सिंह जैसे लोग जो पार्टी की डेडिकेट. काड करता है ये क्यों नहीं मुख्यमंत्री बन. सकते क्यों उनकी वाइफ जो पॉलिटिकली एक्टिव. नहीं थी क्योंकि संजय सिंह के नाम पर. लोगों ने वोट नहीं दिया है हमने नारा. लगाया केजरीवाल तो उनकी वाइफ के नाम पर भी. नहीं था तो आप बताइए ना कहां वो.
मुख्यमंत्री है मुख्यमंत्री नहीं है बट. जिस तरह से उ आज अगर वो मुख्यमंत्री की. पत्नी के तौर पर कोई संदेश उनको मिल रहा. है और वह पहुंचा रही है और मैदान. में सामना कर रही है लड़ रही है तो ये तो. इसकी तो सना ये जिम्मेदारी सुनीता. केजरीवाल को क्यों संजय सिंह को क्यों. नहीं अरे भाई वो उनकी पत्नी है अर्धांग. है सुन तो लीजिए सुन तो लीजिए आज एक. पॉलिटिकल कारण से उनके पति को जेल में. डाला गया है और अगर एक पत्नी के तौर पर.
उनकी लड़ाई को वह आगे बढ़कर लड़ रही हैं. तो इसकी सराहना होनी चाहिए वह किसी पद के. लिए नहीं लड़ रही हैं यह अपनी बात किसी के. माध्यम से आज अगर केजरीवाल जी पहुंचा सकते. हैं तो वह है सुनीता केजरीवाल जी उनकी. पत्नी संजय सिंह क्यों नहीं नहीं संजय. सिंह क्यों भाई संजय सिंह के नाम पर वोट. मिला है क्या आम आदमी पार्टी तो विचार. विचारधारा के नाम प वोट था अगर आज भी. केजरीवाल जी मुख्यमंत्री हैं इसमें क्या. है कोई आप ये पहला ये नहीं आपत्ति नहीं है.
सर आपत्ति ये है मतलब क्या आपत्ति है. आपत्ति लगाने वाले ये कहते हैं कि ये गलत. परंपरा की शुरुआत कर दी गई है कि अगर कल. को कोई भी पॉलिटिकल पार्टी मान लीजिए. बीजेपी भी विपक्ष में होती है कभी ना कभी. तो जाएगी तो कोई भी नेता जो बड़ा नेता जेल. में रहेगा वो सरकार चलाता रहेगा वो कहेगा. जी ये तो पॉलिटिकल आरोप लगे हैं पॉलिटिक. अभी ज क्लियर थोड़ी ना हुआ है जब फैसला. आएगा तब देखा जाएगा बट वो जो एक पॉलिटिकल. में नैतिकता की बात होती थी जैसे नितीश जी. ने एक जमाने में इस्तीफा दे दिया था. दुर्घटना इसका जवाब. जवाब इसका दे.
देखिए अगर आप पॉलिटिकल कारणों से कोई. मुकदमा बना रहे हैं आपने हेमंत सुरेन को. पकड़ के जेल में डाल दिया उनका इस्तीफा हो. गया आपने केजरीवाल को पकड़ के जेल में डाल. दिया वह इस्तीफा नहीं दिए कल को आप. स्टालिन को भाई चार मुकदमे ही तो लगाने. हैं मुकदमे आपने लगाए उठाकर जेल में डाल. दिया इस्तीफा दो विजयन जी को पकड़ा जेल. में डाल दिया इस्तीफा दो तो फिर इस ममता. बनर्जी सुभंकर जी एक मिनट अपनी बात पूरी.
कर लो ममता बनर्जी को पकड़ के जेल में डाल. दिया इस्तीफा दो भगवंत मान को पकड़ के जेल. में डाल दिया इस्तीफा दो तो अगर यह परंपरा. शुरू हो जाएगी तो आप समझिए कि देश के गृह. मंत्री और प्रधानमंत्री भी कानून के दायरे. से बाहर नहीं है उन परे भी अगर चार मुकदमे. कल को बंगाल में लिखे गए और वहां की पुलिस. आकर कहती है नहीं साहब चलिए थाने आप आपको. जांच में हिस्सा लेना है और पुलिस ने उनको. वहां रोक दिया वो इस्तीफा दे रु नहीं संजय.
जी ये कैसे तय होगा फिर ये सवाल मन में. आता है क्क देखिए एक जमाने में आप भी. कोर्ट को त कर कार्यकर्ता के तौर पर आए. आपका भी थॉट प्रोसेस था आज जो संजय सिंह. को देख के बड़ा हो रहा है नेता जो लड़का. देख रहा है अब वो ये कैसे यकीन करेगा. बिकॉज हर पॉलिटिकल पार्टी के कि हम दूध की. दुले वो बिल्कुल यकीन करेगा उसको यह मालूम. है कि यह राजनीतिक कारणों से मुकदमा बनाया. जा रहा है तो फिर साथ की साथ वो यकीन. करेगा कि अजीत पवार से प्रधानमंत्री जी को. प्रॉब्लम नहीं है जिस परे वह 7 हज करोड़. के घोटाले आरोप लगाते हैं छगन भुजबल से. प्रॉब्लम नहीं है जनार्दन रेड्डी से.
प्रॉब्लम नहीं है नारायण राण से प्रॉब्लम. नहीं है अशोक चौहान से प्रॉब्लम नहीं है. यदु रप्पा से प्रॉब्लम नहीं है मुकुल राय. से प्रॉब्लम नहीं है सुवेंदु अधिकारी से. प्रॉब्लम नहीं है हेमंत विश्व शर्मा से. प्रॉब्लम नहीं है कितने सारे नाम गिना. आपको ये सारी बातें आप जो कह रहे हैं ये. हम बीजेपी से पूछते तो लोगों को ये पता है. कि हमारे ऊपर जोशिंग मशीन वाला सवाल है. जिसको हम हर बार उनसे पूछते हैं लेकिन आप. साथ चला गया ह सवाल व रह गया क्या जेल से. सरकार चलाना की एक परंपरा शुरू करना सही.
है क्योंकि यह लॉन्ग टर्म में हर पॉलिटिकल. पार्टी को एक फायदा देगी और नैतिकता. सियासत से खत्म हो जाएगी अगर नहीं यह. नैतिकता बिल्कुल नहीं है कि आप एक सीटिंग. चीफ मिनिस्टर को जो अच्छे स्कूल अस्पताल. चलाते जो अच्छे और मनी सिसौदिया को भी. चलाने देते आ जा रहा हूं उसपे भी उसका भी. जवाब दे रहा हूं अच्छे स्कूल और अस्पताल. बना रहा है जो अच्छे ढंग से दिल्ली के. लोगों की सेवा कर रहा है जिससे दिल्ली की. जनता खुश है उसको पकड़ के आप में डाल द ये. भी कहीं. से अब मनीष जी का सवाल आपने कहा मनीष जी.
को अगर इस्तीफा देना पड़ा उनके पास कई. मंत्रालय थे आज दिल्ली के सारे मंत्रालय. सारे मंत्रियों के पास है उस सरकार की. मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के. तौर पर अरविंद केजरीवाल करते हैं दूसरा. हमरे अवध में कहावत ते ग तीखा सुन तो. लीजिए नहीं नहीं सुन लीजिए तो अगर अगर. अरविंद केजरीवाल इस्तीफा दे देंगे जिस दिन. इस पार्टी को तोड़ने की प्रक्रिया और तेजी.
से जुड़ जाएगी बीजेपी ये भी एक खतरा है. हमारे साथ ये ये एक लॉजिकल पॉइंट आपका है. कि पार्टी ना टूटे इसलिए केजरीवाल. मुख्यमंत्री हैं फिर दूसरा क्वेश्चन इस पे. तो फिर क्या सुनीता केजरीवाल जी को हम. रावड़ी देवी कह सकते हैं क्योंकि सेम सेम. पैमाना बिहार में उस टाइम जो हुआ था. एगजैक्टली यही पैरामीटर्स थे लालू जी के. साथ हुआ उस टाइम रावड़ी देवी जी सामने आई. जो उनकी वाइफ थी फ्रंट पे आई तो भैया. उन्होंने इस्तीफा दिया था ना केजरीवाल ने. कहां इस्तीफा दिया. और हमारा स्टैंड क्या है अरविंद केजरीवाल. इस्तीफा नहीं देंगे यह पार्टी का ऑफिशियल.
स्टेटमेंट है ऑफिशियल स्टैंड है जो मैं. आपके साथ आपके सामने बोल रहा हूं ठीक है. ये आपने क्लियर कर दिया वो इस्तीफा नहीं. देंगे अब आते हैं एक और इंपॉर्टेंट इशू पे. स्वाति मालीवाल स्वाति मालीवाल जहां बैठे. यहीं बैठी थी भावुक भी हुई आंसू भी बहाए. उन्होंने कहा कि मुझे इस पार्टी ने शेरनी. कहा था और स्वाति मालीवाल ने कई सारे ऐसे. काम किए थे जिसकी वजह से डिस्पाइना. अध्यक्ष थी वो टीवी पर दिन रात छाई रहती. थी दिन भर छाई रती थी एक संजय सिंह चार.
पांच जो नेता छा रते थे उसमें उनका भी नाम. था संजय जी सामने आए बोले गलत तो हुआ फिर. उसके बाद सन्नाटा हो स्वाति मालीवाल ने. आरोप लगाया मैंने उन्होने कहा कि संजय. सिंह समेत तमाम नेताओं को ट मैसेज गया य. स्वाति मालीवाल ने कोट करते हुए यहां बोला. है कि ट मैसेज क्या है कि आप अगर स्वाति. मालीवाल को लेकर स्टैंड लेते हैं या. पब्लिक में कोई ऐसी बात करते हैं तो आप. सबको थैंक यू आप मेरा कुमार विश्वास पर. कोई स्टेटमेंट दिखाइए. आप मेरा प्रशांत भूषण पर कोई स्टेटमेंट. दिखाइए योगेंद्र यादव पर.
दिखाइए मैंने हमेशा से एक अपना जीवन का एक. तरीका तय किया हम कभी भी पार्टी के साथ जो. लोग काम करते हैं हम उनके बारे में मैं. कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता दूसरी बात यह. है कि यह पूरा मामला कोर्ट में है इस समय. और कोर्ट का फैसला आने. दीजिए दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा. इतना क्यों बच रहे थे आप लोग केजरीवाल जी. का एक इंटरव्यू भी आपने देखा होगा जो. उन्होंने किया चैनल पर इसमें दो पक्ष आए. ना एक तो आप जिसका जिक्र कर रहे हैं कि.
मैंने आके बोला दूसरा पक्ष वो वीडियो भी. आया सामने जिसमें आपने देखा. होगा जो वीडियो आया तो इसलिए मैं कह रहा. हूं कि इस पर मुझसे अभी कोई बात मेरा कहना. उचित नहीं होगा आप प्रतीक्षा कीजिए तो फिर. जो आपने फर्स्ट डे स्टैंड लिया था क्या वो. वो जल्दबाजी में स्टैंड था तब तक वो. वीडियो नहीं आया. था के बाद आपके क्या चल रहा प्रथम दृष्टि. आपको गलत लग रही है मैं कह रहा हूं जांच. होने. दीजिए जांच होने.
दीजिए अभी मुझसे कुछ ठीक है मैं नहीं कहवा. रहा आपसे लेकिन एक सवाल जो वो उठाती है. वोय कहती है कि मैं भी इस पॉलिटिकल पार्टी. का हिस्सा हूं 20 साल से मैं इन लोग साथ. जुड़ी हुई हूं 20 साल की मेहनत को अगर एक. पीए के आरोप पर क्योंकि उनका विवाद. केजरीवाल जी से कह रही मे केजरीवाल जी का. नामम लेने से बच रही थी अब उसकी डिटेल में. मत जाइए मैंने आप मैंने आप लोग को जितने. नाम बताए मैं कभी किसी के बारे में नहीं. बोलता बस यह मामला न्यायालय में है सामने. आने दीजिए सारा इसकी जांच हो जाने दीजिए.
सारा तथ्य चलिए इसको उठा के दूस इसी से. जुड़ा एक दूसरा सवाल पूछ लेता हूं मैं. उन्होंने हमारे इंटरव्यू में एक आरोप. लगाया कि आम आदमी पार्टी यह उनके कोट है. मैं उनके शब्द कोट कर रहा हूं कि आम आदमी. पार्टी में एक जमाने में वॉलेटर रहे ध्रुव. राठी उन्होंने नाम लेकर बोला यही कि वह आम. आदमी पार्टी के वॉलेटर थे अभी भी वह जुड़े. हुए हैं और उनके थ्रू क्योंकि उनका रीच. अच्छा हो गया इंपैक्ट अच्छा हो गया है आम. आमा आदमी पार्टी मेरे कैरेक्टर को लेकर एक. तर तरीके से वो कैरेक्टर सशन कर रही है जो. सही तरीका नहीं है आम आदमी पार्टी का यह.
स्टैंड गलत है और उन्होंने इसको लेकर तमाम. सोशल मीडिया पर लोगों से मदद मांगी किसने. ध्रुव राठी ने ये स्वाती मालीवाल ने आरोप. लगाया कि आम आदमी पार्टी के वो जुड़े हुए. कार्यकर्ता है और उनके थ्रू ये काम हो रहा. है नहीं कोई मतलब ही नहीं है ध्रुव राठी. से कोई कहे ऐसे मामले में क्यों बात करेगा. कोई कारण नहीं बनता उन्होंने एक वीडियो. बनाया था स्वाती मालीवाल को लेकर जिस पर. आरोप था उनका कि केवल आम आदमी पार्टी का. वर्जन था सबको लेके वीडियो बनाते रहते हैं. भाई ध्रुव राठी ने और मैं तारीफ करूंगा इस.
बात की कि जितना खुलकर सरकार की सच्चाई को. उन्होंने सामने रखा है और बहुत सारे. मुद्दे उन्होंने देश के सामने किस तरह से. लत मैसेज फैला के लोगों को गुमराह किया. जाता है वो बहुत सारी चीजें किया है ध्रुव. राठी आम आदमी पार्टी उसका बड़ा. कंट्रीब्यूशन है इस देश. की राजनीति को हिलाने में झकझोर में वो आम. आदमी पार्टी से नहीं क्योंकि ये स्वाति. मालीवाल ने कहा कि मैं सिस्टम का पार्ट. उसकी मुझे कोई जानकारी और हम उनकी. इनडायरेक्टली हेल्प करते थे बट इस मसले पर. वो बैकफायर कर ग मुझ इसकी मुझे कोई.
जानकारी नहीं है होती तो मैं आपको जरूर. बता देता अच्छा ठीक है एक और इस से. क्वेश्चन आता है आम आदमी पार्टी या विपक्ष. की पार्टियां कई बार जर्नलिस्ट पर आरोप. लगाती है कि गोदी मीडिया और गोदी मीडिया. ट्रेंड बीते पाछ सालों में बड़ा जबरदस्त. चला है कहीं कुछ हो आप गोदी मीडिया है कई. सारी तस्वीरें हमने संजय सिंह की भी देखी. जो कई सारे यूट्यूब हैं जिनके साथ पर्सनल. पार्टीज की तस्वीरें और बहुत अच्छी. सेल्फीज कई सारे यंग जर्नलिस्ट हैं क कई. मेरे बसेस भी रह चुके हैं कई और भी लोग. हैं ठीक है अब एक आम दर्शक ये सोचता है कि.
भाई जो तुम्हारे साथ है वो सच्चा पत्रकार. जो उधर खड़ा है वो गोदी मीडिया ये पैमाना. कैसे क्योंकि तो वैसी फोटो आपने मेरी गोदी. मीडिया वालों के साथ नहीं देखी बड़ा. पार्टी चिलिंग जोन में थी वो थोड़ी सी चिल. जोन में जो किते ना फोटो फोटो तो आपको जो. गोदी मीडिया वाले पत्रकार है उनके साथ भी. मिल जाएगी हां फोटो होना इस बात का पैमाना. थोड़ी है हम वही सवाल आपसे आता है कि वो. इस बात का पैमाना नहीं है हां जहां तक. गोदी मीडिया का प्रश्न है हम जब आप दिन. रात गुणगान करने में लग जाएंगे और एक तरफा.
पत्रकारिता करेंगे तो यह आरोप आपके ऊपर. लगेंगे और वह हो रहा है इस देश में इसमें. कोई झूठी बात नहीं है इस इलेक्शन से क्या. बदल जाएगा जो अभी सरकार तो बन गई उनकी 3.2. आप 0.3 कह रहे थे वो 3.2 कह रहे हैं अंकुश. लगेगा क्या अंकुश लगेगा जो इनका तानाशाही. का रवैया था जो नफरत फैलाने का काम कर रहे. थे क्योंकि आज इनको जवाब देना पड़ेगा बहुत. सारे मुद्दों का. 4 प्रत मुसलमानों को आरक्षण देने की वकालत.
पैरवी और चुनाव के दौरान इसका घोषणा पत्र. में शामिल करके प्रचार करने का काम नायडू. साहब ने किया है वह कोई मुस्लिम विरोधी. राजनीति नहीं करते. हैं नितीश कुमार जी कोई मुस्लिम विरोधी. राजनीति नहीं करते बिहार में तो जो इनका. मुझे लगता है जो एकदम खुला मैदान था कि. दिन रात नफरत. फैलाओ मुगल मदरसा मुसलमान मटन मछली मुजरा.
यह सब पर रोक लगेगा बट एक पॉइंट ऑफ ू और. अगर नहीं बोलेंगे ये घटक दल तो इन परे भी. सवाल उठेगा बट जब बीजेपी की पहली सरकार. बनी थी क्योंकि मैंने स्टोरी भी स्प्रे की. थी तब उसमें तीन मुस्लिम मंत्री थे नजमा. हेपतुल्ला जी एमज अकबर साहब और मुख्तार. अब्बास साहब इस बार एक भी नहीं रहा इवन जो. अल्पसंख्यक मामलो मंत्री बने वो भी. मुस्लिम नहीं है हालांकि अल्पसंख्यक पर. केवल मुसलमानों का हक है ये भी सही नहीं. है ये उनका वर्जन है बट इस बार जब कमजोर. हुए हैं तो उन्होंने अपना स्टैंड और. क्लियर कर दिया तो आपको लगता है वाकई में. आप लोग जो कह रहे हैं वो असर होगा क्योंकि.
कई लोग का मानना है कि अब वो और ज्यादा. अपने पॉलिटिकल स्टैंड पर आगे बढ़ेंगे. देखिए ये तो उनके साथ के लोगों को तय करना. है ना गृह दिया हम ना रक्षा दिया ना वित्त. दिया ना विदेश दिया ना शिक्षा दिया ना. स्वास्थ्य दिया ना कृषि दिया ना. पेट्रोलियम दिया दूर ल आप एक भी मंत्रालय. अपने घटक दलों को नहीं दिया झुनझुना. मंत्रालय दे दिया तो झुनझुना मंत्रालय.
लेकर अगर उनके आप लोग को बुरा तो लगा होगा. सर क्योंकि आप लोग को लग रहा था सब कह रहे. थे कि सारा बड़ा मंत्रालय चला जाएगा. बीजेपी से अग ना ना रेल दिया ना सड़क दिया. तो यह झुनझुना मंत्रालय लेकर अगर उनके घटक. दल कितने दिन शांत रहेंगे यह बड़ी परीक्षा. होग या हो सकता स्टेट गवर्नमेंट पाके खुश. हो कि स्टेट में तुम राज करो देखिए अच्छा. क्योंकि हम धीरे धीरे करते धीरे-धीरे हम. एंड पर आ रहे हैं तो कुछ छोटे-छोटे सवाल. है छोटे-छोटे जब देगा एक सवाल तो यही है. कि भाई आप लोग हर बार विधानसभा जीतते हैं. लोकसभा हार जाते हैं ये इसको क्यों नहीं.
क्रैक कर पा रहे आप लोग फिर विधानसभा. जीतेंगे फिर विधानसभा जीतेंगे लोकसभा में. क्या बा आता है साथ के सातों हार जाते हैं. एक तरफा हां उसको जरूर वो हम लोगों के लिए. चिंता का विषय है मतलब एक बार क्लीन स्वीप. होगा समझ में आता है बैक टू बैक क्लीन. स्वीप हो रहा है हां तीन बार हो गया और ये. इसकी हम हम अयोध्या वासियों को गाली देने. वाला काम नहीं करेंगे हम यहां के लोगों का. जनादेश स्वीकार करते हैं और हम समीक्षा. करेंगे हम से चू ठीक है सेकंड क्वेश्चन. जैसे मैंने कहा चंद्रबाबू डू जेल गए थे. वोट प्रतिशत हमारा जरूर बढ़ा है लेकिन वो.
सब बातें करने नी गठबंधन भी आ गया ना सर. इस बार तो उसका मैं खुद मान रहा हूं एक. सवाल फिर आता है सिंपैथी का केजरीवाल जी. को सिंपैथी क्यों नहीं मिली क् केजरीवाल. जी कह रहे थे कि अबकी हम जेल जाने का असर. होगा चंद्रबाबू नायडू जेल गए वो जीत गए. मैंने अमृतपाल का जिक्र किया जबकि बहुत. गंभीर उस पर आरोप है इंजीनियर राशिद का. जिक्र किया मैंने केजरीवाल जी इज द ओनली. पॉलिटिशियन आमतौर पर मानते हैं कि जेल. जाने से इंसान पॉलिटिकली शहीद होता है और. उसको सिंपैथी मिलती है आपके साथ क्यों. नहीं यह देखेंगे हम लोग क्या कारण इसका.
रहा लेकिन फिर वही बात मैं कह सकता हूं. अपनी पार्टी के पक्ष रखने के लिहाज से कि. हमारा मत प्रतिशत पिछली बार की तुलना में. काफी बढ़ा लेकिन वह जीत तक नहीं पहुंच. पाया ठीक है थर्ड क्वेश्चन कांग्रेस से. दोस्ती कब तक चलेगी क्योंकि विधानसभा में. वसे भी अलग लड़ते हैं आप लोग पंजाब में. अलग ही लड़ते हैं राजनीति में हर चीज का. एक निश्चित समय होता है समय और परिस्थिति. स्थितियां क्या कहती है उस हिसाब से तय. होगा कांग्रेस से खिलाफ शुरू सियासत.
कांग्रेस के साथ. तक यह क्या राजनीतिक पतन या राजनीतिक. हिपोक्रिटस. नहीं है. हिपोक्रिटस. का साथ है क्योंकि जो सरकार है वह चुनी गई. हुई सरकारों को महाराष्ट्र से लेक अरुणाचल. तक खत्म कर रही है वह चुनी हुई सरकारों को.
गिराने का काम कर रही है विधायकों सांसदों. की खरीद फरोख का काम कर रही है तो बहुत. सारे मुद्दे हैं ठीक अन्ना हजारी जी से. रिश्ते हैं. अभी अब वो जब हम लोगों ने राजनीति का सफर. तय किया तो उन्होंने साफ मना किया कि भाई. हमारे फोटो तक भी आप इस्तेमाल मत कीजिए तो. बीच में एक दो बार जरूर मैं रह रह करर. आपको बहुत कोसते हैं आप लोग को वो जब भी. टीवी पर आते हैं तो आप लोग कोसते हुए नजर. आते हैं बहुत बड़े हैं वो कुछ भी कह सकते. कई बार लोग कहते हैं यार जैसे आप लोग आरोप. लगाते हैं ना कि कि जो अपनों के नहीं हुए.
जैसे आप लोग आडवानी जी को लेकर जोशी जी को. लेकर कहते हैं ऐसे वो भी कहते हैं कि आम. आदमी पार्टी ने अपने बड़े बुजुर्गों का. सम्मान नहीं किया आज वो गाली दे रहे हैं. अगर वही नहीं समझ पाए तो हम तो उनके. नेतृत्व में राजनीति करने को तैयार थे. राजनीति के रास्ते में जाने के लिए तैयार. थे उससे उन्होंने ये उनका. फैसला अन्ना जी अगर अगवाई करते तो हम सब. लोग तो उनसे अनुरोध कर रहे थे बार-बार कि. अब नहीं मान रही है सरकार तो हमें राजनीति. का रास्ता चुनना हो बीजेपी में अक्सर आरोप. लगता है कि बीजेपी से बड़े मोदी जी हो गए. क्या आम आदमी पार्टी से बड़े अरविंद.
केजरीवाल हो गए अच्छा आप मोदी जी की. पार्टी में जो कि इतनी बड़ी पार्टी है अगर. मैं आपसे पूछूं 10 नाम आप बता दीजिए जिसको. पूरे देश में जानते हो और आम आदमी पार्टी. जो उनकी तुलना में बहुत छोटी पार्टी है. उसमें आपको 10 नाम मैं बता दूंगा जिसको आप. अगर अंडमान में भी पूछेंगे तो लोग जानते. होंगे तो यह व्यक्तिवाद वाली पार्टी नहीं. है इसमें बहुत सारे लोग हैं जो अपने काम. के हुनर के कारण अपने अपने काम अपनी. प्रतिभा के कारण अपनी पहचान रखते हैं.
हालांकि लोग देश में 10 नाम वो भी जानते. होंगे जो आम आदमी पार्टी से निकल गए अब वो. ठीक है मतलब उसकी एक अलग कहानी है उसपे. मैं बोलता नहीं मैंने आपको पहले बताया आप. आप कैसे रह गए आप क्योंकि आपके सारे साथी. धीरे-धीरे दाएं बाएं होके अलग-अलग वजह से. खिसक गए संजय सिंह में कुछ तो टैलेंट अलग. सा है जो रह गया नहीं मेरा एक ही चीज आप. कह सकते हैं कोई भी आपको ऐसा आदमी नहीं. मिलेगा जो ये कहेगा कि मैंने किसी के साथ. धोखेबाजी की कभी किसी. को मतलब बीच रास्ते में छोड़ दिया मैंने.
कभी यह काम किया नहीं तो मतलब आप यह चीज. पर मतलब मित्रों में भी ये नहीं कि सिर्फ. राजनीति में भी तो हमने अपने संबंधों का. निर्वाह हर हद तक जाकर किया है तो मुझे. लगता है. कि जब आप किसी दल में है संगठन में है तो. जितना हो सके आपको पूरी निष्ठा के साथ. अपना काम करना चाहिए ये सवाल मैंने स्वाति. से पूछा था आपसे पूछ रहा हूं और इसको लेकर. सोशल मीडिया बड़ा कंप न होता है कि आम. आदमी पार्टी में हाव भाव भी लोगों का. अरविंद केजरीवाल जी की तरह होता है ज.
स्वाती जी जब आई पहली बार सुनीता जी जब. पहली बार सामने आई तो लोगों ने बड़ा नोटिस. किया कि जिस तरह से वह हाथ हिला रही थी जो. पॉस ले रही थी जो अंदाज था या जिस तरह से. जय हिंद कहा या सो कॉल्ड आपका शराब घोटाला. जो शब्दों का चयन था वो बिल्कुल केजरीवाल. जी की तरह था लोगों ने कहा कि बिल्कुल. केजरीवाल जी ने एकदम अपना पैरामीटर तय कर. दिया है कि अब उनकी पॉलिटिकल जो राजनीति. अगर वो फस गए तो यहां से कंटिन्यू हो. जाएगी क्या यह आप जैसे कार्यकर्ताओं को. थोड़ा परेशान नहीं करती या कि हमारी तरफ.
भी देख सकते थे आप नहीं नहीं नहीं ऐसा है. कि अगर आप कोई चीज अरविंद केजरीवाल जी से. सीख सकते हैं बिल्कुल सीखना चाहिए बहुत सी. चीजें अरविंद केजरीवाल जी भी हैं जो. कार्यकर्ताओं से सीखते हैं बहुत सी चीज हम. लोग हैं जो कार्यकर्ताओं से सीखते. हैं कोई आदमी परफेक्ट नहीं. है लीडर है लीडर को फॉलो ज्यादा किया जाता. है यह स्वाभाविक बात है लेकिन ऐसा नहीं है. अलग-अलग व्यक्ति का अलग-अलग हुनर है उनसे.
भी सीखते हैं हम लोग आप में ऐसा कभी हो. सकता है कि दो-चार चुनाव हार गए तो. केजरीवाल जी की जगह कोई और बन सकता है. मतलब मैं समझ मतलब जैसे बीजेपी कई बार ये. कहती है जब हम परिवारवाद को लेकर सवाल. पूछते हैं कि आपकी पॉलिटिकल पार्टी में भी. तो बच्चों के बच्चे हैं नेताओं के लड़के. हैं जो नेता बन गए हैं तो वो कहते हैं कि. लेकिन हमारी पार्टी और बाकी पॉलिटिकल. पार्टी में डिफरेंस क्या है कि अगर मैं. चुनाव हार जाऊं दो चुनाव हार जाऊं तो. तीसरी बार कौन नया अध्यक्ष बनेगा या कौन. मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनेगा आप. प्रिडिक्ट नहीं कर सकते बाकी पॉलिटिकल. पार्टी में आप प्रेक्ट कर सकते हैं जैसे. राहुल जी कई बार हारे बट वही रहेंगे या.
प्रियंका जी आ जाएंगे या उनके बच्चे आ. जाएंगे क्या अरविंद केजरीवाल के अलावा कभी. कोई सक्रिय रहते उनके दिल्ली का. मुख्यमंत्री बन सकता या शीर्ष नेतृत्व पर. आम आदमी पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है एक. आदमी अगर अच्छे ढंग से काम कर रहा है और. उसके नेतृत्व में पूरी पार्टी यूनाइट है. तो इसमें समस्या क्या. है नेतृत्व करने दीजिए इसमें कोई इस बात. का झगड़ा या होड़ तो है नहीं कि भाई हमें. नेतृत्व चाहिए अगर उनका उनकी एक्सेप्टेंस.
है वॉटियर से लेकर पार्टी लीडर्स तक के. बीच में और वह सरकार और संगठन को चला रहे. हैं अच्छे ढंग से अच्छी ठीक कुछ सवाल. दिल्ली वालों ने भेजे थे मुझे दिल्ली की. पानी की समस्या कब ठीक होग पानी की समस्या. के लिए बहुत मेहनत और शिद्दत के साथ आसी. जी और हमारी पूरी पार्टी काम कर रही है. लेकिन मैं बड़ी गर्मी है बड़ी. मैं निवेदन करूंगा. हाथ जोड़कर हरियाणा की सरकार से मोदी जी.
से और सात सांसद जो जीते हैं उनसे कि भाई. पानी पर सियासत मत कीजिए पानी. दिलवाइन रुकवा पड़े हुए हैं भाई अगर. दिल्ली के पास अपना पानी होता तो हम क्यों. इस बात के. लिए संघर्ष कर रहे होते हमने जितना पानी. को बढ़ा सके छोटे छोटे बना के या जो कुछ. भी हमसे हो सका वह हमने किया लेकिन जो.
हमारा हिस्सा है हरियाणा से मिलना चाहिए. वो तो अधिकार है हक है उसको देने में आपको. क्या प्रॉब्लम है दीजिए. आप तो मैं तो यही कह सकता हूं बाकी अभी. सुप्रीम कोर्ट में भी है मामला दिल्ली में. पांच काम ऐसा कि जो आप लोग को लगता है य. और बेहतर होना चाहिए अच्छा तो आप बता ही. रहे और क्या ऐसा देखिए बारबार मुद्दा उठता. है. जब ठंड का समय आता है तो प्रदूषण का तो. उसका एक स्थाई समाधान हो जाए तो वह अच्छा. रहेगा दूसरा मुद्दा उठता है पानी का हर.
गर्मी में यह समस्या आती है अब जो हिस्सा. पानी का दिल्ली के लोगों को मिलना चाहिए. वो मिल जाए तो यह दिल्ली के लोगों के हक. में भी होगा आम आदमी पार्टी के भी हक में. होगा तीसरा मुझे लगता है कि जिस प्रकार की. बाधा हमारे सामने उत्पन्न की जाती है और. स्कूल अस्पताल बनाने के लिए जमीन लेना है.
या सरकार से जो केंद्र सरकार से कुछ मदद. चाहिए वो चीजें सिस्टम ठीक हो तो हम और. बेहतरीन तरीके से काम कर सकते हैं एक बड़ा. आरोप आप पर लगता है यमुना जी को लेकर हां. यमुना का हर साल यमुना में वो झाग वाला. पानी और टीवी वालों की बड़ी मोहब्बत है कि. सब जाके वहीं वो भी हमारे लिए चुनौती है. और उसको लेकर दावा किया गया था ठीक हो. जाएगा बट कई कई साल हो गए यमुना अरे कई. साल हो गए सर आप लोग तो 19 2019 में ठीक. करने का दावा हो ग था तो जब आप पांच काम. में पूछ रहे हैं तो वो मैं भूल गया था वो. भी एक शामिल है तो यह कुछ रह गया है रह.
गया क्या आप लोगों ने अच्छा कर दिया स्कूल. अस्पताल बिजली पानी बुजुर्गों की तीर्थ. यात्रा माताओं बहनों के लिए बस की फ्री. यात्रा पेंशन बढ़ाना हर तरह की राहत लोगों. को. दिया फ्लाई ओवर्स का. निर्माण अब देखिए सड़कों का निर्माण. झुग्गी बस्तियों में अनथ कॉलोनी के अंदर. आप जा ये किस हालत में लोग रहते थे 10 साल. के बाद आज वहां हालत क्या है आप जाके.
देखिए ठीक झुग्गी से एक सवाल और आ गया बस. अब खत्म पाच मिनट उस सम करेंगे रोंगिया. मुसलमानों को लेकर बड़ा आरोप लगता है कि. आप लोगों ने बसवा दिया वोट बैंक के लिए यह. अक्सर बीजेपी आरोप लगाती है कि आप लोगों. ने कांग्रेस में शुरू हुआ था आप लोगों ने. कंटिन्यू किया आप लोग जानबूझ के बसवा हैं. ताकि वोट बैंक आपका पक्का रहे अच्छा और ये. कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ मामला है ना. अगर कोई विदेशी नागरिक हम भारत में आता है. तो बॉर्डर से ही तो आएगा हम कैसे आ गया वो.
किसकी जिम्मेदारी है हम किसकी जिम्मेदारी. है बॉर्डर की सुरक्षा कौन करता. है भारत के गृह मंत्री भारत के रक्षा. मंत्री तो अगर को अगर कोई आ गया है ठीक. सुन तो लीजिए मेरी बात तो सुनिए उसको. डिपोर्ट करना है तो कौन. करेगा भारत की सरकार करेगी अब हमसे जो. सवाल पूछ रहे हैं. वह सवाल सीधे-सीधे बीजेपी से ही बनता भैया.
तुम्हारी कृपा से और आप एक चीज बताइए मुझे. 10 नाम बता दीजिए बांग्लादेशियों के. घुसपैठियों के बार-बार बात करते हैं कितने. बांग्लादेशी घुसपैठ आपने 10 साल में भगाए. बताइए. ना 10 साल हो गया शासन किए हुए आपको आप. कभी कहते हैं दो करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ. हैं कभी कहते हैं इतने लाख बांग्लादेशी. घुस बैठी हैं आप दो 10 का नाम बता दीजिए. आप छोड़ दीजिए आप सब कुछ. आपका आपका स्टैंड क्या आपका राजनीति करना. यह राजनीतिक मसला है इसपे आम आदमी पार्टी.
का आपका स्टैंड क्या है कि उनको रहने का. मिलना चाहिए क्योंकि आधार कार्ड बनवा लिया. कई लोगों ने ऐसा अवैध तरीके से किसी को भी. भारत में रहने का अधिकार नहीं है यह मुझसे. सवाल ही क्यों पूछा जा रहा है ठीक है अवैध. तरीके से किसी को भी भारत में रहने का. अधिकार नहीं है यह यह संजय सिंह से क्या. ये ये कोई सवाल ही नहीं बनता है मैं तो ये. कहूंगा जो अवैध तरीके से रह रहा उसकी जांच. करा उसको. आप डिपोर्ट करते नहीं आपको राजनीति करना. है उस मुद्दे प ठीक है बारबार सेकंड लास्ट.
क्वेन और दूसरी चीज आप मुझे बताइए. बांग्लादेश की आजादी के 50 साल पूरे हुए. केजरीवाल को बुलाया गया वहां पर वहां पर. सोनिया गांधी जी को बुलाया गया कौन गया. वहां पर भारत के प्रधानमंत्री. गए आदरणीय नरेंद्र मोदी जी और क्या वह कह. के आए उन्होंने कहा मैं बांग्लादेश की. आजादी का योद्धा हूं मैं जेल गया था तुम. हमारी आजादी के लिए और सवाल हमसे पूछते. हैं आप भाई हमारे मोदी जी बांग्लादेश की.
आजादी के योद्धा हैं वो बांग्लादेश आजाद. कराने के लिए लड़े हैं और उनकी पार्टी. वाले कहते हैं बांग्लादेशियों को भगाए. पूरा नेता बन गए एकदम आप. नहीं भाई ये उनका आधिकारिक बयान है किसी. विषय को कैसे घुमा देना है ये आधिकारिक. बयान है उनका नहीं नहीं पूरा टैलेंट आपका. निकल रहा है आप मुख्यमंत्री पद के भी. दावेदार हो गए हैं राज्यसभा सासद आगे पढ़. के मैं ये कह रहा हूं कि प्रधानमंत्री जी. से सवाल पूछिए ठीक कितने बांग्लादेशी. घुसपैठ हिंदुस्तान के अंदर है और कितने. बांग्लादेशी घुसपैठियों को उन्होने भगाया.
ठीक सेकंड लास्ट क्वेश्चन केजरीवाल जी. कितने रोंगिया है कितने रोंगिया पूछेंगे. कभी सामना जरूर पूछ सेकंड लास्ट सवाल. केजरीवाल जी की आंखों के दो प्यारे थे एक. तरफ संजय जी थे एक तरफ चड्ढा जी थे अब. राघव चड्ढा जी राजनीति के साथ साथ जब से. परिणति वाले हिस्से में गए उसके बाद से. सियासी तौर पर थोड़ा गायब हो गए बहुत दिन. से उनके आंखों का ऑपरेशन चल रहा है इलाज. चल रहा है लंबा चल रहा है क सवाल उठते हैं. एक सवाल उठता है कि दिल्ली में एक तो. केजरीवाल जी अस्पताल नहीं बढ़िया बनवा पाए. बनवा दिए होते तो शायद इतना लंबा समय बाहर.
नहीं गुजारना पड़ता दूसरा आता है कि थोड़ा. थोड़ा बीजेपी से मोहब्बत शुरू हो गई है. खुलकर कोई नहीं कह रहा क्योंकि बड़े करीबी. थे टैलेंट थे सक्सेसर के तौर पर देखे जा. रहे थे क्या ये डिसपिटर है क्योंकि. क्योंकि यही आरोप ऑलमोस्ट स्वाती मालीवाल. पर भी था कि जब केजरीवाल जी जेल गए और ये. स्वाती ने भी कहा कि जब वो जेल गए तो मैं. भी बाहर थी मुझ पर पूरी पार्टी टूट पड़ी. लेकिन राघव चड्ढा को रेड कार्पेट वेलकम. दिया जा रहा है क्यों दिया जा रहा है. उन्हें और मेरे साथ भेदभाव देखिए फिर आप. मु मुझे उसी दुविधा में डाल रहे हैं एक ही.
विषय है जिस पर मैं कुछ नहीं बोलता वह है. पार्टी के मित्रों के बारे में पार्टी के. नहीं नहीं तो ठीक है आप दबाइए कमजोर नस. उसके लिए आप स्वतंत्र है लेकिन मैं कभी भी. अपने किसी साथी के बारे में कोई कमेंट. नहीं करता संघर्ष में एक चीज मैं जरूर. क्लियर कर देना चाहता हूं ये जो बीजेपी. यजेपी में जाने की बातें चलती हैं राघव के. बारे में मैं समझता हूं यह सब बेबुनियाद. बातें हैं बाकी वो आपसे मिले उनसे और बाकी. जितने सवाल आप अगर कभी राघव चड्ढा ने. बीजेपी जवाइन की क्या संजय सिंह को.
डिसपिटर निश्चित. होगी राघव चड्डा ई नहीं हमारी पार्टी का. कोई भी बीजेपी में जाता है मुझे बिल्कुल. निराशा होती नहीं बहुत सारे तो चले गए. पार्टी से बट अगर राघव एक्टिव नहीं होते. बिल्कुल भरोसा नहीं है बिल्कुल कहीं से भी. नहीं लगता बी आपकी बातचीत होती है उनसे. अरे क्यों नहीं होती भाई तो फिर इतनी. अफवाह क्यों पैदा हो रहा आप लोग क्यों. नहीं साथ में आते गले में हाथ डालिए अच्छा. मेरे मेरे बारे में जोय अभी आप भी इसी. कार्यक्रम में कह रहे थे कि मेरे बारे में. अवा फैलाई गई कि बने क्लियर कर दिया नहीं. नहीं उसी दिन खत्म हो गई नहीं नहीं मैं कह. रहा हूं कि आप दो दिन तक फैलाया गया आपने.
इसी कार्यक्रम अफवा फैली संजय सिंह जेल से. निकले छाती चौड़ी करके कहा कि हम आंदोलन. से निकले हैं पूरी मीडिया ने कवर किया वो. भी दिखा दिया अगले दिन से खबर खत्म. अफवाहों का को लेकर चार महीने से खबर चल. रही है अफवाहों का क्या करेंगे आप. क्लेरिफिकेशन कितने कितनी कितनी चीजों का. एक क्लेरिफिकेशन तो बनता है ना सर राघो च. एक ट्वीट तक नहीं करते वो किस चीज का. क्लेरि ट्वीट तक नहीं वो करते आम आदमी. पार्टी को लेकर बीजेपी के खिलाफ खिलाफ या. कोई भी ऐसा जो एक अप्रोच था उनका जो हमने. देखा था क्योंकि आज से तो आम आदमी पार्टी. है नहीं हमने आपको कई विषयों पर बीजेपी से.
लड़ते देखा अब या तो उन्हें भी जेल जाने. का डर है लग रहा हो शायद नई नई शादी हुई. है अभी नन बीवी थोड़ा घूमते टहलते जेल. क्यों जाए बीजेपी के बीजेपी में जाने वाली. किसी भी चर्चा को मैं गलत मानता हूं और यह. बेबुनियाद बातें हैं बाकी और जो प्रश्न. करना होगा वह राघव से जवाब मिले तो पूछ. लेना मैं और कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन यह सब. ऐसे अफवाह चला ठीक है एक आखरी सवाल है आई. होप इस पर आप ऑफेंड ना हो ऑफेंड होंगे तो. ये सवाल मैं कट कर दूंगा आप कमेंट सेक्शन. पढ़ते हैं अपना पढ़ता हूं यह सवाल मैं.
पूछना नहीं चाहता लेकिन मुझसे बहुत लोगों. ने कहा आपको लेकर एक बहुत गंदा रूमर. बीजेपी फैलाता है बताइए सुल्तानपुर वाला. टिकट वाला कि वो कहते हैं सोशल मीडिया पर. एक कहानी चलती है कि संजय सिंह टिकट बेचते. थे ब्लैक में और ये सब बहुत सारी बातें. आती है अब ये पर्सनल आरोप भी है जैसे. अलग-अलग नेताओं को लेकर लगता है अखिलेश जी. को लेकर वाला आता है किसी को लेकर. कोई आरोप लगता है ये क्या कहानी कहां से. ये उठा पहली बार कहां आपके कान में आया कि. ये संजय सिंह ब्लैक टिकट बेचते हैं और ये. वो है और सुल्तानपुर जाएंगे बड़ा पैसा.
छापे हैं संजय सिंह 50 बार के ब्लड डोनर. है संजय सिंह गुजरात की आपदा में गए थे. वहां काम किया था संजय सिंह सुनामी की. आपदा में गए वहां काम किया था संजय सिंह. नेपाल की आपदा में गए उत्तराखंड की आपदा. में गए वहां पर काम किया था संजय सिंह. जम्मू कश्मीर की आपदा में गए वहां पर काम. किया था मेरा पूरा जीवन का रिकॉर्ड उठाकर. देख लीजिए अरे सस टके का नाम तो लिखते. शुभम ट पता नहीं कौन सा नाम लिख के भेजते.
सुन तो लीजिए पहले पूरी आपने सवाल पूछा. लेकिन झूठ फैलाने का लोगों के बारे में. दुष्प्रचार करने का जिन लोगों ने ठेका. लिया है उसका जवाब देना मैं अपने आप की. जिम्मेदारी नहीं समझता उनको अपना काम करने. दीजिए मुझे अपना काम करने दीजिए मेरे. पिताजी मेरे पिताजी. इंटर कॉलेज में अध्यापक थे रिटायर हो गए. अभी भी हैं मेरी मा जी जूनियर हाई स्कूल. में टीचर थी रिटायर हो गई अभी भी हैं हम.
लोग एक बड़े. ही छोटे से परिवार से संस्कार लेकर वहां. से पले बढ़े जो कुछ भी कर पाया जीवन में. किया कभी सोचा नहीं था कि एक छोटे से शहर. से आके यहां दो बार राज्यसभा का सांसद बन. जाऊंगा ईश्वर की कृपा है साथियों का. दोस्तों का सहयोग है अब हमारी किसी बात से. बुरा मान के मुझे कोई कुछ भी कहे गालियां. देता रहे मैं कहां तक उलझता रहूंगा नहीं. तो मेरे मन में थ मेरे मन में जो आया अभी. आपने खुद कहा किसी को चोर कहते हैं.
किसी को टिकट ब्लैकिया कहते हैं किसी को. घुंगरू सेठ कहते हैं किसी को खुजलीवाल. कहते हैं इनका काम ही गाली ब देने का है. आप देखिए ना अब जैसे मैं इसी प सवाल पूछता. जैसे वाली बात तब आई जब अखिलेश जी. वहां से गए कुछ रिपोर्ट आई तो मीडिया को. एक बहाना मिल गया उससे जोड़ दिया उन्होंने. सबका अलग अलग अलग कहानी है जिसको उन्होंने. जोड़ दिया है आपको ये पहली बार कब सुनाई. पड़ा कि यार ये क्या चल रहा है मेरे कमेंट. सेक्शन में मैं देखिए पहली चीज तो मैं. क्योंकि आप तो वोकल नेता है आपने कभी गाली. इनको डांटा नहीं कि अबे तुम क्या लिख रहे.
मतलब कुछ तो लॉजिक होगा आज तक मुझे कमेंट. करने वाले को किसी को मैंने जवाब नहीं. दिया कभी जवाब नहीं. दिया और क्यों जवाब दे आप इसकी बात करते. हैं आप मेरा फोन एक दिन रखिए मैंने कई बार. बीजेपी के प्रवक्ताओं को भी आपको लेकर. टीवी पर नेशनल टीवी पर ये सब बातें छेड़ते. हुए देखा है करने. दीजिए उनकी उनकी मानसिक स्तर यही है उनका. सोच यही है ब जो कहते ना कि जहां आग होती. वही धुआ कुछ कभी कभी लाइफ में आपने मतलब. इससे जुड़ा कोई काम किया हैसा आसपास भी.
कभी मतलब ही नहीं है कोई तो फिर ये कहा. इसीलिए तो मैं कहता हूं बीजेपी एक बहुत. शातिर पार्टी है और उन्होंने बाकायदा. नानाम भी रखा उसका शुभम टॉकेज क्या नाम है. जिसको कमेंट से इस पे एक सीबीआई की जांच. करवाई है मैं तो कह रहा. हूं एक ईडी सीबीआई इनकम टैक्स डिपार्टमेंट. जाकर शुभम टाकीज पे हमला कर दे और रिकॉर्ड. उठाए देखे वहां पे मैं तो ये कह रहा हूं. आप मैंने. तकरीबन 6 700 कमेंट आए जिसमें से बीजेपी. के कम से कम बीजेपी उससे जुड़े लोगों ने. जो आपको नास कर करते कम से कम तीन 350.
लोगों ने एक ही सवाल पूछा मुझसे हा कि भाई. संजय सिंह से जरूर पूछेगा कि अच्छा उसमें. कई हमदर्द भी थे तो उन्होने उन्होने अच्छे. से लिखा कि संजय सिंह जी से जरूर पूछेगा. कि क्या कभी जीवन में उन्होंने शुभम टाकीज. के बाद टिकट बेची और क्या है इस सोशल. मीडिया पर अफवा की सच्चाई वो अफवा ही है. उसकी कोई आप ऑफेंड होते हैं इससे बुरा. लगता है आपको एकदम नहीं क्योंकि मैं जानता. हूं वो मुझसे नफरत करते हैं मुझे गालियां. देंगे आप इसको छोड़ दीजिए ना आप मेरा फोन. एक दिन रखिए हां और कैसी-कैसी गालियां.
देते हैं क्या-क्या बोलते हैं एक मतलब ये. अपने रिपोर्टिंग के लिए रख लीजिए मेरा फोन. एक दिन आपको अंदाजा लग जाएगा पे या फोन. कॉल पे फोन कॉल पे बाकायदा फोन कॉल पे. क्या बोलते हैं आप बहुत सारी गालियां देते. हैं अब वो गाली मैं आपके कैमरे प नहीं बोल. सकता घर परिवार में लोग सक पकाते नहीं है. इससे या सब अब मोटी चमड़ी हो गई सब समझ गए. सब जान रहे हैं कि भाई ये लड़ रहे हैं तो. इनको ये सब चीजें झेलनी प मैं भी ये जान. गया हूं कि मैं लड़ रहा हूं तो ये सब. झेलना पड़ेगा मुझे कोई रास्ता नहीं आप ला.
आप कब टूटे थे अब आप. देखिए जब यह अभियान चलाते और आज से नहीं. है एक लाख बार क क कम से कम लिखा होगा. उन्होंने जो टिकट ब्लैकिया वाली बात आप. बता रहे हैं अब मैं अगर एक लाख बार उनको. जवाब देने में अपनी ऊर्जा लगाता तो मैं. काम कब करता बताइए आप तो मैं ऐसी चीजों. में क्यों जिसका ना कोई सिर है ना पांव है. जिसमें आपको सिर्फ बदनाम करने के लिए कुछ.
भी कहा जा रहा है तो कहने. दीजिए मतलब इन लोगों के कहने से ना तो. अखिलेश जी चोर हो जाएंगे ना उनके. कहने से मैं कोई टिकट ब्ल किया हो जाऊंगा. उनको कहने दीजिए हां यह जरूर है कि एक. सीबीआई की जांच इस पर भी होनी. चाहिए रिपोर्ट कम से कम देश के सामने लाइए. प्रधानमंत्री जी को कहिए भाई आपकी पार्टी. वाले लिखते हैं एक ये भी करा दो जांच अगली.
बार आप जब मोदी जी को नमस्ते कीजिएगा धीर. अब वो एक बार धोखा खा गया मैं अब दोबारा. नहीं करने वाला हूं बस वैसे दूर दूर से ही. ठीक है लास्ट टा में आपका ब्रेक डाउन कब. हुआ था कभी इमोशनली ब्रेकडाउन होता आपका. नहीं मैं आखरी बार कब रोए थे मैं मूल रूप. से इमोशनल आदमी हूं कब आखरी बार कब रोए थे. नहीं मैं किसी की तकलीफ को देखता हूं तो. मुझे अभी मैं 12थ फेल देखा अ जेल में मैं. वहां रोया बड़ा पिक्चर.
थी तो मैंने तीन बार वो पिक्चर संयोग से. आई और मैं उस फिल्म को देखा क्या दौर था. केजरीवाल जी सबको लेके जाते थे पिक्चर. दिखाने तो नहीं. मैंने जो टीवी लगी होती है जेल में तो. वहां पे तो वहां ये सब भी मिलता जेल में. netfx3 चैनल चलते हैं और खाली अकेले मेरे. नहीं तो ये खबर बन जाएगी सबके बैरक में. लगी रहती है टीवी तो चैनल चलते हैं वहां.
बट ये तो हॉट स्टार पे आई थी ना ये तो अभी. रिलीज कहां हुई है चैनल पे कहां आभी ये तो. हॉस्टार पे आई थ नहीं नहीं से सनी सेट. मैक्स पे चल चुकी है 12थ अच्छा हो सकता है. रिलीज हो गए उस टाइम हां हां आप पता कर. लीजिए तो जमीन प बैठ के दिखाते हैं तो. उसमें जो जब वो आता है निराश होके उसका और. उसकी मां उसको बहका रहती है कि ये सब कुछ. ठीक चल रहा है और जब वो. अपनी मां से एकदम लिपट के रोने लगता है वह.
सीन मैं भी आज भी नहीं भूल पाता हूं आपसे. बात कर रहा हूं तो मैं इमोशनल हूं तो ऐसा. नहीं मैं इमोशनल इंसान हूं. और अगर आपके अंदर इमोशन नहीं है तो फिर. राजनीति करिए या समाज सेवा करिए या कुछ भी. करिए मतलब ही नहीं है प्रोफेशनल लाइफ के. चक्कर में पर्सनल लाइफ डैमेज तो नहीं हो. रही कहीं बच्चों को समय बहुत लोग कहते हैं. कि दोनों हो पाता और आप जितना जेल रहे या. ये रहे ऐसा लगता नहीं कि बच्चे बड़े हो ग. समय तो बिल्कुल परिवार को मैं नहीं दे.
पाया. अगर मेरा जब से मैं सार्वजनिक जीवन में. हूं बहुत ज्यादा बाहर रहा मतलब समय नहीं. दे पाया यह बात सच है कभी लगता नहीं छोड़ो. प छोड़ो पॉलिटिक्स हो गया यार कर लिया सा. सांसद बन ग सुकून की लाइफ देखे फिर वही. बात याद आ जाती है रघु जी की कि आपको जब. आप इस फील्ड में है तमाम चुनौतियों का. सामना कर करना पड़ेगा और कर रहे हैं. अरविंद केजरीवाल रघु जी कितने. करीब नहीं दोनों का अपना अलग तरीका है.
राजनीति करने का फिर एक आखरी बात पूछ लेता. हूं रघु जी क्योंकि आपकी आपने रघु जी की. बड़ी तारीफ की मैंने आपके बहुत सारे. इंटरव्यूज देखे आपने जिक्र किया है वहां. से लेकर जब मैं ये देखता हूं कि क्योंकि. आप लोग की शुरुआत भी उसी स्टाइल में हुई. थी रघु जी के स्टाइल में और ये लास्ट सवाल. है फिर जब मैं देखता हूं आम आदमी पार्टी. बदल गई हम सब ने देखा हवाई चप्पल से हम. सबने मफलर और बड़ा कनेक्ट किया अपने आप को. और फिर जो हमने बदलते हुए देखा हो सकता है. कि बीजेपी के खिलाफ आपको वोट मिलता हो. लेकिन एक परसेप्शन जो शुरू में था उसमें. काफी हद तक डेंट हुआ है ये आप माने ना.
माने वो आपके ऊपर हम छोड़ देते हैं कि. सादगी से थोड़ा सा ऐशो आराम की तरफ. लग्जरियस लाइफ की तरफ वगन आर से हमने. अच्छी गाड़ियों की तरफ वो लग्जरी जो हमने. देखा आप मानते हैं कि रघु जी को लेकर जो. शुरू किया सोचा था मैंने उससे थोड़ा सा. डायवर्ट हो गए देखिए उनका एक अलग स्थान. मेरे दिल और दिमाग में है जो हमेशा रहेगा. और मैं उनसे किसी को कंपेयर करने के कोशिश. में भी नहीं जाता क्योंकि वह एक राजनीतिक.
गुरु हैं उनसे सब कुछ राजनीति का ककहरा. मैंने सीखा बाकी जो आम आदमी पार्टी के काम. को लेके या सरकार को लेके या हमारी जो. राजनीति की दिशा है अगर आप देखेंगे मैं. समझता हूं सबसे ज्यादा चुनौती का सामना हम. लोग कर रहे हैं आज जितनी प्रताड़ना हम झेल. रहे हैं जितने तरीके से हम टारगेट किए जा. रहे हैं. जिस साहस के साथ हमारे लोग लड़ रहे हैं यह.
कोई सामान्य बात नहीं छोटी बात नहीं है. गवर्नेंस की बात पर मैं फिर दोहरा रहा हूं. जब मैं आता हूं तो मैं अपने आप को संतुष्ट. पाता हूं कि मैं जिस पार्टी में हूं जिस. संगठन में हूं वह पार्टी और संगठन सत्ता. से टकरा भी रही है और लोगों के लिए काम भी. कर रही है यह हमारे सेटिस्फेक्शन का पॉइंट. है बहुत-बहुत शुक्रिया संजय जी आपसे हमने. कोशिश की हर सवाल पूछे कई सवालों में आप. अपने नेता वाले थॉट दिखाए थोड़ा दिल से. बताया बट अच्छा लगा आपसे बात करके. शुक्रिया आपका थैंक य.
