Unplugged ft. Rasraj Ji Maharaj | The Path of Hanuman | Bajrang Baan | Power of Hanuman Chalisa
ओम चम चम चम चपल चलता ओम हनु हनु हनु हनु. हनुमंता ओम हम हम कप चंचल. हनुमान जी शंकर जी के अवतार माने आते हैं. और शंकर जी की जब बारात का हमने किस्सा. सुना तो हमको उसमें संसार के सारे भूत. प्रेत नजर आए। अब फिर जब हनुमान चालीसा हम. पढ़ते हैं तो पढ़ते हैं भूत पिशाच निकट. नहीं आवे।. बहुत अच्छा प्रश्न। बहुत अच्छा प्रश्न।. क्या हनुमान चालीसा पढ़ने से वाकई में भूत. पिशाच भाग जाते हैं। तुलसीदास जी के साथ. तो घटना ही घटी। भूत ने ही हनुमान जी से. मिलवाया। आपन देश सवारो आप तीनों लोक हा.
भूत पिशाच निकट में आवे महावीर जब नाम. सुनावे. हनुमान जी को भूत प्रेत वाला ही विभाग. क्यों मिला हनुमान जी को सारे विभाग मिले. भाई. जय हनुमान ज्ञान गुण सागर. ये कौन सा विभाग है भाई. जय कपीश दूसरा विभाग बंदरों के भगवान. रामदूत. पूरी सिक्योरिटी का जिम्मा किसके पास है. भाई. अतुलित बलधाम पावर में सबका बाप. श्री राम जय हनुमान। [संगीत].
हनुमान चालीसा कितनी पावरफुल है।. हमारे यहां कहते हैं जय सियाराम। हम बैठे. हैं दिल्ली में। यहां कहते हैं जय श्री. राम। और हम घूमने जाते हैं तो कहा जाता है. सीताराम। अब सही वाला कौन सा है? जय सियाराम। दंडवत भैया मधुरी वाणी बोले।. श्री जानकी जी शक्ति है। जय सियाराम। जय. श्री कृष्ण। लक्ष्मी नारायण। पहले मां को. प्रणाम करके फिर पिता को प्रणाम कर लिया. जाता है। हनुमान जी का यह प्रमाण मिलता है.
कि हनुमान जी एक बार आए. जय श्री राम [संगीत]. और उसके बाद गए नहीं सब यही गाते हैं।. चारों जुग प्रताप तुम्हारा है प्रसिद्ध है. प्रसिद्ध जगत उजियारा।. हनुमान जी का जन्म कहां हुआ? देखिए हनुमान. जी के जन्म का बहुत बड़ा मित्र है। हमने. जो हनुमान जी के बारे में सुना था वो सुना. था एक सौम्य हनुमान जी के बारे में। आपने. कहा ना यह रौद्र रूप लगा करके रखते हैं।. तुलसीदास जी कह रहे कंचन. वरण.
विराज सुवेशा. सुवेशा का मतलब सुंदर वेषा। हनुमान जी का. स्वरूप तो सबसे सुंदर यह है कि शांत बैठे।. तो फिर दिन काहे खाली मंगलवार करा। ये भी. मैंने कई जगह मित्र खत्म कर दिया। सारे. मंगलवार है। हनुमान जी के वार है। अब जो. लोग ये कहते हैं ना हम मंगल शनि को नहीं. पीते। तो उनको ये पॉडकास्ट दिखा के बता. देना। सारे ही दिन हनुमान जी के भाई. हनुमान चालीसा की संरचना क्यों की गई थी? तुलसीदास जी हनुमान चालीसा बहुत दिन से. लिखना चाहते थे। लेकिन हनुमान जी लिखने. नहीं देते थे।.
पंचमुखी का रहस्य क्या है ये? पांच मुख पंचानन शिव से उतरे। इसको लोगों. ने तंत्र से जोड़ दिया। ये सबसे ज्यादा. बिगाड़ा रील वालों ने। बहुत बड़ा परसेप्शन. है कि स्त्रियों को हनुमान जी की पूजा. नहीं करनी। जब गए हनुमान जी तो तुरंत से. राक्षसियां पूजा करने लगी। लंका की. राक्षसियां हनुमान जी की पूजा करें और. माताएं बहने हनुमान जी की पूजा ना करें।. हनुमान जी और राम जी में कभी युद्ध भी हुआ. था? वो राजा सुकंत का है। उसके पीछे कारण. यह था दशराज जी महाराज का हनुमान जी का. सबसे फेवरेट भजन कौन था? जय सियाराम जय जय सियाराम जय जय सियाराम.
जय जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम जय. सियाराम जय जय सियाराम।. आज का यह पडकास्ट भक्ति से सराबोर रहने. वाला है। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि. हमारे साथ वह मेहमान है जिनकी वाणी में. हनुमान चालीसा की शक्ति है। सुंदरकांड की. गहराई है। बजरंगबली के चमत्कारों का आलम.
है। यह वो शख्स हैं जिनसे आज हम हमारे. आराध्य हनुमान जी को समझेंगे। वो हनुमान. जी जिनके बारे में कहा जाता है कलयुग में. इकलौते वह देवता हैं। जो शरीर के तौर पर. भी मौजूद है। वह हनुमान जी जो बड़ी जल्दी. बचपन से हमारी मनोकामना सुनते आए हैं। वो. हनुमान जी जो हमारी यात्रा में एक. महत्वपूर्ण भूमिका निभाए हैं। और आज उनके. परम भक्त रसराज जी महाराज हमारे साथ हैं।.
जय सियाराम। बहुत-बहुत धन्यवाद। खूब-खूब. प्रणाम।. कैसे हैं महाराज जी आप? खूब कृपा हनुमान जी की और आप पर भी बनी. रहे।. धन्यवाद आपका। सबसे पहले तो हम यही पूछ. लेंगे कि हम आते हैं अयोध्या से। हमारे. यहां कहते हैं जय सियाराम।. हम बैठे हैं दिल्ली में। यहां कहते हैं जय. श्री राम।. और हम घूमने जाते हैं तो कहा जाता है. सीताराम। अब सही वाला कौन सा है? क्योंकि. इन में फर्क तो नहीं है लेकिन मायने बड़े.
निकाल लिए गए हैं। तीनों का मतलब तो एक है. लेकिन आज के लोगों ने भाव बदल दिए।. जैसे अयोध्या की तो यह परंपरा ही है।. जय सियाराम दंडवत भैया मधुरी वाणी बोले. करे कीर्तन संत मगन मन गली गली में डोले. सीताराम नाम धुन प्यारी मस्तानी लागे.
मोहे मीठो मीठो सरजू जी को पानी लागे. ये आपकी अयोध्या की परंपरा है जब मोदी जी. गए राम मंदिर के लिए तो मैं यही देख दिख. रहा था कि हर जगह जाके कोई ना कोई उद्बोधन. करते हैं। आज क्या बोलते वहां वो भी बोले. जय सियाराम. और जब दबंगाई की बात आ जाए तो जय श्री राम. और सीताराम सीताराम तो मैथिली वहां से. निकल के आया है ना मतलब तीनों का एक ही. है। तीनों के साथ श्री जुड़ी है। श्री.
जानकी जी को सीय कह दिया श्री श्री कह. दिया और सीता कह दिया। जय सियाराम भी जय. श्री राम है। जय सी श्री राम भी जय. सियाराम है और सीताराम भी जय श्री राम है।. हमारे यहां 33 कोटि देवी देवता है। ये. सवाल अक्सर हम जो धर्म से जुड़े लोग हैं. उनसे पूछ लेते हैं कि आप हनुमान जी के. भक्त काहे बने? बहुत सारे भगवान थे। यही. आपने अपना समर्पण पूर्ण समर्पण क्यों.
दिया? देखिए हनुमान जी के चरित्रों का. गायन शुरू से ही बचपन से ही लोगों को. सिखाया गया। रामचरितमानस के पाठ पहले घरघर. में होते थे। आज से आप 10 20 50 साल पहले. चले जाइए। किसी के घर में कोई उत्सव होगा. 24 घंटे अखंड रामायण का पाठ. हमारे यहां अभी भी होता है।. अभी भी चलता है। आपके इधर पूरी यूपी में. तो अभी परंपरा है। अब लोग थोड़े कम वक्त. हो गए हैं। कम वक्त का मतलब कोई गाली. नहीं, कोई अपशब्द नहीं। संतों की भाषा है. कमबख्त।.
जिनके पास वक्त कम रह गया। 24 घंटे अब कौन. परिवार के लोग बैठकर के अखंड रामचरितमानस. का पाठ करते हैं तो श हो गया सुंदरकांड हो. गया और कम वक्त हो गए तो कम वक्त वाले हो. गए तो भाई श्री हनुमान चालीसा पे आ गए और. कम आ गए तो राम राम पर आ गए लेकिन. प्रैक्टिकल रहना चाहिए समय के हिसाब से तो. जब घरों में अखंड रामचरितमानस के पाठ होते. तो बच्चों को यह बताया जाता था बेटा यहां. हनुमान जी विराजमान है हनुमान जी का मतलब.
यह है अभिमान रहित. जय बजरंगबली. तोड़ दुश्मन की नली ये बचपन से सिखाया गया. हनुमान जी का मतलब हनुमान जी अगर आ गए तो. एक बहुत पावरफुल व्यक्तित्व आपके साथ खड़ा. हो गया और मूल में देखा जाए तो भगवान शिव. रुद्र देह तज नेह बस हरते भय हनुमान जय. शरीर रति राम सोई सादर ही सुजान वान. वानराकार विग्रह पुरारी शिव के रूप में ही. 11व रुद्रावतार के रूप में हनुमान है तो.
सनातन में महादेव देव की भक्ति का तो. इंटरनली सबके हृदय के अंदर है। वहीं से. हनुमान जी की उपासना भी प्रारंभ है। आपके. भजन बहुत लोकप्रिय होते हैं। सोशल मीडिया. पर हम देख रहे थे कि लड़का लोग जब ड्राइव. करता है तो रसराज जी महाराज को लगा लेता. है। बजरंग बाण आपका लोफी वर्जन जो है एकदम. हर तरफ दिख रहा है। हमको लगा हम देर से. क्यों सुने? रसराज जी महाराज का हनुमान जी. का सबसे फेवरेट भजन कौन है? जिसको आपको लग. के सुनता है कि मंत्र बोध आप खुद गाते.
हैं। मैं कभी ये कंपेयर नहीं कर पाता कि. ये फेवरेट है मेरा या ये भगवान मेरे. फेवरेट है या मेरे ये इष्ट है। ये चौपाई. मेरी फेवरेट है। मुझे लगता है अगर मैंने. ऐसा कह दिया तो शायद दूसरे किसी भजन को या. दूसरी चौपाई को कहीं मैं थोड़ा नीचा ना. दिखा दूं। ये भजन का एक ऐसा स्वरूप स्वरूर. है प्रभु जी। यह अपने आप ही अपनी महफिल को. जमाता है। कौन सा भजन किस समय.
कैसे निकल कर के छा जाएगा ये उस समय उस. समय पर ही डिपेंड होता है।. लेकिन जैसे एक होता है ना कुछ दिल के बड़े. करीब होता है।. एक होता है जो आपको. मैं निरंतर गाता हूं जगह। अधिकतर जुबान से. निकल जाता है।. जब जब भी मुझ पे संकट का कोई घेरा होता. है।. मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है।. ये मैं बचपन से गाता आ रहा हूं। और आज भी. गाता हूं। रोज सुंदरकांड के समापन पे जैसे.
ही करता हूं। सकल सुमंगल दायक. रघुनायक गुणगान. सादर सुन तर भव सिंधु बिना जल जान तो. तुरंत गाता हूं दो भजन फेवरेट है ऐसा है. विश्वास हमारा जहां जहां मैं जाऊंगा. ऐसा है विश्वास हमारा जहां जहां मैं. जाऊंगा पवन पुत्र बजरंगबली को वहां वहां.
मैं पाऊंगा. पवन पुत्र बजरंग बली को वहां वहां मैं. पाऊंगा जय बजरंग बली बोलो जय बजरंग बली. जय बजरंगबली. बोलो जय बजरंग बली यही जोड़ देता हूं जब. जब भी मुझ पर संकट का कोई घेरा होता है. मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा होता है.
बोलो जय सिया सियाराम. जय जय हनुमान. बोलो जय सियाराम. जय जय हनुमान. जब से मेरे घर में आए घर के संकट भाग रहे. हम तो सोते घर के अंदर हनुमान जी जाग रहे. सालासर वाले जाग रहे मेहंदीपुर वाले जाग. रहे अयोध्या वाले जाग रहे बाबा मरघट वाले.
जाग रहे हमारे सीपी वाले जाग रहे सबको याद. कर लेते हैं अरे गली गली कूचे में इनका. पहरा होता है मेरे दरवाजे पे हनुमान का. पहरा होता है बोलो जय बजरंगबली. बोलो जय बजरंगबली. और हनुमान जी की क्वालिटी है मुझसे पहले. रक्षा करते ये मेरे परिवार की अवतार लिया.
श्री हनुमान जी के लिए लेकिन लाए सजीवन. बूटी लेने लक्ष्मण जी के लिए जा रहे अवतार. लिया श्री राम के लिए लेकिन खोज में निकले. हैं सीता जी की अवतार लिया श्री राम के. लिए और भरत जी 14 वर्ष रहा एक दिन अवध कर. भरत जी लकड़ियां सजाए बैठे और हनुमान जी. को आदेश दिया राम जी ने भरत हनुमान जल्दी. जाओ दौड़ कर चले जाओ नहीं तो भरत को खो. दूंगा और इतने में आ ही गए वो हनुमान.
[हंसी]. अवतार श्री राम के लिए पहले लेकिन रक्षा. पूरे परिवार की है मुझसे पहले रक्षा करते. ये मेरे परिवार की. करते हैं हरदम रखवाली वो सबके घर बार की. जपते जपते नाम इनका सवेरा होता है. मेरे दरवाजे पे हनुमान का पहरा. होता है। बोलो जय सियाराम.
जय जय हनुमान. हनुमान. बहुत सुंदर बहुत सुंदर हनुमान जी का अर्थ. क्या होता है जो अभिमान रहित है जिसने. अपने मान का हनन कर लिया हनुमान. इसलिए ओम हनु हनु हनु हनु हनुमंता जब. इंद्र ने वज्र का प्रहार किया हनुमान जी. की हानु पर ठुडी पर तो एक जगह विनय.
पत्रिका में गोस्वामी जी ने पद लिखा है. ताकी है तमक ताकी ओर को जाको है सब भांति. भरोसो कप केसरी किशोर को उसकी ओर कोई तमक. के ताक नहीं सकता जिसको हनुमान जी ताक ले. फिर वो कहते हैं जाकी चिबुक चोट चूरन किए. रदम बद कुलस कठोर को. जाको बाल रूप समझ जिए डरत दिवाकर भोर को. सूर्यदेव निकलना में डर लगता है उनको कि. कहीं यार लाल पड़े हैं और फल फल समझ के खा.
ना जाए इसलिए तुरंत पीले हो जाते सूर्य और. इंद्र के वज्र का चूर्ण चूर्ण हो गया।. हनुमान जी की ठुड्डी का बाल बांका नहीं. हुआ। इसलिए कहते जो अभिमान रहित वो हनुमान. जिसने अपने मान का हनन कर लिया। जो सारे. काम स्वयं करे क्रेडिट दूसरों को दे वो. हनुमान और सारे काम दूसरों से कराए. क्रेडिट खुद ले ले वो इंसान। महाराज जी. हनुमान जी के बारे में जब भी जीवन में हम. परेशान हुए साधु संतों से बात की तो कहा.
हनुमान जी का ध्यान करो कलयुग में वो. जीवित देवता है जल्दी सुन लेते है इतने. सारे देवी देवता है लेकिन हमको बचपन से हम. क्योंकि अवध से आते हैं अयोध्या के पड़ोस. से आते हैं हमसे सबने यही कहा कि जब जीवन. में बाधा आए तो हनुमान जी का जाप कर लो और. हमने किया भी हमको जीवन में कदम कदम पर. फायदा मिला जिसको मानना है माने ना मानना. ना माने लेकिन हमने पल-पल महसूस किया. [हंसी]. बिल्कुल हनुमान जी की साधना में ऐसा क्या. है कि सारा दुख दूर हो जाता है और हनुमान. जी को संकट मोचन क्यों कहा जाता है? देखिए.
हनुमान जी चिरंजीवी है जो सात लोग. चिरंजीवी बताया अश्वत्थामा बल व्यासो. हनुमान विभीषणा कृपा परशुरामस. सप्त चिरजीवन भगवान शिव ही जब हनुमान बनकर. के आए तो राम आए त्रेता में चले गए प्रजा. सहित रघुवंश मण किम गवने निज धाम श्री. कृष्ण आए द्वापर में चले गए लेकिन हनुमान. जी का यह प्रमाण मिलता है कि हनुमान जी एक. बार आए और उसके बाद गए नहीं इसलिए कहा.
जाता है यह नहीं कहा जाता त्रेता में. प्रताप तुम्हारा द्वापर में प्रताप. तुम्हारा सब यही गाते हैं चारों जुग. प्रताप तुम्हारा है प्रसिद्ध है प्रसिद्ध. जगत उजियारा. साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम. दुलारे चारों युगों में जिसका प्रताप है. क्यों क्योंकि एक बार आने आने के बाद गए. नहीं जब भगवान श्री राम बैकुंठ गमन करने. जा रहे हैं सरयू जी में समाने जा रहे तो.
सब पूरा अयोध्या के कुकर शूकर जितने जीव. जंतु सब ले लिए भगवान ने धोबी ले लिया वो. जो सीता जी को कलंकित करता और जब वो. पहुंचे वहां पर तो उस धोबी की एंट्री नहीं. हुई श्री राम को कहा कि धोबी की एंट्री. नहीं हो रही है बैकुंठ में भगवान ने कहा. अच्छा तो तुलसीदास जी कॉट करते हैं कि शोक. बसोक बनाई बसाए राम जी ने कहा कि ऐसा नहीं. हो सकता मैं राम हूं अगर इस धोबी एंट्री. नहीं हो रही तो इसके लिए एक अलग बैकुंठ.
बना दो। तो जब हनुमान जी नहीं दिखाई दिए. कि सब जा रहे हैं भाई. हनुमान कहां है? अब हनुमान जी अयोध्या के. किसी महल पर अपनी [हंसी] पूंछ लटका कर बैठ. जाते. कि भाई ये मेरा टावर है। राम जी बुलाए तो. पूंछ हिला देना। हनुमान जी जब राम राम राम. राम राम राम अरे भाई साहब हनुमान जी प्रभु. बुला रहे। हनुमान जी दौड़े देखा भगवान तो. समाने जा रहे हैं सरयू में और जैसे ही.
देखा तो हनुमान जी से कहा हनुमान चलो. हनुमान जी ने कहा प्रभु कहां बोले बैकुंठ. बोले प्रभु मुझे नहीं जाना पहली बार. हनुमान जी ने शायद श्री राम को ये मना. किया होगा राम जी ने कहा क्यों नहीं जाना. बोले प्रभु ये बताइए बैकुंठ में क्या होता. है राम जी ने कहा बैकुंठ में हम होते. प्रभु आपके नाम की कथा होती है बोले कथा. तो नहीं होती तो प्रभु मुझे नहीं जाना जब. मैं दुनिया में रहकर आपकी कथा कथा सुनता. हूं तो ऐसा लगता है जैसे आप मेरे सिर पर. हाथ रखकर कह रहे हैं हनुमान तो मेरा है.
मैं तेरा हूं या धरती पर रहूंगा तो दो लाभ. है आपका भी और कथा का भी बैकुंठ में सिर्फ. आपका इसलिए कहा जाता है यत्र यत्र रघुनाथ. कीर्तनम तत्र तत्र कृत मस्तकांजलि. वास व परिपूर्ण लोचनम मारुती नमत राक्षसकम. इसलिए हनुमान जी सब जगह है चारों जुग. प्रताप तुम्हारा। मां जानकी ने कहा बेटा.
अजर अमर गुण सुत हो तू अजर है। तू अमर है।. गुणों की खान है। तो वरदान मिले हैं. हनुमान जी को। आपने भी यहां कहा कि राम. राम कहते हैं। राम राम सही है या सीता राम. सही है। दोनों सही है प्रभु जी। लेकिन. जैसे कई जगह कहा था कि सीता जी का नाम. पहले ले तो पुण्य ज्यादा मिलता है।. देखिए जनक सुता जग जननी जानकी अतिशय प्रिय. करुणा निधान की श्री जानकी जी शक्ति है और.
हमेशा जिन लोगों ने ये नारी निंदक बताया. गोस्वामी जी को. इसलिए ये चलन शुरू हुआ जय सियाराम जय श्री. कृष्ण. लक्ष्मी नारायण भवानी शंकर इसलिए पहले मां. को प्रणाम करके फिर पिता को प्रणाम कर. लिया जाता है ये वेद की परंपरा भी मान आप. कि मातृ देवो भव फिर पितृ देवो भव फिर. आचार्य देवो भव तुलसीदास जी ने भी पूरा. कोट किया है प्रात काल उठ के रघुनाथा.
मात पिता. पहले मात फिर पिता. फिर गुरु थर्ड नंबर पर गुरु को रखा है. क्योंकि प्रथम गुरु मां है. अद्भुत. इसलिए पहले मां फिर पिता और फिर गुरु. इसलिए पहले सीताराम. राम नाम का अर्थ बड़ा अलग है राम राम में. सीता भी समाई है। सीता में राम भी समा है।. गोस्वामी जी का सूत्र है बालकांड का। गिरा. अर्थ जल बीच सम कहियत भिन्न न भिन्न मनो.
सीताराम पद जिन परम प्रिय खिन जैसे वाणी. और गिरा अलग नहीं होती। ऐसे सीताराम भी एक. है। हनुमान जी का जन्म कहां हुआ था? देखिए. हनुमान जी के जन्म का बहुत बड़ा मिथ है।. हम क्योंकि हमने जब पढ़ रहे थे उनके बारे. में तो तीन कहानी आई हनुमान जी के जन्म को. लेकर। हमको लगा आपसे बेहतर कोई आदमी है. नहीं जो हमको समझा पाएगा।. कभी-कभी मैं प्रभु जी इन बातों का आंसर. देने में चुप हो जाता हूं क्योंकि. विवादास्पद.
मैं कहूं वहां हुआ था कोई उठाकर ले आए कि. नहीं यहां हुआ था। मेरा मानना ये है एसी. चल रहा है।. उसकी ठंडक ले लेनी चाहिए।. ठीक बात।. वो कहां से हवा आ रही है, क्या आ रही है, क्या हो रहा है, इसको जानने में समय. व्यर्थ ना किया जाए। मेरा मानना तो ये है. जहां हवा वहां हनुमान जी। सहमत और हम भी. इससे इत्तफाक रखते हैं कि अगर यह जा रहा. है तो फिर हम इससे आगे बढ़ जाते हैं।. अब आज आप किसी भी तीर्थों में जाइए आप. काशी चले जाओ आप जल चढ़ाकर बाहर निकलेंगे।. बोले नहीं वो जो आपने चढ़ाया बाद में. स्थापित हुआ है। शिवलिंग पुराना ये है।.
हां। गोवर्धन गिरिराज जी में अरे वो पर्वत. यहां उठाया था।. तो ये लोगों ने अपनी-अपनी धारणा बना दी।. सही बात है व्यवसायकरण में। लेकिन महाराज. जी एक सवाल जो हमारे मन में आता है या. खासतौर पर नई पीढ़ी के मन में आता है वो. ये आता है कि हमने जो हनुमान जी के बारे. में सुना था वो सुना था एक सौम्य हनुमान. जी के बारे में।. वो हनुमान जी जो नतमस्तक रहे वो हनुमान जी. जो सेवा के लिए जाने गए।.
लेकिन पिछले 10 सालों में पांच सालों में. हमने जिस हनुमान जी को गाड़ियों के पीछे. देखा वो रौद्र हनुमान जी है।. हां आया भूषण बना दिया। हां एकदम वो हul्क. वाला हनुमान जी को बना दिया कि इंडियन. भगवान जो ताकत के प्रतीक हैं। कईयों ने. कहा कि उनको देख के डर भी लगता है। लेकिन. फिर आपने भी कहा कि हम बचपन से सुनते आए. थे कि जय बजरंगबली तोड़ दुश्मन की नली ये. भी फिर हमको याद आया। तो इनमें हनुमान जी. का भी इस्तेमाल किया गया है या हनुमान जी. के दोनों रूप हैं या हनुमान जी सौम्यता के.
प्रतीक हैं। शक्ति के प्रतीक हैं? थोड़ा. इस बारे में प्रकाश डालिए क्योंकि नई. पीढ़ी इसमें असमंजस में है। प्रभु जी एक. छोटा सा उदाहरण देकर कहूं मैं। आप यहां. बैठे हैं शुभांकर मिश्रा आपका ये ओरिजिनल. स्वरूप है। हम. लेकिन कभी-कभी जब आप किसी न्यूज़ को. एक्सप्लेन करते हैं तो उस समय आपका रूप. अलग है। हम. कभी-कभी आप किसी दर्द भरी न्यूज़ को. एक्सप्लेन करते हैं तो आपका रूप अलग है।. हम. हनुमान जी के पांच रूप बताए। पंचमुखी है.
हनुमान जी। कपि नरसिंह वाराह गरुड़ जब. हनुमान जी पर्वत पर खड़े होकर के जब पता. लगा जामवंत जी ने कहा हनुमान जी हनुमान जी. आराम से जप रहे राम राम राम हनुमान जी का. असली रूप क्या है पहले वहां से शुरू करूं. मैं बताने वाला कौन हूं तुलसीदास जी बताते. हैं कंचन. वरन. ये स्वरूप है हनुमान जी का सोने की देह है. प्योर गोल्ड है 24 कैरेट वेरट हनुमान जी.
जैसा रिच कौन? इसलिए हनुमान जी की शरण में. जो आता है उसको पहले राम जी से मिलाते फिर. दुनिया में राजा बनाते हैं। ये ये. क्वालिटी है हनुमान जी की। जो हनुमान जी. से जुड़ेगा उसको दुनिया में उसके सिर पर. राज छत्र ताज छत्र चढ़ा देते हैं हनुमान. जी। दो उदाहरण है। तुम उपकार सुग्रीव की. ना तो क्या किया? पहले राम मिलाए राजपत.
उसके बाद किष्किंदा का राजा बना दिया। ले. बेटा. रावण का भाई लात पड़ी धड़. और जैसे ही लात पड़ी उसी समय हनुमान जी की. बात याद आई। जब समझा रहे थे तब नहीं आया।. रावण ने मारी लादस क की चरण प्रहारा. दौड़ता हुआ आया। उन चरणों की ओर जो एक बार. अपनाने के बाद टुकराते।. हनुमान जी की क्वालिटी देखो।. सोने की लंका छोड़कर आया जिसका अधिकारी बन. गया था वो। हनुमान जी ने सोचा बेटा कोई.
बात नहीं निमंत्रण तो हमने ही दिया। जैसे. ही भगवान राम के पास आए तो राम जी सबसे. पूछ रहे बताओ क्या करना चाहिए? सुग्रीव से पूछा बोले नहीं. दुश्मन का भाई है मन ही मन राम जी सोचा तू. भी तो दुश्मन का भाई है [हंसी] गाली और जो. निमंत्रण देकर आए हैं हनुमान जी वो मौन है. हनुमान जी मानो ये देख रहे हैं हमें ना. भला बुरा देखना है हमें तो प्रभु आपका. फैसला देखना है कि आपका ये विरद है जो शरण.
में आ गया गीता में आपने कहा है छम भवती. धर्मात्मा मेरी शरण में आने वाले को मैं. धर्मात्मा बना देता हूं और आप यहां भी कह. रहे हैं कोटि विप्रद लाए जाऊ हजारों. हजारों ब्राह्मणों का कोई वध करके फिर भी. शरण में आ जाए अब नहीं करूंगा तो आए शरण. तजऊ नहीं ताऊ फिर उसको छोड़ देते तो प्रभु. अब आप ही करेंगे जो करेंगे और जैसे ही. विभीषण आया भगवान खड़े हो गए. लक्ष्मण जी देख रहे प्रभु क्या नाटक कर.
रहे हैं भाई भाभी का हरण करने वाला इनका. भाई तो उसी समय भगवान ने इतना ही नहीं. किया आके पहले कुशल पूछी और लंका का राजा. बना दिया जो संपत्ति दस शीश अरप कर रावण. शिव पहलीन सोई संपदा विभीषण ही अति सकुच. सहत हरि दीन विनय पत्रिका और सुंदरकांड. में यही दो लिखा है जो संपत्ति शिव रावण. ही दीन दिए दस्मात सोई संपदा विभीषण ही. अति सकुच दीन रघुनाथ जो 10 सिर काट के. रावण ने लंका दी भगवान ने आते ही कहा ले.
लंकेश बना दिया अब बताइए भैया इसके पीछे. कारण कौन है तुलसीदास जी कह रहे तुमरो. मंत्र विभीषण. विभीषण माना. लंकेश्वर भय जग. अच्छा आज की भी दुनिया में रीत है अपने. साथ कोई बंदा काम करता हो एम्प्लई है या. कोई भी है आप थोड़ा सा भर दो उसे अगर. स्वभाव में है आपके तो ये स्टाफ को मैनेज. करने का भी एक तरीका है हनुमान जी यही. कहते हैं जो उनकी शरण में आता है पहले.
उसको दुनिया की टेंशन से खत्म करते हैं।. आर्थिक टेंशन खत्म करते हैं उसकी. और आर्थिक टेंशन ऐसी खत्म करते हैं वो. अपने वजूद से करते हैं वो तो सीधा ही लंका. दे दी ले बेटा लंका का राजा सुग्रीव दोस्त. था चल बेटा किष्किंदा का राजा और मैं आपको. सत्य कह रहा हूं जो दुनिया में सच्चे मन. से श्री हनुमान जी की शरण ले ले दुनिया. में राजा बना देते हैं हनुमान जी उसको. ये स्वरूप है हनुमान जी का कंचन बरन. उसके बाद आपने कहा ना ये रौद्र रूप लगा के.
रखते हैं। तुलसीदास जी कह रहे विराज. सुशा. सुवेशा का मतलब सुंदर वेशा हनुमान जी का. स्वरूप तो सबसे सुंदर ये है कि शांत बैठे. हैं। राम राम जप रहे हैं। गधा भी साइड में. रखी है। जो पूज्य मुरारी बापू जी ने अपनी. कल्पना से बना रखा है।. जो उनके कल काजड़ा गुजरात में भी है और जो. उनकी कथा में भी पीछे लगता है। वही मेरा. प्रिय स्वरूप है।.
कान कुंडल. और हनुमान जी के घुंघराले ही केश है। आज. भी किसी के बाल कर्ली हो तो उसकी सुंदरता. बढ़ जाती है। कर्ली बाल वाला आपके यहां भी. है एक [हंसी] कर्ली बाल वाला व्यक्ति उसकी. सुंदरता में थोड़े चार चांद ज्यादा लगे. होते हैं। हनुमान जी तो कुंचित केसा. हनुमान जी तो सुंदर घुंघराले बाल है. हनुमान जी के लेकिन हनुमान जी कई कई जगह. अपने रूप बदल देते हैं। जैसे ही जामवंत ने. कहा हनुमान जी यह राम काज का समय है राम.
जपने का नहीं सीता जी का हरण करके रावण ले. गया बैठे-बैठे अभी तो जप रहे थे राम राम. राम फिर बदलने लगे जय श्री राम जय श्री. राम जय श्री राम जय श्री राम एक पांव. दबाया समुद्र के तट पर धड़ धाड़ धड़ धड़. जय श्री राम जय श्री राम कहो तो अभी रावण. की लंका को त्रिकूट समेत उखाड़ कर. 10 के द सिर काट के समुद्र में भगाता.
भीगाता थप्पड़ मार के बेहोश करता करता और. यहां लाकर राम जी के चरणों में डाल दूं जो. मेरी मां का हरण करके ले गया। सब ने कहा. बस बस बस बस अब बताइए ये हनुमान जी का रूप. कौन सा है? ये सिंह का रूप आ गया। ये सारे. रूप हर व्यक्ति के अंदर छिपे होते हैं। जब. एक आदमी गुस्से में है तो उसको कहो अपना. चेहरा देख भाई।. उस समय महा. अगर वो अपना चेहरा देख ले डर जाएगा। एक. आदमी में कितने रूप छुपे हैं। लेकिन उसका.
असली स्वरूप तो यही है। कंचन बरन विराज. सुभेसा. कानन कुंडल कुंचित केसा. तो क्या तुलसीदास गोस्वामी जी ने या. पुराणों में कहीं पर जिक्र है कि रौद्र. रूप का हनुमान जी के विस्तार से रौद्र रूप. का तो कहीं नहीं जिसको मारा ठोका भी तो. हंसते-हंसते ही ठोका।. हम पूरी रामचरितमानस में कहीं गधा नहीं. उठाया हनुमान जी ने जिसको भी मारा मुक्का. ही मारा। एक भी चौपाई नहीं मिलती जहां. किसी को गधा मारा हो लंकनी मिली मुठिका एक.
महा कप हानि दाब एक ही मारा धड़ थड़ थड़ थड़. पुरी संभार उठी सो लंका जिसको हनुमान जी. एक मार दे वो दूसरा मानता ही नहीं मैं. कहता रहता हूं हनुमान जी ने गधा नहीं उठाई. अगर गधा मार देते तो गधा बना देते मार मार. कर हनुमान जी शंकर जी के अवतार माने आते. हैं और शंकर जी की जब बारात का हमने. किस्सा सुना तो हमको उसमें संसार के सारे. भूत प्रेत नजर आए अब और फिर जब हनुमान. चालीसा हम पढ़ते हैं तो पढ़ते हैं भूत. पिचास निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे.
बहुत अच्छा प्रश्न बहुत अच्छा प्रश्न. ये जितने गण हैं भगवान शिव के कौन है भूत. पिशाच जितने दुनिया के. इंग्लिश भूत और अरेबियन भूत और इंडियन भूत. और जितनी भी क्वालिटी कैटेगरी के भूत हैं. ये सब महादेव के यहां जब बारात चलने लगी. शंकर जी की तो नंदी ने कहा कि चलेगा कौन. कौन बारात में? शंकर जी ने कहा बारात में तू चलेगा।.
तो बारात में तो घोड़े हो उस पर घोड़े पर. बैठा जाता है घोड़ी पर। शंकर जी ने कहा. यहां घोड़ी तो नहीं है। तो किस पे बैठोगे? बोले तुझ पर। बोले महाराज आजकल का दूल्हा. भी कोई बने तो कार वार मांग लेता है।. भगवान विष्णु से मांग लो वाहन। आपके तो. इतने फ्रेंड सर्कल है। शंकर जी ने कहा जो. दो चार जो मांग करके कार यूज करते हैं दो. चार दिन में बेकार हो जाते हैं। तो भैया. मैं तो तू मेरे साथ है तेरे पर ही बैठ के. चलूंगा। तो बोले बस बारात में हम ही.
चलेंगे। बोले नहीं एक ही मंत्र मारा पता. नहीं कौन सा मंत्र था। वो पूरा भूत. पिशाचों की टोली। तो मैं कहता रहता हूं. जितने दुनिया के रोग है। ये भी भूत है।. भूत पिशाच कैंसर क्या है रोग? भूत है। सिर. दर्द क्या है? डायबिटीज क्या है? जितने. रोग हैं शंकर जी के गण है। इसलिए शंकर जी. है एक वैदनाथ।. 12 ज्योतिर्लिंग में एक स्वरूप क्या है. शंकर जी का? वैदनाथ. वैद्यनाथ यानी कि अगर पूरा बोला जाए तो. वैद्यनाथ.
यानी कि वैदों के वैद महादेव है। दुनिया. के सबसे बड़े डॉक्टर श्री भगवान महादेव. है। क्योंकि जितनी बीमारियां हैं, जितने. भूत गण हैं अब बीमारी का कारण क्या है? यह. बैक्टीरिया आ गया। गंदा वाला बैक्टीरिया आ. गया भाई। तो क्या ये भूत है? हम ये सब शिव. के पास रहते शिव की झोली में। उनके. कंट्रोल में भी है. और छोड़ दे तो किसी में छोड़ भी दे। तो. इसलिए यह विरद हनुमान जी को मिला। भूत. पिशाच निकट नहीं आवे। और जो उनके सामने.
गड़बड़ करे तो भूत पिशाच उसके ही निकट. आवे।. दोनों विरद है। अपनी अपना एम्प्लई है ना. भाई। हम कैसे भी छोड़ दूंगा. अगर तू मेरे साथ ठीक चले तो भूत पिशाच. निकट नहीं आवे और अगर तू गलत करे तो भूत. पिशाच ही निकट आवे. अगर महावीर का नाम ना सुनावे. तो ये दुनिया में भूत पिशाच इसलिए निकट.
नहीं आ सकता उसके क्योंकि शिव के गण है और. हनुमान जी के गण है तो हनुमान जी जिसके. पास भेजेंगे उसके पास ही तो जाएगा भाई. तो जैसे भूत पिशास में जब अभी अभी. बागेश्वर जी के यहां गया था तो वहां पर एक. बड़ा पेड़ था जिसके पास लोग आते थे मत्थ. टेकते थे और ये मानते थे कि बुरी शक्तियां. जो है यहां से दूर हो जाती है। हम छोटे थे. तो बहुत सारे भूतों की कहानियां सुनते थे।. हालांकि जवान हुए तब से थोड़ा कम कहानी. सुन रहे हैं। दादी नानी अब उतना किस्सा. कहानी सुनाती भी नहीं है। और भूत पिशाच.
सहीम होते हैं। एक आत्माएं भटकती हैं। और. क्या हनुमान चालीसा पढ़ने से वाकई में भूत. पिशाच भाग जाते हैं? सबसे पहला प्रश्न भूत पिशाच छोड़ते हैं।. अगर ना होते तो जो भागवत की हमारी कथा है. उसमें लिखा है धन्यो भागवती वार्ता प्रेत. पीड़ा विनाशिनी धुंधकारी प्रेत बनकर के. घूमा।. दूसरा आपने कहा कि भूत पिशाच हनुमान जी की.
शरण में आने से भाग जाते हैं। वह मैंने. आपको बताया ही हनुमान जी की शरण में जो. जाता है वो तो उनके कंट्रोल में है।. और भूत पिशाच अगर ना होते तो तुलसीदास जी. भी लिखते भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर. जब नाम सुनावे तुलसीदास जी के साथ तो घटना. ही घटी भूत ने ही हनुमान जी से मिलवाया. किसने मिलाया भूत ने तुलसीदास जी ये काशी. के संकट मोचन हनुमान जी जो है अपने रोज.
शौच करने जाते तो जो पीपल में जल बच गया. शौच का एक दिन ऐसे ही उन्होंने पीपल की. जड़ में डाल दिया और जैसे ही जड़ में डाला. भूत प्रकट हो गया हा मांग पंडित क्या. चाहिए तुलसीदास जी ने कहा भूत. बोले बस कुछ नहीं एक ही अपनी आशा है कोई. राम से मिला दे तो उस भूत ने कहा कि भाई. राम जी से मिलने के लिए तो उनसे मिलना. पड़ेगा अब वो भूत नाम नहीं ले रहा क्यों.
नहीं ले रहा. क्योंकि उसके. भूत पिशाच. निकट. आवे. महावीर जब. नाम अब वो नाम ले देगा तो गड़बड़ हो जाएगी. तो तुलसीदास जी ने कहा किनसे किनसे किनसे. किनसे अच्छा हनुमान जी से इतना बोला. तुलसीदास जी ने भूत गायब. तुलसीदास जी ने कहा हे भगवान जिंदगी में. एक आदमी राम जी से मिलाने वाला मिला तेरी. किस्मत फूटी है वो भी भाग गए तुलसीदास जी. और आगे चले राम राम राम राम अब आदमी वादे. का पक्का हो या ना हो भूत तो होते ही है.
भूत ने कहा मिलवाऊंगा बेटा अब तूने मेरी. प्यास बुझाई है फिर आ गए पंडित अब नाम मत. लेना उसका. सुन. गंगा जी के तट पर एक राम कथा होती है।. वहां जो सबसे पहले आए और सबसे बाद में जाए. वही तेरा वो है। वो मिलवाएगा तुझे राम जी. से। तो पहुंच गए तुलसीदास जी। कथा का समय. 12:00 बजे 9:00 बजे ही पहुंच गए झोला का. मंडल लेकर। तुलसीदास सबसे पहले आ गए और. हनुमान जी जैसे ही आएंगे पकड़ लूंगा।.
तुलसीदास जी बैठे ऐसे देखने लगे। ये बंदा. देखता ही है भाई कैसा स्टूडियो बनाया है।. कैसा कथा पांडाल है। ऐसे करके तुलसीदास जी. नजर गई तो देखा दूर कोने में एक कोढ़ी. बैठा है। तुलसीदास जी का माथा ठनका यही तो. हनुमान जी नहीं है। सोचा कहां ये हनुमान. जी। कथा शुरू हुई। तुलसीदास जी भी रो रहे।. कोढ़ी भी रो रहा। सब चले गए। दो बंदे नहीं. जाते। एक तुलसीदास जी एक हनुमान जी।. तुलसीदास जी का अब तो माथा ठनका कि लगता. है। यही हनुमान जी है। जाके कहा आप जाओ.
भैया। कौड़ी ने कहा ए दूर हो जा तुझे कोड़. का रोग हो जाएगा। तुलसीदास जी ने कहा पहले. जाओ फिर मैं जाऊंगा। उसने कहा पहले तुम. जाओ। अब तुलसीदास जी को पक्का हो गया कि. हनुमान जी चरण पकड़ लिए। हनुमान जी प्रकट. हो जाइए। हनुमानजी प्रकट हो जाइए। कुड़े. ने कहा दूर तुझे रोग लग जाएगा। तुलसीदास. जी ने कहा हनुमान जी जैसा रोग आपको लगा. ऐसा रोग लगा दीजिए और इतने में हनुमान जी. प्रकट हो गए। कनक भूतराकार शरीरा सवर. भयंकर अति बलवीरा। संकट मोचन हनुमान जी.
अगर भूत ना होते तो तुलसीदास जी कभी ना. लिखते। तीसरा भूत क्या है? कोई व्यक्ति एक्सीडेंट से मर जाए जिनकी. शिनाख्त नहीं हो पाती।. जो हमारे ये क्रिया कर्म का नियम है। जहां. जो अच्छे से जिनका ये सब नहीं हो पाता वो. कहीं ना कहीं एक भटकना शुरू कर देते। वो. किसी शरीर को पकड़ लेते हैं। जैसे आपने.
देखा कोई लोग सिर हिलाते हैं। कोई लोग. खड़े हो गए। कोई ये सब प्रेत आत्माएं होती. है। जिसका निवारण बागेश्वर वाले बाबा बहुत. ऐसी गद्दियां लगती है हमारे भारत में और. मैं प्रत्यक्ष उसका प्रमाण हूं। हमारे. पिताजी हमारी माताजी दोनों को पकड़ा था. भाई। तो बड़ा ये ये तो होता ही है।. आपके माता-पिता जी को आत्माओं ने पकड़ा. था। महात्माओं ने शुरू से बचपन से फिर एक. दरबार लगता है हमारे यहां अलवर वाले बाबा. जी का उनके यहां ये सब निवारण होता है उस.
जब से वहां जाना शुरू किया तो बस वो सही. है नहीं तो ऐसे खड़े ही रहती थी हमारी. मम्मी दीवार के साथ वो बालाजी मेहंदीपुर. बालाजी में गए तो वहां कुछ उल्टी क्रिया. हो गई तो माता जी को भी पकड़ लिया. लेकिन जो हनुमान चालीसा निरंतर जाप करता. रहे निरंतर हनुमान जी की शरण में है अगर. उसको कोई ऐसी आप दुनिया में निकल रहे हैं. स्कूटर पे चल मोटरसाइकिल पर चल रहा है। ये. सब हवा में ही तो तत्व है। कैंसर का तत्व. हवा में घूम रहा है। निरंतर किसको पकड़.
ले? एक बात। अच्छा हनुमान जी को भूत प्रेत. वाला ही विभाग क्यों मिला? इतने सारे. भगवान थे। 33 कोटि देवी देवता सबके. अलग-अलग ये मित्र है। बताइए कौन कहता है? हनुमान जी को सारे विभाग मिले। भाई सबसे. पहला विभाग शुरू ही किया। जय हनुमान ज्ञान. गुण सागर ये कौन सा विभाग है भाई? दुनिया. का सबसे बड़ा ज्ञानी का विभाग आपके पास. है।. ठीक है।. उसके बाद जय कपीश दूसरा विभाग बंदरों का.
राजा पहले सुग्रीव था। सुग्रीव ने कहा भाई. मैं नहीं हूं। हनुमान जी आपने मुझे राम जी. से मिलाया। मेरे जीवन को धन्य कर दिया।. मुझे किष्किंदा का राजा बना दिया। आज से. बंदरों के राजा आप हो। तो हनुमान जी के. पीछे लग गया। जय कपीश।. बोलिए कपी कप. ईश. कप ईश. कपी. बंदरों के भगवान कौन है. हनुमान जी. हनुमान जी बंदरों के राजा तो दूसरा विभाग. ये हनुमान जी के पास इसलिए कहा कपीक्ष. हंतारम वंदे लंका भयंकरम गोष कवारी शकी.
कथा राक्षसम रामायण महामाला रतनम वंदे. नीलाजम. तो श्री हनुमान जी महाराज दूसरा विभाग ये. हो गया जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कपी. त्रिलोक और के बाद रामदूत ये कौन सा. डिपार्टमेंट पूरे सिक्योरिटी का जिम्मा. किसके पास है भाई? हनुमान जी के पास।. रामदूत उसके बाद अतुलित बलधामा पावर पे. सबका बाप. अतुलित बलधाम हेम शला देव.
ज्ञानी नामग्यम सकल गुण निधान वान नाम. रघुपति प्रिय पूरी हनुमान जी की चालीसा. उठा लो संकट मोचन उठा लो बजरंग बाण उठा लो. कोई हनुमत स्तवन उठा लो कोई भी पद उठा लो. सारे विभाग हनुमान जी के पास है. अद्भुत तो फिर दिन काहे खाली मंगलवार का. रहा और कौन कहता है यह भी मैंने कई जगह. मिथ खत्म कर दिया आज क्या वार है. आज बुधवार है. बुधवार है किसका वार है. गणेश जी का. ठीक है गणेश जी को भोग काहे का लगता है.
लड्डू. मोदक प्रिय लड्डूवन का भोग लागे हनुमान जी. को काहे का भोग लगता है. लड्डू. दोनों को लड्डू. हां लेकिन लड्डू अलग-अलग है ना हमारा बेसन. वाला. लड्डू मतलब लड्डू. हनुमान जी का बेसन. हनुमान जी को आप मोतीचूर चढ़ाओ बेसन चढ़ाओ. देसी घीगा चढ़ाओ, चूरमा चढ़ाओ, गणेश जी को. भी कोई भी चढ़ाओ। लड्डू मतलब लड्डू। हमने. यहां भी विस्फोट किया। जैसे लोगों ने. बांके बिहारी बदल दिए। किसी ने राधा रमण. जी कर दिए, किसी ने अपने राधा वल्लभ कर. दिए। कई कृष्ण हो गए भाई। ऐसे लड्डू ही कई.
हो गए। लड्डू एक ही है। सच्चिदानंद रूपा. श्री कृष्ण एक है।. राम जी बदल दिए। अरे भैया ये तो वो वाले. राम जी हैं। हम तो बचपन से भजन सुन रहे. हैं। आज मंगलवार है। महावीर का वार है। तो. अभी बता रहे हैं आपको सारे मंगलवार हैं।. सारे मंगलवार हैं। हनुमान जी के वार हैं।. सच्चे मन से जो कोई ध्यावे उन सबका बेड़ा. पार है। तो ठीक है। हनुमान जी को लड्डू।. गणेश जी को लड्डू हनुमान जी को माथे पे.
गणेश जी को माथे पे सिंदूर। माथे पे. सिंदूर सोहे। गणेश जी को हनुमान जी को लाल. दे लाली लस हर धर लाल दो गुण हो गए गणेश. जी को बॉम्बे में लोग गाते हैं जय देव जय. देव जय मंगल मूर्ति और हनुमान जी कौन है. मंगल मूर्ति मारुति नंदन ठीक है तीनों. समानता हो गई गणेश जी जग वंदन है गाइए.
गणपति जगवंदन. हनुमान जी तेज प्रताप महाज वंदन. महा जग बंद गणेश जी को कहते हैं बॉम्बे. में सुखकर्ता विघनाची हनुमान जी सब सुख है. तुम्हारी शरणा तुम रक्षक काू को डरना. गणेश जी दुख हर्ता है तो हनुमान जी संकट. कटे मिटे गणेश जी विघ्नेश्वर वरदाय सुर. प्रियाय लंबोदराय सकलाय जगिताय नानाय सुच. यज्ञ भूषिताय गौरी सुताय गणनाथ नमो नमस्ते. तो हनुमान जी भी विघ्न काटने वाले संकट.
हटे मिटे सब. पीरा हनुमंत बल पीरा दोनों शंकर पुत्र. हैं। शंकर सुवन. केसरी नंदन. केसरी और वो शंकर सुवन भवानी नंदन तो. दोनों भाई भाई हैं। भाई की प्रॉपर्टी में. भाई का हिस्सा होता है कि नहीं? होता है। तो चलिए मंडे. होता है तो बुधवार किसका हुआ? मंडे ट्यूसडे. हो गया।. मैं मैं बता रहा हूं। बुधवार किसका हुआ? गणेश जी का।. गणेश जी का। उसके बाद क्या आया? थर्सडे।. थर्सडे किसका है? बृहस्पति भगवान।. बृहस्पति भगवान यानी देवताओं के गुरु. दुनिया के सबसे बड़े गुरु। हनुमान जी से.
बड़ा गुरु कौन है? जय जय जय हनुमान गोसाई. करो. कृपा करो और अगर शिव के रूप में देख तो. तुम त्रिभुवन गुरु वेद बखाना आन जीव पावर. का जाना शिव हनुमान जी सबसे बड़े गुरु है. तो बृहस्पतिवार किसका हुआ. हनुमान जी का. उसके बाद क्या आया. शुक्र. शुक्रवार किसका है संतोषी मां भगवती का. हनुमान जी की पूंछ मां है जब शंकर जी बंदर. बने तो बोले कहां जा रहे हैं पार्वती माता. ने कहा बोले राम जी धरती पर आ रहे शक्ति.
शक्ति से उनकी बंदर बनके सहायता करेंगे।. पार्वती माता ने कहा कभी नहीं कर पाओगे।. बोले क्यों शक्ति को तो घर में छोड़कर जा. रहे या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण तो. तुरंत हनुमान जी की पूछ बन गई मां भगवती. और एक जगह हनुमान जी ने जब अहरावण श्री. राम जी को बंधु समेत जब अहिरावण ले रघुनाथ. पताल सिधारो तो देवी ही पूजी देवी का रूप. बनाया तो देवी हनुमान जी ही है साक्षात तो.
शुक्रवार किसका हुआ. हनुमान जी का. उसके बाद. शनि देव का. शनिवार किसका है. शनि देव का. शनि देव हनुमान जी का मंगलवार तेरा है. शनिवार तेरा है बजरंगी संभालो ये संसार. तेरा है हनुमान जी बैठे-बैठे जप रहे राम. राम राम राम राम शनिदेव आ गए हनुमान जी. राम राम जपना बंद करो अब हम तुम पर आ गए. बोले आ गए कितने दिन के लिए बोले साल के. लिए हनुमान जी ने कहा ठीक है शनिदेव बैठ.
गए हनुमान जी के सिर पे. हनुमान जी भी लड़खड़ा शनि भी शनि है तो. हनुमान जी ने हजार योजन बदन बढ़ाया गधा धर. लियो कांधे एक एक योजन के पत्थर रोम रोम. में बांधे और सिर पर पत्थर धरने शुरू करे. शनिदेव ने कहा हनुमान जी क्या कर रहे हो. कोई ढंग का काम नहीं है हम दबे जा रहे हैं. हनुमान जी ने कहा जिसके सिर पर शनिदेव आ. बैठेंगे वो कोई ढंग का काम करेगा. [हंसी] शनिदेव ने कहा थोड़ा डिस्काउंट दे. रहे हैं बोले डिस्काउंट क्या बोले हम हम.
ढई ढाई साल में चले जाएंगे. हनुमान जी ने कहा हम तो डिस्काउंट वाले. आदमी नहीं। हम तो थोक के व्यापारी है। कोई. हमसे बूटी मंगाए तो हम तो पहाड़ ले आते।. आप कहेगा डिस्काउंट दे रहे हैं। ठीक है. डिस्काउंट ले लेंगे। हनुमान जी ने फिर दो. चार पत्थर रखे। शनि देव ने कहा दबे जा रहे. हैं। हनुमान जी ने कहा बैठिए। अरे भाई दबे. जा रहे हैं। हनुमान जी ने कहा बैठिए।. शनिदेव ने कहा मुझे क्षमा करो। हनुमान जी. हम तो अभी जा रहे हैं। और चलते-चलते कहा. जो शनिवार को भी आपकी उपासना करे। तो.
किसका हुआ शनिवार? हनुमान जी का। उसके बाद संडे भगवान रवि. सूर्य और सूर्य को तो खा गए बाल समय रवि. [हंसी] भक्ष लियो कंट्रोल में है सूर्य. उनके और सूर्य के शिष्य हैं तेज प्रताप. महा जग बंधन सूर्य के शिष्य हैं सूर्य का. तेज उतरा है तो इस नाते रविवार किसका हुआ. हनुमान जी का. फिर उसके बाद क्या आया. मंडे तो शिव जी को. सोमवार रुद्र दे तजने बस हरते भय सोमवार. शिव ही शंकर स्वयं केसरी नंदन फिर उसके.
बाद मंगल मंगल का ठप्पा लगा है तो मंगल का. ठप्पा कहा है लगा है ना मंगल को जन्मे. मंगल का जन्म है मंगल ही करते मंगलमय. हनुमान बोलो जय हनुमान जय हनुमान जय. हनुमान जय हनुमान. अपना भी जन्म मंगल का है 20 सितंबर 1988. इज इक्वल टू ट्यूसडे हां अब इसका अब मैं.
आपसे एक बात और कहूंगा जल्दी से आज का. बारे है. बुधवार. तो सात के सात वार किसके हुए? हनुमान जी के।. अब जो लोग ये कहते हैं ना हम मंगल शनि को. नहीं पीते. और मंगल शनि को नहीं खाते तो उनको ये. पडकास्ट दिखा के बता देना सारे ही दिन. हनुमान जी के भाई और दूसरा जो कहता हो आज. मंगल नहीं है। कौन चाहता है कि मेरे जीवन. में अमंगलवार हो।. बताइए. तू कहता है नहीं आज मंगलवार नहीं है। ठीक. है। तो आज तू क्या मंगलवार चाहता है?
हम रोज मंगलवार चाहते हैं। प्रभु जी मैं. आपको सत्य कह रहा हूं। मैंने जीवन में कभी. कोई व्रत नहीं किया। ना हनुमान जयंती ना. जन्माष्टमी ना कोई व्रत नहीं। मेरे लिए. रोज व्रत है। भगवान श्री कृष्ण ने कहा है. सहज व्रतम कौते तुम रोज नियम से जितनी. जरूरत है औषधि के रूप में खाओ तो तुम्हारा. रोज व्रत है। जितनी जरूरत है उतना बोलो तो. तुम्हारा रोज व्रत है। जीवन च्या एक जैसी.
होनी चाहिए। मैं आपको सत्य कह रहा हूं।. मेरा रोज मंगलवार है।. मेरा जीवन एक जैसा है रोज। मैं एक नहीं. करता कि आज मंगलवार है तो मैं आज हनुमान. चालीसा ज्यादा पढूंगा। नहीं रोज मंगलवार. है भाई।. कौन चाहता है कि हमारे जीवन में भाई. मंगलवार ना हो? आपने इतनी देर में हनुमान चालीसा का जिक्र. कई बार किया।. हनुमान चालीसा की संरचना क्यों की गई थी? किस लिए की गई थी? कैसे की गई थी? इसके पीछे बहुत संतों के अपने-अपने मत.
हैं।. कुल मिला के मैं जो एक छोटी सी बात बताऊं. आपको। तुलसीदास जी हनुमान चालीसा बहुत दिन. से लिखना चाहते थे।. लेकिन हनुमान जी लिखने नहीं देते थे। कहते. तू मेरी प्रशंसा करेगा तुलसीदास और यह. मुझे पसंद नहीं। हनुमान जी को एक ही चीज. से प्रॉब्लम है। इसलिए मेरा यह वाक्य बड़ा. वायरल होता है। मैं कहता रहता हूं हनुमान. जी के मंदिर जाओ और बार-बार जाकर कहो आप. जय हनुमान जय हनुमान तो कम सुनेंगे। एक.
बार जाकर कह दो जय सियाराम।. प्रसन्न हो जाते हैं। मैं रोज मंदिर जाता. हूं जहां मेरे घर के पास मैं श्री राम के. दरबार में बैठकर के हनुमान चालीसा सुनाता. हूं। और राम जी को हनुमान जी को श्री. रामचंद्र कृपालु भजन सुनाता हूं।. एक भक्त भगवान की कथा सुनकर प्रसन्न होता. है और भगवान भक्त की कथा सुनकर प्रसन्न. होते हैं।. जहां जहां सुंदरकांड शुरू होता है वहां.
राम जी विराजमान हो जाते हैं और जहां राम. विराजमान होंगे वहां हनुमान जी विराजमान. हो जाते और जहां राम कथा होगी वहां हनुमान. जी विराजमान हो जाते हैं। तो तुलसीदास जी. जैसे ही हनुमान चालीसा लिखने बैठे तो. तुरंत लिखते श्री गुरु चरण सरोज निज मन. मुगुर सुधारी बरनो हनुमत विमल जस हनुमान. जी कहते स्टॉप. क्या हुआ बाबा गलत है. फिर लिखना शुरू श्री गुरु चरण सरोज निज मन.
मुकुर सुधारी बरनो हनुमत विमल. रघुवर हां. तुरंत अयोध्या कांड का पहला दोहा उठा. लिया। यह कांड का पहला द्वार श्री गुरु. चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारी. बरनऊ रघुवर हनुमान जी का बहुत बढ़िया. विमल जसु. जो दायक फल चारी.
जैसे ही हम बोलते हैं ना बरनौ रघुवर विमल. जस यानी कि राम जी के बरनौ विमल यशो का. गायन शुरू कर रहा हूं तो हनुमान जी का तो. यही सुन लिया राम प्रभु चरित सुनवे को. रसिया इनको तो राम कथा ही सुननी है रघुवर. के ही गुण सुनने है तो कोई हनुमान चालीसा. शुरू करता है श्री गुरु चरण सरोज निजम. सुधार बर रघुवर हनुमान जी आके बैठ जाते. हैं सुना बेटा विमल जस जोदायक फलचार. बुद्धि तन जान के सुमन कुमार बल बुद्धि. विद्या देव हर कलेश विकार और फिर आदमी.
शुरू कर देता है चाहे हनुमान ज्ञान गुण. सागर हनुमान जी इतने में लीन हो जाते. ऐसा मानना है और जब हम लास्ट में कर देते. पवन तनय संकट मंगल मूर्ति रूप राम लगन. सीता सही हृदय बसो सिया रामचंद्र हां अब. सब सुख है तुम्हारी शरणा ये भी ले ले और. मनोरथ जो कोई मांगे वो भी ले ले संकट तेरे. सब संकट कटे मिटे सब पीरा ये भी ले ले बता. तुझे क्या चाहिए यार कोई मेरे सामने राम. कथा गाए दुनिया का सबसे ज्यादा प्रिय बंदा. वो है मेरे लिए.
इसलिए मैं कहता हूं हनुमान जी के मंदिर. में जाकर अपनी अपनी डिमांड्स रख दो ये कर. दो वो कर दो बड़े-बड़े पाठ सुना दो सुनाओ. अरे प्रेम से राम नाम सुनाओ ना. आपका साथ नहीं छोड़े। हनुमान जी भी पंडित. जी के कान में मुझे लगता है कहते रहते. होंगे इस बंदे को थोड़ा टाइम ज्यादा दे. दो। यह राम राम वाला आया है और उसको धक्का. लगता है जोर से जो के हनुमान जी हनुमान जी. हनुमान जी करता है।. अद्भुत.
मैंने अभी जगतगुरु का पडकास्ट किया था। एक. बड़ी चर्चा चली थी कि उन्होंने हनुमान. चालीसा में उनका कहना था कि कुछ चीजें गलत. संपादित हो गई थी जिसको बदलाव किया था। आप. हनुमान जी के परम भक्त हैं। थोड़ा प्रकाश. डालेंगे तो कंफ्यूजन नहीं रहेगी। ये विषय. सिर्फ कंफ्यूजन को लेकर हम चाहते हैं कि. आप समझा दे थोड़ा सा।. ये हमारे जगतुगुरु भगवान पूज्य. रामभद्राचार्य जी महाराज ने जो हमारे भारत. का गौरव है उन्होंने इस बात को कहा। वो. कहते हैं ये कहो शंकर स्वयं.
पहला शंकर स्वयं केसरी नंदन और मैंने आपके. सामने अभी कोट किया ये तेज प्रताप महा जग. वंदन दोनों ही बातें एक ही चौपाई में लिखी. है हनुमान जी शंकर स्वयं तो है ही इसमें. कोई शक नहीं लेकिन वो शंकर सुवन भी है. तुलसीदास जी ने वाया वाया कह दिया तेज. प्रताप जब विश्व मोहिनी का अवतार लिया. भगवान नारायण ने तो शंकर जी उन पर मोहित. हो गए और उनका वीर स्खलित हो गया। उसको.
अंजनी मां के कर्ण से गर्भ में प्रवेश. कराया गया। इस कारण वो शंकर सुवन भी है और. शिव अवतार होने के कारण शंकर स्वयं भी है।. दोनों बातें ठीक है। शिव महापुराण के. अनुसार शंकर सुवन ठीक है। एक जगह वो कहते. हैं सब पर राम राय सिर ताजा हो। यह भी ठीक. है। पहली पुरानी प्रति लिपियों में यही. था। अब हो गया सब पर राम तपस्वी राजा. दोनों ही ठीक है बातें.
तो इसमें मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहूंगा. कौन सा सही है कौन सा गलत है. बजरंग बाण में आपका एक बहुत वायरल होता है. ओम हनुमंते नमः बड़ा जबरदस्त वो थोड़ा. चाहते हैं उसको सुना ही दीजिए. ओम चम चम चम चपल चलता. ओम हनु हनु हनु हनु हनुमंता ओम हम कप चंचल. ओम सम सहम पर खलवल अपने जन को तुरंत उबारो. सुमृत हो आनंद हमारो यह बजरंग बाण जे मारे.
ताई कहो फिर कौन उबारे पाठ करे बजरंग बाण. की हनुमत रक्षा करे प्राण की है बजरंग बाण. जो जापे ताते भूत प्रेत सब कापे धूप दे और. जपे हमेशा ताके तन नहीं रहे कलेसा. जय हनुमान जय हनुमान जय हनुमान जय जय. हनुमान हनुमान जय हनुमान जय हनुमान जय. हनुमान जय जय हनुमान और अभी अपने बॉलीवुड.
एक्टर अक्षय कुमार जी उनकी पिक्चर में. मेरा नया वर्जन बजरंग बाण आ रहा है. अरे जबरदस्त. वो पूरा कॉन्ट्रैक्ट हो गया मैंने उनको. वर्जन दे भी दिया बनाकर उसमें [हंसी] आप. बिल्कुल एकदम और एनर्जेटिक बजरंग बाण शायद. कहां उसको प्रयोग करेंगे यह मेरे पास अभी. खबर नहीं है लेकिन वो पूरा चला गया है. निरंतर सुनते रहते हैं सबके सबके घरों में. जितने बॉलीवुड एक्टर्स हैं, जितने. क्रिकेटर्स हैं, सबके घरों की शुरुआत.
जहांजहां सनातन के लोग हैं, सबके घरों की. शुरुआत इन्हीं हनुमान चालीसा से होती है।. हनुमान चालीसा कितनी पावरफुल है।. अब ये भी तो. ये नई पीढ़ी में क्योंकि अब इसकी बड़ी. चर्चा होती है कि हनुमान चालीसा का पाठ. कीजिए। यह आपको एक अलग सी शक्ति का एहसास. कराती है। एक अलग सी ताकत, एक अलग सी. ऊर्जा, एक अलग सी कामनेस।. मैं अगर कहूं कि हनुमान चालीसा कितनी. पावरफुल है तो लोग मान लेंगे। लेकिन मैं. कहता हूं कि थोड़ा करके तो देखो।.
फिर तुम कहोगे कि हनुमान चालीसा कितनी. पावरफुल है। अभी कल मैं बहुत बड़ी किसी. कंपनी का ओपनिंग करने गया था। हजारों. एंप्लई थे। तो मैं जैसे ही घुसा इतना चीख. चीख करके चिल्ला चिल्ला करके वो बजरंगबली. की जय बोल रहे थे और तालियां ये वो सबके. एक ही कमेंट कि हम हनुमान चालीसा. जो मेरे द्वारा गाया गया उसको सुन सुन के. गाना सीख गए और हमारे जीवन में कितना. बदलाव है। मैंने मैं कहता हूं 40 दिन.
हनुमान चालीसा पढ़ लो हम. उसके बाद आप बताना कि हनुमान चालीसा कितनी. पावरफुल है।. जिसज के जीवन में श्री हनुमान चालीसा है. मैं कहता हूं दुनिया का सबसे बड़ा वेद. सबसे पावरफुल वेद अगर किसी को छोटे से. ग्रंथ में पिरो पुरो दिया वो श्री हनुमान. चालीसा हनुमान चालीसा में है कि जो सत बार. पाठ कर हो छूटे मन महा सुख होई बिल्कुल.
इसके पीछे मैं कई चीजें कहता हूं शत का. अर्थ एक तो हो गया 100 एक हो गया सत सात. एक हो गया सच्चे मन से एक ही बार कर ले. भाई सत. एक ही बार कर लो तो भी कल्याण हो जाएगा।. बट वैसे दिन भर में एक बार पाठ करना. चाहिए।. नहीं मैं बापू कहते 11 बार. पूरा नहीं बापू. जी मैं अपने सुंदरकांड में कल भी रात को. बोल रहा था होटल सेवन सीस में कि आप 11. बार पाठ करिए। 11 बार नहीं कर सकते। नौ.
बार करिए। नवग्रह कंट्रोल में रहेंगे। एक. दिन में एक दिन में नौ बार पूरे दिन में. कभी भी चलते फिरते उठते बैठते। अभी-अभी. मिथ्या लोग कहते हैं आसन लगाकर बैठे करें।. अशुद्धि में ना करें। हनुमान चालीसा पढ़ने. का कोई नियम नहीं है भाई।. मैच खेलते खेलते भी पढ़ सकते हैं।. मैच खेलते जय हनुमान ज्ञान गुण सागर पाठ. उठा उठा के अरे. शाम को. इसीलिए लिखा जो यह पढ़े. हनुमान चालीसा. हां पढ़ने में कोई नियम नहीं होता भाई। आप. देखो मैं मुझे बहुत ध्यान है। मैं पढ़ने.
में तो कमजोर ही रहा। हम. लेकिन जब मुझे कुछ याद करना होता था तो. मैं समय नहीं होता था तो एक कॉपी बीच में. रख ली जहां-जहां मुझे काम करना होता था. निकलते-पढ़ते उसको क्वेश्चन को याद करते. गए पढ़ते गए याद करते गए भाई देखते गए. पढ़ते गए. आप अपना कोई भी काम करते-करते हनुमान. चालीसा पढ़िए दिन में 11 बार क्या 50 बार. पढ़िए. 11 बार नहीं कर सकते नौ बार करिए नौ बार. करें तो नवग्रह. प्रतिकूल नहीं होते नौ बार नहीं कर सकते. और डिस्काउंट ले लो सात बार कर लो सात के.
सात दिन रक्षा और नहीं कर सकते पांच बार. कर लो एक हनुमान चालीसा में पांच बार. हनुमान जी की जय हुई है जय हनुमान ज्ञान. गुण सागर एक जय कपी त्रिलोक उजागर दो जय. जय जय हनुमान गोसाई. तीन चार पांच पांच हां जय जय जय हनुमान. गोसाई हां. पांच ही है हनुमान जी के भाई श्रुतिमान. धुतिमान गतिमान मतिमान केतु. पंचमुखी हैं हनुमान जी इसलिए पांच बार. हनुमान चालीसा पांच बार नहीं कर सकते और. डिस्काउंट ले लो तीन बार. तीन ही दुख है दुनिया में दैहिक दैविक.
भौतिक. पंच मुखी का रहस्य क्या है ये? पंचमुखी का रहस्य ये है कि पांच मुख. पंचानन शिव से उतरे। इसको लोगों ने तंत्र. से जोड़ दिया। ये सबसे ज्यादा बिगाड़ा रील. वालों ने। अपने घर के बाहर पंच मुखी. हनुमान जी लगाओगे तो यह फायदा हो जाएगा।. ला सजीवन वाले लगाओगे तो यह फायदा हो. जाएगा। हनुमान जी कई बना दिए भाई।. और पता किसी को कुछ नहीं है। तुलसीदास जी. से पूछो ना भाई।.
पंच मुखी हनुमान जी भगवान शिव पंचानन है. पंच आनन पंच मुख वाले वही हनुमान जी है. पंचमुखी है तो विरा में मिला उनको विरासत. में मेरा सवाल कुछ और था लेकिन अब मैं. तुलसीदास जी से पूछूंगा तुलसीदास जी की. कितनी बड़ी भूमिका है तुलसीदास जी की. थोड़ा उनकी व्याख्या कीजिए क्योंकि. रामचरितमानस से लेकर संस्कृत से अवधि में. लाना हनुमान चालीसा लिखना और सरल सहज. तरीके से जनजन तक पहुंचाना आज जितने पाठ. हो रहा है वो तुलसीदास जी दे रहे हैं. थोड़ा आप बताइए थोड़ा और विस्तार समझेंगे.
हम लोग।. जैसे हो सकता है कोई बहुत बड़े पत्रकार. हुए हो। हां. और वही अब आप हैं।. जन्म बदलने के बाद तुलसीदास जी ही तो. वाल्मीकि हैं।. नाभा जी ने भक्त बाल के ग्रंथ में कहा है. कल कुटिल जीव निस्तारित बाल्मीकि तुलसी. भयो। जो वाल्मीकि जी 24,000 श्लोकों में. वाल्मीकि रामायण लिखकर गए। उसी को. श्लोकावली से लोकावली में उतार दिया.
तुलसीदास जी ने कितना मुश्किल रहा होगा उस. दौर में कोई मुश्किल नहीं रहा कृपा बोलती. है प्रभु हम आपको देखते हैं आपका शेड्यूल. देखते हैं आप क्या करना हमें लगता है बड़ा. मुश्किल होगा यार. एक दूसरे की मेहनत स्ट्रगल देख के आदमी. करता अरे हम नहीं कर पाएंगे बड़ा मुश्किल. है भाई नहीं हम इसलिए सोचते कि मुगल काल. चल रहा था देश में परिस्थितियां कितनी अलग. थी और उस दौर में इतना विस्तार कर देना. लोक तक पहुंचा देना और सनातन को इतना बढ़ा. देना यह अपने आप में ईश्वरीय काम है। जब. कृपा काम करती है तो ना मुगलों की शक्ति.
काम करती है। जब कृपा काम करती है जब. परमात्मा की कृपा बोलती है। हनुमान जी ही. तो लिखवा रहे हैं मानस। तुलसीदास जी को. कौन लिखवा रहा है? हनुमान जी।. हनुमान जी लिखवा रहे। इसलिए जब तुलसीदास. जी ने पूरा ग्रंथ लिख दिया तो काशी के. पंडाव ने कहा क्या है इसमें दिखा? और. विश्वनाथ के मंदिर में सारे ग्रंथ. ऊपर रख दिए। यह नीचे रख दिया। और जब सुबह. मंदिर खोला गया तो अपने आप ही सत्यम शिवम.
सुंदरम लिखा हुआ था इसके ऊपर। इतनी बड़ी. महिमा है। हनुमान जी ने एक हनुमान नाटक. लिखा था। वो वाल्मीकि रामायण से भी अद्भुत. था। लेकिन कहीं संतों में द्वेष ना हो. जाए। हनुमान जी ने अपना वो शास्त्र फेंक. दिया समुंदर में।. तुलसीदास जी का जन्म हुआ। जन्म से ही जहां. शादी ब्याह होते वहां भोजन बच जाता।. पत्तले जो इधरउधर पड़ी रहती उनको बीन करके. खाया। डर लगता तो उस दासी ने कहा बेटा डर.
लगे तो राम बोल।. उसके बाद जीवन चक्र चलना शुरू हुआ तो कहां. क्या अद्भुत थे तुलसीदास जी। लोग कहते. तुलसीदास जी को एक नार नारी ने डांट मारी. तो तुलसीदास बन गए। ऐसा नहीं होता भाई। घर. घर में नारी डांट मार रही है सबको। [हंसी]. सारे तुलसीदास बन जाए। मूल में पड़ा होता. है। आज हम जो हैं उसके पीछे बहुत जन्म की. बातें हैं। हम. आप एक जन्म में इतने अच्छे पत्रकार इतने.
बड़े ये नहीं बन सकता।. एक जन्म का पुण्य नहीं पाता।. नहीं है।. जैसे एक नारियल को तोड़ो एक चोट दो चोट. पांच सात बार में वो टूटता है।. तो इसका मतलब ये तो नहीं कि पांच सात चोट. ने तोड़ा।. सही बात है।. शुरू से उसमें एफर्ट लगा है। आपने कभी. एकांत में बैठकर के बोलना सीखा होगा। मैं. चैनल पर जाऊंगा तो ऐसे बोलूंगा जहां कोई. ना हो कोई मुझे देख ना ले कहीं लोग पागल. ना कहे. मैं ऐसे एंकरिंग करूंगा मैं ऐसे बोलूंगा. हमने खूब किया छत पर घूम घूम के कुंडी लगा.
ली कि कोई आ जाएगा तो पागल रो रहे हैं. भगवान की कथा गा रहे हैं ऐसे भगवान ने. मौका दिया तो ऐसे गाएंगे मुझे बहुत याद. आता है आज. तो वो सब कई स्ट्रगल बहुत मेहनत वो रंग. लेकर के आती है किसी को कहो एकदम खड़े. होते ही ले भाई माइक पे बोलना शुरू का. ठीक है। तो हनुमान जी ने भी कभी कोई. रामायण लिखी थी? हनुमान जी का एक ग्रंथ. लिखा गया। मैं बताया ना आपको मैंने हनुमान. जी. वो रामायण नहीं थी। रामचरित्र था उसमें हम. तो लेकिन उसको कहीं वो हनुमान जी जैसा परम.
विद्वान कौन है? जब तुलसीदास जी वंदना. करते हैं तो लिखते हैं सीता राम गुण ग्राम. पुण्य विहारणो वंदे विशुद्ध विज्ञानो. साइंटिस्ट की उपमा दी हनुमान जी को।. कवीश्वरो कपीश्वर वाल्मीकि और हनुमान जी. को वैज्ञानिक बताया वाल्मीकि जी ने बताया. है पांच दिन में पुल बना. कितने दिन में कितने योजन पुल बना यह. वाल्मीकि रामायण में लिखा है और तुलसीदास.
जी इतना ही कहते हैं श्री रघुवीर प्रताप. थे सिंधु उतरे पाषाण. वाल्मीकि जी साइंटिस्ट है 24 हजार श्लोकों. की वाल्मीकि रामायण को पढ़ना बड़ा. थोड़ा कठिन है आज के समय में।. इसलिए तुलसीदास जी ने रामचरितमानस को लिखा. और वह रामचरितमानस में भी पहले सात श्लोक. है। फिर उसके बाद दोहा लगाया जो सुमिरत. सिद्ध होए गणनायक कर बरबर फिर उसके बाद वो.
करते करते फिर बंदो गुरु पद कंज कृपा. सिंधु नर रूप हरि महामोहत पुण्य जास वचन. रविव निकर फिर चौपाई पे ही आ गए बंदो गुरु. पद पद परागा सुर सुरस अनुरागा आज कौन. दुनिया में ऐसा होगा जिसको यह ना पता हो. मंगल भवन मंगल हारी. कितना सरल कर दिया गोस्वामी जी ने तो अगर. मैं आपसे आपसे एक लाइन में समझने की कोशिश. करूं कि तुलसीदास जी ने सनातन में क्या.
जोड़ दिया. या कैसे सरल करने से सनातन का विस्तार कर. दिया जैसे भगवान को भोग लगा हो और वो. तुलसी के बिना अधूरा है।. जैसे दुनिया भर के व्यंजन हो 56 भोग रखे. हो लेकिन अगर तुलसी दल ना पड़ा हो, तुलसी. पत्र ना पड़ा हो, तुलसी का पत्ता ना पड़ा. हो तो छप्पन भोग अधूरे हैं। ऐसे ही दुनिया. का कोई भी सत हो कहीं ना कहीं तुलसीदास जी. की चौपाई के बिना भाई जय सियाराम असुर.
हनुमान जी के भारत में कौन-कौन से सबसे. पुराने मंदिर हैं प्रमुख मंदिर हैं जहां. एक भक्त को दर्शन करने जाना चाहिए अब आप. फिर वही बात कर रहे हैं मैं फिर मैं मैं. मानव स्थापित बात नहीं कर रहा हूं मैं वो. कह रहा हूं जिनका ऐतिहासिक प्रमाणों में. जिक्र है ग्रंथों में जिक्र है जैसे हमारे. अयोध्या वाले हो गए टीले वाले हनुमान जी. हो गए ऐसे इस तरह के बंदे जिन इनका जिक्र. पुराणों में है। मैं कहता रहता हूं। ये. बातें मेरे सामने कई कई लोग प्रश्न करते. हैं। हम. मैं कहता हूं भाई मैं अगर कह दूं अयोध्या.
के हनुमानगढ़ ज्यादा बड़ा महत्व है।. तो सालासर हनुमान जी भी है।. हम. कोई कहे सालासर हनुमान जी कह दिया तो. मेहंदीपुर हनुमान जी भी है।. कोई मेहंदीपुर हनुमान जी कह दे तो भाई. उसके बाद अपने दिल्ली वाले सीपी वाले. हनुमान जी भी है।. सीपी वाले हनुमान जी कहे तो मरघट वाले. बाबा भी है। हम. मरघट वाले बाबा कह दे तो कष्ट भंजन हनुमान. जी भी है। सहारंगपुर में हम कहां-कहां. हनुमान जी नहीं है। लेकिन मुझे लगता है. सबसे ज्यादा पावरफुल.
अपने घरों के आसपास के हनुमान जी के. मंदिरों के दर्शन करने जाइए।. हम 100 किलोमीटर, 200 कि.मी. 500 कि.मी. वहांवहां दर्शन करने जाते हैं। जाना. चाहिए। वो हमारे प्रमुख स्थान है।. हम. लेकिन मैं बहुत संदेश देता हूं इस माध्यम. से कि भाई अपने घरों के पास जो हनुमान जी. की स्थापना हुई है वहां भी दर्शन करो। रोज. वहां जाकर के दर्शन कर लो। वो भी बहुत. महत्वपूर्ण है।. अद्भुत सही बात है। हम लखनऊ में रहते थे।.
हजरतगंज चौराहे पे एक हनुमान जी का मंदिर. था। जाते थे। भगवान हमको आशीर्वाद देते. रहते थे।. किसकी प्रसिद्धि कहां से कब ज्यादा. मान्यता हो जाए। अरे हनुमान जी का स्थापना. क्या? जहां कहीं लगाया और लेपन सिंदूरी. लगाया। बिठा दिया। लुटेरिया हनुमान जी. जय श्री राम हां. हर व्यक्ति का अपना हनुमान है. लेकिन कई जैसे मंदिर है उनके बारे में. बड़ी चर्चा होती है जैसे एक वड़ोदरा में. हनुमान जी का मंदिर है वहां कहते हैं कि. जब रामायण होती लगता है हनुमान जी. मुस्कुरा रहे हैं कहां नहीं मुस्कुराते. भाई आपके घर के हनुमान जी को रामायण.
सुनाने. चित्रकूट थोड़े दिन में मुस्कुराने लगेंगे. चित्रकूट में कहते हैं हनुमान धारा का. रहस्य जो है वो पानी गिरता रहता है कई. बड़े किस्से. महत्व के स्थान है हमारे जहां जहां हनुमान. जी ने कोई ना कोई लीला की है जहांजहां. हनुमान जी ने कोई ना कोई किसी प्रकार का. कोई स्थापन हुआ हो या हनुमान जी कहीं से. गुजरे हो जहांजहां लीला वहां वहां हमारे. स्थान बन गए उनका अपना महत्व है जाना ही. चाहिए लेकिन मैं ये बात इसलिए कह देता हूं. कि अपने घरों के आसपास के मंदिर सुने पड़े. रहते हैं. और वहां कतार लगी है लंबी.
चाहे मैं थोड़ा तो यार. अपने घर के आसपास मंदिर में आके घंटा बजाओ. वैसे भी जब आप कह ही रहे हैं कि हर दिन. हनुमान जी का है. हर जगह हनुमान जी है. जहां हवा वहां हनुमान हनुमान जी हां. हनुमान जी कौन है? पवन तन वात जातम नमामि. हवा ही तो हनुमान जी है। आप मुझसे कहे कि. हवा हनुमान जी कहां है? तो मैं कह रहा हूं. ये रहे हनुमान जी।. आप कहे दिखाओ। हमने कहा दिखा देंगे। आप.
हवा दिखा दो हमको।. हम कहे हवा कहां है? बोले यह रही हवा। एसी. में से आ रही हवा। लाओ दिखाइए कहां है।. दिखा नहीं सकते। महसूस कर रहे हैं। हम भी. महसूस कर रहे हैं। भाई. वो एहसास है। जय श्री राम। हनुमान जी जब. लंका जी गए थे और जैसे कि आपने बताया भी. उनके लिए दो मिनट का काम था कि सीता जी को. वहां से ले आते। सीता जी को वापस लाने का. विचार क्यों नहीं आया? क्योंकि आयुष नहीं. थी, आज्ञा नहीं थी।.
जब सुंदरकांड में कह सीता जी कह रही है. निश्च पतंग समान कसानो. जननी हृदय धीर धरो जरे निशाचर जानो मां. घबराओ नहीं ये निशाचर तो पतंगे के समान है. ये सब जल के भस्म हो जाएंगे और उसके बाद. कहते जो रघुवीर होत सुध पाई अगर अब तक. भगवान श्री राम ने आपकी कोई खोज निकाल ली.
होती पता निकाल लिया होता तो करते नहीं. विलंब रघुराई. उसके बाद क्या कह रहे हैं हनुमान जी जा. रघुवीर होत सुई करते नहीं विलंब रघुराई अब. मात में जाऊं लभाई प्रभु आयस नहीं राम. दुहाई आपको अभी लेकर के जा सकता हूं लेकिन. प्रभु आयस भगवान की आज्ञा नहीं है और. इसलिए मैं गाता भी हूं. आज्ञा नहीं है मां मुझे किसी और काम की.
वरना भुजाएं तोड़ दूं. सौगंध राम की ये इसकी 20 की 20 भुजाएं ऐसे. पकड़ के तड़ तड़ तड़ तड़ जैसे यहां वृक्ष. उखाड़े ऐसे तोड़ डालो इसके 10 के 10 सिर. खंडित भुज. खंडित सिर मंडित भुज बीसा अभी रावण को. लेकिन मुझे आज्ञा नहीं है माता जी. अगर मैंने यह काम कर दिया तो राम जी का.
प्रोग्राम फेल हो जाएगा. इसलिए नहीं ले गए।. माता सीता और हनुमान जी के कई सारे. वक्तव्य बड़े चर्चित रहते हैं। चाहे वो. सिंदूर वाला वक्तव्य हो या उनके अमर होने. की में कहा था कि सीता माता ने भी वरदान. दिया था।. सुंदरकांड में दिया, हनुमान चालीसा में. दिया, अयोध्या कांड में दिया।. थोड़ा माता सीता और हनुमान जी कि उनका भी. मां और पुत्र का रिश्ता हो गया था। उसके. बारे में थोड़ा हमें बताइए। कोई चर्चित. संवाद सीता जी ने कहा बेटा क्या राम जी की. सेना में सारे बंदर तेरे ही जितने हैं?
हनुमान जी ऐसे बैठे थे. सूक्ष्म रूप धर यही दिखावा. हनुमान जी ने पहला एक स्थान है जहां ये. कहा होगा मां के सामने माता जी मैं तो. बहुत बड़ा हूं सारे बंदर मुझसे छोटे हैं।. नहीं तो हनुमान जी हर जगह ये कहते हैं मैं. छोटा हूं सब बड़े हैं। आज पहली बार सीता. जी के सामने कह रहे हैं कि मैं बहुत बड़ा. हूं सारे छोटे हैं।. क्यों कहा? क्योंकि सीता जी दुखी है। और.
ऐसे में जाकर मैं मां का पुत्र के रूप में. आया हूं। बेटा हमेशा अपनी मां को कहता है. मां घबरा मत तेरा बेटा बड़ा हो गया। जब एक. बेटा बड़ा होने लगता है बाप के कंधे से तो. मां बड़ी आनंदमय हो जाती है। और उसका. पुत्र जब मां के कंधे पर हाथ रख के कहता. है ना कि मां घबरा मत। तेरा बेटा बड़ा हो. गया। मां का. कलेजा चौड़ा हो जाता है। सीता जी तो.
डिप्रेशन में थी वैसे ही। सीता जी तो. परेशान थी। रावण अभी-अभी डरा कर गया और. हनुमान जी पेड़ पर बैठे। तो हनुमान जी कह. रहे माता जी मैं बहुत बड़ा हूं।. अब हनुमान जी ने तो ये अपनी उदारता में कह. दिया और यह पड़ गया उल्टा। सीता जी मन में. सोचने लगी बड़ा इतना है। सूक्ष्म रूप धरी।. तो भाई छोटे और बड़े कितने होंगे? तो माता. जी डाउटफुल हो गई। तो मां ने कहा बेटा. मोरे हृदय परम संदेहा बेटा एक संदेह है.
क्या सारे बंदर तेरे जितने ही है भगवान ने. भी क्या मित्रता की तेरे जैसों से यहां तो. राक्षस बहुत बड़े हैं हनुमान जी ने कहा. हां मेरे जितने ही है. बस मोरे हृदय परम संदेहा इतने में हनुमान. जी ने कहा गड़बड़ हो गई है तो मां को नहीं. पता कि एक बंदर कितना बड़ा है एक पांव. दबाया कनक भू धराकार शरीरा ताड़ ताड़ ताड़. ताड़ जय श्री राम विकट रूप धरी लंग. मां ने कहा बेटा बस छोटा हो जा छोटा हो.
मां विश्वास हो गया हां बेटा छोटा हो जा. अगर राक्षसों ने देख लिया तो गड़बड़ हो. जाएगी. हनुमान जी ने कहा माता जी गड़बड़ ही तो. करनी है और फिर बोलने लगे सुन माता सा. शाखा मृग नहीं बुद्धि विशाल प्रभु प्रताप. ते गरुड़ ही खाए परम लघु वियाल फिर सीता. जी ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया. पहली बार आज मां ने मां कहा और राम राम जी. ने अब तक हनुमान जी को बेटा नहीं स्वीकारा. था। जब यहां से गए पहले तो मां कहती है ना.
यह बेटा है तब जाते ही राम जी ने कहा सुन. सुत तो ही उण में ना मां ने स्वीकार कर. लिया तो उधर बाप ने भी कह दिया ले मेरे. बेटा हम तब सीता जी ने आशीर्वाद दिए थे. अजर बेटा तू अजर है बूढ़ा नहीं होगा. हनुमान जी को खुशी नहीं हुई फिर मां ने. कहा बेटा तू अमर रहेगा मरेगा नहीं हनुमान. जी को फिर भी खुशी नहीं हुई क्योंकि मैं. तो अमर ही हूं शिव के रूप में फिर मां ने. कहा इसको अजरता से भी खुशी नहीं हुई आजकल. किसी बंदे को कह दो तू बूढ़ा नहीं होगा वो.
तो प्रसन्न हो जाएगा सदा जवान बने रहेंगे. और एक शिष्य श्राप भी है किसी को कह तू. बूढ़ा ही नहीं होगा जवानी में मर जाएगा. प्रेम से कहिए जय सियाराम [हंसी]. दूसरा वरदान दिया अमर हनुमान जी चुप खड़े. हैं फिर मां ने कहा बेटा गुण निधि हनुमान. जी फिर भी चुप खड़े हैं क्योंकि जय हनुमान. ज्ञान गुण सागर पहले से ही फिर मां ने. देखा जिसको अजरता भी नहीं चाहिए अमरता भी. नहीं चाहिए बलशील का निधान भी नहीं होना. तो मां ने कहा करहु बहुत रघुनायक छो राम.
जी तुझे बहुत प्रेम करेंगे इतना सुनते ही. हनुमान जी अब कृत कृत भय मैं माता आशीष तब. अमोग विख्याता हे मां अब मैं कृत हो गया. ये चाहिए था कब से क्या-क्या वरदान दे रही. थी मुझे चाहिए ही नहीं थे अब जो तुमने कहा. वो एक वरदान दिया हनुमान चालीसा में अष्ट. सिद्धि नव निधि के दाता. अस्वरदीन. जानकी माता. और जब तीसरा वरदान वहां दिया जब रावण मर. गया तो राम जी ने कहा जल्दी जाओ हनुमान. सीता जी को कह दो कि अब तुम रावण की कैद.
से मुक्त हो गई। जैसे ही हनुमान जी आए तो. राक्षस यहां बैठी थी और वो राक्षसियां. हनुमान जी की पूजा करने लगी। जो लोग कहते. हैं भारत में कि स्त्रियों को माताओं की. को हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए।. उनको इस मिथ से सीखना. यही हमारा अगला सवाल था कि एक बहुत बड़ा. परसेप्शन है कि महिलाओं को स्त्रियों को. हनुमान जी की पूजा नहीं करनी चाहिए। मैं. वही बता रहा हूं जब गए हनुमान जी तो तुरंत. से राक्षसियां पूजा करने लगी चौपाई लिखी. है और जैसे ही पूजा शुरू हुई तो.
राक्षसियों हट गई क्योंकि पहले वो. राक्षसियां रावण की थी रावण के मरते ही. किसकी हो गई राम जी की हो गई कब्जा राम जी. का हो गया लंका पे तो तुरंत उन्होंने पूजा. की तब सीता जी ने वहां आशीर्वाद दिया का. दे दो त्रैलोक्य मा किम किमपि नहीं वाणी. समा तो मैं ये कहना कहना चाह रहा था कि. हनुमान जी को तीन बार सीता जी ने वरदान. दिया। इसी प्रश्न में उत्तर में आपका. प्रश्न का भी आंसर आ गया। हम माताओं बहनों.
को लंका की राक्षसियां हनुमान जी की पूजा. करें और माताएं बहने हनुमान जी की पूजा ना. करें।. सबसे ज्यादा प्रेम श्री हनुमान जी माताओं. बहनों से करते हैं। हनुमान जी सबसे ज्यादा. पहले सुनते माताओं बहनों की है।. एक मिथित ऐसा चला. ब्रह्मचर्य की वजह से ऐसा फैला. नहीं प्रभु. मासिक धर्म की एक जो शारीरिक विधान है. इसके कारण नारी को अपवित्र मान लेते हैं।.
लेकिन मैं कह रहा हूं मैं क्या कहता हूं।. मैं शब्द लगाना ठीक नहीं। हनुमान जी कहते. तुलसीदास जी कहते जो यह पढ़े हनुमान. चालीसा. अगर माताओं बहनों को हनुमान चालीसा याद है. सुंदरकांड याद है तो मासिक धर्म में भी आप. श्री सुंदरकांड हनुमान चालीसा का पाठ कर. सकते हैं।. स्पर्श पूजा का विधान नहीं है।.
आप पुस्तक लेकर ना पड़े। मैं ही माना. मैंने स्नान नहीं किया तो मैं कैसे अपने. ठाकुर जी को स्नान करा लूंगा।. आपको पूजा अगर करनी हो, कर्मकांड करना हो. कि भाई ज्योत जगानी है, धूप बत्ती दिखानी. है तो आप पहले स्नान करेंगे।. बिल्कुल सही बात।. ये तो एक एक शरीर का भाई स्नान किया हमने।. लेकिन अगर आपको सुबह-सुबह हनुमान चालीसा. पढ़ना हो और आप अपने बिस्तर पर पड़े हैं. तो भी पढ़ सकते हैं।. जय श्री राम।. पढ़ने में प्रॉब्लम नहीं है। स्पर्श पूजा.
का बंद हो जाता है बस। वो भी कुछ दिन के. लिए नहीं तो वहां पुरुष और स्त्री का भेद. नहीं है। वहां तो चिदानंद रूप शिवहम शिवोह. नमे जाति भेद नमे मृत्यु शंका सारे कांडों. में सुंदरकांड सबसे प्रसिद्ध काहे हुआ. प्रसिद्ध इसलिए हो गया क्योंकि हनुमान जी. की. सुंदरकांड का पाठ बहुत करते हैं। जैसे. मेरे पिताजी भी हैं वो रोज पढ़ते हैं. सुंदरकांड। मैं रोज सुंदरकांड गाता हूं।. कहीं ना कहीं कहीं नहीं गाता तो अपने घर.
में गाता हूं।. हम. अगर मैं यह कह दूं सुंदरकांड की महिमा. बहुत ज्यादा है तो बालकांड का अपमान हो. जाएगा।. अगर मैं कह दूं सुंदरकांड की बहुत महिमा. है तो अयोध्या कांड कहीं ना कहीं छोटा हो. जाएगा। अगर मैं कह दूं सुंदरकांड की बहुत. महिमा है तो अरण्यकांड छोटा हो जाएगा। मैं. कह दूं सुंदरकांड की बहुत महिमा है तो. किष्किंदा कांड और लंका कांड और उत्तरकांड. छोटे कर दूंगा।. नहीं मेरा सवाल यह है कि सुंदरकांड का. पठन-पाठन आम लोगों में ज्यादा क्यों है?
क्योंकि हनुमान जी का चरित्र है उसमें. मुख्य रूप से और लोगों को हनुमान जी की. वंदना करनी है तो हनुमान चालीसा गाते हैं. सुंदरकांड गाते हैं. कि कांड से हनुमान जी की एंट्री हो जाती. है ना शैल पर कभी पति सुग्रीव. जिस पर्वत पर रहता था वहां बाल ही नहीं. आता था हनुमान जी सा रहता था तो जब राम जी. और लक्ष्मण जी आए तो वहां से एंट्री होती. है हनुमान जी की फिर पूरे सुंदरकांड में. लगभग पांच 10 दोहे पहले तक हनुमान जी का. वहां भी चरित्र खत्म खत्म हो जाता है। हम.
सुंदरकांड में मुख्य रूप से हनुमान जी की. महिमा है। इसलिए सुंदरकांड का गायन ज्यादा. होता है। बस. अच्छा हनुमान जी कई अलग-अलग मुद्राओं में. अलग-अलग मंदिरों में नजर आते हैं। जैसे हम. इलाहाबाद जाते हैं तो वहां पर लेटे हुए. हनुमान जी हैं।. हम अयोध्या जाते हैं वहां अलग तरह से. हनुमान जी हैं। तो कई मुद्राएं हैं या ये. अलग-अलग स्वरूप है भगवान का। थोड़ा इस. बारे में प्रकाश डालिए। अपने जो प्रयागराज. वाले लेटे हनुमान जी जो मुझे दर्शन कराते. रहते हैं महाराज जी कभी वीडियो कॉल कर. देते तो दर्शन कर लेता हूं। अभी एक जगह और.
मैं गया था जहां गडकरी जी ने स्थापना की. है उसकी वहां सुंदरकांड किया हमने वहां भी. हनुमान जी लेटे हैं तो ये अपनीप हनुमान जी. की मान्यता है सबने जहां कोई कहता है भाई. यहां लेटे होंगे हनुमान जी ने विश्राम. किया होगा तो लेटे हनुमान जी कहीं खड़े. हनुमान जी है संकट मोचन कनक भू दराकार. शरीरा जैसे अपने करोल बाग की मूरत देख लो. आप 108 फीट तो स्वरूप है सब जहां देखो. वहीं प्रणाम कर लो लेकिन हनुमान जी का. सौम्य स्वरूप हो होना चाहिए.
और जो आपने शुरू में पीड़ा ही है वह एक. तरीके की हनुमान जी का बिगाड़ ना करें।. हनुमान जी का स्वरूप क्या है वो रहने दें।. तो यह जो गाड़ी के पीछे आप देखते हैं खास. दिल्ली. पोस्टर वाले. पोस्टर वाले हनुमान जी सोशल मीडिया वाले. हनुमान जी जो बना दिए गए हैं।. बिल्कुल बिल्कुल ये सही है दुखद है या समय. की मांग है अपनीपनी मान्यता भी है और. इंटरनली या वायावाया कोई ना कोई जुड़ा तो.
हनुमान. या जैसे भक्त हैं वैसे हनुमान है। जैसे. हमारे भक्त जैसे हम वैसे हनुमान हनुमान और. इसके पीछे कारण यह है कि समय के हिसाब से. बदलता है।. आज की समय की डिमांड को देखते हुए अगर वह. एनर्जेटिक हैं. उससे किसी को एनर्जी मिल रही है या कुछ. अलग आनंद मिल रहा है तो भाई ठीक है कम से. कम हनुमान जी से जुड़े हैं।. हनुमान जी और राम जी में कभी युद्ध भी हुआ. था? एक बड़ा चर्चित किस्सा है वो राजा. सुकंत का है। उसके पीछे कारण यह था.
नहीं विश्वाम विश्वामित्र जी को लेकर जो. आता है वो विश्वामित्र जी को लेकर आता है।. उसमें एक राजा सुकंत था। हां. जिससे नारद जी ने ही यह गेम खेला पूरा. नारद जी का मोटिव यह था दुनिया में वो यह. दिखाना चाहते थे कि राम जी से बड़ा राम का. नाम है। हम. तो वो राम जी ने कहा मार डालूंगा। तूने. गुरुदेव का अपमान कर दिया।. वो हनुमान जी के पास चला गया। हनुमान जी. की मां के पास चला गया। हनुमान जी की मां. ने कहा बेटा इसको बचा लो। उसने कहा मैं.
बचा लूंगा। हनुमान जी ने कहा बचा लूंगा।. राम जी कह रहे मैं मार दूंगा। हनुमान जी. कह रहे बचा लूंगा। अब पता लगा हनुमान जी. ने पूछा किसने कहा तुझे मारने को? बोले. राम जी ने ले अब वचन दोनों तरफ से हो गया।. तो हनुमान जी ने कहा भाई फंस गए अब तो अगर. मैं बचा लूंगा तो कहीं ना कहीं राम जी के. प्रॉब्लम अपमान हो जाएगा। तो हनुमान जी ने. गेम खेला। कहा बेटा तू राम राम राम राम का. जाप कर बैठ के। कितना ही बाण मारे राम जी.
तुझे कुछ नहीं होने वाला। तो उसके सहारे. यह दिखाया गया कि राम जी के नाम का एक. छत्र मानो उसके सिर पर आ गया जिसके कारण. राम से कहूं कहां लगी नाम बढ़ाई राम न सक. अपना नाम गुण गाई राम जी भी नाम की महिमा. नहीं गा सकते कलयुग में राम एक तापस तारी. राम जी ने तो एक अहिल्या को तारा त्रेता. में लेकिन आज राम जी का नाम कोटि खल कुमति.
सुधारी उनका नाम कितने लोगों को उतार रहा. है? अद्भुत हमने जजी के हिसाब से कुछ सवाल. रखे हैं जो जजी कल्चर को लेकर है। आजकल. लोग क्योंकि अब भगवान को भी जोड़ लेते हैं. हर चीज से और राम जी हनुमान जी जो है वो. साक्षात भगवान हैं। हनुमान जी अ मेंटल. हेल्थ को लेकर भी इंपॉर्टेंट है। बिल्कुल. है।. श्री हनुमान जी का मन से बड़ा कनेक्शन है।. बुद्धि से बड़ा कनेक्शन है। इसीलिए कहा बल. बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश।.
हनुमान जी ईएनटी डॉक्टर है।. हां इयर नोज एंड थ्रोट तीनों के डॉक्टर. है।. हम. हनुमान जी का मन पर बड़ा असर होता है। जब. आदमी हनुमान चालीसा करता है सबसे पहले. पॉजिटिविटी में मन बुद्धि आती है।. हम. फिटनेस आइकॉन तो है ही हनुमान जी।. हनुमान जी ऐसा कौन है फिट? बताइए। हनुमान. दंड है इसलिए बाबा रामदेव लगाता है. उछलउछल। हनुमान दंड आ.
उनमें भी अलग सी ऊर्जा है।. बाबा बाबा है हमारे भारत का गौरव है।. हनुमान जी का हनुमान चालीसा को आजकल हम. देखते हैं सोशल मीडिया पे YouTube पे. खासतौर पर कि 432 हर्ट्स पर उसका जाप. वायरल हो रहा है। लोग कह रहे हैं ये साउंड. हीलिंग प्रक्रिया है और बहुत सारे लोग. इसको सुन रहे हैं। मेडिटेशन कम्युनिटी जो. है इसको उठा रही है। बिल्कुल उठाना चाहिए।. मैं पूरी दुनिया में घूमता हूं। बहुत. माताएं ये कहती हैं मां कि हम तो अपने. डिलीवरी रूम में भी उसमें लेबर रूम में भी.
बजरंग बाण हनुमान चालीसा सुनते रहे। बच्चे. बहुत ऐसे जो मेरा हनुमान चालीसा सुनसुन के. उनको लोरी बन गई उनके लिए।. हम. आप अपना हनुमान चालीसा चढ़ा दो। बच्चा. रोना बंद कर देता है। हनुमान चालीसा से. मेडिटेशन हो सकता है। मैं रोज हनुमान जी. का यज्ञ करता हूं हनुमान चालीसा से। अभी. तो हमने उसका वीडियो भी वायरल किया है।. पूरा स्टूडियो से मैंने बताया कि कैसे हम. हनुमान चालीसा से रोज यज्ञ कर सकते हैं।. श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुगुर सुधार. भरन रघुवर विमल जसु जो दायक प्रचार स्वाहा.
ये पूज्य बापू से सीखा आपने बुद्धिहीन धनु. जान सुमिरो पवन कुमार बल बुद्ध विद्या देव. मोहि हरहु क्लेश विकार स्वाहा. जय हनुमान ज्ञान गुण सागर जय कबीर त्रिलोक. उजागर स्वाहा. मेरा मन है कि एक हनुमान जी का ऐसा स्थान. बनाएंगे क्योंकि मैं आश्रम वाला आदमी. नहीं। मुझे आश्रम नहीं बनाने, गौशाला नहीं. बनानी, बड़े-बड़े वो मंदिर नहीं बनाने। एक.
एक मन है कि एक स्थान ऐसा बनाओ जहां. हनुमान जी का मेडिटेशन करते हुए स्वरूप हो. और वहां एक यज्ञशाला हो। अपने युवान. यंगस्टर्स को पांच मिनट में हनुमान जी का. यज्ञ करना सिखा दो। अद्भुत. कितनी सिद्ध हो जाती है चौपाई। रोज हनुमान. चालीसा का यज्ञ करने से। जब हम अग्नि के. साथ स्वाहा आहुति देते हैं तो वो चौपाई. सिद्ध हो जाती है। कोई एक बार हनुमान. चालीसा कर ले तो बजरंग बाण बन जाता है।.
कोई 100 बार भी हनुमान चालीसा करता है तो. कुछ नहीं होता।. बात तो पिस्टल की है कि उस गोली कोई फेंक. के मार रहा है कि पिस्टल में रख के मार. रहा है।. A के 47 में जो गोली है उसको ऐसे करके ऐसे. फेंक के मार दूंगा तो शायद यहां यहां. लगेगी आपको और नीचे गिर जाएगी और वही धर. के मारी तो पार जाएगी।. सिद्धि हो गई उसकी पिस्टल में जाते। जैन.
धर्म में भी हनुमान जी को महत्वपूर्ण. व्यक्ति हमने कहीं पढ़ा माना गया कि महान. संगीतकार हैं। सब वहीं से निकला है ना. सनातन कहां गया है जैन. यहां महावीर है तो वहां भी महावीर ही तो. है. यहां अभी कल मैं किसी जैन परिवार में. सुंदरकांड गा रहा था लुधियाना में तो. मैंने वहां चौपाई यही रखी संपूर्ण रखा जो. ब्लेसिंग का. महावीर. विक्रम बजरंगी.
महावीर से जोड़ दिया फिर मैं तो गा दिया. नमो अरिहंतानम नमो सिं नमो आयणं नमो उणं. नमो लोए सब साहम. चलो जैन धर्म जो है कम से कम सनातन का अंग. तो है. उसका भी बहुत अद्भुत व्रत नियम है उसकी कई. बातें से तो मैं सहमत हूं एक उनका भजन वो. गाते हैं अरे जैनी होके पानी ना छाना.
हाय राम रातों को खाए खाना. और रात्रि में अक्षय कुमार जी ने मेरा. छुड़वा दिया भोजन जब मेरी उनसे फोन पर. वार्ता हुई तो सेकंड कॉल में ही बोल पड़े. महाराज. मैंने कहा जी प्रभु जी बोले 6:30 के बाद. भोजन नहीं करना और छोड़ दिया मैंने. तो मैंने कहा जैन धर्म तो यही बोलता आ रहा. है जैनी होकर पानी ना छाना पानी छान के.
पीने का विधान है वहां और हाय राम रातों. को खाए खाना रात में कौन खाता निशाचर. निशाचर का अर्थ क्या है? निशा रात्रि में. चरे ठीक है आप कह सकते हैं रात [हंसी] में. कहां है? हम मान लेंगे हम लोग शंकर जी से. जुड़े हुए लोग हैं।. लेकिन जो अंत में आए हैं देखिए शुरुआत. हमने जय श्री राम से की थी और आपने कहा कि. जब आप हनुमान जी के बारे में बात करें तो. राम जी को सुन लेते हैं। राम जी के यहां. तो हनुमान जी सुन लेते हैं। तो हमने. हनुमान जी के तो खूब भजन सुने। एक श्री.
राम कवि सुन के फिर आपको बिल्कुल बिल्कुल. श्री रामचंद्र. कृपालु. भज मन हरण. भव भय दारुणम. नव कंज लोचन. कंज. मुख कर कंज. पद कंजुम. भज श्री रामम.
भज श्री रामम. श्री रामम भज विमल मते. भज श्री राम. भज श्री रामम. श्री रामम. भज विमल मते जहां हम मिले कुमार विश्वास. जी के विवाह में उनकी बेटी के विवाह का. सुंदरकांड हमने किया था। अद्भुत उनके घर.
के टेररिस पर बोले महाराज मैं बॉम्ब में. था। बोले नहीं महाराज जी सुंदरकांड से ही. शुरुआत कर. आप बताना ये चाह रहे कि हमारे ब्याह. व्यापी करेंगे। ओ आपके ब्याह का सुंदरकांड. होगा। [हंसी]. जरूर जरूर इसलिए आपको आज आशीर्वाद दे दे. सीताराम मनोहर जोड़ी। मैंने पूछा आपके. यहां आकर कि भैया का विवाह कब होगा? बोले. महाराज जी हमारी टीम में सारे कुंवारे. हैं। [हंसी] तो मैंने कहा ठीक है ऐसा. मंत्र मारेंगे कि सबको एक को कुंवारा नहीं. छोड़ेंगे। जैसे अपने राम जी का विवाह हुआ.
तो उनसे पूछा कि आपकी कोई इच्छा? बोले हां. जितने संगी साथी आए सबका ब्याह करा दो।. और हुआ अकेले दुल्हन लेकर नहीं आए। कितनी. दुल्हन लेकर के आए। जितने कुंवारे गए सबकी. शादी करा के लाए राम जी। आपके ब्याह में. सुंदरकांड गाएंगे।. जय श्री राम जय सिया राम.
