Unplugged ft. Rajyavardhan Singh Rathore | Army | Olympics | Politics | Kashmir| Agniveer| Rajasthan
एक गोली की आवाज होती है जब के बाहर से. निकलती है एक गोली की आवाज होती हैन के. पास से निकलती है दोनों आवाजें अलग होती. है क्या अंतर होता है यही बता. दीजिए मेरी चार पीढ़ियां एक ही भारत की एक. ही पलटन में थी मेरे. परदादा मेजर सरदूल सिंह युद्ध बंधक रहे थे. पहले विश्व युद्ध के अंदर 10 साल तक युद्ध. बंधक थे मेरे दादा मेजर उदय सिंह उन्होंने. दूसरा विश्व युद्ध लड़ा मेरे पिता के बड़े. भाई ब्रिकेट जगमाल सिंह उनको वीर चक्र. मिला हुआ है 71 की लड़ाई के अंदर मेरे.
फादर लक्ष्मण सिंह राठौर. उन्होंने 65 की लड़ाई और 71 की लड़ाई लड़ी. मुझे मौका मिला एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन करने. का कश्मीर के अंदर फौज ओलंपियन और सियासत. दन सबसे ज्यादा मेहनत कहां लगी सीखने में. ट्रेनिंग किसकी सबसे कठिन थी यह सवाल. मुझसे आज तक किसी ने नहीं पूछा राजनीति के. अंदर आपकी दो आंखें नहीं आपको द आके चाहिए. इससे आगे मैंने कुछ नहीं बोला लेकिन समझने. वाले समझ गए केंद्र सरकारने मंत्री ब ने.
पहली बार सरकार बनी फिर केंद्र से राज्य. में आना इज इट पेनफुल फॉर यू क्योंकि कई. लोगों को लगता है ये डिमोशन था मुझे एहसास. हुआ कि जो इर्दगिर्द इतने सारे सैटेलाइट. मेरे घूमते थे वो सारे गायब हो. गए शोभे के दुनिया का सच क्या एहसास होता. है वो कि हाथ में एक 47 उठाओ और कश्मीर. में खड़े हो एक ताकत है मैंने सेना में. रहा हूं सेना में मैंने खत्म भी करे हैं. लोग आपके हाथ और पांव में इतनी उंगलियां. नहीं होंगी जितने लोगों को मैंने खत्म करा.
कश्मीर फाइल्स के अंदर मुझे लगता है जितना. दिखाया वह तो केवल 50 पर कश्मीर की धरती. पर. हिंदुस्तान के नागरिकों का और सैनिकों का. इतना खून बहा. है कि पाकिस्तान की मजाल नहीं कश्मीर को. हाथ लगा सके कश्मीर की मिट्टी के डीएनए भी. अब हिंदुस्तानी है इज इट पॉसिबल कि पीओके. हम ले ले जैसा नेता लोग कहते हैं प से.
देखते रहिए एक फिल्म आई थी शौर्य उनका एक. टड मुस्लिम्स के टू दिखाई पड़ता जो फिल्म. में दिखाई 6 साल की बच्ची बच्चे नहीं है. टाइम बॉम है आतंकवादी के पिल्ले हैं आर्मी. में कैसे मेक श्योर करते हो कि व्यक्ति की. पर्सनल आइडल जीी जो है वो हावी ना हो सेना. इसको यकीन करके रखती है कि किसी भी तरह की. किसी के साथ नाइंसाफी ना हो फौज में यह. तर्क देखे कि बोझ बढ़ रहा है आर्थिक. दृष्टि पर अग्निवीर ला दिया गया अब लड़का. जा रहा है 4 साल सिलेक्ट होगा उसमें से 25. पर बाकी लौटेगा उसको लेकर बहुत सारे सवाल.
अशोक गहलोत बहुत समझदार सचिन पायलेट बड़े. ग्रेसफुल है पहले राजस्थान का मुख्यमंत्री. कौन बनेगा सचिन पायलट या राजवर्धन सिंह. [हंसी]. रा एक बड़ा मशहूर शेर है कि हर चेहरे में. होते हैं कई सारे चेहरे जिसको भी देखो. बार-बार देखो क्योंकि बार-बार देखने पर एक. शख्स की कई शख्सियत नजर आती है जैसे आज जो. मेरे मेहमान है उनकी कई शख्सियत है उनकी.
एक शख्सियत है कि वह आर्मी के वेटरन है. उनकी कई पीढ़ियां भारतीय फौज को सेवाए दे. चुकी है उनकी एक शख्सियत है कि वह शूटिंग. में भारत के पहले ओलंपियन रहे हैं सिल्वर. मेडल जीता उनकी पहचान रही है मोदी सरकार. में मंत्री के तौर पर नई पहचान है. राजस्थान सरकार में मंत्री के तौर पर. इंसान पूरी जिंदगी एक काम नहीं कर पाता. कर्नल राजवर्धन सिंह राठौड़ साहब ने शक. अनलिमिटेड काम कर दिया थैंक यू सो मच सर. फॉर योर टाइम थैंक यू शक और जैसा मैंने. कहा कि हर चेहरे में होते हैं कई सारे.
चेहरे जिसको देखो बार-बार देखो कई शख्सियत. आपकी है सबसे ज्यादा पसंद आपको कौन सी है. तीनों की खासियत थी अपनी और सेना के अंदर. रहकर जो अनुभव होता है वो आप जीवन में. कितने भी पैसे दे दो किसी को लेकिन वो. अनुभव नहीं ले सकते जो एक सेना के अंदर एक. सैनिक का अनुभव होता है उसी तरह खेल तो हम. सभी खेलते हैं लेकिन दुनिया के अंदर सबसे. बड़े मुकाबले में भारत के तिरंगे को लेकर. चलना और पूरा स्टेडियम रहा हो व अनुभव आप.
कितने भी पैसे दे दे आपको नहीं मिल सकता. तो भगवान की कृपा रही है और उसके बाद चलकर. एक ऐसे मंच पर. आना जो मंच किस्मत से और जनता के आशीर्वाद. से और एक लीडरशिप के भरोसे से ही विश्वास. से ही मिलता है तो मुझे लगता है कहीं ना. कहीं भगवान की कृपा रही है हो सकता है. पुनर्जन्म के काम है जो आज यह सब करने को. मुझे मिल रहा है न तीनों का अपना रंग है. तीनों का अपना आनंद है लेकिन एक कॉमन है.
एक कॉमन चीज है तीनों के. अंदर तीनों काम मैंने देश के लिए करे अगर. युद्ध भूमि में रहा तो भारत के तिरंगे के. लिए देश के लिए अगर खेल. की खेल के अरीना के अंदर युद्ध जैसी हालत. थी तो व भी भारत के लिए अगर तिरंगा लहराया. तो भारत के लिए और आज अगर राजनीति में भी. आने का मौका मिला है तो देश को वापस से. लौटाने के लिए जो देश ने प्यार दिया मेरे. को जो बनाया वो देश ने बनाया हुआ है तो.
वापस ल तो आप पॉलिटिक्स में हल्की बातें. क्यों नहीं करते हो आप वायरल नहीं होते हो. हल्की चिच गंदी बातें कर दिया करो मैंने. देखा बहुत सारे वीडियोस मिल नहीं रहे थे. मुझे तो मेरे मन में आया कि क्यों इतनी. सारी शख्सियत इतनी स्ट्रांग शख्सियत है. मंत्री हो आप केंद्रीय मंत्री रह चुके हो. फिर इतने वायरल क्यों नहीं हो रहे हो आप. 16 साल की उम्र से मैं भारत की सेना में. हूं 16 साल की उम्र से यानी 11वीं क्लास. के आपके जितने सुन रहे हैं 11वीं क्लास से. मैं भारत की सेना में हूं तो मेरे को जो. ट्रेनिंग दी है वो भारत की सेना ने. ट्रेनिंग दी है और उसमें यह होता है जो.
शक्तिशाली होता है वह धैर्य रखता है उसको. कोई विचलित नहीं कर. सकता उसके सामने कोई भी कुछ भी कर रहा. हो वह सब अपनी भड़ास निकाल रहे होते हैं. बिक व कुछ कर नहीं सकते आप कोई भय नहीं है. कोई फियर नहीं है फेयरलेस हो तो वापस से. उनको उस गंदी भाषा में बोलने का क्या मतलब. है कोई एक वो कारण रहा दूसरा कारण मेरी. मां टीचर थी हम.
शिक्षिका टीचर होने के नाते जितने उस. जमाने में थप्पड़ पड़ते थे हमने भी खा इस. तरफ से भी पढ़ते थे और लौटते हुए भी पढ़ते. थे तो वो भी हुआ है तो ऐसे जब माहौल के. अंदर आप रहते हैं तो ऊंची भाषा आप नहीं. बोलते मुझे मोरारी बापू को एक शेर याद आ. गया मैंने उनका जब पॉडकास्ट किया था तो. उने मुझसे एक शेर कहा था कि यह अलग बात है. कि वह खामोश खड़े रहते हैं मगर जो बड़े. होते हैं बड़े रहते मुझे याद है जब 2014.
में नए नए हम सांसद बने तो कुछ नए सांसदों. को प्रधानमंत्री मोदी जी ने बिठाया अपने. सामने. और राजनीति की बात करी और उन्होंने कहा कि. मैं एक चीज आपको बतला सकता हूं राजनीति का. गुर हम सब बहुत ध्यान से देख रहे थे क्या. बात. बताए उन्होने कहा. धैर्य और फिर उन्होंने अपने जीवन का परिचय. दिया कि मेरे जीवन में ऐसी भी स्थिति आई. थी जब बहुत.
आ लेकिन कभी मैंने अपना धैर्य नहीं खोया. और वह धैर्य नहीं खोया इस कारण से आज मैं. इस पोजीशन. पर तो अक्सर क्या होता है कि हम जैसे. अंग्रेजी की एक कहावत है. कि यू हैव टू बी इन द शूज ऑफ योर पोनेंट. टू अंडरस्टैंड वट ही थिंकिंग ट्र आपके. आपको कोई कह रहा है तो जब तक आप पूरी बात. नहीं क्योंकि हर बात के कई पहलू होते जब.
आप पूरी बात समझते ही नहीं है और उससे. पहले आप रिएक्ट कर जाते. हैं तो आप में वो लीडरशिप क्वालिटी नहीं. है ट्र मत एक लीडर को एक नेता को जो. राष्ट्रीय नेता है उसको तो समझना बहुत. जरूरी है और हर बात के कई पहलू होते हैं. तो धैर्य रखना बहुत जरूरी है राद देन जस्ट. रिएक्ट मैंने इस पॉडकास्ट को तीन हिस्सों. में बांट रखा है क्योंकि आपकी जिंदगी के. तीन पहलू है एक फौज को लेकर है एक ओलंपियन. को लेकर है सियासत दान को लेकर है लेकिन.
फौजी की शुरुआत करू उससे पहले एक सवाल. मेरे मन में आता है क्योंकि आपने जिक्र कर. दिया पीएम मोदी का उस दौर की सरकार का कई. सारे लोगों ने मुझसे कहा कि आपसे पूछेगा. कि आपने देश का मान किया सम्मान बढ़ाया. फौज में आप थे केंद्र सरकार ने मंत्री बने. पहली बार सरकार बनी फिर केंद्र से राज्य. में आना इज इट पेनफुल फॉर यू क्योंकि कई. लोगों को लगता है ये डिमोशन था आप उस. सरकार में एडजस्ट नहीं कर पाए जो मोदी जी. की सरकार थी और आप की शुरुआत वहां हुई थी.
शिवांकर हालांकि तुमने अपने सवालों को. चेंज करके जो तुम गेंद बाद में डालना. चाहते थे तुमने पहले डाली जिक्र हो गया था. तो मुझे लगा फ्लो में हा बट बड़ा अच्छा. सवाल है और मैं उसको शुरू करता हूं कि जब. मैं राजनीति में जाने की सबसे पहली बार. मैंने सोचा तो लोगों ने कहा कि राज्यसभा. में चले. जाओ मैंने कहा कि अगर राजनीति में ही जाना. है.
तो तो लोकसभा में जाना है क्योंकि असली. राजनीति तो वही है ना जहां जनता आपको. चुनकर भेजे ट्रू नॉट नॉमिनेटेड बाय समवन. बा एक नॉमिनेशन भी होता है कुछ खिलाड़ी आप. खिलाड़ी हो गायक हो कलाकार हो आप नॉमिनेट. होते हैं पाच नॉमिनेट होते हैं. राज लेकिन अगर राजनीति में जाना है अब. फौजी बनना है तो युद्ध नहीं लड़ा तो फौजी. क्या लड़ा सही बात है गोली आपके इधर से.
नहीं निकली तो फौजी. क्या एक गोली की आवाज होती है जब बंदूक के. बाहर से निकलती है एक गोली की आवाज होती. है जब कान के पास से निकलती है दोनों आवाज. अलग होती है क्या अंतर होता है यही बता. दीजिए जब नजदीक से निकलती है साउंड बैरियर. तोड़ती है और एक अलग आवाज आती है वह य. वाली आवाज नहीं आती बहुत अलग आवाज आती है. और आपको पता रहता है कितने नजदीक से निकली. तो फौज क्या तो उसी तरह अगर राजनीति में. और. ये वाला लोकतंत्र वाली लड़ाई नहीं लड़ी.
तोत मेरे को फौजी वाली वाइफस तो नेता क्या. वाइप्स आने लग गई मुझे सो मैं उस समय. लोकसभा में जाना चाहता. था लोकसभा में जाते ही चार महीने के अंदर. आपको मंत्री बना. दिया मुझे लगता है प्रधानमंत्री मोदी जी. ने सबसे पहले तो सबसे पहले मेरी ऊपर कृपा. जो करी वोह 2019 में मुझे मंत्री ना बनाकर. करें जब मंत्री नहीं बना तब मुझे एहसास. हुआ कि जो.
इर्दगिर्द इतने सारे सेटेलाइट मेरे घूमते. थे जिन्ह मुझे लगता था यह तो वाकई में. मुझे चाहते हैं वो सारे गायब हो. गए शुभ की दुनिया का सच तो असलियत क्या है. हा असलियत पहचानो राज्यवर्धन यह इस उसम मत. रहो इस भ्रम में मत रहो यह कुर्सी की ताकत. है ये तुम्हारी ताकत नहीं है ब्यूटीफुल. ब्यूटीफुल तो पहला आशीर्वाद मोदी जी ने. मुझे वो दिया.
फिर मैं देखता था कि राजस्थान की राजनीति. को बहुत गौर से देखता था वहां के. विधायक उनकी एक अलग चहल पहल रहती थी सांसद. होने का एक अलग रुतबा रहता था लेकिन जनता. इर्दगिर्द रहती थी विधायकों के मुझे दूसरा. जो आशीर्वाद मोदी जी ने दिया जोका जिसके. बारे में मुझे जानकारी कतई नहीं थी हा ऐसा. नहीं था कि बातचीत हुई मैंने कहा ठीक है. साहब वहां भेजिए ऐसा नहीं कप्तान तय करता. है कि अब आप कवर से निकलकर स्लिप्स में आ.
बॉस लवेज राट बॉस इ राइट भया बॉस इ सीइंग. समथिंग जो हम नहीं देख सकते दूसरा बहुत. बड़ा आशीर्वाद जब उन्होंने दिया उन्होंने. कहा कि. आप विधायक की लड़ाई लड़ राजस्थान में. जाइए. उससे असली राजनीति जो होती है सक पकाए थे. इस वक्त आप मेरा लंचिंग ये हुआ था नहीं. नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं मैं तकरीबन. एक्सपेक्ट सा ही कर रहा था कि एक मेरी. एजुकेशन पूरी होनी बाकी है हम सियासी.
एजुकेशन सियासी एजुकेशन जो मैंने कहा कि. मैं भले ही 40 साल की उम्र में मैं. राजनीति में आया बट आया तो नर्सरी में ना. आप तुरंत आपको चढ़ना है कॉलेज तक पहुंचना. है जो लोग स्कूल से माफ कीजिए स्कूल कॉलेज. से जो शुरू हो जाते हैं उनको एक अलग अनुभव. होता है तो मैं तो अपनी दो जीवन जीकर सेना. का खेलों का जीवन जीकर आया तो मैं आया तो. नर्सरी में ना लेकिन तुरंत सीखना है जैसे. खेलों के अंदर तुरंत जीतना है तो एनीवे सो. वो एजुकेशन जो बची हुई थी वो होनी बहुत.
जरूरी थी और वो थी राजनीति की गुथ गुत्ता. की लड़ाई राजनीति का गहरा सीखना हां जब. आप बिल्कुल दुश्मन के मोर्चे पर पहुंच. जाते हो ना तो गोली नहीं चलाते उसके बाद. बेनेट लगाते हो चक्कू लगाते हो अपने राइफल. के ऊपर और फिर वो जो युद्ध होता है वो गुथ. म गुत्ता का लड़ा युद्ध होता है तो जैसे. आपने कहा ना ओछी भाषा ओछी भाषा ऊपर कम. होती है वहां नीचे की राजनीति जितना नीचे. जाएंगे उतनी ज्यादा यह होता है तो वो.
सीखना भी बहुत जरूरी था तो मुझे लगता है. कि इट मेरा जीवन एक एजुकेशन है. शिवांकर आप कभी भी यह नहीं कह सकते कि मैं. ऊंचाई पर पहुंच गया ऊंचाई पर पहुंच गया. यानी जीवन. खत्म नहीं आपने एक पड़ाव पार करा मुश्किल. पड़ाव था कोई बात नहीं लेकिन एक पड़ाव ही. तो पार करा जीवन तो बाकी है लाइफ इज अबाउट. एक्सपीरियंस लाइफ इज अबाउट एजुकेशन अगर. आपके पास पैसा है वो पैसा कुछ नहीं खरीद. सकता एक्सपीरियंस है तो वह पैसा नहीं खरीद.
सकता ट्र तो यह सब अनुभव है जीवन के अगर. मेरे को तीन पहलू जीवन में जीने को मिल. रहे हैं तो जैसे मैंने कहा पिछले जन्म के. मेरे पूर्वजों के अच्छे कर्म थे जो आज. मुझे करने को मौका मिला और मैं इस बात को. मानता हूं कि इस जन्म में भी जो मेरे लिए. लिखा है वही पाना चाहिए उससे ज्यादा. नहीं मेरी पत्नी और. मुझे अक्सर ऐसा होता है ना कि बहुत पहुंचे. हुए सिद्ध लोग मिलते हैं और. उनमें से एक ने कहा कि आप बहुत नजदीक है.
कुछ मुख्य पदवी पाने के लिए मैं जान बूझ. के नहीं बोल रहा क्या है पदवी आप समते. मुझसे भी कहा गया हा अगर आप यह कर देंगे. मेरी पत्नी भी साथ उन्होने कहा अगर आप यह. करेंगे तो. 100% उसके बाद जब हम वापस आ रहे थे तो चुप. थे य मेरी पत्नी ने मेरी तरफ देख के बोला. कि उन्होंने जो कहा हम वो नहीं.
करें जिज्ञासा थी मैंने कहा क्यों उन्होने. कहा कि जो हमारे जीवन में लिखा नहीं. है उसको पाना यानी हमारे बच्चों से य कहीं. ना कहीं किसी से छीना जाएगा उनका. अधिकार तो जो मिल रहा है वही हमारे लिए सब. कुछ है तो मैं इस जीवन में भी सही कर्म. करना चाहता. हूं कर्मों की लड़ाई में सबसे आगे रहूंगा. ये पोजीशन वगैरह तो ये तो बहुत.
मैटेरियलिस्टिक है ना तो इंसान ही तो दे. रहा है ये पोजीशन ये पोजीशन महत्वपूर्ण. नहीं है लेकिन जिसका हिसाब वो ऊपर वाला रख. रहा है उस हिसाब के अंदर मैं आगे रहूंगा. जीवन के अंत में और मैंने सेना में स रहा. हूं सेना में मैंने खत्म भी करें लोग आपके. हाथ और पांव में इतनी उंगलियां नहीं होंगी. जितने लोगों को मैंने खत्म करा. है जब मैं वापस वहां से आया तो मेरी नानी. ने कहा कि इसका स्नान करवाओ पता नहीं. क्याक करवाओ इसके तो पाप दुल मेरी मां ने. बोला कता ही नहीं यह अपने धर्म का निर्वाण.
करके आया है. सो उसमें मेरे को कतई वो गलानी नहीं है या. कुछ या भय या कुछ भगवान के सामने जाऊंगा. जो करा देश के लिए करा बिल्कुल सही करा सो. कर्म के उसमें आगे रहूंगा तो यह यह वही है. कि आज जो भी जैसा जैसा काम आता रहेगा उसको. बिल्कुल सही रूप से करते रहो उसूलों पर. आंश आए तो टकराना जरूरी है हो जिंदा तो. फिर जिंदा नजर आना जरूरी है मैं प. आपको सुनना बड़ा फेसिनेटिंग लग रहा है.
मुझे बड़ा मजा आ रहा है मुझे क्योंकि. आर्मी की रॉयल्टी भी नजर आ रही है और अब. आपके बहुत सारे शेट धीरे धीरे खुल रहे तो. बड़ा मजा ले रहा हूं मैं लेकिन एक सवाल. आर्मी पर जाने से पहले तीन अलग अलग सेक्शन. थे फौज ओलंपियन और सियासत दन सबसे ज्यादा. मेहनत कहां लगी सीखने में ट्रेनिंग किसकी. सबसे कठिन. थी यह सवाल मुझसे आज तक किसी ने नहीं. पूछा इसके अर अंदर.
भी मुझे याद है एक बहुत पतली सी किताब थी. जब मैं इंडियन मिलिट्री अकेडमी में था और. उस पतली सी किताब थी वो थी टैक्टिक्स. तो मैंने अपने जो हमारे इंस्ट्रक्टर थे. मैंने उनको कहा कि सर अगर इतनी पतली सी. टैक्टिक्स की किताब है तो ये तो हमारे. दुश्मन के पास भी होगी कि भारत की सेना की. टैक्टिक्स क्या. है तो हम नया कैसे करेंगे उनको आउट विट. कैसे करेंगे. तो उन्होंने कहा ये तो बुनियाद है केवल.
इसके ऊपर जब आप जैसे कोड होता है ना तीन. डिजिट का अगर कोड हो उसके कॉमिनेशन कितने. सारे होते हैं ये तो बुनियाद है इस. बुनियाद के ऊपर जब आप अप्लाई करना शुरू. करोगे बहुत अलग-अलग तरीके से चीजें होंगी. तो सेना के अंदर इतने पहलू होते हैं इतनी. सिचुएशंस होती हैं मैन मैनेजमेंट होता है. याद रखिए कंपनी का मैन मैनेजमेंट ह्यूमन. रिसोर्स मैनेजमेंट और सेना का ह्यूमन.
रिसोर्स मैनेजमेंट कितना अंतर है वहां पर. सेना के अंदर जब आपको बोल रहे हो कि सामने. से जो आग उगलती मशीन गन है उसके ऊपर हम. चार्ज करेंगे तो जो सैनिक आपके साथ है वह. जानते हैं कि यह जो 10 सैनिक जो उस पर. धावा बोलने वाले हैं उसमें से दो ही. बचेंगे लेकिन उसके बाद भी आपके साथ जाने. को तैयार हो जाते. हैं क्यों इसलिए नहीं क्योंकि मरना है. इसलिए कि जिंदा रहने के लिए यही तरीका है.
कि आज हम इस समय धावा बोले उसके हम में से. कुछ बचेंगे लेकिन यही तरीका है जिंदा रहने. का और विश्वास है अपने कमांडर के ऊपर और. वह विश्वास कई महीनों और कई सालों में. पैदा करना होता. है सो वोह कठिन शिक्षा है फिर आते हैं आप. ओलंपिक्स में जब मैं ओलंपिक्स में जाने. लगा था तो 99 पर लोगों ने बोला पागल हो. गया ये सेना के अंदर सब कुछ है बढ़िया है. सर्ड ऑफ ऑनर से पास आउट हुआ हुआ है सेना.
के अंदर इंस्ट्रक्टर बना हुआ है दूसरों को. सिखा रहा है अगर ऐसे ही चलता रहा तो जनरल. बनेगा अब यह सब छोड़कर उसमें जाना चाहता. है ओलंपिक में जहां कोई भारतीय जीतता नहीं. है ऐसे उस समय विचारधारा. थी सबने बोला पागल है लेकिन मुझे लगा कि. मैं कश्मीर से वापस आया था तो कश्मीर से. जब वापस आया था मुझे यह एहसास हो गया था. इतना कि.
जिस चीज के लिए जीना चाहते हो उसी चीज के. लिए. जियो यह करियर बनाना यह सब बड़ा. आर्टिफिशियल चीज है जो पसंद है वह करो तो. हर रोज जीत. है नहीं तो एक दिन आप इंतजार करते रहोगे. कि मैं मेजर जनरल बनूंगा मैं ज जनरल. बनूंगा और नहीं बने तो फिर कोसते रहोगे. अपनी बीवी को भी खुद को भी कि पूरा जीवन. बर्बाद हो. गया तो उस सम मुझे लगा कि यह जो रास्ता है.
ओलंपिक. का इसके अंदर में मैं हर रोज जीतूंगा. मुझे एक यह चीज थी कि मेरा भविष्य दूसरे. तय नहीं. करें उसमें एसीआर वगैरह होती है सेना के. अंदर दूसरे लोग आपको कितना पसंद कर रहे. हैं उस हिसाब से मैंने कहा हारू तो मैं. रिस्पांसिबल और जीतू तो मैं ल और हर रोज. हार जीत हर रोज होगी तो वो उस रास्ते पर.
चलना चाहता था यह था अगर नहीं भी जीता. लेकिन हर दिन मेरा शानदार होगा क्योंकि यह. रास्ता मेरे लिए एक जीत है उसमें वह दो. उड़न तस्त उड़ती हैं उसको आपको आधा सेकंड. में मारना होता. है दए ाए दो गोली चलती है दो अलग-अलग. टारगेट्स को मारना होता है तो वो मुश्किल. था लेकिन वो भी सीखा किसी तरह. से वो तो आपने पाकिस्तान के से चलते हुए. देखा होगा ना.
पहले उसमें एक बहुत बड़ा फर्क ये था कि. मेरे घर में क्या हो रहा है मुझे पता नहीं. रहता था मेरे बच्चे कब बीमार हो रहे हैं. कब सही हो रहे हैं मुझे पता नहीं रहता. था केवल मेरे लिए वह दो टारगेट थे और उन. टारगेट को कैसे खत्म करना है मेरे कई. सालों तक यही मेरा एक परिश्रम. था राजनीति के अंदर आपकी दो आंखें नहीं. आपको 10 आंखें चाहिए. सेना के अंदर यह होता है कि जब एक ही.
वर्दी वाले जब खड़े हो जाते हैं तो सब. आपके. साथी उनसे आपको कोई भय नहीं. है यह बहुत गहरी लाइन जो आप कहने जा रहे. हैं इससे आगे मैंने कुछ नहीं बोला लेकिन. समझने वाले समझ. गए तो राजनीति. में अच्छा एक और बड़ा कारण अच्छा राजनीति. में जो साथ खड़ा है वो ज बड़ा दुश्मन होता. है जो सामने वाला होता है वो बड़ा दुश्मन. होता है मैंने ऐसा कुछ नहीं कहा क्योंकि.
मैं ऐसे बहुत सारे नेताओं से मिला हूं जो. कहते हैं बाहर वाला तो निपट लेते हैं इनसे. कैसे. निपटे ऐसा मैंने कुछ नहीं कहा मैंने इस इस. तो बट मैं आपको ये कह रहा हूं कि राजनीति. में आपको 10 आंखें चाहिए और हर वर्ग हर. सेक्टर हर क्या क्या चल रहा है सबके बारे. में खबर रहनी बहुत जरूरी है तो माइंड आपका. बहुत तेज हो जाता है और मुझे लग रहा था. मैं कभी रिटायर नहीं होना चाहता जीवन के. अंदर मतलब अलर्ट रहना चाहता हूं अ आप. ओलंपिक्स के अंदर आपने इतना कुछ कर लिया.
अब इससे ज्यादा एक स्वर्ण तो है लेकिन. इसके अंदर एक नई शुरुआत थी और दूसरा आप एक. देने वाले बनते हो देश को कुछ देना है. आपको वापस लौटाना है सो यह मेरी प्रेरणा. थी कि तीनों में टफ कौन सा था मूल सवाल यह. था कोचिंग. किसकी सियासत आ आकर रह जा रही है नहीं. सवाल तो उत्तर तो बड़ा स्पष्ट है इसके. अंदर. आर्मी की ट्रेनिंग फिजिकली मेंटली रही.
होगी ज्यादा टफ मेंटली भी चैलेंजिंग रहती. है फिजिकली भी चैलेंजिंग रहती है सियासत. ने मेंटली पस किया होगा. काफी अन डाउटेड राजनीतिक जो क्षेत्र. है यहां आप पूरी तरह से वल्नरेबल हो. आप आप महफूज नहीं हो आपके साथी चारों तरफ. नहीं खड़े हुए आपके रक्षा के लिए आप पूरी. तरह से चारों तरफ से आप एक्सपोज हो आपको. कहीं से भी कोई भी कारण लेकर आपके ऊपर वार.
करा जा सकता बूफ ब्यूटीफुल अब हम. एक्सप्लोर करते हैं आपके आर्मी वाले. बैकग्राउंड को बहुत सारे लोगों को अभी भी. लगता है कि शायद आप स्पोर्ट्स की व से. आर्मी में गए थे बट आप आर्मी में थे उसके. बाद आप स्पोर्ट्स में आए थे मैं 11वीं के. बाद मेने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का. इम्तिहान पास करा ओके उसके बाद मैं. राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के चार साल तीन. साल मैंने एनडीए में गुजारे और उसके बाद. एक साल इंडियन मिलिट्री अकेडमी में गुजार. जहां मुझे स्ड ऑफ नर मिला मतलब नंबर वन.
क्रेट था मैं वहां पर पास आउट में और वहां. से मैं अपनी पलटन में गया जहां मैंने. नॉर्मल उस समय खेल तो हमारे लिए केवल एक. टीम बिल्डिंग का एक माध्यम होता. था राष्ट्रीय लेवल पर खेलना तो हमारे सपने. में भी नहीं था तो वहां मैंने कई साल. नॉर्मल सैनिक की तरह मैंने अपनी सेवा दी. जहां कश्मीर के अंदर भी मेरे को ऑपरेशंस. करने का एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन करने का.
मौका मिला और निसंदेह मेरे जीवन के सबसे. सर्वश्रेष्ठ दिन वो है ना मंत्री ना कुछ. सबसे सर्वश्रेष्ठ दिन वही है कई बार अभी. भी मुझे महसूस होता है मन करता है एक 47. उठाओ और कश्मीर चले जाओ और अंत होना है तो. अंत हो वहां पर लेकिन वहां वह जो जीवन था. तो क्या एहसास होता है वो कि हाथ में के. 47 उठाओ और कश्मीर में खड़े हो. एक ताकत है बहुत.
जबरदस्त. जहां ऐसे लोग जो भारत को तोड़ना चाहते हैं. भारत को काटना चाहते हैं डेथ बाय थाउज. कट्स 1000 घाव दो भारत को कि भारत टूट जाए. जो ऐसे ख्वाब रखते हैं उनके सामने ढाल. बनकर उनके सामने तलवार बनकर एक फौजी ही. खड़ा होता है और उसके पास उसका हथियार. होता है और फिर उसका दिमाग होता है और किस. तरह से से उसको आउट विट करता है वो स वो.
वाले जो दिन थे कश्मीर के तो मैंने वो. एंटी टेररिस्ट ऑपरेशंस करे और वो मेरे. जीवन के सबसे सर्वश्रेष्ठ दिन थे सबसे. बढ़िया दिन थे उसके बाद ओलंपिक में जाने. का मौका बट आप अपनी फैमिली से पहले नहीं. थे कर्नल लक्ष्मण सिंह राठौड़ साहब भी. आपके फादर मेरे पिता थे और मैंने सुना उस. उसके उसके पहले भी आपके पूर्व और भी आपकी. जो पीढ़ी के लोग हैं वो भी फौज में रहे. मेरे मेरी चार पीढ़ियां. एक ही भारत की एक ही पलटन में थी. केवल सेना में नहीं बल्कि एक ही पलटन में.
थे गंगा रिसाला 13 ग्रेनेडियर उसके. अंदर मेरे. परदादा मेजर सरदूल सिंह जो युद्ध बंधक रहे. थे पहले विश्व युद्ध के अंदर 10 साल तक. युद्ध बंधक थे और हम तो कहानी सुनते थे कि. 10 साल बाद जब वोह आए तो येय वर्ल्ड वॉर. के टाइम में पहला फर्स्ट वहां पहला वर्ल्ड. वॉर ओके तो. 10 साल बाद वो आए तब जो बच्चे थे उनको तब.
देखे 10 साल बाद अपने बच्चों को उन्होंने. देखा मेरे दादा मेजर उदय सिंह उन्होंने. दूसरा विश्व युद्ध लड़ा मेरे पिता के बड़े. भाई ब्रिगेडियर जगमाल सिंह उनको वीर चक्र. मिलाहु है 71 की लड़ाई के अंदर अ मेरे. फादर लक्ष्मण सिंह राठौर. उन्होंने 65 की लड़ाई और 71 की लड़ाई लड़ी. और उसके बाद में मुझे मौका मिला एंटी. टेररिस्ट ऑपरेशंस करने का कश्मीर के अंदर. मेरे नाना पुलिस के अंदर आईपीएस ऑफिसर थे.
मेरे मामा सेना में है पुलिस में है तो. हमारा पूरा परिवार इसी तरह सेना पुलिस इसी. के अंदर ही रहा है मेरी पत्नी खुद आर्मी. में मेजर डॉक्टर हैं वो सो वो आर्मी की. मेडिकल कोर में थी हमारा पूरा परिवार उसी. में था राजनीति तो बहुत दूर दूर तक नहीं. थी नेपोटिज्म आर्मी का नेपोटिज्म बट इट्स. ये कैसे तय होता है जैसे बाकी क्या होता. है कि बच्चे आते हैं ये होता है कि इसका. जो मन करेगा आपने कहा आपकी चार पीढ़ी बैक.
टू बैक आर्मी में जा रही है तो यह बचपन से. आप लोग को तरह ट्रेन किया गया या आप लोग. को देखकर आकर्षित होते गए कि यार पापा का. यह रुतबा था दादा का य रुतबा था इससे बड़ा. लेगासी क्रिएट करना है मेरे ख्याल से. माहौल य होता है क्योंकि बचपन से आपके. चारों तरफ सेना ही है तो आपकी जो ग्रूमिंग. हो रही है आपकी जो सोच है आपके विचार है. आपका मन है आपके भाव हैं आपके जो सपने हैं. वह भी बंदूकों के साथ ही होते हैं वर्दी. हो दख हो तो ये मेरे ख्याल से यह वातावरण.
ही जब ऐसा होता है तो आपका मन करता है कि. मैं वहीं जाऊंगा बाकी तो कोई इस तरह का. रिजर्वेशन तो होता नहीं है बट वो टेम्टिंग. लगता होगा हां उसके अलावा तो कुछ और करना. ही नहीं चाता या ये होता कि डड डैड को भी. एक्सपेक्टेशन होती कि मेरा बच्चा मुझसे. अच्छा करेगा और एक प्रूफ करने का भी होता. है कि मेरे पापा यह थे अब मुझे यह बनना है. या कुछ ऐसा करना है नहीं मुझे लगता है. प्रूव करने का तो कुछ भी नहीं था. लेकिन वातावरण वैसे ही था हा मां-बाप तो. चाहेंगे कि आप नौकरी में जाए मैं आपको एक.
वाक्या बताता हूं मैं इकलौता हूं ना बहन. है ना भाई है ठीक है और कईयों को ऐसा लगता. होगा कि भाई इकलौता है तो खूब संभाल के. रखा होगा लाड प्यार से रखा होगा थप्पड़ का. तो बता ही दिया मैंने ना इधर से भी जाता. था उधर से भी आता. था मेरी मेरे फादर क्योंकि कश्मीर में रहे. हुए हैं और वो उस उसी जगह रहे हुए जहां. मैं ऑपरेशन के लिए गया था लेकिन उस समय. बड़ी शांति होती थी जब वो थे. तो जब मैं गया कश्मीर में 22 साल का था 90.
में. 92 93 की बात है ये पीक पर जब शुरू हुआ था. 89 हा पीक पर था सो मैं जब गया तो मेरे. साथ 120 जवान थे और उनका लीडर मैं था 22. साल की मेरी उम्र थी हाथ में बंदूक थी सभी. के पहली बार हम कश्मीर जा रहे थे उंगली. ट्रिगर प थी दिमाग बिल्कुल अलर्ट. था जब मैं वहां पहुंचा तो खबर देने के लिए. उसम मोबाइल फोन नहीं होते थे तो खबर देने.
के लिए बीएसएनएल की टावर थी वहां गए वहां. जाकर फोन करा घर पर यहां पहुंच गए. हैं सोच मेरी मां ने क्या कहा क्योंकि वोह. रही हुई थी कश्मीर में उन्होंने कहा कैसा. लगा कश्मीर मैं कहा बहुत सुंदर क्योंकि हम. जब बनिहाल टनल के इस तरफ थे तो टेंपरेचर. होगा करीब 35 40 के करीब होगा गर्मी थी. बनिहाल टनल पार करा और वहां मौसम ऐसा हो. गया 2 डिग्री का और सुंदर तो उन्होंने.
पूछा कैसा लगा कश्मीर मैंने कहा बहुत. सुंदर उन्होंने कहा लड़ने लायक है. ना तो आप इमेजिन करिए मैं ऐसे परिवार से. जहां इकलौता हूं मैं और हो सकता है मैं. गया ही था तो जरूरी थोड़ी ना था कि वापस. आऊ मेरे साथी कुछ एक वापस नहीं आए वहां से. लेकिन फिर भी मेरी मां ने कहा लड़ने लायक. है ना तो फिर देख देखो किसी किसी भी बेटे. का जोश कितना जबरदस्त.
होगा ब्यूटीफुल बट एक सिविलियन के तौर. बड़ा अजीब सा लगता है क्योंकि आमतौर पर. लोग डरते हैं कि यार एक इकलौता बच्चा है. मत भेजो मेरी फैमिली में भी कुछ लोग रहे. हैं वेटरन मैंने देखा नई पीढ़ी में उनकी. माए रोक लेती थी आपकी मां ने ये कहा ये. मैं उनको भी सलाम करता हूं जिस बहादुरी से. शिक्षिका रही मेरी माम शिक्षिका है अ. कश्मीर सर जब आप गए थे वो पी कह रहा. था क्या था उस टाइम अलग क्योंकि आप लोग गए. होगे बहुत अलग एक्सपीरियंस रहा होगा की. क्योंकि अब कश्मीर को लेकर फिल्में आती है.
जिसको कई बार लोग कहते हैं प्रोपेगेंडा है. फर्स्ट हैंड देखा नहीं आपने फर्स्ट हैंड. देखा कश्मीर को जो हम सुनते हैं जो हम. देखते हैं कश्मीर फाइल जैसी फिल्मों में. यह सब सच होता था या अलग होता था तो कितना. अलग होता. था कश्मीर फाइल्स के अंदर मुझे लगता है. जितना दिखाया वह तो केवल 50 पर. था उन्होंने वह बातें टच करी जो जो बातें. सत्य है लेकिन उन्होंने उतना नहीं दिखाया. जितना होता था और जितना हमने वहां महसूस. करा और सुना. 93 में मैं गया था तो 90 में तो हुआ.
था य जो एक्सोडस हुआ था जो कश्मीरी. पंडितों को वहां से बाहर निकाला व 8990. में तो हुआ था बिल्कुल ताजा. था हम. जब रफियाबाद करके एक इलाका है वहां. पर बारामुला के बिल्कुल पास में वह हमारा. इलाका होता था और वहां पर एक डांगी बच्चा. करके एक गांव है डांगी बच्चा वाले सुन रहे. होंगे. उस गांव के अंदर वो एक स्कूल था उस स्कूल.
के अंदर हम रहते थे एक कोने में उस स्कूल. का जो मैदान था उसके ऊपर आतंकियों की परेड. होती थी और जो फुटबॉल ग्राउंड के गोल. पोस्ट थे जहां मैं फुटबॉल खेला करता था. स्कूल के बच्चों के साथ में कभी-कभी उन. फुटबॉल गोल पोस्टों के ऊपर पब्लिक हैंगिंग. हुआ करती. थी वो वीडियोस व तस्वीरें हमने कैप्चर करी. कई बार जब हम सर्च करते थे तो हमें मिलती.
थी और हमने सेना को वह पहुंचाई सस के. टोलियां के अंदर आतंकियों का परेड होती थी. व अब कश्मीर फाइल्स के अंदर जो चीजें हुई. उनका मैं क्या तो बताऊं आपको या कश्मीर. फाइल्स में जो दिखाते थे वैसा हुआ उससे ही. बुरा. हुआ इससे बुरा और क्या हो सकता है कि. आपको सबसे ज्यादा धोखा वहां पर आपके.
पड़ोसियों ने. दिया बेटी छोड़ के. जाओ नहीं तो गोली मारेंगे यह अगर किसी के. साथ. हो क्या जीवन हो ऐसा हुआ व और किस तरह. से उन बेटियों को लेकर गए जंगलों के अंदर. उनके साथ क्या हुआ वो क्या बताया जाए. लेकिन हम उस हमने फर्स्ट हैंड सुना हुआ.
है और इसीलिए मुझे लगता है जो भारत के. सैनिक जमा जब हम वहां काम कर रहे. थे तो हम इसलिए नहीं कर रहे थे कि हमारे. को किसी को या अभी भी इसलिए नहीं करते कि. कोई तनखा मिल रही है इसलिए करते हैं कि. यही धर्म. है इस धर्म को निभाना. है मैंने फौजी के साथ काफी टाइम स्पेंड. किया कुछ टीवी चैनल्स में उसमें एक फौजी. थे जो कश्मीर में पोस्टेड थे तो उन्होने. मुझसे कहा कि कश्मीर के जो मूलता लोग हैं. वो सीधे साधे लोग.
हैं बाहर से जब आदमी आता है कश्मीरी खुश. रहता है गाना बजाना कहवा पिया मस्त रहता. था जब बाहर के लोग ट्रेंड होकर आते हैं तो. वो आपको डिफरेंस पता लगता है आप खबरों में. पढ़ते होंगे कि जब खबर आती होगी कि इंडियन. आर्मी के एक जवान और सामने चार उधर आप आप. डिफरेंशिया पकड़े वो हमला कर रहा है और. पाकिस्तान से आया हमला कर रहा है डिफरेंस. होता है कश्मीरी लोगों में आपने क्या. महसूस किया क्योंकि एक कहानी मैंने सुनी.
थी कि सबको उस टाइम फोर्स किया गया था कि. आपको मस्जिद जाना है जो नहीं भी जाता था. उसे भी फोर्स था क्योंकि दैट वास अ प्लेस. ऑफ डिस्कशन यह सच कहानिया है याय झूठी. कहानिया है और निर्माण बहुत बढ़ गए थे उस. बीच में 90 में जिनको एक पॉलिटिकल हब बना. दिया गया था स्पिरिचुअल हब की जगह पर उसे. पॉलिटिकल अड्डा बना दिया गया. था फेनेटिक्स जो वहां पर आए भेजे गए. उन्होंने इंडोक्ट्रिनेट करा उनको. भड़काया और फिर उनमें से रिक्रूटमेंट.
करा कईयों को फोर्स. करा कि अपने परिवार का सबसे बड़ा. बेटा शरद पार जाएगा यह सब कुछ हुआ वहां पर. और एक वर्ग ऐसा था उनके अंदर जिन्होंने यह. सारी घटनाएं करी थी जो कत्ल करा जिस तरह. से जो आर से काटा गया ये सारी चीज सच थी. वहां पर यह सब हुई थी.
और उस समय यह था कि आजाद करेंगे कश्मीर को. और पाकिस्तान की सेना बस आने वाली है. लेकिन फिर भारत की सेना वहां पर आई और फिर. आतंकियों को खत्म करना शुरू. करा पहले य 10000 की टोलियां में चलते थे. उसके बाद में जब भारत की सेना ने इनको सेट. करना शुरू करा फिर उसके बाद में छोटी-छोटी. डोलियों में चलने लग गए उसके बाद वो भी. खत्म हो गए धीरे ीरे.
सो यह बात सर बिल्कुल सही है कि कश्मीर के. लोग सरल है. लेकिन उनको भड़काया गया उनमें से कुछ लोग. भड़के एक सवाल मेरे मन में और सर मैं 2020. में कश्मीर गया था डल ले किनारे हम गए और. मुझसे बड़े प्यार से एक व्यक्ति आया. बुजुर्ग थे कि आप इंडिया से. आए और वो बहुत प्यार से सवाल था ऐसा नहीं. था कि क्रोध में सवाल किया था उन्होंने. मुझे चढ़ाने के लिए किया था एक बहुत ही. नॉर्मल उनके लिए सवाल लगा मुझे कि साकी. बहुत ही नर्मल तरीके से पूछ थे साइक उनकी.
साइक में ये डाल दिया गया है कि हम भारत. से अलग यह कई सालों के अंदर वहां पर एक. तरह की मानसिकता बना दी गई कि भारत अलग है. कश्मीर अलग है इसीलिए आपसे य सवाल करा और. बहुत मन की सरलता से करा उन्होंने हां. मतलब व चिढ़ाने के लिए नहीं कहा था. उन्होंने मुझे उन्होंने मुझे बिठाया. घुमाया जब हम किसी आतंकी को मारते. थे और कभी किसी से पूछते थे तो वय कहते थे. कि वो वो तो शहीद हो.
गया. तो अच्छा. हमने जैसे कभी किसी से बात करो कि हम बात. करते थे क्या किस क्या चाहिए बोल आजादी तो. बोला किस लिए चाहिए मैं सेब अपने महंगे. बेचूंगा. किसको बेचो ग सेब. महंगे तो बड़े सरल लोग ऐसे कोई गहरी सोच. भी नहीं लेकिन उनके कान में उनके दिमाग. में मस्जिदों के अंदर कुछ लोग आकर कुछ खास.
लोग आकर उनके दिमाग में यह चीजें डाल देते. और क्योंकि वो सरल है उनको लगता है यही सच. है इंडियन आर्मी से उस समय हम जब वहां पर. थे तो रेडियो के ऊपर पाकिस्तान की. प्रधानमंत्री उस समय की बेजर भुट्टो हर. दूसरे दिन उनका भाषण आता था वहां पर यह. इतने हलाक कर दिए इतनो की इतनी लड़कियों. को रेप कर. दिया हमें पता था जिस इलाके की बात करने. वहां तो हम बैठे हुए हैं ये इल्जाम किस पर.
लगाती थी वो इंडियन आर्मी पर भारत की सेना. पर लगाती थी कि इंडियन आर्मी रेप कर रही. है हां और जिस इलाकों की बात करते थे हमें. पता था हम वहां बैठे हुए हैं कभी हमारे. ऊपर फायरिंग होती थी तो डर के हमारे एक. किलोमीटर दूर से फायरिंग करते थे और फिर. रेडियो में चलाते थे हमने हिंदुस्तान की. सेना पर जबरदस्त हमला करा रहे 1 किलोमीटर. दूर पहन के चला रहे हो वो तो हमारे को. दिवाली की तरह लगता था और फिर हम दौड़ते. थे पकड़ लेते थे मतलब हमला करते थे हम सो. ये एक माहौल बनाया जाता था इंडियन आर्मी.
से जैसे कई सारे कश्मीरी बच्चे दिल्ली में. रहते थे अभी तो काफी चीजें बदली काफी घुल. मिल गए बट 20111 में जब मैं अपने कॉलेज. में था और मैं लोगों से संवाद करता कु. कश्मीरी बच्चे आते थे व हमारे साथ घलते थे. मिलते थे बट इंडियन आर्मी को लेकर बहुत. पॉजिटिव नहीं थे वो या कश्मीर में भी आप. जाएंगे तो इंडियन आर्मी को लेकर बहुत. पॉजिटिव नहीं दिखती थी कई बार जिनसे मिलते. थे जबकि आर्मी उनकी हेल्प के लिए है तो यह. क्यों य क्या साइकोलॉजी थी क्या वजह थी. इसके. देखिए जब एक इस तरह का माहौल होता है जहां.
बार-बार चेकिंग हो रही होती हो हो रही. होती है. और इंडियन आर्मी के पास हथियार होते. हैं और बहुत पेनी नजर से एक सैनिक देख रहा. होता है सबको शक की निगाह से देख रहा होता. है क्योंकि खतरा कहीं से भी आ सकता है और. कोई भी आतंकवादी हो सकता है हा तो वो जो. वहां पर बचपन से जो ब बड़ा हुआ है वो तो. भय की नजर से ही देखेगा ना. इंडियन आर्मी ने बहुत से काम करे एजुकेशन.
कर रही है वहां पर स्किलिंग कर रही है. वहां पर कम्युनिटी रेडियो सेंटर चला रही. है वहां पर मेडिकल ट्रीटमेंट दे रहे हैं. यह सब हो रहा है और आतंकियों से सुरक्षित. रख रहे हैं याद रखिए कि वहां पर 40000. नागरिकों को आतंकियों ने मार डाला है यह. नागरिक कौन थे कश्मीरी. कश्मीरी कश्मीर की धरती पर. हिंदुस्तान के नागरिकों का और सैनिकों का. इतना खून बहा.
है कि पाकिस्तान की मजाल नहीं कश्मीर को. हाथ लगा सके कश्मीर की मिट्टी के डीएनए भी. अब हिंदुस्तानी है. पूरा सो यह तो पर जो उनके पास है पीओके. क्योंकि कई सारे आर्मी वेटरन ने इस बीच. में पॉडकास्ट किया तो कईयों ने कहा कि. फोर्सफुली हम नहीं ले सकते मैं आपसे एक. सियासत दन के तौर पर नहीं पूछ रहा हूं एक. आर्मी वेटरन के तौर पूछ रहा हूं इज इट. पॉसिबल कि पीओके हम ले ले नेता लोग कहते. हैं मंच से या वो सिर्फ पैंपर करने के लिए.
होता है कि मजा आ रहा है पब्लिक खुश है. ताली पी अब मैं आपको जो सवाल का उत्तर दे. रहा हूं व मैं भारतीय जनता पार्टी के. कार्यकर्ता के नाते नहीं दे रहा मैं एक. समझदार नागरिक. जिसने भारत के अंदर य बदलता माहौल देखा है. उस कारण से मैं कह रहा हूं. कि देखते रहिए भारत की लीडरशिप. में इतनी ताकत है. आज कि चाहे आर्थिक रूप से या सैन्य शक्ति.
के रूप. से या इंटरनेशनल डिप्लोमेसी के. चलते मल्टीपल फैक्टर्स के. चलते हमारा जो बड़ा एजेंडा है उसको हम. पूरा कर सकते हैं च इ पीओके विल बी पार्ट. ऑफ इंडिया लाइक आई सेड जरूरी नहीं है कि. एक ही तरीका इस्तेमाल करा जाए सैन्य शक्ति. का जसे मैंने आपको कहा कि आज की जो भारत. की लीडरशिप है स्पष्ट रूप से कहूं.
प्रधानमंत्री मोदी जी का जो कैलिबर है जो. उनकी काबिलियत है वो मैंने तो आज तक ना. किसी सेना के जनरल में नहीं देखी ना मैंने. विदेश में जितने लोगों से मिला ह देखी और. तभी उनको दुनिया के अंदर माना जाता है कि. भाई इस तरह का व्यक्ति वाकई में एक बहुत. तगड़ा लीडर है और ऐसी लीडरशिप के अंदर. भारत बदलेगा बदल रहा है और ऐसी लीडरशिप की. काबिलियत है कि चाहे सैन्य शक्ति हो चाहे. आर्थिक ताकत हो हो चाहे इंटरनेशनल. डिप्लोमेसी हो हम अपना बड़ा एजेंडा जो है.
जो पीए को को शामिल करने का वो कर सकते. हैं देखो आपने इसमें तारीफ बहुत कर दी. इससे मुझे बीजेपी नेता राजवर्धन सिंह. राठौड़ ज्यादा सुनाई पड़ रही मैंने इसीलिए. शुरुआत मुझे कर्नल राजवर्धन सिंह राठौड़. से समझना है मैंने इसीलिए शुओ के शामिल. करना प्रैक्टिकली पॉसिबल है इंडिया के लिए. मैं मैं आपको जो कह रहा हूं मैंने शुरुआत. में इसीलिए कहा कि ध्यान से सुनिए मैं एक. बीजेपी कार्यकर्ता के नाते नहीं बोल रहा. मैंने प्रधानमंत्री मोदी जी को नजदीक से. देखा है आज मुझे बोले आज मुझे वो कहते हैं. कि आप बीजेपी से बाहर हो जाओ मैं बाहर हो.
जाता हूं फिर भी मैं यही कहूंगा जो मैंने. कहा. है. क्योंकि मेरे अंदर खून का एक एक. कतरा इस भारत के लिए है अगर भारत बड़ा. होता है तो मेरे तो साथियों ने जान दी हुई. है भाई ट्रू मेरे साथी आज मेरे साथ नहीं. है तो कम से कम हम सच तो बोल सकते हैं. हमारे साथियों ने जान दी हुई है हम कम से. कम सच तो बोल सकते हैं मैं यह नहीं कह रहा.
कि हम करेंगे मैं कह रहा हूं हम काबिलियत. रखते हैं और वह काबिलियत कैसे रखते हैं. मैं यह नहीं कह रहा कि केवल सैन्य शक्ति. से मैं कह रहा हूं ऐसी चीज करने के लिए. देश के अंदर. मल्टीपल सेक्टर्स होने चाहिए जहां हमारी. ताकत बढ़नी चाहिए और हमारी ताकत बढ़ रही. है ठीक मैं कहता हूं कल हम इसको खरीद. लेंगे फिर. हम मान. पाकिस्तान इतना बैकर हो जाए कि हम.
पाकिस्तान को बेल आउट करके कश्मीर खरीद ले. पीओ के खरीद ले. बताओ चाइना तैयार बैठा है व वहां इन्वेस्ट. कर रहा है उन्हें लाखों से अपने रास्ते. निकाल रहा है तो वो बेच भी रहे उन्हे ये. तो जिओ पॉलिटिकल सिचुएशन क्या ऐसी ही. रहेगी क्या यह तो बदलती रहती है चाइना. कोशिश कर रहा है बट चाइना आज आइसोलेटेड भी. हो रहा. है तो ठीक. इस पर हाइपोथेटिकली बात हाइपोथेटिकली है.
हम और मैं मैं तो ये कह रहा हूं आपसे. काबिलियत रखता है देखिए जब हम हम कम से कम. आज उस लेवल तक तो पहुंचे कि बात कर सकते. हैं कि हमारी काबिलियत होती जा रही. है ठीक है आपने लेवल की बात की जब आप सर्व. करते थे सामने पाकिस्तान था एक साइड चाइना. है क्या इंडियन आर्मी को जो इक्विपमेंट्स. मिलते थे उस वक्त वो उसी लेवल के थे उसी. ग्रेड के थे जो पाकिस्तान के पास थे चाइना. के पास थे और अभी भी क्या हम इक्विपमेंट. में हमारे पास सैनिको पा जो हथियार है या.
जो साजो सामान उनका है वह उसी लेवल का है. इंटरनेशनल लेवल का जो यूएस आर्मी यूज़. करती है या चाइनीज आर्मी यूज़ करती है या. दुनिया देश दुनिया के बाकी बड़े देशों की. आर्मी यूज़ करती है आज की तारीख में अ. इंडिया की मिलिट्री मॉडर्नाइजेशन हो रहा. है हमारे पास ड्रोन हैं एयरक्राफ्ट हैं. इंडिया में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है. टेक्नोलॉजी ट्रांसफर हो रही है रडार्स हैं. अ होजर्स है आर्टिलरी गंस हैं बुलेट प्रूफ. जैकेट्स.
हैं नाइट विजन तो अब मॉडर्नाइजेशन का एरा. आ गया है और यह मैं क्या कहूं आप ग कर. लीजिए आप इंटरनेट पर सर्च कर लीजिए कि. 2004 से लेकर 2014 तक जो 10 साल का समय. रहा था तो एक भी हथियार नहीं आया था 10. साल का पीरियड जब यूपीए सरकार थी तो एक भी. हथियार नहीं आया था हम कितने पिछड़े वहां. पर उस समय और केव मेरा पॉलिटिकल ससे मैं. करगिल से ज पढ़ता हूं तो करगिल में गया भी. क्योंकि सौभाग्य प्राप्त हुआ कि वहां मैं.
गया लोगों से बात की तो वहां जो अभी. सर्विंग लोग हैं वो कहते हैं कि हमने. सिर्फ हॉस्टल से लड़ाई जीती थी हम नीचे थे. वह ऊपर थे हमारे हथियार इतने वो नहीं थे. ठंड में कपड़े नहीं थे हमारे पास वैसे उस. ठंड को रोक सके हमने सिर्फ वो लड़ाई इसलिए. जीती थी क्योंकि हमें पता था कि अगर यह. दराज चला गया करगिल चला गया तो फिर इंडिया. कट सकता है और व हमारे देश केलिए. नुकसानदायक होता है तो हमारे फौजियों ने. अपने जान की परवाह नहीं की हौसले के दम पर. वह जगह जीत ली यह वो क्या तो मुझे लगता है. कि ऐसा कैसे पॉसिबल है कि सही हथियार तक.
नहीं थे कपड़े नहीं थे जूते नहीं थे. ग्लव्स नहीं थे या जो बेसिक बुनियादी. चीजें होती है क्योंकि 90 में आप रहे. इसलिए पूछ रहा हूं मैं क्योंकि प्राथमिकता. नहीं थी यह सच है बिल्कुल सच है हाथ ये ये. तो ये तो एक. बड़ी कॉमन सी बात है आप किसी भी पूर्व. सैनिक से किसी भी सैनिक से पूछना कि उस. समय का समय जब सरहद के ऊपर वहां से. पाकिस्तानियों से तो हम बात करते थे ना. सरद पर वहां से चिल्लाकर बोलते थे कि हम. तो यहीं अभी इसी समय गोली चला सकते हैं.
तुम्हें तो दिल्ली से पूछना पड़ेगा और एक. इंसिडेंट में आपको बताता हूं कि सिचन के. अंदर पाकिस्तानी हेलीकॉप्टर उड़ा और यहां. से एक यंग कैप्टन था उसने एक रॉकेट लंचर. लिया और गिरा दिया हेलीकॉप्टर व ऊपर से. उसकी पल्टन ने उसकी गैंट्री अवार्ड के लिए. एक साइट लिखी लेटर लिखी और दिल्ली से उसके. खिलाफ इंक्वायरी की एक लेटर आई दो. चिट्ठियां ऐसे आई एक दिल्ली की एक सेना. की यानी भय डाल दो सब अधिकारियों के अंदर.
सब सैनिकों के अंदर कि भैया पाकिस्तान की. तरफ गोली धाग से पहले 10 बार सोच लेना. कोर्ट ऑफ इंक्वायरी हो जाएगी उस समय भी. सेना सरहद पार करती थी लेकिन बिना अनुमति. के पार करती थी जब हमारी सर्जिकल. स्ट्राइक्स हुई तब पहली बार. राजनीतिक इच्छा से सेना ने और डायरेक्शन. से सेना ने सरद पार करा और कई किलोमीटर. पार करके अंदर गई लेकिन उससे पहले अपने.
रिस्क पर काम करते थे रिस्क इसलिए उठाते. थे क्योंकि इतनी ट्रेनिंग जब हमने करी हुई. है और जब सामने से इस तरह की बार-बार वह. कारवाई करते थे पीछे से घुस के आ जाते थे. किसी की गर्दन काट देते थे कब करते थे तो. सेना का भी खून खोलता था और वह भी फिर पटव. एक्शन लेते. थे पनिशिंग एक्शन लेते थे. लेकिन लीडरशिप चेंज होने के बाद अब फिर आप. बोलेंगे. बीजेपी यह तो ये तो फैक्ट ऑफ लाइफ है अब.
सैनिकों से पूछिए ना ठीक है आपके परदादा. जी दादाजी पिताजी और आप सब लोग वॉर से. डायरेक्टली इनडायरेक्टली जुड़े रहे हैं. वॉर के साइड इफेक्ट क्या होते हैं क्योंकि. जंग दिखने में टीवी पर सुनने में बड़ी. फेसिनेटिंग लगती है आपने कहा कान के बगल. से गोली निकल. गई गहरे बहुत गहरे जखम होते हैं वर के जब. कोई अपनी शहादत दे देता जब कोई सैनिक. बलिदान दे देता है केवल वही नहीं.
जाता पूरा परिवार चला जाता है आपके कोई. दोस्त गए को किसीने शहा बिल्कुल बहुत ऐसा. जो करीबी रहा बहुत नजदीकी बहुत नजदीकी गए. और मैंने उनके पूरे परिवार को खत्म होते. देखा. है वह जो स्ट्रेस आता है जब एक यंग उम्र. में आपका पति चला जाए आपका पता चला जाए तो. जिस तरह का स्ट्रेस आता.
है जिस तरह से जीवन समाप्त हो जाता. है उसके बारे में तो कोई नहीं. सोचता और उसको कैसे वह कवर कर पाए सेना. कोशिश करती है उनके साथ मिलाप रखने का. लेकिन वो कवर नहीं कर. पाता. मैंने अपने बहुत नजदीकी साथी को वहां पर. बलिदान हुआ उसका उसकी पत्नी को स्ट्रेस से. कैंसर हुआ वो भी खत्म हो गई अब उसका. इकलौता बेटा है जो उस समय 2 साल का.
था आज वह भारत की सेना में जा रहा. है आप उसका माइंडसेट देखो उस दो साल के. बच्चे की मानसिकता देखो उसने कितना देखा. अपना अपने पिता को केवल दो साल लेकिन उसके. जहन में उसके दिमाग में इतने सालों से. चलता रहा कि आतंकियों ने खत्म करा है. ना मैं सेना में जाऊंगा. और अपनी इंजीनियरिंग वगैरह सब करके आज वो.
सैनिक अधिकारी. बन यह जो है ना मैं इसीलिए हमेशा कहता हूं. कि हमारे देश के. दुश्मन अगर एक योद्धा को गिराते हैं तो. हमारे हजार योद्ध. खड़ और इसके लिए मैं अटल बिहारी वाजपेई जी. को धन्यवाद देता हूं फिर बोलोगे. बीजेपी क्यों देता हूं मैं उनको धन्यवाद. मैंने अपने हाथों से अपने जवानों की अंतेश. कश्मीर में करी हुई है घ सम उस समय अनुमति.
नहीं थी कि उनके जो रिमेंस हैं उसको हवाई. जहाज से वापस गांव भेजा जाए लाखों रुपए का. खर्च आता है उस समय अनुमति नहीं थी लेकिन. कारगिल के समय अटल बिहारी वाजपेई हमारे. प्रधानमंत्री जी ने बोला कि इनको वापस. वहां भेजो वो सम्मान जो गांव में मिलना. चाहिए वो मिलना चाहिए और उस कारण से आप. देखिए जब आज कभी कोई बलिदानी का अंत होती. है तो हजारों लोग चल रहे होते हैं.
सम्मान उनके मन में यह भाव होता है कि. जाना तो है ही एक ना एक. दिन अगर जाना है तो ऐसे. जाना देश. के इस पूरे किस्से को तो आपकी आंखें देख. रहा हूं गमगीन हो गई. है पानी.
बोलो आपको लगता है कि इंडिया. में दो हाइपोथेटिकल क्वेश्चन है सबको एक. छोटे टाइम लिमिट के लिए आर्मी आर्मी से. रिलेटेड कामों में सर्व करने के लिए रखना. चाहिए ताकि एक बेसिक ट्रेनिंग एक बेसिक. पैरामीटर सेट हो जाए बेसिक लिविंग लाइफ. स्टाइल जीने का तरीका जो वहां से आप सीख. कर आएंगे वो स्टैंडा हो जाएगा जिसका. इंपैक्ट आप जीवन में कोई भी काम करेंगे तो. वहां दिखाई. पड़ेगा एनसीसी. हुआ और मिलिट्री अकेडमी सैनिक स्कूल हुए.
मिलिट्री स्कूल हुए एक तरह से वैसा ही. रहता है. और. यह भारत के लिए तो अच्छा हो गई एक अनुशासन. जीवन में आता है जब आप एक सैनिक को देखते. हो तो केवल वर्दी उसके पीछे क्या है उसके. पीछे कमिटमेंट है डिसिप्लिन है शासन. है उसके उसके अंदर एक ऐसा व भाव है कि मैं.
हर कुछ हर चीज से मैं गुजर जाऊंगा यह. भरोसा है आत्मविश्वास आसमान पर चढ़ा हुआ. होता है आत्मविश्वास. आप देखिएगा जब. आप मैं अक्सर ही कहता हूं कि जब आपको कोई. सैनिक सम्मान देना चाहेगा ट तो और सीधा. खड़ा होगा राइट और आपके लिए आपके ऊपर गर्व. करेगा आपके ऊपर जान देने को तैयार हो. जाएगा सलूट करेगा तो सीना तान के करेगा.
रा राजनीति में उल्टा होता है. ना सही बात है लेकिन वो लोगों को अच्छा. लगता है ऐसे करके मोदी जी को नहीं अच्छा. लगता मोदी जी बोलते हैं पाव चूना बंद. करो राजनीति में जो ऐसे से होता है ना. मोदी जी ने बंद कराया हुआ है क्योंकि वह. इस बात को समझते हैं कि अगर भावना अच्छी. है तो दिल में अ बाहरी दिखावा. नहीं.
सो एक सैनिक का जो क सेना क्या करती है. कॉन्फिडेंस बिल्ड करती है आपको विश्वास. दिलाती है बड़ा विश्वास उस विश्वास के. कारण आप हो तो वही नागरिक ना वहीं से आए. हो उसी गांव से आए हो लेकिन आपको कूटकूट. के अंदर विश्वास भर देती है आत्मविश्वास. भर देती है कि दीवार के अंदर भी दौड़ के. जाओगे तो दीवार. टूटेगी ये एक मेंटालिटी हो जाती क्या. राइट्स होते हैं आर्मी पर्सन के और एक. नॉर्मल सिविलियन के एक आर्मी जो आर्मी. बैकग्राउंड का बंदा जब नर्मल लाइफ में आता.
है नहीं एक नर्मल ये सवाल मैं इसलिए पूछ. रहा हूं क्योंकि एक केस हुआ था आपका एक. वीडियो वायरल हुआ था आपने बट वो वो वो. पूर्व सैनिक नहीं था वो सर्विंग सैनिक ट्स. वकिंग तो एक आर्मी में सर्विंग व्यक्ति को. एक पुलिस वाला जलील करता है परेशान करता. है मारा पीटा कपड़े उतार दिए हाउ इज इट. पॉसिबल उनके राइट्स का इतना दोहन कैसे. पॉसिबल हो. गया.
ये मिलिट्री पुलिस का जो यह है यह काफी. लंबे समय से होता रहता है दोनों वर्दी. वाली फोर्सेस. है इसके अंदर रूल और कायदा यह होता है कि. सेना के अंदर एक मिलिट्री पुलिस होती. है अगर कोई सर्विंग मिलिट्री पर्सनल अगर. कोई सैनिक कोई गलत काम कर रहा हो होता है. तो उसके ऊपर तुरंत पुलिस कारवाई कर सकती. है और उसके बाद मिलिट्री पुलिस को इफॉर्म.
करती है तो सेना भी साथ में जुड़ जाती है. और उसके बाद में जो देश का कानून होता है. वह उसके ऊपर लाग होता लागू होता. है अब अक्सर क्या होता है. कि सबसे पहली बात पुलिस इफॉर्म नहीं करती. दूसरा पुलिस के पास जब लोग जाते हैं तो. परेशानी में जाते. हैं यानी परेशान व व्यक्ति वैसे ही है. अब मैं एक चीज आपको बतलाता हूं य सेना के.
अंदर एक आर्मी रूल आर्मी एक्ट लगता. है वह भारत का जो कानून है उससे और भी. कड़ा है क्यों लगता है क्योंकि आपके अंदर. इतनी ताकत आपको देवी है तो आपके ऊपर कानून. भी और सख्त होगा सख्त होगा अगर आप इतनी. ताकत जो संविधान ने दी है उसके बाद अगर उस. ताकत का गलत इस्तेमाल करते हो तो आपको सजा. भी डबल. मिलेगी यह पुलिस के ऊपर क्यों नहीं.
होता. पुलिस को ताकत दी है संविधान. ने उस संविधान की ताकत की वजह से पुलिस. काम कर रही. है अब पुलिस में कुछ चंद लोग होते हैं. जिसकी वजह से पुलिस बदनाम हो रही है. हम पुलिस बहुत अच्छा काम कर रही है बहुत. कठिन काम है पुलिस का. दिवाली हो होली हो जनता के बीच में.
पेट्रोलिंग करना काम करना बहुत कठिन काम. है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं पुलिस के. जो पुलिस को बदनाम करते हैं व कानून को. अपने हाथ में ले लेते हैं तो मेरा यह. मानना है कि जितनी ज्यादा पावर उतना सख्त. उतना आपको धैर्य रखना और कानून आपके ऊपर. लागू होना चाहिए तो बेसिकली उस इंसिडेंट. के अंदर मिसयूज करा पुलिस ने अपनी ताकत का. तो. डिस्पाइना.
डिस्पाइना तक बात हुई कि यू नो इस तरह से. कि बोलो बाप कौन है आर्मी का ो य बहुत. घटिया बातें हैं. बट कौन करता है ऐसी बातें जिसको खुद के. ऊपर भरोसा नहीं होता खुद के ऊपर विश्वास. नहीं. होता जो जो उस समय उस पुलिस की वर्दी में. था उसको खुद पर विश्वास नहीं था कमजोर समझ. रहा था अपने आप को और होगा भी कमजोर कि. उसको लाठी उठानी पड़ेगी अच्छा मैं बताता. हूं पुलिस कौन है क्यों पता नहीं क्या. पुलिस कौन है तुम अगर आराम से विश्वास.
विश्राम में खड़े रहो और सुनते रहो अगर व. सामने वाला गाली भी दे रहा है दे. ना क्या. करेगा पुलिस हो संविधान साथ हाथ लगाएगा तो. जेल. जाएगा गाली देने पर भी जेल डालना चाहो तो. डाल दो ना लठ लगा के मैं बताता हूं इसका. तुम तो कमजोर. हो तो कुछ कुछ लोग होते हैं ऐसे जो से जो. पुलिस को बदनाम करते हैं हर जगह मिल.
जाएगी आपने फिल्म देखते हैं हां कभी-कभी. मौका लगता है एक फिल्म आई थी. शौर्य केके मेनन की उसमें किरदार था. ब्रिगेडियर प्रताप सिंह का बड़ा चर्चित. फिल्म रही आर्मी बैकग्राउंड प थी और राहुल. बोस और केके मैनन का वो कोर्ट रूम का. संवाद होता. है आर्मी में कैसे मेक शोर करते हो कि. व्यक्ति की पर्सनल आइडल जीी जो है वो हावी. ना हो उसमें य दिखाया था कि ब्रिगेडियर.
प्रताप सिंह जो कहते हैं कि मैं ठंड में. अपनी हड्डिया गला रहा हूं तुम लोग नीचे. बैठ के बातें करते हो मैं ऊपर बैठा इसलिए. तुम सेफ. हो बट उनका एक टड मुस्लिम्स के ट दिखाई. पड़ता फिल्म दिखाई हालाकि वो आज के दौर. में वो कल्ट सीन बन गया उसे लोग अब. पॉलिटिकली बहुत यूज करते और बहुत वायरल. होता है आपने देखी फिल्म वो फिल्म नहीं. देखी. मैंने लेकिन केके मैन वो कलाकार बहुत. जबरदस्त हैं सो मैंने मेरे ख्याल से वो.
सीन कहीं. youtube0 बहुत सारे लोग इसको रिलेट भी. करते अभी चर्चा भी करते दोनों साइड की. चर्चा चलती है एक जैसे कश्मीर में आप थे. सो कश्मीर में हाउ यू ट हैंडल ऑल दिस. सिचुएशन क्योंकि वही वही कहानी मैं आपसे. पूछ रहा हूं आप लोग कैसे सर्व करते थे.
कश्मीर में क्योंकि एक प्रॉपर आपको विरोध. आ रहा है आपको पता भी नहीं जैसे बनवानी. केस है बनवानी अब बनवानी केस में जो मैंने. पढ़ा वो यह था कि एक बार उसे रोका गया. चेकिंग के लिए उसने शायद जबान लड़ाई या. कुछ किया उसे दो चार थप्पड़ पड़ गए वो बात. उसके जहन में रह गई बाद में ही बिकम. बनवानी सो यह आर्मी में कैसे आप मेक शर. करते हो कि पर्सनल इमोशंस नहीं है जैसे. अभी आपने कहा ना लाठी उठाया कमजोर वाला. कैसे श करते इसकी भी कोई ट्रेनिंग होती है. वच करते हो आप लोग. सीनियर्स आर्मी में बहुत चेक्स एंड.
बैलेंसस होते हैं बहुत चेक्स एंड बैलेंस. होते हैं आपके ऊपर लगातार निगाह होती है. और लगातार आपसे प्रश्न पूछे जाते हैं. लगातार आपकी ग्रूमिंग होती है लगातार आपकी. ट्रेनिंग होती है और रिकॉर्डेड रहती है. चीजें मैं आपको एक इंसिडेंट बताता हूं जब. मैं 22 साल का था. और मैं कश्मीर में अपनी 120 लो लोगों को. लीड करके ले जा रहा था वहां पर उनका जीवन. की रिस्पांसिबिलिटी मेरी थी और आतंकियों.
का सामना करने की भी जिम्मेदारी मेरी. थी तो मुझे याद है मैंने उनको बिठाया और. मैंने उन कहा. कि मैं एक वेलफेयर करूंगा आपका आपके लिए. एक ही काम. करूंगा वह है आपको जिंदा यहां से वापस. लेकर जाऊंगा आपके परिवार के पास. लेकिन आपका खून पसीना आपका आराम सब मेरे. को मेरे हवाले करो. और उसके बाद अगर बारिश हो रही होती थी. बर्फ गिर रही होती थी रात होती थी दिन.
होता था हम बाहर होते थे हम पेट्रोलिंग कर. रहे होते थे हम इतनी पेट्रोलिंग कर रहे. होते थे और इतना हमने अपना डोमिनेंस करा. हुआ था इलाके के ऊपर कि हर गांव वाले को. पता होता था कि अगर पत्ता भी हिल रहा है. इसका मतलब भारत का सैनिक खड़ा हुआ है यह. भय आतंकियों के अंदर भी था और उस कारण से. फिर वह गलती करना शुरू करते थे और जब हम. इतना जाते थे तो हमें एक एक कतरा कतरा पता. होता था हम चाल से देखकर बता सकते थे कि. इस गांव के अंदर आतंकी है या नहीं महिलाओं. के चेहरे से देखकर बता सकते थे कि य है या.
नहीं बच्चों की बात करने के तरीके से. महिलाओं के अग्रेशन से या लैक ऑफ अग्रेशन. से गुस्से में बात कर रही है या बहुत ही. नरम बात कर रही है हर तरह से हमें पता. होता था कि यहां पर अभी आतंकी है या नहीं. तो जैसे मान लिए पता लग गया आपको किसी घर. में आतंकी है अब आप कैसे ऑपरेशन अम देते. हैं अलग-अलग तरीके थे ऑपरेशन के फिर वह हम. करते हैं उस उन ऑपरेशंस को लेकिन ऐसे ब. बहुत से वाकया होते थे जब हमारे मेरे ऊपर. सुबह 5:00 बजे सूरज निकलने से पहले.
कांगड़ी जो कोयला वो रखते हैं अंदर अपने. फिरन के अंदर वो हमारे ऊपर फेंका हुआ है. लोगों. ने मतलब जलता कोयला हमारे ऊपर फेंका हुआ. है लेकिन आप लट थोड़ी ना उठाते आप बहुत. पावरफुल हो आप भारत की सेना हो आपके पास. हथियार है आपके पास पूरी टोली है खत्म कर. सकते हैं सब. इसीलिए आप कुछ नहीं. करते मैं शिव की बराबरी नहीं कर रहा बट.
उनसे सीखने लायक है कि शिव को कुछ कुछ भी. बोल लो तीसरी आंख खोले खत्म कर सकते हैं. हां लेकिन वो करते नहीं है ना जब तक. निहायत जरूरत में तो वो होती है पावर असली. पावर बट वो जो फिल्म में दिखाई ऐसा कुछ सच. होता है या नहीं होता है या कुछ ऑफिसर सा. होता है ऐसा देखिए जैसे मैंने कहा कि सेना. के अंदर चेक्स एंड बैलेंसस बहुत जबरदस्त. होते. हैं और सेना इसको यकीन करके रखती है कि.
किसी भी तरह की किसी के साथ नाइंसाफी ना. हो ठीक मिलिटेंट और टेररिस्ट में क्या. डिफरेंस होता. है ज दोनों एक ही होते. बेसिकली थोड़ा अंतर होता है लेकिन कश्मीर. में जो है वो टेररिज. है एंड. बेसिकली छोटे-छोटे सेल्स होते.
हैं जो अपने आप ऑपरेट करते हैं उनको. कभी-कभी डायरेक्शंस आते हैं कभी उनको जनरल. डायरेक्शंस होते हैं 26 जनवरी को कुछ करना. है य जनरल डायरेक्शन है 15 अगस्त को कुछ. करना है जनरल डायरेक्शन. है उनको अगर स्पेसिफिक किसी ऑपरेशन का अगर. ऑर्डर नहीं भी आता तो उनको पता है कि जनरल. डायरेक्शन को करना है मतलब आतक फ सवाल. मैंने इसलिए पूछा कक जब एज अ टीवी एंकर. आईज टू आस्क क्वेश्चंस तो मुझसे किसी ने. कहा कभी नोटिस करना कि जो कश्मीर के.
रिपोर्टर्स होते हैं वो कहते हैं एक. मिलिटेंट मारा. गया हम दिल्ली में टेररिस्ट कहते हैं वहां. वो मिलिटेंट शब्द का इस्तेमाल करते हैं ये. क्या डिफरेंस होता. है मिलिटेंसी एक बड़ा ऑर्गेनाइज्ड एक हो. गया अ जो जनता के उसमें यह तय नहीं है कि. जनता को. [संगीत]. जनता के अगेंस्ट काम हो रहा है वहा पर.
दहशत जनता में फैलाई जा रही है वह नहीं है. मिलिटेंसी में मिलिटेंसी. केवल मिलिट्री के अगेंस्ट ऑपरेशन हो रहे. हैं मुद्दों को लेकर मुद्दों पर मिलिट्री. आपकी सशक्त सेनाएं है उनके खिलाफ हो रहा. है लेकिन जनता के अंदर कोई दहशत नहीं है. ओके और बहुत ऑर्गेनाइज है बटालियंस काम कर. रही हैं उनकी और वह नीचे कंपनी और प्लट के. अंदर काम कर रही है ऐसा नहीं है वहां पर.
वहां पर लोगों के अंदर दहशत फैलाई जा रही. है टेरिम है वहा पर वो टेररिज्म है जिसको. कुछ लोग मिलिटेंसी कह रहे वो टेरिम है दत. डर. फैलाना तो रात को जाकर जो सेना से बात कर. रहा है हम हमारे साथ हुआ हुआ. है कुछ ऐसे लोग भी. थे जिन्हें मैं जानता था जिनके कान काट. दिए गए नाक काट दिए गए उसके बाद फ पर लटका. दिया गया सौरभ कालिया घटना कितनी दहशत. वाली है वो तो सैनिक है वो तो सेना के.
अंदर काम कर रहा था मैं तो साधारण नागरिक. की बात कर रहा हूं कि इस तरह से तो यह. दहशत फैलाना हुआ यह टेररिज्म है हा यह. मिलिटेंसी नहीं है ठीक कुछ रैपिड फायर रखा. सर. हमने एक ऐसी स्किल जो आपने मिलिट्री के. टाइम सीखी हो जिसे आज भी आप इस्तेमाल करते. हो सच्चाई से. बोलना कमिटमेंट से बोल. आज भी अगर. अ हमारे जो मतदाता हैं वह जब मुझे देखते.
हैं और जब मैं बात करता हूं व जानते हैं. कि अगर राज्यवर्धन कुछ बोल रहा है तो फिर. वो करके ही रहेगा अगर मैंने कहा है तो. सत्य है क्योंकि सच्चाई से सेना के अंदर. काम होता है साफ दिल से काम होता है आर्मी. बैकग्राउंड में क्या ऐसा सीखा जो आप अगली. जनरेशन को या सिविलियंस को चाहते हो कि वो. फॉलो करें वो. भी सॉरी आर्मी बैकग्राउंड में आर्मी सर्व. करने के टाइम में क्या ऐसा सीखा जो आप. चाहते हो कि नेक्स्ट जनरेशन आपकी या.
सिविलियंस देश के उसको सीखे उसको फॉलो. करें अपने शरीर को हथियार. बनाना अपने आप को हथियार. बनाना मुझे लगता है हर नौजवान या बच्चा. चाहेगा कि वह हीरो. बने तो बनो. ना अपने शरीर को हथियार बनाओ शरीर को. हथियार अपने दिमाग को हथियार बनाओ. सबसे बड़ा हथियार तो वही है ना कैपेसिटी. टू आउट विट.
समवन. सो उसके लिए नॉलेज की जरूरत होती है उसके. लिए एप्लीकेशन की जरूरत होती है उसके लिए. डिस्कंफर्ट के अंदर जाकर अपने कंफर्ट जोन. से बाहर निकल करर काम करने की जरूरत होती. है अगर शुभंकर ने अभी अपनी टीवी की दुनिया. से बाहर निकलकर अपना एक स्थान बनाया. है तो मैं कह सकता हूं ना उस ने अपने आप. को हथियार बनाया है हम ओके ट ओके अ जब आप.
आर्मी से सिविल लाइफ में आए सबसे बड़ा. चैलेंज क्या फेस हुआ या सबसे अजीब क्या. लगा इस दुनिया में आई एम श्यर बहुत सारी. चीजें रही होंगी यार कहां आ गया. मैं एक राष्ट्रीयता की. सोच हम सब एक कदम आगे ही सोचते हैं या. केवल अपने दायरे के अंदर ही सोचते हैं. अपने घर का ही सोचते हैं अपने ने पड़ोसी. तक का भी नहीं सोचते कई बार या कुछ लोग. ऐसे होते हैं जो मोहल्ले का सोच लेते हैं.
हम फिर उनमें से भी कुछ लोग ऐसे होते हैं. जो पूरे शहर का सोच लेते हैं फिर उनमें से. भी कुछ ऐसे लोग हो जाते हैं जो समाज पूरे. प्रदेश और पूरे देश का सोच लेते हैं ऐसा. बनना बहुत जरूरी. है वही बात हो गई ना एक लकड़ी और कई सारी. लकड़िया जो हम बचपन में पढ़ते थे एक लकड़ी. को तो तोड़ देते कई सारी लकड़ियों को नहीं. तोड़ सकते तो एक एक राष्ट्रीयता का भाव जब. हम युद्ध लड़ते हैं तो केवल सेना थोड़ी ना. लड़ती है उसके अंदर नागरिक भी जुट जाए तो.
युद्ध कैसा शानदार होगा कितनी ताकतवर भारत. हो जाएगा और ऐसा कुछ संगठन कर रहे. हैं 62 की लड़ाई के. अंदर लोगों ने अपने जेवर तक दिए थे हम. लंगर लगे. थे कारगिल के युद्ध के समय जब ट्रेनें. चलती थी तो लोग लंगर लगाते. थे सेना को मदद करते थे हर तरह से और उसी. को ध्यान में रखते हुए 63 के अंदर जो 26.
जनवरी की परेड हुई उसके अंदर आरएसएस को ने. मार्च करा राजपथ के ऊपर आज कर्तव्य पथ है. हम 63 की के अंदर 26 जनवरी के परेड के. अंदर आरएसएस के 3000 लोगों ने या उससे कम. लोगों ने मार्च. करा क्यों ना हम वैसा अब भी. करें उससे लोगों को लगेगा कि मैं भी सैनिक. बन सकता हूं मैंने वर्दी नहीं पहनी तो. क्या हुआ वर्दी नहीं पहनी तो क्या हुआ मन.
तो मेरा सैनिक का है ना मन तो मेरा देश के. लिए है ना राष्ट्रीयता का भाव कि मैं केवल. जयपुर का नहीं हूं मैं इस देश का हूं सबसे. पहले मैं केवल बंगाल का नहीं हूं मैं इस. देश का हूं सबसे. पहले वह वाला जो भाव है व आना बहुत जरूरी. है. और आज भी अगर मान लीजिए संगठन हो जैसे. आरएसएस है वो 26 जनवरी की परेड में मार्च. करता है तो सबको लगता है हां मैं भी तो.
संघ के अंदर हूं जुड़ सकता हूं या कोई. दूसरा संगठन हो जो काम करता है एनएसएस है. वह मार्च करती है एनसीसी मार्च करती. है तो यह जो है भाव किसी संगठन के साथ. जुड़ना जिसके अंदर भाव राष्ट्रीयता का. हो यह बहुत जरूरी है फौज में आप कर्नल थे. आपने कश्मीर ने बहुत सारे ऑपरेशन को अंजाम. दिया आपके पीछे सैकड़ों सिपाही थे. एक. लीडर को क्या क्वालिटीज लीडर बनाती है.
क्योंकि फौज में तो लोग जान झोक को तैयार. होते हैं आपके नाम. पे इस क्वालिटी के अ के लिए हम एक कसम भी. खाते. हैं और पूरी कसम परेड होती है ऐसे हवा में. बात नहीं कर रहा कसम परेड होती है और कसम. परेड में कसम खानी होती है कि मेरे लिए. सबसे पहले होगा मेरा. राष्ट्र उसके बाद होंगे मेरे साथी और अंत. में हूंगा मैं. खुद और इस कसम को हमेशा आपको याद रखना है.
कि सबसे पहले मेरा. राष्ट्र उसके बाद मेरे साथी अंत में मैं. खुद यह लीडरशिप यही है लीडर बहुत. सिंपलीफाइड तरीके से बिना किसी पेची दी के. बिना कोर्सेस. के कि आप जो काम कर रहे हो उसके पहले एक. मापदंड रख दो कि क्या यह मेरे राष्ट्र हित. में है उसके बाद मापदंड रखलो क्या यह मेरे. साथियों के हित में. है उसके बाद में क्या यह मेरे हित में.
सबसे. लास्ट फौज में कॉन्फ्लेट से हैंडल करना. कसे सिखाते थे कॉफ्ट कॉन्फ्लेट हैंडल करना. कैसे सिखाते थे मान लीजिए किसी विषय पर एक. नहीं हो. रहे या अब जिंदगी में जैसे आप अब तो आप. पॉलिटिक्स में गए हर दूसरी चीज में. कॉन्फ्लेट आते होंगे सो क्या एक्सपीरियंस. लिया आपने कॉन्फ्लेट को हैंडल करने का. शिवांकर फौज के अंदर कॉन्फ्लेट अलग तरह से. हैंडल होता है राजनीति के अंदर कॉन्फ्लेट. अलग तरीके से हैंडल होता है समझ लेना चाह. रहा हूं आपसे हां मैं वही मैं आपको बतला.
रहा. हूं इसके अंदर मैं आपको एक इंसिडेंट बता. [संगीत]. दूं तो मैं नया नया राजनीति माफ कीजिए नया. नया सेना से राजनीति में. आया सेना के अंदर निर्णय पहले लेते. हैं सबसे पहले क्या करते हैं निर्णय लेते. हैं. राजनीति में सबसे अंत में निर्णय.
लेते राजनीति में कंसीक्वेंस देख के. निर्णय सबसे अंत में निर्णय ले तो हुआ. क्या कि कुछ मुद्दा था और मैं मंत्री था. मुझे लगाय एक हफ्ता निकल गया निर्णय अभी. तक नहीं हुआ तो मैंने सभी अधिकारी को बुला. लिया मैंने कहा अब एक जो चिट्ठियां लिख. रहे हो सब एक दूसरे को जिसमें हफ्ते लग. जाते हैं आमने सामने बैठ के अब अपनी. चिट्ठी वर्बल. बोलो और अब आप उसका समाधान दो हा और कोई. जना रिकॉर्ड करता रहे तो उनको लगा ये क्या.
हो रहा है आधे घंटे तो ये चला फिर मैंने. कहा मुझे लगा कि सब सही हो रहा है मैंने. कहा अब ऐसे ही काम करते रहना तो वह काम. फिर वही रुक गया और मेरी कंप्लेन हो गई तो. मुझे जेटली जी ने बुलाया उस समय मेरे. मंत्री थे क्या हुआ मैंने कहा कि यह हुआ. और क्या फिर उन्होने मुझे बोला कि राजनीति. में बिल्कुल लास्ट में जब बिल्कुल ही समय. हो निर्णय लेने का तब निर्णय लेना उससे. पहले सुनते रहना. सबकी सेना में निर्णय तुरंत होता है और.
उसका कारण है क्योंकि सेना इंतजार नहीं कर. सकती तुरंत निर्णय होता है और जो निर्णय. होता है उसको फिर धड़ल्ले से उसको पूरा. करते हैं पूरी सेना लग जाती है और कोई. कन्फ नहीं. होता क्योंकि सबका भरोसा होता है कि जो. मेरा लीडर है मैंने शुरू शुरू में कहा था. आपको कि यही तरीका है यही सही तरीका है. इसी से मैं जिंदा रह सकता हूं या इसी से. मैं इज्जत से वापस जा सकता लेकिन राजनीति. के अंदर सबकी सुन तो बहुत अलग है पे चत की. है जब आपने पहला ओलंपिक में सिल्वर मेडल. जीता क्योंकि मैंने अभी साइना नेहवाल का.
इंटरव्यू किया था और वो बहुत सारी. शिकायतें करही थी कि फैसिलिटी नहीं मिलती. है ओलंपियंस को सिक्योरिटी नहीं है सैलरी. आज भी नहीं मिलती है उन्हें क्रिकेट में. अगर कोई चोटिल हो जाए तो उसे बेस्ट ट्रेनर. बेस्ट फिजियो बेस्ट ट्रीटमेंट मिलता है बट. जो बाकी एथलीट्स है उनके साथ यह नहीं है. इसलिए इंडिया में टैलेंट बहुत है 140. करोड़ की आबादी में टैलेंट बहुत है लेकिन. हम पीछे रह जाते हैं. अब मैं सोचता हूं यह अभी वह बता रही है. मुझे 2004 में क्या हाल रहा होगा सो 2004.
में जब आपने इंडिया के लिए मेडल जीता क्या. फैसिलिटी आपको दी गई थी. उस मुझे याद है हम जब उस समय ट्रेनिंग. करते थे 1998 से मैं मैंने ट्रेनिंग करनी. शुरू करी और 2004 में मैंने पदक जीता तो व. छ वर्ष का कार्यकाल समय. था हम सुबह जब जाते थे तो कम से कम दो. टिफिन लेकर साथ चलते थे और दो जोड़ी कपड़े. साथ लेकर चलते थे पहले पसीना बहाते थे. शूटिंग रेंज के ऊपर चार पांच घंटे वहां. ट्रेनिंग करते थे उसके बाद मुंह साफ करके.
कपड़े बदल. के मंत्रालय जाते थे तीन-चार घंटे वहां. लगते थे अपनी फाइल को धकेलना और हर तरह की. बेइज्जती होती थी जब फाइल अधिकारियों के. सामने रखते थे कैसी बेजती हर तरह की. बेइज्जती होती थी क्या सवाल कुछ बताइए यही. तो सुनना है लोगों को आपसे एक बार एक. वर्ल्ड कप था इंडिया में दिल्ली में हुआ. उसमें मैं छठे स्थान प था हम उसके बाद. विदेश जाना था और मुकाबलों के लिए तो मैं. अपनी फाइल लेकर गया तो उसने बोला जब. इंडिया में नहीं जीतते तो बाहर क्या.
जीतोगे हटाओ इस फाइल को बहुत सार ऐसे होते. तुम लोग मतलब हर तरह से तुम लोग. एनीवे घंटो घंटों हम बैठे रहते. थे आप यह सोचिए सेना के अंदर कश्मीर के. अंदर एंटी टेररिस्ट ऑपरेशन करने के बाद हर. तरह की बंदूक और हर तरह की गोलियां चलाने. के बाद जब मैं वापस दिल्ली आया और शूटिंग. करना चाहता तो मेरे पास खुद का आर्म्स. लाइसेंस नहीं. था मेरे को कई दिनों तक मैं भटकता रहा.
दिल्ली पुलिस के चक्कर काटता रहा उने. लाइसेंस देने से मना कर दिया मेरा मन तो. यह करता था यह बताने का कि तुमने आज तक. जीवन में जितनी गोलिया देखी नहीं होगी. उससे ज्यादा मैं चला चुका. हूं तो एक दिन मैं उनके सामने बैठ ही गया. मैंने कहा मैं बैठा रहता हूं तो उन्होने. बोला कि घंटों लग जाएंगे मैंने कहा ठीक है. तो मैं सात घंटे बैठा. डीसीपी लाइसेंसिंग के ऑफिस में एक छोटा सा. अधिकारी था वहां पर सो मैं उस समय मेजर था.
सेना का मेजर था मैं यह भी सोच सकता था. मैं तो मेजर हूं और वह जो अधिकारी है. मुझसे काफी जूनियर था मैं बैठा रहा और वह. तू तड़ा के से बात कर रहा. था तो मेरे सामने लंच टाइम हो गया तो उसने. टिफिन खोला लंच करने लगा मैं बैठा. रहा फिर बाद में उसने बोला भाई तेरी. हिम्मत तो माननी पड़ेगी इतने घंट तने वेट. करा मैंने कहा मैं कुछ करना चाहता हूं. जीवन में उसके लिए मुझे आर्म्स लाइसेंस.
चाहिए फिर उसने मेरे को आम् ला बना के. दिया बट. शुभंकर ये जो जितनी भी बेइज्जती यां हुई. है अगर ये नहीं होती तो मैं जीतता भी नहीं. मेरे ये ये कई बार बच्चों से मैं कहता हूं. कि लाइफ में बेइज्जत होना भी जरूरी है. क्यों जरूरी है मैं तो अपने भाषण में. बोलता हूं कितने लोग बेइज्जत हुए हाथ खड़ा. करो और. हो और. अंदर रखो न्यूक्लियर पावर की तरह उसको. अंदर रखो न्यूक्लियर बम की तरह मत फटो.
लेकिन न्यूक्लियर एनर्जी की तरह जरूरत समय. उसको उस उस ऊर्जा को निकालते रहो जब. फेफड़े फट रहे हो जब हिम्मत पस्त हो रही. हो तब याद करो व. बेज्जती और तब 100 मीटर और दौड़ो 10 पुशप. और लगाओ दो घंटे और लगाओ उस बेइज्जती को. याद रखो. और जवाब मत दो उस समय बंदूक को.
बोलने बंदूक बोलेगी अपने. समय य जरूरी होता है जी ये क्यों आपने. चुना था शूटिंग के लिए ओलंपिक में जाना. कुछ तो रीजन ट्रिगर पॉइंट रहा होगा कि. आपने सोचा कि यह भी करना है ओलंपिक्स में. इंडिया को रिप्रेजेंट करना. है आपने 2009 त सर्व किया इडियन आर्मी को. नहीं मैं तो 2013 तक मैंने तक ओके नहीं. यही था कश्मीर में जिस तरह. की सिचुएशन जिस तरह की परिस्थितियों से हम.
निकले उन परिस्थितियों में मर भी सकते. थे कुछ हमारे साथी नहीं रहे हम बच. गए लेकिन तो अब कैसे जीना है अब वैसे जीना. है कि हर दिन मजा. आए हर दिन जीत. हो या हार हो लेकिन खुद के ऊपर हो हर दिन. जियो तो व तभी संभव था मैंने कहा यह अब. सेना का सबसे बढ़िया जो समय होता है वह वो.
वही समय होता है जब आप तलवार चला रहे होते. हो दफ्तर में पेन चलाने वाला नहीं होता जब. सीनियर हो जाते हैं माफ करिए कुछ जनरल. इसको देख रहे होंगे वो पेन चलाते हैं जो. मेजर्स है जो कर्नल है वो तलवार चलाते हैं. जब तलवार चला ली उसके बाद सेना का सबसे. बढ़िया जो समय था वो तो वही था फिर उसके. बाद मुझे लगा कि अब ऐसी चीज मैं करना. चाहता हूं जो मैं हर रोज करना चाह और जहां. हर व्यक्ति बोल रहा था अरे यह तो संभव ही. नहीं. है इस रंग का ओलंपिक्स में नहीं जीतते.
गोरे जीतते तो यह चुनौती बन गई कि. ओलंपिक्स में कुछ करना है कुछ वहां जीतना. है तो इस कारण से मैं वो जो सिल्वर मेडल. है उसे क्या बदला उसके बाद एक तो उम्मीद. जग गई उसके बाद से हमने बहुत सारे जीते. मेडल इस बार नहीं मिला लेकिन इससे पहले. पक्का था कि शूटिंग में तो एक आता ही. हमारे पास देखिए सिल्वर मेडल क्या है या. अभिनव गोल्ड मेडल क्या है. या हमारे जितने भी खिलाड़ी हैं नीरज. चोपड़ा है.
यह सायना है क्या है यह मेडल्स यह. कमिटमेंट यह अनुशासन है यह सैक्रिफाइस है. यह दूसरों से सीखने की क्षमता है यह हर. रोज हारने के बाद में भी खड़े होने की. ताकत. है यह मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद भी. अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करने. की काबिलियत है. यह काबिलियत. है तो यह काबिलियत जिसमें भी होगी आप जिस.
भी फील्ड में होंगे आप अच्छा. करेंगे यह पदक पदक कुछ नहीं है यह तो एक. समय आप जीते आपको पदक मिला बात खत्म हो गई. लेकिन आपकी जेब में क्या है आपकी जेब में. अनुशासन सैक्रिफाइस कर सकते हो आप बड़ा. लक्ष्य लेकर चल सकते हो उससे डग मगा होगे. नहीं यह तय है सबूत है आपके. पास आप मेहनत करने से नहीं. कतराते आप हारने से नहीं हार मानते ऐसा ही.
तो व्यक्ति. चाहिए यह है आपकी जेब. में मुझे लगता है फौजी के लिए रिटायरमेंट. के बाद भी बहुत सोचना पड़ता होगा कि अब. क्या करें हाउ टू रीस्टार्ट सबसे परेशान. रिटायरमेंट के बाद एक फौजी रहता है. क्योंकि उसको आदत होती है सुबह उठना जूते. बांध लगाना बेल्ट पहनना अपने आप को बांध. लेना उसके बाद कुछ ना कुछ एक्शन करते रहना. रिटायरमेंट के बाद तो इसीलिए.
मैं राजस्थान में जितने पूर्व सैनिकों से. मिलता हूं मैं उनको यह कहता हूं कि रिटायर. मत होइए मेंटली रिटायर मत होइए युवाओं को. ढूंढिए उनको ट्रेन करिए उनसे बात करिए. अपने अनुभव उनके साथ साझा करिए उनको तैयार. करिए इंडिया तैयार है 2036 में ओलंपिक. होस्ट करने के लिए इंडिया बिल्कुल तैयार. है और अभी जो 12 साल और बचे हैं उसके अंदर. और शानदार तरीके से तैयार होगा और. राजस्थान में हमने तैयार शुरू करी. है कि जब भारत में ओलंपिक हो उसके अंदर जब.
पदक आए तो उसमें राजस्थान एक बड़ा भागीदार. बने उसकी तैयारी हम अभी से कर रहे हैं. मेरे एक सीनियर प्रोड्यूसर एक एंकर थे. मेरे कॉलीग जब मुझे शोज नहीं मिल रहे थे. टीवी में तो मैंने कहा यार शो नहीं मिल. रहे तो उन्होने कहा देखो 10 शो करने से. कोई मतलब नहीं होता एक ऐसा करो कि लोग. उसको याद रखें जो नहीं मिला उसके बारे में. तो हर कोई रो रहा है जो मिला उसमें तुमने. क्या उखाड़ दिया सवाल ये है मैं सवाल आपसे. ही पूछ रहा हूं हर आदमी आपको इंडिया का. स्पोर्ट्स मिनिस्टर देखना चाहता था बट आप. राजस्थान के स्पोर्ट्स मिनिस्टर है क्या.
वहां प ऐसा कर रहे. हैं आप ओलंपियन में रहे कि आप कह रहे यह. देखो राजस्थान य करके दिखा देगा ये मैंने. अलग किया सबसे पहले तो मैं यह कहना. चाहूंगा कि क्योंकि मैंने खेल. खेला इसका मतलब यह नहीं कि मेरी नॉलेज. केवल खेलों तक सीमित. है. मैं हर तरह से मैंने अब पढ़ाई करी सेना. में गया हर तरह का अनुभव है राइट अडेप्ट. बिलिटी है सब कुछ है तो केवल खेल मंत्री.
वाली क्योंकि खेल लिया ये गलती थोड़ी ना. हुई आपने प आप पहले लंप शूटिंग में ओके. पहली बात दूसरी. बात राजस्थान में हम क्या कर रहे. हैं देश के अंदर भी जब मौका दिया. प्रधानमंत्री मोदी जी ने तो उनके विजन के. साथ हमने खेलो इंडिया शुरू. करा अमेरिका इज बिग इन गेम्स क्योंकि. कॉलेज अमेरिकन कॉलेज गेम्स बहुत तगड़े.
होते हैं वहां पे चाइना बहुत तगड़ा है. क्योंकि उनकी बेंच स्ट्रेंथ बहुत तगड़ी है. हर जिले के अंदर उनके पास खिलाड़ी है भारत. के अंदर खेलो इंडिया से वो यह होगा कि. स्कूल और कॉलेज के लेवल के बच्चे अब खेल. रहे हैं और एक ऐसे शानदार माहौल में खेल. रहे हैं जहां 100 घंटे का हाई डेफिनेशन. टेलीकास्ट होता है हीरो बन रहे हैं वहां. पर और हर साल हजार खिलाड़ियों को. स्कॉलरशिप दी जा रही है ₹ लाख की जो 8 साल. तक लगातार चलती रहेगी और पॉकेट मनी दिया. जा रहा है टारगेट ओलंपिक पोडियम के. खिलाड़ियों को जो उससे एक पूरी की पूरी.
ब्रीड शुरू होगी खिलाड़ियों की जहां उनको. स्पंस शिप भी मिल रही है आपको हर तरह से. स्किलिंग आपकी हो रही है फिर टारगेट. ओलंपिक पोडियम को हमने और शानदार बनाया. दुनिया के अंदर कहीं पर भी ट्रेनिंग करने. जाओ पहले हम फाइलें लेके घूमते थे अब वो. फाइल लेके आपका मैनेजर घूमता है हमने एक. मैनेजर लगा हु है हर खिलाड़ी के ऊपर एक. मैनेजर लगाया हुआ है वो सारी फाइलिंग वर्क. करता है. और फिर प्रधानमंत्री जी ने कहा कि यह सब. कर रहे हो लेकिन पॉकेट मनी भी दो तो 00 हज. पॉकेट मनी भी उनको दे रहे हैं ऐसा पहले.
कभी नहीं होता था और किसी दूसरे देश में. ऐसा नहीं होता सो इससे अभी माहौल पूरा. बदलना शुरू हो रहा है प्लस उनका जितना एक. तरह से समर्थन रहता है कि भाई खेल कैसे. खेल रहे हो हार रहे हो कोई बात नहीं है वो. बहुत फर्क पड़ता है इससे बट जैसे इस बार. हम एक भी गोल नहीं ला. पाए डिसपिटर क्योंकि इस बार सबने कहा कि. हमने सरकार ने पैसे खूब खर्च किए थे कई. लोग कह रहे थे बट मेडल नहीं आया हमारे पास. और वो बहुत डिस हार्टनिंग में था डिसपिटर. काफी लोग डिसपे हुए उससे इसके पीछे क्या. रीजन था आपको लगता है ये बात मत भूलिए कि.
जब चाइना लगातार हारता था तो उसने 20 वर्ष. ओलंपिक से हट के तैयारी करी 20. वर्ष हम तो ओलंपिक्स के साथ-साथ इसको पूरे. माहौल को बदल रहे हैं और इसीलिए राजस्थान. के अंदर हम 2036 की अगर तैयारी कर रहे हैं. तो हम 12 साल ले रहे हैं और चाइना ने 20. साल लिए हम कोई बात नहीं हम 12 साल की. तैयारी करके चलते हैं तो अभी हम 10 साल 14. साल के बच्चों को तलाश रहे हैं पूरे. राजस्थान में टैलेंट हंट शुरू करेंगे.
जिसके अंदर फिजिकल टैलेंट हम ढूंढेंगे उस. फिजिकल टैलेंट को फिर हम एजुकेशन भी देंगे. और स्पोर्ट्स की स्किलिंग भी देंगे ताकि. जब अंतरराष्ट्रीय लेवल तक वो पहुंचे जब 10. साल का बच्चा 22 साल का होगा 2036. ओलंपिक्स के. अंदर तो वह मेडल जीतने लायक होगा तो आपका. असली कंपटीशन किससे है इंफ्रास्ट्रक्चर. बेसिक फैसिलिटी लड़का ढूंढने से या. क्रिकेट के टुवर्ड ज्यादा जो अट्रैक्शन है. लोग बच्चों का उससे कि नहीं नहीं क्रिकेट. के अलावा यह भी खेलो क्योंकि इंडिया में.
तो क्रिकेट जैसे आपने कहा ना कि बाहर. देशों में स्कूल पे कॉलेज पे बहुत बच्चे. रहते हैं इंडिया में बच्चा छोटा होता पहले. बैट पकड़ता है तो और उसके रीजन भी है. उसमें चाम दिखता है उसमें पैसा दिखता है. उसमें फैसिलिटी दिखती है जो शिकायत साइना. ने भी हमसे की थी तो उससे आप कैसे कंपीट. करोगे इधर फिर नहीं ये गलतफहमी है मैंने. खुद ने खूब क्रिकेट खेला हुआ है हम मैं अ. और हर तरह की ट्रेनिंग करी हुई है क्रिकेट. में जो भी ट्रेनिंग करते हैं उसके बाद 16. साल की उम्र में सेना में चला गया वो जो. हैंड आय कोऑर्डिनेशन था जब आप स्लिप्स में.
खड़े होते हैं बॉल आती है और उसका हाथ. अपने आप बॉल को पकड़ लेता है वही हैंड हाई. कोऑर्डिनेशन आपका शूटिंग के अंदर इस्तेमाल. हुआ सो स्पोर्टिंग एबिलिटी सेम रहती. है हमार को एक सिस्टम खड़ा करना है जिस. सिस्टम के अंदर क्रिकेट के खिलाड़ी भी. तैयार हो कुश्ती के खिलाड़ी भी तैयार हो. आर्चरी शूटिंग इन सब के खिलाड़ी तैयार हो. वो माल हमें बनाना है और वो माहौल बनना. शुरू होता है स्कूलों से स्कूल के अंदर. स्पेयर टीचर कौन है स्पोर्ट्स टीचर.
क्यों आपका स्पोर्ट्स टीचर स्पेयर कैसे हो. गया स्पोर्ट्स टीचर तो वो टीचर है जिसके. पास स्टूडेंट जाता है जो उसको कोई एल. मैथ्स की समस्या नहीं उसको जीवन की समस्या. सुलझाने हो तो वो स्पोर्ट्स टीचर के पास. जाता है और वो उसको समर्थ उसको हिम्मत. बंता है हारा हुआ होता है तो बोलता है कल. फिराना जीतेंगे उसका कैरेक्टर बना रहा है. वो व्यक्तित्व बना रहा है वहां से शुरू. होता है. उसके बाद आप मोहल्ले में कितनी बार आपके. स्पोर्ट्स के टूर्नामेंट होते हैं आप जहां.
रह रहे हो आपके सुनने वाले जहां रह रहे. हैं वहां पर आपके मोहल्ले में पिछले एक. साल में कितने मुकाबले हुए भले ही खेल का. मैदान नहीं गली में कितने हुए वह जो पतली. सी रोड है उसके बीच में वन हैंड वन वन. क्रिकेट कितनी बार हुआ. हा कुछ भी खेलो खेलो तो. सही तो यह जो यह जो माहौल है यह बहुत. जरूरी है और उसी के अंदर फिर खेलो इंडिया. आ जाता. 11वी के 10वी 11वी के अंदर आपके मुकाबले. शुरू हो जाते हैं उसी के अंदर टारगेट ओ.
उससे आगे जाओ टारगेट ओ पोडियम हो फैसिलिटी. सेटिस्फेक्ट्री है आपकी नर में माहौल बनना. शुरू हो रहा है फैसिलिटी की बात कर रहा. हूं फैसिलिटी भी तैयार हो रही है अभी. इंफ्रास्ट्रक्चर कुछ जगह अच्छा. इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है चाइना यूएसए. ऑस्ट्रेलिया कोरिया यह ज्यादा मेडल जीतते. हैं जैसी फैसिलिटी ये दे रहे उसके आसपास. हम. है इंसेंटिव्स जो है जीतने के ऊपर जो इना. है वो मुझे लगता है दुनिया के अंदर शायद. ही कोई देश होगा जो भारत का मुकाबला कर. सकता है अब बात आती है तैयारी की उसके.
अंदर भारत अब कम से कम नहीं तो टॉप 10. राष्ट्रों के अंदर होगा जहां तैयारी का के. अंदर हम समर्थन कर रहे हैं और जैसे मैंने. कहा यह तो अभी शुरुआत ही हुई है अभी. धीरे-धीरे और माहौल 2036 ओलंपिक्स हम भारत. में कराना चाहते हैं इससे एक बहुत बड़ा. बदलाव आएगा बच्चे देखेंगे देखेंगे तो. एस्पिरेशन जगी जगी तो फिर खेलना शुरू कर. देंगे हर राज्य को तैयारी के अंदर जुट. जाना चाहिए अभी. से हर कॉलेज को शुरू जुट जाना चाहिए हर.
स्कूल को जुट जाना चाहिए हर स्कूल हर. कॉलेज यह बोलने लायक रहे कि यह जो लड़का. जीता है यह जो लड़की जीती है हमारे यहां. पढ़ती. थी ब्यूटीफुल बीजेपी को जवाइन किया आपने. आप कोई और पार्टी भी कर सकते थे कांग्रेस. कर सकते थे सचिन पायलट साह भी शायद आर्मी. बैकग्राउंड से ही है उनके फादर आर्मी में. थे और वो खुद टेरिटोरियल आर्मी वो. कांग्रेस में है आपने बीजेपी जवाइन क्यों. की या बीजेपी ने ऑफर दिया तो टिकट ले लिया.
नहीं ऐसा नहीं था देखिए दो प्रमुख बातें. एक तो और मैं फिर यह इसलिए नहीं कह रहा. क्योंकि मैं बीजेपी में. हूं कांग्रेस के अंदर अगर आपका उपनाम है. आपका परिवार पहले से है तो तो आप सीधे. आपकी एंट्री हो सकती है आप उस लेवल पर आ. सकते हो. बाकी सारे तो जैसे एक विधायक ने राजस्थान. में कहा था ना कि हमें गुलामी करने पर.
गर्व है बाकी सारे तो वही करते हैं आप. फर्डर हो आप वहां पर आप कार्यकर्ता बनकर. जा सकते हो लेकिन अगर ऊपर तक पहुंचना है. तो कांग्रेस के अंदर एंट्री नहीं है वहां. तो परिवारवाद है जैसे विनेश फोगाट अभी गई. थी विनेश गई जीत गई सरकार नहीं बनी बनी. होती तो कुछ लोग क शायद मंत्री बना दया. जाती अब यह देखिए कि वो तो जीती भी नहीं. थी ओलंपिक में मतलब अर्चनेट रहा वो कि वो. जीतते जीतते रह गए डिसक्वालीफाई हो. गई आप देखिए कि कितने लोग हैं कांग्रेस के.
अंदर. जो ऊपर के लेवल तक पहुंचते. हैं और जिनके परिवार का कोई बैकग्राउंड. नहीं एवरेज देखिए एवरेज की बात. कर बीजेपी के अंदर व एवरेज बहुत लो. है होगा एक आधे उदाहरण होंगे लेकिन बहुत. कम है सो एक बड़ी बात यह और दूस दूसरी बात. जो मैंने कसम खाई थी राष्ट्र पहले यह. निश्चित तौर पर है कि भारतीय जनता पार्टी.
राष्ट्रीयता पर काम करती. है मजबूत करना चाहती है देश को मजबूत करना. चाहती है हमारे क्लियर एजेंडे में है धारा. 370 हटाना उसका एक उदाहरण है उसका सबूत है. कि हम राष्ट्रीयता पर बात करते हैं नहीं. तो बाकियों ने तो सोचा ही नहीं था धारा. 370 हटाने का जिसके कारण वहां पर हमारे. फौजी साथी अपना बलिदान देते थे उसका किसी. ने सोचा भी नहीं था धारा 370 हटाने का. उदाहरण दे रहा हूं एक मात्र तो. राष्ट्रीयता का. भाव वो और परिवारवाद ना होना ठीक है मुझसे.
कई लोगों ने कहा कि अ राजवर्धन सिंह. राठौड़ साहब आर्मी बैकग्राउंड से हैं. रुतबा कैरी करते हैं लेकिन जब पूर्व. सैनिकों के हक की बात आई तो उन्होंने आवाज. बुलंद नहीं की वो भी पार्टी की लाइन में. लाइन में आ गए खास तौर पर ओ आरपी के विषय. में कहा गया क्योंकि कई सारे पूर्व सैनिक. कह रहे थे कि पेंशन की दर जो हैं वो दो दो. साल में संशोधित हु या कई और भी उसमें. पॉइंट्स हैं जिसमें कई पूर्व सैनिक अभी भी. खुश नहीं है वो विरोध कर रहे हैं वो कह. रहे हैं कि आप लोगों ने आवाज वैसे बुलंद. नहीं की वो आपके साथी से सहयोगी थे जिनके. साथ आप लोगों ने दशकों तक साथ में दोस्ती.
आरी की देश के लिए प्राण निछावर करने को. तैयार. थे 2018 तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार. थी राजस्थान के अंदर उसके अंदर जिस तरह का. आरक्षण सैनिकों के लिए. था उससे सब संतुष्ट थे उसके बाद कांग्रेस. पार्टी आई राजस्थान के अंदर उन्होंने उस. आरक्षण को बदल दिया उसको पेचीदा बना दिया. पेचीदा बनाने की वजह से इनकी कई सारी. वेकेंसियां मारी. गई तो कश तो कांग्रेस से है ना हम अभी अभी.
आए हैं अभी आए हमारे को 11 महीने हुए हैं. जिसके अंदर हम दो चुनाव भी लड़ लिए जनरल. इलेशन मैं देश के पॉइंट ऑफ व्यू बात कर. रहा हूं नहीं नहीं मैं आ रहा हा चुनाव दो. भी लड़ लिए और हम लगातार उसकी बात कर रहे. हैं जो आरक्षण हमारे जो जिस तरह की. फैसिलिटी सुविधा इनके वेटरन के रिक्रूट के. लिए होती थी जो बीजेपी सरकार में होती थी. उसको वापस लाने के लिए हम हर तरह से. कानूनी कारवाही कर रहे हैं और जो हमार को.
कानून बनाने राजस्थान के अंदर व भी कार कर. रहे जहां तक बात रही पूरे देश की तो देश. में तो बहुत बड़े उदाहरण है 40 साल तक जो. वन रैंक वन पेंशन के लिए धक्के खा रहे थे. सैनिक उसको प्रधानमंत्री मोदी जी ने पूरा. करा आज मेरे पिता के पास में वो भी कर्नल. से रिटायर हुए मैं भी कर्नल से रिटायर हुआ. उनकी पेंशन मेरे पेंशन से ज्यादा है. क्योंकि उन्होंने पूरी सर्विस करी लेकिन. आप यह सोचिए कि आज करीब 85 उनकी उम्र है.
और उन जैसे अनेकों जो सैनिक होंगे उनको आज. अच्छी खासी तगड़ी पेंशन मिल रही है वह. पहले जैसे 30 30 एक हजार नहीं आज के जमाने. में जो खर्च कर सकते हैं सम्मान के साथ रह. सकते हैं वो पेंशन आ रही है क्यों क्योंकि. प्रधानमंत्री मोदी जी ने बीजेपी ने यह काम. कर बट जैसे अभी भी कई मसले हैं और बीच में. प्रोटेस्ट दिल्ली में देखा होगा आपने बहुत. सारे पूर्व सैनिक यहां बैठे हुए थे और. बहुत लंबे समय तक थे तो ऐसे में एक.
क्योंकि आप लोग आर्मी बैकग्राउंड से आप. हुए या वीके सिंह सर हुए इन लोगों से दे. एक्सपेक्ट कि एटलीस्ट आप लोग को सामने आना. चाहिए था आप लोग को मीडिएट बनना चाहिए था. बिकॉज़ आप उनको ज्यादा बेहतर समझ सकते हो. है तो आप ही के लोग है तो हमारे सैनिक. जिन्होंने देश भर जिंदगी भर सेवा की है. अगर कुछ उन्हें ऐसा लग रहा है कि गलत नहीं. भी है या तो आप समझा नहीं पा रहे हो तो. कम्युनिकेशन आप लोग का था वहां वो आरोप. लगता है कि आप लोग शांत रह गए आप हुए शांत. वके सिंह सर थे वो शांत हो गए उतना. इवॉल्वमेंट नहीं दिखाई आप लोगों. ने सबके सामने आकर माइक पकड़ के उनसे.
बोलना वो दिखावा ज्यादा होता है काम कम. होता. है. लेकिन जब पार्टी की एक बैठक होती है जिसके. अंदर सही मंथन होता है और उस मंथन से. निर्णय होते हैं वहां पर मैं भी जनरल वीके. सिंह जी भी हर तरह से शामिल पहले भी थे अब. भी हैं आगे भी रहेंगे आप निर्णय देखिए ना. जैसे मैंने वन रैंक वन पेंशन का बोला वह. देखिए आप जिस तरह से मॉडर्नाइजेशन हो रहा.
है आप उसको भी देखिए जिस तरह. से जो बॉर्डर के ऊपर इंफ्रास्ट्रक्चर. तैयार हो रहा है आप उसको देखिए हर तरह से. सेना का मान सम्मान वापस जो प्रतिष्ठा थी. वापस वहां लाया गया ठीक बात लेकिन एक सवाल. फिर लोग कहते हैं कि नेता लोग एक बार. विधायक बन गए मंत्री बन गए उनकी पेंशन. बरकरार रहती है राजवर्धन जी भी जैसे. विधायक सांसद विधायक बने आपको भी पेंशन. आएगी कई स्टेट में तो है जय बर बनोगे तवार. की पेंशन आती है लेकिन फौज में यह तर्क.
देखे कि बोझ बढ़ रहा है आर्थिक दृष्टि पर. अग्निवीर ला दिया गया वीके सिंह सर का भी. मैंने इंटरव्यू लिया था इसी कुर्सी पर वो. बैठे थे और उन्होंने भी कहा कि अब वक्त आ. गया कि इसको संशोधन किया जाए इस पर नए. सीरे से विचार किया जाए जो कमियां रह गई. हैं उसको भी लोग कहते हैं कि जैसे आप. लोगों ने किया आप लोग गए फुल स्टेटस फौजी. का रुतबा लेकर आए अब लड़का जा रहा है 4. साल सिलेक्ट होगा उसमें से 25 पर बाकी. लौटेगा को लेक बहुत सारे सवाल तो उस पर भी. वो कहते कि आप लोगों ने आवाज नहीं. उठाई अभी थोड़ी देर पहले शुभंकर ने कहा था.
कि ऐसा होना चाहिए कि बहुतों को फौज की. ट्रेनिंग होनी. चाहिए फौज की ट्रेनिंग होनी चाहिए लेकिन. फौज में नहीं रहने चाहिए ओबवियसली वापस. सिविलियन लाइफ में आ जाने. चाहिए अग्निवीर में यही तो. करा कीप हियरिंग मी आउट ना कीप. यरिंग हमने कंस्क्रिप्शन जिसको बोलते हैं. अमेरिका के अंदर कई राष्ट्रों के अंदर. कंस्क्रिप्शन जो है कि जबरदस्ती आपको फौज.
के अंदर सेवा देनी है एक उम्र के अंदर वह. हमने इस तरीके से शुरू करा कि सेना के. अंदर 181 साल के के युवा आएंगे 4 साल तक. जो कॉलेज की जो एजुकेशन करते हैं वह कॉलेज. की एजुकेशन मानिए वह सेना की एजुकेशन होगी. सेना की लगेगी कि यह अनुशासित हैं हर तरह. से शारीरिक रूप से मानसिक रूप से इन्होंने. बहुत मुश्किल परिस्थितियों के अंदर अपनी.
सर्विस दी हैं देशभक्त हैं इनको हम और. उसमें कोई खर्चा नहीं होता उसमें केवल. आपको तनखा मिलती है जो 11 लाख रुपए लेकर. आप वापस जाओगे आपका खाना फ्री है रहना. फ्री है मेडिकल फैसिलिटी हर सुविधा आपकी. फ्री है अब जब मान लीजिए वापस भी जाते हो. सिविलियन लाइफ के अंदर तो आप 11 लाख रुप. लेकर जाते हो ठीक है उसके बाद में. उस समय भी सेना ने जब यह अनाउंस करा था और. सरकार ने भी कहा था कि यह स्कीम बिल्कुल ई. है बाकी स्कीमों की तरह भी इसको देखते.
रहेंगे और इसके अंदर संशोधन करते रहेंगे. तुरंत बिल्कुल परफेक्ट अनाउंसमेंट शायद ही. कहीं होता है सही बात है हर चीज को. डिप्लॉयड करा जाता है फिर देखा जाता है. किस किस तरह से इसमें और तो कैसे फीडबैक. आपके पास आ र सो सेना ने उस समय भी कहा था. जब आर्मी चीफ और उन्होंने अनाउंस करी. अग्नि तो ये कहा कहा था इसकी जरूरत है इस. कारगिल युद्ध के अंदर जो कमेटी बैठी थी. उन्होंने रिकमेंड करा कि औसत उम्र कम करो.
भारतीय जनता पार्टी ने नहीं कहा कारगिल. युद्ध कमेटी ने कहा मानना नहीं. मानना नहीं मानोगे तो फिर से वही. होगा तो वह माना अब उसके अंदर यह करा कि. सेना के अंदर भी सर्वश्रेष्ठ योद्धा आए तो. आप 4 साल रहिए उसमें से सबसे बेस्ट होंगे. उनको रखा जाएगा उसमें से जो वापस भी जाते. हैं तो वह सीआर सीएपीएन अंदर जिसमें.
सीआरपीएफ बीएसएफ ये हो स्टेट की पुलिस. फोर्सेस के अंदर वैकेंसी कर दी गई. है राइट आप अगर वहां से अगर निकलकर आप लोन. भी लेना चाहते हो तो लोन के अंदर भी आपको. खास शायद वो मिलेगी प्रायोरिटी मिलेगी. प्राथमिकता मिलेगी आपको कोई बिजनेस सेटअप. करना चाहते हो ₹ लाख तो आपके खुद ही के. हैं उसके बाद आप लोन भी लेना चाहते हो तो. आपको लोन भी प्राथमिकता से मिलती है आप. अपना जेसीबी खरीदना चाहते हो आप अपना कुछ. अर्थ मूविंग प्लांट खरीदना चाहते हो आप.
कुछ करना चाहते हो आप ट्रेडिंग करना चाहते. हो वह सुविधा भी है आपके पास में तो और. संशोधन भी हो रहे हैं क्या देश को आगे. नहीं बढ़ना चाहिए क्या देश को नए तरीके. नहीं देखने चाहिए ठीक है लेकिन इसी से एक. सवाल और आता है मेरे मन में तो मैं आपका. पूरा सवाल का वो करता. हूं तो वीके सिंह और राज्यवर्धन. हम सब इसके अंदर सहयोगी थे जहां भारत की. सरकार ने पहले जो रिकमेंडेशन हुआ था. कारगिल यूथ कमेटी को उसको ध्यान में रखते.
हुए सेना को बोला कि आप निर्णय करिए आपको. क्या चाहिए और सेना ने यह कहा कि हमार को. यह चाहिए उसके ऊपर काम हो रहा है तो यह. गलत है कहना कि बोल नहीं रहे ठीक है लेकिन. जैसे अर् सैनिक बल है बीएसएफ सीआरपीएफ. वाले कई बार मैं उनसे मिलता हूं और मुझसे. कहते हैं धीरे से हाथ पकड़ के कि आप हमारे. लिए भी आवाज उठाइए ना हमको भी पेंशन मिलनी. चाहिए हम भी कठिन परिस्थितियों में काम. करते हैं हमारा फ्यूचर सिक्योर नहीं है. यह जायज मांग. है सेना के अंदर य मुस्कुराहट काफी कुछ क.
ग. सर सेना के अंदर जी सेना के अंदर जी जो. जवान आता है व सबसे पहले जो रिटायरमेंट ए. आती है वह 15 साल के अंदर आ जाती है यानी. 35 वर्ष की आयु के. अंदर हा 35 वर्ष के अंदर आयु में एक बहुत. बड़ा वर्ग है सेना का जो रिटायर हो जाता. है 35 वर्ष की आयु में. पीएफ में कितने जो 35 वर्ष की आयु में. रिटायर हो रहे हैं हर एक जवान जो जाता है. 60 साल की उम्र तक सेवा देता.
है. इसलिए कौन सा नौजवान कौन से परिवार से. निकलकर बोलेगा कि मैं भारतीय सेना में. जाऊंगा 35 वर्ष में ही घर पर आकर बैठ. जाऊंगा बिना किसी पैसे के अपना जीवन का. सर्वश्रेष्ठ समय में दूंगा और बिल्कुल. मुश्किल परिस्थितियों के अंदर दूंगा. इसलिए वहां पर वन रैंक वन पेंशन दी जाती. है और इसलिए सीआरपीएफ औरस में नहीं दी.
जाती तो इनके भविष्य में भी आप लोग मतलब. कह रहे इसी तरह. चल यह केवल इस बात का उत्तर था जो बात रखी. गई ब उनसे उनका पॉइंट कई बारने मुझसे कहा. कि यार हम लोग भी बहुत कठिन परिस्थितियों. में काम करते हैं 100 पर मैंने खुद ने. देखा हुआ है सीआरपीएफ. हो खासतौर से. सीआरपीएफ चुनाव के लिए उनको कभी भी एक जगह. से दूसरी जगह उनकी बटालियन कहीं और है. कंपनी कहीं और.
है सारा बंदोबस्त उनको खुद को करना पड़ता. है मुश्किल परिस्थितियां होती हैं बीएसएफ. खुद बिल्कुल सरद पर रहती है पूरे समय. मुश्किल परिस्थितियां रहती हैं चाहे पुलिस. हो चाहे सीआरपीएफ हो बीएसएफ हो चाहे. एसएसबी हो चाहे आईटीबीपी. हो चाहे सीआईएसएफ होहे भारतीय सेना वर्दी. में जब आप आते हैं तो आपको हर वह मुश्किल. काम करने के लिए तैयार रहना पड़ता है तो. फिर नेता जी की पेंशन इनकी पेंशन क्यों.
नहीं अब तो आप नेता जी है ना आपसे दोनों. तरह के सवाल हो सकते. हैं नहीं क्योंकि कई बार ऐसा हुआ है. रिपोर्टिंग करने के दौरान भी और नॉन. रिपोर्टिंग में भी जब कई सारे सीआईएसएफ के. लोगों ने हाथ पकड़ के और बड़े प्यार से. कहा कि आप लोग को ये मुद्दा उठाना चाहिए. एक मिनट यह किसने कहा कि इनकी पेंशन नहीं. है इनकी पेंशन है इनकी कंट्रीब्यूटरी. पेंशन है. यह जितना कंट्रीब्यूट करते हैं भारत की. सरकार उतना ही कंट्रीब्यूट करती है इस तरह. से इनकी पेंशन बनती है व तो जैसे आप लोगों.
ने सारे सरकारी अधिकारियों को गायब कर. दिया है 2003 के बज से गायब हुआ है कि. कंट्रीब्यूट कीजिए एक मिनट यह कोई नया. सिस्टम नहीं शुरू. हुआ यह सिस्टम जैसे पहले चल रहा था वही. सिस्टम चल रहा है अभय आवाज क्यों उठी यह. आवाज इसलिए उठी क्योंकि वन रैंक वन पेंशन. दे दिया. गया वन रैंक वन देने का कारण मैंने आपको. स्पष्ट करा कि किसलिए वन रैंक वन पेंशन. दिया गया. है तो यह कोई किसी से सीपीएफ से कुछ लिया.
नहीं गया है और बदलाव और मॉडर्नाइजेशन यह. तो चलता रहता है तो इनकी भी कमेटियां. बैठती है गृह मंत्रालय के. अंदर तो जब जैसे नए रिकमेंडेशन आएंगे तब. वैसे काम हो नेता लो की पेंशन ठीक है सर. वो लोग तो अपनी करेक्ट करते रहते हैं टाइम. टू टाइम आप पेंशन की बात कर रहे हो नेता. लोग की फैसिलिटी और वो सब ठीक है नहीं. अच्छा चलो मैं मैं जवाब तो इसका बहुत रत. जनता इसको लेकर बड़े चुटल अंदाज में कहती. कि नेताजी अपनी मौज काटते रहते हैं भले.
संसद की कैंटीन सस्ती खाना पना सस्ता. बेसिक फैसिलिटी ज्यादा जो कटौती करनी है. वह नीचे लोगों को काट दो मैं. बोलू मैं इसका तो एक सेकंड में जवाब दे. सकता हूं लेकिन वह जवाब व्यक्तिगत हो. जाएगा तो इसलिए उसको छोड़ देते हैं. नेताओं को आप देखेंगे कि उनकी जिम्मेदारी.
अब मैं एक सांसद की बात करता. हूं एक सांसद के रूप. में 19 लाख वोटर एक सांसद के पास होते. हैं 19. लाख जितने. लोग एक कलेक्टर के पास भी होते. हैं कलेक्टर का महकमा देखिए आप. एक कलेक्टर के महक मेंे कम से कम 200 लोग. होते. हैं एक सांसद का देखिए सांसद को 40 या 6.
हजार रप मिलते हैं एक पीए रखने के लिए बस. और कुछ. नहीं सांसद के पास जनता कभी भी चली जाती. है दिन हो या रात कलेक्टर के पास नहीं जा. सकती सांसद को गाली देती है वोट दिया था. हमने अब यह काम करो कलेक्टर को नहीं दे. सकते. सांसद वह जनप्रतिनिधि है जो जनता के. बिल्कुल बीच में रहता है और हर दुख दर्द. पहुंचकर उसको समाधान करने की कोशिश करता. है नेता वाल लो सांसद बोल लो कुछ ही बोल.
लो उसके पास हर रोज कम से कम 10 इनविटेशन. आते हैं मेरे शादी में आना हमारे वह. देहांत हो गया वहां बैठक में आना उसको उन. सब जगह जाना. है गाड़ियां चल रही. है सब जानते हैं कि हमारे यहां सांसद आए. बैठे हमारे यहां विधायक आए बैठे हमारे घर. तक पहुंचे हमारे शादी तक पहुंचे. ताकि एक जुड़ाव हो कभी समस्या हो तो वहां. बोले पुलिस से परेशानी हो रही है घर के. अंदर कोई दिक्कत आ रही है घर के अंदर वो.
पड़ोसी परेशान कर रहा है तो जाते हैं कि. वोह हमारे यहां वो डेवलपमेंट अथॉरिटी वाले. परेशान कर रहे हैं हमारी सुनवाई हो पड़ोसी. ने पानी पूरा बाहर बहा दिया पानी आगे. इकट्ठा हो गया सुनवाई करो कुछ कराओ नगर. निगम से काम करवाओ कलेक्टर के पास नहीं. जाते सांसद के पास जाते हैं गाड़ियां भाग. रही है सब कुछ कर रहा है वो कहां से. आएगा जिम्मेदारी आप देखिए. इतनी जगह जाना है एक ही दिन में और हर. दिन जिम्मेदारियां देखिए साधन.
देखिए आप साधन नहीं. दोगे तो व जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकते. ठीक बात वह जिम्मेदारी पूरी करने के लिए. फिर गलत तरीके इस्तेमाल. करोगे वह मंजूर है क्या आपको तो नेताओं के. करप्शन पर फिर जैसे आपने आर्मी में कहा कि. बड़ा पद मिला तो बड़े सारे एक्ट लगाए गए. कि आपकी जिम्मेदारी ज्यादा है अगर आप गलत. करेंगे तो आप पर सजा ज्यादा होगी नेताओं. के करप्शन को लेकर उस तरह के प्रावधान. क्यों नहीं क्योंकि नेता जेल नहीं जाते.
हैं हुआ ना बहुत रेयर स अभी तुरंत हो गया. नहीं गिने चुने नेता है जो जेल गए जेल जेल. जाने तो और डंका पीट के आते है कुछ हमने. जीवन में बड़ा कर लिया जब निकलेंगे तो और. ऐसे हाईवे करके आते हैं अभी हमने कई सारे. स्टेट आसपास ही देख लीजिए आप क्या नाम लू. मैं हर पार्टी में ऐसे लोग हैं ताली कौन. बजाता है सामने नेता बजाते हैं क्या नेता. के लिए ताली बट जनता जनता नियम तो नहीं. बना रही होल्ड न होल्ड न शंक बात कर रहे. तो फिर खुल के बात करें ना जी जेल से बाहर. निकलकर आपने बोला नेता ऐसे करता है सामने.
जय जयकार कौन करता है जनता कर रही है ओके. लेट्स य रुक जाते ठीक है अब वापस से आते. हैं करप्शन के लिए अभी कानून बने कि जो. नेता होंगे उनके केसेस जल्दी सुनवाई होगी. उनकी मैं पूरा सहमत. हूं जीरो करप्शन होगा. अच्छे लोग राजनीति में आएंगे उससे बड़ा. फर्क पड़ेगा पूरी तरह से सहमत हो. इससे और प्रधानमंत्री मोदी ने एक बहुत.
शानदार उदाहरण रखा है. उसका आज पिछले 10 साल के अंदर केंद्र. सरकार के अंदर कोई बड़ा करप्शन नहीं हुआ. मानते नहीं मानते मतलब यह आरोप लगता है कि. अडानी जी को सपोर्ट कर दिया गया कोई बड़ा. करप्शन जैसे पश क सरकार कहती है कि सरकार. के थ्रू सेंट्रल सीएजी का कोई बड़ा करप्शन. कहीं नहीं. आया तो करप्शन नहीं हो रहा देश में आज के. टाइम करप्शन अभी तो कौन कह रहा है कि.
हमारा देश परफेक्ट है वो तो प्रधानमंत्री. मोदी जी खुद कह रहे हैं कि अभी तो बहुत. काम करना है हमार को कम से कम दिशा तो. हमने सही ले लिए अभी तो बहुत काम करना. है सो हमने जो डायरेक्शन लिया है वो तो. सही लिया है बट सारे करप्शन करने वाले. आपकी पार्टी में आते हैं आप बोलो तो नाम. गिना दूंगा मैं किस-किस पर कहा गया और फिर. वो आपकी पार्टी में आ गए तो फिर मैं मेरा. जो मूल थॉट है जो आपने आर्मी क्योंकि आप. आर्मी बैकग्राउंड से कोई नेता होता मैं. सवाल ना पूछता उससे ये सवाल क्योंकि मैं.
इसे यूज टू मान चुका हूं आपने शुरू में एक. अच्छी बात कही थी कि आर्मी की जिम्मेदारी. ज्यादा होती है वो उसे ताकत ज्यादा दी. जाती है लेकिन साथ में मेक श्यर कि आता है. कि अगर वो गलती करे तो सजा बड़ी हो सेम वे. मुझे लगता है कि जो आपने जो कहा कि गाड़ी. ज्यादा चल रही है जाना ज्यादा जिम्मेदारी. ज्यादा है सहमत हूं मैं लेकिन क्या. क्योंकि आप फौजी बैकग्राउंड से आ इसलिए. मेरे दिमाग में थॉट आ रहा है क्या नेताओं. के करप्शन पर उतनी सख्त कानून चाहिए जैसे. गटरी साहब ने कहा था कि फैसिलिटी ज्यादा. दो लेकिन कानून उतना कड़ा करो उसके करप्शन. पर उसे और ज्यादा बड़ी सजा.
मिले सही माने में अभी. जो जिसको जो हमारी जो कंटस का जो साइज. बहुत बड़ा हो गया. है उसको अब छोटा करा जाएगा उसकी सख्त. जरूरत है उसके साथ साथ. के लिए जो सुविधाएं होनी. चाहिए वह मिलनी. चाहिए आपने जैसे उदाहरण दिया.
कि पार्लियामेंट के. अंदर सब्सिडाइज खाना मिलता है सबसे पहली. बात वह सब्सिडाइज खाना केवल सांसदों के. लिए नहीं. होता वह जितने कर्मचारी हैं सभी के लिए आप. किसी कॉर्पोरेट हाउस में जाओ वहां पर. जितने भी कर्मचारी उनके लिए कैंटीन की. सुविधा होती है और व उनकी तनखा के अंदर वह. पैकेज में शामिल करा जाता है कि यहां पर. आपको सस्ता खाना मिलेगा सांसदों ने तो कह. दिया कि हमारी हटा लो सब्सिडी और शायद हट.
भी गई वहां पर या कम हो गई जैसा. भी तो यह जो मैं कह रहा हूं आपको फैसिलिटी. देना गवर्नेंस के लिए सुशासन के लिए वह. बहुत जरूरी है और अगर ऐसा होता है तो. जिम्मेदारी भी बड़ी तय होनी. चाहिए अगर सबसे महत्त्वपूर्ण मंच एक. राजनीतिक मंच है और उस राजनीतिक मंच से. आकर अगर गलत काम होते हैं तो सदा भी बड़े. होने चाहिए उसी तरह अधिकारियों की भी सदा.
बड़े होनी. चाहिए चाहे वह आईपीएस ऑफिसर हो चाहे पुलिस. वाले हो चाहे आईएस ऑफिसर हो जिम्मेदारी. बड़ी तो उसके साथ-साथ आपकी सजा भी बड़ी. होनी चाहिए ठीक सेकंड लास्ट क्वेश्चन. सरकार पर एक आरोप लगता है कि सरकार बीते. कुछ समय में अपने पसंद की फिल्में बनवाने. लगी है जैसे बीच में री को लेकर कहा कि. सरकार का महिमा मंडन हो अभी एक फिल्म आई. है साबरमती बीजेपी के सारे बड़े मंत्री से. ट्वीट कर रहे हैं हालांकि पॉडकास्ट मैंने. भी किया हमारा भी काम है लेकिन जब मैं.
सरकार की तरफ से किसी पर्टिकुलर फिल्म को. लेकर देखता हूं कि सारे मंत्री ऊपर से. लेकर प्रधानमंत्री जी से लेकर नीचे तक के. सारे मंत्रियों ने ट्वीट कर रखा है तो फिर. यह आरोप आता है खुद की तारीफ करवाई जा रही. है अपने मनपसंद की फिल्में बनवाई जा रही. है जैसा निजाम चाह रहा है वैसी फिल्में बन. रही है एक ये आरोप आता है तो यह अच्छा. कल्चर है नहीं देखिए ये सीधी इस बात को इस. तरह से से. समझिए कि इस लोकतांत्रिक दुनिया के. अंदर सबको इजाजत है अपने विचार रखने की यह.
तो पहली बार मैं सुन रहा हूं यह आरोप लग. रहा है अरे आप अपना विचार रख रहे हो क्यों. अपना विचार रखना गलत बात है. क्या जब एक यह सेगमेंट था जब मैं सूचना. प्रसारण के अंदर मंत्री था तो एक ये आता. था कि यह फिल्म ठीक नहीं है इसको यह नहीं. आनी चाहिए फिल्म. हम तो फिल्म वालों से बात करते थे कि साब.
लोगों को आपत्ति हो रही है आपकी इस फिल्म. से तो वो कहते थे तो आपको किसने मना करा. है आप अपनी फिल्म बना. लो हां तर्क तो सही है भाई लोकतांत्रिक. देश है आप अपनी फिल्म बना लो रिलीज होगी. नहीं सारी फिल्में रिलीज हो रही है हर तरह. की फिल्म रिलीज हो रही है आप ही के सहयोगी. कंगना जी है उतनी परेशान बैठी थी हमारे. इंटरव्यू में वो वो तो अपनी सरकार से. परेशान थी कह रही थी बताओ मैं क्या करूं.
हां रिलीज ही होने नहीं दी मेरी फिल्म हां. बट वो सरकारी तंत्र ने नहीं रोके भी अब. सिस्टम में सरकार के लोग नहीं वो कोई. अधिकारी वहां पे सरकार का अधिकारी ब वो तो. कोर्ट तक पहुंच गई कि पता ही नहीं चल रहा. मुझे क्यों रोक रखी है लेकिन एक अनसेट. तरीके से चल रहा था अब वो उसपे बेचारी कुछ. कह भी नहीं पा रही थी और कह रही थी तो फिर. कह रही थी उसको काट दो एक तरह से तो अ एक. तरह से तो यह बात हो गई कि दिस प्रूव्स आर. पॉइंट कि हम किसी एक वर्ग के पीछे नहीं. पड़े उस हरियाणा में इलेक्शन से डर था कि.
पिक्चर आ गई जदा नुकसान ना हो जाए वो एक. अलग चीज है देखिए वो एक अलग चीज है वो वो. चुनाव से संबंध आपने देखी साबरमती वो लॉ. एंड ऑर्डर से संबंधित है आपने देखी. साबरमती कैसी लगी आपको नहीं मेरे को अच्छी. लगी पिक्चर क्योंकि उसके अंदर. जिस जिस इशू को लेकर. वर्षों तक एक मनगण. एक एक इशू बनाया जा रहा था या छुप्पी थी.
बिकॉज नहीं आरोप लग रहे थे वीजा नहीं लग. रहा था आरोप लग रहे थे हर तरह से कि सरकार. के अंदर गलत इस्तेमाल करा गया सरकारी. तंत्र को एक वर्ग के खिलाफ आरोप लग रहे. थे कम से कम उसका एक पक्ष जनता के सामने. आया जनता अपने आप तय करेगी कोर्ट ने तो तय. कर ही. दिया कि जितने आरोप लग रहे थे गलत है.
सुप्रीम कोर्ट ने तय कर दिया कि जो आरोप. गलत आरोप लग रहे थे व जो आरोप लग रहे थे. वह गलत है उसके बाद में भी विपक्ष के एक. महानुभव सुप्रीम कोर्ट को भी आज गाली दे. रहे हैं और सरकार को भी गाली दे रहे हैं. यानी उन्होंने तय कर रखा है कि मेरे. परिवार का जो कोर्ट है वो सबसे बड़ा है. क्योंकि बचपन से मेरे को आदत थी हम कि मैं. तो तो जो बोलता था मम्मी वही मानती. थी तो आप टट कस रहे राहुल गांधी जी प मैं. तो मैंने कब बोला नाम नहीं लिया लेकिन. पब्लिक समझदार है समझती सर आपने आईबी.
मिनिस्ट्री का जिक्र किया अपने बिहार में. आपने भोजपुरी सिनेमा को बढ़ाने के लिए एक. अवार्ड शोस निकाले थे ताकि भोजपुरी सिनेमा. को सम्मानित किया जाए आपके पहले भी आपके. बाद भी कभी किसी कोने सम्मान ना दिया और. अभी भी लोग भूल चुके हैं क्या था. वो दिल्ली के अंदर एक बहुत बड़ी संख्या है. ईस्टर्न यूपी के और अपनी भाषा है अपने. संगीत. है अपनी एक कला.
है मनोज तिवारी बड़े बढ़िया बड़े बड़े. कलाकार हैं रवि किशन बड़े कलाकार हैं वहां. से निरहुवा जी भी सांसद आपकी पार्टी से है. सो इन सब ने मिलकर कहा था कि हम टूरिजम को. प्रमोट करते हैं उसी तरह हम कल्चर को. प्रमोट करते हैं सिनेमा कभी प्रमोट करते. हैं सूचना प्रसारण का काम भी है तो आप. इसको को करिए सो उसको हमने करवाया और बहुत. शानदार तरीके से हुआ बहुत बढ़िया हुआ मुझे. लेकिन लोगों को याद है लोगों ने हमसे कहा. ये सवाल की कि आपके समय हुआ तो उसका बंद.
हो गया मेरे समय वाली बात नहीं है वो तो. उन्होंने सुझाव दिया और वो सुझाव सरकार ने. माना वो कल मैं था आज कोई और होगा यह तो. एक ऐसा है जब जब भी कोई पॉजिटिव कोई सजेशन. आता है तो हुआ और उस समय जो कलाकार वहां. पर आए बहुत बढ़िया माहौल बना अरुण जेटली. जी उस समय मंत्री होते थे उन्होंने कहा. तुरंत इसको करवाओ और बहुत बढ़िया हुआ मुझे. यकीन है आगे भी भोजपुरी सिनेमा का इस तरह. के कार्यक्रम होंगे तो कोई मित्र बने आपके. पवन सिंह खेसारी मनोज तिवारी जी मेरे को.
तो इनकी भाषा में आनंद आता है जब कभी अपने. मूड में यह सब बोलते हैं और कोई संगीत. सुनाते हैं तो अच्छा लगता है मनोज तिवारी. कलाकार बहुत जबरदस्त है वो तो खड़े-खड़े. गाना बना बना देते हैं कि कला का कोई. मुकाबला नहीं है ठीक है लास्ट सेगमेंट है. सर मैं आपको कुछ नाम दूंगा आपको उनके बारे. में एक वर्ड या एक लाइन में ज कुछ कहना. होगा कुछ नेताओं का नाम लंगा मैं जो आपकी. अंत आत्मा में आए शुरुआत करते हैं अशोक.
गहलोत बहुत समझदार सचिन. पायलट बड़े ग्रेसफुल है ग्रेसफुल को क्या. कहेंगे कि. बहुत बहुत अपने आप को बहुत सही अंदाज से. काम करते हैं आई रियली लाइक हिम ए. पॉलिटिशियन अे अच्छे राजनीति नॉर्मली आई. डोंट सी ऑन कैमरा बट मुझे लगता है. पॉलिटिशियन को अपनी मर्यादा पता होना. चाहिए मुझे लगता है म मर्यादा शब्द है वो. बहुत मर्यादा में रहते हैं बहुत अच्छी बात. है अच्छा उदाहरण है वो एक पॉलिटिशियन के. बट ऐसे लोग पॉलिटिक्स में लंबा चलते हैं.
कई बार लोग कहते हैं कि ऐसे लोग पसंद नहीं. आते ना सत्ता ना विपक्ष को ना अपनों को. मुझे लगता है कि यह. जो मसाला और इस तरह की बात करके जो अपने. आप को बहुत जिसकी लाइक्स बढ़ा देते हैं. सोशल मीडिया के ऊपर मुझे लगता है वो तो. नुकसान करेंगे प्रदेश का या देश का जो स. नहीं रख सकते जो अपने आप के ऊपर नियंत्रण. नहीं रख सकते जो जिस तरह की भाषा घर में. नहीं बोली जाए वह आप पब्लिकली अगर बोल रहे.
हो तो क्या ऐसों को जिम्मेदारी देनी चाहिए. जनता को चलिए ऐसा एक मसालेदार सवाल पूछता. हूं मैं इंटरेस्टिंग रहेगा देखना सचिन. पायलट पहले राजस्थान के मुख्यमंत्री. बनेंगे राजवर्धन सिंह राठौड़ राजस्थान का. पहले मुख्यमंत्री कौन बनेगा इन दोनों में. से उनका तो खैर मैं क्या कहूं लेकिन मेरा. तो बड़ा सिंपल है जैसे मैंने आपको शुरू. में. कि जो जिम्मेदारी दी जाएगी वो जिम्मेदारी. मेरे को ऊपर से मिली है भगवान से मिली है. और वही है मेरा जीवन उसके अंदर मैं 100%.
रहूंगा उसके अंदर कोताही नहीं रहेगी बस. वही. है यही मेरे जीवन का मेरा सवाल बहुत सिंपल. है सर पहले राजस्थान का मुख्यमंत्री कौन. बनेगा सचिन पायलट या राजवर्धन सिंह राठौड़. साहब सचिन का तो मैं कांग्रेस पॉलिटिकल. पार्टी का क्या कहूं अब मैं तो आप बने. पहले नहीं उनका तो मैं क्या कह सकता हूं. मेरा तो सिंपल. है ठीक है नरेंद्र.
मोदी विजनरी. लीडर धन्य कि ऐसे समय में भारत में एक ऐसा. नेतृत्व यही कह सकता हूं सोनिया. गांधी आपने बहुत सीरियस एलिगेशन लगाया था. सोनिया गांधी राहुल गांधी प जी आप बीजिंग. ओलंपिक में थे 2000. और वहां जाकर चाइनीज डेलिगेशन से उन्होने. मुलाकात की थी उस समय नहीं पता था. मुझे लेकिन राजनीति में रहते हुए अब पता.
चला कि वह आए किसलिए थे वहां पर उस समय तो. यह लगा कि ओलंपिक टीम से मिलने. आए लेकिन आप सोचिए कोई कुछ प्रूफ था आपके. पास क्योंकि आपने पार्लियामेंट में कहा था. हा ये तो पब्लिक इंफॉर्मेशन नहीं नहीं ये. कि देश आपने कहा देशद्रोह का मुकदमा चलना. चाहिए ये बहुत बड़ा वर्ड था तो देशद्रोह. जैसा कोई आपको पता था कि राहुल गांधी. सोनिया गांधी ने देशद्रोह किया जो आपने ट. में कह. दिया एक पॉलिटिकल पार्टी देश की पॉलिटिकल. पार्टी.
अगर चाइना जैसे देश में जहां मल्टी पार्टी. सिस्टम नहीं है जहां एक ही पॉलिटिकल. पार्टी है उनके साथ एक सीक्रेट समझौता कर. लेती है. हम यह समझौता और वह पॉलिटिकल पार्टी. नेतृत्व में आएगी तो रक्षामंत्री बनेगी. प्रधानमंत्री बनेगी और उनका सीक्रेट. समझौता हु हुआ हुआ है क्या नहीं लगता आपको. नहीं लगता आप और हमें पूरे देश को पता. रहना पता होना चाहिए सीक्रेट समझता क्या. है उ डिफॉर्मेशन नहीं आया आपको.
लेके नहीं नहीं आया मैं तो खुलेआम बोला था. वहां पर पार्लियामेंट के अंदर और मैंने तो. यह बोला कि भाई बताइए तो सही कभी मुलाकात. हुई राहुल जी से. आपकी नहीं कभी कोई वन टू वन नहीं वो सामने. से आते हैं तो वो सामने ही देखते हुए निकल. जाते हैं. हमारी नजर तो जाती है उनकी तरफ लेकिन वो. सामने देख ठीक है नेक्स्ट नेम भजन लाल. शर्मा बहुत मजबूत कार्यकर्ता जिनको धरातल.
से जो उठकर आए हुए हो हम और आज राजस्थान. की बागडोर मिली हुई है तो मुझे यकीन है कि. संगठन शक्ति भी शामिल होगी और उनके साथ हम. सब मिलकर राजस्थान के अंदर एक बड़ा. परिवर्तन करेंगे रविंद्र सिंह भाटी कौन. रविंद्र भाटी अच्छा हां युवा नेता. बढ़िया है सोशल मीडिया पर काफी पॉपुलर. रहते हैं हमारे हमारे राजस्थान और देश के. अंदर युवा आने चाहिए राजनीति में आप लोग.
को लगता है नहीं बीजेपी में शामिल करा लो. अब तो आप लोग को जिम्मेदारियां बड़ी हो. रही होंगी निर्दलीय जीत कर आए थे वो मुझे. लगता है जैसा समय होगा जैसी चाह होगी वैसा. पार्टी करेगी वैसा वो करेंगे आपकी तमन्ना. है मुख्यमंत्री बनने की मुझसे कई लोगों ने. कहा कि राजवर्धन सिंह राठौड़ साहब. राजस्थान के भावी मुख्यमंत्री हैं बस. इंतजार करना है कि किस्मत की घड़िया जो है. वह कब सही तरह से सही जवा पहुंचाए कभी भी. हो सकता मुझे एक बात बताइए ये पीछे आपके.
कहा गया हां नहीं कोई बात नहीं तो यह. 2000 18 से कहा जा रहा है तो मुझे लगता है. कि अच्छी बात है कि कम से कम कुछ लोग इस. काबिल तो समझते हैं हालांकि मीडिया में. कहते हैं कि जिसके बारे में मीडिया में. कहा था वो कभी नहीं बनता है खासतौर पर. मोदी और केरा में तो कभी नहीं बना जिसके. बारे में मीडियम उड़ गया ये बनने वाला है. हा वो भी वो भी सत्य है आजकल लेकिन मैं. मैं जो कह रहा हूं कि यह कोई डिस.
क्वालिफिकेशन नहीं है अगर लगता है कि भाई. यह यह यह मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो. अच्छी बात है कि लोग सोचते हैं कि भाई. काबिल है लेकिन वही है कि एक बार पार्टी. तय करती है कि कप्तानी कौन करेगा और बाकी. टीम का होगी फिर उसके अंदर कोई गुंजाइश. नहीं फिर वैसा होगा जैसा हुआ और पूरे मन. से होगा वैसा तो राजवर्धन सिंह राठोड़. मुख्यमंत्री क्यों नहीं बने इस बार तो फुल. मेजॉरिटी. थी नहीं तो उसमें मल्टीपल फैक्टर्स होते.
हैं ज आपके निर्णय होता है कोई कोई एक. फैक्टर नहीं है मल्टीपल चीजें होती है. जिसको टॉप लीडरशिप को देखना होता है और. उसको देखकर फिर वह तय करते हैं तो बिल्कुल. जैसे मैंने कहा कि उस लेवल से उनको जो. दिखाई दे रहा है वह हमें अपने लेवल से. नहीं दिखाई दे रहा तो इसलिए प्रश्न नहीं. करना ये सहमत हूं मैं ये तो जब आप बॉस. बनते हैं तो आपका देखने का नजरिया बदल. जाता है जब आप एप्ल होते हैं आपका नजरिया. अलग रहता है इसलिए शक नहीं करना चाहिए हम. ये ठीक है लास्ट क्वेश्चन राजस्थान में. महिलाओं की हा स्थिति बहुत अच्छी नहीं जब. हम टीवी भी पढ़ते थे एनसीआरबी के आंकड़े.
बड़े परेशान करने वाले होते. थे कैसे बेहतर हो सकता है राजस्थान में. महिलाओं की स्थिति आप तो आर्मी बैकग्राउंड. से हैं ये आपको लगता है कंसर्न का इशू. है अभी हमें 11 महीने हुए हैं पिछली सरकार. का एक पूरा एक क्या होता है एक एक एक. माहौल बनना शुरू होता है और वो माहौल. महिला सुरक्षा के लिए सही बने वह अत्यंत. जरूरी है जैसे गुजरात के अंदर है सुनते. हैं कि रात को भी कोई महिला चलती हैं अपने. जेवर पहन के भी चलती है तो मजा ले कोई. उनकी तरफ देख ले इससे य एक माहौल एकदम से.
नहीं होता एक बटन दबाक नहीं होता यह माहौल. बनाना बहुत जरूरी है और यह सरकार की. जिम्मेदारी है और इसके अंदर सरकार. समाज साथ मिलकर काम करें यह निहायत जरूरी. है पुलिस उसके अंदर वर्दी वाला काम करें. वो निहायत ही जरूरी है तो य यह भी सरकार. की दारी हो जाती है और इसी तरह से. राजस्थान के अंदर जो पिछली सरकार की वजह. से जो बहुत बुरा माहौल करा हरियाणा के.
बॉर्डर से लोग आ जाते हैं लूटपाट मचा केर. चले जाते हैं या कहीं और से आ जाते हैं या. ड्रग फैल रहा है पंजाब की तरफ से आ रहा है. य इसन सबके ऊपर रोक लगाना क्योंकि य इजी. मनी होता है ड्रग वाला इसके ऊपर रोक लगाना. पुलिस प्रशासन समाज हर इसके अंदर रोल अपना. अदा करें तब जाकर हम सबका जीवन सुर क्त. होगा और यह निहायत जरूरत है हमारे प्रदेश. के अंदर या हमारे देश के अंदर महिलाएं. अपना हर तरह से रोल जो है समाज के और देश.
का रोल अदा कर सके यह निहायत ही जरूरी है. तो यह करना भी है और करेंगे भी ठीक है सर. आखिरी सवाल व्यक्तिगत तौर पूछ ले रहा हूं. मैं आपने जीवन में बहुत कुछ हासिल किया. है कैसे चीजों को हासिल करते सक्सेस कैसे. पाते हैं क्योंकि आपने हर फील्ड में. सक्सेस पाई है आप जहां रहे वहां सक्सेसफुल. रहे बहुत सारे बच्चे आपको सुन रहे. होंगे तो संक्षिप्त में मैं कहता. हूं. नॉलेज और.
एक्शन यह दो बहुत महत्त्वपूर्ण चीज केवल. जानकारी अपने आप में संपूर्ण नहीं होती और. जानकारी आपको टीचर से मिलती है मोबाइल से. टेलीविजन से ब्लॉगर. से केवल जानकारी पूरी नहीं होती अपने. बड़ों से अपने छोटों से अपने साथियों से. नॉलेज लेकिन एक्शन में डालने की हिम्मत. और एक्शन में डालने की हिम्मत किसको नहीं. होती जो हारने से घबराता है जो हारने से. घबराता है वह पहले ही हार चुका है और हर.
व्यक्ति के अंदर कोई ना कोई कोई ना कोई. खासियत होती है आज आपको नहीं पता कोई बात. नहीं मुझे भी नहीं पता था बहुत सालों तक. कभी ना कभी आप अपने अंदर की खूबी है वह. ढूंढ लोगे इंतजार करो उस खूबी को ढूंढने. का तब तक नॉलेज और एक्शन के अंदर कोई कमी. नहीं रखो हारो जी भर के हारो क्योंकि उसके. आगे जीत होगी तुम हर हार के बाद खड़े हो. जाओ और आगे बढ़ते रहो एंजॉय करो हर दिन. जियो कोई ऐसा लक्ष्य लेकर चलो जिसके अंदर. हर दिन आपकी जीत हो मैं इस रास्ते पर चलना.
चाहता हूं इसी रास्ते में मुझे आनंद है. जैसे आपने कहा हारो डाउन फॉल हो रहा है तो. डाउन फॉल में सेल्फ मोटिवेट कैसे. करें जीतने प तो आदमी को मजा आ रहा है नया. बहुत अच्छा सवाल है शिंकर हारने में रोना. आता है हौसले पस्त होते हैं होना भी चाहिए. क्योंकि मेहनत करिए लेकिन उससे तुरंत अपने. आप को उभार हो क्योंकि वहां रहने से आपको. कोई मेडल नहीं दे रहा वहां रहने में आप. खत्म हो यानी वहां से निकलना ही है उसके.
लिए परिवार नजदीक रखो ऐसे साथी रखो जो. आपको आपकी कमियां भी बताएं और आपकी पीठ भी. थपथपाई तो परिवार हो साथ में गुरु हो. अच्छे जो आपको मार्गदर्शन दे सकते हो और. साथी हो यह यह यह इस तरह की कंपनी ढूंढना. बहुत जरूरी है कई बार गानों के अंदर. हिम्मत बनती है कई बार किसी के में हिम्मत. बनती है अब मैं हमेशा यह बात कहता. हूं आपके पास मोबाइल है आपका मोबाइल स्विच.
ऑफ कर. दो मैसेज आएगा नहीं उसी तरह आपका जब तक. दिमाग के एंटीना खुले हुए नहीं है जब तक. मैसेज नहीं आएगा दिमाग की खिड़किया खुली. रखोगे तो मैसेज ही मैसेज है दिमाग की. खिड़किया बंद रखोगे तो मैसेज बंद है सो. अलर्ट रहो दुनिया के अंदर इंस्प की कोई. कमी नहीं है. ट्रू आप तलाश होगे तो इंस्पिरेशन मिलेगी. नहीं तलाश होगे तो नहीं मिलेगी ू एंड आई. विल सराइज दिस बाय सेइंग कि आपकी लाइफ को.
देख के मुझे आपकी लाइफ जर्नी प मुझे एक. शेर याद आता है जिसे मैं सराइज करूंगा मिल. सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसको है जिद. हमेशा उसकी जिसे लोगों ने कहा मुकद्दर में. लिखा नहीं है वेरी नाइस चाहे ओलंपिक हो. पॉलिटिक्स हो या आगे भी जो सपने होंगे सो. बेस्ट विशेस टू यू सर लवली टॉकिंग टू यू. थैंक यू प्लेजर थैंक यू सो मच m.
