Unplugged ft. Rajpal Yadav: 5 Cr Controversy & Tihar Jail Truth | From Chhota Pandit to Bhoot Bangla
लाइफ में दो इस काम क्रिकेट का गेम देखना है किसी का गेम बजाना है। मैं हूं छोटा. डॉन छोटा. हाउ आर यू? हाउ आर यू? मतलब कौन हो तुम? कौन हो तुम? राजपाल भाई कर्जा डॉलर में लौटाएंगे रुपया. में। राजपाल भाई 250 फिल्मों में उनको. हंसाएंगे। क्या इतना पैसा नहीं बना पाए कि लौटा सके? 5 करोड़ राजपाल ने लिया। 5 करोड़ राजपाल। चेक. 5 करोड़। चेक बाउंस का मामला 10 करोड़ की मिट्टी राजपाल के बेस में.
पड़ी होगी वो जिस पे मकान बना है तो इसके लिए आप झील तक जाने को तैयार नहीं. जब आपको हमने तिहाड़ में देखा हम सबके मन में एक ही सवाल चल रहा था जिनजिन लोगों का. संघर्ष के दिनों में राजपाल ने पेट भरा था जब राजपाल का काम चल रहा था बहुत लोग उसके. खाकर खाना खाते थे कभी भी भूख नहीं थी बिना उम्मीद के रसोई चल रही थी आए लोग उस. मैं हृदय से बात बताऊं कभी ऐसा हुआ कि राजपाल यादव डिप्रेशन में. रहे हो परेशान रहे हो उदास रहे हो और अपना ही मीम देखकर या अपना ही वीडियो देखकर हंस. पड़े बजरंग मैं पागल हूं। मैं पागल हूं।. हमें 25 साल हो गया काम करते हुए। हमें 50 साल और 70 साल के लोग बहुत अच्छे जानते.
हैं। लेकिन 2022 में भूल भुलैया सेकंड रिलीज हुई। और उससे पहले इस रोल ने इतने. मीम और इतने मिनिएचर बनाए। 10 साल का बच्चा भी मेरी ऑडियंस हो गया। वो मुझे. छोटा पंडित के नाम से जानता है। मंदिर का छोटा पंडित।. वो कौन अगरबत्ती कंपनी थी वो जिससे भूत भागे थे।. पता नहीं। दादा ना अगरबत्ती मच्छर भगाता घूम रहा था।. ठीक है। दादा तू अगरबत्ती देना और मैं ऐसे लगा के चिटियां ऐसी खड़ी है।.
जब समय खराब चल रहा हो, दुख आ रहा हो तो उससे कैसे हुए? मैंने तुझको प्यार किया। मेरे बाप ने मुझको पीटा। तन की शक्ति, मन की शक्ति, बोन पीटा, फोन पीटा। मालिक जब इतना खर्चा हो ही गया तो फिर. एक चीज है। जो भी लाना दो लाना। जो भी ला रही हो तो. लाना। नाम क्या है तुम्हारा? तुलसीदास खान। बाप का नाम? जावेद। मां का नाम?
मुमताज मुमताज. क्या तू आदमी है कि इंडिया पाकिस्तानी सर? कह रहा है तू चुप ताले गुंडे बदमाश। मैंने. कहा मैं बिजली नाम है मेरा। तो क्या करूंगा? मालिक गूंगा बोला। हां बोला। बोले वो बोला। वो कौन बोला? बोले वो बोला। मैंने नहीं बोला कि वो बोला? मैंने बोला. कि वो बोला। फिर हेरा फेरी. मालिक पैसा हो तो हां क्या कुछ नहीं हो जाता. फेवरेट सीन कौन सा था आपका चुपचुप में मेरा तो सबसे फेवरेट ये आता है.
अरे बेटी पुष्पा और अभी तक तीन बन चुकी है मंजुलिका को किसी ने देखा है वो अभी तक. रंग बिरंगा घूम रहा है एक पिक्चर आपकी बहुत अच्छी थी हंगामा. मारो मारो मारो मारो मत छोड़ो सालो कहीं आपको ऐसा लगता है कि लोगों ने आपको. टाइप कास्ट कर दिया कॉमेडी में हंगामा के राज्यपाल ही आपको 2026 में. हंगामा करते दिखे। हंगामा तो जीवन में होना चाहिए।. नवाजुद्दीन हो, मनोज वाजपेयी हो, पंकज त्रिपाठी हो लेकिन इनको देखने का नजरिया.
बड़ा सीरियस रहता है। क्या कॉमेडी जो आप रील में करते हो उससे. लोग रियल में जज करते हैं? रोमांस की कोई औकात नहीं है अगर. मुस्कुराहट ना हो। तो ये चाय या पान. कुछ बहाना ना मिले ना अपने आप को बहलाने का तो चलो चाय पी लेते हैं।. कोई मिलने आया? हां चलो चाय पीते हैं।. नाराज हो गए हैं। नहीं चलो चाय पीते हैं।. काम नहीं। अरे बैठो ना थोड़ी चाय पी लेते हैं।. मालिक इतना खर्चा हो गया है। चिट्स ले लेते हैं।. हां तो यही तो रोज ही बोलता हूं कि लंदन का मौसम. लंदन की लड़कियां लंदन का मौसम इनका कोई भरोसा नहीं है। ये कभी भी रंग.
बदलते रहते हैं। आज के लौंडे शादी ब्याह डरते हैं। आप तो. कनाडा किए थे। जी।. यूपी के लौंडा कहां कनाडा पहुंच गया? हमारी बुआ वगैरह से लंगूर नहीं।. किससे शादी की तूने? मुझसे।. तुझे तो कैसे प्यार हो गया कनाडा भाई यहां से।. मैं प्यारा नहीं लगता। इतनी बड़ी आइटम बम तेरे प्यार में गिरी. कैसे? वो नहीं गिरी।. मैं गिरा बचपन से। कभी ऐसा हुआ? किसी ने पूछा भाई फिर तूने. कैसे पटा लिया? ये तो हमारे बहुत सारे दोस्तों ने राधा को.
लेके पूछा भाई ये आज तक बिलीव नहीं हुआ। हमको मारो। हमको मारो जिंदा मत छोड़ो।. क्या स्ट्रगल के दिन में कभी लगा आपके साथ ये हो रहा है? घंटा बज सकता है। लेकिन घंटे को कोई बजा नहीं सकता है।. नहीं जाता। तड़प ही ऐसी है। हे रहा नहीं जाता।. इसमें इसके जरिए कवि क्या कहना चाह रहा था? अपनी मौत की प्लानिंग क्यों? सनातन का पहला मेंबर जिसने अंत को पहचान.
लिया उसको कोई खरीद नहीं पाया। आपका एक बड़ा वीडियो वायरल हुआ था यशु यशु. वाला। उससे बड़ा बवाल चला था। बहुत लंबे समय तक यु मेरा यु. देखिए हम मैं ना सबसे लाइफ का लो मोमेंट कौन सा था आपका? राजपाल एक बहादुर बाप का एक बहादुर बेटा है।. बचपन के राजपाल यादव बचपन के राजपाल यादव उसको कुछ कहना चाहे।. उस समय मैं अननोन स्ट्रगलर था। आज वेल नोन बिगिनर हूं।.
आज हमारे साथ वो शख्स हैं जिन्हें दुनिया कॉमेडियन कहती है। लेकिन सच यह है कि. इन्होंने दर्द को हंसी में बदलने की कला को एक नया आयाम और नया मुकाम दे दिया है।. कदमे ये छोटे हैं। लेकिन बड़े-बड़े हीरो के बीच में खड़े होकर भी फैंस की नजर में. कभी छोटे नहीं हुए। इनकी एक्टिंग का लोहा दुनिया ने माना। इनकी टाइमिंग का लोहा. दुनिया ने माना। और यह वो टाइमिंग है जो शायद किताबों से नहीं जिंदगी से इन्होंने.
सीखी है। शाहजहांपुर की मिट्टी से निकले। संघर्ष रहा, रिजेक्शन रहा, मुश्किल दौर. रहा। आया, गया फिर आया। लेकिन लोगों के दिल के बड़े करीब रहे। पैसा कितना छापे. हमको पता नहीं। लेकिन दिल में लोगों के छाप छोड़ी है। हजारों सेल्फी रोज खिंचवाते. हैं। जिंदा दिल इंसान कहलाते हैं। नाम है राजपाल यादव साहब।. धन्यवाद भाई। धन्यवाद। सही कहे नहीं कहे आपने बहुत कुछ ज्यादा ही अच्छा बोल दिया.
कितना पैसा छापे पता नहीं लेकिन दिल में जरूर छाप छोड़े हैं. पैसा पैसा तो खैर वाकई मुझे भी मैंने भी कभी जीवन में ना. पर्स रखी ना हिसाब रखा लेकिन मुझे यह पता है कि बचपन से लेके. बचपन तक हाय जियो. पैसा पैसा भी साथ रहा हम दुनिया का भी साथ रहा.
और मुझे जहां तक 11 साल की उम्र से मैं वर्किंग हूं क्योंकि कक्षा छह में पिताजी. के साथ कुछ काम किया था तो ₹8 मुझे मिलते थे और ₹15 पिताजी के तो. मिला के तो 15 दिन काम किया तो ₹120 किताबें हुई थी तो वो ₹120 कक्षा छह की. किताबें आई थी तो पिताजी ने कहा क्या बात है मेरे शेर अब किताबें अबे तूने खरीद ली. फीस मैं निपटा डालूंगा। तो मैंने सोचा कि कक्षा छह में पढ़ाई.
करूंगा। हम. लेकिन कक्षा छह ने मेरी पढ़ाई करवाई। कक्षा छह ने मेरा पढ़ाई करवाई और कक्षा छह. ने मुझे मिशन दिया और विज़न दिया। ये पता नहीं कैसे करिश्मा हुआ। अब आपके सामने. कक्षा छह का इसलिए मीनिंग है कि मैं ना सुभाकर भाई कक्षा छह में सबसे ज्यादा. स्कूल में मार्क्स मिले मुझे। एक तो मैं क्लियर कर दूं। कक्षा छह मतलब क्लास. सिक्स। अंग्रेजी वाला लौंडा जो है अच्छा क्लास सिक्स।.
हां, अंग्रेजी वाला लौंडा जो है वह पता लगे कक्षा सोचे होगी कि वह अंदर वाला तो. नहीं है रूपा। क्लास सिक्स। क्लास सिक्स।. नहीं नहीं ठीक है। अब कक्षा चलेगा? कक्षा कक्षा नहीं चलेगा। कक्षा. कक्षा जी बोल नहीं पाएंगे सब। तो. जब अनाउंसमेंट हुआ रिजल्ट का तो हमारा नाम आया कि राज्यपाल के सबसे ज्यादा मार्क्स. हैं। हां। सिक्स से 10 तक तो सब लोग ऐसे बैठे.
थे राजपाल बुलाए जा रहे थे और मैं आ रहा था लेकिन कोई देख नहीं रहा था. तो सब लोग इधर किधर राजपाल राजपाल और मैं कह रहा हूं हां आ रहा हूं कि तो. वो वहां तक और वो जो क्या बोलते थे सर्टिफिकेट लेने में उसने मुझे रात भर. सोने नहीं दिया कि अच्छा यार आज तक मैं सोच रहा था कि मुझे आगे खड़ा किया जाता है.
कि मेरी कोई इज्जत है? नहीं एक्चुअली टीचर हाइट का कॉम्बिनेशन बिछाने के लिए मुझे खड़ा करता था। इसमें. इज्जत किया कितने अच्छे उससे कोई लेना देना नहीं है। हमको लगा हमको सब आता है।. आई एम एक्सपर्ट। हम्म चुप-चुपके।. तो मुझे तो टीचर बोला राजपाल चलो बच्चे लाइन में खड़े हो। राजपाल आ गया हो. तो मुझे इतने में ही अलग लगता था कि मैं कोई विश्व प्रसिद्ध कोई तो.
लेकिन उस नाइट में एक विचार आया कि अगर आज तक आगे खड़ा किया गया. हाइट का कॉम्बिनेशन बिठाने के लिए तो और उधर. अगर जीवन में अब लाइफ भर मतलब फाइट करूंगा जीवन में आगे खड़ा खड़ा रहने के लिए. जी और वो दिन है और आज का दिन है आज मैं बड़ा. जसी बच्चा हूं पैदा होने की प्रैक्टिस कर रहा हूं एवरीडे ऐसे ही मुझे.
तो ये वाला मीम तो लेके नहीं बना था हाइट कम फाइट ज्यादा. हाइट कम हाइट ज्यादा 100% वो हाइट वो हाइट है ना अगर हाइट में भी फाइट नहीं होगी तो. वो भी हाइट नीची हो जाएगी जैसे उदाहरण के लिए दो आदमी है अपने आपने भी देखे हमने. कोई प्रवचन वाली बात नहीं टेक फॉर एग्जांपल तेंदुलकर साहब और क्रिस. गेले साहब हमारे विश्व वसुधैव कुटुंबकम हमारे क्रिकेट के वो भी दोनों लेजेंड एक. हमारे यहां पैदा हुए एक वेस्ट इंडीज में पैदा हुए हाइट और सिक्सर में जवाब नहीं.
लेकिन रॉन्ग रनिंग के लिए फाइट की जरूरत है क्योंकि हाइट सिक्सर तो. पड़वा सकती है बहुत आसानी से लेकिन अगर जिंदगी में सिक्सर लगाना है तो लंबी फाइट. फाइट करनी पड़ेगी। उसका नाम तेंदुलकर साहब है। तो मतलब और फिर उसके बाद हमने कोई हम. आप कुछ भी ऐसा नहीं कि बल्ब बन चुका है। प्लेन उड़ चुका है। कुछ बचा ही नहीं है।.
साइंटिस्टों ने कुछ छोड़ा ही नहीं कि अपन कुछ कर पाए। अपन तो जो है उसको ही. मेंटेनेंस नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन एक चीज है कि मनोरंजन के स्टेडियम में एक बार. अंगद का रोल किया शाहजहांपुर में और ढाई महीना रिहर्सल किया कि मेरा यह पांव. चलाएमान अगर कोई असुर कुमार गया तो रामचंद्र फिर जाएंगे। मैं सीता जी को हार. गया। और उसमें पूरा सिंहासन जहां पे तुम्हारा कोई नहीं। लेकिन तुम्हारे साथ.
अगर कोई था तो ब्रह्मांड रूपी राम नाम का विश्वास था और विश्वास को कोई हिला नहीं. सकता। का पैर तो कोई भी तोड़ सकता है और उसके लेके मनोरंजन के स्टेडियम में उस. फाइट ने शुभंकर भाई चाहे टीम 11 में सातवें खेलने का मौका मिला हो चाहे. पांचवें पे चाहे जब अगर ओपनिंग करने को मिली तो 50 ओवर में सेंचुरी बनी और अगर.
आईपीएल में सातवें नंबर पे गए तो बड़े हेलीकॉप्टर पड़े शॉट ऐसे खूब मारने का. मौका और अगर फील्डिंग में भी खड़े हो गए तो फील्डिंग का भी कोई बॉल ऐसा नहीं जो. राजपाल के कैद से बाहर गया हो। तो हर जगह फिर मनोरंजन एक जीवन का स्टेडियम है। हमको. एक सवाल यहां पर हमारे मन में आया। हम जब आपको सुनते हैं तो हमको जीवन दर्शन अच्छा. दिखता है। जब मैं आपको वैसे सुनता हूं ऑफ द रिकॉर्ड. सोशल मीडिया ब्रॉडकास्ट में तो राजपाल यादव एक गहरा आदमी हमको दिखाई पड़ता है।.
जिसको जीवन समझ है। अब मेरा सवाल आप सुन लो। ये. कहीं आपको ऐसा लगता है कि लोगों ने आपको टाइप कास्ट कर दिया कॉमेडी में। एक राजपाल. के अंदर और भी बहुत नहीं लगता कभी कौन कास्ट आपको टाइप कर सकता है आपके. अलावा जैसे राजपाल यादव सुनके आपको हंसी आता है. मजा आता है आपको कल भी हंसी आएगी लेकिन राज्यपाल अगर. हंगामा के राज्यपाल ही आपको 2026 में हंगामा करते दिखे हंगामा तो जीवन में होना. चाहिए लेकिन वो राजा 2004 का हंगामा फिल्म का था और ये जो है इलेक्ट्रिशियन भूत.
बंगला का है इनमें मेंटालिटी हाइट फाइट नहीं चेंज चेंज कर सकते लेकिन मेंटालिटी. हर समय चेंज कर सकते हैं। एक बिल्डिंग में 500 घर रहते हैं और हर घर में पांच लोग. रहते हैं। पंचम 2500 अगले 50 साल अगर अपने ऐसे बैठे चलो बहुत लालची हैं। रोज फिल्म. हर साल फिल्म करेंगे 10 10 तो 50.500 500 तो भैया आपके ऑफिस के आसपास टहलते मिल.
जाते हैं। रिक्शा चलाने वाले से लेकर प्लेन चलाने वाले तक। बहुत 500 मेंटालिटी. जीनी है। मुझे ऐसा लगता है। तो जिस कैरेक्टर को मिल जाए मैं उसमें एक अलग. मेंटालिटी खोजता हूं। कभी अभिनेता को कोई डायरेक्टर राइटर टाइप नहीं करता।. प्रोड्यूसर नहीं करता। अभिनेता स्वयं वो धारण करता है टाइप होने का क्योंकि उसको. यह लगता है ये मेरा लोगों को अच्छा लगता है। तो एक बात बताओ एक फिल्म ले लो आप.
वक्त का लक्ष्मण। आय हाय हाय हाय हाय वो भूला बिसरा इंसान. और आप चुपचिप गए बांडिया और मैं मेरी पत्नी और वो का मिथिलेश. हां या और ढोल ले लो उसका मारू. मार्तन ढमढेरे तो अगर ये चार कैरेक्टर हैं।. हां ये मेरे टीचर हैं। एक चंदन ने सजा दिया।. एक मैं माधुरी दीक्षित रामू जी ने सजवा दिया। एक प्रियदर्शन जी ने सजा दिया। एक.
डेविड जी ने जी सजा दिया। एक छोटा डॉन. एक मतलब रामू जी प्रदर्शन जी डेविड जी चंदन अरोरा आई थिंक चार कैरेक्टर ऐसे हैं. जो मुझे चार चौकू 16 डायमेंशन हमेशा सिखा सकते हैं कि क्या किया नहीं है क्या करना. है और जीवन में नौ रस सबके चार चौराहे 9 * 4 = 36 फिर 3D 36 * 3 = 108 108 इमोशन. जीने पड़ते हैं जीवन जीने के लिए हम तो कितने जी पाए होंगे सब मिला के पिछले 25.
साल चल चार पांच इमोशन बहुत कुछ करना बाकी है। हम तो यही सोच के. रह जाते हैं कि कितना अरे इतना ही कर पाए अभी चलो पैदा होने की प्रैक्टिस कर लूं. फिर से ताकि और कुछ अच्छा कर पाऊं। मुझसे बहुत लोग कहेंगे पूछेगा कि हाउ आर. यू? अरे हाउ. पकड़ ले। कौन हो तुम? कौन हो तुम?
अच्छा वो विजय भाई अच्छा यहां से आओगे। अंग्रेजी खराब है तुम्हारी।. मैंने पूछा हाउ आर यू? अंग्रेजी हिंदी. ये मैं कम्युनिकेशन का एंजॉय करता हूं। मैं जब गांव जाता हूं जब मैं होली दीपावली. तो मुंबई से चढ़ता हूं तो मुझे लगता है मैं हाउ आर यू बनके चल रहा हूं कौन हो तुम.
कौन हो तुम मतलब डिंगली नहीं समझते मतलब कौन हो तुम जो उसमें कॉन्फिडेंस है वो देख. के मुझे भी हंसी आती है. आय रे था तो गुरु गजब. नहीं एक कभी-कभी एक फिल्म थी गोविंदा भैया के साथ. कि वो कुछ पूछ रहे हैं मैं कुछ भागमभाग आपने देखा.
हां अरे वो बिचारे किसी का पता पूछ रहे हैं। हां. रहा नहीं जाता। रहा नहीं जाता।. अब वो निकल गया वैसे। हां और गोविंदा भैया हम लोग मजले भैया छोटे भैया बड़के भैया. मतलब बच्चन साहब तो उस तरीके का वो करते क्योंकि वो एक ऐसे अभिनेता है ना ऐसे नट. हैं वो अगर सीन हो पाया तो गोविंदा भैया की वजह से क्योंकि. जिनका अंगूठे से लेके और कंधे से लेके भरत मुनि जी ने नाट्यशास्त्र कल्पना की है ना.
उसमें नट अगर कोई मुझे दिखता है तो या तो चैप्लिन दिखते हैं या गोविंदा भैया दिखते. हैं। वाह हां और क्या सुंदर बात कही और हम इनको कॉपी नहीं करने की हैसियत रखते. क्योंकि हम बड़े अकलची नकलची हैं कि नकल एक इंस्पिरेशन होना चाहिए और अकल एक. इनोवेशन होना चाहिए इन्वेंशन होना चाहिए तब आपको सुख मिलता है और मनोरंजन एक.
विज्ञान है मैं उसका विद्यार्थी हूं लेकिन गोविंदा सबने थोड़ा-थोड़ा लिया होगा. कुछ ना कुछ तो लिया होगा सबने मुझे लगता है. टाइमिंग लगता है 100 साल में कोई ऐसा अभिनेता नाचा. होगा कोई नाचा कहीं नहीं देखा जिसमें नाच ना देखे. हमको आपका भी लेकिन आंगन सज जाए उनके थिरकन से मतलब. बोलते हैं ना हम. कि टेढ़े आंगन नाचन जाने आंगन टेढ़ा युग नहीं वो वहां पर अपनी पढ़ते थे तो मुझे.
लगता है कि अगर भैया का कहीं भी पैर या हाथ चल जाए तो टेढ़ा आंगन सीधा हो जाए. इतना अच्छा एंटरटेनमेंट नाचता नाचता आप भी बहुत बढ़िया हो हम नाचते. नहीं है हम झूमते हैं हमें किसी ने नचाया नहीं हम जब नाचने लगे 2000 में तो जैसे ही. हमने शुरू किया वन टू बोले नहीं नहीं राजपाल चकरी चकरी. डू एनीथिंग वो एनीथिंग के चक्कर में सब डांस नाचने लगा.
हां सब लंगड़ा नाचने तो सब डांस करते हैं मैं डांस बिगाड़ता हूं. क्योंकि हमारे अच्छे डांस से कोई कुछ नहीं होने वाला।. और ये वाले से जब हम झूमना पसंद करते हैं. तो कहां आप नाचे कि आदमी पगला के एकदम मतलब डायरेक्टर खुद नोटपोट में गिर पड़ा।. एक मैंने प्यार क्यों किया? एक फिल्म थी। हां हां सलमान भाई कैटरीना।. हां। तो और सुष्मिता जी थी उसमें। उसी में तो लंगड़ा नाचा था।.
हां लंगड़ा उसी के पीछे लंगड़ा हुआ था। पर जी ठीक है ना? तो वो अचानक जो अपनी बैसाखी बैसाखी जो लगा था जो लास्ट में बैठाखी उठा के नाचा हम. तो वो करने के बाद में जितने अगर आप कभी वो शॉट देखिएगा तो फिर उसके बाद में खूब. तालियां बजी और मतलब बहुत देर तक शॉट बंद रहा और मैं भी. और नहीं ऐसे कई मोमेंट आए पिछले 25 साल में. जिसमें कभी कबभार ऐसा हुआ कि एक्शन और सीन शुरू हुआ और उसके बाद में समझ गए और बहुत.
देर तक श नहीं हुआ कि मतलब कुछ ऐसा हुआ तो कैमरा कैमरामैन साहब का कैमरे की नजर. कैमरामैन की नजर उसकी नजर लेंस की फिर हमारी नजर और उनकी लेंस की नजर नजर से नजर. मिलके हम लोग जनता के सामने बड़े रिफाइंड हो के पहुंचते हैं। तो कैमरामैन साहब. हमारे थे वो एक सीन में ऐसे कर रहे थे अचानक ऐसे ऐसे करके और.
क्योंकि एक डायलॉग था कि जीजी शादी करनी है। मालामाल भी है। वो तो किससे? बोले. लड़की से। बोले कहां कब? कब प्यार कब हुआ? तो बोला आधा घंटा पहले। कोई पगलटा ही होगा. कि आधा घंटा पहले एक लड़की देख ली। वो भी लड़की को पता ही नहीं है कि इनको वन. साइडेड लव हो के शादी कर। तो मुझे इस तरीके ऑफ बीट कैरेक्टर।. हां। जो कॉर्नर कैरेक्टर होते हैं। एक्चुअली.
कॉमन मैन के अलग-अलग प्यारेप्यारे शैतान मासूम कैरेक्टर हैं। उनको जीने में बड़ा. मजा आता है। कभी गुल्लू के रूप में, कोई पुन्नू के रूप में, गुनगुनू के रूप में, कभी लेकिन कभी-कभी मिथिलेश कुमार और राजा के रूप में भी। मैं मजा मजा लेता हूं।. मनोरंजन रूपी विज्ञान के क्राफ्ट में डूबा हुआ हूं बचपन से.
और डूबने में जब जो मजा आता है ना फिर निकलने की इच्छा ना हो उसको डूबना बोलते. हैं कितनी जल्दी वो लोग बोल देते हैं वो डूब. गया वो डूब गया वो डूब गया मैंने ईमानदारी से जीवन में एक बार डूबा. और डूबा तो मौत देख ली। बिल्कुल सच में मौत देखी। 10 11 साल के अपने बुआ के यहां. घूमने गए। अपन लोग ताल तलाइयों में नहाने वाले लोग। अब वहां थी गंगा जी। अब उसमें.
गंगा जी में जो गांव के गंगा जी के किनारे के बच्चे होते हैं वो बिल्कुल छोटे-छोटे. बच्चे उनके लिए तो रोज की। वो गए सुबह-सुबह मैं भी गया उनके साथ। वो सब कूद. गए। अब मैं कम से कम मैं भी कूद गया। वो मछली की तरह बाहर खड़े हुए और मैं घोड़ों. जो वो घुमंडे में फंसा तो ऊपर जाऊं और वो पानी ऐसे नीचे ले जाए। अब. धीरे-धीरे करते तो वो बच्चे सब चिल्ला रहे हैं। जब मैं ऊपर आऊं तो मुझे लगा कि.
शोरगुल मचा हुआ है और मेरी फाइट चल रही है। ये डूब गया जब डूब गया जब डूब गया।. उधर से कोई सुबह-सुबह तरबूज खरबूज पर काम कर रहा था। वो हमारा कोई रिश्तेदार था। वो. उसने सुना तो वो भागता हुआ गंगा जी की तरफ आ रहा है। मैं उसको देख रहा हूं कि वह अरे. रुक जाइए रुक जाइए वह उधर से और मुझे लग रहा है जैसे हमारे कैमरा में नहीं कभी-कभी. ब्लर कर देते हैं ब्लर होने लगता है तो धीरे-धीरे इधर से मुझे ब्लर दिख रहा है कि. कोई भाग रहा है लेकिन अब मुझे दिखना बंद हो रहा है लेकिन मैं और मतलब कि लास्ट में.
और एक उंगली आई उसके हाथ में पकड़ी तो उतने में खींचा उसने ऐसे किया और मैं. बेहोश बाद में बहुत देर तो मैं वो चुप-चुप के बांडिया की वो नहीं है जिसमें वो. पहलवान उसको उठा के पटक देता है उसके बाद वैसे की जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। मैं. वैसे ही उठा तो सब पता लगा पूरे सब खड़े हुए कि वो डूब गया था पानी निकाला गया.
वो डूबना जिस दिन हमने देखा तो जिंदगी में 11 टू बोलते हैं कि 55 के बीच में दसों. बार उलझने तो इतनी इतनी भयंकर आई कि वो मकड़ जाल से निकलेंगे कैसे. लेकिन ईश्वर ने उस उस गंगा जी में डूबने के बाद 2026 में हमेशा के लिए डूबा दिया. कि मुझे पता नहीं था कि मैं तो अपने जीवन के झंझ बातों को उलझाने जो उलझी हुई झंझ.
बात कभी करोना कभी यह कभी वो कभी और उसमें यह जो कुछ एपिसोड ऐसा कुछ व्यक्तिगत चीजों. में हुआ जिसको एक्चुअली उसके बारे में डिस्कस नहीं करना चाहूंगा लेकिन उसकी वजह. वजह से जो हमारी व्यक्तिगत जीवन में थोड़े से जो मुश्किलात आए. तो उस समय ना एक प्रेम ऐसा उमड़ा पूरे देश का पूरी दुनिया का मतलब बहुत चुटकी लोग.
बाधक नहीं है। मतलब भी बहुत ज्यादा है। लेकिन. 99.999%. फूल बेचने वाले से लेके आ अनाथ आश्रम में रहने वाले गुल्लक के बच्चों से लेके और. रिक्शा चलाने वाले से लेकर प्लेन जो जहां मिल रहा है मैंने आपके लिए दुआ की। मैंने.
आपके लिए खूब प्रार्थना की और किसी ने तन मन किसी ने धन जो भी जिसकी श्रद्धा से. उनको लगा कि राज्यपाल मुश्किल में है तो राजपाल के साथ खड़ा। ये मैंने कल्पना नहीं. की थी। मैं हमेशा से बचपन से पारिवारिक रहा। सामाजिक रहा। राजनीतिक निष्क्रिय भाव. से रहा। लेकिन अभिनेता के रूप में अगर 800 करोड़ किचन हैं तो 500 तो भाई चेहरा. पहचानने लगे हैं। ब्रदर अब राजपाल भाई यहीं पे मेरा.
इसमें मैं सिर्फ एक फिनिश करना चाहूंगा कि ये जो प्रेम रस रूपी नदी आई इसमें जो मैं. डूबा उलझने तो मैं 50ों बार मतलब जालों में. फंसा और कोई न कोई कृष्ण गणेश जी ने हमें चूहा रूपी सारथी भेजा जो हमारे जालों को. काटा उसने और इसलिए तो हम अपनी इज्जत बाद में करते हैं। चींटी की इज्जत सबसे ज्यादा. करते हैं। लेकिन इस नदी में अब डूबा अब मुझे लगता है कि इस जन्म में इससे नहीं.
मैं निकल पाऊंगा और इससे निकलना भी नहीं चाहूंगा। और इसको बार-बार कभी आंखों का. अंजन बनके कभी दांतों का मंजन बनके और कभी अंत मन से तन मन का मनोरंजन बनके फिनिक्स. की तरह रोज जन्म लेके आपके सामने फर्ज के रूप में आपका कर्ज उतारूंगा। क्या खूबसूरत. राजपाल भाई हमने नवाज भाई का एक इंटरव्यू देखा. जिसमें नवाज भाई ने कहा कि राजपाल बहुत दिलदार आदमी रहा है। जब हम सब स्ट्रगलिंग.
एक्टर्स आते थे तो राजपाल ने घर की रसोई हमेशा चलती थी और ये बड़ा वायरल हुआ। फिर. जब आपको हमने तिहाड़ में देखा तो हम सबके जितने भी हम लोग थे हम सबके मन में एक ही. सवाल चल रहा था कि जिनजिन लोगों का संघर्ष के दिनों में राजपाल ने पेट भरा वो जो. बिना उम्मीद के रसोई चल रही थी आए लोग उसमें क्यों आज भी आम लोग तो आए. आपके पास मैं आम लोगों को जानता हूं मैंने आपके ऊपर खुद 10 वीडियो बनाए आम लोग आए. बड़े आदमी आए आपके पास मैं हृदय से बात बताऊं मैं पहले भी बोला.
कि जो दो माध्यम है सामने आने के ऐसे दसों काम हैं जो शायद मैं अपने मुंह. से कभी डिस्कस करूंगा तो मेरा हमेशा के लिए वो खत्म हो जाएगा मकान. ठीक है सोशल मीडिया के माध्यम से सोनू भाई से ले. जिस फिल्म इंडस्ट्री में पिछले 25 साल में शुभंकर भाई बिलीव करिए मेरे गांव से लेके.
और मुंबई तक कोई आदमी ऐसा नहीं जो मेरे साथ नहीं है।. फिल्म इंडस्ट्री से लेके भारतीय सिनेमा से लेके ऐसा कोई बंदा नहीं है जो मेरे साथ. नहीं है। क्योंकि मैं खुद अंदर से इतना पॉजिटिव हूं। इतना पॉजिटिव हूं। दो तरीके. की मदद होती है ब्रदर। एक मदद होती है। दोनों मदद ही बहुत उनका.
अच्छा मीनिंग होता है कि जो बहुत लोगों को पता लग जाती है और एक मदद गुप्त होती है।. तो अब सोशल मीडिया का जमाना है। तो सोनू भाई ने जिस तरीके की हमारी जो पक्ष. लिया कि राजपाल यादव एक ऐसा चेहरा है. पहले तो कि उस बंदे के पास में पीछे अगर हमने पिछले 25 साल में 10 20 रिलीज नहीं.
हुई होंगी 10-20 कंप्लीट नहीं हुई होंगी तो मिला के दो 250 फिल्में तो हुई होंगी. और ऐसा कोई प्रोड्यूसर नहीं ऐसा कोई डायरेक्टर नहीं ऐसा कोई अभिनेता नहीं. इसमें कोई मीडियाकर बात नहीं कर रहा हूं जिसके साथ एक बार फिल्म की या एक बार. एक्टिंग की उसने हमें 10 बार ना बुलाया हो काम नहीं कर पाए वो अलग बात है क्योंकि.
साल भर में 10 ही फिल्में बहुत फास्ट करोगे तो 300 दिन भी करोगे तो 30 दिन. मिलाओ तो भी 10 फिल्मों ज्यादा नहीं कर सकते मेरी ऑलरेडी पिछले 25 साल में दो 250. फिल्में हैं। तो अगर इंडस्ट्री नहीं साथ थी, प्रोड्यूसर नहीं साथ थे, मैं अकेले. कैसे यह फिल्म कर सकता हूं? सवाल यह आप आपने 250 पिक्चर किए। हम सब ने एन्जॉय. किया आप कमाल के अभिनेता हो। आम आदमी के मन में दो सवाल था जिसने आपको लेकर. संवेदना बढ़ाई। एक सवाल यह था कि यार राजपाल भाई 250 फिल्मों में हमको हंसाए।.
क्या इतना पैसा नहीं बना पाए कि लौटा सकें? यही तो क्वेश्चन है। और मैं आप मेरा प्रश्न बोल रहे हो। मैं यह प्रश्न आपसे. पूछ रहा हूं। आपसे पूछ रहा हूं। आपसे पूछ रहा हूं। यही तो बात जिस दिन समझ में आ. जाएगी पूरे विश्व को हमारा मुकदमा पता लग जाएगा। यही तो बात है कि जिस आदमी के 2005. में जिसको आज अगर मिट्टी डलवाने जाए जो राज्यपाल ने कंधे से लेके ट्रॉली से लेके. बैलगाड़ी से लेके जितनी मिट्टी डाली है ना तो 10 करोड़ की मिट्टी राज्यपाल के बेस.
में पड़ी होगी। जिस पे मकान बना है। कारण क्या है कि 5 करोड़ का पंगा क्या है? यही तो यही तो इंटेंशन होता है ना। मैं मैं मस्खरागिरी करता हूं।. लेकिन जीवन में कभी भी परिवार हो चाहे समाज हो चाहे हमारा रिश्तेदार हो हमने कभी. भी हमेशा गंभीर मशवेरागिरी की है। हम मैं ये कह रहा हूं कि मुझे मेरे देश की. चौपाल है। हमारे अपने लोग हैं।.
हम अपने तीन व्यवस्थाओं की हृदय से रिस्पेक्ट करते हैं। न्यायपालिका, व्यवस्थापिका, कार्यपालिका। राइट? यही तो है तीन जिस पे अपने देश का विधान चलता है।. हम यह कारण क्या हो रहा है? क्यों ऐसा लदी. पिछले 14 साल से. कि एक आदमी वीडियो निकाल के बोलता है कि मेरा तीन तीन सा 3 तो मुकदमे में खत्म हो.
गया होगा। 5 करोड़ के 3 मुकदमे में खत्म हो गए। तो. जो आरोपी है उसके 5 करोड़ नहीं खर्च हुए होंगे। मुंबई दिल्ली मुंबई दिल्ली मुंबई. दिल्ली. कॉमेडी करता हूं इसलिए आपको कॉमेडी लग रही है ये नहीं हो सकता हमारी चौपाल है हम लोग. हैं हमारे अपने लोग हैं जो साधक हैं उनके भी बच्चे मेरे अपने हैं जो वादक हैं उनके.
भी बच्चे मेरे क्योंकि मेरा बच्चों से डायरेक्ट मैं बड़ा बच्चा हूं. हम लेकिन ये बात जो मिसकम इंटेंशन की. मिसकम्युनिकेशन है पूरे विश्व में। मैं इसको रिफ्रेश करता हूं। आप इसको. करेक्ट कर देना। हां।. राजपाल यादव के पास पैसा है बहुत सारा। पैसे की कमी की वजह से वो जेल नहीं गए थे।. चॉइस की वजह से गए थे। उनकी एक अलग सोच पे लड़ाई थी। ये सही कोट है। थोड़ा सा. जल्दबाजी है इसके बारे में बोलना। कि मैं क्यों गया था या क्या पैसा है कि नहीं है.
या इस इस पैसे ने मैं पहले दिन से ₹5 करोड़ का मसला होता तो 2012 में निपटता ये. 5 करोड़ ने 17 करोड़ को डूबाने का काम किया है। उसमें जब ना हमारी अदालत थी ना. हम अदालत नहीं थी उससे पहले मेरी 17 करोड़ की फिल्म डूबा दी जिसमें 70% फिल्म जब इस.
कंपनी ने देख ली थी इसके ओनर ने उसमें गबान देख ली थी उसके बाद वो ₹5 करोड़ पड़ा. था तो 70 करोड़ ₹12 करोड़ ऑलरेडी फिल्म में खर्च हो चुका था और ₹5 करोड़ ऑलरेडी. जो उसमें पड़ा था उसके बाद ₹5 करोड़ ₹7 करोड़ उसके रिलीज पे खर्च 22 करोड़ का. प्रोजेक्ट बना। अगर हम आप दुश्मन भी हो जाए तो जो प्रोजेक्ट में 10 लोगों के पैसे. लगे हैं शुभांकर जी हम आप दुश्मन भी हो जाए क्योंकि यह प्रोजेक्ट जनता के बीच में.
आना है। तो जनता जब तक इसका फैसला ना कर दे तब तक ना जीरो करने का आपको अधिकार है. ना जीरो करने का मुझे अधिकार है। क्योंकि यही तो बात कह रहे हैं कि शुरू 2012 से इस. 5 करोड़ का इंटेंशन क्या था। मेरा इंटेंशन अच्छा था तो माननीय बच्चन साहब से अभी भी. Google पे जाके आप म्यूजिक रिलीज देख लीजिए। आपको वो 1520 करोड़ का प्रोजेक्ट. लग रहा है कि नहीं लग रहा है? क्या मेरा गुनाह था कि मुंबई में 1000 1200 थिएटर.
में रिलीज होने जा रही फिल्म बच्चन साहब उसका इनोग्रेशन वो चाहे दो पैसे की होती।. तीन दिन उसको क्यों नहीं चलने दिया? उससे पहले जाके खुद ही उन्होंने वीडियो में. बोला मैंने मान वकीलों के साथ में मैंने फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। अरे नादान. नादान है क्या आप? आपने 22 करोड़ को मार दिया एक प्रेस. कॉन्फ्रेंस करके। अभी तो वहां अदालत आई भी नहीं थी।.
जब आपके पास में आपका इंटेंशन बुरा था। यह बात बताना चाह रहा हूं कि आपके इंटेंशन ने. 17 करोड़ 22 करोड़ का नुकसान किया जो आज 220 करोड़ के बराबर है।. किसी को 5 करोड़ राज्यपाल ने लिया। 5 करोड़ राजपाल क्या फिल्म फंड फाइनेंस क्या. गुनाह किया? 100 साल में मैं नाराज नहीं हो रहा हूं।. मैं अपना पक्ष रख रहा हूं। एक कॉमन मेरी ये आदत है। मैं अभिनेता हूं। जो सच्चाई है.
उसमें ऐसे हूं। जो कंफ्यूजन है वो आपके सामने रख रहा हूं।. हो सकता है मेरी गलती हो। तो इसके लिए आप जेल तक जाने को तैयार हो. गए। मैं कह रहा हूं कि मैं पिछले 10 साल से हर. चीज में बोल रहा हूं कि मसला सुन लो कि इसमें एक चीज सुन लो कि ये 5 करोड़ का. इंटेंशन क्या है? मैं कह रहा हूं इसमें 17 करोड़ और लगा है। उसका एक-एक शॉट देख लो।. 2000 ढाई हजार जूनियर आर्टिस्टों जो हमारे साथी कलाकारों की भीड़ देख लो। 200 माननीय.
दारा सिंह जी से लेकर 200 कलाकार जो भारत के 36 स्टेटों के 200 थिएटर कलाकारों का. और फिल्मी कलाकारों का कॉम्बिनेशन देख लो। आपने ऐसा उसको मसला बना दिया जैसे 500. करोड़ का घोटाला हुआ है राजपाल ने कोई गुनाह किया क्या? फिल्म फंड फाइनेंस 100. साल से रिश्ता है। मेरा गुना मैं यह बोलता कि शुभांकर से ₹5 करोड़ लेके मैंने सोने.
खदान बना दी। हां यार ये तो एक्टिंग कर रहा था खदान में कहां पड़ गया? अरे राजपाल. फिल्मों में काम करता है। राज कपूर साहब से लेके शाहरुख साहब से ले जितने भी आप. बच्चन साहब से लेकर राजपाल तक हजारों फिल्में बनी।. उनमें 100 फिल्में बन रही 20 फिल्में पूरी. दुनिया में छा जाती हैं। 80 फिल्में फ्लॉप हो जाती है। अगर एक फिल्म बनती है तो. फ्लॉप बनती है या अच्छी बनती है। लेकिन फिल्म ने कर दिया फ्रॉड। राजपाल ने कर.
दिया फ्रॉड। राजपाल ने एक व्यापारी को ठग लिया। राजपाल ने लोन ले लिया 5 करोड़। तो. मैं राजपाल भाई क्योंकि मैं पूरी जनता के सामने एक प्रश्न पूछता हूं आपसे।. कि सर आपने जब आपके पास में फरवरी मार्च के चेक. थे। ठीक है। अभी सितंबर में जो है फिल्म का.
संगीत रिलीज हुआ है। अक्टूबर में फिल्म रिलीज हुई। मेरा गुनाह तो बताओ कि उसमें. क्या ऐसा हो गया था कि 1000 थिएटर में पीबीआर उसको रिलीज कर रहा है पूरे वो बन. गया है। तीन दिन भी फिल्म चल जाती तो इंडिया वीडियो सेटेलाइट चैनल दूरदर्शन. कॉलर ट्यूट बेचने लायक हो जाते। तो 15 20 10 5 कमा लेते। फिल्म तीन दिन वो.
क्या हो क्या गया था कि फिल्म को पहले माननीय हाईकोर्ट में उसका स्टे दे दिया. गया। इन्होंने स्टे ले लिया। खैर माननीय हाई कोर्ट का धन्यवाद तहे दिल से उन्होंने. स्टे दे दिया स्टे क्या बोलते हैं रोक हटा दिया. स्टे कर दी कि नहीं फिल्म रिलीज होने दीजिए फिर जब माननीय हाईकोर्ट ने फिल्म. रिलीज करने का आदेश दे दिया तो पहला गुनाह पहला अपराध पहला कंटेंप्ट इस पार्टी ने कर. दिया कि इसने जाकर तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी जिसकी आपकी पूरी मीडिया गवाह है कि.
2012 में इन्होंने अक्टूबर फर्स्ट वीक में क्योंकि की वह प्रेस कॉन्फ्रेंस जिसमें. चार-छह वकील बैठे और पूरी मीडिया बैठी और राज्यपाल ने कर दिया यह राज्यपाल ने कर. दिया वो फिल्म 1000 से 200 प्रिंट में नहीं रिलीज हो पाई।. ये मेरा पूछने का अधिकार है कि नहीं? बिल्कुल है।. बिल्कुल है। मैं आपसे पूछता हूं कि इसके पीछे अगर मुझे. इतना भी बता दो कि आपका इंटेंशन क्या था? तो इंटेंशन आपका.
अच्छा था। पैसा देने को तैयार। इंटेंशन आपका बुरा था और इसको चंद्र टरे सूरज टरे. और टरे जगत व्यवहार और पै दृढ़ श्री हरिश्चंद्र को टरेन सत्य विचार पूरे जीवन. इस इंटेंशन के लिए लड़ जाऊंगा इनसे समझौता नहीं करूंगा. मुझे लगता है कि जो लोग अब तक मैंने 2014 में माननीय अदालत में अपनी बात रखी थी.
हमने कहा इनहीं ने स्टेडियम बुलाया इनहीं ने. खिलाड़ी बुलाए और इन्हीं ने अंपायर बनके आउट करके मुझे फील्ड से बाहर. कर दिया। इनिंग दोनों की पारी समाप्त होने पर डिसाइड की जाएगी। इनकी बारी तो 5 करोड़. की पूरी दुनिया जान रही है कि क्या पांच से 10 करोड़ 40 लाख 2018 में एग्जीक्यूशन. के निपट चुके हैं। अब इनको ₹1 करोड़ ये तो पांच का मतलब हो गया ₹21 करोड़। फिर 5.
करोड़ मतलब यह हो गए 25 करोड़ तो इनको 25 करोड़ की चिंता है कि पांच का इनको 25. मिलना चाहिए लेकिन इन्होंने 25 करोड़ जो डूबा दिया तो वो 25 करोड़ 17 करोड़ उसका. 85 करोड़ नहीं होना चाहिए. बहुत इसमें मैं अपने देश की माननीय चौपाल की. माननीय हमारी सर्वश्रेष्ठ न्यायपालिका मुझे अंधा पूरा पूरा विश्वास है कि हम जो.
हुआ उसके लिए मैं जहां भी जहां मैं हाजिर आगे भी हाजिर लेकिन हमारे अपने सब लोग. हैं। मैं इस बात को इन्होंने लड़ाई शुरू की है।. लेकिन समाप्ति राजपाल करेंगे। इस बात की मैं आपको आज से नहीं ये मैं आपको प्रण तो. खैर लेता नहीं हूं कि कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं। लेकिन युद्ध या तो मैंने शुरू.
किया होता तो मैं बंद करता। युद्ध इन्होंने शुरू किया और उस समय शुरू कर. दिया था जब मुझे मैं मेंटली फिजिकली प्रिपेयर नहीं था।. लेकिन युद्ध समाप्त हमारी वजह से होगा। नहीं तो जीवन भर चले चलने दो। ये. मुझे लगता है यह जरूरी था। और मैंने प्रेमचंद जी का अगर होरी और महाजन नहीं. पढ़ा होता गोदान। या मर्चेंट ऑफ बेनिस मैंने नहीं खेला होता तो यह खेला मैंने.
समझा नहीं होता।. आज आपने बहुत ये मैं बात ने जो बोली वही मैं ईमानदारी से. यही तो आप कहना चाह रहे थे वहां स्टेज शो में जा. बस यही कहना चाह रहा हूं कि मेरा मसला सुन लो। बाकी मैं जहां भी मुझे तीन बार गया. हूं कंटेंप्ट में क्योंकि मैं माननीय हाई कोर्ट के आदेश का मेरे लिए क्या बोलते हैं.
कि परिवार में जो बोलते हैं कि एक पारिवारिक सिस्टम होता है उसका जो प्रधान. होता है वो बाप समान होता है वो कहता है ये काम करो जी बिल्कुल करूंगा लेकिन वो. तुरंत ये भी कि हमारी बात कब सुनी जाएगी तो जो पिताजी ने बोला वो तो जरूर होगा. लेकिन लेकिन जो मेरे साथ में खेल हो गया वो पिताजी को पता होना चाहिए।. सही बात है। लड़ाई इस बात की है। सही बात है। एक मजाक कर एक मजाक एक मजाक.
करें आपसे। हां हम तो मजाक में ये बोले सब लेकिन. मजाक के पीछे देखिए हमारे दादा जी ने हमेशा ये सिखाया कि बेटा मशवरा. हम गंभीर होता है और मस्खरा मनसुख होता है।. मनसुख और तनसुख में मशवरा और मस्खरा दोनों की बाउंड्री लाइन पता होनी चाहिए।.
तो सोशल मीडिया पर मशवरा और मस्करा को लेकर ही एक बड़ा सोशल मीडिया 2%. बड़ा बवाल चला जब ये सवाल आया कि राजपाल भाई कर्जा डॉलर. में लौटाएंगे रुपया में वो वो एक. बड़ा अनफॉर्चूनेट रहा लेकिन अनफॉर्चुनेट मेरे मैं जीवन में बिजली करिए. मैं 2000 से इस देश नहीं पूरी दुनिया का कलाकार चित्रकार पत्रकार कहानीकार कथाकार. व्यथाकार निर्माणकार.
वो एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. जुड़े हुए हैं और कभी भी कोई मस्ती में निकल जाए चीज लेकिन दिल दुखाने का किसी का. किसी को कोई मन में नहीं होता है। कभी बोलते हैं कभी मीनिंग कोई मैं मतलब तहे. दिल से बड़े भाई हमारे सौरभ जी और बहुत बढ़िया. पत्रकार हैं। ना बहुत और हमेशा और मैं आज भी मैंने. वीडियो भी निकाला। मैंने कहा कि मैं सोच ही नहीं सकता कि सौरभ हमारी कोई इस मामले. में मजाक के रूप में कभी-कभी होता है कि हम लोग ये सब जीवन में कभी सीन हम फिल्मों.
में बनाते हैं और बनाते हैं बहुत बोलते हैं बहुत अच्छा सीन हो जाएगा लेकिन वो. उसका मीनिंग दूसरा हो जाता है। मतलब कई बार आपसी सहजता में आदमी हल्का. मजाक कर देता है लेकिन राजफल भाई क्योंकि आप एक परेशानी से गुजर रहे थे। बड़े समाज. ने उसको बड़े गुस्से से लिया। वो तो आपका वीडियो था जिसकी वजह से वो मामला ठंडा पड़. गया। हम आज भी वरना सलमान भाई को भी बुरा लग गया था।. बड़े भाई हैं वो और हमेशा एक इंडस्ट्री में हमसे 10 12 साल सीनियर हैं। जब वह.
सुपरस्टार थे तब हम लोग बच्चे बन के वहां पे गए थे। कि कहां मैंने प्यार किया जब. रिलीज हो चुकी थी 89 87 88 और हम लोग 97 में तो हम लोग हमेशा हमारे. सिस्टम में कलाकारों में अब जब आमने-सामने होते हैं तो बिल्कुल एक दूसरे से उम्र. उम्र कतई मायने नहीं रखती। लेकिन जब सिस्टम में होते हैं तो 10 साल से कौन.
सेवा कर रहा है? 5 साल से कौन सेवा कर रहा है उसमें बड़ा आदर है सबका और वो उन्होंने. हमेशा बड़े भाई की भूमिका निभाई सबके उसमें लेकिन मैं ये जानता हूं कि मैं इन. चीजों में मेरे साथ इंडस्ट्री भी साथ में है मीडिया भी साथ में देश भी साथ में. सब साथी इसीलिए मैं क्लेरिटी के लिए पूछ रहा हूं आपको बुरा नहीं लगा था जब वो. स्टेटमेंट आया था बिल्कुल नहीं बुरा लगा बिल्कुल बुरा नहीं. लगा क्योंकि मैं मैं इस चीज को बुरा लगाने के लिए बैठा मेरी जिंदगी में मैं कभी भी.
कोई चीज करता हूं तो अगर मैं कर रहा हूं कि यहां पे बहुत लोग अच्छा लगेगा वहां पे. कभी पता लगा कि आया डायलॉग चला गया समझ में नहीं आया तो बोलते हैं अच्छा ये इसका. मीनिंग तो बुरा लगने के लिए जिंदगी में बहुत लोग हैं हमने तो हंसी खुशी का दामन. पकड़ा है और हम हंसी खुशी जीना चाहते हैं और हंसी. खुशी से ही मरना चाहते हैं और जीवन में जो भी मिले हम.
हंसीखुशी से ही उससे संवाद के रूप में कोई भी दुनिया का विवाद हो लेकिन संवाद के रूप. में दुनिया के हर उस मंच का स्वागत करना चाहता हूं जिसमें उसको लगता है कि मुझे. राजपाल को समझना है तो मैं उसके साथ बैठना चाहता हूं।. अद्भुत अद्भुतास अद्भुतम अब इससे पहले कि हम भूत बंगला पहुंचे और कॉमेडी शुरू करें।. हमको एक शायरी सुना दो कोई यार। बहुत बढ़िया शायरी करते हो आप। फिर एक हम भी. सुनाएंगे। एक सोनू निगम साहब ने बड़ी अच्छी एक जब भोपाल प्रेयर फॉर रेन.
फिल्म रिलीज हुई थी उसमें मुझे लीड भूमिका करने का सौभाग्य मिला था लेकिन वो फिल्म. बनी तो बहुत मेहनत से लेकिन उसका वो रिजल्ट नहीं आ पाया. हम जो टाइमिंग उसकी थोड़ी रिलीजिंग ठीक नहीं. थी 2014-15 या हो सकता है मेरी टाइमिंग ठीक ना हो. वैसे पंडित वंडित आप भी दिखा दो कुंडली कुंडली दिखवा दो नहीं मैं एक जन्म लेना ही. सौभाग्य है। बाकी जो मिल जाए वो सब सोने पे सुहागा है। ठीक है? तो उन्होंने कहा कि.
लोगों ने मुझे एक बोले राज्यपाल को देख के हमेशा ये लगता है क्योंकि मैं हमेशा अपने. आप को फिनिक्स मान के चलता हूं। कि मैं रोज ऐसा 24 घंटे में अपने आप को. समाप्त करके राख बन जाता हूं और सुबह-सुबह अपने आप में जीवन देकर और कोशिश करता हूं. कि दिन भर लोगों की सांस बनूं। वाह। ठीक है। तो फिनिक्स चिड़िया कहता है कि लोगों. ने मुझे दफनाने की कोशिश तो बहुत की। हम लोगों ने मुझे दफनाने की कोशिश तो बहुत की.
लेकिन उन्हें यह पता नहीं था मैं तो नन्हा सा बीज हूं।. आय हाय हाय हाय अब नन्हे से बीच में हमको भी एक शायरी याद. आई। जी।. मैंने तुझको प्यार किया।. दिल बाप मुझको पीटा। तन की शक्ति, मन की शक्ति।. ये मुझे बड़ा अच्छा लगता है। मैंने तुझको प्यार किया।. तेरे बाप ने मुझको पीटा। तन की शक्ति मन की शक्ति बोन पीटा। फोन बीटा.
जैसे ट्रकों में जा ट्रकों में जा रहे हैं। हर समय इंटेलेक्चुअल का बोरा लेके सर. पे घूमो। हां। तो कितना बढ़िया कि ट्रक जा रहा है. ढता है कि चलती है गाड़ी खिलते हैं फूल जलते. हैं चमचे उड़ती है धूल समय मिलने पर पास दिया जाएगा.
ये यार ये भी शब्द किसी ने यही कला है सबसे इनोवेटिव आदमी ट्रक के पीछे वाले ही. होते हैं भाई साहब मतलब कमाल की लाइनें लिख लिख के तो मुझे ना जितनी सरल लता में. गा के दो दो चार का पहाड़ा याद होता है। दो एकम दो छ दो चौ और फिर चार बचे दो दूनी. चार तो वो उसमें जो मैंने पढ़ाई और कढ़ाई की. उससे बढ़िया मुझे सरल रास्ता कोई दिखा नहीं आज भी वही अपना के चलता है।.
लेकिन याद रह जाता है जैसे याद रह जाता. है। वो पेशाब वाला लिखा है यहां गधा मूत रहा।. वो आदमी देख रहा है तुम अरे यार क्या फिर दूसरी जगह चला जाता है।. नहीं लेकिन वो हमारे होशियार लोग हैं। जहां लिखा होता है यहां गधा। वही वो गधा. कर देते।. भूत बंगला में आपको कुछ चीजें बड़ी अच्छी देखने को मिली।. क्या जैसे हमको पिछली बार हम भूल भुलैया देखे थे। एक तो हमारे मन में ये सवाल था. पिछली बार जब प्रियदर्शन के साथ आप आए थे। वो कौन अगरबत्ती कंपनी थी वो जिससे भूत.
भागे थे। मुझे पता नहीं।. हमें तो वो दादा जो अपना प्रोडक्शन वाला मिल गया थी। इतनी बड़ी-बड़ी थी।. ये लगवाए प्रियदर्शन जी लगवाए थे। अक्षय कुमार लगवाए थे। कौन लगवाया था पिछली बार. वो? छोटा पंडित नहीं प्रियं सर ने बता ही दिया है तो मैं. पहले प्रियंस सर चाहते थे फूल लगा ले हां क्योंकि फूल भी एक सिंबल है. हां तो मैं उधर से आया तो वो दादा ना अगरबत्ती. मच्छर भगाता घूम रहा था ठीक है तो मैंने दादा तू अगरबत्ती देना और मैं ऐसे लगा के.
चिटिया ऐसी खड़ी ऐसे तो एक्चुअली ये देखिए ये कैरेक्टर ऐसा था ना एक भरत मुनि. जी के नाट्यशास्त्र में एक विदूषक है तो वो क्या होता है वो दरबार का बड़ा चहेता. होता है और हमेशा अपनी मजाक उड़वा के बाकी किसी किचन को बुरा ना लगे ना राजा को बुरा. लगे ना रानी को बुरा ना प्रजा को बुरा लगे और वो अपनी मजाक उड़ा के दरबार का सबका. चहेता बन जाए वही तो है छोटा पंडित जिसका कोई अब बताइए जब तक.
भूत भगाने की उनको विद्या आती थी तब तक तो यूं चल रहे थे जब से भूत देख लिया तब से. अरे बेटी अरे बेटी उस जब तक भूत नहीं देखा था तब तक एबनॉर्मल. थे। पंड प्रिय जी ने यही समझाया कि जब तक इनको भूत नहीं देखा है तब तक इनसे बड़ा. कोई योद्धा नहीं है। और उसके बाद में भूत दिखने के बाद ये इनसे ज्यादा कोई नॉर्मल.
नहीं है। मतलब बिल्कुल नॉर्मल जैसे कोई चीज पता टीले बैठ गए। अरे अरे बेटी पुष्पा. अरे बेटी पुष्पा मतलब जिसका कोई सिर पैर नहीं है वो डायलॉग. बोल वो क्या था वो किसने लिखा था वो अरे बेटी. पुष्पा नीरज नहीं आई थिंक नीरज नीरज. नीरज बोरा जी हां. हंगामा का सालों मंदिर का घंटा समझ के रखा है. मारो सालो मारो मुझे मतलब नीरज भाई और प्रियंस सर और राजपाल. वो नीरज भाई बहुत जल्दी चले गए बिलीव करो और परेश भाई.
नहीं ये मुझे 10 20 फिल्में नीरज भाई के हाथों और भी करने को मिल जाती. तो पता पता नहीं वो क्या जादू करके चले जाते। ये जितनी भी चुपचुप के की लाइनें आप. देखो जिसमें छोटे की मैं मरा हुआ जीतू के. लंगुटिया यार हूं। मरे हुए जीतू खुद ही नहीं समझ में आ रहा है। डर गया कौन है? कौन है तू? तो वो डर गया उसको लाए तो मालिक जब इतना खर्चा हो ही गया तो फिर. एक चीज ये तो पता है हमारे ऑफिस में लौंडे कभी हम.
पार्टी वार्टी देते हैं तो वो भी कह देंगे मालिक जब इतना खर्चा हो ही गया तो. मतलब ये डे टू डे लाइफ का हिस्सा जो भी लाना धो लाना. हां जो भी लाना दो लाना दो लाना तो वो ये छोटी-छोटी रोजमर्रा की जो अपने घर में यूज़. हो जाते हैं ना जब अपन को चिढ़ा देते हैं जैसे आपसे अगर किसी छोटा भाई या छोटी बहन. से बोल दो पानी ले आओ ए खुद नहीं ले लेते। अच्छा उसके बाद में जैसे वो अरे तो चाचा. या कोई बैठा या मम्मी बैठी ले आओ जाके पानी तो वो जाएगी गुस्से में पानी लेने.
जाएगा तो दूसरा चिढ़ाने के लिए बोल अरे दो गिलास ले आना तो और अच्छा तो आई थिंक. घरेलू ह्यूमर में कॉमेडी ऑफ़ एरर के प्रियं वैज्ञानिक हैं।. नाम क्या है तुम्हारा? राजा नहीं तुलसीदास खान. माताजी नहीं एच चिप साले गुंडे बदमाश. बाप का नाम जावेद चौरसिया जावेद चौरसियां मां का नाम. मुमताज मुमताज देवी तो कह रहे तू क्या क्या तू.
आदमी है कि इंडिया पाकिस्तानी सर कह रहा है तू चुप ताले गुंडे बदमाश कहा मैं बिलरी. नाम है मेरा तो क्या करूं नहाऊं ये नीरज भाई ने और प्रियं सर का कुछ स्लैप. स्टिक विद कॉमेडी ऑफ़ एरर वो जो वो हमेशा बोलते हैं डोंट एक्ट. ये एक्ट कौन कर सकता है मेरा भूत भगा दीजिए कान पे झापड़ पड़ा ऐसा लगा कान से. चिड़िया निकल गई हां चलिए तो ये उसमें वो ये कह रहे हैं कि.
अगर आपको सिचुएशन में रह के आप एक्ट मत करो सिचुएशन ऐसे जियो जैसे ये जीवन है और. वो ही हम लोग मत तो जैसे प्रियदर्शन सर को हिंदी आती नहीं. सर को आती है हिंदी मतलब इंटरव्यू में नहीं बोलते वो जैसे हमें अंग्रेजी समझ में. आती है। लेकिन हम बचपन से हिंदी में बिल्कुल खड़े. और बड़े और हर तरीके से तो जब हम भी जब भी बोलते हैं तो अक्षय पाल जी बोलते हैं यार. ऐसा लगता है तू बढ़िया कविता सुना रहा हो। तो मैंने कहा कि मैं. हिंदी में दो घंटे ऐसे बोल सकता हूं क्योंकि उसके लिए कभी लिखने की जरूरत नहीं.
पड़ेगी। तो वैसे प्रिय जी की जो अपकमिंग क्योंकि उन्होंने पूरे देश की सिनेमा में. नेशनल इंटरनेशनल तो इंग्लिश में वो हमेशा समझाते हैं या बोलते हैं।. उनके चक्कर में मैं भी उनसे अंग्रेजी बोल. रहा हूं। वही मैं कह रहा हूं। उनकी हिंदी माशा्लाह. आपकी अंग्रेजी माशा्लाह तो दोनों में इतना जबरदस्त टाइमिंग कैसे निकल आता है फिर? आईज की भाषा से बड़ी कोई भाषा नहीं होती। चाहे जंगल का कोई भी जानवर हो ना वो आईज.
टू आईज मिला के एक दूसरे को रिस्पेक्ट देता है। बोल के तो कुछ कर नहीं पाता।. दुनिया की कोई भी लैंग्वेज हो। 72 लैंग्वेज है शायद अपने विश्व में ऐसा. मुझे लगता है कि ये ना इसके लिए गूंगा हमारे यहां पे इस बात के कि जो. मालिक गूंगा बोला हां बोल नहीं पाते हैं वो भी प्रॉपर जी. पाते हैं प्रॉपर बैठ पाते हैं प्रॉपर चल पाते हैं प्रॉपर सर्विस करते हैं प्रॉपर. मोबाइल लेते हैं तो मुझे लगता है कि भाषा समझने के लिए.
कम्युनिकेशन की बहुत जरूरत है और उसके लिए इमोशन कोई. भी रस समझाने के लिए आईज के अंदर का इंटरेक्शन बहुत जरूरी है और उसमें मैं. प्रियं जी के साथ रामू जी के साथ या डेविड धवन साहब के साथ चंदन अरोड़ा के साथ ऐसे. मैंने बहुत सारे लोगों के अनीश बाजमी जी के साथ बहुत सारे लोगों मुझे उसमें कभी.
तकलीफ नहीं होती। जितना अच्छा कठिन कैरेक्टर है उतना ही समझने में आसानी होती. है। मालिक गूंगा बोला।. हां बोला। बोले वो बोला वो कौन बोला? बोले वो बोला। बोले आज मालिक चलते हैं इस. मुच्छड़ घर। मैं नहीं बोला। वो बोला पर तूने ही तो. बोला कि वो बोला। अरे मैंने नहीं।. मैं कब बोला? यही शब्द है। यही जस्ट पेशगी है। अभी भूत बंगला का जब मैंने ट्रेलर देखा तो. मेरे को थोड़ा भूल भुलैया दिखाई पड़ रहा था। ये ट्रेलर जो आप देख रहे हैं एक्चुअली हम.
लोगों ने जो पीछे काम किया है हम उसको जस्ट याद दिलाने के लिए. जो ट्रेलर देख रहे हैं आप जिसमें आपने देखा होगा कि अकी पाजी कोई लाइन बोल रहे. हैं बहन जी डर गई या मेरा हंगामा का जो डायलॉग है तो ये प्रियंन जी परेश जी और. राजपाल अकी पाजी जो हम लोगों ने पिछले 2000 से 2015 के बीच में जो फिल्में बनाई. जो आज रील के माध्यम से सोशल या मीम के माध्यम से मीम के माध्यम से.
वो सिर्फ यूनियन याद दिलाने के लिए फिल्म जब देखोगे ब्यूटीफुल फिल्म एक डिज्नी. डिज्नी बच्चों के लिए फैंटसी हॉरर कॉमेडी और कहीं स्लैप स्टिक कहीं पे कॉमेडी ऑफ़. एरर भरपूर ड्रामा भरपूर आपको सब कुछ न्यू वो भूल भुलैया थी उसमें साइकोलॉजिकल. स्टोरी थी। ये एक हॉरर कॉमिक और फेंटसी भी इसमें तो आज की 2026 की लेकिन एक.
ब्यूटीफुल स्टोरी के साथ एक फिल्म देख भाई भूत से हमारी बचपन में फटती थी।. हम्म कभी आपकी फटती थी। भाई मैं भूत से हमेशा डरता हूं कि भू अगर आदमी बचपन से. प्यार लेके साथ में चलता है और खाना जैसे खाता है और शादी ब्याह बचपन से देखता है. वैसे जहां पैदा होता है उसके आसपास का सराउंडिंग उसको किस्से ही सुनाता रहता है. आपके यहां भी कहानी था कि फलाने पीपल पेड़ की वहां पे रहते थे उधर से वो बिल्कुल.
बैलगाड़ी निकल नहीं पाती थी वहां पे तो वो चिल्ला रहा था तो रात भर लोग उठाए तो बहुत. मतलब हमें प्रॉपर हमारी जब परवरिश की जाती है जैसे छोटा आ छोटा छोटा बड़ा आ वैसे ही. हमें भूत सिखाया जाता है। उधर मत जाना उधर हवा है। आ उधर जंगल हां भूत उधर वो मतलब. वो आता है। अच्छा लेकिन जब मैं बड़ा हुआ पढ़ा तो मुझे ऐसा. लगता है कि हम लोग जैसे बोलते हैं कि बहुत क्यूट बनाया गया.
कि आत्मा अजरमर है। बैड एनर्जी और पॉजिटिव एनर्जी या नेगेटिव एनर्जी पॉजिटिव एनर्जी।. कोई साकार के रूप में भी अपन पॉजिटिव और नेगेटिव मेंटालिटीज के होते हैं। वैसे ही. हवा लेकिन जैसे सांस है अब बोलते हैं अपन जैसे. हनुमान जी का नाम लेते हैं तो भूत पिशाच निकट नहीं आए तो हमने तो नहीं लाइन लिखी. है लेकिन कि हनुमान जी का आप नाम ले लो तो भूत पिशाच निकट नहीं तो इसके मतलब भूत.
पिशाच कहानियों से लेके जंतरमंतर जंगलों से लेके और उपन्यासों से ले कितने चीजें. बनी है तो शादी ब्याह भूत लव ये जीवन भर था है और रहेगा. ठीक है और इसमें थ्रिल मिलता है इसका एंजॉय करना. चाहिए अब आपने मीम का जिक्र किया तो हम आपको कुछ. फोटो दिखाएंगे आपको पहचानना है किस पिक्चर का आपके है और क्या है पहला. छोटा डॉन एक डायलॉग. दो अक्षर का छोटा नाम लाइफ में दो इज काम क्रिकेट का गेम देखना है किसी का गेम.
बजाना है मैं हूं छोटा डॉन मेरे को बड़ा मजा आया था पिक्चर. और पुनीत भाई के साथ सीन वो जो उठा के वो बड़ा गजब सीन था लेकिन वो. मैं राणा फ्रॉम और वो जो है कौन वो जो गाड़ी में उठा के. फेंक देता है आपको अब जाके फिर भी वहां पे. और वो जो छोटा बच्चा आता है पेशाब कर देता है.
हां बोला है ये मत कहना बहुत तू तू हो गया. दूसरा भी फिर हेराफेरी. सीन क्या था ये था कि. मालिक पैसा हो तो हां हां क्या कुछ नहीं हो जाता. मालिक पैसा हो तो क्या कुछ नहीं ये ये भी कर पिक्चर थी आपकी प्रियदर्शन जी. की और अक्षय कुमार की हां और अक्षय भाई के साथ इस फिल्म से मेरी. ट्यूनिंग और जनता जनार्दन का बहुत प्यार मिला मीम के माध्यम से तो सबको अब तो.
प्रिय जी ने भी बोल दिया कि आई एम लकी कि मतलब इतने एक्टर हैं कि प्रिय जी ने बहुत. सारे एक्टरों के साथ काम किया और प्रियंन जी हमेशा अक्षय में टॉम और राजपाल में जरी. देखते हैं। टॉम इंजरी अच्छा आप लोग रियल लाइफ में वैसे हो। वो जो मैं स्टेज शोज़ उस. पे भी देख रहा था जिसपे अक्षय कुमार पाजी कहे कि बैठ चुप नहीं पल दूंगा।. अच्छा लेकिन वो एक्चुअली वो जो डायलॉग है ना. पिक्चर का तो टाइम क्या है? टाइम बहुत खराब चले निकल. ले नहीं तो पेल दूंगा। तो कपड़े वपड़े फटे खड़े थे तो एक्चुअली जोड़ वो जीत रहे थे।.
बाकी रियल लाइफ में विश्वास करिए। पूरी इंडस्ट्री में पिछले 25 साल में. चाहे कोई जूनियर हो कभी चाहे सीनियर अहमद ची पाजी या किसी भी बच्चन साहब से लेके. कोई भी एक्टर के साथ हम लोगों की इस तरीके की भाषा कभी यूज़ ही नहीं होती है ये फिल्म. की ही थी जो अपना क्योंकि आप लोग कैरेक्टर में ढल जाते हैं. हां कैरेक्टर में नहीं तो अदरवाइज हम लोग भाई आता है तो हमेशा राजपाल साहब क्या हाल. है कभी राजपाल जी मैं की पाजी क्या हाल है और दिन भर. बट आप लोग एक्चुअली ऑफ एयर में भी टॉम एंड जेरी अच्छे लगते हो.
हां ऑफ एयर ये सिनेमा में टॉम एंड जेरी ठीक है उसमें अच्छा भी लगता है. वो मतलब वो अच्छा लगता है हां तू इधर आजा तू इधर आजा मैं इधर खड़ा. हो जाता हूं छेड़ते कूदते. एक दूसरे को अब ये मेरा फेवरेट पिक्चर का फेवरेट सीन. ये एक बंदा मान नहीं रहा था कि मैंने ये ये शक्ति पाजी और इसका ये पहली बार बोला. सो जाओ हां. तो इसको लगता है मुझे दो-दो आवाजें आ रही मालिक गूंगा बोला.
ये सीन बहुत अच्छा था ये सब लोग बोलते बोलते हैं कि तुमने क्या दारू रियल पी रहे. थे? हमने कहा नहीं ये भी पानी था। बट चुपचुपके का फर्स्ट हाफ पाजी अलग था।. सेकंड हाफ थोड़ा सा इमोशनल रोना धोना किच हो गया था। बट फर्स्ट हाफ तो ऐसा है जितनी. बार लाओ खाना खाते हो पेट खाना छूट जाता है। गिर जाता है। अब हां वो उसमें एक से. एक सीक्वेंस वो चाहे ओम जी के साथ हो चाहे शक्ति जी के साथ हो चाहे अन्ना के साथ हो. चाहे वो उसके शाहिद के साथ में हो एक और मेरा इससे बड़ा फेवरेट टुक में.
शीतल के साथ शीतल के साथ लड़ाई करने जा रहा हूं मैं. या वो जो ये सीन हो बहुत अरे ये एक्सप्रेशन देखिए चेहरा इसका. बांडिया है बेचारा वो वो नाव चलाने वाला है दिन रात उसमें बेल्ट. देखो उसकी तो वो जिस चीज जहां पे है वो खुश कितना है कि यही दुनिया है. इतना मजबूत खाने की आदत नहीं है हमारा मैं एक्सपर्ट हूं फेवरेट सीन कौन सा था.
आपका चुप-चुप में बहुत सारे. वैसे दो चार ऐसे रैंडम फेंकने हो तो कौन-कौन से. जैसे मुझे बोलता है वो शाहिद कपूर बोलते हैं कि माफ कर दे तो वो तीन चार. एक्सप्रेशन भूल जाता है कि रोऊं के आंसू वो वाला ये ये. हां कि मैं हां ये एक्सप्रेशन एक बार चार एक्सप्रेशन. नहीं हो पाएंगे ऐसे क्योंकि वो नहीं वो वो वो अलग ही अब हो शायद उस उसमें हो तब हो.
जाए लेकिन ऐसे करना मैकेनिकल हो जाएगा कि वो याद करना पड़ेगा कि मुझे माफ कर दे वन. टू पता. क्योंकि उसको वो भूल गया कि इसको रिएक्ट कैसे करूं ये बोला. मेरा सबसे फेवरेट भी आता है। अरे बेटी पुष्पा. इसके तो सच में तो मेल को बेटी पुष्पा का लॉजिक क्या था? क्योंकि वो यहां से खिसक चुका है। ठीक है? क्योंकि अब वो मंजुलिका को देख चुका है।.
और वो यहां से वो उसको खुद नहीं मालूम वो किधर है।. और अभी तक तीन बन चुकी है। हां।. मंजुलिका को किसी ने देखा है। वो अभी तक रंग बिरंगा घूम रहा है।. हम किसी ने देखा है अभी तक।. बाकी सब बने हुए हैं मंजिलिका। अच्छा मंजुलिका पे हमको एक कॉम्प्लीमेंट. याद आया। किसी ने हमसे कहा था राजपाल जी से कह दीजिएगा।. लोगों ने कहा भूल भुलैया वन में अक्षय कुमार आए। फिर कार्तिक आर्यन आ गए।.
भुलभुलैया में अक्षय से कार्तिक तक तो आ गए। लेकिन राजपाल तब भी एक था। राजपाल अब. भी एक है। राजपाल आगे भी एक रहेगा। अरे अरे थैंक यू। थैंक यू।. देयर इज नो रिप्लेसमेंट। थैंक यू। और ये छोटा पंडित ने एक छोटा सा. रोल था तीन चार सीन का कि 40 साहब का वो देखते हैं ना कि एक. कोर्ट एक स्टेक और एक वो कितने सारे कार्टून हजारों कार्टून अपन लोगों ने बचपन. में देखे हैं मतलब हम. वो ये छोटा पंडित का इतना मिनिएचर कैरी केचर एनिमेशन बच्चे से लेके और इस रोल ने.
क्योंकि हमें 25 साल हो गया काम करते हुए तो हमें 50 साल और 70 साल के लोग बहुत. अच्छे से जानते हैं। लेकिन 2022 में भूल भुलैया सेकंड रिलीज हुई और उससे पहले इस. रोल ने इतने मीम और इतने मिनिएचर इतने एनिमेटेड फोटो बनाए कि 10 साल का बच्चा भी. मेरी ऑडियंस हो गया। वो मुझे छोटा पंडित के नाम से जानता है और 50 साल औसत 60 साल.
का बंदा मुझे 40 साल का बांडिया और ये सब इनसे तो. आगे पीछे की 40 साल पे की ऑडियंस मेरे साथ हो गई इस कैरेक्टर की तरह. एक पिक्चर आपकी और प्रदर्शन था बहुत अच्छी थी हंगामा. अरे मारो मारो मारो मारो मत छोड़ो सालो. हम मंदिर है घंटा है उसमें ये डायलॉग इसलिए ये रखे गए हैं. इसमें कि जानबूझ के प्रेम जी ने प्रोमो की तरह ताकि यह एसोसिएशन जो हम लोगों का 20.
साल का है वो हमारे जनमानस को कि हम मतलब वो. रिमेंबेंस के लिए ना हम. तो वो प्रोमो देखो तो वही तो उसमें सब आपने अक्षय कुमार ने और प्रियदर्शन जी ने. बहुत सारे पिक्चर किए हैं। कौन सी पिक्चर का मजा था जो उसमें आपको. दोबारा याद आया? मतलब किस पिक्चर में आपको बहुत मजा आया था इससे पहले कोई एक नाम. लेना है जो आपको मजा आया इस बार भूत बंगला में. जो हंगामा में मजा आया वो भूत बंगला में आया.
और जो चुपचुप के और ढोल है हम. वो विश्वास करो वो अभी बाकी है लेकिन हंगामा ने जो मेरे जीवन में हंगामा कलाकार. के रूप में दिया पूरे विश्व में मेरा घंटा बजा. अभिनय के रूप में कि सालो मारो मारो कोई मारो सालो घंटा समझ के रखा है कोई भी बजा. जाता है। हंगामा ने मुझे मतलब मेरे चेहरे को बहुत पहचान दी और हंगामा का कैरेक्टर. सच में हंगामा में बहुत अच्छा लगा। भूत बंगला का जो इलेक्ट्रिशियन है आई होप आपको.
अच्छा लगेगा। बहुत अच्छा लगेगा। आई होप मैं तो चाहूंगा देखने में। उम्मीद करता. हूं बाकी सब भी जाएं। लेकिन राजपाल भाई एक सवाल मेरे मन में आता है। ये बहुत सीरियस. सवाल है कि नवाजुद्दीन हो, मनोज वाजपेयी हो, पंकज त्रिपाठी हो इनका भी करियर आपके. बराबर ही रहा। इनमें से कुछ लोग का आपके बराबर रहा है। कुछ आगे पीछे आए हैं। लेकिन. इनको देखने का नजरिया बड़ा सीरियस रहता है। जैसे पंकज जी आते हैं तो लोग बड़ा. सीरियस सम्मान में तुरंत नमस्कार ही जाते हैं। क्या कॉमेडी जो आप रील में करते हो.
उससे लोग रियल में जज करते हैं कि हर आदमी थोड़ा कॉमेडी सुना दीजिए। एयरपोर्ट पे. हंसी मजाक चाह रहे हैं। जैसे मेरे को किसी ने कहा तभी पीयूष मिश्रा संजय मिश्रा ने. कहा था कि जो हल्का पक्ष होता है बड़ा वायरल होता है। कादर खान साहब को जाते थे. वो तो लोग कहते हैं कादर खान एक गोविंदा वाला जोक तो कभी इस बात का मलाल रहा. नहीं हंसी को सही कम्युनिकेट जहां तक कर लिया हजारों साल से तो हंसी राजा है सबका. रोमांस जैसे हंसी सम्राट है.
हंसी से आप घर-घर पहुंच गए बच्चा से लेकर बूढ़ा चाची नानी काकी दादी. आपको घर-घर पहुंचना हो या जीवन जीना हो हम. आपको पारिवारिक के रूप में पति के रूप में बुई के लवर के रूप में या तो आपको पिता के. रूप में या पायलट के रूप जो भी हम. आप जिसमें व्यापार के रूप में अगर आपको जीना है तो एक ही आपके पास रस है वो हंसी. है जिसमें मुस्कुराहट है खुशी पड़ोस में रहती है तो हंसी खुशी के बीच जो. मुस्कुराहट है ना वही जीवन है वही राजा है उसको मलाल की जरूरत नहीं है या आठ रस उसके.
पीछे चलते हैं उस पे जीवित रहते हैं रोमांस की कोई औकात नहीं है अगर. मुस्कुराहट ना हो तो ये ये उन लोगों को बता सकते हो जिनको पढ़े लिखे नहीं है उनको. कोई मलाल हो मुझे दुनिया में इस बात हंसी हमारा गुलाल. है वाह. और दुनिया के नौ रसों पे राज करने वाला अगर कोई सम्राट है कोई चक्रवर्ती कला.
सम्राट है तो जिसके पास हंसी है खुशी है मुस्कुराहट है उसी के पास मस्करागिरी है. और उसके पास मस्करा मस मशबीरागिरी है मैं जीवन में हर अभिनेता को बिलीव करो जिनको. आप सीरियस अभिनेता बोलते हो ना यह भी सब कॉमेडी जानते हैं। सबकी. अपनी-अपनी पेशगी है। आप भी खूब कॉमेडी अभी आपसे चार बार बात हुई। कितना हंसे हम लोग. सब लोग हंसी जानते हैं। और हंसी को सब प्यार करते हैं। हंसी को कभी ना दबने की.
जरूरत है। ना कभी छुपने की जरूरत है। चाहे कोई इनडायरेक्ट वे में बोले, चाहे. डायरेक्ट वे में बोले, हंसी सबके दिल में बसती है। चलो एक सवाल हमको बताओ आप। कभी. ऐसा हुआ कि राजपाल यादव डिप्रेशन में रहे हो, परेशान रहे हो, उदास रहे हो और अपना. ही मीम देखकर या अपना ही वीडियो देखकर हंस पड़े और सारा उड़ गया।. जैसे ही डिप्रेशन होने की कोशिश आती तो उसका बाप है फ्रस्ट्रेशन और उसका भी बाप. है एग्रेशन।. थोड़ा और व्याख्या करो आप इसकी। नहीं नहीं कुछ नहीं। डिप्रेशन में चले.
जाओ। ऐसे हो जाओ। हां।. आपके बस में कुछ नहीं है क्योंकि जीवन की आपाधापी में दुनिया के संसार की. कौन सी ऐसी कंपनी है या कौन सा ऐसा व्यक्ति है अब्राहिम लिंकन से लेके. राजपाल यादव तक हम कोई ऐसा तो बताओ जिसने बगैर परेशानियों के. जहाज खरीदे हो या पहाड़ खोदे हो बगैर परेशानियों से. आप पहाड़ खोदने में परेशानी है तैरने में परेशानी है चलने मिलने में परेशानी है।.
खरीदने में परेशानी है, बेचने में परेशानी है। कहां नहीं है परेशानी? जो परेशानियों. से लड़ गया वो अड़ गया। वो खड़ा हो गया वो बड़ा हो गया। और जो झुक गया वो पड़ गया, वो धड़ गया। वो वो गिर गया। मुझे नहीं लगता है कि मैं कोई बड़ा काम कर रहा हूं।. हमसे बहुत बड़े-बड़े परेशानियां निपटा के। फिर भी चलो अगर समझना हो कि जब समय खराब. चल रहा हो, दुख आ रहा हो तो उससे कैसे उभरे?
अब मैं यही समझता हूं कि जब समय परीक्षा तो पता नहीं लेकिन जब आपको लगे तो आप कम. से कम प्यार दे सको प्यार ले सको और धैर्य रख सको धैर्य दे सको और सहानुभूति तो लव. है हम. लेकिन समय आप आप ले सको समय हर चीज का जो है रिजल्ट है और समय बदलता जरूर परिवर्तन.
संसार का नियम है। मैंने अपने आप को 10 बार पढ़ते हुए देखा और 10 बार इस स्टेडियम. में गिरते हुए देखा। 10 बार मुझे खड़े होते हुए देखा और 10 बार इसी. स्टेडियम में हारों के हार में जीत के तिलक माथे पे लगाते देखा। मैं खुद अपने आप. का गवाह हूं। तो इसलिए जीवन है और लाइफ इज ब्यूटीफुल। चाय या पान. चाय काहे.
थोड़ा सा इतनी देर से बोल रहे चाय मिल जाती है तो थोड़ा मूवमेंट ठीक हो और पान क्या है. अब यहां पे आपसे बात करतेकरते मीठा है तो खा जाओ अगर कोई दूसरा है सादा नहीं तो फिर. उसके लिए मतलब डस्टबिन ढूंढ तो चाय तो चाय का थोड़ा परिभाषा बताओ ना जैसे ओशो हम ओशो. का हम सुन रहे थे ओशो कहे कि जब मर के ऊपर जाओगे तो ऊपर वाला भी सबसे पहले पूछेगा. चाय पिएंगे और ना यकीन जब पहुंचना देख लेना. चाय पीने का एक्चुअली क्या चाय से क्या तृप्ति मिलती है? जैसा.
लोग कहते हैं कि इश्क करना हो तो उनसे करो जो चाय पीते हैं। गर्मी में पसीना चूरा है. लेकिन चाय ही पिएंगे वो। एक्चुअली. हम सब चाय जो नहीं पीते हैं वो ज्यादा सुखी हैं।. ठीक है। लेकिन जो चाय पीते हैं इसको आदत कहते हैं। इसको. एक नहीं। इसको कुछ नहीं कहते हैं।. चशड़ी। हम्म। जब हमें कुछ बहाना ना मिले ना अपने. आप को बहलाने का तो चलो चाय पी लेते हैं। कोई मिलने आया? हां चलो चाय पीते। नाराज हो गए हैं।. नहीं चलो चाय पीते हैं। काम नहीं।.
अरे बैठो ना थोड़ी चाय पी लेते हैं। ठीक है ना? बाद में बात करते हैं। पहले चाय पी लेते हैं। ठीक है।. आओ बाहर चलते हैं। अच्छा नहीं रुको ना पहले आपको चाय पिलाते. हैं। उसके बाद में आपकी थकान करवाते हैं। ठीक है ना? तो एक्चुअली. चाय एक अच्छी चीज है और चाहे जो है चौपाल कॉर्नर पे बैठ के चाहे श्रमिक वर्ग हो और. चाहे कोई भी वर्किंग हो चाय एक बहाना होती है थोड़ा सा रिलैक्स करने के लिए. बनाना आता है चाय आपको चाय खाना सब कुछ बनाना आता है.
बढ़िया चाय कैसे बनती है जितनी सादा बना सकूं. कैसे मतलब अगर आपको बनानी हो कैसे बना मुझे बिल्कुल बनानी हो तो मैं चाय पत्ती. और सिर्फ जितना वांटेड दूध है उसका प्रक्रिया बताओ हमको। हम आपके साथ भगौना. रख दिए, पानी रख दिए, चाय पत्ती, चीनी रख दिख, गैस जला दिए। अब बताओ तुम।. हम पहले दूध खौलाते हैं। हां, ठीक।. धीरे-धीरे उसमें पानी मिलाते हैं। ठीक। कितना दूध? कितना पानी? मतलब मुझे लगता है कि चाय की 3% मतलब तीन हिस्सा पानी एक हिस्सा दूध।.
हम मतलब एक दूध होना चाहिए।. कुछ लोग 1/3 दूध कर लेते हैं। और उसको सिर्फ पत्ती से खौलाते हैं।. ठीक। उसमें जितना लोग बोलते हैं कि बहुत ये सामान डाल दो ये सामान फिर वो चाय नहीं. रह जाती है कि तो वो कोई अदरक चाय उसको बोलता है कोई किसी की चाय बोलता है लेकिन. मैं चाय का मतलब चीनी चाय पत्ती चीनी चाय और दूध और पानी उसको समझता हूं और वो सबसे.
जो उसको खौलाने का मजा है वो सही से आपने उबाल लिए तो वो जीभ का. जो है और जितनी चाय शादी होती है हम. उतनी ही अच्छी लगती है। ना हम सोचे पूछ लेना क्योंकि पान वाला तो पिक्चर में बता. दिए थे आप कि पान बढ़िया कैसे बनाते हैं. ढोल में चूने को पान पे यूं घुमाओ जैसे पान नहीं. गोरे गाल हो बस उसके बाद थोड़ा सा रतनी चटनी नवरतन की. माम फिर असली पान और फिर कत्थ लगाओ कत्थ नकली नहीं असली हो.
आरारोट आरारोट. भाभी आपको कनाडा में मिली थी जी कैलगरी में. यूपी का लौंडा कहां कहां कनाडा पहुंच गया? यही तो हम आज तक नहीं समझ पाए। लेकिन रहा. बहुत अच्छा कि हमको नहीं मालूम था कि जो हमारी सब बैक बोन बनके ये कनाडा हमारे साथ. में रहेगा कैलगरी हम. और ये ईश्वर ने.
मतलब लौंडे दिल्ली से मुंबई इश्क नहीं कर पाते। आप यहां शाहजहांपुर से पहुंच गए. कनाडा। हमारे सब हमारी बुआ वगैरह से है। लंगूर को. मिल गई।. और मुझे भी लगता था. ये तो वो वाली बात हो गई। मुझ में क्या देखा तुमने? आप अपना मजाक उड़ा लेते हो। नहीं नहीं बट ये सच में फीलिंग आई थी।.
हां लेकिन एक चीज है कि प्यार हो या कुछ. तो कैसे प्यार हो गया कनाडा भाई यहां से? नहीं आपको मुझे मैं मैं प्यारा नहीं लगता. हूं।. नहीं प्यारा था। मुझे बहुत प्यार मिला है जिंदगी में. और मैं इसलिए जीवन भर. हां नारी शक्ति ही बोल रहा हूं।. बिलीव करो क्योंकि मां से लेके अलग-अलग रूप में.
जो है जो नारी शक्तियों की भूमिका होती है ना. मैं उससे बहुत मैं हूं ही इन लोगों की आशीर्वाद की वजह. से मतलब हंस पाता हूं इनके आशीर्वाद महिलाओं का फेवरेट थे इसलिए पटा ले गए. वहां तक नहीं लेकिन इनका आशीर्वाद मिलता. है कॉमेडी करते-करते रोमांस के लिए. नहीं नहीं दिल चुरा दिल चुरा दिल चुराने का मौका मिल गया. कॉमेडी के जरिए हां कॉमेडी या किसको कुछ कुछ भी लॉ नहीं. कॉमेडी नहीं जंगल दिखाई थी जंगल का फोटो दिखाया तो हमारे फादर लॉ ये.
बाल खड़े गन हाथ में तो जब मैं मुझे देखा कि नहीं ये तो दिखता. तो नॉर्मल है उसमें एक्चुअली तो आप जंगल का कैरेक्टर आपको पता ही है कि. भाभी फेवरेट पिक्चर कौन सी है आपकी मैं मेरी पत्नी और वो मैं माधुरी दीक्षित. एक्चुअली चुपचुप के हंगामा बहुत लंबी लंबी लाइन है। दो चार फिल्मों में. समेट मतलब दो चार फिल्मों में तो ऐसा हुआ कि गए.
प्रीमियर दिखाने लेकिन बाद में झगड़ा होते आया घर से घर तक डू यू थिंक आपको ये फिल्म. करनी चाहिए। क्या हो गया? मैंने थोड़ी फिल्म की। आपने. कहा था ये नहीं अब ये मत बताओ। दो चार फिल्में थी।. ठीक है। प्रियदर्शन जी वाली नहीं।. नहीं नहीं नहीं इनकी तो कभी नहीं। कभी नहीं। ये तो खैर प्राउड है ये तीनों लोग. लेकिन दो चार फिल्में जैसे जैसे मतलब भाभी टाइट कर देती हैं आपको.
नहीं वो उनको कभी चमचागिरी नहीं आई अगर फिल्म अच्छी नहीं. कह सकते हो सारे पत्तियों का हाल है इसलिए हम लोग ब्या नहीं किए सबका हाल है ये तो. बता सकते हो आप टाइट कर देती है आपको टाइट. टाइट तो नहीं कर देती लेकिन अपने विचार खुल के रख देना. ये फिल्म नहीं इसमें ठीक इसी को टाइट होना कहते हैं. हां जिसको आप बोल नहीं पा रहे हो घर भी जाना. है पता लगे इसके लिए भी टाइट कर दी जाओ हां लेकिन अपने ये जो आसपास रहते हैं इनको. खुश करना बड़ा कठिन होता है।.
क्योंकि भूत से तो पता नहीं लेकिन हमको लग रहा है भाभी फटती है आपकी।. नहीं लेकिन एक बात बताऊं हम उसकी इज्जत बहुत करता हूं। आज चीज बहुत. हमारा 10-12 साल का गैप है। हम दोनों वो बड़ी आप बड़े हो? मैं बड़ा हूं। ओके।. लेकिन हमारा कम्युनिकेशन बाय ग्रेस ऑफ गॉड कि मैं राजा राधा पांच पांच भाषाएं जानती. थी हम और हिंदी भी वो मुझसे अच्छी बोल लेती थी.
वहां पे जब पहली बार मिले हम. और वहां से लेके आज भी मुझे अगर कैलगरी जाना है तो मुझे. वापसी का टिकट पहले चाहिए कि मैंने शादी में बोला कि मैं मुझे एक. वर्कलिक हूं कि मैं कहीं घूमने जाऊं तो मुझे मुझे कोई लालच दे दो। वहां शो कर. सकते हैं या नाटक का शो या कोई चर्चा तो मैं आ जाऊंगा। ऐसे ही खाली वहां घूमने. जाना है तो मुझे क्यों आ जाता है? क्यों? वैसे ही अगर मुझे ससुराल जाना है तो अपने.
बच्चों को लेके जाना है या बच्चों को लाने जाना है या बच्चों के साथ जाना है। लेकिन. मुझे जाना कब है पता ना हो। लौटना कब पता हो? लौटना कब है उसका टिकट मेरे पास हो। क्योंकि ये मैंने शादी से पहले शर्त रख ली. थी कि मैं भारत का फोबिया है मुझे। मैं सातों समंदर में हर जगह घूम आया।. लेकिन मुझे अपनी वापसी का टिकट मुंबई या दिल्ली के लिए चाहिए और दिल्ली.
के बाद में हमेशा जो लास्ट टिकट है वो मुझे अपने आज से पूरे गांव को बोल के रखा।. मेरे गांव में जहां मेरे पिताजी की अंत्यष्टि हुई। मुझे वहीं पे लास्ट टिकट. मेरा वहीं कटना चाहिए। उसके अलावा मैं सातों में इसमें कतई कंफ्यूज नहीं हूं।. इसलिए मैं मस्त होके अपनी मौत की प्लानिंग क्यों आप. मुझे बिल्कुल सनातन का पहला मेंबर जिसने अंत को पहचान लिया उसको कोई खरीद नहीं. पाया। भैया आप खुद ही देखो राजा भोज ने बोला था बड़े-बड़े राजा महाराजा इस पृथ्वी.
पर आए चले गए। पृथ्वी किसी के साथ नहीं गई। जब तक जिसका. राज रहा तो ऐसा लगा कि पृथ्वी इसके साथ कि यह लगता है आपके साथ जाएगी तो मुझे. फिर परेशान नहीं करता कि इतना सारा काम कर रहे हो सारा चीज पकड़ना रोकना लड़के बच्चे. पैसा कौड़ी धन संपदा और फिर सब चला जाएगा मैं मैं जिस दिन अकेले अपने आप से पूछता.
हूं कि तुमने क्या कमाया तो 733 जिले हैं ना भारत में अपने 700 जिले लगभग हैं तो. मुझे ऐसा लगता है कि किसी किसी भी जिले में किसी भी लैंग्वेज में अगर चला जाऊं तो. हर जिले में कहीं पे 10 20 गाड़ियां कहीं पे पांच 10 गाड़ियां मेरे नाम की एक भी. नहीं है लेकिन मेरे नाम से आने को तैयार है आ जाती है तो 10 गाड़ी अगर मैंने पर. जिला अपनी कमाई समझ ली तो 700.
तो 10 आप सोचो 700 00 जुल्म 7000 गाड़ियां मैं लेके चलता हूं अपने साथ इसमें क्या गप. नहीं है मेरे नाम पे नहीं है लेकिन मेरे नाम से आप जैसे सब भाइयों की मोहब्बत में. आ जाती हैं तो ये कमाई नहीं है तो क्या है फिर उसके बाद में 36 स्टेट हैं साहब सब. मिला के अपने हां सब ऐसा कोई स्टेट नहीं जिसमें तीन घर.
हमें मतलब तीन घर मिल जाते हैं जिसमें हमें पैसा मतलब नहीं देना पड़ता एक किसी. जिले का कोई डीएम साहब साहब से बोल दें हमें कहीं रुकवा दो या किसी स्टेट में. मुख्यमंत्री साहब से बोल दें हमें गेस्ट स्टेट बना दो गेस्ट बना दो और या किसी कोई. ऐसा आश्रम मिल जाए जिसमें अपन माथा टेकने आए तो 36 तिया 108 108 घर 7000 गाड़ियां. लेके चलता हूं इससे ज्यादा चाहिए क्या है बताओ क्या और क्या चाहिए आपको.
मुझे लगता है मैं इसलिए हंस पाता हूं और मैं चाहता हूं हर आदमी तक ये बात पहुंचे. कि अगर अगर आप दुनिया में एक मैसेज दो हम. तो आनंद प्राप्ति लाने के लिए खूब लड़ो। सारी शांति लाने के लिए लड़ो क्योंकि अंत. में शांत होने के अलावा आपके पास कोई रास्ता नहीं है।. अद्भुत प्रियदर्शन जी और आपकी फिल्मों का एक रैपिड फायर बनाया मैंने।. दो फिल्में नाम लूंगा या आपको ये चुनना है। हंगामा या हलचल?
हंगामा। हंगामा या गरम मसाला? हंगामा। हंगामा या भागमभाग? हंगामा अबकी वाला टफ है। हंगामा या चुपचुपके? चुपचुपके चुपचुपके या ढोल. ढोल 100% चुपचुपियों के ऊपर. सर वो बांडिया था वो मार्तन ढम ढेरे. वो ढोल वो वो बांडिया है वो लवर है चुपचुप के ऐसा कोई लवर मिल जाए तो जिंदगी में.
आदमी मतलब ना आत्महत्या करने की जरूरत है ना डूबने की जरूरत है। खड़े-खड़े मर सकता. है। ऐसे लवर को देख के ढोल या भूल भुलैया. भूल भुलैया भूल भुलैया या दे दना धन. भूल भुलैया भूल भुलैया खट्टा मीठा. भूल भुलैया भूल भुलैया बिलू बारबर. भूल भुलैया भूल भुलैया भूत बंगला.
भूत बंगला नहीं आपको देखने को भी मिलेगा मैं कभी भी. किसी फिल्म के साथ मेरे ही सब बच्चे हैं और मैंने मेरा भी कहीं ना कहीं. मतलब इस मिठाई की दुकान में एक रसगुल्ला मुझे भी बनने का मौका मिला है। तो 100%. जैसे भूत भूत भूल भैया और भूत बंगला में आप जैसे 20 साल का एक है तो कहानी में भी. एक अलग आपको मिलेगा एक अच्छा आज का फेंटसी डिज्नी वो अलग एक रोमा है एक वो होता है.
कि हॉरर कॉमेडी और फिर मतलब मानते हैं विश्व बड़ा अच्छा कॉम्बिनेशन देखने को. मिलेगा मुझे पूरा भरोसा इसलिए है कि प्रियं जी ने मेहनत बहुत की है।. मैंने आपके मीम पे कुछ सवाल बनाए हैं। थोड़ा कलाकारी हमने भी करने की कोशिश की. है। हमको मारो, हमको मारो, जिंदा मत छोड़ो। हम कोई मंदिर है घंटा है कोई आके बजा जाता. है क्या स्ट्रगल के दिन में कभी लगा कि आपके साथ ये हो रहा है कि साला कोई भी आके. बजा के चला जा रहा है या अभी इस बीच में जब रहा चाहे कबड्डी हो चाहे मनोरंजन का.
स्टेडियम हो हम. घंटा बज सकता है लेकिन घंटे को कोई बजा नहीं सकता है। घंटे. की आदत ही है बजना। जब घंटा बजे ना तब घंटे को प्रॉब्लम होती है यार कोई बजा ही. नहीं रहा है तो मैं उसके उसकी प्रवृत्ति है बजना और जब तक घंटा बजता है तब तक धन.
दौलत शहरत इज्जत का घंटा बजता है मेरे एज ए राजपाल बोलोगे तो बिल्कुल अलग इसका. मीनिंग है। हंगामा पिक्चर में डायलॉग था कि इतनी बड़ी. आइटम आइटम बम तेरे प्यार में गिरी कैसे? ना वो नहीं गिरी। मैं मैं गिरा बचपन से. ये कभी हुआ जिंदगी में अरे एक बार नहीं कई बार वन साइडेड तो कई. बार गिर बचपन से कम अरे मैं टू साइडेड में कह रहा हूं कभी ऐसा. हुआ कि किसी ने पूछा भाई तेरे तूने कैसे पटा लिया. नहीं नहीं ये तो हमारे बहुत सारे दोस्तों ने राधा को लेकर पूछा भाई ये आज तक बिलीव.
नहीं हुआ. अह ओके रहा नहीं जाता तड़प ही ऐसी इसमें इसके जरिए कवि क्या कहना चाह रहा. था? नहीं जाता। तड़प ही ऐसी है। ये एक्चुअली ये. राजपाल भाई सच बोल सकते हो। सच बोल सकते हैं इसलिए कि जब जीवन में. अलग-अलग चाहतें होती हैं। और चाहत किसी की छोटी होती है, किसी की बड़ी होती है।.
लेकिन चाहत कैसी भी होती है। तड़प बहुत बड़ी होती है।. जो भी ला रहे हो दो लाना। दो लाना।. कभी जिंदगी का ये हमारे दोस्तों में रोज हमेशा ही होता. है कि कौन सी चीज दो मंगाते हो. दो कोई पानी की बोतल से लेके कौन सी ऐसी है कि जो भी हमेशा चिल्ला देते हैं पीछे. से कि अरे दो ये भी ले आना अच्छा सुनो सुनो एक वो नहीं थैली दो ले. लेना ठीक है ना कोई चीज तो होगा ना जो मतलब एक पसंद बहुत.
होगा आपको जैसे मोबाइल हो गया कुछ कपड़ा हो गया जो आपको चाहिए कि जाना तो लंबाई भी. लेते आना अब रस मलाई है कि जाना तो हमेशा. क्या लेते हो रस ममलाई रसमलाई मुझे खाना खाने में अच्छा लगता है।. कई पीस खा लेते हो एक बार में। लेकिन जो चीज अच्छी लगती है उसको तबीयत. खराब करने के लिए थोड़ी खाना है। मजा ले ले खाना इसलिए खाता वही दो पीस बड़े वाले. हम जो होते हैं लेकिन अच्छी बहुत लगती है।. चुप-चुप के डायलॉग था। मुझे कपड़े धोना बहुत अच्छे से आता है।.
कभी राधा भाभी ने घर पे कपड़े धुलवाए। नहीं नहीं कभी नहीं धुलवाए। ना खरीदवाए ना. कभी धुलवाए। हमेशा खुद खरीदे और खुद धुलवाए और हमें आपकी चॉइस पे भरोसा नहीं. है उनको नहीं वो हमारी चॉइस पे हमें भरोसा नहीं. है। उनकी चॉइस मुझे भरोसा है कि उन्होंने मुझे. चुना. इसलिए कि अगर ये लड़की मुझे चुन सकती है। तो कुछ भी अच्छा कर सकती है।. कुछ भी अच्छा कर सकती है। और तुमने मुझे चुन लिया बाकी सब तुम चुन लो।. हां बस कपड़े क्या पहनने है वो तुम चुन लो। कैसे जीना है वो तुम चुन लो।.
तुम हमको चुन लिया और क्या चाहिए? बस बस बस।. इससे ज्यादा लोड लेना नहीं चाहता। मोहब्बत में मर्द खूबसूरत होते हैं।. हम मैं तो बचपन से खूबसूरत हूं। 108 फीट दो 2. इंच का हूं। 105 फीट 2 इंच का हूं। 5 फीट 2 इंच का दिखता हूं। 100 फीट माता. जी ने हाइट आशीर्वाद में दी हुई है। ओके। भाई पैसा हो तो क्या कुछ नहीं हो. सकता? दुनिया का सब काम हो सकता है।. कभी जीवन में लगाइए। नहीं हमेशा कि पैसा हो सब कुछ हो सकता है.
लेकिन जिंदगी जीने के लिए पैसे पैसा. हम् के अलावा. हम् जिंदगी जीने के लिए आनंद प्राप्ति के लिए. बहुत कुछ ऐसा करना पड़ता है जो जिसमें पैसा काम नहीं आता है. हां चलो लो पॉइंट का आपने जिक्र किया आपका एक. सीन है हमको मारो हमको मारो हमको जिंदा मत छोड़ो सालो. कभी लाइफ का सबसे लाइफ का लो मोमेंट कौन सा था आपका अब तक का.
जिस दिन लो पॉइंट आ जाएगा उस दिन आपके सामने बैठ नहीं पाऊंगा।. कुछ आया तो था यहां पर लेकिन आज वाला नहीं नहीं नहीं याद किया बचपन से लेके. क्योंकि एक बार और यहां तक लो पॉइंट होता तो फिर.
मतलब फिर राज्यपाल दूसरा होता। राजपाल एक बहादुर बाप का एक बहादुर बेटा. है। मैंने अपने बाप को मेरी हाइट के बाप को कभी 150 गांव में गलत बात करते नहीं. देखा और गलत बात सुनते नहीं देखा। और दादा जी जैसा विचारक दर्श जीवन दर्शन. के रूप में तो यह दादा जी और पिताजी दो लोग हैं मेरी जिंदगी में.
जिन्होंने लो मूवमेंट तो आ सकते थे बहुत सारे लेकिन इन्होंने कभी आने नहीं दिए और. मुझे नहीं लगता है कि लो मूवमेंट कोई आदमी लो मूवमेंट के लिए जो क्योंकि अगर मूवमेंट. आपके जी आपको दो तरीके से जीना है हंस के जीना है या दुखी होके ऐसे या हां तो इसमें. भी आपको कोई कुछ नहीं और इसमें भी आपको कुछ और आपकी चॉइस है। तो मैं इस पटरी. बैठना चाहूंगा। हां वाली नाइस।.
मालिक इतना खर्चा हो गया है। कभी किसी से अपने दोस्त से कहा जब इतना खरीद तो फिर एक. कोल्ड ड्रिंक कौन मंगा? हां तो यही तो रोज ही बोलता हूं कि भाई ये. कर रहे हो तो ये भी मंगवा लो। कंजूस हो आप? कंजूस कंजूस। आई थिंक. कंजूस नहीं होना चाहिए। कंजूस कंजूसी क्या होती है? खर्चा क्या होता है? मैंने आज तक. कभी सीखा ही नहीं। पैसा कौड़ी कौन हिसाब लगता है आपका?
भाभी वाइफ. सब मतलब शादी करके सब दे दिए उनको। नहीं शादी करके वो हमको ले ली।. नहीं नहीं उनको नहीं दे दिए। वो अपने पास हैं।. क्योंकि मैं बहुत ज्यादा हिसाबी किताबी और इन चीजों में मैं मोबाइल से भी उतनी. दोस्ती रखता हूं जितना ये बात करने की जिस दिन मुझे लगा कि अब मुझे किसी से बात करने. की जरूरत नहीं काम करना चाहता हूं क्योंकि मैं खुद ही अपने यहां पे कंप्यूटर की तरह. चाहे कबड्डी हो और चाहे जीवन हो दोनों में हम.
कोशिश करता रहता हूं कि हमेशा अच्छी पॉजिटिविटी के साथ चीजों को फेस. करूं। इस मीम सेगमेंट में लास्ट सवाल एक आपका बड़ा फेमस डाला उसका भागमभाग का. हम लंदन का मौसम. हम क्या था. हां लंदन का मौसम और लंदन क्या है थे की लड़कियां. की लड़कियां हां क्या था पूरा पूरा लंदन का मौसम और. लंदन की लड़कियों पे भरोसा नहीं अगर ना कभी भी कभी भी क्या है कभी भी.
नहीं भरोसा नहीं है क्या. लंदन का मौसम और लंदन मौसम की तरह बदल जाते हैं. हां लंदन की लड़कियां और लंदन का मौसम कभी भी बदल जाता कभी भी बदल सकता है क्योंकि. वहां पे कभी भी गर्मी और कभी भी बरसात जो वाला मौसम है ना. आजकल के लौंडे शादी ब्याह डरते हैं। आप तो कनाडा किए थे।. हां नहीं शादी ब्याह से तो सब डरते हैं। अब ये. है हर चाहते हैं कि सही साथी मिल जाए और क्योंकि जीवन दो पटरियों पे है तो उससे. कितने भी अपन बहादुर बन जाए लेकिन अपुन उस मामले में डरते हैं।.
अब जैसे आपके यहां पूजा महाजन जी हैं। उनके पिताजी बहुत डरते रहते हैं। बेटी. हमारी ब्याह नहीं कर रही। तो ऐसे जो नए लौंडे डरते रहते हैं शादी ब्याह को लेके. तो इनके लिए एक बात बोलूं हां. कि फैमिली और सोसाइटी हां. फैमिली और संसार हां. तो एक करोड़ों कुबे हैं हर कुंडबे में एक सिस्टम है उसी की ये. बोलते हैं पूरा संसार एक परिवार हम. भाई दो लड़ाईयां हैं आपके जीवन में एक पारिवारिक लड़ाई.
हम और एक जीवन की लड़ाई. एक पटरी आपकी खुद खुद की कार्य व्यापार रोजगार ये समाज संसार उस पे चलती और एक आप. कैसे पिता हो कैसे भाई हो कैसे पति हो कैसे बेटा हो ये चलता है तो हम हम आप सब. लोग हैं जितने भी सामने सुन तो मैंने ना बहुत पारिवारिक मुझ में बहुत. बड़ा बनने की कोशिश की परिवार में भी मुझे लगा अरे अपना भीतवा है.
परिवार में और इधर संसार में भी अपना मनोरंजन का तो. मुझे मुझे ये लगा थोड़े दिन बाद कि दो लड़ाईयां नहीं जीती जा सकती। हम. एक लड़ाई जीती जा सकती है। अब एक लड़ाई हारी जाएगी। तो मुझे लगा कि दो लड़ाईयों. में कौन सी लड़ाई चुनू? तो जिनके लिए आप प्रश्न पूछते हो उन सब जेंसी से या भाई. बहनों से सबसे शेयर करना चाहता हूं कि एक लड़ाई है पारिवारिक लड़ाई उसमें भी जीवन.
है। एक सांस्ारिक लड़ाई है जिसमें जीवन है और दोनों में आपको परीक्षा देना है। तो जब. लड़ाई पारिवारिक हो मां से लेकर पत्नी तक तो उसमें हार के अलावा कोई विकल्प ना हो।. और जब सांसारिक लड़ाई हो जो खुद से लड़ाई हो उसके जीत के अलावा कोई और संकल्प दूसरा. ना हो। तो जहां लड़ाई हमारी है उसमें संकल्प है कि हम आई एम अ विनर और जहां. लड़ाई परिवार की है। आई एम अ लूजर। कि तुम सब जीते तो मुझे बहुत आसानी तो पारिवारिक.
लड़ाई में हारना स्वीकार कोई विकल्प नहीं जीतने का. मतलब रिश्ते इतने कठिन नहीं होते इतना हम सोचते हैं।. नहीं नहीं अरे हम 800 करोड़ लोग हमारा चेहरा पहचाने वो सपना हम देखते हैं। हमारे. रिश्तेदार मिला के सब अंश और दुनिया के वंश के मिला कितने लोग हैं। मतलब 100 लोग. 50 लोग सब लोग। हम 100 लोगों के बीच में जन्म लेने के बाद उनसे मिलने से और उनके. लिए हमारे विचार आ जाते हैं कि तुम बुरे हो हम बुरे हैं। नहीं नहीं इतना मेरे लिए.
परिवार भी हमारा एक संसार है और इस परिवार रूपी संसार की वजह संसार हमारे लिए संसार. है। अद्भुत लास्ट सेगमेंट है सर। रैपिड फायर. है। फटाफट नाम लेना है आपको और बेईमानी नहीं करनी है।. इंडस्ट्री का वो कौन सा एक्टर या आपका दोस्त है जो असल जिंदगी में बांड्या से. ज्यादा कंफ्यूज है? राजपाल यादव. ओके अक्षय सलमान शाहरुख हम.
सबसे ज्यादा मजा कहां आया सबसे ज्यादा बकैती कहां की सबसे ज्यादा ठिलवाई कहां. हुई तीनों के साथ बिलीव करो एक झूठ हो जाएगा. क्योंकि तीनों एक एक बिल्कुल स्टेज के हैं। सबके साथ मजा आया।. अगर राजपाल यादव को अपनी बायोपिक बनवानी होती तो वो कौन सा एक्टर है जिसको कास्ट. करते जो उनकी तरह उछल कूद करके कमाल कर देता।. मिलेगा तो बताऊंगा।. अब हां अभी अभी बायोपिक के लिए जल्दबाजी समझता हूं.
हम और ये सोचा नहीं कि हमारा कैरेक्टर कौन. करेगा। आज के मीम कल्चर में आपके डायलॉग्स क्यों. वायरल हो रहे हैं? क्योंकि कॉमन मैन डायलॉग हैं, कॉमन सिचुएशन है, कॉमन. सिनेमा। रियल इज नॉट रियलिटी बट रियल इज़ इल्यूजन ऑफ रियलिटी। तो अच्छा इल्लुजन. क्रिएट करते हैं फोटोज़। तो इसलिए सबको मजा आता है।. जब लोग आपके दुख पर मीम बनाते हैं तो कभी लगता है कि सालों मैं परेशान हूं। मेरे. दुख पर भी साले तुम मजा ले रहे। हंस रहे हो?
नहीं कभी ऐसा समझ कभी सोचता भी नहीं हूं। इतना फॉलो भी नहीं कर पाता हूं।. अगर आपके पास एक सुपर पावर हो, किसी एक बहुत सीरियस एक्टर को आपको कॉमेडी करवानी. हो. हम मतलब सीरियस एक्टर से कोई. कोई एक सीरियस एक्टर हो जिससे राजपाल यादव कॉमेडी करवानी है तो किस सीरियस एक्टर को. पकड़ेंगे कि ये कॉमेडी करेगा तो फाड़ देगा बोले बड़ा कठिन सवाल है. आई थिंक आमिर खान साहब कॉमेडी में हाथ उन्होंने.
एक्चुअली एक्चुअली. हां हां थोड़ा सा उन्होंने अंदाज अपना-अपना में किया। लेकिन वो एक फील्ड. में अभी उन्होंने खूब अगर मुझे जाएंगे तो मुझे लग रहा है कुछ. फनी चीज करेंगे तो लोगों को बहुत अच्छी लगेगी. जो मतलब क्योंकि उन्होंने उछल कूद वाले रोल. जैसे थोड़े-थोड़े के इश्क में या कहीं ये इश्क में मतलब तो कचा.
हां हां हां अच्छा लगता है अच्छा लगा है. तिहाड़ का सबसे फनी किस्सा क्या रहा क्योंकि जिंदगी तो आप हर जगह जीते हो आई. एम श्योर वहां भी गएगे तो कुछ ना कुछ अनुभव लेकर देकर आएगे. तो वहां का सबसे इमोशनल और सबसे बढ़िया अनुभव क्या रहा? हर चीज को सिखाती है।. पूरी दुनिया के प्यार ने आशीर्वाद के रूप में डूबा दिया। वही सबसे. ये तो बाहर निकल के हुआ होगा। पता लगा तो बाद में पता लगा।.
अंदर अंदर की बात कर रहा हूं मैं जब आप तिहाड़ में अंदर थे। अंदर. उस वक्त क्या ऐसा रहा जो आपके साथ अब जीवन में जाएगा? बिल्कुल सिस्टम सिस्टम में. रहना है हम. लेकिन मुस्कुराहट हर समय मुस्कुराहट. कोशिश की कि हर एंगल से मुस्कुराहट जो है सामने वाले को देखने को मिले मुस्कुराहट. बहुत जरूरी है। ओके आज से 100 साल बाद कोई बच्चा अगर. राजपाल यादव को देखेगा तो राजपाल यादव क्या चाहेंगे? वो राजपाल यादव को कैसे याद.
रखें? मुस्कुराते हुए चेहरे के तौर पर, मीम के तौर पर या एक ऐसे व्यक्ति के तौर. पर जिसने मुझे जिंदगी जी अपनी शर्तों पे जी।. इतनी दुनिया के अंदर लाफ पैदा कर दे हम. कि वो सबका ब्लड सर्कुलेशन बनके शांति ले आए। वो ये मिसाइलें हमेशा. के लिए खत्म कर दे। मशीनों को का सदुपयोग करो। मशीनें किसी. हाथ को नहीं पहचानती। जिन हाथों ने बनाई उन हाथों को भी नहीं पहचानते। इसलिए.
ये शांति और आनंद प्राप्ति क्योंकि जीवन सबका समाप्त होना है। कोई 100 साल कोई 150. साल जो कुछ तुम्हारा है ही नहीं तो इसके लिए लड़ना क्यों है? लाओ शांति लाओ आनंद. प्राप्ति। और हम मैं इसके लिए अगर मुझे हवा बनना पड़ा तो मैं सबके ब्लड सर्कुलेशन. में जाके हंसी मुस्कुराहट के साथ पूरी दुनिया को एक साथ गले एक दूसरे गले लगवाना. चाहता हूं। वाह बचपन के राजपाल यादव बचपन के राजपाल यादव को जो 1997 में पहली बार.
मुंबई खालिया हाथ उतरा था उसको कुछ कहना चाहे. बस इतना कि उस समय मैं अननोन स्ट्रगलर था आज वेल नोन बिगिनर हूं. जेल आ ही जाता है और बचपन से लेके बचपन तक हंसी थी हंसी है. हंसी रहे हंसी जिंदाबाद. रिलीजियस आदमी हो आप बिल्कुल. 100% % रिलीजियस हूं। कैसा रिलीजियस मतलब कि ये मानता हूं कि.
कोई भी कर्म जिस पे धर्म का आशीर्वाद ना हो वो कर्म की कोई वैल्यू नहीं होती।. जैसे हमने आज आपको टीका लगाए देखा है। ये तो मैं अभी गया था तो हमारे रिसेप्शन. पे एक बहन ने हमको लगा मंदिर अंदर. नहीं नहीं वो रिसेप्शन पे ताज में गए थे तो वो एक जो उसने लगाया था. लेकिन मैं यह मानता हूं कि कोई तो है इस दुनिया में जिसने आंखें बनाई. हम विज्ञान नहीं बता पाया कि आंखें कौन बना गया। अगर आंखें बनाने का कोई जादूगर.
मिल जाता तो मैं मैं नहीं मानता भगवान किसको कहते हैं। लेकिन अगर जिसको शरीर की. हर बीमारी पता लग जाती है उस विज्ञान को नहीं पता लग पाया कि आंखों की पुतलियां. कहां से आ गई। मां के ब्लड भरे गर्भाशय में इतनी हड्डियां कहां से आ गई? और बच्चा. जब बाहर आ जन्म लेता है तो चीखता किस लिए है कि किस नरक में ले आए क्या स्वर्ग में.
था मैं तो बताइए इस इस जादूगरी को क्या बोलेंगे एक और लाइन. बोलता हूं जिस दिन ये समझ में आ गया उसके बाद तो और भी भगवान में श्रद्धा बढ़ गई कि. हम जन्म लेते हैं जन्म लेने से पहले जितने छिद्र हमारे बॉडी बॉडी में है उतने ही. छिद्र जब जन्म नहीं हुआ होता है मां के गर्भाशय में भी होते हैं और वहां पे कोई.
ऐसा आपके लिए ना कपड़ा होता है ना यह होता है सिर्फ ब्लड होता है और आप कैसे सर्वाइव. करें वो नाभि से जुड़ा हुआ सिर्फ लिक्विड होता है जो नेचर कैसे बच्चे को देता है. पता नहीं ना कान में भरता है जाले बन जाते हैं ना इधर भर भरता है ना इधर भरता है ना. इधर भरता है ना इधर भरता है ना इधर भरता है ना इधर भरता है ना इतने पैरों तक और.
जैसे ही हम जन्म लेते हैं पहले पहले हमारे मां-बाप से लेके हम अपने सारे छिद्र जो है. बंद करते हैं और पूरी जिंदगी हम पूरी अपनी व्यवस्था इन्हीं छिद्रों को. बंद करने में लगा देते हैं कि हमें कानून ठंडा लग रहा है यार कपड़े अच्छे भाई ये. मतलब सही दिखना चाहिए। यह सही दिखना चाहिए। तो आप सोचिए कि भगवान नहीं है, गॉड. नहीं है, वो क्रिएटर नहीं है, वो जनरेटर नहीं है, ऑपरेटर नहीं है। वो है को कोई तो.
है प्रकृति का कोई चाहे मतलब साकार के रूप में, निराकार के रूप. में, हवा के रूप में या जल, वायु, धरती, आकाश, पाताल के क्या कॉम्बिनेशन की. जादूगरी है कि ये कैसे नाखून, कैसे बाल जम जाते हैं, कैसे ये आ जाते हैं। तो इसके. मतलब जीवन के इस रंगमंच में मर मरने से पहले.
बर्थ लेने के बाद यह जो चल रहा है ये सब नाटकीय व्यवस्था है। इसके व्यवस्थापक मत. बनो। हम तो केवल इसके पात्र हैं। अपनी पात्रता निभाओ और निकल लो। बस इतना ही. आपका रोल है। बाकी ना आप इसको बना सकते हो ना कुछ बिगाड़ सकते हो। इसलिए मैं मानता. हूं भगवान है। सेकंड लास्ट क्वेश्चन कोई ऐसा काम जो राजपाल यादव जी ने पैसों. के लिए किया हो रिग्रेट करते हो.
नहीं कुछ भी नहीं. नहीं नहीं जिसका पैसा लिया तो काम पूरे मन से करके दिया और अगर उसका काम नहीं कर. पाया तो कोशिश की कि उसका अगर उसने काम के लिए पैसा दिया तो उसका बहुत सारे. प्रोड्यूसर्स ऐसे मतलब है और और कोई प्रचार प्रसार कभी कुछ नहीं लगा. ऐसा नहीं नहीं कोई भी नहीं अभी अभी तक तो वैसा. नहीं कोशिश करता हूं कि पैसा जो लूं उसमें काम करके दूं और कोई ऐसा पैसा.
मिलने से बचाए जिसके लिए कोई गिल्टी हो या कोई मतलब गुलामी लगे।. जैसे आपका एक बड़ा वीडियो वायरल हुआ था यशु यशु वाला। उससे बड़ा बवाल चला था बहुत. लंबे समय तक। कई बार लोग पूछ लेते हैं अभी भी। नहीं नहीं वो देखिए हम मैं ना मैं. 2000 से या तो एक्शन कट की लाइफ जीता हूं या फिर धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो. प्राणियों में सद्भावना हो विश्व का कल्याण हो सनातन धर्म की जय हो सर्व धर्म.
की जय हो वसुधैव कुटुंबकम की जय हो यही तो पढ़ा है ना हमने तो हम किसी भी मंच पर. जाएं हम किसी की भी शादी में जाएं हम उसके घर. को खुशी कैसे मिलनी चाहिए हम उसकी खुशी में शामिल होते हैं। हमारा धर्म हमें यही. सिखाता है। हम दुनिया के हर धर्म की इज्जत करते हैं। अगर वह सब नाच रहे हैं तो. बिल्ली पर हमें नाचने में कोई प्रॉब्लम नहीं है। लेकिन जहां पे विचारधारा हम कौन. से में तो मैं 100 जन्म भी अगर मुझे मिले और मनुष्य क्योंकि मुझे पता नहीं कि क्या.
जन्म मिलने अभी किसको क्या जन्म मिलना है। लेकिन अगर मेरे हाथ में हो तो मुझसे भगवान. ऐसे ही कुछ काम करवाए जिसमें मुझे यह जिसमें कृष्णम वंदे जगतगुरु मैं ग्वाला. ही बनना चाहता हूं। मेरा अंश जो दुनिया के हर वंश को पूजे वही यदुवंश मैं मानता हूं।. अंश अंश से वंश बनता है और दुनिया के हर वंश को बनते। वही तो ब्रह्मांड उसमें.
कृष्णम वंदे जगतगुरु पहचानता हूं। और मैं मतलब जिस धर्म में पैदा हुआ हूं मैं. जिसमें कंफर्टेबल हूं अगरबत्ती लगाऊं ना लगाऊं लेकिन हमारे मन में हमारा भगवान से. तार जुड़ा हुआ है वो सनातन धर्म एक बार जन्म लूं या 500 बार लूं मैं बहुत खुश हूं. मैं इसलिए श्री राधे. कोई एक आखिरी डायलॉग जो आप सुनाओ और उसी पे हम समाप्त करते हैं।. चलें कौन सा डायलॉग सुनेंगे? आय हाय रहा नहीं जाता तड़प नहीं नहीं नहीं तड़प ही ऐसी.
है बस बस बस बस नहीं नहीं अरे भाई जो भी लाना दो लाना ठीक है अभी तो शुभांकर के. साथ बैठा हूं और कुछ वार्तालाप कर रहा हूं भूत बंगला 16 को रिलीज हो रही है प्लीज. प्लीज बहुत आशीर्वाद मिला है भूत बंगला देखें आशीर्वाद दें लव यू ऑल गॉड ब्लेस यू. जन्मदिन हमारा सफल रहा कल जन्मदिन के दिन अरे जन्मदिन की बधाइयां भाई जियो हजारों. साल सुभांगर जी और खूब आप स्वस्थ रहें व्यस्त रहें मस्त रहें.
और च पट्टे और अगली बार आप आ रहे हो हमारे यहां पे. जी अगली पिक्चर में. अगली पिक्चर हां ये जब वेलकम टू द जंगल हां. का शायद अगला पड़ाव है तो हम चाय और कुर्सी इंतजार करेंगे. बिल्कुल बिल्कुल मिलूंगा और एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी तो फिर. लेकिन मैं मैं कमिटमेंट मैं कमिटमेंट पूरा करना चाहता हूं लेकिन उस समय की सिचुएशन. आपकी की और टीम की और सबकी वो कोऑर्डिनेशन नहीं करेंगे.
हां कोऑर्डिनेशन हो कि खाली मेरे ऊपर दो चार तुम बोले थे आए नहीं मैं बाद में. बोलूं आपने बुलवाया ही नहीं तो ये ये सबकी जिम्मे कोशिश करेंगे कोशिशें कामयाब होती. लेकिन भाई कहते हैं सलमान भाई कहते हैं ना कि एक बार जो मैंने कमिटमेंट कर दी तो फिर. मैं अपने आप की भी नहीं सुनता हां तो कमिटमेंट मैं भी पूरा करना चाहता. हूं लेकिन कोशिश करेंगे कोशिशें कामयाब होती हैं ताकि हमें आपके यहां आके चाय. पीने का सौभाग्य मिले इंटरव्यू करें ना करें चाय जरूर पीना. नहीं इंटरव्यू भी करेंगे श्री राधे श्री राधे जय हो.
