Unplugged ft. Rajan Ji Maharaj | Raam | Krishna | Spirituality | Maha Kumbh | Balaji Mandir | Bihar
अरे हमरा बुझाता बबुआ जीएम हुई है त दूसरे. ने ना चुप रहब अरे ना ना य तो डीएम हुई है. हो एक ने कहा राजा जी हिंद के. सितारा य तो सीएम हुई है हु से उपरा पीएम. हुई है हो मन तिवारी जी साब कहे नहीं कि. महाराज हमको भी थोड़ा क्रेडिट दे दिया. करिए प्रभु जानत सब भी नहीं जनाए मीम. जानते हो आप.
बताइए पूरा बताइए जी मंगल भवन हे. भगवान हे. प्रभु जी मंगल भवाना लोगों ने उसका अर्थ. का अनर्थ कर दिया है जी मंगल भावना अ. मंगल. हारी बंगाल में भले जन्म हुआ है लेकिन मूल. शरीर हमारा है बिहार का गाने का शौक बचपन. से था बंबई भी गया मैं.
दिसंबर की बात है लोखंडवाला में इंडियन. आइडल सारमा से पहले हा उस दिन हो जाता ना. तो आज जो दिन भर भगवत गुणगान चल रहा है. इससे मैं वंचित रह जाता जब भगवान कुछ करते. हैं तो वर्तमान में लगता है कि हमारा. नुकसान हो गया लेकिन भविष्य में व हमारे. लिए हित प्रद रहता है जो भी भला बुरा. है श्री राम. जानते हैं आपको आलू पसंद है जय हो.
प्रभु पूरा रिसर्च करके बैठे हैं सुभाकर. जी आप हम लोग मोरिसस कथा करने गए लोग के. घर गए भोजन करने तो बड़े प्रेम से आकर मा. हमसे पूछे महाराज डू यू लाइक सूसू. सुसू हम क्या बोले. सूसू बोले महाराज वेरी टेस्टी हम क अरे. सुसू बोलके वेरी टेस्टी बोल रहे हो हम क. आप ही खाओ सुसू.
दिल्ली में सुसू नहीं मिलेगा आपको धरती के. किसी कोने में चले जाइए आलू मिलेगा हल्का. गीला भात दाल तड़का लगा हुआ बढ़िया घी का. छोक लगा हो उसमें पानी ना आ जाए और आलू को. पतला पतला अर्ध चंद्राकार में काट के और. उसका भुजिया बने जीरा के साथ और मंगरेल का. सा फोरन लगाकर क्या बात है अमृत फेल है. उसके सामने राम जपते रहो.
काम करते. रहो वक्त जीवन का यूं ही निकल जाएगा मानस. जी का पाठ करने ज्यादा फायदा है या उसको. सुने भी दोनों बराबर है पाठ करने का. स्वभाव बन जाएगा तब सुनने की लत पड़ेगी. ऐसे भी एक पथिक. [संगीत]. को भव. पार करो. अदभुत आपकी आंखें भी भर आई ये मेरे बड़े.
निकट है पद कोई खास. वजह मेरे जैसे को ठाकुर जी सेवा में लगाए. सीताराम. सीताराम. सीताराम. कहिए जाही विधि राखे. राम वाही विधि रहिए.
जय सियाराम आपको लग रहा हो कि आज पॉडकास्ट. के बीच में मैं कहां से आ गया तो आज से. हमने एक नई शुरुआत की है जिसमें हम आपको. वजह बताएंगे कि आप अगले दो घंटे इस. पॉडकास्ट को क्यों देखें देखिए राजन जी. महाराज वो व्यक्ति हैं जिनकी राम कथाएं. सुनकर जीवन धन्य हो जाता है राजन जी. महाराज की अवधि भोजपुरी मैथिली भाषा में. सुंदर भजन गीत हम सबने सुने लेकिन इस. पॉडकास्ट को भगवान श्री राम की कथा सुनने. के साथ-साथ.
जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार करने के. लिए एक नई दिशा पाने के लिए भक्ति को लेकर. जो मन में कई सारे सवाल आते हैं उन सवालों. का जवाब लेने के लिए और खास तौर पर युवा. पीढ़ी जो है उन्हें जरूर य पॉडकास्ट देखना. चाहिए क्योंकि यह पॉडकास्ट आपके जीवन को. एक नई दिशा. देगा भगवान से आपको कनेक्ट करेगा और यह. एहसास दिलाएगा कि ईश्वर जो कुछ करते हैं. उसके पीछे कोई ना कोई वजह होती है तो. पॉडकास्ट देखिए आप हमें रिव्यू कमेंट. सेक्शन जरूर दीजिएगा और प्लीज जाते-जाते.
सब्सक्राइब भी कीजिएगा ताकि हमें थोड़ी सी. और ऊर्जा मिल सके ताकि राजन जी महाराज. जैसे और तमाम दिग्गज लोगों को हम आपके. समक्ष ला सके उम्मीद करते हैं इस पॉडकास्ट. का अनुभव शानदार रहेगा कैसे बन गए राजन. तिवारी राजन जी. महाराज कहानी तो ऐसा है सुभंकर जी की. मैंने कभी सपने में भी ये नहीं सोचा कि. मैं राम जी की कथा गाऊंगा भूलकर भी नहीं. दूर-दूर तक नहीं.
मैं विज्ञान का छात्र रहा और कलकाता में. कॉलेज है स्कॉटिश चर्च कॉलेज जहां से. स्वामी विवेकानंद जी नेताजी सुभाष चंद्र. बोस जी सब पढ़े तो मैं ग्रेजुएशन उस कॉलेज. से किया और उसके बाद से मैं अपनी फैक्ट्री. चलाने लगा लोहे की एक फैक्ट्री है. मैन्युफैक्चरिंग यूनिट उसमें हम लोग मैं. जब था तो हम लोग रेलवे का ब्रेक शू बनाते. थे भारतीय रेलवे के. लिए गाने का शौक बचपन से था और इसी शौक. में.
बंबई भी गया. मैं एक मैं नाम नहीं लूंगा एक गाने का. कंपटीशन था वहां पर तो पूरे भारत से लगभग. 1 स बच्चे सिलेक्ट हुए उसमें मैं भी था. मेरे छोटे भाई विनय भी थे रियलिटी शो में. रियलिटी शो में दोनों लोग गए बंबई और मुझे. अभी भी याद है व डेट था 26 दिसंबर का जिस. दिन बंबई में ऑडिशन साल कौन सा था साल था. 2008 अरे बहुत पुरानी कहानी नहीं 200. दिसंबर की बात है लोखंडवाला में तो वहां 1.
स बच्चों में से पहले 36 बच्चे चुने गए तो. उसमें भी मैं आ गया फिर सेकंड राउंड हुआ. 36 में से 12 बच्चों को चुनना था ऑडिशन. चला रात को 11:30 बजे तक तो मैं जैसा गाया. था कि मुझे उम्मीद था कि हो जाएगा रिजल्ट. अनाउंस करने के ठीक 5 मिनट पहले केवल मुझे. बुलाया गया मैं जब भीतर गया तो सारे. इंस्ट्रूमेंट प्लेयर हट गए थे तो जो सामने. बैठे थे महानुभाव लोग उन्होंने कहा कि कुछ.
और गा के सुनाइए तो बो इंस्ट्रूमेंट तो है. नहीं ऐसे ही गा दीजिए तो हम जैसे प्रारंभ. किए बोले ठीक है. जाइए समझ में कुछ आया नहीं बाहर निकला और. पाच मिनट बाद रिजल्ट आया कि मुझे भी निकाल. दिया गया. तो अंधेरी रेलवे स्टेशन पर रात को बैठ के. बहुत रोया था उस दिन कि अब कलकाता क्या. बोलूंगा घर में इतना दूर आए थे खैर हर. इक्षा बात गई लेकिन आज मैं सोचता हूं.
रघुनाथ जी की इतनी कृपा कि अच्छा हुआ उस. दिन नहीं हुआ क्योंकि यदि उस दिन हो जाता. ना तो आज जो दिन भर भगवत गुणगान चल रहा है. इससे मैं वंचित रह जाता तो हमारे महाराज. श्री जो आपने प्रारंभ की जिस वाक्य से. हमारे पूज्य महाराज श्री कहते हैं हमसे कि. बाबू तुम्हारे सोचने के अनुकूल यदि. व्यवहार हो. गया तो मिठाई बांट.
सभी बांटते. हैं सोचने के विपरीत यदि व्यवहार हो गया. बात थोड़ी अटपटी है मिठाई तो बांटो लेकिन. अबकी बार बाजा बजवा के मिठाई. बांटो तो हमने बात अटपटी है तो मैंने पूछा. कि सरकार ऐसा क्यों कह रहे हैं तो. उन्होंने कहा बेटा जब तुम्हारा सोचा हुआ. नहीं हुआ तो किसी का तो सोचा हुआ हुआ वह. भगवान का सोचा हुआ हुआ और जब भगवान कुछ. करते हैं तो वर्तमान में लगता है कि हमारा. नुकसान हो गया.
लेकिन भविष्य में व हमारे लिए हित प्रद. रहता है और वह अक्षर सह मेरे जीवन में. घटित हुआ मतलब भगवान जिसने हमको बनाया है. वो बेहतर जानता है कि हमारे लिए क्या. अच्छा है वही जानते. हैं एक मेरा भजन है. हा जो भी भला बुरा. है श्री राम. जानते. हैं बंदे के दिल में क्या.
है मेरे राम. जानते हैं एक शब्द है किस्मत आप भी परिचित. है सभी लोग परिचित है लक. डेस्टिनी किस्मत के नाम को. तो सब जानते हैं. लेकिन किस्मत में क्या लिखा. है मेरे राम.
जानते हैं तो भगवान ही एक है जो सब जानते. हैं हम नहीं जानते हैं कि वह सब जानते हैं. इसलिए हम अपना दिमाग लगाते रहते हैं बहुत. सुंदर कहानी है लेकिन इसम हमको एक सवाल आ. गया क्यक बहुत सारे लड़के लोग हम आपको. सुनेंगे. और मैं कई बार कहता हूं कि जीवन में सफल. व्यक्ति से ज्यादा असफल लोगों से. मिलो असफलता कितना जरूरी जीवन में क्योंकि. आप कह रहे हो कि आप रोए थे रात भर रात लगा.
होगा कि जीवन में क्या हो रहा है हमको भी. याद है बीटेक में हमें नौकरी नहीं मिली थी. हम सोच पापा अगर नौकरी मिल जाती. सर्टिफिकेट दिखा देते लेकिन मिल गई हो तो. आज यहां नहीं बैठे होते देखिए मेरा अपना. व्यक्तिगत मानना है सफलता बिना असफलता के. नहीं प्राप्त होनी. चाहिए क्योंकि असफलता से सफलता के मूल्य. का पता चलता है जबरदस्त अब जैसे मैंने. पढ़ा है कहीं पर य बल्ब.
किसने इन्वेंट किया एडिसन ने मैंने ऐसा. सुना है कि शायद हजार बार 100 की हजार बार. उन्होंने प्रयास किया उसके बाद वह सफल हुए. तो किसी ने कहा कि तुम क्या प्रसन्न हो. रहे हो जी तुम तो इतनी बार फेल हुए हो. बोले मैं फेल नहीं हुआ हूं मैं इतने तरीके. बता सकता हूं जिससे बल्ब नहीं बनाया जा. सकता तो. असफलता जीवन में आना अति आवश्यक है. क्योंकि असफल होने के बाद जब सफलता मिलती.
है तो उसके मूल्य का पता चलता है हमारे. महाराष्ट्री मैंने जो कुछ भी पाया. महाराष्ट्री कारण पाया मेरे महाराज मतलब. समझ रहे हैं ना ात स्मरणीय पूज्य श्री. प्रेम भूषण जी. महाराज उनके एक एक वचन उनके एक एक वाक्य. ने मेरे जीवन में इतना बड़ा प्रभाव किया. है इसकी कोई कल्पना नहीं कर. सकता बार-बार कहते हैं कि बेटा आराम से. कुछ नहीं मिलना. चाहिए क.
अब आप बताइए राम जी साक्षात भगवान है राम. जी को बन जाने की क्या आवश्यकता थी जो राम. जी चित्रकूट में बैठकर कुष की चटाई में से. सीक निकाले हैं और उस सीक को ब्रह्मास्त्र. बनाकर छोड़ दिए वह सीख जयंत को तीन लोक. चौद भुवन दौड़ता. रहा वह राम जी अयोध्या में बैठकर बाण. चलाते तो लंका में रावण को ना लगता क्या. भगवान का बाण तो मख बाण है अभी आज ही कथा.
में बात आई कि आजकल ऐसे ऐसे मिसाइल्स आए. हैं कि उसमें नेविगेशन इन बिल्ड है आप. लोकेशन केवल सेट करिए एग्जैक्ट लोकेशन पर. वो हिट कर देता है जाकर ठीक इधर उधर नहीं. जाएगा भगवान राम का बाण का नाम था मोघ बाण. और उस बाण की विशेषता थी कि भगवान जब. छोड़ते थे तो सीधे लक्ष्य का भेदन करता था. और केवल भेदन ही नहीं करता था भेदन करने. के बाद वापस राम जी के तरकस में आ जाता था.
यह भगवान के बाण की विशेषता है हमारे. पूज्य महाराज श कहते हैं. बाबू जीवन में आराम से यदि कुछ प्राप्त हो. जाएगा तो उसका मूल नहीं. रहेगा राम जी बन गए रावण को मारने के लिए. नहीं राम जी पिताजी उनको राज युवराज बनाना. चाहते. हैं पिता के जीवन इतनी तपस्या जब तक पुत्र. के जीवन में नहीं आएगी वो पिता की सल्तनत. को संभाल नहीं सकता सही बात आपने आप तो.
पत्रकार हैं समाज में देखिए कई कई. रियासतें समाप्त हो गई मालिक के जाने के. बाद स्वामी के जाने के बाद गुरु के जीवन. इतनी तपस्या शिष्य के जीवन में नहीं है तो. गुरु उस तेज को संभाल नहीं. सकता हर फील्ड में लागू हर हर फील्ड में. हर फील्ड में तप भाई मानस में कहा गया है. पार्वती जी से कहा जा रहा है तप आधार सब. सृष्टि.
इस सृष्टि का आधार ही तपश्चार्य. है अब यहां तप का डेफिनेशन अलग-अलग हो. सकता. है जैसे तीन अवस्था. है बचपन जवानी और वृद्धावस्था. बचपन की तपस्या क्या है अब जैसे बच्चा. चंचल रहता है कभी यहां बैठेगा कभी उधर. बैठेगा कभी उधर बैठेगा लेकिन बच्चा यदि. बचपन में एक स्थान पर शांत होकर बैठा है. तो तपस्या कर रहा है. आप कथा में आइए मुझे आश्चर्य होता है सात.
सात साल के आठ आठ साल के बच्चे चार-चार. घंटे कथा में बैठे रहते. हैं केवल बैठे नहीं रहते मैं कथाओं में. पूछता रहता हूं वह रिप्लाई करते हैं अब. बड़ों से अधिक रिप्लाई करते हैं यह. तपश्चार्य है उनकी जवानी में मनुष्य यदि. आलस्य का त्याग करके पुरुषार्थ में लगा. हुआ है वह तप कर रहा है अब वृद्धावस्था. में ऊर्जा चली आती है जेवा पर.
य वृद्धावस्था में कोई वृद्ध मौन होकर. बैठा हुआ है तो तप कर रहा है जबरदस्त तो. बिना बिना तपे आदरणीय कुछ मिलने वाला नहीं. है तपश्चार्य ही जीवन में धारिता का. निर्माण करती है धारिता समझ रहे हैं ना. कुछ आएगा तो टिकेगा जितना जितना स्पेस है. उतना ही आएगा तो स्पेस का क्रिएशन होता है. तब. से तो राम जी को पिताजी युवराज आने वाले. हैं आगे चलकर व राजा बनेंगे राम जी ने.
सोचा मैंने जीवन में कोई तपश्चार्य तो की. नहीं अभी मैं इसको संभाल नहीं पाऊंगा. इसलिए भगवान ने ही रचना बना दी भगवान बन. निकल गए दूसरी बात राजा को अपनी सत्ता को. संभालने के पहले अपने राज्य को देखना. चाहिए अस्तु. भगवान समाज के सबसे नीचे पायदान पर बैठे. हुए व्यक्ति से भी जाकर मिले अपने 14 वर्ष. की वात्रा में यह तपश्चार्य है इसलिए मेरा. व्यक्तिगत मानना है कि एक बार में सफलता.
होनी भी नहीं चाहिए फिर उसका मोल नहीं पता. रहता है रगड़ा करिए मैं कथा प्रारंभ किया. ना जब तो मुझे अभी भी याद. है महाराज श्री के गांव के पास कहीं कथा. चल रही थी ठंड का समय था तो सुबह मॉर्निंग. वक पर हम लोग निकले थे तो आप गांव के. मिट्टी के लोग हैं मेढ़ समझते हैं ना. अच्छे से दो खेत के बीच में मेढ़ वही जिसे. लोग थोड़ा बढ़ा देते.
उसी मेड़ पर हम लोग चल रहे थे आगे आगे. महाराट्र पीछे मैं था अब ये था कि मुझे. कथा प्रारंभ करनी है हम बहुत जल्दी आगे. पहुंच गए हमको लग रहा कि बंबई से बंबई का. राजन तिवारी राजन जी महाराज की बीच की कथा. क्या रही नहीं नहीं मैं अ तपस्या प बता. रहा हूं महाराज जी से मुलाकात के पहले. हमको भी जानना है अच्छा अच्छा आप बंबई में. फेल हो गए इसको पूरा करके बताता इसको तो. हम लोग चल रहे थे उस पर अब मुझे कथा. प्रारंभ करनी थी तो महाराज श्री ने कहा.
हमसे कि राजन तुम्हारे पास दो मार्ग. हैं पहला तो मार्ग यह है कि आप अपना खर्च. बताइए हम कि आपका क्या महीने का खर्च है. हम आपको देते हैं आप मेरे पास रहिए. निश्चिंत रहिए कोई टेंशन नहीं है जीवन में. जहां भेजेंगे वहां जाकर कथा करिएगा चुपचाप. मेरे पास आ जाइएगा एक यह मार्ग है दूसरा. मार्ग है कि आप यहां से निकलिए छोड़ के. हमको. अपनी यात्रा करिए कैसे करेंगे आप जानेंगे.
लेकिन एक शर्त है मेरे किसी भी परिचित के. पास आप ना जाएंगे ना उनसे फोन पर वार्ता. करेंगे अपनी यात्रा करिए अपनी दुनिया. बनाइए क्या करेंगे मैं तो निरुत्तर. था तो मैंने एक वाक्य कहा कि सरकार आपके. कहने से मैं इस क्षेत्र में. आया मेरे लिए जो उचित मार्ग हो आप बताइए. मैं उस पर चलूंगा महाराज बोले करेंगे हम. अवश्य करूंगा तो बोले निकलो यहां से छोड़.
के तो हम लोग यात्रा प्रारंभ किए 2011 से. कथा करते करते करते करते अभी 2025 में. दिल्ली में कथा गा रहे हैं जबरदस्त अब हम. लौटते हैं फिर से पीछे जी बंबई में एक. लड़का रोता है जी उसका सिलेक्शन नहीं होता. है जी कोलकाता में उसका जन्म होता है अब. जब मैं सुनता हूं तो अवधी बड़ी खूबसूरत. बोलता है हमारे मन में प्रश्न आता है कि. बंगाली आदमी इतना सुंदर अवधि कैसे बोल रहा. है जी एक दूसरा प्रश्न ये यात्रा कैसे हो.
गई क्योंकि आप फिल्मी गाने गा रहे होंगे. बंबई जाते जी जी जी जी प्रभु के भजन को. पढ़ना सीखना समझना आपकी जिज्ञासा गाने तक. थी जितना हमने अब तक जाना आपकी जिज्ञासा. ईश्वर में नहीं थी मानस को आपने कैसे पढ़ा. कैसे कंठस्थ किया ईश्वर को कैसे समझा और. आज जो स्वरूप हम देख रहे हैं इसके पीछे. तपस्या क्या. थी मैं आपको बचपन से लेकर चलता. हूं मेरे घर का जो माहौल है है परिवेश वो.
जन्म के पहले से अध्यात्मिक है. हम इसके पीछे कारण मेरे पूज्य बाबू जी थे. तो पिताजी नहीं रहे 2019 में पिताजी हमारे. कलकाता में एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे. और उसके साथ-साथ अपना एक व्यापार भी करते. थे और इस नौकरी के काम को करते हुए जहां. से मां गंगा प्राकट्य हुई है गोमुख. गंगोत्री को पर शिव भक्त थे वह गोमुख जाकर.
कावड़ में जल लेकर पैदल चलकर बारहो. ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक. किए अकेले पैदल पैदल मैं जब एक वर्ष का था. तो बाबू जी हमारे गोमुख से रामेश्वरम गए. थे पैदल मां मुझे गोद में लेकर गई. थी उसके. बाद 1983 के बाद मैं. 2000 23 में गया था राम कथा गाने के.
लिए अ 40 साल बाद और जब मैं बैठा व्यासपीठ. तो मेरे नित्र सजल हो गए थे स्मरण करके. मैंने कहा कि मैं 40 साल बाद यहां आया हूं. मैं एक वर्ष का था तो मुझे मां गोद में. लेकर आई थी पिताजी गंगाजल लेकर आए थे. भगवान का अभिषेक करने के लिए 40 साल बाद. में राम कथा गंगा को लेकर आया हूं बाबा का. अभिषेक करने के लिए तो पिताजी के कारण वो. घर का माहौल आध्यात्मिक.
था प्रत्येक वर्ष में लगभग 12 से 15 बार. पिताजी अखंड श्री रामचरित मानस का पाठ. करवाते थे दो बार घर पर होता था एक बार. गांव में होता था फिर तारकेश्वर में श्री. वेदनाथ धाम में गोरकपुर में पटना हनुमान. मंदिर में ऐसे करके तो मानस जी का पठन. पाठन तो बचपन से ही चलता रहा वो एक कहे तो. रक्त में समा गया था पढ़ना हां ये अवश्य. मैं स्वीकार करूंगा उस समय केवल पढ़ थे.
अक्षर क्या पढ़ रहे हैं इसका बोध नहीं था. जैसे अक्षर पढ़ रहे हैं ना कितना सुंदर. धुन में गा ले रहे हैं आनंद आ रहा है लोग. झूम रहे हैं इस पर ध्यान रहता था लेकिन. क्या गा रहे हैं यह समझ नहीं पाए कभी आपने. प्रश्न किया कि बंगाल में जन्म लेने वाला. बच्चा अवधि कैसे गा रहा है तो बंगाल में. भले जन्म हुआ है लेकिन मूल शरीर हमारा है. बिहार का बिहार में एक जिला है सिवान यूपी.
बिहार का एकदम बॉर्डर है वहां एक स्टेशन. है मैरवा मैरवा के पास गांव है हमारा तो. कलकत्ता में रहने के बाद भी हम लोग घर में. जो आपस में वार्ता करते हैं वो आज भी. भोजपुरी में करते हैं हम हम तीनों भाई मां. के साथ बाबू जी जब तक थे दीदी लोग के साथ. हम लोग आपस में भोजपुरी में बात करते हैं. तो जिसके कारण बंगाली भाषा का प्रभाव नहीं. पड़ा बंगाली भी बोलते हैं सारी भाषाए उधर. की बोलते हैं लेकिन उसको हावी नहीं होने.
दी अपने ऊपर तो जिसके कारण वह अपनी मिट्टी. से लगाव रहा और सबसे बड़ी बात बताएं आपके. इस पॉडकास्ट के माध्यम से मैं जितने लोग. सुन रहे उनसे प्रार्थना करना चाहता हूं आप. दुनिया की हर भाषा. बोलिए अच्छी बात है लेकिन जिस भाषा में. आपका जन्म हुआ है उसका सबसे अधिक सम्मान. करिए क्यों इसके पीछे कारण क्या है अब. जैसे आप अयोध्या के पास के हैं. मैं भी मूल रूप से बिहार का हूं कोई.
बंगाली होगा आदमी जब रोता है ना शुभंकर जी. तो रोते समय वह अपनी मातृभाषा में रोता. है बंगाली दुनिया के किसी कोने में रहे वह. रोएगा ना तो मांगो मांगो ही. बोलेगा हम लोग कभी रोएंगे ना तो माहिरे. माहिरे. कहेंगे तो जो विपत्ति में जो आपके साथ. खड़ा है वो आपकी अपनी भाषा है तो अपनी. भाषा का आदर सम्मान आप दुनिया के किसी.
कोने में रहिए आपको करना चाहिए तो उसी ये. हम लोग घर में भी आज भी हम लोग भोजपुरी. में बात करते हैं तो जिसके कारण व अवधी. भाषा पर पकड़ आप देख रहे हैं वही उसके. पीछे कारण है जबरदस्त तो वहां से आपको. प्रेम हुसन जी महाराज कैसे मिले. फिर पूज्य महाराज श्री के पी मिलने के. पीछे कारण है विनय मेरे छोटे भाई 2001 में. मिले थे. वो 2003 में तीन में इंडियन आइडल सारे गमा. से पहले हां हा व बिना छोटे भाई है मेरे.
हां तो वह सामने बैठे जी हां तो ये बहुत. अच्छा गाते हैं हमसे भी अच्छा गाते हैं. विनय कथा में हारमोनियम बजाते हैं ये. तो इनका एक लोकगीत का कैसेट रिलीज हुआ था. वेब म्यूजिक से हम रतिया पहाड़ लागे हम और. य टाइटल सॉन्ग है इसमें गरीबी का बड़ा. अद्भुत चित्रण हुआ है लेखक हैं पूज्य. चाचाजी पंडित तारकेश्वर मिश्र राही बलिया.
के पास के वो पूज्य महाराज श्री के बड़े. अच्छे संपर्क में है तो वह गीत कहीं से. कैसेट महाराष्ट्र जी को मिल. गया महाराष्ट्री सुने तो हमको बताया बेटा. हम उसको कम से कम 500 बार सुना उस गीत को. तो चाचा का नाम देखे तो उनको फोन किए कि य. विनय तिवारी कौन है तो बताए कि कलकाता के. तिवारी जी उनके पुत्र हैं तो नंबर लेकर उस. समय लैंडलाइन नंबर हुआ करता था नंबर ले के. फोन किए 2003 में विनय से बात किए और फिर.
बोले कि हम कलकाता आएंगे तो बेटा आपसे. मिलेंगे तो 2003 दिसंबर में कोलकाता कथा. थी महाराष्ट्र की वो कथा करने आए फिर हम. लोग सब परिवार गए पहली मुलाकात पूज्य. महाराजा श्री से वहीं पर हुई हम लोग की. उसके बाद तो फिर मिलना जुलना लगा रहा फिर. प्रभाव. ऐसा अच्छा एक सवाल हमारे मन में और आता है. वाल्मीकि रामायण मैंने कई बार सुना भी. आपको कि वाल्मीकि रामायण लोगों को कंठस्थ. नहीं हुई थी मानस जी जो है उसका प्रचार.
प्रसार अलग रहा क्योंकि आसान थी लोग समझ. गए जनजन गया दोनों एक है अलग-अलग. है कल्प भेद के कारण कहानिया अलग. है श्रीमद वाल्मिक रामायण संस्कृत देव. भाषा में है और श्री रामचरित मानस जी अवधि. भाषा में है ग्राम ग्राम्य भाषा में ऐसा. मैंने सुना है महापुरुषों के मुख से कि. पूज्य पाद गोस्वामी तुलसीदास जी भी. प्रारंभ में संस्कृत में ही लिखना प्रारंभ.
किए हम छ सात दिन शायद हां वो लिखते गए वो. मिटता गया तो स्वयं साक्षात भगवान. विश्वनाथ की आज्ञा हुई कि आप इसको गांव की. भाषा में लिखिए तो जिसके कारण अब इसका. सबसे बड़ा इंपैक्ट मैं आपको बताऊं यहां हम. लोग इतने लोग बैठे हैं यदि आपसे पूछे कि. वाल्मीकि रामायण का एक श्लोक सुनाइए नहीं. पता होगा नहीं पता होगा किसी पुराण का. श्लोक सुनाइए नहीं पता होगा लेकिन मैं दा. के साथ कह सकता हूं ऐसा कोई सनातनी धरती.
पर नहीं होगा जिसको मानस की कम से कम एक. चौपाई ना याद हो भले कभी मानस खोला भी. नहीं होगा लेकिन गाएगा मंगल भवन मंगलहारी. द्रव स दशरथ अजीर बिहारी तो यह प्रभाव है. मानस जी का हम बहुत अच्छा बोलते हैं अच्छी. बात है लेकिन हम जो बोलते हैं वह कितने. लोगों तक पहुंचता है य बहुत बड़ा विषय है. लेकिन फिर मेरे मन में सवाल आता है अवधि. भी तो सीमित क्षेत्र है.
हम अवधि भी अवध की भाषा जैसे हमारी भाषा. है हम ही लोग संकोच करते थे हम झूठ क्यों. कहे जब हम दिल्ली रहते थे तो हम अवधि. बोलने में संकोच करते थे वो तो बाद में. हमारे हित मित्र मिले कई सारे जो अवध के. लोग थे बाहर निकले मेरे एक मित्र है विशाल. मिश्रा बड़ा अच्छा गाते हैं उन्नाव के. रहने वाले हैं तो हमने उन्होंने पॉडकास्ट. किया हमने अवधि में बात की फिर उससे हमने. देखा लोगों को बड़ा पसंद आया फिर तो हमने. अवधि को बढ़ावा भी देना शुरू किया और असर. ये गया कि हमने श्रद्धा कपूर से लेकर वरुण.
धवन तक सधी बुलवा. दी बड़ी अच्छी बात लेकिन इतना प्रचार. प्रसार मानस जी का अवधि भाषा सब क समझ गए. सहजता के कारण गोस्वामी जी ने अवधि को. बड़ा सहज करके लिखा है अब जैसे एक ऋषि है. उनका नाम है याज्ञवल्क्य. शुद्ध यदि वर्तनी लिखने जाए हम तो य में आ. की मात्रा ज्ञ व आधा ल आधा क य इतना टेढ़ा.
नाम है अब गोस्वामी जी देखि तो बड़ा टेढ़ा. नाम है जो कम पढ़ा लिखा हु बोलिए नहीं. पाएगा तो गोस्वामी जी ने उसको सहज कर दिया. याज्ञ वल के जी को जाग बलिक लिख. दिया अब इसको तो कोई पढ़ लेगा और मैं आपसे. एक बात कहूं देव भाषा और अवधि भाषा देव. भाषा सब नहीं पढ़ पाएंगे संस्कृत लेकिन जो. अवधि भाषा है उस चौपाई को जो हिंदी जानते. हो पढ़ लेंगे और मानस जी की ऐसी महिमा है. कि जब आप मानस जी को पढ़ना प्रारंभ करेंगे.
ना तो पढ़ते पढ़ते की स्थिति ऐसी आती है. कि उसके अर्थ अपने आप निकलने प्रारंभ हो. जाते हैं हम वो अपने आप मानस जी की. ग्रंथियां खुलती जाती हैं और अर्थ प्रकट. होते जाते हैं जिसके कारण जनमानस में इसकी. व्याप्ति हो गई अब इसमें भी कई सवाल हमारे. मन में आता है एक सवाल तो ये आता है कि. जिस दौर में लिखी गई होगी हम क्योंकि किसी. भी चीज को जब नए दौर में आप डालते हैं तो. उस परे सवाल संदेह बड़ा खड़ा होता है जी. तो इसकी एक्सेप्टेंस आसानी से हो गई थी या.
शुरुआत में कहा गया कि नहीं नहीं ये. सम्मानित नहीं है यह मूर्खतापूर्ण है ऐसा. कुछ आज से ठीक सा स साल पहले लिखी. गई संवत. 1611 में स्वामी जी कहते हैं संवत. 1631 आज संवत 2031 है तो ठीक 450 साल पहले. लिखी गई जब गस्वा ऐसा मैंने सुना. महापुरुषों के मुख से जब गोस्वामी जी ने.
लिखा तो समकालीन जो विद्वान थे उसको. स्वीकार नहीं किए मानस जी को क्योंकि. ग्राम्य भाषा में थी य मानस जी उस समय. सारे ग्रंथ हमारे संस्कृत देव भाषा में थे. तो गोस्वामी जी ने कहा कि मैंने लिखा नहीं. मुझसे लिखवाया गया है बाबा ने लिखवाया है. तो फिर निर्णय हुआ कि ठीक है बाबा ही. निर्णय देंगे तो श्री विश्वनाथ जी में. मानस जी की प्रति को रखा गया. सब उसके ऊपर सभी धर्म ग्रंथ पुराण वेद.
शास्त्र सबको रखा गया और पट बंद कर दिया. गया रात भर बाबा बाहर बैठ कर के गोस्वामी. जी एक ही बात कहते रह गए हे बाबा इस पर एक. एक मैं पंक्ति भी गुनगुनाता हूं कभी. कभी. बाबा अब राखो. लाज. हमारी यही गोस्वामी जी रात भर गाए और आपको. बताएं सुबह जब पट खोला गया तो सभी ग्रंथों.
के ऊपर श्री राम चरित मानस जी थे जय श्री. और केवल थे नहीं मानस जी की उस प्रति पर. भगवान श्री विश्वनाथ जी का हस्ताक्षर था. और यह शब्द वहीं प्रकट हुआ सत्यम शिवम. सुंदरम सुंदरम इसका अर्थ जो इसमें है यही. सत्य है शिव यानी कल्याण यही कल्याण करने. वाला है और यही सबसे सुंदर ग्रंथ है. स्वामी जी तो कहते हैं नाना निगमा गम सतम. यद रामायण नितम कोचन तोप नाना पुराण 18.
पुराण चार वेद छह शास्त्र इसके बाद जितने. रामायण है 100 करोड़ से ऊपर रामायण की. संख्या है ग स्वामी जी कहते सबके सार को. निचोड़. करर और उस श्री रामचरित मानस में गोस्वामी. जी ने भर दिया एक श्रीधाम वृंदावन में. महापुरुष थे प्रात स्मरणीय पूज्य श्री. अखंडानंद जी महाराज अद्भुत विभूति थे. भारतवर्ष के तो उनका एक नियम था कि नित्य.
शाम को श्री रामचरित मानस जी की चौपाइयों. को किसी शिष्य के श्रीमुख से सुना करते. थे एक दिन किसी परिकर ने पूछा कि गुरुदेव. आप तो परम वेदांती हैं आप रामचरित मानस को. ही क्यों सुनते हैं नित्य कभी पुराण सुनिए. कभी गीता सुनिए कभी वाल्मीकि सुनिए तो. बोले तुम पहले इधर आओ तुम प्रश्न कर लिया. मैं तुमसे प्रश्न कर रहा हूं. एक प्लेट में आम एक में सेव एक में अंगूर.
और चौथे में प्लेट नहीं है जग है और उसमें. आम सेव अंगूर का रस भरा हुआ है चारों में. से कोई एक उठाना है क्या उठाओगे तो उसने. कहा मैं तो जग उठाऊंगा तीनों का आनंद. मिलेगा स्वामी जी बोले मैं भी जग लेकर ही. बैठा हूं सारे वेद पुराण का आनंद श्री. रामचरित मानस मेंही भरा हुआ है य मानस जी. की महिमा है अदभुत सुंदर लेकिन फिर एक. सवाल हमारे मन में आता है. मुगल काल चल रहा था जिस दौर में लिखा गया.
अब एक सवाल इसको लेकर यह भी आता है कि. मुगल काल में क्या इतनी आजादी थी किस तरह. से लिखा गया प्रचारित प्रसारित हुआ कोई. विरोध शद औरंगजेब का शासन काल था उस वक्त. या उसके आसपास के शासनकाल में ही अकबर. अकबर अकबर का शासनकाल था अकबर का शासनकाल. था अकबर को लेकर भी हाला कई नजरिया लोगों. का है कुछ महान मानते हैं कुछ मानते हैं. कि उनका पीआर अच्छा था उस टाइम पे. देखिए उसमें विरोधाभास नहीं था यहां एक.
बार चोरी करने का प्रयास किया गया श्री. रामचरित्र मानस जी को व अपने मित्र टरमल. जी के पास रखे थे शायद टोडरमल जी अकबर के. ही दरबार में थे क्या हम टोडर मल जी तो जब. चोर चोरी करने पहुंचे तो बाहर दो पहरेदार. मिले धनुष बाण लेकर के वो स्वयं रघुनाथ जी. और लक्ष्मण भैया थे तो प्रयास तो किया ही. जाएगा तब से चलता आ रहा अभी भी चलता आ रहा. है.
लेकिन सीम की चाप सकाई कोई तासु बड़ रखवार. रमा पति जासु जहां भगवान ही स्वयं लिखवाए. हैं भगवान ही रक्षा करने वाले हैं तो. कितना भी कोई विरोध करे उसके कोई प्रभाव. नहीं पड़ने वाला हमने एक पॉडकास्ट किया था. कुमार विश्वास के साथ कुमार विश्वास ने. कहा. कि सीता माता को जंगल में भेजने वाला जो. अध्याय है वो बाद में अलग से ऐड किया गया. ऐसा उनका मानना है उन्होंने ये भी कहा कि. वो किसी और को नहीं कह रहे वो खुद कह रहे.
हैं शद उत्तरकांड में शायद ये है उन्होंने. कहा कि वो अलग से ऐड किया गया है कई. भ्रांतियां फैलाई गई ऐसी बातें रखी गई. जिससे नई पीढ़ी जो है उसके मन में रामायण. को लेकर रामचरित मानस को लेकर श्री राम को. लेकर मन में सवाल आए क्या सत्य है इसका. देखिए वो अध्याय सच है मैं बता र गर्वती. सीता को जंगल में छोड़कर आने का मैं श्री. रामचरित मानस जी के आश्रय में राम कथा. गाता हूं और जब आप श्री रामचरित मानस जी. पढ़े तो सात कांड है उत्तर कांड में पूज्य.
पाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहीं भी इस. प्रसंग का उल्लेख नहीं किया है कि प्रभु. ने मां का त्याग किया. था त्याग तो हो ही नहीं सकता त्याग वहां. होगा जहां दो. होंगे बंदों सीता राम. पद जिन परम प्रिय खिन्न उसके ऊपर है गिरा. अरथ जल बीच सम कहित भिन्न न भिन्न. सीताराम जी दोनों एक हैं तो अलग त्याग.
कैसे होगा गोस्वामी जी ने इस बात का कहीं. उल्लेख नहीं किया मेरे पूज्य पाद गुरुदेव. भगवान भी कहते हैं जगतगुरु भगवान चित्रकूट. सरकार कि बेटा यह बाद में जोड़ा गया विकृत. करने के लिए स्वरूप भगवान ने मां का त्याग. नहीं. किया गुरुदेव भवान भी कहते हैं गोस्वामी. जी तुलसीदास जी भी इसका उल्लेख नहीं किए. जब बाबा नहीं किए तो बाबा से अधिक ज्ञानी. हम और आप थोड़ी हो गए यानी नई पीढ़ी में. हा भ्रांति पैदा करने के लिए या धर्म को. देखने का नजरिया बदलने के लिए बदलने के.
लिए कि नई पीढ़ी सवाल करी कि कैसे भगवान. है क्योंकि नई पीढ़ी में कई लोग ऐसे मिलते. हैं मुझे जो कहते हैं कि वो प्रभु श्री. राम से जदा रावण को पसंद करते हैं क्योंकि. रावण ने माता सीता को हरण करने के बाद. बिछुआ नहीं हरण हरण कर ले अच्छी बात है. नहीं नहीं वो उस पैमाने पर गर्भवती महिला. को छोड़ा ना यह सवाल उठाते नहीं पीढ़ी के. लोग तो आप ये कह रहे हैं कि वो अलग से. जोड़ा गया था भ्रांति फैलाने के लिए देखिए. अब जैसे मां की अग्नि परीक्षा है पहले पढ़. तो तो लीजिए गोस्वामी जी ने स्पष्ट लिखा.
है कि सीता मैया का तो हरण हुआ ही नहीं था. हम रावण जिसको लेकर गया है वह सीता मैया. का प्रतिबिंब है. छाया राम जी ने अब देखिए कारण क्या. है लोग कहते हैं सीता मां को उठा ले गया. यह धनुष. है जिस धनुष को मेरी मां ने बाएं हाथ से. उठा लिया रावण उस धनुष को तो उठा ही नहीं. पाया तो मेरी मां को क्या खाक उठाएगा. कहिए वो तो साक्षात जगदंबा.
है भगवान मैया के साथ पंचवटी में लीला. प्रारंभ की है लक्ष्मण जी नहीं थे एकांत. में भगवान ने कहा कि जानकी जी मैं कुछ नर. लीला करना चाहता हूं अब रावण को भगवान ऐसे. कैसे मार देंगे रावण ने अभी तक राम जी के. प्रति कोई अपराध नहीं किया तो मारने का. कोई कारण तो चाहिए तो भगवान ने कहा कि आप. अग्नि में प्रवेश कर जाइए अग्नि क्यों. अग्नि नारायण भगवान के कारण पिता है अग्नि.
नारायण ही प्रसाद दिया आप अयोध्या के आप. जानते होंगे तो एक रूप से भगवान ने मां को. अपने कारण पिता के पास सुरक्षित करा दिया. ग स्वामी जी चौपाई लिखते हैं कि निज. प्रतिबिंब राख सीता तै सही रूप शल सुभ. नीता मां ने अपने प्रतिबिंब को भगवान के. पास रखा और अग्नि में जाकर बैठ गई इस. रहस्य को राम जी और मां को छोड़कर लक्ष्मण. जी भी नहीं जानते कि ये नकली भावी भी है. अब जब रावण बध के बाद सीता मैया बाग से आई.
है तो वहां गोस्वामी जी फिर लिखते हैं कि. सीता प्रथम अनल महु राखी प्रगट कीन च अंतर. साखी भगवान जिन सीता जी को अग्नि में रखे. थे उनको वापस निकालना है अग्नि से तो झूठी. रचना बनाई अग्नि परीक्षण की प्रतिबिंब की. सीता जी जाकर जल गई और असली मैया अग्नि से. बाहर चली. आई अब जो नहीं इतना डीप जानता अथवा जो. नहीं पढ़ा है वो भगवान पर लक्षण उठाता है.
कि भगवान ने मां की अग्नि परीक्षा ली तो. ऐसी कई भ्रांतियां है समाज में दूसरी बात. जो मैं निवेदन. करूं जब बड़े की कोई बात अब बड़े की का. बड़े का कोई. कार्य अपने समझ में ना आवे तो वहां बड़े. पर क्वेश्चन मार्क नहीं लगाना चाहिए हम. वहां यह स्वीकार करना चाहिए कि अभी हम यह. बात और यह व्यवहार समझने लायक नहीं हुए.
हैं होता क्या है हम बड़े पर ही श्रेष्ठ. पर ही क्वेश्चन मार्क लगा देते कि नहीं. बाबू जी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए अब हम. सिखाए बाबू जी को कैसा बोलना. चाहिए तो बाबू जी काहे होते हो क्यों बाबू. जीी होते हो वो हमारे मीडियम कहते हैं बॉस. इज ऑलवेज. राइट अच्छा लेकिन ये बड़ा मुझे लगता है कई. बार कि हमारे धर्म की खूबसूरती भी है कि. हमारा ही धर्म है जहां पर नारी का इतना. सम्मान है प्रभु श्री राम से पहले हम कहते. हैं सीताराम. राधे कृष्ण व इसीलिए मेरे मन में सवाल आता.
है कि जिस धर्म में राम जी से पहले सीता. जी का नाम लि आता हो जिस धर्म में कृष्ण. जी से पहले राधा जी का जिक्र किया आता हो. वहां पर बदनाम करने वालों ने कृष्ण जी और. राम जी दोनों पर कई लांछन लगा. दिए हर तरह के लोग हैं समाज में तभी समाज. का बैलेंस बना हुआ है इस समय नहीं उस समय. भी था वो शिशुपाल भगवान कृष्ण को कितना. अपशब्द कहा वो तो कृष्ण जी के सामने बोल. रहा है भगवान ने 100 अपराध को क्षमा किया. फिर उसका सर उतारा तो ये सब जगह लोग हैं.
अभी जो आपसे मैंने पोड कास्ट के पहले बात. कर रहा था सबको जाने अच्छी बात है लेकिन. सबको जानने से पहले अपने को जानना आवश्यक. है हमारे जो धर्म ग्रंथ है हमारे जो. मान्यताएं हैं मान्यताएं मानने के लिए हैं. श्रद्धा करने के लिए हैं श्रद्धा करके. रखिएगा तो उसका प्रभाव आपके जीवन में. दिखाई पड़ेगा जबरदस्त और हम अपने छोड़ के. बाकी सब ज्ञान पढ़ लेते हां सब पढ़ रहे. हैं. अपना छोड़ के आपन लड़िका निख संभला दूसरा.
का लड़िका खेलावत. नहीं हमारे गुरु जी कहते हैं गुरुदेव. भगवान कि दूसरे का लड़िका कन्हैया ही. क्यों ना हो. जाए अपने किस काम के लिए सही बात है अपने. लिए तो हमार बकल कन्हैया जैसा. है तो अपने को संभाला जाए जबरदस्त एक. मीडियम बड़ा हम लोग मीडिया में सुनते हैं. राम सबके हैं राम किसी धर्म के नहीं है. काहे कहा ता कि राम सबके हैं राम सबके हैं.
भगवान किसी एक जीव के लिए नहीं है नहीं. हमको समझना है क्योंकि हमने कश्मीर में. फारूख अब्दुल्ला को भी कहते हुए सुना वो. तो राजनीतिक विषय है नहीं वो राम को. रामधुन वो भी गाते हैं बड़ा जबरदस्त गाते. हैं आप सुनिए कभी अच्छा फारूक अब्दुल्ला. जी बड़ा अदभुत गाते हैं मतलब उनको सुनकर. भी आप मंत्र मुग्ध हो जाएंगे इतना बढ़िया. गाते हैं वच्छा हा और वो कहते हैं राम. हमारे भी है बाकी विरोध करते हैं और कई. बार मैंने कई मुस्लिम नेताओं को भी सुना. है तो ये राम सबके हैं कांसेप्ट क्या है.
बाकी भगवान को लेकर नहीं कहा था इतना. देखिए कृष्ण जी हिंदुओं के हैं शिवजी. हिंदुओं के राम जी काहे सबके हैं. अभी इस दिल्ली कथा के पहले हम हम लोग कहां. से कथा करके आए बाबू बंबई से हम 27 दिसंबर. को हम बंबई कथा करके रात को मैं कोलकाता. एयरपोर्ट पर उतरा हम. तो एक स्विट्जरलैंड के कोई व्यक्ति थे तो. मेरा धोती कुर्ता देख कर के हमको घूर रहे.
थे ने पूछा क्या हुआ तो बोले नाइस. ट्रेस बोले धन्यवाद तो मैं पूछा आप कहां. से तो बोले मैं स्विटजरलैंड से हूं यहां. पर एक विवाह में आया हूं तो हमसे पूछे आप. क्या करते हैं तो मैं बोला कि मैं राम जी. की कथा गाता हूं कौन. राम तो मैंने उनसे केवल एक बात बा के कहा. कि राम इस धरती पर जितने मनुष्य हैं उन. सभी मनुष्यों में आदर्श म. श्रेष्ठ व्यक्तित्व है उनकी कथा गाता हूं.
तो उन्होंने पूछा तो मैंने को दो तीन लिंक. भेजे उनको तो मैं देखा कि व उनका बैग आकर. बेल्ट पर घूम रहा है और वह छोड़ छाड़ के. उसको देखे जा रहे कोने में खड़े होकर राम. सबके इसलिए हैं क्योंकि राम ही को मर्यादा. पुरुषोत्तम राम कहा गया यदि कोई धरती पर. पुरुष है मनुष्य है तो उस मनुष्य में कोई. आइडियल मनुष्य कौन होगा तो राम है राम का. जीवन श्रेष्ठतम जीवन में से है राम के.
आदर्श श्रेष्ठतम जीवन में से है अब वो. दुनिया के किसी देश में जन्म लिया हो मानव. क्यों ना हो उसके लिए वह आदर्श पथ है. इसलिए राम सबके हैं तो अगर भगवान राम के. जीवन से नई पीढ़ी को प्रेरणा देनी हो तो. कौन सी तीन चीज की प्रेरणा देंगे आप कि ये. सबको लेना चाहिए प्रभु श्री राम. से पहले तो परिस्थिति को स्वीकार करने का. स्वभाव बने बहुत मुश्किल वाला है असंभव. नहीं है संभव है. परिस्थिति को यदि हम स्वीकार करना सीख ना.
तो हम वन में भी राम जी के तरह आनंद. पूर्वक रहेंगे दूसरी बात राम जी का एक. चरित्र है जब बाल लीला में चौपाई आती है. बालकांड में राम जी का चरित्र क्या है आय. सु. मांगी करही पुर. काजा देखि चरित हर सई मन. राजा राम जी कोई भी कार्य करते हैं तो. अपने पूज्य पिता श्री से पहले अनुमति.
प्राप्त करते हैं हम जब श्रेष्ठ से अनुमति. लेकर के कोई व्यवहार करते हैं तो फिर हम. नहीं करते श्रेष्ठ का वचन हमसे वह कार्य. पूर्ण करा लेता है तो घर में जो आपके. श्रेष्ठ हैं व किसी भी रूप में हो सकते. हैं संबंध में जिनको आप अपना श्रेष्ठ. मानते हैं उनसे पूछ करके व्यवहार करने का. स्वभाव बने पहला दूसरा परिस्थिति को. स्वीकार करने का स्वभाव बने और तीसरा सबको.
अपना समझने का स्वभाव बने आज हमारे देश की. सबसे बड़ी समस्या है भैया जी हमारे जो. अपने. हैं वह हमसे टूट रहे हैं क्यों हम उनको. हीन भावना से देख रहे. हैं आप समझ रहे हैं मेरी बात को हमलोग क. जातिगत व्यवस्था हम लोग कथा करते रहते हैं. लोग मिलते रहते हैं हम लोग वन क्षेत्र में. कथा की एक बार मैं कथा करने गया डिब्रूगढ़.
आसाम में तो वहां पहली कथा की दो साल बाद. जब दोबारा कथा करने गया तो जिस ग्राउंड. में कथा चलती थी उसके सामने वहां पर चर्च. था चर्च वालों ने विरोध कर दिया किब यहां. एक कथा नहीं होगी तो क्यों नहीं होगी कथा. हुई बाद में मुझे पता चला विरोध क्यों हुआ. तो बोले महाराज यहां पर धर्म परिवर्तन. बड़ा जोर से चल रहा था लेकिन कथा के बाद. कोई को परिवर्तन नहीं हुआ उल्टे 10 12 लोग. वापस आ.
गए दो साल में तो इनका विरोध आ गया. तो. हम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य सेवक शुद्र. बाद में बने पहले हिंदू. बने उनको जोड़ना अति आवश्यक है शरीर का. यदि कोई अंग कट जाए ना तो शरीर को अपाहिज. कहा जाता है भले उस अंग का उपयोग हो चाहे. ना हो वो अपाहिज के ही श्रेणी में आता है. इसलिए सारे वर्ण हमारे अंग हैं राम जी.
समाज के चतुर्थ वर्ग के पास भी जाकर रहे. तो राम जी से सीखना चाहिए कि सारे हिंदू. हमारे अपने हैं सबका आदर करें आदर मिलेगा. तो कोई नहीं जाएगा आदर सम्मान करिए रक्त. लेने जाते हैं ना बैंक ब्लड बैंक में तो. कोई नहीं पूछता कि हमको ब्राह्मण का रक्त. दीजिए छत्री का रक्त दीजिए कोई पूछता है. क्या जाहिर सी बात है तो राम जी की तरह. परिस्थिति को स्वीकार किया जाए दूसरा.
श्लोक अयोध्या कांड का प्रसन्नता म्यान. गता विषेक त तथा न मले वनवास दुखता मुखा. बुज श्री रघुनंद नस्य में सदा सुसा मंजुल. मंगल प्रदा जिन राम जी को रात्रि में कहा. गया कि सवेरे आप युवराज बनेंगे भगवान. प्रसन्न नहीं. भए आजकल का जीव रहता तो जैसे खबर मिलता. पाच मिनट में स्टेटस लग. जाता छींट देता सोशल मीडिया पर. सवेरे 6 बजे काउंटडाउन शुरू हो.
गया राम जी प्रसन्न नहीं बए सवेरे सुने की. वन में जाना है राम जो उदास नहीं भए साइड. स्टोरी नहीं लगाए हा नहीं नहीं साइड. स्टोरी नहीं लगाए ये. समरसता एक रस्ता यह बड़ा अद्भुत विषय है. भगवान का मेरे अब हमारे मन में एक सवाल. आपने की जाति प्रथा छेड़ दी एक सवाल. क्योंकि कई लोग यहां पर आए और उनसे इस. विषय चर्चा हुई मेरी यह जो वर्ण व्यवस्था. है यह कर्म के आधार पर हुई थी या धर्म के.
आधार पर हुई थी कर्म के आधार पर तो मतलब. मैं जैसे मेरा धर्म तो एक ही है सनातन. धर्म सब तो अगर मैं ब्राह्मण होने का फर्ज. ना. निभाऊंगी क्या मैं ब्राह्मण हूं देखिए. बड़ा गुढ़ विषय है अब इस प्रश्न का. उत्तर अब. हम कहिए तो दसवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं. आइए पीएचडी का प्रश्न हम तो इस प्रश्न का. उत्तर हमसे श्रेष्ठ हमारे पूज्य पाद.
गुरुदेव भगवान देंगे जगतगुरु भगवान उनसे. पूछिए मेरा अपना व्यक्तिगत मानना है देखिए. वर्तमान का जो परिवेश. है पहले के समय में ब्राह्मण कर्मकांड पर. निर्भर रहते थे हम आज का परिवेश बदला है. अब जैसे आप भी ब्राह्मण है आप पत्रकारिता. में है अब अपने कर्म का दायित्व करते. निभाते. हुए हमको ब्राह्मण होने के नाते अपने. भगवान में निष्ठा रखनी चाहिए हम और हमारा. जो अपना नित्य का कर्म है पूजन पद्धति है.
उसको भी जहां भी है उसको सुचारू रूप से. रखना चाहिए हम भोजन आचार विचार शुद्ध होना. चाहिए अब वो कर्म करे तभी ब्राह्मण. कहलाएगा ना करे तो नहीं कहलाएगा अभी हाई. लेवल की बात है हमारे गुरुदेव भगवान इसका. उ च नहीं तो हमारे केस में हम तो. प्रिविलेज हो गए हम आप कह रहे हो कर्म कुछ. और करते भी ब्राह्मण तो हो जाएगा कोई. व्यक्ति जिसे हमने पिछड़ा माना हां अगर वो. पूजा पाठ कर रहा है वो एक ब्राह्मण के. सारे कार्य कर रहा है तो भी क्या जीवन भर. पिछड़े सोचा जाएगा तो पूजा के लिए मनाही.
किसको है पूजा के लिए किसी को मनाही नहीं. देखिए वास्तु देखिए क्या. है शबरी मैया भीलनी. थी मतंग ऋषि के आश्रम में गई उनकी सेवा. करते थी मतंग जी ने कहा भगवान का स्मरण. करो भगवान तुमसे मिलने आएंगे सब भगवान के. पास जाते हैं भगवान तुम्हारे पास आएंगे. पूजा एक कर्मकांड अलग व्यवहार है अगरबत्ती. दिखाना धूपबत्ती.
दिखाना भक्ति का इससे कोई लेना देना. नहीं भगवान का स्मरण हो हम अपना काम करते. एक एक पद है राम जपते. रहो काम करते. रहो वक्त जीवन का यूं ही निकल. जाएगा गर लगन सच भगवन से लग जाए तो तेरे. जीवन का नकशा बदल.
जाएगा तो किसी भी वर्ण में जीव हो व भगवान. की उपासना कर सकता है भगवान को स्मरण कर. सकता है ठीक बहुत अच्छी बात है एक सा. आखिरी सवाल मानस जी फिर मैं अगले विषय पर. जाऊंगा मानस जी का पाठ करने का ज्यादा. फायदा है या उसको सुने भी जैसे आपने. उदाहरण दिया था कि वो अपने शिष्यों सुनते. थे सुनने से ज्यादा फायदा है या पाठ करने. से ज्यादा फायदा या दोनों बराबर है पाठ. करने का स्वभाव बन जाएगा तब सुनने की लत.
पड़ेगी जब पाठ करने का स्वभाव बनेगा तब. आपकी रुचि बढ़ेगी हम रुचि बढ़ेगी तो नहीं. पढ़ पा रहे तो सुनने का स्वभाव बनेगा जैसे. हम नहीं हम पाठ नहीं करते लेकिन हम आपको. सुन लेते हैं कथा सुनते हैं हम मानस जी के. चौपाइयों को नहीं सुनते आप लगातार सुनते. हैं मानस जी के दादी पढ़ती थी तो हम सुनते. थे सुनते थे तो बचपन से वो स्वभाव बना हुआ. इसलिए सुनते हैं. पढ़ना जरूरी है पढ़ने से सुनने में रुचिता.
आती है अब जैसे आप किसी के बारे में नहीं. जानते हैं तो आप उसके बारे में नहीं सुनना. चाहेंगे तो मानस का सिद्धांत है जाने बिन. न होई प्रतीति बिनु प्रतीति ई नहीं प्रीति. प्रीति बिना नहीं भगति दृढ़ ई जिम खगे से. जल के चिकनाई कासुंडी जी महाराज गरुण जीसे. कहते हैं कि बिना जाने विश्वास नहीं हो. सकता बिना विश्वास के प्रीत नहीं. बिना प्रीत की भक्ति नहीं हो सकती.
गोस्वामी जी सु किष्किंधा कांड में कहते. हैं जो. सुनत. गावत कहत. समझत परम पद नर. पावई चारों आ गया जो सुन रहा है गा रहा है. आवाज अच्छी नहीं है तो कही रहा. है गा नहीं पा तरमी ऐ. और जो समझ रहा है अय समझना तीनों पर लागू.
है सत जो सुन रहा है सुन के भी समझ रहा है. गा रहा है गा के भी समझ रहा है कही रहा है. कही के भी समझ रहा है व अंत में भगवान के. परम पद को प्राप्त करेगा. जबरदस्त सुंदर अति. सुंदर अभी. कुंभ आप जाएंगे हां आ से 16 फरवरी सेक्टर. न में राम कथा है. जबरदस्त क्या होती कुंभ की महिमा और कुंभ. की शुरुआत क्यों की गई थी कई कहानियां.
जैसे हमको सुन हमको उसका दो रीजन सुनाई. पड़ा एक तो वो समुद्र मंथन वाला था अमृत. वाला और एक कहानी हमको सुनाई गई की पुराने. जमाने में राजा लोग को जो साइंटिफिक रीजन. दिया गया कि फोन मोबाइल फोन तो था नहीं तो. अगर देश भर में मैसेज कन्वे करना हो देश. भर के लोग बुला लेते थे ठीक है अलग-अलग का. कुंभ की महिमा क्या है वही जो आपने पहले. सुनी है समुद्र मंथन वाला हां वही वाला. वही सुना हो हम कुंभ है 12 वर्ष में एक. बार आता है चार स्थान पर ऐसा कहते हैं कि.
अमृत की बूंदे गिरी थी तीर्थराज प्रयाग. हरिद्वार उज्जैन और नासिक में तो हर 12. वर्ष में वहां पर जमावड़ा होता है और जाकर. लोग अपने जीवन को कृतार्थ करते हैं इस बार. विशेष क्या है क्या इस बार महाकुंभ है. प्रयाग में प्रयाग में तो वैसे हर माघ मकर. गत रब जब हुई गोस्वामी जी कहते हैं. बालकांड में माघ महीने में सूर्यनारायण जब. मकर राशि में प्रवेश करते हैं जिसको हम. लोग मकर संक्रांति कहते हैं तो बाबा कहते.
हैं माघ मकर गत रवि जब होई तीरथ पति ही आव. सब कोई सारे देश के ऋषि मुनि महात्मा संत. भक्त जन मकर संक्रांति के समय से तीर्थराज. प्रयाग में आते हैं एक मास वहां माघी. पूर्णिमा तक कल्पवास करते हैं त्रिवेणी जी. में स्नान करते हैं सत्संग करते हैं. तीर्थ में अब जैसे कलिकाल में तीर्थ किसको.
बताया गया कलिकाल में गंगा जी का तट तीर्थ. है गोमुख से लेकर गंगा सागर तक जो गंगा जी. का तट है वह तीर्थ है तीर्थ में सत्कर्म. करने का कोटि गुना फल है तो माघ महीने में. वहां पर मेला लगता. है प्राचीन काल से एक मास का आप सुने. होंगे कल्पवास लोग तो बाबा दादी हमरे एक. महीना रहते सब जा के एक महीना रहते हैं. वहां पर कल्प बास करते अब तो सरकार की.
व्यवस्थाएं हो गई वहां पर प्रयाग में दो. बार लगता है एक एक तो प्रत्येक वर्ष लगता. है हम माघी मेला जिसको कहते हैं अवसा के. मेला अवसा के मेला और एक छ महीने छ वर्ष. पर अर्ध कुंभ लगता है और 12 वर्ष पूर्ण. होने पर वो महाकुंभ लगता है तो ये महाकुंभ. है इस वर्ष तो जैसे मैं गंगा स्नान करने. जाता हूं साधारण दिनों में स्नान करना और. कुंभ में स्नान करने क्या फर्क पड़ता है. फल कोटि गुना है कोटि गुना फल है केवल फल.
नहीं है कोटि गुना फल है सबसे बड़ा फल है. देखि वर्तमान परश में देखा जाए एक स्थान. पर जाने पर आपको भारत के सभी श्रेष्ठ. महापुरुषों के श्री चरणों का दर्शन. प्राप्त. होगा संत के कहा गया है संत दरस जिम पातक. टई अब उतने महापुरुषों का दर्शन करने के. लिए आपको कितनी यात्रा करनी. पड़ती और वो सारे महापुरुष से कहीं जगह. दिखाई पड़ जा रहे तो ये कम लाभ है क्या.
सही बात है ये तो आपके पुण्य को वर्धन कर. रहा है ना तो हम सबको लेके जाए मतलब आप कह. रहे पूरा दफ्तर अपना हा सबको सबको निश्चित. लेकर जाना. चाहिए निश्चित लेकर जाना चाहिए जितने. देखिए यह क्या है ना व नेटवर्क मार्केटिंग. है जितने लोगों को लेकर जाइएगा उनका 10 पर. बिना आपको बोले आपके अकाउंट में आएगा. पुण्य. का तो तो रई हो जाएंगे हम हां पुण्य से. पुण्य से पुण्य से अब पुण्य पुंज होगा ना.
पुण्य से तो बाकी सब सब सब सब पुण्य से और. जिसके ऊपर ईश्वर आशीर्वाद उसको और क्या. चाहिए पुण्य से भगवान मिलेंगे जेकर नाथ. भोलेनाथ व नाथ. कैसे. जबरदस्त खास कृपा इस बार कुछ है इस बार. कुं के ब कुछ और बताइए ना थोड़ा हम कुछ जो. लोगों को ना पता हो कम पता हो इस बार. महाकुंभ जो है क्योंकि तैयारी बड़ी चल रही. है जबरदस्त सरकार की ओर से चल रही. सौभाग्य है धार्मिक महता हमको बताइए जो. हमको ना पता हो साधारण लोग कम पता हो.
जितना आपको पता है उतना हमको भी पता है जय. श्री राम हा जय श्री. राम हम देखिए मूल से हटक इधर उधर हम दिमाग. माग नहीं लगाते हैं राम जी रामचरित. मानस अच्छा कथा सुनने कथा होता कि नौ दिन. कथा सुनना होता है. जी जैसे अभी पुंडरीक महाराज हमारे हैं. उनसे हम बात कर रहे थे तो क कुछ लोग एक. दिन सुन के चले आते हैं दो दिन चले आते. हैं कथा पूरी सुननी चाहिए या अगर एक दो. दिन सुनो तो भी उतना लाभ होता है देखिए.
जितना सुनिए उतना लाभ होगा न दिन सुनिए तो. पूरी कथा सुन लीजिएगा सीधी सी बात है ये. कप है जितना च च चीनी डालिए उतना मीट होगा. अभ मैं नहीं कह सकते कि एक दिन सुनक न दिन. का लाभ आपको मिल. जाएगा अब समय है तो न दिन सुनिए नहीं समय. है व्यस्तता है तो और डिजिटल दौर में जो. ये डिजिटल कथा सुनते जैसे आप अब आप लोग. जैसे सोशल मीडिया प आते हैं कई आदमी है कि. वो नहीं जा सकता नौकरी पेशा है तो इसमें. भी उतना ही लाभ होता हा उतना ही लाभ है.
उतना ही लाभ है देखिए इसमें तो मैं कहूं. आपको अब जो अब जैसे हम यहां आए तो मेरे. साथ चार लोग यहां पर बैठे हैं कुछ लोग. मेरे बाद भी आ गए हो सकता है उसमें एक दो. लोग पकड़ के लाए गए. हो हो सकता है व्यवहारिक बात ऐसा यहां पर. कोई है नहीं लेकिन हो सकता है अब वो पकड़. के लाया गया तो बेचारा रात में उसको गाड़ी. तो मिलेगी नहीं जाने के लिए अब उसको तो. बैठना है यहां पर वो मन मार के बैठा है मन. में भी सोच रहा है महाराज कब बंद करेंगे.
कि जाने को मिले जाके सोएंगे रात के 11:30. बज रहे हैं हम तो पंडाल में जो गया है हो. सकता है कि वह किसी के दबाव में पहुंच गया. हो 1 पर ही तो बिना मन से बैठेगा लेकिन जो. अपने काम करते हुए मोबाइल पर सुन रहा है. इसका अर्थ है उसकी रुचि है तभी वह काम. करते हुए उसको खोल के बैठा है तो जो खोल. के बैठा है वह टाइम पास करने के लिए नहीं. खोला है वो सुनने के लिए खुला है तो आप. पंडाल में सुनिए चाहे सोशल मीडिया पर.
सुनिए जा तो कान में भगवत कथा ही रही है. उसका प्रभाव पड़े हमने आपकी एक कथा सुनी. थी एक मोटे भक्त की जिसे खाने का बड़ा शौक. था जी जी और बड़ा दिलचस्प आपने सुनाया था. लेकिन उसका अंत जो था उसको हमारे मन में. एक सवाल पैदा कर गया कि उनके गुरुजी जो थे. उनको भगवान ने दर्शन नहीं दिया जबकि गुरु. जी पूजा पाठ कर रहे थे गुरु जी सारे. शिष्यों को ला रहे थे एक माध्यम दे रहे थे. उस मोटे को भी गुरुजी ने ही माध्यम दिया. कि आओ भैया यहां पर खाने भरपेट मिलेगा.
खाने के बदले तुमको यह करना रहेगा तो. भगवान भक्ति की जगह मासूमियत प दर्शन. क्यों दे गए हमको ये हमारे मन में सवाल हो. मासूमियत नहीं है उसको सरलता और सहजता. कहते हैं राम जी ने शवरी मैया को नौ भक्ति. बताई ठीक सबसे पहली भक्ति क्या है संत का. संग प्रथम भगति संतन कर संगा और सब लास्ट. भक्ति कौन सी बताई नवम सरल सब सन छल हीना.
मम भरोस ही हर्ष न दीना राम जी कहते हैं. कि जीवन में सरल हो जाना सहज हो जाना यह. मेरी नौवी भक्ति और ये सबसे कठिन. है सरल सुनने में जितना सरल है आप पत्रकार. है पत्रकार बनना सरल है हम कथावाचक है. कथावाचक बनना सरल है व्यापारी बनना सरल है. सरल बनना सरल नहीं. बड़ा कठिन है एक महापुरुष कहते थे सरल.
यानी स से सीता जी र से राम जी अल से. लक्ष्मण जी जिसके हृदय में श्री सीताराम. लक्ष्मण जी सर्वकाल विराजमान रहते हैं वह. जीव सरल. है जो सरल होगा वही सहज होगा और जो जितना. सहज होगा उसका इंपैक्ट उतना अधिक होगा. समाज. पर भगवान उस सहजता के कारण मिल गए अब जैसे. कथा मैंने सुनी महा पुरुषों से एक जगह. भागवत जी की कथा हो रही थी एक बिटिया नदी.
उस पार से आती थी कथा श्रवण करने नाव पर. बैठकर तो कथा के चौथे दिन व जो वक्ता थे. भागवताचार्य जी उन्होने कहा कि भगवान का. नाम भवसागर पार करा देता है तो बेटी सोची. कि य कथा महापुरुषों की. है भगवान का नाम भवसागर पार करा देता है. तो मैं तो नदी पार करके आती हूं जब सागर. पार हो जाता है तो नदी पार करने में क्या. दि. तो उस दिन कथा सुनकर जब घर वापस जा रही थी. बनाव तो नदी के पास गई अब बिना नाव के बस.
भगवान का नाम जपते जपते जपते चलते चलते. पार हो गई अब तोरे तो मैं पार हो गई अब वह. अगले दिन से उसी तरह आने जाने लगी सातव. दिन कथा की पूर्णा होती थी छठे दिन सोची. कि महाराज ने इतना बड़ा मंत्र पकड़ा दिया. मुझे मैं कुछ नहीं कर पाई तो बोली सरकार. यदि जूठन गिर जाए घर में तो बोले ठीक है. कल कथा सुन के सुना जब वापस जाऊंगा तो. तुम्हारे घर प्रसाद पाकर फिर जाऊंगा कथा.
के बाद महाराज को लेकर चली दोनों पहुंचे. नदी के किनारे. तो महाराज बोले नाव बोले महाराज नाव आपने. तो ऐसा नाव बना दिया मेरे लिए कि अब सब. झंझट समाप्त कैसा अभी दिखाती हूं भगवान का. नाम लेते लेते चली गई उस पार और उस पार. जाक कहते महाराज आइए अब महाराज सोचे. अरे ये तो चली गई हम भी चले जाएंगे अब वो. मन में संशय है हां जाएंगे कि नहीं जाएंगे.
जाते जाते गए तो डूब गए एक मोरल ऑ द. स्टोरी क्या है हम कथा कह रहे हैं यदि. हमें ही विश्वास नहीं है तो हम कथा कहते. कहते मर जाएंगे कुछ नहीं होगा और इसी कथा. को सुनकर यदि श्रोता में विश्वास जन्म हो. गया तो उसका बेड़ा पार हो. जाएगा बहुत सुंदर लाइन है लेकिन फिर एक मन. में हमारे सवाल आया हम उस दौर में पैदा. हुए हैं जहां पर हमारे अड़ोस पड़ोस में. आलू में गणेश जी लोग दिखाते थे तो विश्वास. और अंधविश्वास के बीच में कैसी महीन लकीर.
वहां क तय करें जैसे हमारी माता जी हैं जी. अब बहुत सरल है कई बार मुझे लगता है कि. इतना सरल होना भी गड़बड़ होता है कुछो. विश्वास कर लेती. है कुछ इत्तेफाकन भी शुरू हुआ तो वह जय. श्री राम हो गया तो उस पे सरल और बेवकूफ. होना इसके बीच का अंतर कैसे तय करें ताकि. विश्वास बना रहे अंधविश्वास हावी ना हो. सके. अभी आपने कहा कि आलू में गणेश जी दिखाई. पड़ गए हां तो हम उनको पूजने लगे अवश्य.
पूजना चाहिए आपको कम से कम गणेश जी दिखाई. तो दे रहे हैं प्रहलाद को तो खंभे में. दिखाई पड़. गए खंभे में कोई आकृति तो बनी नहीं थी हम. भगवान की हिरण कश्यप ने पूछा कि क्या. तुम्हारे भगवान कहां है प्रहलाद ने कहा. पिता श्री प्रश्न ही गलत है आपका कहां है. नहीं पूछिए. कहां नहीं है पूछिए तो बोला खंभे में है. बोले है तुमको दिख रहे हैं तो दिख रहे हैं.
बांधो इसी में. इसको तो हमको आपको एटलीस्ट आलू में वह. स्वरूप दिख तो रहा है गणपति जी का सुंदर. आप मानिए भगवान गणपति है पूजन करिए उसमें. से प्रकट हो जाएंगे विश्वास होगा तो ये भी. मान लिया हमने लेकिन इसके नाम पर जब हम. देखते हैं कि लोग चंदा चढ़ना शुरू कर. दि ये गलत है य गलत है क्योंकि फिर हमने. उसको व्यापार बनते देख लिया विश्वास का. अर्थ य नहीं कि आप उसको मार्केट में लेकर. के प्रचार करें हां भगवान रखवा देते हैं.
तो हमने प्रत्यक्ष देखा है वो गलत है वो. गलत है यदि आपको स्वरूप दिखा है तो य तो. आपका सौभाग्य है कि आप आलू में भी भगवान. का दर्शन कर रहे हैं ये तो सौभाग्य है. आपका तो उसको पूजिए हम तो कंकड़ कंकड़ में. शंकर को देखते हैं यहां तो आलू में आकृति. दिख रही है वो तो प्रत्यक्ष दिख र है ना. गणपति भवान पत्थर है सुंदर चोर चोरी करने. जाता है तो उसको भगवान थो दिखते यदि चोर. को भगवान दिख जाए तो चोरी नहीं.
करेगा उसको भगवान में भी पत्थर दिखाई. पड़ता है इसलिए मुकुट चोरी लेकर च करके. चला जाता है और उसी मंदिर में जब भगत जाता. है तो उसको पत्थर में भी उसके भगवान दिखाई. पड़ते हैं इसलिए प्रणिपात हो जाता है. जिसकी जैसी भावना जैसी भावना प्रभु मूरत. ने देखी. तैसी सुंदर सोशल मीडिया दौर. में जो नया दौर चला है एक तो हो गया लड़का. लोग का कि वो ा सोशल मीडिया बाबा लोगों. में भी हमने देखा है बड़ा जबरदस्त क्रेज.
होता है आपस में फॉलोअर कितने हैं इनके. कितने हैं तो यह भक्ति भावना वाली भावना. होती है या फिर इसको मन में लेकर शंका. पैदा होती है क्या बाबा सब में कंपटीशन हो. गया. है सबकी अब मुझे फिर य मेरे मन में फिर. सवाल आता है कि फिर उनसे हम सरल होने कैसे. जाए क्योंकि हम तो उनके पास गए थे समझने. के लिए नहीं देखिए ठीक है आपकी बात में. समझ. गया उन्होंने जो नवधा भक्ति बताई वो तो.
आपको समझ में आ गई ना तो आप उस पर अमल. करिए. ना अब जैसे उन्होंने कहा जैसे आप मैं कथा. गा रहा हूं कथा में बात आई नवधा भक्ति की. नवी भक्ति सरल और सरलता है तो ये तो आप. समझ रहे हैं ना कि नवी भक्ति सरलता है तो. सरलता जीवन में धारण करने के लिए आप हमको. छोड़िए आप इसको अप्लाई करिए अपने जीवन में. अभी मैं कह रहा हूं अभी जो अभी पहले मैंने. बात कही कि मैं जो कथा गा रहा हूं यदि मैं.
ही उसको नहीं मान रहा हूं तो मेरा कुछ. नहीं हो सकता सही बात है और उसी कथा को. सुनकर यदि आप मानने लगे तो आपका सब कुछ हो. सकता. है नदी पार कर सकते हैं डूब सकते हैं वो. तो एक भक्तों को बताने के लिए कहानी है वो. लेकिन मूल विषय क्या है विश्वास बिनु. विश्वास भगति नहीं ते बिनु द्रव हीन राम. बिना विश्वास के भक्त हो नहीं सकती मानस. के प्रारंभ में भगवान शिव और मां पार्वती.
का विवाह कराया गया आप जब रामचरित मानस. पढ़ेंगे तो शिव जी और पार्वती जी का विवाह. है क्यों भगवान शिव विश्वास है और मां. पार्वती श्रद्धा है बिना श्रद्धा और. विश्वास के मिलन के भक्ति की धारा. प्रवाहित ही नहीं हो. सकती. सुंदर आपका फेवरेट भजन कौन सा है आपका. क्योंकि आप देश दुनिया में कथा करते. कौन सा भजन इसकी सबसे जदा डिमांड होती है. लोग कहते हैं कि महाराज जी ये वाला सुन. लेते हैं डिमांड तो क्या कहे भक्तों का.
अपना भाव है दो तीन भजन लोग बहुत सुनते एक. तो हमारे पूर्वांचल में वो सोहर लोग बहुत. सुनते हैं य राजा जी वाला अरे हां य तो. मनोज तिवारी जी गाए थे हमको तेज प्रताप जी. मिल गए थे तो तेज प्रताप जी से हम कहे हम. क मनोज तिवारी जी गाना गा रहे थे तो कहे. मनोज जी का गाना नहीं था राजन जी महाराज. का था अच्छी बात है मनोज जी गाए हैं मनोज. जी कब गाए हैं अभी पंचायत सीरीज आई थी. उसमें गाए थे इस सोहर को हा मैंने सबसे. पहले 2018 में गाया था हम आपकी आवाज में.
सुनना चाहेंगे फिर उ और उसी समय वो लोड भी. है बच्चों ने डाला है वस्तुत ये जो गीत है. ये हमारे बिहार के भोजपुरी के बड़े अद्भुत. गायक हुए आदरणीय अब तो भगवत धाम चले गए. स्वर्गीय श्री गायत्री कुमार ठाकुर भोजपुर. के थे वो ये गाते थे हमारे पिताजी को बहुत. मानते थे हमारे घर के हर कार्यक्रम में वो. आते थे थे. तो घर में किसी कार्यक्रम में उत्सव में.
सुनाते थे हम इस गीत का आधा गीत बक्सर के. पंडित जी है. पंडित लक्ष्मण दुबे लहरी आधा गीत वो लिखे. हैं और आधा गीत जो है अभी गांधीनगर गुजरात. में केंद्रीय विद्यालय में अध्यापक हैं. पंडित शिवा शिवानंद मिश्र शिकारी जी उनका. नाम है दो कवियों की रचना मिलकर है वो तो. इसको 2018 में मैंने गाया था और लिखा कब. गया था ये ये बहुत पहले हम बहुत पहले लिखा. दो कवियों ने मिलकर आधा-आधा लिखा है उसको.
गायत्री चाचा मिलकर गाते थे तो गायत्री. चाचा का हम सुने थे तो उनका नाम लेकर मैं. इसको गाता हूं तो हमारे तेजू भैया जो हम. से इसका जिक्र किए थे उनके लिए हम गवा. देते हैं आपसे ताकि हमको भी सौभाग्य मिले. कि हम दुनिया को सुनाए कि राजा जी कहां से. आए. थे भगवान का जब जन्मोत्सव होता है बधाई. लोग गाते हैं तो आधा पद तो आधुनिक युग पर. है फिर आधा फिर त्रता युग में है हम. ऐसन मनोहर मंगल.
मूरत सुहावन सुंदर सूरत न. हो राजा जीय करे तर हल ह जरूरत. महूरत. खूबसूरत न हो तो अब गाने में तो बहुत लोग. हैं तो एक ने कहा महाराज अरे हमारा ब ता. बबुआ जीएम हुई है त दूसरे ने ना चुप रह.
अरे ना ना इ तो डियम हुई है हो एक ने कहा. राजा जी हिंद के सितारा इ तो सीयम हुई है. हु से उपरा पीयम हुई है हो अब इसका एक. अंतरा जो मैं 18 में नहीं गाया था 18 में. दूसरा अंतरा गाया था उसका एक दूसरा अंतरा. है अरे कहल हमार सेंट परसेंट हुई है इ.
बेस्ट स्टूडेंट हुई है हो राजा जी सबका से. बेसी ब्रिलियंट हुई है भारत के प्रेसिडेंट. हुई है हो अब इसके बाद त्रेता का प्रवेश. होता. है तो उसमें भाव में हम कहते हैं कि. गुरुदेव भगवान आ गया चुप रहो क्या गा रहे. हो जीएम पीएम सीएम त्रेता में कहां जीएम. पीएम सीएम होता है गाना है तो त्रेता का. सोहर गाइए तब तक एक ने कहा अरे बबुआ.
हमार महाराज हुई है. राजाधिराज हुई है हो राजा जी रतन में हीरा. पुखराज हुई है सिरवा के ताज हुई है हो तब. तक गुरुजी लगे रुपया लुटाने लुटाने गायक. देखे गुरु जी निकाल रहे हैं अब गुरुवे जी. को प्रसन्न किया जाए तो बोले कि मुनि बाबा.
ऐसन बबुआ ज्ञानी ई है राजा जी ऐसन दानी ई. है हो ल राजा जी अखिल. भुवन राजधानी हुई है बापे असस खानदानी हुई. है हो ये उसका मूल गीत है तो मनरी जी साहब. कहे नहीं कि महाराज हमको भी थोड़ा क्रेडिट. दे दिया कीजिए प्रभु जानत सब भीन जनाए दरी.
जी बहुत गाते हैं गाना बहुत अच्छी बात है. गाते हैं मैं जानता हूं मैं सुनता भी ह्र. उपाध्याय जी के यहां गए थे वहां भी सुनाए. थे जी जी जी जी मनोज जी भी गाते हैं अच्छी. बात है कई लोग गाते हैं तो हम पूर्वांचल. में कहीं भी कथा गाते हैं चाहे आपको दुबई. उई में मोरिसस वर्सस में भी लोग कहते हैं. इसको सुनाने के लिए और तो छोड़िए जो. भोजपुरी भाषा के नहीं वो भी कहते हैं गाने. के लिए एक यह गीत है और एक अगर नाथ देखो. वही मैं बोलने जा रहा था अदभुत पूज्य. स्वामी साकेत वासी श्री स्वामी.
राजेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज उनकी रचना. है तो इस गीत को भी हम लोग 2019 में गाए. थे पहली बार खंडवा की कथा में उस गीत को. बहुत लोग सुनते हैं कुछ है इसमें भक्ति जग. जाती है सब कुछ है यह गीत है और एक गीत है. कि सीताराम सीताराम सीताराम कहिए लेकिन. मुझसे यदि पूछा जाए कि जो मेरे बहुत हृदय. के निकट पद है प्रात स्मरणीय पूज्य श्री. पथिक जी महाराज का एक गीत.
है प्रभु हम. भी. शरणागत. हैं. स्वीकार करो तो. जाने अब. हमें पतित से. पावन सरकार. करो तो. जाने आपने उसको बार कर दिया उसको पार कर.
दिया इससे हमको क्या फायदा हमको करिए तब. ना जाने पूज्य स्वामी पथिक जी की रचना है. अंतिम पद सुनाता हूं पथिक जी कहते हैं कि. जीवन. नैया जर जर. है क्षण क्षण. विनाश का डर. है ऐसे भी एक पथिक.
को भव. पार. करो अद्भुत आपको सुनकर हमको एक बात समझ. में आ गई टैलेंट कहीं बेकार नहीं. जाता जो कुछ सीखा बचपन से जाना. हमने अद्भुत अद्भुत आपकी आंखें भी भर आई. यह मेरे बड़े निकट है पद कोई खास.
वजह मेरे जैसे को भी ठाकुर जी सेवा में. लगाए ओम नमः शिवाय. ज कई जन्मों की थाती है. कई जन्मों की थाती हरि.
कृपा मैं डॉक्टर बनना चाहता था तो हमारे. एक गुरु जी हैं मुझे बायोलॉजी पढ़ाते थे. स्कूल में पूज्य एमए सिंह सर तो मैं. कलकत्ता में जब कथा गाता हूं. तो बड़ी निष्ठा से सुनते हैं तो एक बार. कथा के बाद मिलने के कक्ष में आए. तो बोले कि कल आप घर आइएगा. गुरुदेव आज्ञा करिए पहुंच मैं गया तो मां.
थी सर थे मैं बैठा तो एक बात उन्होंने कही. कि राजन मैं आपको डॉक्टर बनाना चाहता. था बत दैट टाइम आई वास. रंग अच्छा हुआ आप नहीं बने क्यों यदि वोह. बन जाते तो यह ना बन पाते. तो भगवान ने यह मानव शरीर में यह अवसर. प्रदान कर दिया. बड़ी कृपा अ इससे बड़ी कृपा नहीं हो सकती. आपकी बात सुनकर हमको ये लग रहा है कि भक्त.
बनना भी सबके नसीब में इतना आसान नहीं. होता उसके लिए भी विशेष कृपा चाहिए ईश्वर. का आशीर्वाद चाहिए तभी आप भक्त बन पाते. पुण्य उस मार्ग पर चल पाते हैं पुण्य. अर्जित करिए भगवत कृपा सदगुरु. कृपा पिताजी का पुण्य सब सब एकत्रित होता. है तब जाकर कुछ हो पाता. है जबरदस्त हम आपसे भजन सुनना चाहेंगे अगर. नाथ देखोगे हां इसको लोग बहुत बोलते हैं. सब जगह प्राय हर कथा में हम लोग आते.
हैं स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज. जी की रचना है स्वामी जी के चरणों में. समर्पित. है अगर. नाथ. देखोगे अवगुण. हमारे तो हम. कैसे भाव से लगेंगे. किनारे अगर नाथ.
देखोगे यह माना अधम. है अवन कुटिल. है यह माना. अधम है. अवन कुटिल. है सब कुछ है लेकिन है. भगवन. तुम्हारे अगर नाथ.
[संगीत]. देखोगे हमारे. लिए. क्यों देरी किए. हो हमारे. लिए क्यों देरी किए. हो. गणिका. अजामिल को पल भर में.
तारे अगर नाथ. देखोगे अंतिम अंतरे में पूज्य स्वामी जी. कहते हैं ये मन होगा. निर्मल तुम्हारी. कृपा. से यह मन होगा. निर्मल तुम्हारी कृपा से. इसे शुद्ध करने में राजेश.
हारे अगर नाथ. देखोगे और मैं आपको एक कोइंसिडेंस. बताऊं मेरा ऑफिशियल नाम भी राजेश कुमार. तिवारी. है स्वामी जी का भी नाम राजेश था तो इस इस. गीर से बहुत रिलेट करता हूं अपने आप. को और इस इस आपको बताऊं भैया जी कोरोना. काल में इस गीत ने और सीताराम सीताराम.
कहिए गीत ने बहुत लोगों को संबल. दिया हमसे हजारों लोग ऐसे मिले कोरोना के. बाद कहे महाराज हम लोग डिप्रेशन में चले. गए. थे परंतु इस गीत ने हम लोग को बचा लिया. विशेष रूप से इन दो गीतों ने अगर नाथ. देखोगे और सीताराम सीताराम सीताराम कहिए. मैं वो भजन सुनू उससे पहले एक सवाल. पूछूंगा आपसे जसे अभी आपने कहा कि. कई लोगों ने आपसे कहा कि इन भजनों ने बचा. लिया अब कई बार दो हिंदुस्तान में दो तरह.
के लोग एक जो आस्तिक है पूजा पाठ करते हैं. जो नहीं करते हैं जो नहीं करते वो भी कहते. कि हम तो हम भी जी रहे हैं जैसे तुम खा पी. रहे हो वैसे हम भी खा पी रहे. हैं किस्मत हमारी भी तय हो गई थी किस्मत. तुम्हारी भी तय है क्या फर्क हो जाता है. उस व्यक्ति में जो भक्ति करता है भक्ति. में रहता है ईश्वर से जुड़ा हुआ है और व. व्यक्ति जो नहीं जुड़ा हुआ है या कोई मतलब. नहीं उसको भी लग रहा है कि जीवन तो चल ही. रहा है देखिए भगवान को मानने वाले ना.
मानने वाले हर युग में रहे कंस कहां मानता. था भगवान को रावण कहां मानता था उसी तरह. आज भी लोग है नहीं मानने वाले एक मैं. पूज्य श्री पुंडरी गोस्वामी जी बड़े भैया. जी की बात कहूं उनको एक दिन मैं सुन रहा. था बड़ी अद्भुत बात वो तो विभूति है. भारतवर्ष. के वो बता रहे थे कि. कहीं जा रहे थे तो बगल में कोई बैठा था तो.
वह कहने लगा कि भगवान गवान कुछ नहीं होते. यह सब बेकार दुनिया भर की बातें पूज्य. श्री सुनते रहे सुनते रहे उतरते समय उसे. बोले आपने बड़ी अच्छी बात कही भगवान नहीं. होते लेकिन मैं आपसे एक बात कहूंगा आपने. जो बात कही जीवन की आखिरी सांस तक इस बात. पर टिके रहना. समझ रहे मेरी बात को बोले कि तुम जो कह. रहे हो कि भगवान नहीं होते हैं अपने इस.
वाक्य पर आखिरी श्वास तक टिके रहना पलटना. मत अंत में तो जो आज कह रहा है कि भगवान. नहीं होते सुख में सिमरन सब करें दुख में. करे ना को कहां जाइएगा जहां जाइएगा वही. पाइए दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे. ना कोई जो सुमर कर दुख को तो एक फेज ऐसा. आता है जहां आपको मानना ही पड़ता है कि. भगवान है फिर अता बच्चन की तरह जाते हैं. पिक्चर वाला वो जो तुम्हारी सीढ़ियों पर. कभी नहीं. आया आज खुश तो बहुत हो.
गय सत्य बात है अच्छी बात उन्होंने कही. आदमी अपने अवसर के अपने हिसाब से डिफाइन. कर देता है तो जो मानता है उस पर क्या. कृपा रहती है वो हमेशा आनंद में रहता है व. हर क्षण भगवत क्या शक्ति है भक्ति में. विश्वास जन्म ले लेता है. देखिए भगवान का भजन कर रहे. हैं भगवान में विश्वास है तो इसका अर्थ यह.
ना समझा जाए कि हमारे जीवन में विपत्ति. नहीं आएगी हमारे जीवन में व्याधि यां नहीं. आएंगी बीमारी नहीं आएगी कथा गाते गाते. मेरे वोकल कॉर्ड में नोड्यूल हो गया 2022. में इसी दिल्ली में ऑपरेशन कराना पड़ा सर. गंगाराम में इसी दिल्ली में अब हम कहे कि. हम तो भगवान की कथा गाते हैं ये गले में. कैसे नोडल हो गया छ महीना आवाज ही बंद हो. गई मेरी कैसे कथा करते थे रघुनाथ जी जाने. तो हमको कैसे हो गया भजन भगवान की कथा.
भक्ति सत्संग करने का सबसे बड़ा फल यह है. कि जीवन में कितनी भी विपत्ति आ जाए उस. विपत्ति में मन विचलित ना. हो यह उसका प्रभाव है विपत्ति तो आएगी. जैसे हम सोचे यदि कि हम परछाई को हरा. देंगे तो. भागे कितन घंटो भागेंगे परछाई आगे दिखाई. पड़ेगी कितना भी तेज भागे आगे आगे दिखाई.
पड़ेगी हराना है तो भागने की आवश्यकता. नहीं है केवल अपनी दिशा बदलने की आवश्यकता. है हम खड़े खड़े हरा सकते हैं सूर्य से. विमुख होकर यदि खड़े होंगे तो परछाई आगे. दिखाई पड़ेगी सूर्य की ओर यदि मुख कर. लेंगे तो परछाई पीछे चली जाएगी उसी प्रकार. दुख सामने दिख रहा है इसका मतलब हम भगवान. से विमुख खड़े हैं जब भगवान की ओर मुख हो. जाए जाएगा तो दुख पीछे चला जाएगा फिर. सामने केवल भगवान दिखाई पड़ेंगे और हर.
परिस्थिति में केवल आनंद ही आनंद दिखाई. पड़ेगा जय श्री राम लेकिन फिर जो बड़े बुढ. से हम सुनते आए कि अच्छे लोगों भगवान. जल्दी बुला लेता है अच्छे लोगों साथ बुला. होता है ये तो अब कोई चला जाए तो हां हु. जा बढ़िया लोग के दरकार बा लोग तो कहते. हैं ये तो कहावत है कहते हैं ऐसा नहीं है. जैसे लोग ये भी कहते हैं कि अच्छे लोगों. के साथ ही गलत होता है ऐसा नहीं है ऐसा. नहीं है ऐसा नहीं है देखिए भगवान किसी के. साथ गलत करते ही नहीं है भगवान का जब.
नामकरण हुआ तो गुरुदेव भगवान श्री वशिष्ठ. जी कहते हैं राम जी के विषय में जो. आनंद सिंधु सुख. रासी राम जी क्या है आनंद सिंधु है अब. समुद्र में जितना पानी है उतना राम जी के. पास आनंद है तो जो सामान राम जी के पास. हैय नहीं है वो देंगे कहां से वो दुख कहां. से किसी को वहा तो आनंद भरा हुआ है तो. भगवान किसी के साथ गलत नहीं करते हमारा.
कर्म का फल हमको जब मिलता है तो लगता है. कि हमारे साथ गलत हो गया भगवान गलत नहीं. करते आपको पता आप इंटरनेट में बहुत वायरल. होते हो एक मीम में मीम जानते हो आप बताइए. पूरा बताइए मीम मतलब अगर आपका. एक जी मंगल भवन हे. भगवान हे प्रभु लोगों ने उसका अर्थ का. अनर्थ कर दिया है सुना आपने दिखा सुना. मैंने कई लोग दिखाते कयो लगा दो जी मंगल.
भवन एक तो मैंने देखा कोई बनाए हम तो उन. बनाने वाले की बुद्धि को प्रणाम करते हैं. जय हो प्रभु एक जने देखा कि किसी का गेट. है मेन गेट हा तीन लड़के हैं पहला जाता है. एक लात मारता है दूसरा जाता है वो भी. मारता है तीसरा जब मारने जाता है तो घर. वाला गेट खोल देता है और वो घर के भीतर. चला जाता है वहीं पर बसता है मंगल भवन. मंगल. अब यह अब चल चुका है ट्रेन तो म मीम में. जहा जहां पर कुछ गड़बड़ा आया वही पर आता.
है जी. मंगल एक बार ते सुरला. सुना व चौपाई है बाल कांड. की भगवान शंकर मंगलाचरण कर रहे हैं कथा के. पहले उसकी चौपाई. है जी मंगल भवाना. अमंगल. हारी द्रव. दशरथ. अजर.
बिहारी लेकिन इसको भगवान सद बुद्धि दे. लोगों को तो क्या कहेंगे उन लोग से जो. आपका जीजी मंगल भवन उठा लेते हैं खाली अब. वो जानते नहीं इसमें कहा क्या कहा जा रहा. सुने के नुकसान में इसको बजाना है लगाई दो. वो भगवान शंकर मंगलाचरण कर रहे हैं भगवान. राम कौन है मंगल के भवन है अमंगल हारी. अमंगल का हरण करने वाले हैं वो राम जी. मेरे पर द्रवित हो द्रवहु कौन सो दशरथ. अजिर बिहारी दशरथ जी के आंगन में बिहार.
करने वाले राम जी जो मंगल के घर है अ मंगल. का हरण करते हैं वह मेरे पर द्रवित हो. कृपा करें यह अर्थ है और लोग अर्थ का. अनर्थ कर. डाले हमको कई लोग दिखाते हैं महाराज यह. देखिए क्या बज रहा है हम कभी कभी सोचते. चलो इसी बहाने दो सेकंड के लिए ही ये मानस. की चौपाई कान में तो पहुंच लोगों की उसी. से हा नई पीढ़ी पूरा जुड़ी उससे ये भी हम. कह सकते हैं सोशल मीडिया का कोई ऐसा लड़का.
नहीं होगा जिसने एजी मंगल भवन ना सुना. हो इसके आगे वाला भले ना सुना हो इतना तो. भगवान कृपा से सबके कान में गया ही है जी. लेकिन लोग जानते नहीं कि राजन जी महाराज. का है कोई बात नहीं भगवान की कथा जार नहीं. बहुत बड़ी बात है आपको आलू बहुत पसंद है. जय हो. प्रभु पूरा रिसर्च करके बैठे. जी अच्छा बताइए आलू किसको पसंद नहीं है. जिसको डायबिटीज होगा भले ना खाए डायबिटीज.
के कारण लेकिन आलू जैसी कोई सब्जी नहीं आप. धरती के किसी कोने में चले जाइए आपको आलू. जरूर. मिलेगा हम लोग बजे की बात है मोरिसस कथा. करने गए तो ये सब लोग थे वहां पर तो एक. लोग के घर गए भोजन करने तो बड़े प्रेम से. आकर हमसे पूछे महाराज डू यू लाइक सूसू. सुसू. हा हम क्या बोले.
सूसू बोले महाराज वेरी टेस्टी हम क अरे. सुसू बोलके वेरी टेस्टी बोल रहे हो हम क. आप ही खाओ सुसू अब वहां एक सब्जी होती है. उसका नाम है सूसू हम बोले जिसका नाम ही. सूसू है वो कैसा होता होगा हम हमको ना. खिलाओ सुसू आप ही सुसू खाओ तो सुसू सब जगह. नहीं मिलता दिल्ली में सुसू नहीं मिलेगा. आपको लेकिन आप ध लोग करते हैं. खाली धरती के किसी कोने में चले जाइए आलू.
मिलेगा कुछ नहीं है तो आलू है साहब व्रत. में है कुछ नहीं है आलू बना लो आलू भून. लीजिए आलू का हलवा बना लीजिए मटर कम हो. जाए आलू डाल दो कोई भी सब्जी काम है कम है. आलू मिला दीजिए कुछ नहीं है तो आलू का दम. निकाल लीजिए दम आलू बना लीजिए आलू तो गरीब. को अमीर से जो बराबर जोड़ दे वो आलू आलू. आलू हर परिवेश में उपस्थित है. जबरदस्त भातो पसंद होगा फिर आपको नहीं भाई. य बिहार में आदमी भात ना खाए तोल भात ना.
खाए तो खाना हजम कैसे दाल भात हम जब बहुत. दिन हो जाता है कथा में तो जब कलकाता जाते. हैं ना तो एयरपोर्ट पर उतरते फोन जाता है. घर में कि दाल भात और आलू का. भुजिया आलू का भुजिया बनाक रख उसमें भी. भात थोड़ा गीला वाला गरम गरम दाल के साथ. जो आनंद मिलता है दाल भात आलू के भुजिया. अभ किसी कथा में निकल ग भया मेरे से अब. उसका परिणाम ये हुआ भैया मैं जिसके घर. जाऊं आलू दाल भात भुजिया बना के रख.
दे कई लोगों घर में हमने कहा भैया जब. महीना डेढ़ महीना में घर जाते तब खाते हैं. अब रोज जहां जाओ वहीं दाल भात और भुजिया. मिल रहा है आलू का लेकिन हमको जरा बताइए. ना क्या स्वाद होता है य जो हल्का गीला. चावल तड़का वाली दाल और भुजिया अगर साथ. अचार चटनी कुछ मिल जाए तो स्वर्ग है चोखा. हो जाए आय हाय हाय हा देखिए साथ में थोड़ा. तीखा भी चाहिए ना सो सुख जान मन और काना. हां नहीं रसना पह जाई बखाना किसी ने कहा.
कि महाराज इसको ऐसे ऐसे करने से क्या. मिलता है हम तो जो महापुरुष थे उन्होंने. झोली से एक माला निकाल के पकड़ाया बोला. तुम भी लेकर इसको ऐसे ऐसे करो तुमको पता. चलेगा क्या मिलता है तो वो हल्का गीला भात. दाल तड़का लगा हुआ बढ़िया घी का छोक लगा. हो उसमें पानी ना आ जाए और आलू को पतला. पतला अर्ध चंद्राकार में काट के हम और. उसका भुजिया बने जीरा के साथ और मंगरेल का. सा फोरन लगाकर क्या बात है अमृत फेल है.
उसके. सामने और. देखिए चावल दाल रोटी सब्जी एक ऐसा भोजन है. जो कितना भी खा लीजिए आपका मन नहीं. भरता भात तो खर बिहार के हम लोग है तो भात. तो खाना ही है खास तौर पर यूपी बिहार. बंगाल यूपी बिहार बंगाल बिना भात के तो. जीवन व्यर्थ है खाना खत्म है आप कितन. बढ़िया खिला दो. आज भी हमारे पूर्वांचल में कोई भी मांगलिक. कार्यक्रम होता है तो एक प्रथा है भत वान.
हम आप जानते हैं भदवा सुने शब्द नहीं. विवाह के चाहे कोई भी मांगलिक कार्यक्रम. के एक दिन पहले अथवा एक दिन बाद अपने भाई. पटीदर्रांग. ये सब बनता है उसको भत वान कहते हैं. क्यों दाल भात एक ऐसा व्यंजन है भोजन है. जिसको आपस में मिलाकर खाया जाता है बाकी.
सारे भोजन को तोड़ के खाया जाता है तो यह. प्रथा हमारे पहले से है पूर्वजों ने डाली. कि मांगलिक कार्यक्रम में दाल भात खाना है. कि जैसे दाल भात मिला के रखते हैं उसी. प्रकार हमको भी आपस में मिलक रहना चाहिए. मिला के खाना हाथों मजा आता हो हाथ से ही. खाने का मजा चम्मच क्या स्वाद आएगा जब. बोले हाथल हाथ का स्वाद हाथ में लगे नहीं. गांव में हम लोग पहले गाते थे बोझ में तो. गांव में ऐसे नहीं खाते पत्तल प भात आ गया.
तो पहले भात को जमा करके उसम बीच में मेढ़. बनाया जाता था जैसे उस सीमेंट. पालते आपको अनुभव हुआ होगा उसमें बीच में. गोल छेदा करके मेढ़ बनाकर उसको दाल से भरा. जाता था और उसके बगल में सब्जी रखकर और. उसको एक किनारे से फोड़ फोड़ के और दाल. मिलाकर उसको मिला मिला के खाते हैं फिर. खाने के बाद जब उंगली आखिर वो तो लेना. पड़ेगा पूरा उसम भोजपुरी में गए तो बरा. जाएगा ये भी एक आनंद है जीवन का सुख है. सुखद सुखद.
सुखद कई लड़कों के लिए हमने आपके कई सारे. सवाल रखे थे आजकल लड़का लोग डिप्रेशन बहुत. चलाता है बहुत कॉमन हो गया हम लोग जब छोटे. थे तब यह था कि परेशान हो दुखी हो तो जाओ. बेटा बाहर मैच खेल के आ. जाओ बचपन में यही था लेकिन अब मेंटल. कंडीशन मेंटल स्ट्रेट डिप्रेशन एंजाइटी. बड़ी चर्चाएं शुरू हो गई इन टर्म्स की. इस सब हो तो कैसे निकले आप तो भक्ति मार्ग. में रहते हो क्या बताओगे नए बच्चों. को अभी प्रारंभ में इस पर चर्चा भाई अच्छा.
आप बताइए जब हम लोग छोटे थे उस समय सुनने. में आता था कि कोई डिप्रेशन में चला गया. यह चला गया बहुत कम रेयर आजकल बहुत ज्यादा. हो गया है इसका एक कारण सोशल मीडिया भी है. दूसरी बात डिप्रेशन होता क्यों. है सबसे बड़ा कारण है कि हम जहां है उसको. हम स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं हम जहां. नहीं पहुंच पा रहे हैं उसकी कल्पना दिन. रात कर रहे हैं ये सबसे बड़ा कारण है.
डिप्रेशन. का लोग भविष्य को ठीक कर रहे हैं हम. भविष्य को ठीक ना किया. जाए आज को ठीक किया जाए यदि हम केवल आज को. ठीक करेंगे तो आने वाला भविष्य तो अपने आप. ठीक हो जाएगा तो जब आएगा तो आज ही बन के. आएगा आपके पास तो अभी जो मैंने राम जी के. बारे में आपने प्रश्न किया और परिस्थिति. को स्वीकार. करिए भगवान पर विश्वास रखिए परिस्थिति को. स्वीकार रखिए अगर अच्छा जैसे बताया कि.
मेरा सिलेक्शन ना हुआ अब हम रोते रोते. कपार फोड़ लेते तो क्या हो. जाता कुछ नहीं होता कुछ नहीं होता और. डिप्रेशन में चले जाते हमको तो आना इधर. मार्ग में कथा में एक बात आती है बार-बार. मैं निवेदन करता. हूं अब जैसे परीक्षा है विद्यार्थी यदि. फेल हो गया तो उसको तब सोचना चाहिए. कि जब वह 100% अपना एफर्ट दे सकता था वह. नहीं.
दिया कि भाई यदि हम पढ़े होते तो पास हो. जाते यदि अपना 100% देने के बाद शत. प्रतिशत अपना योगदान देने के बाद भी यदि. परिणाम हमारे अनुकूल नहीं आ रहा है इसका. अर्थ है कि इस कार्य के लिए हम बने ही. नहीं है तब चिंता नहीं करना चाहिए अपना. 100% दीजिए जो रिजल्ट हो उसको स्वीकार. करिए यदि नहीं हो पा रहा है तो हम दूसरे. मार्ग के लिए बने हैं अब जैसे हम कहां. उलझे हुए थे गए थे बंबई हमको तो कथा गानी.
थी तो पूज्य महाराजा शी ने हमको देख लिया. हमारे भीतर क्या देखा वोह जानते हैं उनके. कहने से मैं इधर आ गया अपने कर्तव्य पर. लगे रहिए सही मार्ग है और यदि श्रेष्ठ के. प्रति आपकी निष्ठा है तो ऐसा ही कोई. श्रेष्ठ मिल जाएगा जो आपको सही दिशा देकर. के आपकी दशा बदल देगा अभी तो चलिए आपने. जनरल कह दिया लेकिन आजकल का लड़का लोगों. प्यार मोहब्बत करता है. दिल टूट जाता है उसका हम बहुत एस्ट्रोलॉजर. का इंटरव्यू किए पॉडकास्ट सबसे पूछे सबसे. बड़ी समस्या क्या लेकर आते हैं कहे या तो.
धंधा या दिल टूटना अच्छा वो लोग बताते हैं. हां कि स यही द समस्या सबसे ज्यादा आती है. अच्छा कि या तो बता दो नौकरी की क्या. समस्या होगी तो या तो गरीबी या इश्कबाजी. और लड़का लोग का दिल टूटता है तो एकदम. डिप्रेशन में चलाता है तो ये एक तो यह. प्रेम क्या होता है पहले हमको समझा दीजिए. प्रेम के लेकर बड़ी परिभाषा है प्रेम लगाव. क्या अंतर होता है इन सब चीजों में और. दूसरा अगर इसमें दिल टूट जाए तो आप कैसे. बताते हो बच्चों से कि आगे बढ़ जाओ ऐसा.
कोई समस्या आई नहीं कि हमरे लगे. आले आज तक नहीं आया ऐसी कोई समस्या पहली. बार आप प्रश्न कर रहे हैं ऐसा कभी नहीं. आया हमारे पास जो लोग आते हैं हम तो पहले. य बोलते भाई लोगों से किसी भी अभी आपने. सुना होगा एक अतुल सुभाष करके व्यक्ति थे. वह अपने पत्नी से दुखी होकर जीवन त्याग. दिए एक बहुत बड़ी आरजे थी जम्मू क कमीर की. अच्छा सिमरन नाम था उसने यही गुड़गांव में. रहती थी वो और दिखने में सुंदर पारिवारिक.
तौर पर सक्सेसफुल उनके जीवन में शायद कुछ. व्यक्तिगत तनाव रहा परिवार से भी जुड़ी थी. लेकिन अपने जीवन लीला समाप्त कर दी और यह. बहुत सारे लोगों केस है कि लड़के आजकल टूट. जाते हैं कमजोर हो जाते हैं देखिए जो. परिवार में घटनाएं घट रही है उसके पीछे. मूल रूप से पीछे क्या कहानी है ना आप. जानते ना हम जानते हैं अकेलापन. लोग सहन नहीं कर पा रहे हैं सहन में कई. तरह की बातें होंगी जो हम आप नहीं जानते. हैं हम हमारे महाराष्ट्र एक बात कहा करते.
बाबू. हम परिवार में यदि लेके चलना है हम तो एक. को बेवकूफ बनना. पड़ेगा दोनों समझदार हो जाएंगे तो टूट. जाएगा बहुत गहरी बात है एक बेवकूफ यदि बना. रहे तो जीवन भर गाड़ी चलती. रहेगी तोन सही है ये हां सही आदमी सहले. सहले नहीं सहला सहने की बात नहीं. है अच्छा यह बताइए पहले के लोग जीवन भर.
साथ में रहते थे आज यह हो रहा है इसका. कारण क्या है कोई झुकना नहीं चाहता मतलब. पहले था कि औरत सह लेती थी मर्द अपना. हिसाब किताब ऐसा ऐसा नहीं बहुत परिवार ऐसा. है जहां पर माताएं आगे हैं पुरुष अभी हम. एक घटना बताएंगे हम नाम नहीं बताएंगे आपको. एक जगह महाराष् के साथ मैं गया था तो. जिनके घर में गया था व भैया बड़े शान. उनकी श्रीमती जी थोड़ी मतलब क्या कहेंगे. उसको क्या शब्द क थोड़ी तेज है तो पूज्य.
महाराज श्री का चरण सेवा में मैं था तो वह. भैया भी थे तो. ऐसे भाव भाव में विनोद में पूज्य महाराज. श्री ने प्रश्न कि क्या हो बहु तो बहुत. तेज है तुम्हारी और तुम एकदम चुपचाप रहते. हो मौन ऐसे हंसी में महाराज ने कहा तो. भैया की बात मुझे बड़ी अच्छी लगी बोले. महाराज श वो ट्यूबलाइट देख रहे हैं आप. बोले हां देख रहा हूं तो बोले महाराज श. उसमें एक और ठंडा है और एक और गर्म.
है जब दोनों गर्म हो जाएगा तो फट. जाएगा तो हम जब यह देख लिए कि वह गर्म है. तो मैंने अपने आप को ठंडा कर लिया खूब. आनंद में जीवन चल रहा है तो ये समझदार य. है यहां पर यही आदमी फील हो जा रहा आज के. टाइम प वो कह रहा हम कैसे हैं तुम ठंडा हो. जाओ हम गरम हमको गर्म रहने दो. अभी हमारे एक परिचित है वह बड़े अद्भुत है. हा बड़े अद्भुत है उनकी श्रीमती जी भी. अद्भुत है तो मैं नाम नहीं लूंगा उनका.
क्योंकि पॉडकास्ट सुनेंगे तो फिर वो. कहेंगे मराज हमारे बारे में चर्चा कर रहे. थे उनसे मैंने सीखा उनकी श्रीमती जी अब. बहुत आलीशान मकान बना. है पंडित जी ने आकर कह दिया किचन लाखों का. किचन बना उनका किसी पंडित जी ने कह दिया. कि जिस दिन इस चूल्हे में माचिस घर में आग. लग जाएगा अब उस किचन में खाना नहीं बनता. है व बोले महाराज जी मैं साल में 10 दिन.
भी घर में नहीं खाता हूं बाहर खाता हूं. लेकिन बड़े आनंद में रहते हैं कभी भी उनसे. आप मिलिए तो आपको नहीं लगेगा कि वह इतने. तनाव माहौल में रहते बोले महाराज जी. रघुनाथ जी का प्रसाद है यह जब रघुनाथ जी. इतना अच्छा किया तो यह भी सही यह भी. प्रसाद है खूब आनंद पूर्वक रहते हैं. तो लचक थोड़ी होनी चाहिए लचक बांस देखे. हैं ना कितन तूफान आवे. खड़ताल चक रहता है उसमें नप के फिर सीधा. हो जाता है खड़ा पेड़ सबसे पहले काटा आता.
है सोजक पेड़ वो पहले कटा जाता है जिसमें. तनिक इधर-उधर लगा रहता है नो काम के नहीं. बेकार है हटाओ इसको लंबा चल जाते हैं ठीक. है बढ़िया बात एक और सवाल हमारे मन में. आता है आजकल तो पंडितों में लोग खूब दबा. के दारू मास सेवन चल रहा है हर धर्म में. हर जात में चल रहा है तोब तो रहा नहीं कि. ये जात नहीं खाता वो नहीं खाता लेकिन जो. ये कांसेप्ट चलता है कि भैया हम मंगलवार. को नहीं खाते हैं बहुत सुंदर जी जी जी तो.
हमारे मन में फिर ये सवाल आता है कि भैया. ये भगवान कैसे डिसाइड किए थे भगवान बताए. थे इन लोग को कि छा दिन बाबू तुम खा लेना. एक दिन छोड़ देना और एक दिन काहे छोड़ना. मंगलवार को हनुमान जी खुश हो जाते होंगे. आज कृपा कर दिया सवार को शंकर जी नाराज कर. सकते हैं अरे क्या बात करते हैं बेवकूफी. बड़ी बात है देखिए नहीं आप अपने भी मिले. होंगे आप बहुत हा बहुत लोग हम जानते हैं. बहुत लोग भैया आज मंगल आज हम नहीं खाएंगे. या नवरात्र में नहीं खाते सावन में नहीं. खाएंगे. सावन में खाएंगे नहीं दाढ़ी ड़ी से बढ़ा.
के रखेंगे यही इस भगवान सब दे देंगे. आशीर्वाद. सब मनगढ़ंत बातें हैं मंगलवार को ना खाइए. बुधवार को खाइए तो बतिया वही है क्यों खा. रहे हैं देखिए भगवान ने हर जीव को अलग-अलग. बनाया जितने मांस खाने वाले जीव हैं उनके. दांत को देखिए नुकीले नुकीले दांत है अपने. है क्या. जितने मांस खाने वाले जीव उनके नाखून को. देखिए नकीला नाखून है जितने शाकाहारी जीव.
हैं उनके दांत देखिए यहां पर चौड़े चौड़े. चपटे चपटे हैं उनके नाखून ऐसे चपटे चपटे. मिलेंगे आपको तो भगवान ने हमको बनाया ही. वेजिटेरियन के लिए अब जो खा रहा है वह. अपने जहवा के स्वाद के लिए खा रहा है. अच्छा व दिखा रहा है कि हम भगत है इसलिए. मंगलवार को छोड़ देते हैं भगवान पर बड़ी. कृपा करते हैं भगवान भी कृतार्थ हो जाते. होंगे मंगर के बचा ले लेवा. हम ये सब बेकार की बातें हैं मंगल को नहीं. खाते बुध को खाते हैं महाराज जी के कहे.
कहीं फोन करो तो हेलो ना बोलो हां. हां कहीं मैंने ऐसा पढ़ा था कि हेलो मत. बोलो देखिए व्यवहारिक जगत में तो आपको. बोलना पड़ेगा क्योंकि मैं नहीं कह सकता कि. आप किसी से व्यवहारिक बात कर रहे हैं तो. उसमें आप जय सियाराम बोलिए चाहे आप बोलिए. अगर साने रिलाई करता है तो परंतु जब आप. आपस में बात करते हैं मैंने कहीं पढ़ा था. कि फोन की जिन्होंने आविष्कार किया फोन का.
उनका नाम था ग्राहम. बेल और उनकी प्रेमिका का नाम था हेलो. मार्गरेट अच्छा उन्होंने जब फोन बनाया तो. रिसीवर उठाकर पहले अपनी प्रेमिका को याद. किया हेलो वेर आर. यू तो वो तो बुलाकर चले. गए हम लोग आज तक उनकी प्रेमिका को बुला. रहे. हैं उतना यदि भगवान को बुलाए होते तो.
रघुनाथ जी भेटा गए होते जितनी बार हेलो. बोले. तो मेरा कहना है कि जब हम आपस में बात. करें अपने परिवार में अपने मित्रों के साथ. तो भगवान का नाम ले आप जिस भी भगवान को. मानते हैं राम राम राधे श्याम हर हर. महादेव जय माता दी क्यों आप बोलेंगे तो. आपका पुण्य बढ़ेगा. सामने वाले के कान में जाएगा तो उसका. पुण्य बढ़ेगा हम लोग गांव में पहले बिहार. में लाइट नहीं थी छोटे-छोटे थे तो गर्मी.
की छुट्टी में गांव जाते थे एक महीना रहते. थे आम के सीजन में खूब टिकरा खाए होंगे. अरे क्या बात है बारी अगर थे बारी बारी. समझते हैं ना तो जब आम का पेड़ फल जाता था. तो उसकी रखवाली के लिए कोई तोड़े नहीं हम. लोग बारी में जाते थे बच्चे दिन भर रहते. थे दिन में हम लोग की ड्यूटी रात को बड़े. भैया लोग की ड्यूटी तो घर से हम लोग चाकू. थाली भरुआ मर्चा जानते हैं अरे बहुत लाल. वाला हा हा मिर्चा वाला भरुआ मिर्चा लेकर.
जाते थे. हम आम उतार के छिलका उतार के उसको छोटा. छोटा भुजली काट के भरुआ मिर्चा मिला केय. क्या बात. है वो आनंद अलग आनंद है आजकल के लोग उससे. वंचित रह गए उस आनंद से तो क्या प्रसंग चल. रहा था हम भी. बोला टिकोरा इतना दिमाग मे चल गया हम भी. वही पहुंच ग हम दो चार ठुक्का टिका भी लिए.
थे हम भी वही पहुंच गए ज शाकाहारी हम लोग. बात कर रहे थे अच्छा एक सवाल मेरे मन में. और आता है अभी तिरुपति बालाजी मंदिर में. घटना हुई. थी कई लोगों ने कहा उसका उतना विरोध नहीं. हुआ देवकी नंदन ठाकुर जी यही बैठे थे और. उन्होंने कहा कि कितना बड़ा अक्षम अपराध. था कि हम लोग विरोध कर. पाए कहीं और होता तो शायद भूचाल आ जाता. अयोध्या में भी उसके प्राण प्रतिष्ठा में. लड्डू आए.
थे धर्म भ्रष्ट होता है होता है ना होता. है देखिए मानस जी में एक प्रसंग आता है. सुमंत जी जब राम जी को छोड़ कर के वापस गए. हैं अयोध्या तो उसमें उनकी दशा बताई गई कि. इनकी क्या दशा है तो उसमें कहा गया है कि. एक दशा है कि जैसे जीवन भर धर्म का पालन. करने वाला.
ब्राह्मण मरण शैया पर पड़ा हो और इस आशा. में हो कि मरते समय उसके मुख में कोई. गंगाजल डालेगा और उस समय कोई मदिरा डाल. दे मरते समय गंगाजल के स्थान पर उस समय. उसके मन की जो स्थिति होगी उस स्थिति में. सुमंत जी वापस अयोध्या लौट रहे. थे गोस्वामी जी ने उसको बताया कि क्या. उनकी मानसिक दशा है तो धर्म भ्रष्ट तो.
होता ही है आप तो यह हमारी सहजता थी सरलता. थी सहता. थी सता कमजोरी थी सता कहिए कमजोरी कहिए सब. उस पर लागू होगा पहली बात हमारे आस्था के. केंद्र पर जिनकी हमारी धर्म में आस्था. नहीं है वो जीव वहा व्यवस्था में कैसे. पहुंचा यह प्रश्न है. भाई यह हम नहीं कह सकते कि सबकी आस्था एक.
जगह होगी हमारी जहां आस्था है वहां आपकी. नहीं हो स बट वो अज्ञानता भी घी के ड घी. के डब्बे में था जैसे जो घी शामिल किया. गया था जितना हमने पढ़ा तेल या घी उसमें. शामिल था प्रत्यक्ष तौर पर नहीं मिलाया. गया था था ना. हा था ना हा और उसको प्राण प्रतिष्ठा में. भेजा गया किसी रूप में था था ना तोय अपराध. नहीं माना जाएगा तो इस पर जो खामोशी रही. वो खामोशी नहीं रही अब इसको किसी प्रकार. से अब इसमें मीडिया को भी आगे आना चाहिए.
था साधु संत महात्मा सब जगह बोले हर जगह. बोले सबको इसमें जागरूक होना चाहिए था. भारत के जनजन से आवाज निकलती थ उसका. प्रभाव भी हुआ वहां बदले गए ऐसा नहीं कि. वहां बदले गए और उसके साथ-साथ देखिए ऐसी. किसी को कल्पना नहीं थी कि ऐसा भी धोखा हो. सकता है हमारे साथ तो उस घटना के बाद. जितने धर्म स्थल है सब सतर्क हो गए. तो हमारे सामने पहली घटना थी ऐसा नहीं कि. ऐसा होते आ रहा है और हम सहते जा रहे हैं. यह हमारे सामने पहली घटना थी अब इसको लेकर.
यह भी बात उठ रही है कि जो भी हमारे आस्था. के केंद्र हैं वहां पर हमारे धर्म में. विश्वास ना रखने वाले व्यवस्था में ना रहे. यह भी मुहिम चल रहा. है इस पर अवश्य कोई ना कोई सकारात्मक. निर्णय आएगा ठीक है कुछ अंतिम सवाल है. छोटे-छोटे समापन से पहले बुद्धिमान. व्यक्ति की पहचान क्या होती. है किसी भी परिस्थिति में धैर्य का धैर्य. ना खोए परिस्थिति को पहले हर तुरंत त्वरित.
प्रतिक्रिया ना. दे सहसा. करी पाछे पछि ताही हम कहा ही वेद बुध ते. बुध नाही आवेश में आकर व्यवहार कर जाए और. बाद में पश्चाताप करें यह बुद्धिमान. व्यक्ति के लक्षण नहीं हुआ करते हैं. ठीक मंदिरों में वीवीआईपी कल्चर क्या. हिंदू सनातन परंपरा को कमजोर करता है.
क्योंकि बाकी धर्मों में ऐसा नहीं होता है. आप सिखों में जाइए सेवा करते नजर आते हैं. इस्लाम में जाइए सब एक साथ बैठते हैं. हमारे यहां पैसा जेब में है वह अलग से. लाइन बनती है सट से निकल जाइए जितना बड़ा. आदमी उतना जल्दी दर्शन उतना जल्दी दर्शन. ठीक है और नहीं है तो क्यों है और क्यों. इस पर आवाज नहीं आती. इस पर हम क्या कहे आपको सभी मंदर आप लाब. उठाए कभी वीआईपी दर्शन वीआईपी दर्शन का.
लाभ नहीं हम जाते तो पुजारी जी लो ही. दर्शन करा देते हैं ठाकुर जी. का कहीं भी जाते पहले तो पिताजी के साथ. जाते तो दर्शन होता था कहीं पर ऐसे. यात्राओं में काशी विश्वनाथ जी जाते रहते. हैं श्रीधाम अयोध्या जी जाते रहते हैं तो. जहां जाते हैं तो या तो भगत जी लो हैं वही. लोग आगे भेज देते हैं जाकर दर्शन कर लेते. हैं पश्तम मैं भी प्रयास करता हूं कि कहीं. जाऊ. तो मेरे कारण किसी को परेशानी ना हो इसका. मैं भी ध्यान रखता हूं जैसे अभी मैं. दिल्ली इसी दिल्ली में मैं मंदिर में गया.
था यहां पर कनाड पैलेस में प्राचीन हनुमान. मंदिर है पिछले मंगलवार को ही सुबह वहीं. पर गया था तो दर्शन करने चला गया तो. मंगलवार को अपार भीड़ लगी हुई है और वहां. जैसे पहुंचा तो कथा के श्रोता भी है तो अब. कई बार यदि श्रोताओं के बीच में रहिए तो. वहां पर भगदड़ भी हो सकता है लोग मिलने के. लिए आजकल तो सबसे बड़ी समस्या फोटो खींचने. वाली है फोटास वाली तो छपा और दिखा छपा और. फोटास फोटो खींच जाए नाम छप जाए तो उसके.
कारण में प्रणाम करके महंत जी के पास चला. गया महंत जी के पास प्रणाम किया फिर वो भी. दर्शन करा दिए तो भगवान के लिए तो सब. बराबर. है आपको किस्सा सुनाते हम वीआईपी दर्शन का. लाभ बहुत उठाए जी फिर हम एक दिन केदारनाथ. में रिपोर्टिंग करने गए थे जी एक चैन से. रिपोर्टिंग कर रहे थे हम और बहुत कड़ाके. की सर्दी थी मतलब हम टोपी पहने हैं हाथ.
में ग्लव्स पहने वीडियो भी है इंटरनेट प. ग्लव्स पहने है हैवी वाला शूज पहन के गए. थे अलग मोजा पहने गए थे बहुत ठंडी पड़ रही. थी और केदारनाथ के कपाट के ठीक बाहर हम. रिपोर्टिंग कर रहे थे वहां पर हमको एक. लड़का दिखाई पड़ा वो नंगे पैर खड़ा था. उसको और उसको देख के हम सकपका. गए तो क्योंकि अलग अलग लोग बाइट लेते हो. आप तो मैं उसके पास गया उससे मैंने पूछा. मैंने कहा नंगे पैर कैसे हो तो कहा दर्शन. करने आए थे तो मैंने कहा कहां से नंगे पैर. आए हो आसपास कहीं चप्पल उतार हो कहा नहीं.
नीचे जहां होटल था वहां से नंगे पैर आए. हैं तो मैं कहा ये 6 आ 10 घंटा तुम नंगे. पैर चलके आए हो तो उसने जो बात बोली वह. मेरे जहन में आज तक ताजा है जिसके बाद. वीआईपी दर्शन को लेकर मेरे मन में सवाल. उठने आत्मा धि काने लगती है उसने कहा. प्रभु अगर भोलेनाथ के दर्शन करने होते तो. घर बैठे कर लेते घर प भी तो शिवलिंग. हम हमको केदारनाथ के दर्शन कर रहे थे. भगवान तपस्या करने आए थे तो भगवान के.
दर्शन करने हम भी तपस्या करके आए हैं बड़ी. बात और वह जो भाव था उसका ना उसको ठंड लग. रही. थी ना वह असहज था और हम इतना पहन के भी. असहज थे वह नंगे पैर भी सहज था और फिर. उसने बात कही वो बहुत गहरी बात थी कि. भोलेनाथ के दर्शन करने तो नीचे ही कर लेते. घर पर कर लेते इसी पर पर मैं आपको एक बात. बताऊं पूज्य पिताजी मेरे गोमुख. से गंगाजल लेकर जा रहे थे पैदल तो पिताजी.
कपड़े का जूता पहन के चलते थे ये बात है. 80 के समय की 1980 के दशक की. तो गोमुख से पहले एक लाल बाबा का आश्रम है. उसमें कुछ था नहीं वहां पर वही एक आश्रम. था व लाल बाबा नहीं रहे जब तक थे साल में. एक दिन कलकाता घर आते थे तो बाबू जी वहां. रुके थे रात्रि विश्राम कर रहे थे जल भर. के वहां एक अंग्रेज मिला पिताजी को एक बैक. पैक लिए हुए तो पिताजी देखे कि यहां पर इस.
बर्फ में अंग्रेज क्या कर रहे हैं तो. पिताजी ने पूछा कि आप कहां से तो बताया कि. हम यूएस से आए हैं तो ये तो बोले मैं. गोमुख से काशी जा रहा हूं. पैदल तो पिताजी. नंग कपड़े का जूता पहने थे वो नंगे पांव. थे तो बोले आप ये जूता चप्पल नहीं पहने तो. उसने कहा कि मैं अ यूएस से बिना जूता. चप्पल का आया हूं क्यों तो उसने कहा कि.
मेरी दृष्टि में पूरा भारत एक मंदिर. है मंदिर में जूता चप्पल पहन के नहीं जाते. हैं भावना भावना की बात. है भाव बिना मिलता नहीं दुनिया में सामान. कहीं भी जाते तो पूछते ना का भाव लगाए हो. भाव बिना मिलता नहीं दुनिया में सामान. बिना भाव कैसे मिले भव तारण.
भगवान आखरी सवाल हम पूछते हैं रामायण और. महाभारत लोग कहते हैं दोनों पढ़ना चाहिए. एक भगवान श्री राम जी से एक श्री कृष्ण जी. से जुड़ी हुई है राम जी और कृष्ण जी में. क्या प्रमुख अंतर. है और क्या सीखना चाहिए दोनों. से राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम. है भगवान श्री कृष्ण लीला पुरुष उतम. है जन्म लेते लीला शुरू कर. दिए भगवान श्री कृष्ण से जो मुझे समझ में.
आता है एक बड़ी अद्भुत बात समझने लायक है. उलझना नहीं है. कहीं सुलझ. रहिए देखिए जो उलझा ना वो अपने विकास को. अपने हाथों समाप्त कर लिया प्रैक्टिकल थेम. प्रैक्टिकल भाग लिए आज तक दुनिया रण छोड़. के आती कहने दीजिए उसे का बिगड़ता है भाग. लिए ना इसलिए उलझ मत एक महात्मा कहते हैं. कि जब गांव से जब हाथी गुजरता है ना तो.
पूरे गांव के जो कुत्ते हैं भोगते रहते हम. कुकुर कहते हैं कुकुर हा कुकुर भोके वो सब. भोगते हैं हाथी निकले बाजार तो तो कुकुर. क्यों भोगते हैं कुत्तों को लगता है कि. बताओ इस गांव के पहरा में हम रहते हैं ये. पहली बार हाथी आया सब लोग इसको सामने हाथ. जोड़कर खड़े गणेश जी गणेश जी कह रहे है हम. यहां रहते लोग हमको लाठी मारते हैं कुत्ते. उसको भ हाथी को लेकिन कभी भी हाथी पलट के. जवाब नहीं. देता अपने मस्ती में चल एक बार सण घुमाया. तो कुकुर कहां जाएंगे भगवान मालिक.
है हा तो हाथी चलता रहता है क्यों हाथी. जानता है कि इन सब को भोक कर यही रहना है. हमको आगे जाना है यदि हम उत्तर देंगे तो. हम भी अजुरा के इधर ही फस जाएंगे इसलिए. भगवान श्री कृष्ण की सबसे अद्भुत बात जो. है उलझना नहीं है अपनी यात्रा में चलते. रहिए अ वृदावन जाते हैं गए हैं इधर इधर. नहीं गया हूं बहुत कम डर लगता है अरे बहुत.
छलिया है फसा. लेंगे भगवान कृष्ण अद्भुत है मैं बहुत कम. जाता हूं अयोध्या जाता रहता हूं हमारे. रघुनाथ जी बड़े अच्छे अच्छा अयोध्या. और वृंदावन में अंतर सिर्फ भगवान श्री. कृष्ण और राम जी का नहीं है वहां के लोगों. का व्यवहार भी वैसा है और लोग तो लोग बंदर. का व्यवहार वैसा हां हां वैसा ही है हमारे. अयोध्या के बानर बड़े शांत है हां जैसे हम. अयोध्या जाते हैं तो जब आप निकलोगे मंदिर.
से तो आपको रेवड़ी मिलती है तो बंदर आएगा. आपको हक कर लेगा कि पकड़ लेगा जेब में. प्यार से हाथ डालेगा उसको एक रेवड़ी चाहिए. लेके जय श्री राम वृंदावन में ऐसा नहीं है. वो घात लाग बैठेगा अगर आप चश्मा लगाए हो. या पर्स है सेट से निकाल ले जाएगा फिर. फ्रूटी दो चश्मा फेंक देगा और कई बार तो. उसमें भी होशियारी करते हैं कि एक वाला. फ्रूटी ले लेता है फिर उसको छोड़ चलाता है. कि अब दूसरा वाला बारगेनिंग कर तो हमने एक. बार बाबा जी से पूछा व अच्छा हमने कहा. महाराज जी हमारे वहां इतने सीधे साधे बंदर.
आपके यहां तो तो कहे जैसे आपके राम जी. वैसे वहां के बंदर जैसे हमारे श्याम जी. ऐसे हमारे यहां के बंदर महाराज जी आप. जस्टिफाई कर दिए अभी मैं बैठा था जयपुर. में कथा थी तो एक सांगरिया धाम है. राजस्थान में सांगरिया में वहां के. श्रीमंत प्रात मण पूज्य श्री दयानंद. शास्त्री जी महाराज लक्ष विभूति है सरकार. अद्भुत. मतलब कम मूर्ति वैसे मिलेंगे देखने को तो. जयपुर में कृपा किए थे एक दिन के लिए.
सरकार बैठे थे मैं भी नीचे बैठा था और भी. भगत जन बैठे थे तो किसी भक्त ने पूछा क्या. सरकार एक बात बताइए वृंदावन के लोग. कन्हैया को गाली देते हैं हमको बहुत अच्छा. नहीं लगता है अब वो चार पांच बार भगत ने. कहा यह बात वृंदावन के लोग कन्हैया को. गाली देते हैं तो महाराज बोले क्यों ना दे. गाली क्यों ना दे गाली कोई गाली सुनने का. काम करेगा तो उसको गाली नहीं दिया जाएगा. छलिया है छलिया है कोई किसी का कपड़ा चुरा. ले तो क्या उसकी आरती उतारी जाएगी व गाली. नहीं सुनेगा ठीक करते हैं लोग उसको गाली.
देते हैं. वहा तो भक्तों का आनंद है भगवान और भक्त. की लीला है ये सहज भाव वाले जीव नहीं समझ. पाएंगे कन्हैया को उसी में आनंद आता है. अभी कुंबल दास जी का चरित्र सुन रहे थे हम. लोग कुंभन दास जी से कहते चलो चलो लीला. करनी है 500 साल पहले घटना है. वो द्वापर वाला अभ्यास छूटना नहीं चाहिए. चोरी वाला अभ्यास में रहना चाहिए चोरी. करने तो एक गोपी का घर दिखाई पड़ा जिसके.
घर में केवल गोपी थी तो कुंभन दास जी को. बोले तुम तो बूढ़े हो गए हो कोई बात नहीं. मैं साथ में हूं चलो अभ्यास बनाना चाहिए. चोरी किया जाए तो उसके घर में गए चोरी. करने तो वह छींका ऊपर टना हुआ था तो कुंभन. दास जी बोले आप तो पहुंच नहीं पाएंगे. कन्हैया छोटे रूप में थे बोले तुमको किस. लिए लाया हूं बैठो तुम उसके उनके कंधे पर. एक पांव इधर रखे एक पाव इधर रखे और बोले. खड़े हो जाओ खड़े हो गए व छका मिला और. भगवान अपनो खाए अ कुंभन दास को भी.
खिलाए खिलाए तो अब क्या हुआ कि बार-बार. उचक उचक भगवान की धोती खुलने. लगी अब हाथ में पूरा व माखन ल भराया हुआ. है इधर धोती खुल उनको ल दिगंबर ना हो जाए. हम अच्छा ज्यादा इधर उधर करें तो आवाज. होगा तो गोपी आ जाएगी तो वहीं पर भगवान के. दो हाथ और प्रकट हो गए दो धोती संभाले दो.
चतुर्भुज रूप में प्रकट हो गए दो धोती. संभाले दो धोती पकड़े और दो से खिला रहे. एक अपने भी खा रहे कुम अब भगवान की लीला. क्या है खाने के बाद ये अब मान लीजिए हम. आपके घर चोरी करने आए आपको पता ना चले कि. चोरी हुआ तो फिर चोरी का मजा क्या है सही. बात है तो भगवान खाते भी थे खाने के बाद. मटकी भी तोड़ते थे घर वाले जाने की काम हो. चुका है अब जब मटकी तोड़े उधर से दौड़ी. गोपिया अब कुंभन दास बोले तुम तो नए हो.
भाग लोगे हम बूढ़े हम तो फस गए बिना मतलब. में मार खाएंगे बो नहीं नहीं अभी बचने का. उपाय काम करो यह जितना दूध हो मुंह में भर. लो तो कुंभन दास जी कन्हैया भर ली बोले. क्यों तो जैसे गोपिया आएंगी मारने के लिए. उनके मुंह पर कुल्ला कर दिया जाएगा. पिया पहुंची लाठी उठी लेकर बिना ला मारने. के लिए मुह में भर के बैठे दोनों लोग जैसे. आई तो मुह में कुल्ला कर दिए कुल्ला बाख.
में पड़ गया भगवान बोले भागो यहां से फिर. दोनों भाग लिए तो कन्हैया का आनंद है उनका. अपने भक्तों के साथ व लीला पुरुषोत्तम है. हमारे राघव जी मर्यादा पुरुषोत्तम है राघव. जी हमारे शांत है सहज है सहज सरल सुनी. रघुवर बानी साधु साधु बोले मुनि ज्ञानी. अंतर दोनों में अंत में वो गाना एक रह गया. आपका भजन सियाराम सीताराम. सीताराम एक अंतरा उसका जो मुझे बड़ा प्रिय.
है सीताराम. सीताराम. सीताराम. कहिए जाही विधि राखे. राम वाही विधि. रहिए जिंदगी की डोर. सौप हाथ दीना नाथ के फिर महलों में राखे.
चाहे झोपड़ी में बास दे हम क्या करें. महाराज. धन्यवाद निर्विवाद. बस राम राम. कहिए जाहि विधि राखे. राम वाही ध. रही अद्भुत अद्भुत अद्भुत कोटि कोटि नमन. आपको सादर प्रणाम सौभाग्य हमारा हम बैठे. आपके साथ संवाद रहा हमने खूब आनंद उठाया.
आशा करते हैं कि दर्शक भीरा उठ अवश्य. अवश्य जय श्री राम जय श्री राम ज.
