Unplugged ft. Rahil Chaudhary | Eye Specialist | Eye Problems | Lasik Surgeries | Save Your Eye
क्या हो अगर आंखों से दिखना कम हो जाए. क्या हो अगर आंखों पर चश्मा लग जाए डॉक्टर. राहिल चौधरी आंखों पर चश्मा क्यों आता है. अगर मैं आपसे कहूं कि आपको चार-पांच बड़ी. वजह बतानी है पेरेंट्स की आंख में चश्मे. का नंबर है तो हाई चांस हो जाएगा बच्चे की. आंख जैसे बाकी बीमारियों में होता है फिर. होते हैं एनवायरमेंटल फैक्टर्स कि आपका. लाइफ स्टाइल कैसा है मोबाइल कितनी दूर से. देखना चाहिए आंखों 25 टू 30 सेमी सिगरेट. शराब हम दोनों नुकसान करेगी आंखों को बहुत. सारी बीमारियां कर देती है सारी बीमारियां. जल्दी ले आती है सिगरेट शराब तो पूरी बॉडी. को ही खराब करेगी ना शाहरुख भाई को चश्मा. नहीं लगा हुआ है शाहरुख खान को भाई ने.
चश्मा हटवाया हुआ है अपना लेजर करा के. रकुल प्रीत ने आईसीएल से हटाया हुआ है. प्रियांका चोपड़ा कि जो दोनों ब्रदर इन. लॉज है जोनस ब्रदर्स उनकी आंख में आईसीएल. से चश्मा हटाया है सूरमा लगाते हैं काजल. लगाते हैं मम्मी लोग तो बड़ा एकदम बच्चों. की आंख में स्पेशली हां उससे आंखों पर कोई. नेगेटिव फर्क पड़ता है इसको लगाना क्यों. है पहले तो मेरे को ये समझ नहीं आ उन्हें. लगता है लाल हमारा सुंदर लगा सुंदरता के. लिए लगा रहे हो वैसे जो आम को सत्यास हो. जाएगा बुरी नजर से बचा रही होंगी कांटेक्ट. लेंस कितने सेफ होते हैं सज रोज पहन रहे. हो ना कंटक्ट लेंस उससे आंखों का सत्यानाश. हो जाए लेसिक सर्जरी का सबसे बड़ा मिथ. क्या है लोगों को लगता है कि एक बार लेसिक.
सर्जरी कराओ तो अभी के लिए तो चश्मा हट. गया लेकिन वो दोबारा वापस आ जाएगा देखिए. कोई भी आप ऑपरेशन करा लीजिए मान लीजिए. लेजर वाला ऑपरेशन करा लिया लेंस वाला. ऑपरेशन करा लिया 15 से 20 दिन बाद एक तरह. से आपने भूल जाना है कि मेरा कोई ऑपरेशन. हुआ था आंखों का ख्याल सबसे ज्यादा कैसे. रख सकते हैं हमारी आंखों में आंसू हैं जो. हमारी आंखों को धो देते हैं आपकी आंखें. खराब हो रही है आपको डॉक्टर से कंसल्ट. करना चाहिए इसके शुरुआती सिम्टम्स क्या है. देखो जलन हो रही है पानी हो रहा है लाली. हो रही है खुजली हो रही है नजर धुली हो. रही है चुबन हो रही है तो मतलब आंख में.
कोई प्रॉब्लम है यू शुड गो कंसल्ट अ. डॉक्टर आयुर्वेदिक होम्योपैथिक में भी. बहुत सारे दावे होते हैं फिर से मैं कोट. करके वो दावे ही है सारे मतलब मैंने तो आज. तक एक भी पेशेंट ने देखा जिसका आयुर्वेद. होम्योपैथी से चश्मा हट गया हो सोने से. फर्क पड़ता है कम सोते हो तो भी आंखों पर. असर आएगा बहुत अनलाइक चश्मे के नंबर प. फर्क नहीं पड़ता बाबा रामदेव अक्सर कहते. हैं दावा ठोकते हैं कि ये खाओ ये पहनो ये. करो ये रगड़ो ऐसा करो उससे आंखें च पावर. रिवर्स हो जाएगी नहीं बाबा रामदेव को तो. पब्लिकली अपोज करना पड़ गया सब चीजों के. लिए जो ये चलता है कि आंखों में ये. विटामिन लो इससे आंखें बेहतर हो जाएंगी.
ऐसे प तो इस बेहतर सोशल मीडिया प ये सब. चीज भरी हुई है जिसकी आंख में चश्मे का. नंबर है सब ट्राई करके देख लो अगर किसी का. हट जाता है तो मुझे आके बता. देना बॉलीवुड की फिल्मों में जुल्फों के. बाद सबसे जदा चर्चा आंखों की होती है. आंखों की गुस्ताखियां तेरे मस्त मस्त दो. नैन शेरो शायरों की दुनिया में भी आंखों. की बड़ी कीमत है अक्सर कहा जाता है कि. मैंने उसे उतना देख उतना देखा जितना दो.
आंखों से देखा जा सकता था लेकिन क्या हो. अगर आंखों से देखना कम हो जाए क्या हो अगर. आंखों पर चश्मा लग जाए आज इन सवालों का. जवाब लेने के लिए मेरे साथ हैं डॉक्टर. राहिल चौधरी पहले डॉक्टर जिन्होंने गिनीस. बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में नाम शामिल किया. लेजिक सर्जरी के मामले में एक लाख से ऊपर. सर्जरी बताया गया कि 50 से ऊपर तो एक दिन. में कर दी थी डॉक्टर साहब आपने कैसे किया. हमें पता नहीं लेकिन सवाल हमारा पहला तो. यही है. कि चश्मा क्यों आ जाता है मतलब भगवान ने.
बनाया था बढ़िया सुंदर. मुंदर आंखों के सामने एक फ्रेम लगाना पड़. रहा है फिर वो बैटरी लग गई बचपन में लोग. मजाक उड़ाते हैं किसी किसी कार बैटरी हो. तुम दिख रहा है नहीं दिख रहा है चश्मा. क्यों आता है सी अगर मैं बहुत सिंपल तरीके. से समझाऊं तो हमारी आंख का एक साइज है अगर. यह आंख हमारी लंबी हो जाती है साइज में. लोंगे हो जाती है तो चश्मे का नंबर आ जाता. है तो अगर 1 मिलीमीटर आंख लंबी हो ग तो एक.
इंसान की आंख में तीन नंबर का चश्मा आ. जाता है यह मैं बात कर रहा हूं जब माइनस. का नंबर आया है तो मेजॉरिटी लोगों की. आंखों में माइनस का नंबर होता है कुछ. लोगों की आंखों में प्लस का नंबर होता है. प्लस का नंबर होता है जब आई का साइज जो है. वो थोड़ा छोटा रह गया है पूरा अचीव नहीं. हुआ तो यह कॉमनली हमें मिलते हैं चश्मे के. नंबर फिर आपने सुना होगा कुछ लोगों की आंख. में सिलेंडर नंबर होता है या जिसको एस्टिग. मटिज्म कहते हैं राइट तो उसका मतलब होता. है कि हमारी आंख का जो सामने वाला हिस्सा.
है जिसको हम कॉर्निया या काली पुतली कहते. हैं वो पूरी तरह से गोल नहीं है जैसे एक. बास्केटबॉल है बास्केटबॉल पूरी गोल होती. है लेकिन कभी आपने वो देखी है रग्बी वाली. बॉल जो थोड़ी सी लंबी सी होती है एक साइड. से घुमाव ज्यादा है एक साइड से घुमाव कम. है तो अगर इस तरह की शेप हो हमारे आगे. वाले स्ट्रक्चर की कॉर्निया की तो हमारी. आंख में सिलेंडर नंबर होता है तो ये तीन. तरह के कॉमनली नंबर दिखते हैं माइनस नंबर. हो सकता है प्लस नंबर हो सकता है सिलेंडर. हो सकता है फिर क्या होता है आपने अक्सर. सुना होगा कि जब एक इंसान की उम्र 40 45.
को क्रॉस कर जाती है तो उनकी आंखों में एक. रीडिंग का नंबर आ जाता है उसको हम लोग. कहते हैं प्रेस बायोपिया कि पढ़ने के लिए. आपको नंबर चाहिए दूर का नंबर आपका नहीं है. तो ये तीन चार तरह के जो है हमें अलग-अलग. टाइप के चश्मे की पावर एक इंसान की आंख. में हो सकती है एक उम्र के बाद आमतौर पर. होते हैं लेकिन आजकल हम स्कूल में देखते. हैं हमारे समय भी हम देखते थे बच्चा इतना. बड़ा सा है इतना मोटा चश्मा लगा दिया कई क. वो मोटी मोटी स्किल वाले चश्मे ला घूमते.
हैं तो वो आ क्यों गया ये क्यों आया राइट. तो देखिए इसके दो तीन रीजन होते हैं सबसे. पहला रीजन जो होता है वो होता है. जेनेटिक्स कि अगर हमारी बॉडी में कुछ इस. तरह की जीनस है हमारे पेरेंट से हमें मिली. है मदर की आंख में चश्मा था फादर की आंख. में चश्मा था तो वो जीनस बच्चे में भी आ. सकती हैं और आंख में चश्मे का नंबर चढ. सकता है बट दिस इज नॉट द ओनली रीजन मोस्ट. ऑफ द टाइम्स हम लोग देखते हैं एनवायरमेंटल. फैक्टर्स तो जब बच्चा छोटा है अगर ज्यादा. समय तक मोबाइल कंप पर काम कर रहा है नजदीक.
का काम कर रहा है या आउटडोर एक्टिविटी. लिमिटेड है सन एक्सपोजर लिमिटेड है तो उस. इंसान की आंख में चश्मे का नंबर चढ सकता. है मेरे मन में फिर एक ख्याल आता है. [संगीत]. कि छोटा बच्चा है आपने कहा चश्मा आ जाता. है चश्मा क्यों मतलब इसके अगर मैं कोर पर. जाऊ चश्मे को लेकर मैं चश्मा नहीं लगाता. था जीवन भर फिर एक इस पर चश्मा आ गया फिर. चश्मा ऐसा आया कि वो बढ़ता चला गया खानपान. मेरा वही है जो मैं आज से 10 साल पहले कर.
रहा था खानपान मेरा शहर के हिसाब से नहीं. बदला पहले भी बाहर था अी बाहर था कोई. एक्स्ट्रा चीजें भी नहीं आई तो ये एक उम्र. के बाद बदलाव 40 वाला ये जो 20 में आया. इसके पीछे रीजन क्या था नहीं देखो एक तो. हमने डिस्कस करा कि 45 के बाद आई में कुछ. चेंजेज होंगे लेकिन उस टाइम में आपको. रीडिंग का नंबर आया पढ़ने का जो आपका नंबर. आया हुआ है वो डिस्टेंस का नंबर है दूर का. नंबर है आपका क्योंकि अभी आपकी एज 45 तो. हुई नहीं अब इसको हम लोग कहते हैं स्कूल. मायोपिया तो क्या होता है जब आप स्कूल में.
जाते हो जब आपकी बॉडी में ग्रोथ हार्मोंस. हैं हाइट बढ़ रही है ऐसे ही उस टाइम पे. आंख का साइज भी बढ़ रहा है तो उस टाइम पे. जब बॉडी ओवरऑल डेवलप हो रही है आंख का. साइज बढ़ रहा है और चश्मे का नंबर आ जाता. है तो अक्सर पेरेंट्स मेरे से पूछते हैं. कि डॉक्टर साहब चलिए ठीक है कोई भी रीजन. था जेनेटिक्स था एनवायरमेंटल था अब हमारे. बच्चे की आंख में चश्मे का नंबर आ गया है. हम तो अब क्या इस नंबर को हम बढ़ने से कुछ. रोक सकते हैं या कुछ ऐसा कर सकते हैं कि. बहुत ज्यादा ना बढ़े क्योंकि अक्सर लोगों. का हम देखते हैं नंबर 18 20 25 30 तक.
पहुंच सकता है चलिए डॉक्टर साहब एक सवाल. मेरे मन में आता है कि आंखों पर चश्मा. क्यों आता है अगर मैं आपसे कहूं कि आपको. चार-पांच बड़ी वजह बतानी है आप क्या. बताओगे कि इन पांच वजहों से आपकी आंखों पर. चश्मा आता है ऐसे आप इसको कैटेगरी इज नहीं. कर सकते राइट तो जैसे मैंने आपको समझाया. पहला रीजन होता है जेनेटिक्स पेरेंट्स की. आंख में चश्मे का नंबर है तो हाई चांस हो. जाएगा बच्चे की आंख ब जैसे बाकी बीमारियों. में होता है ठी फिर होता हैं एनवायरमेंटल. फैक्टर्स कि आपका लाइफस्टाइल कैसा है तो. अगर एक बच्चा जब वो डेवलपिंग स्टेज में है. हम जब वो 18 साल से कम की उम्र में है अगर.
वो लंबे समय तक रीडिंग का मोबाइल कंप्यूटर. लैपटॉप आईपैड्स का काम करेगा तो वो अपनी. आंखों पर कुछ इस तरह का स्ट्रेन डालता है. कि आंख का साइज लंबा हो सकता है तो ये एक. बहुत बड़ा रीजन सामने आ रहा है कि. एक्सेसिव नियर वर्क से बच्चों की आंख में. चश्मे का नंबर आ जाता है फिर हमें यह दिखा. है कि अगर आपका सनलाइट एक्सपोजर कम होता. है देखिए क्या होता है जब आप धूप में. निकलते हैं और ये धूप आपकी आंखों में जाती. है तो हमारे आंख में कुछ तरह के केमिकल. रिलीज होते हैं जिससे ये आंखों की लोंगे.
नहीं होती लेकिन जब आपका सन एक्सपोजर. लिमिटेड होता है और ये केमिकल्स नहीं निकल. रहे तो यह भी एक फैक्टर हो जाता है कि. बच्चों की आंख में स्पेशली चश्मा चढ़ रहा. है तो अगर आप देखो अ नेशन जैसे चाइना हो. गया सिंगापुर हो गया कोरिया हो गया ताइवान. हो गया यहां पे ऑलमोस्ट 80 टू 90 पर. बच्चों की आंख में चश्मा चढ़ गया है ओके. ऑलमोस्ट एक पेंडम की तरह फैल रहा है और अब. यही ट्रेंड हम इंडिया में और वेस्टर्न. कंट्रीज में भी देखने वाले हैं तो वहां के. स्कूल्स ने अब यह मैंडेटरी कर दिया बच्चों.
के लिए कि दो से तीन घंटे आउटडोर. एक्टिविटी करनी ही करनी है सन एक्सपोजर. करना ही करना है जिससे ये जो पडेम आ रहा. है मायोपिया का ये कम हो सके अच्छा एक जो. मैंने अपने केस में आपसे सवाल पूछा. कि आप एक उम्र को पार कर लेते हो आपने कहा. ग्रोथ के टाइम में आंखें भी बड़ी होती. रहती है आपकी बॉडी ग्रो होती है उस टाइम. में कई चेंजेज होते हैं लेकिन जैसे मेरे. साथ हुआ था मुझे 20 साल की उम्र के आसपास. चश्मा लगा अब आमतौर पर 171 तक हम मान लेते. हैं कि हमारी बॉडी फुली ग्रोन हो गई जिससे. जितना बढ़ना था वो हो गया 20 के आसपास 12थ.
पास करने के बाद कॉलेज में एंट्रेंस के. टाइम में और मैं तो इतनी पढ़ाई भी नहीं कर. रहा था देखिए इस टाइप की सिचुएशन यूजुअली. कम दिखती है बट वी आल्सो हैव टू. अंडरस्टैंड कि इसका कोई ब्लैक एंड वाइट. नहीं है भाई एंड ऑफ द डे इट्स अ ह्यूमन. बॉडी ह्यूमन बॉडी में जो आंख है वो एक. लिविंग टिशू है वो अपने आप को चेंज करता. है उसमें खून की नाड़ी है सांस लेता है तो. अगर बॉडी में कुछ चेंज हो जाता है तो उससे. आंखों का जो परफेक्ट ऑप्टिकल फोकस होता है.
वो चेंज हो सकता है तो नंबर आ सकता है एंड. अभी भी जो आपका नंबर आया होगा वो बहुत हाई. नहीं होगा मिनिमल होगा वन के अराउंड 1 1.5. बिकॉज यूजुअली जो स्टार्टिंग से स्कूल के. से बढ़ रहा है वो आधे नंबर से सपोज शुरू. होता है वो बढ़ते बढ़ते बढ़ते बढ़ते काफी. हाई हो जाता है चश्मा अगर हमें लेजर. सर्जरी ना करवानी हो लेजिक सर्जरीज क्या. रिवर्स हो सकता है जैसे आयुर्वेदिक में कई. बार बाबा रामदेव अक्सर कहते हैं दावा. ठोकते हैं कि यह खाओ यह पहनो यह करो यह. रगड़ो ऐसा करो उससे आंखें च पावर रिवर्स.
हो जाएगी नहीं बाबा रामदेव को तो पब्लिकली. अपोलोजि करना पड़ गया सब चीजों के लिए बट. सी अंडरस्टैंड अगेन लेट अस टॉक. साइंटिफिकली सी चश्मे का नंबर क्यों आया. आंख के साइज के बड़े होने से अब ऐसी कोई. दवाई नहीं है या कोई ऐसी एक्सरसाइज नहीं. है कोई ऐसा आयुर्वेदा या होम्योपैथी नहीं. है जो इस आंख के साइज को छोटा करते भाई. हाइट बढ़ सकती है दवाई देके आप हाइट को कम. तो कर नहीं सकते अगर मेरी हाइट 6 फुट हो. गया और मेरे को उसको 5 फुट करना है तो. मुझे पैर को काटना पड़ेगा सिमिलरली अगर. आंख का साइज बड़ा हो हो गया है और चश्मे.
का नंबर चढ़ गया है अब आपको चश्मा हटाना. है तो सिर्फ एक सर्जरी से हट सकता है ये. चश्मा और कोई तरीका ऐसी दुनिया की आज की. डेट में कोई दवाई नहीं है कोई ड्रॉप नहीं. है कोई गोली नहीं है कोई आयुर्वेदा नहीं. है कोई जड़ीबूटी नहीं है कोई योगा नहीं है. कोई एक्सरसाइज नहीं है जो इस साइज को छोटा. कर सकता है चश्मे का नंबर ह सक तो जो ये. चलता है कि आंखों में ये ड्रॉप डालो रिलीफ. होगा ये विटामिन लो इससे आंखें बेहतर हो. जाएंगी ये वाला ऑयल फिश ऑयल खाओ पियो तो. इससे बेहतर हो जाएगा ये फील गुड फैक्टर है. कि सिर्फ फील गुड मान लो मिथ्स मान लो मिस.
लीडिंग चीजें मान लो. youtube1 ही है ऑपरेशन ये भरोसा देखिए हम. इसलिए कर सकते हैं कि डॉक्टर साहब ने 1. लाख सर्जरी की है अब डॉक्टर साहब 1 लाख. सर्जरी मतलब नंबर बहुत बड़ा है मुझसे एक. डॉक्टर ने कहा था 30000 हार्ट ओपन किया है. मैं तभी गिनती गिन रहा था उंगली पर और उस. डॉक्टर की एज हो गई फिर 60 65 ही वाज 75. या आप मस्ट बी अराउंड 35 40 सो मेरे मन.
में डाउट आता है कि यार 1 लाख लेसिक. सर्जरी कैसे कर डाली आपने बिकॉज लेसिक. सर्जरी जो है ये पाच से 10 मिनट का ऑपरेशन. है ह एंड ये एक्चुअली सिर्फ एक नाम का. ऑपरेशन है इन ऑपरेशंस में आजकल कोई दर्द. नहीं है कोई इंजेक्शन नहीं है कोई टांका. ब्लेड कट पट्टी हॉस्पिटलाइजेशन कुछ नहीं. होता पेशेंट एक मशीन पे लेटा है 10 सेकंड. के लिए आंख में लेजर डालते हैं अगले दिन. सुबह उ ओके उटा चश्मा हट चुका होता है. तीन-चार दिन का परहेज रहता है फिर अपने. काम प लग जाओ तो सर्जरी ड्यूरेशन इज. एक्चुअली 5 मिनट्स तो एक दिन में हम लोग.
50 से 60 पेशेंट्स का ऑपरेशन कर पाते हैं. और आपने मैक्सिमम एक दिन में 250 सर्जरी. की एक दिन में 250 कर सो दैट इज पॉसिबल. बिकॉज ऑफ शॉर्ट ड्यूरेशन सर्जरी ना अच्छा. वो जो 250 हो गई वो मैंने अकेले ने नहीं. करी वी हैड अ टीम ऑफ सिक्स डॉक्टर्स एंड. थ्री मशीनस एक बंदे के लिए 250 करना तो. ऑफकोर्स इट्स इंपॉसिबल फिर भी लोगों को लग. रहा होगा टेंपल रन वाला हिसाब किताब है. कुछ कुछ कह सकते हो कि यहां से गए सट से. वहां किया वहां किया इट इज एक्चुअली लाइक. दैट पांच पांच मिनट में सर्जरीज होती है. सो इट्स नॉट अ वेरी लॉन्ग ड्यूरेशन सर्जरी. जैसे हार्ट सर्जरी में तो घंटे लग जाते. हैं करने में कभी कभी 24 घंटे लग जाते.
जस्ट फाइव मिनट जॉब बट डू एंड डोंट भी तो. होते होंगे ना लेजिक सर्जरीज के डू एंड. डोंट भी तो होते होंगे ना कि या हर. व्यक्ति को अलाउड है कोई व्यक्ति किसी भी. उम्र में कर सकता है नहीं देखिए उम्र का. इसमें ऐसा कोई बैरियर नहीं है हां वी से. कि मिनिमम एज 18 होनी चाहिए मैक्सिमम एज. लिमिट कोई नहीं है तो अभी-अभी एक 75 ईयर. ओल्ड लेडी का मैंने चश्मा हटाया था लेजर. टेक्नोलॉजी से बट द क्वेश्चन इज कि पोस्ट. ऑफ रिकवरी कितनी फास्ट है तो देखिए अभी जो. हम बात कर रहे हैं ना वी आर टॉकिंग अबाउट. ओल्ड टेक्नोलॉजी लेसिक लेसिक अब एक तरह से.
ऑब्सोलिसेंट करके टेक्नोलॉजी आई फिर सिल्क. करके टेक्नोलॉजी आई और अब जो लेटेस्ट आ. गया दैट इज द वेवलाइट प्लस टेक्नोलॉजी सो. जैसे-जैसे हम टेक्नोलॉजी में एडवांस कर. रहे हैं हमारी क्वालिटी बेटर हो रही है. सेफ्टी बेटर हो रही है एंड रिकवरी बहुत. फास्ट हो रही है सो नाउ द रिकवरी इज. ऑलमोस्ट इंस्टेंट सो वी से कि आज आपने. कराया कल आपका चश्मा हट गया वैसे तो परसों. से आप अपने काम भी शुरू कर सकते हो बट. बिकॉज़ वीी आर इन इंडिया हमारा ट्रॉपिकल. क्लाइमेट है थोड़ा थोड़ा सा कंटेम एयर है.
कंटेम मिनेटेस्ट को बोलते हैं तीन दिन. थोड़ा सा रिलैक्स हो जाओ तीन दिन थोड़ा सा. घर के अंदर रह लो आंख में धूल मिट्टी. वगैरह ना जाए थोड़ा सा गले के नीचे नहा लो. पानी ना जाए थोड़ा सा मोबाइल कंप्यूटर अभी. के लिए कम रख लो दो से तीन घंटे क्योंकि. नया सिस्टम बनाया आंखों का भी आइज अडॉप्ट. हो रही है तीन-चार दिन में आप नॉर्मल हो. गए नाउ यू आर बैक टू एवरीथिंग एंड एनीथिंग. सिर्फ इसमें हम थोड़ा सा ये कह देते हैं. कि कोई हैवी काम है कुछ स्ट्रेन अस. एक्टिविटी है हार्डकोर एक्टिविटी है. जिमिंग जॉगिंग रनिंग स्विमिंग क्रिकेट टल. ख लड़ाई कर थप पड़ सकता है ये सारा कुछ 15.
दिन बाद होना चाहिए क्योंकि 15 दिन तक हम. चाहते हैं कि आंख में कोई चोट ना लगे ओके. अगर कोई आप बीमारी आपको है उसका भी यहां. परहेज है कि लेसिक सर्जरी इन बीमार लोगों. को नहीं करवाना है या देखिए यूजुअली लेसिक. सर्जरी यंग लोग करा रहे हैं यंग लोगों की. बॉडी वैसे ही हेल्दी है तो बहुत ज्यादा. बीमारियां तो मिलती नहीं डायबिटीज वाले. पेशेंट्स अगर कराना चाहते हैं करा सकते. हैं लेकिन उनकी शुगर कंट्रोल में होनी. चाहिए लेकिन अगर कुछ ऐसे पेशेंट्स हैं जो. इम्यूनो कॉम्प्रोमाइज्ड है या जिनके जो.
एचआईवी के पेशेंट्स हो गए या कुछ इम्यूनो. सुप्रेस ले रहे हैं या कुछ स्टेरॉइड्स ले. रहे हैं या प्रेग्नेंट है लेडीज ब्रेस्ट. फीडिंग पे हैं तो इस टाइम पे हम लोग. सर्जरी करना थोड़ा अवॉइड करते हैं मेरे. पास कई लोग सो बेसिकली मतलब आई विल जस्ट. कंप्लीट दिस कि जब हम किसी का चश्मा हटाने. का ऑपरेशन कर रहे हैं तो हमारी. रिक्वायरमेंट होती है कि आंख में चश्मे के. नंबर के अलावा और कोई प्रॉब्लम नहीं होनी. चाहिए ओके हां यूजुअली व बिकॉज एंड ऑफ द. डे ये जो प्रोसीजर है ये कॉस्मेटिक है कोई. बीमारी तो है नहीं सो अगर आई में सिर्फ. चश्मे का नंबर होता है तो हम बहुत.
कंफर्टेबल होते हैं इसको हटाने में अगर आई. में कोई और प्रॉब्लम है तो यूजुअली इस तरह. के कॉस्मेटिक प्रोसीजर्स को अवॉइड किया. जाता है आंख से चश्मा हटाने का सिर्फ. लेसिक ही सबसे अच्छा प्रोसीजर है या इसके. अलावा भी मल्टीपल ऑप्शंस है है तो कौन-कौन. से मल्टीपल ऑप्शंस है सी वी हैव टू. अंडरस्टैंड कि आपकी पावर क्या है और आपकी. रिपोर्ट्स क्या है और आपकी एज क्या है. उसके हिसाब से आपके प्रोसीजर्स डिसाइड हो. अगर हम मिड एज की बात करें 18 से लेकर 40. साल के सो बेसिकली क्या होता है जदा. ज्यादातर लोगों ने सुना होता है कि अगर.
चश्मा हटवा है तो लेसिक करा लो या लेजर. करवा लो बट यू हैव टू अंडरस्टैंड कि लेजर. इज नॉट द ओनली ऑप्शन इट इज वन ऑफ द पॉपुलर. ऑप्शंस लेजर के साथ-साथ एक टेक्नोलॉजी. होती है जहां पर हम आंख में एक लेंस डाल. के भी चश्मा हटा सकते हैं उसको आईसीएल. कहते हैं तो क्या होता है ये जो लेजर्स है. जैसे मैंने बात करा लेसिक वाज द मोस्ट. पॉपुलर उसके बाद अपना कंटूरा है सिल्क है. नाउ द वेवलाइट वाला ये जो लेजर्स है दे आर. गुड टिल माइनस ए आठ नंबर तक का चश्मा हटा.
सकते हैं अगर आपके चश्मे का नंबर आठ से. ऊपर है 20 है 25 है 30 है तो हम एक दूसरी. टेक्नोलॉजी यूज करेंगे आईसीएल वाली आईसीएल. क्या चीज होती है एक लेंस होता है जिसमें. आपके चश्मे की पावर होती है और इस लेंस को. परमानेंटली आंख के अंदर इंप्लांट कर दिया. जाता है तो मान लो किसी की पावर मान लो 15. है 15 नंबर का चश्मा पहन रहा है 15 नंबर. का लेंस आपने आंक के अंदर डाल दिया सारी. पावर आंक के अंदर है और बाहर से चश्मा. नहीं पहनना तो प्राइमर ये दो दो तरीके हैं. फिर अगर कोई 45 50 की एज में अपना चश्मा.
हटा रहा है तो फिर हम लोग इन दोनों. टेक्नोलॉजीज को भी बहुत ज्यादा प्रेफर. नहीं करते फिर एक और टेक्नोलॉजी होती है. आरएल करके उसको कहते हैं रिफ्रैक्टिव लेंस. एक्सचेंज जहां पे अंदर का नेचुरल लेंस. निकाल के एक नया लेंस डाल देते हैं जिसमें. नेचुरल लेंस और चश्मे की दोनों की पावर. इकट्ठे होती है तो अब ये कैसे डिसाइड होगा. किसी पेशेंट को चश्मा हटवा है तो सबसे. पहले तो उसको कुछ बेसिक क्राइटेरिया. फुलफिल करने होते हैं कि जैसे मैंने बताया. एज 18 से ऊपर होनी चाहिए बॉडी में और कोई. प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए आंखों में और.
कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए कुछ स्टेरॉइड. रइड ना ले लो और एक चीज हम कहते हैं कि. आंखों का नंबर स्टेबल होना चाहिए मतलब. पिछले छ आठ महीने से आपका नंबर चेंज नहीं. होना चाहिए एक बारही आपने ये सब. क्राइटेरिया फुलफिल कर लिए फिर आपको एक. हॉस्पिटल में जाना है जहां पे ये सारे. प्रोसीजर्स होते हैं वहां पे आपके 10-15. तरह की टेस्टिंग होती है इसमें हम लोग. कॉर्निया की टेस्टिंग करते हैं थिकनेस की. टेस्टिंग करते हैं ड्राई आइज की टेस्टिंग. करते हैं पर्दे की टेस्टिंग करते हैं. अलग-अलग तरह की आंखों की टेस्टिंग है और. जब ये आपकी टेस्टिंग नॉर्मल आ जाती है तो. फिर इन रिपोर्ट्स को देख के हम फाइनली.
डिसाइड करते हैं कि पेशेंट को कौन सी. कैटेगरी सूट करेगी अब तो अक्सर में. पेशेंट्स आते हैं एक्चुअली क्या होता है. सबने इतना लेजर सुना है वो सब ये बोलते. हुए आते हैं कि हमें जी सिल्क कराना है. हमें कंटूरा कराना है हमें वेवलाइट कराना. है सो अगेन वी हैव टू अंडरस्टैंड कि ये. टेक्नोलॉजी सबके लिए नहीं है जिसको सूट. करेगी उसका करेंगे बट अगर ये सूट नहीं कर. रही देन यू हैव अल्टरनेटिव ऑप्शंस एंड दे. आर ऑल वेरी गुड ऑप्शंस सब एफडीए से. अप्रूव्ड है ऐसे नहीं कुछ एक्सपेरिमेंटेशन. हो रहा है प्रॉपर रिसर्च थर स्टडीज के बाद. ये मार्केट में कमर्शियली लच होता है अब.
जैसे इंडिया इंडिया में एक बड़ा सिंपल. टर्म चलता है सस्ता सुंदर टिकाऊ हां वो. सस्ता काम नहीं करना नहीं नहीं सस्ता. सुंदर टिकाऊ मतलब एक ऐसी चीज जो आपको. फाइनेंशली बहुत डैमेज ना करे लॉन्ग. लास्टिंग हो और आप उसम भरोसा कर सके फिर. मैं उसमें बोलता हूं सस्ता पछता है. बार-बार महंगा पछता है एक ब एक बार तो. आंखों की अगर आपको आपको चश्मा हटवा हो तो. आपने क्यों कि मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन दिया. और मल्टीपल चॉइस क्वेश्चन अक्सर कंफ्यूज. करते हैं एक बेस्ट अगर आपको बताना हूं कि. यह तरीका है अगर आपको कोई बीमारी नहीं है. आप 18 से 40 साल के हैं अगर आज की डेट में. हम 2024 में आपने चश्मा हटवा है अगर आपके.
चश्मे का नंबर आठ से कम है तो आप करा र. वेवलाइट प्लस इनोवाइज वाला लेजर दैट इज़ द. बेस्ट वन और अगर आठ से ऊपर है तो आपको. कराना है आईसीएल ऑपरेशन ओके वन लाइन आंसर. अनलेस अंट्स कुछ आता है तो वो डॉक्टर आपसे. डिस्कस कर लेता है ठीक है और जो यह लेंस. लेंस लगाते हैं लोग अक्सर आंखों में हम या. आपने कहा कि आप ऑपरेशन के थ्रू भी कर देते. हैं इसके कोई अलग इफेक्ट्स होते हैं. कांटेक्ट लेंस के हां कांटेक्ट लेंस के या. जो आपने बाकी भी आपने टेक्निक्स हमें बताई. कि अगर 18 से ऊपर है आपने इंसर्ट कर दिया.
तो उसके प्रिकॉशंस अलग होते हैं या आप एक. नॉर्मल जिंदगी की तरह रहेगा अब्सोल्युटली. नॉट देखिए कोई भी आप ऑपरेशन करा लीजिए मान. लीजिए लेजर वाला ऑपरेशन करा लिया लेंस. वाला ऑपरेशन करा लिया 15 से 20 दिन बाद एक. तरह से आपने भूल जाना है कि मेरा कोई. ऑपरेशन हुआ था फिर कल को हाथ लग गया बॉल. लग गया पंच लग गया उंगली लग गई खुजला लिया. मल लिया रगड़ लिया एडवेंचर कर रहे हो अंडर. वाटर जा रहे हो स्काई डाइव कर रहे हो. क्रिकेट खेल रहे हो फुटबॉल खेल रहे हो चोट. लग उससे कोई फर्क नहीं पड़ता ओके आर 20 2. डेज फॉरगेट ऑपरेशन हुआ था एंड जस्ट लिव.
लाइक अ नर्मल पर्सन ओके यानी शुरू में 10. 15 दिन तक आपको एतिहाद भरतना है बज अभी. आपकी आंखें हील हो रही है अभी सारे जो. हमने सर्जरी करी है उसको बॉडी हील करके सब. कुछ सेट करेगी तो उस टाइम पर हम चाहते हैं. कि आंख में कोई चोट वगैरह ज्यादा ना लगे. लेसिक सर्जरी का सबसे बड़ा मिथ क्या है. लेसिक सर्जरी का सबसे बड़ा मिथ है कि. लोगों को लगता है कि एक बार लेसिक सर्जरी. कराओ तो अभी के लिए तो चश्मा हट गया लेकिन. वो दोबारा वापस आ जाएगा हां राइट तो ये. हमें ना बहुत जरूरी है क्लियर करना सी.
देखिए क्या होता है इसमें दो चीजें होती. हैं सबसे पहले तो हमें यह समझना है कि हर. इंसान की आंख में जैसे हम डिस्कस कर रहे. थे 40 45 की एज के बाद एक रीडिंग का नंबर. आएगा अब मान लो किसी ने यह लेसिक सर्जरी. 2025 में कराई सो 25 से लेके 45 तक तो. आपको कोई चश्मा नहीं पहनना लेकिन उसके बाद. तो बॉडी में एज रिलेटेड चेंज है जैसे बाल. सफेद होने हैं वैसे ही रीडिंग का चश्मा. आना है तो 45 के बाद उसको रीडिंग का चश्मा. पहनना पड़ेगा तो लेसिक सर्जरी वाला जब 45.
पहुंचेगा तो उसकी दूर की नजर तो अभी भी. परफेक्ट है घूमना फिरना गाड़ी चलाना. पिक्चर देखना टीवी देखना सब बिना चश्मे के. है बट अब जब उसको पढ़ने का काम करना है तो. उसको चश्मा पहनना पड़ेगा या पढ़ने के लिए. अलग सा लेजर करा के उसको हटवा पड़ेगा नहीं. हटवाया तो 45 के बाद रीडिंग का चश्मा तो. पहनना ही पहनना है और अगर आपका मन है तो. दोबारा एक बार करवा लीजिए दोबारा एक बार. करवा लो या तो रीडिंग का हटवा लो दैट इज. वन ऑप्शन सेकंड थिंग वच कैन हैपन इज जिसको. हम लोग कहते हैं फ्लकचुएशन दिस हैपन अबाउट. % पीपल सो अब क्या होता है सपोज 100 लोगों.
का ऑपरेशन करा या हजार लोगों का ऑपरेशन. करा तो उसमें इका दुका पेशेंट ऐसा मिल. जाता है कि आज की डेट में तो जीरो हो गया. लेकिन जैसे मैंने आपको बताया आई लिविंग. टिशू है अपने आप को चेंज करती है अपने आप. को हील करती है सांस लेती है तो कभी-कभी. जब आई विथ टाइम अपने आप को चेंज करती है. तो उस आई के सिस्टम में आधा पौना. छोटा-मोटा नंबर आ सकता है तो अगर इस तरह. की सिचुएशन हो जाती है तब भी कोई टेंशन. नहीं लेनी आपको वापस अपने डॉक्टर के पास. जाना है एक प्रोसीजर होता है उसको हम लोग. कहते हैं टच अप या पॉलिशिंग थोड़ा सा लेजर.
और डाल के वो जो छोटा मोटा फ्लक्ट एशन है. उसको ठीक कर देते हैं सो अगर आप ना लेज. ऑपरेशन करा रहे हो तो आपकी नजर परफेक्ट. होनी ही होनी है इका दुका किसी का रह गया. तो टच अप करके उसको ठीक करा जा सकता है. ओके टचअप में भी फिर वही प्रोसीजर होगा 10. 15 दिन फिर ध्यान रखना पड़ेगा ध्यान तो. उतना ही रखना है दोबारा सेम कहानी ठीक है. अब आपने एक अच्छी बात बताई कि ऑपरेशन करा. के आपकी आंखें पहले की तरह हो जाएंगे 10. दिन बाद आप भूल जाओ कुछ हुआ था नॉर्मल. लाइफ लेकिन नॉर्मल लाइफ में भी आंखों का. ख्याल तो रखना पड़ेगा. तो अगर मैं आपसे पूछूं कि आंखों का ख्याल.
सबसे ज्यादा कैसे रख सकते हैं आंखों का. ख्याल रखने के लिए आपको कुछ नहीं. करना अब आप सुनोगे लोग कह रहे हैं हरी. सब्जियां खा लो गाजर खा लो घास प चल लो. आंख में शहद डाल लो घी डाल लो रोज वाटर. डाल लो सुबह उठके आंखों को धो लिया करो छप. के मार लिया करो यह सब चीजें आपको नहीं. करनी हमारी आंखों का नेचर ने एक सिस्टम. बनाया है हमारी आंखों में आंसू हैं जो. हमारी आंखों को धो देते हैं उन्हीं आंसू. में एंटीमाइक्रोब प्रॉपर्टीज हैं जो अपनी. आंखों को साफ रखते हैं अगर आप ये जुगाड़.
बाजी करोगे ऊटपटांग चीजें डालते रहोगे. मैंने कितने बार देखा लोगों को आदत होती. है वो एक ड्रॉप ले लेते हैं मार्केट से. उसमें लिखा होता है भाई रोज आंखों को डालो. आंखें फ्रेश रहेंगी उसमें प्याज का रस. लहसुन का रस पता नहीं क्या-क्या डाला होता. है और कंटिन्यू नी आंख को डलते र और जलती. है और जब वो जलती है लोगों को लगता है पता. नहीं आंखें साफ हो रही है ये सब चीजें. बिल्कुल गलत है आंखों को खराब करती है इन. रियलिटी आपको एक्चुअली अपनी आंखों का. ध्यान रखने के लिए कुछ नहीं करना बस इतना. करना है कि कोई प्रॉब्लम हो तो डॉक्टर से. मिल लेना सेल्फ मेडिकेट मत करना सबसे बड़ी.
प्रॉब्लम ही आजकल ये है हमारी कंट्री में. कि कभी भी कोई प्रॉब्लम होती है पेशेंट की. आंख में लाली हो रही है खुजली हो रही है. जलन हो रही है पानी निकल रहा है वो डॉक्टर. के पास नहीं जाते वो किसी फार्मेसिस्ट या. केमिस्ट के पास चले जाते हैं और केमिस्ट. वाला उसको एक ड्रॉप पकड़ा देता है उस. ड्रॉप में 99 पर टाइम एंटीबायोटिक. स्टेरॉइड का कॉमिनेशन होता है अब आप उसको. डालते हो उस टाइम तो आपको बहुत अच्छा लगता. है लेकिन जब आप लॉन्ग टर्म इसको यूज करते. जाते हो तो एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस हो. जाती है एंटीबायोटिक काम करना बंद कर देती. है और स्टेरॉइड से आंखों में 100 तरह की. और प्रॉब्लम हो सकती है और जो मेन. प्रॉब्लम है व कि आंखों का जो लेंस होता.
है उसको सफेद कर देती है स्टेरॉइड. कैटरेक्ट बना देती है या आंखों का प्रेशर. बढ़ा देती है कालम होती है ग्लूकोमा हो. जाता है तो सेल्फ मेडिकेशन से हम सबको. थोड़ा सा बच के रहना चाहिए ठीक है कुछ ना. करें अब ये तो आपने कह था कुछ ना करना. आंखों का सबसे अच्छा ख्याल है लेकिन जैसे. बच्चा पढ़ रहा है बोर्ड एग्जाम में अब दिन. रात पढ़ रहा है आजकल ऑनलाइन क्लासेस शुरू. हो गई है वर्क फ्रॉम होम लोग जॉब भी कर. रहे हैं तो दिन रात आपको सिस्टम प बैठे. रहना है आठ आठ घंटे नौ-नौ घंटे बैठना है. अब लाजमी आंखों को दर्द तो होगा ही. उसमें आंखों कैसे बचाए क्योंकि वो आंखों प.
नुकसान पहला सवाल तो ये वो आंखों प नुकसान. करता है सेकंड सवाल ये अगर करता है तो फिर. वहां कैसे बचे देखो नेचर ने ना हमें इतना. ज्यादा स्क्रीन देखने के लिए बनाया नहीं. है हम नेचुरली जो नेचर ने हमारी आंखें. बनाई है वो दूर का देखने के लिए बनाई है. जब भी हम दूर देखते हैं तो हमारी आंखों की. मसल्स रिलैक्स्ड होती हैं और जब भी आप पास. का देखते हो तो हमें आंखों की मसल्स प जोर. डालना पड़ता है ताकि दोनों आंखें अंदर की. तरफ मोड़े और हम पढ़ सकें अब आप सोचो एक.
बच्चा जिसकी आंखें या नॉर्मली जो नेचर ने. आंखें दूर के लिए बनाई है अब 12 घंटे उसने. अपनी आंखों को मोड़ के स्क्रीन पे देखना. है अब मसल्स तो रेडी है नहीं अब एक तरह से. आप ये मानो कि जैसे मैंने इसको पकड़ लिया. ऐसे हम अब अभी तो सब कुछ नॉर्मल है लेकिन. कुछ टाइम बाद मेरा हाथ थक जाएगा बिकॉज़. मेरा हाथ तो डिजाइन है नहीं इसको इतने. घंटे पकड़ने के लिए हाथ थक जाएगा तो दर्द. होएगा सेम विद योर आइज जब आप लंबे समय तक. स्क्रीन प देख रहे हो और आपकी आंखें अंदर. की तरफ मुड़ी हुई है मसल्स यूज हो रही है. तो एक टाइम के बाद वो मसल थक जाएंगी जब वो.
मसल थक जाएंगी तो मसल आंखों को मोड़ना. छोड़ देगी उनमें दर्द होना शुरू हो जाएगा. और डबल विजन होना या ब्लर विजन होना शुरू. हो जाता है तो सबसे पहले तो इतने लंबे. घंटे कंटीन्यू स्क्रीन प नहीं बैठना इसमें. हम लोग रिकमेंड करते हैं एक एक्टिविटी. जिसको हम कहते हैं 20 20 20 कि हर 20 मिनट. में 20 सेकंड का ब्रेक ले लो और 20 मीटर. दूर या 20 फुट दूर देखो थोड़ा सा डिस्टेंस. में जिससे आंखें आपकी रिलैक्स हो जाए अगर. इसमें भी आपको रिलैक्सेशन नहीं मिल रही तो. हम थोड़ा सा सजेस्ट करते हैं कि आंख आखों. में लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स डालना चाहिए.
आजकल मार्केट में रिफ्रेश टयर्स टीजी करके. अवेलेबल है देखो क्या होता है जब आप. स्क्रीन पर लंबे समय तक काम कर रहे हो ना. एक तो आपकी मसल्स यूज हो रही है वो थक रही. है साथ ही साथ क्या होता है कि हमारी. आंखों का एक ब्लिंक रेट होता है झपक का. रेट तो एक नॉर्मल इंसान जो है वो एक मिनट. में करीब अ 151 बार ब्लिंक करता है पर जब. आप स्क्रीन पे होते हो तो वो आपका ब्लिंक. रेट कम हो जाता है चार से छह बार हो जाता. है अब जब आपकी आंखें ब्लिंक नहीं हो रही. तो जो आंसू आ रहे हैं आंख में प्रॉपर्ली. फैल नहीं रहे फैल नहीं रहे तो आंखों में. ड्राइनेस होती है और ये प्रॉब्लम और बढ़. जाती है तो आप देखेंगे जो लंबे समय तक.
स्क्रीन पे काम कर रहे व अक्सर कहते रहते. हैं आंखें सूखी हुई लगती हैं टायर्ड लगती. हैं लाली हो जाती है जलन लगती है चुबन. लगती है वो इसलिए हो रहा है क्योंकि आप. ब्लिंक कम कर रहे हो और आंखों में. ड्राइनेस आ रही है तो हम रिकमेंड करते हैं. कि लुब्रिकेटिंग ड्रॉप्स डालो इससे भी. फायदा नहीं मिल रहा अब आपको अपने डॉक्टर. से जाके मिलना है क्योंकि अब आपकी आंखों. में कुछ ऐसी प्रॉब्लम है जिसको जब तक. प्रॉपर्ली एग्जामिन करके ट्रीट नहीं. करेंगे तब तक आपका कंफर्ट लेवल नहीं आएगा. कुछ लोग ये जीरो नंबर का और ब्लू लाइट. फिल्टर चश्मे पहन लेते हैं उनको ऐसा लगता. है कि इसको पहन के आंखों का स्ट्रेन नहीं. लगेगा कंप्यूटर कंफर्ट हो जाएगा ये मैं.
बता दूं ये मिट है ब्लू लाइट फिल्टर या. जीरो नंबर का एंटी ग्लेयर आई कंफर्ट ये. आंखों के स्ट्रेन बचाने में इसका कोई रोल. नहीं है अब जैसे मैं स्पेक्स लगाता हूं. मैं स्पेक्स में जब स्पेक्स ग्लासेस लेता. हूं उसमें भी आता है ब्लू कोटिंग वाला अगर. आप ब्लू कोटिंग ले लेते हो तो ऐसा कोई. मेजर हार्म नहीं है लेकिन ऐसा कोई मेजर. फायदा भी नहीं है नहीं बट उनके तो. प्राइसेस में जमीन आसमान का फर्क होता है. वो कहते हैं इसका फर्क आपकी आंखों पर भी. रहेगा आपका चश्मा का नंबर बढ़ेगा नहीं ओके. इज इट ट्रू कि नॉर्मल स्पेक्स या ब्लू. कोटिंग में चश्मे का नंबर नहीं बढ़ेगा.
अच्छा पहले मैं ये बता दूं कि अगर एक. इंसान की उम्र 18 से कम है हम और वो लंबे. समय तक स्क्रीन पे है तो अब आप जो मर्जी. चश्मा पहन लो ब्लू लाइट वाला पहन लो ग्रे. वो पहन लो ग्लेयर वाला पहन लो जीरो नंबर. पहन लो जो मर्जी कोटिंग लगा लो नंबर बढ़. जाएगा ओके और अगर आपकी उम्र 1820 साल के. ऊपर हो गई है बॉडी पूरी डिवेलप हो गई है. नंबर स्टेबल हो गया है अब आप 24 घंटे भी. बैठे रहो कंप्यूटर पे नंबर नहीं बढ़ने. वाला अब आप जब कंप्यूटर में ज्यादा देर तक. बैठोगे तो आई स्ट्रेन आएगा डिजिटलाइज ट्र. नंबर नहीं बढ़ने वाला आपका सो ब्लू लाइट.
फिल्टर का इन रियलिटी देयर इज नो. एडवांटेज ओके सच बात है ये मार्केटिंग गेम. काफी नुकसान करवाने वाले हो काफी लोगों का. आप लेंस कार्ड. का ओके एक कॉमन क्वेश्चन लोगों ने मुझसे. कहा था पूछेगा शहरों में लोगों को ज्यादा. आंखों की प्रॉब्लम होती है शहरों में. पोल्यूशन ज्यादा होता है ना गांव देहात. में लोग जो हैं उनकी आंखें काफी हद तक ठीक. होती है वो कहते हैं कि हमारी आंखें चल. रही हैं केवल वही अखबार पढ़ने वाला होता. है कि लगा के देख लिया अखबार पढ़ने क्लोज.
का वो भी एक उम्र की बाद यार देखो आंखों. की बहुत सारी प्रॉब्लम्स ना लाइफ स्टाइल. रिलेटेड भी है अब आप शहर में रहोगे जहां. पे पोल्यूशन ज्यादा है डस्ट ज्यादा है. उससे आपकी आंख में एलर्जिक प्रॉब्लम. ज्यादा होंगी ड्राई आई की प्रॉब्लम ज्यादा. होगी शहर में रहते रहते लोगों को डायबिटीज. की प्रॉब्लम ज्यादा है हाइपरटेंशन की. प्रॉब्लम ज्यादा है इन प्रॉब्लम का भी असर. आपकी आंखों में आता है इनफैक्ट डायबिटीज. का तो बहुत ही खतरनाक असर आता है जिसको हम. कहते हैं डायबिटिक रेटिनोपैथी पर्दे में. खून आ जाता है सूजन आ जाती है और इंसान की. नजर खराब हो जाती है इनफैक्ट अमेरिकन. नेशंस में अगर आप देखो तो डायबिटिक.
रेटिनोपैथी इज द फर्स्ट कॉज ऑफ ब्लाइंडनेस. इंडिया में नहीं है इंडिया में कैटरेक्ट. है लेकिन अमेरिकन नेशंस में डायबिटिक. रेटिनोपैथी है तो ये लाइफ स्टाइल रिलेटेड. चेंजेज भी आंखों को काफी स्पॉइल करती है. फिर शहरों में अक्सर हम देखते हैं कि. शहरों में लोग ओवर स्मार्ट बनने की कोशिश. करते हैं कंसल्टेशंस कम लेते हैं सेल्फ. प्रिस्क्रिप्शन कर लेते हैं मार्केट से. दवाई ले लेते हैं इधर-उधर फ्रेंड्स की बात. सुन ली भाई तेरे को भी ये प्रॉब्लम हुई थी. तूने कौन सी दवाई डाली मुझे भी ये दे दे. इन सब चीजों से भी प्रॉब्लम बढ़ती है ओके. डायबिटिक का आपने जिक्र किया डायबिटिक से. थोड़ा समझा दो क्या आखों फर्क पड़ता है और. कैसे इसे मैनेज कर सकते हैं देखो डायबिटीज.
एक ऐसी प्रॉब्लम है जो पूरी बॉडी को खराब. करेगी किडनी में भी असर आएगा आपका आपके. उसमें अपने एक्सट्रीमिटीज में असर आता है. न्यूरोपैथीज होती है ऐसी आंख में भी. डायबिटीज एक प्रॉब्लम करती है उसको कहते. हैं डायबिटिक रेटिनोपैथी शुगर का असर आपके. पर्दे पर आ जाता है उसकी वजह से पर्दे में. खून और सूजन आ जाती है और अगर आपका उसने. टाइमली इलाज नहीं करा है तो ये ब्लाइंडिंग. कॉम्प्लिकेशन बन जाती है तो जिसको भी. डायबिटीज है उसको तो हम स्पेशली ड करते. हैं कि साल में एक बार अपने आंखों का.
चेकअप स्पेशली पर्दे का चेकअप तो जरूर. कराना है क्योंकि इतने माइन्यूट साइंस. होते हैं उसके अगर टाइम से आपने नहीं. पकड़े टाइम से आपका इलाज नहीं हुआ तो आपका. डैमेज परमानेंट भी हो सकता है शुरुआती. सिम्टम्स क्या होते हैं आपकी आंखें खराब. हो रही है अगर ये समझना शुरुआती सिम्टम्स. डायबिटिक रेटिनोपैथी में आते नहीं है नहीं. मैं जनरल अगर पूछूं आपसे कि आपकी आंखें. खराब हो रही है आपको डॉक्टर से कंसल्ट. करना चाहिए इसके शुरुआती सिम्टम्स क्या है. या आपको स्पेक्स लगने वाला है नहीं. स्पेक्स लगने का शुरुआती सिमट तो कुछ नहीं. है स्पेक्स आ जाएगा तो विजन आपकी ब्लर हो. जाएगी लेकिन कभी भी आपको ऐसा लगे कि आपकी.
आंखें नॉर्मल नहीं है भाई जलन हो रही है. पानी हो रहा है लाली हो रही है खुजली हो. रही है नजर धुली हो रही है चुबन हो रही है. तो मतलब आंख में कोई प्रॉब्लम है यू शुड. गो कंसल्ट अ डॉक्टर भाई एक नॉर्मल फीलिंग. होती है ना यू गेट टू नो कि मेरी आंखें. नॉर्मल है भाई जब बुखार होता है टायर्ड. होती है तो आपको पता लग जाता है ना कि भाई. समथिंग इज नॉट राइट ऐसी आंखों में कोई. प्रॉब्लम होगी तो आपको आंखों में सिमटम्स. आने शुरू हो जाएंगे तो यू गो गो सी योर. डॉक्टर फिर भी हम लोग ना कभी-कभी ऐसा होता. है कि कुछ टाइम पे हम कहते हैं कि एक एक. इंसान को मैंडेटरी अपना चेकअप करा लेना.
चाहिए सी अदर वाइज वी से कि आपकी बॉडी का. चेकअप साल में एक बार होना चाहिए ऐसे हम. कहते हैं आंखों का भी चेकअप साल में एक. बार होना चाहिए बट कोई आता तो है नहीं जब. तक कोई प्रॉब्लम नहीं हो र तब तक कोई नहीं. आएगा सो वी से कि कुछ माइलस्टोंस है. एटलीस्ट इस टाइम पे अपना चेकअप करा लो. क्योंकि कुछ ऐसी बीमारियां हैं जिनके. सिम्टम्स वगैरह नहीं होते और अगर टाइमली. उनको डायग्नोज नहीं करा तो आगे जाके. प्रॉब्लम करती है तो सबसे पहले हम कहते. हैं कि जब बच्चा पैदा हुआ है बिल्कुल नवजा. शिशु है तब एक बारही आंखों का थर चेकअप. होना जरूरी है कि सारी प्रॉब्लम्स है. रेटिनोपैथी और प्रीमेच्योरिटी है अपना वो.
है रेटिनोब्लास्टोमा है ये सारी. प्रॉब्लम्स आपके बचपन में आती है तो. टाइमली इनका इलाज होना जरूरी है फिर जब. बच्चा बड़ा हो रहा है सात आ साल का हो गया. तब एक प्रॉपर चेकअप हो जाना चाहिए मान. लीजिए उसकी आंख में चश्मे का नंबर है. चश्मा नहीं बना रहे तो एमलाप या करके. प्रॉब्लम होती है पूरी जिंदगी आंख की नजर. कम रह जाती है या स्क्विंट तिरछापन की. प्रॉब्लम जिसमें आंख टेढ़ होती है सीधी. नहीं देख रही उसका टाइमली इलाज करना जरूरी. है फिर जब आप जाते हो स्कूल में स्कूल में. मैंने बताया चश्मे का नंबर चढ़ रहा होता. है उस टाइम पे आपके चश्मे का नंबर चेक. होना जरूरी है मान लो चश्मे का नंबर नहीं.
चेक हुआ कम रह गया अब आपको ब्लैकबर्ड नहीं. दिख रहा पढ़ाई नहीं हो रही एकेडमिकली पुअर. हो रहा है बंदा देन वी से कि अबाउट 40. इयर्स में आपका चेकअप होना चाहिए हर साल. क्योंकि 40 के बाद अब कुछ ऐसी बीमारियां. है जो कॉमन हो जाती है तो एक तो यही. डायबिटिक रेटिनोपैथी वाली प्रॉब्लम फिर एक. कैटरेक्ट की प्रॉब्लम होती है जो कॉमनेस्ट. प्रॉब्लम है आई की जिसमें हमारे आंख का. लेंस सफेद हो जाता है फिर एक एआरएमडी की. प्रॉब्लम होती है कि हमारे पर्दा जो है एज. के साथ खराब हो जाता है एक ग्लूकोमा की. प्रॉब्लम होती है काला मोतिया इनफैक्ट. ग्लूकोमा एक ऐ प्रॉब्लम है जिसका कोई साइन. एंड सिमम नहीं होता तभी उसको काला मोतिया.
कहते हैं कि पेशेंट को पता भी नहीं चलता. कि उसकी आंख में बीमारी है और जब वो चेकअप. के लिए आता है तो कितनी बारी एक्सीडेंटली. पता लग जाता है कि अरे आपको यह बीमारी है. और इसका ट्रीटमेंट करना है और जो नजर चली. गई उसको अब हम रिवाइव नहीं कर सकते जो बची. है सिर्फ उसको बचा सकते हैं ओके मैंने अभी. हाल फिलहाल में एक बाबा को देखा ही मस्ट. बी अराउंड 100 100 इयर्स ओल्ड और वो. रामायण की किताब पढ़ते हैं बहुत दुबले. पतले से हैं मध्य प्रदेश में कहीं रहते. हैं उनका नाम मिस कर रहा हूं बट उनकी. तस्वीर अक्सर वायरल होती रहती है वो. रामायण पढ़ लेते हैं मेरे मन में हमेशा.
थॉट आता है कि ये कैसे पॉसिबल है कि इस. उम्र में भी आपकी आंखें एकदम इट्स पॉसिबल. सी क्या होता है रीडिंग का जो नंबर होता. है वो प्लस में होता है एंड यूजुअली दैट. नंबर इज प्लट अब मान लीजिए किसी की आंख. में दूर का भी नंबर है मान लीजिए बाबा जी. की आंख में -3 का नंबर है दूर का तो ये -3. वाला नंबर जो है ये जो प्लट का रीडिंग. नंबर है इसको न्यूट्रलाइज कर देगा सो. जिसकी भी आंख में माइनस का डिस्टेंस का. नंबर है. उसका जो रीडिंग का नंबर है वो यूजुअली लेट.
आता है या उनको रीडिंग के चश्मे की जरूरत. ही नहीं पड़ती क्योंकि दूर का माइनस नंबर. नियर नंबर के लिए कंपनसेटर है तो अक्सर. ऐसे लोगों को आप देखेंगे कि वो चश्मा लगा. लेते हैं दूर के लिए दूर के काम के लिए. चश्मा लगा के रखते हैं और जब भी उनको. पढ़ाई करनी होती चश्मा अपना हटा देते हैं. तो वो माइनस का प्लस को न्यूट्रलाइज कर. देगा और उनको नियर का दिख जाता है ओके सो. दिस इज पॉसिबल या बाबा जी ने अपना. मोतियाबिंद का ऑपरेशन करा लिया है और. मोतियाबिंद के ऑपरेशन में उन्होंने. मल्टीफोकल लेंस डलवा लिया है तो मल्टीफोकल. लेंस आपको दूर और पास का दिखा देता है.
बिना चश्मे के च्च इज वेरी लाइक क्योंकि. उनकी एज 100 हो गई उनका मोतिया बिन आ चुका. होगा उसका ऑपरेशन कर बाहर कम निकलते हैं. लेस एक्सपोज्ड है पूजा पाठ करते हैं कई. लोग उसे चमत्कार की दुनिया में देखते. चमत्कार नहीं है ये अंडरस्टैंड क्या होता. है कि जब हमारी उम्र बढ़ती है तो यूजुअली. 60 70 के अराउंड हम सबको हर इंसान को. मोतिया बिंद आ जाएगा आंखों में कैट ट्रैक. की प्रॉब्लम नोबडी कैन एस्केप जैसे बाल. सफेद सबके होने है वैसे आंख में मोतिया. बिंद सबका आना है अब जब मोतिया बिंद का हम. ऑपरेशन करते हैं तो आजकल कुछ इस तरह के. लेंसेशन हैं जो हम ऑपरेशन में डालते हैं.
जो आपको दूर और पास दोनों का दिखा देते. हैं तो अगर ऐसा वाला लेंस डलवा ले तो आप. बिना चश्मे के दूर और पास दोनों देख सकते. हैं कई लोगों को दिन में समस्याएं होती है. दिखने में कई लोगों को रात में समस्याए. होती है गाव देहात में जिसे वर्ड कहते हैं. रतंधी रतंधी एक प्रॉब्लम होती है नाइट. ब्लाइंडनेस जो विटामिन ए की कमी से हो. सकती है रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा है उसमें. हो सकती है या बहुत हाई नंबर हो आपके. चश्मे का उसमें हो सकती है तो ऐसे. पेशेंट्स को रात के टाइम प कम दिखता है. क्योंकि हमारी आंख में रॉड्स एंड कोन करके. एक सिस्टम होता है जो लाइट की जो.
सेंसिटिविटी है उसको डिटेक्ट करते हैं तो. अगर आपके रॉड वाले हिस्से में कोई. प्रॉब्लम हो जैसे कोनस हमें कलर दिखाता है. रड हमें ब्राइटनेस कराती है तो अगर रॉड. वाले हिस्से में कोई प्रॉब्लम हो तो रात. की नजर आपकी काफी कम हो जाती है तो लाट ब. ले ठीक करे थे नहीं लेसिक का पर्पस है. सिर्फ चश्मा हटाना ओके और आंख में कोई भी. और बीमारी है उसका इलाज अलग होगा लेसिक. ओनली वन पर्पस कॉस्मेटिक पर्पस चश्मे का. बेसिक चश्मा जो मेरी बीमारी आप दूर कर. सकते हैं बेसिकली सुपर्ब अच्छा ये खानपान. वाला मैं फिर से एक बार पूछ ले रहा हूं.
कुछ भी खाने पीने से आंखों को फायदा होता. है मम्मी लोगों ने बहुत ताने मार मार के. रखे हैं हरी सब्जी खाओ आंखें स्वस्थ. रहेंगी मैं बताता हूं ये कांसेप्ट उठा. कैसे देखिए क्या होता है हमारी जैसे हम. नाइट ब्लाइंडनेस की बात कर रहे थे तो नाइट. ब्लाइंडनेस जो बीमारी है ये विटामिन ए की. कमी से होती है ह तो अगर आपकी बॉडी में. विटामिन ए कम है तो आपको ये बीमारी हो. जाएगी अच्छा ये जो गाजर हरी सब्जियां. पंपकिन वगैरह होते हैं ये इनमें विटामिन ए. की मात्रा ज्यादा होती है तो यहां से ये. बात उठी हुई है कि आप ये हरी सब्जियां.
वगैरह खाओगे गाजर खाओगे तो ये नाइट. ब्लाइंडनेस वाली प्रॉब्लम आपकी नहीं होगी. बट द प्रॉब्लम इज कि इस कांसेप्ट को लोगों. ने जनरलाइज कर दिया है अब उनको ये लगता है. कि गाजर खाओ तो आंखें स्वस्थ ही रहेंगी या. कोई भी बीमारी हो आंख की तो गाजर खालो ये. गलत है ओके अ आप लोग तो सर्जरी कर रहे हैं. बट आयुर्वेदिक होम्योपैथिक में भी बहुत. सारे दावे होते हैं फिर से मैं कोट करके. पूछ वो दावे ही हैं सारे मतलब मैंने तो आज. तक एक भी पेशेंट देखा जिसका आयुर्वेद. होम्योपैथी से चश्मा हट गया हो किसी का हट. जाता है तो प्लीज पहले मेरे से मिला दो तो. मैंने अपनी लेसिक सर्जरी करनी है बंद और. मैंने ड्रॉप से ठीक करना है मतलब एज अ.
डॉक्टर ना हम भी यही चाहते हैं कि जो काम. दवाई से ठीक हो जाए उसको दवाई से कर दो. सर्जरी लास्ट रिजॉर्ट रखो लेकिन जब दवाई. से ठीक कोई चीज हो ही नहीं सकती तो तो. सर्जरी करोगे ना उसकी एलोपैथिक और. होम्योपैथिक वाले आपके पीछे पड़ेंगे वो तो. वैसे ही पड़े हुए हैं पीछे एक्सपोज जो कर. दिया मैंने थोड़ा सा. उनको एंड एंड लुक एट इट दैट ऑलरेडी द. फैक्ट दैट पता जली हैड टू अपोलोजि गिविंग. अ फ्रंट पेज और मे बी जो भी न्यूज़पेपर. में ऐड दे के अपोलो कर कोविड वाले को लेके. किया था उन्होंने हां सो दैट इज वन मिथ.
व्हिच वाज बस्टेड ऐसी और बहुत सारी चीजें. हैं जो अभी चल रही है मिस लीडिंग चीजें बट. नोबडी हैज कम फॉरवर्ड टू बस्टेड बट. उन्होंने चश्मों को लेकर तो उन्होंने भी. दावा किया कि हमने बहुत सारे लोगों चश्मे. हटा दिए मैंने तो आज तक नहीं दे वो अपने. बालों को लेकर खुद कहते हैं कि देखिए मेरे. बाल काले आज भी है वेल बालों के बारे में. तो मैं कमेंट कर नहीं सकता आई एम नॉट अ. डर्मेटोलॉजिस्ट बट सेम जैसे आपने आपने कहा. कि कुमर के बाद आंखों में चश्मा लगता है. ऐसे ही हेयर का डॉक्टर कहता है काले सफेद. हो आते हैं बाल एक नेचुरल प्रोसीजर है. उसमें भी उनका दावा था आंखों को लेकर भी. उन्होंने दावा कि है और बहुत सारे. होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक डॉक्टर मुझे. मिले हैं जो ये कहते हैं कि हमने अपने.
पेशेंट्स की आंखें ठीक कर दी है चश्मा. नहीं लगा है अगर आपने बेसिक चीजें फॉलो की. है वेल आई एम यट टू सी कि कोई ऐसे ठीक हुआ. हो बिकॉज साइंटिफिकली दिस इज नॉट. पॉसिबल ओके ठीक है कई सारे बच्चों में. आंखों में इशू हो जाता है जबकि उनके मॉम. डैड को चश्मा नहीं लगा हुआ है वो जेनेटिक. नहीं है बट बहुत अर्ली स्टेज में उनको. चश्मा लग गया और बहुत हैवी चश्मा लग गया. लग गया एनवायरमेंटल फैक्टर्स है ना. एक्सेसिव स्क्रीन यूज रिड्यूस्ड सनलाइट. एक्सपोजर एक्सेसिव नियर वर्क ये सब चीजें.
भी तो आ जाती है फैक्टर में नहीं बट जैसे. हम हम और आप जिस उम्र में हमने पढ़ा. क्योंकि हमारे आसपास भी थे छोटे शहरों में. भी थे बहुत सारे बच्चे मेरी क्लास में से. थे समझ गया आप क्या कह रहे हो सी अभी जो. हमारी जनरेशन में ट्रेंड था और जो अबकी. जनरेशन में ट्रेंड है वो काफी चेंज हो गया. है सो इफ यू लुक एट हमारा जो क्लास होता. था मान लो 50 लोगों की क्लास है तो पाच 10. लोगों को चश्मा होता था नाउ यू सी 50. लोगों की क्लास है तो ऑलमोस्ट 253 लोगों. को चश्मे का नंबर है और ये बढ़ते जा रहा. है तो ये सारा एट्रबीक हुआ है एक्सेसिव. स्क्रीन यूज की वजह से तो स्क्रीन इज वन.
ऑफ द मेजर रीजन जिससे हमारी आंख में चश्मा. चढ़ रहा है मेजर रीजन अगर स्क्रीन टाइम. अपने बच्चों का आप लिमिट कर दो दो से तीन. घंटे तो आप देखना ये प्रॉब्लम आदी तो वैसे. खत्म हो जाएगी ज्यादा बाहर निकालो ज्यादा. सनलाइट में निकालो आउटडोर एक्टिविटीज. प्रमोट करो स्क्रीन टाइम करो बट लिमिटेड. दो से तीन घंटे ऐसे नहीं 1212 घंटे चल रहा. है दैट इज द मेन प्रॉब्लम सोने से फर्क. पड़ता है कम सोते हो तो भी आंखों पर असर. आएगा बहुत अनलाइक चश्मे के नंबर प फर्क. नहीं पड़ता वैसे आप कम सोगे तो आपकी आंखें. थकी रहेगी थोड़ी सी बट चश्मे का नंबर से. कोई ले क्योंकि बाकी जिन डॉक्टर से मैंने.
बात की चाहे वो हार्ट के हो लीवर के हो वो. अक्सर एडवाइज करते हैं कि आप अगर सोते हैं. तो आपकी 70 80 पर बीमारियां वैसे भी ठीक. हो जाती है सी साउंड एंड स्पेशली दे. प्रेफर कि आप रात को सोते हैं साउंड स्लीप. लेना जरूरी है बॉडी हील होती है बट सेइंग. कि कम सोने से चश्मे का नंबर चढ़ेगा दैट. इज. फैक्चर ब्लाइंडनेस क्या होती है कैसे आती. है और कैसे ठीक होती है कलर ब्लाइंडनेस का. फिलहाल तो कोई इलाज नहीं है एंड इसको हम. डायग्नोज कर सकते हैं दो-तीन तरह के टेस्ट. स्टिंग होती है बट देर इज नो ट्रीटमेंट. फॉर कलर ब्लाइंडनेस कैसे होती है क्यों.
होती है बहुत सारे रीजंस है मेनली जेनेटिक. मानते हैं इसको जन्मजात मेनली अच्छा अब. क्योंकि टेक्नोलॉजी काफी बढ़ रही है. हाइपोथेटिकली मेरे मन में सवाल आया जैसे. कलर ब्लाइंडनेस का सवाल आ गया या कोई. व्यक्ति जन्मजात अंधा है क्या टेक्नोलॉजी. इस तरफ बढ़ रही है कि आने वाले समय में. हाइपोथेटिकल क्वेश्चन ये है कि जो कभी. नहीं देख पाया वो भी देख सकता है सी. टेक्नोलॉजी एडवांस करती जा रही है कितनी. सारी ऐसी बीमारियां थी जिसको हम पहले. ट्रीट नहीं कर सकते थे अब हम ट्रीट कर पा. रहे हैं एंड अब जो नया इनोवेशंस आ रहे हैं. एक तो आ रही है जिसको हम कहते हैं बायोनिक.
आई तो एक रोबोटिक आई है जिसमें एक कैमरा. सामने होता है एक चिप लग जाती है पीछे और. उससे पेशेंट देख सकता है एक अभी इलन मस्क. के साइड से न्यूरा लिंक करके आया है आई एम. शोर सुना होगा आपने जहां पे ब्रेन में चिप. लग जाती है तो ये दो टेक्नोलॉजीज है. जिसमें हम काफी मतलब एक्सपेक्टेशन है कि. इससे हम जो ब्लाइंडिंग प्रॉब्लम्स थी तो. पेशेंट अपना दोबारा शायद देख पाए बट अगेन. ये सारी टेक्नोलॉजी रिसर्च फेज में है कब. इनप ट्रायल्स होंगे और कब कमर्शियली. अवेलेबल होगी वी रियली डोंट नो तो अभी छ आ. साल में तो ऐसी कोई रेवोल्यूशन चीज नहीं. आने वाली ठीक है हम और आप दिल्ली एनसीआर.
में बैठे हैं देश में अधिकतर बड़े शहरों. में लोग चश्मे की प्रॉब्लम से परेशान होते. हैं जैसा कि आपने बताया उसमें आपने रीजन. भी दिया कि एनवायरमेंट बहुत मैटर करता है. अब वो आदमी जो चश्मा लगा है मेरे जैसा या. वह आदमी जिसे चश्मा नहीं लगा है लेकिन उसे. रहना अब दिल्ली एनसीआर में छोटे शहर से आ. गया वह अपनी आंखों को सुरक्षित रखने के. लिए क्या करें क्योंकि उसे ऑफिस जाना है. घर लौटना है रास्ते में पोल्यूशन होगा. गाड़ियां बहुत सारी चल रही हैं दिल्ली में. फॉक तो हम देखते हैं क्या अभी आने दीजिए.
दिवाली क्या माहौल बनेगा नहीं देखिए अ. अगेन आई वांट टू रिट्रेट कि ऐसा कोई मेजर. ध्यान नहीं रखना बट अगर पोल्यूशन से आपको. लगता है कि आपकी आंखें सेंसिटिव है तो आप. एक प्रोटेक्शन वाला चश्मा तो ऑफकोर्स पहन. सकते हैं तो जितना मिनिमल कांटेक्ट होगा. पोल्यूशन से उतनी आंखें प्रोटेक्टेड. रहेंगी और अगर आपको लग रहा है कि. सेंसिटिविटी एलर्जी बढ़ती जा रही है. प्रोटेक्शन भी ले र है तब भी रात को आंखें. लाल हो जाती है खुजली होती है पानी निकलता. है तो आप अपने डॉक्टर से मिलके बेस. एंटीएलर्जिक ट्रीटमेंट थोड़ा लुब्रिकेटिंग. ट्रीटमेंट ले लेंगे तो आप ठीक हो जाएंगे.
नहीं बट जैसे अभी नवंबर का महीना आएगा खास. तौर पर दिवाली के आसपास जलन लगेगी आ बहुत. खराब होता है मौसम और जितने लोग भी ऑफिस. जाते हैं सबको आंखों में समस्याएं शुरू हो. जाती है तो वो पोल्यूशन से एलर्जी हो रही. है ना बेसिकली सेंसिटिविटी तो आपको उस. पीरियड के लिए थोड़ा सा एंटीएलर्जिक. ड्रॉप्स को यूज करना पड़ेगा अगर आप. सेंसिटिव हो सब तो सेंसिटिव होते नहीं 10. पर लोग होते हैं उनको थोड़ा यूज करना. पड़ता है इट इज समथिंग लाइक अस्थमा की. प्रॉब्लम उस टाइम प पोलूशन ज्यादा बढ़ेगा. तो अस्थमेटिक अटैक ज्यादा आएंगे तो आपको. ज्यादा दवाई यूज करनी है कंट्रोल में जो. मॉम डैड आपको देख रहे हो मां बाप अपने. बच्चों को लेकर अक्सर बड़े कंसर्न रहते. हैं उनको आप क्या एडवाइस करोगे एक तो ये.
एडवाइस करोगे कि मेरे पास चश्मा लगा है तो. मेरे पास आ जाओ 18 से ऊ ये तो एडवाइस होगी. 18 के बाद मेरे पास आ जाना और सबसे. इंपोर्टेंट एडवाइस है कि प्लीज साल में एक. बार अपने बच्चों का चेकअप करवा लो क्योंकि. इतनी सारी चीजें हैं जो मिस हो जाती है. लेटर स्टेज में डायग्नोज होती है और उस. टाइम प हम एक्चुअली कुछ नहीं कर पाते तो. एक्चुअली क्या होता है हमारी आंखें जो है. ना वो आठन साल तक बहुत डेवलप हो रही होती. है तो अगर डेवलपमेंट स्टेज पे चीजें. डायग्नोज हो जाए और ट्रीट हो जाए तो उनके. रिजल्ट्स बहुत बेटर हो जाते है कंपेयर्ड. के एक बार आंख डिवेलप हो जाओ फिर आप उसको. रिवर्स ट्रीट कर रहे हो तो दिस इज माय.
सजेशन कि आपको कुछ नहीं करना अगर आपको लग. रहा है सब कुछ बढ़िया भी है तब भी आप एक. बार जाके अपना चेकअप जरूर करा लो ओके. स्ट्रेस लेने से प्लस आल्सो आई वुड. रिकमेंड लुक फॉर रेड फ्लैग्स अगर आपको. लगता है बच्चा बहुत ज्यादा पास जाके पढ़. रहा है या आपको लग रहा है बच्चा बहुत. ज्यादा टीवी के पास जाके पढ़ रहा है या अब. क्लास में बच्चा फ्रंट डेस्क प बैठता है. पीछे नहीं बैठता दैट मींस उसकी विजन में. प्रॉब्लम है एंड ही इज ट्राइम टू कंपनसेटर. दैट आगे जाके या आपका बच्चा स्क्विंट करता. है ऐसे-ऐसे करके देख मतलब उसकी आंखों में. कोई प्रॉब्लम है उसकी विजन क्लियर नहीं है.
तो आपको अपना चेक करा के चश्मे का नंबर. लेना है मोबाइल जैसे मेरे पास है मोबाइल. कितनी दूर से देखना चाहिए आख 25 टू 30. सेमी ओके यानी रात में जो हम ऐसे करके. करते हैं ये नुकसानदायक हैन गुड स्पेशली. स्लीपिंग ज ले लेट के करते आप इतना पास. लाओगे मोबाइल तो उतना ही आपकी मसल को. स्ट्रेन लगाना है उसको साफ देखने के लिए. थोड़े टाइम बाद वो थक जाएंगी पेन होना. शुरू हो जाएगा स्ट्रेन होना शुरू हो जाएगा. तो इसका मतलब बेड पे लेट के मोबाइल मत. चलाए नॉट रिकमेंड क्योंकि आमतौर पर तो हम. फोन ऐसे चलाते हैं बेड पे लेट के मोबाइल. चलाओगे तो ऐसा कोई नुकसान नहीं है थोड़ा. स्ट्रेन नहीं पड़े ऐसे ही सपोज आप डार्क. रूम में अपना मोबाइल लैपटॉप चलाओ तो थोड़ा.
स्ट्रेन लगेगा लेकिन ऐसा कोई मेजर नुकसान. नहीं है बट वी रिकमेंड कि जब आपको काम. करना है लंबे समय तक 12-15 घंटे काम करना. है तो यू शुड बी कंफर्टेबल वेल लिट रूम. होना चाहिए सिटिंग पोचर होना चाहिए प्रॉपर. डिस्टेंस होना चाहिए आई लेवल पे होना. चाहिए आंख में कुछ हवा वगैरह ना जा रही हो. जो आंख को सुखा रही है 20202 फॉलो करो. थोड़ा सा बीच में ब्लिंक करते रहो ड्रॉप्स. डालते रहो तो ओवरऑल आपका स्क्रीन पे. कंफर्ट काफी अच्छा रहेगा अब जैसे मेरी. ब्लिंक ज्यादा होती है आंखें मुझे कई बार. ऐसा लगता है कि जब मैं फोटो खिंचवाने आता. हूं तो आंखें ज्यादा ब्लिंक हो जाती है. बंद हो जाती हैं ये आंखों में तनाव का है.
या कुछ नहीं है ये नॉर्मल है मेरी भी. आंखें बंद हो जाती है फोटो खिंचवाते हुए. और बाय चांस शटर ने ऐसे टाइम क्लिक करा जब. आप ब्लिंक कर रहे थे वो कोई टेंशन वाली. बात नहीं है अच्छा एक मैं आपको और बता. देता हूं ये जो ब्लू लाइट की बातें हो रही. थी ना तो जैसे हमने बात करा कि रात को. मोबाइल कंप्यूटर हम चला रहे हैं तो जब आप. रात के टाइम पे स्क्रीन यूज करते हो ना तो. अपनी स्क्रीन का ब्लू लाइट फिल्टर जो है. उसको ऑन कर लिया करो ताकि कम से कम ब्लू. लाइट निकले और आपकी आंखों में स्ट्रेन और. कम बने यही रीजन था जिसको ब्लू लाइट को. लॉन्च करा गया था बट दिस इज नाउ बिकम अ. फेलियर बिकॉज़ जो आपको ब्लू लाइट चश्मे से.
प्रोटेक्ट करनी है वो तो स्क्रीन में आप. ऐसे सॉफ्टवेयर ऑन करके फिल्टर आउट कर सकते. हो सो दैट इज वाय ब्लू लाइट फिल्टर. ग्लासेस आर नो मोर नाउ दे आर अ फेलियर. बिकॉज़ नाउ यू हैव सॉफ्टवेयर्स इन योर फोन. वच वच आर डूइंग द सेम थिंग व्च ब्लू लाइट. फिल्टर ग्लासेस आर डूइंग सुपर्ब स्ट्रेस. से फर्क पड़ता है क्योंकि जब मैंने हेयर. के डॉक्टर से बात स्ट्रेस से ह चीज में. फर्क पड़ता है हां सो स्ट्रेस लोगे तो आंख. में कोई बीमारियां आ सकती है बट ऐसा इफ यू. आस्क मी कि स्ट्रेस और यह बीमारी ऐसा कोई. लिंक नहीं है नहीं बट जैसे स्ट्रेस से. आपके बाल लग जाते से आपको हाइपरटेंशन हो. डायबिटीज हो आती है बहुत सारी बीमारियां.
होती है आपको हर ट्रेस से आपको डायबिटीज. होगा हाइपरटेंशन होगा उसका इफेक्ट आपकी. आंखों में आएगा सो अल्टीमेटली बॉडी है तो. एक होलिस्टिक सिस्टम बट शहरों में तो हर. आदमी स्ट्रेस में है कोई बॉस के स्ट्रेस. में है कोई गर्लफ्रेंड के स्ट्रेस में है. कोई किसी स्ट्रेस में है किसी की तका नहीं. पड़ रही तभी तो शहरों में आंखों की. प्रॉब्लम ज्यादा भी आपने तो बोला क्यों. ज्यादा है ये तो रीजन है ज्यादा है तो. इसका ख्याल कैसे फिर अगेन आपने तो कह दिया. कि ख्याल मत रखो कि सबसे अच्छा ख्याल रखने. का तरीका है बट कई चीजें ऐसी जो. अनअवॉइडेबल है जैसे इसमें एक स्ट्रेस है. स्ट्रेस फ्री लाइफ जियो फिर कैसे स्. स्ट्रेस भी लाइफ जियो गए जो जानबूझ के. अपनी लाइफ में स्ट्रेस ले लेते हैं तो.
इसका कोई समाधान नहीं है मतलब कुछ आपने. कहा कुछ मत करो बट क्या वाकई में कुछ मत. करो या थोड़ी बहुत चीजें कुछ कर सकते हो. क्या करना चाहते हो मैं आपसे समझना चाहता. हूं कुछ नहीं करना आंखों के लिए आंखें. आपकी हेल्दी है कोई प्रॉब्लम है तो डॉक्टर. से मिल लो ये जुगाड़ बाजी नहीं करनी मतलब. माय एमफसिस इ कि ये जो होता है ना जो ये. रोज सुबह उठ के लोग शेट डाल लेते हैं. गुलाब जल डाल देते हैं या कुछ लोगों की. आदत होती है भाई रात को सोने से पहले. आंखों को छप के मार के धोना है सुबह उठ के. छप मार के धोना है या बच्चों की आंख में. ये लोग काजल लगा देते हैं ये सब नहीं करता.
इसका कोई रोल नहीं है आपकी आंखें हेल्दी. है नॉर्मल है कोई प्रॉब्लम है तो आप. प्रॉपर दवाई डालो जुगाड़ बाजी से दूर ओ. योगा योगा से फायदा होता है कुछ नहीं योगा. देखो योगा इन द स जैसे आप मेडिटेशन करते. हो ये मैं बता देता हूं योगा इज अ फॉर्म. ऑफ एक्सरसाइज ओनली तो अक्सर व्हेन यू लुक. एट ऑल दीज थिंग्स ऑन सोशल मीडिया तो वहां. पर आप देखोगे ये लोग बोलते हैं भाई आंखों. को ऐसे दबाओ ऐसे ऐसे ऐसे ऐसे देखो हां ऐसे. ऐसे करो मसाज करो यू करो ये बेकार चीज है.
इनसे कोई फायदा नहीं होने वाला ठीक है कभी. कभार जब हमारी आंखों की मसल्स वीक होती. हैं तो जैसे मैंने बताया मसल्स को मोड़ के. रीडिंग करना है अगर वो वीक होंगी तो आपको. स्ट्रेन होगा तो अगर आपका रीडिंग करते हो. मोबाइल कंप्यूटर प काम करते हुए आंखों में. स्ट्रेन बन रहा है दर्द बन रहा है तो आपकी. मसल्स वीक है और हम आपको कुछ स्पेसिफिक. तरह की एक्सरसाइजस देंगे जो इन्हीं मसल्स. को स्ट्रेंथ करेगी जिससे ज्यादा समय तक आप. कंप्यूटर बैठ पाओगे लेकिन ये सब जो हो रहा. है ना ये सब मल लो हाथ कर लो गर्म कर लो. इधर-उधर देख लो एट फिगर बना लो ये यूजलेस.
है इनका कोई फायदा नहीं है ओके सिगरेट. शराब दोनों नुकसान करेगी आंखों को बहुत. सारी बीमारियां कर देती है सारी बीमारियां. जल्दी ले आती है सिगरेट पियोगे जो कैट 70. में आना है वो 50 में आ जाएगा काला मोतिया. बन जाएगा डायबिटीज की प्रॉब्लम हो जाएगी. सिगरेट शराब तो पूरी बॉडी को ही खराब. करेगी ना भाई कोई भी चीज बॉडी को खराब. करेगी तो आंखों को भी खराब करेगी सिंपल सी. बात. है कि आपने बोल पहले ही कंप्लीट कर दिया. तो वो तो पता ही है ना. सिग शराफ का क्या नुकसान है वो तो पता ही.
है हमें बट बहुत सारे लोग ऐसे हैं जैसे. जैसे शाहरुख भाई को चश्मा नहीं लगा हुआ है. शाहरुख खान को शाहरुख भाई ने चश्मा हटवाया. हुआ है अपना लेजर करा के ओके ये पता नहीं. बहुत लोगों को रकल रकुल प्रीत क्या नाम है. उसका रकुल प्रीत नाम है उसने अपनी आंखों. में आईसीएल कराया हुआ है जो मैंने बताया. ना लेंस डाल के चश्मा हटाते हैं रकुल. प्रीत ने आईसीएल से हटाया हुआ है. प्रियांका चोपड़ा कि जो दोनों ब्रदर इन. लॉज है जोनस ब्रदर्स उनकी आंख में आईसीएल. से चश्मा हटाया है तो बिग बिग सेलेब्रिटी. ने कराया हु है अपना सर बताया नहीं है.
जिसने ब हम तो बस पता लग ही जाता है. शाहरुख खान की तो अभी एक और प्रॉब्लम हो. गई थी मोतिया बन के ऑपरेशन में इसमें इसका. असर था था पता नहीं इसका असर था कि नहीं. था लेकिन प्रॉब्लम हो गई थी मैंने तो देखा. नहीं उनकी आंखों को बट आई एम शर कहीं ना. कहीं तो असर हो गई तो सिगरेट चलो फिर से. मैं इसको थोड़ा और डिटेल आपने कह तो दिया. जिक्र कर दिया सिगरेट शराब पीने से क्या. अधिक जल्दी नुकसान कर सकता है आंखों में. बेसिकली सिगरेट शराब जो है ना हमारी बॉडी. में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस प्रोड्यूस करती है. तो जब ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस होता है फ्री. रेडिकल्स नाम की चीज होती है वो हमारे. पूरे बॉडी को नुकसान करेगा तो वो आंखों को.
भी नुकसान करता है तो क्या होता है जैसे. मोतियाबिंद की प्रॉब्लम है जैसे मैंने अभी. बताया कि यूजुअली प्रॉब्लम 60-70 साल में. आती है एक्सेसिव सिगरेट यूज से ये. प्रॉब्लम जल्दी आ जाती है 40 50 साल की. उम्र में आ जाती है काला मोतिया हो सकता. है पर्दे की प्रॉब्लम जो एआरएमडी वगैरह. बताया तो एक तरह से हर बीमारी को कहीं ना. कहीं हम टोबैको यूज से लिंक कर पाते हैं. ठीक बिकॉज़ ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस जो हो रहा. है वो ओवरऑल बॉडी को डैमेज कर रहा एक तो. मतिया बिंद का आपने कहा 60 पे आती है सबको. हो सकती है आपको मुझको सबको हो सकती है. सबको हो नहीं सकती सबको होनी ही होनी है.
हां होनी है 100% होनी अर्ली स्टेज में. मुति बिंद होता है क्यों होता है सी. मोतियाबिंद हम लोग कहते हैं 90 पर लोगों. को 60 70 साल की उम्र में आएगा कुछ लोगों. को जल्दी भी आ सकता है 10 साल की उम्र में. 20 साल की उम्र में इमीडिएट बच्चा पैदा. हुआ तब भी मोतियाबिंद आ सकता है तो एक. यंगेस्ट जो मैंने ऑपरेट करा है न महीने का. बच्चा ऑपरेट करा है मोतियाबिंद के लिए तो. वैसे तो किसी भी स्टेज में आ सकता है बट. मेजॉरिटी जो है वो लेट स्टेज में आता है. अच्छा किसी भी स्टेज में मोते अ बिंद आ. गया कोई टेंशन वाली बात नहीं है अब इनका. मतलब क्या है कि हमारी आंखों के अंदर का. जो लेंस है वो सफेद हो गया उस लेंस को.
निकाला नया लेंस डाल दिया आपकी नजर वापस. हो गई सामने और फिर 15 दिन बाद भूल जाओ कि. डाला प के बा भूल जाओ प के बाद नॉर्मल करो. अपनी जिमिंग जॉगिंग रनिंग स्विमिंग आपने 1. लाख लोगों की अ सर्जरी की चश्मा हटाने. चश्मा हटाने की अब इनमें से कौन-कौन से. ऐसे नाम हम चाहेंगे थोड़ा आप ही बताओ. क्योंकि इतना तो हमने पढ़ा आपके बारे में. जिनको लोग जानते होंगे जिनको लोग जानते. होंगे. सेलिब्रिटीज आई कांट डिस्क्लोज दोज नेम्स. वो हमारा थोड़ा सा कॉन्फिडेंशियल लगता अंड. आखों में भी कॉन्फिडेंशियल अब है तो है. क्या कर सकते हैं मतलब ठीक है चलिए वो.
आपके गेस्ट का हिसाब किताब है बट आई वुड. लाइक टू से कि मतलब जैसे मैंने सोनू सूत. का सुना था सोनू सूद ने बीच में बहुत. रिकमेंड किए थे आपको सोनू सूद का एक्चुअली. क्या हुआ कि जब कोविड के टाइम. पे वन सोनू सूद वा गेटिंग वेरी पॉपुलर ही. वाज हेल्पिंग लॉट ऑफ पीपल तो एक लड़की थी. गांव में उसकी शादी नहीं हो रही थी सो. चश्मा लगा था मोटा करीब आठन नंबर का चश्मा. था तो उसने सोनू सूत को कांटेक्ट करा कि. भाई मेरी शादी नहीं हो रही मेरी आंखों में. ये प्रॉब्लम है कैन यू हेल्प मी तो उनकी. टीम ने हमें कांटेक्ट किया कि ऐसे ऐसे एक. पेशेंट है एंड वी सेड व्हाई नॉट तो वो फिर.
आई यहां पे एंड वी ऑपरेटेड हर फॉर फ्री सो. दैट इज जस्ट वन ऑफ द स्टोरीज द सोनू सूट. गट इवॉल्वड इन ऑल दिस तो सेलिब्रिटीज के. थ्रू जिनका होता है उनको हम बता सकते हैं. सेलिब्रिटीज नहीं वो आपने आई थिंक आई एम. श्यर वो एक वीडियो देखा होगा हां हां सोनू. सूत के तो कोविड के एरा में या इनफैक्ट. दैट गर्ल वालंटियर टू मेक अ वीडियो विद अस. तो फिर उसने हमारे साथ वीडियो बनाया उसने. अपनी पूरी स्टोरी से बताई कि मैं कैसे. कैसे यहां पहुंची सुपर अब कोविड का जिक्र. है तो एक सवाल और आ गया अ कई लोगों ने कहा. कि हमें कोविड तक चश्मा नहीं लगा था कोविड. के बाद बहुत लोगों को चश्मा लगा है. रि क्यों कैसे इसका वही मेन रीजन तो यही.
है एक्सेसिव स्क्रीन यूज प्लस कोविड जो. वायरस है उसने बॉडी में चेंजेज करे हैं और. हमने देखा कि आंखों में कुछ लोगों का नंबर. आ गया है बट द रियल एग्जैक्ट रीजन बिहाइंड. इट इट इज स्टिल अननोन बट हां ये तो हमने. बहुत इनफैक्ट जो ये चाइनीज कंट्रीज हैं और. मैं जो पहले बताया था सिंगापुर यहां तो. एकदम एक्सपो शियली बढ़ा है यहां पे कोविड. के चश्मा कोविड के बाद और ये किसी भी एज. में यूजुअली यंग एज में क्योंकि मुझे कई. लोग मिले 35 40 वाले भी जिन्होंने कहा कि. हमने इतना मोबाइल स्क्रीन नहीं य किया था. बट हमरा चश्मा लग उनका भी आ गया कुछ लोगों. का आया है सिल्क आई सर्जरी क्या है सिल्क.
अब तो पुरानी हो गई एक टाइप की सर्जरी है. जिसमें हम बेसिकली क्या होता है यह सारे. लेजर्स है लेसिक भी लेजर है कंटूरा भी. लेजर है सिल्क भी लेजर है वेवलाइट प्लस भी. लेजर है अब अलग-अलग टेक्निक्स है इसकी तो. जो सिल्क था एक लेंट क्यूल एक्सट्रैक्शन. प्रोसीजर है लेकिन एंड ऑफ द डे ये जो सारे. लेजर्स है ना इनका बेसिक प्रिंसिपल चश्मा. हटाने का सेम है क्या प्रिंसिपल है कि भाई. आंख का साइज बड़ा है अब आंख के साइज को. अभी भी हम छोटा नहीं कर करते सर्जरी से वो. तो जो बड़ा हो गया हो गया तो हम चश्मा. हटाते कैसे हैं ये जो लेजर्स हैं ये हमारे.
आंख के सामने वाले हिस्से में काम करते. हैं जिसको हम कहते हैं काली पुतलियां. कॉर्निया तो जब हम इसको लेजर को डालते हैं. तो हम इसके जो कर्वेचर है उसको थोड़ा. फ्लैट करते हैं ज्यादा कर्व है थोड़ा. फ्लैट करके कर्वेचर को कम कर दिया और जब. हम ये कर्वेचर कम करते हैं तो पेशेंट के. माइनस का नंबर हट जाता है अब इसको करने के. अलग-अलग तरीके हैं हम टिशू को बर्न करके. हटा दिया थोड़ा सा और फ्लैट कर दिया या. टिश्यू को काट के थोड़ा सा हटा दिया और. फ्लैट कर दिया तो जब हम बर्न करके हटा रहे.
हैं तो ये कंटूरा वेवलाइट लेजर्स है और. अगर हम काट के हटा रहे हैं तो ये सिल्क. लेजर है तो जो सिल्क लेजर है वो अलग. कैटेगरी का लेजर है जो फेमो सेकंड लेजर. कैटेगरी में आता है और जो कंटूरा वेवलाइट. वाले हैं ये अलग लेजर हैं ये एगजाम लेजर. कैटेगरी में आते हैं बट एंड ऑफ द डे सारे. लेजर्स हैं और बेसिक प्रिंसिपल अभी भी सेम. है कि कॉर्निया के कर्व को चेंज करना है. थोड़ा सा टिश्यू को हटा के तो जला के हटा. दो तो कंटूरा वेवलाइट हो गया काट के हटा. दो तो सिल्क हो गया ओके हमने सुना लेजिक. सर्जरी में कुछ लोग को मना भी होता है कि.
इतने से नीचे पावर है तो नहीं आपको वेल. यूजुअली बहुत छोटी पावर्स हम लोग अवॉइड. करते हैं 25 वगैरह तो यूजुअली पेशेंट आस्क. के भा मिनिमम पावर हम कितनी हटा सकते हैं. फ आधा नंबर हम हटा सकते हैं मैक्सिमम पावर. कितनी हटा सकते हैं लेजर से आठ आठ के ऊपर. पावर चली गई आईसीएल ऑपरेशन होगा ओके अ. हमने गांवों में अक्सर देखा लोग सूरमा. लगाते हैं काजल लगाते हैं मम्मी लोग तो. बड़ा एकदम बच्चों के आंख में स्पेशली हां. उससे आंखों पर कोई नेगेटिव फर्क पड़ता. इसको लगाना क्यों पहले तो मेरे को ये समझ. नहीं आता उन्हें लगता है स्लाल हमारा. सुंदर लगा सुंदरता के लिए लगा र वैसे जो.
आंख में सत्यास हो जाएगा ब बुरी नजर से. बचा रही होंगी शायद देखो अगर बच्चे को. बुरी नजर से बचाना है ना तो सुरमा यहां की. जगह यहां लगा लो हां आंख में मत लगाओ देखो. सबसे बड़ी प्रॉब्लम है कि एक तो इन सुरमा. में अक्सर एक लेड करके चीज होती है पॉइजन. अस होता है वो तो वो आपकी बॉडी में. अब्जॉर्ब हो रहा है फिर क्या प्रॉब्लम. होती है जो सूरमा लगाते हैं ना ये बच्चे. शेयर कर लेते हैं एक ही स्टिक ली उसको लगा. दिया उसको लगा दिया उसको लगा दे तो उससे. आंख में टिकोमा करके प्रॉब्लम हो जाती है. फिर अल्टीमेटली सूर्मा में कुछ पार्टिकल्स. होते हैं बच्चों की आंखें अभी सेंसिटिव है.
बार-बार उन पार्टिकल का एक्सपोजर होता है. बच्चों की आंखों में लाली पानी निकलना. शुरू हो जाता है और अगर ये क्रॉनिक हो. जाता है तो आपकी आंखों की एलर्जी भी. क्रॉनिक हो जाती है बहुत सारी तरह की. प्रॉब्लम्स हो जाती है तो सूरमा एक्चुअली. बच्चों की आंखों में लगाने का कोई रोल. नहीं है ना इससे आपकी नजर बढ़ती है ना. इससे आंख में कोई फायदा है और अगर. एक्चुअली आपको नजर सही बचाना है तो कहीं. और लगा लो इधर-उधर लगा लो बच्चों को सुंदर. सुंदरता छोड़ दो क आपने पूछा नहीं जिनका. आपने सर्जरी क्योंकि की मम्मी लोगों से कि. क्यों लगाते थे आप हम वो कह रहे हैं मेरा. बच्चा सुंदर लगता है मेरे बच्चे नजर में.
को सुंदरता छोड़ दो आप नजर से बचाना यहां. लगा लो लेकिन इस सुंदर बनाने के चक्कर में. आंखों को तो मत खराब करो कितने सारे. पेशेंट हमारे पास आते हैं कंटिन्यू सर्मा. लगा लगा के क्रॉनिक एलर्जी हो गई फिर वो. एलर्जी ठीक ही नहीं होती उनको लंबे समय तक. दवाइयां चलानी पड़ती है सो अवॉइड ऑल दिस. कांटेक्ट लेंस कितने सेफ होते हैं. कांटेक्ट लेंस दिन में एक बार पहन लो तो. चलो ठीक है काम चल जाएगा लेकिन जो रोज-रोज. पहन रहे हो ना कांटेक्ट लेंस उससे आंखों. का सत्यानाश हो जाएगा प्रॉब्लम क्या है सी. हमारा कांटेक्ट लेंस जो है ना ये आंखों के. सामने के हिस्से प लगाते हैं उसको हम लोग. कहते हैं कॉर्निया तो आपने एक पतला सा पीस.
उसके ऊपर चिपका लिया अब ये जो कॉर्निया है. ना ये सांस जो लेता है हवा से लेता है. हमारे कॉर्निया में खून की. नाड़ियल है तो पूरी बॉडी जो सांस लेती है. वो खून उनकी नाड़ियों में जा रहा है उस. ऑर्गन तक जा रहा है और वो सांस ले रहे हैं. जो हमारा कॉर्निया है इसमें कोई ब्लड वेसल. नहीं है तो कॉर्निया जो है हवा से डिफ्यूज. करती है ऑक्सीजन अब आपने ऊपर एक लेंस लगा. दिया अब जितना मर्जी उसको बोल लो आप न. परमेबल है कुछ लेवल की ऑक्सीजन तो डिप्लीट. होती है जब आपकी आंख में ऑक्सीजन कम हो.
जाती है तो आपकी आंखों में कुछ कुछ तरह की. प्रॉब्लम बननी शुरू हो जाती है इरिटेशन. रेडनेस वाटरिंग अच्छा एक बहुत बड़ी. प्रॉब्लम है कांटेक्ट लेंस के साथ कि अगर. आपने इसकी प्रॉपर हाइजीन मेंटेन नहीं करी. ठीक से साफ नहीं करा और आपने अपनी आंख प. लगा लिया और आपका आई ऑलरेडी. कॉम्प्रोमाइज्ड है. हाइपोक्लोरमिक इफेक्स होगी बहुत ड्रेडेड. इंफेक्शन होती है उसको ठीक करने में बहुत. टाइम लगता है और अक्सर वो नजर खराब कर.
जाती है तो आपने देखा था अभी एक एक्ट्रेस. थी क्या नाम था उसका जसलीन था या क्या था. वेरी फेमस एक्ट्रेस उसने कांटेक्ट नेस. लगाया था और उसकी आंख में अलसर होख में. दिखने में इशू हो गए थे बहुत बहुत मेजर. इशू हो गया था पट्टी वट्टी करके उसको ठीक. कर बग बस गई थी वो हां सो एक्चुअली. कांटेक्ट लेंस आर नॉट रेकमेंडेड आई टेल ऑल. माय पेशेंट्स कि य चश्मा पहन लो या इसको. लेजर से हटवा बट जैसे हमारी टीवी. इंडस्ट्री है जो वर्किंग प्रोफेशनल्स है. हम देखते हैं वो रोज कांटेक्ट लेंस ऑफिस. आती है लगाती है नॉ फीमेल में स्पेशली नॉट. अ गुड हैबिट एंड यू वुड इफ यू आस्क देम.
अगर वो स्टार्टिंग स्टार्टिंग में लगा रहे. हैं तो चलो कंफर्टेबल है लॉन्ग टर्म अगर. लगा रहे हैं ना तो उनसे कभी आप पूछना वो. खुद ही बताएंगे कि हां कितनी इरिटेशन होती. है जलन होती है ड्राइनेस होती है खुजली. होती रहती है लाली होती रहती है स्टिल आई. टेल. एवरीबॉडी. पीली हरी जो मर्जी आंखें बना लो तो ठीक है. आप उसको सुबह पहन लो रात को उतार के उसको. फेंक दो यूज डेली डिस्पोजेबल वो मंथली. वाले जो होते हैं ना जिनको रोज साफ कर कर. के लगाना है दोज आर वेरी बैड ओके क्या कोई.
तरीका है जिससे आंखों की पुतली का रंग. चेंज हो जाए चेंज कर सकते हैं नीली पीली. कर सकते हैं एक आयरस इंप्लांट्स होते हैं. हां एंड बट इट इज नॉट रेकमेंडेड क्यों. बिकॉज उसके कुछ साइड इफेक्ट्स होते हैं. क्योंकि वो वहां पे डलता है जहां पे आपकी. आंखों का ड्रेनेज सिस्टम होता है तो. कभी-कभी ड्रेनेज को ब्लॉक करके आंखों में. काला मोतिया ग्लूकोमा बना देता है हम सो. नॉट रिकमेंडेटरी कमेंड नहीं है इसलिए बहुत. पॉपुलर नहीं है तो आपने सुना नहीं होगा कि. लोग अपनी आंखों का कलर बहुत चेंज करा रहे. हैं सो आंखों के लिए यूजुअली चेंज करने के. लिए कलर यूज पीपल आर वेयरिंग कंटक्ट लेंस. कंपेरटिवली उससे तो ज्यादा ही सेफ है.
अच्छा आंखों की पुतली में मैंने अभी एक. फॉरेन लड़की की एक रील देख रहा था मैं. बड़ी वियर्ड सी उसकी आंखें की पुतली कलर. था वो थोड़ा स्नेक की तरह उसका आंखें दिख. रही थी मुझे नहीं वो तो आप टैटू करा लो. नहीं उसने दिखाया कि उसकी बचपन की फोटोज. भी वैसी ही थी नहीं फिर तो वो उसकी प्यूप. का शेप वैसे ही खराब है वो तो बस उसको. थोड़ा सा दिखा दिखा के लोगों को इंप्रेस. कर रही है देखिए जरूरी नहीं है कि हमारी. आंखों का जो प्यूप है वो गोल हो कुछ लोगों. के टेढ़े मेढे भी होते हैं तो टेढ़े कुछ. लोगों का हार्ट शेप्ड हो जाता है कुछ. लोगों का ऐसे मल्टीपल तो वो अच्छा नहीं है. वो मतलब नॉर्मल नहीं है अब नॉर्मल है अब.
वो अब नॉर्मल में थोड़ी सी ब्यूटीफ. आर्टिस्टिकली अब नॉर्मल हो गया तो उसने. थोड़ा शो ऑफ कर लिया. instagram2 का चश्मा हटाया था किसी का -30. एंड बहुत डिफिकल्ट होता है किसी की आंख. में -30 का नंबर हो दैट पर्सन इज वर्चुअली. ब्लाइंड और चश्मे के साथ भी नाना उनको. कंफर्ट नहीं मिलता क्योंकि चलो पतला आप. लेंस पहन लो इट इज स्टिल कंफर्टेबल लेंस. पहनते ना तो उसके अपने प्रॉब्लम्स है. मिनिफिकेशन इफेक्ट होता है जैक इंड बॉक्स. फिनोमेना होता है तो जब उसका चश्मा हटाना.
तो एक्चुअली उसकी लाइफ में यू टर्न आ गया. एक पर्सनालिटी चेंज हो जाती है सो शी. स्टार्टेड लिविंग लाइक अ नर्मल पर्सन सो. जब उसको हमने पहली बार देखा था कि शी इ. लिविंग विद माइन 30 वी र इन शॉक मतलब कैसे. लाइफ जी पा रही है इतने साल तक कैसे निकाल. लिया ओके सबसे कॉमन गलती क्या होती है. आंखों को लेकर जो लोग करते हैं जिसकी वजह. से लोग आपके पास पहुंचते. हैं वो सारे पेशेंट लेट स्टेज में आते हैं. हम जब ऑलरेडी आंख खराब हो चुकी होती है.
बातें हाथ से निकल चुकी होती है पहले सारे. एक्सपेरिमेंटेशन कर लेते हैं सेल्फ. मेडिकेट कर लेते हैं दोस्तों से पूछ लेते. हैं आयुर्वेदिक होम्योपैथी सब कुछ कर लेते. हैं और जब कुछ काम नहीं करता तब आता है तब. तक बीमारी इतनी बढ़ चुकी होती है कि उसको. कंट्रोल करने में हालत खराब हो जाती है सो. जैसी प्रॉब्लम हो ना मतलब इमीडिएट जाओ. डॉक्टर के पास ये डिले नहीं करना अच्छा. एंड इनफैक्ट मैं इतनी बढ़िया चीज बताऊं. आपको हमारी कंट्री में तो सिस्टम ही बहुत. अच्छा है मतलब अगर हमारी आंखों में. प्रॉब्लम है तो आप अपनी आंखों के डॉक्टर. से जाक मिल सकते हो आज प्रॉब्लम हुई कल. मिल सकते हो अगर आप बाकी कंट्रीज देखो ना.
अमेरिका यूरोप ऑस्ट्रेलिया कनाडा वगैरह. आंख में अगर आपकी प्रॉब्लम है तो आप आंखों. के डॉक्टर से नहीं मिल सकते पहले आपको. किसी जनरल डॉक्टर को दिखाना होगा वो जनरल. डॉक्टर आपको देखेगा अगर उसको लगता है कि. आपको आंखों के डॉक्टर के पास जाना है तो. वो आपको आंखों के डॉक्टर के पास रेफर. करेगा उसके लिए आपको 15-20 दिन महीना वेट. करना पड़ेगा फिर वो आंखों के डॉक्टर अगर. आपको देखता है आपको उसको लगता है कि आंखों. के सुपर स्पेशलिस्ट की जरूरत है सपोज. पर्दे के डॉक्टर को दिखाना फिर वो और रेफर. करेगा आपको फिर एक महीना वेट करो उसके पास. जाओ तो हमारा सिस्टम तो बहुत कन्वेनिएंट. है इतने कन्वीनियंस के साथ भी लोग नहीं. आते चेक कराना ट्रेंड नहीं शायद हम खुद ये.
जो चल रहा है ना सोशल मीडिया इसने हा काम. ख़राब किया हुआ है उसी सोशल मीडिया पर हम. भी बता रहे हैं भा आंख में जो प्रॉब्लम. होती है सोशल मीडिया खोल के देख लेते हैं. लाल हो गई अब कौन सी ड्रॉप डालनी है ये तो. प्रॉब्लम है स पर डाल के चेक कर लिया सबसे. कॉमन मिथ लेकर लोग क्या आए आपके पास जो. उसको सुनकर आपको हंसी आती है कि यार इतने. लोग एक गलती कैसे सोच सकते हैं. हमने चेक कराया तो हमारी विजन तो इतनी आ. रही थी हम तो मतलब कभी-कभी हमें बिलीव.
नहीं होता कि बंदा बोल क्या रहा है और. एक्चुअली हो क्या रहा है हम इस टाइप की आ. जाती है कभी-कभी. चीजें अब अब आते हैं इसके कमर्शियल पार्ट. पे क्योंकि जो लोग आपको देख रहे होंगे. उनमें से बहुत सारे लोगों का मन होगा कि. वो आपके पैसे लते हैं च हटाने में इंडिया. में तो एक कॉमन सवाल है कुछ भी करना हो वो. देखो सस्ता पछताए बार-बार महंगा पछताए. सस्ता रोए बार-बार महंगा रोए एक बार बट. फिर भी अगर एक बेसिक क्योंकि च चश्मा. हटाना सबका मन होता है स्पेशली फीमेल्स. में ज्यादा होता है कि आप जैसे कांटेक्ट. ले का जिक्र किया मैंने जब मैं एंकर था. मेरी ऑलमोस्ट हर दूसरी कॉलीग को कांटेक्ट. लेंस लगाने पड़ते थे बट आजकल हम देख रहे.
हैं लड़के ज्यादा हटवा हैं लड़कियों से. क्योंकि हम लोग देख रहे हैं कितने सारे. यंग मेल्स जो हैं इनको ये गवर्नमेंट जॉब्स. क्लियर करनी होती है आर्मी नेवी एयरफोर्स. एसएससी हो गया जेडी सीपीओ पुलिस की जॉब हो. गई रेलवे की हो गई स्पोर्ट्स के लिए जा. रहे हो प्लस यू आल्सो हैव टू अंडरस्टैंड. कि चश्मा ना सिर्फ एक कॉस्मेटिक प्रॉब्लम. नहीं है इट इज जनरली अ लाइफस्टाइल. हैंडीकैप मान लो कोई क्रिकेट खेलना चाहता. है स्विमिंग करना चाहता है कुछ और जिमिंग. वगैरह करना चाहता है चश्मा लगा हुआ है तो. एक हसल ही है ना उसके साथ चीजें करना. कितना डिफिकल्ट हो जाता है सो मोर दन.
कॉस्मेटिक नाउ पीपल आर ऑप्टिंग फॉर. लाइफस्टाइल बेनिफिट्स कि कंफर्ट हो जाए. कन्वीनियंस हो जाए ट्रू मुझे बाहर खुद. पॉडकास्ट के अंद में एक एक्स्ट्रा बैग में. रखना पड़ता है क्या कि खुदा नखता कहीं अगर. गलती से चला गया और आपका तो वन है ना तो. मान लो आपका टूट गया आप तो चलो फिर भी. मुझे मतलब दिखाई पड़ता आई कैन रीड नॉर्मल. हो जाएगा मान लो किसी का नंबर चार पांच से. ऊपर है उसका चश्मा टूट गया वो तो घर भी. नहीं जा सकता इतना हैंडीकैप हो जाता है. लाइक व्हेन एवर आई गो टू वृंदावन वहां पर. तो बंदर खींच लेते हैं को केले दो फ्रूटी. दो तो आपको पहले से एडवाइस किया आता है कि. आपको चश्मे ये मेरी एक स्टोरी है पेशेंट.
की वो मेरे पास आया वृंदावन से मैंने कहा. क्यों हटवा चाहते हो क सर वैसे मुझे कोई. प्रॉब्लम नहीं है लेकिन जब भी मैं जाता. हूं बंदर खींच के ले जाता है अब कितने नए. चश्मे बनवाओ तो मैंने कहा हटवा लेता हूं. मैं चल कोई नहीं हटा देते हैं सो वी गेट. टू ये तो मेरे साथ था बिकॉज मैं वृंदावन. गया उन्होंने निकाल दिया अब ये हुआ कि हर. रिक्शा वाला की राधे-राधे जेब में रखिए. मैंने कहा ठीक है अब आपको बाकी आप नॉर्मल. साइड से आपको थोड़ा अन कंफर्टेबल तो होता. है सो मुझे लगा यार जो लोग यहां रहते. होंगे इनके लिए तो मस्त है डॉक्टर राहिल. के पास जाना एक एक मेरे पास हनीमून एक कपल. आया अभी-अभी हनीमून करके आया हनीमून पे वो.
स्काई डाइव करने गए हम तो स्काई डाइव करा. तो उनको कुछ दिखा ही नहीं नीचे तो उनका. इतना एक्सपीरियंस खराब हो गया कि वो वापस. आए दोनों वो कहते हैं कि भाई हमारा चश्मा. हटाओ क्योंकि हम स्काई डाइव नहीं कर पाए. फिर चश्मा हटा आने के बाद वो सेकंड हनीमून. पे गए फिर वो स्काई डाइव करके आए दे. शेयर्ड द स्टोरी विद मी दिस वाज एन. एक्सपीरियंस इंडिया में आई एक्सपर्ट कम है. बहुत कम है क्यों एक्चुअली वीी आर जस्ट. 27000 डॉक्टर्स और जो रिक्वायरमेंट है दैट. इज 1 एंड 1 हाफ लक क्योंकि मैंने सोशल. मीडिया पर भी जब पॉडकास्ट देखने शुरू किया. आपके अलावा कोई दिख नहीं रहा था मुझे नहीं.
आई एम श्यर बहुत सारे हैं कम दिख रहे थे. मुझे काफी कम कंपेरिजन में बाकी जो फील्ड. है द क्वेश्चन इज कि सोशली एक्टिव. डॉक्टर्स कम है कि वैसे डॉक्टर्स कम है. मुझे दोनों जो मैंने रिकॉर्ड्स ही पढ़े जो. हमने हमें जानकारी ली जो सोशली एक्टिव. डॉक्टर्स तो कम ही है बिकॉज आई फील दिस. सोशल इज मोर फॉर द यंग जनरेशन डॉक्टर्स. एंड जो हमारी जनरेशन के डॉक्टर्स है दे आर. बिकमिंग एक्टिव जो हमसे सीनियर्स हो गए दे. आर यूजुअली नॉट कमिंग ऑन सोशल मीडिया एंड. नहीं नहीं बाकी आप देखिए मैंने डॉक्टर. रमाकांत पांडे 75 वो भी हमारे पास आए थे.
डॉक्टर शिव सरीन साहब जो लीवर के डॉक्टर. थे ही इज अगेन 775 आई सॉ दैट मैंने देखा. आई डॉक्टर में थोड़ा कम आ रहे हैं मे बी. दिस विल गिव देम इंस्पिरेशन एंड मोटिवेशन. बट यर क्वेश्चन कि हम क्या जनरली हमारे. इंडिया में आई डॉक्टर्स की कमी है मेजर. मेजर कमी है तो क्या ये भी एक फैक्टर हो. सकता है कि लोग कम जाके दिखा रहे हैं. जागरूकता कमी है इस वजह से भी एक्चुअली ना. बहुत वो है एक गैप है अर्बन और रूरल में. तो एक्चुअली सारे स्पेशलिस्ट और मेजॉरिटी. डॉक्टर्स जो हैं वो अर्बन एरियाज में बैठे. हैं जहां पे फैसिलिटी अवेलेबल है एंड एज.
यू गो टू द रूरल पार्ट्स गांव में जाते हो. तो वहां पे सडन ड्रॉप हो जाता है मेडिकल. फैसिलिटी का तो दिस इज द रीजन कि हमारा जो. कंट्री है इट इज द ब्लाइंड कैपिटल ऑफ द. वर्ल्ड पूरे दुनिया में सबसे ज्यादा. ब्लाइंडनेस के शिकार मरीज हमारे हमारे देश. में है और उसमें भी जो रीजन है दैट इज. कैटरेक्ट सफेद मोतिया बिन और सफेद मोतिया. बिन का इलाज तो 10 मिनट के ऑपरेशन से हो. जाता है फिर भी हमारा बर्डन बढ़ गया है. एंड द ओनली रीजन फॉर दैट इज कि हमारे देश. में डॉक्टर्स भी कम फैसिलिटी भी कम है तो. यूजुअली छोटे-छोटे ऑपरेशन कराने के लिए भी. एक इंसान को गांव से ट्रेवल करके शहरों.
में आना पड़ता है सुपर स्पेशलिटी. ट्रीटमेंट्स लेने बेसिक फैसिलिटी भी नहीं. है इनफैक्ट यू विल बी शॉक टू नो कि एक. स्टडी में आया था कि 70 पर लोग जो रूरल. एरिया में रह रहे हैं उनको एक बेसिक. चश्मों का भी एक्सेस नहीं है चश्मा भी. नहीं ले पाते वो तो ट्रीटमेंट तो क्या ही. कराएंगे नहीं बट अब तो जितने स्पेक्स वाले. वो सब खुद डॉक्टर बन गए. हैं नहीं ऐसे बोलने को तो कोई भी बोल दे. बन जाए मतलब जैसे मेडिकल आप मेडिकल की शॉप. पे आते हो तो केमिस्ट जो है वो ड वो. डॉक्टर होता है केमिस्ट भी डॉक्टर है. ऑप्टोमेट्रिस्ट भी डॉक्टर है हर बंदा.
डॉक्टर है ऐसे ही स्पेक्स की शॉप आप. स्पेक्स लगवाने जाओ अब तो पूरे डॉक्टर वही. हो गए हैं चेकअप भी वही कर दे रहे हैं. आपको ड्रॉप ड्रॉप भी वही दे दे रहे हैं वी. आर टॉकिंग अबाउट अर्बन एरियाज रूरल में. जाओगे ना ये फैसिलिटी भी नहीं है चश्मे की. दुकान ही नहीं है वहां पे क्या ये भी एक. रीजन हो सकता है गांव में लोग चश्मे जो हम. बात कर रहे थे कि शरम ज्यादा दिख रहे हैं. क गांव में आप जनरल डॉक्टर के पास जा रहे. हो वो आपको बेसिक एक दवाई दे दे रहा है या. कह रहा है बाबाज वाला आंख में लगा लो इसी. से काम चल जाए ज्यादातर तो लोग इस झांसे. में आ जाते हैं ना अब उनको डॉक्टर की. फैसिलिटी तो मिल नहीं रही प्रोफेशनल.
ओपिनियन तो मिल नहीं रही अब वो क्या. करेंगे सोशल मीडिया पे देखेंगे दो-दो. फ्रेंड्स से बात करेंगे टीवी पे देखेंगे. जो उनको समझ आएगा वो करेंगे सो इट इज. हैपनिंग बाय डिफॉल्ट ओके दे आर एक्चुअली. नॉट एट फॉल्ट अवेयरनेस की बहुत कमी है ओके. अ डॉक्टर राहिल से कैसे लोग जुड़े हैं. मेरे सोशल मीडिया से आई आई हैव अ. नंबर्स एंड एवरीथिंग i7 करके हॉस्पिटल है. यू कैन कांटेक्ट अस ओके आंखों को लेकर.
जाते जाते कुछ आप बताना चाहेंगे आंखों का. दान जरूर कर देना जब मर जाओगे देखो मरने. के बाद इस बॉडी का क्या करना है या तो जला. देना है या दफना देना है तो अगर आप अपनी. आंखों का दान कर दोगे तो उससे दो लोग. दोबारा देख पाएंगे और हमारे देश में कितने. लाखों लाखों लोग हैं जो वेट कर रहे हैं कि. कोई अपनी आंखों का दान कर दे उनको दोबारा. रोशनी मिल जाए लेकिन हमारे देश में डोनेशन. का कांसेप्ट बहुत ही कम है जैसे आप. श्रीलंका में देखो ना वहां पे ऑलमोस्ट 90. पर पीपल डोनेट ट करते हैं अपने ऑर्गन्स. आंखों को इंडिया में कोई करता ही नहीं है. तो इतना ज्यादा डिमांड सप्लाई का गैप है.
कि कितने सारे लोग अंधकार की जिंदगी जी. रहे है वो दोबारा देख सकता है अगर सिर्फ. हम मरते मरते अपनी आंखों को दान करके चले. जाए मरने के बाद होता है दान जिंदा में. नहीं होता जब मर गए हो बॉडी को जलाने वाला. उससे पहले आंखों का दान करना होता है फिर. भी नहीं करते लगता है कि हमारी चीजें साथ. में जाए साथ में ले जाओ आत्मा को शांति. मिल जाएगी या पता नहीं कोई वो हो जाएगा. अगले जन्म में अंधन पैदा होंगे सुपरस्टिशस. बहुत है ना डेथ के कितनी देर बाद तक आंखें. जिंदा रहती है चार से छ घंटे में निकालना. होता है. और उसमें आपको कुछ मेजर नहीं करना आपको. सिर्फ एक आई बैंक को कॉल करना है आई बैंक.
हर शहर में है बड़े-बड़े हॉस्पिटल्स में. आपको उनको कॉल करो आई बैंक वाली टीम आएगी. आंखों को निकाल के चली जाएगी जब आंखों को. निकालते हैं तो उसे शक्ल खराब नहीं होती. क्योंकि हम अपनी लिट्स को बंद कर देते हैं. उसमें एक टांका मार देते हैं तो सामने से. दिखने में बिल्कुल नॉर्मल लगता है इंसान. ऐसा लगता है नहीं कि किसने आंखों का दान. करा है बट फिर भी लोग नहीं करते बिकॉज. हमारी कंट्री में सुपरस्टिशस बहुत है सोच. ना वो है आपने बहुत अच्छा बहुत अच्छा. मैसेज ये दिया मुझे लगता है कि ये एक सबसे. स्ट्रंग मैसेज है जो नो दिस इ रिली. इंपोर्टेंट और इसी को इसी मैसेज को परकलेट. करने के लिए हम हर साल 15 दिन की.
एक्टिविटीज करते हैं आई डॉक्टर्स मिलके. जहां पर हम लोगों को अवेयर करते हैं कि. इनका दान करना बहुत जरूरी है थैंक यू. डॉक्टर राहिल आपसे बात करके अच्छा लगा एंड. आई एम शर कि बहुत सारे मिसकनसेप्शन जो. होंगे वो लोगों के दूर हो जाएंगे और हम भी. ये अपील करेंगे आपसे कि आप भी अपने घर में. बड़े बूढ़ों को समझाएं कि जब दुनिया से. जाए तो किसी की आंखों को रोशन करके जाए. अब्सोल्युटली थैंक यू सो मच लवली टॉक थ यू. थैंक यू.
