Unplugged ft. Prashant Kishor | Bihar | Jan Suraaj | Tejashwi Yadav| Nitish Kumar| Narendra Modi|
प्रशांत किशोर जी अगर सिंगल मेजॉरिटी नहीं. बना पाए तो क्या वह भी अपने बच्चों को कसम. खाते हैं कि मैं भी इन दोनों से नहीं जुडू. मेरे बच्चे तो नहीं मेरा एक बच्चा है मेरा. एक ही बेटा है और मैं आपको बता रहा हूं कि. सवाल ही नहीं पैदा होता है यह तो बात कर. रही ना आपने इसमें बच्चों को क्यों नहीं. लाया आप दुनिया के बच्चे को बता रहे हैं. कि आप अपने बच्चों को आख देखिए आप भी अपने. बच्चे को दिमाग में रखिए और आप कहिए कि. मैं भी कह रहा हूं कि मैं अपने बच्चे को. दिमाग में र कह रहा हूं कि मैं बीजेपी. कांग्रेस जेडीयू आरजेडी से नहीं जुडा भाई. मेरे हम उसको आप जैसे ही मैं कहूंगा आप.
कहोगे ये तो अरविंद केजरीवाल ने भी कहा था. बच्चों की कसम है ना बीजेपी से गठबंधन. करेंगे ना कांग्रेस से गठबंधन करेंगे आपने. कहा कि देखो लालू जी को यादव समाज का नहीं. फिक्र है अपना लड़का बनवा दिए तुम्हारा. लड़का थोड़ी ना बना सबसे आप ऐसे पूछते हैं. लालू जी इतना अच्छा बाप है लड़का नौवा. नहीं पास है लेकिन चाहते हैं कि बिहार का. राजा बने लोग पूछते हैं कि प्रशांत जी जीत. करर आ गए तो कौन मुख्यमंत्री बनेगा और जात. पात तो वो आप पर भी आरोप लगा रहे हैं कि. आपने जभी एक बड़ा कार्यक्रम किया उसमें.
आपने कह दिया कि जो हमारा अध्यक्ष होगा वो. इस जाति से आ सकता है आज बिहार की जो मैं. बड़ी समस्या देखता हूं लड़का पलायन करना. पड़ता छोटे-छोटे पैसों के लिए दिल्ली में. काम कर रहा है स्वास्थ्य सुविधाएं बड़ी. बदहाल है स्कूल कॉलेजेस उस हिसाब से नहीं. है सब कुछ बदहाल है अब यह कैसे बदल जाएगा. आपकी सरकार मान लीजिए बन भी गई जैसे फिर. मैं केजरीवाल जी को लाऊंगा बिहार में. पूंजी की उपलब्धता को ठीक कर दिया जाए तो. बहुत बड़े पैमाने पर डिस्ट्रेस माइग्रेशन. को रिवर्स किया जा सकता है यह बात आप. नीतीश जी को क्यों नहीं समझा पाए अब जनता. पूछती है कि स्वराज में टिकट पाने का क्या.
आधार होगा बहुत सारे यूट्यूब थे जो मुझसे. कहे कि प्रशांत जी ने कहा था कि सारे. [संगीत].
पैसा छोड़ दीजिए अगर मोदी जी ने बिहार के. विकास के लिए एक बैठक किया हो तो हम यह. पूरा अभियान वापस ले लेंगे मोदी जी का. नीतीश कुमार का ही झंडा लेकर घूमेंगे 19. में तो हम नहीं आए थे तब तो मोदी जी. प्रधानमंत्री थे नहीं लार्जर देन लाइफ तो. आप बना दिए ठीक है भाई हो गया मान लीजिए. हमसे गलती हो गई तो प्रचित भी हम ही कर. रहे हैं फिर नीतीश जी को बनवा दिए धूल हम. ही रहे नीतीश जी को फिर बनवा दिया एक. मुस्लिम अपीज मेंट की बात चल रही है. मुसलमान सिर्फ भाजपा के डर से वोट देता है. और यही बात मैं मुसलमानों को कह रहा हूं. उन्हे इस बात का भी डर है कि प्रशांत.
किशोर मुसलमानों से बात कर रहे हैं कहीं. वोट कटुआ ना बन जाए वो ये बात आप अपनी जात. वालों को क्यों नहीं समझाते सवर्णों को जो. बीजेपी का वोटर है मुसलमानों के बीच में. जाकर मैं मोदी जी की क्या चर्चा करूंगा वो. तो वैसे ही उनकी बात नहीं सुनना चाह हो. सकता है प्रशांत किशोर वही काम कर दे जो. काम चिराग पासवान ने पिछली बार कर दिया था. महिलाओं की भागीदारी के बारे में आपकी. पार्टी में क्या सीन है जन स्वराज की. सरकार बनी 15 मिनट में शरा बंदी हटाकर. फेंक देंगे लोग कह रहे हैं कि भैया इसे तो. महिला नाराज हो जाए कि मैंने होता है होने. दो चुनाव लड़ने के लिए पैसा भी चाहिए आदमी. पूछ रहा है कि भैया इ पैसा आएगा कहां से. पैसा आया कहां से बीजेपी कांग्रेस टीएमसी.
इनके जो जुड़े हुए इंडस्ट्रियलिस्ट हैं. उनसे ही आप पैसा ले इंडस्ट्रियलिस्ट हो. बिजनेसमैन हो छोटे हो नेता भी हो बहुत लोग. दे रहे हैं पैसा बहुत लोग दे रहे हैं पैसा. दूसरी पार्टी के भी दे रहे हैं अब लोगों. के मन में सवाल ये है कि जो आदमी पैसा दे. रहा है कुछ उम्मीद तो वो भी कर रहा होगा. प्रशांत किशोर जी मोदी जी के साथ रहे. अरविंद केजरीवाल स्टालिन या ममता बनर्जी. बिल्कुल कंट्रास्ट लोग हैं तो आप क्या देख. के चुनते थे पैसा देख के चुनते थे योगी. आदित्यनाथ और अमित शाह में बीजेपी का. फ्यूचर कौन है मैं इतना जानता हूं भाजपा.
का लीडर जो भी होगा वो नरेंद्र मोदी से. ज्यादा हार्डलाइनर होगा अभी जातिगत जनगणना. की बात चल रही है तो जातिगत जनगणना के. पक्ष में है लेकिन मैजिक नहीं हो ये मैजिक. नहीं है और चुनावी फायदे के लिए जो लोग ये. बात कह रहे हैं वो देश को गुमराह कर रहे. हैं भ आप खुद 60 वर्ष सरकार में थे बिहार. को ज्यादा नुकसान किसने पहुंचाया नितीश जी. ने या लालू तेजस्वी परिवार ज्यादा. डेमोक्रेटिक कौन है नरेंद्र मोदी या ममता. बनर्जी अब लेंस लगाकर देखना पड़ेगा थर्ड. एंपायर को भेज के तो अंदर से देखें ना. बिहारियों के आन बान का सवाल है और पहली.
बार हम लोग यह दिखाएंगे कि भैया बिहार में. सारे लोग अनपढ़ नहीं है जो गंजी के शर्ट. के ऊपर गंजी पहन ले वही नेता बिहार का. नहीं है अबकी बार प्रशांत किशोर की सरकार. अगर 130 40 सीट आई तो मैं उसको अपनी बहुत. बड़ी हार मान अर्श पर या फर्स पर बीच में. नहीं. म बिहार में एक नारा चला था कि बिहार में. बहार है क्योंकि नीतीश कुमार है हम लगा कि.
जब वक्त बदला तो थोड़ा सा नारा बदल देते. हैं बिहार में बदलाव का शोर है नाम उसके. पीछे प्रशांत किशोर है. धन्यवाद छपवा भी सकते हैं चाहे तो आप. कॉपीराइट लगा दोगे आप कैसे सर आप बहुत. बढ़िया चल रहा है मजा आ रहा है बड इन द. बुस बट यस अलाइव एंड किकिंग लोग कह रहे. हैं कि कई पागल होते हैं जिनको सुकून नहीं. चाहिए होता है अच्छा खासा आपने मोदी जी को. जिताया अमरिंदर सिंह को जिताया जगनमोहन.
रेड्डी केजरीवाल स्टालिन ममता बनर्जी लोग. क फिर भी मन नहीं भरा नहीं देखो कोई किसी. को जिता तो नहीं सकता है वी आर हाईली ओवर. रेटेड गाइ वन वी आई यूज टू वर्क इन दैट. डोमेन तब मैं ये कहता था कि हम लोग बहुत. ओवर रेटेड है मीडिया को कोई चाहिए टेंज बल. जिसको आप क्रेडिट दे सके जिसको आप गाली दे. सके हम लोग एट बेस्ट ऑन द मार्जिन यू कैन. कंट्रीब्यूट. सम सम थिंग्स टू ब्रिंग एफिशिएंसी एंड मेक. सिस्टम अ बिट मोर.
इफेक्टिव लोग जीतते तो नेता ही है जिता. उसका कार्यकर्ता है वोट जनता देती है हम. लोग जैसे उसम थोड़ा बहुत योगदान करते हैं. लेकिन 10 साल वह काम मैंने किया करीब आ 10. 10 स्टेट्स में. जीतने के बाद ऐसा लगा कि अब इसमें कुछ नया. करने को नहीं है और मैं अपना जीवन 10 साल. के बकेट्स में जीता हूं पहले 10 साल. संयुक्त रा संघ में थे ज अच्छी खासी वहां. पर जगह ब बन गई हम तो उसको छोड़कर आ गए और.
जो काम करने की किया उसको लोग चुनावी. प्रबंधन रणनीतिकार वगैरह कहते हैं ब दैट. डोमेन नेवर एक्जिस्टेड इन इंडिया हम जब. मैं छोड़कर आया तो मेरे पिताजी इतने नाराज. हुए कई महीनों तक बात नहीं किया मेरे मां. को उस समय कहते थे लड़का पागल हो गया. अच्छी खासा यूएन का नौकरी छोड़ के पता. नहीं क्या कर रहा है लेकिन धीरे-धीरे ऊपर. वाले की कृपा से थोड़ी जगह बन गई और काम. भी किया सफलता भी मिली फिर जब लगा कि. सफलता मिल गई तो फिर वहां से छोड़कर नई.
यात्रा शुरू करनी पड़ी 2015 में फिर नितीश. जी के साथ लगे फिर पंजाब गए फिर आंध्र. प्रदेश गए कई राज्यों में गए जब लोगों को. लगा कि बंगाल जीत गया आप तो एकदम शिखर पर. पहुंच गए तो मुझे लगा कि अब यह समय है सही. छोड़ने का आपको डोमेन तब छोड़ना चाहिए जब. आप उसके टॉप पर है नहीं तो इसी में एक. सवाल आता है सर क्योंकि आज अधिकतर सवाल. हमने जनता से लिए आपकी पार्टी में भी जन. है और हमने सारा सवाल भी जनता से लिया है. पार्टी तो मेरी नहीं है.
है शुरुआत हो रही है उसकी अब तो कई मीटिंग. हो रही है अब जनता ये कहती है कि प्रशांत. जी का एक जगह मन नहीं लगता यूनाइटेड नेशन. से लेकर राहुल गांधी के लिए स्वास्थ में. काम करना कभी रावड़ी जी के लिए करना फिर. मोदी जी के लिए कैंपेन करना लेकिन वो छटक. अलग-अलग जाते रहे मोदी जी के पास गए वहां. से अमरेंद्र चले गए जगनमोहन रेड्डी चले गए. केजरीवाल चले गए स्टालिन चले गए ममता वाला. पीक था फिर भी मन नहीं माना संतुष्ट नहीं. होते तो अब जब किंग मेकर से किंग की तरफ. ख्वाहिश बनी है नहीं किंग की ख्वाहिश नहीं. बनी है लेकिन जहां तक मेरे अपने कैरेक्टर.
का सवाल है यू कुड से कि. मतलब स्टेबिलिटी स्कर्स मी जो मेरी टाइप. ऑफ पर्सनालिटी है ना जब मेरी लाइफ स्टेबल. होने लगती है तो मुझे बड़ा घबराहट सी होती. है तो मुझे लगता है यार ये तो अब जीत गया. अब तो कुछ यहां पर चैलेंजिंग है नहीं तो. अब कुछ नया चैलेंजिंग चीज ढूंढे तो चुनाव. में नेताओं को दलों को मदद करके जो सफलता. मिली तो मुझे लगा भाई अब तो सारे जितने. नाम आपने गिनाए करीब-करीब हर तरह से हर.
इलाके में काम करके देख लिया अब क्या करें. जो इससे ज्यादा चैलेंजिंग है तो साल भर. सोचा. समझा चर्चा करी दिमाग लगाया दो चीज दिमाग. में आई एक तो अगर कांग्रेस को फिर से खड़ा. कर दिया जाए पुरानी पुरानी कांग्रेस को तो. एक बहुत बड़ा राजनीतिक चैलेंज मुझे लगता. था अभी भी लगता है जहां पर आपने कोशिश भी. की नहीं और इसलिए नहीं मैं आपको बता रहा. हूं कोशिश क्यों की क्योंकि 2 मई 2021 को. जब बंगाल और तमिलनाडु का रिजल्ट आया मैंने. कि अब ये काम नहीं करेंगे हम तो उसके बाद.
एक साल तक मैंने अपने लिए निकाला कि भ. मुझे जीवन में नया क्या करना है हम तो एक. मेरे दिमाग में था कि कांग्रेस को अगर. पुरानी कांग्रेस को जिंदा कर दिया जाए. इसीलिए उस पूरे प्रेजेंटेशन का उस पूरे. डिस्कशन का नाम ही था रिइनकारनेशन ऑफ. कांग्रेस इट वाज नॉट स्ट्रेंथ निंग. कांग्रेस मेकिंग कांग्रेस विन एंड ल दोस. रिइनकारनेशन ऑफ कांग्रेस आत्मा बची रहे. शरीर बिल्कुल नया होना चाहिए वो जब बात.
कई वजहों से नहीं बनी कुछ उनकी वजह से कुछ. मेरी वजह से तो फिर मुझे दूसरा जो विकल्प. लगा कि अपने राज्य बिहार चलते हैं और काम. वही करें जो मुझे आता है लेकिन इस बार दल. और नेताओं को ना सला दे इस बार चल के जनता. को सीधे ही सलाह देते हैं लोगों को लग रहा. है कि हम कुछ यहां बहुत अलग कर रहे हैं हम. बिल्कुल अलग नहीं कर रहे जो लोग ये कह रहे. तो इनको तो पहले चुनाव का ये रणनीतिकार थे. दलों को नेताओं को सलाह देते थे तब जीतते. थे इस बार कैसे जीतेंगे उनको यह समझ में.
नहीं आ रहा कि हम काम तो वही कर रहे हैं. पहले मैं दलों को कैसे संगठन बनाना है. संगठन को कैसे मजबूत करना है यह बताते थे. यह बताते थे कि आपका नारा क्या हो आपका. कार्यक्रम क्या हो आप कैंडिडेट का. सिलेक्शन कैसे करें आप चुनाव का प्रबंधन. प्रचार कैसे करें मैं वही काम बिहार की. जनता के लिए कर रहा हूं नेता और दल को. छोड़कर मैं गांव-गांव जाकर लोगों को बता. रहा हूं कि भाई तुम कह रहे हो कि 3035 साल. से देश के सबसे गरीब और पिछड़े राज्य हो. और सामान्य जनता का आकलन यह है कि कहते.
हमारे पास विकल्प नहीं है तो आप विकल्प. बनाओ कहता है सर हम बनाएंगे कैसे हमारी तो. राजनीतिक समझ नहीं है हमारे पास तो संसाधन. नहीं है व्यवस्था नहीं है चुनाव कैसे. लड़ेंगे तो बड़े-बड़े दल है नेता है तो. मैं उनको मूलभूत क्या कह रहा हूं कि तुम. साथ में. आओ तुम दल बनाओ मैं तुम्हारी मदद करता हूं. साधन की चिंता मत करो चुनाव की चिंता मत. करो पैसे की चिंता मत करो ये सारा जो. व्यवस्था है यह प्रशांत किशोर पर छोड़ दो. और तुम अपने और अपने बच्चों के के लिए नया. विकल्प बनाओ ताकि बिहार की का जो ये गरीबी.
है बिहार की का जो पिछड़ापन है उसको दूर. किया जा सके अब ये जो देखिए मैं दो वर्ष. से यह गांव-गांव घूमकर यही काम कर रहा हूं. लोगों ने कहा पहले अरे इनके घूमने से क्या. होता है लेकिन धीरे धीरे धीरे धीरे का मैं. 10 लोगों के साथ भी पैदल चला हूं ऐसे. जगहों पर भी गया हूं जहां पर कोई नहीं. पहुंचा है 10 10 20 20 साल. से सब कुछ दाव पर लगाया है लोगों ने कहा. रे बिजनेसमैन आदमी है भाग जाएंगे न कहेंगे. आज स्थिति यह है कि बिहार में इसी जातियों.
के ब जातियों में बटे हुए बिहार में. पिछड़े गरीब अनपढ़ बिहार में एक करोड़. लोग इसको मार्क कीजिए एक करोड़ लोग साथ. में आकर एक दल बना रहे हैं जो 2 अक्टूबर. को बनने जा रहा है और वह दल प्रशांत किशोर. नहीं बना रहे हैं यह पहली बार लोकतंत्र. मतलब देश के इतिहास में पहली घटना होगी हम. जिसमें दल बनने के बाद नहीं हम दल बनाने.
के दिन एक करोड़ लोग आकर दल बना रहे हैं. तो 2 अक्टूबर को जब दल बनेगा तो इस दल को. बनाने वालों की संख्या एक करोड़ होगी. बिहार का कोई प्रखंड डिस्ट्रिक्ट पंचायत. नहीं होगा जहां इसके पदाधिकारी नहीं होंगे. जहां इसका संगठन नहीं होगा जस्ट टू गिव यू. कांटेस्ट जो यहां पर 25 साल 30 साल से दल. हैं भाजपा वाले अपने संगठन का बड़ा महिमा. मंडन करते हैं उनका जो कोटेड नंबर है. बिहार में वो करीब 66 लाख का है 30 साल.
पुराना दल देश में इतना बड़ा दल उसके. बिहार में मेंबर है 66 लाख उनका दावा है. सही गलत क्या उसको छोड़ दीजिए यहां एक ऐसी. व्यवस्था बन रही है जिसको एक करोड़ लोग. मिलकर बना रहे हैं हम और विडंबना देखिए. भाजपा यहां रूलिंग पार्टी है जदयू रूलिंग. पार्टी है आरजेडी मुख्य विपक्ष है और वो. दल चिट्ठी निकाल रहे हैं कि भाई अपना दल. मत छोड़ो जन स्वराज मत जाओ पहली बार. रूलिंग पार्टी के लीडर छोड़कर अपना दल.
छोड़कर एक ऐसी व्यवस्था अभियान का हिस्सा. बन रहे हैं जो अभी दल भी नहीं है ठीक तो. यह दिखाता है कि नीचे इसका कितना असर है. और लोग कितना डेस्प्रिंग. नहीं करूंगा क्योंकि मेरे अपने पॉडकास्ट. में कम से कम सात आठ आदमी आपकी तारीफ कर. चुके हैं बीती शाम में कुमार विश्वास के. साथ बैठा था वो भी यही बात कह रहे थे. लेकिन अब मैं कुमार विश्वास की बात से. सवाल उठा कता हूं उन्होंने भी यह सवाल.
उठाया और यह सवाल मेरे जैसे तमाम लोगों के. मन में भी आता है कि जो बात आप कह रहे हो. यह सारी बातें हमने 2012 में दिल्ली में. देखी थी ऐसे ही सेम घटनाक्रम हो रहा था. बीजेपी कांग्रेस थी उसमें एक नई पार्टी का. उदय हुआ आंदोलन से आम आदमी पार्टी थी अब. लोगों के मन में अभी जो सवाल है वह यह है. कि क्या प्रशांत किशोर अरविंद केजरीवाल. बनने जा रहे हैं उनकी पार्टी आम आदमी. पार्टी जैसी तो नहीं हो जाएगी क्योंकि जो. बातें आप कह रहे हो जो होप आप दे रहे हो. जो तस्वीर आप दिखा रहे हो यही एगजैक्टली. सारी कहानी 2012 में हमने देखी थी और अब.
बड़ा कई बार लोगों को तकलीफ होती है कि. कोई जेल जा रहा है कोई कुछ हो रहा है कई. लोगों के मन में डाउट है तो आप पर क्यों. भरोसा करें बिल्कुल आपने कंपैरिजन जो किया. है या जो लोग कर रहे हैं उनको जन स्वराज. अभियान की मूल बातों की कोई समझ नहीं है. हम आपने अपने शब्द में आपके शब्दों में. कहा कि आम आदमी पार्टी आंदोलन से निकली. हुई पार्टी हम प्रशांत किशोर का आंदोलनों. में कोई यकीन नहीं हम मेरे आप जितने. इंटरव्यू है देख लीजिए मैं जितने संवाद.
किया उसमें देख लीजिए मेरा आंदोलनों में. कोई यकीन ही नहीं है क्यों नहीं है मानव. सभ्यता के इतिहास को अगर आप पढ़ेंगे हम. सिर्फ बिहार में देश में भारत में नहीं. पूरे दुनिया में मानव सभ्यता के इतिहास को. अगर आप पढ़ें हम तो फ्रांस की क्रांति को. अगर हम लोग अपवाद के तौर पर हटा दें हम तो. आज तक ऐसा हुआ ही नहीं कि किसी आंदोलन से. समाज का सृजन हुआ हो नए समाज का सृजन हुआ. हो हम आंदोलन जो है. वह एक ऐसा तेज हथियार जैसा है जिससे आप.
लोगों को सत्ता से हटा सकते हैं बड़े से. बड़े सल्तनत को उखाड़ सकते हैं उससे नए. समाज का सृजन नहीं किया जा सकता है अगर. आपके पास तेज हथियार है आप बड़े से बड़े. वृक्ष को काट सकते हैं लेकिन पौधे को. वृक्ष बनाने के लिए कोई हथियार काम आने. वाला नहीं है वो तो उसकी एक अपना सतत. ग्रोथ की सृजन की का काल है उसकी अपनी एक. प्रक्रिया है तो जन स्वराज अभियान में दो. वर्ष में हमने कोई धरना नहीं दिया कोई.
प्रदर्शन नहीं किया कोई रेल रोको चक्का. बंद जाम करो ऐसा कहा नहीं किसी को हटाने. की बात नहीं कही हमने ये भी नहीं कहा कि. वोट किसको दो हम हर व्यक्त हर मीटिंग में. जाकर ये कह रहे हैं कि वोट जिसको मन है. उसको दो हम लेकिन एक संकल्प लो कि अगली. बार वोट नेता को देखकर नहीं दोगे जाति को. देखकर नहीं दोगे धर्म को देखकर नहीं दोगे. 5 किलो अनाज के लिए नहीं दोगे मंदिर. मस्जिद के लिए नहीं दोगे अगली बार वोट.
अपने बच्चों के पढ़ाई और रोजगार के लिए. दोगे ये एक मात्र एक ही लक्ष्य एक ही. मैसेज कभी-कभी जो हमारे साथ लोग चलते हैं. वो इतना बोर हो जाते हैं क् यही भाषण आज. दो वर्ष से गांव गांव जाकर दे रहा आज नहीं. बोर होंगे सर आज हम आपके लिए इन भाषण बहुत. सारे आज मैं आपके. लिए फिर मैं आ रहा हूं आम आदमी पार्टी. वाले और इन सारे बातों तो मैंने आम आदमी. पार्टी के तरह कभी यह नहीं कहा कि जन. स्वराज या प्रशांत किशोर आपको सुधार देंगे.
मैं यह कह रहा हूं कि भैया एक नहीं 10. प्रशांत किशोर आएंगे तब भी तुम नहीं. सुधरोगे तुमको कोई नहीं सुधार सकता है भाई. एक आपके सौरभ जी आए सौरभ द्विवेदी जी है. उन्होंने इंटरव्यू मेरा किया एक दिन मेरे. साथ पदयात्रा में चले तो उनका पहला सवाल. था कि प्रशांत जी इस यात्रा को हम लोग. लताड़ यात्रा डाट यात्रा कहना चाहते हैं. क्योंकि हम यह नहीं कह रहे कि आप जनता. जनार्दन है बिहार के महान जनता हमको वोट.
दे दो हम आपको सुधार देंगे ठीक कर देंगे. जन लोकपाल ला देंगे भ्रष्टाचार दूर कर. देंगे हम कह रहे हैं भाई जब तक तुम नहीं. जगो ग तो प्रशांत किशोर आए जन सुराज आ. सुधरने वाला नहीं ये जो आपका भाषण आप बता. रहे हैं सुना है मैं आम आदमी पार्टी से. बिल्कुल उलट बात कर रहा. हं दूसरी बात मैंने पहले दिन से ये कहा है. जन स्वराज जब दल बनेगा तो वो प्रशांत. किशोर का किसी व्यक्ति किसी जाति किसी. परिवार का दल नहीं होगा और दो अक्टूबर को. जब लोगों ने क्या कहा हम क रहे हैं.
देखिएगा ना अपने बनेंगे हम 2 अक्टूबर को. आप देखेंगे हम कि इसी बिहार की जनता के. द्वारा जो लोग मिलकर दल बना रहे हैं वह. लोग साथ में आकर नया नेतृत्व चुनेंगे और. वह नेतृत्व लोगों को लगेगा कि अच्छा यह भी. आदमी बिहार में था ऐसा व्यक्ति भी बिहार. में था जो राजनीति कर सकता है या राजनीति. में आ सकता है यह इस अभियान की ताकत है और. मेरी भूमिका 2 अक्टूबर के बाद जब यह दल बन. जाए तो भी बदलने वाली नहीं है मैं 2.
अक्टूबर के बाद भी गांव-गांव में पैदल जो. पहले चल रहा था वैसे ही चलूंगा हम तब तक. चलूंगा जब तक कि बिहार में व्यवस्था बदल. ना जाए दो वर्ष लगे पाच वर्ष लगे 10 वर्ष. लगे मैंने यह संकल्प लिया हुआ है इसको. छोडूंगा नहीं ठीक बात कोई घबराहट नहीं है. हम मैं चलते चलते नहीं थका हूं लोग थक गए. भाई कितना दिन चलिए दो वर्ष से चल ही रहे. हैं मैं दो वर्ष में 60 प्र बिहार ही चल. पाया हूं अभी 40 प्र बिहार बाकी है और आप.
देख रहे हैं कि कितनी बड़े संख्या में लोग. लोग अच्छी बात जन स्वराज के लिए कह रहे. हैं इस प्रयास के लिए कर रहे हैं क्यों कह. रहे हैं क्योंकि बिहार में जाकर आप सर्वे. करके देख लीजिए एक चीज आप पाएंगे कि दो. तिहाई से ज्यादा लोग यह कह रहे हैं कि. बिहार में बदलाव चाहिए वो चाहे आरजेडी का. समर्थक है भाजपा का समर्थक है नीतीश का. समर्थक कहता है भैया कुछ भी हो बदलाव होना. चाहिए इसका मतलब ये नहीं कि वो जन सुराज. को चाहता है मैं ये भी कह रहा हूं लेकिन.
बदलाव होना चाहिए इस पर तो करीब-करीब आम. सहमति बिहार में है अब जन सुराज या जो भी. उस बदलाव का वाहक बनना चाहता है या उसका. अगुआ बनना चाहता है यह हम पर उन पर. जिम्मेवारी है कि हम अपने आचार से विचार. से व्यवहार से जनता को यह बताएं कि जब तुम. बदलाव के लिए किसी को चुन रहे हो तो हम या. हमारा फॉर्मेशन या हमारा दल सबसे बेहतर. विकल्प है ये जिम्मेवारी जो लोग विकल्प दे. रहे हैं उन पर है लेकिन जनता के मन में.
बिल्कुल क्लेरिटी है उसको बदलाव चाहिए वो. जनता जिसकी आप बात कर रहे उसी सवाल लेके. हम आए हैं बहुत सारा सवाल आए है इसलिए आप. थोड़ा सा हमको ही मौका दीजिए आज कि हम भी. कुछ कुछ पूछ सक अब एक सवाल जनता ये पूछती. है कि आपने शुरू से बात बिल्कुल सही बात. है आपने कहा कि देखो लालू जी को यादव समाज. का नहीं फिक्र है अपना लड़का बनवा दिए. तुम्हारा लड़का थोड़ी ना बना सबसे आप ऐसे. पूछते हैं लोग पूछते हैं कि प्रशांत जी. जीतकर आ गए तो कौन मुख्यमंत्री बनेगा. देखिए और जात पात तो आप पर भी आरोप लगा. रहे कि आपने जभी एक बड़ा कार्यक्रम किया.
उसमें आपने कह दिया कि जो हमारा अध्यक्ष. होगा वो इस जाति से आ सकता है या बैकवर्ड. समाज से आएगा जात आपने नहीं उस आप बिल्कुल. सुनिए उस बात को जन स्वराज में हम लोग यह. कह रहे हैं कि जिस समाज की जितनी संख्या. है उसको जन स्वराज बनाने वालों में जन. स्वराज के पदाधिकारियों में इसके नेतृत्व. में इससे टिकट पाने वालों में और इससे. मनोनीत पदों पर जाने वाले सभी पांचों. फॉर्मेशन में जो समाज के जिस समाज की.
जितनी संख्या उसको भागीदारी मिलेगी लेकिन. उसमें एक आमूल चूल पर फर्क है जो लोग. दूसरे कह रहे हैं यह बात बताइए हम लोग यह. कह रहे हैं जन स्वराज में हमारा यह मानना. है कि हर समाज में काबिल व्यक्ति है हम और. हर काबिल आदमी किसी ना किसी जाति या समाज. का है हम तो अगर मान लीजिए कि जन सुराज. में 20 लोग नेतृत्व के लिए चुने जाएंगे हम. तो 20 में किस समाज के कितने लोग होंगे जो. पहला 20 चुना जाएगा वो सिर्फ काबिलियत के. आधार पर चुना जाएगा लेकिन मान लीजिए कि हम.
अनुसूचित जाति समाज के लोगों को भागीदारी. मिलनी है तो अनुसूचित जाति समाज के 100. लोग आज काबिल लोग हैं तो कितने लोग 20 में. आएंगे इसके लिए कहा गया कि अगर 18 पर. अनुसूचित जाति समाज है बिहार में तो 20. में 18 मतलब चार लोग जरूर उन काबिल दलित. समाज के लोगों में से होंगे जो उस समाज का. रिप्रेजेंटेशन करेंगे इसमें फर्क है वो जो. दलित समाज को रिप्रेजेंट करेगा नेतृत्व.
में वो इसलिए नहीं करेगा कि वो दलित है वो. इसलिए करेगा कि वो सबसे काबिल व्यक्ति है. जो दलित भी है इसमें फर्क है जो दूसरे लोग. कहते हैं कि जिसकी जितनी जाति है उसको. उतना शेर दे देंगे वो हम लोग ही कह रहे. हैं हम लोग कह रहे हैं कि जब इतने काबिल. लोग आ गए तो उन काबिल लोगों को जब आप मौका. देंगे तो दो चुनाव तो 23 लोग ही लड़ेंगे. तो आप और मान लीजिए यहां अति पिछड़ा समाज. है वो अकेले अति पिछड़ा समाज 5 करोड़ का. है तो कितना उसको मिलना चाहिए आपकी बात.
ठीक है मेरे मन में सवाल ये आ रहा है. कि मेरा नाम शुभंकर मिश्रा है जी या कोई. अरुण पांडे हो या कोई सिंह हो या कोई भी. व्यक्ति हो मैं या कोई रमजान खान या कोई. भी एक्स वाई जड व्यक्ति हो आपने कहा कि. अति पिछड़ा समाज से जो मैंने आपको. स्टेटमेंट एक वायरल हो रहा था कि उससे. हमारा अध्यक्ष चुना जाएगा या आप लोग बताइए. तीन दो तीन ऑप्शन मैं समझा दूं आपको ये. हमने ये नहीं कहा कि अति पिछड़ा से होगा. कि दलित से होगा आप पहले उसके पीछे सोच को. समझिए हम लोगों ने कहा कि समाज में पांच. वर्ग में आप लोगों को देख सकते हैं हम एक.
जो सामान्य वर्ग है हम दूसरा ओबीसी समाज. है तीसरा ईबी स समाज है चौथा अनुसूचित. जाति समाज है और पांचवा मुस्लिम समाज है. करीब-करीब ये पांच बकेट हैं जो कि सामाजिक. राजनीतिक शैक्षणिक स्तर पर अलग-अलग बकेट. में रखे जा सकते हैं ठीक बात हम लोगों ने. कहा कि भाई आपकी संख्या और काबिलियत के. हिसाब से भागीदारी तो मिल गई लेकिन. नेतृत्व कौन सबसे पहले करेगा उसका ऑर्डर. कैसे तय किया कि पह पहला अध्यक्ष पहली बार.
नेतृत्व इसका कौन करेगा दूसरी बार कौन. करेगा तीसरी बार कौन करेगा तो उसके लिए हम. लोगों ने जो फार्मूला दिया है कि अगर आप. पिता है और आपके चार बच्चे हैं चार बच्चे. काबिल है उसमें एक बच्चा थोड़ा कमजोर है. आप संपत्ति का बंटवारा करते हैं चारों. बच्चों को बराबर ही करेंगे लेकिन जो बच्चा. एक कमजोर है उसकी चिंता आप थोड़ा ज्यादा. करोगे कि नहीं पहले हमारे रहते हुए इसको. पहले दे देता हूं तो मैंने जो सभा में. पूछा कि आप बताओ कि सामाजिक राजनीतिक.
शैक्षणिक आर्थिक स्तर पर सबसे पीछे कौन है. इन पांचों वर्गों में लोगों ने कहा. अनुसूचित जाति समाज है हम तो उसको पहला हक. मिलना चाहिए वह पहला इस दल का नेतृत्व उस. समाज का आदमी करेगा दूसरा किसको मिलना. चाहिए लोगों ने कहा अ पिछड़ा समाज उसके. बाद आता है तो उसको मिल गया तीसरा लोगों. ने कहा मुसलमान है तो मुसलमान को मिल गया. कहावत सुन लीजिए सुन लीजिए जी जी सर फिर. सामान्य और ओबीसी वर्ग को मिला उसके बाद. जो सबसे यून बात समझिए जिस बिहार में.
दशकों से लोग जातियों के नाम पर लोगों को. लड़ाकू और चुनौती भी दे रहा हूं आप उस. वीडियो को देखिए जहां मैंने यह कार्यक्रम. किया है और मैंने फिर यह जब फार्मूला दिया. उसके बाद मैंने सवर्णों को और ओबीसी समाज. के लोगों को कहा कि बोलो यह आपको स्वीकार. है कि नहीं और आप सत प्रतिशत लोग खड़े. होकर कहे कि बिल्कुल यह फार्मूला हम लोग. को स्वीकार है 30 वर्ष से लोग क्या कह रहे.
हैं तुम आगे हो तुम सवर्ण हो तुम ओबीसी हो. तो जो पीछे है उसको कहता है तुम इसका लूट. लो इसका सु सुनिए जी जी जो दलित की सोकल. राजनीति करता है जो अति पिछड़ों की. राजनीति करता कहता है तुम्हारा हक ये मार. लिया है तुम इसके खिलाफ आंदोलन करो इससे. छीन हम लोग क्या कह रहे हैं हम लोग कह रहे. हैं कि तुम भाई आगे हो तो थोड़ा थम जाओ जो. भाई पीछे छूट गया है उसका हाथ पकड़ो उसको. ऊपर बढ़ाओ ये जिम्मेवारी तुम्हा. और समाज य मानने के लिए तैयार है मुझे.
किसी सवर्ण ने ओबीसी ने नहीं कहा उस पूरे. सभा में और 12 हज लोगों से य कंसल्टेशन. पब्लिक में कैमरे के सामने किया जा रहा है. दो हुआ है छ और बाकी है और लोगों ने क्या. कहा नहीं बिल्कुल य सही फार्मूला है. क्योंकि किसी को दलित है इसलिए नहीं बना. रहे इसलिए नहीं बना रहे कि व पिछड़ा है. सीधा फार्मूला है सामाजिक राजनीतिक. शैक्षणिक आर्थिक स्तर पर जो सबसे पीछे. उसको सबसे पहले मौका आपने सारी बात के. मेरे मन में तीन चार बातें आई क्योंकि.
मैंने आपको बहुत धैर्य सुना पहली बात आपने. कहा कि मेरे आम आदमी पार्टी में कनेक्शन. नहीं है एक कनेक्शन जो मुझे महसूस हुआ. सुनते हुए यह था अरविंद केजरीवाल भी कहते. थे कि हमने आपस में कंसल्ट कर लिया उसमें. कहा गया यह बात हो गई अक्सर यह स्टेटमेंट. उनसे भी हमने कई बार सुना है दूसरा अपीस. मेंट सर इसी को तो कहते हैं एक बड़े वर्ग. को यह बात ठीक है काबिलियत वाली बात है. लेकिन मान लीजिए कोई व्यक्ति बहुत काबिल. हो हो सकता है उसका नाम रमजान हो हो सकता. है शंकर पांडे नाम हो आपने बड़ी आबादी में. दे दिया तो यही तो बाकी पॉलिटिकल पार्टी.
भी करती जातिगत आधार पर से नहीं दिया आपने. ठीक कहा कोई शंकर पांडे बहुत काबिल हो. सकता है हो सकता है शायद बिहार का ज्यादा. भला कर देता एक मिनट सुनिए और कोई निरंजन. मेहता भी बहुत काबिल हो स कोई. अंसारी मोहम्मद अंसारी भी बहुत काबिल हो. सकते हैं लेकिन आप जब कोई व्यवस्था बना. रहे हैं तो आपको देखना है कि इन सारे. काबिल लोगों. में इनका प्रोपोर्शन क्या होना चाहिए आप. सिर्फ एक व्यक्ति को अगर वो संजय पांडे.
सबसे बड़े काबिल आदमी है तो सामान्य वर्ग. के लोग भी तो नेतृत्व करेंगे ना दो वर्ष. के बाद कर. लेंगे बट अभी इलेक्शन में यह करना चाहिए. ताकि वोट बैंक हम कोई फायदा इलेक्शन से. नहीं मतलब है इसका सर है इसका कोई इलेक्शन. से लेना देना नहीं है बट पॉलिटिकल पार्टी. सारी चीज इलेक्शन केलिए करती है सर इसका. ये चीज जन स्वराज के संविधान में लिखा जा. रहा है ये सिर्फ संविधान ये इलेक्शन की. बात नहीं है इसी ऑर्डर में यह बनेगा इसी. ऑर्डर में ये चलेगा यह प्रशांत किशोर का. डिक्टेशन नहीं है यह लोग जो बना रहे हैं.
वह मिलकर इसको तय कर रहे हैं आपने कहा कि. अरविंद केजरीवाल भी यही कहते थे आप मुझे. आप तो मीडिया में है हम वो वीडियो दिखाइए. जहां पर इस तरह के ओपन सर्वे हुए हैं आप. वो वीडियो दिखाइए जहां पर 5000 गांव में. कोई गया हो और वीडियो रिकॉर्डिंग के अंतर. तहत ये सारी चर्चा की गई है आप मुझे वो. वीडियो दिखाइए जहां हां लोगों ने कहा कि. अरविंद केजरीवाल होंगे और उसके बाद वो.
कहते थे कि. ह और समझ के जस्टिस करना हम वो एक बात है.
और जाति को समझकर जाति की राजनीति करना. दूसरी बात है हम जन स्वराज उन लोगों की. व्यवस्था है जो जाति को समझ रहे हैं हम और. जातियों से जुड़े हुए जो इंट्रीकेट मामले. हैं हम उनको साधने संभालने संयोजन का. प्रयास कर रहे हैं हम जातियों के का. इस्तेमाल करके एक दूसरे को लड़ा करर. राजनीतिक फायदा सा चलिए ठीक बात आपकी. मैंने ये भी बात मान ली अब इसके आगे एक. सवाल पूछता हूं. ये आपने अध्यक्ष बनवा दिया आपने कहा अक्ष.
नहीं हमने एक फॉर्मूला बनाया जिसके तहत. पार्टी को पहले कौन लीड करेगा वो वहां से. निकल कर आएगा अब आप गए जनता के बीच में जी. आपकी किस्मत अच्छी है आपका रिकॉर्ड अच्छा. है मैं रिकॉर्ड मान के कह रहा हूं आप जीत. गए हम अब पहले मुख्यमंत्री का भी तो. फार्मूला तय किया होगा आपने कुछ तो सोचा. होगा बिलकुल बिल्कुल हां तो क्या फर्मूला. तो जैसे 2 साल हमने जब चलना शुरू किया तो. लोगों ने कहा पार्टी कैसे बनेगा इसका. संविधान क्या होगा इसका नेता कैसे कैसे. बनेगा तो 2 साल गांव-गांव कंसल्ट करके यह. फार्मूला बनाया हम संविधान इसका लिखा जा.
रहा है. 1000 मीटिंग हुई है सिर्फ पार्टी का. संविधान लिखने के लिए लोग दल बनाते हैं. अगले दिन आपको मालूम भी नहीं है कि दल का. संविधान किसने लिखा है लोगों को मालूम है. भैया इन्होंने पार्टी बनाई है इसके नेता. होंगे इसके बाद इनके बेटा. होंगे हमने आपको बताया कि जब यह दल बनेगा. तो आपको पता चलेगा कि इस दल को कौन लोग. बना रहे हैं कौन इसका नेतृत्व करेगा इसका. संविधान क्या होगा इसकी प्राथमिकताएं क्या. होंगी अब जब यह दल बन जाएगा तो वो लोग.
बैठकर मार्च में अभी से बता देता हूं. मार्च में पब्लिक एजेंडा अपना पूरा विजन. डॉक्यूमेंट और बिहार के लिए क्या लोग. करेंगे उसकी घोषणा होगी और उसके बाद कौन. इस पार्टी का मुख्यमंत्री का चेहरा होगा. यह भी चुनाव से पहले बताएंगे अभी नहीं. बताएंगे नहीं अभी अभी नहीं बना नहीं अभी. पार्टी नहीं बनी लेकिन अध्यक्ष बता दे रहे. हैं अध्यक्ष का नाम नहीं बताया नाम नहीं. बताया कहां किस समाज समाज भी नहीं बताया. फार्मूला बताया और उस पर चर्चा करके लोग.
सुन इसी पर आ रहे हैं उसी तरीके से जब यह. दल बनेगा जब दल बना ही नहीं है तो हम कैसे. बता द कौन मुख्यमंत्री नहीं बना लेकिन अ. अभी दल नहीं बना लेकिन अध्यक्ष का. फार्मूला आ गया दो र्ष के बाद आया दो बर्ष. के प्रयास के बाद मैंने आपको क्या कहा दो. अक्टूबर के बाद जब यह दल बन जाए प्रशांत. किशोर के अलावा कोई और मुख्यमंत्री बन. सकता है बिल्कुल बन सकता है बिल्कुल बन. सकता है प्रशांत किशोर के मुख लोग ये मान. रहे कि अध्यक्ष आपने एक बड़े समाज से दिया. कि अध्यक्ष के नाम पर वोट आ जाएगा और उसके.
बाद प्रशांत जी मुख्यमंत्री बन आपको लगता. है कि अध्यक्ष के नाम पर बिहार जीता जा. सकता है सर यहां तो देश में राष्ट्रपति. लोग बनाते हैं जा देखकर ठीक वो ठीक बात है. लेकिन अगर आपको लगता है कि किसी एक समाज. के लोग को अध्यक्ष बना देने से बिहार जीता. जा सकता हैता माहौल माहौल तो बनाया स सर. बिल्कुल नहीं आप बिल्कुल ऐसा डिप्टी सीएम. बनता है सर प्रदेश आप देखिए दूसरे क्या कर. रहे हैं अगर हम उसी काम को करने के लिए आए. हैं तो जीवन का इतना सब दाव पर क्यों लगाए.
तब तो अच्छी खासी जिंदगी चल रही थ राजा. वाले जिंदगी होगी सर जी रहे थे अब नहीं. वहां किंग मेकर थे य किंग हो ग ना ना. उसमें ज्यादा सहूलियत में थे तो आप ही तो. कहे आपको स्टेबिलिटी नहीं चाहिए तो मैं. आपको बता रहा हूं तो आपको कैसे मालूम है. कि बिहार जीतने के बाद मैं स्टेबल होना. चाहूंगा तो फिर कुछ और करेंगे कुछ और करना. चले जाएंगे आपके आपके यहां आके घूमने. लगेंगे इसकी कोई गारंटी थोड़ी है आप दल. बनने दीजिए ठीक है और मैं बिल्कुल आपको. अभी से बता दे रहा हूं. में इस दल के पब्लिक प्रोग्राम की.
प्राथमिकताओं की घोषणा की जाएगी त उसके. साथ 10 साल का विजन डॉक्यूमेंट जारी किया. जाएगा और बिहार के सा इसको ध्यान से सुनिए. साज पंचायतों का अलग अलग प्रोग्राम बनाकर. कि हर पंचायत का उस जो जिन पंचायतों में. मैं पैदल गया हूं और जहां नहीं गया वहां. का भी साज पंचायतों का अगले 10 साल का. विकास का योजना जारी करेंगे आप उसको मार्च. से लेकर छ महीना पब्लिक के पास होगा देखने.
के लिए कि आपके पंचायत के लिए जन स्वराज. क्या कह रहा है फिर अब आपका इसका नेता कौन. बनेगा जब मार्च में दल बन गया अक्टूबर में. मार्च में पब्लिक के प्राथमिकताओं की. घोषणा हो गई जन स्वराज का विजन प्रोग्राम. लोगों को पता चल गया तो चुनाव से पहले जून. में जुलाई में सब लोग मिलकर तय करेंगे. उनको यह भी बताया जाएगा कि इसका चेहरा कौन. होगा और कौन लोग इसको आगे ली कर कह रहे वो. हम इजार करेंगे त उसके सवाल तब पूछेंगे अब. दूस सवाल पूछते हैं नीतीश जी मोदी जी से.
आखिरी बार कब मिले थे आप नीतीश जी से मैं. मिला था काफी दिन हो गए उनके यहां ऑफिशियल. रेजिडेंस प मिला था और अच्छी खासी बात हुई. ठीक आप नितीश जी मोदी जी से मोदी से तो. मिला नहीं लेकिन वो दोनों आपको बहुत सुनते. हैं नहीं मुझे बता रहा मैं बता रहा हूं. क्यों सुनते हैं क्योंकि प्रशांत किशोर जी. एक रैली में गए और कहे कि देखो भाई तुमने. मोदी जी को पुलवामा के नाम पर वोट दिया. काहे तुम्हारा विकास होगा नितीश जी को. तुमने इस नाम पर वोट दिया लालू जी को.
तुमने इस नाम पर वोट दिया अरे विकास चाहिए. तो फिर लड़का लोग की तरफ देखो मोदी जी ने. कहा इस बार बजट में सारा पैसा बिहार को दे. देते. हैं सवाल ये सर सवाल ये है कि अगर बिहार. का विकास करना है तो पैसा तो नीतीश कुमार. जी लिया जिनको आपने कहा कि आखिरी समय में. चल एकदम बिल्कुल रिटायरमेंट तरह चल रहा है. अगर जात पात देखना है तो हिंदू मुसलमान तो. हर बार हो ही जाता है फिर एमवाई फैक्टर आप. लोग आप ही लोग कहते हैं कि तेजस्वी जी की. पार्टी करती है तो जात के हिसाब से विकास. के हिसाब से कई पॉलिटिकल पार्टीज से जो.
क्लियर है कि भाई हमारे पास पैसा है. सेंट्रल पार्टी हम है 600 करोड़ हम दे रहे. हैं हमको सरकार में लाओगे तो आगे मिलेगा. हम प्रशांत किशोर को क् ठीक बात है आपने. मेरा पूरा भाषण शायद ध्यान से सुना नहीं. मोदी जी के हवाले. से पहली बात तो जो अभी बिहार को मिला है. बजट में जो थोड़ा बहुत पैसा और कितना. चाहिए सर मैं बता रहा हूं 2015 के चुनाव. में हम मोदी जी ने दिल्ली से नहीं बजट से. नहीं बजट में नहीं आरा में सभा में पूछा. हां और हाथ उठाकर बोला कितना चाहिए कितना.
चाहिए 600 दू 600 करोड़ दू कि 7 हज करोड़. दू 8 हज करोड़ दूं कि 90 हज करोड़ दू. बढ़ाते बढ़ाते बोला 16 हज करोड़ का पैकेज. दिया नतीजा क्या. हुआ नतीजा क्या हुआ बीजेपी को 55 सीट. आया मैं ये नहीं कह रहा हूं कि सेंटर पैसा. दे रहा है कि नहीं तो ये बात ही नहीं र. आपने वो डीएनए वाला करवा लिया था ना सर उस. टाइम सु ली हम अभी क्या कर रहे मोदी जी के. लिए मैं गांव-गांव जाकर यह कह रहा हूं कि.
14 में हम लोगों ने 3032 सीट मोदी जी को. जिताया जाति धर्म भूलकर जिताया क्योंकि. मोदी जी के जाति का तो कोई बिहार में रहता. नहीं है फिर भी लोग कहता है बिहार में सब. जाते वोट देता है हम कहते हैं भाई मोदी जी. को वोट कौन दे रहा है उनके जात का तो कोई. नहीं है बिहार में हम 1415 में हम लोगों. ने मोदी जी को यहां से 3032 सीट दिया 2019. में 39 सीट जिता दिया इस बार भी 30 जिताए. हैं हम और मैं लोगों को कहता हूं कि भाई. जितने यहां पर मोदी के भक्त हैं भाजपा के. वोटर हैं हम आप लोग एक मदद मोदी जी का. कीजिए हमको यह दिखा दीजिए कि एक कोई बैठक.
मोदी जी ने पिछले 10 12 साल में की हो जो. बिहार के विकास के लिए बैठक हो काम छोड़. दीजिए पैसा छोड़ दीजिए अगर मोदी जी ने. बिहार के विकास के लिए एक बैठक किया हो तो. हम यह पूरा अभियान वापस ले लेंगे मोदी जी. का नीतीश कुमार का ही झंडा लेकर घूमेंगे. लेकिन सच्चाई यह है कि 10 12 साल में मोदी. जी ने बिहार के विकास के लिए कोई एक बैठक. एक दिन अपना नहीं निकाला तो मैं लोगों को.
यह बताता हूं कि भाई जिस आदमी को तुमने 30. 32 35 सीट जिताया है उस आदमी ने आपके. विकास के लिए एक दिन नहीं निकाला अने आपके. बच्चों के लिए एक दिन नहीं निकाला फिर. काहे उसको वोट देते हो अ लोग ताली बजाते. हैं लोग कहते हैं ना भया बात तो आप ठीक कह. रहे आप जित वाए थे इसलिए देते हैं नहीं हम. तो 14 में मान लीजिए मदद किए थे 19 में तो. हम नहीं आए थे तब तो मोदी जी प्रधानमंत्री. थे नहीं लार्जर देन लाइफ तो आप ही बना दिए. ना ठीक है भाई हो गया मान लीजिए हमसे गलती. हो गई तो प्रश्चित भी हम ही कर रहे हैं. फिर नीतीश जी को बनवा दिए धूल भा रहे. नीतीश जी को तो फिर बनवा दिया आप अरे भाई. गलती किए तो प्रायश्चित भी हम ही कर रहे.
हैं आप तो नहीं कर रहे हैं बनवाए इनको हां. गलती हुई तो गलती हुई तो प्रश्चित कर रहे. हैं गांव-गांव जाकर धूल फाक रहे हैं उसको. सुधारने का देखिए जी अगर एक बार को आप मान. लीजिए कि आपने गलती की आपके पास दो विकल्प. नहीं बार-बार की मान लीजिए बारबार की तो. आपके पास दो विकल्प है या तो उस गलतियों. का पर चर्चा करते रहे रिग्रेट करते रहे या. उस गलती को सुधारने के लिए प्रयास करें तो. मैं अब अगले जीवन के 10 साल 12 साल जो भी.
मैं कर सकता हूं वो उन फिर इस उसको बिहार. को सुधारने के लिए क्यूजन फिर को आ रही एक. कंफ्यूजन नहीं आ रही आपने कहा मैं एक चीज. हासिल करता हूं फिर मैं स्टेबल नहीं जा. कुछ और चाहता हूं जी तो वो गलती की वजह से. आपने नीतीश जी का साथ छोड़ा मोदी जी का. साथ छोड़ा या आपको लगा यार अब तो बड़ा. बोरिंग सा हो गया कुछ नया लाइफ में ट्राई. करते व मेरे लाइफ का एक दौर था जिसमें. मुझे. यह जो चीज मैं कर रहा था कि मुझे इस चीज. को करना है और इसको करके देश में दिखाना. है अपने को समझना है देश को दिखाना है कि.
ये चीज मुझे आती है मैं कर सकता हूं कर. लिया खत्म हो गई कहानी आप ये कह रहे हैं. कि जो किया वो गलत था तो मैंने आपको कहा. आप कह रहे कि वो लोग कुछ नहीं किए इसलिए. मैं कह रहा हूं नहीं अगर गलती है भी तो. उसका सुधार भी हम ही कर रहे हैं अच्छा एक. सवाल मेरे मन में और आता है लोग कहते हैं. कि प्रशांत किशोर जी मोदी जी के साथ रहे. अब मोदी जी से बिल्कुल अलग विचारधारा. अमरेंद्र सिंह की है उस टाइम तो अब तो. साथी हो गए उस टाइम अलग थी जगनमोहन रेड्डी. अरविंद केजरीवाल स्टालिन या ममता बनर्जी. बिल्कुल कंट्रास्ट लोग हैं तो आप क्या देख. के चुनते थे पैसा देख के चुनते थे कंपटीशन.
देख के चुनते थे या मोदी जी ने आपको आपके. मन का नहीं दिया तो कहा मोदी जी को हराना. शुरू कर देते हैं दो तीन दो तीन बातें हैं. हम जिसको ऐसा लगता है कि पैसा के लिए काम. किया तो इतनी समझदारी तो आपको होनी चाहिए. कि पैसा ज्यादा कहां है चुनाव जो लड़ रहा. है उसको जिताने में या जो जीत कर आ गया. उसके साथ रहने में तो अगर मुझे पैसा कमाना. होता तो जिनको जिता कर लाए मान लीजिए मोदी. जी ने हमारे मन का नहीं दिया अमरिंदर सिंह. ने ने तो दिया होगा नीतीश कुमार ने तो. दिया होगा ममता जी ने दिया होगा स्टालिन.
ने दिया होगा सुनिए मेरी बात अगर मुझे. पैसे से मतलब होता सरकार बनने के बाद तो. पैसा कमाने की संभावना तो वहां ज्यादा है. हम तो कभी सरकार में कहीं रहे नहीं हम तो. आंध्र प्रदेश जीतने के बाद बंगाल चले गए. अगर हमको पैसा कमाना होता तो आंध्र प्रदेश. में रहते पैसा कमा कमाए सर आप सुन तो. लीजिए आप मेरी बात पैसा फैक्टर नहीं है. आपने कहा किस आधार पर. चुनाव इस बात को मैंने पह भी बताया है जब. आप जीवन की शुरुआत कर रहे होते हैं तो.
आपके पास यह विकल्प नहीं है कि आप अपने. चॉइस का ही काम करेंगे बिल्कुल सही बात है. मोदी जी के साथ कैसे जुड़े मोदी जी के साथ. काम करने आए न्यूट्रिशन पर काम करने आए और. क्योंकि वही पढ़ाई पढ़े वही समझे हैं वही. जानते थे धीरे-धीरे रास्ता अलग हो गया. राजनीत राजनीतिक सलाह देने लगे या उसमें. कुछ काम किया मोदी जी के साथ जब काम किया. तो उनके साथ एक व्यवस्था थी कि जिस तरह की. एक पैरेलल प्रोफेस सेटअप बनाई गई है चुनाव. और चुनाव प्रबंधन और राजनीतिक दल की मदद.
के लिए एक ऐसी. व्यवस्था देश में सरकार के साथ भी बनाई. जाएगी जो कि लेटरल इंटेंस के लिए होगी और. एक व मेरी अपनी सोच है लेटरल ट एंट्री. होनी चाहिए और बहुत बड़े पैमाने पर होनी. चाहिए उसका बहुत बड़ा फ्रेमवर्क उनके साथ. मिलकर बनाया गया था जब चुनाव के बाद वो. बात नहीं बनी या किसी वजह से वो बिल्कुल. नए थे नहीं करना चाहते थे हम उससे अलग हो. गए ठीक बात फिर हम कुछ तो करें. मैं बिहार आया नीतीश कुमार जी मिले.
उन्होंने उस समय अपना मुख्यमंत्री पद छोड़. दिया था तो को किसी ने इनको बताया था भाई. आप व मोदी जी का जो कैंपेन चलाया व लड़का. तो बिहार का ही है आए हमसे मिलने दिल्ली. तो हमने बताया सर आपने क्यों छोड़ दिया. मुख्यमंत्री का पदत छोड़कर मांधी जी को. बना मा जी बन गए थे तो इन्होने कहा इतना. 10 साल काम किए उसके बाद जनता ने हरा दिया. हमको हम किस मुंह से रहते वहां तो इसलिए. मांजी जी को बना दिया देखते हैं क्या होता. है तो उस समय मुझे कोई राजनीति में मेरी. दिलचस्पी बिहार की नहीं थी और बिहार के.
नागरिक होने के नाते हम लोगों ने लालू जी. का जंगल राज देखा था और यह भी देखा था कि. नीतीश जी के आने के बाद कुछ सुधार यहां पर. होता हुआ दिखा था हम तो मैंने उनको कहा सर. खाली चुनाव हारने की वजह से अगर आप छोड़. दिए हैं तो आप वापस मुख्यमंत्री बनिए हां. और हम लोग हर तरह से आपकी मदद करेंगे कि. आप चुनाव जीत जाइए हम उस समय नीतीश जी ने. मुझे कहा भी कि भाई मेरे पास तो कुछ नहीं. है ना पार्टी भी नहीं बची है अब तो. मुख्यमंत्री का चेयर भी नहीं है तो क्यों. आइए हमें बिल्कुल आएंगे सर आप बिहार के. मुख्यमंत्री बन जाए बिहार का भला हो से. क्यों नहीं आएंगे बिल्कुल आएंगे आए और एक.
ही शर्त रखी थी कि आप वापस मुख्यमंत्री. बनिए आप रिकॉर्ड को जाकर देख लीजिए हमारे. सलाह के बाद नीतीश जी खुद से वापस आए. मुख्यमंत्री बने उनकी मदद की गई उनको. जिताया गया और सिर्फ जिताया नहीं प्रशांत. किशोर एक पार्टी का जन्म हो गया सुनिए सात. निश्चय का कार्यक्रम भी बनवाया बिहार. विकास मिशन जो लेटल इंटेंट की व्यवस्था थी. वो भी बनवाया लेकिन जब वो चुनाव चल रहा था. तो 15 में एक अरविंद केजरीवाल जी भी चुनाव. जीते थे दिल्ली में जनवरी में नवंबर में.
हम लोग जीते बंपर तो आपस में एक सोशल. मीडिया पर बकक जो कह लीजिए कि कौन ज्यादा. होशियार है कौन ज्यादा बेहतर चुनाव की समझ. रखता है हां भाजपा को मोदी को जी को. अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी ने. हराया और यहां पर महागठबंधन ने हराया. प्रशांत किशोर के साथ हम तो जो सोशल. मीडिया पर चीट चैट चला हम तभी इकोनॉमिक. टाइम्स में एक. इंटरव्यू हुआ अरविंद केजरीवाल जी का और उस.
इंटरव्यू में किसी ने कहा कि यह चर्चा है. कि बिहार में जो महा गण बंधन की मदद की. हैं प्रशांत किशोर यह कांग्रेस उनको लाकर. अमरेंद्र सिंह उनको पंजाब में लाना चाह. रहे हैं तब आम आदमी पार्टी की बड़ी हवा थी. पंजाब में उनको लगता था कि हम जीत रहे हैं. बड़ी हवा बड़ी माहौल बना हुआ था इस बार जो. जीते इससे ज्यादा माहौल था तो अरविंद. केजरीवाल का उस बयान उसका उत्तर था अगर. प्रशांत किशोर पर इतना ही भरोसा है तो. प्रशांत किशोर आकर देख ले पंजाब में हम और. फिर ब्रैकेट में लिखा हुआ था कि इसको छाप.
एगा जरूर. आय इसको कहते सब कुछ करने का लेकिन ईगो. हर्ट नहीं करने तो फिर हम लोगों ने कहा. यार ये तो लड़को की आन पर बात हो गई चलो. पंजाब ही चलते हैं तो अच्छा खासा बिहार. में थे छोड़कर लड़कपन भी है थोड़ा अनुभव. हीनता भी कह सकते हैं एक बिहारी सब पर. भारी नहीं ऐसी बात नहीं और क्या था इसमें. वो बिहारी ो ही है बेवकूफी है नीरा. बेवकूफी थी उस समय लेकिन लगा यार ये आदमी. ऐसे साम ने से क चलो पंजाब तो जाक पंजाब. उलझ गए पंजाब उनको हराया भी फिर जब पंजाब.
हो गया तो लोगों ने कहा यार सबसे बड़ी. चुनौती क्या है तो चलो यूपी यूपी में अगर. कांग्रेस को जिता देंगे तो य इससे बड़ा. कोई गेम नहीं फिर तुसे बड़ा नहीं हो फिर. वहां गए वहां गए नहीं गड़बड़ा नहीं. गड़बड़ा नहीं ये तो लोगों को लगता बाद में. खटिया सब उठ गई मैं बता रहा हूं खटिया तो. बाद में आई खटिया से पहले कुर्सी का. जुगाड़ किया था मैंने कांग्रेस ने उस समय. कहा सर त मैंने शर्त रखी थी कि उस समय. प्रियंका गांधी राजनीति में नहीं थी कि आप.
राजनीति में प्रियंका जी को लाइए इनको. सीएम का फेस बनाइए और हम लोग कैंपेन. करेंगे और अकेले लड़ जीतिए पहला नारा वहां. का था 27 साल यूपी बेहाल हमारा ही राज्य. है तो उसमें सपा और बसपा दोनों और भाजपा. तीनों पर अटैक था हम आठन महीना वो कैंपेन. चला जो खटिया बता रहे हैं उठी बैठी सब हुआ. लेकिन थोड़ी सी ग्राउंड पर सुगबुगाहट शुरू. हो गई कांग्रेसी बीइंग कांग्रेसी उन्हो. उनको लगा कि भाई अब जब थोड़ा बहुत माहौल. बन गया है तो जो अखिलेश यादव सपा वाले 40.
सीट नहीं दे रहे थे अब 110 सीट दे रहे हैं. आप याद कीजिए 2017 में सपा से 110 सीट. कांग्रेस को मिल गई इन लोगों ने हम लोग को. एक तरीके से बेच दिया 110 सीट लिया नतीजा. यह हुआ कि पूरे कैंपेन की धज्जी उड़ गई. प्रियंका गांधी आई नहीं और हम लोग बुरी. तरह हारे हारने का पूरा दोष कांग्रेस पर. नहीं गया राहुल गांधी पर नहीं गया प्रशांत. किशोर पर फोड़ा गया ठीक है पंजाब जीते वो. भूल गए यूपी जीते उसका ठीकरा मेरे पर. फोड़ा गया फिर हम लोगों ने जीरो से शुरू.
किया जब यूपी हार गए तो लोगों ने कहा तो. कुछ नहीं कर पाएंगे तो फिर आंध्र प्रदेश. गए वह जीता तमिलनाडु जीते तेलंगाना जीते. दिल्ली जीते महाराष्ट्र जीते बंगाल जीते. बंगाल वाला जबरदस्त आपने. कहा तब अब लोग क्या कह रहे हैं नहीं कुछ. भी हो लड़के को चुनाव की समझ तो है यह 10. बर्ष का संघर्ष है मेरे भाई एक दिन में. लोगों ने नहीं माना है और जो मैं में कर. रहा हूं इसको भी एक दिन में लोग नहीं. मानेंगे लेकिन आप लिख कर रखिए सुभंकर भाई.
लोग मानेंगे कि इस लड़के ने बिहार में वह. करके दिखाया बिहार के लोगों ने वह करके. दिखाया जो देश में कभी किसी ने सोचा नहीं. होगा कि बिहार के जातियों में बटे हुए इसी. समाज ने अनपढ समाज ने बिहार की सबसे बेहतर. लोकतांत्रिक दल का निर्माण किया और उसको. जिता कर लाया आप एक साल इंतजार कीजिए. नवंबर में आप रहूंगा य इलेक्शन पूरा. इलेक्शन यहीं घा अरे भाई अब कितना भी कवर. कीजिएगा परिणाम के दिन तक तो रुकना पड़ेगा.
हां हां रुकेंगे और आप देखिएगा कि यह होता. है कि नहीं यह बिहारियों के आन बान का. सवाल है और पहली बार हम लोग ये दिखाएंगे. कि भैया बिहार में सारे लोग अनपढ़ नहीं है. जो गंजी के शर्ट के ऊपर गंजी पहन ले वही. नेता बिहार का नहीं है बिहार में बहुत. सारे विचार वान पढ़े लिखे समझदार लोग भी. हैं जो कई दूसरे राज्यों के लोगों से. बेहतर समझ रखते हैं अब एक कठिन सवाल आपने. सवाल कठिन और आसान ल ये सब जीते सब रहा. प्रशांत किशोर कुछ महीने पहले फिर बड़े.
चर्च में थे हम और फिर टीवी पर हमने. इंटरव्यू में देखा जहां उन्होंने कहा कि. हां यार इस बार गलत तो हो गए हम हमने. थोड़ा ज्यादा सोच लिया बिल्कुल सही बात है. अब फिर लोग अब फिर अभी मैं आपको. कॉन्फिडेंस देख रहा हूं अब क्योंकि अभी. हाल फिलहाल में कहते हैं ना दूध की जली. छाज भी फूक फूक कर पीती है तो अभी तो आप. जलकर आए हैं बड़ा टीवी बिल्कुल बिल्कुल. नहीं आप मेरी बात को सुनिए जो मैंने कहा. चुनाव से पहले क्या है 2020 का जमाना है. पॉडकास्ट और ही जमाना है मैंने पांच.
महत्त्वपूर्ण बातें कही चुनाव से पहले. हमने सब सुनी है सुन नहीं सुन लीजिए फिर. से एक बार मैं रिपीट कर देता हूं मैंने. कहा कि अगली सरकार मोदी जी की बनेगी एनडीए. की बनेगी मोदी जी प्रधानमंत्री. बनेंगे दूसरी बात हमने कही कि मोदी जी के. पर्सनल पॉपुलर में उनके सपोर्ट में उसके. इंटेंसिटी में कमी आई है तीसरी बात मैंने. कही कि मोदी जी तीसरे टर्म में दूसरे और. पहले टर्म के मुकाब कमजोर प्रधानमंत्री. साबित होंगे चौथी बात मैंने कही कि चाहे.
जितने भी सीट लेकर आए समाज में जो. बेरोजगारी है फार्मर्स की समस्या है और. इनिक्वालिटी है यह बड़ी चुनौती बनकर तीसरे. ण में उनको फेस करना पड़ेगा पांचवी बात. मैंने कही कि भाजपा की जो भी सरकार बने. जितने भी ताकत से बने उत्तर प्रदेश की. राजनीतिक स्थिति उनके लिए बड़ी चुनौती. रहेगी और. छठवीं वेश जो कि पहली बात बन गई कि बेस. भाजपा को जो 19 में वोट और सीट आया है वही.
सीट वापस आएगा भाजपा को वोट शेयर के हिसाब. से अगर देखें तो करीब-करीब उतना ही वोट. शेयर आया है जो उनको 2019 में आया था 7 पर. वोट शेयर कम आया है लेकिन सीटों का जो. आकलन मैंने किया उसमें 50 सीटों से मेरा. आकलन गलत हो गया मैंने कहा 300 उनको आया. 240 ये बिल्कुल गलत बात है तो मैंने एक. मिनट पूरा कर लेने दीजिए. देखिए जो लोग भी स्टेटिस्टिक्स को समझते. हैं सर सेफोलॉजी को समझते हैं कोई भगवान. तो है नहीं बिल्कुल सही बात है आकलन पूरा.
सही है वोट शेयर सही है सीट के कन्वर्जन. में 5060 सीट कम है जो बड़ा गलती है. क्योंकि स्टेटिस्टिक्स. बंगाल के स्टेटमेंट की आप चर्चा कर रहे. हैं जो लोग आज मुझे बीजेपी का हवा बना रहे. हैं का आरोप लगा रहे हैं ये वही लोग हैं. जो बंगाल में जब मैंने कहा कि भाजपा 100. सीट नहीं आएगा तो उछल उछल के ताली पीट रहे.
थे लेकिन मैंने बंगाल में क्या कहा कि. भाजपा को 100 से कम सीट आएगी हम अब भाजपा. को पांच भी आ सकती थी 17 भी आ सकती थी 50. भी आ सकती थी 97 भी आ सकती थी आया 77 ठीक. बात मैंने अभी छ महीना पहले कहा जगनमोहन. रेड्डी की बहुत बड़ी हार होगी आंध्रा में. हम लोगों ने बड़ा आश्चर्य किया लोगों ने. कहा तो चंद्रबाबू नायडू से आप पैसा ले लिए. इसलिए कह रहे हैं ऐसा कैसे हो सकता है. जगनमोहन रेड्डी को 151 से घट के 11 सीट. मिली है तेलंगाना मैं मैं मैं आ रहा हूं.
तेलंगाना पर भी आ रहा हूं मैं तेलंगाना को. लेकर जो सवाल पूछा नाविका कुमार ने जब मैं. पदयात्रा के शुरुआती दिन में कि कौन. जीतेगा चुनाव से छ महीना पहले की बात है. हम तब कर्नाटक नहीं हुआ था मैंने कहा था. कि जो मुझे लगता है यह कठिन चुनाव है. लेकिन बीआरएस शुड बी थ्रू दिस इज दज आर. माय वर्ड्स बीआरएस शुड बी थ्रू कर्नाटक. हुआ बीआरएस ने बहुत गलती की छ महीना में. चुनाव छ महीना में बदलता है लेकिन फिर भी. वो मेरा दोष है ठीक बात अब एक आप देखिए. आपने कई लोग का नाम लेकिन लेकिन एक अंतिम.
बात मैं. कहूंगा ये जो आकलन है हम बंगाल के आकलन और. बिहार के आकलन और देश के आकलन में फर्क. क्या है फर्क यह है कि बंगाल में हम सिर्फ. सर्वे और सेफोलॉजी नहीं कर रहे थे बंगाल. में हम काम भी कर रहे थे काम कर बिहार में. मैं सिर्फ सर्वे नहीं कर रहा हूं बिहार. में मैं दो साल से गांव-गांव में चीजें. बना रहा हूं और सर्वे भी करर यहां जड़. थोड़ा आपका मज तो यहां पर गलती होने की. संभावना शत प्रतिशत तो कोई भी गारंटी नहीं. कर स नहीं लेकिन यहां पर गलती होने की. संभावना कम है फैच आपकी बात मैं इसको समझ.
भी रहा हूं अब आपने कई इंटरव्यू कई लोग का. नाम लेते एक नाम हम भी ले लेते हैं आपने. नवका कुमार का नाम लिया सौरभ द्विवेदी का. नाम लिया उस इंटरव्यू कहा एक इंटरव्यू और. बड़ा वायरल आपका हुआ अभी हाल फिलहाल में. पानी पीने वा करण थाप करण थापर वाला और. आपने कहा कि मैंने कहीं कहा हो तो दिखाओ. मुझे मैंने कहीं कहा हो या तो सॉरी बोलो. फिर उसके बाद जब वो वीडियो उन्होंने डाला. तो उसमें आपका ट्वीट भी मेंशन कर दिया जी. जिस ट्वीट में लिखा है कि आपने हिमाचल को. को लेके भी उसमें ट्वीट जो था जी बिल्कुल. अब वो डाला जी तो वो तो बात गलत हो उसको.
काफी लोग चर्चा कर रहे बिल्कुल देखिए करण. थापर मेरे बड़े मित्र है उस उसके बाद बात. हुई वो उस के बाद अक्सर होती है आप बात. समझ लीजिए फैक्ट को पहले समझिए कई लोगों. ने कहा करण थापर करण थापर को जो मैंने. इंटरव्यू दिया है उससे पहले मैंने करण. थापर को तीन इंटरव्यू चार इंटरव्यू दिए. हैं और डेढ़ डेढ़ घंटे लंबे इंटरव्यू ऐसा. नहीं है कि करण थापर से मैं कोई डर रहा. हूं कि मैं इंटिमिडेट हो जाऊंगा करण पर ने. जो सवाल किया और यह कहा कि आप हिमाचल में.
और गुजरात में हिमाचल और गुजरात के बारे. में आपने प्रेडिक्शन किया था हिमाचल में. आप फेक्चुअली इनकरेक्ट थे मैंने उनको यह. कहा कि मैंने ये कहां कहा है वीडियो पर. दिखाओ आप जाकर फिर उस वीडियो को देखिए. मैंने कहा है कि आपको वीडियो दिखाइए. उन्होंने यह नहीं कहा उन्होंने ये नहीं. कहा था कि आपका ट्वीट है उन्होंने कहा था. वीडियो कि अखबारों में लिखा गया मैंने कहा. अखबार तो कुछ भी लिख देगा फिर उनके समर्थन. में उन्होंने कहा कि नहीं आपने ट्वीट किया. ट्वीट क्या है उसको जाकर देखिए ट्वीट इज. नॉट अबाउट फॉर कास्टिंग इलेक्शन ट्वीट यह.
है कि जो चिंतन शिविर कांग्रेस का हुआ है. मैंने लिखा है कि इससे कोई बहुत बड़ा. फायदा नहीं होगा. कांग्रेस इज फेसिंग एन इं पेंडिंग डिफीट. और समथिंग इन गुजरात एंड हिमाचल वो हिमाचल. के इलेक्शन को लेकर कोई प्रेडिक्शन नहीं. है लेकिन अगर मान लीजिए हमने कहा तो कहा. तो कहा क्या है आपको नहीं ठीक लगता ना. कीजिए मैंने करण थापर को यह कहा और आपको. भी कहूंगा भाई आप मेरे से आके पूछ रहे हो. सर इनको इस कितना सीट आएगा इनको कितना सी. हम आपसे पूछे तो है नहीं कि कहे तो नहीं.
कि आके हमसे पूछो अगर आपको हमारी बात पर. भरोसा नहीं है इस आदमी को कोई ज्ञान नहीं. है तो काहे बात कर रहे हो भाई और अगर बात. कर रहे हो मी मीठा गप गप तीखा तीखा थूक. थूक कैसे जहां मजा काटना था वहां क देखो. प्रशांत किशोर ने कहा सीट नहीं आई बीजेपी. की सु सुनो मेरी बात अगर जो मैं कहूंगा. मैं तो अपनी समझ से ही कहूंगा और मैं. बार-बार आपको कह रहा हूं कोई भगवान तो है. नहीं सही बात है लेकिन आप इसलिए मेरे से. पूछ रहे हैं क्योंकि आपको मालूम है कि इस. आदमी को थोड़ी बहुत समझ तो है जब मैंने.
बंगाल में भी कहा था तो करण थापर से. ज्यादा राहुल कवल या अनविका कुमार के. इंटरव्यू में जहां मैंने कहा राहुल कंवल. ने कहा मुझे क्या बात करते हो प्रशांत जी. ऐसा कभी होता है भाजपा के ट्रोल आपको मार. डालेंगे आपका जीना हराम कर देंगे और उस. इंटरव्यू के बाद आपके लिए है कि बंगाल का. रिजल्ट आया और आपकी ताली बज गई नहीं छ. महीना तक लोगों ने मेरा जीना हराम करके. रखा था कि तुमने 100 का बेटा याद रखना. नहीं आएगा तो तुमको छोड़ना पड़ेगा हम लोग.
खुद बैठ के गिनते थे कि आप बंगाल वाला अ. आप तो फिर भी दे आप है आप पत्रकार है मेरे. घर वाले चुनाव के एक दिन पहले रात में. रिजल्ट के पहले फोन करके बोल रहे हैं सब. बात तो तुमने ठीक कहा याय 100 वाला बात. क्यों कह दिया मान लो 100 से ज्यादा आ गया. तो तो आपके लिए बस एक लाइन की घटना है कि. प्रशांत किशोर ने कहा और बंगाल में वैसा. हो गया मेरे लिए व छ महीने नाइटमेयर रहे. हैं आज लोग गाली उतना नहीं दे रहे जितना. उस समय गाली दे रहे थे उस समय भाजपाई गाली. दे रहे थे सबको लग रहा सरकार से पलट जाएगी.
अरे भैया उस समय भाजपा ही गाली दे रहे थे. आज कांग्रेस ही दे रहे हैं आप कुछ भी. बोलिएगा तो गाली देगा ही देगा उसको देखिए. मेरे पिताजी ने बहुत एक अच्छी बात बताई है. जो कुछ नहीं करता है वो आलोचना करता है. उनको तो कुछ करना है नहीं तो बैठे हुए हैं. ट्वीट पे गाली दे रहे हैं देते रहो भाई. उससे क्या फर्क प आपको मजा आता है इस सब. में मैं तो देखो मैं पेपर पढ़ता नहीं हूं. हां न्यूज़ देखता नहीं हूं मेरे यहां टीवी. नहीं अंदर मैं टीवी देखता नहीं हूं पेपर. पढ़ता नहीं हूं. फ मेरा है नहीं तो गाली दोगे तो हमको खबर. प प लेकिन पिछले चुनाव तक तो एक्टिव थे आप.
मैंने मेरा. बात ना मुझे.
एक आम आदमी पार्टी का अपवाद में हटा दूं. तो मुझे ज्यादातर पॉलिटिकल पार्टीज का ऐसे.
ही राइस दिखता है बीजेपी भी आई हारी जीती. हराई फिर बाद में बन गई आप कह रहे हो कि. लहर है माहौल है जो महसूस भी होता है. लेकिन आमतौर पर भीड़ आना और उसका वोट में. तब्दील हो जाना कई बार बड़ा विरोधाभास भी. होता है हमने यूपी में कई बार देखा है अब. बिहार वह राज्य है जो लेनदेन वाला राज्य. है पार्शल जाता है अगर जन स्वराज जो आपकी. पार्टी होगी नहीं निकाल पाई अकेले. जो आमतौर पर किसी फर्स्ट टाइम लड़ने वाली. पार्टी से प्रैक्टिकली नहीं पॉसिबल लगता.
खासतौर पर बिहार जैसे राज्य में लोगों के. मन में बड़ा इंटेंस सवाल है उसके बाद क्या. करू देखिए कांशीराम जी बहुत बड़े नेता थे. मुझे लगता है कि पिछले 30 40 सालों में. सोशल पॉलिटिकल मोबिलाइजर में उस आदमी से. बड़ा कोई व्यक्तित्व समाज ने देखा नहीं. पिछले 30 40 सालों में उन्होंने जो बात. कही बिल्कुल ठीक कही लेकिन एक फर्क है. कांशीराम जी के जमाने में टेक्नोलॉजी का. एवल्यूशन इतना नहीं हुआ था जितना अब हो.
गया है तो जो बात पहले आप पोस्ट कार्ड से. बताते थे पोस्ट कार्ड को पहुंचने में 10. दिन लगता था अब र और फेसबुक और टब के. माध्यम से एक दिन में पहुंच रहा है तो अगर. आप य सोशल मीडिया को हटा दे या डिजिटल जो. टेक्नोलॉजी अवेलेबल है कम्युनिकेशन उसको. हटा दे तो बिल्कुल जन स्वराज को भी उतना. ही समय लगता है कहीं इसमें कोई दो मत. नहीं लेकिन चकि टे लजी अवेलेबल है तो. प्रशांत किशोर भले ही एक गांव में बोल रहे.
हैं आज ऑन एन एवरेज दो करोड़ लोग बिहार. में डेली जन स्वराज के वीडियो देखते हैं. डेली ठीक बात तो दो करोड़ लोगों तक. पहुंचने में कांशीराम जी को जितना समय लगा. होगा उसके मुकाबले जन स्वराज को कम समय लग. रहा है इसलिए नहीं कि जन स्वराज वाले लोग. ज्यादा काबिल है इसलिए कि हम लोग को वो. टेक्नोलॉजी का सपोर्ट है सत है दूसरी बात. जो नेता काम करता है 10 साल में यह जो. आपने जर्नी बताई लड़ने के लिए त हराने के. लिए जीतने के लिए तो जनरली एक आदमी साल भर.
में महीने में 10 दिन 15 दिन काम करता है. हम तो हमने तय किया है कि भाई तीन वर्ष. में अगर हम विदाउट ब्रेक बिना छुट्टी लिए. हुए बिना ब्रेक लिए हुए काम करूं तो मुझे. 10 वर्ष का काम तीन वर्ष में करना है तो. मोदी जी वाला हमको शुरू का याद आ है भाई. मोदी जी लोग बहुत बड़े हैं नहीं नहीं 18. घंटे हम काम नहीं करते हैं मैंने यह आपको. कहा कि सामान्य जो राजनीतिक कार्यकर्ता है. व महीने में 10 दिन 12 दिन काम करते उसको. दुकान भी चलानी है उसको परिवार भी चलाना. है उसको काम भी करना है उसको नौकरी भी.
करनी है हम लोग जो काम जितने नंबर ऑफ डेज. वर्किंग डेज अगर आप मेरा देखेंगे तो वो. उतना ही है जितना शायद कांशीराम जी को लगा. हो या दूसरे को लगा हो लेकिन इट इज पैक्ट. इन थ्र इयर्स तो य कॉन्फिडेंट कि आप जीत. जाओगे हम लोग आई एम कॉन्फिडेंट की जन. सुराज आदर अर्श पर होगा या फर्श पर होगा. मतलब या तो कुछ नहीं होगा जमानत ज हो. जाएगी या तो जमानत जपत हो जाएगी अगर जो. बात हम लोग कह रहे हैं वो लोगों को समझ. में नहीं आएगी और हम लोग का कुछ नहीं होगा. लेकिन अगर समझ में आ गई पार तो इतनी सीट.
आएगी कि आप गिन नहीं पाओगे अबकी बार. प्रशांत किशोर की सरकार ना अबकी बार जन. सुराज अबकी बार जनता का राज अच्छा अब देखो. लड़का क्योंकि अभी पैदा हुआ नहीं है अभी 2. अक्टूबर को पैदा होगा जी लेकिन अब फिर भी. जो हम और आप मिले हैं और बात कर रहे हैं. लड़के के भविष्य के बारे में और आपने. दुनिया भर के बच्चों का भविष्य बताया है. कि बंगाल में 100 नहीं जाएगा फलनवा धमकाना. और आप कॉन्फिडेंट हो तो एक आपकी टीम से. मिल रहा था वो बड़े कॉन्फिडेंट थे कह रहे. थे यार 130 सीट मैं कई लोगों से बात कर.
रहा था आपके यहां पे 130 140 तो हम मान के. चल रहे हैं हमारा पक्का हो गया कुछ आपके. भी तो मन में चल रहा होगा ना नहीं मैं. आपको बता रहा हूं सबका भविष्य आप अगर अगर. 130 40 सीट आई तो मैं उसको अपनी बहुत बड़ी. हार. मानूंगा बहुत बड़ी हार मानूंगा पहले चुनाव. में पहले चुनाव में व मैं अपने जीवन की. बहुत बड़ी हार मानूंगा कि तीन साल मेरे. जीवन का सब कुछ. मेरा अनुभव मेरा प्रयास मेरे संसाधन मेरा.
सब कुछ मेरा जीवन मैंने दाव पर लगाया है. उसके बाद अगर 13 सीट अगर आए तो मैं उसको. जन स्वराज की हार मानूंगा अपनी व्यक्तिगत. हार मानूंगा आपको कैमरे पर कह रहा हूं. अर्श पर या फर्श पर बीच में नहीं मरेंगे. प्रशांत किशोर के अंदर जो य एक फायर है. अंदर वाली बड़ी अच्छी लगती है लेकिन कई. बार यह लगता है कि प्रैक्टिकल क्या है लोग. तो कहते हैं मैं बहुत प्रैक्टिकल हूं मैं. गांव गांव में जाकर कहता हूं कि मैं उनमें. से नहीं हूं जो बस लड़ने के लिए लड़ता है. हम लड़ने यहां आए हैं तो यह सोच समझ कर आए.
हैं कि कितनी कठिन लड़ाई है इसको जीतने के. लिए कैसी व्यवस्था बनानी पड़ेगी कितना. पसीना बहाना पड़ेगा कितना संसाधन जुटाना. पड़ेगा यह सोच समझ कर आए आपको लगता है लोग. भूल जाएंगे कि मैं फलानी जात का हूं या ये. है या फलाने धर्म का है या जब आखिर में. मोदी जी आएंगे और तेजस्वी आएंगे और कहेंगे. ये कब्रिस्तान है सारी बातें जब हो. बिल्कुल नहीं भूलेंगे तो फिर कैसे जनता. लेकिन इन सब के ऊपर हम उनको अपने बच्चों. का चेहरा याद रहेगा क्योंकि बिहार के. बच्चे आज अ नग्न दशा में घूम रहे हैं.
बिहार के बच्चे सबसे कठिन स्थितियों में. 10 घंटे 12 घंटे मजदूरी कर रहे हैं बिहार. के बच्चे देश में सबसे ब ज्यादा अनपढ़ हैं. बिहार के बच्चे सबसे ज्यादा गरीब बेरोजगार. और भुखमरी के शिकार हैं तो लोगों को. इसीलिए पहले दिन से प्रशांत किशोर का. चेहरा नहीं याद दिलाया जा रहा है यह बताया. जा रहा है कि एक-एक आदमी अपने बच्चों के. लिए वोट देना और जिन नेताओं ने तुम्हारे. बच्चों को गरीब अनपढ़ और मजदूर बनाया है.
उसको वोट नहीं देना बाकी जिसको वोट देना. है दे दो मैं आपकी जब बात सुन रहा हूं. क्योंकि यूपी बिहार के लोगों से मेरा बड़ा. राबता रहा है जी और बड़े भावुक लोग होते. हैं मतलब ऐसे लोग होते हैं कि अगर आपने. दिल जीत लिया तो आपके लिए जान देने को. तैयार है जी अपने बच्चों से बड़ा लगाव. रखते हैं क्योंकि पलायन बहुत ज्यादा है. मुझे लग रहा है बड़ी स्मार्ट स्ट्रेटजी है. कि आपने ये कहा कि सुनो अपने बच्चे की आंख. में देखना जी आप डायरेक्ट कट कर रहे हो. अपने बच्चे डाल डाल के कि इधर देखो कह रहा. हू नहीं मैं बारबार पर्ट ऑ गुड. स्ट्रेटजी स्ट्रेटेजी नहीं है यह इस समाज.
को जगाने का एकमात्र तरीका है जब आप पा. साल लिटरली नरक की जिंदगी जी रहे हैं पा. साल रो रहे हैं यहां पढ़ाई नहीं है रोजगार. नहीं है खाने को नहीं है घर नहीं है नाली. नहीं गली नहीं और पाच वर्ष के बाद कोई आता. है जात का धर्म का नशा खिलाता है और उसको. वोट दे देते हो उस समय वह नशा उसको न च. उसको रोकने का एक ही उपाय है बच्चों की. कसम कि अपने बच्चों के सर पर हाथ रखकर और.
ये मैं पूरे सभा में हर गांव में कराता. हूं अपने बच्चों के सर पर हाथ रखकर बोलो. और लोग बोलते हैं लोग बोल रहे हैं हर गांव. में बोल रहे हैं ये भावुक करने वाली चीज. है कि अपने बच्चों के लिए वोट दो और मैं. कहता हूं जिसको देना है दो ये कभी नहीं. कहा कि जन सुराज को दो कभी नहीं कहा. प्रशांत किशोर को दो आगे भी नहीं कहूंगा. यही कह रहा हूं कि एक ही संकल्प लो इस बार. नेताओं के बच्चों को नहीं अपने बच्चों के. लिए वोट दोगे सारा बात कह के आप अपने ऊपर. कह दे गुड़ खा गुलगुले परहेज कर.
लिए तो ये स्ट्रेटेजी नहीं है पूरा नेता. बन गया आप इस समाज को जगाने का शायद एक. मात्र तरीका है अच्छी बात है क्योंकि आप. देखिए हम लोग यहां सबसे बड़ा व्रत क्या है. छट छट छठ का व्रत लोग क्यों करते हैं अपने. बच्चों के लिए करते हैं इस गरीब बदहाल. बिहार में साल भर मजदूरी करने वाला आदमी. एक बार जीवन में अगर उसको छुट्टी लेना है. तो छठ में लेता है क सही बात है दिवाली. नहीं आते नहीं आ होली में नहीं आएगा छठ. में आएगा क्योंकि लोगों की ऐसी मान्यता है.
कि छठ से उनके बच्चों का कल्याण होगा बा. इसलिए जन सुराज सिर्फ और सिर्फ बच्चों की. बात कर रहा है मैं अब इसी को क्वेश्चन पलट. हूं इमोशनल बात प इमोशनल सवाल पूछता आपने. प्रशांत किशोर जी कहते हैं अपने बच्चों के. सर पर हाथ र कसम खाओ कसम नहीं खाओ मतलब. उनको देखो अपने बच्चों के चेहरा को देखो. और उसके आधार परने ब नहीं कसम खाक मैं. दूसरी चीज पूछता हम सवाल अलग है प्रशांत. जी कहते हैं जिन्होंने बिहार को बदहाल. किया उनको वोट ना दो नेताओं को बच्चों की. आंखों में देखो प्रशांत किशोर जी अगर.
सिंगल मेजॉरिटी नहीं बना पाए तो क्या वो. भी अपने बच्चों की कसम खाते कि मैं भी इन. दोनों से नहीं जुडा मेरे बच्चे तो नहीं. मेरा एक बच्चा है मेरा एक ही बेटा है और. मैं आपको बता रहा हूं कि सवाल ही नहीं. पैदा होता है जन सुराज 200 कए ना बच्चों. का आप कह रहे मैं कह रहा हूं आ रहा हूं उस. पे पूरी बात सुन लीजिए जन सुराज 243 सीट. लड़ेगा 242 नहीं तो कोई अलायंस किसी भी. तरह का सवाल ही नहीं पैदा होता है प्री.
दूसरा मेरा अपना आकलन है कि जन सुराज या. तो अर्श पर या फर्श पर लेकिन अगर आपकी बात. मान ही ले कि भैया कई ऐसी स्थिति बन जाए. या आपकी पूर्ण बहुमत ना बने तो जन स्वराज. और प्रशांत किशोर 5 साल फिर पैदल चलेंगे. फिर लोगों को समझाएंगे तभी वापस आएंगे ये. तो बात कर द ना आपने इसम बच्चों को क्यों. नहीं लाया आप दुनिया के बच्चे को बता रहे. हैं कि आप अपने बच्चों का खम देखिए आप भी. अपने बच्चे को दिमाग में रखिए और आप क. बिने बहा मैं बीजेपी कांग्रेस जेडीयू.
आरजेडी से नहीं जुा भाई मेरे हम इसको आप. जैसे ही मैं कहूंगा आप कहोगे ये तो अरविंद. केजरीवाल ने भी कहा था अरे उनको छो तो बदल. वो तो बदल गए आप तो छोड़ दीजिए मैं जो कह. रहा हूं आप उसको लिख लीजिए जन स्वराज किसी. से गठबंधन किसीसी भी तरह का गठबंधन ना. प्री ना पोस्ट चाहे पक्ष में हो या विपक्ष. में हो मैं कह रहा हूं अगर हमको जीरो सीट. आएगा तो प्रशांत किशोर पा साल और चलने को. तैयार हैं लेकिन बिहार को बदले बगैर. मानेंगे नहीं चाहे हमको पा साल चलना पड़े.
कि दो साल चलना. पड़े अब ठीक है अब अब जनता का एक और सवाल. आपकी सरकार बन गई अब आपने कहा कि बिहार का. बच्चा पलायन कर रहा आज बिहार की जो मैं. बड़ी समस्या देखता हूं लड़का पलायन करना. पड़ता छोटे-छोटे पैसों के लिए दिल्ली में. काम कर रहा है स्वास्थ्य सुविधाएं बड़ी. बदहाल है स्कूल कॉलेजेस उस हिसाब से नहीं. है सब कुछ बदल मतलब एक होता है कि प्रदेश. में बदहाली है बिहार में ब प्रदेश चल रहा. है जी अब ये कैसे बदल जाएगा आपकी सरकार. मान लीजिए बन भी गई जैसे फिर मैं केजरीवाल.
जी को लाऊंगा केजरीवाल जी जब आए कहे कि. झोला था अब कह रहे हैं जी हम क्या करें जी. सारी समस्या तो उधर थी आप छोड़ आप हमसे ही. पूछिए आप कैसे बदल दोगे कैसे बदल देंगे तो. पहली बात कि जो जो भी बदलने का रास्ता है. हम जो भी वादे हैं जो भी आगे का प्रोग्राम. है जैसे मैंने आपको बताया कि इसका पूरा. ब्लूप्रिंट जारी करेंगे ये नहीं बताएंगे. सिर्फ कि कहेंगे कि नौकरी दे देंगे यह. बताएंगे कि नौकरी कैसे देंगे हम पलायन. कैसे रोकेंगे तो जो जो सबसे बड़ी समस्या. है पलायन मैं उसका एक आंसर देता हूं.
क्योंकि अगर बात प बोलेंगे दो घंटा लगेगा. हा सही बात है लोगों को लगता है पलायन. कैसे रोक दीजिएगा बिहार में सही बात है. मैं आपको बता रहा हूं कैसे रोक देंगे कैसे. बिहार में श्रम का पलायन क्यों है पहले. इसको समझिए हम बिहार में श्रमिकों का. मजदूरों का पलायन इसलिए है क्योंकि यहां. से पूंजी और बुद्धि का पलायन है हम बिहार. से आपको पत्रकार हैं आरबीआई का आंकड़ा. निकालिए पिछले 3032 सालों में 1900 90 के. बाद हम बिहार के बैंकों ने 66 लाख करोड़. रुपया यहां से पूंजी दूसरे जगह ट्रांसफर.
कर दिया हम आरबीआई एक आंकड़ा जारी करता है. सीडी रेशियो हम देश भर में सीडी रेशियो 70. 75 पर होता है मतलब जितना पैसा बैंक में. रखते हैं 7075 पर पैसा बैंक लोन के तौर पर. आपको देता है समाज को देता है ताकि आप घर. बना सकें गाड़ी खरीद सके रोजी रोजगार कर. सके बिहार में सीडी रेशियो है एवरेज 40 पर. लालू जी के जमाने में 18 पर था अभी नीतीश. की सरकार में 40 है इसका परिणाम क्या हो.
रहा है पिछले वित्तीय वर्ष में बैंकों ने. यहां से 26 हज करोड़ रुप दूसरे राज्यों. में ट्रांसफर किया है यह पैसा जा कहां रहा. है यह पैसा जा रहा है गुजरात कर्नाटक केरल. तमिलनाडु आंध्र प्रदेश तेलंगाना वहां पर. सीडी रेशियो कितना है 90 95 100 105 अब. इसका असर क्या होता है मान लीजिए कि अगर. आपको लोन ना मिले तो आप गाड़ी खरीद पाएंगे. अगर अगर आपको लोन ना मिले तो क्या आप अपना. बिजनेस कर पाएंगे अगर बिहार के लोगों को.
नोएडा में घर खरीदना है उसको लोन नोएडा. में मिल जाएगा लेकिन बिहार के आदमी को. पटना में घर बनाना है बैंक वाला लोन नहीं. देगा तो जो पूंजी की जो पूंजी की उपलब्धता. है वह सबसे जरूरी है तो जो हम लोग बना रहे. हैं कि 15 साल से कम उम्र के बच्चे को. इतनी अच्छी शिक्षा दो कि वह व्यवस्था और. राज्य पर बोझ ना बने 15 साल से 40 50 साल. के लोगों को जिनको फिर से पढ़ाया नहीं जा. सकता है उनको आप पूंजी उपलब्ध कराओ ताकि.
वो रोजी रोजगार कर सके इसके लिए सर फंड. आना होगा नहीं फंड तो आपको बता रहे हैं. फंड फंड बजट से नहीं आना है अगर यहां के. बैंक हमको बाहर से पैसा नहीं चाहिए जो. आएगा वो बाद का देखा है बिहार की गरीब. जनता ने पिछले फाइनेंसियल ईयर में 4 61000. करोड़ रुप बिहार के बैंकों में जमा किया. और उस अगर देश का औसत सीडी रेशियो आप. देखेंगे तो बिहार में दो लाख लोगों को दो. 800 हज करोड़ लोन मिलना चाहिए था लोन मिला. 160000 करोड़ तो हम लोग का तो 00 करोड़.
ऐसे ही चला गया बिहार का पूरा बजट है. 240000 करोड़ आप बजट की चर्चा कर रहे हैं. और 26 हज करोड़ जो हम लोग के बचत का पैसा. है जिससे यहां के लोग मोटरसाइकिल खरीदते. गाड़ी खरीदते घर बनाते बिजनेस करते उस पर. कोई बात ही नहीं कर रहा है अब आप एक मिनट. हां आप आप कहिए भाई बिहार में नहीं हो रहा. इसकी तो कोई चर्चा हुई नहीं कभी मेरे भाई. ये बैंकों की स्वायत्तता नहीं है कि वो. जितना पैसा चाहे उतना ही लोन दें एक. वैधानिक उन पर यह उनकी जिम्मेवारी भी है.
कि उनको 70 पर पैसा लोन के तौर पर देना ही. देना है बजाता मुख्यमंत्री के चेयरमैनशिप. में एक कमेटी होती है जो कि हर महीने. जिसको देखना है कि ये पैसा पूंजी लोगों को. उपलब्ध हो लेकिन बिहार में जैसे टीचर. दरोगा डॉक्टर इंजीनियर ऑफिसर बात नहीं सुन. रहा है सरकार की वैसे बैंकर भी नहीं सुन. रहे हैं मेरी बात पूरी होने दीजिए आप इसका. एक उदाहरण देखिए मान लीजिए कि आप एक युवा. है उसको बाल काटने आता है बिहार में हम. आपके पास 00 है हम आप बैंक में गए कि अगर.
हमको 80000 लोन मिल जाए तो मैं एक सैलून. डाल दूंगा चार पाच लोगों को रोजगार भी. दूंगा अपना परिवार भी चलाऊंगा हम बैंक से. लोन मिला नहीं अब आप 20000 का इस्तेमाल. कैसे करेंगे 000 किसी जॉब के दलाल को. देंगे ठेकेदार को देंगे जो आपको बंबे में. किसी सैलून में नौकरी दिलाएगा 000 का. ट्रेन का टिकट बस का खरीदेंगे वहां जाकर. खोली में रहने का स्लम में रहने का एडवांस. देंगे वो 20000 का मूलधन भी गया बमबे में. खर्चा हो गया. और जो आदमी यहां पर सैलून चलाकर एक छोटा. व्यवसाई.
इंटरप्रेन्योर. प्रनर बनके. होता आप नोएडा में देखिए दिल्ली में देखिए. बमबे में देखिए जितने लोग घर काम कर रहे. हैं घर बनाने वाले प्लंबर है. इलेक्ट्रिशियन है फॉल सीलिंग वाले सब यी. बिहार के लोग हैं मेरे भाई अगर बिहार में. घर बनेगा तो वो लड़का दिल्ली में क्यों.
काम करेगा और बिहार में घर कब बनेगा. पुराने जमाने में हम लोग के पिताजी के. टाइम में उनके जनरेशन में घर कैसे बनता था. आपने दो साल पैसा कमाया कुछ पैसा बचाया. चार कमरे बनवाए फिर लिंटर करवाया फिर पैसा. आया तो दो कमरे और बनवाए अब क्या है आप. जाते हैं बैंक में आपको 50 लाख र लोन. मिलता है आप घर पूरा बनाते हैं दैट अगर. उतने घर बन रहे हैं तो उतना ज्यादा सीमेंट. कंज्यूम हो रहा है उतने ज्यादा रोजगार के. अवसर आ रहे हैं तो जो हमारे साथ दुनिया भर. के इकॉनम जिनको मैंने साथ में जोड़ा है जो.
हम लोगों ने मॉडल बनाया है कि अगर बिहार. में पूंजी की उपलब्धता को ठीक कर दिया जाए. तो बहुत बड़े पैमाने पर डिस्ट्रेस. माइग्रेशन को रिवर्स किया जा सकता है ट्रू. फैक्ल मुझे बात समझ में भी आ रही जो आप. बता रहे हो मुझे समझ रहा हूं लेकिन फिर. मेरे मन में एक बहुत मासूम सा सवाल आ रहा. है जो शायद बहुत सारे दर्शकों के मन में. आएगा कि यह बात आप नीतीश जी को क्यों नहीं. समझा पाए इसलिए नहीं समझा पाए पार्टी में. बड़े पद पर थे नहीं बड़े पद पर नहीं थे. मैं नीतीश जी की सरकार 15 में बनी सब मैं. ही कर रहा था हां इसलिए नहीं कर पाए कि.
नीतीश जी जिस विचारधारा से आते हैं उनके. लिए पूंजी जो है वह टैबू है बिहार को जिन. लोगों ने चलाया है यह समाजवाद के नाम पर. इनके लिए पूंजी कैपिटल कैपिटिस वेल्थ. क्रिएशन इट सेल्फ इज अ टैबू दे वांट टू. डिस्ट्रीब्यूटर्स विदाउट थिंकिंग अबाउट कि. अगर वेल्थ क्रिएट नहीं करोगे तो. डिस्ट्रीब्यूटर दोगे तो समानता समाज में. लाने के दो तरीके हैं हम जो ऊपर है नीचे. वाले को ऊपर खींच के सबको बराबर किया जा. सकता है तो बिहार में यह जो डिस्टोर्टेड.
सोशलिज्म है इसमें एक नई तरह की व्यवस्था. बनाई गई इसमें यह त इन नेताओं ने तय किया. कि सबको नीचे ला दो तो बन गया समता मूलक. समाज बिहार में पहले मैं सरकारी विद्यालय. में पढ़ा हूं बिहार में हम लोग के यहां. शिक्षा व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं थी कभी. भी नहीं रही है लेकिन हर प्रखंड में जिले. में आप लोगों से पूछेगा एक दो विद्यालय. ऐसे थे जहां आप पढ़िए पटना कॉलेज आ गए. पटना साइंस कॉलेज आ गए तो आपका जीवन बंद. जाएगा नेतरहाट यहां ही पर बिहार में था. जहां से 1500 से ज्यादा आईएस आईपीएस एक.
स्कूल से निकले हैं नोबा का एसोसिएशन मुझे. लगता है कि सबसे ज्यादा आईएस आईपीएस अगर. किसी एक स्कूल से आए होंगे वो नेतरहाट. बिहार का स्कूल. है लेकिन यह जो जब यह नई समाजवादी समता. मूलक व्यवस्था बनी तो इसमें नीतीश कुमार. ने क्या किया कि शिक्षा को समता मूलक. बनाने के चक्कर में हर गांव में इन्होंने. विद्यालय खोल दिए विद्यालय के नाम पर भवन. बना. नतीजा क्या हुआ स्टेट के पास उतना रिसोर्स. है नहीं कि उतने बड़ी व्यवस्था को सपोर्ट.
करे तो जहां भवन बना वहां शिक्षक नहीं है. जहां शिक्षक है वहां भवन नहीं है जहां. दोनों है वहां पढ़ाने की व्यवस्था नहीं है. जहां तीनों है वहां बच्चे नहीं है जहां सब. है वहां पढ़ाई नहीं है मैं आपको मैं आपको. सही बता रहा. हूं जहां सब है वहां पढ़ाई नहीं है आप. साइंस कॉलेज में चलिए सीबी रमन ने वहां. आकर लिखा है फिजिक्स के लैब में कि दिस इज. वन ऑफ द फाइनेस्ट्राइड फिजिक्स लैब आई हैव. सीन एट दिस लेवल ऑफ कॉलेज एनी वेर इन ईस्ट.
एशिया उस साइंस कॉलेज में लोग कहते हैं कि. बिहार में नियोजित शिक्षक का क्वालिटी. खराब है इसलिए शिक्षा व्यवस्था खराब हो. गया कोई कहेगा कि खिचड़ी बट रहा है इसलिए. खराब हो गया है मेरा उनको सवाल होता है कि. भाई खिचड़ी तो छठवें क्लास तक बट रही है. सातव आठवे क्लास में पढ़ाई क्यों नहीं हो. रही है नियोजित शिक्षक तो स्कूल में पढ़ा. रहा है पटना साइंस कॉलेज और पटना कॉलेज. में क्यों नहीं पढ़ाई हो रही है ये इसलिए. नहीं हो रही है कि कहीं ना कहीं पिछले. 25-30 साल में समाज और सरकार दोनों मैं.
अंडरलाइन कर रहा हूं समाज और सरकार दोनों. की प्राथमिकता में शिक्षा है ही नहीं सही. बात है जो शिक्षा और शिक्षण संस्थान है. बिहार में वो सिर्फ सरकारी अनुदान और कुछ. सहायता बांटने का केंद्र बन गए हैं तो. यहां बिहार में साइकिल योजना चलती है तो. जो गार्जियन है वो आकर मास्टर साहब से. झगड़ा करता है कि मेरा साइकिल का पैसा कब. आएगा मेरा कपड़ा का पैसा कब आएगा यी लेकिन. वो यह नहीं पूछता है कि पूरे साल गणित के. तो टीचर यहां है ही नहीं ठीक बात और समाज.
ने भी इसको ऐसे मान लिया और सरकार ने भी. इनका इस्तेमाल कैसे शुरू किया जितने. शिक्षक हैं इनसे कभी आप स्वच्छता अभियान. चलवा रहे हो कभी इनसे वोटर बनवा रहे हो. कभी इनसे आप झाड़ू लगवा रहे हो नीतीश. कुमार उससे कभी शरा बंदी का काम करवा रहे. हैं ठीक बा ये जिस दिन समाज और सरकार की. प्राथमिकता ऐसा नहीं कि हम लोग शिक्षा पर. खर्च नहीं कर रहे हैं बिहार सरकार में. टोटल 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हम लोग. शिक्षा पर खर्च कर रहे हैं और 50 बच्चा भी.
यहां से पढ़कर नहीं निकल रहा. है ऐसी बात नहीं आप करहे कैसे सुधरेगा. बिल्कुल सुधार होगा ठीक बिहार में महिला. साक्षरता एक बहुत बड़ा इशू है एक तो. साक्षरता ही बड़ा इशू है ऊपर से महिला. साक्षरता उससे बड़ा इशू है जी आपकी पार्टी. का संविधान बन रहा था कुछ राहे बगाहे कहीं. से कान में सुनाई पड़ा कि उसम महिलाओं की. भागीदारी कम है कुछ ने कहा है हमने क पूछ. ले सीधे आपसे आप बता देंगे महिलाओं की. भागीदारी के बारे में आपकी पार्टी में. क्या सीन है बिल्कुल हम लोगों ने तय किया.
है कि फर्स्ट स्टेप क्रेडिबल स्टेप एक. पूरे इस अभियान में हमने एक तय किया है कि. हम लोग वोट के लिए गलत बात नहीं बोलेंगे. जैसे मैं कंट्रोवर्शियल बातें बोलता हूं. कि बिहार में भूमि सुधार लागू होना चाहिए. मुझे किसी ने पूछा कि भाई आप यह बोलिएगा. तो सवर्ण नाराज हो जाएगा मैंने कहा होता. है तो हो जाए मुझे लोगों ने कहा मैं पहला. आदमी हूं जो कह रहा हूं कि जन स्वराज की. सरकार बनी 15 मिनट में शरा बंदी हटाकर. फेंक देंगे लोग कह रहे हैं कि भैया इससे.
तो महिला नाराज हो जाएगी मैंने होता है. होने दो कोई दिक्कत नहीं है झूठ नहीं. बोलेंगे जो सही लग रहा है वो बोलेंगे जो. जमीन पर देख रहे हैं वो बोलेंगे और लोगों. को ये बात समझ में आ रही है कि आदमी बोल. रहा है बहुत कठोर बात लेकिन अच्छी सही बात. बोल रहा है तो महिला के भागीदारी के लिए. हम लोग कोई बड़ा प्रॉमिस नहीं कर रहे हैं. क्योंकि यह संभव नहीं है कि कल तक महिला. बिल्कुल घर में है और कल मैं आकर कह दूं. कि उसको 50 पर भागीदारी मिल जाएगी लेकिन. हम हम लोगों ने एक क्रेडिबल बात कही है कि. हर लोकसभा क्षेत्र में कम से कम एक महिला.
नेत्री को हम लोग चुनाव जरूर लड़ाए मतलब. बिहार में 40 जन स्वराज की उम्मीदवार जरूर. महिला होंगी और अपने आप में वह 40. उम्मीदवारों का लड़ना बिहार के इतिहास की. सबसे बड़ी घटना होगी आज तक किसी दल ने. यहां 40 महिलाओं को विधानसभा में टिकट. नहीं दिया एक साथ तो जन स्वराज का यह. अभियान है यह यह संकल्प है और हम लोग इस. बात को भी सं संविधान में महिलाओं की. भूमिका रही जो लिखा गया है बिल्कुल. बिल्कुल आज जो अभी 121 सदस्य संविधान.
बनाने वाली जो कमेटी है उसमें 14 महिलाएं. हैं म और आपको लिस्ट में दे दूंगा उसको. चेक भी कीजिए आप कि 14 महिलाएं हैं कि. नहीं और यह भी देखिए कि उन महिलाओं का. कैलिबर क्या है यह खाली मत देखिएगा कि. खाली महिला है उनका प्रोफाइल भी है और मैं. चाहता हूं कि आप उन महिलाओं का कैलिबर. देखिए कि किस कैलिबर की महिलाओं को यहां. पर रखा गया है ठीक बात आपने कहा 40 लड़ाए. अच्छी बात है और महिलाओं की भागीदारी नी. चाहिए महिलाओ को होना चाहिए लेकिन अब एक. सवाल आता है कि चुनाव लड़ने के लिए पैसा. भी चाहिए जी और प्रशांत किशोर जी हर जगह.
छाती ठोक केते हैं पैसा चिंता मत करो जी. अभी भी कह रहे और कोई पूछता है तो कहते. हैं पुराने दो सो बनाए थे हो जाता है जी. अब एक कहावत है ना कि भाई जब सियासत में. बीच का मरहला नहीं होता या तो होता है या. नहीं होता है अब आप नेता ना होते तो कोई. कुछ ना पूछता अब आप नेता है तो हर आदमी. खोद खोद के पूछेगा चाए तो खोद के आदमी पूछ. रहा है कि भैया इत इतना पैसा आया कहां से. हर रोज आपका लाखों खर्चा है अभी जो. कार्यक्रम कि क्या जबरदस्त भीड़ थी यहां. आदमी पत्रकार को बुलाता तो वो भी एक बार.
कुछ ब्रेकफास्ट खाके जाते हैं आपको तो. नहीं खिलाया मैंको तो अभी चलिए नहीं खिलाए. उम्मीद करेंगे रात को चाय पानी. पिलाए लेकिन इतना पैसा कहां से ला रहे हैं. ठीक बात है एकदम बिल्कुल सही बात कहा इस. अभियान के लिए जो पैसा है वो पैसा उन. लोगों से ले रहे हैं जिन्होंने जिन्हो की. मैंने मदद पिछले सात आ 10 साल में करी है. और उसका मतलब नहीं नहीं सिर्फ पॉलिटिशियन. नहीं उन पॉलिटिकल पार्टी या उनके जो. बेनिफैक्टर्स हैं जिन राज्यों में मैंने. लोगों को चुनाव जिताने में मदद की उन.
राज्यों में बहुत बड़े-बड़े इंडस्ट्रीज. हैं बहुत बड़े-बड़े पैसे वाले लोग हैं. जिन्होंने मेरा काम देखा है जिनको थोड़ा. बहुत यह विश्वास है कि अगर प्रशांत किशोर. कुछ प्रयास कर रहा है तो इससे कुछ अच्छा. निकल सकता है मैं उनसे हाथ फैला रहा हूं. उनसे मांग रहा हूं कि इस अभियान को करने. के लिए आप मेरी मदद कीजिए और लोग मदद कर. रहे हैं मतलब बीजेपी कांग्रेस टीएमसी इनके. जो जुड़े हुए इंडस्ट्रियलिस्ट हैं उनसे ही. आप पैसा ले इंडस्ट्रियलिस्ट हो बिजनेसमैन. हो छोटे हो ने नेता भी हो बहुत लोग दे रहे. पैसा बहुत लोग दे रहे पै दूसरी पार्टी के. भी दे रहे हैं दे रहे हैं और और सुनिए.
लेकिन यह पैसा सिर्फ अभियान के लिए मांगा. जा रहा है जब यह दल बनेगा और हम लोग चुनाव. लड़ेंगे उसका पैसा कहां से आएगा उस पैसे. की जो व्यवस्था हम लोगों ने की है कि. बिहार में जन सुराज का संकल्प है जैसे. आपने. 20121 में पहली बार देखा सोशल मीडिया का. प्रयोग तो वैसे आप डिसेंट्रलाइज फंडिंग दे. देखेंगे पहली बार बिहार में हम लोग का. लक्ष्य है कि दो करोड़ बिहार के लोगों से.
दो करोड़ बिहार के लोगों से 10000 लिया. जाएगा हम हम लोग वो व्यवस्था बना रहे हैं. कि आप अपने मोबाइल से ₹1 जन स्वराज को. भेजिए 00 ज्यादा नहीं और अगर दो करोड़ लोग. 00100 रुप देंगे तो 200 करोड़ रुप जमा हो. जाएगा और वह पैसा काफी है बिहार में गरीब. से गरीब आदमी को भी चुनाव लड़ाने के लिए. और इसकी पूरी जो पिरामिड हम लोगों ने बनाई. है दो करोड़ लोग 100 100 रुप दे हम 2 लाख. लोग हजार हजार दे हम और कम से कम 13 करोड़. की आबादी है बिहार की हम और कम से कम 2000.
आदमी ऐसा जरूर हो जो लाख लाख रुपया दे ये. फंडिंग का पूरा ट्रांसपेरेंट व्यवस्था. बनाए हैं 2 अक्टूबर के बाद से आप इसको चेक. कीजिए और मेरी गर्दन पकड़िए कि इस तरह से. ये पैसा आ रहा है कि नहीं 13 करोड़ की. बिहार की आबादी में बिलकुल सहमत आप जो कह. रहे हैं उ देखेंगे भी देखिए 13 करोड़ की. बिहार की आबादी में हम 2 करोड़ लोग ₹1. नहीं दे सकते हैं बिल्कुल देंगे अभी वह. व्यवस्था ही नहीं है वह व्यवस्था हम लोग. बना रहे हैं और वह पैसा लोग हम तो आगे जा. ही नहीं रहे हम तो अभी बात कर रहे हैं अभी.
आपको जितना करोड़ों रुपए तो अभी भी खर्चा. हो गया होगा दो साल में बहु अब भारत वो. देश है जितना हमने समझा है अगर हम आपको. ₹10 की चाय पिलाते हैं तो कोई ना कोई. हमारा भी उसमें हित होता है या तो मोहब्बत. होती है या आपको लेके कहीं होता है अब. लोगों के मन में सवाल यह है कि जो आदमी. पैसा दे रहा है कुछ उम्मीद तो वो भी कर. रहा होगा राहुल जी आरोप भी लगाते हैं मोदी. जी पे कि देखिए चुनाव में फंडिंग करवाए थे. अडानी जी बाद में पोर्ट दे दिए ल ऐसा ऐसा. ऐसा है वो बहुत बड़े लोग हैं वो लोग देश. चलाते हैं हम देश नहीं चलाते हम छोटा सा. अभियान चलाते आप सरकार बनवाई थे महाराज.
आपने कहा कि लोग पैसा क्यों दे रहे हैं हम. पैसा इसलिए दे रहे हैं कि उन्होंने उनके. राज्य में जो सरकार चल रही है वो सरकार. बनाने में हमारा कंधा उन्होंने देखा है हम. हमारा उनसे भाईचारा है हम उनकी सरकार है. उसमें वह मंत्री हैं उसमें कोई बिजनेसमैन. है उसमें कोई एमपी है उसमें कोई एमएलए है. तो वो लोग मदद कर रहे हैं इसलिए नहीं कि. उनको तो उनको तो वही कांशीराम जी वाला. फार्मूला मालूम है कि प्रशांत जी को तो 10. साल लगेगा बिहार जीतने में तो अभी वो.
बिहार में कांट्रैक्ट नहीं खोज ट क्लियर. हो गया होगा ना नहीं नहीं वो तो जिसने काम. किया होगा पार्टी ने पैसा दिया होगा मैं. कह रहा हूं कि पार्टियों के जो. बेनिफैक्टर्स है वो एक बहुत बड़ा एक जैसे. टीएमसी है तो टीएमसी को पैसा देने वाला. कोई एक व्यक्ति नहीं होगा ना भाई वहां पर. 50 लोग दे रहे हैं उस 50 में 10 आदमी ऐसा. भी हो जो कह ई प्रशांत किशोर आदमी ठीक है. यह प्रयास कर रहा है इसने तो कोई हमसे. पैसा नहीं लिया हम चाहते थे टीएमसी जी. टीएमसी जीत गई उस समय तो इसको कोई पैसा. हमसे लिया नहीं दोस्त बना लिया आपने दोस्त. बनाए और वो लोग पैसा दे रहे उनसे हाथ मा.
हाथ फैलाकर मांग रहे हैं पहली बार पहली. बार जीवन में पैसा मांग रहे हैं लोगों से. कभी मांगा नहीं किसी से पैसा मांग रहे हैं. कि भाई बिहार में व्यवस्था बनानी है दो. पैसे पैसे दोगे तो सलाह. दूंगा निजी जिंदगी में कोई दोस्त है कि. खाली 24 घंटे सियासत को कोई नहीं य. प्रोफेशनल फ्रेंड्स प्रोफेशनल फ्रेंड तो. सर गिवन डर नहीं लगता मतलब प्रोफेशनल. फ्रेंड कह लीजिए क्विटेंस कह लीजिए. फ्रेंडशिप जिसको आप प्योर फॉर्म फ्रेंड्स. तो नहीं कह सकते बट बेनिफिट वाली दोस्ती. जो होती कई बार खून पीने वाली तीली चल गए.
तो बढ़िया है चांद तक अगर ना चल पाए खून. पी जाएंगे जो की तरह ही लोग ऐसा ही है लोग. जीतते हैं तो दोस्त हैं जब उनकी मदद के. लिए नहीं खड़े होंगे तो हमारे खिलाफ भी. लोग बोलते हैं कुछ विषय है जिन पर आपकी. राय जाना जाते हैं अभी जातिगत जनगणना की. बात चल रही है हालांकि संसद में जात पूछ. ली गई उस परे काफी बवाल हो गया जी आपका. क्या सोचना है बिल्कुल जातिगत जनगणना के. हम पक्ष में है जातिगत जनगणना होनी चाहिए. लेकिन जातिगत जनगणना देश के विकास का. पेनेशिया नहीं है जैसा लोग बता रहे हैं हम.
अगर जातिगत जनगणना हो जाने मात्र से समाज. का भला हो जाता तो पूरा देश जानता है कि. बिहार में कौन लोग गरीब हैं एससी एसटी की. गणना तो हो रही है सबको मालूम है कि एससी. एसटी समाज में शैक्षणिक आर्थिक सामाजिक. नजरिए से पीछे उनका सुधार क्यों नहीं हुआ. जो लोग यह कह रहे हैं कि जातिगत जना होगी. और देश का माहौल बदल जाएगा सब कुछ ठीक हो. जाएगा वो तो ऐसे हुआ कि आप कह रहे हैं कि. आप लाइब्रेरी में जाओगे और आइंस्टीन बन के. निकल आओगे अरे भैया लाइब्रेरी में किताब. है उसको पढ़ोगे पढ़ के अंतर इंटरनलाइज.
इंटरनलाइज करोगे तब तो कुछ कर पाओगे हम. जातिगत जनगणना होने से या किसी भी उस तरह. की जनगणना या सर्वे से जिससे कि समाज के. बारे में बेहतर सरकार के पास जानकारी मिले. उसका फायदा है लेकिन फायदा तब है जब उसके. आधारित आप पॉलिसी बनाएं उस तरह की. टारगेटिंग हो सिर्फ जातिगत जनगणना कराकर. वोट लिए और सो गए तो भाई सबको पता है. बिहार सबसे देश में गरीब राज्य है किसको. नहीं मालूम है ये तो आपके पास गन्ना है कि. यहां प्रति व्यक्ति आए 000 है तो उसको.
सुधार दो. पहले तो जातिगत जनगणना के पक्ष में है. लेकिन मैजिक नहीं हो ये मैजिक नहीं है और. चुनावी फायदे के लिए जो लोग यह बात कह रहे. हैं वो देश को गुमराह कर रहे भा आप खुद 60. वर्ष सरकार में थे आपको किसने रोका था. जातिगत जनना कराने से दो पिछला जो सेंसस. हुआ था देश में वो तो जातिगत जनगणना के. आधार पर कराया ही गया था उसको रिलीज नहीं. किया कांग्रेस और यूपी की सरकार ने फिर. मोदी जी आए हैं तब तो इन्होंने सेंसस नहीं. कराया अभी लेकिन अगर हो तो जातिगत जनना हो.
उसमें क्या दिक्कत है आप मुझे यह बताइए. किसको नहीं मालूम है कि किस जाति के कितने. लोग कहां रहते हैं दिन रात नेता यही चर्चा. करते हैं लोग और समाज को बेवकूफ बना रहा. है कि जातिगत जनगणना होगा तब पता चलेगा. भाई हर बूथ पर लोगों को मालूम है किस जाति. के कितने लोग र दिन रात तो यही गन्ना लोग. कर रहे हैं और समाज को बता रहे भैया. जातिगत जन्ना होगा तो जैसे लग रहा है कि. कोई नई डि कवरी हो जाएगी भाई सबको पता है. कि बिहार में जो अनुसूचित जाति समाज के. लोग हैं वह सबसे गरीब और पिछड़े हैं सबको.
मालूम है कि अति पिछड़ों की जनसंख्या यहां. 35 पर है संभव है कि आप जनगणना कराएंगे तो. 1 पर ज्यादा होगा या कम होगा लेकिन 30 35. पर यहां अति पिछड़ा समाज के लोग रहते हैं. यह बात कोई डिस्कवरी की नहीं है ये तो पता. है सबको भाई ठीक आरक्षण पर आपकी क्या राय. है क्योंकि एक वर्ग मानता है कि आर्थिक. आधार पर आरक्षण होना चाहिए जो गरीब है उसे. मिले उसको लेकर आपका क्या थॉट प्रोसेस है. बिल्कुल जो संवैधानिक व्यवस्था बनी हुई है. आरक्षण को लेकर उसको आगे बने रहना चाहिए. अब लोगों का तर्क यह है कि संविधान में तो.
इसका प्रोविजन 10 साल 20 साल के लिए किया. गया था बिल्कुल नहीं संविधान में 10 साल. की लिए व्यवस्था या 20 साल के लिए की गई. थी लेकिन उसके साथ में यह भी लिखा गया था. ये शायद उनकी आशा अपेक्षा रही होगी कि 10. साल में यह सामाजिक विषमता दूर हो. जाएगी तो अगर आपने पहले 10 साल में. पंचवर्षीय योजना में कहा कि देश से गरीबी. उन्मूलन कर दिया जाए. गरीबी उन्मूलन नहीं हुआ तो क्या आप गरीब. गरीबी उन्मूलन के प्रयास बंद कर देंगे तो.
अगर आरक्षण से जो लाभ जो स्थिति जो आउटकम. संविधान बनाने वालो लोगों ने किया होगा वह. नहीं मिली तो आपको आरक्षण को जारी रखना है. कब तक जारी रखना है तब तक जारी रखना है. जबकि उन वर्गों को जो कि जिनको आरक्षण मिल. रहा है उनकी सामाजिक शैक्षणिक आर्थिक. स्थिति सामान्य वर्ग के बराबर ना हो जाए. जब बराबर हो जाए तो आप हटा लीजिए ठीक अ. जॉब प्रमोशन में रिजर्वेशन होना चाहिए. प्राइवेट कंपनीज में रिजर्वेशन होना चाहिए.
जन स्वराज में हम लोग इसके आगे जाकर बोल. रहे हैं मान लीजिए कि आपने जॉब में. रिजर्वेशन दे दिया इतनी बड़ी राजनीति होती. है बिहार में 13 करोड़ की आबादी में. सरकारी नौकरियों में 23 लाख लोग हैं. चपरासी से लेकर मुख्य सचिव तक सबकी गणना. कर लीजिएगा तो टोटल 23 लाख लोगों को बिहार. में सरकारी नौकरी है प्रतिशत के टर्म में. हुआ. 1.97 ह मतलब 98 पर आदमी को सरकारी नौकरी. से कोई लेना देना ही नहीं है ना उसको मिला. है ना आगे मिलने वाला है और उसी 2 पर में.
रिजर्वेशन 20 पर होना चाहिए कि 60 पर होना. चाहिए उसी में लड़ा लड़ा करर पूरे समाज को. मार. दिया अब लोग कहते हैं भैया प्राइवेट. सेक्टर में भी होना चाहिए चलो उसको भी. जोड़ दो अगर आप प्राइवेट सेक्टर में भी. रिजर्वेशन कर दो तब भी 25 पर होगा 30 पर. होगा भाई 40 पर समाज है जिसके पास ना. सरकारी नौकरी है ना उसके पास प्राइवेट नौक. है ना उसके पास जमीन है ना शिक्षा है उसको. तो इसका लाभ मिल ही नहीं सकता है तो. समानता की जो बात है जो जन स्वराज्य के.
संविधान में हम लोग लिख रहे हैं जो कह रहे. हैं कि अगर आप समानता की बात कर रहे हैं. तो समानता का का अधिकार शिक्षा में भूमि. में पूंजी में यह तीनों में होना चाहिए. तभी आपको सरकारी नौकरियों में या प्राइवेट. नौकरियों में आरक्षण के साथ-साथ अगर ये. तीनों करोगे तभी आपको समाज में समतामूलक. समाज की जो परिकल्पना लोग करते हैं तभी वो. आप को देखने को मिल सकती है और जन स्वराज. आएगा तब जब टिकट से चुनाव लड़ेंगे अब जनता. पूछती है कि जन स्वराज में टिकट पाने का.
क्या आधार होगा क्योंकि क्यों यह सवाल बता. रहा हूं क्यों क्योंकि बहुत सारे यूट्यूब. थे जो मुझसे कहे कि प्रशांत जी ने कहा था. कि सारे. youtube1 लगवाने कहे थे वो भी नहीं लगवाया. हमारे लिए अब वो कह रहे हैं कि हमको डर लग. रहा है कि प्रशांत जी के इर्दगिर्द. बड़े-बड़े अधिकारी रहते हैं और कई सारे अब. कपूरी ठाकुर जी के शायद कोई खानदान से भी. आपके यहां जॉइन कर लिया है या कई और दूसरी. पार्टी से अब वो कह रहे हैं वो बाकी. पार्टी से भी लेने लगे हैं तो फिर हम लोग.
को डर है कि जो युवाओं में उम्मीद थी कि. झंडा हम बुलंद किए टिकट नेता जी लड़का ले. जाएगा देखिए ऐसा है मैंने जन सुराज अभियान. जब शुरू हुआ तो एक स्टडी कराया था एक. आंकड़ा जारी किया था पिछले 30 वर्ष में. बिहार में जितने लोग सांसद विधायक बने हैं. वो किसी भी दल से बने हो सिर्फ 1250. परिवार के लोग ही यह रेवलिंग डाटा है. सिर्फ 1250 परिवार के लोग ही बिहार में. सांसद विधायक पिछले 30 वर्ष में बने दल. कोई भी रहा हो आपको एक उदाहरण देता हूं.
यहां पर अभी डिप्टी सीएम है सम्राट चौधरी. जी वो भाजपा के नेता है सम्राट चौधरी जी. कौन है इनके पिताजी हैं शकुनी चौधरी शकुनी. चौधरी जी जब कांग्रेस का राज था तो उसमें. विधायक और मंत्री थे जब लालू जी का राज. आया तो सकनी चौधरी जी उसमें भी विधायक. मंत्री बने जब नीतीश जी का राज आया तो. उसमें भी विधायक मंत्री सकनी चौधरी बने जब. मांजी जी बने तो उसमें भी सकनी चौधरी. विधायक मंत्री थे और आज जब भाजपा को भी. बनाना हुआ तो उसको भी कोई सामान्य कुशवाहा. नहीं मिला उसको सकुनी चौधरी का बेटा ही.
मिला तो कुछ चंद परिवारों का राजनीति पर. ऐसा कब्जा है कि उससे बाहर राजनीति जाती. ही नहीं है हम आप को लगता है कि हम. कांग्रेस को हटाकर लालू को लाए लालू को. हटाकर नीतीश को लाए लेकिन उनके मंत्रिमंडल. में उनके सरकार में उनके विधायक दल में. वही लोग हैं जो पिछले थे या उनके चट्टे. बट्टे ही हैं उनके परिवार वाले हैं आप का. आधार तो जन सुराज ने यह कहा कि नहीं कम से. कम दो तिहाई लोग ऐसे लोग चुनाव लड़ेंगे.
233 में दो तिहाई लोग ऐसे चुनाव लड़ेंगे. जो जीवन में पहले कभी चुनाव नहीं लड़े हो. जो ज्यादातर लोग राजनीतिक पृष्ठभूमि के भी. नहीं होंगे अब आप ये कहेंगे शत प्रतिशत. क्यों नहीं इस पर भी बड़ी लंबा लंबी चर्चा. चली है कि भैया इन 1200 परिवार को तो आप. बैन ही कर दो हां लोग ये कहते हैं जोश में. आके लेकिन सब बदल ले तो ये भी बदल ये भी. बदल दो लेकिन बहुत चर्चा के बाद लोगों ने. कहा कि नहीं इसको अगर संविधान में हम लोग. लिख देंगे तो उन 1250 परिवारों के साथ यह. गलती हो जाएगी नाइंसाफी हो जाएगी उसमें.
संभव है कि बहुत कुछ अच्छे लोग भी हो ठीक. बात तो लेकिन दो तिहाई सीट निश्चित तौर पर. उन लोगों को मिलेगा जो राजनीतिक तौर पर. पहले चुनाव नहीं लड़ते रहे नए चेहरे आपको. देखने उस कोई क्राइटेरिया होगा ना सर कि. गरीब है जात से है पैसा वाला है या जो. पैसा दे रहा है नहीं पैसा तो यहां कोई दे. ही नहीं रहा यहां तो हम घर-घर जाकर कह रहे. हैं कि तुम भाई आओ हम टिकट ना मिल हमके. प्रशांत जी हमको दीजिए हां बिल्कुल. ठीक बात है डर तो है हां इसका इसको खत्म.
करने के लिए जन स्वराज ने नई व्यवस्था. बनाई हम जब दल बनेगा तो उसके दो महीना के. अंदर हम हर विधानसभा क्षेत्र से पांच से. सात नाम सार्वजनिक कर दिए जाएंगे कि यह जन. स्वराज के संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं. और उन पांच सात लोगों में जनता के पास साल. भर यह अवसर होगा चुनने का कि इसमें सबसे. बेहतर और काबिल व्यक्ति कौन है जो जन. स्वराज का उम्मीदवार होना चाहिए मैं आपको. उदाहरण देना चाहता हूं आप बताइए कि. अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी का.
उम्मीदवार प्रेसिडेंशियल उम्मीदवार कौन. होगा यह कोई कोई एक कमेटी तो तय नहीं करती. है हम जिसको नॉमिनेट नॉमिनेशन चाहिए जिसको. चुनाव लड़ना है वो नॉमिनेशन देता है. प्राइमरी होती है छ महीना लोग प्रचार. प्रसार करते हैं अपनी बात रखते हैं फिर. रिपब्लिकन पार्टी के डेमो जितने डेलिगेट्स. हैं वो मिलकर चुनाव करते हैं कि भैया. जितने लोग हैं सबकी बात सुनने के बाद कौन. सा आदमी. रिपब्लिकन पार्टी का सबसे बेहतर कैंडिडेट. हो सकता है तो एक तरीके से आप वो प्राइमरी.
को देखेंगे नवंबर में आप आए इसी नवंबर में. दल बनने के दो महीने के अंदर पूरे 243 सीट. पर आपको संभावित उम्मीदवारों की सूची जारी. कर देंगे ताकि लास्ट में आकर पैसा देकर. गमछा फेंक कर कोई आ ही ना सके आपने एक बात. कही कि अधिकारियों की तो मैं आपको कैमरे. पर कह रहा हूं करीब-करीब 2. सवा आईएएस आईपीएस या उन के समकक्ष. नौकरियों के लोग छोड़कर आज बिहार में जन.
सुराज से जुड़े हैं और यह एक हमारे लिए. खुशी की भी बात है और चुनौती भी है सबकी. उम्मीदें होंगी टिकट नहीं नहीं उसमें. ज्यादातर लोग हैं जो यह चाहते हैं कि भैया. हम लोग तो जीवन में बहुत यहां कष्ट झेले. हैं जीवन के फैग एंड में अगर लग रहा है कि. बिहार में कोई सुधार हो जाए तो हम लोग. इसमें कंधा लगाना चाहते हैं कुछ लोग उसमें. चुनाव लड़ने वाले भी हैं चुनौती इसलिए है. जो आप बात कह रहे हैं कि अगर इनमें से कई. काबिल लोगों को चुनाव लड़ा दिया जाए तो. लोगों की ये धारणा बनेगी कि भैया ये तो सब. ब्यूरोक्रेट लोग ही आ गए हम खुशी की बात.
यह है कि भाई इतने पढ़े लिखे समझदार लोग. अच्छे. लोग कम से कम उनको यह हम लोगों ने होप तो. दिया है कि भाई बिहार में भी कुछ हो सकता. है एक प्रयास तो हो रहा है लोग रिटायरमेंट. के बाद 10 साल से कोई दिल्ली में है कोई. लखनऊ में है कोई हैदराबाद में छोड़कर आ. रहा है कह रहा है ना भैया पहली बार उम्मीद. जगी है बिहार में कुछ हो रहा है इसमें तो. कंधा जरूर लगाएंगे तो मैं उनको भगा भी. नहीं सकता हूं उनके अनुभव का उनकी विद्वता. का लाभ भी मिलना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है.
कि वही लोग चुनाव लड़ेंगे उस पर भी. बिल्कुल समझ बनी हुई है कि ज्यादातर लोग. उसमें चुनाव नहीं लड़ने वाले मतलब बिहार. हम पहली बार आए लेकिन सवाल सब बिहार का. सही लाए इसका मतलब बिल्कुल ठीक आप सवाल. जनता से पूछ रहे हैं आप बिहार में फॉलो. किए जाते हैं इतने इसीलिए हम सब लिख आई. नहीं आप आपके जो शो पर सेलिब्रिटी लोग या. बड़े-बड़े चेहरे आकर जन स्वराज की तारीफ. कर कर रहे हैं वह हवा में नहीं कर रहे हैं. वह हमारे मित्र हैं ऐसा इसलिए नहीं कर रहे. हैं हम उनको पैसा नहीं दे रहे हैं वह.
हमारे पीआर एजेंट नहीं है जैसे उनको लग. रहा है कि बिहार में कम से कम प्रयास तो. कोई कर रहा है यह हम भी कह रहे हैं जीतना. हारना छोड़ दीजिए इतनी बात तो सब बिहार. में कह रहा है कि भाई प्रयास तो कोई कर. रहा है जो बात कह रहा है वो ठीक है कर. पाएगा कि नहीं वो अलग बात है लेकिन अगर हो. जाए तो बड़ा अच्छा है इतनी बात ये सब कह. रहे हैं और उसके बाद जो सवाल बच रहे वो हम. आपके सामने पे पेश कर रहे अब एक सवाल और. आया कि प्रशांत किशोर जी अब रात के 12. बजने वाले हैं अब आप हर सवाल प हमको हमा.
सवाल हम थोड़ा हमको पोस करना पड़ता है ना. आप पूरा डिटेल देते हैं इसलिए हम रुक जाते. हैं सवाल भी नहीं छोड़ सकते इतना दूर 1000. किलोमीटर आए हैं हां तो अभी आपकी भोजपुरी. जो है वो यूपी वाली भोजपुरी है हमारी अवधी. है अवधी है हमरे बहर अवधि बोला जाता है र. भोजपुरी गोरखपुर से आगे भोजपुरी है हमरे. बाहर अवधी बोला जाता है हां ठीक बात है. ठीक है एक मुस्लिम अपीज मेंट की बात चल. रही है कई सारे मुस्लिम लड़कों ने मुझे. मैसेज किया कि प्रशांत किशोर जी ने हर ली. हर भाषण में कहा कि या पिछड़ों को कहा कि. देखो तुम लोग इन्हीं को वोट देते हो आखिर. में यह बात वो सवर्णों से नहीं कहते वो.
बातें उनकी जो बातें होती है टारगेट जो. होता है वो तेजस्वी यादव आरजेडी या. मुसलमान या शेड्यूल कास्ट उनको होता है वह. अपनी जात वालों को नहीं बोलते या बीजेपी. के टर्ड उतना नहीं दिखाते जितना ऐसा लगता. है कि तेजस्वी यादव ही मुख्यमंत्री है. सारी दुश्मनी तेजस्वी से उनकी है नहीं ऐसी. बात नहीं है मैं हर पूरे अभियान का जो के. जो मूल में बात है कि बिहार में जो. राजनीतिक बंधुआ मजदूरी है जहां लोग लालू. के डर से भाजपा को और भाजपा के डर से लालू.
को वोट पिछले 30 साल से दे रहे हैं उसी. राजनीतिक बंधुआ मजदूरी से तो बाहर निकालने. की बात है मैं मुसलमानों को क्या कह रहा. हूं मैं मुसलमानों को जाकर डंके की चोट पर. कह रहा हूं कि तुमको वोट आरजेडी को देना. है दो लेकिन प्रशांत किशोर की बात मानो ना. मानो जो बात आपके पैगंबर साहब ने बताई जो. बात इस्लाम में बताई गई है सियासी मामलो. के बारे में कम से कम उस पर गौर फरमाइए. मुसलमान आज बिहार में देश मतलब दलितों के.
बाद सबसे ज्यादा गरीब और फटे हाल है फिर. भी मुसलमान आरजेडी को वोट देता है मुसलमान. यह खड़ा होकर कहता है कि भाई हम क्या करें. हम तो भाजपा से के वजह से देते हैं भाजपा. के डर से देते हैं लालू जी के अलावा कोई. विकल्प नहीं है हमको तो सबने ठगा है तो. मैं उनको कुरान के हवाले से बताता हूं कि. भाई पैगंबर साहब ने कहा कि जिसको को अपने. रहनुमाओं की समझ ना हो उसके ऊपर जालिम. हुक्मरानों को मुसल्लत कर दिया जाता है तो.
अगर आप यह कह रहे हैं कि आज के हुक्मरान. जालिम है तो पैगंबर साहब की बात कही हुई. गलत तो हो नहीं सकती उस पूरे लाइन को पढ़ो. उन्होंने कहा कि जालिम हुक्मरान आप पर तब. मुसल्लत किए जाएंगे जब आप गलत रहनुमाओं का. चुनाव करेंगे तो आप खुद ही कह रहे हैं कि. आज के जो रहनुमा है आपको आपने जिनको. रहनुमा बनाया आज के जो हुक्मरान है वो. जालिम है इसका मतलब है कि जिसको आपने. रहनुमा बनाया वो गलत आदमी था कुरान के. हवाले से मैं उनको बता रहा हूं कि इस्लाम. में यह बताया गया है कुरान की शुरुआत का.
पहला वर्ड है इकरा इकरा का मतलब है. पढ़ो और जिस कौम के कुरान सबसे पवित्र. ग्रंथ की शुरुआत होती है इस वर्ड से कि. पढ़ो वह कौम आज आपने अपने बच्चों की पढ़ाई. की चिंता ही नहीं कर रहा है वह सबसे अनपढ. कौम बन गया. है जिस कौम में इस्लाम में बताया गया है. कि अपने बच्चों के साथ इंसाफ करना अपने. बच्चों की अच्छी तरबियत और परवरिश करना.
उनके साथ इंसाफ करना सुन तो लीजिए ये. अल्लाह की एक तरह से उनको इंस्ट्रक्शन है. कि आपको करना है और आप अपने बच्चों का जो. हक मार कर जा रहे हैं जो लूट रहे हैं आपके. बच्चों को जिन्होंने अनपढ मजदूर बनाया है. उन बच्चों की चिंता ना करके भाजपा के डर. से लालटेन को वोट दे रहे हो यार आपको लग. रहा है केवल डर से वोट दे रहा है बिल्कुल. मुसलमान सिर्फ भाजपा के डर से वोट देता है. और यही बात मैं मुसलमानों को कह रहा हूं. कि भाई आप कहते हो कि आप अल्लाह को छोड़कर.
किसी से नहीं डरते हो और यहां हालात ये है. कि भाजपा का डर दिखाकर चोर बदमाश डकैत भी. आपसे वोट ले जाता हैने मुझसे कहा कि. उन्हें इस बात का भी डर है कि प्रशांत. किशोर मुसलमानों से बात कर रहे हैं कहीं. वोट कटुआ ना बन जाए वो भाई देखिए यह. मुसलमान आप दिल्ली के मुसलमानों से बात कर. रहे हैं मुसलमानों कीश के लोगों ने नहीं. दिल्ली मतलब जो बिहार के भी तो बहुत बड़ी. संख्या में वहां लोग रहते हैं जो मुसलमान. यहां जन स्वराज को ध्यान से देख रहा है हा. गौर से दो साल से बिल्कुल उसके मन में हर. तरह के सवाल हैं हां होने भी चाहिए जैसे.
भी जो माइनॉरिटी हैं उनके मन में सुरक्षा. डर कहीं ठगे ना जाए ये सब क्योंकि ये समाज. इतनी बार ठगा गया है कि उसका सवाल करना. जायज है इसलिए जो जन स्वराज में बात कही. जा रही है हम उनको सामने से कह रहे हैं कि. भाई आप बिल्कुल प्रशांत किशोर पर जन. स्वराज पर भरोसा मत कीजिए आप भरोसा अपने. अनुभव पर कीजिए आप भरोसा मेरे कथनी पर. नहीं मेरे करनी को देखिए और आप वोट जिसको. देना है दीजिए लालटेन को मन है लालटेन को.
दीजिए लेकिन राजनीति में अपने बच्चों को. लाइए जन सुराज सिर्फ उनसे एक ही चीज मांग. रहा है कि आप अपने बच्चों को राजनीति में. लाओ जन सुराज आप इस बार दबा के टिकट देंगे. आप मुसलमान नहीं दबाने की बात नहीं है. टिकट देने की बात अच्छा रेशो रहेगा नहीं. मैं आपको बता रहा हूं दूसरी बात गहराई से. समझिए इसको मुसलमानों की आबादी के हिसाब. से बिहार में उनके 40 विधायक होने चाहिए. हम है 19 हम यह दावा और यह ना आकड़े आपको. बहुत लोग बताएंगे हम इसकी चर्चा नहीं करते.
हैं मुसलमानों के 19 विधायक इसलिए हैं. क्योंकि आरजेडी वाले कांग्रेस वाले उनको. उतना टिकट नहीं देते हैं हम जो उनका वोट. लेते हैं उनको टिकट नहीं देते हैं मुसलमान. समाज के लिए चिंता का कारण यह है कि आबादी. के हिसाब से उनके 1650 मुखिया होने चाहिए. बिहार में हम बिहार में 1200 से कम. मुस्लिम मुखिया हैं हम आबादी के हिसाब से. 25700 वार्ड सदस्य मुस्लिम होने चाहिए. 11000 से कम मुसलमान ही वार्ड सदस्य हैं. वहां पर तो दलों की टिकट की जरूरत नहीं है.
ये आंकड़े यह बताते हैं कि मुस्लिम समाज. में कहीं ना कहीं राजनीति को लेकर राजनीति. में भागीदारी को लेकर वह संशय वह वो डर. पैदा कर दिया गया है और यह डर पैदा किसने. किया है यह डर पैदा किया है जिनको. उन्होंने अपना रहनुमा बनाया ये आरजेडी के. लोगों ने उनको यह बता दिया कि भाई तुम हम. हमको वोट देते रहो हमारे पीछे चलो हम बाकी. चिंता तुम्हारा करेंगे तो मैं मुसलमानों. को जाकर यह बता रहा हूं कि भाई तुम.
कांग्रेस के पीछे चलो आरजेडी के पीछे चलो. प्रशांत किशोर के पीछे चलो किसी के पीछे. चलोगे तो तुम्हारा नुकसान होगा ही होगा. आपकी जो आबादी है आपकी जो समस्याएं हैं वह. तब सुलझी जब आप अपने बच्चों को राजनीति. में लाएंगे उनको काबिल बनाएंगे उनको. राजनीतिक सलाहियत सिखाएंगे तभी आपका सुधार. हो सकता है जन स्वराज वो प्लेटफार्म है. जहा आप अपने बच्चों को लाइए आपको राजनीति. में प्रशिक्षण चाहिए राजनीति में आपको आगे. बढ़ाने वाला चाहिए तो जन स्वराज आपके लिए.
वो करेगा आप जो कह रहे हो बिल्कुल जायज. बात है क्योंकि हम क्लोजिंग प बिल्कुल हम. है उनका जो सवाल मेरा था वो यह था कि आप. मुसलमानों को बात समझा रहे हो यह सत्य है. या बाकी पिछड़ों को समझा रहे हो वो ये कह. रहे हैं कि ये बात आप अपनी जात वालो को. क्यों नहीं समझाते सवर्ण को जो बीजेपी का. वोटर है अरे मेरे भाई मैं. अगर म रहे ऐसा है कि अगर मैं 53 अगर मैं. 5300 गांव में गया हूं तो यहां पर सबसे. बड़ी आबादी यादवों की है तो मैं तो सबसे. ज्यादा यादवों के गांव में जाकर भाषण दिए. मैंने अगर 12 पर आबादी सवर्णों के तो.
सवर्णों के गांव में भी जाकर बोल रहे हैं. लेकिन सवर्णों के गांव में जाकर लालू जी. के खिलाफ बोलने का क्या मतलब है लालू जी. के बारे में बोलने का क्या मालूम है तो. पहले से लालू जी के बारे में जानता है. सवर्ण को यह बताना है कि भाई तुम मोदी जी. का भाषण सुनकर गुजरात का विकास का कहानी. सुनकर क्यों अपने बच्चे को मजदूर बना रहे. हो उसी तरीके से जब मुसलमानों के बार के. पास जा रहे हैं तो उ उ उन्होंने जिसको. अपना रहनुमा माना है उसके बारे में तो. बताएंगे भाई मुसलमानों के बीच में जाकर. मैं मोदी जी की क्या चर्चा करूंगा व तो.
ऐसे ही उनकी बात नहीं सुनना चा मुसलमानों. और पिछड़ों के दिल में एक सवाल और आता है. जी कि प्रशांत किशोर पर ईडी छापा क्यों. नहीं पड़ता सीबी छापा क्यों नहीं पड़ता. काहे नहीं मोदी जी उनको डायरेक्टली टारगेट. करते ठीक ठीक बात है उसकी एक वजह यह है. प्रैक्टिकल जो है कि प्रशांत किशोर किसी. पद पर कभी रहे ही नहीं तो आप किस बात पर. छापा डालोगे हमारे पास है क्या जहां आप. बैठकर मेरा इंटरव्यू ले रहे हैं यह पटना. के सबसे अच्छे प्रॉपर्टी में इसकी गिनती. हो बहुत बड़े लोगों का प्रॉपर्टी है. प्रशांत किशोर कुछ नहीं उन्होंने डोनेट. किया है हम यहां के रहते हैं काम करते हैं.
प्रशांत किशोर पैदल चल रहे हैं तो क्या. छापा डालोगे हमारा बैंक अकाउंट देख लो अरे. केजरीवाल जी भी हवाई चप्पल पहने कह रहे थे. आज जेल में इतने दिन से निकल भी नहीं पा. रहे नहीं लेकिन वो तो मुख्यमंत्री बने ले. कागज उनका नाम नहीं था ऐसा है ऐसा है जब. तक केजरीवाल जी किसी पद पर नहीं थे तब तक. तो ईडी का छापा नहीं पड़ा. था लालू जी जब संघर्ष कर रहे थे तब तो ईडी. का छापा नहीं पड़ा था. हम सोनिया गांधी पर तो ईडी का छापा नहीं. पड़ा है तो इसका मतलब है कि वो भाजपा के. एजेंट है अगर ईडी का छापा पढ़ना ही.
सर्टिफिकेट है हम तब तो कांग्रेस के किस. बड़े नेता के घर पर छापा पड़ा जरहा नाम. बताइए तो हमको तो इसके पीछे आप आप तो. दोनों में रहे हैं आप मुझे बताइए ना भाई. अगर ईडी के छापा पढ़ने को ही सर्टिफिकेट. मान लिया जाए तो क्या सोनिया गांधी के घर. पर क्या कांग्रेस के कोषाध्यक्ष के घर पे. या कांग्रेस के किस बड़े नेता के घर पर डी. का छापा पड़ा जरा बताइए तो दिल्ली में हो. सकता है पिछले दरवाजे कोई दोस्ती हो अ फिर. आप बताइए आप अब आप अपनी बात अपने जाल खुद.
फस ग देखिए बंगाल में बंगाल जो स्टेट वाली. पार्टियां है सेंट्रल पार्टियों सेंट्रल. सुनिए आप सुनिए देखिए अब आप उछल के भाई. भाजपा को सबसे ज्यादा खतरा किससे है. कांग्रेस से है ना अरे वो स्विच करते रहते. उनको लगा कि हम उधर उनको हम सेफ कर ले. हमको बाकी सबको. खेलेंगे आपने कहा कि आप पर छापा नहीं पड़. रहा है ये लोगों का. मुलायम मायावती दोनों शिकायत करती थी. कांग्रेस को समर्थन करते वक्त कि सीबीआई. का डर डराया गया फिर बीजेपी पर वही आरोप.
लगाए जिनके साथ. लगाते आपने कहा कि छापा क्यों नहीं पड़. रहा यह सवाल है मैं उस सवाल का जवाब मैंने. दिया मेरी अपनी समझ यह है कि तीन वजह से. शायद छापा नहीं पड़ता है एक मैं किसी. सरकारी पद पर कभी रहा नहीं हूं कोई ऐसा. हमारे पास कोई डीलिंग बिजनेस हम करते नहीं. कि आप हमको छापा डालिए दूसरा शायद उन. लोगों के मन में ऐसा हो कि भाई कभी इस. आदमी ने मेरी मदद की है तो कहे इसको चलो. कुछ कर रहा है करने दो अपने गांव में घूम. रहा है अपने मर खप के खत्म हो जाएगा उनको.
लगता है हम तो कुछ कर नहीं सकते हैं हम. इतने इंपोर्टेंट नहीं है उनके लिए और. तीसरा शायद उनको लगता होगा कि भाई कभी. जरूरत पड़ेगी तो इस आदमी की मदद कभी ली जा. सकती है इसलिए नहीं देते होंगे तो सुनिए. मेरी बात ये उनकी ये मेरा अनुमान है इसका. मतलब ये नहीं हम अनुमान और आता है सर एक. अनुमान ये आता है कि हो सकता है प्रशांत. किशोर वही काम कर दे जो काम चिराग पासवान. ने पिछली बार कर दिया था तो भैया यहां पर. आप आखिर में तो दुश्मन दुश्मन का दुश्मन. हमारा दोस्त आपने कहा कि आप सवर्णों को यह.
नहीं सिखा रहे हैं हां तो मेरे भाई अगर. सवर्ण का वोट जन स्वराज को मिल रहा है. जैसा कि ट्रेडिशनल जो सेंस है तो उससे. सबसे बड़ा नुकसान किसका. होगा अगर सवर्ण बिहार में जन स्वराज को. वोट दें तो उसे सबसे बड़ा नुकसान राजनीतिक. नुकसान किसको हो स को आप सिखा कह रहे हैं. आपको वोट दे अरे प यों में मुसलमानों में. जाकर सबसे ज्यादा हल्ला बोल कर रहे हैं. उनको टिकट दे रहे हैं उनको अध्यक्ष बना. रहे हैं तो आपको ट वोट तो वहीं से मिलेगा. जो आरजेडी का वोट है हाडकोर आरजेडी को.
पिछड़ा कब से वोट देता है अरे नितीश जी का. दो ही पार्टी डेंट कर रहे हैं अरे भाई. नितीश जी तो भाई तो भाजपा का ही नुकसान. होगा ना तो भाजपा तो पिछली बार भी आरोप. लगा थ ती जी कमजोर कर रही थी ताकि उनका. सीएम बन जाए तो भाजपा वाले मुझे खड़ा करके. अपना ही नुकसान करा रहे हैं सकता है आपके. साथ मिल के सरकार बना. ले चलिए ठीक है अब आखरी एक थोड़ा सासी. मजाक का सेगमेंट है देख शंकाओं का तो कोई. अंत नहीं है हम. और मैं कितना भी कुछ कहता रहूं जिसको जो. कहना है वो कहेगा सही बात है अल्टीमेटली. सत्य की एक अपनी ताकत है सही बात है और.
सत्य यह है कि हमने अपना जीवन अभी 8 साल. 10 साल जो भी लगे व बिहार को सुधारने के. लिए लगाया हुआ है कोई भी प्रलोभन किसी भी. तरह का वह मुझे इससे डिगा नहीं सकता है ना. कोई डर ना कोई प्रलोभन ना कोई प्रेशर मुझे. इससे डिगा नहीं सकता है मैं जो कर रहा हूं. यही करता रहूंगा आखरी एक मिनट कुछ सवाल. हमने रखें इसमें एक लाइन का जवाब आपको. सुना. है यह जनता के सवाल थे बिहार को ज्यादा. नुकसान किसने पहुंचाया नितीश जी ने या.
लालू तेजस्वी परिवार दोनों ने मिलकर इन. दोनों से ज्यादा नुकसान बिहार को पहुंचाया. है कांग्रेस और भाजपा ने क्योंकि लोगों को. यह पता नहीं है लालू जी अपने दम पर सिर्फ. बिहार एक ही बार जीते नीतीश कुमार आज तक. बिहार अपने दम पर नहीं जीत पाए इन दोनों. को जनता पर थोपे रखने की जिम्मेवारी जो है. वह कांग्रेस की है कांग्रेस ने चंद. सांसदों के लालच में बिहार को लालू के हाथ. में बेचा आज भाजपा वही कर रही है 1215.
सांसदों के लिए अपने समीकरण के लिए. उन्होंने बिहार को बिहार की जनता को नीतीश. के हवाले करके छोड़ दिया है भुगतने के लिए. ठीक है ज्यादा डेमोक्रेटिक कौन है नरेंद्र. मोदी या ममता बनर्जी. ज्यादा डेमोक्रेटिक कौन है हमने कहा थोड़ा. पिस. दे मतलब फिनिश लाइन पर आपको देखना पड़ेगा. लेंस लगा. कर मैं वही तो कह रहा हूं एकदम जैसे होता. है टाई हो. गया अब लेंस लगाकर देखना पड़ेगा थर्ड.
एंपायर को भे अंदर से देखि ना नहीं देखिए. नेताओं में इस तरह के कंपैरिजन का कोई. मतलब नहीं है ठीक है दूसरी बात है कि ममता. बनर्जी मुख्यमंत्री है नरेंद्र मोदी. प्रधानमंत्री हैं उस नजरिए से भी ममता. बनर्जी कितनी ऑटोक्रेटिक होंगी वो जब. प्रधानमंत्री ब बनेंगी तब देखा जा सकता है. तो मोदी जी की तुलना अगर हो तो इंदिरा. गांधी से की जा सकती है ममता बनर्जी से. तुलना तो कैसे की जाएगी ममता दे खिलाफ आप. नहीं जा रहे सर नहीं क्योंकि ममता बनर्जी.
मुख्यमंत्री है खिलाफ और पक्ष की बात नहीं. है आप मुख्यमंत्री की तुलना कर रहे हैं. प्रधानमंत्री के तौर पर मैं तो पार्टी के. अंदर डेमोक्रेसी की बात कर रहा हूं स्टाइल. ऑफ वर्किंग डेमोक्रेसी मैं तो देश के हिब. से बात ही नहीं मैं आपको बता रहा हूं किसी. भी पार्टी में बाय इ लार्ज कहीं पर यहां. इंटरनल डेमोक्रेसी है नहीं वो थोड़ा कम या. ज्यादा ठीक बात एक ही बात है ठीक बात योगी. आदित्यनाथ और अमित शाह में आपकी नजर में. बिकॉज अब मैं आपसे जन स्वराष्ट्र थोड़ा. हटकर ही पूछ ले रहा हूं ज्ञान लेने के लिए. आपकी नजर में बीजेपी का फ्यूचर कौन है. क्योंकि अभी बड़ा चर्चा चल रही है कि कुछ.
अंदर खाने चल रहा है देखिए ये सवाल पहले. भी पूछा गया है दूसरे शब्दों में नॉट एज. दिस ऑब्जेक्टिव कि ये होंगे कि ये होंगे. मैं ये नहीं जानता हूं कि कौन होगा मैं. इतना जानता हूं कि भाजपा का लीडर जो भी. होगा वो नरेंद्र मोदी से ज्यादा. हार्डलाइनर. होगा क्योंकि उनकी लीडरशिप की ट्रेजे. क्ट्री बिल्कुल क्लियर है पहले वाजपेई और. आडवाणी का कॉमिनेशन था फिर आडवाणी जी और. मोदी जी का कॉमिनेशन हुआ फिर आप देख रहे. हैं कि अब मोदी जी और अमित शाह का.
कॉमिनेशन है अमित शाह और योगी जी का क तो. ये ट्रेजे क्ट्री बिल्कुल क्लियर है जो भी. नेता होगा वह मोदी जी से ज्यादा हार्ड. लाइनर होगा ठीक है किसकी आडलज देश के हित. में है नेहरू जी की वाली आडलज या सावरकर. जी. वाली नेहरू जी बहुत बड़े लीडर थे. और मतलब. देर इज रीजन वई ही इज कॉल्ड द आर्किटेक्ट. ऑफ मॉडर्न. इंडिया तो अगर मुझे चुनना हो तो मैं तो.
निश्चित तौर पर नेहरू जी की आडिल जीी तो. नहीं कहूंगा लेकिन जो महात्मा गांधी की. आईडियोलॉजी है और महात्मा गांधी का मैं अं. भक्त हूं हमने तो महात्मा गांधी ने अगर. नेहरू जी को चुना था तो मैं मानूंगा कि. नेहरू जी में वह सारे गुण रहे होंगे वह. सबसे सही व्यक्ति उस समय कालखंड में रहे. होंगे देश को चलाने के लिए तभी महात्मा. गांधी ने उनको चुना होगा राहुल गांधी केज. वाल ममता बनर्जी कौन ज्यादा विपक्ष का. बेहतर नेता जो मोदी जी से भैया आज लोकसभा. में देश में विपक्ष के नेता राहुल गांधी.
है तो स्वाभाविक तौर पर राहुल जी को आप. कैसे देखते हैं आप क्योंकि कुमार विश्वास. जीसे बात कर रहा था ही सेड ही इज अ ग्रेट. गाय आई हैव मेट हिम ही इज अ ग्रेट गाय बट. आई स्टिल बिलीव कि उन्हें फोर्स किया गया. पॉलिटिक्स में दैट वाज वई ही इज नॉट एबल. टू वो जो कहते है ना ब्लास्ट कर देना फोड़. देना देखिए हमारी क्या विसात है कि हम. राहुल गांधी पर टिप्पणी करें आपने काम. लेकिन बहुत काम किया है काम उनके साथ तो. बहुत नहीं किया है लेकिन मतलब उनको जानते. हैं घंटों बिताए उनके. साथ मतलब राहुल गांधी देश के अपोजिशन के.
लीडर है लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता हूं कि. ही हैज अराइव्ड एज ए लीडर मैं आपको स्टिल. आपको एक आंकड़ा दे देता हूं इंदिरा जी की. सबसे बड़ी हार हुई 1977 में तो उस सबसे. बड़ी हार में इंदिरा जी के नेतृत्व में. कांग्रेस को 154 सीट मिला था राहुल जी के. नेतृत्व की यह सबसे बड़ी जीत है कांग्रेस. की उनको 999 सीट मिला है दैट टेल्स यू द. डिफरेंस दैट टेल्स यू. द डिस्टेंस ही हैज टू कवर बट दे आर.
सेलिब्रेटिंग फॉर दैट कीस आप मैं मैंने जो. बात कहनी थी कह दी आप सेलिब्रेट करें रोए. रिफ्लेक्ट करें वह आपका आपका निर्णय है. ठीक मैं आपको यह कह रहा हूं कि इंदिरा जी. की सबसे बड़ी हार में कांग्रेस को 154 सीट. मिला था राहुल गांधी की सबसे बड़ी जीत में. कांग्रेस को 999 सीट मिला है दैट शोज द. डिस्टेंस राहुल गांधी हैज टू कवर एज अ ली. टू इमर्ज एज द पॉपुलर चॉइस ऑफ द कंट्री. सेकंड लास्ट क्वेश्चन नरेंद्र मोदी और अटल. बिहारी वाजपेई में बीजेपी का सबसे बड़ा.
नेता कौन आपको लगता है ये तो भाई बीजेपी. वाले ही बता तो आप एनालिस्ट नहीं एनालिस्ट. तो मैं हूं नहीं ये तो वही लोग बताएंगे. कौन ठीक नरेंद्र मोदी क्या इस चुनाव के. बाद कमजोर हुए हैं डिक्लाइन शुरू हुआ अभी. आपको लगता है कि ही विल कम बैक नहीं. स्ट्रर मोदी जी इससे पहले भी मैंने आप. इंटरव्यू आप उठाकर देख लीजिए सारे आंकड़े. डाटा बता रहे हैं एनालिटिक्स बता रहा है. कि मोदी जी की जो फॉलोइंग थी जो उसकी. इंटेंसिटी ऑफ सपोर्ट थी वह पिछले चार पांच. सालों से कम हो रही है और हर इंटरव्यू में.
हम लोग बता रहे हैं मैंने एक आंकड़ा दिया. था कि 2014 से 2019 के बीच में हम बीजेपी. का अंडर परफॉर्मेंस असेंबली इलेक्शंस में. जहां मोदी जी खुद के लिए नहीं अपने पार्टी. के साथियों के लिए वोट मांग रहे हैं वहां. पर बीजेपी का अंडर परफॉर्मेंस था 3. परसेंटेज 3 परसेंटेज पॉइंट हम 2019 से. लेकर 2024 के बीच में जो चुनाव हुए. विधानसभा के उसमें बीजेपी का का अंडर. परफॉर्मेंस घट के हो गया अ सॉरी करीब-करीब. 109 95 प्र परसेंटेज पॉइंट तो मोदी जी को.
पहले लोगों ने वोट दिया मोदी जी ने जिसको. कहा उसको वोट दिया लेकिन पहला कहां क्रैक. आया जहां मोदी जी के कहने पर उस तरह से. अंध अंध भक्त होकर लोगों ने वोट नहीं दिया. फिर वो धीरे-धीरे रिफ्लेक्ट होने लगा मोदी. जी ने खुद के के लिए भी जो वोट मांगा है. परसेंटेज भले ना गिरा हो सीटें तो कम हो. ही गई लास्ट क्वेश्चन एक जहां आपने बड़ा. ब्यूटीफुली डिफाइन किया था हाउ टू डिफीट. नरेंद्र मोदी एंड बीजेपी हाउ टू डिफीट हां. आपने कई सारे पॉइंट्स में समझाया था इनन. पॉइंट्स पर काम करना होगा तो हार होगी.
आपकी नजर में क्योंकि आप कह रहे हो. डिक्लाइन मोदी जी का हो रहा है थोड़ी. इंटेंसिटी कम हो रही है आने वाले टाइम में. कौन सा लीडर आपकी नजर में आपको लगता है कि. यार ये रिप्लेस कर सकता है नरेंद्र मोदी. जैसे व्यक्तित्व को स्टिल ही इज लार्जर. देन लाइफ वन यू कंपेरर टू अदर मैं आपको. बताऊ आज के परिपेक्ष में भाजपा को कोई भी. एक दल अगर कोई चुनौती दे सकता है अकेले या. किसी फॉर्मेशन में तो तो कांग्रेस ही है. क्योंकि कांग्रेस ही विपक्ष की सबसे बड़ी. का विपक्ष का सबसे बड़ा दल है तो अगर कोई.
भारत भाजपा को चुनौती देगा हराएगा चुनौती. तो सब दे ही रहे हैं अगर हराने की बात है. तो किसी ना किसी को कांग्रेस से ही हराना. पड़ेगा इट कैन बी राहुल गांधी और समवन. एल्स नहीं इट कैन बी राहुल गांधी इट कैन. बी एनीबडी एल्स ठीक है जाते थे सर आपके. जूतों पर लोगों की बड़ी नजर रही है अभी तो. चप्पल पहना आपने बहुत लोग हमसे कहे कि एक. ही कंपनी जूता काहे पहनते हो और फिर ये भी. कहे कि जरा पूछ लेना कि 5000 किलोमीटर. चलने में कितना जूता. घिसा तो जूते तो मैं मैंने मेरे सारे. ब्रांड ट्राई कर लिए क्योंकि लोग आकर.
गिफ्ट देते हैं तो लोगों को पता है कि. जूतों की चलने में बहुत जरूरत है तो जो. आके देता है वो जूता ही देता है नाइकी भी. मैंने यूज किया है और कुछ दूसरे ब्रांड्स. भी यूज किए हैं ज्यादातर मैं ए6 के जूते. यूज कर रहा हूं और जूते घिसने की जहां तक. बात है चकि हम लोग गांव. के घटिया रोड पर चलते हैं तो जूतो की. एवरेज लाइफ मतलब ए6 के सबसे अच्छे जूतों. की लाइफ भी यहां चार महीना मैक्सिमम है तो. आप यह मान कर चल सकते हैं कि जब हम लोग. चार महीने पाच महीने चलते हैं तो जूता.
खराब हो जाता है तो उस हिसाब से आप जोड़. लीजिए सात या आठ जूते फट गए होंगे थैंक यू. सो मच प्रशांत जी लवली टॉकिंग टू यू रात. के 12:00 बज गए लेकिन मैंने इस दो घंटे की. चर्चा का बड़ा लुत्फ उठाया उम्मीद करता. हूं दर्शक भी उतना ही आनंद लेंगे ऑल द. बेस्ट थैंक यू थैंक यू सो मच.
