Unplugged FT. Pankaj Tripathi| Mirzapur 3| Mai Atal Hoon | Bihar | Bollywood
मिर्जापुर टीन कब आए इस साल के में आ. जाएगी और अन प्राइम उसका डेट अनाउंस कर. देगा मुन्ना है. या इसके लिए अन प्राइम वीडियो का. सब्सक्रिप्शन ले लीजिएगा जब हमारा शो आएगा. बहुत लोग क कि मुन्ना कान पकड़ के कालीन. भैया कान पकड़ लेना चाहिए था मुन्ना भैया. के लिए आइएगा जैसे भी पंकज त्रिपाठी को. देख के निकलता है तुमने घमंड क्यों नहीं. क्योंकि मुझे लगता है कि गुरु जो आज है यह. कल नहीं था 10 साल पहले मेरे साथ कोई. सेल्फी नहीं लेता था क्या अच्छा लग गया था. उन में आपको बहुत रूपवती थी मैंने सोचा.
विवाह करके गुणवंती बना. लूंगा समझे पहले तो रूप ही अच्छा लगता है. ना शक्ल माने रखती है शक्ल माने रखती. है ये तो बड़ा कठिन प्रश्न कर दिए आप. कितना साल हो. गया. 93 हमारे बर्थ. यर तुम्हारे इतना बड़ा मेरा प्रेम कहानी. हो चुकी है बताओ यार ाना देख लौंडा नाच की.
देखा हूं किया भी हूं मतलब नाटकों में. किया हूं लौंडा नाच कंपनी में नहीं खूब. देखा हूं गाली गाते सुने हमारे होता है. लाउड स्पीकर प गाली गाती है भसुर के लिए. ससुर के लिए दुल्हा पक्ष को लड़की लड़की. वाले ख खूब ग आते हैं लाउड स्पीकर प सुर. में लय में ताल में कर आते हैं आपकी शादी. तो बंगाल में होग ना हा वहां आपको तो नहीं. पड़ी गाली नहीं पड़ी थी ना व परिवार बिहार. का ही है ना अच्छा परिवार बिहार आपने पट. देखा था कि सिगरेट पीती हुई नहीं नहीं. देखा था भाई दिल्ली में आकर देखा और देख. सदमा लगा मुझे सवालों से भरा व्यक्ति अब.
खामोश हो गया है अब मुझे उत्तर नहीं चाहिए. एक शेर हमको याद आया कि घर लौटते परिंदों. को देखा है ना किसी से आगे बढ़ने की होड़. है ना किसी के पीछे छूट जाने का डर तो यह. बदलाव कैसे हो गया यह बदलाव थोड़ा आई थिंक. दर्शन शास्त्र और साइकोलॉजी और मनोविज्ञान. पढ़ते हुए और थोड़ा सा थोड़ा सा हो सकता. है कि आध्यात्मिक स्पिरिचुअल ओरिएंटेशन. हुई होगी पंकज त्रिपाठी बिहार के लिए क्या. करने वाले हैं आपकी भी जिम्मेदारी है.
बिल्कुल है क्या करेंगे अब मैं वो जो काम. कर चुका हूं उनको बताने का मुझे अच्छा. नहीं लगता है अपने किए हुए कामों की चर्चा. करो बताओ कोई लगता है बढ़िया आदमी. पॉलिटिक्स में जो बदल सकता है बिहार को. नहीं प्रशांत जी को देखता हूं आजकल घूम. रहे हैं पूरा बिहार गांव गाई जा रहे हैं. बहुत परिश्रम कर रहे हैं तिवारी त्रिपाठी. में क्या अंतर होता है कोई अंतर नहीं होता. दोनों एक ही सरने में है कुछ लोग यूपी में. त्रिपाठी ज्यादा रखते हैं बिहारी में. तिवारी अपने आप को थोड़े आधुनिक उनको लगता. है त्रिपाठी में थोड़ा शास्त्रीय है बोलने. में थोड़ा सा हां त्रिपाठी सरने वाले दो.
चार बड़े लोग हुए क्या कीमत समझ में आती. है पिताजी की बहुत समझ में आती है दोस्त. कैसे करू उसको शब्दों में बयान करना. मुश्किल है पर उनके निधन के बाद मुझे. वैक्यूम हुआ जो अभी तक है लगता है कि. किससे पूछूंगा फिर लगता मैंने पूछा तो था. ही नहीं पिछले 30 सालों में तो यह विचार. ही क्यों आ रहे. हैं तो मां पिता सांसारिक रूप से वही आकार. और निराकार की बात है वो आकार में नहीं है. पर निराकार में.
मनोज वाजपेई का चप्पल लेकर आप कहां से. कहां पहुंच गए हां तो नहीं अच्छी बात है. प्रेरणा तो प्रेरणा ही देने के लिए तो हम. प्रवचन करते हैं दिन भर अटल जी की शख्सियत. को जीने में आपको डर नहीं लगा मुझे. बिल्कुल डर लगा कि मैं न्याय कर पाऊंगा या. नहीं एबीवीपी क्यों था उस वक्त कुछ तो. आपका सोच रहा होगा थॉट प्रोसेस रहा होगा. नहीं मैं चकि आया पटना आया था तो मैं. छात्र संगठन में जुड़ना था मुझे क्या टेक. आपका था अटल जी सेकुलर थे अटल जी कमिल थे. विरोधी ऐसा कहते थे ऐसा एक.
कहते अटल जी के इर्दगिर्द या उतना खुले पन. से अलग-अलग विचारधारा के विचारों को. स्वीकार करने वाला कोई नेता आपको मुझे. नहीं दिखाई देते मुझे नहीं दिखाई. देते जैसे हम और आप बैठे हैं ऐसे 2002. मेंटल जी बैठे थे बगल में मोदी जी बैठे थे. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हो रही थी और. उन्होंने कहा कि राज धर्म का पालन करना. चाहिए भारतीय राजनीति में मैंने वो सीन या. वो जो तस्वीर थी मैंने उससे पहले भी मेरी. स्मृतियों में तो नहीं है ना उसके बाद. देखी मैंने और.
मुझे लगा शायद ये कवि हृदय ही है कवि हृदय. बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल थैंक यू मेरे भाई. आप लगता है सोते बहुत बढ़िया हो आप कितने. घंटे सोते हो पा घंटे घंटे चार घंटे प्लीज. होने का टाइम बढ़ा. दे यह कहते हैं कि सादगी से बड़ी कोई. खूबसूरती नहीं होती और अगर यह सच है तो आज. मैं दुनिया के सबसे खूबसूरत इंसान के साथ. हूं यह वो शख्स है जो जो इन्फ्लुएंस की.
दुनिया में अपनी सादगी से लोगों को. इन्फ्लुएंस कर रहे. हैं बहुत ज्यादा समय में लूंगा नहीं. क्योंकि इनका यह मानना है कि छोटे तरीके. से भी बड़ा इंपैक्ट डालना जो है वो ज्यादा. अच्छा होता है इसलिए पंकज जी आपका बहुत. स्वागत है थैंक यू धन्यवाद और आपने समय. दिया इसलिए शुक्र गुजार हूं मैं लेकिन. सवाल मेरा पहले तो एक ही मेरे मन में आता. है कि यात्रा बड़ी लंबी रही 90 के दशक में. पटना के गांधी मैदान में एक लड़का पंकज. तिवारी जो बाद में पंकज त्रिपाठी बना नारे. लगा रहा था टीवी भी उसने पं 96 में देखा.
आज टीवी पर एक पिक्चर आने वाली है अटल जी. के नाम से एबीबीपी में वह नारे लगाने से. लेकर यहां तक की यात्रा बहुत लंबा सफर तय. कर लिया आपने जी जी जी जी बहुत हम याद. करते हैं पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता. है हां यात्रा तो है. लंबी डिस्टेंस वाइज भी पटना से मुंबई 2000. किलोमीटर है तो और इंटरनल डिस्टेंस वाइज. भी मानसिक दूरी से भी हम तो दूसरी दुनिया. से आते हैं ना सिनेमा से कहां वास्ता कोई.
वास्ता नहीं सिनेमा थिएटर भी घर से 20. किलोमीटर दूर बाद में एक जामू बाजार में. बना पाछ किलोमीटर दूर तो है ही और यही. जीवन. का अनप्रिडिक्टेबल है कि एक रूरल इंडिया. का लड़का जिसने हिंदी बोलना भी सीखी है. मेरी मदर टंग भोजपुरी है तो हिंदी में. सीखा हूं मुझे आज भी मैं स्त्रीलिंग. पुल्लिंग की गलतियां करता हूं मुझे नुक्ते. नहीं मालूम है कि करेक्ट कहां होते हैं.
पहली बार एक टीचर बार-बार बोले देखो क्या. है ज के नीचे तो मैंने बोला था स्याही गिर. गई है मुझे भी नहीं मालूम था व सर पकड़. लिए कि किसको एक्टिंग सिखाने आया हूं तो. नुक्ते को बोल रहा स्याही गिर गई है तो. खैर तो यह जीवन का यात्रा है कुछ भी पता. नहीं है किसके जीवन में क्या होना है नहीं. लेकिन बचपन में आपने सांप वाप गले में. लपेट के खेला बोला सब वो सारा थ्रिल समझ. में आता था लेकिन अटल जी की शख्सियत को. जीने में आपको डर नहीं लगा क्योंकि कि. अटिल जी को हम सब ने देखा है 90 के दशक.
में जो हम भी पैदा हुए हैं उन्होंने भी. उनके भाषण सुने हैं और जब वही भाषण हम. आपको बोलते हुए सुनते हैं प्रोमो में. ट्रेलर में तो हमारे जहन में ख्याल आता है. कि मतलब उसकी तुलना होगी तो उस तुलना में. आपको लगता नहीं कि बहुत सारे सवाल उठेंगे. मुझे बिल्कुल डर लगा कि मैं न्याय कर. पाऊंगा या नहीं पर आपने जिस अटल जी को. देखा. है वो सिर्फ स्पीस में और कविता बोलते हुए. वीडियो फॉर्मेट में देखा है जी हम उस अटल.
जी को दिखाएंगे जो बटेश्वर का लड़का अटला. अटल घर में अटला बोलती थी मां वो. अटल ये अटल बिहारी वाजपेई कैसे बना जिसको. आपने देखा. है वह हम दिखाएंगे वह आपने नहीं देखा है. आपने उनकी स्पीस देखी हैं और वह जब बड़े. नेता बन गए थे उसके बाद के फुटेज देखी हैं. और उसमें भी अभिनय करते हुए कोई फिक्शनल. किरदार नहीं है बहुत बड़ा व्यक्तित्व है. बहुत ही महान व्यक्तित्व. तो मैं मुझे चिंता थी कि मैं इमिटेशन और.
मिमिक्री कितना करूंगा नकल कितना. करूंगा या मैं मैं अपने एक्टिंग के टीचर. के पास गया यह पहली फिल्म है जिसके द्वंद. में मैं रिविजिट किया अपने एक्टिंग टीचर. को मैं जाकर मिला उनसे इसके पहले किसी. फिल्म में मैं अपने एक्टिंग टीचर के पास. नहीं गया हूं कि मुझे दुविधा हो रही है आप. मेरे को समझाइए मैं क्या करूं तो उन्होंने. मुझे. बोला कि व्यक्ति का मैनरिज्म बड़ा है कि.
व्यक्तित्व बड़ा है विचार बड़े हैं मैं. बोलर नहीं मैनरिज्म तो बड़ा नहीं है तो वो. स्पीच बोलते हुए उनकी मनोदशा क्या थी वोह. ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि वह स्पीच किस. तरीके से बोली थी कहां पॉज लिए थे वो. महत्त्वपूर्ण. है े लगा हां मनोदशा महत्त्वपूर्ण है और. विचार क्या चल रहे थे उस बोलने के पहले. तुम स्पीकर की कॉपी करोगे कि एंपलीफायर के. बारे में सोचोगे जहां से उसकी उत्पत्ति. हुई है उस स्वर की.
तो मैं बोला वाह ये तो अलग पर्सपेक्टिव दे. रहे हैं मुझे बोले कि हाव भाव जितना संभव. है कर सकते हो क्योंकि मैं कुछ भी. करके कितना भी प्रोस्थेटिक हो जाए चेहरे. पर और कितना भी मैं मैनरिज्म पकड़ लू मैं. अटल जी नहीं हो सकता हूं और उन व वो वो. आकार है लेकिन जो चेतना है जो निराकार है. वह आज भी मौजूद है आकार वो नहीं रही. श्रद्धेय अटल जी पंचतत्व में विलीन हो गए.
लेकिन उनकी चेतना उनका व्यक्तित्व उनकी. विचारधारा आज भी है तो यह बड़ा द्वंद है. यह बहुत यह एक्टिंग की अपने आप में मेरे. लिए एक नई पहलू खुल रही थी उस मेरे मेरे. शिक्षक थे प्रसन्ना सर उनसे यह बात हो रही. थी कर्नाटक गया था मैं तो फिर यह उहापोह. में मैं आया मैं तय किया कि चलो करते हैं. कुछ हमारे मन में यह आता है कि एक लड़का. जो अटल जी का भाषण सुनने गांधी मैदान में. गया था एक इमेज रही होगी आपके ज में भी. जैसे हमारे जहन में अटल जी को लेकर एक.
इमेज है और हमने ये भी सुना कि आप खाली. उन्हीं का भाषण सुनने गए उन्हीं का दो बार. उन्हीं की रैली में उन्हीं की रैली में आप. गए थे तो वहां जो एक छवि थी और जब आपने. पढ़ना लिखना जानना उनके करीबियों से मिलना. शुरू किया तो हम चाहते हैं थोड़ा समझाइए. आप अटल जी कौन थे पिक्चर तो हम देखे. देखेंगे लेकिन थो फिल्म में समझाएंगे ना. अरे हमार टिकट बेचने हम बैठे हैं तुम बोल. रहे हो समझाइए हम 19 जनवरी को समझा रहे. हैं क्या अटल को अटल बनाता चलिए यही समझा. नजदीकी सिनेमा घर में अटल को. अटल उनका व्यक्तित्व बनाता है उनके विचार.
बनाते. हैं उनकी संवेदना बनाती है उसी संवेदना से. उपजी हुई उनकी कविता बनाती है उनके. राष्ट्र धर्म के लेख बनाते हैं जब पढ़ेंगे. वह सारे विचार से पैदा हुए. हैं हम घूमते हैं हम हम हम. हम पॉइंट ए से पॉइंट बी जाते हैं लेकिन. हमारे विचार पूरे ब्रह्मांड में घूम के आ. जाते हैं और पूरी ब्रह्मांड की घटनाक्रम. अध्ययन सोचना समझना से हमारे विचार बनते.
हैं उसमें पुस्तकों व्यक्तियों लोगों. घटनाओं बहुत चीजों का योगदान होता है. हमारे विचार को बनाने में और वह दिखती. नहीं है यह काले रंग की कोट दिख जाती है. लेकिन मेरे विचार कैसे हैं वह दिख अनुमान. आप मेरी बातों से लगा सकते हो मेरे. विचारों का अगर मैं बहुत बढ़िया अभिनेता. हूं तो शायद मैं अपने विचारों का अनुमान. भी ना लगाने. दूं मन में कुछ हो ऊपर कुछ और बोलूं और आप. पकड़ ना पाओ. तो अटल जी को अटल बनाती है उनके विचार.
उनका व्यक्तित्व उनकी संवेदना उन संवेदना. से उपजी हुई. कविताएं और उनका आचरण संसदीय जीवन का आचरण. निज जीवन का. आचरण कॉलेज में पढ़ते हुए विक्टोरिया. कॉलेज ग्वालियर में वह कौन से दिन देखे. पहली कविता कब लिखी क्या वह बचपन से. इतने धारा प्रवाह बोलने वाले थे.
किसने उनको. उनको बोलना समझना सिखाया वह व्यक्तित्व. कैसे बटेश्वर का अटल श्रद्धेय अटल बिहारी. वाजपेई बने यह पूरी जर्नी है यह 19 जनवरी. को हम फिल्म के माध्यम से यही दिखाएंगे. दर्शकों को समझाएंगे प्रेरणा देंगे. कि हमारी जर्नी जैसे मुश्किल लगती है बड़ी. यात्रा है वैसे ही समानांतर एक साधारण. पृष्ठभूमि का लड़का आता है और देश का. लोकप्रिय नेता बनता है किसी ने हमसे कहा.
कि पंकज त्रिपाठी से बढ़िया कोई होता नहीं. क्योंकि पंकज जी के भी कोई टड नहीं है हर. आदमी पसंद करता है अटल जी को भी हर आदमी. मोहब्बत करता है मुझे प्रोड्यूसर बोले यह. बात कि आप नहीं तो फिर कौन हम फिल्म ही. नहीं बनाएंगे मैं डरा था फिर मेरे दो एक. पत्रकार दोस्त मिले मैं किताब रखा था टेबल. पर बोले अटल जी पढ़ रहे हो तो वो पुस्तक. भी पढ़ लेना तो मैं बोला अरे मुझे एक. फिल्म ऑफर हुई है इसलिए मैं पढ़ रहा हूं. और मुझे समझ नहीं आ रहा मैं चिंतित हू डरा. हुआ हूं तो बोले कि एकदम करिए आपसे बेहतर.
कोई नहीं है तो मुझे मेरे आसपास के लोगों. ने मेरे भरोसा को बढ़ाया कि तुम उचित. व्यक्ति हो इसके लिए करो तो फिर मैंने. बोला चलो यह चुनौती मार्ग में आ रही है. बाधाएं आती हैं आए घिले घिरे प्रलय की घोर. घटाएं कदम मिलाकर चलना होगा अटल जी की. कविता है मनुष्य को चाहिए चुनौतियों से. लड़े एक स्वप्न टूटे तो दूसरा गढ़े आपने. चैनल की नौकरी छोड़कर अपना स्वप्न गढ़. लिया दूसरा. और कुछ गढ़ लोगे तो यही तो जीवन है बड़ी.
समानताएं आप में अटल जी में अटल जी को हम. संसद का उनका एक बयान था कि रातों रात. कुकुर मुत्ते की तरह हमारी पार्टी नहीं हो. गई है 40 साल का संघर्ष है हां पंकेश. त्रिपाठी का भी लंबा संघर्ष हैला मानते. नहीं आप हम कहीं सुन रहे थे आपने कहा कि. मैं सुनाऊंगा नहीं नहीं तो लोग ा पर रील. में सैड सॉन्ग लगा के चला देंगे हां वो. क्या है ना आजकल अंडर डॉग की स्टोरी बिकती. है तो मुझे लगता है मैं अपनी पीड़ा अपनी. वेदना सुनाऊंगा भावना में आके आपको. और वो फिर सिर्फ एक यूएसपी और टीआरपी.
बनेगा और लोग बैकग्राउंड स्कोर थोड़ा सड. म्यूजिक डाल के कर. देंगे मैंने अनुभव किया है कई जगह पर कि. हम इंपल्स में आकर कोई एक वैसी कहानी बता. गए और बाद में मैंने नहीं पाया कि उसका. रील बन गया है तो मुझे लगा नहीं गुरु हम. किसी को प्रेरणा दी जाए तो उसमें क्या. बुराई है मनोज वाजपेई का चप्पल लेकर आप. कहां से कहां पहुंच गए हां तो नहीं अच्छी. बात है प्रेरणा तो प्रेरणा ही देने के लिए. तो हम प्रवचन करते हैं दिन भर.
और कई बार मैं थक भी जाता हूं कि क्यों. प्रवचन इतना करना छोड़ दो पर लगता है नहीं. जीवन ने जो सिखाया है जितना अनुभव दिया है. अथ जल गगरी छलकत जाए तो जो भी कम ज्ञान है. उसको छलका हो क्या पता किसी के काम आ जाए. हम भी तो एक्सप्लोर करने में लगे हैं. स्वयं को आपने बड़ी सारी फिल्में की. अलग-अलग तरह किरदार निभाए मिर्जापुर से. लेकर तमाम जगहो पर हर तरह के रोल हो गया. सबसे नर्वस कहां हुए थे या इसी में. नर्वसनेस इसमें. ही थी इसमें थी.
और. और इसमें भी शुरुआत के तीन चार दिन किस. चीज की नर्वसनेस थी उस व्यक्तित्व की. नर्वसनेस थी सोशल मीडिया पर एक सवाल इसमें. और भी सर है एक सवाल और चल रहा है कि पंकज. त्रिपाठी का जीवन बेदाग ्र है हर आदमी. इज्जत करता हर जात धर्म से ऊपर पंकज. त्रिपाठी है हर आदमी को उनके अंदर अपना एक. भाई दोस्त मित्र पिता पुत्र अलग-अलग. रिश्ता दिखाई पड़ता है कई लोग कह रहे कि. लिखना शुरू किया है और कई सारे लोगों ने. हमें सवाल भी दि दि उसमें लिखा था कि.
लोकसभा चुनाव नजदीक है हो सकता है आपकी. नियत ना आ रही हो लेकिन आपके जहन में. ख्याल कहीं आया कि आजकल भारत में धारणा. इतनी बटी है सोशल मीडिया पर लोग पॉलिटिकल. व्यूज को लेकर बटे हैं है तो एक पॉलिटिकल. पार्टी के ही और आपको चाहने वाले हर जगह. है चुनाव पर असर भी हो सकता है अप्रत्यक्ष. तौर पर तो आप पर छींटे भारतीय मतदाता का. कम मूल्यांकन कर रहे हैं लोग यह तो अटल जी. वाला अंदाज हो गया हां अगर यह बात कोई सोच. रहा है तो भारतीय मतदाता का मूल्यांकन कम.
कर रहा. है भारतीय. मतदाता. बहुत अवेयर है सजग है और हमें मानना चाहिए. लोकतंत्र की यही खूबसूरती. है अटल जी जैसे जवाब लगा में हमें लग रहा. है कि उस किरदार को आपने समझ लिया है समझ. तो लिया हूं गुरु समझ लिया हूं और इसने. मेरे जीवन को कुछ हद तक बदला है क्या कुछ. हद तक यह बदला है कि जो. उनकी रिसर्च के दरमियान मैं भी तो अटल जी. को सिर्फ उस नेता के तौर पर जानता था.
जिनको 500 मीटर दूर से सुना था और जिनकी. कविताएं पढ़ी थी पर हम य पढ़ते हुए अध्ययन. करते हुए हम बहुत कुछ जाने जो कहीं लिखा. नहीं गया है कहीं किसी टेक्स्ट में नहीं. है कहीं किसी पब्लिक फोरम फिल्म का भी. ट्रेलर आता है हम चाहते हैं दो चार तो बता. दीजिए ऐसा. कहानी नहीं मैं बदला हूं वो बता रहा था. ऐसी कहानी बहुत बहुत सारी कहानियां हैं तो. असल में इतना बड़ा व्यक्तित्व है ना अब. मैं एक और आरोप लगेंगे फिल्म देख ने के. बाद यह तो फिल्म ट्रेलर देख के आरोप आपने.
बताए मैं अभी से बता देता हूं फिल्म देखने. के बाद वाले आरोप इन्होंने अटल जी का वह. जीवन का हिस्सा तो दिखाया ही नहीं यह. घटनाक्रम तो दिखाया ही नहीं विशाल जीवन है. दो घंटे 19 मिनट में हमें बात कहनी है एंड. क्रेडिट बिगिनिंग क्रेडिट मिलाकर तो उसमें. भी चार चार मिनट चला. गया क्या रखें क्या ना रखें रवि जादव जी. और विमान ऋषि के लिए बहुत बड़ा टास्क था. कि इसको स्क्रीन प्ले में कैसे पिरोए किस. घटना को रख किसको ना रखें बहुत.
महत्त्वपूर्ण घटनाएं शायद फिल्म में छूट. गई होंगी क्योंकि कहां फिट इन करोगे कि वह. कहानी लगे एक व्यक्ति के जीवन को कहानी की. तरह पीरो के ले जाना दो घंटे में इतने. विशाल जीवन को तो यह आरोप लगेगा इन्होंने. यह तो दिखाया ही नहीं वह तो दिखाया ही. नहीं और अटल जी के व्यक्तित्व से जो मैं. सीखा कि आपको सब पसंद नहीं करेंगे. जी आप जितने बड़े होते जाइए अपनी धर्य को. बढ़ाते जाइए सहने की शक्ति बढ़ाते.
जाइए तो ये तो कमाल की बात. है तो अब मैं मैं बढ़ा रहा हूं अ आप ये. मान कर बैठे क्रिटिसिजम आएगा क्यों नहीं. आएगा और उसको वैसे मैं ये सीखा हूं कि तुम. मुझे ना पसंद करते हो इस बात को मैं पसंद. करता हूं कि लोकतांत्रिक व्यवस्था है करे. अब अलग बात है सोशल मीडिया की राय एक अलग. चीज होती है वहां राय देने वाले को भी पता. नहीं है कि वह राय देने के पीछे का.
तात्पर्य क्या है उसका या क्यों दे रहा है. राय क्योंकि एक एक नया टेक्नोलॉजी आया है. बोला है कि आप राय दो मैंने एक अलिर रिचा. अनिरुद्ध के इंटरव्यू में कहा था कि हमें. मालूम नहीं है. हम अपना इंटरनेट अपना मोबाइल आठ आठ घंटे. देते हैं तो हम अनपेड एंप्लॉई हैं सैलरी. हमें कुछ नहीं मिल रही है लेकिन टाइमिंग. करेक्ट हम दे रहे हैं क्योंकि हमें लग रहा. है मजा मिल रहा है हमारी बात सुनी जा रही. है हम अपनी राय दे रहे हैं यह बड़ी चीज है. कि हर मुद्दे पर अपना राय देना पर क्या. मेरा देना आवश्यक है क्यों राय देना राय.
देने के पहले मैंने सोचा. है कान इधर है ब्रेन इधर है मुंह इधर है. तो एक बात यहां से सुनाई देती है सुनाई दी. तो उसको इधर ले जाओ प्रोसेस करो और फिर. अपनी राय रखो हम सुनते हैं और राय दे देते. हैं प्रोसेस करने के लिए उसको वक्त नहीं. देते. हैं खैर मेरी बात मैं ऐसी उटपटांग बातें. करता हूं तो इसको आप अन्यथा ना ले और आगे. बढ़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद आप. जुड़े थे.
बहुत सारे लोगों ने हमसे यह कहा कि आपसे. पूछा जाए कि एबीवीपी क्यों था उस वक्त कुछ. तो आपका सोच रहा होगा थॉट प्रोसेस रहा. होगा और उससे कितना आपको मदद मिली अटिल जी. को समझने में जब यह फिल्म कर रहे थे तो उस. विचारधारा को पोट्रे करने में नहीं मैं. चकि आया पटना आया था तो मैं छात्र संगठन. में जुड़ना था मुझे और मैं बचपन में शाखा. पर गया हूं गांव में अपने तो आया तो. विद्यार्थी परिषद में स्वाभाविक तौर पर. जुड़ गया उस समय प्रमोद जी थे हरेंद्र जी. थे पटना में. सव नारायण जी थे.
तो उस वक्त महामंत्री विनोद तावड़े जी थे. वो एक आंदोलन में जिसमें हम पटना आए थे तो. हम मिले थे उस समय भी पकड़ाए थे. तो तो मैं स्वाभाविक तौर पर कॉलेज में आया. हम बिहारियों में थोड़ी राजनीतिक चेतना. जरूरत से ज्यादा होती है कि हम चाय पर भी. बैठेंगे घर में चार पुरुष बैठेंगे तो हां. तो बिना राजनीति के बात ही नहीं खत्म होगी. हा के जीतता हो ना जीती खाली बवाल बना. लेवा अभी बाकी लोग नहीं जानते हैं कि डमी.
कैंडिडेट क्या होता है चुनाव में कैसे. उससे असर पड़ और कैसे उससे असर पड़ता है. क्या खेल है वो तो यह एक राजनीतिक सजगता. और रुचि इंटरेस्ट दोनों होती है बिहारी. में मुझ में भी थी मैं विद्यार्थी परिषद. में गया आंदोलन में रहा फिर वहां से निकला. और एक नाटक देख लिया और उस रंगमंच ने मुझ. पर बहुत प्रभाव छोड़ा कि अरे यार यह कौन. सा मीडियम है इसने मुझे रुला दिया फिर मैं. लगातार देखने लगा एक साल देखा थिएटर और. फिर मुझे लगा गुरु ये काम बहुत इससे पहले.
शास्त्री जी ने कहा था कि एक्टर नहीं. बनेंगे आप नहीं तब तो पता ही नहीं था हम. एक्टर बनने वाले हैं वो तो थिएटर होने. कहां वो बचपन में एक्टर नहीं बनेंगे ये था. कि ये विदेश यात्रा है इसके इसमें और ये. इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित कोई काम करेगा. तो किसी ने ये नहीं सोचा य टीवी आपके गाव. बिजली कब आई थी बिजली आई होगी 201617 में. या 15 में आई होगी मेरे ख्याल से एग्जैक्ट. साल याद नहीं बट 15 के आसपास की ही बात है. और शास्त्री जी को बता था कि आप. इलेक्ट्रॉनिक में जाएंगे हां उनको वो उनके.
अपनी गणना में निकला था कि यह कुछ. इलेक्ट्रॉनिक्स से संबंधित काम करेगा उसके. 20 साल बाद 20 साल बाद बिजली आई तो उनको. उन्होंने बोला कि हो सकता है टीवी का. मैकेनिक बन जाए किसी ने नहीं सोचा टीवी पर. आएगा यह मैकेनिक बनाया गया फिर फ्लाइट में. जब बहुत विदेश यात्रा है तो उसके लिए मुझे. एयर इंडिया का मेंटेनेंस स्टाफ बना दिए. पायलट वायलट नहीं. बनाए हम हमारे जितने संसाधन होते हैं ना. हम उतने ही सपने देखते हैं. हमारी जितनी समझ होती है ना हम उतने ही.
सोचते. हैं घूमते हैं दुनिया देखते हैं तो हमारी. समझ बढ़ती है सही बात है तो हमारी सोच. बढ़ती है फिर वो लगता है कि नहीं हम बहुत. बड़ा भी सोच सकते थे सही बात है तो मेरी. माता जी शिक्षिका है ओ वाह मैं मेरे फूफा. जी साइंटिस्ट है तो मैं पढ़ता था तो पूछे. क्या बनोगे हमके शिक्षक बनेंगे बोले कहे. हमने कहा 00 तनखा मिलती है क्योंकि सोची. वहीं तक थी सोची वही तक थी लेकिन ये आपको. रोमांचित नहीं करता है कि आपने 95 में.
पहली बार टीवी देखा जितना हमने आपके बारे. में पढ़ा सुना हां रोमांचित तो करते हैं. और वहां से अब आप टीवी पर रोज आ रहे हो. टीवी सबसे बिका चेहरा हो बड़े-बड़े. प्रोड्यूसर कह रहे हैं कि यार पंकज तुम. सिलेबल हो गए. हो रोमांच अब मेरे जीवन में ऐसा हो गया ना. कि मैं बहुत अति रोमांचित नहीं होता किसी. चीज पे और ना ही अति निराश होता हू हां. नहीं पता नहीं कुछ ठहराव मिल गया है ना. अति निराश होता हूं ना अति एक्साइटेड होता. हूं तो ये भाव कहीं से आ गया मेरे भीतर.
धीरे-धीरे पन बढ़ने लगी है तो अब मुझे. इसलिए मुझे मेरा. अचीवमेंट कि मैं बात नहीं करता बहुत. ज्यादा मुझे बहुत ज्यादा भीड़ में जाना. पसंद नहीं है प्रमोशन पार्ट ऑफ द हिस्सा. है जॉब का कांट्रैक्ट का हिस्सा है मुझे. आना है मुझे बातें करनी है फिल्म के बारे. में मैं मेरे काम का हिस्सा है तो मैं जस. जिस दिन प्रमोशन का दौर खत्म हो गया उसके. लिए दुर्लभ हो मैं मीडिया में मिल पाना. मैं हाथ जोड़कर विनम्र निवेदन करता हूं. मुझसे माता बुलवा वो क्या बचा है सब बोल. चुका हूं कितना बोलूंगा लेकिन आपके जो.
चाहने वाले हैं उनके जहन में ख्याल आता है. कि वो पंकज त्रिपाठी जिनको टीवी पर देखते. हैं हंसता खिलखिला आता मुस्कुराता चेहरा. आपके ऊपर बहुतेरे मीम्स वायरल है सोशल. मीडिया पूरा भरा पड़ा है आपके किस्से. कहानियां पढ़िए तो बचपन में हॉस्टल में. डराने से लेकर सांप लपेटने से लेकर वह. आदमी जब एक इंटरव्यू में कहता है कि. सवालों से भरा व्यक्ति अब खामोश हो गया है. अब मुझे उत्तर नहीं. चाहिए मतलब एक शेर हमको कि घर लौटते.
परिंदों को देखा है ना किसी से आगे बढ़ने. की होड़ है ना किसी के पीछे छूट जाने का. डर तो यह बदलाव कैसे हो गया यह बदलाव. थोड़ा आई थिंक दर्शन शास्त्र और साइकोलॉजी. और मनोविज्ञान पढ़ते हुए और थोड़ा सा. थोड़ा सा हो सकता है कि आध्यात्मिक. स्पिरिचुअल ओरिएंटेशन हुई होगी तो मैं. काफी ऐसे विषयों को पढ़ता हूं जो मेरे. पेशे के लिए जरूरी नहीं है अभिनय के लिए. हालांकि एक बड़े पर्सपेक्टिव में जरूरी है.
वो अभिनय. सिर्फ अच्छी बॉडी और अच्छा डांस स्किल और. अच्छी एक्टिंग नहीं है व एक और भी उसके. बियोंड वो विधा है यह विधा मतलब. आर्ट तो वह एक स्वयं को जानने की विधा है. जब स्वयं को जानने का प्रयास करते हैं तो. आप अध्यात्म से अछूत रह ही नहीं सकते. क्योंकि उसमें फिर आत्मा परमात्मा द्वैत. अद्वैत यह बहुत कुछ आएंगे और बहुत पढ़ना.
होगा और आपकी धारणा बनेगी और दूसरे पुस्तक. को पढ़ने के बाद टूटेगी फिर बनेगी ओ माय. गॉड कर रहा था तो मैं कुछ उपनिषदों से. गुजरा उसके तैयारी के वक्त फिल्म में नहीं. है पर संवाद में उपनिषदों का रेफरेंस था. नाम था व फिल्म में सेंसर ने हटा दिया तो. मैं बोला अमित राय को कि मुझे पढ़वाओ आप. कहां से लिखे हो सोर्स भेजो व अध्याय भेजो. मैं पढ़ूंगा तो अच्छी बात है कि हमारे हम. मैं जिस किस्म के फिल्मों का हिस्सा बनता. हूं तो की तैयारी में भी मुझे जिम जाने से. ज्यादा पुस्तकों के पास जाने का मौका.
मिलता है कि पढ़ लो इसके बारे में ओएमजी. टू का भी आपने जिक्र किया अपने विचारधारा. का जिक्र किया मैं कहीं आपको सुन भी रहा. था कि अब जब मैं गांव जाता हूं तो जो मेरे. हित मित्र हैं उनकी सोच और मेरी सोच के. दायरे में जमीन आसमान का फर्क है या ओएमजी. टू में जो सब्जेक्ट आपने उठाया था एक बहुत. बड़ा अभी भी इंडिया में आबादी है जो शायद. उस दूसरी वाली विचारधारा को ही लेकर बात. करती है पहली वाली पर बात करने के लिए. बड़ा जिगरा चाहिए आपको अपने आप को. व्यक्तित्व की र चना पड़ेगा तो यह.
प्रक्रिया घर से पटना से निकलकर या गांव. से निकलकर वहां पहुंचने के बाद हुई क्या. कैसे हुई क्या य कैसे बदलाव हो गया पटना. आने के बाद हुई गांव से तो हम एक साधारण. ग्राव ग्रामीण लड़के जैसे होते हैं उतने. ही थे. हमारी हमारे दुनिया देखने की और समझने की. क्षमता उतनी ही थी जितना हम देखे थे जब. पटना आए और पटना में जब सिन्हा लाइब्रेरी. जाने लगे कुछ प्रोफेसर के संपर्क में आए. पढ़ने लगे कुछ व पटना मैं नगर में आज. पढ़ता था और आज पता चला कि सेमिनार है इस.
विषय पर मैं जाकर चुपचाप बैठकर सुनता था. आज सहनाई वादन बिस्मिल्लाह खा का स्पीक. मैक में वहां भी जाकर सुनने लगा तो जो भी. ऐसे शहर में आर्ट एंड कल्चर से संबंधित. गतिविधियां होती थी उनमें जाता था सुनता. था और तो लोग मिले किताबें मिली तो दुनिया. देखने का समझ बढ़ने लगा कि आप आप जब. इवॉल्व होने को तैयार रहोगे तभी इवॉल्व हो. हो. ग अगर नहीं तैयार है तो फिर मिर्चे के.
कीड़े को मिर्चा में ही अच्छा लगता है आम. में डाल दो तो दुभ हो जाएगा कि कहां बकवास. जगह आ गया मैं मेरा कितना अच्छा था वह घर. क्योंकि वह उसी दुनिया का आदि है तो हमने. 25 साल अपने 24 साल जीवन के लगभग ग्रामीण. भारत में गुजारे हैं और 24 साल दिल्ली और. मुंबई में दिल्ली आया नेशनल स्कूल ऑफ. ड्रामा यहां एक अलग दुनिया हमारे कल्चरल. बैगेज रोज टूट रहे हैं 60 लोग भारत के 60. हिस्सों से 10 लड़कियां वैसी लड़कियां.
हमने पहले देखा ही नहीं था अनुभव ही नहीं. किया था आपने पटटा देखा था कि सिगरेट पीती. हुई नहीं नहीं देखा था भाई दिल्ली में आकर. देखा और देखकर सदमा लगा. मुझे और सदमा लगा और हम बाहर वह मंडी हाउस. के चार दोस्त सिगरेट पी रहे यही बात कर. रहे हैं देखो यार लड़कियां सिगरेट पीती है. फिर मैं सोचा कि ये चारों भी तो कर लगता. था कि गलत कर रही है उस उस वक्त अभी भी. लगता है गलत कर रही है लेकिन उस सेंस में. कि अभी वो पुरुष हो स्त्री दोनों के लिए. गलत लगता है ये सेहत के लिए नुकसानदायक है. चाहे स्त्री करें या पुरुष करें उस वक्त.
सेहत वाला एंगल नहीं था वैचारिक एंगल था. कि स्त्रियां कैसे कर सकती हैं लड़के हैं. तो ठीक है या कपड़ों को देखकर आपने भी जश. किया हो किरे इतने छोटे कपड़े कैसे. बिल्कुल बिल्कुल. अभी भी मुझे अभी भी लगता है लेकिन लगता है. कि आप. आपको स्पेस का पता होना चाहिए कि किस जगह. पर क्या पहन के जाना है स्वतंत्र है कोई. कुछ भी पहने लेकिन ऑफकोर्स घर में पूजा है. कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम है तो आप पोशाक. तो उसके लिहाज से ही तय करोगे कई बार लोग.
कहते हैं ना सर कि आप गांव से निकल जाते. हो लेकिन गांव आपके अंदर से नहीं आता आप. जब माया नगरी पहुंचते हो और वहां तो. ग्लैमर की दुनिया है तो फिट मानते हो या. मानते हो अभी भी थोड़ा सा मिसफिट है कोशिश. कर रहे मैं फिट हूं क्योंकि मैं कुछ बदलना. नहीं चाहता हूं ओके कि मेरे हिसाब से बदल. जाए दुनिया मैं बदल सकता हूं मेरे विचार. बदल सकते हैं दुनिया को मेरे हिसाब से. बदलने की जरूरत नहीं है तो मैं फिट हूं. मेरा जितना काम है मैं आज तक वही हूं जो. मैं था वैचारिक रूप से बदला हूं बाकी अन्य.
चीजों में नहीं बदला हूं तो मैं संतुष्ट. हूं हैप्पी है मुझे किसी और को नहीं बदलना. है अनुभव जरूर मैं शेयर करता हूं ऐसे. मौकों पर बातचीत में कि आपके जो दर्शक. श्रोता सुनेंगे तो मेरे अनुभव को जानेंगे. मेरे जीवन में बदलाव को जानेंगे पर परपस. नहीं है कि तुम भी मेरी तरह हो जाओ ये. बहुत अच्छी बात आपने कक आप आपको ग्रामीण. भारत के लोग बहुत सुनते हैं हालांकि शहरो. भी सुनते हैं ले मैं मान के चलता हूं जो. मिडिल क्लास या लोअर मिडिल क्लास है वो. पंकज त्रिपाठी में अपने आप को देखता है तो. मैं यस तो मैं चाहता हूं आप उनको भीय बताओ.
कि जो आपने य प्रक्रिया की एक तो आदमी. होता है कि आदमी उस रास्ते से गुजरता है. धीरे धीरे सीखता चला आता है बढ़ता चला आता. है यह जो सोच वाला दायरा हैक उससे सोच एक. बड़ी समस्या है हम लोग वही सुनते हैं जो. हमें पसंद होता है दूसरा वाला सुन आपने. कहा ना कि जैसे उदाह दिया आपने तो यह अपने. आप को जो बदला आपने इसके लिए क्या आप करें. सबको सुने लिबरल हो सबको सुने सबको सुने. मूल्यांकन करें यह व्यक्ति ऐसा बोला तो. क्यों बोला यह पुस्तक में ऐसा लिखा है तो.
क्यों लिखा है इसका परपस क्या है मकसद. क्या है हम हम अपनी समझ तो स्वयं विकसित. करेंगे ना हमारी समझ की जिम्मेदारी आपको. कैसे दे सकते हैं हम लाख पढ़ लेंगे सुन. लेंगे अब उनको इनको शिक्षकों को टीचरों को. मैं एक्टिंग पढ़ा तो मैंने फर्स्ट ईयर में. पढ़ा था कार्पेंट्री सेकंड ईयर में. क्लासिकल इंडियन ड्रामा जो क्लासिकल. इंडियन ड्रामा हमारा भारतीय बेस है. संस्कृत नाटकों से लेकर और मॉडर्न इंडियन. ड्रामा तक उसमें नाट्य शास्त्र का भी अंश. है फिर हमने ट्रेडिशनल पारंपरिक पढ़े.
जिसमें हम नौटंकी भी पढ़े और और अन्य. प्रदेशों के जो है महाराष्ट्र का कुछ है. दशावतार है बिहार का नाच है कहीं का डोमकच. है कहीं का कुछ फॉर्म पड़े लौंडा नाच. देखें लौंडा नाच की देखा हूं किया भी हूं. मतलब नाटकों में किया हूं लौंडा नाच कंपनी. मैंने खूब देखा हूं खूब श्री भगवान शर्मा. का मेरा नाच पार्टी था माधवपुर बाजार में. मैं उनसे जाकर डायरी मांग लेता था कि किस. दिन कहां है मुझे लिखवा दो किस दि कहां. नाच होना है तो आसपास के पांच छह गांव में.
जब उनका प्रोग्राम होता था चुपचाप हम. साइकिल ले गए मुझे जोकर बहुत प्रभावित. करते थे नाच में जोकर होते हैं जो विदूषक. बहुत आनंद आता था य तो मुंबई में नहीं. होता गा ना नहीं मुंबई में नहीं मुंबई हम. चाहते थे जो शहरों के दर्शक थोड़ा उने. बताइए ना क्या होता है उसमें जैसे हमने. क्योंकि हम भी गांव में जब रहे तो रात को. कई बार जो रिहान होती थी वहां पर. कार्यक्रम लगता था टेंट मेंट और हम लोग. जाते थे रात को बढ़िया खट बैठ के सामियाना. उसमें लड़के लड़के बन के नाचते हैं. क्योंकि हमारे इलाके में किसी भी आर्ट.
फॉर्म में औरतों को उतनी हिस्सेदारी नहीं. थी दरवाजे के बाहर अंदर डोम कच करती थी. उनके. अपने मनोरंजन या आर्ट के फॉर्म थे जो चार. दिवारी के भीतर ही होगा जैसे डोमकच बारात. जब जाती थी वो जमाना उस तब था बिजली बत्ती. नहीं तब डकैत चोरों का आतंक था तो उस घर. में पुरुष है नहीं गांव के सारे पुरुष. बरात गए हैं तो स्त्रियां क्या करें तो. डमकच एक फॉर्म है कि उस रात सारी गांव की. औरतें उस घर में इकट्ठा हुई होंगी अधिकतर. औरतें रात भर जगी और वो ड्रामा करती थी.
चोर पुलिस और भी जो अपनी उनकी. कॉम्प्लेक्शन कर. ले तो कितनी कमाल की गालियों की परंपरा थी. मैं शादियों में गाली गाली गाते सुने हैं. हां हमारे होता लाउड स्पीकर पे गाली गाती. है भसुर के लिए ससुर के लिए दुल्हा पक्ष. को लड़की लड़की वाले. खूब आते लाउड स्पीकर सुर में लय में ताल.
में ग आते हैं गागा के तो ये भी तो हमारी. ही परंपरा है जबरदस्त जबरदस्त आपकी शादी. तो बंगाल में हुई है ना हा तो वहां आपको. तो नहीं पड़ी गाली वाली नहीं पड़ी थी ना. परिवार बिहार का ही है ना अच्छा परिवार. बिहार का ही है हमने सुना कि आप जैसे आजकल. करते हैं आप चिट्ठी लिखा करते थे हा आज भी. छोटों को बड़ा प्यार पूरी चिट्ठी का सार. वही होता था छो को बड़ा प्यार कितना साल. हो गया सर. 93 93 हमारे बर्थ यर बाप तुम्हारे इतना.
बड़ा मेरा प्रेम. कहानी चुकी है बताओ. यार वाह जबरदस्त क्या अच्छा लग गया था उन. में आपको बहुत रूपवती थी मैंने सोचा विवाह. करके गुणवंती बना. लूंगा समझे पहले तो रूप ही अच्छा लगता है. ना शक्ल मायने रखती है शक्ल मायने रखती है.
ये तो बड़ा कठिन प्रश्न कर दिया आप हां. इसका बड़ा वोक आंसर देना पड़ेगा ईमानदारी. वाला चा हम तो क पहले ही बोल दिया आपको कि. रूपवती थी तो पहले प्रभाव तो किसी ना किसी. एक एलिमेंट से ही होता है हम वैसे भी. मित्र नहीं थे कि हम बातें करें तो मुझे. उनके विचार भी अच्छे लग गए और फिर हमारे. तो ऑप्शन ही नहीं था बात करने का दूर से. देखे देखे क्या एक आग सूचना दिया था. मिस्त्री ये पता है वहा लड़की फलन बहुत. सुंदर है बहुत सुंदर है हम उसे. क्या. बात तो आई एक किशोर उम्र में जो हर लड़का.
जैसा होता है गमई वैसा मैं भी था दिल दो. तीन थे एक से जीवन चलता था दो हाथ में. लेकर चलते थे तो दो तीन दिल एक ही को दिए. या उस नहीं नहीं वो तो को लेने वाला ही. नहीं था ना रिसीवर ही नहीं था बाजार में. डोनर घूमे फिर रहा है तो खैर वो तो लव. मैरिज थी हां प्रेम विवाह लेकिन अरेंज. मैरिज बाद में हिम्मत थी 11 साल लगे हां. अरेंज कराने में हिम्मत है तभी तो गांव से.
सर उठाकर चले गए एक्टर बनेंगे बमबे नहीं. नहीं हिम्मत काम को लेके लड़कों में कई. बार होती है बट जैसे यह माना आता है कि. छोटे शहरों के या गांवों के लड़के जो होते. हैं वह अक्सर अपने पिताजी के साथ उतना. नहीं खुल पाते हैं मैं कई बार कहता हूं कि. वह बस में चलने वाली सवारी मैं पता नहीं. कैसे मैं भैया को बताया था भाभी को बोला. था कहां से शुरू किया था मुझे याद नहीं है. लेकिन बालपन ही था पर हिम्मत तो थी मैं. बोल देता था. ट्रस्ट बहुत था मैं कुछ गलती गड़बड़ नहीं.
करता था मां बाप जी का भी ट्रस्ट बहुत था. पिताजी मेरे बड़े अद्भुत व्यक्ति थे वह. कभी जीवन में मुझे किसी काम के लिए नहीं. रोके पंडित बनारस तिवारी पिछले दिनों निधन. हो गया नाटक करने जाना है करो यह करना है. करो मैं उनके साथ पंडिताई भी करने गया हूं. कम से कम 10 12 बार मैं अष्टयाम में कभी. किसी. किसी कर्मकांड में उनके साथ गया हूं. पंडिताई करने. मेरे भी चेले हैं रतन सराय में अब मुझे.
याद नहीं है मैं किसकिस को चेला बनाया था. और एक मिठाई दुकान वाले तो याद है उनका. मिठाई का दुकान है जब जाता हूं तो मिठाई. खिलाते हैं मेरे शिष्य है वो शिष्य मतलब. वो वाले शिष्य पुरोहित यजमान वाली परंपरा. के आपने अपना लास्ट करियर ऑप्शन बना रखा. था हां कुछ नहीं होगा तो फिर ये वृति तो. घर की है खेती और पंडिताई और यजमान वैष्णव. है शैव है के शक्त है उसके अनुसार उसको. गुरु मंत्र दिया जाता है तो जीवन का बहुत. बृहत अनुभव है तिवारी त्रिपाठी में क्या.
अंतर होता है कोई अंतर नहीं होता दोनों एक. ही सरने में कुछ लोग यूपी में त्रिपाठी. ज्यादा रखते हैं बिहारी में तिवारी हमारे. घर में भी तिवारी त्रिपाठी दोनों है दोनों. है वो कुछ जो अपने आप को थोड़े आधुनिक. उनको लगता है त्रिपाठी में थोड़ा. शास्त्रीय है बोलने में थोड़ा सा हां कि. त्रिपाठी सरने वाले दो चार बड़े लोग हुए. हैं त्रिपाठी में जी लग जाता तिवारी में. है तिवारी हां तो और राजस्थान में एक. तिवाड़ी भी होता है तिवाड़ी घनशाम तिवाड़ी. हा एक नेता तो. मेरे चाचा थे और बाबा थे वो दोनों.
प्रोफेसर और बड़े अधिकारी बन गए थे तो. मुझे लगा कि कुछ तो चक्कर है जो त्रिपाठी. लिखते हैं व बड़े व्यक्ति बन जाते हैं तो. मैंने अपने से 10थ में एडमिट कार्ड में. पिताजी का नाम भी तो अब वो नीचे उनका. सरनेम गलत होगा तो एडमिट कार्ड कैंसिल ना. हो जाए तो आप डॉक्यूमेंट तो कुछ देना है. नहीं तो लिख दिया पिताजी बताए नहीं कि. बेटा बाप नाम रखता है लौंडे नहीं नहीं. उन्होंने ऐसा उन्हें पता भी नहीं चला ना. वो कभी बताए उन्हें कुछ फर्क नहीं नहीं. पड़ता मेरे बाबू जी अद्भुत व्यक्ति.
थे बहुत मतलब. कर्मयोगी ये सवाल थोड़ा इमोशनल है लेकिन. मैं चाहूंगा आप बताएं हम लोग अपने मां बाप. को कई बार बहुत ग्रांटेड दे लेते हैं पापा. तो है ही शहरों मा गए बात नहीं होती या. बात की तो दो मिनट हां ठीक है अभी बिजी है. करते हैं आपको मम्मी के साथ भी जब साया. हटता है अरे बाप क्या कीमत समझ में आती है. पिताजी. की बहुत समझ में आती है दोस्त कैसे करू को. शब्दों में बयान करना मुश्किल है कि इस.
चीज को मैं शब्दों में बयान कर दूं मैं 30. साल से अपने पिताजी से कोई राय नहीं लिया. था कभी नहीं पूछा था कि मैं यह गाड़ी लेनी. है मेरे को यह घर लेना है मुझे यह फिल्म. करनी है मैं बेटी को यहां पढ़ने के लिए. भेजना चाहता हूं कोई कभी नहीं पूछता था ना. वह पूछते. थे कैसा है काम कैसा चल रहा है इसकी बातें. हो जाए मैं हर चौथे महीने गांव जाता था और. दो दिन तीन दिन उनके साथ रहकर और मां बाप. जी के साथ फिर मैं चुपके से किसी को बिना. बताए जाता था कुछ नहीं और दो तीन दिन घर.
में रहकर लौट आता था पर उनके निधन के बाद. मुझे वैक्यूम हुआ जो अभी तक. है लगता है कि किससे पूछूंगा फिर लगता. मैंने पूछा तो था ही नहीं पिछले 30 सालों. में तो यह विचार ही क्यों आ रहे. हैं तो मां पिता संसार रूप से वही आकार और. निराकार की बात है वह आकार में नहीं है पर. निराकार में है. बायोलॉजिकली भी.
है और वैचारिक रूप से ही भी है कि मैं इस. बात में बार-बार रेफरेंस दे रहा हूं कि. पिताजी अद्भुत. थे मैं जो बना हूं उसमें बायोलॉजिकल और. वैचारिक बहुत बड़ा योगदान है मां पिता का. उसको नहीं इंकार कर सकते इसीलिए स्टोरी. टेलिंग इंपोर्टेंट हो जाती महत्त्वपूर्ण. और इंपॉर्टेंट चीज है कि हम स्टोरी टेलिंग. के बहाने सिनेमा में उपन्यास में किताबों. में आपको यह अनुभूति दिला देते हैं कि. शायद मां पिता को टेकन फॉर ग्रांटेड ले.
रहे हो तुम वह किरदार लेता है वह रिलाइज. करता है और उसका. [संगीत]. रियलाइफ यह लेकर निकलता है और व अपने मां. को अगर फोन कर दे पिताजी को फोन कर. दे मुझे एक दो बार ऐसे दर्शक मिले हैं कि. आपकी वह फिल्म देखकर मैं निकला था. और मैंने किसी एक को फोन किया जिसको मैं. चा साल से फोन नहीं किया.
था तो लगता है कि यह भाई मेरी यह असली. अचीवमेंट है टिकट बेचना असली अचीवमेंट. नहीं है अटल जी की कहानी देखकर कोई. व्यक्ति निकले और बोले कि मुझ में कुछ. बदला है मैं थोड़ा सा अटल जी को लेकर जा. रहा हूं थिएटर हॉल से तो इस कहानी को कहने. का पर्पस मेरा पूरा हो. जाएगा. क्योंकि अटल जी जैसे व्यक्तित्व की और. नेता की सख्त जरूरत है समाज. को करुणा हमारी बढ़ जाए ना तो हम सतयुग.
में पहुंच जाए मैटल जी पस कर एक सवाल पूछ. एक सवाल मैं आपसे पूछ लेता हूं आप भी पिता. है एक हा जी ब बिटिया के हा पंकज त्रिपाठी. कैसे पिता. है यह तो बेहतर होगा बेटी ही बताए पर मुझे. लगता है मैं अच्छा पिता हूं वो भी बोलते. रहती है कि तुम अच्छे पिता अ पिता. की आप जज नहीं करते अपनी बिटिया को नहीं. नहीं जज करता और मैं नहीं स्ट्रिक्ट भी. हूं थोड़ा कभी कभी मैं सीधे ना करता हूं. किसी चीज के लिए जैसे किस चीज.
तो ऐसे ही उसके निजी मैटर में कभी-कभी. बोलता हूं नहीं पूछो मैं फोन तुम 10 बजे. रख दो डर में कुछ भी हो जाए छोड़ दो मैं. इसके खिलाफ हूं मैं नहीं रहूंगा तो तुम. रखो मैं जान नहीं रहा हूं मैं हूं तो नहीं. रहने दूंगा क्योंकि मैं आठ घंटे सोने का. भारत जैसे कृषि प्रधान देश है मैं नींद. प्रधान आदमी हूं क्या ब होते आप 11 बजे तक. 10 बजे मेरा फोन ऑफ हो जाता है उसमें लगा. हुआ है वो जो भी नाइट मोड रिमाइंडर हां तो.
वो अपने आप वो 10 बजे वो बोल स्लीप उसको. डी एंडडी डू नॉट हां उसको खोलना पड़ेगा. मुझे भी इस्तेमाल करना है तो ठीक है तो. मेरे पास बहुत ज्यादा ऐप नहीं है फोन में. तो 10 बजे फोन ऑफ 11 11:5 तक मैं ऑफ सुबह. 6:30 7:00 बजे जग जाता हूं सवाल हमने. इसलिए पूछा क्योंकि कई बार लोग कहते हैं. कि जिसको जितना रोको उतना आदमी उतना और वो. काम करता है तो आपको थोड़ा फ्रेंडली होना. चाहिए अपने बच्चों से या अपने भाई बहनों. से ताकि वो छिपाए नहीं बता दे आप नहीं.
नहीं वो सब बताती है छुपाती नहीं है वही. तो इतना फ्रेंडली रिश्ता है हमारा कि उसका. ए टू जेड मुझे पता है मेरी बेटी का आपके. पिताजी के साथ आपका हम मैंने और मेरी बेटी. ने री गड टू साथ देखी थी बैठ केप ऑफकोर्स. ओटीटी पे आने के बाद क्योंकि उनके आयु. वर्ग को अलाव नहीं था हा अनफॉर्चूनेटली. प हमने भी देखी उसको तो हमें भी एहसास हुआ. कि ये फिल्म जिनके लिए बनी थी उन्हीं के. खिलाफ शायद एक शुरू में शायद एजेंडा. प्रोपेगेंडा बढ़ या तो हम लोग भी नहीं. शायद बहुत सारे लोग उसको हम जैसे लोग भी.
उसमें जिम्मेदार हो गए हमें लगा शायद और. अच्छे से जागरूक कर सकते थे वो एक अच्छी. अपॉर्चुनिटी थी लेकिन यही रिश्ता आपका. आपके पिताजी के साथ था याय आप मानते हैं. कि नहीं नहीं वैसा नहीं था मेरे पिताजी के. साथ मेरे पिताजी के साथ मेरा कम्युनिकेशन. मेरी बेटी जैसा नहीं था क्योंकि हम हमारी. पीढ़ी अलग थी कि पिताजी मुझे कभी बट वो एक. अनसेट सा था व कुछ समझाते नहीं थे बोलते. नहीं थे पर पता नहीं उनके आचरण को उनके. कर्म को देखकर अपने आप हम तो हम हमारे. जमाने में इतनी बाहरी इंटरवेंशन नहीं थे. ना संचार क्रांति नहीं हुई थी जब हम बच्चे.
थे टीवी नहीं था मोबाइल नहीं था मुश्किल. से एक रेडियो सेट था मेरे गांव में तीन. हमारी बच्ची के पास जो डिवाइसेज है तो. दुनिया बदली है वो हमारी नहीं बदली आप भी. सुनते थे रेडियो प मैच ऐसे कान मिला के. हां हां रेडियो प मैच बिना का संगीत माला. पैदान नंबर एक पे सयानी जी अ अमीर सयानी. वो जो अंकर थे एफएम रेनबो में गाने तो. रेनबो तो बाद में आया था रेनबो नहीं था तब. विविध भारती मे खल से और गाना डेडिकेट. किया गया है फलाने गाव से च चिट्ठियां आती.
थी झुमरी तलिया से बहुत चिट्ठियां आती. थीरी तिलैया के लोग रेडियो में सबसे. ज्यादा चि लिखते थे कुछ आपको याद होगा गेस. उस में अनाउंसमेंट होती थी अगर थोड़ा सा. हो पाए हां कि गाने के लिए फरमाइश की है. फरमाइश की. है झुमरी तिलैया से नरेश महेश राहुल राम. प्रकाश चंदन श्वेता ऐसे बहुत सारे नाम आते. एक तरह के नाम होते थेसे रमेश तो रमेश. महेश फलाना ढम काना तो ये होता भी था नाम. भी एक रख थे घर में छ लड़के तो नाम सब.
मैचिंग र रेडियो स्टेशन सुबह खुलने के. पहले वो एक ट्यून आता था या टीवी में भी. आता था. डीडी तो हम वो भी सुना करते थे खैर हम. नोजिया में रहते हैं हमारा वक्त था अभी. वक्त बदल गया है दौर कौन सा बेहतर व या. ये हर आदमी अपने समय को बेहतर बोलता है कि. मेरा समय बेहतर था जो समय होता है बेहतर. ही होता है इस पीढ़ी के लिए यह बेहतर समय. है हां इस पीढ़ी के को प्रिपेयर्ड करना. पड़ेगा इस बेहतर समय और तकनीकी ग्रोथ के.
लिए जो हम ओ माय गॉड टू में करने का. प्रयास था इंटेंशन वही था कि भाई यह. मोबाइल हैंडसेट और इंटरनेट बच्चों के पास. तक क्या-क्या कंटेंट पहुंचाएगा आपको पता. नहीं है तो बेहतर है कि एक जीवन के इस. हिस्से को जो हमारी सनातन परंपरा में. जिसके बारे में पुस्तक लिखी गई है क्यों. ना हमको उसका सैद्धांतिक और उसके उसके. बारे में जागरूक अवेयर कर दे और सिलेबस के. थ्रू पढ़ा द फिल्म मैकाले की शिक्षा नीति. खत्म होती है कि कहां से हुआ कि हमारे.
गुरुकुल की परंपरा में से यह चीजें उजड़. गई और चली. गई सही बात है सिनेमा से दुनिया नहीं. बदलती है पर सिनेमा से संवाद शुरू हो सकता. है बातचीत कर सकते हैं जो आज हम कर रहे. हैं ट्रू और उसका लास्ट सीन बड़ा. इंपैक्टफुल वो कहती है कि कौन नालायक. तुम्हारा बाप पता लगता है कि जज साहब. पिताजी थे पिताजी थे आपने कहा ना आपकी. बेटी के साथ आप गए थे तो मुझे बड़ा रिलेट. हुआ अटल जी के बारे में क्योंकि हम यहां. बैकग्राउंड प हैं सियासी पिच पर आपने एक. सियासी मुद्दा. तो कुछ सवाल सियासत के भी हम रख लेते हैं. अटल जी बेबाकी से जवाब देते थे हम आपसे भी.
वही उम्मीद करेंगे अटल बीजेपी पर अक्सर. आरोप लगता है कि जो टॉप का नेता होता है. वह सेकुलर होता है और नीचे वाला कमल हो. जाता. है हमने अटल जी के भाषण देखे हैं जब अटल. जी ने कहा कि जमीन समतल करनी है और हो. सकता फिल्मों में भी हो वो कि फावड़ा आएगा. यह आएगा और इससे जमीन समतल की जाएगी कार. सेवक. आएंगे कहा था कि बाद में उ उनका शायद थॉट. प्रोसेस जैसा भी रहा लेकिन शुरुआत में राम. मंदिर क्योंकि भी वाला क्या टेक आपका था. अटल जी सेकुलर थे अटल जी कनल थे क्योंकि.
अटल जी के भाषण भी हमने सुने कि कहते हैं. कि बीजेपी कमल है अटल सेकुलर है ऐसे बड़े. भाषण उनके सुने हैं विरोधी ऐसा कहते थे. ऐसा एक बोला है विरोधी कहते हैं कि आदमी. सही है पार्टी गलत है पार्लियामेंट तो. सेकुलर अटल कैसे बीजेपी में हु ये 19. जनवरी को इन सारे सवालों के प्रश्न हमारी. फिल्म मैं अटल हूं देगी तो ये चाहता हूं. कि आप टिकट खरीद के ये देखें और सीधे आपने. ट आपने मेरा सवाल. नहीं नहीं वो नहीं किया. क्योंकि उनके चरित्र को समझते हुए लगा कि.
हमें किसी भी व्यक्ति के बारे में. मूल्यांकन करते हुए फिक्स नहीं होता है. होना चाहिए ठीक है तय नहीं करनी चाहिए. जिसको भी देखिए गौर से देखिए हर आदमी में. होते हैं कई कई आदमी तो पर्सपेक्टिव बदलना. पड़ेगा विचारों की समस्या यही है जो मैं. कल से सोच रहा था कि मुझे लगता है मेरा. विचार सही है आपको मेरे विचार को मान लेना. चाहिए आपको यही चीज आपकी लगती होगी तो. लोकतांत्रिक व्यवस्था है मतलब आपके भी.
विचार उचित है हमारे भी विचार उचित है उस. भारत में शास्त्रार्थ की परंपरा थी. लोकतंत्र में नहीं वैसे पुरानी परंपरा में. बैठ हर मुद्दे पर शास्त्रार्थ बातें होती. थी अब हम कलयुग में जी रहे हैं घोर कलयुग. कहा जाता है. इसमें आपसे आज बातें करने बैठा हूं मेरा. भी कुछ परपस. है यह संभव हो इस बातचीत करने में आपका भी. कुछ परपस हो. तो फिर सत्य क्या है हम दोनों थोड़ा-थोड़ा.
अभिनय कर रहे. हैं अब इसमें हमको लगता है अमृत मंथन करके. सत्य निकाल दो तो फिर तो ऐसे ही चल रहा है. ऐसे ही चल रही है दुनिया बहुत खूबसूरत. आपने जवाब दिया कश्मीर मेटल जी हमेशा. कश्मीर का जिक्र करते थे सरहद पार. पाकिस्तान में भी उनकी फैन फॉलिंग है और. जबरदस्त ब जबरदस्त और कश्मीर में इतने. पॉपुलर नेता हैं मैं वहां के लोगों से. मिला था कुछ बातचीत में और मुझे पता चला. और वो भारतीय मीडिया में कम बात हुई है कि. अटल जी कितने महा प्रचलित थे एक एक लेखक.
मुझे मिले जो कश्मीर पर किताब लिख रहे थे. और उन्होंने मुझे बताया फिर मैं कुछ लोगों. से बातचीत किया मेरे दोस्त हैं तो पता चला. हां कि ये तो अरे ये हमने मैं नहीं जानता. था मैंने आपको लेकर एक पोस्ट डाली थी कि. पंकज त्रिपाठी जी से मैं संवाद करने वाला. हूं कुछ सवाल भेज दीजिए हम सरहद पार से. बड़े सवाल मेरे पास आए तो मुझे बड़ी. हैरानी हुई कि लव फ्रॉम जब वो पाकिस्तान. लिख रहे थे क्योंकि पाकिस्तान को आमतौर पर. एक दुश्मन मुल्क हिंदुस्तान में कहा जाता. है अटल जी की परिभाषा अलग थी कि आप पड़ोसी.
नहीं बदल सकते हैं आपको पड़ोसियों संबंध. बेहतर रखने पड़े पूर्ण संबंध तो भारतीय. सियासत में ऐसे मुट्ठी भर नेता नहीं है. जिनको सरहद के उस पार भी या कश्मीर से फुल. सपोर्ट या देश के बाकी हिस्सों में सपोर्ट. बिहार यूपी हर जगह पर मतलब आप ही वाली. कहानी कि पंकज त्रिपाठी हर जगह प्यार मिल. रहा है तो क्या उन्हें वो स्पेशल बनाता है. मैं उस चीज को समझना चाह रहा हूं केवल. आपसे आप तो पूरा किरदार को जी कर आ रहे. हैं पढ़े हैं रिसर्च किए हैं वही उनको. स्पेशल बनाती है उनके विचार या ओपन टू. कन्वर्सेशन. टू कन्वर्सेशन कि तुम मुझसे डिसएग्री करते. हो इस बात से मैं एग्री करता हूं बहुत.
मुश्किल है आज के दौर में कि आप मुझसे. डिसएग्री करो तो यार हटाओ इसको उसको मत बो. आने दो ठीक है आप हम क्यों चा अगर मान. लीजिए आपको मेरे विचारधारा से असहमति है. मुझे मत बदलो ना मैं ऐसा ही हूं समस्या. शुरू होती है जब हमें लगता हम ठीक है. हमारी पत्नी ठीक नहीं है तुम समझती क्यों. नहीं हो अरे भाई तुम क्यों नहीं समझते हो. हम दो इंडिविजुअल यूनिट्स है तय किया है. कि जीवन साथ निभाएंगे हमने विवाह किया तो. उसमें सब कुछ मेरे मन का नहीं होगा और सब.
कुछ उनके मन का भी नहीं होगा एक कॉमन. मिनिमम प्रोग्राम ही होगा कुछ तो अटल जी. का व्यक्तित्व सबको लेकर चलने वाला कवि थे. कमाल की कविताएं लिखते हैं ईश्वर मुझे. मेरे प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई मत देना कि. गैरों को इ प्रभु मुझे इतनी ऊंचाई मत देना. गैरों को गले ना लगा सकूं इतनी रुखा मत. देना जो सबसे ऊंचा होता है वह नितांत. अकेला होता है एक कविता में लिखे हुएनी.
गहरी बात है हां हर फील्ड में हर जगह ये. सटीक बैठती हैर मैं तो अब. मुझे तो जब आप उनकी कविताओं को पढ़ो और. उनमें कविताओं में उनकी मनोदशा है 25. दिसंबर को कई बार कविता लिखते थे अपने. जन्मदिन पर एक बार बीमार थे दिल यूएस से. इंडिया आ रहे थे तो उस बीमारी में के बाद. उन्होंने उसी दरमियान फ्लाइट में कविता. लिखी थी वो जिंद मौत जिंदगी मौत बड़ी हो. गई आके खड़ी हो गई वाली कविता तो मैं अपने.
रिसर्च में उन कविताओं को और कविताओं के. लिखने के समय की मनोदशा को पढ़ रहा था खोज. रहा था तो मुझे बहुत मिली जो फिल्म में. नहीं है मैं इतना जान गया हूं कि मैं भी. एक किताब लिख दूं या अलग से बात हो लेकिन. फिल्म की एक अपनी लिमिटेशन है कि दो घंटे. में कह एक वेब सीरीज बनती है अटल जी चार. पांच सीजन की बढ़िया तब जाकर न्याय होगा. एक हमने आपका सीन देखा ट्रेलर में जिसमें. नेहरू जी की तस्वीर बरामदे की होते हट. जाती है मौजूदा दौर में किसी भी पार्टी को. हम देखते हैं एक योजना चलती है नई सरकार. आती है नाम बदल देती है फिर हम देखते हैं.
ट्रेलर में व सीन जहां पर अटल जी आते कहते. यहां तो पंडित नेहरू जी की तस्वीर थी तो. कहा हां लेकिन सर वो विपक्ष के नेता थे. लेकिन हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री भी. पंडित जी अरे उनकी एक नेहरू जी के निधन पर. एक उनकी स्पीच है जिसका वीडियो नहीं है. पार्लियामेंट में व रिटन टेक्स्ट में है. मतलब रिकॉर्ड में है 10 लाइन सात लाइन है. आप पढ़. लो वो फिल्म में नहीं है लेकिन मेरे. रिसर्च के दरमियान में उससे भी गुजरा और प. उस पलि रिकॉर्ड का हिस्सा अरे व कवि ही.
वैसा लिख सकता है पांच छ 10 लाइने की है व. लेकिन हृदय मत देती है व पंक्तियां जो. लिखे बोले. थे. तो करुणा संवेदना की बड़ी जरूरत है ना. संसार को भारतीय सियासत में मौजूदा दौर. में आपने कहा हर आदमी को अपना दौर अच्छा. लगता है कोई नेता किसी भी पॉलिटिकल पार्टी. का आपकी भी अपनी एक सोच है आपने भी दुनिया. देखी है बिहार से लेकर यूपी बंबई में आप. रहे देश की सियासत देख रहे हैं दिल्ली में. बैठे हम लोग हैं अटल जी के इर्दगिर्द या.
उतना खुले पन से अलग-अलग विचारधारा के. विचारों को स्वीकार करने वाला कोई नेता. आपको नजर आता मुझे नहीं दिखाई देते मुझे. नहीं दिखाई. देते उस किस्म का क्योंकि अभी पार्टी लाइन. बड़ी इंपॉर्टेंट हो गई है हर कोई अगर उसकी. हो सकता है कि विचार अपने पार्टी लाइन से. ना भी मिलती हो पर वह पब्लिक फोरम पर. बोलेगा नहीं क्योंकि अभी बहुत ज्यादा. पार्टी ला पहले होता था पार्टी के भीतर भी. लोग बयान दे देते थे हर पार्टियों में.
आजकल मुझे नहीं दिखता है और ठीक है ये तो. समय का परिवर्तन है समय दुनिया हम मेरे. हिसाब से और अपने हिसाब से ही चलेगी तो. मैं इसको इसकी आलोचना भी नहीं कर रहा हूं. मुझे लगता है हर मामले में कि समय का चक्र. है वो काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूं. गीत नया गाता. हूं तो उसको वैसे ही स्वीकार है जैसे हम. और आप बैठे हैं ऐसे 2002 में जी बैठे थे. बगल में मोदी जी बैठे थे एक प्रेस. कॉन्फ्रेंस हो रही थी और उन्होंने कहा कि.
राज धर्म का पालन करना चाहिए भारतीय. राजनीति में मैंने वो सीन या वो जो तस्वीर. थी मैंने उससे पहले भी मेरी स्मृतियों में. तो नहीं है ना उसके बाद देखी मैंने और. मुझे लगा शायद यह कवि हृदय ही है कवि हृदय. ही है बिल्कुल बिल्कुल. बिल्कुल क्या यही वजह है कि 201617 तक भी. अटल जी को लोग जब हम हम मीडिया वाले लोग. हम सर्वे आते थे तो कौन प्रधानमंत्री. बनेगा तो मोदी जी 50 पर राहुल जी 20 30 पर. या फलाना आदमी उसमें अटल जी का भी नाम.
हमेशा आता था जबकि उनकी तबीयत खराब थी. अच्छा मैं हां हो सकता है हो सकता है मैं. तो बिल्कुल आपकी बातों से सहमत. हूं ठीक है मटल जी से थोड़ा आगे बढ़ते हैं. अ मीडिया में आप टीवी दुनिया में कैसे आ. पाए थे ये बहुत बेसिक सवाल है लेकिन जब आप. शुरुआत आपकी हुई रन रन फिल्म थी शायद वो. कवा बिरयानी मैं नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से. एक्टिंग का ट्रेनिंग किया था दिल्ली में. ही है और. सरकारी सरकार द्वारा संचालित संस्थान है.
जो ऑटोनोमस बॉडी है एक बार में एडमिशन हो. गया था नहीं नहीं तीसरी बार में हुआ था. थर्ड अटेम्प्ट में जब मैं जब एडमिशन देने. का सोचा तो मैं प्लस टू पास था ग्रेजुएट. भी नहीं था पता चला बेसिक ग्रेजुएशन है तो. मैंने एनएसडी के लिए फिर हिंदी लिटरेचर. में किया कि मैं इम्तिहान दे पाऊं तो मैं. टैक्स पेयर के पैसों से एक्टिंग सीखा हूं. एनएसडी में क्या खास है जब जितने एक्टर. निकलते हैं सब बा कमाल निकलते तीन साल अभी. ने की ट्रेनिंग होती है तीन साल भारत में. कोई ऐसा संस्थान नहीं है जो न साल तक. एक्टिंग सिखाए अब यहां छ महीना चार महीने.
के क्रैश कोर्स होते हैं एक्टिंग के लोग. तीन साल क्या सिखाते हैं बहुत सिलेबस वो. एशिया का अपने आप में सबसे बड़ा संस्थान. है इब्राहिम अलका जी थे तो जो वहां का. सिलेबस है वहां की जो एजुकेशन की प्लानिंग. है व बड़ी ही कमाल है बृहत है सिनेमा नहीं. सिखाई जाती है कैमरे का हम सी भी नहीं. जानते वहां से पढ़ते हुए वो तो इस मीडियम. को बंबे जाकर मैं समझा क्योंकि एक फर्क है. थिएटर और सिनेमा में वहां थिएटर की. ट्रेनिंग होती है और कमाल ट्रेनिंग होती. है वही फर्क जो एक्टर और स् और वो एक्टर.
के संगसंग बेहतर आदमी बनाने की ट्रेनिंग. है बेहतर ह्यूमन बीइंग बनाने की ट्रेनिंग. है वही फर्क जो एक्टर और स्टार में भी है. एक्टर पंकज त्रिपाठी हमेशा से एक अच्छे. एक्टर थे अब पंकज त्रिपाठी स्टार हो गए. फुकरे वन में भी पंकज त्रिपाठी थे फुकरे. टू में भी थे लेकिन शिकायत थी कि बाग की. तस्वीर लगा दी गई है पंकज त्रिपाठी को. नहीं लगाया गया है हां अब पंकज त्रिपाठी. फोटो में आते हैं बाग को रिप्लेस कर दिया. [हंसी]. सिंगल पोस्टर लगा है बड़ा पोस्टर बाकी जो.
है वो छाय में है. जी स्टारडम भी आ गया ये मानते हैं ये. एक्टर से स्टार की भी एक जर्नी होती है. ऑफकोर्स होती अब आप स्टार होती ही है. बिल्कुल होती है और य लोगों का प्रेम है. कि. उन्होंने मैं तो मुझे बेचना नहीं आता था. पता नहीं कैसे लोगों ने खरीद लिया मुझे. मार्केटिंग अभी भी नहीं आती है मैं कभी भी. नहीं चाहता हूं कि अपनी खास इमेज बन जाए. और बनाई जाए जो भी है स्वतः नैसर्गिक. ऑर्गेनिक बनी है जी ठीक है सर अब हमने कुछ.
क्योंकि समय कम है तो मैं कुछ लोगों ने. सवाल भेजे थे और इसके जल्दी जल्दी आप. छोटे-छोटे जवाब दे सकते हैं पहला सवाल तो. ये था कि आप बिहार से हैं बिहार आपके साथ. चलता है पंकज त्रिपाठी बिहार के लिए क्या. करने वाले आपकी भी जिम्मेदारी है बिल्कुल. है क्या करेंगे अब मैं वो जो काम कर चुका. हूं उनको बताने का मुझे अच्छा नहीं लगता. है अपने किए हुए कामों की चर्चा करो बताओ. मुझे लगता है अच्छे कार्य सामाजिक कार्य. करके और भूल जाइए उसका क्रेडिट भी मत. लीजिए. तो कुछ कर चुका हूं और कुछ करने वाला हूं. आगे आने वाले दिनों में करूंगा बट यस मैं.
जनप्रतिनिधि नहीं हूं तो हमारी करने की. क्षमता लिमिटेड होगी जो 13 करोड़ लोगों तक. उसकी सूचना भी ना पहुंचे शायद बट अगर. मैंने 13 लोगों के जीवन बदलने का प्रयत्न. किया प्रयास किया और उसमें थोड़ा भी. योगदान कर दिया तो बड़ी चीज है अपने स्व. स्वयं के सुख के लिए चुनाव लड़ेंगे आप. नहीं क्यों फिलहाल तो नहीं बिहार आपने कहा. कि 1995 में बिजली आई थी आपको नहीं लगता. कि अच्छे लोगों की जरूरत है. बिल्कुल जरूरत है बहुत बहुत जरूरत है. राजनीति में बढ़िया लोगों की पर मैं.
लडूंगा तो हार जाऊंगा बिहार में कोई. बढ़िया आदमी लगता है पॉलिटिक्स हार जाऊंगा. मैं कोई लगता है बढ़िया आदमी पॉलिटिक्स. में जो बदल सकता है बिहार को बिहारी हर. जगह झंडा गाड़ लेकिन बिहार से बाहर निकल. कर नहीं प्रशांत जी को देखता हूं आजकल. घूम रहे हैं पूरा बिहार गांव गाई जा रहे. हैं बहुत परिश्रम कर रहे हैं. आप उनकी बातें तो बड़ी इंटरेस्टिंग और. बड़ी फैक्ट वाली बातें करते हैं वो आप. सुनो तो वो बड़ा एक मॉडर्न अप्रोच साथ. बातचीत करते हैं स्टस डाटा आपको लगता है. जनता को लुभा पाएंगे या मुझे नहीं मालूम.
मुझे नहीं मालूम मैं बोला ना मैं खड़ा. हूंगा हार जाऊंगा चुनाव किस पार्टी किसी. भी पार्टी से खड़ा होंगा हार जाऊंगा निर्व. भी हार जाऊंगा मुझे कोई क्यों मतदान करेगा. अरे आपको पसंद करते हैं हर दिल वो सिनेमा. की बात अलग है दोस्त ये राजनीति अलग चीज. है व हमारी समझ से पर मेरे समझ में नहीं. है गोविंदा जी जीत कर आए सारे एक्टर जीत. करा कौन नहीं जीता सनी देवल पर आप. अभिनेताओं का देखो राजनीतिक करियर कितना. चलता है वो तो ध्यान नहीं दिया ना. उन्होंने नहीं क्योंकि हमारी दुनिया थोड़ी. अलग. है वो बहुत जिम्मेदारी का काम है अगर आप.
जीत के आते हैं तो आपके पार्लियामेंट के. सारे सत्र में आपको होना चाहिए और सिर्फ. होना चाहि नहीं चाहिए एक्टिव पार्टिसिपेशन. चाहिए सिर्फ वो पद नहीं चाहिए अभी तो आप. जवान है लेकिन स्पर्ट मिल गई और सुविधा. मिल गई और नहीं आपको बहुत समय दे बहुत. जिम्मेदारी का काम है आज उस बिहारी भाई के. प्रश्न को मैंने बोला ना कि मैं. जनप्रतिनिधि नहीं हूं कि ये मेरी. जिम्मेदारी है मैं अपने सुख के लिए चुपचाप. अपना सामाजिक दायित्व निभाता हूं उसकी. जिक्र भी कहीं नहीं करूंगा लेकिन यदि मैं. जनप्रतिनिधि होता तो मैं उसका.
जिक्र 10 बार कर देता कि मैंने यह काम. किया है एक यह बदलाव लाने वाला हूं यह. योजना है मेरी तो बहुत अंतर है बहुत. जिम्मेदारी का काम है आप भी कवि एकदम हो. गए हमको कवि हृदय अटल जी का डायलग मैं. अविवाहित हूं पर कुवारा नहीं वो तो होंगे. ही क्य सब कुछ कह दिया कुछ नहीं कहे हा. इनका बातचीत है इनका चरित्र है एक सवाल जो. सबसे ज्यादा पूछा गया हमसे वो यह था कि. मिर्जापुर तीन कब आएगी. इस साल के मैं जाएगी अन प्राइम उसका डेट. अनाउंस कर देगा करेक्ट हमें भी सच में.
मुझे भी ज्ञात नहीं है मैं अपनी डबिंग. करके मैं डबिंग भी करके आ गया हूं अपनी. अच्छा एक उसमें एक सवाल और पूछे थे लोग कि. मुन्ना है या इसके लिए अन प्राइम वीडियो. का सब्सक्रिप्शन ले लीजिएगा जब हमारा शो. आएगा बहुत लोग क कि मुन्ना कान पकड़ के. कालीन भैया कान पकड़ लेना चाहिए था मुन्ना. भैया के ले आइएगा जैसे भी खेतीबाड़ी कैसे. चल रही है यह भी एक सवाल पूछा गया था. अच्छी चल रही है अभी मिर्चा आया हुआ है और. और कटहल बढ़िया सब्जी ला साइज का हो गया. है यहां से जाते मेरा टारगेट है कटहल की.
सब्जी खाने प देखिए लोग एक एक चीज आप पर. नजर रखते हैं लोग नजर लोगों का प्रेम है. गुरु एक सवाल आया कि भोजपुरी फिल्मों में. आप दोबारा कब काम आपने काम किया भोजपुरी. एक किया है करूंगा करूंगा दोबारा करूंगा. है लगाव आपको बहुत लगाव है बहुत लगाव है. बहुत इंटरेस्टिंग सिनेमा का अब करूंगा वो. बार तो मित्रता दोस्ती में किसी को मदद के. लिए किया था इस बार मैं जो करना चाहता हूं. भोजपुरी सिनेमा वो करूंगा आपको लगता है. भोजपुरी सिनेमा. में जो कटाक्ष लगता परसेप्शन बना हुआ है. अश्लीलता को लेकर व सही है या बदल रहा है.
या अभी भी वैसे ही है आप नजर रखते कुछ. नहीं मैं ट्रेलर देखा एक ट्रेलर मुझे ठीक. लगे टेक्निकली खराब लगे कंटेंट वाइज ठीक. लगे कि साफ सुथरे ट्रेलर थे ब तकनीकी रूप. से बहुत पीछे है तो मुझे जिस तरीके का. बनाना है करना है वैसा करूंगा अच्छा एक. सवाल और था कि आप इतने सौम्य व्यक्ति हैं. फिर मिर्जापुर में इतना गरिया कैसे लिए. मैं थोड़ी गरिया है वो किरदार गरिया है वो. चरित्र है जो हम परद प करते हैं वो हम. नहीं है जी वो चरित्र है हम वो है जो आपसे.
इस समय पंकज त्रिपाठी बनकर बातें कर रहे. हैं जीवन में जो हमारा आचरण है वह आचरण. किरदारों का है हमारा नहीं है हालांकि. मैंने अब वो भी कर लिया कि अपने किरदारों. के आचरण को भी मैं उस परे भी नजर रखूंगा. जिम्मेदारी लगता है आपको होती यस बिल्कुल. जिम्मेदारी का काम है वो ये मुझे पहले. अनुमान नहीं था कल इन दिनों हुआ है जैसे अ. एनिमल फिल्म आई थी जावेद साहब ने कहा कि. उसमें एक लड़की को जूता लेख करवाना एक. खराब मैसेज है हालांकि फिल्म के कलाकार. उनका एक अलग परसेप्शन था आप मानते हैं कि. जब आप बड़े हुए आते हैं तो किरदारों का.
चयन केवल कैरेक्टर से नहीं मतलब केवल अब. हां अभिनय से नहीं उसमें थोड़ी सामाजिक. जिम्मेदारी होनी चाहिए जी अ बस हम दो मिनट. में समाप्त कर देंगे काफी क्योंकि लेट हो. रहा है लोगों को लोग बिल्कुल हमारे पीछे. पड़े एक सवाल और था कि पंकज जी को महंगी. गाड़ियां क्यों पसंद नहीं है महंगी गाड़ी. उन्होंने खरीदी उसको लेक भी किसी ने लिखा. था कि कमेंट आते थे कि छोटे कलाकार को कुछ. ऐसा शायद था नहीं नहीं वो तो मैंने वो. राजत जी के शो में बोला जी महंगी गाड़िया. इसलिए पसंद नहीं है कि वो भाई वो. इन्वेस्टमेंट ऐसा है कि जिस दिन शोरूम से.
निकलोगे उसी दिन 1015 लाख टूट गया जाना ही. है ना पॉइंट ए से पॉइंट बी महंगी गाड़ी. क्या है आदर स्टेटस आपको नहीं पसंद स्टेटस. नहीं जब जब मैंने खरीदी थी जब एक आथ बार. ऐसा महसूस हुआ कि सामने वाले को गाड़ी देख. के लग रहा है कि छोटे एक्टर को तो नहीं ले. लिया तो मुझे लगा य व्यवसाय के लिए जरूरी. है यह भ्रम बनाना मुझे नहीं है स्टेटस की. चिंता नहीं है कपड़े पपड़े भी आप कुछ नहीं. अति साधारण सिलवाते कपड़े गांव हां सिलवा. हूं य भी पैट सिला हुआ है शर्ट सिला हुआ. है संबलपुरी है ये तो मैं य आपकी टीम आपको.
दिला देती बढ़िया से एकदम नहीं नहीं हमारी. टीम भी है विनीत भी दिलाता है मैं ऐसा हबल. व्यक्ति हूं यह सुन ले मैं जीवन में. साधारण हूं पर बाकी सब है मेरे पास घर है. गाड़ी है बंगला है डिजाइनर है सब कुछ है. अवगुण क्या है आप. अवगुण अवगुण यही है कि मैं बहुत प्रवचन. करता हूं अवगुण यही है कि मैं इंटेलिजेंट. व्यक्ति हूं आप मुझे प्रश्न से फसाना. चाहोगे मैं कविता बोल के निकल जाऊंगा. अवगुण नहीं है ये तो अवगुण क्या है मुझे.
मैं अपने अवगुण पर खोजने में लगा हूं. अवगुण तो है ना ठीक है आखरी सवाल. आपसे सियासत में कहते हैं कि सादगी मेंटेन. करना बड़ा खर्चे दार होता है अच्छा सादगी. को दिखाना भी बड़ा न्यूज कर रहे हैं बड़े. शब्दों का ये है आपके पास आपकी सादगी. कहानी क्या है क्योंकि क बार लोग कहते अबे. तुम किस बात का घमंड है पंकज त्रिपाठी को. देख के निकलता है अे तुम घमंड क्यों नहीं. क्योंकि मुझे लगता है कि गुरु जो आज है यह. कल नहीं था 10 साल पहले मेरे साथ कोई.
सेल्फी नहीं लेता था यह संभव है 10 साल. बाद वापिस कोई ना लेगा तो वह करुणा और वह. कंसर्न ऐसा है मुझे अच्छा लगता है चुपचाप. बोट में बैठ के पब्लिक के साथ मास्क लगाकर. टोपी लगाकर निकल जाना मैं अभी भी मेट्रो. में चलता हूं बंबई में मास्क टोपी लगाकर. चश्मा पहन के मुझे ऑटो बिल्कुल ये हवा. नहीं है कि दो ऑटो है है मेरे पास मतलब. मैंने खरी नहीं है पर मेरे फिक्स ऑटो है. कि मुझे जाना है राजेश या दूसरा लड़का है. उनको फोन करके आ रहा हूं तो ये सत्य है सज.
जी खरीदते हैं कभी बिल्कुल खरीदता हूं. मुझे आनंद आता है आलू टमाटर भाव पता है. आपको अभी अभी तो 15-20 दिन से नहीं गया. हूं तो मैं कैसे बताऊं ब टमाटर सस्ते हुए. हैं मतलब मुंबई में परसों मुझे ₹ किलो. टमाटर मिल रहे थे परसों की बात है ये. मुंबई में मैं मैं शॉक था कि ₹ बंबई में. टमाटर क्या हो गया आ इधर आमद ज्यादा हो गई. होगी कुछ हुआ होगा देखिए आपसे बहुत सारी. बातें करी थी लेकिन आपके प्रोड्यूसर. बिल्कुल एकदम वो हो गई है तो एक सवाल सि. अटल फिल्म क्यों देखे जाती हत्या बता. दीजिए क्यों इस फिल्म को देखने लोग सिनेमा.
घर में जाए हम चाहते हैं आपने उस किरदार. को जिया आपसे बेहतर कोई बता नहीं सकता. आपने जो अटल जी के स्पीस और रैलियां और. कविताएं सुनी है आप अटल जी के यात्रा और. कहानी को नहीं जानते हैं तो यह कहानी आपको. इंस्पायर करेगी आप में देशभक्ति का जज्बा. भरेगी आपको बेहतर इंसान बनाने की तरफ. अग्रसर करेगी आपको एक विराट व्यक्तित्व से. परिचय कराएगी कि व विराट व्यक्तित्व एक. बटेश्वर का साधारण लड़का था और वह कैसे.
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेई बना इस कहानी. को बताएगी यह फिल्म हम सबने प्रेम से बनाई. है भानुशाली स्टूडियोज ने और रवि जादव जी. इसके डायरेक्टर हैं मैं अभिनय किया हूं. ऋषि बरमानी इसके लेखक है एक ईमानदार. प्रयास है अटल जी की कहानी को संक्षिप्त. में दो घंटे में कहने का इसलिए देखें बहुत. शुक्रिया पंकज जी आशा करते हैं कि आपसे. फिर मुलाकात होगी जिसमें समय बाध्य नहीं. होगा हम बहुत सारे विषयों पर विस्ता चर्चा. कर पाएंगे आप आओ ना हम रिकॉर्ड नहीं. करेंगे आप घर आइए हम बैठ के बए चाय.
पिलाएंगे बढ़िया कटहल की सब्जी खिलाऊंगा. जबरदस्त चाय पीते हैं कॉफी पीते हैं मैं. दोनों पीता हूं जो ज्यादा कौन पसंद मैं. दोनों में से ज्यादा नहीं मैं सुबह एक कप. चाय पीता हूं और कभी कभार शाम को एक कप. कॉफी बस उससे ज्यादा नहीं ठीक है सर. बहुत-बहुत शुक्रिया आपका पंकज जी थैंक यू. मेरे भाई आप लगता है सोते बहुत बढ़िया हो. आप कितने घंटे सोते हो पा घंटे छ घंटे चार. घंटे प्लीज सोने का टाइम बढ़ा दो. ना आप आपसे सीखा हमने आठ घंटे सोना चाहिए. हां तब भी आपका शरीर 16 घंटे के लिए. प्रिपेयर्ड रहेगा मैंने सुना आप कहीं बता.
रहे थे कि शरीर सबसे इंपोर्टेंट यही है. सबसे जरूरी है. नींद कमाई धमाई करियर पैसा काहे के लिए आप. कमा लिए है ना सर एक समय आता है फिर आदमी. पैसे के लिए काम करना बंद कर देता है आप. उस दौर में आ चुके हैं हां इसलिए प्रवचन. दे रहा हूं ना हम उस दौर में पहुंचना. चाहते हैं अच्छा छमा चाहता हूं मैं चलो. थैंक यू थैंक य सो मच.
