
Unplugged ft. Omar Abdullah | Nidhi Razdan | Love & Life | Kashmir Politics | 370 | Pahalgam | Qazi
आर यू इन लव? [हंसी]. आपके चेहरे के गुलाबीपन्न ने काफी कुछ कह. दिया है।. वो एक मुसीबत है। मेरे कान लाल हो जाते. हैं। [संगीत]. इश्क वाला लव. हुआ जो दर्द भी तो हमको. बिना इश्क वाला उमर अब्दुल्लाह और इश्क. में पड़ा उमर अब्दुल्ला कैसे आता है? कुछ. लोग कहते हैं कि हम ज्यादा मुस्कुराते. हैं। कुछ कहते हैं गुस्सा कम आता है। बेटर. लिसनर बन जाते हैं।. अरे मैं बेटर लिसनर जरूर फिलहाल तो दावा. कर सकता हूं।. क्या पता कहीं कोई देखकर मुस्कुरा रहा हो।. [हंसी]. शेख अब्दुल्ला साहब हो, फारूक अब्दुल्ला.
साहब हो। ये सब चीफ मिनिस्टर्स रहे।. सलाखों में भी रहे। आप भी 232 दिनों तक. नजरबंद रहे। ये अब्दुल्ला सरनेम जो सर ये. प्रेशर लेकर आता है, ब्लेसिंग लेकर आता. है। मेरी मां अक्सर कहा करती हैं इफ यू. कांट टेक द हीट स्टे आउट ऑफ द किचन। अगर. आपसे गर्मी बर्दाश्त नहीं होती। आप किचन. से बाहर रहिए। 1975 में इंदिरा गांधी जी. के साथ एक समझौता होता है और जनमत संग्रह. की मांग छोड़ दी जाती है। अभी भी कुछ लोग. हैं जो उसे हार कहते हैं।. बेशक इंदिरा गांधी के साथ इंदिरा शेख का. अकॉर्ड हुआ लेकिन उसके बाद इलेक्शन हुए।.
1987 का चुनाव सर बहुत लोग कहते हैं. कश्मीर वहां से बचा।. यासीन मलिक के खिलाफ एफआईआर है पोल. रिलेटेड 1987 में। उसके बाद उसने बंदूक. उठाई।. हमने 87 में एक एफर्ट की थी तो हमने उसका. हशर देखा।. कश्मीर 84 से बदला जब मेरे वालिद साहब की. हुकूमत को गिराया गया।. आज कश्मीर को सर क्या चाहिए? आर्टिकल 370. या फिर स्टेट हो? हमें अपनी पहचान चाहिए। हमें भी अपनी. इज्जत चाहिए। हमें वो चाहिए जो हमें दिया. गया था जो हमसे लिया गया।. आर्टिकल 370 इसके फायदे नहीं हुए कुछ भी।.
दिल्ली में अक्सर कहा जाता है कि बहुत. सारी चीजें बेहतर हो गई।. सुना मैंने भी यह है। लेकिन जमीनी सतह पे. दिखता नहीं। क्या इंडस्ट्री की शुरुआत. सिर्फ 5 अगस्त 2019 से हमें देखने को मिल. रही है।. कॉमन परसेप्शन आता है कि जब कोई दिल्ली से. या देश के कहीं हिस्से से कश्मीर जाया. करता था तो एक सवाल उठता था कि आप इंडिया. से आए। वह कह रहे हैं कि अब शायद यह. दूरियां कम हो गई।. आज भी अगर आप कश्मीर जाएं और आपके पास. प्रीपेड मोबाइल फोन हो यहां का। आपका फोन. वहां चलेगा। मुझे बताइए ना कौन सी दूरी. है? आपने सर एक स्टेटमेंट दिया था कि जम्मू. कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश इसलिए.
बनाया गया क्योंकि वह मुस्लिम बहुल राज्य. था।. क्या हम एक ही इकलौता रियासत है जहां आपको. आतंकवाद देखने को मिला? क्या पंजाब में. आतंकवाद नहीं था? क्या यूटी बना? माफिया. वालों का कितना हमला चलता है मुंबई में? एक फिल्म स्टार भी आज सुरक्षित नहीं है।. टाइगर श्रॉफ्स अटेम्प्टेड एंड अससिनेशन. ओपन फायर आउटसाइड सलमान खानस गैलेक्सी. अपार्टमेंट।. क्या आप मुंबई को यूटी बनाओगे? 5 अगस्त 2019 को सर जब आपको नजरबंद किया. गया। आपको लगा था 232 दिन चलेगा? मुझे तो लग रहा था कि 15 अगस्त के बाद.
छोड़ देंगे।. आपको पता था कुछ ऐसा होने वाला है? सत्यपाल मलिक गवर्नर जब हम उनसे मिले। आंख. से आंख मिला के झूठ बोला कि हमारा 370 को. छेड़ने का बिल्कुल कोई इरादा नहीं है और. आप मत घबराइए। 36 घंटे बाद हम अंदर थे।. आपने मोदी जी से बाद में कहा नहीं कि साहब. बाकी सब ठीक था। यह महबूब मुफ्ती के साथ. एक ही घर में क्यों बंद करना था? हिदायत दी गई थी के आप एक दूसरे से. मिलेंगे नहीं। वैसे भी मुझे मिलने का कोई. खास शौक था नहीं।. लेकिन हमने सुना कि उन्होंने आपको नमक. वाली चाय भेजी थी।. वो ऑफर किया था। लेकिन मेरा पीने का कोई. खास मूड था नहीं। उसमें. क्यों डाउट था कुछ उसमें मिला?
[हंसी]. इल्तजा कहती है कि आपसे डरपोक और कायर. सीएम कोई नहीं है। जम्मू कश्मीर की. इतना डरपोक और नहीं देखा है।. क्योंकि इल्तजा खुद बदतमीज है। तमीज उसमें. है नहीं। मैं उनको कैसे याद दिलाऊं कि. हमारी तबाही के जिम्मेदार उनके मरहूम नाना. और उनकी मां है। अगर उन्होंने सौदा नहीं. किया होता अपनी कुर्सी का हम इन हालात में. बिल्कुल नहीं।. आज कश्मीर में सर अमन है या सन्नाटा है? दोनों चीजें। मेरे घर के बाहर आप प्रदर्शन. कर सकते हो। मेरे पुतले आप जला सकते हो।.
कोई आपको रोकेगा नहीं। लेकिन जो और. हुकुमरान है वहां पे या मरकजी हुकूमत है. उनके खिलाफ यह कोशिश नहीं करना। फिर वहां. अमन नहीं। फिर वहां सन्नाटा है।. पहलगाव के हमलावरों को जिन लोकल लोगों ने. सपोर्ट किया। वो मजबूर थे। उस सोच के थे, साथी थे।. हमले बहुत हुए। लेकिन कभी हमारे मेहमानों. को [नाक से की जाने वाली आवाज़] इस तरह. बेरहमी से मारा नहीं गया जिस तरह उस दिन. किया गया था। पाकिस्तान से बातचीत करनी. चाहिए।. बातचीत करना पड़ेगा।. ऑफ द रिकॉर्ड कैसा रिश्ता आपका? मोदी जी. हमेशा।.
टीवी पर तो कहते हैं कि आपके परिवार ने. जम्मू कश्मीर को डर अंधेरा दिया।. इन लोगों ने युवाओं के हाथ में दाबों की. जगह पत्थर पकड़ाए, मशीन गन पकड़ा।. अब वो क्या इलेक्शन लड़ेंगे मेरे खिलाफ. मेरी तारीफ करके? फिर उनको वोट कहां. मिलेंगे? मैं क्या कम बोलता हूं उनके बारे. में? बीजेपी से गठबंधन कर सकते हो आप? नहीं। अगर वो कहें कि हम स्टेटहुड आपको. वापस दे रहे हैं।. मैं हट जाऊंगा लेकिन उनके साथ हाथ मिलाना. मेरे से नहीं।. गुजरात दंगों के बाद भी सर आप वाजपेयी. सरकार मंत्री थे। उस वक्त आपने इस्तीफा. नहीं दिया।.
दिया कबूल नहीं हुआ।. आपको अफसोस है राहुल गांधी को क्या सरकार. ज्यादा गंभीरता से ले रही? डेफिनेटली। [संगीत] सीनियरिस्टर्स को अब. लाते हैं रिएक्शन देने के लिए। पहले तो. अपने वो [संगीत] जूनियर स्पोक्सपर्सन से. ही वो मजाक उड़ा देते थे।. राहुल गांधी, उमर अब्दुल्ला, सचिन पायलट।. ज्यादा हैंडसम पॉलिटिशियन कौन है? [हंसी]. दिस आई विल टेक ऑन माइसेल्फ। मैं ईजीएस्ट. नंबर दो. वी विल डू इट द राइट वे राहुल सचिन. योगी आदित्यनाथ हेमंत विश्व शर्मा सम्राट. चौधरी शुभेंदु अधिकारी सबसे सेक्युलर. मुख्यमंत्री कौन है? [हंसी]. मुझे लगता है अगर मैं इनमें से किसी को. सेकुलर मुख्यमंत्री कहूं तो कल कहेंगे.
मैंने उनको शायद उल्टा सीधा कहा कश्मीरी. पंडित उनका ये वर्जन था कि हम दुनिया के. पहले ऐसे लोग हैं जो अपने ही मुल्क में. रिफ्यूजी बनके रहे।. कश्मीर घाटी में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई. है। 19 जनवरी की रात को हजारों लोग सड़कों. पर उतर आए। कई कश्मीरी पंडितों के घरों को. आग लगा दी। कश्मीरी पंडितों को छोड़ के. जाना पड़ा। सही बात है। लेकिन सिर्फ वो ही. नहीं थे जो छोड़ के गए। कश्मीरी सरदार, कश्मीरी मुसलमान छोड़ के गए वहां पर।. यह कैसे ठीक हो सकता है सर? बंदूक शांत कर।. ये कैसे होगी? वही तो हमें तो कहा गया था कि 370 हटाने.
से सारी बंदूकें शांत होंगी।. फारुख साहब को कई बार राम भजन गाते हैं जब. सुना।. नहीं मिले मोहे राम।. मेरे राम। [गाना गाने की आवाज़][संगीत]. ये आपके भी पुरखे कहीं बहुत पहले शायद. कश्मीरी ब्राह्मण रहे हैं।. आमतौर पे जो कश्मीरी मुस्लिम है वो. कन्वर्टीज हैं।. आप बिग बॉस देखते हो सर आपके कश्मीर के. काजी इस वक्त छाए हुए हैं।. ओ हां तौकीर. आकिब नबी डार या काजी तौकीर इनका पैन. इंडिया लोगों में फैन बनना क्या ये एक. पॉजिटिव साइन नहीं है कि शायद नजरिया.
इससे शायद बाकी मुल्क में लोगों को पता. चलेगा कि हम भी नॉर्मल हैं। हम सब मतलब. तबाही और बर्बादी के इरादे से नहीं घूमते. हैं।. दिल्ली और कश्मीर यह फासला बरसों पुराना. है। वही कश्मीर जहां पर अक्टूबर में चिनार. के पत्ते लाल हो जाते हैं। डल झील पर सुबह. का हवा की भाप उठती है और सर्दी में चिलई.
कला के 40 दिन सब कुछ बर्फ में ढक जाता. है। इसी कश्मीर में एक घर है जहां की तीन. पीढ़ियों ने कुर्सियां भी देखी, सलाखें भी. देखी। सबसे पहले शेख अब्दुल्ला साहब 1953. में हटाए गए। 11 साल तकरीबन वो हिरासत में. रहे। जिस दिन वो गुजरे उसी दिन 8 सितंबर. 1982 को उनके बेटे फारुख अब्दुल्लाह. मुख्यमंत्री बनते हैं। सिर्फ 2 साल बाद. उनकी सरकार गिरा दी जाती है। और फिर आते. हैं उमर। 28 साल की उम्र में यंगेस्ट. सांसद बनते हैं। 38 में राज्य के सबसे कम.
उम्र के मुख्यमंत्री बनते हैं और फिर वह. भी 232 दिनों तक नजरबंद रहते हैं। अपना. 50वां बर्थडे वहीं पर मनाते हैं। आज 56. साल की उम्र में एक बार फिर से वह चीफ. मिनिस्टर हैं। लेकिन आज की कहानी थोड़ी. अलग है। यह अलग इसलिए है क्योंकि आज की. चर्चा जो है वह कश्मीर में नहीं दिल्ली. में हो रही है। और इसीलिए आज सवाल होगा. क्या दिल्ली से कश्मीर की दूरियां कम हुई. है? वो आदमी कैसा है जिसने नाम भी ढोया. है, बोझ भी ढोया है? और अब दो बच्चों का. पता भी है। और आज हमारे साथ हैं जम्मू.
कश्मीर के चीफ मिनिस्टर उमर अब्दुल्ला. साहब। कैसे हैं सर आप? मैं ठीक हूं। आप सुनाएं।. मुझे बहुत खुशी है आपको दिल्ली में देखकर, अपने ऑफिस में देखकर और खुशी है कि आपने. इस बातचीत करने के लिए हमें चुना।. आप. इतने जाने-माने हस्ती हैं कि अगर मुझे. किसी के साथ इस तरह का पॉडकास्ट रिकॉर्ड. करना होता।. तो शायद अगर दो-तीन नामों का लिस्ट बनता. उसमें आपका नाम लाजमी पाया जाता और वैसे.
भी हमारी इससे पहले कभी चर्चा हुई नहीं. है।. जी. मैंने सोचा चल एक एक ट्राई मार ले देखते. हैं क्या हो जाता है।. अक्सर सर शिकायत होती है कि कश्मीर से. दिल्ली की दूरी बहुत ज्यादा है। कश्मीर की. आवाज दिल्ली तक पहुंचती नहीं है। आज के ये. माने थोड़ी दूरियां कम हुई है।. आवाज शायद हम पहुंचा देते हैं।. आवाज पहुंचाने के बाद अह उस पे अमल करवाना. हमारे लिए अह थोड़ा सा मुश्किल हो जाता. है। क्योंकि आखिरकार अह मुल्क भर का.
दुनिया भर की सियासत में और हमारे मुल्क. में आंकड़े जो हैं वो बात करती हैं। नंबर. स्टॉक और हमारे नंबर कभी बढ़ेंगे नहीं।. उल्टा घट गए। जहां हम छह पार्लियामेंट. मेंबर भेजा करते थे। अब हम सिर्फ पांच. भेजते हैं। एक लगा को चला गया। तो ऐसे. हालात में यहां अपनी आवाज बुलंद करना. थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है।. हिंदुस्तान में बहुत सारे स्टेट्स हैं सर. लेकिन कश्मीर.
जाने पर भी एक अजीब सा फील होता है और. कश्मीर वालों को लेकर भी एक अलग सा माहौल. आता है। दिल्ली में सबसे अजीब सवाल कोई. आपसे पूछा गया कश्मीर को लेकर अब तक किसी. ने. ना मतलब मुझसे तो सिर्फ एक ही सवाल आमतौर. पर पूछा जाता है कि क्या हम जा सकते हैं. और क्या वहां पर ठीक रहेगा? हम्म।. अ उसके अलावा कोई खास सवाल नहीं पूछे. जाते।. आप जिस परिवार से आते हैं सर जैसा मैंने. ओपनिंग में भी कहा कि शेख अब्दुल्ला साहब. हो, फारुख़ अब्दुल्ला साहब हो ये सब चीफ.
मिनिस्टर्स रहे। बहुत अच्छा दौर देखा। फिर. सब बाहर भी गए। सलाखों में भी रहे। आप भी. 232 दिनों तक नजरबंद रहे। अपना बर्थडे जो. था वो आपने अंदर मनाया। ये अब्दुल्ला. सरनेम जो सर ये है ये प्रेशर लेकर आता है।. ब्लेसिंग लेकर आता है। उमर अब्दुल्ला के. लिए अब्दुल्ला. दोनों चीज़ हैं।. और अ मेरी मां अक्सर कहा करती हैं. अंग्रेजी में इफ यू कांट टेक द हीट स्टे. आउट टू द किचन अगर आपसे गर्मी बर्दाश्त. नहीं होती आप किचन से बाहर रहिए क्यों.
खाना पकाने आ रहे हो तो अगर मैं इस नाम से. जुड़े हुए प्रेशर को बर्दाश्त नहीं कर. सकता हूं या उनको लेके ज्यादा शिकायत करूं. तो नाम के साथ जो मुझे फायदे आए उनका मैं. कैसे जिक्र करूं या उनको मैं कैसे तस्लीम. करूं आपने खुद अपने ओपनिंग में कहा कि. 28 साल की उम्र में मैं पार्लियामेंट आया।. अब कितने लोगों को ऐसा मौका मिलता है? 28. साल की उम्र में तो कुछ लोग मुश्किल से.
मुनिसिपालिटी तक पहुंचते हैं।. उसके बाद एमएलए और अगर किस्मत बनी तो शायद. कभी पार्लियामेंट। मैं 28 साल की उम्र में. पार्लियामेंट पहुंचा। 13 महीने. पार्लियामेंट. का अरसा रहा। उसके बाद डिसॉल्व हुआ।. वाजपेई साहब की पहली हुकूमत। दूसरी हुकूमत. में वापस आया तो मिनिस्टर बना। और. पोर्टफोलियोज़ भी देख लीजिए। पहले मिनिस्टर. ऑफ़ स्टेट कॉमर्स। उसके बाद मिनिस्टर ऑफ़. स्टेट एक्सटर्नल अफेयर्स। ये मौके मतलब. इसमें कुछ तो सरनेम का फर्क पड़ता है। तो.
अब मैं ये कहूं कि नहीं जी इसमें बस सिर्फ. परेशानियां ही परेशानियां हैं। शायद मेरी. तरफ से ज्यादती होगी।. आपने हमेशा सोच रखा था आप पॉलिटिशियन. बनेंगे? ना। मैं तो जहाज उड़ाना चाहता था। मैंने. स्कूल में मैंने जब हमें करियर काउंसलिंग. की जाती थी। काश मैंने उन सवालों का सही. जवाब दिया होता। [हंसी] मेरा करियर का रुख. कहीं अलग होता। लेकिन क्योंकि मैंने तय. किया था कि मुझे बस जहाज चलाना है। तो.
मैंने सवाल के जवाब भी उसी तरह दिए ताकि. करियर काउंसलिंग जब उसकी एनालिसिस करे तो. यह कहे कि हां जी आप पायलट बनने के लिए. सेट हो। अह नहीं बना। अह शायद वकील बनना. चाहिए था मुझे। बट जो बड़े सियासतदान होते. हैं जिनके पिता ने या दादा जी ने बहुत नाम. कमाया होता है। क्या उनके बच्चों को. फोर्सफुली भी तय करा दिया जाता है? जैसे. मैं अखिलेश यादव जी को देखता हूं। वो अलग. फील्ड में जा रहे थे। चिराग पासवान को. देखता हूं। उन्हें एक्टर बनने की तमन्ना. थी। राजीव गांधी साहब का मैं जिक्र सुनता. हूं। वो अलग फील्ड में जा रहे थे। बहुत.
सारे ऐसे पॉलिटिशियन आज के दौर में है. जिनके फादर पॉलिटिशियन थे। वो कुछ अलग. करना चाह रहे थे। बट अल्टीमेटली. अब उनपे दबाव आया या नहीं आया मैं कह नहीं. सकता हूं।. हम्म मेरे ऊपर दबाव नहीं था।. और वैसे भी शुरू शुरू में जम्मू कश्मीर. में सियासत करना उस वक्त नामुमकिन था जो. हालात बने हुए थे 1990 के बाद. 96 में फिर मेरे वालिद साहब चीफ मिनिस्टर. बने एक पॉलिटिकल प्रोसेस दोबारा शुरू हुआ.
और मैं फिर सोचने लगा के मैं प्राइवेट. सेक्टर में गया था काम कर रहा था पहले ओबर. होटल्स के साथ उसके बाद आईटीसी लेकिन मुझे. वो तसल्ली नहीं मिल रही थी जिस तसल्ली की. मुझे तलाश थी जो मैं चाहता था। मुझे लग. रहा था अगर इतना ही काम मैं. सियासत में करूं, लोगों की खिदमत में करूं. तो शायद उससे मुझे तसल्ली ज्यादा मिलेगी. और अच्छी बात यह है कि जो मैंने उस वक्त. सोचा था सही सोचा था।. उम्र के इस पड़ाव में अगर आपके दिमाग में.
बैकअप करियर ऑप्शन होता। अब पीछे देखते. हुए. वकालत वकालत. सियासत और वकालत का इतना करीबी रिश्ता है. और सबसे बड़ी बात यह आप देखिए ना हमारे. सबसे काबिल जो वकील हैं वो सियासतदान भी. हैं. और आप मतलब किसी भी पार्टी को देख लीजिए अ. जब उनके पार्टी की हुकूमत होती है तो. मिनिस्टर बनते हैं। जैसे ही हुकूमत चली. जाती है दोबारा वकालत पकड़ लेते हैं और. कमाते इतना है कि उनको मतलब किसी चीज की. कमी रहती नहीं है। अह.
नेता ज्यादा अमीर होते हैं सर या वकील? नेता ज्यादा अमीर होते हैं या वकील? [हंसी]. अब कुछ लोग तो यह कहेंगे कि नेता ज्यादा. अमीर होते हैं। लेकिन. कागजी तो वकील ही अमीर हैं। अब कुछ नेता. अमीर होंगे। कुछ पार्टियां अमीर हैं।. आप मूवीस देखते हैं? जब मौका मिलता है लेकिन बहुत अरसे से नहीं. देखा। लॉन्ग बैक आई सॉ अ मूवी नेम धड़कन।.
उसमें सुनील शेट्टी साहब बहुत जल्दी अमीर. हो जाते हैं। कईयों ने कहा कि सुनील. शेट्टी और नेताओं शायद यही दो किस्मत वाले. लोग होते हैं जिनकी आमदनी जो है बड़ी तेजी. से बढ़ जाती है।. ये अपनी जगह सही नहीं है। मैंने वो लोग भी. देखे हैं जिन्होंने सिर्फ मतलब लोगों की. खिदमत में अपनी पूरी जान दी। और आज अगर. उनको अह पार्लियामेंट का या असेंबली का. पेंशन नहीं आ रहा होता। शायद उनके घर में. मतलब उनका उनका चूल्हा नहीं जलता। तो यह.
कहना कि सारे सियासतदान जो हैं वो रिश्वत. खाते हैं। अमीर हैं। उन्होंने मुल्क को. लूट के जो है बेचा हुआ है। ये भी अपनी जगह. सही नहीं है। हां हमारे फील्ड में कुछ ऐसे. लोग हैं जिन्होंने अपने मौकों का गलत. इस्तेमाल किया। लेकिन ये आपको हर फील्ड. में मिलेगा। आपको पॉलिटिक्स, स्पोर्ट्स, बिजनेस, जर्नलिज्म, मेडिकल प्रोफेशन. आप मतलब आप फील्ड की तरफ इशारा करिए। मैं. आपको नाम दे सकता हूं जिन्होंने ऐश किए.
हैं। तो चलिए अब छोड़ दीजिए।. ठीक है। आज क्योंकि सर अब्दुल्ला मैं पूरी. अब्दुल्ला फैमिली को एक्सप्लोर कर रहा. हूं। इसलिए शुरुआत मैं दादा जी से करता. हूं। शेख अब्दुल्ला साहब आपके दादा जी. नेहरू जी के बहुत करीबी थे और क्योंकि समय. कम है इसलिए मैं कोशिश करूंगा स्पेसिफिक. क्वेश्चंस में आता हूं।. 1953 में दिल्ली ने उन्हें हटाया, गिरफ्तार कर लिया। आपको क्या लगता है? उनके साथ गलत किया गया, धोखा किया गया? नहीं, गलत तो किया गया। अब. क्या सोच के ये हुआ? ये शायद अगर कभी मेरे.
वालिद साहब यहां बैठे हैं तो आप उनसे पूछ. लें। अह. नहीं मैंने मैं तो इतना ही जानता हूं कि. जो हुआ गलत हुआ। वह उस वक्त वह. मुख्यमंत्री नहीं थे। प्रधानमंत्री थे।. जम्मू कश्मीर का उस वक्त का जो निजाम था. वो अलग था।. तो बाजाप्ता वो वजीर आजम थे जम्मू कश्मीर. के उन्हें. गैर कानानूनी तौर हटा के गिरफ्तार करके.
फिर बाहर रखा गया। और क्या इल्जाम थे वो. अभी तक भी नहीं पता। सिर्फ शक कि शायद शेख. अब्दुल्ला साहब जम्मू कश्मीर को. हिंदुस्तान का हिस्सा देखते हुए खुश नहीं. है और इस शक के बुनियाद पे ही उनको हटा. दिया गया। अह कुछ अभी तक अभी तक भी इस शक. के अलावा कुछ नहीं है। अह लेकिन मेरे अह. दादा जहां तक मुझे मालूम है, अह उन्होंने. कभी इस चीज को मतलब व्यक्तिगत रूप से या.
जाती तौर इसके लिए नेहरू साहब को कसूरवार. नहीं ठहराया। मेरे वालिद अक्सर कहते हैं. कि जब. शेख साहब को नेहरू साहब के इंतकाल का पता. चला जब खबर आई तो वो बच्चे की तरह रोए।. इतना मतलब उनको दुख हुआ अह नेहरू साहब के. गुजरने की खबर जब उन तक पहुंची तो कहीं ना. कहीं उन्होंने मतलब समझा के नेहरू साहब को. शायद गलत खबर दी गई या गलत इंप्रेशन.
11 साल तक. हां. 11 साल तक. हो जाता है हो जाता है. ये शक आज भी लगता है आपको कि दिल्ली के. ज़हन में रहता है. वो तो हम मतलब जो भी चीफ मिनिस्टर हमारे. खानदान पे नहीं पूरे जम्मू कश्मीर पे ही. शक है चलिए पूरे जम्मू कश्मीर पे ना सही. जम्मू कश्मीर के जम्मू कश्मीर के नहीं मैं. कहूंगा जम्मू कश्मीर के मुसलमानों पे शक. रहता है। इसलिए हमारे साथ बर्ताव. दूसरों के मुकाबले अलग होता है। लद्दाख के.
साथ आप 371 पे बात कर सकते हो। लद्दाख के. साथ आप कॉन्स्टिट्यूशनल गारंटीज पे बात कर. सकते हो। क्योंकि कहीं ना कहीं आपको लगता. है कि वहां बोध ज्यादा है। हालांकि आबादी. में आज भी लद्दाख में मुसलमानों की. अक्सरियत ज्यादा है बौद्धों के मुकाबले।. लेकिन चलिए क्योंकि 19-20 का फर्क है तो. हम इस चीज को एक तरफ रखें। अह. जम्मू-कश्मीर के साथ जो रियासत वापस करने. का वादा किया गया है, उस पे भी आज तक आप. बातचीत करने के लिए तैयार नहीं हैं। तो, कहीं ना कहीं तो हम इस चीज़ को मानके चलें.
ना कि क्योंकि अ बाक़ी मुल्कों के मुकाबले. बाक़ी रियासतों के मुकाबले हमारी आईडेंटिटी. अलग है। शायद इस चीज का हमें सजा दी जा. रही है।. 1975 में इंदिरा गांधी जी के साथ एक. समझौता होता है और जनमत संग्रह की मांग. छोड़ दी जाती है। अभी भी कुछ लोग हैं जो. उसे हार कहते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि एक. अच्छा सौदा था। आप कैसे देखते हैं उसे? एक. पोते की नजर से, एक सियासतदान की नजर से. और मौजूदा सीएम की नजर से।. जो भी फैसले लिए जाते हैं, वो उस वक्त के.
हालात को मदेनजर रखते हुए लिए जाते हैं।. शेर कश्मीर ने भी वो फैसला लिया बनुल. अकवामी सतह के हालात को देखते हुए और. मुल्क के अंदरूनी हालात को देखते हुए और. ऐसा नहीं है कि वह फैसला लेने के बाद. उन्होंने लोगों की राय हासिल नहीं की।. बेशक इंदिरा गांधी के साथ इंदिरा शेख का. अकॉर्ड हुआ लेकिन उसके बाद इलेक्शन हुए और. इलेक्शन में जो कामयाबी शेर कश्मीर ने. हासिल की वो आज तक किसी ने हासिल नहीं की।.
तो कहीं ना कहीं जम्मू कश्मीर के लोगों ने. अपना एक थप्पा उस फैसले पे लगाया।. शेख साहब के वफात होने के बाद उनके जनाजे. में जितने लोगों ने हिस्सा लिया। आज तक. किसी ने उतना उतनी पार्टिसिपेशन किसी के. जनाजे में नहीं रही है जम्मू कश्मीर में. जितना उनके तो ये फैसला अकेला उनका नहीं. था उन्होंने लोगों को अपने साथ चलाया हां. कुछ लोग उस फैसले से खुश नहीं थे.
लेकिन उस खुशी उस उस नाराजगी का मुझे लगता. है मिलिटेंसी में उसको ज्यादा बढ़ा चढ़ा. के पेश किया गया जब तक शेर कश्मीर जिंदा. थे मैं कहता हूं 87 88 तक उस फैसले को. लोगों ने चैलेंज नहीं किया बल्कि एंडोर्स. किया।. आप शेर कश्मीर कह रहे हैं अपने दादा जी को. शेख अब्दुल्ला साहब को आपने क्या सीखा. उनसे? काश मेरी उतनी उम्र रही होती तब जब वो. जिंदा थे। लेकिन मैं मुश्किल से 11 12 साल.
का था। अब कहानियां. मैं जानता हूं 12 साल की उम्र में आज शायद. बच्चे हमसे कहीं आगे निकल गए हैं।. 15 साल में वैभव इंडिया खेल रहे हैं।. लेकिन हां वो. मैंने कभी सियासी बात उनसे नहीं की।. जिंदगी में क्या सीखा? जैसे होता है इंसान. के तौर पर भी हम लेते हैं शुरुआती चीजें।. कुछ आदतें होती हैं। कुछ आप में है? क्या? उन कुछ आदतें हैं आप में उनकी जो. टोकी गई हो पिताजी की तरफ से मम्मी की तरफ. से कि ये दादाजी में भी था तुम में भी ऐसा. कुछ है. मैं इन चीजों पे ज्यादा यकीन करता नहीं.
हूं मतलब इसलिए कि कभी कबभार लोग ये कहते. हैं लेकिन मुझे मुझे शक होता है कि कहीं. ये मुझे खुश करने के लिए तो नहीं कहा जा. रहा है।. शेख साहब मेरे दादा मैं उनके फिजिकल हाइट. कद की बात नहीं उनकी जो सियासी कद है उसका. कोई मुकाबला ही नहीं है। तो कोई मुझे ये. कहे कि आपका उनके साथ मिलता-जुलता है। मैं. तो फोरी तौर उसको शक के नजरिए से देखता. हूं।. शेख अब्दुल्ला साहब, फारुख़ अब्दुल्ला.
साहब, उमर अब्दुल्ला साहब किस दौर में चीफ. मिनिस्टर रहते हुए कश्मीर ने सबसे अच्छा. दौर देखा? शेख अब्दुल्ला साहब का जो पूरा दौर था, उसमें हालात अच्छे ही रहे।. मेरे वालिद साहब का पहला दौर बड़ा अच्छा. था।. जिस लिहाज से मतलब जम्मू कश्मीर तरक्की कर. रही थी और घटती आई। दूसरे दौर में. परेशानियां हुई।. पहले तो इलेक्शन को लेके सवाल उठे। लेकिन.
फिर मिलिटेंसी का दौर शुरू हुआ और काफी. तबाही और बर्बादी देखी जम्मू कश्मीर में।. लेकिन जो उनका पहला दौर था 82 टू 84 उसका. तो कोई मुकाबला नहीं। और फिर 96 के बाद. मुश्किल हालात में अह उन्होंने अह जम. जम्हूरियत की और अह जम्मू कश्मीर के अह. डेवलपमेंट की जो गाड़ी पटरी से हट गई थी।. उसको दोबारा पटरी पर लाना आसान नहीं था।. ये मतलब कहने की बात है कि मुफ़्ती मोहम्मद.
सैयद साहब आए उन्होंने ये किया वो किया।. लेकिन 96 में तो वो मैदान में ही नहीं थे।. हालात इतने खराब थे कि वो इलेक्शन लड़ने. के लिए भी तैयार नहीं थे। तो. दौर मुश्किल था लेकिन उस मुश्किल दौर में. बहुत कुछ किया गया।. आज कश्मीर को सर क्या चाहिए? आर्टिकल 370. या फिर स्टेटहुड? हमें अपनी पहचान चाहिए। हमें भी अपनी. इज्जत चाहिए। हमें वो चाहिए जो हमें दिया. गया था जो हमसे लिया गया। आप उसको किसी भी. अंदाज में पेश करो। किसी भी नंबर दो कुछ. भी कहो। जम्मू कश्मीर के साथ मरकजी हुकूमत.
ने वादा किया था के आपकी आइडेंटिटी, आपकी. शनाख्त, आपकी पहचान को बचाने के लिए आपको. एक खुसूसी दर्जा दिया जाएगा। उस पे वक्त. की सीमा नहीं थी। उस पे वक्त की सीमा नहीं. थी। अगर वक्त की सीमा होती जिस तरह हमारे. रिजर्वेशन में है कि 10 साल फिर 10 साल के. बाद हम एक्सटेंड करते हैं। फिर 10 साल के. बाद हम एक्सटेंड करते हैं। जम्मू कश्मीर. के साथ यह नहीं था। जम्मू कश्मीर को यह. कहा गया था कि आपको एक खुसूसी दर्जा. मिलेगा और यह खुसूसी दर्जा रहेगा। उसको.
हटा दिया गया। जम्मू कश्मीर के लोग चाहते. हैं कि उनकी इज्जत जो है वो दोबारा बहाल. हो।. इसके फायदे नहीं हुए कुछ भी क्योंकि. दिल्ली में अक्सर कहा जाता है कि बहुत. सारी चीजें बेहतर हो गई।. मुझे कुछ मुझे कुछ मिसाल दे दें तो मैं भी. मैं भी सुनू। मैं क्योंकि सुना मैंने भी. ये है। लेकिन जमीनी सतह पे दिखता नहीं।. अगर आप मुझे कहोगे कि इंडस्ट्री. इतनी कौन सी ख़ास इंडस्ट्री आई है जो इससे. पहले नहीं थी? क्या इंडस्ट्री अह 2019 से.
पहले नहीं लगी? क्या इंडस्ट्री की शुरुआत. सिर्फ़ 5 अगस्त 2019 से हमें देखने को मिल. रही है। इससे पहले जो बड़ी-बड़ी कंपनियां. आई, जो आज भी काम कर रहे हैं, जिनका काम. मेरे दादा के वक़्त में शुरू हुआ।. बिरला साहब की फैक्ट्री है कठुआ में। वो 5. अगस्त के बाद नहीं बनी। वो मेरे दादा साहब. के वक्त से बनी हुई है। जो होटल क्या 5. अगस्त से पहले. जम्मू-कश्मीर में बाहर की कंपनियां चाहे. वो ओबरॉए हो ताज हो ये हैं। क्या इन्होंने.
होटल नहीं चलाए वहां पर? बिल्कुल चलाए। तो. मुझे बताइए ना इतना खास क्या बदला? क्या. सड़कें नहीं बन रही थीं इससे पहले? सड़कें. इससे पहले भी बनी? क्या रेल पर काम नहीं. हुआ 5 अगस्त 2019 से पहले? रेल का काम. मरहूम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने. शुरू किया। नेशनल हाईवे फोर लेनिंग का काम. डॉ. मनमोहन सिंह साहब ने शुरू किया। दोनों. के दौर में 370 बाजाप्ता वहां मौजूद था।. तो मुझे कोई यह बताएं ना कि इसके हटने से.
आपको ये पूरे जम्मू कश्मीर को चलिए एक आध. तबके को फायदा हुआ होगा। लेकिन पूरे जम्मू. कश्मीर का फायदा मुझे दिख नहीं रहा। एक. जैसे सर दिल्ली से कॉमन परसेप्शन आता है. कि जब कोई दिल्ली से या देश के कहीं. हिस्से से कश्मीर जाया करता था तो एक सवाल. उठता था कि आप इंडिया से आए हैं। वह कह. रहे हैं कि अब शायद ये दूरियां कम हो गई. है। अब शायद हम एक जैसे एक दूसरे को मानने. लगे हैं कि आप इंडिया से आए हैं या आप. कश्मीर से हैं। ये लाइन हट गई है।. अगर आपको लगता है तो मैं मैं क्या कह सकता. हूं? आप कैसे देखते हैं इसे? मतलब ये एक.
परसेप्शन ये है कि. आज आज भी अगर आप कश्मीर जाएं और आपके पास. प्रीपेड मोबाइल फोन हो यहां का आपका फोन. वहां चलेगा नहीं। मुझे बताइए ना कौन सी. दूरी हट गई? आज भी उस पूरे जम्मू कश्मीर. को एक सिक्योरिटी प्रिज्म से देखा जाता. है। हम जब इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस करते. हैं। हमारे इन्वेस्टर्स वहां एक दिन से. ज्यादा बैठने के लिए तैयार नहीं होते।. शिकायत करते हैं। कहते हैं ना हमें ओटीपी. नहीं आ रहे हैं। हम अपने ट्रांजैक्शंस. बैंक के ट्रांजैक्शंस नहीं कर सकते।.
क्यों? क्योंकि हमारे पास प्रीपेड मोबाइल. फोन है। हमारा जैसे ही श्रीनगर में हम. मोबाइल ऑन करते हैं हमें कनेक्शन नहीं. मिलता। कितनी बार आप कभी श्रीनगर आइए, श्रीनगर से हाईवे पे चलिए। कितनी बार आपकी. गाड़ी को साइड किया जाएगा? एक फौज की. गाड़ी को छोड़ने के लिए वहां पे।. अगर इतना कुछ बदला यह क्यों नहीं बदला? आज पहली लड़ाई बढ़ी क्या सर जो सवाल था. मेरा स्टेटहुड की या फिर 370 की.
स्टेटहुड तो हर सब चीज का बुनियाद यह है. आखिरकार 370 है क्या मरकज और रियासत के. रिश्तों का और मरकज और रियासत के जो वजूद. है जो ताकत हैं उनका बंटवारा. आज अगर आप देखें कॉन्स्टिट्यूशनली. सेंटर स्टेट रिलेशंस बेस्ड ऑन पावर. शेयरिंग. स्टेट लिस्ट, सेंट्रल लिस्ट, ककरेंट. लिस्ट। कौन से पावर्स वर्कर्स के पास,
सेंट्रल गवर्नमेंट के पास होंगे, कौन सी. पावर्स स्टेट के पास होंगे और कौन से शेयर. किए जाएंगे। यूटी में ऐसा कोई लिस्ट होता. नहीं है। तो स्टेटहुड ही वो बुनियाद है. जिसके बेसिस पे तय किया जाएगा कि कौन से. पावर्स जम्मू कश्मीर के पास होंगे, कौन से. पावर्स स्टेट सेंट्रल गवर्नमेंट के पास. होंगे। फरवरी 204 में गुलाम नबी आजाद साहब. ने कहा कि 370 हटाने से पहले आपसे और आपके. फादर से सलाह ली गई थी। ऐसा कुछ हुआ था? बिल्कुल नहीं।.
ये इतने बड़े नेता फिर क्यों कह रहे थे. ये? उस वक्त वो हमारे खिलाफ इलेक्शन लड़ने की. तैयारी कर रहे थे।. ऐसा झूठ बोला जाता है पॉलिटिक्स में।. हम. ऐसे झूठ बोले जाते हैं खुलकर।. क्योंकि ये बहुत बड़ा क्लेम था कश्मीर. का्ट में।. गलतफहमी अब इतने बड़े लीडर को मैं. झूठा कह रहा हूं। छोड़ दीजिए उनकी. सीनियोरिटी. मेरे वालिद से थोड़े ही कम शायद उनकी उम्र. होगी। उनको झूठा कहलाना अच्छा नहीं है।. मैं इतना कहूंगा शायद उनको कहीं ना कहीं.
धोखा पड़ा। उस वक्त बीजेपी के काफी करीब. थे। शायद एक गलत खबर उनके कान में डाली. गई।. फरवरी 2025 में रॉ के भी एक्स चीफ थे दुलत. साहब। उन्होंने लिखा कि फारुख साहब ने कहा. था कि अगर आप हमें भरोसे में लेते तो शायद. हम आपकी बेहतर हेल्प कर सकते। अब दूल्हा. साहब पे मैं टिप्पणी कम ही करता हूं. क्योंकि. दुल्हनत साहब को किताब बेचने के लिए अ. एक मतलब अह.
वो तोड़ मरोड़ की चीजें पेश करते हैं। और. जब दूल्हा साहब किताब लिखते हैं वो मतलब. पर्सनल रिलेशंस को जो है वो भुला देते. हैं।. साहब ने ये सेंटेंस कहां से खींच के किताब. में डाला मैं कह नहीं सकता हूं।. बट ये अब्दुल्ला परिवार को लेकर ही लोगों. ने क्यों कहा? मुफ्ती परिवार भी है। उनको. लेकर इस तरह की बातें नहीं आई। आपको लेकर. आई। मुझे लगता है इसलिए शायद ये सवाल आपसे. पूछना पड़ रहा है मुझे।. ये तो अब्दुलक साहब को ही इसका जवाब देना.
पड़ेगा क्योंकि अब उनके किताब में अह हर. एक अह गलत चीज का मैं यहां त्सरा करूं तो. आपके इंटरव्यू में और किसी चीज पे बात. करने के लिए रहेगा नहीं। आपने सर एक. स्टेटमेंट दिया था कि जम्मू कश्मीर को. केंद्र शासित प्रदेश इसलिए बनाया गया. क्योंकि वह मुस्लिम बहुल राज्य था। थोड़ी. देर पहले भी आपने मुस्लिम शब्द का जिक्र. किया था। आप क्यों ये बात करते हो? क्या. पेन इसकी? मुझे मुझे बताइए ना और कौन सी रियासत है. जिसको यूटी बनाया गया? क्या हम एक ही एक. एक इकलौता रियासत है जहां आपको आतंकवाद.
देखने को मिला? हम. क्या पंजाब में आतंकवाद नहीं था? था। क्या. यूटी बना? नहीं।. क्या नक्सलवादी हमले नहीं हुए छत्तीसगढ़. में, आंध्र प्रदेश में, मध्य प्रदेश में, बाकी जगहों में? क्या कभी उनको. स्टेट से यूटी बनाया गया? नॉर्थ ईस्ट में. आसाम उल्फा कभी आसाम को यूटी बनाया। आज तो. देखिए माफिया वालों का कितना हमला चलता है.
बंबई में। एक फिल्म स्टार भी आज सुरक्षित. नहीं है। क्या क्या आप क्या आप बंबई को. यूटी बनाओगे? हमें बनाया। आज तक हमें यह नहीं समझाया. गया कि क्यों।. मैं मानता हूं। चलिए 370 बीजेपी के. मेनिफेस्टो में था। 370 को लेके इलेक्शन. लड़े गए। मुझे 370 पे मुझे गिला है। लेकिन. मुझे मैं कम से कम समझ सकता हूं कि क्यों. किया। क्योंकि उनके मंशूर में था। उनके. मैनिफेस्टो में था। उनको मौका मिला।.
उन्होंने किया।. यूटी बनाना कहीं पे भी उनके मैनिफेस्टो. में नहीं था। कहीं उसका जिक्र नहीं हुआ. था। उसकी मांग नहीं थी। मुझे बताइए जम्मू. कश्मीर में किसने कहा कि हमें यूटी बना के. दे दीजिए।. अरे जिन लोगों ने यूटी के नाम पर जश्न. मनाया लद्दाख में आज वो अपना सिर फोड़ रहे. हैं। जिन लोगों ने मिठाइयां बांटी, पटाखे. जलाए। आज वह कहते हैं हमने क्या गलती की? यह उनका हाल है। हमने तो यूटी मांगा भी.
नहीं था। अच्छा चलिए यूटी बनाया आपने. हमें। जैसे भी वैसे भी यूटी बनाते वक्त. आपने कहा कि यह टेंपरेरी है। आपने सुप्रीम. कोर्ट में जाकर कहा कि हम तीन फेजेस में. इसको दुरुस्त करेंगे। डीलिमिटेशन इलेक्शन. स्टेटहुड डीलिमिटेशन भी आपने करा दिया।. इलेक्शन भी आपने करा है। स्टेटहुड कहां? सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि एज सून एस. पॉसिबल एट द अर्लियस्ट। अब इतनी अंग्रेजी.
तो मैं भी समझ सकता हूं। हूं एज सून एस. पॉसिबल 2 साल एस सून एस पॉसिबल है।. मुझे मुझे अंग्रेजी के किसी भी. एक्सप्लेनेशन में बताइए ना एज सून एस. पॉसिबल का मतलब 2 साल कैसे हो सकता है? तो कहीं ना कहीं फिर वजह वजह कुछ और है. ना? तब जाके मैं कहता हूं कि ना यह हमें. खुसूसी तौर जम्मू कश्मीर को यह सजा दी गई।. और वह क्या चीज है जो हमें बाकी मुल्क से.
जिस जिस चीज में हम बाकी मुल्क से अलग हैं. यही एक है. क्योंकि आतंकवाद हो नहीं सकता। मैं मैंने. आपको अभी इतने रियासतों के नाम गिनवाए. जहां आतंकवाद देखने को मिला। तो आतंकवाद. वजह नहीं है। या फिर आप हमें सजा दे रहे. हो पाकिस्तान के करतूतों की वजह से। वो भी. गलत है।. हो सकता है शायद उन्हें आप लोगों पर भरोसा. ना हो। एक पॉइंट ये हो सकता है।. और क्यों नहीं भरोसा? जैसे आपने कहा कि शेख अब शेख साहब पर.
भरोसा उस टाइम की सरकार ने नहीं किया तो. अगर आप पर ना किया तो फिर आप मतलब आपने. मतलब मरकजी हुकूमत ये कहती क्यों नहीं है. आपने कोशिश किया. अगर हर बार. सुप्रीम कोर्ट में यह कहा क्यों नहीं गया. जब तक बीजेपी का चीफ मिनिस्टर नहीं बनता. हम रियासत वापस नहीं देंगे. या जब तक नॉन मुस्लिम चीफ मिनिस्टर नहीं. बनता हम रियासत वापस नहीं देंगे। जम्मू.
कश्मीर के लोग फिर अपना फैसला इलेक्शन में. खुद करते ना. अगर उनको ये. जहर का घूंट पीना पड़ता रियासत का दर्जा. वापस लाने के लिए। शायद वो बीजेपी के चीफ. मिनिस्टर को एक एक मौका दे देते रियासत. वापस लाने के लिए। लेकिन ये कभी कहा ही. नहीं गया। एक थ्योरी सर थी कि शायद जम्मू. को वो अलग करना चाह रहे थे ताकि. फिर लदा फिर क्या. फिर लद्दाख फिर इनको नक्शा. आपको क्या लगता है लद्दाख लद्दाख क्यों.
अलग किया गया मतलब जम्मू अगर बनता तो शायद. चीफ मिनिस्टर बीजेपी का बन जाता क्योंकि. कश्मीर आप लोग जीतते हैं जम्मू वो जीतते. हैं आमतौर पर आपको क्या लगता है लद्दाख. क्यों अलग किया गया और जम्मू कश्मीर साथ. रहे. अब ये जिन लोगों ने किया उनसे पूछना होगा. लेकिन जहां तक मैं इस चीज को समझ सकता हूं. वो सिर्फ यह था कि अगर जम्मू को इन्होंने. कश्मीर से अलग किया होता तो फिर आप टू. नेशन थ्योरी को कैसे ठुकराओगे? क्योंकि ये ये लकीर आपको मजहब के बुनियाद.
पर खींचनी होती। जम्मू कश्मीर के जो. मुसलमान अक्सरियत इलाके हैं उनको एक तरफ. रखना होता। जो हिंदू अलग। फिर सीधा-सीधा. आप कहते हैं ना कि पाकिस्तान बनने का. फैसला सही था।. 5 अगस्त 2019 को सर जब आपको नजरबंद किया. गया। आपको लगा था 232 दिन चलेगा। उस वक्त. क्या कर रहे थे आप? मुझे तो लग रहा था कि 15 अगस्त के बाद. छोड़ देंगे। [हंसी]. मैं मैंने कपड़े भी उसी हिसाब से लिए थे।. क्या कर रहे थे जब यह न्यूज़ आपके पास आई. क्या कि ले जाएंगे?
नजर बंद कर रहे थे और बाकी सब आपको पता था. कुछ ऐसा होने वाला है। क्योंकि कुछ-कुछ. सुगबुगाहट तो थी मार्केट में।. अब यही तो मुसीबत है ना हम सुन रहे बहुत. कुछ थे। लेकिन हमें कहा मतलब बिल्कुल अलग. चीजें कही जा रही थी। अब वह इस दुनिया में. रहे नहीं। सत्यपाल मलिक गवर्नर लेकिन जब. हम उनसे मिले और कहा कि आपका कुछ करने का. इरादा है। कहा बिल्कुल नहीं बिल्कुल कुछ. नहीं होगा। हमने कहा आपका 370 आप 370 को. कुछ करोगे। कहा मेरा बिल्कुल हमने कुछ.
नहीं करना है। 370 को अब मतलब जो. कॉन्स्टिट्यूशनल पोजीशन पे बैठ के आंख से. आंख मिला के आपको झूठ कहे।. उसके बाद फिर बहुत मुश्किल होता है यकीन. करना।. सीधा सीधा मतलब मतलब हमसे आमने जिस तरह आप. और मैं ऐसे आमने सामने बैठे हैं। आमने. सामने बैठकर उसने मुझे आंख से आंख मिलाकर. झूठ बोला कि हमारा 370 को छेड़ने का. बिल्कुल कोई इरादा नहीं है। ये हम कुछ और.
कर रहे हैं यहां पे और आप मत घबराइए।. 24 36 घंटे बाद हम अंदर थे।. हालांकि बाद में वह बहुत एंटी मोदी बने थे. वो। उनका हृदय परिवर्तन बहुत तगड़ा हुआ. था।. उनको पहले तो जम्मू कश्मीर से हटाया फिर. गोवा भेजा। फिर गोवा से नॉर्थ ईस्ट हटा. दिया। फिर नॉर्थ ईस्ट के बाद उनको नौकरी. से हटा दिया। तो. तो राजनीति में हृदय परिवर्तन पद देके. बदल।. वो तो वैसे भी मतलब उन्होंने कई पार्टियां.
बदली थी। आपने अखिलेश जी की बात की थी।. अगर मेरी याददाश्त सही है तो एक वक्त पे. वो शायद अखिलेश के वालिद साहब के साथ भी. थे।. वो अब चलिए वो इस दुनिया में रहे नहीं।. बट मैंने सुना सर जब यह हुआ था तो आप और. आपके दोस्त लोग सब लैंडाइन नंबर शेयर करने. लगे थे।. कर रहे थे क्योंकि हमारा जो तजुर्बा रहा. था वो ये था के पहले मोबाइल इंटरनेट बंद. हो जाता है। फिर मोबाइल फोन बंद हो जाते. हैं बट नॉट BSNL।.
BSNL पोस्ट पेड जो है कश्मीर का सबसे. सिक्योर सिस्टम है। क्योंकि हर सरकारी. अफसर के पास वह फोन रहता है तो एंड में वो. बंद करते हैं और लैंडलाइन कभी बंद होता. नहीं। तो हम आपस में एक दूसरे को लैंडलाइन. के नंबर भेज रहे थे कि मोबाइल तो बंद हो. ही जाएंगे। लैंड लाइन पे बात कर लेंगे।. हमें क्या पता था सुबह ना फिक्स लाइन, ना. लैंड लाइन, ना ये लाइन, ना वो लाइन ना हम. घर में होंगे। रातों रात एक-एक को जो है. उठा दिया जा रहा था। मुझे तो चलिए सुबह.
नहीं दोपहर के कोई 4:30 बजे. कहा कि सामान बंद करो। जैसे मैंने कहा. मैंने. 810 दिन के लिए सामान बांधा तब 15 अगस्त. के बाद आ जाएंगे। [हंसी] तो कोविड ज्यादा. टफ था सर या ये वाला फेस? मेरे लिए तो ज्यादा ही मतलब मेरे लिए तो. अजीब ही हाल रहा क्योंकि जिस दिन सुबह. मुझे डिटेंशन से छोड़ा गया और मैं शायद. लंच से पहले घर पहुंचा कोई 11:30 12 बजे. और बैठे रहे। फिर खबर आई के अह पीएम साहब.
जो हैं वह मिल मुल्क को खिताब करेंगे। और. पता नहीं था नोटबंदी तो पहले ही हो गई थी।. तो [हंसी] अब. अच्छा आप लोग आप लोग को भी डर लगता है वो. जो आता है खबर के. जब अब हम मोदी जी को कुछ कहने वाले है. हां तो हमें नोटबंदी तो हो गई अब क्या. होगा. और आए टीवी पे और मुल्क को बंद किया और. कहा कि आप लोग घर से मत निकलिए और मैं. वैसे भी निकला नहीं था मुझे वहां.
सब जेल से निकले हुए तीन-चार घंटे हो गए. थे मैं सोचा कहां जाऊं तो मैं अपनी बहन की. गाड़ी मैं सीट के नीचे छुप के क्योंकि. सिक्योरिटी विकेट को मैं बताना नहीं चाहता. था। हमारा एक ये है सुपर मार्केट टाइप. श्रीनगर में। मैंने कहा चलिए नॉर्मल लाइफ. का अगर कुछ नहीं तो सुपरम मार्केट की हवा. में सूंघ के वापस चला जाऊं। तो वही किया. मैंने।.
आपने मोदी जी से बाद में कहा नहीं कि साहब. बाकी सब ठीक था। ये महबूबा मुफ्ती के साथी. के घर में क्यों बंद करना था? वो तो महबूबा जी दो दिन से ज्यादा रही. नहीं वहां पे। वो तो दूसरी गेस्ट हाउस में. गई।. बट आप लोग को एक एक घर में रखा गया था।. हां लेकिन घर बहुत बड़ा ये आजाद साहब का. ऑफिशियल रेजिडेंस और हमें मतलब हिदायत दी. गई थी कि आप एक दूसरे से मिलेंगे नहीं।. लेकिन हमने सुना. वैसे भी मुझे मिलने का कोई खास शौक था. नहीं। लेकिन हिदायत आई और हमने मिलने की. कोशिश भी नहीं की।. लेकिन हमने सुना कि उन्होंने आपको नमक.
वाली चाय भेजी थी।. ऑफर किया था। लेकिन मेरा पीने का कोई खास. मूड था नहीं उसमें।. क्यों डाउट था कुछ उसमें मिला? [हंसी]. नहीं हम हम सियासतदान टेढ़े लोग हैं लेकिन. इतने टेढ़े नहीं। नहीं मुझे पूरा भरोसा है. कि अगर उन्होंने मैंने चाय ली होती तो. शानदार चाय होती। लेकिन मुझे उस वक्त. बिल्कुल चाय पीने का मूड नहीं था।. मैंने शुरू में कहा था कि आपका और आपके. ग्रैंडफादर के बीच में रिलेशन था। एक. रिश्ता मैंने निकाला। 10 मार्च 2020 को 50. साल के हुए थे। आप अंदर थे। बंद थे.
नजरबंद। हम्म।. 1955 में आपके दादा जी भी जब 50वें. जन्मदिन में थे वो भी नजर बनते।. [हंसी]. अगर ये मुझे पहले पता होता तो मैं 50वें. जन्मदिन के लिए कोई और तैयारी कर लेता।. कैसा बर्थडे था सर वो? क्या? मेरी मां आई मिलने। बहन आई। एक बाद और. रिश्तेदार वगैरह आए थे। बैठे हम मैं मतलब. मजाक के तौर पर तो जब लोग मुझे कहते हैं.
कि व्हाट डिड यू डू ऑन योर 50th बर्थडे? मैं कहता हूं आई वास इन अ पैलेस बाय द लेक. और सही है मैं था पैलेस में बाय द लेक। वो. दूसरी बात है कि मैं अपनी मर्जी से नहीं. था और ये पैलेस उदयपुर या जयपुर या ऐसी. जगह नहीं. बट कुछ तो ब्लेसिंग डिसगाइस होता है। ऐसे. कोविड में भी हमें अपने आप को जानने का. ज्यादा समय मिला। नदियां. मेरे लिए कोई ब्लेसिंग इन डिसगाइस। आठ. महीने इस तरह बंद रहना कोई ब्लेसिंग।. कुछ भी नहीं था। क्या क्या ब्लेसिंग होगा. ना मैं आपको 8 महीने बंद करता हूं मुश्किल.
से आप एक दो रिश्तेदारों से मिलोगे कुछ. खास करने के लिए नहीं. करते क्या थे फिर आप लोग पूरे दिन. कर लेता था मतलब मैं अपने हिसाब से तो. अप्टेबल हूं मैं किसी भी सिचुएशन को जो है. अपने मतलब मैं अप्ट कर लूंगा लेकिन. कोई मुझे ये कहे कि ये आपके लिए ब्लेसिंग. है डिसगाइस नहीं कोई ब्लेसिंग नहीं. आपकी पार्टी के एक सांसद है आगा राहुल्ला. मेहदी वो कहते हैं कि 370 को लेकर एनसी ने. वादा तोड़ दिया। घर से जो ये आवाज आती है.
कैसे? ये उनका स्टेटमेंट है। मतलब आपके घर के. हैं।. बहुत कुछ कहते हैं।. छोड़ने के बाद भी कह रहे हैं। तो ये. पॉलिटिकल स्टेटमेंट है या ये आपके घर पर. सवाल है।. और ये सवाल इकलौता नहीं है। इल्तजा मुफ्ती. ने भी आपके अब देखिए आप यही तो है ना। अब. आपने दोनों को एक ही सेंटेंस में जोड़. दिया। उसी से आपको पता. एक आपके घर का एक आपकी सबसे अपोजिशन. पार्टी. हमारे घर के हमारे घर का कोई नहीं है सर. ये एनसी के नहीं है. नहीं है तो एनसी के लेकिन. मैं तो पार्टी को ही घर मान के चल रहा हूं. सर अभी. अच्छा पार्टी को अच्छा सॉरी शुरू में तो.
आप घर. वो वो परिवार अलग है और पार्टी भी तो घर. ही हो गई आपके घर क्या. चलिए. वो कुछ गलतफहमियों के शिकार. बट इल्तजा कहती है कि आपसे डरपोक और कायार. सीएम कोई नहीं है जम्मू कश्मीर की. हिस्ट्री में. इट्स अ वैरी बोल्ड स्टेटमेंट. नहीं नहीं वो तो इल्तजा है बहुत बोल्ड. बचपना थोड़ा सा है उनमें आ मैं अब उनको. कैसे याद दिलाऊं कि हमारी तबाही के.
जिम्मेदार उनके मरहूम अ नाना और उनकी मां. है अगर उन्होंने सौदा नहीं किया होता अपनी. कुर्सी का बीजेपी के साथ हम इन हालात में. बिल्कुल नहीं होते. आपको सरप्राइज किया था बीजेपी पीडीपी का. मिलन क्योंकि पूरे देश में सब हम अब हम. जानते थे कि इ्तेदार की लालच उनमें बहुत. है लेकिन हमने कोशिश की थी कि कहीं अगर.
बीजेपी को छोड़ के वो नेशनल कांफ्रेंस और. कांग्रेस का समर्थन ले लेते तो जम्मू. कश्मीर के लिए वही बेहतर होता और शायद अगर. उन्होंने वो किया था अगर किया होता तो. ज्यादा अच्छा रहता चलिए चलिए उन्होंने. अपनी जिंदगी में नहीं किया। एक मौका मिला. था जब वो दुनिया छोड़ के चले गए थे और. महबूबा. जिनकी बेटी बहुत बात करती हैं। उस वक्त. महबूबा ने आपको याद होगा कहा था कि वी.
वांट मोर सीबीएम हमें और गवर्नमेंट ऑफ. इंडिया से चाहिए तब जाके मैं कुर्सी पर. बैठूंगी। उसी तनख्वाह पर जाकर कुर्सी पर. बैठी कुछ लाया न- नया नहीं लाया बीजेपी से. या मरकजी हुकूमत से उस वक्त अगर वह बीजेपी. को छोड़ के नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस. का ही सपोर्ट ले लेती शायद जम्मू कश्मीर. का हिस्ट्री जो है वो अलग होता. आप इसके लिए महमूद मुफ्ती को जिम्मेदार. मानते. पूरी उनकी पूरी फैमिली को.
मुफ्ती मोहम्मद सईद साहब और. अब बीजेपी को लाने में सबसे ज्यादा तो. उन्हीं का रोल रहा ना इस बात के बावजूद के. फॉर्मल हमने उनको सपोर्ट ऑफर किया। एक. जानेमाने अखबार के. मालिक के हाथों वो मुझे मिलने आए। मैंने. उनको कहा अनकंडीशनल हमें गवर्नमेंट नहीं. चाहिए, मिनिस्ट्री नहीं चाहिए, एमपी नहीं. चाहिए, एमएलसी नहीं चाहिए। हमारा सिर्फ एक. शर्त है कि बीजेपी के अलावा आप हुकूमत.
उनको छोड़के हुकूमत बनाइए। नहीं माना. उन्होंने।. तो बुजदली. के इल्जाम जो है वह लगाना बहुत आसान है।. लेकिन वह पहले अपने घर में झांक के देखें. फिर दूसरों पे उंगली उठाएं।. ठीक है। आज कश्मीर में सर अमन है या. सन्नाटा है? क्योंकि सरकार कहती है अमन है। टीवी पर. अमन की खबरें चलती है। आप वहां के चीफ. मिनिस्टर हैं। पीस है या खामोशी सन्नाटा.
है।. दोनों चीजें हैं। पीस भी है और कुछ जगहों. पे सन्नाटा भी है।. कुछ बेहतर हुआ है।. हां। मतलब यहां तक कि अगर आप इलेक्टेड. गवर्नमेंट के खिलाफ एतजाज करना चाहते हो, तो उसकी इजाज़त है। अ किसी और के खिलाफ. करना है, तो उसकी इजाज़त नहीं होगी। मेरे. घर के बाहर आप प्रदर्शन कर सकते हो। कोई. आपको रोकेगा नहीं। मेरे पुतले आप जला सकते. हो। कोई आपको रोकेगा नहीं। मेरे कार्टून.
आप बना सकते हो। मुझे Facebook और सोशल. मीडिया पे आप गालियां दे सकते हो। कोई रोक. नहीं।. लेकिन. जो और हुकुमरान है वहां पे या मरकजी. हुकूमत है उनके खिलाफ यह कोशिश नहीं करना. क्योंकि फिर वहां अमन नहीं फिर वहां. सन्नाटा है।. आप परेशान होते हो. इंसान हूं। परेशानी तो लाजमी है।.
आखिरी बार कब परेशान होते हैं आप? आज सुबह. क्यों? आप किसी चीज परेशान. होते लेकिन एक परेशानी होती है जिससे हम. हैंडल कर लेते हैं एक होता है इसमें हम. बेबस आते हैं कभी बेबसी में. बेबसी नहीं परेशानी जरूर नाराजगी गुस्सा. बेबसी नहीं. जैसे बीच में मैंने कहीं खबर सुनी थी कि. आप किसी इंटरव्यू में कहा कि आप बहुत. डीमोटिवेटेड हो गए थे इवन आप यू फील लाइक. पॉलिटिक्स छोड़ देते. वो तो जब 2019 के हालात जो देखे मैंने.
उसके बाद तो थोड़ा सा तो हो ही जाता है. लेकिन इन हालात में आज नहीं तो हम लड़ने. की तैयारी है. कैसे मोटिवेट करते हो अपने आपको क्योंकि. बहुत सारे उतार-चढ़ाव आपने देखे आप चुनाव. भी हारे. मेरा कोई मतलब खास तरीका है नहीं. सेल्फ मोटिवेट. है. आप बहुत देर परेशान नहीं रहते हो. ना. नहीं. कैसे डील करते हो मान लो कोई प्रॉब्लम आई. और आप बहुत मेंटली परेशान हो आसपास कोई. परेशान हो हर बार परेशानी अपनी भी नहीं. होती कई बार आसपास वालों की होती है तो.
उससे कैसे लड़ाई करते हो आप. मेरी कोशिश रहती है के चीजों को को एक. प्रैक्टिकल शेप दिया जाए। देखा जाए कि. देखिए आप क्या मेरी पर मेरे परेशान होने. से क्या मैं इस स्थिति को बदल सकता हूं या. नहीं? अगर बदल सकता हूं तो चलिए मेरी. परेशानी ठीक है। अगर मैं नहीं बदल सकता. हूं तो क्या मेरे परेशान होने से क्या यह. हालात और ज्यादा खराब होंगे या ऐसे ही. रहेंगे। अगर और ज्यादा खराब होंगे तो फिर.
मेरा परेशान होना कैसे फायदेमंद है? फिर. बेहतर है कि मैं परेशानी छोड़ के हल करने. की कोशिश करूं और अगर मैं हल नहीं कर सकता. हूं तो कम से कम मैं खुद तस्लीम करूं कि. मैं ये बदल नहीं सकता हूं। ये हालात. फिलहाल मैं बदल नहीं सकता हूं। जो मैं बदल. सकता हूं कम से कम वो तो मैं करूं।. अपने आसपास वालों को परेशान करते हो कभी. आप अपनी परेशानी के वजह से।. बहुत करता हूंगा। [हंसी] बहुत करता हूं।. वो कभी मेरे आसपास जो हैं उनसे पूछ लीजिए।.
आज इतने समय बाद सर इतने सारे उतार-चढ़ाव. देखने के बाद 28 में सांसद बनना, चीफ. मिनिस्टर बनना, फिर नजरबंद होना, लेगसी. देखना, लेगसी का बोझ भी देखना। अब सक्सेस. की डेफिनेशन क्या रह गई आपकी नजर में? सक्सेस मतलब शॉर्ट टर्म गोल्स, मीडियम,
लॉन्ग टर्म सक्सेस एक अपने आप में एक चीज. नहीं है ना।. मैं यह कहूं के मैं अपने आप को सक्सेसफुल. तब मानूं अगर के रिया जम्मू कश्मीर को. दोबारा रियासत का दर्जा मिलेगा। वो एक एक. हिस्सा है और मैं यह कहूं कि जम्मू कश्मीर. के साथ जो किए हुए वादे हैं वह पूरे हो।. वो सक्सेस का एक दूसरा हिस्सा मैं लोगों. की परेशानियां कुछ हद तक कम कर पाऊं। वो. सक्सेस का एक और पहलू है।.
मेरे दिमाग में या मेरी सोच में कोई एक. ऐसी चीज नहीं है जो मैं यह कहूं कि अगर. मुझसे यह हो गया तो मैं कहूंगा कि मैं. दुनिया का सबसे कामयाब हूं।. अपने को सक्सेसफुल मानते हो आप? मानना ही पड़ेगा।. मैंने मतलब 28 साल की उम्र में मैंने. सियासत शुरू की।.
28 साल हो गए मुझे सियासत करते हुए।. 2000. हां दो साल और तो मेरे 30 साल पूरे हो. जाएंगे। इन 30 सालों में मैं दो बार जम्मू. कश्मीर का मुख्यमंत्री बना हूं। एक बार. मरकजी हुकूमत में वजीर रहा हूं। मैंने तीन. पार्लियामेंट के इलेक्शन जीते, तीन. असेंबली के इलेक्शन जीते।. कुछ तो मैंने सफलता हासिल की है।. कभी सर जैसे आपने शुरू में कहा कि आप 28. साल में मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बने.
क्योंकि आपके सरनेम अब्दुल्ला था। कभी ऐसा. हुआ कि अब्दुल्ला सरनेम की वजह से कुछ. आपने गलत नहीं किया। उसका आप पर आया और. आपको रियलाइज हुआ कि अगर मेरी फ्रेश. स्टार्ट होती तो शायद मैं यह नहीं छेड़ता।. ना वो तो सरनेम की वजह से नहीं वो तो. तजुर्बे से ही आ जाता है। उसमें मैं अपने. नाम को कहां जोड़ दूंगा वो तो उम्र का. तकाजा होता है।. नहीं जैसे कई बार कई बार नजरिया में जैसे. यूपी की अगर मैं बात करूं क्योंकि यूपी. में मुलायम सिंह यादव का एक नजरिया था। कई.
बार अखिलेश यादव को उसकी वजह से. परेशानियों का सामना करना पड़ता है।. बीजेपी आरोप लगा देती है कि भाई कार से. ऊपर गोलियां बहुत सारी चीजें जो अब सियासत. से अलग है। आज की जनरेशन से अलग है। आज की. पॉलिटिक्स से अलग है।. देखिए अब वो तो अब लाजमी है। दो-तीन चीजों. का यही जिक्र हुआ। इंदिरा शेख अकॉर्ड उसके. लिए भी मुझे जवाबदेह बनाया जाता है। राजीव. फारूक अकॉर्ड उसके लिए भी मुझे जवाबदेह. बनाया जाता है। हालांकि उस वक्त तो मैं. स्कूल में पढ़ रहा था। मेरा उन फैसलों से. कोई लेना देना नहीं। लेकिन विरासत में.
मुझे यह फैसले मिल जाते हैं और इसलिए. मैंने शुरू में ही कहा अगर मैं इन चीजों. के लिए जवाब देने के लिए तैयार नहीं हूं. तो मुझे यहां होना नहीं चाहिए।. 25 अप्रैल 2025 पहलगाम आप चीफ मिनिस्टर. थे। टूरिज्म आपके पास था। एक ऐसी घटना. घटित होती है जिसने सबको हैरान कर दिया।. परेशान कर दिया। हिंदुस्तान पाकिस्तान के. रिश्ते बहुत से बदतर हो गए। वो लोग भी जो. पीस की बात करते थे उनकी भाषा में भी. तल्खी नजर आ गई।. आपको जब पता लगा तो आपके मन में क्या.
रिएक्शन था उस घटना को लेके और उस घटना ने. कितना आपको परेशान किया? पिछले मतलब अगर तीन चार साल की मैं बात. करूं तो. सबसे ज्यादा परेशानी. उस घटना की वजह से हुई क्योंकि नहीं होना. चाहिए था और जम्मू कश्मीर में हमने कभी इस. तरह के हालात नहीं देखे। हमले बहुत हुए अह. एक सेक्टेरियन प्रॉब्लम बनाने की कोशिश की.
गई। लेकिन कभी हमारे मेहमानों को इस तरह. बेरहमी से मारा नहीं गया जिस तरह उस दिन. किया गया था।. मतलब. क्या सोच के कर रहे थे? क्यों किया वो तो. करने वाले ही बेहतर जानते हैं लेकिन मुझे. एक मुझे इस बात की जहां मुझे दुख है और. हमेशा रहेगा कि ये हमला हुआ वहां पर मुझे.
इस बात की तसल्ली भी है जिस तरह जम्मू. कश्मीर के लोगों ने एक आवाज में उस हमले. की निंदा की कहा कि ये हमारे नाम में नहीं. नॉट इन आवर नेम ये हमारे लिए नहीं हम इसके. साथ नहीं है जिस तरह लोग गांवगांव में लोग. बाहर आए। उन्होंने इस हमले की निंदा की।. पिछले 30 35 साल का जो इतिहास जम्मू. कश्मीर का रहा है। मुझे ऐसा कभी याद नहीं. कि इस तरह का कुछ हुआ हो।. उस घटना में भी आदिल हुसैन ने टूरिस्टों.
को बचाते हुए जान दी थी।. और वो भी एक काफी चर्चा। आप शत के गांव भी. गए थे फातेहा पढ़ने के लिए। लेकिन सर. पहलगाम के हमलावरों को जिन लोकल लोगों ने. सपोर्ट दिया। ये थोड़ा सवाल मेरे ज़हन में. और बहुत लोगों के मन में भी आया क्योंकि. कत्ल हुआ जैसा आपने कहा कि मुस्लिम स्टेट. है इसलिए परेशान किया गया। एक मैसेज गया. कि वह हिंदू थे इसलिए मारे गए। उसी से. जुड़ा यह सवाल है कि पहलगाम के हमलावरों. को जिन लोगों ने हेल्प किया वो मजबूर थे, उस सोच के थे, साथी थे। आपका एनालिसिस.
क्या है? क्योंकि. मैं मेरे पास. रिलीजन बेस हमला तो था वो।. था लेकिन जहां तक मैं जानता हूं और मेरे. मेरे पास कोई इंटेलिजेंस के रिपोर्ट्स. नहीं आते। मुझे कोई इंटेलिजेंस की. ब्रीफिंग नहीं मिलती। हम्म।. ये लोग जिन्होंने ये हमला किया ये अ. सोसाइटी से बहुत दूर रहे।. ये हमारे जो गांव और शहर है वहां से बहुत. दूर रहे। इन्होंने ज्यादा लोगों को लोकल. लोगों को इनवॉल्व भी नहीं किया।. तब जाके ये हमला कामयाब रहा। क्योंकि इनको.
इनके ये जो हमला करने वाले लोग हैं। इनका. खुद का भरोसा कश्मीर के लोगों पे नहीं था।. तो बहुत कम इन्वॉल्वमेंट रही इस हमले में. लोकल लोगों की जो एक दो हैं उनको तो. गिरफ्तार किया गया है।. इंडिया के कश्मीर और जो पाकिस्तान ने. कब्जा कर रखा है जिसे हम पीओके कहते हैं. आज क्या डिफरेंस है सर. वो तो आपको खुद हालात देख के पता चल जाता. है जिस तरह वहां एतेजाज का सिलसिला चला. किस तरह लोगों ने प्रदर्शन किए, डेमोंस्ट्रेशन किए, प्रोटेस्ट किए बेसिक.
डेवलपमेंट के लिए। पानी नहीं है, बिजली. नहीं है, बिजली की कीमतें ज्यादा हैं।. डेवलपमेंट नहीं है। हुकूमत ने वहां कोई. खास काम नहीं किया। वहां से तो सिर्फ यही. खबरें आई।. उनसे बहुत बेहतर हालात में हम हैं।. मां सिवाय सरहद के जो नजदीक के इलाके हैं।. क्योंकि. ये मतलब कैसे हुआ? क्यों हुआ मेरी मुझे.
मतलब मेरी समझ से यह बाहर है। लेकिन. पाकिस्तान ने सोच समझ के सारी डेवलपमेंट. जो की वह बिल्कुल लाइन ऑफ कंट्रोल के. नजदीक. और हमारे जो लाइन ऑफ कंट्रोल के नजदीक. इलाके हैं वह सबसे बैकवर्ड हैं।. तो हमें चिढ़ाने के लिए जो है उन्होंने. सारा डेवलपमेंट वहां किया। हमारी यह सोच. थी नहीं। अब जाके हम उन गैप्स को फिल कर. रहे हैं। आमतौर पर आप देखें तो पाकिस्तान.
के कब्जे में जो कश्मीर है तरक्की से बहुत. दूर है। आप हमारे हस्पताल, हमारे कॉलेजेस, यूनिवर्सिटी, यह सब चीजें उनके साथ कंपेयर. करें। जमीन आसमान का फर्क है। उन्होंने. अगर सड़कें बनाई तो सिर्फ सरहद के नजदीक. हमें दिखाने के लिए। अंदरूनी तौर उनके पास. कुछ नहीं है। अगर होता तो लोग इस तरह. प्रदर्शन नहीं कर रहे होते।. इससे पहले कि मैं उमर अब्दुल्ला दी पर्सन. को एक्सप्लोर करना शुरू करूं। एक छोटा सा. रैपिड फायर रखा है सर मैंने। 1947 का. कबायली हमला या 2016 में बुरहान वानी की.
मौत के बाद महीनों की अशांति कश्मीर के. लिए सबसे मुश्किल वक्त कौन सा था? नहीं कबालियों का हमला 47. हां क्योंकि उन्होंने तो कब्जा कर लिया जो. हमने बुरहानवाणी के वक्त में देखा. बदकिस्मती से वो पहली मर्तबा नहीं था।. 2010 और 2008 में भी हमने उस तरह के हालात. देखे। हम. 2002 में गांधरबल से आपकी हार या 2014 में. सरकार का जाना ज्यादा पेनफुल क्या था?
दो मेरा अपना इलेक्शन हारना क्योंकि 2014. का मेंटली मैं तैयारी कर चुका था। मुझे. मालूम था मैं पॉलिटिकली मैं अपने आप को. काफी एस्टीट्यूट समझता हूं। मैं ग्राउंड. जो है मैं मैं पढ़ लेता हूं। मैं कमरे में. जाता हूं तो मुझे टाइम नहीं लगता वहां. माहौल को जो है समझने में। मैं 2014 की. मैं मेंटली तैयारी कर चुका था। 2002 की.
मैं बिल्कुल मैं मतलब मुझे. शॉक मैं कहूं शॉक शॉक लगा ना वह चिंगम. वाला ऐड। मुझे वही हुआ। 1996. में बरसों के बाद चुनाव और आपके फादर की. वापसी या 2009 में आपकी पहली शपथ. अब्दुल्ला परिवार में ज्यादा खुशी का. माहौल कब था? 96 में क्योंकि. उस वक्त हम.
अंधेरा इतना ज्यादा था मतलब जम्मू कश्मीर. में के एक ऐसा वक्त बीत चुका था जहां हम. सोच भी नहीं सकते थे कि चुनाव होंगे और. चुनाव में नेशनल कांफ्रेंस हिस्सा ले. पाएगी। अ तो. वह चुनाव और 2009 के चुनाव में जमीन आसमान. तो आपके लिए पहली बार आप शपथ ले रहे थे. चीफ मिनिस्टर के तौर पर. हां लेकिन मेरा अपना मतलब अह तब तक अ. सियासत.
आपको पता था आप बच जाओगे. नहीं वो नहीं कहना मैं ये कह रहा हूं कि. तब तक सियासी निजाम जो है वो चल चुका था. 96 में हम बिल्कुल एक एक पॉलिटिकल वैक्यूम. जो बना हुआ था 90 के बाद उसको रिफिल कर. रहे थे। 2009 में तो इट वाज़ कंटिन्यूटी ऑफ़. गवर्नमेंट। ठीक है।. नेहरू या पटेल कश्मीर को किसने बेहतर. संभाला? नेहरू ने।. शेख अब्दुल्ला या महाराजा हर सिंह कश्मीर. के लिए ज्यादा किसने किया? अब ये मुझे आप ये मुझे आप लड़वाओगे और.
मैंने लड़ना नहीं है।. आप चाहो तो एक दो बॉल डक कर सकते हो। कोई. बात नहीं। आप मेरे मेहमान है।. ये मैं एक दो बॉल डक करने की इजाजत दे. सकता हूं। ये मैं वो ये मैं पैड कर लूंगा. और इसको. हां [हंसी] इसको मैं ऐसे ही निपटा लूंगा।. डर सबको लगता है। गला सबका सूखता है।. हां नहीं गला सूखने वाली बात नहीं।. कुछ कुछ लड़ाईयां बेहतर है ना लड़ी जाए? कश्मीर को किसने बेहतर समझा? शेख. अब्दुल्ला या मुफ्ती मोहम्मद सईद.
ओ शेख अब्दुल्लाह।. ये तो फुल टॉस दे दिया।. ये तो [हंसी] ये तो ये सवाल पूछने के मतलब. अब मैं क्या कहूं आपको? [गहरी सांस लेने की आवाज़]. ठीक है।. आपकी मां इंग्लैंड से थी सर? जी अभी भी है।. इंग्लैंड से हैं। फिर कश्मीर आई अ वो शायद. नहीं चाहती थी आप पॉलिटिक्स में जाएं।. वो तो कहने के लिए तो मेरे वालिद भी कहते. हैं कि वो नहीं चाहते थे।. बस दोनों चाहते थे।. नहीं मां नहीं तो मां तो बिल्कुल नहीं. चाहती थी। वालिद साहब कहते हैं कि नहीं. चाहते थे लेकिन मैंडेट पे दस्तखत उन्हीं. का था।. मनाया कैसे आपने?
मैंने कम मनाया शायद साथियों ने ज्यादा।. ओके।. पार्टी में थोड़ा दबाव बना उन पे. कि आप पर जाए. कि मैं आ जाऊं उनको मेरे पार्टी के कुछ. मतलब जो सीनियर थे उस वक्त जिनको तजुर्बा. था उनको हमेशा ये लगता था कि मेरे वालिद. साहब ने आते-आते देरी की जो कि अपनी जगह. सही है। उनको. मेरे दादा के साथ काम करने का मौका कम ही. मिला क्योंकि वो विलायत से डॉक्टर बन के.
76 में वापस आए। और 82 में शेख साहब वफाद. पा गए तो मुश्किल से छः साल का अरसा मिला. था. करीबी से काम करने का। मेरे सीनियर साथी. जिन्होंने डॉक्टर साहब मेरे वालिद साहब को. मशवरा दिया। उनका ये उनकी ये सोच थी कि. अगर मैं जल्दी आऊं तो मुझे सीखने का और. तजुर्बा हासिल करने का मौका ज्यादा मिलेगा. जिसका मुझे फायदा बहुत हुआ है।.
एक मतलब वालिद का साया बने रहना वो बहुत. बड़ी बात है। मां से दूर रहने का तकलीफ. रहा? वो तो मुझे तकलीफ तो रही लेकिन आदत भी थी. क्योंकि 11 साल की उम्र में मुझे बोर्डिंग. स्कूल भेजा गया। तो मुझे काफी मतलब कम. उम्र से ही सेल्फ सफिशिएंट बनाया गया था।. मैं खुद मुख्तार था।. 2018 में आपके मॉम डैड के 50 साल जब पूरे. हुए थे तो आपने एक फोटो डाली थी। लिखा. मम्मी मुझे मार डालेंगी। समथिंग लाइक दैट।.
हां क्योंकि मेरी मां को सोशल मीडिया से. एलर्जी है।. हम्म. हां उन्हें नहीं पसंद. ना बिल्कुल नहीं उनका तो शुक्र है वो शायद. ये इंटरव्यू देखेंगे भी नहीं लेकिन अगर. देखेंगी भी तो उनको इस बात का भी गिला. होगा कि हमने इतना उनको यहां. जिक्र गौर लाया।. आप जैसे मॉम डैड के 50 साल पूरे हुए सर।. आज जनरेशन में अगर मैं बात करूं मैं बहुत.
सारे पॉलिटिशियन को देखता हूं या बहुत. सारे सक्सेसफुल लोगों को देखता हूं और एक. हमारी पीढ़ी में स्पेशली जो हम नए. मिलेनियल्स हम आए हैं या आगे जज आ रहे हैं. उनमें एक कॉमन परसेप्शन आया है कि सफल. व्यक्तियों की शादियां सक्सेसफुल नहीं. होती हैं। आज की जनरेशन ने ये मानना शुरू. कर दिया है। बहुत सारे एग्जांपल भी हैं। अ. जो शादी सक्सेसफुल नहीं हुई। आप इस पर. क्या सोच सकते हो? मैं कुछ नहीं सोच सकता. हूं क्योंकि मेरे लिए ये सवाल बड़ा टेढ़ा. पड़ जाता है।. यू बिलीव इन लव? क्या होता है प्यार?
अब यार [हंसी]. इस सवाल का जवाब मतलब आपको शेक्सपियर या. किसी फिलॉसोफर सेना पड़ेगा।. [हंसी]. प्यार सबको होता है सर।. होना चाहिए। होना चाहिए। क्या कभी ना कभी. कभी ना कभी तो होना चाहिए।. क्या होता है प्यार? कश्मीर के लोगों से. हमें प्यार है। कश्मीर से हमें प्यार है।. हिंदुस्तान से प्यार है। बट वो यह तो. सियासत. फिर तो फिर तो फिर तो वो सियासी प्यार.
यह तो मैं कवर अप करने के लिए कर रहा हूं. ताकि आपको थोड़ा कंफर्टेबल कर सकूं मैं।. [हंसी]. वो तो आपने वो तो बॉल आपने बाउंड्री से. बाहर लगा ही दिया।. हां वो सवाल मैंने छोड़ दिया था। बट ये. सवाल तो हम पूछ सकते हैं क्योंकि आपके. चेहरे पर जो नूर है। लोग कहते हैं कि इश्क. में मर्द होते हैं तो चेहरा खूबसूरत दिखता. है।. हम्म आर यू इन लव? विद हु. आई डोंट नो. अच्छा जनरली. हां जनरली. जनरली. डू यू बिलीव इन लव हाउ कैन यू बी ह्यूमन. और नॉट बिलीव इन लव. कैसे लव इज अ आई मीन लुक देयर आर आई मीन.
लव डजंट हैव वन डेफिनेशन एंड इट डजंट हैव. वन फॉर्म. इट इज द मोस्ट वर्सटाइल इमोशन. मतलब मतलब यार के इतने रूप हैं। आप उसको. एक ही रूप में सी बांध के नहीं रख सकते. हो।. मां-बाप के तहन प्यार अलग दोस्तों के तहन.
प्यार अलग साथियों के साथ जो आपका रिश्ता. और जो प्यार है अलग आपके भगवान अल्लाह. वाहेगुरु के साथ प्यार अलग।. मुल्क, मुल्क के प्यार, मुल्क का प्यार. अलग।. मैं पार्टनर वाले प्यार की बात कर रहा. हूं। क्योंकि किसी ने मुझसे किसी ने मुझसे. कहा कि प्यार में इंसान का बेटर वर्जन. निकल आता है। वो वर्जन आता है जहां इंसान. ये भरोसा रखता है कि अब रेगिस्तान में भी. दूध की नदी बहाली है।. वो अपनी जगह सही है ah लेकिन उस प्यार में. कभी कभार इतना गुस्सा भी है कि एक बहुत. मतलब भयानक रूप भी जो है वो देखने को मिल.
जाता है।. मैंने नीना गुप्ता जी का इंटरव्यू किया. था। सो शी फेल इन लव इन 50स। तो उन्होंने. मुझसे कहा कि एक उम्र के बाद प्यार जो. होता है या दोबारा शादी जो होती है वह एक. मैच्योर मैरिज होती है। जहां पर यू जस्ट. नीड अ कंपैनियनशिप। प्यार जैसा प्यार नहीं. होता। कंपैनियनशिप चाहिए होती है साथ रखने. के लिए। क्योंकि अब आप सिंगल हैं इसलिए. सवाल में पूछ सकता हूं मैं आपसे। इस उम्र. में प्यार को लेकर आपका नजरिया क्या है? यह कंपैनियनशिप वाला या वह बटरफाइ अभी भी.
हो सकती है।. नहीं बटरफाई होने चाहिए। कंपैनियनशिप में. भी बटरफाई होने चाहिए। क्यों ना हो? यह. कहां लिखा गया है कि. 60 साल की उम्र या 70 साल की उम्र के बाद. जो है वह तितलियां जो है वो फड़फड़ानी. नहीं चाहिए।. यही तो मैंने आपसे पूछा था।. हां तो वही मैं क्या आपसे कह रहा हूं. कि तितली आपको महसूस होती है? हां।. तितली आपको [हंसी]. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. चलिए।. क्योंकि बहुत सारी न्यूज़ आती रहती है। तो. मुझे लगा इनडायरेक्टली पूछ लेते हैं।.
आपको तो बहुत खबरें आ रही होंगी। कोई. नहीं। एनी गुड न्यूज़ प्लान से या ये भी डक. कर. अब नहीं नहीं मैं डक नहीं वो आगे आगे. देखिए कि होता क्या. चलिए. वो आप आप यू आर विद आज तक ना. नाउ आई एम अलोन. नो आई नो बट यू यूज़्ड टू बी ना हां तो ये. थे खबरें आज तक इंतजार कीजिए कल तक. ग्रेट बट प्यार हो सर अगर प्यार को डिफाइन. करना हो एक लाइन में पार्टनर. आई कांट डिफाइन लव इन वन लाइन. इट्स आई मीन इट एटलीस्ट एस फार एस आई एम. कंसर्न इट डिफाइन दैट काइंड ऑफ़ दैट. हाउ यू आर डिफरेंट इन लव.
यह तो बता सकते हैं आप आप कैसे अलग हैं. प्यार पे? हाउ आई एम डिफरेंट फ्रॉम व्हाट? जो उमर अब्दुल्ला नॉर्मल जिंदगी सियासतदान. है। बिना इश्क वाला उमर अब्दुल्लाह और. इश्क में पड़ा उमर अब्दुल्ला कैसे अंतर. है? आई डोंट नो द डिफरेंस।. कुछ तो फील करते होंगे। जैसे कुछ लोग कहते. हैं कि हम ज्यादा मुस्कुराते हैं। कुछ. कहते हैं गुस्सा कम आता है। कुछ कहते हैं. कि अपनी हरकतों पे हम काबू कर लेते हैं।. कुछ कहते हैं हम ज्यादा बातें मानने लगते. हैं। सुनने अब बेटर लिसनर बन जाते हैं।. नहीं मैं बेटर लिसनर जरूर चलिए मैं फिलहाल. तो दावा कर सकता हूं।.
हकीकत क्या पता कहीं कोई देखकर मुस्कुरा. रहा हो। [हंसी]. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. ठीक है सर। अब फारुख साहब जो सर है वो 89. के होने वाले हैं।. 90 अच्छा चलिए वो उनके. कागज के हिसाब से. डेट ऑफ़ बर्थ हां ऑफिशियल डेट ऑफ़ बर्थ तो. हां 8. चलिए 90 मान लेते हैं। इस उम्र में भी. मोटरसाइकिल चलाना. अब नहीं।. अब नहीं चलाते? अब गोल्फ खाना सब. नहीं गोल्फ वगैरह खेलते हैं। मोटरसाइकिल. शुगर है। अब गैराज में बंद है। रोक रखा है. आपने? हां। आपने रुक रखा है या.
वो खुद वो इतनी अकल उनको खुद आ गई. ज्यादा जिंदा दिल कौन है आपने. वो. मैं तो शायद अगर 10सदी भी पहुंच जाऊं तो. बहुत बड़ी बात है मेरे आपने जो मुझसे सवाल. पूछे अगर उनसे पूछे होते तो आपको तरह-तरह. के जवाब मिल जाते वो तो शायरी शुरू करते. यहां पे. वो गाते ही बहुत अच्छा है मैंने उनके गाने. सुने हैं शायरियां सुनी है. ये सब आप में नहीं आया कुछ. बिल्कुल नहीं. शेरो शायरी आप नहीं करते. बिल्कुल नहीं मैं कोशिश करता हूं लेकिन वो. लगता है जब मैं करता हूं तो लोगों को लगता.
है कि बड़ी कोशिश कर रहा है।. कौन सी शायरी आपने लिखी है? कुछ ऐसा. मैं कुछ नहीं लिखी।. फेवरेट आपकी है? मैं लिखता नहीं हूं। मैं सिर्फ कोट करता. हूं। चाहे इकबाल हो गलिब हो।. कोई एक जो आपका फेवरेट हो कोट करके सुनाए।. बताइए हमें जो आपका फेवरेट हो कोई भी।. खुद ही को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से. पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा. क्या है? ये तो चीफ मिनिस्टर वाला कोट हो गया।. बस मेरा इतना ही है।. पर्सनल वाला कुछ नहीं है।. पर्सनल कुछ नहीं।. चलिए एक मैं एक मैं आपको डेडिकेट कर दे. रहा हूं। आप चाहे तो कहीं आगे डेडिकेट कर. दीजिएगा [हंसी].
कि काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर. काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर एक. रोज तुम आकर हमारे गले लगो हमारी इजाजत के. बगैर. चलिए वेरी गुड. फारुख साहब सर उनसे कोई आदत जो आपने सीखी. हो. लोगों के साथ जो मैं इतना सीखी नहीं है. लेकिन कोशिश करता हूं के लोगों के साथ. ज्यादा घुलमिल जाऊं। मैं थोड़ा सा.
पीछे हट जाता हूं। वो लोगों में बिल्कुल. मतलब. उनकी तरह बन जाते हैं।. हां। मैं मुझ में वो है नहीं लेकिन कोशिश. करता हूं।. आप आठ साल बोर्डिंग में रहे। स्कूल में. सबको पता था फारुख़ अब्दुल्ला के बेटे. हैं।. फर्क नहीं पड़ता था।. वो एक वो एक वो बोर्डिंग स्कूल में वो एक. बहुत बड़ी खासियत है।. हम वो फर्क नहीं रहता। हमारे साथ तो. बड़े-बड़े अमीर लोगों के बेटे बेटियां.
बड़े-बड़े डिप्लोमेट्स वगैरह कुछ नहीं पता. होता था। वो स्कूल छोड़ने के बाद पता चला. वाह यार ये तो बड़ी तो चीज है। स्कूल में. पता नहीं था।. जमीर और जहीर आपके दो बेटे. जामिर और जाहिर. जामिर और जाहिर. दोनों वकील हैं? दोनों वकील हैं।. आप नहीं बन पाए इसलिए बनवा दिया आपने।. बिल्कुल नहीं खुद [हंसी] बने। खुद बने. लेकिन शायद मेरी गलती का उनको एहसास रहा।. वो पिता जो सियासत में नजरबंदी में रहा वो. अपने बेटों से कैसा रिश्ता रखता है?
ठीक ही है।. शेख साहब का आपसे रिश्ता आपका अपने बेटों. से रिश्ता ज्यादा किसका बेहतर है? मेरा मेरा तो अपने बेटों के साथ रिश्ता. ज्यादा ही होगा।. जनरेशन की वजह से? जनरेशन की वजह से और मतलब एक साथ वक्त. गुजारने की वजह से।. हम. जनरेशन का फर्क रहता है।. समझते हैं अपने बेटों को आप? कुछ हद तक जितना समझ जितना एक वालिद अपने. बेटों को समझ सकता है खुद तो वो 27 29 साल.
की उम्र तक पहुंच गए हैं।. वो टीनएजर्स तो है नहीं।. जैसे कई सारे पिताओं को शिकायत आमिर खान. को मैं सुन रहा था। अभी पीयूष मिश्रा आए. थे हमारे पास। शाहरुख को मैंने कई बार. कहते हुए सुना कि जब आप बहुत पैशनेट होते. हैं, बहुत काम करते हैं तो वक्त कम मिलता. है। तो सक्सेस से कीमत परिवार में चुकानी. पड़ती है।. वो वो रहता है। वो वो मतलब वो तो है ही. है।. ऐसा कोई अफसोस आपको? अफसोस नहीं। मतलब सोच समझ के मैंने फैसला. लिया। जानता था कि शायद ये उसका एक नतीजा.
होगा।. ओके सर। मैंने आपको एक 2014 में भी आप हार. हुई थी बाढ़ की वजह से।. 2014 में। तो एक वही मतलब जब हमारी. गवर्नमेंट गई. वही उसी की. आपको पता था बाढ़ वाले हार को लेकर. हां लेकिन उससे पहले ही हमारी हालत कुछ. पतली थी सैलाब ने तो मतलब पूरा ही साफ कर. दिया. लेकिन सैलाब मैं ये कहूं कि बस हम सिर्फ. सैलाब की वजह से हारे वो गलत होगा हार के.
कई कारण थे. आपको क्यों लगता है शाहरुख खान आप ज्यादा. हैंडसम है. है ही है क्या बात है ये कोई पूछने वाला. शाहरुख सलमान से ज्यादा हैंडसम कौन है? मरवाओगे मुझे? अ. यंग वाले बात करो दोनों यंग जनरेशन में।. इमेजिन यू आर इन 30ज एंड शाहरुख सलमान इन. 30ज। शाहरुख सलमान में ज्यादा हैंडसम कौन. है? आई स्टिल थिंक शाहरुख।. सलमान इज मोर बफ। मोर.
30 की बात कर रहा हूं।. 30ज आल्सो।. राहुल दिलवाले इन योर दैट टाइम. बट अगेन हम आपके हैं कौन सलमान खान हम. आपके कौन मैंने प्यार किया. इट्स इट्स [हंसी] इट्स क्लोज. जब प्यार किसी से होता है. इट्स. अगर फर्क है तो 19-20 का ही है. ओके राहुल गांधी उमर अब्दुल्लाह सचिन. पायलट ज्यादा हैंडसम पॉलिटिशियन कौन है. लेट्स गोना बी इंटरेस्टिंग.
लुक आई मीन. [हंसी]. अह दिस आई विल टेक ऑन माइसेल्फ। मैं. ईज़िएस्ट।. तीनों में सबसे हैंडसम।. नंबर दो।. या तो देन देन व्हाट्स द पॉइंट इफ आई हैव. एनीवे रैंक फ्रॉम अ देन वी विल डू इट। विल. विल डू इट द राइट वे। राहुल, सचिन मी।. राहुल गांधी मोस्ट हैंडसम पॉलिटिशियन।. देन सचिन देन मी।. ओके।. बट आई एम ओनली पुटिंग मसेल्फ देर बिकॉज़ यू. हैव एक्सक्लूडेड सो मेनी अदर्स हु शुड हैव.
बीन ऑन द लिस्ट।. और सबसे हैंडसम पॉलिटिशियन कौन है? और. आपको लगता है. कई सारे हैं।. जैसे. अब चलिए अब फिर कभी. ठीक है. आप रोते हो इमोशनल इंसान हो आप. कभी कबभार आंसू निकल आते हैं. ज्यादा नहीं लेकिन कभी कबभार. पॉलिटिकल चीजों पे पर्सनल चीजों पे. कभी पॉलिटिकल पॉलिटिकल पे कभी. हालात के वजह से. सियासी चीज में किसमें रोए थे आप. हम. सियासी चीज में किस में रोए थे आप.
अब तो वो रोए हुए अरसा हुआ. फिर भी मतलब पॉलिटिशियन तो सख्त माने जाते. हैं मोटी चमड़ी के लोग।. हां लेकिन. मानते हैं हम कि इमोशन. कभी नहीं कभी कबभार हालात ऐसे बन जाते हैं. कि दुख होता है।. हम. लेकिन मुझे मतलब. मतलब बैठ के मैं आपको वो मौका यहां बताऊं.
कि कब हुआ छेड़ सकते कोई. काफी अरसा हो गया इसका मतलब. वाजपेयी साहब की सरकार में आप मंत्री थे. मोदी सरकार को आप बड़े करीब से देख रहे हो. एक बेसिक फर्क जो आपने वाजपेयी साहब मोदी. साहब ने देखा. ये ये मुझसे पहले भी यह सवाल पूछा गया था. लेकिन इस सवाल का जवाब देना आसान नहीं है. क्योंकि दोनों. कश्मीर के कॉन्टेक्स्ट में वाजपेयी साहब. मोदी साहब. कश्मीर के कॉन्टेक्स्ट में दोनों का रवैया. कश्मीर को लेके बहुत अलग था. वो तो मतलब ये कोई छुपी हुई बात नहीं है. वाजपेयी साहब जमूरियत इंसान इंसानियत.
कश्मीरियत की बात कर रहे थे। इस हुकूमत ने. कभी तो वो बात की नहीं।. इस हुकूमत ने तो मतलब जो वाजपेयी साहब ने. श्रीनगर मुजफराबाद का बस शुरू करके दिया. था हमें। इस हुकूमत ने उसको बंद किया। जो. क्रॉस एलओसी ट्रेड वाजपेयी साहब ने हमें. चला के दिया। इस हुकूमत ने बंद किया। तो. उस. बेटा ये कहते हैं हमने भी टनल बनवाई।. नहीं वो जो बैरियर था खत्म कर दिया।. टनल तो सबने बनाए। टनल तो नेहरू साहब के.
वक्त से बने वह कोई रेल तो इंदिरा गांधी. जी ने शुरू की थी उस वक्त संग बुनियाद तो. इंदिरा गांधी का रखा हुआ है तो वो वो कोई. बात नहीं पावर प्रोजेक्ट्स हर किसी ने दिए. हमें वो नहीं जो मतलब जो जो मतलब जो जो. डीलिंग्स. बीजेपी से गठबंधन कर सकते हो आप. नहीं अगर वो कहें कि हम स्टेटहुड आपको. वापस दे रहे हैं कश्मीर का भला चाह रहे. अगर वो स्टेटहुड देने के लिए तैयार हैं. मैं हट जाता हूं वो किसी और के साथ करें. नहीं वो.
मैं मैं मैं रुकावट नहीं बनूंगा। मैं हट. जाऊंगा लेकिन उनके साथ. हाथ मिलाना. मेरे से नहीं होगा।. बट पीपल से ना कि पॉलिटिक्स में कुछ भी. असंभव नहीं होता। दे ऑलवेज अ पॉसिबिलिटी. इंपॉसिबल. बट वो कुछ चीजों को आप इंपॉसिबल ही मान. लीजिए तो बेहतर है। मैं मैं ये नहीं कह. रहा हूं कि मैं. रियासत. को रोकने के लिए जो है कुर्सी को पकड़े. रखूंगा। मैं मैं. छोड़ के चला जाऊंगा 1 मिनट भी.
बट क्यों ऐसा मतलब क्यों ऐसा अगर. हमारी सोच नहीं मिलती. पर तारीफ तो आप भी कर देते हो मोदी जी की. जैसा अभी आपने कहा था. मैंने शुक्रिया किया. 25 साल होने पर आपने कहा कि 25 साल होना. आसान नहीं है 7th अक्टूबर को. आसान है ये तो तारीफ नहीं तारीफ नहीं ना. अब जो जो. असलियत को कबूल करना कोई मतलब इसमें बुराई. क्या है और 25 साल लगातार किसी पोस्ट पे. बने रहना ये कोई मामू चीज नहीं है।. मैं उम्मीद करूंगा हालांकि वो होगा नहीं.
कि मैं 25 साल अब बना रहूं। मैं उम्मीद. करूंगा कि अगर मैं 25 साल बना रहा तो चलिए. जो आज के बीजेपी के यंग लीडर्स हैं. वो कभी ना कभी मुझे उस चीज का मुबारक. करते। सियासत देखिए ना मैं एक चीज मैं. आपको समझाना चाहता हूं। हम सियासत को. दुश्मनी समझना शुरू कर गए हैं। मैंने कभी. सियासत में दुश्मनी नहीं लाई।. मेरे सियासी मुखालिफ हैं। मेरे दुश्मन. नहीं है। मैं महबूबा मुफ्ती को अपना.
दुश्मन नहीं समझता। मैं इल्तजा को दुश्मन. नहीं समझता। मैं बीजेपी के नेताओं को. दुश्मन नहीं समझता। वो मेरे मुखालिफ हैं।. मैं उनकी मुखालफत करूंगा। मैं सियासी. मुखालफत करूंगा।. बट. मैं मैं मैं जाती मुखालफत नहीं करता।. बट दिल्ली में देखते हैं। राहुल जी मोदी. जी के बीच की बॉन्डिंग। यूपी में. मैं अपनी बात कर रहा हूं। मैं दूसरों की. बात कर रहा हूं। ये क्यों ऐसा मतलब फिर ये. ऐसा क्यों होता है कि मतलब अभी तो लगता है. दुश्मन चल रहे हैं। जैसे पिछले जनरेशन में.
देखते थे अभी इनफैक्ट कोई पॉलिटिशियन आए. थे वो कह रहे थे कि पार्लियामेंट में भी. जो कैंटीन है इसमें भी वो भी मिक्स कर हटा. दी गई है कि बीजेपी वाले अलग खाएंगे. अपोजिशन अलग खाएगा. अलग है और अफसोस है मेरे मेरे खुद के जो. पार्लियामेंट के मेंबर्स हैं वो कहते हैं. कि अच्छा नहीं हुआ. हम कम से कम सेंट्रल हॉल में मिल बैठ के. खाते थे और मुझे अच्छा लगता था मेरे इतने. ही दोस्त अपोजिट बेंच के होते थे जितने. अपने बेंच के बैठ के कॉफी सैंडविच वगैरह. दो चार बातें हो जाती थी।.
आज भी जब असेंबली में बैठता हूं, जम्मू. में या श्रीनगर में कोशिश करता हूं कि हर. किसी के साथ जो है एक एक रिश्ता बनाए. रखूं। जब मुझसे टाइम मांगा जाता है तो मैं. इतने ही बीजेपी के एमएलए को मिलता हूं. जितना अपने पार्टी के मिल एमएलए को मिलता. हूं। हां सियासी उनकी जो सियासी सोच है, उनकी जो सियासी नजरिया है, उसकी मैं. मुखालफत करता रहूंगा।. क्योंकि कहीं हमारा वो मेल मिलाव नहीं. बनता। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि मैं.
उनको जाती दुश्मनी समझू और दूसरी बात मैं. बदतमीजी नहीं करूंगा।. अगर. प्रधानमंत्री के तरफ से जम्मू कश्मीर के. लिए कोई फैसला होता है क्या मैं उसका. शुक्रिया ना करूं? अगर हटके जम्मू कश्मीर को चलिए कुछ फंड. ज्यादा मिले या किसी स्कीम में लाया गया. जिसमें हम पहले नहीं थे। क्या मैं उसका. शुक्रिया नहीं करना क्या मुझे उसका. शुक्रिया नहीं करना चाहिए इतनी तो मुझ में.
तमीज है और उस तमीज को उसको गलत जो रुख. नहीं दिया जाना चाहिए यही यही बदतमीजी. इल्तजा करती है. यही मुसीबत है क्योंकि मैं तमीज से पेश. आता हूं वो उसको कमजोरी समझती है क्योंकि. इल्तजा खुद बदतमीज है तमीज उसमें है नहीं. मैं तमीज वाला हूं मुझे मुझे कम से कम. मेरे मां-बाप ने इतना सिखाया है कि अगर. आपके लिए कोई कुछ करे करे आप उनका.
शुक्रिया करिए। शुक्रिया करने का मतलब यह. नहीं है कि मैं उनकी सियासी सोच से जो है. मैं समय मैं उसको मानना शुरू कर गया हूं. या मैं कल उनके साथ अलायंस करूंगा।. बिल्कुल नहीं। मेरा जितना आज बीजेपी. पार्टी के साथ मतलब गुस्सा है। शायद किसी. पार्टी के साथ इतना गुस्सा मेरा रहा नहीं।. लेकिन मैं एक हुकूमत चला रहा हूं। और. हुकूमत में मरकज के साथ एक एक रिश्ता. बनाना वह मेरी जिम्मेदारी है।.
ऑफ द रिकॉर्ड कैसा रिश्ता है आपका? मोदी. जी अमित शाह से।. आप ऑन द रिकॉर्ड ऑफ द रिकॉर्ड पूछिए। मैं. वही जवाब दूंगा। मतलब है मैं हमारा. एक तो है कि आपका एक नजरिया कश्मीर को. लेकर उनका एक नजरिया है। इसके अलावा. व्यक्तिगत रिश्ते कैसे हैं? हम. डिसाइड करें।. जब मैं जब उनसे मिलता हूं तो बड़े अच्छे. से बड़े अच्छी मीटिंग रहती हैं।. अच्छी बातचीत होती है।. वो आपसे कैसे पेश आते हैं? अमित शाह मोदी. जी. कभी कभी कभी उन्होंने मतलब इस इस लिहाज से. कभी शिकायत का मौका नहीं दिया. क्योंकि टीवी पर तो कहते हैं कि आपके. परिवार ने जम्मू कश्मीर को डर अंधेरा दिया.
लूट लिया सारा पैसा हड़प लिया ये सारे. स्टेटमेंट टीवी पर आते हैं जब वो कश्मीर. जाते हैं या स्टेटमेंट आते हैं. इलेक्शन लड़ना है अब वो क्या इलेक्शन. लड़ेंगे मेरे खिलाफ मेरी तारीफ करके. फिर उनको वोट कहां मिलेंगे. मैं क्या कम बोलता हूं उनके बारे में जब. मैं उनके उनके खिलाफ इलेक्शन लड़ता हूं।. मैं भी उनके हर फैसले के खिलाफ बात करता. हूं।. लेकिन उसका मतलब यह नहीं है ना कि मैं.
कमरे में बैठ के अब मुट्ठी बना के मारना. शुरू करूं या बैठ के ऊंची आवाज में बात. करूं।. कमरे में अब आप देखें जब राहुल प्राइम. मिनिस्टर से मिलते हैं पार्लियामेंट से. अंदर आते हुए बात। क्या वो एक हेलो हाय. नहीं करते? करते हैं ना? करना भी चाहिए। कोई बुरी बात नहीं है।. मेरे को सुषमा जी का वो शेर याद आ गया।. पार्लियामेंट में कहा था उन्होंने कि. दुश्मनी जितनी मन करे जमकर करना मगर.
गुंजाइश इतनी रखना कि जिंदगी में फिर कभी. हम मिले तो उस दिन आंखों को शर्मिंदा ना. होना पड़े।. ये ये बिल्कुल आपने जो बात कही यह मेरी. सोच है कि हम इतना करें कि कल को अगर आपकी. और मेरी मुलाकात होती है। कम से कम आंख से. आंख मिलाकर हम एक दूसरे से बात तो कर. पाएं। कि ऐसा ना हो कि मैंने आपके बारे. में कोई ऐसी बात की कि जब मैं आपसे मिलूं. तो मुझे अपना सिर झुका के शर्मिंदा होना. पड़े।. मुझे लगता है इल्तजा को लेकर शायद आपके मन. में थोड़ी नाराजगी है।.
ना नहीं वो बचपना है उसमें वो वो अपने. वो बचपने से बाहर आ जाएगी। ये बचपन. अभी आप उन्हें सीरियस पॉलिटिशियन के तौर. पर लेते हो? वो अपने आप को सीरियस पॉलिटिशियन नहीं. लेती तो मैं क्या लूंगा? पहले तो लोग उसको. ले फिर मैं बात करूंगा।. ओके। अगर सर मान लीजिए पडकास्ट रिवर्स. होता और यहां पर मेरी जगह मोदी जी बैठे. होते और आप होस्ट कर रहे होते। एक सवाल जो. आप मोदी जी से पूछते हैं।. मैं एक सवाल के दो हिस्से कर लेता। क्यों.
किया आपने जम्मू कश्मीर को जो आपने किया. और उसको कब दुरुस्त करने जा रहे हैं आप? आपको लगता है इस लाइफ टाइम में होगा? उम्मीद तो है। वो कहते हैं ना उम्मीद पर. दुनिया कायम है।. गुजरात दंगों के बाद भी सर आप वाजपेयी. सरकार मंत्री थे।. उस वक्त आपने इस्तीफा नहीं दिया। ये सवाल. आपसे. दिया कबूल नहीं हुआ।. ओके. दिया। मैं वाजपेयी साहब से मिला. क्योंकि पार्लियामेंट में वोट होना था.
गुजरात को लेके। हम. और मैं उस वोट में गवर्नमेंट के साथ. हां में हां मिलाने के लिए तैयार नहीं था।. मैंने अबस्टेन करना था और मुझे लग रहा था. कि एज मिनिस्टर अगर मैं अपने गवर्नमेंट के. हक में वोट ना दे सकूं तो मुझे मिनिस्टर. बने रहना नहीं चाहिए। तो मैं वाजपेयी साहब. से मिला। मैंने उनसे कहा कि मैं अबस्टेन. करूंगा। मैं आपके हक में वोट नहीं दूंगा।. और मैं मुझे आप छोड़ दीजिए। मैं इस्तीफा. दे दूंगा।. उन्होंने कहा आप एबस्टेन करिए। मैंने.
एबस्टेन किया। मैं काम पे नहीं गया। मैं. चारप दिन काम पे नहीं गया। फिर उन्होंने. मुझे वापस पार्लियामेंट के अपने दफ्तर में. बुलाया और कहा हम आपका इस्तीफा कबूल नहीं. कर रहे हैं। आप रिजाइन नहीं कर रहे हैं।. आप काम पे वापस आ जाएंगे। मैंने इस्तीफा. दिया था।. आपको अफसोस है इस्तीफा नहीं हो पाया? अब मतलब वही वो इतिहास हैं साइट इज 2020।. इतिहास में जब आप जाते हैं तो फिर सारी. चीजों का आंकड़. तो बहुत चीजों पे है। फिर तो कई कई दो तीन. ऐसे मौके थे।.
जहां आपको लगा कि. देना चाहिए था और उस पर बने बने रहना. चाहिए था।. एज अ पॉलिटिशियन अगर कोई गलती हो जाए कैसे. उसे ओन करते हो अंदर चलता है अपोलॉजी करते. हो. नहीं मैं कोशिश करता हूं जहां तक हो सके. मैं उसको ओन करता हूं और बेहतर है. एक्सेप्ट करते हो पब्लिकली या फिर. पब्लिकली पब्लिकली. बट इस ये वीक वीक पॉलिटिशियन का साइन तो. नहीं है जैसे मैंने एक. अगर है तो मुझे मैं मैं वो वीकनेस. बर्दाश्त कर लूंगा ठीक है.
ओके आपकी फैमिली में सर आपकी फैमिली को. लेकर सबसे गलत गलत अफवाह जो उड़ाई जाती है. जो गलत है और बार-बार सुनाई पड़ती रहती. है। कोई ऐसी. इतने सारे हैं। मैं कहां शुरू करूं? फिर भी जो आपको मैक्सिमम आती रहती है।. बहुत सारे हैं मुझे अब यहां बैठ के. कोई एक टॉप अगर पिक करना हो जिसको आप कहते. हो भाई प्लीज यार बस करो हटाओ। इनफ. नहीं देयर आर टू मेनी बट आई विल आई विल. हैव टू थिंक बिकॉज़ एट द टॉप देयर आर सो. मेनी दैट एट द टॉप ऑफ माय हेड आई कांट.
थिंक ऑफ वन पर्टिकुलर वन। फारुख साहब. ईवीएम को लेकर कई बार डाउटफुल हुए। आप. ईवीएम को लेकर डाउटफुल नहीं रहे। हां।. एसआईआर को लेकर दिल्ली में पूरा बवाल चल. रहा है। आपको लगता है ईवीएम या एसआईआर में. कुछ ऐसा होता है जिससे करंट गवर्नमेंट को. फायदा? एसआईआर के बारे में जो कहा जा रहा है सही. कहा जा रहा है। मैं बिल्कुल 100 फीसदी इस. चीज से सहमत हूं कि यह जो एसआईआर का. सिलसिला चलाया गया है, यह सिर्फ और सिर्फ. बीजेपी को इलेक्शन जितवाने में मदद करने.
के लिए है। जिस तरह हमारा डीलिमिटेशन था।. वह डीलिमिटेशन एक्सरसाइज भी इसी इलेक्शन. कमीशन के तहत कराया गया और उसका मकसद था. कि बीजेपी की मदद हो। तब जाके जो सात. सीटें बढ़ाई गई उन सात सीटों में से छह. बीजेपी ने जीती। तो ये एसआईआर वाला मामला. जो है इसमें जो कहा जा रहा है बिल्कुल सही. कहा जा रहा है।. एसआईआर प्रोटेस्ट को आपकी भी सपोर्ट है? बिल्कुल है। मैं उसमें हिस्सा मैंने उसमें. हिस्सा लिया। मैंने मीटिंगों में हिस्सा. लिया। हमारे एमपीज हर प्रोटेस्ट में शामिल.
हुए। जब हमारी डेलीगेशन इंडिया ब्लॉक की. डेलीगेशन राष्ट्रपति साहिबा को मिलने गई।. मैं उसमें शामिल था। मैंने उस चिट्ठी पर. दस्तखत किए। बिल्कुल 100 फीसदी हम इसके. साथ हैं।. कॉकरोच जनता पार्टी कैसे देख रहे हो आप? क्या आप Twitter पर. है मतलब है कुछ मुझे नहीं लग रहा था कि ये. कर पाएंगे ऐसे। और अह नीट वाले मामले के. बाद मुझे लगा था कि बस अब हो गया। अ.
क्योंकि वो एक मतलब यूथ को एक गैल्वनाइज. करने वाला इशू था। मुझे नहीं लग रहा था कि. एसआईआर पे भी ये कर पाएंगे लेकिन कर लिया।. दूर-दूर से लोग आए इनके प्रोटेस्ट वगैरह. में हिस्सा लेने के लिए। गिरफ्तारियां हो. रही हैं।. कॉकरोच को लेकर एक परसेप्शन सर ये बनाया. जाता है कि ये आम आदमी पार्टी के बैकिंग. से है। इसलिए राहुल जी साथ में नजर नहीं. आते। वो अलग-अलग करते रहते हैं।. लेकिन मुझे यह बताएं ना अगर आम आदमी. पार्टी वाले इतना मोबलाइज कर सकते तो अपने. लिए क्यों नहीं करते? व्हाई मोबिलाइज फॉर.
कॉकरोच एज अ पॉलिटिकल पार्टी नेशनल. कॉन्फ्रेंस इफ आई कैन मोबिलाइज से 1 लाख. पीपल व्हाई विल आई नॉट मोबिलाइज देम अंडर. माय ओन फ्लैग जिससे कि मेरी जो है पोजीशन. स्ट्रेंथन हो। व्हाई वुड आई मोबिलाइज़ फॉर. फॉर एबीसी? वेयर इज़ द पॉलिटिकल सेंस इन दैट? क्योंकि न्यूट्रल. बिकॉज़ अल्टीमेट नो नो वेयर इज़ देयर इज़ नो. न्यूट्रलिटी इन पॉलिटिक्स। अल्टीमेटली यू. हैव टू कन्वर्ट दिस इंटू वोट्स। राइट और. रोंग? ट्रू।.
नन ऑफ दी प्रोटेस्ट मैटर अनलेस वी कैन. कन्वर्ट दिस इन द इन द इलेक्शन इन द इन द. इलेक्शन। दैट्स व्हाई आई डिसएग्री व्हेन. वी से दैट द प्रोटेस्ट द पर्पस ऑफ़ दिस. प्रोटेस्ट इज़ टू ओवर थ्रो द गवर्नमेंट।. नो।. प्रोटेस्ट शुड नेवर बी अबाउट ओवर थ्रोइंग. अ गवर्नमेंट। नॉट इन अ डेमोक्रेसी। दे शुड. बी अबाउट चेंजिंग पीपल्स माइंडस। सो डेट. इन द नेक्स्ट इलेक्शन, दे वोट फॉर यू। एंड. नॉट फॉर द करंट पीपल।. आर यू इंप्रेस्ड विद कॉकरोच? आई आई हैव टू एडमिट इन टर्म्स ऑफ देर.
एबिलिटी टू क्रिएट अ. नैरेटिव एंड देन गेट पीपल टू कम बिहाइंड. दैट नैरेटिव। यू हैव टू यू हैव टू. एक्सेप्ट।. सबसे ज्यादा किसने आपको उसमें मतलब कोई एक. पर्टिकुलर अगर नाम लेना चाहो। कई सारे नाम. जैसे अभिजीत का नाम आया, नेहा का नाम आ. रहा है। एक लड़की बहुत वायरल हो रही है।. इन्हीं दोनों के। इन्हीं दोनों के। एंड. लेट आई मीन लेट्स आल्सो गिव क्रेडिट. व्हेयर इट इज़ ड्यू। अह शुरू में तो हर. किसी ने मजाक उड़ाया। जब पहली बार अभिजीत. आए और उन्होंने जंतरमंतर में वह प्रोटेस्ट.
रखा और लोगों ने कहा अब यहां तो मीडिया. ज़्यादा और प्रोटेस्टर कम। हर किसी को लग. रहा था फेल फ्लॉप।. यूसलेस फिर देखो ना।. वेदर लकी ज्यादा लकी थे या ज्यादा अच्छा. प्लान हुआ? ज्यादा लकी थे। अच्छी प्लानिंग हुई? अच्छा था। यू मेक योर ओन लक। यू मेक योर. ओन लक।. यू मेक योर ओन लक। या सरकार से लोग इतने. नाराज है कि वो जो शेर है कि कारवा जुड़ता. गया लोग आते गए कारवा जुड़ता गया. अगर यही है तो फिर उस कारवा का फायदा हमने.
क्यों नहीं लिया. व्हाई इज इट दैट कॉकरोच जनता पार्टी वाज़. एबल टू मोबिलाइज पीपल टू गेट द एजुकेशन. मिनिस्टर आउट. 11 साल का पहला इस्तीफा. एंड एंड फ्रॉम दिस गवर्नमेंट. उस सर जिसमें राजनाथ सिंह का ओपन. स्टेटमेंट है सरकार में इस्तीफे नहीं होते. इनका इनका ना मैं आपसे मुझे पर्सनली ली एक. बीजेपी के लीडर ने शुरू शुरू में कहा याद. रखना हम वह गलती नहीं करेंगे जो डॉ मनमोहन. सिंह ने किया। आपके कहने पे कभी.
रेिग्नेशंस नहीं होंगे।. राजनाथ सिंह ने ऑन कैमरा कहा सर ये बात. देन इन हालात में एजुकेशन मिनिस्टर का. जाना इट्स नॉट अ स्माल. दैट टू पावरफुल मिनिस्टर. कुछ बदलेगा इससे? डजंट मैटर पावरफुल नॉट. पावरफुल। द फैक्ट इज़ द मिनिस्टर वेंट।. कुछ बदलेगा इससे? बिकॉज़ अगर इसको इलेक्शन. के पॉइंट ऑफ़ व्यू से हम देखें।. आने वाले स्टेट्स में दैट टाइम विल टेल।. एंड दैट अ लॉट विल डिपेंड ऑन अस। एंड. व्हेन आई से अस आई मीन एज़ अ ब्लॉक। सीट.
शेयरिंग नेगेशन।. जैसे आपने कहा ना कि आप समझ लेते हो कमरे. में आके।. नहीं स सीट शेयरिंग डिस्कशन। सी इट्स वन. थिंग इज़ टू हैव दिस क्राउड। द सेकंड थिंग. इज़ टू देन कन्वेंस दिस क्राउड दैट दे नीड. टू वोट। एंड वोट अगेंस्ट द बीजेपी।. हाउ डू वी मैनेजर आवर सीट शेयरिंग? विल वी. हैव अ रिपीट ऑफ द डसू इलेक्शन जहां हम. इंटरनली फिर एक दूसरे को काटना शुरू कर. गए।. जीता ही तो हार गया।. सो एंड परसेप्शन वाइज़ इट इट इट इट इट.
मैटर्स।. कॉकरोच प्रोटेस्ट के फौरन बाद डोसू का. इलेक्शन होना जो एबीवीपी दोबारा जीतती है. लाइक इट और नॉट इट इट डस ऑल्टर परसेप्शंस. ना सो वी विल हैव टू वी हैव टू आई मीन. व्हेन आई से वी आई मीन एज अ ब्लॉक इंडिया. ब्लॉक वी विल हैव टू अप्रोच द फॉरकमिंग. इलेक्शंस वैरी केयरफुली. सर कांग्रेस. मोदी के सामने या रेस्ट ऑपोजिशन सपोर्टिंग. कांग्रेस ज्यादा इंपैक्टफुल कौन है. क्योंकि इन दिनों में भी कांग्रेस.
इन दिनों यू नो तो कांग्रेस एंड अपोजिशन. इज़ मोर इंपैक्टफुल। गवर्नमेंट इज़ एंड फॉर. द फर्स्ट टाइम परहप्स इन मेनी इयर्स. गवर्नमेंट इज़ ऑन द बैकवर्ड।. राहुल गांधी का ग्राफ बढ़ा है आपको लगता है. इस बीच में? आपको नहीं लग रहा मुझे तो लग रहा है।. मैं तो आपसे सवाल पूछ रहा हूं।. नहीं मुझे तो लग रहा है। और शायद इससे. इंकार करना. गलत होगा।. राहुल गांधी, क्या सरकार ज्यादा गंभीरता. से ले रही है? डेफिनेटली।. कैसे आपको लग रहा है? आप देखिए किस तरह. रिएक्ट करते हैं। सीनियर मिनिस्टर्स को अब. लाते हैं रिएक्शन देने के लिए।.
पहले तो अपने वो जूनियर स्पोक्सपर्सन से. ही वो मजाक उड़ा देते थे। नॉट एनी लॉन्ग।. आई थिंक आई मीन. सक्सेस बिल्ड्स कॉन्फिडेंस।. एंड द सक्सेस दैट कांग्रेस इज़ हैविंग इन. टर्म्स ऑफ़ मोबिलाइजिंग पीपल ऑन दीज़ इशूज़।. पिछले दिनों जो दिल्ली में कांग्रेस का वो. जो इंडिया ब्लॉक का प्रोटेस्ट मार्च रहा.
सुप्रीम कोर्ट का वाज़ नॉट स्मॉल बाय एनी. स्ट्रेच ऑफ़ इमेजिनेशन।. हार्ट ऑफ दिल्ली में इतने लोग इकट्ठे करना. इस बात के बावजूद के आसपास आपके पास कोई. रियासत नहीं है। यू डोंट हैव अ स्टेट. गवर्नमेंट। नॉट इन हरियाणा नॉट इन पंजाब. नॉट इन राजस्थान व्हिच आर द स्टेट्स. बॉर्डर इन नॉर यूपी।. योर क्लोजेस्ट स्टेट गवर्नमेंट इज़ हिमाचल।. हिमाचल से तो आपने लोग नहीं लाए। मतलब यह. कि कुछ तो है।. एक इंटरेस्टिंग रैपिड फायर खेला सर मैंने।.
अगेन थोड़ा इंटरेस्टिंग है। योगी. आदित्यनाथ, हेमंत विश्व शर्मा, सम्राट. चौधरी, शिवेंदु अधिकारी सबसे सेुलर. मुख्यमंत्री कौन है? [हंसी]. नन ऑफ़ देम। एंड आई डोंट थिंक दे वांट टू. बी कॉल्ड सेकुलर। मुझे लगेगा मुझे लगता है. अगर मैं इनमें से किसी को सेुलर. मुख्यमंत्री कहूं तो कल कहेंगे मैंने उनको. शायद. उल्टा सीधा कहा नन ऑफ देम. योगी आदित्यनाथ ममता बनर्जी अरविंद. केजरीवाल नरेंद्र मोदी के सामने ज्यादा.
दबदबे से कौन या ज्यादा बेहतर ऑप्शन कौन. एज अ एस फॉर प्राइम मिनिस्टरशिप. यू कैन से और अपोजिशन के नेता के तौर पर. भी बेटर ऑप्शन राहुल गांधी ममता बनर्जी. अरविंद केजरीवाल. व्हिच थ्री. राहुल गांधी. राहुल. यू आप जो भी आप कहे. हम. देयर आर ओनली टू पार्टीज इन द कंट्री विद.
अ पैन इंडिया प्रेजेंस कम ज्यादा बट पैन. इंडिया प्रेजेंस बीजेपी. कांग्रेस एंड बीजेपी द रेस्ट ऑफ अस वी हैव. डलूजनस ऑफ़ ग्रैंडर. आई एम टेलिंग यू वी कंट्रोल वन स्मॉल. पार्ट समवेर बट वी थिंक वी आर नेशनल लीडर. वी आर नॉट. हम्म. वी आर नॉट नेशनल लीडर्स बिकॉज़ वी डोंट रन. अ नेशनल पार्टी वी कैन ओनली बी नेशनल. लीडर्स इफ वी हैव अ नेशनल पार्टी वी कांट. बी नेशनल लीडर्स आई एम नॉट अ नेशनल लीडर. आई एम कनफाइंड टू जम्मू एंड कश्मीर आई मे.
हैव इल्यूज ऑफ बीइंग अ नेशनल लीडर बट आई. एम नॉट सो लेट्स एक्सेप्ट आवर शॉर्ट. कमिंग्स राहुल गांधी हेड्स और वेल ही इज़. पार्ट हेड इज़ खरगे साहब बट राहुल इज़ अ. पार्ट ऑफ अ नेशनल पार्टी दैट गिव्स गिव्स. हिम एड एडवांटेज नोबडी एल्स है. राहुल गांधी ज्यादा बेहतर इंसान है ज्यादा. बेहतर पॉलिटिशियन. नो ही इज़ अ गुड ह्यूमन बीइंग बट ही इज़ अ. ही इज़ अ फास्ट इंप्रूविंग पॉलिटिशियन. एवरीबडी सेस कि राहुल गांधी इज़ अ ग्रेट. ह्यूमन बीइंग क्यों कहते हैं लोग ऐसा मैं.
तो मतलब मैं मिला नहीं हूं तो मैं आपसे. पूछ सकता हूं बहुत लोग कहते हैं कि बहुत. अच्छे इंसान है वो किस बात पे कहते हैं या. ये सिर्फ कहने के लिए कह देते हैं. नहीं नहीं कहने के लिए नहीं यू सी व्हेन. ही द वे ही कंडक्ट्स हिमसेल्फ वि पीपल द. वे ही टॉक्स टू पीपल. आई मीन यू सिट एंड टॉक टू हिम।. ही ही गोज़ इंटू सॉर्ट ऑफ़ डेप्थ एंड डिटेल. दैट अ लॉट ऑफ़ अस डोंट हैव टाइम फॉर। आई. डोंट आई डोंट गो इनटू डेप्थ एंड डिटेल एज. मच एस ही डस एंड आई गो इंटू मोर देन अ लॉट.
ऑफ़ अदर पीपल।. पॉलिटिक्स में लक ज्यादा मायने रखती है या. फिर टैलेंट? नाउ यू मेक योर लक। टैलेंट मैटर्स बट. टैलेंट इन द रोंग प्लेस एट द रोंग टाइम इज. ऑफ़ नो यूज टू यू। जैसे यह सवाल मैंने. इसलिए पूछा अलताफ बुखारी को आप सीएम बनाने. वाले थे। फिर शायद फैक्ट्स मशीन बंद हो गई. थी।. लक [हंसी]. वेदर ही हैड द टैलेंट ऑ नॉट वी नेवर गॉट. टू फाइंड आउट. ये सच था।. क्या वो सत्य सत्यपाल मलिक साहब ने प्लग.
निकाला. पुल द प्लग एंड स्विच्ड ऑफ द फैक्स मशीन. अगर फैक्स वो उसमें भी इसी यू मेक योर लक।. अगर अल्ताफ बुखारी साहब ने वह चिट्ठी हमसे. लेके जहाज चार्टर करके जम्मू गए होते और. सत्यपाल मलिक साहब के हाथ में वह चिट्ठी. थमा दी होती व्हाट वुड सत्यपाल मलिक हैव. डन पुट हड्स बिहाइंड ह बैक एंड सेड मैं इस. चिट्ठी को पकडूंगा ही नहीं आप कुछ भी करो. वी हैड टू टेक द लेटर बैक सी को डन प्लग. सो यू मेक योर लक.
1987 का चुनाव सर बहुत लोग कहते हैं. कश्मीर वहां से बदला आप मानते हो कि. कश्मीर कश्मीर 84 से बदला जब मेरे वालिद. साहब की हुकूमत को गिराया गया।. 84 यानी आप रहे होंगे 13 साल के। 13 14. साल के हैं।. आई वास 14. 14. कश्मीर वहां से बदला। क्योंकि अगर वो नहीं. हुआ होता मेरे वालिद साहब को राजीव फारूक. अकॉर्ड करने की जरूरत नहीं पड़ती। राजीव. फारूक अकॉर्ड नहीं होता तो 87 के इलेक्शन. नहीं होते। 87 के इलेक्शन नहीं होते तो यह. इल्जाम नहीं लगता।.
आप 14 साल की उम्र में जब आपके पिताजी की. कुर्सी जो थी गुलाम मोहम्मद शाह साहब ने. जो आपके रिलेटिव थे ली थी।. माय फादर्स एल्डर सिस्टर्स हस्बैंड. फूफा जी आपके. बहुत कुछ देखा मैंने सियासत में।. 14 साल के बच्चे पे क्या असर पड़ता जब आप. देखते हो कि आपके रिश्तेदार आपकी पीठ पर. छुरा घोंपते हैं।. असर पड़ता है। पड़ेगा ही। उसके साथ-साथ.
हमने वो लोग आते-जाते देखे जो. अच्छे वक्त में आ जाते हैं, बुरे वक्त में. गायब हो जाते हैं। इसलिए जब मेरे अब. साथियों को यह देख के हैरानगी होती है।. मैं कहता तुम लोग किस बात पे हैरान हो।. मैंने तो यह 14 साल की उम्र से मैं देखता. आया हूं। उतार. चढ़ाव उतार चढ़ाव. बट पॉलिटिकल रिश्तों को आप अहमियत देते हो. जैसे पॉलिटिकल रिश्तों से जो पर्सनल. रिश्ते बनते हैं या उन पर भरोसा नहीं करते.
कुछ कुछ रिश्ते पॉलिटिकल ही रहते हैं और. कुछ रिश्ते पर्सनल पॉलिटिकल से पर्सनल हो. जाते हैं कुछ रिश्ते बदकिस्मती से. पॉलिटिकल से पर्सनल और फिर पर्सनल से. दोबारा पॉलिटिकल और और खराब. जैसे सवाल सर सर मैंने इसलिए पूछा क्योंकि. आपके फूफा जी ने पिताजी की कुर्सी ली। फिर. चंद्रशेखर जी के हवाले से कहीं लिखा गया. था कि फारुख साहब इंदिरा जी का खुद को. तीसरा बेटा कहते थे। और उन्हीं के दौर में. यह पूरी घटना हुई।.
अब मैं अब ये इंदिरा जी कहती थी या नहीं. कहती थी मुझे नहीं मालूम। बट हां हुआ।. करीबी रिश्ते थे क्योंकि. तो उसमें जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो ये. क्या रिश्तों से विश्वास उठाती हैं या ये. समझदार आप लोग होते हैं कि निजी रिश्ते. अलग हैं सियासी रिश्ते अलग हैं. नहीं ये मतलब कुछ लोगों से तो ये उम्मीद. नहीं की जाती ना. कुछ लोगों से तो इस तरह की उम्मीद नहीं की. जाती. बैन भी तो चार कर छोड़ देती है.
लेकिन मजबूरियां बन जाती हैं. 87 के चुनाव में धांधली हुई थी. अब ये. ये बहुत चर्चा फिल्मों में दिखाते हैं. क्योंकि हमने हमने तो फिल्में देखी है सर. आप लोग फिल्में बहुत देखते हो मैंने देखना. बंद कर दिया क्योंकि अब फिल्में कम और. प्रोपेगेंडा ज्यादा अ. अब अब मेरे लिए इस सवाल का जवाब देना. चलिए फिल्मों पे आते हैं छोड़ देते हैं. कश्मीर फाइल देखी आपने. ना सुना. सुना तो सुना तो हर किसी ने. देखिए आपने प्रोपेगेंडा शब्द कह दिया एक. वर्ड यूज़ कर दिया कि प्रोपेगेंडा बनाया.
जाता है बहुत लोगों को लगता है कि उसमें. काफी कुछ रियल था जो YouTube पर अवेलेबल. है घटनाओं के कॉन्टक्स्ट में कई लोगों ने. कहा कि बहुत ही हाइपर प्रोपगेंडा वाली. फिल्में थी जो करंट गवर्नमेंट को सूट करती. है। हम. कश्मीरी पंडित का इन सबके बीच में एक सर्च. है। दे आर हैप्पी कि चलो 25 30 साल में. पहली बार कोई बात कर रहा है। जैसे आपने. ये भी सही नहीं है। यह कहना कि किसी ने. बात नहीं की उनके लिए यह गलत है।. उनके लिए कब बात नहीं हुई।. कब उनको वापस लाने की कोशिश नहीं की गई? मैं तो यह कहूंगा कि जितनी कोशिश डॉ.
मनमोहन सिंह साहब के 10 साल की हुकूमत में. की गई उतना इस मौजूदा हुकूमत के दौरान. नहीं की गई है। जो नौकरियां रिजर्व हुई जो. ट्रांजिट अकोमोडेशन बना जो बाकी हालात. बनाए गए उनके वापसी के लिए वो तो इस. हुकूमत ने भी नहीं किया। तो यह कहना कि 30. साल 35 साल के बाद हमारी बात हो रही है।. यह गलत है। हां 35 साल के बाद किसी. बॉलीवुड वाले ने पिक्चर बनाया। वो भी तोड़. मरोड़ के मतलब अपने अंदाज से पेश करना।.
लेकिन यह कहना कि उनके लिए बात नहीं हुई. या किसी ने कोशिश नहीं की। यह गलत है।. बट जिसमें बहुत सारे कश्मीर क्योंकि मैं. टीवी में रहा तो उस बीच में खबरें बहुत. ज्यादा थी तो बहुत सारे लोगों से मिलते. थे। तो उनका ये वर्जन था कि हम दुनिया के. पहले ऐसे लोग हैं जो अपने ही मुल्क में. रिफ्यूजी बन के रह गए। बाकी दुनिया में. कहीं ऐसा नहीं है। अपने मुल्क से बाहर. जाना पड़ता है। हम ना यहां के हो पाए ना. वहां के हो पाए। हम जाना चाहते हैं बट. जानते हैं कि जाएंगे फिर मार दिए जाएंगे।. सेलेक्टिव किलिंग हो रही है। यहां हमारी. पहचान अलग है। अभी भी कश्मीरी पंडित.
कश्मीरी ब्राह्मण साहब हैं। नौकरी मिल गई. है। बट वो जो पहचान जिसका जिक्र शुरू में. आपने किया था कि पहचान मिसिंग है हमारी।. घर हमारा मिसिंग है। पता है वो मेरा घर है. बट मैं शिफ्ट नहीं हो सकता। आप चीफ. मिनिस्टर क्योंकि हैं अभी पहले भी रहे. हैं। आपकी फैमिली रही है। ये कभी ठीक नहीं. हो सकता? होना चाहिए। होना चाहिए। लेकिन. मैंने हमेशा कहा है कोई कश्मीरी पंडित. वहां से भाग के निकल गए. क्योंकि वह अपने आप को अशुरक से समझना. शुरू कर दे गए अनसेफ। देयर सेंस ऑफ़.
सिक्योरिटी और सेफ्टी वाज़ टेकन अवे फ्रॉम. देम। दे विल ओनली गो बैक व्हेन दैट सेंस. ऑफ़ सेफ्टी और सिक्योरिटी इज़ रिस्टोर्ड टू. देम। एंड अनफॉर्चुनेटली दिस गवर्नमेंट हैज़. नॉट डन दैट। वोटों के लिए इस्तेमाल जरूर. किया गया। फिल्में बनाई गई। बाकी सारा कुछ. किया गया। लेकिन वापस ले जाने के लिए एक. डबल पैसे का काम नहीं किया।. आपके फादर की सरकार थी। जगमोहन साहब उस. टाइम राज्यपाल थे।. मेरे फादर की. उसके थोड़े समय पहले. वो वो छोड़ गए थे तब तक।. थोड़े समय पहले तक और फिर जगह जगमोहन साहब.
थे।. फिर जगमोहन साहब थे।. आपको लगता है वो विषय हैंडल नहीं किया गया. उस वक्त क्योंकि जो हालात हम देखते हैं. बहुत स्केरी लगते हैं। मतलब जो घटनाएं हम. पढ़ते हैं अखबारों में, पेपरों में बहुत. डरावनी लगती हैं। किसी के साथ भी हो। आप. आप क्योंकि उस वक्त आप. आप ये हर कोई यह भूल जाता है कि उस वक्त. कश्मीरी पंडितों को छोड़ के जाना पड़ा।. सही बात है। लेकिन सिर्फ वही नहीं थे. जिन्होंने छोड़ के जो छोड़ के गए। कश्मीरी. सरदार, कश्मीरी मुसलमान छोड़ के गए वहां. पे। वो सारे लोग जिनको हिंदुस्तान के साथ.
आइडेंटिफाई किया गया। उन सबको छोड़ के. जाना पड़ा। हम सब निकल गए।. अब मैं मानता हूं कि इनके लिए वापस जाना. बाकियों के मुकाबले ज्यादा मुश्किल रहा. है।. और इसलिए मैंने कहा कि मौजूदा हुकूमत ने. इनकी वापसी के लिए 10 पैसे का काम नहीं. किया है अभी तक। उल्टा कुछ लोग जिनको हमने. दोबारा बसाया था वहां पे वो भी उठ के भाग.
गए। जो दो-ती साल पहले जो टारगेटेड. किलिंग्स हुई. चाहे वो दवाई के दुकान में का मालिक बिंदु. या हमारे कृष्णा ढाबा के मालिक कई और बैंक. में काम करता हुआ मुलाजिम सरकारी दफ्तर. में बैठे हुए मुलाजिम जिस तरह उनको टारगेट. किया गया दो-ती साल पहले. ये कैसे ठीक हो सकता है सर. मैंने जैसे आपसे कहा कि जब तक इनको वो. सेंस ऑफ सिक्योरिटी वापस लौटाई नहीं दी. जाती.
पर ये कैसे आएगी आप मतलब आपसे बेहतर बंदूक. शांत बंदूक शांत करें।. यह कैसे होगी? हां। वही तो यह फिर हम आ गए ना उस सवाल. पे। हमें तो कहा गया था कि 370 हटाने से. सारी बंदूके शांत होंगी।. यूटी का दर्जा देने से बंदूके शांत होंगी।. हुए? अगर हुए तो ये लोग वापस क्यों नहीं. गए? कहीं ना कहीं जो मुल्क को कहा गया और जो. असलियत है, दोनों में फर्क रहा।. पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए। क्योंकि.
लेकिन. महबूबा मुफ्ती साहब कहती थी महबूबा मुफ्ती. कहती रही है मैं आपका वर्जन समझना चाह रहा. हूं सिर्फ बातचीत करना पड़ेगा. लेकिन बातचीत के लिए एक माहौल बनना है और. माहौल बनाना अकेले इस मुल्क की जिम्मेदारी. नहीं है।. ताली दो हाथ से बजती है। एक हाथ से आप. सिर्फ चुटकी बजाते हो।. हां, मैं मानता हूं कि हिंदुस्तान और. पाकिस्तान को पड़ोसी के नाते.
बैठकर एक दिन बात करनी होगी।. लेकिन उस बातचीत के लिए माहौल तैयार करना. होगा। माहौल तैयार करने में पाकिस्तान को. अपना रोल अदा करना होगा।. पहलगाम के हमले होते रहे और फिर हम कहें. कि ना बातचीत होगी। कैसे होगी? जब भरोसा. नहीं होगा।. वो भरोसा कायम करना होगा। उसके लिए. पाकिस्तान की हुकूमत ने भी अपना रोल। हम. यहां अपनी हुकूमत पे जो है दबाव बनाए. रखेंगे। हम यहां बातचीत के लिए जो है एक.
एक. कांस्टीटूंसी जो है वो तैयार करने की. कोशिश करेंगे। लेकिन इसी तरह हमारे पड़ोसी. मुल्क को भी अपना रोल अदा करना होगा।. मैंने फारुख साहब को कई बार राम भजन गाते. जब सुना तो मैं बड़ा क्यूरियस हुआ कि अरे. इतना मधुर कैसे वो गा रहे हैं लिरिक्स के. साथ। फिर मैं कहीं पढ़ रहा था। आपके दादा. की आत्मकथा आतिशय चिनार। उसमें कहीं शायद. जिक्र था कि आपके भी पुरखे कहीं बहुत पहले. शायद कश्मीरी ब्राह्मण रहे हैं। हम. ये सच है. वो तो आमतौर पे जो कश्मीरी मुस्लिम है वो.
कन्वर्टीज हैं।. सारस्वत ब्राह्मण. हम. कश्मीर उसमें हम. इस्लाम जो है इट वाज़ एक्सपोर्टेड इंटू. कश्मीर सेंचुरीज एगो फ्रॉम सेंट्रल एशिया।. दैट्स व्हाई सो मच ऑफ़ आवर कल्चर रिेंबल. सेंट्रल एशिया। सो मच ऑफ़ आवर हैंडीक्राफ्ट. रिेंबल सेंट्रल एशिया। सो अ लैंग्वेज देयर. इज सो मच दैट यू कैन फाइंड वर्ड्स इन कॉमन. फ्रेजेस इन कॉमन विद वर्जन. देयर इज़ अ लॉट कल्चरली दैट लिंक्स कश्मीर.
टू सेंट्रल एशिया. तो फिर जब एक ही सब रहे हैं तो फिर ये. हिंदू मुसलमान की सियासत करते. हम हम हिंदू मुसलमान की सियासत नहीं करते. ना अब जिस पार्टी से मैं ताल्लुक रखता हूं. हमें विरासत में शेख अब्दुल्ला ने नारा. दिया है शेर कश्मीर का क्या इरशाद हिंदू. मुस्लिम सिख इत्तहाद हम हिंदू मुस्लिम. सियासत जम्मू कश्मीर सियासत हम यह सियासत. नहीं करते।. जैसे हम लोग ना नॉर्थ में रहते हैं हिंदी. पट्टी में रहते हैं। यहां पर एक परसेप्शन. बनाया जाता है कि एक जमाने में बड़े मंदिर.
हुआ करते थे। लोग जाते थे फिर सब टूट गए।. रिस्टोरेशन का काम नहीं चला। इज इट ट्रू? कि कश्मीर में जो पुराने मंदिर थे उनके. रिस्टोरेशन के लिए हेल्प नहीं की गई।. क्योंकि एक परसेप्शन यहां. नहीं वो तो काफी काफी रिस्टोर हुए। काफी. प्रोटेक्ट भी रहे। ऐसा नहीं है कि सारे के. सारे मंदिर जो है वह गिराए गए, तोड़े गए, जलाए गए। कुछों को नुकसान हुआ। यह सही है।. उनमें से कई सारे जो हैं वो रिस्टोर हुए, कुछ नहीं हुए।. लेकिन आज भी आप रूरल कश्मीर जाएं। कुछ ऐसे.
इलाके जहां आपको एक भी हिंदू नजर नहीं. आएगा। लेकिन वहां मंदिर होगी। और मंदिर की. रखवाली जो है वहां का नजदीकी कोई मुसलमान. जो है वो कर रहा होगा।. बट क्या अगर हालात अच्छे हो जाए तो यह. टूरिज्म के पॉइंट ऑफ व्यू से एक बहुत. अच्छा ऑप्शन नहीं है कि लोग एक्सप्लोर. करने जाएंगे? आए किसने रोका? आना चाहिए।. लेकिन फिर वही सारी जड़ है कि शांति पीस. बंदूक. ऐसा भी नहीं है ना कि हर गांव में हर घर. में बंदूक पड़े हुए हैं। जहां-जहां है.
वहां मौजूदा हुकूमत को उनसे निपटा निपटना. चाहिए। नहीं होता उनसे तो हमें दे दीजिए. ना। हमने इन हमने अच्छे हालात करके दिए. इससे पहले भी फिर करके दे देंगे।. आप देखिए ना पिछले सालों में सबसे बड़े. हमले जो हुए वो तब हुए जब हमारी हुकूमत. नहीं थी। या तो पुलवामा वाला या पहलगांव. वाला। तो आप यह कैसे मान के चलते हो कि. जनाब हमसे नहीं होता तो यह लोग कर लेंगे।. अब यह तो एक ये तो एक स्टडी मैं भी पढ़.
रहा था कि जब जब बीजेपी सरकार में इस तरह. हमले तभी हुए हैं। नहीं तो कई बड़े हमले. भी तब हुए हैं। चाहे वो पार्लियामेंट अटैक. हुआ हो 2000. नहीं नहीं मैं सिर्फ कश्मीर की बात कर रहा. हूं।. नहीं तो ये ये अब उसको इसको देखने के दो. नजरिया आ सकते हैं। एक होता. नहीं मैं एक ही नजरिए से देख रहा हूं कि. आपने जिम्मेदारी ली. और आप उस जिम्मेदारी को निभा नहीं सके।. मैं सिर्फ वही मैं उसी नजरिए से देख रहा. हूं और किसी नजरिए से नहीं। अब इस पर वो. कहते हैं कि बदमाश बच्चे फिर परेशान करना. शुरू करते हैं। वैसा ही कि मॉनिटर हटा दो. तो फिर वो परेशान करना शुरू करवा देते.
हैं।. ये तो बहानाबाजी है।. ये तो फिर आप बहाने. क्या आपको लगता है इसके पीछे क्या वजह. लगती है आपको? लापरवाही. सक्षम नहीं है।. लापरवाही रही। तभी तो जाके ये हमले हुए।. कहीं ना कहीं वो हम हमारे हम हमारी हम चूक. गए।. बॉल से हमारी नजर हट गई।. ठीक है। अगर सर आपका जम्मू कश्मीर के चीफ. मिनिस्टर हैं। आजकल मैं हेमंत शर्मा को.
देखता हूं। वो असम को बहुत प्रमोट करते. रहते हैं। साइकिल पे घूम रहे हैं। इधर कर. रहे हैं। एक तो मुझे बड़ा कूल आईडिया लगा।. आप जम्मू कश्मीर टूरिज्म को प्रमोट करने. के लिए या जम्मू कश्मीर बुलाने के लिए अगर. कोई बच्चा आपसे पूछे कि सर आप जम्मू. कश्मीर के चीफ मिनिस्टर हो और अगर मुझे. कश्मीर जाना हो, तो किन पांच जगहों पे. जरूर जाना चाहिए। और क्या चार पांच चीजें. हैं जो खाने में जरूर ट्राई करनी चाहिए।. सो द चीफ मिनिस्टर आप क्या बताएंगे उसे. यहां जरूर जाना ये जरूर ट्राई करना।. चलिए आ जाइए जम्मू कश्मीर कश्मीर से शुरू. करें।. श्रीनगर आ जाइए। श्रीनगर से आप गुलम्ग.
जाइए। गुलम्ग से आप पहलगाम देख लीजिए। और. भी बहुत जगह हैं। लेकिन फिलहाल क्योंकि. आपके पास वक्त कम है। घूमने के लिए आपके. पास इतनी फुर्सत नहीं है। जब आप दूसरी बार. आओगे मैं आपको और जगह ले जाऊंगा। फिर. पहलगाम से आप बाय रोड निकलिए। जम्मू की. तरफ जाइए। पत्नी टॉप से होते हुए जाएं।. पत्नी टॉप में भी अच्छे पहाड़ हैं।. खूबसूरत इलाका है। फिर जम्मू शहर जाइए।. जम्मू शहर को हम मंदिरों का शहर कहते हैं।. वहां मंदिर हैं। वहां रिलीजियस टूरिज्म. है। वहां बॉर्डर हैं। अगर आपको बुलावा आता.
है तो जब आप पत्नी टॉप से नीचे जम्मू की. तरफ आ रहे हो। जरा सा डायवर्जन लेकर कटरा. जाइए। कटरा से आप माता के माता के दर्शन. करिए और माता के दर्शन करके आप सही सलामत. निकल जाइए। खाने की चीजें अब मुझे यह नहीं. पता आप वेजिटेरियन हो, नॉन वेजिटेरियन हो।. अगर नॉन वेजिटेरियन हो तो आपकी चांदी है।. क्योंकि मीट खाने में हमारा मतलब हमारा. कोई मुकाबला नहीं है। हम ब्रेकफास्ट में. मीट खा सकते हैं, लंच में, डिनर में और.
सोते हुए भी अगर आप हमें मीट सूंघा दें तो. हम शायद सोते-सोते भी मीट खा लेंगे।. कश्मीरी खाना हर कोई जानता है गुस्ताबा. रिश्ता। वो छोड़ दीजिए। मैं आपसे कहूं कि. हम एक मीट का सालन बनाते हैं आलू बुखारे. के साथ। आप वह आलू बुखारा मीट खाइए चावल. के साथ और एक हम लहवी कबाब मच्छ कबाब हम. उसको कहते हैं। मुझे यह दोनों चीजें पसंद. है। यह दो चीजें आप खाइए। फिर जब आप हाईवे. से जम्मू जा रहे हो मेहरबानी करके पीड़ा.
में एक जगह है पीड़ा। अब मैं आपको यह कहता. कि आप खजूरिया के यहां राजमा खाइए। लेकिन. वहां हर ढाबे [हंसी] का नाम खजूरिया है।. तो अगर आप मुझसे पूछें तो मैं अपने खजूरिए. के ढाबे का पिन आपको भेज दूंगा। आप अपनी. गाड़ी वहां रोकिए। राजमा, चावल, देसी घी, अनारदाना, चटनी और प्याज। बस आपको और कुछ. नहीं चाहिए। खाइए राजमा चावल चलिए जम्मू।. जम्मू में आपको हम डोरी खाना खिला लेंगे.
और आपको वहां से रवाना कर देंगे।. दिस वन मोर प्लेस आई वांट टू ऐड। शिव. खेड़ा शिवखोड़ी. हां शिवखोड़ी. सी बिकॉज़ बिकॉज़ यू टोल्ड मी फाइव प्लेसेस. सो आई हैड टू लिमिट. जब पहली बार मैं सर वहां गया था मैं बड़ा. हैरान था क्योंकि वो पहाड़ों को जिस तरह. काट के बनाया था और पहली बार का मेरा जो. एक्सपीरियंस है वो बड़ा कमाल का था. देयर आर लॉट ऑफ़ पीपल हु दे डू ट्विन दर्शन. माता के यहां बुलावा आने के बाद वो. शिवखोरी दर्शन करते हैं फिर निकल जाते. हैं।. जम्मू कश्मीर टूरिज्म में सर अमरनाथ का.
बहुत बड़ा रोल रहा है। अमरनाथ यात्री आते. हैं। इस बार क्योंकि शिवलिंग बहुत जल्दी. मेल्ट हो गया। कई लोग ग्लोबल वार्मिंग और. बहुत सारे फैक्टर्स मानते हैं क्योंकि. टूरिज्म का एक बहुत बड़ा सोर्स अमरनाथ की. यात्रा रही है।. रही थी रहती थी अब नहीं। अब उनको इतना. मतलब बांध के रखा हुआ है सिक्योरिटी की. वजह से हम उनको दाएं बाएं जाने नहीं देते।. तो जितना पहले टूरिज्म का रहता था उतना. नहीं रहता आज। बट एज अ चीफ मिनिस्टर. क्योंकि आपके स्टेट में एक इतना. इंपॉर्टेंट टूरिस्ट रिलीजियस प्लेस है।.
क्या ये परेशान नहीं कर रहा था आपको कि. अमरनाथ का शिवलिंग इतनी जल्दी इस बार. अब शिवजी ने इतनी देर दर्शन दिए। आप क्या. कर सकते हैं? बट शिव जी को इंसान परेशान भी तो कर रहा. है ना हमने इतना कंस्ट्रक्शन कर दिया।. ओ अब वो तो शिव चीफ मिनिस्टर शिवजी तक है. ना वो कितनी देर रहना चाहते हैं। इसमें आप. इसमें आप छेड़छाड़ नहीं कर सकते हो। यह. शिवलिंग आपके और मेरे हाथ का बना हुआ नहीं. है। यह खुद बना।. इसको अगर हम अब इंसान के शक्ल में अब. बनाना शुरू करें तो यह छेड़छाड़ होगा और.
यह. नहीं नहीं मैं उस ग्लोबल वार्मिंग की बात. कर रहा हूं कि हमने इतनी दुकानें बना दी. जैसे केदारनाथ में हुआ था। इतना. कंस्ट्रक्शन कर दिया हमने कि हमने प्रकृति. से छेड़छाड़ की।. तो आप अब फिर हम आ जाते हैं रिलीजियस. फ्रीडम पे।. बचाने का फिर तरीका रहता है कि आप नंबर कम. कर. नंबर कम कर दीजिए।. आप नंबर कम करोगे तो फिर लोग शिकायत. करेंगे कि देखिए जनाब आप हमें आने नहीं दे. रहे हो।.
कंस्ट्रक्शन. जैसे मैंने अभी हिमालय को लेकर ही पढ़ा था. कि वहां पर भी बहुत सारा लोगों ने टेंट. बना दिया। गर्मी के लिए साधन कर दिए। वॉटर. कर दिया। तो उससे बर्फ पिघलने लगी। जब अभी. नेपाल में बाढ़ आई थी। बहुत सारी स्टोरीज़. हम कर रहे थे। सो. लेकिन अब एक बैलेंस एक बैलेंस बनाए रखना. होगा। जिसमें हम लोगों के लिए वहां. पहुंचना आसान करें। हम. लेकिन. नेचर प्रकृति के साथ छेड़छाड़ जो है वो कम. हो ताकि शिवजी रहे और ज्यादा टाइम तक रहे।.
इस बारे में कभी चर्चा नहीं हुई सेंट्रल. गवर्नमेंट से कभी भी।. किस बारे में? अमरनाथ को लेकर कि. इसमें हम इसमें हम ज्यादा दखल नहीं देते।. हम मतलब कहते तो इतना ही है कि जितना जो. सस्टेनेबल रहे वहीं तक हमें करना चाहिए।. मैं कश्मीर से जब गया डले पे पहली बार. सेकंड टाइम तो ऐसा नहीं हुआ मेरे साथ। बट. फर्स्ट टाइम जब मैं गया तो उन्होंने मुझे. बहुत लाट प्यार दिया कावा पिलाया। बट एक. सवाल पूछा था। आप कश्मीर से हैं? क्या कभी.
दिल्ली में आपको किसी बच्चे ने कहा कि. उससे ये सवाल पूछा गया? आप. नहीं लेकिन मुझे मालूम है। बीच-बीच में. कभी कबभार ये सवाल पूछा जाता है।. ये परेशान करता है? अब इतनी चीजें हैं. या आपको लगता है कि हर जगह कुछ दो चार लोग. होते हैं तो इनको गंभीरता. लेकिन हर किसी को आप इस चीज के लिए कसूरवा. ठहरा नहीं सकते हो। एक आध है तो क्या. करोगे? आपने सर एंड में हम आ गए हैं। कहा था कि. 70,000 लोग नशा करते हैं। 500 लोग करीबन.
हेरोइन लेते हैं। ज्यादातर नौजवान कश्मीर. में यह नशा इतना कैसे बढ़ गया? सरहदों के वजह से कुछ जो इस तरह की चीजें. पंजाब से होते हुए जम्मू कश्मीर भेजी जाती. हैं और कुछ हमारे पिछले 30 35 साल का जो. एक अंधेरा रहा उसका भी नतीजा है।. मेंटल इलनेसेस मेंटल प्रेशर पोस्टोमेटिक.
स्ट्रेस डिसऑर्डर ये मतलब ये ये एक असलियत. है। इसके बारे में शायद हम उतनी बात करते. नहीं है जितना करना चाहिए।. चलिए डरावना. लेकिन होगा नहीं होगा? बिल्कुल है। एक एक. पूरी एक नई जनरेशन जो है वो तबाही की तरफ. जा रही है। इसमें हमारी मुकम्मल कोशिश है. कि इसको कम किया जाए।. आहिस्ता आहिस्ता इसको रोक लगाए। इस पे रोक. लगे। रिहैबिलिटेशन का काम हो।.
कोशिश तो की जा रही है और जहां तक मैं. जानता हूं कुछ हद तक नंबर्स जो है वो कम. हो रहे हैं लेकिन इसमें टाइम लगेगा।. पहलगाम के बाद बहुत सारे पाकिस्तानी. नागरिकों को वापस भेज दिया गया। कई ऐसे भी. थे जो 2020 साल से यहां रह रहे थे। ये. फैसला सही था या गलत था सर? क्योंकि कई कईयों के यहां रुकने का रास्ता. आपने. निर्दोष लोगों को किसी और के जुर्म के लिए. सजा देना ये कभी सही नहीं हो सकता।. हम अब देखिए पहलगाम के बाद अचानक आपने कुछ. लोगों के मकान उड़ा दिए। यह कहते हुए कि. उनका कोई रिश्तेदार मिलिटेंसी में है। फिर.
क्या साबित हुआ कि पहलगाम करने वाले में. से एक भी कश्मीरी नहीं था।. अब मैं जुर्म करूं उसका सजा मेरा बेटा. भुगते।. हम. आप जुर्म करो उसकी सजा आपके घर वाले भुगते. हैं।. हम. ये इंसाफ नहीं है। ये रेट्रिब्यूशन है। वो. गलत है। जिनका जिसका जिनका कसूर है. जिन्होंने जुर्म किया हो सजा उनको दो।. आप बिग बॉस देखते हो सर? ना. आप कश्मीर के काजी इस वक्त छाए हुए हैं।. ओ हां तौकीर.
जो इससे पहले वो सिंगिंग कॉमटीशन. हां अरजीत सिंह को हराकर उन्होंने जीता. था।. हां मुझे याद है. आजकल वो बहुत छाए हुए हैं।. को मैंने एक तो कॉन्सर्ट्स में देखा काजी. तौकीर कोटी अच्छा हां एक कॉन्सर्ट हुआ था।. हां।. आजकल वो बहुत छाए हुए हैं अपने।. मैंने अखबार में पढ़ा। कहीं अच्छे खासे. झगड़े भी चल रहे हैं हाउस के अंदर उसकी वजह. से। मुझे तो लग रहा है शायद वो जीत कर आ. जाएंगे क्योंकि इस वक्त सबसे पॉपुलर वो. है।. गुड. काफी जिक्र कर रहे हैं. पहले रांची ट्रॉफी जीते अब हम बिग बॉस बिग. बिग ब्रदर बिग बिग बॉस बिग ब्रदर विलायत.
में बिग बॉस जीते हैं तो बड़ी अच्छी बात. है उनको शायद पिछले दिनों मैंने पढ़ा शायद. सलमान ने किसी वजह से टोका था. अपने किसी हाउसमेट के किसी लेडी के बारे. में कुछ गलत. मतलब वो कुछ-कुछ करते भी थे किसी कान में. फूंकते फूंकते थूक दिया कुछ कर दिया था. ऐसा बट ओवरऑल ओवरऑल ही इज़ डूइंग वेरी गुड. और उन्हें लोग पसंद कर रहे हैं मैं भी. उन्हें पसंद कर रहा हूं। बिग बॉस थोड़ा. बहुत जितना मैंने देखा. इसमें पब्लिक वोटिंग. हां हां. बेचारे मुझे डालना चाहिए [हंसी].
और काफी खूबसूरत आवाज भी उनकी है रफी साहब. गाते बहुत. रफी साहब के एक दो गाने उन्होंने गाए जो. बहुत-बहुत वायरल हुए. गाते बहुत अच्छा है. और अपने जमाने में अरजीत सिंह को हरा कर. आए थे वो. हम मुझे वो याद है मुझे वो अच्छी तरह से. याद है क्योंकि अचानक वो जीते और किसी को. मतलब पता ही नहीं था कि ये होने वाला है।. बट ऐसे जो बच्चे कश्मीर से निकल रहे हैं. जो इंडियन टीम में खेलने आ रहे हैं।. आप रणजी ट्रॉफी जीत रहे हैं। अरसे बाद आप. जीत कर आए या काजी का हम जिक्र कर रहे. हैं। ऐसे और बच्चे निकलना कश्मीर के लिए. कितना.
निकलते रहते हैं लेकिन बहुत. बाकी मुल्क में इन लोगों के लिए जगह. ढूंढना बहुत मुश्किल हो जाता है।. आप तीन चारों के नाम दे रहे हो जिनके लिए. शायद इतना मुश्किल नहीं रहा होगा। आमतौर. पर जो बच्चे वहां से बाहर आते हैं उनसे. पूछिए उनको किन हालात का सामना करना पड़ता. है। मेरे खुद के नेफ्यूस. जो श्रीनगर से बाहर निकले कॉलेज में पढ़ने. के लिए जो अब एक बड़े शहर में नौकरी कर. रहे हैं बड़े कंपनी के लिए पूछिए ना उनके.
लिए कितना मुश्किल था किराए पे मकान लेना. ये मैंने सुना. मकान मकान मालिक तैयार होता था जब तक कि. वो अपना नाम बता देते थे पहले तो मुस्लिम. नाम सुन के आधा तो कट जाता था जब वो. कश्मीर सुनते थे तो पूरा ही कट जाता था. ये कहने की बात है कि इनको आना चाहिए और. मुल्क में जो. असिमिलेट होना चाहिए, गुलमिलना चाहिए।. बट ये कॉमन लोगों में डर क्यों है? इसका. इसका फैक्टर क्या ये भी हो सकता है जैसे. दिल्ली में बम ब्लास्ट हुआ।.
फिर पुलिस वाले तंग करते हैं ना? अच्छा पुलिस वाले।. फिर पुलिस वाले आपको पहलगांव और दिल्ली के. बम ब्लास्ट के बाद क्या हुआ? गुड़गांव. पुलिस ने क्या किया? एक एक फॉर्मल नोटिस. निकाला सारे हाउसिंग कॉलोनीज़ को कि आपके. यहां जितने भी कश्मीरी मुस्लिम रह रहे हैं. उनके नाम और डिटेल्स दे दीजिए।. अब कौन मकान मालिक कहेगा ना कि मैं पुलिस. के साथ पंगा लूंगा रहने दो मैं अपना जो है. फ्लैट इनको किराए पर दूंगा बट छोड़ दो. अगर आप मकान मालिक होते तो आप क्या करते.
इसमें फिर. मेरे लिए तो मैं खुद मुस्लिम हूं मैं दे. देता ना मेरे लिए मैं अपनी जगह मैं अपने. आप को आपकी जगह नहीं रख सकता ना आई कांट. आई कांट अस्यूम व्हाट आई वुड डू इफ आई वास. नॉट अ मुस्लिम. सो ये वैसा ही दर्द है जैसे कश्मीरी. पंडितों का कश्मीर में और कश्मीरी. मुसलमानों का बाकी जगह पर हो रहा है यह. समझूं मैं? नो आई मीन देयर आर देयर आर सिमिलरिटी. कुछ मतलब कुछ कॉन्टेक्स्ट की बात कर रहा. हूं मैं। बड़े पैमाने पर नहीं बट जैसे वो. दर्द आपने कहा कि एक परिवार को मुसीबत का.
सामना करना पड़ रहा है कि पुलिस ने पूछा. उससे. नो, आई एम सेइंग दैट योर पॉइंट वाज़ दैट, व्हाई डोंट मोर पीपल लाइक काज़ी, तौकीर एंड. अदर्स कम एंड अह इमर्ज इन द रेस्ट ऑफ़ द. कंट्री। आई एम सेइंग दैट यू हैव टू लुक एट. इट फ्रॉम दोज़ यंगस्टर्स पॉइंट ऑफ व्यू हु. फाइंड इट सो डिफिकल्ट। अब हमने कश्मीरियों. के लिए जामिया मिलिया में हॉस्टल बनाया।. आज उनके लिए जगह ही नहीं है उस हॉस्टल. में।.
बिकॉज़ वी वांट टू मेक लाइफ इज़ियर फॉर देम. टू फाइंड प्लेस टू स्टे। दे दे डोंट गेट. स्पेस इन दैट हॉस्टल एनी लॉन्ग। इट्स बीन. गिवन आउट इट्स बीन गिवन एल्सवेयर।. सो देयर आर रियल प्रॉब्लम्स दैट पीपल फेस।. तो ये बातें आप रखते नहीं हो जो आपकी. मीटिंग होती होगी ठीक है. बार-बार रखते हैं बार-बार. योर चीफ ऑफ द आरएसएस. मोहन भागवत. व्हाट डिड ही से इन अमेरिका.
व्हेन ही टॉक्ड अबाउट मुस्लिम्स. उनका कहना और फिर उस पे किसी के तरफ से. अमल होना जमीन आसमान का फर्क ना अब उनके. लिए कहना अमेरिका में बहुत आसान के. मुस्लिम शुड नॉट बी ट्रीट अ सेकंड क्लास. सिटीजन आई डोंट रिमेंबर ह एक्सक्टैक्ट. वर्ड्स बट वर्ड्स टू दैट इफेक्ट. मतलब उन्होंने घुल मिलकर रहने की बात की. थी कि यही भारत यही भारत यही भारतीय थे. हां बट इट्स वन थिंग फॉर हिम टू से क्वाइट. अनदर फॉर इट टू बी इम्प्लीमेंटेड ऑन द. ग्राउंड. बट आप ये मान ये कह रहे हो कि आपको ये.
लगता है कि इंडियन मुस्लिम सिटीजन जो है. वो सेकंड क्लास सिटीजन है।. नो बट दे फेस मोर डिफिकल्टीस।. वेदर वेदर यू वांट टू गिव अ टैग ऑफ अ. सेकंड क्लास सिटीजन ऑर नॉट आई एम नॉट. गोइंग टू गेट इंटू दैट बिकॉज़ देन दैट विल. बिकम द हेडलाइन। सो आई आई लीव दैट बट द. फैक्ट इज़ दैट दे फेस मोर डिफिकल्टीज़ देन. देन अदरवाइज़। अब देखिए अब हमारी तीन बसों. पे पथराव हुआ। तीन बसों पे एक पे तो चलिए. मैं शुक्रगुजार हूं हरियाणा के चीफ. मिनिस्टर सैनी साहब का। उन्होंने इसमें.
कार्रवाई की और दो लोग गिरफ्तार हुए।. लेकिन उसके बाद एक और बस पे पथराव हुआ. हरियाणा में और कल रात को पंजाब में एक बस. पे पथराव हुआ क्योंकि उसमें जम्मू कश्मीर. का नंबर. दे. बट पंजाब में तो बीजेपी नहीं है।. पंजाब में तो बीजेपी नहीं. डजंट स्टॉप पीपल हु वांट टू डू दिस थिंग्स. ना वहां इलेक्शन आने वाले हैं। हु नोस. व्हाट द पर्पस इज द फैक्ट इज दैट द फैक्ट. इज दैट फॉर व्हाटएवर रीज़ अब.
सैनी साहब ने कहा था मुझे के जो पहला हमला. हरियाणा में हुआ वो कोई बस की पार्किंग पे. कोई झगड़ा हुआ तो चलिए उसको छोड़िए लेकिन. उसके बाद जो दो हुए में तो कोई पार्किंग. का पंगा नहीं था।. समथिंग इज नॉट राइट।. मैं हैप्पी नोट पे आता हूं। आकिब नबी डार. या काजी तौकीर जैसे नए बच्चों का आना जो. पैन इंडिया जिनके फैंस बन रहे हैं। जैसे. मैं आकिब नबी को बहुत पसंद करता हूं। जब. वो दिल्ली में खेलते हैं या वो टेस्ट. मैचेस में इनफैक्ट मेरी आरपी सिंह से. लड़ाई भी हो गई थी जो हमारे सिलेक्टर हैं. आई वास वाचिंग अ मैच एंड ही केम टू मी.
लखनऊ एंड ही सेड कि यार तुम लोग बहुत. क्रिटिसाइज करते हो तो मैंने कहा इतना. अच्छा बॉलर है रणजी जीत कर रहे हैं आप. खिलाते नहीं हो ही सेड इस बार मिस हो गया. था अगली बार तक आ जाएगा और ये मैं ऑन. कैमरा कह रहा हूं बिकॉज़ नाउ ही सिलेक्टेड. सो इनका पैन इंडिया लोगों में फैन बनना. क्या ये एक पॉजिटिव साइन नहीं है कि शायद. नजरिया. इट्स अ गुड थिंग. जैसे काजी बहुत वायरल हो रहे हैं अभी हर. तरफ. अच्छा है होना चाहिए अच्छा. इससे इससे शायद बाकी मुल्क में लोगों को. पता चलेगा कि हम भी नॉर्मल हैं।. हम सब मतलब कोई मतलब.
तबाही और बर्बादी के इरादे से नहीं घूमते. हैं। हम सब मतलब मुल्क के खिलाफ नहीं हैं।. हम सब वो लोग नहीं है जो कहते हैं जनाब के. अ 47 में जो हुआ गलत हुआ। हम में से कुछ. ऐसे लोग हैं जो कहते हैं ना कि घुलमिल के. अच्छी तरह से अमन में रहना चाहिए। प्यार. मोहब्बत में रहना चाहिए।. क्रिकेट मैच देखते हो आप? राझी ट्रॉफी के बाद मौका नहीं मिला।. वैसे देखते हो पसंद है?
कभी कबभार. कोईl टीम पसंद है आपको? नहीं. मैंने काफी टाइम से आईपीएल का मैच नहीं. देखा।. कभी कोई टीम पसंद थी? हां, देखता था मैं। राजस्थान रॉयल्स का. देखता का देखा करता था और बीच-बीच में. मुझे कोलकाता का भी एक चसका पड़ा।. मेरे को लग रहा है शाहरुख खान आपको बहुत. पसंद है।. हां। ठीक है, वो अच्छे आदमी हैं। अच्छे. हैं मतलब इसलिए कि मैं जब भी उनसे मिला. मुझे कभी ये नहीं लगा कि वो बड़े स्टार. हैं। मैं लद्दाख में उनसे एक बार मिला था।. आप भी तो चीफ मिनिस्टर हो आप?
नहीं नहीं उनके साथ जो थे इतने नखरे कि. मैं कान पकड़ के भागा वहां से। कोई ना. उनको कोई चीफ मिनिस्टर भी पसंद नहीं।. लेकिन शाहरुख को लगता है कि मतलब उनके पैर. जो हैं वो जमीन पे टिके हुए हैं।. कोई खिलाड़ी पसंद रहा कभी? बहुत ज्यादा।. क्या? क्रिकेट टीम के. क्रिकेट के।. हां।. जैसे हम बात करते हैं विराट की, रोहित की, सचिन की।. मुझे विराट कोहली मुझे विराट कोहली का. अच्छा रहा।. क्या पसंद था विराट में आपको? नॉट जस्ट ह बैटिंग बट आल्सो हिज कैप्टेंसी. एंड ही इज़ स्टैंडिंग अप फॉर व्हाट इज.
राइट।. सो यू आर सॉफ्ट मैन बट यू लाइक अग्रेसिव. पीपल।. नो नो आई कैन बी वैरी अग्रेसिव। ओ आई कैन. बी वै मुझे बहुत जल्दी गुस्सा आता है।. मुझे जब पहाड़ा चढ़ जाता है तो बहुत चढ़ जाता. है।. तो इट्स लाइक विराट। विराट भी ऑफ द. रिकॉर्ड। वैसे मैच के बाहर बहुत सॉफ्ट. इंसान है। मैच के पीक में बहुत अग्रेसिव. होता है। आप भी ऐसे ही हो कि जब पीक किसी. काम में हो तो बहुत अग्रेसिव. यू कांट यू कांट. अग्रेशन इज़ इट्स इट कांट बी.
मैन्युफैक्चरर्ड. इट्स इट्स इदर देयर और इट्स नॉट। सो. समटाइम्स आई एम समटाइम्स आई नॉट।. डू यू अब्यूज? अब्यूज क्या बात है। [हंसी]. होता है कई बार. निकल जाता है।. निकल जाता है।. हां हां. डू यू? हां हां. इंग्लिश पंजाबी कश्मीरी. हिंदी. बोर्डिंग स्कूल में पढ़ा हूं ना आप क्या. बात कर रहे हो आर नेम्स वर अब्यूजस मोर. देन आवर नेम्स लेट्स नॉट इवन गो देयर. कभी किसी ने डांटा कहीं गलत जगह निकल गया.
एम्बरेसमेंट हुई. नहीं आई एम अ बिट मोर केयरफुल. जैसे योगी जी का एक बड़ा फेमस वायरल होता. है ये. मेरे फादर का फेमस पार्लियामेंट में हुआ. [हंसी]. मैं आपके चैनल पे दोहरा ही नहीं सकता. लेकिन YouTube पे होगा डेंटिस्ट को जाना. था उनको निकाल लीजिए कभी आ जाएगा ऐसे योगी. जी का. व्हाट माय फादर सेड ऑन ह वे टू द डेंटिस्ट. सो मेरा शुक्र है ना असेंबली में ना. पार्लियामेंट में अभी तक अब क्या पता इसके. बाद क्या होगा. अगर आपकी फैमिली पर कोई फिल्म बने तीन. पीढ़ियों को लेकर शेख साहब फारुख साहब आप.
पर तीनों का रोल कौन निभाएगा. अब कद के वजह से शेख साहब का तो रोल. अमिताभ बच्चन साहब को करना होगा हाइट उनकी. और पर्सनालिटी फारुख माय फादर्स रोल. दैट एज. ऋषि कपूर होते तो अच्छा करते।. ऋषि कपूर साहब हां कर लेते बट हाइट थोड़ा. फिरोज़ खान वुड हैव डन अ गुड जॉब विथ माय. फादर्स रोल। फिरोज़ खान.
दिलीप कुमार दिलीप कुमार जी वुड हैव बीन. समबडी हु डू माय फादर्स रोल।. पर मेरे पे मैं आप पे छोड़ता हूं।. कोई बॉलीवुड एक्टर से रिलेट करते हो. मेरा. रणवीर कपूर कैन डू. रणधीर और सैफ. सैफ यस सैफ अली खान. सैफ वुड डू. यस आई थिंक हां वो आप जस्टिफाई करेंगे. स्पेशली यंग सैफ जो थे. हम तो. एंड एंड आई हैव अ वेरी स्ट्रेंज कनेक्शन.
विद सैफ. द सीट आई ऑक्यूपाइड इन सनार वास वेकेटेड. बाय सैफ. इंटरेस्टिंग. वो मुझसे से पहले स्कूल में एडमिट हुए. लेकिन दो तीन महीने के बाद छोड़ के विलायत. चले गए। तो उनकी जगह जो खाली हुआ मैं गया।. सो दैट इज द कनेक्शन।. नहीं आप लोग सुनने लगोगे भी। सर जाते-जाते. आपकी प्लेलिस्ट के पांच गाने. हम. आपकी प्लेलिस्ट के पांच गाने जो आप सुनते. हो, गुनगुनाते हो।. देयर आर लॉट। सो आई वुड बी एबल टू बट दे.
आर ऑल. 70 हिंदी।. म्यूजिकल हो आप? आई लाइक म्यूजिक।. आई लाइक म्यूजिक, इंग्लिश।. जैसे मेरी थेरेपी म्यूजिक एंड कॉफी या चाय. होती है कि मुझे ये ये चीजें मिल जाती।. आई कांट गेट इनू अ कार और नॉट प्ले. म्यूजिक।. हां।. अ ड्राइव अ ड्राइव मीन्स म्यूजिक। उसमें. भी फिर मेरे वालिद साहब नाराज होते हैं।. बिकॉज़ इन द कार मोस्ट ऑफ़ माय टाइम इज़ इट्स. इंग्लिश म्यूजिक। इट डिपेंड्स ऑन माय मूड. फॉर हिंदी बट नॉट ऑलवेज। लेकिन जैसे ही वो. गाड़ी में बैठ जाते हैं अगर अंग्रेजी कोई.
शुरू। इस बकवास के अलावा कुछ नहीं है। कुछ. और चला। सो देन [हंसी]. आई हैव स्पेशल प्लेलिस्ट डेडिकेटेड फॉर. माय फादर सो. बट फिर भी अगर हिंदी के पांच गाने आपको. बताने जो आप अक्सर सुनते रहते हो थोड़ा. आपको समझने के लिए. देयर इज द सॉन्ग फ्रॉम आंधी तेरे बिना. जिंदगी. जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं. दैट वुड प्रोबेब्ली बी अमंग्स माय. देन.
आई एम सो बैड वि नेम्स दैट्स माय. प्रॉब्लम। आई आय कैन हियर द सॉन्ग इन माय. हेड। आय कैन पिक्चर द आय कैन पिक्चर द. वीडियो। नो आई लेफ्ट माय मोबाइल आउटसाइड।. इफ यू गिव माय मोफ समबडी ब्रिंग्स माय. मोबाइल आई विल टेल यू माय सॉन्ग।. या या मैं मंगाते रहा हूं। लेट समबडी गिव. यू माय फ़ोन। आई थिंक आई पाउडर्ड इट ऑफ। सो. इज देयर एनीथिंग एल्स विल कम बैक टू द. सॉन्ग।. मैं एक रैपिड फायर है। आखिरी पॉलिटिकल. रैपिड फायर दो चार सवाल ही है।. चलो दे दो। बिकॉज़ इट विल टेक टाइम फॉर माय. फ़ोन। टू. थोड़ा परेशान करने वाला होगा। आ गया फ़ोन।.
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ओके नो आई हैव अ डिफरेंट गुजारिश।. ओके दिस ये तो. ये जावेद अली. जावेद अली और सोनू निगम के आवाज में है।. बट इट्स अ न्यू गुजारिश।. ओके आई हैव दिस गुजारिश।. आई विल फाइंड दैट वन।. इट्स अ ब्यूटीफुल। ये नया सॉन्ग आया जिसको. मैं आजकल लूप मोड पे सुन रहा हूं।. ओके। चलिए. जाने से पहले सर क्योंकि आप सियासी इंसान. है। थोड़ा परेशान करते हैं आपको।. अभी तक परेशान नहीं किया गया।. ये आखिरी परेशानी है। जिन्ना या सावरकर. हिंदुस्तान को किस सोच ने ज्यादा परेशान. किया?
इट्स टफ बिकॉज़ फॉर डिफर डिफरेंट रीज़ंस बोथ. इक्वली बोथ डिवाइडेड द कंट्री वन डिवाइडेड. इट फिजिकली अनदर डिवाइडेड इट इमोशनली बोथ. डिवाइडेड कंट्री. आपातकाल 1975 इमरजेंसी या 2019 कश्मीर की. बंदी लोकतंत्र को ज्यादा चोट किसने. पहुंचाई? आई वुड आई मीन फॉर मी फॉर प्योरली.
सेल्फिश रीज़ इट वुड बी 2019 बिकॉज़ इट वाज़. आई मीन इट वाज़ सिंगुलरली फोकस्ड ऑन जम्मू. एंड कश्मीर।. दिल्ली की दखल अंदाजी या जम्मू कश्मीर के. नेताओं की नाकामी जम्मू कश्मीर की बुरी. हालत के लिए ज्यादा जिम्मेदार कौन है? किसने कहा हमारी हालत बुरी? जितने भी शिकायत. कहां क्या बात करते हो जनाब यही तो मुसीबत. है ना आप बाकी मुल्क के रियासतों के.
मुकाबले हमारी हालत उनसे कई गुना ज्यादा. बेहतर है। आप ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स. हमारी देख रहे हैं। वी आर बेटर ऑफ देन अ. लॉट ऑफ़ लार्ज डेवलप्ड स्टेट्स।. इस बात के बावजूद के मरकज की हुकूमत की का. दखल रहा या हमारी नाकामी रही। वी आर अ लॉट. बेटर देन अदर स्टेट्स। सो आई एम नॉट इवन. गोइंग टू एक्सेप्ट दिस प्रमाइस।. सबसे अच्छा कश्मीरी शब्द जो हर हिंदी. बोलने वाले को सीखना चाहिए।. पेथराट पेट.
क्या मतलब. मीन्स लेट थंडरफॉल ऑन यू. यू से दैट व्हेन यू आर नॉट हैप्पी विथ. समबडी. पैथ्राट. 10 साल बाद मे यू बी स्टक बाय लाइटनिंग. दैट सॉर्ट ऑफ़ थिंग. भाड़ में जाओ. समथिंग भी हां इफ इफ यू आर नॉट हैव ए पेट. 10 साल बाद आप कहां पर होंगे? कुर्सी पर. किताब लिखते हुए, कुर्सी पर या किताब लिखते हुए, किताब. लिखते हुए? छोड़ देंगे सियासत।. मैं किताब लिख लूंगा थोड़ी देर के लिए।.
मैं तो माना था 25 साल तक आप बने रहने. वाले हो।. नहीं ना वो तो मैंने कहा होगा ही नहीं।. आखिरी बार दिल खोल के कब हंसे थे आप? आखिरी बार दिल खोल के कब हंसा था।. इसी प्रोग्राम में। हंसता तो मैं हूं. बीच-बीच में। कभी कबभार रोता हूं हंसता. हूं। इसी दिन को फिर से जीना चाहोगे. कोई दिन लाइफ का जो आपके जेहन में है कि. यह फिर से जीना है. नहीं वो दिन आएगा जब आएगा तो. देश के बाकी स्टेट्स पे नजर रखते हो. चुनावों पे.
आपका क्या आकलन है यूपी जैसे स्टेट को. लेकर अखिलेश जी योगी. ओ. इसमें जो मेरा दिल कहता है और जो दिमाग. कहता है दोनों में एक लड़ाई चल रही है।. दिल अखिलेश जी कह रहा है दिमाग कह रहा है. योगी जी. वही मुसीबत है।. अब अब मुझे जो हालात बन रहे हैं मुझे लग. रहा है कि दिल और दिमाग एक ही होंगे और. दिल जीतेगा।. अखिलेश यादव से रिश्ते हैं आपके? हां मतलब रिश्ते. मतलब ऐसा नहीं कि मैं फोन उठा के उनको.
WhatsApp करता हूं लेकिन मतलब ठीक-ठाक. मेरे बच्चों का उनके साथ अच्छा है। जनरेशन. थोड़ा स्किप हुआ।. ओके। ही इज़ अ गुड ह्यूमन बीइंग।. नहीं। कोई ऐसा अपोजिशन में नेता है जो. आपको बहुत अच्छा इंसान लगता है, बहुत. टैलेंटेड लगता है और आपको लगता है यार. मेरी बातचीत नहीं है अपोजिशन. बेचारे को तबाह कर दोगे नाम ले लूंगा उसको. पार्टी वाले निकाल देंगे तो छोड़ दो यहां. अपोजिशन की तारीफ करना ना वो शायद उसकी. खलासी होगी.
लास्ट क्वेश्चन सर डेमोक्रेसी में सबसे. इंटरेस्टिंग कौन है पॉलिटिशियन या जनता. मालिक जनता लेकिन इंटरेस्टिंग पॉलिटिशियन. आप तो कह रहे थे पॉलिटिशियन दिहाड़ी मजदूर. होते. नहीं है बिहारी मजदूर लेकिन है. इंटरेस्टिंग अगर देखना अगर हम इंटरेस्टिंग. नहीं होते आप क्या इतना वक्त मेरे साथ. जाया करते. कितना हमें दो ढाई घंटे हो गए होंगे. आई हैव नो आईडिया बट आई एंजॉयड दिस. कन्वर्सेशन. दो घंटे तो हो गए. शायद हां. हां तो अगर हम इंटरेस्टिंग नहीं होते इतना.
वक्त तो आप मुझे नहीं देते. बट मुझे खुशी है और मैं दर्शकों से एंड. में कहना भी चाहूंगा कि आमतौर पर सियासी. कौम मुझे बहुत ही डरी हुई कौम लगती है. मैंने बीते कुछ सालों में बहुत ही कम. सियासी से इंटरव्यूज किए हैं और उसकी वजह. यह रही है कि वो डरते बहुत हैं।. आपने मुझसे एक बार भी नहीं पूछा। आपकी टीम. ने मुझसे एक बार भी नहीं पूछा कि आप क्या. पूछने वाले हैं और ना आपको पता था और जिस. पॉडकास्ट में नेता नहीं पूछते उस पॉडकास्ट. में स्पेशली मेंशन कर देता हूं मैं ताकि. जनता को पता रहे। सो मैं इस दिलेरी के लिए.
आपको मुबारकबाद देता हूं।. मैं आपसे एक चीज कहूं मुझे जैसे मैंने कहा. 28 साल हो गए ये करते हुए।. आज तक मैंने कभी कोई ऐसा इंटरव्यू नहीं. किया है जिसमें मैंने पूछने वाले से यह. पूछा हो कि आप मुझे क्या पूछने वाले हो या. कभी मैंने उनको यह कहा हो के यह मत पूछो. या पूछने के बाद उनसे यह कहा हो कि. मेहरबानी करके यह काटो। मैंने एक आध सवाल. पे शिकायत जरूर की हो। फिर उसके बाद उन पे.
छोड़ा कि वह क्या करना चाहते हैं या नहीं।. लेकिन शुक्र है आज तक मैंने कभी मतलब आपके. काम में दखल नहीं दिया। मैंने हमेशा यह. समझा है कि आपका काम है सवाल पूछना और. मेरा काम है उनको डज करना।. वैसे पूछा तो आपसे किसी ने ये भी नहीं सर. इश्क वाला लव हमने पूछ लिया।. आपने पूछ लिया और मैं कहां तक फड़फड़ा. गया? क्या बात की बात है।. कोई नहीं आपके चेहरे के गुलाबी पन्न ने. काफी कुछ कह दिया। वो एक मुसीबत है। मेरे.
कान लाल हो जाते हैं।. वो मेरे कान लाल हो जाते हैं।. तो दुनिया आपसे नर्वस होती है थोड़ा सा. आपको। [हंसी]. अच्छा सर बट आई एम हैप्पी। सो मच टू लर्न. फ्रॉम यू। थैंक यू सो मच सर।. प्लेजर. सेम यस सर।.