Unplugged FT. NV sir ( Jeetu bhaiya) | Kota Factory | IIT Prep| IIT Coaching | Motion Education |
कोटा फैक्ट्री में जीतू भैया ने बहुत सारा. ज्ञान बच्चों को दिया था कि वहां पहुंचने. के बाद भी क्या करो ना करो कोटा आने वालों. को भी मोंटी भैया क्या ज्ञान देंगे मैं. बच्चों को बोलता हूं कि प्यार मोहब्बत. धोखा है पढ़ ले बेटा मौका. है तो लड़को को बोलता हूं कि अगर तुम 15. से 19 साल के लड़के हो और तुम्हें सुंदर. कन्या देख के कुछ ना हो तो तुम लड़के नहीं. हो ये होना तय है मोंटी भैया को जीतू भैया. ज्यादा फायदा हुआ जीतू भैया को मंटी भैया. से मेरे हिसाब से मोंटी भैया को बहुत. फायदा हुआ जो फिल्म आई थी कोटा फैक्ट्री. वो हमने देखी और उसमें बहुत ही खूबसूरती.
से बताया गया क्या करना है क्या नहीं करना. है जीतू भैया और फिजिक्स कभी गलत नहीं हो. सकते इतने सालों के एक्सपीरियंस के बाद आप. कोटा जाने वाले बच्चों को या उन तमाम. बच्चों को जो कोटा नहीं जा रहे आप क्या. बताओगे कि क्या करें या क्या ना करें एक. पवित्र धाम फिर फैक्ट्री और अब एक ऐसी जगह. जिसको लेकर कई बार डर लगता है कि यार अपना. बच्चा भेजे या ना भेजे मैं मानता हूं कुछ. अप्रिय घटना हुई है शायद मीडिया की वजह से. या किसी भी वजह से आप बोल सकते हैं उसे. थोड़ा हाईलाइट ज्यादा करा जा रहा है. कोचिंग इंस्टीट्यूट जो है वो बिहार में भी.
है पटना में भरे पड़े हैं में भरे पड़े. हैं गोरखपुर में भरे पड़े हैं कोटा इतना. स्पेशल क्यों हो गया कोटा में क्या ऐसा है. जो बाकी जगह नहीं कोटा में आपको जान के. आश्चर्य होगा कि ऑटो वाले को भी चैप्टर्स. के नाम याद होंगे फिर ये जो नंबर ऑफ केसेस. बढ़े हैं जिनको लेकर चिंताएं बढ़ने लगी तो. ये केसेस फिर क्यों बढ़ गए क्या बदल गया. कोटा में एक बच्चा मासूम सा जो अपने छोटे. शहर में 90 पर 80 पर मार्क्स ला रहा था. अच्छा था कॉन्फिडेंस स्टेट अच्छा चल रहा. था फिर वो यहां से कोचिंग सेंटर में जाता. है और वहां पर एक घटना आती है कोटा आने की. राइट एज क्या है बच्चे को लगता है कि नहीं.
मुझे इंजीनियर बनना है मुझे डॉक्टर बनना. है जब उसका मन कहता है कि मैं बनना चाहता. हूं तब आना चाहिए अब क्लास सिक्स सेवेंथ. के या फिफ्थ क्लास के बच्चे को क्या पता. कि उसको लाइफ में क्या बनना है अच्छा आप. क्या ये मानते हैं कि अगर आप 11थ में. तैयारी करने गए हैं तो आपको अपना स्कूल. वहां जरूर करना चाहिए हर साल कितने बच्चे. आते हैं तैयारी आईटी एग्जाम कितने बच्चे. देते हैं हर साल 14 लाख बच्चे देंगे 14. लाख बच्चे द सिलेक्ट कितने होते हैं करीबन. 30 से 40 हजार बच्चा चला जाता है 30 से 40. हजार बच्चे और 141 लाख बच्चे आते हैं यानी. कि तो 13600 बच्चे ऐसे हैं जो हर साल. क्वालिफाई नहीं कर पाते हा नहीं कर पाते.
आपको लगता नहीं कि वो जो कहावत है ना घर. के रहे ना घाट के शिक्षा का स्तर बहुत. नहीं बढ़ा है सर जो बढ़ना चाहिए था अच्छे. हॉस्पिटल में आईसीयू में 50 पेशेंट एक साथ. होते हैं उनकी टेक केयर एक साथ हो रही. होती है इसको इमेजिन करिए क्लास में 50. बच्चे पर हर पेशेंट का इलाज अलग होता है. ऐसा शिक्षा में क्यों नहीं हो सकता टोटली. 14 लाख दे रहे तो हर बच्चा जो आता है उसे. लगता है मैं टॉपर हूं वो यहां आता है तो. उसे असलियत महसूस होती है क्योंकि रियल. कंपटीशन है आपकी नजर में सक्सेस की. डेफिनेशन क्या है 100 में से 95 लोगों के. पास दुनिया में काम हो अगर ऑन एन एवरेज आप.
देखोगे पर 95 में से सिर्फ और सिर्फ पाच. या 10 लोग ऐसे होते हैं अपने जीवन में वो. काम वो करते हैं जो वो करना चाहते चाहते. हैं मैं चाहता हूं तुम वो बनो खुशी अपने. आप आ जाएगी असली शिक्षा का मतलब है कि. सीखने की प्रक्रिया को सिखाना असली शिक्षा. है बहुत बड़ी लाइन हमने बोली आजकल मोदी जी. अलग-अलग फील्ड से अलग-अलग लोगों को चीफ. मिनिस्टर बना देते हैं या मंत्री बना देते. हैं अगर आपको एजुकेशन मिनिस्टर बना दिया. जाता है तो क्या बदलो आप बहुत हैवी सवाल. हैसे.
एक जमाना था जब कोटा आईआईटी की तैयारी. करने वाले बच्चों के लिए एक पवित्र स्थान. था फिर एक जमाना आया जब कोटा एक फैक्ट्री. बन गई जहां पर कोचिंग इंस्टिट्यूट का. बोलबाला रहा और थोक के भाव बच्चे निकलने. लगे लेकिन बीते कुछ सालों में कोटा से जो. खबरें आती हैं वह परेशान करने वाली होती. हैं सवाल पैदा करती हैं और इन सवालों के. बीच में इन परेशान करने वाली खबरों के बीच. में हमें लगा कि क्यों ना किसी टीचर से.
बात की जाए क्यों ना यह समझा जाए कि कोटा. में क्या रिश्ता होता है एक बच्चे का एक. कोचिंग इंस्टीट्यूट से क्या जिंदगी होती. है कैसे अलग-अलग कोचिंग सेंटर जो है उनकी. अलग-अलग कहानियां होती और क्या करना है से. ज्यादा जरूरी कोटा जाकर क्या नहीं करना है. वो हमारी कोशिश है कि उन बच्चों को सिखाएं. क्योंकि यह वीडियो देश दुनिया में देखा. जाएगा और शायद अगर वोह एक जिंदगी भी हम. बचा ले गए तो इस वीडियो को बनाने का मकसद. सफल हो जाएगा मेरे साथ कोटा से मोशन. एजुकेशन से नितिन सर हैं नितिन जी आपका. बहुत-बहुत स्वागत है.
और हमने अपने ओपनिंग में कहा भी कोटा. फैक्ट्री का जिक्र किया एक वेब सीरीज भी. आई थी कोटा फैक्ट्री जिसमें जबरदस्त. किरदार था जीतू भैया का एक ऐसा किरदार. जिसने जिससे हर इंसान रिलेट कर पाता है कि. यार अगर आपने तैयारी की तो ये हमारी कहानी. है जीतू भैया और फिजिक्स कभी गलत नहीं हो. सकते वो किरदार एक्चुअली नितिन सर परही है. और उस किरदार के बारे में और पढ़ सकते हैं. लेकिन सवाल सर पहला फिर वही अ एक एक. पवित्र धाम फिर फैक्ट्री और अब एक ऐसी जगह.
जिसको लेकर कई बार डर लगता है कि यार अपना. बच्चा भेजे या ना भेजे सर मैं कोटा से ही. पला बड़ा हूं वहीं पर मेरा जन्म भी हुआ तो. जाहिर सी बात है कि ऐसा थोड़ा परसेप्शन. बना है कि कोटा भेजना चाहिए नहीं भेजना. चाहिए ऐसी बात हुई है पर शायद इस मंच प भी. मैं इसलिए खड़ा हूं कि उन्हें बताना चाहता. हूं कि पवित्र कोटा आज भी उतनी ही पवित्र. भूमि है जहां शिक्षा हवा में बहती है और. मैं इसे मानता भी हूं और जानता भी हूं हां. मैं मानता हूं कुछ अप्रिय घटना हुई है. मुझे डाटा पर बात नहीं करनी चाहिए वहां का. जो डटा है जो अप्रिय घटनाओं का वो कोई ऐसा.
एजॉर्ब हाई नहीं है जो नॉर्मल परसेंटेज है. वही वहां की परसेंटेज है पर शायद मीडिया. की वजह से या किसी भी वजह से आप बोल सकते. हैं उसे थोड़ा हाईलाइट ज्यादा करा जा रहा. है मैं इस मंच के माध्यम से भी क्योंकि आप. बहुत बड़े चैनल पे भी मंच पे रहे हैं बहुत. समय तक तो मैं आप इस इस मंच के माध्यम से. भी कहना चाहता हूं कि कहीं कोटा को स्पेस. कोट की तरह नहीं यूज कर लिया जाए उस डाटा. को देखा जाए हां एक शहर के नागरिक होने के. नाते या एक शिक्षाविद होने के नाते हमारा. धर्म बनता है कि अगर वो परसेंटेज कहीं पे. कुछ है हमारे यहां जीरो होनी चाहिए हमारे.
व्यक्तिगत इंस्टीट्यूट में ऐसी अप घटना 17. साल में सिर्फ एक हुई है पर यह कोई ऐसा. नंबर नहीं है जिसको दिखावे के लिए बताया. जाए यह जीरो होना चाहिए शिक्षाविद और एक. शिक्षा नगरी का नागरिक होने के नाते मैं. उस तरफ आऊंगा मैं कि इस पर्टिकुलर टॉपिक. को लेकर लेकिन सबसे पहले मेरे मन में ये. सवाल आता है कि कोचिंग इंस्टीट्यूट जो है. वो बिहार में भी है पटना में भरे पड़े हैं. में भरे पड़े हैं गोरखपुर में भरे पड़े. हैं कोटा इतना स्पेशल क्यों हो गया और. कोटा हर किसी का जाने का मन क्यों करने. लगा क्योंकि हम भी जब पढ़ाई कर रहे थे उस.
टाइम भी ये ट्रेंड था कि अगर अच्छी तैयारी. करनी है तो कोटा चलो तो ये कोटा में क्या. ऐसा है जो बाकी जगह नहीं क्योंकि वही सेम. इंस्टीट्यूट सेम नाम सेम चीज हर शहर में. है आपने बहुत बढ़िया सवाल पूछा और मैं खुद. से भी कई बार सवाल पूछ चुका हूं और इसका. आंसर है मैं कहता हूं कोटा जैसा शहर देश. में छोड़ी दुनिया में नहीं मिलेगा उसका. कारण मैं आपको बताता हूं जैसे गवर्नमेंट. कहीं पे भी अगर इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट. लाता है तो एक सेज लाती है सेज एरिया उसके. आसपास इको सिस्टम बिल्ड करती है उसमें वही. दिखाई देगा आपको लेबर भी मिलेगी उसके. हिसाब से इकोसिस्टम होगा एलरी यूनिट्स. होंगी में आपको जान के आश्चर्य होगा कि.
ऑटो वाले को भी चैप्टर्स के नाम याद होंगे. बच्चा थड़ी पे जाएगा तो भी चैप्टर की बात. हो रही होगी वहां पर आठ से 10 घंटे पढ़ने. वाले बच्चों को लगेगा ये नहीं लगेगा कि. मैं ज्यादा पढ़ रहा हूं क उसके सामने 12. घंटे पढ़ने वाला बच्चा भी है तो बेसिकली. एक ऐसा इको सिस्टम है जिसमें बच्चे को. सिर्फ एक ही लक्ष्य नजर आता है ये बहुत. इंपॉर्टेंट है वो डिस्ट्रक्ट होने के. चांसेस उसके बहुत कम होते हैं उसे सिर्फ. पढ़ाई पढ़ाई दिखाई देती है थडी पे जाएगा. तो चैप्टर्स की बात होगी ऑटो वाला उसी के. लेके बात करेगा आपको आश्चर्य होगा कि मैं. एक बार मैंने खुद ने टेस्टिंग करने के लिए. मैं स्टेशन से बैठा तो मैंने बोला मुझे. नीट में एडमिशन लेना है तो टले ने मुझे.
बोला बेटा नीट में है ना उसके शब्द हैं कि. बेटा नी नीट में ना सवाल बहुत ज्यादा आते. हैं स्पीड का ध्यान रखना और फिजिक्स पे. खास तौर से आप सोचिए जिस शहर में ऐसी वाइब. हो जहां सिर्फ पढ़ाई की बात हो रही हो ऐसा. मिलना बहुत मुश्किल है आपने बहुत शहरों के. नाम लिए चाहे पटना ले लीजिए दिल्ली ले. लीजिए सब जगह अच्छी कोचिंग है हमारे खुद. के सेंटर्स हैं 60 जगह और मैं मानता हूं. कि वहां पे 100% हम वही दे रहे हैं जो. कोटा में हम दे रहे हैं पर ये जो बाहर का. आबो हवा है वह हम और कहीं रिप्लिकेट करना. हमारे लिए बहुत मुश्किल है तो वहां पे हर. जगह आपको दिखाई देगा यह कोटा को अलग बनाता.
है तो फिर कोटा की पवित्र भूमि जो बीते. कुछ सालों में खबरों को लेकर वायरल रही. क्योंकि सेम पैटर्न तो पढ़ाई का पहले भी. था सेम तरीके से बच्चे आते थे फिर ये जो. नंबर ऑफ केसेस बढ़े हैं जिनको लेकर. चिंताएं बढ़ने लगी जिनको लेकर और सारी. कहानियां ऑलमोस्ट एक जैसी है तो ये केसेस. फिर क्यों बढ़ गए क्या बदल गया कोटा में. क्या थोड़ा सा ज्यादा पैसों की तरफ झुकाव. हो गया ज्यादा प्रोफेशनल हो गए वो लगाओ. क्योंकि आपकी फिल्म भी हमने देखी और आपको. भी हमने वीडियोस देखे वहां पर एक बच्चों. से लेकर लगा है दिखाई पड़ता है कि एक.
अपनापन है कि यह करो यह करो यह नहीं भी. करना है ऐसे फस तो ऐसे बच जाना ए आई बिलीव. हर वो शख्स जो आईटी की तैयारी कर रहा है. आप प्लीज कोटा फैक्ट्री दिखेगा सर की लाइफ. पर बेस्ड फिल्म है एंड क्या कमाल की फिल्म. है क्या कमाल की वेब सीरीज है नेक्स्ट. सीजन भी आएगा वो भी हम देखेंगे और इसके. लिए बिल्कुल. [हंसी]. केयर करते हैं बात ये कि शायद बाहरी.
दुनिया ने ने हमको अलग तरीके से प्रस्तुत. करना का ज्यादा प्रयास करा है मीडिया ने. आई रियली डोंट नो ऐसा क्यों हुआ है वो एक. बार चेन रिएक्शन हो जाती हैना कि अच्छा इस. मीडिया ने दिखाया इसने दिखाया इसने दिखाया. इसने दिखाया फिर मैं कह रहा हूं नंबर्स को. एग्जॉर्ब मेंटली हाई नहीं है हां ये. कोरोना के बाद बड़ा है और ये कोटा की. समस्या नहीं है देशव्यापी समस्या है आईटी. में बढ़ गए हैं आप देखिए नंबर्स आईटी जहां. पे टॉप बच्चा पहुंच गया फिर भी ये हो रहा. है आपको आईटी में जितने लास्ट 3 साल में. आपको सुसाइड केसेस दिखाई देंगे उ उसके. पिछले तीन साल में नहीं दिखाई देंगे. कोरोना के बाद मुझे व्यक्तिगत ऐसा लगा कि. पैंपरिंग थोड़ी ज्यादा हुई थी बच्चे का जो.
स्ट्रेस लेवल लेने का जो क्षमता है वो. थोड़ी सी कम हुई है इसकी वजह से बढ़ा है. और एक और मेरी बात है शायद अजीब सी लगेगी. बट मुझे लगता है कि इसके बारे में जितनी. कम बात करी जाए उतना बेहतर है क्योंकि. कभी-कभी चेन रिएक्शन की तरह काम करता है. बच्चे को विकल्प की तरह ज्यादा दिखता है. कि अच्छा मैं नहीं कर पा रहा हूं तो ये एक. विकल्प है तो मैं सभी मीडिया बंधुओं से भी. जब भी मिलता हूं उनसे बोलता हूं जितनी कम. इस पर बात करी जाए अच्छा ये फिर से. देशव्यापी समस्या सर 121000 लोगों ने. सुसाइड करी देश में कोटा को छोड़ दीजिए ये. कोई सिर्फ कोटा की बच्चों की समस्या नहीं. है क्योंकि बच्चे बहुत अच्छी फैमिलीज के.
वहां पर आते हैं तो नुकसान तो किसान का. अगर आप देखेंगे पर्सीवड वैल्यू के हिसाब. से तो एक किसान का नुकसान और एक अच्छे. फैमिली के बच्चे का नुकसान में हम पर्सीवड. वैल्यू में इस बच्चे को ज्यादा लेते हैं. पर जान तो सबकी समान है उसको हमें समझना. आवश्यक है कि यह देशव्यापी समस्या है किसी. एक शहर की नहीं है नहीं आप ही कह रहे हैं. बट जैसे कोई बच्चा है जैसे हर मां-बाप. पैसा कमाता है सबका सपना ये होता है कि. बच्चा देश के भविष्य है सरकारों का भी मां. बाप का भी हम सब का भी एक बच्चा मासूम सा.
जो अपने छोटे शहर में 90 पर 80 पर मार्क्स. ला रहा था अच्छा था कॉन्फिडेंस स्टेट. अच्छा चल रहा था फिर वो यहां से कोचिंग. सेंटर में जाता है और वहां पर एक घटना आती. है क्योंकि मैंने भी तैयारी की है मैं. उसके पीछे कई और कारणों को समझता हूं. सिर्फ एक मीडिया की तरह नहीं सोचता हूं. मैं मेरे मन में कई बार ये ख्याल आता और. यह सवाल मैं आपसे पूछूंगा कि यह जो कोचिंग. अच्छा सबसे पहले सवाल ये पूछ लेता हूं मैं. कोटा आने की राइट एज क्या है क्या आपको. 11थ में आना चाहिए हम जब आप 10थ पास कर. करके निकलते हैं या आपको 12थ पास आउट करने.
के बाद आना चाहिए जब कंपैरिजन में आप. थोड़े से ज्यादा मैच्योर हो जाते हैं मुझे. लगता है जब बच्चे को क्लेरिटी हो कि मुझे. जीवन में क्या करना है ये क्लेरिटी. पेरेंट्स की नहीं जैसे आपसे मेरी बात हुई. जितना आपके बारे में मैंने पढ़ा है कई बार. पेरेंट्स फोर्स करके भेज देते हैं कि नहीं. तुम्हें साइंस लेनी है तुम्हें आईटी करनी. है तब नहीं आना चाहिए आप किस एज में आ रहे. हैं ये मैटर नहीं करता मैटर ये करता है कि. आपको क्लेरिटी है कि नहीं है जब बच्चे को. लगता है कि नहीं मुझे इंजीनियर बनना है. मुझे डॉक्टर बनना है जब उसका मन कहता है. कि मैं बनना चाहता हूं तब आना चाहिए ये एज.
नाइंथ भी हो सकती है 10थ भी हो सकती है. 11थ भी हो सकती है 12थ भी हो सकती है और. 12थ पास भी हो सकती है परट जब तक बच्चे को. क्लेरिटी नहीं है मेरे हिसाब से मैं. पेरेंट्स को भी हमेशा बोलता हूं कि उनको. कोटा भेजना नहीं चाहिए उनको क्लेरिटी है. उससे फर्क नहीं पड़ता बच्चे को क्लेरिटी. है या नहीं ब जैसे आजकल कोचिंग. इंस्टिट्यूट ने शुरू कर दिया कि हम आपको. क्लास सिक्स सेवन से कोचिंग करेंगे हम अब. क्लास सिक्स सेवेंथ के या फिफ्थ क्लास के. बच्चे को क्या पता कि उसको लाइफ में क्या. बनना है शुरू में आप पूछेंगे वो कहता है. हीरो बनना है एक्टर बनना है डॉक्टर बनना. है या उसने जो देख लिया किसी अच्छी पिक्चर. में उ अक्षय कुमार इंजीनियर बनता नजर आया.
तो उसे लगा नहीं यार यही बढ़िया रोल है. उसको तो उतना डेवलप नहीं है डेवलप होने. में समय ल एक उम्र आती है या वो एक्सेप्शन. केसेस हैं जो टॉपर्स होते हैं या जिनका. माइंड उतना होता है बट मेजॉरिटी जो बच्चे. होते हैं वो तो वही सेम समझ उनकी होती है. तो उसमें कैसे डिसाइड करें सिक्सथ क्लास. के बच्चे को सेवेंथ के बच्चे को कोचिंग. कहां पर कर नहीं सिस सेथ 8 नाथ वाले बच्चे. को कोई जरूरी नहीं कि उसे डिसाइड करना. होता उस समय फिर ये शुरू हुआ है नहीं. उसमें भी आप बात समझे कि जैसे 8 ना 10थ. में बहुत सारे गवर्नमेंट एग्जाम्स कराती. है आईजेएस हो गया एनटीएससी हो गया एनएससी.
जीएस हो गया जो साइंस बेस्ड एग्जामिनेशंस. है उनको बच्चे को सेवंथ एथ में वो ट्राई. करता है अगर उस अगर आप अच्छे से देखेंगे. तो उस समय अगर उसको एग्जाम देके पता पड़. जाता है कि ये मेरा कप ऑफ टी नहीं है तो. दैट इज अ राइट एज टू शिफ्ट आप समझिए जो. निर्णय शायद आपको 12वीं के बाद पता पड़ा. कि यार ये मेरा कप ऑफ टी नहीं है अगर ये. एथ पे ही बच्चों को आईडिया लग जाए कि यार. एनएससी जीएस की उसने तैयारी करी मुझे लगा. साइंस अपने बस की नहीं है नहीं है तो ये. बहुत सही समय है हो सकता है उसके बाद वो. कॉमर्स ट्राई करे हो सकता है कि वो आर्ट्स. के लिए ट्राई करे हो सकता है कोई क्रिएटिव. काम करें तो ऐसा नहीं कि कोचिंग संस्थान. उस समय से उसको कोई आई की तैयारी करने लग. जाता है बेसिक स्कूल का करिकुलम होता है.
उसके ऊपर बहुत थोड़ा सा आप समझ लीजिए 5 10. पर का टॉप पावर होता है बस इतना ही होता. है उससे बच्चे को जज होने लगता है कि मुझे. ये करना है या नहीं करना है मैं इसमें एक. बात और बोलना चाहूंगा इस मंच के माध्यम से. असलियत में कि ये एक रस्सा कस्सी सी दिखाई. देती है मुझे व्यक्तिगत रूप से शिक्षाविद. होने के नाते कि स्कूलों और कोचिंग में हो. गई है स्कूल वाले अपनी तरफ खींचते हैं. कोचिंग वाले अपनी तरफ खींचते हैं ये गलत. है सरकार को भी ये मानना पड़ेगा कि ये. दोनों की आवश्यकता है स्कूल करिकुलम की. बहुत आवश्यकता है मैं भले कोचिंग संस्थान. चलाता हूं मैं मानता हूं कि स्कूली शिक्षा. बहुत आवश्यक है बहुत आवश्यक है पर यह भी.
मानना पड़ेगा कि जो बच्चे कंपट. एग्जामिनेशन की तैयारी करते हैं और जो. मैक्सिमम लोग करते हैं और करनी भी पड़ेगी. क्योंकि टॉप कॉलेजेस की जो सीट्स है वो. वैसे ही भरी जाती हैं तो स्कूल में कोचिंग. की आवश्यकता भी है क्यों ना सरकार सीबीएसई. बोर्ड्स स्टेट बोर्ड्स आईसीसी बोर्ड्स एक. ऐसा करिकुलम डिजाइन करें जिसमें कोचिंग को. भी साथ में लाया जा सके बच्चा एक बार आए. 800 बजे स्कूल दिन में दो या : बजे चला. जाए और उसके दोनों काम पूरे हो जाए अगर. ऐसा समावेश हो गया तो मेरे हिसाब से ये. बातें ही सब खत्म हो जाएगी स्ट्रेस भी. बहुत कम हो जाएग नहीं ये बात आपकी बिल्कुल. सच है क्योंकि हमने खुद स्कूल और कोचिंग.
दोनों का वो दंश झेला है कि अगर आप एक. छोड़ देते हो तो आप दूसरी जगह स्ट्रगल. करते हो और खासतौर पर अच्छा आप क्या ये. मानते हैं कि अगर आप 11थ में तैयारी करने. गए हैं हम तो आपको अपना स्कूल वहां जरूर. करना चाहिए स्कूल ना करने से आपके. डिस्ट्रक्ट होने के आपके कॉन्फिडेंस गिरने. के या पढ़ाई के स्किल्स भी डाउन होने के. चांसेस कंपेरिजन में ज्यादा है अगर आप. केवल कोचिंग कर रहे हैं और आपने 11 12थ की. पढ़ाई स्कूल की छोड़ दी क्योंकि 10थ की. पढ़ाई बहुत बेसिक है सही बात है 11थ का. स्टैंडर्ड सडन बहुत हाई हुआ ह क्या आप. मानते हैं इससे इश्यूज होते हैं बिल्कुल.
होते हैं मैं इसमें ऑनेस्ट अपनी राय दूंगा. मीडिया के सामने ही दे रहा हूं बेसिकली. मंच से दे रहा हूं वीडियो में दे रहा हूं. अ स्कूली शिक्षा आवश्यक है कोचिंग भी. आवश्यक है पर ये भी सच्चाई है कि जो बच्चा. आईआईटी की तैयारी कर रहा है या नीट की. तैयारी कर रहा है उसके लिए 6 घंटे स्कूल. सिर्फ स्कूल करिकुलम में उसमें स्पोर्ट्स. भी होता है उसमें बहुत सारी चीज होता है. इतना समय उसके लिए देना संभव नहीं होता जो. तैयारी कर रहा है जो सिर्फ स्कूल जाना है. अलग बात है पर जो सिर्फ तैयारी कर रहा है. वो अगर 6 दिन या पाच दिन 6 घंटे स्कूल को. दे रहा है तो उसके लिए इनफ टाइम इतना बचना. कि वो प्रैक्टिस कर पाए और 12थ के साथ. सेलेक्ट हो पाए उसकी प्रोबेबिलिटी थोड़ी.
कम हो जाती है इसीलिए मैं इसका पक्षधर हूं. कि अगर स्कूल के साथ मान लीजिए स्कूल की. कोई फिक्स चीजें हैं जिसमें लैब्स भी होनी. है जिसमें मान लीजिए इंग्लिश भी उसको. पढ़ाई जानी है कुछ बेसिक उसके डिसिप्लिन. की भी बात होनी है वो दो-तीन घंटे में. खत्म हो जाए और तीन-चार घंटे उसकी. प्रिपरेशन के लिए काम चले जैसे फिजिक्स. केमिस्ट्री मैथ्स या फिजिक्स केमिस्ट्री. बायोलॉजी ये प्रिपरेशन की उसके काम चले तो. उसके बोर्ड में भी नंबर अच्छे आएंगे वो एक. अच्छा इंसान भी बनेगा और रियलिटी में वो. जो अचीव करना चाहता है वो भी अचीव कर. पाएगा पर अगर आप मेरे से ऑनेस्टली पूछे कि. अगर बच्चा 11वीं 12वीं में तैयारी करना. चाहता है आईआईटी जेई और नीट की तो उसके. लिए स्कूल के साथ मैनेज करना थोड़ा.
मुश्किल है अच्छा इस पे एक काउंटर. क्वेश्चन मेरे मन में आता है हर साल कितने. बच्चे आते हैं तैयारी आईटी एग्जाम कितने. बच्चे देते हैं आईटी एग्जाम इस साल 14 लाख. बच्चे देंगे 14 लाख बच्चे दिए सिलेक्ट. कितने होते हैं अगर मैं आपको फिर मैं आप क. रहा हूं इस प्रश्न को नहीं मैं इससे एक. सवाल दूसरा मेरा है आप ये मान के चली टॉप. इंजीनियरिंग और जो टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज. में चले जाते हैं आईआईटी और एनआईटी मिला. के उनकी कैटेगरी को मान के चले करीबन 30. से 40 हजार बच्चा चला जाता है 30 से 40 हज. बच्चे और अच्छे कॉलेजस में और 141 लाख. बच्चे आते हैं यानी कि अगर हम 14 लाख भी. मान लेते हैं तो 13600 बच्चे ऐसे हैं जो.
हर साल क्वालीफाई नहीं कर पाते देश भर से. और यह बहुत बड़ी संख्या हा बिल्कुल है तो. जो ये 40000 बच्चे थे इन या मान लीजिए 50. 6 हज बच्चे होंगे शायद स्टेट में भी. अलग-अलग कॉलेजेस में अच्छा निकल जाते. होंगे इनको लाइफ में कंपेरिजन ज्यादा. क्लेरिटी थी बट इनको देख के जो बाकी. पेरेंट्स ने पुश किया कि तुम भी स्कूल. छोड़ो या उधर जाओ या उनका आईक्यू लेवल वो. नहीं था या उनको किसी और फील्ड में. इंटरेस्ट था बट आपने पुश कर दिया आपको. लगता नहीं कि वो जो कहावत ना घर के रहे ना. घाट के क्योंकि मेरे टाइम पर मेरे से बहुत.
सारे बैचमेट्स हैं जिनको मैंने देखा कि वह. आईटी दो साल तो अच्छा रहा कि आपने फोन कर. कहा कि आईटी की तैयारी कर रहे हैं एंड इट. साउंड्स वेरी कूल क्या कर रहे हो बेटा. आईटी की तैयारी कर रहे हो बट उसके बाद जब. वो घर लौटते हैं तो रिलेटिव्स में ह्यूमिन. दोस्तों का कटना बाकी दोस्तों का सिलेक्ट. हो जाना और सेल्फ कॉन्फिडेंस से गिर जाना. और उसका इंपैक्ट किते कच्ची उम्र की जो. चोट होती है जीवन भर रहती है वो जीवन भर. रहती है मैं पर इसमें आपको उत्तर देना. चाहता हूं जो मेरा व्यक्तिगत अनुभव है. क्योंकि कोटा से पला बड़ा हूं और ये चोट.
मैंने भी देखी बवी के साथ मैं सिलेक्ट. नहीं हुआ था 13 में मैंने ड्रॉप लिया तो. ये सब मेरे साथ हुआ जो आप कह रहे हो ठीक. है सर मैं ये कहना चाहता हूं और यह सच्चाई. है सर हो सकता है इसको लोग कैसे लेंगे. कोटा में अगर 100 बच्चे आते हैं सर मैं. मानता हूं 15 ही सिलेक्ट होते हैं या टॉप. इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज में जाते हैं. पर मैं आपको दावे से कह सकता हूं कि सर. 100 में से 90 अपने जीवन में सफल होते हैं. उसका कारण मैं आपको बताता हूं क्योंकि ये. सब लोग पढ़ना मेहनत करना सीख जाते हैं मैं. मानता हूं हो सकता है सबका कॉलेज में नहीं. होगा हमें पहले दिन भी पता होता है हम. ओरिएंटेशन में एक ही बात बोलते हैं कि. भैया असली सफलता इस सिलेक्शन में नहीं है.
असली सफलता उस प्रिपरेशन में है जो मेहनत. आप कोटा में आकर सीख रहे हो या किसी भी. ऐसी प्रक्रिया में जाकर सीख रहे हो बेसिक. बात क्या है कि सफलता किस जगह पर है कि. बच्चा रोज 12 घंटे मेहनत करना सीख जाता है. सर जो बच्चा रोज 12 घंटे मेहनत करना सीख. जाता है ना किसी भी प्रक्रिया के थ्रू वो. जीवन में असफल नहीं हो सकता और अभी मैं. आपको बताता हूं रिसेंटली ऐसा हुआ कि मैं. एक शादी में गया कोटा में तो दो पुलिस. वाले थे उनके आगे एक लड़का आया आपकी जैसी. उसकी कहानी थी उसने आकर मेरे पैर छुए वो. बेसिकली कोटा डिस्ट्रिक्ट मैं जज लगा उसने.
बोला सर मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ था और. उनकी वाइफ एडिशनल डीवाईएसपी है कोटा की. उने बोला सर मेरा सिलेक्शन नहीं हुआ पर. मैंने इतना मेहनत करना सीख गया कि मैं. जहां और कहीं जाना चाहता था वहां पे पहुंच. पाया थैंक्स टू दैट ये उनके शब्द थे तो. मैं आपको य बोल रहा हूं कि 100 में से 90. कहानियां आपको सफलता की मिलेंगी हो सकता. है इनिशियल सफलता जो सिलेक्शन को जिसको. मापदंड मान लेते हैं वो नहीं होती पर असली. सफलता वास्तविकता में मेहनत में होती है. आप और हम सिर्फ और सिर्फ किसी डिग्री की. वजह से ऊपर नहीं पहुंचे सर आपने बहुत. मेहनत करी आज की बात में आप बताओ तो मुझे. पता है आप सुबह 5:30 बजे हम सुबह 900 बजे.
इंटरव्यू कर रहे हैं आप सुबह 5:30 बजे सोए. हैं फिर भी आप बैठे हुए हैं हम भी रात भर. से ट्रेवल कर रहे हैं फिर भी ये काम कर. रहे हैं क्यों कर पा रहे हैं क्योंकि सर. हम मेहनती हैं असली सफलता उस मेहनत में है. किसी डिग्री या किसी तमके में नहीं ये तो. मैं मानता हूं कि बीटेक जब मैंने किया था. और बीटेक करने के बाद जब मैं मीडिया में. आया तो बहुत सारे लोग मुझसे कहते थे कि. तुमने चार साल बर्बाद कर दिए हम मैंने कहा. नहीं बर्बाद नहीं हुए बोला क्यों मैंने. कहा लाइफ को लेके एक एटीट्यूड मिल गया कि. अगर हम एक रात पढ़ के पास हो सकते हैं हम. रात भर जग के पास होते हैं तो ये बात बहु.
बहुत बढ़िया बात बोली सर ये वो है जो सर. आपने अब पकड़ा ये कोटा में बच्चा सीख लेता. है या किसी भी ऐसी जगह पे सीख लेता है सर. जो आपने शायद आपने बहुत अच्छी बात बोली. मतलब मैं कहता हूं सबको सुननी चाहिए जितने. बच्चे मुझे सुन रहे हैं कि असलियत में. आपके चार साल आज आप इंजीनियरिंग से कुछ भी. नहीं कर रहे हैं सर पर क्या उस चार साल की. इंजीनियरिंग ने आपको मेहनत करना सिखाया सर. रात भर जाग के पेपर देना सिखाया अगर सर वो. आज आपने नहीं सीखा होता तो शायद आज आप. इतनी ऊर्जा के साथ रात भर काम करके भी. नहीं बैठे होते यू बिलीव इन टू इट सर यही. सफलता का मंत्र वहां पे सीखा जाता है मैं. आपको बोल रहा हूं तो मेरे गस बम्स खड़े हो.
गए क्योंकि मतलब मुझे नहीं पता था वो आंसर. आपके खुद से आ जाएगा ये बात और आई रियली. बिलीव कि वाकई यही होता है सर और सिर्फ. यही नहीं बैक टू बैक पेपर्स का असर ये रहा. कि आपने पैनिक करना बंद कर दिया बहुत. बढ़िया कि वो जो सडन आपको कुछ आता कि जैसे. आज हमारा इंटरव्यू है हमने बिना प्लान किए. हम कर रहे हैं सही बात है ये वैसे ही ऐसे. हमने कितने सारे एग्जाम्स रोज आते थे हम. करते थे क्योंकि वो आपके अंदर कॉन्फिडेंस. आ गया कि नहीं मैं निकाल ले जाऊंगा आपके. अंदर मेरे अंदर कॉन्फिडेंस आ गया कि नहीं. यार मैं निकाल ले जाऊंगा क्योंकि मैं इतनी. लड़ाई पहले लड़ चुका हूं इतनी बार उसे. क्लियर कर चुका हूं तो सर वो बहुत वो. कॉन्फिडेंस बहुत इंपोर्टेंट है वो देता है.
सर शहर वो देती है यह पेडागोजी इसलिए मत. समझिए कि 14 लाख बच्चे जो तैयारी करते हैं. मैं आपको ईमानदारी से बताऊं देश का आपको. डाटा देता हूं अगर जेई से बात करूं जेई. नीट जेई और नीट 14 और 24 करीब-करीब आप मान. के चलिए कि 25 से 30 लाख 40 लाख के आसपास. बच्चा य एग्जामिनेशन दे रहा होता है जेई. और नीट स्पेशली इसमें से मान के चलिए कि. सर 40 लाख में से ऑनेस्टली जो तैयारी कर. रहा होता है ये 15 से 20 लाख होता है. ऑनेस्ट जो तैयारी करता है ईमानदारी के साथ. और इसमें से 15 लाख में से जो तैयारी करता. है मा जो नहीं कर रहा उसका हम कुछ भी नहीं. कर सकते जो 15 लाख तैयारी कर रहा होता है. सर इसका % बच्चा जीवन में सफल होता है.
उसमें शायद आप भी एक कहानी जो जो यह बात. शायद इंजीनियरिंग कॉलेज में जाके समझा पर. हुई जरूर ट्रू ट्रू ट्रू ट्रू अच्छा. क्योंकि जो फिल्म आई थी कोटा फैक्ट्री वो. हमने देखी और उसमें अ बहुत ही खूबसूरती से. बताया गया क्या करना है क्या नहीं करना है. सही बात है क्योंकि आपकी लाइफ पर बेस्ड है. उससे किरदारों को हमने देखा जीतू भैया. आपका जिक्र कर रहे थे कि एनवी सर को हमने. देखा आपके पढ़ाने के तरीके को देखा आपके. कोचिंग सेंटर का जो पैटर्न है स्टाइल है. वो देखा और बड़े खूबसूरती दिखाया गया कि. दो तरह के लड़ाई कोटा में होती है एक. ब्रांड की लड़ाई होती है कि हमारे पास यह.
नाम है इतने बच्चे सिलेक्ट हुए हैं और एक. होता है कि यार बच्चों से एक रिश्ता बनाकर. आगे बढ़ाने की कहानी है इतने सालों के. एक्सपीरियंस के बाद क्योंकि फिल्म में. दिखाया गया इसलिए मैं और समझना चाह रहा. हूं आप कोटा जाने वाले बच्चों को या उन. तमाम बच्चों को जो कोटा नहीं जा रहे हैं. और आपको इस वीडियो के माध्यम से सुन रहे. हैं आप क्या बताओगे. कि क्या करें या क्या ना करें वो जो डू. एंड डोंट की लिस्ट होती है कुछ आप बताना. चाहोगे उन्हें मेरे हिसाब से बच्चों को. हमें हमेशा एक बात बोलते हैं थोड़ा. स्पेसिफिक होना चाहता हूं कि अपने एग्जाम.
को पहचानिए बोर्ड में नीट में जेई में. तीनों में फिजिक्स और केमिस्ट्री का. सिलेबस सेम है पर तीनों को पढ़ने की. प्रक्रिया अलग है तो नो योर एग्जाम जैसे. गोल दिखाई देता है वैसे पता होना चाहिए. एग्जाम क्या है नीट एग्जामिनेशन है स्पीड. एक्यूरेसी का जेई एग्जामिनेशन है डीप डाई. इनटू पर्टिकुलर टॉपिक और बोर्ड. एग्जामिनेशन है रिटर्न का इन तीनों बातों. पे ध्यान दीजिए फिर मैं आपको कह रहा हूं. बिना फोर्स के बिना किसी उसके लाग लपेट के. जिसे अपन बोलते हैं डिसीजन लीजिए आपके मन. से आवाज आनी चाहिए कि आप रियलिटी में वो. बनना चाहते हैं अगर जोश और जुनून जोड़.
लोगे तो कर पाओगे मैं बिल्कुल इस मन से. वादा नहीं कर रहा हूं कि कोई कोई कोई भी. कोचिंग संस्थान आपको वादा करती है कि आप. सेलेक्ट वो आपको सेलेक्ट करा दगी वो गलत. वादा करती है हम भी कभी वादा नहीं करते. हैं बच्चा स्वयं सेलेक्ट होता है हम सिर्फ. एक माध्यम है जो उसे अच्छी तैयारी अच्छा. माहौल अच्छा सिस्टम दे सकते हैं व्यक्तिगत. रूप से इस बात प बिलीव करता हूं क्योंकि. मैं एवरेज बच्चा था तो मैं यह मानता हूं. कि किसी कोचिंग संस्थान का भी कर्तव्य यह. है कि सिर्फ वो टॉपर पे ध्यान नहीं दे टॉप. 10 टॉप 100 ये आयर नहीं है मेरा व्यक्तिगत. मत है कि जो एवरेज बच्चा पढ़ना चाहता है. मेरा लक्ष्य यह है कि हमारी कोचिंग में जो.
बच्चा आ रहा है जो डिसिप्लिन है 1213 घंटे. रोज पढ़ रहा है उसका सबका सिलेक्शन होना. चाहिए नहीं इसमें भी एक क्वेश्चन आता है. जैसे हम मीडिया वायल लोग ग हम बिटवीन द. लाइंस पढ़ते हैं एक तो हो गया कि हम टीवी. पे कहने के लिए कहते हैं और एक हो गया कि. अगर आप ऐसा करते हैं तो कैसे करते हैं. क्योंकि टॉपर्स पर ध्यान हर कोई इसलिए. देता है क्योंकि एट द एंड ऑफ द डे जब आप. भी पोस्टर लगाते होंगे तो उन 15 बच्चों की. फोटो लगाते होंगे बुल जाहिर सी बात है कि. जिसकी 10000 रैंक है उसकी फोटो तो आती ही. नहीं है सर हम लगाते हैं 1000 1500 तक. रैंक लगाते हैं 10000 वाले वाले फोटो भी. हमने हमारे कैंपस में लगा रखे हैं वो.
इसीलिए लगाए हैं कि वो हमारे जैसे बच्चे. हैं सर मेरी खुद ही 3217 रैंक थी मुझसे. कोई एक्सपेक्ट नहीं करता था कि मैं आईटी. में सिलेक्ट हो जाऊंगा पर मैं हुआ और जीवन. में भी ठीक कर रहा हूं और वो कर रहा हूं. पैसे से नहीं होती कई बार कच से बात नहीं. होती मैं सुकून का काम कर रहा हूं जो मुझे. पसंद है जो मुझे पसंद है वो मैं कर पा रहा. हूं मैं चाहता हूं हमारा हर बच्चा वो जीवन. में करे जो वो करना चाहता है ऐसा हम करते. हैं तो जो आपने सवाल पूछा कि जो एवरेज. बच्चा है उसके लिए हम ऐसा क्या करते हैं. उसके लिए बहुत सारे पैरामीटर्स हैं सर मैं. आपको इसको थोड़ा कंपेयर करके बताना चाहता. हूं हमारी शिक्षा में आयर नहीं है जो गलत. है जिस पूरे विश्व में तो छोड़िए देश में.
भी बहुत ज्यादा कभी बात नहीं होती है. शिक्षा का स्तर बहुत नहीं बढ़ा है सर जो. बढ़ना चाहिए था मैं आपको सिंपल सी बात. बताता हूं शिक्षा कस्टमाइज होनी चाहिए हर. बच्चे के लिए समस्या अलग है उसके लिए हर. पैटर्न हर कस्टमाइजेशन ऑफ कंटेंट उसके लिए. होना चाहिए इसका एग्जांपल मैं देता हूं और. हम कर सकते हैं अच्छे हॉस्पिटल में आईसीयू. में 50 पेशेंट एक साथ होते हैं उनकी टेक. केयर एक साथ हो रही होती है इसको इमेजिन. करिए क्लास में 50 बच्चे हैं पर हर पेशेंट. का इलाज अलग होता है हर पेशेंट की. मेडिकेशन अलग है ऐसा शिक्षा में क्यों.
नहीं हो सकता कि हर बच्चे की समस्या अलग. है तो उसके लिए इलाज भी अलग होना चाहिए यह. अचीव करा जाता है अच्छे हॉस्पिटल्स में. अच्छे अच्छे डॉक्टर्स अच्छी मशीनरी और. अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छा मैनेजमेंट. यही शिक्षा में भी हमें करना है अच्छे. एजुकेटर्स अच्छी टेक्नोलॉजी का यूज विच. इंक्लू इंक्लूड्स एमएल एआई ये हम सब कर. रहे हैं सर मतलब मैं आपको गर्व के साथ बोल. सकता हूं कि हमने ऐसी मशीन बना ली है. जिसमें हर बच्चे का होमवर्क अलग आता है. उसकी कमियों के हिसाब से अभी हमने. पैरामीटर बनाए जिसमें हमने बच्चों को नौ. में कैटेगरी राइज करना चालू कर दिया है. एफर्ट और परफॉर्मेंस में एक्स एक्सिस प.
एफर्ट ली वा पे परफॉर्मेंस लिया लो मीडियम. हाई लिखा नौ कैटेगरी बन गई ये बच्ची ये. बच्चा लो परफॉर्म करता है एफर्ट भी लो लगा. रहा है यह बच्चा बहुत एफर्ट लगाता है पर. लो परफॉर्म कर रहा है अभी कुछ ही दिन पहले. हमारी टीम की मीटिंग हुई पूरे. स्टेकहोल्डर्स बैठे उसमें तय हुआ कि 11वीं. से 12वीं में हम अगले साल कई बच्चों को. बोल देंगे बेटा ये तुम्हारा कप ऑफ टी नहीं. है जो खुद ही भगा देंगे हम भगाए पर उसका. तरीका मैं आपको बताता हूं भगाने के दो. तरीके हैं पहले दिन टेस्ट लो तुम लायक. नहीं हो मैं पहली दिर पहले दिन कोटा की. टॉप कोचिंग में पहले दिन 11वीं में जब.
मैंने टेस्ट दिया एंट्रेंस टेस्ट अपनी बात. आपको बताता हूं कोटा की टॉप कोचिंग थी नाम. ले लेता हूं बंसल क्लासेस उस समय उसम. एंट्रेंस होना ही बहुत बड़ी बात थी मेरा. सिलेक्शन ही हुआ एंट्रेंस टेस्ट में मेरे. पिताजी को बोला गया आपका लड़का लायक ही. नहीं है मैं आईटी में सिलेक्ट हुआ एक. टेस्ट तय नहीं कर सकता है बच्चे को कि. लायक है कि नहीं है जो बच्चा डीपीएस. दिल्ली से आ रहा है उसका सिलेक्शन हो. जाएगा जो गांव के परिवेश से आ रहा है. हिंदी माध्यम से उसका सिलेक्शन नहीं होगा. एक टेस्ट के बेसिस पे आप जज नहीं कर सकते. कि बच्चा लायक है या नहीं उसके लिए एक समय. सीमा है मैं कहता हूं जब वो तीन चार छ. महीने हमारे साथ रह लेगा अब हमने तय करा. किर ये बच्चा पूरा एफर्ट लगा रहा है हम.
इसकी काउंसलिंग भी कर रहे हैं बट इसका. मैथ्स एक्यूमेन नहीं है तो हो सकता है हम. उसे बोले बेटा तू कुछ और सोच इसके लिए. करेज चाहिए हमें फाइनेंशियल लॉसेस भी. आएंगे बट वी हैव डिसाइडेड दैट वी विल डू. नेक्स्ट ईयर उसके लिए सेग गन बहुत. इंपॉर्टेंट है कई बच्चे ऐसे निकल के आते. हैं जैसे अभी हमारी रिसेंट मीटिंग हुई. डेटा एनालिसिस डेटा साइंटिस्ट हमने रखे. हुए हैं तो उसमें हमें समझ में आया कि यार. इस कैटेगरी में बच्चा फॉल करता है काफी. सारा जो हाई एफर्ट लगा रहा होता है पर. उसकी परफॉर्मेंस लो या मीडियम होती है. उसका जब ध्यान से देखा तो पाया कि एफर्ट. तो बहुत सारा लगा रहा है जो लोर मीडियम. वाला है इसकी स्पीड बहुत स्लो है कुछ.
बच्चे ऐसे हैं जो लो परफॉर्म कर रहे होते. हैं लो सॉरी हाई परफॉर्म कर रहे होते हैं. पर उनका एफर्ट बहुत कम है वो क्लास ही. नहीं आते उनका अगर एफर्ट मोटिवेट करके. बढ़ा दिया जाए इस नो सेग के हिसाब से हम. उनका करिकुलम डिजाइन कर रहे हैं मोटिवेशन. डिजाइन कर रहे हैं मैं कह रहा हूं ये. पॉसिबल है अगर हेल्थ केयर में हो सकता है. तो शिक्षा में हो सकता है और कस्टमाइजेशन. और पर्सनलाइजेशन पे शिक्षा में बात होनी. चाहिए हेल्थ केयर में क्या है कि जैसे. आपने आईयू का जिक्र किया तो आईसीयू में जा. रहा है उस साब से खर्चा भी कर रहा है हम. और वहां उसको लिमिटेड टाइम पीरियड के लिए. रहना है कि आपको 15 दिन 20 दिन ह. हम नहीं सर करा जा सकता है और हम कर रहे.
हैं बिल्कुल करा जा सकता है सर ये मैं. आपको छोटे से एग्जांपल देता हूं क्लास एक. नॉर्मल लगी क्लास हो गई आपने बच्चे के. जितने भी इनपुट आते हैं आज की तारीख ऐप. में आते हैं टेस्ट पेपर से आते हैं पता. पड़ता है किस तरीके के सवाल गलत करता है. उसको रोज होमवर्क वैसा ही मिलना चाहिए और. उसके होमवर्क के हिसाब से ही उसकी. डिजाइनिंग डाउट क्लासेस होनी चाहिए आप. आपकी क्लास में कितने बच्चे होते एक बैच. मान के चलिए 50 से 100 100 के आसपास होते. हैं बच्चे 100 बच्चे होते हैं और टीचर. उसपे कितने होते हैं मलब टीचर तो एक बार. तो क्लास में एक ही पढ़ाने आता है हां एक. पढ़ाने तो आप 100 बच्चों की अलग-अलग. ऑब्जर्वेशन कैसे कर सकते हैं मैं कह रहा. हूं आप अपन पॉइंट समझे कि जब क्लास में.
टीचर पढ़ा रहा होता है तो ये एक्सपेक्ट कर. लेना कि जितने क्लास में बच्चे बैठे हैं. उनको इंडिविजुअली बच्चे टीचर एक घंटे में. समझ पाएगा उसका ऑब्जेक्टिव उस समय उनको. अच्छे से पढ़ाना है पॉसिबल नहीं है वो. पॉसिबल नहीं है मैं कह रहा हूं अच्छा ये. मिथ है कि 40 में हो जाएगा 40 में भी नहीं. होगा सर उसको ऑब्जेक्टिव उस समय पढ़ाना है. उस समय उसको कंटेंट डिलीवरी करनी है वो. उसको अच्छे से करने दीजिए उसके बाद उसकी. परफॉर्मेंस जो बच्चे की आ रही है जो आप. टेस्ट लेते हैं जो आप टेस्ट लेते हैं. टेस्ट के अलावा भी बहुत सारी चीज सर वो एप. पे प्रैक्टिस कर रहा होता है वो बहुत सारी. चीजें ये कर रहा होता है कि अच्छा. प्रैक्टिस करेगा थ्योरी नोट्स पर समझ में.
आएंगे उसके होमवर्क वो कर रहा है नहीं कर. रहा एफर्ट है ना सर आज की तारीख में हमने. क्या करहा है टीचर आता है जैसे ही वो. क्लास खत्म करता है ऐप पे डालता है कि आज. मैंने ये होमवर्क दिया वो पूरा का पूरा. उसके ऐप पे अपलोड हो जाता है हमें पता. पड़ता है सेकंड डे कि इसने काम करा या. नहीं करा नहीं कर रहा है तो मोटिवेशन डाउन. है तो फोन जाएगा काउंसलिंग होगी तो उसके. नहीं बट कई बार लड़के उसम मेहमान कर लेते. हैं जैसे आपने शीट दी हम अब हम चार लड़के. साथ में रहते हैं एक ने शीट कंप्लीट की. आधे बैठ के या हमने कहा कि एक काम करो तो. शुरू के 15 तुम सॉल्व कर दो नीचे वाले 10. हम कर देते हैं दोनों ने मिला के टिक मार. के भेज दिया हा देखिए ऐसा है कि मैं ये. नहीं बोलता हूं कि जैसे अपने टाइम में ये.
वाली बेमानी हमने भी की है कि भाई ऐसे कर. लेते थे हां बताओ और अगर बिल्कुल मैं. थोड़े से और स्मार्ट बच्चे होते हैं तो. सारे बिल्कुल नहीं करेंगे दो चार हम गलत. कर देंगे ताकि पकड़ में भी ना आए मतलब. देखिए मैं मैं मानता हूं कि हम कितना भी. 100% बोले पर 100% इसको नहीं अचीव करा जा. सकता पर एटलीस्ट कुछ लेवल तक इसको ये सवाल. मैं इसलिए पूछ रहा हूं बारबार सर क्योंकि. जो फिल्म बनी थी और उस फिल्म से मैं बड़ा. इंस्पायर रहा उस फिल्म में एक बड़ा अच्छा. सीन था क्योंकि मैंने काफी पहले देखी थी. कि जो बच्चे एक सेक्शन ऑफ जैसे हर कोचिंग. सेंटर में एक सेक्शन होता है जो प्रीमियम.
बच्चों का होता है हम उन प्रीमियम बच्चों. के लिए सारा ध्यान होता है जैसे हम. पॉडकास्ट भी करते हैं कई बार तो चार बड़े. गेस्ट लाते हैं उनके नाम प चार गेस्ट और. आते हैं तो वही कहानी उनकी भी है कि वो. चार बच्चे जिनसे उम्मीद होती है कि टॉपर. निकल जाएंगे वो उन पर सारा ध्यान देता है. और उन्हीं के चेहरे दिखा दिखा कर बाकी. सबको भेड़ बकरियों की तरह भर लिया आता है. उस फिल्म में दिखाया भी गया है कि बाकी. बच्चों को कहा था कि नहीं हां आपका. परफॉर्मेंस बढ़ेगा देखा जाएगा बट वो बच्चा. वहां तक पहुंच नहीं पाता वो एक सेक्शन ऑफ. ग्रुप बन जाता है जो अलग ही लेवल पे रहता.
है और डिस्क्रिमिनेशन वहीं से शुरू आता है. हम हम हां तो ये आप क्या नहीं होता कि जो. बच्चा टॉपर है उसको हम अलग से ज्यादा फोकस. करेंगे हालांकि उसका हक भी बनता है नहीं. नहीं ज्यादा फोकस की बात नहीं होती है. फोकस अलग-अलग तरीके से करेंगे दोनों बातों. में विचारधारा में अंतर है मेरी विचारधारा. यह कि नीचे वाले प ज्यादा ध्यान देने की. आवश्यकता है मैं आपको जान के आश्चर्य होगा. जो बच्चा टॉप बैच मान लीजिए 1520 का बन. गया मान लीजिए उसके अलावा सारे बैचेज कॉमन. है पहली बात ठीक है उसके अलावा जितने भी. बैचेज हैं जितने भी बैचेज हैं उन सबकी. क्लासेस नंबर ऑफ आवर्स और कांटेक्ट आवर्स.
उन टॉपर बैच से ज्यादा होती है पहली बात. क्योंकि हमें पता है इन परे एफर्ट ज्यादा. लगाना पड़ेगा हमें पता है कि जो जो बच्चा. नाइंथ सेही मान लो तैयारी करके आया था. ज्यादा मतलब कैसे से क्लासेस तो आपकी ही. होती है ना एडू एफ टीटीएस नहीं नहीं अब. बहुत छछ घंटे की होती है उनकी क्लास रोज. अच्छा साढे घंटे से 6 घंटे रोज क्लास होती. है रोज नियम से सिक्स डेज टॉपर बच्चे की. रोज सिर्फ तीन घंटे ही हो रही है उसको हम. होमवर्क ज्यादा देते हैं टफ सवाल ज्यादा. देते हैं इस वाले बच्चों को हमें पता है. कि थ्योरी पर ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा. मैं मानता हूं कि ये करा जाता है और कर. थोड़ा बहुत करना भी चाहिए क्योंकि अगर आप.
समझ कि अगर कैपेबिलिटी डिफरेंस है इनिशियल. लेवल पे किसी ने जल्दी दौड़ना चालू कर. दिया उसकी मसल स्ट्रांग हो चुकी है तो. उसको थोड़ा सा आगे अपने को पुश करना चाहिए. जैसे मैं अपने साथ वालों की जल्दी आगे. निकल गया हां मैं आज तक पहुंचा वहां से. अपना संस्थान खोल लिया सही बात है बहुत. सारे लोग होंगे रीजन में फसे होंगे तो अगर. नहीं मिलता मुझे मौका तो मैं फ्रस्ट्रेट. होता कि क्यों नहीं हो रहा हां तो क्यों. नहीं कर पा रहे हैं आप अपॉर्चुनिटी देना. बहुत आवश्यक है तो मैं कह रहा हूं जिसको. जैसी नीड है ताकि उसका भविष्य अच्छा हो. सके उस हिसाब से हम उसे खाना खिलाना चाहिए. जिसकी जो रिक्वायरमेंट है ताकि उसका. एपेटाइट डिसाइड करा जाए पहले कि इसका. एपेटाइट ये है उस हिसाब से उसे खाना.
खिलाएंगे तो वो धीरे-धीरे ग्रो करेगा सबको. एक साथ कर देंगे तो समस्या होगी दैट इज. व्हाई कस्टमाइजेशन एंड पर्सनलाइजेशन इज. वेरी वेरी वेरी मच नीडेड इन एजुकेशन. सेक्टर और मैं कह रहा हूं इसको क्लास वाइज. छोड़कर इसको इंडिविजुअलिटी पे लाना पड़ेगा. कि इंडिविजुअल पर्सनलाइजेशन इज वेरी मच. नीडेड और इसमें सर टेक्नोलॉजी प्लेज अ. वेरी वेरी वेरी वेरी क्रिटिकल एंड. इंपोर्टेंट रोल जिस पे हम बहुत लगातार काम. कर रहे हैं और आई पर्सनली बिलीव कि ये इस. पे इनोवेशन आर एनडी पे इस पे पैसा डालना. चाहे वो गवर्नमेंट द्वारा हो बहुत ज्यादा. होना चाहिए ठीक है अ कोविड के पहले का जो.
एजुकेशन सिस्टम था जो हमने देखा था जैसे. आप खुद एक संस्थान चला रहे हैं तो कोविड. में क्या हुआ लोग जाना बंद कर दिए कोचिंग. संस्थानों में फिजिकली प्रेजेंट नहीं थे. और हमने और आपने जो पढ़ाई की है वो सामने. टीचर को देखा टीचर ने मजाक किया हमें. डांटा डपटा आप भी करते होंगे आपके वीडियोस. आते हैं कि आपने. किया क्या चेंज हुआ है आपके कोचिंग. संस्थान के तौर पर जब आप अपना मोशन. इंस्टिट्यूट देखते हो और यह सही है गलत है. क्योंकि हमने आपने लग तरीके से पढ़ाई की. है बट ये भी बदलते समय की मांग है मेरे.
हिसाब से ऑनलाइन ऑफलाइन में कौन अच्छा है. कौन बेहतर है ये क्लास वाइज डिवाइड होना. चाहिए जैसे मैं आपको बताता हूं आज आप और. हमें कोई एग्जीक्यूटिव कोर्स करना है. हमारी नॉलेज अपलिफ्टमेंट के लिए और वो दो. घंटे का ऑनलाइन कोर्स है हमें ऑनलाइन ही. करना चाहिए बिकॉज वी डू नॉट हैव अ टाइम. कोई पीजी कर रहा है जो डिसिप्लिन है अपने. आप में पीजी की तैयारी करना है ऑनलाइन. चलेगा बट जो बच्चा 15 से 19 साल का बीच का. है उसे डिसिप्लिन बहुत आवश्यक है तो बीच. मैं नहीं बोलता हं कि ऑनलाइन खराब है कि. ऑफलाइन खराब आपके यहां ऑनलाइन क्लासेस हैं. दोनों है ऑनलाइन ऑफलाइन पैन इंडिया पैन. इंडिया अक्रॉस सब कुछ है पर फिर भी मैं इस.
बात का पक्षधर हूं कि ज्यादा अच्छी तैयारी. क्लासरूम के साथ ऑनलाइन के मिक्स में होगी. जो सारी सर्विसेस क्लासरूम में है क्योंकि. बच्चा क्लास में आके डिसिप्लिन हो जाता है. आप एक बात समझिए बच्चा एक बार क्लास में आ. गया वो उठ के जा नहीं सकता है उसे पता है. कि मुझे पढ़ना ही है मोबाइल प कभी भी रोक. पाता है मैंने व्यक्तिगत इस बात का अनुभव. करा है कि जो जो बात वो डेढ़ घंटे में समझ. लेता है क्लास में वही जब एक नॉर्मल एवरेज. बच्चा एवरेज बात बता रहा हूं आपको वही चीज. समझने में तीन घंटे लगा देता है क्यों. क्योंकि कभी भी रोक पाता है उसको आदत हो. जाती है कभी भी पीछे होके देख लेता है हम. क्लास में हमें पता होता है कि सर की बार. बोलेंगे शेड्यूल नहीं पक्का है शेड्यूल. नहीं प आज आप सुब पढ़ रहे हो कल आप दोपहर.
पढ़ोगे वो इन डिसिप्लिन आ जाता है मैं कह. रहा हूं अगर कोई डिसिप्लिन रख पाए तो. ऑनलाइन में कोई बुराई नहीं है बट उस उम्र. में वो रख पाना 100 में से सिर्फ दो या. तीन के लिए पॉसिबल होता है ट्रू और वो. भ्रम पैदा कर देता है कि मैंने सब कर लिया. पर ऐसा होता नहीं है बेसिकली आप समझिए कि. आपने कोई चीज चार बार आगे पीछे करके देख. ली ये पॉसिबिलिटी है लाइफ में बट आप समझिए. कि आपने अपनी लर्निंग कैपेबिलिटी को कम कर. लिया जो आपको एक ही बार में सीखने की आदत. होनी चाहिए थी वो आपने चार बार में सीखी. आप सीख तो गए बट यू वेस्टेड योर टाइम एंड. योर कैपेबिलिटी ऑफ लर्निंग अ थिंग इन वन. गो दैट हैज डिक्रीज ये पता नहीं पड़ता पर.
धीरे-धीरे बच्चे के माइंड को कम करता जाता. है तो अगर मान लीजिए जितने भी बच्चे यहां. पे सुन रहे उनसे बोल रहा हूं कि अगर आपके. कोई लाइफ सस्ता पड़ता है ऑनलाइन सस्ता. पड़ता है ये एग्री टू देस सब अफोर्ड नहीं. कर सकते उनसे दो रिक्वेस्ट है शेड्यूल. फिक्स होना चाहिए 100% डिसिप्लिन होना. चाहिए एक लेक्चर को एक ही बार में देखेंगे. बिना रुके बार-बार पलट पलट के नहीं. देखेंगे आपको पता नहीं पड़ता आप अगर ऐसा. करते हो तो आप अपने मानसिक स्तर को और. आईक्यू को कम कर लेते हो भले आपको लगता है. कि मुझे समझ में ज्यादा आ गया है पर वो. टाइम वेस्ट करता है तो ये बेसिक अंतर है.
और बेस्ट कॉमिनेशन है क्लासरूम विद 100%. ऑनलाइन लाइव और टेक्नोलॉजिकल सपोर्ट. सॉल्यूशंस ये बच्चे को बेस्ट तैयारी दे. सकता है कस्टमाइजेशन और पर्सनलाइजेशन के. साथ ट्रू अच्छा जैसा आपके इंस्टीट्यूट में. जब बच्चे आते होंगे तो बच्चों को हैंडल. करना ज्यादा टफ है उनके पेरेंट्स. को एक्चुअली हमारे साथ ये होता है कि. दोनों बातें थोड़ी टफ है जैसे मैं आपको. बताता हूं कि 10थ में जब बच्चा आता है. जैसे आपने बात मेरे से रिलेट भी करी थी और. बहुत बढिया आपके साथ हुआ है क्योंकि तो आप. बिल्कुल रिलेट कर पाओगे 10थ का बच्चा आता. है सबकी 8.9 सीजीपीए ना सीजीपीए और ए प्लस.
प्लस ग्रेड आती है अब स्पेशली जब वो जेई. की तैयारी करने आता है नीट की तैयारी करने. आता है जे का पेपर बहुत टफ आता है पहले. दिन पहला बार टेस्ट होता है उसके नंबर आते. हैं 300 में से 100 80 पेरेंट्स को एकदम. से झटका लगता है क्योंकि प्रैक्टिकली 300. में से 100 वाला भी जे के लिए अपीयर हो. सकता है एडवांस के लिए आप सोचिए इतने कम. नंबर पे भी 4045 पर अगर जे एडवांस में को. नंबर लाएगा तो उसे आईटी मिल जाती है पर ये. बात पेरेंट्स तक कन्वे करना बहुत मुश्किल. होता है उन्हें लगता है कि अच्छा 100 में. से 40 ही नंबर ला रहा है ये क्या हुआ एकदम. से हमारा बच्चा तो. तो थोड़ा उनको मुश्किल होता है बट इसको. करने के लिए हम ओरिएंटेशन में उनको समझाते.
हैं रील्स बनाते हैं उनको वीडियो से उनको. एक्नॉलेज करते हैं कि नहीं यार ये ये. चीजें समस्याएं आपके साथ हो सकती है बट. हां इट इज डिफिकल्ट और ये बच्चे के साथ भी. होता है जब वो आता है तो उसे लगता है कि. मैं अच्छा होता क्या है कि अ देश में सर. 135 लाख से 15 लाख के बीच में स्कूल्स है. हम तो हर स्कूल में मान लीजिए 11थ क्लास. है तो सर 10 लाख एटलीस्ट 11थ क्लास हो गई. तो सब में एक टॉपर है हम आप सोचिए टोटली. 14 लाख दे रहे तो हर बच्चा जो उसे लगता है. मैं टॉपर पर हूं अब वो यहां आता है तो उ. उसे असलियत महसूस होती है क्योंकि रियल.
कंपटीशन है यहां तो रियलिटी में आपके 50. बच्चों पे थोड़ी रैंक आएगी यहां तो 14 लाख. बच्चों पे आएगी ये कोई नंबर का गेम भी. नहीं है तो रैंक का ही गेम है तो उससे. थोड़ा सा झटका लगता है ये हमें पता है उस. समय उसे कैसे संभालना है ये टीचर्स को. प्रॉपर गाइडेंस देते हैं हम लोग कि भाई. 11थ का बच्चा आएगा जिस दिन पहला टेस्ट. होगा उसके अगले दिन आपको क्या-क्या बोलना. है क्योंकि उस दिन ये उसके लिए सबसे बड़ा. झटका होगा दूसरे में क्या होगा तीसरे में. क्या होगा डिप देखते हैं डेटा साइंटिस्ट. हमने बिठाए यही सब पर्सनलाइजेशन है कि. अच्छा इस जगह इसकी मनोदशा खराब होगी यहां. पे अपने को काम करना चाहिए मैं फिर आपको.
एक बत बताऊं सर हम अभी भी इसी बात पे लड़. रहे हैं कि इसको कंटेंट कैसे डिलीवर करें. फिजिक्स कैसे पढ़ाएं केमिस्ट्री कैसे. पढ़ाएं मैथ्स कैसे पढ़ाए बायोलॉजी कैसे. पढ़ाए इससे ज्यादा इंपॉर्टेंट एक और चौथा. सब्जेक्ट है इसे मोटिवेटेड कैसे रखें. मॉनिटर करते हुए ये अपने आप में एक. सब्जेक्ट है सर कैसे इसकी स्किल्स को. इंप्रूव करें बच्चे की स्किल ही नहीं है. सर सिर्फ ज्ञान से थोड़ी कुछ हो जाएगा वो. अगर कैलकुलेशन नहीं कर सकता 11वी में कई. बार बच्चा आता है वो हो सकता है एलसीएम. नहीं ले पाता हो हमें समझना पड़ेगा कि. उसकी एलसीएम की समस्या भी हमें ट्रू सॉल्व. करनी है इसके लिए बहुत सारी चीजें करी. जाती है क्योंकि आप कई सालों से पढ़ा रहे. हैं और आप खुद एक एवरेज स्टूडेंट से फिर.
आप आज शानदार कोचिंग इंस्टिट्यूट चला रहे. हैं आपकी नजर में सक्सेस की डेफिनेशन क्या. है जो सक्सेस इन अ सेंस वो बच्चे जो सफल. हो जा रहे हैं आईटी में पहुंच जा रहे हैं. क्या डिफरेंस है उनमें और उनमें जो नहीं. सिलेक्ट हो पाए मेरे हिसाब से मैं इस बात. सफलता को इस बात से मानता ही नहीं हूं कि. उनके पास डिग्री है कि नहीं है तो मैं इस. बात का बिल्कुल बिलीव नहीं करता हूं कि. आईटी पहुंचा नहीं पहुंचा उससे महत्व नहीं. होता मैं खुद को सफल मानता हूं इसलिए नहीं. कि कोई बड़ा नाम है या बहुत सारी चीजें. मैं खुद को सफल इसलिए मानता हूं क् मैं वो. कर रहा हूं जो मैं करना चाहता हूं मैं. बच्चों से यही बोलता हूं कि जीवन में अगर. तुम वो कर पाए जो तुम करना चाहते थे 100.
में से 95 लोगों के पास दुनिया में काम. होता है अगर ऑनलाइन एवरेज आप देखोगे पर 95. में से सिर्फ और सिर्फ पांच या 10 लोग ऐसे. होते हैं अपने जीवन में वो काम वो करते. हैं जो वो करना चाहते हैं चाहते हैं मैं. चाहता हूं तुम वो बनो खुशी अपने आप आ. जाएगी दूसरी बात किसी ने बहुत अच्छी बात. बोली है कि अगर जीवन में खुश रहना है सर. जैसे आपने सुसाइड की बात कर सुसाइड तो. आईएस ऑफिसर्स ने भी करी है वो तो जीवन में. सफल थे सर अपने अगर जीवन में खुश रहना है. तो कर्तव्य का भाव रखिए अधिकार का नहीं जी. बहुत सुंदर बात मुझे लगती है और मैं. बार-बार इसको रिपीट करता हूं फिर बोलना.
चाहता हूं और शायद इसलिए भी बोलता हूं कि. मैं उसका अनुसरण करना चाहता हूं रिवीजन. करना चाहता हूं कि कर्तव्य का भाव रखिए. अधिकार का नहीं जब आपके मन में कर्तव्य का. भाव होगा कि मुझे मा माताजी पिताजी के लिए. समाज के लिए कर्तव्य हैं वह जब बोध होगा. तो आप काम अच्छा करोगे अधिकार का नहीं कि. हमारे लिए ये नहीं करा गया यहां पर यह. खराब था उसको सुधारने की प्रक्रिया में. जाइए उसको सिर्फ और सिर्फ कंप्लेनिंग मोड. में जाने की आवश्यकता नहीं है ू हालांकि. मेरे हिसाब से मेरा जो सक्सेस का फार्मूला. रहा वो थ सी का फार्मूला था क्या बात है. पहला.
कन्विसिटी. जा रहे हो कि मुझे आईटी निकालना है क्या. आपको अपने आप पे कॉन्फिडेंस है एग्जाम. होगा देखा जाएगा तैयारी होगी वो बात की. बात है बट पहला थॉट तो आपको क्या आता है. अंदर से क्या मैं कर सकता हूं सेकंड उसको. लेकर क्लेरिटी कैसे काम करना है कोचिंग. सेंटर्स के थ्रू इधर से करना है ऑनलाइन. करना है एंड थर्ड इज कंसिस्टेंसी करेक्ट. 100% करेक्ट 100% करट आपको रोज अपने आप को. पुश करना है अगर आप पुश नहीं करोगे अगर.
किसी को आपको उठाना पड़ रहा है हां तो फिर. नहीं होगा नहीं होगा नहीं होगा सफलता पहले. मन में आती है पहले खुद के मन में आती है. फिर दुनिया को दिखाई देती है वो कन्वेंशन. वाली बात कि आप अगर श्यर नहीं हो क्योंकि. अगर आप श्यर हो तो आपकी तबीयत खराब होगी. आप उठोगे बिल्कुल सही बात है आपका मूड. खराब होगा आप कहोगे फिर भी पढ़ना है हां. सही बात है आपका फिल्म देखने का मन है आप. देख के भी आओगे लेकिन आप एक्स्ट्रा टाइम. निकालो ग आज नींद से समझौता करोगे कई बार. बच्चे ऐसा करते हैं सैक्रिफाइस नहीं कर. पाते तो उनके मन में गिल्ट आने लगती है कि. अब एक्चुअली मूवी को देख के मुझे याद आया. कई बार बच्चे से प्रश्न पूछते सर मूवी तीन.
दोस्त चले गए और मैं नहीं गया पर मैं पढ़. भी नहीं पाया मैं उनको यही बोलता हूं कि. मैंने भी ये करा क्योंकि कि अगर आपने किसी. चीज के लिए सैक्रिफाइस करा है तो उस समय. में दुगनी रफ्तार होनी चाहिए गिल्ट नहीं. इससे बढ़िया तो चले ही जाते अगर तुम्हारे. तीन दोस्त मूवी देखने गए थे और तुम या तो. चले जाते तो कम से कम एंजॉय करके आते अब. तुम तीन घंटे गिल्ट में निकाल दिए कि यार. मैंने एंजॉय नहीं करा और उसके बाद भी. सोचते रहे यार मैं चला जाता तो मजा आता. इससे बेहतर ये था कि तीन घंटे अगर नहीं गए. हो तो 6 घंटे का पढ़ेंगे ये मैं बात इसलिए. बोल रहा हूं कि आईटी में पढ़ाने लग गया था. तो मेरे सारे दोस्त वगैरह गोवा वगैरह गए. तो मैं उस समय नहीं गया तो मैंने खुद से.
प्रण लिया गोवा गए नेपाल गए बहुत सारी जगह. इंटर्नशिप लगी थी पर मैं क्यों पढ़ाता था. तो मुझे कॉलेज में ही रहना पड़ता था. छुट्टियों में भी वही रहता था तो मैं ये. बोलता था कि अगर मैं वहां नहीं गया हूं तो. फिर काम दुगनी रफ्तार से करूंगा या तो चला. ही जाता बात है इंडिया जैसे देश में आप. एवरेज अगर है या हाफ एंड हाफ आउट है आपके. लिए कोई जगह नहीं कोई जगह नहीं है कोई जगह. नहीं है ये करना पड़ेगा आपको मकर बन के. खत्म हो जाएंगे आप चाहे पढ़ाई कर रहे हैं. बच्चे हैं एजुकेशन सिस्टम में है कोचिंग. इंस्टिट्यूट चला रहे हैं तरह काम कर रहे. हैं अगर आप म्यूकर है तो आप गायब हो.
जाएंगे बिल्कुल सही बात है यह मेरा माना. ठीक है एजुकेशन सिस्टम को लेकर बड़ी बातें. होती है इंडिया में हर आदमी कहता है किर. इंडिया का एजुकेशन सिस्टम जो है बड़ा. अजीबो गरीब है कई बार हमारे मन में भी. सवाल आता है कि जो स्कूल में पढ़ते थे और. जो जॉब करते थे उन दोनों में जमीन आसमान. का फर्क है या ये तो फिर ये इतना डिफरेंस. क्यों है मेरे हिसाब से अपन थोड़ी सी मैं. इस बात प और जो मेरी विचारधारा है वो रखना. चाहता हूं थोड़ी अलग है आपके और हमारे. पिताजी ने जब उनकी डिग्री कंप्लीट करी थी. मेरे पिताजी ने जब डिग्री कंप्लीट करी और. जो भी उनकी उम्र के थे उन्होंने एक डिग्री.
कंप्लीट करी उन्होंने एक ज्ञान लिया उस. ज्ञान के बेसिस प उनकी जॉब लगी और ऑलमोस्ट. उसी ज्ञान से पूरी जॉब निकल गई हम उसी. ज्ञान से अब ऐसा नहीं है सर अब ऐसा नहीं. है जो आप इंजीनियरिंग से मेडिकल से पास. करके निकलोगे लॉ फॉर्म से पास करके. निकलोगे सर वो तीन साल में. ऑब्सटेंट था वो तीन साल में. ऑब्सटेंट नहीं कर सकते इसका मतलब शिक्षा. जो दी जा रही है जो ज्ञान आज दिया जा रहा. है ये ऑब्लेट हो सकता है इसको पढ़ने का. तरीका बदला जा बदल जाएगा कुछ समय बाद तो.
यानी कि असली शिक्षा का मतलब है कि सीखने. की प्रक्रिया को सिखाना असली शिक्षा है दो. चीजें उनमें करना बहुत जरूरी है उनको ये. बताना कि सी बहुत बहुत बड़ी लाइन आपने. बोली है सीखने की प्रक्रिया को सिखाना हा. असली शिक्षा है सर ट्रू अगर ये हम नहीं. इनकल्केटिंग है आज की तारीख में सर सही. बताऊं तो किसी यूनिवर्सिटी किसी कॉलेज. किसी स्कूल किसी डिग्री की जरूरत नहीं है. इंटरनेट आपको सब कुछ सिखा सकता है. विद्या बने रना जीवन भर तभी आप सफलता का.
मूल मत्र पकड़ सकते हो तो शिक्षा का असली. महत्व है कि सीखने की प्रक्रिया को सिखाना. यह असली शिक्षा है और यह हर फीड में लागू. है य हर फील्ड में लागू है यह हर फील्ड. में लागू है उस बेसिक ज्ञान को देना इस पर. बात होनी चाहिए मैं मानता हूं करिकुलम. चेंस होने चाहिए मैं मानता हूं बट करिकुलम. चेंज हो गया नई चीज को कैसे एक्सेप्ट करके. पढ़ना चाहिए यह बच्चे को नहीं आता अगर यह. नहीं आएगा तो आगे एक्सेल नहीं करेगा आज. आपने उसके पले नंबर लिया है जैसे आपने. मुझे बोला कि आपको ललक लग कि यार मुझे. जर्नलिज्म करना था और मैं इंजीनियरिंग में. मेरी नाइ सीजी पे आने लगी थर्ड ईयर से.
क्योंकि सर आपको एक मोटो मिल गया था कि. मुझे क्योंकि फादर ने बोला कि नहीं यार. ढंग से ये करना है तो आप नंबर तो ले आए आज. तो उसको यूज नहीं कर रहे हैं बट आपने जैसे. बोला रात भर पढ़ के मैं पेपर देता था. जिसकी वजह से आज मैं मेहनत कर पा रहा हूं. वो रियलिटी है क्योंकि आपने सीख लिया कि. अच्छा ऐसे पढ़ते हैं खुद करते हैं मेरे. हिसाब से मैं श्यर हूं कि आप कॉलेज में. बहुत प्रोफेसर की बजाय खुद से ही ज्यादा. पढ़ते होंगे वही करते थे दोस्ती आरी. दोस्ती आरी में पढ़ते थे जैसे भी पढ़ते थे. हम काम करते थे हमने दो तीन लड़के रखे थे. अच्छा कि आपका बाकी सारा काम हम कराएंगे. फेस्ट का आप सिर्फ पढ़ो नोट्स बनाओ और.
एग्जाम की एक रात पहले पढ़ के तैयार रहो. ताकि रात भर हमें पढ़ाओ क्या बात है. बिल्कुल मैं भी ऐसे ही करता था उनके आते. थे 99.5 99.7 हम 88.9 पे हम खुश थे फिर. क्योंकि जॉब तो एक ही लगती है हम अच्छा ये. भी एक बड़ा अजीबो गरी सिस्टम है जॉब को. लेके पूछूंगा मैं आपसे अ बीटेक की पढ़ाई. अपने आप में एक लड़ाई है बट पढ़ाई के बाद. जब आप फोर्थ ईयर में जॉब में जाते हो कि. आप तो बहुत सारे बच्चों से राबता आपका. होता होगा आई डोंट नो अबाउट आईटी बट उसके. बाद जितने एआई ट्रिपल ई या जो स्टेट. वगर प्लेसमेंट होता है आपका सीएसआईटी.
फील्ड में हम आप पढ़ रहे हो मैकेनिकल आप. पढ़ रहे हो सिविल आप पढ़ रहे हो और फिर. आती है सारी कहानी इंग्लिश पे मेरे बहुत. सारे दोस्त ऐसे थे जिन्होंने बहुत पढ़ाई. की जिन्होंने हमें पढ़ाया बट उनका. सिलेक्शन इसलिए नहीं हुआ क्योंकि जब. एटीट्यूड टेस्ट हुआ या वो इंग्लिश वाला. टेस्ट हुआ और उनके जहन में सवाल था कि अगर. यही इंपॉर्टेंट था तो फिर चार साल हमें वो. क्यों ज्यादा पढ़ाया गया क्योंकि 4 साल. हमने नंबर तो कमा लिए हमें हमारा काम आता. है हमें हमें ब्रांच का सब कुछ आता है आप. हमसे क्वेश्चन पूछो लेकिन उस क्वेश्चन.
पूछने के पहले का जो एग्जाम था हम एंड आई. सीरियसली नो थ्री फोर गाइज जो 99.8 9.9 एक. सेमेस्टर में 10 आउट ऑफ 10 भी लाए थे ह हम. उनको रिजेक्ट कर दिया गया नहीं ये सर ये. गलत है और मैं कहता हूं आप जैसे लोगों को. इस विचारधारा को बदलना चाहिए कि अगर बच्चे. की इंग्लिश थोड़ी कमजोर है उसे रिजेक्ट कर. दिया जाता है इंटरव्यू में बहुत गलत है ये. मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा है मेरी तो. ठीक-ठाक थी तो मेरी जॉब लग गई आईबीएम. वगैरह में मेरे से जस्ट एक पता नहीं नाम. लेना चाहिए लेना चाहिए मेरे से जस्ट पहले. आईआईटी में मेरा ही एक फ्रेंड मेरे से. जस्ट ऊपर रोल नंबर नितिन ग्रेवाल हो सकता. है वो सुने उसे कैसा लगे मुझे नहीं पता वो.
मुझे पता है दिमाग से बहुत तेज लड़का है. आज भी तेज ही है बहुत और वह बहुत अच्छा कर. रहा है अब तो बट मुझे पता है उसकी सिर्फ. इस कमी की वजह से सिर्फ इस कमी की वजह से. वो हम सब में बहुत तेज दिमाग वाला लड़का. था पर सिर्फ इस कमी की वजह से उसकी. शुरुआती दो-तीन जॉब नहीं लगी ये हमारे साथ. हुआ और और ये उसको फ्रस्ट्रेशन में ले आया. उसको उसका कॉन्फिडेंस हिलता हुआ देखा. मैंने फोर्थ ईयर में इस बात को लेके और. हमें सबको पता था कि यार इंटेलिजेंट है बट. क्योंकि उसकी कम्युनिकेशन उतनी स्ट्रांग. नहीं थी तो शुरुआती दौर में जो जिस तरी की. जॉब वो एक्सपेक्ट कर रहा था उस तरीके की. जॉब नहीं लगी फाइनली उसकी उसकी एक अच्छी. जॉब लग गई अब वो बहुत बढ़िया कर रहा है पर. मैं कह रहा हूं सिर्फ और सिर्फ.
कम्युनिकेशन के बेसिस पे बच्चे को नकार. देना आपको जो उसकी नॉलेज चाहिए उसपे बात. करनी चाहिए कम्युनिकेशन लैंग्वेज तो एक. लैंग्वेज है ना सिर्फ इंग्लिश का टेस्ट. थोड़ी हो रहा है उसे इंग्लिश में मैं. मानता हूं कम्युनिकेट करना आना चाहिए आई. एग्री टू दैट पॉइंट वो सीख जाएगा वो ट्रू. तो ये तो एक प्रॉब्लम है सेकंड प्रॉब्लम. जो मैंने आपसे कही कि आपने चार साल पढ़ाई. की मैकेनिकल की सिविल की या इलेक्ट्रिकल. की और 90 पर कंपनियां जो आपको उठाने आ रही. हैं वो आ रही है सीएसआईटी की वो आपसे. पूछते हैं आपको प्रोग्रामिंग आती है फिर. आप रट्टा मारते हो हम प्लेसमेंट के टाइम. में बिकॉज आपको जॉब चाहिए आपके फादर तो कह.
रहे हैं कि बेटा तुमको बहुत पढ़ाया मैंने. अब उनको नहीं पता कि वो कंपनीज नहीं आती. उनके लिए हम अलग से तैयारी करनी पड़ेगी ये. एक डिमांड एंड सप्लाई का गेम है दूसरी बात. मैकेनिकल में ये क्यों हो रहा है मैं आपको. बताता हूं जैसे मेरे साथ वाले कुछ लोग. आपने किस किस ब्रांच में किया था मैंने. सिरामिक्स में करा था है ना तो मेरी मेरी. भी जॉब इनम लगी थी अ सीएसआईटी सीएसआईटी. में आईबीएम में लगी कोसेस में लगी बाकी. मेरी कोचिंग इंस्टिट्यूट में यही थोक के. भाव ले जाती है हां थोक के भाव ले जाती है. मेरे को तो खैर जाना भी नहीं था जैसे मैं. अपना एक्सपीरियंस आपको बता हूं सुबह 8:00. बजे मेरा दोस्त आया क्योंकि हमारी जॉब में. कंपनी मेरे को तो बैठना भी नहीं था ज्यादा. कि भाई ठीक है अब मैं लग चुकी थी कोचिंग.
सब जगह में तो मेरा दोस्त आया सुबह कियार. है ना अपन जॉब तुम तू जॉब में बैठ जा. क्योंकि तू नहीं बैठेगा ना तो बाकियों की. जॉब नहीं लगेगी क्योंकि ऐसा रूल रहता है. कि यार सबकी लग जाए तभी अपन चलने तो मैं. एग्जाम देने गया आसपास वालों ने रियलिटी. में पेपर क्लियर करा दिया मुझे तो सी. लैंग्वेज भी नहीं आती है है ना तो मैंने. अपना पेपर कर दिया आसपास वालों ने कराया. जो मैं क्लियर हो गया तो मेरा इंटरव्यू या. आईबीएम के दो हस्बैंड वाइफ थे वो दोनों. आईबीएम में काम करते थे उन्होंने मेरा. इंटरव्यू लिया तो इंटरव्यू लिया तो. उन्होंने मेरे से बोला अरे तो यू हैव डन. रियली गुड इन टू टेस्ट पेपर तो मैं. मुस्कुरा दिया तो मेरी मुस्कुराहट से समझ.
गए कि भाई इसको कुछ नहीं आता है तो. उन्होंने मेरे को बोला कि. भाई आपने ये ऐसे ही करा है तो हां सर मैं. ऑनेस्ट था जैसे आपने बोला इंटरव्यू मैंने. नेस्ट बोला हां सर ये आप जानते कैसे हुआ. है तो उन्होने बोला तुम्हें क्या आता है. मैं तो पढ़ाता ही था तो मैंने बोला सर. मुझे फिजिक्स आती है उन्होंने मेरे से. फिजिक्स के दो सवाल पूछे दोनों मुझे बहुत. अच्छे से आते थे बहुत अच्छे से एक्सप्लेन. करा फिर उन्होंने मेरी जॉब लगा दी तो फिर. वो मेरे को मिले शाम को वापस हमारा एक जगह. है वहां पे मैंने कहा सर आपने मेरे जैसे. लड़के को क्यों ले लिया मेरे को तो आपको. ये भी पता पड़ गया कि मैं आऊंगा नहीं या. उन्होंने बोला शायद तुम आ जाओ अलग वो एक. चांसेस है और आपने बिना हमारी कोई. लैंग्वेज को देखे आपने ऐसा क्यों ले लिया.
उनका एक अलग बात इसमें बोलना चाहता हूं जो. शायद आयर एनी भी है पर माननी पड़ेगी हमको. उन्होंने ये बात बोली कि अगर हम टॉप. कॉलेजेस से 100 लड़के उठाते हैं तो 70. अच्छे निकल आते हैं नॉर्मल कॉलेज से 100. उठाते हैं तो 30 अच्छे निकलते हैं इसलिए. अगर हमें कभी कम चांस लेना होता है तो हम. बल्क में टॉप कॉलेजेस से बच्चों को उठा. लेते हैं आपके प्रश्न में वापस आता हूं कि. मैकेनिकल से हम गए सिविल से गए कैसे गए ये. डिमांड एंड सप्लाई का गेम है मैकेनिकल. वाले बच्चे या जो हमारी ब्रांच से जो कोर. ब्रांचेस में चले गए उनको दो-तीन साल में.
समझ में आ गया इसमें ग्रोथ नहीं होगी. इसमें ग्रोथ नहीं होगी वो सेक्टर है ये. सेक्टर डिपेंडेंट है और अब इसे हम डिनायर. कि मैकेनिकल वाला भी इसलिए जा रहा है. क्योंकि उसे पता है सीएस में ग्रोथ है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है डेटा साइंटिस्ट. है मशीन लर्निंग है न्यूरो. न्यूरोप्लास्टिसिटी बहुत काम हो रहा है. न्यूरो मार्केटिंग प बहुत काम हो रहा है. ये सब कंप्यूटर बेस्ड चीजें हैं और ये. डिमांड है तो इसमें ग्रोथ ज्यादा है तो. लोग ज्यादा जाएंगे हम इसे रोक नहीं सकते. पर कोई फर्क नहीं पड़ता चलिए इसी को थोड़ा. रिफ्रेम करते हैं आजकल मोदी जी अलग-अलग. फील्ड से अलग-अलग लोगों को चीफ मिनिस्टर.
बना देते हैं या मंत्री बना देते हैं अगर. आपको एजुकेशन मिनिस्टर बना दिया जाता है. तो क्या बदलो. आप बहुत हैवी सवाल है. वैसे व कहते है ना मोदी है तो मुमकिन है. यू नेवर नो तो मेरे हिसाब से शिक्षा के. क्षेत्र में अगर कभी मुझे काम करने का. मौका मिले या एडवाइजरी बोर्ड प काम करने. का मौका मिले तो जो मैंने अभी आपको पहले. बोला था वही मैं वापस रिपीट करता हूं कि. मुझे लगता है कि शिक्षा के क्षेत्र में. कस्टमाइजेशन पर बहुत काम होना चाहिए चाहे. वो यटी लेवल पे हो चाहे वो स्कूल लेवल पर. हो चाहे वो कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में हो.
पर्सनलाइजेशन इन एजुकेशन इज द की एंड एट द. सेम टाइम वी हैव टू मेक श्यर कि. पर्सनलाइजेशन आपने कर दिया पर वो बहुत. महंगा है तो हमारे पर्पस से डिफीट हो. जाएंगे पर्सनलाइजेशन मिनिमम कॉस्ट पे लाना. ये टारगेट होना चाहिए मुझे अगर कभी ऐसा. मौका मिला तो इस परे रिसर्च एंड डेवलपमेंट. जितनी होनी चाहिए वो मैं कराऊंगा ताकि. बच्चों का सबका एवरेज बच्चे का भविष्य. लिफ्ट हो सके उसकी कमियों से हम उसको बाहर. ला सकें मैं इस इस विचारधारा का पक्ष. बिल्कुल नहीं रखता हूं कि बच्चे में. स्ट्रेस कम करने के लिए करिकुलम को लाइट.
करा जाए उसे और आसान बनाया जाए इससे हम. देश को दूरगामी समय में नुकसान पहुंचाएंगे. यह बात होनी चाहिए कि उसी करिकुलम के साथ. कैसे पढ़ाया जाए कैसे कस्टमाइज करा जाए. ताकि उसे आसानी से डिलीवर करा जाए और हम. एवरेज बच्चे को भी वो बात समझा पाए इस पे. चर्चा होनी चाहिए आसान कर देना कोई. सॉल्यूशन नहीं है ठीक है प्रेशर हैंडलिंग. बहुत इंपॉर्टेंट है मुझे लगता है सबसे. ज्यादा इंपोर्टेंट वही है स्पेशली जब आप. आते हो एक बच्चा आता है जैसे हमने ने उस. कोटा फैक्ट्री में दिखाया कि ऑटो में. बैठने से शुरू आता है हम आशा कहां से आए.
हैं यहां से आए हैं फिर फादर का जाते वक्त. वो बातें करना आपके फादर ने भी आपसे किया. होगा कि बेटा बहुत मेहनत से पैसे कमाए हैं. फिर जो कॉल्स आती होंगी शाम को कि पढ़ रहे. हो ना बहुत मेहनत की है तन पेट काट के. तुमको तो ये एक प्रेशर जो आता है एक आपका. प्रेशर एक बगल वाले बच्चे का प्रेशर जो. रैंक ला रहा है एक वो सपने का प्रेशर और. एक वो मां-बाप का साइकोलॉजिकल प्रेशर. रिश्तेदार पूछ रहे हैं दो पूछ रहे हैं. हमने बहुत खर्च किया है मम्मी का कि पापा.
नजर रखे हैं आज वो खाना नहीं खाए तो नंबर. कम हुए थे ये कैसे हैंडल हो इस बात को. शुरू करने से पहले मैं यह बोलना चाहूंगा. कि जो क्योंकि पेरेंट्स भी बहुत सारे सुन. रहे होंगे मैं इस मामले में सौभाग्यशाली. रहा मेरे फादर मदर ने मुझे कभी प्रेशर. नहीं करा आईटी के लिए भी नहीं करा कभी य. लाइन नहीं बोली कि तेरे पर हमने पैसा खर्च. करा कभी नहीं बोली मुझे लगता है यह अगर. कोई बोल रहा है तो बहुत गलत है यह मुझे. नहीं मिली सुनने को कभी भी कि तू सेलेक्ट. नहीं हो होगा तो तेरा ये उन्होंने समझाया. कि बेटा अपन म एक बार उन्होंने कंधे पर. हाथ रखा मैं 12थ में थोड़ा आउट ऑफ ट्रैक.
चला गया था फेरल वगैरह होता है तो अपन भटक. जाते हैं है ना दैट हैपेंस खूबसूरती के. चक्कर हां खूबसूरती के चक्कर में तो दैट. हैपेंड तो मैं 12 के साथ सिलेक्ट नहीं हु. तो पापा ने कंधे पे हाथ रखा बोला बेटा देख. अपन मध्य ंगी परिवार के हैं तू कुछ नहीं. कर पाएगा तो फिर अपन बहुत नॉर्मल से तेरे. को बिजनेस करा पाएंगे बाकी तेरी जैसी. इच्छा है बस इतनी सी बात उन्होंने बोली. कोई प्रेशर नहीं कुछ नहीं उन्होंने हमेशा. साथ दिया पढ़ रहा है तो बहुत बढ़िया बात. है हमारी माता जी भी हमेशा पढ़ भी रहा है. तो भी उनके लिए ये जरूरी था कि नहीं मंदिर. जाना है अपने को छो छोटे काम करने हैं ये. सब चीजें उनके लिए करना बहुत जरूरी था. हमारी माता जी से मैं आपको सही बताऊं तो.
कभी-कभी अगर मेरा कोई दोस्त आता था मैं. बोलता था कि आप इनको बोल दीजिए कि मैं घर. पे नहीं हूं तो भी वो सही बोलती थी नहीं. वो घर पे ही है मतलब उस विचारधारा से मैं. तो पेरेंट्स से बोलना चाहता हूं प्रेशर मत. करिए मैं एक बात बोलता हूं सभी पेरेंट्स. को जो यहां प रिपीट करना चाहता हूं कि अगर. आप रियलिटी में बच्चों को सफल बनाना चाहते. हो तो उसको पहले ये समझाइए कि जो तुम. मेहनत कर रहे हो सफलता उस जगह में है पहली. शर्त दूसरी बात रोज जब वो आपके घर पे आए. चाहे वो स्कूल से आ रहा है कोचिंग से आ. रहा है यूनिवर्सिटी से आ रहा है आज ये मत. पूछो नंबर कितने आए टेस्ट में नंबर कितना. है ये मत पूछिए प्रश्नावली बदलिए कि क्या. आज पढ़कर कुछ सीखा क्या आज पढ़कर कुछ मजा.
आया अगर हम अपनी प्रश्नावली बदल देंगे ना. एज अ पेरेंट आप विश्वास मानिए हम भविष्य. बदल देंगे बच्चे का उसे जब मजा आने लगेगा. ना पढ़ने में नंबर्स उसका एक बहुत छोटा सा. आउटकम है उसे अगर आनंद नहीं आने लगा ना. उसे आनंद उससे ये पूछना कि तेरे को आज पढ़. के मजा आया नहीं आया कि नहीं मजा नहीं आया. तो फिर उस बात पे जाना कि क्यों नहीं मजा. आया वो वो उसकी क्यूरियोसिटी बिल्ड कराना. बहुत इंपॉर्टेंट है नंबर अपने आप आने. लगेंगे ये इसका छोटा सा आउटकम है अगर इन. बातों को हम समझ लेंगे तो में कर पाएंगे. प्रेशर हैंडलिंग की आपने बात करी उसका. उत्तर भी मैं देना चाहता हूं मेरा.
व्यक्तिगत मत ऐसा है कि हम जीवन में वो. बनते हैं प्रेशर हमारे पास से भी आता है. हमारे. पास हम हमारे जीवन में वो बनते हैं जो हम. याद रखते हैं हम हमारे जीवन में वो बनते. हैं जो हम याद रखते हैं हमारी अपनी. प्रीवियस क्या-क्या बातें आपने याद रख रखी. है ना वो आपके भविष्य का निर्माण करती है. मेरा व्यक्तिगत मत ऐसा है तो आप अपने. प्रीवियस से सिर्फ अच्छी याद याद रखिए जब. हारे थे उसको उससे सिर्फ सीखिए याद मत. रखिए जब जीते थे उसको याद रखिए किस परिवार. के सदस्य ने ने आपसे बुरी बात करी थी उसको. इग्नोर करने की पावर होनी चाहिए मैं जानता. हूं ये कहना आसान है करना बहुत मुश्किल है.
पर अगर ये हमारे जीवन में हमने उतार लिया. जो कि फोन आया जब मैं 12वी साल सिलेक्ट. नहीं हुआ तो बहुत लोगों का फोन आया जब. सिलेक्ट हुआ तो नहीं आया ये सच्चाई है. हमारे जीवन की पर मैं कह रहा हूं इसको. भूलना आपको आना चाहिए अगर ये आप पावर ऑफ. इग्नोर से को समझ पाए कि क्या याद रखना है. क्या याद नहीं रखना है आप प्रेशर को हैंडल. कर पाएंगे अच्छा एक सवाल मेरे मन में और र. है आपने जब आप आपके वीडियोस देखे मैंने और. आप साइकिल का पहिया घुमा रहे थे बहुत सारी. चीजें आप कर रहे थे. यह तो आपका स्टाइल हो गया कि मजा क्या आया. हम बट जरूरी नहीं ना कि सारे टीचर नितिन.
जैसे. हो यहां पर काम करने की आवश्यकता है वही. एजुकेटर बने और हमको एक मजा आया हमने आपसे. फिजिक्स पढ़ी हमको मजा आया हमको. केमिस्ट्री मजा नहीं आ रहा हमने एडमिशन. आपके यहां लिया है और अगर नंबर तीनों. बराबर नहीं आए सिलेक्शन होना नहीं है. इसमें एक बात बोलना चाहता हूं कि जाहिर सी. बात है कि हमारे परिवार में भी सबके. परिवार में मान ले पांच लोग हैं आपके. पांचों से ट्यूनिंग अच्छी नहीं सकती है पर. वो परिवार के सदस्य सब आपका भला चाहते हैं. हम पहली बात तो ये मानसिकता आपको समझनी.
पड़ेगी ठीक है ठीक है 99 पर एजुकेटर जो. क्लासेस में जा रहे हैं वो इसी य के साथ. जाते हैं कि उनका बच्चा अच्छा करना चाहिए. किसी किसी का पढ़ाने का तरीका अलग हो सकता. है कोई थोड़ा सीरियस ज्यादा पढ़ाता है कोई. फन स्पेस में पढ़ाता है जब तक उसकी. नेचुरलिटी बाहर नहीं आएगी अगर हम सबको एक. ही पैरामीटर में डाल द कि आपको इसके बाद. जोक मारना है तो सब एक्टर हो जाएंगे वो. ज्ञान डिलीवर नहीं कर पाएंगे वो पॉसिबल. नहीं है तो पहले तो हम समझे कि जो सामने. खड़ा है क्या वो मेरा भला चाहता है पहली. बात यह विश्वास होना चाहिए और यह एजुकेटर. को भी होना चाहिए अगर वह नहीं है तो वैसे. भी ज्यादा दिन एजुकेटर अच्छा नहीं रह.
पाएगा दूसरी बात बच्चा इस बात को समझे और. इस बात को एक्सेप्ट करे कि सारे उंगलियां. एक बराबर नहीं हो सकती तो सारे एजुकेटर भी. एक बराबर नहीं हो सकते उनका इंटेंट यह है. कि वह आपको सिखाना चाहते हैं उस इंटेंट के. साथ आप बैठोगे तो आप वाकई में आगे बढ़. पाओगे दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं. बच्चों को लगता है कि उसकी प्रिपरेशन का. 80 पर हिस्सा यह है कि टीचर कौन पढ़ा रहा. है और वह कैसा पढ़ा रहा है पर असलियत में. यह हिस्सा सिर्फ 20 पर. है रियलिटी यही है बच्चे को लगता है कि 80. पर हिस्सा वो है कि टीचर जो पढ़ा रहा है.
वो कैसा पढ़ा रहा है बट रियलिटी में बताऊं. कि इसका उसके जीवन में रियलिटी में रोल 20. पर ही है स्पेशली इन कॉम्पिटेटिव. एग्जामिनेशन वो सिर्फ एक थ्योरी पार्ट है. सर इसके बाद बहुत सारी कड़ियां छोटी-छोटी. जुड़ती हैं जिससे सिलेक्शन होता है बच्चे. को लगता है मेरी थ्योरी कंप्लीट हो गई मैं. सिलेक्ट हो जाऊंगा ये बहुत छोटी सी बात है. आज की तारीख में तो हो सकता है कि बच्चों. को कोई चीज क्लास में कम समझ में आई. है वो बच्चों को लगता है % है पर. वास्तविकता में वो 20 पर है और उंगलियां.
बराबर नहीं हो सकती यह मैं उनको कहना. चाहता हूं आपके कोचिंग इंस्टिट्यूट में भी. ड्रेस कोड है हां बिल्कुल ये हमारा ड्रेस. ही है ये हम ये हमारी कोचिंग की ड्रेस है. बच्चे दूसरी पहनते हैं ब बच्चे टीशर्ट है. उनके लिए फिक्स्ड ओके तो ये ड्रेस कोट के. पीछे लॉजिक क्या होता है क्योंकि इस. सेक्शन का भी उस फिल्म में मजाक उड़ाया. गया था हां मैं व्यक्तिगत मेरा ऐसा मत है. कि आप देखिए तो हम सुबह मैं मेरी वाइफ. पूरा स्टाफ इसी को पहनता है हम बच्चे से. एक्सपेक्ट करते हैं कि अनुशासन में रहना. है जीवन में सफल होना है तो आप सोचिए शायद. उसको तो एक दो साल ही पहननी है हमें जीवन. भर पहनना है पर ये इसलिए पहनते हैं ताकि.
उसे उसे लगे कि वो अगर कॉम्प्रोमाइज कर. रहा है अपनी सुंदरता को लेके या जैसा वो. दिखना चाहता है उसको लेके क्योंकि उस समय. अनुशासन चाहिए तो हम भी उतने ही अनुशासित. है मतलब कांसेप्ट जितना मैं समझ पां ये कि. साज सज्जा में कम समय जाएगा अगर एक ही. कपड़ा रोज प एक ही कपड़ा और सता मेरा बहुत. बहुत सारा टाइम बचता है सर मेरे पास ये. 2525 शर्ट हैं 25 जैकेट है 25 ये हैं रोज. यही पहनना है मतलब हो सकता है आपको अजब से. लगे कि यार कोई फनी नहीं है जीवन में बट. हां एक काम कम हो गया है और ईमानदारी से. बताऊं तो मेरी वाइफ भी यही पहनती है रोज.
तो मेरा खर्चा भी बहुत बच गया. है क जोगस पार्ट बट हां बच्चे को क्योंकि. अनुशासन सिखाना होता है हां स्टाफ को. सिखाना होता है तो क्योंकि ये क्या शिक्षा. नगरी जैसे कई बार हमारे पास यंगस्टर्स आते. हैं तो बोलते हैं सर. ह कि यह क्यों हम थोड़ा अनुशासन आवश्यक है. अनुशासन की पहली भरी परिभाषा और यह मेरे.
हिसाब से शिक्षा के क्षेत्र में मेरा. व्यक्तिगत मत है कि डिसेंट लेवल तक होना. चाहिए एक बार आप प्रोफेशनल लाइफ में चले. गए हमारी प्रोफेशनल लाइफ तो क्या डिफरेंट. है इसलिए हमें करना पड़ता है क्योंकि हम. बच्चों से रूबरू होते हैं उसको सिखाने के. लिए हमें करना पड़ता है ये हमारी नीड नहीं. है रियलिटी में यह बच्चे को क्योंकि बता. रहे है कि देखो तुम्हारे लिए हम भी यह कर. रहे हैं और हम यह कर सकते हैं तो तुम भी. यह कर सकते हो क्योंकि एजुकेटर उस समय के. लिए उसका रोल मॉडल होता है तो आमतौर पर. बच्चों की शर्ट और टीशर्ट कितने की आती. होगी मतलब उनका पूरा केट आता है करीब 000. का च 5000 का 4000 क कई बार जैसे स्कूलों.
में हम स्कूल्स में हम रहते थे तो स्कूल्स. पर आरोप लगते थे नहीं नहीं हम तो सब को. दुकान से खरीदोगे नहीं नहीं ऐसा ऐसा कुछ. नहीं होता कोचिंग में ऐसा कुछ नहीं सब. हमारी तरफ से होता है एवरीथिंग मतलब वो तो. हाई कंपटीशन एरिया है सर वो सब हम देते. हैं अच्छा पैसों का जिक्र हुआ बाय जूज. काफी चर्चा में आपने भी उसमें आपका रिश्ता. था उनसे अब मैं बिल्कुल कोरोना के दौरान. बाज रविंद्र सर का खुद का फोन आया था मोशन. उनसे एसोसिएट भी हुआ तीन साल का. कांट्रैक्ट था सात आठ महीने लास्ट में. क्योंकि उनकी फाइनेंशियल स्थिति अच्छी. नहीं थी तो काफी अमाउंट भी पेंडिंग रहा कई.
उनको. youtube0 में पेंडिंग है पैसा मुझे लगता. नहीं है वो शायद आएगा भी नहीं आएगा आई. रियली डोंट नो बट हां उन्होंने कोरोना में. हमारे मोशन परिवार का साथ दिया उसके लिए. मैं धन्यवाद भी देता हूं ही इज अ वेरी गु. गुड एजुकेटर मेरी उनसे कई बार बात हुई अब. तो साल भर से नहीं हुई है क्योंकि वो शायद. बहुत क्राइसिस में है बट उनसे काफी बात. हुई ही इज अ वेरी गुड एजुकेटर विद गुडन. इंटेंट क्या गलत हुआ आई रियली डोंट नो.
क्या वो इन्वेस्टर्स के प्रेशर में. उन्होंने बहुत सारी कंपनीज खरीदना चालू कर. दिया बट मुझ मेरे व्यक्तिगत सीखने वाली. बात है कि शायद ऐसा हो सकता है कि वो. एजुकेटर जो इंटेंट था उससे वह शायद एक भटक. गए भटक गए मुझे ऐसा लगता है बट एज एजुकेटर. ही इज गुड उनका इंटेंट अच्छा है शिक्षा को. लेके इसमें कोई खराबी वाली बात नहीं है तो. ठीक है कभी-कभी समय खराब होता है तो एक. साथी के रूप में साथ देना चाहिए ट्रू. हालांकि यह बात आपने सही कही काफी लोगों. जि जि से उनके बारे में मैंने सवाल किया. सबका एक कहना है कि एस एजुकेटर वो बहुत. शानदार रहे हैं काफी इंस्पायरिंग इंटेंट.
अच्छा रहा है बिल्कुल ठीक है ये जो अभी चल. रहा है हमारा क्या नाम है एजुकेशन का. टेक्नोलॉजी से जोड़कर इसे कैसे आप देख रहे. हो आने वाले समय में कितना बढ़ने वाला है. क्योंकि पुराना जमाना तो अलग था जैसे हमने. वाइ जूज वाले को सुना कि पहले शायद ओपन. स्टेडियम पढ़ाते थे वो हजारों लोग पढ़ा. दिया करते थे बट अब तो टेक्नोलॉजी काज. पोर्टेंट रोल मेरे को व्यक्तिगत रूप से. ऐसा लगता है कि आज से 20 साल पहले तक. शिक्षा के दो मेजर पिलर थे. इंफ्रास्ट्रक्चर और एकेडमिक्स अब मुझे.
लगता है इसके तीन इंपॉर्टेंट पिलर्स है. तीन पिलर्स हैं वन इज इंफ्रास्ट्रक्चर. एकेडमिक्स एंड द थर्ड इज टेक्नोलॉजी इन. तीनों का राइट मिक्स ही कोई यूनिवर्सिटी. को कोई कोचिंग संस्थान को कोई स्कूल को. बनाता है क्योंकि ये तीनों मिलकर उसको एक. अच्छा इकोसिस्टम दे सकते हैं जो वाकई. पर्सनलाइजेशन की तरफ जा सकता है. पर्सनलाइजेशन में टेक्नोलॉजी प्लेज अ वेरी. वेरी इंपोर्टेंट रोल जिससे आप प्राइस. पॉइंट को घटा सकते हो और क्वालिटी को बढ़ा. सकते हो ये एक इनेबलर का काम करता है फॉर. एजुकेटर आल्सो फॉर पेरेंट्स आल्सो फॉर फॉर.
स्टूडेंट्स आल्सो ये सबके लिए बहुत अच्छा. काम करता है जो स्टेकहोल्डर्स हैं उनको. रिपोर्ट्स बहुत अच्छे से दिखाई देती हैं. उसको एनालाइज कर सकते हैं हम प्राइस पॉइंट. को घटा सकते हैं मशीन लर्निंग और एआई को. लगाकर डाउट्स को ला सकते हैं आने वाले समय. में मुझे लगता है कि जो भी एजुकेटर बच्चे. को पसंद होगा उसी की वॉइस में उसी की बॉडी. लैंग्वेज में वही आदमी आपको डाउट बताते. हुए नजर आएगा आने वाले 510 साल में एआई. हां फॉर फॉर श्योर जैसे अभी हमने हमारा एड. ए लॉन्च कर दिया है बट वो अभी थोड़ा महंगा. पड़ रहा है इसलिए उसको रोका हुआ है बाकी. मेरी ही वॉइस में बच्चा जो भी सवाल पूछेगा. उसे सुनाई देगा तो इसका अगला वर्जन वही कि. आप अच्छा आप इस टीचर से पढ़े थे आपको उससे.
1000 डाउट भी पूछने तो आप उससे पूछ सकते. हो आपको लगेगा वोही बता रहा हैट दैट विल. प्ले अ वेरी वेरी इंपोर्टेंट रोल तो फिर. लोग कोटा क्यों आएंगे फिर तो लोग घर से ही. आपको सुनेंगे नहीं सर कोई मैं आपको कह रहा. हूं कि आप बा नहीं आप एक बात समझिए कि ये. सवाल मेरे से टीचर्स भी आज से 10 साल 12. साल पहले पूछते थे जब हमने रिकॉर्डिंग. चालू की ऐसे एआई का हवा बहुत बना हमारे. मीडिया में बना है कि सबकी नौकरी चली. जाएगी सारी चीजें बदल जाएंगी ऐसा हो जाएगा. हालांकि मेरा हमेशा मानना कि इ यू हैव. क्वालिटी व कहीं जाएगी नहीं जाएगी थोड़ा. नया सीखना पड़ेगा हां थोड़ा नया सीखना. पड़ेगा और अगर आपने एक्स फैक्टर है आप में.
एक्स फैक्टर है तो वो हमेशा रहेगा वो. हमेशा रहेगा अच्छे एजुकेटर अच्छे डॉक्टर्स. अच्छे काउंसलर्स अच्छे जर्नलिस्ट ये हमें. चाहिए इनको आई एआई रिप्लेस नहीं कर पाएगा. क्योंकि उन्हे ट्रेड भी तो एआई करेगा. मीडियो कर खा जाएगा मीडियो कर खा जाए वो. भी खाएगा नहीं उसको भी अपडेट होना पड़ेगा. सर बचेगा वो जो अपडेटेड रहेगा जो उसको. एक्सेप्ट कर कर जो नए चेंजेज आ रहे हैं. उसको एक्सेप्ट कर कर अपनी पर्सनालिटी में. जो. कि आप अपने जीवन में एक कोई ज्ञान ले लो. और उससे पूरा जीवन निकल जाए आपको जीवन भर.
विद्यार्थी तो रहना पड़ेगा ये आपके हमारे. सबके लिए मैं खुद से रोज पूछता हूं क्या. आज मैंने विद्यार्थी वाला कोई काम करा है. कोई नई चीज सीखी है किसी अच्छे व्यक्ति से. मिले हो आप अगर नहीं कराए य आत्मचिंतन जब. आत्ममंथन अपन करते हैं रोज 5 10 मिनट आप. भी करते होंगे स्वामी विवेकानंद जी बहुत. बढ़िया बात बोलते हैं कि भाई अगर आप रोज. 10 मिनट आत्मचिंतन नहीं कर रहे हो तो आप. एक अच्छे आदमी से मिलना चूक जाते हो तो वो. बच्चे को रोज करना चाहिए तो अगर आप रोज. अपडेटेड होते रहोगे विद्यार्थी का जीवन. जिओगे तो मेरे हिसाब से आ बढ़ो अच्छा कोटा. फैक्ट्री में जीतू भैया ने बहुत सारा. ज्ञान बच्चों को दिया था कि वहां पहुंचने.
के बाद भी क्या करो ना करो कोटा आने वालों. को भी हम मोंटी भैया क्या ज्ञान देंगे कि. क्या करो क्या ना करो जो जाने वाले भी हैं. कोटा और जो वहां हैं उनको भी मैं उनको एक. ही बात बोलना चाहता हूं कि जो पहले भी. बोली थी और आपने बहुत अच्छा सवाल पूछा था. कोटा तब आए जब खुद को वाकई क्लेरिटी हो कि. मुझे ये करना है तो फिर इससे बेहतर शहर. नहीं है कोटा की पेडागोजी वाकई बहुत अलग. है इसमें कोई शक और संचय वाली नहीं है और. जो टा आ गए हैं उनसे अनुरोध करता हूं कि. इस समय को खराब मत करिए यह समय दोबारा.
नहीं आएगा और अगर आपने इसका सदुपयोग कर. लिया तो आपका जीवन अलग लेवल पर चला जाएगा. ऐसा हमने हजारों बच्चों के साथ होते हुए. देखा है सिलेक्शन का प्रेशर मत लीजिए रोज. 12 से 15 घंटे मेहनत करिए ये मेहनत ही वो. है जो आपको जीत दिलाएगी ये सिलेक्शन की. रैंक ऊपर नीचे टॉप कॉलेज थोड़ा लोअर कॉलेज. ये एक अलग एस्पेक्ट है यही सिर्फ मापदंड. नहीं है ये जो संघर्ष आप कर रहे हो जो. मेहनत आप कर रहे हो यही सफलता दिलाएगी. आईटी क्वालीफाई करने के लिए अगर एक आपको. आईडिया देना हो कितने घंटे पढ़ना हालांकि.
हर बच्चे का अलग है समझने का लेवल अलग है. बट फिर भी एक एवरेज अगर आप क्लास मिला के. 10 से 12 घंटे 10 12 घंटे रोज क्लास मिला. के और रोज पढ़ना है रो पढ़ना चाहिए मतलब. आप माना चाहिए 365 अगर दिन है तो जैसे 11. 12 का जो बच्चा है उसे हम एक्सपेक्ट करते. हैं कि 365 में से 270 280 दिन वो इतना. पढ़ेगा 10 से 12 घंटे 10 से 12 घंटे क्लास. मिला के मिला मिला के कोई बहुत टफ चीज. नहीं है आप भी और हम रोज 10 से 12 15 घंटे. काम कर रहे हैं बहुत नॉर्मल हैय हां इस. वक्त नहीं पता लगता उस पता लगता हां पर. पाच घंटे छ घंटे तो बच्चे क्लास में निकल. जाते हैं उसके बाद पांच छ घंटे उसे पढ़ना.
होता है मतलब क्लासेस के बाद आप पांच से छ. घंटे छ घंटे आप पढ़िए अगर 11 12थ के हैं. थोड़ा 12थ पास वाले को हम ज्यादा बोलते. हैं कि सात से आठ घंटे पढ़िए क्योंकि उनका. एक साल ही मिलता है अच्छा कई बार ये भी. कहता है जो 11थ में लड़का आता है उसके. आईटी क्लियर करने के चांसेस ज्यादा होते. हैं वो 2 साल मिलते हैं उसको दो साल मिलते. हैं क्योंकि उ 11थ और 12थ पूरी बट वो 11. 12थ नहीं भी तो पढ़ा होता है जैसे पर फिर. भी उसको क्या आप ये समझ लीजिए कि 11 12 की. रियल पढ़ाई जो है जो बच्चों को सिखाई जाती. है क्योंकि जो जोड के हिसाब से है वो तो. तीन महीने की होती है तीन चार महीने की. क्योंकि यहां पे तैयारी अलग लेवल की है तो.
11 12 वाले को आप ऐसा समझ लीजिए कि 12थ. पास वाले से इफेक्टिवली पाच से छ महीने. ज्यादा मिलते हैं इफेक्टिवली आप ऐसा अगर. आप बहुत मैच करोगे तो 12थ पास वाले को मान. लीजिए एक साल मिल रहा है 11 12थ वाले को. दो साल मिल रहे हैं 6 महीने में वो बोर्ड. का पढ़ सकता है तो 6 महीने उसको एक्स्ट्रा. मिलते हैं इस वजह से कई बार उसे एज मिल. जाती है बट ये भी सच्चाई है कि 12थ पास. वाले बच्चे ज्यादा सिलेक्ट होते हैं 12थ. के साथ वाले बच्चों की रैंक ज्यादा अच्छी. आती है हम क्योंकि 11 12 में कई बार बच्चे. थोड़ा कम पढ़ना चालू कर देते हैं लगता है. अभी तो 12थ ही चल रही है 12थ पास वाले को. पता होता है कि यार मेरे पास इसके अलावा.
कोई विकल्प नहीं है ये स्पेशली नीट में. जेई में सब होता है और यही सेम प्रक्रिया. नीट के साथ भी है आपने कहा आप 12थ में. डिस्ट्रक्ट हो गए थे फिर अभी मैंने आपका. एक वीडियो देखा था सुंदर कन्या वाला अब. कोई लड़का 11 12थ में आता है तो 10थ तक तो. अपने गांव शहर में रहे हम वहां मां-बाप का. हंटर रहा छोटे शहर में अलाउड नहीं होता है. बाहर गए कई बार लड़कों को लड़की दिखाई. पड़ी इस उम्र में दिल भी धड़कता है हम. बिल्कुल धड़कता है और ज्यादा धड़क बिल्कुल. धड़कता है तो ये डिस्ट्रक्शन क्या होता है.
कई बार क फेस किया है कि अच्छा-अच्छा. बच्चा प्यार मोहब्बत पढ़ के खराब हो गया. मैं बच्चों को बोलता हूं कि प्यार मोहब्बत. धोखा है पढ़ ले बेटा मौका. है तो बेसिकली इस उम्र में बच्चों को हम. क्लास में बोलते वो यहां पर रिपीट करता. हूं लड़कों को बोलता हूं कि अगर तुम 15 से. 19 साल के लड़के हो और तुम्हें सुंदर. कन्या देख के कुछ ना हो तो तुम लड़के नहीं. हो ये होना तय है हा बस अपना विवेक इतना. बड़ा रखो कि यह सही समय नहीं है मैं इसके. बिल्कुल नहीं हूं कॉलेज में जाके ढूंढना. अपना साथी चुनना कोई बुराई वाली बात नहीं. मैंने भी चुना कॉलेज में जाके बहुत खुश.
हूं उस निर्णय को लेकर आज भी पर मैं कहता. हूं यह सही समय नहीं है क्योंकि अभी आपके. लिए इसके पास समय नहीं है और शायद आपकी. उम्र भी थोड़ी अभी कच्ची है अगर यह बात. उनको अभी समझ में आ जाए कि अभी इस ट्रैक. पे नहीं जाना है कोई ये नहीं समझे इस बात. से कि हम रूढ़ीवादी है कि लड़के लड़कि. दोस्ती नहीं होनी चाहिए होनी चाहिए. बिल्कुल होनी चाहिए आपको रिलेशनशिप में. खुद को किससे करना है या आपको चुनना चाहिए. पर ये वो सही समय नहीं है मैं उनको एक. एग्जांपल लेता हूं क्लास में लेता हूं पर. आज यहां लेता हूं मैं एक लड़के को बोलता. हूं कि किसी भी लड़के को खड़ा करता हूं.
मान लीजिए अंकित नाम है अंकित तो भी अपने. पापा से जाके बोले कि पापा मुझे किसी. लड़की से प्यार हो गया इस लड़की से प्यार. हो गया है तो पापा क्या करेंगे तो बोलता. है कि पापा सर मुझे ना पंखे से उल्टा लटका. के मारेंगे आज अगर ये जाके बोल दिया तो. मैंने कहा तू सोच अब आईटी बंबे चला गया है. तेरी माइक्रोसॉफ्ट में 50 लाख की नौकरी लग. गई है एक साल तुझे नौकरी करते हुए हो गया. है और तू पापा के पास जाए और बोले कि पापा. मेरे साथ एक लड़की थी आईटी बमबे में जो. माइक्रोसॉफ्ट में काम करती है वो भी मेरे. ही पैकेज पे मुझे उससे प्यार हो गया है तो. पापा क्या बोलेंगे तो बोलेंगे बेटा मिला. दे एक बार दैट इज डिफरेंस तब भी उसकी. भावनाए आज भी उसकी भावना वही है उस दिन भी. वही होगी पर आपकी भावनाओं की कदर होगी अगर.
चाहते हो आपकी भावनाओं की कदर हो तो पहले. काबिल बन जाइए सिंपल गेम है और कोचिंग. सेंटर में आशकी मत कीजिए मत मतलब प्रयास. मन भटके उसे रोकिए और बारबार याद करिए इस. समय के लिए प्यार मोहब्बत धोखा है पढ़ ले. बेटा मौका है अच्छा एक चीज और कहते हैं कि. हर सक्सेसफुल इंसान ने अपनी करियर में चार. पाच साल बाकी लोगों ज्यादा मेहनत की डू यू. बिलीव इन दिस थ्योरी वापस एक बार कोई भी. सक्सेसफुल इंसान है. उसने अपने करियर के एक स्टेज में बाकी. लोगों से ज्यादा मेहनत की चा से पा साल.
100% बिलीव करता हूं और इसीलिए मैं जो. कॉलेज में बच्चे गए जैसे कल भी मैं बहुत. सारे कॉलेज में गया आईटी बम्बे गया बहुत. सारे जगह उनको एक ही बात बोलता हूं कि. फर्स्ट ईयर में जाके आपको अगर निर्णय कर. पाओ कि आपको जीवन में क्या बनना है तो उसी. समय से अगर तैयारी करना चालू कर दोगे तो. आपको 100% फायदा होगा ज्यादा मेहनत करी. होगी ये मैं मानता हूं बिल्कुल 110 पर बात. किसने कब स्टार्ट करी कई लोग बहुत मेहनत. करते हैं पर कभी इस फील्ड में ज्यादा कर. ली कभी इसमें ज्यादा कर ली कभी इसमें. ज्यादा कर ली तो जो डिजायर्ड रिजल्ट है वो. उन्हें नहीं मिलता जब आपको क्लेरिटी ऑफ. थॉट आ जाए कि मुझे जीवन में यही बनना है.
जब भी आया किसी को हो सकता है नाइंथ में आ. जाए किसी को 12थ में आए किसी को हो सकता. है कॉलेज के बाद आए ऐसा हो सकता है सर. कईयों को 35 साल की उम्र में भी आया है पर. उसके बाद अगर उनको क्लेरिटी आ गई और. उन्हें तीन चार साल लग के मेहनत कर ली नो. लुकिंग बैक होगा ठीक है सेकंड लास्ट सवाल. मेरा मोंटी भैया को जीतू भैया से ज्यादा. फायदा हुआ जीतू भैया को मोंटी भैया से. मेरे हिसाब से मोंटी भैया को बहुत फायदा. हुआ मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं उनका. कि उनको वाकई उन्होंने बहुत मेरे को फेमस. करा और बहुत. इसका फर्क बहुत पड़ता होगा ना कि लोग आते. होंगे आपके पास कि अरे सर हां आते हैं और.
अच्छा भी लगता है पर जब भी ऐसा कभी होता. है बच्चा सोशल मीडिया फॉलोअर अच्छे बढ़ गए. होंगे ब बहुत बड़े हुए हैं और वो कर्तव्य. का बोध भी लाता है जैसे आज आप है तो जब आप. कोई भी बात बोलते हैं तो शायद आपके मन में. एक बात होती होगी कि मैं कोई ऐसी बात नहीं. बोलते क्योंकि आपसे बहुत लोग इन्फ्लुएंस. हैं राइट मतलब मेरे साथ होता है मैं शायद. हो सकता है आप वो महसूस करते हो कि मान. लीजिए मुझे पता है कि यार मेरी कही हुई. बात ना 200 हज बच्चे तो ब्लाइंड फॉलो कर. लेंगे तो मतलब मुझे बहुत कर्तव्य का बोध. होता है सही बताऊं तो मैं बहुत सोचता हूं. बोलने से पहले कि यार वाकई यह काम का है. कि नहीं है मेरे स्वार्थ से प्रेरित तो. नहीं है कि शिक्षा से प्रेरित है क्योंकि. हमारे लिए तो आक्षेप लगना भी बहुत आसान है.
कि ये तो कोचिंग वाले हैं तो कुछ भी बोल. देंगे हम है ना तो मेरे लिए बहुत. इंपोर्टेंट होता है खुद से हमेशा सवाल. पूछता हूं कि स्वार्थ से प्रेरित है कि. शिक्षा से प्रेरित है क्या वाकई काम की. बात है तो कर्तव्य का भाव लाता है और मैं. चाहता हूं वही अगर बना रहे तो ज्यादा. बेहतर है ठीक है मोशन इंस्टीट्यूट में कोई. क्यों एडमिशन ले क्या आप में एक्स फैक्टर. है क्योंकि फिल्म में तो दिखाया गया आपने. आपने खुद एक जहां से पढ़ाई की है जो उस. जमाने का नंबर वन इंस्टीट्यूट था जिसने. कोटा को कोटा बनाया और बहुत सारे अ वहां. कोचिंग सेंटर है बट आपकी भाषा में आपके. शब्दों में हालांकि फिल्म देखी लोगों ने.
क्या एक्स फैक्टर है जो आपके पास लोग आए. और क्यों आप पर भरोसा करें पेरेंट्स पहली. बात इसमें दो बातें मैं बोलना चाहता हूं. मोशन मुझे लगता है इसलिए नहीं कि मेरा है. इसलिए वन ऑफ द मोस्ट एथिकल इंस्टिट्यूट है. जो वैल्यू फॉर मनी लाता है मैं ये नहीं. बोलता कि सबसे सस्ता इंस्टिट्यूट है बट. टॉप क्वालिटी एट द मिनिमम प्राइस पॉइंट ये. मोशन लाता है दूसरी. बात पता नहीं बोलनी चाहिए बोल चाए अगर आप. टॉप 10 टॉप 50 के लायक हो तो हो सकता है. कि मोशन कहीं 21 देता हो तो दूसरी कोचिंग. सर्विसेस 20 देती होंगी पर अगर आप एवरेज.
बच्चे हो मेरे जैसे तो मोशन 25 देता है. दूसरे 15 ही देते होंगे यह मैं दावे से. आपको कह सकता हूं क्योंकि वो जीवन मैंने. जिया है मुझे पता है कि हर एक बच्चा जो आ. रहा है जो 12 से 15 घंटे पड़ रहा है उसके. सपने कहां जाके टिकते हैं उन सपनों को. पूरे करने के लिए हम जान लगाते हैं फीचर. वाइज मैं बताऊंगा डिफरेंस तो शायद दो घंटे. निकल जाएंगे उनको बताना कोई सही बात भी. नहीं है बट क्योंकि मुझे शिक्षा ने सब कुछ. दिया है बात हो सकता है बनावटी लगे क बार. हमें लोग व्यापार भी कहते हैं पर आप. व्यक्तिगत रूप से मुझे सोच मुझे पैसे का. कोई लालच नहीं है मैं ये नहीं कि बोलता. हूं कि संस्थान चलाने के लिए पैसा नहीं.
चाहिए 2 एंप्लॉयज हैं सबको साथ रखना है सब. कुछ करना है संस्थान बननी है. इंफ्रास्ट्रक्चर होना है पर मुझे सब कुछ. शिक्षा ने दिया है मध्यमवर्गीय परिवार से. आता हूं मेरा कोई अस्तित्व नहीं था आज से. पहले आज जहां जाता हूं व मुझे सम्मान. मिलता है ये बच्च और शिक्षा की वजह से ही. है अगर इसके लिए मैं जीवन में कुछ नहीं कर. पाया तो फिर क्या बचेगा और मेरा जीवन. सिर्फ और शिक्षा को समर्पित है मैं यहां. से जाऊंगा जीवन से तब भी शिक्षा के लिए ही. काम करता हुआ जाऊंगा ये मैं जानता भी हूं. और मानता भी हूं हमारी शुभकामनाएं आपको और. आशा करते हैं कि बच्चों को बहुत सारे. सवालों के जवाब मिले होंगे क्योंकि हमारी. कोशिश थी कि जितने भी सवाल पेरेंट्स के मन.
में हो या बच्चों के मन में हो व सारे हम. कुरेद ले और आपने बड़ी बेबाकी से जवाब. दिया हम भी एंड में वही कहेंगे कि जीतू. भैया और फिजिक्स कभी गलत नहीं हो सकते. क्या बात है थैंक यू सर थैंक यू.
