Unplugged ft. Neelesh Misra | Musical Journey | Love, Life, Heartbreak | Story Telling | Bollywood
हर चेहरे में होते हैं कई चेहरे जिसको. देखो बार-बार देखो। निदा फाजली ने आप ही. के लिए लिखा था।. मेरा नाम है नीलेश मिश्रा। मैं कई जीवन जी. चुका हूं इस एक जीवन में। [संगीत] ये. मिश्रा और मिश्रा का थोड़ा अंतर हमें. समझाइए। शहर भर की खुशी से यह दर्द मेरा. भला है। [संगीत]. दर्द एक जेवर है मेरा दोस्त। दर्द को. पहनना चाहिए। किस दौर में ये गाना लिखा. गया था? जब लिखा था तो ये मेरे जो [संगीत] निजी. जीवन था वो कुछ मुश्किलों से गुजर रहा था।. कॉलेज में इशू हुआ था आपको?
कई तस्वीरें एक साथ चलने लगी। [हंसी]. आमतौर पर जिन लड़कों की मोहब्बत मुकम्मल. नहीं होती वो शादी से पहले होती है। आपने. सात फेरे ले लिए थे। ये नियति थी या उस. वक्त आप इमैच्योर थे जो रिश्ता संभाल नहीं. पाए।. निसंदेह. उस पौधे को ज्यादा पानी नहीं दिया गया।. मैंने कभी इस बारे में बात नहीं की और. वो जो नहीं मिला वो जो अधूरा रह गया लेकिन. यादों में ख्वाबों में लिखने में बातों. में वही रह जाता है जो नहीं हो सका वो.
इतनी सारी संभावनाएं लेकर आता है कि. ख्वाहिश थी सिर्फ तुम्हारे साथ जिंदगी. जीने की. वही [संगीत] बताया ना मैंने अगर आप शब्दों. के धनी हैं तो जिंदगी का रोमांस बढ़ जाता. होगा रोमांस के साथ-साथ जो लिरसिस्ट को ना. अनफेयर एडवांटेज होता है तो आप उनके लिए. गीत लिखते हैं आपकी चवन्नी खर्च नहीं होगी. और वो जिंदगी भर तकिए के [संगीत] नीचे. रखेंग [हंसी]. उन निगाहों में मोहब्बत नहीं तो और क्या. है पर वो मुझसे कह रहा वो किसी और. जरा सा झूठ भी ढंग से.
इतना बिना दिल टूटे लिख नहीं सकता इंसान. कभी है इश्क का उजाला [संगीत] कभी है मौत. का अंधेरा बताओ कौन भेस होगा जो भी बनूं. या लुटेरा. कई चेहरे [संगीत]. हैं इस दिल [गाना गाने की आवाज़] के. सबसे ज्यादा कमजोर कहां पड़े हैं आप मुझे. सख्त होने का कोई शौक नहीं था. कि [संगीत] जश्न ये राजस ना आए मजा तो बस. गम में आया।. आया है।. मुकम्मल हुए इश्क पर इतनी चर्चाएं नहीं. होती। मोहब्बत में इंसान खूबसूरत होता है. सर वरना मोहब्बत का। कुछ व्यक्तियों का.
साथ खूबसूरत [संगीत] है। कुछ का ख्याल कि. उस व्यक्ति का साथ कैसा होता? तो क्या मोहब्बत की शुरुआत ऐसे ही धोखे से. होती है कि अभी कुछ दिनों से लग रहा है. बदले बदले से हम हैं।. हम [संगीत] बैठे-बैठे दिन में सपने. आजकल तनहा मैं [गाना गाने की आवाज़] कहां. हूं। आदत होने की आदत हो जाती है आपको।. कि अधूरे इश्क पे तो आपने खूब लिख दिया. है। मुकम्मल इश्क पे क्या लिखा आपने? हमारी भाभी जो है अभी है यामिनी जी। उनके. लिए आपने कौन सा गाना लिखा? [संगीत]. ये मुझसे वो शिकायत करती है। [हंसी].
तो पत्नी के साथ जिया जाता है। एक्स को. याद करके लिख दिया जाता है।. दिल से [संगीत] कहां [गाना गाने की आवाज़]. ढूंढ लाना।. इसीलिए शायद प्रियंका ने कहा था कि पति. पत्नी का [संगीत] रिश्ता चाहे जितना भी. गहरा क्यों ना हो। लोग तो प्रियसी को ही. याद रखते हैं।. तुम क्यों चले आते हो हर रोज इन ख्वाबों. में चुपके से आ भी जाओ एक रोज मेरी बाहों. में. तेरे ही सपने अंधेरों में [संगीत] उजालों. में.
क्या एहसास था ये लिखने के पीछे? जिस समय आप किसी व्यक्ति के साथ क्या गाना. लिखने में भी उम्र के किस पड़ाव में वो. मायने रखता है? क्या नीलेश मिश्रा आज भी. लिख सकते हैं? ले आते [गाना गाने की आवाज़]. हो हर रोज इन ख्वाबों।. देखना आप आशिक बहुत गहरे थे। ये मैं आपके. शब्दों से कह सकता हूं कि रूह बनकर. मिलूंगा आसमान में कहीं खूबसूरत है इतना. रहा नहीं जाता। [संगीत] इतना. सहा नहीं [गाना गाने की आवाज़] जाता।. ये फीलिंग आती है ना किसी चेहरे [संगीत].
को देख के कि कोई चेहरा है व्हिच इज सो. ब्यूटीफुल एंड फ्रजाइल। तो जादू है नशा. है। [संगीत]. मदहोशियां. थोड़ा रोमांटिक एरोटिक में जाता है। एक एक. [संगीत] बड़ा टेंटलाइजिंग इमोशन है। चलो. तुमको लेकर चल। जहां मीठा सा नशा है तारों. की छांव में।. हम उन फिजाओं. में [संगीत]. द लवर इज बेकनिंग। वो बुला रही है अपनी. दुनिया में।. तुमको लेकर.
चले। [संगीत]. उसमें एक मिस्ट्री भी है।. अपने गाने सुनते हो? सुनता हूं। कई बार अच्छा लगता है क्या वो? अच्छा ये तो ये लड़के ने ऐसा ही लिखा है।. [हंसी]. तारों भरी रात में तेरे खत पढ़ेंगे साथ. में। पूरा जो बनना रह गया कांपते से।. थोड़ी [संगीत] शिकायत करना तू. थोड़ी शिकायत मैं नाराज बस ना होना तू. जिंदगी. इश्क में इंसान कितना समर्पित हो सकता है. उसको आपने जज्बातों में विरोध दिया है मैं. वो क्षमा हूं जो रोशन तुम्हें करके खुद ही. पिघल जाऊंगी.
सूरज तुम्हारे लिए है. पहली मोहब्बत और जिंदगी भर साथ निभाने. वाली मोहब्बत में कैसे अंतर होता है और. मोहब्बत क्या एक ही बार होती है नफरत भी. तो एक से ज्यादा बार होती है. भूख भी तो एक से ज्यादा बार लगती है. अब ये तो आप जैसे शायरु ने हमारा दिमाग. खराब किया है [हंसी] आरोप सही है आपका. और कैसा एहसास होता है एक बेटी का बाप का? मेरी बेटी तो पैसे कमाने लग गई है। उसकी. पहली कमाई आज आ गई है।. लड़कियों की नजर से दुनिया को [संगीत]. देखना वो आपको अलग और बेहतर और बहुत. ज्यादा खूबसूरत इंसान बनाने लग जाता है।.
क्यों. ना हम तुम. चले टेढ़े. से रास्तों [गाना गाने की आवाज़] पे नंगे. पांव रे चल भटक [संगीत]. लेना बांवर रे।. घर लौटते परिंदों सी हो गई है हमारी. जिंदगी। ना किसी से आगे बढ़ने की होड़ है, ना किसी के पीछे छूट जाने की। भारत में. मैं पहली बार एक पडकास्ट के लिए आया हूं।. तो ये अनुभव कैसा है कुर्सी के उस पार. बैठने का? [हंसी].
कुछ आवाजें सुनाई नहीं पड़ती। महसूस की. जाती हैं। कुछ कहानियां सिर्फ सुनाई नहीं. जाती। वह जी जाती हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] शहरों की. भागदौड़ से लेकर गांव की पगडंडियों तक. युद्ध के मैदान से लेकर दिल की खामोशी तक. इन सबको अपनी कहानी में पिरोने वाले वो. स्टोरी टेलर, वो पत्रकार, वो गीतकार.
जिन्होंने एक दौर में लिखा कि मैंने दिल. से कहा ढूंढ लाना खुशी ना समझ पाया तो यह. गम ही सही। वहां से लेकर जिंदगी कुछ तो. बता तक की मासूमियत को आवाज दी, गीत दिया।. वो शख्स आज हमारे साथ है। वो शख्स जो पेशे. में हमारे बड़े हैं। हमारे सीनियर हैं।. टैलेंट में वो हम सबके इंस्पिरेशन है। नाम. है उनका नीलेश मिश्रा जी। वैसे आज इनसे. कहानी सुनेंगे नहीं क्योंकि इनकी जिंदगी. अपने आप में एक कहानी है। उस कहानी को.
समझेंगे और महसूस करेंगे। नीलेश जी. बहुत-बहुत स्वागत है आपका।. बहुत धन्यवाद शुभंकर। मैं शुभांकर मिश्रा. हूं। आप नीलेश मिश्रा हैं। यह मिश्रा और. मिश्रा का थोड़ा अंतर हमें समझाइए पहले।. क्योंकि आपकी वजह से बहुत सारे लोगों ने. ये सवाल हमसे पूछे। [हंसी]. मैं जब एक बार अह सुपर साइक्लोन कवर करने. गया था पत्रकार के तौर पर ओसा तो वहां पर. उन्होंने सोचा मैं यहीं कहूं क्योंकि वहां. ऐसे ही स्पेलिंग करते हैं। इसका कोई बड़ा. गूढ़ कारण नहीं है। मेरे पिता ऐसे ही.
स्पेलिंग करते रहे हैं और पिता को क्योंकि. वो गांव में जन्मे और फिर वो उनकी भी बड़ी. अद्भुत यात्रा रही और वो कनाडा चले गए तो. मुझे लगता है कहीं किसी पड़ाव पे उनको. अपना नाम जब अंग्रेजी में लिखने की जरूरत. पड़ी होगी तो उन्होंने इस तरह से लिख दिया. होगा इत्तेफाकन. एम आई एस. एम आई एस आर ए और वही हो गया हां इसका ये. हुआ असर कि मैं उच्चारण नीलेश मिश्रा करता. रहा हूं.
रेडियो पर भी और तो एक बार जब पहली बार. मैं हिंदी में जब पहली बार मैं किताब. पब्लिश करवा रहा था तो मैंने उनको फोन. किया। मैंने कहा कि मैं हिंदी में भी उसकी. स्पेलिंग मिश्र ना करके मिश्रा लिख रहा. हूं। जैसा उच्चारण करता हूं। आपकी लीनियज. में कोई गड़बड़ी तो नहीं हो जाएगी। तो तब. से मैं हिंदी में भी वैसे ही लिखता हूं। स. और र में आ की मात्रा।. मतलब इसमें सही गलत है। कोई फेर नहीं है।. नहीं। आप चाहे मिश्रा हो या फिर मिश्रा हो. सकते हैं।.
ओके आपका एक बड़ा प्रसिद्ध गीत है। मैंने. दिल से कहा ढूंढ लाना खुशी। हालांकि गीतों. का सेगमेंट मैंने आगे रखा है। लेकिन जब. मैं नीलेश मिश्रा की शख्सियत को समझने की. कोशिश कर रहा था तो मुझे मैंने दिल से कहा. गाने के कुछ बोल सटीक बैठते नजर आए।. जिसमें एक लाइन है कि कई चेहरे हैं इस दिल. के। ना जाने कौन सा कौन सा मेरा. आप पत्रकार रहे गीतकार बने कहानियां. सुनाते हैं गांव में लोगों को ले जाते हैं. किसानी भी करते हैं रेडियो पर भी रहे कभी. आईने के सामने उलझन हुई कि असली नीलेश.
मिश्रा कौन है. अक्सर ये होता है कि मैं क्योंकि इतनी. चीजें करता हूं और मुझ में लालच है नई. चीजें करने का अभी. मैंने हाल में सोशल मीडिया पे लिखा था कि. मेरी कि. जिंदगी के सबसे अद्भुत साल अगले 10 साल. होने वाले हैं।. क्योंकि मैं [हंसी] कई चीजें करना चाहता. हूं और करूंगा।. लेकिन अगर एक तरह से देखें तो मैं बहुत सी.
चीजें नहीं करता हूं। मैं सिर्फ एक ही चीज. करता हूं कि मैं साफ सुथरे कंटेंट के जरिए. अलग-अलग माध्यमों, अलग-अलग विधाओं में. लोगों तक इंपैक्ट पहुंचाना चाहता हूं।. चाहे मैं गाने लिख रहा हूं, चाहे मैं. पत्रकारिता कर रहा हूं, चाहे मैं कहानियां. सुना रहा हूं, चाहे मैं फिल्में अब बना. रहा हूं, किताबें लिख रहा हूं, कुछ भी कर.
रहा हूं।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. लेकिन वो जो जिम्मेदारी की भावना है एक. क्रिएटर होने के नाते उसको बहुत. आदरपूक ले चलता हूं और एक वही काम करता. हूं असल में मैं ये सब अलग-अलग रूप है।. अलग-अलग पैकेजिंग है।. तो तब फिर थोड़ा. एक सेंस आने लगता है इस कंफ्यूजिंग दुनिया. में। मेरे लिए भी कंफ्यूजिंग है। हाल में.
मैं विपसना के लिए गया पहली बार और. अभी कोई मुझसे पूछ रहे थे सज्जन कि कैसा. अनुभव था तो मैंने कहा कि. अ. शायद जो प्रॉब्लम स्टेटमेंट लेके ज्यादातर. लोग जाते हैं या जो विपशना. संस्था जो प्रॉब्लम स्टेटमेंट अह मानती है. कि लोग लेके आएंगे उससे अलग थी मेरी. प्रॉब्लम स्टेटमेंट।.
उनका प्रॉब्लम स्टेटमेंट यह था कि. लोगों में दुख है और बहुत मिसरी है और. अवसाद लेकर आते हैं और. अपने अंदर छुपी हुई जो कुंठाएं हैं और और. उनको निकालना मन पर काबू पाना और अपने एक. इंटरनल क्लेंजिंग करना।. मेरा प्रॉब्लम स्टेटमेंट यह है कि माय. माइंड इज अ थाउजेंड वाइल्ड एलीफेंट्स।.
[हंसी]. और. निरंतर ये हजार दिशाओं में भाग रहा है।. नईनई चीजें करना चाहता है। और मुझे इस पर. काबू पाना है। मुझे भी मन पर काबू पाना. है। उनको भी मन पर काबू पाना है। वो दुख. से मुक्त होना चाहते हैं। और फिर मैं कैसे. इसको साध सकूं इसको और. पर्पसफुली. अच्छे इंपैक्टफुली कामों में लगा सकूं। तो.
दोनों का एंड गोल वही था कि मन पे काबू. पाना है। लेकिन मैं जिस. गलियारे से हो के आ रहा था वो अलग था और. यही लालच रहा है निरंतर नई चीजें करना नई. चीजें सीखना। खासकर जो मैं मैं जब भी कुछ. नया शुरू करता हूं वो मुझे आता नहीं होता. और यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है कि मुझे. नहीं आता है। नॉट नोइंग इज माय बिगेस्ट. पावर कि.
अगर मेरे पास कोई रूल्स होते जब मैं पहली. बार मैंने. गाने लिखने शुरू किए। मैंने उसके पहले कभी. भी गाना नहीं लिखा था। जब मैंने फिल्मों. में गाने लिखने शुरू किए। जब मैंने अ पहली. बार. रेडियो पे कहानियां सुनानी शुरू की। मैंने. उससे पहले कभी कहानी नहीं लिखी थी। जब. मैंने स्लो इंटरव्यू किया। मैंने कभी भी. कैमरा के सामने उस तरह से कभी नहीं गया. था। मुझे नहीं पता था कैमरे की दुनिया.
कैसे काम करती है। मुझे मेरे डीओपी ने कहा. कि ये आपकी एक्सेस होगी। मैंने कहा भाई. भाड़ में गई तुम्हारी एक्सेस। मैंने अपने. तरह से मैंने कहा ये कन्वर्से ये इंटरव्यू. नहीं है ये सीन है। इसको सीन की तरह. तुम्हें शूट करना है।. तो ना जानना मेरी सबसे बड़ी ताकत है। और. मैं चाहता हूं कि. यही जो एक स्पिरिट ऑफ एक्सप्लोरेशन होती. है लोगों में कि वो उनको नहीं आता है। इसी.
को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाएं वो। मैं. मुझे फिल्म में स्क्रिप्ट लिखने के बाद. क्या होता है नहीं पता था। पर हाल में. हमने फिल्म बनाई और अब हम तो चसका लग गया।. अब हम और बनाएंगे बहुत सारी।. तो नॉट नोइंग इज माय बिगेस्ट सुपर पावर।. तो ये निदा फाजली ने आप ही के लिए लिखा. था। हर चेहरे में होते हैं कई चेहरे जिसको. देखो बार-बार देखो। [हंसी]. जी बस समझ रहे हैं क्या-क्या चेहरे हैं।. लेकिन जिंदगी आपकी रोमांचित करने वाली है।. जितना मैंने पढ़ा गांव से निकल कर आईएमसी.
जाना। इश्क शादी अलगाव फिर शादी फिर एक. खूबसूरत बच्ची गाय लिखना गाने लिखना गानों. में जज्बातों को डालना गानों में मोहब्बत. भी चरम पर है अलगाव भी चरम पर है फिल्में. भी लिखी जा रही हैं कहानियां भी सुनाई जा. रही हैं. आपकी जिंदगी लगता नहीं है अपने आप में एक. पूरी मसाला फिल्म है [हंसी] बड़ी खूबसूरत. सी रोमांछित करने वाली. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. हां मुझे लगता है कि मैं कई जीवन जी चुका. हूं इस एक जीवन में और हर कुछ वर्षों में.
एक नया अध्याय है. कारगिल की लड़ाईयों से लेके सुनामी है. मतलब मैंने इतने डिजास्टर. दो बार रामनाथ गोयन का. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. इतने डिजास्टर्स कवर किए मैंने इतनी. विभीषिका देखी इतना दुख देखा है लोगों का. और मेरे अंदर सब भरा हुआ है वो. वो मेरा ईंधन है मैं इतने मैंने ज्यादा. किताबें नहीं पढ़ी हैं लेकिन मैं बहुत. लोगों से मिला हूं मैंने ज्यादा.
फिल्में नहीं देखी लेकिन मेरे बहुत अनुभव. हुए हैं और मुझे लगता है कि वही वही मुझे. एक एक ऊर्जा देता है क्योंकि. मेरा मानना है कि एक अच्छे क्रिएटर होने. के लिए. एम्पैथी सबसे ज्यादा आवश्यक है। संवेदना. दूसरे के दुख और खुशी को ईमानदारी से. महसूस कर पाना।. [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. अगर आप यह कर पाए और फर्जी तौर पर नहीं.
है। अगर आप असल में कर पाए तो आपको अच्छा. पत्रकार बनना है, अच्छा एडवरटाइजिंग. प्रोफेशनल बनना है, अच्छा राइटर बनना है, गायक बनना है, कुछ भी बनना है आप बन सकते. हैं। तो वो एमथी. अनुभवों से आती है। वो. आप अपने आपको ट्रेन एक हद तक कर सकते हैं. कि चलिए जब गरीब दिखेगा तो मुझे दुख महसूस. होना चाहिए। लेकिन वो आपको अनुभवों से. मिलती है और वो मुझे अनुभव.
बहुत ही कम उम्र से मिलते रहे हैं। पहले. जो अह गांव का परिप्रेक्ष माता-पिता का. गांव में जो स्कूल शुरू करने की यात्रा. उसके बाद जो पत्रकारिता में अह गांव शहर. विदेश हर तरह के अनुभव हर तरह के लोग तो. मुझे लगता है कि मैं बहुत. ज्वलनशील बन गया हूं।.
[नाक से की जाने वाली आवाज़] कंबस्टेबल. हूं मैं। मेरे अंदर. ये सब भरा पड़ा है।. आज आपकी जिंदगी के सारे पन्नों को हम. खोलने वाले हैं और. आपके स्लो इंटरव्यूज लोगों ने बहुत एंजॉय. किए हैं। लेकिन आपकी जिंदगी की जो किताब. है उसके पन्नों को आज हम सब अनुभव करने. वाले हैं। तो मुझे लगता है बाकी लोग भी. मेहता रोमांचित होंगे।. भारत में मैं पहली बार एक पॉडकास्ट के लिए. आया हूं।. तो ये अनुभव कैसा है कुर्सी के उस पार. बैठने का? [हंसी]. अच्छा ही होगा। सुखद होगा।. और मेरा सौभाग्य है कि ये आप मेरे साथ कर. रहे हैं।. बहुत धन्यवाद।. मैं इसको अपने तंगे के तौर पर लूंगा। जैसा.
मैंने कहा हमारे पेशे में भी हमारे बड़े. हैं तो मैं उसको भी सम्मान करते हुए लेकिन. सर शुरुआत हम मिट्टी से ही करते हैं। एक. तरफ लखनऊ की वो नफासत वाली धीमी जिंदगी एक. तरफ नैनीताल की वो बर्फीली खामोशी आज. नीलेश मिश्रा की आवाज में जो वो ठहराव है. क्या वो इन्हीं दुनियाओं के मिलन से बना. हुआ है? हां आप ठीक कह रहे हैं। मुझे लगता है कि. जो मेरा बचपन गुजरा है अह. पहले हम लोग रीवा में रहते थे मध्य प्रदेश.
में. उसके बाद नैनीताल आए और फिर वापस लखनऊ आए. और छोटा शहर जो है जो मैं दो लाइनें अपने. रेडियो शो में कहता रहा हूं बात बे बात पे. अपनी ही बात कहता है मेरे अंदर मेरा छोटा. सा शहर रहता है वो जी हुई पंक्तियां हैं. क्योंकि छोटा शहर आपको बहुत सी वो चीजें. सिखाता है जो अदृश्य होती हैं। सेंस ऑफ.
स्पेस. जब मैं दिल्ली पहली बार आया और मैं बसों. में चलना मैंने शुरू किया तो वो जो एक इन. आक्रमण होता है ना लोगों का आपकी स्पेस पे. आपके शरीर का स्पर्श करना वो हम नैनीताल. में नहीं हम तो बच्चे भी दूर-दूर बैठते. थे। हम क्लास में उसका डेस्क दूर होता था।. मॉल रोड पे चल रहे हैं तो एक एक आपकी जो. दुनिया है वो बहुत स्पेसियस दुनिया है।. उसमें ठहराव है। उसमें कोई उसमें फुर्सत.
है और तो बिल्कुल वो वो वहीं से आया वो. कहीं ना कहीं व्यक्तित्व वहीं से ढला. और उसको मैंने बचा के भी रखा। यह भी था. उसको उसको खत्म नहीं होने दिया जब मैं. बड़े शहर में या एक आपादापी के जीवन में. आया आगे मैंने मनोज मुंतशर का इंटरव्यू जब. किया था तो मैंने उनसे पूछा कि आप इतने. सारे गाने लिखते हो शुरू में सफल होना. मुश्किल होता है या सफल होकर फिर उसको.
बरकरार रखना तो उन्होंने कहा सबसे मुश्किल. होता है उस अमेठी के मनोज को जिंदा रखना. जो निकला था क्योंकि वो फ्रेश निकला था कई. बार शहरों की चकाचौंध में आपके ऊपर भी एक. अलग सी लेयर आ जाती है कभी आपके साथ हुआ. ऐसा? मुझे लगता है अपने आप को हमेशा याद दिलाते. रहना पड़ेगा कि बाजार के लिए लिखना नहीं. शुरू करना है।. चाहे आप फिल्मी गाने लिख रहे हैं, चाहे आप. किताबें लिख रहे हैं, कन्वर्सेशन कुछ भी. कर रहे हैं। लेकिन.
जो. एक-ए. अपने मन के अंतर के सुख के लिए आप बनाने. चले थे। आपको नहीं पता था आप फिल्मों में. गाने लिखेंगे। आपको नहीं पता था आप यह. सारी चीजें कर पाएंगे। आपने कहीं ना कहीं. मैंने तो गाने जो पहले लिखे थे एक दो वो. अपनी जो फीमेल क्लासमेट्स थे उनको प्रसन्न.
करने के लिए लिखे थे।. क्योंकि ये जो. ये कौन सा वाला गाना सर था ये? शुरुआती वो फिल्मों में नहीं आए।. अच्छा। पर क्या होता है कि ये. मुझे लगा आप कहना चाह रहे होंगे तुम क्यों. चले आते हो हर रोज इन ख्वाबों में चुपके. से आप भी जाओ एक रोज मेरी बात [हंसी]. क्योंकि. ये जो लिरिसिस को है ना अनफेयर एडवांटेज. होता है. कि अगर आपको किसी को तोहफा देना है तो आप. उनके लिए गीत लिख दें तो आपकी चवन्नी खर्च. नहीं होगी और वो जिंदगी भर तकिए के नीचे. रखेंगी। [हंसी].
तो. मैं मैं लिखता था. और एक और एडवांटेज भी था सर. अगर कभी दिल तोड़ दिया और ब्लॉक कर दिया. बात नहीं हो रही है तो गानों के जरिए आप. पहुंचा सकते हो कि मेरे जज्बात क्या है. मैं कहना चाह रहा था. बिल्कुल. कि शहर भर की खुशी में [हंसी]. ये दर्द मेरा भला है. जश्न ये रास ना आए मजा तो बस गम में आया. गम में आया है. जी. कमाल है मतलब लेखों की दुनिया अलग होती है. इसके फायदे भी होंगे बहुत सारे आपको आई एम.
आई एम श्योर बचपन से जब भी आप अगर आप. शब्दों के धनी हैं. तो जिंदगी का रोमांच बढ़ जाता होगा रोमांस. के साथ-साथ।. हां हां बिल्कुल बिल्कुल और जैसे मेरा. मानना है कि एक अच्छा गाना जो होता है. उसको आंकने के कई तरीके हो सकते हैं। पर. मेरा ये है कि क्या मैं ये गाना लिख रहा. हूं। क्या ये. सीतापुर में कोई आदमी नहाते हुए गाएगा।. एक छोटे कस्बे में जब आदमी या कहीं भी जो. आदमी जो नहाते हुए गाता है ना वह फिर.
स्वच्छंद है। वो वो अपने मन की फीलिंग्स. को एक्सप्रेस करना चाह रहा है। आपने बेहतर. लिख दिया है उससे। बस उन्हीं भावनाओं को. लिखा है आपने। बस बेहतर शब्दों में लिख. दिया है। तो मुझे लगता है कि राइटर्स को. यह गिफ्ट मिला होता है ईश्वर से कि. उन निगाहों में मोहब्बत नहीं तो और क्या. है? पर वो मुझसे कह रहा वो किसी और. किसी और का है।. जरा सा झूठ भी ढंग से कहा नहीं जाता।. खूबसूरत है वो इतना सहा नहीं जाता। अभी. कुछ दिनों से लग रहा बदले बदले से हम.
[हंसी]. मेरी बड़ी यादें हैं आप गानों को लेके और. आज भी जब मैं दफ्तर से लौटता हूं तो कुछ. गिनेचुने गाने ही हैं जो मैं प्ले करता. हूं। जिसमें एक शानू दा का गाना है। मेरा. चांद मुझे आया है नजर। मुझे बहुत अच्छा. लगता है।. लेकिन एक गाना है जो मैं बड़ा संजो के. सुनता हूं। वो है मैंने दिल से कहा ढूंढ. लाना खुशी।. ना समझ लाया गम थी गम. बहुत गाने मैंने सुने सर मैं म्यूजिक बहुत. बड़ा फैन हूं लेकिन इस गाने के आसपास मुझे. गाना नहीं मिलता. बहुत शुक्रिया. मैंने बहुत सारे गाने सुने मैं कह रहा हूं. मैं हर राइटर को सुनता हूं बट ये इस गाने.
में कुछ अलग है केके की आवाज में कुछ अलग. था इरफान खान की अदायगी में कुछ अलग था. और आपके शब्दों में कुछ अलग था. और इसीलिए मैंने एक पूरा सेगमेंट रखा है. जहां पर आज मैं केवल गानों की बात करूंगा. लेकिन उससे पहले क्योंकि स्लो इंटरव्यू. बहुत चर्चित है. जी. आपके पिताजी ने गांव में एक स्कूल खोला था. पीछे मुड़कर अगर देखते हैं तो कहीं लगता. है कि वो जो गांव का कनेक्शन है उसकी भी. जो रूह की असल ईंटें हैं वो पिताजी ने. बचपन में रख दी थी? बिल्कुल दोनों पिता और माता दोनों ने मेरे. पिताजी.
डॉक्टर एस बी मिश्रा वो 12 कि.मी. पैदल. जाते थे [गला साफ़ करने की आवाज़]. स्कूल. तो उनका सपना था कि वो ऐसा कुछ करें। अपने. गांव में स्कूल स्थापित करें ताकि और. बच्चों को ना जाना पड़े। फिर वो पढ़ाई में. बहुत अच्छे रहे। तो वहां से लखनऊ. यूनिवर्सिटी जाने का मौका मिला और वहां से. कनाडा जाने का मौका मिला और वहां उन्होंने. फॉसिल्स डिस्कवर किए जो 565 मिलियन इयर्स. ओल्ड 56 करोड़ साल पुराने थे। जो डार्विनस.
थ्योरी ऑफ़ इवोल्यूशन में एक जगह एक प्रश्न. चिन्ह था कि सिंगल सेल से मल्टीसेल कैसे. हुए? उसका उत्तर दे देती थी उनकी. डिस्कवरी।. और फिर वो मशहूर होने लगे लेकिन उनके जो. विदेशी प्रोफेसर थे उन्होंने उनका क्रेडिट. छीनने की भी कोशिश की। खैर लंबी यात्रा. रही और अंततः मैंने और मेरा भाई शैलेश है. हमने कोशिश करके वो क्रेडिट वापस उनको.
दिलवाया। अफसोस कि भारत में उनको कहीं भी. वो सम्मान वो दर्जा नहीं मिला। और ऐसे. बहुत से और लोग हैं। जिनको नहीं मिला. जो उन्होंने यात्रा की तो वापस जब आए तो. शादी के प्रस्ताव आने लगे लेकिन उनकी शर्त. थी कि मैं उसी से शादी करूंगा जो गांव में. मेरे साथ स्कूल बनाएंगी। क्या बात है।. और मेरी मां निर्मला मिश्रा उनका 23 में. देहांत हुआ और वो टीचर रही थी तो उन्होंने.
कहा ठीक है व्हाई नॉट। तो एक. शादी हुई 1972 में और जो डोली थी जो पालकी. थी वो ट्रक के पीछे रखी गई। और लखनऊ से जो. हाईवे तब दिल्ली जाता था जिसको सीतापुर. रोड कहते हैं उसमें आए और वो ट्रक ड्राइवर. के बगल में नवदंपति बैठे हैं। दूल्हा. दुल्हन सजे हुए और वहां से उतर के वह एक. तांगा होता है जिसको वहां पे खड़खड़ा कहते.
हैं। खड़खड़ा इसलिए शायद कहते होंगे क्योंकि. टूटी सड़कों पे वो खड़खड़ करके जाता होगा. और उसके बाद एक उसको ठेलिया कहते हैं जो. कि बेसिकली रिक्शा जिसमें सीमेंट की. बोरियां वगैरह ली कैरी करते हैं तो उसको. और तब वो गांव पहुंचे. ठलिया जो है ऐसे बनी होती है साइड में. छोटे-छोटे हाथ साइड में लगे होते हैं।. और आगे से खुला होता है। अक्सर बच्चे छोटे. बच्चे कूद कर बैठ जाते हैं पीछे इधर करके. बिल्कुल तो गांव के ही है ना. तो माताजी जमींदारों के परिवार से थी और. पिताजी बहुत गरीब परिवार से और वो एक ऐसी.
जगह पहुंची जहां पर ना बिजली ना पानी और. सांप और बिच्छू और एक महीने के अंदर. उन्होंने एक झोपड़ी में दोनों ने साथ. मिलकर एक स्कूल की स्थापना की जिसका नाम. रखा भारतीय ग्रामीण विद्यालय. तो मैं और मेरा भाई हम. स्कूल, गांव से प्यार यह सब हमने. इन्हहेरिट किया. और मेरा गांव कनेक्शन तब से है। लगातार.
गांव में समय बिताना और आप यहां हैं और दो. घर दूर डाकू आ गए हैं। मुझे याद. [नाक से की जाने वाली आवाज़] है कि मुझे. हाई फीवर हो गया था। शायद बच्चों को. स्ट्रेस हो जाता होगा क्योंकि डाकू आ गए।. एक घर जला दिया है और वो कच्चा घर था और. वो करके तो गांव से जुड़ाव गांव के लिए. संवेदना तब से रही और वो फिर धीरे-धीरे. जमीनी बनती गई.
राइटिंग में जर्नलिज्म में पत्रकार के तौर. पे जब मैंने अपनी यात्रा शुरू की तो गांव. नहीं था ज्यादा पत्रकारिता में और गांव. गांव था भी तो एक स्टीरियोटाइप के तौर में. था। लेकिन मैं बहुत जाता था। पहले तो. एसोसिएटेड प्रेस जो ग्लोबल न्यूज़ एजेंसी. है उसमें मैंने बहुत काम किया 9 10 साल। अ. तो उसके लिए मैं जाता रहा। फिर मैं. हिंदुस्तान टाइम्स के थ्रू ट्रैवल किया. मैंने और और देश के कोने-कोने में तो वहीं.
से मिला मुझे गांव। और माता-पिता ने मुझे. गांव का परिवेश दिया और फिर वो मैंने. छोड़ा नहीं उसे अलग-अलग। अक्सर लोग सर जो. होते हैं जो गांव से निकल कर आते हैं जब. वो शहर में आते हैं तो शहर की चकाचौंध. आकर्षित करती है। आप दिल्ली में आईएमसी से. पढ़े. यहां का माहौल अलग होता है। खूबसूरत. लड़कियां बड़े मॉल्स बॉम्बे गेम में आपने. गाने लिखे अगेन नहीं चकाचौंध की दुनिया. लेकिन फिर आपने गांव को ही अपना शहर और. अपना हेड क्वार्टर बना दिया। आज देश विदेश.
के जितने सितारे हैं वह नीलेश जी के पास. गांव में जाते हैं।. शहर में दिल नहीं लगा या शहर ने रोकने की. कोशिश नहीं की या आप उन लोगों में हैं जो. पुरानी यादों में जीते हैं नस्टेल्जिया. में कि नहीं पिताजी ने किया था तो मैं. यहीं जुड़कर जाऊंगा।. नहीं ये या शहर में वो सुकून नहीं है जो. आपके गानों में दिखता है।. हां मतलब थोड़ा-थोड़ा सब है ये क्योंकि. मैं अब जब अपनी पर्सनालिटी को परिभाषित.
करता हूं तो मैं देखता हूं कि ये स्लो नाम. मैंने अब दिया है लेकिन मैं यही हूं। यही. यही मेरा परसोना है और यही मैंने चाहे. जर्नलिज्म जो की या जो गाने किए गानों में. मैंने कोशिश हमेशा की कि एक स्टोरी टेलिंग. सी रहे या जो मैंने जिस तरह की जर्नलिज्म. की वो लॉन्ग फॉर्म जर्नलिज्म थी वो. ब्रेकिंग न्यूज़ वाली पत्रकारिता नहीं थी. वो वो बड़ी तपस्या वाली जर्नलिज्म थी आप. भटक रहे हैं दूर-दूर जा रहे हैं वो. कहानियां ला रहे हैं तो मुझे लगता है कि. मैं वैसा ही था जमीनी था मैं और जमीनी था.
क्योंकि माता-पिता ने वो जीवन जिया वही. जीवन मुझे दिया और उसके बाद लेकिन एक एक. गिल्ट था कि जो उनका स्कूल था उसको एक समय. तक तो मैं अटेंशन दे पाता था उसकी. प्रॉब्लम सॉल्व कर पाता था लेकिन एक समय. के बाद जब मैंने गांव कनेक्शन शुरू किया. वो भी अलग ही यात्रा रही अपना घर बेचा और. ये सब किया तो फिर मैं बहुत अलग ही दलदल. में फंसता चला गया क्योंकि ये करना मुझे. आता नहीं था और वो बीमारी है कि जब करता.
हूं तो वो आता नहीं है। तो बिजनेस कैसे. चलाना है? एंटरप्रेन्योर कैसे होना है? नहीं आता था। आज भी शायद नहीं आता। तो. गिल्ट था कि स्कूल के लिए कुछ कर नहीं. पाते हैं। तो जो स्कूल से जुड़ी हुई कुछ. जमीन थी पिताजी की जो बगल वाले थोड़ा. कब्जा भी करने लग गए थे उस पे ऐसा होता है. हम लोग के गांव में। तो मैंने कहा कि यहां. पर हम कुछ एक कमरा बना लेते हैं। मैंने. अपनी पत्नी से कहा यामिनी से। तो उन्होंने.
तीन कमरे बना दिए और थोड़ा अच्छे बंद. सुंदर से बना दिए और वही जो अब देखते हैं. हम लोग कैमरा पे और एक दिन उन्होंने कहा. कि बाहर बोर्ड क्या लगाना है तो मैंने कहा. कि लेट्स कॉल इट व्हाट वी फील व्हेन वी आर. हियर।. तो हम जो महसूस करते हैं वही नाम दे देते. हैं। तो इसका नाम रखते हैं स्लो। तो मेरे. घर का नाम स्लो है। यह वहां से शुरू हुई.
थी कहानी। लेकिन तो मैं ऐसा ही हूं। मैं. ऐसा ही जीवन पसंद करता हूं। मैं ठीक है. शहरों में शायद मैं अब शहरों के लिए अनफिट. हो गया हूं। हालांकि ऐसा नहीं है। मतलब. अभी मैं लखनऊ और गोवा में रहता हूं। हो. सकता है मुझे बेटी की शिक्षा के लिए आगे. किसी बड़े शहर में जाना पड़े।. लेकिन. मेरा दिल स्लो ही है। मतलब मेरा कम से कम. आधा समय उसी गांव में उसी घर में वहीं अभी. भी बीतता है और वहीं बीततेगा। अब मेरे ज़हन.
में एक सवाल आता है सर अरजीत सिंह बंबई से. बंगाल लौट गए।. एक छोटी गली में रहते हैं। पुराने मकान. में रहते हैं। आप मुंबई से गांव लौट गए? क्या जो लोग अपने स्किल्स को बैक करते हैं. कि हम में काबिलियत है, हम में. आत्मविश्वास है वो दुनिया समाज को अपने. हिसाब से पलट ले आते क्योंकि आधी दुनिया. इस बात पे इनसिक्योर है कि अगर हम शहर. छोड़ देंगे तो शायद काम ही नहीं मिलेगा।. यह क्या मानसिकता होती कि हमने सब कुछ आते.
हुए काम चलते हुए काम छोड़ दिया और अपने. गांव चले गए और अब दुनिया जा रही है।. अरजीत के पास भी जा रही है। आपके पास भी. जा रही है। हां ये बहुत अच्छी बात कही. आपने। असल में जब मैंने मुंबई छोड़ा तो. मैंने इसलिए छोड़ा था क्योंकि मुझे लगता. था कि गांव कनेक्शन को बंबई से चलाना. फर्जी है। गांव कनेक्शन को मैं गोरेगांव. से नहीं चला सकता हूं। तो. इमीडिएट कारण यह था कि मुझे इसको अगर.
चलाना है तो मुझे जीना पड़ेगा वहीं से. और मैं यह सोच के गया था कि शायद मेरे. करियर का की यात्रा यहीं तक थी क्योंकि. मैं बहुत संतोषी व्यक्ति हूं। मैं बहुत. कंटेंट हूं जीवन में। मुझे किसी से. ईर्ष्या नहीं होती है। और यह मैंने अपने. को ट्रेन किया है। मुझे मैंत्वाकांक्षी. हूं। लालची हूं नई चीजें करने के लिए।. लेकिन. संतुष्ट हूं। मैं बहुत अगर कल सुबह मेरा. जीवन समाप्त हो जाएगा तो मैं बहुत खुश हूं.
कि अब तक की यात्रा की क्योंकि यह तो सोचा. ही नहीं था। हम तो एक रिपोर्टर थे जो. अखबार में लिख रहे थे और एजेंसी में लिख. रहे थे। ये सारा ये ये तो सब सेकंड एक्ट. और थर्ड एक्ट ये तो कहीं स्क्रिप्ट में. नहीं था। तो अगर. अगर मुझे कोई गाने लिखने को नहीं देगा।. मुझे कोई काम ये डर नहीं था मेरा। तो जब. मैं गया मैं यह सोच के गया कि एक हाईवे है. और हाईवे से मैं अपनी पगडंडी पर चल दिया. हूं और यह अकेली यात्रा है। यह मुश्किल.
यात्रा है। ये जान के चला हूं मैं।. लेकिन पलट के देखा तो हजारों लाखों लोग. उधर चले आ रहे थे। क्योंकि शायद वो भी वही. खोज रहे थे। शायद वो भी जड़े गांव स्लोनेस. एक स्लो लिविंग वो खोज रहे थे। और ये. डिजाइन नहीं करता है आदमी मतलब अरिजीत का. भी आपने नाम दिया वो फकीर व्यक्ति है वो. मतलब बहुत प्यारा है मुझे वो अ तो.
ये और आपने. उसकी भी बात की एक आत्मविश्वास की वो भी. है निसंदेह है क्योंकि आप वहां हो. एक बार नवाजुद्दीन सिद्दीकी जब आए थे स्लो. इंटरव्यू में बोले आप बहुत जिद्दी आदमी है. आप कहते कहते हो मैं यहां रहने लग गया. हूं।. मुझसे मिलना है तो यहां आओ. और आएंगे। लोग यहीं आएंगे। तो सोचा नहीं. था लेकिन एक समय के बाद वो कि भाई कोई सीओ.
कह रहे हैं कि आप कब मैंने कहा भाई मैं तो. यहां रहता हूं। तो वहीं आते हैं वो अगर. उनको मेरे से काम करना है वहीं आते हैं. वो। तो उनके कि वो पूरा दिन लेके और वहां. से फ्लाइट पकड़ के और डेढ़ घंटे रोड पे तो. मुझे लगता है कि ये एक खुददारी है जो हम. लोग पहनते हैं और एक आवरण एक एक पहनावा. पहन के इसमें कोई घमंड नहीं है और इसमें. जजमेंट भी नहीं है। एक और चीज है कि. जजमेंट बिल्कुल नहीं है कि भाई मैं मेरा.
जीवन बहुत बढ़िया है। शहरी जीवन बहुत खराब. नहीं नॉट एट ऑल।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. मैं जिस टर्निंग स्लो की बात करता हूं और. जो स्लो लिविंग की बात करता हूं वो शहरों. में रह के भी वो एक इंटरनल प्रोसेस है।. अभी जब मैं विपशना में गया मैंने आपको. बताया कि वो जितनी उन्होंने चीजें बताई. और उसके पहले कुछ फैंस मिल गए तो उन्होंने. कहा कि सर आपके स्लो मूवमेंट और इसके बीच. में बहुत समानता है। तो मैंने सुना मैंने. कहा कि इनमें से आधी चीजों पर मैं कोशिश. कर रहा हूं। मैं स्वयं भी कोशिश कर रहा.
हूं। बहुत सालों से मैं काम कर रहा हूं. अपने आप पे कि मेरे अंदर नेगेटिविटी ना हो. और वो एक मार्केटिंग की लाइन के तौर पे. मैं ना कहूं मैं मेरे अंदर ना हो किसी. मुझे याद है मैं एक रेड लाइट पे था ऑफिस. के सामने हिंदुस्तान टाइम्स की क्योंकि. मैंने आपको कहा ना मैंने अपने ऊपर काम. किया है मैंने फोन उठाया और मैंने स्वानंद. को कॉल किया पहली बार और बहुत साल और. मैंने कहा कि स्वानंद. मेरा मेरा नाम नीलेश मिश्रा और मैं.
इत्तेफाकन इन सबसे पहले से गाने लिख रहा. हूं। इन ये पूरी जनरेशंस से पहले से मैं. गाने लिख रहा हूं।. मैंने कहा मैं बस ये कहना चाहता था आपने. ये गाना लिखा है। इतना अद्भुत लिखा है और. और मैं आई वेंट ऑन एन ऑनर और सोनन चुप हो. गए। बोले भाई ऐसे कौन फोन करता है आजकल? तो. वो मैंने. वरना एक होता है ना कि एक किसी ने गाना.
लिखा, किसी को बड़ी फिल्म मिली, किसी को. शो मिला या आपको लगता है लेकिन मुझे लगता. है कि एक समय के बाद एक खुददारी आ जाती है. कि मैं जो कर रहा हूं वो भी अपनी तरह से. बड़ा है। वैल्यूुएबल है और. [गला साफ़ करने की आवाज़] मैं खुश हूं।. मैं मुझे बहुत संतोष है आत्मसंतोष बहुत. ज्यादा है मुझ में. वो जो शेर था कि घर लौटते परिंदों सी हो. गई है हमारी जिंदगी ना किसी से आगे बढ़ने. की होड़ है ना किसी के पीछे छूट जाने का. डर है. बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल. हमारी लड़ाई हमसे ही है हमारी यात्रा हमसे.
ही. बिल्कुल 100%. हम अपने आप को एक्सप्लोर करते जा रहे हैं. नईनई परतें खोल रहे हैं अब ईर्ष्या नहीं. होती जलन नहीं होती किसी से कंपटीशन नहीं. करना. हमारे नसीब में जो है देखते हैं हमारे. अंदर कितने और रंग बचे हैं जिंदगी के रंग. एक्सप्लोर. चलो चलो चलो करके देखते हैं। ये अद्भुत. मैं आपके बारे में जब पढ़ रहा था क्योंकि. बहुत सारी लेयर्स है तो जिस हिस्से के. बारे में सबसे कम पता था मुझे. वो आपका मीडिया फील्ड था।. जजेनरिक मैंने नीलेश मिश्रा क्योंकि मैंने. हम जब बड़े हुए रेडियो की कहानियां आने.
लगी, गाने आने लगे और बहुत सारे इंटरव्यूज. दिखने लगे।. पत्रकारिता वाला हिस्सा मुझे सबसे कम पता. था।. हो सकता है आपके बाकी फैंस जानते हो। तो. मेरी दिलचस्पी बहुत बड़ी कि एक पत्रकार के. तौर पर ये कैसे थे? क्या इन्होंने किया? कहां काम करते थे क्या उपलब्धियां थी और. मैं बड़ा हैरान हुआ कि दो बार रामनाथ गोयन. का बहुत सारे. अलग-अलग घटनाओं को आपने कवर किया तो मुझे. लगता है कि जो नहीं जानते थे मेरे जैसे. लोग थोड़ा सा हिस्सा हम छू लेते हैं आपके. पत्रकारिता जीवन को भी. आजकल सर चारों तरफ युद्ध चल रहे हैं.
युवाओं को बड़ा क्रेज होता है डेंजर जोन. में जाने का कई बार मुझसे लोगों ने कहा कि. ईरान का अगर लग जाए यार वीजा हम चले. जाएंगे इजराइल का लग जाए चले जाएंगे. अफगानिस्तान में युद्ध हो रहा था मेरे. संपर्क थे भेज दो हमें. आप जो कवर कर रहे थे. और अब आप पीछे पीछे मुड़ के देखते हो। ये. रोमांचित करता है क्योंकि कारगिल आपने भी. कवर किया था।. तो वो खतरा रोमांचित करता है या अब लगता. है कि सुरक्षित घर लौटाना और वो कहानियां. बताना ये ज्यादा रोमांचित है।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. कारगिल छोड़ने वाला मैं आखिरी रिपोर्टर. था। मैं औरको दत्ता जो एएफपी न्यूज़.
एजेंसी के फोटोग्राफर हैं। हम दोनों थे और. हम वहां दो-तीन महीना रहे थे।. वह पहला मौका था जब इंडियन आर्मी ने. पत्रकारों को अपनी परिधि में अपने स्फीयर. ऑफ ऑपरेशन में आने की इजाजत दी थी। ये. पहला मौका था। ये एंबेडेड ये सब ये सब बाद. में बहुत बाद में आया है।. बहुत रोमांचित करने वाला था। हम लोग एक.
जोजिला पास से होकर के बस में गए एकदम. नीचे गिर सकते हैं। ये वो. जो इस इस समय की जो जनरेशन है जो जो अब. सीनियर्स हैं बरखा और गौरव और प्रभात. शुंगलू ये सब ये सब लोग दीपक ये सब लोग. हमारे साथी संगी उसी में थे।. और मुझे लगता है कि हम सब अचानक बड़े हो. गए और. वहां जाकर आप जब देखते हो युद्ध की.
विभीषिका. पहली बार. किन मुश्किलों में सैनिक लड़ रहे हैं।. इंसास राइफल आई थी और. सैनिक हमें बताते थे कि वो सही निशाने पे. नहीं मार पाती है। तो इसलिए थोड़ा टेढ़ा. करके मारना पड़ता है।. फाइनली बोफोर्स गन ने ही लड़ाई वो जीती।.
ऊंची जो टाइगर हिल जिनके नाम दिए गए थे।. टाइगर हिल टाइगर हिल एक सेक्सीी नाम दे. दिया गया था ना। टाइगर हिल से बहुत ज्यादा. मुश्किल कई लड़ाईयां हुई। क्या उनके नाम. उनके हाइट्स पे थे? कि 4147 या ऐसे करके. नाम थे। इसका नाम क्योंकि टाइगर हिल था तो. ये सुर्फियों में आ गया। नॉट दैट वो. मुश्किल लड़ाई नहीं थी लेकिन मैं कह रहा. हूं कि इसके समान भी बहुत ज्यादा बहादुरी. के किस्से थे सैनिकों और ऑफिसर्स के।.
मुझे याद है. पहली बार मशको हिल नाम का एक तो चार. सेक्टर्स थे गगिल. दरास. मस्को हिल और एक और था। मुझे याद नहीं आ. रहा है। मशको हिल कोई गया नहीं था।. तो एक दिन मैं संकर्षण ठाकुर हमारे साथी. जिनका देहांत हो गया। अजमल जामी जो एनडीवी. के लॉन्ग टाइम कैमरा पर्सन रहे। हम सब तीन.
चार लोग एक साथ घूमते थे। एक हमने सारी. [गला साफ़ करने की आवाज़] गाड़ियां जो. एंबेसडर्स थी रेंट आउट हो गई थी। तो हमें. एक हरे रंग की विलेज जीप मिली थी। तो. पाकिस्तानी हमको फौजी समझते थे। [हंसी]. यार दुर्भाग्य देखो एक हरी विलेज जीप में. हम घूमते थे हमारे ऊपर इतनी डायरेक्ट. सेलिंग हुई है क्योंकि वो सोच रहा था. आर्मी की जीप जा रही है. मस्को वैली में पहुंचा कार्ड अपना भेजा.
अंदर से ऑफिसर ने बुलाया और वो ऑफिसर देख. भी नहीं रहा है मेरी ओर वो कर्नल है मैंने. उसके ये देखे स्टार्स आके बैठ गए मैं और. संकर्षण. एंड ही सेस. आप जानते हैं मैं क्या कर रहा हूं? मतलब. सो सिनेैटिक. कहा नहीं. बोले मैं उन सोल्जर्स की लिस्ट बना रहा. हूं जो शहीद हुए मतलब और. ऐसा ना गुस्सा भरा होता है। लेकिन आप पहले.
व्यक्ति हो जो बाहर की दुनिया से आए हो।. उस दुनिया से जो इस दर्द को इस मोमेंट को. नहीं समझ सकती है।. करण राजीव नाम था उनका।. फिर मैंने बोला मैं फलाना फलाना हूं और. ऐसे. मैंने इतना ही बताया मैं कहां काम करता. हूं। बोले. लखनऊ में कहां रहते हो? मैं एकदम चुप. मैंने कहा निराला नगर के पास। निराला नगर.
के पास कहां? मैंने कहा त्रिवेणी नगर।. मैं भी निराला नगर से हूं।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. तो मेरे बोलने का लहजा जो है ना आर्मी के. लोग क्योंकि वो ट्रेंड इयर्स होते हैं. उनके वो जान अक्सर जान जाते हैं ये कई बार. मेरे साथ अनुभव हुआ है कि मैंने बोलना. शुरू किया और बोलेंगे लखनऊ में कहां रहते. हैं आप. तो उन्होंने कहा कि मैं भी निराल नगर में. रहता हूं और मैं जब चल रहा था तो मेरा. बेटा है छोटा. रोने लगा था और उसने कहा बाय पापा और मुझे.
पता था मैं कहां जा रहा हूं और मुझे नहीं. पता था कि मैं इसके पास आऊंगा कि नहीं. आऊंगा।. ये जो मोमेंट्स होते हैं ना ये. अभी भी मुझे गूसबम्स हो रहे हैं। मतलब. इतने साल बाद उस मोमेंट को सोच के और. धीरे-धीरे हम घुलते गए उस उस माहौल में उन. लोगों के बीच. ऐसा नहीं मतलब पूरी डिसिप्लिन और दूरी थी. जहां होनी चाहिए। लेकिन एक मानवीय रिश्ता.
जो था. एक दिन हमें अ. उन्होंने अपने वॉर रूम में जाने दिया तो. बंकर था मैप्स अपना वॉरम था उनका. उस समय एक पीक थी 4590. ये मैंने कभी-कभी कहीं शेयर नहीं किया है।. 4590 की लड़ाई उसकी पिछली रात ही हुई थी।. और जो यंग अ मेजर्स थे वो वापस ही आए थे।.
अ वापस [नाक से की जाने वाली आवाज़] आए थे. और बस मतलब कुछ देर पहले आए होंगे। अपने. ऑफिसर के साथ बैठे हैं इन्हीं कर्नल के. साथ।. [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. और. पाकिस्तानी. ऑफिसर्स. की कुछ चीजें वापस लाए थे वो. तो एक पुलिंदा था जिसमें कागज थे.
पाकिस्तान के मेस बिल्स थे. कुछ मैप्स थे कुछ चिट्ठियां थी. और एक कार्ड था वो कार्ड उस पाकिस्तानी. ऑफिसर की पत्नी ने उस ऑफिसर को भेजा था।. उसके पहले पन्ने पर लिखा हुआ था स्माइल. बिकॉज़ इट्स द नेक्स्ट बेस्ट थिंग यू डू. विद योर लिप्स। और अंदर लिखा था आई मिस.
योर किसेस।. और उस पर उस ऑफिसर का खून लगा था।. और. यह सब चीजें पास अराउंड हो रही थी। यह. कार्ड भी पास अराउंड हो रहा है। वह यंग. ऑफिसर्स, इंडियन ऑफिसर्स पास अराउंड कर. रहे हैं। और उनमें से एक दो जाहिर सी बात. है जज्बा है, युद्ध है अपने तो थोड़ा शायद. तंज भी कर रहे थे कि ऐसे करके कुछ हो भी।.
तो ये कर्नल जो था कर्नल ने कहा गाइस ही. वास एन ऑफिसर लाइक यू एंड मी।. कि भाई मजाक मत उड़ाओ। तो उस यंग मेजर ने. कहा सर. मैं उसके देश नहीं गया था। वो मेरे देश. आया था।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. एग्जैक्ट सीक्वेंस याद ये इसने मेरे लिए. कितनी चीजों को सम अप कर दिया। कितनी सारी. चीजों को सम अप कर दिया।. [गहरी सांस लेने की आवाज़].
तो वो जो. वॉर हेडलाइंस के परे जो वॉर होता है ना. जो अनुभव करते हैं पत्रकार तब तो करते ही. थे। अब शायद ये अब शायद एक मैनिक्योर्ड. तरीका फौजों ने भी ढूंढ लिया होगा कि आप. बाहर जा रहे हैं। अमेरिकन आर्मी के साथ जा. रहे हैं। आप एंबेडेड हैं। वो आपको वही. दिखाएंगे जो आप दिखाना आपको दिखाना चाहते. हैं। लेकिन यह तो हम उनकी वलनेरेबिलिटीज. के अंदर चले गए थे।. एक रात.
हमने कहा आज रात बिताएंगे ऐसे पागलपन में. शाम को चले गए और चले गए तो वहां से तब तक. अंधेरा हो गया तो उनके गार्ड ने बंदूक तान. दी बंदूके तान दी कि भाई ये गाड़ी आ रही. है कोई भी तो हमने आइडेंटिफाई किया ये खैर. मतलब ऑफिसर जब आए उन्होंने कहा भाई ये. गोली मार सकता था आपकी ये क्या बेवकूफी है. नहीं हम हम स्टोरी करना चाहते थे कि रात. [हंसी] कैसे होती है। खैर उन्होंने हमको.
कुछ देर रखा। बोले आपको हमें वो जो गोल. वाले बिस्किट्स होते थे मोनाको के उसके. ऊपर कुछ चीज डाल के और ये करके अपना अपनी. ओर से जो भी सिंपल स्वागत कर सकते थे. किया। ये भी बताया कि शालिन उस साइड से. आती है और ऐसे और बोले कि अब आपको जाना. होगा। [गहरी सांस लेने की आवाज़]. हम तो सोच रहे थे कि उनके लोगों के साथ. सोएंगे। भाई सुबह स्टोरी लिखेंगे और. जाएंगे और नहीं बोले नहीं ये रूल्स के. अगेंस्ट है मैं आपको होल्डिंग आपको जाना.
होगा 90 किलोमीटर हमको जाना था पैदल गाड़ी. से उसी विलेज जीप में बत्ती हमने ऑन की तो. वो देख रहा है वो हाइट से देख रहा है. पाकिस्तानी. और नीचे खाई है और नदी बह रही है और हम. मतलब होश उड़ गए थे कि ये क्या पागलपन कर. दिया हमने. और किसी तरह हम गए। फिर हेडलाइट्स ऑफ की।. मैंने और संकर्षण ने दोनों तरफ एक-एक. टॉर्च खोली कि भाई ड्राइवर को कुछ तो दिखे.
और शेलिंग शुरू हो गई।. उसने देख लिया और अरे फिर कहीं जा रहे हैं. फिर रुक जा रहे हैं फिर तो हमने. जीवन को मृत्यु को खतरे को संघर्ष को घर. से दूर होने को सब कुछ देखा और कहीं ना. कहीं उसने हमको शेप किया तो. ग्लैमर नहीं है युद्ध. ये रील्स नहीं है युद्ध वो पत्रकारिता का.
रोमांच भी खत्म हो गया होगा शायद इसमें. क्योंकि जब ये देखा होगा क्योंकि क्योंकि. मैं द्रास 20 साल बाद गया सर. हम. जब कारगिल के 20 साल हुए तब गया. और वहां पर जाकर शहीदों को लेकर जो. मेमोरियल बनाए गए. जब मैं वहां गया या बोफोर्स पर वो हमें ले. गए. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. कि इसकी वजह से हम जीते थे और मैं बोर्स. पर चढ़ा बताया उन्होंने कि कैसे चढ़ रहे. थे। अभी हमारे यहां यशिका त्यागी जी आई. थी। [गला साफ़ करने की आवाज़]. उन्होंने हमें कैप्टन नींबू साहब की कहानी. सुनाई।. कैसे खड़ी पहाड़ी पे चढ़ गए थे।. मनोज सर आए थे नरवड़े सर।.
उन्होंने अपनी कहानियां सुनाई। कैसे उनके. दोस्त को यहां पर गोली लगी. वो जो रोमांच करने वाली चीजें डरा रही थी. मुझे एंड आई एम श्योर ऐसे ही आपको सबक. शायद मिला होगा या ऐसे ही अनुभव हुआ होगा. कंधार में भी. बिल्कुल कंधार कवर करना. 173 घंटे. कश्मीर कवर करना चरखी दादरी विमान. नार्थ ईस्ट चरखी दादरी उफ मैंने. पत्रकारिता शुरू ही की है। मैं. मतलब अर्ली 20ज में हूं। 22- 23 साल का. हूं। और रात को फोन आता है ऑफिस से कि दो.
जहाज टकरा गए हैं एक दूसरे में। एक रशियन. प्लेन था और एक सऊदी अरेबियन प्लेन था और. वो चरखी दादरी हरियाणा में गिरे हुए हैं. और तुम तुरंत चले जाओ। मैंने भी. पत्रकारिता ज्वाइन की। मुझे तो गाड़ी कैसे. बुक करते हैं यही तक नहीं पता भाई। मैं तो. सेक्टर 25 नोएडा में रहता हूं। मैं क्या. मतलब मैं करूं क्या? नेक्स्ट स्टेप क्या. होता है? मुझे कुछ नहीं पता। खैर गया मैं. और. इतना बड़ा खेत दूर एक आग जलती दिख रही है.
और आपने जैसे ही चल रहे हो आपको संभाल के. चलना पड़ रहा है क्योंकि लोगों के हाथ और. पैर वहां पर पड़े हुए हैं। आपका पैर उस पे. आ सकता है। उफ. पहली बार मृत्यु को इतने नजदीक से देखना. आप मॉर्चुरी जा रहे हो। वहां उल्टियां कर. रहे हो पहले तो आप क्योंकि हाउ डू यू. कॉम्प्रिहेंड दिस? एक प्रोसेस कैसे करें. इस चीज को? इतनी बड़ी विभीषिका कि दो जहाज. एक दूसरे से टकरा जाएंगे और लोग एकदम.
लोगों की बारिश हो रही है। हाथ पैर लोगों. के पड़े हुए हैं। तो. वही मैं कह रहा हूं ना ये सब मेरे अंदर. बड़ा भरा पड़ा है। बहुत दुख है मेरे अंदर।. तो जैसे वो कहते हैं ना सर कि पत्रकारों. को सख्त होना चाहिए। सबसे ज्यादा कमजोर. कहां पड़े आप? पत्रकारिता के दौर में।. कमजोर में मुझे सख्त होने का कोई शौक नहीं. था। मैं वनरेबल होना चाहता हूं क्योंकि. संवेदना वहीं से आती है। अगर आप अगर आप.
महसूस नहीं कर सकते मैंने सुनामी कवर किया. है। मैंने देखा है कि कैसे. 20 30 फीट और ज्यादा ऊंची. लहरें हैं लोगों का। सब उजड़ गया है। मैं. उस द्वीप पे एक आदमी सारा सब उजड़ गया। एक. आदमी बचा है। माइकल मैंगल पोलो पांजा वो. यही कहते हुए 25 दिन जीवित है। उसकी. गर्लफ्रेंड थी। वो बह गई। क्रिसमस पार्टी. थी। बह गया सब कुछ। और वो एक दिन उठा और.
कुछ नहीं है। अगली सुबह उठा कुछ नहीं है।. उस आदमी से मिला। तो इतनी. मैं नहीं हूं। मैं मैं मजबूत सख्त मुझे. कुछ नहीं चाहिए। ये आवरण या कवच या नकाब. कुछ नहीं चाहिए। मैं मुझे मैं रोया हूं. अपने सब्जेक्ट्स के साथ। मुझे मैंने उस. आंसुओं को महसूस किया और और. थैंक गॉड किया है। थैंक गॉड कि मैं इतना. सख्त नहीं हो गया हूं कि मुझ के दर्द मेरे. अंदर तक ना पहुंच सके और आज भी जब मैं कोई. कहानी सुनाता हूं तो उसमें मेरा गला रुंध.
जाता है और यह मेरा टेस्ट है क्योंकि जिस. दिन ये नहीं होगा इसका मतलब है कि मैं. कहीं ना कहीं एक एडवरटाइजिंग वॉइस में. बोलने लगा हूं। जैसे हम रोज खबर कवर करते. हैं। मैंने टीवी पे 10 साल काम किया। मैं. रोज. हजारों मौतें, हजारों हादसे, हजारों. बड़ी-बड़ी घटनाएं. रोज [गला साफ़ करने की आवाज़] कवर करते. थे। एक समय ऐसा आता है कि धीरे-धीरे आप. यूज़ टू हो जाते हैं कि चार दो गाड़ियों. में टक्कर हुई। तीन लोगों की मौत हो गई।. एक साधारण सी घटना होती है। अनलेस अंटिल. आप रिपोर्टिंग करने ग्राउंड पे जा रहे. हैं। वहां शायद थोड़ी संवेदना ज्यादा फील.
होती है।. स्टूडियो आके थोड़ी सी वो कम हो जाती है. क्योंकि यूज़्ड टू. कोई बहुत ही भयावह सीन आया. तो आप डर [गला साफ़ करने की आवाज़] जाते. हैं। जैसे मैं अतीक अहमद वाली घटना में. मैं पहला जर्नलिस्ट था जिसने टीवी पर आज. तक पर वो खबर ब्रेक की हम. और शायद किसी को नहीं पता था। पीसीआर को. भी नहीं पता था।. हम. उन्होंने लाइफ चला दिया था आज तक पर सर पे. गोली मारते हुए कि मेन बात ये है गुड्डू. मुस्लिम. और मेरे हाथ से पानी गिलास गिर गया।. हम. मैं सक ये क्या था? ये असंभव है।. हम. ऐसी बहुत सारे मेरठ गया दंगे पत्थर पड़े।. कुछ याद है? कुछ ऐसी घटनाएं जो यूज़्ड टू.
थे।. फिर [गला साफ़ करने की आवाज़] एक रोज मैं. एक एंकर की खबर पढ़ रहा था कि कोई महिला. एंकर थी। वो पढ़ रही थी किसी हादसे की खबर. और उनके पति की मौत की खबर थी।. ओह माय गॉड।. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. उन्हें उस स्टोरी के बीच में पता लगा. कि वो ब्रेकिंग पढ़ी उन्होंने मध्य प्रदेश. का कोई रीजनल चैनल था हम. कि वहां पर उनके पति की मौत के बाद और फिर. मुझे लगा कि जैसे डॉक्टर कहते थे कि. ऑपरेशन नॉर्मल होता है। अपनी बेटी का बेटे. का तो होता है।. हम. तो आप कभी यूज़ टू नहीं हुए।. असल में जब आप वहीं जा रहे हैं ना. हम. जब आप वो सत्य जितने भी समय तक क्योंकि.
न्यूज़ एजेंसी रिपोर्टर रहा हूं मैं।. न्यूज़ एजेंसी रिपोर्टर सबसे आखिर में जा. छोड़ता है जगह। तो वो वो आप उसके साथ जी. रहे हैं और बहुत एक समय तक जी रहे हैं तो. फिर आप उसको इबाइब कर लेते हैं। आप. आत्मसात करते हैं उस दर्द को। आप उनके उस. घर में आप तुरंत जाके नहीं आ रहे हैं। तो. तब आपके अंदर ज्यादा घर कर रहा है वो. क्योंकि आपका हिस्सा बन गया।. आप उसका मैं जैसे नेपाल का रॉयल फैमिली.
मैसकर है मैंने तो. खतरनाक था। उसके बाद का दंगा और मतलब वो. सब देखा मैं दो-तीन महीने रहा वहां पे तो. अ. तो आप फिर उसका हिस्सा बन गए। किस स्टोरी. आपको रामनाथ का मिला था? अ पहली बार मिला था एक इंसर्जेंसी पे हमने. सीरीज की थी इंडिया बस ईस्ट करके जिसमें. हम नौ राज्यों में गए थे और उस समय भारत. में नक्सलवाद.
और अन्य तरह का जो एक्सट्रीमिज्म है वो वो. इतनी तेजी से बढ़ रहा था। बहुत तेजी से. बढ़ रहा था। ऐसा लग रहा था कि आधा भारत. इसके साए में आ सकता है।. तो मैं मणिपुर भी गया जहां पैरेलल. गवर्नमेंट चल रही थी।. मैं. छत्तीसगढ़, झारखंड, ओसा, कश्मीर. वगैरह-वगैरह. उस पे सीरीज की थी जिसका यह थीम था कि.
इंसर्जेंसी. हैज़ बिकम अ कन्वीनिएंट एक्सक्यूज फॉर मिस. गवर्नेंस।. अपना काम नहीं करना है, स्कूल नहीं बनाना. है, सड़क नहीं बनाना है। ब्लेम करना है. इंसर्जेंट को। अब ये हिस्सा इस इंटरव्यू. का मेरा सबसे फेवरेट सेगमेंट है क्योंकि. ये गानों को लेकर है। और पहला गाना जैसा. मैंने कहा कि आपका सबसे पसंदीदा गाना. मैंने दिल से कहा। मैं इस गाने से ओवरकम. नहीं कर पाया और मुझे इससे खूबसूरत गाना. अब तक कोई लगा नहीं। खासतौर पर तब जब मैं.
एक सोच के साथ ड्राइव कर रहा हूं, बैठा. हूं। तो मैंने कुछ सवाल ऐसे इसमें रखे थे।. क्रिएटिव होने की कोशिश की. कि इस गाने में एक बड़ी अच्छी लाइन है कि. शहर भर की खुशी से यह दर्द मेरा भला है।. आज जब पूरी दुनिया खुश दिखने की होड़ में. है। सोशल मीडिया से लेकर जिंदगी में हम. बहुत खुश हैं, हैप्पी हैं। क्या अकेलेपन. और अपने दर्द को ईमानदारी से स्वीकार कर. लेना सबसे बड़ा सुकून है। और ये किस दौर. में ये गाना लिखा गया था? [नाक से की जाने वाली आवाज़]. ये.
जब लिखा था तो यह ऑटोबायोग्राफिकल था।. मेरे. जो निजी जीवन था वो कुछ मुश्किलों से गुजर. रहा था और. यह गाना फिल्म के लिए होगा ये सोचा भी. नहीं था। हालांकि उस धुन पे लिखा था मैंने. लेकिन अ उस पर्दे पर नहीं दिखाया जाना था. इसको। एक जिसको मार्केटिंग सॉन्ग कहते हैं. वो एक था कि एक और गाना है फिल्म में।.
अ मुझे फोन आया था भट्ट साहब का और एमएम. क्रीम भी लाइन पर थे और. एक डिट्टा फोन होता था मेरे पास जो हम. प्रेस कॉन्फ्रेंसेस में ले जाते थे तो वो. उन्होंने धुन गाई एमएम क्रीम ने और मैंने. उसको रिकॉर्ड किया हमारा ऑफिस होता था. पांच सिकंदरा रोड पे वहां से मैं चला जब. तक मैं प्रगति मैदान के पेट्रोल पंप पर. पहुंचा तब तक मुखड़ा मैं अपने मन में लिख. चुका था गाड़ी रोकी नोटबुक में लिखा और जब. तक नोएडा आया तब तक पूरा पूरा गाना लिख.
चुका था मैं।. तो. वो दौर था. जिसमें मेरे लिए एक आउटलेट था ये गाना।. फिर जब उन्होंने सुना ये तो उन्होंने कहा. कि. क्या लिख [नाक से की जाने वाली आवाज़]. दिया है? ये यही तो फिल्म है। तो फिर उसको. शूट किया गया और उस तरह से और. मतलब. जितने यंग लोग इस गाने को मतलब मेरे पास.
आते हैं बताते हैं कि हम सुनते हैं मुझे. बहुत आश्चर्य होता है कि अब तक वो रेजोनेट. किया है पीढ़ी दर पीढ़ी वो कई जनरेशंस में. रेजोनेट किया होगा। तो वो वो दौर था और. ठीक है। चलिए समथिंग गुड केम आउट ऑफ इट।. [हंसी] बट दर्द की भी अपनी ताकत होती है।. दर्द एक जेवर है मेरे दोस्त। दर्द को. पहनना चाहिए। दर्द से छुपना थोड़ी है।. दर्द से बिल्कुल भागना नहीं है। और. दर्द आपको अपनी कमियों, अपनी ताकत सबके.
बारे में बताता है।. जो मैं तो शायद कहता हूं कि मैंने अपनी. आधी जिंदगी आई हैव बीन वेडिंग थ्रू मेलन. कोली। मैं एक जैसे दर्द का एक समंदर सा है. उसमें अपने किसी तरह पैर आगे बढ़ा के हाथ. आगे बढ़ा के जा रहा हूं. तो दर्द रहता है कहीं ना कहीं मेरी.
राइटिंग में. वो अपना जिया हुआ भी है लेकिन वो उधार. लिया हुआ भी है. वो देखा सुना भी है. क्योंकि वो एम्पथी से आता है. औरों का दुख भी है उसमें अ तो. अह. आईएमसी आप गए सब सॉर्टेड था। कॉलेज अच्छा. रहा होगा। कॉलेज में इशू हुआ था आपको?
कई तस्वीरें एक साथ चलने लगी थी। [हंसी]. नहीं नहीं।. ये पहला जीवन का था। इससे पहले विष हो गए. थे। क्योंकि आपने कहा कि शुरू में आप. लिखते थे। किसी को सोच के लिखा था।. मेरा मेरे रिश्ते रहे हैं अ. और. सब सबसे कुछ मिला है। अ. ज्यादा मैं बात करता नहीं हूं उन रिश्तों.
की लेकिन. निसंदेह अ. जो बाद में चाहे. लव सॉन्ग्स रहे या पेन के सॉन्ग्स रहे. उसमें बहुत कुछ जिया हुआ भी था. और तो वो. मेरे माता-पिता तो मुझे बहुत लंबे समय तक. छेड़ते है कि जब मैं.
तीन साल का था. तब मेरी पहली गर्लफ्रेंड बनी [हंसी]. पड़ोस में कोई बच्ची होती थी तो मैं वहीं. पहुंच जाता था और नॉक करके उसको पूछता. रहता था तो तब से मजाक बनता था. तो. अ रहा रिश्तों का सिलसिला रहा. सबकी कदर है. खूबसूरत ये अधूरा इश्क रह क्यों आता है सर. मुकम्मल हुए इश्क पर इतनी चर्चाएं नहीं.
होती ना पूछने वालों को ना सुनाने वालों. को. वो जो नहीं मिला वो जो अधूरा रह गया भले. उसमें हो सकता है थोड़ी गंदगी भी हुई हो. थोड़ी नाराजगियां भी हो शायद सब कुछ सही. भी ना रहा हो लेकिन यादों में ख्वाबों में. लिखने में बातों में वही रह जाता है क्यों. ऐसा होता है. जो. नहीं [गला साफ़ करने की आवाज़] हो सका वो.
[गहरी सांस लेने की आवाज़]. इतनी सारी संभावनाएं लेके आता है जो अक्सर. आप के बहुत सारे सवालों का जवाब बन जाती. हैं कि आपको लगता है कि जिंदगी में. मुश्किल है लेकिन फलाने व्यक्ति के साथ. जिंदगी आसान हो सकती थी क्योंकि उसके साथ. जीवन ऐसा होता. नहीं होता. मेरे दिल में ख्याल आता है. हां तो होता ना होता वो वो पता नहीं रहता. है। लेकिन. ये जो दुख का ईंधन है ये.
शायरों के बहुत काम आता है। जश्न ये रास. ना आए मजा तो बस गम में आया बस गम में आया. है।. ये आप आपने इसको कितने सालों तक जिया? ये. जो गम होता है जैसे मुझे बीच में एक दौर. आया था जहां मुझे लगता था कि ये गम मुझे. अच्छा लगता है। इसका मतलब यह नहीं कि वो. इंसान वापस चाहता हूं। हो सकता है वह. इंसान वापस भी आता तो भी मुझे शायद अच्छा. ना लगता। मैं उस जोन में चला गया था जहां. पर मुझे यह अच्छा लगने लगा था कि जश्न ये. रास ना आए मजा तो बस गम में आया है। मुझे. तन्हाई अच्छी लगती है। मुझे अपने अंदर जो.
ये अब एक भारीपन आया है। एक गहराई आई है।. समझ आया है। ज्यादा जज्बात में समझ रहा. हूं। ये मुझे अच्छा लग रहा है। मेरा ये. नया वर्जन अच्छा लग रहा है। ये दर्द कुछ. मीठामीठा एहसास दे रहा है।. ये रहा आपके साथ? ये होता है। ये मेरे साथ. अभी भी होता है। अक्सर होता है और. मैं उससे डील करना भी जानता हूं। मैं. अवेयर हूं. हम. अ कि अब मैं एक फेज में जा रहा हूं जो अ.
जिसमें मैं अकेला होना चाहता हूं या अकेला. रहना चाहता हूं। अ. तो. मेरे आसपास मेरा जो परिवार है या ज्यादा. दोस्त तो है नहीं मेरे लेकिन जो मेरा. परिवार है वो वो भी जानता है कि इनसे कैसे. डील करना है तब कि लीव हिम अलोन. तो. शायरों लेखकों के साथ. हां हम थोड़ा मिसफिट होते हैं थोड़ा. मिसफिट होते हैं हम लोग.
अच्छा एक और बीमारी होती है शायरों और. लेखकों की जो कि आपने जिक्र. कि. कोई कुछ कह रहा है उसमें से कोई एक बात. होती है जो आपको तकलीफ दे जाती है और हो. सकता है कि आप उसी बात को लेके बैठ जाएं. उसी एक कोई वाक्य हो एक इमोशन हो कुछ तो. मैंने इस पे भी कोशिश की है कि मैं अपनी. बेवकूफियों को अपने आप को बताऊं कि.
नहीं पूरी तस्वीर यह है। हमारे अक्सर. रिश्ते इसीलिए खराब हो जाते हैं। आपसी. रिश्ते आजकल तो WhatsApp पे रिश्ते होते. हैं कि क्योंकि हम कोई एक बात लेके बैठ. जाते हैं और. नहीं बट मेरा इसमें ऑब्जरवेशन ये है कि. मैंने बहुत सारे पॉडकास्ट बीच में किए सफल. व्यक्तियों की प्रेम कहानी अक्सर असफल. होती है।. जो ज्यादा टैलेंटेड होते हैं।. मीडियाकर वाले में शायद चल जाता है. जो ज्यादा टैलेंटेड लोग होते हैं। उनकी. प्रेम कहानियां अक्सर असफल हो जाती हैं।. बहुत सारे उदाहरण मेरे सामने ऐसे नजरों.
में आते हैं। रेखा जी से लेकर साहिर से. लेकर जितने भी आप नजर दौड़ा लीजिए हम. एक जिंदगी रही है बाद में किसी सा खूबसूरत. लेकिन इतिहास से किताबों में लोगों की. यादों में उनको सुनने वालों में उनकी. जिंदगी जो है वो एक अधूरी रही है। ये. क्यों होता है? नहीं अधूरेपन को. खूबसूरत भी तो हम ही शायरों ने बनाया ना।. [हंसी] हम ही ने तो उसकी ब्रांडिंग की है।. अधूरेपन की एक खला की.
अ. कि सफर ज्यादा खूबसूरत है, मंजिल नहीं।. मुझे लगता है ये जो इमोशंस है ना एक पूरा. ना होना. इसमें है एक एक जायका है इसमें और वो उसको. चखना हम जानते हैं और उसको चखाना भी जानते. हैं।. मैंने इसी पे एक लाइन लिखी थी कि जो तू. नहीं तो चल तू ना ही सही।. जी. जो तू नहीं तो चल तू ना ही सही। वैसे भी. शायद तेरी मौजूदगी मेरी जिंदगी से ज्यादा.
मेरे किस्से कहानियों शायरियों में अच्छी. लगती है। तो इसी पे मैंने कुछ सवाल लिखे. हैं। जैसे आपकी गाने की लाइन थी कि बताओ. कौन बेस होगा? मैं जोगी बनूं या लुटेरा तो. कहते हैं कि इश्क में इंसान अक्सर सब कुछ. लुटाकर फकीर हो जाता है। नीलेश मिश्रा ने. अपनी जिंदगी में इश्क से क्या पाया? क्या. खोया? [गहरी सांस लेने की आवाज़]. मैंने. रिश्तों की समझ पाई है। मैंने.
न्यूसेस बारीकियां. पाई हैं। मैंने. सुख. पाया है।. और मुझे गम भी मिला है और मेरे हिस्से का. वो गम है। तो मुझे लगता है कि. जैसी यात्रा रही बढ़िया रही। चलिए इसी पे. अगला सवाल करता हूं। इसमें एक लाइन है।. हजारों ऐसे फासले थे जो तय करने चले थे।. जिंदगी के इस मोड़ पर आकर उन फासलों के ना. मिटने ना पूरा होने का दुख है या इस बात.
से खुश हैं। कुछ रास्ते अधूरे रह गए। तभी. तो शायद कहानी इतनी खूबसूरत है।. हां मतलब. जिंदगी हमारी जो होती है ना एक व्हाट इफ. का सिलसिला होती है। यूं होता तो क्या. होता? हम सबकी जिंदगियों में कि हम फलाने. व्यक्ति के साथ होते या फलाने नौकरी ले ली. होती या फलाने शहर चले गए होते तो क्या. होता? व्हाट इफ? [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] और यह.
जो गु्थियां हम साथ में लेकर चलते हैं, ये. जो पहेलियां साथ में लेकर चलते हैं, यही. सब तो हमें ह्यूमन बनाती हैं। वरना तो हम. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले बन जाते। तो. बिल्कुल मेरी जिंदगी में भी व्हाट इफ्स. हैं बहुत से कि यूं होता तो क्या होता? लेकिन मेरा मन यह भी कहता है कि मैं आता. यहीं पे है। मैं पहुंचता यहीं पे और मेरी. यात्रा घूम के भी होती तो भी यहीं से आगे.
जाती। तो. वो मुझ में आत्मसंतोष है. के. मुझे ऐसी कोई रिग्रेट्स नहीं है। मुझ में. ऐसी कोई नाराजगी तल्खी नहीं है।. इस गाने में आपकी फेवरेट लाइन कौन सी थी? मैंने दिल से कहा मैं. जिसको लिखकर कभी आप खुद रो पड़े या कभी. सुनकर आप वापस चले गए।. जो अंतराई है वो.
कभी है इश्क का उजाला कभी है मौत का. अंधेरा। बताओ कौन भेस होगा। मैं जोगी बनूं. या लुटेरा कई चेहरे दिल के ना जाने कौन सा. मेरा।. मैंने दिल से कहा। बट ये एहसास कितना. तगड़ा है कि मैंने दिल से कहा ढूंढ लाना. खुशी। नासमझ लाया गम नासमझ है गम ले आया. खुशी तो आई थी शादी हो गई थी आपकी आमतौर. पर जिन लड़कों की मोहब्बत मुकम्मल नहीं. होती. वो शादी से पहले होती है हम जैसों की. हम. कि साथ में सात फेरे नहीं ले पाए.
हम. आपने सात फेरे ले लिए थे दो साल जिंदगी. साथ गुजारी थी आप तो समझदार इंसान भी हैं. संवेदनशील भी हैं. ये नियति थी या उस वक्त आप इमैच्योर थे जो. रिश्ता संभाल नहीं पाए आप पीछे मुड़कर. देखते हैं तो यस विकपीडिया से ना आंकड़े. सही नहीं है तुम्हारे भाई. हो सकता है शादी तो हुई थी. हां. ठीक है जो. सवाल ये है कि अच्छा था. जैसे पीछे मुड़कर हम देखते हैं. क्या लगता है नियति थी या हम कम संवेदनशील.
थे जैसे मुझे लगता है मैं पहले समझदार कम. था अगर आज मैं होता पीछे जाकर. तो शायद मैं चीजों को अलग तरीके से कर. लेता मैं संभाल लेता. या इसको एक और परिभाषा मुझे समझ में आ रही. थी जो मैं अक्सर मानता हूं. कि दो ऐसे व्यक्ति जो समान. काबिलियत रखते हो वो अक्सर साथ में नहीं. चल सकते। रिश्ते में एक इंसान थोड़ा आगे. पीछे होता है वो चल जाते हैं। जैसे हम. कहते हैं ना एक मयान में दो तलवारें नहीं. रहती।.
दो पावरफुल लोग जिन्हें हम पावरफुल कपल. कहते हैं। खूबसूरत लोग टैलेंटेड लोग जिनको. जिनसे दुनिया इंस्पायर हो रही है। अपने. क्षेत्र के नामीगिनामी लोग। ये भी वजह. होती है।. देखिए आजकल के जो. बदलते भारत के जो शहरी रिश्ते होते हैं ना. उसमें. कब आप. ड्रिफ्ट करने लगते हैं या आप में दूरियां. आ जाती हैं वो.
वो ठीक-ठीक से उस पर उंगली नहीं रख सकते. हैं।. अ. रिश्तों की ये. कैफियत हो गई है कि वो ड्रिफ्ट. एक एक हिस्सा है। उसको आप उस पौधे को अगर. नहीं सींच पाते हैं तो वो मुरझा जाता है।. तो निसंदेह मतलब मैंने कभी इस बारे में. बात नहीं की और करना पसंद भी नहीं है।.
लेकिन निसंदेह. उस. पौधे को ज्यादा पानी नहीं दिया गया होगा।. ओके। गम के अलावा आपने खूबसूरती पर बहुत. कुछ लिखा है। जो पहले इश्क की रूहानियत. होती है। जैसे एक गाना मेरा बड़ा फेवरेट. है क्योंकि मैं केके का बहुत बड़ा फैन. हूं। आई थिंक ये भी एक वजह है कि शायद मैं. आपसे बहुत रिलेट कर पाता हूं।. और एक बड़ा खूबसूरत गाना आया था वो लम्हे. में क्या मुझे प्यार है।. [गला साफ़ करने की आवाज़]. तुम क्यों चले आते हो हर रोज इन ख्वाबों. में। चुपके से आ भी जाओ एक रोज मेरी बाहों.
में।. तेरे ही सपने अंधेरों में उजालों में।. क्या एहसास था ये लिखने के पीछे? क्योंकि. ये कमाल गाना है। आज भी ये गाना आप इसका. चाहे नॉर्मल वर्जन या इसका जो रिमिक्स. वर्जन है आप गाड़ी ड्राइव कर रहे हो आप. प्ले कर दीजिए। मैं यकीन कह रहा हूं अगर. 10 लोग गाड़ी में बैठे हैं तो उनमें से. सात आठ ऐसे हैं जो गुनगाने लगेंगे। हे हे. हे. देखिए जब आप रिश्तों को जीते हैं ना. अलग-अलग रूपों में. द प्रोसेस ऑफ़ फॉलिंग इन लव. हम.
जिस समय आप किसी व्यक्ति के साथ जुड़ रहे. हैं आप भी अपने आप से पूछ रहे हैं. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. इज दिस लव. मतलब यह उस स्टेज उस ड्यूरेशन के बारे में. गीत. आपको नहीं मिलते हैं. हम. ना कि आपको प्यार हो गया उसके बाद के तो. मिल जाते हैं. हम. बट दिस इज़ दैट फ़ज़. हम्. तो मैं वो चाहता था कि जब आप अपने आप से.
ये दुनिया से नहीं ये अपने आप से. बहुत बहुत रिफ्रेश है ये बहुत ही कोरा थॉट. है ये मतलब. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] कलता. फकीर आज दिल शहजादा है ये वही कर सकता है. जिसने महसूस किया उस तो ये महसूस करते. वक्त ही ये दौर था लिखा था गाना ये. महसूस करके जमा कर लेता हूं। और जब कोई. कुछ लिखने को कहता है तो यह मेरी कोशिश. रहती है कि. जो लिखा जाए वो थोड़ा जिया हुआ सा हो।. थोड़ा ऑथेंटिक हो।. हम. तो.
जरूरी नहीं है कि वो उतना ही मैच कर रहा. हो। लेकिन ये जो अनुभव है ये जरूर जिया. हुआ है। तो गम में भी ये फ्रेश अनुभव याद. रहता है।. इस दौर में आप खुश बेगाना आया था। कलता. फकीर आज दिल शहजादा है क्या मुझे प्यार है. जब इंसान अपने आप से पूछ रहा है. खुश होने की कोशिश कर रहा था ठीक है वो. कौन सा सर मोड़ था जिंदगी क्योंकि इस गाने. की जो लाइन है कल था फकीर आज शहजादा है वो.
कौन सा आपकी जिंदगी का मोड़ था जहां पर आप. सबसे ज्यादा फकीर थे और कौन सा ऐसा मोड़. था जहां आपको लगा अब्दु दिल शहजादा है. [हंसी]. एक पड़ाव तक मैं. एक दौड़ में था।. एक रेस में था। और. उसके बाद मैंने जब अपने आप के ऊपर काम. किया और मैंने अपने आप को सिखाया. कंटेंटमेंट संतोष।.
अ मुझे लगता है उसके बाद से मेरा दिल. शहजादा है। मुझे मैं किसी रेस में नहीं. हूं। मैं किसी होड़ में नहीं हूं। मुझे. किसी से कोई जलन, कोई नफरत, कोई ईर्ष्या. कुछ नहीं है। और मैं. मालिक हूं अपनी डेस्टिनी का। मैं कल को. फिल्म बनाना चाहूं तो मैं अपने लड़कों को. जुटाऊंगा गांव में। भाई चलो शूट कर रहे. हैं यार। इससे बड़ा शहजादा और कौन हो सकता. है भाई? मुझे कोई कहीं किसी को पिच नहीं. करना। मुझे गाना बनाना है। बैठूंगा.
जाऊंगा, रिकॉर्ड करूंगा, फोन करूंगा। भाई. चलो यह धुन मना रहे हैं गाना एक रचनात्मक. व्यक्ति के लिए इससे ज्यादा फ्रीडम. लिबरेशन है ही नहीं तो मुझे लगता है कि एक. पड़ाव आया जिसके बाद शायद वो पड़ाव क्या. वो था जब मैंने औरों के लिए नौकरी करना. छोड़ दिया हो सकता है हो सकता है आप भी. इससे रिलेट करें लेकिन उसके बाद मैं अपनी. सफलताओं और असफलताओं दोनों के लिए. जिम्मेदार हूं। आई एम आल्सो रिसोंसिबल फॉर. माय फेलियर्स और वो निसंदेह रहे हैं तो.
लेकिन तब से राजा की तरह जीते हैं भाई।. जैसे मैं अलका अग्नि जी को सुन रहा था।. उन्होंने कहा कि चिकनी चमेली जैसा गाना. मैं आज नहीं गा सकती। आज से 20 साल पहले. आया होता मैं गा लेती।. क्या गाना लिखने में भी उम्र के किस पड़ाव. में वो मायने रखता है? क्या नीलेश मिश्रा. आज भी लिख सकते हैं? तुम क्यों चले आते हो. इन ख्वाबों में? चुपके से आ जाओ एक रोज. मेरी बाहों में या अब उम्र के साथ लिखने. के तरीके तरीके बदल गए? नहीं मैं बिल्कुल लिख सकता हूं। मैं आज भी.
मैं शायद जरूर ये सोचता होगा कि क्या ये. गाना मैं कुछ अलग तरह से लिखता? क्या. इसमें अलग लाइंस करता वो हो सकता है मैं. सोचूं। लेकिन मुझे लगता है कि उस समय भी. मेरे. जो जिन अनुभवों की मैं बात कर रहा था. उसमें एक प्रौढ़ता थी।. उस समय भी एक इमोशनल मैच्योरिटी थी। अ. और अब ऐसा नहीं कि मुझे कोई शर्म होगी उस. तरह के एक्सप्रेशन को लिखने की क्योंकि.
कभी कुछ ऐसा लिखा नहीं जिसके बारे में. शर्मिंदा होना पड़े।. लेकिन आप आशिक बहुत गहरे थे।. ये मैं आपके शब्दों से कह सकता हूं. क्योंकि जब जो इंसान आशिकी में ये लिख. सकता है कि रूह बनकर मिलूंगा आसमान में. कहीं। प्यार धरती पर फरिश्तों से किया. नहीं जाता।. खूबसूरत है इतना रहा नहीं जाता। उफ. इस गाने में इश्क की पराकाष्ठा पार की. आपने और ये तो वही फिल्म है।. क्या खोकर इंसान की कीमत ज्यादा समझ में. आती है? हां कह सकते हैं।.
निगाहना बहुत खूबसूरत है आपका ये। खूबसूरत. है इतना वो सहा नहीं जाता। कैसे हम खुद को. रोक ले रहा नहीं जाता। उन निगाहों में. मोहब्बत नहीं तो और क्या है पर वो मुझसे. कह रहा वो किसी और का है।. जरा सा झूठ झूठ भी ढंग से कहा नहीं. नहीं जाता। [गला साफ़ करने की आवाज़]. उदित नारायण जी ने क्या गाया है? उफ कितने. सारे मेमोरीज आपके दिमाग [हंसी] में टकरा. रहे होंगे फ्लैशेस।. ये किसी ने कहा था ये भी दिल की कहानी थी।.
खूबसूरत है वो इतना।. ये फीलिंग आती है ना किसी चेहरे को देख के. कि. कि कोई चेहरा है व्हिच इज सो. ब्यूटीफुल एंड फ्रजाइल. जो. वो बड़ी एम्बरेस हो जाएंगी लेकिन मेरी. पत्नी जो है यामिनी जी. जब मैं उनको पहली बार.
देखा था तो कश्मीर में थी वो वहां पर वो. इंटर्न थी एसोसिएट प्रेस के ऑफिस में एंड. आई लुक्ड एट हर. अ मतलब यही था कि एक बहुत ही खूबसूरत और. फ्रजाइल चेहरा जो. जो स्टे करता है आपके साथ मतलब मुझे. क्रोनोलॉजी याद नहीं है कि ये गाना और इस.
दिन का क्या आगे पीछे था। लेकिन ये इमोशन. मैं जानता हूं। ये गाना उनकी उनकी आपकी. जिंदगी आने के पहले का है।. अच्छा तो ये इमोशन से मैं परिचित हूं. क्योंकि अवेश का मतलब यामिनी जी है तो. पूरी तरह से उन्हीं को जा रहा है। हालांकि. यामिनी जी को लेकर मुझे लगता है उनके साइड. से वो गाना आया होगा। देखती हैं जिस तरह. से मेरी नजरें मैं खुद को छुपाऊं कहां. जादू है नशा है।. या फिर उन्होंने आपसे कहा होगा चलो तुमको. लेकर चले।. नहीं तब मैं उनसे परिचित नहीं था।.
बट आपके गानों में एक कहानी है।. जैसे. मेरी कोशिश ये रही है कि गानों में. मोमेंट्स हो विजुअल राइटिंग हो हम. और एक स्टोरी टेलिंग हो आपने सही कहा. जैसे. दिल मेरा मुफ्त का अब वो गाना मेरे कंफर्ट. ज़ोन से थोड़ा बाहर का था वो मुजरा था एजेंट. विनोद में लेकिन मैंने कोशिश की कि यूं तो.
प्रेमी 75 हमारे. थोड़ा यूपी वाला आ करके 77 इशारे दिल मेरा. मुफ्त का और दिल के बाजार का चित्रण है. उसमें. जिसमें रसीदें काटी जा रही हैं और. दुकानदार हैं और मोलभाव हो रहा है। तो. कोशिश यही की है मैंने कि. स्टोरी टेलिंग को लाऊं।. नीलेश मिश्रा का अपनी राइटिंग में पांच. फेवरेट गाने कौन से हैं? अपनी राइटिंग. में।.
क्यों बर्फी से. बहुत क्यों ना हम तुम टैलेंटेड है मेरे से. रिश्तों बहुत खूबसूरत गाना है. बजरंगी भाईजान से कुछ तो बता अगेन वन ऑफ. माय फेवरेट जब नटियाल.
एक अरिजीत ने गाया है फिल्म पगलेट में. हम. थोड़े से कम अजनबी. हल्का गाना है कम लोगों ने सुना है. और. आपने खूबसूरत को नहीं रखा मैं उससे प्यार. मैं सोच रहा था उसको बोलूं या चलो चलो. तुमको लेकर चलने को बोलूं पर आई थिंक. खूबसूरत है वो इतना सहाया नहीं जाता.
बहुत कॉम्प्लीमेंट मिले होंगे इन दो गानों. के लिए रोक के इरफान खान साहब से राब्ता. था आपका. हां एक दो बार मिला इस गाने केके के बारे. में बताइए केके नेहा पे गाने गाए हैं कई. सारे. केके और मैं सिर्फ एक बार मिले बड़ी. खूबसूरत मीटिंग थी वो किसी स्टूडियो के. बाहर ऐसे मिले जैसे पुराने दोस्त मिल रहे. हो क्योंकि मैंने कहा कि हम लोगों ने इतनी. फिल्मों में एक साथ काम किया है लेकिन. मुलाकात नहीं हुई थी और बहुत आत्मीयता से.
बहुत ही बढ़िया इंसान थे वो और. मुझे लगता है कि एक राइटर के लिए बहुत. सुंदर होता है जब उसके शब्दों को कोई. खूबसूरत आवाज एक जीवन दे. तो वही भावना आती है जब केके की आवाज में. अपने गीत सुनता हूं. तारों भरी रात में तेरे खत पढ़ेंगे साथ. में कोरा जो पन्ना रह एक कांपते से हाथ. में. ये. थोड़ी शिकायत करना तू थोड़ी शिकायत मैं.
करूं नाराज बस ना होना तू जिंदगी. मोहब्बत दिल टूटना. पैच फिर उम्मीद जताना. जय हिंद नोटियाल प्रीतम ब्यूटीफुल. कंपोजिशन ब्यूटीफुल मूवी इस मूवी में दो. गाने बहुत खूबसूरत है एक तू जो मिला. इसमें जिंदगी बहुत खूबसूरत और अच्छी बात. है कई अलग-अलग आवाजों में भी सुनाई पड़ा. हम. [गला साफ़ करने की आवाज़] करेक्ट. ब्यूटीफुल सॉन्ग तो ये क्या बताना चाह रहे. थे तारों भरी रात में तेरे खत पढ़ेंगे साथ.
में क्योंकि फिल्म का एक तो आया था बट. मुझे ऐसा लगता है कि आप सिर्फ फिल्म को. नहीं रखते आप अपनी जिंदगी भी थोड़ा डाल. देते हैं ये गाना दो गाने जो मैंने अभी. बोले ये बड़े मुश्किल थे लिखने में एक तो. बर्फी में क्यों और एक ये गाना कुछ तो बता. जिंदगी क्योंकि ये रोमांस पे नहीं है. हम. ये रोमांटिक लव पे नहीं है दोनों गाने. दोनों में उसमें भी जो रणबीर कपूर. प्यार में नहीं है उस समय हम.
लेकिन जो मैं लाना चाहता था एक सेंस ऑफ. रोमांस उसके बावजूद. तो क्यों में भी वही है कि ना लफ्ज खर्च. करना तुम. नजर के कंकड़ों से तो वो. हमने कोशिश यह की कि जो इमेजरी हो वो. प्यार की हो। हालांकि बात जिंदगी से हो. रही है। तो इसमें. जो ये तारो भरी एक रात में वाला है वो एक.
इमोशनल मैच्योरिटी के जब रिश्ते एक दूरी. तय कर चुके होते हैं। उसके बाद जब आप अपनी. कमी और उनकी कमी और. अपनी गलतियां और उनको असेस करने की. मैच्योरिटी होती है आप में।. हम. जब आप खत एक साथ पढ़ सकते हैं।. हम. कोरा जो पन्ना रह गया एक कांपते से हाथ. में।. थोड़ी शिकायत करना तू थोड़ी शिकायत मैं. करूं नाराज बस ना होना तू जिंदगी तो वो. वो एक वो एक इमोशनल मैच्योरिटी के साथ आप.
उस मुकाम पे आते हैं फिर तू तकल्लुफ छोड़. कर रखना मेरे कांधे पे सर. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. [हंसी]. शायरों की बातों में एक बड़ी अच्छी चीज. होती है वो बिना कहे भी बहुत कुछ कह देते. हैं [हंसी]. उफ चलो तुमको लेकर चलें|. मुझे भी गाना बहुत पसंद है।. [गला साफ़ करने की आवाज़]. जिस्म के दोनों गाने जो थे जादू है, नशा. है। जादू है, नशा से ज्यादा मुझे चलो. अच्छा लगता है। जादू नशा थोड़ा रोमांट.
एरोटिक में जाता है कि आप उस पे सेंसेशन. में आते हैं।. चलो में एक अपनेपन का एहसास आता है कि आप. चाह आप किसी शख्स से बेपनाह मोहब्बत करते. हैं और आप चाहते हैं कि उसका हाथ पकड़ कर. आप और उसमें जहां मीठा सा नशा है तारों की. छांव में।. इसको कुछ बताया था आपसे या म्यूजिक दे दी. गई। लिख दीजिएगा आप ये।. इसमें. क्योंकि ये एक ऐसे आशिक कहानी है जो अपने. हमसफर को ले जाना चाह रहा है दुनिया से. हटाकर. किसी छांव में.
शायद अब गांव में वो अपनी जो है ना कि जो. इसको जो भट्ट साहब ने ब्रीफ किया था. उन्होंने कहा था कि द लवर इज बेकनिंग वो. बुला रही हैं अपनी दुनिया में तो वो जो एक. एक बड़ा टेंटलाइजिंग इमोशन है वो बड़ा. उसमें एक मिस्ट्री भी है। थोड़ा एक. शबनम सी चुभन है। महका सा मिलन है।. हां। तो वो कोशिश ये थी कि उस वो जो एक.
मैजिकल नेचर है उस मोमेंट का जो वो चाहते. हैं उसको ये किया जाए।. एक आपका गाना है जो आपने इसका आपने जिक्र. नहीं किया लेकिन मुझे बहुत पसंद है।. बेपनाह प्यार. हम. इट्स अ ब्यूटीफुल सॉन्ग। ब्यूटीफुल सॉन्ग. मतलब. आपने पांच ही बोले थे ना असल में। कोई कोई. महसूस कर सके आपको कोई महसूस करके अगर. केवल एक्ट ना कर रहा हो महसूस करे गा दे. इंसान उस पे फिदा हो के ता उम्र उसपे. कुर्बान कर दे क्या लाइन है मैं वो शमा. हूं जो रोशन तुम्हें करके खुद ही पिघल. जाऊंगी ब्यूटीफुल कंपोजिशन एंड श्रेया जी.
ने क्या खूबसूरत गाया बहुत खूबसूरत गाना. अपने गाने सुनते हो सुनता हूं सुनता हूं. कई बार अच्छा लगता है कि ओ अच्छा ये तो ये. लड़के ने सही लिखा है [हंसी]. मुझे लगता है बेपनाह प्यार आपका गाना जो. है वो समर्पण की हद है।. हम. बिल्कुल. इश्क में इंसान. कितना समर्पित हो सकता है. हम. उसको आपने जज्बातों में विरोध दिया है।.
कभी इस गाने को ले कुछ ऐसा फीडबैक मिला जो. आपको याद रह गया कोई कमेंट ऐसा लगातार ये. गाना तो. मतलब. इस जिस तरह की फिल्म में था उससे परे इसकी. एक हस्ती बन गई थी। तो मतलब. मैंने दिल से कहा से थोड़ा ही कम होगा जो. फीडबैक मुझे किसी अपने वो ये था. मतलब आज के दौर में जहां इश्क में लोग. पूछते हैं हमें क्या मिलेगा. हम. ये गाना उस ओल्ड स्कूल लव में ले जाता है.
जहां पर बताया था कि इश्क देने का नाम है. लेने का नहीं अपेक्षाओं की. अब जहां अपेक्षाएं हैं वहां इश्क नहीं है. इश्क वो है जो एक तरफा रहकर भी गा सकता है. और इसलिए शायद मुझे गाना बहुत पसंद है।. आपका फिर अगेन देखिए मेरे पास खूबसूरत. मैंने खूबसूरत से तो मैं हैंगोवर से निकल. नहीं सकता बट उसमें एक लाइन बड़ी अच्छी थी. आंखों में मैं कैद किए बैठा एक हंसी लम्हा. जब मैं इस नींद से जागूंगा दिल टूटेगा. बिल्कुल. इतनी गहराई में इंसान कैसे पहुंचता है और. क्या इतना बिना दिल टूटे लिख नहीं सकता. इंसान लिख सकता है दर्द बट इस लेवल पर.
जाके कि आंखों में मैं कैद किए बैठा एक. हसी लम्हा जब मैं इस नींद से जागूंगा दिल. टूटेगा वह मुझे ख्वाब कोई क्यों दिखा नहीं. देखिए बचपन की यादें गाने में भी बैठे हुए. हैं।. ये दर्द के बाद ही आता है और हम सब क्या. अपनी किसी पुरानी यादों में कैद है जिससे. हम सब अच्छा फील करते हैं? हमारे. मन का एक द्वीप है।.
हम सबके. हो सकता है हम वहां वापस ना जाना चाहे. लेकिन उसका ख्याल खूबसूरत है। देखिए कई. व्यक्तियों का होना खूबसूरत होता है और कई. व्यक्तियों का ख्याल बहुत खूबसूरत खूबसूरत. बात कही आपने. तो ये वो है वाह अभी कुछ दिनों से लग रहा. है बदले बदले से हम हैं.
अगेन ये जैसे क्या मुझे प्यार था ये वैसा. गाना था मुझे अभी भी याद है उस टाइम. श्रुति हसन पे मेरा बहुत बड़ा क्रश था. और इस फिल्म [नाक से की जाने वाली आवाज़]. में वो एक्ट्रेस जैसे इमरान हाशमी थे।. हम भोले हैं, शर्मीले हैं। जिस दिन कभी. जिद पे बहुत खूबसूरत लाइनें हैं कि हम हम. अपने आप को डिफाइन कर रहे हैं। इट्स इट्स. नॉट अ सॉन्ग फॉर समवन।. राइट? ये हमारी अपनी कहानी है।. हम. क्वेश्चन भी कर रहे हैं अपने आपको। अपने. को असेस कर रहे हैं कि ये मेरा कैसा. बिहेवियर है? हम. तो.
वही फेस है।. तो क्या मोहब्बत की शुरुआत ऐसे ही धोखे से. होती है? क्या अभी कुछ दिनों से लग रहा है. बदले बदले से हम हैं? या मोहब्बत में. इंसान एक बुद्धू बन जाता है।. वो हम शर्मीले [हंसी] हैं।. आजकल तन्हा मैं कहां हूं हम आजकल आई एम इन. लव. अरे. मुझको किसी आदत होने की आदत हो गई।. आदत होने की आदत हो जाती है आपको।. ये वो फेस है।. मोहब्बत में इंसान खूबसूरत होता है सर।.
मोहब्बत में इंसान खूबसूर. और अगर पसंदीदा औरत से हो ज्यादा हां वरना. मोहब्बत कहां है? नहीं नहीं मोहब्बत तो कई. बार साथ रहने पर भी आती है। एक शेर हमने. इस फिल्म में ही पढ़ा था कि एक ख्वाहिश थी. सिर्फ तुम्हारे साथ जिंदगी जीने की वरना. दिल तो कई बार साथ रहने पर अपने आप लोगों. से लग जाते हैं। हम कभी महसूस किया ऐसा. आपने. नहीं मैं काफी. मुखर और ऑनेस्ट रहा हूं अपने अपनी भावनाओं. के बारे में।.
तो ये महसूस किया कभी आपने कि एक ख्वाहिश. थी सिर्फ तुम्हारे साथ जिंदगी जीने की।. वही बताया ना मैंने कुछ व्यक्तियों का साथ. खूबसूरत है। कुछ का ख्याल कि आप दैट. इमेजिन लाइफ कि उस व्यक्ति का साथ कैसा. होता। हो सकता है वो अच्छा होता। हो सकता. है उतना अच्छा नहीं होता। लेकिन हमारा मन. ये सारी संभावनाएं हमें देता है। अब कौन.
समझाए उन्हें कि जिंदगी भर साथ रहने के. लिए साथ थोड़ी जरूरी है। [हंसी]. आई एम इन लव अगेन वन ऑफ़ माय फेवरेट सॉन्ग. वंस अपॉन अ टाइम इन मुंबई। बहुत खूबसूरत. इसके भी लाइनें सारे अंतरे हैं। कुछ. सरफिरा सा हूं मैं। बुद्धू जरा सा हूं. मैं। मैं बादल पे चलता हूं। मैं गिरता. संभलता हूं मैं। अब तीन गाने आपके मुझे. ऐसे लगे जो मोहब्बत की फर्स्ट स्टेज की. है।. राइट? एक हमने शुरुआत में उधर किया। फिर हम. मुझे प्यार है।. क्या मुझे प्यार है? फिर हम चले गए अभी. कुछ दिनों से।. और फिर तीसरा गाना आई एम इन लव। हम्।.
यह तीनों गाने मोहब्बत की पहली सीढ़ी के. हैं।. हां। वह भी अपना आदत हो गई। इनकी मुझे आदत. यह वही है वही है। आई एम इन लव। बादल पे. चलता हूं संभलता हूं मैं। मेरी कॉलेज की. मेमोरीज है। स्कूल स्कूल है कॉलेज की।. स्कूल शायद था मैं। क्रॉस बैक पहन के. हेडफोन लगा के एंड आई यूज्ड टू वॉक अपनी. कोचिंग तक। ये गाना सुनते हुए।. अच्छा।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. इन तीनों में आपका पहली मोहब्बत में पहली. कशिश में फेवरेट गाना कौन सा है? अभी कुछ. दिनों से लग रहा क्या मुझे प्यार है या.
फिर आई एम इन लव। तीनों नीलेश मिश्रा गाने. पहली मोहब्बत के गाने पहली इमोशंस के जब. ओस बूंदों में तू है आंखें बूंदों तू है. फुर्सत की हंसी तू है जो भी थी कमी तू है. ये वही फील होता है. इस पे जाएगा शायद मेरा वोट बट हां मुश्किल. है बट आई थिंक. तुम क्यों चले आते हो हर रोज इन ख्वाबों. में हम भोले हैं शर्मीले हैं. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. आई थिंक यही थर्ड वन. ओके नंबर दो पे.
अब कैसे अपने ही गानों में चुनू बट [हंसी]. देखिए वो अ क्यों आजकल. हम. एक ऐसा गाना है जो आप. दुनिया को बता रहे हैं. हम. कि क्या मुझे प्यार हो गया है और बाकी जो. दोनों गाने हैं वो थोड़ा सा इंटरनल गाने. हैं. हम. कि अभी कुछ दिनों से मैं बदला-बदला सा. हूं। तो आई फील वो डिफरेंस भी है तो. स्लाइट डिफरेंस आई मीन ऑलदो उसी फेस के. हैं.
बट इट्स थोड़ा एक. इंट्रोवर्ट वाले गाने हैं बाकी दोनों. हमारी भाभी जो है अभी हैं यामिनी जी उनके. लिए आपने कौन सा गाना लिखा या कौन से गाने. को लिखते वक्त आपके ज़हन में वो रही. क्योंकि अधूरे इश्क पे तो आपने खूब लिख. दिया है।. मुकम्मल इश्क पे क्या लिखा आपने? ये मुझसे वो शिकायत करती हैं। [हंसी]. अ मुझे लगता है कि.
उनके साथ जो रिश्ता रहा है वो ज्यादा. मजबूत और ज्यादा. सॉलिड है वो। उसमें. सिक्योरिटी है। उसमें रिशोरेंस है।. वो लंबी रेस है। तो आपको. वो अलग तरह का एक जो जैसे जॉब सिक्योरिटी.
होती है ना आपको एक अलग तरह का जब आप. सिक्योर हो जाते हैं वो अलग तरह का इमोशन. देता है। और. वो. वो फीलिंग है। अ और हम दोनों सबसे पहले तो. मतलब सबसे अच्छे दोस्त हैं एक दूसरे के अ. तो वो वो भावना है उसमें और. शायद. फिल्मों में तो नहीं लिखा है मैंने.
इस तरह से और यूं किसी को कहना भी नहीं. चाहिए कि फिल्म में लिखा गाना मैंने आपके. ऊपर लिखा है किसी के लिए भी क्योंकि वह. असल. आपने जरूर मोमेंट संभाले और शब्द संभाले. लेकिन वो आपने सिचुएशन पे लिखा। आपने एक. ब्रीफ पे लिखा है। तो पत्नी के साथ जिया. जाता है। एक्स को याद करके लिख दिया जाता. है। उसको पासवर्ड में रख दिया जाता है।. इसीलिए शायद रामलीला में प्रियंका ने कहा. था कि पत्नी कितनी भी अच्छी है। लोग. प्रियसी को याद रखते हैं। नहीं मैं ऐसा तो.
नहीं कहूंगा।. मैं अलग-अलग. तरह के अनुभवों को बहुत अच्छे से याद रखता. हूं।. क्या प्यार दो बार होता है सर? जैसे पहली. बार आपका दिल टूटा हम. एक गहराई में आप गए गाने लिखे और आप आपने. बहुत तगड़ी वाली मोहब्बत की जैसे पीयूष. मिश्रा ने की थी।. नहीं आपने जो कोरिलेशन किया है कि मेरा. दिल टूटा और मैंने फिल्म. फिर उसने मेरे. वाह गाने लिखने शुरू कर दिए. बट आपके गानों में जज्बात में वो दिखा है. उस दौर में और ये आपने कई बार माना भी है.
कि उस दौर का असर है. हां. क्योंकि जिसने भी इश्क किया है वो जब उन. गानों को वो इसीलिए शायद घर-घर में जगह. बना पाए क्योंकि वो उस कशिश को महसूस कर. सकते थे।. तभी शायद [गला साफ़ करने की आवाज़] उन. गानों की मेमोरी हमारे पास आज इतने सालों. बाद भी नई पीढ़ी में उतनी ताजा है क्योंकि. वो ओरिजिनल है। ईमानदार है।. और कोई चीज ईमानदारी से लिखी जाए दिल से. तो वो दिल तक पहुंच जाती है और दिल में घर. करके रह जाती है।. लेकिन सवाल मेरा आगे. इश्क कई लोग ये मानते हैं इश्क सिर्फ एक. बार होता है। सच्ची मोहब्बत एक बार होती. है। दूसरे में आपकी आदत बन जाती है। आप.
सहज हो जाते हो। बड़े हो जाते हो। आपको. समझ में आता है। कुछ चीजें प्यार से भी. ऊपर होती है। उस जोश से ऊपर होती है।. पहली मोहब्बत और जिंदगी भर साथ निभाने. वाली मोहब्बत में कैसे अंतर होता है और. मोहब्बत क्या एक ही बार होती है और कैसे. माने कि यह सबसे अच्छी मोहब्बत है. इतना [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्यों. सोचना मुझे लगता है कि मोहब्बत जरूर. दो बार हो सकती है। क्यों नहीं हो सकती. है? अ दोनों बार उस.
इमोशन में ईमानदारी हो हम. और मेरा मानना है कि जो लिविंग इन द. मोमेंट है अ. उसमें विश्वास करना चाहिए जो आपका आज है. जो आपका प्रेजेंट है अ उस इमोशन को आप. बेशक किसी को अगर. याद करते हैं अच्छी तरह से याद करते हैं. खूबसूरती से याद करते हैं। उसमें.
उसमें गलत नहीं है कुछ।. और. इतना क्यों. रोमांस को रोमांटिसाइज करना कि वो. होगा तो एक ही बार होगा या नफरत भी तो एक. से ज्यादा बार होती है।. भूख भी तो एक से ज्यादा बार लगती है। तो. मुझे लगता है कि रोमांस का जो इमोशन है और. वो जो हमारे जो खलल करता है. ये तो आप जैसे शायरु ने हमारा दिमाग खराब. किया है। [हंसी]. अमृता प्रीतम जी ने.
बाद में इश्क मुकम्मल हुआ लेकिन आज भी लोग. साहिर के बारे में बात करते हैं।. ठीक कहा आपने ठीक कहा ये. साहिर की अधूरी सिगरेट का ही जिक्र होता. है।. आरोप सही है आपका। [हंसी]. साहब भी कमाल के व्यक्ति थे।. लोग आते थे अमृता जी से सवाल पूछते थे।. साहिर के बारे में और वो खामोशी सुनते थे।. वो कहते थे कि उसकी खुशी में भी हम खुश ना. हो तो कैसा इश्क है? [हंसी]. तो ये तो दिमाग आप लोगों ने ही खराब किया. है।. नहीं सच है।. लिविंग इन द मोमेंट फॉलोइंग योर हार्ट।.
मुझे लगता है ये ये हमारे कोर प्रिंसिपल्स. हो।. अपने आप के लिए आप अगर ऑनेस्ट हैं कि ये. इमोशन ऑनेस्ट है। वो आपके लिखने में, बोलने में, महसूस करने में, जताने में वो. सब जगह आएगा। आपका इमोशनल कोर ऑनेस्ट है. कि नहीं है? आई थिंक इट बॉइल्स डाउन टू. दैट। तो. उसकी मैंने कोशिश की है। भाभी से डरते हैं. आप? [हंसी]. कह सकते हैं।. जैसे आपने कहा आप दोनों बहुत अच्छे दोस्त. हैं।. आप सारी बातें कर लेते हैं। लेकिन आप हैं.
लेखक भी, राइटर भी। हम जैसे लोग आपसे सवाल. ही पूछ रहे हैं। कई सवालों में कोशिश कर. रहे हैं कि आपके अंदर की नस को टटोला जाए।. कहीं घबराहट होती है कि यार अब ये सब नहीं. करना चाहिए। या वो इतनी सहज है कि वो. समझती हैं कि आप एक लेखक भी हैं। यही. नीलेश मिश्रा है या कहीं आपके मन में डर. होता है कि अरे ऐसा ना हो कि कहते कहते. थोड़ा सा मैं आगे निकल जाऊं जिसप शायद. जवाबदेही हो।.
अ कल मैं गया था. हम कुछ कपड़े खरीदने गए थे और कुछ शर्ट. मैंने पसंद की तो उन्होंने कहा नहीं नहीं. अच्छी नहीं लग रही यार। तो बगल में वो. अटेंडेंट खड़ा था। मैंने कहा तुम्हारी. शादी हो गई बेटा? बोला हां सर। मैंने कहा. मोजा भी खरीद पाते हो तुम अपने मन से? नहीं सर। [हंसी]. तो ये तो हर पति की कहानी है।.
ये शाश्वत है। पर लेकिन रिश्ता निभाने के. लिए. डर अच्छा है। [हंसी]. डर सबको लगता है। रिश्ता. [नाक से की जाने वाली आवाज़] निभाने के. लिए प्यार ज्यादा जरूरी है या समर्पण. ठहराव? और क्या आप मानते हो कि जो वो. जिंदगी का पुराना मलबा था उसी ने शायद नए. रिश्ते की नीव इतनी मजबूत कर दी। आपको. समझदार बना दिया।. हम. हमारे जितने. अनुभव रहे हैं।. चाहे वो रोमांस से जुड़े हो या वो तकलीफ.
से जुड़े हो। जैसे भी अनुभव रहे उन्होंने. हमें ढाला है। अ हमारी काबिलियत इसमें है. कि हम पलट के उनको एक खुले दिमाग से देख. सकें। अ पुराना दंश कोई लेकर आगे ना बढ़े।. ये इतना आसान नहीं है। ये कहना बहुत आसान. है।. क्योंकि हम लोग तो वही लेके बढ़ते हैं और. वही गाने करते हैं और वही कहानियां करते. हैं वगैरह। लेकिन एक जो इमोशनल मैच्योरिटी.
है और एक ठहराव जो आपने कहा वो ठहराव की. भावना कि. जो मैंने आपसे कहा कि अगर मैंने कई. यात्राएं भी की होती तो भी मैं यहीं. पहुंचता।. चाहे मेरा प्रोफेशन हो या मेरा निजी जीवन. हो. ये फीलिंग ऑफ डेस्टिनी मुझ में है. और मैं इसको बदलना नहीं चाहता हूं। मैं. जरूर. नई चीजें करता हूं या अब अचानक सोचता हूं.
कि नई जगह जाना चाहिए या नए अनुभव होने. चाहिए।. लेकिन एक ठहराव है।. संतोष है जैसा मैंने कहा।. ये संतोष आपकी बेटी की वजह से भी है।. वैदही नाम है उनका। वैदेही नाम. तो वैदेही के आपके जीवन में आने के बाद. कुछ शिकायतें जो ऊपर वाले से होंगी कुछ. शिकायतें जो जिंदगी से होंगी कुछ अधूरापन. जो होगा क्या वो पूरी तरह शांत हो गया और. उस पते पर आप पहुंच गए जिससे शायद आपने. तलाशा हो या कभी ऊपर वाले से शिकायत की हो. और कैसा एहसास होता है एक बेटी का बाप.
होना असल में शिकायत इसलिए नहीं थी. क्योंकि मैं कहीं ना कहीं पेरेंटहुड से. डरता था ऐसा मुझे अब लगता है जब मैं पलट. के देख रहा हूं। इसीलिए अ. पेरेंटहुड का जो जादू है वो मैंने पेरेंट. बनने के बाद पहचाना और. [गला साफ़ करने की आवाज़]. एक मोमेंट होता है जब ये फीलिंग आपको.
इंस्टेंटली. स्ट्राइक करती है जब आप अपने नए जन्मे. बच्चे का जब आप चेहरा देखते हैं हो सकता. है तुरंत ना हो सकता है दो दिन बाद हो वो. लेकिन लेकिन एक मोमेंट होता है और. मैं और आयुष्मान एक बार बात कर रहे थे कि. जब पहले हम हवाई जहाज में जाते थे तो. बच्चे जब रो रहे होते थे ना थोड़ा इरिटेशन. हो रहा था।. अब जाते हैं तो बोलते हैं कि उसको थोड़ा.
पानी पिला दीजिएगा।. थोड़ा बोतल है क्या दूध उसके कान में कुछ. लगा। आपको इरिटेट नहीं करता है। आप एमथी. है आप में कि जब बच्चे हवाई जहाज में जाते. हैं या सफर पर जाते हैं या तो परेशान होते. हैं तो आपको झुंझुलाना नहीं है। आप आप. उनकी जगह अपने आपको रख के तो दुनिया को एक. नए तरह से देखने का एक चश्मा आपको मिलता. है जब आप एक पिता बनते हैं। खासकर बेटियों. के पिता मुझे लगता है कि सारी कविता.
कहानियों शायरी के परे बेटी का पिता होना. एक बहुत अलग एहसास है और. वो वो आपको एक अलग तरह से ढालने लग जाता. है और. हालांकि मैंने. मतलब मैं हम दो भाई ही थे मैं और शैलेश. मेरा भाई तो हम बहनें नहीं थी हमारे घर. में लेकिन जो एक लड़कियों की नजर से. दुनिया को देखना.
वो वो आपको अलग और बेहतर और बहुत ज्यादा. खूबसूरत इंसान बनाने लग जाता है। आपने. पहले नहीं किया होता है वो लड़कों वाले. घरों में आपने नहीं किया होता है ये।. तो बहुत अच्छा. सफर है। अभी तो शुरू ही हुआ है।. मुझे लगता है कि मैं जैसे कहानियां सुनाते. सुनाते बेहतर इंसान बन गया हूं। वैसे ही. बेटी का पिता होने के नाते बेहतर इंसान बन. गया हूं।.
केयरफुल मुझे लगता है इस हिस्से को बहुत. लोग कनेक्ट कर पाएंगे। सर स्लो होना एक. लग्जरी है।. आज के दौर में नहीं जरूरत है। जरूरी है।. स्लो नहीं होगे तो लाइफ स्पैन कम हो जाएगा. भाई। बट जैसे सारी दुनिया रेस में चल रही. है। हर. स्लो का मतलब स्पीड से है ही नहीं। स्लो. तो एक. इंटरनल बातचीत है। इंटरनल मामला है।. स्लो जो फिलॉसफी है हम लोगों की और.
टर्निंग स्लो वो बहुत सिंपल है कि आज हम. एक नेगेटिविटी के दौर में हैं। चाहे आप. कंटेंट को ले लीजिए, चाहे आप खाने को ले. लीजिए, चाहे आप अपने अनुभवों को ले लीजिए।. आप जाते हैं किसी रेस्टोरेंट में जाते. हैं। इतना शोर होता है। आप बात ही नहीं. सुन पाते। आप किस लिए आए वहां पे? आप. व्यक्ति से मिलने आए हैं ना? अगर कान. फोड़ो संगीत आपको सुनना था तो आप तो वही. सुन लेते कान में लगा के।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. आप कंटेंट देख रहे होते हैं अगर उसमें.
इतना गाली गलौज होता है या महिलाओं का ऐसा. चित्रण होता है या एक्सेसिव सेक्सुअल. पोट्रेल होता है या वायलेंस होता है वो वो. वो हिंसा आपके माइंड को पर असर कर रही है. और अब अगर वो YouTube पे है तो वो आपके. बच्चों पे असर कर रही है क्योंकि वो कब. आपके बच्चे अपनी नर्सरी रैं देखतेदेखते. वहां पहुंच जाएंगे या डॉक्यूमेंट्री देखते. वहां पहुंच जाएंगे आपको नहीं पता मेरा. एग्जजेक्टली यही प्रॉब्लम मेरी रही है जो.
जैसे ये जो समय रहना एपिसोड हुआ और इनका. रणवीर का हुआ या जो भी गाना आया उस पे हुआ. ये प्रॉब्लम है मेरी कि आप जो एडल्ट. कंटेंट है वो तो हमेशा से बनता रहा है ना. लेकिन सिनेमा हॉल पे एडल्ट लिखा होता था. बच्चा नहीं जा सकता था उस दीवार के अंदर. अब वो दीवार खत्म हो गई. तो एडल्ट कंटेंट बनाना तो किसी का भी. अधिकार है। अगर समय रैना को या रणवीर को.
वो बोलना था जो उन्होंने बोला तो उनका. अधिकार है। उस हॉल के अंदर जो भी लोग हैं. सुनना उनका अधिकार है।. लेकिन जब वो डिस्ट्रीब्यूशन. हमारा आज इतना पुख्ता नहीं है कि वो दीवार. हम कर पाएं। तो हमारे. जो इंप्रेशनेबल एज के बच्चे हैं जिनके. माइंड पर असर हो सकता है जो बच्चे हैं. टीनएजर्स हैं वगैरहकि. हम एल्गोरिदम के गुलाम हैं इस समय और.
एल्गोरिदम के जमाने में हैं तो उन तक उस. कंटेंट का पहुंचना और ऐसा बहुत सा और. कंटेंट सिर्फ वही क्यों मतलब उनको क्यों. टारगेट किया जाए हर दूसरा व्यक्ति ऐसा. कंटेंट बनाना चाहता है तो इसका एक असर. होता है इस पे साइंटिफिक स्टडीज हुई हैं. अमेरिका में तो वायलेंट और सेक्सुअल. कंटेंट के के इंपैक्ट पे स्टडीज हुई कि. किस तरह से टीनएज प्रेगनेंसीज तक बढ़ी है।. इससे जो वायलेंस की प्रवृत्ति है वो बढ़ी. है। तो. मैंने इस पे बहुत.
ही मुखर एक स्टैंड लिया हुआ है। जो अ. कुछ लोगों को ओल्ड फैशन लग सकता है। लेकिन. मैं एक एक पिता के पॉइंट ऑफ व्यू से आ रहा. हूं। मैं एक रिस्पांसिबल क्रिएटर के पॉइंट. ऑफ व्यू से आ रहा हूं। इस पे आप यह पलट के. नहीं कह सकते कि तो फिर बच्चों को दिखाइए. मत। तो फिर वरना फिर आपको इंटरनेट शटडाउन. करना पड़ेगा। यह आर्गुमेंट ही नॉनसेंस है. कि तो फिर दिखाते क्यों हैं बच्चों को? क्योंकि एल्गोरिदम बना ही ऐसा है कि आप या.
तो ऐसे कंपार्टमेंट होते कि आप नहीं नहीं. मैं तो यह डॉक्यूमेंट्री देख रहा हूं या. ये मैं 7 साल के या 10 साल के बच्चों वाला. कंटेंट देख रहा हूं। मुझे यही मिलेगा।. पर टेक्नोलॉजी कंपनीज ने तो अपना बिजनेस. मॉडल ही इस पर बनाया है कि आप कुछ लेने आए. हो पर कुछ और मिलेगा आपको. [गहरी सांस लेने की आवाज़] तो बट जैसे उनका. तर्क ये आता है कि [हंसी] अगर आपका बच्चा. ये देख रहा है तो आपकी पैरेंटिंग में कमी.
है। ऐसे जवाब उन्होंने पलट के दिए।. बेशक मैं वही मैंने कहा कि नहीं पेरेंटिंग. में कमी नहीं है क्योंकि कि फिर वो आपकी. प्रॉब्लम है कि आप आपका बच्चा क्यों इस. उम्र में मोबाइल ले रहा है या मुझे सुन. रहा है।. नहीं नहीं बच्चे को अगर एक डॉक्यूमेंट्री. दिखानी है डॉल्फिनस के ऊपर तो मैं तो वो. दिखाऊंगा ना वो YouTube पे दिखाऊंगा मैं. लेकिन उसी. YouTube पे अगर एल्गोरिदम के कारण ऐसे. गार्ड रेल्स नहीं है. [गला साफ़ करने की आवाज़]. सी ये अस वर्सेस देम की बात तो होनी ही.
नहीं चाहिए।. हम्. हर क्रिएटर को अपने बच्चे को सबसे पहले. पूछना चाहिए। यह दोष बिल्कुल नहीं देना. चाहिए कि तुम्हारा तुम्हारी पेरेंटिंग. खराब है। तुम्हारा बच्चे में प्रॉब्लम है।. तुम्हारा बच्चा क्यों देख रहा है? हम सब. एक समाज में रह रहे हैं। और हम सबको. हमें वो नर्सरी रम भी चाहिए और हमारे. ऑडियंस को वो एडल्ट कंटेंट भी चाहिए। फेयर. इनफ। नो प्रॉब्लम।. लेकिन जब डिस्ट्रीब्यूशन के रास्ते आपस.
में टकराते हैं तो कहीं आपको या आप पब्लिक. प्लेटफॉर्म्स पे हैं आप सोशल आपकी बातों. की जिम्मेदारी आप अगर एक कॉमेडी शो कर रहे. हैं और कॉमेडी में आप. किसी के अह ऊपर इस तरह की टिप धर्म पर फॉर. एग्जांपल धर्म पर इस क्यों क्यों जरूरी है. धर्म पर टिप्पणी करना किसी का भी धर्म हो. कोई तो कई चीजें हैं ना कि आप राइट और. रॉन्ग इसमें नहीं डिसाइड कर सकते। ठीक है?
कि ये सब्जेक्टिव है कि भाई ये ठीक है या. ये ठीक है। लेकिन क्या बिल्कुल ठीक नहीं. है वो हमको पता है।. हम. क्या बिल्कुल नहीं कहा जा सकता वो हमें. पता है।. हम. वो वही है जो उस उस शो में कहा गया उस. गाने में कहा गया या ठीक है ना जो हम नहीं. किया और ये आपको भी पता है और हमको भी पता. है। तो ये कन्वर्सेशन ये नहीं है कि तुम. अपने को मत ये हम हम आपके बच्चों के लिए. भी चिंता कर रहे हैं। हम आपके परिवार के. लिए भी चिंता कर रहे हैं ना कि यह ये कैसा. हम एक एनवायरमेंट बना रहे हैं एज.
क्रिएटर्स क्योंकि ताकत है हमारे पास। यह. ताकत पहले नहीं थी। पहले ये था कि आप. अखबार में लिखेंगे और वो अखबार 5 लाख लोग. पढ़ते हैं तो उसमें से एक हिस्सा पढ़. लेगा।. आज हम मिलियंस पे बात कर रहे हैं ना।. हम्म। [गला साफ़ करने की आवाज़]. हमारी ताकत हजार गुना बढ़ चुकी है। तो उस. जैसे ही वो ताकत आई हमें जिम्मेदारी से. यूज़ करनी है वो ताकत आई। तो एनीवे टू. टू कम बैक टू योर क्वेश्चन कि भाई. अ.
सॉरी मैं ट्रेन ऑफ़ थॉट लूज हो गया। हम. बेटी को लेकर बात कर रहे थे कि मेरी बेटी. वो कंटेंट मैं उसको लेकर चिंतित हूं। हां. हां नहीं मतलब मैं कि जो हम एज एज. क्रिएटर्स हम नेगेटिव दुनिया में हैं।. हां एक नेगेटिव दुनिया में हैं। राइट. वायरल हम स्लो होने की बात कर रहे हैं।. वायरल होने की दुनिया है। नेगेटिव होने की. दुनिया है।. यहां पर स्लो होना क्यों जरूरी है? तो हमें क्या नहीं चाहिए वो हमें पता है।. हम. जो चाहिए उसको हमने स्लो नाम दे दिया है।.
जो मीनिंगफुल कंटेंट पर्पसफुल कंटेंट हमें. चाहिए. उसको हमने नाम दे दिया है स्लो। आप फूड. लेवल्स पे देख रहे हैं। आपको झूठ बोला. जाता है लगातार एस कंज्यूमर्स।. तो क्या पर हेल्दी आप जो खाना खाना चाहते. हैं हमने उसको नाम दे दिया स्लो।. आपने तो हेल्दी प्रोडक्ट्स भी निकाले हैं।. जी स्लो स्लो वो स्लो बाजार वो यामिनी. उसको चलाती है।. तो मेरा कहना है कि स्लो जो है वो जिंदगी. को एक देखने का तरीका है। दैट इज टर्निंग.
स्लो। स्लो इज नॉट अबाउट स्पीड। जिंदगी. एल्गोरिदम पे क्या सोचती है? बच्चों की. शिक्षा पर क्या सोचती है? क्या उन्हें रटन. वाले रूट पर भेजना है या उनको अनुभव देने. हैं? एक्सपीरियंशियल यह स्लो है।. आर्किटेक्चर कैसा होना चाहिए? ये स्लो की. थिंकिंग है कि क्या जो पारंपरिक हमारे. तरीके थे उससे भी मकान बनाए जाए। उन. सामग्रियों को इस्तेमाल किया जाए तो मकान. ज्यादा ठंडे नहीं रहेंगे। हम ये स्लो के. तो टर्निंग स्लो इज अ चॉइस.
फॉर एनीबॉडी। उसका रफ्तार से कोई लेना. देना नहीं है।. हम. मतलब मैं कल को अगर रैप सॉन्ग भी लिख रहा. हूं लेकिन उसमें मैं बदतमीजी कोई ना करूं।. ऐसी कोई बात ना करूं जिससे मैं शर्मिंदा. हूं। वो कोई शायरी कर दूं। मैंने किया है. अरिजीत के लिए रैप सॉन्ग लिखा है। पगलेट. में फकीरा करके गीत है। मैंने पहली बार. रैप सॉन्ग लिखा क्योंकि मुझे कोई लिखने को. बोलता ही नहीं था। सब जिसको देखो लव सॉन्ग.
लिखवाने को आ रहे हैं। भाई मैं भी मैं. कवाली लिखना चाहता हूं। मैं भजन लिखना. चाहता हूं। मैं रैप लिखना चाहता हूं। मैं. अपने आप को चैलेंज करना चाहता हूं। तो. फिल्में बनाना चाहता हूं मैं। बना ली है. मैंने।. मैं अभिनय करना चाहता हूं। मैंने वो कर. लिया है अभिनय और. आपने एक्टिंग भी की है।. जी कूद में मैंने एक्टिंग की है। [हंसी]. भाई देख लेना तो।. मैं 100% सर।. हमारे दर्शकों को भी दिखा देना थोड़ी सी।. कब आ रही है पिक्चर? मेरे चैनल पे है।. वाओ।. मैं तुम्हें लिंक भेजूंगा। मैं पक्का. देखूंगा, शेयर भी करूंगा। अगली फिल्म भी.
हमारी रेडी है। द लास्ट बैट्समैन उसका नाम. है।. हम अपनी अगली चार पांच फिल्मों पे काम कर. रहे हैं।. इंसान के ख्वाहिश कोई इंतहा नहीं होती। दो. गज जमीन भी चाहिए दो गज कफ़न के बाद। अब. जीते जी तो ख्वाहिशें खत्म कैसे हो जाए? बिल्कुल बिल्कुल।. क्या-क्या और सर ख्वाब अभी बचे हैं आपके? जो सोच रखा है जैसे आपने कहा कि अगले 10. साल मेरा बेस्ट वर्जन आने वाला है। मेरा. बेस्ट समय आने वाला है।. मैं किन चीजों पे काम कर रहा हूं मैं आपको. बताता हूं।. एक तो हमने फिल्म्स का वर्टिकल बनाया स्लो.
मोशन पिक्चर्स जिस पे हम ने. कई सारी फिल्में और एक दो सीरीज वगैरह कर. रहे हैं। और हम मोहताज नहीं है कि कोई. प्लेटफार्म इसको प्रूव करे तभी हम दिखा. पाएंगे। हमारी अपनी एक ऑडियंस है। हमारा. एक अपना मंच है और हम उसका बिजनेस मॉडल. सॉर्ट कर रहे हैं कि हम कैसे बनाते रह. पाए।. इस पर हम लगे हैं। मैं हर 15 दिन पे एक. नया गाना रिलीज कर रहा हूं अपनी आवाज में।. मैंने सुना है खुशियाल ने?
बचपन से गाने का शौक था। कभी मौका नहीं. मिला और कभी सीख भी नहीं पाया। इसकी. शिकायत मैंने बहुत की अपने माता-पिता से।. वो शौक अब पूरा कर रहा हूं। तो मैंने दो. साल पहले एक एल्बम रिलीज किया था और फिर. अब लगातार अब तो मैं लगातार हर 15व दिन एक. मेरा नया गाना आ जाएगा। कोई सुने ना सुने. अच्छा लगे ना लगे कि मुझसे गवाओ ना गवाओ. मैं गाऊंगा। मैं गाऊंगा स्वा अंतः सुखाए. अपने मन के अंतर के सुख के लिए वो हो रहा.
है। हमने. अपनी जो एक किताबों का इंप्रिंट बनाया. पब्लिशिंग का स्लो इंप्रिंट जिसमें हम. किताबें छापते हैं। तो वो वेस्टलैंड. पब्लिशर्स के साथ कोलैबोरेशन में है। फिर. हमने. हम एक नीलेश मिश्रा फेस्टिवल करके शुरू कर. रहे हैं। जिसका पहला फेस्टिवल चंडीगढ़ में. है चितकारा यूनिवर्सिटी में. 24 जुलाई को यह फेस्टिवल मेरी दुनिया को. एक दिन में समेटता है मेरी फैली हुई.
दुनिया को तो पूरे दिन कुछ ना कुछ. गतिविधियां इसमें है जिसका क्लाइमेक्स. होगा मेरी एक लाइव स्टोरी टेलिंग. परफॉर्मेंस मेरे बैंड के साथ शुरुआत होती. है एक स्टोरी टेलिंग वर्कशॉप मोबाइल फिल्म. मेकिंग वर्कशॉप फिर हम अपनी फिल्म. दिखाएंगे डिस्कशन होगा दूसरी फिल्म. दिखाएंगे, डिस्कशन होगा। फिर यंग लोगों से. बातचीत होगी। फिर एक ओपन माइक की हमारी. प्रो आईपी है स्लो माइक नाम से। स्लो माइक. होगा नहीं छोड़ा आपने। [हंसी].
तो दुनिया को समेट दिया। फिर थोड़ा गांव. कनेक्शन भी दिखेगा उसमें और तो इस तरह से. क्योंकि दुनिया मेरी इतनी फैली हुई लगती. है ना. कि उसको एक कोहेरेंट रूप में लोग देख पाए।. फिर हम जो हमारा बहुत बड़ा एक एंबिशियस. प्रोजेक्ट है वो है द नीलेश मिश्रा स्कूल. ऑफ क्रिएटिव इंटेलिजेंस।. स्टोरी टेलिंग के जरिए स्टोरी टेलिंग को. यूज़ करके कैसे जो यंग लोग हैं वो जिंदगी. में बेहतर कर सकते हैं। तो पहले स्कूलों.
से शुरू करके पार्टनर करके कि पढ़ाई में. भी कैसे बेहतर हो सकते हैं स्टोरी टेलिंग. को यूज़ करके। तो हमने अपना करिकुलम बना. लिया पूरा 36 हफ्तों का करिकुलम है और वो. पहले हम सीबीएसई के करिकुलम से उसको अलाइन. कर रहे हैं और उसके बाद और बोर्ड्स के साथ. जाएंगे और फिर चाहे वो अमीबा की कहानी हो. चाहे वो स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी की कहानी. हो चाहे वो प्लूटो की कहानी हो चाहे वो. एंड्रोमेडा की कहानी हो उन कहानियों के. जरिए उसको बताएंगे बच्चों को व्यक्त करना.
सिखाना चाहते हैं एक्सप्रेस बैक बेंचर. शब्द कहां से आया क्योंकि क्योंकि बच्चा. एक्सप्रेस नहीं करना चाहता। वो पीछे बैठा. है कि टीचर देख ना ले। सवाल ना पूछ ले।. मैं छुप के बैठा रहूं। बच्चों के मन में. कितना कुछ होता है और कितना टैलेंट होता. है। अगर उसको व्यक्त करना सीख ले वो अपनी. थॉट्स को ऑर्गेनाइज करना और उसको. एक्सप्रेस करना तो उनकी जिंदगी भर जो. यात्रा रहेगी उस पे असर है। वो किसी टीम. का मेंबर है तो अपने बॉस को ज्यादा. एक्सप्रेस कर पाएंगे। टीम मैनेजर है तो.
अपने थॉट्स टीम को एक्सप्रेस कर पाएगा। वो. ब्यूरोक्रेट है या पॉलिटिशियन है या. साइंटिस्ट है कुछ भी है तो मुझे लगता है. कि यह सबसे बड़ा जो एक गु्थी रहती है. लोगों के बच्चों के माइंड में आगे बढ़ के. उनके जिंदगी को अफेक्ट करती है कुछ बड़े. मुखर होते हैं जिसको कहते हैं दे ओन द रूम. जिस भी कमरे में चले आते हैं भाई हैं और. कुछ होते हैं जो माइंड में रहता है नहीं. बोल पाते हैं झिझकते हैं या स्टंबल करते. हैं अच्छे से नहीं बोल पाते इसी तरह से. फिर यह कोर्स जो है हमारा सेल्स.
मार्केटिंग ये वो वगैरह सब सब स्टोरी. टेलिंग ही तो है। सेल्स, मार्केटिंग, टीचिंग ये सब स्टोरी टेलिंग ही तो है। और. क्या है ये? तो जो स्कूल ऑफ क्रिएटिव. इंटेलिजेंस हम लोग ल्च करने वाले हैं वो. ये है। मुझे लगता है कि एक शिक्षा में एक. इंटरवेंशन की आवश्यक है। मैं टी टीचरों के. परिवार से भी हूं। तो. ये जो. चीजें हैं और कुछ जो चल रहा है वो तो. चलेगा ही। लालची हैं आप। मतलब बहुत लालची.
हूं मैं। हम. ये सब समेटने में परिवार के और भी लोग साथ. देते हैं. क्योंकि आई एम श्योर ये समेटना इतना आसान. नहीं होगा।. आसान नहीं है। आसान नहीं है। हां परिवार. है और जो टीम है मेरी लखनऊ में. हम. वो उनको तो आदत ही नहीं हो पाई मेरे. पागलपन की आज तक। वो हैंडल ही नहीं कर. पाते हैं। मैं बोलता हूं यार एक नया. आईडिया है। वो सर पकड़ लेते हैं अपना।. तो.
लेकिन है कि छोटी टीम के साथ बहुत. एक सवाल सर पूछ लेता हूं मैं क्योंकि एंड. में हम आ गए हैं। सादगी और स्लो जैसे मैं. ओशो को सुन रहा था तो ओशो का कहना था कि. सबसे खतरनाक अहंकार वो होता है जिसमें. मुझे पता है [गला साफ़ करने की आवाज़]. क्या ये स्लो होने में भी एक किस्म का. अहंकार हो सकता है या कभी आया ऐसा कि मैं. तो दुनिया के रेस से बाहर हूं। मैं अलग हो. गया हूं। अब मैं भीड़ का हिस्सा नहीं हूं।. मेरे ख्याल से यह संभव है कि लोगों में यह.
भावना आ जाए कि हम ज्यादा हैं, वह कम है।. वो हमसे कमतर हैं। अ लेकिन जहां तक हम जिस. स्लो होने की फिलॉसफी की बात करते हैं, उसमें एमथी और डिसेंसी तो सबसे टॉप पे है।. सबसे टॉप पे है। इसके बिना आप इस रास्ते. पे नहीं जा सकते।. दूसरा ये है कि जो अपने अंदर. अपने. दुख से कॉम्प्लेक्सेस से अहंकार से डील.
करना. ये बहुत बहुत इंपॉर्टेंट है। वरना आप कैसे. एक फ्रेज़ मैं यूज़ करता हूं बिकमिंग दी. अदर। दूसरा बनके दुनिया को देखना। यह. स्टोरी टेलिंग करते-करते मुझे आया है। और. मैं जानता हूं कि कहानियां सुनाते सुनाते. मैं एक बेहतर इंसान बन गया हूं। मुझे पता. है ये और मैं उम्मीद करता हूं कि मेरे. श्रोता भी कहानियां सुनते-सुनते बेहतर. इंसान बन गए होंगे। क्योंकि रोज अगर मैं. उनको एक 75 साल के बुजुर्ग की कहानी बता. रहा हूं या 16 साल के बच्चे की कहानी बता.
रहा हूं। उसकी जिंदगी के बारे में आप नहीं. जानते। मैं झांक के दिखा रहा हूं आपको और. मैं खुद झांक के देख रहा हूं पहले। मैं. देख रहा हूं कि वह बच्चा वो जब 6:00 बजे. आया 7:00 बजे घर आता है और उसको डांट. पड़ती है कि देर से क्यों आए तो उसको कहीं. कुछ टीस होती है और वो दादाजी क्यों बोलते. हैं ऐसा और वो जो महिला जो शादी करके आती. है और उससे बोल दिया जाता है कि. एक कहानी है मेरी स रे गा मा पा. शादी करके कहानी दहलीज से अंदर ही आती है.
और आवाज आती है सर्वेंट की हस्बैंड की. आवाज आती है सर्वेंट ऐसे बोलते हुए. हारमोनियम स्टोर में रख दो। हारमोनियम लाई. होती है वो। संगीत ही उसका जीवन होता है।. और स्टोर में बंद कर देता है और स्टोर में. वो रोज जाती है। रोज हारमोनियम देखती है।. रोज रोती है।. ऐसे तो हम नहीं सोचते कि वो जो नई ब्याहता. आई है। वो क्या छोड़ के आई है। वो अपना. कमरा, उस कमरे की खुशबू, उसका पर्दा, उस.
खिड़की से क्या दिखता है। उसका घर, उसका. किचन, उसका उसके कुशंस का रंग, उसका. माता-पिता. अपना पूरा घर, अपनी दुनिया छोड़ के आई है।. वो शादी करके आई है। और एक सेकंड में आपने. बोल दिया कि यह आपका घर है। अब यह आपका. कमरा है। यह आपकी खिड़की है। यह खिड़की से. आपके दिखता है। इस कमरे की खुशबू है। ये. यहां के पर्दों का रंग है। यह आपके नए. पापा है। यह आपकी नई मां है।.
यह कहानियों ने ही मुझे बताया है कि यह. कैसा होता होगा।. और यह जो संवेदना है जब तक आपको नहीं आएगी. यह एमथी नहीं आएगी. आप कुछ नहीं मान सकते आप अच्छा इंसान तो. छोड़ दीजिए सेकंड लास्ट क्वेश्चन सर आज. एआई भी कहानियां लिख रहा है एआई भी गाने. लिख रहा है एआई गाने गा भी दे रहा है. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. क्या कहीं डर लगता है कि इंसान या वो जो. इंपैथी है वो एक रोज कमजोर पड़ जाएगी. एल्गोरििदम के सामने क्योंकि आप.
इंस्ट्रक्शंस देंगे सब कुछ हो जाएगा बाहरी. आवाज में कहानियां आ जाएंगी।. शब्दों में गहराइयां. [गला साफ़ करने की आवाज़] आ जाएंगी। अब तो. वीडियोस ही बनकर आ जा रहे हैं। तो जो. मानवीय टच है क्या इसकी कीमत धीरे-धीरे कम. हो जाएगी? जरूर यह रिस्क है लेकिन मेरा मानना है कि. एआई एक ऐसा टूल है जिसको हम ही को साधना. है. हम. और अगर हम कीबोर्ड पर टाइप करतेकरते ही. साधते रहे तो अभी की जो पीढ़ी है उसके.
पुराने अनुभव हैं. हम. लेकिन आगे की जो पीढ़ी आएगी उसके पुराने. अनुभव नहीं होंगे. हम. तो वो मौलिकता नहीं होगी. उन्हें पता ही नहीं होगा कुछ. उन्हें पता ही नहीं होगा ना हमें तो पता. है कैसा होता है हम ही तो वो प्र्ट जब दे. के डिस्क्राइब कर पा रहे हैं। तो मुझे. लगता है कि जो अनुभव जो मानवीय अनुभव है. गांव के पगडंडी उन्हें क्या पता. हम हम ही को साधना है उसे वो जो गांव जाते. थे ट्यूबवेल में नहाना होता था. उनको पता ही नहीं होगा जानते ही नहीं.
होंगे वो. बिल्कुल बिल्कुल. ठेला आप कह देंगे वो तो सब [हंसी] कुछ एआई. नहीं बना पाएगा. हम एआई को भी मौलिक अनुभव चाहिए. दर्द चाहिए ना उसे भी. ये जो टीवी और सोशल मीडिया वाले सर हैं. टीवी आपने टीवी में काम किया आपने आपने. रेडियो में काम किया। अब दोनों जगह बहुत. शोर है। इस वक्त एक बड़ी खबर आ रही है।. सेम रेडियो में भी आ गया। ये ये ये ये. कहीं आपको लगता है मिसफिट हो या आपको लगता. है कि.
असली सुकून तो वही है जो हम कर रहे थे जो. हम चाहते थे। अब सब कमर्शियलाइज हो गया. है। टीवी और रेडियो से कभी शिकायत होती है. आपको? हां मैं. न्यूज़ चैनल्स तो नहीं देखता हूं। जो. देखता हूं वो सोशल मीडिया फीट्स पर देखता. हूं। टीवी भी अदरवाइज नहीं देखता हूं और. रेडियो चैनल्स रेडियो. सुनता हूं तो नाराजगी होती है। उस दिन. मैंने ट्वीट भी किया था और बहुत से लोगों. ने रिएक्ट करना शुरू कर दिया क्योंकि वो. भी वही महसूस करते हैं क्योंकि मैं एक. घंटे तक सिर्फ विज्ञापन सुनता रहा। 1 घंटे.
तक गिन के 1 घंटे तक मैं लखनऊ से गांव जा. रहा था। सवा घंटा लगता है। मैंने सिर्फ. बैक टू बैक और मैंने रियलाइज नहीं किया।. मेरी वाइफ ने बताया कि भाई तुमने सुना आधे. घंटे से ऐड आ रहा है। फिर हम आगे देखते. गए, देखते गए, देखते गए। सिर्फ ऐड आ रहे. थे। कोई गाना भी नहीं।. लेकिन देखिए या तो मैं प्रलाप कर लूं और. विलाप कर लूं।. और या मैं अच्छा काम कर लूं। बड़े मेन. स्ट्रीम के अंदर मेरा एक छोटा मेन स्ट्रीम.
है।. मैं पैरेलल सिनेमा नहीं बना रहा हूं भाई।. मैं हाशिए पे नहीं खड़ा हूं। मैं मेन पिच. पर खेल रहा हूं।. मैं 9:00 PM का शो करूंगा।. मैं मेन स्ट्रीम की बातें करूंगा। मेन. स्ट्रीम के लोगों से अपने तरह से करूंगा. मैं। स्लो इंटरव्यू में उन्हीं से करूंगा. जो जाके हो सकता है कि अलग तरह की बात. करना चाहते हो या अलग कंटेंट क्रिएट करते. हो। लेकिन मैं अपनी लक्ष्मण रेखाओं के.
अंदर काम करूंगा और मेरा रोज ये कोशिश. रहेगी. कि अच्छा कुछ कंटेंट बनाता रहूं। अच्छी. चीजें कहता रहूं ताकि मैं बेहतर बनूं।. मेरी ऑडियंस को भी कोई लाभ हो। तो मैं. हाशिए पे बिल्कुल नहीं हूं। लेकिन उस. विहंगम बड़े विशाल मेन स्ट्रीम में जिसका. मैं सामना नहीं कर सकता हूं। उसमें मेरा. एक छोटा मेन स्ट्रीम है। पर वो मेन. स्ट्रीम है। और मैं उसकी सेवा करता. रहूंगा। तो प्रलाप करने से कुछ होगा नहीं।.
मैं क्यों विलाप क्यों कि भाई वो खराब है. वो खराब है वो खराब है हां मैं स्टैंड. लूंगा मैंने जैसे बोला आपको कि मुझे ऑफेंस. क्रिएटर्स की रिस्पांसिबिलिटी मेरे लिए. महत्वपूर्ण है उस पे स्टैंड लूंगा लेकिन. मैं इससे वाकिफ हूं कि मैं हर चीज नहीं. बदल सकता ना सुनने वालों के शौक को बदल. सकता हूं और ना बनाने वालों के शौक को बदल. सकता हूं इस चीज से डरते हो आप इस चीज से. किसी चीज से जिंदगी में कोई डर बचा है अभी. या आपने डर पर हर डर पर काबू पा लिया.
आपने।. मैं उस दिन से डरता हूं जब मैं कोई कहानी. सुना रहा हूं और मुझे पता है कि. आई डोंट मीन इट। इस अनुभव को मैं जी नहीं. रहा हूं। मैं सिर्फ सुना रहा हूं। जिस दिन. मैं फर्जी हो जाऊं।. मैं उस दिन से भी डरता हूं अगर.
मेरे पास. अभी तो मैं लगा रहता हूं किसी तरह से कि. इस ब्रांड और रीच और ऑडियंस व्यूज की. दुनिया में भी अपनी जगह लेकिन क्या ऐसा. समय आएगा जब यह कोना भी नहीं बचेगा। उस. दिन से मैं जरूर डरता हूं। अह. लेकिन तब तक ये कोशिश है कि.
अपने को भी सुख मिलता रहे और आपकी ऑडियंस. को भी सुख भी मिले और कहीं ना कहीं कुछ. अच्छा भी बताते हुए चले जाए। जब कूद फिल्म. अगर आप देखोगे तो. यह कोशिश आपको उसमें दिखेगी और यह हर. फिल्म में दिखेगी। हर गाने में दिखेगी। हर. कन्वर्सेशन हर किताब हर हर चीज में दिखेगी. कि. कुछ. कुछ तो छोड़ के कुछ सौंप के जाना है। कुछ.
अच्छा एक मैसेज अच्छी बात. क्या ऐसा दिन आएगा जब ये कहने की भी जगह. नहीं बची रहेगी। उस दिन से जरूर मैं. डरूंगा. लेकिन ये भी है कि जब दुनिया के लिए मैं. नहीं बनाऊंगा तो उस खुद के लिए बना सकता. हूं। इसका संतोष है। मैं गाने लिखता. रहूंगा। अभी भी मैं गाने जो बना रहा हूं. कौन सा मैं फिल्म के लिए कर रहा हूं। मैं. अपने लिए बना रहा हूं वो गाने। अह लोग सुन. ले रहे हैं। तो वह डर भी है लेकिन वह. खुददारी भी है मेरे अंदर और क्योंकि मैं.
सिर्फ. एक बाजार के लिए या उपभोक्ताओं के लिए. बनाने कुछ बनाने के रास्ते पे नहीं निकला. हूं। तो. जैसा मैंने दो लाइनें लिखी हैं उसे समाप्त. करूंगा कि जो होगा जैसा होगा कल आज से. अच्छा होगा।. क्या परिभाषा आपकी सफलता की? शर्मिंदा ना होना पड़े।.
जब 20 साल 30 साल बाद पलट के देखूं कि ये. क्यों किया मैंने? कुछ लोगों के लिए नहीं. इंपॉर्टेंट होता है। ये लेगसी इंपॉर्टेंट. नहीं होती है। मेरे लिए है पैसा।. अपने पैरों पर खड़ा रहूं। एक पॉइंट तक. पैसा इंपॉर्टेंट नहीं होता था। वो गलत-. गलती थी मेरी।. अ मेरा Twitter का अपना जो बायो है उसको. एडिट किया कोविड के दौरान।.
डिसेंसी इज माय बिजनेस मॉडल। बिजनेस शब्द. लिखने में ही इतने दशक लग गए। क्योंकि. हमें सिखाया गया कि बिजनेस गंदा है।. बिजनेस में समझौते होते हैं। लेकिन यह गलत. था। यह गलत सिखाया गया है। हम एक. सस्टेनेबल अपने पैरों पर खड़े होने वाला. मॉडल बनाना चाहते हैं।. तो पैसा आवश्यक है। तो पैसा उस लिहाज से. बिल्कुल आवश्यक है। सुविधाएं आवश्यक हैं।. मैं अपनी बेटी को निसंदेह एक फाइव स्टार.
जीवन देना चाहूंगा। कोई काम ऐसा, कोई. वीडियो ऐसा, कोई और काम ऐसा जिसमें पैसे. को दिमाग में रखकर आपने किया। इससे अच्छा. पैसा आ जाएगा। इसलिए कर लेते हैं कभी-कभी।. लेकिन वो खराब नहीं होता कभी। हो सकता है. कम रोचक हो। अन्यथा नहीं करता। लेकिन मेरी. मैं कभी भी ब्रांड से के साथ जब काम करता. हूं या पैसे लेके काम करता हूं मेरा एक ही. फिल्टर रहता है। हर क्रिएटर का यही फिल्टर. रहना चाहिए मेरी राय है।.
वुड आई डू इट एनीवे क्या मैं अन्यथा भी. करता। अगर पैसा नहीं मिल रहा होता तब भी. करता मैं ये। मेरा एक ही फिल्टर है। तो. अगर मैं कोई ब्रांड आ रही है बोल रही कि. आप मशरूम की खेती के बारे में कर दो। तो. ठीक है रोचक नहीं है पर क्या मैं अन्यथा. भी करता हां करता ना मैं गांव कनेक्शन के. लिए भाई कर देता यार अभी पैसा भी मिल रहा. है उससे तनख्वाएं दे पाऊंगा उससे थोड़ा. सेल्फ रिलायंट हो पाऊंगा तो लेकिन ऐसा कुछ. नहीं करूंगा मैं ऑन रिकॉर्ड बल्कि कहना.
चाहूंगा मुझे कोई ऐसी वो नहीं है मैं. bjजूस और वाइट हार्ड जूनियर का पब्लिक. एनिमी नंबर वन रहा हूं मैंने इतना पब्लिक. स्टैंड लिया उनके खिलाफ क्योंकि जब वाइट. हार्ड जूनियर आया तो. मैंने इंस्टेंटली ये स्टैंड लिया कि किसी. बच्चे को यह बिजनेस मॉडल नहीं बेचा जा. सकता कि अगर आपने तीन चार पांच साल की. उम्र में कोडिंग नहीं की तो आपका भविष्य. बर्बाद हो जाएगा। यह बिजनेस मॉडल था वाइटर.
जूनियर और bjूस का और मैंने इतना मैंने ये. ट्वीट किया कि जिस दिन ये आदमी जेल जाएगा. मैं प्रसाद चढ़ाऊंगा। यह ट्वीट है मेरा ऑन. रिकॉर्ड है। कई लोगों ने बोला सर तो कोर्ट. केस कर देगा आपके। तो मैंने कहा करें ना. मैं इसको पब्लिक मूवमेंट बना दूंगा और वो. जानता है मैं बना दूंगा। बड़ी खुशी है कि. विध्वंस हो गया है उस कंपनी का क्योंकि ये. ये क्राइम है। ये कोकेन बेचने से बदतर है. कि आप एक बच्चे को उस उम्र में जब उसकी. ब्रेन की फॉर्मेशन हो रही है। उसकी ब्रेन. डेवलप हो रही है। इस तरह से न्यूरोलॉजिस्ट.
कहते हैं मैं नहीं कह रहा हूं कि उस समय. जो उसको अनुभव मिलेंगे वो उसकी सारी. जिंदगी तय करेंगे। सारी जिंदगी तय करेंगे।. अगर तुमको उस उम्र में तैराकी सिखाई गई. होती, समुद्र में सिखाया गया होता तो तुम. एक तरह के अनुभव ले बड़े होते। उस उम्र. में आप कह रहे हो कि नहीं बच्चों कंप्यूटर. के सामने बिठाओ। सिर्फ कोडिंग सिखाओ। मैं. कोडिंग के खिलाफ नहीं हूं। मैं डर बेचने. के खिलाफ हूं। जैसे मैं एडल्ट कंटेंट के.
खिलाफ नहीं हूं। मैं उसके डिस्ट्रीब्यूशन. के खिलाफ हूं। ताकि वह उस उम्र को वनरेबल. उम्र को अफेक्ट ना करे।. तो. bजूस ने उसके बाद मैंने बहुत तो bजूस ने. कई बार मुझे अप्रोच किया. क्योंकि मुझे वो खरीदना चाहते थे और कई. बार आया कि सर दे वांट टू वर्क विद यू और. दे वांट टू वर्क विद गांव कनेक्शन और. आखिरी बार जब ये आया कि सर एक देयर इज़ अ. कैंपेन बायजूस स्किन टू वर्क विद यू इतने.
करोड़ की कैंपेन है।. मैंने लिखा. थैंक यू फॉर कांटेक्टिंग मी। आई डोंट वर्क. विजूस फिलोसोफिकल डिफरेंसेस।. मैंने वो जो लेडी थी उन्होंने उनका नंबर. डिलीट किया। ऊपर से पेन लगा के अमाउंट. डिलीट किया और यह मैंने सोशल मीडिया पर. डाल दिया स्नैपशॉट।. यह दिखाने के लिए. कि आई एम रेडी टू सैक्रिफाइस सीरियस.
अमाउंट्स ऑफ मनी।. ताकि मैं उस रास्ते पर चल सकूं जिसकी मैं. बात कर रहा हूं। मैं हवाई बात नहीं कर रहा. हूं। एकदम नहीं कर रहा हूं। कल. कल मैं गोवा में था। फोन आया कास्टिंग. एजेंट. कुछ साल से कास्टिंग वास्टिंग का पता नहीं. क्यों [नाक से की जाने वाली आवाज़]. आने लगा है कि सर ऐसा है एक ऐड है सर शूट. होना है.
सर यूरोप में शूट है एक बड़ा बड़ा कथड्रल. है उसमें सर आप स्टोरी सुना रहे हैं आप. स्टोरी टेलर हैं और आप कहानी सुनाते हैं. और बहुत बड़ी भीड़ है और फिर आप निकल रहे. हैं और एक और स्टोरी टेलर जो आपके पहले. आया था और. वो आपको फॉलो कर रहा है भीड़ में। आप उसकी. डायरी लेते हैं और आप कुछ लिखते हैं। ऐसा. ऐड हो सकता है। आगे आए तो तुमको याद आएगा।. ये ठीक है। तो बोलता है कि. सर ये ऐड है। मैंने कहा अच्छा बोला सर.
यूरोप में है। सर दो दिन का शूट है आपका. और एसएस है। रजनीगंधा का है।. मैंने कहा भाई लास्ट में बोले तुम।. अब तब इतनी कहानी बुन रहे हो शुरू में. लास्ट में बोले तुम. भाई चम्मच उठा के. तुमको क्यों लगा मैं रजनीगंधा का ऐड. करूंगा मैं नहीं करूंगा ना. तो मैं अपनी परिधियां मेरी तय है. मैं एक एक्सपेंसिव आर्टिस्ट हूं मैंने. मेरा सेइंग नो इज माय बिगेस्ट सुपर पावर.
आई कैन वॉक अवे फ्रॉम द बिगेस्ट डील मेरे. पास गोरेपन की क्रीम वाले आ चुके हैं कि. ये इतने करोड़ की डील आप कहानियां सुनाइए।. मैंने कहा भाई तुम समझ किससे बात किससे. बोल रहे हो यार तुम्हें मतलब मैं क्या. मुंह दिखाऊंगा अगर मैं गोरेपन की क्रीम का. महिमा मंडन करूंगा कहानियों के जरिए जितना. भी तुम मुझे पैसा दे रहे हो मतलब मुझे. इसमें कास्ट किया गया था एक शो में.
नाम ले लेता हूं महारानी हम. नीतीश कुमार का जो रोल था. ओके गॉट इट. ठीक है. तो मुझे कास्ट किया गया था उसमें और मैं. मैंने एक ही शर्ट रखी थी कि मैं गाली नहीं. दूंगा और उनके जो सज्जन थे उन्होंने कहा. ठीक है सर ये तो कैरेक्टर है ऐसा नहीं है।. अब मैं अगले दिन जब गया जो भी उनकी. थिंकिंग होगी या जो भी गैप होगा तो.
डायरेक्टर जो थे बहुत बढ़िया डायरेक्टर. हैं सुभाष कपूर. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. कहा सर भर भर के गाली देनी है।. तो वही नेचर है उस ओटीटी की दुनिया का। तो. मुझे समझ नहीं आया मैं क्या करूं। उमा थी. वहां पे और भी बहुत सब काबिल कलाकार थे।. तो पूरा दिन पता नहीं कैसे गुजरा मेरा।. मैंने शाम को मुकेश चावड़ा को कॉल किया जो. कास्टिंग डायरेक्टर हैं। मैंने कहा मुकेश. भाई मैं आई एम द रॉन्ग पर्सन इन दिस शो।.
मैं बहुत असहज हूं। मैं नहीं यह कर. पाऊंगा। [गला साफ़ करने की आवाज़]. शोक व्यक्ति से बड़ा होता है तो मुझे. मुक्त करिए आप तो मैं वापस आ गया. तो ये मैं अब कोई और कह सकता है कि क्या. आप कौन से जमाने की बात कर रहे हैं फेयर. इनफ कि मैं नहीं दूंगा मैं गाली नहीं. दूंगा ना मेरे को एक्टिंग नहीं करने को. मिले कोई प्रॉब्लम नहीं है मैंने अपने बना.
लिया भाई मैं छोटी उसी में फिल्में बनाता. रहूंगा अगर मुझे एक्टिंग करनी है मैं कर. लूंगा उसमें जिसका हर फ्रेम मैं अप्रूव कर. रहा हूं जिसमें तो कोई बदतमीजी नहीं होगी।. कुछ कुछ ऐसा नहीं होगा जो जिसके लिए मैं. शर्मिंदा हूं। लेकिन हम कॉम्प्लेक्स से. कॉम्प्लेक्स इमोशंस और सिचुएशंस और हम. एंटरटेनिंग रखेंगे उसको। अभी अगला एक्शन. बना रहे हैं। करेंगे ना सारे अरमान पूरे. करेंगे भाई। अपनी शर्तों पे सुपर सर।. जाते-जाते सर आपने कोई गाना गाना भी शुरू.
किया है। अगर आप कोई क्योंकि आपकी आवाज. हमने कहानियों में सुनी है। बाकी तो आपके. YouTube पे जाके हम सुन लेंगे सारे गाने।. हम. लेकिन अगर आई आप कोई टीज़ दे दे थोड़ा सा. जिंदगी कुछ भी समराइज करते हो कोई भी गाना. जो आपके दिल के करीब हो लिखा हुआ गाया हुआ. वो. बर्फी वाला ही सुना देता हूं. क्यों. ना हम तुम.
चलें टेढ़ेमेढ़े से रस्तों पे नंगे पांव रे. चल. भटक लेना बावरे. क्यों. ना हम तुम. तलाशें बगीचों में फुर्सत भरी छांव रे चल. भटक लेना बावरे. इन टिमटिमाती निगाहों में इन चमचमाती.
अदाओं में लुके हुए छुपे हुए. है [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. क्या ख्याल बावरे. क्यों. ब्यूटीफुल सॉन्ग सर. थैंक यू थैंक यू. क्या आई एम श्योर पैप भी बहुत मजा आएगा. सुन के आपका वर्जन. थैंक यू. आई विश यू ऑल लक सर आप ऐसे ही इंस्पायर. करते रहिए इस पॉडकास्ट को करने के दौरान. बहुत सारी चीजें सीखी मैंने बहुत सारे. ख्वाब थे जो जिए आपसे पूछकर [हंसी].
बहुत अच्छा अनुभ रहा मेरा आई एम श्योर आई. होप कि मैंने आपको बहुत परेशान ना किया. नहीं नहीं बहुत अच्छा लगा मुझे। थैंक यू. सो मच सर।. थैंक यू। थैंक यू। नमस्कार।.
