Unplugged ft. Morari Bapu | Motivation | Spirituality | Ram Katha | Ram Yatra | Shubhankar Mishra
प्रभु श्री राम कौन है आपकी नजर में? कैसे. आप उनको परिभाषित करते हैं? मेरे लिए. ब्रह्म भी है, ईश्वर भी है, भगवान भी है, परमात्मा भी है, राम वो है जो दुश्मन पर. भी करुणा करता है। राम व्यक्ति भी है, व्यक्तित्व भी है. और पूरा अस्तित्व भी है। रामेश्वरम की. थोड़ी महिमा बताइए। भगवान राम ने अपने. हाथों से शिवलिंग की स्थापना करके उसमें. ब्रह्म ने स्वयं अपने प्राण की स्थापना. करके तो ये विशेष है। रावण का अकल्याण.
करने नहीं जा रहे हैं। लंका का कल्याण. करने जा रहे हैं। क्या हम ये माने कि. श्रीलंका में कथा कहना रामायण के. पुनर्मिलन का प्रतीक है? पहले तो नाम लंका. ही था। जानकी जी गई तब से श्रीलंका।. श्रीलंका को लेकर कई बार कई हिस्टोरियन. कहते हैं कि वो लंका अलग थी। ये लंका अलग. है। इतिहास के पास तथ्य होता है। अध्यात्म. के पास सत्य होता है। दुनिया में कई जगह. ऐसी है जहां पर अपनीपनी रामायण है। थोड़ा. इसको हमको समझाइए। विश्वामित्र जी ने कहा. है कि चरितम रघुनाश सस्य शतकोटि प्रविस्तम.
सूरज की किरण पड़े 1 लाख घड़े हो पानी से. भरे तो 1 लाख घड़े में सूरज देखता है सूरज. एक है जितने अंतकरण इतने राम है. इतने अलग-अलग देशों में जब आप राम कथा. कहते हैं किसी एक देश में आपको सबसे अलग. अनुभव हुआ हो. एक घर बताना कि जिसके घर में तुलसी का. पौधा ना हो और हनुमान जी की मूर्ति हो मैं. गया और हर घर में आंगन में तुलसी है. तुलसी के मायने क्या है घर में होने कि. हमारे महुआ में एक सुल्तान मुस्लिम मुझे. कहा मित्र के नाते हम साथसाथ हुए एक बार. चाय पीने तो आओ तो मैं गया मुझे कहा बाबू.
बालकनी में जरा आओ मैं हूं मुस्लिम लेकिन. तुलसी को पानी चढ़ाता हूं कई लोग कहते हैं. उत्तरकांड बाद में जोड़ दिया गया इसकी. सच्चाई क्या है. इसके पीछे लोकतांत्रिक देश में राम राज्य. को कैसे शामिल किया जाएगा. रामचरितमानस में उसका स्पष्ट जवाब है. राम कथा जो है वो केवल सनातनियों के लिए. है या सबके लिए है. सबके लिए गणिका अजामिल व्यास. अपने सेक्स वर्कर ट्रांसजेंडर समुदाय जो. उनके लिए भी विशेष कथाओं में राम के. स्वीकृति का संदेश जोड़ा।. हूं। मेरी आंखों की नजर से स्थिति क्या.
है? वो समझने के लिए मैं यहां आया हूं। ये. करना ही चाहिए क्योंकि हर बुद्ध पुरुषों. ने ये किया है। बुद्ध भगवान ने गणिकाओं का. स्वीकार किया। कबीर के साथ भी बातें जुड़ी. है। तुलसी के साथ भी जुड़ी है।. एक व्यक्ति जो प्रभु श्री राम का जाप करता. है और एक व्यक्ति जो राम नाम जाप नहीं. करता है। क्या फर्क होता है दोनों? राम. नाम का जाप करें और दूसरे की निंदा करें. तो जाप का बहुत बड़ा महत्व है।. निंदा ना करें, घृणा ना करें, जीवन में. सबका भला करें, चाहे पूजा पाठ ना करें।. हम ये नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए हम पूजा.
करते हैं। पूजा की आड़ में ऐसी ऐसी वस्तु. को छिपाना बहुत आसान है।. की यात्रा चल रही है। इसमें युवा आते हैं।. इसमें तो कितने आते हैं वो देखो। लेकिन. इंटरव्यू करने वाले सब युवा आते हैं।. युवा प्यार में पढ़ते भी बहुत है। उसमें. परेशान भी बहुत होते हैं। रोते गाते भी. बहुत है। सच्चा प्रेम क्या है? प्रेम झूठा. होता ही। तुलसीदास जी लिखते हैं राम ही. केवल प्रेम। केवल प्रेम तू ही राम प्रेम. है।. रामचरितमानस में वो कौन सा श्लोक है जो. जीवन का मूल मंत्र बन सकता है।. एक ही मंत्र है। के रघुपति नाम.
इंसान की ख्वाहिश की कोई इंतहा नहीं होती।. दो गज जमीन चाहिए दो गज कफन के बाद भी।. मुरारी बापू की भी कुछ ख्वाहिशें हैं। नदी. समुद्र को मिलना चाहती है। हमारा आरोप है।. नदी ने कभी नहीं कहा कि मैं समुद्र को. मिलना चाहता हूं। बहते हैं गंगा की तरह।. आज हम बात करेंगे एक ऐसे संत की जिनकी राम. कथा दिल को छू लेती है। जिनकी वाणी में.
राजा राम के संदेश जो हैं वो सत्य, प्रेम. और करुणा की धारा में बहते हैं।. ये चर्चा आज इसलिए भी खास है क्योंकि ये. संत आज दूसरी बार राम परिक्रमा में है। 25. अक्टूबर 2025 को चित्रकूट से एक यात्रा. शुरू होती है। 411 भक्तों के साथ 8000. कि.मी. का सफर तय होता है और अब हम. रामेश्वरम में हैं। मेरे साथ है मुरारी. बापू। बहुत-बहुत स्वागत है बापू। प्रणाम. आपको। कैसे हैं आप? बिल्कुल।.
स्वास्थ्य कैसा है? तन मन सब ठीक है। बिल्कुल।. आनंद है? आनंद आनंद।. हम जानते हैं बापू ये जो प्रभु श्री राम. को लेकर ये यात्रा है ये दूसरी बार आप कर. रहे हैं। इस यात्रा के मायने क्या है? नहीं जैसे. जहां जहां चरण पड़े गौतम के कई आध्यात्मिक. साधकों ने जहां जहां बुद्ध के चरण पड़े. उसकी यात्रा की।.
गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के दो सूत्र. लेकर पूरे भारत की यात्रा की। फिनोबा जी. ने भूमि दान जैसा मंत्र लिखकर वंचितों को. अस्पृश्यों को आखिरी लोगों को भूमि मिले. वो स्वाश्र बने इसलिए पूरे देश की यात्रा. की तो. इन सभी यात्राओं से प्रेरणा आदि यात्रा तो. राम की है जो अयोध्या से निकल कर के पूरी. यात्रा करके फिर अयोध्या में आए तो.
एक अर्थ में कहूं तो इसका कोई उद्देश्य. नहीं ये निरुदेश है। दूसरे अर्थ में कहूं. तो सत्य प्रेम और करुणा के कदमों पर चलते. चलते फिर एक बार हम राम की स्मृति खुद में. जगाए और समाज में जगाए। तो इसी एक बिल्कुल. विनय भाव को लेकर के हम यात्रा पर निकले।. 2021 में भी आपने यात्रा की थी।. 2021 में पहली यात्रा थी।.
हां।. 2025 में दूसरी बार यात्रा है। अब मेरे मन. में सवाल आता है कि पहली यात्रा क्या. अनुभव था जिससे दूसरी यात्रा का अनुभव अलग. है और दूसरी यात्रा में चार साल का समय. क्यों लिया गया? नहीं यह तो जब योग होता. है तब होता है। लेकिन मेरा हर एक यात्रा. का आनंद भिन्न है।. कभी. एक आनंद है तो कभी परमानंद है तो कभी. ब्रह्मानंद है तो कभी निजानंद है। ये. यात्रा रामानंद है।.
राम का आनंद. ग्रहण करते बांटते हुए यात्रा चल रही है।. ना सुख है. ना कोई सुविधा की चिंता है। सब कुछ है. लेकिन ये केवल आनंद की यात्रा है। मुझे. पूछो तो मैं भी कहूंगा मेरे फ्लावर्स को. पूछेंगे आप तो उसको भी कहेंगे और मीडिया. जो हमारे साथ-साथ चल रहे हैं शायद वो भी. महसूस कर रहे कि ये परमानंद की यात्रा है।. प्रभु श्री राम कौन है आपकी नजर में?
क्योंकि राम जी जहांजहां गए वहां वहां आप. जा रहे हैं। लेकिन राजा राम है कौन? भगवान. है। एक इंसान है भगवान के अवतार में। एक. वह व्यक्ति हैं जिनसे हम सब प्रेरणा ले. सकते हैं। जिनके जीवन जीने की शैली सीख. सकते हैं। कैसे आप उनको परिभाषित करते. हैं? प्रश्न पूछने की आपकी. आपका अधिकार है। जवाब मैं दूं लेकिन मैं. भी एक प्रश्न पूछूं। भगवान राम क्या नहीं. है? मेरे लिए ब्रह्म भी है, ईश्वर भी है,
भगवान भी है, परमात्मा भी है। एक. जिसकी ऊंचाई को कोई छू ना सके। ऐसा इंसान. भी है। मानवता से भरा हुआ। राम जैसा बेटा, राम जैसा बाप, राम जैसा पति, राम जैसा. मित्र, राम जैसा सखा, राम जैसा आखिरी. व्यक्ति को प्रेम करने वाला आदमी और राम. वो है मेरे लिए जो दुश्मन पर भी करुणा.
करते हैं। तो राम सब कुछ है।. ये मेरा मेरा अनुभव है। मेरी निष्ठा है।. मेरा इसीलिए. वाल्मीकि ने राम को ब्रह्मकम कहा है।. मनुष्य कहा है। दुनिया को जरूरत है।. मनुष्य के रूप में राम मिले। तुलसी दास जी. ने ब्रह्म के रूप में और मनुष्य के रूप. में प्रस्थापित किया। और इन पूर्व सूर्यों. का आशीर्वाद लेकर मैं राम को सर्व रूप में.
देखता हूं। समस्त में देखता हूं। राम. समष्टि है। राम व्यक्ति भी है, व्यक्तित्व. भी है और पूरा अस्तित्व भी है।. बहुत सुंदर बापू। 8000 किलोमीटर की यात्रा. नौ राम कथाएं। अब यह हर कथा में कुछ. अलग-अलग है या उस जगह के महत्व के हिसाब. से जो लीलाएं थी थोड़ा इस बारे में बताइए. क्योंकि हम तो आपसे रामेश्वरम मिल रहे. हैं। कई जगह हमने मिस कर दी। तो क्या है. कि अयोध्या से हमने यात्रा शुरू की थी.
पहली यात्रा चित्रकूट तक। तो वहां जो. प्रसंग आए भगवान जहांजहां गए भरत जी गए ये. प्रसंगों को हमने कवर किया। चित्रकूट से. भगवान आगे बढ़े लंका तक और फिर वही से. अयोध्या तो हम इसी. प्रसंगों को फोकस कर रहे हैं। लेकिन हमारी. एक परंपरा है कि नौ दिन का अनुष्ठान होता. है। उसमें पूरी राम कथा का विंगोलोकन. क्रमश तुलन तो संक्षेप क्रमश प्रसंगों को.
संक्षेप करते जहां जहां यात्रा जा रही है. उसको केंद्र में रखता है। उसका उसका. सामाजिक रूप क्या है? उसका पारिवारिक रूप. क्या है? उसका राष्ट्रीय रूप क्या है? और. उसका आध्यात्मिक रूप क्या है? इसी पर हम. फोकस जिस जगह पर हम हम और आप चर्चा कर रहे. हैं रामेश्वरम रामेश्वरम की थोड़ी महिमा. बताइए।. भगवान राम शिव के उपासक.
जहां जहां क्योंकि राम और शिव के संबंध. सखा मित्र और स्वामी तीनों प्रकार परस्पर. एक दूसरे एक दूसरे को स्वामी मानते हैं।. एक दूसरे एक दूसरे को मित्र मानते हैं। एक. दूसरे एक दूसरे को मित्र मानते हैं। तो. मित्र भी मानते हैं, स्वामी और. सेवक भी मानते हैं। इष्ट और आश्रित मानते. हैं। लेकिन भगवान राम ने अपने हाथों से.
शिवलिंग की स्थापना करके उसमें ब्रह्म ने. सर्व का प्राण राम है। उसने स्वयं अपने. प्राण की स्थापना करके स्थापना तो ये. विशेष है कि यहां भगवान राम ने एक मनोरथ. किया कि उत्तम धर्मी है। यहां हम शिव की. स्थापना कर क्योंकि हम रावण का अकल्याण. करने नहीं जा रहे। हम कल्याण की स्थापना. शिव मींस कल्याण कल्याण की स्थापना करके. लंका का कल्याण करने जा रहे हैं। तो यहां.
की विशेषता है। अब जैसे इस यात्रा का अगला. चरण जो हमने सुना वो श्रीलंका है।. श्रीलंका एक दूसरा देश है। श्रीलंका की. यात्रा का महत्व क्या हो गया? रामेश्वरम. से श्रीलंका जाना। भगवान यहां से सेतु. बना। लंका का बड़ा महत्व है क्योंकि भारत. और लंका को आसुरी संपदा और दवी संपदा को. राम ने जोड़ा था सेतु बनाकर मनोरथ तो यही. था कि हम भी यहां से समुद्र मार्ग से लंका. जाए जिस तरह राम गए थे शीप में लेकिन.
अवेलेबल नहीं हुआ तो हम फिर भाई हवाई जहाज. से जाए तो भगवान राम लंका गए तो लंका. वालों ने आमंत्रण नहीं दिया था कि आप आइए. वरना कोई बुलाए तो व्यवस्था करते। राम ने. स्वयं सेतु बनाया जाने के लिए। सबको. जोड़ना है। एक करना है। एकता लानी है। सब. एक और नेक बने। इसलिए ये यात्रा थी। तो. राम ने जो किया वो राम नाम के आधार पर हम.
करने जा रहे हैं। तो ये जोड़ना चाहिए। एक. दो देश के बीच में सेतु नहीं है। ये विश्व. की आसुरी ताकत और सूर्य. शक्ति ऊर्जा इन दोनों के बीच में समन्वय. साधने का एक विनम्र प्रयास है। तो लंका तो. जाना ही चाहिए। तो क्या हम ये माने कि. श्रीलंका में कथा कहना रामायण के. पुनर्मिलन का प्रतीक है? पुन पुनर्मिलन का. एक तरीके से जी और पहले तो नाम लंका ही.
था। जानकी जी गई तब से श्रीलंका हुआ।. अच्छा. हमारी श्री गई उभय बीच श्री सोहति कैसे. ब्रह्म जीव बीच माया जैसे तो सीता जी जब. गई उसके बाद उसका नाम रामायण में तो जग. विख्यात नाम ते लंका पूर्व में लिखा है. विश्व में प्रसिद्ध इस देश का नाम लेकिन. जानकी जी श्री है साक्षात ऐश्वर्य है. साक्षात परम ऊर्जा हो गई तो फिर श्रीलंका. हो गया ये वही श्रीलंका है उस दौर वाली.
जहां पर रावण था युद्ध हुआ था क्योंकि अब. उसके प्रतीक नहीं दिखता हमें रामसेतु तो. दिखता है कि यहां से प्रभु श्री राम गए थे. वहां साक्षात सब कुछ प्रमाण मौजूद है. लेकिन श्रीलंका को लेकर कई बार कई. हिस्टोरियन कहते हैं कि वो लंका अलग थी ये. लंका अलग है इस पर क्या विचार है आपका. इतिहास के पास. तथ्य होता है अध्यात्म के पास सत्य होता. है और इतना तथ्य हमारे सामने है और. विज्ञान नासा का विज्ञान सिद्ध कर रहा है.
फोटोग्राफ भेज रहे हैं वीडियो पेज की यही. है और अशोक वन वहां है लंका जहां जानकी जी. रहे वहां जाकर हमने भगवत कृपा से एक. अनुष्ठान किया नौ दिन की कथा की तो मेरी. दृष्टि में मैं इतिहास का आदमी नहीं हूं. मैं अध्यात्म का आदमी हूं लेकिन इतिहास. बदलते रहते हैं अध्यात्म बदलता तो मेरे. अंतकरण की प्रवृत्ति तो कहती है कि यही. लंका होनी चाहिए बात हजारों साल हो गए.
कितना इतना परिवर्तन हुआ भोगा आपको जल का. परिवर्तन भूगोल का लेकिन आत्म प्रतीति. मेरी ये कहती है कि यही लंका बाकी तो सब. कोई कहते हैं यहां है यहां लेकिन हम तो. इसी लंका में ही राम गए थे उसी लंका में. हम जा रहे हैं। अच्छा बापू जब मैं आपके. बारे में पढ़ता हूं तो मैंने पढ़ा कि आप. 90 से अधिक जगहों पर राम कथाओं को कर चुके. हैं। श्रीलंका गए हैं, दक्षिण अफ्रीका, केन्या गए हैं। यूके, यूएस, ब्राजील, इजराइल, ऑस्ट्रेलिया, जापान सब जगह गए.
हैं। दुनिया में कई जगह ऐसी है जहां पर. अपनी-अपनी रामायण है। अलग-अलग तरह की. रामायण है।. थोड़ा इसको हमको समझाइए। हम लोग तब बहुत. बालक हैं। विश्वामित्र जी ने कहा है. कि चरितम रघुनाथस. शतकोटि प्रविस्तम. राम का चरित्र शतक कोटि है। कभी एक श्लोक. में भी है। दो पंक्ति में भी है। कभी एक. सूत्र के रूप में कभी मंत्र के रूप में. कभी एक बहद ग्रंथ के रूप में कभी सद ग्रंथ.
के रूप तो. कई भाषाओं में कई देशों में अपने अपने राम. की चर्चा लोगों ने की क्योंकि राम. राक्षसों के भी है राम वानरों के भी है. राम भीलों के भी है राम आदिवासियों के है. वनवासियों के है नगरवासियों के है ग्राम. वासियों के भीलों को कोल किरात अहल्याओं. का शबरीियों का विभीषणों का पत्थरों का. सबका राम है। तो.
सूरज की किरण पड़े एक लाख घड़े हो पानी से. भरे तो एक लाख घड़े में सूरज दिखता है।. सूरज एक है लेकिन जितने घट जितने अंतकरण. इतने राम है तो राम सब कुछ है मेरी दृष्टि. में सर्वस्व है राम तो रामायण में अमुक. प्रसंग विलंब कहा भुंडरी जी ने भी कहा है. रामचरितमानस में कि मैं भगवान के उदर में. गया तो मैंने वहां अनेक ब्रह्मांड देखा नई. अयोध्या देखिए सब नईनई लेकिन राम का रूप. दूसरा नहीं देखा राम एक है इसलिए.
श्रुतियों ने कहा एकम सद सत्य एक है. विप्रा बहुधावदती. हर एंगल से देखने वाले इस सत्य को अपनी. निगाहों से देखता है महसूस करता है एंजॉय. करता है. लेकिन जैसे हर यात्रा का एक अपना एक अनुभव. होता है इतने अलग-अलग देशों में जब आप राम. कथा कहते हैं कोई एक हमको प्रसंग या कोई. एक किस्सा सुना दे जहां पर आपको सबसे अलग. अलग अनुभव हुआ हो किसी एक देश में जो आप. आपको भी थोड़ा सा हतप कर गया हो। मैं बहुत.
सालों से रामायण की कृपा आप सब की शुभ. शुभकामना से दुनिया में घूम रहा हूं।. लेकिन मैं मोरशियस में ही गया था।. तो कभी-कभी ट्रांजिट में वहीं से मैं. निकला वाया वाया एयरपोर्ट पर रहा। तो एक. बार मोशियस वासी लोगों को पता लगा कि. मुरारी बापू जा रहे है तो मुझे एयरपोर्ट. दो घंटे का वहां हमारा स्टे वहां आए बोले. बापू आपको मोरशियस आना चाहिए आप राम. खतरनाक मैंने कहा कभी आऊंगा.
अभी तो दो घंटे मुझे फिर लाइट लेनी है तो. उसने मुझे जो कहा वो मुझे बहुत अच्छी कि. आप अगली बार भले कथा ना करो लेकिन दो तीन. घंटे का आपको यहां ट्रांजिट में रहना ना. है तो हम आपको ले जाएंगे। हमें एक घर. बताना कि जिसके घर में तुलसी का पौधा ना. हो और हनुमान जी की मूर्ति हो. और ना दिखे तो कभी मत आना। मैं गया.
मैं गया और हर घर में आंगन में तुलसी है. हनुमान जी का वो है तो मुझे लगता है कि. राम कथा हनुमान के रूप में तुलसी के रूप. में और मैं तुलसी और हनुमान दोनों को लेकर. घूमता हूं। फिर मैंने यहां कहा कि मैं. यहां राम कथा करने आऊंगा।. अब देखिए हमारे देश में कई लोगों को सोचना. चाहिए। हमारे देश में पहले पुराने जमाने. में आंगन में तुलसी लगती थी। अब आंगन रहे. ही नहीं। सब फ्लैट में शिफ्ट हो गए।. तुलसी के मायने क्या है घर में होने के?
देखो आंगन नहीं रहा वो तो ठीक तो नहीं है।. आंगन होना आंगन है तो घर है।. तो भी बच्चे के कदम आंगन में घूमने चाहिए।. यही हमारा वैभव था। यही ऐश्वर्य था। लेकिन. ये नहीं रहा देश काल के अनुसार फ्लैट बन. गए। लेकिन फिर भी सनातन धर्मियों के फ्लैट. में भी आप छोटी सी अलमारी हो तुलसी का. बालकनी होती है बालकनी वहां रखते और आप. हैरान होंगे कि मुझे तो ऐसा भी कि हमारे.
महवा में एक सुल्तान. राजानी मुस्लिम हम साथ साथ में पढ़ते हैं. मैट्रिक में एक क्लास में तो ये सुल्तान. उसका भाई उसकी एक पीढ़ी थी वो भी अलग हो. गया तो जहां से मैं तलगाड़ा जाता हूं वहां. उसने एक फ्लैट लिया तो मुझे कहा मित्र के. नाते हम साथ साथ एक बार चाय पीने तो आओ. मैंने कहा जाता हूं तो मैं गया तो चाय पी.
मुझे कहा बाबू बालकनी में जरा आओ बोले. क्या मैं हूं मुस्लिम लेकिन तुलसी को पानी. चढ़ाता हूं. तुलसी एक कौम का नहीं है बोले ग्रंथकार. तुलसी भी एक कौम का नहीं तुलसी एक धर्म की. नहीं तुलसी एक परम औषधि है और औषधि को. औषधि को कोई सांप्रदायिक नहीं कह सकता।. औषधि सर्व को निरोगी करने का स्वभाव निकल।. तो मैंने तो यह अनुभव किया है। वो लोग. बालकनी में रखते हैं, कमरे में रखते हैं. पर तुलसी का पौधा इतना सरल है, इतना.
सामान्य है कि कहीं भी रखो कोई शिकायत. नहीं कर। सही बात है। अच्छा बापू आप. गुजरात से आते हैं। अब जैसे मेरा जन्म. अयोध्या के पास हुआ है तो मेरा प्रभु श्री. राम से लगाव होना स्वाभाविक है क्योंकि. मेरे घर के बगल वो रहे। मैंने उनको देखा, किससे कहानियां सुनी। हमारे यहां 33 कोटि. देवी देवता है। प्रभु श्री राम के करीब आप. बचपन से होंगे क्योंकि 11 साल की उम्र से. आपने राम कथा शुरू की थी। तो ये प्रथम. जुड़ाव जो था शुरुआती जुड़ाव ये प्रभु. श्री राम की तरफ कैसे आकर्षित किया?
वो निकट रहते हैं। उसको कम परिचय मिलता. है। दूर वाले ज्यादा परिचय कर लेते हैं।. क्योंकि तुलसी की एक चौपाई है उपजे ही अनत. अनत छबी नहीं। मोती कहते हैं हाथी के. मस्तक में पकता है लेकिन हाथी को उसकी कोई. कीमत नहीं। कोई राजा के मुकुट में कोहिनर. जड़ दिया जाए तो उसकी करोड़ों कीमत कुछ. वस्तु ऐसी है कि पैदा कहीं होती है शोभा. कहीं पाती है। से दूर रहवा और इसी पे हमको. एक हमारे मन में एक सवाल और आता है। मैं.
उत्तर प्रदेश से आता हूं। हमारे यहां. भगवान श्री कृष्ण पैदा हुए। वो आपके. गुजरात में द्वारिका चले गए। हमारे यहां. भगवान कई सारे आए। प्रभु श्री राम आए वो. भी देश दुनिया में चले गए। जन्म उत्तर. प्रदेश में हुआ। यहां से लोग चले गए। तो. मैं उत्तर प्रदेश वासी होने के नाते अपने. को सौभाग्यशाली मानू या ये सवाल पूछू कि. मेरे पूर्वज जो थे उस दौर में नहीं उत्तर. प्रदेश को सौभाग्य मानना चाहिए कि हमारे. यहां प्रभु आए लेकिन हमने उसको हम उसका. महा जानते हैं। तो उसको फैलाना चाहिए।.
उसको विस्तृत करने जाने देना चाहिए कि जाओ. हम तो जग गए सबको जगाओ।. बहुत सुंदर बहुत सुंदर। सभी 12. ज्योतिर्लिंगों पर भी आपने ट्रेन से कथा. का आयोजन किया था। कैसा अनुभव था वो? देखो हमारी कथा की जो गिनती होती है आज. 900 के ऊपर जो हुई हो लेकिन 700 वी कथा. 900 900 वी कथा आई तब मैं असम था कि मैं. किस कथा को 900 कथा बनाऊं। तो हमने कैप कर.
लिया।. यह कथा मुझे भी पता नहीं था कि नव श्लोका. में किस कथा से जोड़ू लेकिन ज्योतिर्लिंग. द्वादश ज्योतिर्लिंग की कथा शुरू हुई तब. मैंने कहा ये नवस कथा इसके साथ कुछ विशेष. अनुभव रहे. कुछ विशेष सबको ज्योति का अनुभव हुआ. ये तो हो गया हो गया आपकी कथाओं में शेरो. शायरी भी खूब होती है बापू और बड़ा आनंद.
भी लेते हम लोग आजकल की नई पीढ़ी वाले लोग. जो है वो वो बड़ा शेयर करते हैं। पिछली. बार आपने एक सुनाया था ये अलग बात है। वो. खामोश खड़े रहते हैं। मगर जो बड़े हैं वो. बड़े रहते हैं। तो हम भी एक शायरी से एक. सवाल पूछ लेते हैं। एक बड़ा अच्छा शेर था. कि इंसान की ख्वाहिश की कोई इंतहा नहीं. होती। दो गज जमीन चाहिए। दो गज कफन के बाद. थी। मुरारी बापू की भी कुछ ख्वाहिशें हैं. कि अध्यात्म से अभी इस जीवन काल में और. क्या-क्या देख करना है, देखना है, जाना. है। देखो. नदी समुद्र को मिलना चाहती है। हमारा आरोप.
है।. नदी ने कभी नहीं कहा कि मैं समुद्र को. मिलना चाहता हूं। मैं नदी की तरफ बहता. हूं। मेरी तुलसी की कथा को तुलसी ने. नदियां कही है। तो हम नदी की मेरी कोई. ख्वाहिश नहीं है। और ख्वाहिश पूरी हो तो. अहंकार आता है। ख्वाहिश अधूरी रहे तो. निराशा आती है। हम क्यों इस झंझट में बहते. हैं गंगा की तरह जहां ले चले। जय श्री. राम। अच्छा प्रभु एक सवाल मेरे मन में और.
आता है नई पीढ़ी में क्योंकि आपसे बेहतर. कोई समझा नहीं सकता। मैंने कई सारे साधु. संतों का इंटरव्यू किया। उसमें नई पीढ़ी. के बच्चे अक्सर एक सवाल देते हैं कि प्रभु. श्री राम और माता जानकी को लेकर जो. अयोध्या लौटने के बाद उनको अलग करने की. बात है। कई लोग कहते हैं कि कांड. उत्तरकांड बाद में जोड़ दिया गया। उस दौर. में नहीं था या हमारे धर्म को अपमानित. करने के लिए कि श्री कृष्ण भगवान के ऊपर. अलग तरह के आरोप लगाए। राम जी के ऊपर वाइफ. को अलग करने का आरोप लगाए। इसकी सच्चाई.
क्या है? नहीं उसके उसकी लोग ऐसी उसके. स्थूल रूप में ही देखते हैं। उसके पीछे. तुलसी के ग्रंथों में भी स्पष्टता है कि. दशरथ जी की उम्र ज्यादा थी. और राम के विरह में उसको उसने प्राण त्याग. दिया। तो उसकी प्रारब्ध वाली उम्र बची थी।. पर जब तक यह उम्र ना पूरी हो तब तक मोक्ष.
ना हो। तो शास्त्र का नियम है कि पिता की. उम्र पुत्र भोगता है।. तो बची हुई उम्र पिता की राम को भोगने की।. पिता की मुक्ति के लिए। अब जब पिता की आयु. राम भोगे तो सीता जी को पत्नी के रूप में. नहीं रख सकता।. एक पुत्रवधू हो गई।. किसी रूप में उनके साथ संसार में नहीं रह. सकते क्योंकि दशरथ जीवन हो गया राम का।.
सीता और राम का पति पत्नी का जीवन नहीं. रहा। तो उसके कोई बहाना बने भले निंदा हो, भले आलोचना हो। और इससे बढ़िया लोकतंत्र. आप कहां देखोगे? एक सामान्य आदमी कहे कि. राम ने जो किया वो हम नहीं करते। और एक. व्यक्ति का, एक मतदाता का, एक नागरिक का. वचन सुनकर राम ने अपनी महारानी को कहा कि.
जाओ भीतरी कारण मिल गए। लेकिन लोकतंत्र को. भी प्रेरणा लेनी चाहिए कि अब और सीता जी. के मन में भी यह भाव था कि ऋषि मुनियों के. साथ 14 साल तक रहे और जो सात्विकता एक. मनुष्य के रूप में जो सात्विकता मैंने छुई. मेरे बच्चों को भी यही सात्विकता मिली।. इसलिए मैं चाहती हूं इस गर्भा स्थिति में. कोई तपस्वी ऋषि के आश्रम में मेरे बच्चे.
और ये ऋषियों के गुरुकुल में तैयार हो और. फिर राज्य में आए पहले सत्य पावे फिर. सत्ता को प्राप्त. कई कारण है जो हमने यही पकड़ा. लेकिन ये उत्तरकांड बाद में नहीं जोड़ा. गया. तुलसीदास जी ने तो ये प्रसंग लिया ही. क्योंकि मैं बार-बार बोला हूं कि जिसमें. अपवाद हो दुर्वाद हो विवाद हो तुलसी का. इसकी जगत को जरूरत नहीं संवाद हो और तुलसी.
ने संवाद प्रसंग उठाया वाल्मीकि रामायण. में था ये. वाल्मीकि रामायण में भी कहते हैं कि. क्षेपक डाल दिया गया. हां यही यही कह. इसीलिए हम आपसे इसकी स्पष्टता चाह रहे थे. हमारे. जैसे हमारे तीर्थों को हमारे देवताओं को. हमारे इष्टों को भी भग्न करके तोड़ना हटा. देना. ये सब बड़ी. प्रवृत्ति दुष्प प्रवृत्ति चली वैसे हमारे. सत्य सनातन शास्त्रों को भी दूषित करने का.
प्रयास भी किराए पर पंडितों को रख के कर. किया गया. ऐसे प्रसंग. तो तुलसी अवश्य लेते प्रसंग क्योंकि तुलसी. को राम दिखता है हर प्रसंग को वो साक्षी. बनके जैसे कमेंट्री होती है कि कैसा बॉल. गिरा कैसे बैटिंग की कैसे कहां गया ये सब. आंखों देखकर वो तुलसी ने पूरा रामचरितमानस. आंखों देखकर कहा और पहुंचे हुए महापुरुष.
पढ़कर नहीं बोलते देखकर बोलते हैं और. तुलसी ने देखकर जैसे कबीर ने कहा मैं कहता. नहीं आंख ना देखी. सुंदर आज बापू अब हम लोकतांत्रिक. प्रक्रिया में जी रहे हैं। लोकतांत्रिक. देश में राम राज्य को कैसे शामिल किया. जाए? किस व्यवस्था यही बनी रहे? लेकिन. शैली जो है वह राम राज्य के दौर की आ जाए।. इसके लिए क्या करना चाहिए हमें? रामचरितमानस में उसका स्पष्ट जवाब है।. यदि समाज स्वीकार तो.
आजकल के दुनिया के लोकतंत्र में केवल. लोकमत लिया जाता है। केवल लोकमत हम सब. जानते हैं। और लोकमत के आधार पर बड़ी-बड़ी. सत्ता पद भ्रष्ट होती है कोई दूसरा आ जाता. है केवल लोक मत. लोकतंत्र में आज के लोकतंत्र में राम. राज्य का लोकतंत्र लाना है तो केवल लोक मत. पर नहीं लोक मत तो आदर देना ही है लेकिन. साधु मत भी लेना चाहिए.
और साधु. कुटस्थ भी ना हो तटस्थ भी ना हो मध्यस्थ. भी ना हो केवल सत्यस्थ हो ऐसे साधु का मत. लेना चाहिए। जैसे राम वशिष्ठ जी का मत. लेते, भरद्वाज जी का मत लेते, वाल्मीकि का. मत लेते, कुंभज का मत लेते हैं। तो साधु. मत भी लेना चाहिए। वो वो लोकतंत्र लाना. चाहिए जिसको हम राम राज्य कहते हैं। फिर.
वेद मत।. वेद मत माने. सर्व का मंगल, सर्व का विकास और सर्व का. विश्राम चाहे। ऐसे जिसमें मंत्र है, ऐसे. विचार और सूत्र है, उसका भी मत लेना. चाहिए। जो सर्वकालिक है, सनातन है, शाश्वत. उसका भी मत लेना और राजनीतिज्ञों का भी मत. लेना चाहिए। लेकिन ऐसे राजनीतिज्ञों का. जिसकी केवल राजनीति में रुचि ना हो,
राष्ट्र प्रीति में भी रुचि हो। ये चार मत. पर राम राज्य का लोकतंत्र आ सकता है।. रामचरितमानस में वो कौन सा श्लोक है जो. जीवन का मूल मंत्र बन सकता है? एक ही मंत्र है के रघुपति नाम उधारा राम. का नाम रामचरितमानस. राम नाम का विस्तार है वैसे रामचरितमानस.
वैसे राम रामचरितमानस है उसका सार उसका. अर्क. एकमात्र राम है और राम पर्याप्त है राम. पूर्ण है राम संपूर्ण है. राम पर्याप्त. बापू जैसे आपने कहा कि गंगा किसी एक धर्म. की नहीं संप्रदाय की नहीं तुलसी किसी एक. संप्रदाय की नहीं प्रभु श्री राम को लेकर. भी कहा जाता है कि वो किसी एक के नहीं राम. कथा जो है वो केवल सनातनियों के लिए है या.
सबके लिए सबके लिए गणिका गणिकाओं के लिए. अजामिल जो अधम से अधम गणिका अजामिल व्याध. जो शिकार करते थे उनके लिए गिद्ध जो मांस. भक्षी गिद्ध है उसके लिए भी यवन यवन के. क्या व्याख्या मूल जिसको आज हम विधर्मी. कहते हैं यवन कहते हैं मूल यवनों के लिए. भी तुलसीदास जी ने जवन किरात कौन सबकी राम. कथा सबके लिए राम कथा लोकतंत्र कहता है.
गवर्नमेंट ऑफ द पीपल बाय द पीपल की फॉर. मैं कहता हूं मुझे इंग्लिश आती नहीं लेकिन. मैं कहता हूं राम कथा फॉर द पीपल बाय द. पीपल बाय फिर ऑफ द पीपल. ऑफ द पीपल बाबू आपने सेक्स वर्कर और. ट्रांसजेंडर समुदाय जो हैं उनके लिए भी. विशेष कथाओं में राम के स्वीकृति का संदेश. जोड़ा। अभी भी हम उस देश में रहते हैं. जहां पर ट्रांसजेंडरर्स को भी हम फुली.
एक्सेप्ट नहीं कर पाए हैं। सेक्स वर्कर्स. को तो हम बड़ी उपेक्षित निगाहों से देखते. हैं। ट्रांसजेंडर को लेकर भी हमारा वही. नजरिया है एलजीबीटी के समुदाय को लेकर।. इनमें जो राम जी के संदेश या स्वीकृति को. आपने जोड़ा ये क्या मायने था? क्योंकि. समाज में बहुत सारे लोग आपको सुनते हैं।. हम चाहते हैं थोड़ा इस पर आप प्रकाश डाले।. ये करना ही चाहिए. क्योंकि हर बुद्ध पुरुषों ने ये किया है।. बुद्ध भगवान ने गणिकाओं का स्वीकार किया।. एक शिष्य गणिका के यहां चातुर्मास करने.
जाना चाहता था। बुद्ध ने मंजूरी दी कि तू. जा सकता है। क्योंकि तू उसको सुधारेगा तू. बिगड़ेगा नहीं। ऐसा कहकर और कई शिष्य. आलोचना करते थे बुद्ध की कि आपने पूरे. धर्म विरुद्ध बोले नहीं चिंता मत करो चार. साल पूरा होने दो उसके पीछे गणिका भी मेरे. पास बुद्धम शरणम गच्छामि कबीर के साथ भी. बातें जुड़ी है तुलसी के साथ भी जुड़ी है. रामकृष्ण परमहंस भी दौड़कर कबीर कभी उसके. उसके घर उसकी कुछ खाने के लिए जा रहे तो.
वंचितों को उपेक्षितों को केवल अपराधी और. गुनहगार कह करके उसको वो कर उसको और मैं. समझ रहा हूं कि ये जैसे एक घास की घास का. समूह पड़ा हो अगल बगल में पानी ना हो कोई. दूसरी संभावना ना हो और उसमें आग लग जाए. तो आप क्या करेंगे मिट्टी एक आदमी डालेगा. तो कैसे आग क्षम तभी समझदार आदमी की जितनी.
पुलिया आग से बचा ली जाए तो राम कथा. जितने को बचाया जाए को बारिता ना जाए उसी. का एक विनम्र प्रयास. मुरारी बापू आज के दौर में लोग दुखी बहुत. है. हर चीज में कष्ट है जिसके पास सब कुछ है. वो भी महसूस करता है कि भगवान सब कुछ नहीं. दिए हो हम भगवान का शुक्रिया नहीं अदा. करते खाली शिकायत करते रहते हैं.
दुख एक क्या है आपकी नजर में और दुख से. उबार कैसे पाए. एक वस्तु तो आध्यात्मिक दृष्टि से हमारी. हमारा जो भीतरी स्वरूप है वो सुख स्वरूप. आनंद स्वरूप दुख स्वरूप है. हमें आनंद मिलना चाहिए जैसे लोकमान्य तिलक. ने कहा कि स्वराज मेरा अधिकार. जन्म सिद्ध अधिकार है वैसे परम सुख अनुभव. करना हमारा जन्म सिद्ध अधिकार लेकिन कहीं.
कर्म का कारण है और साधन मिला है साधन तो. कितने है 60 70 साल का इतिहास मैं कहूं तो. कुछ नहीं था पर कितने तो साधन है सुविधा. है लेकिन शांति नहीं है कहीं चूक है कहीं. क्योंकि हम साधन को ही साध्य मान बैठे हैं. ये चश्मा मेरा साधन है कि मैं ठीक से. देखूं लेकिन मेरा साध्य तो मेरी आंख है ये.
आंख है तो चश्मा. वरना चश्मा किस आंख है तो अंजन की. तुलसीदास जी एक सूत्र लिखते हैं अंजन काहे. आंख को फूट जब तुम्हारी आंख फूट जाए तो. अंजन कजरे की क्या जरूरत है साधन बेकार है. साध्य बचना चाहिए आंख बचे तो फिर दूर के. निकट के चश्मे को साधन के रूप में आप यूज़. करें डेंस के तो कहीं हम चूक कर गए हैं कि. साधन को ही सब कुछ मान लिया. आंख का इतना जतन किया हो तो चश्मा नहीं.
लेना पड़ता दांत का इतना जतन किया होता तो. रिप्लांट नहीं कराना पड़ता। मूड भूल गए, कहीं चुक गए। इसीलिए ये परिस्थिति हमारी. पीढ़ी में मुरारी बापू पेरेंट्स की एजिंग. कई बार बच्चों को परेशान करती है कि अब. धीरे-धीरे लोग बड़े हो रहे हैं। एक रोज खो. देंगे। आपने भी अपने जीवन में एक करीबी. व्यक्ति को खोया। इस खोने के डर और इस. जीवन मरण की प्रक्रिया को आप कैसे देखते. हैं? क्या यह चिंतित करना चाहिए? सहज.
स्वीकार करना चाहिए और इस दुख से कैसे. निकले? क्योंकि ये सोच कर कई बार बड़ा. विचलित कर देता है मन। अब ये कठिन है. उसमें स्थिर रहना अपने आप को क्योंकि साधु. के हृदय में तो संवेदना और ज्यादा होती. है। कोई चला जाए कुछ हो जाए तो उसको पीड़ा. कम नहीं होती। लेकिन साधु की तुलना वृक्ष. के साथ की गई है। हमारे अध्याय वृक्ष. वृक्ष कभी रोता नहीं। एक पत्ता पीला हो.
गया जड़ गया। रोता नहीं। और एक कोपले नहीं. फूटी उसका स्वागत करता है। तो यह संसार का. जो क्रम है समय आने पर सब चले जाते हैं।. इसीलिए. थोड़ा राम स्मरण थोड़ा आध्यात्मिक जीवन जो. हमें संतुलित रखे। आखरी कुछ सवाल है। एक. व्यक्ति जो प्रभु श्री राम का जाप करता है. और एक व्यक्ति जो राम नाम जाप नहीं करता.
है। एक व्यक्ति जो ईश्वर से जुड़ा है और. ये व्यक्ति नहीं जुड़ा है। क्या फर्क होता. है दोनों में? राम नाम का जाप करे और दूसरे की निंदा करे. तो जाप का बहुत बड़ा महत्व है। लेकिन किसी. की भी निंदा ना करे। सबका शुभ चाहे। वो. भले राम का जाप ना करे। बड़ा व्यापक है।. सुंदर वो राम को नहीं देख पाएगा। राम उसको. देखेगा।. तो फिर जीवन में क्या करें? निंदा ना.
करें, घृणा ना करें। जीवन में सबका भला. करें। चाहे पूजा पाठ ना करें या पूजा पाठ. करके भी ये सारी चीजों का स्मरण कर ले तो. ज्यादा बेहतर है। एक आइडियल जीवन आपकी. परिभाषा में कैसे होगा? नहीं ये हम यह. नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए हम पूजा करते. हैं।. पूजा की आड़ बहुत अच्छी है। पूजा की आड़. में ऐसी ऐसी वस्तु को छिपाना बहुत आसान. है। बाकी जो ईमानदारी से जीवन जिए। गांधी.
जी को तीन घंटे किसी ने पूजा करते देखा।. दो टाइम प्रार्थना करता था आदमी और. प्रार्थना का एक मिनट चुकता है कि आधा. घंटा घंटा जो हो तो लेकिन सत्य और अहिंसा. को लेकर विश्व पूज्य बन गया तो सत्य बोलना. सत्य सोचना सत्य में शामिल करना सत्य. स्वीकारना सत्य सहन कर लेना. यानी बहुत धार्मिक होने से बेहतर है कि. बहुत अच्छे इंसान आप बने। नहीं धार्मिक. होना बुरा नहीं है। नहीं दोनों की अगर आप.
तुलना करें एक इंसान अच्छा इंसान होना. हमें शायद ईश्वर का आशीर्वाद ज्यादा. मिलेगा।. लेकिन मेरा कहने का क्या कि. हमारी वस्तु हमारी इंसानियत राम से जो. जुड़ी रहेगी ना तो इंसानियत का अहंकार. नहीं आएगा।. वरना कई लोग कहते हैं हम समाज सेवा करते. हैं। नेत्र यज करते हैं। हम ये नहीं करते।. हम दंत यज करते हैं। हमारी तो पूजा ही. हमारे हमारे गुजरात में भी कई व लोग कहते.
हैं हम पूजा पाठ नहीं करते मुरारी बाबू की. तरह कथा नहीं करते बापू की कथा में हम तो. इंसानियत का काम लेकिन इंसानियत का अहंकार. ठीक नहीं है. मैं समाज सेवक हूं इसका अहंकार नहीं. अहंकार मुक्त सद प्रवृत्ति में भगवत पूजा. आपकी यात्रा चल रही है इसमें युवा आते हैं. और युवा अगर आते हैं तो उनका लगाव कैसे है. रामली का. उसमें तो कितने आते वो देखो लेकिन. इंटरव्यू करने वाले सब युवा आते हैं।.
युवा. नहीं जैसे मेरा आपसे तो विशेष मोहब्बत है।. मैं तो सब छोड़छाड़ के आपसे प्रेम में चला. आया भागा हुआ। लेकिन मुझे जानना ये है कि. जो युवा राम कथा सुनने स्पेशली आते हैं।. कभी आपने अनुभव किया क्या बदलाव उनका गुजर. रहा है? और आज की पीढ़ी को आप भगवान से. जुड़ा हुआ देखते हैं? बहुत बदलाव।. भगवान के किसी फॉर्म के रूप में भगवान को. ना भी माने लेकिन प्रेम के कारण रो रहे.
हैं। करुणा उसको दिल को छू रही है। सत्य. के प्रति उसकी अभिपक्षा बढ़ी है। तो. युवान बहुत आ देश विदेश से युवा और ऐसे. युवान आ रहे हैं कि जो समर्पण करने के लिए. हमारी ये ट्रेन चल रही है तो किसी को ये. हो कि हमको अच्छी सीट मिले हमको अच्छे. कंपार्टमेंट में जगह मिले हम सब एक साथ रह. सके तो हम कहते हैं कि कुछ युवानों को कह.
दो कि उसको वहां बैठने दो उसी समय बापू ने. संदेश भेजा है वही हमारे हमको तो युवान. जितना समझ युवान चाहता है उसको कोई प्यार. करे. हम निंदा करते रहे युवा पापी है भ्रष्ट है. भटकाव भटकते रहते हैं ये नहीं इससे कभी. कभी कभी उसके कंधे पर हाथ रखकर प्यार करना. चाहिए और प्रेम प्रेम जितना परिवर्तन कर.
सकता है तुलसीदास के रामचरित्रों में. प्रेम आदि में है प्रेम मध्य में. प्रेम. मुझसे किसी ने कहा था प्रेम इंसान का बेटर. वर्जन निकाल देता है। पिछली बार हमने आपसे. पूछा था प्रेम क्या है? बड़ा वायरल हुआ. था। क्या परिभाषा अभी आपकी नजर में है। इस. यात्रा में आप भी इवॉल्व हुए होंगे। प्रेम. की परिभाषा आप क्योंकि आपने बहुत जिक्र. किया कि युवाओं को थोड़ा प्यार दीजिए।. चीजें परिवर्तित हो जाती है। तो ये मैं. युवाओं के दृष्टिकोण से पूछ लेता हूं।. युवा प्यार में पढ़ते भी बहुत हैं। उसमें.
परेशान भी बहुत होते हैं। रोते गाते भी. बहुत हैं। सच्चा प्रेम क्या है? आज सच्चा. प्रेम. प्रेम झूठा होता ही. झूठा हो प्रेम नहीं वहम है ये ब्रह की है. भ्रम है कैसे अंतर पता करें अंतर कैसे पता. आत्मा कहेगी आत्मा. कुछ समय समय लगेगा भ्रम और ब्रह्म का पता. लग जाएगा तो प्रेम परमात्मा है जीसस ने. कहा प्रेम परमात्मा.
गांधी ने कहा ईश्वर सत्य है नहीं सत्य. परमात्मा. और बुद्ध ने कहा परमात्मा करुणा नहीं. करुणा परमात्मा. तो प्रेम सब कुछ है और राम को जो सबसे. ज्यादा राम को पूजा प्रिय नहीं प्रिय पूजा. करनी चाहिए मैं भी करता हूं ये अपनीप. मर्जी लेकिन तुलसीदास जी लिखते हैं राम ही. केवल प्रेम केवल प्रेम इसके पीछे कोई हेतु.
नहीं केवल प्रेम वही वही राम को प्रेम है।. आखिरी सवाल बापू कई आपकी यात्रा में शामिल. हुए। कई आपकी यात्रा को डिजिटल माध्यम से. देखेंगे, सुनेंगे, समझेंगे। जो आपकी. यात्रा में शामिल नहीं हो पाए और इस. यात्रा से सीखना चाहते हैं वो अपनी दैनिक. दिनचर्या में श्री राम को कैसे शामिल. करें? सनातन को कैसे शामिल करें? क्या. जीवन यापन हो? क्योंकि आज के दौर में लोग. तैयार हो के ऑफिस जा रहे हैं। स्कूल जा. रहे हैं, कॉलेज है, कंपटीशन है, समय की. बड़ी ममारी है। उस दैनिक दिनचर्या के बीच.
में क्या करें? या एक जीवन जीने की शैली. थोड़ा सा सीख ले जिसको अपने जीवन में अमल. कर सके क्योंकि आपकी बात सुनते सब हैं। एक. तो पहले तो श्रवण करें केवल पंडाल में आकर. श्रवण करने की जगह मीडिया ने बहुत उपकार. कर दिया दुनिया को उसी क्षण जो बोला जाए. पूरे विश्व में जब तो पहले तो श्रवण करें।. गुरु नानक देव ने बहुत अच्छी बात कही कि. सुनो. सुनते ही तुम्हारी बुराइया निकल। तुम सुनो. कुछ भी हो सुनो। पहले श्रवण करें।.
फिर जो श्रवण किया है उसका चिंतन करो, स्मरण करो और उसके बाद सत्य प्रेम की शरण. ग्रहण करो। ये सब मैसेज. बड़ा बड़ी प्रसन्नता हुई। जी. आपके दर्शकों के लिए भी हमारी इस राम. यात्रा की और बहुत-बहुत शुभकामना और आपकी. भी जैसे हर एक हमारे गांव में छोटा सा. यज्ञ नवरात्रि में होता था देहात में तो.
कोई एक चम्मच घी लाते थे कोई एक कटोरी में. घी लाते थे सब अपनी अपने अपनी ही आचार्य. को वैसे ये जो प्रेम यज चल रहा है इसमें. आपका भी आहुति है उसकी मैं कदर करता हूं. उसका स्वागत करता हूं सबके लिए सर्वे. सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निरामया. सर्वे भद्राण पसंतु मा खुश रहो. आपका भगवान का आशीर्वाद बना रहे लोग अक्सर. हमसे कहते हैं कि हम काला कपड़ा बहुत. पहनते हैं हमने कहा बापू से हम थोड़ा.
इंस्पायर हो रखे हैं. प्रणाम बापू. काले रंग में फायदा है कि दूसरा रंग नहीं. लागू होता. हां. ये आज आज आपके साथ था इसलिए हमने बदल दिया. कि हम चाहते थे आपको हम आप ओजी है हमारे. है ना ओरिजिनल. वरना सारे पॉडकास्ट हम लाइक नहीं करते. वाह वाह से.
