Unplugged FT. Morari Bapu | Motivation | Spirituality | Baba Bageshwar | Ram Mandir | Shubhankar
व्यास पीठ पर बैठकर मरी बापू ने अली मौला. शायद कहीं कहा कुछ कहा था कोई कारण नहीं. था धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी हैं आपकी. क्या राय है उनको लेके मैं सबसे प्रमाणिक. डिस्टेंस किए हुए बैठा ह मेरी खामोशी ने. हजारों जवाबों की लाज रखी प्रेम क्या है. प्रेम केवल आंसू है डिप्रेशन एंजाइटी से. कैसे निकले मुझे नौ दिन दो मैं आपको नौ. जीवन दूंगा लोगों ने कहा कि मुरारी बापू. काला टीका क्यों लगाते हैं काला गमछा जो. आप पहनते हैं वो भी उसी का हिस्सा है मण. करणी का घाट जब हम जाए तो कई सारे ख्याल. मन में आते थे लोगों के मृत्य होने के बाद. तो कई बार लोग कहते हैं कि आके स्नान कर. लो थोड़ा बचो जा से आपने कहा कि जो चिता.
है व अशुभ जगह नहीं है वो शुभ जगह है तो. वो हिट करती है कई बार कि यह क्यों कहा जा. रहा है काशी महा स्मशान है मशान जैसी. पवित्र जगह कौन है कई और खबरें आई जहां. लोगों ने शमशान के आसपास विवाह भी करवाया. मैंने हमने करवाया क्या अनुभूति ऐसी होती. जो आपको अच्छा लगता है योग में भोग है और. भोग में योग है बहुत गहरी बात कही आपने. वाली किस उमर में ईश्वर को समर्पण करें. परमात्मा को देना है तो ताजा तरो आजा जीवन. देना चाहिए सड़ा हुआ बूढ़ा शरीर बुद्ध जी. हमारे विष्णु जी वाले अलग है अयोध्या में.
अभी हाल फिलहाल में एक बहुत बड़ा उत्सव. हुआ जब यह आंदोलन मुखर हुआ था तब मुखरता. से लगे थे क्रेडिट लेने नहीं आए आप उनमें. से एक है इंसान के ख्वाहिश की कोई इंतिहा. नहीं होती दो गस जमीन चाहिए दो गस कफन के. बाद अयोध्या में तो हो गया अब कई आशावादी. लोग हैं वो कह रहे हैं कि और भी कई जगह है. हम प्रतीक्षा करें अदालत निर्णय करे ये और. बात है कि वह खामोश खड़े रहते हैं लेकिन. जो बड़े होते हैं बड़े ही होते हैं बहुत. बड़ी बात है.
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि के पास. जन्म लेकर और 30 साल की आयु जीने के बाद. केदारनाथ भूमि के पास मुरारी बापू के साथ. बैठना मेरे लिए सौभाग्य का विषय है य तो. बराबर की कुर्सी पर बैठने का हक नहीं है. मेरा लेकिन शायद पूर्वजों कुछ आशीर्वाद. होगा कि बापू जी आज आपसे मुलाकात करने का. इस तरह से मौका मिला और समकक्ष बैठकर आपसे. सवाल जवाब करने का यह अनुभव मुझे लगता है. बड़ा अच्छा रहेगा आप ही की लाइन सुन रहा. था कहीं मैं. कि अगर वो पूछ ले हमसे किस बात का गम है.
तो किस बात का गम है तो हमने भी आज दुनिया. से कहा कि मुरारी बापू से मुलाकात कर रहे. हैं कुछ आपको ही पूछना हो तो आपके माध्यम. से हम पूछ ले कुछ हम पूछ लेंगे तो सबसे. पहला सवाल तो यही है कि केदारनाथ भूमि के. पास आप आए हैं राम कथा. करने क्या लगाव आपका है और आजादी के एक. वर्ष पहले आपका जन्म हुआ था बड़ी लंबी. यात्रा रही आपकी. जी 46 में मेरा जन्म हुआ और मैं अभी 79. रनिंग हूं.
और मैं 14 साल का था तब से कथा यात्रा में. हूं. निरंतर एक प्रवासी बनकर घूम रहा हूं तो. मुझे तो हर. कथा कुछ ना कुछ रूप में विशेष लगती है कुछ. विशेष यात्रा लगती है और फिर जैसे जैसे. ऊंचाई पर आता हूं हिमालय में तो कुछ और. अनुभव होते. हैं और. [संगीत].
हर वक्त कुछ. नया नई महसूस होती है और फिर वो मैं. व्यासपीठ से मेरे श्रोताओं को बांटता हूं. प्रसाद के रूप में तो मेरे लिए नव दिन की. एक. कथा एक नया युग शुरू हो जाता है मानो एक. मेरा एक नया युग शुरू हो जाता है इसी रूप. में मैं देखता हूं इसीलिए इस उम्र में भी. मुझे थकावट नहीं लगती.
उत्साह वर्धन होता है और शरीर की उम्र. होती है तो ऊर्जा तो कम होती है उत्साह कम. नहीं होना चाहिए यह मैं महसूस करता हूं. बापू हम लोग देव भूमि में है और कहते हैं. कि देव भूमि की हवा जो है वह अलग तरीके से. आपको ऊर्जा भी देती है कई बार हमने महसूस. किया है जब छोटे थे थोड़ा डिप्रेशन या. परेशान होते थे तो आते थे हरिद्वार में. ऋषिकेश में नहाते थे और उसके बाद एक नई. ऊर्जा का संचार होता था या केदार नाथ जाए. जी आपकी नजर में देव भूमि की भूमिका क्या.
है कितनी महत्त्वपूर्ण है कितनी अलग है. क्योंकि आप तो संसार पूरा देखे हुए हैं. मैं हर वक्त ऐसा मानता हूं और कहता हूं कि. यह मेरी दृष्टि में पहाड़ नहीं है यह सब. साधना रत ऋषि मुनि. बैठे उसमें केवल हम तो जड़ में भी चैतन्य. खोजते हैं और जड़ में सुश पत चैतन्य होता. है तो मेरी दृष्टि में यह य पूरा देव. भूमि देव से भरी हुई है और पग पग पर र्थ.
है और सबसे बड़ी बात जहां जंगल हो जहां. पवित्र नदी बहती हो जहां अचल पहाड़ हो. और अध्यात्म जगत की बहुत बड़ी मात्रा में. चेतना हों ने जहां साधना की. हो उसकी ऊर्जा तो आज भी काम कर रही है और. कोई भी यहां आएगा व अनसुन नहीं रह.
पाएगा हम बर्तन में अचार बनाते हैं तो. उसको कितने ही केमिकल डालकर धो डालो तो भी. उसकी खुशबू रहती है एक सामान्य चीज की महक. बनी रहती है तो यह भूमि तो बहुत ऊर्जा से. भरी हुई हो और इसमें भी गंगा अलकनंदा मंदा. किनी इसका क्या कहना तो ये. पूरा चैतन्य से भरा हुआ.
पूरा वातावरण है जी अब बात यह है कि हम. कितना रिसीव कर सकते हैं उस पर यह डिपेंड. करता है वो तो बरस रहा है लेकिन हमारी. औकात हमारी क्षमता कितनी है उस पर जैसे नई. पीढ़ी के लोग है उत्तराखंड सब आते हैं. दिल्ली वाले खास तौर पर घूमने आते हैं कि. ठंडा वातावरण होगा आजकल एक नया ट्रेंड भी. चला है कि जो देवभूमि पवित्र स्थान है. वहां लोग जाते हैं रील बनाने के लिए आप भी. देखते होंगे कि सब जा रहे हैं और एक सोशल.
मीडिया पर बन गया लोग देखते भी ज्यादा है. और फॉलोअर भी बढ़ते हैं तो जब आप 79 में. उस जज से पूरा नए बच्चों को देखते हैं तो. इसे आप कैसे देखते हैं अच्छा मानते. हैं नहीं किसी भी बहाने मर्यादा तो रहनी. चाहिए तीर्थों. की लेकिन किसी भी. बहाने यहां वह आएंगे तो उसको कुछ ना कुछ. तो. छुए यद्यपि. देव भूमि का व्यापारी करण ना.
हो उसको केवल हिल स्टेशन के रूप में हम ना. देखें ये होली स्टेशन है हिल स्टेशन नहीं. है और इसी रूप में देखे बाकी जो आएगा एसी. कमरे में किसी को धक्का दे दो तो शीतलता. महसूस करेगा ही सही बात है या तो किसी भी. मानसिकता से गए हो तो युवान को मर्यादा तो. रखनी चाहिए लेकिन किसी भी बहाने इस तरफ आए. तो यहां से कुछ लेकर जाएगा सही बात है और.
ये जो युवानी है आजकल की नए परिंदों को. उड़ने में वक्त तो लगता है थोड़ा समय तो. लगता है लेकिन परिवर्तन होता है सुंदर. मुरारी बापू एक सवाल बहुत लोगों ने हमसे. कहा कि आपसे हम पूछे कि आपका नाम मुरारी. बापू कैसे पड़ा क्योंकि ओरिजिनल नाम शायद. मुरारी दास प्रभुदास हरियाणवी. है मेरा नाम मुरारी दास मेरे पिताजी का. नाम प्रभुदास और हरियाणी अच्छा हरियाणी. हरि.
हा ये हमारी सरनेम है वो अपभ्रंश है हम. मूल निबार की परंपरा में हरि व्यास जी. आचार्य हुए उसी परंपरा के तो गुजरात में. आते आते हरि व्यासी का हरियाणी हो गया. अच्छा अपभ्रंश हो गया और यही चल रहा लेकिन. हम जिस वैष्णव साधु कुल में मेरा जन्म हुआ. है जी उसमें बच्चा जन्मता है तब से लोग. बापू कहना शुरू करते हैं जी एक छोटा बच्चा. होगा तो भी लोग बापू ही कहेंगे जी तो यह.
बापू शब्द हमें जन्म से लग जाता है तो यह. तो बाहर बाकी हम छोटे थे तब मुरारी बापू. के रूप में ही सब मुझे बुलाते थे गुजरात. में से बापू शब्द का प्रचलन है साधुओं के. लिए बाप बाबा बापू ऐसा है और क्षत्रियों. को जो क्षत्रिय लोग है उसको भी लोग बापू. कहते हैं य जैसे गांधी जी को लोगों ने. बापू कहा व. तो राष्ट्रपिता बन गए तो बापू एक सम्मान.
वाचक एक श्रद्धा वाचक संबोधन है जी कुछ. सवाल आपको लेकर और थे उसके बाद में युवाओं. को लेकर धर्म को लेकर समाज को लेकर बात. करूंगा आप में भी लोगों की बड़ी उत्सुकता. है क्योंकि आपको लोग सुनते हैं और मैंने ज. हजारों की संख्या में लोगों ने लिखकर भेजा. कई सारे सवाल जैसे एक सवाल था कि ज हम लोग. छोटे थे साधु महात्मा से मिलते थे अभी भी. वृंदावन जाते हैं अयोध्या जाते हैं मेरा. तो घर ही है तो वहां प चंदन लगाते हैं वो. अक्सर काला नहीं होता है लोगों ने कहा कि. मुरारी बापू काला टीका क्यों लगाते हैं हम. निबार की परंपरा परंपरा के जो हमारे.
आचार्य है निबार के और हमारे में काली. बिंदी एक प्रवाही परंपरा का एक एक प्रतीक. है इसीलिए हम काली बिंदी लगाते हैं तो आप. आप देखिए कि ये बंगाल के जो साधु है कुछ. राधा कृष्ण को मानने वाले हैं वह भी काली. भस्म लगाते हैं वारकरी संप्रदाय. महाराष्ट्र में देखिए वो भी तो हमारी तो. पूरी परंपरा ये काली बिंदी की है जैसे कोई.
लाल टीका करता है कोई केसरी करता है कोई. भस्म का टीका करता है तो हमारी ये हमारी. आचार्यों की परंपरा है जी तो इसलिए हम. काला गमछा भी उसी का हिस्सा है बापू काला. गमछा जो आप पहनते हैं वो भी उसी का हिस्सा. है ना वो उसी का हिस्सा नहीं है वो वो. मेरी दादी मां थी वो काले कपड़े पहनती थी. और मैं उसकी गोद में उसके साथ बड़ा हुआ. हूं तो काले रंग से इतना इतना लगाव हो. चुका है.
और चुनरी ओढू तो रंग चुए रंग बेरंगी होई. मैं तो ओढू काली कामली जिसमें दूजा रंग न. लागे कोई राधा भी काली कमली रखती थी भगवान. कृष्ण भी काली कमली रखते थे तो कृष्ण. उपासक है तो मैं पहले से ही काले रंग काला. रंग मुझे बहुत प्री है उसकी मेरी आत्मीयता. इसलिए मैं अक्सर धर्म जगत में कोई काली. शोल नहीं रखते के रखते तो ये प्रश्न उठता. है.
लेकिन ये एक ये भी एक महत्व का अब जैसे. हमको भी काला बहुत पसंद है हम भी सारा. इंटरव्यू काला पहने करते हैं लेकिन जैसा. आपने कहा ना कि धर्म जगत में लोग नहीं. इस्तेमाल करते तो कई बार लोग मन में होता. है कि अलग कैसे है क्यों इसकी वजह है और. देखो हमारे हमारे साधु परंपरा में काली. कमली वाले एक पंथ है जो काली कमली वाले. महात्मा लोग है जो अन क्षेत्र चलाते. बद्रीनाथ पै दल जाते वो भी काले कपड़े. पहनते हैं उदासीन साधु भी काले कपड़े.
पहनते हैं हमारी ही परंपरा में हमारी. सनातन वैदिक परंपरा में तो ये काली शल. इसलिए सब प्रश्न करते कई लोग कहते हैं कि. एक काली साल में कुछ है तो मैं कहता हूं. ये आप ले जाओ आप मुझे दूसरी दे दो इसमें. और कुछ नहीं है एक लगाव है अच्छा मुरारी. बापू जैसे हम लोग बनारस हम लोग छोटे थे तो. बचपन से बनारस जाया करते थे स्नान करने के. लिए तो मण कणी का घाट जब हम जाए तो कई. सारे ख्याल मन में आते थे और जब कभी भी. ऐसा भोज होता है लोगों के मृत होने के बाद.
तो कई बार लोग कहते हैं क्या आके स्नान कर. लो या थोड़ा बचो जाने से आपने इसको लेकर. भी धारणा बदलने की कोशिश की आपने कहा कि. जो चिता है वह अशुभ जगह नहीं है वह शुभ. जगह है तो यह क्योंकि एक बदलाव है एक वि. सो चली आ रही है तोव हिट करती है कई बार. कि यह क्यों कहा जा रहा है क्या मकसद है. अलग दिखाने के लिए है अगर सही है तो क्या. इसके पीछे विचारधारा सोच है तो यह कहां से. आया और इसके पीछे क्या सोच थी आपकी देखिए. कोई अलग कुछ नया दिखाने की चेष्टा नहीं है.
एक सहज है भगवान शिव स्मशान स्वा क्रीड़ा. स्मर हर पिशाचा सह चरा चिता भस्मा लेप गरल. मनम दि पट धरो शिवजी स्मशान में रहते और. काशी महा स्मशान है उसको महा स्मशान कहा. तो स्मशान जैसी पवित्र जगह कौन है और. वैराग की भूमि है त्याग की भूमि है आज भी. महादेव वहां निवास करते हैं तो मैंने कोई.
नई बात नहीं कही स्मशान में कथा शिव जी आज. भी कैलाश पर कथा करते हैं जहां शिव है. वहां स्मशान होता ही है तो स्मशान में कुछ. करने से शव शिव बन जाता है जो मुर्दा है. जो शव है वो शिव में परिवर्तित हो जाता है. भीतरी परिवर्तन होता है तो ये कुछ अलग. दिखाने के लिए नहीं उस समय जब मैंने मानस. मशान की. काशी.
में किसीने कोई गलत उसका अर्थ नहीं नि. उसके बाद कई और खबरें आई जहां लोगों ने. शमशान के आसपास विवाह भी करवाया है मैं. हमने करवाया मेरे गांव के स्मशान में हमने. करवाया था तो इसमें क्या बनारस में विवाह. नहीं. होते पूरा प्रदेश मशान है वहां तो बहुत. शादी दाम धूम से होती बड़े बड़े रिसेप्शन. होते हैं तो य स्मशान जैसे पवित्र स्थान. में हो गृहस्थ जीवन में प्रवेश करे तब से. ही फ्यूचर में वैराग दिखने लगे तो बड़ा.
अच्छा है इसमें क्या है यह भोग योग में. भोग है और भोग में योग है बहुत गहरी बात. कही आपने वाली अच्छा यह जीवन मरण जो है कई. बारसे हम कहते कि आपने कहा कि शमशान अशुभ. जगह नहीं है य मौत से इतना डरते सब क्यों. क्योंकि अटल सत्य वही है जीवन तो आज है कल. चला. जाएगा लोगों को भयावह बता दिया है.
मैं सावन महीना में जब मौन रहता पूरा. महीना कथा नहीं करता मौन रह जाता तो मैं. ज्यादातर रात को मेरे महुआ से पैदल चलकर. लगा जड़ा चला जाता और हमारा स्मशान जहां. है वहां बैठा रहता था आज भी कई महापुरुष. ऐसे हैं कि जो रहते लेकिन इसके पीछे मेरा. कोई और कोई कोई नहीं मुझे स्मशान अच्छा लग. मैंने तो कभी-कभी हमारे देहात में कथा. होती है तो मुझे पूछे कि आपका निवास कहां.
रखे मैंने कहा स्मशान भूमि को स्वच्छ कर. लो दो चार पड़ बू दो और घास पूस की कुटिया. बना दो मैं यज्ञ कुंड रखूंगा और मैं वहां. रह जाऊंगा ये शमशान आपको आपने कहा अच्छा. लगता उसमें क्या अनुभूति ऐसी होती जो आपको. अच्छा लगता है इसीलिए कि शिव तत्व है वहा. बसम है शिव. है. और वर्तमान में जिया जाता है वहां निरंतर.
वर्तमान की याद रहती है भूतकाल मिट जाता. है जो लोग भूत भूत करते हैं वो मेरी. दृष्टि से भूत चला जाता है और प्रेत प्रयत. करते वह भविष्य की चिंता आदमी वर्तमान में. जी सकता है तो ये मुझे तो बहुत अच्छा लगता. है इसलिए आत्माएं होती है आत्माएं होती. हैं आत्मा हां आत्मा तो होती है जैसे. शमशान घाट प कई बार लोग कहते हैं हम लोग. किस्से कहानिया दादी दनी सुनते थे कि. आत्माएं भटकती रहती है अगर सही से उनका. अंतिम संस्कार ना हो आत्मा तो है लेकिन.
मुझे कोई ऐसा अनुभव नहीं कभी नहीं हुआ. नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं मैं कभी डरता नहीं. कुछ बातों से मुझे कभी बय नहीं लगता मुझे. कहीं भी आप छोड़ दो मुझे बय नहीं लगता मैं. डरता प्रभु श्री राम की कथा आप यहां कर. रहे हैं अयोध्या में अभी हाल फिलहाल में. एक बहुत बड़ा उत्सव. हुआ कईयों का यह मानना था कि यकीन नहीं था. हम जैसे जर्नलिस्ट जो थे हमें भी लगता. नहीं था कि शायद ऐसा कुछ हो पाएगा.
आप 90 के दशक में भी इसको लेकर काफी वोकल. थे आपके अंदर क्या चला कई लोग ऐसे हैं जो. बाद में टीवी पर नहीं आए बट जब जरूरत थी. जब यह आंदोलन मुखर हुआ था तब मुखरता से. लगे थे क्रेडिट लेने नहीं आए आप उनमें से. एक है जिन्होने क्रेडिट नहीं मांगा लेकिन. अंदर क्या चला वह भावना हम जानना चाहते. हैं नहीं मैं तो बहुत पहले से कह रहा हूं. यह होना चाहिए और संवाद से होना चाहिए कोई. विवाद कोई संघर्ष नहीं और भगवत कृपा से.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया और जो लोग. सोचते थे क्या होगा क्या कुछ हुआ नहीं और. भगवत कृपा से सब तो अयोध्या में राम का. आना भगवान कृष्ण तो जैल में जन्मे बंदी. गृह में और सुबह तो निकाल दिए गए और हमारे. राम जी 500 साल तक दबे रहे 500 साल के बाद.
जो जगत पूरे विश्व को मुक्ति देने वाला. मुक्त हुआ तो हम सबके लिए पूर्वाग्रह छोड़. दे अपनी अपनी कट्टरता छोड़ दे अपने अपने ल. और सर्व भूत हिताय सर्व भूत सुखाय सर्व. भूत पिताय यदि चिंतन किया जाए तो यह घटना. घटनी ही थी केवल प्रतीक्षा थी जोग लगन. ग्रह वार तिथि य पांच कब अनुकूल हो और यह. 22 तारीख को अनुकूल हो गया जनवरी को और.
रामलाला विराजमान हो गया और मेरा संकल्प. था कि जब ये हो जाए तब सबसे पहले मैं एक. कथा सुनाऊंगा ठाकुर जी को और 24 फरवरी से. मैंने एक कथा भी वहां ली. तो मैं पहले से बोलता रहा था कि यह होना. है ठाकुर जी ने ये करके दिखाया अब जैसे एक. शेर है बाबा की इंसान के ख्वाहिश को इंतहा. नहीं होती दो गस जमीन चाहिए दो गस कफन के. बाद तो अब अयोध्या में तो हो गया अब कई.
आशावादी लोग है वो कह रहे कि और भी कई जगह. है तो उसको लेकर आपकी सोच क्या है जैसे. मथुरा काशी का खास तौर पर जिक्र होता है. लेकिन अदालत में है जैसे अयोध्या का संवाद. पूर्ण निर्णय आया हम प्रतीक्षा. करें अदालत निर्णय. करे अदालत में है तो प्रेम क्या है प्रेम. क्या है प्रेम अख्या उसकी व्याख्या नहीं. कैसा कसा.
प्रेम की कोई भाषा यदि है प्रेम की कोई. लिपि. है तो केवल आंसू. है यही बात प्रेम की बात आज सुबह भी में. कथा में कह रहा कि प्रेम का कोई अर्थ कोई. नहीं कर सकता य अ वाच्य है अव्यावहारिक. [संगीत]. दो उसे कोई नाम ना दो प्रेम परमात्मा है.
इसे हम कहते हैं ईश्वर सत्य है गांधी ने. बदल दिया ईश्वर सत्य है वो तो है ही लेकिन. गांधी कहते हैं मेरी फिलिंग सत्य ईश्वर है. वैसे परमात्मा प्रेम है क्योंकि हमारे. मानस में लिखा है राम ही केवल प्रेम. प्यारा परमात्मा प्रेम है मेरी फीलिंग. कहती है प्रेम ही परमात्मा है. परमात्मा की व्याख्या नहीं क सकते वेद भी.
नेति नेति कहकर रुक गए. तो प्रेम तो एक अनुभूति है तो ये आज के. दौर में आधी दुनिया जब हम देखते हैं लोगों. से बात करते तो प्रेम में दुखी है अब वो. वाक प्रेम है या कुछ और है देखो हमारे. ग्रंथ खास कर के मानस तो प्रेम और परम. प्रेम वो बांट देते हैं जो दिखता है शुरू. शुरू का थोड़ा आकर्ष होगा प्रेम होगा.
लेकिन परम प्रेम नहीं है परम प्रेम जब हो. जाएगा तब कब आदमी पहुंच जाएगा राम और भरत. के बीच में परम प्रेम है आदिवासी वनवासी. कौल किरात अछूत वंचित लोग जो राम जी जिन. जिसको 14 साल मिले इन लोगों में परम प्रेम. था जिस जो जो अपेक्षा मुक्त है प्रलोभन. मुक्त है भय से मुक्त है.
तो और प्रेम का यदि मैं कोशिश करूं लक्षण. बताने तो प्रेम से त्याग प्रकट होता. है यदि आजकल तथाकथित प्रेम जो त्याग करने. के लिए तैयार हो तो समझना चाहिए कि प्रेम. की डगर पर है लेकिन त्याग की बात नहीं भोग. की बात. है कितना पाया जाए वो सोचा जा रहा है. कितना दिया जाए वो नहीं सोचा तो ये पूरी. दुनिया प्रेम पर चल रही है सब पता चले ना.
चले. ये वृक्ष की शाखाएं जूम जूम करके दूसरी. शाखा से छूती है य क्या है प्रेम है गंगा. का. प्रवाह कल कल नाद करता चट्टान सु ये सब. प्रेम है तो प्रेम मेरी दृष्टि में. परमात्मा बहुत सारे नए लड़के बाबा. जिन्होंने जो 18 साल के 19 साल के 20 साल. के 22 24 साल के उन्होंने हमसे कहा कि जरा. पूछेगा कि डिप्रेशन एंजाइटी से कैसे निकले.
क्योंकि आप एक लंबी उम्र जी चुके हैं आपको. जिंदगी के सही मायने भी पता है और आप. ईश्वर से भी जुड़े हुए हैं और नए दौर में. यह बहुत ज्यादा हो गया अभी हर तीसरा आदमी. इस दौर से गुजर रहा है वह कहता नहीं है. सोशल मीडिया पर मुस्कुराता रहता है लेकिन. अंदर खाने वो एक युद्ध चल रहा. है राम कथा मैं कहता हूं इसीलिए नहीं यह. तो शिवजी ने शुरू किया है मैं तो उसके.
नक्शे पा पर चल रहा हूं यह मेरा सद् भाग्य. है लेकिन डिप्रेशन की जो बात है जो जो आज. के युवानी में दिखता है मैं निमंत्रित. करता हूं इन युवान को कि मुझे नौ दिन. दो मैं आपको नव जीवन. दूंगा केवल नाइन डेज दीजिए मुझे मन लगे ना. लगे आप. बैठो और मैं टीचर च रहा हूं प्राइमरी. स्कूल में शुरू में मेरी माता जी अभी भी.
पढ़ाती है. अच्छा तो 35 मार्क से छात्र को हम पास कर. देते थे जी और पांच कम हो तो कृपा गुण. देकर तो मैंने युवानो में मेरी इतनी लंबी. यात्रा में 65 इयर्स से मैं बोल रहा हूं. मेरी इतनी दीर्घ यात्रा में मुझे लगता है. कि 35 प्र युवानो में परिवर्तन आया. 100% में नहीं कह सकूंगा 50 नहीं कह स.
लेकिन 35 प्र एक समय था कि हमारी सभा में. बूढ़े ही होते थे जो समाज के कोई काम के. नहीं वो हमारे भाग में इसके अलावा कोई कोई. नहीं आज देश विदेश. में. युवानी सत्संग के लिए संवाद के लिए अपना. वेकेशन रिजर्व रखते हैं कब तो इसका परिणाम. अच्छा रहा मेरी दृष्टि.
में तो य कोई मुरारी बापू का प्रभाव नहीं. है यह रामायण का स्वभाव है अब देखि इससे. भी हमको एक सवाल याद. आया दादी नानी हमारी कहा करती थी कि बचपन. जो होता है वह लड़कपन के लिए होता है. जवानी काम करने के लिए होती है फिर एक. उम्र आती है जब आप ईश्वर को अपने आपको को. समर्पित कर देते हो जब हमने लोगों से बात. करना शुरू किया कई सारे साधु महात्मा से. उन्होने कहा कि जब बुढ़ापे में जरजर हो गए. तब क्यों जा रहे हो जब जवानी का जोश था. ईश्वर को समर्पण कर सकते थे समाज में. बदलाव ला सकते थे तब जाना चाहिए था तो ये.
बड़ा कॉन्फ्लेट हो गया कि किस उम्र में. ईश्वर को समर्पण करें नहीं नहीं अच्छा. संगीतकार बनने के लिए रियाज बहुत पहले. करना पड़ता है बुढ़ापे में विश्राम पाना. है तो मैं नहीं कहता कि सब जुवान कथा में. आ जाए माला घुमाए तिलक करे यही करे य ये. मैं मैं बहुत व्यावहारिक रूप से कहूंगा. उसको पढ़ना है डिग्रियां प्राप्त करनी है. ंदा करना है उत्तर दायित्व निभा लेकिन. थोड़ा समय निकाल कर के उसमें भी आना चाहिए. ये थोड़ा रियाज जरूरी है वरना जिसने.
युवानी में अच्छा संग नहीं कहा अच्छे. अच्छी कंपनी प्राप्त नहीं की उसका बुढ़ापा. कभी अच्छा नहीं रहेगा उसका बुढ़ापा इतना. बदबू से भरा होगा हमारे घर कोई मेहमान आता. है कहे कि एकादशी का व्रत है उपवास है हम. अन्न नहीं खाएंगे तो हम कहीं फ फल खाएंगे. तो क तो उसको सड़ा हुआ फल हम नहीं देते. आजा रोजा दे परमात्मा को देना है तो ताजा. तरज जीवन देना चाहिए सड़ा हुआ बूढ़ा शरीर.
नहीं अच्छा बाबा जब मैं देखता हूं कि सिख. धर्म को या क्रिश्चियंस को या मुस्लिम्स. को तो उनके यहां देखता हूं मैं कि बचपन से. ही उनको धर्म से जोड़ा जाता है मुसलमान है. तो पांच बार नमाज पढवा जाएगी सिख है तो. लंगर साफ करने जाएंगे और सारी सेवाओं का. हिस्सा होंगे एक हमारा धर्म में मुझे कई. बार महसूस होता है कि हमारे यहां कोई ची. जबरदस्ती नहीं है आपकी इच्छा है तो भगवान. का नाम ले लो नहीं इच्छा है तो तुम्हारे. ऊपर जब जीवन में परेशान हो गए तब जाक.
भगवान प्रणाम कर देना और यही हनुमान चल. कहा भी गया कि दुख में सुमर सब करे सुख. में करे ना कोई जो सुख में करे तो दुख. काहे को होए तो ये खूबसूरती है या इस पर. काम करने की जरूरत है कि थोड़ा जोड़ा. जाए दबाव नहीं डालना चाहिए मेरी दृष्टि. में सहज होने देना चाहिए और सनातन वैदिक. परंपरा इतनी उदार और विशाल है कि आस्मा भी. छोटा पड़ता है इतनी उदारता से हम सबको. फ्रीडम देते हैं और निरंकुश नहीं करना.
चाहते हैं लेकिन स्वतंत्रता तो देनी चाहिए. तो जबरदस्ती करने से ठीक नहीं होगा यह. उदारता हमारी परंपरा देती है और इसका. परिणाम भी अच्छा है जैसे मैं अपना उदाहरण. ले लू तो मेरी माता जी ने मुझे बचपन से. जैसे हम लोग छोटे थे तो छुट्टी मतलब. अयोध्या या बनारस में शिव जी का स्थान या. वैष्णो देवी थोड़े से और बड़े हुए तो. केदारनाथ बद्रीनाथ जाने लगे तो जब हम और. बड़े हुए तो हमारी आदत लग गई अब हमें.
छुट्टी मिलती तो हम कहते चलो गाड़ी. निकालते केदारनाथ घुमाते दर्शन भी हो. जाएगा या देश में ऐसी जगह खोजते हैं जहां. पर एक पन दो काच है कई न जगह एक्सप्लोर कि. हमने सोमनाथ के आगे दव हम गए वहां पर. गंगेश्वर महादेव हमको दिखे अद्भुत शंकर जी. का समुद्र से रुद्राभिषेक हो रहा था तो वो. एक ढल गए हम अब जिसको उस तरफ दिशा ही नहीं. दिखाई गई नहीं ये जरूरी बचपन के. संस्कार माता पिता के संस्कार जरूर लेकिन. जबरदस्ती कुछ नहीं करना चाहिए गीता में.
लिखा है सहज कर्म कौंतेय सहज होने. दो नदी सहज बहती है तो तीर्थ कहलाती है. उसको कैनाल बना दो तो उसका. तीर्थम हो जाता है तो चेतना को बहने दो और. हमारे देश में हमारे बच्चे जो हैं व तो. कुछ तो लेकर आए उसके मां बाप के गर्भ मांस. के गर्भ से लेकर आता है लेकिन देने चाहिए. धीरे धीरे उसको रुचि लगी लेकिन जबरदस्ती.
तो नहीं करनी चाहिए एक बाबा जी बड़ा सवाल. लोगों ने हमसे कहा कि पूछेगा कि मुरारी. बापू से कि व्यास पीठ पर बैठकर मुरारी. बापू ने अली मौला शायद कहीं कहा कुछ कहा. था तो वह उसको लेकर बड़े सवाल आए आप ही के. भक्त सब है व हमसे पूछे कि इसके पीछे क्या. सोच थी बाबा जी की नहीं मेरा मेरा तो और. कोई कारण नहीं था सनातन धर्म इतना उदार. है गगन सिद्धांत हमारे यहां कहा कि. सिद्धांत आकाश के समान है तो इसीलिए जैसे.
मैं बुद्धम शरणम गच्छामी बोलता हूं महावीर. स्वामी अंतर्यामी बोलता हूं श्री कृष्ण. शरणम बोलता हूं श्री राम देर तो इसी लेकिन. कई लोगों को अच्छा नहीं लगा तो हम किसी का. दिल क्यों दुए ठीक है कोई बात नहीं लेकिन. मेरा अर्थ है मेरी व्यासपीठ संवाद की. व्यासपीठ है मैं किसी को सुधारने के लिए. नहीं निकला स्वीकार करने के लिए निकला तो. ये. सबका आदर सबके प्रति आदर और कोई कारण नहीं.
था मुझे कहते ईश्वर अल्लाह तेरे नाम गांधी. बापू ने कहा बट अभी अभी आप अगर आजकल के. दौर में आप देखते हो तो आजकल बड़ा. डिवाइडेड हो गया मामला आप महसूस करते हैं. य चीज य आपसे उधव जी दूर पड़ी है अभी आपने. दूर रखा व टॉक सिटी सारी नहीं मैं सबसे. प्रमाणिक डिस्टेंस रखता हूं सबसे एक. प्रमाणिक डिस्टेंस रखकर रहता हूं उ मुझे. अच्छा लगता है. आज की पीढ़ी को कुछ कहना हो आपको बताना हो.
लाइफ के बारे में मैं इतना ही कह आज की. पीढ़ी को कि वो बलवान बने बलवान होना ब ज. बल केवल शरीर का शरीर का बल भी होना चाहिए. बलवान बने और बल के साथ में दो इसमें. प्राण का भी बल हो बारबार डिप्रेशन ना हो. जाए और आत्मा बल भी हो कि मैं मेरे लक्ष्य. को. पाऊंगा चरस धारा निशिता. दुर दुर्गम पस्त कवि जो विवेकानंद जी ने. उद्घोषणा की थी उपनिषद उत्तिष्ठ तो आज की.
युवा पीढ़ी को आज के जनरेशन को वो बलवान. बने लेकिन केवल बलवान होगा तो संघर्ष. करेगा युद्ध करेगा विघटन करेगा हिंसा. करेगा संभव है बल क्या नहीं करता दुर्योधन. बन जाएगा दुर्योधन बन जाएगा हा हो सकता है. हो सकता है तो बलवान के साथ वो बुद्धिमान. भी बने कि बुद्धि उसके बल को कहा यूज करना. कहां नहीं करना व विवेक दे इसलिए आज की.
पीढ़ी को बुद्धिमान भी होना चाहिए लेकिन. कभी-कभी बुद्धि का भी गर्व हो जाता है कि. हम इतने पढ़े लिखे हम इतने. एडवांस यह सब पुराने मां बाप पुराने धर्म. की बातें करने वाले सब सब ऐसे पुराने लोग. हैं ऐसा बौद्धिकता का भी एक अहंकार उस समय. बौद्धिकता हमें बांध ना दे इसलिए. विद्यावान आज का जन. विद्या तो व है जो बांधे ना मुक्त करे सा.
विद्या या विमुक्त है तो मैं तो युवान के. लिए हनुमान जी के चरणों में य और हनुमान. चालीसा में यही तो कहा है बल बुद्धि. विद्या दे मोहि तो आज के जनरेशन को मेरा. इतना ही कहना है आपसे पाच मिट बस और ल कि. सौभाग्य मुझे रोज मिलना नहीं है बड़ी. मुश्किल से हम आठ घंटे वहां से आए तो एक. सवाल मेरे मन में और एक तरफ मैं आपको. देखता हूं एक सौम्य छवि है उदार हृदय मुझे. नजर आता है आप बड़े सौम्यता से लोगों से. बात करते हैं अब साधु महात्मा भी.
धीरे-धीरे बदल रहे हैं कई सारे अलग-अलग. तरह के लोग आ रहे जहां बहुत भीड़ भी जा. रसे अभी धीरें कृष्ण शास्त्री जी है बहुत. चर्चा में है आप जब उनको देखते हैं नई. पीढ़ी में आपकी क्या राय है उनको लेकर. कैसे आप उनको देखते हैं नहीं. सबका सबके अपने अपने विचार है सबकी अपनी. अपनी रीत. है मैं सबसे प्रमाणिक डिस्टेंस किए हुए. बैठा हूं. कोई कमेंट नहीं कर बड़ा अच्छा शेर था कि.
मेरी खामोशी ने हजारों जवाबों की लाज रखी. अच्छा आप शेरो शायरी भी खूब करते. हैं साहित्य की रुचि है तो अच्छा लगता एक. बार अगर वाला बड़ा अच्छा लगता सुनते अगर. वो पूछ ले हमसे जो आपने एक बार सुनाया था. बड़ा वायरल होता है न लड़को में भी बड़ी. रील्स बनती है उस पर. लोग एक शेर सुना जी जी. जी ये और बात. है वो खामोश खड़े रहते. लेकिन जो बड़े होते हैं बड़े ही होते हैं.
बहुत बड़ी बात है बड़े लोग ज्यादा बोलते. नहीं लेकिन जो बड़े होते पर्वत कहां बोलते. हैं लेकिन बड़े हिमालय कहां बोलता है सही. बात है उसकी भाषा सिद्धों ने सुनी उसकी. वाणी राम तीर्थ ने सुनी उसकी गिरा उसकी. देववाणी उसका नाद. निनाद अनाहत अनाहत उसकी बानी शंकराचार्य.
ने सुनी जो बड़े होते हैं. वो बड़े ही सेकंड लास्ट सवाल बाबा जी. शंकराचार्य जी का जिक्र कर लिया आपने मेरी. बड़ी रुचि उनमें रहती है मैं जब उनको. पढ़ता हूं लिखता हूं सुनता हूं तो मुझे. लगता है कि अगर आज हमारे धर्म में. कंट्रोवर्सी कम है साउथ और नॉर्थ का मेल. अच्छा हो गया है तो उसमें उनकी बड़ी. भूमिका है बिल्कुल बक तो थोड़ा शंकराचार्य. जी के बारे में अगर आप आज की पीढ़ी आप. बेहतर समझा सकते और हमको भी थोड़ा सीखने. का मौका मिल जाएगा उनके बारे में शंकर. शंकराचार्य केशवं बारायण सूत्र भास कतो.
वंदे. भगवंत शंकराचार्य भगवान को हम गुनातीत. श्रद्धा से शिव का अवतार मानते हैं और आप. कल्पना करिए कि आठ और नौ साल की उम्र में. जिन्होंने समस्त वेद और शास्त्रों को. आत्मसात किया और भाष्य शुरू कर दिया और. अपना अवतार कार्य करके 32 साल की छोटी. उम्र में तोव निर्वाण कदार में जाकर. तिरोहित हो गए निर्वाण पद पर तो ये देश का.
और इस पृथ्वी का बड़ा भाग्य है एक ऐसा. युवा सन्यासी हमें मिला शंकर के नाम से और. वो अद्वैत सिद्धांत वाले महापुरुष थे. अद्वैत लेकिन उसने निराकार को मानने वाले. थे लेकिन सगुण रूप का उसने विरोध नहीं. किया उसने हमें पंच देव की पूजा बताई कि. सूर्य को नमन करो गणेश को पार्वती को शिव. को विष्णु को यह पंचदेव की पूजा देकर बहुत.
बड़ा समन्वय किया और सबसे बड़ा भारत को एक. और नेक रखने के लिए चार मठ की स्थापना. की एक 32 साल का यवन युवान इतना कर सकता. जब यातायात का कोई व्यवस्था नहीं थी आज. 1200 1300 साल हुए शंकराचार्य और यह कर तो. एक एक बहुत दैवी शक्ति का अवतरण इस देश. में हुआ था इस भूमि तो भारत बहुत गौरव ले. सकता है बड़ भाग्यवान है ऐसे आचार्यों से.
तो मुझे तो शंकराचार्य के प्रति और लगाव. इसीलिए कि मेरे दादाजी जी वो ऋषिकेश के. महामंडल सन्यास लेकर महामंडलेश्वर बने थे. विष्णु देवानंद के जब सनातन धर्म को जरूरत. पड़ी तो शंकराचार्य भगवान ने द नाम अखाड़े. पैदा किए. और तो शंकर शंकर है मतलब ब रोमांचित करता. है यह कई बार सोचकर कि जैसा आपने कहा ना.
कि आज भी हमें यहां आने हमारी हालत खराब. होती है जी उस टाइम पे अच्छा एक सवाल और. आता है मे जैसे अभी चाइना बगल में है या. जापान है वहां पर बौद्ध धर्म की बड़ी. चर्चा है बौद्ध हमारे और नेपाल के बीच में. से शुरू हुआ कई बार बड़ा हैरान करता है कि. भारत में उसका प्रचार प्रसार उतना नहीं. रहा अड़ोस पड़ोस में रहा यह भारत में केवल. हम जब विदेश में जाते हैं तो हम कहते हैं. शांति के लिए बहुत बुद्ध धर्म जो है तो ये. बुद्ध जी हमारे विष्णु जी वाले हैं अलग. थोड़ा इस बारे में आप नहीं हमारे द दशा.
अवतार में भगवान विष्णु का अवतार हम हमको. शास्त्रों ने कहा बुद्ध को हमने स्वीकार. किया है कोई उसके बारे में जो अपनी राय दे. वो मुबारक उसको हम नहीं लेकिन बुद्ध बुध. बुद्ध भी एक एक गजब शंकराचार्य के बारे. में कहा जाता था कि शंकराचार्य प्रसन्न. बहुत है विज्ञान को लेकर शंकर का धर्म चला. है और बुद्ध भगवान जैसे कोई टीचर समझाए. उसी तरह अपना आदेश देते थे तो बुद्ध बुद्ध.
है और वह भी इस देश में आए यह देश बड़ा. मूल्यवान है बड़ा गजब का देश है यह भूभाग. नहीं है हमारी भूमिका है यह भूमि नहीं है. हमारी साधना की अध्यात्मिकता की विश्व. मंगल की य भूमिका है तो शंकराचार्य. कभी-कभी किसी ने बुद्ध को थोड़ा नकारा हो. क्योंकि उसने यज्ञ का विरोध किया था और.
यज्ञ का विरोध इसलिए कि जो बलिदान दिए. जाते थे ब पशु का बलि प्रथा करते तो हिंसा. होती थी तो उसके बारे में अपने विचार. प्रकट. लेकिन अब आखरी सवाल अगर ईश्वर है तो अपने. भक्तों को दुख देते शांत क्यों रहता है. क्योंकि कई बार हम प्रथा पीड़ित रहते हैं. परेशान रहते और हम कहते हम तो भक्ति कर. रहे हैं प्रभु सुनते क्यों नहीं हो प्रभु. सुनते हैं बना कान सुनते हैं और वो दुख. नहीं देते हमारे दुख का.
कारण और कोई है हमारे सुख का कारण कोई और. है यही सबसे बड़ी हमारी अज्ञानता है हमें. और कुछ नहीं दे सकते हमारे दुख का कारण. चार है एक तो काल समय अब गर्मी के दिनों. में कहीं जाओगे तो आपको पसीना होगा ये काल. कारण है आप यसी कमरा ले लो तो तुम सुख में. तुरंत परिवर्तन एक तो काल दूसरा हमारा.
कर्म हमने कुछ ऐसा किया तो उसका परिणाम. आता काल कर्म और गुण रगुण है आदमी रजोगुण. है कभी कभी बैठता नहीं और तमो गुण कभी. उठता नहीं व लेटे रहता प्रमाद में सत्व. गुण हमारे सुख दुख का कारण गुण भी है एक. तमोगुण आदमी है 24 घंटा गुस्सा करता है. फिर कोई कहे कि हमारे परिवार में कोई. हमारी बात मानती नहीं तो यह उसके तमो गुण.
का परिणाम है और चौथा अपना. स्वभाव अपना स्वभाव अपने दुख का कारण है. तो यह भी हमें सोचना पड़ेगा वाकई परमात्मा. सुनता है. और वह हमारे परम हित में जो होता है वह. करता है हमारे हित का नहीं करते हम चाहते. हमारा हित हो परमात्मा कहते तेरा परम हित. नहीं मैं तेरा तेरा हित नहीं परम हित. करूंगा तो कोई शक्ति है जो सुन रही है और.
उसका निर्णय हमारे परम हित में ही होता. थोड़ा वेट करना होता है थोड़ी प्रतीक्षा. करना. पड़ती बहुत-बहुत धन्यवाद महाराज जी आपने. हमें समय दिया कई सारे विषयों पर बात हुई. कई सारे विषय रह भी गए बट कई सारे विषयों. को बिना कहे ही आपने हमें समझा दिया कि. चीजें हैं आशीर्वाद बनाए रखिए धन्यवाद खुश. र आपके श्रोताओं को आपके दर्शकों को मेरी. ओर से बहुत बहुत शुभकामना बधाई खुश रहो.
प्रणाम जय सियाराम.
