Unplugged ft. Manoj Bajpayee | Struggle | Bhaiyya JI | Gangs of Wasseypur | The Family Man
चाबी कहां है क्या तारा बाबू जी के तकिया. के नीचे बा भैया जी उड़ा देंगे सरदार खान. को इतना गोली मारेंगे कि पूरा बदन उसका. छलनी हो जाएगी इतना बड़ा हो ग य बियार. नहीं हुआ विधायक जी को कूट दिए क्या किए. थे गोली लगा है गोली लग गोली लग गया उसी. मारे बट साहब जब काम देखते थे तो वो बहुत. जोर जोर से तारीफ किया करते थे उने कहा. बाजपई तुम पीते हो मैं पीता. हूं सस्ती वाली सस्ती वा मतलब जाहिर सी. बात है हम सम तो मतलब ताड़ी पीने का भी.
पैसा नहीं होता था यार तो नजर ज्यादा कहां. थी बोतल प या जबान प भट्ट साहब ने मुझे. देखा दूसरा बनाया क्या तुमने देखो आराम से. पियो वाजपेई तुम गरीब लोग जो है इसको. ताड़ी ताड़ी की तरह पियोगे उसके बाद जो. मेरा माथा घुमा है बट साब चार पांच दिखाई. दे रहे थे आवाज भी जो है उनकी बड़ी मफल्ड. वा वा वा भाई. भाई 50 शायद आप उधार लेकर दिल्ली निकले और. कोई आप दोस्त था व कह दे भिखमंगा हो त. रविंद्र चौधरी मेरा दोस्त 50 ल नहीं लटा.
नहीं नहीं हम कभी लौटा आते थोड़ी है. दोस्तों का पैसा नहीं लौटा हमको लग रहा है. इसीलिए पंकज जी ने भी चप्पल उठाने के बा. लौटा नहीं जब सुपरस्टार ने पूछो तो फिर. वही शाहरुख सलमान आमिर आता है जी आता नहीं. आप लोग के मन में कि यार ये क्या रह गया. मतलब जो उनको है जो हमको नहीं सुशांत सिंह. राजपुत आपसे कैसे रिश्ते थे उनके बहुत. अच्छे बड़े भाई की तरह मानता था क्रिकेट. देखते सर सचिन तेंदुलकर जिस दिन से रिटायर. हुए मन उठ गया क्या था सचिन आपको इतना मजा. आता विराट कोहली रोहित शर्मा आज दुनिया की. बेस्ट टीम में बेस्ट प्लेयर्स है राइट.
लेकिन वो लोग टीम को कंधों पर नहीं लेके. चल रहे हैं वो पुराने दिन. आशिनेट नमी में भीग वो पुराने दिन एक बात. आपने कही जिसको सुन के मैं कल रात मेरे. हाथ पाव सुन पड़ गई मैंने फोन पर अपने. पिताजी से कहा कि बाऊज अब हो गया हां जाइए. जाइए एक महीने या दो महीने से वो होश में. भी नहीं थे मेरी छोटी बन ने कहा कि आप. बोलिए इनको जाने के लिए मैंने कहा ठीक है. तुम फोन बाबाजी के कान पर लगा दो हैप्पी. मैरिज लाइफ का फार्मूला क्या है पत्नी.
हमेशा सही होती है भोजपुरी सिनेमा को लेकर. इतना सारा क्वेश्चन होता है कि यार. अश्लीलता परोसी जा रही है ये हो रहा है वो. हो रहा है क्या इनकी जिम्मेदारी नहीं बनती. कि अपना रीजनल सिनेमा जो है उसको थोड़ा सा. और नेक्स्ट लेवल ले जाए बिहार वाले इतने. यूपीएससी काहे क्लियर करते हैं ये पावर. भैया जी में जो हमने देखा ये हमने पहले. सुना है हां हमने सुना है कि मनोज वाजपेई. जी जो है वो अपने इलाके में गुंडई करते थे. कब आ रही है भैया जी 24 मई को क्योंकि. उसपे भी मीम बना कि पकड़ केसी खींचा और. लिखा भैया जी कब आ रही है.
हजरात हजरात हजरात 50 उधार लेकर एक लड़का. बिहार से दिल्ली चलता है फिर दिल्ली से वह. मुंबई पहुंचता है भीकू मात्रे बनता है. मुंबई पर राज करने की बात करता है और आज. 30 साल बाद 100 पिक्चर करके फिलहाल व. हमारे स्टूडियो में बैठा है मनोज जी आपको. सलाम थैंक यू थैंक यू वेरी मच आप ही का. डायलॉग है कि करारा जवाब मिलेगा हा हमको. लगा हम आपसे क क कि भाई जवाब सारा करारा.
दीजिएगा जवाब तो करारा ही होगा चुनाव चल. रहा है पॉलिटिकल मत होएगा नहीं नहीं. बिल्कुल नहीं 30 साल जितना हमारा उमर उतना. पिक्चर कर डाले उतना साल आप गुजार दिए सवा. पिक्चर आदमी के मन में सवाल आता है हमसे. जदा लोग कहे लिख के कि यार जब हम लोग. लड़का थे तब भी मनोज जी जवान थे हा हम लोग. जवान हुए तब वो मनोज जी जवान है अब हम लोग. बढ़ाने की तरफ बढ़ रहे तब मनोज जी जवान. है जड़ीबूटी मिल गया है.
कहां से इतना सब हो गया मतलब पता नहीं. कैसे हो गया यह तो चमत्कार सा ही लगता है. क्योंकि मैंने तो कभी गिना नहीं था कि मैं. इतने फिल्में कर चुका हूं व भैया जी का. डायरेक्टर है उसने एक दिन आके बोला कि सर. 100 फिल्म मैंने देखा विकपीडिया प कि आपके. 100 फिल्म हो गए विकपीडिया आमडी भी कहां. पर तब मुझे एहसास हुआ कि यह सवामी फिल्म. जो है हो सकती है हमारी भैया जी मब कभी. क्योंकि सर जुगा के आप काम करते रहे तो. उसमें आपको आप गिनना भूल गए क्योंकि काम. ज्यादा महत्त्वपूर्ण हो गया गिनना.
कभी मतलब दिमाग में नहीं आ कि चलो यार. गिनते हैं कि कितनी फिल्म कर चुके हैं. नहीं लेकिन हमारे मन में कई बार ये ख्याल. आता है कि यूपी बिहार में जो लोग हैं वो. पिक्चर देखना बड़ा पसंद करते हैं जी मध्यम. वर्गीय या जो गरीब परिवार से आते हैं जी. लेकिन हमारा लड़का काम करे ये पसंद नहीं. करते वो कहते हैं कहां नाचने गाने जा रहे. हा बिल्कुल तो जब आप 100 पिक्चर कर रहे हो. और पीछे मुड़ के देखते हो तो कोई कहा आपको. याद नहीं आया कोई गांव देहात में कहा हो. या बाबू जी कहे हो यार यही काम धंधा कर लो. मेरे मेरे मेरे ग्रैंडफादर जो है बहुत.
तकलीफ में आ गए थे जब उन्होंने सुना कि. मैंने जो है रामजीत से ग्रेजुएशन करने के. बाद मैंने जब यह न्यूज अपने फैमिली को. दिया था तो उन तक बात पहुंची और जब मैं. वापस गया तो उन्होंने मुझसे बात करना बंद. कर दिया था मेरे ग्रैंडफादर ने दादाजी में. हां वो बहुत नाराज थे मतलब उनका कहना था. क्या ये भांड गिरी शुरू कर दिया और भांड. मतलब नचनिया नचनिया बोलते थे हां मतलब. हमारे कहते ना कि नचनिया गवैया हां. बिल्कुल तो वो वो बहुत नाराज कीी ी उनको.
बाकी. जो समाज था वो थोड़ा सा पीठ पीछे ज्यादा. हंसता था कि. येय कौन सा काम करने गए हैं ये. तो मुझे लगता था कि इन लोगों को पता नहीं. है कि थिएटर होता क्या है उनके लिए थिएटर. था कि रामलीला या फिर नौटंकी या गांव. लौंडा नाच या गांव में लौंडा नाच उनके लिए. यही सब था उनको उनका एक्सपोजर नहीं था तो. मैं भी मैंने भी कहा कि किसको किसको को. मैं सफाई देता.
फिरंगाई मैं गांव जाता था मैं डेढ़ साल. में एक बार दो साल में एक बार ती साल में. एक बार मैं जाता था गांव तो इसलिए कभी उस. तरह से लगा ही नहीं कि इनको मुझे आंसर. करना है नहीं तो आपको गंभीरता से लेना कब. शुरू किया लोगों ने मतलब एक तो होता है कि. आप चले गए फिर हुआ कई बार लोगों ने डाउट. किया जैसे ओमपुरी जी का मैं कहीं सुन रहा. था कि जब वो ओमपुरी जी और नसीर जी बॉलीवुड. में गए तो लोगों ने कहा अे तुम्हारी शक्ल. देख के तुम कैसे यकीन कर सकते हो तुम हीरो. बनोगे मुझे तो गंभीरता से सत्या के बाद ही. लेना शुरू किया लोगों ने बाकी समय तो उनको.
लगता रहा कि थोड़ा बहुत थोड़ी बहुत. गंभीरता उनके अंदर में आई थी जब स्वाभिमान. सीरियल करता था मैं डीडी पे हम तो वो रोज. आता था. और गांव दयार में या फिर दिल्ली जैसे शहर. में औरतों में बहुत पॉपुलर था औरतों. बच्चों में दोपहर में वो सब देखते थे तो. उनमें बहुत पॉपुलर हो गया था मैं तो थोड़ी. बहुत गंभीरता उनके अंदर आई थी लेकिन फिर. भी ऐसा कुछ नहीं था लेकिन सत्या के बाद. उनको लगा कि यह कुछ अनोखा काम हो गया.
क सत्या के बाद बहुत सारे मुझे इतना पता. है कि ना सिर्फ एक्टर बनने के लिए. डायरेक्टर बनने के लिए लोग भागे बल्कि. अचानक बिहार के लोगों को लगा छोटी जगहों. के लोगों को लगा कि अगर यह बन सकता कुछ. गांव छोड़ के घर छोड़ के अगर यह कुछ बन. सकता है तो हम क्यों नहीं तो बकायदा एक. बहुत पलायन हुआ बहुत सारे यंग यंग लोगों. का हमने सुना कोई शद केके मैन साहब ने. शायद कहा था कि अगर सत्या ना होती तो आप. जैसे लोग या इरफान खान या नवाज जैसे लोग.
जो आगे बड़े अच्छे-अच्छे कलाकार बने ऐसी. फिल्में ना मिली होती तो शायद इनको उम्मीद. ना होती और फिर आज ये सब इतने बड़े स्टार. ना होते बेसिकली केके का कहना यही है कि. हम हम जैसे नाक नक्श वाले लोग और थिएटर से. आए हुए लोगों को कैरेक्टर रोल के अलावा. कोई सोचता नहीं था लेकिन बकू महात्र ने. पॉसिबल किया हम सबके लिए मुझे मेरा करियर. दिया और मेरे जैसे जितने भी थिएटर के लोग. थे और दिखने वाले लोग थे आड़े टेढ़े सबके. बारे में बड़ी गंभीरता से लोग सोचने लगे.
उनको लीड रोल देने के लिए तो अ जैसे-जैसे. चीजें मैं करता गया वैसे-वैसे मेरे लिए. चीजें खुलती गई ना सिर्फ चीजें मेरे लिए. खुली बल्कि जो मेरे साथ के थे या मेरे. जैसे देखने वाले थे या मेरे बैकग्राउंड. अरे आप सुंदर दिखते हैं आप क है अपने आप. कंस्ट नहीं मतलब जिस तरह के की जो अ हमारी. हिंदी फिल्मों में रिवायत है जिस तरह की. चॉकलेटी चेहरा हां एक खास तरीके का गुड. लुकिंग कन्वेंशन बॉडी बॉडी बढ़ल लकिंग.
बॉडी गॉडी तो वो उन सबसे अलग था मैं तो और. ये सब अलग थे इरफान हो चाहे केके हो फिर. बाद में नवाज आया नवाज जब तक आया तब तक. चीजें बहुत बदल चुकी थी हाला उनका भी लंबा. स्ट्रगल रहा लेकिन हमने सुना कि सत्या में. जो सीन है जहां पर आप ऊपर खड़े होकर पहाड़. पे चिल्लाते हैं वो एक्चुअली हम कोई कहा. कि आपकी बिल्कुल हालत खराब थी हालत टाइट. थी और नीचे पैर पकड़े थे शायद मुझे. वर्टिगो है मतलब ऊंचाई से जो है मैं नीचे. नहीं देख सकता हूं मुझे प्रॉब्लम है बहुत. ज्यादा और आप अनुराग कश्यप और सौरभ शुक्ला.
गाली दे रहे थे हां उनको गाली दे रहा था. कि ये क्या मुझे हटाओ यहां. से मैं डरता हूं तो गुस्सा होता है गुस्सा. जो है मेरा मेन इमोशन होता है और गुस्से. में फिर गाली निकलती है तो डर के कारण. गुस्सा आ रहा था. तो गुस्से में उन लोगों को गाली दे रहा था. मैं लेकिन बेचारे बहुत कोशिश कर रहे थे सब. की तो अंत में ये हुआ कि यार किसी तरह से. और कुछ नहीं गिनती गिन ले वहां प बाद में. हम डबिंग कर देंगे डायलॉग तो एक्चुअली.
वहां प मैंने कुछ और बोला है वो कितना. रियलिस्टिक सीन लगता है और उसको डबिंग. किया मैंने जाकर के क्योंकि मेरी हालत. खराब थी बहुत ज्यादा हालत खराब थी नहीं तो. जैसे नवाज भाई का जिक्र आपने किया. नवाजुद्दीन नेने जब कुछ फिल्में कर ली और. हिट हो गए तो उन्होंने कहा यार अब ये. गुंडई उंडाई मार खाना या मारना रोल नहीं. करूंगा मैं अब हमको करना है रोमांस हां और. उन्होंने कहा बहुत अंदर से कीड़ा निकल रहा. है मेरे और उन्होंने कोशिश भी भरसक की है. इस बीच में तो मनोज वाजपेई को लेकर एक. सवाल आता है कई लोग हमसे लिखे भी कल हमने. एक फ प पोस्ट डाली थी जी तो उस हजारों.
कमेंट आए तो कई लोगों ने कहा यार हमको. टिपिकल वो रोमांटिक वाला मनोज वाजपेई. देखना है वीरजारा में मिला था प्रीति झटक. मौका लेकिन फिर बीवी भाग गई हा हा. हा बीवी दूसरे के साथ चली गई और कमाल बात. है कि मुझे ही विलन मानते हैं. लोग जुबेदा में कि उसम काफी लोग नाराज. होते हैं बहुत टॉर्चर किए थे आप मतलब. मैंने तो टॉर्चर किया ही नहीं था गलत काम. उन्होंने किया भाई तो गलत काम जब आप करोगे. और जब राजा आदमी रहेगा तो भाई अपने पावर.
का इस्तेमाल को तो करेगा. गजब जुबेदा में मैंने किया था जुबेदा में. रोमांटिक रोल था एक तरीके से मैं पिंजर को. ही मानता हूं लेकिन दूसरे स्वाद का लेकिन. हां मैं कैरेक्टर और कहानियों पर मैंने. ज्यादा फोकस किया कभी यह नहीं सोचा कि यार. रोमांटिक रोल करूं या ये थोड़ा सा सीरियस. रोल करू या डायरेक्टर को आपने खाली भैया. जी. दिखा डायरेक्टर को दिखा कि मैं उस कहानी.
को कर सकता हूं और एक्शन कर सकता हूं मुझे. नहीं पता था कि मैं यह वाला एक्शन कर सकता. हूं डायरेक्टर को लगा और एस विजन जो बहुत. बड़े लेजेंड एक्शन डायरेक्टर है तमिलनाडु. के उनको लगा कि मैं कर सकता हूं यह अलग. बात है कि मैं इस समय आपके सामने बैठा हूं. बहुत टूट फूट चुका हूं लेकिन पर्दे पर देख. के अच्छा लग रहा है कि यह सारा अचीव किया. हमने भैया जी लेकिन भैया जी में जो हमने. देखा ये हमने पहले सुना है हमने सुना है. कि मनोज वाजपेई जी जो है वो अपने गुंडई. करते थे स्कूल के बाद लौंडा लफड़ी लेकर.
जाते थे मार पिटाई करने और खूब लड़ाई. झगड़ा किए है जी जी जी जी वो एक समय था जब. हम 11 12 में थे तब वो थोड़ी सी कहां. बिहार में कहां मार पटाई बेतिया शहर था तो. हम लोग का भी अपना दल था कुछ नाम हम रखे. दल का ना कोई नाम व वहां नाम नहीं रखते. हैं वहां पर तो मतलब चार पाच छ सात आठ. लौंडे जो साथ में घूमते फिरते हैं तो इस. इलाके के. की लड़ाई दूसरे इलाके से तो अब उस इलाके.
में सिनेमा हॉल में फिल्म लगी अमिताभ. बच्चन की अब उधर जाना है तो सबसे बड़ा. रिस्क है अब उसी हॉल में लगी है तो सब. तैयारी से जाते थे को देख के आपको हीरो. बनने का शौक. चढ़ा सब सब तैयारी से जाते थे. फिर वहां पर कभी-कभी जो है 30 साल पहले से. भैया जी की ट्रेनिंग आपकी चल रही थी मत. बहुत. बहुत भैया जी वाले काम बहुत सारे किए हैं. हम लोगों ने 1 16 17 साल की उम्र में उसके.
बाद छोड़ दिया सब कुछ सब दिल्ली आया तो सब. छूट गया बह होने के बाद तो अच्छा अच्छा. आदमी सुधर जाता है ब्याह कहां हुआ था उस. समय अरे बाद में हुआ जब बहुत बाद में बहुत. बाद बट हमने सुना कि भीकू मात्रे वाला. कैरेक्टर जो था वो शायद आपने अपने गांव के. ही किसी उससे उठाया था हां मेरे अपने शहर. का एक था वो कलरफुल कपड़ा कलरफुल पहनता था. वो जितेंद्र का बहुत बड़ा फैन था और उसने. एक आद मर्डर भी किया था. तो तो उसका उसका पूरा उठाया था मैंने अ.
पहनने का और फैब्रिक उसका उसका लिया था. प्लस जिस तरीके से वो चलता था यहां तक का. बटन खोल करके तो वो पूरा वहां से लिया था. बाकी जो हाई पिच पे बात करना वो कहीं और. से लिया था मैंने तो कई सारी चीजें मिला. कर के आप एक कक्टर को खड़ा करते हो तो. जैसे ये वाली पिक्चर आई है अभी भैया जी आ. रही है इसमें आपने कुछ उठाया कहीं से दाएं. बाएं से यहां पे दाएं बाए से नहीं उठाया. या डायरेक्टर साहब ने कहा कि कर दो तो कर. दिया हां नहीं वो. चीजें जब हम तैयारी करना शुरू करते हैं तो.
इसमें जो भैया जी हैं जब फिल्म शुरू होती. है तो इनका लेट शादी हो रहा है क्योंकि. बहुत लेट शादी मतलब समस्या कई पिक्चर आपके. साथ सोनाक्षी वाले. में तो उनकी लेट शादी होने वाली है और. सौतेला छोटा भाई उसकी जिम्मेदारी ऑलमोस्ट. पूरी हो चुकी है जो लड़की इनका वेट कर रही. थी वो भी जो है थोड़ी ज्यादा उम्र होने तक. वेट कर रही थी अब चीजें वहां भी नहीं हो. पाती है कुछ एक हादसा होता है भैया जी.
एक्स बाहुबली हुआ करते थे सब कुछ छोड़. छाड़ चुके हैं जब फिल्म शुरू होती है और. वहां से चीजें शुरू होती हैं कि क्या भैया. जी उसी तरीके से प पारिवारिक रहेंगे या. फिर अपने पुराने दिनों में जाएंगे पूरी. कहानी उस बात की है उस कॉन्फ्लेट की है. नहीं तो जैसे हमने जितना देखा इस पिक्चर. का ट्रेलर जब पहली बार आया था टीजर ही आया. था जी तो आप लेटे हुए थे हां और फिर वो एक. जो यूपी बिहार में कहते हैं भोकाल हां.
भैया जी का भोकाल टाइट था पड़े थे लेकिन. आदमी की हालत फटी पड़ी थी हा तो भैया जी. ऐसे हुआ करते थे ऐसे हुआ करते थे अभी आपको. जो है बाकी फिल्म देखनी पड़ेगी चलिए तो. दर्शक देख. लेंगे हमने ये भी सुना कि 50 शायद आप उधार. लेकर दिल्ली निकले थे और कोई आप दोस्त था. व कह था भिखमंगा हो तुम हां रविंद्र चौधरी. मेरा दोस्त अभी भी बहुत अच्छा दोस्त है वो. तो 50 लौटाया नहीं लौटाया नहीं नहीं हम. कभी लौटा थोड़ी है दोस्तों का पैसा नहीं. लौटा मैं जब अनलेस अटिल की वो भुखमरी में.
हो तो भुखमरी में अगर हुआ करते थे वो लोग. तो भाई आपके पास 50 क्या फिर 2000 है तो. 2000 दे दीजिए दोस्ती तो यही होती है. लेकिन लौटा होता दोस्तों का पैसा थोड़ी. लौटाया जाता है हमको लग रहा है इसीलिए. पंकज जी ने भी चप्पल उठाने के बाद लटाई. नहीं पंकज प्यार बहुत करता है किया था. हमने इंटरव्यू उनका अच्छा इंटर बहुत. प्यारा इंटरव्यू था जी तो हम दोनों जो है. बहुत कभी कभार मिल जाते हैं मुंबई में. उसका घर जाता हूं और उसके घर का जो है मीट.
भात खाना मुझे बहुत अच्छा लगता है हम लोग. बैठते हैं फिर बैठकी होती है कुछ एक लोग. मिल जाते हैं थिएटर वाले लोग पंकज जी हुए. आप हुए दो तीन लोग को देखकर कई बार लोग. कहते हैं कि यार मिट्टी खुशबू रह गई हा हा. आमतौर पर बदल जाती है कई सारे एक्टर्स है. जिन पर कई तरह के आरोप लग जाते हैं कि यार. थोड़ा बदल गए ये हो गया आप लोग में अभी भी. वो रॉ पना है तो ये क्या वजह थी कि बाकी. सब में तो नहीं होता आप लोग मेंटेन कर ले. गए चाहे पंकज जी हैं अभी भी है वो मेरे खल. से.
हम लोग बहुत ही ठेट गांव से आए हुए लोग. हैं और दोनों जो हैं किसान परिवार से हैं. तो उसको हम बदलना भी चाहे तो हमें हम फेल. हो जाएंगे वो क्योंकि वो वो अंदर तक है. डिफॉल्ट डीएन पहुच डीएनए है वो किसान. परिवार का कोई आदमी बदल जाए यह नहीं हो. सकता है कभी नहीं हो सकता है मैंने कुछ एक. हरियाणा के एक्टर्स हैं वहां पे और वो भी. किसान परिवार से आते हैं वो बिल्कुल.
प्रदीप है या फिर मेरे साथ से जयदीप है ये. सब लोग बड़े बड़े नॉर्मल लोग हैं और बहुत. ही जमीनी लोग हैं तो उ इन लोगों का बदल. पाना बहुत मुश्किल है बहुत ज्यादा नहीं तो. कई बार मेरे मन में ख्याल आता है कि जैसे. मनोज जी है आप किसी से पूछिए रैंडम हा कि. इंडिया में बढ़िया कलाकार कौन है एक नंबर. का एक्टर कौन है तो आपका नाम आता है पहले. इरफान जी थे अभी जयदीप जी का नाम बड़ा. चलता है और बहुत सारे एक्टर विजय जी. के मेनन सर बड़े पसंद.
है लेकिन जब सुपरस्टार ने पूछो तो फिर वही. शाहरुख सलमान आमिर आता है जी या कोई नया. लड़का है जो जा रहा है बंबई हां उसके सपने. में वही तीन चार लोग आते हैं हां तो आप. लोग के मन में कभी आता नहीं कि यार 100. पिक्चर 100 पिक्चर बहुत बड़ा नंबर होता है. हां हां बहुत बड़ा नंबर होता है 30 साल. काम किए 100 पिक्चर किए और अपने दम पर हिट. किए बहुत सारी. फिल्में और हर आदमी जो कहता है कि यार इस. लेवल का एक्टिंग कोई कर नहीं सकता एक सेक. है सोशल मीडिया में मीम्स में आप अकेले. भरे पड़े रहते हैं वासेपुर तो कम से कम. 100 बार हम देखे होंगे हां हा तो फिर आता.
नहीं आप लोग के मन में कि यार ये क्या रह. गया मतलब जो उनको है जो हमको नहीं है नहीं. दो दो दो तरीके के एक्टर्स हैं एक एक्टर. है एक हीरो है हीरो हीरो का हीरो जो है उस. अपने करिश्मा अपने जिसे कहे लक दोनों. चीजें म के लिए बहुत काम करती है और जब. थिएटर में दर्शक जाता है तो वो किसी. कैरेक्टर को देखने नहीं जा रहा होता है वो. अपने एक चहते हीरो को देखने जा रहा होता.
है हमारे पुराने जमाने में भी इसके पहले. भी ब जितने सारे हीरोज रहे कोई यह थोड़ी. देखने जाता था कि भाई कमाल का परफॉर्मेंस. देखने जा रहा हूं नहीं उनका पहले यह होता. है कि अब इस फिल्म में फला हीरो ने क्या. किया है चलके देखा जाए उसकी एंट्री पर. तालियां बजती है वह नाचता है तो तालियां. बसती है वो मुस्कुराता है रोमांस करता है. फाइट करता है तो तालियां बजती है तो ये. वाला हीरो बनने का आपकी इच्छा नहीं नहीं. हुई हम लोग उसमें ट्रेन ही नहीं थे.
और ये सवाल मैं इसलिए टोक रहा हूं सर आपको. आप दिल्ली से गए जी शाहरुख खान दिल्ली से. गए शाहरुख खान का भी कोई गॉडफादर इनिशियल. डेज में नहीं था जी आपका भी कोई माय बाप. वहां पर नहीं था आज के टाइम में बॉलीवुड. की शुरुआत जब होती तो कहा था कि एक नंबर. से शाहरुख खान से गिनती अब शुरू होती है. जी जी सारी कहानी तो यात्रा तो एक ही रही. लगभग यात्रा से बात थोड़ी बनती है बात है. कि आप करना क्या चाहते थे हम मैं बिहार से.
मुंबई जा सकता था हम मैं दिल्ली क्यों आया. थिएटर थिएटर करने आया तो वहीं से बात अलग. हो जाती है जैसे ही मैंने डिसाइड किया कि. मैं थिएटर करूंगा तो इसका मतलब कि मेरे. मेरा मेरी पूरी मंशा अभिनय पे केंद्रित हो. गई कि मैं इसमें अच्छा करना चाहता हूं. जिंदगी में और इसको पहले सीखू तभी मैं. मुंबई जाऊंगा हम वही किया मैंने तो मन में. यह कभी नहीं था कि मैं स्टार बनूंगा या. मैं मुंबई जाता हूं डांस क्लासेस जवाइन.
करता हूं घोड़ सवारी जवाइन करता हूं. मार्शल आर्ट जवाइन करता हूं जो कि लोग. करते हैं कोई बुरा बुराई नहीं है क्योंकि. एक अलग तरीके के सिनेमा है जिसमें बहुत. सारे लोग है काम करते रहे हैं और बहुत. सारे लोग उसमें काम करना चाहते हैं उस तरह. का स्टारडम हासिल करना चाहते कुछ लोग. कामयाब होते हैं कुछ लोग नहीं होते लेकिन. मेरी मंशा हमेशा शुरू से रही एक बढ़िया. एक्टर बनने की और उसी दिशा में आज तक चल. रहा हूं तो आपको क्या लगता कहां पर आपका. ड्यू आपको मिलना शुरू हो गया अरे कभी.
मिलता था शूल से लगता है कि वासेपुर से. लगता है सत्य से तो मिलना शुरू हो गया था. लेकिन जिस तरह के काम मेरे पास आते थे वो. मैं करना नहीं चाहता था अब मैंने सुना कि. विलन का रोल बड़ा मिलता था शाहरुख पीट. देगा सलमान पीटेगा पीटेगा हां हां हां. बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा मिलते थे और. भुखमरी में और गरीबी में पैसे को और काम. को मना करना बहुत बहुत परेशानी वाला काम. था बहुत दिक्कत सबसे डिफिकल्ट काम मेरे. लिए. उसी दौर में था कि मैं काम को मना कर रहा.
था जानते हुए कि मेरे अकाउंट में एक पैसे. नहीं है जानते हुए कि इसका घर जिसमें रह. रहा हूं उसका किराया जाना है नेक्स्ट मंथ. में तो व जब डिसाइड किया था मैंने वह. सबसे कठिन निर्णय था मेरे लिए कि वो यह. नहीं करने आया हूं य वही दौर था जिसमें. महेश भट जी के य ब्ल स्कच चला था वो तो. पहले था अच्छा जब स्वाभिमान सीरियल करता. था तो महेश भट्ट जी उसके प्रोड्यूसर भी थे. तब उन्होंने मेरा काम देखा था तो उन्होंने. बहुत पसंद किया था मेरे काम गजब किस्सा.
लेकिन था ब्ल हा हां सर मतलब किस्से तो. मतलब एक तो किस्सा बढ़िया ऊपर से जैसा आप. सुनाए कि आखिर में. वा क्या हुआ था उस कैसे फोन आया था नहीं. फोन भट्ट साहब बहुत पसंद करते थे मुझे. बहुत ज्यादा और क्या देखा था उन्होने कौन. सा रोल देखा था वो स्वाभिमान में मेरा काम. स्वाभिमान सीरीज जो कि रोज आता था सीरियल. सीरियल डेली सोप था और उसके प्रोड्यूसर थे. तो तो कभी कभी बै जाते थे देखने के लिए. देखूं तो सही जो मैं प्रोड्यूस कर रहा हूं.
उसमें क्या चल रहा है तो मैं भाग्य से जो. है मेरा वाला एपिसोड आ रहा था और उन्होंने. बैठ कर के पूरा मेरा देखा और फिर यूनिट के. लोगों को फोन किया कि भाई यह लड़का कौन है. यह मुझे पता ही नहीं चला क्या कास्टिंग. हुई तो उन्होंने बताया मेरे बारे में उ. कहा कि उसका नंबर भेजो मुझे और उस दौरान. में पेजर हुआ करता था उसपे मैसेज आया मुझे. कॉल मी महेश भट्ट फिर नंबर दिया था आपको.
लगा नहीं कोई हमको क्यूट बना रहा है मुझे. लगा कि यार ये तो. कुछ लग रहा है कोई बेवकूफ बना रहा है. लेकिन पीसीयू में जाकर देखता हूं तो उस. समय शाम के 7:30 बज रहे थे और पीसीओ से. फोन किया तो जब आवाज आई हेलो तब मैं समझ. गया यह महेश भट है जी मैं मनोज बाप बोल. रहा हूं अरे भाई तुम किस के बने हो तुम.
कहां हो मैंने कहा जी मैं यारी रोड में. रहता हूं ऑटो का पैसा है तुम्हारे. पास मैंने कहा जी है तो ऑटो ले लो और झू. के फला सोसायटी में आ. जाओ मैं पहुंचा उसी दिन गए थे अगले दिन. उसी दिन उसी समय बुलाया महेश भट्ट साहब जब. काम देखते थे तो वो बहुत जोर जोर से तारीफ. किया करते थे कभी पीछे नहीं हटते थे और. मैं उनके घर पहुंचा. उनकी ये दोनों बच्चे अब तो खैर बड़े हो गए.
हैं तो उसमें छोटे-छोटे. थे और बुला कर के जो है तारीफ की उसके बाद. उन्होंने कहा देखो भाई मैं पीता तो हूं. नहीं तुम पीते हो तो उस समय मैं भी पीता. था जी मैं पीता. हूं सस्ती वा हम तो सस्ती वा मतलब जाहिर. सी बात है हम उस समय तो मतलब ताड़ी पीने. का भी पैसा नहीं होता था. [हंसी]. यार तो. मैंने कहा जी तो ठीक है मैं.
तुमको तुम्हारे लिए बनाता हूं मैं तो भट्ट. साहब एक समय पर बहुत बड़े हा दारू पीने. वाले एक्सट्रीम थे तो उनके पास में एक. ब्लू लेबल विस्की रखी हुई थी जो कि बहुत. महंगी आती है उन्होंने कहा. बाजपेई तुमने जो है तुम्हारी जिंदगी आज. मैं बना दूंगा जो तुमने परफॉर्मेंस दिया. है तुम नसीर के बाद के समय के सबसे बड़े. एक्टर मैंने तुम तो इतनी बड़ी-बड़ी बातें.
कर रहे थे मतलब मैं तो एकदम सातव आसमान प. था क्योंकि अभी तक तो लोग जो है जूते ही. मार रहे थे वहां प हमें तो नजर ज्यादा. कहां थी बोतल प या जबान पे नहीं जो तारीफ. थी उसी प थी लेकिन मुझे लगा ठीक है कितनी. भी महंगी होगी सारे दारू का काम माथा. घुमाना ही है ना मत्ता ही घुमाएगा और क्या. करेगा य लेकिन मैंने एक पिया. तो कुछ नहीं हुआ ऐसा लगा जैसे पानी पिया फ.
मैं दूसरा खुद ही जब चले गए उधर तो चुपके. से बना कर मैं पीने वाला था तब तक भट्ट. साहब ने मुझे देखा दूसरा बनाया क्या तुमने. मुझे बहुत शर्मिंदगी हुई कि इन्होने पकड़. लिया देखो आराम से पियो वाजपेई तुम गरीब. लोग जो है इसको ताड़ी ताड़ी की तरह पियोगे. तुम आराम से पियो नहीं तो यह ना गिर जाओगे. तुम यहां पर मुझे लगा क्या गिर जाऊंगा यार. ऐसा क्या. हैया उसके बाद जो मेरा माथा घूमा.
हैर मैं बता नहीं सकता भट साब चार पाच. दिखाई दे रहे. थे एक भट्ट साहब अब मुझे समझ नहीं आ रहा. है कि यह वाले भट्ट साहब को देखू या यह. वाले भट्ट साहब को देखू या यह वाले भट्ट. साहब लिटरली चार पाच दिखा दिखाई दे रहे थे. आवाज सुनाई पड़ रही थ आवाज भी जो है उनकी. बड़ी. मफल्ड आवाज आ रही थी मैं कैसे आया हूं. वहां से मुझे ही पता है तो रात को छोड़ आए. थे वो नहीं नहीं उनको पता ही नहीं चला कि.
मुझे चढ़ी है उन्होंने अपनी बिटिया के लिए. छोड़ दिया था जो उनका मैंने किस्सा सुना. था कि पहली बार जब उन्होंने छोड़ा तो उनका. किस्सा था कि दो उनकी दो दिन की बेटी ने. उनको देखकर मुंह घुमा लिया था पूजा मेरे. ख्याल से नहीं शाहीन का शालिया की जो बड़ी. बहन है उनको देखकर मुंह घुमा लिया और उसके. बाद उन्होंने तय किया हा अब जिंदगी में. नहीं पिंगा नहीं पिा आप लेकिन बिल्कुल वो. बिल्कुल. कंपलीटली छोड़ा उन्होंने वो हुए जावेद. अखतर साहब हुए के किस्से सुने मैंने आप.
छोड़. दिए उमर के चलते या बया केडर सेडर नहीं. नहीं मैं तो 14 साल पहले हार्ड लेकर छोड़. दिया था 14 साल पहले छोड़ दिया था अच्छा. कई लोगों ने हमसे कहा आपके क्योंकि यूपी. बिहार है कई लोग आपस में एक दूसरे जानते. हैं जी तो हमको कई लोगों ने मैसेज किया कि. मनोज जी जो हैं उनका घर परिवार बड़ा. संपन्न वाला है वो कई बार कहते हैं कि हम. गरीब रहे पैसा लिखले ऐसा कुछ है या. बैकग्राउंड कैसा रहा आपका थोड़ा सा लोगों. को मेरे ख्याल से वो दूर से जाते हैं ना. तो उनको एक कोठी दिखती है हां हां यही था. कि हां. को जी जी जी जी जी वो उनको कोठी दिखती है.
हा तो वो कोठी में मेरी पैदाइश हुई थी और. उसके बाद मेरे पिताजी के हिस्से में बहुत. ही छोटी सी जितना उनके हिस्से में आई व. सोचिए ना कि वो इतनी नहीं थी कि छह बच्चे. पल पाए. बावजी के हिस्से में दो कमरे थे उस कोठी. में उसके एवज में बाबजी को दिया गया जमीन. ब बल में कि आप अपना बना लीजिए तो लोगों.
को कोठी तो दिखती है हम लेकिन वो जो छोटा. घर उसके ठीक बगल में बनाया गया वो नहीं. दिखती है क्योंकि वो पेड़ पौधों से ढका. रहता है तो जाहिर सी बात है अ अ हम जॉइंट. परिवार में हमारी पैदाइश हुई हम लेकिन. उसके बाद हम लोग अलग हुए अलग होने के बाद. जो स्थिति रही मेरे पिताजी की वो हर हर. समय संकट कर रहा छह बच्चों को पढ़ाना अ. स्कूल कराना और छह बच्चों को ग्रेजुएट. कराना. स्थिति ऐसी थी कि मेरे पिताजी को जब मैंने.
कहा था मैं दिल्ली जाऊंगा दिल्ली. यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए तो उन्होंने. कहा कि यार मैं ज्यादा सपोर्ट नहीं कर. पाऊंगा क्योंकि मेरे बच्चे ज्यादा है है. ना तो तुमको भी कुछ देखना पड़ेगा तो आप. समझ सकते हैं. तो लोग जो है कोठी देख के सोचते हैं मैं. बड़ा संभ्रांत परिवार का हूं लेकिन उसके. बगल का जो जो घर था वही धारणा बना लेते. हैं और फिर वो जी लेकिन बाद में उसी घर को. हमने अच्छा भी किया हम सारे भाई जो हैं हम.
कमाते गए मैं कमाता गया मैं भाऊजी को देता. गया कि उसको अच्छे से बना लीजिए फिर अब. ट्रैक्टर भी हुआ फिर जीप भी हुआ सब कुछ. हुआ भगवान की दया से फिर ह हर कुछ हुआ. मैंने पंकज त्रिपाठी जी का इंटरव्यू किया. था पंकज जी ने अपने इंटरव्यू में ज अपने. पिता का जिक्र हुआ उनके पिता जी का तभी. देहांत हुआ था जी जी उन्होंने मुझसे कहा. कि मेरे मन में कई बार ख्याल आता है कि अब. मैं किससे पूछूं हा वो नहीं रहे लेकिन फिर. मुझे ख्याल आता है कि मैंने बीते 253 में. कभी पूछा ही नहीं था हा हा और फिर मैं.
सोचता हूं कि ये ख्याल क्यों आ रहा है कि. मैं किससे पूछूंगा जब मैं पूछ नहीं रहा था. क्या पूछूंगा कोई भी चीज मैं कहीं जीवन. में फस जाऊंगा तो मैं कैसे पूछूंगा लेकिन. फिर वो खुद अपनी बात काटते कहते लेकिन. मुझे फिर याद आया कि मैं तो कभ पूछता ही. नहीं था अपनी मर्जी से जी रहा था मैं. क्योंकि हम हम लोगों की तरफ का पिता पुत्र. का पूरा संबंध ही अलग रहा है हा वो संबंध. मेरी बेटी के साथ मेरा नहीं है लेकिन पिता. पुत्र में आज मेरे पिता बहुत ही जेंटल. आदमी थे पोलाइट आदमी थे बहुत हम सारी. बातें उनसे करते थे लेकिन तब भी जो है एक.
छोटी जगह का गांव का एक एक पिता पुत्र में. जो दू दूरी होती हैना हम समझ सकते हैं. हमारा होती है तो वो दूरी हमेशा रही नहीं. तो ये सवाल सर मेरे मन में इसलिए आया. क्योंकि वो अपने पिता के जाने का एहसास. बता रहे थे मैंने अभी हाल फिलहाल में आपका. एक इंटरव्यू देखा जी और उसमें एक बात आपने. कही जिसको सुन के मैं कल रात मेरे हाथ. पांव सुन्न पड़ गए जी जी आपने कहा कि मैं. एक फिल्म की शूटिंग कर रहा था हां किलर. सूप की किलर सूप की मेरे साथ कुछ लोग बैठे. थे जी और मैंने फोन पर अपने पिताजी से कहा. बाऊज अब हो गया हां जाइए जाइए जी क्या था.
सर वो और ये बहुत तकलीफ में थे वो दो साल. से बहुत तकलीफ में थे. और जब यह बात कहा तब वोह दो महीने से मेरे. खल से एक महीने या दो महीने से वो होश में. भी नहीं थे डॉक्टर तक कह चुका था कि यार. अब अब तो यही कह सकते हैं कि उनकी उम्र हो. गई है अब हो गई इन्होंने अपना जिंदगी जी. लिया है अब ये कभी भी जा सकते हैं तो. तकलीफ जो था बाबू जी का वह हमारे परिवार. में किसी से देखा नहीं जा रहा था सारे.
परिवार के लोग उनको बोल चुके थे कि बाबाज. आप क्यों उनसे बात करते थे वह तो बेहोश थे. बिस्तर प लेटे रहते थे हां बेहोश थे बात. करते रहते थे तब भी जो है अंत में. इन्होंने मेरी छोटी बहन ने फोन करके कहा. कि आप आप बोलिए बाबाज को क्योंकि बाबाजी. आपके बहुत करीब रहे हैं सब सारे भाई भाई. बहन तो थे ही मेरे पिता के लेकिन हमेशा एक. बेटा जो है बाप के बहुत करीब होता है बाप.
मैं बड़ा बेटा था तो जाहिर सी बात है कि. एक क्या कहे दोस्त की तरह से थे मेरे. पिताजी और बहुत बातें करते थे हम. लोग तो बाबाजी के बहुत क्लोज था मैं. क्योंकि जब मैं जाता था तो मेरी मां भी. कहती थी किसी और के लिए नहीं करते हैं यह. लेकिन जब तुम आने वाले होते हो तो शाम को. आना है तुमको लेकिन सुबह से ये जाकर बाहर. खड़े होते रहते हैं कि इस समय तक आ जाना. चाहिए इस समय तक आ जा तो इतना क्लोज था.
मेरी छोटी बहन ने कहा कि आप बोलिए इनको. जाने के लिए और मैं शूटिंग प था आता जाता. रहता ब इतनी बड़ी बात है कि अपने. माता-पिता आपकी बहन का बहन ने भी जो आपसे. कहा जी क्या भावना आपके मन में चली जबी. आपकी नहीं क्योंकि मैं भी सोच रहा था कि. ये ये अटके हुए. हैं और बार-बार मेरे भाई बहन भी कहते थे. कि ये किसी मोह माया में अटके हुए हैं समझ. नहीं आ रहा था किस चीज से अटके हुए हैं तो. शायद मुझे भी लगा कि यार यह कहीं इस बात. से तो नहीं अटके हुए हैं कि. मनोज नहीं है य.
तो और मैं दिल्ली आता था फिर कोची चला. जाता था शूटिंग के लिए तो मैंने कहा ठीक. है तुम फोन बाबाजी के कान पर लगा दो तो. मैंने उनको बोला बात करना शुरू किया बताना. शुरू किया कि वह कितने अच्छे पिता. रहे उनको बताना शुरू किया कि वह कितने. अच्छे पति रहे उनको बताना शुरू किया वो. कितने अच्छे दोस्त रहे और वो उन्होंने. अपनी जिम्मेदारी एक पिता और पुत्र और एक.
पति को बहुत अच्छे ढंग से. निभाया और अब उनका उनकी. जिम्मेदारी इस शरीर के साथ खत्म हो चुकी. है अब उनको जाना चाहिए. अपने दूसरे शरीर की. तरफ यही बात कर रहा था मैं उनसे कि आप. जाइए है ना आप मेरा इंतजार मत कीजिए आप. जाइए क्योंकि कहीं ना कहीं किसी ने कहा था.
मुझे कि यार तुम्हारे भाग्य में नहीं है. कि अपने पिता माता के मृत्यु के समय तुम. रह पाओगे मेरे दिमाग में ये बात अटकी हुई. थी तो मैंने उनको बोलना शुरू किया उसके. बाद उसके बाद मैंने मेरी बहन को फोन मेरी. बहन ने फोन लिया कहा कि आपने बोल दिया. मैंने कहा हां बोल दिया और मेरा जो बॉय था. असिस्टेंट मेरे वैन में था और वह दूसरी. तरफ ये बातचीत सुन कर के रो रहा था धड़े. मार के रो रहा था लेकिन मुझे. मुझे यह बोलते हुए कोई रुलाई नहीं आ रही.
कक मु मुझे यह लग रहा था क्योंकि अगर. स्वार्थ मैं अपने स्वार्थ में रहता तो. शायद नहीं बोल पाता लेकिन मैं उनके कष्ट. को देख रहा था और मुझे लग रहा था कि यह. शरीर जो है अब इनको छोड़ना चाहिए और जब. जीवन और मृत्यु का चक्र है उसके लिए आगे. बढ़ जाना. चाहिए मेरा असिस्टेंट रो रहा है सब लोग रो. रहे. हैं मैं अपना गया शूटिंग किया जाकर सो गया. और और सुबह मैं यकीन मानो मैं अभी.
मेडिटेशन के लिए आंख बंद किया था मैं. लेकिन मैं सुबह 5. बजे और गाहे बगाहे जो मेरा फोन था वह. साइलेंस प नहीं. था है ना साइलेंस प था शायद वो घर घर व. वाइब्रेशन तो वो कहीं रखा हुआ था अब पाच. बजे सुबह मुझे फोन नहीं आता है कभी नहीं. आता. है और मैं मेडिटेशन के लिए जैसे दो मिनट. हुए थे और मुझे एहसास हुआ कि फोन वाइब्रेट.
कर रहा है और मुझे एहसास हो गया कि मे माय. फादर इज. गॉन मुझे उसी समय एहसास हो गया मैंने. मेडिटेशन उसी समय ब्रेक कर दिया फोन पर. देखा मेरा भाई था पहली चीज मैंने फोन. उठाया उसने कहा निकली है अच्छा मैंने कहा. गए हां चले गए आपने बात किया था क्या हां. रात को बात हुई एंड ही लेफ्ट द बॉडी. मैं समझ सकता हूं मेरी दादी बहुत लंबे समय.
तक वितर प. थी एक समय के बाद परिवार भी कह देता है. कष्ट इतना कष्ट देखने से बेहतर है हा मतलब. आप किसी को कष्ट में देखते हो आप हेल्पलेस. होते हो आपको लगता है कि इसकी भलाई इसमें. है किय जाए क्योंकि आप अपने स्वार्थ को कब. तक देखोगे कि यह हमारे बीच में हमेशा रहे. क्योंकि हम स्वार्थी होते हैं ना हम नहीं. चाहते कि हम उस दुख को झेले लेकिन वो वो. जो शरीर है अब उसका उस.
उसकी उसका समय खत्म हो चुका है अब सोल हैज. टू ट्रांजिट तो यह तो आपके पिताजी से. रिश्ता हुआ आपकी बिटिया भी है जी आप कैसे. फादर हम दोस्त की तरह से टिपिकल है. ऑर्थोडॉक्स नहीं नहीं ऑर्थोडॉक्स व तो. क्या ही होंगे नहीं चेक करते नहीं नहीं. मेरी फाइन मेरी वाइफ जो है वो बहुत ही. मॉडर्न. है लिबरल है काफी तो और परिवार भी हमारा. उसी तरीके का है बेटी के साथ में दोस्ती. का रिश्ता है कोई इस तरह का स्ट्रिक्ट हां.
मैंने सुना कई आप कह रहे थे कि बिटिया. हमारी प्रिविलेज. है वो तो प्रिविलेज है ना भाई वो तो सही. बात है प्रिविलेज लड़की है वो लेकिन उसको. संस्कार और उसको डिसिप्लिन. वह सारा काम जो है शवाना मेरी वाइफ जो है. बहुत अच्छे से देती हैं जहां पर माता-पिता. होना होता है वहां पर हो भी जाते हैं हम. लोग लेकिन बाकी समय दोस्त रहते हैं अभी उस. उसके अंदर में यह संस्कार तो जरूर है कि. जब तक हमने नहीं कहा कि हमने अनुमति नहीं.
दी कि तुम अपना इग्रा अकाउंट बनाओ तब तक. इा अकाउंट नहीं बनाया उस जिद करती रही. चीखती रही क्योंकि उसके बाकी दोस्त बना. चुके थे लेकिन बाकी दोस्तों के परिवार. नहीं जानता है लेकिन उसका परिवार जानता है. कि उसके पास ा अकाउंट है दिस इ दिस इ दिस. इ वट आ कम्युनिकेशन बहुत ओपन है बहुत. ज्यादा मेरी वाइफ ने य यह ब बिगेस्ट. अचीवमेंट ऑफ हर एस मदर इ दिस अच्छा आपकी. शादी बड़ी सक्सेसफुल है आज के जमाने में. बॉलीवुड पर अक्सर ये आरोप लगता है कई बार.
पावर कपल तो होते हैं बट इन साइडल मामला. गड़बड़ होता है सर मैं ज्यादा बात इसलिए. नहीं करता हूं कि शादी वगैरह के बारे में. कभी-कभी लगता है पनौती हो जाएगा हम शादी. चलिए आप शादी बारे लेकिन मेरे मन में एक. थॉट आता है कि जैसे आपने कहा ना आप एक्टर. बनने निकले तो लोगों ने कहा भाई कहां. नाचने गाने जा रहे हो हां आपकी वाइफ का. नाम शबाना है जी जी तो घर परिवार में सब. संतुष्ट था उस टाइम या आपको बड़ा पापड़. बेलना पड़ा नहीं नहीं नहीं मेरे माता-पिता. और उनके माता-पिता किसी को कोई प्रॉब्लम.
नहीं आपके घर में नहीं नहीं हमारी हमारी. शादी बहुत म्यूचुअल. एग्रीमेंट था सबका पहले तो हम लोग का था. फिर बाकी किसी को कोई प्रॉब्लम नहीं कुछ. किसी को कुछ नहीं तो हैप्पी मैरिज लाइफ का. फार्मूला क्या है नहीं कोई फार्मूला नहीं. है सर मैं भाग भाग्यशाली हूं सर भाग्यशाली. हूं बस य यही जानता हूं कि पत्नी हमेशा. सही होती. है अच्छा मैंने मनोज जी से सवाल पूछा था. क्या नाम पंकज जी से कि आपने क्या देख के. शादी की तो उन्होंने कहा यार देखो रूपवती.
थी मुझे लगा मिल जाएगी तो गुणवंती तो मैं. बना. लूंगा आपने क्या सोचा था कुछ तो आपका भी. रहा होगा ना नहीं मुझे लगा कि यार पढ़ने. लिखने वाले परिवार से हैं कुछ मुझे भी. ज्ञान मुझे भी ज्ञान की प्राप्ति हो जाएगी. तो यहां दूसरा था क्योंकि उनके पिता जो है. बहुत पढ़े लिखे आदमी बहुत बड़े. जानकार तो मुझे लगा कि यार बड़े अच्छे. संस्कारी लोग हैं पढ़े लिखे हैं पढ़ाई. लिखाई का मा माहौल है तो इस तरह का परिवार.
के साथ संबंध बने तो बहुत ही अच्छा रहेगा. मेरा ही फायदा होगा कई लोगों ने हमसे कहा. मनोज जी से पूछे कि वो एनएसडी से निकले. हैं भोजपुरी सिनेमा को लेकर इतना सारा. क्वेश्चन होता है कि यार अश्लीलता परोसी. जा रही है ये हो रहा है वो हो रहा है मनोज. जी जैसे काबिल लोग जो पढ़े लिखे हैं जो. एक्टिंग की पढ़ाई किए हैं क्या इनकी. जिम्मेदारी नहीं बनती कि अपना रीजनल. सिनेमा जो है उसको थोड़ा सा और नेक्स्ट. लेवल ले जाए क्वालिटी फिल्म बनाए और अब तो. इतने सारे लोग भी हो गए हैं जी जी बिहार. से निकलकर यही सब आपस से मिलेंगे तो. पिक्चर भी सुपर डुपर हिट होगी पैसा भी छ. लेंगे और भोजपुरी इंडस्ट्री का कद भी बढ़. जाएगा ऐसा कोई पैसा पैसे वाली इंडस्ट्री.
भोजपुरी इंडस्ट्री रही नहीं है ये एक मिथ. है लेकिन पैसे के लिए तो कुछ नहीं करना है. और ना कभी किया है कोई है मन में भोजपुरी. पिक्चर भी करना देखिए एक फिल्म तो मैं. हमने बड़ी कोशिश की उसके राइट्स ही नहीं. मिले किताब के लिए जो हम करना चाहते थे. दूसरा भोजपुरी फिल्म की अपने फाइनेंस की. समस्याएं हैं उसके मार्केट की समस्याएं. हैं जिसको हम लोग लगातार कोशिश कर रहे हैं. कि उसपे और काम करें ताक फिल्म बने तो. जिसे जिसका पैसा लगे उसका पैसा तो मिले.
भैया जी भी 100 करोड़ कमाए गी तो उसम से. 100 200 करोड़ तो उसम भानुशाली जी से. बोलिएगा भानुशाली जी भोजपुरी प कहां. लगाएंगे यहां प्रॉफिटेबल करवाए वहा भी. हमारे नाम पर बिक जाएगी लेकिन लगातार खोज. जारी है किसी ना किसी स्क्रिप्ट की और. दूसरी बात यह है कि मैं बंबई. से कई साल पहले मैं दिल्ली आया था थिएटर. किया उसके बाद मुंबई गया. ये जब लोग मुझे ये जो.
नैतिक रिजनल नैतिक बोझ डालते हैं ना कि. भाई वो क्यों नहीं करते हैं मैं कहता हूं. भाई आप ही कीजिए अच्छी स्क्रिप्ट आप ही. दीजिए मतलब इस सवाल से आपको परेशान किया. गया है हां आप ही दीजिए स्क्रिप्ट आपको. लगता है कि बहुत आसान है स्क्रिप्ट तो आप. ही दे दीजिए मुझे कोई एक रोल कर लूंगा. उसमें लेकिन स्क्रिप्ट तो अच्छी लगे हमने. तो कई साल स्क्रिप्ट का इंतजार किया कुछ. एक स्क्रिप्ट भी पढ़े लेकिन हो नहीं पाया. है. ना सक्सेसफुल मानते हैं अपने आप को कि आप.
सक्सेसफुल हो गए तो 100 पिक्चर हो गई 30. साल हो गया अब उसका डेफिनेशन अलग है आप. आपकी नजर में क्या डेफिनेशन मेरी नजर में. तो बु महात्रे जब मैंने किया था तभी. सक्सेसफुल हो गया था सक्सेस का मतलब है कि. आप एक कंफर्ट एक बेसिक कंफर्ट में चले. जाते हैं नहीं तो पाने को तो जहां और भी. है आप उसके बारे में सोचते रहिए लेकिन मैं. उस समय मान चुका था कि हां अब मैं एक. नेशनल अवर्ड चाहिए था वो भी मिल गया एक ही. नेशनल वर्ड की तमन्ना थी क्योंकि वो भी.
मुझे मुमकिन नहीं लगता था एक फिल्म फेयर. भी मिल गया अब काफी है अब मैं अब मैं. सक्सेसफुल क्योंकि अब मैं एक्टर एक्टर. एक्टिंग करके रोजी रोटी कमा सकता हूं तो. कोई अधूरी ख्वाहिश नहीं है अभी आपकी मेरी. तो कभी भी नहीं रही मैं तो बड़ा बेसिक में. जीने वाला आदमी र आप ही का एक शेर पढ़ रहा. था मैं कि ख्वाहिशों का काफिला बड़ा अजीब. है गालिब अक्सर वहीं से गुजरता है जहां. रास्ता ना हो हां बिल्कुल इसलिए खवाहिश. ज्यादा रखी नहीं. ताकि इधर-उधर से गुजरने की जरूरत ही नहीं.
हमेशा फोकस स्टोरी कैरेक्टर डायरेक्टर काम. पे क्योंकि बेइंतहा मोहब्बत है मुझे इस. काम से और उसको उसमें मैं कोई मिलावट नहीं. करना चाहता पैसा कितना जरूरी है उतना ही. कि जिससे कि आपका इलाज अच्छे से अच्छे. हॉस्पिटल में हो जाए आप अच्छे से अच्छी. जगह खाना खा पाए अच्छी से अच्छी जगह घूम. पाए और अच्छे से अपने बच्चे की परवरिश कर. पा मैंने कई इंटरव्यूज आपके देखे आपने कहा. जिस तरह की फिल्में हम करते हैं यार यहां. पैसा नहीं होता हां पैसा उसम नहीं होता है. लेकिन फिर भी मैंने अपने परिवार को चलाया.
वो तो बाद में अच्छे अच्छे रोल मिले. फैमिली मैन सुपरहिट रही व कई सारी फिल्म. देखिए उसके पहले उसके पहले तक मेरी बच्ची. 9 साल की हो चुकी थी है ना तो फैमिली मैन. फैमिली मैन शुरू हुई और बहुत पैसा हुआ आया. ऐसा नहीं होता क धीरे-धीरे चीजें मार्केट. में आपकी पोजिशनिंग जो है स्ट्रांग होती. जाती है मार्केट बिहेव्स वेरी. डिफरेंटली इट हैज नथिंग टू डू विद द. परसेप्शन ऑफ द पीपल मार्केट का पूरा. स्वभाव अलग होता है अच्छा इरफान साहब की.
एक फिल्म आई थी मकबूल जी मैंने कहीं सुना. कि आप भी करने की बड़ी तमन्ना थी आपने फोन. भी किया था शायद यार हमको ले लो 2021 बार. आपने फोन मिला दिया था विशाल को बहुत बार. फोन किया था उन्होने मना कर दिया हां उसने. नहीं दिया था मुझे मेरे ख्याल से केके. मेनन कर रहा था उस समय उस रोल को फिर फिर. वो फिल्म थोड़ी सी डिले हुई तो वो डेट. केके. [संगीत]. मेनन फिर वो कुछ और करने चला गया कि म. जैसा कि मुझे केके ने बताया था कुछ और. करने चला गया था क्योंकि उसको एक घर बहुत.
पसंद आया था वो वो घर खरीदना चाहता था वो. और उसका घर सच में अच्छा है उस परे टेरेस. है इसमें उस बागबानी करता है केके बागबानी. का बहुत शौक है. उसे बहुत करीबी दोस्त है मौजूदा दौर में. जो एक्टर है जसे आप तो एक आपने कहा कि खुद. भट्ट साहब ने कहा कि नसीर साहब के बाद उस. लेवल के उस समय उसके बाद देखिए इरफान आया. फिर उसके बाद के के मेनन आया सबसे करीब आप. अपने किसे पाते हैं कि आपकी एक्टिंग का जो. स्तर है उसके इर्दगिर्द सबसे करीब आपको.
कौन लगता है कि यार ये लोग है ना यार. मजेदार है नहीं मैं देखिए नसीर साहब मुझे. हमेशा पसंद पसंद रहे ओम भाई इन दोनों के. काम से बहुत सीखा है मैंने हम फिर बाद में. इरफान केके नवाज ये पंकज भी ये सब लोग जो. इनके काम जो करते रहे या अब तो जयदीप. राजकुमार वगैरह हैं इनके काम को देखता हू. मुझे लगता है कि बड़ी मैच्योरिटी है. तो इनके काम को आप देखते हो उनसे उनसे.
सीखते हो एक्टिंग का अप्रोच सीखते हो किस. तरह का क्राफ्ट यूज कर रहे हैं सब चीज. चीजों से सीखता हूं अभी दोस्त यार है. पुराने आपके बहुत सारे कोई ऐसा है जिसके. पास बैठ हो तो घड़ी ना देखना पड़े कि यार. ज्यादा समय हो गया उठना चाहिए बहुत सारे. थिएटर के समय के बहुत सारे दोस्त. है आपको पंकज के साथ में ऐसा होता है. विनीत कुमार मेरे बहुत अच्छे दोस्त आप फैन. थे हा पंकज के ठीक बगल में विनीत कुमार. रहता है विनीत कुमार मेरा बहुत अच्छा म. दोस्त है उम्र में बड़े हैं लेकिन एनएसडी.
ग्रेजुएट और बहुत सीखा उस आदमी से बहुत. समय गुजारा विनीत के साथ विनीत के घर जाता. हूं तो मैं पंकज को ही बुला लेता हूं या. पंकज के घर जाता हूं तो मैं विनीत को ही. बोल देता हूं आ आ जाओ फिर हम लोग बैठे. रहते हैं फिर हम लोग गप्पे मारते रहते हैं. फिर टाइम प टाइम हम नहीं देखते फिर हम कभी. गाते होते नहीं वो पुराने दिन नहीं वो सब. गाते हैं बहुत गाते हैं हम लोग अगर सुना स. अी पियूष मिल जाता है तो तो उसके साथ गाते. हैं पियूष अभी भी जो है अगर मैं गाना गाना. शुरू करूं तो उसको तकलीफ हो जाएगी फिर अभी. बिसरा गा रहा है तू फिर भी दो लाइन सुना.
पुराने दिन ब बड़ा उसको जो लोगों ने देखा. सभी नलि चले गए बहुत अच्छा लिखा है पियूष. ने बहुत ही अच्छा लिखा है वो पुराने दिन. आशिका ने दिन होश की नमी में भी ग वो. पुराने दिन दिन किधर गए सब किधर. गए पीछे मुड़ के देखा जाने कब किधर गए अके. ले है खड़े कदम नहीं.
[संगीत]. बढ़े मतलब याद नहीं आ रहा दोस्ती आरही. क्या है सर आपके लिए दोस्त कौन होता है. जिसके साथ आपने जीवन का एक बहुत बड़ा लमहा. शेयर किया है जीवन का एक बहुत बड़ा चंक. आपने शेयर किया. है मेरे ख्याल. से वो समय होता है दोस्तों के साथ में जब. ना आपके आसपास मां-बाप होते हैं और ना. आपका परिवार जो बाद में परिवार बनता है वो.
जो बीच का समय होता है जहां पर सिवाय एक. दूसरे के आपके पास में और कोई सपोर्ट नहीं. होता है मैंने सुना दिल्ली में जब थे तो. आपका दोस्त लोग हाथ पकड़ के सोते थे अरे. वो एनएसडी वाला जब वो बड़ा ब्रीफ मोमेंट. था लेकिन हां इससे यह दिखाता था कि वो. मेरे लिए कितने कंसर्न थे वो मुझे देखते. थे एनएसडी का पहले रिजेक्शन के बाद मैं. हिल गया था पूरे तरीके से तो उनको डर लगता. था यार ये कहीं खुदकुशी ना कर ले जिस तरी. से ये डिप्रेशन में चला गया है तो वहां.
दूध पकड़ के सोते थे सब है ना तो वो दो. तीन दिन चार दिन तक रहा तो आप इमोशनल. व्यक्ति है था हुआ करता बहुत सेंसिटिव था. बत पहले बहुत ज्यादा ये स्पिरिचुअल. प्रैक्टिसेस के बाद बहुत 90 पर चीजें जो. है बहुत बैलेंस हो गए कभी लाइफ में दौर. आया सर डिप्रेशन ऑपरेशन का एक ही बार आया. था मैंने बताया आपको एक ही बार आया उसके. बाद नहीं है सारा नहीं ऐसा कभी नहीं. क्रिकेट देखते हैं सर देखता था स सचि. तेंदुलकर जिस दिन से रिटायर हुए मन उठ गया.
क्या था सचिन मेंसा जो आपको इतना. मजा. देखिए गावस्कर के बाद जब सचिन तेंदुलकर आए. एक अकेला व्यक्ति ना सिर्फ जिसने खेलने को. तरीके को. बदला और जो उसका पूरी टेक्निक थी चाहे वह. वनडे हो चाहे. वह टेस्ट मैचेस हो जिस तरीके से क्विकली. वो आदमी अडेप्ट करता था अपने आप को और. तीसरी बात. यकीन मानिए विराट कोहली रोहित शर्मा आज.
दुनिया के बेस्ट टीम में बेस्ट प्लेयर्स. है. राइट लेकिन वह लोग टीम को कंधों पर नहीं. लेकर चल रहे हैं लेकिन सचिन तेंदुलकर. दुनिया के चौथे नंबर की टीम को अपने कंधे. पर लेकर चलता था और साथ में पूरे देश की. उम्मीद को अपने कंधे पर लेकर चलता था पूरा. स्टेडियम चिल्लाता था सचिन सचिन तो सिर्फ. स्टेडियम नहीं जो टीवी के सामने बैठ हु. 100 100 करोड़ की जनता 90 करोड़ की जनता.
उस समय सबकी उम्मीद को उसी आदमी के कंधे. पर होती थी इसीलिए सचिन तेंदुलकर महान है. यानी आप आईपीएल वाली जनरेशन के नहीं है. मैं देखता हूं बीच-बीच में कोई टीम सपोर्ट. करते है अभी. आईल चलता है आरसीबी या सीएस मैं देखता ही. नहीं हूं इस बार भी नहीं जाता हूं बीच-बीच. में कभी-कभी फिल्मों को प्रमोट करने के. लिए धोनी जी आप बिहार झारखंड से आते हैं. तो कभी आप लोग का नहीं रहा संवाद उवा नहीं. रहा एक फंक्शन में आज से मेरे ख्याल से 13. 14 साल पहले मिले थे.
हम उस समय धोनी बहुत चुपचाप थे तो सिर्फ. हाय हेलो. हुई उससे ज्यादा बात आगे नहीं बढ़ी लेकिन. मैंने तो सिर्फ इतना ही कहा कि भाई बहुत. बड़ा प्रशंसक हूं मैं. आपका धोनी क्योंकि धोनी. ने छोटे शहर और गांव से आने वाले प्लेयर्स. के लिए रास्ता बनाया उनके लिए उम्मीद जगह. है क्योंकि हम एंड सेगमेंट की तरफ बढ़ रहे. हैं तो कुछ सवाल जो लोगों ने हमें कहे थे. पूछ लीजिएगा मनोज जी से स्पेशली वो हम पूछ. लेते हैं एक सवाल था बिहार से एक एक्टर आए. थे सुशांत सिंह राजपूत जी मुझे बड़ा ताजुब.
होता है कई बार कि आज के प्यार के दौर में. अभी भी तीन चार साल बाद लोग उनके बारे में. हैग चलाते हैं बिना पेड़ वाला जो दर्शाता. है कि मोहब्बत कितनी ज्यादा थी कई लोग. जाते कि मनोज जी तो इनसाइडर है क्या हो. कुछ अगर बता पाए उस बारे में लोगों का ये. भ्रम है कि मैं इनसाइडर हूं हा मैं मैंने. हमेशा कहा है कि इंडस्ट्री के. बाहर. बाहरी कोने पे रह कर के मैंने हमेशा काम.
किया है जब जब किसी के साथ काम किया तो उस. आदमी से दोस्ती हुई मेरी सुशांत भी मुझे. पहले कुछ एक पार्टियों में मिलता था और. अपना बहुत सारा स्नेह और प्यार देता था वो. मुझे सम्मान देता था फिर हमने सोनचिरिया. में काम किया उसमें बहुत सारी मुलाकातें. हुई हर दिन मुलाकातें हुई खाना भी बनाता. था मैं यूनिट के लिए खिलाता था सबको आपसे. कैसे रिश्ते थे उनके बहुत अच्छे बड़े भाई. की तरह मानता था अ लेकिन इसको यह ऐसा नहीं. कहूंगा कि वह महीने में हम 20 दिन भी मिल.
पाते थे ऐसा कभी नहीं होता था कभी-कभी जो. है उसका मैसेज आ गया या मैंने मैसेज कर. दिया कभी उसका फोन आ गया. वो मेरा बनाया हुआ मीट भात उसको बहुत पसंद. था हम तो मैं शूटिंग में बहुत बहुत खिलाया. था मैंने तो वो बार-बार बीच-बीच में मैसेज. करता था या फोन करता था कि सर जब आप शहर. में आए तो खिलाइए और बहुत अंदरूनी बातें. करता था मुझसे कि इंडस्ट्री में कैसे अपना. रास्ता बनाया जाए इन सब चीजों को लेकर के. वो क्या है हैशटैग वाले लोग ना मैं जैसा.
देख रहा हूं कि. अ अ चीजों को थोड़ा ज्यादा कर देते मतलब. कुछ बोलता हूं मैं तो उसको किसी और लेकर. चले जाते हैं किसी और ही तरफ लेकर जाते. हैं इसको हमेशा मानना चाहिए कि मेरा मैं. मैं एक बड़े भाई की तरह से था उसके जिंदगी. में एक छोटे दौर छोटे समय के लिए और तब तक. तो उसकी मृत्यु हु हो गई. ठीक हैक मामला अभी भी क्लियर नहीं हुआ है.
शायद इस लोगों के मन में भावना रुकी पड़ी. है हां मतलब देख तक स्पष्ट नहीं हो पाए ना. कि क्या था मेरे ख्याल से उस पर कुछ. छानबीन चल रही थी. राइट अच्छा अब क्योंकि भैया जी आ रही है. आपकी फिल्म अब सियासत और बाहुबल का बड़ा. गजब का रिश्ता होता है भैया जी में बाहुबल. हम देख रहे हैं बाकी लोग थिएटर में जाएंगे. देखने के लिए इस बारे में हमने चर्चा भी. इस पॉडकास्ट में की कई लोगों ने हमसे कहा. मनोज जी बड़े साफ आदमी वोकल आदमी बोल देते. हैं जो दिल में आता है बोल देते हैं अपने. व्यूज को नहीं छिपाते हैं हा फिर लोगों ने.
कहा कि ऐसे आदमी को पॉलिटिकली एक्टिव भी. होना चाहिए हा हां अब तो नाम भी है रुतबा. भी है सब कुछ है तो आपका कोई पॉलिटिकल. एंबिशन है दो दो चीजें मैं 25 26 साल से. मुझे ऑफर होते रहे कौन-कौन ऑफर सारे सारे. लोग सब जगह से हुआ है ऐसा नहीं कि दो. लोगों ने किया दो लोगों ने नहीं किया सब. सब जगह से और मैंने हाथ जोड़ कर के मैंने. अपने आप माफी मांगी सबसे पहला कि मेरा. राजनीति प बात करना मुझे अच्छा लगता है. मतलब अपने बंद कमरे. में और राजनीति प का विश्लेषण कर राजनीतिक.
विश्लेषण करना बहुत अच्छा लगता है मैं. बिहार का आदमी हूं बचपन से मेरे हमारा तो. सब चलता. है तो वो मैं जिस तरह के परिवार से आया. हूं वहां पर राजनीति पर और सिनेमा पर. लगातार बातचीत होती थी तो वहां से हमारा. एजुकेशन और अखबार पढ़ना न्यूज के न्यूज. पढ़ना यह हमारे परवरिश का हिस्सा रहा. है ये वहीं तक राजनीति मे लेकिन कभी. एंबिशन मेरा राजनीतिक नहीं रहा क्योंकि.
पॉलिटिक्स में जो पहली बात आपने की कि जो. मन में आता है बोल देता है मनोज बाजपे अब. ऐसा आदमी तो नहीं जा सकता है बिल्कुल ही. नहीं जा सकता कि मैं अपने ही पार्टी के. साथ में अगर मेरा मनमुटाव हो किसी बात प. और वह मैं बोल दूं तो आप समझ सकते हैं कि. आज की स्थिति में क्या होगा दूसरी बात मैं. अपने दर्शक को नहीं बांटना चाहता हूं जिस. दिन मैंने एक पार्टी पकड़ी बाकी सारी. पार्टी के फॉलोअर्स जो हैं सपोर्टर हैं या.
वोटर्स हैं मैं वो मुझसे कट जाएंगे वो मैं. नहीं करना चा ये बात आपके अपने दोस्तों को. नहीं बताते आप अनुराग कश्यप जी को या. क्यों वोलो तो पॉलिटिकली काफी ओपन है जैसे. अनुराग जी हुए किसी पार्टी में नहीं पीयूष. मिश्रा जी देखिए वो लोग वो लोग किसी. पार्टी में नहीं गए वो किसी पार्टी में. डोलजी तो अपनी काफी हद तक जैसे ही आप. पार्टी जवाइन करते हो ना आप आप वोटर्स के. लिए आपका आपकी अभिनय की यात्रा ऑलमोस्ट ठप. हो जाती है अच्छा ये सवाल आप छोड़ आप जवाब. दे ना दे वो आपकी इच्छा होगी हम जि पर. दबाव नहीं.
बनाएंगे मनोज वाजपेई की पॉलिटिकल आइडल. क्या है कोई आईडियोलॉजी नहीं पॉलिटिकल. आईडियोलॉजी राइट लेफ्ट में कहीं तो पाते. हो वो जरूरी नहीं है कि आप राइट में हैं. लेफ्ट में रहे मौजूदा गट आप जो है आप एक. ऐसा समाज देखना चाहते. हैं या एक ऐसा समाज की परिकल्पना करते हैं. जहां कोई भेद भाव ना हो जहां पर शांति हो. कानून सबके लिए बराबर हो महिलाओं बच्चों. के साथ न्याय हो और उनको उनका अधिकार मिले.
आप यही चाहते हैं और शिक्षा सबके लिए हो. और रोजगार सबके लिए हो आप इसी तरीके की एक. आदर्श समाज की आदर्श देश की परिकल्पना. करते हैं और वोह आप भी करते हो वो मैं भी. करता हूं तो यही यही पॉलिटिकल आ आइडियो. समझ लीजिए ठीक है हमारी खामोशी ने सारे. जवाबों की लाज रख ली हम उसको करते अभी भी. डर लगता है फ्लॉप फिल्मों से नहीं बुरी. फिल्मों से डर लगता है बुरी फिल्मों से डर. लगता है ल फिल्म से मुझे तो बुरी फिल्म की. डेफिनेशन क्या होती है जिसको देखते मुझे.
शर्म आए जो जो. फिल्म बुरी भी है और और वह चली भी नहीं. बात समझ रहे. हैं तो दोनों तरफ से जो है इज्जत भी गवाया. और भात भी नहीं खाया आप समझ रहे हैं पैसा. तो पाया हुआ पैसे सब पैसा आपने उस फिल्म. से पाया लेकिन उस चक्कर में चार जगह से और. जो पैसा आ सकता था वो रुक गया तो तो बुरी. फिल्म गलत फिल्म मैं उसको गलत फिल्म कहता. हूं आप आप फ्लॉप फिल्म में कर कर लीके पाट.
हो सकते हैं उसमें कोई नुकसान नहीं होगा. बट रंग फिल्म मत कीजिए तो 100 पिक्चर आप. कर चुके हैं सव पिक्चर आपकी भैया जी है. इसमें तीन चार रंग फिल्में गई है मेरी कौन. सी नहीं मरवाओ ग तुम यार शुभंकर तुम अच्छा. है मैं तुमसे शाम में मिला करूंगा. सुबह-सुबह उठा के तुमको बुलाया मैंने. अच्छा चाय तो आप अभी भी होम्योपैथिक दवा. चाटते हो आप हां अभी होमपथ वा लोग जानते. नहीं बहुत कम लोग जानते हैं कि उसमें चाट. खट्टी खट नहीं वो मैं ड्रॉप्स लेता हूं तो.
ड्रॉप्स 10 बुंद फिर 15 मिनट के बाद 10. बुंद दूसरा बट इन लोगों को तो पता होगा ना. कि वो दवा है वो कुछ और नहीं है इनको पता. है जो अनजान आदमी देखता है तो उसको लगता. है कि टिकार हैं. सर लेकिन कम लोग होम्योपैथिक लेते हैं आप. होम्योपैथिक क्यों प्रेफर करते हो क्योंकि. होम्योपैथिक हमारे नाना जीमो खिलाते थे. मीठी गोली वाली लेकिन मेरे पिताजी बचपन. में लेके जाते तो उस समय होम्योपैथिक. डॉक्टर बड़े अच्छे हुआ करते थे पता नहीं. क्या चक्कर था कि दो दो खुराक में आप आपका. फूड डाइजेशन खत्म ठीक हो जाता था एग्जिमा.
खत्म हो जाता था पाच दिन के खुराक में. आपकी स्किन के सारे रोग चले जाते आपके बाल. गिरने रुक जाते थे लेकिन आज होम्योपैथी. क्यों नहीं काम करती है मुझे ये सिर्फ. जागरूकता नहीं हुई शायद शायद उसको लेके. प्रचार प्रसार उतना नहीं नहीं लेकिन मैं. डॉक्टर्स की बात कर रहा हूं अब उनका उनकी. उनके उनका इलाज साल चलता है डेढ़ साल चलता. रहता है दो साल चलता है पैसा कम मिलता ख. करते हां मेरे ख्याल से वो लोग जो है. थोड़ा सा उसका पावर कम कर देते हैं ताकि.
ये मरीज आता रहे लगातार मेरे ख्याल से. आपके नाम पर हमको 2000 सवाल लोगों ने भेजे. थे हा जिसमें से 700 से हज सवाल खाली एक. थे क्या चाबी कहां. है उनको बोलिएगा तारा बाबू जी के तकिया के. नीचे. बा जाके ले लो. किया के नीचे आपके पिक्चर में एक डायलॉग. था कि क्या बवासीर बना दिया हां हम जब.
उतना कमेंट पढ़े तो हमको भी वही मुंह से. मारे निकला हम क क्या कर दियो तुमने मतलब. 2000 कमेंट में 1000 कमेंट लगभग यही था कि. पूछेगा चाबी कहां है तो मैं तो कह भी रहा. हूं पपा पप्पा के तकी के नीचे और फिर हमने. चेक किया हमने. [संगीत]. में नवाजुद्दीन को परमिशन लेना. था वो परमिशन दिया होगा मेरे ख्याल से.
प्रोडक्शन कंपनी ने जिन्होंने बनाया था. वायकॉम गजब पिक्चर थी लेकिन हा अनुराग. कश्यप को उसके लिए जो है श्रेय देना चाहिए. हम लोगों ने तो एक एक्टर की भूमिका निभाई. थी मतलब बहुत सारा सीन ऐसा था कि इतना. बड़ा हो गई बयाह नहीं. हुआ तो ये सब अंदर ये सब लिख के आए थे. आपका अंदर का था नहीं नहीं सब लिख और आपकी. आंखों में जो हमको वो हैवानियत दिख रही. थी इसीलिए लिया था उसने मुझे बट बड़ा अलग. रोल था मतलब मैंने मैंने मनोज बजप की बड़ी. फिल्में देखी है शूल से लेकर सारी देखी है.
बट वासेपुर में कुछ अलग फ्लेवर था हां वो. वो वो तीन थे राइटर राइटर्स थे वो. स्क्रिप्ट लेके आए. थे तो अनुराग अनुराग ने उस स्क्रिप्ट को. थोड़ा ठीक किया पहला वाला दूसरा उसने पूरा. का पूरा खुद ही लिखा ना पिक्चर पिक्चर. अच्छी तो अलग कहानी है मैं डायलॉग्स की. बात कर रहा हूं हां तो कि विधायक जी को. कूट दिए हां हां. का किए थे एसपी ऑफिस एस ऑफिस मेंट दिए थे.
फिर एक नथा गोली लगा. है गोली लग गया उस. मार उधर के उधर के बाप ऐसे ही करते हैं. अगर आप चोट ट लग जाए तो दो देंगे फिर जो. है डॉक्टर के पास लेकर जाते हैं फिर एक. सीन था की अरे हमको बोली की नगमा. है मुझे याद है कि. वो वो सीन हम लोग बस कर रहे थे जब मैं. मैंने ये इंप्रोवाइज किया तो रिचा चड्ढा.
चलते सीन में हंसने. लगी काफी अच्छी मेमोरीज है उस फिल्म की हम. लोग उस टाइम कॉलेज में थे हमारा फर्स्ट. ईयर था तो हमारे यहां नियम था कि आधी रात. को जब जो हम लोग राती रातो खाना खाते थे. तो फिर वो वासेपुर रिपीट चलती थी और हम. सबको डायलॉग रट गए थे हा हा इतना बड़ा हो. गए ब्याह नहीं हुआ तुम्हारा हर जितना. डायलॉग चलते फिरते था सरदार खान नाम है. हमारा हां या वो हजरात हजरात हजरात जी जी. जी जी या इतना इतना गोली मारेंगे कि खोखा. हां हां हां खोखा बेच के क्या अमीर हो.
जाएगा ऐसे कुछ हा तो ये भैया जी भी मतलब. उसका फ्लेवर कुछ दिखे क्योंकि आपसे वो. वाला एक्सपेक्टेशन बहुत ज्यादा हो गया. लोगों का कि यार कुछ वासे बो देखिए भैया. जी की दुनिया शायद एक जैसी हो सकती है हम. भैया जी सद खान नहीं है चलो भैया जी काहे. दिखे अग आपसे कोई पूछे कि मनोज भाई भैया. जी उड़ा देंगे सरदार खान को उसको इतना. गोली मारेंगे कि पूरा बदन उसका छलनी हो. जाएगा क्या बात भैया जी वसूल वाला आदमी है. अ भैया जी भैया जी शांत आदमी है तब तक जब.
तक आप जो है ज्यादा उनको उनको जो है फॉर. गड तो मान लीजिए कोई आपका प्रशंसक पूछे जो. वीडियो देखेंगे वो कहे कि भाई हम भैया जी. काहे देखने जाए हमने मनोज वाजपेई को. फैमिली मैन हम देखना चाह रहे हैं हमने. वासेपुर देखी हम रिपीट देख लेते हैं शूल. अभी भी आती जिस वजह से आपने वो सब फिल्में. पहली बार देखी थी हां उसी वजह से भैया जी. देखने जा अच्छी फिल्म है अच्छा किरदार है. एक ऐसा किरदार जो आपने पहले नहीं देखा एक. ऐसी कहानी जो आपने पहले नहीं देखी हा और.
बाकी तो आप तो ट्रेलर में और टीजर में तो. जो देख देख रहे हैं उससे ज्यादा बड़ा. भौकाल है पूरी फिल्म में रोमांस ंस है. आपका कुछ ये भैया जी की शादी जो है बचारे. 45 39 हो गए लेकिन शादी नहीं हो पाई इनकी. तो अब जब फिल्म शुरू होती है. तोवा निजी जिंदगी में खुश कर दि सिनेमेट. जिंदगी में वाला दुख दिए आपको तो बेचारे. की जब फिल्म शुरू होती है तो बेचारे जो है. अब जिम्मेदारी से थोड़े मुक्त हो रहे हैं. तो अब जो लड़की वेट कर रही थी उनका शादी.
का इतने साल से तो अब जाकर के शादी होने. वाला है लेकिन फिर कुछ ना कुछ हो मनोज जी. से गाना गवाए आप लोग बड़ा ट्रेंड भी कर र. मैं मनोज जी का बहुत बहुत मतलब उनका सच. में शुक्र गुजार हूं मैंने मनोज जी को फोन. किया मनोज जी आप आप हम आप आपसे जो बहुत. खुश थे परसों नरस आए थे यही बैठे थे आध. रात को बड़ा खुश थे म्यूजिक मैंने कहा. जैसे ही बोला एकदम से फ्लाइट लिया पहुंच. गए मुंबई और एक घं में दो गाने को फाइनल. करके दूसरी फ्लाइट से वापस आ गए मैंने कहा.
कि यार यह आदमी कमाल है और यह आदमी रिश्ते. निभाना मुझे मुझे लगता नहीं है कि मनोज. तिवारी से ज्यादा अच्छा कोई होगा रिश्ते. निभाने में कोई नहीं तो हिट तो आप किए थे. ना नहीं देखो मनोज तिवारी कोई नया लड़का. है व कह वो बता रहे थे ये हमने आपका. इंटरव्यू सुना था बट ये मनोज जी ने खुद ही. बताया कि शूल पिक्चर में आप लोगों ने कहा. कि देखो मनोज तिवारी आया है और ये पूरा. रात को उन्होंने एक्सप्लेन किया हम जी. कैसे शूल हुआ फिर आप लोग का वो गाना कितना. आइकॉनिक है जियाओ बिहार के ला बिहार के.
लाला और इस ें प है वो भी जो थी हमारी. स्नेहा खान लकर वो मुझे एयरपोर्ट पर मिली. उसने कहा मनोज सर मुझे ना लाश का एक जो. ऊंचे रेंज में गाना गाने वाला कोई बताओ. मुझे मनो सर और मुझे वासेपुर में वो गाना. रिकॉर्ड करना है आप जल्दी मेरी हेल्प कर. दो तो मैंने कहा यार मनोज तिवारी से. बढ़िया कोई है नहीं ऊंचे रेंज में वो आदमी. उ उससे बेहतर तो कोई है नहीं हमारे पूरे. इलाके में तो उन्होने कहा कि आप मुझे नंबर.
दोगे मैंने नंबर दिया मनोज जी आए एक घंटे. में स्नेहा का मुझे फोन आया कि क्या मजीन. आदमी है एक लाइन दिया और यह आदमी शुरू हो. गया लगातार इसने रिकॉर्ड किया और रिकॉर्ड. करके चला भी गया अरे उनको मुखड़ा देते. पूरा गन बना देते हा पूरा गाना बना देते. हैं. वो अच्छा बिहार में इतना मनोज का होते. मतलब पता नहीं एक मनोज कुमार जी ऐसा. प्रभाव हुआ मेरे समय में खास करके इतने.
मनो ही जनरेशन तो आप लोग मतलब रोटी कपड़ा. मकान क्रांति शो और क्याक फिल्में उनकी. मनोज कुमार साहब की लेकिन उनके साथ एक. कमाल का एक मनोज कुमार साहब के साथ एक. जितेंद्र हा तो हर गली में चार मनोज दो. जितेंद्र मनोज अब तो इतने सारे हो गए थोक. दो तो मनोज प. गिरेगा पक्का मैं गारंटी देता हूं आप भी. थोको देखो आप गिरेगा वहीं प एक मनोज जी. खड़ा रहेगा वहां प. अच्छा हम क्योंकि समापन की तरफ अब है शूल. आपकी आई थी एक बड़ा अच्छा किस्सा उसमें आप.
सुनाए थे कि रविना जी गई और सारा दोस्त. लोग बोले मिलवा दो हां हां नहीं वो सब. करते थे सब मैं जानता था कि यह सब होगा. लेकिन रवीना के आसपास ना कम से कम पांच. सर्कल होता था जो कि मोतिहारी के एसपी ने. दिया था वो पूरा वो भी फैन थे मोतिहारी के. एसपी नहीं उनका मोतिहारी के एसपी की का. जिद था उस समय में मैं शूटिंग करा के. रहूंगा मैं एक ट्रेडीशन सेट करना चाहता. हूं कि बिहार बिहार में शूटिंग हो सकता है.
और यहां पर कोई कोई अपराधी जो है उसको रोक. नहीं सकता है तो रविना उस समय के. सुपरस्टार थी और वो एसपी ने मानना पड़ेगा. एसपी राजन करके थे साउथ इंडियन थे और. उन्होंने पूरी शूटिंग 25 दिन की शूटिंग. मोतिहारी में में उस आदमी ने कराई कुछ दो. तीन दिन की शूटिंग बेतिया में थी लेकिन. ज्यादातर मोतिहारी. जी से मुलाकात है कभी कभी कभी अभी तो इधर. तो नहीं लेकिन हां स्वामी फिल्म की थी.
मैंने उनके साथ पूछे नहीं कि हमको मैडम. कहे हटवा दी थी आप अरे नहीं ये पता नहीं. कहां से ये सब चल रहा है बड़ा वायरल रहा. ये कि आपको एक पिक्चर से हटवा दिया था. उन्होंने पता नहीं ये सब क्या पता किसी और. सब आजकल सोशल मीडिया के जमाने में बड़े अ. बात कौन सी कौन बोलता है क्या जाकर के. निकलती है चीज ऐसी यह बात सही नहीं है. अच्छा बिहार अब क्योंकि लास्ट में हम है. आप बिहार से आते हैं आपने कहा कि उतने साल. पहले भी समस्या थी अभी बिहार में ये आखिरी. क्वेश्चन बिहारी के तौर पर है मनोज जी से. मैंने पूछा कि उनका भी एक गाना था कि ए.
बिहारी उसम शुरू होता तो हमका बिहारी कहला. हमरा का नीक लागल लेकिन कह के तू हस का. देला ये लाइन थी कि तुम हंस का दिए बिहारी. कहना ठीक है बट हंसे क्यों अब आप बंबई में. काम करते हो अभी प्राउड बिहारी है या अभी. भी थोड़ा होता है कि अगर कोई मैं हमेशा से. प्राउड बिहारी रहा हूं मैं दिल्ली में था. तब भी प्राउड बिहारी था और मैं आज भी अपने. मां-बाप भाई अब तो मां-बाप है नहीं भाई. बहन या जो जो मनोज तिवारी है या फिर पंकज. त्रिपाठी है हम लोग भोजपुरी में ही बात. करते हैं और 50 लोगों के बीच में भी.
भोजपुरी में बात करते हैं हमें बड़ा गर्व. है हम जहां से आते हैं लेकिन अगर किसी को. को किसी को उससे हंसी आती है तो यह मेरे. बारे में कोई कमेंट नहीं है यह कमेंट उस. आदमी के बारे में कि जो हसता है किसी मेरे. क्षेत्र के कारण उसको जिस बात से भी हंसता. है यह बताता है कि उसकी परवरिश कैसी रही. मैंने हमेशा ऐसा सोचा मैंने किसी से कभी. झगड़ा नहीं किया कभी भी नहीं इस बात को.
लेके क्योंकि झगड़े से आप आप पे तंस कसा. किसी ने कभी ऐसे थोड़ा वो सारकास्टिकली. बिहार को लेके बिहारी हां शुरुआती दौड़. में या एक जो परसेप्शन बनाने कोशिश करते. हैं कि कोशिश करते हैं थोड़ा दिखाने की आप. गवार हो देहाती हो वो बहुत साल पहले की. बात है होता नहीं नहीं नहीं अब आप मब आपके. साथ नहीं मैं आप तो चलो बड़े स्टार बट जो. आपके स्टाफ होंगे या उनके हि साथ नहीं. नहीं बिल्कुल नहीं आज का आज का आज आज आज. तो मेरे आमने-सामने तो मैं नहीं देखता हूं. हम पीछे की बात किसी ने कही नहीं है हम एक. समय था वह समय था वो 30 40 साल पहले का जब.
दिल्ली में हो या मुंबई में हो जहां पर. बिहार से आने वाले को सब समझते थे कि या. तो या तो यह अनपढ़ है गवार है या फिर यह. सब के सब या तो यह क्रिमिनल है आप बात समझ. रहे तो वो ये एक धारणा हटी है क्योंकि जब. बाद में लोगों को पता चला कि इस देश में. सबसे ज्यादा. यूपीएससी हां बिहार वाले इ यूपीएससी काहे. क्लियर करते हैं ये क्योंकि गवर्नमेंट जॉब.
पावर पावर दोनों चीजें उससे हासिल होती है. ना एक तो सरकारी नौकरी है और उससे बड़ी. सरकारी नौकरी कोई है नहीं तो हमेशा. एस्पायर तो बड़े के लिए किया जाता है ठीक. है अब क्योंकि समापन है फैमिली मैन में एक. सीन था जहां आप उसका पकड़ के खींच लेते. हैं हां हां उसपे मीम बहुत वायरल होता है. जी एक मीम एक सवाल उस पर लिख के आया कि कब. आ रही है भैया जी 24 मई क्योंकि उस पर भी. मीम बना कि पकड़ किसीने खींचा और लिखा. भैया जी कब आ रही.
है मेरे ख्याल. से वासेपुर और फैमिली मैन हा के ऊपर जितने. मीम्स बने होंगे मुझ मेरे मुझे लगता नहीं. और एक तीसरा है यू कैन बी नॉलेजेबल बाय. समवन नॉलेज हां एक तीसरी फिल्म वा डायलग. याद है आपको सर ये वाला डायलग उसका जवाब. सुनाए थे वो तो वो साइकेट्रिस्ट मुझे. काउंसल हा उस आप जो बोले थे हां. यह भी ग में मिल जाएगा इसके आप सुनाए थे. दो पलट के हां हार के जीतने वाले को.
बाजीगर कहते हैं जो जीता उसका जो जीता वही. सिकंदर हा उसके बाद गाली थी साला कोर्ट्स. के लिए पैसा दिए. थे मीम्स भरा पड़ा मतलब मैं ल चक था एक तो. उस फिल्म का वासेपुर का और दूसरा फैमिली. मैन का जी जी जी जी दो दो दो चीज दो. प्रोजेक्ट का जो है वो मतलब मैं मुझे इतने. डीएम प ये सब चीजें आती है बता नहीं सकता. खुश होते हैं मीम से या भाई साहब आप तो. मतलब सुबह शाम अगर आप मेरे डीएम में वो.
ठोक के मारते रहो तो आप खुशी के आप आगे. खुशी भी कहीं ना कहीं स्टैग्नेट हो जाएगी. भैया जी तो आपने बता दिया कब आ रही है एक. सवाल और जाता था लास्ट में था फैमिली मैन. थ्री कब आ रही है हम लोग शूटिंग कर रहे. हैं अभी इस साल तो पूरी शूटिंग में जाएगी. अगले साल देखते हैं किस समय चलिए प्राइम. वीडियो भैया जी पे मिले उम्मीद करेंगे. फैमिली मैन फिर मुलाकात भैया जी एकदम भैया. जी का भोकाल बनाइए फिर उसके पीछे फैमिली. मैन आ ही जाएगी बहुत-बहुत शुभकामनाए सर. आपको थंक थैंक यू.
