Unplugged ft. Malini Awasthi | Folk Music | Folk Singer | Padma Shri | Politics | Ram Mandir
और महिनवा मा बरसे ना बरसे फगुनवा में रंग. रस रस बरसे फगुनवा में रंग रस रस बरसे. आवटी 2.0 किसी ने रैंडम कहीं प्रोग्राम. में सुन लिया तो वो कि आप यहां कर क्या र. हैं आप बम्बे आइए ऐसे जैसे बमबे में थाली. लेक सब इंतजार कर रहे हैं वो एक शेर है ना. हमको मालूम है जन्नत की हकीकत नजमी रोज एक. ख्वाब सुनाते क्यों एक सफल महिला के पीछे. कौन होता है ईमानदार उत्तर तो ये है कि. महिला ही होती है अवनीश अवस्थी की पत्नी. मालिनी अवस्थी से यह मालिनी अवस्थी जी के.
पति हैं अवनीश अवस्ती हैप्पी मैरिज लाइफ. का फार्मूला क्या है मैंने बहुत ही एड़िया. रगड़ी शुभंकर लास्ट टाइम सर ने आपको लव यू. कब लिखा था मुझे लगता बोला तो अभी दो-तीन. दिन पहले ही होगा सर तो हंसते हैं. मुस्कुराते हैं तो हमने कहा तो बोले तो. उनके देख कर के हम लोग तो बहुत राते थे हम. लोग तो सोचते थे हसबे नहीं जानते हैं वो. तो कितना अच्छा से हंसते सर से कहिए का. हंसा करें जी मैं अवध शित से जाता हूं. लेकिन जब हम बड़े शहरों में गए और हमारे. माता-पिता जब हमारे इर्दगिर्द कभी आए या. फोन प बात कर रहे थे और बध बोलने लगे अवध.
में हमें लगे तो हमने कहा देहाती में काहे. बया रहे भैया हिंदी में बोलो मम्मी मैं भी. वैसे ही हूं गवार देशज एक मायावती की. सरकार थी क्योंकि कल्याण जी की सरकार तो. हम बहुत छोटे याद नहीं रहा माव सुर नर. मुनि सब कीरत. गावे अरे बरस फूल. आंगनवा चला हो करि आई. दर्शनवा कला जिनके लिए आराधना है और लोक.
संस्कृति जिनके लिए. अभिमान द क्वीन ऑफ फोक है आज मेरी नई. मेहमान पद्मश्री सम्मान से नवाजे गई यश. भारती सम्मान से नवाजे गए मालनी अवस्थी जी. आपका बहुत-बहुत स्वागत है और हर बार की. तरह बहुत खूबसूरत लग रही है तमाम लोग जब. मैंने बताया कि आज हम आपका इंटरव्यू करने. वाले हैं तो लोगों ने कहा कि मालिनी जी की. उम्र डिसेंडिंग ऑर्डर में कैसे चलती है. अरे अब तो बच्चे भी बड़े हो गए सब हो गए. लेकिन बच्चे नहीं बच्चों के बच्चे हो ग.
हैं दादी नानी हूं और बहुत मैं तो कहूंगी. कि बहुत सदा शयता के साथ इस. कम्प्लीनोस. में लोक संस्कृति के लिए क्या कहा था लोक. संस्कृति के अभिमान है का अभिमान तो लोक. संस्कृति जितनी जितना समय बीतता. जाएगा जितना इससे दूर जाएंगे जितना इसके. साथ-साथ भी चलते जाएंगे यह उतनी युवा होती. जाएगी हर बार आपको लगेगा कि ये तो आज.
हमारे मन की बात कह रही है इस युग में भी. वही बात कह रही है जो सही है और सच्ची है. यानी फोक इज फॉर एवर यंग तो आई थिंक दैट. एक्सप्लेंस योर कॉम्प्लिट एक सवाल मेरे मन. में बार-बार आता है कि जो नई पीढ़ी है अ. वो वेस्टर्न कल्चर की तरह बड़ी प्रभावित. होती है जिस यूपी बिहार में आपके गाने. सबसे ज्यादा सुने जाते हैं आपको सबसे. ज्यादा पसंद किया आता है वहां पर बड़े. सारे आरोप लगते हैं बड़े-बड़े नाम है. लेकिन आरोपों की बौछार है कई बार मुझे.
लगता है कि वो तपती दुपहरिया में वो जो एक. ठंडी सी हवा चलती है आप और आप जैसे एक दो. लोग और हैं जो उस मशाल को जलाए हुए हैं तो. यह इतना आसान भी नहीं. होगा क्योंकि छड़ फेम नहीं है इसमें बाकी. चीजों में क्षणिक फेम है मैंने जो रास्ता. चुना उसमें तो बिल्कुल भी क्षणिक फेम नहीं. था और शायद इसी कारण से एक लंबा वक्त निकल. गया और मुझे लगता है ना शुभंकर जब आपको. रास्ता समझ में आ जाए जीवन में क्या करना. चा ये उसका उद्देश्य समझ में आ जाए और आप.
चलते जाए चलते जाए और आपको लगे कि आपने. कोई और चला रहा है कोई और चाहता है आपसे. कुछ और आपका अभीष्ट हो और कुछ प्राप्य हो. आपका तो आपको समझ में आता है कि यह लंबे प. रस्ते पर ही चलकर हासिल करने वाली चीज है. और यह बहुत कम उम्र में मुझे समझ में आ. गया था जो आपने अभी इशारा किया कि हमारे. उत्तर प्रदेश में बिहार में पारंपरिक लोक. संगीत में दो बातें थी एक तो जो पारंपरिक. संगीत घर में गाया जाता था जो इतना सुंदर.
है जो इतना गरिमामय है लेकिन घरों के बाहर. उसकी पहचान नहीं थी उसकी कोई कह सकते हैं. कमर्शियल या एक कै फिजिकल कह लीजिए कोई. ऐसे पहचान नहीं थी घर में बुलवा हो रत जगह. हो नटवरा हो या शादी ब्याह में गाए जाने. वाले गीतों के रूप में सम्मान लेकिन. सम्मान होने के संगसंग उनकी क्या. प्रासंगिकता है उनकी आज भी क्या अहर है. क्यों वे अनिवार्य हैं वो धीरे-धीरे लुप्त.
हो रही. थी ढोलक घर से गायब हो रही थी उन दादि हों. को भी बच्चे कह रहे थे भाई अब अम्मा हो. गया अब अब ये गिटर पिटर नहीं चलेगा ढोलक. का सही बात है अब ये तो डीजे का जमाना है. अब तो ये होगा वो होगा और कहीं ना कहीं. उससे इतना दूर चले जा रहे थे बिना यह समझे. हुए कि यह सिर्फ गाने नहीं है एक बहुत. बड़ी विरासत को हम पीछे छोड़ रहे हैं और. जो दूसरा पक्ष था जिसकी ओर आपने इशारा. किया लोकप्रिय जो गाने हो रहे थे वो. लोकप्रियता के नाम पर एक ऐसी एक कह लीजिए.
बयार बह रही थी जिसमें स्तर का तो किसी को. ख्याल था नहीं एक दीवानगी थी सिर्फ. व्यवसायिक के नाम पर. जिसमें भाषा के नाम पर बोली के नाम पर. हमारी. आंचलिक संस्कृति के नाम पर सिर्फ और सिर्फ. दोहन और उसने कितना नुकसान किया है इसकी. कोई कल्पना भी नहीं कोई कर सकता तो मुझे. शुभंकर उसी समय य समझ में आ गया था कि यह. किसी तरह से जो हमारी दादिया गीत गाती हैं. जो हमारे किसान खेतों की मेड़ में बैठ कर.
के अभी देखिए चैत का महीना है इसमें जो. चैता गाते हैं घाटों गाते हैं इन गीतों को. कौन आ कर के बताएगा कौन इनको डिकोड करेगा. कौन इनको सरल शब्दों में समझाएगा कि यह हम. हैं हमारे पूर्वजों ने प्रकृति हो या जीवन. का कोई भी क्षण जैसे जिया उसको गीतों में. ढाला इसलिए इन गीतों का रहना जरूरी. क्योंकि आप इनके भीतर झांक कर अपने आप को. देख सकते हैं तो वह जो ऑप्शन आपने बताया. वह तो सदा से मेरे लिए था लेकिन मैंने यह.
बहुत जल्दी समझ लिया था कि मेरे लिए है. नहीं मेरे सामने होते हुए भी तो मैंने. पहला मार्ग चुना और उसमें तो सफर लंबा था. आज भी चल रही हूं अब मैम मेरे मन में एक. सवाल आता है जैसे मैं अवध क्षेत्र से आता. हूं जी अवध में हमारे यहां अवधि बोली जाती. है बिल्कुल और बचपन से हमने अपनी दादी. चाची नानी मौसी हा हा पड़ोस वाली बुआ सबको. बोलते हुए सुना बिल्कुल बिल्कुल लेकिन जब. हम बड़े शहरों में गए और हमारे माता-पिता. जब हमारे इर्दगिर्द कभी आए या फोन पर बात. कर रहे थे और वो धिम बोलने लगे तो एक शर्म. में खिच सी उन को लगने लगी आप सोचते हैं.
तो लगता है क्यों लग रही थी क्योंकि बाकी. लोगों को हम देखते हैं हर स्टेट के वो. अपने कल्चरल चीजों को बड़े मजबूती से पकड़. कर रखते हैं चाहे वो साउथ इंडियंस हो चाहे. वो पंजाबी हो गुजराती हो बिल्कुल सभी. लेकिन यह यूपी और बिहार में न जाने क्यों. मैंने कई बार महसूस किया कि अगर कोई कह दे. कि भैया तुम बिहारी हो तो वह थोड़ा सा. उपेक्षित लगता था कि अरे कैसे बोल दिया. तुमने या अवध में हमें लगे तो हमने कहा. देहाती में काहे बतिया रहे हो भैया हिंदी. में बोलो मम्मी तो ये धारणा कैसे बना दी. गई हमारे जहन में क्योंकि आप इस चीज में.
रोज आप लोगों सामना करती हैं जरा हमको. समझाइए हम जानना चाहते हैं इस बात को आप. अपनी बात कर रहे हैं यह तो इस पूर्वाग्रह. का तो आजीवन मैंने सामना किया है क्योंकि. मैं अवधि में गा रही हूं और भोजपुरी में. गा रही हूं या आंचलिक गीतों को गा रही हूं. पारंपरिक गीतों को गा रही हूं तो मैं भी. वैसी ही हूं गवार देशज हां और कह लीजिए. बिल्कुल. ग्रामीण समझ ज्यादा कुछ समझ में आता नहीं. ये एक मानसिकता है और ये इस मानसिकता से. से तो आज भी हम लोग लड़ रहे हैं कैसे.
मानसिकता बना दी गई जो अवधि बोलता है जो. भोजपुरी बोलता है वो गवार है देहाती है. मैं बहुत साफगोई से एक बात कहूंगी और यह. शायद किसी को बुरी लगे इसमें तो पूरा. हमारे माता-पिता का भी दोष है क्या वे. बोलते थे क्या उन्होंने जब बच्चे बोल रहे. थे उसी भाषा में तो मना करना नहीं शुरू. किया आप देखिए ये घरों में था यदि बच्चे. बोले तो उनको उनको सिखाया जाता था ऐसे. नहीं हिंदी में बोलो हिंदी में बोलो या. फिर अंग्रेजी में बोलो हिंदी बोले तो बहुत.
अच्छा है अंग्रेजी में बोलो आप यह सोच. लीजिए यदि कोई मेहमान आए तो क्या नहीं. करना इतना सिखा दिया गया था खाना भी नहीं. लेना है उनके सामने टॉफी रखी है तो भी. नहीं उठानी है उनके सामने गोदी पर नहीं. चढ़ना है बोलना नहीं है कमरे में भी नहीं. आना है इतने सारे तो हमने ना जाने क्यों. अंग्रेज चले गए अंग्रेजी छोड़ गए एक जो हम. लोग आज भी कहते हैं कोलोनियल माइंडसेट तो. वही एक गुलामी वाली मानसिक का सबसे ज्यादा.
असर तो उत्तर प्रदेश बिहार में हुआ ना और. देखिए यह जो उत्तर प्रदेश बिहार है मैं. मानती हूं यह हमारे यहां पूरे भारतवर्ष. में जी सभ्यता की उनका पालना रहे सारी. सभ्यताओं ने यहीं पर आकर अपनी समझ विकसित. की यहीं पर जागे यहीं पर वह अपना रूप रंग. बदलते गए पुराने यही देखिए आप अवध के नम. शरण में उपनिषद लिखे गए यही अभी अयोध्या. में राम मंदिर बना तो राम कृष्ण य पूरी जो. धरती है बिहार को ले तो गौतम बुद्ध या. सबसे पहला लोकतंत्र वैशाली का यहां पर.
सबसे ज्यादा सभ्यता ने अपना रूप रंग देखा. है और सबसे ज्यादा जब हम पराधीन हुए तो हम. पर भी इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा अब. आपको मैं आपके सवाल को थोड़ा जड़ से लेकर. जा रही हूं जैसे आप यदि यह देखें कि एक. बहुत मैंने बात सुनी बड़े होते हुए कि. अक्सर दक्षिण भारत में महाराष्ट्र में. गुजरात में हम लोगों को लोग कहते थे कि. हमारे लड़की का बड़ा सम्मान है आपके यहां.
पर देखिए एक तो क्राइम भी है अपराध भी है. और लड़कियों का वह सम्मान नहीं दहेज. मांगते हैं और लड़कियों का आप याद करिए. वोह जमाना जिसम महिलाओं पर अत्याचार तो इस. प्रकार के बहुत सारे आलोक आरोप और ये सब. सुनते थे हम लोग लेकिन तब तो बहुत खुले मन. से कहते थे कि वो दक्षिण भारत में देखिए. कितना सम्मान है जैसे कि उदाहरण के लिए. वहा घूंघट नहीं होता और यहां पर पर्दे की. प्रथा है प्रथा है.
हर समस्या या हर बात को यदि अतीत में लेकर. के जाएं इतिहास में हर बात का उत्तर है हम. पराधीन हुए और पराधीनता के अपने अपनी. तकलीफें हैं अपने कष्ट है जिनके बारे में. आज खुशी की बात है आज चर्चा होती है आज. बातें हो रही हैं 11वीं शताब्दी 12वीं. शताब्दी में ज पराधीन हो गए और ऐसे में जब. आज हमारे यहां कानून का अधिकार है राज है. वहां पर एक लड़ के संग छेड़खानी हो जाए.
किसी लड़की के साथ. यदि कोई भी गलत काम हो जाए तो पूरी दुनिया. में चर्चा होती है जब अपनी सरकार है किसी. को भी अधिकार है कि व जाकर एफआईआर करे आप. सोच उस समय किसका राज्य था हमारे ऊपर. किसका बस था और उस समय हमारे पूर्वजों ने. क्या किया शक्ति इसी तरह की शुरू करी. क्योंकि जो आया बहुत सारे लोकगीत मिलते. हमारे य शुभंकर जिनमें जिक्र है कि एक. कुसुमा की कहानी मिलती है हमारे यहां जिस. में.
कुसुमा पानी भरने जा रही है पनघट में एक. मिर्जा आता है कुसुमा को देख कर के उस पर. मोहित हो जाता और कहता मैं तुमको अपने संग. लेकर जाऊंगा और मेरे साथ चलो मेरे जो सागर. है वहां के जल. पीना कुसुमा क्या करे उसको उठाकर वो घोड़े. पर बैठा लेता है यहां से ही समझ में आ. सकता है कि इसको बलात एक तरह से हरण करके. ले जाता है कुसमा एक ही एक उसके सामने. मिन्नत करती है कि अंतिम बार मुझे अपने. गांव का जलाशय देखने दो अपने मा पिता को.
एक बार देखने दो वो उसको उसके गांव लेकर. के जाता है जब अपने पिता और बंधक बने अपने. भाई को देखती है तो मिर्जा से कहती है. तुम्हारे गांव तो चली रही हूं जलाशय से जल. पीने मेरे पिता और भाई को छोड़ दो वो छोड़. देता है फिर कहती है अंतिम बार प्रणाम कर. लू अपने जलाशय को मिर्जा कहता अच्छा ठीक. है वह घोड़े से उतरती है और उसी जलाशय में. समाधि ले लेती है वापस कभी ना आने के लिए. यह हमारे यहां घटा है ये लोकगीत उस सच्चाई. को बयान करते इस तरह की कई कथाएं हैं जहां.
पर स्त्रियों का जीवन ऐसा रहा हो. असुरक्षित रहा हो कि जिसको जब जो हरण करके. ले जाए वह ले जाए ऐसे में कन्या का जन्म. ही कहीं ना कहीं बुरा माना जाने लगा और. जन्म हो गया तो उसका उत्सव नहीं मनाना. जैसे हमारे यहां सोहर मिलते हैं लड़कों के. सोहर मिलते हैं पुरुष के बच्चे के लड़के. के जन्म के सोहर मिलते हैं लड़की के जन्म. के सोहर नहीं मिलते थे क्योंकि खबर ना करो. बैरण सुन ले कहते ना धीरो से हले से शोर. करियो राजा बैरण सब सुने लेंगी गानों में.
जिक्र मिलता है इसका इसी तरह से रात में. ब्याह होने लगे जबकि हमारे यहां तो विवाह. दिन में होने की परंपरा थी छोटी उम्र में. विवाह होने लगा कि भाई ब्याह हो जाए जवान. हुई लड़की य पता ना चले क्योंकि लोग डरते. थे कि जिसकी लाठी उसकी भैस जिसके पास ताकत. है वह किसी भी लड़की का हाथ पकड़ के ले. जाएगा तो जब ऐसी असुरक्षा की भावना में ये. जो पूरा गंगा पट्टी का जमाना हमने पूरा एक. युग ऐसे बिताया है इस पूरे युग का प्रभाव. कैसे नहीं पड़ेगा वो प्रभाव पड़ा और उस.
प्रभाव से दक्षिण भारत अछूता रह गया आप. देखिए आज भी मंदिरों से देख लीजिए ना. हमारे सारे मंदिर तोड़ दिए गए आज जहां. जहां जैसे आप दक्षिण भारत की तरफ चलेंगे. विंध्याचल के नीचे तो आपको सब कुछ वहां. सुरक्षित मिलता है जहां तक वो नहीं जा पाए. जब मंदिर टूटे हैं तो सिर्फ मंदिर नहीं. टूटे ना हमारा पूरा सामाजिक ढांचा हमारा. मनोबल सब कुछ तोड़ा गया और उसमें सबसे. पहले विजेता का सबसे पहला जीत का जो उसका. पौरुष मिथ्या और उष का दंब होता है वो किस.
पर निकलता है नारी प नारी पर निकलता है तो. हमारी तो पूर्वजा ने जो सहा होगा उसकी हम. लोग कल्पना भी नहीं कर सकते कभी नहीं. कल्पना कर सकते कहना बहुत आसान है लेकिन. यह जितनी भी कुरीतिया आई उनके पीछे क्या. कथा तो इसलिए मैं तो धन्य धन्य बोलती हूं. कि उत्तर प्रदेश बिहार. में आज हम जिस भारतवर्ष को जानते हैं जिन. राम कृष्ण जिन महादेव जिन मा बिंदवासनी या. मैं कहूं. गंगा जमुना सरस्वती क्यों सूर कबीर तुलसी.
सबका नाम लूं राजस्थान में मीरा है सबकी. यदि मैं बातें करूं ये सब मिलकर के ही आज. भारत है और यह इसी मिट्टी इसी धरती ने. पूरा अपने भीतर सोखा है तो यह यहीं पर मैं. आती हूं जो आपने पहला प्रश्न पूछा था कि. किस कारण से लोकगीत भी इस तरह के आए जो कि. बहुत लोकप्रियता पा गए और चलन में भी आ गए. क्योंकि कहीं ना कहीं पर एक उत्पाद के रूप. में एक प्रोडक्ट के रूप में आप जब एक.
स्त्री को देख रहे हैं वैसा ही वर्णन कर. रहे हैं नकश और वैसा ही उसको बेच भी रहे. हैं तो दुर्भाग्य तो है ही कहीं ना कहीं. यह दोहन एक पूरे उस वर्ग उस समाज का जो. अपनी नीड़ से बहुत दूर बिछड़ा हुआ दो रोटी. कमाने की अ जुगत में दिन रात जूझ रहा है. तो उन गानों को सुन कर के कहीं ना कहीं. अपनी जड़ों को याद कर रहा है तो वह कहीं. ना कहीं उस भग नाशा का दोहन है इस तरह के. गाने हालांकि आपने बिना मेरे सवाल पूछे.
इतनी सारी कुरीतियों के पीछे की जो असल. वजह थी या जो सोच थी उसको इतनी खूबसूरती. से बयां कर दिया नहीं मैं अक्सर सोचती हूं. शुभंकर आप ये सोचिए मैं आज एक बात बोलना. चाहती हूं क्योंकि मुझसे यह बात बहुत आप. जानते हैं मैं तो कार्यक्रम देती हूं तो. सर ढक कर के जाती हूं हम लोग मंदिर जाते. हैं तो भी हम लोग सर ढकते हैं क्योंकि जो. बड़ा है तो बड़े के सामने आदर भाव से हम. सर ढकते हैं और ये सभी धर्म मजहब में है. लेकिन अक्सर अ. मैं इस बात का यहां पर इसलिए जिक्र कर रही.
हूं क्योंकि परिवार में हमारे यहां एक दो. विवाह ऐसे हुए जहां पर. जो जो बहुए आई वो मुंबई की आई तो यह अक्सर. कहा गया घरों में कि भाई मैं अपनी देवरानी. का ही बता रही हूं तो हम स्वाभाविक है घर. में बड़ी बहू का तो जो चलन चलाती है पूरा. परिवार उसी में ढलता है और मुझे कहीं ना. कहीं परंपराएं उनमें रचना पसंद था और मुझे. भाती है मुझे लगता है हमने लिया है इसका. वैसे निर्वहन भी होना चाहिए तो मैं अपना.
सर ढककर काम करूं तो हमारे घर में जो उनके. मां थी मैं देव वो लोग कहे कि भाई यह तो. सब कर लेते क्योंकि इनकी तो आदत है. इन्होने अपनी मां को करते देखा लखनऊ में. लेकिन हमारी आदत नहीं हमारे यहां सर ढकना. बुरा मानते हैं लड़कियों की आजादी का हनन. है ये सर में क्यों सर क्यों ढकना तो मैं. आप लोग को एक बात बताना चाहूंगी शुभंकर. बहुत कम लोगों को पता है कि यह जो पर्दा. है ये जब यवन आए तो पर्दा आया पर्दा हमारे. यहां नहीं था अपने अपने आपको को ना.
दिखाने अपना चेहरा. छिपाने उसकी अदम्य चेष्टा यही पर्दा था आप. जानते हैं आज भी थिएटर में हिंदी में जो. पर्दा गिरता है उसको क्या बोलते हैं. यवनिका यवन से यवनिका आया है जो पर्दा. गिरता है ना नाटक जब होता है तो कहते. यवनिका गिरी मराठी थिएटर गुजरात कि. देखेंगे तो यवनिका वो यवन से आया है कि. पर्दा इसीलिए हरियाणा हो या पंजाब ये आपका.
राजस्थान हो अ उत्तर प्रदेश और बिहार हो. यह. पर्दा कोई देख ना सके घूंघट के पीछे कैसा. है पद्मावती की कहानी तो हम सबके सामने है. तो ये एक मैं इन चीजों को तो बहुत सुनती. रही हूं तो मुझे लगता है कि कभी-कभी हम. बहुत जल्दी खारिज कर देते हैं चीजों को. लेकिन हर चीज को सापेक्ष रूप में समझने के. लिए उसके पीछे इतिहास देखना बहुत जरूरी है. तो ये जो आपने बताया कि आपके घर में. परिवार में मुंबई से लोग आए हां ये बड़ा. दिलचस्प किस्सा है क्योंकि ये हर परिवार.
की कहानी है तो फिर आगे इसमें क्या हुआ. अरे भाई तो उन्होंने मना करा कि नहीं. करेंगे भाई हमारे यहां नहीं होगा तो ये भी. हमारे यहां ससुराल ऐसी है कि हमारे यहां. हमारी सास बड़े खुले मन की थी और उन्होंने. कहा भाई ये तो इच्छा है जिसकी अपनी इच्छा. है परिवार में सम्मान के लिए एक यह कोई. इसमें कोई दबाव तो होता नहीं आजकल पढ़े. लिखे परिवारों में तो बिल्कुल भी नहीं है. लेकिन कहीं ना कहीं मुझे लगा मुझे देख कर. के एक मानसिक दबाव सब में रहा होगा कि ये. तो बहुत ज्यादा ही ट्रेडिशनल है बहुत.
ज्यादा परिवार को संभाल के रखती लेकिन. जहां जिन्होंने नहीं देखा पर्दे को या सर. पे घूंघट उनको बहुत अजीब लगता है तो वह. नहीं करते और उनसे कोई अपेक्षा भी नहीं. करता क्योंकि मुझे लगता है सम्मान हृदय. में होना चाहिए तो यह जो ट्रेडिशनल होना. होता है कई बार इसे लोग आउटडेटेड मानते. हैं बिल्कुल मैं मैं तो आपको शुरू में. बताया कि कई लोग मुझसे जब मिलते हैं तो एक. बार बड़ा मजदार किस्सा मेरी बेटी अ तब उस. समय पढ़ रही थी य डीपी सारख पुरम में तो.
उसको पार्टी में एक जाना था और मैं उसको. कह रही थी वो बहुत कह लीजिए कि वह ज्यादा. घुलती मिलती नहीं थी उन दिनों तो मैंने. उसको कहा उसके मित्र का फोन आया कि आंटी. इसको भेज दीजिए पार्टी में जाने के लिए तो. मैंने कहा कि अन्या यू शुड गो जाओ हो करके. आओ बहुत कहने पर वह गई तीन दिन बाद वह. मित्र घर. आई जब वह घर आई तो मुझसे मिली तो कहती. आंटी यू सो कूल मैंने कहा कि बोली नहीं. मुझे आपको देख के लगता था कि आप ही होंगे.
जो अनन्या को मना करते हो कहीं ना जाने के. लिए तो मुझे कई बार ये लगता है कि ए जब. उससे बात की तो उसने कहा कि मुझे लगता है. कि यसो कुल हमने कहा ये एक वस्त्र के पीछे. या आप जो करते हैं जो एक परंपरा से जो. आपका जुड़ाव है उसको लेकर के लोगों ने. अपने मन में ऐसी धारणा एक बना रखी है कि. बहुत ही प्योरिटी तो सुंदर शब्द है एक. वर्जना हों से बंधा हुआ एक ऐसा व्यक्ति जो.
हिलना झुकना दबना तो हिलना झुकना दबना तो. हम भी नहीं जानते लेकिन उस परंपरा के भीतर. जो औदार्य है जो उदारता है जो एक पूरा. वैश्विक दृष्टि है उसको लोग समझे. प्रोग्राम जो देखते दो ढाई घंटा तो मैं तो. उनको यही बताती जाती हूं कि गाने को यदि. आप देखेंगे समझेंगे जिन गीतों को मैं गा. रही हूं तो उसके पीछे उसी भारतीय स्त्री. का चित्रण है जिसने अपने पूर्वजा से कितना. मन लिया है भाई शुभंकर अब आपने तो कह दिया.
अवध के सच बताओ मेरे को तुम्हारी दादी से. ज्यादा लिबरे स्त्री कोई नहीं रही होंगी. या तुम्हारी नानी से उस जमाने की जो. स्त्रियां थी मेरा अपना मानना है कि वे. बड़ी. ही अपने मन की बड़ी जीजी विशा वाली बड़ी. मेहनती बड़ी. पुरुषार्थ और जो ठान लिया वही करने वाली. सच है आज कि मुझे लगता है स्त्रियां फिर.
भी सोचती हैं बड़ी जल्दी स्ट्रेस हो जाता. है बहुत जल्दी दूसरे के पिर प्रेशर में भी. आ जाती है लेकिन पहले जो सोच लिया तो कह. दिया मे नानी अभी भी जीवित है और मैं. इमेजिन कर सकता हूं सारी बातें जो आप कह. रहे हो एटली और मुझे याद है हमारी हमारी. दद सास थी या मैंने अपनी मां को देखा है. वो हमारी दधि सास 95 96 की होके नहीं रही. तो जब मैं ब्याह कर आई तो वो भी थी हमारी. सास तो थी हमारी दरिया सास भी थी तो वो. हमारे सामने सामने हमारी सास पर यानी अपनी.
बहू पर भी शासन चलाती थी तो हु इज द बॉस. यह तुरंत पता चल जाता था उस उम्र में उस. अवस्था में वह तय करती थी उन्हें कहां. जाना और उनको रोकने की किसी में ना तो. साहस था क्या खाएंगे क्या बनेगा और यह. मुझे लगता है. कि यहां तक कि विवाह के व्यवहार में भी. किसको क्या देना है वे तय करती थी और घर. के लड़के भी उनसे पूछ कर के जानते हां ठीक. है अम्मा सही कह र हो तो यह मुझे लगता है. कि कहीं कहीं जो.
रोल्स हमने आज वर्किंग मेमन के लिए डिफाइन. किए हैं एक जॉइंट फैमिली के स्ट्रक्चर में. जो घर का सबसे बड़ा होता था उसमें आप किसी. भी फैमिली में हमारे य कहते हैं फ्यूड िक. माइंडसेट रहा या फ्यूड स्ट्रक्चर रहा. लेकिन आप किसी भी एक आम भारतीय घर में. देखें घर की जो बुजुर्ग स्त्री होगी वह. सर्व शक्तिमान होगी उसके पास सारे अधिकार. होंगे हां उन बात परिवारों की बात करूं. जहां संस्कार है हां जहां संस्कार नहीं.
वहां तो बात करने का कोई फायदा नहीं ब. आपकी बातें सुनकर मुझे मेरी लेट दादी पूरी. तरह से याद आई कि जब मेरी माता जी गई थी. और हम छोटे थे कैसे उनका शासन था हर एक. व्यक्ति पर अधिकार था अच्छा मैम एक सवाल. मेरे मन में आया क्योंकि हमने ईश्वर का भी. जिक्र किया यूपी में मैं जब टीवी डिबेट. करता था मैं तो अक्सर कहता था कि हमारे. यहां चार भगवान का जन्म. हुआ और कल्चर की आप बात कर थी यूपी बिहार. के और बड़ा अनफॉर्चूनेटली. गए जन्म यहां लिया मथुरा में श्री कृष्ण. जी जहां से मैं गोंडा से आता हूं अयोध्या.
से श्रीराम जी उसी में बगल में जगह है. अक्षर अक्षरधाम मंदिर बना स्वामी नारायण. भगवान और काशी कैलाश जी की धरती और चारों. भगवान इस लोक से यहां जन्म लिए यूपी में. लेकिन बाद में चले गए तो मैं कहता था अब. धीरे-धीरे चीजें रिस्टोर हो रही है भगवान. भी लौट रहे हैं नहीं देखिए एक बात है. हमारे यहां हिंदू धर्म में हमारे यहां जो. ईश्वर की जो परिकल्पना है या जितने भी. महापुरुष हैं आप यदि देखें व चलाए मान रहे. हैं एक जगह स्थिर होकर के ना किसी ने.
ज्ञान पाया ना ज्ञान साझा किया बना तो वही. है जिसने घर छोड़ा यह तो आप भी मानेंगे तो. जितने भी प्रभु हैं जितने ईश्वर आपने. चारों का नाम लिया इनमें आप यदि संतों को. भी लीजिए तो आप कबीर को भी देखिए वह कहां. जन्म लेते हैं और मघर में जाकर के देह. त्याग हैं या आप गोस्वामी तुलसीदास जी को. लीज सोरों में जन्म लेते हैं और फिर काशी. बांदा उनकी पूरी एक अलग उनकी यात्रा है.
मुझे लगता है यह लीलाएं चाहे राम की देखें. भगवान राम की या भगवान कृष्ण की देखें. स्वामी नारायण जी की देखें इन सब का जीवन. एक तपस्या है कि जब. तक जहां जन्म लिया वह तो प्रारब्ध है कि. आपने उन माता-पिता उस धाम में आपने जन्म. लिया अब आपके कर्म आपको बनाएंगे जो आप. बनेंगे आप कृष्ण का यहां पर उदाहरण ले तो. कृष्ण तो यही सिखाते सखते कि भाई जहां. उनको को मोह होने लगा उस चीज को तजत हैं.
वह गोकुल छोड़ते हैं मथुरा छोड़ते हैं. पहले मथुरा के बाद गोकुल छोड़ते हैं और. द्वारिका जाते हैं वहां के बाद भी आप. देखिए जब. वह गोमांतक में पर्वत में जहां पर का बड़ा. सुंदर वर्णन है कि पूरा बलराम जी के लिए. पूरा जो बनाते हैं और रेवती के लिए राजा. उन्हीं को बना कर के वहां से चले आते हैं. मैं कभी-कभी सोचती हूं जब मैं महाभारत. सुनती हूं. कहां कुरुक्षेत्र है प्रस्त और कहां उस.
समय द्वारिका से भगवान श्री कृष्ण यदि देह. में थे एक शरीर में थे तो वे उनका जीवन तो. पूरा यहीं चारों तरफ बीता कहने को. द्वारिका में थे लेकिन पूरा वह जब देखे तो. इंद्रप्रस्थ में जब देखे तो सुदूर मणिपुर. में भी थे वे उड़ीसा में भी जगन्नाथ जी के. भी रूप में विराजमान है ऐसे भगवान राम की. कथा है कि वे लौटते यही यही देखिए गुप्तार. घाट में ही जल समाधि लेते हैं में लेकिन.
उनकी. पूरी जो यात्रा है चित्रकूट से लेकर के. लंका जाने की और फिर वापस लौट के आने की व. पूरा भारत को जोड़ने की एक शोषित तों. वंचितों को. समर्थवादी. होता है जब वह प्रजा के साथ रहेगा यह राम. सिखाते हैं ऐसी स्वामीनारायण जी हैं यह तो. मुझे मुझे लगता कितने लोगों को पता भी. नहीं होगा कि स्वामी नारायण जी हमारे य के.
जन्म हा तो ये उन्होंने पूरा विश् ये सवाल. मेरे दुर्दशा को लेकर मेरे मन में था. क्योंकि जब मैं छोटा था. तो अच्छा आप मंदिर के और धाम के मैंने तो. उनको आपने ईश्वर की बात की तो मैंने ईश्वर. के उस रूप में लिया कि ईश्वर बने ही तब जब. उन्होंने अपना धाम छोड़ा एक तो बात यह हुई. जो आपने अभी धाम की य स्थिति की बात कर. रहे हैं आप जैसे स्वामीनारायण का जिक्र कर. लीजिए स्वामीनारायण भगवान का जन्म मेरे. गोंडा जिले में हुआ है जी जी वहां पर.
महर्ष कितना अच्छा लगता है ना मेरे गोंडा. जिले में पतंजलि पतंजलि महर्षि का जन्म. वहां पर हुआ बड़े लेकिन जब मैं देखता हूं. कि स्वामिनारायण जिसके नाम पर यहां पर. इतना बड़ा अक्षरधाम मंदिर बना है जो सबसे. बड़ा हिंदू मंदिर में से एक है मैं गुजरात. जाता हूं बड़े-बड़े मंदिर बने हैं भगवान. ने कुछ चार चरण पादुका रखी होगी दो और. सामान रखे होंगे लेकिन जहां जन्म हुआ जहां. भगवान ने बचपन खेला कूदा वहां एक छोटा सा. हॉल्ट है ढंग से ट्रेन भी नहीं रुकती जाने. के लिए उबड़ खाबड़ रास्ते थे पा साल पहले. तक तमीज की सड़क तक नहीं थी अगर आपको जाना.
हो आपकी पीठ दुख जाए बड़ी मुश्किल से जाते. थे मेरे परिवार में कई लोग उस परिवार में. जुड़े हैं स्वामीनारायण भगवान के अयोध्या. की भी यही कहानी थी 2015 के पहले बस. स्टैंड नहीं था सरयू घाट किस तरफ उतरना. पड़ता था अगर आपको नहाना है नागेश्वरनाथ. जाना है हनुमान गढ़ी में जाता था मैंने कई. साल पहले ट्वीट भी किया था कि वाटर कूलर. में फंगस निकल रहा. है अरे अब बस स्टैंड तो छोड़िए लोगों कई. लोगों को जो अब आ रहे हैं दर्शन करने. उन्हें यह तक नहीं मालूम कि अयोध्या रेलवे. स्टेशन भी है हां यह तो एक इग्नोर का लेवल.
है आप जो बात कह रहे. हैं उसमें बदलाव किस प्रकार का आ चुका है. चमत्कारिक को आप देख रहे हैं मैं जब बात. कर रही थी कि पराधीन भारत में यह वह. मिट्टी है जिसने हर प्रकार का मान अपमान. और स्त्री असुरक्षा की मैं जब बात कह रही. थी और वहां से यह पूरा कालचक्र ऐसा ऐसा. घुमा है कि आज उत्तर प्रदेश में नारी. सुरक्षा हो या जन सुरक्षा हो उसकी मिसाल. पूरी दुनिया में जा रही है और उसी बदलाव.
का यह एक क्रम है जो आपने अयोध्या में. देखा है तो जब आप अयोध्या गई थी पुंडर. महाराज ने हमसे कहा कि ऐसे ऐसे लोग जिनके. जाने से 15 20 हज आदमी खड़े हो जाए और. वैसे 15 20 हज आदमी एक साथ खड़े हो एक. टकटकी लगाकर क्या बात श्री राम के दर्शन. करने को तो वो क्या अनुभूति थी आप लोगों. की क्योंकि हम तो टीवी पर ही देख रहे थे. आपको वो वो वो क्षण बड़े बड़े पुण्य किए. थे वहां पर खड़े होने का सौभाग्य मिला और. उस से भी ज्यादा पुण्य किए होंगे जो वहां.
पर. सुर लगाने का सौभाग्य मिला ये ये यह तो. मैं मानती हूं कि ये ये इस जन्म का. सौभाग्य नहीं यह कुछ पूर्वजों के अच्छे. किए हुए पुण्य है जिनका प्रसाद मुझे मिला. कि मैं उस दिन अयोध्या में खड़ी थी. आमंत्रित थी और जब रामलला का प्रकट हुआ है. उस समय हम माइक पर कीर्तन कर रहे थे मोरे. राम लला मोरे राम लला मोरे राम लला मोरे. राम लला मोरे राम लला मोरे तो वह वह मुझे. नहीं लगता कि इस देह शरीर हमने कुछ ऐसे.
कर्म किए कि यह सौभाग्य मिला यह पिछले. जन्म में दान किए हुए मोतियों का आशीर्वाद. है बस यही कहूंगी. कि कुछ कल्पनाएं जो आप के मन के किसी कोने. में दबी हो काश ऐसा हो जाए ऐसा होगा बातें. सुनते आ रहे हैं क्या ऐसा होगा और वह हो. जाए और ऐसे हो कि आपको लगे कि नहीं नहीं. मैंने जो कल्पना की थी व तो इतनी छोटी थी. ये कितना विराट और कितना भव्य और कितना.
सुंदर है ऐसा था 22 जनवरी को रामलला का. प्रा काटे और एक बात मैं बताऊं यह मैं. इसलिए कह रही हूं क्योंकि मैं अयोध्या रही. हूं तब फैजाबाद और अवनीश उस समय कलेक्टर. थे यह बात है 97 की 97 98 दो वर्ष हम लोग. थे वहां तब रामलला अ टाट में थे और हम लोग. रामलला के दर्शन को जाते थे आप जाती थी. दर्शन करने जी जी आपको. याद थे और एक मिट्टी के टीले पर भगवान.
श्रीराम विराजमान थे और घूम करके जाना. पड़ता था और उस समय एक घटना भी हुई थी कि. आंधी पानी आई तो छप्पर उड़ गया मुझे याद. है अगले दिन अखबार में निकला और ऊपर तक इस. पर चर्चा हो गई कि ऐसा कैसे हो गया कि तो. मैं उस दिन मुझे याद है कि यह आए देखने के. लिए मैं साथ में आई तो मैं बड़ा फूट फूट. के रोई. कि यह मैं इसलिए कह रही हूं शुभंकर कि मैं. आज ये पहली बार यहां बता रही हूं किसी.
पॉडकास्ट. में. जब अडवाणी जी का रथ आया था तो उसमें भोजन. पका करके पूड़ी सब्जी देने वालों में से. हम थे मैं मेरी मां हमारी. भाभी निराला नगर में हमारा मायका लखनऊ में. तो उन्हें पूरा प्रोग्राम पता था मुझे आज. भी याद है कि हम लोग अब इतनी भीड़ थी और. वो बस आगे आगे चलती जा रही थी हम लोग पीछे. कहीं छूटते चले जा रहे थे और लखनऊ के यहीं.
ये जो क्लाक अवद वाला जो चौराहा है वहां. पर बेगम हजरत महल अब तो बदल गया वहां पर. अलग मूर्तियां बन गई है वहां पर हम लोग. रुक पाए और हमने जब चढ़ कर के क्योंकि जगह. नहीं थी कि हम लोग ऊपर किस पर चढ़ पाए हम. लोग चढ़ कर के किसी के आदमी के उस परे. रिक्शे पर चढ़ कर के जब हमने पूरी सब्जी. वहां पर दी और अडवाणी जी दोनों हाथों से. ऐसे जैसे प्रसाद हम लोग दे रहे हो ऐसे का. था मैं सोचती हूं कि मन में भाव था बस कि.
इतने सारे कार सेवक जा रहे हैं उनको भोजन. वो हम लोग बस अपनी ओर से दे दे भावना उस. तरह की जुड़ी थी और ऐसे में जब वहां पर. रामलला को हम लोग देखते थे तो हमारे वहां. पर जितने साधु संत थे वह यह बात कहते थे. कि कारण है कि अयोध्या दर्शन माने हनुमान. गढ़ी जी का दर्शन य हनुमान जी यहां पर. इसीलिए विस्थापित है कि हनुमान. जी यह प्रण करके बैठे हैं कि भगवान राम. यहां पर स्थापित होंगे और जिस दिन राम लला.
यहां पर स्थापित होंगे तब हनुमान जी का य. प्रण संपन्न होगा इसलिए अयोध्या दर्शन. यानी हनुमान गढ़ी का दर्शन तो हम लोग. हनुमान गढ़ी जी के दर्शन करने जाते थे तो. हम लोग यही सोचते थे कि क्या ऐसा होगा और. क्या चमत्कार चमत्कारिक ढंग से और एक बात. शुभंकर और कहना चाहूंगी कि. मैं मुझे लगता है कि भगवान राम का जो पूरा. जीवन है बड़ा सौम्य शांत श्री राम थोड़ा. बताइए ना इस ब नहीं नहीं एक बात मैं बस कह.
लू मैं जो इसी विचार से अभी चकि मैं मंदिर. की बात प कह के फिर उस पर आती हूं कि. भगवान राम का जो पूरा जीवन देखें तो जो एक. पूरा उसका निकष जो हमें दिखता है वो बड़ा. सौम्यता और बड़ा. शांति विनम्रता से. परिपूर्ण और इस पूरे आयोजन में जिस तरह से. चाहे वह राम मंदिर के बनने का सुप्रीम. कोर्ट से आने का निर्णय हो पूरे देश. द्वारा उसको स्वीकारा जाना हो शांतिपूर्वक. ढंग से और चाहे व उसकी नीव रखा जाना हो और.
तय समय से भी कम समय में उसका बन करके. प्राण प्रतिष्ठा उतनी शांति और सौहार्द. पूर्ण वातावरण में होना यह मुझे लगता है. कि रामलला ऐसा ही चाहते रहे होंगे जितनी. शांति हो जितनी सौम्यता जितने गरिमामय ढंग. से और उस दिन मैं अभी असल में उस दिन वहीं. पर हूं अभी 22 जनवरी के दिन तो मैं भी. इसलिए भावुक हूं बहुत ठंड थी कपकपी एकदम. सबकी छूट रही थी. इतनी ठंडक थी कई दिनों से कोहरा छूटा नहीं.
था सूर्य भगवान प्रकट नहीं हुए थे और रात. में हम लोग मजाक कर रहे थे कि सूर्यवंशी. भगवान राम को देखने क्या सूर्य भगवान आज. नहीं. आएंगे अपने राम लला का प्रकट और उस दिन. सुबह 9 बजे जो आदित्य मल ऐसा प्रकट हुआ. ऐसा प्रकट कि वो जो गुनगुनी गुनगुनी धूप. थी और यत्र तत्र सर्वत्र चारों तरफ सिर्फ. सिर्फ पीला भगवा लाल और पूरा स्वर्ण.
रश्मिया जैसे फैली हुई हो मुझे तो लगता है. हमने साक्षात रामलाला के उस दिन दर्शन. किए अब आप क्या पूछ रहे थे आपको सुनकर. विजुलाइज करकर मैं ये अनुभूति कर पा रहा. मैं तो वहीं पर अभी तक मतलब मैं उस उस अब. मतलब मैं कह सकती हूं कि उस दिन के सुख के. बाद लगा कि सुख जो हम लोगों ने सुना है कि. राम के जन्म पर संतों को सुख हुआ देवताओं. को सुख हुआ तो गाते हैं हम लोग उन चीजों. को जैसे सुर नर सुर नर मुनि सब कीरत.
गाव अरे बरस फूल. आंगनवा चला हो करि आई. दर्शनवा तो कैसे कीर्ति गाते होंगे कौन से. फूल बरस रहे आनंद के फूल बरस रहे उस दिन. साक्षात आनंद बरसता हुआ देखा बहुत खूबसूरत. जी अब यह सवाल कई लोगों के मन में आता है. प्रभु श्री राम कौन हैक मैंने कहीं आपको. सुना था आपने राम जी के अलग अलग रूपों का. वर्णन किया था और बड़ा खूबसूरत वर्णन किया. था तो हम चाहते हैं कि बताइए आप हमारे.
दर्शकों को कौन है श्रीराम और कैसे उनके. अलग-अलग रूपों का वर्णन आप करती है भगवान. राम एक विचार है और वह विचार यह है जितना. सहज जितना सहज भाव से हम मानवीय धर्म को. निभाए वही राम होना है राम ने यही किया. राम जन्म लेते हैं प्रतापी रघुवंश में और. वहां पर जन्म देने के बाद आप यदि ध्यान से.
देखें तो वे नियति द्वारा उनका प्रारब्ध. पूरा तय हो गया इतनी छोटी उम्र में आते. हैं और आते ही सीधे ऋषि आते हैं उनको ले. जाने के लिए असुर सतावत राजन मोही मैं. जाचन आया निर्प तोही राजन भेजो राम. लक्ष्मण को देखो असुर उत्पात कर रहे और. दशरथ सोचते इतने छोटे मेरे लड़के य क्या. असुरों का नाश करेंगे लेकिन भेजते हैं और. वहां उनकी वीरता से चकित हो उनकी कीर्ति. चारों ओर फैल जाती है इतनी छोटी उम्र में.
राम लक्ष्मण के साथ यज्ञ निर्विघ्न संपन्न. हो सके इसलिए वे रक्षा कर रहे थे ऋषियों. की इतनी किशोर भी नहीं थे बाल अवस्था. थी किशोर होते हैं उनके गुरु उनको लेकर के. जाते हैं वहीं से मिथिला लेकर जाते हैं. मिथिला लेकर जाते हैं वही कहते हैं ये वन. जनक स्वयंवर रचाए चलो तुम भी स्वयंवर में. हिस्सा लो अब यह देखिए सीखने वाली बात है.
कि आजकल के माता-पिता सोचते हैं भाई गुरु. का कैसे अधिकार हो गया कि वह तय करे लेकिन. राम राज्य सिर्फ राम से नहीं आरंभ हुआ ये. रघुवंश का राम राज्य है वहां पर यह. परिपाटी थी कि दशरथ ने यदि सौंप दिया गुरु. को तो जो गुरु सर्वश्रेष्ठ होगा अपने. शिष्य के लिए वो करेंगे वह माता-पिता भी. कुछ नहीं कह सकते और गुरु की आज्ञा मान कर. के जाते शिव का धनुष उठाते सीता का वर्ण. हो करते हैं और सीता का वर्ण करके वापस. आते हैं वापस आते हैं आने के बाद कई कथाए.
कथाए वहां पर बड़ा रोचक है. जब दुर्वासा ऋषि क्रुद्ध हो जाते हैं कि. मेरे शिव के धनुष को किसने भंग किया उसम. बड़ा रोचक संवाद है जब आते हैं अयोध्या. वापस परछन उतारती है कौशल्या मां और सुख. के दिन आते हैं कि राज्याभिषेक होने वाला. है जिस राजा का राज्याभिषेक होने वाला हो. उसकी माता पिता कहे कि नहीं अब जाओ वन 14.
वर्ष के लिए आज कोई वन चला जाए तो वह. सोचता कनेक्टिविटी नहीं थी और चप्पल नहीं. पहने थे और सड़क भूल गया तो गल से रास्ता. आप भटक जाए तो भी रास्ता भटक जाए उस समय. जब सड़क मार्ग तो बहुत कम थे जल मार्ग था. और वन ही वन थे और हिंसक जीव थे वहां 14. वर्ष वे सीता जी के साथ लक्ष्मण जी के साथ. वन में रहते और रहते कैसे हैं कि सारे. वंचितों शोषित को.
सार्थवाह वो निषाद राज के शबरी के केवट के. जितने प्रसंग है वोह मैंने जो पहले पंक्ति. कही कि राम का जीवन सिर्फ यह सिखाता है कि. मनुष्यता जो आपको नैसर्गिक गुण मिला है कि. आप सबके साथ मनुष्य हो करके मिलो और मुझे. अभी लगता है कि इन चीजों का राम का केवट. के साथ प्रेम या शबरी का साथ उनका मान. रखना उसका उस समय चर्चा इसलिए हुआ क्योंकि. राजा प्रजा में इतना ज्यादा इतना ज्यादा.
फासला रहा होगा कि व भी अयोध्या इतने. प्रतापी अयोध्या के राजा राम होकर के. साधारण मनुज जैसा व्यवहार करने हैं और. पूरे देश में आर्यावर्त में ख्याति फैल गई. कि भाई इतने बड़े राजा होने वाले थे और. गेरुआ वस्त्र धारण करके मुनि वेश में वन. में रह रहे हो और एक बात जिस पर चर्चा. नहीं. होती पूरे हिंसक जीवों का वन में सारी. विपरीत परिस्थिति का सामना कैसे किया. उन्होंने धनुष के खाली सिर्फ धनुष था यानी.
वे अद्वितीय योद्धा थे अद्वितीय योद्धा थे. अद्वितीय धनुर्धर थे और उन्होंने पूरा देश. को जो एक करने का काम किया पूरे देश में. चाहे वह हमारे जितनी भी भील किरात गोंड. जितनी भी हमारे कह सकते हैं कि वंचित. जितनी भी हमारी य जातियां उपजातियां थी. पहली बार उनके पास कोई आया बताने के लिए. समर्थ बनो खेती करो स्त्रियों को सीता जी.
ने शिक्षा दी यह पूरा अनुसूया माता ने. उनको बताया कि जाकर तुम अब यह काम करो तो. राम का जीवन और सिर्फ राम फिर आगे जब जाते. हैं तो वह पूरी नीति है किस तरह. से किष्किंधा पहुंच कर के नीति बनाते हैं. रावण को हराने की जब सीता जी का हरण हो. जाता है और उस पूरे प्रकल्प में कितनी. बड़ी बात है कि हर ा उनकी मदद कर सकता था. और करने को तैयार था लेकिन इस समय वनवासी.
है वे तो किसी राजा की मदद नहीं लेंगे. वनवासी है तो वनवासियों का सहयोग लेकर के. रावण को हराते हैं और लंका वापस विभीषण को. सौंप करके जिस दिन आने का वचन दिया था उसी. दिन वापस लौट कर के आते तो राम तो राम है. और मैं आप कभी किसी दिन अलग पॉडकास्ट में. बुलाएंगे. तो हमारे लोक गीतों में भन राम के जीवन पर.
ऐसी ऐसी कथाए कुछ थोड़ा अगर आप लोक गीत के. माध्यम से सुना दे तो श्री राम को लेकर. ऐसी ऐसी कथाएं हैं कि उन कथाओं को सुन कर. के आपको लगता. है जैसे एक कजरी मिलती है अरे रामा सोने. के हरवा अरे सिया मांग री. हारी अरे रामा सोने के हरवा हरे. सिया ंगरी. हारी राम समझाते हैं यह नाही सोन हरिन.
वासिया मोरी अरे इहा निशाचर रानी मोरे अरे. वन वन घूमे वही निशाचर उन्ही की मायरी. हारी की अरे रामा सोने के हरवा अरे सिया. मांग री हारी. राम समझा रहे हैं कि यह वह हिर नहीं है यह.
वन वन में देखो इस समय निशाचर घूम रहे हैं. आजकल एआई का जमाना है ना यह उस जमाने में. कह रहे कि देखो य सोने का मारी ये वन वन. में पूरे निशाचर घूम रहे आज भी डिकोड करना. चाहे तो सारी चीजें बड़ी कंटेंपररी है और. यह भ्रम में मत आओ यह वह हिरन नहीं सोने. का न जाने कितने एक बड़ा सुंदर गीत मिलता. है. जिसमें राम लक्ष्मण. एक शिकार करने के लिए गए.
हैं शिकार करने गए शिकार करते करते राम को. प्यास लगती है और लक्ष्मण से कहते हैं जल. लेकर आओ लक्ष्मण जल लेने जाते हैं कहीं जल. नहीं मिलता बहुत दूर जाते हैं एक वन गए. दूसरे वन गए तीसरे वन गए चौथे वन गए आखिर. जाकर के वहां पर एक माली दिखता है जो अपनी. वाटिका में जल दे रहा है वहां पहुंच कर के. लक्ष्मण जी कहते हैं कि जल चाहिए मैं. अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र राजा राम. का अनुज लक्ष्मण हो वो कहते वो सब तो ठीक.
है तीर कमान नीचे रखो तब बात. होगी लक्ष्मण तो क्रोधी स्वभाव से लेकिन. रख देते हैं क्योंकि भाई की आज्ञा है जल. लेते हैं राम के पास पहुंचते राम दूर से. देखते हैं इतने हिंसक वन में बिना तीर. कमान के लक्ष्मण चले आ रहे हैं कहते अरे. ऐसे कैसे वह कहते भैया जल मांगा था. उन्होंने यही एक शर्त रखी थी राम जल पीते. और कहते चलो मिलने चलते हैं और जाते हैं. उन्हीं माली से मिलने के लिए जब वे माली. के पास पहुंचते.
हैं तो राम तो विद्वान है पहले ही धनुष. तीर कमा नीचे रख कर के कहते बहुत-बहुत आप. पर कृपा प्यास से हमारा मन व्यथित हो रहा. था आपने जल पिला करके तो हमारा हमारी. प्यास बुझा दी लेकिन एक शंका का समाधान. करें आप जानते हैं हम राजपुत्र हैं और आप. जानते हैं इतना हिंसक वन है इस वन में. आपने हमारे अस्त्र रखवा लिए और तब जल दिया. यदि कोई हिंसक पशु हम पर हम कर दे तो माली. हसा माली हंसकर कहता है मुझे मालूम है राम.
तुम राजपुत्र. हो मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा. तुम सिर्फ मेरे प्रश्न का उत्तर. दो मैं माली का पुत्र हूं मैंने सिर्फ यही. सीखा कि वाटिका को जल देना है प्रकृति का. रक्षण संरक्षण करना तुम राजा के पुत्र हो. तुम्हारा धर्म आखेट करना है एक बात का. उत्तर दो प्रतिदिन. मेरे इस वाटिका के सामने से सारे हिंसक.
जीव जंतु भालू हथनी सब निकलते. हैं और उनमें इतना विवेक है कि आज तक कभी. किसी ने मेरी फुलवारी को नहीं रौदा तुमने. इन पशुओं को क्यों मारा. राम यह गीत. है राम यह सुन कर. के वहीं पर माली के पास पैरों पर गिर जाते. हैं और बिलख बिलख कर रोने लगते हैं और. कहते हैं. आज से इस क्षेत्र का नाम अवध.
होगा यहां कभी किसी का वध नहीं होगा यह. गीत है मैं तो से पूछेला अरे पंडित वा के. बिना बदरी केरे घाम कैसे यह गीत है और. वहां पर राम का यह कहना कि आज से इस. क्षेत्र में कोई वध नहीं होगा यह घटना हुई. कि नहीं हम नहीं जानते लेकिन राम के जीवन. के व्यक्तित्व का ऐसा प्रभाव है कि एक.
पूरे लोक मानस ने उनके जीवन की घटनाओं पर. कल्पनाओं पर इतने गीत रचे जिनसे सीख ली जा. सके यहां क्या सीख है कि राजा हो लेकिन जो. ज्ञान दे रहा है वह इस समय गुरु है यदि. राजा होकर के राम इस समय आखेट शिकार खेलना. निषेध कर सकते हैं माली के पैरों पर गिरकर. प्रणाम करके उस उसे गुरु मान सकते हैं तो. यही तो है समावेशी भारत यही तो है.
रामराज्य जहां जाति नहीं धर्म नहीं वर्ग. नहीं कोई भेद भाव नहीं कोई छोटा बड़ा नहीं. आज य जिसने ज्ञान दिया है वही गुरु है और. ज्ञान लेने वाला यदि राजा का भी पुत्र है. तो ज्ञान लेगा पूरी सदा शयता विनम्रता के. साथ यह राम है बहुत बहुत खूबसूरत आपने. बनाया मैं केवल सुनता रहा मैंने कहा इसम. कहां छोड़ा जाए श्री राम के बारे में तो. आपने बता दिया अब कई लोग मालिनी जी के. बारे में भी जानना चाहते हैं जी क्योंकि. आमतौर पर य माना जाता है कि एक या एक. धारणा होती जैसे आपने शुरू में एक बड़ी.
अच्छी बात कही कि जब लड़का होता था तो. गाना गाया था लड़की हो तो छिपाया था ऐसे. ही कहा जाता है कि हर सफल पुरुष के पीछे. एक स्त्री का हाथ होता है क्योंकि आपके. पति भी जानेमाने व्यक्ति हैं दुनिया उनको. जानती है टीवी पर देखती है सशक्त व्यक्ति. है मजबूत व्यक्ति. हैं फिर मेरे मन में सवाल आता है कि एक. सफल महिला के पीछे कौन होता है क्योंकि. मेरी माता जी भी एक शिक्षिका है प्रिंसिपल. हैं. मैं आपको भी देख रहा हूं एक विराट. व्यक्तित्व है जिसको सुनना समझना लोग पसंद.
करते हैं और हम उस देश में भी हैं जहां. महिलाएं कम निकलती हैं जिस बिहार से आप. आती है अगर मैं मालिनी अवस्थी जी जैसी और. महिलाओं की कल्पना करूं तो मुझे अ गिनी. चुनी महिलाएं नजर आती हैं शारदा सिन्हा जी. नजर आती हैं नई पीढ़ी में एक लड़की अभी. जल्दी निकली है वो नजर आती है स्वाति ने. भी गाने वाने गाए कुछ राम आएंगे और कई. सारी चीजें उनकी भी संघर्ष का सुनी मैंने. तो यह इतनी इंस्पायरिंग महिलाएं जिनको. लाखों करोड़ों लोग सुनते हैं उसके बावजूद. उनकी धारणा नहीं बदलती कि व आगे बढ़े तो.
सफल महिलाओं के पीछे कौन होता. है सच तो यह है कि सफल महिला के. पीछे ईमानदार उत्तर तो यह कि महिला ही. होती. है महिला के पीछे. महिला मेरी मां और उनका मुझ पर. विश्वास अब उसके. बहुत कह लीजिए कि उस के बहुत अंग और. माइक्रो लेवल पर जाएं तो मां भी ऐसी थी.
क्योंकि पिता ऐसे थे. और जब तक एक स्त्री के भीतर खुद कोई. विश्वास नहीं होता यह आत्मविश्वास कि वह. अपने सपने को चेज करें वह अपने सपने को. पूरा करने के लिए जितने पूर्वाग्रह जितनी. बंदिश हैं जितने विरोध हैं उनका सामना. करके भी डटी रहे हम तब तक कोई उसको. संभालने आगे बढ़ाने थामने आता नहीं तो सच. पूछिए तो यदि कोई भी औरत आगे बढ़ी है तो.
वह आगे पहले तो इसीलिए बढ़ी है क्योंकि वह. आगे बढ़ना चाहती थी और उसका आत्म बल इतना. था कि उसने सारे विरोध को पीछे धकिया हुए. वो आगे आई उसके बाद दूसरे तत्व आते हैं. जिसमें परिवार है हम मेरे अपने मामले में. मेरे माता-पिता. पति और अब तो बच्चे सभी अ क्योंकि मैंने. हमेशा से. विश्वास किया है शुभंकर.
की जो हमारे यहां परिवार का एक स्ट्रक्चर. है वह अपने आप में इतना सुंदर है अपने आप. में आपको इतना इतनी स्पेस देता. है स्व होने में आप जो हैं उसको होने में. अपने स्वप्न पूरे करने में. अपने क्या कहना चाहिए व्यक्तित्व को पूर्ण. व्यक्तित्व को स्वतंत्रता बनाते हुए पूरे. परिवार को लेते हुए चले यह भारतीय परिवार. का पूरा पूरा ढांचा रहा है यह गलत है वह.
लोग जो कहते हैं कि भारतीय परिवार में का. मतलब है कि स्वयं को मिटा देना स्वयं को. मिटाने का मतलब यदि परिवार का के लिए. त्याग करना है तो परिवार के लिए ऐसी. स्त्रियों को भी त्याग करते हुए मैंने. देखा है जो अपने स्वतंत्र व्यक्तित्व को. बनाए रहते हुए भी त्याग करती हैं आपकी मां. यदि शिक्षिका है तो मुझे नहीं लगता कि. उन्होंने अपने करियर के संग संग आपको नहीं. देखा होगा या परिवार को नहीं देखा होगा यह. स्त्री ही कर सकते कुछ कारण है जो हमारे.
नौ रूप माने गए देवी के नहीं लेकिन मैम ये. सवाल इसलिए आता है क्योंकि अगर पुरुष और. स्त्री दोनों किसी प्रोफेशन में है तो. जितना समाज को हमने देखा या दुनिया को. हमने देखा अलग-अलग क्षेत्र में एक व्यक्ति. को समझौता करना पड़ता है और अधिकतर उदाहरण. हमारे सामने वो है जहां पर स्त्री ने. समझौता कर लिया बड़े-बड़े नाम देखता हूं. मैं सचिन तेंडुलकर अंजली तेंडुलकर डॉक्टर. थी परिवार के लिए छोड़ दिया अजय देवगन. काजोल बड़ी एक्ट्रेस थी उस जमाने में अजय. देवगन से बड़ी थी वो उन्होंने परिवार के. लिए छोड़ दिया अधिकतर केसेस में हमने देखा.
है कि महिलाएं जो हैं वह समझौता कर लेती. हैं शाहरुख खान गौरी खान कई सालों तक वो. चुपचाप परिवार संभालती रही बाद में हो गया. तो इसीलिए कहते हैं कि सफल व्यक्ति के. पीछे औरत होती है क्योंकि औरत घर संभाल. लेती है एक धारणा होती है मैं आपको जब. देखता हूं तो आप देश विदेश में घूमती भी. हैं अब आमतौर पर पुरुष जो होते हैं उनको. लेकर कहा जाता है कि बड़े पजेसिव भी होते. हैं बड़ी सारी बातें होती हैं तो मुझे कई. बार लगता है कि क्या आपके हिस्से में नहीं. आता कि क्या कभी अवनीश स ने नहीं कहा नहीं. नहीं. मैं समझ गई अब क्या पूछना चाह रहे हैं जी. तो मैं आपको बहुत पीछे लेक चलती हूं लव.
मैरिज थी अरेंज मैरिज थी अरेंज मैरिज ओके. बहुत पीछे लेकर चल रही हूं तो जब हमारा. विवाह. हुआ तो मुझे यह बात अच्छे से मालूम थी कि. इनकी नौकरी ऐसी है इनकी सेवा ऐसी है. जिसमें ये 24 घंटे में 20 घंटे काम करने. वाले अधिकारी हैं और जिन जगहों पर इनकी. तैनाती हो रही थी वो ऐसी जगह थी जहां पर. गाने बजाने का कोई भविष्य नहीं था रियाज. का करने का कोई भविष्य नहीं था मंच तो. असंभव था और दूसरी एक बात यह भी है किय एक.
अलग उत्तर प्रदेश था अलग भारत था उस जमाने. में शंकर गाने का मतलब यह था कि आप बम्बे. जाए तभी आपका करियर बन सकता है अपने घर पर. रह कर के आपका कोई नाम होगा यह तो कोई सोच. भी नहीं सकता था तो मुझे यह लगता था कि जो. मैं गाती थी और अब जीवन बिल्कुल एक अलग. विपरीत कह लीजिए परिवेश में मैं यहां पर आ. गई हूं जिसमें कि उसके लिए अब ज्यादा. स्कोप नहीं कि मैं परिवार छोड़ कर के गाने.
के लिए कहीं जा पाऊं बच्चे हो गए तो सारा. समय मैंने वहां दिया और बैक सीट कह सकते. हैं आप ले ली लेकिन जो एक मन जिज्ञासु मन. होता है अध्ययन शल मन होता. है संस्कृति प्रेमी मन होता है वह तो जहां. रहता है वहां पर भी पत्थर को फोड़ के भी. जल निकाल लेता है तो मैंने उसको अपनी तरह. अपने लिए इस्तेमाल किया उस पूरे अवसर को. शुभंकर अ पिता की भी ऐसी पोस्टिंग्स होती. थी जगह-जगह. अवनीश के साथ मैंने उत्तर प्रदेश का पूरा.
जो छक कर के पूरा जो ग्रामीण जीवन था उसका. आनंद लिया एक कह सकते. हैं जो मिट्टी की विरासत है लोक गीतों के. रूप में तीज त्यौहार के रूप में हर शहर के. हर अंचल के हर कस्बे के अलग मेले हर गांव. के अलग परंपरा वह सब इतने करीब से देखने. को मिली कि वह सब मैं अपने भीतर समा गई. उड़ेल गई और ना जाने किस चीज के लिए खुद. को तैयार करती गई आकाश मण रेडियो इस बीच.
में चल ही रहा था और बच्चे बड़े होते चले. गए कई बार लोग कहते थे जानते थ जो थे कि. आपकी वाइफ तो गाती है पुराने लोगों को. मालूम था और कहीं ना कहीं मुझे लगता अवनीश. इस बात का जिक्र करते थे उन्हें अफसोस. होता था इस बात को लेकर के कि कहां मेरा. करियर था और विवाह के बाद बैक सीट ली तो. मैंने कहा मुझे कभी यह नहीं लगा कि मैंने. कोई भी चीज. तकलीफ में किया कोई चीज. छोड़ी जब परिवार है जब विवाह किया है जब.
प्रेम है तो उस समय जो जरूरी था परिवार के. लिए परिवार को समय देना देखिए. बढ़िया जब. आप लड्डू बनाते हैं तो धीमी आंच में उसको. खूब अच्छा देसी घी में गुड़ में खूब अच्छा. पकाते हैं मुझे लगता है विवाह एक ऐसा. संबंध है जिसमें प्रेम और विश्वास. भरोसा धीमी धीमी आंच में ऐसा पकता है कि.
बाद में कैसे भी झंझा आता है आदमी उससे. निकल के सामना करता है तो हम दोनों ने वह. पूरा जीवन एक दूसरे. को दिया और लिया और बहुत सुंदरता से कह. सकते हैं जिया काफी समय बीत गया फिर मुझे. याद है कि. एक. इनफैक्ट इसी बीच में. एक हमारी मा को कैंसर हुआ और मेरी मां को. जब कैंसर हुआ तो वो अपना चेकअप कराने के.
लिए बॉम्बे टाटा कैंसर इंस्टिट्यूट जाती. थी तो मुझे याद है बच्चे थोड़े बड़े हो गए. पिताजी डॉक्टर थे वही उनको लेकर जाते थे. मैंने पिताजी से एक बार कहा कि मैं जाऊंगी. आपकी बार मां के. साथ तो उन्होंने कहा अच्छा मैंने कहा मैं. म्यूजिक कंपनी जाना चाहती हूं एक दो बार. उस सम कैसेट्स आते थे अपने रिकॉर्डिंग सा. की बात ये बात. है 9496. शादी के सात आ साल.
बाद और उस जमाने में इडी पॉप वगैरह चल रहा. था आपको याद होगा तो सारे एल्बम्स मैगना. साउंड वगैरह के आ रहे थे सारे गमा शुरू हो. चुका था तो मैं मां को अपने लेकर के जाती. थी और साथ में एकय था कि एक दो दिन. एक्स्ट्रा जो मिले हैं तो दादर में पारले. में जहां पर भी इनके परेल में म्यूजिक. कंपनीज के थे वहां पर कभी जी जा रही हूं. कभी कहीं पर मैं मेरी मुलाकात हुई एक. कंपटीशन हुआ था म्यूजिक कशन म्यूजिक. इंडिया एक कंपनी थी उसने ऑल इंडिया.
म्यूजिक कंपटीशन कराया था जिसमें जज थे. कयाम साहब और उसमें मैं सेकंड आई थी ऑल. इंडिया गजल का कंपटीशन था तो मैं उन्हीं. के पास गई उन्होंने कहा कि देखो तुम में. तुम्हारी आवाज में जो बात है मैं एक बात. मेरी बस याद रखना ऊपर वाला यह आवाज हर एक. को देके नहीं भेजता इतना दमखम छोड़ना नहीं. खत्म नहीं आना बस मुझसे मिलना तो मैं. उन्हीं के पास पहुंच गई और मैंने कहा आपने. बुलाया 8 10 साल पुराना किया वायदा मुंबई. में कौन याद रखता बट ही वास काइंड इनफ और. उन्होने मुझसे कहा कि.
आप प्यारे लाल जी से मिलिए लक्ष्मीकांत. प्यारीलाल जी हा मैं उनके पास गई उनके जो. बेटे थे गौतम भतीजे वो उस समय म्यूजिक. इंडिया में काम कर रहे थे बड़ी आज पुरानी. बातें मैं आपको अपने स्ट्रगल की बातें बता. रही हूं क्योंकि यह चीजें मैंने कभी कही. नहीं आज शायद पहली बार बता रही हूं और. जैसा होता है उन्हें जो चाहिए था क्योंकि. उस समय इडी पॉप में वीडियोस बनते थे और. वीडियोस जो बन रहे थे उनमें पूरा इट वाज ल. ग्लैम डॉल का कांसेप्ट था आपको पता ही है.
जिस तरह के गाने जिस तरह उसम वीडियो बनते. थे और सम हाउ मैं उसके लिए मेंटली. प्रिपेयर्ड थी नहीं मैं फिर वापस आ गई ऐसे. ही मां का जब चेकअप होता तो मैं उनके साथ. बमबे जाती थी ऐसे में एक बार क्या हुआ कि. अवनीश आजमगढ़ में पोस्टेड थे ये डीएम थे. और वहां. पे अचानक. वो अर्दली आया और एक का कार्ड लेकर आया कि.
वो मिलने के लिए आए हैं तो जब तक ये तैयार. होते कार्ड जाहिर है वो तो बीवियां तो हर. कारा होती है खबर देने के लिए अंदर तो. मैंने से कार्ड देखा तो मैंने देखा. गजेंद्र सिंह प्रोड्यूसर अंताक्षरी. सारेगामा. जीटीवी मैंने कहा आजमगढ़ कैसे आए हैं आपको. उम्मीद दिख गई मैंने कहा बिल्कुल मैंने. कहा नहीं एंड आई रिस्पेक्टेड हिम क्योंकि. उस समय आपको याद होगा क्या अंताक्षरी और. सारेगामा के बहाने एक अच्छा संगीत का. रिवाइवल हुआ था पहली बार तो मैंने इनको. कहा कोई गजेंद्र सिंह मिलने आए और इसमें.
लिखा है कार्ड में तो बोले हां तुम बैठा. बैठा और वो वो मिलने आए वो यहीं के रहने. वाले थे उनको कुछ काम था मैं तो दौड़ी और. ड्राइंग रूम में उनको मैंने बैठाया और. मुझे बैठाया तो मुझे संकोच हुआ कि मैं यद. मैं अपना परिचय दूंगी तो यह कहेंगे कि. मुझे पता है भाई सारे कलेक्टर की बीवियां. गाती है यह सबको होता है कि भाई हां मैं. भी बड़ा अच्छा गाती हूं तो मैं उस संकोच. में मैंने अपने बारे में कुछ नहीं बताया. उनको बैठाया चाय पिलाई उन्होंने मुझसे कहा. कि आपने कभी एंकरिंग के बारे में सोचा है.
तो मैंने कहा कि नहीं बोले नहीं आप बड़े. कॉन्फिडेंस से बोलते हैं यू हैव अ ग्रेट. बॉडी लैंग्वेज आप बम्बे कभी आइए तो आई. थिंक मैं आपका स्क्रीन टेस्ट लेना चाहूंगा. फॉर एंकरिंग तब तक अवनीश आ गए अवनीश हसे. ही बात सुन के बोले नहीं शी सिंग्स बोले. आप गाती है तो मैंने बताया उनको कि मैं. भातखंडे से आईव डन मास्टर्स एंड आई एम ए. ग्रेड आर्टिस्ट एंड आम परफॉर्मिंग. आर्टिस्ट उन्होंने कहा प्लीज जब बम्बे आइए. तो मिलिए तो मैं ममा का फिर भी मैं जब. मम्मी का चेकअप हुआ चार महीने बाद तब मैं. मां के साथ गई क्योंकि दो छोटे-छोटे बच्चे.
उनको लेकर के बंबे में जाना और वही लोकल्स. लोकल में ही घूम कर के साथ में जाना वहां. जब हम पहुंचे तो ऑडिशन चल रहा था उन दिनों. अंताक्षरी का तो गज जी ने साथ में सारे. गजेंद्र सिंह जी सारा आन शर्मा सारा पूरा. उनका म्यूजिक क्रू था और अनु जी थे अनु. कपूर जी तो उन्होंने ऐसे कहा कि यह देखिए. लखनऊ से आई है कुछ सुनाएंगे तो मैंने क्या. सुनाएंगे साज रखा था मैंने गजल सुनाई कौन.
सी थी सुनेंगे. जरूर हर. एक बात. पे कहते हो. तुम के. तू क्या. है हर एक बार. पे कहते हो.
तुम के. तू क्या. है तुम ही. कहो कि. अंदाज गुफ्तगू. क्या. है हर एक बात पे. कहते लिब की गजल जैसे मैंने गाई तो वहां. सब वो हो गए उन्होंने कहा कि भाई आप तो. सारेगामा का नेक्स्ट ऑडिशन दीजिए आप.
सारेगामा में आइए आप वहां क्या कर रहे हैं. आजमगढ़ में आप सब छोड़कर बमबे आइए मैंने. कहा भैया मेरे बच्चे दो मैं परिवार नहीं. छोड़ सकती उनको पता था पति कलेक्टर है. नहीं वो तो आजमगढ़ आए थे ना मुलाकात करने. के लिए नहीं बाकियों को कुछ नहीं मालूम था. और फिर गजेंद्र सिंह जी ने परिचय दिया और. वो परिचय कभी देते नहीं अब वो पहले परिचय. पहुंच जाता मैं उसके लिए क्या कर सकती हूं. लेकिन देखिए गाने जाने में एक सबसे बड़ी. अच्छी बात यही है कि ताली या गाली दोनों.
आपको आपके मेरिट प ही मिलेगी ट्रू आप. अच्छे हैं तो ताली बज सकती है किसी से आज. बेटा भी चाहे तो अपने पिता से ताली नहीं. बजवा सकता आज पिता चाहे कि उसका भाई उसके. लिए ताली बजा दे नहीं ये कलाकारों को. सौभाग्य है कि यदि उनके रियाज में यदि उन. पर गुरु कृपा है यदि उनकी तालीम ऐसी है कि. सभागार में अपना सब काम छोड़कर आए हुए लोग. सुन कर के ताली बजाते हैं तो यह तो नसीब. से ही मिलता है तो वहां पर आपका टेस्ट.
तुरंत हो जाता है बैकग्राउंड बैकग्राउंड. काम नहीं करता वहां तो जो आप है ऑर्गेनिक. है तो उन्होंने कहा आप तुरंत आइए और सारे. गमा के लिए आइए मैं वापस गई सारे गम में. उन जमाने फिल्म के गाने चलते थे मैंने कहा. देखिए मैसा मैं फिल्म के गाने गाती नहीं. उसका कारण ऐसा नहीं कि गा नहीं सकती लेकिन. इतने खूबसूरत गाए हुए हैं कि उनको गाकर. क्या करना कभी कुछ और मेरे लायक हो तो आप. बताइएगा एक बात और है शुभंकर मेरे साथ. जिंदगी में हुआ कि मैंने हां करने के बजाय.
बहुत सारी चीजों को ना किया है मैं आपको. जब सुन रहा हूं अभी तो मुझे रेखा भारद्वाज. जी भी याद आ रही थी क्योंकि आपने जब गजल. गाई तो काफी मैं रिलेट कर पा रहा था उस. खूबसूरत आवाज को मुझे कविता कृष्णा मूर्ति. जी याद आ रही थी बहुत सारी तो मुझे लगा कि. अगर मालिनी अवस्थी की इच्छा होती जी जी जी. आपने लोग गायिका बनना प्रेफर किया वह आपकी. चॉइस थी बहुत सारे आपके बैकग्राउंड या कुछ. जिम्मेदारियां थी मैं दूसरे वर्जन में भी. आपको इमेजिन कर पा रहा हूं तो यू आर राइट. आपको एक बात पता है यह एक बड़ी कमाल की. बात बताऊं कि जो मैं टॉप ग्रेड आर्टिस्ट.
हूं वह मेरा ग्रेडेशन गजल में है फोक में. नहीं है सो आई एम अ टॉप ग्रेड आर्टिस्ट इन. गजल कैटेगरी नॉट इन फोक और जो सुनते हैं. गजल का या सुफियाना चीजें सुनते हैं तो व. भी दाद देते हैं कैसे आपका मतलब तलफ्फुज. कैसे इतना साफ है क्योंकि उ बहुत आप उर्दू. के सारे लफ्ज़ आपके बड़े एकदम सटीक नुक्ता. बैठता है एक तो उसका उसकी वजह है कि मैं. लखनऊ से हूं और जो मैंने उस्ताद थे उस्ताद. राहत अली खान साहब उस्ताद शुजात हुसैन खान. साहब तो बहुत बचपन से उनका आशीर्वाद मिला.
तो पहली चीज तो उनका इसी पर जोर था कि आप. पहले तो आपका प्रोनंसिएशन साफ हो जुबान. साफ हो और उसके बाद तालीम तर्ज की आए तो. वह तो पहली शर्त है कि गजल गा रहे तो आपका. शीन काफ बहुत साफ हो तो खैर हमने गजल गाई. और उसके बाद उन्हें याद रहा और. उन्होंने अंताक्षरी में बुलाया मुझे अब आप. देखिए अंताक्षरी में बुलाया तो मैं गई. कमाल की बात है होली का एपिसोड था और.
उसमें उन्होंने कहा. फोक होली प कुछ हो जाए तो मैंने उसमें. गाया था और महिनवा बरस ना बरस फगुनवा में. रंग रस रस बरसे फगुनवा में रंग रस रस बरसे. हरे रस रस रस रस रस रस बरसे फगुनवा. में वहां जहां मराठी लावनी वाले आए थे. मांड गाने वाले न से आए थे पंजाब से हीर. और बुल्ले शाह गाने वाले आए थे वहां पहली.
बार भोजपुरी बिरहा पे झूम कर जो लोग नाचे. हैं तो धूम मच गई और मुझे लगता है शायद. दूरदर्शन के अलावा यह पहली बार किसी. रियलिटी शो में फोक इतने मेन स्ट्रीम ढंग. से आया और रातों रात एक पहचान बन गई आप कह. सकते हैं और यह जो हुआ यह हुआ है हमारी. शादी के करीब 10 साल बाद 11 साल बाद फिर. सारेगामा भी मालव 2 प करेक्ट 2.2 बिल्कुल. सही कह रहे 2.2 उसके बाद सारेगामा हुआ. सारेगामा में जब गई तो वो लंडन में हुआ और.
उसमें शुभंकर मेरी जिंदगी का एक बहुत बड़ा. मैं सारगामा को अपनी जिंदगी का एक टर्निंग. पॉइंट मानती हूं. क्योंकि वहां मेरे सामने जजेस. थे मेहदी हसन साहब फरीदा खानम गुलाम अली. साहब जगजीत सिंह जी आप सब जहां जजेस में. बैठे हो और सोनू निगम एंकर थे तो उसमें. ठुमरी दादरा गजलें खूब सुनाने का मौका. मिला और उसमें जगजीत सिंह जी ने मुझे एक.
बात कही उन्होंने मुझसे कहा मालिनी एक बात. याद. रखना तुमको अंदाजा नहीं कि तुम्हारे पास. कितनी नॉलेज है तुम्हें तुमको स्टार्ट. रिस्पेक्टिंग व्हाट यू नो क्योंकि तुमने. इतने खेल खेल में कह दिया मैं चार तरह की. कजरी सुना सकती हूं हमें तो यह भी नहीं. पता था कि चार तरह की कजरी होती भी है तो. वो एक कहीं ना कहीं इट गिव मी अ. कॉन्फिडेंस बूस्ट टू माय कॉन्फिडेंस फिर. मैं बमबे गई जगजीत सिंह साहब ने घर बुलाया.
और मेरा एक कई सारे एक बात है जिंदगी में. जितने सपने मैंने शायद बचपन में जवानी में. देखे थे जिनको सुनकर हम लोग बड़े हुए वह. सारे सपने सच हुए जगजीत सिंह जी ने मेरे. लिए बात करी मैग्ना साउंड में म्यूजिक. कंपनी से लेकिन देखिए क्या इत्तेफाक है जो. चीजें नहीं होनी थी वो नहीं हुई एल्बम्स. नहीं हुए और यहां मैं एक बात जरूर कहना. चाहूंगी जैसे टी सीरीज है. कोई भी कह सकता है मेरे हस्बैंड तो यूपी. कार्डर आईएस ऑफिसर थे गुलशन कुमार जी थे.
उस समय टी सीरीज कंपनी थी लेकिन वह मुझे. कभी से गवारा यह चीज नहीं थी जो मैं हासिल. करूं अपने दम पर हासिल करू जो चीज मुझे. मिले मेरी मेरिट पर मिले मेरे एड़िया. रगड़ने पर 10 चक्कर लगाने के बाद मिले. लेकिन मुझे यह गुरूर और फख्र हो कि मेरे. अपने दम पर मुझे चुन कर के बुला आपकी लाइ. सुन रहा हूं तो मुझे ये लग रहा है कि एक. प्रोसेस भी होता है भगवान का वो जो साल वो.
जो साल आप गांव गांव में अलग-अलग जहां रह. रही थ तैयार कर रहा था प्रभु वो आपको त. आपको बिना बताए तैयारी चल रही थी बिल्कुल. मैं तो मानती हूं देर रीजन जगजीत सिंह सर. ने कही एकदम बिल्कुल सही इसीलिए मैंने आज. जगजीत सिंह साहब का जिक्र किया और उसी समय. मैंने 98 में जब वो सारगामा हुआ उसके बाद. मैंने अप्पा जी से हमारे गुरु गिरजा देवी. जी से सीखना शुरू. किया यह जब मैंने उनसे सीखना शुरू किया तो. मैं सारेगामा जीत चुकी थी मतलब सारेगामा. करने के बाद मैंने सीखना शुरू किया कि. पूरा अंग की ठुमरी शादी के 12 साल हो चुके.
है शादी के 12 साल के बाद मैंने अप्पा जी. से सीखना शुरू किया और मैंने कहा मैं. शिष्य के विनम्र विनीत भाव से आई हूं मुझे. क्लीन स्लेट मानी आप सिखाइए और उनसे मैंने. अंतिम सांस तक सिर्फ गाना बजाना ही नहीं. बहुत कुछ आध्यात्मिक पक्ष भी सीखा जीवन. जीने का अंदाज भी सीखा लेकिन इस बीच में. प्रोग्राम चलते रहे बम्बे जाती रही. कभी-कभी किसी से मुलाकात कभी कहीं वादा. कहीं कोई बुला रहा है क्या बात है आपकी. क्या आवाज है कभी आइए ना और वह कभी आइए ना.
कभी फलीभूत तो होता नहीं बॉम्बे में आप. जानते हैं जो सुनता था तो वहां पे यह हाल. था कि अ मतलब किसी ने रैंडम कहीं. प्रोग्राम में सुन लिया तो वह कि आप यहां. कर क्या रही हैं आप बॉम्बे आइए ऐसे जैसे. बॉम्बे में थाली लेके सब इंतजार कर रहे. हैं तो वह एक शेर है ना कि हमको मालूम है. जन्नत की हकीकत नजमी रोज एक ख्वाब सुनाते. क्यों हो तो मुझे अच्छे से मालूम था वहां. क्या है कह सकते हैं कि मेरे अंदर कोई ऐसी. बर्निंग एंबिशन नहीं थी लेकिन यह भरोसा था.
कि वक्त आएगा जब होगा और वक्त ऐसे आया कि. वही गजेंद्र सिंह जी ने 1012 साल बाद एक. सीरियल बनाया जुनून और वह जुनून को. उन्होंने बनाया एक चैनल लॉन्च हो रहा था. एडीटीवी इमेजिन आपको याद होगा नया शो था. तो उसके लिए उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं. कि आप फोक में आप आइए मैंने उनको कहा. देखिए भैया ऐसा है यह वोटिंग से आजकल. सिलेक्ट और इलेक्ट होते हैं आपके किसी ने. वोट. करके एक दो एपिसोड में य निकाल दिया तो.
जाने का कोई मतलब नहीं और दूसरा रियलिटी. शो उस जमाने में ऐसे हो रहे थे जिसमें. जजेस खुलेआम कह रहे थे क्या गा रहे हो मैं. तुमको रोटी दूंगा मैं तुमको वादा करता हूं. कि मैं तुम्हारे घर को रो रोटी दूंगा इस. तरह के क्लेम हो रहे थे तो मैंने कहा कि. जो गिमिक्स है उनको छोड़ने के लिए तो मैं. बहुत शांतिपूर्वक ढंग से जहां हूं तपस्या. कर रही हूं आई डोंट वांट टू बी अ पार्ट ऑफ. दैट अच्छा इस स्ट्रगल में आपको य ख्याल. होता था कि मेरे पति जो है कलेक्टर मुझे.
उनकी भी गरिमा ख्याल रखना है क्योंकि जब. आप यह बात बोल रहे हो तो मुझे. सबकॉन्शियसली कि एक अंदर खाने आपको एहसास. है कि मुझे आजादी है सब कुछ सपने जियो. लेकिन मुझे यह भी ख्याल रखना है कि मेरी. वजह से वहां भी सवाल ना हो या वो भी असहज. ना हो देखिए इसमें तो कोई दो राय नहीं है. और मुझे लगता है यह मेरे मामले में शायद. ज्यादा ओबवियसली लोग कहेंगे इसलिए क्योंकि. यह ब्यूरोक्रेट थे और एक पॉलिटिकली बहुत. सेंसिटिव हर तरह से एक बहुत संवेदनशील. उत्तर प्रदेश में बहुत संवेदनशील दशक में.
सक्रिय पदों पर रहे 90 के दशक में रहे. 2000 उन सब जगहों पर कलेक्टर रहे आठ जगह. डीएम रहे बहुत महत्त्वपूर्ण युग में. महत्त्वपूर्ण संवेदनशील समय में रहे तो यह. कई बार यह बात मर्यादा या गरिमा की या उस. स्टेटस के सम्मान की रक्षा करने की आती है. लेकिन शुभंकर मुझे लगता है यह तो बात हर. पति-पत्नी के लिए है जब आप एक रिश्ते में. होते हैं तो उस रिश्ते का सम्मान तो मुझे. लगता है कहीं भी कोई भी हो तो यू. रिस्पेक्ट जिस स्पेस में भी आपका स्पाउस.
है आपको करनी ही चाहिए तो उस बात की मुझे. हमेशा से अहमियत का मुझे मालूम था कि एक. फिल्टर फिल्टरेशन कहते हैं ना एक फिल्टर. तो आ ही जाता है जैसे मैं स्वभाव से एक. बहुत वोकल व्यक्तित्व हूं जिसकी बहुत. ओपिनियन है बहुत स्पष्ट ऑपिनियंस रही है. लेकिन मुझे पता था कि मेरे पति जहां पर. हैं बहुत संवेदनशील जगहों पर हैं वहां पर. वो ऑपिनियंस कहां पर है और कहां कही जा. सकती है कहां नहीं कही जा सकती है उनकी तो. बहुत बचपन में कह लीजिए कम समय में.
ट्रेनिंग आ जाती है एज एन आर्टिस्ट अगेन. आप बहुत एक मुखर व्यक्तित्व होते हैं. क्योंकि आप मुखर है मंच आपको वह आजादी. देता है लेकिन फिर वोह फिल्टरेशन काम आता. है कहां क्या कहना कहां नहीं कहना तो जो. आपने एक बात कही कि उनका इन पदों पर रहना. या इन महत्त्वपूर्ण दायित्वों में रहने. कहीं आड़े आया आड़े यह कह सकते हैं आपकी. शायद यह चीज आई होगी कि जो लोग मुझ तक. पहुंचना चाहते थे उन्हें संकोच हुआ आज. बहुत लोग बताते हैं ये च मैं इसको एक बड़ा. अच्छे दूसरे तरीके से फ्रेम करता हूं सफ. बताइएगा जी अवनीश अवस्थी की पत्नी होने का.
मालिनी अवस्ती को लाभ रहा या जो आप ये बात. कहना चाह रही थी उस पर सवाल मेरा है या. उसको लेकर एक हानि रहा कि नहीं नहीं यार. कलेक्टर की बीवी है पता नहीं कैसी हो क्या. सोचे या थोड़ा संकोच रहा नुकसान उसका हुआ. आपके प्रोफेशन में देखिए लोग क्या सोचते. हैं मैं उनके हवाले से अपनी. जिंदगी का भविष्य कभी निर्धारित नहीं. करूंगी मुझे क्या लगता. मैं वही सही मानती हूं और मुझे तो फायदा. ही फायदे हुए इनकी बीवी बनने से इनकी.
पत्नी बनने से इनकी पत्नी बनना. सिर्फ एक ऐसी एक ऐसे इंसान की अर्धांगिनी. होना जीवन साथी होने का सौभाग्य है जो 24. कैरेट खरा चरित्रवान सोना है मुझे लगता है. इस जमाने में एक चरित्रवान व्यक्ति की. जीवन संगिनी बनना इससे बड़ा सौभाग्य कोई. नहीं लोगों की नजरों में जो आप एक कह सकते. हैं कि दुनियावी नजरें प्रोफेशनल. उसमें एस एन आर्टिस्ट यह जरूर होता था कि. आई नीडेड टू प्रूव माइसेल्फ क्योंकि कई.
बार आप क्या करते हैं वह बहुत हल्के में. ले ली जाती थी या आड़े में ली जाती है कि. कई बार लोग कहते हैं वह तो उनकी वाइफ है. ना व तो अच्छा वो तो उन्हीं की जो वाइफ है. ना उगाती है हां ठीक है क्योंकि पीपल. एज्यूम ट सिंस यू कम विद सच. बैकग्राउंड दिस एक्सप्लेंस वई यू आर हियर. वो पीछे की जो पूरी कवायद है बिना सुने. निर्णय ले लेना यह तो हमारे जैसे लोगों को. तो आभार व्यक्त करना चाहिए सोशल मीडिया का.
जहां आज हम रियल टाइम में जी रहे हैं आज. हम जो बोल रहे हैं जो गा रहे हैं वोह आप. सुन कर के निराकरण कर सकते हैं हमें वेट. नहीं करना 40 साल एक गाने के लिए लेकिन उस. जमाने में तो बहुत हुआ मुझे कई बार ऐसा. हुआ कई लोग बाद में जो मिलते थे कहते थे. जैसे बिल्डर्स हैं बहुत सारे जो इस तरह के. प्राइवेट ऑर्गेनाइजर्स थे आप समझ सकते हैं. एक बड़ा मजेदार किस्सा हुआ एक व्यक्ति थे. प्रो पहले मैं करती थी शादी पहले तो वो आए. बाद में तो मैं नाम नहीं लूंगा वो बड़े.
मसाले वाले हैं मसाले वाले बोले भाई हमारी. वाइफ बहुत बड़ी फैन है और उनको बुलाना है. तो उन्होंने कहा जो जिनसे कहा गया. उन्होंने बिना मुझे बताए मेरी ओर से मना. कर दिया कि भैया वो आएंगी वो नहीं आएंगे. प्रोग्राम ग्राम करने बहुत दिनों बाद न. साल बाद मेरी मुलाकात उनकी पत्नी से ही. हुई कहीं उन्होंने ऐसे बताया देखिए कितना. हमने ढूंढा आपको आपसे मुलाकात नहीं पाई. मैंने कहा नहीं मेरा तो नंबर बहुत अवेलेबल.
है आपने बोली नहीं नहीं और वो बड़ी मुंहफट. थ उन्होंने बता भी दिया कि किहो किनसे कहा. था उन्होंने मना किया हमने उन्हें आड़े. हाथों लिया बोली नहीं हमें लगा कि आपके. पतिदेव कलेक्टर आप कहां जाएंगे तो वो एक. जो दो बातें हैं कि संभवत मैं नहीं ही. जाती और दूसरा उसी प्रदेश में कार्यक्रम. मैं कहां करूं मैं व्यक्तिगत व्यवसायियों. के यहां तो कर नहीं सकती थी क्योंकि प्रति. उन्हीं उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक सेवा. में जो पता नहीं कब किस पद भार को संभाल.
ले उस मर्यादा का तो हमको सम्मान रखना था. हमें इतना बड़ा बनना था कि हमें मध्य. प्रदेश बुलाए हमें राजस्थान बुलाए हमें. छत्तीसगढ़ बुलाए आज भगवान के देश. कोरिया टर्की सब जगह कार्यक्रम के लिए. दुनिया भर में बुला रहे तो मैंने बहुत. एड़िया रगड़ी शुभंकर क्योंकि यह जीवन में. मेरे साथ के चाहे वो इनके सेवा में सहयोगी. हो या. जिसने सुना भी नहीं था उन सबको मुझे लगता. है कि कहीं ना कहीं मुझे चौगुनी मेहनत.
करनी पड़ी अपने नाम को प्रूव करने के लिए. इस बात के लिए अब आप यश भारती हैं आपको. पद्म अवार्ड मिल चुका है संगीत नाटक. अकादमी पदमश्री जी बहुत तेरे अवार्ड अब तो. अब अब दुनिया जानती है क्योंकि होली आती. है तो मालिनी अवस्ती टीवी पर छाई रहती है. छट आती है मालिनी अवसी टीवी आप फेवरेट. क्वीन है टीवी की हर चैनल को आप चाहिए. होता है सबको पता है टीआरपी टॉप पे जाएगी. लेकिन जब शुरुआती दौर में सब संघर्ष चल. रहा था जी आपके हस्बैंड ब्यूरोक्रेट हैं. क्या उनकी वाइफ्स होंगी कुछ ब्यूरोक्रेट्स. होंगे कुछ बड़ी एलीट क्लास वाले होंगे कभी.
किसी ने आंख नाग मटकाए आपको देख के कि. क्या करती है ये बहुत होता था शुभंकर ये. तो सबसे ज्यादा तो उनको मतलब हर चीज से था. क्योंकि मैं सीधा पल्ला पहनती थी हां. बिंदी लगाती थी बड़ी एक पता नहीं आपको. ध्यान है कि नहीं एक दौर आया कि बिंदी. ऑलमोस्ट माथे से गायब हो गई थी 90 वगैरह. के टाइम पे बहुत छोटी सी बिंदी लगती थी. साड़ी पहने लेकिन बिंदी नहीं तो मैं. सिंदूर भरे बिंदी बिल्कुल उनको लगता था कि. 18वीं शताब्दी की कोई प्रकट हो गई स्त्री. और ऊपर.
से सोहर बन्नी चैती चैता हर्ती माटी. मांगुर ये सब गाने कौन गाता है ये सब गाती. बोली तो वो यह तो अक्सर होता था कि जब हम. लोग पार्टी में बैठे हैं और वहां पर सो सो. सो मालिनी व्ट वड यू लाइक टू सिंग सो अब. हम लोग के तो क्योंकि आप जानते अंग्रेज. चले गए लेकिन वो पूरा असर तो सेवा में था. और अफसरों में उतना नहीं था जितना उनकी. पत्नियों में लिए. तो वो दुर्भाग्यवश क्योंकि उस मिट्टी से.
उनका वो जुड़ाव नहीं था तो वह समझने भी. बिल्कुल असमर्थ थी कि यह मैं क्या कर रही. हूं और क्यों कर रही हूं तो सबसे पहले तो. जज उन्होंने किया मुझे जज भी किया और कहीं. ना कहीं डिस्क भी किया दोनों बातें हैं आज. वही सब प्रशंसक हैं लेकिन यह बात मैं कर. रही हूं आज से 35 साल पहले तो मुझसे कहती. थी. कि बट हु सिंग य नो झूमर एंड दादरा एंड. पूर्वी इन योर होम हमने क मैम नोबडी डज.
योर मदर डसने क नो मैम बट देन ड आई मीन वई. वुड यू सिंग दस स आन हु डज वई वुड यू सिंग. इनफैक्ट एक ने तो कहा कि अवनीश वई डोंट यू. एक्सप्लेन आईन शी हैड क्लासिकल बैकग्राउंड. वई नॉट ममरी एंड यू नो गजल एंड वाई दिस य. जो वाइ दिस था इसने शुभंकर मेरे. सामने पूरा एक रोड मैप तैयार कर दिया कि. मालिनी वस्थी लग जाओ काम पर यह पढ़ा लिखा. प्रबुद्ध वर्ग भारतवर्ष का आज यदि.
हतोत्साहित कर रहा है उस बात से जो आईना. हमारे पूर्वजों का जिया हुआ एक दृश्य है. उससे इतना दूर है और मुझे मेरे सामने बैठ. कर के यदि हतो उत्साहित कर रहा है नकार. रहा है तो अब तो यही करना है कैसे करना है. इसका रास्ता ढूंढना होगा और वह रास्ता. मैंने इस तरह से ढूंढा कि नमेंट है टू बी. द कोर. तत्व है य एंटरटेनमेंट और मैंने इसके लिए.
वेश भी बदला वेश बदला लहंगा चूनर पहन कर. के जिन गानों में नृत्य करना था नृत्य. किया जिन गानों में अभिनय था अभिनय कि कि. लोक में तो गीत है जो कह रहा है यदि गीत. कह रहा. है अरे. बाबानी मिया के. पेड़ जनी. काटयो. बाबुल निया पे चिरैया के बस शेर बलैया.
ले बीरन की. बाबुल बलैया. ले. बीरन की बाबा. सगरी. चिरैया. उड़ी जई है हैय रही जई है. निमिया. केर बलैया.
ले. बीरन की. बाबानी मिया के. पेड़ विदा होते हुए एक बेटी की. वेदना बाबा मैं जा रही हूं इस नीम के पेड़. को मत काटना मैं विदा हो जाऊंगी तो यह. चिरैया कहां जाएगी यह पेड़ नहीं रहा तो. उनका मेरा घरौंदा जैसे नष्ट हुआ इनका. घरौंदा चला जाए. यह मैं यदि गा रही हूं तो मेरा भाव सिर्फ. शब्द कहना नहीं अभिनय स्वाभाविक है.
क्योंकि मैं जी र हूं उस कालखंड को जैसा. हमारी पूर्वजा ने जिया और वहीं पर मैं यदि. गाती हूं अरे पीली पगया वाला बन्ना मोरा. जुग जुग जिए जुग जुग जिए रे बन्ना जुग जुग. जिए अरे पीली. पगया वाला बन्ना मोरा जुग जुग जिए. तो. यह उत्सव का पूरा भाव आ गया कि यहां एक. बनना घर में शादी की चहल पहले तो यह मैंने.
अपने भीतर वह जो कह लीजिए एक कार्यक्रम की. प्रस्तुति कैसी हो कि लोक का प्रका आज की. पीढ़ी के सामने होना है तो इट सस टू बी. विजुअल मीडियम फर्स्ट क्योंकि आज की पीढ़ी. देखती पहले सुनती समझती बाद में पहले. देखती है फिर सुनती है फिर धीरे धीरे. समझती है तो इसलिए. हमने पहली बार लहंगा पटोरेंकिंग.
लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि 20 2. साल उन्होंने मुझे ऐसे ही देखा था. उन्होंने कहा अरे क्या जोरदार घूमती क्या.
नाचती और फिर उसके बाद जैसे जैसे दिन. बीतता चला गया समय बीतता चला गया लोगों ने. फिर प्रशंसा शुरू कर दी क्या स्टैमिना है. माइक पकड़े रहती है नृत्य भी करती है तो. जो आपको पहले डिस्कस करते हैं मैंने आपको. जो जवाब दिया ना कि ये स्त्री का अपना. आत्म बल है उस आलोचना से डरे नहीं सहमे. नहीं एक स्त्री की सफलता के पीछे एक. स्त्री होती है निश्चित आपकी बात जो. शुरुआत में आपने कही थी अब यहां महसूस. करता हूं लेकिन एक सवाल मेरे मन में आता. है अवनीश अवस्थी की पत्नी मालिनी अवस्थी.
से ये मालिनी अवस्थी जी के पति हैं अवनीश. अवस्थी. जी यह वाला जो सफर है इससे अब आप कैसे. एंजॉय करते हो क्योंकि अब जो देश दुनिया. में लोग जानते हैं या जब हम कहते हैं कि. मैंने अपनी टीम सेब कहा कि मालिनी जी आ. रही है अरे आपको पता है उनके हस्बैंड जो. है वो बड़े अधिकारी हैं योगी जी के करीबी. है तो यह जो एक बदलाव हुआ यह अब आप इसे. कैसे देखते कि मेरी मम्मी से अक्सर जब. बातें करता हूं तो वो हमेशा कहती है कि. मुझे बड़ा अच्छा लगता है कि जब तुम्हारे. पिता स्कूल जाते हैं और कहा जाता है कि ये.
मैडम के हस्बैंड है तो वो जो एक लम्हा. होता है वो आपको एहसास कराता है कि यार. नारी सशक्तिकरण कै सते या अपनी पहचान. होना मुझे लगता है कि उस पहचान को मैंने. कभी भी बहुत महत्व नहीं दिया मुझे लगता है. क्योंकि हमने अपने हम दोनों के रिश्ते में. जैसा मैंने आपको पहले कहा कि यह गुड़ बहुत. पक्का बन चुका है देसी गी का. मंद मंद आंच में पका हुआ ये एक जब लोग. कहते हैं तो मुझे हंसी आती है कभी-कभी कि.
लोगों के लिए बहुत बड़ी बात है लेकिन मुझे. लगता है कि गृहस्थी या जीवन साथी वास्तव. में गाड़ी के दो पहिए हैं और दोनों साथ. चलते हैं जब एक साथ एक स्पीड पकड़े और. दूसरा ढली तो गाड़ी तो गड़बड़ा जाएगी तो. हम दोनों बस साथ-साथ चलते हैं एक के नाम. पर दूसरे को हो यह तो मुझे लगता है. क्योंकि तो हम जैसे लोग जो शादी करने से. डर रहे हैं समाज में दुनिया की की तमाम. खबरें पढ़ के आप एक हैप्पी सक्सेसफुल. मैरिज लाइफ जी रहे हो और सबसे अच्छी बात. है कि दो लोग दो अलग प्रोफेशन अलग-अलग तरह.
के लोग और एक साथ बड़ी खूबसूरती से जी रहे. हो जी तमाम जो दर्शक आपको देख रहे होंगे. वो भी जानना चाहते होंगे खास तौर पर नए. लड़के लड़कियां कि हैप्पी मैरिज लाइफ का. फार्मूला क्या है क्योंकि कुछ तो अच्छा. किया होगा आप लोगों ने जो इतनी खूबसूरती. से आगे बढ़ रहे हो आप देखिए पहली बात तो. मैं ये बताना चाहूंगी कि जब मैं धीमी आंच. में शादी के लड्डू को पकने की बात कह रही. हूं तो जो पकता है ना. उसमें दुख भी पकता है संघर्ष भी पकता है. इंतजार विरह भी पकता है बहुत सारी निराशा.
एं असफलताएं भी पकती हैं और यह साझा होता. है आज के समय में हो क्या रहा है. कि मीठा मठा बहुत अच्छा अच्छा कड़वा कड़वा. थू थू वाला हाल है ऐसा नहीं हो सकता जब दो. लोग एक साथ एक जीवन को व्यतीत कर रहे तो. दुख सुख संघर्ष सब साझा. है बहुत कुछ मैंने इनके लिए सहा है बहुत. कुछ उन्होंने मेरे लिए सहा है और यह. परिवार में जब दोनों एक दूसरे के साथ. विश्वास में इतना प्रेम करते हैं कि पता.
नहीं चलता कौन एक दूसरे के लिए कुछ कर रहा. है तभी जाकर की एक अच्छी शादी हो पाती. मुझे लगता है कि आज कभी-कभी होता है कि जब. ये इंतजार करते हैं मेरा मैं देर में आती. हूं या एक दो दिन बाद आती हूं तो मैं इनसे. हमेशा कहती हूं हमने कहा कि मेरे तुम्हारे. हिस्से का इंतजार मैंने कहा मैंने बहुत. करा 20 साल क्योंकि तो अक्सर मैंने कहा. खाना भी अकेले खा रही हूं मैं नहीं आ रहे. हैं या नहीं आ रहे मैंने कहा पूरी जिंदगी. मैंने इनका इंतजार किया है अब ये मेरा. इंतजार करते हैं तो वो कहीं ना कहीं एक कह. सकते हैं कि ये जीवन के अपने अपने पल है.
लेकिन जब फाउंडेशन अच्छी होती है तो यह. चीजें कभी मैटर नहीं करती मैं नई पीढ़ी को. बस यही कहूंगी कि जो संघर्ष आए या कभी ऐसा. आए कि एक को दूसरे के लिए परीक्षा देना. पड़े यह बहुत जरूरी है आपने इनके. प्रशासनिक सेवा की होने की बात की मैं. बताना जरूर चाहूंगी कि इतने लंबे दीर्घ. इनके जीवन में प्रशासनिक जीवन बहुत सारे. परीक्षा के युग दौर आए ऐसे ऐसे परीक्षा के. दौर आए उस समय तो बतौर पत्नी में एकदम ढाल.
कवच बन के खड़ी थी और इनके निर्णय में. इनके संग खड़ी थी कि जो आए देख लिया जाएगा. वहां पर कलाकार वगैरह नहीं कुछ वहां पर तो. एक फौलादी पत्नी की तरह के पति के बल्कि. कभी इनका यदि इरादा डगमगाए तो मैं अटल. जैसी खड़ी रहूं अब वही हमारे संग होता है. कि कभी मैं थक रही हूं कि चलो डाल देते. हैं तो ये क अरे जाओ जाओ बुलाया तुमको. कार्यक्रम के लिए तुम जाओ तो मुझे लगता है. यह एक साझी साझा जीवन है जहां पर एक दूसरे.
की सफलता में आप प्रसन्न हो और मुझे लगता. है निश्चित. ही एक को दूसरे को अप्रिशिएट करने के लिए. दूसरा वही अप्रिशिएट कर सकता है जो बहुत. खुद मुख्तार जो बहुत सेल्फ कॉन्फिडेंट. पर्सनालिटी हो जिसमें खुद असुरक्षा की. भावना ना हो ये कलाकारों के संग हमेशा. मुझे लगता है बहुत ये कहा जाता है कि आपके. हस्बैंड को ऐसा नहीं लगता क्योंकि. आर्टिस्ट को सक्सेस तुरंत मिलती है एज आई. सेड ना कलाकार ने अच्छा गाया चार लोग भाई. क्या बात है वाह वाह वाह वाह वाह वाह.
कलाकार की प्रशंसा तुरंत होती है तो कहीं. ना कहीं वह उसको लेकर के मुझे लगता है. बहुत सारे स्पाउसेस में जो हम सुनते हैं. हैप्पी मैरिजस नहीं रही या प्रॉब्लम्स आई. तो मुझे लगता है व्यक्तिगत रूप में मैं. अपने लिए कह सकती हूं कि मुझ में बहुत. एंडोरेंस है मैंने सहने की बहुत शक्ति है. मुझ में ज सारी दुनिया आपकी खूबसूरती की. तारीफ करती है आप कलाकार हो तो आपको वाह. वाह मिल गई जी सर जिस डिपार्टमेंट में है. वहां क्या करना ज्यादा जरूरी क्या नहीं.
करना है बिल्कुल तो उनकी लिमिटेशंस होती. है तो आमतौर पर ऐसे लोग थोड़े एक्सप्रेसिव. कम होते हैं आप तो एक्सप्रेसिव हो भी और. आपको सुनने की आत है तो ये वाला इशू नहीं. होता आपके साथ बिल्कुल होता है देखिए मैं. यार तुम बिल्कुल रोमांटिक नहीं हो नहीं. नहीं एक रोमांटिक तो नहीं नहीं ये तो. देखिए अच्छा लास्ट टाइम सर ने आपको लव यू. कब लिखा था मुझे लगता है बोला तो अभी. दो-तीन दिन पहले ही. होगा देखिए एकत लोग करते हो लिखते य बहुत. हां हां हम लोग बहुत मतलब वी आर वेरी. कम्युनिकेटिव ओके संवाद बहुत एक बात सबसे.
जरूरी जो मुझे लगता है अच्छे रिश्ते के. लिए हम लोग बहुत बोलते हैं और बहुत बोलते. हैं इसलिए हम लोग में खूब मता भी होता है. हम लोग बहुत ज्यादा एग्री डिसएग्री करते. हैं बट वी बेग टू डिसएग्री विथ ईच अदर तो. वो भी चलता रहता है क्योंकि हम दोनों बहुत. स्ट्रांग पर्सनेलिटीज हैं शुभंकर अभी जो. आपने एक बात कही कि इनके जो इनकी नौकरी है. उनकी सेवा में बहुत सारा ऐसा समय रहा जो. टेंशन का समय गुजरा तो यह आपको बड़ी. मजेदार किस्सा बताऊं मैं बनारस में जब. डीएम हो कर के गए तो क्लब का मैंने कहा कि.
नए साल का फंक्शन करते हैं तो मैंने सारे. ऑफिसर्स को सबको बुलाया वाइफस को कि पवाली. तैयार करा रही हूं और एक स्किट तो जब ये. आए तो रिलैक्स रात के 9 बजे काम काज खत्म. करके 9 बजे रात मेरी हरसल शुरू हुई एडीएम. थे एसएसपी सब लोग बैठे थे रात में 30 साल. पुरानी बात तो हम लोग जब बैठ कर के करने. लगे तो दो दिन बाद हमसे जो हमारी ऑफिसर. बोली की मैडम जी एक बात कहे बुरा मही. मानेगी हमने क नहीं बोलिए बोलिए बो सर तो.
हंसते हैं मुस्कुराते हैं तो हमने कहा तोत. बोले तो उनको देख कर के हम लोग तो बहुत. राते थे हम लोग तो सोचते थे हस नहीं जानते. हैं व तो कितना अच्छा से हसते सर से कए. हसा कर जी तो हमने आ कर के इनको बताया कि. यू हैव दिस रेपुटेशन लोगों को यकीन नहीं. हो रहा कि तुम हसते मुस्कुराते क्योंकि जो. काम का एक रा होता है या जो होती या काम. का जो 24 घंटे में स्ट्रेस है वह आपको. कहीं ना कहीं मतलब वैसे क्षण देता नहीं तो.
मैंने कहा इसलिए तो इस तरह के फंक्शन करा. रही हूं कि हंसे और आप भी साथ में. मुस्कुराए तो जब एक आपको मैं बात बताऊं कि. मैंने एक बार पहले आपसे कहा कि मैं खुद. बहुत एक्सप्रेस व बहुत स्ट्रंग ओपनि टेड. थी तो मुझे याद है कि मैं. यह सेक्रेटरी होम हुए और एडिशनल चीफ. सेक्रेटरी होम और उस समय उत्तर प्रदेश. बहुत संवेदनशील दौर से गुजर रहा था.
क्योंकि बहुत कुछ उस समय घट रहा था मैं कह. सकती हूं. कि आज पूरे विश्व में माननीय योगी जी की. जो पूरी लॉ एंड ऑर्डर की इतनी प्रशंसा. होती है उस समय उस समय पूरा कह सकते हैं. कि वह पूरा एक उनका रथ कह सकते हैं कि चल. रहा था और सारे अपराधियों को त्राहिमाम. त्राहिमाम करना पड़ रहा था ऐसे.
में मैं जब जो कुछ लिख रही थी तो उसके. रिपर मुझे समझ में आए क्योंकि अवनीश तो. आई वही बात जो आप कह रहे कि जब जीवन साथी. हैं तो वहां पर आपको यह समझ में आना होगा. कि आपका स्वतंत्र व्यक्तित्व आपकी ओपिनियन.
और आपका यहां पर एक सहयोगी होना ज्यादा. महत्त्वपूर्ण है बजाय आपका स्वतंत्र. व्यक्तित्व एंड आई बैक ट्रक और मैंने उस. तय किया कि मैं भी इस. समय जो संवेदनशील और महत्त्वपूर्ण विषय है. मैं उन पर कोई भी टिप्पणी करने से इस समय. बचू क्योंकि जाहे अनचाहे मैं परिवार के के. द्वारा इस समय एक ऐसी भूमिका में आ गई हूं. जहां महत्त्वपूर्ण निर्णय हो रहे हैं. महत्त्वपूर्ण निर्णयों के केंद्र में हूं.
तो मेरा वहां पर मुखर होना ठीक नहीं अब आप. कहेंगे कि यह कोई किसी प्रकार का य वो. नहीं है कि इसको आप बोले कि यह कोई बैक सट. लेना है यह आपका स्वतंत्र निर्णय कोई कहता. थोड़ी आपसे मैंने संस्था चलाना कम कर दिया. हां ये इसीलिए है क्योंकि आप स्वयं देखते. हैं कि जीवन में आप एक कलाकार है प्रेम. रहे कटुता कम रहे न सकारात्मकता ना रहे. सकारात्मकता रहे तो कहीं ना कहीं वो ऐसे. निर्णय जीवन में आते हैं जहां पर आप एज अ.
यूनिट सोचते हैं आप एज एन इंडिविजुअल नहीं. सोचते और मैं जब मैं अपने सिर्फ गाने और. मंच के लिए सोचती हूं वहीं पर मैं एकल. होकर सोचती हूं बाकी मेरा थॉट प्रोसेस. बहुत यूनिफाइड है मैं सिर्फ एक परिवार की. ही तरह सोच पाती ट्वीट करना होता तो कई. बच्चे कहते कि मम्मी एक बार चेक करा लिया. कर नहीं नहीं नहीं कोई कुछ नहीं बहता मुझे. कोई कुछ नहीं रोकता ना टोकता कमेंट सेक्शन. पढ़ते हो आप कभी कभी कभी करती हूं बिल्कुल. क्योंकि t क्या बहुत ओपिड है मेरा मानना. है कि.
[संगीत]. उसमें कुछ ही लोग थे जो सामने खुल कर के. आए थे जिन्होंने खारिज किया था कि. असहिष्णुता आंदोलन या अवार्ड वापसी गलत है.
उसमें उनमें से मैं थी तो हम लोग तो हम तो. तब से निशाने प हैं तो हम लोग उसके बाद. कुछ भी अच्छा करते तब भी एक बड़ा वर्ग था. जो हमेशा ना ना हा तो ये मोदी जी का जो. फैन आपको कहा जाता है कि मालिनी जी मोदी. जी की फैन है अब तो पूरा देश फैन है हा जी. तो ये क्या आपको अलग लगा मोदी जी या योगी. जी में जिसको लेकर आप फैन हो गए और आपको. इस बात से तराज भी नहीं ठीक है ये पति काम. करते हैं इसलिए या कुछ आपका अपना नहीं ये. तो देखिए यदि आप ये बात कहेंगे तो इसका.
मतलब मुझे लगता है कि नहीं ऐसे लोग आप. मेरी नहीं इसका मतलब तब तो मेरी पूरी एक. समझ को आप नकार रहे हैं इसका मतलब कलाकार. जो भी व्यक्ति हो उसके भीतर एक कहीं ना. कहीं हर व्यक्ति उसके भीतर एक समझ है और. सबसे पहले राजनीतिक समझ है क्योंकि जो भी. एक नागरिक स्वतंत्र नागरिक के रूप में. पैदा हुआ है तो उसका पहला अधिकार राजनैतिक. अधिकारी होता है वोट करने का अधिकार अपनी. सरकार को चुनने का अधिकार हमारे लिए सही.
क्या हो रहा है इसको तय करने का अधिकार और. मैं तो अधिकारी की पत्नी रही हूं तो मैंने. नियम कानून का कि अवज्ञा पालन सब कुछ होते. हुए बहुत करीब से देखा है तो निश्चित रूप. आपने कई मुख्यमंत्रियों को भी देखा है हां. मत पूछिए सब कुछ देखा आप याद है कौन. कौन-कौन से मुख्यमंत्री आपने देख लिए अरे. मैंने क्या देखे लेकिन हां पूरे मुझे याद. है जब कल्याण सिंह मायावती आपको ऐसे नहीं. मैं बताती हूं. जब अवनीश सेवा में आए तो उस समय नारायण द. तिवारी जी सीएम थे एनडी तिवारी जी और या.
उत्तराखंड यही था एक था पूरा यूनिफाइड. उत्तर प्रदेश और अवनीश की पोस्टिंग हुई है. मैनपुरी पहली पोस्टिंग उसमें भोगांव. एसडीएम और वहीं से उसी समय मुलायम सिंह. यादव जी पहली बार मुख्यमंत्री बने वे बने. उसके बाद मायावती जी आई मायावती जी के बाद. फिर कल्याण सिंह जी आ जी आए और कल्याण. सिंह जी आए फिर राम प्रकाश गुप्ता जी आए. फिर राजनाथ सिंह जी आए मायावती जी आई. मुलायम सिंह जी आए और फिर अखिलेश जी आए और.
फिर योगी जी का दूसरा टर्म है तो बहुत कुछ. देखा कह लीजिए पूरा कालचक्र है कि हम. लोगों ने नारायण द तिवारी जी से लेकर के. समझ लीजिए योगी जी त तो जैसे हम आपने कई. बार कानून व्यवस्था का जिक्र किया हम लोग. स्कूल कॉलेजेस में बड़ी लड़ाई देखते थे तो. जब बात होती तो कि मायावती की सरकार थी. क्योंकि कल्याण जी की सरकार तो हम बहुत. छोटे रहे याद नहीं रहा तो उसमें बड़ी टाइट. व्यवस्था थी और एक योगी जी में आ गई आपकी. नजर में कक आप पॉलिटिकली ओपीनेड भी है. कौन-कौन सरकार में क्या-क्या खास लगा.
आपको बुराई वाला नहीं अच्छा वाला पर्ट. देखिए देखिए नहीं देखिए कल्याण सिंह जी. अद्भुत थे यदि कोई प्रशंसा करता हो मिलता. है आपको कल्याण सिंह जी की तो वह ठीक. मिलता है क्योंकि कल्याण सिंह जी वह पहले. व्यक्ति थे जिन्होंने यह भरोसा जगाया था. उस समय उस बिगड़े हु उत्तर प्रदेश में कि. चीजें ठीक की जा सकती हैं नकल. रोकना पहली बार पहली बार बार वे स्वास्थ्य. मंत्री जब बने मेरे पिताजी डॉक्टर थे तो. वे इतना प्रशंसा उनकी करते थे कि किस. प्रकार से उन्होंने लोकल परचेस में नियम.
कानून को लेकर के आए मुझे याद है आज भी कि. वे ऐसे सीएम थे उस जमाने में जो सारे. अधिकारियों को नाम से जानते थे नाम से. पुकारते थे वो मुझे नहीं पता आज कितने उस. जमाने में मैं बात कर रही हूं तो एक एक. मुझे किस्सा याद है कल्याण सिंह जी का मैं. ट्रेन से सफर कर रही थी प्रोग्राम देने. में अलीगढ़ आ रही थी और गोमती एक्सप्रेस. थी तो एसी उसमें बच्चों को लेकर थी बगल. में वो भी थे तो गनर दिखा तो गनर ने बताया. कि वो कलाकार है वो जा रही साथ में तो.
कल्याण सिंह जी ने बुलवाया मुझे उस समय. मुख्यमंत्री नहीं थे मैं जाकर के मिली और. मैंने अपने पिता का बताया कि वो किस. प्रकार से आपकी इतनी प्रशंसा करते थे और. तीन साल बाद वोह मुख्यमंत्री बने और सदैव. उनका तो बड़ा मन में सम्मान रहा और. मायावती जी देखिए उनके अंदर एक विलक्षण. गुण था मैंने अपने पति को उनके समय में. काम करते हुए देखा वो डीएम भी रहे हैं. गोरखपुर इनफैक्ट मायावती जी के दौर में वे. कलेक्टर गोरखपुर थे जब माननीय योगी जी.
सांसद थे वहां से मायावती जी के भीतर यह. विलक्षण गुण था कि वे जो कहती थी वह करवा. सकती थी उनके कहे का ऐसा असर था कि उनकी. बात की अवज्ञा करने का किसी में साहस नहीं. था वैसे कहते ना यू कमांड दैट पावर एंड. रिस्पेक्ट वो उनमें था लेकिन उनकी जो बाकी. चीजें थी हम सब जानते हैं कि किस कारण से. से अ वो वरना मुझे लगता है कि उन्होंने. कहीं ना कहीं यदि उस अपने उस पक्ष पर काबू.
पा लिया होता तो शायद भारतवर्ष की बहुत. बड़ी नेता होती वो मायावती जी के लिए मैं. यह जरूर बोलूंगी क्योंकि और मैं यह भी. मानती हूं शुभंकर कि यह समाज का एक चक्र. है मायावती जी का उस समय आना शायद समाज. में बदलाव के लिए बहुत जरूरी था उत्तर. प्रदेश में बदलाव के लिए बहुत जरूरी था वे. जिस प्रकार की सामाजिक चेतना लेकर के आई. एक पूरे शोषित दबे हुए पूरे एक वर्ग का. आगे आना लड़कियों का यह भाव आना कि हम आगे.
आ सकते हैं ये निश्चित रूप से बहुत बड़ा. एक उसका मैं सोशल एस्पेक्ट में बता रही. हूं बहुत बड़ा असर था लेकिन वो सिर्फ एक. विषय वही शायद था जो जरूरत से ज्यादा. केसेस ठोकने जाने लगे और या एक वर्ग का. बड़ा हावी हो जो शोषित वर्ग था शायद उस. उसने अब बाकी थोड़ा कते अति करना शुरू कर. दिया था ऐसा आरोप उस ल तरफ इशारा कर रही. थी की लोभ वाले में चलता रहा कि बड़ा हा. सारा चीज हा और तीसरा वही है कि जब अतिशय. अधिकार आता है तो उसको उसका नियंत्रण करके.
कैसे चलना वही तो सबसे बड़ी नीति और. राजनीति. है योगी जी एक अखिलेश जी भी आ ग अखिलेश जी. में यश भारती आपको मिला था नहीं मुलायम. सिंह जी. ने अखिलेश जी जब आए थे तो जैसे और एक बात. बता दूं मुलायम सिंह जी के पहले मैं. मुलायम सिंह जी की बात करूं उन्हें धरती. पुत्र कहते हैं तो सच में धरती पुत्र ही. थे मुलायम सिंह यादव. जी का राजनीतिक पक्ष तो सब जानते हैं नेता.
कितने बड़े थे और किस प्रकार से उन्होंने. भी सबका संगठन पूरा जोड़ा और उस उसको आज. भी उस प्रकार के नेता दल में वैसे नहीं. जैसे उन्होंने जिस संघर्ष से अपनी जमीन. तैयार की लेकिन एक जो उनका पक्ष था व. साहित्य और संगीत के बहुत बड़े कद्रदान थे. बहुत बड़े कद्रदान थे मेरे ऐसे अनुभव रहे. उस समय का चकि दुर्भाग्य से आज का जो पक्ष. है उस समय का इन चीजों का डॉक्यूमेंटेशन. नहीं है जो 90 के दौर में 80 के दौर में.
मतलब मुझे याद है पंडित हरि प्रसाद. चौरसिया जी को बुलाकर लेकर आए थे कि आप. संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष बनिए नीरज. जी को उन्होंने हिंदी संस्थान का अध्यक्ष. यह जो उनकी सोच थी कि अच्छे लोग वही वाली. बात है ना कि धीरे धीरे कालांतर में वह. चीजें संभल नहीं सकी और बात करें योगी जी. की तो देखिए योगी जी का जो की जो. पृष्ठभूमि है वो. नाथ परंपरा से आ गए और वह योगी हैं जब. योगी हैं तो वह योगी यानी.
कि उठा हुआ जीवन के उन सारे भौतिक सुखों. और आकर्षणों से जो बांधती है एक नेता को. सत्ता से उससे उठा हुआ ऐसा व्यक्ति यदि. सत्ता पर बैठ जाए तो सबसे बड़ी बात तो. निडर है वह निर्भीक है उसे किसी चीज की. लालसा नहीं ना पद की ना धन की ना शक्ति की. वो उसके पास है तो मुझे लगता है कि जिस जो. व्यक्ति एक कहते हैं ना कि जो व्यक्ति अभय. हो जाता.
है जो व्यक्ति अभय हो जाता है उसकी बात का. असर सब सबको हो जाता है क्योंकि उसे किसी. बात का अभय मतलब डर है ही नहीं योगी जी ने. इसी मुझे लगता है शैली. से उत्तर प्रदेश जिसकी में शायद कभी कानून. व्यवस्था वापस पटरी पर आ पाएगी इसकी. उम्मीद भी छोड़ दी थी उसको ना सिर्फ वापस. लेकर के आए बल्कि एक बीमार पड़े हुए उत्तर. प्रदेश बीमारू मतलब हमें तो याद है कि जब. भी स्कीम्स होती थी तो हम लोग नीचे उत्तर. प्रदेश मानते थे कि यह 23 में 22 में.
19वें रैंक नंबर वन पर आज उत्तर प्रदेश हर. स्कीम हर योजना में मतलब सिर्फ लॉ एंड डर. की बात नहीं कर रही हूं. सर्वांगीण जो विकास है और उसका कारण शायद. यह हो सकता है कि बहुत लंबे समय तक एक तो. सांसद रहे हैं और देखिए शुभंकर गोरखपुर. में आठ वर्ष रही हूं मेरा बचपन गोरखपुर. बीता है मैंने वहां पर स्कूल में अपनी. शिक्षा ली है संगीत की शिक्षा भी ली मेरे. पिताजी ने वहां पर उस जमाने में सरकारी. अस्पताल में सेवाएं दी जब इनसे फ्लाइट से.
बहुत बड़ा कहर हुआ करता था उस गोरखपुर को. जानने के कारण मैं आपसे बात बता रही हूं. कि जिसने पांच टम वहां पर 25 साल. सांसदीय विरासत में मठ से भी वही गुरु. विद्या पाई हो कि उनके गुरु भी उसी प्रकार. से उन्होंने वहां की पूरी समस्याओं को जन. समस्याओं को देखा हो ऐसा. व्यक्ति जब सत्ता पर. बैठे तो आम व्यक्ति का कैसा संघर्ष है.
क्योंकि मट पर बैठ कर के तो हर व्यक्ति. उनके पास जाता था और इसीलिए आज आप देखते. हैं कि उनके बराबर दौरा करने वाला कोई. नहीं उनके बराबर कोई भी. जो जनता दर्शन करने वाला कोई नहीं है उनके. बराबर कोई लोगों से मिलने वाला नहीं है. अभी तक हम लोग तो यह देखते थे कि सीएम से. कोई जल्दी मिल नहीं सकता था सीएम के साथ. साथ 10 10 लोग आज भी लोगों को एक पूरी. दुनिया में किसी से बात करें तो एक. संत धर्म को आधार.
मानकर राजनीति के बीच में रहकर धर्म के. आधार पर उत्तर प्रदेश जैसे कठिन प्रदेश को. किस प्रकार से एक आदर्श पथ पर ले जा सकता. है योगी जी एक उसका अनुपम उदाहरण है और. मुझे लगता है यह असाधारण को स मतलब. असाधारण को संभव बना देने का कमाल किया. योग जी ने हम लोग बड़े भाग्यवान है हम लोग. तो उत्तर प्रदेश में बागेश्वर बाबा जी. मिलिया जी मुलाकात है हमारी उसी दिन भेंट.
हुई थी 22 तारी क्या आपका अनुभव है. क्योंकि वो भी बड़ी चर्चा में रहे हैं और. उनको लेकर भी कई अलग-अलग धारणाएं हैं. अलग-अलग बातें हैं लेकिन बड़े प्रचलित हो. गए बीते कुछ समय में जिस तरह से उनकी. पॉपुलर आई आपको क्या लगता है कहां से यह. बाबा इतना वायरल हो गए देखिए मेरा उनसे. व्यक्तिगत कोई परिचय नहीं है मेरी भेंट. उनसे हुई. थी 22 जनवरी को ही राम. मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा में हमारी भेंट. कराई भी कि किन्ने हमारे. गुरुवर पं भूषण गुरु हमारे गुरुवर श्री.
रामभद्राचार्य जी ने. तो बहुत बहुत उन्होंने प्यार दिया मुझे. मैं आपको एक चीज दिखाना चाहता हूं मुझे. याद आ गया राम भद्राचार्य जी और मैं वो. मेरे पदार लगते हैं अच्छा अच्छा हां वो तो. जौनपुर के ही तो हां हम दोनों जो ब्राह्मण. है वशिष्ठ गुत हमारा और मैं आपको छोटा. साडि दिखाता इसकी ऑडियो मैं कहूंगा बाद. में म्यूट कर दिया जाए ये देखिए ये.
मेरे हां हां भद्राचार्य जी ने मेरा. स्पेक्स जो था हा उसको निकाल के और ये. देखिए खुद पहन लिया खूबसूरत दृश्य था मेरे. मैनन का पॉडकास्ट के घर जाकर बड़ा अद्भुत. आनंद ये मेरे जीवन का सौभाग्य है कि. गुरुवर से मेरा जुड़ाव है अभी भी नवरात्रि. में चित्रकूट हम जाएंगे और उनके जन्मदिन. पर संक्रांति के दिन वे जहां भी होते हैं. मैं उनका आदेश है तो मैं गाने के लिए. हमेशा पहुंचती हूं तो उनकी वजह से एक जीवन.
को एक अलग दृष्टि मिली है ये एक अलग. सौभाग्य रामभद्राचार्य जी से जुड़ा वो भी. अपने आप में ईश्वरीय चमत्कार है देखिए मैं. आपको एक बात बताऊं कई लोग उनके ज्ञान से. उनकी स्मरण शक्ति से उनकी राम कथा की जो. नई-नई दृष्टि से जो बानगी उसको बताते. व्याख्या करते हैं उससे प्रभावित होते हैं. मैं तो बिल्कुल एक अलग ढंग से प्रभावित. हूं. उनकी संगीत की जो समझ है वो चकित करने. वाली वो चकित करने वाली मैं मतलब आप सोचिए.
कि एक दिन ऐसे ही बैठकर बात हो रही थ. उन्होने मुझसे कहा कि मालिनी सुंदरकांड. करना है तुम्हें और सुंदरकांड तो हम उनके. पास वही बैठे थे आश्रम में चित्रकूट में. और वे अलग-अलग राग रागिनियो. में पूरा वृतांत सुंदर कांड में कब क्या. हुआ हनुमान जी कब आते हैं मुंदरी कब मेरी. सीता जी अलग-अलग राग में बांधकर गाने लगे. तो जब मैंने टोका मैंने गुरु जी आपको. मालूम है कि आप किन-किन रागों में गा रहे. हैं राग बदलते जा रहे भाव के साथ-साथ तो.
मैं मानती हूं वे तो अवतार है अवतारी ही. हो सकते हैं जो इस प्रकार का ज्ञान उनके. भीतर है और इस प्रकार की प्रभु की कृपा है. जो उन में तो संगीत की ऐसी समझ है कि क्या. बताया जाए बड़े-बड़े गवायो को नहीं होगी. क्योंकि हम एंड सेगमेंट प मैम है और एक. चीज और कहना चाह रही थी आपने सबके बारे. में पूछा बात वही रह गई अहि श्रोता आंदोलन. की बात चली आपने उत्तर प्रदेश के. मुख्यमंत्रियों का पूछा मोदी जी के बारे. में नहीं पूछा मैंने जिक्र किया था कि आप.
मोदी जी बात वही रह गई जी जी चलिए तो मोदी. जी को लेकर मैं एक रिफ्रेम करता हूं आप दो. जब हम लोग बड़े हो रहे थे कॉलेज में बड़े. हो रहे थे तो नरेंद्र मोदी जी का नाम जो. था वो मीडिया में एक ऐसा नाम आता था जिसको. अनटचेबल हम कहते हैं फिर मैंने वो भी दौर. देखा जब मैं 2011 या 12 की अपनी व्यक्तिगत. कहानी सुना रहा हूं मैं मैं गोंडा में था. और बाल कटवाने गया था और शाहरुख नाम का एक. लड़का मेरा बाल काटता था और उसने मुझसे. कहा कि मैंने कहा किसको वोट देने वाले हो. 13 शायद 12 1 की बात है तो उसने कहा कि.
यार वो गुजरात से कार है बड़ा सुने है. विकास की ये उसके लफ्ज थे तो मैंने कहा. तुमको किसने बताया उसने कहा नहीं चर्चा चल. रही है फिर मैंने बदलते हुए पूरे देश में. धारणा देखी आज बड़ी किस्से कहानियां है कि. दुबई से लेकर तमाम जगहों पर मुस्लिम. राष्ट्रों में हिंदू मंदिर बन रहा है राम. मंदिर के विषय में जैसे आपने कहा कि. सौम्यता बनी रही बड़ी बड़ी घटनाएं देश में. हुई इतिहास में नरेंद्र मोदी जी का नाम. रहेगा हमेशा और उसके बारे में चर्चा हमेशा.
रहेगी एक बड़ा वर्ग पसंद करता है कुछ लोग. उस पर सवाल करते लेकिन व ऐसे व्यक्ति. जिन्ह आप इग्नोर नहीं कर सकते हैं आप उनसे. क्योंकि मिली है मैं भी मेरा भी सौभाग्य. कि दो तीन बार में उनसे मुलाकात की है. हमारी बात हुई है आपका पर्सनल टच क्या रहा. और क्यों आप नरेंद्र मोदी जी की फैन. बनी देखिए सबसे पहले तो मैं यहां य जर बता. दूं कि हमारे परिवार का बहुत पुराना. जुड़ाव जनसंघ से रहा हमारे पिताजी.
का साहिर हमारा भावनात्मक रूप से रहा ज. मैं आपको बता रही थी कि रथ यात्रा जब जा. रही तो हम लोग भोजन लेकर पहुंचे थे इसलिए. नैसर्गिक रूप. से गोधरा में जो हुआ और उसको लेकर जिस. प्रकार. का दुष्प्रचार. पूरे एक विश्व में कह लीजिए इस प्रकार की. एक. इमेज बनाई गई और उसी समय से एक बहुत पुष्ट. धारणा एक वर्ग की थी जो यह मानता था कि एक.
बहुत बड़ा प्रोपेगेंडा है जो मिथ्या. प्रचार फैलाया जा रहा तो हम उसी वर्ग के. थे हम लोग पूरे परिवार से जो य मानता था. कि कितना बड़ा एक इकोसिस्टम डेवलप हो चुका. है बाहर की छोड़ो कि अमेरिका वीजा नहीं दे. रहा वो सब छोड़ो अपने देश में मीडिया. छोड़ो हमारे जानने वाले हम इष्ट मित्र सब. तक संचार माध्यम से प्रिंट माध्यम से. गॉसिप के माध्यम से कहानी किस्सों के.
द्वारा एक झूठ सच के रूप में बताया जा. चुका है तो आपने पहले एक व्यक्ति को खारिज. कर दिया ऐसा. व्यक्ति किस प्रकार का पुरुषार्थी होगा कि. जब वे चौथी बार मुख्यमंत्री बनते हैं तो. पूरा देश उनको एकदम प्रतीक्षा कर रहा था. कि किस प्रकार से जो भारतवर्ष इधर मुड़. चुका था क्योंकि जिस इको सिस्टम कहते हैं. ना कि भाई. आप बड़े से. बड़े विश.
को आपको कोई अच्छा नहीं लगता आप किसी को. अपने घर आमंत्रित करते हैं और कहते हैं. भैया इसको निकालो बाद में जिसको आपने. बुलाया वही आपके लिए समस्या सबसे बड़ी है. आपको पता चला वह तो है ही नहीं तो जिनको. इन्होंने घर पर आमंत्रित किया था जो इको. सिस्टम डेवलप किया था उसने भारत को. धीरे-धीरे जो घुन की तरह से नष्ट करना. शुरू किया और हम सब लोग येट करते हुए देख. रहे थे आपको क्या लगता है अन्ना का आंदोलन. पूरे भारतवर्ष में सफल क्यों हुआ था. क्योंकि पूरे देश में कहीं ना कहीं.
भ्रष्टाचार को लेकर. के अपने स्वाभिमान को लेकर के विरक्त हो. गए भारतवर्ष के नेतृत्व को लेकर के जगी एक. निराशा के कारण ही तो था देखि नेतृत्व. देखिए कहीं भी गया हो लेकिन ये नहीं 2012. 13 की जो आपने बात की तो मैं इसलिए अन्ना. आंदोलन पर गई क्योंकि लगभग उसी समय. बिल्कुल सही बात है मोदी जी. गुजरात में कमान संभालते हैं और यहां पर. यूपीए का शासन दो बार चल चुका है.
और शीला दीक्षित जी के खिलाफ कहे या. सीडब्ल्यू जीी या किस कुछ कुछ घोटाले लेकर. के दिल्ली में आंदोलन के बहाने पूरे देश. में अस्थिरता के संगसंग नेतृत्व के प्रति. अविश्वास का भाव जग रहा था और जग चुका था. और उसमें देश ने तो तय कर लिया था क्या. होना है यह बात सच है क्योंकि मैंने कहा. ना वो उसका नाम शाहरुख मुझे क्योंकि मेरा. मित्र है फैन भी है वो और उसने मुझसे कहा. तो मैं थोड़ा हैरान था कि मुस्लिम व्यक्ति. ऐसा कैसे कह रहा है लेकिन उस घटना को 10.
साल बीत गए जी अब मोदी जी 10 साल से नहीं. नहीं मैं वही से बता रही हूं और उसके बाद. जब प्रधानमंत्री जी आते. हैं और देश की वास्तव में कमान संभाल लेते. हैं तो वह भी एक अनहोनी होते हुए दिखती है. कि अनहोनी जैसे लग रही थी कि कैसे होगा और. व वास्तव में देश में कमान संभाल लेते हैं. जो पहला रेजीम थी उनकी पहली रेजीम आपको. याद हो कितनी ज्यादा प्रोपेगेंडा इतना. ज्यादा अनरेस्ट इतने ज्यादा गल्प इतना मिस.
इंफॉर्मेशन और दुष्प्रचार का ऐसा कुचक्र. पूरे इंटरनेशनल मीडिया से लेकर अपने आपी. चला लेकिन उन्होंने एक ही काम किया कि. हमें इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करना है. वेलफेयर पर काम करना है जो कहा है वह करना. इस देश में पहली बार यह विश्वास दिलाना. है कि राजनीति में ऐसी भी सत्ता हो सकती. है ऐसे भी नेता आ सकते हैं जो अपने कहे पर. अमल करते हैं और सिर्फ और सिर्फ उसी वजह. से 2019 में आशातीत सफलता पाई चाहे वह.
उज्जवला गैस हो या फिर मैं इसलिए आपको य. बता रही हूं क्योंकि मैं तीन चुनावों में. उत्तर प्रदेश की चुनाव की आयोग की ओर से. ब्रांड एंबेसडर रही हूं तो मैंने इलेक्शन. कमीशन के इस काम को और जाकर के वोट करने. की संदेश को 2011 से लेकर 2017 तक दिया है. तो मैंने वोटरों के भीतर निराशा और उसमें. आशा और उत्साह के भाव को बदलते देखा है. जिस देश में 39 पर वोटिंग होने लगी उत्तर. प्रदेश में 39 40 पर वोटिंग होती थी वहां.
से लेकर 57 पर वोटिंग पे आए 61 62 पर. वोटिंग पर हम आए क्योंकि लोगों में. विश्वास जगा नहीं वोट अब करना चाहिए वो. क्यों आया क्योंकि जब आपको एक अच्छी. लीडरशिप मिलती है जो आपको लगता है नहीं. वोट देने का लाभ है क्योंकि एक सत्ता है. एक शक्ति है नेता हैं जो हमारे लिए सोचती. हैं जो गरीबी हटाव का आंदोलन नारा सुने आप. सोच नहीं सकते मैं तो लोक कलाकार हूं गांव. कस्बों में इतने कार्यक्रम किए. हैं टॉयलेट बनना जिसका तीन साल चार साल तक. मजाक उड़ा है शुभंकर मैं एक महिला कलाकार.
हूं आज से नहीं 40 साल से सड़कों पर घूम. रही हूं और कार्यक्रम देने के लिए आठ आ. घंटे 1010 घंटे यात्रा सड़क पर हम लोग. करते हैं कभी किसी ने सोचा कि स्त्रियों. के लिए टॉयलेट्स कहां है कभी किसी ने सोचा. इस बारे में कि स्त्रियां झाड़ियों के. अलावा कहां. जाएंगे और जो एक बिल्कुल सही बात कि लॉ. एंड ऑर्डर में सबसे आसान और सबसे पहले जो. एक मेमन सेफ्टी का इशू बनता है कि संझा को.
स्त्रियां निवृत्त होने के लिए गई थी और. वहां पर किसी बदमाश ने उन्हें पकड़ लिया. यह क्यों होता था आजादी इतने सालों बाद यह. टॉयलेट बनना और लोग उस समय मजाक उड़ा रहे. थे कि किसी स्त्री के स्वाभिमान का सवाल. कैसे हो सकता है कैसे व जनता ने बताया जन. धन नोटबंदी. अ और अब दोबारा वे आए मैं तो आपको यह बता. सकती हूं कि सबसे बड़ा बदलाव तो यही है कि. मैं नहीं सोचती कि यदि मोदी जी होते ना आए. होते यदि मोदी जी नहीं आए होते तो योगी जी.
कहां से आते उत्तर प्रदेश के होने के नाते. मु तो लगता है कि मोदी जी की तो बहुत बड़ी. देन यह है कि आज हमारे योगी जी उत्तर. प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं कौन सोच सकता. था कभी एक संत उत्तर प्रदेश का नेतृत्व. करेगा यह मोदी जी ने संभव किया और चला. करके दिखा सकता है 2019 की बात करें इस. पिछले पा साल में. आपको पता है मैं कल पटना में थे सारे. हमारे. यहां जो ड्राइवर है सब यह कहते हैं हमारे.
य बिहार में भी हमें बस योगी जी भेज दीजिए. आज उत्तर प्रदेश में जो सड़कें हैं. एक्सप्रेसवेज है बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे. गंगा एक्सप्रेसवे जो नया बन रहा है लखनऊ. एक्सप्रेसवे आगरा एक्सप्रेसवे पूर्वांचल. एक्सप्रेसवे कभी कोई सोच सकता था जिस जहां. पर गड्ढे होते थे उत्तर प्रदेश में ये. आज मोदी जी और योगी जी की वजह से ही संभव. है पूरे भारतवर्ष मैं भी गई थी कार्यक्रम. देने औरंगाबाद आप यहां फोटो चला रहे यही. फोटो देखिए क्या संयोग है देखिए यह पद्मा.
फेस्टिवल और ये अजनता अलो की मैं क्या बात. है संयोग देखिए मैं इसी का जिक्र कर रही. थी कि औरंगाबाद से मेरा कार्यक्रम अगले. दिन. था पुणे. में औरंगाबाद के बाद नागपुर में तो मैं जब. आई हूं तो नागपुर एक्सप्रेसवे से आई जो. समृद्धि बनी तीन घंटे. में कोई सोच नहीं सकता था कोई कभी कल्पना. नहीं कर सकता था अयोध्या में एयरपोर्ट. बनेगा कोई सोच सकता था हमने तो कभी कल्पना.
नहीं की. थी काशी की हूं बनारस में पली बड़ी हूं आज. काशी कॉरिडोर का जिस प्रकार की व्याप्ति. है महाकाल की जैसी व्याप्ति मुझे तो बड़ा. गर्व होता है कि मैं हम तो मैं आपने. शुरुआत परंपरा से की थी कि मैं परंपराओं. में आस्थाओं में विश्वास करने. वाली एक स्त्री हूं जिस दौर और मैं पूरा. भारतवर्ष खारिज करने लगा था किरे टीका मत. लगाकर चलो लोग पोंगा पंडित समझेंगे मुझे. तो बड़ा फक्र होता है जब हमारे.
प्रधानमंत्री जी पूरा अपना त्रिपुंड लगाकर. महाकाल के सामने बैठ कर के पूजा करते हैं. और यही नहीं यूएई में जाकर पूजा करते तो. ये पूरे भारतवर्ष में पूरे वि आपने इतनी. तारीफ की तो मेरे मन में एक सवाल आ गया और. ये सवाल कई बार लोग कहते हम लोग जर्नलिस्ट. के तौर पर कवर करते थे एक अंदर खाने से. धीरे धीरे अफवाह उड़ती है मीडिया में योगी. जी जी में पड़ती नहीं. है हम लोग कई बार गए तो पत्रकार लोग आपस. में खुस फसाते रहते हैं कि अरे इनकी टीम. जो है योगी जी को प्रधानमंत्री बनवाना.
चाहती है मोदी जी की टीम में यह सब जो. कहानियां होती है इसमें कुछ आप तो इन. साइडल है आप भी चर्चा करती होंगे दोनों से. मिलती होंगी आपने अपने सवाल में ही उत्तर. दे दिया कि अफवा है तो अफवा फैलाने वालों. का काम अफवा है क्योंकि इस संसार में. लोगों को प्रसन्न बहुत कम लोग देख सकते. हैं अधिकतर लोग चाहते हैं कल रहे क्योंकि. उन सबका काम चलता है योगी जी को. प्रधानमंत्री बनते आप देख रही हैं. बहुत भविष्य की बात है अभी तो मैं चाहती. हूं कि इस चुनाव में हम मोदी जी को. प्रधानमंत्री बनते देखें और मोदी जी ने. पहले ही 207 की बात कर दी तो हम तो.
चाहेंगे वह उस समय तक वहां रहे और एक बात. मैं यहां पर कहना चाहूंगी जो मैंने पहले. ही कह दी कि यदि. प्रधानमंत्री मोदी जी ना होते और ना चाहते. तो क्या योगी जी मुख्यमंत्री बनते उन. दोनों के भीतर मैं तो एकदम पिता पुत्र. जैसा संबंध देखती हूं और वही वह आदर एक. दूसरे को देते हैं तो यह बहुत गलत बात है. जो इस प्रकार के अफवाह उड़ाते हैं दो. विशिष्ट लोगों में जो उम्र में भी इतना. अंतर है एक दूसरे का सम्मान करते हैं. दोनों इतने सक्षम है दोनों इतना अच्छा कर.
रहे हैं और दोनों के पास इतना काम है मैं. तो ऐसे विघ्न संतोषी लोगों से कहूंगी भैया. आप लोग इतनी नकारात्मक मतलब ऊर्जा जो है. बेकार की बातों में ना लगाए इतना अच्छा. उत्तर प्रदेश चल रहा है इतना अच्छे. सुयोग्य हाथों में देश चल रहा है इस समय. 2024 में हम सबकी यही कामना मेरी. व्यक्तिगत कामना है कि गाजे के साथ. प्रधानमंत्री तीसरे टर्म में आए लास्ट. क्वेश्चन मेरा एक बड़ा अच्छा शेर है कि. इंसान के खवाहिश की कोई इंतिहा नहीं होती.
दो गस जमीन चाहिए दो गस कफन के बाद. बिल्कुल मालिनी अवस्थी जी ने अपनी पूरी. जिंदगी हमें बताई जी दो हिस्सों में बताई. पहला हिस्सा ब्रेक एंड देन 2.2 राइट कुछ. रह गया जो लगता है कि यार यह भी हो जाता. तो बेहतर था आपको एक बात बताऊ मुझे तो. लगता है मेरी जिंदगी अभी शुरू हुई है मैं. तो ऐसे ही सोचती हूं यदि ऐसा ना कोई. व्यक्ति सोचे तो क्या क्याक हम नया देख. सकते हैं आने वाले समय माल जी कोल आने. वाले समय में मेरी जो कामना है और कल्पना. है मैं गुरुकुल स्थापित करना चाहती हूं.
जहां बहुत सारी स्त्रियां हैं जो हमसे. जुड़ी हैं और जिन्हें मैं सिखाती हूं जो. मुझसे सीखते हैं जब हम वर्कशॉप करते हैं. वहां पर भी आकर के सीखते हैं लेकिन यह. गुरुकुल ऐसा हो जहां. पर बच्चे आकर के स्वयं रहे जो बच्चे अपनी. उगाई सब्जियां खुद खा सके और और पूरे वर्ष. नहीं तो कम से कम 1010 दिन 1515 दिन को. माता-पिता अपने बच्चों को भेज सके कि 15. दिन के लिए हम अपने बच्चे को भेज रहे हैं.
आपके पास रह करके 15 दिन में यह जाने भारत. क्या है हमारी संस्कृति क्या है हम किन. पूर्वजों की संतान है यह मेरा स्वप्न है. और यह स्वप्न मुझे लगता है कि स्त्रियां. होते हुए हमारे य गैया क्योंकि मैं वैसे. घर भी हमारा ऐसा ही है गाय पली है पूरा. परिवार है खेती होती है मैं अभी वैसे ही. तो लेकिन मैं चाहती हूं कि यह बहुत सारे. लोग क्योंकि मुझसे यह कहां से ख्याल आया. मैं जहां भी जाती हूं तो लोग कहते हैं कि. आपके घर पर हम भेज दें बच्चे को दो दिन.
तीन दिन रख दीजिए तीन दिन बच्चा आपके साथ. रहेगा तो कुछ सीख जाए तो मैं पहले तो बहुत. गंभीरता से नहीं लेती थी इन बातों को और. फिर मुझे अब मेरे नाती पोते हैं उनका जन्म. हुआ है तो मेरी बेटी मेरी बहू जब यह बात. कहने लगे कि मम्मा बस ये तीन साल के हो. जाए फिर इन्हे तुम्हारे से अच्छे कोई. ग्रूमिंग नहीं दे सकता तब मुझे लगता है कि. शायद वो जो शंका सबके मन में है क्योंकि. आज नौकरी पेशा होने. की कह लीजिए व्यवस्था ने संयुक्त परिवार.
रहने नहीं दिए गांव रहने नहीं दिए कस्बे. रहने नहीं जड़ों से बहुत दूर आदमी आ गया. नीड़ पीछे रह गया किससे सीखे दादी तो है. नहीं सुलाने वाली कहानी सुनाने वाली बातें. किससे सीखे दूसरे को देखकर तरसते कि अच्छा. इनके घर में कुआ है वाह तो यह कुए में लोग. जाते थे पनघट पर पानी भरने उसको. रोमांटिसाइज आदमी फिल्म की कहानियां देख. करता है यह देखिए फोटो सरसों के खेत में. मैं हूं तो यह सरसों खेत में लोगों को. लगता है य सब डीडीएलजे में ही होता है. नहीं भैया हमारे यहां भी होता है यह बच्चे.
आए और देखें ऐसा गुरुकुल और जिसमें संगीत. की शिक्षा हो बहो मास उनमें होने वाले. सारे पर्व. त्यौहार उनकी सारी रस्मों के पीछ के कारण. उत्सव किस प्रकार से मनाए जाते हैं उनका. संगीत का साथ में अनुवा संबंध इसके बारे. में भी साथ में बताओ स्प और गायकी में. क्योंकि मुझे अभी भी लग रहा है कि हिंदी.
गाने भी लोग सुनना चाहेंगे गजल भी सुनना. चाहेंगे नहीं बिल्कुल गाने का स्वपन कुछ. है कि कुछ हिंदी गाने कुछ तो गा ही देंगे. देखिए मुझको एक बात बताऊ बड़ी शायद अजीब. लगी मेरी अपनी सोची बात. है बहुत फोकस जो व्यक्ति है वही सोलो. करियर गाने का अपना आगे लेके जा सकता फोकस. मतलब जो सिर्फ अपने लिए सोचे आई मी. माइसेल्फ. मैंने फोक ट्रेडीशंस पर काम किया है जिसका. मतलब ही है कि हम मैं नहीं आगे बढ़ सकती. हम आगे बढ़ेंगे समाज आगे बढ़े इसीलिए.
सोनचिरैया जो हमारी संस्था है जिसमें लोक. कलाकारों की हम लोग प्रस्तुतियां कराते. हैं उनके कार्यक्रम कराते हैं उनकी. वर्कशॉप कराते हैं उनको मंच देते हैं आज. 13 साल हो गए हम लोग कोय काम करते हुए तो. व जैसे गुरुकुल की बात की तो हमारे बहुत. सारे सपनों में वह भी है बहुत सारे गाने. आए यह भी एक सपना है और गुरुकुल में. स्टूडियो बने वहीं पर बहुत सारे गाने. रिकॉर्ड करे तो जाते जाते श्रीराम कु लाम. से कुछ भी जो चार लाइन आप सुनाते कि आधा. पॉडकास्ट श्रीराम पर था तो हम चाहते हैं.
समापन भी प्रभु श्री राम पर ठीक है. बिल्कुल. क्या सुनेंगे भगवान श्री राम का कौन सा. रंग सुनना चाहेंगे मुझे तो बाल रंग ही. सबसे जदा पसंद आया है मुझे तो लवकुश का. संवाद भी अगर कुछ आप उसमें चाहे तो वो भी. बड़ा अच्छा रहा है क्योंकि नागेश्वरनाथ. में दर्शन करता हूं जब भी तो लोग जानते. नहीं हमारे यहां तो मैं तो अयोध्या गया था. रिपोर्टिंग करने तो मैंने सारी चीज बताई. थी कि नागेश्वरनाथ जो है ये कुश जी का उधा. था तो राम जी का चरित्र तो पूरा है या. सीता माता से जोड़कर आप कुछ अगर सुनाना. चाहे बिल्कुल देखिए लवकुश जी से जितने भी.
प्रसंग जुड़े हुए हैं हमारे य गीतों में. उनमें बहुत कार्णिक प्रसंग है क्योंकि. सीता जी ने जब जन्म दिया लव कुष को एकांत. में दिया है तो अधिकतर गीत चूंकि. स्त्रियों ने रचे तो सीता की व्यथा में. अपने को देखा तो बहुत सारे गाने जैसे कि. अरी ठाड़ी सिया पछता. लव कुश जन्म लियो इस तरह के बड़े कारनिक. प्रसंग आते हैं लेकिन आपने बोला कि सीता. जी से जुड़ा बताऊ तो मैं आपको एक बात यह.
कहना चाहती हूं आपको याद है आप चाहे तो. इसको एडिट करके वहां लगा सकते हैं आपको. याद है जब यह बात हम कर रहे थे. कि हमने उस मिट्टी में जन्म लिया जिस पर. पराधीन होने का जो दुर्भाग्य था उसका बड़ा. प्रभाव पड़ा मैंने आपको बताया था जैसे कि. लड़कियों के जन्म का उत्सव मनाना बंद हो. गया पर्दा आरंभ हो गया आदि आदि आदि तो. मैंने उसी समय ठाना कि यदि वक्त बदला है.
समाज बदला है तो बतौर कलाकार आने वाले समय. में आने वाली पीढ़ी के लिए मेरी अपनी देन. इस बदलते हुए सोच के संग क्या है यदि मैं. थिंकिंग आर्टिस्ट हूं तो मैंने नया क्या. रचा तो मैंने बेटी का सोहर बनाया कि बेटी. का सोहर नहीं होता तो अब गाया जाए और. जानकी मां का ही सोहर क्यों ना गाया जाए. क्योंकि. वे इतनी अद्भुत थी तभी राम को प्राप्त हुई. तभी राम ने उनका वर्ण किया और दोनों जिस.
प्रकार का जीवन सीता जी ने जिया है वो. असाधारण विलक्षण थी तो सीता जी का सोहर. सुना रही. हूं हरि मिथिला मगन भैया सिया को जन्म भयो. अरे मिथिला मगन भै आज सिया को जन्म भयो. सुनना हरस अपार सिया को जन्म भयो सिया को. जन्म.
भयो सिया को जन्म भयो अरे मिथिला मगन भै. आज सिया को जन्म. भयो राजा. जनक मोहर. लुटावा राजा जनक मोहर लुटावा अरे बाट. अरे बाटर गैया हजार सिया को जन्म लयो अरे. मिथिला मगन भई आज सिया को जन्म.
भयो मुझे लगता है एक अच्छी शुरुआत भी है. बोल की बोलिए जानकीनाथ की जय जय बहुत बहुत. शुक्रिया मालिनी जी आप आपने वक्त दिया. आपके बहुत सारे रंग हमने टीवी पर देखे थे. लेकिन निजी जिंदगी के रंग आपकी सोच बहुत. सारी और ची ची हमें जानने को मिली मुझे. लगता है कि दर्शक भी उतना ल उठाएंगे कोई. बात जो आप कहना चाहे जाते जाते नहीं मुझे. आज बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके कुछ ऐसे. पक्षों पर बात की जिन पर मुझे नहीं लगता.
है मैंने कभी पहले कहा है और और हमने एक. भी सवाल इसका या इसका नहीं पूछा ये क्या. है अच्छा ओ वो ठीक किया क्योंकि ये मुझे. लगता है पॉडकास्ट का वही उद्देश्य भी है. कि प्रवाह निर्बाध चलता रहे इसलिए मैंने. कई बातों में संदर्भ जो पीछे छूट गए उनको. मैं बीच-बीच में लेकर के आई एक जब पूरा. जीवन अनुभवों से भरा हुआ हो तो उसको डेढ़. दो घंटे में बातों में समेटना कठिन भी है.
लेकिन आज अभी जा रही हूं वापस तो ऐसा लग. रहा है कि कितना जीवन जी लिया उन सारी. स्मृतियों को दोबारा दोबारा साझा करना. बहुत-बहुत सुंदर अनुभव था बहुत-बहुत आभार. और आपका ये न्यूज बुक और नई सफलता के. नए-नए मुकाम हासिल करें यही शुभकामना यही. आशीर्वाद आशीर्वाद प्रभु श्री राम का. आशीर्वाद रहा तो जरूर करता रहेगा थैंक यू. सो मच मैम धन्यवाद i.
