Unplugged ft. Kranti Jha | MS Dhoni | Raktanchal | Vaibhav Suryavanshi | Bihar| Sushant Rajput
आप वही कहीं देखे हुए हैं आपको। फिर मैं. कहता हूं कि अरे आपने धोनी देखी है क्या. मेरी? ओ थप्पड़ शॉट। [संगीत]. कितना मैच खेले थे धोनी पिक्चर बनाने के. टाइम में? सर प्रैक्टिस मैंने एक महीने की थी।. हेलीकॉप्टर शॉट।. लोगों ने मिलवाया कि ये संतोष लाल कर रहे. हैं। संतोष लाल तो थोड़ा काला सा था। ये. कैसे करेगा? सुशांत के जाने के बाद लोगों ने सुशांत का. जिक्र बहुत किया।. सुशांत की मौत का सच।. सुशांत सिंह राजपूत। सुशांत सिंह राजपूत. दो ड्रग दो ड्रग दो.
ये पॉलिटिकली सुशांत को बेचा गया या. सुशांत से वाकई में इतना इमोशनल कनेक्शन. धोनी को आए हुए 10 साल होने को आए हैं 9. साल का बच्चा है क्योंकि अंकल आपका तो. फिल्म हम 100 बार देखे हैं धोनी कैसे धोनी. देखी होगी उस इंसान से आज का बच्चा भी. रिलेट करता है. सुशांत सिंह राजपूत जुबिन गर्ग सिद्धू. मूसेवाला जितना प्यार इनके जाने के बाद. उमड़ा क्या जो लोग जल्दी चले जाते हैं. उनके बारे में हम ज्यादा बात करना पसंद. करते हैं. ये शायद उन लोगों के लिए आप सोचते हैं. जिनसे आपका जुड़ाव होता है दुनिया का सच. है सर अगर मेरी लास्ट लाश यहां पड़ी है।. सब बोलेंगे अरे लाश को यहां से वहां रख.
दो। कोई यह नहीं कहेगा क्रांति को उठा के. वहां रख दो। वो नाम खत्म वो पहचान खत्म वो. इंसान खत्म।. आपके पिताजी की पीएचडी राष्ट्रकवि रामधारी. सिंह दिनकर जी पर थी। वहीं से आपका नाम. क्रांति रखा गया था।. क्षमा सोभति उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. उसको क्या जो दंतहीन विहीन विनीत सरल हो।. बिहार को कान से मत देखो। बिहार आके देखो।. तब तुम्हें पता चलेगा बिहार क्या है? कैसा. रंग है? कैसा रस है? कैसा स्वाद है।. ये हम बहुत मानते थे कि हम अवधि वाले. संकोच करते थे। यह बिहार में भी रहा है।. अब जैसे वैभव सूर्यवंशी आपके बिहार का जी. पंजाबी गाना हो गया गाइस आपकी भोजपुरी.
चलेगा। सब नाचिए सॉरी सॉरी यस. जब भी वो आउट होता है मेरा खुद जो वहां पे. घर पे हमारे जो हेल्प है वो खानावाना नहीं. बनाते हैं। भैया आई नहीं खिनाई बने वाला. भोग दैट्स वंसी आउट हो गई। दिल्ली आप. पहुंचे। कैसी रैंकिंग हुई थी? हिंदू कॉलेज. में दाखिला हुआ। मेरे मौसा जी तो बोले बुआ. बैगिंग हुआ करवा लीजिएगा। टच करेगा कोई ना. फिर आ के हमसे बात कर लीजिएगा। जब कुत्ता. मैंने कहा कुत्ता कैसे बनेंगे? तो फिर. उन्होंने कुत्ता बनवाया, भावुक गए।. तो कभी मन नहीं किया कि विशाल भारद्वाज के. पास जाए इम्तियाज अली के पास कि सर हम भी.
तो आपके कॉलेज के हैं। बड़े संकोची स्वभाव. के हैं हम हैं।. कुछ मुकम्मल नहीं होते तो क्या हुआ कम से. कम घनघोर इश्क तो किया था।. अरे यार लड़के जो होते हैं वो एक ही बारिश. में टूट पाते हैं। उसके बाद या तो वो. गर्लफ्रेंड बनाते हैं या बीवी बनाते हैं।. मोहब्बत पहली, दूसरी या तीसरी नहीं होती।. मोहब्बत तो वो होती है जिसके बाद फिर कभी. मोहब्बत नहीं होती। इज देयर एनीथिंग कॉल्ड. ट्रू लव इन दिस वर्ल्ड? जो महादेव और अह मां पार्वती का जो प्रेम. है कि मां पार्वती ने सिर्फ इसलिए प्रेम. नहीं किया उनको सिर्फ चाहिए थे। वो शिवत्व.
चाहती थी। मुकम्मल हुई प्रेम कहानियों में. कौन सी कहानी है जो आपको आकर्षित करती है? और अगर यह सोचने पर मजबूर कर रहा है।. हां। या फिर ये मान ले कि इंसान को जो. नहीं मिलता इंसान भागता रहता है। जैसे आप. भाग रहे थे। पीछे बैठकर आगे वो सीट वाली. लड़की के लिए।. [नाक से की जाने वाली आवाज़][हंसी]. आपने क्या. एक मर्द के नजरिए से ज्यादा तकलीफ कहां. होती है? जब कोई आपके काम में आपको. रिजेक्ट करता है, कोई मोहब्बत में रिजेक्ट. करता है या तो जेब में पैसा कम होता है।. मोहब्बत वाली जिंदगी भी देखी और बिना पैसे.
वाली जिंदगी भी देखी। मोहब्बत वाली जिंदगी. तो संभाल ली। बिना पैसे के संभालनी. मुश्किल हो जाती है।. बहुत कम वेब सीरीज होती है जिसमें तीन. सीजन तक चला जाए और एक ही किरदार जो है. मुख्य भूमिका में ले जाए।. विजय सिंह। अगर मैं यह चीज अगर मुझे 20-25. में सक्सेस मिला होता तो शायद मैं कहता कि. इसकी पूंछ तुमने तो मतलब क्या काम किया? रक्तांचल को जो प्यार मिला है इसमें आप. लोग की अदायगी ही है या मुख्तार अंसारी की. जो दुश्मनी थी अभय सिंह वाली उसका भी आपको. लाभ मिल गया। संखी पांडे का रोल हमको बहुत. तगड़ा लगा।. लोगों ने इसलिए इतना रिलेट किया क्योंकि. वो नंगा इश्क करते हैं।.
कभी लड़की नहीं देखी? दारू की दुकान पर जैसे कभी लड़की नहीं. देखी।. मतलब अगर किसी किरदार को देख के आपका. चप्पल उठाने का मन करे तो इसका मतलब उस. आदमी ने बहुत तगड़ा एक्टिंग किया। बहुत. तगड़ा काम किया है।. आपने बाबा रामदेव के ऊपर पिक्चर शुरू की. थी। दो बार हुआ था शायद ऑडिशन उसका।. हां, दो बार हुआ था। एकदम. बाबा का अभिनय करोगे तो हमें रामदेव की. तरह कुछ तो सीखना ही पड़ेगा और करना भी. पड़ेगा। [हंसी]. अरे मैंने संकल्प देखी वहां भी मुझे अब. अच्छे लगे।. ये बहुत कम लोगों ने मतलब देखी है। पहला. सीन जो था वो बड़ा ही खतरनाक सीन था। पर. डंडे बहुत पड़े थे।.
इसलिए मारे थे।. कि नकली वाले से बात बन ही नहीं रही थी।. तो हमने भी कहा कि सर मार दीजिए।. मुझे मां को खुश कराने की प्रेस. कॉन्फ्रेंस में ले गए गए थे।. हां। अरे यह भी आपको पता है लेकिन मैं. अपने पिताजी को कभी कुछ दिखा नहीं पाया।. कहीं हमारे पिताजी को गर्मी बहुत लगती थी।. आज हर रूम में एसी है। तब ना मेरे पास वो. सुविधा थी कि मैं अपने पिता के लिए एसी. लगवा पाता एक कमरे में। तो अब एसी है भी. अगर चार एसी तो किसी पिता नहीं है। क्या. हुआ? आज फिर से बात नहीं बनी। क्या हुआ? आज जिंदगी से फिर ठगी। अरे जिंदगी है. दोस्त। अपने रंग दिखाएगी। आज नहीं [संगीत]. मानी। कल तो फिर मुस्कुराएगी।.
[संगीत]. देश इन्हें रक्तांचल से जानता है। पर ये. आते हैं मिथिलांचल से। एक अंचल ने इन्हें. नाम दिया और एक अंचल को इन्होंने नाम. दिया। यह वो शख्स हैं जो कहते हैं कि. बिहार को लोगों ने कान से सुना है। आंख से. नहीं देखा है। हालांकि इनके बारे में भी.
हम ये कह सकते हैं कि इनको देखा सबने है।. इनके नाम को लेके थोड़ा सा अभी लोगों कान. कच्चा है। [गहरी सांस लेने की आवाज़]. चेहरा ऐसा है कि जिसको देखकर आप कहेंगे कि. हां भाई साहब ये हां वही वही वाले एक्टर. हैं जो धोनी में दिखाई पड़े थे। जो. रक्तांचल में तीन-तीन सीजन में आपको दिखाई. पड़े थे। जिनकी अदायगी को आप लगातार पसंद. करते आए हैं। नाना पाटेकर संकल्प में. दिखाई पड़े थे। लेकिन नाम.
पहचान सब बन रहा है। किरदार मजबूत है। नाम. है क्रांति प्रकाश झा बिहार से। स्वागत है. आपका।. बहुत धन्यवाद। और आपने मिथिलांचल का नाम. लिया है तो मैं मैथिली में इसको कहना. चाहूंगा जो मेरी मातृभाषा है सुभांकर जी. के हृदय से आ के धन्यवाद आभार जहां हमरा. मंच पर हमरा सब बात करके इच्छा थैंक यू सो. मच. ये सही है जो आपने कहा कि जानते सब ने. देखा सबने है पर ये वाला आता है क्या आप.
वही. आता है बिल्कुल आता है और कई बार लोग. कंफ्यूज होते हैं कहीं देखे हुए हैं मैं. आपको फिर मैं कहता हूं कि अरे आपने धोनी. देखी है क्या मेरी तो कहते हैं. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] हां. अरे तो आप वही वाले हैं क्या संतू मैंने. कहा हां वो थप्पड़ शॉट फिर उनका एक आता है. कि अरे हम समोसा सिंघाड़ा खिलाएंगे आपको. हम सिखा देंगे तो लोग होते. [गला साफ़ करने की आवाज़] हैं थोड़े. कंफ्यूज बाटला हाउस मैंने एक फिल्म की थी. तो उसमें किसी ने पहचाना ही नहीं मुझे. क्योंकि उसमें मेरे दो बकतीथ लगे हुए थे.
हां. और उसमें किरदार छोटा सा ही था लेकिन. इंपैक्टफुल था तो कई बार लोगों को बताना. होता है कई बार लोग पहचान लेते हैं. बस ये एक्टर के तौर पर ये काबिलियत. [गला साफ़ करने की आवाज़]. को सेहरा तारीफ देना है कि किरदार ऐसा. निभाया कि पहचान नहीं पाए या यह सवाल. परेशान करता है कि यार काम तो किया हमने. आप काहे नहीं पहचान रहे हो अब तो जानना. चाहिए अब तो हमारा काम बोल रहा है ना मतलब. समझ रहे हो तुम. जी जी. कि दम है हम में. जी. पर वो फट नहीं रहा है मुझे लगता है कि. फटना भी शायद नियति तय करती है मेहनत आप.
करते हैं मुझे याद है जब मैं पहली बार. पहला काम किया था मैंने ₹600 के लिए किया. था ₹200 मैंने सिद्धि विनायक में चढ़ाए. थे। ₹200 मां के लिए रखे थे। ₹200 की हम. लोगों ने दोस्तों ने पार्टी की थी। वड़ा. पाव और जो कुछ पआव जो भी उस टाइम पे चलता. था। पर मेहनत मैंने कभी कम नहीं की। पर. समय का पहिया है। सबके लिए घूमता है।. जब आपको जब मिलना है तभी मिलता है। हमारे. पिताजी बड़ी अच्छी बात कहते थे। जब कभी जब. तक वो रहे तब तक देखते थे कि कैसे उद्योग.
हूं मैं और थोड़ा तो कहते थे बाबू बेटा. समय से पहले और भाग्य से ज्यादा किसी को. नहीं मिला आपको भी नहीं मिलेगा हमको भी. नहीं मिला तो आप लगे रहिए. अब पिताजी नहीं है तो बड़ा अफसोस होता है. दुख होता है लेकिन मेहनत मैंने हमेशा सेम. की है सीखता रहा हूं अपने आपको एक बेहतर. इंसान अपने आप को बेहतर कलाकार हर दिन. बनाने की कोशिश की है। आपने पिताजी का. जिक्र किया तो हम सेक्शन पिताजी से शुरू. करते हैं। आपके पिताजी की. मेरी आंखों में आंसू आ जाएंगे।. नहीं नहीं आपके पिताजी की पीएचडी.
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी पर थी।. जी बिल्कुल।. और वहीं से आपका नाम क्रांति रखा गया था।. यह संयोग था या सोच समझ कर? अह मेरे पिताजी एक मुझे बड़ा हम दोनों. भाइयों को तीनों भाइयों को बड़ा अच्छा. वाक्य सुनाते थे कि जब वो एक मंच पे. उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर. जी को देखा था तो फिर जब वो नीचे उतर के. वहां से चले गए थे तो हमारे पिताजी उनके. पद चिन्हों पर चले थे। क्योंकि उनको वो. इतना एक कहते हैं कि अपने लिए इतना आइडियल. मानते थे और वो जब कहानी सुनाते थे तो.
कहते थे इसीलिए मैंने अपनी पीएचडी उन पे. की थी। पर क्रांति नाम के पीछे एक एक अलग. कहानी है। कहानी ये है कि हमारे एक मामा. थे सतीश चंद्र मिश्रा जिनको हम लोग प्यार. से लड्डू मामा कहते थे। वो आरएसएस में काम. करते थे। तो जब मैं पैदा हुआ तो अब बिहार. में दो नामों का एक साथ प्रचलन है। अगर आप. देखेंगे जितने भी दो नाम वाले हैं शशांक. शेखर अभिजीत प्रकाश कुछ भी हो सकता है।. शुभांकर सुमन भी हो सकता है। तो सब बिहार. के लोग होते हैं। तो जब वो आए तो उन्होंने. मां को बोला कि इसका क्या नाम रखेंगे?
बड़े वाले का तो नाम उज्जवल है। तो वो तो. उज्जवल करेगा। इसका नाम क्रांति रख देते. हैं। यह क्रांति ले आएगा। पापा बोले. क्रांति मतलब क्यों? तो अरे प्रकाश भी. लगाएंगे इसके पीछे। तो क्रांति प्रकाश और. झा तो इस तरह से मेरा नाम क्रांति प्रकाश. झा पड़ा।. दिनकर साहब की कोई पंक्ति याद है आपको? दो में से तुम्हें क्या चाहिए कलम या की. तलवार? तो मैं हमेशा कहता हूं कि कलम की. ताकत तलवार से बहुत ज्यादा होती है।. और वैसे बहुत सारी कविताएं हैं उनकी क्षमा. शोभती।. उस क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल.
हो उसको क्या जो दंतहीन विषण विनीत सरल. हो।. कमाल की बात कह रखी है उन्होंने। आज भी हम. कई बार जब कोई एक्सप्लेनर करते हैं तो. हमें कह देते हैं. जी बिल्कुल. कि माफ करने के लिए भी औकात चाहिए।. माफ करने के लिए भी औकात चाहिए। कृष्ण की. चेतावनी है। इतनी सारी तमाम कविताएं उनकी. तो ये लेकिन बहुत आपने ये पापा कहा करते. थे कि बेटा अपने आप को उस तरह बनाइए कि. आपको चीज वो शोभे। क्षमा अगर आप क्षमा. करने के लिए आपको उस लायक बनना पड़ेगा.
पहले। काम ऐसा करो कि नाम हो जाए और नाम. इतना कर दो गुरु के नाम सुनते काम हो जाए।. [हंसी]. बिल्कुल सही कहा है आपने।. रक्तांचल से आप रक्तांचल से दुनिया देखिए।. मिथिलांचल से आप आए। ननिहाल दरभंगा है।. जी. विद्यापति जी की धरती. जी. मातृभाषा मैथिली. जी।. तो एक आदमी के अंदर कितने अंचल हैं? एक आदमी के अंदर पूरा देश है। भले मैं. बहुत जगह की भाषाएं नहीं बोल पाता हूं. लेकिन मैं कोशिश करता हूं कि जो बिहार की. अपनी भाषाएं हैं। भोजपुरी मुझे आती है।. काहे कि भोजपुरी हम मौसी वाला लैंग्वेज.
भाषा मैथिली हम मातृभाषा। हमरे यार चला तो. अवधि हो जात अवधी हो जात है हां और जैसे. ही आप आगे बढ़ते जाते हैं अंगिका बजिका. मैथिली से या भ्रंश निकली हुई है तो इस आद. इंसान के अंदर सारे के सारे अंचल हैं आप. कह सकते हैं क्योंकि मैं देश से मैं. दुनिया से मैं लोगों से बहुत प्यार करता. हूं. हम. मराठी भी सीखने की कोशिश करता हूं मैं. गलत ही बोल पाता हूं लेकिन कोशिश करता हूं. और उनसे मैं बहुत कुछ सीखता भी हूं मराठी. लोगों से वो लोग अपनी चीजें छोड़ते नहीं. है.
साउथ के लोग अपनी चीजें छोड़ते नहीं है. पूरे ब्रह मतलब मतलब पूरी पृथ्वी पे कहीं. भी चले जाएंगे। अगर दो साउथ वाले लोग हैं. तो अपनी भाषा में बात करते हैं।. संकोच नहीं करते।. संकोच नहीं करते हैं। लेकिन शायद ये. विडंबना है हम बिहार यूपी वाले लोगों की।. पता नहीं आपने कितना महसूस किया है और हो. सकता है कि लोग इसके लिए मुझे बहुत सारी. बातें कहीं भी लेकिन मैंने देखा है।. नहीं इसका हमने इसको डिकोड थोड़ा किया था।. ये हम बहुत मानते थे कि हम अवधी वाले. संकोच करते थे।. जी. हम अवत से आते हैं तो हमारे ये मेरे बोला. जाता है। तो हमारे साथ बड़ा संकोच कर जाए. कि नहीं भैया मैं नहीं बोल। ये मेरे बोलब. तो आदमी कहीं गवार है।.
गवार है।. हां. ये बिहार में भी रहा है। अवधी वालों में. बिहार वालों में भी तो हमने कई लोगों से. इस पे चर्चा की तो इसका आया ये क्योंकि. हमारे यहां के लोग जो थे वो दुनिया के पटल. पर इंडिविजुअल तो कर रहे थे लेकिन वो फटे. नहीं. वैसे वाले अधिकारी बन गए ये बन गए तो जो. बड़े मंच थे बड़े मंचों पर हमने संकोच कर. लिया प्लस हिंदी क्योंकि हमारी भाषा का. हिस्सा है हमारे यहां हिंदी बोली आती है. तो हम बाहर जाकर हिंदी बोलने लगे अपनी. लोकल लैंग्वेज को लेकर थोड़ा संकोची हो गए.
हम. बिल्कुल. बट समय के साथ धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे. चीज बदली जैसे विशाल मिश्रा आए थे. तो वो नाव रहने वाले हैं तो हमने उन्होंने. बैठ के अवधिम पडकास्ट किया वहां जो गाना. गा रहे हैं पहले भी मैं तुमसे मिला था. कैसे हुआ अभी आई है उनकी नई फिल्म. बड़ी तगड़ी फिल्म आई है कि आरा आडवाणी. वाले पिक्चर जिस पे बवाल चल रहा है. वो टॉक्सिक. टॉक्सिक. हां उसमें भी गाना विशाल मिश्रा का है तो. जब आदमी बड़े मंच पे पहुंच गया और फिर. अवधिमती आया तो अवध ओझा वाली बात हमको याद. आई कि बमई खरादा निराली होती है.
[हंसी]. बड़ा आदमी कोई भी काम करता है तो लोग ताली. पीटते हैं।. छोटा आदमी वही काम करता है तो लोग कहते. हैं गवार है।. तो वो ताकत दिया। अब जैसे वैभव सूर्यवंशी. आपके बिहार का था।. अंडर19 वर्ल्ड कप खेल के आया तो कहा जी. पंजाबी गाना हो गया गाइस आपकी भोजपुरी. चलेगा।. हां और सबने नाचा भी. और सब नाचे सॉरी सॉरी।. यस [हंसी]. लौंडा एक्स्ट्राऑर्डिनरी टैलेंट लाएगा तो. पूरा देश सलाम ठोकेगा।. पहले बिहार वाला जो दिल्ली गया मुंबई गया. वो उनके में ढलने लगा। अपनी पहचान पर.
संकोच कर रहा था। वैभव सूर्यवंशी ने बताया. काबिलियत बड़ी थी पहचान थोड़ी छोड़ी। हां. भैया हम ऐसे ही बात करेंगे।. ऐसे ही बात करेंगे। वो ऐसे ही बात करते भी. हैं।. पसंद कर रहे हैं लोग ना भाई।. पसंद कर रहे हैं। ऑथेंटिसिटी है। ऑर्गेनिक. है वो वो चीज कहीं से भी नकली नहीं लगती. है।. आज इंग्लैंड में जॉर्ज बटलर भी कह रहा है. कि ही कम्स फ्रॉम अ गांव विलेज में जहां. पर स्टेडियम तक नहीं है।. तो अपने समाज की अगर पहचान बनानी है तो. संकोच करने की जगह पर अपने गांव से समाज. से एक दो लड़के निकालो। जी. जो विश्व पटल पर तुम्हारा नाम रोशन करें. और फिर देखो दुनिया तुम्हारे साथ ढल जाएगी.
तो वही शायद होने भी वाला है. और इसीलिए मैं कहता हूं कि बिहार का भी यह. सौभाग्य है कि उसे वैभव सूर्यवंशी जैसा एक. ब्रांड मिला. अब्सोलुटली इसमें कोई कहीं से भी डाउट. नहीं है क्योंकि बिहार को लोगों ने और. ज्यादा जानना शुरू किया तभी से है कि ये. कहां से आ गया 15 साल. वरना खिलवाड़ में था. हां ही ही हंस दिए अरे गंदा सिनेमा आता है. नेता लोग ऐसे होते हैं वहां के अब टैलेंट. से बिहार पहचाना गया दुनिया में और हर जगह. पर हर जगह. लोग वैभव देखने पागल आ रहे हैं। हमारे साथ. आदमी टीवी खोलता है। बैटिंग देखता है। वो. आउट हो गया। चलो छोड़ो।.
अरे मेरे ख्याल से सचिन सर के बाद सचिन. तेंदुलकर के बाद ये पहली बार ऐसा हुआ है।. सचिन धोनी के बाद हमको लगता है सचिन धोनी. जी के बाद के आपको फिर देखने का मन नहीं. करता। आपको लगता है हो गया यार। एंड नॉट. टू ऑफेंड एनीवन। पर मन में कहीं एक ऐसी. चीज जुड़ चुकी है ना उनसे कि आपको लगता है. कि यार इस बार तो कुछ और जब भी वो आउट. होता है। मेरा खुद जो वहां पे घर पे हमारे. जो हेल्प है वो खाना ववाना नहीं बनाते. हैं। वो कहते हैं भैया आई नहीं खिनाई बने।. जब आई एम अमर मॉन खराब भगवंशी आउट भगले. हां हम बोले यार खाना तो खिला दो. उसके सामने सब ऑर्डिनरी लगने लगे हमको. जब भले ही एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी होंगे सारे.
सब एक्स्ट्राऑर्डिनरी है लेकिन जब वो. खेलता है बाद में देखते हैं हम कहते हैं. नहीं यार तुम अच्छा खेलते हो गुरु मना. नहीं कर रहे हैं पर यार तुम वैभव. सूर्यवंशी नहीं हो पर मुझे लगता है कि. मेरा ऐसा मानना है कि असली पहचान जो है ना. वो जब मुझे टेस्ट मैचेस बहुत अच्छे लगते. हैं। तो जब टेस्ट मैच होगा तब मैं देखना. चाहूंगा और ये चीज आई होप कि वो दुनिया को. बता सके कि टैलेंट जो है वो कहीं भी छिपता. नहीं है। चाहे टेस्ट हो वनडे हो कोई भी. फॉर्मेट हो। उसका पहला सीजन इंग्लैंड वाली. सीरीज फ्लॉप गई थी तो हमसे बहुत लोग हमारी. टीम में कहे कि भैया आप लोग थोड़ा ओवरेट.
कर दिए थे।. तो हमने एक लाइन कही थी अपनी टीम में कही. थी हमने। हमने कहा देखो गुरु दुनिया में. दो तरह के लोग होते हैं। एक जो प्रेशर में. बिखर जाते हैं दूसरे जो निखर जाते हैं।. उस लौंडे की तुम यात्रा देखोगे वो हर जगह. नहीं चला है। लेकिन जहां इट मैटर्स मोस्ट. वहां उसने डंडा किया है। अंडर-19 वर्ल्ड. कप में सब सवाल उठा रहे थे। इंग्लिश. गेंदबाज थे। जिंबाब्वे मैच था 170 प्लस टू. का फाइनल में। पूरा वर्ल्ड कप जिसने देखा. उसने देखा है कि औकात का डिफरेंस था।. इंडियन 10 प्लेयर और इंग्लैंड 11 यानी 11. और 10 21 खिलाड़ी वर्सेस एक खिलाड़ी। उतना.
ही अंतर था इंडिया के वर्ल्ड कप जीतने में. एक प्लेयर का. एक प्लेयर का. अभी श्रीलंका ये वाली सीरीज थी. जी. उसमें सब मजाक उड़ा रहे थे वो सुपर ओवर. जीता नहीं पाया था फाइनल में मार के उसने. भूसा भर दिया था जो कहते हैं ना कि उसने. बताया कि औकात का अंतर होता है जो गैंग्स. ऑफ वासेपुर में डायलॉग था कि इतना बड़ा हो. जाए लेकिन नहीं होता [हंसी] उसने बताया वो. सेम सेम कहानी आईपीएल में गुजरात आखरी. आखरी के तीन मैच देखिए आप. जहां प्ले ऑफ आया था उसने बताया. [गला साफ़ करने की आवाज़].
बड़े मैटों पर बड़े मैटर पर सबसे बड़ा. प्लेयर हुआ है। और मैं हमेशा कहता हूं. खिलाड़ी बड़ा वही आदमी बड़ा वही कि जब. साला सारा प्रेशर तुम पर था तब तुम कैसे. निखर कर आए।. सही बात है।. तो हमको इसलिए लगता है कि जो किसी भी. दुनिया में जाएगा जो लोग जिद्दी होते हैं. कॉम्प्रोमाइज नहीं करते कि साला नंबर दो. नहीं रहना हमको। आप सोचो संजू सैमसन साथ. हो गया आईपीएल में खा गया।. अभी अभिषेक शर्मा हमको ऑर्डिनरी लग रहा. था।. हां [हंसी] वो जिंबाब्वे वाली सीरीज में।. तो वो जिसके साथ खेलता है उसको यशस्वी.
जैसवाल जैसा लड़का गायब इस साल में कोई. देखा नहीं उसको तो मुझे वही सचिन जी का. एरा याद आता है जब हम लोग देखते थे कि. मतलब सचिन आए तो हमारी नानी. कई बार झंडा लेके बाहर निकल जाती थी ऐ. सचिन आई विल ले ऐ सचिन आई एम नानी की भले. मतलब क्या हुआ तुमको अरे सचिन आ के मारेगा. ना तो उसके बाद फिर एक जमाना ऐसा आया जहां. पे आप पी विल लुक फॉरवर्ड टू इट के अरे. यार ये क्या करेगा यार हमने तो वैभव से. फोन पे खाली एक बात कहा था हां हमने कहा. कि गुरु तुम लड़की वड़की मत पटाना यार।. [हंसी].
अभी तो बहुत. थोड़ा बड़ा हो जाओ तुम। अभी पैसा कौड़ी. आएगा तो लड़की नहीं पटाओगे अभी।. गर्लफ्रेंड गर्लफ्रेंड मत बनाना। थोड़ा. दिन खेलो वो लो। अरे नहीं भैया हमको खाली. खेलने में मजा आता है।. हां अभी वैसे भी तो उम्र और मेरे ख्याल से. पिताजी का बहुत बड़ा योगदान है। और ऐसे. पिताजी की भी तारीफ है। वो कल्चर दिया हुआ. है। आप भी आज भी देखिए ना पैर छू लेता है. वो।. पैर छू लेता है।. ये अपने यूपी बिहार में दिखेगा। ये दुनिया. में कहीं नहीं दिखेगा। कहीं नहीं दिखता और. जैसे ही कोई भी एक साल भी बड़ा होता है तो. सीधा आदमी वो संस्कार वैसे मिले हैं अभी. शायद वैसा. तो मुझे लगता है कि ये यूपी बिहार को. चाहिए था इसलिए आई एम वेरी प्राउड ऑन वैभव.
सूर्यवंशी मुझे लगता है अगर ऐसे चार. ब्रांड एंबेसडर और आ जाए तो वो जो संकोच. करते थे हमारी आपकी पीढ़ी. वो संकोच खत्म हो जाएगा. ये मेरा एनालिसिस है।. मैंने कभी नहीं किया सर संकोच बात हो रही. है तो मैं आपको बताऊं जब मैं दिल्ली में. भी था यहां हिंदू कॉलेज में तो उस उस. जमाने में अब जमाना कह रहा हूं तो ये नहीं. कि मैं सन 47 की पैदाइश हूं कुछ साल पहले. तो बड़ी ही एक एक अलग निगाह से दिखा. बिहारी हैरी कहते थे बिहारी नहीं कहते थे. हैरी हैरी ओए तू भी मतलब ओए आ गया हैरी तो.
मुझे बड़ी तकलीफ होती थी और धीरे-धीरे. मैंने भी अपने आप को ग्रूम किया तो फिर. मुझे लोगों ने कहना शुरू किया कि ओए तू. बिहारी नहीं दिखता यार. मैंने कहा व्हाट मतलब एक कहना क्या चाह. रहे हैं आप बिहारी नहीं दिखता तो नहीं. बिहारी तो दिखते हैं ना एक तरीके से वो. तेलवेल लगा होगा फिर ऐसा वैसा कुछ होगा. मैंने मैंने कहा नहीं गुरु ऐसा नहीं है।. जा के देखो बिहार में यार एक से एक हैंडसम. लोग हैं। आपको पता नहीं है। तो तब से लेकर. जो यात्रा बॉम्बे तक की और अभी तक की. यात्रा रही है तो उसमें ऐसी चीजें बहुत. देखी हैं मैंने तभी मैं लोगों को कहता हूं.
कि बिहार को कान से मत देखो। बिहार आ के. देखो तब तुम्हें पता चलेगा बिहार क्या है? कैसा रंग है? कैसा रस है? कैसा स्वाद है।. आपके व्यक्तित्व में नानी का भी हाथ है।. नानी का बहुत बड़ा हाथ है क्योंकि हमारी. नानी हमारे पैदा होने के बाद हमारे साथ ही. रह गई।. लेकिन नानी का जिक्र कम रहा। जिक्र. क्योंकि कभी किसी ने बात की नहीं। लेकिन. आप आपसी जितने भी लोग हुए हैं उसको पता है. कि नानी ने मुझे पालपस के बड़ा किया। मां. के साथ. हमको थोड़ा समझाओ ये जैसे हम भी नानी के. बड़े क्लोज रहे हैं।. जी जी. नानी हमारी अभी भी जिंदा है सौभाग्य से।.
नानी लोग का क्या योगदान होता है? क्योंकि. यूपी बिहार में नानी बहुत खास होती है।. बाकी राज्यों का हमको पता नहीं लेकिन यहां. तो हमने नानी से प्रेम बड़ा देखा है कि. गर्मी छुट्टियों में नानी के पास जाना।. नानी ही नानी पाल के बड़ा करते हैं। नानी. की क्या भूमिका होती है यूपी बिहार में? दादा जी मैंने देखा नहीं। दादी मैंने देखी. नहीं। नाना जी मैंने देखा नहीं। नाना जी. को हमारी माताजी ने भी उतने ध्यान से नहीं. देखा होगा क्योंकि बहुत छोटे में ही वह. चले गए थे। नानी मैंने देखी, नानी मैंने. समझा, नानी को मैंने जिया क्योंकि नानी जब.
हम पैदा हुए तो पापा ने नानी से कहा कि आप. थोड़े दिन के लिए आ जाइए क्योंकि अकेले. संभालना मुश्किल हो जाएगा क्रांति की. मम्मी के लिए। तो नानी बोली ठीक है मैं आ. जाती हूं। गांव से उठ के आई उस जमाने के. बसव में जो भी जैसा भी रहा होगा। एक दो. महीने बीते तो फिर पिताजी ने कहा कि अब आप. कहीं नहीं जाएंगे। अब आपको हम कह रहे हैं. कि आप यहीं रहिएगा। हम लोग के साथ रहिएगा।. आप हमारी मां है, सास नहीं है। आपको ये घर. संभालना पड़ेगा और तब से नानी फिर हमारे. साथ रह गई।. हम. नानी का योगदान ये है कि मैं इतनी अच्छी.
मैथली बोल पाता हूं और अपने संस्कारों से. अपने धरती से इतना जुड़ा हुआ हूं। उसमें. नानी और मां का हाथ है तो है ही है लेकिन. जब भी मां से कुछ होता था बचपन में तो हो. जाता है कुछ ना कुछ नानी आगे बचाती थी तो. कई बार मां से जब पिटाई होती थी तो नानी. हमेशा एक प्रोटेक्शन की तरह आती थी क्या. है क्यों मारोगे तुम इसको अरे हमारा बच्चा. है तो मां भी थोड़ा सा नानी से डरती थी. उसके बाद जब जब हॉस्टल गया तो नानी का. बहुत मन दुखी हो जाता था अरे मत भेजो.
बच्चा है कर लेगा सीख लेगा लेकिन अब भाई. पिताजी माताजी तो हमेशा कहते थे नहीं नहीं. बाहर जाएगा पढ़ाई करेगा. तब का बिहार तो उनको लगता था कि नहीं यहां. से बाहर निकलना जरूरी है। तो नानी का. लेकिन कभी मन नहीं करता था। और यकीन मानिए. नानी ने कहा भी कि इस घर से अब हम तभी. जाएंगे जब आखिरी सांस लेंगे। और यही वो. हाथ है. जहां पे नानी ने अपना दम तोड़ा था। नानी. को मैंने गंगाजल पिलाया था अपने घर में और. तुलसी खिलाया था। तुलसी जी का पत्ता। तो. नानी की बहुत बड़ी कृपा रही हमारे ऊपर कि.
वो सौभाग्य हमें दिया कि नानी के साथ हम. इतनी नानी की सेवा कर सके। और नानी ने. आपको कर्मा पिक्चर दो बार दिखाया था।. अरे ये भी आपको पता है।. बुआ हां नानी के शब्द के लिए. अरे नानी कैमरा इसलिए शब्द आ गया।. हां नानी के साथ बहुत फिल्में देखी है. मैंने। नानी पूर्णिया में थे उस टाइम पे।. हां. तो तब पता नहीं फिल्म लगी थी तो नानी कहा. बुआ चलने फिल्म देख ले। अब बच्चे में हम. बोले हां चलो चलो तो दो बार नानी ने कर्मा. दिखाई थी हफ्ते में। एक ही हफ्ते में दो. बार।. हालांकि पिक्चर भी तगड़ी थी।. पिक्चर भी तगड़ी थी।. डॉक्टर दिलीप कुमार तुम्हें बहुत महंगी.
पड़ेगी। मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा तू गाना. गाना भी क्या बढ़िया था. दिल दिया है जहां भी देंगे आए वतन तेरे. लिए. मेरा कर्मा तू मेरा धर्मा तू टिंग टिंग ट. म्यूजिक बहुत बहुत जबरदस्त. बहुत जबरदस्त था और जो पूरा ग्रंचर था उस. फिल्म का. हम. जब चाहे दिलीप साहब हो तो पूरी की पूरी. फिल्म ही नूतन जी ने कितना मतलब. क्या कमाल की एक्टिंग की. रोते थे देख के फिल्म में कि अरे यार मार. दिया अरे यार ये आके जब सबको मार रहा है. तो कैसे होगा फिर दिलीप साहब आते हैं तो. कमाल की फिल्म थी वो अच्छा अनुपम खेर तब.
भी वैसे लगते थे। अनुपम खेर अब भी वैसे. लगते थे। एजलेस है वो।. [हंसी][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. मतलब अनुपम खेर जी भी मतलब कमाल है।. कमाल है। बहुत कमाल है। और जैसे उन्होंने. अपने आप को सारांश में जब उन्होंने प्रूफ. कर दिया कि भाई कलाकार में दम होना चाहिए।. चाहे उम्र को. उससे भी कमाल मुझे लगता है अनुपम जी की. माता जी को देख के।. हां वो जो सही बात बिल्कुल सही बात।. जीवटता देखिए आप।. मतलब वैसे अनुपम जी मुझे कई बार बुजुर्ग. लगते हैं। लेकिन जब माता जी के पास जाते. हैं तो मुझे बच्चे लगने लगते हैं। और मेरी. मम्मी कई बार कहती हैं.
जी। कि यार इनको देखो मां बेटों को मतलब. क्या खूबसूरत उन्होंने रखा है और क्या. कमाल एक कलाकार अनुपम खेर साहब किसी भी. मां के सामने बेटा तो बच्चा ही लगता है. मतलब मैं भी मां के लिए बुआ हूं भले ही. हमारे बड़े भाई साहब वो भी बुआ है मां के. लिए हमारी नतनी भी है एक नाती भी है लेकिन. वो तो बुआ है ही छोटे हैं लेकिन हम लोग भी. बुआ हैं और यकीन मानिए मां अपने बच्चे से. हमेशा एक ही चीज पूछती है खाना खाए हो ठीक. हो. और कोई नहीं पूछता संसार में.
ठीक हो मेरा ऐसा मानना है. पेट में अजीब सा लग रहा था. हां. कुछ तो हो रहा था. काम चलता रहेगा. आवाज से पता चल जाता है. मैं पूरे दिन में मां को मैं तीन बार फोन. करता हूं एक बार सुबह उठकर करता हूं एक. बार दोपहर में करता हूं एक बार रात में. करता हूं आवाज से मां को समझ में आ जाता. है कि आज इसका क्या मूड है पूरे संसार में. किसी को समझ में नहीं आता हमारे पिताजी ने. बड़ी अच्छी बात कही कि एक बेटा हम तो नहीं. रहेंगे जब बीमार हो गए थे वो पर एक बात. ध्यान रखिएगा आप मैंने पूछा पूछा क्या? सब.
देव देवियां एक और ऐ मां मेरी तू एक और तो. मां से बढ़के कुछ नहीं है। और कभी भी अपनी. मां से एक जरा भी ऊंची आवाज में बात मत. करिएगा। मां का स्वाभिमान कभी हिलाना नहीं. है। मैंने कहा. हमसे किसी ने बहुत सुंदर बात कही थी कि. औलाद के तौर पर भी इज्जत तभी तक है जब तक. मां जिंदा है। मां मर जाए तो बाप पड़ोसी. बन जाता है।. वाह वाह वाह क्या बात है। क्या बात है।.
और आप देख लेना जिसकी मां नहीं होगी उसके. बाप ने भी अपने बच्चों को दरकिनार कर दिया. होगा।. और बाप ना हो मां पाल गई होगी।. मैंने देखा है. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. पिता चले गए लेकिन मां ने मोती की माला. में धागा होती है मां सब कुछ जोड़ के रखती. है वो धागा टूट जाता है मोती की माला बिखर. जाती है भले ये सब मोती क्यों ना हो फिर. कभी जुड़ नहीं पाते वही वो धागा है मां और.
आसपास भी मैंने बहुत सारे ऐसे लोग देखे. हैं मां के रहने तक या मां अगर ना भी रहे. प्रत्यक्ष रूप से लेकिन मां की सिखाई. बातों को अगर इंसान लेके चलता है जीवन सरल. रहता है।. हमने अपने जीवन में सिगरेट शराब नहीं पी।. बीटेक किया जहां सब पीते खाते हैं।. जी. मीडिया इंडस्ट्री में आए सब पीते खाते. हैं। आज फिल्म इंडस्ट्री के सारे. इंटरव्यूज पार्टी ले रहे हैं। इसमें सिर्फ. मां की भूमिका है।. वो हमसे प्रॉमिस ले ली। आज तक निभ रहा है।.
क्या बात है। धन्य है आप और धन्य है माता. जी।. और हमको लगता है कि अगर मां से प्यार है. तो वो रहता है। आपको ताकत से रोक नहीं. सकता आदमी। हम. सिर्फ उन्होंने इतना कहा था कि तुम कुछ. अच्छा करोगे नाम तुम्हारे पिता का होगा।. जिस दिन कुछ खराब करोगे ना सब हमारे पास. आएंगे। तुम सिखाई थी ना तुम्हारा बेटा है।. तो हम देखे मत पीना खाना।. और बहुत मौके आए जहां पर लोगों ने कहा एक. बार दो बार.
लेकिन वो अंदर से आया कि नहीं मम्मी मना. किए हैं।. तो हमको लगता है कि दुनिया में आप किसी से. वफादार रहे ना रहे। किसी से वफादार होना. वो आपका अपना एक स्वभाव होना चाहिए लेकिन. अपनी मां से प्यार करना चाहिए। बहुत. ज्यादा जीवन का आधार होती है मां। और आपने. कहा ना कि किसी और का नाम होता है तो उस. पर एक हमारे पिताजी कहा करते थे कि किसी. का नाम होता है किसी का काम होता है। किसी. का नाम होता है किसी का काम होता है। जले. तेल और बाती दिए का नाम होता है। सही बात.
है। तो सबसे कमाल की बात ये है कि हां कि. जले तेल बाती जलती है। लेकिन नाम दिए का. होता है कि दिया जल रहा है। कोई ये नहीं. कहता कि बाती जल रही है। तेल जल रहा है।. पेट में तो मां ही रखी थी ना 9 महीना।. पाली पोजीसी बड़ा की. किसकी औलाद है ये? फलाने की।. फलाने की औलाद है। फलाने का भी पिता का भी. संघर्ष बहुत बहुत कह सकते हैं कि झकझोरने. वाला होता है। कोई भी पिता मर्द घर का जो. होता है उसके पास हम लोग उस जमाने से आते.
हैं जहां पे रोने की जो है वो कभी भी. अनुमति नहीं होती थी। किसी भी इंसान को या. मर्द को किरा हो। पर मर्द को दर्द होता. है। [गला साफ़ करने की आवाज़] मर्द रोता. है। हो सकता है कि मैं आपसे बात करते-करते. दो चार ऐसी बातें निकली। मेरे आंखों से. आंसू आए ना. पिछली पीढ़ी में मर्द नहीं रोते थे या. सामने नहीं रोते थे इस पीढ़ी में रोते हैं. या सामने नहीं रोते सामने नहीं रोते थे. पिछली पीढ़ी में. पिछली पीढ़ी में सामने नहीं रोते होंगे. मैंने अपने पिता को कभी नहीं देखा लेकिन. मैंने उनको उदास देखा है और वो उदासी शायद. मां से भी नहीं कह पाते होंगे. पिछली पीढ़ी में बाप बेटे गले भी नहीं.
लगते थे कम लगते थे. साथ बैठते कम थे संवाद कम था. बिल्कुल मैं जब भी पापा से हॉस्टल से जाकर. गले मिलने की कोशिश करता था तो एक बॉडी. लैंग्वेज होती है ना कि आप तो शायद कहीं. वो एक संवाद नहीं था शारीरिक रूप से जो एक. आप फिर भी छोटे बेटे छोटे बेटों छोटे. बेटों से पिता का फिर भी रिश्ता बेहतर. होता है।. जी. बड़े बेटों से नहीं होता।. नहीं होता।. बड़े बेटों का मां से ज्यादा होता है।. मां से ज्यादा होता है। हां. घर में भी देख लीजिएगा अपने। सही बात है।. बेटियों का पिता से होता है। छोटे बेटों.
का पिता से होता है। बड़े बेटे का रिश्ता. मां से होता है। बड़े बेटे और पिता का. रिश्ता कम से कम मिलेनियल जिस दौर में हम. आते हैं वहां पर कंडक्टर और सवारी वाला. होता है।. दे ट्रेवल टुगेदर. बट दे डोंट. दे डोंट एक्सप्रेस सो मच. अब्सोलुटली. दोनों को एक दूसरे की जिम्मेदारी बिना कहे. पता होती है हम हम लेकिन कहता नहीं. एक्सप्रेस नहीं करता कोई क्योंकि वो अनसिट. सी चीज है जो बाप को भी पता होती है और. बेटे को भी पता होती है।. दोनों नहीं कह रहे. दोनों नहीं कह रहे. और दोनों की बातचीत मम्मी के थ्रू होती.
है।. मम्मी के थ्रू अरे सुनो उसको कह देना. मम्मी पापा से लेना।. कितना बार बोलेंगे उसको। अरे सुन लीजिए ना. थोड़ा सा सुन लीजिए ना। ठीक है ठीक है। तो. मां बीच में जो होती थी वो कैटलिस्ट का. काम करती थी। क्या बात कही आपने सीधा बचपन. में ले चले गए आप [हंसी] दिल्ली आप पहुंचे. जी कुएं के मेंढक को समंदर के पास छोड़. दिया गया. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. हां समंदर का पहला दिन कैसा था दिल्ली. पहला दिन. बड़ा ही रैगिंग से भरा हुआ था और रैगिंग. को मैं अच्छी रैगिंग मानता हूं. कैसी रैगिंग हुई थी.
मैं बताता हूं आपको तो हमारी माताजी ने. कहा जब और हमारे दिल्ली में जाने में. हमारी माताजी का बहुत योगदान है। हमारे. पिताजी जो हैं वह बहुत ही इसके खिलाफ थे. कि बच्चे को अपने साथ रख के पढ़ाएंगे। पर. मां जिद्दी थी। मां ने एक दो दिन तक खाना. नहीं खाया था कि इसको दिल्ली भेज के रहना. है। नंबर अच्छे आए थे। हिंदू कॉलेज में. दाखिला हुआ। मेरे मौसा जी मेरे सुपर. सीनियर हैं सेम कॉलेज के। तो मैंने उनसे. पूछा क्योंकि लोकल गार्डियन वही थे कि. मौसा जी अब तो रैगिंग होगा। अब क्या. करेंगे? तो बोले बुआ.
रैगिंग होगा करवा लीजिएगा।. टच करेगा कोई ना फिर आके हमसे बात कर. लीजिएगा टच नहीं करने दीजिएगा रैगिंग करवा. लीजिए आपके लिए अच्छा होगा तब मेरी समझ. में नहीं आया कैसे अच्छा हुआ यार मानसिक. रूप से बड़े ही प्रताड़ना मिलती है आपको. कि आपको बताया जाता है कि और रैगिंग के. बड़े अजीब अजीब किस्से होते थे. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. रूम में कबर्ड होता था तो कबर्ड के ऊपर हम. लोग ऊपर हम लोगों को बिठा दिया जाता था. सीनियर सारे कहते थे सर ऊपर जाके बैठो हम. लोग बैठ जाया करते थे अब क्या दिख रहा है. वहां से तुमको तो जैसे ही आपने कहा कि आप.
ही लोग दिख रहे हैं तो चार गाली अब बताओ. क्या दिख रहा है? तो कन्याकुमारी दिख रहा. है। अभी ठीक है। तो इस तरह की बहुत सारी. चीजें होती थी। पर पहला दिन यह था कि मां. ने मुझे काले रंग का ट्राउज़ दिया था। पैंट. जिसमें कम से कम सात आठ प्लीट्स हैं जो. वापस आज फिर से फैशन में आ चुका है। तब. नहीं था। कारगो कारगो नहीं है। काले रंग. का पट ट्राउज़ जिसमें छह प्लीट्स छह। छह. इसलिए क्योंकि वो उस टाइम पे छह ही निकलता. था मुंह से। छह भी नहीं निकलता था। चार गए. हैं तो छह निकलेगा। छह प्लेट्स और लाल रंग.
का शर्ट था। उस शर्ट में जो है वो आप. जितनी चेक आप सोच सकते हैं गोविंदा एकदम. और मां होगा मेरा बेटा जो है वो कितना. सुंदर लग रहा है यार हमको भी लगता था. कितने बेटा राजा बेटा राजा बेटा तो मैंने. हिंदू कॉलेज में अंदर कदम रखा कदम रखते के. साथ ही हमारे कोई सीनियर थे अब कोई होंगे. उनकी नजर हम पे पड़ गई. बोले ऐ इधर सुनो अब मैं डरा हुआ सहमा हुआ. एक बिहार का लड़का जिसने कभी इतना कुछ. देखा नहीं है बाहर पढ़ा हूं मैं हरियाणा.
में भी पढ़ा रहा हूं। विकास विकास. विद्यालय में भी था लेकिन कम कम समय के. लिए था। अब आप सीधा दिल्ली आ गए। दिल्ली. के बारे में आपने सिर्फ सुना है। बचपन में. शायद एक बार आप माता-पिता के साथ घूमने आए. होंगे। मैंने कहा यस सर अंग्रेजी ठीक से. बोलनी नहीं आती थी। क्योंकि अंग्रेजी का. माहौल नहीं था घर में। उस टाइम पे. अंग्रेजी आप तभी सीख पाते हैं।. सर प्रॉब्लम फॉर यूपी बिहार।. यूपी बिहार। हां। तो मैंने कहा दो चार. चीजें आती थी। सर माय नेम इज क्रांति. प्रकाश झा। तो वि बैच मैंने कहा सर आई हैव. जस्ट जॉइ अच्छा फ्रेशर फच्चा कहते थे उस.
टाइम पे तो जैसे ही आप गए तो जय सिंह लॉन. होता था वहां से आप निकले वहां से निकलने. का आर यू अ हॉस्टलर तो जैसे ही मैंने बोला. हां सर हॉस्टल तो मिला है फिर जो हंसते थे. वो लगता था भाई साहब बकरा मिल गया है आज. तो रात में इसको काटा जाएगा तो पहले दिन. गया तो फिर हमारे कुछ चीजें हैं जो मैं. डिलीट करूंगा क्योंकि वो मैं कह नहीं सकता. तो जो हमारे सीनियर थे उनकी एक गर्लफ्रेंड. थी तो हमारे सीनियर ने कहा कि यह बिहार से. आया है। इसका रैगिंग करो जरा। अपनी भाषा.
में उन्होंने कहा गर्लफ्रेंड से. गर्लफ्रेंड से कहा उन्होंने फिर मुझे वापस. आए मेरे पास और मुझे वहां कोने में खड़ा. किया हुआ था। बोले सुनो मैंने कहा सर ये. पेन है। ठीक है ये पेन लो। पेन लेके तुमको. मैडम के पास जाना है और कुछ-कुछ कहना है।. मैं कह नहीं सकता। मैंने कहा क्या बात कर. रहे हैं सर? यह हमको कहना है और मैं तो ऐसे घबरा गया. क्योंकि आज तक कभी उससे पहले महिला से. सीधी बात नहीं होती थी और आप कुछ ऐसा कहने.
को कह रहे हैं कि वो पहन लेगी हमको. देगी वो वहीं पे हमारा वहीं पे खात्मा हो. जाएगा हमारा जबकि दोनों की मिलीभगत थी मैं. परेशान मैं डरते हुए गया मैंने कहा मैं. एक्सक्यूज मी मैडम अब उस टाइम पे तो स्वैग. तो कुछ था नहीं ना एक्सक्यूज मी मैडम. व्हाट उनका तो स्वैग था दो चार एफ वाले जो. शब्द होते हैं अच्छा मैंने एफ वाले शब्द. सुने नहीं थे। उसके पहले जब तक मैं बिहार. में था मुझे पता भी नहीं था होता क्या है. ये। जब वहां गया तब मुझे मालूम चला पहली. बार कि एफ वाले कुछ शब्द होते हैं जिसका.
मतलब ये ये होता है। मैंने कहा अच्छा उस. बात पे बहुत उन्होंने हंसी मजाक बनाया था. हमारा। उसके बाद उन्होंने पूछा हां बोलो. चल मी। मैंने कहा एक्चुअली मैडम अब हम ही. निकलता है। वी बिलीव इन हम। अरे मैं वो हम. जो है ना वो सर पीछे जो खड़े हैं ना हम. कौन-कौन? हां वही वही होता है हम कौन-कौन? मैं अकेला। अरे हमारे यहां हम कहते हैं।. बिहार यूपी के लोग ऐसे हैं कि सबसे पहले. मुझे लगता है कि वो अहंकार छोड़ देते हैं।. मैं अहंकार है। हम लोग पहले से ही हम बन. जाते हैं। सबको लेकर साथ चलने वाले। तो.
मैंने बोला अरे वो जो सर है ना पीछे वो सर. हमको बोले हैं कि आपको ये जो कुछ-कुछ आपको. कहना है। फिर मैंने उनको कहा। उन्होंने. पूछा क्या कहना है? व्हाट द एफ? मैंने कहा. ये बोला है बोलने को। उसके बाद जो. उन्होंने मेरा कॉलर पकड़ा उन्होंने फिर. बोला वो जो भी दो चार गालियां निकाली और. उसके बाद एक चमेटा खींच के मारने वाली थी. मुझे तब तक पीछे से भागे-भागे सारे सीनियर. आए उनको समझाया कि नहीं नहीं अरे ये हमने. इसे वो भी हंसने लगे फिर बड़े अच्छे से तो.
पहले प्याज का लेयर पहली बार तब खोला कि. अच्छा ये सब भी होता है इस दुनिया में. गुरु क्या बात है फिर हॉस्टल पहुंचे. हॉस्टल में कोशिश ये की कि मेस में सबसे. बाद में जाएं सबसे एंड में जब सब खाना खा. के चले चले जाए तो जो हमारा कमरा था वो. 117 था जो हॉस्टल का अब तो पुराना हॉस्टल. नहीं था हिंदू कॉलेज का नया हॉस्टल बन. चुका है तो उसकी खिड़की एकदम पीछे की तरफ. खुलती थी जहां सुनसान इलाका होता था तो. शुरू में क्या हुआ कि जब मेस में गए खाने. के लिए तो आखिरी तीन-चार लोग थे हम लोग. किसी तरह से डरते डरते गए सीनियर लोग की.
नजर पड़ गई अच्छा साला हैं सबसे बाद में. खाना खाने आ रहे हो क्लैगिंग नहीं होगा. तुम्हारा सालों इसके उसके झोपड़ी के. खोपड़ी के जो भी वो कहते हैं तो ये सब. उन्होंने कहा और बोला कि अच्छा आप चलो. कुत्ता बनो।. उन्होंने कहा कुत्ता बनो मतलब और गाली साथ. में अब उस जमाने में बिहार में कोई गाली. दे दे. हां. तो बिहार यूपी में. आज से 10 साल पहले गाली बहुत सेंसिटिव थी।. तो फिर बहुत चीजें हो जाती थी। एक गाली से.
पर मौसा जी ने कहा था बुआ करने दीजिएगा रह. कोई बात नहीं है। हमने भी कहा सुन लेते. हैं सह लेते हैं। बिहार होता ना साला पटना. होता ना तो इसको बताए होते हम। भले ही. कितना सीनियर क्यों ना हो तो गाली सुने. कुत्ता बोलो मैंने कहा कुत्ता कैसे बनेंगे. तो फिर उन्होंने कुत्ता बनवाया भव करवाया. और भव करवा के फिर जो ग्राउंड फ्लोर पे नस. था अपने कमरे में लगे ऊपर फर्स्ट फ्लोर पे. चले गए भव करते भव अपना नाम भी बोलते जाना.
तो अंदर से बहुत क्योंकि भाई बिहार का एक. लड़का ऐसा है. हमारे यहां तो प्रतिष्ठा ही सब कुछ है ना. प्रतिष्ठा ही सब कुछ है और अचानक से आपको. हम में कहते हैं ना कि सब नंगे हैं अचानक. से सारे नंगे हो के नंगे कहने का मतलब. समझ गए. समझ गए आप मन से नंगे हो गए क्योंकि ये. कैसे हो गया हमारे साथ थे आज तक मां-बाप. ने पिताजी साहब थे माताजी मेम साहिब थी. इतने नाजों से पाला है हमने एक बार हाथी. मंगवाई थी बचपन में आपको एक ऐसी एक अलग. वाक्या सुनाता हूं एक शादी हमने देख ली.
हाजीपुर में होते हुए बच मेरे ख्याल से 7. आठ साल या छ साल के रहे होंगे वो शादी. पहले के ज़माने में हाथी वाथियों से जाते. थे लोग हमने जिद कर दिया हमने और भैया ने. कि हाथी पे हमको भी बैठना है हमारे पिताजी. जी ने हाथी मंगवाई थी। हम हाथी पर बैठे. थे। हमें शादी करनी थी बचपन में। कहा था. कि हमको भी शादी करना है। मां ने. तैयार-व्यार किया। फिर हाथी पे बैठ के आधे. घंटे गए। नींद आ गई वापस आ गए। तो हमारे. पिता ऐसे थे। तो हमें लगता था कि यार हम. तो राजकुमार जैसे हैं। अरे कैसे कोई कह. दिया ऐसा पर लेकिन वही है। मौसा जी ने कहा. था।. मानसिक तौर पर आपका चीर हर हो गया था।.
हां एकदम अच्छे से। टच करे तो ही बताइएगा. नहीं तो करवाते रहिएगा। मैंने कहा ठीक है. यार। गए फिर पूछा क्या कैसे वगैरह वगैरह. बहुत सारी बातें हुई। पर धीरे-धीरे करके. मुझे लगता है कि मजा आने लगा इस बात का कि. मुझे अपने अंदर कुछ परिवर्तन दिखाई देने. लगे। थोड़ा सा कॉन्फिडेंस आने लगा। थोड़ा. सा लगा कि बात कैसे करनी है। कुएं का. मेंढक जो है अब समंदर में तैरना सीख रहा. था। कैसे तैरना है यहां पे और मैं जितने. भी हमारे ड्रैगिंग करने वाले लोग थे उस. टाइम पे आज मेरे सबसे अच्छे भैया हैं।.
सीनियर हैं और हर महीने में एक बार पूछते. हैं जरूर कि भाई ठीक हो ना तुम। इतना ही. काफी होता है।. तो ये इम्तियाज़ अली आपके सीनियर थे? सुपर. सीनियर थे हम लोगों से। मेरे ख्याल से. काफी पहले इम्तियाज सर, आशीष विद्यार्थी. सर, विशाल भारद्वाज सर ये लोग सुपर सीनियर. थे हम लोगों के।. इनमें से कईयों के हमने इंटरव्यूज किए हैं. एकदम के वहां पे।. कई भैया लोग के इम्तियाज का इब्तदा देख कर. ही आपने वो क्लब ज्वाइन किया था? जी जी बिलकुल। और मैं इब्तदा जब वहां पे.
आया था तब पता नहीं था क्योंकि यूपीएससी. करने की चाह होती थी। [हंसी] हम. पिता को देखा है तो पिता को देखा तो भाई. पिता का सपना रक्तांचल में एक डायलॉग है. कि पिता के सपने बेटे को पूरे करने पड़ते. हैं यही नियम है तो मुझे भी लगा हां. सही बात है यही नियम है. यही नियम है बड़ा अच्छा डायलॉग लिखा है और. बोलते बोलते मेरी आंखों में आंसू आ गए थे. कई बार ऐसा कथा सच है सच है. यही नियम है. यही नियम है पिता के सपने तो पिता का वो. सपना मैं पूरा नहीं कर पाया लेकिन. यूपीएससी जो है वो नहीं कर पाया पर अंदर.
कहीं था एक फिल्मी थे हम लोग बहुत पहले से. ही [नाक से की जाने वाली आवाज़] मतलब. घूंघट की आड़ से दिलबर का दीदार अधूरा. रहता है मैं जो आमिर खान साहब. तो हम लोग ख्यालों वाले होते हैं ना हम. लोग इमेजिनेशन वाले होते हैं. चले जाते हैं. तो बचपन से इमेजिनेशन की परख गरीब आदमी के. पास क्या. इमेजिनेशन. तो बचपन सोचे गाना सुन के सोचे लड़ते हुए. देखे डिशुम डिशुम. चैन ली हाथ में चैन भी ली थी हाथ में वो. शिवा वाली फिल्म देख के. ऊपर से नानी आपके पिक्चर दिखा रही थी. नानी कर्मा सोचे तो किस तरह से तो फिल्मी.
तो हो ही चुके थे तो उसके बाद इब्तदा हमने. ये सब काम किया। साफ सफाई झाड़ू ये सब का. काम और फेस्टिवल्स में जाते थे। मुझे याद. है मैं आईटी कानपुर गया था। मैं बिट. पिलानी गया था सबके साथ क्योंकि मजा आता. था पर पढ़ाई करता था और कभी सोचा नहीं था. कि जिंदगी आपके सामने लाके खड़ा कर बिठा. देगी मुझे।. तो इम्तियाज़ अली का थिएटर ग्रुप इब्तदा. आपने ज्वाइन किया।. जी. कहीं मन में आया नहीं यार इम्तियाज. उस टाइम उसका नाम आवाज एक अलग ग्रुप था।. उसका नाम आवाज हो गया था।. अच्छा हम लोगों के हां हम लोगों के जाने. के बाद फिर से इब्तदा को रिवाइव किया गया.
था। तो हम लोगों ने अपना ही एक आवास ग्रुप. करके और स्ट्रीट प्ले बहुत करते थे। नवज. ज्योति एक फाउंडेशन होता था जो नशा मुक्ति. अभियान चलाते थे जो किरण बेदी जी थी तो. उनका एक फाउंडेशन होता था तो उसके लिए हम. बहुत सारे स्ट्रीट पेस्ट किया करते थे तो. एक बिहारी की एक और लेयर खुल रही थी. धीरेधी धीरे धीरे धीरेधी. तो कभी मन नहीं किया कि विशाल भारद्वाज के. पास जाए इम्तियाज अली के पास कि सर हम भी. तो आपके कॉलेज के हैं इम्तियाज सर जानते. हैं बहुत अच्छे से बहुत. साथ में अगर प्लान कर पाए तो अच्छा रहेगा.
मेरे ख्याल से वो मौका मिला नहीं वो भी. चाहते जरूर होंगे और बड़े संकोची स्वभाव. के हम है. तो हमको हमको लगता है कि यार अगर वो पक्का. अगर उनके पास कुछ होगा तो जरूर मुझे. कहेंगे और मैं कह भी चुका हूं पर ऐसा कुछ. बना नहीं होगा नहीं तो हिंदू की बॉन्डिंग. बहुत तगड़ी है क्योंकि ऐसा कहा भी जाता है. कि हिंदू वाइट्स आर डायनामाइट्स. हम तो इसलिए कह दे रहे हैं ना कि विशाल जी. के और इम्तियाज़ जी के कान में थोड़ा चला. जाए। अभी रेखा मैम का आया था एक गाना. कचौड़ी के लिए तो मैंने उनको मैसेज भी. किया था रेखा मैम को कि उनका रिप्लाई भी. आया था तो स्नेह तो सब करते हैं काम तो.
खैर वो वो समीकरण और वो टाइमिंग की बात है. कब कैसी टाइमिंग जमेगी. डिप्रेशन में गए थे आप यूपीएससी ना क्लियर. करने के बाद. यहां रहता तो चला जाता मेरे ख्याल से. क्योंकि मैं अकेला हो गया था उस टाइम पे. मेरे बहुत सारे दोस्त जो हैं जो मेरे एकदम. हार्ड कोर फ्रेंड थे वो सब बॉम्बे शिफ्ट. हो चुके थे क्योंकि उनको शायद एक क्लेरिटी. पहले से थी कि उन्हें क्या करना है। एक. राइटर हैं रितेश शाह जो हमारे सीनियर हैं. जिन्होंने पिंक लिखी है और बहुत सारी तम. फिल्में लिखी हैं बड़ी-बड़ी। फिर एक एक्टर. हैं राजेश कुमार जो रोशेष का किरदार करते. हैं वो तो सब लोग वहां चले गए थे और मैं.
यहां अकेला था और तब हॉस्टल में भी नहीं. था क्योंकि मैं मुखर्जी नगर में रहता था. तब अपने बड़े भाई साहब के साथ भाड़े पे घर. लेके. हम. तो जब नहीं हुआ तो लगा कि तो मेरे दोस्त. ने कहा कि भाई तुम यहां आ जाओ बॉम्बे।. हम. तुम अगर बॉम्बे नहीं आओगे तो तुम कुछ कर. लोगे। यह तो तय है क्योंकि तुम्हारा कोई. भैया है तुम्हारे लेकिन फिर भी जो हम. समझेंगे तो ब्रेक लेने के लिए आ जाओ दो. महीने के लिए आ जाओ या फिर चले जाना मैं 2. महीने के लिए गया और ब्रेक लेके अब तक. ब्रेक ही चल रहा है शायद एज अ सेम मैन. प्रपोज गॉड डिस्पोजस तो यूपीएससी में दिल.
टूटना ज्यादा परेशान करता है या रिश्ते. वाला कौन से रिश्ते वाला [हंसी]. इश्क अधूरा इश्क. अधूरा इश्क तो. कुछ मुकम्मल नहीं होते तो क्या हुआ कम से. कम घनघोर इश्क तो किया था. अरे या [हंसी]. ये आपने पढ़ा हुआ है। वाह कोशिश कभी. मुकम्मल नहीं होते। लेकिन इतना जरूर है कि. हमने इश्क किया था। कॉलेज में चर्चे होते. थे हमारे इश्क के। बॉम्बे गया तो वहां भी. इश्क किया था। लेकिन कुछ कहानियां अधूरी. रह जाती हैं। इश्क एक बार होता है, कई बार.
हो जाता है। मैंने एक चीज लिखी थी इसीलिए. जैसे अभी विक्रांत मासी की एक फिल्म आई. है।. जी।. सीरीज आई है। विक्रांत मासी की एक सीरीज. आई है।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] उस. मुसाफिर कैफे तो मुसाफिर कैफे को देखने के. बाद कई लोगों ने एनालिसिस किया कि लड़के. जो होते हैं. वह एक ही बारिश में टूट पाते हैं। उसके. बाद या तो वो गर्लफ्रेंड बनाते हैं या. बीवी बनाते हैं। सेकंड वाली गर्लफ्रेंड को. वो कभी वो कशिश नहीं मिलती जो पहली वाली.
को दे चुके होते हैं। और सेकंड वाली से वो. कितने भी अच्छे हो समझदार हो सकते हैं।. पर वो जो रूहानियत थी, वो जो पागलपन था, वो जो जुनून था वो सब कुछ वो पहली वाली. में निपटा चुके होते हैं। उसके बाद वो. समझदार बन जाते हैं। अच्छी लग गई तो उसको. बीवी बना लेते हैं। [हंसी]. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] ये. कईयों ने लिखा। अब आप कह रहे हो कि कई बार. आप पेश किया है। हमको लगा थोड़ा समझ लेते. हैं।. नहीं मतलब समझाने के लिए कुछ नहीं है। फिर. इश्क नहीं आसान। एक आंख का दरिया है डूब.
के जाना ये तो सबको पता है। लेकिन मोहब्बत. पहली, दूसरी या तीसरी नहीं होती। मोहब्बत. पहली, दूसरी या तीसरी नहीं होती। मोहब्बत. तो वह होती है जिसके बाद फिर कभी मोहब्बत. नहीं होती। बट ये कैसे तय होता है? कोई. छोड़ के चला गया। आप अकेले रहते हो। कई. साल बाद फिर जरूरत होती है। जरूरत मोहब्बत. में तब्दील कैसे हो सकती है? मोहब्बत जो. और फिर ये भी चीज है कि एक मैं आपको बताऊं. कि मैंने ये लिखा था कभी कि एक बार हमसे. यार ने पूछा कि प्यार इश्क और मोहब्बत में.
कितना फर्क है? प्यार इश्क मोहब्बत में. कितना फर्क है? हमने सोचा और हमने सोच कर. उन्हें कहा कि फर्क है लेकिन बहुत महीन सा. है। प्यार जो है ना वो किया जाता है।. इश्क हो जाता है और मोहब्बत निभाई जाती. है। तो वो मोहब्बत निभाने के क्रम में. बहुत सारे ऐसे दिल टूटते हैं। बहुत सारी. चीज़. जैसे हमने कहीं सुना था कि एक ख्वाहिश थी. सिर्फ तुम्हारे साथ जिंदगी जीने की। एक. ख्वाहिश थी सिर्फ तुम्हारे साथ जिंदगी.
जीने की।. वरना दिल तो कई बार साथ रहकर अपने आप. लोगों से लग जाते हैं। [हंसी]. तो फिर कैसे माने कि मोहब्बत वो थी या यह. थी? दिल तो लग गया यहां भी।. हां दिल तो है दिल। दिल का ऐतबार क्या. कीजिए? आ गया दिल किसी पे यार तो क्या. कीजिए? सही वाला प्यार कौन सा है? कैसे तय? मैं ढूंढ रहा हूं अभी तक। मुझे सही वाला. प्यार प्यार की परिभाषा ही मुझे अभी सही. प्यार क्या है? ये. या प्यार कुछ होता भी है या सिर्फ जरूरत. है। जैसे मैं कई बार और डीप जाता हूं जो.
प्यार को समझने में तो मुझे लगता है प्यार. कुछ है ही नहीं। मतलब मेरे जैसा इंसान जो. इश्क में टूट कर निखरा भी बिखरा भी. हम जैसा इंसान. हम जैसा इंसान हम सब जैसे इंसान. सब जैसा इंसान. जो इश्क में वो था ना कि तुमसे मिलकर. निखरे तुमसे मिलकर जब निखरे थे तब वो भी. इश्क था। अब तुमसे बिछड़कर जब बिखर रहे. हैं तब यह भी इश्क है। वो इंसान जब और. गहराई में जाता है और जीवन को समझने लगता. है तो फिर एक बार मन में ख्याल आता है. इश्क कुछ होता है या हम डिजाइन ऐसे किए गए.
थे कि मैं लड़का हूं तो मैं एक लड़की का. आश्रित हूंगा. और मेरी एक चेक लिस्ट होगी कि मुझे ऐसी. लड़की चाहिए होगी। शायद स्वभाव ऐसा हो, दिखती ऐसी हो ये ऐसा हो। वो चेक लिस्ट के. आसपास कोई मिल जाएगा साथ रहने लगूंगा। अगर. उसने हां कर दी। साथ रहने लगे तो आदत हो. गई।. हम्म।. आदत हो गई। संबंध बन गए। संबंध बन गए तो. निभने लगा। अब वो गई अगर तो वो आदत में सो. रही है। वो रूहानियत में सो रही है। तो. फिर इश्क क्या था? क्योंकि इश्क था तो. इसके जाने के बाद भी जिंदगी भर रहना चाहिए. था। पूरी जिंदगी और अगर बाद में समय ने उस.
पर एक परत चढ़ा दी जो कहते हैं कि समय घाव. भर देता है।. जी जी बिल्कुल।. और फिर कहीं और कुछ अच्छा एहसास हो गया।. कभी जिंदगी में एक दौर के बाद किसी के. छूने से फिर लगा कि नहीं. कुछ तो ख्वाहिश रही होगी बारिश की बूंदों. की।. सही [हंसी] बात है।. इस बार क्या था? इस बार का एहसास कुछ अलग है।. तो फिनिश क्या रह गया? या फिर ये सब जरूरत है। एक यात्रा है. जिसमें आपको चाहिए होता कोई साथ निभाने के. लिए। शायद उसकी भी जरूरत मुझे लगता है मैं. जहां से देखता हूं कि साथ निभाने की जरूरत.
अच्छा आज की डेट में मैं अगर आप मुझसे. पूछे साथी होना जरूरी है देन बीइंग अ. बॉयफ्रेंड और अ गर्लफ्रेंड और अ हस्बैंड. और अ वाइफ साथी वो होता है जो साथ देता है. जो आपके पर को आपके पंख को और कहता है कि. उड़ो मैं तुम्हारे साथ हूं। साथी जो है. मैं अपने आसपास ऐसा बहुत ही आजकल कम देखता. हूं। लेकिन जो आपने इश्क के बारे में कहा. मैं खुद भी सोचता हूं कि इश्क है क्या? जरूरत है। सबसे ज्यादा मुझे लगता है कि. खुद का साथ खुद को देने की जरूरत होती है।.
तो फिर किसी का साथ मिले तो भी अच्छा, ना. मिले तो भी अच्छा। यह वही आदमी कह सकता है. जो दिल जला हो, जिसका दिल टूट चुका हो, जो. जारजार हो चुका हो, चाहे अपनी वजह से हुआ. हो, किसी और की वजह से हुआ हो। लेकिन खुद. का साथ आपको खुद के होने का एहसास दिलाता. है। वैसे दिल टूटने के बाद आदमी का वो. फेजा आता है कि अब वो लौट भी आए तो भी हम. खुश नहीं होंगे।. जिंदगी बदल. वो लौट भी आए तो भी ऐसा नहीं कि हम बहुत. खुश हो जाएंगे। अब हमको यह दर्द अच्छा. लगने लगा है।.
कह सकता है. इस दर्द ने हमको निखार दिया है। ये जो. हल्की सी तकलीफ है इसने कुछ बदला है हमारे. अंदर और यह बदलाव अच्छा लग रहा है। और फिर. वो सुनने लगता है कि मैंने दिल से कहा. ढूंढ लाना खुशी।. ढूंढ लाना खुशी।. ना समझ लाया ये गम तो गम ही सही। घर लौटते. परिंदों सी हो गई हमारी जिंदगी। अब ना. किसी से आगे बढ़ने की होड़ है। ना किसी के. पीछे छूट जाने का डर। जीने के लिए सोचा ही. नहीं। दर्द संभालने होंगे। मुस्कुराए तो. मुस्कुराने के।. इज देयर एनीथिंग कॉल्ड ट्रू लव इन दिस.
वर्ल्ड? आई एम श्योर जो महादेव और मां पार्वती का. जो प्रेम है तो मां पार्वती ने शायद थोड़ा. मैं आध्यात्मिक रूप से भी इस बात को कहना. चाहूंगा कि मां पार्वती ने सिर्फ इसलिए. प्रेम नहीं किया। उनको शिव चाहिए थे। वो. शिवत्व चाहती थी। मेरा जितना मैंने पढ़ा. है कि वह एक कॉन्शसनेस है। तो ट्रू लव. जरूर एक्सिस्ट करता है। मैंने अपने. माता-पिता में देखा है। आज की जनरेशन के. बारे में आपने. बार-बार हो सकता है जैसे इम्तियाज बैठे. थे। यहीं कुर्सी पर इम्तियाज बैठे थे।. जी. इम्तियाज से मैंने पूछा था।.
वो मान रहे थे। उन्होंने कहा हिंदुस्तान. की सभी मशहूर कहानियां जो है वो एक्स्ट्रा. मैरिटल अफेयर्स की है। हीर राजा जितनी भी. एक्स वाई जेड आती हैं। अभी कानपुर में एक. कहानी आई थी कि एक सास ने अपने दामाद से. शादी कर ली।. काफी चर्चित रही। पुलिस थाने में जाकर. शादी की उसने। काफी चर्चित रही। इम्तियाज. ने उसमें भी एक रॉकस्टार 2 देख ली थी।. [हंसी]. बट मेरे मन में फिर सवाल आता है। बार-बार. बार-बार आता है। कई लोग आए। अनु कपूर साहब. आए थे। उन्होंने एक अपनी. [गहरी सांस लेने की आवाज़][अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. अलग सी लव स्टोरी बताई कि उनको उनकी पहली.
पत्नी से उनकी शादी होती है। फिर दोनों के. संबंध खराब होते हैं। वो किसी और से प्यार. करने लगते हैं। किसी और से वह शादी कर. लेते हैं तलाक देकर। फिर जब दूसरे से वो. प्यार करते रहते हैं सेकंड वाइफ के साथ. तभी उनकी फर्स्ट वाइफ से फिर मुलाकात होती. है और फिर वो सिर्फ वापस प्यार करने लगते. हैं और सेकंड वाइफ उनको पकड़ लेती है ऐसे. कैसे एंड देन ही वेंट बैक एंड ही. स्पेंडिंग ह लाइफ वि द फर्स्ट वाइफ. एंड ही सेस कि.
ये दूसरा वाला जो मैंने गलत किया ये मेरी. चिता तक जाएगा अब ये भी एक प्यार है फिर. मेरे मन में आता है प्यार क्या है मतलब यह. इंसानी कपोल कल्पना का हिस्सा है या जो. मुकम्मल नहीं हुआ। उसी की हमने बड़ी-बड़ी. व्याख्या कर दी।. मतलब मैं इस इस एक मकड़ जाल जैसा है।. समंदर में जो घूमता रहता है गोल गोल गोल. गोल गोल कि इसके मतलब इसको समझे कैसे? सर जलेबी की तरह सीधा है इसलिए समझना इसको. बहुत मुश्किल है। क्योंकि जितना आप इसको. समझने की कोशिश करेंगे उलझते जाएंगे आप।.
सिंपल जरूर सिंपल ये है कि अगर आपसे कोई. प्यार करता हो अब प्रेम जो है वो आप. कहेंगे प्रेम है क्या? हां प्रेम क्या है? प्रेम क्या है? तो मुझे लगता है कि कोई. आपका साथ दे। आप किसी का साथ दें। बिना उस. इंसान को नीचा दिखाए, बिना उस इंसान को. नीचे गिराए। कोई इंसान अगर उड़ना चाहता. हो, उसको उड़ने दें आप। मैं अगर उड़ना. चाहता हूं, मेरा साथी मुझे उड़ने दें। आज. की डेट में मेरी परिभाषा यही है और किसी. का साथ अच्छा लगता हो, किसी के होने से.
आपके जीवन में आपको लगता हो कि कोई. श्रृंगार है तो वही प्यार है। बाकी प्यार. की परिभाषा सबके लिए अलग है।. मिलने के बाद ऐसा रहता है. ये तो मिलने तक का होता है। कि तुम हासिल. नहीं हुई तब तक ये रहा कि तुम खुश हो तो. हम खुश हैं।. मिलने के बाद फिर जीवन घटित हो जाता है।. तो जो प्रेम है प्रेम की प्रेम की अवस्था. बदल जाती है।. मुकम्मल हुई प्रेम कहानियों में कौन सी. कहानी है जो आपको आकर्षित करती है? अधूरी. नहीं। मुकम्मल हुई कहानियों में से कौन सी. प्रेम कहानी है? मैं जानता नहीं किसी को पर्सनली तो दूर से. तो दिखता तो सब बहुत अच्छा है। आई एम.
श्योर होता ही होगा जितने भी. कोई मशहूर कहानी जो मुकम्मल हुई कहानी है।. और अगर ये सोचने पर मजबूर कर रहा है।. हां वही तो मुझे थोड़ा सा वो लगता है कि. दिखने में तो सब कुछ बहुत सही लगता है।. लेकिन. Instagram के रिश्तों का क्या भरोसा वो तो. हमने सिया केतन में भी देखा मुंबई में।. साथ में जश्न मना रहे थे। एक पीछे धक्का. दे। पता नहीं अब कि बड़ा ही विचित्र हो. गया है कि किस बात को माना जाए, किस बात. को नहीं माना जाए।. या फिर यह मान लें कि इंसान को जो नहीं. मिलता इंसान भागता रहता है। जैसे आप भाग. रहे थे पीछे बैठकर आगे वो सीट वाली लड़की.
के लिए. [नाक से की जाने वाली आवाज़][हंसी]. गलत तो नहीं है? ये कब की बात है सर ये? आपने [हंसी] क्या. हिंदू कॉलेज? जी जी. वहां पर. जी बिल्कुल। ऐसा कुछ इश्क था? बहुत बहुत गहरा बहुत भयंकर वाला इश्क था।. आखिरी बेंच फर्स्ट बेंच पर चश्मे वाली एक. लड़की जो ना बात कर रही थी ना मुलाकात कर. रही थी।. बहुत दिनों तक ये ये मसला चला था और उस. टाइम पे जब हमसे हमारे दोस्तों ने जाके. फिर उस जो महिला थी उनसे बात की थी कि यार.
एक बार बात तो कर लो यार ये क्योंकि मुंह. से कुछ निकलता ही नहीं था जब सामने जाते. थे तो. बस देख के अच्छा लगता था।. बस देख के अच्छा लगता था यार।. यही तो मैं कह रहा हूं।. हमारे यहां मुकम्मल प्रेम कहानियां नहीं. है। वो जो नीलेश मिश्रा ने मेरे यहां कहा. था कि वो जो नहीं मिलता है वो अनगिनत. संभावनाएं लेकर आता है। और इंसान बना ऐसा. है कि वो संभावनाओं में जीता है। जो मिल. गया उसकी कीमत नहीं है। आज हवा कितनी. मौजूद है। हमें कोई कीमत नहीं है।. बिल्कुल।. कल को पोलशन बढ़ जाए। ऑक्सीजन लगाना हो.
हमें एहसास हो जाएगा।. बिल्कुल। ऐसी मोहब्बत है जो रिश्ता आपको. मिल गया जो आपके लिए अवेलेबल है वो पानी. हो जाता है जो नहीं मिला कद्र नहीं करते. आप जो चीजें आपको आसानी से मिल जाती हैं. उसकी कद्र. जैसे हमें पंच तत्व जो भी है यहां पे धरती. पे सब कुछ तो हमें फ्री में मिलता है. लेकिन आप देखिए तो हम किसी चीज की कदर. नहीं करते और जब प्रकृति अपने पे आती है. चाहे पोलशन आपने कहा हो चाहे कुछ भी कहा. हो आपको कदर करवाने पे मजबूर कर देती है. प्रकृति पहाड़ गिरने लगेंगे बारिश होने.
लगेगी [गला साफ़ करने की आवाज़] हमें ये. सोचना चाहिए बतौर इंसान कि हम इस धरती को. बेहतर बनाने के लिए क्या कर पा रहे हैं? ले तो सब कुछ रहे हैं जो फ्री में है।. कितना दे पा रहे हैं। मेरा ऐसा मानना है।. मोहब्बत इंसान में क्या बदलती है? जैसे. हमसे किसी ने कहा कि मोहब्बत इंसान का. बेटर वर्जन बनाती है। ये आपको एहसास. दिलाती है कि आप रेगिस्तान में दूध की नदी. बहा देंगे।. एहसास तो दिलाती है कि आप तो अंतरिक्ष में. चले जाएंगे, चांद लाके दे देंगे। मोहब्बत. वो एहसास कराती है लेकिन जब जिंदगी घटित. होती है मोहब्बत के साथ तब वो मोहब्बत.
क्या बचती है असली मोहब्बत शायद वही होती. होगी मैंने बहुत दिन से एहसास नहीं किया. इसका तो मैं कहना मेरे लिए उचित नहीं होगा. लेकिन चांद तारों और सुरखाब के ख्वाब. दिखाने के बाद जो बच जाए वही असली मोहब्बत. चलो मैं आप ही से पूछ लेता हूं कई बार. इश्क मुकम्मल भी हुआ होगा ऐसा तो होगा. नहीं कि हर बार लड़की देखते ही रह गए कई. बार मिली भी होंगी इस जीवन में तो यात्रा. थोड़ी आगे बढ़ी है. जी जी. किसी इंसान को हासिल िल करने से पहले का. इश्क और हासिल करने के बाद के इश्क में.
क्या परिवर्तन आता है? जब तक वो मिला नहीं. कोशिश कर रहे थे मर्दों के नजरिए से। आप. शायद चीजों को मैं अपने हिसाब से कह सकता. हूं कि टेकन फॉर ग्रांटेड लेना शुरू कर. देते हैं। आप वो चीजें एक तरीके से जो एक. सेफ्टी नेट होता है वो शायद आप भूलने लगते. हैं। मन में कहीं जरूर आपके होता है कि आई. कैन ऑलवेज फॉल बैक अपॉन पर आप तवज्जो देना. बंद कर देते हैं। जो मुझसे भी गलती हुई. होगी। हुई थी और किसी के भी जाने में मेरे. जीवन से मैं मानूंगा कि सबसे ज्यादा हाथ.
मैं किसी को ब्लेम नहीं करूंगा इसके लिए।. मैं एक अलग इंसान था। अलग इंसान था तो. मेरी चीजें अलग मेरी बातें अलग थी और वो. समझने की बारी थी हमारी कि क्या समझूं. क्या ना समझूं जब अपने आप में सामने समझ. में नहीं आता. तो इंसान का है ना विज़न ब्लर हो जाता है. तो जब वो धक्का लगता है तब उसको इंसान की. अहमियत समझ में आती है मेरे साथ भी कुछ. ऐसा ही हुआ मैंने भी गलतियां की गलतियों. से सीखा है और अब कोशिश वही करता हूं कि. सेम गलती दोबारा ना करूं क्योंकि फिर आपने.
सीखा क्या एक मर्द के नजरिए से ज्यादा. तकलीफ कहां होती है जब कोई आपके काम में. आपको रिजेक्ट करता है, कोई मोहब्बत में. रिजेक्ट करता है या जब जेब में पैसा कम. होता है? सर जब जेब में पैसा कम होता है।. सबसे ज्यादा तकलीफ तभी होती है।. सबसे ज्यादा तकलीफ तभी होती है। बहुत सारा. ऐसा अपने बॉम्बे शहर में मैंने टाइम देखा. है जब सर पे छत थी लेकिन खाने को पैसे. नहीं थे। वो बहुत अंदर से किलसा दिया करती. थी वो चीज।. मोहब्बत से भी ज्यादा।. मोहब्बत से भी ज्यादा। पैसा एक कंफर्ट.
देता है आपको लाइफ में। और वह कंफर्ट बहुत. जरूरी होता है। जो बेसिक चीजें होती हैं. मुझे ऐसा लगता है क्योंकि वह मोहब्बत वाली. जिंदगी भी देखी और बिना पैसे वाली जिंदगी. भी देखी। मोहब्बत वाली जिंदगी तो संभाल. ली। बिना मोहब्बत के भी संभाल ली। बिना. पैसे के संभालनी मुश्किल हो जाती है।. मम्मी हमारी कहते हैं गरीबी सबसे बड़ा. अभिशाप है।. सबसे बड़ा अभिशाप है। और जब आप देखते हो. आपके ऊपर जिम्मेदारियां हैं तो आपको लगता. है कि नहीं यार ये तो जरूरी है सबसे। तो. यह वाली जिंदगी जो है वो भी अच्छी नहीं. है।. हमारे पडकास्ट में किसी ने कहा था शक्ति.
हासिल कर लो प्रेम अपने आप मिल जाएगा।. सामर्थ आ गया तो बिल्कुल मैं मानता हूं इस. चीज को और आज की डेट में अगर ऐसा लगता है. तो अपने आप ही आपके आपके पास विकल्प जो है. वो आपको मिलने शुरू जैसे आज से शायद पांच. सालों के पहले लोग उतने तारुफ नहीं रखते. होंगे। उससे इत्तेफाक नहीं रखते होंगे।. आपसे बातें हो रही है। इसके बाद शायद पता. नहीं सैकड़ों हजारों लोग मुझसे इत्तेफाक. रखना शुरू कर दें। चीजें अपने आप चीजें. सरल हो जाए। सुलभ हो जाए। लेकिन पांच साल. पहले नहीं था क्योंकि मेरे पास वो.
सामर्थ्य नहीं था। तो सामर्थ्य के आने से. भी बहुत सारी चीजें. नहीं जुलाई किसी ने मुझे कही कि शक्ति. हासिल कर लो प्रेम अपने आप मिल जाएगा। ये. मुझे लगता है जेंडरलेस है। आप बॉलीवुड ही. उठा लो। बहुत सारी एक्ट्रेस ऐसी होंगी. जिन्होंने शादियां नहीं की है।. जी बिल्कुल।. लेकिन उनके आसपास नए लड़के भी होंगे जो. उनसे इश्क कर रहे होंगे, प्यार करना चाहते. होंगे। बहुत सारे एक्टर्स हैं। उनके. बॉयफ्रेंड्स नए उम्र के हैं। सुष्मिता सेन. हो गई, मलाइका अरोड़ा खान हो गई। रेखा जी. के बारे में बहुत सारी कहानियां आती रहती. हैं। तो ये केवल मर्दों पर आधारित नहीं.
है।. नहीं पुरुषों में भी यही कहानी है कि अगर. पुरुष. संपन्न है. तो आपको प्रेम मिल जाता है। 18 साल वाला. भी मिल जाएगा, 16 साल वाला भी, 22 साल. वाला भी, 24 साल वाला भी बहुत बड़े-बड़े. टाइटेनिक वाले हीरो की हम देखते हैं वो 26. साल के अलावा गर्लफ्रेंड बनाते ही नहीं. है। लियो भैया सही बात है। वो तो अपना एज. क्राइटेरिया भी तय करके रखे हैं भाई साहब।. अब ये शक्ति का ही तो कमाल है ना।. व्यक्तित्व का कमाल केवल नहीं हो सकता ये।.
शक्ति है तो लोग आप की बुराइयों में भी. अच्छाई ढूंढना शुरू कर देंगे।. कुछ भी होगा और आप कमजोर हैं. तो आप कितनो अच्छे इंसान होंगे। सबका पैर. छूत होंगे। भैया नमस्ते।. आपका सम्मान नहीं होगा। उगते सूरज को सब. सलाम करते हैं। डूबते को कोई नहीं करता।. जबकि हमारे बिहार में वो अलग चीज है कि छठ. में हम दुनिया को ये सिखाते हैं। बिहार के. लोग छठ जो बिहार के लोग नहीं पूरा छठ. त्यौहार ही वैसा है कि डूबते सूरज को भी. उतना ही सलाम करते हैं। पर ये बात आप सच.
कह रहे हैं कि उगते सूरज को सब सलाम. करेंगे।. परिवार में भी परिवार में। रिश्तेदार में. अगर दो लड़के हैं और एक ज्यादा बढ़िया कर. रहा है। तो आप देखना जब घर में स्वागत. होता होगा रिश्तेदारों में आपको हल्का सा. फर्क महसूस करा दिया जाता है।. ये दुनिया शायद ऐसी चलती रही है। मुझे ऐसा. लगता है शुरू से ही ये. तो फिर इसका मतलब यही है कि जीवन का रस. यही है कि आप शक्ति हासिल कर लो। बाकी सब. अच्छा हो जाएगा। शक्ति पैसा दे देगी।. शक्ति प्रेम दे देगी। शक्ति कंफर्ट दे. देगी। फिर आप बगैर जहां चूजर बन जाओगे। तो.
ये बात बचपन से पढ़ाई क्यों नहीं जाती है? क्योंकि यह बात हमको बहुत समय बाद समझ में. आई। रिजेक्शन लेकर समझ में आई। जब किसी ने. दुत्कारा कि तुम अच्छे हो।. पर हमारी चाहत अलग है।. और फिर आपको समझ में आता है कि आप कितों. बढ़िया आदमी हो। सबको जी करते हो। जी जी. पैर छूते हो। किसी से बुरा नहीं चाहते हो।. मोहब्बत में बड़े लॉयल हो। काम ईमानदारी. से कोई फर्क नहीं पड़ता।. वो जो किसी ने हमसे कहा था कि 27 साल के.
बाद मर्द खूबसूरत या बदसूरत नहीं होते. हैं। वो सिर्फ सफल या असफल होते हैं।. और इसको जितना जल्दी आप समझ लेंगे मर्द. होकर जीवन आपका उतना बढ़िया रहेगा। आपकी. शक्ल, सूरत, आवास कोई चीज मायने नहीं. रखती। सिर्फ मायने रखती है कि आप अपने. कार्य क्षेत्र में सफल हैं और नहीं है तो. आपको हर दिन हर पल हर सेकंड वह एहसास घर. परिवार रिश्तेदार कार्यक्ष क्षेत्र हर जगह.
करा जाएगा सड़क चलते सोते जगते गाड़ी में. ट्रेन एयरपोर्ट बैठते. लेकिन ये बात सिखाई नहीं जाती बचपन में. हां क्योंकि शायद हमारे जो हमारे. माता-पिता रहे होंगे उन्होंने ये चीजें. देखी नहीं होंगी जो प्रेम मैंने अपने. माता-पिता में देखा है के लड़ाईयां भी. होती थी झगड़े भी होते थे पर वो एक अनदेखा. प्रेम तो नहीं होता गुस्से वाला प्रेम कि. हम. बातें नहीं हो रही है लेकिन मां. मुझे एक मीम वायरल होता है कि एक आदमी. बुड्ढे अंकल बैठे हैं छा बारिश हो रही है. अपना भीग रहे हैं और छाता इधर कर दिया.
आंटी की तरफ आई हेट यू बट आई लव यू. हां वही तो खाना दिया करती थी मां पापा को. हम नहीं खा रहे हैं तो मां फिर कहती थी हम. ऐसे करके होता था. तुझसे लड़कर भी सोच तुझसे लड़कर भी सो जाओ. जैसे एक बड़ी शायरी थी तुझसे लड़ाई एक तरफ. मोहब्बत एक तरफ. तेरे बिना रहा भी ना जाए या तेरा संग सहा. भी ना जाए. हां ये भी एक चीज है लेकिन वो प्यार हमने. देखा है आपने तो ऐसा नहीं है कि हमने वो. प्यार देखा नहीं है।. मुझसे लड़कर भी वो सो जाए तो उसका माथा. चूम लूं मैं।. हां. उससे नाराजगी एक तरफ मोहब्बत एक तरफ।. क्या बात है। क्या बात है।.
इसीलिए शायद उन लोगों ने हमें सिखाया नहीं. क्योंकि उनको पता नहीं होगा कि जिंदगी. इतनी सरल नहीं रहेगी और आगे जाके इतनी. कॉम्प्लेक्स हो जाएगी।. पर जब आप दुनियादारी में गए मुंबई में गए।. जी।. पहली बार कब एहसास हुआ यह बेकदरी का यह. सफलता असफलता का कि इंसान को सिर्फ इंसान. के नजरिए से नहीं दिखाता। जैसे बॉबी देओल. हमारे यहां पर आए थे। बॉबी देओल ने बताया. कि वो डिप्रेशन के दौर में इसलिए गए थे।. जी. वो तो धर्मेंद्र के लड़के हैं भाई इतने. बड़े बाप के लड़के हैं। उन्होंने कहा जब. आप पार्टी में घुसते हो तो कितनी देर आपसे.
कोई बात करेगा यह आपकी सफलता तय करती है।. कैसे आपसे मिलकर आगे बढ़ जाएंगे सफलता तय. करती है। तो जब लोग मिलने कम हुए टाइम कम. देना शुरू किया तो वो संकोच पैदा शुरू. हुआ। फिर मैंने जाना छोड़ दिया। फिर मैं. अकेलेपन में चला गया। फिर मैं पीना शुरू. कर दिया। फिर पीते-पीते मैं उस दौर में. चला गया जहां से बर्बाद हो गया। आप. क्योंकि उसी दुनिया का हिस्सा हो। विनीत. भी आए थे। विनीत के आंसू दुनिया ने देखे. थे। जब विनीत ने कहा कि सोना तपते रहेगा. तो निखरेगा कब? मैंने भी देखा था। बिल्कुल.
सही बात कही थी उन्होंने। शाहिद कपूर के. भाई का एग्जांपल दिया। आलिया भट्ट को. दिया। बोला गोद में खिलाया इन सबको मैंने।. और ये सब भी स्टार बन गए और हम अभी भी. संघर्ष ही कर रहे हैं। जवानी खपा दी हमने।. तो ये पहली बार कब एहसास हुआ? कहीं कब लगा. कि यार आदमी. इंसान से ज्यादा लोग देखते हैं। सिर्फ. इंसान नहीं देखते।. ये मेरे ख्याल से जिस इंडस्ट्री में हम. लोग हैं तो जहां तक लॉर्ड बॉबी ने भी कहा. क्योंकि मैं उनको लॉर्ड बॉबी की तरह ही. देखता हूं। सही कहा उन्होंने वो है भी। तो.
इंसान को इंसान और वो अपनापन जो है शायद. एक इंसान का बतौर इंसान होता है। जितना. आपने मुझे स्नेह दिया। ये सारी चीजें शायद. उतनी मायने नहीं रखती हैं। आपका चिप कितना. हाई है। आपकी कितनी चीजें चल रही हैं। उस. पे एक शाहरुख खान सर का एक ट्रैवल विद. शाहरुख खान ऐसे एक बहुत पहले. डॉक्यूमेंट्री आई थी। तो उसमें शायद. उन्होंने अपने घर के ऊपर एक अपने लिए एक. कमरा बनाया है। जहां पे जब कभी वो अकेले.
होते हैं ही इस किंग ऑफ हिंदी फिल्म. इंडस्ट्री अगर आप कह सकते हैं तो बट ही. आल्सो फील्स अलोन। उनको लगता है कि मेरा. अपना कोई नहीं है। उनको भी यह लगता है और. यह बात मैं नहीं कह रहा। उस डॉक्यूमेंट्री. में यह चीज मैंने देखी थी। टीएलसी पे आई. थी वो डॉक्यूमेंट्री। रह गई एहसास की बात. मेरे तो सर एहसास तो बहुत बार हुआ है। कदम. कदम पे हुआ है। लेकिन हमारी माताजी ने मैं. अगेन क्योंकि मैं बना ही हूं अपने पूरे घर. परिवार की वजह से। मैं एक बहुत बड़ी फिल्म. कर रहा था। नाम नहीं लूंगा। बहुत बड़ी. फिल्म थी। और उस फिल्म के बाद ना जाने उस.
फिल्म से एक सुपरस्टार बने। एक बहुत सारी. चीजें हुई। मेरा उसमें रोल छोटा सा था पर. अच्छा रोल था। शुरू के 8 9 दिन उस फिल्म. के सेट पर बड़े अच्छे बीते मेरे। मतलब. बहुत ही अच्छे तरीके से बातचीत होती थी. डायरेक्टर से। लेकिन पता नहीं उसके बाद. शायद उनकी मुझसे उम्मीदें ज्यादा थी या. फिर उन्होंने सोचा होगा कि ये तो यार कोई. बहुत कमाल ही कर देगा जो शायद मैं नहीं कर. पाया होगा। तो उसमें भी मैं दोष अपने आप. को दूंगा कि मैं ही नहीं कर पाया हूं।. लेकिन फिर भी माहौल खराब होता चला गया। और.
वो रिजेक्शन मुझे जो है वह बहुत कई बार. अभी भी सोचता हूं तो मुझे थोड़ी सी खलिश. हो जाती है कि इसको और किसी तरीके से उस. सेट पर हैंडल किया जा सकता था। किसी नए. कलाकार के साथ ऐसा उसको मतलब कहते हैं. प्रोत्साहित ना करके उसको आपने इतना. किनारे में कर दिया। तो जो रोल के लिए मैं. साइन हुआ था वो रोल बिखर गया। बैठ गया वो. रोल। तो मैं बड़ा ही दुखी हो के सेट से. वापस आया करता था। तो उस टाइम पर मां. हमारी बॉम्बे में ही थी हमारे साथ थी।. मसून का महीना था या जुलाई अगस्त का एक.
दिन वहां से रहा नहीं गया। मां ने मुझसे. पूछा कि बुआ क्यों इतने तुम उदास रहते हो? तुमको क्या मजा नहीं आ रहा? तब मैंने मां. को बताया कि माते ये सारी चीजें हैं और. मुझे समझ में नहीं आ रहा मैं क्या करूं।. आई वास सो डाउन एंड आई वास सो लो एट दैट. टाइम। कि यार अब कैसे मतलब और एस एन एक्टर. भी मेरा अपने आप से विश्वास उठता जा रहा. था। और ये बहुत साल पहले की बात है। 10 12. साल हो गए उस बात को। तो मां ने मुझसे एक. बात कही थी कि बेटा बुआ जब तुम मुंबई आए. थे, किसके भरोसे आए थे? अपने माता-पिता से.
पूछ के तो नहीं आए थे तुम? मैंने कहा हां. माते अपने भरोसे आए थे और भगवान के भरोसे. आए थे। तो मां ने मुझे बोला वही तुम्हारा. भरोसा है। किसी सामने वाले को इतनी ताकत. मत दो कि तुम्हें ऐसा लगे कि वो तुम्हें. बना सकता है या बिगाड़ सकता है। एक वो दिन. था और एक आज का दिन है कि प्रोजेक्शन बहुत. सारे आए लेकिन मुझे अपनी माता के आशीर्वाद. पे ऊपर वाले पे बहुत विश्वास है। तजुर्ब. हुए हैं मुझे। तजुर्बा होना जरूरी है।. जैसे विनीत जी ने कहा था कि सोना कितना.
तपेगा। तप रहा है सोना तप रहा है। कितना. तपेगा हमें भी नहीं पता।. लाइक आई एम हैप्पी फॉर हिम।. हां सर उनका कमाल का रहा।. कमाल का रहा।. बैक टू बैक अच्छी फिल्में आई और. जो भी मैं उनसे इतना रिलेट करता हूं. क्योंकि हम लोगों की कहानी कहीं ना कहीं. सिमिलर ही है। कहां से आए, कहां पहुंचे।. तो सोना तपा तभी वो ऐसा बना और कितना. तपेगा कोई नहीं जानता है। लेकिन अपने हाथ. में सिर्फ तपना है। पाना तो ऊपर वाला जाने. कब देगा। हालांकि रिजेक्शन और थप्पड़ भी. जरूरी होता है। हमको लगता है बहुत जरूरी. होता है सर। खासतौर पर हम जैसे जो छोटे. शहर के लोग होते हैं उनको.
स्वाभिमानी होते हैं ना यूपी बिहार के लोग. बहुत ज्यादा। तो जो थप्पड़ पड़ता है वो. उनके अंदर मुझे लगता है एक ऊर्जा पैदा. करता है। जब भरे सेट पे 500 लोगों के. सामने मुझे गालियां निकाली गई थी। बहुत. सारी गालियां मुझे बड़ा अफसोस हुआ था।. बहुत दुख हुआ था मुझे कि मैं क्या मां को. जाके मुंह दिखाऊंगा यहां पे यार कि मैं. गाली खा के आया हूं। मैं तो मां को बोल के. आया था कि मां ते आज इतना बढ़िया करके. आएंगे जो डायरेक्टर खुश हो जाएंगे सब लोग. तो वो पूरा एक दो ढाई महीने का जो पूरा.
वफा था वो मेरा बहुत ही दुखद बीता था. लेकिन इवेंचुअली फिर आदमी तपा और सीखा. उससे और आज भी अगर मुझे वो काम करने के. लिए कभी अगर उस साइड पे मौका मिलता है मैं. जाऊंगा काम करने के लिए तो मेरे संदेह सब. पे होता है अभी हम अनुराधा पडवाल जी साहब. बैठे थे उन्होंने बताया कि मोहम्मद रफी. जैसे इंसान पे लोग शक करने लगे थे. जब उनका आखिरी दौर चल रहा था तो उनका मुंह. लोग मुंह बनाने लगे एंड देन शी ही सेड कि. मोहम्मद रफी. सोचिए. तो ये तो कहानी है तो मतलब इस दुनिया में.
शक तो दिक्कत नहीं है लेकिन फिर वही है कि. जिंदगी पटके तो रबर वाली गेंद बन जाओ छोटी. वाली. कि जितना नीचे पटके हो ससुर हम उतना ऊपर. उठ के आएंगे. 20 साल से ऑलमोस्ट आप काम कर रहे हो. जी ऑलमोस्ट अब 18 20 साल हो गए. 20 साल फिल्म इंडस्ट्री में देने के बाद. कभी महीने खर्च की चिंता होती है या उस. दौर से निकल गए. [हंसी]. अ. कुछ सवाल. कुछ सवाल हमारे यहां पूछे जाते हैं।. नहीं नहीं एकदम सही आपने पूछा है।.
कई बार जब अभी अगर सोचूं तो अभी शायद उतनी. चिंता नहीं होती है। लेकिन कुछ जो. जिम्मेदारियां हैं कुछ जो चीजें हैं अपने. जीवन में तो लगता है कि हां ये कैसे कर. पाऊंगा मैं।. पर बीच में ऐसे बहुत सारे मैंने कहा आपको. कि बीच में मैंने ठीक-ठाक से पैसे कमाए तो. कुछ घर ले लिया। एक छोटा सा ही घर लिया।. लेकिन सर पर छत है पर उस छत में उस छत को. उस घर को चलाने के पैसे नहीं होते थे। तो. मेरे साथ जो हमारे दोस्त रहते थे. अमित आनंद उनका नाम है। नाम इसलिए क्योंकि. आपके माध्यम से मैं उनको थैंक यू भी बोलना. चाहूंगा कि दोस्ती यही होती है। उसका भी.
एहसास नहीं होने दिया था उसने कि ये तुम. कुछ नहीं कर पा रहे हो। तो वो वाला फेस जो. है बहुत बहुत ही अच्छे से निकला था. क्योंकि दोस्ती वैसी थी और जीवन में अगर. एक दो दोस्त ऐसे हो तो आपका जीवन थोड़ा सा. सरल हो जाता और मुझे लगता है ये चीज सबको. सीखनी चाहिए कि आपके साथ किसने गलत किया. है उसका जिक्र भले आप जीवन में ना करो. लेकिन जिसने आपके साथ अच्छा किया है उसका. जिक्र सार्वजनिक मंच पर जरूर करो. मैं हमेशा करता हूं मैं कोशिश करता हूं. करने की जैसे मैंने बताया आपको.
जो दुनिया में अच्छाई को जिंदा रखता है और. इतना तो हम कम से कम कर ही सकते हैं उस. इंसान के लिए निस्वार्थ होकर जो हमारा कुछ. भी नहीं था हमारे पास कुछ भी नहीं था. हमारे पास। एहसास नहीं होने दिया। महसूस. नहीं होने दिया।. कितनी बड़ी बात है सर। ये बहुत बड़ी बात. है ये कि कोई आपको छोटा होने का एहसास ना. कराए। Stro होती थी उसके पास। मुझे ऑडिशन. के लिए वो गाड़ी में भेजता था। नहीं भाई. तू गाड़ी से जा यार। भाई है ना तेरा अब. मुझे लगता था कि यार इससे अच्छा क्या हो. सकता है? ऑटो से जाने में और Santro से. जाने में फर्क होता था। आज भी जब मैं अगर.
आप सोच अगर पूछेंगे तो कोई अगर कैब से. जाता है, कोई अगर मग से जाता है तो एक. छोटी सी निगाह बदलती है इंसान की।. क्योंकि हर जगह है।. आपने एग्जांपल दिया अभी थोड़ी देर पहले ही. सुनंदा जी का कि जब पहली बार आई थी तो. उस तरह से आए और उसके बाद अब आते आती. उसके बाद तो वही चीज़ है।. दुनिया का नजरिया बदलता है।. हम. आपका नजरिया दुनिया के लिए वही रहता है।. कल को अगर मेरे पास फिल्मफेयर आ जाए, ऑस्कर आ जाए, सब कुछ आ जाए। मैं दुनिया के. लिए वैसे ही रहूंगा जैसे मैं दुनिया को.
देखता रहा हूं। दुनिया का नजरिया मेरे लिए. बदलेगा। अरे यार अब तो यह बड़ा आदमी हो. गया। अभी भी लोग मुझे कहते हैं यह बात. मुझे समझ में नहीं आती। बड़ा आदमी मैं. पहले भी था उस तरीके से अपने मन के लिए. अपने लिए खुद के लिए। आपके लिए मैं अब. बड़ा बना हूं। सही बात है। मैं इंसान तो. वही था। आपसे उतनी ही मोहब्बत करता था।. कुछ थोड़ी बदला है।. कुछ नहीं बदला। मेरी तरफ से नहीं बदला।. आपका नजरिया बदला है।. तो ये दुनिया जो है ये हिट होने से सोशल. मीडिया फॉलोअर्स से आपको इज्जत देती है।. बिल्कुल देती है और लेकिन आप तटस्थ बने.
रहिए क्योंकि आपको पता है जीवन की असली. सच्चाई सोशल मीडिया नहीं है।. जीवन की असली सच्चाई आपके फॉलोवर्स या कुछ. भी नहीं क्योंकि जो आप देखते हैं. जरूरी नहीं है कि वो सही हो।. आपको अपना सबसे अच्छा दोस्त बनना पड़ेगा।. तभी आप इस दुनिया में सरलता से जी पाओगे।. मेरा ऐसा मानना है।. रामलीला में 6 महीने आप वहां भी काम किए. जी. सेट पर. जी जी. फिल्म में तो नहीं थे आप. हां फिल्म में नहीं थे कहीं-कहीं दिखे. होंगे शायद आपको इधर-उधर करके कुछ ऐसा हुआ. होगा. तो फिर वहां छ महीने क्या कर रहे थे पैसों.
के लिए. छ महीने नहीं मैं छ महीने नहीं था ये शायद. गलत दो ढाई महीने था वहां पे दो ढाई महीने. जितना भी हमारा काम था वो काम किया हमने. और. एक्टिंग का ही काम था या और भी कुछ था. नहीं नहीं एक्टिंग का ही काम था. कैसा एक्सपीरियंस रहा भंसाली साहब के साथ. बहुत ही महीन एक्सपीरियंस रहा आप कह सकते. हैं क्योंकि वो एकदम परफेक्शन चाहते हैं. तो मैं कोशिश करता था सब लोग ही कोशिश. करते थे। चाहे वो रणबीर हो, चाहे दीपिका. हो या जितने हम सब लोग उनके दोस्त थे तो. सीखने को बहुत कुछ मिला था कि एक इंसान की. निगाह कहां तक जा सकती है एक फ्रेम के. अंदर कितना कुछ हो सकता है। और ही इज़ अ.
परफेक्शनिस्ट। सबका तरीका अपना-अपना अलग. होता है काम करने का। जैसे वो अलग थे, नीरज पांड्या सर अलग थे, प्रकाश जा सर अलग. थे, प्रीतम श्रीवास्तव सर अलग हैं। तो. सबका अपना-अपना तरीका है। पर आई वुड लव टू. वर्क विथ हिम। अगेन अगर मुझे मौका मिले. बिकॉज़ वो अपने आप में एक संस्था है जिससे. आदमी बहुत कुछ सीखता है।. बड़े फिल्म के सेटों पर छोटे एक्टर्स को. छोटा एहसास कराया जाता है। जैसे शाहिद. कपूर ने ये कहा था. जी. वो पद्मावत कर रहे थे और उन्होंने कहा कि. आपको छोटे होने का एहसास कराया जाता है।.
कहकर नहीं व्यवहार से. होता है वो वो होता है। जैसे आपने कहा ना. मुझे कराया गया। ये शाहिद कपूर ने एक. इंटरव्यू में बताया था कि मुझे कराया गया. हर चीज पे। कितनी अटेंशन दी जा रही है।. कैसे आपको ट्रीट किया जा रहा है? आपको एक एहसास करा दिया जाता है।. जी बिल्कुल मैं मैं भी महसूस किया है. मैंने भी। बहुत बड़ी-बड़ी पिक्चरों में. मैंने अगर आप कहें तो लेकिन धोनी के सेट. पे मुझे सिर्फ और सिर्फ आप कहें बहुत बड़ी. पिक्चर थी उस टाइम के हिसाब से मुझे सिर्फ.
प्यार मिला था। और वहां कोई ऐसा किसी ने. एहसास नहीं कराया। सब लौंडे थे एकदम। अरे. चलो ना साला खेलते हैं जा के। अब सब उधर. बिहार झारखंड तो आए आओ ना खेलते हैं। तो. कितना मैच खेले थे धोनी पिक्चर बनाने के. टाइम में? हम लोग सर प्रैक्टिस मैंने एक महीने की. थी। शैडो प्रैक्टिस होती है।. खाली बैटिंग करने की।. हेलीकॉप्टर शॉट मारने की। हेलीकॉप्टर शॉट. सिखाना है।. बॉलर सहित करवा रहे थे।. बॉलर सहित और उसके बाद घर में वो टेनिस. बॉल बांध के फिर उसके बाद कैसे वो आया।. क्या हुआ? एक महीना खाली मैच खेलते रहो।. सोचिए आपके ऐसे क्रिकेटर जो है वो उसको.
मिलता तो कितना अच्छा होता।. हम तो एंजॉय करते। पूरा दिन खाली मैच. खेलते रहो। खाली मैच खेलते और मैच हम लोग. वीकेंड पे जब कभी यूनिट का ब्रेक होता था. तब खेलते थे। नहीं तो शाम में पैकअप के. बाद तो कभी ना कभी गेम हो ही जाया करता था. दो चार। तो धोनी फिल्म में कभी ऐसा एहसास. नहीं हुआ कि कोई बड़ा है कोई छोटा है। एंड. वो भी एक नीरज पांडे सर हैं जिसकी वजह से. ऐसा हुआ।. क्या कमाल की फिल्म थी भाई. कमाल मतलब. क्या कमाल के गाने अमाल मलिक हैट्स ऑफ. यार। अभी अमाल से मेरी बात हो रही थी।. अमाल भी आने वाले हैं।. अच्छा. और हम जिक्र कर रहे थे। मनोज मुंतुशरी की.
राइटिंग। अच्छा देखिए सब हमारे आसपास के. लोग हैं। सुशांत जी की बहन आई थी अभी।. जी जी जी. बड़ा प्यारा इंटरव्यू था हमारा और बहुत. भावुक इंटरव्यू था। उन्होंने मुझे बहुत. अच्छे से हग किया लास्ट में और वो अपने. भाई की तरह ट्वीट कर रही थी मुझे अमाल आने. वाले हैं। बट क्या मेमोरीज हमारी है भाई. धोनी से? हम तो जब 2011 वाला वर्ल्ड कप. देखते हैं और वो रवि शास्त्री की कमेंट्री. आती है। एंड धोनी फिनिशेस ऑफ इन स्टाइल।. यस।. तो हमको तो आपको थैंक यू बोलने का मन करता. है कि आप ही सिखा दीजिए। नहीं नहीं सर. मतलब आप यकीन मानिए हमने उस घर में भी शूट.
किया जहां पे धोनी साहब रहते थे। उस घर. में जो ओरिजिनल घर है एक सीन है उसमें. जहां पे ये तीनों दोस्त जाते हैं धोनी को. ले जाने के लिए वो एक्चुअल घर था उनका. धोनी का धोनी जी का जो उनको सरकारी. क्वार्टर मिला था उनके पिताजी को और वो. ग्राउंड वैसा ही था तो नस्टिया में जी रहे. थे सारे के सारे अरे यहां पे और मैं दो. बार मिला भी था शूटिंग के दौरान धोनी जी. से धोनी जी इसलिए. धोनी मूवी कैसा लगा. बहुत अच्छा लगा. कैसे आदमी धोनी है. अरे बहुत. पर्सनल लाइफ में मतलब.
ज्यादा तो मेरी बातचीत उतनी. अरे जितना भी आदमी बहुत अच्छा तो उन्होंने. उन्होंने मुझे देखा फिर लोगों ने मिलवाया. कि ये संतोष लाल कर रहे हैं। तो बोले. संतोष लाल तो थोड़ा काला सा था। ये कैसे. करेगा? तो फिर बाद में मैंने भी कहा कि. अरे सर मेक वेकअप से कुछ हो जाएगा। पर. उतना मेकअप नहीं हुआ था क्योंकि नीरज सर. वैसा नहीं चाहते थे। तो कहां के हैं वगैरह. वगैरह दो बार उनसे मुलाकात हुई थी। बाकी. जो उनके दोनों जो परम मित्र हैं परम भैया. और चित्तू भैया उनसे कभी-कभी बातचीत होती. रहती है। परम परम भैया अभी भी वैसे ही. हैं। रांची में रहते हैं। चित्तू भैया भी.
वैसे ही हैं। चित्तू जो उनके साथ जो आलोक. पांड्या ने किया था पर चितरंजन उनका. चित्तू भैया से बात हुई थी। उन्होंने. रक्तांचल देखी बहुत सारा प्यार दिया। बॉस. ने दिया तो अगर 10 सालों में वो रिश्ता. अभी तक कायम है तो मैं तो बहुत उनको. धन्यवाद देता हूं। अच्छा आदमी में ओरा. शुरू से होता है या जब बड़े बन जाए तो ओरा. बन जाता है? जैसे धोनी को लेकर लोग कहते. हैं कि धोनी में एक ओरा है। आते हैं महफिल. में अलग निगाहें चली जाती है। सलमान भाई. आते हैं लोग कहते हैं ओरा है। तो ये ओरा. जो होता है ये बचपन से होता है या जब आप. सफल हो जाते हो तो लोग आपके अंदर ओरा.
देखने लगते हैं। लोगों का पता नहीं है सर।. लेकिन मैं अपने बारे में कह सकता हूं कि. जो कॉलेज में तो मुझे लोग शायद देखते भी. नहीं होंगे। धीरे-धीरे करके अपने ऊपर काम. किया। ओरा कब बना नहीं बना मुझे नहीं पता।. लेकिन अगर ऋतम श्रीवास्तव ने जो डायरेक्टर. है रक्तांचल के उन्होंने कहा कि ब्रो वो. ब्रो वाला बात चलता है कि ब्रो द वे यू. वॉकिंग टू द रूम आई सॉ माय विजय सिंह इन. यू तो वो एक ओरा बना होगा और वो जिंदगी. आपको सिखाती है मेरे ख्याल से मुझे ऐसा. लगता है कि संघर्ष संघर्ष और कहीं भी.
लेकिन आपका कॉन्फिडेंस नहीं शेक करता है. वो ओरा बनाता है आपका. जैसे धोनी भी यही कहानी होगी. धोनी की भी यही कहानी होगी. एंड आई एम श्योर जो धोनी कर रहेगे आप लोग. तो यह बड़ा इंस्पिरेशन भी दे रहा होगा कि. यहां से निकल के एक आदमी अगर वहां पहुंच. गया. बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा वहां की कहानी और. मिट्टी से निकली हुई कहानी मिट्टी से. निकले हुए जुड़े हुए लोग और आज भी अगर आप. देखें तो उनके दोस्त वही हैं. हम. उनके दोस्त वही हैं और सबसे कमाल की बात. है कि दोस्त हैं और सबको साथ लेके चलते. हैं वो दोस्ती वही होती है ना.
बट ये भी बड़ी बात है भाई. बहुत बड़ी बात है इतने बड़े हो जाने के. बाद आपके दोस्त बदल जाते हैं आपका पता बदल. जाता है. हां मतलब. आप जेल नहीं कर पाते उनमें आपका थॉट. प्रोसेस चेंज हो जाता है।. लेकिन आज भी तो बड़ा ही हतप करने वाली. सीखने वाली चीज है ये. धोनी से।. बिल्कुल बिल्कुल दोस्त वही है।. जैसे पंकज त्रिपाठी का हमने इंटरव्यू किया. तो उन्होंने हमसे कहा कि अब जब मैं गांव. जाता हूं तो मेरे को नहीं समझ में आता. क्योंकि मुंबई रहा तो मैं खुल गया।. बिल्कुल बिल्कुल।. तो अब माइंडसेट चेंज हो गया मेरा उनका।.
धोनी ने तो पूरी दुनिया देखी है।. बिल्कुल।. लेकिन आखिर वही रांची वहीं रह वहीं रहते. हैं। कहीं भी रह सकते हैं वो लेकिन उनको. वहां मजा आता है। और वही दोस्त दो किसी. दोस्त के बल्ला बै बैट पे लगवा लिए और. तुम्हारा इस आईपीएल तुम्हारा प्रमोशन कर. देते हैं।. हां हां और वो बहुत दिलदार आदमी है। वो. इतनी चीजें करते हैं जो दुनिया को पता भी. नहीं है। इतनी चीजें करते होंगे वो अपने. जीवन में जिससे लोगों का भला होता होगा।. सुशांत सिंह राजपूत के बारे में कुछ बताओ. क्योंकि सुशांत अब इस दुनिया में नहीं है. और.
मतलब मैं इस कहानी को समराइज नहीं कर. पाता। सुशांत के जाने के बाद लोगों ने. सुशांत का जिक्र बहुत किया।. ये पॉलिटिकली सुशांत को बेचा गया या. सुशांत से वाकई में इतना इमोशनल कनेक्शन. था? कनेक्शन तो था सर। कनेक्शन इसलिए था. क्योंकि उनकी कहानी वैसी थी। पटना से. निकला हुआ एक आदमी सबसे इंटेलिजेंट आदमी।.
इतने बड़े एग्जाम को क्लियर करता है, पढ़ाई करता है। आप ही की तरह जो आपने कहा. बीटेक छोड़ के बाद आपने कहा नहीं यह नहीं. करना। थर्ड ईयर में छोड़ देता है। तो. कहानी कहीं ना कहीं उस छोटे शहर के किसी. इंसान की होती है जो हमने एक एक सपना देखा. है और जाके वहां पे इतना सक्सेस मिलता है।. इतनी सफलता मिलती है। तो आदमी का. एक्सपिरेशन बढ़ जाता है। मैं खुद देखता था. कि अरे यार कितना बढ़िया काम। कितना अच्छा. काम। जब मैं उनको जानता नहीं था। ऐसे. रूबरू नहीं हुआ था। जब हम मिले तो मिलने. के बाद फिर हमारे कुछ कॉमन कनेक्शन निकले।.
तो हम बोले कि वो भैया को जानते हो। अब वो. लहजा आ जाता है तो तुम भी जानते हो। बोले. हां यार रुको ना बाद एक बार बोले थे कभी. तुम जाओगे तो बोलना कि ये फोन आया था. इनका। तो हम फोन लगा के दिए उनको। फिर वो. शुरू हो गए।. और वैसे ही शुरू हुए जैसा जब वो पटना में. रहते थे स्कूल में जब वो कभी मिलते होंगे. उस भैया से एग्जैक्टली वैसे ही थे। कोई. बदला नहीं था। तो मेरे पास तो इतनी. अच्छी-अच्छी मेमोरीज हैं कि जब लोग कहते.
हैं मैं अपने हिसाब से कह सकता हूं कि. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. वो इंसान जितने दिलों को छुआ है इसी वजह. से उस इंसान को आज भी इतना याद किया जाता. है।. और वो इंसान सिर्फ ये नहीं कि बिहार के. लोग याद करते हैं। साउथ के लोग हैं। उस. कहानी को साउथ के लोग कितनी बार धोनी देख. चुके हैं। कभी मैं अगर गया भी हूं कभी कुछ. साउथ के लोग मिले भी हैं। वो भी कहते हैं. अन्ना दैट हेलीकॉप्टर्स आउट आई हैव सीन द. फिल्म मेनी एट टाइम्स। कल मुझे एक 9 साल.
का बच्चा है। अब 9 साल के बच्चे धोनी को. आए हुए 10 साल होने को आए हैं। 9 साल का. बच्चा है। तो वो मुझे एक वीडियो कॉल भी है. मेरे पास। वो वीडियो भेजा उन्होंने हमारे. एक भाई साहब हैं उन्होंने।. अरे अंकल आपका तो अब अंकल तो हो ही चुके।. अंकल आपका तो फिल्म हम 100 बार देखे हैं. धोनी। अब सोचिए तो कैसे धोनी देखी होगी? उस इंसान से आज का बच्चा भी रिलेट करता. है।. बड़े-बूढ़े तो छोड़िए। अगर बच्चा रिलेट कर. रहा है 10 साल का उनको गए हुए इतने साल हो. गए।. जब सुशांत की खबर आई थी आप क्या कह रहे. थे?
मैं घर पे था कोविड में और मैं दो दिन तक. मैं सन्नाटे में था क्योंकि उसके ठीक कुछ. दिनों पहले रक्तांचल सीजन वन आई थी। मैंने. उनको मैसेज किया था कि भवा भवा कह के ही. बुलाता था मैं कि भवा रक्तांचल सीजन 3 सीज़. वन आ रहा है। तो जरा देख के बताना भवा तुम. कैसा लगा। उनका रिप्लाई नहीं आया था। पर. मैं रिप्लाई के इंतजार में रह गया और रह. गया।. अफसोस बहुत हुआ था।.
पूरे देश को बहुत दुख था। मैंने कभी बात. नहीं की है और मैं कभी क्योंकि एक ऐसा एक. टॉपिक है हमारे लिए मेरा दिल जहर हो जाता. है। मैं बिल्कुल टूट जाता हूं यह सोच के. कि यार वो इंसान. मतलब कैसे हो गया ये? क्यों हुआ यह? एक. बार कह देता।. किसी से भी कह देता. पर मेबी जब उनकी आप कह रहे हैं कि उनकी. दीदी आई थी जब तो जब वो हम लोग तो बहुत. दूर की बात थे शायद उनको भी समझ में नहीं.
आया होगा कुछ चल रहा था अंदर और अंदर का. चलना बहुत ही हिला देने वाला होता है मुझे. लगता है कि सबके एक दो दोस्त ऐसे होने. चाहिए चाहे आप कितने भी ऊपर जाओ या नीचे. जाओ उनको पकड़ के रखो यार मन करे तो बोल. दो कि भाई करोड़ों रुपैया है लेकिन मैं. टूट रहा हूं अंदर से आदमी कह नहीं पाता।. कह नहीं पाता। हालांकि सुशांत केस में. बड़ी लेयर्स है। मैं कोई लाइन कह के. कंट्रोवर्सी नहीं क्रिएट करूंगा क्योंकि. उनके फैंस का भी मानना है कि इट वास नॉट. नेचुरल डेथ। उनकी दीदी भी दुनिया के एक.
अलग-अलग कोनों में जाती हैं। बहुत सारे. मोंग से मिलती हैं। बहुत सारे ऐसे लोगों. से मिलती हैं।. संवाद होते हैं उनके।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तो उनका एक बिलीफ है और कानून की अपनी. भाषा है। मैं तीनों का सम्मान करता हूं।. मैं उसमें टिप्पणी नहीं करूंगा। बट. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. मैंने लोगों को कमजोर होते हुए देखा है।. अगर मैं सुशांत से आगे भी देखूं अंदर से. कमजोर इंसान. वो बहुत अलग पीड़ा होती है। और सबसे बड़ी. समस्या इंसानों में होती है कि जैसे-जैसे. आप सक्सेसफुल हो जाते हैं आप संकुचित हो.
जाते हैं।. दायरा आपका कम होता है।. एक्सप्रेसिव नहीं हो पाते। कहानी वही ना. हमारे मर्दों को रोना नहीं सिखाया गया। हम. डरते हैं लोग जज कर लेंगे। हम रोएंगे तो. लोग कहेंगे कमजोर हो तुम।. बहुत कम मर्द होते हैं नीलेश मिश्रा की. तरह जो कह देते हैं कि मैं कमजोर होने से. नहीं डरता। मुझे सख्त होने का कोई शौक. नहीं है। इसलिए मैं भी डरता हूं। आई कांट. एक्सप्रेस इफ देयर आर समथिंग गोइंग इनसाइड. मी।. हालांकि आई एम मेंटली टफ नाउ। आई नो हाउ. टू हैंडल मसेल्फ। आई नो हाउ टू मूव ऑन। आई.
नो हाउ टू फेस दिस। मेरा ईश्वर से जुड़ाव. थोड़ा अच्छा है। हम मुझे लगता है आप ईश्वर. से कनेक्टेड होते हैं तो मेरा तो भोलेनाथ. हेल्प कर देते हैं।. सही यहां भी वही है।. लेकिन जो लोग ईश्वर से शायद कनेक्टेड. थोड़े कम हो जाते हैं। मुझे लगता है और. विचार ज्यादा अंदर आते हैं। बड़ी मुश्किल. होती होगी। वहीं से शायद ये डिप्रेशन, ए्जायटी या मेंटल इश्यूज, मेंटल हेल्थ. जबकि वो ईश्वर से इतने कनेक्टेड थे भी. बहुत ज्यादा।. वो कनेक्टेड थे।. बहुत ज्यादा। वो उनके भजन के आप वीडियोस. हां मैंने देखे हैं बहुत सारे वीडियोस।. देख सकते हैं। तो कहना बड़ा मुश्किल है कि.
इसके अंदर क्या चलता है। लेकिन. मुझे लगता है कि दोस्त होने चाहिए। एक ही. दोस्त. जितनी थ्योरी आई थी उनको लेके. पता नहीं सर मतलब. बहुत सारी थ्योरी है। हर आदमी कुछ ना कुछ. कर रहा था। हर आदमी कुछ ना कुछ बेच रहा. था।. हां मतलब इसीलिए मैंने पूछा। आपको लगता है. सुशांत का इस्तेमाल किया गया उनके डेथ के. बाद अपनी दुकान चलाने के लिए? हर आदमी ने अपने तरीके से उनको उस चीज को. सच क्या था वो किसी को नहीं पता। लेकिन सच. तक पहुंचतेपहुंचते नैरेटिव बहुत बन जाते. हैं। मुझे लगता है कि थोड़ी संवेदनशीलता.
दिखानी चाहिए थी। हम वो बहुत जरूरी था। एक. इंसान गया है। एक ऐसा इंसान गया है जिसने. दुनिया को इतना प्रेम दिया है। जिसने अपने. काम के माध्यम से लोगों के सपनों को बताया. है कि सपने साकार हो सकते हैं। थोड़ी. संवेदनशीलता और वैसे भी समाज में भी होनी. चाहिए एक दूसरे के प्रति जो आजकल नहीं है. शायद। पर क्या हिंदुस्तान में लोग मृत्यु. को सेलिब्रेट करते ज्यादा हैं? मतलब आप जी. रहे हैं। आप कैसे भी हैं? आपके बारे में. चर्चा नहीं होगी। यह बहुत ही मतलब मैं.
हारश क्वेश्चन पूछ रहा हूं। सुशांत सिंह. राजपूत और जुबिन गर्ग. सिद्धू मूसेवाला ये कुछ घटनाएं ऐसी हैं. जिसको देखकर मुझे लगता है कि. जितना प्यार इनके जाने के बाद उमड़ा पूरे. देश से. क्या वो. मृत्यु के बाद हम ज्यादा समर्पित हो ये सब. महान लोग हैं। सबने बहुत अच्छा काम किया।. मैं सबका जुबिन घर का बहुत बड़ा फैन हूं. मैं। सिद्धू मूसेवाला के बाद में मैंने.
बहुत सारे गाने सुने। अनफॉर्चुनेटली उसके. पहले मेरा उनसे इतना राब्ता नहीं था. क्योंकि मैं आई वास मोर इनू हिंदू. म्यूजिक।. जी. और सुशांत कमाल के एक्टर थे। बट जिस तरह. से महीनों तक सालों तक इनको चर्चा की गई।. मैंने वो चर्चाएं लता मंगेशकर के जाने पर. नहीं देखी। मैंने वो चर्चा दिलीप कुमार के. जाने पर नहीं देखी।. [गला साफ़ करने की आवाज़][नाक से की जाने वाली आवाज़]. मैंने वो चर्चा और भी एसपी बाला. सुब्रमण्यम होंगे जिनको मैंने अपने सामने. जाते देखा जो बहुत बड़े-बड़े लेजेंड्स रहे. हैं। अलग-अलग फील्ड में नहीं देखी। तो.
क्या जो लोग जल्दी चले जाते हैं. उनके बारे में हम ज्यादा बात करना पसंद. करते हैं या फिर वही कहानी कि जो नहीं हुआ. वो संभावनाओं से भरा पड़ा होता है और. संभावनाओं पर चर्चा ज्यादा होती है। यह. शायद उन लोगों के लिए आप सोचते हैं जिनसे. आपका जुड़ाव होता है या जो आपके सपनों को. एक एक तामीर देते हैं या फिर सपनों को आगे. बढ़ाते हैं। बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं. जो चले जाते हैं। कोई किसी के बारे में. बात नहीं करता।. इंसान को इंसान से हमेशा लगाव रहना चाहिए।.
चाहे इंसान बड़ा हो या छोटा हो। मेरा ऐसा. मानना है। मैं अगर अभी भी ऑटो में बैठता. हूं, मैं कैब में बैठता हूं। मैं कोशिश. यही करता हूं कि सामने वाले से पूछूं कि. भाई नाम क्या है आपका? वो कहता है फलाना. नाम है। कहां के हैं? वो कहता है यहां के. हैं। एक बार बात होती है। वो भी खुश मैं. भी खुश।. मेरे जाने के बाद अगर लोग मुझे प्रेम देते. हैं या फिर यह बोलेंगे मैं ऐसे. हाइपोथेटिकली कह रहा हूं कि अरे वो तो. बहुत अच्छा आदमी था। बहुत बढ़िया। तो समाज. को देखने की जरूरत है। तुम्हारी जिंदगी. खुद कल सुबह तुम रहोगे या नहीं रहोगे.
तुम्हें पता नहीं है।. मैंने यह सवाल इसलिए पूछा क्योंकि अनु. कपूर ने हमारे पॉडकास्ट में कहा था कि अगर. मैं आज मर जाऊं तो मैं महान बन जाऊंगा।. जीते जी लोग सेलिब्रेट नहीं करते हैं।. मरने के बाद महान बनाते हैं। पर मरने के. बाद एक बहुत कमाल की चीज है। दुनिया का सच. है सर ये। अगर मेरी लाश यहां पड़ी हो। इस. रूम में जितने लोग हैं सब बोलेंगे अरे लाश. को यहां से वहां रख दो। कोई यह नहीं कहेगा. क्रांति को उठा के वहां रख दो। यह दुनिया. का सबसे बड़ा सच है। मैं खत्म हो जाऊं अभी.
के अभी मेरी सांस बंद हो जाए। सब लोग. आएंगे लेकिन कहेंगे अरे इस बॉडी को यहां. से वहां रख दो। वो नाम खत्म, वो पहचान. खत्म, वो इंसान खत्म।. जिसके लिए हम मर मिटे थे।. जिसके लिए हम मर मिटे थे।. छल कपट सब कुछ।. लोभ, लालच।. अगेन हमारे पिताजी एक बड़ी अच्छी बात कहते. थे। कीर्ति, कामिनी और कंचन से कौन बचा. है? कीर्ति, कामिनी और कंचन से कौन बचा है? इन. तीन कों में पूरी दुनिया तबाह है। सर आप.
देखिए बात सही है।. कीर्ति माने यश, कामिनी माने काम, कंचन सोना, कंचन माने लक्ष्मी. लक्ष्मी ककार मतलब जो आपके दुनिया को हिला. के रख देते हैं।. हम. जो एक तरह से कह सकते हैं कि एक. व्याधि की तरह होते हैं। तो इन तीन ककारों. में कोई बचा नहीं है। पूरे पूरी दुनिया. इसी में है।. आपने बाबा रामदेव के ऊपर पिक्चर शुरू की. थी। मैंने सर वेब सीरीज एक की थी मैंने।. बाबा रामदेव ने खुद टेस्ट लिया था आपका।. जी बिलकुल। उसके वीडियोस भी हैं।.
छत्रसाल स्टेडियम. जी वहां पे लांच हुआ था।. हजारों लोगों के सामने देश के कई मंत्री. खड़े थे।. जी बिल्कुल।. और फिर एक दिन पिक्चर बंद हो जाती है। एक. दिन पिक्चर बंद हो जाती है।. और आपको लगता है कि बहुत सारे ख्वाब जो. मुकम्मल हो सकते थे नहीं हो पाते।. नहीं हो पाते।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. तकलीफ होती है जब कोई कहावत है ना हाथ आया. मुंह को ना लगा तकलीफ तो होगी तकलीफ बहुत. होगी और होती भी है तकलीफ क्योंकि पर.
मुद्दा फिर वही है कि आपके हाथ में क्या. था आपके हाथ में ये था कि एक सिलेक्शन हुआ. आपका रिजेक्शन नहीं हुआ. दो बार हुआ था शायद एक ही बार हुआ था. ऑडिशन उसका दो बार हुआ था. हां दो बार हुआ था एकदम [हंसी]. सर [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. और कमाल. नहीं नहीं बिल्कुल अरे बिल्कुल कमाल की. बात ये है कि मैं उस टाइम पे डिस्कवरी जीत. का एक दूसरा शो कर रहा था जो हॉकी कोच हैं. हमारे जिनकी कहानी दुनिया को पता होनी.
चाहिए बिहार के हैं उनका नाम है हरेंद्र. सिंह पता नहीं आपने सुना है या नहीं सुना. है वो इंडियन वुमेन हॉकी टीम के कोच वो एक. ऐसे इंसान थे कमाल के जो घरों में जा के. प्लेयर ढूंढ के लाते थे कि अरे इसका यह. अच्छा है इसको लेके अपने पैसे खर्च करके. उनकी कहानी कहानी थी तब मैं उनकी बायोपिक. कर रहा था। मुझे उस बायोपिक को करने में. बहुत मजा आ रहा था क्योंकि एक रियल स्टोरी. बहुत दिनों के बाद और एक काम मिला था. मुझे। सबसे बड़ी बात है कि कितने अगर आप.
देखें इतने सालों में आप दिन निकाल दें. लगभग 6000 दिन होंगे। अगर आपने 18 20 साल. कहा है तो आप उसको काउंट कर लें 365 से. कितने दिन होंगे। उसमें मैंने कितना काम. किया होगा? उतने दिन जो मैंने काम नहीं. किया उसमें मैंने कैसे अपने आप को रखा भी. बहुत कमाल की बात हो सकती है। पर कमिंग. बैक टू दिस टॉपिक। तो वो कहानी कर रहा था।. मैं पुणे में था उस टाइम पे। ये शूटिंग. करते हुए वहां पे बालेवाड़ी स्टेडियम है।. वहां पे मैं कर रहा था तो फोन आया कि भाई. ऐसे-ऐसे ऑडिशन एक ऑडिशन हुआ। अब उसमें वो. हिंदी दो-दो पन्ने की क्लिष्ट हिंदी जो है.
वो आपको बोलनी है। तो जो हमारे डायरेक्टर. थे उस टाइम पे सतीश उनको मैंने कहा कि सर. यह वाला ऑडिशन मेरा कर दो यार। तो. [नाक से की जाने वाली आवाज़] उन्होंने कहा. सर आइए मैं कर देता हूं। तो रात भर 4 घंटे. का ऑडिशन हमने भेजा। तो चैनल जो है चैनल. को लगा कि यार शायद ठीक है इसको वापस. बुलाते हैं जब यह आता है तब इसे एक बार. पूरे गेटअप के साथ इसका ऑडिशन करेंगे वो. ऑडिशन भी हुआ लोगों को पसंद आया फिर मैं. स्वामी रामदेव से मिलने गया उनके पतंजलि. भी कमाल है जब मैं पहली बार गया पतंजलि तो.
मैं देख के अचंभित था कि यार यह मतलब. पतंजलि विश्वविद्यालय से लेकर सब कुछ जो. चीजें वहां मिलती हैं बनती हैं सब कुछ. वहां देखा फिर जब स्वामी जी से मिलने का. स्वामी जी सुबह मिलते हैं। उन्होंने पूरी. टीम को राइटर जो भी प्रोड्यूसर डायरेक्टर. जो भी थे सबको उन्होंने 5:30 बुलाया था. ठंड के महीने में यह नवंबर दिसंबर का. महीना था और गया प्राणायाम होता है. सुबह जब उल्टे चलते हैं प्राणायाम होता है. ये सारी चीजें होती. के सामने. अब नहीं वो उनके घर पे गया था मैं. अच्छा. उनका एक वहां पे बुर्ज जैसा एक पूरा का.
पूरा वो सारी चीजें वहां पे हैं। तो तीन. सिक्योरिटी के लेवल्स थे उसको क्रॉस करने. के बाद फिर स्वामी जी से मिले थे तो. उन्होंने पहली बार जब मुझे देखा बोला. यह कैसे करेगा योग आता है तुझे योग आता है. योगा नहीं कहते योग कहते हैं योग आता है. तुझे अब उसके पहले योग उतना ध्यान दिया. नहीं था प्राणायाम वगैरह करते थे लेकिन. मुझे एज स्टैंड भी नहीं आता था कभी ध्यान. ही नहीं दिया जिम वाले इंसान थे भागने. वाले इंसान थे तो मैंने कहा नहीं स्वामी. जी तो मैंने बोला चल मैं सिखाता हूं तुझे. फिर तीन-चार दिन उन्होंने बड़े अच्छे से.
उसके वीडियोस भी हैं कैसे होता होता है. क्या होता है कौन सा आसन हलासन बकासन ये. सारी चीजें उसके बाद नाश्ता आया था नाश्ते. में एक बड़ी सुंदर सी कटोरी थी जिसमें. खिचड़ी होती थी और उसके ऊपर एक पूरा घी एक. लेयर घी जो इतनी मोटी घी का आप परत देख. सकते हैं और वो उतना स्वादिष्ट मैंने. खिचड़ी कभी नहीं खाई थी और उसके बाद गोंद. के लड्डू आए थे तीन दिन हमने ये खाया था. उसके बाद फिर मैं वापस आया तो मेरा रूटीन. उस टाइम दिनचर्या हमारी ये होती थी कि मैं. 4 बजे उठता था 4:30 में योग करता था एक.
घंटे सीखता था टीचर से बॉम्बे में और 4:30. से 5:30 6:00 बजे मैं फिल्म सिटी पहुंच. जाता था। 7:00 बजे शूटिंग चालू 4 महीने तो. पता ही नहीं चले लेकिन तब शो बंद हो गया।. आपको अचानक से इतना बिजी रहने की आदत है।. शो बंद अचानक से आप खाली हो गए। जिस शो पे. आपको लगा था यह वाला कहानी और एक बार फिर. से आएगा उससे कुछ बात बनेगी। उसका नाम था. कोच सर। चैनल बंद वो भी बंद। अब मैं फिर.
से खा ली। अब क्या करूं यार? अब क्या करूं. यार? दुखी था। डिप्रेशन नहीं कहूंगा उसको।. लेकिन फिर मैं घर चला गया। दो खेती करने. एक दो महीने मां के पास चला गया। खेती. खेती करने नहीं हमारे गांव में मेरा गांव. बेगूसराय में है। रुदौली गांव है। बछवाड़ा. के अंतर्गत आता है। खेती वहां पे हमारी. उतनी ज्यादा नहीं है। क्योंकि हमारे. दादाजी गरीब किसान थे। तो मैं मां के पास. गया और कुछ नहीं। मैं बस दो महीने जाके रह. गया मां के पास। खाया पिया जो भी वहां पर. मां से बातें वाते की तो दिमाग से निकालना. बहुत जरूरी था। उसी बीच में मेरे पास एक.
डॉक्यूमेंट्री आई थी ट्रे्स ऑफ गेंजेस. गंगोत्री से लेके और हरिद्वार तक की कहानी. थी जहां-जहां प्रयाग हैं करण प्रयाग. रुद्रप्रयाग नंदप्रयाग तो इस तरह की कहानी. तो मेरा दिमाग वहां से भटका पाया था। नहीं. तो बहुत टफ फेस था। आई विश की वो पर उसे. भी सीखा कि धीरे-धीरे रे मना धीरे सब कुछ. होए। माली सीचे 100 घड़ा ऋतु आए फल होए।. तो भैया कहते हैं कि बड़ी तकलीफ होती है. जब आप योग्य हो लोग आपकी योग्यता ना.
पहचाने।. तकलीफ सबको ही होती होगी। आई एम श्योर. हमको तो होती ही होती है। लेकिन मेरे. ख्याल से जिन लोगों की योग्यता नहीं. पहचानी गई होगी उनको तकलीफ होती है और. तकलीफ होना स्वाभाविक है। आप एक इंसान. हैं।. तो जब आप काम नहीं कर पा रहे हैं।. जी. काम नहीं है आपके पास। आप बैठे हैं सबको. फोन कर चुके हैं कि भैया कोई काम होगा बता. देना। और कोई काम नहीं है। और पहला हफ्ता. बीता, दूसरा हफ्ता बीता, तीसरा हफ्ता. बीता, चार हफ्ते बीते, दो महीना बीता।. एक कलाकार की क्या मानसिक दशा होती है उस. वक्त? जिसको लगता है कि मैं योग्य हूं।.
बाकियों का तो मैं नहीं कह सकता लेकिन. मेरी मानसिक दशा यही थी कि मुझे छोड़ना. नहीं है। क्योंकि हमारे यहां कहावत भी है. कि वो जो फिल्में आई थी माउंटेन मैन में. कि जब तक तोड़ेंगे. [नाक से की जाने वाली आवाज़] नहीं तब तक. छोड़ेंगे नहीं। तो एक कहीं ना कहीं एक वो. चीज और बिहारी कभी गिव अप नहीं करते। बहुत. जल्दी नहीं करते। भले मैं खाली रहा हूं. लेकिन अपने आप को मैंने हमेशा इंगेज रखा।. कुछ ना कुछ अपने ऊपर वर्कशॉप कर लिया। कोई. एक्टिंग वर्कशॉप कर ली। कहीं कभी. पोंडीचेरी चला गया और दिनचर्या मैंने.
मेंटेन करके रखी।. सुबह उठना अपने नित्य कर्मों से निवृत. होना। उसके बाद फिर आप योग करें। आप जिम. जाएं आप जो भी करें। 2:00 बजे तक अपने आप. को मैं बिजी रखता था। 2:00 बजे के बाद लंच. करने के बाद अब मुझे 4 घंटे क्या करना है. इस बारे में सोचता था कहीं चला गया. दोस्तों ने संभाल लिया तकलीफ होती है. लेकिन ये है कि आपको यहां से बहुत. स्ट्रांग रहने की जरूरत है अब आते हैं. रक्तांचल पर. जी. मिथिलांचल से निकल कर. रक्तांचल पर आते हैं. आयुष दो कप चाय करवा दो.
रक्तांचल. सीजन तीन अपना जलवा जलाल किए बहुत कम वेब. सीरीज होती है जिसमें तीन सीजन तक चला जाए. और एक ही किरदार जो है मुख्य भूमिका में. रह जाए। कुदरत ने बहुत कुछ छीना भी लेकिन. फिर दिया भी। तीन सीजन रक्तंचल का. जी. विजय सिंह. विजय सिंह. इतना क्यों अपना लगने लगा लोगों को? कुदरत ने सिखाया सर छीना नहीं। मैं नहीं. मानता कुदरत ने छीना। क्योंकि छीना होता.
तो दिया भी नहीं होता।. सिखाया। ये सब मैं अपने मैं ये मानता हूं. कि मेरे सीखने का एक प्रोसेस रहा है। इट्स. ऑल अबाउट द प्रोसेस कि उस प्रोसेस में आप. कैसे अपने आप को निखार पाते हैं और जब. विजय सिंह मुझे मिला तो पूरी शिद्दत से. मैंने मेहनत की। पूरी शिद्दत से काम किया. और विजय सिंह जिस तरह से निभा पाया मैं वो. शायद जनता के साथ वो कनेक्ट हो गया। 4. सालों के बाद सीजन 3 आया है। सीजन 2 के. बाद लेकिन 4 साल में तो पता नहीं दुनिया. कहां से कहां चली जाती है। सरकारें बदल. जाती हैं। लोगों को विजय सिंह याद रहा।.
लोगों को वसीम खान की दुश्मनी याद रही और. उसी वजह से लोगों को लगा कि यार इस बार. क्या होगा? मैंने इन सात सालों में जब कभी. मैं कहीं गया, गांव गया, कुछ भी मैंने. पोस्ट किया हो सबका एक ही सवाल होता था कि. अरे अब सीजन अगला सीजन कब आएगा? अगला सीजन. कब आएगा? तो ये लोगों का प्यार था और जब. बीच में शायद दो साल मर्जर चल रहा था. प्लेटफॉर्म्स का। उस वजह से नहीं बन पाया. था। लेकिन लगा होगा प्लेटफार्म को कि भाई. ये बहुत अच्छा फ्रेंचाइज़ है। तो इसी वजह. से उन्होंने इस चीज को आगे बढ़ाया। एंड आई. एम वेरी थैंकफुल टू देम कि उनको ऐसा लगा.
हो और जनता को इतना जनता ने बहुत प्यार. दिया है।. तो ये रक्तंचल को जो प्यार मिला है इसमें. आप लोग की अदायगी ही है या मुख्तार अंसारी. की जो दुश्मनी थी अभय सिंह वाली. उसका भी आपको लाभ मिल गया क्योंकि उस पूरे. इलाके में यूपी बिहार में वो दुश्मनी बड़ी. वायरल रही है। कृष्णंद राय हत्याकांड से. लेकर मुन्ना बजरंगी कहानियां वो इतनी. घर-घर चर्चित रही हैं कि जब वह पर्दे पर. उतार कर पहले दो सीजन में हूबहू दिख रही.
थी तो आदमी बड़ा रिलेट कर गया ये मानते हो. आप या मानते हो कि नहीं केवल वेब सीरीज से. कमाल है. सर ये काल्पनिक सत्य घटनाओं से प्रेरित है. काल्पनिक कहानी है लेकिन. काल्पनिक तो हो ही गई वो तो एंड काल्पनिक. हो गया. लेकिन. लेकिन क्योंकि जो थोड़ा सा एक आदमी फील कर. लेता है। हां, वह इंसान के फील करने के. ऊपर कुछ नहीं है कि इंसान कुछ भी फील तो. लोगों ने बहुत कुछ सोचा कि अरे यह यहां से. कैरेक्टर आया है, यह यहां से आया है। पर. हमने कभी भी और बतौर कलाकार हमसे यह पूछा. जाए तो मैं यही कहूंगा कि शायद ये.
प्लेटफार्म और जो भी हमारे डायरेक्टर. राइटर हैं उनकी ये चीज होगी कि हम एक ऐसी. कहानी लेके आते हैं जहां पे हम दो. बाहुबलियों की दुश्मनी दिखा सकें। अब दो. बाहुबल की दुश्मनीियां कहीं भी हो सकती. है। लेकिन हमारे पूर्वांचल में ज्यादा. होती है। तो उस टाइम पे शायद यह रहा होगा. तो लोगों ने उसे रिलेट किया होगा। पर यह. कहानी अलग थी। लोग अलग थे। दौर वही था. इसलिए शायद लोगों ने रिलेट किया होगा।. हम हम जैसे तो रिलेट कर रहे थे। मेरा आधा. इंटरेस्ट जो रक्तंचल में पहली बार आया था।. जी उसी वजह से. मतलब मैंने MX प्लेयर जब पहली बार डाउनलोड. किया था तो रक्तंचल देखने के लिए किया था. क्योंकि दो चार उसमें वेब सीरीज बड़ी.
अच्छी-अच्छी आई थी।. भोकाल आई. जो रियल लाइफ जैसे भौकाल आई थी रक्तंचल आ. गई। ये रियल लाइफ के आसपास से गुजरती हुई. कहानियां थी जिन्हें डायरेक्टर ने अपने. वर्जन में पेश किया था।. उसमें कुछ बदलाव भी किए होंगे। बट फिर भी. काफी रिलेट कर पा रहा था मैं। इसलिए मुझे. मजा आ रहा था कि यार ये कहानी हमारे इलाके. की है। लाओ जरा देखते हैं क्या चल रहा है।. आप लोगों ने इन किरदारों के बारे में. स्टडी की थी जो या इन किरदारों को जानते. थे आप? मुख्तार अंसारी, अभय सिंह, कृष्ण. राय, मुन्ना बजरंगी।. नहीं सर नहीं मैंने फिल्म देखी थी। वो सफर.
एक फिल्म आई थी। शहर आई थी।. शहर इसकी आशा द्वारसी सर की फिल्म आई थी।. वो मैंने देखी थी। तो उससे कहीं-कहीं और. बिहार में रह चुका हूं। तो पता है कि भाई. कैसी चीजें होती हैं। और बचपन से ले अभी. तक कुछ लोगों से मिल भी चुका हूं। तो यह. मालूम था कि कैसे चीजें मेंटेन होती हैं. या कंट्रोल होती हैं। लेकिन कभी हमने इसके. लिए स्टडी नहीं की थी। किरदार को समझा था।. वर्कशॉप हुई थी। डायरेक्टर ने बताया था कि. उन्हें क्या चाहिए और हमने कोशिश वही की. कि हम उनको दे सकें।. आपके वसीम खान तो इस बार और चौड़े हो गए. थे।. हां। वो एक फिल्म कर रहे थे। बहुत कमाल के. इंसान हैं। निकिन धीर.
उनके पिताजी का बड़ा प्रशंसक रहा हूं मैं।. वो कर्ण बने थे।. महाभारत में और महाभारत के सारे किरदारों. में मेरा सबसे फेवरेट किरदार कर्ण का था।. तो जिस तरह से उन्होंने किया अमर कर दिया. उन्होंने। पंकज जी. जी बिल्कुल. तो पंकज जी का मैं बहुत बड़ा प्रशंसक रहा. और इनकी पत्नी जी को मैंने बताया था. कि मैं आपके ससुर जी का बहुत बड़ा फैन. हूं।. अच्छा. करण उन्होंने उसको जीवंत कर दिया था जिस. तरह से उन्होंने जिया था. भूतों ने भविष्यति वाली बात. हां ये भी बहुत तगड़े कलाकार हैं।. जहां-जहां इन्होंने रोल किया है वहांवहां. छा गए हैं। सलमान भाई के साथ कई फिल्मों.
में. और वसीम खान तो इस बार वो और एकदम मतलब. हां वो किसी फिल्म के लिए उन्होंने वो. किया था। मुझे बड़ा आश्चर्य लगा कि इतना. आसान हो जाता है। जैसे मेरे लिए पुट ऑन. करने के लिए मुझे बहुत मेहनत करनी पड़ती. है। उनको भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है। पर. वो वसीम खान इस बार दिखाना था वैसा ही कि. विजय सिंह को अगर आप देखें तो वो लैंकी. पतला दुबला आदमी है। मतलब शायद वसीम खान. कहां और विजय सिंह कहां? तो कभी भी फीस. फाइव में वो जीत नहीं पाएगा। अगर आप सीजन. भी देखेंगे तो उसमें सारा मेंटल गेम है।. लेकिन आखिर में तो आप मार दिए ना उनको।.
लेकिन वो जो देखा है आप तो फिर गलती से. आपने देखा होगा कैसे कुछ चीज़ें हुई कि. जिसकी वजह से वो नहीं तो अगर वो तो एक हाथ. से उठा के हमें नीचे फेंक दें। इतने तगड़े. इंसान हैं वो। तो विजय सिंह मार पाया. क्योंकि उसके हाथ में एक चाकू आ गया। और. गलती से वो लग गई नहीं तो फिर विजय सिंह. का उस दिन खात्मा था। पर ये जरूर है कि. उनके साथ काम करने में मजा बहुत आया।. हमारे सीन कम होते थे। सीजन वन में कभी. हमने बात नहीं की थी एक दूसरे से। पूरे. सीजन में कभी बातचीत नहीं की थी। हमारे. डायरेक्टर ने हमें कहा था कि दोनों दुश्मन. हैं। ना आप इनसे बात करेंगे ना यह आपसे. बात करेंगे। सीन भी कम थे लेकिन कभी भी.
अंदर जब भी होता था तो गुस्सा ही आता था।. इतना अंगार भर लिया था अपने अंदर। इतनी. ज्यादा जो है वो कह सकते हैं कि आक्रोशित. हो गया था क्योंकि विजय सिंह जीने लगा था. मेरे पिता को मारा है। मेरे साथ इसने ऐसा. किया है वैसा किया है। तो एक्चुअली में. कभी-कभी दिखने भी लगता था कि अरे यार इस. आदमी के साथ। पर वो सीजन वन था। धीरे-धीरे. करके मैच्योरिटी आई। धीरे-धीरे करके. किरदार और मैच्योर हुए। तो इस बार हमने. बहुत मजे से काम किया। बहुत मजे लिए इस. बार हमने। एक्शन होते ही हम लोग विजय वसीम.
बनते थे और एक्शन के बाद क्रांति और. निकेतन दो. किरदार और बड़ा वायरल हुआ। इसमें मुन्ना. बजरंगी का रोल जिसने निभाया है जो आपकी. तरफ आते हैं शूटर होते हैं. सनकी पांडे।. सनकी पांडे. विक्रम कोचर विक्रम. सनकी पांडे का रोल हमको बहुत तगड़ा लगा।. बहुत अच्छा रोल है। मैं हमेशा कहता हूं कि. सनकी पांडे को लोगों ने इसलिए इतना रिलेट. किया क्योंकि वो नंगा इश्क करते हैं। उनका. इश्क सीजन वन से ही नंगा रहा है। और जिस. तरह से वो करते भी हैं वो बहुत कमाल का. करते हैं। एनएसडी के कलाकार हैं वो।. कमाल के एक्टर हैं।. कमाल के एक्टर हैं।. मतलब अगर किसी किरदार को देख के आपका.
चप्पल उठाने का मन करे तो इसका मतलब उस. आदमी ने बहुत तगड़ा एक्टिंग किया।. बहुत तगड़ा काम किया है। और उस आदमी को. देख के हमको चिढ़न होने लगी थी बीच में।. [हंसी]. बहुत कमाल का काम किया। जिसको धूर्त आदमी. कहते हैं, वह उसके किरदार को उसने इतने. अच्छे से जिया है कि सनकी पांडे किर और. एंड होते तो किरदार काफी अच्छा भी आता है।. बट. व्हाट अ कैरेक्टर व्हाट अ आर्टिस्ट मैन? सुपर्ब है वो। मतलब इस बार जब वो सीन कर. भी रहा था मैं कि जब वो इस पाले में आते. हैं तो हम दोनों को मतलब समझ में नहीं आया. कि सीन करना कैसे है? क्योंकि इसके पहले. तक तो दोनों सीजन में दोनों दुश्मन थे.
यार। एक दूसरे को मारकाट के ऐसा वैसा तो. फिर एक मिनट के बाद हमें हंसी आ गई थी।. पहले शुरू के दो-तीन टेक में। अरे कैसे. करेंगे यार? पर ये है कि फिर एक्टर एक्टर. ही होता है जो. अच्छा लगा विजय सिंह ऐसे पीठ थपाई आपने. अपनी कि यार तीन सीजन हीरो बन के लीड बन. के हम गए भगवान सुने तो देर से सुने लेकिन. सुने. सर वो थपथपाने वाली बात तो कब की खत्म हो. जाती है वो अगर मैं ये चीज अगर मुझे 2025. में सक्सेस मिला होता तो शायद मैं कहता कि. अरे भैंस की पूंछ तुमने तो मतलब क्या काम. किया अब लगता है कि यार इसे और अच्छा करना.
है। इसे और बेहतर करना है।. बट अपेक्षाएं तो बढ़ती होंगी ना कि शायद. अब दरवाजे और बड़े खुल जाएं। उम्मीदें और. बड़ी हो जाएं। लोगों ने काम देखा हो।. बिल्कुल काम देखा हो और मुझे लगता है कि. काम पसंद आया है तो काम मिलना भी चाहिए।. कैसे फीडबैक आए अब तक? बहुत अच्छे आए हैं।. इंडस्ट्री से कैसे आए जो जरूरी है? जरूरी फीडबैक मेरे पास तो नहीं आए हैं. वैसे लेकिन लोगों के माध्यम से आए हैं कि. सबको काम बड़ा अच्छा लगा है। कई बार लोग. कहते भी हैं शायद कि रक्तांचल मैंने देखी. है। देखने के बाद भी नहीं कहते हैं शायद।. अब्सोलुटली फाइन।. एक तो बड़ी समस्या समाज में ये है कि लोग.
अपने लोग मुंह पे आके नहीं बोलते।. सबसे कम। आप कभी अपना Instagram खोलना जिन. लोगों को आप फॉलो करते हो सबसे कम लाइक्स. सुन के आते होंगे मैं कभी ध्यान ही नहीं. कभी चेक करना. नहीं आप कह रहे हो तो मैं जाके देखूंगा. जरूर. आप चेक करना आप चाहे 100 लोगों को फॉलो. करो चाहे हजार लोगों को फॉलो करते हो सबसे. कम उनके होंगे. ये कमाल की बात है ये. बड़ी अजब चीज है जिनसे नहीं मिले वो. अपनापन रख लेते हैं. जी.
और जो आपके अपने हैं आसपास है वो देख. लेंगे संकोच करेंगे अनलेस एंड अंटिल सारी. दुनिया कहने लगेगी हम हम. कि हर आदमी एकदम चार। अरे फिर तो वो गांधी. जी वाली बात कि पहले वो फास उड़ाएंगे. हसेंगे फिर आपका मजाक उड़ाएंगे और आखिर. में कहेंगे हमको पता है तुम तुम में कुछ. तो है।. बट रक्तांचल ने क्या बदला जिंदगी में? रक्तांचल ने यही बदला कि मैं. लोग मुझे विजय सिंह के नाम से जानते हैं, पहचानते हैं और कभी मैं अगर कहीं जाता हूं.
तो लोग कहते हैं कि अरे आप वही तो मैं. कहता हूं कि हां अगर कंफ्यूज होते हैं तो. मैं भी कहता हूं कि अरे वो आपने रक्तांचल. देखी होगी और मुझे ये कहने में कोई. शोभा नहीं होती क्योंकि अगर वो कंफ्यूज. हैं तो मुझे अच्छा लगता है लोग मुझसे आके. मिलते हैं। तो रक्तंचल ने बदला है कि लोग. अब बतौर कलाकार बतौर इंसान मुझसे बहुत. इत्तेफाक रखने लगे हैं। हम ये बदला है और. मुझे अच्छा लगता है। इस फिल्म में आपको. लीड रोल मिला। अब. क्या होता है कि कोई आदमी आपको लीड दे और. कई बार आपको साइड रोल ही देता रहे। नजरिए.
नजरिए में ये कैसे फर्क हो आता है? ये यहां तक आने में सारे इसके पहले जितने. भी काम किए सब छोटे-मोटे ही काम रहे. होंगे। इंसान वही था। कलाकार बदला हूं. क्योंकि अपने ऊपर काम करता रहा हूं। बतौर. जो कल था मैं आज नहीं होना चाहिए। अच्छा. होना चाहिए। तो लोगों का नजरिया है सर।. मेरा नजरिया खुद को लेके हमेशा से वही रहा. है कि मैं बॉम्बे आया हूं। अपने बूते पे. आया हूं। मां-बाप का आशीर्वाद है। ऊपर. वाले का आशीर्वाद है। होगा तो वही भोलेनाथ. जो आप कहते महादेव कराएंगे। देने वाला तो.
उसको भी तो भगवान ने दिया है। मुझे भी. भगवान देगा। जब मेरा समय आएगा तो देगा। और. अगर समय अगर ऊपर नीचे कुछ होता भी है तो. मेरी सीख है। मेरा प्रारब्ध है। जिसके लिए. मैं कुछ नहीं कर सकता। मेरे हाथ में एक ही. चीज है। कर्म करते रहो। पिताजी ने यही. सिखाया है। कर्म करते रहना है। कर्म नहीं. छोड़ना। वही मैं करता रहा हूं।. हालांकि मैंने संकल्प देखे वहां मुझे आप. अच्छे लगे।. अरे ये थैंक यू सो मच। ये बहुत कम लोगों. ने ये बात मतलब देखी है क्योंकि मैं मेरी. एंट्री चौथे एपिसोड से होती है।. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. और बहुत मजा आया था काम करने में। मेरे.
लिए वो सपने जैसा था। हर बिहार का कलाकार. जो एक बार मुंबई जाता है तो उसके लिए. प्रकाश झा सर के साथ काम करना एक सपने. जैसा होता है। तो मैं भी गया था। गंगाजल. आरक्षण अपहरण सॉरी अपहरण. अपहरण मृत्युज बचपन में हमने वीडियो. वीसीपी वगैरह में देखी होगी तब से लेके. आपके पास अब एक फोन कॉल आता है कि भाई. आपसे मिलना चाहते हैं तो आप पहले क्योंकि. 15 साल से उस दरवाजे के उस तरफ मैं जा. नहीं पाया था इन द सेंस कि उनसे मिल नहीं. पाया था लोग वहां मिलते थे जब कास्टिंग.
होगी तब पर थैंक्स टू दिशा झा दिशा झा जो. उनकी जो शो की प्रोड्यूसर है उनकी बेटी. हैं तो उनका फोन आया था कि क्रांति जी. आपसे एक बार सर मिलना चाहते हैं मैंने. आप सही बोल रही हैं क्या सर मुझसे मिलना. चाहते हैं क्योंकि मेरे लिए वो सपने जैसा. था ना बच्चे का सपना पूरा हो रहा है अरे. बच्चे को वो टॉफी है वो टॉय मिल रही है तो. मैंने कहा कब मैं गया सर के मैंने पैर छुए. प्रणाम किया सर ने देखा सर ने कहा ओ तो. कस्तूरी तुमको बोला गया है ना हम बोले हां. सर कस्तूरी और तो क्या होता है कि बिहार.
से या यूपी से जो लोग आते हैं ना तो सामने. कोई सीनियर बैठा हो तो आपका बॉडी लैंग्वेज. ऐसे वाला हो जाता है चेंज हो जाते हैं आप. कि अरे पता नहीं क्योंकि आपके आपको सामने. गुरु दिखता है आपको सामने पिता दिखता आपको. सामने बड़ा भाई दिखता है तो आपके सडनली आप. ऐसे नहीं बैठते तो मैं आज तक जब भी उनसे. मिला हूं तो मैं ऐसे ही मिला हूं क्योंकि. वो अपने आप ही एक बॉडी लैंग्वेज के अंदर. है जो मैं कुछ कर नहीं सकता उसका वो. सम्मान वो सम्मान जो हमें हमारे माता-पिता. ने सिखाया है. हम. तो मेरे लिए सपने जैसा था और पहला सीन जो. था वो बड़ा ही खतरनाक सीन था जो उसको. कस्तूरी को जब मा साहब सजा देते हैं पनिश.
करते हैं पहले दिन का सीन था वो मैंने. दिशा जी को बोला कि दिशा जी फर्स्ट डे यार. पहला सीन कैसे इतना इतना हैवी सीन और मैं. फंबल भी किया आधे घंटे के लिए मेरा. कॉन्फिडेंस सेक भी हुआ था क्योंकि एक तरफ. आपके दोनों स्टॉल वर्ल्ड. नाना पाटेकर. नाना पाटेकर सर. प्रकाश. मेरा खून मेरा खून सब है लालाल वो प्रकाश. झा पर कहीं ना कहीं कुछ और शायद दोनों की. वजह से भी दोनों सर ने समझा कि अरे कर. लेते हैं ना चलना आना पर डंडे बहुत पड़े.
थे अच्छे से. इसलिए मारे थे वो. असली में नकली होता है सब लेकिन कई बार. असली चाहिए होता है उस फीलिंग के लिए उस. इमोशन के लिए चाहिए होता. तो जब दोनों कोशिश कर रहे थे कि नकली वाले. से बात बन नहीं रही थी तो हमने भी कहा कि. सर मार दीजिए। उन्होंने भी कहा कि चोट. लगेगी तेरे को। मैंने कहा सर देखी जाएगी।. सीन निकलना चाहिए। बढ़िया सीन निकलना. चाहिए और वो सीन बहुत अच्छा लगा लोगों को।. उसमें किरदार आपका साइलेंट है लेकिन. पावरफुल है।. वायलेंट है।. हां पावरफुल भी है।. पावरफुल है। यस।. सेकंड सीजन का हमको वेट है। नाना पाटेकर.
ने भी क्या कमाल की एक्टिंग किया है।. बहुत काम किया है। और मेरे से मेरे मेरा. जो कोर था उसमें कड़कनाथ मुर्गा था। आपने. देखा होगा तो तो उस खड़कनाथ के साथ मुझे. बहुत मजा आया था। कड़कनाथ को मैं कहता भी. था कि बेटा शूटिंग खत्म तुम तो गए क्योंकि. उसके बाद इवेंचुअली हुआ वही कड़कनाथ. मुर्गा भले ही चढ़ गया था।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. जीशान अय्यूब ने बहुत अच्छी एक्टिंग की. थी।. सबने बहुत अच्छा कुबरा जीशान नीरज काबी सर. संजय कपूर तो ये मासी सा एक था शो और. नाना पाटेकर और प्रकाश झा से क्या सीखा.
आपने? एक-एक चीज अगर बतानी हो जो जीवन बरसात. रखोगे. कि हमें अभी भी बहुत कुछ सीखना है।. नाइस कमाल था ये। कैसे करेगा मैं? अरे तू. कर लेगा ना ना। अरे कैसे तू अभी भी कुछ. सीखना बाकी है। दोनों एक बहुत ही. विद्यार्थी जैसे थे उन दोनों के लिए। जबकि. इतना सारा काम दोनों सर ने साथ में किया. है। उसके बावजूद। अरे अपहरण में क्या काम. किया दोनों ने? अपहरण देख के दिल खुश।.
और दोनों की दोस्ती सर। लड़ते भी थे।. लड़के ऐसे हैं जो नोकझोंक होती है पर. दोनों की दोस्ती सीखने वाली थी यार इतने. साल हो गए इतने सालों के बाद और एक. अंडरस्टैंडिंग होती है दोस्तों के बीच. नाना नहीं तो सर भी कहती ठीक है रुक मैं. देता हूं और फिर वो मिल जाया करता था ये. मैंने सीखा है मेरे को याद है तबरेज आलम. का किरदार निभाया. तबरेज आलम. अपहरण में. तबरेज आलम गाड़ी चेक करो इंस्पेक्टर को. झापड़ मारता आय हाय क्या सीन है वो. कमाल कमाल का सीन था सर. मुझे बहुत मजा आया था. अपहरण बहुत जबरदस्त मूवी बनाई थी कई लोग.
कहते हैं कि लालू लालू यादव की सरकार को. जितना डेंट प्रकाश झा ने दिया है। [हंसी]. जितना पिक्चर बनाई थी उन्होंने हर आदमी. रिलेट कर गया। कितना सच कितना फसाना पता. नहीं लेकिन हम यूपी में रह के हम लोग को. दिमाग में डाल दिया गया. कि वो शबुद्दीन थे तबरेज आलम।. हां मैंने भी सुना था क्योंकि उसके उस तरह. के किस्से वहां तक बहुत चलते थे अखबारों. में। आपने भी पढ़े होंगे हमने।. हां सारे वैसे ही रहे। [हंसी]. और सारे किरदार वेग से कास्टिंग करते थे. वो. और किरदारों ने उसको जीवन बना दिया।.
जीवन बनाया उन्होंने। वजय देवगन की वॉक जो. आती है अपहरण में जेल सब सलाम सलाम करते. हैं।. हां करेक्ट [हंसी] वो जो. वो जो बाप और बेटे का कन्वर्सेशन है. दोनों के बीच का हम. तो मोहन आगाश साहब जो हैं उन्होंने किया. था और अजय देवन सर एक-एक सीन आइकनिक है।. कमाल के पिक्चर. दमदार मतलब ये लोग हैं मतलब।. गंगाजल में आंख दिखाता है।. आंख दिखाता है साला। ऐसे करके जो यशपाल सर. ने. हां। अरे बहुत बढ़िया एक्टर भाई यशपाल जी।. दो अरे पूरे के सब के सब और वो जो साधु.
यादव बनते थे अपहरण बने थे।. अपहरण में बने थे।. गंगाजल में बने थे साधु यादव।. गंगाजल क्या बढ़िया एक्टर है यार वो।. क्या बढ़िया बहुत कमाल किया।. यशपाल जी कितना कमाल की एक्टिंग की है।. इनफैक्ट जो वो पुलिस वाला जो घूंस ले लेता. है।. अरे उसमें एक अखिलेश भैया अखिलेश अखिलेश. सर हैं। तो वो एक उसमें पुलिस का गंगाजल. में ऐसे जाते थे पेट ऐसे निकाल के। नहीं. होगा सर। वो देखिए कभी आप कितना अच्छा. किरदार किया उन्होंने। अच्छा जो अच्छे. डायरेक्टर्स होते हैं वो अपने साइड. करैक्टर्स को भी इतना अच्छे से पोट्रे.
करते हैं. जी. कि देखने वालों को याद रहते हैं अब सोचिए. मैंने कब देखी होगी आप गंगा जी. वही जिस तरह से आप अभी तबरेज आलम और इतनी. सी मेरे पडकास्ट का हिस्सा रही है. ये इंपैक्ट है. ये इंपैक्ट है. उस सीन का. तबरेज आलम में गाड़ी चेक करेगा वो जो. थप्पड़ मारते हैं यशपाल जी को तो मारते. हैं शायद. हां वही वही वही कह रहा हूं मैं और उसके. बाद वो सीन आपके थप जो बाप बेटे का सीन है. वो गाड़ी खोल के अंदर लाश पड़ा दिखाते हैं. डिग्गी चेक कर लो। अरे डिग्गी अरे कितने. दिन बाद मैंने सुना है डिग्गी चेक कर लो।.
[हंसी]. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. दैट्स इंपैक्ट ऑफ़ सिनेमा। दैट्स इमैक्ट ऑफ़. सिनेमा। ऑलवेज. आपने कहीं कहा था कि हर अभिनेता नौ रस के. इर्द-गिर्द जिंदगी देखता है। कितना रस जिए. अब तक आप? [नाक से की जाने वाली आवाज़][गला साफ़ करने की आवाज़]. घृणा छोड़ के मुझे लगता है कि मैंने बाकी. रस जीने की कोशिश करता हूं मैं। उससे घृणा. किसी से नहीं होती है।. हम. तो घृणा के अलावा भय जो है वो भय भी भय भी. नहीं है। पर किरदारों के माध्यम से भय. जिया है, घृणा जी है, विजय सिंह के अंदर.
घृणा है वसीम खान के लिए। तो अगर जिंदगी. में नहीं जिया तो किरदारों के माध्यम से. जिया वही नरस. श्रृंगार की अनुभूति करना चाहता हूं अपने. काम में। अब. हम. क्योंकि गोली बंदूक बारूद बहुत चला लिए।. क्या लगता है सब छोड़-छड़े गांव लौट जाओ. जीवन में? अभी नहीं सर।. सफल हो के फिर लौटोगे? कुछ जिम्मेदारियां. बाकी हैं। उसके बाद मन करेगा तो मैं अभी. मई में गांव गया था। तो वो चौकी आज भी वही. है जिस चौकी पे हमारे बाबा सोते थे। हम. और मैंने अपने जो हमारे साथ भाई गए थे।.
मैंने कहा था कि अगर सब कुछ करने के बाद. मैं गांव आऊं और मेरी सांस यहां निकल जाए।. मैं चाहूंगा कि इसी चौकी पर मेरी सांस. निकले।. तो चौकी मुझे आज भी वो घर याद दिलाती है. जब सब कुछ घर में सब भरा हुआ था। कोई. मतभेद नहीं था। पता नहीं क्यों लोगों के. बीच मतभेद हो जाता है। भाई भाई से प्यार. करना बंद कर देता है। भाई भाई के बीच इतनी. खाई बन जाती है कि लोग रिलेट करना मुश्किल.
हो जाता है कि जबकि वो सोचते नहीं है कि. ऊपर से जब कभी मैं तो मानता हूं कि सब. ऊर्जा स्वरूप में है। ऊपर से देखेंगे तो. बहुत आशीर्वाद देंगे आपको। मनभेद क्यों. करना है? कोई रहता है गांव में अभी या. गांव अब घासवा-वास निकल आई।. घासवास निकली थी बीच में। लेकिन उसी में. से हमारे एक भाई साहब हैं कजिन है हमारे।. उन्होंने कुछ अच्छा किया तो हमारी छोटी. वाली चाची काकी वहां रहती हैं। मैं अभी मे. गया था तो वहां जाके हम लोग अपने घर से. खाना बना के ले गए थे। पूरी भुजिया आलू का. वो सब जो होता है. विचलित करता है।. बहुत करता है सर।. जब आप कहीं से कहीं शिफ्ट हो जाओ तो जब आप.
लौटते हो तो आपकी याददाश्त वहीं रुकी रहती. है।. बहुत करता है। अगल-बगल की जो बहनें आकर. कहती थी कि बुआ क्या होगा? और मैं सोचता. था कि क्या करूं? मैं अभी भी सोचता हूं. कैसे करूं। कुछ चीजें हैं जिसकी वो. जिम्मेदारियां निभानी है। तो उसके बाद में. अगर गांव चला जाऊं वहां रह जाऊं कोई. दिक्कत नहीं है।. कभी गांव कोई कहा अरे धोनी तुम यहां क्या. हो? [हंसी]. नहीं गांव के लोग बहुत प्यार करते हैं।. उधौली के भी और जो हमारा ननिहाल है पंचोब. दरभंगा में वहां के लोग भी हर छत में वहां. जाता हूं. और हर छाइट में लोग वहां इंतजार करते हैं. कि यार ये विजय भैया या फिर जो भी हैं.
भैया आ रहे हैं।. कभी बिहारी होने की वजह से बॉलीवुड या. कहीं पर असहज महसूस कराया गया? नहीं सर मुझे अपने एक्सपीरियंस में तो ऐसा. नहीं हुआ। लेकिन हां मैंने वो जर्नी. दिल्ली से लेके वहां तक देखी है जहां पे. बिहारियों को एक तरीके से देखा जाता है।. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. अब उसमें किसी का मैं दोष नहीं दूंगा। कुछ. जो आपने कहा ना कि उससे हम लोग रिलेट करना. छोड़ देते हैं।. हम. जरूरी नहीं कि बाहर का आदमी भी बहुत बड़ा. बने तभी आपके अंदर वो क्षमता होनी चाहिए. कि आप लटाई अगर जो लटाई पतंग वाली होती है.
तो जब तक डोर बंधी रहती है ना मांझी से तब. तक वो बहुत ऊपर उड़ती है। अगर आप वो डोर. काट देंगे तो पतंग नीचे गिर जाती है। तो. इंसान कहीं का भी हो उसको अपनी जड़ों से. जड़ों को पकड़ के रखना चाहिए। लेकिन जैसे. बिहार के बाहर जो लोग रहते हैं उनको बिहार. मतलब भोजपुरी समझ में आता है. क्योंकि ऐसा है नहीं. बिहार में भोजपुरी मैथिली मगही अंगिका. बजिका पांच भाषा. पांच भाषा है भोजपुरी केवल के लोगों को. पता रही. सिनेमा आप कह सकते हैं कि आज का साहित्य.
देखा जाए तो सिनेमा है लोग अगर लोगों ने. शायद फुलसुंगी किताब नहीं पढ़ी होगी. भोजपुरी की एक महेंद्र मिश्र के ऊपर की. किताब है. हम. पर लोगों ने वो सिनेमा देखा है कि भोजपुरी. सिनेमा तो लोग उससे ज्यादा रिलेट करते हैं. मैथिली सिनेमा का भी बहुत अच्छी-अच्छी. फिल्में पहले बनी थी भोजपुरी सिनेमा में. पहले के जमाने में कितनी अच्छी-अच्छी और. किन-किन ने गाना नहीं गाया था उसमें. अगर आप देखें गंगा मैया तो पीियरी चढ़े वो. अच्छा नदिया के पार लोगों को लगता है. भोजपुरी फिल्म है पर नदिया के पार है नहीं. वो अवधी फिल्म है तो उसमें अवध आपकी भाषा.
है उसमें. हमारी भाषा है वो. आपकी भाषा है उसमें. रामचरितमानस हमारी भाषा है।. भाषाएं सब एक ही है लेकिन अगर आप देखेंगे. तो उसमें. आप जैसे-जैसे थोड़ा बढ़ते जाते हैं।. बढ़ते जाते हैं।. जैसे अवध वाला हिस्सा जैसे आप गोरखपुर के. आगे जाओगे। जी बिलकुल चेंज हो जाता है।. अक्सर में जो बोली जाती है भोजपुरी या. गंगा पार करेंगे। आप गोरखपुर आएंगे तो. वहां पे फिर या फिर आप कहीं और आगे. बढ़ेंगे तो वहां पे आपको नहीं मिलेगी। तो. वो बदलती जाती है। तो बिहार में पांच. भाषाएं हैं और लोगों को मैं कहता भी हूं।. कभी मुझसे पूछते हैं लोग कि अरे अभी भी. लोग मुझसे पूछ देते हैं. कि अरे तुम गांव जा रहे हो क्या? मैं कहता. हूं नहीं भाई मैं पटना जा रहा हूं। पटना.
गांव नहीं है लोग। तो बिहारी भाषा तुम बता. बोल के। कभी-कभी ऐसा होता है। मैंने कहा. कौन सी भाषा? पांच. मतलब मैंने कहा पांच है। क्या बात कर रहे. हो तुम? पांच भाषाएं हैं। ऐसा होता है।. लोगों को पता नहीं है पर अपनी कोशिश करते. रहेंगे।. तो मान लो आपको कितनी भाषा आती बिहार की? पांच में से. हमरा मैथिली है भैया मैथिली हम मातृभाषा छ. भोजपुरी हम बहुत निमन से आवेला की भोजपुरी. हम पटना में रहानी तो भोजपुरी हमरा सीख गई. अपन दोस्ती यारी के खातिर एक वो फिल्म हम. देवा वो खातिर हम भोजपुरी सीखे रह मघ जो.
है मघी में खते अल हम जात हम करत ये वाली. होती है जो उतनी फ्लुएंटली मुझे नहीं आती. है लेकिन मैं बोल लेता हूं थोड़ी अिका. बजिका जो है वो मैथिली से ही निकली एक. अपभ्रंश भाषाएं हैं मुझे ऐसा लगता है कि. जहां पे वो गैले छलव जैसे जैसे हम अगर. मैथिली में कहेंगे कत जा तो उसको थोड़ा सा. भ्रंश में बोलेंगे कि मर ग छ अब जैसे. बेगूसराय की भाषा है हमारी तो बेगूसराय की. भाषा बहुत लठ मार है प्रेम भी बहुत है. लेकिन जब वो बोलेंगे ओ सुनो ना के मर जाो.
प्यार है इसमें [हंसी] ये इसमें प्यार है. लेकिन मेरी मातृ जो मेरी मातृिक जो पंचोब. है वो मैथिली अगर मैं बोलूं तो अरे सुनो. ना क ज वो ऐसे बोलेंगे लेकिन अगर मेरे. पैतृक गांव चले जाओ बेगूसराय में हमें. थोड़ा सा प्रेम कर अब लोगों को लगेगा अब. ये कौन सा प्रेम है तुम जला रहे हो यार. मेरठ वाला हो गया जैसे हमारे यूपी में. जी आप कह सकते हैं. मेरठ या हरणवी जो टच आता है. दुष्यंत कुमार हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद. नहीं मेरी कोशिश है सूरत बदलनी चाहिए. वो आग तेरे [नाक से की जाने वाली आवाज़].
सीने में या मेरे सीने में मगर ये आग जलती. रहनी चाहिए. आग का नुकसान तो नहीं होता कहीं टू मच. फायर. नहीं टू मच फायर इज ऑलवेज हार्मफुल. हम. पर मुझे लगता है कि आग भी जलती रहनी जरूरी. है आपके अंदर की बतौर इंसान हो बतौर. कलाकार हो और आग इस बात की होनी चाहिए कि. आप किसी के लिए कितना अच्छा कर पा रहे. हैं।. हम. मेरा हमेशा मानना है कि जिंदगी का पर्पस. लोग पूछते हैं वास द पर्पस ऑफ़ लाइफ। मैं. सोचता हूं कि यार अगले दिन सुबह उठूं या. नहीं उठूंगा किसी को पता नहीं है। कैसे.
आपको पता कि आप सुबह जिंदा ही बचोगे। हो. सकता है कि रात में आपका काम तमाम हो जाए।. सही बात है।. तो कम से कम रात तक जितने लोगों से मिले. उतने लोगों को थोड़ा टच कर दो यार। उनको. अच्छा लगेगा। उनको खुशी मिलेगी। कोई आता. है फोटो खिंचवाने दे दो ना यार। क्या फर्क. पड़ तुम्हें भी तो अच्छा लगता है। हां. लीजिए ना मैं तो खुश हो जाता हूं कि मुझसे. कोई इतनी इस दुनिया में उसके जीवन में. इतनी प्रॉब्लम होगी उसके बीच में आके. मुझसे कोई कह रहा है कि आपके साथ एक फोटो. चाहिए। कितनी बड़ी बात है यार। मैं क्या. कंप्लेन करूं? मुझे मां को खुश कराने के लिए प्रेस. कॉन्फ्रेंस पे ले गए थे।.
हां। अरे ये भी आपको पता है। मैं मैं मां. बोली हम बातें हमको बोली कि अरे आप हमको. लेके मत जाओ। हम क्या करेंगे जाके? मतलब शर्माती है थोड़ा ना। जैसे हमारी. मम्मी को हम बुलाते हैं पॉडकास्ट में कोई. आ जाए कि इसको आप बचपन में हमको दिखाती. थी।. देखिए अब आ रहा है। हम. तो अरे नहीं नहीं ठीक है तुम जाओ हम तो. जाएंगे. सब मांओं का लगभग उधर की माओं का यही वाला. हाल होता है कि नहीं नहीं ठीक है ठीक है. पर हम चाहते थे क्योंकि हमारे हमारे पिता. ने कुछ नहीं देखा था. हम. जब वो चले गए तब तक मैं सिर्फ दो ऐड कर. पाया था एलआईसी का और रेमंड्स का वो सिर्फ.
उन्होंने देखा था उन्होंने अपने जीवन में. एक सुख ये लिया था कि मैं रेमंड्स का ऐड. करने एजेंसी हमारी ब्रिसबेन ले गई थी तो. वहां से फोन करता था मैं उनको बड़ा अच्छा. लगता था कि बेटा विदेश से फोन कर रहा है. फिर उसके बाद धीरे-धीरे करके बीमार हुए और. वो चले गए। तो उस मंच पर भी जब आपने कहा. कि सब नेताग बैठे हुए थे और मां थी। मेरे. पिता नहीं थे वहां पे।.
और आज भी मैं उनको. मैं उनको बहुत मिस करता हूं। जब उनको पता. चला था कि अब बेटा बॉम्बे में रहेगा. तो उन्होंने कहा था कि बेटा दुख तो है. हमको लेकिन मैं आपको बहुत आशीर्वाद देता. हूं कि आप सफलता के चरमोत्कर्ष पर पहुंचे. और दूसरा उन्होंने कहा था हमारे बिहार में. कहावत है कनगो आदमी नहीं है भड़का आदमी है.
मतलब आप छोटे आदमी नहीं रहेंगे आप बड़े. आदमी बनेंगे एक वो दिन है एक आज का दिन है. हर दिन उनके जाने के बाद उनकी एक बहुत. अच्छी तस्वीर मैंने लगा रखी है अपने घर पर. मैं जब पूजा करके आता हूं उनसे मैं हर दिन. प्रेयर करता हूं। यह सपना हमसे पूरा हो. पाए पापा और मां को अच्छा लगे। तो मां को. इसलिए ले गया था क्योंकि मां में ही पिता. है।. उसी मां में मैं पिता देखता हूं। तो मां. को उस दिन अच्छा लगा कि लोग आ रहे थे, मिल.
रहे थे।. आपकी माताजी का फेवरेट सॉन्ग एक प्यार का. नगमा है। जिंदगी भर कुछ भी नहीं। तेरी. मेरी कहानी है। कुछ खोकर पाना है, कुछ. पाकर खोना है। तो हां ये मां की. पिताजी को कौन सा गाना पसंद था? पिताजी को राजेश खन्ना साहब की फिल्म थी।. आराधना [नाक से की जाने वाली आवाज़] फिल्म. के गाने बड़े अच्छे लगते थे उनको।. आराधना फिल्म के बहुत सारे गाने थे। मुझे. बहुत अच्छे लगते थे। उनको आराधना फिल्म. थी। फिर वो गाना उनको बहुत अच्छा लगता था.
कि. ऐ जिंदगी गले लगा ले। हमने भी तेरे हर गम. को गले से लगाया है।. सुरेश वाडेकर. जी वो गाना बहुत अच्छा लगता था। तो रेंज. बहुत था। पिताजी बहुत कमाल के शिक्षावि. थे, साहित्यकार थे और एक सबसे कमाल का जो. वाक्या है हमारे सामने कि जब वो उनका फेयर. विल हुआ था पूर्णिया से और जिला शिक्षा. पदाधिकारी थे वहां पे पूरा शहर उनको विदा. करने आया था। मैं उस इंसान का अगर नाखून. भी बन जाऊं कि जहां पर 10 लोग भी आ सके. मुझसे मिलने के लिए तो मुझे लगता है कि.
मैं मेरी तरफ से उनके लिए एक बहुत बड़ी. श्रद्धांजलि होगी।. आपकी फिल्म आई रक्तांचल अगर पिताजी जिंदा. होते और देख रहे होते तो लगता है इसमें. कमी निकालते कैसे रिएक्ट करते आप. वो खुश हो जाते उनके लिए बेटे की खुशी. सबसे बड़ी खुशी थी उन्होंने अपनी खुशी को. भी ताक पर रख दिया जब उनको मालूम चला कि. अब बेटा यूपीएससी नहीं करेगा. हम. एक दो महीना नाराज रहे लेकिन फिर वो बोले. बॉम्बे भी आए साथ में रहे भी लेकिन मैं. अपने पिताजी को कभी कुछ दिखा नहीं पाया. हम. तो वही जो आपने कहा ना कि कल को मैं बहुत.
कुछ कर लूं पॉज कर ले आऊं। पांच गाड़ियां. खरीद लूं। पिता की बात आपने कही। हमारे. पिताजी को गर्मी बहुत लगती थी। आज घर में. पटना में आज हर रूम में एसी है। तब ना. उनके पास वो सुविधा थी ना मेरे पास वो. सुविधा थी कि मैं अपने पिता के लिए एसी. लगवा पाता। एक कमरे में मैं नहीं लगवा. पाया था। और उनको गर्मी में बहुत. घमोड़ियां निकलती थी। उनको कूलर से उनका. काम चलता नहीं था। बीमार दवाइयां इतनी.
खाते थे। तो अब एसी है भी अगर चार एसी तो. वो किसी पिता नहीं है।. पिता का होना बहुत जरूरी होता है। क्या. होता है उनका होना? पिता का होना. आपको बल देता है। पिता का होना आपको लगता. है कि कोई है मेरे पीछे खड़ा।. जो देख लेगा मुझे होते हुए बड़ा।. पिता का वो होना वो होता है कि अरे सब ठीक. है हो जाएगा ना कर लेंगे पापा है ना.
पिता का होना. निस्वार्थ प्रेम होता है जैसे मां का होना. पर पिता के साथ अब आप पहले तो मैं उतनी. बात नहीं कर पाता था अब जब एक मैच्योरिटी. या फिर जो भी आई है तो अब मैं मेरा दोस्त. नहीं है। मैं अपने पिता में अपना दोस्त. नहीं ढूंढ सकता हूं। पिता में एक दोस्त भी. होता है। अब के जमाने में तब के जमाने में. शायद नहीं होता होगा लेकिन अब के जमाने. में मैं बहुत मिस करता हूं उनको और जब भी. कभी जैसे यहां पर आया हूं तो मैं अपने.
पिता को अपने अंदर साथ ले भी आया हूं कि. मेरे थ्रू कहीं जहां से भी वो देखेंगे. उनको बहुत खुशी हो रही होगी कि दो लोग. इतनी अच्छी-अच्छी बातें कर रहे हैं।. पिता का होना बहुत कुछ होता है।. सब कुछ जो मिल गया जिंदगी में तो तमन्ना. किसकी करोगे? यह कुछ अधूरी सी ख्वाहिशें हैं। जिंदगी. जीने का मजा बरकरार रखती है। बिल्कुल सही।. ईश्वर कुछ [नाक से की जाने वाली आवाज़]. देते हैं तो कुछ लेते भी हैं। संतुलन यही.
धरती का संतुलन है।. आपके शो का स्क्रीन टाइम 9 अरब से ऊपर गया. है। यही हम पढ़ रहे थे सब मिला के। तो यह. मुझे पहली बार पता चला है। फिर भी अगर कभी. एयरपोर्ट पर निकलो और लोग कम पहचाने तो. तकलीफ होती है. या पहचाने और नाम में आ करें।. सर मुझे अब इन चीजों से मतलब ये जरूर मैं. चाहूंगा कि तकलीफ नहीं होगी। मैं और अच्छा. काम करूंगा कि और लोग पहचाने क्योंकि. [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसी पहचान के.
लिए यहां पे आया हूं।. कभी ऑफिस के बाहर बैठाया गया? नजरअंदाज. किया गया? बहुत बार।. पहले. बहुत बार। क्या अंतर होता है जब आपकी एक. वेब सीरीज चल जाती है और नहीं चली होती है. ऑडिशन के वक्त अब शायद पता चलेगा मैं अभी. तक ऑडिशन देता आया हूं अभी तक अब शायद. मालूम चलेगा कि क्या होता है क्या पता अभी. ऑडिशन दे देना पड़े और मैं दूंगा भी ऑडिशन. कोई दिक्कत नहीं है उसमें पर ऐसा मत करो. यार कि ऑडिशन लेने के नाम पे आप मतलब कोई. भी आदमी आके आपको ऑडिशन कर दे रहा है मैं.
अब कहता हूं मेरा लुक टेस्ट करो अगर मेरी. मेरा काम अच्छा लगा है जो भी काम मैंने. किया है तो डायरेक्टर आप सामने बैठिए। मैं. सामने बैठता हूं। आप बताइए आपको क्या. चाहिए? बतौर कलाकार मैं देने की कोशिश. करूंगा। लेकिन ऐसा नहीं कि आप कोई किसी से. भी आके कोई भी जो एक्टर बनना चाहते हो और. फिर वो कास्टिंग में चले गए। उसके बाद वो. आके मुझे उससे भी दिक्कत नहीं है। पर. सामने. सामने वाले को पता होना चाहिए कि आपको. क्या काम इससे निकलवाना है। टेक माय लुक.
टेस्ट। आप एक नहीं है। आप 10 बार लीजिए. मैं दूंगा। पर ऐसा मत करिए यार कि आप काम. देखा है आपने मेरा वो एक चीज है जो टीस. देती है और मुझे नहीं बहुत कलाकारों को. देती है काम [नाक से की जाने वाली आवाज़]. देखा है ना आपने तो आप लोग टेस्ट कराइए पर. शायद डायरेक्टर मेरे ख्याल से उनके पास. समय नहीं होता होगा. क्या देखकर काम मिलता है आपका पुराना काम. देखकर या आपके आपके कांटेक्ट कैसा है. पहचान कैसी है. सर मुझे तो आज तक जितने भी काम मिले हैं. मुझे काम ऑडिशन देख के ही मिले हैं और.
मेरा कांटेक्ट मेरी पहचान बहुत ज्यादा. नहीं है उस शहर में जितने भी लोगों से है. वो लोग मेरा सपोर्ट सिस्टम है वहां पे।. उन्होंने मुझे खड़ा करने में मेरी मदद की. है। लेकिन काम मुझे मेरे ख्याल से अपनी. बदौलत कह सकता हूं। जो हमारी माताजी ने. कहा था तुम खुद के भरोसे आए थे।. हम. उसी बदौलत मिला है।. मैं आपको कई बार सुनता हूं। आप गीता का. जिक्र करते हैं। आप गॉड्स प्लान में बहुत. बिलीव रखते हैं।. बिल्कुल।. तो ये विश्वास है या ढाल? ये ढाल तब बनती है जब आपकी मानसिक. प्रक्रिया जटिल होने लगती है।.
हम. ये ढाल तब बनती है। क्योंकि फिर आप अगर आप. बहुत सोचेंगे इन सब चीजों के बारे में. बहुत सारी ऐसी चीजें हैं तो उसमें आपको. लगता है कि अपने आप को बचाऊं कैसे? फिर. आपको लगता है कि यह ढाल नहीं है। यह मेरा. फेथ है। तू करता वो है जो तू चाहता है। और. होता वो है जो मैं चाहता हूं। फिर तू कर. वह जो मैं चाहता हूं और होगा वह जो तू. चाहता है। तो ढाल जो है विश्वास में तब. तब्दील होती है जब मुझे अपने जीवन को. सिंपल रखना होता है। मैं क्या करूंगा सोच. के जो मेरे हाथ में नहीं है। शुभांकर.
मिश्रा जी के पॉडकास्ट पे आना मेरा एक. सपना था। मैनिफेस्टेशन थी हमारी। हम भी. जिंदगी के बारे में बातें करना चाहते थे।. लेकिन यह तभी होता है जब होना होता है।. रक्तांचल आई। लोगों को पसंद आई। आपकी भी. नजर गई। इन लोगों ने आपको कहा कि यार इनसे. अच्छी-अच्छी बातें करता है आदमी। बातें. मैं तब भी करता था अच्छी लेकिन वही होता. है कि जब चीजें टाइमिंग मैच होनी चाहिए और. मैं आज आपके इस जब शो में आया हूं तो. मेनिफेस्टेशन है हमारी है। क्योंकि मैं.
आपको बहुत पहले से देखता आ रहा हूं। मेरा. बहुत मन था कि कभी इस इंसान से ऐसा नहीं. भी होता। मैं आपसे कॉफी शॉप पे बैठ के. बातें कर सकता था। आई जस्ट वांट टू मीट. यू। क्योंकि पडकास्ट तो एक बहाना है लेकिन. इंसान को जानना उससे बड़ी चीज होती है कि. दो लोग कभी मिलेंगे आप मेरे बारे में. सोचेंगे आपको लगेगा अरे अच्छा आदमी था यार. मैं सोचूंगा अरे सुहागर जी जैसे मिलके. कितना मजा आया यार कितनी बातें की हमने. क्यों बात करनी थी आपको हमसे. ऐसे ही आपके विचार आपकी बातें इससे मैं. इत्तेफाक रखता हूं आप जहां से आते हैं मैं. जहां से आता हूं. यात्रा एक जैसी.
यात्रा एक जैसी रही है आपकी माताजी हमारी. माताजी कुछ नहीं चाहती सिर्फ बच्चों को. आगे बढ़ता हुआ देखना चाहती हैं बहुत कुछ. सिमिलर है आप गंगा के उस पार में इस पार. तो हमेशा मुझे लगा कि जिस तरह से आपने भी. अपने ऊपर बहुत काम किया होगा पिछले कई. सालों में तो वो जर्नी एक जैसी हो गई ना. तो मिलके दो लोग बातें की अच्छी-अच्छी. बातें की इस दुनिया में बहुत नेगेटिविटी. है उसमें दो लोग मिलके अगर कुछ पॉजिटिविटी. बढ़ा देते हैं इस दुनिया में इससे अच्छा. क्या हो सकता है. मनोज वाजपेयी पंकज त्रिपाठी में किसकी.
यात्रा दिल के ज़ारा करीब लगती है आपको. दोनों की सर किसी एक का नाम लेके मैं. दोनों की यात्रा लगती है वो लोग जहां से. आते हैं जिस तरह से दोनों ने अपने आप को. एक मुकाम पे पहुंचाया है। तो दोनों की. यात्रा से मैं बहुत इत्तेफाक रखता हूं।. काम करने का मौका नहीं मिला है। मैं जरूर. काम करना चाहूंगा दोनों के साथ।. मुलाकात है दोनों से? नहीं सर।. एक इलाके से आने के बाद भी मुलाकात नहीं. है।. नहीं सर नहीं है। पंकज जी से एक. कॉन्फ्रेंसिंग पे बात हुई थी ज़ूम कॉल के. थ्रू। लेकिन मुलाकात नहीं है।.
पंकज त्रिपाठी की यात्रा कैसी लगती है. आपको? मुझे मतलब फैसनेट करती है वो चीज. क्योंकि गैंग्स ऑफ वासीपुर में जब मैं. उनको देख रहा था. आई नेवर थॉट कि ही विल बिकम दिस बिग। या. नवाजुद्दीन को जब मैंने पहली बार सरफरोश. में देखा था। आई नेवर थॉट ही विल बिकम. दिस। एंड इन कुछ लोगों ने मेरे अंदर एक. चीज बदली कि नेवर जज अ बुक बाइट्स कवर।. बिल्कुल सही बात है।. इनफैक्ट विनीत भी अभी आजकल अगर मैं देख. रहा हूं और बहुत सारे कलाकार ऐसे हैं.
जिनकी पहली फिल्में देखने के बाद जब आप. उन्हें देखते हो तो आप कहते हो यार. इस तरह इमेजिन नहीं करता। यह तो मुझे. रणवीर सिंह के साथ भी लगा जब मैंने धुरंधर. देखी। हम इस तरह इमेजिन नहीं किया था।. मैंने कहा यार इतना बड़ा कलाकार ये नहीं. लगा था मुझे। अच्छा एक्टर लगता था। इतना. बड़ा कलाकार होगा जो रेंज रणवीर ने धुरंधर. में दिखा दी। छोटे बाल में, बड़े बाल में, आंखों से हर जगह से लड़ाते हुए।.
तो क्या व्यक्ति कितना बड़ा बनेगा? डायरेक्टर पर भी निर्भर करता है कि अगर. डायरेक्टर भरोसा कर ले।. सर मुझे लगता है कि सिनेमा का जो विज़न है. वो डायरेक्टर का ही होता है। दे आर ऑल. टूल्स चाहे वो एक्टर हो चाहे. सिनेमेटोग्राफर हो सब अपना इनपुट दे सकते. हैं। लेकिन जो आउटकम है अगर. धुरंधर ऐसी दिखी है तो कहीं ना कहीं. आदित्य धार जी की का वो विज़न रहा होगा।. बाकी लोग उसमें आके सबने उस धागे में. अपनी-अपनी चीजें डाली है। अपनी माला पिरोई. है। अपने मोती डाले हैं। लेकिन जो.
डायरेक्टर है मुझे लगता है कि ही इज़ द. कैप्टन ऑफ द शिप। तो उसका विज़न है अगर. आपने उसको जस्टिफाई कर दिया।. मतलब कई फिल्में ऐसी हैं जहां रणवीर कपूर. रणवीर सिंह मुझे बहुत ही साधारण एक्टर लगे. हैं। लेकिन कई ऐसी फिल्में जहां मुझे. असाधारण लगे हैं। जैसे बर्फी में रणवीर. कपूर, रॉकस्टार में रणवीर कपूर, तमाशा में. रणवीर कपूर, एनिमल में रणवीर कपूर, मैंने. रणवीर सिंह का नाम लिया, धुरंधर में और कई. सारे फिल्में संजय लीला भंसाली से जब वो. आते हैं कई फिल्में साधारण लगते हैं। तो.
मुझे लगता है आदमी तो वही था। कलाकार भी. वही था।. पर सर निर्भर भी करता है कि कहानी क्या है. और कहानी कितना रेजोनेट करती है लोगों से, ऑडियंस से। तो डायरेक्टर और कहानी मिलकर. ही किसी फिल्म को या तो सफल बनाते हैं या. वो फिल्म असफल होती है।. कहानी तो आदि पुरुष में भी रामायण की थी।. लेकिन. और प्रभास ने जो बाहुबली में किया था।. मैंने रामायण जब आदि पुरुष देखी। मैंने. कहा ये कौन आदमी है? कहानी लोगों को कितनी पसंद आती है। आप. क्या कहानी बताना चाहते हैं? रामायण ऐसी. चीज है कि जहां पे जो रामायण हम लोगों ने. देख ली है.
रामानंद सागर वाली. जी तो उसका उसको दिल से हटाना बड़ा. मुश्किल है। हम्।. बहुत मुश्किल है उसको दिल से हटाना। वह एक. जैसे महाभारत ही आपने देखी। अभी तक आपको. याद हैं।. हां हां।. पंकज धीर साहब अभी तक सारे याद हैं।. सारे याद है इनफैक्ट फॉर दैट मैटर। तो वो. चीजें हटा के एक नई चीज डालना वो एक. चैलेंज होता है और लेकिन जब कुल मिला के. कहानी और सब चीजें अच्छी होती है तभी. फिल्म चलती भी है। चाहे कोई भी फिल्म हो।. ठीक है। हमारे यूपी बिहार में लड़का लड़की. लोग सब लोग भैया बुलाते हैं।. जी।. कभी ऐसा हुआ किसी लड़की ने भैया बुलाया।. आपने आपने कहा अरे भैया मत बुलाओ यार।.
मतलब फिर दो चार लोग हैं जो हमको एकदम. यूनिवर्सल भैया बना के पे लगे हुए हैं। हम. कहे ना भैया अरे कभी सयामी बनने दो हमको. यार भैया क्यों बना रहे हो यार तुम मां भी. कहती है कि अरे कब मैं कहता हूं अच्छा. माते होगा जब [नाक से की जाने वाली आवाज़]. ब्याह करना जरूरी है. लगता तो है क्यों जरूरी. जीवन जीवन की अवस्थाएं हमने पढ़ी हैं हमने. देखी हैं तो मुझे लगता है कि हां अगर साथी. मिले तो साथ होना चाहिए विवाह तो एक ठीक. है हम लोग उसका नाम देते हैं पर बिना साथी. के विवाह करना अब मुश्किल है कि अब आओ चल.
कोई देखते हैं कुछ ऐसा साथियों का तभी. विवाह लेकिन. डरते हो. विवाह से विवाह से नहीं डरता हूं लेकिन. विवाह के साथ जो 25 चीजें आती हैं उससे. थोड़ा डर लगने लगता है क्योंकि बहुत दिनों. से एक आजाद ख्यालों से रहने की आदत रही है. हॉस्टल से लेकर अभी तक तो अगर आदमी तभी. पहले शादी करवा दिया करते थे आप देखते. होंगे बचपन में ही शादी हो जाती थी 20 21. साल में साथ में दोनों बड़े होते थे. एडजस्टमेंट की ताकत होती थी एक टाइम के.
बाद शायद थोड़ा एडजस्ट करना मुश्किल हो. होता है।. तो यही हम पूछ रहे हैं। ब्याह करने की सही. उम्र वही होती है जो मां-बाप करवाते थे।. अभी एहसास हो रहा है? नहीं ऐसा नहीं है। इसलिए ऐसा नहीं है. क्योंकि शायद होने के बाद भी चीजें बिखर. जाती हैं। आपके अंदर वो मैच्योरिटी होनी. चाहिए कि आप विवाह को संभाल सके।. बट क्या एक समय के बाद सहने की क्षमता कम. नहीं हो जाती है।. बिल्कुल होती है। मैं कह तो रहा हूं कि वो. एडजस्ट करने की जो क्षमता पहले होती होगी. आप में या में। अब शायद कुछ चीजों इंसान. की प्रवृत्ति बदल सकती है। प्रकृति बदलना.
मुश्किल है।. प्रकृति इंसान की बदलनी बहुत मुश्किल होती. है। प्रवृत्तियां बदल सकते हैं। तो अब मैं. अगर कहूं कि मैं प्रवृत्तियां नहीं बदल. लूंगा। लेकिन अगर मेरी प्रकृति ऐसी है कि. मैं बहुत ही घरेलू इंसान सब कुछ खानदान. मां-बाप, भाई-बहन, भगवान तो वो सब मैं. कैसे बदलूंगा? हम सबको साथ ले चलने वाला. इंसान हूं। तो वो प्रकृति है हमारी। वो. कैसे बदलेगी? क्या ख्वाहिशें हैं यहां से जिंदगी में. आपकी? वो शेर था ना कि. हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम.
निकले। बहुत निकले मेरे अरमा मगर फिर भी. कम निकले। ख्वाहिशें तो अनंत है लेकिन. इतना जरूर है कि जो जिम्मेदारियां घर की. हैं वो. उसको बहुत अच्छे से निभा सकूं।. फिर भी एक बकेट लिस्ट होती ना जैसे वो एक. शेर था कि इंसान की ख्वाहिश को इंतहा नहीं. होती। दो गज जमीन चाहिए दो गज कफन के बाद. भी। घुमा फिरा के तो जाना वही है। बहुत. ज्यादा कुछ. फिर भी एक बकेट लिस्ट होती है ना कि. यात्रा खत्म हो उसके पहले गांव का घर. बनाना है।. जो गांव का घर है पैतृक और मातृिक दोनों.
घर जो है वो बनाने हैं। वो मेरे लिए. आत्मिक सुख है। वो मेरे लिए मुझे ऐसा. लगेगा कि मैं कुछ दे पाया अपने पितरों को. अपने खानदान को, अपने पिता को, अपनी नानी. को तो वो दो चीजें हैं जो मुझे बनानी है. और साथ में जो कुछ घर की जिम्मेदारियां. हैं मेरे पांच बच्चे हैं। तो आप वैसे अगर. पूछे तो पांच बच्चे इसलिए क्योंकि मेरे. भैया के बड़े भाई साहब के दो हैं और मेरे. घर में तीन बच्चे हैं जो मेरी नाती ननी सब. मिलाकर तो उनकी अच्छे से एक सुचारू रूप से. पढ़ाई लिखाई हो जाए अच्छे ढंग से वो हो.
जाए उसके बाद तो फिर ठीक है जीवन जहां. लेके जाए पर नई पीढ़ी जो आएगी उसको पुराने. घर से वो रिश्ता नहीं है उसका क्योंकि वो. वहां नहीं रही उसकी इमोशनल कनेक्शन नहीं. है आजकल बहुत सारे लोगों को देखता हूं वो. शहरों में घर बसा लेते हैं और फिर गांव. में घर कच्चा पक्का पड़ा है वो कहते हैं. किसके लिए वो घर बनवाया वहां कोई जाएगा तो. है नहीं अब तो वैसा परिवार भी नहीं कि. वहां पर लोग रह रहे हैं कि छुट्टी में. जाके मिल लें। तो फिर गांव का घर क्यों. बसाना है? मैं इस बात पर मैं कुछ मतलब मैंने कुछ. लिखा था.
मैं आपको सुनाना चाहूंगा क्यों घर बनाना. और क्यों ये चीज करनी जरूरी होती है ये उन. लोगों के लिए है जो अपने बेहतर जिंदगी के. लिए अपने घरों को छोड़ कहीं दूर चले जाते. हैं।. तुम आसमान में उड़ पाए क्योंकि तुम्हें. पता था तुम्हारा घोंसला कहां था।. तुम आसमान में उड़ पाए क्योंकि तुम्हें. पता था तुम्हारा घोंसला कहां था। तुम. जिंदगी में आगे बढ़ पाए क्योंकि तुम्हें. पता था तुम्हारा भरोसा वहां था।.
अब जो कहीं दूर जाकर एक और घोंसला बना. लिया है। तो भूलना मत।. तुम्हें पंख देकर. उड़ने की ताकत उसी घोंसले ने दी थी। तो. अपना घोंसला कभी टूटने मत देना। क्योंकि. घोंसला है तो हौसला है। इसलिए मैं यही. मानता हूं यह उन तमाम लोगों के लिए जो. पुराने घर से मोहब्बत छोड़ देते हैं। ताकत. वहीं से आती है।.
ताकत वहीं से आती है।. जड़ वही है। जड़ वही है। ऐसे बहुत लोग मैं. जानता हूं जो कहते हैं हमारा कोई गांव. नहीं है। और तकलीफ होती है इस बात की कि. मैं शहर में रह गया और मैं गांव नहीं जा. सकता हूं। यू आर वेरी लकी क्रांति एंड आई. एम रियली वेरी लकी। जो लोग गांव नहीं जाते. हैं गांव जाकर देखें। चलिए अपने गांव का. घर हम भी पक्का बनवाएंगे और बेहतर. करवाएंगे।. मैं चाहूंगा कभी आप वहां पे आ।. आखिरी सवाल. जी।. अ मैंने कहीं पढ़ा था आप मां-बाप पर कुछ.
लिखना चाहते थे।. मैं एक. किताब लिखना चाह रहे हैं। किताब लिखना। तो. अगर किताब का पहला वाक्य मैं सोचूं कहूं. कि मां-बाप पर जो किताब लिखने की आपकी. ख्वाहिश थी उसका पहला वाक्य क्या होता तो. क्या पता किताब की शुरुआत शायद यहीं से हो. जाए।. यहीं से हो जाए और किताब का नाम भी मैंने. सोचा हुआ है हमर मैं। मैथिली में है जिसका. हिंदी है रूपांतरण हमारी मां।. हम्म. तो वहीं पे मैं किताब लिखना चाहूंगा और. पिताजी की वो पंक्ति मैं सबसे पहले लाइन. लिखूंगा।. सब देव देवियां एक और ए मां मेरी तू एक और.
अद्भुत. देखिए मैं चाहूंगा वो किताब लिखूं मां के. मां स्वस्थ रहे और वो किताब उनके सामने. उसका विमोचन मैं उनसे करवा सकूं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] देखते हैं वो. कब होता है। चलिए शुभकामनाएं आपको बहुत. धन्यवाद कि सीरीज आई सीरीज छाई लाखों. करोड़ों लोगों ने पसंद की। हम आशा करते. हैं, प्रार्थना करते हैं कि यहां से आपको. बहुत ढेर सारा काम मिले। थैंक यू सो मच।. बहुत ढेर सारा नाम मिले। आपकी माताजी का. नाम रोशन करें। पिताजी आपके देख रहे हो।. वहां से उनके ख्वाब पूरे हो। जो अधूरा काम.
वो छोड़ गए हैं और बस यूं ही एक. पॉजिटिविटी फैलाते रहिए।. हां, मैं भी लोगों से कहना चाहूंगा एक चीज. कि जाते-जाते कि अगर हमसे अगर इतनी सी भी. चीज हो सकती है ना, तो किसी से भी हो सकती. है। तो कभी छोड़ना नहीं है यार। हमेशा लगे. रहना है। क्योंकि लगे रहने के अलावा हमारे. पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है। जिंदगी. मिलनी बहुत मुश्किल होती है। जिंदगी. छोड़नी बहुत आसान होती है। तो जिंदगी मिली. है ना उसका कुछ बना के जाइए। उसको बिगाड़.
के मत जाइए। इसी में तो किसी ने कहा था. मंजिलें मिल ही जाती हैं भटकते भटकते।. गुमराह तो वो हैं जो घर से नहीं निकलते।. घर से नहीं निकलते। आप घर से निकलिए लगे. रहिए, जमे रहिए, डटे रहिए। दुनिया चाहे ना. चाहे एक रोज आपको उस सिर आखों पर बिठा. लेगी। लेकिन शर्त यही है कि हालात कैसे भी. हो लगे रहिए, जमे रहिए, डटे रहिए। इसी बात. पे एक और चीज कहूंगा मैं।. क्या हुआ? आज फिर से बात नहीं बनी। क्या. हुआ? आज जिंदगी से फिर ठनी।.
अरे जिंदगी है दोस्त। अपने रंग दिखाएगी. ही। आज नहीं मानी कल तो फिर मुस्कुराएगी।. मन का हो तो अच्छा ना हो तो और भी अच्छा।. मन का होता है तो वो होता है जो आप चाहते. हैं। नहीं होता है तो वो होता है जो ईश्वर. चाहता है। और जिस ईश्वर ने आपको बनाया है. उसको आपसे बेहतर आपके बारे में पता है।. इसलिए भरोसा रखिए गॉड्स प्लान पर।. यस।. आएगा आपका समय।. थैंक यू सो मच। श्री राधे श्री राधे।.
[संगीत].
