Unplugged ft. Khan Sir | @unpluggedshubhankar
वो बिहार जहां पर सारा क्वेश्चन पेपर लीक. हो जाता है। हम खान सर का ब्याह हो गया।. लीक काहे नहीं हुआ भाई? [संगीत]. ये जब तक हम नहीं बताए तो लीक हो ही नहीं. सकता। अगर हम एक साल बाद बताए रहते ना तो. एक साल बाद ही पता चलता।. अब खान सर का ब्याह हो गया है। क्या वो. अपना हेयर स्टाइल चेंज करेंगे? क्या वो भी. स्किन केयर रूटीन फॉलो करेंगे? मेरे स्कूल. की प्रिंसिपल मिली थी। वो कह रही थी तुम. जब क्लास फाइव में पढ़ता था तो ऐसे ही बाल. झाड़। भाई मतलब ललवा वाला बालक.
हम हस्बैंड है कि उनके प्रयोगशाला है? आप. इंटरनेट पे हम देख रहे थे हमारी 16 17. भाभी दिख गई हमको। अरे बाप रे ये तो जिसको. मैं गुरु पत्नी पकड़ के बनाते रह ऐसे खान. सर की पत्नी है। लेकिन दुनिया में बड़ा चल. रहा था कि खान सर जो है घूंघट पहना दिए. थे। नया ब्याह शादी रहेगा। आप ज्यादा थोड़ी. ना खोपड़िया पे चढ़ के कहेंगे कि ना हम जो. बोल रहे हैं वही करिए। दुनिया में भगवान. हर जगह नहीं रह सकता था ख्याल रखने के. इसलिए उसने मां बना दिया और सबको सजा नहीं. दे सकता था इसलिए बीवी बना दिया।.
आप लोग जब पढ़े होंगे तो टीचर लोग मारते. बहुत थे। हम अभी मारते हैं। यहां सब पिटाई. होता है। लड़का लड़की सब पीटना चालू करते. हैं। निर्जीव समझ के पीटते हैं।. क्या रुपए लेते हो आप फीस पढ़ाने का। तीन. महीना पड़ेगा ₹200 में। दो ₹200 में तीन. महीना पड़ेगा। हमारा कहना है ना कमाए ना. कमाए देम।. अभी मैं गया था एक कार्यक्रम में और बड़ी. बातें चल रही थी कि 2047 तक हम देश को. दुनिया का नंबर वन देश ये सबसे बड़ा झूठ. चीज है लेकिन अगर गुमराह करना है तो हम. देश बदलेंगे तब देश में को जैक लगा के उठा.
देंगे देश को आप लोग के पास तो तक्षशिला. था नालंदा था सब था कब था. वहां ना बड़ा क्राइम नहीं है लिचड़ई टाइप. का है चाट वाले से चाट खा लिए कहा ₹30 हुआ. हमरा से पैसा मांगेगा हमरा से तड़त दिए. उसको यहां पे अब वो बेचारा देख रहा है हम. क्या कर पाएंगे आपको योगी जी का स्टाइल. अच्छा लगता है। मुंडा फसा किए हो? नहीं. किए हो? मार दो। बाद में देखा जाएगा। बता. देना गाड़ी पलटा था। ये क्या पलटा था? इस. देश में जेएनयू जैसी और यूनिवर्सिटी होनी. चाहिए। एक जेएनयू है तो सरकार को तो इतना. कटक रहा है। आप ऐसा वैसा पांच छ और.
बनवाइए। आपके अंदर इतना ज्ञान है। इतना. इनोवेशन आप दे रहे हो। आप क्यों उन लोग. आगे नहीं आते? संसद में क्यों नहीं जाते? आप जैसे लोग भारत की मीडिया कैसे देखते. हैं आप? हम देखवे नहीं करते।. तो हम तो कई ठों को तो विषक कन्या बोलते. हैं। 20 पुरुष से काहे दिक्कत नहीं है. आपको? हां। विश्व पुरुष है तो चिल्लाता है. उधर से बहुत तगड़ा चिल्लाता है यहां पे।. पाकिस्तान का आपने कहीं कह दिया कि इसका. नक्शा जो है वो कुत्ता से मिलता है और. लक्षण भी कुत्ता से मिलता है और इसमें. कुत्ते की बेइज्जती है। हमारा बस चले ना. तो इन सबको पकड़ के दफना दे एक जगह बढ़िया.
से और लोगों को कहें कि 20 साल बाद ये सब. पेट्रोलियम बन के निकलेगा सब। बहुत तेज. जलेगा सब ये सब। कोई गर्लफ्रेंड फ्रेंड तो. नहीं थी पहले वहां पे। अरे नहीं वहां पे. इतना दिन खराब हुआ है। रहती तो हम जिंदा. रहते हैं। हम जो यूपी बिहार के लोग हैं और. हम क्यों इतने अंडर कॉन्फिडेंट होते हैं? सब जगह फिल्म इंडस्ट्री होती है। भोजपुरा. में आर्केस्ट्रा इंडस्ट्री है। ताली पे. चढ़ के नाचा है सब। आज इन सब को ₹10. थमाइएगा तो पकड़ लेगा सब। ट्रेलर बार-बार. पा रहा है। क्या करना चाहिए उसे? हम लोग. तो कई टाइम समझ में आए थे डिप्रेशन होता. कैसा है? अभी नया-नया ब्याह हुआ है ना कुछ. दिन बाद बताइए।.
डरा रहे हैं हमको आप।. ये कहते हैं कि शिक्षा शेरनी का दूध है।. जो पिएगा वो दहाड़ेगा। लेकिन इस देश में. इस शेरनी के दूध को जो सबसे अच्छे तरीके. से आम लोगों को पिला रहे हैं वो खान सर आज. हमारे पास है। ब्याह करने के बाद सीधे हम. उनको उठा लाए यहीं पे।.
कैसे हैं सर आप? एकदम बढ़िया। सब मजे में. शादी के बाद क्या फर्क लग रहा है? मतलब. अच्छा लग रहा है। लड़का लोग बहुत एकदम से. कहा कि ब्याह के बाद सीधे आप पाल ल्च हो. रहे हैं। सर. हमको लगता है कि जिसका जिसका पुराना ब्याह. हुआ है 15 20 साल पुराना सब यही पूछ रहा. है। हमको लगता है कि वो लोग इंतजार में है. कि बवाल कब हो।. तो अभी तो कोई बवालवाल नहीं है। अब तो. आदमी पठनपाठन में ही व्यस्त है। अभी. बच्चों सब का प्रोग्राम बचा हुआ है। मेन.
तो बचवे हैं सब हम लोग के औरकि उनकी. संख्या इतना ज्यादा है कि उनका मैनेजमेंट. में थोड़ा सा टाइम लग जा रहा है। वरना तो. पहले बचवे सबको करना था। लेकिन वही अगेन. वही बात हो जाती है कि आप 10,000 का. मैनेजमेंट संभाल सकते हैं। 1 लाख का. संभालने में बड़ा मुश्किल हो जाता है।. इंटरनेट पे हम देख रहे थे हमारी 16 17. भाभी दिख गई हमको। अरे बाप रे ये तो जिसको. मैं की गुरु पत्नी पकड़ के बनाते रहिकांत. सर की पत्नी परेशान हो गए हैं हम लोग यहां. तो एक आध तो तो मतलब किसी किसी का जैसे.
किसी यहां रिलेशन में गए हैं तो पार्टी. फंक्शन हुआ तो कोई कहा कि सर एक फोटो बगल. में वो कहीं बेचारा Facebook अपलोड किया. होगा वहां से चिपका दिया यही है लग रहा है. यही है अजीब अजीब हाल हो गया यहां तो जैसे. हम लोग तो अभ्यस्त हैं एक कि भैया ये तो. होते रहता है यहां पे अब मैडम पूछती हैं. कि ये ये लोग कौन है हमको भी नहीं पता कौन. है लोग एक हफ्ते मैडम पूछना शुरू कर दी।. नहीं ऑब्वियस मतलब इतना न्यूज़ चल गया।. इतना न्यूज़ चल गया कि खुद हम लोग परेशान. हो गए हैं। एक आध तो पे तो हम लोगों ने.
एआई का यूज़ करके अब थोड़ा सा मन बढ़ही चालू. कर दिए हैं। तो एक आध पे तो एफआईआर भी. लांच करना पड़ा मजबूरी में। अच्छा दुनिया. ये कह रही थी कि वो बिहार जहां पर सारा. क्वेश्चन पेपर लीक हो जाता है। हम खान सर. का ब्याह हो गया। लीक काहे नहीं हुआ भाई? तो हम तो गारंटी कहते हैं जब तक हम नहीं. बताए थे लीक हो ही नहीं सकता। अगर हम एक. साल बाद बताए रहते ना तो एक साल बाद ही. पता चलता। लेकिन उससे पहले पता नहीं चल. सकता था। ये हम लोग को ना पता नहीं कैसे. पेपरवा लिख कर देता है सबको कहे कि छपवा. देते हैं हम ही लेकिन फिर है कि क्योंकि.
हम लोग शिक्षा जगत में कम से कम ट्रेनिंग. तो दे देते हैं गधों की कैसे पेपर छपता है. कैसे प्राइवेसी मेंटेन की जाती है बट ये. ऐसा कैसे रहा कि कोनो नौकर कोनो रिश्तेदार. कोनो चाकी कोनो दोस्त यार एकको आदमी रिलीज. नहीं किया मतलब कई बार होता है ना कि अंदर. वाला धीरज छोड़ देता है कि भैया सर का. ब्याह हो गया है तो वही तो एक वो चीज है. यहां पे कैसे महीना डेढ़ महीना हम लोग. महीना बाद बताए थे कि ये ऐसा ऐसा ऐसा हो. गया। ये तो हम जान पाए कि देश ऑपरेशन. सिंदूर में लगा था। आपका अलग अपना अलग. ऑपरेशन सिंदूर चला। वो एक्चुअल में हम लोग.
की बदनसीबी है कि हम लोग को पाकिस्तान. जैसा पड़ोसी मिला है। वरना किसी को ये. थोड़ी पता था कि अचानक आके पहलगाम में कोई. मैगी खा रहा होगा। कोई खुशियां मनाने गया. होगा। पाकिस्तानी आके आतंकवादी गोली मार. देंगे सब। ना आपको पता था ना हमको। हम लोग. तो खुशियां मना रहे थे कि ट्रंप मारा है. चाइना पे टेरिफ। अब चाइना का कमर टूट. जाएगा। iPhone हमारे यहां बनेगा। चाइना ने. एक फोन किए घुमाया पाकिस्तान में। कहा. गोली मारो आइसन मुद्दा पे मारोगे पूरे. भारत में बवाल हो जाएगा और वही हुआ ही तो. हम और आप कोई एक्सपेक्ट नहीं कर रहे थे.
चीजों का तो उसी बीच में चीजें लाइन अप थी. अब चीजों को अचानक से पलटना ये चीज ना. होना थोड़ा सा मुश्किल हो जाता जैसे हमारा. ब्याह नहीं हुआ है तो हम ये समझना चाहते. हैं जानकारी के लिए कि अगर छिपा के रखना. हो ब्याह करके तो कई आदमी साथ आदमी बुलाना. चाहिए अपने तो आप मैनेजमेंट की जिम्मेदारी. हमको दे दीजिए आप 10 साल तक छुपाए रहेंगे. जब तक आप ना बोलेंगे वो लीक नहीं हो सकता. यहां पे हम मैनेजमेंट की जिम्मेदारी लेते. हैं। ड्रोन प्रूफ एरिया होगा। कैमरा प्रूफ. एरिया होगा वहां पे। ना ड्रोन आ सकता है. ना कुछ। चाहे वो यूक्रेन का ड्रोन हो चाहे.
कहीं का भी ड्रोन हो। हम लोग का जहां हुआ. तो वो ड्रोन प्रूफ था। अच्छा इतना. प्राइवेसी था क्यों? देखिए एक तो तो सबसे बड़ा चीज क्या. क्योंकि आप सोशल आप सोशल आदमी हैं। हम. देखते हैं कि कोनो विषय होता है। आप सामने. आते हैं। अपने बच्चों से संवाद करते हैं।. बताते हैं रक्षाबंधन किए बताते हैं। तो ये. आप परिवार के लिए था या कोई सोच इसके पीछे. थी? देखिए हम लोग एक साधारण ढंग से मतलब. 10 12 लोग मिलके किए और कुछ होंगे जो. खानेपीने खिलाने वाले होंगे। कैटरिंग में.
कोई खाना खिला रहा है कोई कुछ कर रहा है।. तो हम लोग ने उसको भी काउंट किया था। उन. सब लोग को मिला सब चीजों के लिए तो मतलब. एक दो00 लोग ले पहुंच जाए किसी के दरवाजे. पे किसी की बेटी के यहां कि अब हमको खिलाओ. बढ़िया से बारात लेके आए हैं खिलाओ बढ़िया. से लाइट लगाओ बढ़िया से तुम्हारा पैसा. लगेगा तुम पानी पिलाओ तुम जनरेटर ले आओ. तुम साउंड बनाओ तो थोड़ा सा अजीब टाइप का. लगता है कि एक बेटा बेटी भी दे रहा है सही. बात है ये तब पैसों उससे निकलवा लेते हैं. और झुक के भी रहता है तो हम लोग ने सोचा. कि नहीं इसमें कोई खर्चा ये सब नहीं होना. चाहिए रिसेप्शन देना है वो हमारी.
जिम्मेदारी है हमारे गेस्ट है हम अपने. यहां ले जाके रिसेप में जिसको जैसा मन हम. अपने बच्चों को बढ़िया से खिलाएंगे। अपने. गेस्ट को बढ़िया से इज्जत करेंगे। दूसरे. की आधार वाले पे काहे धमक जाए हम। अच्छा. रिसेप्शन जो हुआ था वो बड़ा वायरल हुआ. क्योंकि वो कैमरे पे था और बहुत सारा. तस्वीर आया। आपका फेवरेट मोमेंट कौन सा था. रिसेप्शन पे? हमको हम हमको क्योंकि दो तीन. हमारे मन में हम फोटो क्योंकि हम तो आ. नहीं पाए थे। तो हम फोटो देख रहे थे। तो. हमको तीन चार मोमेंट हमको बड़ा अच्छा. अच्छा लगा। हम आएंगे लेकिन हम आपका. मूवमेंट जानना चाह रहे हैं। कि टॉप थ्री. मूवमेंट क्या था? जो वहां बैठा रहता है.
उसको तो समझ में आता नहीं है। सबसे बड़ा. टेंशन ये था कि हम तो मतलब नॉर्मल जो. कपड़े पहने जाते हैं ऐसे ही कपड़ों पे तो. हम थे। हमारे लिए तो कोई नया चीज वहां था. नहीं। सूट वगैरह तो आदमी नॉर्मल पहन लेता. है। लड़कियों के लिए दिक्कत होता है एक तो. बड़ा है अलग टाइप का ड्रेस पहन के और हमें. तो हम पढ़ाने वाले टीचर हमको तो 10 घंटा. कोई खड़ा कर दे तो कोई दिक्कत नहीं है।. हमको दिक्कत ये था कि खड़ा होके रखना। कोई. रेस गेस्ट आ रहे हैं तो आप उनको खड़े होके. इज्जत करिए। उनको आप बुलाए हैं तो उनको.
रिस्पेक्ट करना पड़ेगा। अब वो चाहे रात को. 12:00 बजे आ रहे हैं 11:00 बजे आ रहे हैं।. उनको नहीं मतलब है कि आप 5 घंटा से खड़े. हैं कि नहीं यहां पे। तो हमको यही था कि. ये खड़ी हो पाएंगी कि नहीं हो पाएंगी।. उतने देर तक शक्ति परीक्षण हो रहा था। हां. शक्ति परीक्षण हो रहा था एक तरह का। लेकिन. बाप रे बाप उतना जितना देर हम खड़े रहे थे. उतना देर तक उनको भी सबके साथ हां नमस्ते. सलाम आदाब सत श्री अकाल। जो जैसे हैं उसी. हिसाब से तो तीन मोमेंट का हम जिक्र करते. हैं। हम बताओ हमको आप बताना। पहला मोमेंट. जो था वो तेजस्वी जी वाला था। हां। क्या. हुआ था तेजस्वी के साथ? वो एक्चुअल में.
उनकी उनके यहां भी संतान जन्म लिए है तो. उनके लिए भी बड़ा हेक्टिक था किसी के लिए. यहां पे और वो भी कोलकाता में थे। तो आपके. वो आपके हिडन शादी के हीरो थे। हां मतलब. उन्होंने भी ऐसे ही किए थे। हां तो हमने. भी किए थे कि भाई आप भी ऐसे ही। एक्चुअल. में क्या होता है कि बहुत कहीं हमको भी एक. चीज लगता है कि किसी के लड़की के घर अगर. हम लोग जा रहे हैं लोग तो उसके आप कितना. उस पे बर्डन डाल सकते हैं लोग। ठीक है।. इसलिए चुपचाप हम लोग शादी कर लिए और वो. बड़ा वायरल हो गया। सबसे अच्छा मोमेंट.
हमको नीतू मैडम का लगा। नीतू मैडम आई कहीं. तुम सब जो ना देखो देखो ऐसे उठाई ऐसे देखी. ताकी फिर कहीं बढ़िया है। ये वो काफी चला. मैडम कही कि हम बड़ी दीदी वाला रोल निभा. लिए। तो नीतू मैडम ने जो किए वो हमारे. गांव की परंपरा है। अब जैसे गांव में क्या. होता है कि आप भी देखिएगा कि जो औरतें. होती है हमारे यहां भी होता है। हमको. इसमें नया क्यों लग रहा है? हमें नहीं। ये. गांव का कल्चर है। हम लोग के बिहार का यही. कल्चर है कि आप जब देखते हैं तो नेग के. रूप में मुंह दिखाई देना होता है। हां। तो. अब तो ये नीतू मैम ने वही किया। मुंह.
दिखाई के रूप में नेग में दी है वहां पे।. तो वो तो वो गांव से जुड़ी हुई हैं। अभी. भी अपने गांव को नहीं भूलिए हैं। भले वो. दिल्ली से हैं लंबे समय से हैं। हम भी. पटना शहर में आ गए लेकिन है तो हम भी गांव. के यहां पे। हम काहे बिहार की संस्कृति. भूल जाएंगे। दूसरा आप अगर गांव से जुड़े. होंगे तो जो भसूर होते हैं लोग मतलब जो. हस्बैंड से बड़े होते हैं उनको उनके सामने. औरतें नहीं जाती हैं। आज भी जेठ बोलते हैं. वहां पे उनके यहां नहीं जाते हैं या फिर. अगर है भी तो थोड़ा सा मतलब पर्दा वो करते. हैं अभी भी है सर अभी भी है गांव में तो. गांव की यही संस्कृति है अब शहर वाले हम.
लोग को अलग संस्कृति है भाई शहर वालों की. अलग है गांव वालों की अलग है तो हम लोग तो. गांव की परंपरा से हैं तो एक उसके वजह से. दूसरा ये था कि उनका अपना डिसीजन था हम. बोले थे कि आप इतनी देर तक खड़ी हो जाएंगे. तो उनका कहना है कि दुल्हन तो अब लगेंगे. कैसे. तो मतलब वो तो लगता है ना यहां पे कहेंगे. हम डेली डेली थोड़ी ना घूंघट करते हैं या. फिर ऑफिस में थोड़ी ना ये लगा के जाएंगे।. अच्छा हां ये सब ये सवाल तो दुनिया में. सबसे ज्यादा वायरल तो यही हुआ था। हमको. लगता है इससे आप भी खून पी लिए होंगे. लड़के आपका क्या? सोशल मीडिया पर कि मैडम.
झुकाई। हालांकि हमको तो हमको पता है रीज़न. आप बताए थे हमको लेकिन दुनिया में बड़ा चल. रहा था कि वो जो घूंघट हल्का सा था वो कि. खान सर जो है घूंघट पहना दिए थे। उस घर. में या उनके ऑफिस में थोड़े पहना रहे हैं।. उनका अपना डिसीजन था। उनका कि हर लड़की का. अब ज्यादा आप नया ब्याह शादी रहेगा। आप. ज्यादा थोड़ी ना खोपड़िया पे चढ़ के. कहेंगे कि ना हम जो बोल रहे हैं वही करिए. कि हर लड़की का शौक होता है बचपन से कि वो. दुल्हन बनेगी घूंघटन होगी उनका दिन होता. है अब अब हम अब घूंघटे नहीं लगाएंगे तो अब. कितना समझाएंगे आप सही बात है हमारे अब.
उनका शौक है तो हम ठीक है ठीक बात है. अच्छा शादी के बाद जो लौंडा सर उसमें क्या. बदलाव आता है क्योंकि आप सिंगल लौंडो बहुत. बात करते थे और बहुत सारा देश में लड़का. लोग था वो कह रहा था कि आप हमारे हीरो थे. फिर एक परी आई हमारे गुरु जी लेके निकल गई. देखिए मेंटालिटी िलिटी अगर मैच करेगी कोई. चेंजिंग नहीं आती है। कोई चेंजिंग नहीं. आएगी। बसशर्ते मेंटालिटी मैच करती जाए।. हमारा बकरी ईद के दिन हम क्लास में थे। हम. बोल दिए कि बकरी ईद के दिन हम नहीं आ. पाएंगे घर। कह कोई बात नहीं लेकिन त्यौहार.
वगैरह है तो घर तो आना चाहिए। हम कह नहीं. आ पाएंगे हमारे साथ। ऐसा ऐसा है कि बच्चों. का लिए रिसेप्शन है। हम उनमें मैनेजमेंट. में बिजी हैं यहां पे। वही अगर कच कच कच. कच होता तो वही हम भी आके बोलते। लेकिन. अगर मैच कर जाएगा तो दिक्कत नहीं है। तो. ये कैसे डिसाइड हुआ कि कच कच कच कच वाली. नहीं है और ये सीधी वाली है क्योंकि आपका. तो एक्सपीरियंस था नहीं। आप तो सिंगल. लौंडो के सबसे बड़े हीरो थे इस देश में. जाकिर खान और आप दो आदमी जो हम लोग. इंस्पायर होते थे। लेकिन आपको हमने एक चीज. और भी देखा। आप बड़ा बात लव रिलेशनशिप पे. आप बड़ा बात करते थे। तो ये भी हमारे मन. में कई बार सवाल आता कि खान सर शिक्षक.
हैं। ज्ञानी है समझ में आता है। लेकिन. प्रेम का इतना ज्ञान कैसे है? हम अपने. फ्रेंड सर्किल में ना बड़ा बाद में शादी. किए हैं। ज्यादातर फ्रेंड्स वाले सब कोई. 2014 में 15 16 में 810 साल पहले ब्याह कर. लिया सब जो उनमें मार होता है ना हम ही. समझाने जाते थे। मतलब जब भी डिस्प्यूट. होता था तो समझाने जाते थे। ऐसे नहीं ऐसे. ऐसे नहीं ऐसे तो हमको समझ में आता था। जब. पंचायती कर लेते हैं ना तो डिस्प्यूट समझ. में आ जाता था। तो पंचायती में हम बैठ-बैठ. के इस चीज समझ गए थे। हालांकि ये सब हम. लोग के तो मम्मी का ही काम था। गांव में.
तो अक्सर मां ही देखती हैं। वो लोग अपना. देख देख सुन के अपना बट फिर भी जैसे आपको. देख के हम जैसे लौंडे अब जो इंस्पायर हो. गए हैं कि हम भी ब्याह करेंगे आने वाले. समय में आप भी इंस्पायर हो गए तो उसमें. क्या क्या ध्यान रखें क्योंकि अब तो आप. एक्सपीरियंस आदमी हैं ज्ञानवान तो आपसे. लेते ही रहते हैं हम लोग लेकिन जिंदगी का. ज्ञान बहुत जरूरी होता है तो क्या देखना. चाहिए अगर आप शादी ब्याह करने जा रहे हैं. देखिए सबसे बढ़िया बड़ा चीज होता है. मेंटालिटी मैच होना चाहिए अगर कैसे पता कर. ले मेंटालिटी अब देखिए मैं आजकल तो लड़के.
डरे हुए हैं अभी वो जो खबर आई थी मेघालय. वाली हां पहाड़ ढकेल दी पहाड़ पे लेके. मरवा दी जाके तो बड़ा खतरनाक स्थिति हो गई. उधर एक ठू मेरठ में आई थी वो ड्रम में पैक. करवा दी उसका तो लड़का बच्चा भी हो गया था. इधर तो हनीमून पे गए थे बेचारी मम्मी. लड़के गया था हनीमून पे वो तो ये सब देख. के डर लग जाता है हम लोग को तो कैसे. मेंटालिटी मैच करे कि हमारी वाली जो है वो. सोनम ना निकल जाए या मुस्कान रस्तोगी ना. निकले ये तो बड़ा खतरनाक चीज है यहां आप. अभी माताजी पे छोड़ दीजिएगा मां लोग बेहतर. ढंग से पख लेती है मां बात करने में ये वो.
क्योंकि ना वो लोग अब आप जाएंगे देखने तो. हो सकता है कि आपको इमोशन में चले जाए. लेकिन मां लोग थोड़ा सा अच्छे से पर. सुंदरता देख के बैठ जाए हां आप लोग जाएंगे. ना सुंदरता देख के आप लोग साइड हो जाएंगे. मां लोग थोड़ा इस मामले में ठीक होती है. अच्छा मां और बीवी में कैसे संतुलन बनाते. हैं क्योंकि हम तो हम लोग जो अपने गांव. ध्यान मेंटालिटी अगर अच्छे ढंग से होगी तो. कोई संतुलन बनाने की जरूरत नहीं है।. परिवार के हिस्सा हैं। आपका सुखदख उनका. सुखदख यहां पे तो दिक्कत नहीं होगा और. मेंटालिटी मैच नहीं होगी ना तो संतुलन. बनाने में जिंदगी का संतुलन खराब हो.
जाएगा। कभी फैमिली से संतुलन बनाओ, मां से. संतुलन बना, वाइफ से। मेंटालिटी मैच हो. गया टेंशन नहीं। मां की भूमिका कितनी बड़ी. क्योंकि मां को लेकर मैंने आपको बहुत कहते. हुए सुना और एक आपका बड़ा फेमस कोट मुझे. अच्छा लगता है जिसमें आपने कहा था कि पिता. पढ़ा लिखा हो तो ऐसा हो सकता है बेटे. अनपढ़ हो जाए। लेकिन अगर मां पढ़ी लिखी है. तो कभी औलाद जो है वो अनपढ़ नहीं होगी।. हमको थोड़ा बताइए ना मां के बारे में।. अपनी मम्मी को आप दिल्ली दिखाने लाए। आप. बढ़िया आदर्श बेटे हैं। लोग बता दें शादी. के बाद भी खान सर दिल्ली अपनी माता जी को. दिखाने लाए हैं और हम सब कामना करते हैं. वो स्वस्थ रहे। लंबी उम्र सेहत अच्छी उनको.
मिले। नहीं बच्चों की बहुत दुआ थी। मम्मी. का मतलब पिछले साल से जब ट्रीटमेंट करा. रहे थे तो हम बच्चों से कहे थे भाई देखो. मतलब माताजी के लिए दुआ करो। अगर वो ठीक. रहेंगे तो हम टेंशन फ्री पढ़ाएंगे। अगर. मम्मी को एक छोटा सा बुखार भी आ जाता है. तो हम टेंशन में चले आते हैं। तो मां तो. मां होती है। उनको वो दुनिया में हम लोग. को बाकी दुनिया से 9 महीना पहले से जान. रही होती है। तो मां का दुनिया में कोई. तुलना ही नहीं कर सकते हम। दुनिया में. भगवान हर जगह नहीं रह सकता था ख्याल रखने. के लिए इसलिए उसने मां बना दिया और सबको.
सजा नहीं दे सकता था इसलिए बीवी बना दिया. बस अगला अगले दिन खाना खत्म. ये नहीं कटेगा. और ये भाभी तक स्पेशली टैग होके पहुंचेगा. नहीं हम लोग का भी कुछ झगड़ा वगड़ा नहीं. हुआ है. दूसरों के इतने झगड़ा सुलझाए हैं ना. कोई बात नहीं। लो बी लो बीपी हो तो बीवी. के पास चले जाओ। हाई बीपी हो जाता है। हां.
हां तो लो बीपी आपका चल रहा है। जाओ भी. अरे ये क्लिप पहुंचने दो। वो पढ़ाई के. दौरान हम लोग ऐसे बोल देते थे बच्चों को. समझ में आने के लिए। लो बीपी हाई बीपी इन. सब चीजों के लिए। बच्चों को समझाने के लिए. ना बहुत पापड़ बेलना पड़ता है। तब जाके. उनको समझ में आता है कि खान सर पढ़ाते हैं. तो समझ में आ जाता है। तो दुनिया ने. कामयाबी देखी है। पांव के छाले नहीं देखे।. मैंने अम ओझा सर का पॉडकास्ट किया था। तो. मैंने उनसे एक सवाल पूछा था कि विकास सर. या खान सर? तो उन्होंने कहा खान सर? मैंने. पूछा क्यों? तो उन्होंने कहा खान सर की.
खूबी ये है कि एक रिक्शे वाला जो है उसको. भी वो समझ में आते हैं। शिक्षा आपको कितनी. आती है। उन्होंने कहा वो भी बहुत अच्छे. टीचर है। बट वो पर्सनली आपको एडमायर कर. रहे थे इस बात को लेकर कि वो व्यक्ति जो. अशिक्षित भी है खान सर उसे भी समझा ले. जाते हैं। ये जब से आपने पढ़ाना शुरू किया. तब से ऐसे ही था या ये आपने डेवलप किया।. क्या रहा इसका प्रोसेस? हम लोग देखिए पढ़ाना तो हम लोग को था ही. नहीं। मतलब हम आज भी कहते हैं आपके. पडकास्ट पे भी कहते हैं कि हम पढ़ाने में. हमको कोई इंटरेस्ट नहीं है। हम पढ़ाना ही.
नहीं चाहते हैं। महाराज हम सच बता रहे. हैं। अगर कोई डूबता हुआ रहता और कहता मुझे. इंटरेस्ट नहीं है तो लोग कह सकते थे कि. भैया ये बहाना कर रहा है। हमारा दुनिया का. सबसे बड़ा एजुकेशन चैनल है। बावजूद हम. कहते हैं कि हमको पढ़ाने में हम पढ़ा हम. पढ़ाते हैं बच्चों का मुंह देख के कि वो. गरीब बच्चे हैं। फिर उनके लिए कोई नहीं. लड़ेगा। मेरे लिए वो हम उनका चेहरा देख. लेते हैं ना कि इनके पास बेचारों के पास. दो चार ठो कपड़ा ले आते हैं। ऐसे पूरा. स्टूडेंट लाइफ खत्म कर देते हैं वहां पे।. आज भी बच्चों के पास ना तकिया नहीं रहता. तो हथवा मोड़ के लगाते हैं सब तो ऐसा. गद्दावार मोड़ लेते हैं सब यहां सुबैया का.
नाश्ता नहीं बना मतलब दुजे टाइम खा के. रहेगा बढ़िया एकदम उसी टाइम में हम उनका. मुंह देख के पढ़ाना पड़ता है दो एक तो गरीब. है दूसरा कि अगर हम ये सोचते हैं कि हम. जिस तकलीफ से देखे हम लोग के टीचर लोग. पढ़ाते थे ऐसे कि लगता था डर लगेगा हमें कि. अरे बाप रे अब का बोल देंगे अब का बोल. देंगे मुंडिया नीचे रखते थे कहीं हमसे मत. पूछते ऐसे अरे बाप हालत खराब हो जाता था. क्या मतलब पढ़ाई को एकदम दर्दनाक बना के. रख दिए थे लोग तो हमें कई बार डाउट हो. जाता था तो हम पूछने जाते थे ना तो और.
रद्द कर देते थे लोग मतलब तनी सा डाउट. रहता था पूछने जाते थे तो धीरे डाउट हो. जाता था हमको तो झूठ टाइम वो खराब हुआ तो. जो अपने दोस्त सर्कल में जो बच्चे थे उनसे. जब बताते थे ना तो वो लोग बड़ा बढ़िया. बनाते थे तो शिक्षक लोग क्या है ना अपनी. विद्वता दिखाने के चक्कर में कि हम बड़ा. विद्वान है हम बहुत सोफेस्टिकेटेड है सभ्य. भाषा बोलते हैं एकरा चक्कर में आपन भाषा. ठीक रहे अपना मतलब मैनर के चक्कर में न. जाने कितना लेकिन को चौपट कर दिए जब हमारा.
आर्मी में रिजेक्ट हुए हम एनडीए में तो हम. कहे क्या करेंगे तो जब यहां है तो हम कहे. कि ना ये नहीं होगा लोग हमें भले कहे कि. इनकी भाषा गवारों वाली है इनकी भाषा गांव. की है। ये कुछ ये लोग भले कहेंगे जो जड़. रहे हैं। लेकिन जो पढ़ रहा है वो कहेगा ना. भाई सीधे दाएं तो खोपड़िए में बुझा जाता. है हमको। एकदम सीधे डायरेक्ट समझ में आता. है कि कहना क्या चाह रहे हैं। तो मेरा बस. यही उद्देश्य रहता है। अब हम कई बार देखते. हैं हम बच्चों को ये नहीं कहते हैं कि. अपना लेवल उठाओ क्योंकि बच्चों की संख्या. करोड़ों में है। उतना लेवल उठाने की क्या.
जरूरत है? हम खुद से कहते हैं अपना लेवल. डाउन करो। साथ ले चलते हैं इनको यहां पे।. कैसे छूट जाएंगे यहां पर? अंतिम बेंच का. बच्चा कह नहीं कह सकता सर हमको समझ में. नहीं आया। नहीं यह बात ठीक है क्योंकि मैं. मुझे याद है जब मैं आपका पहली बार मैं. इजराइल पैलेस्तीन पे आपने एक वीडियो बनाया. था और मुझे बड़ा कॉम्प्लिकेटेड इशू लगता. था वो कि यार बड़ा है और मैं आधा घंटा. सुना आपको मेरे को ऐसे रट गया मैंने कहा. अरे यार कोई बुलाओ मैं समझा दूंगा नक्शा. बता दूं कहां-कहां है तो मुझको ये एहसास. हुआ कि अगर इतनी आसानी से समझ में आ रहा. है तो फिर दम है लेकिन शुरुआत कहां से हुई.
थी सर आपकी थोड़ा बताओ ना अपने बारे में. कौन है खान सर पीछे थोड़ा बताओ कैसे आप. क्या पढ़े कहां लिखे कैसे आपने एजुकेशन. फील्ड में आए यहां पर पढ़ाने आए थोड़ा सा. कुछ तो बताइए हम लोग का ऐसा कोई एजुकेशन. बैकग्राउंड नहीं था। क्लास एट में जब हम. पढ़ते थे कैसे पढ़ने लिखने कैसे थे बचपन. में आप? ठीक-ठाक नहीं थे। 40 लेन के स्कूल. में 37 नंबर पे आते थे। हम काहे के लिए. मास्टर लोग ऐसे पढ़ाता था लेकिन मत पूछिए. यहां पे। हमको डरे पांच क्लास फाइव सिक्स. का एक जो टॉपिक होगा ना वो भी हमको एक. दुगो याद है अभी तक। डरे मास्टर लोग के. पिटला के डरे याद कर लिए। तो बुझवे नहीं. कि क्या पढ़े हम और सबसे बड़ा खराबी क्या.
था कि हमारे घर वाले लोग कि बाबू अच्छा. करेगा अंग्रेजी मीडियम में स्कूल एडमिशन. करा दिए। हमें कुछ बुझाइए नहीं रहता है।. खाली पानी पीने का बुझाता मे आई गो टू. ड्रिंक वाटर मे आई कमिंग सर ये बुझ किया. अबे. हां बस थोड़ा बहुत ये एिकेट्स वगैरह था तो. क्लास जब एट में हम लोग पढ़ते थे तो हम लोग. को ये था दो चार दोस्त थे तो कि भाई. भोजपुरी में बोलते थे कि कमाई ज कोन काम. कर तो जल्दी धए दे नौकरी ला ज हम के तो हम. लोग को समझ में आया कि एक डिप्लोमा बड़ी.
बढ़िया चीज होता है 10 के बाद डिप्लोमा कर. दीजिएगा धए दे नौकरी हो जाता है तो हम लोग. को नहीं पता था कि डिप्लोमा क्या होता है. हम लोग को लगता है कि कोई एक आध दिन एकआध. महीना का कोई चीज होगा एग्जाम निकाल देंगे. ध से नौकरी लग जाएगा तो ये दिमाग में बैठ. गया था कि हम लोग को डिप्लोमा करना है और. चुपे-चुपे कहते थे सबको नहीं बताना है हम. लोग डिप्लोमा करके निकल देंगे सबको नहीं. बताना है धीरे-धीरे पता चला कि सब. पॉलिटेक्निक को डिप्लोमा बोलता है सब. इंजीनियर का छोट इंजीनियर होता है तो फिर. पता चला कि डिप्लोमा बड़ा चर्चा बड़ी. चर्चा चला अब बाद में पता चला कि अरे बाप.
बाप तो इसमें भी पढ़ना है यहां तो फौज. वाला सबसे अच्छा रास्ता होता है तो एनडीए. में सोचे थे लोग निकलेंगे लोग यहां एनडीए. में तो उसके साथ जब नहीं हुआ तब क्या. करेगा आदमी कुछ नहीं कर सकता था तो. थोड़ा सा नहीं सिलेक्शन जब आप छट जाते हैं. तो थोड़ा सा डिप्रेस्ड हो जाते हैं और जो. एज होता है ना उस ऐज में बड़ी दिक्कत होता. है तो हम लोग थोड़ा बहुत ये सीख लिए. वेल्डिंग वोल्डिंग जेसीबी और दो चार ठो. काम हम लोग प्लान बनाए थे कि भैया हम लोग. ना एक काम ना सीखल ज खवास लगन मौसम में ना.
बेरोजगार हो ज घर के बड़ा दिक्कत हो ज दोद. काम सीखल ज तो सब अपना-अपना सीख गया कोई. हमारे साथ में था वो कॉफी बनाना सीखा कि. देखा हमने ठंडी में कॉफी बेच लिया आज तो. तू जूस बेचिया गर्मी में तो एक के दुकान. यहां रही परिवार कैसा था आपका मतलब मध्यम. वर्गीय गरीब परिवार बहुत मतलब जॉइंट. फैमिली थी लेकिन एक कमरे में जॉइंट जॉइ. मैं भी कहीं सुन रहा कोई एक वीडियो सुन. रहा था मैं ओशो आए थे ओशो भाई आए थे वो. कहे पहले जॉइंट फैमिली इसलिए थी कि लोग. गरीब रहते थे छोटा घर था उसको बांटेंगे तो. कुछ नहीं मिलेगा कुछ नहीं मिलेगा लोग.
जॉइंट थे पैसा कमाने लगे सब सेटल हो गए. अलग-अलग अभी दादा वाला घर बाटा नहीं है एक. और कमरा. सबका चाचा जी का एक कमरा हम लोग का एक कम. एक कमरे में सब लोग यहां पे कि मतलब सारे. परिवार के दिक्कत कब होता था पता है. त्यौहार और कभी कोई कि रिश्तेदार को रुक. मत जाए भैया आप दिन भर मिलो और चले जाओ. रुक गए तो बहुत सोएंगे कहां सोएंगे कहां. एक्स्ट्रा है तो यही सब दिक्कत ससुरा ऊपर. सोएगा तो हम कहां सोएंगे तो बड़ी हम ऐसे. तो गांव में ऊपर एक तल्ला घर ही होता है. मतलब ऊपर एक बार चौराहा हो जाता है लगता.
है गोलंबर पे बैठल है हम गांव का घर के छत. पे छत पे गद्दा बिछाओ बढ़िया सो जाओ तो. इसी समय थे हम लोग। उसके बाद से धीरे-धीरे. फिर पठनपाठन में हम लोग नहीं थे यहां पे।. तो मेरा एक मित्र था हेमंत नाम था उसका।. वो पढ़ाता था कहीं वो हमसे सीनियर था। जब. हम लोग एनडीए कर रहे थे तो सीडीएस कर रहा. था। एनडीए इंटर पे होता है। सीडीएस. ग्रेजुएशन पे होता है। तो जहां पढ़ाता था. इंग्लिश पढ़ाता था। तो अपना वो भी इंग्लिश. बस इसीलिए पढ़ाता था कि मतलब कुछ रहने खाने. का पैसा निकल सके स्टूडेंट लाइफ में। तो. वो जहां पढ़ाता था वहां जीएस का टीचर भाग.
गया। हम अब पता नहीं क्या हुआ। डिस्प्यूट. हो गया। भाग गया तो पता चला काहे भाग गया. तो भैया एक एक बहुत अच्छे वहां जीएस के. टीचर थे उनका नौकरी लग गया तो वो चले गए. उसके जगह ये आया तो ये भाग गए बहुत बहुत. झमेला हुआ तो वही हमको कहा कि भाई चल ना. तनी मनी पढ़ा दोगे तो हो जाएगा तो गए वहां. पे तो छ बच थे सब क्योंकि हर दो दिन पे एक. टीचर आता था वहां और उस बच्चे सब उसको भगा. देते थे तो अच्छी खासी थी वो छह बच्चे थे. सब वहां पे तो फिर उसी में धीरे-धीरे. पढ़ाने गए तो पहले दिन पढ़ाने गए तो छह.
बच्चे सब मजाक बनाने लगे तो हम हम आज भी. पढ़ाने जाते हैं तो ये नहीं देखने जाते. हैं। गुड बस गुड मॉर्निंग चालू हो जाते. हैं हम यहां। उसके बाद हम सब को अच्छा. लगा। तो छह के जगह 10 15 20 50 ऐसे एक. हफ्ता के अंदर पूरा आज से 10 15 12 साल. पहले की आज से 10 12 साल हो गया। तो फिर. उसके बाद पढ़ाने लगे हम लोग। धीरे धीरे. धीरे धीरे। अब बच्चे बढ़ गए। तो जो नए का. लड़का आता था सब ना वो देख के भड़क जाता. था सब हमको। हम दाढ़ी बनाए रहते थे एकदम.
और ऐज मेरी उस समय थी नहीं 18 19 के ऐ से. हम लोग मतलब अच्छा खासा पढ़ाना उसी समय. बहुत पहले से हमको लगता है कि हम. ग्रेजुएशन में थे तभी से पढ़ा रहे थे अब. ग्रेजुएशन में ना उतना दाढ़ी मोछ नहीं आया. रहता बढ़िया से और आदमी लगता नहीं है कि. मास्टर है ग्रेजुएशन में आदमी ऐसे नहीं. लगता है कि मास्टर हां हां नया लौंडा लग. रहा था हां अब वो सब को देखते थे तो. मास्टर जी की छवि अलग होती थी छवि अलग. होती थी तो पहले क्या होता था नया बैच. होता था ना तो हम पहले नहीं जाते थे। सारे.
बच्चे बंद हो बैठ जाते थे तब जाते थे यहां. पे और तुरंत पढ़ाना चालू। हम सोचते थे कि. ना पहले इनसे नहीं पूछेंगे कुछ। अब पहले. एक टॉपिक पढ़ा देंगे। टॉपिक पढ़ा देंगे तो. ये पूछ भी नहीं करेगा सब कि कैसे है कैसे. नहीं। नहीं तो जहां ऐसे पूछ दिए कि कैसे. हो? तो ये सब हल्ला करने लगेगा सब। तो फिर. एक और सर थे मानस सर। अभी वो गवर्नमेंट. टीचर हैं। वो कहें कि दाढ़ी-वढ़ी रख लीजिए. तो बढ़ लगेंगे। दाढ़ीवढ़ी रख लिया आदमी।. आप समझ रहे हैं। हां। तो थोड़ा खप गया. आदमी उसमें। और फिर उसके पढ़ाने लगे तो.
कोचिंग वाले को डर हो गया कि अगर यह टीचर. भाग गया तो इसके पीछे सब ले भाग जाएंगे सब. तो उसने कहा सर आप पूरा नाम मत बताइएगा हम. कहा भैया हमको क्या जरूरत है बताने का तो. उसने कहा कि आप खान सर हम बस आपका शॉर्टकट. नाम हम कहा ठीक है हम पूरा नाम नहीं. बताएंगे खान सर ही बता देंगे उसके बाद खान. सर खान सर हो गया यहां पे वो कोचिंग वाला. बड़ी मनब था तो यहीं से अमर अकबर एंथोनी. की शुरुआत हुई थी हां वहीं से हो गया इसके. बाद आप तक कैरी कर रहे हैं कि भाई आप खाली.
अच्छा उसके बाद कोचिंग वाला बड़ी मनब था. लेकिन से फीस लेता था ज्यादा ज्यादा और. हमको आड़ जाता था हमसे कहता था कम में. पढ़ाइए जल्दी खत्म हो जाएगा हम जल्दी खत्म. होने के चक्कर में उड़ा नहीं ना दे टॉपिक. 500 का बढ़िया पढ़ाएंगे तो समय लगता है तो. कहता नहीं नहीं रे जल्दी खत्म कीजिए नया. बच्चा आएगा पैसा आएगा अब दिमाग खराब होते. होते एकदम दिक्कत हो गया यहां पे फिर उसको. उसको छोड़ दिए कोचिंग-वचिंग फिर दूसरे जगह. गए वो भी शुरू में ठीक-ठाक ऐसा पट्टा में. था कहीं और थे लोग पटने में इधर-उधर थोड़ा.
बहुत तो फिर वहां से भी शुरू में कुछ. बच्चे लोग ईमानदारी का बोलते थे कि हम फीस. कम लेंगे ये करेंगे फिर जब बचवा भर जाते. थे सब वो भी वही नौटंकी कर देता था तो. धीरे-धीरे लास्टली अपना ही खोल दिया तो. यानी खान सर की शुरुआत यहां से हुई और ये. नाम की कहानी भी यहीं क्लियर हो गई कि. भैया किस वजह से वो जीवन भर खान सर खान. अरे बहुत उस पे भी सीबीआई वाला मंथन चलता. रहे एक कटप्पा ने बाहुबली काहे मारा और एक. खान सर तो इससे कहानी खत्म हो गई। आपने जो. अपना कोचिंग इंस्टट्यूट स्टार्ट किया इसके. पीछे क्या सोच रहे हो क्योंकि आपके पास. पढ़ाने का आपका मन नहीं था। आपने. ग्रेजुएशन कहां से की है? और क्या किया.
है? हम बीएससी किए हुए हैं। नॉर्मल स्कूल. से किए हैं। ऐसा कोई बहुत बड़का वीआई. वीवीआईपी नहीं। नॉर्मल है ग्रेजुएशन।. बीएससी जैसे आप यूपीएससी की पढ़ाई करते. हो। यूपीएससी पढ़ाई अच्छी खासी वो होती. है। एकदम लोग कहते हैं कि टफेस्ट एग्जाम. है। तो फिर आपने इतना पढ़ाई कैसे किया? बीच में या आपने पढ़ा फिर बैठ के सारा? हां पढ़ते इंटरेस्ट आते रहता है तो आदमी. पढ़ते रहते। क्योंकि आपका पढ़ाने का मन था. नहीं। हां। बीएससी आपकी नॉर्मल ग्रेजुएशन. की लेकिन आपका पढ़ाया लड़का देश दुनिया. में बड़ा-बड़ा नौकरी कर रहा है। हां तो ये. ये हमको ये समझ नहीं आ रहा कि टीचर रणजी.
खेल रहा है। लड़का इंटरनेशनल खेल रहा है।. तो शिक्षक और सड़क अपने जगह पे रहते हैं।. दूसरे को मंजिल तक पहुंचाते हैं।. ग्रेजुएशन करने के बाद हमको लगा बीएससी. में बहुत पहले हम लोग को ना साइंस वाले ना. अलग घमंड में रहते हैं। हां पता है हम. साइंस वाले हैं। हम साइंस वाले हैं। तो हम. लोग कॉलेज वाले में ना अलग घमंड में रहते. थे। हम लोग को लगता था साइंस ग्रेजुएशन. खत्म होते ही नौकरी आपके पास आएगी। हां. कुछ भी नहीं किया ग्रेजुएशन के बाद तो हम. कहे अब एमए करेंगे तो बीएससी के बाद फिर. एमए किए बढ़िया पहले लोग करते यही कर थे.
बीएससी करें एमएससी करें एमए कर ले हां. वही उसके बाद उसी में पठनपठन चलते गए इधर. पढ़ाने लगे अब इसी में पढ़ातेपढ़ाते आदमी. इतना लग गए यहां पे फिर हम पढ़ाने लगे. उसके बाद से फिर हम लड़ाई लड़े बच्चों के. लिए कि भैया पूरी इंडिया में फीस कम होनी. चाहिए हम फिर धीरे धीरे धीरे धीरे वहां पे. पटना में भी सबसे बड़ी कोचिंग होती है. कोरोना से पहले भी कोरोना से पहले भी उतना. बड़ा कोचिंग कहीं नहीं था। बट यह था कि हम. टेक्नोलॉजिकल फ्रेंड टेक्निकल फ्रेंडली. नहीं है। हम हम आज भी Facebook नहीं चलाते. हैं। Instagram तो हमरा पतो ना है। वो.
हमारे नाम पे भले चल रहा होगा कोो हमको. नहीं एक्स व एक्स कुछ नहीं सब। खाली. अंग्रेजी अल्फाबेट है एक्स वाई जेड। बस वो. सब हमको कुछ नहीं आता है। WhatsApp पे लिख. के ढकेल दो चल गया। सबसे सिंपल लगता है।. जो चीज़ लिखना है ढकेल दो चाहे कुछ दाब के. बोल दो। चल गया वहां पे। YouTube वगैरह. में क्या है कि मैं आए कैमरा ऑन किया। जय. हिंद पढ़ाना हुआ चल दिए पढ़ा के आ तो. टेक्निकल फ्रेंडली नहीं थे तो इसलिए नहीं. था लॉकडाउन लगा तो फिर मजबूरी में क्लास. पढ़ाना पड़ा ऑनलाइन ऑनलाइन पढ़ाना पड़ा और. ऑनलाइन में तो लिमिट ही नहीं है.
देखतेदेखते देखते पता नहीं क्यों लोगों को. अच्छा लगने लगा बच्चा बूढ़ा सब पढ़ने लगा. तो ये आपको कब रियलाइज हुआ कि खान सर जो. है वो ट्रेंड का विषय बन गए अब कोविड में. ही. धीरे-धीरे जब चीजें होती है ना तो पता. नहीं चलता है बट फिर भी होता जैसे जैसे. मैं यूपी में बैठा हूं मेरी मम्मी यूपी. में बैठी है अब हम मेरी मम्मी बिहार कभी. नहीं. लेकिन वो खान सर का सब सुनी है। मतलब शादी. ब्याह से लेकर जितना लड़का बच्चा वो आज. हमको बता रही थी कि खान सर कहे कि बच्चा. लोग को हम पार्टी देंगे। लड़की लोग को अलग. लड़का लोग को अलग। फिर लड़का लोग पूछे वो.
हमको बता रही थी। लड़का लोग पूछे मैडम. आएंगी। वो कहे नहीं वो अपना ऑफिस पढ़ाने. आती है। तो कोई बच्चा लोग कहा कि 5:00 बजे. बाद बुलाइएगा तब। बाप रे रिसर्च हमको करना. है इनको पता है।. तो ये इंटरनेट इंटरनेट कैसे मतलब कब आपको. लगा कि यार इंटरनेट ने मेरे क्रांति कर. दी। एक होता है ना कि रियलाइज होता है कि. आप लोग पहचान दारा पहचान रहे हैं। यूपी. में भी जाने लगे, देश में जाने लगे। कब. आपको ऐसा लगा कि ये कुछ मैजिकल हो चुका. है। अब हां दो चार साल जैसे 20 22 23 के.
बाद क्योंकि ना जब आदमी बाहर निकलने लगा. धीरे धीरे धीरे धीरे पहचानने लगे लोग तो. समझ में आता है और शिक्षक को ना पहले से. हम लोग को ना भीड़ का आदत है।. डेली 50 60 हजार आदमी को पढ़ातेपढ़ाते ना. जी मतलब लग जाता है कि हां ये तो पढ़ने. आते ही हैं। तो धीरे-धीरे ऐसा कोई खास. रियलाइज नहीं। लेकिन हां ये है कि जब से. ऑनलाइन चीजें जो होती है उसका एरिया बहुत. बड़ा होता है। तो कश्मीर से कन्याकुमारी. तक कोई लिमिट ही नहीं है। हम कोयंबटूर में. गए थे वहां पे इनके सद्गुरु जी के आश्रम. में वो दो चार पहचान गए हम अरे भैया यहां.
हम तो शांति से आए हैं यहां। चुपचाप वो. बड़ा विशाल वहां शिव जी की प्रतिमा है।. वहां बैठ के हम भी आराम से बैठल थे। यहां. दो चार पहचान के वहां अंदरवा मोबाइल अलाउ. नहीं है। बड़ा हम शांति से थे। उनको बड़ा. अच्छा जगह लगा हुआ था। किसी के पास मोबाइल. ही नहीं है। अच्छा ये मोबाइल कितना बड़ा. बीमारी है? आजकल के यंग लव बच्चे मोबाइल. में परेशान हो गया। पूरा इसका जितना यूज़. नहीं कर रहा उससे ज्यादा उसका मिसयज कर.
रहा है। अपना टाइम एंटरटेनमेंट में खत्म. कर बड़ा बूढ़ा भी सर। सब लोग सब लत लग गई. है इस चीजों की। वो आपका एल्गोरिथम सेट. है। आपको क्या अच्छा लग रहा है क्या नहीं? उसी हिसाब से वो काम कर रहा है। हमारे. पिताजी हमको जो हमारा एक पॉइंट बढ़ता है. घटता है हमको भेज देते हैं। आज तुम्हारा. 11.8 हुआ नाइन हुआ 10 हुआ। हमने कहा. महाराज क्या चल रहा है जिन बचपन में बच्चे. टोकते थे बच्चों को टोकते थे कि मोबाइल मत. चलाओ। हमको लगता है आप जितने बड़े बूढ़े. हैं उनको लौंडे टोकते हैं। ये ब्लेसिंग है. या ये खराब आदत हो गई कि हम लोग खराब आदत. हो गई बच्चों के अंदर यहां पे। मतलब 4:00.
बजे तक उसको मैसेज आ जाता है। यू हैव यूज़. 90% ऑफ योर डेली लिमिट डाटा। क्या पढ़ेगा? तो कोचिंग सेंटर में अलाउड है मोबाइल. आपके। वह उसको फुर्सत कहां मिलेगा कोचिंग. सेंटर में? टीचर सामने आ गया वो पढ़ा रहे. हैं। अब अगर ऑफ़लाइन बैठा हुआ है तो वह चला. कैसे पाएगा? वह तो ऐसे ही पकड़ा जाएगा. क्योंकि सबका मुंह सामने रहेगा। उसका नीचे. रहेगा आदमी थूर देगा उसको। वो पकड़ा नहीं. जाएगा उसमें। भीड़ में पकड़ना बड़ा इजी होता. है। खास करके क्लास रूम में सबका मुंडी एक. जैसा रहेगा। कोई गड़बड़ किया तो जरूर हिलडुल. करेगा। ऑटोमेटिक पकड़ा जाएगा। अच्छा जैसे. आप लोग जब पढ़े होंगे तो टीचर लोग मारते. बहुत थे। हम अभी मारते हैं। आप मारते हो?
हां। पूरा बिना मारे छोड़ ही नहीं सकते।. इंसान जो होता है जब तक पीता मार से भूत. भाग जाता। अरे तो जो दिल्ली बंबई की स्कूल. है यहां ह्यूमन राइट वायलेशन और फलाना. ढिमकाना तो चलता है। पेरेंट्स को भी अलाउड. नहीं है। आजकल तो बड़ा चलता है। हम लोग जब. पढ़े हैं तो हम लोग कूटे गए हैं। कब वो. पीछे मारते थे कब वो पीठ सर झुका के धपाधब. मारते थे। ये सब चलता था। अब नई पीढ़ी. बड़ी सॉफ्ट लोग के यहां सब पिटाई होता है।. लड़का लड़की सब कोई जब पीटना चालू करते. हैं निर्जीव समझ के पीटते हैं।. कोई दिक्कत नहीं। एक आदमी मुकदमा लड़ लेगा.
आदमी। ठीक है लेकिन बच्चों का भविष्य. बनाने के लिए पीटना पड़ेगा तो पीटेंगे। तो. पिटाई जरूरी है। बहुत जरूरी है। यहां पे. काहे जरूरी भारत का कितना बड़का क्रिमिनल. है उसको भेजिए सऊदी अरब सीधा हो जाता है।. सही बात है। काहे मार के उनका व्यवस्था कर. देंगे। हां तो पिटाई कितना जरूरी है सर. जी? बहुत जरूरी है। नहीं पीटिएगा तो अच्छा. एक बात बताइए इनाम क्यों जरूरी है? प्रोत्साहन देने के लिए तो सजा भी जरूरी. है। मनब को रोकने के लिए फिर इनाम बंद कर. दीजिए। ऐसा नहीं होता है। हम देखे ना एक. से एक उदंड बच्चा आता है सब। हां एक से.
दंड बिना पीटे संभल में नहीं करता है. आखिरी बार कब कूटे थे और कैसे कूटे थे वो. थोड़ा बताओ ना कौन कौन वाला मार मार जैसे. एक तो होता था हमारे टाइम में कि यहां. पेंसिल रख के दबा देना एक होता था मुंडी. पकड़ के झुका के कूट देना एक पीछे मारना. ताकि लाल रहे दिखाई ना पड़े. फ्राइडे के दिन पीटे थे. कैसे कौन से वाला पिटाई होते हैं सब वहां. पे पढ़ाने के टाइम पे अब बदमाशी करेगा जो. टॉपिक पूछेंगे नहीं बताएगा तो थरेंगे उसको.
इतना मेहनत से पढ़ाए काहे हैं या तो. बिजनेस करने में चले जाओ समय क्यों बर्बाद. कर रहे हो सही बात है भाई तो थू देते हैं. आदमी वो सब डिसिप्लिन डर बनाने के लिए. जरूरी है आप बताइए एक आदमी डेली 30 40. हजार बच्चे आए 5000 बच्चे आए आप नहीं. पीटिएगा तो मन बढ़ जाएगा उनसे उनको पता. होता है कि डिसिप्लिन में रहना बहुत जरूरी. है सही बात है अच्छा आपकी कोचिंग को लेके. एक बड़ी चर्चा चलती है जब मैं गया क्योंकि. मैं यहां पे कोचिंग सेंटर आया था और बड़े. सारे बच्चे मिले और आप भी कह रहे हैं. गरीबों का पढ़ाते.
क्या रुपए लेते हो आप फीस पढ़ाने का? बहुत सस्ता होता है। वो हमारा डेढ़ साल. पढ़ लेता है 6000 में। अब महीना का जोड़. लीजिए उसको। वाह हां कितना रुपया आएगा? मतलब बहुत महीना का एक-एक ऐसा बैच है जैसे. मैप पड़ेगा। वो तीन महीना पड़ेगा। ₹200. में दो ₹200 में तीन महीना पड़ेगा। कहीं. बैठो। आगे बैठो पीछे बैठो। कहीं बैठ जाओ. यहां पे। ₹200 में तीन महीना पूरा मैप पढ़. के चल जाता है। एक.
एक अभी किसी को एक बच्चा आया था वहां पे. अभी पीसीएस का एग्जाम होता है उसमें ₹4500. देके एसडीएम बन गया कह रहा है कि सर हम तो. इतना सस्ता में हो गए कोई बात नहीं अभी एक. बच्चे का रिजल्ट आया जेई में अभी उसको. आईआईटी कॉलेज मिल गया बड़ा खुश है कह रहा. है कि सर जानते हैं जब हम पढ़ना आए थे ना. तो जितना वो कोचिंग वाला अन्य कोचिंग वाला. जीएसटी मांग रहा था ना उतना तो आपका पूरा. फीस था. अब आज देखिए जेई निकाल लिया जेई मेन. एडवांस दोनों तो ये इसके मतलब इसका.
कांसेप्ट क्या है? गरीब देके करना है या. सबका यही फीस है कि सबका यही फीस है। हम. फीस नहीं गुरु दक्षिणा होना चाहिए। अब. हमारा पूरा ज्यादातर कुछ टीचर लोग भी हमको. इस वजह से नाराजगी रहती है उनकी भी। अब वो. खुल के नहीं बोल सकते हैं कि हमसे मेन. नाराजगी किस वजह से है? यही फीस के वजह. से। लेकिन दबोपाव में उनको भी ये नाराजगी. रहती है कि यही खराब किए हुए हैं सब कुछ।. नहीं तो आज हम लोग बहुत पैसा कमाए रहते. हैं। हमारा कहना है ना कमाए ना कमाए देम।.
साल में क्या लड़के पढ़ते हैं आपके यहां. से? एक साल में अगर अनुमानन बताना हो नहीं. बता पाएंगे हम। बहुत ज्यादा 15 मिलियन. एप्लीकेशन पे हैं जो मतलब क्या वेट वेटिंग. में चलता है आपका? ऑनलाइन पढ़ जो पढ़ाई कर. 15 मिलियन ओके।. तो उसके एप्लीकेशन पे 15 मिलियन है उस पे. एक एक बच्चा कई-क दो-दो बैच लिया होता है. कई जैसे कोई यूपी यूपीपीसीएस भी पढ़ रहा. है यूपीएससी भी पढ़ रहा है तो ऐसे भी होते. हैं सब बहुत सारे बच्चे और ये ऑफलाइन में. क्योंकि चारप लड़का तो हम भी देखे थे जब. तो आप गए किए थे एक टाइम पे 5000 बच्चा.
रहता है सर सुबह से सुबह 7:00 बजे से लेके. रात 9:00 बजे तक अब जोड़ लीजिए कभी भी. क्लास खाली नहीं हो सकता है एट अ टाइम हर. घंटे 5000 बच्चे हैं अगर 10 घंटे भी क्लास. चला मिनिमम 10 घंटा क्लास चलता है मतलब. एवरेज 12 घंटा क्लास चलता है लेकिन हम. मिनिमम मानते हैं 10 घंटा भी क्लास चला तो. पांच में 10 5000 एक घंटे में आते हैं. मतलब 500. तो कोई कहा नहीं आसपास में कि खान साहब का. इतना मतलब इतना बड़ा बैच हो गया एक एवरेज. फीस कर लो थोड़ा घर परिवार भी बड़ा हो. जाएगा और अच्छा हो जाएगा जैसे शादीवादी हो.
गई है आए तो होंगे कुछ दो चार बुद्धिमान. लोग कि थोड़ा रेट बढ़ा दो मार्केट में बगल. वाले टीचर भी खुश रहेंगे आप भी कमाओगे. थोड़ा घर बड़ा हो जाएगा स्टाइल अच्छा होगा. गाड़ी जो है थोड़ी महंगी हो जाएगी महंगी. गाड़ी के चक्कर में हो सके तो किसी की. मोटरसाइकिलों ना खरीदा पाए तो हमारे पास. जो है हमारे हम खुश हैं उससे लेकिन मेन है. कि बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। आज. हमारे यहां जब रिजल्ट आया था तो कोई चाय. बेचता था। किसी के पिताजी रो के कह रहे. हैं कि हम फल बेचते थे। हम कभी सोचे नहीं. थे कि मेरी बेटी का नौकरी हो जाएगा। मेरी. बेटी अधिकारी बन जाएगी। ऐसे ऐसे बच्चों को.
हम लोग पढ़ाए वहां पे। एक बच्चा था अभी. उसका बिहार पुलिस में हुआ है। वो उसका ना. हाथ में फ्रैक्चर हो गया। हम कह रहे गधा. कहीं का। जब तुमको पता है कि मेडिकल होने. वाला है। तुम्हारा दौड़ है तो तुम. फ्रैक्चर कैसे कर लिया? तो साइड में ले. गया। कह रहा है कि सर जानते हैं हम लोग. बड़ जात के हैं। तो हम कहा इससे क्या मतलब. है? कहा सर छोटमोट काम हम लोग करेंगे ना. तो ग वाला और सुनाएगा हम लोग को कि देखो ह. जात हो काम करता ना लेकिन हकीकत में सर. ट्रक से ना हम लोग सामान उतारते थे तो. मालिक कभी-कभी दो ट्रकवा जगी ना तो मालिक.
गरियाने लगता था जल्दी उतार जल्दी उतार तो. मुआव छबान के हम लोग उतारते थे लोग यहां. पे और वही में जल्दी के चक्कर में ना. थोड़ा हाथ क्रैक हो गया इस टाइप के बच्चे. पढ़ते हैं हमारे यहां कोई मतलब ये ऐसा. वाला नहीं आता कि आए आए अमीर कोई मना. थोड़ी अमीर से दुश्मन है बड़े को BMW से. कोई आ रहा है ना ये सब तो हमने अब कुछ आ. जाएगा उतना 500 लेखन के बीच में BMW वाला. कितने कुछ आ जाएगा पता नहीं चलेगा उसको वो. अच्छा जो BMW से आ रहा है उसको क्या जरूरत.
है 80900 की नौकरी अभी एक हमारे यहां एक. लड़की थी एकदम दुबली पतली थी तो उसको हमने. हमेशा डांटते रहते थे कि खाना पीना खाया. करो तुम लोग ऐसे आंधी आएगा तो उध आ जाओगी. तो एक बार दबे अंदाज में कही थी कि उतना. घर से पैसा नहीं आता है. मतलब बच्चों में यह एक उस लड़की की हम बता. रहे हैं। ऐसे लाखों बच्चे हैं जिनके पास. सोचना पड़ता है कि एक के टाइम का खा लेते. हैं। सोचते रहते हैं कहीं भंडारा लगा है. तो जाके खा लेते हैं। उनके पास पैसा जब.
उसकी सैलरी आई ना ₹0000 की ₹80,000 आई थी. यहां पे तो आई थी मिठाई लेके और उसके खुशी. का जो चेहरे पे अंदाज था जानते हैं सर. ₹80,000 महीना में धड़ाक से आ जाता है।. मतलब उसके चेहरे पे वो जो खुशी थी कि. जिसको ये सोचना पड़ता था कि हम खाएंगे ठीक. से कि नहीं और कहिए सर पापा ना कपड़े की. दुकान पे किसी के कपड़े की दुकान पे नहीं. होते हैं लोग हेल्पर दिखाने वाले होते हैं. कि हां देख लीजिए पिताजी ये वाला काम करते. हैं हम पिताजी का काम छुड़वा दिए इतना. मतलब खुशी होता है ना कि तब लगता है कि ये.
सब करोड़ों ये दुआ जो मिलेगा ये करोड़ों. में कोई नहीं खरीद सकता है। आज भी कोई. बच्चा है तो वो कह वो कह सकता है कि मेरे. लिए खान सर है हमारा कोचिंग है उनके लिए. और लड़ा है इंसान उसके लिए देखिए एक चीज. होता है कि कल को कोई यो कोचिंग खोल दे कह. दे कि हम ₹50 में पढ़ाएंगे तो एक. स्टैंडर्ड नहीं ना मेंटेन कर पाता है. दुनिया का सबसे बड़ा कोचिंग है कि. स्टैंडर्ड जिस जगह पे है वहां से अगर हम. 200 की चीज को 2000 भी करेंगे तो लोग. मजबूरी है आएंगे हां तो उस जगह पे खड़े. होकर आप तब वहां पे कर सकते हैं यहां पे. एक बड़ा वो फेमस कोर्ट है हम कि हमको बड़ा.
खराब लगता था जब महंगी फीस ली जाती थी।. लेकिन एक कहावत कहा जाता था इफ यू डोंट. लाइक द रूल फॉलो द रूल गो ऑन द टॉप चेंज द. रूल। तो हमें शुरू से यह बड़े फीस के. खिलाफ थे हम लोग। तो हमने कहा कि कभी मौका. मिलेगा तो इसे चेंज करेंगे। तो जब हम भी. आए एजुकेशन के टॉप पे तो हम भी चेंज कर. मैं इसी सवाल पूछ लेता हूं कि आज की. शिक्षा प्रणाली में सबसे बड़ा दुविधा क्या. है? सिलेबस, टीचर या फिर सिस्टम? तीनों तीनों दुविधा है टीचर अपन बहसबाजी.
में लग हम सबसे विद्वान है भाई विध्वता. अपना घर रखो हमारे जैसे लाखों टीचर पढ़े. होंगे लोग इंडिया में भारत में शिक्षकों. की कोई कमी नहीं है आप विद्यार्थी के जीवन. में क्या चेंजिंग लाए क्या आप उसकी फीस. डाउन कराने में इंडिया लेवल पे योगदान किए. उसको उसके टू द पॉइंट क्वेश्चन पढ़ाने में. योगदान किए कि आपका पढ़ाया हुआ सीधे-सीधे. क्वेश्चन आ रहा है एक बच्चे को क्या चाहिए. हम कम फीस में पढ़ाएं आराम से समझा दिए. कितनो गधा है समझ गया और जो पढ़ाए धए थे. क्वेश्चन आ गया इससे ज्यादा टीचर का क्या.
रोल है कुछ नहीं कुछ नहीं है यहां पे अभी. हम लोग पढ़ाए थे ना इतना क्वेश्चन आ गया. था ना कि केस कर दिया था हम लोग के ऊपर कि. इनके यहां से पढ़ाए हुए में आ गया बड़ी. दुख हुआ बड़ी दुख हुआ कि एक शिक्षक लोग. केस कर दिया मिलके तो बड़ा आपको समझ में. नहीं आता कि हम किस क्यों लड़ रहे हैं. क्यों और जब ये सुप्रीम कोर्ट तक आ गया. मैटर तो कई बार अजीब सा लगता था क्योंकि. इंडिया में लोग बड़ा जल्दी जज कर लेते हैं. कि कल को सुप्रीम कोर्ट बुला के पूछे कि. काहे पढ़ाए थे कि आ गया तो हां ना मतलब अगर. खबर आपके खिलाफ बन गई तो एक धारणा बन जाती.
है वो सही है गलत है क्या है कैसी है उतना. तो वो जय भी नहीं करता जय भी नहीं उतना. कोई समझता नहीं यहां पे हालांकि सुप्रीम. कोर्ट के जज डांट के भगा दिए यहां पे तो. पढ़ा रहा है क्यों आदमी यहां पे उन्होंने. एग्जांपल भी दिया कि हम लोग भी जब पढ़ते. थे तो एक सामने कोई बुक्स आती थी जिसमें. हम लोग को पता था कि इससे क्वेश्चन आएंगे. तो आदमी पढ़ाता ही किस लिए यहां पे तो हम. यही मेन टीचर का यही इसके सिवा टीचर का. क्या काम है अब कोई कहेगा कि संस्कार. सिखाना चाहिए शिक्षा के ओसामा बिन लादेन. भी बहुत पढ़ि लिखल था। हां। दुनिया का. जितना खतरनाक काम है पढ़े लिखे लोगों ने.
किया है। सही बात है। मां-बाप के समय जो. संस्कार घर से मिलता है वो बहुत जरूरी. होता है। एक इंसान का अपना मानवता क्या. होती है? वरना स्कूल कॉलेज में प्रोफेसर. सब तो अभी अभी यहां पे देख रहे हैं यहां. पे अफजल गुरु अनपढ़ बोलिएगा।. हां आतंकवादी जो है पढ़ा लिखा जितना बड़ा. घोटाले हुए सब पढ़े लिखे लोगों ने किया तो. एक शिक्षक सिस्टम का क्या चीज है कि देखिए. एक जरूरी चीज क्या होती है ना कि एजुकेशन. के बदौलत अगर आप अपने परिवार का पोषण नहीं. कर पाए हैं तो लोग एक का एजुकेशन से मनोबल. टूटेगा भरोसा टूटेगा तो जो सरकार में बैठे.
लोग हैं जो सिस्टम चला रहे हैं उनको. बच्चों ने अपने जीवन का सबसे बहुमूल्य समय. दिया जब वो ग्रेजुएशन पे थे 18 से 25 साल. का ऐज जो होता है यह किसी की जिंदगी का. सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इससे कमती. चीज कुछ नहीं है। ये वो अपने कॉलेज अपने. यूनिवर्सिटी को दे दिया। बदले में. यूनिवर्सिटी ने क्या दिया? आपने तो उससे. जिंदगी का सब कुछ छीना। बदले में फोटोबाजी. हवाबाजी कुछ नहीं। अगर ग्रेजुएशन करके. निकल रहा है। कोई 25 3000 की नौकरी नहीं. कमा रहा है ना तो तो कहते हैं आग लगा दे. ऐसा व्यवस्था के ऊपर। बट आज 70% कॉलेज ऐसे.
ही है। किसी काम के नहीं है यहां पे। आप. चार साल रख के उसको कुछ नहीं सिखा पाए।. जी। हां। सही बात है। हां। आपके पास. स्किल्ड ही नहीं है यहां पे। आप उसको. एडिटिंग तक नहीं सिखा पाए। आप उसको कंपनी. बेसिक किसी फील्ड में देखिए किसी फील्ड. में देखिए कहीं पे भी तो हमको यह नहीं समझ. में आता गया किस लिए था यूनिवर्सिटीज में. सही बात है इस देश में सारे अब तो. बड़े-बड़े संस्थानों में हालत हो गई कि. निकल के बच्चे कुछ नहीं देखिए सबसे बड़ा. चीज क्या है ना बेवकूफ बनाने के लिए ऐसा. बेवकूफ बनाओ ना कि बेचारा सामने वाला समझ. में ना आए कि शिक्षा ग्रहण करो ये करो. क्योंकि इसका कोई नाप नहीं होता है मानक. नहीं होता है यहां पे सबसे अच्छी चीज होती.
है कि भैया आपने उसे ग्रेजुएशन कराया चार. साल अब तो ग्रेजुएशन 4 साल का हो गया आप 2. साल उसको रगड़ के पढ़ाओ लास्ट के 2 साल आप. उसको को स्किल सिखाओ कि आप दवा बनाने की. कंपनी में कैसे जा सकते हो। एमआर ही कैसे. बन सकते हो? मार्केटिंग कैसे जो मन वहां. पे 50 75 जो नौकरी करना हो जो करना है आप. वहां पे स्किल सेंटर करो। उसके बाद जब वो. हो जाए तो लास्ट का छ महीना आप उसको फील्ड. में उतारो कि अब तू कमा के दिखा उतना कमा. के दिखा। तो मार्क्स जो होता है जैसे हम. लोग प्रैक्टिकल में नंबर देते हैं तो.
उसमें भी उसको नंबर मिलना चाहिए कि हां. भैया तुमने इतना कमा के दिखाया है। तुमने. इतना बिजनेस करके दिखाया है। ये करके. दिखाया। मैं हमारी फील्ड का कह देता हूं।. इस देश के 90% या 95% मीडिया संस्थानों. में बच्चे पढ़कर डिग्री लेकर स्पष्ट हिंदी. लिखना नहीं सीख पाते।. अब आप यकीन नहीं मानेंगे जब इंटर्नशिप. करने बच्चे आते हैं तो आप सवाल पूछिए कि. आपको हिंदी लिखना आता है? वो कहते हैं. नहीं और हम पूछते हैं कि हिंदी पत्रकारिता. करने वाले हिंदी नहीं लिख पाते। कह रहे. हैं सर किसी ने बताया ही नहीं। अरे हमने. कहा अब इससे इससे ना सोचिए क्या वो होगा।.
ना हिंदी बोलना आता है ना हिंदी लिखना आता. है। आप कह दीजिए गिनती सुना दो। वही बचपन. सुने हैं। आप हमारे एजुकेशन सिस्टम में कह. दीजिए ना कि आप पढ़ाई कर रहे हैं तो पैसा. कमाना जरूरी है। लेकिन अगर आप ये डायरेक्ट. कह दीजिएगा तो भड़क जाता है। पढ़ाई का. मतलब ये थोड़ी होता है। काहे नहीं होता. है? क्यों नहीं होता है? फिर एक एग्जांपल. देगा फला आदमी पढ़ पढ़ा नहीं था तो ये भी. कर दिया। पढ़ाई बेसिक चीज़ है। जरूरी होती. है। लेकिन आप बताइए कोई इंसान पीजी कर. लिया है, पीएचडी कर लिया, खाली बैठेगा तो.
समाज में पढ़ाई के प्रति भरोसा टूटेगा। आज. कोई लड़की हम लोग के यहां से पढ़ के आती है. तो हम लोग उसको अगर थोड़ा कमियां भी रहती. है तो हम लोग विशेष ध्यान देके उसको आगे. बढ़ाते हैं। रीज़न क्या है हमें पता है कि. अगर ये ये अधिकारी बन के अपने गांव में गई. ना, ना जाने कितनी लड़कियां पढ़ के पढ़ के. आगे बैठेंग। लेकिन अगर वही है कि अगर वो. खाली हाथ लौटी ना, तो उसके ऊपर 20 लोग. उंगलियां उठाएंगे। कि अरे पढ़ती थोड़ी थी, ये थोड़ी थी, वही हम हां दिल्ली गई होंगी. पटना गई होंगी यह कर रही उंगलियां उठाने. के लिए बहुत लोग हैं इस चीज के लिए अच्छा. इस देश में सर यह मानते हो आप कि सरकारी.
स्कूल अगर प्राइवेट स्कूल के आसपास आ जाए. तो हमारे देश की ग्रोथ और तेज हो सकती है. क्योंकि अभी मैं गया था एक कार्यक्रम में. और बड़ी बातें चल रही थी कि 2047 तक हम. देश को दुनिया का नंबर वन देश ये सबसे. बड़ा झूठ चीज है। ये सबसे बड़ा झूठ है।. देखिए ये बेवकूफ बनाने का तरीका है। 2047. तक आधी पीढ़ी मर चुकी होगी। आपकी बातों को. भूल चुके होंगे। 2025 में क्या चेंजिंग. लाइएगा? आप ये बताइए अगर 2047 तक आप देश. को बदल सकते हैं तो उस उसके हिसाब से 2025. का आपने गोल सेट किया होगा। किए होंगे आप.
25 में क्या चेंजिंग लाइएगा 47 तक ना आप. रहेंगे इतना ये राजतंत्र नहीं है। ये सबसे. बड़ा बेवकूफ बनाने का तरीका है। जब आप. 2015 में रहेंगे तो कहिएगा 2022 में. किसानों की इनकम दोगुनी कर देंगे। हो गया. दोगुना।. आत्महत्या रेट भले बढ़ा होगा। नहीं हुआ ना. यह सबसे बड़ा बेवकूफी है ये चीजें आज हमको. क्या करना है यह नहीं दिख रहा है आज. करप्शन है यह नहीं दिख रहा है बाबर के समय. का करप्शन दिख रहा है आज हमारे सामने. घटनाएं हो रही हैं समाज को झकझोर देने.
वाली घटनाएं हो रही हैं वो नहीं दिख रहा. है लेकिन दिखता है हमें तो 400 साल 500. साल पुरानी चीजें दिख रही है तो अगर हमको. बेहतर करना हो मान लो हम एक लक्ष्य ले. चलते हैं कि हमको भारत को बेहतर करना है. और एजुकेशन से ही सारी चीजें बेहतर होती. हैं आपके हिसाब से इंडिया में क्या चेंजज़. होना चाहिए सबसे बड़ा चीज क्या है कि आप. जब हम कहते हैं इंडिया को बेहतर करना है।. यहीं से हम लोग अलग रास्ते पर भटक जाते. हैं। इंडियंस को बेहतर कीजिए। इंडियंस को. ओके। आप एक-एक इंडियन आदमी एक गांव का. इंसान अपनी बूढ़ी मां का इलाज नहीं करा पा.
रहा है। उसके घर में प्रॉपर लाइट की. व्यवस्था नहीं है। वॉशरूम नहीं है। शौचालय. नहीं है। अगर उसको किसी बढ़िया शादी ब्याह. में जाना है तो उसके पास अच्छे कपड़े नहीं. है। गिफ्ट का दौर ऐसा चला गया कि गरीब. इंसान अब मिलने से खतरा नहीं लगा है। आप. जाके देखिए कोई फल खरीद रहा है तो गरीब घर. का गरीब घर का आदमी नहीं खरीद सकता है।. गरीब का खाना अलग है। अमीर का खाना अलग. है। गरीब का हॉस्पिटल अलग है। अमीर का. हॉस्पिटल अलग है। ये सब चीजें चेंज कीजिए।. देश अपने से चेंज हो जाएगा। लेकिन अगर. गुमराह करना है तो हम देश बदलेंगे। मतलब. इन देश बदल देंगे लोग या मतलब देश में को.
जैक लगा के उठा देंगे देश को। देश बनता है. देशवासियों से। आप उसका चेंज कीजिए।. महिलाएं जो हैं उनको कोई आगे बढ़ाने के. लिए क्रम नहीं अगर होम इंडस्ट्रीज चालू हो. जाए जो देश घर की जरूरत की चीजें हैं यहां. पर। महिलाएं उसमें बढ़-चढ़ के भागीदारी. लेने लगे। आज देखिए हर जिला में अगर सरकार. एक बड़ा सा 10 एकड़ का जमीन ले ले हर जिला. में कि वो मार्केट में जितनी भी दुकानें. रहेंगी वो औरतें ही उस दुकान को चलाएंगी. तो उसमें एक इको सिस्टम बन जाएगा। उसमें. हजार दुकानें आप खोल दीजिए कि उसमें जींस.
नहीं चला सकते। तो जो अभी पहली पीढ़ी जा. रही है बिजनेस में वो तो अपनी बेटियों को. वहां कर सकते हैं भाई तुम्हारे लिए अच्छा. है। है एक भी जिला में नहीं है। लड़कियों. के लिए कौन सा जिला है? हर पांच जिला के. बीच में एक गर्ल्स यूनिवर्सिटी होनी. चाहिए। वुमस यूनिवर्सिटीज होनी चाहिए। है. नहीं है। देश 47 में कहा जाने कहां से. डेवलप कर देंगे लोग यहां पे। मतलब देश में. 10% लोग हैं ऐसे जिन्हें समझ में आता है. कि सामने वाला झूठ बोल रहा है। लेकिन. लोकतंत्र चूंकि भीड़ तंत्र हो चुका है।. 90% की आवाज ज्यादा सुनाई देती है। हम देश.
की बात करेंगे यहां बूढ़ा इंसान कैल्शियम. की कमी जब आपको लंबे समय तक 20-25 साल तक. अगर आपको कैल्शियम की कमी रही है ना तो. बुढ़ापे में शरीर झुक जाएगा। तो लोग कहते. हैं बुढ़ापे में झुका है। नहीं। 20 साल तक. बेचारा ने कैल्शियम की कमी झेला है वहां. पर। औरतें देखिएगा जो नए गांव वगैरह में. किसी की नई-नई शादी हुई है। बेचारे के पास. अच्छे भोजन नहीं होने की वजह से. हीमोग्लोबिन कम है। प्लेटलेट कम है। जिस. वजह से उसके नई-नई बहू आएगी या नई-नई कोई. गांव में रहेगी। बेचारा उसका मन नहीं.
लगेगी। थकी थकी रहेगी। वो चार को सुना. देगा। सब कामचोर है। ये है वो है। बूढ़ी. औरत है बेचारा उसके शरीर में कमी है।. यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है। प्लेटलेट नहीं. है। उसका बदन दर्द करेगा। अब वो अपनी बहू. को खोजेगी। ये बहू पैर दबाओ। अरे यार उसका. इलाज करा दे भाई। पैर दबाना एक संस्कार. है। चलिए भैया लोग शौक से दबा देते हैं।. हम लोग भी आज भी जाते हैं। मम्मी सोई भी. रहती है तो दोबारा से दबा देते हैं। चलिए. यहां पर लेकिन बताइए आप कहिएगा कि देश. पढ़ने को वो कहां जाएगा बेचारा? कितने. भयानक लेवल तक गरीबी है। आप सोच नहीं. सकते। मेरा रिसेप्शन जब खत्म हुआ ना तो जो.
झाड़ू मारने वाला था। कहीं कुछ साफ सफाई. करने वाला था। हम उन लोगों से मिलने गए. ड्राइवर वगैरह तो इन तो पूछे सर हम लोग का. खाना किधर है? मतलब समझिए उन्हें ये लगता. है कि मेरा खाना अलग है। हम गरीब हैं। हम. छोटे लेवल का काम करते हैं। मेरा खाना अलग. है। ये तो बड़े लोगों का खाना होगा। फिर. हम उन लोगों को वही खाना खिलाएं जो हमारे. यहां पे हम लोग खाए थे। हमारी फैमिली खाई. थी। जो वीवीआईपी गेस्ट थे वो लोग खाए थे।. वही खाना था। कोई फर्क नहीं था। जो उनकी. थाली में थी वही उनके थाली में। लेकिन. उनका हिम्मत देखिए। टूट चुका था हिम्मत।.
उनको उन्हें लगता था वहां रखा हुआ था. लेकिन हिम्मत नहीं थी कि प्लेट उठा के खा. ले। शायद कोई छीन ना ले। ये कहीं ना कहीं. बेचारा कोई डांट ना दे। कोई तुम्हारी. हिम्मत कैसे यहां मतलब उन्होंने कहीं ना. कहीं ठोकर खाया होगा। दूध का जला हुआ. लस्सी फूंक के पीता है। अभी साहब हम छोटे. थे अपने गांव तो हम देखे थे कि उनका खाना. अलग लगता था। चीजें अलग थी। आप बात करते. हैं 47 में देश बदलने के लिए।. आप जा के देखिए सरकारी हॉस्पिटल में। फिर. आप भूल जाइएगा 47 में। देश की आप गरीबी. कैसे दूर कर सकते हैं? कोई अंबानी बने या.
ना बने लेकिन हर घर में कम से कम 40. 50,000 की नौकरी हो। बड़ा तो प्रायोरिटीज. अलग है ना? ने सब कहा था कि आत्मनिर्भर. बनाया जा रहा है। आप जॉब दीजिए। मैं. ज्यादातर जितने कई सारे मुख्यंत्रियों का. मैंने पॉडकास्ट किया और मैं बार-बार पूछता. था सरकारी नौकरी को लेकर तो उन्होंने कहा. देखो सरकारी नौकरी पॉसिबल नहीं है आबादी. के हिसाब से हम चाहते हैं जिसका जो टैलेंट. है उधर अपना एक्सपेरिमेंट करो और उधर. नौकरी देना शुरू करो। इंडिपेंडेंट. स्वारोजगार जिसको हम कहते हैं. एंटरप्रेन्योरशिप ये सब भाषण देता है। सब. ये सब ये सब एक समय के भाषण देना चालू. करता है। सब कोई सब चीजों की जरूरत नहीं.
पड़ती। पूंजी चाहिए। गांव का आदमी दो भैंस. रखा है। बेचारा दो भैंस में परेशान है। एक. भैंस दूध दे रही है। एक बिसू गई है। एक. बीमार पड़ गई है। एक ई पढ़ ले परेशान है।. अगर आप उसको पूंजी दे दीजिए बैंक से अगर. बैंक उसे फाइनेंस कर दे ₹1 लाख दे दे। दो. के जगह 20 भैंस लाएगा। 20 भैंस लाएगा। आप. भाषण बाजी बंद कर दीजिए। उसकी स्थिति सही. हो जाएगी। ना उसको कॉलेज ना कोई मोटिवेशन. ना कोई केस स्टडी ना कुछ। दो से 20 भैंस. आने के बाद वो सही हो जाएगा। अगले साल 2. साल 3 साल के बाद 20 भैंस से 50 भैंस पे. चल जाएगा। फिर आप पकड़ नहीं पाइएगा उसको।.
निकल दिया वो निकल दिया यू खेल होता है. भाषण सिखाते हैं किसी को बेवकूफ बनाना है. ना तो उसे कहिए कि शिक्षा बहुत जरूरी यह. वो जरूरी भाषण बाजी मत करो कोई होटल में. काम कर रहा है ना प्लेट उठा रहा है यहां. पे जो खाना बना रहा है वो जिंदगी भर खाना. बनाते रह जाएगा पैसा दीजिए अपना होटल. चलाएगा. पूंजी कहां से लाएंगे पूंजी भाषण तो देके. चल जाएंगे मुख्यमंत्री लोग कि हम सबको. नौकरी नहीं दे सकते सब मांग रहा है नौकरी. आपसे जिस दिन सब लोग नौकरी मांग देगा भाग. जाएंगे लोग यहां पे सब मांगा है नौकरी. इसको मैं एक चीज और फ्रेम समझने की कोशिश.
करता हूं मैं। हमारी आबादी 140 करोड़ है।. जैसे दुनिया के वो देश जो फ्री एजुकेशन. देते हैं या फ्री हेल्थ की बात करते हैं. उनकी आबादी बहुत कम है। जहां पर पर कैपिटा. व्यक्ति पर खर्चा ज्यादा होता है। बहुत. सारी चीजें आती है। वहां पर लोग बहुत कम. है। गाड़ियां वहां जब लोग बाहर जाती है. जैसे मेरे कजिन बाहर गए तो मुझसे कहे मेरा. भारत लौटने का मन नहीं होता। हम काहे कहे. कि वहां पर हर इंडिविजुअल का ख्याल रखा. आता है। वहां जो दवाइयों की प्रीमियम. क्वालिटी होती है वो मिलती है। तुम्हारे. यहां छट-छांट के आती है। तुम्हारे लोगों. पर एक्सपेरिमेंट होता है। इंडिया। बड़ी. बातें उन्होंने मुझसे कही जो मुझे बड़ी. नकारात्मक और गुस्से वाली लग रही थी और.
कुल मिलाकर मूल वजह वो आबादी को मान रहे. थे। इतनी बड़ी आबादी के हिसाब से इस देश. को कैसे उठा सकते हैं? पहली बात कि ये. बताइए जो आबादी है उसको मार के खत्म तो. नहीं कीजिएगा। नहीं कर सकते थेनोस वाला. काम तो नहीं कर सकते हैं आगे खत्म कर. देंगे। अवेंजर्स वाला दूसरा हम आपको कहते. हैं कि एक काम करते हैं। आपके यहां ना 25. ठो एकदम खराब ट्रक भेज देते हैं। कोनो काम. का नहीं है। हम आप परेशान परेशान हो. जाएंगे। कहां रखें? लेकिन 25 का 25 बढ़िया. ट्रक देते हैं तो क्या कहिएगा ढेर ट्रक हो. गया है दिक्कत है बहुत तो पैसा अच्छा आएगा.
रखेंगे धकाधक पैसा आएगा मजा काटेगी तो 140. करोड़ आदमी को जब आप जनसंख्या के तौर पे. देखिएगा तो बहुत दिक्कत होगा जिस दिन वो. आपको वर्क फ़ोर्स दिखने लगेगा जिस दिन आपको. वो दिखने लगेगी स्किल्ड है वो दिखने तब. बोझ नहीं बनेगा वो आपने उसको सिखाया क्या. आपको पता है कि आपका एजुकेशन सिस्टम किसी. काम का नहीं ग्रेजुएशन करके 500 का नौकरी. ना कमा पाएगा इसलिए आपको जनसंख्या बोझ. लगती. चाइना की बात तो जनसंख्या थी। उसने बोझ. कैसे लगने दिया यहां? एजुकेशन स्किल. सिस्टम को चालू किया वहां पे। आज हर इंसान. स्किल करने लगेगा। भात दाल बांटने की.
जरूरत नहीं। चलो इसी में पूछता हूं सवाल।. चाइना ने क्या ऐसा किया कि उसकी आबादी. उसके लिए एसेट हो गई और हमारी आबादी आज भी. हमें बोझ लगती है हर चीज में।. मतलब वहां पर एक जो डिसीजन लिया जाता है. उसको इंप्लीमेंट करना है। यह करना है मतलब. यह करना है और हर इंसान अपने काम पर फोकस. कर रहा है। हमारे यहां हर इंसान अपने. पड़ोसी के हिसाब से काम कर रहा है। खान सर. की कोचिंग में क्या चल रहा है? पड़ोसी के. यहां जलन है। खान सर की शादी में कौन आया? खान सर की मेहर में फोटो काहे नहीं दिख. रहा। खान सर कंघी काहे ऐसे करते हैं? खान.
सर का बुसड़ का रंगी काहे है। तो ये चीजें. चाइना में ये सब नहीं होता। तो वो इंसान. अपना वर्क कर रहे होते हैं और वहां सबसे. बड़ा चीज क्या है ना कि मेल और फीमेल में. भेदभाव नहीं है। जैसे अपने यहां ना अगर आप. कोई ईंटा जोड़ने वाला मिस्त्री लाए हैं घर. प्लास्टर कर रहा है। अगर कोई महिला आ. जाएगी ना तो आप चौंक के देखो अरे ये कहां. से चल रहा है? क्यों नहीं कर सकती भैया? आप अपने जेब में एक 5 किलो का 2 किलो का. ताला लेके घूम दीजिएगा। तीन मोबाइल रख के. जेब में देख लीजिए। ऑकवर्ड लगने लगेगा।. तीन-तीन मोबाइल ले लिए हैं आप। वो 3 किलो. का बच्चा लेके पेट में 9 महीने तक रहिए।.
उस महिला को आप ये कह रहे हैं क्योंकि हम. लोगों ने ना अजीब माइंडसेट बना लिया उसको. देखा नहीं ना सर देखे नहीं है देखे नहीं. है यहां पे हम तो हमको पंकज त्रिपाठी मिले. थे पडकास्ट कर रहे थे हम तो हम उनसे वो. हमसे कहे कि जब पहली बार दिल्ली आया उस. लड़की सुट्टा पी रही थी मैं सकपका गया मैं. कहा हे रहा हूं ये सुट्टा पी रही है कहे. मुझे अभी कहे मुझे अभी तो गलत है फिर कहे. तो मैंने कहा अब कहे अब मेरे गांव वालों. से मेरा नहीं पड़ता मैंने कहा क्यों बोले. हमारा माइंडसेट अलग हो गया मुझे सुट्टा. पीने से भी दिक्कत है लेकिन लड़कियों के. इसलिए दिक्कत दिक्कत नहीं कि वो लड़की है.
इसलिए दिक्कत है सेहत के लिए खराब है. लेकिन लड़की पी रही है अब उस बात से. दिक्कत नहीं है पहली बार जब मैं निकला तो. मैंने कहा हे राम ये कैसे पी सकती है रे. ये तो कच्चा पहन घूम रही है और बड़े. मसूफियत से उन्होंने समझाया मुझे तो ये. मुझे रियलाइज हुआ कि एजुकेशन या बेहतर. कल्चर से चीजें बेहतर हो सकती है लेकिन. फिर वही हरा बी निकलेगा देखिए चाइना जो है. ना स्किल पे बहुत आगे वर्क करने के आपको. यहां पे ऐसा दुनिया का कोई घर है जहां. चाइनीस समान नहीं है नहीं हो ही नहीं सकता. वहां पे आप चाइना का हर चीज है तो वहां तक.
सोच रहा है चाइना तो प्रोडक्शन चीज़ करिए. जहां जो चीजें हैं अब आप एक सिंपल सा चीज. बताते हैं चाइना वाले जो है सब बहुत सारे. चीज का मतलब. डंप जैसे चाइना ने इस पे टेरिफ लगाया. अमेरिका ने चाइना पे टेरिफ लगाया उसको कोई. टेंशन नहीं वो अफ्रीका में ले जाके पलट. देगा यहां पे लेकिन एक छोटा बिजनेसमैन. कहता है कि हमारे पास मार्केट कहां है. आपके बगल में नेपाल है भर दीजिए. बगल में ही तो नेपाल है यहां पे भर सकते. हैं भूटान है बांग्लादेश है नहीं भर पा. रहे हैं हम हम लोग ये एक बड़ी समस्या है।.
हमारा सबसे लड़ाई भी चल रहा है आजकल। तो. खैर ये तो एक इंटरनेशनल इशू हो जाता है।. लेकिन एक बिजनेस व्यापार के लिए तो जरूरी. है। अच्छा बॉयकॉट पाकिस्तान हो जाता है।. लेकिन पाकिस्तान को चाइना हथियार देता है।. पाकिस्तान में ये भी खबर आई थी कि वहां. अंदर चाइना बैठ के मॉनिटरिंग कर रहा था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान। हमारे देश में हम. चाइना के लिए गुस्सा क्यों नहीं दिखाते? हमारे देश में राजनीति और धर्म ज्यादा. हावी है। नहीं लोग भी तो नहीं दिखाते।. जैसे हम ही लोग थे। पाकिस्तान में खूब. गरिया आए। तो बात भी तो माइंड चाइना को ले. नहीं आए हम लोग माइंडसेट भी तो है कि हम.
राजनीति धर्म को ज्यादा वरीयता देते हैं. इसलिए क्योंकि मुसलमान वहां है बस इसीलिए. नहीं मतलब हम लोग के यहां राजनीति वो जो. समीकरण हो क्योंकि उसका जो पाकिस्तान जिस. नींव पे बनाया गया था ना वो न्यू ही. धार्मिक मामला था यही तो गड़बड़ अगर हमसे. कोई विवाद रहता तो जाता अगर कोई हम उसका. ख्याल नहीं रखते तो हम हमको समझ में आता. हमने कुछ नहीं किया उसका हम हमने उसका कुछ. नहीं नहीं किया पाकिस्तान का और वो चला. गया यहां से और सबसे बड़ा तो हम दोष देते. हैं उस समय के तत्काल नेताओं पे जिन्होंने.
एक्सेप्ट कर लिया कि पाकिस्तान अलग है। बट. जैसे मैंने बहुत सारी डॉक्यूमेंट्री देखी. मैंने आपका भी एक स्टेटमेंट सुना था कि. गांधी जी दुबले पतले थे उनको मार दे जिनक. मार देना चाहिए था। बहुत सारे उस पे बवाल. भी काफी मचा। खूब कांड हुआ। Twitter पे सब. नेता ने तालियां अपना राय दिए। लेकिन सर. उस दौर में जब मैं बहुत सारी. डॉक्यूमेंट्री देखता हूं तो देखता हूं कि. जैसे जवाहरलाल नेहरू का था कि उन्हें नहीं. अलग करना था। लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन. गई कि लोग मरने लगे और जिन्ना साहब जो है. वो मरवाए ही जा रहे थे। जानबूझ के बवाल. काटे जा रहे थे। बंगाल में आग लगवा दिए।. पंजाब में आग लगवा दिए कि हजारों लोग मरने.
लगे। तो ये हुआ कि मरते मरते मरते अब या. तो लोगों को मरते देखो या इस फसाद को. परमानेंट खत्म करें। जो उन्होंने दिखाने. की कोशिश की है। जितना मैंने पढ़ा लिखा. समझा। तो क्या वो रोका जा सकता था? पार्टीशन। जिन्ना अगर नहीं रहता तो कौन. पार्टीशन कर सकता था? ये बताइए। लियाकत. अली नहीं उनकी शायद इतनी हैसियत नहीं. हैसियत ही नहीं थी। जब देश पाकिस्तान बन. गया ना तो मुस्लिम लीग ने कहा था कि हमने. पाकिस्तान बना लिया तो जिन्ना ने भरे मंच. से डांटा था। कहा था कि पाकिस्तान का.
निर्माण मुस्लिम लीग के बस के बाहर की थी।. वो मैं था जिसने पाकिस्तान का निर्माण. किया था। एक जिन्ना मार दिए रहते। काम. खत्म हो गया रहता। बट जैसे यही बात आपने. कहा एक जिन्ना मार दिए होते। अभी बहुत. सारे लोग कहते हैं कि जैसे पश्चिम बंगाल. है। पश्चिम बंगाल में बहुत सारे इलाके हैं. जहां पर बिल्कुल एक अलग तरीके की बात हो. लगे। हिंदुस्तान में बहुत सारे लोग. पाकिस्तान का प्रेम करने लगे हैं और कई. बार झंडा उठा लेते हैं, नारा लगा देते. हैं। तो इन सब को बढ़िया से थुराई नहीं. होता है। बढ़िया से थूर दें लोग। सब शांत. हो जाएंगे यहां पे। अब जैसे हमारे पास. कश्मीर है। अब जाके थोड़ा कम हुआ है। वरना.
कश्मीर में भी बिल्कुल यही हाल था एक टाइम. पे। अब तो इस बार का मैं गया घूम टहला।. बहुत अलग लगा मुझे महसूस हो रहा था। बट 15. 20 साल पहले जो किस्सा हम सुनते थे। उनका. भी अलग कहानी था। ये तो हमारे पास था।. शुरू से ना डिस्प्यूटेड रह गया। यहां पे. जनरल बूचर की वजह से। अगेन वहां पे उसने. कबाली उसको घुसा दिया। आज हरी सिंह को तो. अब कोई दोषी नहीं देता है। अब किसी से. कहिए तो कश्मीर इशू में उठा देते हैं। मेन. हरी सिंह तो आग लगा के चल गए। कोई पूछता. है उनको अपना धुन था कि हम स्विट्जरलैंड. ऑफ एशिया बनेंगे। कवाड़ बन गए भाई।.
हरी सिंह ने क्या आग लगा के रख दिया था? जब सब कुछ खो दिए। तो आए आप हमारे पास।. हम तो उनका देख रहे थे। उनका पूरा सिक्का. विकक्का एक दिन कहीं इंटरनो आया था सोशल. मीडिया पे। तो उनके सिक्किम में तो पूरा. तिब्बत वब्बत सब उनके पास था और पहले. कश्मीर जम्मू कश्मीर तिब्बत का भी बहुत. इलाका सब सब उनके पास उनको वही धुन था. दुनिया पलट रही थी तो अपने हाथ से बाहर. निकल के नहीं देखे थे जब निकले तो पता चला. हमारे चार गो रिश्तेदारों के पाकिस्तानी. उठा ले गए सब तब आके हरी सिंह भागे-भागे.
आके साइन किए थे ये पहले साइन कर दिए रहते. कश्मीर का इशू नहीं हुआ रहता कश्मीर के. इशू को कैसे देखते हो अभी जो टैकल किया. गया 370 हटाया आपका क्या आकलन है बेहतर. हुआ 370 हटाना बहुत अच्छा था इसमें कोई दो. राय नहीं है उसको को साथ में दो अलग-अलग. स्टेट कर दिया गया। यह भी बहुत अच्छा है।. यूनियन टेरिटरी बना दिया गया। ये भी बहुत. अच्छा है। इसमें कोई दो राय नहीं है। ये. बहुत बेहतर डिसीजन है। कई अब मैं इस पे एक. और क्वेश्चन पूछ लेता हूं। कई लोग कहते. हैं कि जम्मू को भी कश्मीर से अलग कर देना. चाहिए। क्योंकि जम्मू वाले जो है वो पिसते. रहते हैं। सीटों की संख्या कम होती है।. बवाल सारा कश्मीर में होता है। आपके है इस.
पे। जम्मू कश्मीर एक साथ रहना चाहिए।. क्योंकि जम्मू कश्मीर में जितना मैंने. देखा है दोनों में बहुत सौहार्द भी नहीं. है। बहुत बहुत कम है। इधर वाले उधर को गरी. आते हैं उधर वाले इधर गरी आते हैं। बहुत. छोटा हो जाता है फिर क्योंकि अगर फिर. जम्मू बनाते हैं तो इतना एकदम छोटा. एडमिनिस्ट्रेशन हो जाएगा। अब ये तो. सेंट्रल गवर्नमेंट अपना सर्वे करा ले. क्योंकि ये तो चीजें बैठ के दो मिनट की. चीजें ठीक है। आपका बिहार बड़ा है हम बड़े. वाले बिहार पे आते हैं। बिहार को जब कोई. बीमारू राज्य कहता है तो खान सर को गुस्सा. आता है? नहीं देखिए गुस्सा की बात क्या है. कि आप चीज कैसे कीजिएगा? हम लोग के यहां. पे हर चीज के लिए बाहर जाना है। बढ़िया.
इलाज करना है तो भी बाहर जाना है। बढ़िया. पढ़ाई करना है तो भी जाना है। बिजनेस करना. है तो भी बाहर जाना है। तो वहां पे क्या. कर सकते हैं? ये इस वजह से सब सुनते-सुनते. आदत हो गया है। तो क्यों ऐसा है? आप लोग. के पास तो तक्षशिला था, नालंदा था, सब था।. कब था? सब था लेकिन कब था? 2000 साल पहले। हां।. इतना पहले 2000 साल पहले था। पिछले हजार. साल में बहुत बहुत पतन हुआ। बहुत ज्यादा. जरूरत से ज्यादा। मैंने एक वीडियो देखा. था। एक मैडम थी उनकी सरकारी नौकरी लगी थी।.
हां कह रही थी उनको कहां भेज दिए? हां।. मतलब बहुत कुछ कह रही थी। वो थोड़ा-मोड़ा. नहीं कही थी। वो जिस हिसाब से कही थी उस. पे सबने उनको सुनाया बहुत ज्यादा। लेकिन. कई लोग ऐसे भी आए क्योंकि जिन्होंने कहा. कि जो कह रही थी वो पूर्णता गलत नहीं कह. रही थी। आपकी छवि यही है बाहर कि कोई. क्यों आना चाहेगा। अगर उससे कहीं और बेहतर. जगह नौकरी मिलेगी तो उसका एक सामान्य जीवन. होगा। वो एक पिछड़ेपन की नजर से देख रही. है कि उसके जिंदगी का स्तर जो है वो शायद. कई गुना नीचे पहुंच जाएगा। कुछ-कुछ चीजें.
हैं वहां मन बढ़ाई बहुत ज्यादा है।. पॉलिटिक्स के वजह से ज्यादा है कि मतलब आप. अगर कोई जाति का इंसान है अगर उसका बच्चा. पैसे की कमी से पढ़ाई छूट रही है तो उसके. जात का कोई नहीं आएगा। उसको बचाने नेता और. उसको कोई घर नहीं है या कोई बीमारी से वो. ब्लड देने नहीं आएगा। लेकिन अगर किसी का. जाके कपार फोड़ दिया ना तुरंत बचा जाएगा।. ए नेता जी हमरा आदमी है थाना ये बहुत खराब. लगता है वहां ना बड़ा क्रीम क्राइम नहीं है. मतलब बहुत बड़े टाइप का नहीं है लिचड़ई टाइप. का है चाचा विधायक हां हां लिचड़ाई टाइप का.
किसी चाट वाले से चाट खा लिए कहा ₹30 हुआ. हमरा से पैसा मांगेगा हमरा से तड़तड़ा दिया. उसको यहां पे अब वो बेचारा देख रहा है हम. क्या कर पाएंगे हम तो ना लड़ पाएंगे ना कुछ. यहां पे तो वहां पर जो क्राइम कंट्रोल. करने के लिए योगी आदित्यनाथ टाइप का. एनकाउंटर की जरूरत नहीं है वहां महिला. पुलिस को लाए और जो भी हर मोहल्ले में दो. चार ठो क्रिमिनल टाइप के सब मन टाइप का. उसको कॉलर पकड़े और दो-3 किलोमीटर पैदल ही. खींच के ले जाए उसको उसका भूत उतर जाएगा. अगले दिन से गुंडई छोड़ देगा ये नॉर्मल. नॉर्मल मतलब क्या बताएं एक हमारे यहां आया.
था ग्रेजुएशन में पढ़ता था फर्स्ट ईयर. सेकंड ईयर का होगा धमका रहा था ऑफिस वालों. को ऐसे ऐसे हम लोग कहा अरे छोड़ो इन सबको. हटा दो यहां पे जो एक दिन जरूरत से ज्यादा. कर दिया उसको धोए लोग फिर उसका घर पता किए. लोग तो उसका घर रहने को ठीक नहीं था इस. टाइप के तो वहां गुंडई है तो मन बढ़ बहुत. ज्यादा हो गई योगी आदित्यनाथ आपको काहे. पसंद है? हम कई बार आपके भाषणों में सुने. हैं कि ये चाइना बन जाए तो चाइना ठीक कर. देंगे ये हो जाए तो ये कर देंगे। आपको. योगी जी का स्टाइल अच्छा लगता है जो ये. गुंडा फसाद ठीक किए हो। ये गुंडा फसाद को.
गुंडाई फसाद की तरह ठीक करना चाहिए। ये. आरती उतारने वाला चीज नहीं है यहां पे।. गुंडाई किए हो मार दो। बाद में देखा. जाएगा। बता देना जी गाड़ी पलटा था ये क्या. पलटा था? बता देना। पहले इलाज हो जाएगा।. कौन इंजेक्शन दिया था टेबलेट इंजेक्शन बता. देना। खत्म कहानी तो इस पे भी कई लोग कहते. हैं ह्यूमन राइट वाइट जो चलता रहता है सब. कोई ह्यूमनो राइट वालों को ना. जिस दिन वो पकड़े जाएंगे वो भी कहेंगे. बाबा बचा लो ये सब मामले में बाबा एकदम. सही है नो डाउट यहां एकदम अपराध ही मुक्त.
होना चाहिए कोई भी जगह अपराध कहीं से. एक्सेप्टेबल नहीं है चाहे किसी जाति किसी. धर्म का हो बिहार की पांच बड़ी समस्याएं. क्या है आपके हिसाब से एक तो तो बाढ़ आज. को से कंट्रोल नहीं हुआ इ बैल सबको बाढ़. कंट्रोल नहीं पहले बताओ असम और बिहार में. हर साल बाढ़ कहां आती है आजादी लाया जाता. है बाढ़ देखिए पैसा कमाने के लिए उसको पता. है000 करोड़ का बजट निकालेंगे 100 200. करोड़ बांटेंगे 800 करोड़ का हो गया केक. कटेगा सब में बेटेगा अगर हम बता रहे हैं. ना कि वहां के लोग भी वही हैं आप अपने.
यहां हम लोग कहते हैं ना कि उस सीमांचल जो. बाढ़ वाला एरिया है कि वहां आप किसी नेता. को घुसने ही मत दोगे जब तक बाढ़ है तुमको. घुसने नहीं देंगे यहां पे घुसने ही मत दे. एकदम पूरा बॉयकॉट कर देना चाहिए यहां पे. दूसरा वहां पे एक बड़ी समस्या लोगों के. पास पूंजी नहीं है। पैसे का अभाव है। पैसे. का जब अभाव रहेगा तो आप बिजनेस नहीं कर. पाएंगे। हम इतना पैसे का अभाव है कि. 10,000 12,000 के लिए मुंबई दिल्ली जाते. हैं। हां 10,000 अरे 10,000 में तो खुश. रहते हैं 101,000 में तो एक पैसे पैसा. बहुत अभाव है। तो क्या कर पाएंगे? अब जब.
पैसा नहीं रहेगा तो उस हिसाब से एजुकेशन. नहीं मिलेगा। एजुकेशन नहीं मिलेगा तो आपके. अंदर कॉन्फिडेंस नहीं आएगा। कॉन्फिडेंस. नहीं आएगा तो कोई वो जैसे मैडम आई थी. कहेगी तो इन लोग को बात करने नहीं बुझाता।. अरे भाई अमीर बहुत गरीबी देखा है इंसान. उसने। इतना ज्यादा गरीबी देख लिया कि. एयरपोर्ट पे जाने के बाद साफ सफाई देखने. के बाद आदमी को अजीब लगने लगेगा। तो कहेगा. कि गवार है। गवार नहीं भाई गरीब आदमी है।. तुम भी पहली बार एयरपोर्ट पे आए होंगे तो. ऐसे ही हुआ होगा। आते-जाते तुम्हें. कॉन्फिडेंस हो गया कि ये बोर्डिंग गेट है. और यहां लगेज ड्रॉप करना होता है। वो. इंसान उस हिसाब से जी रहा है वहां। तो.
पूंजी वगैरह भी बहुत कमी है। क्राइम जो है. वो बहुत भयानक लेवल पे है। और दूसरा क्या. है ना कि सजा कितना दुश्मनी लेंगे नहीं. लेंगे बोलते बड़ी ज्यादा हैं। मतलब एक. तमाचा मारना रहेगा तो 25 हुआ आएगा सर।. धुआधुआ कर देंगे। कौन है यहां पे एक दो. तमाचा मार के चल जाएगा और फिर यही जाएगा. तो उसको मारेगा। भाई इतना हल्ला काहे कर. रहा है? अरे आप क्या अस्पताल में कोई. दिखाने को कूट देते हैं। आजकल बड़ा खबर. वायरल हो रहा है।. अस्पताल मतलब अस्पताल में पीएमसीएच कहां. बड़ा रोज हर दिन तो हर चौथे दिन खबर पढ़ते. रहते हैं हम। अच्छा पीएम से पाप है। उसमें.
आप एक बार इलाज कराने चले जाइएगा ना तो. आपका हिम्मत कांप जाएगा। हम जमीन पे लेटे. हुए आदमी को देखे हैं और उस पे उसका. अटेंडेंट ऐसे पानी लेके चढ़ाता है। उसको. पानी चढ़ रहा है। अरे हम खबर पड़े चूहा. नाखून खा गया भाई। हम हमारा दिमाग खुद. खराब हुआ। हम अच्छा चूहा नाखून का खा गया. ना तो एक बार हमको ये भी नहीं समझ में आता. है जिसका मरीज था उसका अटेंडेंटवा कहां. गया था? ये भी तो देखिए। अरे हो सकता है. बहुत। तो ये बताइए एक मरीज पे एक डॉक्टर. तो नहीं ना खड़ा रहेगा। उसका मरीज का साथ. जो आता है उसको भी तो थोड़ा ध्यान रखना.
चाहिए। और रात में सोया इंजेक्शन लगा।. अच्छा हां ये भी बात है वो तो बेचारा मरीज. है उसको क्या समझ में उसको इंजेक्शन लगाया. होगा वो सोया होगा सोया होगा वाला खर्राटा. ले रहा होगा हां जैसे हमारे आपके घर में. कोई बीमार पड़ जाए तो अब हम लोग ऐसे छोड़. देंगे लोग लेकिन अगर बिस्तर हो बेड हो तो. ठीक है अगर भया बिछा पड़ा है क्या. उन्होंने हां ये हो सकता है कि जमीन पे. बिछा सोया होगा रेलवे स्टेशन अस्पताल में. तो मोटा-मोटा चूहा भी बहुत तंदुरुस्त चूहा. होते हैं सर काट लिया होगा यहां पे क्या. कहिएगा तो बहुत बहुत ही सब की समस्या है. यहां और एक और भी ख़राबी है ना कि आप वहां. किसी एक आदमी का पूरा नाम बताइएगा बता.
देगा कि किसको वोट देगा. हां तो जब आपको पता ही है कि आप किस. ब्रांड का जूता खाएंगे तो फिक्स है आपको. उसी ब्रांड का जूता हर साल खाना है आपको. और फिर आके गरियाना है कि ये ऐसे नहीं. होता है वैसे होता है एक मूलभूत ये सब. समस्याएं हैं बहुत ज्यादा अटल जी कहते थे. कि माना कि अंधेरा घना है बट दिया जलाना. कहां मना है कोई उम्मीद दिखती है आने वाले. सालों में कि बिहार भी बेहतर होगा फिर. अगेन बिहार नहीं बिहारी को बेहतर बनाने की. जरूरत है और सबसे पहले अपनी पूंजी के दम. पे अपने खड़ा होने बिहारी तो इतना सारा. आईएस पीसीएस अधिकारी निकल रहा है बिहारी. तो बेहतर हो ही रहा आप तो ऐसे कर रहे हैं.
जैसे जैसे बिजनेसमैन होता है। नौकरी करने. वाला केवल अपने के लिए काम करता है।. बिजनेसमैन ही दूसरे को देता है। एक. बिजनेसमैन 10 लोगों को रोजगार देता है।. अगर छोटको बिज़नेसमैन है तब तो बिज़नेसमैन. आता है तो उसका टीवी खोल ले आते हैं सब।. तो ये तो लॉ एंड ऑर्डर की जरूरत है वहां. पे। कोई जैसे अभी हम आपको बताते हैं अगर. हमको किसी को नोएडा में यूनिवर्सिटी खोलनी. है। तो नोएडा यूनिवर्सिटी अगर खोलना है ना. एक महीने के अंदर गवर्नमेंट आपको जमीन. वमीन अलॉट करके दे देगी। आराम से मिल. जाएगा आपको। कोई झमेला नहीं है। उस पे भी. आपको लीज़ दे देगी। कि जो बचा हुआ पूंजी आप. यूनिवर्सिटी के डेवलपमेंट में लगाइए। हम. आपको कहते हैं 5 साल तक पैर घिस के रगड़.
दीजिए वहां नहीं मिलने वाला है बिहार में. हम नहीं देगा कोई गवर्नमेंट के पास है ही. नहीं है देगी भी नहीं गवर्नमेंट और दूसरा. जो मिलेगा वो विवादित मिलेगा तो कोई कंपनी. वाला आता है पैसे हम तो एक बिजनेसमैन को. जानते थे कोई इन्वेस्टमेंट करने के. उद्देश्य से आया था और 6 महीना तक बड़ी. घूमा उसका चला गया कहा कि जहां जा रहे हैं. वो पूछ रहा है कि हमको कितना मिलेगा हमको. कितना मिलेगा भैया अभी शुरुआत में यह हाल. है तो हम क्या करेंगे आपने सपोज कीजिए आप. एक कंपनी खोल दिए फैक्ट्री खोल दिए तब. छोटा समय तो फैक्ट्री खोलेंगे नहीं अब वो.
जो बाउंड्री भी कराना है ना आप नहीं करा. सकते हैं अपने से उस एरिया का एक फिक्स. होगा कि ये एरिया का ठेका यही लेते हैं।. अब जो ईटा बाहर ₹1 मिल रहा है ना आप वहां. ₹1 में खरीदेंगे जो टाइल्स बाहर 400 का. मिल रहा है आपको आपको उससे टाइल्स खरीदना. है वो 700 में देगा आपको फिक्स है तो ऐसे. करते-करते सब वहां से भागने लगे और ये. चीजें है ना बड़ा इंसान कुछ बोल नहीं पाता. है वो चुपके से अपना रास्ता लेके निकल. जाता है तो ये सबको पता है सब सिस्टम का. ऐसा बदलता है या नहीं सबको मजा मिल रहा है. इसलिए कोई नहीं सब में बट रहा है और.
पब्लिक उसी हिसाब से जब तक पब्लिक नहीं. बदलेगी सोचिए वहां देवर भाभी का अश्लील. गाना मिलियन में जाकर रिकॉर्ड बना देता. है। हां मतलब बिहार का इमेज हो गया ढोरी. चाटना. यही सब चीज तो रह गया यहां पे बेशर्मी हो. गई है ये चीज़ इस पे सरकार सेंसर बोर्ड ये. सब नहीं लगा पाई है तो कितना शर्म की बात. है कि अश्लील गाने ट्रेंडिंग पे चले जा. रहे हैं नंबर वन चलते सारे नंबर वन चले जा. रहे हैं तो ये हो गया एक सिंगर से हम मिले. तो उसने वो अश्लील गाने गाता था तो. इत्तेफाक से कहीं ऐसे मुलाकात हो गई किसी.
पार्टी फंक्शन में वो भी आया हुआ था तो हम. कहे का तो कहा खान सर अगर हम लोग सब गाना. गाने लगे तो कोई सुनवे नहीं करेगा हम कहे. इसका अलग रोना है भाई ये तो हम ही को समझा. समझा रहा है। हम कहेंगे कि भाई अब हम क्या. करें हम? कह हम सब गाना गाए हैं और लगा. दिखा नहीं कि देखिए इसको कितना लोग देखे. हैं और इसको कितना ले दो चार 10% का अंतर. रहता तो समझ में आता कोई देख नहीं किया तो. मतलब हमने गिरने को उत्थान मान लिया। हां. यही यही सहीस कहानी है। अच्छा बिहार मेंति. जातिवाद में आपको लगता है कब वो खत्म. होगा। जातपात खत्म क्यों नहीं हो जाएगा?
एजुकेशन से अभी अभी देखिए क्या है ना जो. समाज में ना जो एक 20-25% लोग होते हैं वो. हमेशा प्रोग्रेसिव सोच के होते हैं बट. उनकी जनसंख्या बड़ा धीमी गति से बढ़ रही. होती है और समाज में जो रूढ़िवादी सोच के. लोग होते हैं ना उनकी संख्या एक तो पहले. से ज्यादा है और उनकी संख्या भी बड़ी बढ़. रही होती है और समाज में वही चारों ओर. ज्यादा देखने को मिल जाते हैं तो ऐसा लगता. है ये समाज ही नहीं बदल रहा है बट. धीरे-धीरे समाज वहां भी बदल रहा है मैं. बिहार में कई नेताओं का मैंने पॉडकास्ट. किया तो उसमें एक बीच में एक डाटा आया था. कि बिहार में 12 1300 परिवार है जिनके के.
परिवार के लोग ही 70 80 90% बिहार में. सांसद, मंत्री, उप मुख्यमंत्री बनते जा. रहे हैं। ये पूरे इंडिया की बात यही है।. यूपी में भी तो वही है हम कि वो डायनेस्टी. चलती आती है तो कोई जरूरी नहीं कि केवल आप. बिहार को ही बोलिएगा। यूपी में कोई भी. बड़ा नेता देखिएगा उसके या तो फादर नेता. होंगे या तो उसका बेटा आ गया होगा। तो अगर. सिस्टम चेंज करना है। जैसे आपने कहा ना कि. टॉप पे जाओ। टॉप पे जाके नीचे बदलाव करो।. तो पॉलिटिक्स में आना पड़ेगा या दूर रहकर. भी हो सकता है। चीजें सही हो जाती है तो.
दूर से ही कर सकते हैं। अकाउंटेबिलिटी तय. कर दीजिए। जैसे मान के चलिए आप राशन कार्ड. बनवाने के लिए गए तो उसका या तो 15 दिन के. अंदर बनाओ या तो प्रॉपर रीजन दे के. रिजेक्ट करो। बट यहां क्या है ना ओपन है।. वो 15 दिन का 15 साल लगा देगा। तो फिर. उसके लिए उसको पैसा देना पड़ता है। आपका. आधार कार्ड में नाम गलत हो गया। 10 दिन के. अंदर उसको सही करो या तो प्रॉपर रीज़न देके. खत्म करो। आप प्रॉपर लिख के दो कि इस रीज़न. से नहीं खत्म कर पा रहे हैं। वो देगा वहां. पे। तो आपने क्या किया ना? टाइमिंग नहीं. रखा है। जिस वजह से अधिकारी का मन बड़ा. हुआ है। अच्छा तुमको जरूरत है। आओ बताते. हैं तुमको। अब हो गया वही काम यहां पे जब.
उसको दिख रहा है कि इस इंसान को 10 दिन के. अंदर काम है लेकिन हम करेंगे ही नहीं। तो. कुछ चीजें तो गवर्नमेंट इनिश शुरुआत में. ही सही कर सकती है। लेकिन ये करेगा कौन? मान के चलिए वो 10 दिन में नहीं किया। तो. आप इसके लिए कोर्ट में जाएंगे और सबसे. ज्यादा चीजें कहां अटकी हुई है? कोर्ट. में। कोर्ट में।. मोदी जी जब चुनाव नहीं जीते थे तो कहते थे. मैं जजों की संख्या सुप्रीम कोर्ट में. बढ़ाऊंगा। एक तो 80% समस्या उसी समय खत्म. हो जाएगी जितना लोकसभा में सांसद बैठते. हैं ना सांसद भवन में जितना सांसद बैठते.
हैं सुप्रीम कोर्ट में उतना ही जज बैठाइए. खाली बैठेगा लोग यहां पे अरे भाई साहब. हमारे यहां कोई केस है ले आओ इधर आओ तुमको. सुबह में भी बुलाया तुम एक काम करो 3:00. बजे फिर आना एक के दिन में दो बार तारीख. लगेगा चलो इसीलिए मैं कहता हूं देश में. कानून व्यवस्था में दो तरीके से है एक आम. लोगों के लिए खास लोगों के लिए कानून. व्यवस्था किस पे चलता है वकील पे पैसा है. बढ़िया वकील है पैसा नहीं है बढ़िया वकील. नहीं. वैसे ही जैसे कैसे होता है वह उसके पास वह. एक लेगसी है उसके पास अह उसकी पूरी टीम है.
वर्क कर रही है सब कुछ कर रहे बढ़िया पैसा. वाले वकील लड़ते भी केस बहुत मजबूती से. हैं ऐसा नहीं है जैसे डॉक्टर में क्या है. आपके पास पैसा है आप बढ़िया डॉक्टर देख. लीजिए और पैसा नहीं है तो नॉर्मल डॉक्टर. से जाके दिखाइए तो क्या है फर्क थोड़ी है. पढ़ा तो दोनों सेम है उसके पास. एक्सपीरियंस है उस अपनी चीजों को रखने का. तरीका है ठीक है अब पॉलिटिकल सेगमेंट में. बात करते हैं अह इंदिरा गांधी को आपने कहा. कि बड़ी मजबूत प्रधानमंत्री रही और अभी. शायद आपने कहीं जिक्र भी किया था वो होती. तो मारमूर के पाकिस्तान को एकदम ठीक कर. देती। आपको लगता है इंदिरा गांधी जी सबसे. मजबूत प्रधानमंत्री रही भारत आजाद भारत की.
डिसीजन लेने में ज्यादा नौटंकी नहीं करती. थी। उन्हीं का डिसीजन है उनको मार मरवा. मतलब उनकी हत्या का कारण का उन्हीं का. डिसीजन पड़ा क्योंकि जो इंटेलिजेंस थी. उन्होंने हटा दिया था उन्हें। इन्होंने. कहा कोई बात नहीं। ये तो उन्हीं का डिसीजन. था। तो डिसीजन लेने में बहुत स्ट्रिक्ट. थी। मोदी जी डिसीजन लेने में क्या है ना. कि अगल-बगल में 101 लोग हैं जैसे ऑपरेशन. सिंदूर चलेगा कि नहीं चलेगा अब डोभाल साहब. बताएंगे डोभाल साहब बहुत अच्छे हैं बट अब. एज हो गया है एक ऐज के बाद आदमी थोड़ा. सबका होता है आज से हम लोग का भी जब एज.
होगा तो शायद इतना नहीं एक्टिव हो पाएंगे. आदमी तो ये थोड़ा सा उनमें है गड़बड़ी. इतना बढ़िया मौका मिला था धोधा के बराबर. करना चाहिए था ऑपरेशन सिंदूर में मतलब. इतना उम्मीद पाल के हम लोग रखे थे तो मतलब. दिल पे लात रख दिए. बहुत तकलीफ लगा बहुत तकलीफ पाकिस्तान में. बोलता कि सीज फायर कर दीजिए आप काहे सीज. फायर कर दिए हां तो वो धाप्पा बोल के चल. रहे पाकिस्तान ने यूएस से कहा यूएस ने. हमसे कहा जो खबर आ रही थी फिर आपकी. सोवनिटी कहां चली गई संप्रभुता हम किसी की.
बर्दाश्त नहीं करते म ट्रंप आप बोल देगा. वो पेट्रोल पंप तो हो जाएगा डोनाल्ड ट्रंप. ये नहीं होना चाहिए ऐसा पाकिस्तान पे आपने. क्या बदलाव किया आपको क्या लगता है ऑपरेशन. सिंदूर के बाद आतंकवाद खत्म हो जाएगा मतलब. वो ये कह रहे हैं कि हमने उनके घर में. बाथरूम में किचन में घुस के बता दिया कि. अब हमारे यहां आओगे तो हम तुमको घुस के. फिर से तुम्हें ठोकेंगे। कौन वाला मिसाइल. मारे हैं? जाके ढलैया तू है खाली। मैं. माने घर वो नहीं उड़ाया है। जिस चीज पे. गिरा है ना उसका एक वो कोनवा मारा है। तो. किस लेवल का आप मिसाइल मारे हैं? मतलब आप. पब्लिक को दिखाना चाहते थे कि हमला किए.
हैं। आप आप पर्सनली खुश नहीं जिस तरह आपसे. कारवाई हुई और और स्टंग होनी चाहिए थी। आप. बताइए ये मतलब ये दिखा कि हम इंडिया में. लोगों को दिखाएंगे कि हमला किए हैं और. वहां कह देंगे कि भैया ये जवाब था उतना. बड़ा हमला नहीं था। मतलब आपका मिसाइल पूरी. इंडिया को क्रॉस करके जाता है और. पाकिस्तान के एयरबेस पे गिरता है। उस. एयरबेस की पूरी बिल्डिंग नहीं तबाह होती. है। उसका एक कोना तबाह होता है। पूरा. एयरबेस उड़ना चाहिए यहां पे। हमला मतलब. जिस तरह से रूस कर रहा है। हमला मतलब जिस. तरह से इजराइल कर रहा है। तब ना जाके कोई।.
अच्छा तब फुल फ्लेजेड वॉर आती है। अगर हम. पूरा उड़ा देते। वो कह रहे हैं कि एक. मैसेजिंग के लिए हमने किया कि मैसेज दे. दिया कि आतंकवादी मार दिए तो रहिए मैसेज।. मैं इसमें क्या मिला? आपको लगता है. पाकिस्तान फिर हिमाकते। इससे कितना देखिए. पूरी दुनिया का ध्यान था कि इंडिया के ऊपर. इन्वेस्टमेंट करने का क्योंकि यूएस ने. टेरीफ लगाया था चाइना पे। ये चीज चाइना की. थी और हम लोग क्या किए हैं? अब डोभाल साहब. को कौन समझाएगा? ये ऑपरेशन जो पहलगाम हमला. हुआ था ये पाकिस्तान द्वारा कराया गया था।. इसका मेन मास्टरमाइंड चाइना था। उसके ऊपर.
इतनी टेरिफ लग गई थी। पूरी दुनिया चाइना. की बात कर रही थी। एप्पल शिफ्ट हो गया था. इंडिया में। बड़ी-बड़ी इन्वेस्टमेंट आ रहे. थे। उसको चाइना को दिख गया कि भाई साहब यह. पैसा चाइना एक चीज जानता है। भाषण बाजी. नहीं। उसको कहना पैसा लगाओ। पैसा आ गया ना. पैसा आ गया ना तो 20 गो दिमाग वाले को रख. लेंगे। अब पैसा नहीं है ना तो अपनो दिमाग. वाला काम अपनो दिमाग काम नहीं करेगा। सही. बात है। तो चाइना का सीधा सिंपल है। हम. लोग भाषण बाजी की सस्टेनेबल डेवलपमेंट तो. एजुकेशन तो ये तो इसको भाषण बाजी रहने दो. यहां पे। पैसा रहेगा अपना फर्स्ट क्लास.
सेक्रेटरी रख लेना यहां पे। प्रधानमंत्री. के पास पावर है पैसा है। बड़े-बड़े आईएएस. अधिकारी एक्सपीरियंस लेके उनके पीछे रहते. हैं। यहां पे काम कर रहे होते हैं यहां. पे। चाइना ने यही काम कर दिया। चाइना का. ड्रोन टेस्ट हो गया। चाइना का मिसाइल. टेस्ट हो गया। चाइना का रडार टेस्ट हो. गया। और चाइना ने यह भी टेस्ट हो गया कि. भारत जब हमला करेगा तो किस तरह की मिसाइल. और किस तरह का एयरफोर्स लेके आएगा। चाइना. खुश पाकिस्तान को क्या जाता है? पाकिस्तान. का वो जो सेना प्रमुख है आसिफ मुनीर अपने. को फील्ड मार्शल घोषित कर दिया। हां वो भी.
गजब था। हम मतलब एक तो उनके यहां छाती में. इतना बैश लगा। का मैं आज तो जान नहीं पाया. कि कौन सा जीते वो इतना और ऊपर से फील्ड. मार्शल और जो फोटो शबाज शरीफ दिए वो चाइना. वाली फोटो थी। अब ये क्या कहिएगा हमको. क्या मिला ऑपरेशन सिंदूर से हम किसी से. पूछते हैं क्या मिला? तो आपकी नजर में. क्या मिला हमें ऑपरेशन सिंदूर से पॉजिटिव. नेगेटिव क्या मिला? हम एक तो सेना का. मनोबल आप लेके चले गए। सेना पूरी फुल. फ्लेज आप बॉर्डर तक पहुंचा के लेके गए थे।. सबकी छुट्टियां कैंसिल कराए थे। क्या-क्या. हुआ था? हम अपने बटालियन एनसीसी बटालियन.
में जाके वो कह क्योंकि हम लोग जब करते थे. तो बताया गया था कि आप लोग अपने बटालियन. में आके वो करिएगा तो हम लोग भी तैयार. बैठे थे कि क्या पता उस समय नहीं हुआ था. इस समय मिल जाए थूरथार देंगे यहां पे सही. में हम इसे छुट्टी दिए थे तीन दिन अपने. यहां को इस बार हां नहीं महाराज इस टाइम. तो आपका ब्याज इस टाइम तो आपका ऑपरेशन. सिंदूर चल रहा होगा नहीं वो उसमें कितना. टाइम लगता है एक दिन अच्छा कोई बहुत बड़ा. धूमधाम थोड़ी करना है यहां पे हमारा तो. जिस दिन रिसेप्शन था उस दिन हम क्लास लिए. थे सब रिसेप्शन वाला कर रहे थे बॉर्डर. पिक्चर का सुन सट्ठी वाला हो उधर ब्याह.
हुआ उधर तो चलो तो हम तो क्लास ले रहे थे. यहां पे तो क्या कहिएगा ये ऑपरेशन सिंदूर. इतना बेहतरीन मौका था समझाने का आप उसको. कुछ एक बढ़िया चीज को डैमेज कर देते चलो. नुकसान क्या हुआ मुझे बताओ ऑपरेशन सिंदूर. जैसे आप मुझे कह रहे हो कि हासिल नहीं. मतलब आपकी बात सुनोगे जो मुझे लग रहा है. ऑपरेशन सिंदूर से भारत का क्या-क्या. नुकसान होगा मीडिया से लोगों का भरोसा उठ. गया कश्मीर का जो हम लोगों ने आप मीडिया. से जुड़े अरे मैं मैं वो काम नहीं किया. हूं.
मैंने कराची एयरपोर्ट नहीं उड़ाया था।. हां। अब देखिए कश्मीर का जो सस्टेन हुआ था. इतना मुश्किल से कश्मीर अपने रास्ते पे. आया था। वो कश्मीर तबाह होते गया। हम लोग. का जो सेना का मनोबल था नेवी एयरफोर्स रखे. रह गए कि हम लोग कभी युद्ध करेंगे। ये कभी. किए नहीं यहां पे। इंटरनेशनलली ऐसा. पाकिस्तान साबित कर रहा है और बड़े देशों. में यह दिखा चुका है कि पाकिस्तान अपर. हैंड में था क्योंकि सीज फायर पाकिस्तान. ने तो नहीं किया और ना ही कोई उसने बोला. यहां और उसे पता है कि आप गर्मी के दिन.
में खुद ही हमारा तो जयशंकर साहब ने कहा. ना कि पाकिस्तान ने ही हमें कॉल करवाया था. उधर रिक्वेस्ट करवाई थी सीज फायर की तो ये. मान लिए हम किसकी बात मानेंगे मतलब बदला. ले लिए सीज फायर कर दिए हो गया मतलब इनका. तो सीज फायर ने मैसेज दे दिया हम अपना. ऑपरेशन जारी रख रहे हैं इनफैक्ट जब. पत्रकारों के अमित शाह से मुलाकात भी हुई. थी तो उसमें भी ये सवाल आया था और हमने भी. उनसे पूछा अमित शाह साहब से कि टेररिस्ट. नहीं पकड़े गए तो उन्होंने कहा कि हम. टेररिज्म को मारना चाह रहे हैं। टेररिस्ट. तो वो शराबी है या धर्म के नाम पे भटका. हुआ आदमी है जिसे कुछ पैसा देकर या नारा.
लगवा कर आगे भेज दिया गया। हम रूट कॉस्ट. को मार रहे हैं। कितना परसेंट डाउन होगा. इसके बाद? ऑपरेशन सिंदूर के बाद कितना. परसेंट आपका क्या कहलना है? आप एकको. परसेंट कमी नहीं आएगा। उन सब का और मनोबल. बढ़ जाएगा। इसके बाद क्योंकि पकड़ाया ही. नहीं है सब। ये बताइए इजराइल जो किया है. उसके बाद हमस हिम्मत करेगा नहीं तो फिर. यही बत आप ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों. नहीं बोल पा रहे हैं. हम पर्सनली बता देखिए हम हमेशा एक चीज को. लेके हो जा रहा है कि हम में अपनी सेना का. मनोबल सेना का इज्जत सेना सर्वोपरि होनी.
चाहिए तो ये जो बीच में सेना आ जा रही है. ना तो इस वजह से इंसान को थोड़ा सा बोलने. में चला बोलने में लगता है कि सेना मतलब. सेना उन्होंने अपना सवा उससे मतलब उस पे. सवाल उठाओगे तो फिर आपकी देशभक्ति पे सवाल. उठ जाएगा नहीं नहीं उठाना भी नहीं चाहिए. उनकी क्या गलती है? आपने आदेश ही नहीं. दिया। इंदिरा गांधी ने दिया था। बट इंदिरा. जी का भी जैसे अगर मैं दौर बात करूं सर. क्योंकि मैंने उसपे भी स्टोरीज की थी।. 1971 वाली जो बात है उसपे भी एक आता है कि. उस टाइम भी पाकिस्तान ने हमारे कई सारे. कैद हमारे कई सारे फौजियों को कैद करके. रखा था और वो कैदी जिनके बारे में आया कि.
वो मर गए। बाद में बहुत सारी चिट्ठियां. आती रही। ऐसे सैकड़ों फौजी शायद 504 हमारे. मूवी भी बनी। उससे मूवी बनी, दीवार बनी थी. अमिताभ बच्चन की जिस पे आते रहे धीरे धीरे. धीरे और उनकी हमने बारगेनिंग नहीं की। कि. हमने कश्मीर बारगेन नहीं किया। जबकि हमारे. पास बड़ा अच्छा मौका था। 93,000 सैनिक थे।. अगर इंदिरा जी चाहती तो या तो कश्मीर का. मामला सॉल्व कर लेती या कम से कम 93,000. के बदले 52 कैदी हमारे 52 सैनिक जो है वो. ले सकती थी। बट उन्होंने भी प्रेशर में. बाद में छोड़ दिया। एक युद्ध के बाद बहुत. बड़ा एक इतना बड़ा युद्ध होने के बाद भी. कहीं ना कहीं अमेरिका का प्रेस्टीज इशू.
दांव पे लग गया था। हां उस बार नेक्सन. उसकी पूरी इज्जत प्रतिष्ठा दांव पे हो गई. थी। वो तो मटिया मीट कर दी थी इंद्रा जी. ने। इंद्रा जी ने पूरा बर्बाद कर दिया था।. तो कहीं ऐसा ना हो कि इंदिरा गांधी का. जििद अमेरिका के लिए द्वितीय पर्ल हारबर. ना बन जाए क्योंकि अमेरिका का ईगो होता तो. लड़ जाता डायरेक्ट आके भारत से लड़ जाता. ट्रंप पगलाया आजकल हां जैसे ट्रंप अगलाया. non तो एक तरह से बड़ा पागल था अब आज की. जनरेशन को नहीं पता non के बारे में तो. अलग बात है यहां पे या फिर लोग लिटरेचर से. इतने दूर हो गए हैं कि non का कौन पढ़ रहा. है तो इंदिरा गांधी कहीं ना कहीं उस चीज.
को थी वो प्रेशर झेल रही थी उस प्रेशर के. बावजूद उन्होंने पाकिस्तान को बर्बाद हम. पर हम हमला करने आए थे वो तो रशिया दोस्त. थे हमारे वो तो दोस्त थे तो बचा लिया वहां. पे तो लेके चला आया था सातवां बेड़ा अपना. वहां हमको ठोक देगा पूरा बढ़िया से लेके. आया था वो अब मार देता वो अमेरिका अपने. एलआई को कभी नहीं छोड़ा पूरा उसका. हिस्ट्री रहा है अपने एलआई को उसने हमेशा. बचाया भले लेट से बचाया है वो अमेरिका के. चाल है कि उसका अपने दोस्तों को बड़ा लेट. से बचाता है पहले तुम बर्बाद हो जाओ. बर्बाद हो जाओ तब हम तुम्हें बचाएंगे जैसे. यूक्रेन जैसे ईरान जैसे कुवैत जिसको बचाता.
है ना बड़ी लेट से बचाता है कहता है कि. तुम मेरा दोस्त रहोगे ना हमेशा मेरे पे. डिपेंडेंट मतलब तुम्हारा दो टांग टूट जाए. एक हाथ कट जाए एक हाथ से अंधे हो जाए एक. किडनी खराब हो जाए तब बचाएंगे। फिर मैं. तुमको खाना पीना दे दिया करूंगा रोज एक. प्लेट। बस बस तब उसको बचाने कौन दोस्त है. अमेरिका का? पाकिस्तान या हम उस समय तो. वही था पाकिस्तान आज के दौर पे। आज के दौर. पे भी वो पाकिस्तान को ही हम लोग के लिए. रखता है क्योंकि उसे पता है कि चाइना के. बाद इंडिया को काउंटर करना है और इंडिया. के लिए पाकिस्तान है। अब इंडिया पाकिस्तान. दोनों को काउंटर करना है। तो इंडिया चाइना. दोनों काउंटर करना तो पाकिस्तान से। हां. वो पाकिस्तान को लेके रखता है। वो उसने.
हिलरी क्लिंटन 2011 में आके क्लीन चिट दे. रही है पाकिस्तान को कि आपको पता नहीं था. कि ओसामा बिलादेन है। वो उसके भैया उसके. आर्मी कैंप के बाहर में खड़ा था। हिलरी. क्लिंटन और जबकि सारे अभी Netflix पे जो. सीरीज आई है उसमें दिखाया गया कि जितने. आतंकवादी थे वो सब पाकिस्तान में पकड़े गए. सब के सब वहां पे तो पाला भी तो यही था. ओसामा बिन लादेन को जन्म किसने दिया. अमेरिका ही नहीं तो सद्दाम को भी इन्होंने. बनाया था बाद में अमेरिका तो पॉलिसी रही. है हाउ यू सी अमेरिकन गवर्नेंस स्टाइल कि. अपना एक बंदा ना मरे इराक में जाके हजारों. मार दिए अफगानिस्तान में जाके हजारों मार.
दिए पाकिस्तान में घुसे लादेन को उठा लिए. कैसे देखते हो आप अमेरिकन स्टाइल उन लोग. का एक फिलोस सफी अलग है कि अगर आप राजा. बनने के लिए 500 लोगों की हत्या कर दिए और. राजा बन गए तो आप हत्यारे नहीं है लेकिन. अगर आप राजा बनने के लिए 500 लोगों को. मारे और राजा नहीं बन पाए तब आप हत्यारे. हैं उनकी थ्योरी इतिहास कौन लिखे इतिहास. कौन लिखे मार दिया वहां पे कोई मर्सी नहीं. एक कश्मीर में अगर कोई गलती से इंडियन. आर्मी की गोली से क्रॉस फायरिंग में चला.
जाता तो ह्यूमन राइट वाले कूद जाते हैं. गाजा में क्यों नहीं कूदे. हम बात तो यह है कि भाई आपकी लड़ाई ठीक है. बट एक दो साल का बच्चा जो मर रहा है यह तो. गलत है।. हम यह क्या किया है? एक दो साल का बच्चा. हमास ने जो गलत किया बिल्कुल गलत किया।. उड़ा दो पूरा हमास को लाइन से खत्म कर दो।. इजराइल पैलेस्तीन में जिक्र कर दिया. क्योंकि मैंने पहला वीडियो आपका इजराइल. पैलेस्तीन में देखा था और इजराइल. पैलेस्तीन में बड़ी चर्चा होती है। अभी भी. चर्चा चल रही थी कि 14,000 बच्चे मर. जाएंगे भूखे। हालांकि ऐसा कुछ हुआ नहीं।.
बीबीसी की रिपोर्ट आई थी। इजराइल. पैलेस्तीन में आप किसे गलत मानते हो? हालांकि वहां दोनों का अपना सच है। दोनों. का अपना सही है। दोनों का अपना गलत है।. जिसको इतना आसानी डिकोड करना आसान नहीं. है। फिर भी क्योंकि आप इजराइल में बहुत. बात करते हो आप और आपको इजराइल स्टाइल ऑफ. गवर्नेंस बहुत पसंद है। ये मैं आपके बहुत. वीडियो में देखा हूं। फिर किसे देखते हो. आप? क्योंकि आज आपने बच्चों का जिक्र. किया। ये इंपॉर्टेंट टॉपिक है और इस पर. दुनिया इकट्ठा होती है और जब आप इजराइल की. तारीफ करते होंगे। तो आई एम श्योर आप पर. भी लोग क्वेश्चन करते हैं। हां क्वेश्चन. करने लगते हैं कि इजराइल का तारीफ कर रहा. है। ये कर रहा है। तो भाई.
लोग इस पे भी सला बना देगा वीडियो कि पानी. पी लिया सर ने इस सवाल पे। हां। अरे नहीं. नहीं पूछने दीजिए उन लोग को। इन दोनों के. बीच में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच में. अरब देश जिम्मेदार है। ओके। ये इजराइल. फिलिस्तीन वगैरह नहीं। जैसे हम लोग किसी. को नहीं कहते हैं कि 20 आदमी मिलके किसी. बच्चे को कहे कि तुमको डांट दिया। वो. विधायक तुमको डांट दिया। मारो मारो। और वो. 20 आदमी जाके चढ़ा दिया उसको और उधर सु. निकला AK-47 लेके तो 20ो भाग गए सब वो. पकड़ा गया है वो अभी तक पिटा रहा है और 20ो.
कह रहा है साहब हम आएंगे हम आएंगे और पिटा. रहा है 80 साल से 80 साल से वो जाएंगे. कहां वो जाएंगे कहां ये बताइए. वो जाएंगे कहां उनको तो जाना नहीं है और. ये क्या करते हैं अरब वाले और ईरान और. प्रॉक्सी लगा के हमास को खड़ा करके वहां. चलाते हैं इजराइल का भी क्या है इजराइल ने. भी ऐसा शर्त रखा है कि वो लड़ाई खत्म नहीं. होगी इजराइल का कहना कि फिलिस्तीन अपनी. नेवी नहीं रख सकता है। एयरफोर्स नहीं रख. सकता है। नेवी नहीं रख सकता। आर्मी नहीं।. आज हम अगर श्रीलंका को बोल दें कि.
श्रीलंका तुम नेवी या एयरफोर्स आर्मी नहीं. रख सकते हो। कल को श्रीलंका से मार हो. जाएगा हम लोग का।. हां बट वो मतलब वो अपने वो अपने आप वही. वाली अमेरिका वाली बात। बस बस अमेरिका. वाली बात। तो ये भी तो गड़बड़ है ना। वो. एक वो वो देश है। आप उसका जितना टुकड़ा. करना है या जो करना है आप कर लिए। अब उसको. स्वतंत्र छोड़िए। बचा कितना? वो इतना था. इतना होते इतना इतना रह गया। अब उसको. मान्यता भी नहीं दे रहे हैं आप तो यही बात. है ना वहां पे आपने शर्तें ऐसा रख दिया कि. वो कभी लड़ाई शांत नहीं होगा उनका कभी. खत्म होगा कभी युद्ध तो हो जाएगा तो जब तक.
खत्म होगा तब तक ये पूरा खत्म कर चुका. रहेगा अभी गाजा के बीच में वो 5-प किमी का. सड़क ले जा रहा है मतलब ये कॉलोनी बसेगी 5. किमी सड़क फिर 5 किमी चौड़ी एरिया खाली. मतलब ना वो एकदम क्लस्टर क्लस्टर करके रख. देगा और आने वाले लगभग 2035 तक का इन लोग. का प्लान है कि गाजा के लोगों को पूरी तरह. खत्म कर देगा पहले इसे से क्लस्टर क्लस्टर. बनाएगा। फिर उसमें कुछ क्लस्टर को उठा के. सोमालिया में बसा देगा।. 2035 के लोगों को पहले गाजा से करेगा।.
पहले गाजा है उसको पार्ट बाय पार्ट करेगा।. उसको आठ पार्ट में करेंगे सब। ये क्लस्टर. बाय क्लस्टर यहां पे जैसे एक कॉलोनी है. बीच में से रास्ता बना देंगे 5 कि.मी. बराबर उसमें इजराइल को घुसा देंगे। इजराइल. की आर्मी रहेगी। ठीक? और इधर वाले को इधर. वाले से कोई कनेक्शन नहीं। दो चार साल बाद. हो जाएगा तो इन्हें अच्छी सुविधा देके. अच्छी लालच देके कुछ हिस्सा माइंड वाश. करके इनमें कुछ लीडर बना के इन्हें. सोमालिया में शिफ्ट कर देंगे लेकिन इनकी. जो अलक्स मस्जिद है वो तो बड़ी वो तो फिर. वेस्ट बैंक में है अच्छा गाजा से करेंगे. ये लोग तो गाजा गायब कर देंगे गाजा गायब.
कर देंगे ये लोग 2035 तक फुल इंप्लीमेंट. कर खाली बचा वेस्ट बैंक वेस्ट बैंक वेस्ट. बैंक को धीरे-धीरे मारते हैं ये लोग वो. सेटलर है वेस्ट बैंक में क्या करेंगे गाजा. का ही है ना हां सारा बॉल तो गाजा का है. ये वेस्ट बैंक वाले तो अपने ही सब फूंका. काट तू है सही क्या करेगा सर ये किसी. मोहल्ले को उसका कोर्ट आदेश देता है कि यह. मोहल्ला इजराइल का है अब कब्जा कर लेता है. कि भाई कोर्ट ऑर्डर है ना मतलब हमास को. अगर आपने टैकल कर लिया तो आपका सारा खेल. खेल खत्म है यहां पे तो इनको सोलिया में. डिपोट कर देंगे ये लोग ठीक बात ही को. कहेगा लोग कि एक और टॉपिक सर बड़ा आजकल.
ट्रेंड है आरक्षण को लेकर अब उसमें ये है. जैसा क्योंकि आप गरीब बच्चों की बहुत बात. करते हो और एक सवाल मुझे किसी ने भेजा कि. खान सर से पूछेगा कि जो लोग अब संपन्न हो. गए हैं आरक्षण को लेकर दो नजरिया है एक. होता है आर्थिक आधार पर, एक होता है. सामाजिक आधार पर। लोग कहते हैं। लेकिन अब. एक आने लगा है कि क्या आरक्षण जो संपन्न. हो गया है, जिनका स्टेटस अच्छा हो गया है. उनको उनके लिए छोड़ देना चाहिए जो उन्हीं. के कैटेगरी में गरीब है। ये सुधीर चौधरी. ने भी सुझाव दिया था कि जैसे मान लीजिए. कोई एससी है तो उसको गरीब एससी के लिए.
छोड़ देना चाहिए। ये नहीं किसी और को दे. दे लेकिन संपन्न एससी को गरीब एससी देना. चाहिए। तो क्या आरक्षण एससी, एसटी, ओबीसी. जो संपन्न है उनको अपने ही एससी, एसटी, ओबीसी के लिए छोड़ देना चाहिए या उनके. पुरखों के साथ गलत हुआ था तो उसको उनका. कंटिन्यू करना चाहिए। क्योंकि हर साल कई. सारे आईएस पीसेस भी निकलते हैं। इस साल. कोई एक लड़की वायरल हुई थी बड़ी तो उसका. बैग बैग दिखा के बड़ा ट्रेंड चला कि देखिए. 1 लाख का बैग यूज़ कर रही है, ये कर रही. है, वो कर रही है। इनको क्या जरूरत 30 से. अच्छा किसी गरीब एससी, एसटी, ओबीसी को ही. दे देते हैं। देखिए बड़ा दुविधा वाला चीज.
होता है। लेकिन फिर भी अगर कोई क्रीमी. लेयर मतलब एक वेल सेटल्ड हो चुका है जिससे. अब आरक्षण की कोई जरूरत नहीं है। तो अपने. ही कैटेगरी के अगर किसी को पास ऑन कर देता. है तो ये एक पॉजिटिव और प्रोग्रेसिव होना. चाहिए। तो इसमें दो चार लोगों को वॉलंटरी. आना चाहिए ताकि लोगों को लगे यहां पर और. फिर इसकी पारदर्शिता भी होनी चाहिए कि मान. के चलिए उसने तो अपना छोड़ दिया कि भाई हम. संपन्न हो गए। आप उठा के थमा दिए किसी और. को बात सही इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा फिर. तो भड़क जाएगा फिर एक भी पकड़ाया एक भी. पकड़ाया तो फिर हमेशा के लिए रास्ता बंद.
और ये भारत के अधिकारी हैं सब तो पैसा. देके पुरुष को महिला बना देगा सब बना देगा. सब हमारे यहां एक बच्चा का आई कार्ड बन. जाता है आधार कार्ड एक बच्चा पास हो गया. उसका और ना एग्जाम देने गया तो उसको ना. फॉर्म में ना मेल के जगह फीमेल था तो कह. रही है कि इसमें तो फीमेल लिखा हुआ है तो. कह रहा हम मेल है अब वो बता रहा है मेल है. फिर तो फीमेल लिखा हुआ है अरे भाई कोई लिख. रहा है वो ह्यूमन ही है ना गलती से मार. दिया उसको.
अब हमारे पास आया कि सर एक गड़बड़ हो गया. हम का हो गया तो सर हमको फीमेल कर दिया. तो ऐसे नहीं तो अधिकारी है सब पूरा चेंज. तो हो गया नहीं महाराज. अधिकारी ऐसेसे होते हैं यार अच्छा हमारे. यहां 32 टू कार्ड भी होता है। कितने चोर. होते हैं? अधिकारी बता रहे हैं। एक पेपर. ऐसे हो गया था तो पेपर आया बक्सा में तो. पेपर को ले जाना था तीसरा तल्ला पे हम तो. को ये नहीं गया तो तीसरा तल्ला पे पेपरवा.
वो कह रहा है कि हम काहे ले जाएंगे? इसके. लिए तो एक आदमी नियुक्त होना चाहिए कुली. या कोई एक लेबर नियुक्त होना चाहिए। अरे. वो बच्चा एग्जाम में वेट कर रहा है। ये. आपस में लड़ते लड़ते एक घंटा तक पेपर वे. नहीं दिया सब। वो बवाल कर दिया सब यहां. पे। यूपी यूपी बिहार इज नॉट फॉर बिगिनर्स।. हां ये तो नौटंकी चल रही है बिहार में सर. जो अभी क्योंकि इलेक्शन भी आ रहा है बिहार. में इस बार चलो मैं इस पे नहीं आ रहा. बिहार में कई सारे युवा नेता है युवा. नेताओं में किस में आपको उम्मीद ज्यादा.
बेहतर दिखती है पॉजिटिव थोड़ा-थोड़ा बता. सकते हो जनरलाइज स्टेटमेंट किसी का नाम मत. लो चलो वैसे करते हो जैसे कई सारे अब नए. लड़के मुझे लगता है इस बार बिहार इलेक्शन. लोग कह रहे हैं कि बड़ा स्पेसिफिक होगा. क्योंकि नीतीश जी की एक उम्र हो गई है कई. लोग मान रहे हैं शायद इस बार वो सीएम ना. बने स्वेच्छा से या पता मुझे आईडिया नहीं. है। बट कई लोग इस चुनाव को मान रहे हैं कि. यह चुनाव बिहार का अगला 20 साल की दशा-दशा. तय करेगा। जिधर जाएगी। तो मान लो जो वोटर. हो बिहार में जो जाति धर्म से ऊपर जा रहा. क्या देखना चाहिए? कैसे देखना चाहिए बिहार. को? क्योंकि इस इलेक्शन को आप कैसे देख.
रहे हो? अगर मैं स्पेसिफिक ना जाऊं नेताओं. पे तो भी मैं पूछ रहा हूं मैं। इस बार के. बिहार इलेक्शन में कितनी अहमियत दे रहे हो. आप? इस बार इलेक्शन में थोड़ा सा दिलचस्पी. होगा क्योंकि बहुत सारे लोग जैसे क्या है. कि जागरूकता सोशल मीडिया के वजह से पिछले. 5 साल में कोरोना के बाद से बड़ा बढ़ी है. और प्रशांत किशोर भी बड़ा जागरूक किए हैं. गांव-गांव जाके लोगों को भी और ये सब. फैक्टर आएगा। दूसरा क्या है कि अब लोग ना. वो 2050 में हम विकसित हो जाएंगे। 47 2047. में हम विकसित हो जाएंगे। तो ये सब चीजों.
से लोग अब उब चुके हैं। उनका कहना है कि. रोजगार दीजिए। अब इधर देखिएगा तो जब. गवर्नमेंट ने बहुत सारे रोजगार दिए हैं और. जैसे तेजस्वी यादव इनका पूरा एजेंडा ही. यही है एकदम फिक्स है कि हमने रोजगार दिया. है हमने इतना दिया है तो बहुत सारे लोगों. को ये चीजें समझ में आ रही है और दूसरा. अभी क्या है कि गवर्नमेंट को भी सोचना. चाहिए कि इस जो स्कीम्स ला रही है जैसे अब. किसी को आप भात दे रहे हैं चावल. और गेहूं दे रहे हैं भैया इसके जगह पे आप. तेल और दाल दे दीजिए हम काजू किशमिश नहीं.
मांग रहे हैं ओके मेन मेन दिक्कत तेल. खरीदने में है, दाल खरीदने में भात और. गेहूं तो गवा में मिल ही जाता है। तो तो. वह काम हो गया आपको। क्या दे रहे हैं? केकरा भात के कमी कालू को ससुर तुम कहोगे. खीरा काट के दे दो। हम आपसे क्या कहे? हम. काजू किशमिश नहीं मांग रहे हैं। हम नहीं. मांग रहे हैं आपसे काजू किशमिश। लेकिन एक. समस्या समझिए। ई बताइए कि हमको टाइफाइड. हुआ है तो आप हमको कान खजवाने का दवाई.
दीजिएगा तो हम क्या करेंगे भाई उसको. दिक्कत हो रहा आप देखिएगा ना गरीब घर क्या. ऐसे अगर चूड़ा फ्राई करके आएगा ना दिख. जाएगा गरीब अरे भतो बढ़िया गरम कर लेगा. दुब तेल डाल लेकिन तो तेल चाहिए होगा तेल. इतना महंगा कर दिए आप क्या काम का हो गया. है अभी सरकार वाले सब सुन लेते हैं तो. हमको बड़ा तिरछा नजर से देखते हैं लोग. कितना भड़का रहा है आदमी लोग को हम यही. कहते हैं अपन भात रखो अपन गेहूं रखो भैया. तुम उसको दुई किलो सरसों तेल दे दो दु चार. लीटर दाल दु किलो दाल दे दो लेकिन ये कब.
तक देश भी चलता रहेगा जैसे आज मैं देखा 81. करोड़ लोगों को इस देश में फ्री में खाना. मिल रहा है जो जिसको आप भोजन कहते हो अब. 140 करोड़ की आबादी में अगर 81 करोड़ आदमी. मुफ्त भोजन वाले हैं कहां जाएगा सर देश. हमारा ये वही तो उस तरह से देखिए तो 140. करोड़ को मोदी जी खोज खोज इंजेक्शन मरवाए. थे फ्री में कि हमारे पास है अरे वो तो चल. कोविड था हमारा। ये बताइए आपको जरूरत थी. फ्री लगाने की? मतलब खरीद सकते थे कि. नहीं? हां खरीद सकते थे। लेकिन जबरदस्ती.
पकड़ के हमारे पास है अभी हम मारेंगे तो. फ्री में लगाओ तुम यार। जब फ्री फ्री में. घुस गए। चलो वो तो आपदा आई थी। चलो उनको. लगा के कर दिए। अरे वो पैसा बचता तो उसके. उसके उसके लिए हम हमको बड़ा अफसोस होता है।. हमने अपने पूरे कोरोना में जो इंजेक्शन. कुचवाए थे हम लोग या बूस्टर डोज़ लगा पैसा. लेना चाहिए था उनको। जो देने में सक्षम आप. हम आप दे नहीं सकते। हां ये कर सकते थे कि. जो देने में सक्षम हो जैसे सिलेंडर में. बाद उन्होंने कहा कि वापस करना है वापस कर. दो लोग कर दिए हां और उससे एक और अच्छा हो. जाता आप ना पैसे रख देते जो देने में. सक्षम थे वहां चले जाते लोग सोचते इधर.
भीड़ कम हो जाता बाद में नेता लोग खाए गए. इससे अच्छा थोड़ा कुछ तो मिल रहा है. तो देखिए बेसिक चीजें है ना आप महंगाई. कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। सब चीजें. बड़े अभी एक बात बताइए आप कहते हैं बेटी. पढ़ाओ और बेटी बचाओ क्या किए बेटियों को. पढ़ने के लिए दो लाइन लिख देने से बेटी. पढ़ने लगेगी. तो इससे बोलने से क्या किए एक लेडी गर्ल्स. यूनिवर्सिटी खोले हैं गर्ल्स का जीएसटी. हटा दीजिए एजुकेशन से निर्मला मैडम को. बोलिए अब इनको बुझाइए नहीं करता है 18%.
जीएसटी काहे लगाए हैं आप एजुकेशन पे मतलब. कोई ना पढ़े शर्म की बात है कि नहीं. मोबाइल खरीदिएगा एंटरटेनमेंट फिल्म देखने. जाइए 18% जीएसटी आप पढ़ने आइए 18% जीएसटी. शर्म आना चाहिए ना अरे कम से कम 18 के जगह. तू 28 कर दे कम से कम फीलिंग वाले दुनिया. से तो ऊपर उठाओ कम से कम इतना तो लाश शर्म. होना चाहिए छोड़िए पुरुषों की महिलाओं का. कर दीजिए 18% कम आएगा तो आखिर बोल देने से. थोड़ी चीजें हो जाती है चेंज.
47 में कोची के हिसाब से हम डेवलप हो रहे. हैं कह रहे ₹1 लाख हमने टैक्स में कम कर. दिया यह अच्छा डिसीजन था बिल्कुल. तो जो अच्छा चीज है वह उसमें कोई कमी नहीं. है। इस 12 लाख लेकिन यह वाला पॉइंट आपका. सही है कि भाई हमारे एजुकेशन पर अगर हम. एंटरटेनमेंट पर लग्जरी चीजों में हम पैसा. खर्चा करते हैं। वहां बैटल ठीक है। बट. बेसिक नेसेसिटी पे तो आप छूट दे सकते हो।. हम जब ये हल्ला किए तो फिर पता चला. गवर्नमेंट ने किताब पर जीएसटी नहीं था।. ओकरों पे लगा दिया। तो अब हम तो नहीं दबे. अंदाज में कहते हैं कि चीज पे मत लगा दे.
लोग। सुनवे नहीं करती है। इनको वित्त. मंत्री को बोलेंगे तो कहेंगे कि मैं तो. पढ़ाई छोड़ दी।. उनका तो अलग ही स्टेटमेंट आता है। पढ़ी है।. वहां फीस बहुत कम होती है। वहां बहुत कम. फीस होती है। तो उसके बाद भी पैसा लग रहा. है। पैसा लग रहा है। बहुत अजीब लगता है. ये। तो लड़कियों को बोल देंगे कि पढ़ाई करो, पढ़ाई करो। कहां से करेगी वो? अच्छा इस देश. में जेएनयू जैसी और यूनिवर्सिटी होनी. चाहिए कि जहां पे बेसिक मिनिमम पैसा देकर. एक जेएनयू है तो सरकार को तो इतना कटक रहा. है। आप वैसा वैसा पांच छ और बनवाइए। फिर.
वो तो सीधे सरकार के दुखते नस को पकड़ लेते. हैं ना। नहीं वो तो दुख रहा होगा वो तो. वहां पर हमें चाहिए आज़ादी से दुख रहा. होगा। हमको नहीं लग रहा पैसा दुख रहा. होगा। लेकिन इस देश में भी लोग दुखता है।. इतना कम में काहे पढ़ रहे हैं? हम हम भी. सोचते थे जेएनयू से सस्ता एम्स है।. बाहर एमबीबीएस करेंगे तो एक डेढ़ करोड़. लगेगा। अंदर 5000 भई इतना भी अंदर बिना. डोनेशन के घर। हां। तो एम्स में बेसिकली. एम्स डोनेशन के लिए नहीं है। वो एक आध पर%. सीट जो रहती है डोनेशन वाली वो अलग चीज है.
वहां पे। लेकिन जो एम्स में निकाल के जाते. हैं वो लोग। नहीं तो ऐसी यूनिवर्सिटीज देश. में और क्यों नहीं बनती है? जैसे जेएनयू. हो गया आप एम्स का जिक्र कर रहे हैं। ऐसी. और क्यों नहीं बनती? सबसे बड़ा खराबी क्या. चीज है कि यह एक तो एम्स सरकार से पूछो. एम्स तो कहते हैं कि एम्स हमने इतना बना. दिया। भाई पहले समझिए कि आपके दादा के पास. पांच को भैंस था। हम 15 को भैंस रख लिए।. यही ना कहने का। अरे भाई भैंस की जगह आप. खरगोश पे आइए। भैंस की जगह आप आप ऊंट लेके. आइए। भैंस की जगह आप गाय लाइए। इ का रट. रहे हैं कि 15 से हम 30 को भैंस कर दिए।. 35 को भैंस कर दिए। मैंने एम्स ही ना बनाए.
हैं। एक नया कांसेप्ट तो लाइए लोगों के. दिमाग में बैठे कि ये वाला चीज एक ऐसा आप. आप ना विवेकानंद जी के नाम पे रख लीजिए।. विवेकानंद मेडिकल कॉलेज मतलब ये वाला. कॉलेज किडनी के लिए स्पेशलिस्ट है। ये इस. टाइप का है। कुछ तो नया कांसेप्ट बनाइए।. उसी चीज की संख्या क्या कर रहे हैं? बढ़ा. रहे हैं। आईआईटी को उसी की संख्या आईआईटी. को बढ़ा रहे हैं। मतलब हम इसमें बुराई. क्या है? मतलब नहीं कोई बुराई नहीं है।. कोई बुराई नहीं है। बट एक इनोवेशन नहीं ना. है ये। ये तो आप इसको आप उसको और बढ़ा रहे. हैं। बढ़ाते जा रहे हैं। चलिए 10 की जगह.
20 कॉलेज आ जाएगा। चेंजिंग क्या? इनोवेशन. क्या है? नया कांसेप्ट क्या? मतलब शायद. इनका स्टैंडर्ड सेट होगा कि एक बेसिक मानक. पे है या इतने बड़े यूनिवर्सिटी दुनिया. में एक टीचर्स यूनिवर्सिटी है। जहां टीचर. जाके पढ़े। वो हो गया वही जो 1980 में. पढ़े थे वहीं जाके चिपका रहे हैं। एक. टीचर्स यूनिवर्सिटी होनी चाहिए ना।. हर स्टेट में एक होना चाहिए। जहां हर टीचर. को आप 15 दिन के लिए ही बुला लो। जैसे मान. के चलिए कि किसी एक जगह से आप है 15-15.
दिन का सेशन बुला लीजिए। हां ये देखिए ये. अपडेट आया है। ये एनिमेशन आया है। ये. चीजें वहां जाके वो टीचर्स यूनिवर्सिटी. हमको एक बात बताओ हमारे मन में बड़ी. उत्सुकता से बात आ रही है। आपके अंदर इतना. ज्ञान है। इतना इनोवेशन आप दे रहे हो। ये. बात आप क्यों उन लोग आगे नहीं आते? संसद. में क्यों नहीं जाते आप जैसे लोग कि आप. पढ़ाओ भी लेकिन देश में रिप्रेजेंट करो।. कम से कम जहां ये सब बात रखने लायक हो। अब. आप पडकास्ट पे कह दोगे नेता जी ना सुने. जनता तो सुन ली जनता जागरूक हो गई लेकिन. अस्तित्व जगाना तो नेता होगा देखिए. पॉलिटिक्स में ना पब्लिक जो होती है ना वो. खुद ही ऐसे लोगों को नहीं पसंद करती.
पब्लिक को चाहिए ऐसा नेता जो तू बोल दे. कजिया में आके खा जाए तेरही में आके खाना. खा ले उनको ये सब आदमी नहीं चाहिए कि भैया. जो जीडीपी के डेवलपमेंट की बात करें जो यह. कहे कि भैया ये जो आप नहर बना रहे हैं. यहां पे तो नहर बनाइए ये सब वो सब तो. हाइपोथेटिकली अगर मैं पूछूं कि अगर मान लो. चुनाव लड़ तो आपको लगता बाहर जाओगे। नहीं. हमको ये सब चीज़ देखिए। हमको पठनपाठन से. खुद फुर्सत नहीं है। हम आप हम आपको पहले. भी बता आपकी इच्छा नहीं है। हम हमारी. इच्छा है कि हम एग्रीकल्चर में किसानों के. लिए ऐसा काम कर सके कि आने वाले समय में.
किसान अपना फोर व्हीलर पे घूमे। ओके। मेरी. बस मेरा यही है कि हमारा किसान अपना फोर. व्हीलर खरीदे। और उसी धोती और उसी हवाई. चप्पल पे जिसका एड़ी घिस चुका होता है। जो. खेत में पहन के जाता है उसी पे जाए वो. शोरूम में वो खरीदे। हमने डाला था कि हम. खान सर का पडकास्ट कर रहे हैं। बिहार कई. पॉलिटिकल पार्टी के नेता लोग लिखा कि. हमारी पार्टी भिजवा दो मतलब हमको भिजवा. दिया कि जोरजोर लगा दो हमारी वाली अच्छी. बता दो कि हमारे ज्वाइन कर ले। तो मतलब. आपके बताने से हमको नहीं पता चल जाएगा. वहां कौन अच्छा है। अरे सोर्स से पारिस कह.
रहे थे कि थोड़ा भावनात्मक जुगाड़ आप आपका. इंटरेस्ट नहीं है पॉलिटिक्स में एक्टर. पॉलिटिक्स में। देखिए क्या हमको ही नहीं. समझ में आता है कि एक नहीं इस देश इस देश. में क्या होता है सर जब आदमी बड़ा बन जाता. है किसी फील्ड में तो लोग चाहते हैं तुम. चुनाव लड़ लो। अब तुम चुनाव लड़ लो। सबको. चाहते हैं वो। ये होता है। दूसरा शायद. भारत में अच्छे लोग शायद पॉलिटिक्स में कम. है। एक की रीज़न ये भी है कि अच्छे लोग कम. है तो कोई आदमी जब बदलाव की बात करता है. तो लोग चाहते हैं कि काहे खाली काहे कह. रहे हो? आ करके दिखा दो। देखिए सबसे चीज. क्या लगती है ना यहां पे कि ये अब जब.
व्यवस्था को चेंज करने की बात कर रहे हो. तो पब्लिक को भी उस हिसाब से चाहिए होता. है। जब आप जाति में बटे रहेंगे, धर्म में. बटे रहेंगे तो क्या कर पाएंगे? और लोग भी. ना पढ़े लिखे लोगों की एक खराबी होती है. कि वो ज्यादा तू तत में नहीं करते हैं।. नेताओं को दिखेगा ना कहीं जाएंगे चाची. कैसे हो यह हो उसको दिखेगा ही अब पढ़ा. लिखा इंसान दिखेगा भैया इसके पास तो घर. नहीं है अब इसका इनकम कैसे होगा यहां पे. इसका बेटा है यहां है गुजरात वो उसके. सलूशन में लग जाएगा और वो कहेगा कि ये. अच्छा आदमी नहीं था ये तो कुछ करे नहीं. किया हमको वो सलूशन में लगेगा और वो चाची.
कुछ नहीं ऐसे कुछ कुछ बांट देगा पढ़ा लिखा. इंसान सोचेगा ये बांटने से इसको तो कुछ. नहीं होगा इसको हम एक कपड़ा दे देंगे क्या. कर लेगा ये बेचारा मुर्गा भात खिलाएंगे. क्या कर लेगा ये बेचारा तो लोगों को बहुत. बार कंधा. चाची पाय लागी भैया कैसे हो भैंस ठीक है. गवा दूध दे नहीं देते उसी में ठीक लग. जाएगा यहां पे एक तो सबसे खराब चीज हमको. क्या लगता है इंडिया में प्लेन बीए कर दिए. कोई बीए कर दिया है बेकार बैठने से अच्छा. है बेकार बैठने से अच्छा है बेकार बैठने.
से ज्यादा खतरनाक बीए कर दिया यहां पे आप. बताइए हम अगर किसी को बीएससी नर्सिंग करा. देते हैं तो बीएससी नर्सिंग वाला इंसान ना. डॉक्टर के बाद वही होता है डॉक्टर के जस्ट. बाद नर्सिंग होती है और किसी भी हॉस्पिटल. का बैक बोन होता है नर्सिंग चीजें। तो अगर. हम किसी को नर्सिंग करा देते हैं तो कितना. बेहतर हो सकता है। अब आपको कोई सड़क. एक्सीडेंट होगा तो 10 आदमी उसको देखने. आएंगे यहां पे। वो बेचारा उिया गया है।. गिरल है छिटाया है ऐसे तैसे उसमें से आप. खोजिएगा उस मरीज को आप छोड़ दीजिए। अब जो.
भीड़ खड़ी है 20 उसमें पूछिए कि बीएससी का. है तो पांच गो बीए 15 गो बीकॉम इतना एंड. बीएससी नर्सिंग कोई नहीं। जबकि वहां क्या. था? अगर कोई नर्सिंग किया रहता उसका. फर्स्ट एड वही इलाज करके उसको फर्स्ट लाइन. ट्रीटमेंट दे सकता था। तो जो अछक्का पढ़. है ना सरकार ने उसको बहुत महंगा रखा है।. बीएससी नर्सिंग करने जाइएगा तो 7 से ₹1. लाख लगेंगे। अब बीए करने जाइएगा तो 25 300. में नॉर्म मतलब 1015000 से स्टार्ट हो. जाता है। अलग-अलग कॉलेज थोड़ा महंगा सस्ता. लेते हैं। अच्छा जितने ये प्राइवेट कॉलेज. खुल गए सब्जी मंडी की तरह इनमें प्लेसमेंट.
तो होता नहीं है। ये खाली बुलाते हैं, पैसा लेते हैं। चार साल मौज मस्ती करवाते. हैं। आपको छोड़ देते हैं। फिर आप उसकी जगह. फिर घर से कर्जा लेते हो। फिर आप एमबीए कर. लेते हो। यही भारत में चल रहा है। इसको. रोकना नहीं चाहिए कि अगर आप प्लेसमेंट. नहीं करा सकते हो। पहले से पता है. प्लेसमेंट नहीं करा सकते हो। आपका एजुकेशन. लेवल इतना नहीं है। ना मॉनिटरिंग है ना. कुछ है। 10% बच्चे 20% बच्चे प्लेसमेंट. होता है और जिनका होता भी है मैंने देखा. है वो दो चार महीने भाग जाते हैं।. जो पहले से चल चुके हैं ना जिनका रिकॉर्ड. देख लीजिए। प्लेसमेंट नहीं हुआ है बंद करा. दीजिए उनको। आग वाले को काहे रोक रहे हैं?
जो नया खोलने जा रहा है आप उसको रोकिएगा।. तो हो सकता है कि वह नया यूनिवर्सिटी नया. कासेप्ट ला रहा तो उसको तो रोक देते जो. पहले खराब कर रहा है उसको बंद कराइए जो. इनका परफेंस खराब है 2047 में बिहार कहां. होगा देश तो हाउस पावर हाउस बन जाएगा 2047. में बिहार क्या बनेगा क्या यहां ये लोग. नहीं बोलेंगे कि 47 में हम विकसित हो. जाएंगे बिहार वाला नहीं मिला अभी जाएंगे. ना इलेक्शन कवर कर पूछेंगे अभी आपसे पूछ. ले रहे हैं एक चीज 47 में तो पावर हाउस. देश बन रहा है हमारा हम नंबर वन बन रहे.
हैं विश्व गुरु बिहार क्या बन रहा है अब. ये ये वहां का नेता लोग बताएगा लोग क्या. बनाना जा रहे हैं। जिस हिसाब से जिस हिसाब. से वहां पे चीजें चल रही हैं बहुत ज्यादा. आप नहीं बदलाव देख पाएंगे। कोई धरातल पे. जो चेंज करने वाली चीजें हैं वो है ही. नहीं है। आप सपोज कीजिए कि बिहार के लोगों. को इस तरह से बेवकूफ बनाता है सब कि यहां. फैक्ट्री नहीं है। मतलब तुम फैक्ट्री डाल. के अपना सामान चेन्नई बेचोगे। फैक्ट्री. डाल के अपना सामान अमेरिका बेचोगे।. तुम्हारा खाने वाला मछली आंध्र प्रदेश से. आ रहा है। पहले उसको तो बना लो। मछली तो.
पोस लो बढ़िया से।. सर मैंने अंडा जो बिकता है ना बिहार का. अंडा जो लोग अंडा खा रहे हैं वो बिहार से. सप्लाई पूरी नहीं हो रही है। क्या बेवकूफ. बना रहे हो उस इंसान को? वहां जो ब्रेड जा. रहा है वो बनारस से जा रहा है। जो मंदिर. में फूल चढ़ रहा है वो बनारस से जा रहा. है। कोलकाता से बढ़िया डेकोरेशन का फूल. कोक से आ रहा है। भाई किसको बेवकूफ बना. रहा है? जो तुम्हारी जरूरत की चीज है पहले. उसको बना लो। फिर तुम दिल्ली मुंबई की. चीजों को पूरा करना। मैंने कहीं सर एक कोई. वीडियो देखा था। आपका था किसी और का था कि.
बिहार में शहर भी कम है। आप यूपी की बात. कर ले आपको 20 शहर मिल जाएंगे। अलग बिहार. में पटना बिहार में सिर्फ पटना बस है ही. नहीं इसके आगे पीछे कुछ मतलब यह मेरे लिए. बड़ी सोचने की बात थी कि आजादी के बाद से. इतने समय तक आपके पास सिर्फ पटना और पटना. भी जब मैं पहली बार गया था तो लखनऊ और. पटना में आपको फर्क समझ में आता है बहुत. ज्यादा कि लखनऊ राजधानी है वो आपको महसूस. कराती है अगर आप गोमती नगर इलाके में घूम. रहे हैं या उधर हजरतगंज से आगे निकल रहे. हैं तो आपको फील होता है कि ये कोई. राजधानी है बिहार में गया बिहार मुझे एक.
साधारण सा शहर लग रहा था कुछ इलाके थे. भीड़भाड़ वाला गांव है थोड़ा सा उस डेवलप. जो हुआ है हां कुछ-कुछ जगह अच्छी दिख रही. थी लेकिन पूरे शहर के तौर पर मुझे उतना. डेवलप नहीं दिखा जबकि एक शहर है आज आप. यूपी में जाइए प्रयागराज आपको बेहतर दिख. रहा है गोरखपुर जाए बेहतर अयोध्या देखिए. वो बेहतर हो गया है नोएडा जहां हम बैठे. हैं ये काफी बेहतर है तो बिहार में एक ही. शहर और कोई शहर क्यों डेवलप नहीं हुआ कभी. किया ही नहीं लोगों ने तो डेवलप कहां से. हो गया मना नहीं था किसी का हां हर एरिया. का एक ठो अपना क्रिमिनल था और अगर वो अमीर. है या बड़ी जाति से है तो आप उसको बाहुबली.
बोलिएगा गरीब है या छोटी जाति से तो. अपराधी बोल दीजिएगा।. तो यही तो है क्रिमिनल का वहां परिभाषा. अलग है। बड़ी जाति से तो बाहुबली है।. बाहुबली है। हमारे और लोग जंगल राज. बोलेंगे और नाम लेंगे कभी किसी उसका नहीं. लेंगे। उसका लेंगे जो बेचारा गरीब था या. फिर उसके जाति लेवल था वहां पे वो कहेगा. यही जंगल राज फैलाया था। तो जंगल राज में. जो जो फैलाया था उसका नाम लो।.
बहुत महीन नस पकड़े सारा आप बहुत देर तक. दर्द दिगी बट यस या आप आपने कभी सोचा ही. ये मतलब मैंने पहली बार जब सुना कहीं पर. कि बिहार में एक ही शहर है पटना सब घूम. टहल के आओ पटना और वो भी शहर ऐसा नहीं कि. जो बहुत शहरों में शहर हो. महाराष्ट्र में आप जाओगे आपको बहुत शहर. मिल जाएंगे तमिलनाडु जाओगे साउथ कहीं भी. चले जाओ. ये शहर को ये लोगों ने बसाया ही नहीं उस. हिसाब से ना अब किसी को नहीं अब तो काफी. अब तो 2025 में हम अब तो सारे संसाधन है.
मतलब मैं तो सारी राजनीति बिहार चलती है।. राष्ट्र पहला राष्ट्रपति बिहार से मिला।. प्रधानमंत्री. वहां जाते रहते हैं। देश में बड़ा पावर. हाउस वहां पर है। सब तो कुल मिला के यूपी. बिहार से ही है। 40 सीट निकल कर आती है. लोकसभा की। जनसंख्या से ही तो रिलेटेड. चीजें हैं यहां पर। बाकी किसी चीजों में. अच्छा वो सबसे बड़ा खराबी क्या है ना. बिहार में हम लोग मानने को भी रेडी नहीं. है। अभी हम लोग किसी से कहेंगे बिहार पीछे. तो स्टार्ट करेगा। का रुख तुमको बताते. हैं। 2000 साल पहले चलते हैं। अशोक, चंद्रगुप्त, मौर्य, महात्मा बुद्ध पूरा. पीछे का इधर 20 सालों में क्या हो रहा है?
ये नहीं हो पा रहा है। और इन्हें एक चीज. इनके दिमाग में रटवा दिया गया है कि. फैक्ट्री नहीं है इसलिए डेवलपमेंट नहीं. है। और जो सरकार में है वो कहता है कि. समुंदर ही नहीं है तो फैक्ट्री कहां से. आएगा? माने बंदरगाह रहता तब तो म. पाकिस्तान में चला था। अरे यह हरियाणा. पटना उसको उड़ा दिए थे। हां मतलब वहां पर. वहां पे समंदर बना दिए बंदरगाह पटना. बंदरगाह उड़ाया गया था। अच्छा पाकिस्तान. वाले कह रही तो इन सब से क्या बात. कीजिएगा? तो एक इन लोग के दिमाग में बस.
गया है कि फैक्ट्री फैक्ट्री फैक्ट्री. फैक्ट्री वो चीजें धीरे-धीरे चीजें आए आती. रहेंगी। बिहार का एक जगह था वहां पे. रोहतास के आसपास का एरिया। रोहतास हो गया. और डालमिया नगर के आसपास का जो एरिया था. वहां बहुत सारी फैक्ट्रियां थी। यहां के. लोकल जो नेता थे सब बर्बाद कर दिया सब।. क्या किया सब? 10 मजदूरों को बुलाया सब और. अपने मजदूर का यूनियन बन गया नेता खाना. ठीक नहीं है स्ट्राइक मार दिए 10 दिन. फैक्ट्री बंद है उसकी तो पूरा प्रोडक्शन.
रुक गया ना तो कहा तो हम एक नेता बन रहे. हैं अब ये जाके कंप्रोमाइज कर लेंगे अंडर. द टेबल कुछ ले लेंगे तो धीरे धीरे धीरे. धीरे ना वहां उजड़ने लगे सब बंद कर करके. फैक्ट्रियां गई है सब वहां से यूनियन इतना. इतना मतलब आप यूनियन है बट अब तो 15 20. साल से एक ही सरकार है सेंट्रल में भी. इनकी सरकार इधर भी कुछ बेहतर नहीं हुआ 10. सालों से बिहार में 10 12 साल से नहीं. नीतीश जी जब शुरू शुरू में थे ना तो एकदम. किसी से कोई जान पहचान नहीं जो गलत किया. वो उसे एकदम उसका इलाज कर देंगे कुछ भी.
किसी को टोलरेट नहीं करेंगे क्योंकि जान. पहचान किसी से थी नहीं सरकार में बहुत दूर. तक थे दूर तक इनका कोई वो नहीं था अब. धीरे-धीरे सबसे जान पहचान हो गई. तो थोड़ा एक्शन धीरे लेते हैं लेकिन. व्यक्तिगत रूप से इंसान बहुत मतलब काम किए. बिहार के लिए अब तो खैर उम्र हो गया और. स्वास्थ्य हो गया तो कोई बोले लेकिन अभी. भी बिहारियों के अंदर किसी भी बिहार से. पूछिएगा ना उसके अंदर एक दबा सा एक एक. उनका एहसान दिखता है कि नहीं नीतीश जी ने. काम किया है चाहे वो बिजली हो या कुछ भी.
हो ठीक है भारत की विदेश नीति को कितना. नंबर देंगे आप. विदेश नीति में हम लोगों ने पड़ोस को. बैलेंस मतलब दूर विदेश नीति में जैसे दूर. को तो मैनेज कर दिया हम लोगों ने बट पड़ोस. में हम लोगों ने गड़बड़ कर दिया. जैसे मालदीव श्रीलंका बांग्लादेश म्यांमार. नेपाल भूटान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान सब जगह से तो चौपट हो रहा था। एशिया. को हमने गवा दिया। आगे वर्ल्ड में ठीक जा. रहे हैं। यूरोप के हिसाब से। ठीक है। भारत. की मीडिया कैसे देखते हैं आप? हम देखवे.
नहीं करते. क्योंकि इनसे इनसे अगर हम नाम नहीं लेंगे. लेकिन बहुत सारे एंकरों का जिक्र कर देते. हैं आप प्यार प्यार से। तो एंकर लोग का. जिक्र कर देते हैं। वो अलग बात है। बट ये. लोग क्या चला देंगे कुछ समझ में नहीं आ. रहा। मैंने देखा एंकर लोग को पसंद करते. हैं आप। नहीं एंकर लोगों को तो हम यही. कहते हैं कि मतलब हम तो कई ठोंठों को तो. विषक कन्या बोलते हैं।. देखिए हम वही चीज हो गया। नमस्कार आज. देखते हैं हम आज आपके देश में हम कितनी आग. लगा सकते हैं। देखिए यहां से दो बकलोल को. बैठा देगा सब मुर्गा कैसे लड़ा जाता है? हां चलो लड़ लड़। अरे भाई ये कोई.
इंटेलेक्चुअल इंसान लाओ ना कौन गधों को. पकड़ के लाए हो? मतलब कि गधा गधा को उठा. के लाएंगे। आदमी सुनेगा कौन? आप वही आप. वाली बात कि जब तक वो चाची नमस्ते नहीं. आएगा। बस वही बात हो गई यहां पे।. इंटेलेक्चुअल को लेके आए सब। एक ऐसे ऐसे. इंसान से इकोनमी पे डिस्कस कर रहे थे सब. जिसको मतलब होलसेल प्राइस इंडेक्स और. कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में अंतर ही नहीं. पता है और वो बैठ के इकॉनमी समझा रहे हैं. सब। और क्या मतलब मन करता है टीवी फोड़. दें।.
चल रहा है तो चल रहा है। तो भारत की. मीडिया में अगर कुछ बेहतर करना हो। अब. देखो आप हरमंतर के जादूगर तो आपसे जो. समस्या कहेगा उससे समाधान पूछा जाएगा। तो. भारत की मीडिया में क्या ऐसा बेहतर किया. जाए जो मीडिया वापस विश्वास ला सके? हो. सकता है कुछ लोग फिर से मीडिया में जाने. वाले हो तो वो सुधार. देखिए एक तो 24 घंटा ये न्यूज़ चलता है।. इसको रोकना चाहिए। आप 24 घंटा कहां से. न्यूज़ लाएंगे? फिर वही घसिया पटा. घसीटेंगे। एक सुबह दोपहर शाम का तीन स्लॉट.
बना जहां पडकास्ट दिए हैं वहीं से खबर. चलाते रहते हैं पूरे दिन। तो खैर तो 24. घंटा अलाउ है तो चल रहा है। फिक्स होना. चाहिए कि इतने इतने टाइम पे न्यूज़ आएगा।. बीच में अगर कोई ऐसी घटना हो गई जो देश के. लिए जरूरी है। जैसे अभी पहलगांव जैसी घटना. हो गई या कोई स्पेशल सूचना देनी है तो आ. जाए यहां पे। बाकी बचे टाइम पे आप स्किल. भी सिखा दीजिए। किचन गार्डनिंग सिखा. दीजिए। टेरेस गार्डनिंग सिखा दीजिए। उसका. एक कोई लेक्चर लेने आएगा वो समझाने लगेगा।. जैसे फिजियोथरेपी किसी के घर में कोई.
बूढ़ा है। स्पाइन में दर्द है। किसको. माइग्रेन में दर्द है? तो कैसे दबाया जाता. है आपको पता नहीं। माथा लेके आओ। को लोटा. इसे दबा रहा है। अब भैया माइग्रेन के दर्द. वाले को किधर से दबाया जाता है कुछ पता. नहीं है। बदह में दर्द है तो दाब दे ये. बुझा रहा है चाप दे इसको सब सही हो जाए. यहां पे किस बीमारी में कौन सा जैसे अब. किसी को किडनी फेल है या किडनी का. प्रॉब्लम है और उसको दबा के उसको प्रोटीन. दे रहे हैं सब उसका क्रिटिनिन बढ़ा हुआ. है। उसको प्रोटीन नहीं चाहिए। तो जो बीच. का टाइम है वह हम लोग घरों को चीजों में.
जानकारी के जैसे पहले होता था पहले. किसानों के प्रोग्राम आते थे आते थे वो. आते थे ये और दूसरा क्या है ना कि सरकार. के पास एक बहुत बड़ा हथकंडा होता है. एडवर्टाइजमेंट देने का कि आप हमारे खिलाफ. चैनल चलाएंगे तो हम आपको एडवरटाइजमेंट ही. नहीं देंगे और एडवरटाइजमेंट ही मेन कमाई. का जरिया हो गया है वो तो वही टीवी चैनल. का तो मेन वही है यहां पे तो एक इसका. रेगुलेशन होना चाहिए कि गवर्नमेंट अगर. एडवर्टाइजमेंट दे रही है तो सबको दे और. इसको रेगुलेट कौन करेगा गवर्नमेंट.
यही सबसे बड़ा नस होता है और आम पब्लिक को. यह समझ में नहीं आता है कि ये वाली जो. न्यूज़ पे बैठी कन्या है नमस्कार आज हम. आपको दिखाते हैं बाल सीधा करते हुए और जो. टेली प्रॉप्टम पे पढ़ रही होती है कैमरा. के पीछे तो लोगों को लगता है धधरा के बोल. रही है एक के बाद एक खबरों में आपका. स्वागत है। सबसे पहले हम देखते हैं आज. कहां पूल गिर गया ये गिर गया वो सब तो ये. लोगों को नहीं समझ में आता इसकी मजबूरी है. इसका मालिक का पेमेंट रुक जाएगा तो बोलेगा. वो करेगी तो एक ये जरूरी होना चाहिए विष. पुरुष से काहे दिक्कत नहीं है आपको खाली. विश कन्या कन्या को दिक्कत है बहुत सारा.
विष पुरुष भी होंगे हां विष पुरुष है एक. तो चिल्लाता है उधर से बहुत तगड़ा. चिल्लाता है यहां पे उसके एक तो क्या. कहिएगा पत्रकारिता का जो लेवल गिर गया है. वो बहुत चिंता में है मतलब हमको नहीं समझ. में आता कि पत्र पत्रकार सब दो राजनीतिक. पार्टियों को लड़वाता है सब भैया एक. पार्टी के तो तुम खुद ही हो तो तुम उसको. क्यों बुला लेते हो और हमको ताज्जुब ये. होता है कि जो विपक्ष में आया है वो बोलता. नहीं है कि मैम आप पत्रकार महोदय या.
पत्रकार महोदया आप स्वयं हैं तो इस पार्टी. से आपने क्यों बुला रखा है? अब पत्रकार आप किसी पत्रकार का नाम बताइए. हम बताएंगे कि किस किस ओर से है। चलो ये. तो सबको पता है।. ये बताइए कौन सा आपको पसंद है? चलो एक नाम. बताओ। आप अपना सवाल हमारे ऊपर फेंक दिए।. आज इधर बैठे ना आपको कोचिंग सेंटर में. पूछेगा।. हमारा देखिएगा हम हम दोनों बजाते हैं।. इतना बजाते हैं कि लोग पीछे कमेंट सेक्शन.
में भर जाते हैं। लेकिन ठीक है। खैर अब. किसी का एक बहुत सारे लोग कोई जर्नलिस्ट. आपको पसंद है। नापसंद वाला बात। कोई पसंद. है? बहुत सारे जर्नलिस्ट पसंद है। बट क्या. है ना कि लोगों को एक नहीं होता है कि खुद. से धारणा बनने लगती है एक चीजों में और एक. चीज हम देख रहे हैं ना पत्रकारिता में आप. एक और उंगली नहीं उठा सकते हैं। एक है जो. सरकार की गुलामी में लगा हुआ है। मतलब ऐसे. पत्रकार हैं कि अगर उनकी जान लेनी है ना. तो आप जहर लेके नेताओं के तलवे पे लगा.
दीजिए। सारे सब मर जाएंगे। सुबह चाटने. आएंगे तलवा।. मर जाएगा उधर यहां। हे प्रभु हे हरि राम. कृष्ण प्रेमंदी मतलब और समझिए जहर कहां. लगाएंगे और मरेगा कौन? ऐसे ऐसे पत्रकार. हैं और कुछ ऐसे पत्रकार हैं जो कसम खा के. रखे हैं कि हमको मोदी से ही एलर्जी है।. अरे यार उस इंसान ने अच्छा भी काम किया. है। मतलब एक है जिनके दाहिने पैर में जहर. लगा दे के बाएं में। बाएं पैर लगा दो। बस. हो गया। ये खराबी हो गई है। मर जाएंगे।. हां यही खराबी हो गई है। ऐसा नहीं है कि. मोदी ने सब कुछ खराब किया है। कुछ चीजों.
को बहुत बेहतर किए। कनेक्टिविटी हो गई या. फिर इंफ्रास्ट्रक्चर पे काम करना हो गया।. बहुत सारी चीजों पे वर्क किए हैं। कुछ. चीजें पे काम ही नहीं किए। एजुकेशन जैसे. एजुकेशन में कुछ कर नहीं कुछ कर नहीं नहीं. किए हैं। हम आपको गारंटी देते हैं. प्राइवेट स्कूल को बंद कर दीजिए। एजुकेशन. सिस्टम तबाह तबाह हो जाएगा। पूरी एजुकेशन. सिस्टम प्राइवेट लोगों ने संभाल के रखा. है। चाहे वो नर्सरी का आप आप अपने गांव का.
बात बताइए। आपके जिला का अगर कोई 10 अच्छे. स्कूल बताइए जिसमें एक भी सरकारी आता हो।. नहीं होगा। फिर और वो भी ईसाइयों ने तो. इंडिया का एजुकेशन सिस्टम ईसाइयों के कंधे. पे है। बोले कितनी दुर्भाग्य की बात है और. आप उनको कोई मतलब एक तरह से एहसान दिखा. सकते हैं उस चीज को कि हमने पूरी इंडिया. के एजुकेशन सिस्टम को बना के रखा। YouTube. जर्नलिज्म कैसे देख रहे हो आप? चलो ये तो. हम हम समझ गए कि सरकार वाला तो हमने एक. लंबा चैप्टर किया। जर्नलिज्म में बात कर. रहे थे। YouTube जर्नलिज्म जो दूसरा चल. रहा है अभी आजकल। ये काफी ठीक चल रहा है।.
बट इसका भी एक हिस्सा है ना जिसको केवल. व्यूज चाहिए। जो नए-नए हैं जो एथिक्स ने. व्यूज चाहिए वो आपका बेडरूम दिखा देंगे।. गजब एकदम मत पूछिए। अरे हम तो कई. जर्नलिस्ट देखे जो खान सर के सादिम नेगा. इस चीज का वीडियो बना दिए। हां बहुत सारा।. अब देखिए अब हम तो इसमें गए ना मतलब. परेशान परेशान हो गए। हमने इसमें क्या नाम. है? कहीं भी चले गए। कुछ भी सवाल पूछ. दीजिए। अरे भाई आप मतलब हम एक जगह से निकल. रहे थे तो एक एक मोहतरमा थी। सीधे माइक.
घुसा दिए। अमित सिंह से खान सर कैसे बने? हम कह रहे हैं भाई साहब तुम्हारा सवाल कुछ. से कुछ पूछ दोगी. हमको कई वो आधा अमित सिंह समझता है कई तो. खान सा समझ रहा है देखो इधर हम घुसेंगे. नहीं इस नाम वामम के चक्कर में नाम में. क्या रखा है इतिहास भूगोल ने बहुत कुछ रखा. है हम इधर इतिहास भूगोल पे आते हैं नाम तो. दुनिया से देख हीगी गांधी जी पटेल जी कौन. ज्यादा प्रासंगिक थे आपकी नजर में अपने. दौर में किसका ज्यादा इंपैक्ट था देश में. हथौड़ी अच्छा की पीलास.
जियो. दोनों का अलग-अलग काम फिर दोनों का. अलग-अलग काम था। जिसका ज्यादा इंपैक्ट रहा. देश पे उस पे तुम कह सकते हैं ना कि पिलास. ज्यादा तो स्वयं स्वयं सरदार पटेल गांधी. जी को अपना मतलब समझिए कि सरदार पटेल जो. थे जब वो बारदोली सत्याग्रह कर रहे थे और. वहां की महिलाओं नहीं बट सरदार सरदार का. मैं इंपैक्ट आजादी के जो लास्ट के फेस थे. जब वो रियासतों को जोड़ा गया। उसके पहले. सरदार पटेल वन ऑफ द फ्रीडम फाइटर थे जो. महान थे। बट जो इंपैक्ट उनका वो रियासतों.
को. बहुत अच्छा उसके. पूछ रहा हूं मैं सरदार पटेल ने बहुत अच्छे. से रियासतों को जोड़ा था लेकिन हम आज भी. एक चीज हम कहते हैं कि सरदार पटेल को उस. समय यह प्रस्ताव पास कर देना चाहिए था कि. वो विभाजन की तत्काल परिस्थितियों को. एक्सेप्ट नहीं कर रहे हैं। लेके आ सकते थे. संसद में क्योंकि जैसे देखिए 370 हटाने का. कौन लाए थे? गृह मंत्री लाए थे। अमित शाह. लाए एक प्रस्ताव लाके अगर बस ओपन छोड़ देते. ना कि 2 साल बाद जनरल बूचर चला गया था और.
2 साल बाद जिन्ना तो मानते हैं ना कि. हमारे तो बहुत टाइम तक सरकार अंग्रेजी चला. रहे थे लंदन से बैठ के हां कुछ समय तक चला. तो पटेल साहब थे ना यहां तो दोनों में हम. आप कैसे अलग कर सकते हैं दोनों ही महान थे. आप एक आई थिंक तुलना विषय गांधी गलत से. नेहरू के साथ फिर भी बात गांधी जी गांधी. से अच्छा नहीं है नेहरू नेहरू पटेल पे चलो. बताता हूं मुझे नेहरू पटेल पे ज्यादा. इंपैक्ट इसका देखिए अगर नेहरू जी के पास. लेगसी नहीं रहती मोतीलाल नेहरू तो सरदार. पटेल उन्हें पीछे कर देते हैं। गलत हुआ. सरदार पटेल साहब वो जो 1935 में इलेक्शन.
हुआ था जिसमें वो जीते थे गांधी जी ने कहा. उसको देखने का बड़ा नजरिया अलग-अलग वो तो. बिना मतलब की चीजें 1935 कहां है उस समय. चलो ठीक है हम वहां से भी आगे से वहां से. बढ़ते हैं। मैंने ओशो के भाई का आपका. पॉडकास्ट किया। ओशो का एक बड़ा फेमस कोट. है कि गांधी जी की सादगी के चक्कर में. बड़ा खर्चा हुआ। वो एक सादगी मेंटेन करते. थे। गांधी जी के बारे में आपने बड़ी तारीफ. की आपने कही हाल फिलहाल पॉडकास्ट में। हाउ. यू सी गांधी जी दोनों नजरिए से एक उनका. इंपैक्ट जो आपने बंगाल वाली बात की कि. दिल्ली में दंगा हो रहा था वो बंगाल में. बैठ के भारत को जोड़ने की कोशिश कर रहे थे.
जो उनकी महानताई की बहुत बड़ी पराकाष्ठा. है जिसके लिए हम सबको उनका सम्मान करना. चाहिए और एक जो उनके बारे में चर्चा होती. है आज के दौर में कि उनकी सादगी मेंटेन. करने में बड़ा खर्चा होता था एक पहनना है. साथ बकरी जाएगी और एक डब्बा पूरा बुक होगा. ओशो का एक बड़ा बयान फेमस वायरल होता है. तो ये दोनों कैसे देखते हो आप ओवरऑल देखिए. गांधी जी के में किसी भी इंसान के अंदर. कोई कमियां है तो उसको उस कमी के हिसाब से. कहिए। अब किसी के पैर से नहीं चल पा रहा. है तो उसको अंधा नहीं ना कहिएगा। सही बात. है। तो जो अब कहते हैं विभाजन गांधी ने.
किया। हां ये बहुत चलता है। गांधी जी ने. भी ये क्या ये क्या तरीका है? पाकिस्तान. पे थोड़ा सॉफ्ट थे वो भिजवा दिया। वो नरम. दल के थे। आप इससे ऐतराज दिखा सकते थे कि. वो नरम दल के थे। भगत सिंह के टाइम जब. बचाने की बात आई तो एक तो तो उनके ऊपर दो. आरोप बड़ा लगा देता है। एक विभाजन. इन्होंने किया। हमको पूरा हिस्ट्री पढ़ने. के बाद हमको आई नहीं बुझाया कि गांधी कहां. से चले? सीआर फार्मूला चक्रवर्ती. राजगोपालाचारी फार्मूला आया था और सरदार. पटेल से लेके हर लोगों की सहमति थी यहां. पर तो एक यह आरोप लग जाता है दूसरा कि भगत. सिंह को नहीं बचा सकते थे भगत सिंह को.
बचाने की हम बात कर रहे हैं गांधी क्या थे. वकील अगर मान के चलिए आपका कहीं केस अटक. गया आपको फांसी लगने वाली है वकील बचा. सकता है या आपके सामने बैठा जज बचा सकता. है आपको ज्यादा बचाने की चांसेस कौन है जज. जज आगा हैदर खान एक जज थे आगा हैदर खान ने. लिखा है कि भगत सिंह को शक के आधार पर आप. फांसी फांसी नहीं दे सकते हैं। तो उसके. बावजूद जो जजेस की टीम थी, जरिश थी, भगत. सिंह को फांसी दे दी। आगा हैदर खान ने. अपने जज के पद को इस्तीफा दे दिया कि मैं.
इस अंधे कानून में जज बनके क्या करूंगा।. अंग्रेजों को फिक्स था कि इनको मारना ही. मारना है। लेकिन फिर भी गांधी वहां चाहते. तो बचा सकते थे। उनके पास एक मौका था कि. अगर वो सेकंड राउंड टेबल समिट में नहीं. जाते। तो इरविन की मजबूरी थी वो वीटो लगा. के फांसी माफ कर सकता था। ये गांधी जी की. एग्जैक्ट गलती थी। सिर्फ इकलौती वो उनको. जाना ही नहीं चाहिए था वहां सेकंड राउंड. टेबल में और यह मैकडोनल उनको मजबूरी में. बुला रहा था इरविन की नौकरी चली जाती अगर. गांधी नहीं जाते तो अच्छा ये अपनी नौकरी.
बचाने के चक्कर में भगत सिंह को माफ करते. हैं ये उनकी एग्जैक्ट गलती लेकिन विभाजन. का ठीकरा फोड़ देना उनके ऊपर ठीक गांधी जी. की डेथ एनिवर्सरी पर इस देश में एक्सपर्ट. घोटसे ट्रेंड करते हैं और हर साल मैं. देखता हूं बीते कई सालों से हमारा पूरा. बचपन महात्मा गांधी जिंदाबाद गांधी जी. हमारे राष्ट्रपिता सब इसी में गुजरा। अब. जब हम बड़े हुए सोशल मीडिया द्वारा एक्सेस. करते हैं तो मैं देखता हूं कि एक कंपटीशन. चलता है कि कितने लोगों ने गांधी जी को. विश किया। उनकी जयंती पर भी ये होता है कि. कितने विश किया और गोडसे वाले का आता है।.
इस ट्रेंड को आप कैसे देखते हो? गांधी को. मानने वाले भी गांधी की तरह शालीन है।. मानने वाले हां। हम उनकी तरह शालीन है. इसलिए उधम नहीं मचाते हैं और गोडसे को. मानने वाले भी गोडसे टाइप के अग्रेसिव. हैं। इसलिए गोडसे को मानने वाले कम है बट. अग्रेसिव हैं इसलिए दिखते हैं। गांधी को. मानने वाले ज्यादा हैं बट वो शालीन और. शांत है इसलिए नहीं दिखते। तमाशा विरोध. दिखाई पड़ता है। दिखाई पड़ता है। किसी को. लठाई मार देंगे सब। किसी को दो लाठी कपार.
पे मार देंगे। सो यहां पे वही हो गया।. जिन्ना को मानने वाले. ज्यादा नहीं है बट जितने हैं वह तबाह करने. के लिए काफी हैं।. इंटरेस्टिंग तो ये जैसे गांधी जी को जो. नहीं भी मानते हैं या गांधी जी के जो. साइडलॉजी विरोध करते हैं जब वो भी बाहर. जाते हैं तो गांधी जी के बारे में बात. करते हैं। गांधी के बिना भारत की कल्पना. हो सकती है। ऐसा नहीं है कल्पना है। भाई. जैसे जब हम बाहर जाते हैं तो मैं कई बार. देखता हूं कि बाहर जब भारत से कोई भी. प्रधानमंत्री कोई भी हो विदेश मंत्री कोई.
भी हो बाहर गए तो हम बौद्ध और गांधी इन दो. का जिक्र जरूर होता है और इस देश में आते. ही ये हमको ये वाला सुनाई नहीं पड़ता।. आइडियोलॉजी का वही है कि देखिए ऐसा नहीं. है कि गांधी जी के लोग चाहने वाले कम है. बट वही अगेन कि गोसे को माने और आजकल तो. WhatsApp पे ना ऐसा ऐसा इतिहास पढ़ा रहा. है ऐसा ना कि हम लोग का दिमाग खराब हो. जाता है और बचवा सब आजकल का यंग जनरेशन. उसको मान लेता है ऐसे कि ये सही है कुछु. लाइन लिख के भेज दे रहा है सबसे ऑकवर्ड. क्या सुनाई पड़ा आपको मतलब ये चीजें ना.
हमेशा ये हर हफ्ते एक आते ऑकवर्ड जरूर चला. आता सबसे खतरनाक क्या सर आपका दिमाग खो. गया ई का बता देता है तुम अब देखिए एक चीज. हम देखे ना कि WhatsApp में हर लेवल के. अलग टाइप का मैसेज जा रहा है। मतलब बच्चों. को जो भेज रहा है वो बच्चों के लेवल का. भेज रहा है। हमको एक दो ठो अलग-अलग ग्रुप. में जोड़ दिया है सब। हम बाहर निकले फिर. जोड़ा सब फिर निकले तो इंडिविजुअल भेजता. है सब। कुछ कुछ से कुछ से कुछ भेजता रहता. है सब। अब झांसी की रानी के बारे में बता.
रहे थे। एक पार्टी के नेता हम कहे कि भाई. आप तो ऐसे बता रहे हैं कि आपकी पार्टी की. अध्यक्ष है झांसी की रानी वो तो देश की. संपत्ति है। जितना आपका अधिकार है उतना. दूसरे पार्टी का भी उसके पार्टी का भी है।. आप तो ऐसे इकलौता ऐसे लेके जा रहे हैं. जैसे आपके घर की थी वो ये बताइए झांसी की. रानी आपकी जितनी उतनी हमारी थी। सही बात. है। इसमें क्या चीज उसमें है? छत्रपति. शिवाजी महाराज जितने तुम्हारे जितने उतने. वहां राष्ट्रीय धरोहर हैं वो। इसमें. इकलौता वो दिखाना कि लगता है कि जैसे आप. ही उनको मतलब तलवारबाजी सिखाए हैं। उनका.
तो एहसान हम पूरे देशवासी मानते हैं। ट्रू. लेकिन एक तरह से दिखाना कि नहीं ये ये. हमारे हैं। ये नहीं समझ में आता है। ठीक. है। इस देश की समस्या सर पाकिस्तान का. आपने कहीं कह दिया कि इसका नक्शा जो है वो. कुत्ता से मिलता है और लक्षण भी कुत्ता से. मिलता है।. काहे का आपकी नक्शा जो है सच में कुत्ता. से मिलता है आप आप लगाइएगा यहां पे मतलब. दिखाइएगा लोगों से वो दिखेगा और इसमें.
कुत्ते की बेइज्जती है. सही बता रहे हैं इसमें कुत्ता का बेइज्जती. है ये आपको पाकिस्तान धमकी वमकी नहीं आता. है पाकिस्तान धमकी वमकी नहीं आता आपको. हमारा बस चले ना तो इन सबको पकड़ के दफना. दे एक जगह बढ़िया से और लोगों को कहें कि. 20 साल बाद ये सब पेट्रोलियम बनके निकलेगा. सब बहुत तेज जलेगा सभी सब मतलब किसी काम. का नहीं। हम तो ऑपरेशन सिंदूर में इस बात. का इंतजार कर रहे थे कि जब भारत वहां पे. हमला करेगा तो दो चार ठो ताजाताज़ा लाश. लाया जाएगा और मेडिकल कॉलेज में दिया.
जाएगा पढ़ने के लिए। अरे महाराज तो करके. देखो बहुत खतरनाक चीज है। कितना बढ़िया. एकदम फ्रेश लाश रहेगी उसमें। आज को पुराना. बॉडी पे उसको नशे नहीं मिल रहा है। इधर से. उधर। क्या पढ़ रहा है बच्चा बताइए। 6. महीना पुराना बॉडी है। सब कलर चेंज हो गया. उसका। कुछ है ही नहीं है। उधर और अरे. हमारे इंसान लोग बुरा मानेंगे। सर बहुत. लोग इधर जाते रहते हैं। सेलिब्रिटी लोग. बोले तक नहीं कि वहां का फॉलोअ नुकसान हो. बुरा मान जाएगा और आप कह रहे हो वहां. फ्रेश बॉडी लेके आ जाओ। हमारी तो दिली. इच्छा थी। हम तो एक मेडिकल कॉलेज खोल देते. हैं।.
आज कोई भारतीय आज सरकार कहे कि हम ला रहे. हैं बढ़िया से धोधा के। हम एक मेडिकल. कॉलेज इतना इतना काहे पाकिस्तान से आपको. दिक्कत है कुत्ता का बेचती है। ये काहे. इतना क्या? हम हम पाकिस्तान की बुराई नहीं. करते। हम नफरत करते हैं उससे। काहे कोई. गर्लफ्रेंड फ्रेंड तो नहीं थी पहले वहां. पे? अरे नहीं वहां पे इतना दिन खराब हुआ. है।. रहती तो हम जिंदा रहते हैं। मार दी रहती. है। अभी तक यहां पे दहेज में बम ले आती।. अरे हमारे यहां बहुत शादी है। पता लगा इसी. में दो चार लाख हमारी यहां लड़कियां जो.
वहां शादी की यहां बैठी है। यहां शादी की. वहां गई हैं। इधर-उधर बड़ा लाला खेल चल. रहा था। बहुत सारा चीज बीच में निकला है।. एक तो 300 को ही नहीं बुझाता। हिंसों को. और कहीं देश नहीं मिलता है यहां पे।. अगल-बगल में इंटरनेशनल ब्याह कर रहा है।. बताओ। अरे अगल-बगल कहीं देख के कर लो भाई. यहां हां तो पाकिस्तान समस्या कहां है. इतना पाकिस्तान में आप किसको समझाइएगा. आर्मी अलग धर्म गुरुओं का अलग कहानी. राजनेताओं का अलग कहानी पब्लिक बेचारी. वहां जो गरीब जनता है वो तो गरीब ही हर.
जगह पे है तो जो गरीब है उसको समझ में. नहीं आ रहा हम किसका जूता खाएं।. मतलब आज के डेट में एक समस्या यह है कि. पाकिस्तान भारत में मिलने की कोशिश करेगा. तो जो उस टाइप के कबाड़ हो गए हैं सब ना. जंग लग गए हैं सब वो किसी काम के नहीं है. सब उनको लाइन से जेसीबी लगा के अरब सागर. में उलाट दे दो साफ हो जाए हिटलर वाला बात. कर रहे हैं आप जो हिटलर ने जूस के साथ. किया था पूरा साफ कर देना चाहिए एक भी बच. गया ना तो पूरा खराब कर देगा जोरन है. समझिए तो आतंकवादियों का जैसे दही में. जोरन डाला जाता है ना बच गया तो दिक्कत कर. देगा यहां लगा के दो चार000 जेसीबी अब.
बाबा को इधर से आदेश धकेल के फिर अच्छा. यहां पे हमको बाबा चाहिए. बुलडोजर बुलडोजर मामले में तो वही ठीक है. तो पाकिस्तान के इलाज बाबा करेंगे हमको. हमको लगता है हमको लगता है आपकी आत्मा को. तृप्ति तब मिलेगी जब बाबा पाकिस्तान पे. अटैक करेगी मोदी जी वाले से आप खुश नहीं. हो पाए मोदी जी कर ही नहीं रहे यहां पे. यही बड़ा उम्मीद था हम आपको बता नहीं सकते. हैं कि मोदी जी से कितना उम्मीद था इस. मामले में डिसपॉइंट कर दिया आपको डिसपॉइंट. दिल तोड़ दिया दिल तोड़े नहीं चहर के. कचौड़ दिए एकदम यहां पे मतलब इसी दुख में.
आप ब्याह कर लिए. आपको नहीं लगता कि मतलब नहीं बात सही है।. उस टाइम जब ये घटना जब ये सीज फायर हुआ था. पूरे देश का मूड एकदम शांत हो गया था।. मतलब ये रहा कि सरकार ने कह दिया तो हर. आदमी अब ठीक है। अब कह रहा है कि चलो ठीक. है। लॉन्ग लास्टिंग वॉर होती तो देश का. नुकसान होता। आप एक्सक्यूसेस देने लगे। बट. सबको लग रहा था कि एक बड़ा मौका था जहां. पर आप सबक सिखा सकते थे जिंदगी भर के लिए।. और देश शायद तैयार था। पहली बार शायद जब. से हम पैदा हुए हैं मुझे लगता है तब से.
शायद ये पहला मौका था जब एज अ देश हम. तैयार थे कि कुछ होगा तो बड़ा. कुछ नहीं कर रहे हैं इस इस मामले में. नेशनल सिक्योरिटी में अग्निवीर उठा के. लेके चले आए भाड़ा का फौज बताइए कोई तरीका. है वो कह रहे हैं युवा चाहिए था इतने साल. से चल रहा था मांगा जा रहा था कि नया. लड़का आएगा 80 के बाद से वो सजेशन दिया जा. रहा था कि नए-नए लड़का करो भर्ती ताकि यंग. लड़के हो फौज में पगला गए हैं सब का सब. यहां नए बच्चों को तब भरा जाता था जब. युद्ध घोड़ा पर चढ़ के तलवार से मारा जाता.
था। अभी नया लड़का नहीं नया हथियार चाहिए।. नया हथियार. कौन समझले है नया लड़का चाहिए बताइए। आज. तो हथियार ऑटोमेटिक आ गया है। आपका हाथ. में प्लास्टर बैन ले तो मार देगा वो। तो. क्या करेंगे? मने मने उसको घोड़ा पे बिठा. के हथिया। अरे दादा हो दादा जा. पॉइंट तो है यार। राफेल अगर तगड़ा है हां।. तो नया पायलट चलाए। पुरण का चला। पुरण का. चलाए। हां मतलब मिडिल चलाए चाहे नौका.
चलाए। क्या फर्क पड़ता? क्या फर्क पड़ता. है? घोड़ा से लड़ाई लड़ रहे हैं लोग। हां।. सही बात है। इस बार भी इतना लड़े झगड़े।. कहां कौन सा नहीं लड़ने गया? आपके पास. बढ़िया हथियार है। मार दीजिए काम खत्म।. स्नाइपर रखे रहिए। बूढ़ा आदमी मारेगा तो. उधिया देगा उसको।. आप नए हैं। पुलिस वाला 2.33 लेके चल रहे।. क्या कर लेंगे? सही बात है। अच्छा एक और. आप पर बड़ा आता है कि ई जो आप पंचर वाला. कहने लगे इससे बहुत लोग बुरा मान गए कि आप. मुस्लिम लौंडा नया तो कहते हैं पंचर बनाते. हो। पंचर बनाते हो। ये जबरदस्ती घसीट दिया.
सब। क्योंकि हम पाकिस्तान उसकी लगी बुराई. करने। इजराइल का हम एक आध जगह जहां सही था. तारीफ कर दिए बट उन लोग के अंदर हमारे पर. खटक गए यार ये पाकिस्तान को गाली देता है. ये इजराइल को अच्छा बोल दिया अरे भाई जहां. वो सही था वहां बोले हम अभी भी कहते हैं. ना इजराइल जो छोटे बच्चों को मार रहा है. गलत कर रहा है महिलाओं को मार रहा है गलत. कर रहा है वो तो कहीं से कहीं से नहीं तो. जो सही है वो सही है जो गलत है वो गलत है. तो उसी बीच में हमको कर दिया और हमने ये. बात पाकिस्तान को बोला था और अभी भी कहते. हैं वो वीडियो 25 अप्रैल 2021 में आज भी. पड़ा हुआ है हमने ये बोला था कि पंचर.
बनाने वाला पाकिस्तान ने राफेल बनाने वाले. फ्रांस से टक्कर लिया। अब हम पाकिस्तान को. बोल रहे हैं तो मुसलमान को क्यों बुरा. लगेगा? और अगर बुरा लग रहा है तो ये चिंता. का विषय है। हम जापान को गाली दे तो कोई. दिक्कत नहीं है। भूटान को गाली दे कोई. दिक्कत नहीं है। सिंगापुर को गरियागरिया. हमारा माथा दुखा जाए कोई दिक्कत नहीं।. पाकिस्तान को गरिया रहे तो दर्द हो रहा. है।. तो काहे दर्द होता है? आप कुछ डिस्कवरी तो.
किए होंगे ना आप भी। तो हम और दर्द पाट. देते हैं। जिसको दर्द होता है ना और पाट. देते हैं। ठीक है। अब कुछ एंड में. क्वेश्चन सर बेसिक-बेसिक है। कभी लाइफ में. ऐसा लगा कि आप टूट गए, हार गए, कभी कमजोर. पड़े? हां, कई बार ऐसा होता है कि आपको. लगा कि यार. कई बार ऐसा मूवमेंट होता है। एक बार जब. हमको कोचिंग शिफ्ट करके जाना पड़ा था जैसे. सब कुछ तो वहां लगा था कि सब कुछ हार. जाएंगे। शुरुआत में जब पहली बार जैसे. इसमें नहीं हुआ था एनडीए में तो लगा था कि. सब कुछ हार जाएंगे। एक बार तो गजब हुआ था.
बीएससी में मेरा एक पेपर जिस दिन था ना. हमको लगा था कि कल है पेपर आज ही पेपर था. और फर्स्ट क्लास घूम रहे थे अरे महाराज. शाम में जब हम लोग क्रिकेट खेलने गए ना तो. सब चर्चा कर रहा था इसका क्या आंसर लिखे. इसका क्या लिखे तो हम कहे कहां से. क्वेश्चन मिला तुम लोग को कह रहा था. परीक्षा देना नहीं आता मेरा तो दिमाग. लेकिन मेरा किस्मत बड़ी अच्छा था वही वाला. पेपर वाला लिख कैंसिल हो गया अच्छा अरे. अरे बिहार में हां एकदम वही कैंसिल हुआ. रीज़न पता वो बड़ा नॉर्मल सा रीज़न था कि जो. कॉपी दी जाती है ना वो हिंदी सब्जेक्ट में.
दी जाने वाली कॉपी को इन लोगों ने फिजिक्स. में ले आके शायद दे दिया था। तो कॉपियों. का कुछ कोड होता है। तो कोड गड़बड़ी था इस. वजह से कैंसिल करना पड़ा था। तो किस्मत. कभी-कभी साथ दे देता है। यहां तो अच्छा. बिहार में पता लगता नहीं वो कौन सा पेपर. दिए पास हो गया। लीक हो गया। बिहार में. एजुकेशन में एक खराबी क्या है कि आप पढ़. के भी 70% ला सकते हैं। चोरी से भी ला. सकते हैं। ये खराबी है। चोरी को आप एकदम. से खत्म नहीं कर सकते। धीरे-धीरे खत्म कर. सकते हैं। लेकिन जो कॉपी चेक करने वाला. घोचू है कम से कम उसको समझाओ कि तुम्हें. दिख रहा है कि नकल करके लिखा है। आप कोई.
पढ़ के लिखा रहेगा आप उसकी कॉपी से बता. देंगे। तो उनको समझाना चाहिए गधों को कि. देख गधा ई का कॉपियां जो चेक कर रहा है. इसको एवरेज मार्किंग दो। 50 52% देके पास. करके निपटाओ और जो जेन्युइन ले रहा है. उसको 75% लाओ 80 लाओ। ये जो थोड़ा टॉप करा. देता है सब बैलन को और फिर जब उसका. इंटरव्यू होता है तो बर्बाद हो जाता है।. डब्बा छब्बा तो वही निकलता है। एक से एकदम. टॉप करा देता है। एक लड़का हमको सर मैसेज. लिखा था कि पीएससी में हिंदी का रिजल्ट 5%. रहा। क्या वजह थी कि हिंदी वालों का. रिजल्ट जो है वो यूपीएससी में कम आता है?
एक इसके बड़ा रीज़न है। हिंदी मीडियम वाले. बच्चे ना जो उनको अच्छा लगेगा उसी को लगते. हैं सब पढ़ने। एग्जाम में भले पूछे ना. पूछे। आप हिंदी मीडियम के बच्चे से. पूछिएगा हिटलर के बारे में। ऐसा नहीं बात. बताएगा कि हिटलर काहेगा तरीका हम भी किए. थे। ये वो एकदम बकई टाइप का एकदम मजा लेके. पढ़ेगा। एकदम हिटलर ये किया। हिटलर वो. क्या जबकि उसको पता है कि वर्ल्ड वॉर से. वर्ल्ड हिस्ट्री से एक क्वेश्चन पूछेगा. मेंस में।. लेकिन वो पूरा दबा के पढ़ेगा। उसको उसको. मजा ले पढ़ता है और प्रायोरिटी देकर नहीं. पढ़ता है। इंग्लिश मीडियम वाले बच्चों में.
एक चीज है कम नंबर कम टाइम देंगे। ज्यादा. नंबर भले इंटरेस्ट नहीं है उसको 20 बार. पढ़ेंगे लेकिन ज्यादा नंबर आ रहा है तो. पढ़ेंगे उसको। ये उनके अंदर एक चीज है।. दूसरा क्या है कि इंग्लिश मीडियम वाले. बच्चे जो है ना ज्यादातर उनकी बैकग्राउंड. जो है इंग्लिश मीडियम में शुरू से ही. पढ़ाई ठीक-ठाक हुई है। ठीक-ठाक और हिंदी. मीडियम वालों में ना आप कल ये नहीं कह. सकते हैं कि ये बोरा बिछा के पढ़ा है कि. सरकारी से पढ़ा है कि कहां से पढ़ा है? हो. सकता है कि अच्छे से पढ़ा हो। लेकिन आप वो. फिर मिक्स हो जाता है। अच्छा जैसे अभी.
कर्नाटका में चल रहा था व्यवहार हिंदी का।. महाराष्ट्र में हिंदी का खास तौर पर यूपी. बिहार होता है। पहले था कि हिंदी हम थोप. रहे हैं। अब हिंदी से उन्हें एलर्जी हो गई. है। आप अंग्रेजी बोल देंगे, बर्दाश्त कर. लेंगे। हिंदी पर मार कर लेंगे। अंग्रेजी. बाप है, हिंदी पाप है। यह कैसे देख रहे हो. आप? हिंदी को लेकर जो अब एक नया. डिस्क्रिमिनेशन शुरू हुआ है। एक तो होता. है कि चलो काम चलाऊ हो गया। आप सीख लो वो. सिखाने से ज्यादा एक हिंदी को लेकर घृणा. शुरू हुई है जो अभी थोड़ा देश में वो कैसे. देखते हो इसे आप? और खास तौर पे यूपी. बिहार वाले बहुत फेस कर रहे हैं। साउथ में.
ये बहुत समय से रहा है। इधर थोड़ा. एग्रेसिव रूप से बढ़ गया। ये बहुत खराब. चीज है। एक लैंग्वेज है भाई। जिसको. सहूलियत है वो बोल रहा है। अब बोलने पे और. कपड़ों पे हमको नहीं समझ में आता है कि. क्या है भाई यहां पे। जैसे मान के चलिए कि. आपको संस्कृति ठीक है। अब आप कोई उघारे. घूमने लगे ये हम गलत कह रहे हैं। लेकिन एज. ए आप इंडियन दिख रहे हैं तो ठीक है। वहां. पर तो अब भाषा में है। अब जिसको बंगाली. आती है वो बंगाली बोल रहा है। हिंदी नहीं. आती है कभी टाइम पे सीख लेगा। अब कोई. बंगाली है अगर वो हिंदी टूटी फ्रूटी भी.
बोल रहा है तो उसको हम क्या कहेंगे? बोलने. दो भाई उसको। अब जैसे हिंदी अब कोई. महाराष्ट्र गया, कोई तमिलनाडु गया। अगर. उसको हिंदी अगर उसका रीजनल लैंग्वेज नहीं. आ रहा है तो धीरे-धीरे वो भी सीख जाएगा।. और लेकिन अगर जबरदस्ती बोलने उसको जरूरत. पड़ेगा तो सीख जाएगा। अच्छा जैसे. महाराष्ट्र वाला मराठी बोलने नहीं. शर्माता। गुजरात गुजराती नहीं शर्माता।. पंजाब वाला पंजाबी बोलने में शर्माता। हम. जो यूपी बिहार के लोग हैं खासतौर पर अवध. हो पूर्वांचल और बिहार वाले हम अपनी. स्थानीय भाषा को लेकर इतना संकोच भी करते.
हैं और हम क्यों इतने अंडर कॉन्फिडेंट. होते हैं अवधी बोलने में भोजपुरी बोलने. में नहीं अवधी में तो कोई या हिंदी में भी. फॉर दैट मैटर हिंदी भी जैसे तो भोजपुरी. में तो हम लोग अनकंफर्टेबल इसलिए हो जाते. हैं कि जितना लोअर कैटेगरी को भोजपुरी को. गिरा दिया ये सब नाच गाना वाला सब तो एक. बर्बाद कर दिया सब जगह फिल्म इंडस्ट्री. होती है और भोजपुरा में आके इंडस्ट्री है. ये एक्चुअल में जितना फिल्म इंडस्ट्री थे. ये सब आके वाले हैं सब टाली पे चढ़ के. नाचा है सब. आज वो बन गया सब एक्चुअल में यही है इसलिए.
इन्होंने स्टैंडर्ड गिरा दिया आज इन सब को. ₹10 थमाइएगा तो पकड़ लेगा सब हां वो तो. खुद यही पडकास्ट में मतलब आप समझिए. स्टैंडर्ड आप पैसे की इज्जत कीजिए उसमें. वो नहीं आप उसका चेक साइन करके ले लीजिए. हम आप चेक साइन करके ले सकते हैं आप इज्जत. से ले सकते हैं. तरीका होता है उस चीज का और आप गाना को भी. आप उस तरह से बनाइए ना आप शरीर से बाहर. नहीं निकले हैं। लहंगा चोली से बाहर नहीं. जा रहे हैं। ये सब क्या गाना गा रहे हैं? बट हिंदी और अंग्रेजी में फिर भी. कॉन्फिडेंस का अंतर होता है। एक हां थोड़ा. सा कॉन्फिडेंस हिंदी की बात करें ये तो.
भोजपुरी का संगीत का हो गया। हिंदी और. इंग्लिश में कॉन्फिडेंस का अंतर आ जाता. है। उसका एक कई कई सारे रीजन इंटरनेशनल. लैंग्वेज हो गया इंग्लिश। आप जबरदस्ती. जाइए। अब फ्लाइट वगैरह में सब अंग्रेजी. बोलते रहता है। सब अब एक फ्लाइट जा रही थी. पटना। अब एयर होस्टेस को तो इतना बुझाना. चाहिए कि बिहार जा रही है तो यहां कोई. अंग्रेजी तो है नहीं। तो अच्छा गांव में. आदमी ना फ्लाइटों में कुछ खरीदने से. कतराता है। तो उनका वो लंच उनके कोई बेटा. ने कर दिया होगा। बूढ़े से थे तो उनके साथ. वो कुछ बेवरेज कंप्लीमेंट्री था। एक ठो तो.
बेवरेज नहीं बुझा रहा है किसी को उस से. कॉम्प्लीमेंट्री नहीं बुझा रहा है। तो पूछ. रही है कि सर आपको बेवरेज क्या लेंगे? वो. बेचारे कंफ्यूजन में है। बेवरेज बट ये. फ्लाइट वाले सोचिए कि वो किस जगह ले जा. रहे हैं? किस जगह ले जा रहे हैं सही बात. है। आप उसको चंडीगढ़ ले जा रहे हैं। पानी. भी मंगाने से लोग कतराते हैं। अच्छा हां. कि क्या पूछ देगी वहां पे कि वो आके. अंग्रेजी में आपसे एकदम स्टाइल से पूछे कि. आपको समझ आएगा नहीं और आपके अगल-बगल लोग. बैठे हैं। आपको लगेगा हम तो बेवकूफ हैं।. तो ये बड़ा नहीं होता एक ईंठ के बोलने. वाला चीज यहां पर इंग्लिश वाले तो बस यही.
खराबी है। अपने आप को शो करने हमने जिंदगी. में सबसे अच्छा किया था। आपके साथ कभी. अंग्रेजी वाला कॉन्फिडेंस नहीं हुआ। हम. हिंदी में बोलते हैं उसको हिंदी में बोल।. नहीं वैसे कहीं नहीं कभी कहीं गए हो. अंग्रेजी का थोड़ा सा। हां हां तो इनसे. आठते हैं सब वहां पे थोड़ा बहुत। तो हम भी. थोड़ा सा इंग्लिश बोल के फिर उसको हिंदी. में ले आते हैं। हम देखना चाहते हैं कि. हिंदी आता है कि नहीं? अच्छा जब वो हिंदी. में आ जाता है ना तब कहते हैं। जब तो आ. रहा था हिंदी तो काहे लिए तुम रहा था? देर. होशियार बन गया है। बढ़िया एक रैपिड फायर. सर है एंड में। शिक्षक ना होते तो क्या. होते खान सर?
एग्रीकल्चर में। का करते खेत खेत? नहीं तो. हम तो मतलब खेती में ऐसे थोड़ी ना हसुआ काट. रहे होते। एजुकेशन में जैसे तो एग्रीकल्चर. में क्या करते? कुछ तो करते जैसे. इंडिया में प्याज अभी का रेट हम हम नहीं. खरीदते अप्रोक्स हमको लगता है 40 हां 30. होगा 30 दुबई में 250 दुबई भेजते हैं. किसानों से लेके जबरदस्त एक बड़ा कॉमन. सवाल आया था अब खान सर का ब्याह हो गया है.
क्या वो अपना हेयर स्टाइल चेंज करेंगे. क्या वो भी स्किन केयर रूटीन फॉलो करेंगे. नहीं ये सब कुछ नहीं करेंगे मेरा कभी चेंज. नहीं होता है मेरे स्कूल की प्रिंसिपल. मिली थी वो कह रही थी तुम जब क्लास फाइव. में पढ़ता था तो ऐसे ही बाल झाड़ता मतलब. ये ललवा वाला बाल है कि मम्मी बैठाई इधर. से कंघी की फिर इधर से मार दी बस ये मम्मी. का फेवरेट था ऐसे सरसों तेल रखती थी और. मिलाती नहीं थी ऐसे लेके यहां रख देती थी. ये और ना बैठी है सामने माताजी कान से ऐसे. टपकते जाता तलवा मजबूत होता है दीवान.
मजबूत होता है ऐसे सर ये हमको हम ग्वालियर. रहते थे और ये तेल जात वापस लौटाती थी तो. हमारे जो रिश्तेदार थे कहते थे इतना तेल. लगा के गई अगली बार लौटेगी तब तक जूता. रहेगा. तो ये तो चेंज नहीं नहीं होगा कब वो नहीं. चीज करेंगे अब तो मतलब पैसा भी है भाभी भी. आ गई है उस तरह स्टाइलस्टाइल कहे कि थोड़ा. सा इधर से ड्रायर मार के छोटा कर लो या. स्पाइक उठा लो ये सब चेंज नहीं हो सकता है. सब अपना चीजें हैं आप उनको अपना जो चेंज. करना है करें. हमरा तो पे प्रयोगशाला है हम.
हस्बैंड है कि उनके प्रयोगशाला है आप. इसीलिए तो बैंड है कि बजाते रहो हंस हंस. के बजा बैंड बजाते रहो. हम लोग नहीं वाला नहीं है। मिलेंगे आपसे. एक साल बाद। हम पूछेंगे कौन-कौन सा स्किन. केयर रूटीन कर रहे हैं? हम रिसेप्शन के. दिन भी नॉर्मल मुंह धुल के और खड़े हो गए. थे शादी के दिन भी यहां पे। अभी बताइएगा. साबुन से मुंह धोते हैं। अभी भी फेस वही. फेस वॉश साबुन और फेस वॉश में थोड़ा सा.
चेंज किया। साबुन में क्या है ना. किचड़-किचड़ हो जाता था। बिलीव नहीं होता. था कोो हाथ माज के चल गया। ये वो डर रहता. था। साबुन ना बड़ा बेवफा निकलता था।. गिर गया। कहीं नीचे गिर गया। उठा के रख. दिया। एक साइड से पुचुक गया। हां। चूहा. काट के लेके चल जाता था। गांव वाले चूहा. खा जाते हैं उसको। तो फेस वाश के साथ क्या. है ना कि थोड़ा सा ले जाने ले आने में. सहूलियत है। अदरवाइज में कोई चेंजिंग तो. है नहीं। चिप कागज में कागज मेरे को. चिपे-चिपेरि हो जाएगा। फिर वो धीरे-धीरे. खोल के पूरा पसीज के खराब हो जाता। रेलवे.
रेलवे में गए कभी बोलने के तो अब ये क्या. है ना कि फेस वाश उसी का तो क्या है ना. थोड़ा सा एडवांस रूप है और क्या है हम. समोसा अभी भी खाते हैं ₹1 वाला ना हम. समोसा खवे नहीं करते हैं कब पसंद था समोसा. एक स्टूडेंट लाइफ में तो बहुत यही सब तो. पसंद ही आता था अभी समोसा नहीं खाते हैं. बाहर का चीज हम नहीं खाते पानी पूरी के. सिवा. अरे हमको ये भी सवाल आया था एक सवाल आया. था कि खान सर कह रहे थे कि हमारा अरेंज. मैरिज है लोग कहे जहां भाभी घर है वहां ये.
बहुत पानी पूरी खाने आते थे नहीं नहीं. मेरा कंप्लीट अरेंज मैरिज है और मम्मी. मम्मी और छोटे भाई ये लोगों ने पसंद किया. अपना क्या सवाल पूछे क्या नहीं मम्मी दो. चार बार जाके मिली बाबू बबनी क्या उसके. बाद से तय कर दिए लोग हम जाके धोखा कर लिए. शादी तय करते वक्त खान सर बातचीत किए थे. या इंटरव्यू लिए थे ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. था. ऐसा कुछ नहीं होता है अच्छा टीचर टीचर हो. गए क्योंकि आप दिन भर पढ़ाते हैं सबके. सवाल का जवाब देते हैं आमतौर पर आदमी जो.
प्रोफेशन में करता है वो पर्सनल में करने. से बचता है नहीं हम पर्सनल में कर देते. हैं। सो हमको देखिए हमारे लिए बड़ा सिंपल. सा चीज़ है। कुछ चीज़ व्हाट काइंड ऑफ़. हस्बैंड यू आर थोड़ा बताओ ना इस बारे में।. हमारा टाइमिंग के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं. होना चाहिए कि हमारा जो टाइम है हम टाइम. के बहुत पंक्चुअल आदमी हैं। दूसरा हम बिना. मतलब का तारीफ नहीं कर सकते हैं। खाना. अच्छा बना है तो अच्छा बनेगा। खाना खराब. बना है तो खराब बना है। अगली बार सुधार. दीजिएगा। खराब बना है तो ऐसा नहीं कहेंगे. कि हम बवाल कर देंगे कि यह खराब है। हम. खराब बना रहेगा तो भी खा लेंगे। लेकिन हम. बोलेंगे कि उतना ठीक नहीं था। अच्छा बना.
रहेगा तो हम बोलेंगे अच्छा बना है। ज्यादा. घूमना फिरना हमको पसंद नहीं है। शॉपिंग. करते कर नहीं करते हैं। सिंपल चीज रहता. है। बहुत ज्यादा ये सब नहीं। पढ़ाई सबसे. जरूरी चीज है। तो ये हमारे लिए शिक्षा है।. हमको मतलब वो बच्चों का एग्जाम है। उनका. क्लास है। ये सब कितना दिन हो गया ब्याह. हुआ आपका? अब आप डेटवां निकाल लेंगे। अरे. वैसे हम डेट नहीं अंदा एक महीना हो गया।. हां। एक महीना हो गया। एक महीने में महीने. से ज्यादा हो गया। एक महीना मान लेते हैं।. मोटा-मोटा एक महीने में बार डांट खाए। हम. अभी तक नहीं। काहे मतलब डांट खाना जरूरी. होता है। नहीं ऐसा नहीं होता। मेंटालिटी. मैच करेगी तो कभी ये सब का जरूरत नहीं.
आएगी और अगर नहीं मैच हुआ तब तो फिर. महाभारत होगा। ठीक है। 16 साल पुराने खान. सर को खान सर क्या सलाह देंगे? अगर यंग. खान सर को सलाह देनी हो आपको आज पीछे लौट. कर तो क्या सलाह देंगे आप? बहुत क्या ही सलाह देते हैं कि ज्यादा. मतलब हम एक चीज देखे हैं कि ज्यादा दिल के. साफ रहिएगा कुछ भी बोल दीजिएगा ना तो बड़ा. लोग विरोध करने लगते हैं। हम हमने बड़ा. साफ दिल से यह लड़ाई लड़े थे कि बच्चों के.
लिए सारी दुनिया से लड़ेंगे कि फीस कम करो. और लड़ते लड़ते पता नहीं कैसे हम टीचरों. के नजर में खटक गए और अपनी ही उस सर्किल. बिरादरी में और हम सबसे बाहर कर दिए गए जो. एसोसिएशन है हम उसके सदस्य नहीं है. हम उसी से बाहर हैं। तकलीफ देता है तकलीफ. देता है कि अगर हम अपने लिए कुछ मांग रहे. होते आपसे आप हमसे लड़ते हैं। हम बच्चों. के लिए मांग रहे थे। आप अपना घर बना लिए.
आलीशान। घर मतलब क्या चीज? तो आप बच्चों. के लिए लड़ लीजिए। आपके पास रास्ते हैं।. आप फीस कम करके ज्यादा बच्चों को पढ़ा. दीजिए। हम ऐसा नहीं कह रहे हैं कि हमारे. पास पैसा नहीं है या हम पैसे नहीं लेते।. हम बहुत कम लेते हैं बट ज्यादा बच्चों को. पढ़ाते हैं। हम भी यही कह रहे हैं कि आप. ज्यादा ही बच्चों को पढ़ा दे। यह तब कहते. हैं कि जब आपके स्विट्जरलैंड जैसा देश. रहता है, जनसंख्या ही नहीं है। हमारे यहां. तो इतनी जनसंख्या है। इसका कोई अंत ही. नहीं है। आप पढ़ाने जाएंगे तो। तो इसी ये. ज्यादा तकलीफ दे देता है कि किसके लिए हम.
मतलब. अपने लिए एक बात मांगे हो तब. बट अप्रत्यक्ष तौर पर आप उनके धंधे को. नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसलिए शायद तो जब. धंधा ही करना था तो कर लेते। मैं भी जब. टीवी में नया-नया आया था तो मैं सीखने के. लिए 16 घंटे काम करता था। तो मेरे सहयोगी. आते थे कि तुम्हारा शोषण हो रहा है। पहले. शोषण कहा। फिर उसके बाद आए कहने लगे कि. तुम्हारे चक्कर में हमको डांट पड़ती है कि. साले तुम छुट्टी नहीं लेते हो। तुम यह. नहीं करते हो। तो मुझे एहसास हुआ कि मैं. अपने लिए बेहतर कर रहा था लेकिन उससे. तकलीफ होगी क्योंकि उनको भी उससे परेशानी.
हो रही थी। आप आर्थिक तौर पर आप सस्ता कर. रहे तो एक बड़ा बच्चा है कंपैरिजन हो रहा. है। स्टैंडर्ड ऑलमोस्ट मेंटेन कर ले रहे. हैं। तो उससे एक और दुख होता है क्या है. कि जब लोगों का धंधा चौपट होता है, बिजनेस. चौपट होता है तो हमारे ऊपर पांचों सवाल. उठाते हैं। बचपनों सबको कभी-कभी ये नहीं. बुझाता है ना कि ये सर को इसलिए बोल रहा. है क्योंकि सर ने हम लोग की फीस के लिए. लड़ाई लड़ी है। इसको तकलीफ हुई है। कई बार. यह चीज तकलीफ देती है कि भाई हम अकेले. कितनी लड़ाई लड़ेंगे। कभी तुम भी तो आओ।.
हां। जैसे इस बार कई बच्चा लोग आपको लेके. सवाल पूछा था। कई सारे टीचर मैं जिक्र. नहीं करूंगा बट कर रहा था। तो मुझे लगा कि. ये सवाल इस बार बढ़े हैं मतलब आपको लेके।. तो थोड़ा मतलब हमको लगता है कि फिर कहते. हैं कि इनकी इनकी फीस के लिए लड़ो। फिर. इनके पढ़ाई के स्टैंडर्ड के लिए लड़ो। फिर. इनके ऐसा पढ़ाओ कि एग्जाम में आ जाए। तो. ऐसा नहीं है कि सारे बच्चे मतलब ऐसा नहीं. कि लड़ जाते हैं वो भी। हां लेकिन फिर वही. है ना वही आप वाली बात जिससे आप बुरा मान. रहे हो कि जो छोटी जो शोर मचाता है वो. दिखता है जो समर्थन कर रहा है वो दिखाई.
नहीं पड़ रहा आपको दिखाई नहीं पड़ रहा. लाखों करोड़ों ऐसे भी होंगे जो आपको. समर्थन कर रहे हैं लेकिन वो शोर नहीं. मचाते लेकिन फिर भी जब वो आते हैं ना हमको. ये होता है कि जब रिजल्ट होता है जब. रिजल्ट का लाइन लगता है ना लाइन तो मतलब. स्टेज टूट गया था मेरा जिसमें पढ़ा रहे थे. स्टेज टूट गया था इतने रिजल्ट आए थे अभी. बिहार पुलिस का अभी रिजल्ट हुआ 10,000 से. ज्यादा कि एक दिन में हम बुला नहीं पाए. मतलब मेरी कैपेसिटी नहीं थी एक दिन में. बैठे बैठा देने की तो उसको पार्ट बाय. पार्ट बुलाना पड़ा। तो जब यह होता है जब. उनकी कहानियां सुनते हैं कि मैं हम सर. हमारे पास ऐसे पढ़े थे। कोई पलदारी कर रहा.
था। कोई सब्जी बेच रहा था। कुछ ऐसे पढ़. रहे थे। एक अग्निवीर में से था छोड़ के. आया था। एक बीएसएफ में था। उसमें भी पढ़. मतलब सोचिए वो कह रहा था सर हम लोग पापड़. वपड़ ऐसे अंडा बालू के नीचे रख देते तो. बॉईल हो जाता। उस तपती धूप में से पढ़ के. आ रहा है। एक अभी हमारे यहां लड़का आया. दरोगा है। डबल स्टार है। वो गुजरात में. पेंटर था। पेंट करता था। तो पेंटिंग करके. आए वो दरोगा बना हुआ। अब वो जब वो फील्ड. में जाएगा तो किसी गरीब के साथ अन्याय. होते देखेगा ना तो थूर थार देगा वो. क्योंकि वो गरीबी किताबों में नहीं पढ़ा. है। जी के देखा तो ये सब चीजें जो ना है.
ना कि इंसान को फिर से हमको झकझोर देती है. कि टीचिंग कराना पसंद नहीं है तो क्या. हुआ? ये लोग आस लगा के बैठे हैं। क्या. मुझे याद है आपके जब बम शायद हमला हुआ था।. आप ही कह रहे थे कि पुलिस वालों से पहले. बच्चा घेर लिया था। बच्चा घेर लिया था। और. ये जो गद्दा होता है ना ये गद्दा ये ये. बड़ा अच्छा ये बचा लिया था क्योंकि वो बड़े. शातिर थे सेकंड राउंड में आए थे मारने के. लिए कौन हमला किया था वो वहीं के थे सब. पोचिंग माफिया या वही माफिया सब हां तो. मेन मैटर यही था तो जब उछलाए थे तो हम. साइड हुए थे तो ये गदवा पे लगता है ना तो.
फूटता नहीं है ये बड़ा सॉफ्ट हो जाता है. कुशन दे देता है यहां पे तो हमको बड़ा और. उसी के जस्ट ऊपर शंकर जी की मूर्ति थी और. गणेश जी शंकर जी के यहां पे वहां पे उसी. दीवार पे तो कई ठु कहता था कि यहां पे इधर. देखते हैं मक्का मदीना इधर देखते हैं शंकर. जी का फोटो ये आदमी है कौन जी तो ये ये जो. था ना ये बड़ा हेल्प किया था वही बचा लिए. ना दोनों मिलके हां वही दोनों मिलके बचा. लिए अच्छा नहीं रहता तो पीछे पड़ता है ये. सबसे कमजोर हिस्सा होता है एक स्कूटी. लगाया था बच्चा उसका स्कूटी उड़ गया अभी एक.
देखिए अभी एक बच्चे का रिजल्ट हुआ वो भी. पुलिस में हुआ तो कह रहा है कि सर हमको. पहचान रहे हैं तुम चेहरा थोड़ा-थोड़ा याद आ. रहा है कहा सर आप हमको दिए थे पैसा मेरा. साइकिलिया उड़ गया था बमवा से हम कह तू वही. मतलब वो उस समय पढ़ रहा था उसका साइकिल ही. उड़ गया था तो उसको हम पैसा दिए थे मतलब. एक तो बम वो चला वो बेचारा उदास हो गया सर. हम उसके लिए साइकिलें सब कुछ था हम कहे. भाई साहब ये ले तुम दूसरा साइकिल ले लेना. है अभी हम बहुत टेंशन में है तुम जाओ यहां. से ठीक है खान सर पे अगर पिक्चर बने तो.
हीरो कौन होगा. अभी इस पे सोचे नहीं है कोई एक्टर आपको. लगता है कोई एक्टर लगता है आपको बॉलीवुड. में शाहरुख सलमान आमेर नवाजुद्दीन. नवाजुद्दीन सिद्दीकी की तो बात ही अलग. नवाज भाई बहुत पसंद करते हैं आप उनको बहुत. काहे पसंद करते हैं जिंदा कर देते हैं. चीजों को एकदम जैसे लगता है कि मतलब मौत. को छू के आ सकते हैं. तक से तक से आ सकते हैं एक कोई लड़की हमको.
लिख के भेजी खान सर गुस्से में इतने. मजेदार काहे लगते हैं गुस्सा मैनेजमेंट. कोर्स किए हैं क्या नहीं सवाल की. क्रिएटिविटी देखिए. गुस्से में मजेदार नहीं मेरा गुस्सा बहुत. तगड़ा रहता कह रहे हैं गुस्से में भी आप. उनको क्यूट लगते हैं अब अलग बात है लेकिन. हम धोधा देते हैं गुस्सा आता है तो मैं. गुस्सा बहुत उमार नहीं खाई होगी ना आपसे. हां ये नहीं मेरे मैनेजमेंट में भी एक चीज. है कि भाई गुस्सा नहीं आना चाहिए इनको. क्योंकि अगर गुस्सा आ जाता है तो वो वो. मतलब फिर हम अगर गुस्से में जो डिसीजन दे. दिए हैं तो चाहे अच्छा हो या खराब हो वो. डिसीजन होगा हम आपके लिए सफलता का मतलब.
क्या है. जो आप एक डिजायर चाहते जो आप चाहते थे. उसके हद तक एक पहुंच गए जैसे सर सक्सेसफुल. आदमी है. हम देखिए हम क्या कहे मेरे लिए सफलता है. जो आप चाहते थे वह हो गया हम चाहते थे फौज. में या एग्रीकल्चर में टीचिंग हमको आज भी. हम बोल रहे हैं ना हम टीचिंग के शीर्ष पे. बैठ के कह रहे हैं हमको टीचिंग पसंद नहीं. है बस हम उस बच्चों का उम्मीद देखते हैं. कोई मजदूर है जो मेरे भरोसे बैठा हुआ है. हमको एग्रीकल्चर जिस दिन हमको एग्रीकल्चर.
में हमको लग गया आपको प्याज बेचने का ऐसा. कौन सा शौक है अरे प्याज नहीं बेचना है. हमको वही प्याज बेचना है हमको अरे नहीं हम. प्याज नहीं बेच हमको बेच दो आप पटनम पटनाम. उगाओ नहीं हमको वो चीज़. हमें. किसानों के डेवलपमेंट के लिए आपको आप. किसान का तकलीफ समझिए ना उसको बैंगन की. सब्जी बोएगा ना बैंगन आधा बैंगन सड़ जाएगा. उसका हमको बैंगन पसंद नहीं तो कोई सड़. जाने नहीं चाहिए नहीं आपको नहीं पसंद है. बट उसका तो फसल बर्बाद हुआ ना उसकी फसल. बर्बाद हो गई.
आज भी किसान ना गाय पाला हुआ है जो 15. लीटर दूध देती है हां गाय 55 लीटर वाली. होस्टीन एचएफ काहे नहीं पालता है क्योंकि. अवेलेबिलिटी नहीं है हम अवेलेबिलिटी नहीं. है और दूसरा क्या है कि वह बीमार पड़ती है. तो बचता बहुत मतलब बचाना थोड़ा वो हो जाता. है। रीज़न क्या है कि उनकी संख्या कम है।. संख्या कम होने की वजह से उनकी दवाइयां भी. कम है। उनके उनके डॉक्टर्स भी कम है।. लेकिन जब धीरे-धीरे बढ़ेगा तो उनकी अब कोई. किसान है एक उगाया रखा है उसे 15 लीटर दूध. दे रहा है। कोई 55 लीटर दे रहा है।. ऑब्वियस बात है फायदा होगा उसको। मोटा. आदमी हो या दुबला आदमी हो। खाना में बहुत.
ज्यादा का अंतर नहीं होता है। 2025% का. अंतर आएगा। अब ऐसा नहीं है कि हम मान के. चलिए हम आठ रोटी खाते हैं तो ऐसा नहीं है. कि आप 40 खाए। हमको आप मोटा काहे का कह. रहे हैं डायरेक्टली। हमसे तुलना में ठीक. लग उससे क्या मतलब है आप बड़ी. कितने केजी के होंगे आप कितने भी केजी के. हो आप हम टीवी बताएंगे बैठिए कितने केजी. वो भी आपके साथ. हम कितने केजी के मतलब आप होंगे 50 60 60. 62 65 70 83 तब कहा बहुत अंतर है महाराज.
बाहर का खाना नहीं ना खाए. लेकिन इसको आजकल मॉडर्न डे में इसको बॉडी. शेमिंग कहते हैं। अब हमारे पहले था मोटा. पतला गोंदू अब अब कहते हैं बॉडी. शेमिंग कर रहे हो।. अच्छा ये भी सब बदल गया। पहले हम लोग छोटे. जब थे तब कुछो बोल दो। हां लेकिन हालांकि. मोटापा ठीक नहीं होता है। अच्छी चीज नहीं. होती। ये निमंत्रण है चीजों के लिए। मतलब. जिस तरह इनडायरेक्टली हम फिर कह रहे हैं।. हम अपने आप दोबारा से हमको फिर कह रहे हैं.
साबित कर रहे थे। आपको नहीं कह रहे। हम. पूरे मतलब पूरी इस चीजों को कह रहे हैं. आप। मतलब वो चीजें कहीं से भी ठीक नहीं. होती वो।. लास्ट क्वेश्चन अगर कोई व्यक्ति जीवन में. निराश है, असफल है, फेलियर बार-बार पा रहा. है, क्या करना चाहिए उसे? क्योंकि इस देश. में नेगेटिविटी बहुत ज्यादा है। आजकल. मेंटल स्ट्रेंथ की बातें शहरों में तो. बहुत होने लगी है। मुझे नहीं पता छोटे. शहरों में कितनी क्योंकि हम छोटे शहर में. थे तो मेंटल स्ट्रेंथ की बात नहीं करते. थे। बड़े शहरों में मैंने आके बहुत सुना. है। बट ये है कि डिप्रेशन, ए्जायटी,
जॉब ना लगना या पढ़ाई में नंबर ना आना, सपना पूरा ना होना, हालात से परेशान होना. अगर ये नकारात्मक ख्याल है। इंसान क्या. करे? एक दिन में कोई कामयाब नहीं होता है।. दूसरा कई बार इस चीजों पे डिपेंड करती है. कि हम फाइनेंसियल कितने स्ट्रांग है। कोई. बड़े घर का लड़का है फेल हो जाएगा।. गार्डियन कहेगा छोड़ ना क्या दिक्कत है।. अब कोई गरीब घर का है तो कहीं ना कहीं. उसका फाइनेंसियल बैकअप कितना है? ये इस. बात पे भी डिपेंड करता है और उसकी परवरिश. कैसे हुई है बहुत लाड प्यार से पाल देंगे. ना तो डिप्रेशन का शिकार हो जाता है और.
जैसे गांव में बच्चे इतना ना कुचाए थुराए. रहते हैं ना कि उनको डिप्रेशन का मतलब ही. नहीं पता होता है सही में उन्हें पता ही. नहीं है हम लोग तो कई टाइम समझ में आते. हैं डिप्रेशन होता कैसा है अभी नया-नया. हुआ है ना कुछ दिन बाद बताएंगे. डरा रहे हैं हमको आप तो ये डिपेंड करता है. परवरिश पे फाइनेंशियल स्टेटस कैसा है और. उस ऐज पे भी देखिए जब हम लोग का सिले. छांटा था ना एनडीए से तो ऐसा मन में इच्छा.
आती थी ना कि घर पहुंचने से पहले प्रलय आ. जाए कि हम यह चेहरा ना दिखा सके।. मतलब मरना पसंद था लेकिन चेहरा लेके जाना. पसंद नहीं था। तो जिस ऐज में हम लोग को. असफलता लगती है ना। उस ऐज में जाके देखिए. कि क्या लगता है। एक कोई बच्चा 10थ में जब. फेल होता है ना तो हम लोग का जमाना था. साइबर कैफे में जाके। वहां आज ना मोबाइल. पर चेक कर लेते हैं वहां पे तो जब कोई फेल. होता था ना तो उसके लिए वो मतलब घर तक का. रास्ता पहाड़ हो जाता था और घर पे आके भी.
ना दरवाजे पे थोड़ा देर 10 15 मिनट बैठा. रहता था कैसे जाएंगे कैसे हम लोग के टाइम. पे नेट नहीं चलता था रोल नंबर डाले तो लगा. गोलगोल घूमने तो सांस अटक गया था कि अरे. भैया हम का होगा का नहीं होगा जब देखे पास. हो गए फर्स्ट डिवीजन तो जो हम लोग की. दौड़ने की रफ्तार थी उस बोल्ट क्या. दौड़ेंगे. मतलब एक उमंग तो मैट्रिक में अगर कोई फेल. हो गया तो क्या कर लेगा? कोई बहुत बड़ा. चीज तो दिक्कत नहीं है उसके लिए और हम लोग. पास ही होके आए हैं यहां बैठे हैं तो.
मैट्रिक के दम पे 10थ के दम पे क्या कर. लेंगे? कुछ नहीं कुछ नहीं। लेकिन जिस दौर. में वो हुआ रहता है ना वो बड़ा तकलीफ देह. होता है। क्योंकि समझना होगा कि जिंदगी. बड़ी लड़ाई है। बड़ी लड़ाई है। तो उस दौर. में जा के आप देखिएगा तब समझ में आएगा। अब. होता क्या है कि 40 साल का आदमी 20 साल के. बच्चे को समझाता है कि लाइफ ऐसी नहीं है।. उसको लगता है कि बुड्ढा ज्ञान दे रहा है. हमको।. उस ऐज में वो भी वही था। हम तो हम तो अपने. बच्चों को कहते हैं कि भाई देखो तुमको. मोबाइल चलाना है। मोबाइल चलाओ। बतिया रहे.
हो लोग। हमारे कहने पे तो छोड़ोगे नहीं जब. तक लात नहीं खाओगे। नहीं नहीं हम सुने थे. आपका कि स्कूल में साथ पढ़े। 10थ 10वीं. सातव में पास किए। फिर रोड के उस पार उसका. घर था। इधर हमारा घर था। रोटी इधर बन रही. थी। ये बच्चे आजकल के ये बच्चे यही कर रहे. हैं। गांधी मैदान में कहीं और घूमे जाते. हैं। ये बच्चे पटना के कॉमन बच्चों का ही. है। बहुत सारे बच्चे हैं ना जो गांव से. प्लान बना के आ रहे हैं। जोड़े में हां. जोड़े में आ रहे हैं सब यहां पे। जोड़ा. में हम तो देख रहे हैं ना जोड़े में आ रहे. हैं सब पढ़ने के लिए। आज जब यहां लात खाते. हैं तब समझ में आता है। लेकिन हम यही कहते.
हैं कि आप जो काम करने आए हो, पढ़ाई करने. आए हो, इसे कंप्लीट कर लो। पहले जैसे हमने. आज जो आपने टास्क दिया, आप इसे कंप्लीट कर. लो। उसके बाद आपको जो करना है करो।. गर्लफ्रेंड के उम्र में बनाए।. जब बहुत ज्यादा गरीबी आ जाती है ना बहुत. ज्यादा गरीबी तो इंसान प्रेम मोहब्बत से. इस बात से डरता है ना कि मेरे पास उस. हैसियत के कपड़े नहीं है। खर्चा करवा. देगी। हां क्योंकि जब पेंट बड़े होने पे. ढीला होता है ना तो पीछे से सिलाई खोल के. जब उसका कमर चौड़ा किया जाता है ना तो दाग. बच जाता है। उस बचे हुए दाग से कोई ले.
जाके ये कहने जाएगा गर्लफ्रेंड बनाने के. लिए ना लात मार दिया जाएगा। क्योंकि लड़की. अगर खूबसूरत है और लड़का कामयाब है तभी. प्यार होता है। जब स्कूल का मोजा बह रहा. हो घी के रबड़ लगाना पड़ता हो. तो उस उस समय ये सब नहीं दिखता है। स्कूल. बेल्ट का जो आगे लोगो रहता था वो घिस के. उसका लोगो मिल गया था। उस पे यू नहीं पता. चलता था कि स्कूल का बेल्ट है कि जेल का. बेल्ट है। तो वहां पे बड़ा तकलीफ होता है।.
आजकल मां-बाप जो पैसे उपलब्ध करा दे रहे. हैं ना ये बहुत काल हो जा रहा है बच्चों. के लिए।. वो डर नहीं रह रहा है। पैसा रहता है ना तब. आप रेस्टोरेंट में जाते हैं। अदरवाइज में. ढाबा पर ही रह जाते हैं। उतना नहीं रहेगा. ना तो भूखे घर आ जाते हैं। तो ये आजकल के. बच्चों के पास हो गया है। पैसावा ज्यादा आ. गया है ना तो आज हम दोनों एक हो जाते हैं।. फिर तीन हो जाते हैं। फिर यही सब सोच रहा. है।. जब भूखा पेट होता है ना इंसान कतराता है. ये सब चीजों से।.
कोई बच्चा सफल होना चाह रहा हो। कोई बच्चा. ये पडकास्ट देखे और उसे लगे लाइफ में कुछ. करना है। संसाधन नहीं है। क्या सुझाव दोगे. आप उसे? जिस काम को कर रहा है 5 साल. लगातार उसको करें। ना सफल हो जाए तो. कहेगा। कुछ कर रहा है 5 साल लगातार करें।. एक दिन में सफल नहीं हो सकते हैं। आज आप. पत्रकारिता में लोग आपको जान रहे हैं।. शुरुआत ऐसी ही थी। 10 साल हो गया। 10 साल. हो गए। हमने 5 साल इसलिए बोला ताकि बच्चों. को 10 साल ज्यादा ना लगे। हकीकत यही है कि. 5 साल हम इसलिए बोले हम अपने हम 5 साल.
थोड़ा-थोड़ा जाने लगे। हां हां। तो थोड़ा. 5 साल में इंसान अपना मुकाम बना लेता है।. हम लोग भी जब स्टार्ट किए थे तो शटर खुद. से उठाते थे। ऑफिस नहीं था। हम जिस कैंपस. में पढ़ाते हैं वो एक डॉक्टर साहब एक. डॉक्टर फैमिली है। डॉक्टर रमाशंकर प्रसाद. उनका नीचे क्लीनिक था। हमारे पास ऑफिस. नहीं था बैठने का। तो बच्चों की जब छुट्टी. होती थी ना तो हम उनके जहां मरीज रहते थे. वहीं जाके चुपचाप खड़े हो जाते थे। तो हम. देखते थे नहीं देख रहे हैं डॉक्टर साहब।. मरीज की कुर्सियां बैठ जाते थे। कि मेरे. पास नहीं था यहां पे। तो बुला के बैठा. लेते थे। आप कौन है? तो हम कहे कि सर हम.
एक शिक्षक हैं। मेरे पास ऑफिस नहीं है। तो. वो कहे कि आप ना एक काम कीजिएगा मेरे. चेंबर में बैठ जाया कीजिएगा। तो हम मरीज. बनके उनका गोलका वाला कुर्सियां नहीं होता. है जिस पे थरिया उलाट के बना देते हैं सब. मरीज देखने के लिए। उस पे चुपचाप बैठल. रहते थे। अब एकदम कम स्पेस लेके कि कहीं. इनको खराब ना लग जाए कि पसर के बैठल है. यहां पे। धीरे-धीरे वही उनका ही कैंपस है।. धीरे-धीरे ऑफिस दिए हैं। करते करते तो ऐसा. नहीं होता है कि कोई चीज एक दिन में बन. जाए। 25 अप्रैल 2016 मेरा पहला दिन था और.
तब से लेकर आज तक हम लोगों ने वीक ऑफ नहीं. लिया है। अभी भी आज भी हम हम सैटरडे संडे. को हम लोग ज्यादा काम करते हैं। आई थिंक. आप भी करते होंगे। हकीकत है। लोगों को. लगता होगा कि सैटरडे संडे को आराम करते. हैं। जिस दिन यहां नहीं होता उस दिन घर पे. बैठ के घर पे बैठ के काम करते हैं। कुछ ना. कुछ करते रहते हैं। मंडे टू फ्राइडे ऑफिस. वर्क होता है। अगर उस समय हम लोग 14 घंटा. काम कर रहे हैं तो सैटरडे संडे 16 घंटा हो. जाता है। और आज काम छीन लीजिए तो लगेगा ये. कुछ है ही नहीं है। ऐसा लगेगा क्या हो गया. यहां पे? आज के टाइम में जीवन का सबसे. अच्छा सुखमय समय काम करते हैं। काम करते.
होता है। टेंशन ही नहीं रहता यहां पे।. दुनिया में क्या हो रहा है वो दिखता ही. नहीं। जो कहते हैं ना मी टाइम हमको लगता. है वो हमारा काम करते हुए होता है। कितनी. सिमिलरिटी से आखिरी सवाल सर समापन गरीबी. कितना बड़ा अभिशाप है क्योंकि हम लोग. गरीबी पे बात कर रहे थे। कई लोग कहते हैं. कि संसार का सबसे बड़ा दुख गरीबी है। आप. मानते हैं बहुत बड़ा दुख गरीबी है। लेकिन. कई लोग गरीबी को मतलब गरीबी को एक सिंपैथी. के नजर से एक असहाय के रूप में किस्मत के. तौर पे ना देखो। गरीबी को देखो। यह बीमारी.
है। इसका एक्सरे कराओ, अल्ट्रासाउंड कराओ, कुछ कराओ, इसको ऑपरेशन कराओ, इंजेक्शन दो, टेबलेट दो, कुछ दो। नहीं हो रहा है तो कूच. काच के ठीक करो। लेकिन इसको भागो। यह. बीमारी है। इसको तुम आज नहीं किया गया तो. कल और बड़ा होगा। आज टेबलेट से सही हो रहा. है तो कल इंजेक्शन से होगा। परसों ऑपरेशन. कराना पड़ेगा। हो सकता है पूरा शरीर खराब. कर देगा। नो सिंपैथी विद पॉवर्टी। ब्रूटल. एक्शन लीजिए। इसको चाहे जैसे खत्म कर. दीजिए। दुनिया ने कोरोना के पीछे पड़े थे. सब। खत्म कर दिया सब कोरोना को। उसी. रफ्तार से कमर कस के पूरी दुनिया एक बार.
गरीबी के लिए खड़े हो जाए ना। बहुत हद तक. सुधार देगा। लेकिन हम लोग सिंपैथी दिखाने. लग रहे हैं। नहीं। कुछ भी करो। ईमानदारी. से करो। अब गरीबी का मतलब यह नहीं कि. गरीबी दूर करने के लिए सुपारी ले किसी को. मारने के लिए नहीं होना चाहिए।. मतलब मेहनत से अपने सपनों को पूरा करना. चाहिए। पूरा करना चाहिए। अंधा और अगेन. कहते हैं 8 घंटे की नौकरी करने वाले लोग. जो देखते हैं कि अमीरों का सपना 8 घंटा. नौकरी करने पे कभी नहीं हो सकता है। जो आज. उस मुकाम पर पहुंचा है आंख में आंख डाल के.
देख ले कि 16 घंटा से कम काम किया हो तो. हम कह सकते हैं कभी ऐसा हो सकता है 15. घंटा सोने किसी फील्ड में किसी फील्ड में. कोई सक्सेसफुल आदमी हो कोई सक्सेसफुल. इंसान अगर कह दे कि तुम्हें सबसे ज्यादा. क्या पसंद है तो किसी दिन 8 घंटा सोने को. मिल जाए कोई इंसान उसको खाना पीना वो दूर. जा चुका है उस चीजों से और 8 घंटे में. सोचिए कि सफल हो जाए कभी नहीं होगा आप. गरीब पैदा हुए हैं कोई बात नहीं आप गरीब. मरे हैं तो लानत है आप पर लानत क्योंकि. इसका मतलब आपने मेहनत नहीं की है। बिल्कुल.
बचपना अगर गरीबी में बीता है तो कोई दुख. की बात नहीं है। लेकिन बाप का बुढ़ापा अगर. गरीबी में बीत गया तो धिक्कार है। भले. हमने खिलौनों की गलियों से अपने रास्ते. बदले हो लेकिन बाप अपना कोई रास्ता ना. बदला हो। भले हम लोग कोई सामान खरीदने से. पहले उसका प्राइस देखे हो कि औकात में है. या नहीं। लेकिन जब पिताजी जाए तो सीधे कहे. पैक कर दो इसको। बेटा है मेरा। भले हम लोग. को बुखार लगा हो तो इंतजार किए हो अपने से. उतर जाएगा लेकिन बाप का इलाज के लिए अगर.
अमेरिका जाना हो तो अगले दिन सोचना ना. पड़े। बहुत बार ऐसा होता था बचपने में तो. याद है हम लोग दिवाली वगैरह होता था दशहरा. तो मेला लगता था ना वो खिलौने बिकते थे तो. खिलौनों की दुकान पे आदमी एक घंटा दो घंटा. खड़ा रहता था देखते थे कोई कौन खिलौना. कैसे चल रहा है फिर दो-ती घंटा खड़ा हो. जाएंगे तो दुकान वाला भगाएगा खरीदना नहीं. है तो खड़ा कहां है यहां पे तो फिर तो. दूसरा दुकान पे जाके आदमी खड़ा होता था तो. बड़ा अजीब सा वो समय लगता था कोई दूसरा ही. खरीद के ले जाता था उसी में खुश हो जाते. थे लोग कोई दूसरा पटाखा छोड़ता था तो वहीं. जाके देख लेते थे लोग कि अरे यार सब लोग.
उसी में ताली बजा लेते. बड़ा वो दिन अजीब सा लगता है। अभी देखते. हैं तो लोगों को देखते हैं तो लगता है. छोटे बच्चों को एक दौर था। हम लोग भी यहीं. थे। उनको देख के कभी उनके कंधे पे हाथ रख. के दिल से दुआ निकलता है कि बेटा जल्दी. कामयाब हो जाए। अच्छा आप शौक में मर गया. होगा ना सब मर जाता है। जैसे हम जैसे आज. के टाइम में पैसा कौड़ी सब आ गया है। कुछ. कोई चीज अपील नहीं कर सर। कपड़ा पहनना. खाना पीना घूमना। लोग कहते हैं ना कि. रेस्टोरेंट जाओ ये करो। अभी प्राइस टैग. देखते हो जिंदगी के उस जिंदगी ने उस मकाम.
पे ले आके छोड़ा है जहां पसंद तो बहुत कुछ. है लेकिन चाहिए कुछ भी नहीं ये मर जाता है. ना मर जाता है जब एक समय रहा हो चाहिए हो. ना मिला हो अब अब अब पता है खरीद सकते हैं. अब लेकिन लेकिन अब पता है ना खरीद सकते. हैं इसलिए उसकी कीमत खत्म हो गई अरे जब. पैसे नहीं होते थे तो कभी देखते थे ना ऐसे. पिज़्ज़ा वगैरह का प्रचार देता था तो ये हां. वो स्लाइस निकल स्लाइस निकलती थी तो कभी. इसको भी हमारी औकात होगी कि हम इसको भी. खाएंगे। इसको भी हम खरीदेंगे। लगता था कि.
क्या है वो चीज। अब मतलब कामयाबी ना जैसे. हम लोग गन्ना का रस कैसे निकालते हैं? रस. निकालने के बाद उसमें कुछ बचता ही नहीं. है। तो इंसान भी जब कामयाब होता है ना तो. जिंदगी उससे इतना रस निकाल देती है ना कि. फिर उसके पास अपना शौक नहीं बच। मैंने. इसमें एक लाइन लिखी है सर जी कि वो जो. पहली पीढ़ी होती है ना जो सफलता हासिल. करती है। उसमें अपने आप को आदमी को बहुत. समर्पण बहुत त्याग करना पड़ता है। दूसरी. पीढ़ी को नहीं एहसास होता।. आपकी सेकंड पीढ़ी आएगी आगे उसको यह नहीं. करना पड़ेगा। अपने घर की स्थिति जो बदलता.
है कोई भी बड़ा व्यक्ति किसी भी फील्ड में. उस पहले व्यक्ति ने बड़ा त्याग किया होगा।. बड़ा कॉम्प्रोमाइज किया होगा। बड़ा समझौता. किया होगा। अपने सपनों को मारा होगा।. ख्वाबों को कुचला होगा वो सफलता पाने के. लिए। बहुत आप कोई भी उठा लो। देख लो। कोई. भी पहला व्यक्ति बड़ा हुआ होगा। बहुत. दूसरे तीसरे चौथे आदमी भूल जाता है। भूल. जाता है। वहां से उसको लगता है सर उसे. बचपन से मिला होता है तो उसे लगता है यही. नसीब है। हां। यू नो पहला व्यक्ति हम जैसे. अपने घर में आप पहले हो गए बहुत अजीब लगता. है। मतलब कभी ऐसा होता था कि किसी यहां.
शादी ब्याह में जाना हुआ तो स्टार्टिंग. फेज में तो तो हम लोग ऑटो से जाते थे तो. ऑटो वालों को ना कहते थे 100 मीटर पहले ही. रोक दे सर आप इसका छोड़ोगे मैं फिलटी में. नौकरी करता था एक चैनल था नेशनल चैनल था. मैं एंकर था तो मैं कैब वाला ₹350 लेता था. बरसात वसात हो वैसे ₹250 लेते हैं उस दिन. बरसात में और बढ़ जाता है रेट क्योंकि. बारिश वारिश होती है और बाइक वाला 60 से. ₹120 तो हम कई बार पन्नी रख लिए और हेडफोन. फोन अगर लगाया हो तो ऐसे बैठ के बाइक पे. और बाइक वाले से बोलो चैनल से थोड़ा दूर.
उतार देना क्योंकि गार्ड जो होता था वो तो. आपको हीरो मानता है आप टीवी पे दिखते हो. तो गार्ड कहे सर आप बाइक से मत आया करो सर. अच्छा नहीं लगता या इंटर्न कोई जा रहा हो. अच्छा नहीं लगता तो हम दूर कर देते पैदल. चले जाएंगे ये बहुत छोटी चीज है मैं कई. बार रात को ऐसे इसलिए जानबूझ के फिल्म. सिटी घूमने जाता हूं अच्छा जो फर्स्ट में. ऐसे हुआ है ना यहां पे हम आप घूमने कभी. जाते हैं हां मैं जाता हूं रात को कई बार. फिर घूमने की खाली ऐसे खाली बैठा हूं. गाड़ी ऑन है अब खाली घूम के आता हूं मैं. ये समझने के लिए कि आदमी की औकात कहां. शुरू हुई है? हम चार 4 कि.मी. पैदल जाते.
थे ट्यूशन पढ़ाने। एक बच्चे को ₹600 मिलता. था और उसको स्कूल के बाद पढ़ाते थे 2:00. बजे दोपहर में धूप में एकदम ऐसा लगता था. जैसे हड्डी जल जाएगा और फिर 4 कि.मी. पैदल. आके पढ़ाने के लिए। लेकिन वो ₹600 बड़ा. मायने रखता था। पॉकेट खर्च निकल जाता था. उससे। ये वो इंडिया टुडे की मैगजीन आती. है। तो पहले पढ़ते बहुत थे क्योंकि पढ़ना. होता था पत्रकारिता के बारे में। ₹25 की. उस टाइम आती अब तो शायद महंगी आती होगी तो. अट्टा से रजनीगंधा चौराहा जो है वहां तक.
ईर्षा आता है वो ₹10 लगता है तो वो ₹10. जाना ₹10 आना बचा लिया करते थे ₹20 बच गए. आपका ₹10 घर से मिलते थे आपने कमाए वो रहे. तो वो जो बचे हैं हरी बस और लाल बस चलती. है नोएडा में जो लोग ट्रेवल किंग वो जानते. होंगे उस टाइम हरी बस में ₹45 का पास बनता. था और लाल बस में 55 का ₹10 के अंतर में. एसी और नॉन एसी था 45 वाले थे क्योंकि वो. आपको आपको वो ₹1 शायद ज्यादा लगता है। एक. कप चाय पी लेंगे। बिल्कुल। एक पैकेट चिप्स.
खरीद लेंगे। एक गन्ने का जूस गर्मी में. मिल जाएगा। तो छोटी-छोटी चीजें हैं। मुझे. लगता है। अच्छा जब आपको सब हासिल हो जाता. है तो आपको लगता है अब क्या है? अब तो सब. है ही। अब तो सब है ही है। अब खत्म ही हो. जाता है। शौक है यहां पे। अब कुछ बचा ही. नहीं यहां पे। बट ऐसा लगता है कि एक मतलब. एक बड़ा भाई रहता ना। तो एक एक कसक सी बच. जाती है।. आपके बड़े भाई हैं। छोटा भाई है। अच्छा।. हां। एक बड़ा भाई रहता था लगता है जैसे आज. आज हमको लगता है ना मेरे भाई मतलब उनको. लगता है कि लाइफ में कभी मुसीबत रहेगी ना.
हम तो इनको खींच के लेके निकाल ही देंगे. यहां पे तो ऐसा लगता है कि कई बार लाइफ. में ना ऐसे ही टेंशनंस आ जाते हैं जहां. लगता है कि हम किसको जाके कहें एक टाइम के. बाद इतने बड़े टेंशन आते हैं कि आप. मां-बाप को फैमिली को नहीं बता सकते वो और. डिप्रेशन में चले जाएंगे यहां पे किसको. बता सकते थे उनको बताने लायक होता भी नहीं. होता भी नहीं है यहां पे उनको बताओ मतलब. अपना टेंशन लो फिर उनका टेंशन लेके अपने. में लो फिर डबल डबल डबल टेंशन ले डबल तो. एक रहता है बड़ा भाई रहता है तो बड़ा हम. अपने छोटे भाइयों को देखते हैं ना कि एक. लेवल तक वो बर्दाश्त करते हैं उसके बाद.
लगता है कि भैया ये वाला हमसे नहीं होगा. हम कहे अच्छा चल हम कर देते हैं लाइफ में. एंड गोल क्या है सर आपका कुछ तो होगा ना. एक कुछ तो इंसान सोचता है कि एंड गोल क्या. है आपका. इतना भी ज्यादा हम बताएं ना कि हम बड़ा. दूर वाला गोल नहीं देखते हैं हम यहां. देखते हैं चार अगला वाला क्या सोचो कुछ तो. सोचोगे ना जिंदगी का मकसद क्या है अब आपके. अगला वाला को ये देखना है कि एग्रीकल्चर. वाले इलाज खत्म नहीं नहीं हो रहा। हां। तो. जो मेरा गोल है हम आपका गोल कैसे बता. देंगे? हम अपना गोल मैं सारा प्याज. खरीदूंगा आपका। अरे हमको प्याज नहीं बेचना.
है।. किसानों की स्थिति को चेंज करनी है। वहां. पे किसान सब आज भी वही वाला ट्रेडिशनल. तरीका अपना के रखे हुए हैं। तो वो किसान. को जब तक आप इंडिया में सबसे ज्यादा. पापुलेशन किसकी है? किसानों की। आप. किसानों को और महिलाओं को चेंज कर दीजिए।. पूरा देश चेंज हो जाएगा। अब यही दोनों. बेचारी सब सबसे ज्यादा समस्या में जी रहे. हैं।. बाकी जो हम लोग कह रहे हैं देश बदलना है, देश बदलना है। ये सब कुछ नहीं। किसान और. महिलाओं की स्थिति बदली है। काम खत्म।.
महिला वही फिर वही वाली बात जो आपने शुरू. में कही थी। मतलब वो लाइन मेरे को. एक्चुअली टच कर गई। मैं बैठ के सोच रहा था. जो आपने कही कि जिस घर में पुरुष पढ़ा हो।. बिहार में भी एक बड़ा परिवार राजनीतिक है. जहां पर पढ़े थे। जैसे मैं लालू जी पे. स्टोरी कर रहा था। अभी मैंने बड़ा अच्छा. स्टोरी की। तो नलन वर्मा जी आए तो नलिन. वर्मा जी ने बताया कि लालू जी को पढ़ने का. बहुत शौक था और वो अपने खानदान में पहले. थे और जब उनके घर गए वो तो उनको रियलाइज. हुआ इस घर से निकले कोई इतना बड़ा कैसे बन. गया ये वो बता रहे थे मुझे मम्मी वाली बात. बहुत सटीक लगी मुझे कि जिस घर में मम्मी. पढ़ी होती है उस घर में अनपढ़ नहीं मिलता.
और ये प्रैक्टिकल कहीं उठा लो. मां बच्चे को बहुत मतलब पिता के पास क्या. होता है ना बहुत सारी चीजें हो जाती है. बाहर देखना है ये देखना है मां क्या है ना. कि उसको लिए सबसे प्राइम चीज होती है वही. बच्चे ही होते हैं उसके लिए बहुत शुभ. शुभकामनाएं सर। मुझे लगता है हजारों लाखों. बच्चों की जिंदगी आपने बदली है और सुनकर. मुझे बड़ा इंस्पायरिंग लगा। इनफैक्ट एंड. में भी जो आपने कहा कि आपका बड़ा मकसद. समाज को लेके है। मुझे कई बार लगता है कि. अभी भी हम अपने बारे में सोच रहे हैं।. शायद अपने परिवार के बारे में अपने आसपास.
के बारे में। हालांकि पत्रकारिता भी एक. जरिया है। मेरी कोशिश रहती है कि समाज में. आखिरी व्यक्ति की आवाज उठाओ। कई बार भली. गालियां कई बार बड़ी गालियां पड़ती है। कई. बार तालियां पड़ती है। बट ठीक है इट्स अ. पार्ट ऑफ बिज़नेस। बट बहुत शुभकामनाएं सर।. आशा है जल्दी मुलाकात होगी आपसे। थैंक यू।.
