Unplugged FT. Indresh Upadhyay |Dharma, Jeewan aur Mrityu | Lord Krishna | Sanatan | Humanity
रामलला जी का इतने वर्षों के बाद मंदिर. में विराजमान होना एक संकेत है हम आप सबके. लिए आप तो दिए जैसी कहानी बता रहे हैं. जैसे दिया बुझने पहले एक बार बड़ा तेज. प्रकाश अभी ठाकुर जी विराजमान होकर के हम. सबको य चेतावनी दे रहे हैं हमारे बाद की. जो पीढ़ी आएगी. बहुत लगता है कि भया भय समय दिख सकती है. क्या है कलयुग क्या वाकई में अवतार लेंगे. प्रभु कलकी अवतार में कलयुग में कोई प्रकट. राक्षस नहीं है कलयुग में राक्षस का नाम. एक अक्षर का मैं कृष्ण जिस दिन धरा हम.
छोड़ कर के गए कलयुग उसी दिन प्रारंभ हो. गया कलयुग में क्या-क्या चीजें हैं जो. बताती है कि यह कलयुग चल रहा है नॉनवेज. सही है या गलत है वह भी समय दूर नहीं है. कि मानव मानव को भी खा जाएगा और उस समय भी. लोग तर्क करने वाले होंगे कि इसमें बुराई. क्या है तुम जलाने जा रहे थे उससे अच्छा. तो खा दो सबको प्लेट पर परोस दो मुझे. शाकाहार में भी चार पांच तरह के शाकाहारी. मिले हम एक जो कुछ नहीं खाते हम एक जो. कहते हैं हम शाकाहारी हैं लेकिन हम अंडा. खा लेते हैं और क्या चीजें हैं जो कृष्ण. जी को लेकर इतना आकर्षित करती हैं पूरी. दुनिया कृष्ण में जाती है सबसे बड़ी बात.
है उनका नाम ही कृष्ण है वो आपको एक उंगली. से छू भी देंगे तो भी आप उनके हो जाओ कई. लोग ऐसे हैं जो सीता माता को जब जंगल में. भेजा गया वापस लौटने के बाद तो उसको लेकर. वो सवाल करते हैं बड़े-बड़े संत भी मानते. हैं कि यह राम जी का स्वरूप नहीं है. इसीलिए गोस्वामी जी ने उसका वर्णन नहीं. किया वीडियो वीडियो कुछ ऐसी देखी थी भूत. पेड़ उस पर बैठा था पंखे प उसने पंखा ही. ऑन कर दिया ले लटक जाए सी तो मंदिर जाना. क्यों जरूरी है चार्ज तो सब कर देते हैं. फोन को लेकिन ओरिजनली क्यों चाहिए.
सोशल मीडिया के दौर में जो यह भक्ति बढ़ी. है राक्षसों के शस्त्र होते थे तलवार धनुष. माण आदि आज के रूप में शस्त्र यही है. हमारे यहां पर बड़ा वीवीआईपी सिस्टम है. वीआईपी सुविधा सिर्फ हमारे धर्म में जो है. ये कितनी सही है और कितनी गलत और इससे. क्या भगवान का पुण्य मिलता होगा ठाकुर जी. को देखना है तो आप वीवीआईपी जाओ कितनी. शादी कृष्ण जी की हुई थी 16108 राधा जी. कृष्ण जी की कौन थी हम वृंदावन भी जाते. हैं तो हर आदमी श्री राधे श्री राधे स्वयं. रुक्मिणी जी भी श्री राधा करती.
जब प्राण प्रतिष्ठा हुआ उसके बाद रामलला. अलग नजर आ रहे थे आपने महसूस किया. बागेश्वर बाबा आपके मित्र हैं जी बागेश्वर. जी को लेकर कई लोग ये आरोप लगाते कि. चमत्कार की बातें ज्यादा होती जो उनके. गुरु भी डिनायर हैं आप उन्हें कैसे देखते. हैं बाबा बागेश्वर को गौ सेवा को लेकर एक. सवाल मेरा हमेशा मन में था हम लोग घर से. निकलते हैं तो माता जी कहती है एक रोटी जा. गाय को खिलाओ पैर छू के चले जाओ गाय को एक. जीव कहना भी अपराध माना गया है निदन की. क्या भावना है क्या सच्चाई है क्या कहानी.
है वृंदावन तो भैया पूरा ही निधिवन. है अनप्लग के इस न एपिसोड में आपका स्वागत. है आपके साथ मैं हूं शुभंकर मिश्रा और आज. मेरे साथ एक कथावाचक हैं इंद्रेश उपाध्याय. जी इंद्रेश उपाध्याय जी बिना लाग लपेट के. बड़ा सीधा सवाल पूछता हूं मैं क्या आपको. भी लग रहा है कि देश जो है अब भक्ति पथ पर. चल पड़ा. है जय श्री कृष्णा आपको और.
चलना ही पड़ेगा क्योंकि वास्तविकता में. आना यह स्वभाव है सबका धारा कितनी भी बदलो. नदी की पर एक दिन वह अपनी धारा पर जरूर. आती है ऐसा लोग कहते हैं समुद्र के लिए भी. कि समुद्र अपना स्थान छोड़ता है लेकिन एक. दिन आएगा जरूर तो जो हमारा वास्तविक पथ है. जो हमारा वास्तविक रास्ता है उससे भटक हम. चाहे कितना भी जाए पर कभी ना कभी तो हमको. लौट कर के उस पर आना है और अभी वह समय चल. रहा है कि सब लोग आ गए हैं अपने रास्ते पर.
धीरे धीरे आ रहे हैं लेकिन आपने तो अपने. सोशल मीडिया में भक्ति पथ बहुत पहले से कर. रखा था क्या उसकी कहानी है प्रारंभ से ही. नाम क्योंकि मुझे पहले से ही पता था कि. रास्ता तो असली यही है ना भक्ति पथ. श्रीमद् भागवत के अंत में जब भगवान उपदेश. देते हैं तब वहां भगवान स्वयं कहते हैं ये. वही भगवत प्रक्त उपाया आत्म. लब्ध वहां पर भगवान कहते हैं उद्धव. व्यक्ति का असली मार्ग क्या है बोले वो. उपाय जिससे मेरी प्राप्ति हो और उसी को ही.
भक्ति पथ कहते हैं उसी को ही भागवत धर्म. कहते हैं इसी उपाय का पालन करना यही मानव. के कल्याण का साधन है तब से ही मेरे मन. में था कि मैं अपनी कुछ भी जो चाहे मेरा. सोशल मीडिया हो चाहे मेरी संस्था हो चाहे. मेरे कथा की व्यासपीठ हो सबका नाम भक्ति. पथ भक्ति पथ वृंदावन और मथुरा और उस. क्षेत्र में आप लोग अपना प्रचार प्रसार. कथा आपने अपना स्थान बनाया अब वहां से. लेकर अयोध्या तक इस वक्त देश जो है वो. भक्ति प पर चल रहा है पूरे देश में चल रहा.
है लेकिन वृंदावन से लेकर हम अयोध्या. इसलिए कह रहे हैं कृष्ण जी राम जी एक. दूसरे के अवतार है अयोध्या गए आप जी क्या. देखा आपने अयोध्या में और क्या आपने सोचा. था अपने पूर्वजों से जो किस्से कहानियां. सुनी होंगी आपने कि ऐसा कुछ अयोध्या में. देखने को मिलेगा मेरे दो दृष्टिकोण है. अयोध्या के प्रति अगर आप व्यवस्था के रूप. में देखो और आधुनिकता के रूप में देखो तो. अयोध्या एक वर्ष में ही बदल गया अब वहां. सब रोड़ें अच्छी हो गई एक रौनक सी आ गई.
मानो जैसे मेहमान घर में आ जाए तो पूरा घर. जगमगा जाता है दीपावली सभा हां तो जैसे घर. में खुशी आ जाए आज पिताजी को बहुत ज्यादा. पैसा मिल जाए कहीं से तो व घर को सजा देते. हैं तो ऐसा जैसा नॉर्मल घरों में होता है. ऐसा ही लग रहा है कि मानो जैसे मेहमान के. आने पर या घर के सदस्य के बहुत वर्षों आने. के बाद घर सज जाता है पूरी अयोध्या सज गई. यह परिपेक्ष सबको दिख रहा है पर एक पता. नहीं क्यों मेरे मन में जब मैं अयोध्या.
में राम जी के मैंने दर्शन किए पहले तो. भावुक हुआ लेकिन बाद में एक भाव. आया जब जब होए धर्म के हानि बाढ ही असुर. अधम अभिमानी तब तब प्रभु धरी विविध. शरीर एक प्रकार से रामलला जी का इतने. वर्षों के बाद मंदिर में विराजमान होना एक. संकेत है हम आप सबके लिए कि अब समय बहुत. कम है कलयुग चल रहा है सब जानते हैं और. इसका एक पीक आएगा पीक से पहले मध्यम आएगा. मध्यम को ही घोर कलयुग कहेंगे शायद अब वह.
आने से पहले राम लला जी आकर के विराज के. हम सबको संकेत कर रहे हैं कि अब आप लोगों. के पास समय कम है यह भक्ति सतक पहले भी. आया था 100 साल के लिए भक्ति जगी थी लोगों. में अभी यह भक्ति जग रही है यह कुछ वर्षों. के लिए है और ऐसा शास्त्रों में भी लिखा. है कि भक्ति एक बार बीच में बढ़ेगी कलयुग. में लेकिन उसके बाद डाउन फॉल होगा फिर. नहीं उठेगी तो ये अभी वही समय चल रहा है. कि भक्ति बढ़ रही है आप तो दिए जैसी कहानी. बता रहे हैं दिया बुझने पहले एक बार बड़ा.
तेज प्रकाश देता है हा तो बस वही एक. प्रकार से आप ये समझ ले राम जी का आगमन हम. सबको चेतावनी है कि आप सब लोग अब जितना हो. सके अपने मार्ग को सुदृढ़ कर लीजिए. क्योंकि हमारे बाद का जो लोग जीवन जीने. वाले हमारे बाद का जो वंश आएगा या हमारे. बाद की जो पीढ़ी आएगी. बहुत लगता है कि भया भय समय दिख सकती है. आपने तो बिल्कुल एक हमें अलग ही दिशा दे. क्योंकि लोग यह मान रहे थे कि रामलला का. मंदिर बना प्राण प्रतिष्ठा हुई रामलला.
टेंट से निकलकर उस तंबू से निकलकर सुप्रीम. कोर्ट के आदेश प जब कपड़े बदले जाते थे. वहां से निकलकर एक भव्य मंदिर में गए अब. लोग कई लोग उम्मीद जता रहे थे कि मथुरा. होगा काशी होगा या और होंगे लेकिन आपने एक. अलग दिशा दे दी कि अब बहुत अंत दूर नहीं. है सचेत होने के लिए वोह उसका परिपेक्ष. मैंने कहा ना दो है एक परिपेक्ष तो आप यह. देख रहे हैं कि रामलला मंदिर में विराज गए. सब कुछ बहुत बढ़िया हो रहा है यहां पर. काशी भी मिल रही है मथुरा भी मिलेगा सब.
कुछ होगा परंतु यह सब होने का एक प्रकार. से हम लोगों को एक चेतावनी भी है कि कलयुग. भी तो बढ़ रहा है आगे की ओर कलयुग भी तो. अपनी गति पकड़ेगा तो कलयुग का एक भयावह. रूप यह भी है कि वह अंदरूनी रूप से आपको. ऐसा दिखाएगा सब कुछ आपके अनुकूल है पर एक. समय ऐसा आएगा कि वो पता चलेगा कि नहीं ये. कली का रूप था अभी ठाकुर जी विराजमान होकर. के हम सबको ये चेतावनी दे रहे हैं.
कि हम आ गए हैं आप लोगों के पास अ एक. चेतावनी है कि अपने सुदृढ़ होकर अपने. कल्याण का मार्ग ढूंढ लीजिए क्योंकि कुछ. वर्षों के बाद उस वर्ष का कोई नियम नहीं. 100 भी हो सकते हैं 1 स भी हो सकते हैं. हमने कहा हमारी आने वाली पीढ़ी भी हो सकती. है उसका समय बहुत खतरनाक होगा कलयुग आपने. क्योंकि जिक्र कर दिया कलकी अवतार का. कलयुग का मैं इसको बाद में छेड़ना चाह रहा. था लेकिन क्या है कलयुग कलयुग से इतना डर. क्यों लगना चाहिए और कैसे य अलग है बाकी. सारे युगों से सतयुग त्रेता द्वापर से और.
क्या वाकई में अवतार लेंगे प्रभु कलकी. अवतार में लेंगे तो क्या सच्चाई है थोड़ा. सा कलयुग को विस्तार से कलयुग भय का कारण. इसलिए है कलयुग में कि कलयुग में कोई. प्रकट राक्षस नहीं है कलयुग में कोई दिखने. वाला एक कोई व्यक्ति नहीं है कि रावण है. कि कंस है. कि शिशुपाल है दंत्र वक्र हिरण कश्यप है. सबको पता था पूरे विश्व को पता होता था एक. ही राक्षस है कहां वो मथुरा में बैठा कंस.
लेकिन आज किसी को नहीं पता कलयुग मानसिकता. में आता है बुद्धि में आता है आपके. विचारों में आता और विचार के द्वारा वह. सबको राक्षस बनाता है और कलयुग का यह भी. स्वरूप है कि वह बाहर से. आपको एक सदा हुआ सुधरा हुआ. और बहुत व्यवस्थित जीवन जीने वाला दिखाएगा. पर वास्तविकता में जैसा कि अभी हम बिफोर. पॉडकास्ट एक बात कर रहे थे कि हम किसी. व्यक्ति के बारे में एक ख्वाब बना लेते. हैं ऐसा होगा लेकिन मिलने के बाद वह.
बिल्कुल परिवर्तित होता है यह कली का. राक्षस है कि वह व्यक्ति को दिखाएगा कुछ. और होगा कुछ इसलिए कलयुग भय का कारण है. परंतु जैसे कहते हैं ना गुण सब में होते. हैं कलयुग में भी एक गुण है जो कि बाकी के. युगों में नहीं है अभी मैंने नाम लिया शंक. चक्र गदा पद्म धारी चतुर्भुज नारायण तो. चतुर्भुज नारायण का नाम लेते ही आपको. नेत्र भी नहीं बंद करने पड़ेंगे आपके. चित्त में मन में अपने आप चतुर्भुज भगवान. का रूप आ जाता है यह कलयुग में भक्ति साधन.
की प्रधानता है कि यहां पर भगवान का स्मरण. बहुत जल्दी होता है बाकी के योगों में. आपको तप करना पड़ेगा आपको हिमालय पर जाना. पड़ेगा आपको साधन छोड़ने पड़ेंगे घर त्याग. करना पड़ेगा तब भगवत प्राप्ति तो कलयुग. में भय का कारण एक है और प्रसन्नता का. कारण य य भगवत प्राप्ति बहुत. स यह है कली यही है कलयुग और रही बात आपने. कहा भगवान अवतरित होंगे निश्चित होंगे कली.
का जब अंत आएगा. तब भागवत में वर्णन भी है कि भगवान का. अवतरण होगा कलकी के अवतार के रूप में. भगवान आएंगे उस समय गिनती के साधक बचेंगे. और ठाकुर जी पूरे विश्व का संघार करके. सतयुग में पहुंचा देंगे सबको नहीं जैसे. बहुत क्योंकि हिंदू एक बड़ा धर्म है जिसको. मानने वाले कई लोग हैं लेकिन दुनिया में. और भी धर्म है उनकी अपनी अपनी मान्यताएं. हैं कई सारे और लोग हैं जिनकी अपनी अपनी. भविष्यवाणी.
कई सारे लोगों ने कह दिया था कि 2011 में. दुनिया खत्म हो जाएगी कई लोगों ने कहा था. 19 के आसपास जब कोविड आया तो हमें आपको. एहसास भी होने लगा श अभी 24 की भी चल रही. है बात कि कहीं ग्रंथों में ऐसा लिखा है. 24 में शायद नष्ट होगी दुनिया तो मन में. सवाल यही है कि हम हिंदू भगवानों को मानने. वाले लोग हैं ब दुनिया में एक बड़ी आबादी. जो नहीं मानती है तो उनकी हमारी दुनिया एक. ही साथ खत्म होगी प्रभु एक ही है सारा. ईश्वर एक है और अगर एक है तो फिर.
मान्यताएं अलग-अलग क्यों है और अगर वही. सृष्टि के हरता और या उनके नाम अलग-अलग है. अलग-अलग तरह से मान्यता क्योंकि हम और आप. मान रहे हैं शायद दूसरे धर्म के लोग इस. बात को ना माने जो आप कह रहे हैं बिल्कुल. सत्य बात है सबके विचारधाराएं अलग हैं. सबके भाव अलग हैं ऐसा अब वही बात है कि इस. विषय पर बोलना एक प्रकार से कुछ लोगों को. निराश करने जैसा भी होता है यहां पर मेरी. जगह कोई और धर्म का व्यक्ति बैठा होगा वो. अपने को प्रधान बताएगा ये बात तो है ही है. पर वही कि कई सारी भोजन की वस्तुओं में.
आपको जो सूट करती है आपको जो प्रिय लगती. है निश्चित है वो मुझको प्रिय नहीं लगती. होगी या मुझको सूट नहीं करेगी कई दवाइयां. ऐसी है जो आपको शायद ठीक कर देती होंगी पर. मुझको उ उससे एलर्जी होगी ऐसे ही धर्म को. भी लोगों ने बांटा ठाकुर जी ने नहीं बांटा. बाकी विधि का विधान हमने जो अपने. शास्त्रों में पढ़ा वह सब पर लागू होगा. चाहे वह किसी भी धर्म के हो किसी भी मजहब. के हो किसी भी पंथ के हो सृष्टि में कल की. भगवान आएंगे असर सब पर करेंगे ऐसे तो फिर.
रावण भी नहीं मानता था भगवान को हम रावण. भी राम जी को पूर्ण ब्रह्म मानने से. अस्वीकार करता था कंस को हजार बार समझाया. गया कि जिसको तुम मारना चाहते हो अपनी बहन. के पुत्र को साक्षात भगवान है वो भी. अस्वीकार करता था तो ऐसा नहीं है कि मैं. किसी को कह रहा हूं कि वो राक्षस है कि वो. अस्वीकार कर रहे हैं पर अस्वीकार करना और. स्वीकार करना यह तो आज का नहीं सतयुग से. चला आया है कई लोगों ने तब भी भी नहीं. माना था कि ये परब्रह्म है या ये परम. सत्ता है पर हम मानने वाले लोग तो इसी बात.
को कहेंगे ना कि हमारी सत्ता यह कहती है. कि ऐसा होगा तो निश्चित ऐसा होगा और सबके. साथ होगा अच्छा एक कहीं मैंने आपको बोलते. हुए सुना था कि हर युग में नाम भी छूटे रा. के हा वो ऐसा था कि चार युग है सतयुग. त्रेता द्वापर कलयुग सतयुग में राक्षस का. नाम थोड़ा बड़ा है वहां हिरण्य कश्यप नाम. है त्रेता में राक्षस का नाम थोड़ा छोटा. रावण है तीन अक्षर का है और द्वापर में रा. का नाम कंस और कलयुग में राक्षस का नाम एक.
अक्षर का मैं यह मैं अहम यह मत्व यह मैं. मैं करना हर चीज में मेरी सत्ता को. प्रधानता देना यही जब चर्म उत्कृष्ट हो. जाएगा तो समझो मैं ही कलि कली का रूप धारण. कर. लू तो यही इसका प्रावधान था य मैं ही कली. है मैं ही राक्षस है कलयुग कलयुग शुरू. कहां से होता है भगवान कृष्ण जिस धरा धाम. छोड़ कर के गए अपनी लीला पूरी करके गए.
कलयुग उसी दिन प्रारंभ हो गया था और इसका. विवरण भागवत में आता है जब राजा परीक्षित. को पहली बार कलयुग मिला तो राजा परीक्षित. ने पूछा तुम कौन हो तब उसने कहा मैं कलयुग. हूं तो तब राजा परीक्षित कहते तुम कब आए. मुझे तो लगा था अभी द्वापर ही चल रहा है. तुम्हारा आगमन कब हुआ त उसने बताया कि जिस. दिन भगवान श्री कृष्ण धरा धाम से अपनी. लीला पूरी करके गए मैं उसी दिन प्रारंभ हो. गया था बड़ा सौभाग्यशाली मा अपने आपको को. कि हम लोग उस स्थान पर गए थे जहां पर.
प्रभु श्री कृष्ण ने अपनी लीला संवरण लीला. को अंतिम पड़ाव दिया था वो पेड़ आज भी है. विराजमान है आप उसको प्रभाष क्षेत्र बोलते. जो लोग नहीं जानते उन्हे हम बता दें कि. अगर आप कभी गुजरात के सोमनाथ मंदिर जाते. हैं तो सोमनाथ से तकरीबन 10 किलोमीटर की. दूरी पर वह स्थान है जहां पर वो पेड़ आज. भी मौजूद है जहां पर श्री कृष्ण जी लेटे. थे और उनके पैरों में वो तीर लगा उसके बाद. जो वो नदी है वो भी वहां से थोड़ी दूरी. परी है और श्री कृष्ण जी के चरणों के.
स्थान वहां बने हुए हैं और बकायदा सारी. जानकारियां दी गई है जी जी तो कलयुग अ. वहां से शुरू होता है लेकिन एक मान्यता यह. भी है कि बाकी युगों के मुकाबले कलयुग में. भगवान को आप आसानी से मना सकते बहुत बहुत. प्रेम से ठाकुर जी मान जाते हैं क्योंकि. कलयुग में ठाकुर जी को दया भाव रहता है हम. लोगों के ऊपर कि बेचारे जीव हैं इनका जीवन. भी छोटा है 100 ही वर्ष मिले लेकिन वो भी. पूरे कोई जी नहीं पा रहे हैं खानपान की. इतनी अशुद्ध होता हो गई है टेंशन इतनी बढ़.
गई है इनको विचारों को 100 साल में ही सब. निपटाना है ब्याह भी करना है बालक भी करना. है 100 कहा लोग रहते हैं 100 भी मतलब 100. तो एक आंकड़ा है मैक्सिमम पैरामीटर है. मैक्सिमम कोई कह दे कि हमारी दादी 100 साल. की तो लोग आश्चर्य करते हैं अच्छा 100 साल. की है तो ठाकुर जी को थोड़ा दया रहती है. हम लोगों प कलयुग के जीवों पे इसलिए कलयुग. में ऐसा भी भाव है कि कोई महापाप भी एक. बार भी भगवान नाम लेता ठाकुर जी के नेत्र. सजल हो जाते हैं अरे बेचारा मुझको याद कर. रहा है इसलिए ठाकुर जी बड़े सहजता से.
कलयुग में प्राप्त हो जाते हैं हम ये आपने. एक अच्छी बात कही लेकिन कलयुग अ में. क्या-क्या चीजें हैं जो बताती है कि ये. कलयुग चल रहा है जैसे कैसे माने हम जैसे. आपने तो बता दिया लेकिन अगर आदमी को महसूस. करना हो कि कलयुग दूत ह जी का वर्णन होता. है हां दूतम पानम स्त्रीय सोना यत्र धर्म. चतुर्वेद पुनश्च याच माना या जात रूप मदा. प्रभु कलयुग के पंच स्थान बताए गए.
जिसमें यह पंच स्थान परीक्षित जी ने ही. दिए थे कलयुग को जब कलयुग बोला कि राजा. परीक्षित इतने बलवान थे कि मार रहे थे. कलयुग को तब कलयुग ने चरण पकड़ लिए तो. राजा परीक्षित बोले अब तुम चरणों में गिर. गए मार तो मैं तुमको सकता नहीं हूं लेकिन. मैं तुमको कुछ स्थान दे रहा हूं तुम वहीं. रहना कितनी बड़ी आश्चर्य की बात है कि. कलयुग केवल पांच जगह रहता है आज भी आप. मुझे छठवां स्थान नहीं बता पाएंगे कोई. छठवां स्थान आप लेंगे तो वो भी इन्हीं से. लिंक टब होगा पांच जगह पर ही कलयुग है.
सबसे पहले जुआ दूतम दूसरा पानम मदिरा पान. या भक्ष भक्ष सेवन दूषित भोजन स्त्रीय पर. स्त्री या पर पुरुष संग सना यानी कि हिंसा. कलेश दुनिया भर. के विवादास्पद भाव रखना और अंतिम बताया. बिना मेहनत के कमाया गया धन ये पंच स्थान. है कलयुग के किसी ऊ परर कलयुग का प्रभाव.
है तो निश्चित है वह पंच स्थानों में से. किसी एक स्थान में तो गया है तभी कलयुग उस. पर प्रभाव दिखा प्रभाव कैसा प्रभाव ये. मतलब प्रभाव के बहुत सारे. रूप जैसे कि सबसे पहला रूप तो बताया गया. कि वैष्णव और संत महापुरुष जो भी भगवत. संबंधी होंगे उनके प्रति हास्य पद भाव. रखना जैसे हमको हम दो तीन पहन के निकल गए. बगल बंदी पहन घूमते हैं अब तो नहीं है ऐसा.
अब तो थोड़ा थोड़ा बदल रहा है लेकिन पहले. एयरपोर्ट पर जाते थे लोग ऐसे देखते एलियन. घूम रहा है हमारे एयरपोर्ट पर मतलब धोती. बगल बंदी पहनने वाले को ऐसा दिखते हैं कि. यह भी इंसान है क्या यह भी रहते हैं क्या. ऐसी दृष्टि लोगों की बड़े-बड़े शहरों में. हो गई पुराने शहरों में तो आज भी लोग धोती. पहनते हैं तो ऐसा वैष्णव के प्रति भाव. रखना यह भी एक कलयुग का प्रभाव है ठीक. माता-पिता के प्रति केवल आज कल कई बालकों.
में ऐसे भाव आ जाते हैं कि उनका ना ज्यादा. सम्मान करना ना उनकी वैल्यू इतनी ज्यादा. रखना अपने चित्त में यह भी कलयुग का. प्रभाव है दूसरा संबंधों को दूषित कर देना. चाहे वह पति-पत्नी का हो भाई भाई का हो. भाई बहन का हो परिवार के जितने भी संबंध. उसमें दूषित दूषित आने का मतलब है जैसे कि. किसी भी भाव से जैसे भाई भाई विवाद कर रहे. हैं एक भाई चाहे तो उसको विवाद को शांत. करके और उसको उसका मार्ग जुड़े लेकिन नहीं.
दोनों का भाव यह नहीं हमको अलग ही होना. विवाद ही हमारा कारण है इसी से ही हम ठीक. कर सकते हैं माता-पिता बाधक बन रहे हैं. किसी प्रकार की उन्नति में और मन होता है. कि माता-पिता को त्याग दे वृद्ध हो ग क्या. करेंगे हमारे साथ रह के इस प्रकार के भाव. पत्नी के प्रति किसी और के प्रति आकर्षित. होकर पत्नी का त्याग कर देना या पति का. त्याग कर देना इस प्रकार के भाव तो ये. दूषित काए संबंध में आ. जाना किसी व्यक्ति. के भाव को दूषित करके दूसरों को बताना यह.
सब कलयुग के प्रभाव है तो यह तो मैंने. बहुत सूक्ष्म सूक्ष्म भाव बताए इससे भी. घिनौनी हरकतें आप तो रहे हैं न्यूज के. अंकर भी रहे हैं और आपने कई सारी न्यूज. देखी भी है तो आपको तो खुद पता है कि लोग. कितने दूषित स्थिति तक चले जाते हैं य सब. कलयुग के प्रभाव पर इसमें विशेष रूप से यह. कुछ है जैसे कि धन को अपनी दासी समझना. उसको केवल अपने भोग के लिए ही प्रयोग करना.
मद्यपान और भक्ष भक्ष सेवन करना उसमें. किसी प्रकार का हीन भावना ना आना नहीं यह. तो खाने के लिए बना है खाओ इसको इस प्रकार. का भाव रखना पर स्त्री पर पुरुष संग करने. में लज्जा ना होना बस कर देना उस पर यह. विचार ना करना कि यह एक गलत मार्ग जबकि वह. जानता है कि गलत है तब भी उस कार्य को. करने में लज्जा ना. होना शांति से कोई बात हो सकती है लेकिन. जबरदस्ती वहां जाकर के हट पूर्वक लड़ाई.
झगड़े को बढ़ावा देना और मैं मेहनत ना. करूं और धन मुझे मिल जाए इसके प्रति. ज्यादा रुझान होना ये सब कलयुग के प्रभाव. कलयुग के स्वरूप है अब आपने खानपान का. जिक्र किया था खानपान में क्योंकि बड़ी. आबादी है जो नॉनवेज खाना खाती है और उनका. यह मानना है कि प्रकृति ने उसी तरह से. बनाया है अगर नहीं खाए पंगे तो उनकी आबादी. बढ़ जाएगी और उनका एक अपनी विचारधारा है. कई लोग मानते हैं कि जैसा देश वैसा भेष. वैसा खानपान अगर कोई बंगाल में रहता है तो.
वहां पर समंदर है तो मच्छी तो खाएंगे और. क्या खाएंगे या कई ऐसे इलाके हैं जहां पर. वही ले सकते हैं तो यह. खानपान नॉनवेज सही है या गलत है गलत है तो. क्यों है क्योंकि जो तर्क हमने आपको बताया. कि जो लोग ऐसी परिस्थितियों में रहते हैं. जहां वही मिलता है और बाकी तो ब्राह्मणों. में भी खूब दबा खाते हैं आजकल लोग अब. इसमें क्या है खूब तो हम बोलते हैं पर. जिसको रुचि है वो उस स्थिति से हटने वाला.
नहीं है रही बात आपने कहा जहां स्थिति ऐसी. ऐसा नहीं है कि व्यक्ति उस स्थिति में. उसके बिना जी ही नहीं पाएगा या मृतक ही हो. जाएगा कर ही नहीं सकता किसी के मांस का. सेवन करना प्राण का हरण करके यह तो किसी. भी हद तक स्वीकार्य हमारे शास्त्रों में. नहीं है और एक प्रकार से एक हिंदू व्यक्ति. को जो हिंस दु यते हृदयम यस्य हिंदू जहां. हिंसा से पीड़ा होती है उसको हिंदू कहते. हैं जहां किसी को मारने काटने से किसी का.
हृदय. विगलियो के सुख के लिए अपने पेट के भरण. पोषण के लिए तो हम अपने आप को हिंदू ही. कहना बंद कर दें हम हिंसा से हमको द. बिल्कुल भी भाव मन में पीड़ा नहीं हो रही. तो हम हिंदू कैसे दूसरी बात जो लोग कहते. हैं एक बार मैं कहीं गया था तो वहां मुझको. एक व्यक्ति बोला कि महाराज जी वो गंगा. बहती हुई हमारे गांव से जाती हैं और जाकर. समुद्र में मिल जाती है तो समुद्र कहीं.
दूषित ना हो जाए पूरी नगरिया का दूषित पना. गंगा में बहता हुआ समुद्र में जाता है उस. दूषित कोई मछली खाती मच्छी को हम खाक हम. तो गंगा को पवित्र कर रहे हैं तो व्यक्ति. अपने स्वाद को प्रधानता देने के लिए किसी. भी स्थिति तक जा सकता है परंतु मैं ऐसा. मानता हूं प्राण जीवित रखने के. लिए मांस आवश्यक नहीं प्राण जीवित रखने के. लिए बहुत वस्तु है यह मांस केवल और केवल. जीव के सुख के लिए केवल और केवल व्यक्ति.
अपने स्वाद के लिए ही खाता है अगर आप मुझे. अनुपात बताएं जितना भी हो कितने परसेंट. लोग मांस खाते हैं तो मैं उसमें से 2 पर. ही कम करूंगा कि वह व्यक्ति अपनी जरूरत के. लिए खा रहा है बाकी के लोग केवल स्वाद के. लिए पा रहे हैं अब जैसे एक उदाहरण मैं और. देता हूं आपको मैं जो लोग जिम करते हैं या. क्रिकेट खेलते हैं जैसे कई बार कहा था कि. पाकिस्तान के गेंदबाज जो है वो थोड़ा तेज. गेंद फेंकते हैं उसके पीछे वजह आती कि. उनका जो खानपान है वह ऐसी चीजों को लेकर. ज्यादा है जो शारीरिक तौर बड़ा मजबूत. करेते आप जिम जाए हम लोग हम लोग तो चलिए.
वेजिटेरियन है बट कई बार जब जिम जाते हैं. तो पूछता है हमसे कि क्या आप नॉनवेज खाते. हैं क्योंकि आपको उसमें प्रोटीन की मात्रा. ज्यादा मिल जाती है या शरीर ज्यादा मजबूत. और सुडेल बन जाता है तो कई बार देखा है. मैंने कि जो लड़के नहीं भी खाते वो जिम जा. खाना शुरू कर देते हैं जरूरत के हिसाब से. या तेज गेंदबाज है तो खिलाना शुरू करते. हैं या खेल खिलाड़ी है तो जबरदस्ती उनके. कोचेस खिलाते हैं कि नहीं करोगे तो फिर. तुम उतने मजबूत नहीं बनोगे तो उसमें फिर. वो गलत है या सही है हम लोग हनुमान जी को. पूज ने वाले लोग जिनको बल बुद्धि विद्या.
दे मोहर क्लेश विकार उन्होंने तो कभी मांस. नहीं खाया जिनके एक. अंगुठा से रसातल में पर्वत चला गया ऐसे. बलवान महावीर हनुमान जी उन्होंने तो कभी. मांस नहीं खाया ऐसे शिव जो कैलाश पर बैठते. हैं और रावण आकर के जब कैलाश पर्वत उठाता. है तो केवल अपना अंगूठा रखते हैं और वह. पर्वत नीचे आ जाता है ऐसे महादेव ने तो. कभी मांस नहीं खाया हम उनकी पूजा करते हैं. यह बात केवल एक एक प्रकार से लोग.
साइंटिफिक साइंटिफिक रूप से इसको प्रूव भी. कर देंगे मेरे आगे क्योंकि करते हैं लोग. कि नहीं ये आवश्यक ही है ये आवश्यक ही है. इसके बिना ये होगा नहीं इसके बिना ये नहीं. कर पाएंगे इसके बिना वो नहीं कर पाएंगे पर. मेरा एक मानना है कि व्यक्ति कुछ भी कर्म. करता है वो जीवित रहे स्वस्थ रहे उसके लिए. करता है अपने पावर को बढ़ाने के लिए या. किसी भी रूप में अपने आप को तेज करने के. लिए अपने आप को सुदृढ़ दिखाने के लिए हम.
किसी के परिवार को नष्ट करें किसी की. हत्या करें किसी की जीव हिंसा कर दें तो. फिर एक समय वह भी दूर नहीं कि मानव को भी. मार देंगे लोग कलयुग का जब अंतिम वर्णन. आता है वहां पर यह भी वर्णन किया दुनिया. में ऐसे देश है जहां खाते हैं लोग लोग खा. जाएंगे खाते हैं खाते हैं आज भी मुझे पता. है जीवित छोटे-छोटे बालकों का भी खा जाते. हैं लोग तो वह भी समय दूर नहीं है कि मानव. मानव को भी खा जाएगा और आप बता उस समय भी. लोग तर्क करने वाले होंगे कि इसमें बुराई.
क्या है तुम जलाने जा रहे थे उससे अच्छा. तो खा दो सबको प्लेट पर परोस दो तो यह बात. ऐसी है कि इसका तर्क खत्म नहीं होगा लेकिन. मैं केवल इतना ही कहूंगा कि हम लोग हनुमान. जी को मानते हैं हम लोग महादेव को मानते. हैं हम लोग ऐसी सत्ता हों का पालन करते. हैं जिनके बल बुद्धि विद्या बल बल के आगे. किसी की पहुंच नहीं ऐसों ने कभी जब सेवन. नहीं किया वे भी जब इतने पवित्र भाव में. रहते हैं तो हम क्यों जबरजस्ती न वस्तुओं. को और एक और बात कह कोई भी ऐसी वस्तु.
संसार में पृथ्वी से उत्पन्न होने वाली. ऐसी वस्तु नहीं है जिसकी भरपाई मांस करे. कोई ना कोई वस्तु तो ऐसी होगी जो उसके भी. सब्सीट्यूट में आपको पूर्ण प्रोटीन देता. होगा पूर्ण रूप से उस चीज की भरपाई पृथ्वी. भी करती होगी वो हमारी पोषक हमारी मां. इसीलिए तो है पृथ्वी को मां क्यों कहते. हैं क्यों प्रणाम करते हैं क्योंकि वो. हमारे पोषण के लिए ही भगवान ने दी है और. वो हर तरीके से पोषण करेगी. चाहे वह किसी भी रूप में हो व्यक्ति धुड़े.
निकाले उसका भी सब्सीट्यूट मिलेगा और कई. लोग ऐसे हैं हमारे वृंदावन में तीर्थों. में भी अच्छी से अच्छी बॉडी बना रखी है. अच्छे से अच्छा उनका शरीर है लेकिन वो कुछ. भी नहीं खाते सात्विक रहते हैं फिर भी. उनका शरीर है हालांकि मुझे शाकाहारी में. भी चार पांच तरह के शाकाहारी मिले एक जो. कुछ नहीं खाते एक जो कहते हम शाकाहारी है. लेकिन हम अंडा खा लेते हैं एक वो थे जो. कहते हैं भैया हम शाकाहारी है लेकिन हम. केक में खा लेते हैं कुछ वो मिले जो कहते. हैं कि भैया हम मंगलवार को नहीं खाते हैं.
बाकी दिन खा ले बाकी दिन हम खा लेते हैं. कुछ है जो दवाई में ले लेते हैं हम तो. शाकाहार में कई तरह के हमको शाकाहारी मिले. लेकिन वो अपनी अपनी इच्छा है लेकिन सबसे. बड़ी बात है कि भुंग तेते त्वम पापा ये. पचत आत्म कारण भगवान गीता में कहते हैं. मुझे जो निवेदित करके प्रसाद पाता है वही. पाने योग्य है और ठाकुर जी को वही निवेदित. करना चाहिए जो निवेदित हो सके तो ऐसा आहार. ही सेवन करना चाहिए एक हम मिस कर गए एक वो.
भी हमको मिले जो कहते हैं हम खाते नहीं है. बस ग्रेवी ले लेते उसमें स्वाद आता है तो. ये पांच छह तरह के हमको इन सब के जितने भी. आपने बताए सब चटोरे हैं ये सब अपनी जीव के. लिए भोजन करते हैं पेट के लिए जीवित रहने. के लिए नहीं जी अच्छा राम जी और कृष्ण जी. के भक्तों में सबसे बड़ा अंतर क्या. है अंतर तो ऐसा कुछ नहीं बस दो युगों के. दो अलग-अलग प्रभु है क्या एक एक तो हमने.
आपको जो किस्सा सुनाया कि हम वृंदावन गए. हमारा चश्मा निकाल लिया गया हम नाराज हुए. हमने क्या हुआ तो हमसे बड़ा अच्छा उदाहरण. दिया गया कि हमने कहा हमारे अयोध्या बंदर. बड़े अच्छे हैं खाली प्रसाद लेते हैं तो. कहा गया कि जैसे आपके राम जी वैसे आपके. अयोध्या बंदर जैसे हमारे श्याम जी वैसे. हमारे मथुरा वृंदावन के बंदर इसके अलावा. और क्या सिमिलरिटीज है अ देखिए प्रेमी की. प्रेम की अगर बात आए तो दोनों स्तर पर. प्रेम है लोग राम जी के उपासक भी राम जी. से बहुत प्रेम करते हैं कृष्ण के उपासक भी. कृष्ण से बहुत प्रेम करते हैं पर अनुपात.
यदि मात्रा ज्यादा देखी जाए परसेंटेज तो. भगवान श्री कृष्ण के जो उपासक हैं वो. ज्ञानी ध्यानी और वैराग्यं से ज्यादा. प्रेमी है राम जी गमर ग्लैमर बड़ा अच्छा. है उनके प्रेमी ज्यादा उपासक है क्योंकि. उसका भी एक कारण आता है कि तुलसीदास जी के. एक मित्र थे और उन मित्र के सगे भैया. भगवान श्री कृष्ण के भक्त थे उनका नाम था. कृष्णदास ह तो गोस्वामी तुलसीदास जी को जब.
यह बात पता चली कि वृंदावन जाकर रहने लगे. तो ऐसा नहीं कि कोई द्वेष में उन्होंने. प्रेम भरी बात चीत दोनों में होने लगी तो. उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी ने उनको. पत्र लिख के भेजा कहा कमी रघुनाथ के छोड़ी. कुल की कानी बोले रघुनाथ जी में क्या कमी. थी जो तुम सब छोड़ छाड़ के वृंदावन चले गए. वहां उनकी शरण ग्रहण कर ली तो कृष्ण दास. जी ने पलट में जो पत्र लिखा उसमें ये लिखा. बोले राम जी एक पत्नी वृति है वो एक पत्नी. के अलावा सबको या तो मित्र मानते हैं सखा.
मानते हैं भाई मानते हैं शिष्य मानते हैं. आदि आदि पत्नी तो एक ही है पर ये हमारे. ठाकुर जी इनके यहां बहुत बड़ा स्लॉट है ये. सबको अपनी प्रियसी के रूप में स्वीकार कर. लेते हैं चाहे वो पुरुष हो चाहे वो स्त्री. हो चाहे वो जानवर हो जामवली की बेटी. जामवंत की बेटी जामवली से ब्याह किया. भगवान श्री कृष्ण ने ये लीला पुरुषोत्तम. है ये विचार नहीं करेंगे कि आप स्त्री. पुरुष जानवर कौन हो ये सबको अपनी पत्नी के. रूप में स्वीकार कर लेते हैं इसलिए हमने. इनकी शरण ग्रहण कर ली है बाकी अंतर तो.
दोनों में है नहीं दोनों समान ही हैं और. रही बात फिर उन्होंने एक अंत में यह बात. भी कही कि गलती मेरी नहीं है कि मैं इनकी. शरण में क्यों आया पिताजी ने मेरा बचपन. में नाम ही रख दिया था कृष्ण दास तो तब से. ही मैं इनका दास हो गया तो अगर दोनों में. अंतर कहे तो अंतर बोलना तो नहीं चाहिए पर. यह कह ले कि भगवान श्री कृष्ण के जो उपासक. हैं उनमें प्रेमियों का स्तर थोड़ा सा. ज्यादा है महिलाओं की संख्या ही बहुत. ज्यादा. है ज्यादा है क्योंकि वहां तो एक ही है ना. उनके अलावा तो सबको राम जी कहते हैं वर्णन.
आता है कि वो नजर नीची करके रखते हैं सीता. जी के अलावा कोई स्त्री दिख जाए तो या तो. पुत्री या फिर बहन के भाव से देखते हैं या. मां के भाव से देखते हैं या फिर नजर नीचे. ही रखते हैं लेकिन हमारे ठाकुर जी तो नजर. कोई नहीं देख रही हो तो जबरदस्ती और देखते. हैं उसको ताकि जेव मेरी है जाए नहीं तो यह. सवाल फिर हमारे मन में आती है बहुत बढ़िया. बात आपने कही जैसे भारत में भगवान के. उपासक हर भगवान के हैं लेकिन हमारे श्री. कृष्ण जी जो है वो इंटरनेशनल भगवान हो गए. दुनिया के हर देश में आपको श्री कृष्ण जी. का मंदिर नजर आता है जब हम लोग भी मथुरा.
वृंदावन या नोएडा में जाते हैं अलग-अलग. मंदिर खुले हैं तो बड़ी संख्या में विदेशी. हमें दिखाई पड़ते हैं कोई रशिया से आया है. कोई यूक्रेन से आया है कोई अलग-अलग देशों. से आया है तो ये कृष्ण जी कैसे इंटरनेशनल. हो गई ये भी थोड़ा हमको जानना है कुछ तो. महाराज जी लोग गए बाहर आकर्षित करते गए. यहां से लेकिन और क्या चीजें हैं जो कृष्ण. जी को लेकर इतना आकर्षित करती है पूरी. दुनिया कृष्ण में हो जाती है सबसे बड़ी. बात है उनका नाम ही कृष्ण है कृष्ण शब्द. का अर्थ होता है कर्ष त कृष्ण. जो आकर्षण करे अभी मैं एक जगह और पॉडकास्ट.
में मैं बता के आया उनको कि कृष्ण शब्द का. अर्थ क्या होता है आप नेत्रों से देखोगे. तो उनके हो जाओगा आप कहो मैं आंखों में. पट्टी बांध लू तो तो वो स्वर ऐसा बोल. देंगे कि आप कान से सुन लोगे तो उनके हो. जाओगे आप कहोगे मैं कानों में रुई लगा लू. तो उनके तन की सुगंधी ऐसी आएगी कि आप नाक. से सूं के उनके हो जाओगे आप कहोगे मैं नाक. भी बंद कर लूं तो वो आपको एक उंगली से छू. भी देंगे तो भी आप उनके हो जाओ कर्ष कृष्ण. मतलब आपकी 12 इंद्रियां हैं आंख नाक कान.
जीव त्वचा हाथ पैर मुख मन बुद्धि सब कुछ. वह कहीं से भी आपको अपना बना सकते हैं कर. शति इसीलिए उनका नाम कृष्ण है कि वोह. आकर्षण करते हैं सबको अपनी ओर खींचते हैं. इसीलिए कृष्ण लीला में त्रेता के बाद. द्वापर में कृष्ण लीला हुई तो भगवान ने. मर्यादाओं को थोड़ा किनारे रखा कहा कि भाई. द्वापर ये जो कलयुग आने वाला ना यहां पर. मर्यादा तोड़ने वाले ज्यादा आएंगे यहां पर.
मर्यादा में रहने वाले बहुत कम लोग रहेंगे. मर्यादा तोड़ने वाले ज्यादा रहेंगे इसलिए. उनको किसी भी रूप में भक्ति के मार्ग पर. लाया जाए इसलिए ठाकुर जी ने अपनी पूरी. लीला को इस प्रकार से डिजाइन किया कि बालक. हो तो बालक आकर्षित हो जाए कोई प्रेम की. उपासिकों. इसलिए श्री कृष्ण इंटरनेशनल है क्योंकि.
उन्होंने संपूर्ण रूप से अपनी पूरी लीला. को ऐसे डिजाइन किया कि कोई भी आकर्षित. होने से बचेना सब उनकी ओर आकर्षित होकर के. उस लीला. में मिलित हो जाए पर राम जी थोड़ी. मर्यादाओं का पालन करते हैं यह मर्यादा है. ऐसा नहीं करना है यह नहीं करना है ऐसा. नहीं होना चाहिए यह उचित नहीं है इसलिए. राम जी मर्यादित रहते हैं और एक संग्रह. उनका है वो. मानते तो कृष्ण उपासक भी राम जी को अ हम.
ब्रजवासी गए वहा दर्शन करने अयोध्या राम. लला को देख के लग लाला लग तो बिल्कुल. हमारे लाला जैस ही र है बिल्कुल वृंदावन. वाले ठाकुर जी जैस ही र तो प्रेम भाव है. बस कृष्ण के प्रति लोगों का आकर्षण इसलिए. भी ज्यादा है कि वह आकर्षण करते और एक और. कारण है कि द्वापर के बाद कलयुग प्रारंभ. हुआ ना तो रिसेंट ही है अभी कुछ दिन. पुरानी ही लीलाए है ठाकुर जी की इसलिए भी. लोग आकर्षित हो सवाल हम पूछते हैं सवाल. कठिन नहीं है यह जो लोग संदेह करते हैं.
क्योंकि नई पीढ़ी को कई बार अगर आप तरक से. जवाब दे देते हैं तो उनमें विश्वास बैठ. जाता है वरना उनके मन में कुछ संदेह रहते. हैं तो कुछ सवाल मेरे मन में आए जैसे जब. मैं अपने एज ग्रुप में लड़कों से बातचीत. करता हूं हमारी आपके एज ग्रुप के जो लड़के. जो कॉलेज में पढ़ते हैं या नौकरी करते. हैं तो कई बार ज आप राम जी का जिक्र करते. हो राम जी को लेकर हर आदमी मर्यादा. पुरुषोत्तम श्री राम कहता है एक अच्छे. पुत्र के तौर पर उन्हें हर कोई स्वीकार. करता है एक अच्छे कैकई माता के कहने पर ख.
गए भाई को लेकर उनकी हर आदमी कहता कि राम. जैसे भाई बनो औरंगजेब जैसे सब चीज होती है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो सीता माता को जब. जंगल में भेजा गया वापस लौटने के बाद तो. उसको लेकर वह सवाल करते हैं कि एक औरत जो. प्रेग्नेंट थी उसको अकेले जंगल में भेज. दिया गया और जो हमने लवकुश का संवाद भी. सुना है उसमें भी जिस तरह से बताया गया है. कि कितनी परेशानियों का सामना उन्हें करना. पड़ा उस प्रेगनेंसी के दौर में अकेले. लकड़ी काटी फिर लव कुश का जन्म हुआ फिर. उनको अकेले पाला.
पोसा क्या वह सही था सही था तो उस लीला का. भाव क्या था यह सवाल सबके मन में आते हैं. और यहीं पर श्रीराम को लेकर कई लोग हैं जो. सवाल खड़े करते हैं क्योंकि मौजूदा दौर. में भी यह मानते हैं लोग कि आपकी अगर आपने. शादी की है पत्नी से तो आपका कर्तव्य उसकी. तरफ है मां-बाप की तरफ भी आपका झुकाव है. समाज की तरफ भी है लेकिन पत्नी को आपने. स्वीकारा है वो सब कुछ आपके भरोसे छोड़कर. आई है तो वोह सही था गलत था क्या उसकी. लीला थी क्या उसके मायने. हैं देखिए अब इसके भी बहुत सारे रूप हमारे. यहां बताए जाते हैं कई लोग तो ऐसा भी.
मानते हैं कि श्री राम ने ऐसा नहीं किया ग. स्वामी तुलसीदास जी महाराज ने तो अयोध्या. आगमन के बाद लिखा ही नहीं कुछ उसके बाद का. विषय वर्णन ही नहीं किया बस वही कथा को. उसके बाद विराम दे दिया लेकिन वाल्मीकि जी. महाराज जब अपनी कथा में वर्णन करते हैं तो. वहां वह लवकुश के भाव का और सीता जी के वन. गमन का वर्णन करते हैं उसमें कई लोगों का. ऐसा मानना है कई हमारे धर्म जगत के लोगों. का भी और कई लोगों का कि यह लीला हुई नहीं.
है पर शायद हमारे यहां कहीं विष घोलने के. लिए इनसे छेड़छाड़ की गई लीलाओं से कहीं. प्राचीन काल में बीच में मुगल राज आया था. और भी कई हमारे यहां शासन काल हुए थे उस. समय पर ग्रंथों से छेड़छाड़ की गई ताकि हम. लोगों के भीतर किसी भी रूप में यह विष आ. जाए परंतु कई लोग इस बात को कहते हैं अब. लिखा तो है वर्णन तो उसका हो गया तो अब. उसको किस बात में स्वीकार किया. उसके प्रति भी कई हमारे महापुरुषों का ऐसा.
भाव रखा जाता है कि श्री सीता जी की. महानता और उनके विशेषता को परिलक्षित करने. के लिए उसको विशिष्ट रूप से प्रकट करने के. लिए राम जी का य निर्णय था कि उन्होंने. ऐसा किया सीताया चरितम महत सीता जी के. चरित्र की विशेषता और महत्वता बताने के. लिए लोग इस बात तक सीमित रह जाते हैं कि. राम जी ने उनका त्याग कर दिया उसके बाद के. कितने सारे ऐसे प्रसंग हैं लव कुश का.
प्रसंग लव कुश जैसे बालकों को भेज कर के. वहां संपूर्ण सीता जी का चरित्र सुनाना. वाल्मीकि रामायण जी ने राम जी का चरित्र. नहीं कहा है सीता जी का चरित्र कहा है. पूरा सीता जी की चरित्र को महत्वता दी तो. वहां पर कई भाव ऐसे हैं जहां सीता जी की. भावों को महत्व दिया गया है और उनकी. महत्वता को बढ़ाने के लिए ही श्री राम जी. ने वो निर्णय लिए अब वही बात है कि थोड़ा. सा. वैसा प्रश्न हो जाता है कि इसके प्रति.
उत्तर देने पर कई वर्ग के लोग उंगली भी. उठाते हैं और कई वर्ग के लोग संतुष्ट भी. हो जाते हैं परंतु हमारे यहां निश्चित है. कि एक नारी का कितना बड़ा गौरव होता है कि. वह अपनी पति की आज्ञा का मान कर के चली भी. गई जहां वह वन में भी गई तो वन में भी राम. जी उनसे कहते हैं कि तुम पावक म करो निवास. आप वन में स्वच्छंद मत रहो आप पावक में. रहो आपका आपकी छाया हमारे साथ रहे क्योंकि. आप वन में रह नहीं पाओगी एक प्रकार से.
वहां पर यह भाव भी प्रकट होता है कि श्री. राम जी ने सीता जी को भेजा तो वन की ओर पर. वह राम जी कैसे भेज सकते जो पावक में सीता. जी को निवास दे देते हैं तो कहीं ना कहीं. इस पूरी लीला में सीता जी को वन में भेजने. का भाव केवल और केवल राज सत्ता को महत्व. देना और राज राजा क्योंकि राम जी का पूरी. लीला में भाई के प्रति परिवार के प्रति. पत्नी के प्रति शत्रु के प्रति सबके प्रति. भाव था पर एक राजा का दायित्व क्या होता.
है वह भी एक प्रकार से निभाने की. उनकी भाव था कि वह भी एक संदेश दिया जाए. तो वहां प्रजा को महत्व देकर के अपनी. अत्यंत. प्रियसी ग्रहणी का परित्याग किया तो एक. राज धर्म का निर्वहन वहां पर राम जी ने. किया है तो एक राज धर्म राजाओं को क्या. सीख लेनी चाहिए वह बस एक बात वहां पुष्ट. की गई बाकी सीता जी वो भूमि जा है व सदैव.
भूमि की ही पुत्री है उनका त्याग करना वह. त्याग उसका किया जाए जो सदैव विलग हो सदैव. राम जी के संग ही है पर उस परिपेक्ष में. राज धर्म को ही महत्व दिया गया है इसलिए. राम जी ने उनका परित्याग किया है तो वह. विषय कई जगह ऐसा बड़े-बड़े संत भी मानते. हैं कि यह राम जी का स्वरूप नहीं है. इसीलिए गोस्वामी जी ने उसका वर्णन नहीं. किया वाल्मीकि जी ने इसका वर्णन किया है. वाल्मीकि जी ने वर्णन किया है तो कहीं ना.
कहीं इसमें छेड़छाड़ है कितनी रामायण लिखी. गई है क्योंकि 100 कोटि हा 100 करोड़. दक्षिण की अलग है महाराष्ट्र की अलग है. उड़ीसा की अलग है हमारे यहां की अलग पर. सबसे प्राचीन वाल्मीकि रामायण है वाल्मीकि. रामायण वेदों से भी पुरानी है इतनी पुरानी. वाल्मीकि. रामायण सबसे प्राचीन तो कैसे सजोई रह गई. अब तक अब वही बात है कि मैंने एक जगह और. कहा था कि हम संतो को और वैष्णव क्यों पूज. रहे हैं क्योंकि आज तक शिष्य पर शिष्य पर.
शिष्य शिष्य के द्वारा शिष्य को शिष्य के. द्वारा शिष्य को वो सजो चले आए हैं इसीलिए. बीच में जब मुगल राज आया और अंग्रेजों का. शासन आया ऐसा हो ही नहीं सकता कि हमारे. यहां किसी शास्त्र की छेड़छाड़ ना की गई. हो भागवत का प्रचार अब हुआ भगवत गीता का. प्रचार अब हुआ प्राचीन भारत में रामायण की. प्रधानता ज्यादा थी रामायण को ही विशेष आज. भी माना जाता है लेकिन प्राचीन में और. ज्यादा था तो निश्चित ही भारत पर आक्रमण. करने वाले लोगों ने उसको ठेस तो पहुंचाई.
है कहीं ना कहीं किसी ना किसी रूप से उसका. रूप भी मैं नहीं कहता कि ऐसा नहीं रहा. होगा निश्चित कुछ तो रहा होगा लेकिन उसको. इस प्रकार से बता देना कि राम जी पूर्ण. रूपेण सबके चित्त में यह प्रश्न प्रकट कर. दें कि यार ऐसा कैसे कर दिया यह तो. निश्चित ही कुछ छेड़छाड़ ही की गई है. हमारे शास्त्रों से ऐसा कई लोगों का मानना. है अच्छा इंडोनेशिया में भी क्योंकि. मुस्लिम देश है वहां पर भी वो कहते हैं कि. हमारे यहां भी राजा राम थे वो भी एक बात. आती है कि कल्प में जैसे जरूरी नहीं है कि.
राम जी इसी त्रेता में आए थे किसी कल्प के. किसी त्रेता में राम जी का पुनर अवतार भी. हुआ है और आगे के कल्पों में भी राम जी. पुनः आएंगे बस लीलाओं में थोड़ा-थोड़ा. अंतर होगा तो इस बार भारत भूमि में हुआ था. लेकिन किसी कल्प में राम अवतार उस क्षेत्र. में भी हुआ जिसमें बाली में लोग कहते हैं. कि यहीं पर हुआ था यहां रावण की नगरी थी. ऐसा था ऐसा था वहां वहां मानते हैं तो. कहीं ना कहीं अब एक बार मैं यूएस गया था. यूएस में टेक्सास में अहिरावण की गुफा है.
वहां अहिरावण बोलते हैं कि यहां पर राम जी. और लक्ष्मण जी को जब अहिरावण लेकर के आया. था तो व यहीं लेकर के आया था यहीं लाकर के. उसने रखा था तो कभी ना कभी कल्प में ठाकुर. जी की लीला वहां पर भी हुई है तो कल्प भेद. के अनुसार कई बार लीलाओं में अल ना भी. लगभग मिलते जुलते हैं थोड़े-थोड़े कभी कभी. थोड़ा बहुत कुछ अंतर होता है लीलाओं में. भी थोड़ा अंतर हो जाता है जैसे भागवत में. आप राम जी का दो अध्याय में च. वहां थोड़ा पढ़ेंगे वहां थोड़ा सा अलग. दिखाया है मानस जी में थोड़ा अलग है.
दक्षिण की पढ़ेंगे वहा थोड़ा अलग है. निश्चित रूप से यह सब कल्प भेद की वजह से. कभी-कभी भाव आते हैं अब कई बार ऐसा भी. होता है जैसे आप रामचरित्र मानस पढ़ते हैं. चिंतन करते करते आपके मन में कोई एक भाव. आया जो कहीं नहीं लिखा था आपने सोचा ऐसा. कभी हुआ तो होगा और वो निश्चित है वो हुआ. होगा किसी कल्प में तो हुआ होगा तभी आपके. भाव में आया तो कल्प भेद की वजह से कभी. बाली में इंडिया में या कहीं कहीं पर यह. लीलाओं का ऐसा दर्शन दिखाया जाता है ये.
अपने आप में बड़ा रोचक लेकिन. है कई बार तो ऐसा भी बताते हैं कि भविष्य. कैसे बता दिया किसी ने आपका हमारे ज्योतिष. शास्त्र में भविष्य कैसे बता देते हैं. क्योंकि कभी ना कभी किसी कल्प में शायद. हमारा आपका भी मिलन हो चुका है और यह सब. भी लीला पूर्व हो चुकी है इसीलिए आगे की. नियोजित है निश्चित है बस आप कर्म सुधार. के उसको थोड़ा बदल सकते हो ये इसका भी कई. जगह कहा जाता है कि शायद यह भी इसलिए.
निश्चित पता है क्योंकि यह भी किसी कल्प. में पूर्ण पूर्व में हो चुकी है तो फिर तो. पुनर्जन्म भी सत्य होगा हां तो है ही है. यकीन रखते हैं आप बिल्कुल होता है क्यों. नहीं होता है एक हमारे परिवार में ही एक. हमारी एक बहन ऐसी है जिनको जन्म के बाद. अपने पूर्व पति का नाम भी याद था और वह. बताती थी कि मुझे गोली मार के मुझे मारा. गया और मेरा वहां परिवार है वहां ढूंढो. ऐसा बाल अवस्था में जब बच्चे खिलौने से.
खिलते हैं तब वो ये सब बताते फिर बाद में. विस्मृति हो गई तो पुनर्जन्म तो भागवत में. भी लिखा है कि पुनर्जन्म होता है इसीलिए. कहा गया कि जो भक्ति मार्ग भक्ति पथ पर. चलते हैं और भगवत प्राप्ति करते हैं. पुनर्जन्म न विद्यते उनका फिर पुनर्जन्म. नहीं होता तो इसका मतलब पुनर्जन्म होता है. इसीलिए भक्ति मार्ग बनाया कि पुनर्जन्म ना. हो नहीं लेकिन जब हम लोग छोटे थे तब हम. लोग बड़े कहानी सुनते थे ऐसी कि फलाना. व्यक्ति मर गया उसको ले गए शमशान घाट तक. या कहीं पर ले गए वहां जीवित हो गया लौट. आए हैरान हो गए या जैसे पुनर्जन्म वाली.
कहानी कि उस गांव में एक चाची थी वो बता. रही थी पूरी कहानी या आत्माओं को लेकर कि. वहां पर एक आत्मा है अब जिस दौर में हम है. अब ये किससे कहानियां कम आते हैं कंपेरिजन. में जब हम छोटे थे दादी नानी साथ बैठे थे. तो क्या वह कल्पनाएं ज्यादा थी उस वक्त. यही कह लीजिए कल्पनाएं ज्यादा थी उस समय. का विचार जो था ना वो इन प्रोस्पेक्टिव पर. ज्यादा रहता था आजकल आदमी थोड़ा आधुनिक हो. गया और बहुत अभी भूत प्रेत भी कम हो गए.
भाही मुझे अब नहीं सुनाई पड़ता ऐसा डर. नहीं लगता मुझे जितना बचपन में था कि. पेशाब करने भी जाना हो बाथरूम तोत आदमी. लेके जाना पड़ता था अब भूत प्रेत भी कम हो. गए क्योंकि वे भी जानते हैं बहुत टेक्निकल. हो गया है अब कोई फायदा नहीं कुछ करने से. हां नहीं तो बड़ी एक जगह मैंने कहीं कोई. वो वीडियो वीडियो कुछ ऐसी देखी थी भूत. पेड़ उस पर बैठा था पंखे प उसने पंखा ही. ऑन कर दिया ले लटक जा. इसी तो आजकल बहुत टेक्निकल लोग हो गए. अच्छा एक और बात है. मानवी भूत बन गया है तो भूतों की आवश्यकता.
क्या है क्या हम लोगों का जीवन मानवों. जैसा रह गया है आज भी कथाओं की आवश्यकता. क्यों आज भी मंदिरों की आवश्यकता क्यों. आध्यात्मिक कथा प्रवचन करने वालों की इतनी. संख्या क्यों बढ़ रही है क्यों जरूरत है. एक भाव तो उसके प्रति कुछ और है कि लोग. बाग धन कमाने के लिए फॉलोअर्स बढ़ाने के. लिए आदि आदि करते हैं पर एक बात यह भी है. कि मानव यह भूल गया कि मानव कहते किसको. उसको मानव मानवता बताने के लिए क्योंकि हम. सब भूतों जैसा ही जीवन जी रहे हैं हम.
लोगों का सोना उठना एक महाराज जी बेचारे. आज 80 85 वर्ष के वो कहते हैं कि आजकल का. बालक उससे बोलो सुबह बेटा उठके हमारे पास. बैठोगे हां 12 एक बजे मिलना मैं 11 बजे तो. उठूंगा फिर मिलूंगा 11 बजे उठना आज के रूप. में फैशन हो गया है कहां 3:30 च बजे हमारे. दादा परदादा पिताजी लोग भी इतनी देर तक. नहीं सोने वाले थे आजकल लोगों का जीवन. कैसा हो गया है आने वाले समय में वो दू. नहीं कि लोग दिन भर सोएंगे रात भर जग और. यह अभी भी कई जगह पर बहुत मात्रा में हो.
रहा है अगर आप रेशियो नाप तो शायद रात में. उठने वाले दिन में सोने वाले ज्यादा लोग. हैं दिन में उठने वाले रात में सोने अब भी. मैं कथाएं करने जाता हूं तो लोग जो बच्चे. आते हैं कथाओ में व कहते महाराज जी हमारे. मित्र नहीं है मैंने. क्यों महाराज जी आजकल मित्र उसके हैं जो. थोड़ा बिगड़ा हुआ है जो थोड़ा खाता भी है. पीता भी है ना हो तो लोग. में थोड़ा गलत काम भी करता है अगर हम उसको. बता दे नहीं हम पीते नहीं हम खाते नहीं.
नहीं हम रात में जल्दी सो जाते हैं तो. बच्चे कहते हैं भाई तो फिर तू अपने जैसा. ही कोई दोस्त ड़ ले अब क्योंकि हमारे लिए. तो फिर उनकी प्रायोरिटी ज्यादा है तो यह. यह भी कलयुग का प्रभाव है किस प्रकार के. हम भूत हम ही बन गए तो भूतों की आवश्यकता. क्यों. होगी सही बात आपने क लेकिन आपने कई बातें. इस बड़ी महत्त्वपूर्ण म क कि दोस्ती वाली. बात जगने वाली बात सोने वाली बात चलिए हम. लोग के साथ भी है कि कई बार रात को लेकिन. सुकून रहता है काम करने में जसे हम लोग. रात भर काम करते रह जाते हैं दिन में चकर.
पकर शोर शराब उसके पीछे भी कारण है रात्रि. में सोने का विधान क्यों है क्योंकि उस. समय सारी सकारात्मक ऊर्जा आती हैं और आकर. के मानव की बुद्धि में प्रवेश करती हैं. मैंने एक कथा में एक बात कही थी किसी. व्यक्ति के सारे काम विफल हो रहे हो किसी. व्यक्ति को कोई काम नहीं कोई टोना टोटका. नहीं है एक वास्तविकता है मानवता की कोई. काम नहीं बन रहा हो उसको समझ ना आ रहा हो. निर्णय नहीं ले पा रहा हो एक महीने तक. जैसे आजकल वह चैलेंज शुरू हुए ना वह कौन.
सा चैलेंज. है1 इतने डेज का इतने मैं कह रहा हूं 30. दिन का एक चैलेंज ले ले 10 बजे के बाद. सोना उठना नहीं है और सुबह 4:30 बजे के. बाद सोना नहीं है 30 दिन तक वह यह काम कर. ले 31 व दिन वह अपने आप अनुभव करेगा अपने. विचारों में अपनी स्थिति में अपने भावों. में अपनी बोली चाली में अपने क्रोध पर. अपने अवगुणों पर कितना अनुभव उसको होगा वह. 31 दिन देख 30 दिन का य चैलेंज फॉलो कर ले.
क्योंकि रात्रि में जब हम बिल्कुल शटडाउन. मोड में होते हैं सो रहे होते हैं उस समय. कई ऊर्जा आती है आकर के हमारी बुद्धि को. सचेत करती है हमारे विचारों को सुदृढ़. करती है हमारी दूषित काओं को नाश करने का. प्रयास करती है अब हम क्या हम जागृत. अवस्था में होते हैं तो आती है तो उस समय. काम करने में मन लगता है पढ़ने में मन. लगता है बात करने में मन लगता है घूमने. में मन लगता है सब कार्य करने क्योंकि उस. समय सारी ऊर्जा भ्रमण कर रही होती है. लेकिन सुसुप्त अवस्था यदि उस समय तो वो. सुसुप्त अवस्था में आपकी बुद्धि को और. ज्यादा अच्छे से सृजन कर पाएंगी अब.
वर्किंग में उसको स्वीकार करोगे तो वह. उतना अच्छा फल नहीं दे पाएगी जितना देना. चाहिए अब एक सवाल मेरे मन में और रहा. थोड़ी देर पहले आपने कहा मंदिर जाने की. जरूरत क्यों पड़ यह सवाल बहुत लोगों के मन. में है कि जिसे उनसे पूछता हूं कि आप पूजा. पाठ करते हो हां करते हैं जहां कहीं मंदिर. र में दिखाई पड़ा सर झुका लिए भगवान कहीं. बैठे हैं जाप ले लिए कड़कड़ में राम है. कहा जाता है अयोध्या में भी चला था कि. मंदिर वही क्यों बनाना है जब पूरी अयोध्या. में राम है तो मंदिर जाना क्यों जरूरी है. क्योंकि वहां भी तो भगवान विस्थापित ही. किए गए हैं घर के मंदिर में आप पूजा पाठ.
कर ले उसे करें अयोध्या क्यों जाए वृंदावन. क्यों जाए काशी मथुरा क्यों जाए अगर भगवान. हर जगह है कड़कड़ में राम है कड़कड़ में. शिव है तो फिर घर पर कर ले या अपने मन में. ध्यान कर ले सही बात है वो उसका रूप अब. बहुत रूपों से इसको बात को बताया जा सकता. है पर इसका एक भाव यह है मैं खुद कथा में. कहता हूं कि अगर आपको अपने घर के ठाकुर जी. में और वृंदावन बिहारी लाल में अंतर लगता. है तो आपकी भक्ति श्रेष्ठ नहीं है व समान.
है हमारे वृंदावन के एक महाराज जी थे उनके. कई सारे शिष्य आते सब बिहारी जी जाते सब. एक ना एक दिन पूछा महाराज जी आप मंदिर. क्यों नहीं आते आपको मैंने कभी बिहारी जी. जाते नहीं देखा बगल में बिहारी जी है तो. कहते कि यह मेरे जो छोटी सी इसमें बैठे. हैं क्या यह बिहारी जी नहीं है इनमें और. उनमें अंतर है कोई अंतर नहीं है एक ही है. पर अब यहां दूसरी बात ये आती है तो फिर. अयोध्या काशी मथुरा वृंदावन जाना आवश्यक. क्यों है ठकुर जी वहां अवतरित हुए हैं और. आज नहीं अनादि काल पहले अवतरित हुए ना.
जाने कितने संतों ने कितने वैष्णव ने. कितने महापुरुषों ने वहां जाकर के भजन. किया है तब किया है तो ऊर्जा एं उस स्थान. पर होती हैं जिन. ऊर्जांचल प्रसन्नता होती है अभी आप यहां. से बाहर निकले दिल्ली है नोएडा है यहां पर. आपको कोई कोहनी मार दे धक्का मारे खिच पिच. हो तो निश्चित है आप परेशान हो जाओगे. लेकिन वही रामलला के मंदिर में आप जाओ. वहां जाकर के एक भले ही कितने परेशान आप. हो रहे हैं लेकिन फिर भी एक एक मन में एक. पॉजिटिविटी सी रहती है क्योंकि वहां की.
ऊर्जा हों में वहां के वातावरण में अनेक. साधकों का अनेक वैष्णव का और ठाकुर जी के. अवतरण होने की वोह ऊर्जा अभी भी विद्यमान. है हम उनसे मिलने के लिए जाते हैं अपने आप. को जैसे चार्ज तो सब कर देते हैं फोन को. लेकिन ओरिजिनल क्यों चाहिए क्यों क्योंकि. ओरिजिनल करेगा तो बैटरी जो है वो सीमित. रहेगी बैटरी जो है वो व्यवस्थित रहेगी तो. ऐसे ही सब जगह भगवान भवान है सब जगह यहां. पर भी है वहां पर भी है सब जगह हैं लेकिन.
जो ओरिजिनल जहां से भगवान का स्रोत. प्रारंभ हुआ उस स्थान पर जाकर के अपने. हृदय रूपी बैटरी को लगाएंगे तो शायद हमारी. जो बैटरी है उसकी खराब होने की क्षमता जो. है वो कुछ दिन के लिए बढ़ जाएगी मतलब कुछ. दिन लंबी चलेगी इसलिए उन स्थानों पर जाना. आवश्यक होता है जिनको हम तीर्थ कहते हैं. जिनको हम धाम कहते हैं क्योंकि वहां की. वातावरण में कई ऐसी ऊर्जा हैं जो हमारे. लिए बहुत पोषक होती है बीते कुछ सालों में. चाहे अयोध्या की बात कर लीजिए अयोध्या हाल. फिलहाल में चर्चा में थी बनारस में उज्जैन.
में सोमनाथ में और खास तौर पर वृंदावन. मथुरा में आखिरी बार जब हम लोग भी वृंदावन. गए थे तो जहां पर हम पहुंचे पुलिस वाले ने. कहा कि सर इस दिन मतया करो बहुत भीड़ होती. है पूरा शहर जाम रहता है मत आया करिए बीच. में कभी वीक डेज में आइए वीकेंड पर तो. बिल्कुल नजर मत आइए हमने कहा य भी गजब. स्थिति है कि लोग आते ही मना कर दे रहे कि. आप मत आइए फिर भी हम लोग गए तो ये सोशल. मीडिया के दौर में जो यह भक्ति बढ़ी है यह.
कितनी सही कितनी गलत क्योंकि जैसे रामलला. भी आप विराजमान हो रहे थे तो हमने राम जी. को लेकर इतने गाने सुन लिए जितना शायद. बचपन से नहीं सुने होंगे हर एक सिंगर ने. हर एक आदमी ने राम जी को लेकर सब राम भक्त. उसके पीछे एक और बात थी नरेंद्र मोदी जी. अपने सोशल मीडिया पर डाल रहे थे तो कई. लोगों ने तो रात रात में भजन बना के डाले. ता कि हमारा भी डल जाए अगले दिन सब और उन. लोग को खास तौर पर कार्ड भी आ रहा था. जिनके गाने वो ट्वीट कर रहे. थे तो यह सब बात देखिए बट ये सोशल मीडिया. वाला कितना है जैसे केदारनाथ मैं बात करूं.
केदारनाथ जब मैं गया तो वहां पर अब भीड़. चार गुना जक बहुत ही दुर्गम स्थान चलिए. वृंदावन तो बगल में ही है या बांके बिहारी. दर्शन करने हम जाते हैं बीच में खबर आई. कुछ लोगों की डेथ तक हो गई. थी जन्माष्टमी के दिन खबर आई बड़ी दुखद. खबर थी अभी भी आप जाएंगे तो चार बी से. लाइन लग जाती है बांके बिहारी के बाहर. हजारों चप्पल फेंके पड़े हैं बड़ी दुर्गम. स्थिति है तो उसमें जो ये भक्ति है ये. वाकई में भक्ति है या वो सोशल मीडिया में. एक सेल्फी है कि वृंदावन बांके बिहारी लाल. की या वो एक गाने पर जो ट्रेंड में आ गए. फॉलोअर बढ़ गए कितनी सच्चाई इसमें कैसे आप.
देखते हैं थोड़ा देखिए प्रभाव के प्रति. ज्यादा आकर्षित हो गए हम लोग अपना दिखाने. के लिए कि देखो हम यह कर रहे हैं पर. श्रीमद् भागवत में नारद जी महाराज एक बात. कहते हैं तस्मा के नाप उपायन मनः कृष्णन. में. सत किसी भी उपाय से. सही मन भगवान में थोड़ी देर को ही लग रहा. है पर लग तो रहा है ना तो यह बात कहते थे. तो मन में थोड़ा संतोष आया था चलो ठीक है. जा रहे हैं सेल्फी खींचने जा रहे हैं.
वीडियो बनाने जा रहे हैं नाचने जा रहे हैं. राधा राधा लिखवाने ही जा रहे हैं बस गोपी. बन कर के या फिर ग्वाला बन कर के डोलने के. लिए जा रहे हैं जा तो रहे हैं तो कम से कम. ना जाने से तो अच्छा है एक बात यह आती है. लेकिन दूसरी बात आती है कि कांस्टेंट केवल. इसी के लिए जाना वो फिर आपको लाभकारी नहीं. होगी कोई मां इसकी गिनती नहीं करती कि. मैंने अपने बेटे को कितनी बार प्यार किया. मैं उसको कितनी बार हृदय से लगाती हूं हम. क्यों उसको बार-बार पोस्ट कर रहे हैं कि. हमने ऐसा किया या यह किया या सोशल मीडिया.
पर वायरल होने के लिए ही वो विषय नहीं. होना चाहिए प्रेम अप प्रकट हो तो अच्छा है. प्रेम को ज्यादा प्रदर्शन कर दोगे तो. प्रेम नहीं वह आसक्ति है वो प्रेम नहीं. वोह दिखावा है तो इसलिए मेरा कभी कभी मन. होता ठीक है ऐसे तो मैं भी जाता हूं मेरे. भी फोटोस डाले जा रहे हैं कि वहां गया. वहां गया वहां गया लोग उसको भी लाइक्स कर. रहे हैं सब कुछ हो रहा है पर वो प्रदर्शन. के भाव में नहीं होना चाहिए हम तो इसलिए. भी करते हैं क्योंकि हमारे कई सारे लोग.
हमें देख कर के उनके मन में आएगा चलो हम. भी जाएं हम महाराज जी गए महाराज जी ने ऐसे. ऐसे अभिषेक किया ऐसे ऐसे दर्शन किए तो हम. भी करें पर इसके पीछे प्रदर्शन का ही भाव. नहीं होना चाहिए कि केवल सोशल मीडिया पर. डाला अभी राम मंदिर में फोन ले जाना अलाव. है अगर फोन ले जाना अलाव बंद कर दिया जाए. राम मंदिर में तो भी बहुत हद तक मात्रा. थोड़ी कम हो जाएगी भीड़ की मतलब लगभग लगभग. तीन पर लोग तो जो केवल इसी भाव से ही जा. रहे हैं उनकी भीड़ तो कम हो ही जानी है तो.
प्रदर्शन की भक्ति जब आती है ना तो वह. लाभकारी कुछ नहीं होती है उसका कोई लाभ. नहीं होता है इसलिए प्रदर्शन नहीं दर्शन. की भक्ति हो तो क्या यह बात फिर कथावाचक. पर लागू नहीं होती हम जितने आजकल हम बड़े. कथावाचक देखते हैं जो हर चीज सोशल मीडिया. के हिसाब से होती है जैसे हम ही लोग कई. मैं अपना उदाहरण ले लू कई ऐसे मैं नाम. नहीं लूंगा कई जगह में ऐसी गया जहां पर. चुपचाप गुमनामी में बैठे थे कोई पूछने. नहीं रहा था हम भी भक्त की भाव बैठे थे. फिर पता लगा फिर जब गए तो फिर ऐसा रहा कि.
पूरे टाइम हाथ पकड़ के रहे क्योंकि ये था. कि जाते ही रील शेयर हो जाएगी फोटो आ. जाएगी तो तो ये मेरे दिमाग में भी आता है. कोई बड़ा आदमी आया उसको अलग से आप बिठाते. हो उन्हीं का सोशल मीडिया पर डाल रहे हो. उन्हीं को लेकर एक जिसके आश्रम में कोई. बड़ा आदमी चला गया उसकी अलग भीड़ जा रही. है आजकल ना एक नई चीज हुई है अभी कुछ दिन. पहले सोते हुए मेरे मन में आ रहा. था आप कितने सुखी. हो यह इससे प्रभाव नहीं है इसका कोई मतलब. नहीं है आप दिखते कितने सुखी हो इसका बहुत.
बड़ा आजकल रोल चल रहा है और दिखाई देता है. सोशल मीडिया पर वह आदमी भले ही कमरे में. बैठकर रो रहा है वह बेचारा भले ही बहुत. दुखी है टूटा पड़ा है भीतर से बुरा हाल चल. रहा है उसका टेंशन के मारे कर्जे के मारे. मरा पड़ा है लेकिन वह सोशल मीडिया पर ऐसा. दिखा रहा है देखो मैं इनसे मिला मैंने. इनसे हाथ मिलाया आजकल व्यवस्था आप सुखी. कितने हो यह विशेष नहीं आप दिखते कैसे हो. दिखते सुखी हो कि नहीं इस पर व दिखावे की. दुनिया बहुत ज्यादा शुरू हो गई है सब.
लोगों को अपना दिखाने का बहुत रहता है कि. हमने देखो ऐसे किया इनसे मिले उनसे मिले. इनसे मिले ये सब चीज रहती है पर मैं कहता. हूं ठीक है कोई इन्फ्लुएंस हो जाए इतने तक. ही रखो उससे अधिक नहीं अब लोग सब कुछ. दिखाते हैं कि हम कैसे कर रहे हैं क्या कर. रहे हैं राम लला जी ऐसे दिखे राम लला जी. ऐसे राम ऐसे वृंदावन में ऐसा राधा राधा. लिखवाने वीडियो बनवा रहे हैं नाच रहे हैं. आ यह सब फिर प्रदर्शन में आ जाता है. प्रदर्शन की भक्ति वह भी तामसी मानी जाती. है वह आपके लिए कोई श्रेयष्कर नहीं होगी.
भक्ति वही अच्छी प्रेम वही अच्छा जो. गोपनीय आप कभी एक बार आप तो वैसे आप भी. बहुत फॉलोअर्स आपके भी खूब हैं एक बार मैं. भी ऐसा प्रयास करता हूं आप भी करना एक बार. बिना किसी फोटोग्राफ्स के बिना किसी. वीडियो के बिना कुछ फोटो खींचवाए एक बार. जाकर देखिएगा अयोध्या या फिर वृंदावन. दर्शन करके आइएगा कहीं अपडेट मत कर मैं. मैंने आप छोड़ दिया ये चीज नहीं मतलब मैं. एक ये दर्शकों के लिए भी कह रहा हूं एक.
बार ऐसा करके. देखिएगा तब आपको ना लगेगा कि हां पहले मैं. देखने गया था लेकिन अबकी बार शायद राम जी. ने मुझको देखा होगा अबकी बार शायद राघव जी. की नजर मुझ पर पड़ी होगी अबकी बार शायद एक. प्रकार से एक बात कह दूं तो कोई अतिस. युक्ति नहीं आज की डेट में जैसे प्राचीन. काल. में राक्षसों के शस्त्र होते थे तलवार. धनुष बाण आदि आज के रूप में शस्त्र यही है. इसके बिना जब जाओगे तब ठाकुर जी क हां अब.
ये बिना शस्त्र के आया है अस्त्र आया है. अब मैं इसको शास्त्र रूप से देख सकता हूं. तो प्रदर्शन नहीं अच्छा एक सवाल मेरे मन. में और आता है इस पर मैं मेरा ध्यान बड़ा. आकर्षित होता है वीवीआईपी सुविधा हम मुझे. व्यक्तिगत तौर पर बड़ा तराज होता है जब. मैं बाकी धर्मों को देखता हूं जैसे हमारे. यहां जहां मेरा घर है वहां पर जो दिल्ली. में अक्षरधाम मंदिर है स्वामीनारायण भगवान. का उनका जन्म स्थान है वहां वहां पर तो. गुजरात से बड़े सारे रईस धन्ना सेठ जो हैं. वह आते हैं उनकी पत्नियां बर्तन साफ करती.
हैं सब हीरे जवारा पहने हुए सेवा करते हैं. हम गुरुद्वारे में जाते हैं वहां पर. बड़े-बड़े लोग जो सिखों के हैं वो लंगर. लगाते हैं समानता है मुसलमानों में भी. देखते हैं तो आप एक बार मस्जिद परिसर के. अंदर घुसे तो आप एक व्यक्ति हैं हमारे. यहां पर बड़ा वीवीआईपी सिस्टम है आप बांके. बिहारी भी जाइए आप इनफ्लुएंशल आदमी है आप. साइड से सट से घुस के दर्शन करके आ आपको. पंडित जी बुलाएंगे आगे आइए भैया आपको अलग. चार प्रसाद दो लड्डू हनुमानगढ़ी भी जाएंगे. तो आपको ढेर सारा प्रसाद लड्डू किसी भी.
मंदिर में जाएंगे कई बार अच्छा भी लगता है. उसका फायदा हमें भी मिला जैसे मैं उज्जैन. गया तो गर्भ गृह से दर्शन मुझे हो गए. महाकाल के जल चढ़ाने का भी अवसर मुझे मिल. गया मुझे मिल गया बड़ा अच्छा लगा लेकिन जब. एक भक्त के नजरिए से मैंने सोचा तो मुझे. एहसास हुआ कि भगवान की नजर में सब बराबर. कई ऐसे मंदिर है जहां 10 हज लिए आते हैं. तो ये वीआईपी सुविधा सिर्फ हमारे धर्म में. जो है ये कितनी सही है और कितनी गलत और. इससे क्या भगवान का पुण्य मिलता होगा. देखिए भगवान श्री कृष्ण महाभारत में. जब पांडवों के यहां यज्ञ हुआ ना तो यज्ञ.
में सबने सेवा बांट ली किसी ने भोजन की. किसी ने संतों के आगमन की किसी ने दक्षिणा. वितरण की किसी ने सबको बैठाने की सबका. ध्यान रखने की सब लोग बांटते गए सेवा जब. भगवान की बारी आई बोले श्री कृष्ण आप क्या. करेंगे तो पांडव ने नहीं इनकी तो वो लगेगा. आसन लगेगा य तो उस पर बैठेंगे द्वारिकाधीश. भैया सबको दर्शन देते हो भवान नहीं नहीं. हम भी सेवा करेंगे क्या सेवा रहेगी बोले. जितने साधु महात्मा संत आएंगे सबकी पादुका.
रखने की सेवा तो श्री कृष्ण भार द्वार पर. रहे जितने संत आते सबकी पादुका संभाल करके. उनको एक जगह स्टॉक कर यह हमारे ठाकुर जी. का स्वभाव है और हम बिल्कुल विपरीत हो गए. हम लोगों को यह रहता है कि हम जरा से. श्रेष्ठ क्या हो गए कि हमको मान मिले हमको. सम्मान मिले अभी मैं अयोध्या ही गया तो कई. लोगों ने मुझसे यह पूछ लिया जबकि दर्शन की. विधा थी कि मैं पूर्व निमंत्रित था वहां. के कार्यक्रम में लेकिन मैं नहीं जा पाया.
तो मैंने केवल एक बार उनको संदेश दिया कि. मैं 28 को आऊा तो उन्होंने कहा ठीक है तो. आपको जो निमंत्रित लोगों की जो व्यवस्था. थी उससे दर्शन करा देंगे ठीक है पर कई. लोगों का मेरे पास इस बात पर बहुत प्रश्न. हुआ फोन भी आए कई लोगों ने बोले आपको. दर्शन कैसे वीवीआईपी का कोई वहां पर कोटा. बता दो कोई हमको फोन नंबर दे दो कैसे हुए. आपको कितने आगे से ले गए कितनी देर में हो. गए दर्शन समय कितना लगा आपको तो व्यक्ति. को इस बात से प्रसन्नता नहीं कि मैंने. दर्शन कर लिए पर मैंने वीवीआईपी किए कि.
नहीं और किसने करा इस बात से ज्यादा तो यह. मान सम्मान और अपने आप को बहुत विशिष्ट. मानना यह भी एक मानवता में आपके मानवता को. हनन करने वाली वस्तु है नहीं तो मेरा फिर. सवाल यही है कि क्या इस तरह दर्शन करके. जैसे मैंने भी बहुत बार किए हैं कि आप. जर्नलिस्ट होते हो लोकल रिपोर्टर आपका है. या पुजारी जो है व भी सोशल मीडिया चलाते. हैं तो कई बार नई पीढ़ी के बच्चों से आपकी. जान पहचान जान आती है सिक्योरिटी गार्ड जो. रहा मुझे किस्सा याद आता है कि मैं. केदारनाथ में रिपोर्टिंग कर रहा था और ये.
किस्सा मैं कई बार जिक्र भी कर चुका हूं. एक और लंबी-लंबी कतार थी माइनस में. टेंपरेचर चला गया था और एक लड़का नंगे. पांव मुझे मंदिर के बाहर खड़ा हुआ और. बिल्कुल ध्यान में एकदम खड़ा हुआ पूजा पाठ. करता नजर आता हाथों में कुछ प्रशाद वसाद. ले रखा होगा तो मैंने उससे के पास जाकर. पूछा मैंने कहा यार इतनी ठंड है मैंने. ग्लव्स पहन रखा है और सब अलग-अलग चीजें. मंगाई थी ठंड से बचने के लिए और तुम नंगे. पैर खड़े हो चप्पल का पर है तो उसने कहा. चप्पल हमें नीचे ही उतार थी मैंने कहा. नीचे कहां पर बोला जहां होटल था हमारा तो.
मैंने कहा किससे आए हो उसने बोला पैदल तो. मैंने कहा नंगे पैर पैदल आए उसने कहा हां. तो मैं बड़ा हैरान क्योंकि हम ठंड के टुर. रहे थे तो उसने मुझसे एक बात कही जो मैं. भूल नहीं पाया उसने कहा कि अगर मुझे केवल. भगवान शिव के दर्शन करने होते तो मैं घर. पर कर लेता मेरे घर के बगल में छोटे-छोटे. मंदिर हैं जहां पर जाता शिव मुझे केदारनाथ. के दर्शन करने थे भगवान यहां तपस्या करने. आए थे तपस्या के स्थान पर दर्शन तो एक. तपस्या के थ्रू मैं जाऊंगा वाह और मुझे.
बड़ी हैरानी भी हुई कि 22 24 साल का व. लड़का उसकी सोच ने मेरे को थोड़ी देर. सोचने पर विवश कर दिया बिल्कुल सही यह. भावना है वास्तविक दर्शन मैं ऐसे लोगों. ऐसे में क्या कहता हूं एक होता है कि. लाखों लोग केदारनाथ जी को देखने गए पर. लाखों में केदारनाथ जी ने किसको देखा. दोनों में अंतर है लाखों लोगों ने. केदारनाथ जी को देखा ये सामान्य बात है पर. लाखों में उनकी दृष्टि किस पर पड़ी विशेष. शेष है तो निश्चित है वीवीआईपी वीआईपी आप. चाहे कितने भी बड़े हो आप कितनी भी जल्दी.
में हो आप कितने भी पॉपुलर हो मैं भी कई. बार वीवीआईपी दर्शन कर लेता हूं पर उस समय. मन में एक भाव आता है कि हमने देखा. इन्होंने नहीं देखा होगा हमको क्योंकि ये. तो वो है जो अपने यहां राजाओं की कतार को. छोड़ कर के सुदामा खड़ा था उसके लिए दौड़. कर के भागते हैं उसको अपने हृदय से लगाते. हैं तो ठाकुर जी को देखना है तो आप. वीवीआईपी जाओ चाहते हो ठाकुर जी देखें तो. सामान्य बने मुझे लगता है बहुत बड़ी बात. और र हमारे तमाम दर्शक जो देख रहे होंगे. उन्हें भी तय करना होगा कि आप प्रभु को.
देखना चाह रहे हैं या आप चाहते हैं कि. प्रभु आपको देखे और प्रभु आपको देखें तो. उस लिए आपको उस तरफ जाना पड़ेगा लेकिन. श्री कृष्ण जी को लेकर एक सवाल हमेशा मन. में आता है कितनी शादी कृष्ण जी की हुई थी. 16108 ये सब शादी हुई थी बिल्कुल. निश्चित अब ये कौन है यह सुन लीजिए बस. 16108 भगवान की अष्ट पटरा निया मतलब. विशिष्ट जिनसे ब्याह हुए थे ठाकुर जी. के तो पूरी कथा तो बहुत लंबी हो जाएगी पर.
मैं एक बात बता दूं कि भगवान श्री कृष्ण. ने. 1618 कन्याओं से ब्या नहीं किया है ये. अपनी ही सृष्टि के 16108 तत्त्वों से. ब्याह किया जैसे कि अष्ट पटरा निया जो. भगवान की प्रथम है यह कौन है पृथ्वी. अग्नि पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश पंच तत्व. जिससे बाहर की सृष्टि बनी हमारा तन बना. फिर हमारे भीतर चार सृष्टि और है मन. बुद्धि चित्त और अहंकार इसमें से चित्त जो.
है यह भगवान का ही स्वरूप है जिसको हम. आत्मा कहते हैं यह भगवान का ही स्वरूप है. तो इसको हटा दे तो भीतर बचे तीन बाहर बची. पांच तो मन बुद्धि मन बुद्धि अहंकार भीतर. के पृथ्वी जल अग्नि वायु आकाश पांच बाहर. के अष्ट तो भगवान की प्रथम. पटरानी भगवान ने अपनी ही बनाई हुई सृष्टि. को केवल जै क सर जमीन तो मेरी थी बस मैंने. बाहर बोर्ड लगा दिया कि नहीं ये मेरी ही. है तो इसी प्रकार अष्ट प्रकृति भगवान की.
बनाई है बस भगवान ने ब्याह करके और. क्लेरिफाई कर दिया कि मेरे ही हैं अब बची. 16100 ये कौन है तो उपासना कांड में जितने. भी भगवत आराधना के मंत्र है वह. 16100 जैसे कि आपको पुष्प दिया पंडित जी. ने और कहा भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करो. वंशी विभूषित करा नर दवात पीतांबरा रुण. बिंब फला दात पूर्ण इंदु सुंदर मुखा. दविंद्र नेत्रा कृष्णा परम केम प तत्व हम. ना जाने पुष्प छोड़ दीजिए तो यह भगवत.
आराधना का जो य मंत्र है ऐसे 16100 मंत्र. ही 16100 रानियों के रूप में राजकुमारियों. के रूप में भोमा सुर राजा के यहां बंदी थी. उनको भगवान ने जाकर के स्वीकार किया वेद. में प्रचलित जो मंत्र हैं ये ठाकुर जी की. उपासना करते हैं भगवान से कहते हैं हम. आपके होना चाहते हैं आप हमें स्वीकार करो. तब कृष्ण लीला में भगवान उन्हीं मंत्रों. को स्त्री रूप प्रदान करे उन से ब्याह. करते हैं तो ऐसे देखा जाए तो भगवान ने. किसी स्त्री से ब्याह नहीं किया और देखा.
जाए तो भगवान ने अपनी ही प्रकृति अपने ही. मंत्रों से अपने ही समस्त बनाई हुई. वस्तुओं को केवल स्वीकार करके 16108 ब्याग. की अब एक सवाल हमारे मन में और आता है. राधा जी को लेकर कई सारी भ्रांतियां. दुनिया भर में फैली हुई है अलग-अलग तरह से. उनके रिश्तों का विश्लेषण किया आता है. अलग-अलग रिश्तों का नाम देता है क्या सच. है राधा जी कृष्ण जी की कौन थी जान पहचान. में थी रिश्तेदार थी सखा थी या. एक गोपी थी क्या न थोड़ा राधा जी की हमारे. स्पष्टता दीजिए हमें मैं एक जगह ना ऐसा.
बोलता हूं कि पॉडकास्ट जो होते हैं ना इस. सात दिन की कथा एक घंटे में सुनानी है अब. श्री जी को समझने के. लिए हमारे यहां 12 वर्ष की आयु में आए और. अब 80 वर्ष की आयु हो गई आज तक भजन कर रहे. हैं वृंदावन में अभी भी श्री जी को नहीं. जान पाए जहां व्यक्ति पूरा पूरा जीवन. वृंदावन में व्यतीत कर दे रहा है कि श्री. जी को हम समझ जाए उनको जानना मुश्किल. लेकिन उनको पाच मिनट में वर्णित करना है. तो कैसे करें.
देखिए श्री राधा जो है भगवान की ही अलादी. शक्ति है ठाकुर जी का ही तत्व रूप श्री. किशोरी जी के रूप में प्रकट हुआ भगवान की. सब लीलाएं जो है नाय हमको इन्फ्लुएंस करने. के लिए होती है हमको समझाने के लिए हमको. बताने के लिए हमको सद् मार्ग दिखाने के. लिए होती है भगवान ने अपनी ही अहला दिनी. शक्ति को वृषभान जी और कीर्तिदा मैया के. यहां रूप राधा श्री किशोरी जी के रूप में. भेजा व कोई अलग नहीं थी उनसे ठाकुर जी का.
ही स्वरूप थी मैं कथा सुनाता हूं कि जब. देवासुर संग्राम. हुआ समुद्र मंथन हुआ समुद्र मंथन में जब. अमृत प्रकट हुआ देवताओं दैत्यों में हुआ. कौन पहले पिएगा तो भगवान ने पहले ही. देवताओं से कहा था कि दैत्य जो कहे उनको. करने देना तुम लोग विवाद मत करना दैत्य. लेकर अमृत कलश भाग गए भगवान के पास पहुंचे. बोले आप तो कह रहे थे जो कहे दे देना अब. ले गए अमृत वो लोग अब हम क्या करें भगवान.
बोले धैर्य रखो हम आते हैं अभी तो भगवान. मोहिनी बन कर के आए इतने सुंदर बन के आए. इतने सुंदर बन के आए कि महाराज उनके रूप. माधुरी पर सब मोहित हो गए दैत्यों ने तो. अमृत कलश हाथ में दे दिया बोले तुम ही. पिलाओ तुम्हारे हाथ सेही पिएंगे हम तो हम. अपने आप नहीं पिएंगे तुम जितना जितना. जिसको पिलाओगे उतना पिएंगे तब मोहिनी. भगवान ने कहा ठीक है सुनो गाढ़ा गाढ़ा. तुमको पिलाएंगे पतला पतला ऊपर है अमृत. पहले देवता को पिला देते इस प्रकार वह. पूरा हुआ था तब कहते हैं कि भगवान का रूप.
इतना सुंदर था कि देवता भी उनके रूप पर. मोहित हो गए सब देव मोहित हो गए महादेव को. भी आसक्ति से हो गई वाह कितने सुंदर जो. महादेव काम को भी नष्ट कर देते हैं उनको. भी लगा की कितनी सुंदर. है पर एक देव थे जो आसक्त नहीं हु वो थे. सूर्य सूर्य के प्रति हृदय में वात्सल्य आ. गई सुंदर रूप देख कर के सबको तो लगा ऐसी. पत्नी पर सूर्य को लगा ऐसी पुत्री ऐसी. पुत्री का मैं कन्यादान करूं ऐसी पुत्री.
का मैं पिता कहला ह यह मेरा सौभाग्य होगा. उस भाव पर भगवान रीज गए बोले कि सूर्य तुम. तुम्हारे भाव से हम बड़े प्रसन्न बताओ. सबको लग रहा है कि हमसे ब्याह हो जाए पर. तुमको लग रहा है कि हम तुम्हारी पुत्री बन. जाए निश्चित होगा द्वापर आ रहा है हम. कृष्णा अवतार होंगे ना अवतार तो हमारा. पुरुष रूप में होगा पर तुम्हारे मन की. भावना की पूर्ति के लिए और प्रेम की. प्रधानता को स्थापित करने के लिए हमारा ही. अंश री ही अलादी शक्ति तुम्हारे यहां. पुत्री रूप में प्रकट हो वही सूर्य.
वृषभानु बन कर के आए और उनके यहां मोहिनी. को भी आसक्त कर ले अपने ऊपर ऐसा रूप धारण. करके भगवान किशोरी जी के रूप में प्रकट. हुए तो वे अलग नहीं है ठाकुर जी से ठाकुर. जी की ही लादने शक्ति है उनके साथ ठाकुर. जी ने निष्काम प्रेम किसको कहते हैं. जिसमें कोई कामना नहीं होती ऐसा प्रेम. वृंदावन में स्थापित किया अब लोग कहते हैं. कि उनसे ब्या क्यों नहीं कि ब्याह वो संभव. नहीं है वो ठाकुर जी का ही स्वरूप है अब.
वृंदावन के गर्ग समता आदि ग्रंथों को देखो. वहां ब्याह हुआ है ठाकुर जी का किशोरी जी. के साथ परंतु श्रीमद् भागवत आदि विशिष्ट. ग्रंथों में ठाकुर जी का उनसे ब्याह का. कोई संबंध नहीं बताया क्योंकि वो भगवान का. ही स्वरूप है और दूसरी बात ब्या के लिए. शास्त्र में आज्ञा करते हैं ब्याह उससे. होता है जो आपसे विलग हो जो आपसे विपरीत. हो जो आपसे परे हो उसके स्वीकारी करण को. ब्या कहते हैं जो आप ही हो जो आपसे ही है. जो आपका ही है उससे ब्याह नहीं होता श्री. जी ठाकुर जी के ही स्वरूप है इसलिए उनसे.
विवाह नहीं बहुत खूबसूरती से आपने डिफाइन. किया मीरा जी कौन थी मीरा भगवान की भक्त. हैं और यह पूर्व जन्म की माधवी नाम की एक. गोपी है जिनको अपनी मां की आज्ञा से ऐसा. भाव हुआ था कि भगवान को मुख नहीं दिखाना. भगवान की सखा से इनका ब्याह हुआ था पूरा. मेरा चरित्र है तो माधवी गोपी जय थी. द्वापर में तब इनकी मां ने कहा कि सुन तू. ब्याह करके तो जा रही है लेकिन वह कन्हैया.
को मुख मत दिखाइ हो क्यों बोले तू अपना. मुख दिखावे गी तो व देखते तो को अपना कर. लेगा तेरो पाति व्रत धर्म नष्ट हो जा ब्रज. भाषा में बोल ले तो माधवी ने अपनी मां को. वचन दिया था कि मैं ब्रज में कृष्ण को मुख. नहीं दिखाऊंगी व जानती नहीं थी कृष्ण कौन. है जब माधवी आई ब्याह करके भगवान के सखा. से तब माधवी का रूप देखने के लिए ठाकुर जी. उसकी पालकी में बैठ गए पालकी में बैठ खूब.
हाथ पाव जोड़े भाभी जी ने मुक्तो दिखाई दो. लेकिन माधवी ने अपना मुख नहीं दिखाया कस. के घूंघट पकड़ लिया बोले मां को वचन दिया. इसको तो मुख दिखाना ही नहीं तब ठाकुर जी. ने शाप दिया बोले तुम तरस होगी मेरा मुख. देखने के लिए माधवी बोली हां चलो जा मु को. तेरो मुख दे कोई मन ना है मैं तो अपने पति. के संग प्रेम से रहूंगी भ ठीक है उन्हीं. श्री कृष्ण ने इंद्र के मान मर्दन के लिए. गिरिराज पर्वत को को अपने बाम हस्त की. कन्ने उंगली पर धारण किया सब बृजवासी थे.
तो जब सबने कहा अरे अरे देखो नंद के लाला. ने पर्वत उठा लिया तो माधवी ने भी देखा. इतना विशाल पर्वत 21 किलोमीटर लंबा चौड़ा. एक बालक ने कैसे उठा लिया दूर खड़े थे. ठाकुर जी तो माधवी बोली आज देखूं तो सही. है नेक स स लाला या में इतनो बल है जैसे. ही वो ठाकुर जी को देखने पास गई भगवान का. शप था कि तुमको हम देखेंगे नहीं ठाकुर जी. देखे एक क्षण के लिए और ऐसे जैसे आंखों. में पानी आ गया हो नहीं दि. खूब उसने मुख पहुंचा खूब पहुंचा लेकिन. ठाकुर जी दिखे ही नहीं भगवान से रह वेदना.
करने लगी बोले मैं समझ गई आप तो परम तत्व. आप तो ईश्वर हो आप तो अवतार के लिए पधारे. मैंने क्यों अपनी मां की बात मानी क्यों. आपको मुख नहीं दिखाया भगवान अब मुझे मुख. दिखा ठाकुर जी बोले अब यह पीड़ा ही. तुम्हारे भीतर ऐसी भक्ति को जन्म देगा. जिससे लाखों करोड़ों लोग भक्ति के मार्ग. के अनुगामी बनेंगे अब इस पीड़ा में तुम. अपना पूरा जीवन तीत करो अगले जन्म में यही. पीड़ा पुनश्च उद्भव होगी तुम्हारे रूप.
तुम्हारे चित्त में तब तुम मीरा नाम से. जानी जाओगी पूरा जीवन व्यतीत करोगी संतों. की आज्ञा से जियोगी तब अंत में. द्वारिकाधीश के रूप में मैं तुमको प्राप्त. होा और मुझ में ही तुम विलीन हो जाओ यह. मीरा बड़ा खूबसूरत आपने बताया अब हाल. फिलहाल में एक फिल्म आई थी कुछ साल पहले. जिसमें एक संवाद था वो संवाद हमको याद आया. आपकी बात सुनते. हुए एक बड़ी रो उनका एक स्टेटमेंट था कि. पत्नी कितनी भी अच्छी हो लोग प्रेसी को ही. याद रखते हैं श्री कृष्ण का वो रामलीला.
फिल्म थी उसमें संवाद का जिक्र किया गया. है और उसी संवाद में इस बात का जिक्र है. कि कितनी भी पत्नी कमिटेड हो लोग प्रियसी. को याद करते हैं और फिर वो कहती है श्री. राधे कृष्णा ने भी यही कहा था रुक्मिणी और. उनके संवाद का वो जिक्र करती हैं जी. रुक्मिणी जी को लेकर यह बात फिर आती वहां. पर कि श्री राधे हर कोई करता है पत्नी. उनकी रुक्मिणी जी थी हम भी आते हैं तो हर. आदमी श्री राधे श्री राधे स्वयं रुक्मिणी. जी भी श्री राधा करती थी ये द्वारिका लीला.
में अभी द्वारिका में कथा थी वहां मैंने. रुक्मिणी जी का ही संवाद बताया एक्चुअली. क्या है कि हमारे यहां लोग बाहर बाहर से. लीला को देख कर के उसको उसका रूप नहीं समझ. पाते आप कभी ब्रज आइए या वृंदावन वीथि हों. में ब्रज की लीलाओं को सुनिए तब आपको पता. चले कि रुक्मिणी जी ने भी जब किशोरी जी का. भाव सुना ना और जब किशोरी जी से पहली बार. मिली वो राधा रानी से तो रुक्मिणी जी बोली. मुझे वापस जाना ही नहीं है द्वारिका मुझे. आपके संग ही रहना मुझे आपके पास ही रख लो.
ऐसा रूप था श्री राधा रानी का वह सामान्य. कोई प्रियसी नहीं है ठाकुर जी की व प्राण. है ठाकुर जी का व प्राण स्वरूप है उस. प्रेम को हम आज के रूप में तो कहीं भी. नहीं घटा सकते वो बात अलग है कि वोह उस. पिक्चर में ऐसा कुछ कहा गया पर किशोरी जी. और ठाकुर जी के प्रेम को आज के किसी भी. परिपेक्ष में आप नहीं ले सकते वो ले ही. आएगा ही नहीं आज के भाव को आप प्यार कह दो. प्रेम तो कोई इतना स्वच्छंद इतना पवित्र.
आज का प्रेम है भी नहीं तो वहां जो बात. कही गई है और उसमें भी राधा रुक्मिणी को. जो कंपैरिजन किया गया कभी रुक्मिणी जी का. चरित्र सुनिए रुक्मिणी जी भी राधा रानी की. शिष्य थी उन्हीं का ही चिंतन करती थी. रुक्मिणी जी को जब श्राप लगा दुर्वासा जी. का कि 12 वर्ष का वियोग होगा तुमको और. तुमको जाना पड़ेगा दूर रहना पड़ेगा ठाकुर. जी से तो 12 वर्ष तक रुक्मिणी जी को. संभाला ही श्री जी ने था किशोरी जी ने था. बहुत गुण विषय है बहुत गहरी चिंतन चर्चा. है पर यही है कि आज के प्रेम में आप राधा.
कृष्ण के उस भाव को घटा नहीं सकते ठीक है. अयोध्या में श्री रामलला का भी प्राण. प्रतिष्ठा हुई आप गए आपने दर्शन भी किए कई. लोगों ने ऐसा कहा कि जो मूर्ति बनाई गई थी. यान कि जो शिल्पकार भी थे जिन्होने बनाया. था उन्होंने कहा कि जब प्राण प्रतिष्ठा. हुआ उसके बाद रामलला अलग नजर आ रहे थे. आपने महसूस किया तस्वीर और साक्षात दर्शन. करहा उसका पूर्व जो तस्वीर आई थी जिसमें.
पहले वायरल हो गई थी कि राम जी ऐसे दिख. रहे हैं उसके बाद जब वह प्रत्यक्ष. विराजमान हुए उसका रूप अलग ही था वो अलग. ही जैसे घर का बालक सामान्य है लेकिन. दूल्हा बन जाए तो अलग ही हो जाता है उसका. रूप ही उसमें भाव ही अलग आने लग जाते हैं. पिता बन जाए तो और अलग हो जाता है और आगे. को बढ़े तो और अलग रूप रूप बदलते रहते हैं. ठीक वैसे ही जब आप वेद मंत्रोच्चार अभी. मैं अयोध्या गया तो मैंने देखा कि चार.
द्वारों पर कुछ ब्राह्मण बैठे थे और. अलग-अलग वेदों के ध्वनियों से पाठ कर कर. के वहां पर वेद मंत्र उच्चारण कर रहे थे. क्यों उस भूमि को उस क्षेत्र को उस प्राण. प्रतिष्ठा के भाव को और तेजोमय बनाने के. लिए वह सब किया जा रहा है एक मैंने जब मैं. दर्शन करने गया तो एक ब्राह्मण देवता साउथ. के ही थे वो राम जी से एक एक छड़ी का. स्पर्श करा कर के और कुछ बहुत घंटों तक वो. किसी मंत्र का उच्चारण कर रहे थे ये सब.
इसलिए है कि श्री रामलला विराजमान हुए हैं. और अभी तक सब उनको मूर्ति मूर्ति मूर्ति. बोलते है मूर्ति बोलना एक प्रकार से अपराध. माना जाता है हमारे शास्त्रों में मूर्ति. नहीं है वो साक्षात ठाकुर जी हैं और उनके. अंदर साक्षात तत्व प्रकट हो उसके लिए ये. सब भाव किए जा रहे हैं और वह प्रकट हो. चुका है इसीलिए हमको ऐसा अनुभव हो रहा है. कि इनके नेत्र तो वास्तविक हैं ये तो अभी. पलक झपक के थोड़े मुस्कुरा रहे हैं आप कोई. वृंदावन में हमारे श्री राधा रमन लाल जी. को देखें आप विश्वास नहीं मानेंगे जिस दिन.
वो बहुत खुश होते हैं उनके दांत दिखते हैं. और वो फोटोग्राफ्स में स्पष्ट भी होते हैं. आप गिन भी सकते हो आप सुबह का दर्शन करो. फोटो खींच के ले जाओ ठाकुर जी आपको. देखेंगे आप जूम करके देखो दांत नहीं. दिखेंगे शाम के फोटो में आप देखोगे तीन. दांत दिख रहे हैं दो दांत दिख रहे हैं चार. दांत दिख रहे हैं पांच दांत दिख रहे हैं. क्यों क्योंकि वो एक बार स्थापित होने के. बाद में और नियमित रूप से जब उनकी सेवा. होती है तो वो मूर्ति नहीं है साक्षात. ठाकुर जी विराज में. तो निश्चित है कि जब तक उनकी प्राण. प्रतिष्ठा नहीं थी वो मूर्ति थी पर अब. वहां राम लला ही है उनको मूर्ति भी नहीं.
कहना चाहिए और कोई कहे भी ना कि देखो. मूर्ति कैसे लग रही तो उसको रोकना भी नहीं. मूर्ति नहीं भाई साक्षात ठाकुर जी हमारे. साक्षात राम जी है तो पहले वो मूर्ति रहे. होंगे पर वो साक्षात है साक्षात राम जी. विराजमान है इसीलिए देखो आप तो वही के ही. है अचानक से लक्ष्मी भ्रमण कर रही है पूरे. अयोध्या में ऐसा लग रहा है नृत्य कर रही. है लक्ष्मी घर घर में सबके चित्त में. बुद्धि में क्यों क्योंकि सा सात लक्ष्मी. पति विराजमान हो और विराजमान होने के बाद. ही ऐसा क्यों हुआ रमा क्रीड मभु रप भागवत.
में वर्णन आता है कि ब्रज की स्थिति क्या. थी बोले कि जैसे ही भगवान कृष्ण का अवतरण. हुआ ब्रज में तो बोले लक्ष्मी प्रकट नहीं. हुई रमा क्रीड बोले क्रीड़ा करने लगी रमा. यानी कि लक्ष्मी नंद बाबा कहते खूब लुटा. रहे थे लुटा लुटा करके लुटा लुटा करके थक. गए लेकिन उनकी तिजोरी खाली नहीं हो रही. क्यों साक्षात रमा बैठ गई तो प्रकार से. अयोध्या का रूप बदल जाना वहां के लोगों के. भाव बदल जाना वहां की गलियां बदल जाना. वहां का माहौल स्थिति बदल जाना इस बात का.
प्रमाण है कि साक्षात रामलला है वो मूर्ति. नहीं है ये भी आपने बड़ी सुंदर बात कही. बागेश्वर बाबा आपके मित्र हैं जी हमने. बड़ी सारी तस्वीरें आपके साथ देखी जी उनके. गुरु जी से मिला मैं उनसे हमने सवाल पूछा. एक जी राम भद्राचार्य जी से ईश्वर उनको. लंबी उम्र दे सेहत उनकी बेहतर हो उनसे. हमने सवाल पूछा हमने कहा बाबा आप चमत्कार. पे यकीन करते हो हम कहे हम नहीं करते हम. तो हमने कहा फिर जो लड़का करता है वो हम. तो कहे कुछ होगा फिर हमने पूछा कि कई लोग.
उनको लेकर ये कहते हैं जैसे आप मैं आपसे. बात कर रहा हूं तो आपसे बात करने में मुझे. शास्त्रों के बारे में धर्म के बारे में. बड़ी जानकारियां मिल रही है भद्राचार्य जी. के पास जाता हूं वही जानकारियां मिलती है. बागेश्वर जी को लेकर कई लोग ये आरोप लगाते. कि चमत्कार की बातें ज्यादा होती जो उनके. गुरु भी डिनायर हैं हालांकि वो कहते हैं. कि वो एक बहुत अच्छे शिष्य हैं शिष्य की. भक्ति है और इसी वजह से उन पर ईश्वर का. आशीर्वाद है आप उन्हें कैसे देखते हैं. बाबा बागेश्वर को मेरे बहुत अच्छे मित्र.
हैं और मेरे कैसे मित्रता हुई मित्रता तो. अब कैसे हुई है मैं कैसे बताऊं कब हुई दो. साल पहले हुई आप उनसे छोटे हैं साल एक. महीने छोटा हूं हा वो एक महीना बड़े हैं. पर पूर्ण अधिकार जमाते हैं एक महीना बड़े. होने का. तो मित्रता ऐसे थी कि उनके य एक बहुत बड़ा. यज्ञ था और उस यज्ञ में वे आमंत्रण भेजा. था उन्होंने कि आप आइए क्योंकि जब शायद. उनको कोई जानते नहीं थे तब भी उन्होंने.
एकद बार देखा होगा कथा करते हुए मुझे सबका. भाव रहता है कि सबसे मित्रता हो मिलना. जुलना हो उनकी तरफ से एक आमंत्रण आया तो. मैं किसी कारण से नहीं जा पाया तो फिर. हमारे संस्कार आस्था के जो सीईओ हैं. संस्कार चैनल के उनका मेरे पास फोन आया. बोले महाराज जी एक बार चलिए मैंने कहा मैं. कैसे जाऊं बोले नहीं नहीं एक बार आप चलिए. तो सही वहां अच्छा लगेगा आपको मैंने कहा. ठीक है मेरे पास समय है मैं चलता. हूं तो निश्चित मानिए मैं उनका प्रभाव. देखने नहीं गया था और मुझे ये भी नहीं पता.
था आपको संदेह था पहले थोड़ा तो सबको ही. रहता मैं तो उनको खुद बोलता हूं कि महाराज. जी आपसे पहली बार मिलने में सबको संदेह. होता ही है तो इसलिए कोई आपको परखने आए तो. आप नाराज मत हुआ करो मैंने क हो सकता है. भाई सबको सबके लिए नई बात है मैंने कि मैं. भी परखने तो नहीं पर मैं देखने आया था है. क्या लेकिन सत्य बता रहा हूं मैं जब मैंने. पहली बार गाड़ी से मैं उतरा लाखों लोग थे. वहां बहुत बड़ा उत्सव. था और वह सामने खड़े मेरा वेट कर रहे थे.
और लाखों लोग खड़े हो गए उनसे मिलने के. लिए लेकिन वो बिल्कुल सहज भाव में और जैसे. ही मैं गया तो मुझे हृदय से लगाया और मतलब. उनका स्वभाव बहुत अच्छा था बहुत डाउन टू. अर्थ बहुत हसमुख बहुत मतलब स्टारडम इतना. होने के बाद भी कहीं भी अहम नहीं है बहुत. सरलता हम बहुत जल्दी समझ जाते हैं लोगों. को जरा सी पॉपुलर मिलने पर उसकी हालत क्या. होती है दिख जाता है लेकिन उनके अंदर वो. मुझे नहीं दिखा वो बहुत स्थिर थे अपनी.
सहजता पर सरलता पर और ऐसा नहीं सबके सामने. कमरे में भी एकांत में भी फोन पर भी आधी. रात में भी अब तो मुझे और समझ आ गया उससे. मैं बहुत प्रभावित हुआ फिर उसके बाद उनका. व्यवहार जो था वह बहुत अच्छा लगा वो देख. कर के मुझे और थोड़ा प्रेम बना फिर इतने. व्यस्त इतने ज्यादा बिजी होने के बाद भी. वो ख्याल रखते हैं कभी मैं जाता हूं उनके. पास से लौट के तब तक मैसेज करेंगे जब तक. मैं पहुंच ना जाऊ पहुंच गए भैया मैंने ठीक. है अच्छा है फिर कभी भी कोई विषय होगा तो.
ऐसा नहीं कि मैंने जो निर्णय लिया वह सत्य. मैं एक सत्ता है वह अकेले अपने बल पर बने. आज जो भी पर सबसे राय लेंगे आप बताइए भैया. क्या करें आप पिताजी महाराज से पूछो. गुरुदेव की क्या आज्ञा है वैसा करना बहुत. डाउन टू बहुत सहज अब बात आती है उनके जो. चमत्कार की जो असल विषय है जिसको लेकर. लोगों के. आप भी तो मेरी भी जिज्ञासा है मैं धार्मिक. व्यक्ति हूं जैसे मैंने कहा ना आप आए कई.
बार जैसे मेरे साथ रहा मैं आपको उदाहरण. देता हूं मैंने कई सार क्योंकि मैं भी. धार्मिक व्यक्ति हूं मैं भी रामलला की. जन्मभूमि से आता हूं संसार के सारे जितने. तीर्थ स्थान है वहां जाता हूं बिना स्नान. के खाना नहीं खाते सारी चीजें हम भी करते. हैं कई बार बाबा बागेश्वर से मुलाकात का. मौका रहा लेकिन लोगों ने कहा आपको जाकर. चरणों में बैठना होगा मैंने कहा मैं बैठ. जाऊंगा लेकिन मुझे यकीन तो हो जाए अगर वो. शक्ति ऐसी है जिस पर मेरा विश्वास आता है. तो मुझे क्या दिक्कत है मैं भद्राचार्य जी. के पास गया उनसे मिला मुझे एहसास था उनकी. बातों से उनमें प्रभावित था तो कई बार आप.
भी चाहते हो कि आपको भावना समझ में आए तो. इसीलिए मैंने सवाल आपसे पूछा क्क आपके. मित्र हैं आपसे ब और आप खुद आध्यात्मिक. व्यक्ति हैं जी तो देखिए एक प्रसंग मैं. आपको छोटा सा. सुनाऊ भगवान कृष्ण जब कंस को मारने के लिए. जा रहे थे तो अक्रूर जी उनको लेकर जा रहे. थे तो ठाकुर जी को देख लिया सुंदर है सब. कुछ है पर क्रूर जी के मन में एक संशय बना. हुआ था ये कंस को मार पाएंगे कंस के अंदर.
हजारों हाथियों का बल है हम य इतना कोमल. सा बालक इतने सुंदर इसके चरण इतना प्यारा. स्वरूप इतना सबका लाड़ला बृजवासी सब रो. रहे हैं तीन दिन के लिए जाने की कह की तो. इतने व्याकुल हो गए यह कंस का बाल भी. बांका कर पाएंगे ठाकुर जी पीछे बैठे बैठे. समझ गए कि बोले कि अक्रूर जी को संशय हो. रहा है मन में हम एक जगह अचानक अक्रूर जी. ने रथ रोका रथ रोक कर के अक्रूर जी बोले. मैं थोड़ा यमुना जी में स्नान कर लेता हूं. भगवान बोले हा जाओ करो अक्रूर जी बिल्कुल.
सहज हो गए वो उनको विश्वास हो गया कि यह. बालक कंस को मार नहीं बल्कि मुझे तो लगता. है इसको बचाना पड़ेगा कंस से चंचलता इतनी. उनमें ठाकुर जी में जैसे ही अक्रूर जी. महाराज ने यमुना जी में डुबकी लगाई वही. रूप वही स्वरूप वैसी ही आकृति शंक चक्र. गदा पदम धारण करके उनको यमुना जी के भीतर. दिखाई दी और शेष नाग पर पौड़े हैं ठाकुर. जी जब अक्रूर जी ने वह दृश्य देखा तुरंत. बाहर आए बाहर आकर के जब अपने रथ पर देखा.
तो वही चंचल बालक इधर से उधर कूद रहे हैं. फुदक रहे हैं उछल रहे हैं सब क्रिया कर. रहे हैं फिर दोबारा भीतर जाकर देखा तो फिर. से वही रूप बाहरा करके देखा तो वही चंचल. बाल तीसरी बार जब भीतर देखा तो कुछ नहीं. दिखा बाहर देखा तो वही ठाकुर जी चतुर्भुज. रूप में दिखाई. दिए लेकिन एक मिनट के बाद वह सब ओझल हो. गया कुछ भी नहीं था यह बात मैंने क्यों. बताई. कभी-कभी ठाकुर जी ने भी किसी के चित्त में. अपनी सत्ता को विशिष्ट करने के लिए.
कभी-कभी चमत्कार. दिखाया तस्मा केना मैंने अभी एक श्लोक. बोला था कि किसी भी उपाय से मन भगवान में. लगना. चाहिए कहीं वह प्रवचन का माध्यम ले लेता. है कहीं वह तीर्थ यात्रा दर्शन का माध्यम. ले लेता है कहीं वह संगति का माध्यम ले. लेता है कहीं पर चमत्कार का माध्यम अगर आज. मैं कहता हूं चमत्कार विशिष्ट नहीं होता. है चमत्कार श्रेष्ठ नहीं होता चमत्कार. पर निर्भर भी नहीं रहना चाहिए मैं खुद. नहीं रहता हूं मैं खुद भी अपने कर्मों पर. ध्यान रखता हूं पर उस चमत्कार से यदि किसी.
को भगवत विश्वास सुदृढ़ हो रहा हो व. चमत्कार बुरा नहीं है आपने महसूस किया. उनके साथ रहते बिल्कुल किया क्या किया कोई. अनुभव में साझा कीजिए जैसे. कि हम मैंने अपने पर्सनल जीवन की तो मैं. ज्यादा उनसे ना तो बात करता ना पूछता वो. बताते भी तु हमारे रहने दो देख लेंगे हम. जो होगा कभी कभी बोलते है आओ आपका पर्चा. बना नहीं मुझे नहीं बनवाना है आपके हमारी. मित्रता बहुत है पर मेरे भक्ति मार्ग में.
कई बात उन्होंने ऐसी बताई जिनकी मुझे. आवश्यकता थी और जो मैं विचार करता था और. जो मैं चाहता था हो और वो हुई जैसे मेरे. ठाकुर जी की सेवा के प्रति हो चाहे मेरे. भक्ति मार्ग कथा जगत के प्रति हो किसी. कारण से बीच में ऐसा भाव व्यासपीठ के. प्रति कुछ आया था तो उन्होंने मेरे को एक. बात मैं गया उसी भाव से था कि मैं महाराज. जी से पूछूंगा क्या करना है तो उन्होंने. मेरे से एकही मैंने बोला नहीं उससे पहले. वो मुझसे बोले या तो व्यासपीठ छोड़ दीजिए. या व्यासपीठ के लिए सब कुछ छोड़.
दीजिए मैंने उनसे कुछ कहा नहीं था मैंने. बस हाथ पकड़ा मेरे आंख थोड़ी सजल हो गई. मैंने कहा धन्यवाद महाराज जी तो दोनों. परिपेक्ष हैं उनके बालाजी की कृपा है उन. पर हम और यदि इस कृपा से वो आज के आप उनके. सा अभी मेरी कथा है उनके एक से 7 मार्च तक. जो वो कन्या विवाह करते हैं शिवरात्रि पर. मेरी कथा है वहां पर हमें भी नहीं होता. दीजिएगा आप हां निश्चित पधार हम कार्ड.
नहीं लाए लेकिन वैसे देते अरे आप हम तो आप. जरूर आइए वहां आपको मिलवांगी हां हां मुझे. बड़ी तमन्ना है मुझे वो महसूस करना है. क्योंकि देखिए मैंने कहा ना कि मैं वो. व्यक्ति हूं जो ईश्वर में विश्वास करता है. लेकिन मैं कई सारी चीजों को लेकर सवाल भी. करता रहता हूं और सवाल करना भी जरूरी है. कई बार मैंने आध्यात्मिक व्यक्ति में रहा. तो बहुत सारी चीजें जसे हम टीवी में थे. हमें एक लड़की आई सुहानी जो हमारे दिमाग. पड़ती थी बाबा बागेश्वर को मानने वालों की. संख्या था है बहुत बड़ी लोगों में एक.
भक्ति है और उन्हें मानते हैं और मैं भी. उसे महसूस करने आता हूं हालांकि कई बार. क्या होता है जैसे हम जब हम छोटे थे तो. आशाराम जी थे आपको याद होगा बड़ी असंख्य. संख्या थी लोगों को मानने की मैंने वो दौर. भी देखा है जब लोग घरों में उनकी. मूर्तियां रखते थे अभी भी कई घर ऐसे हैं. जहां पर उनकी तस्वीर रखी जाती है फिर एक. ऐसा मामला आया जिसने बहुत सारे क्वेश्चंस. किए फिर कई सारे साधु संतों के साथ. कहानियां आई. जिसने मन में संदेह पैदा किया तो वह संदेह. और भक्ति के बीच में जो एक सवाल जवाब होते. हैं मुझे लगता है कि वह अपने आप से भी.
जरूरी एक बात नॉर्मल सी कहूंगा विश्वास को. सुदृढ़ करने के लिए चमत्कार का आश्रय आप. ले लीजिए वह एक आद बार. लेकिन व्यक्ति का फिर स्वभाव भी देखिए. प्रभाव तो उनका केवल यह विश्वास के लिए कि. हा यह कुछ है वो हो जाएगा पर उसके बाद में. एक व्यक्ति का जो स्वभाव है उस पर मैं. आपको कहूंगा उस पर जरूर दृष्टि डालिए. क्योंकि प्रभाव तो उनका आपको आकर्षित कर. ही लेगा मैं इसमें उनका कोई पक्षधर नहीं.
हूं है उन पर बालाजी की कृपा पर उससे भी. ज्यादा मुझे श्रेष्ठ जो जिसकी वजह से मैं. उनको इतना प्रेम करता हूं या मेरा उनका. प्रेम है वह उनका स्वभाव है स्वभाव बहुत. अच्छा है व्यक्ति अपने स्वभाव को नहीं सजा. पाता प्रभाव तो सब बना लेते हैं प्रभाव तो. रावण का भी था प्रभाव तो कंस का भी था. बल्कि भगवान कृष्ण और राम से ज्यादा. प्रभावशाली थे ये लोग लेकिन स्वभाव नहीं. था तो वो स्वभाव अगर कोई व्यक्ति मेंटेन. करता इतना सब कुछ होने के बाद भी मुझे. लगता है कि वह सीखने का केंद्र बिंदु है.
जी तो इसलिए मैं ज्यादा उनके प्रभाव की. वजह से उनका मित्र नहीं हूं उनके स्वभाव. की वजह से हूं प्रभाव आप देखिएगा लेकिन. फिर स्वभाव को भी दर्शन कीजिए ठीक है. क्योंकि हम अंतिम तरफ बढ़ रहे हैं गौ सेवा. को लेकर एक सवाल मेरा हमेशा मन में था हम. लोग घर से निकलते हैं तो माता जी कहती है. एक रोटी जा गाय को खिलाओ या पहुंचते हैं. तो कहते हैं एक रोटी खिला दो पैर छू के. चले जाओ ये बड़ा बचपन से मानते आए हैं 33. कोटि देवी देवता वहां निवास करती हैं. सुनते आए हैं क्या हो गौसेवा में क्या ऐसा.
है जो मैं एक अनुशासन पर्व है महाभारत का. उसका एक कथा सुना देता हूं उससे आपको पता. चल जाएगा यही प्रश्न जो आप कर रहे हैं ये. युधिष्ठिर जी ने पूछा था भीष्म पितामह से. गौ की महिमा क्या है तो भीष्म पितामह कहते. हैं मैं एक छोटी सी कथा सुनाकर आपको पूर्ण. करूंगा गलती से गाय का स्पर्श करने का. महत्व क्या होता वो समझ लो तो समझना कि. भाव से छुओ ग तो क्या होगा तो भीष्म पिता. मा कहते हैं.
कि. अधिकतर यहां से प्रस्थान के बाद मृत्यु के. बाद जाने वालों की संख्या नरक में ज्यादा. है नरक ज्यादा जाते हैं. लोग पर और नरक का मार्ग दुर्गम भी सबसे. ज्यादा है शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि. हमारे गले में फंदा बांध कर के कितने लाख. किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ते. हैं यमदूत और कितनी दूर नरक इतने रास्ते. में पहाड़ आते हैं नदियां आती हैं सब जगह. ठोकर खिलाते हुए हमको लेकर जाते हैं इतनी.
मुश्किल से हम लोग वैतरणी नदी के किनारे. पर पहुंचते हैं मतलब वैतरणी नदी के पास जब. हम पहुंचते हैं तो इस एक प्रकार से हमारी. आंख जो है व पैरों तक आ जाती है इतनी बुरी. स्थिति हमारी हो जाती है उसके बाद हम हाथ. जोड़ के यम दूतों से कहते हैं नरक भेज दो. भैया जल्दी भगवा हमको छुट्टी दो तब न. यमदूत कहते हैं नरक तो तुमको जाना 27 दिन. के लिए लेकिन उससे पहले वैतरणी नदी है. इसको पार करना करना पड़ेगा वैतरणी नदी. कैसी है कि उसका दूसरा छोड़ नहीं दिखाई. देता वो इतनी गहरी है कि उसको पार नहीं कर.
सकते गति इतनी तेज है कि उसमें तैर नहीं. सकते और पानी के रूप में वहां पर मवाद. रक्त मांस और हड्डियां बहती है दुर्गंध. इतनी कि आप वहां खड़े नहीं रह सकते उसको. पार करना है तो शास्त्र आज्ञा करते हैं कि. नरक में तो 27 दिन रहना है लेकिन वैतरणी. पार करने में हजार साल लगते हैं तब जाकर. नरक पहुंचते हैं हम और नरक में फिर जाते. हम कढ़ाई बढ़ाई में डाल दिया जाता है जो. भी किया जाता हो भीष्म पितामह कहते हैं. लेकिन वही पापी व्यक्ति जिसको नरक जाना है. वो गलती से यदि गाय का स्पर्श कर.
दे तो गायों की अधिष्ठात्री जो सुर भी है. व सुर भी गौ माता वैतरणी नदी के तट पर आ. जाती है और जो गया हुआ व्यक्ति जिसको नरक. जाना है उसको अपनी पूंछ पकड़वा करके. सेकंडो में वैतरणी पार करा कर के उसको नरक. के द्वार पर छोड़ देते हैं और वहां जाकर. के वो नरक में अपने भोग भोग के जिसको. 1027 वर्ष लगने थे वह 27 दिन में मुक्त. होकर के वापस पृथ्वी पर जन्म ले लेता.
है यह सुर भी के स्पर्श का केवल भाव है तो. सोचो कोई भाव से यदि उसको प्रणाम करता हो. कोई भाव से उसको वंदन करता हो शास्त्रों. में तो उसको जिस प्रकार मैंने कहा मूर्ति. कहना अपराध है ऐसी गाय को एक जीव कहना भी. अपराध माना गया है व जीव नहीं है साक्षात. भगवान की प्रियसी है उसको उसी भाव से देखा. जाता 33 कोटि देवता उसमें विद्यमान है. यहां तक कि हमारे ब्रज साहित्य में तो ऐसा. कहते हैं कि आप ठाकुर जी से प्रेम करते हो.
इसका प्रमाण क्या है कि आप तिलक लगाते हो. कंठी पहनते हो हाथ में माला जप करते हो. वेशभूषा ऐसे पर ठाकुर जी आपसे प्रेम करते. हैं इसका प्रमाण क्या कि आपको गौ से प्रेम. होगा इस बात को इस प्रमाण में ले सकते हो. कि ठाकुर जी आपसे प्रेम करते तो भगवान की. व अद्भुत कृति है भगवान ने 33 कोटि. देवताओं को उन में बास दिया है उनके बहत. बहुत महत्वता हमारे साथ बताइ बड़ा सुंदर. अब आखिरी दो सवाल वृंदावन को लेकर एक तमाम. दर्शक जो सुन रहे हैं वृंदावन जाए तो.
कहां-कहां जरूर जाए वृंदावन में बहुत जगह. हैं वृंदावन में यत्र प्रविष्ट सकलो प. जंतु आनंद सच्चित घनता उ पति वृंदावन सतक. कहता है वृंदावन में कहां-कहां जाए यह मत. पूछो वृंदावन पहुंच जाओ बस प्रवेश मिल गया. बस हर क्षण हर कण हर वस्तु सब वहां पर. श्रेष्ठ. श्री राधा रानी के पग पग पर प्रयाग जा. सुनिए आप एक पग भी वृंदावन में चलते हैं.
एक पग चलने पर आपको प्रयागराज जाने का जो. फल मिलना चाहिए वो एक पैर आगे बढ़ाने पर. मिलता है तो आप सोचो पूरे वन घूमो ग कितने. प्रयाग जाने का फल मिल गया श्री राधा रानी. के पग पग पर प्रयाग जहां केशव की केली. कुंज कोटि कोटि काशी है वहां पर. कुंजोंदरू कुंज उनकी छाया में बैठने से. काशी जाने का फल मिल जाता. है यमुना में जगन्नाथ यमुना जी का दर्शन.
करने से जगन्नाथ यात्रा का फल रेणु का में. रामेश्वर यमुना जी का जो तट है उस पर. बैठने से रामेश्वरम जाने का फल तरु तरु पर. पड़े रह तब आपको शायद अटपटा लगे अयोध्या. निवासी है तरु तरु पर मतलब वहां के हर. पत्ते पर हर पत्ते को स्पर्श करके प्रणाम. करने मात्र से अयोध्या जाने का फल मिल. जाता. है गोपन के द्वार द्वार हरिद्वार वसत जहां. वृंदावन में यदि किसी बृजवासी के द्वार पर. आप चले गए उसके द्वार को प्रणाम के लिए.
मंदिर को नहीं बृजवासी के द्वार को प्रणाम. कर लिया तो हरिद्वार जाने का फल प्राप्त. हो गोपन के द्वार द्वार हरिद्वार बसत जहां. बद्री केदारनाथ फिरत दास दासी है बद्री. केदारनाथ जाने के फल तो बोले बाकियों को. तो फल बताए जा रहे हैं बोले बद्री. केदारनाथ के तो ना जाने कितने फल असंख्य. मिल जाएंगे वृंदावन पहुंचने मात्र से. स्वर्ग अपवर्ग लेकर करेंगे हम क्या. वृंदावन जाने का सबसे बड़ा मूल रूप क्या. है कि स्वर्ग अपवर्ग की इच्छा नहीं होती.
जान लो हमें हम वृंदावन वासी वृंदावन का. महत्व है तो वृंदावन में कहां कहा जाए यह. एक विस्तृत भाव हो जाता है पर वृंदावन आप. पहुंच गए तो ना जाने आप कितनी जगह घूम रहे. हो कितने तीर्थ हो रहे हैं कितने पुण्य हो. रहे हैं उसका कोई गणना ही नहीं है उसकी. कोई उपमा कहां तक कहे उसका वर्णन अदभुत अत. है पर हमारे वृंदावन में मैंने कहा पांच. पंचायत है सबसे पहले तो वृंदावन की रज.
दूसरे पंचायत वृंदावन के वृक्ष तीसरे. पंचायत वृंदावन के बृजवासी चौथे पंचायत. वृंदावन में श्री गोपेश्वर. महादेव गोपी के रूप में बैठे हैं और. पांचवे पंचायत वृंदावन की मधुकरी वृंदावन. के जो. बृजवासन है ये पंच भाव जरूर वृंदावन जाकर. के करने चाहिए बाकी ब्र को तो बहुत सारे. स्थान है वहां पर ठीक है बहुत सुंदर आपने. बताया आखिरी सवाल निधिवन जाने पर कहा जाता. है कि रात को मत जाइए हम बड़ी आप निधिवन.
पहुंची हर आदमी किससे कहानियां सुनाता है. श्री कृष्ण जी की लीलाओं को लेकर कई लोग. उस पर भी संदेह खूब करते हैं सोशल मीडिया. पर डालते रहते हैं कि एक रात खोल के सच. दिखा देना चाहिए कई सारी कहानियां आती है. सनसनी निधिवन हां निधिवन को लेकर क्योंकि. घर भी बहुत सारे अगल बगल हैं वहां पेड़. सारे जमीन की तरफ झुके हुए हैं हम लोग कई. बार गए कहानी. हर बार वहां सुनी हमने हर बार जाते हैं. वहां की मिट्टी को माथे पर भी लगाते हैं. निदन की क्या भावना है क्या सच्चाई है.
क्या कहानी है वृंदावन संपूर्ण ही निधिवन. राज वो पूरा वन ही है उसका नाम है वृंदावन. वृंदावन में एक स्थान है निधिवन जहां पर. भगवान बांके बिहारी लाल प्रकट. हुए उस स्थान पर कहते हैं कि रात्रि में. ठाकुर जी राज बहार करते हैं वृक्ष जो है. सब गोपी बन जाते हैं सब लीला करते हैं. ठाकुर जी केवल रात्रि में वही नहीं पूरे. वृंदावन में राज बिहार करते हैं बस उस. स्थान को एक विशेष महत्व दे दिया गया. क्योंकि वहां पर कभी किसी को अनुभव हुआ.
होगा और अनुभव के माध्यम से अगले दिन वह. थोड़ी विचित्र अवस्था में मिला लोगों ने. सोचा कि शायद ठाकुर जी यही करते हैं पर. ऐसा नहीं है आप वृंदावन में कहीं चले जाए. पूरे वृंदावन मेरे मेरे मेरे साथ एक. प्रत्यक्ष मेरे साथ तो नहीं घटा पर मेरे. एक जानकार है बिहारी जी के गोस्वामी है. उन्होंने कहा बो मैंने उनसे यही प्रश्न. किया मैं निधिवन में बोले निधि की कहा बात. करे लाला तो रात में 3:30 बजे यमुना जी के. किनारे घूम जाइयो तो को अनुभव हो जाएगा कि. श्री किशोरी जी ठाकुर जी दोनों यहीं कहीं.
विचरण कर रहे हैं तो को ऐसा अनुभव है. जाएगा कि नन्ने नन्ने ठाकुर जी यहां पर. विचरण कर रहे हैं भाव विचित कर रहे हैं तो. निधिवन को लोगों ने इसलिए ज्यादा उसका. प्रधानता कर दी क्योंकि वहां किसी वैष्णव. को स्पेसिफिक उस स्थान पर भगवत अनुभव हुआ. था पर निश्चित फिर उसको हर रोज का नाम दे. दिया गया हा पर वृंदावन में हर कण हर. स्थिति हर कोने में यह अनुभव किसी को भी. हो सकता है उसकी शुद्धता पवित्रता और.
विशिष्टता इतनी होनी चाहिए अब लोग सोचते. हैं कि निधिवन में रात में कुछ होता है. उसको देखने से सुबह अंधे हो जाएंगे बहरे. हो जाएंगे डर के मारे कोई जाता भी नहीं. अंधे हो जाए बहरे हो जाए पागल हो जाए तो. जाए भी क्यों जाइए एक बार जाकर वहां देखिए. लेकिन दूसरा भाव मेरे मन में एक बात आती. है मान लीजिए कि निधिवन में ठाकुर जी लीला. करते हैं रात्रि की ठाकुर जी की निज लीला. है उस निज लीला में हमको क्यों इतना. इंटरफेयर ठाकुर जी कर रहे हैं हमारे या तो. हमारे अंदर विश्वास नहीं है कि ठाकुर जी. विद्यमान है हमको उस विश्वास को प्रकट. करना है इसीलिए हम वहां जाना चाहते हैं.
विश्वास है तो फिर उसमें आवश्यकता क्यों. हमको आज 27 वर्ष हो गए वृंदावन में जन्मे. हम हम तो नहीं जाते रात्रि में हमको. विश्वास ठाकुर जी दिन में भी लीला कर रहे. हैं दिन में भी नहीं दिख रही तो उसको. रात्रि में कहां दिख जाएंगे वहां पर इसलिए. वृंदावन तो भैया पूरा ही निधिवन है कहीं. पर भी आपकी पवित्रता यदि हृदय की है तो. आपके साथ लीला ठाकुर जी करेंगे बहुत बहुत. श इंद्रेश जी आपने हमें समय दिया और हमारी. कोशिश थी कि लगभग सभी सवाल जो आस्था से. जुड़े हैं भावना से जुड़े हैं भक्ति से.
जुड़े हैं या वो जो थोड़े बहुत भी आपके मन. में संकोच या संदेह पैदा करते हैं उन्हें. पूछा जाए क्योंकि मेरा मानना यही कि जब. व्यक्ति को तर्क दे दि जाते हैं तब आस्था. का प्रचार प्रसार अपने आप हो जाता है जी. उसकी भावना अपने आप जुड़ जाती है और फिर. हर व्यक्ति अगर ऐसे जुड़ता जाएगा तो फिर. जो आपने कहा कि हम उस पथ पर निकल जाते हैं. जिसे हम भक्ति पथ कहते हैं तो आपका. बहुत-बहुत शुक्रिया बहुत आभार और आशा करता. हूं कि दर्शक भी उतना ही आनंद लेंगे इस. चर्चा का.
