Unplugged ft. Imran Pratapgarhi | Allahabad| Politics | Rahul Gandhi | Shayari | Owaisi| Atiq Ahmed
नाम प्रतापगढ़ ही है लेकिन कभी-कभी मुझे. लगता है कि मेरे अंदर जितना इलाहाबाद है. वही मुझे इमरान बनाता है। लोकसभा हारने के. बाद इमरान प्रतापगढ़ी राज्यसभा में सांसद. इसलिए बने क्योंकि वो मुसलमान थे। जिन सब. ने हो हल्ला मचाया जब वो मेरी उम्र के थे. तो वो कैबिनेट मंत्री थे। इमरान प्रतापगढ़. को ओवैसी से क्यों तकलीफ है? कि पहले. शायरी सुनाते थे और अब जब सांसद बन गए तो. अब दिन रात पानी पी पी गाली देते। खड़े हो. के अल्लाह और रसूल का नाम लेकर के वोट. मांगते हैं। सर पे टोपी लगा के.
मुलाकात करूंगा।. मतलब एक 50 साल की आपकी सियासत है। 5 साल. पहले पॉलिटिक्स में आए हुए एक लड़के को. आपको गाली देनी है। इतना डर किस बात का? मोदी जी की आलोचना करता हूं। मैं भाजपा की. आलोचना करता हूं। मुझे उतनी गाली कभी उधर. से नहीं मिलती। जैसे इनसे सवाल पूछूंगा ना. तो सल्तनत हिलने लगती है।. अरे ये टूटता शायर है ये। इसको कुछ नहीं. आता। जितना समझत उतना महान थोड़े है। तो. लिखत है लेकिन पठान थोड़े हैं। हम मानी था. मोहब्बत में चोट खाए हैं। जितना चिल्लात.
है उतना चट्टान थोड़े हैं। आप बार-बार कहते. हैं कि मैं इंडिया का इमरान खान हूं।. मैं भारत का इमरान हूं।. तो मुझे पाकिस्तान के इमरान खान खट से. फ्लैशबैक में आए।. भारत का इमरान मुझे मुझे अच्छा लगता है।. पड़ोस वाले में वो प्रधानमंत्री तक पहुंच. गए थे।. पुराने जमाने में लोग ज्यादा मेहनती थे।. आप 10 भाई बहन हैं इसलिए पूछ रहे हैं। अलग. तरह की मेहनत की. कॉम्पटीशन भी था कि फलान वग छा है। उनके. चार बेटवा है तो हमरे जो है तीन चार बेटवा. चाहिए।. क्या बदल गया इलाहाबाद से प्रयागराज आने. में? भले ही नाम कागज पर मिटा दो लेकिन ये तय.
है। इलाहाबाद बोला था इलाहाबाद बोलेंगे।. 37 साल की उम्र में ब्याह नहीं किया तो. कौन याद आता है जिसके चक्कर में ब्याह. नहीं कर रहे? मतलब अभी राहुल जी पड़े हुए हैं। सलमान. खान पड़े हैं।. हमको राहुल भाई और सलमान खान के लक्षण. नहीं लगने चाहिए।. हमारे लक्षण है हम ब्याह करेंगे। जिसको. करना होता है वो तेजस्वी जी की तरह चुपचाप. करके बैठ जाता है।. कैसे तेजस्वी लोग हैं? नहीं तेजस्वी लोग हैं हमारे पास।. मोहब्बत लिखने के बाद नहीं हुआ।. मुझे लगता है ना ही कुरे दे।. मेरी आंखों का प्रस्ताव. ठुकरा के तुम. कैसे मोहब्बत की दुकान आपकी है। पत्रकारों.
पे तो आप लोग भी केस करवाते हो। NDTV चैनल. के एक पत्रकार हैं जिन पर आपने केस ठोक. दिया है।. एक ही पे हुआ? कर्म तो कईयों के ऐसे हैं।. चार नाम बताओ हमको अच्छे पत्रकार का जरा।. एक के तो सामने ही बैठा हूं।. राहुल जी टीवी इंटरव्यू क्यों नहीं करते? मैं उनसे पर्सनली पूछूंगा, आपके लिए. पूछूंगा।. एक यूनिवर्सिटी आप बनवाने वाले थे और वो. बड़ा स्क्रीनशॉट आप आई एम श्योर आप भी. देखते होंगे। जमीन ली, चंदा लिया पर वो. स्कूल कभी बना नहीं। लोगों का चंदा लेकर. गायब हो गए। एक सवाल आपको लेके बहुत आता. है अतीक अहमद का। अतीक अहमद कैसे आदमी थे? यूपी में तो हर जिले में जो एक नेता है,
जो सांसद है, जो विधायक है, वो लगभग. कमोबेश उसी स्टाइल का है।. आपके फेवरेट शायर कौन है? फैज नज़्मों के. बड़े शायर हैं।. वो लोग बड़े खुशकिस्मत थे जो इश्क काम. समझते थे या काम से आशिकी करते थे हम जीते. जी मशरूफ रहे. कुछ इश्क किया कुछ काम किया काम इश्क के. आड़े आता रहा. इश्क में काम बिगड़ता रहा. हमने थकार हार के दोनों को अधूरा छोड़ दिया. राहत साहब बहुत पसंद है राहत इंदोरी साहब. बड़े आदमी थे. ये अलग बात के खामोश खड़े रहते हैं. मगर जो बड़े हैं. बड़े रहते हैं मतलब मुशायरों में हमारे.
बहुत मधुर रिश्ते कभी नहीं रहे सभी का खून. है शामिल. यहां की मिट्टी में. किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है. क्या होता है पन में इलाहाबाद पन्ना. प्यार की बड़ी इससे. और मिसाल क्या होगी? हम नमाज पढ़ते हैं. गंगा में वजू कर के.
वो शायर है जो मजहब से मुसलमान तो पेशे से. सियासतदान तब के इलाहाबाद और अब के. प्रयागराज की जान नाम है इमरान खान कैसे. हैं इमरान खान साहब आप. मैं अच्छा हूं शुभांकर भाई. सही है लाइन. बिल्कुल. क्या बदल गया इलाहाबाद से प्रयागराज आने. में क्योंकि इमरान खान तो इमरान प्रतापगढ़.
हैं उस कहानी पर हम जाएंगे लेकिन इलाहाबाद. से प्रयागराज. मुझे लगता है कि कम से कम हम वो सारे लोग. जिन्होंने इलाहाबाद को जिया है इलाहाबाद. विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान या. इलाहाबाद की संस्कृति को जिया है उसके लिए. कुछ नहीं बदलेगा सिर्फ नाम बदला है और वह. नाम कागजों पर बदला है। मेरा एक शोर शेर. था कि तुम्हारे पहले बोला है तुम्हारे बाद. बोलेंगे। तुम्हारे फैसले बिल्कुल हैं. बेबुनियाद बोलेंगे। भले ही नाम कागज पर.
मिटा दो लेकिन यह तय है इलाहाबाद बोला था. इलाहाबाद बोलेंगे। तो इलाहाबाद तो दरअसल. उस दौर में जिसने भी इलाहाबाद में पढ़ाई. की है। इलाहाबाद को जिया है। वो कभी. इलाहाबाद बोलना नहीं छोड़ सकता। और. प्रयागराज तो पहले से ही था। प्रयाग घाट. स्टेशन, प्रयाग स्टेशन, संगम यह सब तो. इलाहाबाद की संस्कृति का हिस्सा था। तो. नाम अकेले बदला है। बाकी तो इलाहाबाद वैसा. ही था। इलाहाबादीपन वैसा ही है। लोकनाथ की. होली वैसी ही है। जलेबी नेतराम की वैसी. है। सब कुछ वैसा ही है। कटरा चौराहा वैसा.
ही है। सिविल लाइंस में कॉफी हाउस वैसा ही. है। उसकी यादें वैसी ही हैं। मुझे लगता है. कि कुछ नहीं बदला। और खासतौर से हमारे. आपके लिए नहीं बदलेगा। क्योंकि हम आप जो. लेकर के इलाहाबाद से आए हैं, इलाहाबाद की. बकैती लेके आए हैं। इलाहाबाद की खुशबू. लेके आए हैं। इलाहाबाद के अमरूद की मिठास. लेके आए हैं। वो कहां बदल सकता है? हालांकि आपने बता दिया फिर भी हम इसको एक. बार फिर से फ्रेम करते हैं। हमसे कई लोग. मिले। उन्होंने कहा अगर उत्तर प्रदेश को. समझना है गुरु तो इलाहाबाद और बनारस घूम. लो। ये दो शहर ऐसा है जो बहुत कुछ सिखा. देता है।.
इसमें कोई दो राय नहीं।. क्या क्या अलग फ्लेवर है इलाहाबाद और. बनारस में? थोड़ा समझाओ ना हमको।. देखिए देखिए मैं तो प्रतापगढ़ में पैदा. हुआ और बिल्कुल गांव में पैदा हुआ। दुनिया. कैसी है इसको पहली बार जाना तब जब. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आया एक बड़ा. कैनवस मिला. और इलाहाबाद से इतना कुछ आपको सिखाता है. इलाहाबाद मैंने कहा ना एक शब्द है बकैती।. पहली बार मैंने यह शब्द सुना था जब कटरा. के चौराहे पर लक्ष्मी टाकीज़ के पास बैठ. के चाय पी रहे थे। तो पता चला कि यार गुरु. बकैती मत करो। बहुत ज्यादा बकैती कर रहे.
हो। यह शब्द अमूमन सुनाई पड़ने लगा।. हॉस्टल के बच्चे, यूनिवर्सिटी के साथ के. पढ़ने वाले लड़के तो लगा कि यार इलाहाबाद. तो इलाहाबाद है। मतलब इसकी जो खुशबू है और. यह शब्द कहीं आप और नहीं सुन सकते।. बनारस ज्यादा धार्मिक है। बनारस थोड़ा सा. पूर्वांचल वाला जो टच है। लेकिन इलाहाबाद. में पूर्वांचल से ज्यादा अवध का टच है।. औरकि मैं अवध का हूं तो फैजाबाद, अयोध्या. ये सब जो पूरा ज़ोन है सीतापुर तक लखनऊ, प्रतापगढ़, रायबरेली, सुल्तानपुर,
इलाहाबाद ये जो सात आठ जिलों से मिलकर के. एक अवध बनता है। मेरा अपना मानना है। वो. उसकी मिठास अलग है। आपका गोंडा भी है सब. में। तो वो अलग है। बनारस थोड़ा पूर्वांचल. का टच लिया है तो बनारस पूर्वांचल का रंग. थोड़ा डिफरेंट. जैसे बनारस में हम कहते हैं कि वो शहर है. जहां हर कोई गुरु कोई नहीं चेता।. हां लेकिन इलाहाबाद में तो हर आदमी आपको. बच्चा-बच्चा बकैती करता हुआ मिलेगा और. उसकी बकैती का अपना एक मतलब है। वो बात. शुरू करेगा तो पंडित मोतीलाल नेहरू से। वो. बात शुरू करेगा तो चंद्रशेखर आजाद से.
क्योंकि उसके पास इतनी यादें हैं। इतने. बड़े-बड़े नाम है। वो फिराक गोरखपुरी के. किस्से सुनाएगा आपको। महादेवी वर्मा के. किस्से सुनाएगा। वो आपको हरिवंश राय बच्चन. अमिताभ बच्चन से बात नहीं शुरू करता वो वो. हरिवंश राय बच्चन से बात शुरू करता है। वो. पंडित नेहरू की बात शुरू करता है। तो उसके. पास बोलने के लिए इतना कुछ है और अमूमन. कहा जाता था ना कि इलाहाबाद बाबुओं का शहर. है। लेकिन मैं मानता हूं कि इलाहाबाद कला. से जुड़े हुए लोगों का शहर है। कवियों का. शहर है। अकबर इलाहाबाद का शहर है। तो कला. और संस्कृति के लिए इतना कुछ है उस शहर.
में कि आप उसको समझते पहली बार मैं तो आया. था तो ना तो लेफ्ट ना तो राइट कुछ पता ही. नहीं था ना एकदम कोरा कागज लेकर के. इलाहाबाद आए थे यूनिवर्सिटी में. यूनिवर्सिटी में आकर के तो तब पट शर्ट. नहीं पहनते थे पैंट और बुशर्ट पहनते थे. याद है. हां हां बुशर्ट. तो हमारे उधर अवध में बुशर्ट कहते हैं. बुशर्ट कहते हैं तो वहां आकर के लगा कि. यार दुनिया ऐसी है और यह इतना बड़ा कैनवस. है इस कैनवस पे आप अपने दस्तखत कैसे कर. सकते हो? अपना कुछ चित्र कैसे बना सकते.
हो? इसके लिए कोशिश करो। तो इलाहाबाद ने. सपनों को एक उड़ान दी। इलाहाबाद. विश्वविद्यालय ने आपको हौसला दिया, ताकत. दी और दुनिया को समझने का सलीका दिया। मैं. तो मानता हूं कि मैं जो कुछ हूं वो. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की देन हूं। तो खाली. वहां शेरो शायरी की कि थोड़ा गुंडाई-वंडई. भी क्योंकि हमारे भाई साहब वहीं से आए. हैं।. नहीं शायर आदमी क्या गुंडई? इनको जो हम छोड़ के आए थे और जब लेकर आए. तो जमीन आसमान का फर्क था।. नहीं नहीं इलाहाबाद गुंडई नहीं आपको. सिखाता। मेरा मानना है वो गुंडई सिखा ही. नहीं सकता। बस ये है कि हर नाइंसाफी के. खिलाफ आपको खड़ा होना और आवाज मतलब बुलंद.
करना सिखा देता है। इसमें कोई दो राय. नहीं। आप आर्गुमेंट कर सकते हो। आप पलट. करके जवाब देना सीख जाते हो और जो. इलाहाबाद सिखाता है वो मेरा मेरा ख्याल है. कि भारत का कोई शहर नहीं सिखाता। कुछ तो. कांड क्यों? जैसे हमने अपने भाई साहब से. पूछा। हमने कहा तुम लोग क्या करते हो? तो. एक दिन हमको फोन किया सिनेमा हॉल में बैठे. हैं। तो हम क्या कर रहे हो? कह रहे बाहर. गर्मी बहुत थी। तो हम लोग का एक अड्डा है. एक सिनेमा हॉल जहां जाते हैं अंदर और सो. जाते हैं क्योंकि एसी चलता है। कोल्ड. ड्रिंक और पॉपकॉर्न वहां फ्री मिलता है।. कभी कोई पिक्चर अच्छी लगी तो देख लेते. हैं। नहीं तो हमारे लिए सोने का अड्डा है।. तो हम खैर गजब हाल है गुरु तुम्हारा। नहीं.
ऐसा तो ऐसी बहुत सारी यादें हैं। कंपनी. बाग जो है वो जिसको आप जिससे तमाम. स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हुई यादें. हैं। वो कंपनी बाग तो मतलब अलग ही अड्डा. है। वो आप वहां जाइए। वहां आपको किसी पेड़. के नीचे कोई शायर बैठकर के कुछ सुनाता हुआ. मिल जाएगा। किसी पेड़ के नीचे आपको आर्ट. से जुड़ा हुआ रंग रंगकर्मी मिल जाएंगे जो. प्रैक्टिस कर रहे हैं या अपना रिहर्सल कर. रहे हैं। एक एनएसडी जो है ना वहां भी है।. वो चलती फिरती एनएसडी है। मेरा अपना मानना. है। दूसरी बात ये कि इलाहाबाद. विश्वविद्यालय का जो वो बरगद है ना जो. उसका सिंबल है वो बरगद और उसकी जो शाखे.
हैं वो अलग ही है। वो अलग सिखाता है आपको।. तो इलाहाबाद कभी स्मृति से जा ही नहीं. सकता। और इलाहाबाद से ज्यादा इलाहाबादीपन. कभी स्मृति से नहीं जा सकता। क्या होता है. पन में इलाहाबादीपना? मतलब बिल्कुल इलाहाबाद का हो जाना। नाम. प्रतापगढ़ ही है लेकिन कभी-कभी मुझे लगता. है कि मेरे अंदर जितना इलाहाबाद है वही. मुझे इमरान बनाता है और वो बचा रहे तो. शायद जिंदगी में और कुछ बेहतर कर पाऊंगा।. हालांकि आपने इलाहाबाद के कई प्रतिष्ठित. लोगों के नाम लिए और इसमें एक नाम मिस हुआ.
जिस पे मैंने कुछ दिनों पहले एक स्टोरी की. थी। वो नाम था फिरोज गांधी साहब का. और जब मैं उन पर रिसर्च करने बैठा क्योंकि. उनकी कब्र इलाहाबाद में ही है. तो मैं बड़ा हैरान था कि इस आदमी के बारे. में देश में बात क्यों नहीं होती? बिकॉज़. ही वाज़ मोर देन जस्ट. हस्बैंड ऑफ इंदिरा जी और फादर ऑफ राजीव. गांधी साहब। मुझे पता चला क्योंकि आपने भी. जर्नलिज्म की पढ़ाई की कि दिल्ली में जो. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया है वो उन्होंने दान. किया था। LIC उनकी देन थी। वह आजाद भारत.
में पहले व्यक्ति थे जिन्होंने वित्त. मंत्री का इस्तीफा करवाया था। अपनी ही. ससुर की सरकार के खिलाफ डायनेमिक. पर्सनालिटी एक सांसद फिर वो गुमनाम हो गए. और मैंने और उनके ऊपर एक ही किताब छपी. फिरोज़ द फॉरगोटन गांधी एक्चुअली इसका. इसका गुनाह भाजपा के सर जाना चाहिए। भाजपा. ने फिरोज गांधी को फिरोज गांधी बना के एक. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वो जेल गए हैं।. स्वतंत्रता संग्राम में. 21 साल की उम्र में तीन बार जेल गए।. जेल गए वो उनको फिरोज गांधी बना के वो. पारसी थे। हां लेकिन उनको क्या बना के.
बीजेपी आईटी सेल देश के सामने पेश करता. है? तो यह तो देश के स्वतंत्रता संग्राम. सेनानियों का कितना बड़ा अपमान आप सिर्फ. अपनी पॉलिटिक्स के लिए करते हैं।कि आपको. इंदिरा जी को कहीं ना कहीं डिफेम करना है।. कांग्रेस को घेरना है तो आप एक फर्जी नाम. निकाल लाएंगे। फिरोज़ गांधी को फिरोज़ खान. लिखने लगेंगे। यह जो आईटी सेल ने किया है, दरअसल उसका गुनाह भाजपा के सर पे जाता है।. वरना फिरोज़ गांधी पे बहुत बातचीत होनी. चाहिए। आपने पढ़ा आपने कुछ पढ़ा ज्यादा. जितना पढ़ना चाहिए सामान्य तौर पर.
इलाहाबाद रहते हुए जितना उनके बारे में. जाना बाद में भी कुछ पढ़ा तो वो बहुत बड़ा. नाम और मैंने कहा ना कि बार-बार जेल गए वो. और बड़े स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. लेकिन उनकी बात देश में लोगों को भी. बिल्कुल बात नहीं होती बिल्कुल बात हमारे. देश में लोगों को बात होती भी है तो सिर्फ. एक मैंने कहा ना जो बीजेपी आईटी सेल ने. दुनिया के सामने रखा वह राहुल जी को बुरा. भला कहना है बीजेपी आईटी सेल को तो ले. जाकर के उनसे जोड़ो और उनका नाम फिर गांधी. मत दो उनका नाम कुछ और लेकर के आप राहुल. जी को काउंटर करो। तो यह भाजपा की वह मतलब.
कभी-कभी गुस्सा आता है कि आप अपनी राजनीति. के स्तर को कहां ले जाकर के ठहरा रहे हो? इस लेवल तक नहीं जाना चाहिए राजनीति। नहीं. मैंने जब उनकी किताब पढ़ी बर्टिल फ्रॉग. क्योंकि इकलौते राइटर हैं। स्वीडिश राइटर. हैं जिन्होंने किताब लिखी। हमारे देश में. तो उनके बारे में किसी ने बात ही नहीं की।. और उस बर्टिल फ्रॉग की जो ओपनिंग लाइन है. उसने मुझे झकझोर दिया कि एक ऐसा गांधी. जिसकी वाइफ आजाद भारत की पहली महिला. प्रधानमंत्री। ससुर पहला प्रधानमंत्री।. बेटा प्रधानमंत्री अह छोटा बेटा वह. व्यक्ति जिसने इमरजेंसी में बड़ी भूमिका. निभाई। ताकतवर व्यक्ति था। बहू सबसे लंबे.
समय तक कांग्रेस के अध्यक्ष। आज राहुल जी. आपके नेता हैं। उनके पोते प्रियंका जी एन. उस गांधी के बारे में कोई बात नहीं करता।. शुभंकर भाई मुझे लगता है कभी-कभी मतलब देश. काल परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि कुछ ऐसे. नाम जिन पे बहुत बात होनी चाहिए थी। जैसे. और कौन-कौन. लेकिन नहीं बहुत सारे लोग हैं। स्वतंत्रता. संग्राम में तो इतने नाम हैं, इतने. बड़े-बड़े हीरोज़ हैं कि उनप बहुत बात होनी. चाहिए लेकिन नहीं होती।. प्रधानमंत्री चर्चा करेंगे अगर अंडमान. निकोबार कभी गए या उस संदर्भ का जिक्र.
करेंगे तो वो सिर्फ सावरकर की जेल का. जिक्र करते हैं। वो शेर खान अफरीदी का. जिक्र नहीं करते। वो मौलाना फजले खैराबादी. का जिक्र नहीं करते। उसी जेल में. तड़प-तड़प करके अपनी एड़ियां रगड़ के मैं. तो यह कहूंगा उन्हीं दीवारों के बीच में. वो लोग उन लोगों ने भी अपनी जान दे दी ना. कुर्बान हो गए ना और काला पानी की सजा. भुगतते हुए अंग्रेजों के जरिए स्वतंत्रता. संग्राम की लड़ाई लड़ते हुए तो जिन्होंने. वहां रहते हुए जान दे दी उन पे बात ही. नहीं होती जो बाहर निकल आए उन पे बात होती. है तो परिस्थितियां ऐसी बहुत बार बनी देश.
में कि जिन पे बात होनी चाहिए थी उन पे. बात नहीं होती होनी चाहिए थी आप शायर हो. पहले भी रहे अब आप एक पॉलिटिकल पार्टी से. हो तो कुछ मजबूरियां भी रहेंगी बट मैं एक. शायर को एक्सप्लोर करना चाहता हूं। एक. शायर के तौर पर क्या यह बातें परेशान नहीं. करती कि हमने आजादी के हीरोज़ को भी अपनी. आइडियोलॉजी के हिसाब से बांट रखा है? हां बिल्कुल. जैसे जो नाम आपने लिए तीन चार नाम. छोड़िए हम तो अभी ऐसे लोग हीरोज़ बनाए जा. रहे हैं जिन्होंने आजादी की लड़ाई में कुछ. किया ही नहीं। कोई योगदान ही नहीं है। भाई. अगर मतलब थोड़ी सी कड़वी बात कहूं तो.
तिरंगे का विरोध किया जिन्होंने वो आज. तिरंगे के सबसे बड़े पैरोकार और आलमरदार. बनेंगे। आपको सामने दिखेंगे और और. जिन्होंने तिरंगा इस देश को दिया. जिन्होंने संविधान दिया उनको देश. देशद्रोही कहेंगे। तो ये ये कुल मिलाकर के. पीड़ा देने वाली बात ही तो है। आप एक नई. जनरेशन है जो पिछले 20 साल में जवान हुई. है। उसने स्वतंत्रता आंदोलन को कम पढ़ा. है। आप उसके सामने जो कहानी रखते हो उसमें. आप जिस तरह से असली हीरोज़ को डिफेम करते. हो। उनको जिस तरह से उनके बारे में फालतू.
की कहानियां देश के सोशल मीडिया ने मतलब. हमसे हमारी रचनात्मकता छीन ली, सच छीन. लिया। इसका नुकसान हुआ है ना देश को और. गुनहगार कौन है? हम सब जानते हैं इस चीज. को। बट इमरान जैसे जब मैं बाहर भी दुनिया. के हिस्टोरियंस को पढ़ता हूं तो हमेशा. हिस्ट्री को लेकर एक परसेप्शन दिया आता है. कि हिस्ट्री इतिहास नहीं बताती। हिस्ट्री. बताती है कि लिखने वाले का नजरिया क्या. था? जिसने लिखा है उसकी सोच क्या थी? अगर. जर्मनी जीत गया होता तो शायद हम दूसरी. हिस्ट्री पढ़ रहे होते। हिंदुस्तान की.
हिस्ट्री अलग है। पाकिस्तान अपनी अलग. कहानियां सुनाता है। मेरे पाकिस्तान में. अब तो नहीं है लेकिन जब पहले दोस्त जो थे. उनसे हम बातें करते हैं। उनकी एक अलग. कहानी है।. शुभंकर भाई मैं यहां एक. तो ये जो आज जो सवाल आपने रखा है क्योंकि. मैं जब इधर बैठता हूं जो भी गेस्ट होता है. मैं हमेशा दूसरे साइड के सवाल नजारा पसंद।. मैं शुभंकर भाई इस पे बहुत एक तथ्यात्मक. बात कहता हूं कि एक ऐसे समय में जब. सरकारें कवियों की लिखी हुई कविताओं से. किसी के चरित्र को महान मान रही हैं।. जब सरकारें किसी सामान्य लेखक की लिखी गई.
बातों से किसी स्थल को पर्टिकुलर एक मतलब. धर्म विशेष से जोड़ दे रही हैं। ऐसे समय. में आप इतिहासकारों को अगर यह कहें कि. इतिहासकारों ने तो बायस्ड हो के लिखा तो. इतिहास ज्यादा ऑथेंटिक है या नहीं मैं. भक्ति भाव से लिखी गई कविताएं ज्यादा. ऑथेंटिक हैं। मैं बायसनेस में नहीं गया।. जैसे जो सरकार के लोगों का पक्ष है या. दूसरा वर्ग जो है जो आपके खिलाफ है उनका. परसेप्शन ये होता है कि कुछ लोगों को. हाईलाइट किया गया बाकी और भी बहुत सारे. लोग थे जो शायद डिर्विंग होते थे बट नहीं.
दिया गया जिसमें जैसे कई बार अंबेडकर जी. का भी जिक्र आता है कि भारत रत्न काफी देर. से दिया गया सरदार वल्लभ भाई पटेल का. जिक्र होता है सुभाष चंद्र बोस जी का. जिक्र होता है या फॉर दैट मैटर मुझे बहुत. अफसोस हुआ बाद में जानकर कि भगत सिंह साहब. को बहुत लंबे समय तक ऑफिशियल बुक्स में. टेररिस्ट ही रखा गया था जो बाद में. भाई भारत रत्न मुझे लगता है कि कोई इतना. बड़ा पैमाना नहीं है कि उसी से नापे जाए।. वह इतने बड़े हीरोज़ हैं कि कोई एक अवार्ड. उनका कद तय नहीं कर सकता। डॉ. बाबासाहेब.
आंबेडकर का कद जो है वो नहीं तय हो सकता. उससे भारत रत्न से।. ठीक है। भारत रत्न देके आप भारत रत्न को. उसका कद बढ़ा रहे हैं। मैं अपना मान मैं ये. मानता हूं। कुछ लोग तो ऐसे हैं कि जिनको. भारत रत्न मिलने का मतलब है भारत रत्न का. सम्मान बढ़ा।. ये ये मेरा अपना नजरिया है। ठीक नजरिया. है। तो ऐसे में बहुत सारे ऐसे लोग हैं. जिनको भारत एक अवार्ड है। साल में आपको एक. दो तीन मतलब ठीक है आप संख्या बढ़ा लीजिए।. जितना संख्या बढ़ाते जाएंगे उस उतना उसका.
वो मतलब पाने की ललक लोगों में कम होती. जाएगी। तो उसे लिमिटेड रखिए तो अच्छा है।. एक को दीजिए मैक्स टू मैक्स दो कर दीजिए।. तो इतने हीरोज़ हैं कि सब भारत रत्न के. हकदार हैं। उस वक्त में उस मुश्किल वक्त. में जिन्होंने लड़यां लड़ी। 1947 का भारत. कैसा भारत था? मैं जैसे पार्लियामेंट में. बोल रहा था। मैंने नेहरू जी पे बात करते. हुए बात कही कि एक ऐसा राजनेता जो मतलब. 3000 दिन से ज्यादा जेल में रहा। आज के. नेता मतलब उसके कद को छोटा करने की कोशिश.
करते हैं। जिसके पिता जेल में रहे। जिसका. पूरा परिवार जेल में रहा। बेटी जेल में. रही।. दामाद जेल में रहा।. आप ऐसे व्यक्ति को मतलब हमने वह गाना सुना. है ना फूलों की सेत छोड़ के दौड़े दौड़े. जवाहरलाल साबरमती के संतों ने कर दिया. कमाल। हम तो बचपन से सुनते आ रहे हैं ना।. तो नेहरू जी के बारे में उस वक्त कवि. प्रदीप या फिर और बाकी कवि क्या लिखते थे. कि फूलों की सेज पे रहने वाला व्यक्ति।. फूलों की सेज पर रहने वाला व्यक्ति अगर 10.
साल तकरीबन जेल में रह रहा है तो आज के. दौर के राजनेता उसको मतलब उसको उस उसको. अपना कद बढ़ाने के लिए उसका कद छोटा करने. की कोशिश करते हैं। काटकर गैरों की टांगे. खुद लगा लेते हैं लोग। इस शहर में इस तरह. भी कद बढ़ा लेते हैं लोग। तो मतलब इतिहास. के साथ आप जो अन्याय कर रहे हो अपने दौर. में। मुझे लगता है इतिहास जैसे मैं एक. बड़ा अच्छा वाक्य सुनाऊं आपको के जब गांधी. पर फिल्म बनी एक बाहर के निर्देशक ने.
फिल्म बनाई तो मैं पार्टी के एक बड़े नेता. के साथ बैठा हुआ था तो वो इंदिरा जी से. मिलने आए और इंदिरा जी से मिलने के बाद. उन्होंने उसकी एक स्पेशल स्क्रीनिंग रखी. उससे पहले उनका यह कहना था कि मुझे वो. गांधी जी का अंतिम संस्कार वाला वो सीन. शूट करना था तो मुझे भीड़ चाहिए थी तो उस. समय पार्टी के एक बड़े नेता जो पार्टी में. नहीं है। वह यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ. करते थे। तो इंदिरा जी ने उनको बुलाया कि. भाई एक सीन शूट होना है और भीड़ चाहिए।.
कश्मीर वाले तो नहीं है। तो अब यह हुआ कि. ठीक है यूथ कांग्रेस उस समय एक अलग जलवा।. आज भी जलवा है। तो 500 के आसपास का क्राउड. उनको चाहिए था। तो उन्होंने कहा कि मैंने. आसपास के जितने राज्य थे सबसे बात की और. फिल्म की शूटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री. का खुद इंस्ट्रक्शन है तो वह 2 लाख से. ज्यादा लोग आ गए। बहुत शानदार शूटिंग हुई. तो उन्होंने कहा कि निर्देशक हमसे बहुत. प्रभावित थे। तो स्क्रीनिंग जो स्पेशल रखी. उन्होंने उसमें मुझे भी बुलाया।.
तो प्रधानमंत्री जी बैठकर के उसे देख रही. हैं। अब उसमें कुछ जगहों पर ऐसे दृश्य हैं. जिसमें नेहरू जी और गांधी जी का संवाद है।. तो उन्होंने कहा कि. मुझे लगा कि नहीं नहीं ऐसा नहीं होना. चाहिए। होता है ना आदमी जब पार्टी का एक. नेता प्रधानमंत्री को खुश करने के लिए. अपने बड़े नेता को खुश करने के लिए ऐसा. करता है तो उन्होंने बाद में जाकर के. मैंने मैडम से कहा कि मैडम ये नहीं होना. चाहिए। ये ये थोड़ा सा मुझे लगता है कि ये. नहीं होना चाहिए। जैसे नंबर बढ़ाना होता. है।.
होता है।. तो इंदिरा जी ने कहा कि सुनो उनका नाम. लेकर के इतिहास जैसा है उसे जस का तस रहना. चाहिए। उसमें छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।. यह मतलब कई बड़े नेता साथ बैठे थे। मेरे. लिए भी बहुत यह सुनकर बहुत अच्छा लगा कि. इंदिरा जी इस तरह सोचती थी। तो दरअसल. इतिहास को आप जस का तस रहने दीजिए ना जैसा. भी था और छोड़ दीजिए लोगों पर ना उसे. पढ़ें समझें अलग-अलग नजरिया विकसित करें।. मुझे लगता है यही तो लोकतंत्र है। यही तो. खूबसूरती है। यही तो मानव सभ्यता का विकास.
है। आप उस विकास से छेड़छाड़ क्यों करना. चाहते? आप अपनी सोच के लोग एकदम से चाहते. हो कि पूरा देश बस एक रंग का हो जाए। यह. जो सोच है यह खराब है। बट यह सोच कैसे. बदली? जैसे मेरा चाइल्डहुड था। मैंने अटल. जी की सरकार को भी अच्छे से गौर से सुना।. देखा 989 के बाद से थोड़ा-थोड़ा टीवी था।. 200 में अटल जी की सरकार अच्छे से देखी।. फिर मनमोहन सिंह साहब की सरकार देखी। फिर. मोदी साहब कह रहा बीच में कह रहा मैंने.
देखा कि देश का मिजाज बदला है। लोग वोकल. भी हुए हैं। अपनी आइडियोलॉजीस को लेकर वो. एक्सप्रेस भी कर रहे हैं। चाहे वो सोशल. मीडिया हो या उसके पहले भी सोशल के इतने. एक्टिव होने के पहले भी और अगर हम वोटिंग. की दुनिया से देखें जैसे आप लोग लगातार. चुनावों में जा रहे हैं। अपनी बात रख रहे. हैं। बहुत सारी बातें आपके रेलेवेंट लगती. हैं। बट जब वोटिंग में रिजल्ट आता है तो. आपको ऐसा लगता है कि देश का मिजाज अलग है।. सोशल मीडिया के मिजाज में आप लोग तो रोज. दिखाते हैं कि हमारे नंबर ज्यादा आ रहे. हैं। देखिए इतने लोग इनको सुन रहे हैं।. हमको इतने लोग सुन रहे हैं। पोस्ट आती है।. बट व्हेन इट कम्स टू वोटिंग चीजें अलग आती.
हैं। तो डेमोक्रेसी में कैसे माने कि जो. आप कह रहे हैं सही है क्योंकि अल्टीमेटली. डेमोक्रेसी मतलब जिधर ज्यादा लोग जा रहे. हैं हमारे यहां तो वोटिंग सिस्टम ही है और. बीते कई सालों का जो बीजेपी प्रचार करती. है कि राहुल जी सेंचुरी लगाने वाले हैं. चुनाव हारने में तो फिर यह मिजाज क्यों. बदला है कैसे बदला है कहां आप गड़बड़ रह. गई या कहां वो एज कर गए शुभंकर भाई यही. हां यही लोकतंत्र है हम इस लोकतंत्र का. हिस्सा हैं और इसे बहुत खूबसूरती से. स्वीकार कर रहे हैं। लेकिन यही लोकतंत्र. तो तब भी था जब 400 प्लस सीटें दे रहा था.
राजीव गांधी को। यही लोकतंत्र तो तब भी था. जब नेहरू जी को बार-बार जिता रहा था। बट. नेहरू जी के टाइम में दैट वास स्टार्टिंग।. स्टार्टिंग थी तो तब तो और मुश्किल था ना।. आप लोकतांत्रिक बना रहे थे लोगों को।. राजतंत्र से निकल के आए थे लोग। आप उनको. लोकतांत्रिक बना रहे थे। आप उस योगदान को. सोचिए ना। वो किसी ने बहुत अच्छी बात कही. है कि मतलब जब आप नेहरू जी पे तब्सरा करें. तो आप यह सोचें कि बुनियाद पे बात कर रहे. हैं आप। छतें आप हो सकता है खूबसूरत बना. लें और थोड़ा सा हटवट बना लें। एक और.
खूबसूरती के साथ डोम बना लें। लेकिन जो. बुनियाद है ना हम नी के पत्थर हैं दिखाई. नहीं देते। तो आप उनके योगदान को तो आप. बड़ा ही मानना पड़ेगा आपको। तो जाहिर तो. लोकतंत्र तो वो भी था ना। आज जब आप. क्रिटिसाइज करते हो तो एकदम से खारिज कैसे. कर देते हो? तब आप वहां क्यों नहीं मानते. कि वो लोकतंत्र था और इसी देश की जनता तो. 400 प्लस सीट दे रही थी. राजीव जी को दे रही थी ना? तो ऐसे में उस समय का जो कुछ राजीव जी. वाले समय का एक इंदिरा जी वाली घटना का भी. जिक्रवाता है। तो वो एक मैं पॉलिटिकल. क्योंकि आप देखते हो उसमें कि एक बहुत.
बड़ी घटना हुई थी। सेंटीमेंट पूरे चेंज हो. गए थे क्योंकि मैंने कई नेताओं पे स्टोरी. की। बड़े-बड़े नेता उस टाइम चुनाव हार गए. थे क्योंकि पूरे देश का मिजाज बदल गया था।. बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। बट नेहरू जी. के योगदान को जाहिर से कोई नहीं मना कर. सकता। अटल जी ने खुद जब वो तस्वीर हटाई गई. थी। तो इसी दौर में शुभांकर जी आप सोशल. मीडिया पे बात हो रही है। आप देखिए ना. नेहरू जी को किस तरह क्रिटिसाइज करते हैं।. इंदिरा जी को इस इस बीच आप बताइए ना कि. विदेश एक डेलीगेशन जाता है ऑपरेशन सिंदूर. से संबंधित। और जब यह होता है कि विदेश. में बैठ के आप कोई बात देश के किसी. व्यक्ति के बारे में पुराने किसी व्यक्ति.
के बारे में नहीं करेंगे तो भारतीय जनता. पार्टी के एक सांसद उस डेली उस डेलीगेशन. के अहम सदस्य इंदिरा जी के खिलाफ विदेश. में बैठ के ट्वीट करते हैं।. क्या यह अच्छा है और यह हो रहा है और इसे. इसे स्वीकार कर रही है सरकार। स्वीकार ही. नहीं कर रही है बल्कि एक तरह से पुरस्कृत. कर रही है ऐसे लोगों को। तो ये जो पूरी. प्रक्रिया है ये प्रक्रिया गलत है। ठीक. है? आप आपके समय में जो लोकतंत्र में घट. रहा है वो वो सब कुछ है। तो जो पुराने समय. में लोकतंत्र में हुआ जो इतिहास लिखा गया. वो सब भी तो लोकतांत्रिक प्रणाली से ही.
लिखा गया है ना। देश के लोगों ने ही. एनसीईआरटी की किताबें हो, पाठ्यक्रम हो सब. कुछ तो. लोकतांत्रिक प्रणाली से ही आया है ना। तो. मतलब मीठामीठा गप कड़वा कड़वा थू ये अब. जैसे ये सवाल मैंने पूछा ये सवाल जो आप. बात कर रहे हैं ये क्योंकि मेरा बड़ा इस. बात को लेकर दिलचस्पी होती है कि जब मैं. अटल जी के एराक देखता हूं इलेक्शन या संसद. में चर्चा का विषय तो मैं एक सम्मान देखता. था मैंने ये सवाल अखिलेश यादव जी से पूछा. था कि मैं आपकी शादी में अटल जी आए थे और.
आज के दौर में एक बहुत बिलो द बेल्ट खटास. चलती है। ये आज की जनरेशन में मुझे नेताओं. में मिलता है। मुझे लगता है ऑफ द रिकॉर्ड. भी इनके रिश्ते अच्छे नहीं है। ज्यादातर. लोगों के खास तौर पर बड़े लोगों के. एक्चुअली बहुत अलग कर दिया गया जैसे मैं. नया पार्लियामेंटेरियन हूं। मैं 3 साल से. पार्लियामेंट में हूं। मैंने पुरानी. पार्लियामेंट में ओथ ली और सेंट्रल हॉल. था। सेंट्रल हॉल में क्या भाजपा, क्या. कांग्रेस, किसी भी दल का व्यक्ति जैसे ही. हाउस से निकलता था। एक तरफ लोकसभा, एक तरफ. राज्यसभा। आप आके सेंट्रल हॉल में बैठते. थे। दुआ सलाम हो ही जाती थी। चाय साथ में.
आप पी ही लेते थे। थोड़ी बहुत जान पहचान. बातचीत। अब नई पार्लियामेंट बनी तो. बिल्कुल कैंटीन अलग।. कैंटीन के साथ-साथ मतलब कभी आप आइए स्वागत. रहेगा आपका। दो मतलब लाउंज भी बनाए गए तो. दो बनाए गए। एक तरफ सत्ता पक्ष के लोग बैठ. रहे हैं। एक तरफ विपक्ष बैठ रहा है। मिलन. मतलब मिलनाजुलना हो ही नहीं सकता कि आप. बात कर सकें। राज्यसभा की कैंटीन अलग, लोकसभा की कैंटीन अलग। ठीक है? अब. राज्यसभा और लोकसभा के दो अलग लाउंज एक.
में सत्ता पक्ष बैठ रहा है। एक में विपक्ष. बैठ रहा है। विपक्ष वाला उधर जाने की. कोशिश नहीं कर रहा है। उधर वाला इधर आने. की कोशिश नहीं कर रहा।. जो जाएगा वो ऑकड़ लेगा।. ये मतलब आप देखिए ना सीधे-सीधे आपने. बांटने की जो कोशिश की कि बैठो ही मत साथ. में। नहीं बैठोगे तो जरा सी भी मोहब्बत की. कोई गुंजाइश छोड़ो ही मत। जो कुछ है वो बस. बांटो बांटो। ये ये जो हो रहा है ये ये. गलत है ना। यह सरकार ही तो कर रही है और. कौन कर रहा है भाई कम से कम पार्लियामेंट. को इस लायक छोड़ते आप कि वहां एक साथ बैठ.
के बातचीत कर लेते थोड़ी सहजता तो रहती. आपको लगता है ये भी इंटेंशनली डिजाइन किया. गया. बिल्कुल किया गया है मैं तो मतलब मैं तो. ये बात कहता हूं और मुझे तो लगता है कि. कभी भी जब सरकार बदले तो मैं तो अपने. नेताओं से रिक्वेस्ट करूंगा उस दौर के. मौजूदा प्रधानमंत्री से रिक्वेस्ट करूंगा. कि पार्लियामेंट को फिर पुरानी. पार्लियामेंट में ले चलिए यहां ऑफिसेस. शिफ्ट कर दीजिए क्योंकि जो रंगत और जो. विरासत अभी भी आप चले जाइए एक निष्पक्ष. पत्रकार के तौर पे दोनों बिल्डिंग्स को आप. गौर करके देख लीजिए। आपको भी लगेगा कि यार. पार्लियामेंट तो वही है।.
आप तो जीते हैं आप।. मतलब. पुरानी चीजों से मोहब्बत है आपको।. हम लोगों को अभी भी सेंट्रल हॉल में जाकर. बैठ के ज्यादा मजा आता है। लगता है कि यार. ठीक है। वो आपको लगता है ना कि यहां खड़े. होकर के संविधान सभा पे डिबेट हुई थी।. यहां यहां संविधान बना था। यहां ये खड़े जो. विरासत थी ना आप उसको क्यों मिटा देना. चाहते हो? बट वो अब जो अपग्रेड होने की. बात आती है कि वहां व्यवस्थाएं कम थी।. सिक्योरिटी पर्पस अलग था। नहीं प्रांगण एक. ही है, परिसर एक ही है। टेक्नोलॉजी तो. बदली हुई।. मतलब सिक्योरिटी फीचर क्या? सिक्योरिटी. फीचर आप मतलब पार्लियामेंट में आप एक एक.
सत्र चलाने में करोड़ों करोड़ों रुपए खर्च. कर रहे हैं। आप अपग्रेड नहीं कर सकते थे।. ये तो ये तो जबरदस्ती कहा।. तो आपको लग रहा है कि वो नई हिस्ट्री. लिखने के लिए ऐसा किया गया।. मतलब नई हिस्ट्री लिखने से ज्यादा पुरानी. हिस्ट्री को मिटाना। मतलब दो चीजें होती. हैं। आप नई हिस्ट्री लिखिए। नए शहर बसाइए. ना। कौन मना कर रहा है? अच्छे शहर बसाइए. ना। चंडीगढ़ बसाया कांग्रेस शासित. प्रधानमंत्रीियों ने, मुख्यंत्रियों ने।. आप चंडीगढ़ से खूबसूरत एक शहर बसा दीजिए।. इलाहाबाद था आप एक और खूबसूरत अड़ोस पड़ोस.
में कोई और खूबसूरत शहर बसा देते।. लेकिन ये नाम बदलने का जो ट्रेन. चलो इसी पे मैं सवाल पूछता हूं नाम पे।. मैंने मोहन यादव का भी इंटरव्यू किया था।. मैंने टीवी में योगी जी से भी बात की और. कई सारे नेताओं से हम जब सवाल पूछते हैं. कि आप नाम क्यों बदलते हैं? खासतौर पर उन. जगहों का नाम जहां पर मुस्लिम नाम है, आप. उसे नाम बदलकर हिंदू नाम क्यों करते हैं? यह सवाल तो उनका तर्क यह होता है कि एक. जगह की पहचान अलग थी। बीच में आक्रांता. आए। नाम बदला हम नाम बदल नहीं रहे हैं। हम.
पुराने नाम को रिस्टोर कर रहे हैं। जैसे. इलाहाबाद को लिखा कि वो प्रयाग था। पुराने. लोगों से मिली है तो वो कहते हैं कि वो. प्रयाग था।. प्रयाग तो था ही। मैंने तो कहा ना प्रयाग. स्टेशन आज भी है। मैं जब पहली बार. प्रतापगढ़ से ट्रेन पकड़ के आया था तो. प्रयाग घाट स्टेशन पे उतरा था। इलाहाबाद. स्टेशन पे नहीं तो वो तो 2001 में पहले भी. था ना तो यह कहना कि हम रिस्टोर कर रहे. हैं। रिस्टोर नहीं कर रहे हैं। आप अपनी एक. एजेंडा अपनी एक पॉलिटिक्स जो है वो. इस्टैब्लिश करने की कोशिश कर रहे हैं।. अच्छा यह कहना कि आक्रांता नाम से आप कैसे.
डिसाइड करोगे? जैसे एक नाम पे बहुत विवाद. हुआ ना औरंगजेब नाम पे औरंगजेब नाम का एक. सैनिक भारतीय सेना का सैनिक आतंकवादियों. से लड़ते हुए चार आतंकवादियों को मार करके. शहीद हो जाता है। तो अब सिर्फ इसलिए उसको. उसको राष्ट्र उसके परिवार मतलब उसको. राष्ट्रपति पदक मिलता है। तो आप क्या. करेंगे? उसका नाम. आपको सूट नहीं करता तो आप जो है वो भारतीय. सेना के औरंगजेब नाम के उस बहादुर सिपाही. को क्या करेंगे? आप खारिज कर देंगे।.
यह सोच मुझे लगता है इस सोच का कोई हासिल. नहीं। कागज की एक नाव अगर पार हो गई इसमें. समंदरों की कहां हार हो गई।. ठीक है? तो ये जो रिस्टोरेशन वाला पॉइंट. आपको नहीं वैलिड लगता क्योंकि ये सबने कहा. है योगी जी से लेकर जितने भी नाम जो. चेंजेस हो रहे हैं वो सिर्फ ये कह रहे हैं. कि जैसे हम फ्यूचर जनरेशन सोच रहे हैं। आज. की जनरेशन को दिक्कत जैसे आज आप इलाहाबाद. वाले हो। बट कल को आपकी दो पीढ़ियां जब. पैदा होंगी तो वो प्रयागराज से वाकिफ. होंगी। वो भूल जाएंगी कि इलाहाबाद था। यही.
पहले हुआ यही आगे हो जाएगा। यही हो रही है. ना कि आप उस पहचान को मिटा देना चाहते हो।. हां वो कह रहे हैं उनका तर्क है कि हम. रिस्टोर कर रहे हैं।. अब आप. जो हमारे पुरखों की थी हम उसे आने वाली. पीढ़ियों को दे रहे हैं। हमारी पीढ़ी में. बदल जाएंगे।. मतलब जो इलाहाबाद में जितने स्वतंत्रता. संग्राम सेनानी थे जिन्होंने वहां रहकर के. लाल पदमधर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय का. गेट तोड़ करके अंग्रेजों के खिलाफ बगावत. का बिगुल फूंका। वो सब आपके पुरखे नहीं. थे।. मैं इस स्तर पे आपको समझना चाह रहा हूं. आपसे।. मुझे लगता है ना कि आप इसका मतलब आप उनको.
अपना पुरखा नहीं मानते। आप चंद्रशेखर. आजाद, भगत सिंह, अशफाक उल्लाह खान, राजगुरु. या फिर फिरोज गांधी, मोतीलाल नेहरू पंडित. जवाहरलाल नेहरू गांधी का जिक्र किया आपने।. इंदिरा गांधी आप इन सबको अपना पुरखा नहीं. मानते? बट को आप अपना पुरखा शहर का नाम है ना? शहर के नाम की बात. नहीं मतलब यादें तो उसी से जुड़ी हुई हैं. ना? उन्होंने तो उन्होंने तो उनका सारा. स्वतंत्रता संग्राम इलाहा आप क्या करोगे? अकबर इलाहाबाद को अकबर प्रयागराज ही कर. दोगे?
कैसे कर दोगे? ठीक है। वेल साइड। पुराने जमाने में लोग. ज्यादा मेहनती थे।. अलग तरह की मेहनत थी। आप. आप 10 भाई बहन हैं। इसलिए पूछ. रिसोर्सेज कम थे। नहीं आप उसको मेहनत से. क्यों जोड़ते हैं? नहीं पुराने जमाने में लोगों के बच्चे. ज्यादा होते थे।. मुझे लगता है कुछ लोग बहुत मेहनत करते. हैं।. जैसे मेरे बाबा जी प्रकृति प्रदत्त है।. मेरे बाबा जी के भी 10 बच्चे थे। तो मैं. इसको कहीं और नहीं कोट कर रहा।. अब ये तो अब बाबा जी पता नहीं है या नहीं.
बाबा जी ही बता सकते हैं और मैं कम से कम. अपने पिता से पूछने का यह साहस नहीं रखता. और पुराने जमाने में तमाम परिवार ऐसे हैं. क्या हिंदू क्या मुसलमान देखिए मैंने. मैंने हमेशा ये बात की मैंने इसलिए हमेशा. खुद ही कोट करके आप गोंडा से हो मैं. प्रतापगढ़ से हूं पहले होता क्या था ना. कि आपकी जमीनें हैं आपका घर बार है तो. आपको परिवार में ज्यादा लोग चाहिए थे. हम. असुरक्षा का भाव था लोगों में और लोग मतलब. सोचते थे कि जी खा लेंगे. अभी यह है ना आप डरे हुए हैं। आप कंपटीशन. भी था. आप एकाकी परिवार चाहिए आपको।.
कंपटीशन भी था कि फलाना वग छा है।. हां यह होता ही था कि मतलब उनके एक. मर्दानी वो भी उनकी टैगलाइन थी कि उनके. चार बेटवा है तो हम जो है तीन चार बटवा. चाहिए। पांच बटवा चाहिए। लड़के हैं। तो. अवध का एक सामान्य अवध नहीं मुझे लगता है. पूरा पूर्वांचल बिहार ये सब इसी ज़ोन से. निकले हुए। तो ये राज्य हैं। तो सवाल मेरा. इसलिए था कि 10 भाई बहन जब हो. हम. तो आदमी बचपना कैसा होता है? मुझे लगता है बहुत सौभाग्यशाली है वो. व्यक्ति जिसके बहनें दो चार हैं। जिसके. परिवार में भाई हैं छोटे या बड़े उसकी.
परवरिश का एक अलग रंग है। उसको एक अलग. ताकत है। आप मैं मेरे ऐसे तमाम दोस्त हैं. जो अकेले हैं। आप उनकी पीड़ा को उनके साथ. बैठकर शेयर करिए। और यह जो भाजपा का बनाया. हुआ नैरेटिव है ना जनसंख्या। जनसंख्या. चाइना की जनसंख्या तो आपसे ज्यादा है ना।. आप छोड़िए भाजपा आप जनसंख्या का सदुपयोग. करिए ना. भाजपा छोड़िए अभी उमा भारती जी का मैंने. इंटरव्यू किया उन्होंने कहा कि मेरी बड़ी. वाली बहन और मुझ में 25 साल का अंतर है तो. मैं जिंदगी भर उनको मम्मी समझती रही अपनी. मम्मी को दादी समझती रही. आप आडवाणी जी को खुद प्रधानमंत्री जी मतलब.
कई भाई बहन हैं और ये अच्छी बात है मुझे. लगता है कि आप मतलब अरे छोड़िए हम आपको. जानना चाह रहे हैं आपका एक्सपीरियंस क्या. आपके सबसे बड़े वाले आप में कितना अंतर है. एज गैप है. नहीं ज्यादा एज गैप नहीं है मेरी बड़ी बहन. है वो ढाई तीन साल बड़ी है मुझसे से सबसे. जो बड़ी सबसे बड़ी सेकंड मैं हूं बाकी सब. मुझसे छोटे हैं। तो. सबसे छोटे वाला कितना गैप है? नहीं मतलब बस अब 2ाई साल का गैप मानते. हैं।. अच्छा तो ढाई ढाई साल मानते 10 साल हो गया. महाराज 20 साल हो गया होगा।. तो वो और लेकिन वो बड़ा अच्छा है ना मतलब.
आप तो क्या फन होता है? वही हम थोड़ा. जानना चाह रहे हैं। हमारे जैसे मतलब आपस. में ही भाई-बहन के बीच में लड़ते झगड़ते. आप बच जाते हैं। आप समाज में लड़ते झगड़ते. नहीं। ये सबसे पहला फायदा तो ज्यादा भाई. बहन होने का यह होता है कि आपके पास घर. में ही भाई बहनों से लड़ने का समय है।. आपके पास यह समय नहीं है कि आप समाज में. जाकर के लड़ाई कर सकें। तो ये सबसे पहली. चीज है। दूसरी चीज ये कि आपको एक अलग तरह. का आत्मबल मिलता है। एक अलग तरह की ताकत. मिलती है। भाई जो है वो ताकत होता है।.
बहनें जो है वो आपको जो भाव देती हैं ना. आपको इंसान बनाए रखती हैं। आपको कैसा एक. समाज आपको महिलाओं के साथ, औरतों के साथ, बेटियों के साथ, बहनों के साथ कैसा. बिहेवियर करना है। मुझे लगता है कि यह. आपको इस तरह के जो बड़े परिवार हैं, जहां. ज्यादा भाई-बहन हैं, वह परिवार आपको. सिखाते हैं। बहन होने से क्या फर्क पड़ता. है? यह कई लड़कियों लड़कियां अक्सर कहती. हैं कि अच्छी परवरिश देखनी हो तो हमेशा एक. बहन होनी चाहिए। इसका इसके मायने क्या. होते हैं? आपकी कई बहनें हैं। बहन होने से.
क्या फर्क पड़ता है एक लड़के के जीवन पर? सबसे पहली बात तो आप लड़कियों को लेकर के. आपका नजरिया जो है ना वो नवाज साहब का एक. शेर है कि गलत निगाह उठे उठने वाली थी. किसी की जानिब। अपनी बेटी का ख्याल आया तो. दिल कांप उठा। तो आप अपनी बहनों के बीच. में होते हैं ना तो अगर आप इंसान हैं तो. आप बाहर किसी की बहन, किसी की बेटी पर. बुरी नजर नहीं डाल सकते। आपको यह ख्याल. रहेगा कि हां हमारी भी बहनें हैं। वो ही.
आपको अच्छा इंसान बना के रखता है। और मुझे. लगता है कि वो बदनसीब है इंसान जिसके बहन. नहीं है।. मैंने कहीं सुना आप बार-बार कहते हैं कि. मैं इंडिया का इमरान खान हूं। यह टाइटल. पहली बार मुझे एक चैनल ने दिया। मैं एक. प्रोग्राम में गया था तो उन्होंने मेरे. प्रोग्राम का जो प्रोग्राम था उसका टाइटल. रखा था भारत का इमरान।. तो यह भारत का इमरान जो मुझे अच्छा लगा वो. अलग से कोट किया गया भारत का इमरान। तो. मुझे पाकिस्तान के इमरान खान खट से. फ्लैशबैक में आए क्योंकि वो क्रिकेट खेलते. थे। मैं क्रिकेट बहुत फॉलो करता हूं। वो. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने। उनको काफी.
लोग इंडिया में पसंद करते हैं। अब वो जेल. में हैं। पाकिस्तान जैसे पॉपुलर लीडर होने. के बावजूद उनकी अपनी पॉलिटिक्स है। आप कभी. इंस्पायर हुए उन्हें इमरान खान से? नहीं।. नहीं मैं क्रिकेट एक वक्त तक खेलता रहा और. वो मेरे ऐज ग्रुप वाले नहीं थे। फिर भी. जैसे लेकिन. क्या बात कर रहा. लेकिन नो डाउट अच्छे प्लेयर थे इसमें कोई. दो राय नहीं पर्सनालिटी बहुत उनकी मतलब. लुभाने वाली है किसी को भी लेकिन वहां की. राजनीति की परिस्थितियां अलग है यहां. वो तो जेल में बैठे हैं बेचारे अलग हैं तो.
मैं जो है जाहिर सी बात है आप अपने आसपास. के पड़ोसी हैं. नाम से पॉलिटिक्स नाम सेम है भारत का. इमरान कहा. जैसे देखिए हमारे साथ हमारा नाम इमरान है. इसकी जो पीड़ा है वो हमने ने वक्तव पर. देखी है। उसको महसूस किया है।. मैं ऐसे कहता था कि आप ट्रेनों में सफर कर. रहे हैं। आपके आप चेहरे से मुसलमान नहीं. लग रहे हैं। आपके मोबाइल पे फोन आ रहा है।. आप जवाब में जब वालेकुम अस्सलाम कहते हैं. ना तो आसपास की सवारियों के चेहरों के जो. एक्सप्रेशनंस बदलते हैं ना मैंने मैंने. बहुत यात्राएं की हैं। तो मैंने उसको जिया.
है। आप एयरपोर्ट जा रहे हैं। अब तो आप. एमपी हो गए। पहले का जो सफर था आप जा रहे. हो और आप अपना बोर्डिंग पास दे रहे हो। तो. सामान्य तौर पर चेकिंग करने वाले की. उंगलियों का दबाव बता देता है कि नाम में. कुछ तो है तो नाम में कुछ तो होता है. लेकिन वह भारत का इमरान मुझे मुझे अच्छा. लगता है मैं अपने देश का नाम लेकर के जैसे. मैं प्रतापगढ़ में पैदा हुआ बहुत कम रहा. जिले में लेकिन आज मैं पूरी दुनिया में. अगर कहीं खड़ा होता हूं मैं देश की. पार्लियामेंट में खड़ा हुआ तो इमरान.
प्रतापगढ़ ही पुकारा गया ना. हम. तो मेरे नाम के साथ मेरे जिले का नाम आया. जबकि मैंने पहली बार जब इस नाम को कैरी. किया तो मुझे याद इलाहाबाद में कमिश्नर. हुआ करते थे। उन्होंने मुझे बुला के कहा. कि यार कहां तुम प्रतापगढ़ी तुम इतने. सॉफ्ट से इतने मतलब अच्छी शायरी करते हो।. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य. से पढ़ाई कर रहे हो। कहां ये प्रतापगढ़ी. कितना अलग सोच है जिले की। तो मैंने कहा. सर उस सोच को बदलेंगे आगे लेकर के जाएंगे।. तो मुझे अच्छा लगता है भारत का इमरान में.
मैं बीच में रियाद गया। वहां जो प्रोग्राम. रखा उन लोगों ने उस प्रोग्राम का नाम भी. भारत का इमरान रखा। मैं अभी यूएस गया तो. वहां भी एक इवेंट हुआ तो मैंने कहा यार ये. नाम मुझे अच्छा लगता है आप इस नाम से करो. तो देश का नाम आपके नाम से पहले आए तो. इससे बड़ा गर्व. सही बात है वो तो पड़ोस वाले में वो. प्रधानमंत्री तक पहुंच गए थे. [हंसी]. तो महत्वाकांक्षाओं का बाजार खत्म कैसे हो. जाए. नहीं नहीं ये महत्वाकांक्षा ज्यादा ये. जज्बात है जो एक अलग तरह मेरा मेरी एक.
नज्म है उसका एक शेर है के. सोचता हूं हूं तो मेरी आंख छलक जाती है।. मुल्क से रूह का रिश्ता बड़ा जज्बाती है।. सोचता हूं तो मेरी आंख छलक जाती है। मुल्क. से रूह का रिश्ता बड़ा जज्बाती है। मेरे. आका ने मदीने में कहा था यह कभी हिंद की. सिमत से एक ठंडी हवा आती है। ये ये. रेफरेंस है। तो हमसे तो सबूत मांगे जाते. हैं ना। हमें तो इनबॉक्स में हर चौथे दिन. कोई ना कोई सबूत मांगता हुआ दिखता है।.
ये क्यों होता है? चलो मैं इस पे बहुत. मतलब बस बहुत ही बोल्ड तरीके से पूछ लेता. हूं मैं। ये ये एक सांप्रदायिकता जो भरी. गई है जहनों में उसका इंपैक्ट है।. जैसे मैं सोशल मीडिया कमेंट सेक्शन पढ़ता. हूं या कई बार मैंने कई सारे मुस्लिम. नेताओं में जो बच्चे गए सवाल पूछने के लिए. तो उन्होंने एक कॉमन सवाल पूछा कि हर बार. आतंकवादी मुसलमान क्यों होता है? या आपने. अभी कहा कि दबा दिया जाता है। एक्स्ट्रा. दबाया जाता है। नाम में वजन होता है। यह. क्यों आपको लगता है ऐसा क्यों हुआ? क्यों? इतने बड़े पैमाने पर लोगों को आतंकवादी.
बनाया गया, ठप्पा लगाया गया। इस रिसर्च पर. अगर कभी कोई मीडिया हाउस काम करे ना तो. आपकी आंखें भर आएंगी। ऐसेसे लोग हैं 17. साल बाद बाइ्जत बरी। 23 साल बाद बाइ्जत. बरी 12 साल बाद बाइ्जत बरी।. आप वो 22 साल लौटा सकते हो किसी इंसान के. जिसका नाम अकरम था। जिसका नाम साहिल था. जिसका नाम सोहेल था। वह 17 साल लौटा सकते. हो किसी के। सदियों से यहीं पर रहता है।. जाने कितने दुख सहता है। भीगी पलकों से एक.
बेटा भारत मां से यह कहता है पुरखे हम. सबके गोद में तेरी खाक ओढ़कर लेटे हैं।. मां हम भी तेरे बेटे हैं। तो उस पीड़ा को. कभी किसी ने समझने की कोशिश आप जो कह रहे. हो ये बहुत सारी घटनाएं इस बीच में घटनाएं. बहुत जिनमें 20 21 साल का है। लेकिन इमरान. इसका एक सच ये भी है कि सारे नहीं निकले. हैं। कई सारे होंगे भी और एक पहलू यह भी. है कि जैसे प्रज्ञा ठाकुर अभी निकली।. वो भी यही बात कह रही हैं कि हम भी जेल. में रहे। अदालत ने हमें ही बरी कर दिया।.
लेकिन आप उन्हें उस निगाहों से देखते हो. कि वह अदालत ने गोडसे को बरी नहीं किया।. हम. अदालत ने ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनको बरी. नहीं किया। और अदालतों ने वही एनआईए जो. फांसी की सजा मांग रही थी वही एनआईए कितनी. शिथिल हो जाती है। वो भी देश के सामने है।. इस पूरे एपिसोड में अगर आप जाएंगे तो. अदालतें बट आखिर में तो लोगों को अदालत का. फैसला याद रहेगा ना। जैसे आपने कहा सब 21. साल बाद बरी हो गए। स्वीकार जैसे वो कह. रहे हैं कि पूरा शरीर तोड़ दिया। सब.
स्वीकार कर रहे हैं। लेकिन कई मामलों में. अदालत से बरी हुए लोग हाई कोर्ट से बरी. हुए सरकारें तुरंत सुप्रीम कोर्ट चली गई।. कई मामलों में अदालत मतलब सरकारें बहुत. खामोश ऐसी चुप्पी ओढ़ती हैं कि आपको पता. भी नहीं चलता। और जिस मीडिया ने फ्रंट पेज. पर हाफ-हाफ पेज की खबरें छापी, प्रिंट. मीडिया ने, चैनलों ने बड़े-बड़े प्रोग्राम. चलाए। वो बाइ्जत बरी होने के बाद कभी सुध. भी नहीं लेती हैं।. दैट्स हाउ मीडिया ये होता है। लेकिन दूसरे. केसेस में नहीं हो रहा है।.
मतलब एक एक बारीक एक महीन एक सिस्टम ऐसा. है जो काम कर रहा है जिसके लिए बहुत सॉफ्ट. टारगेट है मुसलमान।. उस पे ठप्पा लगा दो। मतलब मैं जानना ही. चाह रहा हूं जो आपने कहा. लगता है कि वो राजनीति को मतलब हमारे साथ. तो कई तरह से नाइंसाफी हुई ना। बट लंबे. समय तक तो आप ही की सरकार जैसे कांग्रेस. शाहज आजा आप हैं। बहुत लंबे समय सरकार. उनकी रही। तो फिर ये माहौल क्यों बना कि. आप कह रहे हो कि मुसलमान को सॉफ्ट टारगेट. करना पड़ा।. देखिए सबसे पहली बात तो ये सोचना कि सिर्फ. राजनीति बहुत सारे मसलों का हल है।. सरकारें चेंज हो जाना बहुत सारे मसलों का.
हल है। तो मैं इससे इत्तेफाक नहीं रखता. हूं। मेरा अपना मानना है कि एक ऐसा सिस्टम. है जो अपने हिसाब से काम कर रहा है।. आजादी के बाद से. वो आजादी के बाद से काम कर रहा है। और वो. उसके मन में कहीं ना कहीं एक बारीक सी. सांप्रदायिकता है। वो खत्म होनी चाहिए। वो. नहीं खत्म होगी। एक बड़ी आबादी को आप. हमेशा शक की नजर से देखें। आपसे ही शुभंकर. भाई सुबह शाम कहा जाए सबूत दो तुम अच्छे. आदमी हो तुम देशभक्त हो तुम सबूत दो कितनी. बार सबूत दे कोई कितनी बार कब तक मतलब सब.
कुछ कुर्बान करके सब कुछ लुटा के वो आप जब. चकदे इंडिया देखते हो ना तो वो जो आखिरी. का सीन है ना शाहरुख खान का तो अगर वैसे. व्यक्ति से भी आप सवाल पूछ रहे हो उस. व्यक्ति की भी देशभक्ति को आप सवालों के. घेरे में खड़े करने लगते हो जो पूरी. दुनिया में आपकी मोहब्बत का ब्रांड. एंबेसडर बन के जा रहा हो तो आप आम. मुसलमानों के साथ कैसा व्यवहार? बट इमरान जैसे चलो आपने एक अच्छा टॉपिक. छेड़ा। अभी मैंने अनु कपूर का पडकास्ट किया. था। उन्होंने यह मसला उठाया कि अब सबकी. अपनी शिकायतें हैं। जैसे एक शिकायत आपने. शाहरुख खान वाली की कि शाहरुख खान को भी.
अपनी पहचान बताना पड़ता है। व्हिच इज़. अनफॉर्चूनेट बिकॉज़ ही रिप्रेजेंट इंडिया।. वो ग्लोबल आइकॉन हमारे और हम सबको वो. रिप्रेजेंट करते हैं बाहर जाकर। बट वो. कहते हैं कि उसी बॉलीवुड में वो नेगी साहब. का किरदार था जिसे बाद में कबीर खान बना. दिया गया। बॉलीवुड में 70 के 80 दशक में. बहुत ही आरोप बहुत सारे आजकल के जो पुराने. लोग हैं वेट्स वो ये कहते हैं कि बड़े. सिस्टमेटिक तरीके से बॉलीवुड ने हमेशा. इमरान चाचा को ही अच्छा दिखाया। गांव में. सबसे अच्छा आदमी। ब्राह्मण जो था वो. रूटमार था। ठाकुर जो था वो आक्रांता जैसा. था। बनिया जो था वो चोर था। एक गांव में.
चाचा थे जो. जो जो वर्ण व्यवस्था है आप उस अगर उससे. संबंधित फिल्में बन रही है। तो वहां भी. आपको और ये शिकायतें कब से शुरू हुई है? 2014 के बाद से. मतलब इधर बीते 15 साल. मतलब लोगों में होड़ लग गई है कि किसको. एफटीआई का चेयरमैन बनना है एनएसडी पहुंचना. है कुछ हासिल कर लेना है तो आप कैसे मतलब. जो अपना नाम उर्दू उपनाम रखें और बाद में. पता चले कि उर्दू से संबंधित सारे साहित्य. को खारिज करने पे आ जाए तो आप समझ लीजिए. ना कि कौन सी मानसिकता के साथ काम कर रहे.
हैं। तो अनू कपूर ने जी ने ये बात कभी. पहले कही नहीं कही। अभी कह रहे हैं कि वो. बॉलीवुड तो इस तरह से काम कर रहा है।. उन्होंने भाई बॉलीवुड का आप सामान्य. बॉलीवुड तो जालीदार टोपी पहना करके जो. सिंबोलिज्म दिखा रहा है कि फिर तो मुसलमान. उस पे कह रहे कि भाई आप हर मतलब हर. व्यक्ति को जालीदार टोपी दिखा करके. आतंकवादी बताने की कोशिश क्यों करते हो? आप सिंबोलिज्म की जो राजनीति कर रहे हो।. हम भी कोें हैं वो भी कोें हैं। तो खुश. काहे नहीं है? भाई मैं समझ पा रहा हूं।. अगर मुसलमान कह रहा है हमको शक की निगाहों. से देख रहे हैं। हिंदू कह रहा है हम खतरे. में हैं। तो मजे में कौन है देश में?
आप बताओ कैसे खतरे में है।. मजे में कौन है देश मतलब मुझे तो हैरत. होती है कि ये एक नैरेटिव सरकार ने बना. दिया कि नहीं खतरे में है। भाई 11 साल से. आप हो। चलो आप आलमबरदार हो उस विचारधारा. के तो अगर खतरे में है तो फिर तो आप बहुत. कमजोर हो। सीमाएं सुरक्षित नहीं है। आप. कहते थे कि हम एक के बदले 10 सर लेके. आएंगे। आप कितने सर लेके आ रहे हो? आप. कहीं से एक फोन आ रहा है। आप सीज फायर कर. दे रहे हो। वहां से आपके बेटों को हथकड़ी. लगा के भेजा जा रहा। मतलब इसको बहुत मैं.
मैं सरलीकरण इसका कर रहा हूं कि. पार्लियामेंट का सत्र चल रहा है। एक खेप. हमारे भारत के नागरिकों की जो अप्रवासी. हैं बेड़ी हथकड़ी दोनों लगा के भेजी जाती. हैं। प्रधानमंत्री जी उसी दौरान अमेरिका. का ट्रिप अपना प्लान करते हैं या पहले से. प्लान रहता है। वो ट्रंप से मिलके आते हैं. और उनके आने के दो दिन के बाद एक खेप फिर. उसी तरह से भेजी जाती है। जबकि पड़ोसी देश.
के लोगों को जब वापस भेजा जाता है तो उनके. हाथों में हथकड़ी बेड़ी नहीं लगाई जाती।. और आप कह रहे हो कि नहीं अमेरिका तो. अमेरिका तू क्या है? वो सुना है ना। तो आप. बताओ ना कि आप अगर आप इतने कमजोर हो तो. फिर ये ढिंढोरा आप क्यों पीट रहे हो? भाई. आप जब उच्चतम मानदंड पे खड़े होकर के. बड़ी-बड़ी बात करते हो तो आपसे तो ज्यादा. सवाल पूछा जाएगा ना। तो इससे तो लाख गुना. बेहतर कि जब नेहरू उस दौर में जब जाते थे. तो पूरा यूएस खड़ा हो जाता था। इंदिरा जी. उस दौर में उन्होंने कह दिया कि सातवां.
बेड़ा नहीं आठवां बेड़ा भेज दो देश की. संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे। तो आप. तो बहुत कमजोर हो भाई। मुझे लगता है ये. पार्लियामेंट के लिए आप बचा लो। ये डिबेट. आप बीजेपी वाले आप लोग करोगे ज्यादा मजा. आएगा। मैं इमरान प्रतापगढ़ की सोच को. एक्सप्लोर करना चाहता हूं। पॉलिटिकल तो. दुनिया कर ही रही है आपके साथ। फिर मैं आ. रहा हूं।. मैंने आपके कई शायरियों में कई जगहों पर. मुसलमानों का जिक्र करते हुए सुना। मैं. मुसलमान हूं। बहुत कोर्ट आपने हाईलाइट. करते हो आप। कई बार स्पेशली करते हो।. क्यों जरूरत पड़ती है इसकी? देखिए मैं इसे. एक नॉर्मल इंसान के तौर पर भी कर सकते हो।.
क्यों वो हाईलाइट करना पड़ता है। क्यों ये. आपको कहना पड़ता है कि सिक्योरिटी वाला. छूता है तो नस दबाता है। फिर मैं जानना. चाह रहा हूं। ये भी शिकायत कर रहे हैं. सरकार हमारी है। सिस्टम उनका है। आप कह. रहे हो कि 1947 से एक सिस्टम चल रहा है।. देखिए शुभंकर भाई मैं जिस समाज में रहता. हूं। मेरी शायरी में कहा जाता है ना शायर. तो समाज का आईना है।. कवि समाज का दर्पण है।. हम वो दिखाएंगे जो समाज सोच रहा है।. हम जिस समाज का हिस्सा हैं उस समाज में. हैं और उनका दर्द उनकी पीड़ा हम तक पहले. पहुंच रही है और एक पूरा मीडिया ने वाश. आउट कर रखा है कि नहीं इस इस दर्द पे हम.
बात नहीं करेंगे। तो हम ढिंढोरा पीट के. कहेंगे कि मेरे भारत तेरी सरहदों के. निगबान हैं। हम मुसलमान हैं। हम कहेंगे कि. हम अपनी कुर्बानियां गिनाएंगे। भाई आप. हमारी कुर्बानी स्वीकार करने तक को तैयार. नहीं हो। तो हम गिना रहे हैं। सुनो। हम. अपनी सफाई में कह रहे हैं कि भैया हमने. इतनी कुर्बानियां दी। आप आक्रांताओं से. लेकर के राजाओं से लेकर बादशाहत की लड़ाई. और सारी जो पुरानी इतिहास है पुराना उससे.
आप हमें जोड़ने की हर दिन कोशिश कर रहे हो. जोड़ दे रहे हो फ्रेम कर दे रहे हो तो हम. क्या करें हमारे पास चारा ही क्या है मतलब. मैं ये कहूं कि फिर लोकसभा हारने के बाद. इमरान प्रतापगढ़ी राज्यसभा में सांसद. इसलिए बने क्योंकि वो मुसलमान थे. नहीं इमरान थे इसलिए बने शायर थे इसलिए. बने पहचान थी इसलिए बने एक सोच थी इसलिए. मुसलमान भी वर्क किया था उसमें नहीं या आप. उस कम्युनिटी को रिप्रेजेंट कर रहे थे. तो मतलब फिर सवाल आएगा कि प्रधानमंत्री जी. प्रधानमंत्री जी. मैं उधर नहीं जाना मैं आप आपकी शिकायतों.
के बीच में समझने की कोशिश कर रहा हूं. नहीं मुझे लगता है कि पार्टी ने संभावनाएं. देखी और मैंने मुझे पहले ऑर्गेनाइजेशन की. जिम्मेदारी ऐसे ही नहीं दे दिया गया मतलब. बड़ा हो हल्ला मचाया गया क्योंकि मतलब. बड़ा हो हल्ला मचाया गया हालांकि जिन सब. ने हो हल्ला मचाया जब वो मेरी उम्र के थे. तो वो कैबिनेट मंत्री थे. ऐसा नहीं कि हम अकेले बिरले नहीं है। बहुत. जैसे मेरी इंडस्ट्री में लोग कहते हैं ना. मुझसे कई बार कई सीनियर जर्नलिस्ट ने कहा. कि अगर तुम लड़की होते तो तुम्हारे बारे. में सीओ से लेकर चपरासी तक चर्चा होती।.
राइस बहुत जल्दी हुआ मेरा। ऐसे ही आपके. बारे में लोग कहते हैं कि इमरान प्रतापगढ़. का राइस बहुत तेज हुआ है। वो चुनाव हारे. उसके बाद सब आता आ रहा है। वो बिल्कुल बगल. में दिखते हैं। साथ में घूमते हैं। बिहार. जाते हैं। भारत जोड़ो यात्रा कर रहे हैं।. तो इतना मेहरबानी क्यों हो गई सडनली इमरान. प्रतापगढ़ पे? अब शुभांकर के पडकास्ट को ज्यादा व्यूज. आते हैं।. हां। तो बुजुर्गों को इस बात पे मुझे नहीं. लगता कि बहुत ज्यादा मतलब पीड़ा होनी. चाहिए।. वो शाहिद आपके फैजाबाद के एक शायर हैं।. उनका एक शेर है कि जो भी मिलता है उसी को.
देखने लगता हूं मैं। क्या करूं मजबूरियां. है गांव से आया हूं मैं। मैं तेरे साहिल. पे आया था कि देखूं तेरा जर्फ। ऐ समंदर. किसने तुझसे कह दिया प्यासा हूं मैं। तो. हो सकता है हम में आप में जो जुर्रें. इंकार है ना। क्या पता नेताओं को आपके. आलाकमान को या आपकी जो टॉप लीडरशिप है. उसको लगता हो कि नहीं यार यह लड़का कुछ. अलग करने के नजरिए से आया है। कुछ तो इसकी. आवाज को पार्लियामेंट पहुंचना चाहिए। मैं. चुनाव लड़ा हार गया। कुछ आता नहीं था।.
सीधे चुनाव में गया और चुनाव तो एक अलग ही. चीज है। अब जब कभी लडूंगा तो शायद बेहतर. तरीके से लडूंगा। तो उसके बाद पार्टी को. लगा कि नहीं पार्टी कोई भी पार्टी हो किसी. भी यंग फेस पे इन्वेस्ट करती है। उसमें. संभावनाएं देखती है। पार्टी ने मुझ में. संभावनाएं देखी। पहले मुझे ऑर्गेनाइजेशन. का काम दिया और मैंने लगातार उस पे काम. किया। माइनॉरिटी डिपार्टमेंट का नेशनल. चेयर पर्सन हूं अभी भी और मैंने काम किया. और काम करने के बाद पार्टी ने एक मौका और.
दिया और पिछले 3 साल में जिस पार्लियामेंट. को समझने में 5 साल लग जाते हैं मैं डे वन. से खड़ा हूं और बोल रहा हूं और हर मुद्दे. पे बोल रहा हूं। मतलब जब आपने कहा ना कि. आपको मुसलमान होने की वजह से मेरी. पार्लियामेंट की जो पहली स्पीच है वह. इलाहाबाद विश्वविद्यालय की फीस वृद्धि के. खिलाफ है।. सुना मैंने. तो मैं तो मैं हाथरस की उस दलित बिटिया के. लिए भी आवाज उठा रहा हूं। मैं महंगाई पर. भी आवाज उठा रहा हूं। मैं ट्रेनों के बड़े. हुए किराए पे भी आवाज उठा रहा हूं। मैं. हवाई जहाज में हवाई चप्पल वाले वायदे पर.
भी आवाज उठा रहा हूं। हां, मैं वो पर भी. बात कर रहा हूं। मैं नजीब के लिए भी बोल. रहा हूं। मैं बिलकिस के लिए भी बोल रहा. हूं। मैं जिस समाज से आता हूं उसकी पीड़ा. मेरे पास ज्यादा है। तो शायद मैं जब उस पर. बात करता हूं तो मैं ज्यादा संवेदना से. भीग जाता हूं। बस इतना ही है। मैं मुसलमान. हूं ये एक सच्चाई है। मैं भारतीय हूं। यह. एक सच्चाई है और मैं भारतीय मुसलमान हूं।. यह मेरे लिए गर्व का विषय है।. ठीक है। राहुल जी के बारे में एक अच्छी.
चीज़ कही जाती है कि वह अच्छे सिलेक्टर. हैं। वह पिक बहुत अच्छे लोगों को करते. हैं।. अभी कहना. लेकिन फिर लेकिन फिर उनके टीममेट्स जो हैं. दूसरी टीम से खेलने लगते हैं। वो सामने से. आके रन बनाने लगते हैं। और ऐसी लंबी चौड़ी. लिस्ट है। राहुल जी जब आए लॉन्च हुए अच्छे. से तो उनके आसपास जितने लोग हमें यंग फसेस. दिखते थे। वो आज बीजेपी के साइड से. चौके मारते हुए हमें दिखते हैं। देखिए. राहुल जी जो लड़ाई लड़ रहे हैं वो बड़ी. मुश्किल लड़ाई है। रोक नहीं पाते हैं वो. लोगों को अपना।. बड़ी मुश्किल लड़ाई है राहुल जी जो लड़ाई. लड़ रहे हैं। मतलब सिर्फ सरकार से नहीं. लड़ रहे हैं। सिर्फ एक राजनीतिक दल से.
नहीं लड़ रहे। एक विचारधारा से नहीं लड़. रहे। मतलब कई चीजें जुड़ी हैं। एन केन. प्रकारण साम दाम दंड भेद सब कुछ जुड़ा हुआ. है। ऐसे में मैंने एक शेर कहा था कि कांटे. गुल के साथ नहीं चल सकते हैं। बुजदिल खुल. के साथ नहीं चल सकते हैं। रास्ते में जो. छोड़ गया उसे जाने दो। सब राहुल के साथ. नहीं चल सकते हैं। तो इस मुश्किल लड़ाई. में राहुल जी ने पाला खींच दिया है। जिसको. चलना है आए 4000 कि.मी. साथ चले। न्याय. यात्रा में साथ चले। वोटर अधिकार यात्रा. में साथ चले। उसे मतलब पैदल भी चलना.
पड़ेगा। पांव के छालों की परवाह करनी है. तो घर बैठिए। ईडी से डरना है तो घर बैठिए।. सीबीआई से डरना है तो चले जाइए। शामिल हो. जाइए। राहुल जी ने तो खुले मंच से कह दिया. जिसे जाना है जाए। फिल्टर हो रहा है। अब. जो एक नई कांग्रेस निकल के आई है, यह. राहुल गांधी की कांग्रेस है और आप देख रहे. हैं, आप सब भी इससे सहमत होंगे कि पिछले. कुछ महीनों में, कुछ सालों में चीजें तेजी. से बदल रही हैं। राहुल जी जनता का भरोसा. लगातार हासिल कर रहे हैं।. बट उसके बावजूद फिर मैं कहूंगा क्योंकि आप.
घूम टहल के आते हो इंडियन पॉलिटिकल सिस्टम. में। एट एट द एंड ऑफ़ द डे वोटिंग सरकार. पे।. मुझे प्रमोद महाजन जी का वो डायलॉग जब उन. संसद में भाषण दिया था उन्होंने कि वी आर. सिंगल लार्जेस्ट पार्टी बट वी आर इन. अपोजिशन ही इज़ ओनली पर्सन ऑफ ह पार्टी बट. ही इज़ द गवर्नमेंट तो वो बड़ा इंडियन. पॉलिटिक्स का एक बड़ा अच्छा स्ट्रक्चर. बताया उन्होंने अगर आपने स्पीच सुनी हो. प्रमोद महाजन जी की. सुनी. हां लेकिन उसमें अब मैं बीते 2 साल का. रिकॉर्ड देख रहा था बीते 2 साल में मध्य. प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ मिजोरम सिक्किम. अरुणाचल आंध्र प्रदेश उड़ीसा फिर उसके बाद. हरियाणा महाराष्ट्र दिल्ली.
हां ये चुनाव आप हारे हारे और ये बीते 2. साल की बात कर रहा हूं से नहीं जबकि इसी. बीच में भारत जोड़ो यात्रा रही। लोकसभा. में आपने अच्छा किया बट अगेन आप सरकार में. नहीं आ पाए। देखिए जब भारत जोड़ो यात्रा. शुरू हुई अंत होते-होते असल में हम लोकसभा. चुनाव में गए।. हम. बीच में जो विधानसभा चुनाव थे उस दौरान तो. राहुल जी लगातार यात्रा ही कर रहे थे।. मेरा अपना मानना है। और चुनाव जीतने के. लिए बहुत सारी चीजें आप गोंडा से हो।. हम्म। जो जो चीजें मतलब अस्थाई जरूरी हैं.
हो सकता है उन मानकों पे हम वहां वहां खरे. ना उतर पाए।. आपका क्या एनालिसिस. कुछ तो आप लोग करते होंगे ना बात कि यार. इतने सारे चुनाव हो गए। देखिए अभी जो. राहुल जी ने जो खुलासा किया राहुल जी ने. जो सबूत देश के सामने रखे हमारे लिए भी. जैसे मैं मध्य महाराष्ट्र चुनाव में बहुत. इनवॉल्व था। मैंने बड़ी रैलियां की और. लिटरली मतलब सबके लिए बहुत शॉकिंग है वो. चुनाव कि कैसे वो बिल्कुल एकदम मतलब. परिवर्तित हो गया। हरियाणा बहुत ही शॉकिंग.
है हमारे लिए। तो मतलब कुछ राज्यों के. चुनाव तो इतने चौंकाने वाले हैं बट कई. जैसे पत्रकारों से मैं बैठता हूं क्योंकि. हरियाणा हमारे लिए भी चौंकाने वाला था।. लेकिन फिर जब कई लोग कड़े जल जुड़ते हैं. कि शैलजा जी थी. वो जो वो कह रही थी हुड्डा साहब को लेके. जो बात चली थी कि कुछ आपस में ही लोग. हरवाना चाह रहे थे। मुझे तो यहां तक लोगों. ने बताया कांग्रेस में ही जो लोग आए मिले. बैठे कि वो चाहते थे कि जीतें। लेकिन इतना. जीतें जिस पे हम सीएम बन जाए। इससे आज. जीतेंगे तो किसी और को बना दिया जाएगा। तो. ये रहा कि इंटरनल ये ये उस पूरे चुनाव की. चोरी को उससे ध्यान हटाने के लिए बहुत.
आसान है कि शैलजा जी ने ये कर दिया। शैलजा. जी तो ठीक है। उन्होंने एक इंटरव्यू दे. दिया ना इससे ज्यादा क्या कर दिया? हुड्डा जी का चला कि उन्होंने कई कैंडिडेट. हटवाए।. उसके बावजूद कांग्रेस को लेकर के जो लहर. थी आप यकीन करो।. हां ये सब मतलब मैं ग्राउंड पे था। मैंने. प्रचार किया है वहां पर। महाराष्ट्र में. मतलब मुझे झंडे नहीं दिख रहे थे दूसरी. पार्टियों के।. और बाद में पता चला कि उस लिस्ट में ऐसेसे. मतलब एक साथ इतने-इतने नाम जोड़े गए। मतलब. अभी सच में अभी उस पे बहुत काम होना बाकी. है। बट आप बेंगलुरु सेंट्रल की सीट लोकसभा.
की हारना मैं खुद मान रहा था कि वो नहीं. हार सकते। और अब जब राहुल जी ने सबूतों के. साथ ये कहा. हम. के हम जो है. इतनी बड़ी वोट चोरी पकड़ कर के ले के आए. तो वो बहुत शौकीन. तो मतलब मैं ये मान लूं कि बिहार चुनाव आप. लोग हार गए।. नहीं अभी तो राहुल जी ने जो क्रांति कर दी. है बिहार में।. अरे तो आप तो कह रहे हो क्रांति तो. महाराष्ट्र में भी हो गई थी आपके हिसाब. से। नहीं भाई हम वो हमें बाद में पता चली. ना वो चोरी हमें बाद में पता चली इस बार. तो हम पहले से सड़क पर हैं और हम अभी आप.
देखिए आज आज का वीडियो उठा के देखिए आप. चंपारण मोतिहारी बेतिया पहुंची है यात्रा. जन सैलाब है कई-कई किलोमीटर का भीड़ जनता. सड़क पर भीड़ से वोट. भीड़ ही देखिए आप भीड़ को आप मोदी जी की. रैली में मतलब अगर विदेश में ऑस्ट्रेलिया. जा रहे हैं और वहां 200 आदमी बुला करके. एम्बेसी अरेंज कर रही है तो फिर आप कहो कि. मतलब बस मोदी मोदी के नारे लग रहे हैं. भीड़ तो इस बार प्रशांत किशोर के लिए भी. दिख रही है मुझे. दावा तो वो भी मुझे मेरे पडकास्ट में कर. गए कि शुभांकर 150 के नीचे आए तो लानत है. मेरे ऊपर. आप भी आप हंसे रहे होंगे उस वक्त हंसे.
उन्होंने कहा कि 150 ला. उस वक्त आप हंसे होंगे मेरा ख्याल. कहे कि 2025 आए तो खुद तोड़ के भेजेंगे ये. ये सब सारी रील्स और सारी भीड़ उस समय तक. थी. जब तक राहुल जी मैदान में नहीं उतरे थे. तेजस्वी मैदान में नहीं उतरे थे महागठबंधन. मैदान में नहीं उतरा था जब से ये रोड वोटर. अधिकार यात्रा शुरू हुई है उसके बाद कहीं. की कोई नई विजुअल है आपके पास. जाएंगे अभी तो इलेक्शन माहौल लीक होगा. नहीं दिखेगा आपको तो मतलब मतलब आप मान रहे. बिहार में अच्छा होगा इस बार. बिहार में बहुत अच्छा होगा बहुत अच्छा. होगा मैं स्क्रीनिंग कमेटी में हूं मैं.
ग्राउंड पे भी जा रहा हूं आपको देख के. अच्छा आपका आपका ही प्रमोशन इसी पे निर्भर. करेगा. मुझे लगता है मैं जो काम कर रहा हूं वो. पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है मैं उस पे. प्रमोशन. लाइक वी से विद ग्रेट. राजनीति में मुझे. ग्रेटर रिसोंसिबिलिटी कम ग्रेटर भसड़. प्रमोशन डिमोशन जैसी कोई चीज नहीं होती है. आप काम कर रहे हो आप ईमानदारी से अपना काम. करो और डरो मत. राहुल जी का नारा ही है डरो मत मैं बैठ के. पढ़ रहा था। यूपी में एनडी तिवारी 35 साल. पहले कांग्रेस के मुख्यमंत्री थे। बिहार.
में 6 दिसंबर 1989 से लेकर 10 मार्च 90 तक. जगन्नाथ मिश्रा जी मुख्यमंत्री थे।. हम. इट्स बीन 35 इयर्स। 35 साल हो गए इमरान।. यूपी और बिहार में कांग्रेस का. मुख्यमंत्री बने। इन 35 सालों में तो मोदी. जी या बाकी लोग नहीं थे।. 35 साल में कांग्रेस की सरकार भी रही. केंद्र में। लंबे समय तक रही। क्या वजह. रही कि जो कांग्रेस यूपी, बिहार जैसे बड़े. राज्यों में पावरफुल पार्टी थी जिसके लोग. आज इन बाकी पार्टियों में क्षेत्रीय. पार्टी में गए वहां से कांग्रेस बिल्कुल.
विलप्त हो गई। आज रीजनल पार्टीज पे बहुत. डिपेंडेंट होना पड़ रहा है। चाहे तेजस्वी. जी पे या अखिलेश जी पे। देखिए राजनीति में. यह होता है। 35 इयर्स होता है और बहुत. सारे मतलब भाजपा का भी आप उभार देखेंगे।. दो सीट थी देश की पार्लियामेंट में उनके. पास और उभार आया। फिर वह राजनीति ऐसे ही. काम करती। इतना नहीं गए. जो जो इंदिरा जी एक चुनाव में चुनाव हार. गए अगली बार वो कितनी प्रचंड बहुमत के साथ. सत्ता में आईं. आपकी उम्र कितनी है. मेरी अभी 37 38 साल है. तब दो साल के रहोगे जब आप यहां.
मुख्यमंत्री था. तो बहुत लंबा टाइम निकल गया भाई इसलिए नो. डाउट नो डाउट. 35 साल बहुत लंबा टाइम होता है उत्तर. प्रदेश में. पार्टी को फिर से और मजबूती के साथ आने की. जरूरत है और लोकसभा में हमने अच्छा. प्रदर्शन किया हमें पूरा विश्वास है कि. आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस. अच्छा प्रदर्शन करेगी गी कैसे. संगठन पे काम देखिए अल्टीमेट जो हमारा काम. है वह संगठन पे काम करना नई टीम खड़ा करना. बाकी चुनाव तो बहुत कुछ डिपेंड करता है उस.
वक्त के तात्कालिक मुद्दों पे विधानसभा के. मुद्दे अलग हैं लोकसभा के मुद्दे अलग हैं. और लोकसभा में किसी को उम्मीद थी उत्तर. प्रदेश में इतनी सीटें आने जा रही हैं. विपक्ष के. किसी को नहीं थी आई सीटें विधानसभा मुझे. लगता है इससे और बेहतर होगा सारे समीकरण. हमारे पक्ष में हैं और गठबंधन. अच्छा करेगा मुझे लगता है उत्तर प्रदेश. में और कांग्रेस भी अब राहुल जी ने जिस. तरह लीड ली है. आप ये कह रहे हैं अखिलेश जी ज्यादा पॉपुलर. आदमी है यूपी में इसलिए वो अच्छा करवा. देंगे. करवा देंगे देखिए सब अपनी-अपनी क्षमता के.
हिसाब से काम कर रहे हैं और सबकी अपनी. पॉपुलरिटी है। मैं उससे इंकार नहीं कर. सकता। वो हमारे अच्छे सहयोगी हैं। लेकिन. कांग्रेस जब सड़कों पे उतरी। आपको याद. होगा भारत जोड़ो यात्रा में उत्तर प्रदेश. में जब राहुल जी निकले सिर्फ पश्चिमी. उत्तर प्रदेश से निकले थे तो जो मोमेंटम. बना वो मोमेंटम हमने बनाया राहुल जी ने. बनाया और चूंकि हम गठबंधन में थे तो फायदा. दोनों को मिला आप ये कह रहे हो कि राहुल. जी की वजह से अखिलेश जी की सीटें बढ़ गई. अरे इसमें कोई दो राय नहीं बढ़ी हमारी भी.
बढ़ी उनकी भी बढ़ी आप जब साथ मिलकर लड़ते. हो तो फायदा होता है अल्टीमेट आप वोट. बिखेरते नहीं हो तो फायदा तो होता ही. तो किसको ज्यादा फायदा होता है सपा की वजह. से कांग्रेस को कांग्रेस की वजह से सपा को. आप दोनों को एक दूसरे से फायदा हुआ।. शायर को बातों में उलझाने का मजा अलग है।. आपके टॉप फाइव एंटी बीजेपी शेर कौन से. हैं? बड़े सारे लिखे हैं आपने। मुझे लगा. कुछ फेवरेट वाले ये रिसर्च तो आप ही ने की. होगी। आपको सारे ही लगे होंगे।. हां तो मैं जानना चाहता हूं क्योंकि बड़े.
सारे छोटे-छोटे वाले अच्छे लगते हैं। एक. गोबर वाला था. वो तो. आपके फेवरेट कौन-कौन से? लिखे तो बहुत. सारे हैं। मैं टॉप देखिए मैं एक्चुअली. बेसिकली नज़्मों का शायर हूं। मैं नज़्में. कहता हूं और वो लंबी होती हैं। मैं गज़लों. का शायर नहीं हूं कि एक शेर कह दिया। मैं. पर्टिकुलर एक सब्जेक्ट चुनता हूं और उस पे. नज़्म कहता हूं और मैं अपने फन का मतलब अलग. सा एक एक अनूठा ही हूं। गज़ें गज़ें कहने की. परंपरा है उर्दू शायरी में। नज़्में कम. लोगों ने कही। थोड़ा इसका अंतर भी समझाओ.
यार। हां ये टेक्निकल लोगों को सबको पता. होगा। नॉन टेक्निकल नहीं जानते होंगे।. जैसे आपने एक गजल सुनी चुपके-चुपके रात. दिन-दिन आंसू बहाना याद है हमको अब तक. आशिकी का वो जमाना याद है।. ये एक एक शेर हो गया। इसी से इसी के. तसल्लसुल से जुड़ा हुआ और शेर कहा. उन्होंने ये गजल है। उस पे कई विषय एक गजल. में हो सकते हैं। एक शेर महबूब की जुल्फों. पे कह रहे हैं तो दूसरा शेर जो है वो आंचल. पे कह रहे हैं। तीसरा शेर जो है वो खत. भेजा जा रहा है। उस पे कह रहे हैं। बट आप. नज़्म पर्टिकुलर किसी एक टॉपिक को चुनते.
हो। नज़्में फैज ने बहुत अच्छी कही। हम. देखेंगे लाजिम है कि हम भी देखेंगे यह यह. नज्मों का फौज. वो लोग बड़े खुशकिस्मत थे जो इश्क काम. समझते थे या काम से आशिकी करते थे हम जीते. जी मशरूफ रहे. कुछ इश्क किया कुछ काम किया. काम इश्क के आड़े आता रहा. इश्क में काम बिगड़ता रहा और आखिर हमने थक. हार के दोनों को अधूरा छोड़ दिया तो फैज. नज्मों के बड़े शायर रहे और यहां सरदार. अली जाफरी बड़े शायर रहे नज़्मों के और बाद. में हबीब जालिब पड़ोसी मुल्क में नज़्मों. के बड़े शायर हुए तो हिंदुस्तान में गज़.
गजलों की परंपरा ज्यादा है।. आजकल जॉन एलिया साहब युवा. जॉन एलिया साहब भी गजलों के शायर हैं।. युवाओं में बड़ा इंस्टा रील पे चलते रहते. हैं।. हां नई पीढ़ी का अपना टेस्ट है और वो पसंद. करती है जॉन को। जॉन बहुत अच्छे शायर हैं।. इसमें कोई दो राय नहीं।. तो जैसे शायरों को लेकर एक परसेप्शन होता. है कि या तो वो दारूबाज होगा कि पी के लिख. देता है या इश्क में दल तोड़ के लिख देता. है।. मैंने दोनों भरम तोड़े।. मैं मैं हिंदी साहित्य का. तोड़ा होगा ना। यह है तो आप यह तो आपने हर. जगह कह रखा है कि मैंने दोनों.
तोड़े-वोड़े। हर आदमी का कटता है।. देखिए आप. हर जगह खुशनसीब नहीं हो सकते ना कि. पॉलिटिक्स में भी चमक गए, यहां भी चमक गए।. कहीं तो झटका दिया होगा ऊपर वाले ने।. नहीं मेरा मानना. 37 साल की उम्र में ब्याह नहीं किया तो. कौन याद आता है जिसके चक्कर में ब्याह. नहीं किया? आप किसी आर्ट फॉर्म से मतलब कोई कला आपके. अंदर है तो आप बड़ा खुशकिस्मत होते हैं इस. मामले में। बड़ा प्रेम मिलता है आपको।. और फिर शहर छूटता रहता है। आप आगे बढ़ते. रहते हैं। तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय का. जो दौर था वो बड़ी मोहब्बतों का दौर था।.
लेकिन दिल टूटने जैसी कोई बात हुई नहीं।. सही बताएं। लोगों को लगता है कि शायर है. तो दिल तो टूटा ही है।. ये बकैती कर रहे हो आप। 37 साल की उम्र. में एक बार प्यार नहीं हुआ।. नहीं प्यार तो मतलब. गजब मतलब ये तो टोपीबाजी हो गया फिर काम।. 37 साल का आदमी हो गया।. मतलब आप चाह रहे हो कि आप जो टोपी पहना. रहे हो मैं पहन लूं।. नहीं प्यार. अरे तो हम राजनीतिक टोपी थोड़ी ना पहना. रहे।. बड़ा सोचते हैं कि हां. ये हमको बहुत क्वेश्चन ये कॉमन क्वेश्चन. आया था कि इमरान भाई से पूछना ब्याह काहे. नहीं करते वो? तो हम ब्याह के पहले वाला. स्टेप जो पूछ. कौन सी हमारी उम्र निकल गई है भाई कि हम.
ब्याह नहीं कर. फिर भी मतलब अभी राहुल जी पड़े हुए हैं. सलमान खान पड़े. हमको राहुल भाई के लक्षण नहीं लग रहे सब. हमको राहुल भाई और सलमान खान के लक्षण. नहीं लग रहे. हमारे लक्षण है हम ब्याह करेंगे परेशान ना. हो और जिससे करेंगे बाद में आप समझ. लीजिएगा. जिसको करना होता है वो तेजस्वी जी की तरह. चुपचाप करके बैठ जाता है या अखिलेश जी की. तरह कर लेता है. कैसे तेजस्वी लोग हैं. कितने तेजस्वी लोग हैं. हां मतलब भाई गजब शादी है दोनों की. अच्छी बात है मतलब मुझे. अखिलेश जी से मैंने पूछा मैंने ने कहा. महाराज उस जमाने में आप इंटरकास्ट मैरिज. कर लिए थे और वो भी जब बाप आपके खिलाफ थे.
पिताजी और पिताजी लड़ाई किए थे उनसे अच्छी. खासी अखिलेश जी ने पूरा किस्सा सुनाया था. हमें तो अब किए होते तो. अरे आज तो फिर आज डर लगता है हम लोगों को. आज तो उसका नया नाम दे दिया जाता. देखिए किया ना. मैं भी किसी दिन खामोशी से कर लूंगा आपको. सूचना दे. कोई तय कर रखा है. नहीं तय कर लेंगे मतलब अब सोच रहे हैं. शादी करने. तो बताओ थोड़ा कहीं तो दिल टूटा होगा भाई. थोड़ा तो जिक्र करो ना कितना सियासत करोगे. नहीं इसमें सियासत जैसा कुछ नहीं है. या राहुल जी ने मना किया कि इश्क पे बात. नहीं करनी सीरियस पॉलिटिक्स. नहीं नहीं राहुल देखो एक बहुत क्लियर कह. दूं एक नैरेटिव रहता है ना पार्टी लाइन.
लीडरशिप से पूछ के बोलना है कुछ भी ऐसा. नहीं है कांग्रेस सच में आपको बड़ी. स्वतंत्रता देती है मैं मतलब मैं दिल से. बात आज तक पिछले 5 साल से मैं सक्रिय. राजनीति में हूं ऑर्गेनाइजेशन संभाल रहा. हूं पार्लियामेंट में हूं मुझे आज तक. पार्टी के किसी व्यक्ति ने नहीं कहा कि इस. टॉपिक पे नहीं बोलना है इस पे क्यों बोल. दिया. चलो हम लाइव टेस्ट कर लेते हैं हमको अपना. इश्क का किस्सा सुनाओ पहले आप सुनाओ अपना. इश्क का. भाई मैं तो साल 2 साल में सेटल्ड हो मतलब. मेरे इश्क का कोई किस्सा ऐसा नहीं है कि. इसे सुनाया जाए। सीरियस वाली मोहब्बत नहीं.
हुई।. मतलब मुझे लगता है कि नहीं ही हुई।. बड़ा कंफ्यूजन है।. इम्तियाज़ अली का मैंने पॉडकास्ट किया था।. उन्होंने कहा कि इंसान इश्क के तसवुर में. होता है। फिर ढूंढ लेता। आप कभी इश्क के. तसवुर में नहीं हुए।. बशीर साहब का शेर है कि नहीं आप होते हो।. ऐसा नहीं कि आप नहीं होते हो। आप होते हो।. आप बिना मोहब्बत के जी नहीं सकते। और. बट आपकी जिंदगी का जब गोल अलग-अलग होता है. ना, आपके टारगेट अलग-अलग होते हैं। आप. अपने लिए सोचते हो कि यार मुझे ये करना.
है।. ये तो इस दौर में समझ में आता।. तो सच में नहीं इस दौर में हम हम लोग तो. शायर तो समाज से और अपने दौर से 10 20 साल. आगे ही चलता है ना। मतलब मेरे साथ तो मसला. क्या रहा? ज्यादातर दोस्त या तो बहुत कम. उम्र के रहे या बहुत सीनियर रहे। तो आप. अपनी उम्र को तो कभी जिया ही नहीं हमने।. तो जो गुलजार साहब ने लिखा है कि वो जो. किताबों में गिरने उठाने के बहाने फूल. मिला करते थे वो सब आप नहीं किए हो। नहीं. मिली चिट्ठियां वटियां मिलती थी पढ़ाई के. दौरान तब तो मोबाइल था ही नहीं वो. बड़ा अच्छी बड़ी अच्छी वो करता है किताबें. झांकती हैं बंद अलमारी के शीशे. उदय प्रताप जी का एक शेर है कि मोबाइलों.
के दौर के आशिक को क्या पता रखते थे कैसे. खत्म में कलेजा निकाल के. सब फैसले होते नहीं सिक्के उछाल के ये दिल. का मामला है जरा देखभाल के तो वो थोड़ा. बहुत जिया लेकिन फिर वो सच में आप उम्र से. बड़े हो जाते हो परिवार में बड़े हो बड़ा. बेटा होना जो एक परिवार की जो सबसे बड़ी. आप भी आप उस दर्द को समझते हो आप कुछ भी. बन जाओ वालिद को यह लगता है कि यार या तो. डॉक्टर या तो आईएएस बस दो ही नौकरी है.
उनके लिए. इसी चक्कर में ब्याह नहीं हुआ हमारा अब तक. हो गया होता अब तक दो चार खेल रहे होते. तो पिताजी के साथ भी मेरे मतलब मेरे अब्बू. का मसला क्या था ना उनके एक दो ऐसे दोस्त. थे हैं जिनको लगता था कि दुनिया में सिर्फ. आदमी मतलब आईएएस बन जाए तो ही वह कामयाब. हुआ मैं शायर हो गया बहुत पॉपुलर हो गया. पूरी दुनिया इज्जत करने लगी तब भी वह जब. आते थे तो ठीक है यह सब तो ठीक है लेकिन. अगर आईएएस हो जाते तो ठीक रहता और अब मजे. की बात बताऊं मैं मेंबर ऑफ पार्लियामेंट. बन गया उसके बाद भी उनका कहना था आईएस हो.
जाते तो ठीक था तो आप सोचो ना कि ये. पिताजी लोगों का एक ज़हन है और मैं इससे. मतलब इसका बड़ा लुत्फ लेता हूं।. मैंने रामविलास पासवान जी पे एक स्टोरी की. तो उसमें मुझे रिसर्च में पता लगा कि उनके. पिताजी ने उनके खिलाफ गवाही दे दी थी।. उनकी ऐ का कुछ गड़बड़ झाला था तो जीत गए. चुनाव वो जीत गए तो सामने वाली पार्टी ने. केस ठोक दिया तो पिताजी गवाही देने चले गए. इस चक्कर में चले गए कि अधिकारी नेतागिरी. छोड़ के अधिकारी बना रह जाए. नहीं उस दौर के मुझे लगता है इस चक्कर में. भी ना गए होंगे पिछले जमाने के जो पिता.
हैं वो सब अपनी बातों के मतलब वो ज़िद के. पक्के हैं और उनको इससे कोई लेना देना. नहीं कि आपका नफा हो जाएगा कि नुकसान हो. जाएगा। मतलब वो आज भी उनका बस चले तो वो. पीटें आपकी गलतियों पर। मतलब मैं पूरी. दुनिया को कन्विंस कर सकता हूं। मैं अपने. वालिद को कन्विंस नहीं कर सकता और मैं. कोशिश भी नहीं करता। मुझे लगता है कि नहीं. यह जो कहें उसे सुन लो। इनके सामने बैठ के. चुपचाप मतलब उनको उन उनको बाप होने का. एहसास दो ना। मैं कोशिश करता हूं कि वो. मेरे साथ रहे। मैं कम जाकर रह पाता हूं।. वो आएंगे तो कहेंगे कि फ्लैट में दम घुटता.
है। पहले फ्लैट था तो दम घुटता है। मैंने. किसी तरह जुगाड़ करके कि नहीं यार एक छोटा. सा एमपी हो गया तो घर मिल जाए तो जमीन हो, पेड़-पौधे हो तो उनको खुली सांस मतलब यहां. एमपी बंगलोज़ जितने हैं आपको मोर बोलता. हुआ सुनाई देगा सुबह। उतना गांव में नहीं. होता। गांव में आपको मोर की आवाज नहीं. सुनाई पड़ेगी। अभी शाम में हम लोग बैठे थे. तो बिल्कुल ऐसा लगता था सर पे आके मोर बोल. रहा है। बंदर घूम रहे हैं। मतलब बिल्कुल. आपको गांव वाला फील आएगा। लेकिन उनका दम. अब भी यहां घुटता है। नहीं यहां नहीं रहना. है। कितना भी कोशिश कर लो वह नहीं रहेंगे।.
तो ऐसे में उनकी ज़िद के आगे आप हार जाते. हो ना तो मुझे लगता है कि वही एहसास आपको. इंसान बनाए रखता है और वह जितने दिन. मां-बाप हैं उन उनका लुत्फ उठा लो। उनसे. फायदा उठा लो। उनके साथ जी लो। दरअसल. शुभंकर भाई हम आप जैसे जितने भी लोग हैं. जो सामान्य परिवारों से आए लोग हमको आपको. लगता है कि हम आप अपने कर्म से या अपनी. हुनर से कुछ पा रहे हैं तो अगर ऐसा लगता. है तो हम मतलब गलतफहमी के शिकार हैं। अवध.
क्षेत्र में कहावत है कि बाढ़े पूत पिता. के कर्मे हमको आपको जो भी मिल रहा है ना. वो हमारे आपके पिता हमारे आपके माता के. कुछ अच्छे कर्म हैं। उनकी दुआएं हैं। हमसे. आपसे लाख गुना बेहतर लोग समाज में पड़े. हैं। हम्म।. और उनको वो सब नहीं मिल रहा है जो हमको. आपको मिल रहा है।. सहमत है।. तो अगर आप खुशनसीब खुद को पा रहे हो तो. आपने अभी तक ऐसा कोई तीर नहीं मार दिया. है। आप बस यह समझ लीजिए कि अगर आपको ऊपर. वाला जबान दे रहा है बोलने के लिए। शब्द. निकल आ रहे हैं। आपके शब्दों में सरस्वती.
जी की कृपा है आप पर। तो आप यह समझ लो ना. कि कोई कहीं खामोश बैठ के आपके लिए दुआ कर. रहा है। मम्मी ज्यादा फोन नहीं करती। उनका. चौथे पांचव दिन हाल खैरियत देने के लिए. फोन आएगा और मैं उनसे कहूंगा कि अम्मी. क्या हाल है? बस ठीक है बेटा अब ठीक हो. तुम तुम्हारे लिए दुआ करते ही ठीक है जा. ठीक है अच्छे से करा यह जो भाव है ना मुझे. लगता है कि यह जब तक आपको बच्चा बनाए रखे. ना इसे जी लीजिए वरना दुनिया इतनी बुरी है. इतनी शातिर है कि इसमें जीना बहुत मुश्किल.
हो जाएगा टेक्नोलॉजी ने सियासत ने चकाचौंध. ने कैमरे ने आपके अंदर जो डर बिठा दिया है. ना जो आपसे आपका आपकी मासूमियत भोलापन हम. जैसे से लोग ना आप जैसे लोग बहुत कम उम्र. में बड़े हो गए।. हमें लगता रहा कि हमें बड़ी बातें करना. है। हमें समाज को चौंका देना है। इस एहसास. ने मासूमियत छीन ली ना। हम अपनी उम्र जी. ही नहीं पाए।. सही बात है।. हम अपने वक्त के साथ नहीं चल पाए। हम 10. साल आगे चलते रहे।. या फिर बिल्कुल माजी में रहे। पास्ट में.
रहे। तो इन दोनों के बीच में वर्तमान तो. गायब है। अब तो क्या ही कहूं। मोहब्बत पर. जब भी बात होती है तो यही सब कहना पड़ता. है। मोहब्बतें कई रूप में जी गई और किसी. दिन बड़ी खामोशी से शादी करेंगे। बिना. दहेज की शादी करेंगे। एक जोड़े में किसी. को दुल्हन बना के ले आएंगे। फिर देश को. बताएंगे कि आज शादी कर ली।. देखिए इस पे भी कोई मीम बना के हमसे एक. सवाल लिखा था कि आपके यहां तो चार अलाउड. है। कम से कम एक तो कर ही लो। हमारे यहां.
तो चलो एक ही है।. दरअसल सुभाकर भाई सच बताऊं ना। यह जैसा एक. मिथक देश में गढ़ा गया ना बीच में भाजपा. के एक मुख्यमंत्री ने यह बयान दिया कि. मुसलमान तो चार शादियां करते हैं। मैं. पार्लियामेंट में घुस रहा था। तो वो कैमरा. लग जाता है ना माइक आपके मुंह में लगा. दिया जाता है और सवाल आपको पता नहीं है तो. बहुत सारे लोग इसमें गच्चा भी खा जाते. हैं। हम जर्नलिज्म पढ़ के आए हैं तो थोड़ा. सलीका है। तो उन्होंने लगाया मुंह पे. माइक। हेमंत विश्व शर्मा ने कहा कि. मुसलमान चार शादियां करता है। मैंने कहा. भाई मुझे तो आज तक एक भी ऐसा मुसलमान नहीं.
मिला। सच में नहीं मिला। पूरे भारत में. मैं ठीक-ठाक मुस्लिम समाज के बीच में उठता. बैठता हूं। मुझे आज तक एक भी व्यक्ति ऐसा. नहीं मिला जिसने चार शादी की हो। मतलब. रेस्ट होगा। अगर वो रेस्ट है तो वो दूसरे. समाजों में भी है। ऐसा नहीं है। तो मैंने. कहा भाई मुझे तो नहीं मिला और दूसरा मुझसे. क्यों पूछ रहे हो? मैंने तो अभी तक एक भी. नहीं किए। तो बेसिक बात यह है कि ये ये. वही बात है ना कि आपको एक चिढ़ है।. नहीं हमारे यहां इसको आप जलन कह सकते हो. कि हमारे यहां एक ही अलाउड है। तो लड़कों. में खासतौर पर जलन होती है। हालांकि ये.
आप पास्ट में जाएंगे तो इतिहास भरा पड़ा. है।. तो हम तो यहां बैन कर दिया गया ना।. तो. आपके यहां आपके यहां बैन नहीं है ना।. तो ये होता है आपका बैन करवा दे पहले।. मुझे लग नहीं रहा है कि दौर में. हाइपोथेटिकल दौर में आप एक मतलब एक किसी. अच्छी लड़की से शादी करें अच्छे से जीवन. यापन करें वही इतना मुश्किल है सरकार ने. इतना महंगाई कर रखी है कि आप एक बीवी. अच्छे से. आर्मी सियासतदान से आगे घूम टहल के पहुंच.
जाओ मोदी जी तक. अब मतलब मोदी जी तक नहीं जा रहा हूं मैं. सरकार की बात कर रहा हूं सच में महंगाई. इतना ज्यादा है भाई. गंगा जमुनी तहजीब क्या है क्योंकि लोग. कहते हैं यह सब सिर्फ बकवास आज के दौर में. यह आता है यह बकवास बातें कुछ लोगों के. लिए तो सब कुछ मोहब्बत बकवास चीज है। कुछ. अमन की आशा यह बेवकूफ बनाने का तरीका है।. मतलब किसको बेवकूफ बना रहा है? कौन बना. रहा है? हम मोहब्बत की बात करें तो यह. बेवकूफ बनाना है। आप नफरत की बात करो तो. वो अटल सत्य है। गंगा जमुनी तहजीब यही है.
कि देखिए सेकुलरिज्म का अलग-अलग अर्थ. निकालते हैं लोग। मैं अक्सर एक बात कहता. हूं। सेकुलरिज्म का मतलब यह नहीं कि मैं. आपका धर्म मानूं। आप मेरा धर्म माने। हम. एक दूसरे के धर्म का सम्मान करें। यह है. सेकुलरिज्म।. अब स्थिति यह है कि बड़े संवैधानिक पदों. पर बैठे हुए लोग कहते हैं सेकुलरिज्म. नासूर है। संवैधानिक पद पे बैठे हुए भारत. में बैठे हुए केंद्रीय मंत्री ये शब्द बोल. रहे हैं। तो आप बताइए ना कि आप आप नहीं. चाहते कि समाज जो है मिलजुल के रहे। मतलब. इसके जो कंट्रास्ट में बातें आती है.
क्योंकि मैंने टीवी में बहुत सारी डिबेट. इस पे अपनी छाती फाड़ फाड़ कर की है।. दोनों पक्षों को सुना है। तो उसमें ये आता. है कि इंडिया में सेकुलरिज्म मतलब है. लिटिल इंक्लाइंड टुवर्ड मुस्लिम्स। किसने. कहा? मतलब मुस्लिम समाज का अपना एक अलग रोना है. कि मतलब हमें शिक्षा सही से नहीं। दूसरा. इसको मतलब सच कमेटी की रिपोर्ट बताती है. कि चीजें बेहतर नहीं रही।. दूसरा इसको लेकर मनमोहन जी का बयान जिसको. लेकर अलग-अलग वर्जन लोग करते हैं। झूठा. था। वो झूठा बया उसको भी लेकर आता है कि. इट वाज़ लिटिल इंक्लाइंड टुवर्ड रहा और.
क्योंकि उस दौर में जैसे भगवा आतंकवाद का. जिक्र आया तो सुशील शिंद साहब ने मेरी. पॉडकास्ट में कहा था कि नहीं कहना चाहिए. था हमने कह दिया तो वो ये मानते हैं कि. कांग्रेस आपको पता है ये शब्द किसने गढ़ा. था. किसने आर के सिंह ने तत्कालीन गृह सचिव. नेम का स्टेटमेंट था और आर के सिंह आर के. नहीं गढ़ा उन्होंने शब्द था और उनको भाजपा. ने मंत्री बनाया दो बार सांसद बनाया. मतलब चिदंबरम साहब मैं जिस मशीन सिस्टम का. जिक्र करता हूं ना. वो महीन सिस्टम दरअसल वही है. तुम्हारे भी हमारे भी हैं.
मतलब ठीक है बैठे हुए हैं आप सोचिए आज के. दौर में कोई एक अधिकारी. कुछ भी सरकार के खिलाफ मतलब रिपोर्ट देश. को दे पा रहा है कैग ने जो जो रिपोर्ट दी. झूठी रिपोर्ट सरकार के खिलाफ यूपीए के. खिलाफ माहौल बनाने के लिए बाद में अदालतों. ने कह दिया कि वह रिपोर्ट्स झूठी हैं।. वह कैग के तत्कालीन महोदय से किसी ने पूछा. विनोद राय जी से? नहीं पूछा किसी ने. क्योंकि वह कौवा कान ले उड़ा तो वह. नैरेटिव देश में बनाया गया कि तो दरअसल.
मतलब सेकुलरिज्म को भी अमन की आशा को भी. अमन और प्रेम और मोहब्बत से किसको तकलीफ. हो सकती है और क्यों होती है? क्या नहीं. चाहते कि समाज में हिंदू मुसलमान भारत का. ताना-बाना इतना खूबसूरत है भाई। आप इस. फैब्रिक को कैसे तोड़ सकते हो? ठीक है। इमरान प्रतापगढ़ को ओवैसी से. क्यों तकलीफ है? बहुत मैसेज हमारे पे यह. भी आया था कि पहले शायरी सुनाते थे कि. ओवैसी साहब ऐसे हैं और अब जब सांसद बन गए. तो अब दिन रात पानी पी पी गाली देते हैं।.
कहते हैं बीजेपी की बी टीम है। पत्रकार. कोई सवाल पूछे तो मुस्कुरा कहते हैं कि वो. एनडीए से बाहर कब निकले? नहीं नहीं हमें. देखिए। वो तो सवाल था अलायंस करना चाहिए. या नहीं। हम तो हम तो आपके पॉडकास्ट में. ये बात अच्छा सवाल है। भाई कल तक आप कह. रहे थे कि कांग्रेस तो म्यूजियम में रखने. वाली पार्टी है।. ये अभी 2 साल पहले कह रहे थे आप। आपके. छोटे भाई कह रहे थे कि मैं पूरे देश में. मोदी के साथ मिलकर के कांग्रेस का जनाजा. उठाऊंगा। स्टेटमेंट है मेरे पास। आप कह. रहे थे कि राहुल भैया के बस का नहीं है अब.
भाजपा को हरा पाना। आज आप अलायंस करने के. लिए अर्जी दे रहे हो कि नहीं नहीं मतलब. हमसे अलायंस करिए।. आप लोग तोड़ लोगे। जितना जीते आप आप. जितना जीतेंगे वो तोड़ लोगे। आप लोग पिछली. बार भी तोड़ लिए थे। आप कांग्रेस को आप. कांग्रेस को. हम. मतलब यह कह के कोसते हो कि कांग्रेस के. लोग तो दूसरी पार्टियों में चले गए।. हम्म. आप तो बड़ा अल्लाह रसूल के नाम पे वोट. मांग रहे थे। आपके लोग दूसरी पार्टियों. में क्यों चले गए? जी सारे चले गए। तो तो आप बाकियों से अलग. कैसे हुए?
ये तो पॉलिटिकल हो गया।. मतलब आपको भाई तो पॉलिटिक्स आप भी कर रहे. हो। मैं आपसे एक अलग एक पार्टी में हूं।. आप एक अलग पार्टी चला रहे हो। मुझसे सवाल. पूछा जाएगा। मैं उसका जवाब दूंगा। मैं. भाजपा की आलोचना करूंगा। मेरी विचारधारा. नहीं मिलती। मैं आपकी आलोचना करूंगा। मेरी. विचारधारा मेरी विचारधारा नहीं मेरी. विचारधारा नहीं मिलती आपसे। आपको इतनी. तकलीफ क्यों होती है? आपको क्यों लगता है. बीजेपी? आप गाली गलौज पे क्यों उतर आते. हैं? आप अपनी आलोचना नहीं सुन सकते। आप. लोकतंत्र में नहीं हैं। स्वाभाविक सी बात. है।. आपको किसी ने गाली दी।.
जो जो सोशल मीडिया पे आपको गाली दी भाजपा. का आईटी सेल जिस तरह बिहेव करता है। आपका. सेम आईटी सेल उसी तरह बिहेव कर रहा है।. स्पेसिफिक।. तो क्यों ना क्यों ना? कभी इमरान प्रतापगढ़ी को किसी ने इसलिए. गाली दी कि उन्होंने ओवैसी का विरोध किया।. मतलब आप सोशल मीडिया उठा के देख लीजिए वह. तो काम ही है। वह तो मैं देखिए मैं 2017. से इस चीज़ को फेस करता हूं। मतलब फेस करता. हूं और आपने टिकट मांगा था क्या? मेरे. हिसाब से सवाल ही नहीं पैदा होता। यह भी. एक बात यह भी एक रमर उठता है कि आपने. मांगा था तो उन्होंने दिया नहीं। वो तो कई. झूठ बोलते हैं। एक झूठ उन्होंने यह भी. बोला ना कि मैं महाराष्ट्र में उन्हीं के.
दो एमएलए के वोट से राज्यसभा पहुंचा। यह. बड़ा झूठ। हमारे पास 44 एमएलए थे। हमें 41. वोट की जरूरत थी। हमें 44 के 44 वोट मिले. और उनके जो स्टेट के सदर थे वो जो है सुबह. के 5:00 बजे ट्वीट करते हैं कि हमारा वोट. इमरान प्रतापगढ़ को जाएगा। हमें जरूरत ही. नहीं आपसे मांगा किसने? और दूसरी बात. हमारे 44 वोट थे। हमें 44 के 44 वोट मिले।. आप तो अजीत पवार जी के साथ मीटिंग कर रहे.
थे। और मैं अगर बोलूं तो आपके वोट तो. जिनसे आपने तय किया था उनको भी नहीं दिया।. तो फिर आपके वह दोनों वोट पता नहीं भाजपा. को गए या शिवसेना को गए तो भैया आप हमारे. नाम के साथ क्यों चिपकाते हो? बट आप दोनों. तो एक ही लड़ाई लड़ रहे हो ना? ये ये जो ये जो आप चिपकाने की कोशिश करते. हो ना वो गलत है ना। आप जब देखो बात यही. है ना कि जब आप कुरान की आयतें पढ़ के वोट. मांगते हो तो फिर आप सच्चाई भी बोलो ना।. मुझे आपके वोट की जरूरत नहीं थी। मुझे 44.
वोट मिले थे। मैं चुन के आया हूं।. ओवैसी साहब की पार्टी झूठ बोल रही है।. बिल्कुल झूठ बोल रही है। मैं आपके पडकास्ट. पे कह रहा हूं। मुझे तो उनसे पूछना है कि. आपके वह दो वोट किसको गए थे? भाजपा को या. शिवसेना को? या एनसीपी को? डील किससे हुई. थी? आपने बीजेपी की बीटीपी कहां? भाई इस देश में एसआईआर पे प्रोटेस्ट चल. रहा है। 300 सांसद डिटेन हो रहे हैं।. मार्च हो रहा है। आप गायब क्यों हैं? कहां. है आप? वोट किसके काटे जा रहे हैं बिहार में?
बड़ा चंक किसका वोट काटा जा रहा है? कौन. मतदाता परेशान है? आप इतनी बड़ी यात्रा हो. रही है। राहुल गांधी जैसा इंसान जिसको आप. कहते हो कि शहजादा है, राजकुमार है। वो. सुबह 8:00 बजे निकलता है। रात के 9:00 बजे. लाखों लोगों से मिलता हुआ उनको जागरूक. करता हुआ यात्रा कर रहा है। आपका स्टेट. प्रेसिडेंट कहां है? आप कहां हो? और फिर. कहोगे कि हमें अलायंस में शामिल कर लीजिए।. और उसके लिए अपने समर्थकों से आप चार. पोस्टर लेकर के खड़ा कर दोगे कि हमें.
अलायंस में शामिल कर लीजिए। कल तक तो आप. कह रहे थे कि कांग्रेस म्यूजियम में रखने. की पार्टी दिल पे आज दिल दिल पे ले गए. उनका बयान आप लोग. आज आप आज आप कह रहे हो कि हमें शामिल कर. लीजिए नहीं दिल पे नहीं ले गए हम तो मजे. ले रहे हैं. बट अगर आएंगे तो आपका मुस्लिम वोट यूनाइट. होगा. देखिए कांग्रेस किसी एक समाज किसी एक धर्म. विशेष की पार्टी नहीं है। कांग्रेस सबको. साथ लेके चलती है। कांग्रेस के लिए सबका. वोट महत्वपूर्ण है।. बट इसी लॉजिक से तो आप बीजेपी की बी टीम. कहते हो कि अगर वह अलग लड़ते हैं तो इतना. मुसलमान का वोट डिवाइड होता है जिसे. बीजेपी जीत जाती है। इसीलिए उनको बी टीम.
कहते हैं। तर्क पे उनको बिल्कुल ऐसा फिर. मीटिंग में. वह अपना चुनाव लड़ने लोकतंत्र में सबको. चुनाव लड़ने का हक है। मैं कभी इस चीज को. डिनाई नहीं करता। आप चुनाव लड़िए।. आपने कहा ना इंडिया एनडीए से बाहर कब? नहीं नहीं हम भाई हम हम क्यों नहीं सवाल. पूछेंगे कि आप एसआईआर पे कहां हो? हम. क्यों नहीं सवाल पूछेंगे कि मतलब इस बीच. डेलीगेशन के बाद सुर बदले बदले हैं। हम. क्यों नहीं सवाल पूछेंगे? अच्छा हम सवाल. पूछेंगे तो आप गाली दोगे। तर्क से जवाब. नहीं दोगे। तो यह तो वही बात हो गई ना जो. जो भाजपा का आईटी सेल कर रहा है वही आपका. आईटी सेल कर रहा है। तो जो लोग यह.
अच्छा अल्लाह रसूल के नाम पे वोट मांगोगे. और गाली गलौज करेंगे आपके समर्थक तो भैया. फिर मतलब एक 50 साल की आपकी सियासत है 5. साल पहले पॉलिटिक्स में आए हुए एक लड़के. को आपको गाली देनी है। इतना डर किस बात का. है? आपको क्यों टारगेट कर रहे हो? उनसे. पूछिएगा जरूर कि उनकी पूरी ट्रोल आर्मी. मुझे क्यों टारगेट करती है? मुझसे कौन सा. इतना डर है? क्या खास मोहब्बत है? कुछ तो. आप भी एनालाइज किए होंगे ना कि आप ही से. इतनी मोहब्बत क्यों है? मतलब मुझे भी यह हैरत है कि क्यों इतनी.
मोहब्बत है लोगों को मुझसे? मैं ही निशाने. पे क्यों रहता हूं? बीजेपी के निशाने समझ में आते हैं। ओवैसी. साहब के निशाने. यही तो मैं मैं मोदी जी की आलोचना करता. हूं। मैं भाजपा की आलोचना करता हूं। मुझे. उतनी गाली कभी उधर से नहीं मिलती। जैसे. इनसे सवाल पूछूंगा ना तो सल्तनत हिलने. लगती है। फिर गाली गलौज ये वो तो कभी-कभी. मीम बना करके वायरल करेंगे। झूठी बातें तो. वही होता है ना कि जैसे कभी-कभी लगता है. कि भाई 50 साल 70 साल की पॉलिटिक्स और. उसका दम है और एक आम से लड़का जो गांव से.
आया है जिसके पास कोई विरासत नहीं है अपने. दम पर बिना किसी गॉडफादर के बिना किसी. विरासत के बिना किसी तामझाम के बिना किसी. ट्रोल आर्मी के अगर आज वो यहां खड़ा है. देश की पार्लियामेंट में खड़ा है तो फिर. इतनी तकलीफ क्यों है उससे. ठीक क्यों बर्दाश्त करने करने को तैयार. नहीं है ठीक ठीक है? आप जिन चीजों का. हवाला देकर वोट मांग रहे हैं तो ठीक है।. मैं भी तो. आपको लग रहा है वो गलत करते हैं जो अल्लाह. पाक का नाम लेके वोट मांगते हैं।. मुझे लगता है कि किसी भी धर्म के इंसान को.
धार्मिक नारे लगा करके धार्मिक प्रतीकों. का इस्तेमाल करके वोट नहीं मांगना चाहिए।. मैं इसके सख्त खिलाफ हूं। तो जो मुसलमान. उनको अपना रहनुमा समझते हैं। यह मानते हैं. कि मुसलमानों की सच्ची लड़ाई वही लड़ रहे. हैं। बाकी सब तो खाली इस्तेमाल कर रहे. हैं। एक बड़ा बात इस्तेमाल एक बड़ा तबका. है आम हिंदू भाइयों का जो इधर भी मानता है. कि हमारी लड़ाई तो गगड़िया लड़ रहे हैं।. हमारी लड़ाई तो फलाने लड़ रहे हैं। हमारी. लड़ाई तो ढिकाने लड़ रहे हैं। मुझे लगता. है कि ये इस तरह की जितनी भी राजनीति है.
वो सही दिशा में नहीं है।. ठीक है। आपकी दो तस्वीरें बड़ी वायरल होती. है। मुझे जब मैंने पोस्ट किया कि आप आने. वाले हैं तो आपके चाहने वालों ने लिखा वो. तस्वीर है एक यूनिवर्सिटी आप बनवाने वाले. थे. हम. और वो बड़ा स्क्रीनशॉट आप आई एम श्योर आप. भी देखते होंगे. हां देखता हूं. हां कि इमरान प्रतापगढ़ ने बड़े खुशी-खुशी. इज़हार किया कि देखो जमीन मिल गई है. हम यूनिवर्सिटी बनाने वाले हैं चंदा लिया. है. नहीं मैंने पहली बात तो यूनस बनाने का मैं. सवाल कंप्लीट किया स्कूल बनाने की बात. सवाल कंप्लीट कर लेता हूं मैं. तो आरोप ये इमरान प्रतापगढ़ पर लगता है कि.
इमरान प्रतापगढ़ ने जमीन ली चंदा लिया पर. वह स्कूल कभी बना नहीं।. नहीं पहले लोगों का चंदा लेकर।. पहली बात तो मैंने किसी से चंदा नहीं. लिया।. वो दो पोस्ट ना मैंने चंदा मांगा किसी से।. उन दोनों पोस्ट को भी उठा के देखिए।. मैं बड़े प्राउडली देखिए जब मैं मुशायरों. में पॉपुलर हो गया।. हम. तो मुझे लगा कि मुझे तालीम पे काम करना. चाहिए।. हम. और मैंने काम शुरू किया। मैं देश में जहां. भी जिस मंच पे जाता था जाता हूं मैं 5. मिनट 4 मिनट 3 मिनट एजुकेशन पे जरूर बोलता. हूं। हम्।.
मेरा मेरा खुद का शेर है कि इस तरह हौसले. आजमाया करो। मुश्किलें देखकर मुस्कुराया. करो। दो निवाले भले कम ही खाया करो अपने. बच्चों को लेकिन पढ़ाया करो। मैं जब मुझे. लगता है कि सिस्टम पे कब्जा करो जब हां आ. गए। तो ये ये मेरी 2012 की स्पीच है। तो. मैं हमेशा 4 मिनट 3 मिनट 2 मिनट बोलता. हूं। मैं लोगों को मोटिवेट करने की कोशिश. करता हूं। ठीक-ठाक फैन फॉलोइंग है। तो मैं. कोशिश करता हूं उसमें से 5% बच्चों को भी. अगर लगे कि एजुकेशन की तरफ मुड़ना है तो. मुझे लगता है कि यह एक अच्छा कंट्रीब्यूशन.
होगा।. फिर मैंने प्राउडली बताना शुरू किया।. मैंने प्लान बनाया कि मैं स्कूल बनाऊंगा, कॉलेज बनाऊंगा और एक नहीं बनाऊंगा, कई. बनाऊंगा। ये मेरा ख्वाब है और इसको करूंगा. भी। अब होता क्या है ना कि उसके बाद. मुशायरों की कमाई कोई बहुत ज्यादा नहीं. पैसे मिलते थे। मेरे कोई इतने बड़े परिवार. से तो आया नहीं हूं।. हम. धीरे-धीरे जमीनें खरीदना बड़ा मुश्किल काम. होता है। गांव में जमीनें खरीदना जो कस्बे. हो चुके हैं। वहां जमीनें हैं नहीं।. खरीदनी शुरू की, इकट्ठा करना शुरू किया।. थोड़ी-थोड़ी खरीद के स्कूल भर की जमीन. इकट्ठी भी कर ली। बनाने का प्लान किया। सब.
कुछ बनाना शुरू भी किया। मतलब नींव डालने. का प्लान भी था।. हम. उसी दौरान. 2017 आते-आते थोड़ा राजनैतिक गतिविधियां. शुरू हो गई। तो. दिल्ली आ गया। तो जब आप एक दूसरा टास्क आप. जिंदगी में ले लेते हो तो जो पुराना वाला. टास्क है वह कुछ दिन के लिए स्थिर हो जाता. है। परिस्थितियां ऐसी हैं पैसे जुटाने. हैं, पैसे नहीं है। उस दौरान मैं मुशायरों. में जाता था तो बड़ा गर्व से लोगों से. कहता था कि मैं स्कूल बना रहा हूं।. मैं अगर आप एक मिनट पॉज लेंगे 16 दिसंबर.
2015 आज बहुत खुश हूं। कॉलेज के लिए जमीन. के लिए पिछले दो साल से परेशान था। मिल. नहीं रही थी। लेकिन अल्लाह का ऐसा एहसान. हुआ कि दो दिन पहले वो जमीन मिल गई।. शुक्रिया आपकी दुआओं का। ख्वाबों की. ताबीरर के लिए कदम। फिर दूसरा पोस्ट वाला. क्या गुनाह है इसमें क्या. कॉलेज से काम शुरू हो गया रोजे की हालत. में अपने ख्वाब की ताबीरर के लिए मेहनत. करने का मजा अलग है. दुआओं की गुजारिश है अब यही दो तस्वीर. इससे बुरा क्या है इसमें इसमें मैं किससे. चंदा मांग रहा हूं इससे मैं किससे क्यों. क्यों लोग लिखते हैं और कोई मैं ये जानना. चाहता हूं. दरअसल इमरान प्रतापगढ़ी पे हमला आप किस. रूप में करोगे आपके इमरान प्रतापगढ़ी के.
पिता ने कोई करप्शन नहीं कर रखा है इमरान. प्रतापगढ़ी के खानदान में कोई जो है वो. किसी सरकारी. या संवैधानिक पद पे नहीं था तो उसने अपने. मंत्र मंत्रालय में कुछ लूटा नहीं है या. उसके पिता ने या इमरान प्रतापगढ़ ने वफ की. जमीन नहीं लूटी है। इमरान प्रतापगढ़ी के. पास वह बैंक नहीं चलता कि वह सूत खाता हो।. इमरान प्रतापगढ़ी के पास देश के अलग-अलग. हिस्सों में चुनावी पैसा नहीं आता। तो. इमरान प्रतापगढ़ी के ऊपर लगाने के लिए.
आपके पास आरोप क्या है? कुछ नहीं। तो आपको. झूठे आरोप गढ़ने हैं। बट ये कंटीन्यूअसली. आता है। मैंने आपकी बहुत सारी पोस्ट पे जब. मैं आपकी आपकी प्रोफाइल भी चेक कर रहा था. मैं तो ऐसा नहीं कि मेरे सवाल पूछने पर ही. आया।. मतलब अच्छा है कि आज हम बात कर रहे हैं इस. पे।. हम. मतलब मैं हिंदुस्तान में मुशायरों का सबसे. महंगा शायर हूं। आज भी मैं मुशायरों के. लिए हां कर दूं कि हां अब कम पढ़ पाता. हूं। राजनीति में आने पे मेरा सबसे बड़ा. नुकसान आर्थिक हुआ।. हम. अब मैं मुशायरे नहीं पढ़ पाता। जिनके. मुशायरों में मैं ₹1 लाख पेमेंट लेकर के.
जाता था। अब उसी में जाता हूं अपनी गाड़ी. का डीजल फूंक करके क्योंकि मुख्य अतिथि. बनके यह नुकसान हुआ है मेरा राजनीति में. आने का तो मैं तो अब मतलब मैं अपनी कमाई. से मैंने जमीन खरीदी उस समय कई सारे ऐसे. दोस्त होते थे जब मैं मुशायरों में जाता. था और मैं बात करते-करते भाई मुझे कविताएं. सुनानी है। मुझे तालीम पे बात करनी है।. लोग जज्बाती हो के मुझे ऑफर भी करते थे कि. इमरान भाई हम मदद करेंगे। आप आप बनाना. शुरू करिए। आप स्कूल क्यों बना रहे हैं? आप यूनिवर्सिटी बनाइए। आप कॉलेज बनाइए।. कार्यक्रमों में ऐसा होता है तो मैं उनसे.
कहता था कि ठीक है लेंगे आपसे मदद लेंगे. अब तो मैं आपके चैनल पे कह रहा हूं कि अभी. जिस दिन मैं शुरू करूंगा तो देखूंगा कि. जितने लोग मुझे गाली दे रहे हैं जो आरोप. लगा रहे हैं ये ये क्या मदद करते हैं ये. क्या मतलब उस यूनिवर्सिटी में अब तो. यूनिवर्सिटी भी बना. ये मुस्लिम समाज के लोग हैं ये हिंदू समाज. के लोग नहीं है. और ये यूपी के लोग हैं मतलब ठीक है. मतलब इनको तो ये तो आप तो इनको रिप्रेजेंट. करते हो आप बार-बार कह रहे हो कि आप इनके. लिए आवाज उठा रहे हो और यही आपको गरिया. रहे हैं मतलब. कि हमारा पैसा लूट लिया बिहेव ऐसा जैसे. आपने सच लूट लिया. गुंडा मैं आप तो सब खुश नहीं हमसे हम बट. मैं नेता नहीं हूं ना.
नेता नहीं है फिर भी खुश नहीं. तो वो मतलब नहीं मैं तो वजह देता हूं. आपके बीच का लड़का. आप जैसा दिखने वाला लड़का. मतलब आप जैसे प्रतापगढ़ में आज तक मतलब. एमएलए बनना भी एक ख्वाब हो सकता है किसी. का ना. तो कामयाबी अपने साथ दुश्मनों की एक फौज. एक फौज लेके आती है ना. तो इसको एंजॉय करो ये सब मेरे साथ. मुशायरों में भी होता है. प्रतापगढ़ का सबसे. जब जब मैं मुशायरों में आया ना तो बड़ा. मजे का एक वाक्य तो जमी हुई थी बादशाहत. लोगों की 30 साल से तो मैं तो हिंदी.
साहित्य का आदमी था और वो भी प्रतापगढ़ तो. किसी बड़े शायर ने कहा कि प्रतापगढ़ में. कहां से शायर पैदा होने लगे? यह पहला तंज. था जो मैंने सुना और कहां-कहां से आ जाते. हैं। मेरा तलफुज उतना अच्छा नहीं था. क्योंकि मैं उर्दू एकेडमिक तौर पे उर्दू. से पढ़ाई मेरी नहीं हुई थी। मैं हिंदी. लिटरेचर का स्टूडेंट था। तो मैंने सीखा और. फिर जब मैंने पहली बार मदरसे की नज़्म कही. तो उसके बाद से मैंने पलट के नहीं देखा।. वही जो लोग कहते थे कि कहां प्रतापगढ़ में. शायर पैदा होते हैं। मैं उन्हीं के सामने. जनता जो है मुझे कंधों पर उठा लेती थी और.
उन्हीं के देखतेदेखते. मतलब पहले मुशायरे में ₹50 पेमेंट मिला. था। ₹100 का लिफाफा मिला था और उस उस. पेमेंट को मैं कहां तक लेके आया और यह कोई. ज्यादा अरसा नहीं लगा। 10-12 साल का सफर. है। उस सफर में मैं यह नहीं मानता कि सारा. मेरा ही हुनर है। उस सफर में आपके मां-बाप. की दुआएं, आपके दोस्तों की दुआएं, आपके. पुराने दोस्तों की मेहनत, आपके परिवार का. संघर्ष बहुत कुछ है। मैंने कितनी रातें. अपनी मतलब कितना जागा होऊंगा मैं। कितना.
सफर किया होगा मैंने। रात-रात भर मुशायरा. पढ़ना। सुबह आप खुद इंडिका गाड़ी खरीदी. पहली बार, तो मुझे याद है मेरे एक दोस्त. ने मुझे थोड़े पैसे उधार दिए। मेरे एक. डॉक्टर मिश्रा जी थे। फाइनेंस नहीं हो. सकता था क्योंकि आईटीआर क्या होता है पता. ही नहीं था ना तो उन्होंने मतलब सहयोग. किया तो पहली बार गाड़ी खरीदी वो एहसास जो. है ना अब आप मतलब लैंड कूज़र खरीद लो उसका. वो एहसास आ ही नहीं सकता जो पहली बार. इंडिका खरीदने पे मिला था तो मैं तो ऐसी. पृष्ठभूमि से आया हूं तो मेरे खिलाफ तो.
आरोप ही नहीं है ना तो आरोप जब नहीं है तो. आरोप गढ़ो गढ़ो तो क्या है कि इमरान. प्रतापगढ़ ने एक बार स्कूल बनाने का वादा. किया था. अरे ठीक है बनाऊंगा मेरे लिए मेरी बात. मेरे मैंने वादा किया था अगर यह आरो. बीजेपी वाला होता तो शायद मैं उतनी. गंभीरता से इसको नहीं लेता। मुझे लगता है. यह पॉलिटिकल है।. मैं जिन-जिन लोगों ने डाला उनकी प्रोफाइल. चेक की मैंने।. देखिए. गाली कमजोर लोग देते हैं।. हम्म. तो जो गाली दे रहे हैं उनको डर है कुछ? किस बात का डर है? वही है। कि आपकी.
सल्तनत, आपकी विरासत. 5 साल पहले सियासत में आए हुए एक लड़के से. इतना डरती क्यों है? मैं अभी भी खुद को लड़का है।. आप कह रहे हो यह हैदराबाद से आ रहा है।. ठीक है। कौन से शहर से आ रहा है? बहुत सारे लोग क्या करते हैं ना खुद ही. पोल कराएंगे। आप वो भी देखना वो. स्क्रीनशॉट भी मिलेगा। खुद ही उनका आईटी. सेल पोल कराएगा कि देश में सबसे पॉपुलर. मुस्लिम लीडर कौन है? और खुद के पोल में. खुद ही हार जाएंगे। उसके बाद कहेंगे अरे.
ये कैसे हो गया? पूरी बीजेपी आईटी सेल है. सपोर्ट करने के लिए। एक उसी पैटर्न पे. उनकी अपनी आईटी सेल है। हार जाएंगे। आप. उठा के देख लेना। आप थोड़ा और रिसर्च. नहीं हमको नहीं पता। हमको ओवैसी साहब ने. ब्लॉक कर रखा है।. पूरा और. हमको चार साल से ब्लॉक कर रखा है।. क्या बात कर रहे हैं।. सच में अच्छा. और जबकि मेरा उनसे कोई संवाद भी नहीं रहा।. मेरे साथ मेरे साथ भी वही मसला है।. ना टीवी पर।. अच्छा एक तस्वीर और मैं चाहूंगा कि अब. मौका मिला तो मैं कह भी दूं। एक और कि. ओवैसी साहब मतलब आप अनब्लॉक कर सकते हो।. मुझे आपका इंटरव्यू करना है।.
मजे की बात सुनो ना। एक और तस्वीर बताएंगे. कि साथ में चाय पीते हुए। कर्नाटक का एक. मुशायरा था। आपका अलग सेशन था। मेरा अलग. सेशन था। जिंदगी में एक ही मुलाकात साथ. बैठ के हुई है। हम. किसी और की चाय थी। मैं भी पी रहा था। वो. भी पी रहे थे। तो उतनी ही देर का संवाद. है।. आपने कसीदे नहीं पढ़े उनके लिए।. नहीं जब आप पे मुश्किलें थी तो हो सकता है. मैंने आपका सपोर्ट ही किया होगा। लेकिन. आपकी चाय नहीं पी है। अभी भी कह रहा हूं।. और आप कभी कह नहीं सकते कि इमरान. प्रतापगढ़ ने आपकी चाय पी।. दिल में आपके भी लेकिन है उनको लेके। मतलब.
क्या है? ये टॉपिक से मैं आगे बढ़ना था। आपने तीन. बार रोक लिया मुझे। नहीं नहीं खींचा इस. मतलब अच्छा है कि चर्चा हो रही है मैं. मतलब प्रासंगिक है. आप आपके दिल में है उनको लेके कि मतलब. उन्होंने आपको पर्सनल जरा हिट किया है. क्योंकि मुझे लग रहा है कि उनकी उनकी आईटी. सेल है देखिए मैं मैं अक्सर एक बात. लड़े तो जीते नाम सरदार का हारे तो नाम. सरदार का. आप उनका एक बयान आप उठा के सुनिए टूटता. शायर. ये कौन सी भाषा है आप अल्लाह रसूल की बात. करते हो और दुनिया में बाकी जब हैं सब. हकीर हैं सब मतलब कमजोर हैं कौन सी भाषा. है ये या तो फिर आप मंचों पे कुरान की.
आयतें मत पढ़िए और अगर आयत आयतें पढ़िए तो. फिर उस उस मानक पर खरे भी उतरिए ना।. संतत्व का दावा कर रहे हैं तो फिर संत. जैसा बिहेवियर भी करिए ना। नहीं करेंगे तो. सवाल तो पूछेंगे। आपको लगता है कि आप कि. ट्रोल आर्मी से डर जाएंगे तो हम 2017 में. नहीं डरे जब नांदेड़ हरा के आए थे आपको।. नहीं डरेंगे।. हम डरने वाले लोग नहीं हैं। हम गांव की. मिट्टी से बने हुए लोग हैं। तो एक सियासत. की खूबसूरती कितनी है। एक तरह बीजेपी से. लड़ाई चल रही है। अलग ही झंडे पे यहां चल.
रहा मामला अलग ही झंडे पे। ठीक है देखिए. हमने तो भाई हमसे सवाल हमसे सवाल पूछा गया. कि अलायंस में आप लोग क्यों नहीं शामिल. करते हमने कहा ठीक है आप पूछ लीजिए तो चलो. अब मैं अब आप बताओ ना मैंने कहा मेरा सवाल. मैंने ऐसा क्या गुनाह कर दिया कि भाई आप. इतना आप आपकी पूरी ट्रोल आर्मी इतना गाली. देने पे उतर आई क्यों उतर आई क्या डर है. आपको. कुछ नहीं आपने थोड़ा छीला फिर उस पर नमक. उठाकर रगड़ दिया. नहीं हमने कौन सा नमक उड़ा भाई आप आप. राहुल जी को आप कांग्रेस पार्टी को सुबह. शाम आप भला बुरा कहो कांग्रेस में आप मतलब. तेलंगाना चुनाव में आप रेवंत रेड्डी को. आरएसएस का टिल्लू यह शब्द मैं इस्तेमाल कर.
आरएसएस का टिल्लू है वो। जैसे ही सरकार. बनी, चीफ मिनिस्टर बने रेवंत रेड्डी। आप. खजूर खाने के लिए पहुंच गए उनके हाथ से।. यार बॉस आपकी पॉलिटिक्स क्या है? सवाल. क्यों नहीं पूछेगा आदमी? और सवाल पूछेगा. तो आप गाली दोगे जवाब नहीं देंगे आपके. लोग। तार्किक बहस करो ना।. यही काम तो राहुल गांधी जी के खिलाफ जो है. ना बीजेपी का आईटी सेल करता है। राहुल. गांधी सवाल पूछते हैं। विज़नरी सवाल पूछते. हैं नरेंद्र मोदी जी से तो कुछ नहीं। तो. जो बयान राहुल गांधी नहीं बल्कि नरेंद्र. मोदी जी ने दिया था आलू को सोना बनाने.
वाला उसको राहुल जी के नाम पर चिपका दो।. ऐसे ही है। भाई मैंने प्राउडली कहा मैं. स्कूल बनाऊंगा। बनाऊंगा। अपनी मर्जी से. बनाऊंगा। अपने पैसे से बना रहा हूं। कुछ. दोस्तों ने मदद के लिए ऑफर किया। मैंने. कहा ले लेंगे जब अब जिस दिन बनाऊंगा उस. दिन देखूंगा कि जो गाली देने वाले हैं ये. कितनी मदद करते हैं।. हम आएंगे।. जिनको अपने बच्चों को जो है ना हमारे. स्कूल में. हम आएंगे उसमें। एक अच्छा काम होगा, तो हम. उस. नहीं मैं बनाऊंगा और एक नहीं कई बनाऊंगा।. देखिए, जिंदगी में हर आदमी अपने लिए एक. टास्क चुनता है। हम गांव के लोग हैं।.
मैंने एक दिन ख्वाब देखा कि मुझे देश की. पार्लियामेंट में पहुंचना है।. ख्वाब था मेरा वो। मुझे लगा मुझे इस देश. में एक पॉपुलर होना है। एक अच्छा शायर. बनना है। मैंने उस फील्ड में जो ऊंचाई हो. सकती है, मैंने उसे छुआ।. हम. मेरे जैसे इंसान के लिए 2019 में जब मैं. अपनी पॉपुलरिटी के पीक पर पहुंचा था।. वहां से एक बारगी स्विच करके पॉलिटिक्स. में आना। लोग कहते थे अब खत्म हो जाएगा।. चुनाव हार जाना। सपा बसपा का डेडली अलायंस.
था। उसके खिलाफ चुनाव लड़ने की हिम्मत. करना। जानता था कि चुनाव हारूंगा। हिम्मत. की मैंने आप एक जिसका कोई गॉडफादर नहीं।. मतलब कोई गॉडफादर नहीं है। आप उस लड़के के. हिम्मत को देखो आप। कोई सपोर्ट नहीं। अपने. घर से 600 कि.मी. दूर चुनाव लड़ने आया।. चुनाव हारा। चुनाव हार के छ महीने सदमे. में रहा। स्वाभाविक है। उसके बाद एनआरसी. का प्रोटेस्ट शुरू हुआ। मैं पूरे देश में. 67 जगहों पर गया हूं मैं। अपना किराया.
अपना टिकट फूंक करके देश में गया। कई जगह. मुकदमे हुए। हैदराबाद में भी हुए।. और जानते हैं वहां मैंने सिर्फ क्या पूछा. था? मैंने यह पूछा था मंच पर खड़े हो के. कि मुझे हैरत है कि हैदराबाद में कोई. शाहीन बाग क्यों नहीं? वो इतना चुभा कि उस. पे एफआईआर हुआ।. तो अब आप बताओ ना कि आप उस लड़के की. हिम्मत देखो। अब फिर वो पार्लियामेंट में. आ गया।. तो मतलब ये कह रहे हो कि दोनों ही मोहब्बत. के जज्बात में जलते हैं। बस फर्क इतना वो. बर्फ पे चल रहे हैं। आप आग पे चलते हैं।.
नहीं हम किसी जज्बात में नहीं चल रहे हैं।. भाई हम सवाल हम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछे. तो आपको. घर में घुस के छेड़ो।. हम उनसे सवाल घर में घुस के छेड़ोगे तो आग. तो लगेगी।. घर इसमें कौन सा? बिहार में बैठा हूं. दरभंगा में। दरभंगा मेरे घर से ज्यादा. नजदीक है। हैदराबाद से दूर है।. इसमें घर में घुसने वाली कौन सी बात है? बहुत रिएक्शन आने वाले हैं। इंतजार करो।. आने चाहिए। मैं रिएक्शन से कहां डर रहा. हूं? डरे होते तो फिर यहां थोड़ी होते।. चलो मैं इसको एक रिफ्रेम करता हूं।. हम. इमरान प्रतापगढ़ को नरेंद्र मोदी की.
बीजेपी से लड़ने में ज्यादा मजा आता है या. ओवैसी की एआईएमआईएम से? देखिए हमें ये हंसी कसम से कह रही है।. मतलब हमें जुल्म से लड़ने में मजा आता है।. मैं मतलब अभी ख्याल आया तो किसी का एक. बहुत अच्छा शेर है।. हम. के मतलब हम अहले दिल हैं नया मोजजा. दिखाएंगे। हम अहले दिल हैं नया मोजजा. दिखाएंगे। चिराग बोएंगे और रोशनी उगाएंगे।.
जिसे यह वहम है कि जुल्म जीत सकता है, वह. और जख्म दे, हम और मुस्कुराएंगे। तो, यह. किसके लिए है? ओवैसी साहब के लिए है। आप. जिसके लिए भी छोड़ो भाई. शायर अपना काम। मैं तो गजल सुना के अकेला. खड़ा रहा और लोग अपने-अपने चाहने वालों. में खो गए। कृष्ण बिहारी नूर ने कहा था. कभी तो मैं अपना काम कर रहा हूं। आपको. इतनी तकलीफ क्यों हो रही भाई ना? मैं मैं. पार्लियामेंट में खड़ा होकर के मोदी जी. सामने बैठे हैं। अमित शाह जी सामने बैठे. हैं। मैं उनसे सवाल पूछ रहा हूं। बस वही.
बात है ना कि कागज की एक नाव अगर पार हो. गई तो इसमें समंदरों की कहां हार हो गई? अगर आपको यह मुगालता था कि सिर्फ आप बोलते. हो। अब और कुछ और जुबाने निकल आई बोलने के. लिए और वो सुनी जा रही हैं। लोग उनको पसंद. कर रहे हैं। तो इतना मतलब इतना परेशानी. क्यों है? और गाली मतलब गाली क्या राजनीति. में गाली की का स्पेस कहां बनता है? एक पिक्चर आई थी वर्चस्व। खैर उस पर चोट. है। नहीं कोई अच्छा आप कह रहे होंगे आप.
पत्रकार हैं। ज्यादा बेहतर समीक्षा कर. सकते हैं। मैं अपना काम कर रहा हूं।. यहां पे मन का मैं मोहब्बत यहां पे. स्वीकार कर मैं मोहब्बत की दुकान ले चल. रहा हूं। मैं राहुल गांधी जी के साथ खड़ा. हूं। कैसे मोहब्बत की दुकान आपकी है? पत्रकारों पे तो आप लोग भी केस करवाते हो।. हमारे ही चैनल. हमारे एनडीवी चैनल के एक पत्रकार हैं जिन. पर आपने केस ठोक दिया है।. अरे हां एक ही पे हुआ।. कर्म तो कईयों के ऐसे हैं के. मतलब आपको लगता है कि.
आप तो खुद पढ़ाई किए हो जर्नलिज्म आप उनको. पत्रकार. आप तो खुद पढ़ाई किए हो एक टर्म हमने सुना. था।. आप तो खुद पढ़ाई किए हो जर्नलिज्म की।. एडिटर गिल्ड ने भी कहा कि ये हमला सही. नहीं है। कन्हैया से भी हमने सवाल पूछा. था। तो कन्हैया ने हमको इसका जवाब दिया।. कभी-कभी बैलेंस बनाने के लिए ठीक होता है।. मतलब देखिए आप. इससे संतुलन बना रहता है। पत्रकारिता में. एक शब्द है श्वेत पत्रकारिता पीत. पत्रकारिता।. हम. हिंदी साहित्य का विद्यार्थी हूं तो थोड़ा. हिंदी के शब्द ज्यादा प्रयोग कर रहा हूं।. तो मतलब श्वेत पत्रकारिता हो रही है क्या? पत्रकार कह जाएंगे वो सारे दौर में फिर.
ऐसे सवाल उठ जाएंगे।. हां नहीं उठने चाहिए। हर दौर में सवाल. हर दौर में सवाल होंगे। सवाल उठने चाहिए।. किसी भी दौर में आप नीट कंप्लीट 100%. पत्रकारिता. ठीक है। 100% नहीं हुई होगी।. लेकिन 0% तक भी नहीं आया होगा। माइनस में. चली गई है चीजें। भाई. अब आपका परसेप्शन ये हो सकता है। इस पे तो. मैं. हमारा नहीं मतलब आप तो कमेंट सेक्शन बहुत. पढ़ते हो आप।. हम. आप मतलब मेरी कई डिबेट आप उठा के उसके. कमेंट सेक्शन पढ़ो। मतलब पत्रकारिता का. जिक्र आते ही कई-कई शब्द ऐसे गढ़ दिए गए. हैं। तो. ठीक है। मैं मान लो आपको नहीं समझ में.
आया। बट स्टिल. एफआईआर करना जेल डालने की कोशिश करना। इज. इट सही ये सही है? नहीं आप किस स्तर तक जाकर के व्यक्तिगत. आलोचना कर रहे हैं या फर्जी एजेंडा चला. रहे हैं। एफआईआर किस बात पे हुआ? अगर आप. फर्जी कोई खबर प्रोपेगेंडा फैलाएंगे। आप. पत्रकारिता करिए ना। जितना आपको सवाल. पूछना हो आप विपक्ष से पूछिए। लेकिन सरकार. से सवाल पूछिए। सरकार से सरकार ने कितने. लोगों को जेल भेजा? मिड डे मील की खबर. चलाई थी मिर्जापुर में एक पत्रकार ने यहां. चंदौली चंदौसी में मिनिस्टर ने सामने से.
जेल भिजवा दिया बनारस में एक डीएम साहब के. पास एक पत्रकार चला गया उसको जेल भिजवा. दिया कितने-कितने पत्रकार. इनका तो आपने विरोध किया था. मतलब कितने-कितने वही विरोध. इनका आपने विरोध किया था. ये तो सच्ची खबरें थी जिस पे जेल गए अब. अगर प्रोपेगेंडा कोई फैला रहा है और उस पे. अगर किसी ने व्यक्तिगत तौर पर जाकर के. एफआईआर कराया तो क्या पत्रकार. बट ये लकीर कैसे डिसाइड होगी इमरान. क्योंकि हर हर पॉलिटिकल पार्टी को लगता. होगा कि ये हमारे फेवरेट में या नहीं है।. अच्छे पत्रकारों को आगे आना चाहिए। एक.
स्वतंत्र. चार नाम बताओ हमको अच्छे पत्रकार का जरा. आप सोचिए आपके लिए भी मुश्किल है कि चार. आप इमरान प्रतापगढ़ को चार पत्रकार नाम. बताओ। मुझे लगता है जो आपको लगता है कि. न्यूट्रल पत्रकार हो आप भी कमेंट सेक्शन. खोलते हो।. मतलब एक तो अब एक के तो सामने ही बैठा. हूं।. एक जहां से आप जहां आप गए हैं वहां से वो. आजाद हो गए। तो ऐसे और नाम निकलेंगे। जाने. दीजिए।. मुझे मालूम है ये ख्वाब झूठे हैं। ये. ख्वाहिशें अधूरी हैं। मगर जिंदा रहने के.
लिए कुछ गलतफहमियां जरूरी हैं।. गलतफहमियों और खुशफहमियों के बीच में एक. एक पतली लकीर होनी चाहिए।. कुछ कुछ लोग बड़ी खुशफियों में भी जी रहे. हैं और उन्हें लगता है कि अपनी तरफ यूपी. में अवध में. वो तालाब में एक परिंदा होता है एक. चिड़िया होती है टिटहरी. पता है ना. वो रात में सोती है ना तो दोनों पैर जो है. वो ऊपर कर लेते हैं उसको लगता है कि जब. आसमान गिरेगा ना तो हम रोक लेंगे.
तो ये खुशफहमियों का भी जमाना है। कई लोग. अजीब खुशफहमी में हैं। आप उनका प्रोफाइल. चेक करो उनका आप Twitter हैंडल पर घूम आओ. आप ना उनके तो लगेगा भाई इतनी खुशफहमी तो. अपने वक्त के बादशाहओं ने भी नहीं पाली. होगी. फिलहाल. राहुल जी टीवी इंटरव्यूज क्यों नहीं करते. या नॉर्मल हिंदी इंटरव्यूज क्यों नहीं. करते मुझे बहुत कम दिखाई पड़ते हैं. मेरा ख्याल है खूब किया उन्होंने भारत.
जोड़ो यात्रा के दौरान तो बुला बुला के. लोगों को मतलब मेरा ख्याल है टीम ने जिसको. भी बुलाया उन्होंने उससे बात की. कैसे राहुल जी का इंटरव्यू करना तो क्या. करना चाहिए. बात करनी चाहिए कैसे कैसे. अब देखिए हर नेता का अपना एक मतलब एक एक. सेटअप है एक ऑफिस है. नहीं जैसे सत्ता पक्ष में चलो उनके पास. जैसे मुझे लगता है कि विपक्षी नेताओं को. ज्यादा इंटरव्यू. प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं आपने प्रेस. कॉन्फ्रेंस प्रेस कॉन्फ्रेंस तो खूब करते. हैं वो मैं इंटरव्यूज की बात कर रहा हूं. क्योंकि कई बार क्या होता है कि आप कई.
सवालों पर नजरिया लेते हो एक व्यक्ति को. समझने की कोशिश करते हो और विपक्ष में यह. मौके ज्यादा होते हैं सत्ता पक्ष में जाने. के बाद आपको बचना भी होता है बहुत सारा. पाप भी छुपाना होता है तो जिम्मेदारियां. भी होती है 11 साल तक थोड़ी बचना होता है।. अरे हम आप पहले बातें हैं। बताइए ना हमको. कि. नहीं वो करते हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस खूब. करते हैं। इंटरव्यू. प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं। मुझे लगता है. इंटरव्यू नहीं इंटरव्यूज नहीं करते। बहुत. कम ना के बराबर।. मैं उनसे पर्सनली पूछूंगा।. आप मेरा पडकास्ट आपके लिए पूछूंगा।. मैं करवाने की मतलब मैं कोशिश करने की. अधिकारी नहीं हूं। लेकिन मैं जो उनका.
इंटरव्यू उनका मैनेज करते हैं या जो बात. करते हैं या मैं व्यक्तिगत उनसे आपके लिए. आप. और उसके लिए बीच में किसी का इंटरव्यू. नहीं करना पड़ेगा।. ऐसी परंपरा है नहीं। मुझे नहीं लगता ऐसा।. मैं उनसे डायरेक्ट एक बार जरूर उनसे जब भी. मुलाकात हुई मैं कहूंगा कि भैया एक पैगाम. है आपके लिए।. ठीक है। राहुल गांधी जी को आपने महात्मा. गांधी जी से कंपेयर किया। मेरे मन में. पहला थॉट आया कि राहुल गांधी जी ने ऐसा. क्या किया है जो आप उन्हें महात्मा गांधी. जी से कंपेयर कर रहे हैं। बिकॉज़ वो एक. लार्जर दैन लाइफ छवि है। उन्हें फादर ऑफ.
नेशन कहते हैं। राष्ट्रपिता से आपने तुलना. कर दी। मैंने यह कहा कि. जो हर जालिम से टकराएगी वो आंधी बनाऊंगा।. नए अंग्रेज आए हैं नया गांधी बनाऊंगा।. मैं यह शेर मैंने भारत जोड़ो यात्रा के. दौरान लिख कहा था और मैंने कई जगह बोला. हम. दरअसल हमने महात्मा गांधी को नहीं देखा।. मैं उनके दौर में पैदा नहीं हुआ था। हमने. उनकी कहानियां सुनी है। उनका संघर्ष सुना. है। हमने भगत सिंह को नहीं देखा। अशफाक. उल्ला खान को नहीं देखा। अब है क्या कि हम.
राहुल गांधी के साथ काम कर रहे हैं। मुझे. लगता है कमोबेश ऐसी ही स्थिति रही होगी और. ऐसे ही एक धोती में एक लाठी लेकर के एक. व्यक्ति निकला होगा और अकेला चला होगा तो. दुनिया ने ताने दिए होंगे। क्या-क्या कहा. होगा लेकिन फिर ऐसा आया कि पूरी दुनिया. साथ चल पड़ी। पूरा देश साथ चल पड़ा।. बट जैसे नरेंद्र मोदी जी इस इलेक्टेड. प्राइम मिनिस्टर। यहीं लोगों ने वोट दिए. हैं। हो सकता है आपके भी जान पहचान में. बहुत लोग हो जिन्होंने मोदी जी को वोट. दिया हो। आपके शहर से आपके जान पहचान से.
कुछ पुराने आपके दोस्त हो जब उधर शिफ्ट हो. गए हो जो कि होते रहते हैं आजकल आपके यहां. से. तो उन्हें कैसे आप अंग्रेज कह सकते हो या. उन्हें कैसे गांधी जी और अंग्रेजों की. तुलना कर सकते सबसे पहली बात तो अंग्रेजों. ने जो एक काम किया वो ये किया ना कि फूट. डालो और राज करो. हम. तो पूरी राजनीति भाजपा की फूट डालो और राज. करो पर टिकी हुई है। भाजपा के किसी भी. प्रवक्ता किसी भी नेता और खुद. प्रधानमंत्री जी का भी एक भी भाषण किसी भी. चुनावी रैली का बिना हिंदू मुसलमान के. पूरा होता है क्या? हो सकता है वो उनकी यूएसपी हो जैसे आप लोग.
कास्ट पर करते हैं। नहीं. जैसे कांग्रेस मतलब कांग्रेस दलितों. मुसलमानों का जिक्र ज्यादा करती है। आपके. संबोधनों में हमें यह शब्द बार-बार सुनाई. पड़ता है।. नहीं हो सकता है कि उनका राहुल गांधी जी. का आप उनका हिंदू मुसलमान पे चलता हो।. मतलब हिंदू मुसलमान पे राजनीति करनी पड़. रही है आपको। इसका मतलब आपने डेवलपमेंट के. नाम पे कुछ नहीं किया। आप जिस विकास की. बात कर रहे थे वह विकास पिछले 11 साल में. कहीं दिखा नहीं। महंगाई आसमान छू रही है।. आपके नारे थे बहुत हुई महंगाई की मार। अब. की बार मोदी सरकार स्थिति यह है कि मतलब. सच में स्थिति यह है कि आप किसान किसान हो.
युवा हो एसएससी का इतना बड़ा प्रोटेस्ट हो. रहा है। लाठियां आप छात्रों पे बरसा रहे. हो। बीपीएससी के पेपर पेपर लीक हुए। आपने. पटना में मार लठिया के बच्चों को एक एक. बच्चे को इतनी लाठी लगी थी। उसका नाम. नीतीश कुमार था। मैं उससे व्यक्तिगत ही जब. मेरी बातचीत हुई तो तो आप सोचो ना पूरे. देश में पेपर लीक कितनी बड़ी समस्या है।. आप उसको एड्रेस नहीं करोगे। आप पेन तक पर, पेपर तक पर, कॉपी तक पर जीएसटी लोगे। आप. दूध, दही, मक्खन, पनीर, छाछ और यह अंतिम.
संस्कार के सामानों तक पर जीएसटी लगाओगे. आप। कोई तो मानक छोड़ो भाई। और वित्त. मंत्री से कोई पूछेगा तो कहेंगे मैं प्याज. नहीं खाती।. यह कोई जवाब है? पेट्रोल डीजल महंगा होना. चलो ठीक है। आप कहोगे कि अंतरराष्ट्रीय. बाजार तय कर रहा। लेकिन सस्ता होगा तब. अंतरराष्ट्रीय बाजार तय नहीं करेगा।. क्या कुछ एक चीज गिना दे भाजपा ना पिछले. 11 साल में 12 साल में जो सस्ता किया हो. उन्होंने. मतलब यह मैं आपके पॉडकास्ट पे बैठ के बड़ा.
राजनीति विपक्ष में होने के नाते नहीं कह. रहा हूं मैं मैं बजट सेशन में कई बार इस. पे बात कर चुका सच में बताइए ना क्या. सस्ता किया आपने? कुछ तो नहीं सस्ता कर. पाए आप? आप सीमाएं सुरक्षित नहीं कर पा. रहे हो। आप हर दिन नारा दे रहे हो कि. हिंदू खतरे में है। इतने दिन से सारे पदों. पर तो वही हिंदू भाई बैठे हुए हैं। सब कुछ. आपके हाथ में है। महंगाई आप कम नहीं कर पा. रहे हो। अभी भी आप नेहरू जी को कोसते हो।. अभी भी आप इंदिरा जी को कोसते हो। और फिर.
आप कहते हो कि मैं बहुत मजबूत सरकार चला. रहे हैं।. कहां से चला रहे हो आप? मतलब छात्रों के. मसले पर तो मैं खुद कई बार आवाज उठा चुका. हूं कि मैं दुर्भाग्यपूर्ण. आपके साहस को सलाम करूंगा कि आपने कुछ. दुर्भाग्य नहीं हमने सारे मुद्दे उठाए. आपने वीडियो नहीं देखा होगा हमने मतलब. उठाए मसला कोई नहीं छोड़ा हमने. अच्छी बात और कम से कम छात्रों को लेकर. मैं बहुत खुद संवेदन. किसानों का मसला हो छात्रों का मसला हो. महिलाओं का मसला हो हमने हर मसले पर. बेबाकी सवाल उठाए बिना ये सोचे किसको. अच्छा लगता है किसको बुरा लगता है.
मतलब मैं विशेष रूप से यूपी बिहार आसपास. के जिलों के आप कभी सोचो ना कि गोंडा से. बहराइच से बांसगांव से, गोरखपुर से कितने. सपने लेकर के वो बच्चा जो पिताजी ने धान. बेच के, गेहूं बेच करके उसको इलाहाबाद. विश्वविद्यालय पढ़ने भेजा। आपने 400% फीस. बढ़ा दी। अभी अलीगढ़ मुस्लिम. विश्वविद्यालय में अभी भी प्रोटेस्ट चल. रहा है क्योंकि बच्चों की फीस आपने बढ़ा. दी। जो हॉस्टल की फीस 15,000 थी एक साल की. वो आपने 500 कर दी।. सर हमारे देश का दुर्भाग्य है।. सवाल ही नहीं। इस कोई.
यह हमारे देश का दुर्भाग्य है और मैं बहुत. स्पष्टता से कह रहा हूं कि हमारे यहां पर. शिक्षा स्वास्थ्य इनका ऐसा व्यवसायकरण हो. गया है। मैं अभी इंग्लैंड गया था और वहां. पर मुझे कई इंडियन ड्राइवर मिले जो कैब. चला रहे थे और मैंने उनसे पूछा मैंने कहा. कि व्हाट इज द कोर डिफरेंस? ही सेड सर. लोअर मिडिल क्लास के लिए और गरीब आदमी के. लिए जगह जन्नत है। मैंने कहा क्यों? बोले. सर सबके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते. हैं। बिल्कुल 90% सबके लिए हॉस्पिटल जो है. वो प्राइवेट गवर्नमेंट जॉब वो वाले हैं और.
उनके लिए प्लानिंग बड़ी अच्छी है। अमीरों. के लिए नुकसान है। टैक्सेस ज्यादा हैं। बट. चलिए वो तो अमीरों का मसला है वो तो कमाई. खेलेंगे। गरीब आदमी के लिए तो मैं हमेशा. मानता हूं कि शिक्षा स्वास्थ्य का ही. करोड़. जितने भी बड़े देश हैं जिनसे आप जिनसे भी. ज्यादा ताकतवर होने का आप दावा करते हो।. उनकी सबकी स्थिति यही है कि वहां शिक्षा. और स्वास्थ्य देश में कोई मुद्दा ही नहीं. है।. पढ़ने दे दो। मतलब जीने दे दो। आप आप सोचो. ना। बाकी आप करो अपना मैंने यह बात. पार्लियामेंट में उठाई थी। आप फ़ें टैक्स. फ्री करोगे जो आपकी विचारधारा की फिल्में. हैं जिससे आपका आपकी आईडियोलॉजी आपका.
प्रोपेगेंडा फैल सके। आप स्टूडेंट्स के. मतलब जो प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म हैं. जो ₹1000 के हैं, 400 के हैं, 500 के हैं।. कितनी-कितनी बार वो फॉर्म भर रहे हैं। आप. वो फॉर्म फ्री नहीं कर सकते।. मतलब यह बहुत बड़ा सवाल है। व्यवस्था कम. से कम ठीक है। मतलब तीन दिन पहले एडमिट. कार्ड आ रहा है। मुश्किल आ रहा है। यहां. से अंडमान अंडमान निकोबार अंडमान निकोबार. आपने भेज दिया बेचारा कितना पैसा खर्च. करके वहां. तीन दिन में आपका रेलवे रेलवे का तो कोई.
मुद्दा एड्रेस ही नहीं किया जा रहा है।. भाई कोई सुनने को तैयार है। सरकार सुनने. को तैयार है। आप मतलब अपने एचआरडी. मिनिस्टर से मिलना चाहो तो उनके पास दूसरे. विषयों पे बोलने का काम है। मतलब सरकार का. गडमड सोचो आप। रक्षा मंत्रालय पे कोई और. पीसी करेगा। बजट मंत्रालय पे भूपेंद्र. यादव जी आकर के बोलेंगे। कानून के विषय पे. धर्मेंद्र प्रधान जी बोलेंगे। जिसको जो. काम मिला है उस विषय पे कोई नहीं बोलेगा।. विदेश मंत्रालय का होगा तो कोई और पीसी. आकर के करेगा। भाई जिसको जो काम है वो.
उसकी जवाबदेही तय करो ना। रेल मिनिस्टर को. मतलब रेल मिनिस्टर की रील मिनिस्टर. तो मतलब आप सोचो ना सीनियर सिटीजन को. हम. छूट मिलती थी ना. हम. खत्म कर दिया आज तक किसी ने पूछा कोविड का. बहाना लेके इन्होंने ट्रेनों में कितनी. सुविधाओं का हक मार लिया. किसी कोई कोई सवाल ही नहीं पूछ रहा है. मैं फिर कह रहा हूं कि पढ़ने का मौका दो. जीने का मौका दो स्वास्थ्य ठीक कर दो. इंसान जिंदा रहे और पढ़ने का मौका दो देश.
की सारी समस्याएं खत्म हो जाए। करप्शन पे. ध्यान दे दो।. लूट. कम से कम इतना तो कर लो।. ये तीन चीज़ कर इतना तो बेहतर हो जाए।. इतना कर लो तो शायद हिंदू मुसलमान करने की. जरूरत ना पड़े। तब आपके पास गिनाने के लिए. कुछ हो।. मतलब. इस पाप पे तो आपकी पार्टी भी फिर आएगी। वो. फिर वो कह देंगे कि 75 साल आप झेल। आप. आपने किया आपका पाप धोया।. आप 75 साल का रोना रो कहो कि हमने आपके. पाप धोए। मतलब. वो अवधी के एक हमारे कवि थे। आध्या प्रसाद. उन्मत जी हमारे मतलब बड़ा उनका स्नेह रहा.
हम. उनका एक बड़ा अच्छा मतलब अवधी की एक गजल. थी कि कुछ ना बोली कुछ ना बोली पाप खोली. डोली जाई का करी इनकी जफड़ी मा कस इज्जत. बचाई का करी. और पूत जो पूछे बमक के बाप से तू का. पूत जो पूछे बमक के बाप से तू का तू. बेचारा हाथ मल के रह ना जाई. का करी मतलब आप कहोगे 75 साल का हम पाप धो.
रहे हैं। अच्छा कितने दिन तक धोगे और बता. दो आप। इन्होंने कहा था कि हम विकास. लाएंगे। अब ये कहते हैं कि हम 2047 में. विकास लाएंगे। और फिर कहते हैं गर्व करो।. किस बात पे गर्व करें इस देश? किस बात पे? मतलब राहुल जी जो मुद्दे उठा रहे हैं मतलब. मैं कम राजनीतिक हो के यहां बात कर रहा. हूं। क्योंकि एक अलग तरह का पडकास्ट है।. हम किस बात पे गर्व करें? पड़ोस का कोई भी. देश आपके साथ उसके मतलब जो घोषित शत्रु था. वह तो था ही।.
बाकी भी आपके साथ मित्र तो नहीं रह गए। अब. एक आरोप इसमें भी आप पर लगता है कि आधा. मार तो आप लोग करवा देते हो। ट्रंप वाला. जो मार्ग हुआ है अभी इसके पीछे आप लोग कोच. के बोले नहीं बोले नहीं बोले नहीं और जैसे. बुलवाए 25% उसी वक्त बढ़ के आया है. मतलब अच्छा आपको लगता है इसका मतलब विपक्ष. इतना ताकतवर है. तो आप बहुत कमजोर हो इसका मतलब. मतलब आपकी सरकार विपक्ष के हिसाब से चल. इस बार सही पट भी मेरी पट भी मेरी मजे की. बात ही बताओ शुभंकर भाई नमस्ते ट्रंप आप. जाके कर रहे हो और ट्रंप जो है वो चल रहा.
है विपक्ष के कहने पे. तो इसका मतलब आपकी विदेश नीति फेल है. आप इधर तो गड़बड़ा हो तो देखिए ही रहा. मतलब इधर तो सब गड़बड़ाया ही है। इधर नहीं. शुरू से गड़बड़ गड़बड़ा होता तो. शुरू से गड़बड़ था और पहले तो होता है ना. कि गुब्बारे में हवा भरी गई थी. और पहले था भाई और ट्रंप साहब आते थे. बोलने. हवन हो रहा था ट्रंप साहब के लिए मैं तो. बाबा रामदेव जी का एक बयान सुन रहा था. कभी-कभी लगता है कि भाई मतलब झूला झूला.
रहे थे जिसको झूला झूला रहे थे उसका क्या. हुआ. अरे भाई तो कोशिश तो करना होता कहीं ना. कहा मार थोड़ी ना कर लोगे. तो मानो ना कि विफल हो गए हो आप सहयोग लो. ना जैसे पुराने बड़े राजनेता स्टॉलवर्ड जो. थे वह सहयोग लेते थे। पंडित नेहरू ने. विपक्ष के नेताओं को साथ में लिया ना. राजीव जी ने विपक्ष के नेताओं आप तो. कुचलने पे लगे हो. कि मतलब ईडी भेज के बस कुचल दो। आज अभी. सरकार ने इस सेशन में जो डाटा दिया है. 013%.
ईडी का सक्सेस रेट है। 013. मतलब आधा परसेंट भी नहीं है। पौना परसेंट. भी नहीं है। कितना पैसा बटोरे रहे हो आप? हमारे पास कहां पैसा है? सौरभ भारद्वाज भी. यही कह रहे थे। अभी छापा पड़ा है। तो हम. तो मतलब हमारे पास शायर आदमी के पास शब्द. हैं। वो भी यही कह रहे थे। हमारा पक्का. है। हम तो वो तो YouTube चला रहे हैं।. यूटबर बन गए आजकल। नहीं हम YouTube मतलब. हम तो हम तो YouTube हम तो सीधे मंच लाइव. वाले आदमी हैं। केजरीवाल कैसे लगते हैं.
आपको? ठीक है। अब मतलब क्या ही बोले उनप. अरे भाई मुख्यमंत्री रहे तीन-तीन बार। आप. कह रहे हैं बोलने लायक आदमी नहीं समझ रहे. हो आप।. बहुत लोग इस देश में मुख्यमंत्री रहे। अब. का बोले उनप. एक सवाल आपको लेके बहुत आता है अतीक अहमद. का।. हम बहुत आपके नाम से चिपकाया जाता है कि. बहुत गुणगान किए हो आप। यह वह पाप है जो. आपके माथे बहुत अच्छे. फिर वही है ना कि कोई आरोप नहीं है।. जनप्रतिनिधि थे।. अरे यह था कि शेरवेर आप कहते हैं कि शेर.
जैसा. जनप्रतिनिधि थे। सांसद थे।. आदमी कैसे थे आप? मैं जहां रहता था पूछ रहे हैं।. जब मैं रहा जहां रहता था एक जनप्रतिनिधि. जैसा होता है वैसे थे।. अतीक अहमद कैसे आदमी थे? जैसे आज के दौर में सब जनप्रतिनिधि हैं. वैसे थे।. मतलब जनप्रतिनिधि थे। फूलपुर से सांसद थे।. हां। मैं इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में पढ़ने. के दौरान जहां रहता था तो वो. कास्टिट्यूएंसी उनके लोकसभा क्षेत्र का. है।. हां हां मतलब हमारे भाई साहब बहुत किस्सा. सुनाए कैसे आके मास्टर को टपली मार के वो. सब करवाए हैं वो. लेकिन आप तो इंसाइडर रहे हो. सबकी अपनी वर्किंग स्टाइल है। देखो यूपी.
में तो हर हर जिले में जो एक नेता है जो. सांसद है जो विधायक है वो लगभग कमोबेश उसी. स्टाइल का है। किसी के ऊपर माफिया का टैप. चिपक गया। कोई जो है वो. मैं राजनेता बना हुआ है।. पॉडकास्ट किया था। मैंने एक राइटर हैं. मनोज राजेंद्र त्रिपाठी यूपी में पहले वो. ब्यूरो चीफ भी थे एक चैनल के बड़े तो. उन्होंने कहा कि अतीक किसी का नहीं था।. अतीक को मुख्तार पे मैंने सवाल पूछा था कि. क्या अंतर है? तो उन्होंने कहा मुख्तार. नेता थे। उनकी कब्र पर मैं गया तो हिंदू.
भी रो रहे थे। अतीक गुंडा था।. देखिए सब खालिस गुंडा था। उन्होंने किताब. लिखी है। उनका अपना नजरिया होगा।. पूछ रहा हूं मैं। आप इलाहाबाद से बात कर. रहे हैं। भाई एक व्यक्ति जो चुनाव जीतता. है ज़ाहिर सी बात है उसको वोट मिलते हैं. तभी तो जीतता है ना इस देश की जो. लोकतांत्रिक प्रणाली है उसमें एक व्यक्ति. जो विधायक चार बार पांच बार विधायक बन रहा. है जो सांसद बन रहा है वो उसके साथ जनमत. है तभी तो बन रहा है ना. जनमत तो इसलिए भी हो सकता है कई बार तो. लोग जनता जात धर्म देख के भी वोट देने. लगती है. तो वो तो बहुत लोगों को दे रही है.
हां तो इसलिए पूछ रहा है. बहुत लोग तो मतलब मसीहा बने हुए हैं उसी. जनमत से ना. सो यू बिलीव ही वास लाइक वन ऑफ द पर्सन. डिस जैसे एक राजनेता होता है, जैसे. जनप्रतिनिधि होता है, वैसे एक जनप्रतिनिधि. थे।. यही परिभाषा जनप्रतिनिधि कहती अहमद।. नहीं देश में कई जनप्रतिनिधि ऐसे हैं। आप. ठीक है। मीडिया किसी के साथ पर्टिकुलर वो. एजेंडे को सेट करने के लिए वैसी खबरें. चलाती है। वरना बहुत लोग ऐसे हैं। आप. उत्तर प्रदेश की राजनीति को बिहार.
जैसे मैंने मदरसा कांड का जिक्र सुना।. बिहार की राजनीति. इलाहाबाद में मदरसा कांड हुआ था। उसमें. मुस्लिम महिलाओं का रेप मुस्लिम बच्चियों. का रेप हुआ था। जमीन खाली करवाने के लिए।. ऐसे बहुत सारी घटनाएं आती हैं जो मुझे. अशरफ की बहुत सारी कहानियां सुनाई गई।. मुझे लगता है आपको एक बार इलाहाबाद उन उन. घटना स्थल पे उन लोगों से पीड़ितों से. मतलब कहानियां तो बहुत सारी किताबें मैं. इसीलिए लोग इसीलिए इमरान प्रतापगढ़ के वजन. रहा हूं क्योंकि आपको लोग उनका करिए। सबके. स्याह और सफेद पहलू हैं।. आपका वर्जन क्या उसके नहीं मेरा वर्जन वो. एक जनप्रतिनिधि थे और पांच बार कोई चुनाव.
जीत रहा है जिसमें निर्दलीय भी जीत रहा है. तो जाहिर सी बात है कि उसने अपने क्षेत्र. में लोग जोड़े थे तब वो चुनाव जीत रहा है. और मैं मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में. पढ़ाई कर रहा था तो कार्यक्रमों में. मुलाकात होती थी कई बार हुई है. तो इसमें मतलब मुझसे वही बात है ना कि कोई. आरोप नहीं है तो पूरी आईटी से लग के एक. आरोप ये भी चिपकाओ. था मतलब ये वाला काफी चिपकता ती को लेकर. बीजेपी की तरफ से खास तौर पर सवाल आता है।. लेकर के और कुछ है नहीं ना? और कितने दिन.
से पूछेंगे यह सवाल? ठीक है। एक सवाल और आपको लेकर आता है। 20. अप्रैल 2023 को आपने कहा कि मुसलमान सिर. झुकाने वाले नहीं सिर काटने वाली कौम है।. ये एक देश का बड़ा टीवी चैनल मैं नाम. ये एनबीटी में खबर छपी थी।. एनबीटी में नहीं टीवी नाइन ने इस पे. स्टोरी चलाई थी।. मतलब कभी-कभी. जहां आपने इंटरव्यू किया था।. हां। हां। टीवी नाइन कन्नड़ आने। मैं. कर्नाटका गया। मैं कर्नाटका में एक. कार्यक्रम में खड़ा होकर बोल रहा था कि यह. टीपू सुल्तान की सर जमीन है। यहां के लोग.
सर झुकाना नहीं सर कटाना जानते हैं।. हम. तो कन्नडा में ट्रांसलेशन वो हुआ कभी-कभी. मुझे मीडिया के दिवालियपन पे वहां बैठे. हुए डेस्क पे बैठे हुए लोगों के दिवालियपन. पे तरस आता है। के कटाना और काटना एक होता. है। सर झुकाना सर कटाना. एक चैनल पे आपका और इंटरव्यू देखा था. जिसमें आप इसको कह रहे थे कि मेरे मायने. कुछ अलग थे। वर्जन अलग था।.
नहीं मैं एकदम वहां ये सफाई नहीं दी थी।. यही सफाई ये सफाई नहीं दे रहा हूं मैं।. मैं सत्यता बता रहा हूं और मैं मीडिया पे. हंस रहा हूं कि भाई मैं कह रहा हूं के ये. अब जैसे आप आप बलिया गए। बागी बलिया है।. यहां के लोग सर झुकाना नहीं जानते। सर. कटाना जानते हैं।. भाई यह यह. कटाना काटने में अंतर है।. मतलब यह यह अपराध है। मैं वो YouTube पे. मेरे मेरे YouTube चैनल पे वो वीडियो पड़ा. है। आप एक बार सुन लीजिएगा। जब इस तरह के. सवाल आते हैं शुभंकर भाई ने तो कभी-कभी. मुझे भी लगता है यार कि अरे बट आपके नाम. की खबर छपी है। कितना आप टीवी में आपने.
क्यों नहीं बोला? आप तो इंटरव्यू देने गए. थे। उन्होंने सवाल पूछा तो मैंने बोला. जहां सवाल पूछा जाएगा मैं बोलूंगा। मैं. क्या करूं? मैं मतलब सच बात यह है तो इस. पे तो मानहानि का मुकदमा करना चाहिए। अब. बाद में आप कहोगे कि आप मीडिया पे मुकदमे. करते हो। आप पत्रकारों पे मुकदमा करते हो. क्या करे आदमी बताओ ना एकदम फेक खबरें. चलाएंगे उसके बाद तरीका क्या है उबरने का. भाई आप किसी के बारे में एक फेक खबर चला. दो और बाद में वो बेचारा कहां. अभी भी छपी हुई है कहां-कहां सफाई दे तो. अभी कहते हो ना मैं अभी YouTube चैनल खोल. के सुना दूंगा.
आप मतलब लिटरली मैं अभी YouTube चैनल खोल. के अपना मेरे YouTube चैनल पे अभी भी वो. वीडियो पड़ा है मैं वो कार्यक्रम बता उस. कार्यक्रम में मल्लिकार्जुन खरगे जी बैठे. हुए थे तब वो राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं थे. मैं मेरे मेरे स्टेट चेयरमैन का कार्यभार. ग्रहण का कार्यक्रम था। मैं उसमें भाषण दे. रहा हूं। तो दरअसल होता क्या है ना बहुत. आसान है किसी मुस्लिम राजनेता पे कोई भी. इस तरह का शब्द चिपका देना। वही बात मैं. जो कहता हूं ना एक बारीक एक महीन खेल है. और उसमें पूरा तंत्र साथ देता है। कोई एक.
व्यक्ति जाकर के थाने में एक कंप्लेंट. देगा. और उस कंप्लेन की बुनियाद पर फिर मीडिया. खबर चलाएगी और बाद में कहेगी भाई हमें. क्या पता वो तो कंप्लेन दिया गया था और. बाद में मतलब. शोभा करण लाजे बीजेपी के वो नेता. जिन्होंने शिकायत दर्ज कराई. मिलती है तो नजर बचा के जाती हैं. पार्लियामेंट में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इन्होंने मेरे खिलाफ. बट वो आर्टिकल्स मीडिया ने हटाए नहीं आज. ही पड़े हैं मतलब यह भी तो मतलब थ रही है. इससे शर्मनाक क्या हो सकता है अच्छा यह.
खबर इसलिए भी बड़ी हुई क्योंकि इसी बीच. में नपुर शर्मा प्रकरण हुआ मैं मतलब आप. कहेंगे तो मैं अभी सुना नहीं आप आप हां. मैं. मतलब वो निकाल लेना. तो जब आप एडिट करना तो वो वीडियो आप निकाल. लेना. हां मैं कर दूंगा नपुर शर्मा प्रकरण हुआ. उसमें कईयों के गले काटे गए और वो बड़ा. दुर्भाग्यपूर्ण रहा और उसको लेकर भी एक. देश में हिंदू समाज में खासतौर पर नहीं. हिंसा किसी भी जरिए से हो हम उसका हम उसका. हर तरह से विरोध करते हैं। इसमें क्वेश्चन. यह आया कि एक एक सवाल जो आप आरोप आप पर.
लगता है क्योंकि आपने मुस्लिम कम्युनिटी. कई बार बात की तो मैं उस एक कम्युनिटी तौर. पे जो क्वेश्चन उठाए थे वही उठाए थे कि. हिंसा ज्यादा होती है विरोध नहीं सहाता. जैसे एक एग्जांपल आया कि जिन लोगों ने उस. दर्जी का गला काटा वो जेल जाकर बाहर निकल. गए जमानत पर आ सकते हैं लेकिन नपुर शर्मा. 3 साल से अंदर बैठी क्योंकि डर है. निकलेंगे तो कोई ना कोई आ जाएगा जो काट. देगा जबान कहने पर. जिन्होंने गला काटा था हम पहली चीज तो. उनकी निंदा करते हैं। हमारी सरकार ने उनको. जेल भेजा और वह सब भाजपा के बड़े नेताओं.
के अह मतलब कार्यकर्ता थे। फ़ोटो हैं। आपने. फोटो देखी ही होंगी। बाद में जिनको भाजपा. ने गवर्नर बनाया। अह उनके साथ उनके कई. विजुअल हैं। तो. फोटोज पे तो वो कह देंगे भाई कोई भी आता. है।. मतलब अब कोई भी आता है तो भी भाजपा के गले. मतलब पटका पहन करके आप साथ गलवहिया कर रहा. है। आप कहोगे कि अब वही बात है कि आपके. साथ विजुअल मिल जाए। ठीक है। एकदम ठीक है।. दोनों ये दोनों साइड है। खेले तो इस पे. मैं जाऊंगा। उस कट्टरता की बात कर रहा. हूं।. नहीं वो कट्टरता जिस भी जगह मौजूद है, जिस.
भी समाज में मौजूद है, हर समाज अपने-अपने. तौर पे उसमें कुछ लोग हैं जो बहुत ही. एक्सट्रीमिस्ट हैं और मैं यही तो लोकतंत्र. की खूबसूरती है कि ऐसी किसी भी कट्टरता के. लिए लोकतंत्र में जगह नहीं होती। और एक. साथ में किसी भी धर्म को टारगेट करके कोई. भी बयान किसी भी व्यक्ति को नहीं देना. चाहिए, नहीं देना चाहिए, नहीं देना चाहिए।. और जो देता है वो लोकतंत्र में देश का. नुकसान करने के लिए काम करता है।. नपुर शर्मा 3 साल से गायब है।.
मुझे तो कई बार विजुअल दिखते हैं। कहां. गायब हैं? वो क्या मेरी जब उनसे उनके आसपास के लोगों. से बात उन्होंने कहा कि एक डर है कि. सिक्योरिटी याद दी गई है। उस कट्टरता को. लेकर।. मुझे लगता है दिल्ली में बैठ के अगर किसी. को डर है तो सरकार का बहुत बड़ा फेलोर है।. ये गृह मंत्रालय क्या कर रहा है? वो कह. रहे हैं उसीलिए शायद बची हुई होगी। गृह. मंत्रालय ने संभाल रखा था। अदरवाइज. देयर आर हाई चांसेस। तो ये ये एक जनरलाइज. स्टेटमेंट ये है जैसे सलमान सलमान रश का.
आया था।. ये अगर सरकार ऐसा बोलती है कि उसके मतलब. सरकार रहते हुए. मिनिस्ट्री. में एक पावरफुल मिनिस्टर के होते हुए. जिसके पास गृह मंत्रालय है और दिल्ली में. बैठे व्यक्ति को खतरा है। तो फिर देश में. कौन सुरक्षित है? फिर हम लोग कहां. सुरक्षित हैं? नहीं ये एक जनरलाइज में. क्वेश्चन पूछा जा रहा है। जैसे इस घटना के. दो दिन बाद सलमान रशदी के साथ एक घटना हो. गई। क्या क्योंकि अब आप दुनिया भर में घूम. रहे हैं। आप एक्सप्लोर कर रहे हैं। आप. बेहतर समझते हैं। आप अपनी कम्युनिटी का. इशू भी रेज करते हैं। एक ये आता है कि.
बहलाना आसान होता है। क्योंकि गरीबी. ज्यादा है इसलिए बहलाना आसान होता है। ये. आप मानते हो या आपको लगता है कि यह भी एक. प्रोपेगेंडा का हिस्सा है। नहीं ये. प्रोपेगेंडा का हिस्सा है। किसी को इस दौर. में बहलाना आसान नहीं। यह सिर्फ. प्रोपेगेंडा है। शुद्ध रूप से और हर समाज. में इस तरह के लोग हैं।. हैं इस तरह के लोग बहुत सारे लोग अभी मध्य. प्रदेश में महाराष्ट्र में आप उनको आतंकी. मत बोलो. लेकिन पकड़े गए हैं ध्रुव सक्सेना को आप.
आतंकी मत बोलो लेकिन वहां पे कोई सुहेल. होगा तो उसको तुरंत पहले आतंकी कह के ही. संबोधित करेंगे तो नजरिए का फर्क है जो. एक्सट्रीमिस्ट हैं जो गलत अपराधों में. लिप्त हैं आप उनके लिए एक एक पर्टिकुलर. शब्द का इस्तेमाल सबके लिए करिए ना. जनरलाइज करिए अपराध अपराध है आतंक आतंक. है। वह कोई हिंदू हो, मुसलमान हो, सिख हो, ईसाई हो, वो कहीं भी अगर कुछ कर रहा है, धर्म को लेकर के वो मतलब दूसरों के साथ. हिंसा करने पे उतारू है तो ऐसे व्यक्ति की. लोकतंत्र में कोई जगह नहीं। जैसे आजकल एक.
नया ट्रेंड चला है कि पहलगाम में घटना. हुई। बहुत खतरनाक घटना हुई। हम सब ने उसकी. बहुत कड़े शब्दों में निंदा की, भटना की।. लेकिन जो जो लोग बीच में आए जिन्होंने कहा. कि टेररिज्म हैज़ नो रिलीजन। उनको भी. टारगेट बनाया गया।. आप सोचिए ना कितना कितना असहिष्णु हो गए. लोग. और यह कहा गया कि आप कहिए आप इसको कैसे. देखते हैं ये उन आतंकवादियों का मकसद क्या. था आपके देश को अशांत करना.
और उस एजेंडे को तो फिर आप ही आगे बढ़ा. रहे थे नहीं बट जैसे इसमें मेरी शिकायतें. इसमें दो तरह के एक तो मैंने उनकी भी. शिकायतें की जिन्होंने कहा नो रिलजन मैंने. कहा डोंट आप सबको एक कैटेगरी में कैसे डाल. रहे हो दूसरा एक एक्ट्रेस थी फलकनाज़ उनका. भी एक वीडियो अगर आपने देखा वायरल हुआ था।. इसमें कहा कि. तो शी सेड कि. बीइंग अ मुस्लिम आई फील बैड कि हमारे जो. एक्टर्स हैं वो नहीं बोलते हैं क्योंकि. पाकिस्तान में बैठे लोग नाराज ना हो जाए।. सम टाइम इट्स गुड टू रेज योर वॉइस। आपको. अपनी आवाज रेज करनी चाहिए क्योंकि आपके. आपकी चुप्पी संदेह पैदा करती है।.
इस देश में बहुत सारे फिल्म बड़े फिल्म. स्टार हैं। वो किसी विषय पे नहीं बोलते।. कई तो ऐसे हैं जो सिर्फ उस विषय पर बोलते. हैं जिसका ट्वीट जो है वो. पीएमओ से जाता है। सिर्फ उस विषय पर ट्वीट. करते हैं।. एक एक्टर वो भी हैं जिनका नाम आप ले रहे. थे शुरू में।. कभी-कभी तो पिक्चर का आप जिक्र कर रहे थे।. वो भी बहुत ट्वीट करते हैं। आप लोग बड़ी. गाली दे रहे थे।. जो भी कर नहीं हम किसी को गाली नहीं देते।. अरे आप ही के आईटी सेल के लोग हैं।. हमारे लोग किसी को गाली नहीं देते। शुद्ध. रूप से मैं यह मना कर रहा हूं।. शाहरुख़ खान का जिस दिन मोदी जी को ट्वीट. जाएगा।. के रास्ते पे. शाहरुख़ खान का जिस दिन मोदी जी पर ट्वीट. जाता है आप उसका। नहीं नहीं हम तो देखिए.
मान लीजिए शाहरुख खान कभी नहीं करते थे।. हां।. हम तो उनसे सवाल पूछ रहे हैं कि जो कहते. थे कि डॉलर जो है ना शुक्र है कि हमने. डॉलर की अंडरवियर नहीं पहनी है। वरना डॉलर. तो रोज गिर रहा है।. जुई चावला. मतलब कई लोग थे। आप बताओ ना अब डॉलर कहां. है? ये वाला टू टूटी का है। जूही चावला का है।. अब आप बताओ ना कि मतलब फिल्म स्टार्स का. ये काम है कि वो पूछे कि आम चूस के खाते. हो कि काट के? अब पत्रकारों का ये काम है. कि मोदी जी आप कौन सी गोली खाते हैं? एनर्जी कहां से मिलती है? ये सवाल है यार।.
मतलब शब्दों की तो थोड़ी मतलब उसकी रूह को. तो मत कुचलिए ना। तो मेरा मतलब मेरा. गुस्सा इस बात का है। मैं आप अपनी रीड पर. कायम रहो। बट ये दोनों साइड के पत्रकार है. भाई।. यह अरविंद केजरीवाल जी ने मुझसे कहा था।. मुझे लगता है पत्रकारों का कोई साइड नहीं. होना चाहिए।. ये अरविंद केजरीवाल जी ने मुझसे कहा था यह. वाली बात कि आम चूस से खाते हैं उसके।. हमने कहा महाराज हमने भी आपका वीडियो देखा. जिसमें एक पत्रकार ने आपसे पूछा कि आप में. बहुत करंट है। इतना बौद्धिक क्षमता कहां. से है? भाई जिस पत्रकार ने करंट उनका महसूस किया. होगा वो बोला होगा। मुझे तो नहीं लगता कि.
ऐसा कुछ होना चाहिए. और राहुल जी हमारे यहां ऐसा कुछ नहीं है।. हमने एक राहुल जी का वीडियो देखा है। कौन. सा पुराने जर्नलिस्ट हैं एक को हमारे ही. पुराने चैनल के जो पुराने पत्रकारों में. थे उनको समोसा खिला दिए थे।. तो वो बड़ा खिलाने में क्या गलत है? तो बड़ा उसका ऐसा महिमा मंडल. राहुल जी तो है कि आप साथ में खा रहे हैं. तो वो साथ में जो भी है उसको ऑफर करते. हैं। तो ये तो अच्छी बात है। ये तो आप. मतलब जिसको आप शहजादा कहते थे उसका गेस्चर. कितना तो यही हो गया ना।. मीठा-मीठा गप गगप तीखा तीखा मतलब समोसा. समोसा तो तीखा ही होगा। उसको सवाल पूछ रहे. थे मुंह में डाल दिया समोसा। अब वो उस खुश.
है कि समोसा पा गए? नहीं। अब वो खुश है कि. नहीं? बाद में उसने सवाल पूछा कि नहीं? सवाल तो वो बाकी समोसा से समोसा चला गया. सारा।. समोसा पे उसको ज्यादा भरोसा रहा होगा।. मैंने नहीं देखा है जो हालांकि राहुल जी. मतलब कोई भी साथ में वो तो अपने सुरक्षा. कर्मियों तक को खुद पानी ऑफर करते हैं।. खुद मतलब लिटरली वो ये गेस्चर उनका बहुत. अच्छा है। मैं उनको व्यक्तिगत तौर पे. इसलिए भी उनकी सराहना करता हूं कि आप उनके. आसपास बैठे हैं तो वो कभी फील नहीं. कराएंगे आपको कि नहीं आप लीडर ऑफ अपोजिशन. के पास बैठे हैं। आप राहुल गांधी के पास. बैठे हैं। वो अपनी तरफ से आपको ऑफर.
करेंगे। व्यक्तिगत तौर पे वो इंसान बहुत. शानदार हमरे में एक कहावत कहते हैं पता. नहीं गवा बाल कटवावे तो पूछिस भैया मु बार. तो कह भैया छो गिरी सामने देख लो. अब आप कहो मिलव तो मिला तो देख. नहीं बिल्कुल मिलबो तो तुमका बहुत मतलब. मजा आए एकदम आपको लगेगा कि यार ये तो इस. इंसान से पहले मिलना चाहिए. वही मैं जब पहली बार मिला मैं बहुत सुनके. इंटरव्यू में आप कहो कि 20 मिनट का. इंटरव्यू घंटा भर गया सबका मिलना चाहिए. हम टाइम ना बताओ लेकिन हम ये जरूर कहा. कि आप जब भी उनसे मिलेंगे.
तो आपको लगेगा कि जो छवि इनकी बनाई बनाई. गई है उससे तो हजार गुना अलग इंसान है ना. भैया मोड इनके बार देख समन्वय चलो अब. हमारे गोंडा में हमारे एक शायर थे आदम. गोंडवी साहब. जी. अब क्योंकि हमने आपको बहुत सुना नहीं बहुत. शेर शायरी ज्यादा तो हम सोचे गोंडवी साहब. को हम याद कर लेते हैं हमारे अवतिक बड़े. शायर थे और एक आप एक आप सुना दोगे एक हम. सुना देंगे तो हमको एक बड़ा अच्छा इनको. लगता है एक लगता था कि तुम्हारी फाइलों. में गांव का मौसम गुलाबी है मगर ये वादे.
झूठ क्या है पूरा. मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावे किताब. तो अब मैं. एक बढ़िया कोई आप सुनाओ। देखिए उसी पड़ोस. में जमुना प्रसाद उपाध्याय हैं फैजाबाद के. एक शायर. हम्. मैंने इसको पार्लियामेंट में भी कोट किया. था कि ये चुनर धानी धानी भूल जाते. हम. ये पूर्वा की रवानी भूल जाते. हम. जो आकर चार दिन में जो आकर चार दिन गांव. में रहते तो सारी लंतरानी भूल जाते तो ये. सत्ताधीश जो है ना और उसी बीच में फैजाबाद. में एक रफीक सादानी थे उनको सुनिएगा वो.
अवधी के शायर थे अवधी के कवि थे उनका एक. बहुत अच्छा शेर कह रहे है कि तू जितना. समझा था उतना महान थोड़े है।. तू जितना समझा तो उतना महान थोड़े है।. हम. खान तो लिखत है लेकिन पठान थोड़े हैं।. हम मानी था मोहब्बत में चोट खाए हैं।. जितना चिल्लात है उतना चटान थोड़े हैं।. आय रे. तो ये मतलब जो पूरा अवध का क्षेत्र है ना.
हम लोग मतलब सच में कभी-कभी मुझे खुद भी. लगता है कि यार अवध की मिट्टी ने आपको पल. पालपस के बड़ा किया है ना वो मिट्टी की जो. तासीर है ना वो भी आपको अलग करती है और. फिर आप इलाहाबाद आ गए इलाहाबाद की बकैती. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का वो पानी इलाहाबाद. का इलाहाबादबादी पना उसने जो आपकी परवरिश. की ना वो आपको एकदम जैसे होता है ना तपा. करके उसने आपको कुछ बनाया तो फिर अच्छा. आदम गोंडवी साहब हमारे बड़े डेमोक्रेटिक. आदमी थे। दोनों साइड ठोकते थे।.
नहीं नहीं वह जिस दौर में ठोक रहे थे अपनी. शायरी के जरिए वो उस वक्त की सरकारों के. खिलाफ लिख रहे हैं।. जैसे एक लिखा उन्होंने कि काजू भुने प्लेट. प्लेट में वििसकी गिलास में उतरा है. रामराज विधायक निवास में।. हां और एक आपो वाला है कि आपके सहयोगी. वाला। पक्के समाजवादी हैं।. हां मतलब. क्या था? आप इसको भी बोल के सुना।. नहीं वो खाली बीजेपी वाला सुना।. नहीं बीजेपी वाला कुछ नहीं था।. हां पक्के क्या था पूरा? नहीं नहीं आप. उसको पूरा करिए ना. वाला नहीं याद है महाराज. देखिए वो पहला भी गठबंधन थोड़ी चलाना.
जब भी कोर्ट होता है उनका पहला शेर ही कोट. होता है पूरी गजल कोट नहीं होती आप कोट कर. दो. पक्के समाजवादी हैं तस्कर हो या डकैत. हम्म इतना असर है खादी के उजले लिबास में. उनका एक शेर और था जितने हरामखोर थे. कुर्बो जवार में प्रधान बन के आ गए अगली. कतार में. बहुत लेकिन बहुत उनकी एक उनकी एक गीत मतलब. नज़म जैसी एक गीत हम. आइए महसूस करिए जिंदगी के ताप को वो उस. कविता का शीर्षक ही जो है वो मतलब दलितों.
पर है। वो बहुत अच्छी कविता है। उसको. पढ़िएगा आपको अच्छा लगेगा। हमको ये भी. अच्छा लगा था जो डलहौजी ना कर पाया वो ये. हुक्मरान कर देंगे। वो वो ये हुक्काम कर. देंगे।. हुक्काम कर देंगे।. जो डलहौजी ना कर पाया वो ये हुक्काम कर. देंगे। कमीशन तो दो. हिंदुस्तान को नहीं नीलाम।. शेर उन्होंने उस समय कहे प्रासंगिक आज. बहुत है उनके शेर। दुष्यंत जी हूं। आदम. साहब हो, यमुना प्रसाद उपाध्याय जी हो, यह. लगभग एक लीक के लोग हैं जो हिंदी कविता से.
बाहर निकल के आए। उन्होंने गजलें कही. हिंदी में गज़लें कही। मतलब इस पूरे गजल. शास्त्र को समझने की आवश्यकता है। तो वो. अपने. आपका टॉप थ्री एंटी बीजेपी कोर्ट कौन सा. है? एंटी बीजेपी।. अरे लिखे तो सब महाराज बीजेपी वाला। आजकल. तो खड़गे साहब भी शेरों शायरी कर रहे हैं।. नहीं नहीं खड़गे साहब को शौक है बहुत। वो. मुशायरे सुनते हैं शायरी सुन लिख के तो आप. देते हैं वोट करते हैं।. नहीं नहीं मतलब वो खुद भी पढ़ते लिखते हैं. और किताबें पढ़ते होंगे लेकिन जब बगल में. लड़का बैठा है तो बाबू दुठ दे दो। नहीं. नहीं वो तो आप उनको देने की हैसियत हमारी. नहीं है। ठीक है हमारे बुजुर्ग हैं.
और बहुत सारे लोग मांगते रहते हैं। मजे की. बात है कि उधर वाले भी मांगते रहते हैं।. इमरान भाई भाषण देना यार कोई एक शेर. बताइएगा।. तो इतना तो लोकतंत्र अभी अंदर बचा हुआ है।. तो ये कहां मिलते हैं बाथरूम में फिर. क्योंकि बाकी सब तो बंद है।. नहीं नहीं पार्लियामेंट में बैठे हो। आप. उठे तो निकल रहे हो इस परि मतलब जो वो. पूरा जिसको आप कहते हो ना कि वो राउंड. वाला जो पोर्च है उसमें आपसे मुलाकात हो. ही जाती है। मतलब मुझे इस बात की खुशी है. कि जब मैं मेरी वक्त की जो स्पीच थी. शुभांकर. काफी चर्चित रही थी।. उस स्पीच के बाद मुझे कम से कम भाजपा के.
50 बड़े नेताओं ने अच्छे नेताओं ने. पार्लियामेंट के राज्यसभा लोकसभा उन्होंने. आकर के बधाई दी और कहा कि भाई बहुत सारे. मिथक थे वफ को लेकर के जो हमने आपकी स्पीच. सुनी तो क्लियर हुए। ठीक है वोट हम पार्टी. में हैं विप है हम बिल के समर्थन में दे. रहे हैं तो मुझे अच्छा लगा कि चलो कम से. कम इतना सहजता बाकी है. नहीं वो उस दिन आपकी और अमित शाह की दो. स्पीच काफी चर्चित थी. नहीं मैंने मैंने मतलब मैंने दिल से बोला.
था लगा वो तीर चला वो तीर जो बेहतर तेरी. कमान में है किसी की आंख में जादू तेरी. जुबान में है तो कोशिश करिए अपनी जुबान के. हुनर को आजमाइए और मैं कोशिश कोशिश की कि. बोलूं अच्छा बोलूं पार्टी ने. बहुत बहुत आई थिंक अक्रॉस पार्टी लाइन. लोगों ने आपकी स्पीच की तारीफ. सराहना की उसे बहुत सुना गया. देश में काफी सुना गया था वो स्पीच. मैं मैं दिल से बोल रहा था और देखिए मैं. इसमें एक बहुत अच्छी बात कहता हूं बहुत. सारे लोगों ने बोला. हम.
ऊपर वाला आपकी बात में तासीर देता है असर. देता है कोई एक ताकत है जो आपकी आवाज में. असर देती है हम. तो मैं मैं जेपीसी में भी नहीं था मैं वफ. से रिलेटेड किसी कमेटी में नहीं था और जब. लोकसभा में बिल पास हो गया 22 घंटे डिबेट. हो गई बासी हो गया मामला तब राज्यसभा में. आया राज्यसभा में भी मुझे 8:00 बजे बोलने. का 8:30 9 बजे बोलने का मौका मिला जब एकदम. टीवी में गए. टीवी में उसको प्राइम टाइम कहते हैं. मतलब. जब देश में सबसे ज्यादा लोग सुनते हैं.
सौभाग्य से प्राइम टाइम था वो वरना मतलब. मेरा ही शो खाए थे. बासी हो चुका था. मेरा ही शो खाए थे ना इसलिए मुझे याद है. तो तो अब जो है ना फिर भी मतलब ऊपर वाले. ने तासीर दी उस स्पीच में उस तकरीर में तो. शायद उसका कारण यही था कि मैं बहुत दिल से. बोल रहा था। मैं बड़ा भावुक हो गया था. बोलते हुए। तो कैसे-कैसे रिएक्शंस आए थे. और बहुत मतलब मुझे खुशी है कि इस देश के. बड़ी तादाद में हिंदू भाइयों ने सराहना. की। हर हर प्लेटफार्म पे मतलब मैंने पहली.
बार अपनी स्पीच के किसी कमेंट सेक्शन को. पढ़ा तो बहुत अच्छे रिस्पांस थे लोगों के।. बहुत और देखिए आप बतौर राजनेता आप पे कोई. भी टैग लगाया जाए आप फला वर्ग की राजनीति. करते हो आप फला समाज को रिप्रेजेंट करते. हो लेकिन अगर आपको सभी समाजों का प्यार. हासिल नहीं है तो आप राजनीति नहीं कर रहे. हो आप और अपनी राजनीति को आप सफल नहीं कह. सकते. तो मैं कोशिश करता हूं कि संसद में पहुंचा. हूं पता नहीं किन नसीबों की वजह से तो.
वहां पहुंच के इंसाफ करूं यार सच में. शुभंकर भाई मुझे देश के अलग-अलग हिस्सों. से अलग-अलग समाज के अलग लोग मुझसे कहते. हैं भैया मेरी बात उठा दो पार्लियामेंट. में मेरी यह मुझे लोग चिट्ठियां भेजते. हैं। मेरे पास ढेर लगा रहता है सेशन आने. से पहले। मेरा मुद्दा उठाइए मेरा मुद्दा. उठाइए। यह बात उठा दीजिए। आज भी गांव के. कोने-कोने में मतलब एकदम कोने में, बंगाल. के कोने में, कश्मीर के कोने में बैठे हुए. आदमी को भरोसा है कि हमारी बात. पार्लियामेंट में उठ गई, तो हमारा मसला हल.
हो जाएगा। और स्थिति यह है कि पूरा का. पूरा सेशन चला जा रहा है। बोलने का मौका. ही नहीं है। सेशन चलेगा ही नहीं। उठा भी. दोगे मुद्दा तो उसका कोई हल नहीं निकलेगा।. तो जो लोकतांत्रिक और संसदीय मर्यादाओं का. हनन हो रहा है ना वो उस संस्था का नुकसान. है। सरकार को इस पे सोचना चाहिए। अगर. पार्लियामेंट में किसी विशेष मुद्दे को. किसी ने कितनी मुश्किल से समय मिलता है. पार्लियामेंट की जो पूरी मतलब जो. प्रोसीडिंग है उसमें एक व्यक्ति को 1 मिनट. का समय कितनी मुश्किल से मिलता है बोलने.
के लिए हम जीरो आवर लगाते लगाते थक जाते. हैं लकी ड्रॉ में निकलता है जीरो आवर कि. आपका जीरो आवर आया या नहीं जीरो आवर आया. तो आपको 3 मिनट का समय मिला आपने 30 जीरो. आवर लगाए तो दो निकला बड़ी मुश्किल से और. पता चला कि ज़ीरो आवर शुरू हुआ और उसी उसी. समय हंगामा होने लगा तो खत्म। आप फिर. कोशिश करते रहिए और तब कोशिशें करके आप. आवाम के मुद्दे उठाने का प्रयास करते हो।. मैं कभी यह नहीं सोचता कि मैं किस समाज से. आ रहा हूं। मुझे मैं सोचता हूं कि जो भी.
मजलूम है हर व्यक्ति का मुद्दा उठाऊं और. सरकार की आंख से आंख मिला के बात करूं।. जैसे मैंने मुंबई हज हाउस में कोचिंग चलती. थी।. जो हज करने वाले लोग जाते हैं उनका जो. उनका जो पैसा जमा होता है उसके कॉर्पस से. चलती थी। कोविड का बहाना लेकर के स्मृति. ईरानी जी ने उसे बंद करा दिया। उस समय वो. मिनिस्ट्री उनके पास थी। बहुत लोगों ने. लड़कों ने मुझे चिट्ठियां भेजी मेल किया।. मैंने बड़ी मुश्किलों से जीरो आवर लगाया।.
मैं उपराष्ट्रपति महोदय से व्यक्तिगत जाके. मिला कि सर यह शिक्षा से जुड़ा मुद्दा है।. मुझे धन साहब हां धनकर साहब थे तब और तो. संयोग से मेरा जीरो आवर आ गया। मैंने वह. मुद्दा उठाया और. तो नहीं बाहर हो गए। ज्यादा सुन ले आप लोग. की।. मुझे खुशी है कि मतलब 20 दिन के अंदर. सरकार ने नोटिफिकेशन किया और वो कोचिंग. फिर से शुरू हुई। कितने बच्चों ने मुझे. दुआएं दी। तो आप कुछ कर पा रहे हो। मुझे.
लगता है कि मतलब आप जैसे होता है ना. शुभंकर भाई मेरा अपना मानना है कि मैं. पॉजिटिव पॉलिटिक्स करूंगा। हर आदमी अपनी. पॉलिटिक्स का एक फ्लेवर चुनता है। मुझे. पॉजिटिव पॉलिटिक्स करनी है। मैं. पार्लियामेंट में ऐसे मुद्दे उठाऊंगा जो. जनता से जुड़े हुए हैं। सच में ठीक है। आप. छोड़ भी सकते हो ना। बहुत सारी चीजें हैं. जिस पे जैसे मीडिया जबरदस्ती बहुत सारे. विषयों पे बयान लेना चाहती है। मैं मना कर. देता हूं।. मुझे याद है एक बड़े चैनल ने जब पद्मावत. पे बवाल चल रहा था तो मुझे फोन आया कि.
आपका उस पे रिएक्शन चाहिए। हमने कहा संजय. लीला भंसाली से बात करिए। करणी सेना से. बात करिए। इसमें इमरान प्रतापगढ़ का क्या. रोल? मैंने मना कर दिया। बोले नहीं नहीं. ये टाइम है आप आ जाएंगे चलेगा। हमने कहा. नहीं चलेगा के हिसाब से नहीं चलना है। कम. दिखेंगे लेकिन मुनासिब तरीके से दिखेंगे।. जब दिखेंगे तो दिखेंगे।. नाइस। तो एकदम पॉजिटिव अप्रोच पॉलिटिक्स. करूंगा। अपनी शर्तों पर करूंगा। पार्टी जो.
जिम्मेदारी देगी उसे बहुत आगे बढ़ के. निभाऊंगा। पार्टी की आईडियोलॉजी, पार्टी. की विचारधारा, पार्टी की लीडरशिप जो चाहती. है उसको समझता हूं और वह सही जनता के. मुद्दों को चाहती है। उसे अच्छे से. निभाऊंगा। लेकिन खुददारी की राजनीति. करूंगा क्योंकि जहां से आया हूं वहां कुछ. और मिला हो ना मिला हो। खुददारी सीख के. आया हूं।. लोकसभा लड़ने का मन है।. पार्टी आदेश करेगी तो लडूंगा।. मैं मन की बात कर रहा हूं। देखिए पार्टी. तो जो भी चाहेगी देश की पार्लियामेंट में.
का एक पार्लियामेंट एक बड़ा प्लेटफॉर्म. है। वहां आने के बाद यह महसूस हुआ कि यहां. से आप देश के बड़े जरूरी मुद्दे उठा सकते. हो और उन मुद्दों पर कुछ काम भी हो सकता. है। तो जाहिर सी बात है कि देश की संसद. में रहना चाहूंगा। उसके लिए पार्टी. राज्यसभा या लोकसभा जो भी प्लेटफार्म देगी. वो चुनाव लडूं। राज्यसभा भी आदमी चुनाव. लड़ के ही आता है।. हां लेकिन. लड़ के ही आए थे हम भी। सांस अटकी रहती है. आप मतलब वोट यहां भी चुनाव हुआ 8 घंटे.
काउंटिंग रुकी थी. हां लेकिन वो होता है ना कि वो जंगल वाला. मामला ही खुल के गए. ठीक है उसके अपने मजा अलग आता है उसका. मतलब उसका एडवेंचर अलग है एस्टैब्लिश आदमी. वहीं से होता है आप राज्यसभा में कई बार. चुन के आए हो लेकिन नेता के तौर पर आप पर. ठप्पा तभी लगता है जब आप जनता के बीच में. जीत के आते हैं कि अब आप हैं जनता के नेता. मुझे लगता है कि जनता के बीच में से चुन. के आए हैं या राज्यसभा में आए हैं। नेता. आप तब बनते हैं जब आप सड़क पर और संसद में. जनता के मुद्दों पर खड़े रहते हैं और. कभी-कभी कुछ लोग बिना चुनाव लड़े भी नेता. हैं ना इस देश में वो कभी कोई चुनाव नहीं.
लड़ते. देखो हमको बहुत बढ़िया सवाल आया मन में. आया कन्हैया कुमार राज्यसभा काहे नहीं. भेजे गए इमरान इमरान प्रतापगढ़ काहे भेज. दिए गए मतलब क्या ऐसा था कन्हैया भी जनता. के बीच में जा रहे हैं सड़क पे लड़ रहे. हैं मुझे लगता है कि देखिए. कब कौन आ जाए कब किसका समीकरण बैठ जाए. कब किस आवास को पार्लियामेंट लाना चाहती. है. वो बेचारे बस तक नहीं पहुंच पा रहे आप. पार्लियामेंट तक पहुंच गए. नहीं नहीं वो हर जगह मंच पर हैं.
नीचे उतार दिए गए थे महाराज. नहीं वो मुझे लगता है कि देखिए वो ऐसी. रैली थी कि उसमें गठबंधन के एक छोटी सी. जीप है या गाड़ी है उसमें गठबंधन के ही. सात आठ नेता 10 नेता स्टेज पर हैं तो मुझे. नहीं लगता वो वो एक सामान्य कार्यक्रम है।. मतलब आप भीड़ में चल रहे हो।. अह देखो बागी शायर जो है कैसे दबदब के बात. कर रहे हैं।. दबदब के सीधा-सीधा बात देखो फ्रैंक बात यह. है कि तेजस्वी जी नहीं चाहते तो आगे बढ़े।. नहीं नहीं पिछली बार हरवा दिए थे। यह.
फालतू का यह फालतू का नैरेटिव. कन्हैया में पोटेंशियल है। दुनिया जानती. है उसको लोग पसंद करते हैं।. बिहार में बहुत सारे नेता बीजेपी वाले. कांग्रेस पार्टी के बहुत सारे नेता बीजेपी. वाले गरियाते भी हैं लेकिन यह है कि उस पे. नोटिस करते हैं।. नहीं नो डाउट बिहार के जितने भी नेता हैं. युवा लोगों में. युवा लोगों में नो डाउट हमारे कई साथी. बहुत अच्छे हैं और बड़ी संभावनाएं हैं. उनमें। अब एक फालतू का नैरेटिव कि पप्पू. यादव को और कन्हैया को तेजस्वी पसंद नहीं. करते। अभी सब साथ में गलबियां करके घूम. रहे हैं। साथ में फोटो आ रही हैं। स्टेज.
पे साथ हैं। ये. चलो ठीक है। फालतू का नैरेटिव है। सियासत. या मोहब्बत? ज्यादा टफ क्या है? किसकी यात्रा ज्यादा मुश्किल भरी है? यार दोनों मेरा शेर है मोहब्बत कौन करता. है? सियासत कौन करता है? मुझे मालूम है मेरी हिफाजत कौन करता है? हम ही ने लाज रखी है बुजुर्गों की। यहां. वरना सभी टुकड़ों पे पलते हैं। बगावत कौन. करता है? दोनों आप तब कर सकते हैं जब समाज. से बागी हो जाइए। दोनों बहुत मुश्किल काम. है। फिर भी अगर एक चूज़ करना हो.
यार अब एक ही क्यों चूज़ करें? दोनों. अरे हमारा दो ही ऑप्शन था डिप्लोमा मतलब. अब फैज बन करके कि कुछ इश्क किया कुछ काम. किया। दोनों साथ में करेंगे और इस बार. अधूरा दोनों नहीं छोड़ेंगे।. पहले रह गया था एक।. चलो आखिरी सवाल है। अभी आएगा उन कब कर रहे. हो? हां ये सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल।. राहुल जी तो करने वाले नहीं है। उनके. लक्षण नहीं लगते हमको।. देखिए YouTube चैनल वाले तो हर दिन शादी. कराते रहते हैं और बाद में मुझे भी पता. चलता है कि मेरी डेट जो है मुझे वो मेरी.
डेट शादी के जरिए पता चलती है कि YouTube. के जरिए कि हां कई लोग तो मुझे फोन करके. कहते हैं भाई आपने बुलाया नहीं। आपने. मेहमानों की लिस्ट भी फाइनल कर दी। तो ये. सब YouTube के बच्चे अपना व्यूज के लिए. करते रहते हैं। करेंगे शादी। एक-दो साल. में कर लेंगे। क्या है शादी आपके लिए? सोचते हो कभी? देखिए जरूरी है मतलब आपको. एक परिवार बनाने के लिए शादी जरूरी है। बट. मुझे लगता है कि उससे भी जरूरी काम हमने. अपनी जिंदगी में तय कर रखे हैं। नेता. ईमानदार होते बिल्कुल होते हैं। कई नेता.
हैं जो बहुत ईमानदार हैं। आज के दौर में. कौन? कई हैं। मतलब किसी एक को क्या गिनाऊं? कई. हैं। फिर भी अगर आपके फेवरेट पॉलिटिशियंस. बन जाए तो किसे आप चलो अपनी पार्टी हटा. दो। अपनी पार्टी में तो कहोगे लोग कहेंगे. घर की बात है। बाकी पार्टी. पिटिकल पार्टीज में. लास्ट में मुझे नेहरू बहुत लुभाते हैं।. बहुत लुभाते हैं। नेहरू जी क्यों पसंद है. आपको? नेहरू जी का जो पूरा विज़न है नेहरू. की जो पूरी पॉलिटिक्स है वो जितनी समावेशी. है। मतलब एक व्यक्ति कह रहा है कि जब मैं.
मरूं तो मेरी राख को जो है ना वो भारत की. फजाओं में बिखेर देना ताकि मैं यहां की. मिट्टी में मिल जाऊं।. ये इंदिरा जी कही ये नेहरू जी का है।. अरे वो कंगना की पिक्चर में निंद्रा जी का. डायलॉग्स है।. मतलब कंगना है वो कुछ भी कर सकती हैं।. अरे भाई ऑथेंटिक पिक्चर बनाई। बढ़िया. फिल्म है भाई।. ठीक है। हम कहां मना कर रहे हैं वो अच्छी. कलाकार हैं।. आपने देखी है पिक्चर? अच्छी कलाकार हैं। इस बीच फिल्में देखना. बंद कर दिया है। टीवी देखना. प्रियंका जी उनकी दोस्त बन गई है।. टीवी देखना तारीफ की क्यों है प्रियंका जी. की? कि प्रियंका जी कह रही थी कि तुम्हारे. बाल अच्छे हैं। कैसे हैं? और आजकल. फ्रेंडशिप हो गई कंगना जी की प्रियंका जी.
से।. हो सकता है बीजेपी में कम दोस्त मिल रहे. हो इसलिए कांग्रेस में दोस्ती तलाश। जहां. भी था वो कहीं राहुल जी नहीं बात करते. प्रियंका जी इज अ वेरी डिफरेंट पर्सन. सीरियसली उन्होंने और सीरियस नोट पे. प्रियंका गांधी की बड़ी तारीफ की थी।. नहीं उन्होंने तो ये भी अभी एक ट्वीट किया. था कि ट्रंप के खिलाफ ट्वीट डिलीट करने के. लिए मुझे नड्डा जी ने कहा इसलिए मैंने कर. दिया।. देखिए आप ही की तरह बेबाक है वो ये बेबाकी. बची रहे। हम दुआ करेंगे कि ये बेबाकी बची. रहे। बहुत कम लोग बेबाक बचे हैं राजनीति.
में। जो बचे हैं उनकी कदर किया जाए।. कुछ सुना दो भाई फिर हम समापन करते हैं।. कुछ तो अच्छा सुनाओ ऐसा जो यादगार हो जाए. आपके चाहने वालों को।. बड़ा मुश्किल सवाल है कि मतलब मैं क्या. सुनाऊं कि जो यादगार हो जाए।. एक नज़्म सुना देता हूं आपको।. जख्म पर जख्म खा के निकले हैं। हां मगर. मुस्कुरा के निकले हैं। इसका प्रसंग है कि.
एक दिन पार्लियामेंट में 146 सांसद एक साथ. सस्पेंड हुए।. बाहर निकले तो मीडिया के साथ ही खड़े थे।. सस्पेंड हो गए।. बड़ा तंज से तब ये नज़्म हुई वही हुई थी के. जख्म पर जख्म खा के निकले हैं। हां मगर. मुस्कुरा के निकले हैं। सर झुकाने का. हुक्म जब आया. सर झुकाने का हुक्म जब आया.
और भी सर उठा के निकले हैं।. और भी सर उठा के निकले हैं और हर सितम का. जवाब आएगा।. देखना इंकलाब आएगा।. अच्छे दिन का किए थे जो वादा. उनका दिन भी खराब आएगा।.
हम तो निकले हैं मुस्कुराते हुए।. हम तो निकले हैं मुस्कुराते हुए. और वो तिल मिला के निकले हैं और भी सर उठा. के निकले हैं।. के सच का नारा बुलंद करते हैं। झूठ को.
नापसंद करते हैं। झूठ को नाप करते हैं। सच. का नारा बुलंद करते हैं। हाकी वक्त से. अदावत है।. वो हमें कम पसंद करते हैं। झूठ के हाकिमों. के चेहरे पर. आईना हम दिखा के निकले हैं। और भी सर उठा.
के निकले हैं। और जिस गंगा जमुनी तहजीब की. बात आप कर रहे थे उसके नाम चार मिसरे. जरूरी हैं। आपका पॉडकास्ट बहुत बड़े. पैमाने पर लोगों तक देखा जाता है।. असल इमरान यही है। मैं अक्सर ये बात कहता. हूं कि मैं इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जब. पढ़ने के लिए आया तो बिल्कुल सादा कागज. था। सेंटर लेफ्ट राइट विंग क्या है? कुछ.
नहीं पता था। वहां आके संगम के किनारे. जहां गंगा और यमुना जैसी दो पवित्र नदियां. मिलती हैं और अदृश्य सरस्वती सरस्वती. उपजती हैं। वहां बढ़े हैं। वहां कितनी. कविताएं लिखी हैं। जब उसी जगह हम नारा. सुनते हैं के कुंभ में जो है वो मुसलमानों. की एंट्री नहीं होगी। दुकान नहीं लगा. सकते। तो कभी-कभी लगता है वो समाज टूट रहा. है। वो संस्कृति जो प्रयाग की इलाहाबाद की. संस्कृति है उसे जो तोड़ने की कोशिश है।.
तो उस दौरान मैंने एक शेर कहा था के चाक. है जिगर फिर भी. आए हैं रफू कर के. जाएंगे हकीकत. से. तुमको रूबरू करके. प्यार की बड़ी इससे. और मिसाल क्या होगी।.
हम नमाज पढ़ते हैं।. गंगा में वजू करके. हम नमाज पढ़ते हैं।. गंगा में वजू करके. और शुभांकर भाई आपसे यह कह के जाते हैं के. इंकलाब का नारा होगा।.
इंकलाब का नारा. होगा।. इंकलाब. का नारा होगा।. पहला नाम हमारा होगा।. पहला नाम हमारा. होगा।. और धरती के आंसू. निकलेंगे।.
धरती के आंसू निकलेंगे।. धरती के आंसू. निकलेंगे. और समंदर. खारा होगा. और समंदर खारा. होगा और मल्लाहों से रंजिश थी तो.
मल्लाहों से रंजिश थी तो मल्लाहों. से रंजिश थी तो. किसने पार उतारा होगा. किसने पार उतारा. होगा इंकलाब का नारा होगा. पहला नाम हमारा.
होगा।. क्या बात है खूबसूरत। मेरे मेरे को बहुत. सारी चीजें मेरे को लगा काफी मिस कर। आपके. फेवरेट शायर कौन है? किसी एक पे नहीं टिक इंडिया में जो आपको. बहुत पसंद. इंडिया में मेराज फैजाबादी बहुत पसंद है।. राहत साहब बहुत पसंद है। राहत इंदोरी. साहब। मुझे हबीब जालिब बहुत पसंद है।. पड़ोसी मुल्क के हैं। बागी थे। हर सरकार. से लड़ते रहे। चलो एक राहत साहब का एक. इनका सुना दो कुछ भी. राहत साहब के बहुत सारे शेर हैं। राहत.
साहब का एक शेर बहुत प्रासंगिक है इसलिए. सुना. कि राह में खतरे भी हैं लेकिन ठहरता कौन. है? मौत कल आ थोड़ा अंदाज लाओ ना राहसा वाला. वो लाया नहीं जा सकता। उसकी नकल भी नहीं. करनी चाहिए कि राह में खतरे भी हैं लेकिन. ठहरता कौन है? मौत कल आती है। आज आ जाए. डरता कौन है? और तेरी लश्कर के मुकाबिल. मैं अकेला हूं। मगर फैसला मैदान में होगा. कि मरता कौन है। और हबीब जालिब साहब का.
के दो शेर सुनाता हूं। फिर आप कहेंगे कि. प्रासंगिक है के सर मिंबर वो ख्वाबों के. महल तामीर करते हैं। सर मिंबर वो ख्वाबों. के महल तामीर करते हैं। इलाज गम नहीं. करते। फकत तकरीर करते हैं। इलाज गम नहीं.
करते। फकत तकरीर. करते हैं। हमारी. शायरी में दिल धड़कता है जमाने का। जो हम. महसूस. करते हैं वही तहरीर. करते हैं। जो हम महसूस.
करते हैं वही तहरीर करते हैं।. और मिराज साहब का जाते-जाते उनके बहुत. सारे शेर हैं जो मुझे बहुत पसंद हैं कि. इसी थके हुए दस्ते तलब से मांगते हैं। इसी. थके हुए दस्ते तलब से मांगते हैं। जो. मांगते नहीं रब से वो सबसे मांगते हैं। वो. भीख मांगता है हाकिमों के लहजे में। हम.
अपने बच्चों का हक भी अदब से मांगते हैं।. ये मोहब्बत लिखने का मन नहीं हुआ? हुआ कुछ एक कम से कम एक तो बनता है। वैसे. भी आप लोग प्यार की दुकान हो। मोहब्बत की. दुकान हो।. मुझे लगता है जख्म ना ही कुरे दे।. संकोच क्यों? इतना मोहब्बत में ऐसा क्या. कटाप है कि. कोई संकोच नहीं है। वो मैं तो नॉर्मल एक. शेर ही सुनने मैंने कहा ऐसा कौन सा जख्म. है जो आप निकल के थट से निकल के आ जाएगा.
कि रात को परेशान हो जाओगे।. नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं है भाई।. ऐसा कोई जख्म भी नहीं है। बस यह है कि. होता है ना कि अब आप एक अलग दिशा में बढ़. रहे हैं तो मोहब्बत. दो बस एक मोहब्बत सुनो फिर एक मेरे एक ज़हन. में मेरे. पहले ज़हन वाला बता दो मोहब्बत हल्ला के. सुना रहे।. किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है।. हां वो तो बहुत राज साहब का ही शेर है वो।. अरे. अरे आहा। ये सब. टोनल क्वालिटी क्या गजब है. ये सब धुआं है कोई आसमान थोड़ी है.
हमारे मुंह से जो निकले वही सदाकत है. हमारे मुंह में तुम्हारी जुबान थोड़ी है. सभी का खून है शामिल यहां की मिट्टी में. किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है वो. जिस ठसक के साथ राज साहब बहुत जल्दी चले. गए और मैं मतलब मुझे मलाल रहा कि मैं उनके. साथ कम बैठ सका मतलब उनके साथ मुझे और. बैठना चाहिए था मशा में आया तो वो थोड़ा. मेरे आने के बाद मशा शायर थोड़े. अस्त-व्यस्त रहे। उस अस्त-व्यस्त होने में. उनके साथ कम बैठ पाया। मुझे मलाल रहा। बड़े.
आदमी थे। उनका ही एक शेर है कि चांद तारे. बुझ गए। सूरज सवाली हो गया। एक तेरे जाने. से सारा शहर खाली हो गया। तो खाली हो गया।. इस वक्त उनकी आवाज की जरूरत महसूस होती. है। मतलब मुशायरों में हमारे बहुत मधुर. रिश्ते कभी नहीं रहे। लेकिन मैं यहां बैठ. के एतराफ करता हूं कि राहत साहब की कमी. महसूस होती है और उन्हें होना चाहिए था।. मैंने कहा बड़े लोग थे।. सच में मैं.
देखिए आप मुशायरों में या किसी भी फील्ड. में आप पॉपुलर हो जाएं। आप ज्यादा पैसे. लेने लगे। आप ज्यादा व्यूज लाने लगे। आपके. लिए ज्यादा तालियों का पहाड़ खड़ा होने. लगे। आप पे ज्यादा फूल बरसने लगे। इसका यह. मतलब नहीं कि आप बड़े हो गए। बड़े वो लोग. हैं जो जी रहे हैं शायरी को।. हम परफॉर्म कर रहे हैं। हम परफॉर्मर बड़े. हैं। वो शायर बड़े थे।. मुझसे मुरारी बापू ने एक लाइन कही थी कि.
ये अलग बात है कि वो खामोश खड़े रहते हैं।. ये राहत साहब का ही शेर है।. मगर जो बड़े हैं. ये अलग बात कि खामोश खड़े रहते हैं। फिर. भी जो लोग बड़े हैं वो बड़े रहते हैं। ऐसे. दरवेशों से मिलता है हमारा शजरा। जिनके. जूतों में कई ताज पड़े रहते हैं। तो राज. साहब ने बहुत कुछ कहा और उन पर बहुत बात. होने की जरूरत है। उनको भी बहुत विवादित. करने की कोशिश की गई। लेकिन वो बड़ी मजबूत. आवाज थे और मैं उनको बतौर शायर बहुत पसंद. करता हूं और.
उर्दू शायरी में हिंदी कविता में भी कई इस. तरह के नाम है जिनको पसंद किया जाए। उन पे. बात की जाए। शायरी रूह की आवाज है। उसे. सुना।. नई जनरेशन में कोई नहीं पसंद आपको? नई जनरेशन में. जैसे कुमार विश्वास जी करते हैं, मनोज. बंदुशर जी करते हैं।. वो करते क्या हैं? अरे महाराज ऐसे मत कहिए।. नहीं नहीं मतलब वो आप कौन सी कौन से. संदर्भ में. हिंदी के प्रख्यात कवि हैं।. नहीं नहीं वो तो मैं जान रहा हूं। कुमार. जी हमारे बड़े हैं। आप राम कथा का जिक्र. कर रहे हैं या कविता का जिक्र कर रहे हैं।.
कविता का भी जिक्र कर रहा हूं मैं।. कविता. कॉलेजों में बड़ी कविता चलती होंगी।. अच्छे परफॉर्मर हैं वो।. मनोज जी गीतकार हैं शायद। गीतकार और शायर. में बहुत फर्क होता है।. शेर शायरी भी करते हैं। उनका उन्होंने. पहला लिखा तेरी गलियां जो था वो लिखा ही. था।. गीत है. जिसको बाद में करेंगे बाद में कन्वर्ट कर. दिया।. मतलब वो बेसिकली वो गीतकार हैं। शायर होना. अलग बात है।. ठीक है। मोहब्बत का. तो उतरता है वो।. ठीक है। मोहब्बत की आखिरी हमारी रह गई फिर. हम समापन कर देंगे। अंत तो मोहब्बत से. होना चाहिए ना। हैप्पी एंडिंग।.
नहीं नहीं।. आपके ब्याह के दिन आपकी जो फोटो आएगी तो. उसमें लगा के रील चला देंगे। उस दिन हम. मैंने गीत लिखा था वो सुना।. किसी को सोच के चलाइएगा कि शादी फोटो के. दिन लगाना है हमको। यह मेरी आंखों का. प्रस्ताव. ठुकरा के तुम शुद्ध हिंदी का गीत है। मेरी. आंखों का प्रस्ताव ठुकरा के तुम मुझसे यूं. ना मिलो अजनबी की तरह।.
अपने होठों से मुझको लगा लो अगर बज उठूंगा. मैं फिर बांसुरी की तरह मेरी आंखों का. प्रस्ताव ठुकरा के तुम मुझसे यूं ना मिलो. अजनबी की तरह धूप से रूप तेरा बचाऊंगा.
में सर पे रख लो मुझे ओढ़नी की तरह मेरी. आंखों का प्रस्ताव ठुकरा के तुम. बशीर साहब का एक शेर है के परखना मत परखने. में कोई अपना नहीं रहता. किसी भी आईने में देर तक चेहरा नहीं रहता. मोहब्बत एक खुशबू है हमेशा साथ रहती है. कोई इंसान तन्हाई में भी तन्हा नहीं रहता.
तो यह बड़ा बड़ा खूबसूरत एहसास है। इसके. साथ जिए वरना ये जो समाज है ये जो दौर है. आपको पागल कर देगा। इसलिए मोहब्बत के साथ. जिए। नफरत के साथ मत जिए।. कोई नहीं आपके जो पुराने वाले जख्म है. उनको लेके हम ये कह देते हैं समापन पे।. आपकी तरफ से मेरे हिस्से की मोहब्बत बचा. के रखना जाना। हम किसी भी उम्र में मिल. सकते हैं।. इसी उम्र में मिल जाइए जिससे मिलना है. वरना देर हो जाएगी।. अरे हमसे बड़े आप पहले अपना ब्याह करो. यार।. आई गेस लगभग एक ही उम्र के हैं। अच्छा लगा.
शुभंकर भाई बहुत मजा आया आपसे बात करके।. कितने घंटे हुए भाई? 2 घंटे 40 मिनट।. यानी आपका सबसे लंबा इंटरव्यू हो गया।. हो गया।. घर भी जाना है।. लवली टॉकिंग टू इमरान और बेस्ट विशेस।. थैंक यू।. आप जो भी कर रहे हैं। आई एम श्योर कि आपके. दर्शकों को आनंद आएगा।. थैंक यू सो मच फॉर बीइंग अनफिल्टर्ड। थैंक. यू ब्रदर।.
