Unplugged ft. HariOm Tiwari | Baba Bageshwar | Hinduism | Sanatan | Premanand Maharaj | Spirituality
आप बाबा बागेश्वर पर विश्वास रखते हैं. उनके यहां वो लाखों लाख लोग जा रहे हैं ये. क्या कर वो डर से जा रहे हैं ये कैसे आप. कह सकते हैं ये डर से जा रहे हैं कैसे कह. सकते हैं उनके तो चाहने वाले कहते हैं. हिंदुत्व को बढ़ाया जा रहा है आज पहले एक. लाख लोग आते थे आज चार आते हैं अब वो कहीं. ऐसी जहां जाते हैं जहां लोग इकट्ठा नहीं. वहां 10 लाख इकट्ठा हो रहे हिंदुत्व किसी. की बपौती नहीं है आपके हिसाब से जितना मैं. समझ पा रहा हूं बाबा बागेश्वर ने लोगों. में डर पैदा करके भीड़ बढ़ा ली जी बाबा. बागेश्वर धर्म का धंधा कर रहे हैं उसका. वही नहीं कर रहे हैं सब कर रहे हैं सनातनी. होने का मतलब मतलब क्या होता है कौन है.
सनातनी सनातनी वो है जो विवेकपूर्ण जीवन. जी रहा है वो कोई भी धर्म का हो कोई भी. धर्म का हो मुसलमान भी सनातनी हो सकता है. क्यों नहीं हो सकता है आपने कहा कर्म ही. पूजा है मंदिर जाने का फिर लॉजिक क्या है. क्योंकि हमारे यहां कहते हैं कड़कड़ में. भगवान है हर इंसान के अंदर भगवान है पेड़. पौधों में भगवान है प्रेमानंद महाराज जी. हैं बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर. बड़े वायरल हो गए विराट कोहली उनके यहां. गए उसके बाद बड़ी संख्या में लोग जाने लगे. लेकिन बीते चार पांच सालों में नई पीढ़ी. में ज्यादा वायरल हो ये बाबा लोग आपकी उसी. का फायदा उठा रहे हैं आरोप बाबाओं पर भी.
लगता है और वह आरोप यह होता है कि जो आदमी. कहता है कि दुनिया के लोभ लालच से दूर रहो. उतना ही पैसा छाप है व फलाना बाबा देखो. कितनी महंग गाड़ी चल रहा है कई लोगों ने. कहा कि आजकल टाइम सबसे अच्छा प्रोफेशन जो. है वो बाबा बनना हो गया हम धर्म से डरते. हैं हम सनातन से डरते हैं और आज कुछ लोगों. ने यह आपके डर को ऑर्गेनाइज्ड व्यापार. इसीलिए बना दिया है क्यों क्योंकि आपका. विचार अशुद्ध हो गया है आपकी क्या राय है. महिला कथावाचक सही है जी सही है कई सारे. मंदिर ऐसे हैं जहां पीरियड्स में महिलाओं.
को जाने की इजाजत नहीं होती है या मना. करते हैं पूजा पाठ में मना कर देते हैं तो. क्या वहां भी इजाजत होनी चाहिए आपकी नजर. में पूजा पाठ की सही उम्र क्या है धर्म की. आवश्यकता क्या है युवा पीढ़ी को क्यों कहा. जा रहा है कि आप धार्मिक बनिए अधर्म क्या. है यह समझना है क्या अधर्म अपने को जानना. ही सबसे बड़ा धर्म है पूजा पाठ नहीं करता. तो भी क्या ईश्वर की मेहरबानी मुझ पर उतनी. ही होगी यस स्लिटी और रिलीजन रिलीजन अलग. चीज है स्पिरिचुअलिटी अलग है आज यूथ. रिलीजियस होता जा रहा है जो उसके लिए खतरा.
जहां पर खून खराबा है वहां धर्म कभी हो ही. नहीं. सकता रामचंद्र कह गए सिया से ऐसा कलयुग. आएगा जब युवाओं में धर्म के नाम पर रास्था. छोड़कर केवल तड़क भड़क और दिखावा रह जाएगा. यही कहा जाता है आजकल के दौर में युवाओं. को लेकर कि युवा पीढ़ी जो है वो धार्मिक. दिखने की ज्यादा कोशिश करती है धार्मिक. रहने की जगह पर और आज लिए हम चर्चा करने.
वाले एक ऐसे व्यक्ति से जिन्होंने हमारी. तरह बीटेक किया लेकिन उसके बाद अब वह धर्म. कर्म के कार पर जुड़ गए हैं और कोशिश कर. रहे हैं कि दिखावे की जगह वाकई में लोगों. को धर्म से जोड़ा जाए नाम है हरिओम तिवारी. जी अयोध्या के रहने वाले हैं आपका. बहुत-बहुत स्वागत है धन्यवाद हमने शुरुआत. जो सर की कि धर्म के नाम पर धार्मिक रहने. की जगह खाली दिखावा रह जाएगा आप मानते हैं. इस बात को कि आज की पीढ़ी जो है सोशल. मीडिया की पीढ़ी वहां पर खाली इंस्ट रील. धर्म रह गया है आओ चलो चलते हैं केदारनाथ.
लेकिन मौज मस्ती के लिए चलते हैं अयोध्या. चलते हैं मौज काट के आते हैं वृंदावन जाते. हैं तिलक लगाते हैं रील बनाते हैं लौट आते. हैं उसका देखिए मेन कारण यह है अज्ञानता. जैसे किसी भी चीज का यदि आपको नॉलेज नहीं. रहती तब क्या होता है आप उस चीज को समझ. नहीं पाते सपोज यदि आपको यहां से कहीं. जाना है आपने कहा केदारनाथ जाना है तो. केदारनाथ जाना है तो आपको पूरे रास्ते का. यदि ज्ञान रहेगा तो आप बहुत सुगमता से. वहां पर पहुंच जाएंगे लेकिन यदि आपको. रास्ते का ज्ञान नहीं रहेगा तो आप पूछते.
पूछाते जाएंगे तो पूछते अब ग की मैं बात. नहीं कर रहा हूं पूछने में क्या होता है. कि कोई सही बताता है कोई अपने हिसाब से. रास्ता बता देता है आज जो आप युवाओं की जो. सबसे बड़ी समस्या क्या है कि जो हमको धर्म. ग्रंथ मिले हैं वो चाहे रामायण हो चाहे. गीता जी हो या जितने भी बुक्स हैं या. जितने भी हमारे आज गुरु जी लोग थे या. जितने भी हमारे इनफ्लुएंसर थे जितने भी. हमारे लोग हैं जिन्होंने अनेक अनेक. माध्यमों से जो भी संग्रहित किया है खा हम.
उसको नहीं पढ़ते क्या करते हैं हम उनको. सुनना चाहते हैं जो अपने हिसाब से क्योंकि. हर आदमी आजकल धर्म को अपने हिसाब से. मैनिपुलेट कर देता है वह कहता है कि यह हम. कह रहे हैं उसकी अपनी खुद की मस्ती है खुद. की अपनी परिभाषा है ऐसा नहीं हो सकता जो. गीता जी ने कहा है जो रामायण ने कहा है. उससे ना प्राप्त करके जब हम किसी के. द्वारा बताए बताने से इन्फ्लुएंस हो जाते. हैं तब हम भटक जाते हैं जी तो हम शुरुआत. ये करते हैं कि धर्म की आवश्यकता क्या है.
धर्म क्योंकि ये सवाल मैं इसलिए कर रहा. हूं क्योंकि कई बार युवा पीढ़ी मन में आता. है कि सब ढकोसला. है जो नास्तिक है जीवन तो उसका भी चल रहा. है वो भी मजे से जी रहा है वो भी मजे से. खा रहा है तो फिर युवा पीढ़ी को क्यों कहा. जा रहा है कि आप धार्मिक बनिए क्या. आवश्यकता है धार्मिक हो सबसे पहले तो धर्म. क्या है सबसे पहले अधर्म क्या है ये. जानिए दो बात है इसमें पहली बात यह है कि. अधर्म क्या है यह समझना है अ अधर्म यह है.
कि आप आप अपना जीवन यदि व्यवस्थित नहीं जी. रहे हैं यदि आपको अपने जीवन में क्लेश है. यदि आपको अपने जीवन में कंफ्यूजन है यदि. आप अपने जीवन को कंक्लूजन. किसी को मार देना काट देना वह है अधर्म वह. धर्म की परिभाषा है परंतु यह भी एक इस. टाइप का अधर्म है क्यों क्योंकि अपने. प्रति ईमानदार ना होना सबसे बड़ा अधर्म है. यदि हम अपनी लाइफ को सुव्यवस्थित नहीं कर.
पा रहे हम अपने अपने से खुद के प्रति लाइफ. को सुव्यवस्थित किस तरह से आप कहना चाहते. ये इसी पर मैं आ रहा हूं पहले धर्म की. आवश्यकता क्या है धर्म क्या है मैं यह. बताना चाह रहा हूं धर्म क्या है इसको पहले. अधर्म को जानना है अधर्म क्या है जो यदि. हम अपने अपने को ना जानना ही सबसे बड़ा. अधर्म है और धर्म क्या है अपने को जानना. ही सबसे बड़ा धर्म है और धर्म की आवश्यकता. क्यों है अपने को जाने यदि हम अपने को. जानेंगे नहीं तो हम अपने को मानेंगे नहीं.
यदि हम अपने को मानेंगे नहीं तो हम अपने. जीवन के प्रति ईमानदार नहीं होंगे मैं. किसी पूजा पाठ तिलक माला की बात धर्म की. इसलिए यहां नहीं कर रहा हूं क्योंकि युवा. जो आपने कहा युवा को जब भी आप धर्म की बात. करो तो वो सिर्फ ये मानता है कि धर्म मतलब. पूजा पाठ हां ठीक है दो चीज होती है एक. प्रतीति होती है एक प्रीति होती है जैसे. मैं आपको यदि जाना मैंने आपसे आप आपसे यदि. मेरा संपर्क हुआ आपसे मैं मिला फिर क्या. होगा आपसे हमारी प्रीति बढ़ेगी.
उसे कहते हैं प्रतीति से प्रीति जानने से. लेकर के समझना इसलिए यदि यह सबसे बड़ा. धर्म है स्वयं को जानना भगवान ने कहा है. धर्म क्या है तो परहित सरस धर्म नहीं भाई. अब परहित कब करेंगे जब आप अपना हित करेंगे. क्योंकि जब आप आप आप स्ट्रांग रहेंगे तभी. तो आप किसी की हेल्प कर पाएंगे इसी प्रकार. आज जो युवा यह तड़क भड़क धर्म जो दिखाना. चाहता है रील को उन स्थानों पर जाकर के. पहले अपने को जाने फिर अपने को जब जानेगा.
तो उस स्थान की जो ऊर्जा है उससे अपने को. आच्छादित करेगा उस स्थान से अपने को. जोड़ेगा और जब वह अपने को जोड़ लेगा तब. जाकर के वह दूसरे को ट्रांसफर कर पाएगा. जैसे आपके यदि अकाउंट में पैसा नहीं है तो. आप यदि आपसे कोई मदद मांगेगा तो क्या आप. दे पाएंगे आपको मदद करने के लिए सबसे पहले. अपने अकाउंट में पैसा चाहिए तोय आप कह रहे. हैं अपने आप को जानो कैसे अपने आप को. व्यक्ति जान सकता है यही यही अपने आप को.
जानने का सबसे बड़ा यदि साधन है तरीका है. तो उसका नाम है अध्यात्म उसका नाम है धर्म. धर्म वह नहीं है जो आपको दिखाया जा रहा है. देखिए धर्म की अपनी-अपनी व्यवस्थाएं होती. है अलग-अलग युग में हमारे सनातन धर्म की. हम यदि बात करें एक समय कभी धर्म सिर्फ. यदि हम ग्रंथ की बात कर ले थोड़ा सा मैं. ग्रंथ में इसमें ले चलूंगा कि थोड़ा सा. ग्रंथ के साथ-साथ सामाजिक परिदृश्य में. आपको इसका नॉलेज हो तो यदि हम धर्म की बात. करते हैं तो वाल्मीकि रामायण में धर्म की.
अलग-अलग व्याख्या है आप पहले धर्म था कि. जो पहले धर्म शर्फ ब्राह्मणों के लिए था. फिर आया फिर उसमें ब्राह्मण क्षत्रिय फिर. उसमें आया ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और फिर. अब चारों वर्ण को जानने को धर्म का सबको. अधिकार है अब धर्म को जानना अभिप्राय. स्वयं को जानना धर्म सिर्फ पूजा पाठ तक. सीमित नहीं है धर्म क्या है यदि आप अपने. जीवन को व्यवस्थित जीते हैं सबसे बड़ा. धर्म यही है व्यवस्थित मतलब समय से खाते. जी समय से उठ समय से खाना बहुत जानना भी.
यदि आप बहुत चीज आज आज की समस्या क्या है. धर्म को लेकर के अलग-अलग इतना लोग हम. जानना चाहते हैं कि धर्म क्या है धर्म. क्या है अरे भाई स्वयं को जानना सबसे बड़ा. धर्म स्वयं को जानना क्या अभिप्राय एक. साधारण जीवन जियो एक अच्छे से जीवन जियो. अपने माता-पिता अपने परिवार अपने समाज के. लोगों के साथ जी कोई आदमी अगर पूजा पाठ. नहीं करता है भगवान को जल नहीं चढ़ाता है. लेकिन टाइम छूटता है सीधा साधा आदमी है. खाया पिया नौकरी किया तो वो भी धार्मिक है. बहुत वो क्यों धार्मिक नहीं भगवान ने.
क्यों फिर कर्म की प्रधानता की है यदि वो. धार्मिक यदि भगवान इसको धर्म ना कहते तो. कर्म की. प्रधानता आशीर्वाद होगा अगर मान लीजिए मैं. हूं मैं सवेरे उठा समय से उठा सूर्योदय के. पहले पूजा नहाया धोया अपना काम सलीके से. कर रहा हूं शाम को घर आया परिवार साथ खाया. पिया सो गया और मैं पूजा पाठ नहीं करता तो. भी क्या ईश्वर की मेहरबानी मुझ पर उतनी ही. होगी इसीलिए तो गीता जी में एक योग कर्म. को योग कहा गया है यदि आप साधारण कर्म. करते हैं तो उसको कर्म कहते हैं परंतु उस.
कर्म को यदि आप दूसरे के हित के करते. दूसरे का हित अभिप्राय समाज के लिए आप. अपने लिए दूसरे का हित तभी करेंगे मैं. बार-बार इस कह रहा हूं कि यदि आप अपना हित. भी सुव्यवस्थित कर लेते हैं अपना घर भी. सुव्यवस्थित कर लेते हैं तो वो भी आपका. कर्म नहीं हो जाता उसके एक शब्द लग जाता. है योग योग क्या है समग्र को जानना ही. सबसे बड़ा योग है आज हम ना अपने को जानते. हैं जब अपने को जानेंगे तब समग्र को जानने. का प्रयास करेंगे वो सबसे बड़ा योग कहलाया. है इसीलिए भगवान ने इस क्रिया को जो भी.
व्यवस्थित क्रिया है उसको भगवान ने कहा. कर्म योग हमारे राम जी ने ऐसा जीवन इसीलिए. जिया भगवान भी क्या ऐसा जीवन ही जीते थे. परिवार के साथ रहे और भाइयों के साथ प्रीत. की समाज के साथ रहे यह क्या है यह कर्म. किया उन्होंने और ब कर्म करना कैसे है यह. अध्यात्म सिखाता है यह धर्म सिखाता है. कर्म कर्म के भी अनेक प्रकार है आप कर्म. को भी अपने हिसाब से परिभाषित कर देते हैं. एक ही काम को आदमी कहता है मैं ऐसे करूंगा. ये मेरा कर्म है मैं ऐसा करूंगा मेरी. मर्जी ऐसा नहीं है एक एक पाथ मिलता है ये.
जो गीता जी हैं एक पाथ देती है रामायण जी. हैं ये एक पाथ देती हैं राम जी ने एक जीवन. जी कर के पाथ दिया है य जो हमसे श्रेष्ठ. है स्वामी विवेकानंद जी ने क्या किया एक. पाथ दिया हमको कि हां हम ऐसा जीवन जी सकते. हैं क्या स्वामी जी कर्म नहीं करते या. जितने भी हैं सब लोग कर्म करते हैं क कर्म. हमारी आवश्यकता भी है कर्म हमारी व्यवस्था. भी है कर्म के बिना एक क्षण भी आदमी नहीं. रह सकता गीता जी का न्याय ये है कि कर्म. ही हमारा पूजा है कर्म ही हमारा अधिकार है. परंतु यह कर्म कर्म तक ही ना रह जाए उसको.
योग में परिवर्तित करना है और कर्म जब योग. में परिवर्तित कब हो जाएगा जब आप अपना हित. छोड़ कर के दूसरे के समाज के हित के लिए. यदि आप चिंतन करेंगे उसके बारे में कुछ. अध्ययन करेंगे और वह चिंतन अध्ययन जो आप. कह रहे हैं ना कि तड़क भड़क म्यूजिक इसके. दो फाय इसके दो नुकसान है पहला यदि पहले. तो यदि एक ये ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का एक. रिसर्च है कि एक हॉल तैयार किया गयास. उसमें दो तरीके के वो पत्थर रखे गए एक में.
बड़े पॉप म्यूजिक बचाया गया और उन पत्थरों. को आप देखा गया तो वो अलग बिछड़ गए थे. दूसरे में संकीर्तन किया गया भजन किया गया. तो वह पत्थर एक दूसरे से जुड़ गए थे तो. अध्यात्म क्या करता है क्योंकि हर आदमी की. व्यक्ति की अपनी एक ऊर्जा है हर आदमी अपनी. ऊर्जा लेकर के आपकी अपनी कुछ ऊर्जा है. हमारी अपनी कुछ ऊर्जा है आपकी अपनी कुछ. ऊर्जा है आपकी अपनी कुछ ऊर्जा है उसका. प्रतीत कब होता है कैसे पता चलता है जैसे. आप आपके पास कोई बैठ जाए तो आप आपके पास. बैठने मात्र से आपके अंदर से वो जो उसके.
अंदर से जो ऊर्जा निकलेगी उससे आपको फील. होने लगेगा कि नहीं ये आदमी यार इसके साथ. बैठा जाए थोड़ी देर नहीं इस क नहीं अब एक. आदमी आज चला जाए यहां से थोड़ा जल्दी बस. जल्दी करके वो क्या है हर व्यक्ति अपनी एक. ऊर्जा लेकर के चलता है यदि उस ऊर्जा को. पॉजिटिव जिसे हम पॉजिटिव ऊर्जा यह सब कहते. हैं विज्ञान की भाषा में आज की भाषा में. जो भी कह ले उस ऊर्जा को यदि हम. आध्यात्मिक ऊर्जा में परिवर्तित कर देंगे. और वो आध्यात्मिक ऊर्जा तभी परिवर्तित हो. पाएगी जब हम व्यवस्थित रूप से अपना जीवन. जिएंगे एक दिन के नहीं क्योंकि आजकल आडंबर.
बन गया है जो आपने कहा ना दिखावा मतलब. मंदिरों में जाकर के सेल्फी मंदिर की अपनी. ऊर्जा है मंदिर क्यों अब मंदिर इसीलिए तो. भाई अभी यहां पर मैं आऊंगा इस पर आप जो कह. रहे हैं मंदिर से वहां से शुरुआत करूंगा. लेकिन मैं थोड़ा और पीछे जाता हूं आपने. सनातन का जिक्र किया और मैं कई बार लड़कों. से मिलता हूं और वो अपनी सोशल मीडिया. प्रोफाइल पर लिखते हैं कि हम सनातनी है आप. कुछ पूछिए तो कहते हैं हम सनातनी है और जब. मैं पलट कर सवाल पूछता हूं सनातन का मतलब.
क्या होता है तो व अब्बा डब्बा चब्बा करने. लगते उनको नहीं समझ में आता कि इसके आगे. क्या कहा जाए तो शुरुआत हम शुरुआत से करते. हैं सनातनी होने का मतलब क्या होता है. सनातन वही है जो. अक्षुण सनातन की एक परिभाषा है जो अक्षुण. है व कभी अपरिवर्तित नहीं है और क्या. परिभाषा है सनातन की जो सब सत्य है और. सत्य क्या है कि हम एक बीइंग ह्यूमन है. सत्य यह है कि हम में हम जानवर नहीं है हम. में भगवान ने विवेक दिया है एक जानवर में. और एक.
विवेकवानी ही अंतर है कि उसके पास यह नहीं. होता कौन है सनातनी सनातनी वो है जो विवेक. पूर्ण जीवन जी रहा है वो कोई भी धर्म का. हो कोई भी धर्म का मुसलमान भी सनातन नहीं. हो सकता क्यों नहीं हो सकता है जो यदि. विवेक पूर्ण जीवन जी रहा है वो सनातनी है. और सब सनातनी थे वो हिंदू मुस्लिम पहले. सनातन ही है उसी से यह लोग अब कोई भी धर्म. हो कोई भी अब आजकल चाहे बुद्धिज्म ले. लीजिए कुछ भी ले लीजिए उन्होंने क्या वो. एक व्यक्ति आए उन्होंने एक अपनी आज जो ये. खतरा बन रहा है य यूनिटी जो आज जो खतरा है.
ये कुछ समय बाद आज बुद्ध निकल गए कल को. कोई आएगा अब कोई कथावाचक हो गए आजकल. कथावाचक की अपनी एक धर्म हो गई वो अपने. हिसाब से अपना धर्म बनाने लगते हैं कि आप. ऐसा जीवन जियो कुछ दिन बाद वही जो लोग जो. है पूजा करने लगेंगे उनकी ऐसा नहीं हो. सकता हरक सनातन यह एक परंपरा है यह सत्य. सनातन है सनातन अभिप्राय जो अपरिवर्तित है. सनातन अभिप्राय जो प्राणी मात्र के लिए. कल्याण करे सनातन अभिप्राय जो कभी भी किसी. के अहित का चिंतन ना करें उसको कहते हैं.
सनातन वह सनातन है और वही सत्य है और वही. सत्य अक्षुण रहना चाहिए आज आज अपने हिसाब. से जो सनातन की परिभाषा हो रही है ये सबसे. बड़ा खतरा है मतलब जो टीका लगा के बैठा है. रोज मंदिर जा रहा है जरूरी नहीं वही. सनातनी हो वो वो उसकी प्रतीति है वो उसकी. इच्छा है हर आदमी की अपनी इच्छा. स्वतंत्रता है टीका लगाना प्रतीति है जैसे. आप आप यदि कोई आज आजकल युवा को क्यों पूजा. पाठ टीका क्यों इसीलिए कि जब आप कहीं पर. भी जाते हैं है जैसे आप गान रात में पॉप.
म्यूजिक सुनने जाते हैं बार में जाते हैं. तो आपका क्या होता है आपका जो मस्तिष्क है. आपका उसी का चिंतन करता है क्योंकि बैक ऑफ. माइंड में साइंस ये कहता है कि आप जो दिन. भर रहते हैं जैसा आप सोचते हैं जैसा आपका. आभा मंडल रहता है वही आपके बैक ऑफ माइंड. में जाता है वही आपका विचार बनता है और. वही धीरे-धीरे आपके व्यवहार में उतरने. लगता है इसीलिए हमारे ऋषियों ने हमारे. मुनियों ने हमारे ग्रंथों ने हमको यह कहा. कि यदि आप अच्छे विचार से प्रेरित होंगे. अच्छे विचार से प्रेरित का क्या एक उपाय. बताया है ये जरूरी मेन डेट नहीं है बट ये.
मनुष्य मनुष्य का है उपाय बताया कि भाई आप. यदि टीका लगाते हैं यदि आप पूजा करते हैं. यदि आप थोड़ी देर 10 मिनट भगवान का ध्यान. करते हैं तो क्या होता है आपकी जो बैक ऑफ. माइंड में आपको चिंतन है फिर आपको भगवान. के बारे में जानने की एक लालसा जगती है. भगवान के बारे में भगवान क्या है तो भगवान. यही है कि भाई भगवान तो सबके हैं भगवान को. ठीक है मूर्ति मूर्ति पूजन क्या है मूर्ति. ध्यान क्या है ये क्या है ये आपको जैसे आप. राम जी के उपासक हैं आप कृष्ण किसके भी आप. अल्लाह किसी के भी तो वो क्या कर आप उनके.
बारे में जानने का एक प्रयास करते ये. इसीलिए पूजा के लिए इसीलिए व्रत का एक दिन. व्रत रखो तो उससे क्या होता है वो तो ठीक. है डिटॉक्स टॉक्स होता है व्रत क्या है जो. आपको उतनी देर व्रत का असली जो परिभाषा है. वह है कि आपको जित जिस क्षण आप प्रभु के. समीप होते हैं उस क्षण आपका व्रत होता है. व्रत किसी भोजन पदार्थों का त्याग करने से. नहीं होता यह हमारा भ्रम है जिस क्षण हम. प्रभु का चिंतन करते हैं वो क्षण हमारे.
लिए वृत का क्षण हो प्रभु का अभिप्राय. अच्छी चीजों का चिंतन करते हैं प्रभु का. अभिप्राय प्रभु की परिभाषा क्या है सर्वे. भवंति सुखना प्रभु की परि प्रभु की. परिभाषा क्या है रामचरित मानस में कहा है. राम क्या है जो आनंद सिंधु सुख राशि जो. आनंद में के सुख के राशि है खजाना है. जिनके चिंतन मात्र से आपके जीवन में. हैप्पीनेस आ जाए जिनके चिंतन मात्र से. आपके जीवन में आनंद आ जाए उसको कहते हैं. राम उनका नाम है राम इसीलिए व्रत वो है.
पूजा वो है वो क्या करता है वो आपको उनके. समीप लि जाता है वो उनको उनके आप उनके. बारे में जानने की लालसा बढ़ाता है अब. आपने बताया अब एक सवाल मेरे मन में आता है. आपकी बात सुनकर कि आपने कहा कर्म ही पूजा. है तो फिर मैं मंदिर क्यों जाऊ मंदिर जाने. का फिर लॉजिक क्या है क्योंकि हमारे यहां. कहते हैं कड़कड़ में भगवान है हर इंसान के. अंदर भगवान है पेड़ पौधों में भगवान है तो. फिर मंदिर जाने का लॉजिक क्या बनता है क्. कई बार सवाल उठता है लोगों में कहीं बैठे.
हम ध्यान कर सकते हैं फिर अलग से मंदिर. क्यों जाए मैं आपसे एक प्रश्न करता हूं. इसी से हवा तो सब जगह है तो पंखे का क्या. काम है थोड़ा तेज चलाता है हवा. और हवा को तेज व वो पंखा क्या पंखा की कोई. खुद की हवा है क्या पंखा की कोई खुद की. हवा तो नहीं है वैसे ही जो निर्गुण. परमात्मा तो हर जगह है परंतु जब हम सगुण. परमात्मा रूपी पंखा अपने हृदय में लगाते. हैं तो वो जो निर्गुण परमात्मा रूपी ऊर्जा. है वह सब जगह से एकत्रित करके आपको अपने.
सगुण रूपी परमात्मा के समीप पहुंचा देता. है यह एक हिंदू मैथोलॉजी की एक परिभाषा है. इसीलिए क्यों क्योंकि मंदिर की अपनी एक. ऊर्जा होती है वहां पर सारे लोग जाते हैं. वहां पर जो लोग जाता है उसका चिंतन शुद्ध. रहता है तो वहां पर ऊर्जा जैसे कोई चीज. कहीं पर बह रही हो तो नहीं समुद्र में. आदमी जाता है ना जाकर के खजाना बह रहा है. जाओ वहां ले लो जैसे आप नदी में जाते हैं. वहां पानी का प्रवाह है वहां पर नदी से. जाकर के एक लोटा जल ले लो उसी प्रकार. वहां पर मंदिरों में पूरी पॉजिटिव ऊर्जा.
रहती है वहां पर जाने मात्र से आपकी ऊर्जा. जो है जो नेगेटिव ऊर्जा की तरफ यदि जीव. जाता है मंदिर मैं किसी भी बात प्रेयर. रूम्स की बात कर रहा हूं मैं हिंदू. मुस्लिम सिख ईसाई सब की बात कर रहा हूं तो. वहां पर क्या होता है अच्छे लोगों की. ऊर्जा रहती है वो ऊर्जा आपकी ऊर्जा के साथ. जुड़ जाती है तो आपके अंदर एक जो बंडल्स. ऑफ एनर्जी जिसे आप कहते हैं पूरी ऊर्जा का. प्रवाह हो जाता है जिससे आपके विचार और. आपका व्यवहार शुद्ध हो जाता है सिंपल सी. बात है इसीलिए मंद क्वेश्चन फिर और आता है. कि चलिए मंदिर चले गए अब मंदिर में भजन.
कीर्तन होता है तो भजन कीर्तन की आवश्यकता. क्या है क्योंकि मन ध्यान तो मन में भी. होता है मान लीजिए मंदिर पहुंच गए ईश्वर. सामने बैठे हैं अब मन में ध्यान कर ली. ईश्वर मेरे सामने है आप वातावरण की बात कर. रहे थे कि वो ऐसी जगह जहां पर पॉजिटिव. वाइब्स आती है तो फिर मंदिरों में भजन. कीर्तन का काम क्या देखिए अब क्या होता है. आप विचार कर लिए व्यवहार का अभिप्राय क्या. होता है व्यवहार का अभिप्राय होता है आपकी. बोली आपकी वाणी आपकी वाणी कब शुद्ध होगी.
उसका एक पूरा एक जैसे आप कोई चीज आप. कंप्यूटर कोर्स कोई करता है सोज या कोई. संगीत सीखता है तो वो पहले दिन गलत संगीत. सीखता है धीरे-धीरे क्या होता है वह. धीरे-धीरे गाना शुरू कर देता है फिर अपना. सुर साधना शुरू कर देता है धीरे-धीरे धीरे. धीरे फिर वह सा लगा प सा पे आता है उसी. प्रकार हम क्या हमारा व्यवहार हमारी वाणी. निश्चित करती है यदि हम वाणी से अच्छा भजन. करते हैं कीर्तन करते हैं धीरे-धीरे क्या. होता है हमा वाणी प एक हमारी वाणी का एक.
प्रैक्टिस हो जाता है कि हम हमारी वाणी से. अच्छे शब्दों का उच्चारण होने लगता है. इसीलिए यह क्या है यह प्रैक्टिस है जब आप. कीर्तन करते हैं भजन करते हैं तो आपकी. वाणी शुद्ध और पवित्र होने लगती है और. आपके व्यवहारिक जीवन में भी आप कोई भी. अपशब्द बोलने से बच जाते हैं इसीलिए मुख. से भजन और कीर्तन करने का यह हमारे ऋषियों. ने हमको आपको यह एक परंपरा दिया है विचार. शुद्ध हो गया वाणी शुद्ध हो गई फिर जैसे. वाणी शुद्ध हो जाएगी आपकी समाज में.
स्वीकार्यता बढ़ जाएगी और आपका जीवन सुंदर. हो जाएगा ठीक अब जितने भीय बाबा लोग कि आप. जिक्र कर रहे हैं अलग-अलग धार्मिक भजनों. को सुनने का तो भजन कीर्तन हम बाबाओं के. कार्यक्रम ज सुनते हैं वहा. पर लेकिन एक आरोप बाबाओं पर भी लगता है और. वह आरोप यह होता है कि जो आदमी कहता है कि. दुनिया के लोभ लालच से दूर रहो उतना ही. पैसा छाप है व आपसे कहते हैं कि जो अपना. कमाए वो लाकर यहां दे. जाओ और उनका खजाना बढ़ता जा रहा है कई. सारे लोग सोशल मीडिया पर ये लिखते हैं कई.
बार देखते हैं कि फलाना बाबा देखो कितनी. महंगी गाड़ी चल रहा है कई लोगों ने कहा. आजकल टाइम सब प्रोफेशन जो है वो बाबा बनना. हो गया कितना पढ़ो लिखो सब अपनी जहा पर है. बाबा बन गए तो जीवन अच्छा रहता है जी तो. ये. उसकी मैं यदि आप उसका सबसे पहला तो. क्वेश्चन आपने शुरू किया जहां से सुरा. शुरू हुई हम लोगों का डिस्कशन सबसे पहले. क्या होता है कि यदि हम हमारा विचार शुद्ध. नहीं रहता तो हमारी आस्था कहीं पर भी जाकर.
के आज हमारी आस्था और श्रद्धा के साथ जो. खेल हो रहा है वह हम उसका उसका मेन कारण. यह है कि हम यहां से पंग हो गए हमने चिंतन. करना बंद कर दिया है हम धर्म नहीं हम. भगवान से प्रेम नहीं करते हम भगवान से. डरते हैं हम धर्म से डरते हैं हम सनातन से. डरते हैं और आज कुछ लोगों ने यह आपके डर. को ऑर्गेनाइज्ड व्यापार इसीलिए बना दिया. है क्यों क्योंकि आपका विचार शुद्ध हो गया. है विचार अशुद्ध हो गया तो आपके अंदर जो.
भाव प्रकट हो रहा है वह अशुद्ध प्रकट हो. रहा है आपका जो क्रिया कलाप है वो अशुद्ध. हो गई है क्योंकि जिस भाव से आप जो. व्यवहार करते हैं जिस भाव से आप यदि अच्छे. भाव से व्यापार शुरू करेंगे सही रास्ते पर. व्यापार जाएगा यदि आपका इंटेंशन जिसे कहते. हैं यदि आपका इंटेंशन रंग है तो आप कभी भी. सफल य तो बाबा की बात हो गई मैं एक सवाल. पूछ रहा हूं आम दर्शक के तौर पर मैं उसी. पे जा रहा हूं उसी पे आ रहा हूं एक बार. सवाल फिर से मैं फ्रेम कर ताकि दर्शक समझ. पाए. एक आम व्यक्ति यह कैसे सुनिश्चित करें कि.
जो फलाना बाबा है वह सही है उसका इंटेंशन. सही है यह यह धार्मिक गुरु जो है इसके पास. जाकर मुझे ज्ञान मिलेगा यह मैं क्यों पूछ. रहा हूं सीध कोई व्यासपीठ पर बैठकर अली. मौला कह रहा है कोई व्यासपीठ पर बैठकर. चमत्कार दिखा रहा है किसी के यहां बैठने. पर अगल बगल फिल्मी कार्यक्रम जैसे होता है. पूरा ऑर्गेनाइज कार्यक्रम चल रहा है लोग. डांस कर रहे हैं माहौल बन रहा है एक बड़ा. सिस्टमिक ऑर्गेनाइज तरीके से काम चल रहा. है उस कैसे पहचाने कि यहां जाकर हमारे.
जीवन में कुछ हम लाभ ले सकते हैं सिर्फ. मौज मस्ती के अलावा मैं वही पे आ रहा था. कि जब हम जब हम यहां पर वैचारिक रूप से. पंग हो जाते हैं तो हमको कोई भी अपने. हिसाब से मैनिपुलेट कर लेता है जिसकी शरण. में जाने के जिसके पास बैठ जाने से आपके. जीवन में अच्छे विचारों का प्रकटीकरण हो. जाए जिसके शरण में बैठने से जिसकी कथा. सुनने से आपको अपने ईष्ट के चरणों में. प्रीति बढ़ जाए आपकी अपनी बुराइयां आपको. दिखने लगे उसी के शरण में जाकर के अपने को.
समर्पित करना चाहिए आपको ब आपको बेहतर तब. पता लगेगा जब आप बुराई के बारे में जानते. होंगे आज के जमाने में जो वहां बैठा है. वहां भी लाखों की भीड़ है उनको लग रहा है. कि यही अच्छा है यही बेहतर है इसीलिए तो. मैं कह रहा हूं आप बुराई तभी तो जानोगे जब. आप आपको अपने बारे में कुछ जानकारी होगी. तब ना तो आप जानोगे गलत सही क्या है भाई. एग्जामिनर जब चेक करता है क्वेश्चन तो ये. जानता है ना कि ये क्वेश्चन का उत्तर क्या. है तब वो डिसाइड करता है ये उत्तर गलत है. कि सही आज हम अपने बारे में नहीं नहीं. जानते हम अपनी आस्था हम भगवान से इतना.
डरते हैं कि हम भगवान से बात ही नहीं करना. चाहते हम अपने को जनाना ही नहीं चाहते हम. भगवान से प्रीती नहीं भगवान से आप बात. कीजिए भगवान आपसे आपको उत्तर देंगे इसीलिए. क्यों क्योंकि हम ये बाबा लोग आपकी उसी का. फायदा उठा रहे हैं क्या फायदा उठा र आपको. वैचारिक रूप से पंग कर दिया डरा करके कि. यह हो जाएगा वो हो जाएगा ऐसा नहीं करोगे. तो क्योंकि फिर आप उसी हिसाब से चढ़ावा. चढ़ाओ ग चाहे जो हो सबकी मैं किसी व्यक्ति. की विशेष की बात नहीं कर रहा हूं हर आदमी. को डर नहीं रहेगा तो आप क्यों भाई आज क्या.
है आपके डर का वो फायदा उठा रहे हैं वो एक. डर क्रिएट कर रहे हैं समाज में कि नहीं. यार भगवान की ठेका हमने ले रखा है अरे. भगवान का किसी ने ठेका नहीं लिया भाई. रामायण जी कोई भी पढ़ सकता है गीता जी कोई. भी पढ़ सकता है इसीलिए तो गीता जी पढ़ो. रामायण पढ़ो उसको जानो उसको समझो आपको. किसी के पास जाने की आवश्यकता नहीं है. भगवान ने कहा है कि कृष्णम वंदे जगत गुरुम. वो जगत के गुरु हैं और जगत गुरु ने क्या. दिया जब अर्जुन पूरा विषाद योग में था. अर्जुन को कुछ समझ में नहीं आ रहा था तो. गीता का प्रवाह कर दिया उन्होंने और गीता. घर-घर में है गीता प्रस जैसा महान जो. प्रेस है उसको धन्यवाद देने योग्य है कि.
आज उसकी कृपा से घर-घर राम है घर-घर कृष्ण. है घर-घर अच्छे संदेश है आप पढ़ो तो आपको. किसने कहा वहां जाकर के करोड़ों रुपए दो. अब ठीक है अच्छी बात है वो कराओ उससे. ऊर्जा. बनती क्रिएट होती है वो एक अलग विषय उस. परे मैं नहीं जाना चाहता विवाद का विषय है. परंतु जो है आज आपकी अज्ञानता का एक डर बन. रहा है एक व्यापार बन रहा है जिसका फायदा. ये लोग उठा रहे हैं क्या बाबाओ में भी. सोशल मीडिया कंपटीशन होता है पूरा हो रहा. है आजकल जो सब जो जिसका जिसके सबसे ज्यादा. फॉलोअर्स है वही सबसे बड़ा बाबा जिसके. सबसे ज्यादा भक्त है वही सबसे बड़ा बाबा.
उसका रीजन क्या है जो जितना डरा ले गया यह. एक व्यापार है जिसने जो जितना डरा ले गया. आज का डर का व्यापार है इ हमारे पास नहीं. आओगे कल को खत्म हो जाओगे आप आप हमारे पास. आ गए यदि हमारा शिष्य होकर के दूसरे के. पास चला गया तो वह शिष्य यदि बड़े बाबा के. पास से छोटे बाबा के पास चला गया तो बड़े. बाबा उसको निकाल देते हैं कि तुम वहां. क्यों चले गए ये क्या है डर का व्यापार है. आजकल जो जितना हा जिसके पास जितना पैसा है. वही सबसे बड़ा बाबा सोशल मीडिया प जो.
जितना हाईलाइट हो रहा है कुछ भी बोल कर के. ब प्रेमानंद महाराज जैसे लोग भी जो डराते. नहीं लेकिन उके भीड़ जा रही है वो वो मैं. क्या बोला जिसकी बात सुनने से जिसके संग. में जाने से जिसका सत्संग सुनने से आपके. जीवन में परिवर्तन आ जाए वही श्रेष्ठ है. प्रेमानंद जी महाराज आज क्यों लोग क्यों. पसंद कर रहे हैं क्यों क्योंकि वो जिस भाव. से कहते क्योंकि बात जिस भाव से आती है आप. जिस भाव से कोई बात कहते हैं वो उतना ही. असर करती है दूसरे के ऊपर यदि आप स्वयं.
नाम जप नहीं कर रहे हैं आप स्वयं. आध्यात्मिक जीवन नहीं जी रहे हैं यदि आप. अपना जीवन अच्छे से नहीं जी रहे हैं तो. आपकी बात और आपका व्यवहार दूसरे पर बहुत. प्रभावित नहीं कर रहा है और आज यही हो रहा. है कि इतनी घर-घर कथाएं इतना आध्यात्मिक. सेंटर इतना खुलने के बाद आज क्यों लोग. विकार हो रहे हैं क्यों क्योंकि वो स्वयं. ऐसा जीवन नहीं जी रहे हैं इसीलिए उनकी बात. का बहुत प्रभाव नहीं हो रहा प्रेमानंद जी. महाराज की आपने बात किया तो प्रेमानंद जी. महाराज की बात का क्यों प्रभाव पड़ा है. इतना क्योंकि वो स्वयं ऐसा जीवन जी रहे.
हैं वो दिमाग से नहीं वो दिल से निकल फर. यही मैं कहता हूं जैसे प्रेमानंद महाराज. जी हैं बीते कुछ सालों में सोशल मीडिया पर. बड़े वायरल हो गए विराट कोहली उनके यहां. गए उसके बाद बड़ी संख्या में लोग जाने लगे. वो पहले ही बाबा थे पहले भी शायद ऐसी. बातें करते होंगे अच्छी बातें करते होंगे. लेकिन बीते चार पांच सालों में नई पीढ़ी. में ज्यादा वायरल हो गए अब ट्रेंड बन गया. कि जो भी लड़का वृंदावन जाता है वो कोशिश. करता है कि बाबा के मथा टेक के चलाए ये बट. फिर अगेन ये भी सोशल मीडिया से आया ये. देखिए विज्ञान का युग है इसमें कोई बुराई. भी नहीं है विज्ञान के युग में आज सोशल.
मीडिया का युग है यदि इससे इसके यदि सब. लोग तो नहीं जा सकते करोड़ों में यदि 10. पाच लोग जा पाते होंगे वहां परंतु करोड़ों. लोग उनके पर प्रवचन को सुन कर के उनके. अभिप्राय अच्छे प्रवचनों को सुन कर के यदि. परिवर्तित हो रहे हैं तो इसमें कोई इसमें. कोई बुराई नहीं है यह तो वंदनीय है परंतु. जो लोग व्यापार कर रहे हैं जो लोग आपको. डरा रहे हैं जो लोग आपको लालच दे रहे हैं. मैं किसी के व्यक्ति के नहीं जिसकी फीस ही. एक करोड़ 50 लाख 27 लाख 25 लाख ₹ लाख रप.
जो फीस लेगा वो क्या बताएगा कि ये बताएगा. कि सब छोड़ दो सब छोड़ना ये तो कोई किसी. भी तरीके से सलूशन नहीं मैंने कई सारे. धार्मिक गुरुओं का कार्यक्रम पटकास किया. तो उनसे जब मैंने पूछा तो उन्होंने कहा कि. जब वो कथा करते तो उनके साथ एक टीम होती. है हां उस टीम का अपना एक खर्च होता है. उसमें लोगों का रोज मर रहा होता उन्होंने. कहा कि हमारा जीवन वैसा है पहले राजा. महाराजा खर्च उठाते थे तब जरूरत नहीं. पड़ती थी अब राजा महाराजा खर्च उठाते नहीं. है पहले हमारे परिवारों का खर्च जो था वो. जो राजा होता था वो रिटायरमेंट के बाद भी. उठाया करता था तो पहले व्यवस्था अलग थी.
मैं होता क्या है इसमें यह ठीक है उनका. अपना तर्क है मैं उस परे विरोध भी नहीं. करता उनका ठीक है सब खर्चा लगता ही है हम. लोगों की भी कथा ऑर्गेनाइज होती है खर्चे. होते ही हैं परंतु वो खर्चे भी सीमित होते. हैं पहला भाग दूसरा भाग आप सोचिए जो. व्यक्ति आपको 50 लाख देकर के कथा करा रहा. है क्या वह आपकी बातों से प्रभावित होगा. उसके जीवन में परिवर्तन आएगा और वो कितने. लोगों को बताता है आज ये क्या हो रहा हैय. कथा व्यवसाय क्यों बन गई ये एक ऑर्गेनाइज.
व्यापार क्यों बन गया क्यों क्योंकि माउथ. पब्लिसिटी हो रही है जो व्यक्ति 50 लाख. देता कहता है यार क्या है इतना पैसा लिया. और क्या बोल रहे हैं कि सब छोड़ कर के. मेरे पास आओ मेरे आश्रम में आओ मेरी जगह. ही आओ यह क्या अब आश्रम देखिए आश्रम क्या. है आश्रम वो है जहां पर आपको आश्रय मिल. जाए जहां पर आप जो तप रहे हैं जहां पर जो. संसार के झंझा वोटों से जब आप जब चारों. तरफ से लोग परेशान होते हैं तो बुजुर्ग. लोग क्या करते थे ो एक दिन के लिए तीर्थ. चले गए एक दिन के लिए मंदिर हमारे सनातन. में आश्रम चले गए आश्रम अभिप्राय जिससे.
आपको आश्रय मिल जाए क्या जैसा आश्रम गौतम. नारी श्राप बस जैसे राम जी ने कैसा आश्रय. दे दिया गौतम जी को गौतम नारी को अहिल्या. जी को वैसा आश्रय मिल जाए जो आपके जन्म. जन्म के पापों का नष्ट कर दे उसे कहते हैं. आश्रम आश्रम ये नहीं फाइव स्टार होटल. आश्रम नहीं आज आज हर चीज फाइव स्टार तरीके. से चाहिए ये हर चीज कथा भी तो एक क्रूज प. कथा होनी चाहिए कथा भी ये पूरा प एक पूरी. पीआर टीम चल रही है कथा यहां प व्यवस्था. ठीक है व्यवस्था होनी चाहिए परंतु इतना.
लग्जरियस मत कर दीजिए पैसा अपना कर रहा है. नहीं मैं वही कह रहा हूं कथा को इतनी. लग्जरियस मत कर दीजिए कि वह आपके अंदर. विकार पैदा कर दे कथा अभिप्राय एक जीवन. में व्यवहार एक ऐसा होना चाहिए जो आपके. जीवन में थोड़ा त्याग लाए हम अपने जीवन का. त्याग बढ़ाने के लिए अध्यात्म में आते हैं. हम अपने जीवन का भोग बढ़ाना है तो संसार. में जाइए संसार में हैय भोग के सारे सामान. है खूब कीजिए खूब पार्टी कीजिए एंजॉय. कीजिए मस्ती कीजिए घूमिए परंतु इसको बचा. करके रखिए क्योंकि भगवान ने कहा है जीवन. में जब सब जगह से आदमी हार जाएगा तो.
सत्संग का सहारा लेगा और आज न दुख की बात. यह है कि सत्संग को दूषित किया जा रहा है. सत्संग को टीआरपी का साधन बना लिया गया है. कि सत्संग को अलग-अलग आजकल तो यू कैन कनट. इमेजन कि क्या-क्या तरीका हो रहा है. टीआरपी बढ़ाने का अलग-अलग तरीके कोई कुछ. कर रहा है कोई कुछ रहा कोई नाच रहा है कोई. कूद रहा है कोई भविष्य बता अरे भाई भविष्य. ब्रह्मा जी नहीं बता पाए तो आप क्या. भविष्य बताओगे कोई कुछ भी बता रहा है जो. उसकी जो इच्छा है कोई कुछ क रहा चैलेंज. करर कुछ लोग नेता जी को मतलब राजनीति धर्म.
में राजनीति ठीक नहीं है आज आपकी बात. सुनकर मुझे बा बाबा बागेश्वर याद आ रहे. हैं आप बाबा बागेश्वर पर विश्वास रखते. हैं इस परे टिप्पणी करना कुछ ठीक नहीं है. परंतु इस प्रकार का डर ठीक नहीं. है आप देखिए आप एक किसी एजेंडा मत लीजिए. धर्म को एजेंडा उनके अनुयाई कहते हैं कि. बालाजी की शक्तियां उनके अंदर आए उनके. गुरुजी भी करते थे और उस इलाके में कई और. लोग भी हैं जो वही काम करते हैं जो आपके. मन में क्या चल रहा है बता देते हैं आप. मानते हैं कि ऐसी शक्तियां होती हैं तो.
फिर ब्रह्मा जी का काम ही खत्म हो जाता तो. फ्यूचर य सब कोई फ्यूचर बता देता तो फिर. आदमी प्रेजेंट में काम क्यों करेगा आप यदि. आप यदि आपका भाई आपका भाई यदि पढ़ रहा है. अच्छे से पढ़ रहा है उसको आईएएस बनना है. और यदि मैं आ कर के अभी बता दूं कि नहीं. भैया अी डॉक्टर बनेगा आईएस नहीं बनेगा अब. पता चला उसका इंटरेस्ट आईएस में है आईएस. भी छोड़ दिया और डॉक्टर में नहीं था. डॉक्टर में कहने प पड़ गया डॉक्टर भी नहीं. बना उसका फ्यूचर खत्म हो गया नहीं तो फिर. जो उनके यहां वो लाखों लाख लोग जा रहे हैं. ये क्या कर वो डर से जा रहे हैं ये कैसे. आप कह सकते हैं ये डर से जा रहे हैं कैसे.
कह सकते हैं आप ये लोग उनके प्रशंसक के. सवाल पूछेंगे कि हो सकता है वो आपको गलत. कहे भाई मैं किसी को गलत नहीं कह रहा हूं. ये जीव का स्वभाव होता है भविष्य को जानना. हर कोई ये चाहता है कि मैं कल क्या होगा. ये जान जाऊं ये ये मानव का स्वभाव है और. वो उसी के डर का फायदा हर लोग उठाते हैं. मैं वो अच्छा है उनका जो अपना है परंतु उस. डर का फायदा उस उस उस उसकी आस्था उसकी. श्रद्धा को जब चोट पहुंचती है कुछ लोग. जाते हैं लोग हॉस्पिटल्स में है कुछ लोग. एडमिट भैया जाएंगे वहां से आएंगे कुछ. करेंगे एडमिट वो हो जाएंगे नहीं होता है.
फिर कितनी आस्था कुछ वो क्या होगा वो उसकी. आस्था हिंदू धर्म से चली जाएगी उसकी आस्था. सनातन से चली जाएगी उसका वो जो सोर्स ऑफ. एनर्जी है वो वहां से कट ऑफ हो जाएगा उनके. तो चाहने वाले कहते हैं हिंदुत्व को. बढ़ाया जा रहा है आज पहले एक लाख लोग आते. थे आज चार आते हैं अब वो कहीं ऐसी जहां. जाते हैं जहां लोग इकट्ठा नहीं होते थे. वहां भी 101 लाख इकट्ठा हो रहे हैं देखिए. हिंदुत्व वोट बैंक के लिए नहीं बढ़ा है. हिंदुत्व कोई वोट बैंक ना बनाया जाए. हिंदुत्व तो ये एक विचारधारा है जिसको. स्वामी विवेकानंद जी शी के महापुरुषों ने.
भी जिया है हिंदुत्व को राम जी ने भी जिया. है और हिंदुत्व ये नहीं है हिंदुत्व किसी. की बपौती नहीं है हिंदुत्व एक विचारधारा. है वो विचारधारा क्या कहती है जो यह कहती. है वसुदेव कुटुंबकम जो ये कहती है कि सब. हमारे परिवार हैं हिंदू किसी व्यक्ति किसी. पार्टी का नहीं है या हम किसी को अब. हिंदुत्व के सहारे लेकर के हम अपना टीआरपी. बढ़ाएं ये गलत है इससे क्या होगा कोई. व्यक्ति अगर ये कह रहा है कि लोगों ने. पूजा पाठ करना छोड़ दिया आपने तिलक लगाया. है हमारे धर्म में तिलक लगाना कलावा पहनना.
लोग संकोच करने लगे थे एक बीच में दौर चल. रहा था अगर कोई व्यक्ति कह रहा है कि हम. उस तरफ बढ़वार हैं लोगों को तो उसमें क्या. बुराई है हां तो मैंने कहा ना कि वो बुराई. ठीक है वो अपना जो कर रहे हैं उसमें मुझे. कोई मैं मेरी कोई आपत्ति नहीं है उसमें. परंतु जो है जो डर बनाया जा रहा है ये डर. नहीं बना मतलब आप आपके हिसाब से जितना मैं. समझ पा रहा हूं बाबा बागेश्वर ने लोगों. में डर पैदा करके भीड़ बढ़ा ली है जी ये. नहीं करना चाहिए फर्जी वाला है अब इस चीज. पर मैं हम लोगों का कहना उचित नहीं हम लोग.
व्यासपीठ पर बैठते हैं तो अब यह है कि बट. आप एक तरफ कह रहे ना कि जब सच सामने आएगा. लोग जानेंगे उसके बाद लोग अपने आप को. पहचानेंगे तो फिर तो आपको खुलकर कहना. पड़ेगा कि सच क्या है मैं किसी किसी. व्यक्ति विशेष पर टिप्पणी नहीं कर रहा हूं. मैं इतना कहना चाह रहा हूं कि आप किसी के. भी श्रद्धा के साथ आस्था के साथ हाथ जोड़. कर के मैं विनम्र निवेदन कर रहा हूं आपके. माध्यम से उस पर मत खेलिए अन्यथा वह सनातन. और हिंदू धर्म से कुछ दिन बाद कट जाएगा. बहुत सारे लोग आए पूर्व में भी आए मैं.
किसी का नाम नहीं लूंगा एक समय काल सबका. होता है आते हैं 105 साल तक उसके बाद में. फिर जो लोग जैसी स्थिति थी पूर्व में चाहे. वो मैं मैं मुझे नहीं कहना चाहिए लेकिन और. जितने भी बाबा. जो मैं अपने मुख से नहीं कहूंगा जितने. प्रख्यात बाबा थे उ उन्होंने भी खूब अपने. हिसाब से धर्म को चलाया लेकिन बाद में. उन्हीं के अनुयाई लोग अलग चले गए उनकी. आस्था खत्म हो गई आज वो चारों तरफ भटक रहे. हैं आज वो गीता रामायण से दूर हो रहे हैं. यह मुझे लगता है क्योंकि यदि यह सब होता.
तो फिर और में जो स्वामी विवेकानंद जी ने. तो कभी नहीं लगाया इस प्रकार का हमारे और. ऋषि आदि शंकराचार्य जी ने तो कभी नहीं. लगाया रामानंदाचार्य जी महाराज जी ने तो. कभी नहीं लगाया और भी नजदीक चले आए तो. कितने भी लोग थे स्वामी करपात्री जी. महाराज धर्म सम्राट कभी नहीं लगाए और लोग. को भी तो करना चाहिए था वो क्यों नहीं किए. क्योंकि ये जीव का स्वभाव है भाई भविष्य. जानना और धीरे-धीरे क्या होगा किसी भी. शक्ति का यदि आप दुरुपयोग करेंगे तो तो वो. किसी कोई भी शक्ति आपको अपने अपने साधना.
के लिए यदि शक्ति है भी अपनी साधना के लिए. होती है ना उसको व्यापारी करण करने के लिए. तो नहीं होती है ना बेचने के लिए तो नहीं. होती बाबा बागेश्वर धर्म का धंधा कर रहे. हैं क्योंकि आप व्यवसाय रण जिसकी आप बात. कर रहे हैं उसका वही नहीं कर रहे हैं सब. कर रहे हैं बहुत सारे लोग जो आज टीआरपी का. साधन ले लिए हैं उन्होंने क्या किया जिसकी. आज सबकी कथा का प्रचार का सत्संग का सबके. आने का सबके जाने का एक पूरा ऑर्गेनाइज्ड. बिजनेस है ये जिसको हम कहे तो स्पिरिचुअल. टेररिज्म है और जो यह बहुत खतरनाक है आने.
वाले समय में आज जो युवा जो आपने जहां से. शुरुआत की कि आज युवा धर्म को दिखावा कर. रहा है उसका एक कारण यह भी है कि आज युवा. धर्म में डीप डाउन नहीं जाना चाहता आज हम. अपने को जानना नहीं चाहते और हम अपने को. इसलिए नहीं जानना चाहते कि कुछ लोग आपको. अपने को जानने देना ही नहीं चाहते कुछ लोग. चाहते ही नहीं कि आप धर्म को जानो कुछ लोग. यही चाहते हैं कि हम जितना कहे हिंदू का. अभिप्राय किसी मुसलमान को गाली दे देना है. क्या हिंदू का अभिप्राय क्या होता है किसी.
को किसी का धर्म परिवर्तित कर देना किसी. के आस्था परिवर्तित कर देना ये हिंदू कहां. लिखा है हिंदू रामचरित मानस में कहीं लिखा. हो तो. बताइए रामचरित मानस में तो भगवान ने कहा. सब नर करह परस्पर प्रीति चल सुधर्म वेद. श्रुत नीति यह है रामराज्य सबको अपने अपने. धर्म में चार वर्ण एक साथ बैठ कर के भोजन. करते थे ये राम राज्य है भैया राम राज्य. बैठे ऐसे राम राज्य में राम राज्य बैठे. त्रिलोक का जाकर के हर्षित होगा ऐसे नहीं. होगा कि आप किसी किसी को लड़ा दे कहां पर.
राम जी ने किसी को लड़ाया उनके अनुयाई. आपके पीछे पड़ने वाले हैं मैं किसी मैं. किसी का विरोध नहीं कर रहा हूं आप नहीं कह. रहे लेकिन आप इशारों इशारों में जो कह रहे. उनके अनुयाई पीछे पड़ जा मैं सत्य मैं. सत्य कह रहा हूं मैं देखिए मैं ना दक्षिणा. लेता हूं और ना मैं किस किसी के लिए हमारे. ये ये हमारी साधना है हम मैं और समाज के. लिए यदि आप लड़ते हैं तो शुरू में आपको. झेलना पड़ता होगा परंतु सत्य यही है कि. अपने को जानो और अपने को जानने का सबसे. अच्छा तरीका है आप पहले ग्रंथों का अध्ययन.
करो फिर उसका चिंतन करो फिर उसकी अनुभूति. करो आज किसी भी समाज में व चाहे हिंदू में. हो मुस्लिम में हो सिख में हो मुस्लिम्स. की मैं बात कर लूं तो पहले पढ़ो उसको आपके. जो धर्म गुरु जी ने जो आपको दिया है व. उसको पढ़ो उसको जब पढ़ोगे उसको जानोगे. उसको समझोगे तब आपको पता चलेगा सत्य क्या. है असत्य क्या है हवाहवाई भागोगे तो. एक्सीडेंट निश्चित होगा वही हो रहा है. पाठ करने की सही उम्र क्या क्योंकि एक.
वर्ग का कहना था कि बचपन जो होता है. लड़कपन के लिए होता है जवानी काम के लिए. उसके बाद वृद्ध होने के बाद आप पूजा पाठ. की तरह डेडिकेटेड होते हैं बीते कुछ सालों. में कई लोगों से मिला मैं जो कहते कि नहीं. अपने आप को समर्पित करना है तो जवानी में. समर्पित करो जब आप ताजा फल सड़ा हुआ फल. क्या करेंगे आपकी नजर में पूजा पाठ की सही. उम्र क्या है सबसे बड़ी बात है कि पूजा का. अभिप्राय यह नहीं कोई चीज छोड़ दो आज हमने. ये एक्सेप्शन मान लिया है देखिए हम भारत य.
कह ले या आज का युग कह ले इसमें गृहस्थ. जीवन सबसे सुखी जीवन है सबसे ये हमारे. प्रभु ने भी ऐसा जीवन जिया है ऐसा जी करके. हमको आपको उदाहरण दिया है ध्रुव जी की कौन. सी उम्र थी यदि हम अपने हिंदू धर्म की बात. करें अभी 5 साल की उम्र में पूजा का पूजा. का तो अंक से होना चाहिए जब आपकी मां के. अंक में यदि संतान आए तब वह हमारे हिंदू. धर्म में भय प्रकट कृपाला दीन दयाला गाय. तो व जन्म से ही उसके उसके जो संस्कार.
होंगे व अच्छे संस्कारों से उसका जन्म. होगा वह जीवन में कभी भी अपने माता-पिता. को दुख नहीं देगा जीवन में वह कभी असफल. होगा ही नहीं इसीलिए अंक से पूजा यह यह. क्या है यह भी इस प्रकार से कि पूजा का. अभिप्राय सब चीज छोड़ देना युवाओं के मन. में यह भ्रांति है भाई पूजा का अभिप्राय य. है शुद्ध जीवन जियो अच्छे से जीवन जियो. यही सबसे बड़ी पूजा है और अच्छे से पढ़ाई.
करे यूथ सबसे बड़ी पूजा है एक यूथ जो आपने. कहा यदि पढ़ेगा नहीं तो पूजा का अभिप्राय. क्या यदि एक यूथ आगे बढ़कर के युवान होकर. के कर्म नहीं करेगा अच्छा व्यापार नहीं. करेगा नौकरी नहीं करेगा तो पूजा का. अभिप्राय क्या वो एक पूजा है यदि आप. बुढ़ापे में होकर के आप तीर्थ याद समाज के. लिए कुछ उपयोगी नहीं है तो आप तो डस्ट बीन. है वो भी एक पूजा है तो पूजा को एक ये मत. डराइन पूजा तो संतान को अंग से आए पूजा. अभिप्राय जो सबका कल्याण करे जो सबके बारे. में चिंतन करे वही सबसे बड़ी पूजा है.
परहित सरस धर्म नहीं भाई इसीलिए कहा गया. गुरु की भूमिका जीवन में कितनी. महत्त्वपूर्ण. है यद्यपि. हमारे सनातन में कहे तो गुरु विन भव निधि. तरही न कोई जो रंच संकर सम होई परंतु आज. गुरु को समझना. है गुरु वह नहीं है जिस जो आपके धन से. प्रेम करे गुरु वो व है जो आपके भक्ति से.
प्रेम करे जो आपके हृदय से प्रेम करे जो. आपके जीवन को संवारने के लिए आगे बढ़े. जिसके जिसके शब्द और जिसकी जिसकी वाणी. आपको आपके जीवन के समीप ले जाए वही सबसे. बड़ा गुरु है और उस गुरु को खोजने की. आवश्यकता नहीं है गुरु को सोशल मीडिया पर. खोजने की कोई आवश्यकता नहीं है प्रभु. प्रेरणा करके एक ना एक दिन आपको आपकी. अनुभूति से उस उस के पास आपको पहुंचा. देंगे और आज के समय में बार-बार कहता हूं.
सबसे बड़ा गुरु है धर्म ग्रंथ यह जो हमको. गीता प्रश्न दिया है उससे बड़ा गुरु खोजने. की की की आप चेष्टा मत कीजिए यदि आप स्वयं. से गुरु खोजने की चेष्टा करेंगे तो आप. गड्ढे में पड़ेंगे क्योंकि समय काल की ऐसी. स्थिति चल रही है तो गुरु वो जो आपके धन. से प्रेम ना करके गुरु वो जो आपकी भक्ति. से प्रेम कर दान सिर्फ धन का ही होता है. नहीं यह एक बहुत बड़ा यह लोगों के मन में. एक परसेप्शन बन गया है कि हम दान दान सबसे.
बड़ी बात है विचारों कान सबसे बड़ी बात है. यदि आपका पड़ोसी दुखी है यदि आपकी किसी. शब्द से आपके किसी व्यवहार से उसका कष्ट. कट जाए वह सबसे बड़ा दान है दान पैसे का. ही नहीं है पैसे का है जरूर परंतु. व्यवस्था में हमारे वह एक बहुत छोटा दान. है जो अंश जो भी पैसे का दान है उसे. व्यवस्थाएं चलती है मैं यह नहीं कहता कि. दान नहीं है परंतु उसकी बहुत महत्वता नहीं. है न दान विचारों के शुभ विचारों का दान.
ही सबसे बड़ा दान है और शुभ विचारों का. दान जब हम करेंगे तो हमारे जीवन में भी. शुभ होगा और शुभम करोति कल्याणम इसीलिए. मंत्र है जब हम शुभ करेंगे तो हमारा. कल्याण होगा इसीलिए शुभ विचारों का दान ही. सबसे बड़ा दान है धर्म क्या होता. है यह जहां से मैंने शुरुआत. की धर्म क्या है या इसको और मॉडिफाई करें. स्पिरिचुअलिटी और. रिलीजन यस क्या यह आपने सही प्रश्न.
किया आज जो समस्या जो आपने इसके पहले कहा. कि रिलीजन अलग चीज है स्पिरिचुअलिटी अलग. आज यूथ रिलीजियस होता जा रहा है जो उसके. लिए खतरा है अध्यात्म किसी में जहां पर. बंटवारा है जहां पर द्वेष है जहां पर एक. दूसरे में इफरिट है वो रिलीजियस. वो धर्म नहीं है व अध्यात्म नहीं है इस.
प्रच एक अलग चीज है अध्यात्म एक अलग चीज. है धर्म आज आज की भाषा में जो आज धर्म को. लेकर के जो ये एक संशय हुआ है वह आज एक. अलग चीज है आध्यात्मिक होना है धार्मिक. होइए अच्छी बात है यह आपकी मर्जी है परंतु. धार्मिक से अधिक आध्यात्मिक होना है जब तक. हम आध्यात्मिक नहीं होंगे तब तक हम. धार्मिक नहीं हो सकते और यदि हम धार्मिक. हैं तो तब फिर खतरा है क्योंकि धार्मिक.
अभिप्राय आज के समय में देखिए जहां पर खून. खराबा है वहां धर्म कभी हो ही नहीं. सकता जहां पर यदि हम किसी की बुराई कर रहे. हैं वहां पर धर्म हो ही नहीं सकता यदि हम. किसी से द्वेष कर रहे हैं तो व धर्म है ही. ना धर्म का अभिप्राय जहां पर प्रीति हो. जहां पर हम सब सबके बारे में च सबको लेकर. के जा जहां पर एक सौहार्द हो धर्म ये नहीं. किसी जहां पर यदि किसी की हत्या कर दें. किसी को मार पीट दे किसी को कष्ट पहुंचाए. तो वो वो वो वो धर्म नहीं आज यही हो रहा.
है लोग धार्मिक होना चाह रहे हैं लोग. आध्यात्मिक होना नहीं चाह रहे आप धार्मिक. होई अच्छी बात है परंतु आध्यात्मिक होना. बहुत जरूरी है और आध्यात्म क्या करेगा. आपका विकास करेगा आपके साथ-साथ समाज का. विकास करेगा आपका विकास कब होगा जब आप. अपने को अपनी चेतना को उस छुपी हुई जो. आत्म चेतना ऊर्जा है उससे आप परिचित होंगे. क्यों भाई एक विद्यालय में एक टीचर सबको. पढ़ाता है हम. सबको बराबर शिक्षा देता है लेकिन उसमें से.
कोई आप जैसा है जो छोटे शहर गांव से निकल. कर के आज पूरे देश में नाम करता है देश. विदेश में नाम करता है कोई व आप ही का साथ. के कोई विद्यार्थी होंगे जो पढ़े होंगे वह. गांव में आज भी. होंगे वह क्या किए वह अपने को जाना आपने. अपनी ऊर्जा को पहचानने का प्रयास किया तब. आप खड़े हो गए धार्मिक हुए धर्म के चक्कर. में यदि आप पढ़ेंगे तो उसकी परिभाषा यह है. लेकिन अब मैं इसको बोलूंगा विवाद हो जाएगा. तो वो अब उससे अच्छा है आध्यात्मिक होइए.
और अपने को जानिए अपने को स्ट्रांग कीजिए. जब आप अपने को स्ट्रांग करेंगे तभी आप. समाज के लिए उपयोगी हो जाएंगे. स्पिरिचुअलिज्म आपको पॉजिटिव रखता है और. आपके जीवन को पॉजिटिव रखता है आजकल एक. बड़ा ट्रेंड चला है धार्मिक. कट्टरता हिंदुओं को जगाने की बात चली. मुसलमानों में पहले कहा था कि वह अपने. धर्म को लेकर कट्टर होते हैं हमारे धर्म. में भी अब शुरुआत हुई है कि हिंदुओं को. जगाना है जरूरत है लोग कहते हैं समय की. आवश्यकता है हिंदू धर्म वैसे बड़ा उदार. रहा है लेकिन समय की आवश्यकता है इत्तफाक. रखते हैं आप नहीं मैंने क्या कहा जहां पर.
खून खराब है वहां पर धर्म नहीं बना धर्म. की कट्टर नहीं बिना खून खराबा क्या एक. होता है शारीरिक एक होता है. मानसिक येय यही तो समझना है शरीर का खून. बहना खून नहीं है यदि आप मानसिक रूप से. किसी को प्रताड़ित कर रहे हैं तो आप सबसे. बड़े दोषी हैं और धर्म आपको धर्म एक शैल. चिकित्सा है भैया जैसे जो सर्जन होता है. वह क्या करता है जो पार्ट होता है शरीर के. जो पार्ट में यदि गंदगी आ जाती है तो उस.
पार्ट को काट देता है रोग आ जाता है तो उस. पार्ट को काट के बाईपास कर देता है कि. जिससे कि उस पार्ट की जितनी दूर की बीमारी. है वो निकल जाती है और वहां पर जो विकार. रहता है वो निकल जाता उसी प्रकार ये. अध्यात्म यह आपके मेंटल हेल्थ के लिए. जरूरी है यह आपके मेंटल आपके मानसिक हेल्थ. की सबसे बड़ी दवाई है आज आपका विचार आपको. मानसिक मजबूत कर देता है और कट्टरता आपको. मानसिक रूप से रु कर देती है आज यदि आप. कट्टर होंगे तो यहां से रुग्ण हो जाएंगे.
आपके जीवन में सिर्फ आपको क्या दिखेगा मार. काट मानसिक रूप से वही दिखेगी इनको तोड़ो. इनको जोड़ो इनको करो इनको सब में संशय की. दृष्टि से देखेंगे परंतु यदि आपके अंदर. प्रेम का प्रवाह हो जाएगा आप आध्यात्मिक. हो जाएंगे तो आपका यह जो मस्तिष्क है. इसमें आपको सब जगह प्रेम ही प्रेम दिखेगा. क्योंकि जो दिख जो चश्मा लगा रहता है उसी. को हम लोग देखते हैं और हमारे पर जो. कट्टरता का चश्मा लगा है यही हटा कर के.
आपको आध्यात्मिकता का चश्मा लगाना है. क्योंकि कट्टरता आपको एक दूसरे को तोड़ती. है धार्मिकता आपको एक दूसरे को जोड़ती है. ठीक एक सवाल मेरे मन में और आता है जैसे. हम बाकी धर्मों में देखते हैं तो वहां पर. एक परंपरा बंधी कि लोग जाते हैं मुसलमानों. में पांच वक्त की नमाज होती है सिख धर्म. में देखते हैं कि जाते हैं सेवा भाव करने. हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जहां पर आप पर. कोई दबाव नहीं है आपको मंदिर जाना है जाओ. नहीं जाना मत जाओ पूजा करना करो आपकी.
स्वक्षा पर छोड़ दिया जाता. है कई लोग मानते हैं कि हिंदू धर्म में जो. लोग नास्तिक बन रहे हैं या ईश्वर से ध्यान. हट रहा है उसकी एक बड़ी वजह है कि हमारे. यहां बचपन से नहीं कहा जाता कि आप पूजा. पाठ कीजिए आप ये मानते हैं या हमारे धर्म. की खूबसूरती यही है कि आप पर दबाव नहीं है. नहीं ये ये खूबसूरती नहीं है मैंने क्या. बोला कि बच्चे को जब बच्चा अंक में हो तब. संस्कार की आवश्यकता है आज यह हमारी. कमजोरी हो गई. उसका कारण क्या है उसका कारण भी एक है कि. युवा यह कहता है कि मैं मंदिर क्यों जाऊं.
क्यों क्योंकि उसको बचपन में बताया ही. नहीं गया आज के जो युवा जो मां-बाप है. हमारे हम लोगों की पीढ़ी में हमारे. मां-बाप हमको सुबह जल चढ़ाने के लिए. प्रेरित करते थे आज के जो यूथ मां-बाप हैं. उनको लगता है कि आवश्यकता नहीं है इसकी आज. उनको सुधारने की आवश्यकता है आज उनको. समझने की आवश्यकता है कि आप यदि. संस्कारवान होंगे तो आप जब यह क्या होता. है जब आप बच्चा बड़ा हो जाता है तो दरदर. जो भटकते हैं ना किसी के डर का व्यापार. करते हैं लोग यह नहीं भटकना पड़ेगा जब आप.
अपने बच्चे को शुरू से ही छोटे से ही. बताएंगे कि भैया ये हमारे भगवान हैं. इन्होंने ऐसा जीवन जिया ये हमारे महापुरुष. हैं इनके साथ ऐसा जीवन जिया पूजा का कुछ. देर इनके पास बैठो कुछ देर इनकी पुस्तक दो. थोड़ी देर पढ़े तो क्या होगा वो जीवन में. ऊंचाई भी प्राप्त करेगा और उसके जीवन में. कभी नेगेटिविटी नहीं आएगी आज हिंदू धर्म. में जो इतना विवाद है इतना अपवाद है उसका. कारण यह है कि बचपन से आजकल के जो मॉडर्न. फादर मदर हैं वो अपने बच्चे को संस्कार.
नहीं दे रहे हैं उनको लगता है कि यह. संस्कार अभिप्राय बहुत पीछे छोड़ देना ये. तो बहुत पीछे पुराने जमाने की बात है जो. आप कहते हैं ना तिलक आज माला ये नहीं ये. ये भैया ये गर्व से कहो कि यस आई एम. सनातनी मैं हूं आप मुस्लिम है मेरे भैया. है आप हिंदू हैं आप सिख है आप ईसाई है सब. हमारे भैया हैं परंतु मैं हिंदू हूं इसका. मुझे आई एम प्राउड है मुझे गर्व है कि मैं. सनातनी हूं इसमें गलत क्या है ये आज के. मां-बाप को समझना पड़ेगा और ये इतना ही तक. मत सीमित करो उसके डीप डाउन करो उसको.
समझाओ कि इस क्या है इससे क्या फायदा होगा. हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होगा हनुमान. चालसा पढ़ने से ये होगा जब आप घर से. हनुमान चालसा पढ़ के आपका बच्चा निकलेगा. तो उसके जीवन में किसी भी प्रकार का कष्ट. नहीं आएगा उसको कभी असफलता नहीं आएगी उसके. जीवन में सुसुक नहीं आएगी उसके जीवन में. हरदम तेज रहेगा उसका विवेक हनुमान जी के. जैसा बुद्धिमान रहेगा वो हरदम निर्णय उसका. शीघ्र निर्णय लेगा वो उसके अंदर. सकारात्मकता रहेगी यह सब बताइए यह हनुमान. चालीसा के पढ़ने के फायदे हैं ठीक है हाल.
फिलहाल में हमने कुछ पॉडकास्ट की जिसमें. हमारे यहां चित्रलेखा जी आई हमारे यहां. जया किशोरी आई फिर कई सारे और लोग का हमने. पॉडकास्ट किया उसमें कई सारे और कथावाचक. आए कई सारे कथावाचक ऐसे थे जिनको महिला. कथावाचक को लेकर सवाल उन्होंने उठाए आपकी. क्या राय है महिला कथावाचक सही है जी सही. है तो फिर सवाल क उठते हैं जी सबसे बड़ी. बात है प्रभु के आज किसी भी समाज के लिए. अब वह उसकी बाद धर्म की बात करेंगे तो फिर.
वह धर्म में तो धर्म जो लोग धर्म की बात. करते हैं हम उनसे कहेंगे कि धर्म में तो. बहुत सारी चीजें हैं उसको आप लोग नहीं. मानते यदि एक लड़की एक स्त्री जब किसी. समाज की स्त्री यदि स्ट्रांग नहीं होगी तो. वह समाज कभी भी प्रोग्रेसिव नहीं हो सकता. यह हमारे धर्म ग्रंथों में पुराने चाहे. राली लक्ष्मीबाई ले लीजिए चाहे राधा जी ले. लीजिए चाहे सीता जी ले लीजिए अनेक उपाय. हैं उसके बहुत लंबा विषय हो जाएगा इतना. सिर्फ कहना है कि शारीरिक शुद्धता का कोई. अभिप्राय नहीं होता यदि आप क्या हमारे य.
मल मूत्र की शरीर है कोई भी व्यक्ति इस. धरा पर शुद्ध नहीं है जिसने जन्म लिया है. मां के अंक से वह शुद्ध नहीं है क्योंकि. शुद्ध तो सच्चिदानंद एक है और यदि आप. शारीरिक रूप से अशुद्ध यदि बात आती है य. अशुद्ध की बात करते हैं तो मैं उनसे कहना. चाहूंगा शारीरिक शुद्धता से अधिक आवश्यकता. है मानसिक शुद्धता भगवान कहते हैं कि मन. क्रम वचन छाड़ चतुराई जो मन क्रम और वचन. तीनों से छोड़ेगा वह मेरी शरण में आएगा तो.
क्या शारीरिक शुद्धता ही सबसे बड़ा. पैरामीटर है आपका इशारा पीरियड्स की तरफ. जा रहा है जी अब मेरा फिर से भी काउंटर. क्वेश्चन आता है कि फिर कई सारे मंदिर. उनका उनका कई सारे मंदिर ऐसे हैं जहां. पीरियड्स में महिलाओं को जाने की इजाजत. नहीं होती है या मना करते हैं पूजा पाठ. में मना कर देते हैं तो क्या वहां भी. इजाजत होनी चाहिए मुझे लगता है होनी चाहिए. यदि आपका बहुत क सारे मंदिरों ने बाहर लिख. रखा है य ये यह क्या करता है यह दूरी बढ़ा. रहा है आप आप एक तरफ कहते हैं कि सनातन.
सबको स्वीकार करता है एक तरफ आप करते हैं. जो हमारी महिलाएं हैं स्त्रियां हैं वो जो. तेज संपन्न है उनको आप दूर करना चाहते हैं. क्या सीता जी के साथ राम सीता राम जी और. सीता जी क्या विलग रहे हैं क्या वह तो एक. साथ ही है गिरा अरथ जल बीज सम वह तो एक ही. अंग है हरदम साथ में रहे हैं तो यह. अभिप्राय यह है कि ये ये ये जो द्वेष की. भावना है ये धीरे-धीरे ये एक रूप ले लेगी. और और इसका कोई ना कोई फायदा उठाएगा तो यह. प्रकट मत होने दीजिए आपको लगता है कि आप.
यदि पूजा नहीं कर सकते तो आप दूर से. प्रणाम कीजिए कम से कम उनको आने जाने का. अधिकार देना ही चाहिए क्योंकि शारीरिक रूप. से सब अशुद्ध है कोई ये नहीं कह सकता कि. मैं शुद्ध हूं और शारीरिक अशुद्ध ही सबसे. बड़ी बात नहीं है जब तक आप मानसिक शुद्ध. नहीं होंगे तब तक परमात्मा आपको. आप की तरफ देखना तो छोड़ो परमात्मा को आप. समझ भी नहीं पाएंगे नहीं तो फिर जो ये. पुरानी परंपराएं बनाई गई है क्योंकि आप ये. बात कह रहे हैं कि पीरियड्स में महिलाओं. को मंदिर जाने इजाजत होनी चाहिए तो फिर वो.
कहेंगे कि आप धर्म से छेड़छाड़ कर रहे हैं. मैं धर्म से छेड़छाड़ नहीं कह रहा हूं मैं. कह रहा हूं कि यदि आप मैं मानता हूं कि. नहीं जानी चाहिए परंतु जो है यदि स्पर्श. नहीं कर सकते विग्रह का तो दूर से प्रणाम. करने की स्वीकार्यता उनको देनी चाहिए जो. आपने कहा मंदिर प्रवेश नहीं होना चाहिए तो. मंदिर प्रवेश होना चाहिए यदि आप विग्रह. नहीं स्पर्श कर सकते तो दूर से प्रणाम. करने की स्वीकार्यता देनी ही चाहिए ठीक है. अ आखरी सवाल है क्योंकि आप अयोध्या से आते. हैं जी राजा राम की भूमि से प्रभु श्री. राम कौन. है राम एक शब्द में बताएं कि पर बड़ी.
परिभाषा बताएं जैसी आपकी इच्छा परिभाषा दे. सकते हैं आप राम का जो सबसे बड़ा परिचय है. राम जी वोह है जो विपरीत परिस्थितियों में. भी कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से बलग नहीं. परिस्थितियां कितनी भी विपरीत रही हो सुन. जननी सोई सुत बड़भागी जो पित मातु चरण. अनुरागी जो राम का अनुयाई है वो अपने. माता-पिता की सेवा यदि नहीं करेगा तो राम. के पास नहीं पहुंच पाएगा जो कृष्ण का.
अनुयाई है जो अपने माता-पिता की सेवा नहीं. करेगा वो कृष्ण के पास नहीं पहुंच पाएगा. जो अपने भाई से प्रीति नहीं करेगा वो राम. को नहीं समझ पाएगा जो अपने परिवार से समाज. से प्रीति नहीं करेगा वो राम को नहीं समझ. पाएगा जिसके जीवन में द्वेष है वो कभी राम. को नहीं समझ सकता राम वो है जो सबको लेकर. के चले राम वो है जो सबका चिंतन करें राम. वो है जो सब में सकारात्मकता का प्रभाव. करें राम वह है जो स्वयं में अड़क हो जो. स्वयं में सबके बारे में सबका हित करें.
वही राम है और यद्यपि राम तो अनंत है अनंत. है राम राम को बताना व्याख्या करना यह. आसान नहीं है परंतु आज के समय में आज के. परिवेश में युवाओं को राम से यही शिक्षा. लेनी चाहिए कि हमें कठिन से कठिन कर्म. करना है परंतु ध्यान में रखते हुए कि. हमारा परिवार हमारा समाज हमारा जीवन भी. हमारे साथ है आज युवा आगे बढ़ता है लेकि. लेकिन आज वो ऐसी गलती इसलिए कर देता है. क्योंकि वो पीछे पलट के नहीं देखता आज.
युवा आगे बढ़े खूब आगे बढ़े खूब एंजॉय करे. मस्ती करें सब करें परंतु उसको याद रखनी. चाहिए कि हमारी भी कुछ परंपराएं हैं हमें. उन परंपराओं का भी निर्वाहन करना है हमें. गुरु श्रेष्ठ माता पिता भाई पिता सबका. सम्मान करना है राम जी की सबसे बड़ी. खूबसूरती यही थी कि राम जी कभी किसी से. द्वेष नहीं किए सबसे प्रीति करे सब सब नर. सबसे सब मम प्रिय सब वही उपज जाई सबको. अपना परिवार माने जो सबको अपना परिवार.
मानेगा वही राम का सबसे बड़ा अनुयाई है. क्योंकि राम जी सबको अपना मानते थे यही. राम की सबसे बड़ी खूबसूरती अब एक आखरी. सवाल आपसे हम पूछ लेते हैं कि आप बीटेक कर. कर रहे थे कर चुके बीटेक आपसे लोग नहीं. पूछते कि आप बीटेक करने के बाद कथा की. दुनिया में क्यों आए क्योंकि आप पर भी. आरोप लग सकता है कि हो सकता है आप भी लाभ. के लिए आए हो नहीं मैं कह रहा हूं मैं. व्यापारी हूं व्यापारी था व्यापारी हूं. मैं आज भी पेंट शर्ट पहनता हूं मैं यही. लोगों को बता ना चाहता हूं कि आपको किसी. चीज को छोड़ने की आवश्यकता नहीं है आप सब.
चीज करते रहो आप धार्मिक हो परंतु आप. भगवान के समीप जाओ हनुमान चालसा सुंदरकांड. पढ़ोगे आप पढ़ो तिलक लगाओ आप राम नाम जप. अवश्य करो ये सब करते हुए करो मैं यही. लोगों को बताना चाहता हूं कि धार्मिक होने. के लिए कुछ छोड़ने की आवश्यकता नहीं है आप. खूब व्यापार पढ़ो फोर्ड का जो मालिक है. अभी प्रेरित हुए ऑलरेडी बहुत सारी स्टोरीज. हैं वो बताएंगे तो टाइम लग जाएगा कितना. अभिप्राय आप यदि आप 24 घंटे में आप 10. मिनट 5 मिनट सिर्फ अपने को दीजिए 10 मिनट.
5 मिनट आप हनुमान चालसा सुंदरकांड ये हम. हिंदू की बात कर रहे हैं आप इबादत करते. हैं इबादत कीजिए जो भी आपको अच्छा लगे वो. आप कीजिए परंतु सब करते हुए कीजिए क्योंकि. आप कुछ यदि आपका है क्या जो आप छोड़ेंगे. इस यहां पर सृष्टि में आपका है क्या आप. कुछ छोड़ नहीं सकते क्योंकि आप जहां. छोड़ेंगे आज क्या होता है घर छोड़ते हैं. उससे बड़ा. आश्रम गाड़ी छोड़ते हैं महंगी गाड़ी तो आप. कुछ छोड़ नहीं सकते भैया. जो सब आपका है इन सबके बीच में यदि आपको. सुंदर जीवन जीना है तो आप 15 से 20 मिनट.
1015 मिनट अवश्य ध्यान कीजिए नाम जप अवश्य. कीजिए इस कलयुग का एक ही साधन है नाम जप. इसीलिए कुछ प्रभाव नहीं पड़ता आप खूब. सेंटर जाते हैं सा दिन 10 दिन का कोर्स. करके लाखों रुपए लोग लेते हैं हमारे पास. यूथ आता है कि मैं 10 दिन गया लाखों रुपए. दिया मैंने लेकिन कुछ दो महीने बाद. धीरे-धीरे क्या होता है कि धीरे-धीरे फिर. वो वो वैसे फिर जीवन हो जाता है तो मैंने. कहा आपको मिला क्या वहां तो कह सा दिन का. कोर्स था यह व्यापार है आपको यदि जब तक.
प्रतिदिन आप नाम जप नहीं करेंगे अपने ईष्ट. को नहीं याद करेंगे आप अपने ईष्ट का चिंतन. नहीं करेंगे जब तक आप विचारों में नहीं. रहेंगे तब तक आपका कुछ होने वाला नहीं है. यह सीजनल फल के तरीके से आप जाएंगे पाएंगे. छूटेगा जाएंगे पाएंगे छूटेगा यही हो रहा. है क्योंकि व चाहते हैं कि आप जितनी बार. आओगे उतनी बार दोगे यह नहीं कोई कहेगा कि. आप जाओ प्रतिदिन नाम जप करो थोड़ी देर 10. मिनट भगवान का नाम लो और सबसे दूर होकर के.
जिस प्रकार जैसे एक आपके घर में दाई होगी. नौकरानी होगी नौकरानी यदि आपके घर में काम. करती है तो आपके जो बच्चे होते हैं उनसे. बड़ा प्यार करती है खूब खिलाती है उसको. लेकिन जिस दिन आप नौकरानी को निकाल देते. हो उस दिन क्या करता है वह बच्चे को. छोड़ती है और अपना बरिया बिस्तर बैक करके. चल देती है उसी प्रकार ये जीवन है संसार. है आप जितने दिन रहो यह मान के चलो कि ये. जिम्मेदारी मिली इसकी से खूब अच्छे से हम. इसका निर्वाहन करेंगे और उसके बाद में. प्रभु ऊपर अंत है तो प्रभु के पास जाएंगे.
लेकिन उसके लिए कम से कम पाच से 10 मिनट. नाम जप की अवश्य हर य हर सनातनी को जो भी. उसको कृष्ण भगवान गीता जो उसको समझ में आए. हनुमान जी माता जी जो उसको समझ में आए. उनका नाम अवश्य घर के किसी कोने में बैठ. कर के यदि आप करेंगे तो आपके जीवन में कभी. असफलता नहीं आएगी और आप सदैव सफल ही रहे. हमारी कोशिश थी कि धर्म और धर्म बीच में. जो महीन सी लकीर होती है उसको आपके जरिए. उकेरा जाए बहुत-बहुत शुक्रिया हरि ओम.
तिवारी जी आपका अयोध्या से यहां आने के. लिए और दर्शकों तो अपनी बात रखने के लिए. कोई बात आप कहना चाहते हैं आते मैं सिर्फ. इतना ही कहना चाहता हूं कि प्रे धर्म से. डरिए नहीं भगवान से डरिए नहीं भगवान से. प्रीत कीजिए भगवान आपसे बहुत प्रेम करेंगे. धीरे-धीरे आपको इसकी अनुभूति होने लगेगी. आप जितना भगवान से प्रेम करेंगे आप. देखेंगे भगवान आपको उससे अधिक देंगे. क्योंकि भगवान को आप कुछ दे नहीं सकते. संसार को से संसार आपसे उम्मीद रखेगा.
भगवान आपसे आपकी सिर्फ प्रीति रखते हैं आप. देखिएगा सफल भी होंगे और आप किसी व्यापार. के चक्कर में मत पड़िए खूब भजन कीजिए यही. यही मेरा यही सफलता का राज भी है जय श्री. राम जय श्री रा.
