Unplugged ft. Gitanjali Babbar | Shubhankar Mishra
हर शहर में रेड लाइट एरिया होते हैं।. क्या होते हैं रेड लाइट एरिया? रेड लाइट. एरियाज इलाके होते हैं जो कि आइडेंटिफाइड. होते हैं कि वहां पे कोठे हैं। जो दिल्ली. का रेड लाइट एरिया है वहां पे 2500 से. 2800 औरतें रह रही हैं। और वहां पे कभी. मैंने किसी पॉलिटिशियन को चढ़ते हुए नहीं. देखा। वहां पे रात-रात में. एक फिल्म आई थी हीरा मंडी कितना अंतर है.
हीरा मंडी और दिल्ली या मुंबई या बंगाल. में जो कोठे हैं कुछ सिमिलरिटी नहीं है. अगर हमें धरती पर नर्क देखने का मन है तो. कोठे में जाकर बैठ जाओ आपको दिख जाएगा किस. तरीके के टॉयलेट्स हैं किस तरीके की. जिंदगी वो औरतें जी रही हैं इतने से कमरे. होते हैं एंड दी मैन कैन ओनली लाई ऑन यू. 140 करोड़ की आबादी आबादी में कोठों में. रहने वालों की गिनती नहीं होती। बिल्कुल।. कोठों में इस टाइम पे करीबन 13 मिलियन. लड़कियां रह रही हैं। शौकिया तौर पर जाते.
हैं या बड़े लोग? लंबी-लंबी गाड़ियों में. रात में आते हैं मिनिस्टर्स। उनके कुछ. कोठे फिक्स हैं। इन कोठों में ज्यादातर. लड़कियां शौकिया तौर पर हैं। पैदाइशी तौर. पर हैं। मजबूरी में है। बचपन में उठा के. डाल दी गई थी या जनरेशनल चली आ रही है। उन. 99% लड़कियों को नहीं पता था कि मेरा. फ्यूचर एक सेक्स वर्कर के नाम से जाना. जाएगा। कुछ फैमिली ट्रेडिशंस भी है ऐसा।. कोठा फंक्शन कैसे करते हैं? एक कस्टमर नई. दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर उतरा वहीं पर ही. उसको दलाल पकड़ना शुरू कर देंगे। वो उस. कोठे में आपको लेकर जाएंगे। किस तरह के. लोग जाते हैं यहां पर? स्कूल के बच्चों से.
लेकर ऑफिस के लोग. क्या लव अफेयर्स में प्रॉस्टिट्यूशन में. टर्न करने का नंबर ज्यादा है। आपके अलावा. और भी जो एक्टिविस्ट होंगे उन्होंने. सरकारों से हेल्प मांगने की कोशिश की।. जीवी रोड पर जो लोग रहते हैं वो कैसे इन. कोठों को देखते हैं? दे हेट देम। क्या उन. कोठों में वैसे भी लोग हैं जो उसको एंजॉय. कर रही हैं। क्या अब यही हमारी किस्मत है? डीपर लेवल पर देखोगे तो अफसोस तो है। कोई. इंसान अपने शौक से गंदा काम नहीं करेगा।. हर तरह-तरह के पता नहीं कैसे इंसान आते. हैं। कोई बुड्ढे आते हैं, कोई दारू पी के. आते हैं। मजबूरियों से भी जाना पड़ता है।.
₹300 के लिए, ₹350 के लिए। सेक्स वर्कर. बढ़ रहे हैं या घट रहे हैं? ऑनलाइन चीजें. बहुत अवेलेबल हो गई हैं। कोठों का जो. ऑनलाइन ट्रांसफॉर्मेशन हुआ है। ये कैसे. हुआ है? क्योंकि अभी सब कुछ तो एप्स में. बहुत ज्यादा आ गया ना। तो वहां पे ही. अवेलेबल हो रही है चीजें। कॉलेज. प्रॉस्टिट्यूशन क्या है ये? जैसे कॉलेज की. लड़कियां हैं यंग। दे आर मेकिंग देम अ. पार्ट ऑफ़ दिस होल सिस्टम। वेयर दे आर. गोइंग टू सेल देयर बॉडीज फॉर मनी इन. रिटर्न। सेक्स वर्कर जरूरी है सोसाइटी के. लिए। उन मर्दों से आप मुझे सेफ रख रहे हो. जिसको हम इजीली बोल रहे हैं कि मर्द जाति. ऐसी होती है ना उनको तो चाहिए। तो उनको.
करो ना कोर्टों में बंद।. [संगीत]. जो विदेशों में सेक्स वर्कर्स हैं वो. ऑर्गेनाइज्ड हैं, मर्जी वाले हैं या वहां. भी ऐसे ही होता है। सेक्स वर्कर जो होते. हैं वो पुलिस वालों को मददगार मानते हैं. या परेशानी की वजह? दोनों जो लोग यहां आते. हैं उनकी मेंटालिटी क्या होती है? मैं तो. ₹200 दे रहा हूं। मेरा जो मन करेगा मैं इस. लड़की के साथ करूंगा। क्या फ्यूचर देख रहे. हो कोठों का आप इंडिया में? और बर्बाद ही. होगा। अभी 7 मिनट पे एक उठ रही है।. धीरे-धीरे 3 मिनट पे उठेगी और शायद।.
कभी मंटू ने कहा था कि हर औरत वैश्या नहीं. होती।. पर हर वैश्या औरत होती है. और वैश्या कोई पैदा नहीं होती। वैश्या. बनाई जाती है।. कभी मर्जी से. कभी मजबूरियों से।. और जो मर्द वैश्याओं का नाम सुनकर आंख,
नाक, मुंह बना रहे हैं, वही मर्द बिरादरी. अगर वैश्यालयों पर जाना छोड़ दे तो. वैश्याएं अपने आप नहीं होंगी। वह हैं. क्योंकि वहां जाने वाले मर्द हैं और. इसीलिए आज उनकी समस्याओं को उनको समझने के. लिए यह विषय हमें चुना है।. मेरे साथ खास मेहमान है गीतांजलि बब्बर जी. सेक्स वर्कर एक्टिविस्ट हैं। फाउंडर हैं. एनजीओ की कटकथा।. जैसा कि शुरुआत किया मैम मैंने कि वैश्या.
कोई पैदा नहीं होती है। वैश्याएं बनाई. जाती हैं मजबूरियों में, मर्जी से, समाज. की वजह से और क्योंकि उनकी जरूरतें हैं तो. वो चलती जा रही है। हम नहीं होती तो खत्म. हो जाती। लेकिन वैश्याओं पर मैं जाऊं।. उससे पहले मैं आपसे पूछूंगा कि ये सिक्स. वर्कर एक्टिविस्ट क्या होता है? यह नाम मुझे दिया गया है।. अभी बहुत सारे इंटरनेट पर लिखा जा रहा है।. बट मैंने इस लेबल को कभी मुझे नहीं लगता. एक्टिविस्ट मतलब सेक्स वर्कर एक्टिविस्ट.
आई डोंट नो। आई थिंक आई स्टैंड फॉर ह्यूमन. राइट्स। आई स्टैंड फॉर वुमेन राइट्स, आई. स्टैंड फॉर चिल्ड्रन राइट्स। क्योंकि जब. हम उन वैशालय में जाते हैं और वहां पर और. वहां हर कोई नहीं चढ़ रहा है। यह एक दुखद. बात है हमारे देश में कि हर शहर में रेड. लाइट डिस्ट्रिक्ट हैं और बड़े-बड़े शहरों. में तो बहुत बड़े-बड़े रेड लाइट. डिस्ट्रिक्ट हैं बट वहां कोई जाना नहीं. चाह रहा है। और शायद क्योंकि कटकथा वहां. जा रहा है और हम लोग वहां 14 साल से बहुत. दिल से जमीनी तौर पर काम कर रहे हैं तो. इसलिए सेक्स वर्कर एक्टिविस्ट नाम दे दिया.
गया है। बट दैट्स नॉट अ लेबल जो कि मैं. अपने आप लिखती हूं। कभी असहज होते हो आप? जब कोई कभी असहज होते हो जब कोई कहता है. कि यह सेक्स वर्कर एक्टिविस्ट है या आप. उनमें डील करते हो जो प्रॉस्टिट्यूशन में. है? सेक्स वर्कर एक्टिविस्ट या प्रॉस्टिट्यूशन. में डील करना दोनों सेम ही चीज है। हां, वही मैं कह रहा हूं। कभी-कभी जब कोई कहता. है ऐसा आपकी पहचान बनाते हुए तो आप असहज. महसूस करते हैं? नहीं मुझे नहीं। मुझे इन. सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि. यह सब लेवल्स हैं। अगेन आई सेड मुझे मेरे.
को मेरा काम पता है। मैं आज पॉडकास्ट में. भी आई हूं क्योंकि मेरा एक मकसद है कि. मुझे यह आवाजें जो मुझे कोठों के अंदर की. आवाजें सुनाई देती हैं और बाहर की दुनिया. को नहीं सुनाई दे रही हैं। तो मेरा फर्ज. है कि मैं वो कहानियां सुनाऊं। अब आप मुझे. सेक्स वर्कर एक्टिविस्ट के नाम से सुनना. सुनना चाह रहे हो। आप मुझे एक सामाजिक. कार्य कार्य करने वाली लड़की के नाम से. जानना चाह रहे हो। गीतांजलि के नाम से. जानना चाह रहे हो। फाउंडर बोल रहे हो, डायरेक्टर बोल रहे हो, समाज सेविका बोल. रहे हो, दीज़ लेबल्स डजंट मैटर। व्हाट.
मैटर्स इज कि वो कहानियां बाहर आनी चाहिए।. दैट्स दैट्स दी ओनली मिशन। ओके। मैं इसके. शुरू इसकी बिल्कुल बेसिक से शुरू करता. हूं। आपने कहा हर शहर में रेड लाइट एरिया. होते हैं। क्या होते हैं रेड लाइट एरिया? रेड लाइट एरियाज ऐसे कुछ इलाके होते हैं. जो कि शहर में आइडेंटिफाइड होते हैं कि. वहां पे कोठे हैं। हम उन कोठों के अंदर. लड़कियां. एवरीबडी नोस दैट दीज़ आर आइडेंटिफाइड. एरियाज और वहां पर अंदर लड़कियों को लाया.
जाता है बेचने का काम करना और वहां पे ही. सारे के सारे जो मर्द आपने जैसे इनिशियली. बोला तो उन्हें भी पता होता है वैसे तो. बहुत अलग-अलग जगह पर छोटे-छोटे कोठे चल. रहे हैं। आप दिल्ली में भी अगर देखोगे तो. एक रेड लाइट एरिया है जहां पर 77 कोठे एक. साथ हैं। बट अगर आप और जगह पर भी जाते हो. सीलमपुरी जाते हो, लक्ष्मीनगर जाते हो, शकरपुर जाते हो तो छोटे-छोटे कोठे वहां पर. भी जल रहे हैं। बट रेड लाइट एरिया एक. प्रॉपर इलाका है। जैसे रेड जो दिल्ली का. रेड लाइट एरिया है वहां पे 2500 से 2800. औरतें रह रही हैं उन कोठों में। आप.
सोनागाची की बात करोगे तो वहां पे करीबन. 40 45 हजार औरतें हैं बंगाल में। अगर आप. मुंबई की बात करोगे तो वहां पर करीबन 20. से 25 हजार औरतें हैं। अगर आप पुणे में. बुधवार पेठ की बात करोगे तो वहां पर भी. हजारों औरतें हैं। सो ये आईडेंटिफाइड. एरियाज हैं व्हिच इज इललीगल।. बट दे आर रनिंग। ये ऑर्गेनाइज्ड कोठे हैं।. ऑर्गेनाइज तरीके से प्रोस्टिट्यूशन चल रहा. है। ये जानते हुए कि इललीगल है। ऑर्गेनाइज.
तो नहीं बोल सकते। बिकॉज़ ऑर्गेनाइज्ड का. मतलब तो मैं ये भी मानती हूं कि फिर सरकार. वहां पे फैसिलिटीज दे रही है। वहां पे उन. औरतों के पूरे आइडेंटिटी कार्ड जैसे जब. मैं फॉरेन कंट्री गई हूं और वहां के कोठों. में देखा है तो वहां की औरतों के पास. अधिकार हैं। उनके पास सारे कार्ड्स हैं।. सब कुछ है। पर यहां तो एक तीन साल की. बच्ची को बेच दिया जाता है और उसके जितने. भी कार्ड्स वार्ड्स हैं वो कभी बनते ही. नहीं है लाइफ में। उसे पता ही नहीं होता. कि मैं कहां से हूं। मेरा क्या बैकग्राउंड. है। मैं हिंदू हूं, मुसलमान हूं। उसे नहीं. पता है। वहां पर आकर उसको जो बताया गया. है, जो कहानी दी गई है पूरी जिंदगी जिस.
मालकिन ने उसको खरीदा है, वही उसकी सच्चाई. है। वहां पर कभी मैंने किसी पॉलिटिशियन को. चढ़ते हुए नहीं देखा है वोट मांगने के. लिए। वहां पे रात-रात में मर्डर्स हो जाते. हैं। मैंने कभी नहीं देखा है कि कोई वहां. पर आकर कंसर्न शो कर रहा है। वहां पे. कोठों में आग लग जाती है। आती हैं लोग।. ऐसा नहीं है कि लोग बिल्कुल नहीं आते हैं।. मगर वो आके बस एक एक देखकर अच्छा इन लोगों. को मुआवजा मिलना चाहिए। बट मुआवजा किस. बेसिस पे मिलेगा? उनके पास कोई कार्ड्स ही. नहीं है। उनके पास कोई आधार कार्ड, राशन.
कार्ड, बूढ़ी हो रही हैं वो औरतें। कोई. ओल्ड एज कार्ड कुछ भी नहीं है। अब हम लोग. कोशिश कर रहे हैं उन सबका बनवाने के लिए।. बट अदरवाइज दे डोंट दे डोंट एक्सिस्ट।. उनका काउंटिंग नहीं है हमारे देश में। तो. जिस इंसान का काउंटिंग नहीं है हम उसको. ऑर्गेनाइज तो नहीं बोल सकते। मतलब 140. करोड़ की आबादी में. कोठों में रहने वालों की गिनती नहीं होती।. बिल्कुल हमें तो ऐसा ही लगता है। बाकी. कोठों में इस टाइम पे करीबन 13 मिलियन.
लड़कियां रह रही हैं। ऐसा डाटा भी कह रहा. है। अ बट 13 मिलियन हम बट उनके पास कोई. कार्ड नहीं है। कुछ आइडेंटिटी नहीं है। 1. करोड़ 30 लाख महिला है देश में। हम्।. यह तो एक गिनती है। मुझे तो लगता है काफ़ी. होंगी और ज्यादा।. आपने कहा कि अ उन कोठों की सीढ़ियों पर. कोई जाता नहीं जब वो परेशान होती हैं।. हम्म। शौकिया तौर पर जाते हैं नेता लोग।. शौकिया तौर पर जाते हैं या बड़े लोग? जो.
वोट मांगने नहीं जाते या इन्हें देखकर. मुंह बनाते हैं। मैंने खुद नहीं देखा है. लेकिन मैंने बहुत कहानियां सुनी है। जब. मैं नई-नई गई थी तो मुझे बहुत कहानियां. पता चलती थी कि लंबीलंबी गाड़ियों में रात. में आते हैं मिनिस्टर्स और वो उनके कुछ. कोठे फिक्स हैं। उन्हीं कोठों में से वो. लड़कियां भी फिक्स्ड होती हैं। जो. लड़कियां मुंह नहीं खोलेंगी, जो लड़कियां. चू नहीं करेंगी, जो लड़कियां आराम से. सरेंडर कर देंगी उस इंसान के आगे। और जो. लड़की खूबसूरत है, फेयर स्किन है वो. लड़कियां उन गाड़ियों में जाती हैं। रात.
भर उनको उनके साथ रहना होता है। एंड देन. नेक्स्ट मॉर्निंग दे आर ड्रॉप्ड ऑफ। तो. मैं ये नहीं बोलूंगी कि मिनिस्टर्स वहां. पे शौकिया नहीं गए हैं। ऑफ कोर्स जाते. हैं। और ऑफ कोर्स वो लड़कियां वहां पर भी. उनके लिए भेजी भी जाती हैं उनके घरों में।. इन कोटों में ज्यादातर लड़कियां शौकिया. तौर पर हैं। पैदाइशी तौर पर हैं, मजबूरी. में हैं। बचपन में उठा के डाल दी गई थी या. जनरेशनल चली आ रही हैं। हर तरीके की. लड़कियां हैं। लेकिन 99% औरतें जो वहां पर. इस टाइम पर हैं दिल्ली के जीबी रोड के उन. 77 कोटों की मैं बात और क्लियरली कर सकती.
हूं। उन 99% लड़कियों को नहीं पता था कि. मेरा फ्यूचर एक सेक्स वर्कर के नाम से. जाना जाएगा। तो वो या तो शादी करी गई है. और उनको उनके पति ने आकर बेच दिया या फिर. कोई औरत अपने घर में गांव में बाहर खेल. रही थी बच्ची 12 साल की 13 साल की उसको. किडनैप करके चाय में कुछ मिलाकर पिला दिया. गया और जब वो उसको होश आया तो वो बिक रही. थी कोठे के अंदर या कुछ जनरेशन मतलब कुछ. फैमिली ट्रेडिशंस भी हैं ऐसा कि अगर उस उस. पूरी कम्युनिटी में अगर एक बच्ची पैदा.
होती है और अगर वो खूबसूरत बच्ची है तो. उसको बचपन में ही बोल दिया जाता है कि तुम. ही घर चलाओगी आगे तो यानी कि तुम धंधा. कंटिन्यू करोगी और उन फैमिलीज में जो भाई. होते हैं जो बेटे होते होते हैं और जो. हस्बैंड्स होते हैं वो बहुत ही इट्स एन. एक्सेप्टेबल प्रोफेशन इन देयर फैमिलीज़ कि. लड़की ही कमाएगी और हमको सिर्फ क्लाइंट्स. लेकर आने हैं उसके लिए। तो इनका परिवार. कैसे रहता है फिर? जैसे मान लीजिए एक. जनरेशन आपने कहा कि एक महिला है उसने इनकी. शादियां होती हैं या ऐसे ही रहते हैं लोग।. सो कुछ लड़कियों की उनमें शादियां भी होती.
हैं। जैसे मान लीजिए एक परिवार में तीन. बहनें हैं तो उनमें से दो बहनों को सेक्स. वर्क में डाल दिया और एक बहन की शादी कर. दी। तो इनमें जब शादी भी होती है तब भी. पैसा मिलता है परिवार वालों को। देन आल्सो. दे गेट मनी क्योंकि इस कम्युनिटी में. लड़कियां शादी के लिए बहुत कम अवेलेबल. होती हैं। तो जो होती हैं वो भी एक तरीके. से आप खरीदते हो। इसमें डवरी लड़की वालों. को मिलती है। और जो लड़की सेक्स ट्रेड में. गई है वो तो जिंदगी भर वैसे ही कमा कर. देने ही वाली है अपने परिवार वालों को। तो. इस तरीके से इनकी फैमिली आगे बढ़ती चली. जाती है। मैंने ऐसा कोई किस्सा बंगाल का.
सुना था। मेरा एक मेरे घर में एक ड्राइवर. थे। तो वो गए। उन्होंने कहा कि वो बंगाल. से गए हैं। वहां शादी की है। ₹80,000 में. अपनी वाइफ लेकर आए। तो क्या वो किसी कोठे. से लेकर आए होंगे? नॉट नेसेसरली क्योंकि. ऐसे बहुत सारे गांव भी हैं हमारे देश में. जहां लड़कियां एकदम खत्म हो रही हैं। तो. वहां पर भी खरीदा जाता है। बट ऐसा जरूरी. नहीं है। हमने जो देखा है वो इस कम्युनिटी. की औरतों को जनरली इसी कम्युनिटी में ही. शादी करवा देते हैं। बहुत ज्यादा बाहर. भेजते नहीं है। ये बेडिया कम्युनिटी की. बात कर रही हूं मैं। तो ये बेड़िया.
कम्युनिटी में जनरली ये अंदर ही अंदर अपने. ही खानदान में क्या कम्युनिटी का नाम दिया. आपने? बेड़िया। बेड़िया बी ई डी आई एं. बेड़िया कमेटी। मीडिया कम्युनिटी क्या यह. नाम कैसे पड़ा और इसके क्या मायने हैं? मुझे यह तो नहीं पता नाम कैसे पड़ा है।. दैट्स गुड बट कम्युनिटी का क्या मायना. इनका फैमिली ट्रेडिशन है सेक्स वर्क। इनका. फैमिली ट्रेडिशन बेसिकली सेक्स वर्क भी. नहीं है। मुजरा है। मुजरा हुआ करता था। ये. लोग मुजरे के लिए मतलब ये नोटिफाइड ट्राइब. कहलाती है। तो ये नोटिफाइड ट्राइब इनको.
पहले पूरा प्रॉपर सर्टिफिकेट्स मिलते थे. कि आप मुजरा कर सकते हैं। आज भी जीबी रोड. पे कुछ ऐसे कोठे हैं जो कि बेड़िया. कम्युनिटी ही पूरा हमें पता है कि ये कुछ. कोठे बेड़िया कम्युनिटी के हैं। तो वहां. मुजरा होता है। बट इवेंचुअली अब क्योंकि. जीबी रोड की कंडीशंस भी जैसे पहले जब मैं. कहानियां सुनती हूं तो पहले जीबी रोड पे. बहुत अमीर लोग भी आते थे और हर तरीके के. लोग आते क्योंकि पहले एक्चुअली. जब तवाइव्स वगैरह होती थी तो एक एक अलग रब. भी था सेक्स वर्कर्स का जो अब पिछले कुछ.
सालों में बहुत ही पैथेटिक कंडीशन हो चुकी. है। मतलब आज की डेट में जीबी रोड पे ऐसी. हालत है अभी हमने एक नई टीचर रिक्रूट करी. है और वो उन्होंने शेयर करा अभी उनको एक. ही महीना हुआ है। एंड एव्री फोर्थ डे शी. इस फीलिंग अनवेल। हर फोर्थ डे पर उनको. लगता है मुझे फीवर आ रहा है। क्योंकि कोठे. की कंडीशन इतनी बुरी है कि आपकी बॉडी आपको. अलाउड ही नहीं करती उस टॉक्सिक एनवायरमेंट. में ज्यादा देर रहना। तो इमेजिन करिए वो. वहीं रह रही हैं। उनके बच्चे वहीं पैदा हो. रहे हैं। पूरी जिंदगी वो लोग वहीं बिता.
रहे हैं। तो बेडिया कम्युनिटी को इस तरीके. से पहले बोला गया था। लेकिन अभी कुछ समय. में क्योंकि अब मुजरा कम हो रहा है. क्योंकि और सोर्स ऑफ़ एंटरटेनमेंट बहुत बढ़. गया है। तो वो लोग सेक्स वर्क में भी आ गए. हैं अब वो लोग। अह बट अदरवाइज़ सर्टिफिकेट. वाइज़ उनके पास यह अधिकार है कि वह मुजरा. कर सकते हैं। ओनली मुजरा नॉट सेक्स वर्क. आफ्टर दैट। मैंने अभी एक फिल्म आई थी हीरा. मंडी। हम हीरा मंडी देखी उसमें तवाइयफ़ों. का अपना एक जलवा था। हम आप कोठों पे जाती. हैं। सेक्स वर्कर से मिलती हैं। कितना.
अंतर है? हीरा मंडी और दिल्ली या मुंबई या. बंगाल में जो कोठे हैं। कुछ सिमिलैरिटी. नहीं है।. पिक्चरों के जो कोठे हैं अगर वैसे बन जाए. तो. आई मीन इट्स अ डिफरेंट वर्ल्ड जो वो. दिखाते हैं। आप गंगू भाई का भी एग्जांपल. ले लीजिए। जिस तरीके का वो कोटा है हां. उसमें जो शुरुआत में आलिया भट्ट के साथ जो. हुआ है जो नथुतराई एक एक रीत होती है. उनमें जब लड़की पहली बार सेक्स वर्क में. घुसती है तो वो लोग इस तरीके से मतलब वो.
एक सिंबलाइज होता है कि नथुतराई हो गई. उसकी जब वो अपनी वर्जिनिटी लूज करती है तो. वो सब उसने दिखाने की कोशिश करी है बट. इतना फैंसी आई मीन नो दिल्ली के कोठों की. हालत बहुत खराब है। आई मीन आप अंदर घुसोगे. तो आपको मन नहीं करेगा कि आप 15 मिनट से. ऊपर वहां बैठ पाओ। आप बैठ भी नहीं पाओगे।. आपकी बॉडी आपको अलाउड ही नहीं करेगी।. मतलब. यू कैन इमेजिन मैं तो हमेशा बोलती हूं अगर.
हमें धरती पर नर्क देखने का मन है तो कोठे. में जाकर बैठ जाओ। आपको दिख जाएगा। किस. तरीके के टॉयलेट्स हैं, किस तरीके की. जिंदगी वो औरतें जी रही हैं। छोटे-छोटे. कमरों में मतलब इस कमरे के अंदर ऊपर एक और. कमरा होगा और उसमें सीढ़ियां चढ़ के वो. लोग खड़ी नहीं हो सकती हैं पूरी। सिर्फ. जाके आपको लेटना है। इतने कमरे हैं उनके।. इतने इतने से कमरे होते हैं। जो उनके. एनकाउंटर रूम्स होते हैं जहां पे एक्चुअली. वो लोग क्लाइंट को लेकर जाते हैं। वो. पतले-पतले से कमरे होते हैं। आप जाके. सिर्फ आप लेट सकते हो। एंड दी मैन कैन.
ओनली लाई ऑन यू। देयर इज़ नो अदर स्पेस। अम. और मतलब अगर आप गंदगी की बात करोगे तो. दैट्स अ डिफरेंट लेवल। हम अपने देश में. सफाई की बहुत बातचीत कर रहे हैं आज की डेट. में। तो मिनिस्टरर्स झाड़ू उठा उठा के. फोटोस खिंचवा रहे हैं। आई समटाइ्स वांट टू. आस्क कि आप एक जीबी रोड जैसा इलाका जो. सबको पता है। पूरी दुनिया को पता है। पूरे. देश को पता है। आप वहां पे क्यों नहीं जा. सकते हो? बट वहां पे तो सिर्फ बेकार लोग.
जाते हैं ना। जी बंगाल में जिसका आपने. जिक्र किया कि 400 महिलाएं वहां सोनागाची. तो वहां भी ऐसी कहानी है या वहां की. स्थिति बेहतर है। नहीं मैं नहीं बोलूंगी. कि वहां की स्थिति बेहतर है। वहां पे भी. ऐसा ही है। वहां पे सिर्फ एक फायदा ये है. कि वहां पे ज्यादा औरतों का यूनिटी बहुत. स्ट्रांग है क्योंकि मोस्ट ऑफ देम आर. बंगालीज। मोस्ट ऑफ़ देम आर फ्रॉम द सेम. कम्युनिटी। तो उनका बॉन्डिंग बहुत अच्छा. है। वेयर एज इन दिल्ली दिल्ली में हर कोठे. में आपको छोटा सा छोटा सा उन्होंने मंदिर.
भी बना रखा होगा। छोटी सी मजार भी बना रखी. होगी। वहां पे क्रिसमस पे भी वो हमें. बोलते हैं कि तुम लोग सा क्लॉस क्यों नहीं. बनकर आते हो? दिवाली पर भी बोलते हैं दिया. जलाने क्यों नहीं आए हो? मतलब वहां पे वो. हर फेस्टिवल की मतलब हर हर रिलीजन की. औरतें आपको मिलेंगी एक ही कोठे के अंदर।. कुछ ऐसे कोठे हैं जो फेमस है कि यहां पे. सिर्फ नेपाली औरतें नेपाली वमेन है या कुछ. कोठे हैं जहां पर बोला जाता है कि यह मतलब. थोड़ा अलग है आंध्रा की औरतें यहां पर. ज्यादा है बट इन जनरल हर कोटे में हर.
तरीके के हर एरिया की औरतें मिलेंगी तो. यूनिटी यहां पे कम है दिल्ली में. कंपैरेटिवली बट सोनागाची में यूनिटी थोड़ी. ज्यादा है। इंडिया में सबसे बद से बदतर. कोठे कहां पर है? सबसे बेहतर कोठे कहां पर. हैं? इंडिया में तो मुझे नहीं लगता बेहतर. कोठे हैं। मैंने बुधवार पेट भी देखा है।. छोटू टाइनी रूम्स ऊपर मां बेड पर क्लाइंट. अटेंड कर रहे हैं और बेड के नीचे बच्चे को. सुला रखा है। कमाटीपुरा की भी हालत काफी. खराब है। दिल्ली के जीबी रोड पे भी वहीं. पर ही मां बैठी है और वहीं पर ही क्लाइंट.
आएगा और बच्चे के सामने बच्चा बैठा है।. मां उसके साथ जाएगी और 10 मिनट में अपना. एक्ट करेगी, बाहर आएगी, बच्चे को दूध. पिलाएगी या खाना खिलाएगी। तो बेहतर इंडिया. में मैं नहीं बोल सकती हूं कि कोई भी रेड. लाइट एरिया बेहतर है और वर्स्ट में. सब एक दूसरे से बढ़कर सबसे ज्यादा वर्स्ट. कौन है? मैं दिल्ली को बहुत अच्छे से. जानती हूं तो मैं दिल्ली बोल सकती हूं कि. दिल्ली की कंडीशन बहुत ज्यादा खराब है। बट. हां आई थिंक मुंबई भी कोई बहुत साफ नहीं. है। मुंबई की भी हालत बहुत खराब है।.
इंडिया में सेक्स वर्कर जो है वो. लीगलाइज्ड नहीं है। कभी कोई ऐसा दौर रहा. इतिहास में क्योंकि अब आप उनके बीच में. उठते बैठते होंगे। वो आपको किस्स कहानी. सुनाते होंगे कि किसी दौर में वो. लीगलाइज्ड था या वेल ऑर्गेनाइज्ड था।. लीगलाइज तो देखिए उनको ये सब बातें नहीं. पता है क्योंकि उनको यह पता है कि मेरे को. तो पता ही नहीं है यहां पे मैं आने वाली. हूं। मैं जिस दिन आई हूं तब हमारी दीदियों. के साथ अब ऐसा है कि अगर उनका तभी बीच में. हमारे. हमारा एक घर है नोएडा में ही जहां पे सब. औरतें रहती हैं। तो वहां पे एक दीदी काम.
कर रही थी और उनके चोट लग गई। खून निकलने. लग गया। तो मेरे को बहुत डर लग रहा था।. मतलब कि दर्द हो रही है। उसने मुझे बोला. डरो मत दीदी। मैं इतना पिटी हूं अपनी. जिंदगी में। बचपन में मैं इतना पिटी हूं. कि मुझे ये छोटे-मोटे खून से कुछ फर्क. नहीं पड़ता है। एंड दैट वाज़ अ बिग कट. क्योंकि नेक्स्ट डे कोई गेस्ट आने वाले थे. तो वो पागलों के जैसे काम कर रही थी। मुझे. बोला तू रुक पहले डॉक्टर के पास। नहीं. नहीं मैं रात को देख लूंगी जो मुझे करना. है। सो उनको लीगलाइज अगर आप उनसे जाके ऐसा. बातें करोगे ना तो वो हंसते हैं आपके. चेहरे पर। और वो बोलते हैं क्या लीगलाइज.
और इललीगल कि तुम मुझसे बात कर रही हो।. मेरे को यहां पे मैं रोज डर में सोती हूं।. मेरी बच्ची है एक अभी तो बड़ी हो गई है।. हम एक शेयरिंग सर्कल करते हैं अपना हर. रोज। हमारा दिन का एंड होता है शेयरिंग. सर्कल से। तो उसमें एक सवाल था कि आपको. सबसे ज्यादा डर किस चीज से लगता है? तो उस. बच्ची ने बोला मुझे रात को सोने से डर. लगता है। क्योंकि जब मैं सोऊंगी तो पुलिस. वाले या कोई ना कोई अंकल आके मेरी मम्मी. को पीटेंगे। और अगर पुलिस वाले अंकल आ गए. तो वो पीट-पीट के मेरी मम्मी को लेकर चले.
जाएंगे। तो मुझे वो ऐसा रात में होगा यह. सोच के डर लगता है। तो मुझे नींद आने से. डर लगता है कि अगर मैं सो गई और मेरी. मम्मी को ले गए तो फिर मेरे को कौन. देखेगा? पुलिस वाला क्यों पीटेगा? फ्रस्ट्रेशन क्योंकि अ. पैसे या हनक या फ्रस्ट्रेशन पैसा क्योंकि. वहां पे मतलब ये एक अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर. है। बट इनफॉर्मली ये बहुत ऑर्गेनाइज्ड है।. क्योंकि अगर एक लड़की आ रही है छोटी सी.
दूर गांव से आ रही है। दो-तीन स्टेशंस. ट्रेंस बदल-ब कर आ रहे हैं। दिल्ली के. कोठे में चढ़ रही है। तो आपको लगता है कि. ये ऐसे ही हो सकता है? नहीं हर स्टेशन पे. लोग हैं। हर स्टेशन पर पैसा दिया जाता है।. जब दिल्ली में भी आते हैं तो आई एम श्योर. पैसा देते हैं और जो मैंने सुना है हफ्ता. जाता है पुलिस वालों के पास। तो अगर ऐसा. में किसी ने हफ्ता नहीं दिया या कभी और. बहुत बार ऐसा भी होता है कि क्लाइंट्स. नीचे चले जाते हैं और वो लोग गलत कहानियां. भी बता देते हैं कि मेरे ₹00 ले लिए या.
मेरे ₹600 ले लिए तो पुलिस वाले उनको. बोलते हैं ठीक है ऊपर चलते हैं तो 1 लाख. बोलियो. और या कभी मान लीजिए ₹200 ले लिए तो बोलते. हैं ऊपर चलते हैं तो ₹25000 बोलियो अब वो. औरत को तो देने ही पड़ेंगे क्योंकि पुलिस. वाला साथ में आया है नहीं तो वो उसको अंदर. कर देंगे और अगर उस औरत को अंदर कर दिया. तो उसका मालिक मालिक उसको छुटवाने जाएगा. तो मालिक बोलेगा मैंने तेरे नाम के 500 दे. दिए तो अब तू मेरे को वापस लौटाएगी और. वहां पे इंटरेस्ट रेट जो है वो 50 से 60%. है तो वो औरत तो जिंदगी भर से उसके ऊपर और.
और लोन ही चढ़ता रह जाता है सिर्फ जिंदा. रहने के लिए कुछ अपने शौक पूरे करने के. लिए नहीं तो इन सब से बचने के लिए वो. औरतें पुलिस वालों को हफ्ता देती रहती हैं. टाइम टू टाइम हर कोठे से हफ्ता जाता रहती. जो कस्टमर जा रहा है पुलिस उसको परेशान. नहीं करेगी एक्चुअली वही बहुत स्ट्रेंज है. हमारे हमारे देश में क्योंकि हमारे देश. में सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में बोल. दिया था बहुत ही क्लियरली कि सेक्स. वर्कर्स आर नॉट क्रिमिनल्स दे विक्टिम्स. मतलब उनको आप क्रिमिनल नहीं बोल सकते हो.
बट जो क्लाइंट है उसको हम बोल सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है जब भी एक औरत और. एक क्लाइंट पुलिस स्टेशन में जाता है तो. औरत को ही देखना पड़ता है औरत ही वहां पे. अटकती है। क्लाइंट तो अक्सर क्लाइंट्स तो. भाग ही जाते हैं। वो तो कभी पकड़ में आते. ही नहीं है। उनको कभी पकड़ने की कोशिश भी. नहीं करी गई है।. औरतें हैं हमारी क्रिमिनल जिस बच्ची को. खरीदा गया है बचपन में जिसको पीटा गया है, जिसको जबरदस्ती दारू पिलाई गई है, उसको लत. लगाई गई है, वही आगे जाके क्रिमिनल भी है.
हमारी बुक्स ऑफ लॉ में। ये लड़कियां कहीं. भागने की कोशिश नहीं करती, बचने की कोशिश. नहीं करती? करती हैं। अ फिर मर भी जाती. हैं। मतलब अ पहले की बहुत सारी कहानियां. हैं। हम एक कोठा है। हमने एक स्कूल बनाया. था उसको अपना क्योंकि हमारे पास कोई जगह. नहीं थी और वो एक कोठा बंद था। उस पे कुछ. इशू चल रहे थे। तो वहां पे मेरे बच्चे. पहले आने से डरते थे कि मैम यहां स्कूल मत. चलाओ। तो हम जब शाम को 7:00 बजते थे तो. बच्चे भाग जाते थे। तो मैं बोलती थी तुम.
क्यों ऐसा करते हो? मैम यहां पे शाम को. आत्माएं घूमती हैं। सेड ऐसा क्यों बोलते. हो? मैम इस कमरे में इतनी दीदियों को काट. के मारा गया है कि वो सब दीदियां यहां पे. घूमती हैं। और जो मालकिन थी इस कोठे की वो. भी फिर यहीं मर गई थी तो सब लोग बोलते हैं. कि उसकी आत्मा भी यहीं पर ही है। तो वहां. पे मर्डर्स होना, लड़कियों को मार देना, काट के ट्रंक में डाल देना या कभी-कभी. क्लाइंट्स अगर रूम के अंदर उनके साथ काम. कर रहे हैं उनको अंदर ही मार कर चले जाना. यह बहुत आम है। मतलब उस उस सड़क पे ये सब.
चीजें बहुत ज्यादा हम लोग इसको बहुत इशू. नहीं बनाते हैं। वहां पे गोली लगना या चकू. मार देना इट्स नॉर्मल। तो मेरे को जरा एक. बार आप बताओ ये कोठा फंक्शन कैसे करता है? जैसे मान लीजिए कोई व्यक्ति कस्टमर है।. उसे पता है ये कोठा है। अब वहां से मुझे. आप बताओ कैसे फॉलो अप होता है यहां पे? सो. बेसिकली मान लीजिए वहां 77 कोठे हैं। ठीक. है? कुछ फेमस है। जैसे मैंने बताया कि कुछ. कोठे हैं जो फेमस है। तो अगर मान लीजिए एक. कस्टमर नई दिल्ली मेट्रो स्टेशन पर उतरा.
तो वहीं पर ही उसको दलाल पकड़ना शुरू कर. देंगे। आप भी अगर जाओगे और अगर आप जीबी. रोड की तरफ जा रहे होगे जबकि जीबी रोड. एशिया का लार्जेस्ट हार्डवेयर मार्केट है।. आपको चावड़ी जाना है आपको तब भी जीबी रोड. से जाना पड़ेगा। आपको. लाहौरी गेट जाना है तब तो आपको जीबी रोड. से ही पार करना पड़ेगा। बट यह दलाल आपको. समझेंगे कि आप तो सिर्फ कोठों के लिए आते. हैं। ऑटोमेटिकली ट्रैक कर लेंगे। अगर आप. तो अगर आप सड़क पर हो तो और आपके पीछे. पीछे पीछे पीछे यंग लड़की दूंगा 12 साल की. 12 साल की 13 साल की इतना रेट ये वो नेपली.
सुंदर ये वो करते-करते वो आपको पकड़ते चले. जाएंगे। अगर आप उनको एग्री कर गए कि हां. ठीक है मुझे ले चल तो फिर उनके कुछ-कुछ. कोठों में मतलब वो कुछ कोठों के दलाल. असाइन है कि मैं इस कोठे में ही लेकर. जाऊंगा। वो उस कोठे में आपको लेकर जाएंगे।. क्लाइंट के उस कमरे में जाते ही उस दलाल. को एक पर्टिकुलर परसेंट कट मिल जाएगा। वो. नीचे आ जाएगा। वो आदमी वहां पर कुछ कोटों. में पर्ची सिस्टम होती है। तो वो लोग वहां. पर पर्ची कटवाते हैं अपनी और लड़की चुनते. हैं और उसके बाद वो अंदर जाते हैं अपने. एनकाउंटर रूम में। 10 से 12 मिनट उनको.
मिलता है अपना एक्ट करने के लिए। उसके बाद. वो बाहर आते हैं। क्लाइंट चले जाते हैं. लड़कियां वापस से दोबारा से। इस बीच में. कोई लूट मार या कोई वेरिफिकेशन या कुछ. असहज करना। वेरिफिकेशन तो कुछ नहीं है।. जैसे आप जैसे आपने कहा ना कोई आके मार के. चला जाए। कोई हथियार रखा आपने या कुछ ऐसा. कुछ कोई चेकिंग नहीं है। नहीं ऐसी कोई. चेकिंग नहीं है। कोई चेकिंग करने का सोर्स. ही नहीं। ये मैं आपको बहुत सिंपल वर्जन. बता रही हूं। बट आप इमेजिन करिए एक कमरा. इतना बड़ा और यहां पर ऑलरेडी 25 लड़कियां.
खड़ी हुई हैं और कम से कम 75 आदमी घुस के. उन लड़कियों को पसंद कर रहे हैं उनको जाकर. छू रहे हैं उनको जाके बात कर रहे हैं देख. रहे हैं कि किस लड़की के साथ मुझे अंदर. जाना है वहीं पर ही पर्ची कट रही है वहीं. पर ही दो आदमी बैठे होंगे और वो कोई कुछ. बेच रहा होगा या कोई क्योंकि वहां पे. मार्केट भी ऊपर ही चढ़ती है वो औरतें नीचे. नहीं आती हैं तो कोई कुछ बेच रहा होगा तो. एक इतने से कमरे में आप लगाइए अगर 75 80. लोग खड़े खड़े हुए हैं। तो आपको पता भी. नहीं है। बहुत सारे आदमी तो ऊपर चढ़ते हैं. और उनको कोई पसंद नहीं आती तो उसी वक्त.
नीचे उतर जाते हैं। बहुत सारे आदमी ऊपर चढ़. के तसल्ली से एक-एक औरत से बातचीत करते. हैं। इट्स लाइक अ शॉपिंग। इट्स लाइक अ. शॉपिंग। या इट इज लाइक दैट। कि आप कपड़े. देखने जा रहे हो। बिल्कुल इट इज लाइक दैट।. कुछ कमरों में इट इज लाइक दैट। कुछ कमरों. में ऐसा होता है कि जहां पे आप ऊपर गए और. सीधा आपको दलाल ही एनकाउंटर रूम में धक्का. दे देता है। एंड देन जिस लड़की का भी नंबर. होता है या मालकिन जिस भी लड़की को बोलती. है वो उस कमरे में चली जाती है। किस तरह. के लोग जाते हैं यहां पर? हर तरह के स्कूल.
के बच्चों से लेकर ऑफिस के लोग आफ्टर ऑफिस. हां ऑफिस के बाद मैं ऑफिस बैग्स और लैपटॉप. बैग्स के लोगों को भी देखती हूं। रिक्शे. वाले आदमी लोग जो रिक्शा चलाने के बाद वो. अपनी फ्रस्ट्रेशन निकालने जाते हैं। बूढ़े. लोग 80-80 साल के लोग भी वहां पर चढ़ते. हैं। तो वहां पे कोई एज ग्रुप या कोई किस. ट्रेटा के लोग आ रहे हैं। ऐसा नहीं बोल. सकते। डीयू के बच्चे एज एन इंटरेस्ट कि हम. देखने चाहते हैं कि कैसा है। बिकॉज़ इसके.
आसपास काफी इसको हमने रोमांटिसाइज भी तो. कर रखा है ना। वो तो कभी जीबी रूट नहीं. गया। यार फिर तो तूने जिंदगी में कुछ भी. नहीं करा। ये भी एक डायलॉग चलता है. कॉलेजेस में टू ट्राई एवरीथिंग एक्सप्लोर. राइट तो वो एक्सप्लोर करने के लिए भी. चाहते हैं तो हर तरीके के लोग आपको वहां. दिखेंगे तो वहां पे मान लीजिए कोई 18 साल. से नीचे का लड़का जा रहा है तो अंदर. उन्हें कोई मना नहीं करेगा रुकेगा नहीं. मना नहीं करेगा लेकिन अब मैंने देखा है कि. बहुत सारी औरतें ही जैसे कभी कोई बच्चा आ. गया 13 14 साल का तो औरतें ही उसको झापड़. मार के नीचे भेज देती चल अभी तू बहुत छोटा.
है बट कुछ लड़कियां भी हैं उस उम्र की तो. वो लोग उनके साथ भी कुछ कोठों में उनके. साथ भी सेटअप कर देते हैं। एंड व्हाट आर द. चार्जेस लाइक इनकी क्या ड्यूरेबिलिटी होती. होगी? सब कोटों के अलग-अलग रेट से फिर भी. अगर मिनिमम से मैक्सिमम मैक्सिमम अगर हम. बात करें तो 600 पर एक्ट मिनिमम अगर हम. बात करें तो ₹50 और इसमें इनके पास क्या. आता होगा? वो भी हर लड़की का अलग डिपेंड. करता है। तो अगर लड़की बहुत यंग है और. अभी-अभी उसको खरीदा गया है तो जीरो। उसके. पास कुछ अमाउंट नहीं जाएगा। एटलीस्ट फॉर द.
नेक्स्ट फोर फाइव इयर्स जब वो लड़की खुद. एक तरीके से इस चीज को समझ जाएगी कि अब. क्योंकि मैं यहां आ ही चुकी हूं। सो लेट. मी लर्न दी आर्ट ऑफ हाउ टू सर्वाइव इन अ. ब्रोथल। तो वो विक्टिम से सर्वाइवर के. उसमें आ जाती है। बट वो भागती नहीं है. वहां से क्योंकि भाग नहीं सकती है। बट वो. वहां की लैंग्वेज समझ जाती है। तब होता है. कि मान लीजिए अगर वो कोठे में अपना एक अलग. कमरा लेकर रह रही है तो उसको एक पर्टिकुलर. अमाउंट देना पड़ता है मालकिन को। मान. लीजिए वो बोलती है नहीं मुझे अलग नहीं.
रहना है। सबके बीच में रहना है। जो आप. खाना बना रहे हो मैं भी वही खाऊंगी। आपके. हिसाब से ही चलूंगी तो उसको कम पैसा. मिलेगा क्योंकि खाना ववाना सब कुछ मालकिन. ही देख रही है। एज वाइज डिपेंड करता है। द. मोर आप जितने बड़े होते चले जाते हो उतना. ही आप कम कट देना शुरू कर देते हो लेकिन. आपका रोल बढ़ जाता है। तो जब आप बड़े होते. हो तो आप सिर्फ खुद धंधा नहीं कर रहे हो. तब आप और लड़कियों को भी लेकर आओगे अपने. गांव से या जैसे आप खुलाए गए थे उतना आपका. ब्रेन वाश कर कर चुके होते हैं या फिर आप. और लड़कियों की एज अ मैनेजर बनके बैठ.
जाओगे। लाइक सात आठ लड़कियां आपकी. रिस्पांसिबिलिटी हो जाएंगी कि सात आठ छोटी. लड़कियां कि वो भागे नहीं या उनको. रेगुलरली मारपिटाई हो रही है ताकि वो डरी. रहे उनको खाना तभी मिलेगा जब वो क्लाइंट्स. इतने पर्टिकुलर क्लाइंट्स अटेंड कर लेंगी. तो उनका पूरा मैनेजमेंट फिर वो एक औरत. संभालना शुरू कर देती है। मैंने कई जगह. देखा जैसे जानवरों को कई खतरनाक जानवर. होते हैं। उनको ट्रीट करना होता है। तो. पहले डराते हैं। इतना डरा देते और फिर एक. इंसान सर्वाइवल सर्वाइवल बनकर आता है। फिर. वो संभाल लेता है। तो वो जो.
जानवर या होता है वो उसको सरेंडर कर देता. है और उसका लॉयल लगाता है। यहां कैसे. फंक्शन करता है? कोई नई बच्ची आई यहां पे. भी ऐसा ही होता है। जैसे हम बोलते हैं ना. अगर कोई नई बच्ची मान लीजिए किसी शहर से आ. गई। अब वो लाजमी बात है कि उसने लाइफ में. ये सब नहीं किया। प्रोस्टेशन में कभी. इन्वॉल्व नहीं रही है। तो वहां से आप उसे. कैसे तैयार करते हो? मतलब कोठे में कोठे. में कैसे तैयार करते हैं वो हम्। अह जैसे. मैंने आपको बताया कि शुरुआत में मैंने जो. बहुत सारे केसेस देखे हैं उनमें ऐसा होता. है कि लड़की आई वो लोग उसको पहले जीबी रोड.
पे नहीं रखते हैं। वो उसको कहीं और रखते. हैं। वहां पे उसको प्रेम मोहब्बत से जैसे. हमारी एक दीदी का मैं अगर केस बताऊं तो. उनकी शादी हुई थी नई-नई अभी तो खैर शी इज़. 35 बट व्हेन शी केम शी वास 14 इयर्स ओल्ड।. उसकी शादी हुई थी गांव में। 15 साल की. हुई। उसका बच्चा पैदा हो गया। एक साल उसको. अच्छे से रखा उसके हस्बैंड ने और खूब उसका. ख्याल रखा उसको दिल्ली घुमाया सब कुछ करा. उसका बच्चा जब 15 दिन का हो गया तब वो.
उसको कोठे में लेकर आ गया और उसको बोला कि. अब यहीं रहेगी तू और अब तेरे को यही धंधा. करना है और मैं ही तेरे कस्टमर्स लेकर. आऊंगा और उसके बेटे को उसने एक सोर्स बना. लिया कि अब यह बेटा है यह बेटा मेरे पास. रहेगा मतलब अब मेरे कंट्रोल में रहेगा तो. वह भाग तो सकती नहीं है। शुरुआत में उसने. मना करा बहुत तो उसको. एक्सट्रीम पीटा गया। मतलब आप सोच भी नहीं. सकते हो। आज भी वह दीदी जब कंघी करती हैं. अपनी तो अक्सर मैं मेरे को मैं उनको बोलती. हूं आप बाल खुले क्यों नहीं रखते हो। बट.
उनका जो स्टाइल है कंघी करने का क्योंकि. यहां उनके इतना इतना मारा गया है कि यह. पूरा एरिया उनके यहां बाल हट चुके हैं। तो. वो अपने बालों को ऐसे स्टाइल करती है कि. आपको पता नहीं चलेगा कि वो अंदर से उनके. बाल नहीं है। बट दैट्स द लिमिट जिस पे वो. मारते हैं। उनको इतना तक भी टॉर्चर किया. गया है कि जब वो मना करती है तो एक बार. उसने मना करा और उसके कमरे में उसके. बच्चों के साथ गैस का पाइप खोलकर चला गया. वो आदमी कि मर जा फिर तू। अगर तू मेरा काम. नहीं कर सकती है तो मैं तेरी जगह किसी और. को लेकर आ जाऊंगा। एंड देन शी हैज़ टू.
सरेंडर। वो अपने को शायद मार भी देगी. लेकिन अब उसके पास बच्चे भी हैं। व्हाई. डोंट दे गो टू पुलिस? ओह लाइक आई सेड वो. तो गांव से आई थी तो प्रॉस्टिट्यूट नहीं. थी। फिर वो पुलिस के पास क्यों नहीं आता? इतनी छोटी उम्र की बच्ची तो कोठे से नीचे. उतर भी नहीं सकती है। उसको नहीं पता है. बाहर आसमान किस रंग का चल रहा है। अभी. बाहर बारिश चल रही है या क्या चल रही है।. वो कोठों के अंदर ही बंद रहते हैं।. एटलीस्ट शुरुआत के तीन चार पांच साल। उनको. अलाउड नहीं है बाहर। क्या लव अफेयर्स. में प्रॉस्टिट्यूशन में टर्न करने का नंबर.
ऑफ नंबर ज्यादा है? नहीं ऐसा नहीं बोलूंगी. मैं। वो भी है। लेकिन एक एक औरत की कहानी. है। अभी वो भी ड्रीम विलेज में हमारे साथ. हैं। वो तो काम करती थी। अपने घर चला रही. थी। शी वाज़ 14 इयर्स ओल्ड। जो धागे होते. हैं कपड़ों में वो काटने जाती थी. फैक्ट्री। और रिक्शा नहीं लेती थी क्योंकि. रिक्शे में ₹10 लग जाएंगे। ₹5 आने और ₹5. जाने में महाराष्ट्र में। और एक दिन बहुत. तेज बारिश हुई तो वहीं रेलवे स्टेशन के. नीचे बैठ गई कि मैं छोटे शहरों में रेलवे.
स्टेशन से भी आप पार कर लेते हो। तो बैठ. गई कि बारिश रुक जाएगी और वहीं पर ही एक. आंटी आई और उसको अपनी मां जैसी लगी। उसने. अपनी मां को अभी रिसेंटली खोया था। उसको. अपनी मां के जैसी लगी वो और उसने उसको. बोला बेटा चाय पिएगी। उसने बोला हां आंटी. क्यों नहीं इतने प्रेम से आप पिला रहे हो।. एंड देन व्हेन शी ओपन हर आइज शी वास बीइंग. सोल्ड। ₹80,000 देकर उसको वह औरत ने उसके. सामने ₹80,000 लिए और वह चली गई और गांव. में जाकर यह बता दिया कि वह खुद से अपनी. मर्जी से दिल्ली के जीवी रोड पर जाकर बिक.
गई है। तो वो लड़की चार-प साल तक तो नहीं. निकल पाई लेकिन जब उसका बेटा पैदा हो गया. चार-प साल के बाद तो एक टाइम के बाद कोठे. वालों को पता है कि अभी भागेगी नहीं। तो. वो भी उसको बोलता है कि ठीक है अब तेरे को. जहां जाना है जा। क्योंकि अब वो उसको अंदर. तक इतना तोड़ चुके हैं कि वो उसको यह बता. चुके हैं कि अगर तू बाहर जाएगी भी तो. जितने भी आदमियों से मिलेगी ना वो सब तेरे. को गंदी नजर से देखेंगे क्योंकि वो तेरे. साथ कभी ना कभी तो सोए होंगे। तो वो औरत. को इतना डाल देते हैं उसके दिमाग में कि. अब तू नहीं बची है बाहर की दुनिया के लिए।.
सो यू बेटर डाई हियर। सो बट वो फिर भी गई. अपने गांव जस्ट टू फाइंड आउट। रहने नहीं. गई थी। देखने गई थी तो उसने देखा कि उसकी. फोटो पर माला है। उसके बाप ने उसको हाथ. जोड़कर बोला कि गांव में यह बात सबको पता. चल चुकी है कि तू कोठों में थी। अब मेरे. को अपनी शक्ल दोबारा मत दिखाई जिंदगी में।. उसके पास कोई और ऑप्शन ही नहीं था। बेटा. साथ में था। वो वापस उसी कोटे में आ गई।. तो हम ये नहीं बोल सकते हैं कि सिर्फ लव.
अफेयर की वजह से एक लड़की को उसमें डाला. गया है। सबके अलग-अलग रीज़ंस हैं। एक दीदी. हैं जो कि डिप्रेशन का शिकार हैं। पिछले. 18 सालों से 20 सालों से। और वो 13 साल की. थी। अपने गांव में बाहर खेल रही थी बंगाल. में और खेलतेखेलते उन आठ लड़कियों में से. उनको पिक कर लिया गया। आज वो शायद 45. इयर्स की होंगी। तब से ले आज तक वो कोठे. पर ही हैं। और अब तो उनकी हालत ऐसी हो गई. कि अगर वो डिप्रेशन की गोली नहीं खाती.
हैं। तो वो कुछ भी कर सकती हैं। मतलब बीच. में वह 3 महीने के लिए गायब हो गई थी।. उनका बेटा कोठे में ही था और वह गायब हो. गई थी। एंड व्हेन शी वास फाउंड शी वास. फाउंड नेकेड ऑन द स्ट्रीट्स।. बिकॉज़ शी वा शी डिड शी वास नॉट इन ह. सेंसेस क्योंकि उनको गोली नहीं मिली थी. उनके डिप्रेशन की। तो वहां की मतलब हम लोग. अक्सर देश में अलग-अलग बातें करते हैं. क्रुलिटी के ऊपर, टेररिज्म के ऊपर। और. मुझे तो ऐसा लगता है कि अगर हम जीबी रोड. जैसी जगह पर जाएंगे तो वहां तो रोज ये सब.
कुछ हो रहा है। वहां लड़कियों की जिंदगी. की कोई वैल्यू ही नहीं है। बट हम वहां देख. ही नहीं रहे हैं। हमको हम लाल किले पे. झंडा फहरा देते हैं हर साल बहुत ही शौक से. हम लोग. या अपने रामलीला मैदान में जाके स्वेर एंड. सेरेमनीज़ कर देते हैं। बट उससे 1 कि.मी. दूर हम यह नहीं देख रहे हैं कि दिल्ली का. जो सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट इलाका है जहां. पे जहां पे हम बोलते हैं ना महिलाएं ही. देश का फ्यूचर है। वो महिलाओं के साथ क्या.
हो रहा है? वी डोंट वांट टू सी दैट एरिया।. हम ब्लाइंड हैं उस एरिया के लिए। कभी आपने. जैसे आपके अलावा और भी जो एक्टिविस्ट. होंगे उन्होंने सरकारों से हेल्प मांगने. की कोशिश की। बिल्कुल की है। बहुत मैंने. तो बहुत दरवाजे खटखटाए हैं। क्या रिएक्शन. होता है जब प्रॉस्टिट्यूशन को लेकर आप. जाते हो हेल्प मांगने की। इनके भी ह्यूमन. राइट्स का ख्याल रखा जाए। सो कुछ लोग ऐसे. होते हैं जो बोलते हैं वेरी गुड गीतांजलि. ये काम तो बहुत इंपॉर्टेंट है। मैं देखता. हूं मैं क्या कर सकता हूं। फिर वो कभी.
नहीं देखते। कुछ ऐसे भी लोग मुझे मिले हैं. जिन्होंने मुझे बोला ओह गीतांजलि जी अभी. भी चल रहे हैं दिल्ली में कोठे। तो ऐसे. इंसान से तो आपको बात करने का मन ही नहीं. करेगा ना क्योंकि वो उस इलाके में जीत रहे. हैं इतने सालों से वैसे बोलते हैं कि इन. इन कोठों को यहां से हटाया जाए क्योंकि. आसपास के रेजिडेंट्स अनसेफ फील कर रहे हैं. या उनको बेइज्जती फील होती है और आप मुझसे. सवाल कोठे अभी आप हटवा क्यों नहीं देती. कोठों को? अभी रिसेंटली मुझे एक. पॉलिटिशियन के बेटे ने बोली यह बात। आप.
कोठों को हटवा क्यों नहीं देती? साफ करवा. दीजिए ना इस गंदगी को यहां से। एंड आई. लुक्ड लुक्ड एट हिम एंड आई लाइक गुड आई. मीन यू आर गोइंग गुड आवर कंट्री इज गोइंग. स्ट्रांग वि पीपल लाइक यू एंड आई जस्ट केम. आउट ऑफ हिज ऑफिस आप इस ऐसे इंसान से आप. क्या बोलोगे एंड देन आई जस्ट मूव्ड आउट आई. सेड ओके कांग्रेचुलेशंस योर फादर गॉट. इलेक्टेड. सो इट्स होपलेस मतलब एक एक बिल्डिंग है. जीबी रोड पर क्योंकि जीबी रोड पर किराया.
बहुत ज्यादा है तो एक छोटे से स्कूल के. लिए भी हमें बहुत किराया देना पड़ रहा है. फंड रेिंग इज इशू इशू फॉर एव्री. ऑर्गेनाइजेशन। तो वो बिल्डिंग है जो पिछले. ऑलमोस्ट चार सालों से बंद पड़ी है। उसके. लिए मैं चार साल से हर दरवाजे पर. चिट्ठियां लिख चुकी हूं। यहां तक कि 2 साल. पहले ऐसा भी हो गया था कि वो बिल्डिंग में. हमने अपने आर्किटेक्ट को बुलाया और सब कुछ. उन्होंने हमारे हिसाब से पूरा प्लान कर. दिया। वो डूसिप के अंडर आती है दिल्ली. अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड के अंदर।. सरकार बदली और वह बिल्डिंग वापस वहां.
बकरियां बंधी हुई हैं। अब दूसरी सरकार को. सुनना ही नहीं है। तो वहां पे जीबी रोड. क्योंकि आपके एजेंडा में आप कभी. मैनिफेस्टो पढ़ेंगे तो आपके एजेंडा में कभी. जीबी रोड आएगा ही नहीं। सेक्स वर्कर्स के. ऊपर बात ही नहीं आएगी। सुप्रीम कोर्ट ने. बोल दिया ट्रीट देम विद रिस्पेक्ट बट हु. इज़ ट्रीटिंग देम विद रिस्पेक्ट। व्हाट इज़. वी आर इंप्लीमेंटिंग ऑन द ग्राउंड। नोबडी. नोज़ नोबडी गिव्स अ डैम अबाउट इट। जीबी रोड. पर जो लोग रहते हैं वो कैसे इन कोठों को. देखते हैं? जो जीबी रोड के पीछे रहते हैं।. हां जो आसपास इलाके होंगे मतलब 500 मीटर.
या 1000 मीटर के आसपास दे हेट देम दे दे. आर देयर क्लाइंट्स आल्सो बट दे हेट देम. जैसे आपने शुरुआत में बोला ना कि हम लोग. उनके बारे में बात करते हैं कि अरे मतलब. यू नो बदनाम गलियां हैं ये हैं वो तो वहां. पे वो क्लाइंट बनकर जरूर जाएंगे बट मैंने. बहुत सारी वीडियोस ऐसी भी देखी हैं जहां. पे बोलते हैं हमारी बेटी के लिए हमें. रिश्ता करना है और जब उनको हम बोलते हैं. जीबी रोड के पीछे रहते हैं हम तो आधे लोग. तो आते ही नहीं है तो क्यों नहीं हटा देते.
यहां से? वहां पे एक स्कूल चलता था बहुत. पहले तो आसपास के रेजिडेंट्स ने वो स्कूल. बंद करवा दिया कि इन कोठेवाली के बच्चों. को पढ़ाना शुरू कर दोगे अगर तो मतलब क्यों. इनको आपको कोई भी फैसिलिटी देनी क्यों है. या इनके बच्चों को कोई भी इनको इतना रुला. दो। इनको इतना तड़पा दो कि ये खुद ही कोठे. बंद कर दें। बट वो तो आना ही नहीं चाहती. हैं ना वहां पे। जो रन कर रहे हैं हमारे. देश के बड़े-बड़े लोग उनको बात करो ना आप. उन लड़कियों से क्या बोल रहे हो जो खुद ही.
वहां पर एक रात नहीं रहना चाहती अपने. बच्चे को एक रात नहीं रखना चाहती क्या उन. कोटों में वैसे भी लोग हैं जो उसको एंजॉय. कर रही हैं कि अब यही हमारी किस्मत है ऐसे. ही जीना है मजे उन्हें उन्हें अब इसमें. कोई अफसोस नहीं है देखिए डीपर लेवल पर. देखोगे तो अफसोस तो है। डीपर लेवल पर अगर. आप देखोगे और उन औरतों को एक सपना पूछोगे. तो हर दीदी का एक सपना है मेरे को गृहस्ती. जीवन जीना है। मैंने गृहस्थ शब्द वहां से. उसकीेंस समझी है लाइफ में जो हम लोग बहुत. टेकन फॉर ग्रांटेड है। हमारे लिए मां होना.
बाप होना शादी होना और शादी में सब. रिश्तेदारों का आना इट्स नॉर्मल राइट फॉर. अस इट्स नॉट समथिंग इट्स नॉट अ लग्जरी।. उनके लिए यह जिंदगी का सपना है कि मुझे. गृहस्ती में जीना है। जहां पर मेरे सर पर. यह ना लिखा हो कि मैं जीबी रोड की कोठे. वाली हूं। और उनके आधार कार्ड्स में भी अब. तक कोर्ट जीबी रोड ही लिखा जाता था। हम. फिर हम लोगों ने जब इलेक्शन कमीशन के. रिकॉर्ड्स में देखा तो एक्चुअली जीबी रोड. का नाम बहुत सालों पहले श्रद्धानंद मार्क.
कर दिया गया है। करीबन 38 40 40 साल पहले. बट उनके कार्ड्स में वो नहीं आ रहा था। तो. वह औरतों को अपने कार्ड दिखाने में भी. प्रॉब्लम है बाहर जाकर कि मेरे कार्ड कोई. देखेगा और अगर उसने मुझे देखा और उसने. मुझे बोला कि अरे तू तो कोठे वाली है तो. मेरी क्या इज्जत रह जाएगी? स्कूल्स नहीं. भेजती वो अपने बच्चों को क्योंकि स्कूल्स. में जाके सबसे पहला सवाल होता है बाप का. नाम। क्या नाम दें? उन्हें नहीं पता।. या वो लोग बोलते हैं कहां है आपका घर? तो. मेरा एक बच्चा मेरे पास आया वो 14 14 साल.
का था। बहुत ब्राइट बच्चा और मुझे आकर. उसने अपना स्कूल बैग डोनेट कर दिया। ही. सेड यह मेरा बैग आप रख लो। मैंने कहा क्या. करूंगी मैं इसका? तो जो छोटे बच्चों को आप. पढ़ा रही हो ना उनके लिए रख लो। तो आई सेड. तेरा मैं नहीं जाऊंगा अब स्कूल में वापस।. कहा क्यों? आज सारे लड़कों ने मुझे बोला. का बच्चा है। कोठे में रहता है। मैं अब. स्कूल में कभी वापस नहीं जाऊंगा।. उस बच्चे की गलती है क्या? उस मां की गलती है क्या? जिसकी गलती है वह.
देख ही नहीं रहा है।. तो. और वहां पर ये रोजमर्रा की कहानियां है।. यह एक बच्चे की कहानी नहीं है। ये हमारे. हर बच्चे की कहानियां है। सेक्स वर्कर बढ़. रहे हैं या घट रहे हैं? अ अगर हम कोठे में देखें तो कोठे में धंधा. कम हो रहा है। ऐसी मेरी सारी औरतें बोलती. हैं कि पहले तो बहुत लोग आते थे। एक-एक. दिन में 50-50 क्लाइंट्स भी अटेंड करे हैं. लड़कियों ने। आज की डेट में ऐसा भी होता. है कि चार क्लाइंट करने के लिए भी वो काफी.
उनको दिक्कतें होती हैं और अगर क्लाइंट. अटेंड नहीं होंगे तो खाना नहीं मिलेगा। तो. ये भी शर्तें रखी जाती है उनके ऊपर। तो इस. तरीके से यानी कोठों में अभी सेक्स वर्क. कम हो रहा है। बट क्योंकि ऑनलाइन चीजें. बहुत अवेलेबल हो गई हैं। बहुत सारी एप्स आ. गई हैं। तो सेक्स वर्क कम हो रहा है। मैं. ये नहीं बोलूंगी। मगर कोठों में अब लोग कम. जाने कम जा रहे हैं। नहीं जा रहे हैं यह. भी नहीं बोलेंगे बट कम जा रहे हैं. कंपैरेटिवली टू आज से 15 साल पहले। तो ये.
कोठों का जो ऑनलाइन ट्रांसफॉर्मेशन हुआ है. ये कैसे हुआ है और कितना ये उनको परेशान. करने वाला और ये नया वर्जन क्या है? क्योंकि आई एम श्योर इनमें भी लोग परेशान. होते होंगे।. मतलब बिल्कुल है। जैसे मान लीजिए अगर. ऑनलाइन हमारी ही कोई दीदी है जिनका. Instagram चैनल बहुत चल रहा है और वो. Instagram पे बहुत एक्टिव है और वो. क्लाइंट्स को अटेंड करने के लिए जा रहे. हैं। ऑनलाइन ऑनलाइन ये कैसे सिस्टम बदला? क्या है ये मतलब? क्योंकि अभी सब कुछ तो. एप्स में बहुत ज्यादा आ गया ना। तो अगर आप. देखेंगे तो बहुत सारी हुकिंग एप्स भी बन.
चुकी हैं। तो वहां पे ही अवेलेबल हो रही. हैं चीजें। सम आर पेड वेयर यू हैव टू पे. बट सम आर जस्ट ऑप्शनल। एंड आल्सो अगर हम. देश में देखेंगे तो सेक्स को ले डिस्कशंस. पहले से तो काफी बड़ी ही है। ओपननेस बड़ी ही. है। तो आई थिंक उसकी वजह से भी बहुत सारी. चीजें अब जीबी रोड पर बहुत लोगों को जाने. की जरूरत नहीं पड़ रही है। बिकॉज़ दे आर. ऑलरेडी गेटिंग व्हाट दे वांट अदरवाइज मे. बी इन कॉलेजेस एंड स्कूल्स। अभी बहुत सारी. लड़कियां कॉलेजेस में भी ऑप्ट करने लग गई. हैं सेक्स वर्क को बाय चॉइस इन सम केसेस।.
बट इन सम केसेस बाय फोर्स आल्सो। लाइक फॉर. एन एग्जांपल दे वांट टू कंटिन्यू स्टडिंग।. दे वांट टू फंड देयर देयर स्टडीज। तो दे. विल गो इनटू दिस फील्ड। तो अभी मतलब मैं. आपको बता रही हूं ना कि अभी कोठे सिर्फ. रेड लाइट एरियाज में नहीं रह गए हैं।. कॉलेज प्रोस्ट्यूशन क्या है ये? जैसे. कॉलेज की लड़कियां हैं यंग। तो इन कॉलेजेस. आल्सो दीज ऑप्शंस आर देयर। सो सम गर्ल्स. आर देयर। आप अगर कभी भी देखेंगे तो आपको. शायद मेट्रो स्टेशन के टॉयलेट्स के डोर के.
पीछे भी लिखा होगा ना। इफ यू वांट अ गर्ल. कॉल अप हियर। आपको कॉलेज के टॉयलेट्स में. भी दिखेंगी ऐसी सब चीजें। इफ यू वांट टू. हैव अ वन नाइट फन देन कॉल अप एट दिस नंबर।. यह सब क्या है? यह सब एक तरीके का सिस्टम. ही तो बन रहा है दैट देयर इज़ अ मैन और. देयर इज़ अ होल सिस्टम जहां पे वो लोग. लड़कियों को बोलते हैं दैट इफ यू वांट टू. डू दिस कम एंड जॉइन आवर गैंग एंड देन सम. वमेन कम्स इंटू इट फॉर एन एग्जांपल कुछ. लड़कियों को चीट करके कुछ लड़कियों को झूठ. बोलकर इसका पार्ट बना लेते हैं। कुछ.
लड़कियों को बताकर इसका पार्ट बना लेते. हैं। बट इन एनी केस दे आर मेकिंग देम अ. पार्ट ऑफ़ दिस होल सिस्टम वेयर दे आर गोइंग. टू सेल देयर बॉडीज फॉर मनी इन रिटर्न एंड. इट्स नॉट ऑलवेज. अ इट्स नॉट ऑलवेज अ रोजी एंड ब्यूटीफुल. जर्नी लाइक मैं यूएस गई थी और आपने शायद. रीनो का नाम सुना होगा दैट्स कंसीडर्ड एस. मिनी वेगस सो आई मेट दिस वूमन देयर मैं. रात में पुलिस के साथ पुलिस की गाड़ी में. पूरी रात रेकी कर रही थी तो बहुत खूबसूरत.
लड़की बहुत ही सुंदर। शी वास् वेयरिंग अ. ब्यूटीफुल ड्रेस एंड वी वेंट अप टू हर टू. आस्क हर इफ एवरीथिंग इज फाइन एंड शी लुक्ड. सो कॉन्फिडेंट या एवरीथिंग इज जस्ट. परफेक्ट एंड आई एम फाइन एंड आई एम टेकिंग. केयर ऑफ एंड देयर इज़ नथिंग टू वरी अबाउट।. दैट्स व्हाट शी टोल्ड द पुलिसमैन। नेक्स्ट. मॉर्निंग मैं उस एनजीओ के लोगों के साथ. फोन आया उन लोगों के पास दैट देयर इज़ अ. गर्ल हु इज़ इन नीड। आई वेंट देयर एंड शी. वाज़ अ सेम गर्ल। इन अब मतलब उसकी जो.
कंडीशन थी अगले दिन मैं पहचान नहीं पाई कि. वही लड़की है। एकदम उलझे हुए बाल फटे हुए. कपड़े उसका कमरा जब मैंने जाकर देखा तो तो. मेरे हाथ मेरे पास कुछ खाने का सामान था. और जब वो हमारी गाड़ी में आकर बैठी और. मैंने उसको वो ऑफर करा उसने एकदम पकड़ के. खा लिया। एंड फिर मैंने उसे इवेंचुअली. थोड़ी देर के बाद आधे पौने घंटे के बाद. पूछा बट रात को तो तुम बोल रही थी कि सब. कुछ परफेक्ट है। एंड अभी तुम्हारी हालत. देखकर तो उसने मुझे मुझे बताया कि जब आप. रात को मुझसे बात कर रहे थे तो मेरा पिंप.
ऊपर खड़ा था। और अगर मैं तब आपको कुछ भी. बोलती क्योंकि आप पुलिस के साथ थे तो वो. वहीं से ही मेरे को कंट्रोल कर रहा था।. एंड दे हैव टैटूस ऑन देयर बॉडीज। उनके. यहां थाइस पर वो लोग जैसे हम गाय भैंसों. को टैटू लगाते हैं ना आग जलता हुआ वो उस. तरीके से स्टैंप करते हैं उन लड़कियों को।. सो वो लड़कियां चाहकर भी बॉर्डर नहीं. क्रॉस कर सकती हैं। वो चाहकर भी नहीं भाग. सकते। ये मैं आपको यूएस की बात बता रही. हूं।. तो इंडिया में तो उनको टैटू करने की जरूरत. ही नहीं है। उनको पता होता है। इतने दलाल.
नीचे घूम रहे हैं जीबी रोड पे कि अगर कोई. लड़की आपको भागते हुए किसी लड़की का पता. चल गया तो वो लड़की नहीं जा पाती ज्यादा. दूर तक। रेलवे स्टेशन तक मैक्सिमम। उसके. बाद उसको पकड़ कर ले आते हैं। ये रेलवे. स्टैंड, बस स्टैंड हर पब्लिक प्लेस में. होंगे। बिल्कुल।. ये हर जगह है। हमारे देश का एक डाटा यह. कहलाता है कि हर 7 मिनट पे एक लड़की उठी. है हमारे देश में। एव्री 7 मिनट्स अ गर्ल. इज पिक्ड अप। जितनी देर में हमारा पडकास्ट. चल रहा है उतनी देर में शायद ऑलमोस्ट सात. लड़कियां उठ चुकी होंगी अलग-अलग शहरों से.
और ट्रैफिक हो चुकी होंगी। और इन सबका. इस्तेमाल सेक्स ट्रैफिकिंग में जरूरी नहीं. है। बहुत अलग-अलग टाइप्स के ट्रैफिकिंग्स. भी हैं। बट हां ह्यूमन ट्रैफिकिंग तो हो. ही रही है। उसकी जिंदगी अब उसकी नहीं रही।. नाउ इट्स शी इस बीइंग सोल्ड। उसका पैसा. मिल रहा है किसी और को और अब वो उसको जो. चाहते हैं वो करवा सकते हैं। तो सपोज़ मान. लो कोई बच्ची आपको देख रही हो और वो इसमें. फंस गई हो। मोबाइल आज सभी के पास है। हो. सकता है कोई शायद आपको सुने हिम्मत आए।.
इस प्रोसेस में इन्वॉल्व होने के बाद कैसे. निकल सकते हैं या ऐसा दलदल है जहां फंस गए. तो फिर निकल नहीं सकते? एक्चुअली ऐसा जैसे. हमारी खुद की ही एक बच्ची है और वो बीड़िया. कम्युनिटी से ही है।. तो हमने उसको हमारी लाइफ में आ गई थी जब. वो आठ साल की थी। तो जब वो 11 साल की हुई. तब तक उसको ये सब बातें पता थी। सो. अवेयरनेस इज अ वेरी बिग आई वुड से इट्स अ. ब्लेसिंग।. तो जब वो 11 साल की हुई और उसको उसके गांव. लेकर गए। उसको बोला गया धंधा करेगी या. शादी करेगी। तो उसने बोला मुझे तो पढ़ना.
है। सो उन्होंने बोला यह ऑप्शन नहीं है।. तो शी कॉल्ड मी एंड शी सेड मुझे यहां से. निकालो। मुझे नहीं पता कैसे। अब हमें उसके. गांव का कुछ नहीं मालूम है। बट यह मालूम. था कि चाहे कुछ भी हो जाए इन दोनों बहनों. को निकालना है। तो फिर वी आल्सो डिड. एवरीथिंग वहां के पुलिस, वहां की सरकार. एंड कभी-कभी ऐसा होता है ना लाइफ में कि. आपको अच्छे लोग ही मिलते चले जाते हैं जो. जेनुइनली चाहते हैं कि यह ना हो। तो हमें. भी ऐसे ही लोग मिलते चले गए। एंड वो लड़की. बहुत स्ट्रांग थी। उसने अपनी लोकेशन, अपने.
फोन को बार-बार अपनी मम्मी से चोरी छिपे. फोन करती थी। हमें मैसेजेस कर देती थी। अब. मैं यहां हूं, अब मैं यहां हूं। हमने उसका. फोन टैप करवा दिया। तो हमें पता चलता रहा. उनकी लोकेशन कहां पर है। उसको हमने. मैसेजेस में ही बोल दिया। जस्ट बी रेडी। द. मोमेंट एनीबडी कम्स इनू योर विलेज। उनकी. गाड़ी में जाकर बैठ जाना। डोंट आस्क एनी. क्वेश्चन। तो ये सब कुछ उस बच्ची ने बहुत. स्मार्टली करा। एंड शी वाज़ आउट। देयर वाज़. अनदर गर्ल जो जीबी रोड पर इसी तरीके से आई.
थी। पढ़ी लिखी लड़की थी। एंड शी आल्सो टूक. सम कस्टमर्स फोन और उसने फोन कर दिया।. उसके पापा काफी रिच एलट मतलब काफी रिच लोग. थे वो लोग। रात आज तक उससे बड़ी रेड नहीं. हुई कभी जीबी रोड पर। रात-रात में मैं ऐसा. मुझे बताते हैं कि वह साउथ की पुलिस आई थी. और उन्होंने पूरा जीबी रोड एकदम पूरे. तरीके से सील कर दिया कि कोई भाग ही नहीं. सकता है। अदरवाइज क्या होता है जीबी रोड. पे मान लीजिए अगर खबर मिली कि रेड पड़ रही. है तो कोठों में ऑलरेडी खबर पहुंच जाती है.
पहले ही पुलिस वालों के अंदर ही अंदर के. लोग मालिक वल्लिक सब जुड़े हुए होते हैं. तो खबर पहुंच जाती है इस कोठे में रेड. पड़ने वाली है तो वो लड़की को अंदर ही. अंदर तो हर एक कोठे कनेक्टेड है अंदर से. काफी सारे तो सुरंगे बनी हुई जैसे ये आपका. डक्ट है तो ऐसी सुरंग होगी डक्ट के अंदर. अंदर से वो निकाल कर लड़की को कहां निकाल. कर ले जाएंगे आपको पता ही नहीं चलेगा बट. इन दैट वन रेड उन्होंने पूरा जीबी रोड सील. कर दिया किस साल की बात है. आई थिंक 2015-16 की बात है ये और वो निकाल.
कर ले गए उस बच्ची को वहां से वो लोग नहीं. गए बट ये ये वन ऑफ द केसेस है क्योंकि. उसके बाप के पास रिसोर्सेज थे और क्योंकि. वो कर सकते थे बट मेजर लड़कियों के तो. पापा को या मांओं को यह भी नहीं पता होता. है कि मतलब मैं दिल्ली तक कैसे पहुंचूं।. उनके पास इतने भी पैसे नहीं होते हैं कि. वह बस के या ट्रेन की टिकट लेकर दिल्ली तक. आ जाए या बॉम्बे चले जाए। उनको पता ही. नहीं होता है कि कहां है हमारे तो ये. ज्यादातर लड़कियां जो दिल्ली में जीबी रोड. पे इन्वॉल्व है ये गरीब घराने की है हां.
मैक्सिमम क्योंकि इनको ट्रेस नहीं जाता. होगा बिल्कुल बिल्कुल. इनकी फोटो लगी होती है पुलिस स्टेशन के. बाहर नॉट इनकी बट बहुत लड़कियों की ना. मिसिंग गर्ल्स तो हमारे यहां पे है ही. बहुत ज्यादा उनमें से काफी लड़कियां हैं. कोठों के अंदर सेक्स वर्कर जरूरी है. सोसाइटी के लिए. मतलब अ क्यों जरूरी है आप मुझे यह बताइए. मैं पूछ रहा हूं क्वेश्चन। नहीं बिल्कुल. भी नहीं। क्यों? मतलब हमारी दीदी भी अक्सर. यह बात बोलती है कोठों पे जब मैं जाती हूं.
और जब उनके साथ कभी दिल से बात हो रही है. जो मुझे बोलती है हम ना हो ना तो तुम. लड़कियां सेफ नहीं रहोगी। मुझे नहीं रहना. फिर सेफ। अगर मेरे को सेफ रखने के लिए. मेरी एक 12 साल की या 11 साल की बच्ची को. आप बेच रहे हो और आप उसको पूरी जिंदगी मार. रहे हो। उसको पीट रहे हो। आपका कोई अंत. नहीं है वायलेंस करने का तो मुझे सेफ नहीं. रहना। और अगर उन मर्दों से आप मुझे सेफ रख. रहे हो जिसको हम ईजीली बोल रहे हैं कि. मर्द जाति ही ऐसी होती है ना उनको तो. चाहिए उनको अपनी ये लस्ट खत्म करने के लिए.
औरत चाहिए तो उनको करो ना कोठों में बंद. उनके साथ ये सब कुछ करो ना उस छोटी बच्ची. के साथ क्यों कर रहे हो तो 12 साल की. लड़की पैदा होती हुई लड़की को आप बेच देते. हो लड़की पैदा हुई है पता चला लड़की है. मालकिन खरीद लेती है उसी वक्त पे ही वो भी. 12 साल की होती भी नहीं है। उसकी. मेंसुरेशन साइकिल शुरू भी नहीं हुई होती. है कि उसकी वैल्यू लग जाती है। उसकी क्या. गलती है? उस मर्द की हैवानियत के लिए वो.
क्यों बैठेगी ना कोठे पे? आई मीन अगर. जरूरी है तो हम अपने घर में अपने घर वालों. को बिठा देते हैं। तो फिर जरूरत पूरी हो. जाएगी ना। मेरे हिसाब से तो बिल्कुल जरूरी. नहीं है। बट जैसे एक लॉजिक दिया है। कई. बार जब हम सेक्स वर्कर की बात करते हैं तो. यह होता है कि. अगर ये लीगलाइज कर दिया जाए। खासतौर पर जो. लीगल सेक्स को मानते हैं कि ऐसी जगह होनी. चाहिए उनका लॉजिक ये होता है कि इससे देश. में रेप केसेस कम हो जाएंगे। महिलाओं के. शोषण कम हो जाएंगे। जिनको लस्ट होगी वो.
जाएंगे। वहां पर पे करेंगे, सेक्स करेंगे. और लौट आएंगे। इससे समाज में महिलाएं. सुरक्षित हो जाएंगी। ऐसा लॉजिक दिया जाता. है। यह लॉजिक तब मुझे समझ में आएगा जब वो. लड़की अपनी मर्जी से यह ऑप्शन ऑप्ट करेगी।. जब उसको पता होगा कि मैं इस धंधे में जा. रही हूं। ये प्रोस हैं। ये क्स हैं। मुझे. कंडोम का इस्तेमाल करना है क्योंकि उससे. मेरी हेल्थ ठीक होगी। मेरे को मालकिन नहीं. बताएगी कि मुझे कंडोम यूज़ करना है या नहीं. करना है। अगर मुझे कोई बीमारी होती है तो. मैं ना बोल सकती हूं कि मुझे नहीं करनी. है। मेरे अधिकार है। अगर हम उस लेवल तक.
पहुंच सकते हैं अपने देश में जो मुझे तो. नहीं दिख रहा है इन द न्यूर फ्यूचर जहां. पे अभी सुप्रीम कोर्ट ने बोल दिया और. इंप्लीमेंटेशन में जीरो है। अगर हम उस. लेवल तक पहुंच सकते हैं तो जरूरी है हमें. करना चाहिए लीगलाइज़। बट अगर हम उस लेवल तक. पहुंच सकते हैं तब। अगर हम यह कर देंगे कि. हमने लीगलाइज तो कर दिया लेकिन उसके बाद. हमारी इंप्लीमेंटेशन जीरो चल रही है और आज. भी छोटी-छोटी लड़कियां बिक रही है और उन. बच्चियों को पता ही नहीं है कि ये धंधा. होता है। उनको यह बताया जाता है कि तू अगर. धंधे में जाएगी ना तो तेरे को अच्छे कपड़े.
मिलेंगे। तेरे को मिठाइयां मिलेंगी। देख. तेरे को डांस करने को मिलेगा। उनको उसके. बाद की कभी कहानी नहीं पता होती है। मेरे. हमारे ड्रीम विलेज है जो हमारा होम है. नोएडा में। तो वो दीदी बताते हैं उनको. पोलियो है पैर में। एंड शी इज माय. स्ट्रांगेस्ट वुमन। वो बताती है मुझे तो. सिर्फ यही बताया गया था कि तेरे को पोलियो. है तो शादी तो होगी नहीं। तो तू यह वाला. काम कर ले जो तेरी बाकी बहनें कर रही हैं।. तेरी बुआएं कर रही है। देख तेरी ऐश ही ऐश. है। अच्छे कपड़े मिलेंगे। बॉम्बे में जाकर. डांस करेगी डांस पार्स में। पता है कितना.
पैसा है वहां पे। तेरे को मस्त जिंदगी. मिलेगी। एंड देन शी शेयर्ड हर फर्स्ट नाइट. स्टोरी। मैंने बोला उस रात के बाद तो मैं. मतलब मैं मर भी नहीं सकती थी क्योंकि मौत. भी बहुत इजी तो नहीं है करनी मतलब. एक्सेप्ट करना और आज आज भी वो इसी ट्रेड. में है. ये डांस बार का जो आपने जिक्र किया मुंबई. में डांस बार बंद कर दिए गए इसकी वजह से. ही प्रॉस्टिट्यूशन बढ़ा होगा मुंबई में. नहीं मुंबई में हमेशा से ही था और आज भी.
है और डांस बार मतलब मुझे ऐसा लगता है कि. मेरा मेरा. ज़हन में मुझे ये सही ही नहीं लग रहा है।. मुझे नहीं पता लोग इसके लिए जो भी बोलते. हैं और वो मुझे गलत भी बोलते हैं। मुझे ये. चीज नहीं सही लग रही है कि मेरी वजह से. मेरे लिए या देश में कुछ आदमियों के लस्ट. के लिए एक लड़की को डांस बार में डांस. करना पड़ रहा है। अपनी मर्जी के बगैर अगर. वो अपनी मर्जी से कर रही है अगेन आई एम. सेइंग इट्स फाइन। बट उसको पता ही नहीं है.
कि वो चलो मैं इसको रिफ्रेम करता हूं। जो. विदेशों में सेक्स वर्कर्स हैं वो. ऑर्गेनाइज्ड हैं, मर्जी वाले हैं या वहां. भी ऐसा ही होता है? वहां पे भी ऐसा भी. होता है और मर्जी वाले भी हैं। वहां पे. दोनों तरीके के लोग हैं। हमारे देश में भी. मर्जी वाली भी हैं। हमारे देश में भी ऐसी. औरतें हैं जो अपनी चॉइस से कर सकती हैं।. करती हैं वो यह काम। व्हिच इज फाइन।. शॉर्टकट पैसा। पैसा अपना घर चलाना है।. पैसा चाहिए। जैसा कॉलेज वाला आपने बताया।. कॉलेज वाला बताया। और भी बहुत सारी औरतें.
हैं जो कि रोज सुबह तैयार होकर अपने घर से. यह बोलकर निकलते हैं कि मैं दफ्तर जा रही. हूं। उनके ऑटो वाले फिक्स्ड होते हैं।. उनकी लोकेशन फिक्स्ड होती है। और उनके. हस्बैंड्स को यही पता है कि मेरी बीवी. नौकरी पर जा रही है। बट क्योंकि पति कमा. कर ला ही नहीं रहा है। कुछ काम ही नहीं कर. रहा है। तो वो उस औरत को बाहर निकलना है. और उसको और कोई उसको समझ में नहीं आ रहा. और कोई काम करना। उसको यही ऑप्शन दिया गया. आसपास की और और औरतों ने तो वो जाते हैं. और वो करते हैं। आप जेएनयू के पार्क में. जाइए। जेएनयू के जो जंगलों में जाइए आपको. मिलेंगी वहां पे औरतें। छोटा-छोटा अपना एक.
इतना सा कपड़े का मतलब चुन्नी जितना एक. बेड लेकर घूम रही होंगी। बेड मतलब एक छोटा. सा चुन्नी जैसा और वहीं पर ही डालकर बैठी. होंगी। वहां पे आदमी जाते हैं। तो वो फिर. भी अपनी चॉइस से कर रही हैं। चॉइस तो मैं. नहीं बोलूंगी कि वो भी पावर्टी और फोर्स. में ही कर रही हैं एक तरीके से। पर फिर भी. वो चुन सकती हैं। पर कोठे में तो वो चुन. ही नहीं सकती ना। कोटे में भी मैं बीच में. हम लोग नाइट वक्स करते हैं कि रात को हम. जीवी रोड पर जाते हैं क्योंकि रात में. बहुत सारी ऐसी दीदियां मिलती हैं जो दिन. में सो रही होती हैं। तो एक दीदी थी एंड.
शी वाज़ नाइंथ मंथ प्रेग्नेंट. एंड आई आस्क्ड एंड शी वाज़ स्टैंडिंग डाउन. स्टेयर्स. वेटिंग फॉर द क्लाइंट्स एंड आई सेड तेरी. हालत है तो उसने बोला खाना नहीं देगी ना. मालकिन. सोए नींद ही नहीं आएगी बिना खाने के भूख. लगती रहेगी मेरे को और बच्चे को उसे खड़ा. नहीं हुआ जा रहा था बट खाना तो जरूरी है. ना तो इसलिए वो खड़ी हुई थी नीचे. तो वहां पर चॉइस नाम की कोई चीज नहीं तो. अगर आप मतलब फॉरेन कंट्री में भी हर तरीके.
के दोनों टाइप के लोग हैं। आई हैव बीन टू. स्ट्रिप क्लब्स आल्सो। आई हैव सीन वुमेन. इन द टॉयलेट। जब आप जाते हो उनके ड्रेसिंग. रूम में आप देखते हो उनका असली चेहरा। वो. हो सकता है बाहर स्टेज पर आपको जो दिख रहा. है जो वो कर रही हैं हम आपको लग रहा है ओह. वाओ शी इज एन्जॉयंग इट। बट व्हेन यू गो. इनसाइड द टॉयलेट एंड व्हेन यू वाच देम. क्लोज यू व्हेन ट्राई टू टॉक टू देम। यू. विल गेट टू नो नो दे डोंट वांट टू बी. हियर। दे डोंट वांट टू बी ऑन द स्टेज। दे. डोंट वांट दिस अटेंशन बट हम कहां इतने.
डीपर लेवल पर जाएंगे ना हमने तो और हमने. तो बहुत इजीली एक्सेप्ट कर लिया ना सेक्स. वर्क नहीं होगा तो देश अनसेफ हो जाएगा वाओ. आई मीन दिस स्टेटमेंट इन इटसेल्फ इज. समथिंग व्हिच आई डोंट अग्री इंडिया में. फिलहाल कितने लेवल पे हो रहा है ये कितने. लेवल पे हो रहा है जैसे आपने कहा स्कूल को. कॉलेजेस में शुरू हो गया है एक हम बात. करें जीवी रोड जैसा जगह है नोएडा में हम. जाते हैं कई बार रातों में हमें लोग दिखाई. हर शहर में दिखाई पड़ते हैं इनफैक्ट आप. किसी भी शहर शहर में जाओगे सड़कों पर. दिखाई पड़ते हैं। कई बार फिल्म इंडस्ट्री. या बॉलीवुड इंडस्ट्री में का भी जिक्र.
होता है। कितने लेवल पे मुझे तो लग रहा है. हर लेवल पे है ना पॉलिटिशियंस के लेवल पर. अगर आप देख लो आप बॉलीवुड में देख लो आप. स्कूल्स में देख लो कॉलेजेस में देख लो. प्रोफेसर्स के बीच में देख लो कॉलेजेस में. आप कहीं पर भी देख लो तो सेक्स वर्क तो एक. तरीके से ओल्डेस्ट प्रोफेशन है हमारे. हिस्ट्री का है ना तो सेक्स वर्क तो तब से. ही चल रहा है आज कोई नया चीज तो है नहीं. ये तो ये तो हर लेवल पर ही है तो जैसे आप. हील कर आप आप लोगों की हेल्प करने आते हो. अपने एनजीओ के थ्रू तो एक तो हो गया जीबी. रोड पे आपने हेल्प की इसके अलावा और.
कहां-कहां की महिलाएं आपको मिली है? नहीं. हमारा जो मेजर फोकस है तो मैं जाती हर जगह. के मैंने मैंने ऑलमोस्ट सारे रेड लाइट. एरियाज में गई हूं। वहां की एनजीओस के साथ. हमारा कोलैबोरेशन है। बट अभी हमारा जो मेन. फोकस चल रहा है पिछले 14 सालों से वो जीबी. रोड के कोठों पे ही चल रहा है। बाकी अगर. एनजीओस हमारे पास कोई लड़की भेजते हैं वो. बोलते हैं कि हम चाहते हैं कि दिल्ली में. आपके पास रहे ये सीखें। सो मोस्ट वेलकम।. बट हमारी टीम अभी उतनी बड़ी नहीं है कि हम. और जगह पर जा पाए और अपना बट आई एम श्योर. आपके आप लोग भी फॉलो करते होंगे बाकी.
एनजीओस को या बाकी लोगों को या आप. इंटरकनेक्टेड हो गए आपस में हम तो और. किस-किस लेवल पे आपको किस्से कहानियां. सुनाई पड़े कभी कोई बॉलीवुड का किस्सा. टीवी का किस्सा या किसी ऑफिस का किस्सा. ऐसा कोई भी सुनाई पड़ता है ऑफिस के किस्से. तो हां. जैसे हमें ये भी बताया जाता है कुछ. दीदियां ये भी कहानियां बताती हैं कि जब. रेड पड़ती है और जब उनको नारी निकेतन में. डाल दिया जाता है तो नारी निकेतन से. रात-रात में उनको भेजा जाता है अलग-अलग. मिनिस्टर्स के पास बड़े-बड़े लोगों के.
पास। तो वो किस्से जरूर सुने हैं कि वो. दीदियां बताती हैं कि रात को आती है जो भी. वहां की अंदर की वार्डन होती है। शी पिक्स. अप अ वूमन शी ड्रेसेस हर अप। शी गिव्स हर. सम पिल्स टू ईट। सो दैट वो अपना लूज कर दे. अपने आपको पूरे तरीके से। एंड देन शी. मेक्स अस सीट इन द कार ऑफ सम पॉलिटिशियन. सम एमएलए एंड देन और नेक्स्ट मॉर्निंग वो. वापस आ जाती है। तो ये नारी निकेतन की. कंडीशन बता रही हूं मैं आपको। जहां सुधार. के लिए भेजे एक्सक्ट्ली जो सेफ होम्स हमने.
बना रखे हैं हमारे इस देश में। सो इट्स. लाइक एवरीबडी इज इनवॉल्व्ड। या बट सबने. आंखें फेर रखी है। कोई देखना ही नहीं. चाहता इस सड़क के ऊपर। ऐसा बोलते हैं कि. वोट बैंक्स आपके खत्म हो जाएंगे। मैं तो. आई एम जस्ट वेटिंग फॉर एनी डेरिंग. पॉलिटिशियन टू कम अप एंड से कि मैं काम. करूंगा रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट्स के लिए।. दिल्ली में महिला मुख्यमंत्री भी कई सारी. रही हैं। अभी भी आई हैं। इससे पहले भी थी।. कभी किसी ने नहीं कोशिश की? मैंने तो नहीं. देखा ना ही मेरी औरतों ने देखा है। आप लोग.
गए जैसे अभी रेखा जी आई हैं। अभी तक तो. नहीं मिली हूं मैं उनसे। बट हां मिलने का. प्लान तो है इन द नियर फ्यूचर। बट अभी तक. तो मुलाकात नहीं हुई है। ऐसे मामलों को. लेकर सार्वजनिक बयान कभी कोई देते हैं. नेता लोग? मैंने तो नहीं सुना है। आपने. सुना है? मैं मिलूंगा तो मैं जरूर. पूछूंगा। बिल्कुल। मुझे लगता है हम सबको. पूछना चाहिए। इसीलिए मैं आज यहां पर भी. बैठी हूं। वरना मुझे आई आई आई हैव डन माय. जर्नलिज्म। तो मेरा मीडिया बैकग्राउंड ही. है। पर फिर भी मेरे को मीडिया में जाना. बहुत वो नहीं लगता। क्योंकि मुझे लगता है.
कि हम अक्सर मैं जीबी रोड पर भी देखती हूं. कि बहुत लोग आते हैं और कहानियां बनाकर. चले जाते हैं। बट उस कहानियों को कभी कोई. पहुंच ही नहीं पाता। उस कहानियों से जीबी. रोड पर कभी कोई नहीं पहुंच रहा है। जीबी. रोड की हालत बद से बदतर होती ही चली जा. रही है। तो मेरा भी बहुत हद तक विश्वास हट. चुका है ये सब चीजों में। बट नाउ आई. स्टार्टेड कमिंग बैक बिकॉज़ मुझे लगता है. कि कहानियां बाहर जानी बहुत जरूरी है। उन. कोठों की दीवारें इतनी स्ट्रांग हैं कि. वहां की चीखें बाहर ही नहीं जा रही हैं।. और वहां पे औरतें अंदर चीखें मार मार के.
बच्चे रो-रो के वहीं मर रहे हैं। दुनिया. को या तो दुनिया के कान बेकार हो चुके. हैं। हमारे लोगों को का लोगों के कान खराब. हो चुके हैं या उस सड़क की दीवारें बहुत. स्ट्रांग है कि बाहर चीखी नहीं जा रही. हैं। क्योंकि हम लोग उस कोठों के अंदर भी. जा पा रहे हैं और बाहर की दुनिया में भी. रह पा रहे हैं। तो शायद ये हमारा फर्ज. बनता है कि हम वो कहानियां बाहर लेकर आए।. तो जैसे आप जीबी रोड में जाते हो सेक्स. एक्टिविस्ट के तौर पर मैं फिर कोट कर रहा. वुमेन राइट के तौर पर जो दलाल होते हैं या.
जो उनकी मालकिन होती हैं वो आप लोग से सहज. होती हैं और वो आपको भी डरा धमका के रखती. हैं या आप को कैसे देखा आता है अंदर? तो. एक्चुअली ये एक जर्नी रही है हमारे लिए. कटकथा में। शुरुआत में हमें भी डेंजर की. नजर से ही देखा है। बट अगर आप देखोगे तो. जितनी भी मालकिनें हैं जो अभी जीबी रोड पर. बैठी हैं उनकी हिस्ट्री भी कोई बहुत. खूबसूरत नहीं रही है। बहुत पेनफुल ही रही. है। उनके साथ भी ये सब कुछ हुआ है। बट वो. इतना पिट-पिट के पिट-पिट के पिट-पिट के अब. वो इस स्टेज पर आ गई हैं कि नाउ दे हैव. सेड अब तो इतना पिट ही गई हूं। तो अब मैं.
क्यों ना मैं ही कुछ कर लूं जिंदगी में. मैं कमा लूं या मैं भी अब मालकिन बन सकती. हूं। बट अगर आप उनके साथ सच में बैठोगे और. आप रिश्ता बनाने की कोशिश करोगे ना तो वो. आपके सामने खुलेंगी। अभी रिसेंटली आई थिंक. इसी महीने की दो तारीख को अप्रैल की ही दो. तारीख को मैं जीबी रोड के एक कोठे में थी. और वो मकान मालकिन थी और मैं उनके साथ. बैठी हुई थी और मुझे बोलती है मुझे तेरी. एक मदद चाहिए। मैंने कहा बोलिए। बोलती ये. पुलिस वाला ना नया आया है और रोज के रोज. मुझे कांस्टेबल या पुलिस वाले आकर बोलते.
हैं उनके साथ फोटो खिंचवा। और अगर मैंने. फोटो खिंचवा ली तो अभी उनके ही कमरे में. एक दूसरी दीदी ने भी तो पुलिस वालों ने. बोला होगा कि नए एसएओ अगर आते हैं तो उनको. थोड़ी बहुत तो फोटो खिंचवानी है कि मैं. कुछ अच्छा करूंगा मैं अच्छा कर रहा हूं।. तो जिस एक दीदी ने फोटो खिंचवाई थी उसको. कुछ दिनों के बाद अरेस्ट कर लिया। तो बोल. रही है मेरे को नहीं खिंचवानी फोटो।. अरेस्ट क्यों कर लिया? कि किसी भी रीजन पे. वो लोग अरेस्ट कर सकते हैं। उनके पास. अनलिमिटेड रीज़ंस हैं। फिर मैंने बोला ना. दैट्स द थिंग वहां पे। तो वहां पे हम मतलब.
मैं हर पुलिस वाला खराब है यह तो नहीं. बोलूंगी लेकिन मैक्सिमम वहां पर जितने भी. लोग आते हैं वह इसीलिए आते हैं कि अब इन. औरतों को और हम भी थोड़ा इनसे ले पाए तो. वो उसने मुझे बोला अगर मुझे बुलाया पुलिस. वाले ने तो तू चाहे रात के 2:00 बज रहे हो. 3:00 बज रहे हो चुपचाप आ जाइयो पुलिस. स्टेशन सेड हां दीदी आई विल बी देर तो वो. मकान मालकिन है कहने को अगर आप देखोगे तो. वो बहुत स्ट्रांग है बट दैट्स हर फियर शी. हैज़ अ डॉटर एंड शी वास बीइंग सेंट टू.
तिहाड़ फ्यू इयर्स बैक इन सम केस उसकी. बेटी को पुलिस वाली बनना था। पर उसने अपनी. बेटी की जब वो तिहाड़ में थी तो पीछे से. शादी करवाने के लिए बोल दिया कि उसकी बेटी. को यह पता ना चल जाए कि मेरी मां तिहाड़. में है। उसकी उसकी बेटी को आज भी नहीं पता. है कि मेरी मां कोठा चलाती है। तो सोचिए. एक औरत जो कोठे की मालकिन है लेकिन वो आज. तक अपनी बेटी को ये सच नहीं बता पाई है कि. मैं कोठा चलाती हूं। इमेजिन द. हिप्पोक्रेटिक लाइफ व्हिच शी इज़ लिविंग।. तो बेटी के सामने वो एक मां है केयरिंग.
मदर बट अदरवाइज वो एक कोठे की मालकिन है।. कोई सबसे पेनफुल स्टोरी जिसने आपको जग. छोड़ दिया। जैसे मीडिया में हम कहते हैं. ना कि हम इमोशनलेस हो जाते हैं। डॉक्टर्स. भी जब किसी का इलाज करते हैं तो उन्हें. कटा पिटा देख कर रोना नहीं आता। हम मीडिया. वाले होते हैं। हम खबरें कवर करते हैं।. अनलेस अंटिल कोई बहुत ब्रूटल हुआ। हम भी. नॉर्मल रहते हैं। खबर पढ़ देते हैं। आई एम. श्योर ये आपके लिए भी रोज का हो गया होगा।. बट कुछ कहानियां होती हैं जो सीना चीर. देती हैं। आंखें गमगीन कर देती है। जैसा. आपने कहा कि जीबी रोड की दीवार इतनी मजबूत.
है कि अंदर की चीखें बाहर नहीं आती। कोई. चीख जो आपको परेशान कर गई। अभी फिलहाल एक. कर रही है। ऐसी बहुत आती हैं कहानियां। बट. जैसे आपने बोला ना कि आपको आपके मेंटोर्स. और आपके स्पिरिचुअल गुरुज भी डिटचमेंट. सिखाना शुरू कर देते हैं। कि कोठे से वापस. आके नहा लेना नमक का पानी में या रो लेना. आधे घंटे। मेरे स्पिरिचुअल गुरु ने मुझे. बोला था रोज बिना रोए सोना मत क्योंकि. आंसू के थ्रू आपके अंदर जो इमोशंस. बढ़ जाएंगे वो आपको निकाल कर ही सोना है।.
डोंट टेक देम विद यू व्हेन यू स्लीप बट. देयर आर स्टोरीज व्हिच जस्ट हंट्स यू। एंड. अभी ही एक बच्ची की स्टोरी है जिसको मैं. बचपन से देख रही हूं। और उसको बचपन में ही. खरीदा गया था। बट जिसने खरीदा था वो उसको. बोलती थी मेरी बेटी है। मेरी बेटी है, मेरी बेटी है। और अभी मैं उससे मिलकर आई. हूं। उसी दिन की कहानी है। और उस वो अपनी. आंख में ऐसे-ऐसे कुछ कर रही थी। और मैंने. उसको बोला तू रो रही है। तो उसने बोला. नहीं दीदी आंख में कुछ चला गया है। बट शी.
वास् एक्चुअली क्राइंग।. और मैंने उससे बोला तू क्या कर रही है? अब. तू पढ़ने क्यों नहीं जा रही है अब? शी इज़. नाउ 19। 18 और 19। नहीं नहीं दीदी मैं. जाती हूं पढ़ने के लिए। बट एक्चुअली वह. पढ़ने नहीं जाती है। उसको डाल दिया धंधे. में और मैं उसको बचपन से देख रही हूं। शी. वास सो फोंड ऑफ स्टडिंग। उसको इतना मजा. आता था। एंड आई एम हेल्पलेस इन दैट केस. क्योंकि वो बच्ची नहीं बोल रही है मुंह. से। उसकी जो जिसने उसको खरीदा है वो एकदम. आ गई और वो खड़ी रही अगले 10 मिनट। कि मैं.
उससे कुछ ऐसी बात ना कर दूं कि वो उसको. कुछ एक मैसेज मिल जाए और वो उसको देखकर डर. रही है क्लियरली। नहीं नहीं दीदी मैं. बिल्कुल ठीक हूं। अरे अभी मैं इतना धुआं. क्यों है? अभी-अभी पूजा करी है, ये करा. है, वो करा है। बट आई नो शी इस बीइंग. ऑलरेडी फोर्स्ड इनू दिस ट्रेड।. सो ऐसी कहानियां बहुत होती है जहां पे हम. हेल्पलेस हो जाते हैं। हम बट दैट्स व्हाट. वी हैव टू एक्सेप्ट। पुलिस वाले सेक्स. वर्क सेक्स वर्कर जो होते हैं वो पुलिस. वालों को मददगार मानते हैं या परेशानी की. वजह। दोनों डिपेंड करता है किस टाइप के.
पुलिस वाले उस टाइम पे अपॉइंट हुए हैं। तो. ऐसे भी कुछ पुलिस वाले रहे हैं जो कि. जेनुइनली उनकी केयर करते हैं। और वो. जेनुइनली आते थे उनके बोलने पर। जेनुइनली. वो औरत की कहानी सुनते थे। बट ऐसे भी. पुलिस वाले हैं जो सिर्फ और सिर्फ पैसा. देकर यहां पर आते हैं। कमला मार्केट के. पुलिस स्टेशन की वैल्यू भी बहुत अच्छी है।. पैसा देकर आते हैं और उनको यह मकसद होता. है कि मुझे अपने पैसे को चार गुना करके. निकलना है। तो ऐसे भी पुलिस वाले हैं।. कितना जाता होगा हफ्ता? महीने का या महीने.
का पैसा पुलिस स्टेशन हर कोठे का अलग है।. कुछ कोठे से ₹00 जाता है। कुछ कोटों से ₹1. लाख जाता है। कुछ कोटों से ₹2 लाख जाता. है। हर कोठे का अलग है। जितने कोठे में. जितना बिजनेस है बड़ा उतना ज्यादा पैसा. जाएगा। क्योंकि वहां 77 कोटे हैं और 77. कोटों की कहानियां बहुत डिफरेंट है। कोई. दो कोठे सेम नहीं दिखेंगे आपको वहां पे।. किसी कोटे में जहां बहुत छोटी लड़कियां है. वहां पैसा ज्यादा जाता है। तो वहां पे. पुलिस वालों की ज्यादा सपोर्ट की जरूरत. है। क्योंकि छोटी लड़कियां है तो वहां. रेड्स नहीं पड़नी चाहिए। कुछ कोटे ऐसे हैं. जहां पे बूढ़ी औरतें हो चुकी हैं। अभी वो.
दे आर ऑल इन देयर 40ज। तो वो अपना अपने. हिसाब से कमरा चला रही हैं। उन्होंने अपने. दलाल रखे हुए हैं। तो वहां पे उनको इतनी. जरूरत ही नहीं पड़ती क्योंकि सभी एजेड. हैं। सभी के सभी उनको पकड़ कर भी लेकर. जाते हैं तो वो बोलते हैं मैं तो अपनी. मर्जी से काम कर रही हूं। तो वो कोर्ट में. भी जाकर बोलेंगी मैं तो अपनी मर्जी से काम. कर रही हूं। तो वहां पे रेड्स मारने का. कोई इतना पॉइंट ही नहीं है। ले जाओ पकड़. के। क्या ही होगा आपको? छोड़ना ही पड़ेगा. कुछ टाइम के बाद। थोड़ा मार लोगे, थोड़ा. पीट लोगे, थोड़ा पैसा ले लोगे। पर फिर तो. छोड़ ही दोगे। बट जिन कोठों में ज्यादा. रिस्क है वहां से ज्यादा पैसा जाता है और.
यह पैसा नेताओं तक भी जाता होगा। बिल्कुल. हमारी वन ऑफ द लार्जेस्ट इकॉनमी। आई थिंक. दिस इज़ आवर सेकंड लार्जेस्ट इकॉनमी इन द. कंट्री। सेक्स ट्रेड से जो पैसा जाता है।. तो इकॉनमी के लिए तो ये बहुत बड़ा अमाउंट. है। लेकिन वोट मांगने नहीं आते होंगे।. नहीं मैंने कभी नहीं देखा। एक बारी आग लगी. थी तो कुछ लोग आए थे। उसी रात में दो. कोविड के टाइम की बात है यह पीक कोविड के. टाइम की और थोड़ी देर के लिए आए और.
उन्होंने देखा अच्छा आप लोग पहुंच चुके हो. ठीक है ठीक है आपने इनके रहने का इंतजाम. कर दिया ठीक है हम खाना भिजवा देंगे वन. टाइम मील दे हैव सेंट फॉर श्योर वन टाइम. और वो औरतें वहां पे ऑलमोस्ट आई थिंक एक. हफ्ता रही हैं उस शेल्टर जैसी जगह पे. कोविड में मैंने नहीं देखा वहां पे ज्यादा. सरकार को पुलिस वालों की तरफ से कुछ-कुछ. ऐसे इनिशिएटिव्स थे कि खाना बना हुआ वो. लोग बांटते थे बट हर औरत तो नीचे आ ही. नहीं रही है। उसको आने ही नहीं दे रहे. हैं। कोठों के अंदर हर कोई जा नहीं सकता. है। तो हमें स्पेशल कार्ड मिले थे कि हम.
लोग जाएं और तो कोविड में सर्वाइव कैसे. किया इन कोठे वाले ने? एनजीओस और कुछ-कुछ. लोगों की मदद से। जैसे हम लोगों का टारगेट. था कि हम हर महीने में हमारा एक ट्रक जाता. ही जाता था और हमारे पास क्योंकि लिस्ट है. हर एक औरत की। किस कोठे में कितनी औरतें, किस एज ग्रुप की हैं। वी हैव दैट होल डाटा. विद अस। तो हम उस हिसाब से हर एक औरत को. सामान देकर आए थे। तो हमारे जैसे और भी एक. दो लोग हैं जिन्होंने राशन या सिलेंडर या. सब्जियां इस तरीके से पूरे टाइम पर. प्रोवाइड करी थी।.
बट दैट वाज़ अ वेरी ब्यूटीफुल पीरियड फॉर द. वीमेन। और क्योंकि जब मैं तब होठों में. जाती थी मुझे इतना मजा आता था बिकॉज़ दे वर. चिलिंग। मतलब फोन पे गेम्स खेल रही हैं।. मैंने कभी कोठे में लड़कियों को हंसते हुए. नहीं देखा है। क्योंकि दे आर ऑलवेज सो. बिजी। क्लाइंट आ रहा है। आपको पूरा मेकअप. करना है और उस टाइम पे नो मेकअप नथिंग. डूइंग। दे वर एक्चुअली लिविंग द लाइफ. व्हिच दे वांटेड टू। सो फॉर सम कोविड वाज़. अ ब्लेसिंग एंड जीबी रोड के लिए हां उनकी.
कमाई नहीं हो रही थी बट खाना तो मिल ही. रहा था ना। और उनको क्या चाहिए उस टाइम. पे? मतलब एक लड़की जब बिक चुकी है तो. एनीवेज उसको खाना ही मिल रहा है पूरे दिन. में। कुछ बैंक बैलेंस तो मिल नहीं रहा है।. तो वह टाइम मुझे बहुत मजा आता था। मतलब. मैं घंटों बैठती थी उस टाइम पे कोर्टों. में क्योंकि इतना चिल मारते थे हम लोग. बट दैट वास अ टेंपरेचर वहां से लड़कियां. वापस नहीं गई जैसे दिल्ली मुंबई से लोग जो. थे वो अपने-अपने गांव लौट गए थे कोविड में. कुछ औरतें गई थी कुछ जो थोड़ी उम्र में. बड़ी है जो छोटी लड़कियां वो तो नहीं जा.
सकती ना वो जा ही नहीं सकती बट जैसे कोविड. पीक जब था तो पीक कोविड में भी इनके. मालकिन ने छोड़ा नहीं नहीं क्यों छोड़ेगी. क्योंकि शहर बंद था दुनिया बंद थी नहीं. नहीं मतलब उसका तो उसको पता ही है ना कि. कोविड किसी ना किसी टाइम पे तो ये कर्फ्यू. खत्म ये सब कुछ खत्म होगा ही ना तो वो. क्यों करेगी नहीं करा ऐसा किसी ने भी. मालकिन खुद बहुत सारे कमरों से चली गई थी. और अपने-अपने घरों में रह रही थी बट यहां. पे बहादुर भैया और और लोग उन और लड़कियों.
के ऊपर पूरी नजरें थी उस टाइम पर भी कि. कोई लड़की भाग ना जाए। जो लोग यहां आते. हैं उनकी मेंटालिटी क्या होती है? आप खुद. ही इमेजिन कर सकते हो ना कि आप कैसे लोग. आओगे। तो वह इस उससे आते हैं कि मैं तो. ₹200 दे रहा हूं। मेरा जो मन करेगा मैं इस. लड़की के साथ करूंगा। मैं मार सकता हूं, पीट सकता हूं, काट सकता हूं, जला सकता. हूं। जो चाहूं मैं वो कर सकता हूं। बिकॉज़. आई हैव पेड ₹200।. सो वो उसी मेंटालिटी के ही लोग आते हैं।. जब वो ऊपर चढ़ते हैं मतलब अक्सर मैं भी.
देखती हूं मतलब मेरी भी बहुत बार वैल्यू. लगी है वहां पर कि अच्छा ये दे दो मुझे ये. वाली ये वाली लड़की मुझे अंदर भेज दो तो. मतलब मुझे ऐसा कभी-कभी मैं उनको देखती हूं. मैं बोलती हूं व्हाट काइंड ऑफ अपब्रिंगिंग. मतलब कैसे आप सोच सकते हो ना मतलब वो क्या. लेवल ऑफ थिंकिंग है आपका कि आपको लग रहा. है कि जितनी लड़कियां यहां पर हैं आई कैन. जस्ट बाय देम लाइक दैट देयर प्रॉपर्टी. सो. गलत गंदी सोच वाले लोग मुझे लगता है कि.
सेक्स वर्क सेक्स खरीदते हैं। पेनफुल. लड़के भी शामिल होते हैं लड़कों का भी कोई. ऐसा कोठा है इंडिया में? इंडिया मुझे नहीं. पता है दिल्ली में तो खासकर. मुझे नहीं पता है। मेरी इनफार्मेशन नहीं. है। बट नाउ बॉयज आर इंटू सेक्स ट्रेड।. जैसे एक फिल्म आई थी। मैंने कोई रिसेंटली. Netflix पे एक सीरीज आई थी। उसमें ये. दिखाया गया था। सो एमएसएम जो होते हैं मेन. हु हैव सेक्स विद मैन या जो ट्रांसजेंडर्स. होते हैं सीए टॉपर हां मुझे याद आ गया नाम.
सीए टॉपर नाम की Netflix पे एक फिल्म आई. थी हां जिस पे जो एक्टर हैं वो अलग-अलग. महिलाओं के पास जाते हैं उनका भी दिल्ली. में गोलोस बोलते हैं ना हां उनको भी. होटल्स उनके बुक होते हैं जहां पर एक. ऑर्गेनाइज तरीके से ऑनलाइन एप्स के थ्रू. वो जाते हैं हम वो है दैट्स व्हाट आई एम. सेइंग बट प्रोथल्स नहीं पता है मुझे आपने. बोला कि क्या लड़कों के भी कोई कोट कोठे. हैं। मुझे कोठे नहीं पता है। लेकिन इस तरह. की चीजें तो मैं भी फिल्म्स में ही देख. रही हूं। बट आई हैव नेवर मेट बट आई हैव. मेट एमएसएम मैन हु हैव सेक्स विद मैन या.
जो ट्रांसजेंडर्स हैं जो कि अब गर्ल्स बन. चुकी हैं। आप अगर अक्सर सड़क पे भी देखोगे. साइड पर अक्सर नाले वगैरह जहां पर होते. हैं जैसे गाजीपुर का नाला है। इन सब जगहों. पे आपको जनरली जो रात को लोग मिलते हैं दे. आर ट्रांस मैन। ट्रांस वुमन बेसिकली। सो. वो लोग होते हैं वहां पे। अ तो ऐसे लोग तो. बहुत हैं दिल्ली में इस वक्त पे बट क्या. उनके लिए कोठे हैं? जैसे जीबी रोड के. कोठों में मैंने कभी आदमी नहीं देखे हैं।. वहां ट्रांस वुमेन भी नहीं होती। नहीं. वहां ट्रांस वुमेन भी नहीं होती है। वहां.
पे सिर्फ एक एक ग्रुप ऑफ ट्रांसजेंड मतलब. एक ग्रुप ऑफ यूनक्स आता है बट ओनली टू. ब्लेस एंड टेक द मनी। बट वहां पर मैंने. कभी लड़कों का सेक्स वर्क होते हुए नहीं. देखा है। वहां पर लड़के दलाल बनते हैं। हम. तो जो बच्चा अगर मान लीजिए मां का बेटा है. बेटी को तो सेक्स वर्क में डाल देते हैं. लेकिन अगर बेटा है तो वो दलाल बन जाता है।. तो वो जब उसकी उम्र पहुंचती है नौ या 10. साल की वो तब तक वो नीचे चला जाता है अपनी. मां के लिए क्लाइंट लेने के लिए। तो वो. बोलता है इतने साल की है। इतने साल की है. चलेगा चलेगा चलेगा। एंड देन बाय द टाइम ही.
इज़ 14 15 वो खुद बहुत बार सेक्स कर चुका. होता है। उसका कोठे में अलग-अलग. गर्लफ्रेंड बन चुकी होती हैं। 15 16 साल. के लड़के का तो बच्चा पैदा हो चुका है। हो. जाता है मोस्टली बट पढ़ाई बहुत डिफरेंस कर. रही है। लाइक व्हेन कट एंटर्ड तो हम लोग. उसी टारगेट पे काफी फोकस करते हैं। तो अब. जो हमारे जितने भी बच्चे हैं दे आर ऑल आउट. ऑफ दिस ट्रेड नॉट इंटू दलाल नॉट इंटू. अल्कोहल नॉट इंटू ड्रग्स एंड दे आर डूइंग. समथिंग रियली ग्रेट इन लाइफ।. तो कोई ऐसी स्टोरी जो इंस्पिरेशनल लगती है.
आपको कोटिया से निकल कर। बहुत सारी. स्टोरीज हैं। लाइक हमारा एक बच्चा है. नोएडा में ही एक बहुत ही ब्यूटीफुल एकेडमी. है। मैं उसका नाम नहीं लूंगी क्योंकि अब. उस बच्चे को लगता है कि वो मेरी हिस्ट्री. हो गई है और मैं अब उस आइडेंटिटी के साथ. नहीं जाना चाहता हूं लाइफ में। वो बच्चा. उस एकेडमी में ट्रेनर भी है और वन ऑफ द. बेस्ट डांसर्स भी है। सीख भी रहा है वो उस. एकेडमी में।. वो निकल चुका है। उसने पढ़ाई पूरी करी है।. उसने सब कुछ अपना कंप्लीट करा है। हमारी.
एक बच्ची जिसकी मैं बात बता रही हूं जिसको. हमने गांव से रेस्क्यू करा था। उसकी बहन. अभी सीयूटी के एग्जाम्स की तैयारी कर रही. है और वो खुद अजीम प्रेम जी में जा चुकी. है। तो अजीम प्रेम जी यूनिवर्सिटी में वो. पढ़ रही है। उसका एक साल खत्म हो चुका है।. और अब छोटी बहन को भी या तो वो अजीम प्रेम. जी जाएगी। उसको वैसे ब्यूरोक्रेसी में. जाना है। उसका वह सपना है। उसको आईपीएस. ऑफिसर बनके जीबी रोड पर ही आना है। और वह. पढ़ने में बहुत ब्राइट है। तो वो दोनों. बहनें कर रही हैं। मतलब वो अजीम प्रेम जी. से फोटो भेजती है। एंड अपना रूम दिखाती. है। मैं आज सूफी नाइट में जा रही हूं। मैम.
मैं आज इधर जा रही हूं। इतनी ब्यूटीफुल लग. रही है और मैं कभी-कभी रिफ्लेक्ट करती हूं. कि अगर उस वक्त पे हम उस गांव में नहीं गए. होते तो आज वो शायद मुजरा कर रही होती और. वो. उस पूरे ट्रेड में अब तक क्योंकि अब वो 21. इयर्स की हो गई है तो अब तक तो वो पूरी. इसमें घुस चुकी होती पूरे तरीके से और. सरेंडर कर चुकी होती तो स्टोरीज तो बहुत. है हमारे बच्चों की अगर मैं अपने बड़े. बच्चों की एक बच्चा हमारा सिविल डिफेंस. ऑफिसर बन गया है जो उन्होंने पहली बार.
यूनिफार्म पहनी और उसने फोटो भेजी तो आई. वास लाइक ओ माय गॉड दिस इज पॉसिबल और उसने. अपने गांव में जिस गांव में बेड़िया. कम्युनिटी से ही वो बिलोंग करता है उसने. वहां पे अनाउंस कर दिया था कि मेरी कोई भी. बहन धंधे में नहीं जाएगी और आज उसकी बहनें. बाहर हैं। उसकी कजिन सिस्टर्स भी बाहर. हैं। वो खुद सबका ख्याल रखता है। बाहर. रहता है। ही इज़ मैरिड। ही इज़ अ फादर टू अ. स्मॉल बेबी। और वह अपनी सारी बहनों का. ख्याल रख रहा है। सो एजुकेशन और अगर हम. वहां पर हम बोल देते हैं अक्सर कि उन्हें.
तो आदत पड़ चुकी है ना धंधा करने की। अब. आप उनको बाहर भी निकालोगे तो वो निकलेंगी. नहीं। वो सस्टेन नहीं होंगी। तो मैं सुन. रही हूं पहले दिन से 14 सालों से। बट आइए. ड्रीम विलेज और देखिए उन औरतों को मौका. दोगे तो वो. दुनिया इधर से उधर करने को जो पोलियो वाली. मैं औरत की बात बता रही हूं। शी रिसेंटली. कंप्लीटेड हर ट्रेनिंग विद हल्दीराम्स एज. अ शेफ। शी वांट्स टू स्टार्ट हर ओन कार्ट।. कह रही मुझे कैफे खोलना है। मुझे कैफे. खुलवा दो। मैं देखना कहां से कहां पहुंचा. दूंगी कैफे। मौके ही नहीं देंगे अगर हम.
किसी को तो फिर उसके लिए कुछ भी बोल लो. आप। कंफर्ट ज़ोन में है हमारी सरकार। क्या. फ्यूचर देख रहे हो इन कोठों का सेक्स. वर्कर्स का इंडिया में? और बर्बाद ही. होगा। इफ वी विल नॉट टेक केयर ऑफ़ इट राइट. नाउ। इफ वी डोंट टॉक अबाउट इट। तो इसको. इसमें लड़कियां अभी 7 मिनट पे एक उठ रही. है। धीरे-धीरे 3 मिनट पे उठेगी और शायद. बहुत टाइम नहीं लगेगा कि ये हर घर तक. पहुंच जाएगा। हम बहुत समय नहीं लगेगा। हर. घर तक पहुंच जाएगा मतलब मतलब अभी हम बोल.
रहे हैं कि गरीब लोगों की लड़कियों को उठा. रहे हैं। हम बट शायद कल को हमारी भी. बच्चियां अनसेफ हैं। तो हमें वो नहीं. भूलना चाहिए। सोसाइटी में इट्स अ बिग. प्रॉब्लम जो अंदर ही अंदर से सोसाइटी को. होलो बना रही है। बट हम इस पर ध्यान ही. नहीं दे रहे हैं। क्योंकि. इट्स नॉट एन एजेंडा फॉर एनीबॉडी। बट वो भी. शायद ट्रैक करके उठाते होंगे कि ऐसे इंसान. को उठाओ जो शोर कम मचा पाए, अखबारों में. कम जा पाए, टीवी पर कम लाए। ऐसा नहीं है।.
बहुत सारी कहानियां आप स्कूल्स में. देखोगे, पब्लिक स्कूल्स में देखोगे।. लड़कियां तो मिस हो ही रही है ना हमारे. देश में। ऐसा तो नहीं है। बच्चे तो मिस हो. ही रहे हैं। इनफैक्ट अब तो और ज्यादा पहले. मुझे याद है हम अपार्टमेंट्स में रहते थे. तो हम आराम से घूमते थे नीचे। रात के. 12:00 बजे लाइट गई तो हम शोर मचाते थे।. लाइट चली गई। अब कंचकों पे हम लोग ओपनली. एक दूसरे के घर जाते थे। क्या अब सोसाइटीज. में वो है? नहीं है। डेंजर बढ़ चुका है।. हम लोगों को सबको पता है यह बात। अब हम. अपने बच्चों को ओपनली नहीं छोड़ पाते हैं।.
पहले हम छोड़ पाते थे। बट हम समझ नहीं पा. रहे हैं कि डेंजर जो बढ़ रहा है ये. एक्चुअली इसका बहुत रिलेशनशिप है ह्यूमन. ट्रैफिकिंग से। तो हमारी बच्ची को जब वो. उठाएंगे तो वो ह्यूमन ट्रैफिकिंग का. हिस्सा बन जाएगी हमारी बच्ची। बट कहानियां. बाहर नहीं आ रही है बहुत ज्यादा। पुलिस. वाले भी बहुत हद तक छिपा देते हैं इन. कहानियों को। ओके। अभी सेक्स वर्कर्स के. लिए सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
इज्जत ना मिलना उनको यह. उनको गलत तरीके से देखना कि वह एक धंधे. वाली है तो उसको क्या चाहिए लाइफ में।. उसके लिए उसके पास कोई अधिकार नहीं है।. उसके बच्चों के पास कोई अधिकार नहीं है।. वो एक आम जिंदगी जीना भी चाहे हम उसको तब. भी वो मौके नहीं दे रहे हैं। जिसके पास एक. कार्ड बनाने के लिए एक बैंक में अकाउंट. खोलने के लिए उसके लिए इतनी प्रॉब्लम्स. हैं। इंश्योरेंस वो नहीं कर सकती है।. मेडिकल इंश्योरेंस वो नहीं ले सकती है. क्योंकि उसके पास कुछ है ही नहीं। अम तो.
सोचिए मतलब इट्स लाइक टू सर्वाइव इज़ अ. बिगेस्ट चैलेंज फॉर हर टू सर्वाइव विद. रिस्पेक्ट इज़ अ बिगेस्ट चैलेंज फॉर हर टू. कम आउट ऑफ़ अ ब्रोथल इज़ अ बिगेस्ट चैलेंज. फॉर हर। तो एक छोटी सी बच्ची जो बिक चुकी. है वो वहां से बाहर निकल पाए और एक जिंदगी. जी पाए ये उसके लिए इंपॉसिबल है। इज़्ज़त. बहुत बड़ा बहुत बहुत बड़ा लफ्ज़ वहां इस. कॉन्टेक्स्ट में बात कर रहा हूं मैं। हम. सबके लिए अभी आपने पहले बोला ना कि नाम. सबके लिए इंपॉर्टेंट है। हमारे मतलब बोलते. हैं ना मतलब पैसा और खाना पीना तो एक तरफ.
है। शेल्टर भी एक तरफ है। बट सबसे बड़ी. चीज भूख होती है। पैसा लेकिन जब भूख मिट. जाए तो फिर इज्जत सबको प्यारी होती है।. इज्जत सबको प्यारी होती है। तो इंसान है. तो इज्जत तो वो चाहेगा ही। तब एक दीदी. बताती हैं कि वो जब सड़क पर भी चल रहे हैं. और अगर उनका किसी ने आधार कार्ड देख लिया. वो एक दीदी ट्रेन में गई थी और रात को. अपने गांव जा रही थी एक उम्र के बाद और. टीटी ने उनका जब आधार कार्ड आके चेक करा. तो जब वो रात में टॉयलेट गई तो पीछे पीछे.
चला गया और बोला क्या रेट है तेरा. एंड शी वास अशेम्ड एट दैट मोमेंट शी वाज. एंग्री एंड शी वाज हेल्पलेस एंड शी वाज. अशेम्ड कि मैं हर जगह रेट टैग तो नहीं लग. सकता मेरे ऊपर. बट क्योंकि जीबी रोड लिखा है उसके आधार. कार्ड पे तो रेट टैग तो उसके साथ ही चल. रहा है। तो इज्जत बहुत बड़ी चीज है और वो. यह चाहती हैं तो हमारी अक्सर दीदियों से. जब हम अभी बात करते हैं कि एक चीज जब. तुम्हारी जिंदगी में बदलाव आए तो बोलती है.
तो छोटे-छोटे प्रोडक्ट्स बनाती हैं। तो जब. कोई हमारे प्रोडक्ट को देखकर ये सुंदर. बोलता है ना तो हमें लगता है कि यह कोई. सपना पूरा हो गया हमारा। क्योंकि आज तक. हमें यह बोला गया था कि तुम सिर्फ और. सिर्फ सेक्सीी कर सकती हो। एक आदमी को. सेटिस्फाई कर दो। दिस इज व्हाट यू कैन डू।. दैट्स इट। बट अब जब हम चीजें बनाते हैं और. लोग उसकी तारीफ करते हैं और जब आप लोग. हमारी कहानियां इतने प्राउडली बताते हो तो. हमें जिंदगी में लगता है दिस इज इट। वी. डोंट वांट एनीथिंग एल्स।.
सो सबकी जिंदगी के अलग-अलग संघर्ष होते. हैं। बिल्कुल। मेडिकल इनका क्या होता है? क्या सेक्स वर्कर्स मेडिकली. इतनी वेल नोन होती हैं कि क्या सही है. क्या गलत है? नहीं।. जीबी रोड के कमरों में अगर आप जाओगे तो. हरा पत्ते और लाल पत्ते की गोली हर औरत खा. रही है। हर बीमारी का इलाज हरे पत्ते की. गोली है। क्या है ये हरा पत्ता? सैराडॉन. समटाइ्स कोई पेन किलर एंड दैट्स इट। जब वो.
तो एक कहानी मतलब एक बारी मैं ही एक कोठे. में थी और एक कोठे से मुझे फोन आया रात को. 11:00 बजे के आसपास कि ये दो औरतें हैं. मतलब एक औरत है और मरने वाली है तो तू. इसको ले जा यहां से किसी हॉस्पिटल में. इसका इलाज करवा दे तो मैं अगले दिन. सुबह-सुबह पहुंची वहां पे 7:00 बजे और वो. औरत बिल्कुल पतली एकदम बिल्कुल जैसे उनके. बॉडी में जान नहीं होगी शी वास् लाइंग ऑन. द बेड और उनकी बेटी भी वहीं पर ही थी और. उनकी बेटी ने बोला दीदी आप मेरी मम्मी को. बचा लोगे किसी तरीके से तो मैं उसको लेकर.
आने लगी हॉस्पिटल अपने कंधे पर डालकर तो. पीछे से आवाज आई बेटी भी मरने वाली है. इसको भी ले जा। सो मैं दूसरे दोनों को. अपने कंधों पर लेकर कोठे से नीचे उतरी. रिक्शे वाले की मदद ली। उसने उन दोनों को. और मुझे रिक्शे में उन दोनों को बिठाने की. कोशिश करी। हॉस्पिटल गई एंड दे वाज़ दे वर. स्केर्ड ऑफ़ गोइंग इनटू द हॉस्पिटल।. क्योंकि उन्होंने बोला कि वहां जाते ही. मुझसे पूछेंगे तू क्या करती है? तो आई सेड. लाइक आई एम देयर। सो डोंट वरी। सो मतलब, एंड व्हेन वी एंटर्ड देयर ददी वाज़ एट द.
लास्ट स्टेज ऑफ़ हर एचआईवी एंड टीबी। एंड द. गर्ल वाज़ आल्सो एट द लास्ट स्टेज ऑफ़ टीबी. एंड शी वाज़ 15 इयर्स ओल्ड। और उन लोगों को. उन कोठे वालों ने बोला था लड़की को कि अगर. तू धंधे पे बैठ जाती है तो तेरी मां का. इलाज करवा देंगे। अगर तू धंधे पे नहीं. बैठेगी तो हम तेरा इलाज और वो लड़की वही. उसी कोटे में पैदा हुई है। उसी कोटे में. बड़ी हुई है। तो वो काफी स्ट्रांग थी। मतलब. कुछ लड़कियां निकल जाती हैं तो बोलती है. मैं यह कर दूंगी, मैं वो कर दूंगी, मैं. क्लाइंट्स को मारूंगी, मैं पीटूंगी, मैं. चीखूंगी, मैं चिल्लाऊंगी। तो थोड़ा सा तो. कोठे वाले भी डरते हैं क्योंकि उनकी खुद.
की बेटी ही है वो। तो उसने मुझे वहां पे. हॉस्पिटल में जाकर बोला मैम अगर मैंने अभी. बोल दिया ना कि मैं धंधा करने को तैयार. हूं तो वो मेरी मां का इलाज करवा देंगे।. लेकिन मैं नहीं बोलूंगी। मेरी मां को तो. मरना है। आज नहीं तो कल वो मरेगी ही. मरेगी। लेकिन मुझे नहीं मरना है। तो मतलब. वो औरतें हॉस्पिटल जाने से डरती हैं।. हॉस्पिटल में अगर वह जाती हैं तो उनसे. पहला सवाल पूछा जाता है तुम क्या करती हो? यह बोलती हैं तो उनको उस उस चीज से डर. लगता है कि मैं डॉक्टर को फेस कैसे. करूंगी? तो दे एंड अप गोइंग टू छोटे-मोटे.
जो आसपास दवाखाने हैं पुरानी दिल्ली में. उन्हीं में से चली जाती हैं और ऐसी औरतें. मर जाती हैं वहां पे क्योंकि उनको सही. इलाज ही नहीं मिल रहा है। इनका फेनरल कैसे. होता है सेक्स वर्कर्स का? बहुत केसेस में. हमने ऐसा देखा है कि गांव भेज देते हैं।. जिस भी गांव से वो आई होती है मकान मालकिन. इतना कर देती है कि गांव भेज देती है। अब. गांव में जैसे भी हो तो कभी-कभी जैसे मान. लीजिए जब पता चल गया वो लास्ट स्टेज पर है. बिल्कुल तो किसी के साथ गांव भेज देगी और. पता चलता है पांच छ आठ दिन में वो मर गई.
तो गांव में फ्यूनरल हो रहा है। कुछ लोगों. का जब यहां पर होता है किसी की अगर डेथ. यहां पर हुई क्योंकि गांव में पता नहीं. होगा वो क्या कर रही है। हां तो अगर कुछ. लोगों का यहां पर हो रहा है डेथ हुई है तो. फ्यूनरल तो करती हैं कुछ औरतें जाती है. अभी रिसेंटली एक दीदी का मर्डर हो गया था. और तब हमने बोला कि हम भी चलते हैं उनके. फ्यूनरल में तो हमें मना कर दिया गया कि. नहीं आप मत जाओ हम ही जाएंगे नहीं पता. क्यों मना करा बट मना करा कि आप मत जाओ. वहां पे हम लोग करके आ जाएंगे.
वहां भी सेक्स वर्कर्स के बीच में भी. कास्ट रिलीजन ये सब होता है रिलीजन कास्ट. नहीं होता है लेकिन कंपटीशन होता है. क्योंकि सबको पैसा ज्यादा कमाना है। सबको. चाहिए कि मैं दिन में ज्यादा से ज्यादा. क्लाइंट्स ले लूं ताकि मेरे पास ज्यादा. एंड में पैसा आ जाए या मेरी मालकिन ज्यादा. खुश हो जाए। तो वहां पे वैसे ही लड़ाई. झगड़े बहुत हैं। सरप्राइजिंगली वहां हिंदू. मुसलमान ये सब चीजों का डिफरेंस नहीं है।. वो सब साथ में ही बैठती हैं। साथ में ही. उठती हैं। साथ में ही खाती पीती हैं। बट. जैसे मान लीजिए एक बिल्डिंग में. आमने-सामने दो कोट हैं तो वो दो कोठों में.
बहुत लड़ाईयां होंगी कि ये कस्टमर मतलब. वहां पे अगर एक लड़का कभी-कभी बहुत. एंटरटेनिंग भी होता है कोठों में बैठना।. क्योंकि कस्टमर आया और उसकी एक शर्ट इधर. से खींच रही और एक शर्ट इधर से खींच रही. और कस्टमर बेचारा एकदम परेशान हो रहा है. कि मैं बेचारा तो ये नहीं बोलूंगी मैं कि. मतलब मैं कहां जाऊं मुझे छोड़ दो टाइप. टाइप टाइप्स एंड फिर जो औरत जीतती है या. जो औरत धमकी दे देती है दूसरी औरत को तो. वो उसको जाने देती है उसके पास तो वो वाला. कंपटीशन वहां पर बहुत ज्यादा है और कुछ हद. तक बिकॉज़ दे आर ऑल ट्रोमेटाइज्ड तो वो.
इमोशंस उनमें काफी कम हो जाते हैं मतलब. पेन या कोई दीदी रो रही है या कोई दीदी. बीमार है तो वो बहुत बोदर नहीं करते हैं. वहां पे। ठीक है बीमार है चल बहाने मत मार. कस्टमर अटेंड कर। मतलब ऐसा वाला वहां पे. काफी ज्यादा वो रहता है।. काफी पेनफुल कहानी है इसमें।. कोई मिथ सेक्स वर्कर्स को लेकर जो समाज. में बहुत वायरल हो। यही कि सेक्स वर्कर्स. नहीं होंगे तो रेप्स फट जाएंगे। मुझे तो. लगता है यह बहुत बड़ा झूठ है जिसको हम सच.
मान कर बैठे हुए हैं इतने सालों से और. इसलिए हम आंखें बंद कर कर बैठे हुए हैं।. एक दिन में एक सेक्स वर्कर मैक्सिमम जैसे. जीबी रोड है यहां पे तो जीबी रोड में. कितने क्लाइंट मैक्सिमम सेक्स वर्क अटेंड. करते हैं जो मैंने सुना है वो 70. 70 मर्दों के साथ एक दिन में हम. जब आप बहुत यंग होते हो तो दे आर लाइक डेड. बॉडीज इन दैट वन डे तो जब इनिशियली इयर्स. में वो लड़की को उन्होंने इतना ड्रग्स. देके ऐसा रखा होता है कि वो मरी हुई होती. है आदमी आएंगे जाएंगे आएंगे जाएंगे आएंगे.
जाएंगे पे करेंगे आएंगे जाएंगे आएंगे तो. इनिशियल इयर्स ऑफ़ दैट गर्ल इज दिस मच ऑफ़. नंबर. 40 50 60 60 एवरेज क्या होता होगा? मतलब. मतलब एवरेज एक दिन में एक टाइम के बाद आके. तो मैंने आपको बोला ना दो-तीन भी मिल जाए. तो बहुत बड़ी बात है एक ऐज के बाद बट अगर. पीक एज में बात करें हम पीक एज में अगर हम. बात करें तो 15 से 18 रोज रोज.
20 पी मतलब रोज. एंड दे वर्क फॉर फ्यू आवर्स हां मतलब वो. अगर पूरी रात काम कर रही हैं तो फिर वो. पूरा दिन काम नहीं करती हैं कुछ औरतें वो. दिन में सोती हैं तीन चार पांच घंटे फिर. मेकअप अप करने में उनको समय लगता है। खाना. बनाना खाना खाना तो वो रात का समय मान. लीजिए वो रात को 8:00 बजे शुरू हुई है और. वो सुबह 7 या 8:00 बजे तक ये काम कर रही. हैं। तो वो उस टाइम पे इतने क्लाइंट्स ले. लेती हैं।. तो हम इसे कैसे ठीक कर सकते हैं? सेक्स. वर्कर्स की जिंदगी कैसे ठीक हो सकती है?
मुझे लगता है बातचीत कर कर क्योंकि अगर हम. बात करेंगे और इसको मुद्दा समझेंगे तो. शायद सरकार उठेगी और ये एक लार्जर लेवल. इश्यूज है। हम एनजीओस कोशिश कर रहे हैं पर. मुझे नहीं लगता है कि हम लार्जर लेवल पर. इसमें कुछ बदलाव लेकर आ सकते हैं। तो अगर. सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया है और अगर. लार्जर लेवल पर हम इसको एज अ पॉलिसी बना. दें और इंप्लीमेंटेशन किस लेवल तक जा रहा. है उसको भी अगर हम मॉनिटर करें और फॉलो अप. करें तो चीजें बदल सकती हैं। क्यों नहीं.
बदल सकती हैं? क्यों नहीं हमें इंश्योर कर. सकते हैं कि जीबी रोड के कोठों में 18 साल. से नीचे की लड़कियां नहीं होंगी। हम कर. सकते हैं यह इंश्योर। अभी यंगेस्ट लड़ी. कितनी बड़ी होगी वहां पे? पांच साल की. बच्चियां भी हैं वहां पे। छ साल की. लड़कियां भी हैं वहां पे। 12 साल की. लड़कियां जो मैंने आपको बोला है वो फुल. फ्लेजिड सेक्स वर्कर्स बन जाती हैं तो हम. ये इंश्योर कर सकते हैं लेकिन क्योंकि हम. इतने लेवल पे करप्ट हैं कि हमें पैसा आ. रहा है तो हमें लग ही नहीं रहा है कि हमें. तो मुझे लगता है बातचीत करना और एक्शन.
लेना चाहे हम छोटा-छोटा इन बच्चों को. क्यों नहीं एडमिशन मिल सकता है स्कूल्स. में मगर हम नहीं दे रहे हैं। मैं जब जब. कटकथा शुरू हुआ था तो मैं बहुत स्कूल्स. में गई थी और उन्होंने बोला हम तो. सेंसिटिव हैं लेकिन गीतांजलि हमारे टीचर्स. शायद सेंसिटिव नहीं होंगे या बच्चे. सेंसिटिव नहीं होंगे सो यू आई मीन यू मेक. देम सेंसिटिव. बट फिर पेरेंट्स सो वी हैव टू मेक द. पेरेंट्स सेंस अगर मैं कल को अपने बच्चे. को स्कूल भेज रही हूं और मुझे पता है कि.
वहां पे एक जीबी रोड का बच्चा भी पढ़ने आ. रहा है पढ़ने आ रहा है मैं क्यों उस बच्चे. को डिस्क्रिमिनेट करूंगी ना तो यह तो. सेंसिटिविटी हमें एज अ कंट्री लेकर आनी. पड़ेगी ना कि वो मेरी वजह से अगर मेरी मैं. अवेयर सिटीजन होती तो शायद लड़कियां ना. होती सेक्स वर्क में। बट क्योंकि हम लोग. आंखें बंद कर कर लगता है ना कि हम दुनिया. सुधारने थोड़ी ना आए हैं। हमारा बच्चा जो. है वो उनको लगता होगा वो शायद गलत संगत. में जा रहा है या चला जाएगा या ये सब उनका. ही बच्चा बहुत थोड़े सालों के बाद जीबी.
रोड के कोठों में जाएगा। ट्रू तो फिर संगत. आप डिसाइड नहीं कर सकते हो। लेकिन आप अपने. बच्चे को सेंसिटाइज कर सकते हो। आप अपने. बच्चे वो भी पढ़ने आए बेहतर तरीके से आप. नजरिया बदल सकते अगर आप उसे नजरिया दे दो. तो और वो बहुत इंपॉर्टेंट है हमारे लिए. बात करना हमारे लिए ये बात बचपन से ही. बताना कि तुम क्योंकि लड़के पैदा हुए हो. देयर फॉर यू डू नॉट हैव एक्स्ट्रा राइट्स. ओवर अ वूमन ये बात हम कब शुरू करेंगे करना. या कभी नहीं करेंगे और हमेशा लड़का होने.
पर मिठाई बांटेंगे और लड़की होने पर मातम. मनाएंगे ये भी बदल रहा है ना अब हम कहीं. ना कहीं किसी जमाने में तो हम ये नहीं सोच. रहे कि लड़की पैदा होने पर भी लड्डू बांट. रहे हैं मां-बाप। बट अभी बदल रहा है तो. बदलाव पॉसिबल है। बट हम करना तो चाहें।. आखिरी सवाल जीबी रोड के बारे में चार पांच. बातें जो लोग ना जानते हो। जीबी रोड पे हर. लड़की अपनी मर्जी से नहीं है। ओके। जीबी. रोड पे बच्चे होते हैं। अक्सर मुझसे सवाल. पूछा जाता है। वो वो भी माएं हैं। वो माएं.
हैं। उनके लिए सबसे बड़ा रिश्ता है उनका. बच्चा। वो अपने बच्चों को उतना ही प्यार. करती हैं जितनी एक कोई भी मां करती है। वो. अपने बच्चे के लिए जान दे सकती है और जान. ले भी सकती है जिसे और माएं करती हैं।. जीबी रोड पर कोई फैसिलिटी नहीं है। एंड दे. डिर्व फैसिलिटीज बट हम लोग आंखें बंद कर. कर बैठे हुए हैं।. और जीबी रोड पर. जीबी रोड गंगूबाई या हीरा मंडी जैसे कोठे. नहीं है। वहां पर अगर हम चढ़ेंगे तो मैं.
हम लोग जीबी रोड को प्यार का मोहल्ला. बोलते हैं। उसको बोलते हैं कि हमको उसका. नाम बदल के स्ट्रीट ऑफ लव कर देना चाहिए।. क्योंकि वहां पे चार मतलब 2500 2800 माएं. रहती हैं और एक घर में एक मां एक घर को घर. बना देती है। तो इमेजिन करिए अगर हम उन. औरतों को मां की नजर से देखना शुरू कर दें. या एक्चुअली एक औरत की नजर से देखना शुरू. कर दें तो जीबी रोड एक बहुत सुंदर एक बहुत. ही ब्यूटीफुल कम्युनिटी है। पर क्योंकि हम. उसको देखते ही एक ही नजर से मुझसे अक्सर.
लोग पूछते हैं तुम 12:00 बजे वहां रहती. हो। तुम्हें डर नहीं लगता? मुझे नहीं लगता. है क्योंकि वो औरतें मेरे लिए शील्ड बनकर. खड़ी हैं। वो मुझे फुल ऑन प्रोटेक्ट करती. हैं। बिकॉज़ दे आर ह्यूमंस फर्स्ट एंड देन. दे बिकम वैश्या. एंड दे वर फोर्स टू बिकम वैश्या बट दे आर. स्टिल ह्यूमंस एंड दे विल डाई एज ह्यूमंस।. सो आई थिंक इट्स वेरीेंट कि हम लोग उनको. इंसान की नजर से देखना शुरू करें।. आई होप जो लोग सुन रहे हैं शायद थोड़ा. नजरिया बदलेगा। बदलना पड़ेगा। अभी नहीं तो.
शायद कुछ सालों के बाद कोशिश हमारी यही थी. क्योंकि मुझे लगता है कि संवाद से चीजें. बेहतर होती है। बिल्कुल कम से कम बात तो. बिल्कुल अगर इस टॉपिक को करने के पहले ही. मैं आंख नाक कान बना लूं या कोई थंबनेल. देखकर नांक नाक कान बना ले तो फिर तो. बदलाव नहीं हो सकता। बदलाव करने के लिए कम. से कम समस्या को पहचानना जरूरी है। अगर आप. पहचानेंगे तो शायद देर से लेकिन समाधान. निकल आएगा। बिल्कुल बदलाव तो है ही. पॉसिबल। हम देख रहे हैं 14 सालों में जीबी. रोड से सक्सेस स्टोरीज निकलते हुए तो निकल.
सकती हैं पर देखने का नजरिया बदलना. इंपॉर्टेंट है। लवली टॉकिंग टू थैंक थैंक. यू सो मच।.
