Unplugged ft. General VK Singh | Talking About Agniveer | Bangladesh | Kargil | Kashmir| Corruption|
अग्निवीर के इशू पर आम जनता ने आरोप लगाया. कि नेता अपनी पेंशन मेंटेन रखते हैं देश. के सैनिकों के साथ गलत कर रहे हैं यह छोटी. समस्या नहीं मिड कोर्स करेक्शन करना. पड़ेगा क्या जनरल वीके सिंह को इंडियन. आर्मी चीफ के पद से हटाने के लिए उस दौर. की कांग्रेस सरकार ने देश की सुरक्षा को. खतरे में डाला चिट्ठी लीक वाले मामला जो. आप कह रहे थे और दूसरा जो यह तख्ता पलट. वाली बात हुई सच है आपको स्पष्ट आंसर. चाहिए बिल्कुल सही है क्या जनरल वीके सिंह.
को नरेंद्र मोदी की अगवाई वाली सरकार ने. वह सम्मान नहीं दिया जो उनके जूनियर्स को. जिसमें एस ज शंकर साहब है हरदीप पुरी साहब. अश्विनी वैष्णव जी आर के सिंह साहब उनको. कैबिनेट मिनिस्टर बनवाया लेकिन आपको छोटे. ओहदे पर मंत्री बनाकर रखा कांग्रेस के आला. कमान से भी रिश्ते आपके बहुत अच्छे नहीं. थे देखिए ऐसा है एंथनी साहब थे बहुत अच्छे. रिश्ते थे अगर यही बंड सोनिया गांधी या. मनमोहन सिंह के साथ में शेयर किया होता तो. आपको लगता है कि जो आपको सोनिया गांधी की. उसके सर भूमिका क्या है सरकार का हिस्सा.
तो नहीं थी जिनको लगता था वो सरकार का. हिस्सा व रिश्ते रख सकते थे अगर भारत. करगिल का युद्ध हार गया हो लद्दाख पूरा का. पूरा कट जाता वैली आपकी अलग हो जाती ऊपर. का हिस्सा कट जाता बहुत भारी नुकसान जनरल. विपिन रावत के साथ जब दुर्घटना हुई नाल. एक्सीडेंट था आपको लगता है कि उसम कोई. साजिश उस एक फिल्म आई थी अया आ उस फिल्म. में दिखाया गया कि कैसे भारतीय सेना के. अंदर भी करप्शन है वो फिल्म सच थी उसके.
अंदर फैक्ट थे व सच श्रीलंका आप लोग गए थे. आपको लगता है व फैसला सही था क्योंकि उस. फैसले की वजह से लोग मानते हैं कि राजीव. गांधी जी की बाद में हत्या कर दी शहीद. मेजर विभूति शंकर ढोडिया आपको याद हो गए. तस्वीर निकिता कॉल बारिश होती है और बारिश. में वो चीखती है. निकिता कॉल ने जब आर्मी जवाइन की महिलाए. आर्मी में आने लगी तो एक चीज जो हमने डिजन.
लिया वो यह था कि हमको खासकर उन वीरांगना. जिनके हस्बैंड नहीं रहे उनको मोटिवेट करना. चाहिए एक फिल्म आई थी कश्मीर को लेकर. कश्मीर में खुलेआम रेप हो रहे थे सारी. घटनाए सच है शत प्रतिशत सही है एक बड़ा. झटका आपने पाकिस्तान को और दिया था. बांग्लादेश में तकरीबन एक करोड़ लोग जो है. वो उसके अंदर खत्म हो गए बांग्लादेश में. बांग्लादेश में मेडिकल कॉलेज के अंदर. उन्होंने रेस इंप्रूवमेंट कैंप बना जितने. भी सैनिक थे उनसे वो रेप करवाते थे 90 पर.
गर्भवती थी उस समय नस्ल बदलने की कोशिश. यह कहते हैं कि अ सोल्जर इज नेवर ऑफ. ड्यूटी फौजी जो होता है वह कभी भी ड्यूटी. से हटता नहीं है और आज जिस फौजी को हम. लेकर आए हैं उन्होंने देश की सेना को लीड. किया है नाम जनरल वीके सिंह साहब रिटायर्ड. इंडियन आर्मी चीफ संसार के सारे अवार्ड जो.
है फौज के वो उनसे नवाजे गए हैं परम. विशिष्ट सेवा मेडल अति विशिष्ट सेवा मेडल. युद्ध सेवा मेडल लेकिन पहचान इससे कहीं. ज्यादा है एक पहचान आर्मी चीफ के तौर पर. है एक पहचान सियासी नेता के तौर पर है एक. पहचान उस जनरल के तौर पर है जो उम्मीदों. का जनरल है जिसने देश और विदेश में जब जब. भारतीयों पर मुसीबत आई तब तब यह बताया कि. सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटी थैंक यू सो मच. सर फॉर गिविंग टाइम बहुत-बहुत धन्यवाद.
न पीपल से थैंक यू फॉर र सर्विसेस मैं. उनको कहूंगा कि आप डिजर्व करते थे द नेशन. डिजर्व आवर सर्विसेस ट इज वई वी रेंडर्ड. आवर सर्विसेस बट आपकी बात सुनकर मुझे एक. बात याद आई मुझे लगा कि मुझे कहना चाहिए. कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त. देखिए पिक्चर तो जब तक जिंदगी पूरी नहीं. होती सबकी बाकी रहती है आगे क्या होगा. किसको नहीं पता ट्र और.
मुझे नहीं पता था कि मैं. पॉलिटिक्स में आऊंगा कभी सोचा नहीं था. पॉलिटिक्स से बहुत दूर था ना मेरे परिवार. में जो आपने कहा कि डायनेस्टी का कुछ होना. चाहिए कोई कोई नहीं हद आपके परिवार में छह. भाई बहन आप थे और सभी आर्मी में दादाजी. आर्मी में बहनों के भी हस्बैंड आर्मी में. सब सब फौजी कौन कौन है थ बताइए ना सर. फादर आर्मी में ओके दादाजी आर्मी में नाना. जी आर्मी में फादर के सब भाई आर्मी में.
उनकी सब बहनों के हस्बैंड आर्मी में मेरी. बेटी का हस्बैंड आर्मी में सुपर्ब सुपर्ब. तो. उससे पहले भी सब आमी में कहीं ना कहीं. उनको उनको सिर्फ आर्मी के चक्कर के अंदर. ही रहना था तो एक और शायद यही कारण था कि. हालांकि पिताजी चाहते थे कि हम. इंजीनियरिंग कर ले बिट्स के अंदर पर वह.
दिमाग के अंदर घुसा हुआ था फौज में जाना. है. तो उनके. इच्छा के विपरीत मैं कहूंगा बिना उनको. बताए एनडीए का फॉर्म भरा गया हाउस मास्टर. ने साइन कि गार्जियन वो है या दो साल में. तीन महीने को छोड़कर पूरे टाइम हॉस्टल में. थे. और. गलती से पास हो गए. फिर एसएसबी आया तो फादर को लिखा कि एसएसबी.
आ गया उन्होने कहा कौन सा एसएसबी कैसे तुम. एसएसबी में जा रहे हो एनडीए का एग्जाम पास. कर लिया उने कहा अच्छा ठीक है एसएसबी कर र. एक्सपीरियंस अच्छा है लेकिन उसके बाद. स्कूल चले जाना. एसएसबी करने गए एयरफोर्स का एसएसबी था मैं. एयरफोर्स कैट था. एसएसबी में पास हो गए मैंने क मेडिकल. कराया तो उन्होने कहा मेडिकल कराया मेडिकल. में भी पास हो गए उसके बाद मेरिट में भी.
नंबर आ गया अच्छा नंबर आया तो मैंने कहा. अब तो जाना है उन्होने कहा कहीं नहीं जाना. अपना संदूक उठाओ स्कूल में वापस. तो स्कूल में बड़ा मन के अंदर था इच्छा है. कि भ सब कुछ हो गया तो वहां पर जाकर जब तक. वह फ्रेश होने गए हमारे हेड मास्टर साहब. जो ते उन दिनों में हेड मास्टर बोलते आजकल. प्रिंसिपल है उनको मैंने कहा सर. इतने साल आपने मुझे देखा है क्लास वन से.
लेके क्लास 11थ के अंदर था मैं उस टाइम. मैंने कहा एक कभी आपसे कुछ मांगा नहीं एक. चीज चाहिए मुझे जाने दो. उन्होंने फिर दो घंटे फादर को समझाया. तब जाकर एडीए गए तो एक. कई बार चीजें अलग उसम होती है तो क्यों. आपको रोकना चाह रहे थे कि आप फौज में ना. चाहे मुझे नहीं पता उनकी उनकी शायद इच्छा. ये थी कि.
कोई तो इस रास्ते से दूसरी तरफ चले. और तो मुझे कुछ समझ में नहीं आता तो मुझे. लगता है कि उनकी इच्छा यह थी कि भाई असल. में थोड़ा गलती से पढ़ाई में थोड़ा ठीक था. मैं और 10थ बोर्ड के अंदर राजस्थान बोर्ड. के अंदर अच्छा जगह आई थी नेशनल. टैलेंट स्कॉलरशिप जो होती है उसकी चिट्ठी. आ गई थी कि भाई आपको य मिलेगी तो उनको लगा. कि भ ये पढ़ सकता है क्योंकि आमतौर पर एक.
लोगों के अंदर. धारणा होती है पढ़ने वाले आर्मी में नहीं. जाते. एक धारणा होती है हां मतलब शायद मेरे मन. में भी थी मुझे नहीं पता था कि एनडीए में. जाते ही इतनी ज्यादा किताबें मिलेंगी कि. मैं कहूंगा कहां आ गए. तो हम अक्सर बॉलीवुड में नेपोटिज्म की बात. करते हैं यहां तो लग रहा है कि फैमिली में. आप इंस्पायर हो. छह पीढ़ी सो एक सवाल जो सबके मन में आता. है कि जैसे देश में हम फौजी को देखते हैं.
तो हमारे ऑटोमेटिक हाथ सलूट करने आते हैं. फौजी होने का एहसास क्या होता है क्योंकि. आपका तो पूरा खानदान पिछली जनरेशन करेंट. जनरेशन और जिस तरह दिख रहा है फ्यूचर. जनरेशन भी देखिए फौजी होने का सबसे बड़ा. एहसास है कि आपकी जिंदगी जो है वह आपकी. नहीं है. आपने आपने अपनी जिंदगी दे दी और अब आप जो. है उसको उसी हिसाब से जिएंगे जिससे कि वो. जिंदगी सार्थक सिद्ध हो जिस परपस के लिए. आप है ये एक बहुत बड़ा एहसास है और मैं.
आपको एक छोटा सा एक. किस्सा बताता हूं एक हमारे ऑफिसर थे मेजर. जनरल थे उनका बेटा. मैनेजमेंट कर रहा था. फाइनल ईयर के अंदर था एमबीए के उस टाइम. कारगिल की. का युद्ध हुआ उसके बाद वो अपने आप शॉर्ट. सर्विस कमीशन को उसने भरा और जिस दिन जैसे.
मैंने बताया था उसने अपने फादर को कहा. मेरा एसस भी आ गया तो उन्होने कहा मैं. तुमको जैसे तुम क्लास. नाइंथ में थे मैं कह रहा हूं कि फौज में. जाओ तुमने कहा मुझे फौज में नहीं जाना. मुझे आपकी तरह नहीं बनना अब क्या हुआ तो. उसने कहा डैड. मुझे एक चीज का एहसास हुआ मैं कुछ भी बन. जाऊ मैनेजमेंट करके. लोग मुझे दूसरी तरफ से नहीं देखेंगे. पर अगर मैं यूनिफॉर्म में चलता हूं तो सब. लोग मुझे देखते हैं एक अलग एक एहसास है और.
मेरे ख्याल से लोगों के अंदर भी यह एहसास. रहता है कि भ ये फौजी है तो इसके अंदर कोई. ना कोई ऐसी भावना है जो अलग है. अब फिर मेरे मन में एक सवाल आता है सर और. यह बहुत ही कॉमन सवाल है एक पुलिस वाला भी. वर्दी पहनता है एक फौजी भी वर्दी पहनता है. फौजी में क्या ऐसा है कि नजरिया बदल जाता. है सेवा तो दोनों देश ही कर रहे हैं देखिए.
दोनों एक है पहली चीज. जो पुलिस में है उसका काम जिस तरह का. पड़ता है. उसमें ज्यादातर कमियां दिखाई देने लगती है. आप ऑनस से ऑनेस्ट पुलिस वाले को भी ले. लेंगे कोई ना कोगा नहीं जी जब फौजी है. उसके अंदर यह चीज कम दिखाई देती है. क्योंकि डायरेक्ट इंटरेक्शन नहीं हमारा.
रोजमर की डायरेक्ट इंटरेक्शन की बात नहीं. है सिस्टम ऐसा है. एक सिस्टम अलग है उस सिस्टम के अंदर. समर्पण की जो अगर हम क्वांटिटी ले व. क्वांटिटी उनके अंदर ज्यादा है दूसरी तरफ. है ठीक है रोजी रोटी का मामला है तो इसलिए. थोड़ा सा फर्क पड़ जाता है वो रोज रोटी का. मामला नहीं है आप. जो भी करते हो वो एक ही भावना से करते हो.
यहां पे चल जाता है. मैंने कई सारे फौजियों को देखा करगिल में. या उसके बाद ज हम टीवी पर कवर करते थे. जिनके बच्चे देश की रक्षा करते करते. वीरगति को प्राप्त हो गए लेकिन फिर भी. अगली जनरेशन जो है वह तैयार हो रही है फौज. में जाने के लिए कई बार रोजमर्रा की. जिंदगी में मेरे जैसे लड़कों के मन में. सवाल आता है कि लोग लॉन्ग डिस्टेंस. रिलेशनशिप नहीं चला पाते.
कि हमारी गर्लफ्रेंड दूर रहती तो हम कैसे. बात करेंगे एक फौजी आधा जीवन देश के नाम. पर सरहदों पर ऐसी जगहो पर जहां पर मूलभूत. सुविधाएं नहीं है वहां रहता है और परिवार. भी खुश है फक्र महसूस कर रहा है अगर. वीरगति को प्राप्त हु तो नई पीढ़ी जो है. वह भी कह रही कि मुझे भी वही करना है यह. क्या भावना यह भावना देखिए भावना सिर्फ एक. ही है और व भावना यह है कि जिस दिन. व फौज में जाता है. वो एक तरीके से यह लिख के जाता कि अब मैं.
हूं परिवार का जो भी मैं करूंगा लेकिन. मेरा मेन परिवार अब देश है मैंने उधर ही. काम करना है और इसी तरीके से जो वीर गति. को प्राप्त होता है सबको दुख होता है फक्र. भी होता है. लेकिन एक जो फौज का खुद का एक सपोर्ट. सिस्टम फौज एक परिवार है. वाकई में आप. हम लोग हमारे लिए एक लार्जर फैमिली फौज है.
सपोर्ट सिस्टम फौज है तो. वह हमारी जो वीर नारिया है. सब कुछ चला गया उस सपोर्ट सिस्टम के कारण. उनको लगता है कि परिवार अभी भी उनके साथ. है और. एक उनके अंदर तब तक भावना भर जाती है कि. भाई ठीक है मेरे पति मेरा भाई मेरा बेटा.
जो भी है वो चला गया मैं इसके आने वाली जो. पीढ़ी है उसको यहीं पर भेजना है ताकि जो. नाम वो पूरा नहीं कर पाए उस नाम को आगे ले. जा सके. एक. आपकी बात सुनकर मुझे वो एक ब्रेव लेडी याद. आ गई उनका मैं नाम मिस कर रहा हूं उनके. हस्बैंड वीरगति को प्राप्त हुए थे और. उन्होंने फिर पढ़ाई की उनकी वीडियो बड़ा. वायरल हुआ था वो अपने बारिश हो रही है और. अपने हस्बैंड.
को लेकर वो कस के रोती है तिरंगे में. लिपटे हुए और अभी उन्होंने रिसेंटली. एग्जाम क्रैक करके वो आर्मी में जवाइन. किया उन्होंने. ये. सिस्टम जब बना कि जब महिलाएं आर्मी में. आने लगी तो एक चीज जो हमने डिसीजन लिया वो. यह था कि हमको खासकर उन वीरांगनाओं को. जिनके हस्बैंड नहीं रहे उनको मोटिवेट करना. चाहिए ताकि वो आ सके. उनकी जिंदगी बन सके के उनका लगाव ना टूटे.
और वह अपनी देखभाल कर सकती यह तो बड़ा. मुश्किल होता है मैं. आपको एक अपने ऑफिसर की बात बताता हूं. कनल अवस. हमारी यूनिट के थे लेकिन कमांड की. उन्होंने फोर राजपूत. 62 के अंदर लड़ते हुए मारे गए छोटा सा. परिवार था लखनऊ में था परिवार दो बे.
उस टाइम इतना सपोर्ट सिस्टम नहीं था लेकिन. वह लोग बड़े हुए और उनमें से एक की शादी. भी फौज में हुई जी. यह जो कष्टदायक उस टाइम जो जिंदगी थी शायद. आज धीरे धीरे धीरे धीरे उसको फौज ठीक कर. पाई है उसमें कई चीजें जुड़ गई सपोर्ट. सिस्टम ठीक हो गया उस टाइम नहीं था और और. मेरा मानना है कि.
[संगीत]. उन जितना बहादुर. उन वीर नारियों जितना बहादुर और कोई नहीं. हो सकता जी जिन्होने अपना परिवार भी चलाना. है सब कुछ खो चुकी हैं और अगर सपोर्ट. सिस्टम ना हो तो कैसे वह संघर्ष करके अपनी. जिंदगी को और अपने परिवार को चला सकती है. उससे बड़ा मेरे ख्याल से त्याग कुछ नहीं. हो सकता ये खबर सर थी शहीद मेजर विभूति. शंकर ढौंडियाल आपको याद हो गए तस्वीर.
निकिता कॉल बारिश होती है और बारिश में वो. चीखती हैं और रिसेंटली उन्होंने अभी जब. आर्मी जॉइन की और वह तस्वीरें आई उनकी. फैमिली थी 21 दिन के लिए घर आने की बात. बहुत वो तस्वीरें ऐसी थी पुलवामा वाली जो. आपको अंदर से तोड़ देती है हम सबने मुझे. याद है मैं अपनी मम्मी के साथ बैठ के. तस्वीरें देख रहा था और हम फूट फूट कर रहे. थे उनकी बहादुरी को लेकर और निकिता कॉल ने. जब आर्मी जवाइन की तो हम सबके दिल से. निकला कि यह क्या भावना थी लोग रिश्ते.
तोड़ के चले आते हैं शी सो यंग बट. उन्होंने अपने पूरी लाइफ हस्बैंड को. डेडिकेट करती बहुत से बहुत से ऐसे और यही. एक. मैं कहूंगा कि. हमारे. सेना के अंदर और दुनिया की दूसरी सेनाओं. में अंतर है. जब हम. यूएसए के अंदर एक ट्रेनिंग कोर्स कर रहे.
थे और उनसे बात करते थे. तो हमने कभ आप कि दो महीने के बाद आप. छुट्टी मांगते हो बोले नहीं दो महीने हम. तो एक महीने के बाद मांगते हैं बड़ा. कष्टदायक जिंदगी होती है मैंने कहा हमारे. यहां तो सोल्जर जो तीन-तीन साल रहता उसके. बाद फिर कहता है कि और रखोगे तो मैं और रह. जाऊंगा मैंने कहा यह हमारे अंदर अंतर है. और उसके बाद फिर उनको कारगिल के बारे में. बताया कि किस तरीके से कल कारगिल है कि.
किस तरीके से. उस एल्टीट्यूड के ऊपर उन वजन के साथ उन. चट्टानी पहाड़ों के ऊपर कोई अगर चल सकता. है लड़कर उसको ले सकता है तो भारतीय सैनिक. और किसी के अंदर हिम्मत नहीं मैं करगिल का. जिक्र बाद में करने वाला था लेकिन कक आपने. जिक्र कर दिया साल 2019 में मुझे करगिल. जाने का स् भाग मिला 20 साल हुए थे तब.
करगिल को. करगिल में जब हम गए और ऊंची ऊंची. पहाड़ियों पर देखा तो जो हम किस्से सुनाते. थे टीवी पर कि हम नीचे थे वो ऊपर थे. उन्हें हाइट का फायदा था मुसीबतें कितनी. ज्यादा है गर्मी के दिनों में हम गए तब. हमारी हालत खराब थी ये जुलाई का महीना था. हम गए थे और ठंड में वो युद्ध लड़ा गया था. यही बताया गया कि सही से झूटे तक नहीं हुआ. करते थे उस दौर में वो सारे इक्विपमेंट्स. नहीं थे कि आप वहां चढ़कर जाओ लेकिन हौसला. था जज्बा था और हम वहां पर वह फतेह हमने.
हासिल कर ली अब मेरा एक सवाल आपसे आज है. कि अगर करगिल की वह लड़ाई हम हार गए होते. हम जीत गए कई सारी कमिया कहते हैं जीत. छुपा देती है अगर भारत करगिल का युद्ध हार. गया होता जिसके चांसेस उस प्लानिंग को. देखकर आज भी ऑफिसर्स कहते हैं क्या बदल. जाता भारत में सर देखिए आपका लद्दाख पूरा. का पूरा कट जाता. वैली आपकी अलग हो जाती ऊपर का हिस्सा कट. जाता आपका यानी कि.
स्ट्रेटेजिक तौर पर भी और टैक्टिकल तौर पर. बहुत भारी नुकसान होता बहुत भारी नुकसान. होता और शायद. यही एक. प्रेरणा का स्रोत था कि ऐसा नहीं होना. चाहिए कि सैनिकों ने अपनी जान पूरी की. पूरी लगा दी ऐसा नहीं होने देंगे ऊपर है. ठीक है. आप.
योगेंद्र यादव की कहानी कहानी सुन लीजिए. किसी की भी सुन लीजिए संजय की कहानी सुन. लीजिए मनोज पांडे मनोज पांडे की सुन लीजिए. बत्रा की सुन लीजिए जिस तरीके से लोगों ने. अपना बिल्कुल अपनी फिक्र नहीं की वो अपने. आप के अंदर एक बहुत बड़ी चीज है. थापर ट्रू उनके उनके फादर हमारे गुरु थे. मैं जब यंग ऑफिसर था मिला मैं कई बार टीवी.
शोज में कई बार उनसे मुला हु कनल थापर जो. है अब उनका जजबा देखिए. यह. मैं यह कहूंगा कि एक बहुत बड़ा नुकसान. होता हमारा. बट सर सवाल फिर य आता है कि पहली टुकड़ी. गई सौरभ कालि अगर मैं सही नाम कोट कर रहा. हूं वह गए और पाकिस्तान ने जब खबरें आई की. आंखें निकाल ली पूरे शरीर में बहुत पूरा. पूरा बहुत क्रूरता उनके ऊपर की. और मैंने उनके बारे में पढ़ा मुझे इतना. दुख हुआ कि वो अपनी पहली सैलरी भी नहीं ले.
पाए थे जस्ट आर्मी जवाइन की थी उन्होंने. बक और अपनी पहली तनखा भी नहीं ले पाए और. उनके साथ बर्बरता की सारी हदों को. पाकिस्तान ने पार कर दिया था र पाकिस्तान. के अंदर एक खासियत है बर्बरता करने की. यह उनके. सिस्टम में भरा हुआ. और. मैंने एक जिक्र भी किया है अपने पुस्तक के. अंदर 71 के अंदर जब हम बांग्लादेश के अंदर. थे हमने.
जहां पर हमला किया उसके बाद हम तेजी से. आगे निकल गए पीछे जब वो लोग पकड़े गए तो. एक यंग कैप्टन थे तो उन्होने कहा जी मैंने. तीन दिन से खाना नहीं खाया मुझे. मुस्कुराकर मैंने कहा कि तीन दिन से मैंने. भी खाना नहीं खाया. तो बोले आपने क्यों नहीं खाया मैंने कहा. आपको पकड़ने के लिए क्योंकि आप आप लोग भाग. रहे थे हम भी दूसरी तरफ से मैं हमारा. रास्ता लंबा था तो.
मैंने कहा मैं आपको कुछ देता हूं तो. इमरजेंसी रैशन के तौर पे हम लोग शक्कर. पारे लेकर चलते थे आजकल तो थोड़ा चीजें. बढ़ गई है बहुत से ऐसे उत्पाद मिलते हैं. पर वो अ फौज का स्टैंडर्ड रशन जो था नमकीन. और मीठे शक्कर पारे आपके साथ चलते रहते. हैं खराब होते नहीं है कभी भी आप खा सकते. हो उसको तो मैंने अपने निकाले उसको हाथ से. दिए वो लेकर बैठ गया थोड़ी देर में.
बाकियों से बात करके आया उसने खाया नहीं. मैंने कहा क्या बात हो गई फिर मुझे कुछ. ऐसा लगा कि इसको शक है कि कहीं इसमें जहर. तो नहीं है मैंने उसमें से एक उठाकर खाया. मैंने कहा इसमें जहर नहीं है ये मेरा राशन. वो रोने लगा उसने कहा जी हम लोगों को कहा. गया है कि तुम अगर बंदी बनोगे तो तुमको. उल्टा टांग मारेंगे यह करेंगे वो करेंगे. और कुछ खाना मत क्योंकि जहर दे देंगे उसके. अंदर.
तो बहुत देर तक रोता रहा बो हमने पता सोचा. भी नहीं था कि हमारे साथ ऐसा मानवता वाला. व्यवहार होगा. उनके अंदर भरा जाता है. कि आपने जब तक आप बर्बर नहीं हो गए क्रूर. नहीं हो गए तो आप. यानी कि आपके लिए तो दुश्मन जो है उसके. साथ पूरी पूरी क्रूरता होनी चाहिए बहुत. इंसिडेंट है बहुत इंसिडेंट है मैं जब उस. घटना में गया सर उस जगह पर तो मेरी वहां. पर एक ऑफिसर से बात हुई तोन ऑफिसर ने कहा.
कि मुशर्रफ एक आर्मी चीफ के तौर पर. ब्रिलियंट थे उस प्लानिंग में और मुझे. बड़ी हैरानी हुई कि इंडियन आर्मी का एक. सीनियर ऑफिसर यह बात कह रहा है उन्होंने. कहा कि हमारे फौजियों का जज्बा था जो बात. आपने कही कि भारत कट जाएगा इन इन हिस्सों. से इसलिए हम जीत गए वो युद्ध वरना. प्लानिंग के पॉइंट ऑफ व्यू से मुशर्रफ. ब्रिलियंट था किसी को अंदाजा नहीं लगता. ठंड के महीनों में और अगर तीन-चार महीने. वो और वहां रह जाते गर्मियां आती तो फिर. लगभग असंभव सा था मैंने फिर आपको भी कहीं.
कोट करते हुए देखा मुशर्रफ को क्या. मुशर्रफ वाकई में ब्रिलियंट थे और अगर थे. तो फिर पाकिस्तान हारा इसमें इसमें. ब्रिलियंस की वो नहीं थी. सबसे. शांत सेक्टर. कारगिल का सेक्टर यहां पर लाइन ऑफ कंट्रोल. जो है वह शिखरों के ऊपर से जाती है अगर आप. किसी शिखर पर बैठ गए तो हम लान कंट्रोल. वायलेट कर दी इसलिए कोई वायलेट नहीं करता. था तो यहां पर कुछ होता नहीं था यानी.
यह कहना चाहिए कि बाकी लाइन ऑफ कंट्रोल के. सेक्टर जो हैं वहां पर कुछ ना कुछ छुटपुट. जरूर होता था कारगिल के अंदर नहीं होता था. और. उस इलाके को चूज करना हम उसके बाद तैयारी. करना और उस तैयारी का हमको पता ना चले. उस फैक्टर को भी आप डाल लीजिए. तो. उनको सक्सेस मिली.
और मेरा अपना मा मत यह है कि इतनी सक्सेस. मिलनी नहीं चाहिए थी यह सवाल उठना चा कैसे. इतने समय तक पता नहीं लगा हमें कि वो आए. बकर बना लिए कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं. इंटेलिजेंस के फेलियर हर युद्ध के अंदर. हुए. क्योंकि जिस तरीके से इंटेलिजेंस का ढांचा. है. सरहद के पार की खबर कोई एजेंसी देती है. सरद के इस तरफ दूसरी एसी होती है मिलिट्री. इंटेलिजेंस का दूसरा काम है तो तालमेल.
समन्वय. नहीं है और इसीलिए गड़बड़ होती है अगर. तालमेल और समन्वय होता. इतने हेलीकॉप्टर सामान ला रहे थे इतना. वहां पर. सब सप्लाई स्टॉक की जा रही थी इतना कुछ हो. रहा था. और उनको भी पता था कि जब बर्फ ज्यादा हो. जाती है तो आगे की पोस्ट वेकेट करते हैं. वो भी करते हैं हम भी करते हैं एक यूनिट. थी जिसके सीने का अबकी बार मैं नहीं वेकेट.
करूंगा लोग उस पर नाराज हो गए यहां तक. नौबत आ गई कि आपको कोर्ट मार्शल हो जाएगा. लेकिन शुकर है वह टिके रहे वहा पर तो उस. इलाके में बच गए नहीं तो उस इलाके के अंदर. भी आकर बैठ सकते थे और फिर और ज्यादा. दिक्कत होती तो यह जो इंटेलिजेंस का जो. फेलियर है ये आपको हर हमारी क्या हमने. करगिल में शुरू में भी लापरवाही भरती सौरभ. कालिया वाला डेंट क. मैंने पढ कहा गया नहीं कुछ लोकल टेररिस्ट.
है या कुछ गरिए है बहुत सारी बातें निकल. कर आई थ्रेस तो वही थी जो हमारे जो गुर्जर. बकरवाल वगैरह थे जिन्होंने खबर दी तो. उन्होने खबर तो यही दी कि कुछ लोग हैं. वर्दी में नहीं थे लेकिन हथियार वगैरह थे. तो यह जो एक. जो मुस्तैदी आनी चाहिए थी. अच्छा ठीक है टेररिस्ट है होंगे चार पाच छ. सात उनको हम भगा देंगे लेकिन लोग भाग.
ज्यादा थे यह कहीं ना कहीं पे एक. इंटेलिजेंस फेलियर था करगिल सियाचिन का. बदला लेने के लिए था या कश्मीर केशु को. दोबारा स्टार्ट करने के लिए था नहीं. सियाचिन का बदला नहीं था सियाचिन का. सियाचिन की एक अलग चीज है बट वो हार तो. पाकिस्तान के दिल में रही ना हां नहीं. लेकिन कारगिल जो है अगर आप देखें जब तक. कारगिल नहीं हुआ था कश्मीर. जो है वो ठंडे बस्ते में जा चुका दुनिया. की निगाहो.
ज्यादा उसके ऊपर कुछ नहीं होता था चीजें. जैसी है वैसी है थोड़ी बहुत छुटपुट लाइन. ऑफ कंट्रोल पर फायरिंग होती है व कोई उसके. ज्यादा वह नहीं थी अहमियत नहीं थी एक तरह. से. स्टेबिलिटी थी उस स्टेबिलिटी को तोड़ने का. जरिया मुशर्रफ ने अपनाया. वो कारगिल का था बहुत नी डीपर प्लानिंग थी. लंबा सोच के. कारगिल की जो लोकेशन आप गए हैं आपने देखा.
होगा जी. हमारा नेशनल हाईवे व पहाड़ी से डोमिनेट. होता है और कोई रास्ता निकलने का नहीं है. आप छोटी बैठे तो आप हाईवे डिस्ट्रॉय कर. सकते अच्छा वो वहां से अगर हाईवे आपका. डोमिनेट हो जाता है कोई उस पर निकल नहीं. सकता है सप्लाई लाइन कट जाती है तो आपके. पास दिक्कत है कि नहीं आप यहां से कुछ भेज. ही नहीं सकते. [संगीत]. एक बहुत बड़ी समस्या थी और मैं तो कहूंगा.
कि. देश को आभारी होना चाहिए उन सैनिकों के. लिए जिन्होंने अपना सर्वस्व वहां पर दे. दिया लेकिन. भगा दिया ट्र एक खबर सर और आई थी कि. पाकिस्तान ने अपने सैनिकों की डेड बॉडी को. ओन करने से मना कर दिया था बिल्कुल. क्योंकि उन्होने क्या किया कि एनल जो थी. उसको उन्होंने दिखाने का दिखाने की कोशिश. की कि वो रेगुलर नहीं है और वो टेररिस्ट. है उन्होंने भी वो हमने कहा कि हमने शुरू.
में कहा कि टेररिस्ट है उन्होंने दिखाने. की कोशिश की कि टेररिस्ट है सिविल कपड़ों. में थे और. इसलिए उनको वापस नहीं लेना चाहती थ. कुछ जगह पर वापस भी हुए लेकिन कई जगह पर. उनको हमें दफनाना पड़ा. कई सारे पाकिस्तानी जर्नलिस्ट को मैं कभी. कॉलम लिख देता हूं वो कहते हैं करगल हमने. जीती थी वो उनका एक अलग कोशिश करते बताने. की. ऐसा है कि वो हमेशा हमेशा ऐसी बात कहेंगे.
अच्छा वो हर युद्ध को कहते हैं क् हर. युद्ध हमने जीता था वो उनके उनके दिमाग. में भर दिया गया है उनके यहां तो इतिहास. की किताब जो शुरू होती है बचपन से उसमें. यही होता कि वही सब कुछ थे दुनिया में और. कोई नहीं था. लेकिन एक बड़ा झटका आपने पाकिस्तान को और. दिया था बांग्लादेश में बांग्लादेश मैं. आपकी भूमिका अच्छी थी महत्त्वपूर्ण भूमिका. आपकी थी बांग्लादेश का एक अलग वो था. जिस तरीके से चीज चली वहां पर और जिस.
तरीके से शेख मुजीब रहमान को कैदी बना. लिया गया एक. अलग संस्कृति थी अलग सब कुछ था व्यवहार. उनके साथ. गलत था और इसमें भुट्टो की बड़ी वो रही कि. तो कौम गलत है यह तो मैंने एक स्टोरी कीप. की हां तो और उसके बाद जब उनको दबाने की. जो कोशिश की गई. लोगों का तो मानना यह है कि तकरीबन एक.
करोड़ लोग जो हैं वो उसके अंदर खत्म हो गए. बांग्लादेश में बांग्लादेश में. एक करोड़ से ज्यादा तो हमारे यहां दौड़कर. आए जि जिन्होंने जो शरणार्थी बने ट्र तो. और वो जो बर्बरता जो थी वो इसीलिए भारत को. जाना पड़ा मैंने सुना कि बहुत सारी आर्मी. के जो कैंप थे वहां पर महिलाओं के कपड़े. मिले थे रेप बहुत किया गया था बांग्लादेश. की महिलाओं के साथ ब बहुत कुछ एक उस टाइम. किताब लिखी थी पाकिस्तानी जर्नलिस्ट थे.
गोंजाल्विस पाकिस्तानी. जर्नलिस्ट उनकी किताब थी रेप ऑफ. बांग्लादेश. उसको कभी आपके हाथ लगे तो उसको पढ़िए मैं. जरूर कोशिश करूंगा पढ़ने की पाकिस्तानी. जर्नलिस्ट बाद में उन्होंने पाकिस्तान. छोड़ दिया इसके बाद लेकिन किताब उनकी. निकली थी मेरे ख्याल से. अगर मैं गलत नहीं होगा तो 72 में वो किताब. निकली थी आप तो वहां रहे हैं बांग्लादेश. में सेवाए दी है आपने अपनी आंखों से वहा. क्या देखा वो बरता आपने देखी जो आप बता.
रहे हैं वो देखी भी सुनी भी और एक मैं. आपको उसमें बता सकता हूं कि जब चिट गंग. पहुंचे. हालांकि बंगाली में वो लोग चौट ग्राम. बोलते हैं उसको सब चिट गंग बोलते तो चिट. गंग के अंदर पहले दिन जब हम लोग गए तो अलग. अलग जगह पर. जाना था तो उसमें जो. उनका जो मेडिकल कॉलेज था. वहां पर हमारी टुकड़ी गई उसके साथ थे वो.
मेडिकल कॉलेज के अंदर उन्होंने रेस. इंप्रूवमेंट कैंप बना रखा था थोड़ा सा अगर. आप हमारे दर्शको को आप डिटेल समझा पाए रेस. इंप्रूवमेंट कैंप का मतलब था कि वहां पर. एक जगह पर सब महिलाएं थी जिनको. अपने उनके जितने भी सैनिक थे उनसे वह रेप. करवाते थे. और उनमें से मैं यह कहूंगा कि तकरीबन. 90 पर गर्भवती थी उस समय नस्ल बदलने की.
कोशिश और जब उनके पास गए तो वो उन्होंने. कहा कि अपना हथियार हमको दे दो ताकि हम. अपने आप को मार सके हमें जीना नहीं है. बर्बरता बहुत हुई है उसको दिक्कत क्या है. कि अ. बाद में एक अलग. चीज हुई जब. शेख मुजीबुर रहमान की हत्या हुई पूरे.
परिवार को उस टाइम पर मार दिया गया एक. नैरेटिव बना पाकिस्तान की तरफ से बड़ी. कोशिश की उन्होंने कि इन सब चीजों को दबा. बोले यह तो कुछ हुआ ही नहीं ऐसा कुछ नहीं. हुआ यह तो सब. इंडिया जो है भारत जो है वह इसके बारे में. बोलता रहता है ऐसा कुछ नहीं हुआ हम तो. बड़े अच्छे तरीके से हमने लोगों को रखा. जैसे. लेट जीलानी साहब बोलते थे ना कश्मीर के.
अंदर कि बारा मूल में कुछ नहीं हुआ लेकिन. इतिहास हम सबको पता सात दिन तक वहां पर. लूटपाट और रेप हुई. व तो कहते यह तो सब इंटेलिजेंस एजेंसियां. बोलती है कुछ नहीं हुआ तो यह एक और किसी. ने उसको नैरेटिव को तोड़ने की कोशिश नहीं. की और शायद इसी का असर है कि जो मौजूदा. बांग्लादेश की पीढ़ी है कई बार जब मेरे. दोस्त क्योंकि हमारे कई सारे मित्र कॉलेज. में हुआ करते थे तो जब बांगलादेश देश वो. गए तो मुझे एक दो किस्से मैंने उनसे सुने. तो उन्होंने कहा कि एक बार इंडिया का मैच.
चल रहा था पाकिस्तान के साथ तो मैंने ियर. किया तो सब मुझे बड़े ऑकवर्ड तरीके से. देखने लगे हमने जो इतिहास पढ़ा था वो यह. पढ़ा था कि हमने बांग्लादेश को आजाद. करवाया वहां के लोगों की मुसीबतों से. बचाया उनकी महिलाओं को रेप होने से बचाया. लेकिन वहां की जनरेशन जो नई जनरेशन है वो. आज इंडिया ज्यादा अपने आप को पाकिस्तान से. करीब पाती है जब इंडिया वर्सेस पाकिस्तान. होता है वही है ना कारण उसका है देखिए अ. शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद. जो लोग.
शासन में आए. उन्होंने पाकिस्तान की मदद ली. पाकिस्तान की आईएसआई तेज हुई अलग-अलग. कट्टर पंथी संगठन वहां पर खड़े हुए और उन. सबने लीपापोती इतनी अच्छी की कि जो जनरेशन. आई वह तो यह सोचते रहे कि यह कुछ हुआ नहीं. और जिस तरीके से अगर आप इजराइल को ल जिससे. उन्होंने होलोकास्ट म्यूजियम बनाया है. शायद वैसी किसी चीज की जरूरत थी कि लगभग.
समझ सके उनके साथ हुआ क्या है हुआ क्या था. नहीं पता उनको. व ठीक है जो. मुक्ति जोधा है या उनकी फैमिलीज हैं या उस. टाइम के जो लोग हैं उनको पता है लेकिन. बाकी सब दो जनरेशन बाद लोग भूल गए कोई. फर्क नहीं पड़ता अच्छा ये आप. पूरे हमारे इस भूखंड में हमारे य भी कुछ.
हो जाएगा कुछ दिनों के बाद कुछ हुआ नहीं. भूल जाते बहुत जल्दी भूलते हैं. चीज याद नहीं रहती यह. लोग कहते कि अभी अब समय बदल चुका आवाज. आपके इतिहास में आपके साथ क्या हुआ एक. करोड़ से ऊपर अधिक लोग मर गए लाख महिला का. बलात्कार हुआ नहीं जानना चाहते हम लोगों. को पता जो उस टाइम गए थे क्या देखा वहा पर. वो जो सर 900 प्लस सरेंडर वाली कहानी आती. है एक बड़ी अच्छी तस्वीर आती है इंडियन.
आर्मी के पीछे पाकिस्तान के जनरल ऐसे खड़े. हुए हैं सर झुका है जो अक्सर हम 14 15. अगस्त को एक्सचेंज करते रहते हैं एक दूसरे. से देखिए हम जब. जब अनाउंस हुआ कि सरेंडर होगा सरेंडर हुआ. उसके बाद जहां जहां जो लोग थे उनका सरेंडर. लिया हम लोगों ने चिट गंग के अंदर सरेंडर. लिया तो हम लोग पहाड़ के अंदर से चिट गंग. की तरफ जा रहे थे और. एक रोड थी जो कि कोस्ट समुद्र से ज्यादा.
दूर नहीं है पहाड़ियां थी रोड थी उसके. नजदीक समुद्र था तो हम लोग जंगल में से. निकले और पहली जगह जब हम पहुंचे तो वह थी. पाकिस्तान टोबैको कंपनी जैसे इंडियन. टोबैको कंपनी है उसके जो मैनेजर थे वह. अंग्रेज थे व पहुंचे उन्होंने कहा कि हम. आपको ब्रेकफास्ट वगैरह देते हैं जगह मिली. कि किसी को नहाना है तो नहा सकता है हालत. जैसी थी दो-तीन दिन से चल रहे थे जंगल के.
अंदर से उसके बाद हम लोगों को बोला गया कि. भाई फला जगह पर आप जाएंगे तो आपको वहां पर. पाकिस्तानी सेना के लोग मिलेंगे वो आपको. लेकर जाएंगे ताकि आप वहां पर जाके सरेंडर. ले सके. हम वहां पर पहुंचे तो स्टार्च लगी हुई. यूनिफॉर्म बढ़िया. स्मार्ट कपड़ों के अंदर उनके दो अफसर मिले. और हम लोग वही क्या कहते हैं. यूनिफॉर्म जिसके रंग उतरे हुए थे जंगल से.
चल के आ रहे थे लड़ाई की हालत थी. और लोग खड़े हुए थे वहां पर बहुत सारे. दोनों के बीच में फर्क साफ था एक वो जो कि. बांग्लादेश को बचाने आए थे और एक वो जो. शोषण कर रहे थे तो ये. मैं यह कहूंगा कि. फर्क यह था कि एक वह थे जो कि अपने आप को.
राजा समझते थे और एक वह थे जो कि उनके साथ. मिलकर एक नए देश को बना रहे थे बहुत बड़ी. चीज मेमोरी आप लोग के जहन में अभी भी गुस. बम वाली होगी सर बिल्कुल वो जा नहीं सकती. चीज. कितनी बड़ी फौज सरेंडर कर रही है इतिहास. में इतनी बड़ी फौज और उनके जो जवान जो थे. वो कहते थे जी कि अगर. इंडियन आर्मी के ऑफिसर हमारे साथ होते. तो हमको कोई जीत नहीं सकता था.
साफ कहते थे. एक फर्क है क्योंकि हमारे यहां इसीलिए आप. देखेंगे कि अगर आप सैन्य इतिहास उठाए. दुनिया का सबसे ज्यादा यंग ऑफिसर्स की अगर. कैजुअलिटी होती है वह भारतीय सेना में. होती क्योंकि सबसे आगे चलता है कारगिल का. आपने गए आपने देखा होगा पीछे नहीं रुकता. वो और एक टास्क खत्म फिर और मांगते हैं.
कैप्टन विक्रम बत्रा की कहानी हम सुनते. हैं उनके टास्क खत्म हो गए थे बिल्कुल. उन्होंने कहा ये दिल मांगे और चाहिए मुझे. एक अगला सा ये एक जो भावना है हमारे उसके. अंदर यही विजय दिलाती है. और यही चीज है जो. हमारे जवान के अंदर भी एक चीज पैदा करती. है कि देखिए सर हमारे साथ रहेगा.
वह हमको ऐसा कोई काम नहीं बताएगा जो वो. खुद नहीं कर सकता ट्रू ये फर्क है और शायद. इसीलिए उस अफसर को देखकर तन मन धन समर्पण. होता है ब बिल्कुल सर यहां बांग्लादेश में. आप लोगों ने फतेह हासिल कर ली बहुत आज व. दुनिया हमेशा उसके बारे में जिक्र करेगी. और वह तस्वीर कभी भी गायब नहीं होगी तो वो. तो एक फक्र का विषय उसके बाद श्रीलंका आप. लोग गए थे आपको लगता है वो फैसला सही था. क्योंकि उस फैसले की वजह से लोग मानते हैं. कि राजीव गांधी जी की बात में हत्या कर दी. गई.
एलटीटी एलटीटी ने हत्या की वह. है वो लेकिन. हम यह कहे कि. फैसला जो है जो लिया गया. उसके अंदर एक त्रुटी थी. जो समझौता हुआ वह श्रीलंका सरकार और भारत. सरकार के बीच बीच में हुआ वहां पे लड़ाई. किसकी थी त एलटीटी की और श्रीलंकन.
श्रीलंका सर उनके बीच में कोई एग्रीमेंट. नहीं था. हमने ज जिम्मेवारी ले ली अपने आप नहीं जी. हम एलटीटी को जो है कंट्रोल करेंगे वो गलत. था. हम और उस चीज को फिर ध्यान में नहीं रखा. गया अ. देखिए कई बार कई चीजें होती हैं जिसमें. कैसे अ. फैसला लिया जाता है उसमें बहुत से.
प्लेयर्स होते हैं. और. जो हम जैसे उस टाइम. मैं कंपनी कमांडर की हैसियत से गया था. उसके बाद सेकंड हैंड कमांड बना और पूरे दो. साल हम रहे. शुरू में तो हम किसी को यह नहीं पता था कि. जाना कहां एक जगह गए उससे टिंको मली में. उतरे रात को वहां पर रुख अगले दिन बोला. गया बुनिया चले जाइए वगनिया से उनिया में. दो दिन अपनी सब तैयारी की उसके बाद हुकुम.
आया एलीफेंट पास चले जाइए एलीफेंट पास पर. पहुंचे तो कहा गया कि एक टुकड़ी जाफना की. तरफ चलेगी एक टुकड़ी. दूसरी जगह चली जाएगी एक टुकड़ी मन्नार की. तरफ जाएगी हमें नहीं पता जाता कुछ दिनों. के बाद किसी ने कहा कि अरे नहीं नहीं नहीं. आप लोग वर्टिकल हो जाओ. शुरू के जो दिन थे तो वो. नहीं दिखाता था कि. मार्गदर्शन ठीक है चीजें क्यों गलत चल रही.
है बहुत चीजें हैं उसके अंदर और मैंने. इसके बारे में थोड़ा बहुत लिखा भी अपनी. किताब के अंदर मौका मिले तो पढ़िए उसको. मुख्य चीज यही थी. समझौता दो सरकारों के बीच में था एलटीटी. उसके अंदर अछूती थी और इसीलिए प्रभाकर ने. मौके का फायदा उठाया उसने कहा साथ तो कोई. एग्रीमेंट नहीं है पहले मैं भारतीय सेना.
को ट्राई करता हूं कई जगह उन्होंने ट्राई. किया कि भारतीय सेना क्या करेगी उसने फिर. शायद उसको यह लगा कि यह लोग इस तरीके से. काम करेंगे. उसके बाद युद्ध जो है उन्होंने भारतीय. सेना के खिलाफ कर दिया. श्रीलंका को छोड़ दिया उन्होंने उन्होंने. भारतीय सना को टारगेट करना शुरू कर दिया. अक्टूबर के महीने में और तब से लेकर उसके. बाद फिर उनके साथ अ जिनकी जिनके लिए.
समझौता कराया गया था उन्हीं से ल उन्हीं. से हम लड़ने लग गए. और इसके अंदर जब प्रेमदासा बने. हेड श्रीलंका के अंदर उन्होंने उनकी मदद. करनी शुरू कर दी कि हां इनको भाई तुम. जिसकी जिससे लड़ाई थी वो आपस में दोस्त हो. गए वो दोस्त हो गए हमारे खिलाफ चीजें होने. लगी और इसीलिए फिर हम लोगों को वापस आना. पड़ा तो यह. मैं यह कहूंगा कि इसमें. कहीं ना कहीं पर पॉलिसी के तौर पर कुछ.
हमारी त्रुटिया थी पॉलिसी के तौर पर या. पॉलिटिकल एंबिशन के तौर पर अब पता नहीं. एंबिशन क्या थी राजीव गांधी की उस टाइम. लेकिन उनके जो एडवाइजर्स थे और दूसरे थे. उनको भी इसका श्रेय जाता है कि उन्होने. उनको गलत चीज बताई होगी जिसकी कीमत उनकी. जान ब और एक बहुत ही अ. एलटीटी नेर फैसला किया कि इनको करना है. हमने पर एलटीजी ऐ ऐसी चीजों के दक्ष हो.
चुकी थी. हर तरीके से. यानी कि. मैं यह कहूं कि अगर. भारतीय सेना. खुले तौर पर. युद्ध करती. शुरू में हमें हमें दिक्कत थी क्योंकि हम. उसके लिए गए नहीं थे हम तो पीसकीपिंग. फोर्स थे. लेकिन आप युद्ध में ढके ले गए और जैसा कि. हमारी एक खासियत है हम धीरे-धीरे जो है.
उसके अंदर जब आती है बात तो उस पर खरे. उतरते हैं. उस टाइम. जिस तरह से चीजें थी. यह कहिए कि हम उसके अंदर ऊपर थे और उसके. बाद फिर एक पॉलिसी वानी छोड़ दो. तमिलनाडु का प्रेशर था दूसरा था छोड़ के आ. गए. श्रीलंका एक दूसरे रास्ते पर चल पड़ा और.
जब राजीव गांधी का की हत्या हुई तो उसके. बाद एक देश के तौर पर हम लोग फिर दोबारा. जाकर श्रीलंका सरकार के साथ खड़े हुए मदद. करने के लिए फिजिकल मदद म और उसका उनको. फायदा मिला तो अगर मैं आज आपसे कहूं कि. श्रीलंका गवर्नमेंट और एलटीटी के बीच के. विवाद के बीच में आज अगर यही भूमिका आपको. निभानी होती तो क्या बदलते पीछे जा नहीं. देखिए बदलना बहुत साफ था एग्रीमेंट होना.
चाहिए था श्रीलंका और एलटीटी के बीच में. आप ऑब्जर्वर के तरौर पर ऑब्जर्वर होते आप. अंपायर होते किसी और भूमिका में आपको होना. चाहिए था और शायद वो चीज ठीक रहती है. मैं तो कहूंगा कि. कई बार होता हम फौज में यही बोलते हैं कि. हर गोली प हर गोले पर आपका नाम लिखा होता. है तीन बार तो मैं बचा वहां पर और.
अपने आप को खुश किस्मत समझता हूं लेकिन. मेरा मानना है कि इस चीज को दूसरे तरीके. से किया जा सकता था ठीक है आप फिल्में. देखते हैं सर कभी-कभी एक फिल्म आई थी. कश्मीर को लेकर आर्टिकल 370. बड़ी चर्चा में रही बहुत सारी चीजें दिखाई. गई कैसे आर्मी के ऑफिसर्स के कत्ल किए गए. इंडियन एयरफोर्स ऑफिसर्स के कत्ल हुए थे. पॉलिटिकल भूमिकाएं थी कई सारे उसके फैक्ट.
सोशल मीडिया पर ऑलरेडी पहले से मौजूद थे. वीडियोस के माध्यम से. कश्मीर आपने भी खुद कहा घटना में जिक्र. किया था कि कई लोग कहते हैं कि अरे यह सब. तो इंटेलिजेंस की बातें 90 के दशक में जो. हम सुनते हैं कि कश्मीर में खुलेआम रेप हो. रहे थे पुरुषों को भगाने की बात कही गई थी. सारी घटनाएं सच है. जो घटनाए कश्मीर फाइल में दिखाई गई शत. प्रतिशत सही है.
कोई उसमें ना इधर है ना उधर. घटनाए पूरी की पूरी थोड़ा पिक्चराइजेशन. होता है व पर घटनाए सब की सब सही है और. मैं यह कहूंगा कि. देश के तौर पर शायद उसको 90 के दशक में. दूसरे तरीके से टैकल करने की जरूरत थी. हम धीरे-धीरे. उसको आगे बढ़े और.
एक चीज को यह मानकर चलीय आपने पंजाब में. भी शायद देखा होगा जब हम किसी को हथियार. दे देते हैं तो उसके पास किसी की जान लेने. की क्षमता आ जाती है यानी कि वह भगवान बन. जाता है वह आपकी हदों से बाहर निकल जाता. है व बाहर है तो जो वहां से टेररिस्ट भेजे. गए जो अफगानी भेजे गए दूसरे भेजे गए वो तो. सब इसलिए भेजे गए कि वहां पर तुमको यह. मिलेगा तुम यह कर सकते हो और उन्होंने वह.
सब कुछ किया. उन्होने दहशत फैलाई कश्मीरियों के अंदर भी. यही नहीं कि सिर्फ उन्होंने पंडितों के. अंदर फैलाई उदाहरण के तौर पर कश्मीर के. अंदर ऐसा नहीं था कि हर हर जुम्मे पर सब. लोग मस्जिद जाते हैं जो काम कर रहा व काम. कर रहा है कहीं पर लेकिन जब यह टेररिज्म. शुरू हुई. तो बंदूक के बल पर होंगे. वहां पर मौलवी साहब वही पढ़कर सुनाएंगे जो.
उनको दिया गया है. उसी के अंदर रहना है सबको अब अगर किसी को. यह है कि भाई कल कोई मार देगा मुझे कल कोई. मेरे घर से बहु बेटी को उठा के ले जाएगा. और य मुसलमानों के साथ भी हां. तो इसीलिए लोग भाग कंट्रोल में रहे ना. आखिर एलटीडी के टाइम क्या था श्रीलंका में. अच्छा यह मुखबिर है ना कल इसको टेलीफोन की.
टाल उस पर टांग. और उस बॉडी को कोई नहीं छुए एक हफ्ते तक. अब वहां पर रहने वालों का क्या होगा जो. जाते हैं व कहेंगे भाई डर के रहो. सब और दुनिया के सब टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन. यही करते हैं मैंने आपके एक जूनियर है. उनके साथ मैंने काम किया तो मैंने उनसे. पूछा एक सवाल कि कश्मीर में अक्सर खबरें. आती है कि आतंकवादी मारे गए. कई बार रेशो अलग होता है कि भारतीय सेना. के दो जवानों को वीरगति प्राप्त हुई एक.
उधर लंबी लड़ाई के बाद मारा गया कई बार. होता कि चार पांच उधर हो तो मैंने कहा. कैसे पहचाने कि यह कश्मीरी था या बाहर से. आतंकवादी था उन्होंने कहा बड़ा आसान है जब. नंबर ऑफ रेशो ज्यादा होता है कश्मीर का. कश्मीर के मूल लोग जो हैं वह अभी भी सीधे. साधे लोग हैं वह खुश मिजाज लोग हैं जो. हसते हैं गाते हैं गाते बजाते और अपना. जीवन कर जो आतंकवादी बाहर से आता है समंदर. के रास्ते से पहाड़ों से वह इतना ट्रेंड.
होकर आता है कि वह अपनी दहशत दिखाता है. उससे लंबी लड़ाई चलती है देखिए दहशत भी. दिखाता है और. वह सिर्फ इसीलिए आया है कि वह किसी तरह. जिंदा वापस चला जाए पकड़ा जाएगा तो नहीं. जाएगा मारा जाएगा वह जब फंस जाता है. तो उसके बाद पूरे टाइम पर वह यही करता है. कि किसी तरीके से. ज्यादा से ज्यादा.
कई बार. वह ऐसी स्थिति में होता है कि घर के अंदर. है बड़ा घर है कंक्रीट का है दुनिया भर की. खिड़कियां है. तो. कहीं से भी वह कर सकता है अंधेरे का फायदा. उठाता है तो उसमें हमारी कैजुअलिटी हो. जाती है कई बार हम लोग. अंदर घुस जाते हैं सोचते हैं कि शायद सब. शांत हो गया है फिर गड़बड़ होती है तो हर.
एक इंसिडेंट अलग तरीके का है. ट्रेंड लोगों के साथ लोग आते हैं और जो. ट्रेंड आता है वह दक्ष तो होता ही है उसके. बाद उसको अपनी जान बचानी. किसी तरीके से तो हर तरीके का काम करेगा. जगमोहन जी राज्यपाल सर थे उस दौर में. किताब बहुत अच्छी किताब भी लिखी उनकी. किताब मैंने पढ़ी कई लोग मानते हैं फ्रोजन.
टर्बुलेटर कई लोग मानते हैं उन्होंने. कश्मीर में बहुत अच्छा काम किया विपक्ष. वाले कहते हैं कि जब यह घटनाएं हुई तब तो. केंद्र के लोग थे. जो बाद में जो आज शिकायत करते उनके करीबी. रहे. इधर वाले कहते हैं कि अब्दुल्ला परिवार और. दिल्ली की सरकारें जो थी वह जानबूझकर वह. माहौल को बढ़ने दे रही थी अपने सियासी. फायदे के लिए आप पॉलिटिशियन भी रहे आप. आर्मी में भी रहे आपने इनसाइट दोनों साइड. में देखा है आज जब आप पलट कर देखते हैं तो. कश्मीरी पंडितों का या कश्मीरी लोगों का.
कौन गुनहगार नजर आता है किसने अगर सही कर. लिया होता हालात अलग होते हैं बहुत है. गुनाहगार बहुत हैं सबसे पहली चीज तो उसमें. यह है कि उस टाइम जो भी सरकार थी जब चीजें. हो रही थी. तब उन्होंने क्या किया नेशनल कॉन्फ्रेंस अ. आपको याद होगा अ. जो. अब जो मेन सलाउद्दीन जो कि बना वो चुनाव.
लड़ा था पुलवामा से चुनाव लड़ा था चुनाव. में नली उसको आपने जबरदस्ती हराया उसी को. लेकर. उसके मन में यह था कि यह यहां पर और कोई. कर ही नहीं सकता कुछ भी एक उसके साथ जमात. खड़ी हो गई पाकिस्तान ने उसका फायदा उठाया. ट्रेनिंग दी गई उनके साथ अपने ट्रेन लोग. बाग भेजे गए और उसके बाद दहशतगर्दी शुरू. हुई यानी सियासी तौर पर जो लोगों के साथ.
जनादेश गद्दारी हुई उसका उसका उसका साफ. फायदा अल्गावादी उठा लिया और. उसके बाद सरकारों को समझ में नहीं आया. पहले सब चुपचाप रहे. गुल शाह कुछ समय के लिए मुख्यमंत्री बने. और उस टाइम जितने स्कूल थे वो तकरीबन. वही करने लगे जो कि किसी. पाकिस्तानी मदरसे में होता है जिस तरह की. मानसिकता लोगों के अंदर डाली जाती वो.
डालने लगे. सरकारों ने ध्यान नहीं दिया क्योंकि आपको. एक पपेट सीएम चाहिए था या पपेट दिल्ली में. बैठ दिल्ली चीज तो दिल्ली से चलनी थी ना. आपको आपको सजगता तो वहां से होनी चाहिए थी. कि करना क्या है और. एक बारबार लोग बग पूछते हैं आपने भी इसका. जिक्र किया 370 का. एक दिमागी बाधा थी. कश्मीरी के मन में यानी उसको 370.
का व. दिखाकर बेचा गया भाई तुम तो अलग हो. तुम तो अलग ही देश हो तुम इधर नहीं हो तो. बचपन से मैंने देखा है क्योंकि फादर की. पोस्टिंग थी 60 के अंदर और स्कूल से. छुट्टी है जब हम जाते थे. अच्छा बेटा इंडिया से आए हो मैं फादर से. पूछता था इंडिया का क्या मतलब है इंडिया. के तो सभी है ये घटना मेरे साथ भी हुई ज.
मैं पहली बार कश्मीर गया सर और पूछते डल. लेक प मैं गया तो उन्होंने मुझसे सवाल. पूछा आप इंडिया से आए हैं तो मैंने कहा आप. कहां से हैं नहीं नहीं हम तो कश्मीर से. हैं हा तो ये 370 का जो दिमाग के अंदर. घुसा हुआ था इसको तो बहुत पहले हटाना. चाहिए था नहीं हटाया जो सरकारें रही. जो उनको क्या फायदा दिखाई दिया क्या नहीं. दिखाई दिया. अब जो है चीज दूसरी है लेकिन घटनाए सर अभी.
भी हो रही है आए दिन जैसे हमने जब मैं. टीवी चैनल्स पर काम कर रहा था तो अक्सर. खबरें पड़ता था कि टारगेटेड किलिंग बढ़ गई. है अब आप अगर हिंदू हैं या यहां से काम. करने गए हैं आपका धर्म अलग है आपको ढूंढ. ढूंढ कर मारा जा रहा था आप कश्मीरी. पंडितों को वहां वापस विस्थापित करना चाह. रहे थे वह आप नहीं कर पा रहे उस तरह से. जिस तरह से आपने वादा किया था या अभी भी. घटनाएं हो रही है हमारे फौजियों की जान जा. रही है तो कई बार लोग सवाल उठाते हैं कि. 37 के हटने का फिर क्या फायदा हुआ अगर. आतंकवादी घटनाए अभी भी चल रही हैं फौजी.
अभी भी वीरगति को प्राप्त हो रहे हैं या. अभी भी खुलकर लोग वहां जाकर नहीं बच सकते. हैं वह जिनकी जमीन वहां थी. दो कारण. पहला. जो आतंकवादी तानाबाना है. वह कभी पूरा टूटता नहीं है समय लगता है. बहुत से लोग हैं जिनके दिमाग के अंदर भरा. गया है. बहुत से लोग हैं अब बीच के अंदर आपने देखा. होगा कि स्थानीय.
लोग ज्यादा उसके अंदर आने लगे थे 370 के. बाद जाने के बाद थोड़ी उसके अंदर कमी आई. अब पाकिस्तान उसको दोबारा रिवाइव करने की. कोशिश कर रहा है अब वह अपने यहां से लोगों. को भेजता है वह आएंगे रिक्रूट करेंगे डराए. धमका जाएंगे प्रलोभन करेंगे जो भी करेंगे. तो यह. परोक्ष युद्ध चलेगा. अग और यह तभी खत्म होगा जबकि. क. अपनी उन्नति को खुद देखे जब उनको लगे कि य.
क्या है ये और वह समय आ रहा है ऐसी बात. नहीं है आज जिस तरीके से आमदनी होती है. जिस तरीके से. विकास की दूसरी चीजें हो रही है कश्मीर. में पहले इतनी नहीं थी मैंने तकरीबन 12. साल बिताए कश्मीर में अलग अलग रैंक के ऊपर. और मैंने देखा है कि जितना पैसा कश्मीर. में आता था सरकार की तरफ से उतना शायद. लोगों के लिए नहीं लगा हम और ये.
इसका इसका गुस्सा लोगों के अंदर क्यों. होता था वो देखो जी पैसा आ रहा है पर हमको. कोई पैसा मिलता ही नहीं हमारे यहां कुछ. होता ही नहीं हमारे यहां हॉस्पिटल नहीं है. हमारे यहां रोड नहीं है हमारे यहां फला. चीज नहीं है. तो कोही तो जिम्मेवार होगा ना इसका ट्रू. ये दूसरी चीज यह है कि. यह बात तो जम्मू वालों ने मुझसे कही सर. पाकिस्तान जब बैठा हुआ है एक सोचकर कि.
किसी तरीके से इसको हमने एक्टिव रखना है. तो कुछ ना कुछ तो कोशिश करेगा ना ट्र एक. शिकायत कश्मीरियों को अक्सर होती है वह. कहते हैं कि हम दिल्ली वाले या इधर के जो. लोग हम बात करते हैं हमें कश्मीर तो चाहिए. लेकिन जब बात कश्मीरियों की आती है तो. उनके साथ हम अलग थलग व्यवहार कर देते हैं. कई बार वो शिकायत करते हैं कई सारे मेरे. दोस्त भी रहे कॉलेज में उसके बाद भी बड़े. अच्छे बच्चे हैं बहुत प्यार कर करते हैं. मिलते हैं क्रिकेट खेलते हैं साथ में हम. और वो हमसे बड़ा दुलार करते हैं बट वो.
कहते हैं कि इन जनरल ओपिनियन जब आप लोग. देते हैं तो आप लोग को जमीन चाहिए कि अब. तो हम कश्मीर में जमीन खरीद सकते हैं बट. जब कश्मीरी को हक करने के बाद आती है. थोड़ा सा आप आइसोलेट कर लेते हैं या अगर. कहीं दुकान वाला कई बार छुटपुट घटनाएं आती. है तो आपको लगता है कि थोड़ी सी मानसिकता. हमें भी चेंज करनी चाहिए थोड़ा और दार दिल. जहां तक अलग-अलग प्रदेशों का सवाल है आप. हिमाचल प्रदेश लीजिए. आप जमीन लेना चाहते हैं आपको सरकार की. परमिशन चाहिए हम ऐसे नहीं है कि आप गए.
आपने खरीद लीया और अपना काम शुरू कर दिया. हम या तो आप वहां के लोकल हैं या आपने. सरकार की परमिशन लेकर अपने जमीन ली. व्यवसायिक. चीज के लिए वो जमीन नहीं देते हैं हम. हर एक स्टेट के रूल हैं और शायद वही चीज. कश्मीर के अंदर भी लागू होगी अभी जो एक. लोगों के अंदर एक. भर दिया ना कि भाई लोग आएंगे भर जाएंगे. तुम लोगों के घर छीन लेंगे तुम लोगों की. जमीन छीन लेंगे वो जब तक मानसिकता नहीं.
निकालो आप तब तक यह गड़बड़ र ओके सुपर्ब. सर आप एक पॉलिटिशियन भी है और मेरे मन में. कई बार यह सवाल जब आपने चुनाव लड़ा. तब से लेकर अब तक रहा है शुरुआत से लेकर. अब तक क्योंकि हमने आपको आर्मी चीफ के तौर. पर देखा और आपने खुद कहा कि आर्मी चीफ को. देखकर आर्मी का बंदा जब वर्दी में आता है. तो सम्मान आता है पहला सवाल जो मेरे मन. में आया जब आपने फौज जवाइन की थी अभी. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी. राज्यसभा में हो गए तो यह आया कि जो ऐसे.
पद है सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस हो या. इंडियन आर्मी का चीफ हो क्या इन लोगों को. पॉलिटिक्स जवाइन करनी चाहिए एक सवाल मेरे. मन में रहा और य मेरे जैसे बहुत सारे लोग. के मन में इसको लेकर आपका आज नजरिया क्या. है देखिए मैं आपको मैंने आपको एक बार. थोड़ी देर पहले बोला था. मुझे पॉलिटिक्स के अंदर जाना नहीं था कुछ. नहीं करना था. रिटायरमेंट के बाद एक सवाल दिमाग के अंदर.
अंकित था करोगे क्या रिटायर हो गए. जो नॉर्मल सब लोग करते हैं सवेरे गोल्फ. खेलो शाम को गोल्फ खेलो किसी कॉकटेल. पार्टी में जाओ कभी एक दो लेक्चर कहीं पर. दे दो. लेकिन नीव स्कूल की गलत थी. लोगों के लिए कुछ काम करना है तो मैं. रिटायरमेंट के एक महीने के बाद. सवा.
या सवा महीने के बाद मैं किसानों की. समस्याओं से जुड़ गया गांव से आता हूं तो. किसानों के बारे में वैसे ही पता है सब. चीजें हैं. जमीन पर देखी है चीजें और सबसे पहला जो यह. कहिए कि एक सिखलाई के तौर पर और चीजें जो. सीखनी शुरू की वीएम सिंह है जो कि गन्ना. किसानों क्या के हितेश हैं और उनके लिए. लड़ाई करते हैं मैं उनके साथ जुड़ा उनके.
साथ घूमा. हम लोगों ने रंगराजन कमेटी के खिलाफ. पार्लियामेंट का गहरा भी किया. बहुत लोगों ने उसकी आलोचना भी की. किसानों की लड़ाई थी उसका फायदा भी. किसानों को मिला क्योंकि रंगराजन कमेटी. अगर लागू हो जाती तो पूरे उत्तर भारत के. गन्ना किसान ठप हो जाते और और उस गहरा का. फायदा यह हुआ कि शाम को मनमोहन सिंह जी का. हुकम आ गया कि लागू नहीं होगी.
किसानों के साथ साथ फिर कुछ युवाओं के साथ. जुड़ने लगा. और 2012 के अंत में. मन में एक. जागृति हुई कि एक और फौजी है जिसको लोग. बाग डंप करके चले गए अन्ना हजारे अना. हजारे इनको दोबारा वहीं पर लाना है और कोई. एम नहीं था उनके पास गया तब तक एक छोटा सा.
ऑर्गेनाइजेशन मैंने बनाया था किसी के साथ. मिलकर जनतंत्र मोर्चा मैंने उनको कहा कि. हम जनतंत्र मोर्चे के तौर पर देश में. यात्रा करेंगे जागृति पैदा करेंगे लोगों. को प्रेरणा देंगे कि गलत काम से अलग हो तो. उन्होने कहा मुझे क्या करना है तो मैंने. कहा आपका एक पेट सब्जेक्ट है करप्शन आप. उसके ऊपर बोलिएगा. और मैं व्यवस्था परिवर्तन की बात करूंगा. फर बोले इसका फायदा क्या होगा मैंने इसका.
फायदा यह हुगा कि जब लोगों के अंदर जागृति. आएगी लोग भाग आपके साथ जुड़ेंगे. और ज्यादा संख्या में अभी तो महाराष्ट्र. में और मुझे लगता है कि हम आपको दोबारा उस. जगह पर ला सकते हैं जिससे लोग भाग आपको. गिराकर चले गए हमारे साथ जुड़ गए हमने. जलियावाला बाग से यात्रा शुरू की पंजाब. किया हिमाचल किया उत्तर प्रदेश किया. उत्तराखंड किया राजस्थान किया मध्य प्रदेश.
किया. थोड़ा आधा बिहार किया और तब अन्ना बीमार. पड़ गए जब वो दो तीन महीने के बाद आए तो. उन्होंने कहा मैं तो लोकपाल के लिए अनशन. कर मैं यात्रा में नहीं जाना चाहता ठीक है. लोकपाल का हुआ योग पाल जिस दिन पास हो गया. दोनों सदनों से उस दिन मैंने कहा आज आप. पुनः वहां पर आ गए मेरा काम हो गया खत्म. उन्होने कहा तुम क्या करोगे मैंने कहा मैं. एक तरीके से.
शशो पंज में हूं उने क क्यों मैंने क. व्यवस्था परिवर्तन के चक्कर में मैं लोगों. को कहता था कि राजनीति में गैर राजनीति. करने वालों को आना चाहिए ताकि. इसके अंदर कुछ बदलाव आ सके तो राजनीति ऐसे. चलती रहेगी. किसी भी आप पार्टी को लेंगे लोग तो वही है. ना जैसे जो कि एक उससे आए हैं मानसिकता भी. तकरीबन वही है तरीका भी तकरीबन वही है तो. इसमें बदलाव कब आएगा.
तो उन्होने कहा फिर इसका मतलब क्या है. मैंने कहा मैं तो लोगों को कहता हूं कि. नॉन पॉलिटिकल लोगों को आना चाहिए थोड़ा एक. अलग उसके अंदर चीज आएगी तो बोले क्या. पॉलिटिकल पार्टी जवाइन करोगे मैंने कभी तक. सोचा नहीं उसके बाद बहुत पार्टी के लोग आए. अलग-अलग पार्टियों के और 2014 के अंदर. मार्च के महीने में मैंने भारतीय जनता. पार्टी का दामन पकड़ा. फिर मुझे बोला गया कि आपको तो हमने इसलिए. लिया कि आप चुनाव लड़े फौजी आदमी जिसने.
कभी चुनाव नहीं देखा उसको आप बोलेंगे. चुनाव लड़ो तो बड़ा मुश्किल काम है तो. बताया गया कि देखिए हमने लिया इसलिए कि आप. चुनाव लड़े अब यहां से आता है मेरा. इंपोर्टेंट क्वेश्चन जो मुझे आपसे पूछना. था जनरल वीके सिंह चुनाव लड़ते हैं सब ने. स्वागत किया कि चलो अच्छे लोग आने चाहिए. आपका य कहना सही है आपने गाजियाबाद से. चुनाव लड़ा. दो बार चुनाव लड़ा दोनों बार 5 लाख से ऊपर. वोटों से जीते.
हमें लगा था कि शायद जनरल वीके सिंह को. रक्षा मंत्री या देश में कोई बड़ी औधे की. जिम्मेदारी दी जाएगी लेकिन दो टर्म आपका. चुनाव लड़ना और उसके बाद आपका पॉलिटिक्स. से रिटायरमेंट करना जिसको कुछ लोगों ने. कहा कि टिकट नहीं दिया गया कई सार लोगों. के टिकट टे थे एक सवाल मेरे मेरे मन में. और मेरे जैसे आपके लाखों चाहने वालों के. मन में रहा कि क्या जनरल वी के सिंह को. नरेंद्र मोदी की अगवाई वाली सरकार ने वो. सम्मान नहीं दिया जो उनके जूनियर्स को कई.
सारे जूनियर्स जिसमें एस जयशंकर साहब हैं. अलग-अलग जिन्होंने देश को सेवाए दी है. हरदीप पुरी साहब अश्विनी वैष्णव जी आर के. सिंह साहब जो राज्यसभा से गए उनको कैबिनेट. मिनिस्टर बनवाया लेकिन आपको छोटे ओहदे पर. मंत्री बनाकर रखा जबकि आपने देश के लिए. बहुत सारे काम इन बीच में रहते हुए किए. जिससे आपकी अलग पहचान रही इसकी कहीं टीस. आपके मन में है कोई टीस. देखिए. मैं आया किस लिए था जनसेवा जनसेवा के आज.
अगर गाजियाबाद अच्छा हुआ है वहां पर. प्रगति हुई है वहां पर खुशहाली हुई है और. वह जिला गाजियाबाद वाला गाजियाबाद नहीं. रहा तो खुशी होती है. अगर पार्टी कहती कि आपने पा साल और कर. देने हैं देने को तैयार थे कोई दिक्कत. नहीं और हमेशा जो भी काम किया सिर्फ इसलिए. किया कि लोगों का कुछ हो. पार्टी का अपना एक तंत्र होता है पार्टी.
की एक अपनी सोच होती है अलग-अलग उसके अंदर. जब चीजें रखी जाती हैं तो जाति समुदाय. इलाका इन सबको मिला के वह अलग-अलग. जिम्मेवारी देते हैं तो जो भी उन्होंने. जिम्मेवारी दी जैसे एस जयशंकर साहब है या. हरदीप पुरी साहब है इनसे डायरेक्ट इनकी. कास्ट फस पॉलिटिक्स का फायदा उतना नहीं है. वो एक डिपार्टमेंट में करते थे जिससे उसी.
डिपार्टमेंट में उनका इस्तेमाल कर लिया. गया आप क्योंकि इंडियन आर्मी की चीफ थे. मेरे मन में बारबार यह सवाल इसलिए आता है. इंडियन आर्मी के चीफ को आपने कैबिनेट. मिनिस्टर भी नहीं बनाया यह कई बार मुझे या. मेरे जैसे लोगों को लगता था कि यह आपके उस. पद का और आपके साथ थोड़ा सा असम मान वाली. एक भूमिका हमें लगती थी और इसके लिए हमारे. मन में सवाल आते थे फैसला किसी का है और. जहां तक मेरा सवाल था मैं तो कोई आशा नहीं. थी मैं सिर्फ एमपी भी रहता तो भी कोई वो.
नहीं था. साधारण उसमें. यह था कि लोगों के लिए काम करना इसलिए जब. भी कोई काम दिया गया चाहे रेस्क्यू का काम. हो और कोई काम हो पूरे दिल से लगा के उसको. काम किया बखूबी किया आपने जैसे फौजी करता. है बहुत बखूबी किया मतलब जितनी घटनाएं. चाहे उत्तराखंड में जो आपने रेस्क्यू. ऑपरेशन को अंजाम दिया वो जबरदस्त था यमन. में आपने ऑपरेशन राहत चलाया था वह बड़ा. जबरदस्त था संकट मोचन दक्षिणी सूडान का जो.
ऑपरेशन था या इराक से शवों को वापस लाना. ऑपरेशन गंगा यूक्रेन से मतलब यह वो लम्हे. थे जहां पर पॉलिटिकल पार्टी से हटकर सभी. देशवासियों ने आपको जय हिंद जनरल कह दिया. फिर इसलिए मेरे मन में वो सवाल और धाव कर. गया कि फिर क्यों नहीं देख वो वो डिसीजन. जो है हम वो मेरे ऊपर नहीं है वो किसी और. के ऊपर है ह. उनकी क्या सोच है क्या वह है वह जाने यहां.
तो एक फौजी की तरह काम करने वाले थे जो. काम दिया गया उसको अच्छी तरह से करेंगे. अभी भी आप बीजेपी में है बिल्कुल कोई शक. नहीं आप रिटायर हुए थे रिटायर करवाया गया. था चुनाव से नहीं देखिए चुनाव के अंदर. सीट का जो एक वह था वो बदल दिया गया पहले. वहां पर ठाकुर सीट थी वो वैश्य हो गई तो.
किसी और को दे दी गई. आप चाहते थे एक टम चुनाव लड़ना देखिए मेरा. सिर्फ एक ही मन के अंदर एक वो था कि काफी. काम गाजियाबाद में बाकी. और. पा साल और मिलते तो शायद गाजियाबाद को ऐसी. उस परे पहुंचा देते कि दिल्ली के लोग. गाजियाबाद में रहना पसंद करते. एक सोच थी बगला आदमी करेगा कुछ और प्रॉमिस.
किया गया आपसे कि यह ना सही तो हम नहीं. ऐसा अभी देखिए प पॉलिटिक्स में प्रॉमिस. नहीं होती है वो उनकी मर्जी है जो करना. चाहे. जैसे आप ही के एक जूनियर थे मेरे मित्र भी. बाद में बने हमने साथ में कॉलीग बनके काम. किया उत्तराखंड के गवर्नर बना दिए गए. गुरमीत जी वो आज गवर्नर है आपकी भी ऐसे. तमन्ना हैं ऐसा कुछ कहा गया आपसे देखिए. एक तमन्ना थी लोगों के लिए काम करना अब. बाकी जो भी सोचते हैं जो भी नेतृत्व सोचता.
है कि इनको किस चीज में इस्तेमाल करना ठीक. है नहीं तो और बहुत कुछ है करने के लिए. कमी नहीं है यह मैंने सोचा नहीं था कि मैं. रिटायरमेंट के बाद कहां से कहां से कहां. तक पहुंच जाऊंगा. एक वह था कि हां भी लोगों के लिए काम करना. है यह करना है वो करना है धीरे धीरे धीरे. तो. जो चीज होनी है आगे उसमें करने के बहुत. चीजें सामने हैं अभी थोड़ा सा.
सुस्ताने का टाइम है कई लोग कहते हैं कि. वीके सिंह साहब बहुत महत्वाकांक्षी है और. क्योंकि दिलेर भी है बेबाक भी है इसलिए. पॉलिटिक्स में बिल्कुल फिट मैन नहीं बैठते. हैं बाकी जो फिट हो गए वो इसलिए क्योंकि. वो स्वभाव अलग था पॉलिटिकल. ऐसा नहीं है देखिए. पॉलिटिक्स एक अलग चीज है लेकिन. जैसे मैंने आपको बताया कि. जब एक हम ऐसे संस्थान से आते हैं जहां आप.
उस चीज को. अलग रूप से नहीं पेश करेंगे. काम हो सकता है काम होगा. काम नहीं हो सकता तो आप साफ बोल देंगे भाई. ये काम नहीं हो सकता मदद आपकी जरूर होगी. लेकिन सिर्फ यह कहा जाएगा हां ठीक है. देखते हैं बात करते हैं हो जाएगा वोह. शब्दावली में नहीं है. ठीक है एक क्वेश्चन मेरे मन में और है कि. आपने कहा कि बीजेपी आपने 20144 में जॉइन. की 2012 में जब आपका टेनर था तब उस दौर.
में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी एंटनी. साहब से आपके रिश्ते भी ठीक थे. फिर कुछ खबरें मैंने पढ़ना शुरू किया तो. बीच में आया कि कहीं अखबारों ऐसा लिखा था. कि शायद सोनिया गांधी जी आपको बहुत पसंद. नहीं करती थी ऐसा आया और इसी वजह से जो. अार अखबारों में जो मेरी कभी बात नहीं हुई. उनसे. उसम कि उनकी शायद डिफेंस फर्म थी उसे. ब्लैकलिस्ट करवा दिया गया था और इस वजह से.
आपके टेनोर को आर्मी चीफ के तौर पर एक साल. कम भी कर दिया गया था जो काफी. कंट्रोवर्शियल इशू भी बना बाद में आप. सुप्रीम कोर्ट भी गए तो कांग्रेस के आला. कमान से भी रिश्ते आपके बहुत अच्छे नहीं. थे. देखिए ऐसा है एंथनी साहब थे बहुत अच्छे. रिश्ते थे हां उन्होंने आपकी ब और क्योंकि. मैंने कभी उनसे कोई ऐसी चीज नहीं कही जो. कि. सेना की अच्छाई के लिए ना हो हम या मेरे. खुद के फायदे के लिए हो और इसलिए वो पसंद.
करते थे क्योंकि और बहुत चीजें की हमने. आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं हम फौज. के अंदर. रशन जो मिलता था उसमें ऑफिसर्स के रेशन. में और जवान के राशन में फर्क था कैसा. फर्क क्वालिटी का या क्वांटिटी का. क्वांटिटी का फर्क था. क्वालिटी सेम है क्वांटिटी का फर्क था. मैंने एंथनी साहब को कहा कि ऐसा है. उन्होने कहा ऐसा कैसे हो सकता है मैंने.
कहा है. बोले क्या करना चाहते हो मैंने कहा दोनों. को बराबर कर दी. तो उने कहा अच्छा ठीक है उन्होंने हुकम. दिया तो उसके बाद फिर वो आपको तंत्र तो. ऐसे ही चलता है कोई बदलाव नहीं करना चाहता. तो एमडी से पूछा गया भाई इनकी कैलोरिक. वैल्यू निकालो ये निकालो मैं उनके पास. दोबारा गया मैं कहा देखिए जब काम एक तरह. का. फिर फर्क क्यों होना चाहिए. और.
ज्यादा कुछ नहीं होना है. यह चीजें बदली जानी. फिर चार पाच महीने के बाद वह चीज हो गई. जवान का ऑफिसर का राशन सेम कोई फर्क नहीं. फौज के लिए अच्छा है. इसलिए उनको यह भरोसा था कि मैं कभी कोई. ऐसी चीज नहीं कहूंगा जो कि फौज के लिए या. जवान के लिए ठीक ना हो.
उसका फर्क पड़ता यह तो आपके रक्षा मंत्री. हो गए बाकी उनसे किसी बात पाला पड़ा नहीं. प्रधानमंत्री या कांग्रेस की अध्यक्ष. सोनिया गांधी जी से नहीं पाला पड़ा आपका. नहीं पाला पड़ा मीटिंग्स के अंदर या. अनौपचारिक तौर पर एक दो बार जो. मिलते हैं पर ऐसा नहीं कि. और फिर बाद. अभियान चल गया कि जी. इनको जितना जल्दी करें उतना अच्छा है.
जितना जल्दी हटा दे तो उसमें जो है. आपको याद होगा काफी अखबार में भी आया वो. एक चिट्ठी लिखी थी मैंने जो कि थी लीक हो. गई थी लीक हो गई प्रधानमंत्री कार्यालय से. लीक हो गई. और फिर उसको कवर अप करने की कोशिश की किसी. एक निचले स्तर के अधिकारी ने लीक कर दी या. क्या किया या उससे गलती से हो गई उसको हटा. दिया गया यह सब एक अभियान के तौर पर चला.
और उसका. चर्म था कि. भारत के सबसे ऊंचे कोर्ट ने. दो जन्म तिथियां दे दी. एक एक जो कि मेरी थी 1950 1951 हां जो. मेरी थी 1951 जो कि हर डॉक्यूमेंट मेरा. उसम उन्होने कहा ये आप र. लेकिन फौज के तौर पर इनको वो रखने दीजिए.
य हमारे य ही हो सकता और कहीं नहीं हो. सकता दो दो डेट ऑफ बर्थ ले. बट फिर से एक सवाल पूछता मैं कि जो रिश्ते. आपके रक्षा मंत्री ए के एंटनी उस दौर में. आपके थे उनके साथ थे अगर यही बंड सोनिया. गांधी या मनमोहन सिंह के साथ शेयर किया. होता तो आपको लगता है कि जो आपको सोनिया. गांधी की. उसके अंदर भूमिका क्या है. सरकार का हिस्सा तो नहीं थी जिनको लगता था. व सरकार का हिस्सा व रिश्ते रख सकते थे हम.
लोग तो नहीं रख सकते लेकिन आप हटाए तो गए. ना आ आदेश तो वही से आया होगा कोई बात. नहीं जो चीज सेना के लिए ठीक थी वो की गई. अगर एक गाड़ी जो कि 2 लाख रुपए की आती थी. और उसको एक करोड़ के अंदर सेनाओं को बेचा. जा रहा था और वह गाड़ी रद्दी थी. तो उसके लिए खड़ा होना ठीक था ये आपने. मुझे बड़ा सवाल दिया एक फिल्म थी अ यारी. आई थी मनोज वाजपेई उसमें एक्टर थे और.
सिद्धार्थ मलोतरा उसमें थे उस फिल्म में. दिखाया गया कि कैसे भारतीय सेना. के अंदर भी करप्शन है उस फिल्म को मैंने. पूरा देखा कैसे एक ऑनेस्ट ऑफिसर बदल जाता. है और बड़ी लंबी चौड़ी कहानी आती है बड़ा. एक पूरा तंत्र दिखाया गया जो हमें दिखाई. नहीं पड़ता हम तो इंडियन आर्मी मतलब सलूट. हमें लगता है किन सारी ईमानदारी इंडियन. आर्मी में बट वो करप्शन की तस्वीर देखकर. दिल सहमा था मेरा वो फिल्म सच थी.
फिल्म थी लेकिन उसके अंदर जो उसके. कहना चाहिए फैक्ट्स थे वो सच थे. यानी करप्शन इंडियन आर्मी में रहा है उससे. हम डिनायर सकते नहीं नाई नहीं करना चाहिए. और इसीलिए. बहुत से लोग आते हैं जो कि उनके खिलाफ. एक्शन भी लेते हैं और और ज्यादातर उसमें. जो चीजें दिखाई गई वो मेरे समय की थी. जिनके खिलाफ एक्शन लिया गया तोई किरदार.
उसका जो आप से हो किरदार मुझे नहीं पता कि. मेरे से था कि नहीं था फिल्म तो आपने देखी. आपको पता होगा सर वो. उसके अंदर खासकर आर्म्स लॉबी के खिलाफ था. और एक उसके अंदर आदर्श हाउसिंग स्कैम के. बारे में था तो ये चीजें वाकई थी हम ये. किस टेनर में आप बता रहे हैं किस ईयर में. यह सारी घटनाएं हुई होंगी.
देखिए आदर्श कैंप तो जो है काफी दिनों से. तो चर्चा में रहा चर्चा में रहा उसके बाद. 2010 के अंदर उजागर हुआ वो हम. इसी तरह य टारा व्हीकल का बहुत दिनों से. चल रहा था व 2 10 11 के अंदर 40 से 80 लाख. र की कीमत प यह ट्रक आए थे और इनको 25 लाख. की कीमत और इनको 100 गुना फीसद से ज्यादा. महंगा करके बेचा गया एक करोड़ के अंदर. भार और ऐसी ऐसी तकरीबन छह या 7 हज.
गाड़ियां. बेची गई बाप. तो और इसमें भारतीय फौज के नाम पे बकुल. करप्शन हां जो इसमें बेमल शामिल था. उन्होंने. उनकी पहुंच थी पीएमओ तक उस टाइम के पीएमओ. तक और एक रवि ऋषि थे जिनकी कंपनी के नाम.
पर उनको कभी आप उस पर नेट पर जाएंगे उनकी. जो कंपनी थी उसके बारे में अगर आप पढ़ेंगे. कि वो क्या करती थी तो आपको हंसी आएगी वह. गाड़ियां सेकंड हैंड. रद्दी गाड़ियां जो कि जैसे मायापुरी में. मिलती है व रिफर्बिशमेंट पट करके नॉक डाउन. किट आते थे बमल उनको नट बोल टेक्नोलॉजी से. करता था और वो बेचे जाते थे तो यह टाटा. ट्रक का जो करप्शन था जिसमें भारतीय फौज. के नाम पर करप्शन किया गया ये ये बिना.
पॉलिटिकल इवॉल्वमेंट तो संभव है नहीं थी. उसम पॉलिटिकल इव मैंने इसलिए बताया ना कि. पीएमओ तक उसके तार थे. एक बार आपको घुस की पेशकश भी शायद की गई. थी बिल्कुल आपने शायद उसका उसका उसका अ. सीबीआई जांच की है उसकी सीबीआई ने जांच. पूरी कर ली हम स्टेटमेंट्स रिकॉर्ड हो गई. लेकिन. जिनके खिलाफ है. वो किसी चीज को लेकर फिर कोर्ट के अंदर. चले गए चल रहा प्रक्रिया कोर्ट की तो लंबी.
चलती है जनरल वीके सिंह की लाइफ में जब. देखता हूं तो एक तरफ बड़ी इंस्पिरेशनल. कहानियां आती है बड़ी मोटिवेशनल कहानियां. आती हैं लोगों की मदद की है देश के लिए. समर्पण है पैरेलली कंट्रोवर्सी की भी लाइन. से लिस्ट निकल कर आती है देखिए आप काम. करोगे तो कंट्रोवर्सी होगी ना कहीं ना. कहीं जन्म तिथि विवाद जिसको आपने कहा कि. आप पहले व्यक्ति हैं जिसको दोदो डेट ऑफ. बर्थ सुपीम कोर्ट से मिली नहीं मुझे एक. चीज बताइए शवा. पूरी दुनिया के अंदर एक रूल है हां आपके. मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट आपका एज है आपका.
बर्थ सर्टिफिकेट आपका एज है उसी पर सब. चलता है हम अब एक दिन आप कहो कि नहीं जी. वो आपने कहीं पे. एक जगह ये लिखा हुआ था अरे भाई अगर वो. लिखा था उसके बाद अगर आप एनडीए में गए हम. तो सर्टिफिकेट दिखा कर ही गए ना हम वो. सर्टिफिकेट जमा भी हुआ फिर आप उसको बना. दें. जब क्या कहते हैं 36 37 साल निकल जाए कि. नहीं जी य ये तो उसमें लिखा हुआ एम क्या.
था उसका मम यह था कि आपने किसी को. लाना है जिसके लिए इनका जाना जरूरी है. मतलब आपको जल्दी रिटायर करवाने के लिए. आपके एज का इशू उस दौरे कांग्रेस सरकार ने. बनाया था. कोई इसमें शक नहीं है. और आपके जो सक्सेसर थे. उसको लेकर भी खबर आई थी जो बहुत ज्यादा. चर्चित हुई थी पंजाब से व आते थे और एक.
पंजाब से ही शायद खबर आई थी कि भारतीय. सेना जो है वह दिल्ली कूछ कर रही है दो. टुकड़िया और जैसे खबर हम पाकिस्तान को. लेकर सुनते हैं कि पाकिस्तान देश की. सरकारों का तख्ता पलट कर देती है. पाकिस्तानी फौज भारतीय फौज वीके सिंह की. अगवाई में देश की सरकार का तख्ता पलट करने. वाली ऐसी खबर आई थी देखिए उस समय जो एक. अभियान चल रहा था ये उस अभियान के तहत थी. खबर हम कि किसी तरीके से कुछ ना कुछ. निकाला जाए हम ताकि.
एक लांछन लगाया जा सके बट ये बहुत घिनौना. लांछन है सर ये है और इसके खिलाफ शिकायत. भी की गई कि आप ये यह चीजें हैं जिसके. अंदर आपने जो डाली है उनके खिलाफ कुछ. एक्शन नहीं हुआ उस पत्रकार के खिलाफ. कोई एक्शन नहीं हुआ उस टाइम होम मिनिस्टर. सिंडे साहब थे तब कोई एक्शन नहीं हुआ बाद. में फिर इस चीज को रिवाइव करके बताया गया. एक्शन नहीं हुआ. अब.
जो उसकी असली चीज है वह तो किसी को मालूम. नहीं है. कि नॉर्मल एक एक्सरसाइज थ और मैं एक बड़े. विश्वास के साथ आपको कहना चाहूंगा. भारत के अंदर पाकिस्तान जैसा नहीं हो सकता. भारतीय सेना की मनोवृत्ति वह है ही नहीं. हम ये हमारी सोच से मैं है ही नहीं बहुत.
दूर है आता ही नहीं हमारी सोच के अंदर. तो ऐसे उसके अंदर एक मसाला डाल के बनाया. जाए वो जी पूरी तरह नहीं भी बोला जाए वो. कुछ हो रहा था कुछ ऐसा लग रहा था आप उसके. जहन के अंदर ना जाए कि क्या था. कोई किसी चीज की तैयारी थी. किसी चीज के लिए रिहर्सल थी. वोह चीज बाद में उसकी जरूरत नहीं पड़ी अगर.
आपको. आप उस समय के दिल्ली को देखें जितने. फोर्सेस है दिल्ली में व क्या कम थे क्या. अगर किसी के मन में होता पाकिस्तान की तरफ. लेकिन हमारे मन में नहीं है मैंने इंडियन. आर्मी को जितना पढ़ा समझा जाना मुझे दो. किस्से के आते हैं जहां पर ऐसे आरोप लगे. एक आरोप लगा था फील्ड मार्शल समम मानेक पर. जिसमें फिल्म में भी दिखाया गया कि इंदिरा. जी ने उनसे पूछ लिया कि समम क्या तुम. तख्ता पलट की तैयारी कर रहे हो.
उन्होंने कहा मेरा पॉलिटिकल एंबिशन नहीं. है वहां के बाद दूसरा आरोप अगेन कांग्रेसी. गवर्नमेंट है जनरल वीके सिंह पर लगा एक. जर्नलिस्ट ने खबर छापी काफी चर्चा हुई कुछ. लोगों ने डिनायल ने उसको थोड़ा बढ़ाने का. भी काम किया. और ये आरोप लगा कि जैसे पाकिस्तान में. तक्ता पलट होता है वैसे ही आप कर रहे थे. मैंने कहना कि हमारे यहां बट. इंडियन आर्मी के ऊपर अगर लांछन लग रहा है. बहु ग नहीं देशद्रोह है.
और यह बात उसी तरह से लिखकर भेजी गई कि यह. जो किया गया है जिस जिस जर्नलिस्ट ने यह. शुरू किया है उसके खिलाफ एक्शन होना चाहिए. और उस जर्नलिस्ट के आप तार देखिएगा. पंजाब से उनकी यात्रा शुरू हुई जो उस समय. पीएमओ में थे वह पंजाब के थे. दोनों के अच्छे रिश्ते थे बोला गया कि तुम. कुछ निकालो.
यह कर सकते हो तो ये एक नहीं ब जैसे कहते. हैं ना सर जहां आग होती है वहीं धुआ दिखता. है इसमें कुछ था कुछ कुछ नहीं था दिक्कत. ही है. कुछ भी नहीं था एक किसी देखिए. बाहर के देश के अंदर एक जहां पे एक बार हम. पहले जा चुके हैं हम वहां प कुछ होने वाला. था मालदीव. उसके अंदर तैयारी की जरूरत थी आप बोल तो.
नहीं सकते ना किसी को ट्रू हमारे पास खबर. थी और वो खबर उस टाइम के जो एनएस उनको. बताई गई थी कि वहां पर यह होगा. उन्होंने कहा नहीं हमारे पास ऐसी कोई खबर. नहीं है बट ये एक आम इंसान के तौर पर. डाइजेस्ट करने में बड़ा मुश्किल हो रहा है. कि एक इंडियन आर्मी के प्रमुख को हटाने के. लिए एक खबर चलाई जाती है जिसमें कहा जाता. है कि व इंडियन आर्मी का प्रमुख भारत की. सरकार में करेंट गवर्नमेंट को हटाएगा और.
तख्ता पलट करके खुद बैठ जाएगा ये यही तो. खासियत है इसीलिए तो क्या कहते हैं उनकी. सरकार की जो उस हालत थे उस टाइम के अगर आप. देखो य क्या था उस जो भी मर्जी आ जो कर. सकता था. कोई उनको यह नहीं थी कि भाई एक गोपनीय. चिट्ठी लीक हो सकती है. मैंने तो आज तक सुना नहीं एक तरीका है. गोपनीय चिट्ठियों को रखने का हम. अकाउंटेबिलिटी होती है ट्रू.
मनमोहन सिंह को आपने चिट्ठी लिखी थी फौज. के टैंक में उस दौर में खबर थी कि ग फौज. के फौज की सब चीजों के बारे में लिखी थी. कि हमारी ये कमी है यह कमी है यह कमी है. और इनको दूर करना जरूरी है जो मुख्य बात. हमने पढ़ी थी उस दौर में ये था जो मैंने. अगर क्योंकि मामला सेंसिटिव इसलिए कोट कर. दे रहा हूं कि अखबार में खबर छपी थी कि. मनमोहन सिंह को आपने चिट्ठी लिखी कि फौज. के टैंक का गोला बारूद खत्म हो चुका है. पैदल सेना के पास हथियारों की कमी है हवाई. सुरक्षा के उपकरण जो है अपनी ताकत खो चुके.
हैं और यह सारी बातें प्रधानमंत्री गई और. फिर यह सार्वजनिक कर दी क्योंकि. इसके बारे में प्रधानमंत्री जी को एक बार. पहले बताया तो यह चिट्ठी लिख होना तो देश. के भी खतरा था सुरक्षा के साथ खत था. बिल्कुल यह भी तो देशद्रोह है ऐसी गोपनीय. चिट्ठी आप लीक कर रहे हो जिसको कि पढ़कर. देश के दुश्मन बड़े खुश होंगे. तो इनके ऊपर एक्शन होना चाहिए था कि नहीं. अब नहीं हुआ अब वो बड़े लीपा पोती होगई कि.
नहीं जी एक जूनियर कोई है उसने गलती से. निकाल दी अरे. सीक्रेट चिट्ठियों का एक तरीका बना हुआ है. सरकार के अंदर कैसे रखी जाती है कौन उसको. देखता है कौन पढ़ता है और ये वो भी इतने. सेंसिटिव इशू प. तो जो लोग. कर रहे थे उनके दिमाग में नहीं आया ना. उनको आया कि शायद इससे ही इनको इनके जाने.
के अंदर आसानी हो जाएगी. अब मैं एक बहुत ब्लंट सवाल पूछता हूं सर. में क्या जनरल वीके सिंह को इंडियन आर्मी. चीफ के पद से हटाने के लिए उस दौर की. कांग्रेस सरकार ने साम दम दंड भेद चला और. देश की सुरक्षा को खतरे में डाला चिट्ठी. लीक वाला मामला जो आप कह रहे थे और दूसरा. जो यह पलट वाली बात हुई सच. आपको स्पष्ट आंसर चाहिए.
बिल्कुल सही है. कोई भी सरकार ऐसा गैर जिम्मेदाराना काम. नहीं कर सकती लेकिन हुआ क्योंकि कुछ. व्यक्तिगत उसमें इंटरेस्ट थे चाहे वह. आर्म्स लॉबी के हो चाहे वो ट्राटर वाले. मामले के हो चाहे किसी और को लाने के. मामले के हो लेकिन उसमें व्यक्तिगत. इंटरेस्ट थे. ऐसा. और मैं इसको देश द्रोह की संज्ञा देता हूं.
देश के बारे में आपने सोचा ही नहीं उसका. क्या फर्क पड़ेगा आपने भारतीय सेना के. बारे में नहीं सोचा कि उसके पर क्या फर्क. पड़ेगा इतने बड़े लांछन का. एक बहुत. बड़ी चीज. विश्वास डगमगाने वाली चीज है है अगर य. आरोप जो कह रहे हैं शत प्रतिशत इसी तरह से.
सच है ब फिर यह विश्वास डग मंगाने वाली. चीज है बिल्कुल है. मैंने इंडिया और पाकिस्तान प की स्टोरी की. थी 1947 से हम कैसे आगे बढ़े तो उसमें. अलग-अलग पहलू थे कि भारत आगे कैसे निकल. गया और पाकिस्तान कैसे पीछे रह गया उसमें. एक बहुत मेजर वजह थी आर्मी का रवैया. हमारी आर्मी. का जो रवया है और पाकिस्तान की आर्मी का. रवैया जो है उसमें जमीन आसमान का फर्क है. इसी ज से डेमोक्रेसी हमारी बची रहेगी उनकी. खत्म हो गई शुभंकर अगर आप देखे उस समय का.
टाइम. जब. फि मार्शल करिया उस सम जनरल करिया थे. उन्होंने स्वतंत्रता के बाद नेहरू जी को. कहा कि देखिए हम लोग. अंग्रेजों के पे स्केल के ऊपर. और शायद एक नए देश के लिए यह बाहर उठाना. मु होगा तो हम चाहते हैं कि इसको कम कर. दिया जाए हमारी पेंशन कम कर दी जाए.
जो फौज ऐसा कर सकती है. वह देश के साथ चलेगी. पाकिस्तान ने नहीं किया इसीलिए वह तो. बिजनेस करते उनके सारे फौजी इसीलिए वहा पर. तो कोर कमांडर को करोड़ कमांडर बोलते हैं. घर बनवाते हैं सब. इंग्लैंड में सब बिल्कुल तो. हमारी मनोवृति हमारा काम करने का तरीका.
देश हित का है और यह फौज उसी तरह से चली. है जिस दिन से भारत आजाद हुआ है आर्मी चीफ. के टेनोर के तौर पर आपको क्या लगता है. आपने कौन सा ऐसा काम किया जो आपको लगता है. ये रिमार्केटिंग. जिसके अंदर. और भी बहुत सारी चीजें थी उसके अलावा जिस.
तरीके से हम. सीमाओं पर काम करते हैं उसको सुगठित कैसे. किया जाए और आप अगर देखेंगे. 2010 से पहले जो चीजें होती थी वो 10 और. 12 के बीच में उनकी इंसिडेंट जो है वो कम. हो गए. लोगों के अंदर विश्वास पैदा करना होता है. चीजों को आगे बढ़ाना होता है.
तीसरी सबसे बड़ी चीज थी जनता के अंदर अपने. फौज के अंदर एक विश्वास पैदा करना. कि आप कर सकते हो रोक नहीं आपके ऊपर गलती. अगर. इसलिए हुई है कि आपकी जजमेंट गलत थी कोई. बात नहीं डांट खा ले ना लेकिन और कुछ नहीं. होगा. अगर गलती इसलिए हुई है कि आपका मन ठीक. नहीं था आप उसमें बेईमानी का आपका मन था.
फिर आप भूल जाओ. कि क्या होगा एक विश्वास लोगों के अंदर. पैदा किया गया ताकि. सेना जो है वह उसी तरह चले जैसे कि 1947. के अंदर उसके बारे में सोचा गया था अब आप. नेता भी है आप आर्मी चीफ भी रह चुके हैं. अगनि के इशू पर आम जनता ने आरोप लगाया कि. नेता अपनी पेंशन मेंटेन रखते हैं जय बार.
विधायक तय बार पेंशन बनी रहती है और. नेताजी अपनी मलाई नहीं गायब करते लेकिन. देश के सैनिकों के साथ गलत कर रहे हैं. क्योंकि यह जो 4 साल का पीरियड है यह. इसलिए किया गया है ताकि आपको पेंशन ना. देनी पड़े और इसमें से बहुत सारे जवान जो. हैं क्योंकि केवल 25 पर आगे जाएंगे तो. क्वालिटी तो जाएगी लेकिन जो 75 पर बचेंगे. ऐसा भी हो सकता है कि समाज में गलत चीजों. में इवॉल्वड अगर वो हो गए तो समाज का भी. माहौल खराब हो सकता है तो नेताजी ने अपनी. जेब बचा ली लेकिन फौजी का हिस्सा काट दिया.
जबकि देश की जनता फौजियों के नाम पे देती. है देखिए इसमें अ. एक और आपने शायद रावणी जी के बारे में. चीजें निकली थी उन्हो उनका एक आईडिया था. टूर ऑफ ड्यूटी का जो कई देशों में होता है. आमतौर पर उन देशों में जिनमें अ. जनसंख्या कम है. पूरा देश जो है व टूर ऑफ ड्यूटी के लिए. जाता है और.
काम करता है. तरीका यही था आईडिया उनका यह था. परंतु. वह उस आइडिया को जिस तरह से. सेना ने उसका प्रेजेंटेशन दिया जिस तरीके. से वह पसंद आया कि इसको लोगों के अंदर. ज्यादा लोग ट्रेंड होंगे एक जरिया बढ़ेगा. बहुत लोग उसके अंदर वह करके जब उसका पूरा.
जो निकाला गया व इस रूप में आया. किसी भी चीज को जब हम शुरू में लाते हैं. तो व शत प्रसत सही नहीं होती और यह. अग्निवीर के बारे में एक साल हो गया. जो पहला बैच निकले एक साल होने वाला है शद. तो. मिड कोर्स करेक्शन करना पड़ेगा देखकर कि.
क्या हुआ है क्या नहीं हुआ है कैसे इसको. और अच्छा कर सकते हैं कैसे इसको और आगे ले. जा सकते हैं ताकि सबकी भलाई हो मेरा अपना. मानना है कि इसके अंदर कोर्स करेक्शन होगा. और कोर्स करेक्शन की जरूरत भी है कि कैसे. उसको किया जाए. जिस तरीके से हमारे शॉर्ट सर्विस कमीशन थे. ऑफिसर्स के लिए क्या क्या जवान के लिए. शॉर्ट सर्विस. योजना है क्या ये इसको क्या दूसरा रूप.
दिया जा सकता है यह सब चीजें सोचने की और. उस समय जिस तरीके से सिर्फ. सेना मुख्यालय के बीच में और मिनिस्ट्री. के बीच में और पीएमओ के बीच में जो भी. इसके ऊपर विचार विमर्श हुआ शायद उसको. ब्रॉड करने की जरूरत थी एक एक्सपर्ट कमेटी. बठ ने की जरूरत थी कि इसको पूरे तरीके से. आप एग्जामिन करिए कि इसको क्या करना चाहिए. और मुझे लगता है कि यह बदलाव आएगा.
इसमें काउंटर क्वेश्चन मेरा ये कहा गया था. कि सेना को यंग रखने के लिए किया जा रहा. है अब सवाल मेरा ये क्या सेना के भविष्य. को बेहतर करने के लिए कहकर उठाए कदम क्या. सेना के भविष्य. पर संकट के बादल मंडरा सकता है क्योंकि जो. आपकी बातें सुनी मैंने उससे मुझे लग रहा. है बहुत कुछ इसमें सही करने की जरूरत है. अग्निवीर में देखिए. सेना युवा रहनी चाहिए कारगिल जैसी जगह पर.
एक एज के बाद मुश्किल है काम करना. और वह तो हाइट फिर भी कम है हमारी सिचन के. अंदर पोच 19000 200 हज फुट की हाइट पर और. भी ज्यादा है. कई तरीके करने के और सेना इसके बारे में. बहुत पहले से कहती रही है एक लेटरल. मूवमेंट का तरीका होना चाहिए था एक एज के. बाद आप उसको पैरामिलिट्री फोर्सेस में डाल. दीजिए अब दिक्कत हमारे यहां क्या होती है.
कि. हम अपने-अपने दुर्ग के अंदर रहते हैं अपना. अपना झंडा फहराते हैं दूसरे से हमारा कोई. सरोकार नहीं है. लेटरल ट्रांसफर किसी को नहीं चाहिए. जी हम अपनी रिक्रूटमेंट खुद कर रहे हैं हम. क्यों ले. देश के तौर पर हमको सोचना होगा और ये. लेटरल ट्रांसफर आज से नहीं. सेना बहुत दिनों से कह रही कि ठीक है आप 8. साल 9 साल 10 साल एक निर्धारित कर दीजिए.
उसके बाद इस जवान को जो. आर्थिक तौर पर दूसरे तौर पर चीजें ठीक हो. आप इसको उधर ट्रांसफर कर दीजिए आप उधर भी. तो पेंशन लेगा. उसी उसी उसमें जाएगा उधर ट्रेंड होगा. एक्सपीरियंस आदमी आएगा उधर भी पुलिस. फोर्सेस. सेंट्रल. आर्म पुलिस फोर्सेस जो है उनकी भी उनकी. बेहतरी होगी कितने परसेंटेज आप लेते हैं व.
फिक्स किया जा सकता है व एक्सपर्ट्स बैठकर. उसको कर सकते हैं यह लेटरल जो चीज है यह. आई नहीं क्योंकि इसमें सबने कहा नहीं जी. हमारी दीवार मत तोड़िए हमें नहीं चाहिए. अब. सेना के अंदर उसको. लोगों के क्या आकांक्षा भाई अब सेना का. अगर जवान आज की तारीख में 15 साल मिनिमम. उसकी कलर सर्वेस से 15 साल के बाद जाता है.
और. मान लीजिए 19 साल 20 साल की उम्र में आता. है तो 35 साल. की जज में वो चला जाता है उसको उसकी. देखभाल भी करनी जरूरी है अगर आपको यंग. रखना है तो और अगर आप चाहते हैं कि और. थोड़ा सा युवा वर्ग हो तो उसके लिए आपको. तरीका निकालना पड़ेगा तो ये छोटी समस्या. नहीं है और मेरा मानना है कि इसके ऊपर.
बहुत गहन. विचार करने की काम करने की जरूरत है ठीक. है सर अब हम एंड सेगमेंट में हम आ रहे हैं. तो कुछ सवाल लोगों ने भी मुझे दिए थे अ. छोटे-छोटे सवाल हैं ये बड़े मासूम सवाल है. जो आम जनता के मन में आते हैं पहला सवाल. इंडियन आर्मी में भी करप्शन है देखिए. इंडियन आर्मी में कौन जाता है हम लोग. हम लोग जाते हैं समाज से लोग जाते हैं ना. जो समाज के अंदर वो आपको वहां पर मिलेगा.
वो वो वो आईना हालांकि जिस तरीके से. ट्रेनिंग की जाती है जो कुछ किया जाता है. वो. काफी हद तक इंश्योर करती है कि चीजें ना. हो लेकिन आखिर वो तो समाज का ही व्यक्ति. है ना है तो वही अगर उसके अंदर अ. प्रोटोटाइप के अंदर गड़बड़ है. उसका क्या करोगे आप. क्या इंडियन आर्मी चीफ का सिलेक्शन भी.
सरकारों के फेवरेट जम पर होता है देखिए. आमतौर पर इंडियन आर्मी के चीफ का सिलेक्शन. एक प्रक्रिया बहुत निर्धारित की गई है और. उसके अंदर. जो वहां तक पहुंचता है पहले तो नॉर्मल. नहीं है यह नहीं है कि सभी वहां तक पहुंच. जाएंगे हमारा पिरामिड बहुत स्टीप है और. इसीलिए. सेनाएं हमेशा कहती रही है कि हमारे. पिरामिड को समझिए हमारा पिरामिड फ्लैट हो.
नहीं सकता. जो कि अन्य सर्विसेस के अंदर है. उस स्थान से एक स्थान नीचे तक योग्य लोग. पहुंचते हैं दूसरे नहीं पहुंचते और उनके. अंदर से अगर आप और वो सरकार का उसका वो है. कि आप सिलेक्ट करिए जो आपको उसमें ठीक. लगता है अमूमन सीनियरिटी का. देखा जाता है कई बार सीनियरिटी का ना रखकर.
योग्यता का आधार भी बना लिया जाता है तो. ऐसा कुछ वो नहीं है ठीक है विक्रम बत्रा. की कहानिया अक्सर लोग सुनते हैं और कई बार. कहा जाता है कि अगर वह जीवित होते तो शायद. वो इंडियन आर्मी के चीफ बन जाते इट्स अ. वेरी हाइपोथेटिकल क्वेश्चन बट क्योंकि. कहानी इतनी फेसिनेटिंग है जितना उनको हमने. देखा वीडियोस में पहली बार इंडिया नाम की. वीडियोस आ रहे थे. ड यू थिंक अगर वो होते तो इंडियन आमी के. लिए ग्रेट सर्विस होती देखिए बहुत चीजें. होती है आपके.
ट्रेनिंग कोर्सेस होते हैं अलग-अलग चीजें. होती हैं आपकी अलग-अलग जगह पर रिपोर्ट. होती है आप वीर हैं बहादुर हैं सब कुछ है. आपके अंदर. और एक स्टेज वो आती है आप कहीं भी चूक. सकते हैं. चूक गए फिर क्या करोगे. तो जरूरी नहीं है मैंने कभी नहीं सोचा था. कि मैं चीफ ब. मैं आपसे शेयर कर रहा हूं आज और आपके. माध्यम से सबसे शेयर कर रहा हूं. एक ख्वाहिश थी अपनी बटालियन की कमांड करलो.
जिस दिन वह कमांड खत्म हो गई. 94 के अंदर मैं. आज जन्नत मिल गई. उसके बाद सब. आप कहां पर हो कैसे काम कर रहे हो आपके. कोर्स की ग्रेडिंग्स क्या है. आपकी रिपोर्ट्स कैसी हैं. किसकिस इलाके में आपने काम किया है वहां.
पर कैसा काम हुआ. बहुत ऐसे मौके आते हैं जबकि पता नहीं चलता. कि आप आगे बढ़ेंगे कि नहीं बढ़ेंगे तो यह. कहना बड़ा मुश्किल है कि आज एक यंग ऑफिसर. के तौर पर मैं सोचूं चीफ बन जाऊंगा. जनरल विपिन रावत के साथ जब दुर्घटना हुई. तो हम सब टीवी पर कवर कर रहे थे उससे पहले. जनरल विपिन रावत ने चाइना को लेकर कुछ. स्टेटमेंट भी दिए थ और लगातार समय समय पर. हार्श स्टेटमेंट वह दे रहे थे.
पाकिस्तान से लेकर दुनिया के तमाम बड़े. देशों में हमने यह देखा कि जब बड़े लोगों. के साथ ऐसी घटनाएं होती हैं तो आमतौर पर व. इत्तफाक नहीं होती है कुछ ना कुछ कहानी. जुड़ी होती है उस वक्त कई सारे ऑफिसर्स. संदेह भी किया हालांकि कोई ऐसी बात निकल. कर नहीं आई लेकिन क्योंकि आप इनसाइड आउट. देख चुके हैं सारी कहानियां व नाश. एक्सीडेंट था आपको लगता है कि उसमें कोई. साजिश हो सकती इत्तेफाक. अच्छा हेलीकॉप्टर था.
कमांडिंग ऑफिसर उसका चला रहा था रिहर्सल. कर चुका था दो बार जोक कायदे से जैसे करनी. चाहिए. कहीं. स्प्लिट सेकंड की कोई दिक्कत हुई. स्प्लिट सेकंड जहाज की स्पीड उस. हेलीकॉप्टर की स्पीड काफी है दो पहाड़ों. के बीच में से गुजर रहा था अच्छा अनक नीचे. से बादल आए वाइट आउट हो जाता आपको दिखता. नहीं है ऐसा नहीं है कि आपको कुछ आगे. दिखाई दे उसके अंदर क्या उस टाइम किया.
होगा व किसी को नहीं पता वह एक जो. एक सेकंड की जो गड़बड़ हो गई या माइक्रो. सेकंड की ग क्रश कर. इसमें और फुली. फ्यूल्ड. उसके टैंक्स पूरे भरे हुए थे क्योंकि वो व. वहां पर रिफ्यूल नहीं करना चाहता था वहां. पर बैरल्स के अंदर उसका वो आएगा दूसरा. आएगा उसको फेथ नहीं थी वो अपना पूरा लेकर.
जा रहा था तोव एकदम से जैसे ही क्रैश हुआ. वो पूरा का पूरा एकदम से. यह कहिए कि सारे फ्यूल टैंक्स एकदम से. स्टार्ट हो गए. तो बहुत ही मैं कहूंगा कि. दर्दनाक. बहुत ही. ऐसी चीज जिसके बारे में कभी सोचा नहीं जा. सकता और अनफॉर्चूनेटली कॉप्टर्स.
के साथ पता नहीं चलता कब क्या होगा. आप आपको कब पता लगा था उस जब ये घटना हुई. क्या रिएक्शन जैसे जैसे ही हुआ था उसी. टाइम उ पता लगा कि ऐसा हो गया है उसके बाद. चेक किया शुरू में उनका उनके शव का पता. नहीं चला क्योंकि पूरे जल गए थे यह था कि.
शायद बच गए हैं अभी नहीं तो लगा शायद बच. गए हैं लेकिन फिर बाद में पता चला कि फिर. उनका डीएनए कराया गया तब उनका पता चला. व पूरा जो. फ्यूल टैंक के साथ पूरा भरा हुआ तो पूरा. यह कहिए कि एक तरीके से आप बम के अंदर बैठ. के जा रहे हैं. सीडीएस बनाया गया पहली बार भारत में आपने. शुरू में एक बात कही थी करगिल वाली घटना.
को लेकर कि समन्वय नहीं था आपस में. कोऑर्डिनेशन नहीं था आप आर्मी चीफ रह चुके. हैं सीडीएस बनने से आपको लगता है कि चीजें. बेहतर हुई है बिल्कुल सीडीएस की डिमांड. कोई आज की नहीं है 40 साल से डिमांड चल. रही थी और उसका कारण था कि एक व्यक्ति. चाहिए जो कि सिंगल पॉइंट ऑफ एडवाइस दे. सारी चीजों को समझ. और उनको. उनके कारवान के अंदर उसकी भूमिका हो ताकि.
सब चीजें एक समन्वय के साथ चल सके उसकी. जरूरत थी और मैं श्रेय देना चाहूंगा. प्रधानमंत्री जी को कि उन्होंने इसको. जल्दी माना और इसको कराया इंडियन आर्मी का. सबसे बड़ा दुश्मन कौन है पाकिस्तान या. चाइना. इन आर्मी के सभी दुश्मन है सबसे बड़ा भारत. के लिए ज्यादा बड़ा खतरा पाकिस्तान देखिए. कौन क्या करता है उसकी बड़ी एक अलग चीज है. इस समय हमारे दोनों उत्तरी पड़ोसी और.
हमारे पश्चिम में जो पड़ोसी हैं उनकी मन. छाए ठीक लगती नहीं और दोनों के बीच में. समन्वय भी है तो कुछ ना कुछ वह करते. रहेंगे और हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम. क्या उनको संदेश दें जिससे कि वोह. वहीं पर रुके रहे ला में भी 2008 में आपके. साथ एक घटना मुझे आपने कहीं सुनाई थी यंग. ऑफिसर ने यंग ऑफिसर को देखिए क्या होता.
चानी ट्रूप को कहा कि आई विल शॉट यू हा. नाइन ग्रेनेडियर्स का यंग ऑफिसर था और. होता क्या है कि अगर आदमी को पीछे मुड़ के. देखना है. तो फिर काम गड़बड़ हो जाएगा. तो एक सीधी साधी इंस्ट्रक्शन थी कि आप को. क्लियर हुकम. यह चीज नहीं होनी है तो चाइनीज पेट्रोल.
आया मेजर था उसके साथ 50 या 40 जवान थे और. आके उन्होंने व हमारा तार हिलाना शुरू कर. न्यू टेक इट आउट हमने सुना इसके पहले शद. बंकर भी तोड़े गए थे हमारे उससे पहले उससे. पहले मैं उसके बाद क्या कते हैं ईस्टन. कमांड के अंदर आया था तो व मेरे दिमाग में. था कि बंकर क्यों टूटे. अगर अगर हम चाहते अगर हम वेट करते रहे. पूछेंगे अभी आर्मी हेड क्वार्टर बताएगा. पता नहीं क्या हो जाएगा तो एक क्लियर एक.
निर्देश था सबको ऐसे नहीं होना है तो जब. उसने हिलाना शुरू किया तो उसने जाकर उसका. हाथ पकड़ा प्यार के साथ और हटाया अगली बार. हाथ लगाया आईल शूट यूट्स इट चले गए अब. दोबारा नहीं आए वहा. दोबारा आए नहीं. तो यह. देखि सबके अंदर है लेकिन अगर किसी को यह.
लगने कि मैंने कर दिया तो कहीं गलती ना हो. जाए पता नहीं मेरा क्या होगा तो यह भरोसा. दिलाने की जरूरत है देखिए. जजमेंट की अगर गलती है ठीक है डां ढूं लग. जाएगी लेकिन अगर कोई और बात है तो ठीक है. उसके लिए तैयार रहो अगर कुछ नहीं है तो. हमारा हाथ आपके ऊपर है कोई. इंडियन आर्मी को जो अभी इक्विपमेंट मिल. रहे हैं जो जिस तरह से फैसिलिटी मिल रही. है वो चाइना के कंपेरिजन में सही है देखिए.
हम चाइना के साथ क्यों कंपेयर करते हैं हम. ये देखें क्यों वो हमारे पड़ोसी है और वो. पाकिस्तान में नेपाल में श्रीलंका में. हमारे तीनों पड़ोसियों को लगातार वो फंड. कर रहे हैं उनके पोर्ट्स पर कब्जा कर रहे. हैं वहां से हम पर प्रेशर बना रहे हैं. उनको साथ में लेके इसलिए पूछ जहां तक जहां. तक हमारी जो चीजें हैं अगर वो अच्छी है. उसके ऊपर हम को विश्वास है तो हमको किसी. से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि हमारे. अंदर एक और बड़ी चीज है और वो है हमारे.
लोगों का जजबा. उससे बड़ा कुछ नहीं. 62 के अंदर हम बोल्ड एक्शन रफल लेकर लड़े. जहां जहां हम लड़े वहां चीनियों के. छुटा दिए हमने वो दूसरी बात है कि उस टाइम. जो भी हायर लीडरशिप थी उनकी गलतियां थी. लेकिन जवान उसके साथ खड़े हुए ऑफिसर और. यूनिट लेवल जो लोग बाग थे उनका कोई.
मुकाबला नहीं और बाद में कई बार चीनों को. छुड़ाए हमने फिर त बात ही है ना. सर यह तो हमने सारी बातें कर ली. प्रैक्टिकल एक और फौजी भी तो इंसान ही है. फौजी का इमोशनल साइड भी तो होता होगा ना. सर फौजी भी टूटता होगा बिखरता होगा रोता. होगा क्या होता है फौज का इमोशनल साइड. देखिए इमोशनल होते हैं आप आपके साथ कोई है. [संगीत]. मारा जाता है किसी ऑपरेशन में शायद आप.
आंसू नहीं बहाते दिल रोता है और बहुत. सालों तक रोता है. दिखाते नहीं आप आप कहते हैं नहीं मुझे. सहज दिखना है बाहर से शायद अंदर आप टूटते. हैं आपने कोई दोस्त साथी खोए ऐसे जो अभी. भी याद आते हो बहुत किसी एक का नाम लेके. बताना चाहेंगे. कितनों के नाम बताऊ आपको कोई ऐसा जो अभी. भी याद आता हो अक्सर.
कई ऐसे हैं जो कि एक हमारे. [संगीत]. सुभेदार साहब थे. बंका सिंह. इसी तरीके से एक और थे गोपी. बहुत से ऐसे हैं जो श्रीलंका के के थे. 71 में थे. बहुत से लोग हैं जिनकी याद अभी तक आपके मन. में है वो रहेगी व जाएगी नहीं परिवार को.
लेकर फौजी भी रोते हैं क वहां पर. परिवार तो रोता है होगा फौजी ही सोचता. जरूर अपने परिवार के बारे में लेकिन. जो काम है वह शायद उसको. लगाए रखता है जिसमें वो उसको पता है कि. कोई ना कोई उसके परिवार को जरूर देखेगा. इंडियन आमी की सबसे चैलेंजिंग पोस्टिंग. कौन सी है देखिए आप सब जगह चैलेंज होते. हैं बट जैसे सियाचीन है बहुत टफ है देखिए.
टफ है उसी तरीके से आप. पूर्वोत्तर में चले जाएं नॉर्थ ईस्ट में. अपनी उसकी अल एक अलग वो है आप. सिक्किम में ऊपर चले जाएं अलग है सब जगह. कठिनाई जहां पर है जहां पर रा दुर्गम. रास्ते हैं जहां पर डिप्लॉयड आपकी हा. एटीट्यूड पर है या जंगल में है या आप लाइन. ऑफ कंट्रोल पर हैं जहां पर एक अलग तरह का. माहौल रहता है तो कठिनाई सब जगह है सब जगह.
मुश्क चलिए इसको रिफ्रेम करता हूं एक फौजी. के लिए बॉर्डर का युद्ध ज्यादा कठिन होता. है एलएसी एलओसी वाला या वह जो अपने ही. लोगों से लड़ना पड़ता है चाहे वह माओवाद. की समस्या हो नॉर्थ ईस्ट की समस्या हो जो. अभी हमने मणिपुर में देखा या कश्मीर में. रहा देखिए दोनों तरह की चुनौतियां अलग है. जब हम अपने. आंतरिक उसमें पढ़ते हैं व सबसे बड़ी. कठिनाई आती है कि दुश्मन तो कोई नहीं है. आपका.
बॉर्डर के ऊपर तो दुश्मन है ना एक. आंतरिक उसमें कहां दुश्मन होता है व अपने. ही लोग हैं आपका आपका आपको तरीका अपना. बदलना पड़ता है आपको अपने लोगों को भी. बचाना पड़ता है क्योंकि आप तब तक कुछ नहीं. करना चाहते जब तक कि हद एक हद जो आपने. नियुक्त की वो पार ना हो कठिनाई है और. शायद बॉर्डर से जदा कठिनाई है. अपने लोगों पर आप बहुत कठिनाई है आप आप. नहीं कर सकते आपको बहुत सोच समझकर काम.
करना पड़ता है बीच में आर्मी पर कई सारे. एलिगेशन सर आए थे कश्मीर में खासतौर पर कि. महिलाओं के साथ ऐसी घटनाएं हो गई यह सब. बातें आती है तो आप लोग कैसे रिएक्ट करते. हैं देखिए मेरा अपना जो एक व्यक्तिगत. अनुभव रहा है. जितनी हमारे पास ह्यूमन राइट वायलेशन की. चीजें आती है. जितनी आती है. 98 पर. जब उनकी जांच कराई जाती है तो तथ्य नहीं.
पाए जाते. 2 पर. घ गलती पाई जाती उस पर एक्शन होता तो. कई चीजें हैं जिसमें. कई बार मीडिया ट्रायल हो जाता है बिना. समझे कि क्या हुआ है क्या नहीं हुआ हुआ. बहुत ऐसे इंसिडेंट है मैं आपको बता सकता. हूं कि जहां चीज अलग चलती है बाद में जब.
उसका सच पता चलता तो कुछ और होता. एक खबर मैंने और पढ़ी थी नेपाल से. रिक्रूटमेंट होता था हमारी फौज में उसे. काफी कम किया गया चाइना ने उनको रिक्रूट. करना शुरू कर दिया क्योंकि चाइना नहीं. उसमें क्या है कि. रूस ने भी कुछ लोगों को लिया है यूक्रेन. ने भी कुछ लोगों को लिया है कुछ चीन भी. कोशिश कर रहा है अब ज्यादातर लोग सेना में. इधर आते थे और उसके हिसाब से व पसंद भी. करते थे.
कुछ जब डिस्पेरटनेस. योजना. की समीक्षा हो इसके बारे में पुन विचार हो. इसके बारे में पूरे तरीके से सब पहलुओं को. समझा जाए तो शायद य नेपाल वाली समस्या भी. हल हो जाएगी य इनका ये जो नेपाल का हमारा.
संबंध रोटी बेटी का है. छोटा मोटा संबंध नहीं है. वहां पर जो हमारे पेंशनर है उसकी पेंशन जो. भारतीय. रुपए में जाती है वो उनके यहां. अच्छे-अच्छे लोगों की उतनी पेंशन नहीं है. तनखा नहीं है पेंशन को तो छोड़िए. एक बहुत बड़ी एक वो है वहां पर. हमारे हिमायती हों की लॉबी है और मेरा.
अपना मानना है कि इसको हमको बनाए रखना. चाहिए. बहादुरों के भी वो कौम है जो जो बिल्कुल. बकुल. जी और ये स्ट्राइक आपको पता था आपको रखा. क्योंकि बाकी सब जगह तो रेस्क्यू में आपको. रखा गया है आप चेहरा आप ही रहेरी स्ट्राइक. आपको नॉलेज थी या नहीं थी उसमें क्या ब. चीफ थे एक बार जब चीजें हो जाती है तो पता. चल जाता है. होना है हम इसका भी मन के अंदर पता था कि.
कुछ होना है किस रूप में होगा. किस तरीके से होगा कहां पर होगा एक जनरल. अंदाजा क्योंकि वहां पर इतना रहे हैं तो. होता है कि कुछ ना कुछ होना चाहिए. अच्छा था. कुछ चीजें कई बार करने की जरूरत पड़ती है. ताकि दूसरे को लगे कि ऐसे ही अबकी बार. नहीं होने वाला आपको भी नुकसान होगा.
इंडियन जो आर्मी को लेकर एक नया स्टैंड. आया कि यह नया भारत है जो फिल्मों में. दिखाते हैं अर कि हम घर में घुसकर मारते. हैं एक तो हो गया फिल्मों के लिए एक हो. गया कि आर्मी चीफ आप रहे हैं आपको रियलिटी. पता है क्या आज की इंडियन आर्मी. इतनी सशक्त है कि वह एक साथ पाकिस्तान. चाइना दोनों को कर सकती है इंडियन आर्मी. हमेशा से सशक्त थी सशक्त रहेगी और यह. सशक्त के अंदर सहारा जब सरकार साथ होती है.
तो सहारा ज्यादा मिलता है जब सरकार थोड़ी. उखड़े मन से होती है तब मोर्चा सेना को. अपने आप संभालना पड़ता. ठीक है एक लास्ट क्वेश्चन मैं करता हूं. आपसे राजनेता के तौर पर आर्मी चीफ के तौर. पर बहुत सारी जिज्ञासा मेरी थी अगर जनरल. के सिं यस बॉस वाले आदमी होते तो क्या. पॉलिटिकल करियर और शानदार हो सकता था. पॉलिटिक्स में भी वह सर्वोच्च पर पहुंच. जाते.
देखिए पॉलिटिक्स मेरे लिए उसकी व्याख्या. अलग है. पॉलिटिक्स का मतलब है जन सेवा पॉलिटिक्स. का मतलब पद नहीं है पर जितना बड़ा पद होगा. उतनी ज्यादा आप सेवा कर सकते आज आप. गाजियाबाद सीमित है या अगर अगर आप मान. लीजिए डिफेंस मिनिस्टर होते तो आप आर्मी. में रहे हैं आप और चार बारीकियों को और उस. तरह से कर सकते थे या आपका कोऑर्डिनेशन. आर्मी चीफ के साथ ज्यादा बेहतर होता वो. ठीक है आपकी बात लेकिन मेरा अपना मानना है.
कि अगर आप जनता के लिए काम कर सकते हैं. तो वह राजनीति की सबसे बड़ी उपलब्धि. कुछ भी आप करें जिससे जनता को फायदा हो और. शायद मेरी सोच 2014 से यही थी कि क्या. होना है गाजियाबाद आगे. तक बड़ी चीजें होनी चाहिए. चाहे एक्सप्रेसवे हो चाहे कनेक्टिविटी. दूसरी हो चाहे मेट्रो हो चाहे रैपिड हो.
चाहे हवाई अड्डा हो चाहे अ. किस तरीके से स्कूल अच्छे. चले. हर चीज जिससे कि लोगों को फायदा हो 2004. में अटल जी ने चुनाव हारा था तो एक. स्टेटमेंट दिया था ना टायर्ड हूं ना. रिटायर्ड हूं. दो पारी आपकी हमने देख ली थर्ड में क्या. है. देखिए मेरे खल से थ थोड़ा सा देखिए टायर्ड. तो कोई होता ही नहीं है जो टायर्ड हो जाता.
है उसको रिटायर करते हैं. 3.2 कुछ देखते हैं थैंक यू सो मच सर आपने. हमें समय दिया तकरीबन हर एक विषय पर हमने. कोशिश की बात करें आई एम शर कि लोग भी. उतना एंजॉय करेंगे एक सवाल मेरा आपसे आखरी. है जिसको मैं पूछना हगा तकरीबन दो घंटे का. हमने इंटरव्यू किया ये इंटरव्यू लोग क्यों. देखे आपका जो है हम चाहेंगे आप साझा करें. क्योंकि यह शुभंकर ने किया यह शुभंकर ने. बहुत कुरेद की कोशिश की ताकि बहुत सारी.
चीजें निकल कर सामने आए और मुझे आशा है कि. जो चीजें निकल कर आई है उनसे एक कई काफी. सवाल होते हैं लोगों के मन में उन सबका. जवाब मिलेगा थैंक यू सो मच सर एंड जय हिंद. थैंक यू.
