Unplugged ft. Gaur Gopal Das | Monk Life | Spirituality | Motivation | Love&Relationship |Shubhankar
इंसान के जीवन में जब दुख बहुत आता है तो. वो अध्यात्म की तरफ चला आता है। ऐसा कौन. सा दुख मिल गया? [हंसी]. बाबा बहुत कुछ चीजें याद दिला रहे हैं. कई बार लोग मुझे सीधे-सीधे पूछते हैं. नौकरी नहीं मिली कि छोकरी नहीं मिली? [हंसी]. मक बनने के बाद ईगो आता है, संपूर्ण चला. जाता है या वो ईगो किसी नए रूप को धारण कर. लेता है? ओह हो बड़ी बात कही आपने। बहुत बड़ी बात. निकाली।. आपको पे गुस्सा आता है? हां, क्या बात है।. सर्वश्रेष्ठ कभी इंसान हो सकता है कि केवल. एक ईश्वर होता है?
ईश्वर होता है? बस।. किसी ने मुझसे कहा था आपसे पूछ लें कि गौर. गोपाल जी गाली देते हैं? [हंसी]. शुभंकर जी क्या-क्या सवाल पूछ रहे हैं आज. आप हमको? प्यार मोहब्बत को लेकर मैंने आपके बहुत. सारी रील्स देखी है।. किसी को चाहो तो वो आकर्षण होता है।. झुकने से यदि आपके रिश्ते सुधर जाते हैं।. तो झुक जाओ।. ये प्यार को समझने के लिए प्यार करना. जरूरी नहीं है।. आए हाए हाए। [हंसी]. फिर लोग मुझे पूछते हैं आपको हक क्या है. इस भविष्य पर बोलने का? लोग चीट क्यों.
करते हैं? खुशी भी यही और गिला भी यही। वो. हमको मिला तो सही लेकिन मिला ही नहीं। दिल. कहां मिले जी? जिस्म मिले हैं बस। जीसस. क्राइस्ट ने एक बात बहुत अच्छी कही है। द. स्पिरिट इज स्ट्रांग बट द फ्लेश इज वीक।. अकेलेपन का डर कि अब हमें कोई और नहीं. मिलेगा।. अकेलापन तब ज्यादा महसूस होने लगता है जब. हमको लगता है कि लोग हमारी परवाह नहीं कर. रहे। अकेला रहने में दिक्कत नहीं है लोगों. को।. किसी को फर्क नहीं पड़ा कि. परवाह नहीं करता कोई। फॉर अ हैप्पी. रिलेशनशिप, हैप्पी मैरिज। सबसे इंपॉर्टेंट. चीज क्या है? किसी के साथ रहने में ना आपको खुश रहने के. लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़े।.
दूसरा किसी के बिना अगर आप उदास रहते हो. तो ठीक है।. साथ रह के अगर. किसी के साथ रहकर आप रोज उदास रहते हो तो. भाई साहब प्यार में लोग सरेंडर हो जाते. हैं। लेकिन कहां पर कंप्लीट सरेंडर हीलिंग. है और कहां पर कंप्लीट सरेंडर सेल्फ. डिस्ट्रक्शन है।. ओवरथिंकिंग जो होती है क्या यह कमजोर. लोगों की निशानी है या यह भीतर का डर है? कमजोर नहीं है। मन का स्वभाव है सोचना।. कुछ लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं। इश्क. सच्चा वही जिसको मिलती नहीं मंजिलें। बस. गाते रहे फिर [हंसी] गाना। जटायु ने किया,
हनुमान ने किया, सुग्रीव सोचता रहा और. रावण करता रहा। दोनों उल्लू थे।. बैलेंस जो है वो अचीवल डील है या एक. इल्लुजन है। मेरे हिसाब से बैलेंस ये सबसे. बड़ा मिथ है। गलत सिखा रहे हैं कि लाइफ. बैलेंस हो सकती है।. क्या मॉक को भी अकेलापन होता है? बिल्कुल होता है।. आप ओशो कैसे देखते हैं? तालीम में आपके और. हमारे बस इतना ही फर्क है। आपने उस्तादों. से सीखा है और हमने जिंदगी से सीखा है। एक. ही सत्य को कई लोग अलग-अलग दृष्टिकोण से. देखते हैं। सहमति की बात तो कभी थी ही. नहीं। चैतन्य महाप्रभु कमल में जो शहद.
होता है जो नेक्टर होता है वो कमल जानता. है उसका स्वाद क्या है? वो तो भौरा जानता. है उसका स्वाद क्या है। इसलिए चैतन्य. महाप्रभु जो है है कृष्ण लेकिन आए हैं. राधा भाव में यह समझने के लिए कि उनमें. कितनी मधुरता है।. इंसान दिनरा कुछ ना कुछ खोजता रहता है। वो. सुकून बाहर तलाशता है। ज्ञान को किताबों.
में और शांति किसी और के शब्दों में। पर. जो वो तलाश रहा है वो बाहर नहीं है। वो. दरअसल अंदर है शांति। और आज हमारे साथ एक. ऐसे ही खास मेहमान हैं। यह वो शख्स हैं. जिन्होंने सफलता के शोर के बीच शांति की. आवाज को सुना। पढ़ाई आईटी बॉम्बे से की।. सब कुछ सॉर्टेड था। लेकिन फिर लगा कि. सफलता के बीच में कहीं कुछ गायब है। कुछ. थोड़ा सा मिसिंग है। और उसकी तलाश में जो.
हमें मिला वो आज लाखों करोड़ों लोगों को. सुकून दे रहा है। उनकी आवाज के जरिए। आज. बात मन की, रिश्तों की, कृष्ण की, जीवन की. सब कुछ गौर गोपाल दास जी के साथ। नमस्ते. जी।. कैसे हैं सर आप? बस ईश्वर की कृपा, आपकी. सद इच्छाएं, प्रार्थनाएं और सारे आपके. दर्शकों की सदच्छाएं सब सबकी कृपा से ही. और सबकी प्रार्थना और सदच्छाओं से ही. अच्छा चलता है। कई बार हम कहते हैं कि जब. सब कुछ अच्छा चल रहा हो ना तो श्रेय खुद. पर खुद की ओर लेना बहुत आसान हो जाता है।.
लेकिन जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो श्रेय. दूसरों को भी देना जरूरी है। क्योंकि. अच्छा कुछ चल रहा हो तो ईश्वर की कृपा है।. माता-पिता का आशीर्वाद है। गुरुओं का. आशीर्वाद है। आपके सदच्छों का सद जो. सदच्छा देने वालों का आशीर्वाद है। तो. अच्छा चल रहा हो तो क्रेडिट और श्रेय. दूसरों को भी देना चाहिए और जो बुरा चल. रहा हो तो जिम्मेदारी खुद पर भी ले लेनी. चाहिए क्योंकि जिम्मेदारी लेने से शायद. बुरा वक्त बदल जाए। तो आपकी सद इच्छाएं.
हैं। ईश्वर की कृपा है। गुरुओं की कृपा. है। माता-पिता का आशीर्वाद है। दर्शकों का. प्रेम है। बस अच्छा. प्रारब्ध भी है।. प्रारब्ध भी है। बिल्कुल जी। प्रारब्ध भी. है।. मैंने जब पहली बार आपको देखा पहला सवाल तो. मैं ये पूछ लेता हूं कि मैं आपको किस चीज. संबोधित करूं? क्योंकि आप इंजीनियरिंग के. पेशे से मेरे सीनियर हैं। तो [हंसी]. तो उस हिसाब से आप सर हो गए। आप मक हैं।.
किस चीज से मैं आपको इस पॉडकास्ट में. संबोधित करूं? जो भी आपको स्वाभाविक लगे. फिर भी आप कुछ होता है ना कि आप भी लोग ना. कहीं कुछ कोई मुझे दास जी कहता है, कोई. गुरु जी कहता है, कोई प्रभु जी कहता है, कोई सर कहता है तो आपको जो स्वाभाविक लगे. कहते-कते बोलते बोलते संभाषण में संवाद. में जो आपको. फिर भी एक होता है ना कि हमें एक एक हम. चाहते हैं कि हमें थोड़ा सरल लगता है। हम. असाज नहीं होते सुनने में।. [हंसी]. अह बाहर तो कई लोग मुझे दास जी कहते हैं. या दास कहते हैं तो और मैं भी उस शब्द को.
बहुत पसंद करता हूं। क्यों दास जी को आप. पसंद करते हैं इतना? दास हमेशा स्मरण. दिलाता रहता है कि आपके जीवन का मकसद है. दूसरों की सेवा करना। मैं कई बार अंग्रेजी. में कहता हूं स्लेवरी और सर्वीट्यूड में. बहुत अंतर होता है। सर्वट्यूड होता है. सेवा करना। और स्लेवरी जो होता है ना वो. होता है नौकर की नौकरी करना। अंतर है सेवक. और नौकर. बहुत बहुत अंतर है।. बहुत बड़ा अंतर है। जी क्योंकि अगर आप. देखेंगे जो सेवक है उसने सेवा चुनी हुई.
है।. चॉइस है।. चॉइस है।. जो नौकर कहा जाता है किसी को. बहुत डिरोगेटरी उसको फोर्सबली उसको किया. गया है। लालच है।. स्लेवरी जैसे कॉलोनियलिज्म में कॉलोनियन. टाइम्स में हमको जो स्लेव्स गए यहां से. अंग्रेजों के पास उनको जोर जबरदस्ती वो. किया गया।. लेकिन जो दास का टाइटल है, सेवक का टाइटल. वो तो चुना जाता है। जैसे आज भी केरला में. आप देखिएगा जो रॉयल फैमिली है, अनंत. पद्मनाभ स्वामी के मंदिर से जो रॉयल. फैमिली जुड़ी हुई है मार्तंड वर्मा के जो. लेगसी वाले आज भी वो लोग पद्मनाभ दास या.
पद्मनाभ सेविनी टाइटल लगाते हैं अपने आप. को। और अगर आप यूरोप में देखिएगा एक समय. थॉमस मोर के रॉयल नोबेलमैन रहे। वो भी. साइन करते थे योर हंबल सर्वेंट। वो कोई. डेरोगेटरी नहीं है। तो इसलिए दास जो टाइटल. है ना मुझे बहुत पसंद है क्योंकि वह हमेशा. याद दिलाता रहता है कि हम हैं क्यों यहां. पर। मोहम्मद अली जो थे बॉक्सर बड़े बॉक्सर. थे बहुत। उन्होंने एक बहुत अच्छी बात कही. कि हम इस पृथ्वी पर जो आए हैं, जो रहते.
हैं, पृथ्वी के सारे रिसोर्सेज को उपभोग. करते हैं। इस पृथ्वी पर रहने का किराया है. दूसरों की सेवा।. वाओ। द रेंट वी पे फॉर आवर स्टे ऑन प्लनेट. अर्थ इज आवर सर्विस टू अदर्स। किराया तो. देना है। रहना है फ्री में तो नहीं रहना।. वो किराया है दूसरों की सेवा करना। तो. इसलिए दास बहुत पसंद है। ब्यूटीफुल। बट अब. इसी से मेरे ज़हन में सवाल आता है कि हम. हमारा जन्म क्यों हुआ? जी।. जी।. क्या मैं कई बार जब दफ्तर जाता हूं या दिन. रात काम करता हूं, मेहनत करता हूं। सो.
मुझे मेरे मन में ये ख्याल आता है कि क्या. इसलिए जन्म हुआ था मेरा ताकि मैं काम कर. सकूं या वो जो सुख भोग रहे हैं उसके लिए. उनका जन्म हुआ था? आपके लाइफ का पर्पस क्या होता है? भगवान. ने हमें क्यों धरती पर भेजा और हर इंसान. कैसे यह हास जान पाए कि मेरा पर्पस क्या. है? जी जी. वो एक पुराना वाला गाना था ना बहुत दुनिया. बनाने वाले क्या तेरे दिल में समाई. काहे को दुनिया. काहे को दुनिया बनाई? ये सवाल तो तब से. पूछा जा रहा है शुभेंद्र जी. कि क्यों ये दुनिया बनी है? है ना? तो मैं.
ना इसको अलग-अलग दृष्टिकोण से देखता हूं।. एक दृष्टिकोण है यह दुनिया इसलिए बनी है. ताकि हम अपने जीवन में और दूसरों के जीवन. में कोई ट्रांसफॉर्मेशन ला पाए।. ओके. सफर है ये जिंदगी एक सफर है और इस सफर में. अगर आप जैसे आप आपके स्कूल में स्पेलिंग्स. कैसे थे पहले? स्पेलिंग्स में आप कमजोर थे. अच्छे थे। ठीक-ठाक. ठीक-ठाक एवरेज।. ठीक-ठाक एवरेज। है ना? कई लोग बड़े कमजोर. होते हैं स्पेलिंग में। एक टीचर ने एक. क्लास में बच्चे से पूछा आप भारत के कौन.
से राज्य से हो? उसने कहा अरुणाचल प्रदेश।. बोला तू स्पेलिंग बताना थोड़ा वो बोला गोवा. से हूं। [हंसी]. ये तो कपल शर्मा वाला हो गया। [हंसी]. तो मैं ना कई बार मैं जब कई इवेंट में. जाता हूं तो लोगों को पूछता हूं कि आप. थोड़ा मुझे इंग्लिश शब्द सफर का स्पेलिंग. बताइएगा। तो लोग कहते हैं एस यू डबल एफ ई. आर ये इंग्लिश सफर हुआ। और हिंदी में भी. एक सफर है। इस दुनिया में आइएगा तो सफर तो.
करना है जी। इंग्लिश सफर तो होने वाला है।. ब्यूटीफुल. या तो शरीर सफर सफरिंग देने ही वाला है।. ये वस्त्र पहनने से कोविड ने तो हमको. एक्सक्यूज नहीं किया।. सही बात है।. कोविड कोई गेरवा तो देखता नहीं है। सबको. फेयर ट्रीटमेंट होती है इस दुनिया में।. शरीर कष्ट देता है। कई बार मन कष्ट देता. है। कई बार लोग कष्ट देते हैं। भाई साहब. जब लोग कष्ट देते हैं ना. पता नहीं क्या उनमें होता है। मतलब देखिए. ना जब जब लोग जिंदे होते हैं ना जिंदे.
होते हैं तब लोग गिराने में लगे हुए होते. हैं और मर जाते हैं तो उठाने में लगे हुए. होते हैं। बस तभी आते हैं। जिंदे होते हैं. तब गिराने में और मर जाते हैं तब उठाने. में। अजीब की एक गजब की एकता दिखाते हैं. लोग इसमें। है ना? तो देखिए ना लोग कष्ट. देते हैं, शरीर कष्ट देता है, मन कष्ट. देता है। अपने कर्म और प्रारब्ध जैसे आपने. कहा अगर कोई पिछले जन्म में मानता हो तो. वो कष्ट देते हैं। तो इंग्लिश वाला जो सफर. है ना जी। वो तो किसी को होना ही है बस।.
अब इस इंग्लिश सफर में. हिंदी सफर बनाना यह चॉइस अपनी है। जो भी. है वो चलना ही है। ये मैं कभी-कभी जब. अमेरिका जाता हूं लंबी होती है फ्लाइट।. डायरेक्ट फ्लाइट 16 1/2 17 घंटे की फ्लाइट. होती है। अब उसमें मेरे पास चॉइस है। 16. 17 घंटे को मैं सफर करूं कि मेरे पास पैर. के लिए जगह नहीं है या मैं अब क्या करूं? बोरियत हो गई। भूख लग रही है। कोई ये क्या. खाना है मेरे लिए है नहीं। ये बगल वाला. आदमी बस बातें किए जा रहा है। मेरे सर.
दर्द हो रहा है। ये एक इंग्लिश सफर हुआ।. और दूसरा है कि एक हिंदी सफर है। चलो एक. आदमी मैं कोई मूवी देख लेता हूं या इस बगल. वाले से एक रिश्ता बना लेता हूं। दोस्ती. बना लेता हूं। किताब पढ़ लेता हूं। हो. सकता है थोड़ा सो लेता हूं। तो सफर या सफर. यह चॉइस अपनी है। तो यह जो दुनिया बनी है. ना यह केवल सफर के लिए नहीं बनी है। मैंने. कई बार देखा है ना आध्यात्मिक सर्कल. सर्कल्स में ना इंग्लिश सफर पे बहुत. ज्यादा जोर दिया जाता है कि दुनिया में. बहुत कष्ट है। बहुत ही दुख है। बस सब कुछ.
सब कुछ बस प्रॉब्लम है यहां पर। इस पर. ज्यादा जोर कई बार पड़ता है। लेकिन इस पर. जोर देने से ये तो कांस्टेंट है ना जी। वो. पाई है 3.1418. उसकी वैल्यू बदली नहीं जा सकती।. मैथमेटिक्स में जो पाई कांस्टेंट होता है. उसकी कीमत कैसे बदली जाएगी? लेकिन जो. हिंदी वाला सफर है ना वो x है वेरिएबल है. वो।. तो इसीलिए तो नहीं कि आपने आईटी बॉम्बे. में इतना सफर कर लिया इंजीनियर बनकर. [हंसी] कि आप मॉक के सफर पर निकल पड़े।.
हाय हाय हाय [हंसी]. लेकिन एक छोटी सी करेक्शन कर दूं। बस. विनम्रता से मैंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग. पुणे में इंजीनियरिंग पढ़ाई की और क्योंकि. आईआईटी बॉम्बे की औकात नहीं थी सर।. अच्छा [हंसी]. तो इसलिए आपने इंजीनियरिंग के सफर को सफर. में तब्दील कर दिया।. नहीं नहीं नहीं ऐसी बात तो है नहीं। लेकिन. मेरे ख्याल से दुनिया का एक पर्पस ये है।. जिंदगी का एक पर्पस ये है कि इंग्लिश सफर. से दिल हटा के अपना अटेंशन हटा के थोड़ा.
हिंदी सफर पर भी ध्यान दिया जाए। जब. जिंदगी को सफर बना दिया जाता है ना, जिंदगी एक सफर है, सुहाना, यहां कल क्या. हो, किसने जाना। कल हो, जो हो, लेकिन सफर. तो सुहाना बनाया ही जा सकता ना। यह एक बात. हुई कि क्यों ये जिंदगी क्यों है? ये. दुनिया क्यों बनी है? दूसरी बात हम कई बार. देखते हैं कि जिंदगी जो है ना वो बहुत कुछ. सिखा देती है। हर रोज हर रोज।.
मैं कई बार कहता हूं तौहीन ना कर। शराब को. कड़वी कह कर। कभी पी नहीं है। शुभंकर जी।. तौहीन ना कर। शराब को कड़वी कहकर जिंदगी. के तजुर्बे और भी कड़वे होते हैं। है ना? शराब से कड़वे तो जिंदगी के तजुर्बे होते. हैं। शराब की नशा तो एक दिन में उतर जाए. साहब। जिंदगी के जो कड़वे तजुर्बे हैं ना. सालों साल तक मन से नहीं निकलते।. लेकिन कई बार मैं सोचता हूं कि इन्हीं. कड़वे अनुभवों में, इन्हीं कड़वे तजुर्बों.
में, इन्हीं कड़वे पलों में, मोमेंट्स. में, क्षणों में मिठास की क्षमता है, सीखने की क्षमता है, ग्रोथ की क्षमता है।. भाई केवल सब कुछ मीठा रहे तो डायबिटीज हो. जाएगी। तो जब कड़वाहट हो, करेले के बाद जो. रसगुल्ले का स्वाद है, दुख है तभी सुख का मजा आएगा। हां करेला. खाया उसके बाद रसगुल्ला खाइए तब तो मजा आए. केवल रसगुल्ला खाओ तो भैया रसगुल्ला ठीक. है भाई करेला का नीम का कड़वा जूस पीजिएगा. उसके बाद आपको रसगुल्ला मिले तो भाई वाह.
क्या स्वाद मजा आ गया आनंद आ गया तो मुझे. लगता है ये दुनिया ना एक यूनिवर्सिटी है. शुभंकर जी एक कॉलेज है यहां हम क्यों आए. हैं सीखने के लिए आए हैं उन्नति करने के. लिए प्रगति करने के लिए. उत्कर्ष के लिए आए. और वो तो तभी हो पाएगा ना जब थोड़ी ठोकरें. खाएंगे।. तो क्या ठोकर खाई थी आपने? क्योंकि एक आम. परसेप्शन अगर एक आम भारतीय के दृष्टिकोण.
से कहूं तो ये मानता है कि इंसान के जीवन. में जो दुख बहुत आता है. तो वो अध्यात्म की तरफ चला आता है।. कब ऐसा होता है कि जवानी में लोग अपना. जीवन अध्यात्म को दें। हमारे बुजुर्गों ने. जो हमें माइंडसेट दिया है या जो हम सीखते. हुए आए हैं कि बचपन लड़कपन का है। जवानी. कामकाज की हो और फिर बुढ़ापा आए तब ईश्वर. के पास जाइए। समर्पण कर जाइए। जी. यही आपका जीवन है।. जी. आप अच्छे कॉलेज से इंजीनियरिंग कर रहे. हैं।. वहां से आप एक मक बन जाते हैं।. जी जी. अब प्रथम दृष्ट शायद किसी के ज़हन में आएगा. भाई दिल टूट गया होगा। [हंसी].
किसी के मन में आएगा प्लेसमेंट नहीं हुआ।. [हंसी]. किसी के मन में आएगा कुछ परिवार में हो. गया हो।. बिल्कुल बिल्कुल। [हंसी]. ये सफर क्यों? मतलब वहां से यहां पर. क्योंकि कॉलेज लाइफ तो लैविश लाइफ होती. है। दिल बॉम्बे पुणे जैसे शहर में आप हैं।. आसपास लड़कियां होंगी। अच्छी नौकरी होगी, कपड़े अलग होंगे।. बिल्कुल बिल्कुल अब आप बहुत कुछ चीजें याद. दिला रहे हैं हम। [हंसी]. नस्टाल्जिया. मेरा एक्सेस. मेरा [हंसी] एक्सेस को याद दिलाने का कोई.
इरादा नहीं था।. हमारी बंबई की स्लैंग यूज़ कर रहा हूं यहां. पर। जैसे आपने कहा नौकरी या फिर दिल टूटा. होगा।. इसीलिए तो मैं बंबई की स्लैंग यूज़ कर रहा. हूं। कई बार लोग मुझे सीधे-सीधे पूछते।. नौकरी नहीं मिली कि छोकरी नहीं मिली? [हंसी]. कि सर मुंडवाकर आश्रम में चले गए। [हंसी]. कई बार किसी ने मुझे पूछा था ये क्या दिल. तोड़ा किसी ने आपका. क्या इतना क्या हुआ कि. ऐसा कौन सा दुख मिल गया?
ऐसा कौन सा दुख ऐसा कौन सा हार्ट ब्रेक हो. गया कि हार्ट जाकर वहां देना पड़ा आपको।. तो मैं उनको एक बार कह रहा था किसी को. बातचीत में कह रहे थे। मजाक से कह रहा था. कि जिंदगी हमारी यूं ही सितम हो गई।. जिंदगी हमारी यूं ही सितम हो गई। खुशियां. ना जाने कहां दफन हो गई। जिंदगी हमारी यूं. ही सितम हो गई। खुशियां ना जाने कहां दफन. हो गई।. लिखा तो खुदा ने सबके हिस्से में मोहब्बत.
को। जब हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो. गई। [हंसी]. दिल तो टूटा है आपका ना. [हंसी]. बिल्कुल नहीं जी कभी दिल लगाने का वक्त ही. नहीं मिला सही बात बताइए. अरे मक में ही सलमान खान होता [हंसी] है. देखिए ना इंजीनियरिंग के आप जानते हैं. शुभंकर जी हम इंजीनियर स्टूडेंट्स को कहां. दिल लगाने का टाइम मिलता है भाई साहब हम. इंजीनियर वाले स्टूडेंट बस असाइनमेंट करने. में लगे रहते हैं और अगली ओपोरर्चुनिटी.
क्या मिले कैंपस प्लेसमेंट में लगे रहते. हैं तो वक्त वक्त भी नहीं मिला लेकिन वक्त. मिलने से भी ज्यादा ना मुझे लगता है कि. मुझे किसी और चीज से मोहब्बत बट जैसे मेरे. ज़हन में सवाल आता है मैं जाता रहता हूं. अलग-अलग आश्रमों में मैं परमार्थ क्या था. तो परमार्थ मुझे ऐसे बहुत सारे बच्चे मिले. जो बचपन से ही तैयारियां कर रहे हैं वैसे. ही पढ़ाई कर रहे हैं. या वो लोग मिलते हैं जो एक उम्र के बाद. जाते हैं. आप जैसे एक्सेप्शनल मुझे कम मिले या इस के. आसपास मिले या कुछ अभी मिलने लगे हैं कि.
कॉलेज से वो शिफ्ट हो बट आप फुल टाइम मक. हो गए।. आपने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और. जो गेरवा व्यस्त है वो अपने आप में उसकी. पहचान है।. जी. ये कैसे हुआ? थोड़ा सा इस अगर टच कर सके।. हां हां बिल्कुल क्योंकि मोहब्बत हो गई ना. जी मोहब्बत हो गई। सोचने लगे कि देखिए. मोहब्बत. असाइनमेंट से इतना समय मिल जा रहा था।. नहीं नहीं नहीं बता रहे हैं ना बता रहे. हैं शुभंकर जी आप ना बिल्कुल खुरेदते हैं. और यही तो आपकी विशेषता है हमेशा मैं सारे. दर्शकों को कहना चाहता हूं कि पॉडकास्ट. बहुत की हमने लेकिन आपकी विशेषता ये है कि.
आप एक तो बड़ी अच्छी रिसर्च और सवाल सब. कुछ जान पहचान कर पूरे सामने वाले इंसान. को पढ़ के आते हैं। केवल उनके बायोग्राफी. पढ़ के नहीं आते। उस इंसान को पढ़ के आते. हैं। दूसरी चीज हमको लगती है कि आपके जो. सवाल है वह तैयार होते हैं। शायद सवाल तो. तैयार करके आते होंगे लेकिन वो एक बड़ी. स्वाभाविक दृष्टि से बड़े नेचुरली फ्लो. होते हैं वह सवाल। एक क्यू से दूसरा लेकर. आप आगे बढ़ते हैं और बड़े सम्मान पूर्वक.
करते हैं। सामने वाले के. सामने वाले को देखकर कौन बैठा हुआ है? कैसे बैठा हुआ है? और कोई भी बैठा हो।. शायद आपसे कई बार कोई यंग भी बैठा हो।. लेकिन बड़े सम्मान के साथ करते हैं और यह. एक बहुत अच्छी क्वालिटी है और सबसे बड़ी. बात तो जी मुस्काते हुए और [हंसी] हंसते. हुए हंसते खेलते हुए बड़े खुशी-खुशी से. मधुरता से करते हैं तो ये आपकी विशेष बात. है लेकिन खुरेद तो है खुरेदते तो है. बिल्कुल हंसते-हंसते यूं कहां पहुंच जाते.
पता भी नहीं लगता [हंसी] मैं सिर्फ आपको. थैंक यू बोलूंगा और मेरे लिए पडकास्ट एक. यात्रा है जो यात्रा हर बार एक अलग अनुभव. देती है हर एक अलग मेहमान के साथ और मुझे. लगता है कि हर एक पडकास्ट आपको कुछ सिखाता. हम. सो वो सवालों से ज्यादा मेरे लिए सीखने की. प्रक्रिया भी होती है और मुझे लगता है कि. आप हर बार कुछ लेकर जाते हैं एक मेहमान. से।. एक बेहतर इंसान बनकर, कुछ लाइफ में नया. सीख कर और मुझे लगता है इस पॉडकास्ट की. यात्रा ने मुझे बहुत मजबूत और बेहतर इंसान. बनाया पिछले कुछ समय में।. जी। यही तो अंतर होता है ना कि अगर आप उस. हिसाब से कर रहे हैं कि मैं अपने लिए भी.
सीखकर मैं मैं भी आगे बढ़ना चाहता हूं जो. सीखना हूं उससे। तब फिर उसी प्रकार की वो. चर्चा भी होती है। लेकिन आपके सवाल का. जवाब देते हैं कि. क्या वो था? क्या चीज थी जो वो असाइनमेंट. के बीच में मोहब्बत का काम हुआ था? हां मतलब वही समय कैसे मिला? क्योंकि हमको. तो नहीं मिला था।. हां बिल्कुल बिल्कुल लेकिन इसमें ना थोड़ी. सी बचपन की भी भूमिका आ ही जाती है जैसे. आपने कहा बचपन में हमारे घर पे पूरे बहुत. ज्यादा धार्मिकता भी नहीं थी लेकिन. धार्मिक थे लोग सब और.
कई जो एग्जिस्टेंशियल सवाल होते हैं वो. थोड़े बचपन से भी आ रहे थे।. और यह जो सवाल है यह तो मुझे बड़ी सरलता. से दिखता है कि इस इस जन्म के नहीं थे वह. सवाल क्योंकि वह सवाल आप तब नहीं पूछते. इसलिए मैंने प्रारब्ध. हां क्योंकि तब नहीं पूछते वो सवाल आप जब. कुछ ऐसे सवाल आते हैं आपके मन में जो एक. बच्चे के मन में नहीं आते हमें इससे मैं. कोई अपनी विशेषता की बात नहीं कर रहा कि. मैं कोई विशेषता ये बात है ही नहीं यहां.
लेकिन वो सवाल आ रहे थे तभी और तब ना हमने. सीखा था बस कि सवालों के जवाब ढूंढना. जैसे जैसे धीरे-धीरे आगे बढ़ते गए ना, हमने सोचा कि नहीं, जवाबों पर सवाल करना, डोंट फाइंड आंसर्स टू द क्वेश्चंस।. स्टार्ट क्वेश्चनिंग द आंसर्स।. एंड देन यू विल हैव इट ऑल। [हंसी]. देन यू कैन हैव इट ऑल। देन यू कैन हैव इट. ऑल।. तो ये ना हमारे स्कूलों में, पाठशालाओं. में, परिवारों में, समाज में सिखाते नहीं.
हम। हमको ना बस जवाब ढूंढने की का. प्रशिक्षण दिया गया है और इसीलिए जवाब. ढूंढो परीक्षा में लिखो और बस पास हो जाओ. इंटरव्यू में जाओ सवाल पूछेंगे जवाब दे. देंगे शादी की बात आई सवाल पूछेंगे जवाब. दे देंगे सब में सवाल जवाब सवाल जवाब सवाल. जवाब हमारी ट्रेनिंग है सवाल पूछे जाएंगे. जवाब देने हैं लेकिन जो जवाब है उन पर. सवाल कौन उठाएगा क्वेश्चनिंग द आंसर्स तो.
जैसे जैसे-जैसे आगे बढ़े थोड़े तो पहले से. थोड़ा वो बचपन का वो जैसे आपने कहा. प्रारब्ध ही है वो और तो मैं और कुछ. क्रेडिट नहीं है सर मैं ना अपने जीवन में. मैंने एक बात सीखी है किसी बात की क्रेडिट. नहीं ले हम किस किस बात पर इतना इतरा रहे. हैं हम है ना किस बात की इतनी अकड़ है किस. बात पर इतना लेकर बैठे हैं हम कि इतनी. सारी चीजें तो रिस्पांसिबल है हमको बनाने. के लिए जो हमें तो क्रेडिट की बात नहीं है. बस था वो प्रारब्ध से बोलिए ऐसे बोलिए वो.
थी एक क्यूरियोसिटी और जैसे-जैसे आगे. बढ़ते गए तो जब जब गए कि कई लोगों के पास. गए और. जब जवाबों पर सवाल उठाते हैं ना. सामने वालों को आदत नहीं है उसकी। चाहे. व्यवस्था हो, चाहे अध्यात्म हो, चाहे. विवाह संस्था हो, किसी भी चीज पर। जब जो. जवाब समाज ने दिए हुए हैं, उस पर आप सवाल. करने जाइएगा, तो आपको एक रिबेल माना जाता. है।. तो इससे एक मोहब्बत हो गई।.
द लव जो हम मोहब्बत इश्क की बातें करते. हैं ना शुभंकर जी वह केवल व्यक्ति से नहीं. होती। लव इज नॉट ओनली फॉर अ पर्सन। लव इज. फॉर योर पाथ। लव इज फॉर व्हाट योर पैशनेट. अबाउट। लव इज फॉर व्हाट यू आर सीकिंग। तो. ये जो प्यार हुआ उसी सिलसिले में फिर. एक्सप्लोर करने लगे। तो फिर पता लगा कि. भाई खुदगर्ज तो बहुत लोग हैं दुनिया में. आज जो खुद को भूल जाते हैं।.
तो इन इस सारी दुनिया में खुद को खोजना, खुद की जर्नी को खोजना. और शायद खुद को खोजते खोजते हुए खुद में. खुदा को खोजना। राइट? यह बहुत जरूरी हो. गया। तब वो मोमेंट आया। कोई ट्रिगर नहीं. था। कोई दिल नहीं टूटा। कभी था ही नहीं।. कभी वो वो जर्नी कभी ली नहीं। वक्त ही. नहीं मिला जैसे कहा वो कभी नहीं हुआ।. परिवार बहुत अच्छा था। बहुत प्यार करने. वाला परिवार। इकलौता बेटा मेरी छोटी बहन.
है। इकलौता बेटा था। बहुत प्यार करते थे।. हम तो मिडिल क्लास फैमिली से थे। एक सिंपल. लोअर मिडिल क्लास फैमिली से थे। और जो भी. मांगा गया कभी डिनाई नहीं किया गया।. डिसिप्लिन से दिया गया। एंटाइटलमेंट नहीं. था। लेकिन मिलता था जो कभी न्यू ईयर में. कॉलेज में थे। गिटार सीखने का मन किया।. पापा ने तुरंत गिटार ले। गिटार ले आए। एक. साल सिंथेसाइजर सीखने का मन था। तुरंत. सिंथेसाइजर घर में आ गए और मिडिल क्लास. फैमिली थे तो अच्छे परिवार में जो बड़ा.
प्रेम करने वाले परिवार में आए अ जॉब एचपी. में थीट पैकेर्ड में जॉब मिली हुई थी. इंजीनियरिंग के बाद तो उसमें भी स्कोप. बड़ा अच्छा था तो वहां कोई गड़बड़ कहीं. नहीं हुई. लेकिन ये जो एक अंदर से पता है खालीपन. लगता है कभी-कभी. छोड़ के जाना केवल प्रॉब्लम से नहीं. छोड़ के जाना कई बार सीकिंग से भी होता. है। जब आप ढूंढते हैं, जब खोजते हैं कि जो.
कर रहे हैं उसमें प्रवीण है। जो बिजीनेस. चल रही है, उसमें सब कुछ चल रहा है। सब. अच्छा चल रहा है।. लेकिन कुछ लोग ये सवाल पूछते हैं कि सब. कुछ अच्छा चल रहा है। क्या केवल यही. लक्ष्य है? और शायद उसको पूछते-पूछते फिर. ये जर्नी शुरू हो गई। तो गड़बड़ कुछ नहीं. थी। सब ठीक-ठाक ही चल रहा था।. अब यहां पर भी मेरे मन में दो सवाल आते. हैं।. अध्यात्म की तरफ झुकाव हुआ। कुछ प्रारब्ध.
था। प्रारब्ध में अगर अध्यात्म था भी कि. भविष्य के लिए. तो भी दो रास्ते होते हैं।. एक रास्ता सफेद चोले का होता है। एक. रास्ता भगवे चोले का होता है। भगवा चोला. ही क्यों चुना गया कि जिसमें जीवन साथी की. जरूरत नहीं थी। [हंसी]. आप भी पुंडरीिक महाराज या इंद्रेश. उपाध्याय जी की तरह भी जीवन जी सकते थे।. बिल्कुल और बहुत महान है दोनों भी। दोनों. को मैं बहुत आदर और सम्मान करता हूं।. जितना वो समाज में जिस प्रकार की जागृति. ला रहे हैं धर्म के बारे में भक्ति के. बारे में और विशेष रूप से जो युवा पीढ़ी. पर जो उनका प्रभाव है बहुत सम्माननीय और.
प्रशंसनीय है। अ मैंने यह पर्टिकुलर ये. वाला चोला क्यों चुना जाके दो अलग-अलग. मार्ग हो सकते थे। मैं आपको एक छोटी चीज. बताता हूं। मेरे एक किताब में भी लिखी हुई. है बात क्योंकि मेरे वो जो मित्र है चले. चल बसे लंदन में रहते थे। मैं हर साल 2005. 6 से लेकर 2019 तक वो चल बसे। हर साल में. डेढ़ से दो महीने लंदन में रहा करता था. उनके साथ। और बहुत सारी वहां पे स्पीकिंग. इंगेजमेंट्स होती थी और बहुत खास मित्र.
थे। मेरे से 15-20 साल बड़े थे। लेकिन. मित्रता ना और दोस्ती जो होती है ना वो. आयु से नहीं होती। वो माइंड सेट से होती. है। केमिस्ट्री से होती है। और रिश्तों. में हमेशा यही तो देखना चाहिए। केमिस्ट्री. उम्र नहीं। तजुर्बा, उम्र नहीं। कनेक्शन. वाइब्रेशन वाइबिंग कैसा होता है वह देखा. जाता है। तो यह मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त. थे और दोस्त ही क्या फ्रेंड फिलॉसफर गाइड. कहूंगा मतलब यह वस्त्र पहने तो कोई गाइड. नहीं हो ऐसा थोड़ी है और वो गृहस्थ थे. उनकी पत्नी उनका बच्चा था.
यह वस्त्र पहने इसका मतलब यह नहीं कि आप. गृहस्थ से कोई सीख नहीं सकते श्री चैतन्य. महाप्रभु जो गौ संप्रदाय में जिनको भगवान. माना जाता लेकिन राष्ट्र में संत माना. जाता है अलग-अलग धारणा है उनकी वो जब कहीं. भी. यात्रा के लिए जाते थे तो गृहस्थ थे बड़े. सर्वभम भट्टाचार्य उनका ये सन्यासी थे. उनका आशीर्वाद लेने जाया करते थे तो. सन्यास लेने का मतलब यह नहीं हुआ कि आप. किसी सफेद चोले वाले से सीख नहीं सकते और.
उन उनसे आशीर्वाद नहीं ले सकते ये जो थे. लंदन में अच्छे मित्र थे 2016 में हमारी. ये सोशल मीडिया जर्नी शुरू हुई एक वीडियो. वायरल हुआ जिन्होंने बहुत चिंतित कर दिया. था हमको उस वीडियो के वायरलिटी के बाद और. वीडियोस लोग निकाल के डालने लगे तब तब. किसी ने हमको सजेस्ट किया कि आप जब तक. कॉन्शियसली ये काम नहीं करेंगे तो लोग तो. यहां वहां से उठाकर कुछ मजाक बनाएंगे. इसका।. तब लेकिन एक बहुत बड़ा सवाल हमारे ज़हन में. आया कि अगर इसमें घुस गए ना तो ये पाथ ऑफ.
नो रिटर्न है। इसे लौट के आना बड़ा. मुश्किल है। और ये कपड़े पहन रखे हैं। एक. बार घुस गए ये सेलिब्रिटी मंकी ऑक्सीमोरॉन. है। ऑपोजिट वर्ड्स है वो। [हंसी]. सेलिब्रिटी और मंग कैसे हो सकता है? [हंसी]. इसकी बड़ी चिंता थी। लगी थी कि ये कैसे. चाहिए तो लौट के कैसे आएंगे? दोबारा लौट. के आने की कोई गुंजाइश नहीं। तब हमने उनको. पूछा कि आपको क्या लगता है? करना चाहिए ये.
कि छोड़ देना चाहिए। उन्होंने जो जवाब. दिया हमको उसी में यह जवाब है कि सफेद और. गेरुए में यह क्यों चुना? उन्होंने कहा आप इसके पीछे तो नहीं पड़े. थे ना इस शहरत के। भगवान ने आपके लिए यह. अपॉर्चुनिटी खोली है। यह अवसर दिया है। यह. दरवाजा खोला है। अगर आप इस दरवाजे के भीतर. से चल के नहीं ना जाओगे तब आप भगवान का. अपमान कर लें। जब ईश्वर आपके पास कोई कोई.
अवसर भेजते हैं। कोई बिना मांगे आपके पास. कुछ चल के आ रहा है। वो किसी ने भेजा है।. आप उसको प्रारब्ध कहिए। हम उसको ईश्वर. कहेंगे। जब वो आपके पास चल के आ रहा है।. आप कहे नहीं नहीं हमको नहीं करना ये. एक्सप्लोर भी नहीं किए तब तो उनका अपमान. हुआ। आपको अगर कोई तोहफा ला कर दे और हमको. नहीं चाहिए ये। इतना प्यार से तो कोई भेज. रहा है आपको। कैसे लगेगा आपको? अपमान हुआ।. अपमान हुआ वो। तो उन्होंने हमको कहा आपने.
तो इसको सीख नहीं किया था। आप इसके पीछे. नहीं पड़े थे। हम तो कब से पीछे लगे? किताब लिखो वेबसाइट खोलो। आप तो नहीं कर. रहे थे। अभी आया है ना। तो भगवान दरवाजा. खोल रहे हैं। आगे बढ़ो। तब हमने उनको यह. सवाल पूछा कि यह तो आप बहुत अच्छी बात कह. रहे हैं। श्रुति धर्मदास जी नाम था उनका।. उनको श्रुति धर्म प्रभु कहते थे। 2020 में. कैंसर से गए वो। तो. हमने उनको पूछा लेकिन कभी-कभी ना भगवान 10. दरवाजे खोल देता है। जी [हंसी]. कैसे पता लगे कौन से दरवाजे से चल के जाना.
है? ये भी ये कहानी किताब में लिखी हुई. है। इसकी ये वाली कहानी। कौन से दरवाजे से. चल के जाना चाहिए? तो उन्होंने कहा. जब भगवान 10 दरवाजे खोलता है ना तब आपका. काम उन दरवाजों के भीतर से चलके जाना नहीं. है। आप उन दरवाजों तक चल के जाइए। वॉक टू. द डोर्स। डोंट वॉक थ्रू द डोर्स। वहां तक. चल के जाइए। जो दरवाजा उनको खुला रखना है. ना वो खुला रखेंगे। बाकी सब बंद कर देंगे।.
और हमने अपने सबने अपने अपने जीवन में. इसका अनुभव किया है कि कई ओपोरर्चुनिटीज. आती है। हम जब सबको एक्सप्लोर करने जाते. हैं जो नहीं होना होता है वो एक-एक एक-एक. करके बंद हो जाता है और जो पथ हमको जिस पथ. पर चलना है वो आगे-आगे क्लियर होता जाता. है। तब हम जब ये मार्ग शुरू किया अध्यात्म. का कभी सोचा नहीं था कि ये करेंगे। घेरवा. वस्त्र पहनेंगे। बस सोचा था कि अध्यात्म. के मार्ग पर अग्रसर होंगे। आगे बढ़ेंगे।. ब्यूटीफुल। इसी में एक क्वेश्चन मैं और ऐड.
कर देता हूं।. अह आज की जजी जनरेशन जो है वो कई बार. क्वेश्चन उठाती है कि रंगों को धर्म से. जोड़ दिया गया।. हां जी। हां जी।. भगवा जो है वो हिंदुओं कर दिया गया। हरा. जो है वो इस्लाम कर दिया गया। और कई. फिल्में आती हैं जहां पर दिखाया जाता है. कि नहीं नहीं रंग किसी धर्म के नहीं है।. धरती देखो किसी की नहीं है।. क्या रंगों का धर्म से जुड़ना किसी. मान्यता का, व्यवस्था का या सोच का प्रतीक. है? हां जी। हां जी। हमको लगता है कि रंग किसी.
भी धर्म में रंग के पीछे एक विचारधारा. होती है। एक मनोभाव होता है। जैसे अ मैं. इस रंग की बात करता हूं क्योंकि ये रंग. मैं खुद पहनता हूं और जिस जिस धर्म को मैं. रिप्रेजेंट कर रहा हूं उसका ये रंग है। तो. ये गेरुआ वस्त्र जो है ये भगवा रंग जो हम. पहनते हैं ये जब हिंदू धर्म में सनातन में. कोई अगर चल बसता है। कोई किसी की मृत्यु. हो जाती है तो उसको हम.
फ्यूनरल में उनकी अंतिम क्रिया में हम. उनको अग्नि संस्कार करते हैं। तो अग्नि. संस्कार के वक्त जो अग्नि की लपटें आती है. वो इस रंग की होती है। तो ये रंग पहनने का. अर्थ होता है कि हम अपने आप के लिए मर गए. हैं। अब हम दूसरों के लिए जी रहे हैं। अब. हमारा जीवन अन्य किसी के लिए है। तो ये एक. अर्थ हुआ। दूसरा अर्थ यह है कि हम कहते. हैं कई बार अगर आप कोई मिठाई बनाइए, खीर. बनाइएगा तो उसमें केसर डालते हैं। लेकिन. केसर में बहुत सारा मॉइस्चर होता है। तो.
उस मॉइस्चर को निकालने के लिए आप पहले. केसर को एक गर्म तवे पर भूनते हैं ताकि. उसके मॉइस्चर निकल जाए। फिर उसको लेते दूध. या पानी में यू मसलते हैं, रगड़ते हैं। और. जब रगड़ा जाता है ना वो केसर तब उस केसर. से खुशबू स्वाद रंग निकलता है जिससे वो. खीर रंगीन भी हो जाती है, स्वादिष्ट भी हो. जाती है और खुशबूदार भी हो जाती है। जायका. आता है उसमें एक। तो यह भी केसर जैसा है।. भूने जाने की तैयारी होनी चाहिए। इसी को.
तो तप कहते हैं। थोड़ा तप होना चाहिए।. तपने की तैयारी, मसले जाने की तैयारी और. उसका मकसद क्या है? ताकि दूसरों के जीवन. में रंग, स्वाद, खुशबू, दूसरों के जीवन. में जायका लाए। यह नहीं कह रहा कि यह. पहनने से मैं कर रहा हूं। यह तो सफर है. जी। कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मकसद ये है।. तो इसके पीछे की विचारधारा रही है। अगर. हरे रंग की हम विचारधारा तो मैं तो पता. नहीं होगी कोई। जरूर कोई विचारधारा होगी. कि ये रंग इसके साथ क्यों जुड़ा हो? जो. मैंने तो कहीं पढ़ा नहीं है लेकिन निश्चित.
रूप से होगा और हम किसी हमारे इस्लामिक. भाई से अगर पूछेंगे तो शायद वो हमको बता. पाएंगे कि हरे से ये क्यों जुड़ गया है।. लेकिन हम तो ये जरूर कह सकते हैं कि इस. रंग के पीछे निश्चित रूप से एक विचार मक. बनने के बाद ईगो आता है। संपूर्ण चला जाता. है या वो ईगो किसी नए रूप को धारण कर लेता. है। [हंसी]. ओ हो हो. ईगो बड़ी बात कही आपने बहुत बड़ी बात. निकाली है ना.
अ मेरा ना एक बहुत फेवरेट गाना रहा है. पहले से जो धोनी साहब का भी फेवरेट गाना. है बहुत कल और आएंगे नगमों की खिलती. कलियां चुनने वाले मुझसे बेहतर कहने वाले. तुमसे बेहतर सुनने वाले कल कोई मुझको याद. करे क्यों कोई मुझको याद करे मशरूफ जमाना. मेरे लिए क्यों वक्त अपना बर्बाद करें? मैं पल दो पल का शायर हूं। पल दो पल मेरी. जवानी है। पल दो पल मेरी हस्ती है। पल दो.
पल मेरी कहानी है। और मैं हमेशा कहता हूं. अरे पल दो पल के शायरों अपने आप को इतनी. अहमियत मत दो।. चाहे अध्यात्म हो, चाहे स्पोर्ट्स हो, चाहे सिनेमा हो, चाहे पॉलिटिक्स हो, चाहे. सरकारें हो, चाहे कोई हो। अरे पल दो पल के. शायरों।. अपने आप को इतनी अहमियत. तुमसे बेहतर आएंगे।. कल तुमसे बेहतर आएंगे। मैं आने से पहले तो.
दुनिया चल ही रही थी।. मैं जाने से पहले भी दुनिया चलती रहेगी. बल्कि शायद मेरे से अच्छी चलती रहेगी।. मेरे लिए बस एक ही चीज है। मेरा सौभाग्य. है कि जब मैं इस दुनिया में हूं तब मुझे. इस दुनिया के लिए कुछ करने का यह सु अवसर. प्राप्त हुआ है। मेरा सौभाग्य है कि जब. मैं इस दुनिया में हूं तो कुछ किसी प्रकार. का योगदान देने का मुझे अवसर मिला है।. इसमें अहंकार की क्या बात है? अहंकार तो. तब होता है जब हम अपने आप को कुछ ज्यादा. ही अहमियत देने लगते हैं। इसलिए कहते हैं.
ना वो कि मुझे किसी की जरूरत नहीं। इसको. अहम कहते हैं और मेरी जरूरत सबको है। इसको. वहम कहते हैं। और दुनिया अहम और वहम में. ही चलती रहती है। अहम की मुझे किसी की. जरूरत नहीं। वहम की मेरी जरूरत सबको है।. है ना? तो इसीलिए यह समझना कि सौभाग्य है. हमारा. मैं कई बार कहता हूं मशहूर होना पर मगरूर. मत होना। बट सोशल मीडिया के दौर में जब अब. मैं देखता हूं कि हर क्षेत्र में कंपटीशन. है।. जी. आप क्रिकेटर हो, एक्टर हो, पॉडकास्टर्स.
हो, पॉलिटिशियंस हो. या स्पिरिचुअलिटी से और रिलीजन जुड़े लोग. हो।. अब सारा गेम नंबर का हो गया।. दर्शक भी देखते हैं कौन से बाबा के कितने. नंबर आ रहे हैं? किसको कितना सुना जा रहा. है। उसी हिसाब से उनकी कथाएं तय हो रही. हैं। उसी हिसाब से उनके रेट्स तय हो रहे. हैं।. क्या इसने स्पिरिचुअलिटी या रिलीजन को. देखने का नजरिया बदल दिया है? और इसे. ब्लेसिंग की जगह पे एक बर्डन बना दिया है. कि समझ में नहीं आता कि अच्छा कौन है। कई. बार कोई कुछ भी कह के वायरल हो जा रहा है।. और बीते दो सालों में ऐसे बहुत सारे केसेस.
आए हैं। अगर मैं नाम ना लूं तो भी. सबके ज़हन में स्मृतियां आती हैं कि कुछ भी. बोला. जी. एक चोला पहना व्यास पीठ पे बैठे वायरल हो. गए।. और उनके यहां भी भीड़ है। आपके पास भी. भीड़ है।. एक ज्ञानी आदमी उस पर कोई पहुंच ही नहीं. रहा।. हम. तो दर्शक कंफ्यूज हो गया। तो ये ब्लेसिंग. है, अच्छा दौर है, बर्डन है और ये क्या. आपके ज़हन में भी आता है? हम्. क्योंकि आप शुरुआती लोगों में हैं जो. एक्सट्रीम वायरल हुए. स्टार्ट में. जी बिलकुल बिलकुल बिलकुल देखिए ना कि जैसे. आपने नंबर्स की बात करी आप नंबर्स की बात.
कर रहे थे कि हर क्षेत्र में हर क्षेत्र. में हर क्षेत्र में स्पर्धा भी हो जाती. है।. अह. अगर आप केयरफुली देखिएगा. तो सेब, आम अमरूद, अनार सबके प्रेमी होते. हैं।. हर हर फल के कोई प्रेमी होते हैं। किसी को. अगर अमरूद पसंद नहीं तो उसको सेब पसंद. होगा। किसी को सेब पसंद नहीं तो उसको अनार. पसंद होगा। तो इसमें स्पर्धा नहीं है। अगर.
हम इस दृष्टिकोण से देखा जाए अगर हम इस. दृष्टिकोण को अपनाएं कि हमारे पास जो है. वो हम लोगों को दे रहे हैं और उस फ्लेवर. को पसंद करने वाले लोग तो आपके पास आने ही. वाले हैं। तो उस पर्दा की बात कहां है? अगर कोई लोग मेरा फ्लेवर नहीं पसंद करें. तो उनके लिए और फ्लेवर भी अवेलेबल है। अलग. किस्म के फल भी अवेलेबल है। तो उनके पास. उस वाले लोग जाएंगे जो उस प्रकार का सुनना. पसंद करते हैं। अब यहां पर सवाल यह उठता. है कि क्या क्या केवल इस नंबर गेम में लगा. जाए और कुछ भी बोलकर.
हम. कुछ भी बातें करके क्या दर्शक कैसे समझेगा. कि सच्चाई क्या है? जो देखने वाला है उसको. कैसे पता लगे कि इसमें सच्चाई क्या है? तो. पहली बात हम हमेशा कहते हैं कि स्पेशली. स्पिरिचुअलिटी में यह बात कर रहा हूं मैं. कि आध्यात्मिक जो विषय होते हैं गुरु होते. हैं गुरु वो होता है जैसे ब्रूसली जी ने. कहा था एक बहुत ब्रूसली ने बहुत अच्छी बात. कही ब्रूसली ने कहा कि गुड टीचर इज अ.
पर्सन हु वांट्स टू फ्री द स्टूडेंट फ्रॉम. देयर इन्फ्लुएंस. ओके. एक अच्छे गुरु एक अच्छे शिक्षक वो होते. हैं जो अपने विद्यार्थियों को अपने प्रभाव. से मुक्त कराना चाहते हैं तो अगर सच्चा. गुरु कौन है जो अपने शिष्यों को अपने ऊपर. डिपेंड नहीं कराए जो उनको एमावर करे उनको. ज्ञान दे उनका मार्गदर्शन करे और उनको. अपने पैरों पर खड़े होने के लिए सबल करे. सशक्त करे अगर कोई चाहे कि वो बार-बार. मेरे पास आता रहे और मेरे ऊपर डिपेंड रहे.
तब तो फिर वहां पर एक बड़ा सवाल उठ गया जी. दूसरी चीज आप किसी के पास भी जाइएगा तो यह. देखना होता है कि वो कितने महान है इससे. कोई फर्क नहीं पड़ता. आपके जीवन में क्या परिवर्तन आ रहा है? किसी किसी के आपको अगर किसी के पास अगर. जाइएगा आप तो आपको यह देखना होता है कि. उनके पास जाने से उनकी बात सुनने से उनका. मार्गदर्शन लेने से उन्होंने जो प्रक्रिया. दी है उसको फॉलो करने से मेरे जीवन में. कैसे परिवर्तन आ रहा है? क्या मैं शांत हो. रहा हूं? क्या मुझे जीवन में मकसद आ रहा. है? क्या मैं सबसे अच्छी तरह से व्यवहार.
कर पा रहा हूं? क्या मुझे जब गुस्सा आता. है तब मैं अपने आप को कंट्रोल काबू में रख. सकता हूं? तो दर्शकों को अभी इनफॉर्म होना पड़ेगा।. जब तक दर्शक एजुकेटेड नहीं होगा तब तक. उसको उसमें से इतने सारे तो लोग हैं। इतनी. सारी तो बातें कही जा रही है। तो पता ही. नहीं लगेगा कि क्या सही और क्या इसलिए हम. कौन सही कौन गलत नहीं कहेंगे। क्या सही और. क्या गलत। ये जब लोग जानेंगे कि सही क्या. है और गलत क्या है? तो उनको चुनना है वो.
कि किसके पास जाए, किसके पास नहीं जाए. इसका प्रभाव हमारे जीवन पर।. आपको गुस्सा आता है? हाय हाय. सीरियस वाला कभी? हां, क्या बात। क्या हमें गुस्सा आता है? आपको एक सवाल पूछे? क्या हम इंसान हैं? क्या इंसानों के जज्बात होते हैं? सर्वश्रेष्ठ कभी इंसान हो सकता है कि केवल. एक ईश्वर होता है? ईश्वर होता है।. बस सर्वश्रेष्ठ केवल एक ईश्वर होता है जो.
इस संसार के सारे जो अनर्थ है उनसे ऊपर. होता है। इस संसार में रहने वाला हर इंसान. चाहे वो गुरु हो या गुरु हो। कोई फर्क. नहीं पड़ता। गुरु संस्कृत में गाय को कहा. जाता है। चाहे वो हम अवत से. अरे हम अवध से हैं तो क्या ही बोले आपको।. चाहे वो गुरु हो या गुरु हो। है ना? देखिए, गुस्सा आना हम कई बार कहते हैं. संस्कृत में ना गुस्से किसी को अगर गधा.
कहना है तो उसको वैशाख नंदन कहते हैं।. [हंसी]. तो अगली बार किसी को गधा कहना हो ना. शुभंकर जी। तो उसको कहना हे वैशाख नंदन. उसको लगेगा आप उसके ऊपर कविता की रचना कर. रहे हैं जो आप पहले करते ही थे। [हंसी]. तो तो देखिए संस्कृत में तो हम गाली देते. नहीं है। आपको किसी को [हंसी] भी अगर. ट्राई करना है ना भाई साहब आपको बाहर किसी. को बोल देना यहां मत बोलना किसी को बोल के. देख लेना हे वैशाख नंदन सच में उसको फ्लैट.
[हंसी] लगे. तो कहने का तात्पर्य यह है कि गुस्सा तो. सबको आएगा। हम सबको आता है। अंग्रेजी में. हम कई बार कहते हैं कि व्हेन द हेड गेट्स. हॉट द टंग वर्क्स फास्ट देन द माइंड। जब. सर गर्म होता है ना तो जीभ मन से तेज चलती. है। तो मन सोचने से पहले बोल देती है कई. बार कर देती है कुछ। तो. क्या ये वस्त्र जो पहनते हैं व्यास पीठ पर.
जो बैठते हैं उनको भी गुस्सा आता है? जरूर. आता है। और अगर कोई नहीं आता है, कहता है. कि नहीं आता है, मैंने अपने गुस्से पर. काबू कर लिया तो वह तो कह रहा है मैं. ईश्वर बन गया।. वो तो कह रहा है कि मैं ईश्वर बन गया। और. हम तो है इंसान। इंसान को ना इंसान के. जैसे रहना चाहिए।. झूठ नहीं बोलना चाहिए।. रुको मैं एक आगे एक्सटेंड करता हूं।. हां। एक साधारण व्यक्ति जो आम जीवन जी रहा. है वो व्यक्ति और एक वो व्यक्ति जो. अध्यात्म से जुड़ा हुआ है या आप जैसा मक.
हो गया है उसके गुस्से में फर्क क्या होता. है. सबसे पहला फर्क ये होता है कि छोटी-छोटी. चीजों पर गुस्सा नहीं करने लगेंगे सालों. की ट्रेनिंग है। सालों का ध्यान जाप किया. है। सालों का ज्ञान सीखा है तो छोटी-छोटी. बातों पर गुस्सा नहीं करेंगे। एक बात. दूसरी बात पर्सनल चीजों पर गुस्सा करना. थोड़ा कम हो जाएगा।. पर्सनल चीजें. जैसे अगर मुझे आप कोई गाली दे दीजिएगा. तो शायद मैं उतना उसको सीरियसली नहीं.
लूंगा।. जबकि आप कोई काम जो हम कर रहे हैं उस पर. अगर आप कोई तो उसको ज्यादा सीरियसली लेने. लगेंगे। वो एक अंतर हो जाता है कि एक. धीरे-धीरे आप पर्सनल चीजों से ऊपर उठके एक. आपका जो कामकाज है उसको ज्यादा अहमियत. देने लगते हैं। तीसरी चीज जो है वो जो. गुस्सा होता है वो गुस्सा कई बार. जितनी जल्दी आता है उतनी जल्दी आपको चला. भी जा सकता है। गुस्से में आप रहेंगे. नहीं। गुस्सा आएगा तो भी उस गुस्से में. रहेंगे नहीं। और चौथी बात कि गुस्सा आए तो.
उस गुस्से से नेविगेट कैसे करना है? उस. गुस्से को हैंडल कैसे करना है? वही एक. थोड़ा अंतर आ जाता है। लेकिन अगर बाहर. वाला कोई आदमी हो जिसने जो कोई आध्यात्मिक. गुरु नहीं कोई नहीं वो भी अगर इसका पालन. करे वो भी ये कर पाएगा।. मेरे साथ भी सारा होता है।. वो भी ये सब कर पाएगा।. इशारा तो मैं भी करता हूं। हां तो बिल्कुल. कर पाएगा तो. मेरे काम पे सवाल उठाओगे मुझे गुस्सा जरा. आएगा सोचूंगा मैं आप व्यक्तिगत बोलोगे मैं. सीरियस. बिलकुल लेकिन दुनिया में ऐसा नहीं है. दुनिया में जो व्यक्तिगत बोला जाएगा ना. बहुत ज्यादा अहंकार को जहां चोट पहुंचती.
है अहम को जहां चोट पहुंचती है ना जी उस. वाला वो वाला जो गुस्सा है भाई साहब. फरहराते हैं लोग उसमें. किसी ने मुझसे कहा था आपसे पूछते हैं कि. गौर गोपाल जी गाली देते हैं. आपको अभी इस किताब में एक कहानी लिखी की. बताता हूं जब हम [हंसी]. शुभंकर जी क्या-क्या सवाल पूछ रहे हैं आज. आप हमको? [हंसी]. देखिए हमारी कोशिश होती है कि हर वो सवाल. जो आम इंसान से लेकर धर्म क्षेत्र से या.
लेकर किसी बड़ी कंपनी के सीईओ तक. बहुत अच्छे सवाल पूछ रहे हैं। बढ़िया सवाल. पूछ रहे हैं। प्रैक्टिकल रियल रिलेटेबल. वो कोई सिद्धांत फिलॉसफी वाली केवल बात. नहीं वो तो चल फिलॉसफी लाएंगे तो घंटों. निकल जाएंगे उसी में बोलने में। रियल सवाल. है। क्या हम गाली देते हैं? हां क्योंकि आपसे सवाल इसलिए पूछ सकता हूं. मैं। आप एक इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आए. हैं।. जी जी. आप उन चीजों से भलीभांति वाकिफ हैं।. बिल्कुल. फिर आप मक बन गए।. अब एक लंबा जी उधर गुजारा है।. एक इंस्टेंट रिएक्शन होता है।.
जी जी. अध्यात्म ने आपने कहा ये ऐड कर दिया कि. आपको थोड़ी देर से आप कंट्रोल कर रहे हैं. बिल्कुल नेविगेट कर पाएंगे उसको ठीक तरह. से बस।. बट फिर भी अगर सैचुरेशन पॉइंट तक ले जाए. कोई।. हां हां बिल्कुल। अभी हम जब आश्रम में आए. 30 साल पहले तो हमारे आश्रम में सारे. एजुकेटेड लोग हैं। सारे बहुत पढ़ पढ़ लिख. के आए हैं। बड़े-बड़े कंपनीज़ में बड़ी. पोजीशंस छोड़कर आए हुए हैं। तो उतने किस्म. के ईगोस रहते हैं वहां। 80 लोग हैं। 80. ईगो है।. हम [हंसी]. सीखें ईगो को कैसे.
टेम डाउन करना। लेकिन है तो ईगो। अच्छा जब. हम आए तो हम तो छोटे मिडिल क्लास परिवार. से आए हुए हैं। हमारे माता-पिता ने हमको. कभी एक गाली देने मतलब सवाल ही नहीं उठता. था।. मिडिल क्लास फैमिली में हां. कभी सवाल ही नहीं ना हमारे माता-पिता ने. कभी गाली दी। हमारे जो मित्र हुआ करते थे. उनसे भी हमेशा बोला गया कि नहीं ये नहीं. ये नहीं। तो वो बैठ चुका था कि ये नहीं. बोलना है कभी। मतलब स्कूल कॉलेज में. मैक्सिमम बोला होगा इडियट। इससे ज्यादा तो. कभी कोई बोला नहीं। इडियट मैं वो भी बहन.
को बस और बाहर किसी दोस्त को किसी को नहीं. बोला। कहीं सिस्टर बहन के साथ खेले कुछ तो. इडियट कभी बोल दिया इससे ज्यादा कभी नहीं. बोला तो जब हम आश्रम में आए तो यहां के. हमारे जितने सब मंक्स थे ये सब बंबई वाले. बंबई में पले बड़े इनकी भाषा सब बंबई तो. जैसे किसी के पिताजी गुजर गए बोले मेरे. मेरे पापा ऑफ हो गए तो मेरे मन में आया कि. कितने साल तक ऑन थे ये [हंसी] ऑन ऑफ की. भाषा कहां से आई भाई इसमें सम्मान.
रिस्पेक्ट कैसा ना जब कोई पिताजी के घर. चले गए लेकिन वो वहां की भाषा है। एक बार. किसी ने क्या मेरे दिमाग का दही मत कर। तो. हमने दही खाया है बस ये दिमाग का दही कभी. सुना नहीं था हमने वो। दिमाग का दही मत कर. परेशान मत कर। मुझे ये कह रहा था तो मैं. थोड़ा मेरे मन में ये आने लगा कि क्या है. ये किस प्रकार के लोग हैं ये? ये क्या कर. क्या कहते थे? तो 6 महीने में मैं उन्हीं. के साथ तो रह रहा हूं। 6 महीने में अचानक. एक गड़बड़ हो गई कोई और अचानक से मैंने. कहा अरे भाई यार यार बड़ा लफड़ा हो गया.
आज। [हंसी]. पर मुझे अपने आप को पिंच करना पड़ा चार. बार कि भाई कि कभी मैंने ऐसा शब्द कभी उस. इस शब्द का उपयोग ही नहीं किया और आज ये. कह रहा हूं लफड़ा हो गया तब फिर मैंने. सोचा कि भाई थोड़ा कॉन्शियस रहना पड़ेगा. कि ये बातें नहीं आए अपनी भाषा में ये सब. बातें नहीं आए रहना तो यही है और तभी किसी. ने कहा भी था एक हमको यह कि हम ना यह. देखते हैं कि लोग क्या करते हैं लेकिन. क्यों करते हैं नहीं देखते. वी नो व्हाट दे डू बट वी डोंट नो व्हाई दे. डू यह लोग यह भाषा बोल रहे थे। लेकिन यह.
क्यों बोल रहे थे? क्योंकि इनकी परवरिश. वहां की थी। तो उनको जज करने की बजाय मैं. थोड़ा एमथी से देखने लगा कि परवरिश बोल. रही है। इंसान तो कैसा इंसान है। सोना है. ये तो। ये सोना है ये। लेकिन सोने पे हम. लोग बस वो जो मिट्टी लगी है ना उसी को. देखते रहे कि अरे ये तो ऑफ हो गया। बोल. रहा है। ये दिमाग कदई मत कर बोल रहा है।. तो जब व्हाट के पीछे वाई देखा तो बड़ा. अच्छा लगने लगा। और आज की तारीख में बता. दें। बता दे कि क्या बोलते हैं कभी-कभी. बहुत जब पारा चढ़ जाता है कभी जब इवेंट.
में कभी बहुत कभी-कभी इवेंट में बहुत जोश. में जब आ जाते हैं तब बोलते हैं हु द. ब्लडी हेल इज सेइंग दिस [हंसी]. श्री राधे श्री राधे वो बस जोश वाली बात. है कभी-कभी वो गाली नहीं है वो टेमो में आ. जाता है और कैसा है कि मैं लंदन में बहुत. समय बिता चुका हूं बहुत ज्यादा लंदन में. वक्त बिताया करता था तो उसकी वजह से लंदन. में ब्लड ब्लडी वर्ड जो है ना बहुत कॉमनली. यूज़ किया जाता है पॉजिटिव कनोटेशन में भी. कि.
यू नो समथिंग. दैट एपिसोड वाज़ ब्लडी कूल. ही दिस स्काई वाज़ दिस क्लाई वाज़ ब्लडी. ग्रेट तो वो ब्लडी केवल उसका वो गाली का. कन्वोटेशन ही निकल गया।. भावना ले लिया।. भावना ही निकल गई उसमें। तो एक बस वो एक. वर्ड आ गया। तो कभी-कभी ये शुभंकर जी पहली. बार किसी पडकास्ट में कनंफेस कर रहे हैं।. कभी-कभी ब्लडी बहुत जोश में आ जाती है तो. कहते हैं कोशिश करते नहीं कहे लेकिन. कभी-कभी हो जाता है।. मैं इससे पहले कि आज के युवाओं और लाइफ और.
रिलेशनशिप्स पे जाऊं। एक लास्ट क्वेश्चन. सोशल मीडिया को लेकर कि 21वीं सदी में. कहने से ज्यादा सोशल मीडिया फोन हटा के. उपवास करना चाहिए।. उपवास बिना सोशल मीडिया के।. अ. जी बिल्कुल मुझे लगता है कि सोशल मीडिया. से उपवास जो है ना. वो थोड़ा खुद से कनेक्शन जोड़ने के लिए. बहुत ज्यादा जरूरी है। सोशल मीडिया बहुत. बड़ा टूल है आज टूल है कंटेंट कंज्यूम. करने के लिए कंटेंट डालने के लिए अवेयरनेस.
फैलाने के लिए बिजनेस को ग्रो करने के लिए. सोशल मीडिया एक बड़ा टूल है और आज की. दुनिया में एक सख्त जरूरत है। लेकिन. प्रॉब्लम क्या हो रहा है ना कि हम उसमें. इतने कई बार घुस जाते हैं। कि फिर खुद से. नाता टूट जाता है। वाली एक कविता थी ना. बहुत सुंदर आप तो कवि है वो वाली क्या था. वो जंगल जंगल ढूंढ रहा है मृग अपनी. कस्तूरी कितना मुश्किल है तय करना खुद से. खुद की दूरी भीतर शून्य बाहर शून्य शून्य.
चारों ओर है मैं नहीं हूं मुझ में लेकिन. मैं मैंम का ही शोर है ना तो कई बार ना. दिक्कत ये है कि मैं नहीं हूं मुझ में मैं. हूं उस रील में मैं हूं काम में मैं हूं. कंपैरिजन में मैं हूं हूं स्टोरीज में, मैं हूं कंटेंट में। मैं बस उसमें लग गया।. गलत है। बिल्कुल गलत नहीं है। जरूरत है आज. की। लेकिन उससे एक छोटा सा ब्रेक लेकर अगर. थोड़ा मैं मैं डाल दे मुझ में मैं अपने आप.
को डाल दूं। अपने आप से संबंध बना लूं तो. दो चीजें होती है। एक जो कंटेंट डाल रहे. हैं ना उसमें इंपैक्ट आता है साहब।. इंप्रेस नहीं। इंप्रेस करने में और. इंपैक्ट करने में बहुत बड़ा अंतर है। एक. होती है बोलने की बातें। दूसरा होती है. खुद से जो संपर्क बना लिया उसमें से आने. वाली बातें वो नंबर गेम वाली नहीं होती वो. क्वालिटी वाली होती है। वो आपको नंबर्स. में नहीं दिखती। वो जब ऑन द ग्राउंड जब. आपका नेटवर्क बनता है ऑन द ग्राउंड जिन.
लोगों के साथ आप उठते बैठते हैं जो लोग. आपसे मार्गदर्शन लेते हैं जो लोगों जिस. लोगों के साथ आप बातचीत करते हैं उसमें. दिखाई पड़ती है तो उस मैं में थोड़ा मैं. भरने की जरूरत है तो एक ये होता है. इंपैक्ट होता है बहुत बड़ा और दूसरा दूसरी. बात है जी थोड़ा सा एक रिलैक्स करने से. थोड़ा सा एक समय निकालने से ना थोड़ी. खुशियां. थोड़ी खुशियां ज्यादा आ जाती है क्योंकि. सोशल मीडिया पे रहने से ना कंपैरिजन इतना. ज्यादा है। बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा है. सर। कोई इधर बैठा हुआ है। वो खा रहा है.
राजमा चावल और स्टोरी देखता है कि उसका. दोस्त सिंगापुर में बैठ के मोमोज खा रहा. है। तो इसको यहां इनसिक्योरिटी होती है कि. मेरे मां-बाप के पास पैसा नहीं है मुझे. सिंगापुर भेजने के लिए। पहले ना देखिए. कंपैरिजन मैं कई बार कहता हूं जब दो कपल. मिलते हैं ना एक दूसरे से तो दोनों. महिलाएं एक दूसरे के जेवर देखती है और. दोनों पुरुष एक दूसरे के बीवियों को देखते. हैं। [हंसी]. सॉरी।. तो पहले ना कंपैरिजन के लिए ऑन द ग्राउंड.
होना पड़ता था। मजाक दूर की बात है।. सही बात है।. लेकिन पहले आपको ऑन द ग्राउंड होना पड़ता. था। तब तो देखेंगे ना आप तो आपको इंटरनेट. पे सबका कंपैरिजन सब दिख रहा है। और किस. तरह का सब फोटोशॉप है। जी। 10 फिल्टर. लगाएंगे तो हम भी एकदम ऐसे स्वैग वाले. दिखेंगे। है ना? मैं इवेंट्स में तो हमेशा. कहता हूं मेरे लिए मेरे लिए#शटग है मंक. स्वैग। [हंसी]. देखिए ना।. है मंक और अर्बन हूं बहुत तो अर्बन होने. की वजह से ऐसा देखा जाता है हमको तो जितना.
आप वहां देखेंगे इतना फोटोशॉप्ड है ना सर. वो खाने में खाने से ज्यादा तो लाइटिंग की. वजह से खाना अच्छा लग रहा है खाने पर जोर. ज्यादा नहीं वो लाइट डाल के उसकी फोटो. पोस्ट करने पे ज्यादा जोर और उसमें कोई. गलत है ये नहीं कह रहे हम बस कह रहे हैं. कि थोड़ा सा उपवास हो जाएगा ना थोड़ा सा. पीछे हटेंगे ना तो खुशियां बढ़ेंगी. क्योंकि ये देखने लगोगे कि अपने पास क्या. है? दूसरों के पास देखतेदेखते खुद के पास. देखना पड़ता है।. हमारी लाइफ में जो हमारे अपने होते हैं वो. हमारी ग्रोथ से खुश क्यों नहीं होते? किसी.
ने अभी मैंने सोशल मीडिया पे एक कोट पढ़ा. कि आप सोशल मीडिया पर कोई चीज डालिए अपनी. सफलता के बारे में, अपने लाइफ में अचीव. किया उसके बारे में। आप ये चेक करेंगे कि. ज्यादातर लोग जो आपको प्रेस कर रहे हैं वो. वो हैं जो आपको नहीं जानते या नहीं मिले. हैं।. जिनको आपने सब्सक्राइब कर रखा है, फॉलो कर. रखा है। जो आपके जुड़े हुए लोग हैं उनके. लाइक्स कम होंगे। हम हम बिल्कुल. यानी वो आपको एप्रिशिएट करने कम आएंगे।. हम्म हम. वो लोग ज्यादा आपकी सफलता में खुश होंगे. जिन्होंने आपको दूर से देखा है।. इंस्पिरेशन लिया है। ऐसा क्यों होता है कि.
जो हमारे अपने हैं वो हमारी सफलता में. उसका हिस्सा बनना नहीं चाहते या उससे वो. दूरी बना लेते हैं। भले शायद कुछ बुरा ना. सोचते हो लेकिन एक डिस्टेंस कर लेते हैं।. जी जी जी. एक ना हम हम कहते हैं ना कि लोग हमारे. शुभचिंतक हैं।. तो हमको लगता है शुभचिंतक दो प्रकार के. होते हैं। एक है जो हमारे शुभ का चिंतन. करते हैं।. और दूसरे हैं जो हमारे शुभ की चिंता करते. हैं। किसका शुभ हो रहा है। तो शुभचिंतक दो.
प्रकार के हैं हमारे हिसाब से। एक जो शुभ. का चिंतन करें और एक दूसरे शुभ को देखकर. चिंता करें कि के शुभ कितना हो रहा है। तो. शुभचिंतक वो है. जो हमारी खुशी में भाग ले। कभी-कभी लाइक्स. करके और कभी-कभी बिना लाइक्स करते हुए भी।. हम कल किसी से बता रहे थे ये कि आज कोई. अगर हमारे पास सेल्फी खिंचाने आता है तो. हमारे साथ थोड़ी ना सेल्फी खिंचा रहा है।. शुभंकर जी हम. हमारे अच्छे वक्त के साथ सेल्फी खिं रहा. है।. ट्रू. वक्त बदल जाएगा.
तो इंसान नहीं आएगा नहीं आएगा। 30 साल से. बोल रहे हैं हम। कोई नहीं आया सेल्फी. खिंचाने। ये अचानक क्यों आ रहे हैं लोग? है ना? इसलिए हम कहते हैं ना कि जिनके ना. आते थे जवाब उनके सलाम आने लगे।. हमारा वक्त क्या बदला? हमारे नीम के पेड़. पर आम आने लगे। [हंसी]. सो अचानक से लोगों की भीड़ हो गई। तो कई. लोग होते हैं ना जो ऑनलाइन वाले नहीं होते. हैं शुभचिंतक और उनको उसी स्पेस में रखना. जरूरी है। जहां हम जो आप ईगो की बात कर.
रहे थे ना कि ईगो वो ईगो एक ऐसे स्पेस में. जाए जहां हम एक मामूली इंसान हो। किसी के. लिए तो हम एक मामूली इंसान होना चाहिए ना. भाई। नहीं तो ईगो और अहंकार तो बढ़ता ही. रहेगा कि हम सबके लिए हीरो है। तो तो. इसीलिए कई शुभचिंतक होते हैं जो हमको सेफ. स्पेस में रखते हैं। इसलिए नहीं कि वो. नहीं चाहते कि वो हमारे पोस्ट को लाइक. करें। इसलिए ताकि वो हमको एक सेफ स्पेस. देना चाहते हैं। जहां हम ऑथेंटिक बन पाए।. जहां हम विनम्र बन पाए। जहां हम एक मामूली.
इंसान बन पाए। हर एक इंसान की, हर एक. सक्सेसफुल फिगर की, पब्लिक फिगर की ये. सख्त जरूरत है। एक सेफ स्पेस जहां हम. मामूली बन पाए क्योंकि सब जगह तो हम. मामूली है नहीं बाहर। तो वो भी एक. शुभचिंतक होते हैं। कुछ लोग लाइक करते हैं. वो भी शुभचिंतक है। कुछ लोग नहीं लाइक. करते लेकिन ये सेफ स्पेस देते हैं उनको।. वो भी बहुत बड़े शुभचिंतक हैं।. और तीसरे होते हैं जिनसे अंतर रखना तो. बहुत जरूरी है। जो हमारे शुभ को देखकर. चिंतन करते हैं।.
चिंता करते हैं। चिंतन तो अच्छी बात है।. चिंता करते हैं।. शुभ को देखकर चिंता करते हैं, जलते हैं, द्वेष करते हैं। ईर्ष्या करते हैं। उनका. हमारे पोस्ट को नहीं लाइक करना सेफ स्पेस. नहीं है। उनके हमारे पोस्ट को नहीं लाइक. करना इनसिक्योरिटी है।. आपके पास लड़के बहुत आते हैं सवाल पूछने।. हां बिल्कुल।. सो आपने तो रिलेशनशिप में आप रहे नहीं।. फिर प्यार मोहब्बत को लेकर मैंने आपके. बहुत सारी रील्स देखी हैं। ये इतने अच्छे. अनुभव कैसे? मैंने बहुत सारे सवाल भेजे. हैं लड़के लड़कियों ने। तो [हंसी] मैं.
पहले अपनी संतुष्टि के लिए जाना चाहता हूं. कि प्यार को समझने के लिए प्यार करना. जरूरी नहीं है या [हंसी] ईश्वर से प्यार. करके भी हम लड़का लड़की वाला प्यार समझ. सकते हैं? हाय हाय हाय। [हंसी]. इस सवाल का विस्तृत जवाब किताब में है. लेकिन बताऊंगा जो भी लिखा है बता रहे हैं. आपको इसमें [हंसी] इसी विषय पर ये पूरी इस. किताब की कहानी शादी डेस्टिनेशन वेडिंग. वाली कहानी है. हम. डेस्टिनेशन वेडिंग में जहां मैं जैसलमेर. में गया हूं उसमें जो लड़का लड़की की जो.
शादी हो रही है उसमें लड़की का एक्स आता. है और [हंसी] ये सच्ची कहानी है और उनकी. शादी होती है कि नहीं वो सस्पेंस है लेकिन. वहां सारे रिलेशनशिप की और जिंदगी की. बातें बातें की हुई है इस किताब में तो उस. पर यही सवाल जो आपने पूछा वो मैं पाठकों. को पूछ रहा था कि लोग मुझे पूछते आपको हक. क्या है इस विषय पर बोलने का प्यार. मोहब्बत की बातें शादीशुदा लोगों की बातें. आप करते हो और इतनी बारीकियों को पकड़. पकड़ के आप बोलते हैं कहां से बोल पाए.
इसीलिए मैंने पहले सवाल मैंने रखे पहले. [हंसी] मैंने अपनी जिज्ञासा पूरी की. तो इसके लिए मैंने इस किताब में तीन चार. बातें कही सबसे पहले आपको बताया हमने कि. हमारे आश्रम में 80 ईगो रहते हैं. हम. और रिश्तों में इंसान नहीं आते। इंसान के. साथ-साथ ईगो आते हैं।. तो जो सारे पुरुष एक साथ रह रहे हैं साधु. मंक्स लोग एक साथ रह रहे हैं। उनके भी. ईगोस है और उनके भी पसंद कुछ लाइक्स है, डिसलाइक्स है, इडओसिंकसिस है, पर्सनालिटी. टाइप्स है। 80 लोग जब एक साथ रहते हैं ना,
तो बहुत कुछ होता है साहब। तो 30 साल तक. अगर आप 80 लोगों के साथ रहे तो जो रिश्तों. के जो बेसिक फंडामेंटल प्रिंसिपल्स हैं ना. वो भली-भांति समझ जाते हैं। फ्लेवर्स अलग. है बस। पुरुष स्त्री के जो रिश्ते हैं जो. प्रेम मोहब्बत के थोड़े अलग है। फंडामेंटल. प्रिंसिपल्स तो वही है। सब प्यार चाहते. हैं। सब सम्मान चाहते हैं। सब स्पेस चाहते. हैं। आश्रम में भी सब चाहते हैं। तो ये एक. हुआ।. दूसरी बात. 30 सालों से जितने लोगों ने आकर मेरे पास.
अपने दिल खोले हैं भाई साहब. एक बार एक आया एक किसी का दिल टूटा एक. लड़के का. 20 साल का 19-20 साल का आया रोते-रोते. मेरे पास बॉम्बे का पूरा स्वैगर आया रोते. रोते और जानता था मैं उसको आके सीधा मेरी. गोद में सर रख के रोने लगा। तो मैंने कहा. मैंने कहा भाई तेरे आंसुओं से मेरी धोती. गीली हो रही है। गलतफहमी हो जाए। [हंसी]. तू यहां रख दे यहां भाई यहां खड़े रख के.
और रोते-रोते शेर मार रहा है वहां एक और. शेर सुना रहा है मुझको रो रहा है। बोला. मैं लड़कियों में विश्वास नहीं कर रहा।. सारी दिल तोड़ देती है। सब के सब के सब ये. गाली देने लगा लड़कियों को। फिर शेर सुना. रहा है उसने। कहता है दिल बोली आंख से।. दिल बोला आंख से तुम देखा करो कम। देखते. हो तुम और तड़पते हैं हम। मैंने कहा अरे. भाग ठीक है। फिर आगे बोल रहा है और आगे कह. रहा है। आंख बोली दिल से आंख बोली दिल से.
तुम चाहा करो कम चाहते हो तुम और रोते हैं. हम। और रोए जा रहा है ये शेर बोलते बोलते।. तब इतने लोगों के हार्ट ब्रेक्स देखे।. इतने लोगों के डिवोर्सेज देखे। इतने. फैमिलीज में भाइयों भाइयों के बंटवारे. देखे। इतने 30 सालों में रिश्तों में. फ्लेवर्स देखें साहब। इनफेडिलिटी देखी, चीटिंग देखी लोगों की। सम कम्युनिटी में. रहते हैं जहां 10,000 फैमिलीज जुड़ी है।. इनकी कहानियां सुनते-सुनते.
हर एक फ्लेवर और नोसू समझ में आने लगता. है। तीसरी बात जो हम शास्त्र पढ़ते हैं. महाभारत हो, रामायण हो और हमारे सारे. शास्त्र है। उन सारी किताबों में. रिलेशनशिप की नन्सेस जो है ना यूं छिपी. हुई है। बस ढूंढना होता है उसको।. वो आप अगर भली-भांति ढूंढने लगे ना तब पता. लगे। जैसे सीता की बात करते हैं हम सीता. मैया की बात करते हैं कई बार रामायण से हम. हमेशा कहते थे कि जब सीता मैया राम के साथ.
थी तब मृग चाहिए था उनको. और जब अशोक वाटिका में बैठ गई तब राम. चाहिए थे उनको तो जब आपके साथ कोई होता है. तो आपका ध्यान कहीं और होता है और जब विरह. में चले जाते हैं तो जो साथ में था उसकी. कीमत पता लगने लगती है सीता मैया तो हम. अलग तरीके से उनको देखते हैं देवी है. लेकिन अगर शिक्षा ढूंढने जाए रिश्तों. तो बहुत सारी शिक्षाएं तो हमारी है. किताबों में और चौथी बात हो सकता है पिछले. जन्म के कुछ संस्कार कुछ कुछ [हंसी].
संस्कार जो अंदर बैठे हुए हैं।. तो मेरा बहुत सारे सवाल हैं। सबसे पहला. सवाल तो मैं आपसे यही कर लेता हूं कि. लोग चीट क्यों करते हैं? आज के दौर में. चीटिंग एक बहुत कॉमन ट्रेंड हो गया है।. बहुत कॉमन हो गया है। चाहे वो शादीशुदा. लोग हो या कपल्स हो।. हर दूसरे कपल में एक इंसान चीट कर रहा है. जो शायद दिखा नहीं रहा होगा या पकड़ में. नहीं आ रहा होगा बट चीट कर रहा है।. चीटिंग करने की प्रथा इस दौर में इतनी. ज्यादा बढ़ क्यों गई है? हम हम.
किसी ने क्या खूब कहा है? खुशी भी यही और. गिला भी यही।. खुशी भी यही और गिला भी यही। वो हमको मिला. तो सही लेकिन मिला ही नहीं।. खुशी भी है और गिला भी है। खुशी की है कि. जो चाहते थे वह मिल गए। गिला है सच में. मिले ही नहीं। पूरे नहीं मिले। मिले ही. नहीं। दिल कहां मिले जी? जिस्म मिले हैं. बस।. जहां केवल जिस्म मिलते हैं। जहां चेहरे की.
रोशनी और चेहरे की खूबसूरती से लोग मर. पड़ते हैं। जहां वनाई स्टैंड्स और हुकअप्स. के फिजिकल रिलेशनशिप्स वाली केवल बातें. करते हैं। वहां दिल मिले ही कहां है? जहां. दिल मिलते हैं, जहां आत्माएं मिलते हैं, जहां रूह जुड़ती है, वहां चीटिंग गलती से. होती है। इंटेंशनल नहीं होती। चीटिंग तो. हम सब [हंसी] किसी से भी गलती हो सकती है, हमसे भी हो सकती है। देखिए, इंसान है हम. सब। इंसान से गलती तो हो सकती है। इसलिए.
कहते हैं ना भूल होना प्रकृति है, मान. लेना संस्कृति है और सुधार लेना प्रगति. है। है ना? भूलना तो सब नेचुरल है।. प्रकृति है लेकिन मान लेना संस्कृति है।. जिनकी रूह जुड़ी है ना वो गलती मानते हैं. और सुधार लेना प्रगति है। तो जिनके पास. जिस्म और चेहरे से जा रहे हैं। चेहरे की. रोशनी से जा रहे हैं। जिस्म जुड़ रहे हैं. बस एक दूसरे से। गलत है सही है नहीं कह. रहा। जिस्मों का मिलन प्रेम के बाद होता. है। शुभंकर जी। फिजिकल कनेक्शन इज अ.
मैनिफेस्टेशन ऑफ इंटरनल कनेक्शन।. लेकिन जब इंटरनल कनेक्शन के बिना केवल. फिजिकल कनेक्शन में आप जाओ तो वो फिजिकल. कनेक्शन में तो बोरियत आएगी ना साहब। एक. इंसान के साथ कब तक रहेंगे? अगर आपके रूह नहीं जुड़ी है। आपके सोल. कनेक्ट नहीं हुआ है। आपके अंदर से जुड़. जुड़ नहीं पाए हैं आप। तो एक समय तो. बोरियत आनी ही है। उसी इंसान के साथ कब तक. रहोगे? उसी इंसान के साथ कब तक फिजिकल. कनेक्शन बनाओ? उसी इंसान के.
इरिओसिंक्रेसिस को कब तक टोलरेट करोगे आप? लेकिन ये सब चीजें तब छोटी होने लगती है. जब सोल कनेक्ट होता है. और तब जाके ऐसा नहीं कह रहा कि सोल कनेक्ट. जिनका है उनका चीटिंग नहीं हुआ होता है ना. जीसस क्राइस्ट ने एक बात बहुत अच्छी कही. है मुझे बहुत है ये बात ये सारे आज के. समाज को डिफाइन करती है द स्पिरिट इज़. स्ट्रांग बट द फ्लेश इज वीक. अंदर से कमजोर अंदर से स्ट्रांग है जी.
जिनकी रूह जुड़ी है ना वो भी अंदर से. कनेक्शन स्ट्रंग लेकिन ये जालिम शरीर. द फ्लेश इज वीक. क्या गहरी बात है ये. है ना तो इसलिए जब कभी ऐसा हो जाता है तो. हमने देखा है हमारे कम्युनिटी में भी देखा. है ऐसी गलतियां हुई तो बड़ी-बड़ी गलतियां. होती हुई देखी है लेकिन क्योंकि इतना सोल. कनेक्ट था ना कम से कम उस पर काम करने की. एक इच्छा थी कि हम जुड़े हुए हैं लेट्स. ट्राई ये नहीं कि हम आगे बढ़ेंगे हो सकता.
है तोड़ देंगे इस रिश्ते को लेकिन कम से. कम एक दूसरे की बात को समझ और खुद आके बोल. रहा है। चीटिंग करो ना।. चीटिंग करो ना। मैं मैं अंग्रेजी में. हमेशा कहता हूं इस किताब में कोट है ये। द. वर्स्ट लाइ वी टेल आवरसेल्व्स।. द वर्स्ट लाइ वी टेल इज़ नॉट द लाइ वी टेल. द वर्ल्ड। वी टेल आवरसेल्व्स। सबसे बड़ा. झूठ हम दुनिया को बोला हुआ झूठ नहीं है. सर। हम खुद को जो झूठ बोलते हैं ना वो. सबसे बड़ा झूठ है।. नजरों का पानी मर जाएगा।.
नज़रों का पानी मर जाएगा। तो खुद से कितना. झूठ बोलते रहोगे कितना घूमते रहोगे जिसके. रूह का आत्मा का संबंध सोल कनेक्ट है ना. वो छिपाएगा नहीं सर वो कनंफेस करने के लिए. उसको वक्त लगेगा शायद लेकिन पता है कि इस. विश्वास इस इस रिश्ते में विश्वास की. बुनियाद है ना भले ही टूट जाए लेकिन झूठ. बोलेंगे नहीं टूटना है ना टूटेगा रहना है. ना रहेगा लेकिन इसमें झूठ नहीं बोलेंगे तो. ये चीटिंग वाली बात जो बोल रहे हैं ना एक. तो यही बात है कि कनेक्शन बस जिस्मों का.
संबंध हो गया है बस यहां जिस्म जिस्म. जिस्म जिस्म चल रहा है ना पूरा तो उसमें. तो बोरियत आनी है उसमें तो मोनोटोनी आनी. है उसमें तो पका पकाएगा वो एक दिन पे पक. जाएंगे हम उसी चीज से दूसरा कभी-कभी हमको. ये भी लगता है कि चीटिंग को ना थोड़ा. यूलोजाइज किया जा रहा है आजकल बहुत ज्यादा. उसको ठीक-ठाक किया जा रहा है. इट्स ऑल राइट नॉर्मलाइज हो रहा है इट्स ऑल. राइट. फिजिकल चीटिंग. माय लाइफ माय रोल्स ब्रो माय लाइफ्स माय. रूल्स डू यू अंडरस्टैंड दैट डू यू गेट इट.
इट्स माय ब्लडी लाइफ। आ गया ना ब्लडी? अभी. यहां पे ब्लडी आता है। तभी एम्फेसिस आता. है उस पे। इट्स माय ब्लडी लाइफ। यू डोंट. हैव टू टेल मी हाउ टू लिव माय लाइफ। तो. क्या ये गलत है, क्या सही है? इसमें नहीं. पढ़ रहे हम। मैं कौन गलत, क्या गलत की बात. ही नहीं कर रहा।. बस एक बात पक्की है कि जब हम बस यही सोचते. हैं कि ये सब ठीक-ठाक है। तब फिर वो. नॉर्मलाइज होकर एक समाज का संस्कृति का. हिस्सा बन जाता है। है ना? तो आज के दौर.
में ये ये नहीं कह रहा चीटिंग होगा नहीं. होगा करना है नहीं करना है कुछ नहीं कह. रहा। बस ये कह रहा हूं. कि थोड़ा कनेक्शन के लिए. इससे ऊपर उठकर इससे भीतर जाकर जब कनेक्शन. होगा ना ये नहीं ये भी नहीं कह रहा कि. चीटिंग नहीं। दौर बहुत बदल गया। शुभंकर जी. प्रलोभन और टशंस जगह-जगह पर है जो पहले. नहीं थे। तो यह कहना कि इसके साथ कुछ होगा.
ही नहीं जागती होगी। बहुत बड़ी जागती. होगी। कुछ लोग होंगे शायद जो जिंदगी भर. बहुत लॉयल रहेंगे। बाय अनलार्ज ये कॉमन हो. गया है आजकल क्योंकि प्रलोभन इतने हैं।. इतने सारे प्रलोभन अवेलेबल है सबको। ऐसी. परिस्थिति में एक जरूर कहूंगा सारे. दर्शकों से। चाहे आपको विवाह करना है, नहीं करना है, चाहे आपको किसी के साथ. जिंदगी भर रहना है, नहीं रहना है।. कंपैनियनशिप बहुत जरूरी होती है जिंदगी. में। हमने ईश्वर को ले लिया अपने कंपैनियन.
के रूप में। हर एक इंसान केवल ईश्वर से. कंपैनियनशिप नहीं कर सकता जिंदगी भर।. शादी केवल कोई एक शरीर के लिए और परिवार. बढ़ाने के लिए नहीं होती है। एक वक्त आता. है जहां पुरुष को भी किसी के सामने रोना. पड़ता है। किसी के सामने जाकर दिल की बात. खोल के कहना पड़ता है। तो ऐसी कंपैनियनशिप. की जब जरूरत होती है ना उसके लिए थोड़ा. जिस्म से ऊपर उठ के अंदर के कनेक्शन. ढूंढना बहुत ज्यादा जरूरी है। और ये अगर. होगा तो क्या चीटिंग बंद होगी?
नहीं।. नहीं होगी। हो सकती है? नहीं भी हो सकती।. लेकिन अगर होगी भी ना तब भी वो चीटिंग की. वजह से रिश्ता टूटने की गुंजाइश थोड़ी कम. हो जाएगी क्योंकि इसमें ऑनेस्टी है। इसमें. ऑथेंटिसिटी है। इसमें कनेक्शन है। ये ठीक. है। देखते हैं। एक और कोशिश करते हैं इस. पर काम करने की। तो मतलब समझ में मुझे ये. आया कि आजकल लोग प्यार में प्यार करने के. पहले इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं।. बहुत ज्यादा। कमोडिटी हो गई है।.
फिर आपको भी हजारों सैकड़ों लोग ऐसे क्यों. मिलते हैं जो अकेलेपन से घबराते हैं कि. रिश्ता टूटता है तो वो उन्हें लगता है कि. वो अकेले नहीं रह पाएंगे। आई एम श्योर. आपको भी मिले होंगे ऐसे बहुत सारे लोग।. अकेलापन से भागने घबराहट की वजह से लोग. रिश्ते में जाते हैं।. हां जी। हां जी।. कि आई कांट स्टे अलोन। जैसे आपने भगवान का. कैंपेनशिप मान लिया।. हां।. बट इंसान को चाहिए होता है।. हां जी बिल्कुल बिल्कुल। वो कहते हैं ना. जिंदगी का सफर।. एंड आई थिंक ब्रेकअप में सबसे ज्यादा हर्ट. भी यही करता है शायद। हां. अकेलेपन का डर कि अब हमें कोई और नहीं.
मिलेगा. हम अकेले कैसे रहेंगे हम तो साथ में उठते. थे साथ में बैठते थे. बिल्कुल और बहुत चोट पहुंचती है. हां बहुत ज्यादा चोट पहुंचती है तो मैं. मैं हमको हम सफर की बात कर रहे थे ना पहले. अंग्रेजी और हिंदी सफर वाली बात तो किसी. भी सफर को खूबसूरत सफर बनाने के लिए तो. हमसफर चाहिए होता है. किसको हमसफर चुनिएगा वो अलग बात है। कोई. ईश्वर को चुन ले कोई माता-पिता को अपना. हमसफर बना लेते हैं। जिंदगी में चलता है. वो। सफर को तो खूबसूरत हमसफर ही बनाता है।.
अकेले कब तक चलोगे? सही बात है।. भूत थोड़ी ना हो। कि भूत जैसे प्रेत जैसे. घूमते रहोगे क्या? तो हमसफर की जरूरत तो. सबको होती है। कौन है वो अलग बात है। तो. जब अकेलापन है ना जी अकेलापन. काटने को दौड़ता है। वो अकेले होने की बात. नहीं है। लोनलीनेस की उतनी बात नहीं है।. अकेलापन तब ज्यादा महसूस होने लगता है जब. हमको लगता है कि लोग हमारी परवाह नहीं कर. रहे।. अकेला रहने में दिक्कत नहीं है लोगों को।.
सबको अपनी स्पेस चाहिए ना भाई।. हर रिश्ते में अपने आपको अपना लोनलीनेस और. सॉलिट्यूड चाहिए होता है क्योंकि नहीं तो. टॉक्सिक हो जाता है।. फर्क नहीं पड़ता।. नहीं तो टॉक्सिक हो जाता है बहुत। बार-बार. बार बार वही वही थोड़ा सा एक स्पेस मिल. जाता है। तो एक अकेलापन भी वैल्यूुएबल है. वो। वो अकेलेपन से कोई नहीं डरता जी।. किसी को फर्क नहीं पड़ा।. किसी को फर्क नहीं पड़ रहा है हमारी वजह. से। हमारी परवाह नहीं करता कोई। ये दिक्कत. है उसमें। और इसीलिए रिश्तों में. पूरी इन्वेस्टमेंट एक इंडिविजुअल में एक.
रिश्ते में कभी नहीं होनी चाहिए।. क्या ब्यूटीफुल लाइन है ये सबसे बड़ी गलती. करते हैं और. सबसे बड़ी गलती करते हैं।. सबसे्ट. एक इंडिविजुअल में सब कुछ आप इन्वेस्ट कर. रहे हो। अरे भाई एक स्टॉक मार्केट के शेयर. में अगर आप सब इन्वेस्ट कर दिए। आपका. इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो में एक ही स्टॉक. है। वो जब डूबेगा ना आप साथ में डूबने. वाले हैं। इसलिए आप इन्वेस्टमेंट करते तो. आपका पोर्टफोलियो में मल्टीपल आप. म्यूच्यूल फंड में करते हैं, डेप्स में. करते हैं, एफएओ में करते हैं, स्टॉक्स में. करते हैं। सारी चीजों में आप इन्वेस्टमेंट. करते हैं।. इसका मतलब ये नहीं कि 10 जगह रिलेशनशिप.
रखते हैं। इसका मतलब है आपके परिवार के. रिश्ते में ये बात मैं कहने वाला था। आपने. क्लेरिफाई कर दी। थैंक यू। [हंसी] नहीं तो. अरे गुरुजी ने तो आज पूरा रेड ग्रीन फ्लैग. दे दिया हमको।. [हंसी]. मैं कहता हूं किसी मेरा एक बहुत. बैकअप बनाते चलो. मेरा एक बहुत फेवरेट जोक जो मैं बहुत. बोलता था पहले आजकल नहीं उतना बोलता बहुत. समय के बाद याद आ रहा है पहले बहुत बोला. करता था मैं कि. सबसे ज्यादा फ्लर्ट कौन होता है पता है. आपको जो लव लेटर लिखता है कहते हुए कि टू. सो एवर इट मे कंसर्न [हंसी].
तो 10 रिश्ते चले जाएंगे सो ये जो. इन्वेस्टमेंट है एक इन्वेस्टमेंट होती है. आपके जीवन साथी में जो भी हो आपकी. लेकिन दूसरे आपके पारिवारिक रिश्ते. माता-पिता हो, भाई बहन हो, दोस्त इत्यादि. हो, सामाजिक कलीग्स हो यह जो इन्वेस्टमेंट. है ना फिर एक अगर परवाह नहीं करे तो चार. तो परवाह कर रहे हैं आपको। तब वो अकेलेपन. का महसूस जो जो अकेलापन एक रिश्ते से. टूटने से आता है वो हैंडल करना थोड़ा सरल. हो जाता है।. इस जमाने में बहुत सारे लोग हैं दास जी जो.
कहते हैं कि हमने एक इंसान के लिए बहुत. किया। दिल से किया।. पर वो इंसान इतना करने के बाद भी आगे चला. गया। हम्म।. ऐसे लोगों से आप क्या कहेंगे? एक ना तितली थी शुभंकर जी।. और ये तितली एक बार आई और एक बिच्छू के. पास आकर बैठी। और बिच्छू से कहने लगी मैं. तुमसे डरती नहीं हूं। बिच्छू ने कभी किसी. से सुना ही नहीं था। कि कोई मुझसे डरता. नहीं है। तो बिच्छू ने सोचा कि पहली बार.
तो कोई कह रहा है। थोड़ा इसके साथ चल जा. चला जा तू। तो तितली आगे आगे उड़ रही है।. उसके पीछे पीछे बिच्छू अपनी दुम दबाकर चल. रहा था। बिच्छू जब जा रहा था तितली के. पीछे तो तितली ने भी देखा कि अरे यार ये. मेरे साथ आ रहा है। तो तितली ने उसको. बगीचे दिखाए। फूल दिखाए। बड़े सुंदर-सुंदर. खूबसूरत खुशबू वाले फूल दिखाए। वो सारी. चीजें दिखाई जिसको बिच्छू ने कभी जिंदगी. में सोचा भी नहीं कि इसका अस्तित्व होता. है। द जेंटल साइड ऑफ़ लाइफ। और फिर एक दिन.
तितली बैठी बिच्छू के पास एक रात और तितली. ने कहा चलो ना उड़ के चलो मेरे साथ हर. रिश्ता ऐसे होता है चलो साथ में उड़ते हैं. लेट्स फ्लाई टुगेदर वी हैव हाई फ्लाई इन. लाइफ चलो चलते हैं साथ में बना है हमारा. प्रारब्ध है साथ में जाना बिच्छू ने कहा. आने की इच्छा तो बहुत है लेकिन शरीर देखो. कितना विशाल उड़ नहीं पाऊंगा पंख नहीं है. मेरे पास कहने लगा कोई बात सो गई तितली. वहीं पर रात में और अचानक से बिच्छू की.
पूंछ में कुछ एक रिफ्लेक्स एक्शन होने. लगा। और जाके उसने उसको डस लिया तितली को।. सवेरे जब तितली उठी तो सवेरे नहीं तुरंत. उठी ना जब दर्द हुआ तो तो कहने लगी तुमने. तो कहा था तुम मुझे काटोगे नहीं।. बिच्छू ने कहा मैं चाहता नहीं था।. कसम खाता हूं खुदा की। चाहता नहीं था।. बड़ा दर्द अपनी तितलियों में ले अपने.
पंखों में लेकर तितली उड़ गई।. देखिए जब कोई इंसान इस प्रकार का व्यवहार. करता है, चीट करता है, इस प्रकार से चोट. पहुंचाता है, कई बार वो खुद अपनी लड़ाईयां लड़ रहा है।. आदतों की लड़ाईयां, कंडीशनिंग की लड़ाईयां, अपने आप को जिस प्रकार से वायर्ड है उसकी. लड़ाईयां। उसको स्ट्रगल करके किसी न किसी. तरह से कोशिश कर रहा है कि सामने वाले को. के साथ अच्छा रहा जाए।.
और जब तक वह चलता है ठीक है। लेकिन अगर. किसी बिच्छू की वजह से उनकी आदतों की वजह. से अगर हमारे पंख कटने लगे. तब तो फिर इस इंसान को तितली को उड़ के. जाना ही पड़ता है और जो पीछे रह जाता है. उसको पूछना पड़ता है कि आगे बढ़ गई उसकी. स्वार्थ की वजह से या मेरी वजह से यह जो. हार्ड वर्क है ना शुभंकर जी करते नहीं है. लोग। ब्लेम गेम खेलना बड़ा सरल होता है।. दूसरों पर आरोप लगाना कि हमारा रिश्ता था.
टूट गया। वो मुंह ऑन कर गए। हम तो वहीं पर. रो रहे हैं। मुंह ऑन कर गए। ठीक है। क्यों. मूव ऑन कर गए? हो सकता है उनकी गलती हो तो. ठीक है। वो तो उनकी गलती तो पॉइंट आउट. करनी चाहिए। लोग ना कभी खुद की गलती नहीं. देखते।. और और इसीलिए जो मोमेंट्स होते हैं ना. थोड़े रिफ्लेक्शन के उसमें खुद को थोड़ा. आईना दिखा।. तो व्हाट इज मोस्टेंट देन लव? फॉर अ. हैप्पी रिलेशनशिप, हैप्पी मैरिज। अपने. अनुभवों से सबसे इंपॉर्टेंट चीज क्या है. रिश्ते के लिए? जी देखिए दो तीन चीजें हमको लगती है कि.
रिश्ते के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। एक. अच्छे रिश्ते में ग्रीन फ्लैग और रेड. फ्लैग क्या है? कि किसी के साथ रहने में. ना आपको खुश रहने के लिए बहुत ज्यादा. मेहनत नहीं करनी पड़े।. इफ यू हैव टू स्ट्रगल हार्ड एवरी डे टू बी. हैप्पी विद समवन। रेड फ्लैग है साहब।. मेहनत तो करनी पड़ती है। हर दिन मूड सेम. नहीं होता। हर परवरिश सेम नहीं होती। तो. थोड़ी तो मेहनत रहेगी हर रिश्ते में।. लेकिन अगर हर रोज इतनी ज्यादा मेहनत करनी.
पड़ रही है तो रिश्ते पे फोकस करें कि. हार्ड वर्क पे फोकस करें? तो पहली बात यह. ध्यान रखना कि अगर आपकी खुशी के लिए आपको. बहुत स्ट्रगल करना पड़ रहा है रोज। तब. सवाल पूछना कि क्या यह मेरे लिए सही. रिश्ता है? दूसरा किसी के बिना अगर आप. उदास रहते हो तो ठीक है। साथ रह के अगर. किसी के साथ रहकर आप रोज उदास रहते हो तो. भाई साहब रेड फ्लैग है। बहुत बड़ा रेड. फ्लैग है।. उसके लिए ना आपको सोचना पड़ेगा कि भाई ये.
चली जाती है। ये चला जाता है तो उदासी. होती है। बात मान ली। साथ में बैठकर रोज. का ऐसे ही लग रहा है। तो क्या ये रिश्ता. सही है? क्या यहां प्यार है? क्या यहां. सोल कनेक्ट है? और तीसरी बात तीन चीजें. कभी किसी से नहीं मांगनी चाहिए। समय, प्यार, प्यार, रिस्पेक्ट, सम्मान।. तीन चीजें किसी से नहीं मांगनी चाहिए।. समय, वक्त, प्यार और सम्मान। ये तो वही.
लोग आपको बिना मांगे देते जो आपकी कदर. करते हैं। लेकिन सर प्यार में लोग सरेंडर. हो जाते हैं और अच्छा भी लगता है कई बार. कि आप कंप्लीट सरेंडर कर दें। लेकिन कहां. पर कंप्लीट सरेंडर हीलिंग है और कहां पर. कंप्लीट सरेंडर सेल्फ डिस्ट्रक्शन है।. हम बिल्कुल. इसे देखिए ना हमने सरेंडर का मतलब ही गलत. है।. तितली वाली कहानी से मेरे को फिर याद आया. ये।. हां जी।. सरेंडर सरेंडर का मतलब ही गलत समझे हम.
लोग। सरेंडर का मतलब हमारे अस्तित्व को. खोना थोड़ी ना होता है।. अभी हम थोड़ा आध्यात्मिक की ओर मिडते हैं।. गीत ये रिलेशनशिप पे आने से पहले। अर्जुन. ने कृष्ण के प्रति शरणागति की।. कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर गीता में अर्जुन. की शरणागति है। नष्टो मोह स्मृति लब्ध तत. प्रसादात्मयाचत. करिश वचनम तवा आपने जो जो बताया मेरा मोह. नष्ट हो गया। सब कुछ अभी जो आप कहेंगे मैं. वो करूंगा। रिश्ता तो यही होता है ना अभी.
सरेंडर का मतलब जो यह चाहे वो उसके लिए. जीना उसके लिए करना अपने आप को पूरी तरह. से भूल जाना मैं चंदन तुम पानी है ना मैं. चंदन तुम पानी इस प्रकार से घिसेंगे हम अब. कि एक हो जाएंगे बस तुम्हारे लिए तुम्हारी. खुशी के लिए जिएंगे बहुत अच्छी बात है. प्यार का तो मतलब यही होता है कि दूसरों. की खुशी जिससे प्यार करते हैं उसकी खुशी. ले के लिए जीना लेकिन सरेंडर का मतलब यह. नहीं कि हम अपने अस्तित्व को भूल जाएं. देखिए जब कृष्ण के प्रति अर्जुन ने. शरणागति ली तो अर्जुन का अस्तित्व खत्म.
नहीं हुआ। अर्जुन तभी भी अपना अस्तित्व. बनाए रखे थे।. और इसीलिए सरेंडर में एक बात समझनी जरूरी. है कि सरेंडर क्या होता है? दूसरों की. खुशी, दूसरों की इच्छाएं, दूसरों के दुख. हमारे लिए मायने रखने रखने लगते हैं। इसका. मतलब यह नहीं कि हम अपनी खुशी, अपने दुख, अपने लाइक्स, डिसलाइक सब भूल जाए। यह सबसे. बड़ी गलती हो रही है। आप आपको आप कभी. बिस्कुट खाए हैं चाय में डुबो के. चाय में डुबो के जो बिस्कुट खाते हैं ना. साहब उसका जो नीचे सेडिमेंट्स बचता है.
आपने कभी खाया है वो. जो पहले खाने के बाद वो ऊपर डबो डूब के वो. बीच में नीचे होकर पूरा वो नीचे क्या कहते. हैं हिंदी में नहीं सेडिमेंट्स तो कहते. हैं उसको हम लोग के पता नहीं क्या कह रहे. हैं वर्ड क्या है तो उसको चायवा खत्म होने. के बाद वो चम्मच से स्कूप करके जो ओ भाई. साहब [हंसी]. मैं ना न्यूयॉर्क गया हुआ था हमारे आश्रम. में और एक बिस्किट का ब्रांड नहीं कहता वो. जो सबका पसंदीदा इतना बचपन से खाते आए हैं. हम उस बिस्कुट को और मैंने सालों से ये. बिस्किट नहीं खाए। आश्रम में कहां से. बिस्कुट खाएंगे हम? तो उधर वो न्यूयॉर्क.
वाले आश्रम में तो न्यूयॉर्क के लिए फैंसी. था वो। उनके आश्रम में बड़े-बड़े पैकेट. रखे हुए थे उनके बिस्कुट के। तो हमने बड़ा. मसाला वाला दूध दूध बनाया। उसमें [हंसी]. डुबो के खाए और सालों के बाद जो नीचे वाला. जो था ना वो खाने का एक अलग अनूठा जो. अनुभव है। हां ना बस एक रस है वो।. बिल्कुल। [हंसी]. तो देखिए बिस्कुट की गलती क्या है जानते. हैं आप? खुद को किसी में इतना मजबूल कर देता है कि. खुद का अस्तित्व ही खो देता है और प्यार.
में लोग बिस्कुट बन जाते हैं। शुभंकर जी. इतना डूब जाते हैं कि खुद को भूल जाते. हैं। दूसरों की खुशी के लिए खुद की खुशी. को मार देना सबसे बड़ी खुदकुशी है।. दूसरों की खुशी के लिए खुद की खुशी को मार. देना सबसे बड़ी खुदकुशी है। खुदकुशी करने. के लिए कोई रस्सी बनाने की जरूरत नहीं।. रोज तो मर ही रहे हैं आप। रोज तो मर ही. रहे हैं। रोज तो मार ही रहे हैं अपनी. इच्छाओं को। रोज तो मार ही रहे हैं अपनी. इंडिविजुअल।. प्यार की परिभाषा क्या रही? लोग कहते हैं. कि प्यार में खुद को भूल जाना चाहिए।.
बिल्कुल।. जहां पर मैं से पहले हम आ गया या आप आ गए।. बिल्कुल नहीं मैं मैं सहमत हूं। पूरा सहमत. हूं उससे। हमारे बड़ा चैतन्य महाप्रभु के. जीवन के बारे में बड़ा ग्रंथ लिखा हुआ है।. जिसको चैतन्य चरितामृत कहते हैं। कृष्णदास. कविराज गोस्वामी नाम के बड़े संत ने गीता. बोले। उसमें ना प्रेम की ये भगवान के लिए. लेकिन श्लोक बड़ा अच्छा है, बंगाली श्लोक. है। अह प्रगाढ़ प्रेमे रही स्वभाव विचार।. प्रगाढ़ प्रेम का स्वभाव क्या है? प्रगाढ़. प्रेमे स्वभाव विचार। निज दुख विघ्न आदि.
ना करे विचार। खुद का दुख खुद का सुख खुद. का विघ्न सोचता ही नहीं। डूब जाता है. उसमें। मैं सहमत हूं उससे कि प्यार तो वही. होगा जिसमें हम डूब गए।. लेकिन एक बात पूछता हूं।. यह तो यह देखिए अगर एक कप खाली है ना. शुभंकर जी तो क्या मैं आपके कप में पानी. भर सकता हूं? नहीं।. तो हम तो उसको डूब कर उस कप से प्यार करना. चाहते हैं। देना चाहते हैं।. लेकिन देंगे क्या आप? खाली है।.
खाली है। क्या दोगे? दूसरों को प्यार में. क्या दोगे? खालीपन। दूसरों के प्यार में. क्या दोगे? निराशा। दूसरों के प्यार में. क्या दोगे? तकलीफ। खुद की तकलीफ।. तो इसलिए अपना का भरना स्वार्थ नहीं है।. यह प्यार में डूबना ही है। उसको प्यार. करने के लिए तो अपने आप को इक्विप कर रहे. हैं। उसको देने के लिए तो अपने आप के पास. ला रहे हैं।. और वो अवस्था भी आए कि आपको पता हो कि यह. है आपके जीवन भर का। जैसे मां के लिए बेटा. होता है।. हां बिल्कुल।. वहां पर डूबना भी शायद.
हां वो स्वाभाविक है। वो तो स्वाभाविक है।. ईश्वर है स्वाभाविक है।. लेकिन लेकिन एक बात बताएं आप।. लेकिन हर इंसान में डूबने में अगर आप. लेंगे तो आप डूब जाएंगे।. हां डूब जाए। मां को भी नहीं डूबना चाहिए. उतना।. इस भारत देश की महिलाओं को सबसे बड़ा. प्रॉब्लम यह है जीती बस अपने बच्चों के. लिए जीती बस अपने पतियों के लिए जीती बस. सबके लिए और जीतेजीते भूल जाती है खुद की. भी एक जिंदगी है भाई साहब वो भी इंसान है. ट्रू उसकी भी चीजें हैं उसकी भी इच्छाएं. हैं उसके भी सपने हैं उसको भी कुछ करना है.
उसको भी कुछ अच्छा नहीं लगता उसको भी कुछ. अच्छा लगता है आप बताइए आप बस सवाल पूछ. रहा हूं आपसे आपकी मां का फेवरेट कलर क्या. है अगर पूछेंगे तो हम कहीं में से कई. लोगों को पता नहीं होता। कभी बताती ही. नहीं है।. आपकी मां को खाने में क्या अच्छा लगता है. बताएगी नहीं। क्योंकि कोई अच्छा भी लगता. हो तो बेटे के लिए देने में कम पड़ जाए तो. नहीं खाती है वो। और यही करते-करते जीती. है और इसको तो सराहना करनी चाहिए। इसको. दंडवत प्रणाम करते हैं हम इस समर्पण को।. लेकिन साथ ही साथ यह भी कहते हैं कि भगवान.
ने ईश्वर ने हर इंसान को जीवन दिया है। एक. सफर दिया है। और इस सफर को अच्छी तरह से. जीना भी बहुत ज्यादा जरूरी है। तो इसलिए. बिस्कुट बनना नहीं चाहिए।. अपने कप को भी भर लेना चाहिए। इसलिए नहीं. कि हमको अपना कप भरना है।. इसलिए कि दूसरों के कप में देना है, पोर. करना है। मान लीजिए किसी का प्रेम अंत हो. गया हो. तो प्रेम का अंत होना सेपरेशन होता है, दुख होता है या फिर एक नए सिरे से. कॉन्शियसनेस की शुरुआत होती है। एक नए.
इंसान का अर्थ होता है। क्या हर बार आदमी. दिल दुखाने आता है या कई बार आपको एक. मार्ग की दिशा दिखाने आता है।. जब जीवन में कुछ होता है ना. जैसे हम कहते हैं कई बार इट्स नॉट सो मच. अबाउट व्हाट हैपेंस टू अस इट्स अबाउट. व्हाट वी डू विथ व्हाट हैपेंस टू अस हमारे. साथ क्या हुआ वो इतना मायने नहीं रखता जो. इतना मायने रखता कि हम जो हुआ है उसके साथ. हम क्या करने वाले हैं जब किसी के प्रेम.
का अंत होता है तो सबसे पहले तो मिलती है. शिक्षा. कि क्या हुआ और उस रिफ्लेक्शन में ऑनेस्ट. होना चाहिए. दूसरों पर केवल आरोप लिखकर नहीं चलता।. हमारी ओर से भी तो कुछ गलतियां हुई होंगी।. 100%. एक हाथ से तो ताली नहीं बजती ना साहब। तो. दूसरों के हाथ को गाली देना आसान है।. लेकिन खुद के हाथ पे तो जिम्मेदारी लेना. बहुत जरूरी है और वही लोग नहीं करते।. इसलिए जब दूसरे रिश्ते में जाते हैं वही. गलतियां दोबारा दोहराते हैं। वही. टॉक्सिसिटी वापस लेकर जाते हैं।.
एक ही एक ही तरह से इंसान हर रिश्ते में. रहता है।. एक ही तरह से तो रहता है हर सब। दूसरी चीज. को लेकर तो जा रहा है वो।. तो इसीलिए जब प्रेम का अंत होवे तो थोड़ा. शांति से बैठकर थोड़ा पहले रिफ्लेक्ट होना. चाहिए कि इसमें से मैंने क्या सीखा कि. मेरी टॉक्सिसिटी क्या है? मैंने कितनी. ताली बजाई जो मैं अगर अगली बार जाऊं तो. ताली नहीं बजाऊं मैं वापस दोबारा। मेरी ओर. से कोई गड़बड़ नहीं हुए। दूसरी चीज क्या. यह प्रेम का अंत और यह हार्ट ब्रेक मुझे. किसी और से भी किसी और चीज से जोड़ने के.
लिए भी प्रवृत्त कर रहा है। हो सकता है. मेरा काम हो जिस पे मुझे ज्यादा समर्पण. देना चाहिए। इस दौर में मेरे लिए यह. ज्यादा मायने रखता है। हो सकता है भगवान. वो वाला दरवाजा खोल रहे हैं आपको यह. दरवाजा बंद करके ताकि आप इस दरवाजे से ऊपर. चले जाओ अंदर [हंसी]. कुछ कुछ. जख्मों को खुदा जा रहा है। [हंसी]. सी बट व्हेन यू लुक बैक यू रियलाइज दिसली. ईश्वर ने इसीलिए किया था ये दरवाजा खोलना. था आपके लिए. ईश्वर ने किया हो ना किया हो हमको तो उस.
दृष्टि से देखना होगा. हां. कि वो अगर वो बंद हो गया इसका मतलब कोई और. दरवाजा खुल रहा है वो रिश्ते का खुलना है. जरूरी नहीं रिश्ते का है तो उसको निभाएगा. बट कई बार रास्ता एक कहीं से होकर ही. गुजरता है. पर हो से होकर गुजरता है तो इसलिए ऐसी. परिस्थिति में अपने ग्रोथ के लिए क्या है. यह देखना और तीसरी चीज बहुत जरूरी चीज. तीसरी और चौथी दो और बोलता हूं। एक चीज. केवल कड़वाहट. लेकर बैठने से नहीं चलता साहब। किसी के.
प्रे किसी के साथ का अंत हुआ उसकी कड़वाहट. को अगर लेकर बैठेंगे कि वो ऐसी वो वैसी वो. वैसा वो वैसा तो हम वो तो भाई मुंह ऑन. करके. गुलछर्रे उड़ा रहे हैं वो। और हम अपने आप. को पनिश कर रहे हैं यहां बैठकर।. और इस दुनिया में बहुत सारे लोग ऐसे हैं. दास जी जो जिसके लिए रो रहे हैं उसको पता. तक नहीं होगा।. यही तो बैठ के अकेले मरे जा रहे हैं। ये. तो कह रहे हैं खुद को पर खुद को पनिश कर. रहे हैं आप। तो इसलिए बिटरनेस से ऊपर उठना. बहुत जरूरी है। गलती नीम की नहीं है साहब.
कि वो इतना कड़वा है।. गलती तो उस खुदगर जीभ की है जिसको मीठा. पसंद है।. हैं. [हंसी]. नजर और नजरिए का खेल है।. नजर और नजरिए का खेल है। हम ना बचपन में. एक स्कूल में एक हमारे पास टंग ट्विस्टर. था। इसमें भी लिखा हुआ है ये। इसमें बहुत. सारी चीजें आज मैं सुना रहा हूं। बस किताब. का कॉन्टेक्स्ट नहीं दे रखा। मतलब मुद्दे. जो है बता रहा हूं ये। टंग ट्विस्टर था।. बहुत बढ़िया था।. मैंने अभी किताब की पिछली किताबों का एक.
छोटा सेक्शन रखा है।. अच्छा अच्छा अच्छा कोई नहीं। तो ये ये. टंगट्विस्टर आप ट्राई कीजिए हमारे मजा आ. जाएगा। पहले फास्ट बोलता हूं। फिर धीमे से. बताता हूं। फ़ास्ट मैंने बचपन में बहुत. प्रैक्टिस प्रैक्टिस की थी। बेटी बॉट सम. बटर बट द बटर वाज़ टू बिटर। सो बेटी बॉट अ. बिट ऑफ़ बिटर बेटर बटर टू मेक द बिट ऑफ़. बिटर बटर बेटर। हां। बेटी बॉट सम बटर बट द. बटर वाज़ टू बिटर। सो बेटी बॉट अ बिट ऑफ़. बेटर बटर टू मेक द बिट ऑफ़ बिटर बटर बेटर।. बोलने की कोशिश करेंगे? मेरे को दूसरा वाला [हंसी] है। वो मेरे को. नहीं आ पाएगा।. समझ-सम के समझ के समझो समझ समझना। एक समझो.
समझ समझ के जो ना समझे मेरी समझ में ना. समझे। [हंसी]. पके पेड़ पर पका पका।. [हंसी]. समझ-समझ के समझ को समझो। समझ समझना एक समझ. है। समझ समझ के जो ना समझे मेरी समझ में. ना समझ है।. हां बिल्कुल। अब ये तो मैं दोहरा नहीं. पाऊंगा और आप मेरे वाला दोहरा नहीं पाएंगे. क्योंकि हमने बचपन में अपनेप वालों की. प्रैक्टिस की। [हंसी]. तो ये वाला जो बेटी बॉट सम बेटर वाला है. ना बहुत बढ़िया है। बेटी बोट सम बटर मक्खन. ले आई. बट द बटर वास टू बिटर। सो बेटी बोट अ बिट.
ऑफ बेटर बटर टू मेक द बिट ऑफ़ बिटर बटर. बेटर। तो कड़वे मक्खन को अच्छा बनाने के. लिए अच्छा मक्खन ले आई। कड़वाहत तो भाई. साहब बहुत रहेगी और रिश्तों में तो बहुत. हो जाती है। इसलिए कड़वे रहने से नहीं. चलेगा। हम. वो वाइब्रेशन और वो एनर्जी ना अट्रैक्ट. करेगी और कड़वाहट को और चौथी बात कोई अगर. आपको देख आपसे रिश्ता तोड़ के जाए ना तो.
आपकी कीमत और वर्थ उससे इतनी सी भी घटती. नहीं है।. सही बात है।. लोग ना अपने आप पर डाउट करने लगते हैं।. सेल्फ डाउट होने लगता है कि शायद मैं ही. मेरी औकात नहीं है यार। मैं ही ऐसा नहीं. हूं। चार बार कोई लड़की मेरे दिल तोड़ के. गई यार। लड़की सोचती है चार बार कोई मेरा. लड़का मेरे पास दिल तोड़ कर गया। चार. रिश्तों में ऐसा हुआ है। मतलब मेरे में. कोई कमी होगी। हां गलतियां हो जैसे हमने. ताली वाली बात की। आपकी वर्थ आपकी कीमत. कम नहीं होती। इतनी सी भी कम नहीं होती।. ये तीन चार चीजें ना प्रेम के अंत होने के. बाद याद रखनी चाहिए।.
और टूटने के बाद आई थिंक अपने को एनालाइज. भी करना चाहिए।. हां बिल्कुल।. लोग करते नहीं है। फिर वही मुंह उठा के. अगली जगह हो जाते हैं।. वही वही वही. जहां से पॉज किया था। [हंसी]. बिना रिफ्लेक्शन के, बिना अपने ऊपर काम. किए और फिर वही टॉक्सिक पैटर्न चलते रहते. हैं बार-बार।. मुझसे इम्तियाज अली ने कहा था कुछ लोग हर. रिश्ते में एक जैसे होते हैं। यही होते. हैं। एक अब लाइफ को क्वेश्चन है।. ओवरथिंकिंग जो होती है क्या ये कमजोर. लोगों की निशानी है? या ये भीतर का डर है. या ज्यादा समझदार आदमी जो है वो ओवरथिंक.
करता है या वो आदमी जिसने लाइफ ज्यादा. एक्सपीरियंस कर ली कि हमने सारे कांड किए. तो हर चीज में ओवरथिंकर सामने वाला भी ऐसा. करता होगा।. [हंसी]. इस बार थोड़ा बताइए ना ओवरथिंकि. जी जी जी अ देखिए ओवरथिंकिंग जो है ना ये. माइंड का मैकेनिज्म है सबका होता है. ओवरथिं. कमजोर लोगों का ऐसा नहीं. कमजोर नहीं है मन का स्वभाव है सोचना. कुछ लोग बहुत ज्यादा सोचते हैं।. हां तो तो क्योंकि वो उसको मन को थोड़ा. काबू में नहीं कर पा रहे इसलिए. गांव में जमीन लेने गए उससे पहले सोचिए.
हां लड़ाई हो गई तो पीढ़ी के लिए. हां तो वो तो सोचते ही रहते हैं। जैसे आप. किसके यह देखिएगा किष्किंदा कांड रामायण. में किष्किंदा कांड में ना यह हनुमान जी. राम जी को सुग्रीव के पास ले आए और जब. सुग्रीव के पास ले आए तो राम जी ने पूछा. सुग्रीव जी को आपने सीता को देखा क्या? देखा ना कोई ले जा रहा था ऊपर से तो फिर. बोले तो और सुग्रीव जी ने कहा अरे हमारे. पास तो इसका सबूत भी है और सीता मैया का. वो क्या कहते हैं उसको पायल व्हाट इज इट. कॉल्ड नपुर नपुर दिखा है और जब वो देखा तो.
लक्ष्मण जी ने पूछा तो भैया किया क्यों. नहीं कुछ. लोग ना सोचते सोचते सोचते सोचते रह जाते. कुछ नहीं है ओवरथिंकर्स. और इसी इसी [हंसी] के सिलसिले में आप. जटायु को देखिए देखा ही नहीं सीता को टूट. पड़े रावण पर सीता को बचाने के लिए। ये. किष्किंदा कांड है।. फिर आपका है लंका कांड जिसमें सोचना है. नहीं बस करना है।. मार दो बस का बाद में क्या होगा देखा. जाएगा। किष्किंदा कांड इज़ थॉट विदाउट.
एक्शन। लंका इज़ एक्शन विदाउट थॉट। सोचना. नहीं है। बस करते रहो। और सुंदरकांड है।. सुंदरकांड में सुंदरकांड को सुंदरकांड. क्यों कहा जा रहा है? उसमें सुंदर कौन है? हैं? राम और सीता का उल्लेख तो इतना सा. आता है सुंदरकांड में। सबसे चर्चित कांड. लेकिन. सबसे चर्चित कांड है हनुमान जी को. सुंदरकांड कहा हनुमान जी के शारीरिक. सुंदरता तो आप मत बताइए जी हमको लगता है. कि हम उनके आरा हमारे आराध्य है वो लेकिन. ऑब्जेक्टिवली देखो तो उनको सुंदर कौन. कहेगा सुंदरकांड में हनुमान जी को सुंदर.
क्यों कहा जा रहा है यहां पर कई कारणों से. एक तो उनका चरित्र इंसान शरीर से सुंदर. नहीं होता है उनके चरित्र से उनके व्यवहार. से उनके भक्ति से उनके समर्पण से सुंदर. होता है लेकिन एक और कारण उसको सुंदरकांड. कहा जा रहा है क्योंकि यहां सोच सोचना और. करना इसका सुंदर समन्वय है। जबकि किष्कंडा. कांड केवल ओवरथिंकिंग है और लंका कांड. केवल ओवर एक्टिंग है। करते रहना सुंदरकांड. है सोचने और करने का समन्वय। बैलेंस।.
हनुमान जी सोचते हैं मैं छोटा बन के जाता. हूं लंकिता देवी के सामने। अगर बड़ा बन के. जाओगे तो डर जाएगी वानर हूं देख के। मैं. संस्कृत भाषा में नहीं बोलूंगा यहां। मुझे. यहां अवधि में बोलना चाहिए क्योंकि अवधि. में बोलेंगे तभी तो अपनापन समझेंगे कि. वहीं से आया है। यह सब सोचते हैं और सोचते. नहीं रहते। कूदते हैं और करते हैं। तो ये. जो समन्वय है ना ये सुंदरकांड है। तो. ओवरथिंकिंग जो है ये किष्किंदा कांड में. पड़ता है। सोचते रहते हैं। सोचते रहते. हैं। सोचते इसको प्रपोज करूंगा। इसको. प्रपोज करूंगा। अरे दूसरे की हो गई भाई. वो। कब करेगा प्रपोज? शादी हो गई उसकी। एक.
तरफ़ा रहेगा तेरा इश्क। एक तरफ एक तरफ़ा. रहेगा। इश्क सच्चा वही जिसको मिलती नहीं. मंजिलें।. [हंसी]. बस गाते रहे फिर गाना दुपासा आए दूरियां. फिर भी कम नहीं हुई। [हंसी]. तो ये जो है सोचते रहेंगे करेंगे नहीं।. अरे वो पडकास्ट शुरू करना है। ये कुछ करना. है हमको। ये प्रॉपर्टी खरीदनी है। ये काम. करना है। ये शुरू करना है। सोचते रहेंगे।. सोचते रहेंगे।.
जिसको छोड़ना होता तो हम ऐसे छोड़ देता आज. तक।. हां।. जिसको छोड़ना होता तो हमारे से आज तक नहीं. देता। [हंसी]. शुभंकर जी आप बहुत कुछ ला रहे हैं. पर्सनली।. सो ओवरथिंकिंग के लिए एक सिंपल चीज मैं. सोचता हूं, बोलता हूं, खुद भी करता हूं. क्योंकि हमारे भी तो विचार कामकाज के तो. 50ों विचार आपके मन में आते रहेंगे। कल का. पॉडकास्ट करना है तो हम तो 1:30 बजे के. जगे हुए हैं आज सवेरे। सो गए थे करीब. 10:30, 11:00, 1:30 बजे के जगह। कोई. तैयारी की बात तो है नहीं यहां क्योंकि ये. तो कन्वर्सेशनल है।.
तो ओवरथिंकिंग के लिए तीन चीजें बहुत. ज्यादा सोचने की जरूरत है। पहली कि मेरे. कंट्रोल में क्या है? मेरे हाथ में क्या है? ये परिस्थिति है।. ये व्यक्ति है, इंसान है। मेरे हाथ में. क्या है इस परिस्थितियां या इंसान के बारे. में? दूसरी, मेरे हाथ में क्या नहीं है? व्हाट इज नॉट इन माय कंट्रोल? और तीसरी इन. दोनों के बीच की फिलहाल मेरे कंट्रोल में. नहीं लेकिन कल को हो सकती है ये बात.
कंट्रोल में। ये तीन चीजें अगर हम देखने. लगेंगे और उसको कैटेगराइज करने लगे जो. कंट्रोल में नहीं है उसको बाजू में रख. देते हैं। जो सेमाई कंट्रोल में है उसप. थोड़ा सा मेहनत जो कंट्रोल में है ना उस. पर काम करते हैं। किष्किंदा कांड में नहीं. रहते हैं। लंका कांड में नहीं रहते हैं।. सुंदरकांड में आते हैं। सोचते नहीं. रहेंगे। करते हैं कुछ इसका। जटायु ने. किया। हनुमान ने किया। सुग्रीव सोचता रहा. और रावण करता रहा। दोनों उल्लू थे। राइट? सुग्रीव को तो उल्लू नहीं कहा जा सकता एक.
हिसाब से। उन्होंने तो राम की सेवा ही की।. लेकिन फिर भी सोचता रहा क्या कुछ नहीं।. इसीलिए जो अपने हाथ में है जो एक्स जो कह. रहे थे हम एक्स वेरिएबल उस पर जोर देना. बहुत ज्यादा जरूरी है। और मैं एक बात जरूर. कहूंगा इसमें। ये केवल मन में मत रखिएगा. इस बात इन बातों को सोच कर। क्योंकि मन. में रखेंगे ना तो मन भाई पागल है यह मन।. कहां-कहां घूमता रहेगा। पता नहीं किस दिशा. से कहां ले जाएगा आपको लिखना शुरू करना. चाहिए मेरे हाथ में क्या है फिलहाल मेरे. हाथ में क्या नहीं है और हमेशा के लिए.
मेरे हाथ में क्या नहीं है एक बार वो. दिखने लगे ना सामने तब एक्शन प्लान बनता. है माइंड में रखेंगे ना केवल तो कहां चला. जाएगा पता नहीं लगेगा इतने तो विचार आ रहे. हैं इतने सारे थॉट्स आ रहे हैं तो इसलिए. ओवरथिंकिंग में मैं ये जरूर कहूंगा कि. थोड़ा जर्नलिंग करना शुरू करना चाहिए ये. लिखना शुरू करना चाहिए व्हाट इज इन माय. कंट्रोल व्हाट इज नॉट इन माय कंट्रोल एंड. व्हाट इज नॉट इन माय कंट्रोल एट द मोमेंट. और फिर उसके हिसाब से प्रायोरिटी देनी. चाहिए। मन को शांत कैसे रखें? लिखने से एक.
बात लिखने से हम हमेशा कहते हैं ये अगर. फोन का कितना वजन होगा शुभंकर जी? 200 250. ग्राम होगा। अगर यह हम 5 मिनट के लिए. पकड़ेंगे तो हमारी कलाई दर्द नहीं होगी।. 15 मिनट के लिए पकड़ेंगे तो थोड़ा सा 1. घंटे 2 घंटे के लिए बिना उतारे रखेंगे तो. कलाई दर्द। वजन की बात नहीं है। कब तक. कैरी कर रहे उसकी बात है ये। कितने समय तक. लेकर घूम रहे हैं। आप सोचिए ना हम अंदर. कितना लेकर घूम रहे हैं साहब। तो मन को. शांत करने का एक मार्ग है। दिल खोल के.
किसी के पास बोलना लेकिन आजकल सबके पास तो. वैसे विश्वसनीय लोग मिलते नहीं है।. हम. यूज़ कर लेते हैं लोग इस्तेमाल करते हैं।. इसलिए लिखना जर्नलिंग गालियां आ रही है ना. बाकी है। हमने नहीं दिया। आपको तो कोई मना. नहीं कर रहा।. हमने नहीं दी। गालियां सेंसर नहीं करना।. एडिट नहीं करना। से आपको ऑड पॉडकास्ट में. ऑथेंटिक रॉ चाहिए तो आप कहेंगे साहब ये. वाला हमको एडिशन नहीं जमेगा। आप कहेंगे. निकालो ये नहीं चलेगा। अपने थॉट्स को बिना. एडिटिंग किए लिखिए। वो सारी बात बाहर. निकालिए। नेगेटिविटी को लेकर घूमेंगे ना.
साहब बहुत दिक्कत है। आपको आप जानते हैं. अगर हम पानी पिएंगे। इतना ज्यादा पानी पी. रहे हैं। शरीर ने व्यवस्था की इस पानी को. बाहर निकालने की। भोजन खाएंगे।. नहीं निकलेगा तो फिर समस्या।. भोजन हां समस्या होगी। भोजन खाएं। भोजन के. लिए शरीर ने व्यवस्था की है भोजन को. निकालने की बाहर नहीं निकलेगा तो दिक्कत. होगी लेकिन सृष्टिकर्ता ने मन के लिए ऐसी. व्यवस्था नहीं की कि अपने आप निकलेगा ये. आपको निकालना पड़ेगा टॉक राइट टॉक राइट. ओपन और अगर लिखना है अरे जो ईश्वर में.
मानते हो जाकर प्रार्थना करो वो आपको जज. नहीं करते एक ही तो इंसान है जो आपको जज. नहीं करेगा आपकी कितनी ही कमजोरी है आप. कितने कितने ही बड़ी गफला करके आए. वो जज नहीं करेगा। मैं रोज गलती करता हूं।. वो रोज बख्श देता है। मैं रोज गलती करता. हूं। वो रोज बख्श देता है। मैं आदत से. मजबूर हूं। पर वो रहमत से मशहूर है। है. ना? तो इसलिए अगर लिख नहीं पाओ, बोल नहीं. पाओ, प्रार्थना करो।. नाइस।. हाउ कैन हैव इट ऑल? ये आपकी नई किताब है।.
इससे पहले भी कई किताबें आई हैं। इस किताब. में अलग क्या है? और ये किताब क्यों लिखी गई? क्या इसमें. है? जी जी।. पहली वाली थी लाइफ्स अमेजिंग सीक्रेट्स. जिसमें हमने लिखा था कि हमारे दोस्त के. साथ एक कार वाली जर्नी पूरी थी. जिसमें कार की चार व्हील्स थी एक पर्सनल. लाइफ एक रिश्ते है एक आपके प्रोफेशन चार. पहियों के तौर से जीवन को समझाया था दूसरी. थी एनर्जी योर माइंड जो पूरी रूप से मन पर. थी माइंड को जैसे हम अभी बातें कर रहे हैं. इमोशंस नेगेटिविटी को डील करना अभी यू कैन.
हैव इट ऑल जो है ना हम सबके मन में एक. सवाल है ये कि क्या मुझे जिंदगी में सब. कुछ मिल सकता है क्या मेरी माशूका मेरी हो. सकती है।. क्या वो जो ग्रोथ मैं चाहता हूं सोशल. मीडिया पर वो मेरा हो सकता है? क्या मैं. अपने सपनों को पूरे करते-करते अपनों को भी. साथ में रख सकता हूं? क्या मैं अपने आप से. एक सच्चा जीवन जी सकता हूं? क्या मैं सच. में ये सब करते-करते खुश रह सकता हूं? क्या मैं सारी प्रॉब्लम्स के बीच में मुझे. सच में शांत हो सकता है कि केवल ये साधुओं.
का काम है? मंक्स का काम है शांति। क्या. मैं सच में क्या मैं सच में अपने रिश्तों. में मिठास ला सकता हूं? हम सबकी इच्छाएं. ऐसे शुभमकर जी कि हम सब पाना चाहते हैं।. और मैं आपके सारे दर्शकों से ये पूछना. चाहता हूं हिंदी अनुवाद आने वाला है। अगर. आपको कुछ शीर्षक याद आए तो जरूर कमेंट में. बता देना। टाइटल क्या हो? यू कैन हैव इट. ऑल तो अंग्रेजी है। आप सब पा सकते हैं। यह. नहीं होना जरूरी नहीं है वह। तो अगर आपको. कुछ माइंड में आए तो जरूर बता देना हमको।.
सोचेंगे इसके बारे में। तो क्या हम सब पा. सकते हैं या नहीं? ये सवाल मेरे जेहन में. बहुत समय से और. शेर याद आ गया हमको।. हां जी बोलिए ना।. इंसान. आपने आज एक भी नहीं शेर बोला अभी. इंसान की ख्वाहिश की कोई इंतहा नहीं होती।. दो गज जमीन भी चाहिए दो गज कफन के बाद।. अरे क्या बात है भाई।. मरने के बाद भी इंसान को चाहिए होता है।. क्या बात है। क्या बात है। और हमको भी एक. याद आ गया। [हंसी]. अभी हम तो भाई यही करने वाले लोग बैठे. हैं। इंसान ख्वाहिशों से बंधा एक परिंदा. है।.
इंसान ख्वाहिशों से बंधा एक परिंदा है।. ख्वाहिशों से ही घायल है लेकिन ख्वाहिशों. पर ही जिंदा है। [हंसी]. तो सबकी ख्वाहिशें हैं ये। तो फिर तभी. आपने सोचा कि इसको इसका जवाब दिया जाए।. लेकिन जवाब कैसे दिया जाए? कहानियों के. माध्यम से जो भी बताया जाता है वो बात. बड़ी सरलता से।. देर तक याद रहता है वो। बहुत देर तक याद. रहता है। स्टोरी टेलिंग आज प्रोफेशन हो. गया है। जबकि हमारे वेद पुराण सारे ग्रंथ. स्टोरी टेलिंग में ही माहिर थे। स्टोरी के. माध्यम से ही हमको जीवन का सिद्धांत समझा. रहे थे। तब फिर हमने सोचा कि क्या कहानी.
लिखी जाए। तो इस किताब की सारी कहानियां. सब सच्ची कहानियां है। ऑल रियल स्टोरीज. लेकिन सब अलग-अलग घटी हुई है। उसको सबको. एक जोड़कर बना दिया है।. चलिए इस किताब को तो हम पढ़ लेंगे। पिछली. किताब से मैंने एक-एक सवाल रखा है। पूछ. लेता हूं मैं। जैसे आपकी थी लाइफ अमेजिंग. सीक्रेट्स।. जी। तो बैलेंस जो है वो अचीबल डील है या. एक इल्लुजन है जिसके पीछे हम भागते रहते. हैं।. हां जी।. क्योंकि बैलेंस कई लोग ऐसे हैं जो बैलेंस. खोजने के लिए फ्यूचर सिक्योर करने के लिए. अपना वर्तमान खराब कर देते हैं।.
जी. और बड़ी शिकायतें रहती है।. जी. मेरे हिसाब से बैलेंस एक सबसे बड़ा मिथ. है।. कल्पना है बैलेंस एक बस।. नहीं हो सकता ये।. ऐसा कभी नहीं होता। बैलेंस्ड लाइफ कभी. नहीं होता।. आधे लोग बैलेंस लाइफ पीछे भागते रहते हैं।. ये सब गड़बड़ है साहब। कौन सिखा रहा है. दुनिया को बैलेंस मिलेगा? गलत सिखा रहे. हैं कि लाइफ बैलेंस्ड हो सकती है। हम आपको. बताते हैं हमारे लिए बैलेंस क्या है? ये. किताब लिख रहे थे। यू कैन हैव इट ऑल। एक. महीने में किताब पूरी की। 16 घंटे से 18. घंटा इस पर रोज का काम कर रहे थे। लैपटॉप. पर बैठकर इतना सारा स्क्रीन टाइम हो रहा.
है। 18 घंटे का स्क्रीन टाइम चल रहा है।. 16 घंटे का रोज का स्क्रीन टाइम चल रहा. है। पूरे दिन में लिखने के बाद. इच्छा एक ही होती थी कि अभी कुछ अच्छा. खाया जाए। तो खा रहे थे। हमारे बहुत सारे. दोस्त हैं। अलग-अलग चीजें जो मंगा रहे थे. सब आ रहा था। यहां आ गया है सब। ये नहीं. थे। ये ऐसे नहीं है हम। ये सब यहां आ गया. है। अब यहां आपको पता है इसका मुझे इतने. भी गिल्ट नहीं है इसका। बैठूं यहां दिखाऊं. आपको। बढ़ गया। मैं बता रहा हूं। मैं खुद.
बता रहा हूं कि ये बड़ा वजन बढ़ चुका है।. 95% लोग ना गिल्ट में जीते हैं।. कि मेरा वजन बढ़ गया। मैं तो ऐसे ही नहीं।. मेरा तो रिश्ता टूट गया। मेरी तो ग्रोथ ही. नहीं हो रही। भाई साहब आपको भगवान ने जीवन. गिल्ट में जीने के लिए दिया है।. देखिए कोई भी आप निर्णय लीजिए। कोई भी काम. कीजिए उसके साथ एक कोलटरल डैमेज आती है।. ट्रू. ये लिखने गया तो ये बड़ा है।. ट्रू. किताब खत्म हुई आप एक महीने के बाद देखिए. कैसा होगा हमारा शरीर।.
डेढ़ महीने के बाद देखिए क्या ये होगा कि. नहीं। आएंगे फिर आपको बताने के लिए।. अच्छी थी कि आप कुछ भी करने आते हो।. कोलटरल डैमेज होना ही है साहब। होना ही. है। यह तो होना ही है कि एक कुछ करने जाओ. तो दूसरा तो निकलना ही है।. कुछ तो. हां। तो बैलेंस हमारे लिए क्या है? यह. जानना कि आज की प्रायोरिटी क्या है? बैलेंस हमारे लिए क्या है? ये जानना कि. अगर इस प्रायोरिटी पे ध्यान देके तो एक. हाथ प्रायोरिटी कॉम्प्रोमाइज होगी। बैलेंस. हमारे लिए ये जानना कि वो जो कॉम्प्रोमाइज. हो के कोलटरल डैमेज होना है उसके गिल्ट.
में नहीं जीना।. टु आल द पीपल हु आर क्वेश्चनिंग शादी. क्यों नहीं कर रहे हो? [हंसी]. गिल्ट में नहीं जीना है ना और अगर जैसे ये. फज़ हो गया अगर इस फेज के बाद भी रोज शाम. को मैं वैसे ही खाऊं ना तब गड़बड़ है. तब गड़बड़ है तब के समय आपने किया तो तो. जरूरत थी तब की आपके कामकाज में आप करेंगे. थोड़ा आपको 10 बार ट्रेवल करेंगे दिन में. तो सेहत तो खराब होनी है हम कौन से भगवान. थोड़ी ना है कि हम सब परफेक्टली जीवन जीना. जीने.
मक बनने के बाद में सर एक क्योंकि आपकी. बुक मोंक पे भी आई थी द वे ऑफ़ मक. वो सेम वाली बुक बस टाइटल. उसमें कुछ अकेलापन फील होता मोंग बनने के. बाद भी या मॉक बनने पर ज्यादा फ्रीडम होती. है डिसिप्लिन होता है और यह अकेलेपन का. रहना क्या मॉक को भी अकेलापन होता है? बिल्कुल होता है लेकिन अकेलापन चुनते हैं. साहब। सॉलीट्यूड और लोनलीनेस में बहुत. अंतर है। लोनलीनेस होती है। सॉलिट्यूड. चुनी जाती है। तो हमने तो चुना है इसको।. खुद होके चुना है। अब जब इतने लोगों के. साथ चार दिन से यहां दिल्ली में हैं। इतने. लोगों के साथ मुलाकातें हुई है। इवेंट हुए.
हैं।. अब जब जाएंगे ना आज दो दिन अब बस अकेले. रहना है चुनके फोर्सिवली नहीं। और उस. अकेलेपन में उस शांति में जो सुकून है, उस. शांति में जो क्रिएटिविटी है, उस शांति. में जो ग्रोथ का बीज बोया हुआ है, यह. लोनलीनेस में नहीं आता है। ये सॉलीट्यूड. में आता है। तो, जैसे मंक सॉलीट्यूड चुनते. हैं। वैसे हम सब भी चुन सकते हैं।. अकेलापन कई बार ब्लेसिंग होता है ना, होना.
चाहिए इंसान को।. होना चाहिए। होना चाहिए। अपनी स्पेस होनी. चाहिए।. लेकिन जब वो फोर्स हो जाता है ना तब तकलीफ. है साहब। बूढ़े बूढ़े मां-बाप इतने. बूढ़े-बूढ़े इंसान है इस दुनिया में।. बेचारों के पास अपने बच्चे नहीं है। आप. जानते हैं क्या होता है वो।. वो तो खा लेता है। कमजोर वो तोड़ दे।. खा लेता है। वो अकेलापन नहीं बात कर रहे. हैं हम।. हां। हम क्रिएटिविटी के तौर पर बात कर रहे. हैं। तौर पर कर रहे हैं।. अगर आप अकेले होते तो नए विचारों शुरुआत. होती।. बिलकुल बिल्कुल मैं तो इस प्लेटफार्म से.
हम कहना चाह रहे हैं भाई बुजुर्गों के पास. थोड़ा सा सब नौजवानों से कहना चाह रहे हैं. टहनियों के पत्ते टहनियों के पीले पत्ते. मत तोड़ो तुम। चंद रोज में खुद ही खुद खुद. ब खुद ही झड़ जाएंगे। कभी अपने बुजुर्गों. के साथ वक्त बिताया करो तुम। एक दिन केवल. तस्वीर में ही रह जाएंगे। खर्च कर लेने दो. उनको अपने हिसाब से।. अगर वक्त गुजारोगे तो उनके आशीर्वाद से. तुम्हारे भी दुख दूर हो जाएंगे।. दुख दूर हो जाएंगे। खर्च कर लेने दो उनको. अपने हिसाब से। क्योंकि एक दिन सब कुछ.
तुम्हारे लिए छोड़कर चले जाएंगे। बार-बार. वही बात दोहराने पर मत उनको रोको टोको. तुम। एक दिन हमेशा के लिए खामोश हो. जाएंगे। कभी खिला दिया करो उनकी पसंद का. कुछ। बता रहे हैं साहब। बुलाने पर भी. श्राद्ध का खाना नहीं खाने आएंगे।. बाप रे।. टू डीप है ना सच है ये अकेलेपन के लिए. हमको कुछ करना है शुभंकर जी हम सबको मिलकर. कुछ करना है इनके अकेलेपन को दूर करने के.
लिए बाकी लोगों का अकेलेपन तो हो जाएगा. हैंडल ये क्या करेंगे इतने सारे बुजुर्ग. लोग बैठे हैं वहां जिनके ना कोई है कोई. नहीं है बस अकेले मर रहे हैं मर इसलिए. नहीं रहे कि शरीर साथ नहीं दे रहा इसलिए. रहे नहीं है कोई हम सफर नहीं रहा और कहीं. तो अकेले हैं बेवा है कहीं क्या करें तो. इसीलिए आप भी अपने कभी कोई जब भी. प्लेटफार्म मिले इस बात को जरूर बोलते. रहिएगा ताकि कहीं ना कहीं किसी को लगे और.
एक रेवोल्यूशन शुरू हो जाए हम भी इसमें. बहुत इच्छा है काम करने का भविष्य में. ताकि लोग जुड़ जाए और कुछ एक अच्छी चीज इस. क्षेत्र में करनी है पांच किताबें या तीन. किताबें सर जो आप रेकमेंड करना चाहे लोगों. को ये पढ़नी चाहिए हर व्यक्ति को इससे आप. बेहतर हो जाएंगे. हां जी. गीता तो पढ़नी चाहिए पक्की। क्यों पढ़नी. चाहिए गीता? क्योंकि गीता केवल धर्म का ग्रंथ नहीं है।. जीवन का जीवन का सार है। हमने उसको. धार्मिक बना के रख दिया। धर्म तो अच्छा.
है। उसमें से धर्म सीख ही लेंगे। लेकिन. हमें जीवन का सार है। जीवन को किस तरह से. जीना चाहिए? सांप सीढ़ी का गेम है साहब।. कभी सीढ़ी आ गई ऊपर चढ़ गए। एक सांप काट. लिया ना नीचे आ जाओगे। गीता सिखाएगी. निष्काम कर्म योग कैसे करना है? कैसे फिर. भी हौसला नहीं हारना है। कैसे फिर भी. कार्य करते रहना है। अर्जुन का बेटा. अभिमन्यु मर गया। सांप काटा। सांप सीढ़ी. के खेल में नीचे आया। जब युद्ध लड़ रहे थे. तो सीढ़ी से ऊपर जा रहे थे कई बार। सांप. काटे तो नीचे आ गए। अभिमन्यु मर गया।.
भीष्म भीम का घटोत्कच मर गया। द्रोपदी के. पांच बेटे मर गए। भाई साहब जिंदगी में सब. फ्री ऑफ कॉस्ट नहीं आता। देयर आर नो फ्री. लंचेस इन दिस वर्ल्ड। और इसीलिए यह किताब. मैं तो पांच नहीं एक किताब बोलूं एक किताब. पांच का सार है साहब लेकिन हां गीता. मुश्किल किताब है पढ़ने के लिए फिलॉसफी है. उसको जीवन के हिसाब से पढ़ने के लिए. मार्गदर्शन लगता है थोड़ा लेकिन अगर उस. मार्गदर्शन के हिसाब से पढ़ने लगेंगे ना. कसम से यहां हाथ रख के कहता हूं जिंदगी.
बदल जाएगी साहब जिंदगी के प्रति का. दृष्टिकोण नजरिया बदल जाएगा और फिर जो भी. आए उसका सामना ना करने की जो शक्ति है, अपने पोटेंशियल के हिसाब से ग्रो करने की. जो शक्ति है, वह है। इसमें पैशन भी है, कंपैशन भी है। इसमें अटैचमेंट भी है, डिटचमेंट भी है। इसमें भक्ति भी है, ज्ञान. भी है। इसमें जीना भी है, मरना भी है।. जीवन को अगर समराइज करना है तो कौन सी.
किताब इससे बेहतर होगी? भगवत गीता।. एक आखिरी सवाल सर। उसके बाद मैं बुक को. लेकर कुछ कहना चाहूंगा। अ आपने शुरुआत में. रेबेलियन से अपने आप शुरुआत की थी।. जी जी. कि सवालों के उत्तर नहीं उत्तर से सवाल. पूछने चाहिए।. बिल्कुल. ओशो ऐसा करते थे।. जी. जी. आप ओशो कैसे देखते हैं? क्योंकि नई पीढ़ी. बड़ी इंस्पायर रहती है।. हालांकि ओशो की मुझे सबसे अच्छी बात लगती. है कि वो एक ही बात कहते हैं। फिर उसको. काट देते हैं। फिर उसी बात से एक नई बात. कहते हैं।. जी. और उनके एक परंपरा में एक व्यक्ति मुझे. मिले थे। उनसे मैंने पूछा तो उन्होंने.
बड़ी खूबसूरत बात कही। कहा कि यही तो. अपग्रेड होना होता है।. हम बिल्कुल बिल्कुल।. आप उन्हें कैसे देखते हैं? बिलकुल।. व्यक्तिगत रूप से मैंने उनको बहुत सुना. नहीं है। थोड़ा कई खाद बिखदात कभी कुछ. देखा हुआ है। तो मैं उनको पर्सनली उनकी. जर्नी को बहुत जानता नहीं। लेकिन. प्रिंसिपल जो है वो जरूर बता सकता हूं कि. एक शेर पढ़ा था हमने तालीम. तालीम में आपके और हमारे बस इतना ही फर्क. है। आपने उस्तादों से सीखा है और हमने. जिंदगी से सीखा है।.
है ना? और जिंदगी में दोनों की जरूरत होती है।. उस्तादों की भी और जिंदगी की भी, तजुर्बे. की भी। तो हमारे इस देश में कई ऐसे. महानुभाव हुए हैं। महान हस्तियां हुई है।. कईयों ने उस्तादों से सीखा। कईयों ने. तजुर्बे से सीखा। कईयों ने उस्तादों और. तजुर्बे से सीखा। और अपनेपने हिसाब से इस. दुनिया में कुछ छोड़ गए।. हो सकता है उन जो वो कह रहे हैं हम पूरी.
तरह से सहमत नहीं हो। हो सकता है आप मैं. जो कह रहा हूं आप कोई मेरे से पूरी तरह से. सहमत नहीं हो लेकिन बात सहमति की थी ही. नहीं कभी. एका विपरा बहुदा विदती ये हमारे सनातन की. संस्कृति है एक ही सत्य को कई लोग अलग-अलग. दृष्टिकोण से देखते हैं सहमति की बात तो. कभी थी ही नहीं बात क्या थी जहां से जो भी. मिले वो लेते लेते अपने सफर को अपने. समर्पण से चलते रहना कल किसी कोई किसी ने. हमको पूछा कि आप क्या दूसरे किसी प्रांत.
के दूसरे धर्म धर्म के दूसरी भाषाओं के. किताबों से पढ़ते हैं क्या सीख सकते हैं? हमने कहा देखिए जहां अच्छाई हो जहां से जो. अच्छा सीखे वो सब जगह से अच्छाई मिलती है।. हमने नेकी अपने संप्रदाय से जोड़ी है।. सबसे सीखे हम अपने जो अपनी जो जर्नी उसको. और तगड़ा बनाते हैं ना। तो इसीलिए इस देश. की विविधता इस देश की डायवर्सिटी इस देश. का सबकी सबसे बड़ी खूबसूरती है और इस. खूबसूरत के अगर हम तोड़ने लगेंगे ना.
शुभंकर जी. चलिए आपने सीखा चैतन्य महाप्रभु से मैं. चाहता हूं जाते-जाते आप हमें बता दें. चैतन्य महाप्रभु के बारे में कुछ ऐसा जो. नई पीढ़ी को जानना चाहिए आप लोग तो उन्हें. भगवान मानते हैं देश में लोग उन्हें संत. मानते हैं. और पिछले मेरे कई पॉडकास्ट में चैतन्य. महाप्रभु का जिक्र रहा है. जी जी. मैं चाहता हूं थोड़ी उनकी महिमा आप बताते. जाए ताकि हम किसी किसी रोज आप सब बैठ के. चैतन्य महाप्रभु पे. क्या बात [हंसी]. अद्भुत आनंद आएगा. बिल्कुल बिल्कुल. क्योंकि मेरी लालसा बढ़ रही है मेरी लालसा. है आप सर एक किताब पर एक पडकास्ट करने की. इसे मैं पढूं उसके बाद कभी सुकून से बैठे.
कभी सुकून से. चैतन्य महाप्रभु पे कभी करें लेकिन. जाते-आते थोड़ा चैतन्य महाप्रभु की महिमा. बिल्कुल. देखिए चैतन्य महाप्रभु. जो गौडिय वैष्णव संप्रदाय है वो उनको. स्वयं कृष्ण मानते हैं लेकिन कृष्ण राधा. भाव में और ये ये बात ऐसी है ना आप बताइए. बताइएगा कि कमल जो होता है कमल में जो शहद. होता है जो नेक्टर होता है वो कमल जानता. है उसका स्वाद क्या है वो तो भौरा जानता.
है उसका स्वाद क्या है वो कमल को क्या. मालूम उसमें कितनी मिठास है कितनी खुशबू. है तो भौरा आके समझने लगता है तो चैतन्य. महाप्रभु के अनुया अनुयायियों ने ये बात. समझाई है कि कृष्ण जो है वो कमल के कमल के. फूल के समान है उनमें कितनी मधुरता है. उनमें कितनी कितनी करुणा है उनमें कितनी. महानता है वो क्या जाने अरे भाई कमल क्या. जानेगा वो तो भौरा जानेगा ना कितना कितनी. उसमें कितनी मिठास है और कितनी महानता है.
तो भौरा कौन है वो भौरा हमारे गडिया. संप्रदाय के लोग कहते हैं कि वो भौरा है. भक्त वो भक्त जानता है भगवान की करुणा. क्या है वो भक्त जानता है भगवान का प्यार. क्या है वो भगवान कैसे जानेंगे वो तो बस. वो है मीठे हैं ये जो स्वाद कर रहा है. अपने भक्ति से उसको मालूम है कि उसमें. मिठास क्या है? और गौ आचार्य कहते सबसे. बड़ी भक्त कौन हुई? श्री राधा। और इसीलिए. अगर भगवान को खुद समझना हो कि मैं कितना.
मीठा हूं। मैं कितना कितना. महान हूं। तो उसके लिए उनको भगवान को ही. भक्त के भाव में आना पड़ेगा। तभी समझ. पाएंगे कि इनमें क्या है? खुद में क्या. है? और अगर सबसे बड़ी कोई भक्त है तो श्री. राधा है। इसलिए चैतन्य महाप्रभु जो है है. कृष्ण लेकिन आए हैं राधा भाव में यह समझने. के लिए कि उनमें कितनी मधुरता है। इसलिए. कविराज गोस्वामी चैतन्य चरितामृत में कहते. हैं श्री कृष्ण चैतन्य राधा कृष्ण ना ही.
अन्य। जो श्री कृष्ण चैतन्य है राधा और. कृष्ण का मिलकर जो अवतार है वो ये है। तो. ये बस संक्षिप्त में. बहुत सुंदर बहुत सुंदर। बहुत-बहुत आनंद. आया सर और. आपके साथ भी बातचीत करने में बहुत आनंद. आया और आपको तो मैंने पहले ही बता दिया आप. बहुत बढ़िया काम कर रहे हैं।. आशा करेंगे कि आपसे और मुलाकातें होती. रहे। जब भी आप. मन बनाए पॉडकास्ट का किताब लिखने का, किसी. विषय पर बात करने का। इस बार तो जनरलाइज. हमने पॉडकास्ट किया लेकिन अगली बार कोशिश. रहेगी कि कुछ विषयों पर अब चर्चा की जाए. ताकि सार जो है वो जो रस है जैसे आपने कहा.
ना कि कमल को क्या पता।. तो आप में कितना रस है ये आपको क्या पता।. [हंसी]. ज्यादा रस नहीं जी निरस है हम।. ये सुनने वालों का आनंद आएगा। बहुत-बहुत. शुभकामनाएं सर।. आपको भी बहुत-बहुत बधाई और आपके पडकास्ट. के लिए ढेर सारा प्यार, ढेर सारी. शुभकामनाएं और प्रार्थना करते हैं कि. ईश्वर आप पर और आपकी पडकास्ट पर बहुत ऐसी. करुणा बनाए रखे। बस बहुत दिन दुगनी और रात. 100 गुनी तरक्की हो।. श्री राधे।. श्री राधे।.
