
Unplugged ft. Former VP MD. Hamid Ansari | BJP vs Congress | UCC | Afzal Guru | Mukhtar Ansari
डॉक्टर राधाकृष्णन के बाद यू आर द ओनली. वाइस प्रेसिडेंट जिन्होंने दो टर्म किया. है। इट्स नॉट माय फॉल्ट।. सर वाइस प्रेसिडेंट की ताकत क्या होती है? कुछ भी नहीं।. देयर इज़ नो पावर? देखिए व्हाट पार्ट डस द प्रेसिडेंट ऑफ. इंडिया हैव? 10 और 13 के बीच में भगवा आतंकवाद जैसे. शब्दों का जिक्र किया। चाहे पीछे दम साहब. हो या सुशील कुमार शिंदे साहब हो। कुछ दिन. टेररिज्म बढ़ाने का काम देख रहे थे।. देयर इज़ अ रिसेंटली अनकवर्ड फ़िनोमिनन ऑफ़.
सैफरन टेररिज्म।. क्योंकि आज हम कहते हैं टेरिज़्म हैज़ नो. रिलजन। अब ये सही था? जब इतिहास लिखा. जाएगा तो बात साफ हो जाएगी।. सो एज अ वाइस प्रेसिडेंट ऑफ़ इंडिया, क्या. आपने कभी सलाह भी दी कि ऐसे शब्दों का. इस्तेमाल से बचना चाहिए? उन्होंने मुझसे राय नहीं मांगी और मैंने. उनको राय नहीं दी। ये मेरा काम नहीं था।. यही तो गलती लोग करते हैं।. कई बार जैसे आप अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर. आप नहीं देते। जब गुलिस्ता को लहू की. जरूरत पड़ी सबसे पहले हमारी ही गर्दन कटी. मुस्लिम सेंटीमेंट. तो एक बहुसंख्यक समाज के जन्म में भी आया. कि आप उनके भी वाइस प्रेसिडेंट रहे एक.
राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी थ्योरी दी गई. कंडेम कर सकते. एट द अप्रोप्रियट टाइम आई एक्सप्रेस माय. व्यूज अबाउट सोशल मैटर्स. शिंद साहब ने मेरे इंटरव्यू में कहा. पहले तो क्यों आतंकवाद शब्द लगाए मुझे पता. नहीं. लगाना नहीं चाहिए. देखिए वो उनका व्यू था मेरा व्यू नहीं था. अफजल गुरु आपके कार्यकाल में यूपी. गवर्नमेंट में उन्हें फांसी दी गई थी।. जेएनयू में कई बार नारे लग जाते थे कि. नारे तो गलत दिए गए।. 5000 स्टूडेंट्स की कम्युनिटी है तो नारे.
तो लगेंगे। आप उनका जुबान बंद तो नहीं कर. सकते।. आपका नजरिया क्या वो आतंकवादी थे? मुझे क्या मालूम कि हम लोकसभा में घुस के. वहां पे उनको खत्म कर देंगे। जो भी जो भी. मिलता है उनको. कन्हैया इसलिए बच गए क्योंकि उनकी. आइडेंटिटी अलग थी। उमर खालिद या शरजील. इमाम को उनकी आइडेंटिटी की वजह से इतने. लंबे समय तक रखा गया। इन आरोपों में आप दम. मानते हैं? देखिए अगर ये थिंकिंग है तो बहुत गलत है।. कानून कहता है टू बी डन एस अर्ली एस.
पॉसिबल। तो ये क्यों होता है? आप भी जानते. हैं मैं भी जानता हूं।. दिल्ली में अभी एक ब्लास्ट हुआ था। जब. उसकी जड़े निकाली गई तो पता लगा सब. डॉक्टर्स थे। दे वर हाईली पेड। बहुत अच्छी. नौकरी कर रहे को लगा कि एजुकेशन इज नॉट द. ओनली सशन। दिल्ली में एक बम ब्लास्ट नहीं. हुआ है। दिल्ली में बड़ी लंबी हिस्ट्री. है।. ये सब सोसाइटी में जो भाईचारा है उसकी कमी. है।. आज भाईचारा है हमारे देश में? नहीं बहुत कम है और उसकी बहुत जरूरत है।. और ये कब से कम आपको लग रहा है?
ये चल रहा है। ये धीरे-धीरे हो रहा है।. अपने कार्यकाल के अंतिम दिन आपने असुरक्षा. की भावना का जिक्र किया।. देयर इज अ फीलिंग ऑफ़ अनईस। द सेंस ऑफ़. इनसिक्योरिटी इज क्रिपिंग इन। आज हम 2026. में बैठे हैं। क्या आपको लगता है कि यह. असुरक्षा की भावना देश के मुसलमानों में. आज भी है? अच्छा ये सारी बातें आपको इसलिए लोग क्या. जानबूझकर भी करते हैं क्योंकि आप हामिद. अंसारी हैं।. हो सकता है करते हो तो मैंने तो नाम नहीं. बदला है।. आपकी जो परिवार भी है सर वो. क्रांतिकारियों का रहा है। फिर एक परिवार. आपका मुख्तार अंसारी वाला भी रहा है।.
माय फादर गिव मी द ओपोरर्चुनिटी टू डू द. एजुकेशन। माय लक दैट आई सक्सीडेड। आज के. भारतीय मुसलमान की सबसे बड़ी चिंता क्या. होनी चाहिए? आर्थिक पिछड़ापन, मुख्यधारा. की पॉलिटिक्स या पहचान या सुरक्षा? ईडी, सीबीआई, आईटी को लेकर देश की सारी. अपोजिशन पार्टियां कहती हैं कि ये जो. संस्थाएं थी इनका भी अब पॉलिटिकल इस्तेमाल. होता है। क्या यह हमेशा से होता आया है? अब होने लगा है या यह विपक्ष की बात है या. इसमें सच्चाई है? जो आपने कहा पांच से लव वो सब सही है।.
थोड़ा बहुत हमेशा से मगर बढ़ता जा रहा है।. एक बार आपने एम में जिन्ना की तस्वीर को. लेकर कहा था कि हमें पहचान से नहीं हटना. चाहिए। वह भी हमारा हिस्सा थे। क्या सिर्फ. पहचान का हिस्सा होना चाहिए? क्योंकि. विभाजन के लिए जिम्मेदार मानते हैं लोग।. मैं आपको पूरी कहानी सुना दूं।. खिलजी वाला जो बयान था कि वो आक्रांता जो. थे वो बाहर के नहीं थे। वो भी हिंदुस्तानी. थे।. कोई लोधी है, गजनी है, कोई ये है। ये सब. हिंदुस्तानी लुटेरे थे। अरे बाबा. हिंदुस्तान के एक हिस्से के राजा थे तो वो. उनको आप क्या कहेंगे? यूनिफार्म सिविल कोर्ट।. नाम बहुत अच्छा है।.
तो करंट गवर्नमेंट जो है इनकी टॉप. प्रायोरिटी में हमेशा से रहा है। ये. कहने के लिए हमेशा रहा है। किसके लिए. कोर्ट बनाएंगे? यूएन में सर इंडिया को कभी भी परमानेंट. चेयर नहीं थी। कुछ लोग कहते हैं कि हमारे. पास भी ऑप्शन था। हमने चाइना को पुश कर. दिया था।. हमने ये कहा था कि हमारे अपना राइट, चाइना. का अपना राइट।. अटल जी को यूएन भेजा गया था। इस सारी. गवर्नमेंट ने भेजा था। जो ऑपरेशन सिंदूर. के बाद शशि थरूर साहब गए। क्यों वो इसलिए. गए क्योंकि बीजेपी के करीब है इसलिए गए कि. वह बोलते बहुत अच्छा है। जब अटल जी गए थे. तो मैं यूएन में राजपूत था। तो वहां ये. सवाल तो नहीं था कि साहब रंग ये है ये.
ईरान है। आपके रिश्ते हैं शशि जी से? मैं. जानता हूं उन्हें बहुत अच्छी तरह से आज से. नहीं बहुत सालों से। इजरायल पैलेस्तीन. कंट्रोवर्सी का फ्यूचर क्या देख रहे हैं? ये जो हुआ फिलेस्टाइन में वो अत्याचार था।. भारत के जितने भी प्रधानमंत्री को आपने. देखा है, कोई एक जो आपको लगता है जिसने. बहुत ऐतिहासिक काम किया और. जब मैं फॉरेन सर्विस में दाखिल हुआ वो. पंडित जी के आखिरी दिन थे।. सारी वॉइसेस मुस्लिम्स को रिप्रेजेंट करने. की बात करती है। ओवैसी साहब, राहुल जी. इनमें आपको क्या लगता है कौन ज्यादा. ऑनेस्टी?
ये सेक्शनल पार्टीज इज नॉट अ गुड हेल्थी।. भारत को सबसे ज्यादा किस थॉट प्रोसेस. नुकसान पहुंचाया? सावरकर वाली आइडियोलॉजी. ने या जिन्ना वाली? सोबवरन पाकिस्तान. चाहिए उससे कम कुछ भी नहीं।. दैट्स नॉट द इंडियन वे ऑफ़ डूइंग थिंग्स।. अंबेडकर जी, गांधी जी, सरदार जी, सुभाष जी. किसके विचारों का भारत आपको लगता है कि जो. आज हम भारत देख रहे हैं? डॉ. अंबेडकर उन्होंने जो कॉन्स्टिट्यूशन. के लिए काम किया वो विदाउट कंपैरिजन।. तो फिर उनके जीते जी इज्जत क्यों नहीं की.
लोगों ने? उनके जाने के बाद सबने उनको. अपना भगवान बना लिया सारी पार्टीज ने।. बाबा साहब अंबेडकर. बाबा साहेब अंबेडकर. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर बाबा साहब का. अंबेडकर जी का. उनके अपने ख्यालात थे बहुत से ख्यालात. आपके दफ्तर में आकर जो सबसे पहली चीज. जिसने मुझे आकर्षित किया वो थी गौतम. बुद्धा की प्रतिमा. किसी ने मुझे एक तोहफा दिया मुझे अच्छा. लगा. अटल जी ने एक लाइन कही थी ना टायर्ड हूं. ना रिटायर्ड हूं. अपना काम था वो कर लिया.
एक तरफ गाजीपुर की जड़े दूसरी तरफ बंगाल. की नज़ाकत और तीसरी तरफ दिल्ली की सत्ता. का वो शिखर जहां एक साथ पूरे देश की नब्ज़. महसूस होती है। मेरे साथ आज एक ऐसी. शख्सियत हैं जिन्हें दुनिया एक शानदार. डिप्लोमेट के तौर पर जानती है। एक विद्वान. के तौर पर जानती है। बीते कुछ सालों में. हमने उन्हें एक लेखक के तौर पर देखा है।. और वह भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हैं।.
इनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड भी है जिसका. जिक्र हम इस पॉडकास्ट के बीच में करेंगे।. यह वो शख्स हैं जिनसे इस देश में बहुत लोग. सहमत है। कुछ असहमत है। लेकिन इनके बारे. में एक बात कही जाती है कि ये सच को चाशनी. में डुबो कर नहीं पेश करते हैं। बेबाकी से. रख देते हैं। हामिद अंसारी साहब बहुत-बहुत. स्वागत है आपका। कैसे हैं आप सर? ठीक हूं। मैं अच्छा हूं।. यू आर 89. 89. एंड आप काफी फिट है मतलब. काफी फिट हूं अगर 100% होता तो बेहतर होता.
मुझे इस आपके दफ्तर में आकर जो सबसे पहली. चीज जिसने मुझे आकर्षित किया वो थी गौतम. बुद्धा की प्रतिमा मैं इस रूम में आया. मैंने उधर भी देखा गौतम बुद्ध यहां पर. हैं। अब आमतौर पर हामिद अंसारी साहब को. लेकर एक इमेज बना दी गई है। कई सारी बातें. आती है। उसमें मुझे गौतम बुद्ध दिखते हैं।. गौतम बुद्ध यह तस्वीर यहां होना इस कमरे. में होना थोड़ा बताइए ना हमें. कुछ नहीं. किसी ने मुझे एक तोहफा दिया मुझे अच्छा.
लगा. मेरी फैमिली को अच्छा लगाओ. इसमें कोई ग्रेट. पॉलिसी डिसिशन नहीं होता है ये पर्सनल. डिसिजंस होते हैं जो चीज पसंद आई उसको. रखिए जो नहीं पसंद है उसको मत रखिए. बट जैसे मैंने आपसे जिक्र किया कि हामिद. अंसारी साहब साहब को लेकर एक परसेप्शन बना. दिया गया है। पहचान को लेकर।. किसने बनाया? कब बनाया? एक आम धारणा में लोगों ने डाल दिया। उसमें. ये चीज मुझे आश्चर्यचकित की या शायद बहुत. लोग होंगे। क्योंकि वो ये मानते हैं कि.
धार्मिक पहचान के इर्द-गिर्द आपको लगते. हैं। बट ये आपकी साइड का एक दूसरा पहलू. है।. देखिए. 1961 से 1999 तक. जी।. मैं. एक. फॉरेन सर्विस में था। तब तो किसी ने यह. सवाल नहीं पूछे।. उन्होंने देखा मेरी कंपटेंस है नहीं है।. एक काम को कर सकता हूं कि नहीं कर सकता. हूं। बस उसके आगे तो कोई फैक्टर कभी आया.
नहीं।. ब्यूटीफुल। और सर आपकी पहचान जैसे मैंने. कहा तीन हिस्से हैं। एक आप डिप्लोमेट रहे. विद्वान के तौर पर, लेखक के तौर पर, उपराष्ट्रपति रहे। कभी इन अलग-अलग. किरदारों में आपस में कोई द्वंद हुआ? नहीं हुआ। देखिए 40 साल मैंने जो फॉरेन. सर्विस में गुजारे वो 100% फॉरेन सर्विस. थी और कुछ नहीं था।. ओके।. उसके बाद जब मैं सरकार से रिटायर हुआ एट. दी प्रिस्राइब्ड एज।.
फिर किसी ने कहा कि आप जेएनयू में. विजिटिंग प्रोफेसर हो जाइए। हो गया मैं।. उसके बाद किसी ने कहा कि हम आपका नाम वाइस. चांसलर अलीगढ़ यूनिवर्सिटी बनाना चाहते. हैं। मैंने कहा कीजिए मैं नहीं अप्लाई कर. रहा हूं आपका ये फैसला।. उसके बाद फिर मैं वाइस चांसलर होने के बाद. थिंक टैंक में काम करता था।. जामिया मेल्या में कुछ दिन विजिटिंग. प्रोफेसरशिप की। तो ये.
इंकार्नेशंस आते गए विदाउट एनी. कंट्राडिक्शन।. ओके।. बट आपके सबसे करीब कौन सा रोल रहा जिसे. आपने पसंद किया? वो एएमयू वाला, जामिया. वाला जब आप डिप्लोमेट रहे वो उपराष्ट्रपति. के तौर पर या बीते दिनों जब आप किताबें. लिख रहे हैं? देखिए मैंने 40 साल डिप्लोमेसी में गुजारे. हैं।. हम. तो वो तो ऑब्वियसली इट्स पार्ट ऑफ माय. बीइंग।. मुझे कोई शिकायत नहीं। मुझे जहां जाने की.
जरूरत सरकार ने समझी मुझे भेजा।. अच्छी जगह हो सकती है, कठिन जगह हो सकती. है। उसका कोई असर मेरे ऊपर नहीं पड़ता था।. तो हामिद अंसारी जी के अंदर डिप्लोमेट जो. है वो थोड़ा ज्यादा है। इन कंपैरिजन बाकी. है उससे।. अब ये तो दूसरे जज करेंगे। मैं नहीं जज कर. सकता।. इंडिया की डिप्लोमेसी कैसे देख रहे हैं. आप? क्योंकि आजकल विश्व. भाई मैं बताया मैंने आपको राज की बात कि. 40 साल मैंने की है।. जी। मुझे कोई शिकायत नहीं है।. नहीं नहीं आज के दौर की डिप्लोमेसी कैसे. देख रहे हो? क्योंकि आज. आज आज के दौर में भी पॉलिसी तो वही है।.
पर्सनल बदलते हैं।. लोग आते हैं जाते हैं मगर पॉलिसीज तो. बेसिकली मुल्क की एक है। वो पॉलिसीज क्या. है? वो चीज करो जो देश के हित में है। और. जो चीज हमारे हित में नहीं है उससे जितनी. दूर रह सकते हो रहो।. तो सर क्योंकि आप उस पद पर हैं। आप बेहतर. समझा सकते हैं हमें। इंडिविजुअल व्यक्ति. देश की पॉलिसी तय करता है या देश की. पॉलिसी जो होती है वो एक तय होती है। जैसे. अभी ये सवाल इसलिए पूछ रहा हूं मैं.
क्योंकि ट्रंप साहब जब से आए हैं तब से. बड़ा फेरबदल हो गया है दुनिया भर में।. सबसे रिश्ते उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे. हैं।. तो क्या इंडिविजुअल व्यक्ति तय करता है. जैसे भारत की पॉलिसी है या जो पॉलिसी चली. आ रही है उसका व्यक्तियों से कोई फर्क. नहीं पड़ता। कोई भी सरकार कोई भी. लीडर का इंप्रिंट. किसी मुल्क की पॉलिसी पे होगा और हुआ है।. पर्सनालिटी बदलती है।. हम. कोर इंटरेस्ट नहीं बदलता है।. ओके।. मगर अब आपने ट्रंप साहब का जिक्र किया।. उनकी एक स्टाइल है। उससे पहले जो लोग थे.
अमेरिका के राष्ट्रपति उनकी दूसरी स्टाइल. थी।. जैसे अभी भारत आप ईरान में क्योंकि काफी. लंबी सेवाएं आपने दी। आज ईरान को लेकर रोज. खबरें आती है। अमेरिका ईरान में काफी. टेंशन है। भारत का अपना एक स्टैंड रहा है।. भारत हमेशा से एक न्यूट्रल पॉलिसी पे रहा. है। लेकिन अब डॉन्ड ट्रंप साहब जो है ऐसा. लगता है कनपट्टी पर बंदूक रखकर करते हैं।. या तो हमारे दोस्त बनिए दुश्मन बनिए। तो. आप कैसे देख रहे हैं इस पॉलिसी को? क्योंकि ईरान से थोड़ी सी दूरी हुई है।. रूस से जो नया एग्रीमेंट हुआ हल्की सी. डिस्टेंस हुई है।. नहीं देखिए दूरी नहीं हुई है। हमारे ईरान.
के संबंध आज के नहीं है। सैकड़ों साल के. हैं। एमजी साहब. जी. तो दूरी नहीं हुई है। मगर इंटरेस्ट. मॉडिफाई होते रहते हैं। कभी इस हित में. फायदा है। कभी उसमें फायदा है।. जी।. अगर हमको तेल की जरूरत थी तो हम ईरान गए।. तेल की जरूरत कि हम सऊदी अरेबिया गए, अबू. धाबी गए, और दुनिया के और देशों में गए, जी, रूस में गए। मगर उसका ये मतलब नहीं है कि. हमने पॉलिसी बदल दी है। व्यापार है, बाजार.
में सामान अगर मिलता है और हमारी जेब में. पैसा है तो हम खरीद लेते हैं।. आपकी जड़े गाजीपुर से आती है। बंगाल में. भी आप रहे।. गाजीपुर कुछ रह गया है क्योंकि मैं यूपी. से आता हूं इसलिए मेरी थोड़ी दिलचस्पी है।. मैं बहुत जमाने से नहीं गया हूं। तो मैं. कह नहीं सकता हूं।. अगर है अपनी जगह पे हम. ठीक है. ओके आपकी जो परिवार भी है सर वो. क्रांतिकारियों का रहा है। स्वतंत्रता. सेनानियों का रहा है। देश में बड़ी-बड़ी.
भूमिकाएं लोगों ने निभाई हैं। फिर एक. परिवार आपका मुख्तार अंसारी वाला भी रहा. है। आपकी फैमिली को लेकर रमर्स बहुत सारे. क्योंकि अखबार सोशल मीडिया पढ़ता रहता हूं. मैं। एक तो पता नहीं कहां-कहां वंशज जोड़. दिए लोगों ने। सो कुछ अपना थोड़ा फैमिली. के बारे में अगर आप बताएं।. भाई कुछ नहीं मैम।. आई वाज़ बोर्न। आई वाज़ एजुकेटेड। माय फादर. गव मी द अपोरर्चुनिटी टू डू द एजुकेशन। गो. टू यूनिवर्सिटी, फिनिश द यूनिवर्सिटी। आई हैड टूक द डिसिशन. टू सीट फॉर दी कंपिटिटिव एग्जामिनेशन।.
माय लक दैट आई सक्सीडेड।. रेस्ट इज़ दिस। नाइस। आपने पढ़ाई पर बहुत. जोर दिया। आप एक विद्वान व्यक्ति भी हैं।. इस देश में पहले जो शिक्षा मंत्री थे आजाद. साहब। उसके बाद भी अगर आज हम इस देश में. देखते हैं तो शिक्षा को लेकर मुस्लिम वर्ग. में थोड़ा सा एक क्वेश्चन अभी भी होता है. कि उत्तरा अपलिफ्टमेंट नहीं हुआ। आप. क्योंकि एक पढ़े लिखे विद्वान व्यक्ति. हैं। डिप्लोमेट रहे आपको इसके पीछे क्या. वजह लगती है? देखिए लोगों ने फोकस नहीं किया।.
जब मैं जब मैं ये इन बिटवीन पीरियड था. हम. ना डिप्लोमेट था ना कुछ और था। एक फंक्शन. में मुझे इनवाइट किया गया। यूपी में एक. शहर है। आप जानते होंगे इटावा।. हम हम अच्छा सर. तो उसके वहां एक कॉलेज है पुराना कॉलेज है. इट्स कॉल्ड इस्लामिया कॉलेज तो उसके जो. मैनेजिंग कमेट के चेयरमैन थे मेरे जानने. वाले थे तो एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि. भाई तुम अब तक हमारे कॉलेज में नहीं आए हो. तो आओ तो मैंने कहा आ जाओ उसमें कोई मुझे.
दिक्कत नहीं है मैं कालका हमारे दिल्ली. जंक्शन से कालका मेल में बैठा और इटावा. पहुंच गया तो उनके कॉलेज में जो फंक्शन. होता नॉर्मल फंक्शन. एनुअल डे का. जी. वो प्राइस गिविंग होती है। तो मैंने. प्राइस गिविंग कर दी। तो जब खत्म हो गया. वो फंक्शन तो मैंने कॉलेज के प्रिंसिपल से. पूछा।. मैंने कहा आपने कॉलेज का नाम दिया है.
इस्लामिया कॉलेज।. प्राइस विनर्स जो थे वो सब दूसरे थे। तो. ये वजह क्या है? तो कह यही तो रोना है।. हमारे पेरेंट्स. यह समझते हैं कि तालीम. बेकार चीज है। वो बच्चे या बच्चियों को. आठवीं क्लास तक पढ़ पढ़ने देते हैं। उसके. बाद कहते हैं कि काम से लगो।. तो ये एटीट्यूड ऑफ नेगलेक्ट.
ऑफ द यूटिलिटी ऑफ़ एजुकेशन हैज़ प्रिवेल्ड. फॉर अ लॉन्ग टाइम। इट्स चेंजिंग। इट्स. डेफिनेटली चेंजिंग टू बोथ इन द नर्थ मच. मोर इन द साउथ एंड इट इज शोइंग रिजल्ट्स. बट इतना समय क्यों लग गया सर जैसा मैंने. शुरू में भी कहा कि पहले शिक्षा मंत्री ही. हमारे रहे जो उस कम्युनिटी से रहे आप जैसे. लोग रहे और बहुत सारे बुद्धिजीवी रहे. हमारे देश में राष्ट्रपति कलाम साहब रहे. हैं उसके बाद ये धारणा क्यों नहीं आई कि. शिक्षा से ही उद्धार होता है जो आपने खुद. आपने अनुभव किया.
बड़ी सोसाइटीज में एटीट्यूड के जो चेंजेस. जो होते हैं वो समय लेते ओके।. हमारे यहां कोई डंडा तो चलता नहीं था।. देयर वास नो रिस्ट्रिक्शन कि साहब यू मस्ट. सेंड योर बॉय और गर्ल टू कॉलेज।. ओके।. अ किताबें लिखने का आपको बहुत शौक रहा। एक. किताबी व्यक्ति, पढ़ने लिखने वाला व्यक्ति. जब सियासत की दुनिया में आया तो सबसे. ज्यादा कल्चरल शौक आपके लिए क्या था? कोई कल्चरल शौक नहीं था।.
भाई मैं जब फॉरेन सर्विस से रिटायर हो गया. किसी थिंक टैंक में चला गया। कुछ लिखने का. मन था। लिखता था छोटे-मोटे आर्टिकल्स आर. वेल ऑन फोकस्ड सब्जेक्ट्स। मैं इसको. रिफ्रेम कर देता हूं। एक प्रोफेसर, एक. टीचर, एक वाइस चांसलर, एक वाइस प्रेसिडेंट. जब. ये भूमिका और पॉलिटिकल भूमिकाओं में।. इसमें कभी आपको लगा कुछ कल्चरल शॉक कि द.
वे यू सी द वर्ल्ड। देखिए पॉलिटिकल. पॉलिटिकल भूमिका तो कभी थी नहीं।. इवन एज़ वाइस प्रेसिडेंट आई वाज नॉट देयर. बिकॉज़ आई वाज़ अ पॉलिटिकल एंट्री।. ट्रू शॉक नहीं लगा।. दिस इज़ अ एस्पेक्ट्स ऑफ डेली लाइफ इन अ. सोसाइटी।. मैं आपके बारे में जब पढ़ रहा था तो एक बड़ा. इंटरेस्टिंग फैक्ट मुझे दिखाई पड़ा कि डॉ. राधाकृष्णन के बाद यू आर द ओनली अह वाइस. प्रेसिडेंट जिन्होंने दो टर्म किया है।. आई डिडन्ट सेक इट। इट्स नॉट माय फॉल्ट।.
लेकिन सर एक चीज डॉक्टर राधाकृष्णन को. लेकर जैसे बच्चों को लेकर इनकी एक इमेज. बनाई गई। आपका जो एंड रहा जब आपका. राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति कार्यकाल एंड में. आ रहा था उसमें वो लास्ट डे आपका और. प्रधानमंत्री जी का जो एक संवाद आया वो. बहुत वेल गुड नहीं गया। जिसमें. प्रधानमंत्री जी ने भी एक स्टेटमेंट दे. दिया था कि असहजता को लेकर। सो एक वाइस. प्रेसिडेंट क्योंकि आप यह रिकॉर्ड सिर्फ. दो लोगों के नाम है। मैं इस चीज को बहुत.
उसमें देख रहा हूं कि आप बहुत लकी लोगों. में से आप लोग हैं। केवल इतने बड़े देश. में केवल दो राष्ट्रपति हैं। डू यू बिलीव. कि वो अवॉयडेबल था. वो था क्या? यही पहली चीज तो ये है कि लोग. जानते नहीं है था क्या? भाई छोटी सी बात. थी। सरकार एक पॉइंट ऑफ व्यू रखती थी। एक. मेरे पोजीशन थी।. वो मैंने प्रधानमंत्री जी को बता दिया।. एंड दैट वास द एंड ऑफ इट। लोग यह कहते हैं.
कि भाई आपके उनसे संबंध कैसे हैं? भाई. बहुत अच्छे संबंध जब वो चीफ मिनिस्टर थे. तब भी उसके बाद जब प्रधानमंत्री हुए तब भी. ओके। कब से जानते हैं मोदी जी को? जब से मैं जब वाइस प्रेसिडेंट हुआ. ओके।. तो कैसा आपका एक्सपीरियंस रहा उनके साथ. का? क्योंकि आपने उससे पहले यूपीए में भी. आपने काम किया। फिर ये आए। शैली में क्या. अंतर था? नहीं उनकी पॉलिसी अलग थी यूपीए. की पॉलिसी अलग थी बस और क्या. जैसे कई बार बीजेपी को जो एक आम जनता है.
वो सेंटर टू राइट थोड़ा मानते हैं उन्हें. वो कि सेंटर टू राइट है. ये राइट और लेफ्ट इज अ मैटर ऑफ कहां आप. खड़े हैं. हां सो कभी ऐसा रहा कि पॉलिटिकल डिफरेंसेस. की वजह से संवाद में कुछ तल्खियां आई. वो मेरे काम से कभी नहीं इंटरफेयर किया. ओके. उनके जो पॉलिसीज हैं उनके जो एटीट्यूड्स. हैं कुछ चीज सोशल चीजों पे वो अपनी जगह पे. हैं। मेरे अपने एटीट्यूड्स हैं। मगर वो. कभी काम में इंटरफेयर नहीं किए।. व्यक्तिगत संवाद में कैसे अशर है आपके?
मतलब. व्यक्तिगत पर्सनल वन टू वन में जैसे एक हो. गया. वेरी गुड। अभी 10 दिन पहले. हम. मैं राष्ट्रपति भवन के रिपब्लिक डे फंक्शन. में गया था। तो उसके दूसरे दिन दो चार. लोगों ने मुझे फोन किया. कि अच्छा आपकी बड़ी अच्छी बात हो गई।. मैंने कहा किससे बात हो गई? प्रधानमंत्री. से आप हाथ मिला रहे थे। मैंने कहा भाई ये. कौन सी एबनॉर्मल चीज है? वो सबसे हाथ मिला. रहे थे। मुझसे भी मिला रहे थे।.
ओके। अ वाइस प्रेसिडेंट सर ऐसा पद होता है. जो किसी धर्म जात का नहीं होता है। एंड. इट्स वै अनफॉर्चूनेट कि मैं आपके बहुत. सारे इंटरव्यूज देख रहा था। या इनफैक्ट. आपकी टीम ने भी मुझसे इस बात का जिक्र. किया कि डॉक्टर हामिद अंसारी को लेकर कई. बार लोग मुस्लिम पहचान के इर्दगिर्द. ज्यादा सवाल करते हैं। मैं जब सवाल फ्रेम. कर रहा था तब मुझे भी एहसास हुआ कि शायद. मेरे भी सवाल उधर ही जा रहे हैं। तो ये. ऐसा क्यों होता है? आपको इसके पीछे क्या. वजह लगती है? भाई कुछ नहीं हर आदमी की आइडेंटिटी मालूम. करना चाहते हैं हम।. ओके।.
समझे साहब? आप मद्रासी हैं। आपकी. आइडेंटिटी कहीं ना कहीं तला मिल जाती है।. हम. कोई दूसरा है बंगाली है उसकी आइडेंटिटी. मिल जाती है। तो नाम कभी छुपाया नहीं गया।. हम. मेरा नाम है।. मेरी पेरेंटेज जो है वो है नो। तो अगर. उससे कोई कंक्लूजन ड्रॉ करना चाहता है तो. सही कंक्लूजन ड्रॉ करें या गलत कंक्लूजन. ड्रॉ करें।. कभी आपको हशता होती है जब आपसे सवाल ऐसे. ही आते रहे? कभी नहीं। ये खेल तमाशी की बातें हैं। जब.
कुछ नहीं होता है तो लोग इन चीजों की. सोचते हैं।. ओके।. मगर मैं इस देश का नागरिक हूं। आई एम वेरी. प्राउड ऑफ़ बीइंग अ नागरिक हियर। और इस देश. में हर तरह के लोग रहते हैं। और यही शायद. खूबसूरती इस देश की है।. हैं? यही शायद खूबसूरती भी इस देश की है।. बहुत बड़ी खूबसूरती है।. भारत आप दुनिया भर में आप गए। ये सवाल. मेरे ज़हन में अब आ रहा है कि आप डिप्लोमेट. के तौर पर गए। दुनिया से अलग भारत को आप. कैसे देखते हैं? अलग नहीं देखता हूं। भारत.
इज पार्ट ऑफ दुनिया।. हां। दैट इज ट्रू। बट हमारी क्या खूबसूरत. जैसे आपने अभी कहा कि. हमारी जो है कि इतनी बड़ी सोसाइटी, इतनी. पपुलेशन, इतनी डायवर्सिटी, इतनी. कॉम्प्लेक्सिटी उसके बावजूद हम एक सिस्टम. चला रहे हैं. जो कि आसान नहीं है।. हम. ओके सर। कई सारे सवाल मेरे ज़हन में भी थे. क्योंकि आपको पूरा देश सुनता है।.
भारतीय मुसलमानों को लेकर हर चुनावों में. बहुत बातें होती है। हर वक्त बातें होती. हैं। आप बड़े-बड़े विद्वान बात करते हैं।. आज एक नया बच्चा जो आपको सुन रहा है जो. किसी कॉलेज में पढ़ो का वाइस चांसलर भी. रहे हैं। आपने पढ़ाया भी है। आज के भारतीय. मुसलमान की सबसे बड़ी चिंता क्या होनी. चाहिए? आर्थिक पिछड़ापन, मुख्यधारा की. पॉलिटिक्स या पहचान क्या सुरक्षा? उसे नए बच्चे को कहां ज्यादा फोकस करना. चाहिए? सब देखना चाहिए।. ओके।. टोटलिटी तस्वीर पूरी होनी चाहिए। एक. हिस्सा देखेंगे तो तस्वीर पूरी नहीं होगी।.
पूरी पूरी तस्वीर देखिए। उसमें ये भी है, वो भी है, वो भी है।. तो प्रथम प्रायोरिटी क्या होनी चाहिए? कोई प्रायोरिटी नहीं। इट्स ऑल पार्ट ऑफ वन. होल सम।. हम. आई कीप माय आइडेंटिटी। मैं मैं किसी ने. मुझसे ये तो नहीं कहा कि आपका नाम बदल. देंगे।. बट इसकी आवश्यकता भी क्यों है? नहीं यही बात है ना तो मेरी आइडेंटिटी जो. है हम. इंडिविजुअल आइडेंटिटी और माय रिलीजियस.
आइडेंटिटी और एनी अदर आइडेंटिटी इट्स ऑल. पार्ट ऑफ मी।. मैं अलग नहीं हूं किसी उसको आप. टुकड़े-टुकड़े में नहीं देख सकते।. मैं आपके बारे में पढ़ रहा था तो मुझे यह. एहसास हुआ। कहीं लगा मेरा अपना परसेप्शन. था कि आप एक सादगी पसंद इंसान हैं। बट. डिप्लोमेट या वाइस प्रेसिडेंट की वजह से. हमेशा आप बड़ी जगहों पर रहे। कभी अंदर का. वो जो गाजीपुर रहा या छोटे शहरों की एक. मिट्टी रही, खुशबू रही। आपको महसूस हुआ कि. बड़े शहरों में सुकून है या छोटे शहरों.
में वापस लौट जाए? नहीं।. देखिए मेरा बचपन गुजरा।. मेरा ओरिजिन गाजीपुर डिस्ट्रिक्ट में है।. हम. मेरा बचपन गुजरा कोलकाते में और शिमला. में।. दोनों खूबसूरत जगह. दोनों बहुत खूबसूरत जगह है।. अच्छा ठीक है। मेरी एजुकेशन हुईक में हुई. अलीगढ़ में हुई। हम. तो मैं अपने आप को किससे जोडूं और किससे. ना जोडूं. हम. दे आर ऑल पार्ट ऑफ़ माय एक्सपीरियंस।. कुछ ऐसा जो लुटियन दिल्ली में ना मिला हो.
जो शिमला में हो या कोलकाता में हो।. आप उनकी अलग-अलग आइडेंटिटी है। उनकी. अलग-अलग आइडेंटिटी। हम. की अपनी आइडेंटिटी है। शिमला जब शिमला. होता था अब तो बदल गया है। दूसरी. आइडेंटिटी. कोकत्ते में क्या पसंद था? अगर एक-एक चीज. आप जिक्र कर सके कि एक-एक चीज गाजीपुर का, शिमला का या कोलकाते का कोई एक चीज जो. आपकी मेमोरी में सबसे फ्रेश है।. नहीं नहीं बहुत मेरे कोक में कॉलेज इयर्स. जो थे सिंस जेवियस कॉलेजक हम. बहुत अच्छे थे हम.
और बहुत मजा आया मुझे। आई आई लर्न अ ग्रेट. डील।. नाइस।. अ आज की जो करंट मोदी कुछ पॉलिटिकल सवाल. सर मेरे हैं। जैसे आज की करंट मोदी. गवर्नमेंट है। इस पे कई बार जो आज के जो. पॉलिटिशियंस हैं वो ये कहते हैं कि भेदभाव. हो रहा है। कई सारे पॉलिटिशियन ये लगाते आ. रहा हूं। इनके समर्थक ये कहते हैं कि जो. पिछली गवर्नमेंट थी उन्होंने भी कुछ नहीं. किया। सो जिस बात हम कह रहे थे कि आप एक. कॉलेज में गए वहां पर आपको एक्सपीरियंस. हुआ कि कुछ बच्चे हैं जो अभी भी एजुकेशन.
तरफ नहीं जा रहे हैं। उन्हें काम पर लगाया. जा रहा है। इस मानसिकता में आप ज्यादा. जिम्मेदार किसे मानते हैं? अभिभावकों को. पिछली सरकार की पॉलिसीज को या करंट. गवर्नमेंट में उत्थान नहीं रहा। जबकि. बातें आई सबका साथ सबका विकास।. पहले जहां तक कि एजुकेशन की बात है, हम. बात शुरू होती है पेरेंट्स से।. अगर बच्चों को. पेरेंट्स ने स्कूल नहीं भेजा, प्राइमरी. स्कूल नहीं भेजा, सेकेंडरी स्कूल नहीं. भेजा। तो वो रिस्पांसिबिलिटी उनकी अगर.
स्कूल नहीं है तो सरकार की. रिस्पांसिबिलिटी है। मगर आज के हिंदुस्तान. में स्कूल आपको हर जगह मिल जाएंगे।. और स्कूल जाना भी चाहिए सबको।. जाना चाहिए। बिल्कुल जाना चाहिए।. एजुकेशन क्या चेंज करती है लाइफ में? आपको मन के जो पर्दे हैं हटा देती है।. दुनिया देखने की ओपोरर्चुनिटीज बढ़ा दे।. ओके। जेएनयू में कई क्योंकि आप जेएनयू में.
भी रहे हैं। उमर खालिद और कन्हैया को लेके. बड़ी चर्चाएं होती हैं। उमर का जिक्र आजकल. बहुत ज्यादा होता है क्योंकि उन्हें बेल. नहीं मिल रही है। एक वर्ग है जिसने मुझसे. भी कई मेरे पडकास्ट में कि मैंने कन्हैया. का भी इंटरव्यू किया था। तो ये सवाल मैंने. कन्हैया से ही पूछा था।. वो कन्हैया को अक्सर ये कहती है कि. कन्हैया इसलिए बच गए क्योंकि उनकी. आइडेंटिटी अलग थी। उम्र इसलिए अभी भी जेल. में है। आइडेंटिटी अलग थे। हालांकि केसेस. बिलकुल अलग-अलग थे। उमर खालिद का केस. बिलकुल अलग है शजील उमर का। लेकिन जो ये. आरोप लगता है कि उमर खालिद या शरजील इमाम. को उनकी आइडेंटिटी की वजह से इतने लंबे.
समय तक रखा गया। इन आरोपों में आप दम. मानते हैं या मानते हैं कि नहीं? भारत की. न्याय. देखिए अगर ये थिंकिंग है तो बहुत गलत है।. मेरा सिर्फ एक कमेंट है। हमारा एक सिस्टम. है।. ट्रू।. सिस्टम में अगर किसी आदमी ने कोई गलती की. है. हम. तो. वो उसकी अकाउंटेबिलिटी का स्ट्रक्चर है।. भाई आपने गलत काम किया है। पुलिस में. रिपोर्ट होगी, मुकदमा बनेगा, अदालत में.
जाएगा, अदालत से फैसला होगा। मेरा सिर्फ. एक पॉइंट है कि अदालत में फैसले में देर. क्यों होती है? अब कोई अगर 5 साल से बेल की तलाश में है. तो यह किस सिस्टम में है? किसी सिस्टम में. नहीं। कानून कहता है टू बी डन एस अर्ली एस. पॉसिबल।. तो ये क्यों होता है आप भी जानते हैं मैं. भी जानता हूं।. बट मेरा सवाल जो सर था वो था फ्री ट्रायल. को लेकर कि मैं शुभांकर मिश्रा हूं। हो.
सकता है मेरा कोई दोस्त हो जिसका नाम कुछ. अलग हो।. कोई मुसलमान हो, कोई क्रिश्चियन हो, कोई. सिख हो, कोई जैन हो, कोई ईसाई हो? आप के नजरिए से क्या सबके लिए कानून एक है. या इसमें भी धार्मिक पहचान देखी जाती? कानून का ऑब्जेक्ट क्या है? ऑल सिटीजंस ऑफ. इंडिया।. तो इसमें लाइन कहां ड्र करते हैं? अगर कोई. लाइन ड्र्रा करता है तो गलत करता है।. ओके।. कानून की स्पिरिट के खिलाफ जाता है। कानून. के शब्द से खिलाफ जाता है।.
ओके। और यूएन में सर इंडिया को कभी भी. परमानेंट चेयर नहीं मिली।. यूएन में इंडिया को. बड़ी पुरानी कहानी है। बड़ी पुरानी कहानी. है।. अब जब हम बात करते हैं कि हम विकसित भारत. हैं या हम विश्व गुरु बनने की बात करते. हैं। क्या वो एक बहुत जरूरी चीज है. क्योंकि आधे काम तो हमारे उसीलिए फंस जाते. हैं हमें कहीं।. नहीं नहीं ऐसा नहीं है। देखिए जब यूएन बनी. थी तो. एक सिचुएशन में बनी थी। सेकंड वर्ल्ड वॉर. खत्म हो गई थी। वेस्टर्न पावर जीत गए थे।. जर्मनी जापान हार गए थे। तो जो जीते थे.
उन्होंने एक नया ऑर्गेनाइजेशन बनाया।. उसमें जो बड़े-बड़े खिलाड़ी थे उनको. परमानेंट मेंबरशिप दे दी।. कुछ लोग कहते हैं कि हमारे पास भी ये. ऑप्शन था। हमने चाइना को पुश कर दिया था।. नहीं नहीं ये पुश किसी एक को नहीं किया. था। हमने ये कहा था कि हमारे अपना राइट. है। चाइना का अपना राइट है।. बट आज के दौर में क्या अगर भारत को वाकई. में ग्लोबल लेवल पावरफुल होना है तो वो एक. इंपॉर्टेंट कदम है? होना चाहिए। होना.
चाहिए इसलिए कि दुनिया के बहुत से फैसले. यूएन में होते हैं।. हम. या ये कि उनका डिस्कशन होता है मगर और. बहुत सी बॉडीज हैं। अब आज सिर्फ यूएन की. पॉलिटिकलेंस नहीं है। सोशल इकोनॉमिक. एनवायरमेंटल सबा जिसमें इंडिया इज एन. एक्टिव प्लेयर।. बट जैसे अभी वेनेजुएला में जो हमने देखा।. बहुत सारे लोगों ने सोशल मीडिया पे चर्चा. की कि वेनेजुला में जो हुआ। यूएन भी वहां. हेल्प करता है जहां दो कमजोरों की लड़ाई.
हो। बड़े लोगों की लड़ाई में वो भी चुप. बैठ जाता है। स्पेशली वेनेजुएला की. एग्जांपल देख के लोगों ने काफी इस पे. चर्चा की। सर. देखिए यूएन के पास कोई फौज तो है नहीं। वो. तो अपने मेंबर्स की के सपोर्ट से चलता है।. हम. तो अगर मेंबर्स का सपोर्ट नहीं है तो फिर. तो नहीं गाड़ी आगे चलेगी।. सो अगर कोई पावरफुल है अमेरिका जैसा देश. वो तो कर लेता है अमेरिका। तो उसके लिए. यूएन मायने नहीं रखता।. मायने नहीं रखता है। कोशिश यही होती है.
उसकी कि मानीय ना रखें। मगर छोटे देश भी. बोलते हैं। उनका भी असर होता है। इसीलिए. तो अमेरिका यूएन जाता है। वरना क्यों जाए? बट जैसे अभी देख रहे हम ग्रीनलैंड पे. उन्होंने धमकी दे दी। मैं उठा ले जाऊंगा।. ठीक है।. ईरान को वो रोज डांट रहे हैं कि हम ये कर. देंगे। भारत को उन्होंने कितनी सुनाने की. कोशिश बीच में भारत से उन्होंने की।. हालांकि भारत अपने स्टैंड पे अब हमारा अलग. स्टैंड रहा। नाराज भी हुए। 50% नंबर टैक्स. लगा दिया। अभी हटाया। अब ये उनका एक. सेंट्रिसिटी है।.
ट्रंप जैसा किरदार आपने देखा सर। आपने. इतना लंबा अनुभव आपका रहा। आप ऑलमोस्ट 90. अमेरिका के. राष्ट्रपति मैं नहीं कहूंगा।. ओके। चलिए हम अपने देश की बात कर लेते. हैं। हमारे देश में सर जितनी जितने भी लोग. आम लोग हैं उनमें अब एक चर्चा होती है. ईडी, सीबीआई, आईटी को लेकर।. किस? ईडी, सीबीआई, आईटी को लेकर। देश की सारी. अपोजिशन पार्टियां कहती हैं. कि यह जो संस्थाएं थी इनका भी अब पॉलिटिकल. इस्तेमाल होता है। क्या यह हमेशा से होता.
आया है? अब होने लगा है या यह विपक्ष की. बात है या इसमें सच्चाई है. जो आपने कहा पांच छ लफ्ज वो सब सही है सब. सही है. हमेशा से थोड़ा बहुत हमेशा से मगर बढ़ता. जा रहा है देखिए दरिया में सैलाब आता है. थोड़ा पानी होता है तो कोई दुखी नहीं होता. है जब पानी ज्यादा बढ़ जाता है तो घरों. में घुसना शुरू कर देता है.
गुड साइन फॉर इंडियन डेमोक्रेसी. इट्स नॉट अ गुड साइन फॉर इंडियन. डेमोक्रेसी. वी शुड स्टिक टू दी डेमोक्रेसी एस बिल्ट. आउट इन दी कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ इंडिया बस. उसके आगे जाने की जरूरत नहीं है। उसको. इंप्लीमेंट करने की जरूरत है।. वो पूरी तौर पे नहीं हो रहा है।. तो ये कैसे ठीक हो सकता है? क्योंकि आप एक. संवैधानिक पद पर रहे हैं।. देखिए मैं आपको बताऊंगा।. आप सुझाव दे सकते हैं आज के दौर में जो. लोग हैं उन्हें.
हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में के पहले सफे पे. कुछ प्रिंसिपल्स दिए हुए हैं।. उसमें जस्टिस, इक्वलिटी, फ्रीडम सब कुछ है। उसमें एक और शब्द है।. लास्ट लाइन में है फ्रेटरनिटी. मतलब भाईचारा।. भाईचारा जो है उसकी बात हुई है मगर कभी. इंप्लीमेंट नहीं हुआ है।. इससे मैं जब जाता हूं बाजार में अपने.
कंप्यूटर अरे. कंप्यूटर को रिपेयर करवाने के लिए. तो मैं क्या पूछता हूं? पूछता हूं भाई. अच्छा मिस्त्री कौन है? सही बात है।. ये तो नहीं पूछता हूं कि वो मिस्त्री. गाजीपुर का है या कन्याकुमारी का है? ट्रू।. तो यह गलत चीज के. इसकी वजह से परसेप्शन डिस्टोर्ट हो रहा. है।. अब आपने भाईचारा शब्द का जिक्र किया है।.
आजकल बड़ी चर्चा चलती है। बहुत कंप्लीट. कंट्रास्ट दिखता है। भाईचारा शब्द में अब. लोग रंग को लेकर सवाल करते हैं। धार्मिक. झंडों को लेकर सवाल करते हैं। अब तो बहुत. क्लियरली डिवाइडेड है कि भगवा मेरा है।. हरा तुम्हारा है। यह उसका है। कम्युनिटी. में भी आपस में पॉलिटिकल पार्टियां वोट. मांगने में भी दोनों साइड लेफ्ट राइट. सेंटर हर तरफ से।. तो क्या भारत में वो जो गंगा जमुनी तहजीब. या भाईचारा हम बात करते हैं वो आज आपको. दिखता है। इसके बाद मैं काउंटर क्वेश्चंस. पे ये पूछूंगा कि बहुत से लोग जिनसे हम ये. सवाल करते हैं वो कहते हैं पहले भी कभी.
नहीं था। सिर्फ एक परसेप्शन बना के रखा. गया था। ऐसा है कि एक वर्ग अंडरस्टैंड. करता है। ये काउंटर आता है। आप इस पर क्या. सोचते हैं अपने लंबे एक्सपीरियंस से? देखिए परसेप्शन बनाना या परसेप्शन नहीं. बना कोई एब्सोल्यूट बाउंड्रीज नहीं है।. मगर बहुत सी चीजें हैं जो इस एक तरीके से. ठीक रहती हैं। और अगर एक तरीके से आगे बढ़. जाए। जैसे मैंने आपसे कहा सैलाब आता है. थोड़ा पानी है आपके मेरे घर में गया तो हम. उसको किसी तरह ठीक कर लेते हैं। ज्यादा.
लेवल बढ़ जाता है तो फिर दुखी होते हैं. लोग। भाज भाईचारा है हमारे देश में। नहीं. बहुत कम है। बहुत कम है और उसकी बहुत. जरूरत है।. और ये कब से कम आपको लग रहा है? यह बहुत. दिनों से हो रहा है। यह आज की बात नहीं. है।. मतलब बहुत दिनों से इस गवर्नमेंट के से या. बीते 20 25 सालों से. गवर्नमेंट और उस गवर्नमेंट की बात नहीं. है।. 20 25 30 सालों से आपको. हां ये चल रहा है। ये धीरे-धीरे हो रहा. है। लोग भूलते गए हैं कि भाईचारे का मतलब.
क्या है? आप क्या समझाएंगे भाईचारा? सीधी बात है। आप मेरे भाई हैं। मैं आपका. भाई हूं। इसमें कोई दो कोई कॉम्प्लेक्सिटी. है कोई।. तो फिर ये अगर ये इतना सरल है जैसा आपने. कहा आप मेरे भाई हैं। मैं आपका भाई हूं।. आप एक सामान ठीक करवाने जा रहे हैं। आप. पूछते हैं बेस्ट मैकेनिक कौन है? तो ये. इतनी सरल सी बात लोगों को समझ में क्यों. नहीं आई? क्यों? इसलिए कि वो उसमें अपना. फायदा देखते हैं कि ना समझे। कभी-कभी. अनजानियत भी एडवांटेज के होती है।.
उससे देश को नुकसान हो रहा है या नहीं हो. रहा है? ये सवाल है।. अगर समाज में झगड़ा होता है तो समाज कमजोर. होता है या पावरफुल होता है? ऑब्वियसली. कमजोर होगा। तो फिर वही चीज है बट बीते. कुछ. हमने नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल क्यों बनाई. बहुत पहले. जो कुछ उसमें कहा गया. हम. उसको इंप्लीमेंट नहीं किया. हम.
अब वो उसकी भी वजह है. हम. देखिए बहुत सी चीजें दिल्ली में संसद भवन. में बैठ के तय हो जाती हैं। उसका. इंप्लीमेंटेशन तो संसद भवन में नहीं होता. है। वो तो कभी चेन्नई में होता है, कभी. बंगाल में होता है, कभी मुंबई में होता. है। वो गैप्स आ गए. और उसमें लोग अपना देखते हैं हमारे हित. में क्या है? हमारे हित में क्या. इट्स अ वीकनेस ऑफ़ आवर कैरेक्टर। दैट्स ऑल।.
आजाद भारत में आपको सबसे बड़ी कौन सी घटना. लगती है सर जिसने भाईचारे पर सबसे ज्यादा. चोट पहुंचाई? कोई एक घटना नहीं। बहुत करना है।. फिर भी कुछ होता है ना बहुत बड़ा. बहुत सी चीजें हर ओकेजन पे कुछ ना कुछ. होता है।. जब कभी कोई ज्यादती होगी. कम्युनिटी के किसी सेक्शन में कम्युनिटी. से मेरा मतलब धार्मिक कम्युनिटी नहीं सोशल. कम्युनिटी के साथ. हम. तो वो गलत है। जैसे बीते कुछ समय में मुझे.
एक दो घटनाएं जो अपने इस जर्नलिज्म के. रिसेंट करियर में नजर आती हैं। एक अह नपुर. शर्मा जब प्रकरण हुआ उसके बाद देश में कई. जगहों पर वह जो एक धारणा निकली सर. तंत्रशुदा जिसमें लोग WhatsApp पे कुछ. लगाए थे और दोनों ने अपने-अपने क्लियर. स्टैंड लिए और इंडिया डिवाइडेड दिखा वहां. पर मुझे. कश्मीर में मैं खुश हूं कि कश्मीर में जब. घटना हुई उसका पूरा कश्मीर और देश एक साथ. था। उस घटना पे मैं डिवाइडेड नहीं कह सकता. क्योंकि वो एक ऐसा मोमेंट था जहां मुझे. लगा कि भाईचारा है। सब ने एक साथ स्टैंड. लिया। बट आपको ये लगता है जो घटनाओं का. जिक्र कर रहा हूं मैं इनमें इंडिया.
डिवाइडेड दिखा आपको और यह इसको रोकने की. जरूरत है? भाई ये तो रोज की बातें हैं। रोज का अखबार. पढ़िए। आप भी पढ़ते हैं मैं भी पढ़ता हूं।. जो डिवीजन सोसाइटी में हो रहे हैं. और जिन चीजों पे आपस में पॉइंट ऑफ व्यूज. का एक्सचेंज जो है वो बंद हो गया है वो. ठीक नहीं है।. तो ये ठीक कैसे होगा? फिर. ठीक वैसे ही होगा कि गो बैक टू द. प्रिंसिपल।. तो अगर आपको मान लीजिए राजनेता को हम जैसे. लोगों को समझाना हो, नए बच्चों को समझाना. हो कि आप इन चीजों का ध्यान रखें, यह.
चीजें इंप्लीमेंट करें चीजें बेहतर हो. सकती हैं। क्योंकि आप एक संवैधानिक पद पर. हैं। मैं आपसे गाइडेंस ले सकता हूं। शायद. देश में बहुत लोग आपकी बात सुन रहे हैं।. सावधान को पढ़ाइए और समझाइए। उसके जो. रिक्वायरमेंट्स हैं वो पूरे करने चाहिए।. हर रूलर को करना चाहिए। हर उसको करना. चाहिए। लेजिस्लेटर को करना चाहिए। हर अफसर. को करना चाहिए। अगर वह नहीं करेंगे तो फिर. कहीं ना कहीं दे आर फेलिंग इन देयर.
रिस्पांसिबिलिटी। बट जैसे सर पढ़ाई लिखाई. का भी आपने जिक्र किया। हालांकि मैं किसी. एक कम्युनिटी को लेके बात नहीं कर रहा हूं. मैं। ओवरऑल बात कर रहा हूं मैं। बट बीते. कुछ सालों हमने भी देखा कि एजुकेशन से भी. इंसान सही रास्ते पे जाए ये क्लियर नहीं. है। जैसे दिल्ली में भी एक ब्लास्ट हुआ।. जब उसकी जड़े निकाली गई तो पता लगा सब. डॉक्टर्स थे। दे वे वर वेर हाइली पेड।. बहुत अच्छी नौकरी कर रहे थे। इंसानियत को. बचाने की। उनके घर परिवार में लोग उन्हें. मसीहा मान रहे थे। पड़ोसी अब तक यकीन नहीं. कर पा रहे हैं कि वो ऐसे होंगे। बट उनकी. जो प्लानिंग थी, जिस तरह से बातें आई वो. लगा कि एजुकेशन इज नॉट द ओनली स्यूशन। भाई.
इट इज नेवर दी ओनली स्यूशन। मगर कम से कम. ये उम्मीद तो रखी जा सकती है कि एज. एजुकेशन से उनके मन के जो दरवाजे बंद हो. गए थे खुलें। जिस किसी ने ऐसा काम किया. तो वह भी समझेगा किसी वक्त कि इससे कोई. फायदा नहीं हुआ। गुस्से का इज़हार किया. तो गुस्सा तो आता है। ठीक है। बहुत सी. चीजें होती है जिसमें गुस्सा आता है। उसका.
ये मतलब है कि तोड़फोड़ करना शुरू करें।. दिल्ली में जो बम ब्लास्ट हुआ. इसको आप कैसे देखते हैं? उसके पीछे जो. माइंडसेट है उसको क्योंकि एक मोबाइल पे. वीडियो बनाई एक बम ब्लास्ट नहीं हुआ है।. दिल्ली में बड़ी लंबी हिस्ट्री है।. जी. 200 ईयर में दिल्ली में मुख्तलिफ किस्म के. ब्लास्ट हुए थे। तो ये सब सोसाइटी में जो. भाईचारा है उसकी कमी है बस और कुछ नहीं।.
देखिए ग्रीवेंसेस तो सबके होते हैं। भाई. मुझे नौकरी चाहिए। नौकरी 10 नौकरियां थी।. मेरा नंबर 11वीं था या 12वीं था। तुम्हारा. नंबर नहीं आया। बात खत्म हो गई।. बट क्या गवेंसेस इतने ज्यादा बढ़ गए. गुस्सा इतना बढ़ गया कि बहुत जगहों पे. ग्रीवेंसेस हैं। सही ग्रीवेंसेस हैं।. तो इस इसको हम कैसे रोके? क्योंकि देश को. हमें साथ लेके चला। देश एक रहना चाहिए।. देश का नुकसान नहीं होना चाहिए। और.
ये जो घटना थी ये बड़ी परेशान इसलिए भी कर. रही थी क्योंकि एक पढ़ा लिखा व्यक्ति जिस. कम जिस जिस शांति से बैठकर एक होता है कि. आप गुस्से में आते हो आपने एक मेरी आपकी. लड़ाई हुई मैंने गुस्से में कदम उठा लिया।. एक होता है बहुत शांत दिमाग से सोच समझ के. वो जो वीडियो आया था हमारे पास वो बहुत. डरावने डराने वाला था कि आपका परिवार है।. आप पढ़े लिखे हैं। आप समझदार हैं। आप. लोगों का इलाज करते आए हैं। आप बच्चों को. पढ़ा भी रहे हैं। उसके बावजूद आप एक पूरी. तैयारी कर रहे हैं। इतना आपके अंदर नफरत. भर गई है। देखिए यह अनयूजुअल चीज नहीं है।.
आप अपने देश की बात मत कीजिए। दुनिया की. बात कीजिए।. जी।. बड़े-बड़े जो लीडर्स थे कई पढ़े लिखे लोग. थे। बेवकूफ नहीं थे।. हम. वो दुनिया को बदलना चाहते थे। जो जर्मनी. का लीडर था वो सारी दुनिया को उलटपलट कर. दिया।. हिटलर। हां।. कितने लोग कत्ल कराया? तो एजुकेशन इज नॉट ए फेल सेफ.
रेमेडी. दैट वी सॉ इन एस्टीन फाइल्स सर. या आपके लिए कितना शॉकिंग था सर क्योंकि. आप तो डिप्लोमेट रहे हैं वो जो पूरी लिस्ट. आई है क्योंकि हम जैसे लोग कईयों को तो. बचपन से बिल्कुल मानते थे कि इंसानियत के. मसीहा है। ये विज्ञान के मसीहा हैं। बड़ा. कल्चरल शौक लगा सर। मतलब नई जनरेशन अभी भी. सदमे में है वो लिस्ट पढ़कर वो ऐसा लग रहा. था कि एक पेज थ्री फिल्म आई थी उसमें एक. डायलॉग था कि मुंबई गटर है जब तक ढका है. तब तक अच्छा है। वी एक्चुअली फेल्ट दैट कि. हमें नहीं पता था इट वास बेटर। पता लग गया.
तो बहुत शौक था। आप डिप्लोमेट रहे हैं।. मालूम हुआ तो मालूम हुआ बात खत्म हो गई।. आपको झटका लगा वो लिस्ट पढ़ के वो सारी. चीजें पढ़ के।. कौन सी लिस्ट? जो एफstिन फाइल्स की पूरी लिस्ट आई है।. जिसमें बिल गेट्स साहब का जिक्र है जो इन. भारत में दवाईएं दे रहे थे और वहां. क्या-क्या चीजें निकली अपनी वाइफ को लेके।. अ बहुत सारा नाम है। मतलब कुछ नाम को. एक्सपेक्टेशन थी। कुछ नाम ऐसे थे जो हैरान. जैसे हॉकिंग साहब का नाम था। कई नाम ऐसे. थे जो असहज कर रहे थे मुझे। आपका रिएक्शन. क्या था? मैं डिटेल में नहीं जा रहा हूं।. सिर्फ फर्स्ट राइट रिएक्शन आपका क्या था.
एब्सेंट फाइल्स को लेके? मैं क्या कहूं? जो दिल में ईमानदारी से बस उतनी सी बात. सर। इसलिए कि पूरी हकीकत सामने नहीं आई. है। एब्सिन था कौन? कहां से आया था? क्यों कर रहा था जो कर. रहा था उसकी भी थ्योरीज आ रही है. ब्लैकमेलिंग का कासेप्ट था इजराइल से. जुड़े हुए थे मसाद का जिक्र आ रहा है बहुत. सारी थ्योरीज आ रही है. ये सब सही है मगर कोई जिक्र नहीं करता है. उनका. ये कन्वीनियंस की बात है.
मेरा किससे कनेक्शन है किससे कनेक्शन नहीं. है वो बात वहां खत्म हो जाती है।. आपको झटका लगा था ये पढ़कर सब या आपको पता. था कि ये दुनिया ऐसी है? नहीं नहीं खराब. चीजें होती है दुनिया में बात खत्म. इतनी खराब. बहुत से ज्यादा खराब चीजें होती है अब. अमेरिका के अखबार पढ़िए इंग्लैंड के अखबार. पढ़िए उसमें भी बहुत आता है हमारे यहां तो. कुछ नहीं आता है. तो बट इतना सब अगर था तो इन किसी पर केस. क्यों नहीं चल रहा है मतलब क्या दुनिया. में ताकतवर लोगों के लिए नियम कायदे अलग.
होते हैं. कल हिलरी क्लिंटन ने एक बयान दिया टीवी पे. मैंने देखा कि आप कांग्रेस में हियरिंग. क्यों कर रहे हैं पब्लिक हियरिंग क्यों. नहीं करते हैं मतलब यह है कि कहीं ना कहीं. तो पर्दा डालना है तो कांग्रेस में. हियरिंग हो जाएगी तो कांग्रेस तक रहेगी।. पब्लिक हियरिंग होगी तो सारी दुनिया में. फैलेगी।. क्या ये पूरा सच आपको लगता है अभी और भी. छिपाया गया होगा इसमें।. पता नहीं क्या है ये तो जब आने दीजिए. मैंने तो पढ़ा नहीं है। बट इट्स वेरी. शॉकिंग। आई मीन वेस्ट हमें इतना गाइड करता.
है ह्यूमन राइट्स पर। आई एम श्योर आप जब. डेवलपमेंट रहे होंगे। पूरी दुनिया को. सिखाता है वो ह्यूमन राइट्स पर। और उनका. ह्यूमन राइट हम बच्चियों के साथ देख रहे. थे।. दे बेटर। ओके। ठीक है सर। कुछ चीजें हैं. सर। ये आपकी लाइफ को लेकर कुछ क्वेश्चंस. हैं जो पॉलिटिकल है। थोड़े से. कंट्रोवर्शियल भी हो सकते हैं। मैं आपकी. सिर्फ राय लेना चाहता हूं। किसी सवाल पर. अगर आप स्किप करना चाहे तो आप मुझे बेबाकी. से कह सकते हैं।. अपने कार्यकाल के अंतिम दिन आपने असुरक्षा.
की भावना का जिक्र किया था। आज हम 2026. में बैठे हैं। क्या आपको लगता है कि यह. असुरक्षा की भावना देश के मुसलमानों में. आज भी है? कहां किसके लिए? हमारे देश में। आपने जब लास्ट डे अपना. जिक्र किया था कि एक असुरक्षा की भावना. है।. देखिए क्या हर नागरिक अपने आप को सेफ फील. करता है या नहीं करता? नहीं करता।. तो वही बात है।. बट एक होता है सेफ ना फील करता। दिल्ली. में गड्ढा था।. अब एक आदमी बाइक चला रहा था। गड्ढे में. गिर गया।. नोएडा में एक घटना हुई जिसमें एक आदमी.
पानी में गिर गया। पुलिस आई उठा नहीं पाई।. एक तो यह असुरक्षित भावना हो गई।. एक भावना हो गई कि मुझे मेरी पहचान के. जैसा सुरक्षा। यह तो सामाजिक असुरक्षा है।. किसी के साथ हो सकती है।. मैं पहचान की असुरक्षा की बात कर रहा हूं।. क्या पहचान के आधार पर. पहचान तो एक ही चीज है। आइडेंटिटी तो बहुत. आपकी पर्सनालिटी एक पर्सनालिटी तो नहीं. है।. हां।. यू आर नॉट यू नो दी हेड ऑफ एन मीडिया. सिस्टम।. हम. आपकी और भी आइडेंटिटीज है। तो टोटलिटी. देखिए ना। क्यों एक पे क्यों फोकस करते.
हैं? नहीं तो मैंने इसलिए पूछा कि वो जो 17 में. आपका बयान था वो 26 में आपको लगता है कि. वो बदल गया है या अभी भी देश के मुसलमानों. में असुरक्षित भावना है? कौन सा बयान 17 में था? जब आप कार्यकाल के लास्ट डे आपने बात की. थी जिस पर प्रधानमंत्री जी ने टिप्पणी कर. दी थी कि अब शायद आप आजाद महसूस कर रहे. होंगे।. देखिए लोगों ये बहुत आजाद मुल्क है मगर. लोग सेलेक्टिव बहुत है। जिस दिन. प्रधानमंत्री ने यह बात संसद में कही थी. उसी दिन शाम को संसद के दूसरे हिस्से में.
उन्होंने दूसरे भाषण में दूसरी बातें कही. थी। तो ये तो देश. तो आप कौन से वो भाषण लेंगे वो? लोग तो. वही उठाते हैं जो ये तो आई एम श्योर ये तो. हर जगह शायद यही होता होगा कि वो एक. प्रधानमंत्री जी भी 1 घंटे का भाषण देते. हैं 3 मिनट की क्लब वायरल. उन्होंने मेरी तारीफ की बुराई की सबकी ठीक. था मुझे उसमें कोई चिंता नहीं. सो हम ये कह सकते हैं कि आज असुरक्षित. नहीं है. मैं बिल्कुल नहीं मैं ठीक हूं. नहीं आपकी बात नहीं कर रहा मैं कम्युनिटी. की बात कर रहा हूं आप माशाल्लाह सुरक्षित.
हैं फिल हेल्दी हैं और मैं चाहूंगा कि. मैं वहां पे कम्युनिटी रिप्रेजेंटेटिव. नहीं था आई वाज देयर इलेक्टेड वाइस. प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया. याह. देयर इज़ नो आइडेंटिटी अटैच टू मी।. ओके। बट ये बयान तो सर आया था ना सर इसलिए. यही वाला असुरक्षित भावना के महसूस हो।. नहीं नहीं मैं जिस चीज का जिक्र कर रहा था. उसमें मैंने बताया वो वो पहली बार मैंने. नहीं कहा था। मैंने उससे पहले भी एज वाइस. प्रेसिडेंट मैंने बहुत सी बातें कही थी।. सर वाइस प्रेसिडेंट की ताकत क्या होती है? कुछ नहीं।.
कुछ भी नहीं। कुछ नहीं।. सो इट्स अ गुड हैप्पी रिटायरमेंट प्लान।. इट्स अ गुड हैप्पी रिटायरमेंट प्लान।. यू कांट मेक दैट प्लान। दैट्स द पॉइंट।. मतलब आपको एक सम्मान कह सकते हैं कि आपको. किसी ने सम्मान दे दिया हैप्पी. रिटायरमेंट।. देयर इज़ नो पावर।. व्हाट पावर वुड वी हैव? अरे देखिए व्हाट पार्ट डस द प्रेसिडेंट ऑफ. इंडिया हैज़? सारे हस्ताक्षर उनके बिना वो किसी की. फांसी माफ़ कर सकते हैं। सारे कानून उनके. जरिए जाते हैं।. बिल्कुल वही ना सिग्नेचर।.
तो आप आप मना कर सकते हैं।. एक प्रेसिडेंट थे हमारे नाम नहीं लूंगा।. जिनके पास एक बिल दोनों हाउस से पास होके. गया था हम. और उनको चिंता कुछ थी. तो प्रेसिडेंट क्या कर सकता है प्रेसिडेंट. उसको अप्रूव कर सकता है या वापस भेज दिया. उन्होंने दोनों में से कोई चीज नहीं की. उन्होंने वापस ही नहीं भेजा सरकार मेहनत. करती रही कि साहब फैसला कर दीजिए उनका सोच. रहा हूं.
तो इंडिया में प्रेसिडेंट या वाइस. प्रेसिडेंट के पास वैसी ताकत नहीं है।. दी आर कॉन्स्टिट्यूशनल पोजीशंस इन अ. फंक्शनिंग डेमोक्रेसी। द फंक्शनिंग. डेमोक्रेसी. रेस्ट विद दी पिटिकल पावर व्हिच इज दी. प्राइम मिनिस्टर एंड ह डोमिनेंट पार्टी।. उसको ज्यादा इससे ज्यादा नहीं देखना. चाहिए।. ये नहीं है कि बिकॉज़ प्रेसिडेंट इज़ कमांडर. इन चीफ के वो तोप चला सकते हैं। नहीं चला.
सकते। हां बट जैसे कुछ विषय हो जहां पर यह. लग रहा हो कि यह राष्ट्र का इसमें अहित. है। एक पद पे क्योंकि वो पद तो है. स्ट्रांग। आप फर्स्ट नागरिक के तौर पर. देखे जा रहे हैं। आपके पास पद है। आपके. सारे कमांड के आप हेड है। सब आपके नीचे. आते हैं। तो क्या वहां पर ये अधिकार होता. है कि आप आउट ऑफ द बॉक्स जा सकते हैं या. यू हैव टू फॉलो जो उधर से चल रहा है। या. यू आर पार्ट ऑफ़ द सिस्टम। सो यू गो विथ द. सिस्टम। मगर जैसा कि मैंने आपको जिसकी. एग्जांपल दी. जी. कि अगर उन्होंने वापस नहीं किया और एग्री.
नहीं किया ना वापस. दैट कैन बी अ स्मार्ट मूवी. वेरी स्मार्ट. वेरी ब्राइट टैक्टिक नाइस. बट देयर वाज़ नथिंग गवर्नमेंट कुड डू. इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग अ सर मैंने सुशील. कुमार शिंद जी का इंटरव्यू किया था और वो. देश के पूर्व गृह मंत्री थे कुछ समय पहले. ही मैंने किया था अच्छा इंटरव्यू था काफी. चर्चित भी था। उनसे भी यह सवाल मैंने पूछा. था और आपसे भी मैं पूछ ले रहा हूं यह मैं. कि 2010 और 2000 क्योंकि आप दो बार यूपीए.
कार्यकाल में देश के उपराष्ट्रपति रहे। 10. और 13 के बीच में चाहे पी चिदंबरम साहब हो. या सुशील कुमार शिंद साहब हो इन्होंने. सार्वजनिक मंचों पर भगवा आतंकवाद जैसे. शब्दों का जिक्र किया। अब यह. सही था या आपको लगता है कि एक संज्ञा जोड़. देना क्योंकि आज हम कहते हैं टेररिज्म हैज़. नो रिलजन।. देखिए. और क्या कभी. जब इतिहास लिखा जाएगा. जी. तो बात साफ हो जाएगी। मैं नहीं उस पर.
कमेंट कर रहा हूं।. बट आपने कभी उन लोग को राय दी कि क्योंकि. आप हेड थे कि. उन्होंने मुझसे राय नहीं मांगी और मैंने. उनको राय नहीं दी। वो अपना काम करते थे।. मैं अपना काम करता था।. बट फिर भी भगवा जैसे एक रिलीजन में एक. इंपोर्टेंस बनाता है। आप एक आप उस पद पर. थे जहां आपको सबको गाइड करना था। सो एज अ. हेड वाइस प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया क्या आपने. कभी सलाह भी दी कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल. से बचना चाहिए? ये मेरा काम नहीं था। यही तो गलती लोग. करते हैं। जो वाइस प्रेसिडेंट का काम है.
वो उससे एक्सपेक्ट कीजिए।. संसद के दूसरे. हम्म. उसका चलाना हाउस का चलाना उसका काम है वो. चलाता है।. ठीक है। आप बिल्कुल सही बात है आपकी।. लेकिन एक नागरिक के नाते कई बार मेरे मन. में सवाल आता है कि कई बार जैसे आप. अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर आप कह देते हैं. बात रख देते हैं तो एक बहुसंख्यक समाज के. जन्म में भी आया कि आप उनके भी वाइस. प्रेसिडेंट रहे एक राजनीतिक लाभ के लिए. ऐसी थ्योरी दी गई कंडेम कर सकते हैं. एट द एप्रोप्रियट टाइम आई एक्सप्रेस माय.
व्यूज अबाउट सोशल मैटर्स. ओके. एंड इट इज देयर इन इन राइटिंग इन माय. स्पीचेस. ओके हालांकि शिंद साहब ने मेरे इंटरव्यू. में कहा कि वो गलत था और बाद में उन्होंने. कहा कि ऐसा उन्हें नहीं कहना चाहिए था। उस. वक्त की परिस्थितियां थी। यह उनका ऑफिशियल. कोर्ट है। इसलिए मैं इसको. देखिए वो उनका व्यू था। मेरा व्यू नहीं. था।. ठीक बात है। बिल्कुल सर। बिल्कुल ठीक बात. है। एक और क्वेश्चन है सर आप क्योंकि. जेएनयू में आपने पढ़ाया है और. अफजल गुरु एक ऐसा टॉपिक है जिस पे अफजल.
गुरु एक ऐसा टॉपिक है।. कौन है? अफजल गुरु।. आप उस यूपी गवर्नमेंट में उन्हें फांसी दी. गई थी। अफजल गुरु को फांसी दी गई वो एक. ऐसा टॉपिक है जिस पे. दो वर्जन डिवाइडेड होते हैं। एक होता है. कि कोर्ट ने फांसी दी। कई लोग टेररिज्म से. सीधे रोकते हैं। आपके कार्यकाल में. क्योंकि दिया गया था। व्हाट्स योर व्यू ऑन. दैट? मैंने तो कोई जजमेंट नहीं दिया था उस पे।. ना वो जेएनयू में कभी. डिस्कशन का वो था।. बट कई बार मेरा. मेरा काम डिपार्टमेंट ऑफ स्टेशन अफेयर्स.
था। वहां ये तो कभी नहीं डिस्कस हुआ। उसी. जेएनयू में कई बार नारे लग जाते थे कि. नारे तो गलत दिए गए।. 5000 स्टूडेंट्स की. कम्युनिटी है तो नारे तो लगेंगे। आप उनका. जुबान बंद तो नहीं कर सकते हैं।. ठीक है। इस पर मैं एक लास्ट कमेंट दे देता. हूं। आपका नजरिया क्या वो आतंकवादी थे? कौन? अफजल गुरु।. मुझे क्या मालूम सरकार ने जस्टिस सिस्टम. से उनको फांसी की सजा दी। बात खत्म हो गई।.
ठीक बात है। उपराष्ट्रपति के तौर पर सर. आपका सबसे अच्छा काम जो आप चाहते हैं. लोगों को पता होना चाहिए था। कुछ अगर. चीजें आप बताना चाहे अपने दौर की कि ये. तीन चार ऐतिहासिक चीजें आपने की थी जो. लोगों को और जानना चाहिए आपके बारे में।. पीपल शुड नो मोर अबाउट हामिद अंसारी।. मैंने. राज्यसभा को 10 साल. हम. चलाया टू एवरीबडी सेटिस्फेक्शन।. सेटिस्फेक्शन ऑफ ऑल पार्टीज इन द. स्पेक्ट्रम। आई थिंक दैट इज द गुड इनफ।.
टारगेट टू एम फॉर एंड आई डीड इट। आज जब आप. देखते हैं संसद को नहीं बोलता हूं। चुप. रहता हूं। बट एक टैक्स पेयर के तौर पर सर. मन में ये सवाल आता है मेरे बार-बार कि हम. सब क्योंकि बहुत कैलकुलेशन होती है अब. लोगों में कि इतने पैसे हमारे टैक्स के. जाते हैं। और फिर हम देखते हैं वो चिल्ला. रहे हैं, चीख रहे हैं। बिरला जी ने अभी. कहा कि प्रधानमंत्री जी आते तो कुछ घटना. घटित हो सकती थी। फिर वो शोरशराबा वी फील. कि कुछ प्रोडक्टिव आ रहा है या वो पैसा. वर्थ है मतलब ये आप कैसे देखते हो आप.
क्योंकि आप उसको अपनी तारीफ में. क्या होता है संसद में. लोकसभा या राज्यसभा में वो वहां का काम है. मैं नहीं सब उस पे कमेंट करता मगर सीधी. बात ये है. हम. के आज से 20 साल पहले या 30 साल पहले. पार्लियामेंट साल में 100 साल 100 दिन काम. करती थी. ओके ओके।. आज वो 50 60 दिन काम करती है। जिसका मतलब. यह है कि वो आधा काम कर रही है पहले के.
मुकाबले में।. यूनिफार्म सिविल कोर्ट आजकल बड़ी चर्चा चल. रही है और. देखिए आप नाम बहुत अच्छा है।. यूनिफार्म सिविल कोर्ट है। आप किसके लिए. कोर्ट बनाएंगे? हमारी सोसाइटी ऐसी है कि हर सोसाइटी में. अपने इंटरनल रूल्स हैं।. समझ. वो कौन? मेरे एक दोस्त थे।. वो कहने लगे कि बहुत अमीर आदमी थे.
कि हमारे घर में लड़की की. शादी होती है तो उसको जो कुछ दे सकते हैं. देते हैं। मगर दामाद को कभी अपने काम में. इनवॉल्व नहीं करेंगे।. तो आप देखिए ऐसी सिचुएशन में जहां रूल्स. आर देयर विद इन रूल्स इट्स नॉट इजी टू मेक. अ यूनिफार्म रूल. बट जैसे आज ये करंट गवर्नमेंट जो है इनकी. टॉप प्रायोरिटी में हमेशा से रहा है ये. कहने के लिए हमेशा रहा है करने की बात है.
ये करना आसान नहीं है. तो इस पे आपका नजरिया क्या है ये. यूनिफार्म सिविल कोड लागू होना चाहिए या. भाई आप पहले ये तो बताइए एक ड्राफ्ट. प्रोड्यूस कीजिए. एक बहुत बड़े प्रोफेसर ऑफ लॉ थे। मर गए. बेचारे। हम. उन्होंने ये कहा था शो मी द ड्राफ्ट एंड. आई विल कमेंट।. ओके। इस पे सरकार के जो लोग हैं वो अक्सर. ये कहते हैं कि जब आप बाहर देशों में जाते.
हैं क्योंकि आप डिप्लोमेट रहे हैं। इसलिए. मैं आपसे पूछ सकता हूं ये कि आप यूएस जाते. हैं, यूके जाते हैं, कनाडा जाते हैं। वहां. उनके नियम है। वहां पर पहचान पर खतरा नहीं. आता। लेकिन इंडिया में कई बार मुसलमानों. की तरफ से कहा था कि यूसीसी पहचान पर खतरा. है। हमारी एक अपनी तौर पे. ये एक एंगल है उसका।. ओके।. बट वेयर इज द यूसीसी एस दैट प्रोफेसर सेड. शो मी द ड्राफ्ट व्हाई हैज़ द गवर्नमेंट. नेवर प्रोड्यूस्ड अ ड्राफ्ट।. ओके। ठीक है। एएमयू में जब सर आप थे तो.
अभी क्योंकि आपका एक रिसेंट लास्ट. इंटरव्यू में एक बयान बहुत वायरल चल रहा. है सर इंटरनेट पे। आई एम श्योर आपने देखा. होगा।. कौन सा? खिलजी वाला जो बयान था मैं उसको और पीछे. ले आता हूं एएमयू में. कौन सा वाला. एक बयान था कि वो आक्रांता जो थे वो बाहर. के नहीं थे वो भी हिंदुस्तानी थे. अरे बाबा हिंदुस्तान के एक हिस्से के राजा. थे वो. तो वो उनको आप क्या कहेंगे. हां तो इसी को मैं और आगे बढ़ाकर एक बार. आपने एमयू में जिन्ना की तस्वीर को लेकर. कहा था कि हमें पहचान से नहीं हटना चाहिए. वो भी हमारा हिस्सा थे. जो इस पर काउंटर लोग कर रहे हैं वो ये कह.
रहे हैं कि क्या सिर्फ पहचान का हिस्सा. होना ही ठीक है क्योंकि विभाजन के लिए. जिम्मेदार मानते हैं लोगI सो क्या जो. हमारी हमारी पुरानी हिस्ट्री है उसको हमें. साथ में लेकर चलना चाहिए मैच्योर बनके या. उसका कंप्लीट बॉयकॉट होना चाहिए जैसे. पाकिस्तान में होता है कि वहां. मैं आपको पूरी कहानी सुना दूं. जी. जब मैं रिटायर हो गया वाइस प्रेसिडेंट से. जेएनयू. एएमयू में एक स्टूडेंट हूं उन्हें बहुत. पुराने. उसके फर्स्ट. सेट ऑफ.
जो एमिनेंट विजिटर्स थे उनमें गांधी जी थे. उनके एक आज से नहीं 50 साल पुरानी एक. प्रैक्टिस है कि जो एमिनेंट लोग उनके यहां. जाते हैं उनके इनविटेशन पे भाषण देने उनकी. तस्वीर भी लगा देते हैं। एक गैलरी है. उसमें उनकी तस्वीर उसी तरह से गांधी जी की. भी तस्वीर वहां लगी थी।. हम. जिन्ना की भी लगी थी और 2000 लोगों की थी।. तो उस वक्त की जब मैं रिटायर हुआ स्टूडेंट.
यूनियन जो थी हम. उन्होंने मुझे एक खत लिखा हम. कि हम आपको ऑनर करना चाहते हैं टू पुट योर. से योर नेम इन दैट लिस्ट और उसके लिए आप. अलीगढ़ आइए और भाषण दीजिए। तो मैंने कहा. ठीक है अच्छी बात है। चला गया मैं अलीगढ़।. जब मैं वहां गया तो. कुछ और चीजें थी। दूर से फर्सेस काम कर. रही थी।.
एजिटेशन किसी ने शुरू कर दिया था. कि जिसका मेरा जीने से कोई मतलब नहीं था. कि इनकी तस्वीर क्यों है वहां बाबा आज से. नहीं ये बहुत जमाने से तस्वीरें बहुत सी. ऐसी तस्वीरें हैं।. तो मैंने कहा ऐसी जरूरत है तो मैं नहीं. करता। मैं वापस चलाया।. बात खत्म हो गई।. अच्छा यह सारी बातें आपको इसलिए लोग क्या. जानबूझकर भी करते हैं क्योंकि आप हमें. अंसारी हैं।. हो सकता है करते हो ना मैंने तो नाम नहीं.
बदला है।. मतलब क्योंकि आपके अगर हम लिस्ट देखें. उसमें बहुत सारी योग्यताएं हैं। जैसे. मैंने कहा 40 साल का डिप्लोमेसी करियर है, किताबें हैं, विद्वान व्यक्ति है। लेकिन. ये जो चुप बातें कहलाती हैं कि आपने पूरा. भाषण वहां क्या दिया उसका जिक्र नहीं हुआ।. वो एक जिक्र हो गया।. नहीं किया तो नहीं किया। मैंने अपनी जितनी. तकरीरें की है. सब छपवा के किताब के फॉर्म में रखी है।.
हमारे एक मित्र थे राज्यसभा में अब नहीं. है दुनिया में अरुण जेटली जी. जिनसे आपकी काफी नोकझोक भी होती थी मीठी. मीठी. हां होती थी मगर समझ भी एक दूसरे को समझते. थे उन्होंने एक दिन भाषण दिया था. वो भाषण राज्यसभा की प्रोसीडिंग्स में है. कि इनके भाषण बहुत अच्छे होते थे। इसलिए. मैंने अपने तरीके से मालूम करने की कोशिश. की कि कौन लिखता है।.
इट्स ऑन रिकॉर्ड।. और उन्होंने कहा कि मुझे मालूम हुआ कि ये. खुद लिखते।. मेरी कोई उनसे अदावत नहीं थी।. डिसए्रीमेंट होता था।. बात खत्म हो जाती थी।. क्या ये आज के दौर में मिसिंग है? ये कि. मुझे नहीं मालूम आजकल. मतभेद है लेकिन मनभेद नहीं अटल जी कहते थे. कि मतभेद रखिए मनभेद मत रखिए. बिल्कुल सही था अटल जी बहुत बुद्धिमान. आदमी थे सही बात कहते थे तरीका यही है.
जैसे मेरे यहां सर अभी इमरान प्रतापगढ़ आए. थे राज्यसभा के सांसद है तो उन्होंने. इमरान ने मुझसे एक बात कही उन्होंने कहा. मैंने उनसे पूछा आपके कैसे रिश्ते हैं. बीजेपी वालों से उन्होंने कहा मुलाकात ही. नहीं होती अब तो कैंटीन भी अलग-अलग हो गई. हमारी. देखिए यही सब छोटी-छोटी चीजें. पहले हम साथ बैठते थे कम से कम खाते पीते. थे. यही सब चीजें गलत है। पहले जब पुरानी. बिल्डिंग थी. हम. तो उसमें एक सेंट्रल हॉल होता था जिसमें. सब मिलते थे। अपना काम करते थे मगर उसके.
बाद मिलते थे लंच टाइम में, शाम को, रात. को, किसी टाइम भी।. अब बिल्कुल उसका उल्टा हो गया है। नए. बिल्डिंग जो बनी है उसमें सेंट्रल हॉल ही. नहीं है।. राज्यसभा का सेंट्रल हॉल अलग है। लोकसभा. का सेंट्रल हॉल अलग है। तो मिले कहां? छोटी-छोटी चीजें।. इससे क्या लॉन्ग टर्म में इंपैक्ट पड़ेगा. इसका? पर इंपैक्ट यह होगा कि पॉलिटिकल. प्लेयर्स जो हैं उनके आपस की बातचीत बंद.
हो गई है।. बंद नहीं हुई है। अब भी होती है मगर. मुश्किल से होती है।. बट जैसे इमरान ने मुझसे कहा कि अगर अब मैं. जाऊं बीजेपी वाली कैंटीन में खाना खाने तो. मैं एक सबको नोटिस हो जाऊंगा कि एक अलग से. इंसान आया है। पहले हम घुल मिल के खा लेते. हैं।. नहीं वो जाएगा कैसे. उसके पास कार्ड नहीं होगा अंदर जाने का।. अच्छा ये भी आप अलाउड ही नहीं है।. भाई आप मेंबर है तभी तो जाएंगे।. ये आप ये बट ये आप आपके ऑब्जरवेशन के तौर. पर क्या पुराने समय में जो पॉलिटिशियंस थे.
उनके बीच में या दिल बड़ा कह ले या. पिटिकटलिक अंडरस्टैंडिंग बड़ी थी. मिलनाजुलना बहुत था. क्योंकि जैसे मैं सुनता हूं चंद्रशेखर जी. अटल जी को गुरु मानते थे जबकि वो. डिफरेंसेस थे. सब सब था एक दो नहीं सब थे किसी पुराने. पॉलिटिशियन का नाम ले लीजिए. आप देखेंगे कि वो हर तरफ उनकी चलती थी आज. केवल शशि थरूर ही जी बचे हैं ऐसे. जो हर तरफ है।. पता है। आपके रिश्ते हैं शशि जी से?
बहुत अच्छी तरह जानते हैं।. बहुत अच्छी तरह जानता हूं।. ही इस द ओनली पर्सन सर जो कांग्रेस. मैं नहीं जानता उनके क्या रिश्ते अब है।. मैं जानता हूं उन्हें बहुत अच्छी तरह से. आज से नहीं बहुत सालों से।. बट जैसे अभी आपने कहा पुराने जमाने में. रिश्ते अच्छे थे। तो जैसे मैंने जिक्र. किया अटल जी का। अटल जी को यूएन भेजा गया. था। इधर इधर ही गवर्नमेंट ने भेजा था जो. अपने आप में एक ऐतिहासिक फैसला चंद्रशेखर. जी का मैंने जिक्र किया और बहुत सारे ऐसे. किस्से आते हैं जहां पर अपोजिशन से लोगों. को भी सम्मान मिलता था। स्पेशली जब इंडिया. की बात होती थी। अब इस बार ऑपोरेशन सिंदूर.
के बाद शशि थरूर साहब गए। अब ये हो रहा है. कि एक बड़ी कशमकश है। समझ नहीं आ रहा कि. वो इसलिए गए क्योंकि बीजेपी के करीब है. इसलिए गए कि वो बोलते बहुत अच्छा है। यूएन. में रिप्रेजेंट अच्छा करेंगे या अब दोनों. साइड से इनटॉलरेंस बहुत बढ़ गया है। मैं. आपको एक चीज बता दूं।. जब अटल जी गए थे तो मैं यूएन में राजदूत. था।. जी. तो वहां यह सवाल तो नहीं था कि साहब आज. रंग यह है ये रंगम है। सब एक जगह थे। सब.
मिलते थे। उस डेलीगेशन में फारूक. अब्दुल्ला साहब भी थे। शशि वो थे।. बहुत लोग थे।. हमारा पाकिस्तान से मुकाबला था और हमने. उसको मुकाबला सक्सेसफुली किया। कैसे किया? एक मिक्स्ड. हमारा एक अप्रोच था एस अ कंट्री व्हिच वाज़.
अप्रिशिएटेड बाय अदर्स। दैट्स ऑल।. तो अभी जैसे ऑपरेशन सिंदूर था जिसमें. कर्नल सोफिया कुरैशी सामने अभी उन्हें. अवार्ड भी मिला 26 तारीख को या जो. डिप्लोमेट्स मारे गए अलग-अलग पॉलिटिकल. पार्टियों के। ये स्टैंड आपके जमाने के. स्टैंड के हिसाब से आप कंपेयर करके देखते. हो।. मैं कंपेयर नहीं करता हूं। ये. या चलिए एक जनरल देखते हैं। पॉइंट ऑफ व्यू. ऑपरेशन फौज में हमेशा लोग रहे हैं।. नहीं नहीं मैं फौज की बात नहीं कर रहा. हूं। मैं डिप्लोमेटिक लेवल में बात कर रहा. हूं। फौज में जो हुआ वो तो हमारे. लेवल में भी हमेशा लोग रहे हैं। कोई ये.
डिस्टिंशन हुआ ही नहीं है। कभी भी नहीं. हुआ है।. इस स्ट्रेटजी को स्मार्ट मानते हो या. मानते हो इसमें क्वेश्चन था क्योंकि. कांग्रेस नहीं है। बाकी सब थे उसमें।. यह प्रैक्टिस है सबकी। इसमें कोई नई चीज. नहीं है।. ओके? इंडिया फर्स्ट।. इंडिया फर्स्ट ऑब्वियसली. सारे पॉलिटिशंस में इंडिया फर्स्ट होता है. सर क्योंकि आपके दोस्त भी रहे होंगे। मैं. नाम नहीं पूछ रहा हूं या कुछ होते हैं कि. नहीं पार्टी फर्स्ट होना चाहिए, स्टेट. फर्स्ट होना चाहिए।. वो कहां रहा हो उनके मन में क्या रहा होगा. मुझे क्या मालूम।. ओके। अभी सर इजराइल का भी एक जिक्र कर. देता हूं मैं। इजराइल हालांकि एप्स फाइल्स.
से अलग जिक्र है। इंडिया की हमेशा थ्योरी. रही है। टू नेशन थ्योरी। हम तुम्हारे भी. दोस्त हैं। तुम्हारे भी दोस्त हैं जिससे. हमारा हमारा हित नुकसान ना हो। प्लस हम. सबके साथ हैं। एक हमारी थ्योरी रही है।. अभी वर्ल्ड डायनेमिक्स काफी चेंज हो रहे. हैं। अभी हमने देखा पाकिस्तान भी अमेरिका. की हेल्प से पैलेस्तीन के मसले पर एक. काउंटर उसमें दे रहा है। इजराइल पैलेस्तीन. कंट्रोवर्सी का आप फ्यूचर क्या देख रहे. हैं? देखिए सिनेरियो. पहली चीज जो ये है. हम. कि जो हुआ पैलेस्टाइन में.
वो अत्याचार था। गलत था।. वहां के जो ओरिजिनल इनहबिटेंट्स थे. पैलेस्टिनियंस उनके साथ बहुत अत्याचार. हुआ। उनको निकाल दिया गया। अब तक वो चल. रहा है। सिर्फ इसलिए कि कुछ बड़ी ताकतों. को कन्वीनिएंट लगता है।. उनका हक है उनको आप दीजिए।. आपको लगता है वहां शांति आएगी कभी? मैं कह नहीं सकता।. या ये चलता रहेगा यूं ही।.
कह नहीं सकता।. ओके ठीक है। अभी तालिबान के लोग सर देवबंद. गए थे। ये बड़ा एक अलग सा. तो कौन सी अजीब आवा बात थी? देवबंद इज़ अ यूनिवर्सिटी. ओके।. ऑफ थियोलॉजिकल स्टडीज. और वहां पे बहुत स्टूडेंट्स हैं। रहे हैं. आज से नहीं 100 साल से ऊपर से हैं। और. चल रहे हैं।. मैं भी गया सर अभी। मुझे मैं इंडिया का. फर्स्ट जर्नलिस्ट था जो तालिबान रिजीम आने.
के बाद अफगानिस्तान गया था। चलिए. मैं बहुत ही इंटरेस्टिंग मेरी ट्रिप थी. अफगानिस्तान की।. अफगानिस्तान गए थे।. मैं अफगानिस्तान गया और वहां मैं रहा और. चारप दिन रहा। मैंने वहां पर हकानी साहब. का इंटरव्यू भी किया। कई सारे उनके. डिप्लोमेट जो थे वो मुझसे मिले और बड़ी. अच्छी यात्रा थी मेरी।. तो ये कोई नई चीज नहीं है कि तालिबान का।. ये अलग बात है कि इंडिया में दिल्ली. एयरपोर्ट पे जो फ्लाइट जाती है. अफगानिस्तान. वो डिस्प्ले भी नहीं होती कि अफगानिस्तान. जाने वाली है।. अब ये सब पॉलिटिकल कन्वीनियंस की बात है.
और कुछ. बट इंडिया को लेकर बड़ा प्यार था वहां पर।. ये मैंने महसूस किया कि. उनके हमारे से संबंध बहुत अच्छे रहे।. बहुत अच्छे रहे हमेशा।. ओके। सर कुछ ऐसे रैपिड फायर जनरल. क्वेश्चंस मेरे पास है दो चार। उसके बाद. हम समराइज कर देंगे। भारत के जितने भी. प्रधानमंत्री को आपने देखा है कोई एक जो. आपको लगता है जिसने बहुत ऐतिहासिक काम. किया और उनके कोई काम आप बताना चाहे. देखिए मैं पूरी हिस्ट्री तो नहीं जानता. हूं. कोई एक आपकी जो. मेरी ये उम्र नहीं थी जब मैं फॉरेन सर्विस. में दाखिल हुआ.
वो पंडित जी के आखिरी दिन थे समझे. जो प्रोबेशनर्स होते थे उनको सलाम करने के. लिए जरूर मिलते थे मगर कोई डिस्कशन की. गुंजाइश नहीं होती थी जो प्राइम मिनिस्टर. र्स में सबसे ज्यादा वो एक्सटेंसिव. पीरियड जो था वो इंद्र जी का था।. ओके छोटा सा क्वेश्चन मोदी जी अटल जी. ज्यादा कम्युनिकेट कौन करता था क्योंकि. आपने दोनों के साथ. अटल जी की स्टाइल दूसरी थी। मोदी जी की.
स्टाइल दूसरी बस. ओके अभी सारी वॉइसेस मुस्लिम्स को. रिप्रेजेंट करने की बात करती हैं। ओवैसी. साहब, राहुल जी इनमें आपको क्या लगता कौन. ज्यादा ऑनेस्टली. देखिए मेरा तो एक व्यू है मैंने कहा भी है. कहीं. कि ये सेक्शनल पार्टीज इज नॉट अ गुड. हेल्थी थिंग. ओके. वी आर सिटीजंस अबव ऑल सो आई शुड बी सीन एज. अ मेंबर ऑफ अ पिटिकल पार्टी व्हिच इज़ ऑल.
कॉम्प्रहेंसिव. बट दैट्स अ हार्शियलिटी कि हमारे इंडिया. के एकदम. अगर है तो आप क्या कहेंगे. इतना अंदर घुसा है कि अब आप. अगर आप नागालैंड में जाए तो वहां उनकी एक. सेक्शनल पार्टी है। अब क्या करेंगे? कश्मीर में जाए वहां एक अलग सेक्शनल. पार्टी है।. ओके।. बहुत सी और जगहों पे आपको यही चीज मिलेगी।. यूजीसी में जो सरकार ने भी स्टैंड लिया था. कि कुछ को सिक्योर करने के लिए कुछ ने कहा. हमें इनसिक्योर किया। वाज़ इट राइट? या. इंडिया के भविष्य के लिहाज से सही था?
क्योंकि आप बार-बार कह रहे हैं कि सबको. साथ लेकर चलना चाहिए। किसी को अलग से. डिस्क्रिमिनेट चाहिए। भाई इसीलिए तो मैं. कहता हूं कि अब तक ड्राफ्ट नहीं प्रोड्यूस. हुआ है।. यूजीसी की बात कर रहा हूं सर।. यूजीसी. यूजीसी जो अभी इस बच्चों को लेकर आया था।. यह लेटेस्ट वो. लेटेस्ट वाला। हां हां यूजीसी जो बच्चों. को लेकर आया था कि एससी, एसटी, ओबीसी के. छात्रों को सिक्योर करने के लिए उन्होंने. कुछ रूल्स बनाए थे।. मैंने पढ़ा नहीं उन रूल्स जिस आई हैव नो. आईडिया व्हाट द रूल्स आर।. ओके। सेकंड लास्ट क्वेश्चन। भारत को सबसे. ज्यादा किस थॉट प्रोसेस ने नुकसान.
पहुंचाया? सावरकर वाली आईडियोलॉजी ने या. जिन्ना वाली आइडियोलॉजी ने? नाइदर नाइदर. दिस इंटरेस्टिंग व्हाई यू से बिकॉज़ बोथ व. ऑफ द ट्रैक ब्यूटीफुल ब्यूटीफुल. दैट्स नॉट द इंडियन वे ऑफ़ डूइंग थिंग्स. बोथ वेर मिस लेड मिसलीडिंग. ब्यूटीफुल. लास्ट क्वेश्चन सर अंबेडकर जी गांधी जी.
हमारे सरदार जी सुभाष जी किसके किसके. विचारों का भारत आपको लगता है कि जो आज हम. भारत देख रहे हैं उसमें बड़ी भूमिका है।. उसमें सबसे बड़ी भूमिका है। भाई देखिए. गांधी जी बहुत बुद्धिमान आदमी थे।. डॉ. अंबेडकर प्रिंसिपल्स के आदमी थे।. उन्होंने जो कॉन्स्टिट्यूशन के लिए काम. किया वो. विदाउट कंपैरिजन।. तो फिर उनकी जीती जी इज्जत क्यों नहीं की.
लोगों ने? जितना मैं इतिहासिकल. डिसग्रीमेंट होते हैं हो गए. मतलब जितना मैंने इतिहास के छात्र के तौर. पढ़ा अंबेडकर जी को पॉलिटिकल पार्टीज ने. भी बहुत नुकसान पहुंचाया इज्जत नहीं की. उनकी उनके जाने के बाद सबने उनको अपना. भगवान बना लिया सारी पार्टीज ने. लेकिन उनके जीते जी. मुझे नहीं लगता उस दौर में कोई पॉलिटिकल. पार्टी. उनके अपने ख्यालात थे बहुत से ख्यालात कि. आप किताबों में पढ़ लेंगे. जिसको. लोग इनकन्वीनिएंट समझते थे. हां. गांधी जी भी उन्हें इनकन्वीनिएंट समझते थे. कुछ चीजों पे आप कैसे देखते हैं? यह आखरी.
सवाल है। समराइज कर देंगे इस पे। आप. अंबेडकर जी को कैसे देखते थे? अंबेडकर जी. के सभी विचारों से आप सहमत हैं। मैंने. बहुत पढ़ा है उनके ऊपर।. जो उन्होंने कहा वो सही था। जो इंडिया एज. इज रियलाइज. इन दी प्रएमबल. इज व्हाट ही मेंट।. कहीं डिसए्रीमेंट भी है किसी के ख्याल. में। इतना बड़ा विचार है, इतना बड़ा. व्यक्ति है।. उन्होंने सिर्फ उसको वो वो ताकत उनके पास.
नहीं थी कि वो इंप्लीमेंट करते। मैंने. आपको बताया फ्रेटरनिटी. भाईचारा. भाईचारा वो नहीं इंप्लीमेंट कर पाए।. उन्होंने जो कहा लिखा फ्रेटरनिटी पे बहुत. ठीक कहा मगर वो पावर उनके पास नहीं था कि. उसको इंप्लीमेंट कर पाते।. ठीक है सर।. अटल जी जब चुनाव हारे थे उन्होंने एक लाइन. कही थी ना टायर्ड हूं ना रिटायर्ड हूं।. हामिद जी 89 इयर्स के हैं। पॉडकास्ट हम. समराइज कर रहे हैं। टायर्ड रिटायर्ड तो. अभी नहीं लग रहे मुझे। एक बड़ा अच्छा शेर. था कि इंसान की ख्वाहिशें कोई इंतहा नहीं.
होती। दो गज जमीन चाहिए। दो गज द कफ़न के. बाद ख्वाहिशें नहीं मरती है। हामिद अंसारी. साहब की क्या ख्वाहिशें हैं अभी यहां से? देखिए दो गज जमीन. तो हमेशा उसकी जरूरत होती है।. उसको कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए।. ठीक है। अपना काम था वो कर लिया।. अभी ख्वाहिशें हैं कुछ या आप जिंदगी बस. एंजॉय कर रहे हैं।. आई एम एंजॉय। आई एम एंजॉय नहीं कर रहा हूं. इसलिए कि मैं बीमार हो गया था बीच में। सो. आई एम रिकवरिंग फ्रॉम दैट इलनेस।. अभी और किताबें लिखेंग कुछ? नहीं। सो नाउ यू जस्ट वांट टू सी व्हाट ऑल.
यू हैव डन।. यू सी इवन दीज़ बुक्स दैट आई हैव रिटन एंड. नाउ देयर आर सिक्स ऑफ़ देम।. एट. एट बुक्स व्हेन आई रिटायर्ड फ्रॉम. राज्यसभा, समबडी आस्क्ड मी दैट क्वेश्चन।. आर यू गोइंग टू राइट एंड आई सेड, नो।. एंड दैट पर्सिस्टेड फॉर अ फ्यू मंथ्स एंड. देन माय ओन चिल्ड्रन थ्री ऑफ देम. केम एंड पुट अ क्वेश्चन टू मी.
हाउ वुड वी नो व्हाट यू डीड? नाइस ट्रू. इट टच अ कॉर्ड इन माय माइंड एंड आई. स्टार्टेड राइटिंग। दैट्स ऑल।. सो हामिद जी जो नए बच्चे आपको सुन रहे हैं. वो तीन कौन सी किताबें हैं जो सारे बच्चों. को पढ़नी चाहिए। आपकी भी और जनरल भी। नहीं. नहीं ये सबसे पहली चीज यह है कि संविधान. पढ़ना चाहिए। सोच समझ के पढ़ना चाहिए। आंख. बंद करके नहीं।. ठीक है। एक संविधान दो किताबें और बता. दीजिए। बच्चे पढ़ना लिखना शुरू कर देंगे।.
वैसे भी सब मोबाइल में. नहीं पढ़ते हैं आजकल। आजकल तो हर चीज वही. होती है। गलत. तो आप बताएंगे तो लोग क्या पता लोग पढ़े।. इससे तो मैंने आपसे पूछा कि आप. नहीं मैं इंपोज नहीं कर।. आपकी तीन फेवरेट किताबें कौन सी है? बहुत हर समय में अलग-अलग किताबें।. अभी करंट अगर बात कर ले। तीन किताबें. थोड़ा तो कुछ दिखाइए। हम लोग पढ़ लेंगे।. ऐसी सीक्रेट रिवील नहीं करता हूं।. हेल्दी लाइफ का कोई सीक्रेट बताना चाहे? यू आर सो फिट एंड हेल्दी? आई एम नॉट फिट।. यू आर डैम फिट सर। हमारी जनरेशन में लोग. 89 के आसपास. फॉर द लास्ट टू इयर्स आई हैव नॉट बीन एबल.
टू प्ले गोल्फ।. बिकॉज़ आई एम अनफिट।. जिस दिन फिट हो जाऊंगा और गोल्फ कोर्स. क्लब चला जाऊंगा। आई विल से आई एम फाइन।. कोई टिप देगी हेल्दी लाइफ की? मॉडरेट. एक्शन. एनी टिप फॉर लाइफ बिकॉज़ यू हैव वास्ट. एक्सपीरियंस ऑफ़ लाइफ. नो. आर यू हैप्पी सेटिस्फाइड विथ योर लाइफ. नहीं.
कोई रिग्रेट्स नहीं कुछ भी नहीं. नो रिग्रेट ना एट ऑल. थैंक यू सो मच सर लवली टॉकिंग टू यू आई. गुड टू सी आप यूं ही मुस्कुराते रहिए फिट. रहिए एंड आई होप कि आप जल्दी गोल्फ खेलने. जाएं आपकी तस्वीरें आए फिर आपसे हम लाइव. टिप लेने आए. फिर फिर बहुत अच्छा होगा। लाइफ विल बिकम. सो मच बेटर।. थैंक यू सो मच सर। थैंक यू। लव यू डॉक्टर।. ऑल द बेस्ट।. थैंक यू सर।. थैंक यू।.