Unplugged ft. Former Deputy CM Haryana Dushyant Chautala | Politics | Kisan Andolan
तामीर यूं हुए थे कि हैरान थे महल और फिर. उजड़े यूं कि सूरते बगदाद हो गई।. मैं कोई 90 साल का तो हूं नहीं। मैं 25. साल का पार्लियामेंट में गया था। 31 साल. का मैं उप मुख्यमंत्री बना। आज 37 साल का. हूं और 80 तक रिटायरमेंट लूंगा नहीं।. जो चुनाव पड़ रहा था पांचवें नंबर पर आए. थे। दो निर्दलीय भी आपसे ऊपर पहुंच गए थे।. अगर इतना काम आपने किया तो फिर जमानत ज्त. होने की नौबत क्यों हो गई? 1%. शुभांकर जी ये समय की बात है।. इतना बुरा समय काल आपकी नजर में बीजेपी और.
कांग्रेस हरियाणा के लिए ज्यादा. नुकसानदायक पार्टी कौन सी है? आपका नाम. दुष्यंत कैसे रखा गया था? मुझे मेरा नाम बहुत सुंदर लगता है। आजकल. जो नाम आ गए आप कोई नाम है? तीन-तीन. चार-चार अल्फाबेट मां-बाप का मुंह भी नहीं. खुलता नाम खत्म हो जाता है।. बीजेपी से गठबंधन स्मार्ट मूव था या आपके. करियर की सबसे बड़ी गलती? अगर मैं स्मार्ट. ना होता और मैं बैठकर अड़ जाता कि मैं तो. विपक्ष की राजनीति करूंगा और शाम को मेरे. साथ-साथी जेजेपी लेकर बीजेपी में विलय हो. जाते तो मैं क्या करता? क्या क्लस्टर. पीट-पीट कर मैं ये रोता मेरी पार्टी तोड़.
दी। किसान आंदोलन में चुप्पी डर थी, चाल. थी या लाचारी थी? एक दिन या स्ट्रेटजी थी।. एक दिन भी चुप नहीं रहा।. अगर अभय चौटाला जी से आपकी मुलाकात हो, तो. क्या कहेंगे एक लफ्ज़ में? मैं क्यों अपना टाइम खराब करूं? उतनी कम उम्र में सांसद बनने क्या. एडवांटेज, डिसएडवांटेजेस थे? मैं. पार्लियामेंट गया। भाई चांस हरियाणा का ही. सिक्योरिटी गार्ड था। वह खड़ा होके कहता. है हां जी। मैंने कहा भाई एमपी. रजिस्ट्रेशन होनी है आज। कहा हां जी। कहता. एमपी साहब कहां है? मैंने कहा मैं ही हूं।. संसद में आप ट्रैक्टर ले क्यों पहुंच गए. थे? अटल बिहारी वाजपेयी जी बैलगाड़ी ले आए।.
मैं ट्रैक्टर लाता हूं किसान का बेटा होकर. आपको उस पर भी आपत्ति।. इस देश की सियासत में भतीजों के चाचा से. पड़ती क्यों नहीं? इस देश में विवाद सारे. चाचा भतीजों में हुए हैं। जबकि सारे. भतीजों के बचपन में फेवरेट चाचा रहे. होंगे। आप पॉलिटिकली इस बात को इस तरफ. डाइवर्ट कर रहे हो।. आईएनएलडी में क्या ऐसा हो गया था कि आपको. जीजेपी बनाना पड़ा। हमें पार्टी से निकाल. दिया गया था।. मोदी सरकार गवर्नमेंट जो है कैसे देख रहे. हो उसे आप? जितनी बातें ग्लोबली कही गई कि इंडिया हैज़. बिकम दिस। हमारे पड़ोस के साथ लगते हुए आठ. देश हैं। आप मेरे को दो दोस्त बता दो।.
कोई सुलह की उम्मीद है आप में और आपके. चाचा जी में. दरवाजे बंद हैं।. हरियाणा का आज तक का सबसे अच्छा चीफ. मिनिस्टर कौन रहा है? चौधरी ओम प्रकाश चौकाला।. भूपेंद्र सिंह हुड्डा।. कांग्रेस की बर्बादी. अभय चौटाला. नॉन सीरियस पॉलिटिशियन. अखिलेश यादव. अब तो यंग नहीं. अगर आपको किसी एक राजनेता के साथ एक दिन. कहीं जाके रूम शेयर करना हो तो किसके साथ. शेयर करेंगे कौन सा एक राजनेता के साथ रूम. शेयर नहीं करेंगे. भूपेंद्र हुड्डा. चौटाला खानदान ये गर्व की विरासत है या. बिखराव का बोझ सियासत में ज्यादा दिलचस्प. कौन होता है जनता या नेता.
जनता. ये कहते हैं कि सियासत में कुछ भी सही या. गलत नहीं होता है। अच्छा या बुरा नहीं. होता है। सब समय होता है। समय अच्छा है तो. सब अच्छा है। गड़बड़ है तो हर तरफ सवाल. है। और आज हमारे मेहमान उस समय के फेर के.
एक जीते जागते प्रमाण है। इनकी शख्सियत के. बारे में बताऊं तो कई सारे कहानियां बता. सकते हैं। यह 2019 चुनावों के मेकर रहे।. वो शख्स जिससे उम्मीदें बहुत बड़ी। अगर. इनके पारिवारिक इतिहास की बात करेंगे तो. ग्रेट ग्रैंड सन ऑफ चौधरी देवीलाल जी. फॉर्मर डिप्टी प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया।. ग्रैंड सन ऑफ ओम प्रकाश चौटाला जी हरियाणा. के मुख्यमंत्री और इनकी खुद की शख्सियत जो. है वो बड़ी कमाल की रही है। नाम दुष्यंत. चौटाला। बहुत-बहुत स्वागत सर आपका।. बहुत-बहुत धन्यवाद। जब मैं आपकी तैयारी कर. रहा था तो मुझे एक शेर बड़ा अच्छा याद.
आया। पढ़ते पढ़ते पढ़ते पढ़ते एक शेर है. उर्दू में कि तामीर यूं हुए थे कि हैरान. थे महल और फिर उजड़े यूं कि सूरत बगदाद हो. गए।. 2019 से 204 की कहानी 19 में जब आप आए तो. आपके राइज के ऊपर हम आर्टिकल्स पढ़ रहे. थे। किताबें पढ़ रहे थे। कहानियां पढ़ रहे. थे। लगा कि यार. नेक्स्ट बिग थिंग इन हरियाणा। डिप्टी चीफ. मिनिस्टर आप बने। हमें लगा चीफ मिनिस्टर. का पद बस बिल्कुल यूं एकदम करीब है और फिर.
वक्त बदला जज्बात बदला हालात बदला आपकी. पार्टी के जमानत जब्त हुई 1% पर वोट रह. गया आप खुद अपना चुनाव हार गए और अब लोग. नए सिरे से आपका आकलन कर रहे हैं। कोई कह. रहा है वन टाइम मैजिक था। कोई कह रहा है. खत्म हो गया। हालांकि जैसा मैंने शुरुआत. में कहा पॉलिटिक्स में समय का खेल बड़ा. शुभांकर जी एक तो कंट्राडिक्टरी चीज आपने. की उजड़े।. हम. राजनीति में शायद कोई उजड़ता नहीं। हम. समय है उसमें सेटबैक्स भी आते हैं और. रिवाइवल्स भी होते हैं। और दूसरी चीज मैं.
कोई 90 साल का तो हूं नहीं। मेरी आखिरी. पारी थी।. ट्रू. साल का पार्लियामेंट में गया था। 31 साल. का मैं उप मुख्यमंत्री बना। आज 37 साल का. हूं और 80 तक रिटायरमेंट लूंगा नहीं। तो. अभी भी 43 साल हैं। मेहनत करेंगे दोबारा. आएंगे। मगर एक चीज मैं मानता हूं। हम. राजनीति शॉर्ट टर्म गेंद है।. हम. लॉन्ग टर्म विज़न है। और मैंने चौधरी. देवीलाल जी से जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ी.
हम. उस समय से लेकर आज तक ये हमारे परिवार में. भी देखी है और देश की भी बदलते देखी है।. बादल साहब इस देश के सबसे युवा. मुख्यमंत्री भी बने और सबसे बुजुर्ग. मुख्यमंत्री भी बने।. और आप उनका जीवन देखिए। 19 महीने जेल भी. काटी, चुनाव भी नहीं लड़े और आखिरी चुनाव. उनके जीवन का वह हारे। हम. कितने फेरबदल आते हैं। किसको पता है समय. राजनीति में क्या मोड़ लेगा। मायावती जी. को देश के प्रधानमंत्री की चर्चा होती थी.
और जब मैं पार्लियामेंट में गया तो लोग. कहते थे हाथी ने अंडा दिया।. वही बीएसपी थी जो जीरो पे आ गई। तो. राजनीति के अंदर काम करना, पब्लिक. ग्रीवेंसेस को उठाना, पब्लिक विजन को आगे. लेकर चलना मुझे लगता है यह उद्देश्य है और. उसके ऊपर काम ना मैंने छोड़ा है ना मैं. छोडूंगा। अगर मैंने राजनीति को अपना जीवन. दिया है जनसेवा के लिए तो मैं काम करता. रहूंगा। हर मुद्दे पे करूंगा। चाहे मुझे. 1% मिले, चाहे मुझे 32% मिले, चाहे मुझे.
16% मिले।. एक और शेर हमको याद आ गया। जिस ओर जवानी. चलती है उस ओर जमाना चलता है।. बिल्कुल है। और मैंने तो जब मैं कॉलेज में. था तब एक चीज सीखी थी युवा और वायु. हम. अंतर इतना है युवा और उसको दो हिस्सों में. तोड़ के आगे पीछे कर दो तो वायु। तो आज. अगर हमारे पास वो एनर्जी है, एनर्जी है और. काम करने का जज्बा है तो हम क्यों नहीं. जीत सकते? ठीक बात है। आज मैंने पहली बार. सर अपना प्रोग्राम पूरा उल्टा कर दिया है।.
आज आपके जीवन की शुरुआत करें उससे पहले. मैंने कहा आइंड का रैपिड फायर जो उसको. शुरू में कर देते हैं। तो ये रैपिड फायर. के कुछ सवाल है। मैं आपसे पूछूंगा आप. बताइएगा। सियासत में कौन सा पल आपके दिल. के ज्यादा करीब रहा और ज्यादा सीख दे गया? वो जो 2014 में जीत के तौर पर आया था. हिसार में या वो जो 2019 में किंग मेकर के. तौर पर आया या जो अभी हार के तौर पर आया।. राजनीति के अंदर सबसे महत्वपूर्ण पल 17. नवंबर 2018 है।.
जब हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मेरे पिताजी. डॉ. अजय सिंह चौटाला जी ने यह निर्णय लिया. कि वह झंडे डंडे की लड़ाई ना करके और एक. नई शुरुआत का बिगुल बजाएंगे और जींद के. चौधरी देवीलाल मैदान से यह नारा दिया कि. हम एक नई पार्टी बनाएंगे और वो टास्क मुझे. देकर गए कि तूने 9 दिसंबर से पहले पार्टी. खड़ी करनी है और हमने मात्र. 22 दिन के अंदर एक पार्टी खड़ी कर कर.
और विद इन लेस देन वन ईयर हरियाणा प्रदेश. में 10 विधायक जीताए मुझे लगता है उससे. बड़ा पल मेरी जिंदगी में तो कोई नहीं होगा. राजनीतिक तौर फिल्में देखते हैं आप. हां बहुत. एक फिल्म आई थी राजनीति. मनोज वाजपेयी अजय देवगन नाना पाटेकर अगर. आपने देखी हो कैटरीना कैफ परिवार की लड़ाई. थी परिवार कहानी थी फिर हुआ कि एक अलग. रणवीर कपूर एक नई पार्टी बनवाते हैं जीत. जाते हैं बड़ा रिलेट कर रहे थे लोग.
चलिए आप मेरे को कह रहे हैं कि उस मूवी से. रिलेट कर रहे थे। मैं आपसे पूछ लेता हूं।. आप पॉलिटिक्स कवर करते हैं।. हम. लंबे समय से करते हैं। आप मेरे को इंडिया. में दूसरा उदाहरण दे दीजिए। जिन्हें झंडा. डंडा ना लेकर एक नई शुरुआत कर कर और 10. विधायक छोड़िए सरकार का हिस्सा बनने का. काम किया। एक भी उदाहरण नहीं है।. हां, मतलब विरले उदाहरण है। एक अरविंद. केजरीवाल ने नई पार्टी बनाई थी जो पहली. बार में जीत कर आ गई आप आप पार्टी की बात. कर रहे हैं कि एक शुरुआत एक नई शुरुआत के.
तौर पर आपका पहला नाम. नई शुरुआत एज अ पॉलिटिकल पार्टी तो बहुत. हुई है पर पारिवारिक तौर पर जब आप राजनीति. की बात करें तो मैं पारिवारिक तौर पर कर. रहा हूं चाहे वो पंजाब उठा लीजिए चाहे. यूपी उठा लीजिए चाहे महाराष्ट्र उठा लीजिए. तमिलनाडु उठा लीजिए चाहे आप आंध्र प्रदेश. उठा लीजिए. एक एक उदाहरण दे दीजिए. सही बात है. हमने कोई भी पुरानी पार्टी का रिसोर्स ना. लेते हुए. एक नई तौर पर शुरुआत करी एंड जनता के. इश्यूज को लेकर गए। जनता ने विश्वास किया।.
हमें वह जनमत दिया 16% का। हम गवर्नमेंट. का हिस्सा बने। और मुझे लगता है कि 4 साल. वो सरकार में रहकर मैंने जो वादे किए थे. वो प्रदेश में पूरे कर कर दिखाए। चाहे उस. दौरान मेरे को झटके भी झेलने पड़े। किसान. आंदोलन के हो, कोविड के हो वो झेले हैं।. मगर क्या मैं कमजोर पड़ा किसी दिन? नहीं. पड़ा। हारजीत तो चुनाव में चलती रहती है।. चौधरी देवीलाल जी के जीवन को अगर कभी आप.
पढ़ें हम. तो वो ज्यादा चुनाव हारे कम जीते. हम. मगर क्या इस देश के उप प्रधानमंत्री पद तक. वो पहुंचे नहीं. पहुंचे पहुंचे। जनता ने विश्वास किया तो. पहुंचे।. ठीक है। इसी मेरा अगला रैपिड फाइनल. क्वेश्चन है। बीजेपी से गठबंधन स्मार्ट. मूव था या आपके करियर की सबसे बड़ी गलती? स्मार्ट मूव था।. अभी भी पीछा. 4 साल बाद जब बीजेपी मेरे. सात साथियों को ले गई.
अगर मैं पहले दिन ना जाता तो क्या एक भी. वादा मैं पूरा कर पाता जो मैं जनता से. करके 10 विधायक जीता कर लाया था।. क्या यह सात साथी मेरे साथ 5 साल खड़े. रहते।. अगर मैं 75% को विधानसभा में कानून को पास. करवाकर लिटिगेशन आज कोर्ट में है। पास करा. सकता हूं। अगर मैं हरियाणा की महिलाओं को. 50% पंचायती राज में रिजर्वेशन दे सकता. हूं। अगर मैं किसान के खाते में 48 घंटे.
में उसकी बेची हुई फसल का पैसा पहुंचा. सकता हूं। आड़ती राज को अबॉलिश कर सकता. हूं। तो क्या मैं सक्सेसफुल नहीं हूं? अगर मैं स्मार्ट ना होता और मैं बैठकर अड़. जाता कि मैं तो विपक्ष की राजनीति करूंगा. और शाम को मेरे साथी जेजेपी लेकर बीजेपी. में विलय हो जाते तो मैं क्या करता? क्या क्लस्टर पीट-पीट कर मैं यह रोता मेरी.
पार्टी तोड़ दी।. हमने वो किया जो हरियाणा की जनता से हम. वादा कर कर गवर्नमेंट में आए। हम. और हमने उन वादों को स्टेप बाय स्टेप. 4 साल में पूरा किया और मेजॉरिटी वादे. पूरे करे।. ठीक है? हालांकि ये रैपिड फायर है। मैं. चाहता हूं सर क्योंकि सबने डिटेल नीचे रखी. है सारी चीजें। किसान आंदोलन में चुप्पी. डर थी, चाल थी या लाचारी थी? एक दिन या स्ट्रेटजी थी? एक दिन भी चुप नहीं रहा।.
अगर आप किसान आंदोलन के पहले महीने से. लेकर आखिरी दिन तक आप मेरे इंटरव्यूज की. हिस्ट्री निकालेंगे. निरंतर मैं बोलता रहा हूं. और ड्यूरिंग किसान एेजिटेशन किसी दिन. मैंने किसान के फायदे की चीज को इग्नोर. नहीं किया हरियाणा को पहला राज्य बनाया. जहां चार फसलें एमएसपी पर ली जाती थी उसको. 14 पर ले जाने का काम किया. तो फिर यह परसेप्शन क्यों गया कि हमारे घर. का छोरा जो है यह सात साथ नहीं आया। देखिए.
कई आपके अपने हैं जो आपको गद्दार के तौर. पर, विरोधी के तौर पर देख रहे हैं और. इसीलिए आप शायद अपनी सीट खुद हार गए।. परसेप्शन राजनीति के अंदर समय बनाता है और. समय किस और किस मुद्दे पर रुख बदले. हम. वो आप शायद रोक भी नहीं सकते।. ठीक बात।. आप 2019 का चुनाव लीजिए। बीजेपी के खिलाफ. इतनी एंटी इनकंबेंसी थी और पुलवामा हुआ।. सर्जिकल स्ट्राइक हुई। एंटी इनकंबेंसी का.
मुद्दा ही चुनाव में मुद्दा नहीं रहा।. आप यह कह रहे हैं पुलवामा सर्जिकल. स्ट्राइक ने बीजेपी को जिताया था।. एक बहुत बड़ा इशू बीजेपी के पॉजिटिव में. गया।. आप देखिए इस देश के अंदर पिछले. लगभग मैं मानता हूं 4 सालों से हम. मुफ्त अनाज बंट रहा है।. हम. आज उस विषय को बीजेपी ने इस चुनाव में. पूरा बुनाया है। तो कई बार इश्यूज जो हैं. वो प्रोलोंग करते हैं। मगर इशूज़ प्रोलोंग.
होने के बाद भी जनता समय पर समझती है और. वापस साथ देती है। हम ठीक है। चौटाला. खानदान यह गर्व की विरासत है या बिखराव का. बोझ? मैं तो मानता हूं चौधरी देवीलाल की विरासत. है।. बिखराव का बोझ नहीं आता आप पर।. किस चीज का बिखराव? चाचा जी से विवाद, पार्टी अलग। अब आप अब. खबर आई इस बार कि इधर वाले उधर चले गए।. आप उदाहरण तो दीजिए देश का जहां राजनीतिक.
तौर पर हम. अगर लोगों ने कदम उठाए हैं हम. तो वो अपने पॉलिटिकल. जो सोच है उसको आगे ले जाने के लिए है। हम. मैं आपको उदाहरण दे देता हूं। अब मेरे को. आप चाचा भतीजा कहते हैं। मैं तो भाई-भाई. गिनवा देता हूं।. अच्छा मैं एक चीज और चलिए इसमें पूछ लेता. हूं मैं। इस देश की सियासत में भतीजों की. चाचा से पटती क्यों नहीं? आपके आपके चाचा हैं। मेरे चाचा से मेरी. पटती है। वो पॉलिटिकल नहीं है। बट इस देश.
में कहीं भी देख लीजिए। आप महाराष्ट्र में. शिवसेना में देख लीजिए। शरद पवार जी के. यहां देख लीजिए। आप यूपी में अखिलेश जी के. यहां देख लीजिए। इस देश में विवाद सारे. चाचा भतीजों में हुए हैं। जहां पारिवारिक. लड़ाई हुई है। ये चाचा भतीजे में क्या है? और जबकि सारे भतीजों के बचपन में फेवरेट. चाचा रहे होंगे।. नहीं आप पॉलिटिकली इस बात को इस तरफ. डायवर्ट कर रहे हो। मैं आपको एक चीज बता. दूं. कहीं भी. किसी भी पॉलिटिकल पार्टी में आइदर भी. रिलेशन ब्लड की हो चाहे आपकी पॉलिटिकल हो।. हम.
बहुत सी ऐसी पॉलिटिकल पार्टी है जहां चेला. गुरु से मजबूत हुआ है।. हम. तो वह क्या चाचा भतीजे नहीं थे? दो अच्छे दोस्त पॉलिटिकल राइवल्स बन गए।. क्यों बन गए? एंबिशन. आज आप एक एंकर से शुरू होकर और एडिटर इन. चीफ बन जाएंगे तो जो आपके साथ काम करने. वाले थे वो आपसे जेलस फील नहीं करेंगे।. कोई भी ऐसा काम नहीं है। डॉक्टर है। अगर.
दो एमबीबीएस करे डॉक्टर थे और एक सेवन. स्टार हॉस्पिटल में काम करे और एक सरकारी. काम करे क्या वो उससे जेलस फील नहीं. करेगा? तो किसने जेलस फील किया था? दुष्यंत. चौटाला ने या चाचा जी ने भी नहीं किया।. मैं तो अपना काम कर रहा हूं। आज भी कर रहा. हूं।. ठीक है। मैं सब डिटेल में बाद में जाऊंगा।. अगर अभय चौटाला जी से आपकी मुलाकात हो तो. क्या कहेंगे एक लफ्ज में? मैं क्यों कराया? नहीं मिलेंगे।. मुझे क्यों मिलने की जरूरत है? दूसरी. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। हमारा.
कोई अलायंस नहीं है। कोई पॉलिटिकल आज. विचारधारा एक नहीं है। मैं क्यों अपना. टाइम खराब करूं? कई लोग कहते हैं ना कि पॉलिटिकल. आइडियोलॉजी अलग है, व्यक्तिगत अलग है। आप. लोग के संवाद होते हैं? बिल्कुल।. मेरी तो लास्ट चर्चा ही शायद विधानसभा के. पटल पर हुई होगी।. तो पारिवारिक रीजनों ने व्यक्तिगत रिश्ते. भी खराब कर दिए। आप राजनीतिक कारणों ने.
रिश्ते खराब करे होंगे।. ठीक है। अगर पॉलिटिक्स छोड़ दे. तो क्या करेंगे फिर? बिनेस. ओके।. मैं तो जब अमेरिका गया था. हम. तब भी मैं अपनी जो बैचलर्स करके आया था वो. मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग में करके आया. था। हम्म।. और उसके बाद जब मैंने लंदन जाना था रीजंस. कॉलेज के अंदर तो मेरी ग्लोबल मैनेजमेंट. के अंदर एमबीए थी और उस दौरान पिताजी को.
सजा हुई, दादाजी को सजा हुई और उस कारण. विदेश जा नहीं पाए और फिर एमपी का चुनाव. लड़ लिया और उसके बाद फिर यहां पढ़ाई करी।. ठीक है। अब मैं यहीं से शुरुआत करता हूं. आपके। एक कॉमन परसेप्शन सर ये आता है कि. पहली बार आप जीते। उस वक्त सिंपैथी भी थी।. एक एक जन समूह भी था। बट असली लड़ाई आपकी. अब शुरू हुई है क्योंकि अब आपको फिर से. ग्राउंड जीरो से शुरू करना है। तो आपके. विरोधी ये कहते हैं कि अमेरिका की चमकदमक. में पढ़ा लड़का हरियाणा गांव में कैसे खाक.
छानेगा? कैसे ताऊ को समझाएगा कि ताऊ हम. तुम्हारे हैं। हम अलग नहीं है। यहां से. विदेश गए।. आप मेरे पॉलिटिकल करियर को उतना क्लोजली. मॉनिटर नहीं कर पाए।. हम. 14 में मैं जब आया था जब भी मैं कोई. अंग्रेज नहीं था।. हम. मैं वैसा ही हूं जैसा था। और मेरे में कोई. अंतर नहीं आया है। जितना देसीपना मेरे में. है शायद मेरी उम्र के मेरे कलीग्स में. किसी में नहीं है। मैं गांव में भी सो.
सकता हूं। मैं गांव में भी खेल सकता हूं।. और गांव के लोगों की समस्या को अगर मैं इस. देश की सबसे बड़ी पंचायत में उठा सकता. हूं। गांव के लोगों को दिल्ली लाकर मेट्रो. घुमा सकता हूं। पार्लियामेंट की कैंटीन. में रोटी खिला सकता हूं। तो मैं जैसा हूं।. मुझे लगता है कि गांव का ताऊ हो, ताई हो, भाई हो, मेरा भाभी हो, सारे मुझे उतना ही. लाड करेंगे। और मैं मैं अपने आप को नहीं. बदल सकता। समय के साथ जरूर आदमी चेंज होता.
है, रिस्पांसिबिलिटी आती है और कारण है और. कई बार वो जो कहावत है ना विद ग्रेट पावर. कम्स, ग्रेट रिस्पांसिबिलिटी। जब आप एक. ओदे पर बैठे हैं तो शायद वह. रिस्पांसिबिलिटी को आपको टेक केयर करना. बहुत जरूरी है। उसके अंदर थोड़ा बहुत. बदलाव आपके नेचर में आ सकता है। मगर शायद. हावभाव और रहन-सहन में कोई बदलाव मैंने तो. नोटिस नहीं किया।. आपने दिल्ली में पढ़ाई की है? मैंने एनएलयू के अंदर से हमारे एलएलएम का. एक कोर्स किया था। मास्टर्स करी थी मैंने.
और फिर मैंने जीजे हिसार से मास. कम्युनिकेशन में मास्टर्स करी और अब मैं. पीएचडी पर्स्यू कर रहा हूं। और फिर. अमेरिका में कैलिफोर्निया में थे आप? मैंने बैचलर्स अमेरिका के. बैचलर्स में। तो हिसार का लड़का जब. कैलिफोर्निया गया तो वहां से यहां से वहां. क्या लेकर गया और वहां से यहां क्या लेकर. आया? मैं सनार में पढ़ा हूं आठ साल। ऐसे नहीं. कि मेरी एजुकेशन बिल्कुल ही कोई थर्ड. ग्रेड हुई हो। मेरे पेरेंट्स ने जरूर मैं. मानता हूं एक एसेट अपनी लाइफ का बनाया कि. हमारी दोनों भाइयों की एजुकेशन में अच्छा.
इन्वेस्ट किया और हमें वो ओपोरर्चुनिटी दी. जो शायद. हमारे परिवार में पहली बार किसी को मिली. और मैं चौटाला साहब को अपने जीवन से कभी. बाहर नहीं निकाल सकता क्योंकि उनकी फुट. सर्जरी हुई थी 2006 के अंदर और मैं मेरा. आखिरी बोर्ड एग्जाम देकर 23 अप्रैल को और. रात की फ्लाइट पकड़ अमेरिका गया था। मैं. घर पे भी नहीं सोया। और अमेरिका उनके पास. जब मैं ढाई महीने रुका तो मुझे याद है. उन्होंने मेरे से एक चीज पूछी.
तालीम कहां से करेगा? और मेरे को उर्दू का. यह शब्द नहीं पता था कि तालीम होती क्या. है? हम. तो मैंने कहा जी आप बता दो कहां मिलती है. ले आएंगे। तो कहते अरे पढ़ाई कहां करेगा? मैंने कहा मैं पढ़ाई तो दिल्ली. यूनिवर्सिटी सोच रहा हूं। और मैंने उस समय. दिल्ली यूनिवर्सिटी अप्लाई भी कर दिया और. एसआरसीसी में मेरा एडमिशन भी हो गया। मगर. उनका विज़ था कि तू वहां रहेगा तो नारे. लगाएगा खराब हो जाएगा।.
बाहर पढ़ और मैंने ऑनलाइन अप्लाई करने शुरू. कर दिए। मेरे को अमेरिका की दो टॉप. यूनिवर्सिटीज के अंदर मेरा एडमिशन भी हो. गया। फिर वो एडमिट हो गए। बड़े शहर में. नहीं पड़ेगा। बिगड़ जाएगा।. और उनके सलाहकार थे। उनके मित्र हैं। आज. यूसीएसएफ के बहुत बड़े कैंसर डॉक्टर हैं. डॉक्टर दैया। वो आए हुए थे और एक इंडियन. एंबेसी के अंदर शर्मा जी होते थे। वो. दोनों बैठे और उनको कहते कि चंडीगढ़ जैसा.
शहर ढूंढ के बताओ जहां ये पढ़ाई करें। और. उन्होंने. यूसी मर्सड ढूंढी और यूसी मर्सड 80000 की. आबादी का एक छोटा सा कस्बा है और मैं. मोबाइल पर देख रहा हूं और कह रहा हूं जी. शहर में दो पेट्रोल पंप है एक ग्रोसरी. स्टोर है एक मैकडोनल्ड्स है मैं कहा मर. जाऊंगा. तो फिर. उन्हीं ने एक यूनिवर्सिटी ढूंढी बेकर. फील्ड के अंदर और चौटाला साहब को उन्हें.
काउंसिल कैसे किया. कहते जी वो थापर्ड्स हैं आप जानते हो बड़ी. पेपर मिल है। उनका बेटा इस यूनिवर्सिटी से. पढ़ के गया है। 20 साल पहले एक दो और. पॉलिटिशियंस के नाम लिए कि वो यहां से पढ़. के गए। 35 साल पुराना यूनिवर्सिटी थी और. चौड़ाला साहब का मन बन गया कि हां यहां. पढ़ाएंगे और मेरा एडमिशन करा दिया। एक. मेरे नोन थे उनका घर खाली था। मैं वहां. जाकर रुका और धीरे-धीरे धीरे-धीरे जब मैं. वहां रहने लगा। मैंने अमेरिका का रिसेशन.
भी देखा। ₹38 का डॉलर आ गया था।. किस साल में आप गए थे वहां पे? 2006 में। छ ओके तो ₹38 का डॉलर भी देखा. हुआ है मेरा मेरा यह भी देखा हुआ है कि जो. वी8 गाड़ियों में आते थे यूनिवर्सिटी में. वो साइकिल पे आने लगे ऐसी आर्थिक हालात भी. अमेरिका की देखी है मगर हां उस दौरान उस. चार साल के सफर में बहुत कुछ सीखा और उनकी. जो एजुकेशन है प्रैक्टिकिटी है. यूनिवर्सिटी लाइफ की वो हमारे से बहुत अलग. है और कहीं ना कहीं उसने हमारे डेवलपमेंट.
के अंदर और एक शायद वो छोटे शहर में रहने. के कारण रिस्पांसिबिलिटी ज्यादा थी। वहां. एग्रीकल्चर बहुत था बेकर फील्ड में। वहां. ये जो अपन बेबी कैरेट खाते हैं ऑरेंज कलर. की वो वहां की पैदाइश है। हम कैलिफोर्निया. आम आलमंड्स खाते हैं। कैलिफोर्निया. ऑरेंजेस सुनते हैं तो वो सारा उस बेकर. फील्ड की वो करन काउंटी है जिला होता है. जैसे अपने उसकी सबसे बड़ी मार्केट है। तो. मुझे वहां के जो इंडियन बड़े लैंड लॉर्ड्स. थे उनके साथ इंटरेक्ट करके एग्रीकल्चर के.
बारे में बहुत कुछ सीखने को मिला और आज. मुझे खुशी है कि वो चीज हम हमारी स्टेट. में भी इंप्लीमेंट कर पाएंगे। मेरे को एक. सवाल यहां पर आ रहा है। इंडिया एक. डेवलपिंग कंट्री है। अमेरिका एक डेवलप्ड. कंट्री है। आप वहां रहे। आप यहां अच्छी. फैमिली से गए थे। क्या डिफरेंस होता है. माइंडसेट में एक अमेरिकन और इंडियन के. माइंडसेट की बात कर रहा हूं मैं। रहन-सहन. की बात नहीं कर रहा हूं मैं। जिंदगी को. लेकर, काम को लेकर।. तो आपके साथ एक सादा पल कर सकता हूं मेरे. वीजा अपॉइंटमेंट का। मैं चौटाला साहब के.
पास जब गया था B1 B2 वीजा पे।. हम. मैं इंडिया नहीं आया वापस। और मैंने वहीं. अप्लाई किया। मुझे उन्होंने i20 देते हैं. वो आपको एडमिशन के लिए। तो i20 दे दिया।. मैंने ऑनलाइन मेरा पासपोर्ट भेज दिया और. मेरा टेंपरेरी कन्वर्शन हो गया B1 से F1. स्टूडेंट वीजा के लिए। मैं 9 महीने बाद. इंडिया आया। 3 महीने रहा, 12 महीने हो गए।. हो गया i20 एक्सपायर हो गया क्योंकि आपको. हर साल उसको रिवैलिडेट कराना पड़ता है। पर. उस दौरान मैंने मेरा परमानेंट F1 के लिए.
अप्लाई कर दिया एंबेसी में और एंबेसी में. जब मैं गया तो जो काउंसलर बैठा था उस. काउंसलर के साथ बड़ा एक अच्छा इंसिडेंट था. कि उसने मेरा पासपोर्ट देखा यू वेंट देयर. एंड देन कन्व्टेड योर वीजा कहा यस आई वेंट. देर आई गॉट एडमिशन आई स्टेड बैक एंड गॉट. माय पासपोर्ट वीजा कन्वर्टेड कहता नो नो. दिस इज इललीगल मैं कहा देन व्हाई डिड योर. गवर्नमेंट डू इट. यू गोइंग टू गो देर नाउ एंड स्टे देर। मैं.
कहा नो आई एम गोइंग टू कम बैक।. कहता आर यू श्योर। मैं कहा आई एम श्योर।. तो उसके मन में ये था कि शायद मैं अमेरिका. जाके माइग्रेंट बन जाऊंगा और मैं वहीं. रहने लग जाऊंगा। मैंने कहा कैन आई टेल यू. थिंक फ्रैंकली? मैंने कहा मैं जीपी इज़. 3.75 आउट ऑफ फोर। दैट इज 95%।. कहता यस आई सी दैट। मैंने कहा आई एम अ गुड. स्टूडेंट। कहता यस। मैंने कहा प्रॉब्लम. क्या है? मैंने कहा आई एम नॉट गोइंग टू. स्टे इन अमेरिका।.
मैंने कहा है आई हैव टू वाश माय ओन. क्लोथ्स। आई हैव टू वाश माय ओन कार। आई. हैव टू क्लीन माय ओन रूम वैक्यूम इट। पुट. माय क्लोथ्स फॉर वाशिंग। मैं कहा इंडिया. वी हैव दिस लग्जरी।. देयर वी डोंट। आई एम देयर फॉर एजुकेशन।. एंड यू गाइस आर लकी।. $00 देता है एक अमेरिकन एक क्वार्टर का।. हम उस समय $6000 दे रहे थे। अब उस. कन्वर्जन के अंदर चार गुना ज्यादा पैसे. लेते हो और फिर भी नखरे करते हो। तो वो. माइंडसेट जब यू बिकम बिग आपका बन जाता है.
कि शायद ये ऐसे ही आ गए। आज वो लोग. रियलाइज नहीं करते कि शायद हम उनकी आबादी. के दो 2ाई% हो। मगर उनकी इकोनमी को चलाने. के लिए हिंदुस्तान का बहुत बड़ा रोल है।. चाहे आप सैन फ्रांसिस्को चले जाओ, चाहे आप सन वैली चले जाओ, चाहे आप एले चले. जाओ। आज के दिन लोग कहते हैं हॉलीवुड अगर. हॉलीवुड चल रहा है तो हॉलीवुड डेवलपिंग.
नेशंस की वजह से चल रहा है ना कि अमेरिका. की वजह से। चाहे व्यूअरशिप की बात हो, चाहे वहां मैन पावर की बात हो, चाहे. एक्टर्स की बात हो। आज आईटी है। अगर जब. चौटाला साहब सेटल थे तो मैं बेल व्यू गया।. बेल व्यू के अंदर आप घूमोगे आपको ऐसा नहीं. लगेगा कि आप इंडिया से कहीं बाहर हो।. क्योंकि मेजॉरिटी साउथ इंडियंस है।. सिर्फ उनके लोगों की पेइंग कैपेसिटी जो है.
अगर वो कन्वर्जन पे आते हैं हमारे कंट्री. में तो सीधी 85 गुना आज के दिन हो जाती. है। तो वो सोचते हैं हम बहुत ज्यादा. आधुनिक हैं। यस दे हैव गॉट द बेस्ट ब्रेन. इंटू देयर कंट्री। और आज उसका कारण है कि. उनकी एजेंसीज कितनी डेवलप 20 साल पहले. होगी और हम आज डेवलप हो रहे हैं। और अब. हमारे ब्रेंस को भी ये पता चल चुका है कि. इंडिया में भी अगर आप उतनी मेहनत करोगे तो. शायद आप उससे ज्यादा कमा लो।. ट्रू।. और इसीलिए हर रोज हम देखते हैं कि.
बड़े-बड़े बिजनेसमैन मैं जानता हूं. गुड़गांव का एक आदमी ₹00 लेकर अमेरिका गया. आईटी वर्ल्ड में। उसने जाके पेट्रोल पंप. पे ये छोटी-छोटी मशीनें लगानी शुरू कर दी. क्रेडिट कार्ड वाली और पर स्लाइड वो कमाने. लग गया कमीशन 30 सेंट या 20 सेंट एक. ट्रांजैक्शन के और 150 या 15 मिलियन की आई. डोंट एक्सक्टली याद नहीं मेरे को अमाउंट. उतने की कंपनी बेच के उसने नोएडा में आके. दो टावर खरीद लिए और अब यहां से चला रहा.
है इंडिया को पैसा आ रहा है यानी पूरी. फैमिली वापस ले आया तो बहुत ऐसे लोग हैं. जो वापस आ रहे. मगर कंपैरिजन अगर दोनों का करोगे तो हां. आज से 2025 साल पहले वो लोग हमसे बहुत. ज्यादा एडवांस थे क्योंकि टेक्नोलॉजी. ट्रांसफर धीरे आती थी। मैं माइंडसेट की. बात कर रहा था कि माइंडसेट में क्या. डिफरेंस होता है। जैसे मैं जयपुर में बीच. में गया था। मेरा एडमिशन होने वाला था। तो. मेरे एक फ्रेंड ने कहा कि जयपुर की जगह. अगर तुम दिल्ली जाओगे तो तुम्हारा.
माइंडसेट जो है क्योंकि दिल्ली तेज भागता. शहर है। कंपटीशन बहुत ज्यादा है या मैंने. आपको. किसी छोटे शहर दिल्ली मुंबई में अगर आप. रहते हो तो आप इन कंपैरिजन कंपटीट ज्यादा. रहोगे।. नहीं मैंने ये तो पहले बता ही दिया था जब. चौटाला साहब ने मेरे को छोड़ा. हम. तो एक ही विज़न के साथ छोड़ा ना कि यहां. आके तू दुनियादारी ज्यादा सीखेगा। हां। तो. वो एक माइंड से का जो स्कोप था वो मैं. कहता हूं एनहांस हो गया कि मैं बड़ा सोच. पाया, बड़ा देख पाया। मैं ग्लोबल. स्ट्रक्चर कैसे चलता है वो समझ पाया।.
इकॉनमीज़ कैसे चलती है वो समझ पाया। मैंने. वहां के दो प्रेसिडेंशियल इलेक्शन देखे।. गवर्नर का कैलिफोर्निया का इलेक्शन देखा।. मैंने तो मेरी पढ़ाई के दौरान सबसे. इंटरेस्टिंग जो जैसे अपने एक्ट्स लाते हैं. हमारा रेफरेंडम जो है एमपीज दोनों हाउसेस. करते हैं।. वहां इस तरह के एक्ट्स के अंदर जब. प्रेसिडेंशियल और गवर्नर इलेक्शन होता है. तो पूरी स्टेट को पोलिंग में जाता है। तो. उस समय. एलएस बीटी वाला रेफरेंडम आ रहा था.
कैलिफोर्निया के अंदर। मैंने तो देखा कि. उन लोगों की सोच जो दुनिया के आगे दिखाते. हैं हम इतनी बड़ी सोच के हैं। उन लोगों ने. 70% वोट खिलाफ देकर. एलजीबीटी क्यूब पे. उसको स्ट्राइक डाउन किया।. ओके. हां वो तो ट्रंप ने अभी भी किया ना कि. देयर इज़ ओनली टू जेंडर दे ओनली टू जेंडर।. अब मेल फीमेल अभी. मैंने तो 2008 में चुनाव में कैलिफोर्निया. गवर्नर के उसको गिरता देखा और गोरों को. सड़क पे मेरे लॉन के ऊपर वो जो पिन लगाकर. और ये पैन होर्डिंग लगाते हैं पोस्टर टाइप.
ये खड़े करके देखे थे से नो टू. 77 ए या कुछ नाम था उसका उस समय. और लोगों ने उसके खिलाफ इतना बड़ा. रेफरेंडम बल्कि जिसमें सैन फ्रांसिस्को तो. ऐसा शहर है व्हिच इज फेमस फॉर सेम जेंडर. मतलब कितना चेंज उनके माइंडसेट में 1 मिनट. में आ जाता है जब वो अपने आप को इतना वाइड. माइंडेड दिखाते हैं और एकदम इतना नैरो. माइंडेड हो जाते हैं।. हां मतलब वही अमेरिका जो अपने एक-एक.
नागरिक की बात करता है और दूसरे देशों में. जाकर हजारोंज़ लोगों को मारकर जस्टिफाई कर. देता है। सो उनके ड्यूल स्टैंडर्ड तो है।. बहुत ज्यादा है। पर मुझे लगता है कि जब आप. इतनी बड़ी ताकत बन जाते हो तो फिर आपके. पास कहीं ना कहीं वह जरिया है कि आप इन. चीजों को सप्रेस भी कर सकते हो।. वहां पे इंडियंस को ट्रीटमेंट कैसा था उस. टाइम जब आप लोग वहां पे थे।. अच्छा था।. कोई ऐसा था या कुछ नहीं था।. मेरे साने चार साल के समय पे मुझे कोई. घटना ऐसी याद नहीं जहां किसी हिंदुस्तानी.
नागरिक को किसी प्रकार की भी कोई हरासमेंट. की न्यूज़ आई हो।. ओके। ठीक है। अब सर एक सवाल एक कॉमन इंसान. के तौर पर मेरे मन में आता है कि जब कोई. पॉलिटिकल खानदान का होता है जैसे आप. देवीलाल जी के खानदान के थे तो क्या बचपन. से डिसाइड हुआ था कि भाई जितने बच्चे. होंगे कुछ भी पढ़ लिख लो कुछ भी कर लो कोई. भी टैलेंट हो आखिर में पॉलिटिक्स में. लाएंगे. बिल्कुल नहीं मेरा तो असलियत में मन ये था. कि मैं बिनेस स्ट्रीम में जाऊं. मगर ये 2013 का जो इंसिडेंट हुआ जब जेबीटी. भर्ती के नाम पर डॉक्टर अजय सिंह चौटाला.
जी को और चौटाला साहब को 10-10 साल की सजा. सुनाई गई मुझे लगता है मेरी लाइफ उसका. डिरेल होकर नए ट्रैक पे ट्रेन चढ़ना कहीं. ना कहीं वो लम्हा था कि मेरे को पॉलिटिक्स. में आना पड़ा।. क्या कर रहे थे जब आपको यह पता लगा सजा. ससुराई. मैं तो नहाने घुसा हुआ था और छोटा ब्रदर. आके नॉक करता है और कहता है जल्दी बाहर आ. इस तरह से न्यूज़ आई है और मैं 18 जनपद से. और गाड़ी में भाग के जाता हूं रोहिणी.
कोर्ट और जज ने प्रोनाउंस नहीं करी सिर्फ. गिल्टी घोषित कर कर और बैठा रखा है और फिर. लंच तक हम बैठे रहे बैठे रहे लंच के बाद. आकर कहता है कि मैं 22 तारीख को सजा. सुनाऊंगा और फिर इनको तहाड़ ले जाया गया. और 22 तारीख को फिर आए और 22 तारीख को. सिर्फ. 10 सेकंड के अंदर यह कहा गया कि एक से. पांच 10 साल और छ से 55 चार साल.
मतलब हाथपांव फूल जाते हैं। अगर उस दिन का. उस जरिए को भी याद करो कि किस तरीके से. बिना किसी सबूत के और आपके फादर को 10 साल. जेल में डाल दिया जाता है। मैं नहीं मानता. कि अगर हम ना एक पॉलिटिकल फैमिली से होते. हु वाज प्रिपयर्ड कि राजनीतिक के अंदर. रंजिशें होती है। लोग इस तरह से कदम उठाते. तो शायद आज हम राजनीति भी ना कर रहे होते।.
उसके बाद फिर क्या हुआ? उसके बाद हम गांव-गांव गए प्रदेश के अंदर. और 2014 का लोकसभा चुनाव आ गया। और उस समय. क्योंकि मेरे पिताजी हिसार से उपचुनाव. लड़े थे 2011 के अंदर लोकसभा का तो मैं 25. साल 11 महीने का था। मेरे को लड़ाया गया. जीत गए और मैं सांसद बना देश का उस तक का. तो सबसे युवा सांसद था। अब तो नए आ गए।. मेरे बाद शायद उड़ीसा की कोई लेडी एमपी.
बनी थी। मुर्मू सरनेम था और शायद अब दो और. आ गए जो उससे भी छोटे हैं।. तो उतनी कम उम्र में सांसद बनने के क्या. एडवांटेज डिसएडवांटेजेस थे? डिसएडवांटेज तो एक रहा। मैं पार्लियामेंट. गया। मैंने बूट्स पहने हुए, जींस पहनी हुई. और ऐसी आदि बाजू की शर्ट थी और गेट पे मैं. येलो कलर का वो फोल्डर था जिसके अंदर मेरा. सर्टिफिकेट था एमपी का और मैं जा रहा हूं. और हरियाणा बाय चांस हरियाणा का ही. सिक्योरिटी गार्ड था. दिल्ली पुलिस का और वो खड़ा हो के कहता है. हां जी। मैंने कहा भाई एमपी रजिस्ट्रेशन.
होनी है आज। कहा हां जी कहता एमपी साहब. कहां है? मैंने कहा मैं ही हूं।. और वो दिन और मैं मानता हूं 5 साल मेरे. ऐसे गए कि मुझे पार्लियामेंट में कभी आई. कार्ड भी दिखाना नहीं पड़ा क्योंकि मेरी. अपनी जो मेहनत हमने करी उसके बाद लोगों ने. प्यार भी बहुत दिया पार्लियामेंट के अंदर।. 25 26 साल का लड़का सांसद बन जाए। लोग. गंभीरता से लेते हैं अंदर। बिल्कुल लेते. हैं। अगर आप एथिकली साउंड हैं और फ़क्चुअली. करेक्ट हैं. हम. तो इस देश की पार्लियामेंट एक ऐसा.
मैं मानता हूं माध्यम है कि आप कुछ भी. बोलेंगे तो आप 140 करोड़ लोगों तक पहुंच. सकते हैं। पिताजी और दादाजी आपके जब जेल. में रहे और यह पूरा टेन्योर चला था। इसका. क्या साइकोलॉजिकल इंपैक्ट आप पर पड़ा और. क्या इसका इससे क्या सबक लिया आपने? क्या. सीखा? बात तो साइकोलॉजिकल एक इफेक्ट तो यह था कि. कई चीजें जो शायद जीवन में ना आती वो आई।.
एक तो राजनीति है और दूसरी 24 घंटे काम. करना।. शायद 25 साल का युवा जो है वो तो उस एज के. अंदर होता है जिसमें मौज मस्ती है, घूमना. फिरना है और एकदम आप इस पे आ जाते हो कि. सुबह 6:00 बजे गाड़ी में चले गए रात को 12. 1:00 बजे घर वापस आए सोए और मैंने तो वो. दौर भी देखा है शायद मैं डेढ़ डेढ़ दो-द. महीने मेरी मदर से भी नहीं मिल पाता था. क्योंकि हम फील्ड में इतना इंगेज्ड रहते.
थे और पॉलिटिक्स के अंदर भी बात करें तो. मुझे पार्लियामेंट के अंदर रहते हुए यह. फायदा मिला कि हम दो सांसद थे पार्टी के. आईएलडी के उस समय और दो के अंदर भी. छोटी-छोटी पार्टियां जो नॉन बीजेपी एनडीए. की या नॉन यूपीए हम बीच में इकट्ठे बैठते. थे और मेरे साथ उस समय शिवसेना टीडीपी थी. जो बीजेपी का थी लास्ट में वो भी अलग हो. गए तो हमारा जो वो जो विंग था एक सेक्शन.
था जिसमें हम सारे बैठे होते थे उसके अंदर. पैन इंडिया था. और पैन इंडिया से मुझे तमिलनाडु का भी. मेरा दोस्त बना जो 26 साल का था। मेरा. आंध्रा का भी दोस्त बना। जाओ सिविल एिएशन. मिनिस्टर है। मेरा महाराष्ट्र का भी दोस्त. बना जो एकनाथ जी का बेटा है या गोपीनाथ जी. की बेटी है या पूनम ताई है और मुझे हिमाचल. से लेकर नॉर्थ ईस्ट तक भी दोस्त बनाने का. मौका मिला। और मैं आज अपने आप को खुशनसीब.
मानता हूं कि मेरे साथ के आज शायद पांच. सांसद हैं जो मेरे टेन्योर में मेरे साथ. एमपी थे जो अलग-अलग प्रदेशों के. मुख्यमंत्री हैं।. इंटरेस्टिंग। अभी दोस्ती वैसे ही है या. सियासत में दोस्तियां बदल जाती हैं? नहीं देखिए राजनीति के अंदर दोस्ती ज. पॉलिश होकर पता चलती है। जब आप शायद उनसे. बड़े लंबे समय बाद मिलो और वो कैसे आपसे. मिलते हैं। और मैं मानता हूं डेप्टी सीएम.
के तौर पर मुझे ट्रैवल करने का बहुत मौका. मिला। मैं उनसे जबजब मिला हूं वो उससे. ज्यादा करियस तरीके से मेरे से मिले।. तब तो आप डिप्टी सीएम थे। डिप्टी सीएम से. हटने के बाद अब दोस्ती कैसी है? अभी जब भी मिला हूं मेरे ख्याल से पिछले 8. महीने से. तब तो आप उगते सूरज थे। सांसद सांसद से. सीधे डिप्टी सीएम राजनीति उगते सूरज को. दुनिया प्रणाम करती है। राजनीति में भी. करते होंगे लोग।. अच्छा सवाल तो आप ये कह रहे हैं कि जो. मुख्यमंत्री है वो उप मुख्यमंत्री को उगता. सूरत मान के सलाम करे।.
हां आप लोगों को उम्मीद थी कि आप भी. नेक्स्ट चीफ मिनिस्टर हैं। आप बिल्कुल. बहुत करीब रहे। मैंने क्या छोड़ दिया. इसको? नहीं नहीं मैं उस अभी तो पांच साल है ना. सर तो पांच साल फिर जनता तय करेगी।. पांच साल कुछ नहीं पता राजनीति बहुत छोटी. चीज है। हर रोज बदलती है। ये तो समय आ गया. और समय आने पर हमें मौका अवसर मिल गया।. दोबारा हम उससे मजबूती से लड़ाई लड़ लें।. क्योंकि बीच में तो एक परसेप्शन बन रहा. था। आपने खुद भी उस तरफ हिंट दिए थे कि आप. अगले नीतीश कुमार हैं।. कभी नहीं कहा। डोंट. इशारों-इशारों में था। आपका एक बयान आज.
देश के एक बड़े चैनल पर आपने कोट किया था।. इस चीज के बिल्कुल विरोध में हूं कि आप. मेरी कंपैरिजन किसी ऐसे व्यक्ति से करें. जिसका राजनीतिक करियर 60 साल का है।. 50 इस वजह से आप मना कर रहे हैं।. नहीं मुझे लगा इसलिए मना कर रहे हैं कि वो. बीजेपी और कांग्रेस दोनों में एडजस्ट कर. जाते हैं।. आपने मेरे को कब कांग्रेस से. मैं समझने की बात कर रहा हूं कि लोगों की. एक धारणा शुरू हो गई थी कि जैसे नीतीश जी. हैं कि चाहे साथ में बीजेपी हो या आरजेडी. हो वो दोनों के लिए सर्वमान्य नेता है कि.
उनके बिना सरकार नहीं बन सकती बिहार में।. एक ऐसी इमेज बन रही थी कि शायद दुष्यंत. चौटाला भी उसी तरह किंग मेकर बन जाएंगे कि. बीजेपी और कांग्रेस चाहे जो जीते बिना. दुष्यंत चौटाला के नहीं काम चलेगा। मैं. आपको एक विज़ बड़ा क्लियरली बता दूं कि हम. कोई 40 200 में से 40 सीट जीतकर राज लाने. वाले सोच के लोग नहीं है।. हम. हमारा टारगेट 45 क्रॉस करना है। 90 में से. हम तो पहला चुनाव लड़े थे जब तो हमारे पास. 90 आदमी भी नहीं थे। तो भी हमने 90 खड़े.
करे और 90 खड़े कर कर 87 हमारे कैंडिडेट्स. के नॉमिनेशन क्लियर हुए। जब तो वकील भी. नहीं होता था कि नॉमिनेशन पेपर चेक करा दे. और हम चुनाव में उतरे। हां, हमने हर. पॉलिटिकल पार्टीज के लोगों से संपर्क किया. जो हमारे पास आए. हम. उनको हमने लाकर मैदान में उतारा।. हमें उनका फायदा मिला या उनको हमारा फायदा. मिला। वो भी विधायक बने।. चलिए मैं इसको और स्ट्रेट ब्लंटली पूछ.
लेता हूं। नीतीश कुमार की पॉलिटिक्स आपको. सूट नहीं करती। आपको लगता है ये सही. पॉलिटिक्स नहीं है? क्योंकि आपने जिस तरह. से कहा कि 200 में से 40 सीट लाकर हम नहीं. करेंगे। कुमार. मुझे ऐसा लगा कि आप उस तरह की पॉलिटिक्स. को बहुत पसंद नहीं कर रहे। आपको लगा सिंगल. जॉब हमारा तो टारगेट यही है कि प्रदेश के. अंदर जननायक जनता पार्टी की सरकार बनाए और. उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी। मुझे भी पता. है। संगठन के एक-एक साथी को भी पता है और. हम करते रहेंगे।. यह क्यों सोचे कि हमारा टारगेट ही वो 30%.
है और हम 30% में ही अपने आप को सीमित. रखें। यह हरियाणा विधानसभा चुनाव के पहले. क्या आर्टिकल है जो आपको लेके छपे थे. नितीश कुमार वाले।. लिखने वाला तो कुछ भी लिख सकता है। आज के. दिन तो बहुत लिबर्टी है।. आप खुद बताइए।. ठीक है। संसद में जब आप गए तो आप सवाल. पूछने वाले सांसद के तौर पर जाने गए।. लेकिन कई आपके चाहने वालों को लगता है कि. जितनी पब्लिसिटी आपको मिलनी चाहिए थी या. जितना नाम आपका होना चाहिए था, जितने सवाल. आप पूछते थे या जितने आप एक्टिव थे, उतना. नहीं रहा।. पार्लियामेंट में? हां।.
मैं तो बहुत एक्टिव रहा। मुझे लगता है. नहीं नहीं आपको एक्टिव वो भी कह रहे हैं।. वो कह रहे हैं जितना सवाल जितना एक्टिव आप. थे उस हिसाब से मार्केट वैल्यू में. शायद हरियाणा एक छोटा स्टेट है और बड़ी. स्टेट्स के कंपैरिजन उतना हरियाणा को नहीं. दिखाया जाता या सुना जाता।. यह तो इतिहास रहा है। हरियाणा की हिस्ट्री. से चौधरी देवीलाल जी ही शायद वह व्यक्ति. हैं जो इस देश के सबसे उच्च पद तक पहुंचे. हैं। नहीं तो हमेशा कब्जा ही यूपी का रहा।.
अब जाके मोदी जी गुजरात से आए हैं। नहीं. तो आप अधिकतम. प्रधानमंत्री देखेंगे क्योंकि सिंगल. लार्जेस्ट नंबर जो एमपीज के आते थे वो. यूपी से आते थे और उस कारण यूपी का दबदबा. ज्यादा रहता था। हरियाणा तो बहुत छोटा सा. था।. सारा खान सब तो यहीं से हैं। मोटा-मोटा सब. यहीं से रहेगा। नेहरू गांधी खानदान यूपी. से रहा। शायद यह भी वजह थी कि कांग्रेस. सरकार बने। बीजेपी के अटल जी भी यूपी से. थे। मैं वही बोल रहा हूं ना यूपी का एक. दबदबा रहा है। आज नहीं है। आज अगर आप उठा.
कर देखेंगे तो वो शायद दबदबा पार्लियामेंट. में नहीं है।. ओके।. मगर आप हरियाणा जैसी स्टेट को उठाकर देखो. तो शायद हरियाणा ने वह स्टॉलवर्ड्स दिए. हैं इतना छोटा होने के बाद भी जो देश की. राजनीति को हिलाया है। चौधरी देवीलाल जी. हैं, चौधरी बंसीलाल जी हैं। दो ऐसे नेता. थे जिन्होंने इस देश की राजनीति को अच्छी. तरह समझा और इस देश की राजनीति को अच्छी. तरह चलाया भी है।. नहीं हिलाया तो एक बार आपने भी था जब आप.
ट्रैक्टर ले पहुंच गए थे।. देखिए बिल्कुल वो एक पल था।. क्या था वो संसद में आप ट्रैक्टर ले क्यों. पहुंच गए वो बड़ा चर्चित कांड रहा। नितिन. गडकरी जी के डिपार्टमेंट ने मॉर्थ ने एक. नोटिफिकेशन निकाली. हम. कि जो चौधरी देवीलाल जी ने ट्रैक्टर को. टैक्स फ्री किया था उसको अब कमर्शियल. व्हीकल ट्रीट किया जाएगा और कमर्शियल. व्हीकल जब ट्रीट कर दिया जाता है तो कोई. ट्रैक्टर किसान अनाज लेके मंडी खेत से. मंडी आ रहा है तो भी टैक्स देना पड़ेगा. उसको पीली नंबर प्लेट लगेगी आज भी होता है.
अगर आप ये जो कचरा उठाने वाले ट्रैक्टर. हैं और हैं ये कमर्शियल है मगर उस. नोटिफिकेशन के अंदर फार्मर का एग्रीकल्चर. ट्रैक्टर भी कमर्शियल माना जाएगा। नॉन. एग्रीकल्चर व्हीकल डिक्लेअ होगा।. हम. तो जब मेरे को एक साथी ने गैजेट. नोटिफिकेशन दी तो वो सैटरडे था. और समझ नहीं आया कि हम प्रेस कॉन्फ्रेंस. करें कैसे टाइम लेके नितिन गडकरी जी से. मिलके आए। तो उस समय दिमाग में एक ही चीज.
आई कि ट्रैक्टर मंगाओ दिल्ली में। तो. बहादुरगढ़ का एक हमारा साथी था। उसका. मैंने ट्रैक्टर मंगाया।. उसका पोलशन पास कराया, इंश्योरेंस कराई।. पहले तो यही डर होगा।. और यही ना पकड़ ले।. घर पे लाके रात को खड़ा कर लिया 12:30. बजे।. और पिछले दिन हमने पार्लियामेंट का हमारा. एक विंग होता सीपीआईसी जो पाससेस बनाता था. एमपीज के लिए। अगर वो व्हीकल चेंज कर रहे. हैं स्टिककर के बिना व्हीकल आ रहे हैं तो. आप एक दिन पहले इनफॉर्म करो. और पुलिस वेरिफिकेशन होगी व्हीकल की और.
आपको एक येलो कलर का पास दे देंगे जो. मैंने फ्रेम करा रखा है. हम. तो वो पास मेरा बन के आ गया बन के आ गया. शायद दिल्ली पुलिस को सुबह वो वेरिफिकेशन. में पता चला कि ये ट्रैक्टर है तो वो. लिस्ट में तो उसको कैंसिल कर चुके मगर पास. मेरे पास था और मैं घर से निकल गया और. ट्रैक्टर लेकर मैं ली मेरीडियन के पास से. क्योंकि 18 जनपद पे रहता था वही रास्ता था. और सीधा पार्लियामेंट आ गया और.
पार्लियामेंट का एक नंबर गेट जो आपके विजय. चौक पर है. हम. वहां एंट्रेंस पे क्योंकि गाड़ी का नंबर. तो लिस्ट में था। अच्छा लकीली सीपीआईसी की. जो प्रिंटेड लिस्ट थी उस पे भी नंबर है।. मगर उनके सिस्टम में कैंसिल कर दिया। तो. वो जब आया मैं तो हमारे किसी साथी सांसद. का निधन हो गया और हाउस एडजॉर्न हो गया एक. मिनट में दोनों हाउसेस. दोनों हाउसेस एडजॉर्न हो गए तो जितनी. स्पीड से एमपी अंदर जाते हैं उतनी स्पीड. से एडजन होने के बाद बाहर आते हैं पर जब.
ट्रैक्टर खड़ा और इतनी मीडिया पुलिस तो. पीएम का एग्जिट गेट भी उसके साथ था. ना पीएम निकल पाए ना स्पीकर निकल पाए ना. चेयरमैन निकल पाए तो करतेकरते एक सवा घंटे. की मशक्कत में वहां दिल्ली पुलिस के. डीसीपी और जेसीपी और यह सब आ गए और आकर. कहते हैं हम आपको अरेस्ट करेंगे। तो इतना. मैं पढ़ा लिखा था। मैंने कहा जी. पार्लियामेंट के अंदर अरेस्ट करना है. ड्यूरिंग सेशन तो दो लोकसभा सांसद है. स्पीकर से लेके आओ और एक राज्यसभा सांसद.
था। मैंने कहा चेयरमैन से आप लिखवा कर ले. आओ और हमें अरेस्ट कर लो। पर आप अरेस्ट. किस चीज पे करोगे? मेरे पास ट्रैक्टर है, पोलशन पास है, इंश्योरेंस है। तो एक पुलिस वाला हरियाणा. का था। कहता पिछली लाइट टूटी हुई है।. कहता उस लाइट टूटे हुए पे अरेस्ट कर. करेंगे सर आपको।. मैं कहा कर लो फिर मैं कहा ये मीडिया खड़ी. है। न्यूज़ भी बनेगी टूटी लाइट पे अरेस्ट. हुआ। कितनों को दिल्ली में अरेस्ट करोगे? हम. तो एक सवा घंटे बाद उसमें हमारी स्पीकर.
होती थी सुमित्रा महाजन जी। तो ताई का. मैसेज आया। कहते तू एक नंबर से नहीं चार. नंबर गेट जो बेसिकली विजिटर एंट्री का साथ. था चार नंबर गेट से एंट्री करो और. पार्किंग में ट्रैक्टर खड़ा हो के मेरे. ऑफिस में और मैं खड़ा होके और ट्रैक्टर. अंदर लगा के और उनके ऑफिस में गया कहती. क्या करा है तूने मैंने कहा जी ट्रैक्टर. लेके आया हूं गाड़ी है मेरी कहते नहीं. ट्रैक्टर पार्लियामेंट में नहीं ला सकता. मैंने कहा जब अटल बिहारी वाजपेयी जी. बैलगाड़ी ले आए मैं ट्रैक्टर लाता हूं.
किसान का बेटा होकर आपको उस पर भी आपत्ति. और वो मुझे लगता है एक क्षण था जिसने. पॉलिटिकल माइंड्स के अंदर किसान की जो. मजबूरी बनने जा रही थी उसको जगाया विद इन. मिनट्स हरसिमत बादल जी प्रेस कॉन्फ्रेंस. कर रही है। तमिलनाडु में प्रेस कॉन्फ्रेंस. हो रही है। और ऐसा मुद्दा बना कि नेक्स्ट. मॉर्निंग मॉर्थ ने वो नोटिफिकेशन विड्रॉ. कर ली और फिर मैं गडकरी जी से मिला और.
उनसे जब मैं मिला तो उन्होंने बड़े मेरे. को अच्छे तरीके से समझाया कि हमारे. सेक्रेटरी ने सुझाव दिया. कि इस तरीके से इसको चेंज. उनके आसपास वाले बहुत गड़बड़ लोग हैं। वो. मेरे पडकास्ट में उन्होंने कहा था. और इनके चक्कर में मैं. मैं मानता हूं कि वो उस समय के वन ऑफ द. मिनिस्टर्स आई ऑलवेज एडमायर जो आज भी हैं. कि जब उनको कोई विषय समझ आ जाता है तो ही. टेक्स एक्शन इमीडिएटली. और वो एक्सेप्ट भी करते हैं। मेरे.
पॉडकास्ट में मैंने उनसे टोल पर खूब सवाल. पूछे थे। और मैंने उनको कहा मैंने कहा. आपका नाम लोगों ने टोल मंत्री रख दिया और. मैंने पडकास्ट में सवाल पूछे एंड ही सेड. ही मेंशंड कि ये मेरे आसपास वाले जो कई. लोग गड़बड़ करते हैं इनके चक्कर में डांट. पड़ती है मैं सबको ठीक करूंगा तो बेस्ट. पार्टीज वो चीजों को दुरुस्त करना नहीं. पसंद करते. राजनीतिक आदमी ये तो मैं जब शुरू शुरू में. एमपी बनके घुसा पाल एक आदमी ने मेरे को. बोला के सुनो सबकी करो मन की. हम. मगर कई बार आप इतने ओवर ऑक्यूपाइड होते हो.
कि आप सबको ऑब्जर्व नहीं कर सकते कि कहां. शरारत है और कहां आपको असली सुझाव दिए जा. रहे हैं।. कोई एक फैसला जो आपके आसपास के लोगों ने. सुझाया हो और आपने भी मान लिया हो बाद में. लगा हो यार।. देखिए बहुत होते हैं ऐसे।. कोई एक बड़ा. जैसे हमने सरपंचों की. ऊपर एक प्रतिबंध लगाया था. कि आप 5 लाख तक के ही काम कैश पे करा सकते. हैं।. बचे हुए आपको टेंडर्स पे करना पड़ेगा। वो. विज़न था कि सरपंच आज जेल चला जाता है।.
इंक्वायरियां होती है। जब टेंडर होगा तो. ठेकेदार ने रिस्पांसिबिलिटी और सरपंच का. काम एडमिनिस्ट्रेटर का है। उसका काम ये. छोटे-मोटे नाली और ये बनाने का नहीं है।. सरपंच एक पद बनाया गया था देश की सबसे. छोटी सरकार का नेतृत्व करने का। हम. म शायद धीरे-धीरे सरपंच का काम यही रह गया. कि तूने गली बनवा दी, नाली बनवा दी, टूटी. लगवा दी, ट्यूबवेल लगवा दिया, हैंडपंप. लगवा दिया। और हमारे सरपंची इसीलिए डेवलप.
नहीं हो पाई नॉर्थ इंडिया में। आप जाओ. केरल के सरपंचों को देखो द वे दे वर्क। वो. असली एडमिनिस्ट्रेटर है, चीफ मिनिस्टर तक. से डायरेक्ट बात कर लेता है सरपंच। और. हमारा सरपंच फाइल ले रखता है कि ग्रांट दे. दो, ग्रांट दे दो। मगर मैं मानता हूं कि. यस उस समय हमने सोचा यह ऐसा कर लेंगे तो. हमें फायदा होगा। स्टेट का एक्स चेकर. बचेगा। मगर कहीं ना कहीं वो पॉलिटिकल. रिवोल्ट में बदल गया। कांग्रेस ने मुद्दा. बना लिया और हमारी पार्टी के खिलाफ गया।. ओके। अ आईएनएलडी.
में क्या ऐसा हो गया था कि आपको जीजेपी. बनाना पड़ा।. हमें पार्टी से निकाल दिया गया था और कुछ. नहीं।. उसके पहले आप पर ये आया ना कि आप पार्टी. विरोधी गतिविधियां कर रहे हैं।. नहीं करी। आपके बाप दादा की पार्टी रही. है। तो एक भी गतिविधि ऑन रिकॉर्ड आप मेरे. को दिखा दो जो मेरे. बोलने से या मेरे स्टेज शेयर करने से. पार्टी विरोध की हो तो मैं मानूंगा मैंने. गलती करी।. क्या चार चार लोग एक रैली में अपनी. भावनाएं जाहिर कर रहे हैं।.
उस भावना को आप पार्टी विरोधी कहोगे तो. अलग चीज है। क्या मैंने कांग्रेस से हाथ. मिलाया? कांग्रेस की मैंने मीटिंग अटेंड. करी। कांग्रेस के साथ स्टेज शेयर किया।. मैंने बीजेपी के साथ स्टेज शेयर किया। मैं. तो बल्कि हमारे चौधरी चरण सिंह जी के. परिवार से रिश्ते खराब हुए। सोनीपत चुनाव. में जो चौधरी देवीलाल जी लड़े। हम. उसके बाद शायद दोनों परिवारों ने कभी. स्टेज भी सांझा नहीं किया। मैं तो.
स्वर्गीय अजीत सिंह जी की एक बुक ल्च था. और मेरे को न्योता आया जयंत की तरफ से और. उस न्योते के ऊपर जब मैं गया तो भी मैं. जेल जाकर चौटाला साहब से परमिशन लेके आ. रहा कि जी ऐसा न्योता कहते तुझे जाना. चाहिए चौधरी चरण सिंह जी तो हमारे एक बहुत. बड़े नेता रहे हैं और उसके बाद मैं जयंत. की कैंपेनिंग में गया तो भी मैं चौटाला. साहब से परमिशन लेके आया. तो मैंने आज तक मुझे नहीं याद कि पार्टी. विरोधी गतिविधि. दादा जी से आप इतने क्लोज रहे पार्टी आपके.
पिताजी की भी रही आप खुद वहां से जीत कर. आए फिर ऐसी स्थितियां क्यों बन गई कि आपको. निकाला गया. राजनीतिक तौर पे स्थितियां कब क्या रुख ले. ले. फिर भी आप एक आप आपके बाप दादा की खून. पसीने की पार्टी है ऐसा तो है नहीं आपकी. पार्टी नहीं किया. इस पे तो बेटर जवाब आईएलडी दे सकती है. एक आपने भी तो आकलन किया होगा ना. मैंने तो यही आकलन किया कि कई लोग वहां. बैठे थे उनको यह इनसिक्योरिटी थी कि शायद. डॉक्टर अजय सिंह चौटाला जी की जो मेहनत है. जो उन्होंने काम किया है वह उनको उभरने.
नहीं दे रही और किसी तरह डॉ अजय सिंह. चौटाला जी को साइडलाइन किया जाए और. साइडलाइन का तरीका एक ही है कि एक. एटमॉस्फेयर बनाया जाए और वो कामयाब रहे. अफसोस हुआ था आपको जब ये सब इकट्ठाएं हुई. थी क्या चला था आपके. अफसोस करके क्या मिलता उस समय. नहीं मिलता नहीं एक होता है ना कि एक एक. आदमी का आत्म मंथन चलता है अब तो कई साल. हो गए ये हम पुरानी घटना का जिक्र करते. हैं 18-19 का. मैं एक किताब आपको बता सकता हूं मैलकम. ग्लडवेल की है टिपिंग पॉइंट. हम्म उसमें लिखा हुआ है कोई भी चीज एक पीक.
पे जाती है उसके बाद गिरना शुरू होती है।. ट्रू। और उस समय आपके पास दो ही ऑप्शन है. और वो चाइनीज़ में एक ही शब्द है क्राइसिस. और ओपोरर्चुनिटी या तो मैं सिर पकड़ के. रोऊं या मैं उसको ओपोरर्चुनिटी देखूं कि. ठीक है और मैंने इसलिए आपकी शुरुआत में एक. बात कही कि वो 17 नवंबर जब डॉक्टर अजय. सिंह चौटाला जी ने स्टेट. की मीटिंग बुला ली. हम. और सबकी ये मांग थी कि चश्मे की लड़ाई. लड़ेंगे। हमने एक बात कही थी मैं यूपी की.
तरह पंजाब की तरह लड़ाई नहीं लडूंगा झंडे. डंडे की मैं अपनी नई शुरुआत करूंगा आज. अजीत पवार उठा लो आप शिंद जी उठा लो आप. शिवपाल यादव जी उठा लो आप कितने उदाहरण है. जहां झंडे डंडे पे. पासवान कि झंडे डंडे पे कितनी लड़ाईयां. हुई मगर मैं विज़ मानता हूं डॉक्टर अजय. सिंह चौटाला जी का जब उन्होंने ये बात कही. कहते रू आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं. घुसबम्स तो उस समय मुझे याद याद है। एक-एक.
आदमी के यह शौक था कि यह क्या. और उन्होंने बड़े प्यार से कहा कि बिल्लू. ले तेरे को देता हूं मैं अपना काम खुद. करूंगा। उनको विश्वास था शायद हम पर कि. उनकी जो साथी थे उनकी जो विचारधारा के. अंदर लड़ाई में साथ चले हैं चौधरी देवीलाल. के सोच को लेकर वो सारे खड़े होकर दोबारा. पार्टी खड़ी कर सकते हैं और हम कामयाब. रहे।. सबसे टफ क्या होता है कि नई पार्टी बनाने.
में. कुछ नहीं है। 200 लोग एक कमरे में बैठकर. एक रेजोल्यूशन करें। इलेक्शन कमीशन को. लिखकर भेज दे छ महीने के अंदर पार्टी. नहीं ये तो टेक्निकल बात हो गई। मैं. प्रैक्टिकल बात कर रहा हूं।. प्रैक्टिकल तो सबसे टफ एक ही चीज है कि आप. के पास काम करने वाले योद्धा तो हो।. जैसे मैंने काशी में क्योंकि मैं कांशीराम. जी को सुना मैंने। वो कहते थे कि पहला. चुनाव लड़ो हारने के लिए दूसरा हरवाने के. लिए। तीसरा कोशिश करो चौथा जीत कर आओ। आप. पहले में जीत गए तो मुझे समझना यह. दूसरे मैं पहला जीता दूसरा हारा तीसरा.
हारा चौथा जीता पांचवा हारा. मेरी लाइफ के अंदर आपको ये नहीं पता कि. मैंने चुनाव कितने लड़े. हम. मैं 5 साल में 10 चुनाव लड़ा. नहीं सॉरी 5 साल में चार चुनाव. एज अ न्यू पॉलिटिकल पार्टी बात कर रहा था. कि मैं ये ये उदाहरण कम है जैसे अभी बिहार. में प्रशांत किशोर लगे हैं वो भी दावा कर. रहे हैं कि हम जीत जाएंगे हालांकि. उन्होंने ठीक-ठाक टाइम ले रखा है। तैयारी. का टाइम लिया दो-ती साल टाइम लिया।. अच्छी मेहनत कर रहे हैं। मैं तो उनसे. दो-तीन बार मिला हुआ हूं। उनका विज़न. क्लियर है। मगर क्या जनता उस विज़न के साथ. जुड़ेगी? हां, इसीलिए मैं समझना चाह रहा हूं कि. उनका पॉडकास्ट जब मैंने किया तो उनकी.
परेशानियां मुसीबतें समझी। आप बहुत जल्दी. चुनाव में चले गए थे। तो क्या मुसीबतें. होती या वो एडवांटेज होता है कि जब आप. पॉलिटिक्स में शहीद करार दिए जाते हैं. क्योंकि जो भी पार्टी से निकाला जाता है।. एक बड़ी सिंपैथी तो जाती है उधर।. तो वो शहादत में विजेता बन गए। सिंपथी. आपका एक पत्रकार साथी मेरे को हमेशा कहता. है कहता आपके साथ बड़ी दुविधा है. हम. ठीक-ठाक सीनियर पोस्ट पे कहता आपके साथ एक. दुविधा है कहता और सारे तो रो-रो के. इलेक्शन जीतते कहते आपने अग्रेशन में.
इलेक्शन जीता. हम. जब हम मैदान में उतरे तो हमारा विषय यह. नहीं था कि हम आईएलडी को कोसे हमने नाम भी. नहीं लिया होगा शायद उस पूरे कैंपेन में. उस समय हम कांग्रेस के विरोध में लड़ रहे. थे और बीजेपी के विरोध में लड़ रहे थे और. दोनों के विरुद्ध में अपनी लड़ाई हमने. मजबूती से लड़ी और मैंने 4 साल जब. गवर्नमेंट का हिस्सा रहकर सरकार चलाई है. हम. तब भी अपनी बातें बहुत हद तक मनवाई है. हम. बहुत से ऐसे हरियाणा के आज भी फैसले हैं.
जो अगर हम गवर्नमेंट में ना होते तो कभी. ना पूरे होते। हिसार एयरपोर्ट है। मैं. फक्चुअली आपको एक चीज बोलूंगा। हम नोएडा. में बैठे हैं। मेरे यहां से 2025 किलोमीटर. दूर जेवर एयरपोर्ट बन रहा है। एयरपोर्ट. अथॉरिटी ऑफ इंडिया का है।. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया का है। आप मानोगे. हिसार एयरपोर्ट का निर्माण हमने बाद में. शुरू किया। जेवर एयरपोर्ट का गवर्नमेंट ऑफ. इंडिया ने पत्थर पहले रखा। हमारे वहां पर.
प्रधानमंत्री भी उतर चुके हैं। एयर इंडियन. जो एक्सप्रेस की हर रोज फ्लाइट भी शुरू हो. चुकी है। और जेवर में अभी रनवे का काम भी. नहीं कंप्लीट हुआ। एग्जजेक्टली सेम साइज. रनवे है। सेम टेक्नोलॉजी रनवे है। मगर. हमारा विज़न क्लियर था। और उस विज़न के ऊपर. मेरे को हर महीने बैठना पड़ा। मैं बैठा।. मैंने काम करवाया।. लोगों ने बहुत आरोप लगाए। साढ़े चार साल. में। मगर क्या हम अपना विज़न पूरा नहीं कर. पाए?" करा हमने हरियाणा के अंदर 25,000.
कि.मी. इतनी छोटी स्टेट के अंदर सड़क का. निर्माण या रिकारपेटिंग करवाना क्या ये. टास्क नहीं था? आज आप हरियाणा चले जाओ. आपको लगभग प्रदेश के मेजॉरिटी जो बड़े. रास्ते हैं वो बिल्कुल ठीक मिलेंगे। कहीं. कोई दिक्कत नहीं है। कोई मानसून में टूटता. है तो साथ के साथ रिपेयरिंग हो जाती है।. वो इंफ्रा बना के दे दिया हमने स्टेट को।. तो फिर 14.8% से 1% क्यों हो गया? 10 सीट. से जीरो क्यों हो गए? आप आप का जो चुनाव.
पड़ रहा था. आप शायद पांचवें नंबर पर आए थे। दो. निर्दलीय भी आपसे ऊपर पहुंच गए थे। जबकि. उस सीट पर क्लोज कंपटीशन में शायद 32 से. 37 वोट से बीजेपी जीती थी और वहां पर आप. दो निर्दलीय की बात है। पांच नंबर पर आपके. यहां ऑलमोस्ट सबकी जमानत जब्त हो गई। अगर. इतना काम आपने किया तो फिर जमानत जप्त. होने की नौबत क्यों हो गई? और 1%. शुभांकर जी ये समय की बात है।. इतना बुरा समय काल. यह तो ऐसा था कि बिल्कुल आपको नकार दिया. गया कि आप एग्जिस्ट ही नहीं करते। आपके. अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिया।. जब आपके साथ लड़ने वाले लोग और आखिरी.
क्षणों में छोड़कर चले जाते हैं अपने. लालसे के लिए तो मुझे लगता है जनता भी. सोचती है और जब वोट कंसोलिडेट होना शुरू. होता है और जब दो पार्टीज के बीच में. कंसोलिडेशन शुरू होती है तो और किसको वोट. मिले हरियाणा में आप मुझे बताइए कोई और. पॉलिटिकल पार्टी बताइए जिसको 5% वोट भी. मिले कांग्रेस बीजेपी को छोड़ के. आईनएलडी खाता खुला कम से कम आपका खाता भी. नहीं खुला. खाता खुलना.
बीजेपी के साथ पूरी सेटिंग कर कर बीजेपी. का कैंडिडेट ना उतरे रातोंरात में विड्रॉ. कर जाए और टीम बनके 85 सीट्स पे उनकी मदद. करनी है और वो पांच पे आपकी करे तो अलायंस. ही कर लेते. खुले पत्ते हैं ये तो कोई छुपी बात नहीं. और वहां पर भी कितने से खाता खुला है. दोनों इलेक्शन पिटीशन में हैं और दोनों के. एक 700 वोट हैं शायद शायद एक 3000 वोट है. और इलेक्शन पिटीशंस है। हियरिंग शुरू हो. चुकी है। किस दिन फैसला आ जाएगा? ऐसे खाता.
भी नहीं लो।. आपको लगा था बीजेपी जीतेगी क्योंकि लोग. बहुत सारे लोग ये मान रहे थे कि इस बार. बीजेपी की दाल नहीं गलने वाली।. चुनाव बहुत बदला। पहली चीज जब हमारा चुनाव. एक तारीख को पोल होना था।. हम. और उसका बहाना लेकर हॉलिडेज़ का और उसको. पांच तक इलेक्शन कमीशन ने फिर एक्सटेंड. किया। उस समय परिस्थितियां बनने लगी।. इलेक्शन कमीशन ने एक्सटेंड किया मतलब. बीजेपी के इशारे पर. बिलकुल. बीजेपी की चिट्ठी है ऑफिशियल लिखी हुई कि. हमारे यहां यह उत्सव है और डेट बदल दी जाए.
फिर किसका इशारा है बीजेपी इलेक्शन कमीशन. टैप में काम कर रहा है जब डेट बदल सकते. हैं बीजेपी की चिट्ठी पर तो फिर टैप में. है नहीं है इसका तो आप पत्रकार हैं आप. ज्यादा वो निकाल सकते. मगर मैं आपको एक चीज बता सकता हूं. नहीं इलेक्शन कमीशन हर बार ये कहता है कि. जब इलेक्शन में विपक्षी पार्टियां जीतती. हैं तो वह तारीफ कर देती है। जैसे ही. बीजेपी जीतती है वह कभी ईवीएम का कभी टाई. अप का आरोप लगा लेती है। यह अपनी कमियों. को छिपाने के बहाना वो कहते हैं।.
ईवीएम की बात ही नहीं कर रहा हूं। मैं तो. सिर्फ डेट चेंज की बात कर रहा हूं। हम्म।. बड़ा स्पेसिफिक चीज है। हरियाणा उदाहरण है. कि इलेक्शन कमीशन पहले एक तारीख चुनाव की. निकाल देता है और फिर अपने आप एक बीजेपी. के पत्र के ऊपर और उसको चेंज करके पांच. तारीख कर देता है।. क्या फर्क पड़ा एक से पांच में? एक से पांच में बहुत फर्क पड़ा। जो. कांग्रेस की गलतियां थी उसने बीजेपी को. फायदा पहुंचाया। चाहे वह कुमारी शैलजा का.
रूसना हो, चाहे बागियों को चुनावी मैदान. में ना बैठाना हो, कहीं ना कहीं बीजेपी. सक्सेसफुल रही। और कांग्रेस के अंदर एक. सोच बन गई थी मिस्टर हुड्डा की कि मैं 50. का आंकड़ा ना क्रॉस करूं। क्योंकि अगर 50. क्रॉस होता तो शायद सीएम दूसरा कोई आ. जाता। तो वो इस डर में थे कि मैं नंबर्स. इतने ही रखूं कि चीफ मिनिस्टर मैं बनूं और. वो पिता पुत्र दोनों लगे रहे। लगे रहे लगे. रहे और कांग्रेस किस जगह आकर बैठ गई?
मतलब यह बड़ा दिलचस्प है कि हमको जितना भी. है लेकिन इतने तक ही जीतना है।. तो आप किसी. हां मतलब ये कॉमन ये तो ओपन चीज़ थी।. किसी लेमन हरियाणवी से पूछ लीजिए। आपके. यहां कोई आता होगा तो उसके भी माइक लगा के. पूछ लीजिए कि क्या हुड्डा 50 क्रॉस करवाना. चाहता था? सारे कहेंगे नहीं इसलिए तो. सत्यानाश कर दिया कांग्रेस का।. और असलियत है आप मुझे बताइए ना स्ट्रांग. होल्ड कौन सा है उनका ओल्ड रोहतक हम.
सोनीपत की छह सीटों में से एक 7000 वोटों. से जीती. जींद जहां से मैं भी हारा हूं चुनाव उनने. चाहे उचाना में बागी खड़ा करा हो चाहे. नरवाना में खड़ा कराया हो आज यह हालात है. कि रणदीप सुरजेवाला का आदमी ना जीत जाए तो. दूसरा खड़ा कर दो जींद में एक जीती विनेश. फोगाट 7000 वोटों से भिवानी एक भी नहीं. जीते दादरी एक भी नहीं जीते रोहतक की चार.
जीते और तो और जो रोहतक का पार्ट है झज्जर. उसके अंदर भी वो एक सीट हार गए अपना. स्ट्रांग होल्ड में कहां वो दबदबा दिखा. पाए. अपने स्ट्रांग होल्ड को तो वो खो गए यह तो. नॉर्थ हरियाणा के लोगों ने कांग्रेस को. सीटें दे दी मेजॉरिटी जो आज ही आप नंबर. देखते हैं। नहीं तो भूपेंद्र हुड्डा ने तो. राई की सीट खोई है कैंडिडेट बदलकर। जब. लोगों की डिमांड थी कि आप यहां गुहाना में.
कैंडिडेट चेंज करिए। पुराना कैंडिडेट लाए. वो हार गया। खरखौदा में वो हार गया। आप. एक-एक सीट मेरे से पूछ लीजिए। मैं बता. दूंगा क्यों हारे। आपकी नजर में बीजेपी और. कांग्रेस हरियाणा के लिए ज्यादा. नुकसानदायक पार्टी कौन सी है? जिसने. हरियाणा का ज्यादा नाश किया है।. दोनों हैं।. कोई एक जिसको आप मानते हो कि ज्यादा ही. है।. ज्यादा बेहतर कौन है फिर चलिए। देखिए. ज्यादा बेहतर किसने किया हरियाणा के विकास. के लिए. जननायक जनता पार्टी ने। मैं आपको एक चीज. बताता हूं। यह चीज आप किसी भी राजनीतिक.
व्यक्ति से पूछ लीजिए। रीजनल पार्टीज. हमेशा स्टेट डेवलपमेंट की सोचेगी। नेशनल. पार्टी की मजबूरियां बन जाती है कि उनको. पूरे देश की डेवलपमेंट के विज़न के साथ कई. स्टेट्स के विज़न को सप्रेस करना पड़ता है।. अब जीएसटी है।. आज हम 40% गाड़ियां बना रहे हैं। हम 60%. बाइक्स बना रहे हैं देश के लिए। हम जेसीबी.
सबसे ज्यादा बना रहे हैं। ट्रैक्टर्स बन. रहे हैं और बन रहे हैं। जीएसटी मिल कितना. रहा है? क्योंकि कंजमशन पे है। आज यूपी. में बैठे हैं। हम 2% आबादी हैं। 16% आबादी. है। अब उत्तर प्रदेश में एक फैक्ट्री ना. लगे। तो भी 16% के हिसाब से टैक्स तो आ ही. रहा है ना। इसलिए तो आप न्यूज़ पढ़ते. होंगे देश की सबसे ज्यादा कंजमशन वाली. स्टेट जीएसटी लेने वाली स्टेट यूपी यूपी. में तो आना ही है भाई. अब आप जब टैक्स को बनाई इस तरीके से दोगे.
कि कंजमशन पे होगा तो हरियाणा में हम 2%. आबादी को 9% तो कर नहीं सकते या तो मैं कल. नारा दे दूं भाई सब 5-प 10 बच्चे करो कि. स्टेट को टैक्स आएगा मूर्खता है मेरी अगर. मैं ऐसी बात करूंगा तो हमने दूसरी चीजें. शुरू करी अल्टरनेट सर्विज लेकर आए, आईटी. सेक्टर लेकर आए, डाटा सेंटर्स को हमने. लाने का काम किया। स्टार्टअप्स को लाने का. काम किया। आज उठाकर देखो। हरियाणा बीइंग. 2% ऑफ दिस कंट्रीज पपुलेशन फिर भी वी आर द.
लार्जेस्ट वन ऑफ द लार्जेस्ट टैक्स. पेयर्स। क्यों है? क्योंकि हम विज़न दे. पाए। नहीं। बट एक जो आपका डर शुरू में. आपने मुझसे कहा कि मैंने बीजेपी इसलिए भी. ज्वाइन की वरना वो जो साथ अभी गए थे वो. पहले भी जा सकते थे। ये डर तो फिर हमेशा. बना रहेगा। तो फिर जनता. क्यों बना रहेगा जिस दिन मेरे पास 47. होंगे. 47 47 तो मेजॉरिटी हो गई कि 46 पा गए तो. आप मेजॉरिटी में चले गए बट अगर मेजॉरिटी. से आप आगे पीछे रहे 15 20 25 सीटें तो ये. तो डर हमेशा रीजनल पार्टी से रहेगा. क्यों मैं अपना.
कि आप जिन लोगों को ला रहे हैं वो. लॉयलेस्ट जनता से नहीं है वो उनके साथ. पैसों की लॉयल्टी है. मैं अपना विज़न इतना छोटा क्यों लेके चलूं. जब मुझे यही इसी डर में जीना है मैं मेरा. विज़न 90 सीटों का रखता हूं मैं 10 सांसदों. का रखता रखता हूं और हां विश्वास यह भी. रखता हूं कि इस मेहनत के साथ हम देश में. अपनी पार्टी को एक्सपेंड करें। हमने तो. जाके राजस्थान में भी चुनाव लड़ा है 20. सीटों पर।. हम. क्या मैं बीजेपी से डरा था? नहीं डराए।. 2019 में भी जब जीते थे तो उस वक्त भी.
बीजेपी के खिलाफ एक माहौल था हरियाणा में।. फिर आप उनके साथ गए। उनकी सरकार बन गई। तब. भी बहुत सारे लोगों का कहना था कि यह एक. ऐसा लोकतंत्र है जहां पर जिन लोगों ने. बीजेपी के खिलाफ आपको वोट दिया। पहली बार. चुनी हुई पार्टी को इतनी 15% लगभग वोट दे. दिया। वो बीजेपी के साथ अल्टीमेटली चला. गया।. आप पॉलिटिक्स के अंदर. हम. जब आते हैं. हम. तो आप क्या विज़न लेके आते हैं? सत्ता में जाएंगे सेवा करेंगे। आप कहने को. तो यही कहते हैं कम से कम।.
सेवा नहीं जो आप वादे करते हैं वो पूरे. करेंगे।. हम. यही विज़न है।. हम. मोदी जी ने कहा मैं देश में 370 हटाऊंगा।. हटा ही रहा।. हम. कोई विज़न ही लेकर आए थे। तब लोगों ने. विश्वास किया कि मैं इनकी करप्शन बंद कर. दूंगा। मुझे तो नहीं दिखा सोनिया गांधी. राहुल गांधी जेल में गए। वो पॉलिटिकल. बातें हैं।. हम. मगर ये विषय जब हम बात करते हैं कि भ हम. क्या लिख रहे हैं। अगर मैं मेरे इलेक्शन. मेनिफेस्टो की इलेक्शन में करे वादों की. बात करूं तो आई हैव अचीव्ड व्हाट आई.
प्रॉमिस्ड। मगर शायद जनता को समझने में. समय लग सकता। विचारधारा. हरियाणा का प्रगति है सबसे बड़ी विचारधारा. क्या मैंने किसी दिन हरियाणा की प्रगति को. सैक्रिफाइस. वो तो आप दावा अभी भी कर रहे हो कि आपने. इतने सारे काम किए 20 काम आपने गिनाए बट. फिर प्रैक्टिकल रिजल्ट ये है कि आपको. विचारधारा के नाम पर ये वोट नहीं मिले. क्या अखिलेश ने यूपी में काम नहीं करे. किए हैं. क्या सुखबीर बादल ने पंजाब में काम नहीं. किया है बादल साहब के टाइम पे कितने ऐसे.
लोग हैं चलो आपसे उदाहरण ले लेता हूं. इस देश का आईटी का रेवोलशनिस्ट चीफ. मिनिस्टर कौन था? आप किसे मान. चंद्रबाबू नायडू. जी. सबसे पहले साइबर आबाद बनाने का सपना था।. लोगों ने अगले इलेक्शन में इतनी बुरी तरह. क्यों हराया? तेलंगाना का निर्माता केसीआर था।. हम. क्या रिजल्ट आए? खुद. कई स्टेट्स ऐसे जहां वन बाय वन करते हैं. वो।. वन बाय वन छोड़ो। उड़ीसा का सबसे बड़ा.
लंबा सर्विंग चीफ मिनिस्टर. नवीन पटनायक साहब. अपनी खुद की विधानसभा हार जाते हैं।. किया सर 22 23 साल राज कर लिया वहां पे।. भाई राज. उनके हेल्थ इश्यूज भी हो रहे थे और बहुत. सारे और भी फैक्टर्स होंगे।. आप त्रिपुरा चलिए। कितने साल रहे? वहां. मुख्यमंत्री? चेंज चेंज तो होता ही रहता है ना सर. चीजें। अरे चेंज होना एक बात है बापोती. नहीं है दो. चीफ मिनिस्टर की कुर्सी या एमएलए की. कुर्सी. नहीं बिल्कुल ठीक बात.
किसी की एक होता है हारना समय के साथ. एक होता है हारना हारजीत होती है सियासत. का हिस्सा है कभी आप जीतेंगे कभी आप हार. जाएंगे अखिलेश भी हारे जीते आप बाकी जो. उदाहरण दे रहे हैं एक होता है बिल्कुल. अस्तित्व पे क्वेश्चन आ जाना आप अपनी. पार्टी सबसे बड़े चेहरे फिर मैं कोट कर. रहा हूं सबसे बड़े चेहरे आप आप सांसद भी. बने डिप्टी सीएम बने बहुत पॉपुलर फेस रहे. आपका खानदान का बहुत बड़ा रुतबा रहा है. दादा परदादा सब रुतबा रहा वहां से आपका. इंडिविजुअल पांच नंबर पर आ जाना दो. निर्दलीयों का पर आना यह थोड़ा.
क्वेश्चननेबल हो गया. चलिए आप पंजाब उठा लीजिए सुखबीर बादल तो. अपनी पार्टी के लीडर हैं. हम. वो क्यों चुनाव हारे सरदार प्रकाश सिंह. बादल. एक नए लड़के से चुनाव हार जाते हैं मैं. आपको कितने उदाहरण दे सकता हूं जहां चीफ. मिनिस्टर भी तीसरी तीसरी चौथी चौथी पोस्ट. रिवाइवल कैसे करोगे फिर आप. मेहनत करके लोगों के बीच में रहकर लोगों. के विषय उठाकर. क्या आपको फीडबैक मिला? क्यों आप आ रहे? आपका क्वेश्चन. देखिए हमारे सबसे बड़ा रीज़न तो यही रहा कि.
जो प्रोलोंग ये फार्मर एजिटेशंस चले. हम. दो हरियाणा के अंदर. हम. क्योंकि बिल्कुल इलेक्शंस के दौरान शुरू. हो गया। एक पंजाब वाला जो बॉर्डर बंद हुए. हमारे. और एक गवर्नमेंट बनते ही हुआ था। वो हो. गया। फार्मर के बाद रेसलर्स वाला इशू आ. गया। हम वी आर अ स्पोर्ट्स फनेटिक स्टेट।. आज भी अह 33 40% मेडल्स हरियाणा लेकर आता. है।. वह इशू हो गया। कहीं ना कहीं कांग्रेस के. तो यह यह इशूज़ जिनके खिलाफ था। बीजेपी के. खिलाफ ये दोनों इशूज़ थे।. प्रोटेस्ट बीजेपी तो जीत गई।.
बीजेपी के खिलाफ थे। कांग्रेस के. प्रोपेगेंडा थे। मगर एक हरियाणवी में. कहावत है कि लड़ियो झगड़ियो छोट की भू पर. आकर पड़ी है।. और घर में लड़ाई होती है ना।. सारा दोष किसका निकाला जाता है? सबसे छोटी. बहू का। हम. जब आप जूनियर पार्टनर हो तो आप दोषी आप. बनते हो. क्योंकि आप अपने थे ना बीजेपी को सेंट्रल. पार्टी माने थे। आपको घर की पार्टी माने. थे कि हमारा बच्चा तो हमारे लिए खड़ा ही. होगा। ये कुर्सी पकड़ के नहीं बैठ जाएगा।. हमारी एक और कहावत भी है कि अपना मारे छा. में घेरे।. हां.
कि अपना आदमी मारता है ना तो फिर भी छाए. में बैठा के आता है कि इस तरह को धूप ना. लगे।. हम. तो हम हरियाणा की सोच के और हरियाणा के. विज़न को आगे ले जाने की लड़ाई में मैं. पीछे नहीं हटूंगा। निरंतर काम करूंगा। तो. मुझे और मेहनत करनी पड़े 20 के 21 घंटे. काम करना पड़े। मैं 21 घंटे भी काम. करूंगा।. क्या आईडियोलॉजी क्या है आपकी? हरियाणा को आगे कैसे लेके जाए? युवा को. सशक्त कैसे? वो तो बीजेपी भी कह रही है। कांग्रेस भी. कह रही है। आप बीजेपी नायब सिंह साहब से. भी मिलोगे वो भी कह रहे हैं हम हरियाणा को. आगे ले जा रहे हैं। आप किसी से भी मिल.
लीजिए। हुड्डा साहब से मिले वो भी कहेंगे. हम हरियाणा को आगे ले जा रहे हैं। डिफरेंस. क्या है? कैसे बताओगे आप कि मैं हरियाणा. के लिए सही हूं।. देखिए पहली चीज बताता हूं मैं आपको।. एक बहुत बड़ी समस्या फार्मर्स की थी हम. कि आड़तियों का ब्रिटिश एरा से कब्जा था।. हम. पैसा सरकार का जो भी आता था वाया आड़ती. किसान को जाता था और उसमें किसान परेशान. था। क्या मैंने वो सिस्टम को सुधारा नहीं? मेरा विजन था इंडिया का पहला प्रदेश मैं. बन पाया जिसमें हमने 48 आवर्स में.
गवर्नमेंट टू फार्मर पैसा ट्रांसफर कर कर. दिखाया और प्रधानमंत्री जी ने हरियाणा को. देखते हुए देश में लागू किया।. आज महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए. प्रधानमंत्री ने तो बाद में बिल पास किया. कि 33% रिजर्वेशन होगी। हरियाणा में हर. दूसरी सीट पर महिला सरपंच है।. हमने कानून पारित किया विधानसभा से।. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से अप्रूव करा। वी. बिकम द फर्स्ट स्टेट जिसने हरियाणा प्रदेश. को लाल डोरा मुक्त किया। आप नोएडा में.
बैठे हैं। आप देखेंगे पुराने गांव बसे हुए. हैं लोग कहते हैं जी ये लाल डोरे हैं।. इनमें कुछ भी बना लो कैसे भी बना लो। मगर. उनकी रजिस्ट्रियां नहीं होती। सरपंच या. कोई एमसी लिख के दे देता है इतने बाय इतने. गज का प्लॉट है। हमने डिजिटल मैपिंग करवाई. और मैंने कोई प्राइवेट कंपनी नहीं दी।. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की एक ऑर्गेनाइजेशन. थी जिसको बहुत कम काम था।. हमने उसको एंगेज किया। उसको कहा ड्रोंस. खरीदो। ड्रोंस का सपोर्ट किया। और आज. सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया इतना बड़ा बन गया.
कि पीएम ने हरियाणा के फर्स्ट विलेज को. मॉनिटर करते हुए सिरसी को। आठ स्टेट्स के. अंदर लालडोरा मुक्त का प्रोग्राम चलाया।. और सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया के ऑफिस में आप. आज जाकर काम देखोगे तो आप कहोगे कोविड के. बाद रेवोल्यूशन आ गई इस महकमे में। हमने. प्रदेश के अंदर. हम. कैसे रोड नेटवर्क्स को मॉनिटर करा जाए।. कैसे छोटी-छोटी चीजों को डिजिटलाइज कर कर.
आज के दिन कोई ठेकेदार सड़क बनाता है तो. उसको बुक नहीं भरनी। आज अपने मोबाइल पर. गवर्नमेंट को फीड देता है और उसका भी. ट्रांसपेरेंट एक मैकेनिज्म बना दिया कि. नीचे जेई से लेकर और चीफ इंजीनियर तक सब. स्टेप बाय स्टेप डिजिटली जाता है फॉर. अप्रूवल्स. और उससे हरियाणा को फायदा मिला। हम पैसा. बचा पाए जो चीज एक बार कारपेट होती थी और. कह देते थे बारिश आ गई जी दोबारा करनी. पड़ेगी। आज जब उसको हर रोज फोटो डालनी है.
प्रोग्रेस वर्क की तो वो चीटिंग नहीं कर. सकता सरकार के साथ। खट्टर साहब एक. सक्सेसफुल सीएम थे या फेलर? नहीं अच्छे थे।. मैं उनको फेलियर तो नहीं बोलूंगा जिन्हें. हरियाणा को 10 साल चलाया है। कोई भी चीफ. मिनिस्टर फेलियर नहीं है।. नहीं क्योंकि जब आप काम गिना रहे हो अपने. 4 साल जो आपका टेन्योर जो था तो इसमें कई. सारे आप अच्छे काम गिना रहे हो। फिर मुझे. लगता है कि खट्टर साहब को तो क्रेडिट. मिलता है। मिला ही नहीं।. क्यों नहीं मिला? उन्होंने भी कितनी चीजें. करी है।. क्योंकि जो आपने अचीव किया होगा वो उनकी. लीडरशिप में ही किया साथ में।.
आप उनके डिप्टी थे। टिपी हो. तो लड़े तो जीते नाम सरदार का हारे तो. सेरा सरदार का. चलो यह तो यह राजनीतिक क्रेडिट्स की लड़ाई. है. हां. सारे लेते रहेंगे. हम. अब नितिन गडकरी जी इतना अच्छा काम भी करें. क्रेडिट किसका है. हम लड़े तो जीते नाम सरदार का। हालांकि. गडकरी साहब की अपनी एक अलग फैन फॉलोइंग. है। तो उनको क्रेडिट मिल जाता है। बाकी. बाकी विभागों में सच है कि गडकरी जी के. अलावा बाकी विभागों में जो काम होता है. उससे क्रेडिट मोदी जी को जाता है। गडकरी.
जी अपना ले लेते हैं क्रेडिट।. तो मैं अपना ले लेता था।. अच्छा ये चंद्रशेखर आजाद के साथ जो गठबंधन. था ये सही था। गलत फैसला था? देखिए समय की मांग थी और मुझे लगता है कि. एससी वर्ग का एक बहुत बड़ा चंक कांग्रेस. से नाराज था और कहीं ना कहीं हमें विश्वास. था वो हमारे साथ जुड़ेगा और एक और एक 11. तो है ही। चंद्रशेखर मेरी उम्र के हैं और. मैं तो मानता हूं कि उनका भी अच्छा भविष्य. अगर मेहनत करते रहे और हमें तो लंबा.
राजनीति करनी है और दोनों मिलकर चलते. रहेंगे तो और ज्यादा प्रभावित बदलाव ला. सकते। चंद्रशेखर आजाद उनके साथ दलितों का. मुसलमानों का कई और पिछड़े वर्ग के लोगों. का एक अच्छा जुड़ाव रहा है। उनका राइस भी. देखा हमने भीड़ भी देखी है उनकी रैलियों. में। लेकिन एक वर्ग है जो उनसे नाराज भी. रहता है। खासतौर पर कईयों का ये आकलन था. कि आपको उस वर्ग ने थोड़ा और साइड किया. क्योंकि आप उनके साथ गए थे। आप इस आकलन को. सही मानते हो? मैं ये मानता हूं कि समय की. जब मांग होती है किसी विषय पर और समय के.
अंदर जनता चाहती है कि आप मिलकर चलो और. अगर आप उसको नहीं समझ पाते तो नुकसान होता. है। मैंने तो चंद्रशेखर से पहली बार. जिंदगी में जब बात करी थी जब हम राजस्थान. चुनाव लड़ रहे थे और इनका हनुमान बेनीवाल. के साथ अलायंस हुआ था। तब भी हमने ये. विचार रखे थे कि हम तीनों मिलकर लड़ ले. लेते। मगर उससे पहले इन आरएलपी का और आजाद. समाज का अलायंस हो गया तो तो हम मिलकर. नहीं चल पाए और फिर हरियाणा के चुनाव आए. तो हमने मिलकर जब चर्चा करी तो चर्चा.
फ्रूटफुल थी और मैं तो मानता हूं अगर इसी. तरह मेहनत करते रहेंगे तो आने वाले भविष्य. के अंदर आजाद समाज बसपा की जगह भी ले सकती. है।. आप ये गठबंधन कंटिन्यू करोगे उनके साथ।. बिल्कुल मेरे तो निरंतर बातचीत भी होती. है। अभी तो कोई चुनाव आ नहीं रहे। और अगर. उनको कभी मेरी यूपी में जरूरत पड़ी या. किसी और प्रदेश में जरूरत पड़ी तो जरूर. नहीं मैं हरियाणा कॉन्टेक्स्ट बात कर रहा. हूं। जैसे जब भी चुनाव आएंगे. हरियाणा तो अभी 4 साल बाद लोकसभा 4 साल. बाद लोकसभा है तो बिल्कुल उस समय.
आयोलॉजिकल सेम पेज पे आप दोनों लोग हो।. हां. हरियाणा को लेकर. मैं एक चीज बड़ी अच्छी मानता हूं कि हम. दोनों ने जो इस चुनाव में टाइम बिताया. इकट्ठे कैंपेन में उसके अंदर मैंने देखा. कि उनका विज़न क्लियर है कि उन्होंने करना. क्या है आगे भविष्य में और मुझे. वो चीज लगती है कि अगर वो स्वस्थ रहे, भगवान उनको इसी तरह एनर्जी देते रहे कि वो. काम करते रहे तो जरूर वो आगे बढ़ेंगे।. क्या पसंद है आपको चंद्रशेखर आजाद? एनर्जी है। क्लियर विज़न है, लीडरशिप है और.
कहीं ना कहीं जो उनके साथी. क्या विज़न में क्लेरिटी अच्छी लगी आपको. उनके? उनकी जो कार्यशैली है स्पेसिफिकली. जो अगर मैं एससी कम्युनिटी की बात करूं. उनकी पीड़ा है और उसकी आवाज बनकर वो. रातोंरात पहुंचते भी हैं, उठाते भी हैं और. उनको न्याय दिलाते हैं। ये बहुत कम लोगों. में क्वालिटी होती है कि 24 आवर्स अब. अवेलेबल रहो इन चीजों के लिए।. सो यू सी अ ब्राइट फ्यूचर इनका।. बिल्कुल।.
ओके। ग्रेट। अ हरियाणा या बाकी भी देश के. स्टेट्स में क्षेत्रीय दलों का कमजोर. होना। कई स्टेट्स में बीजेपी कांग्रेस जो. हो रहा है। क्षेत्रीय दलों का कमजोर होना. एक नुकसानदायक चीज है। जैसे आपने भी कहा. कि हरियाणा ही देख लीजिए बीजेपी कांग्रेस. के अलावा कौन है जो 5% ही पहुंच पाया।. देखिए ये समय. पहले मायावती जी भी थी और कई सारे. छोटे-छोटी पार्टियां निकलती साल में एक. बार यह समय आता है. जब नेशनल पार्टीज थोड़ी मजबूत होती है।. हम. और ये अटल जी के टाइम पे भी आया.
हम. ये इंदिरा गांधी जी के टाइम पे जब नारा. चला था इंडिया इज इंदिरा इंदिरा इज इंडिया. हम. उसके बाद क्या हुआ था? राइज ऑफ रीजनल. पार्टीज थी। 2 साल. और जब राइज़ ऑफ़ रीजनल पार्टीज हुई. हम. तो कहीं ना कहीं देश के अंदर स्टेटहुड्स. और स्टेट डेवलपमेंट की बातें शुरू हुई और. ये समय अनुसार आता है। आज के दिन नेशनल. पार्टीज के अंदर कांग्रेस बीजेपी है। आप. 2000 29 का जो इलेक्शन होगा लोकसभा का आप. उसको देखना। उसके अंदर कहीं ना कहीं.
क्योंकि बीजेपी देश की सर्विंग पार्टी है, गवर्नमेंट चला रही है। इसके विरुद्ध. रीजनलिज्म की आवाज उठेगी और जो सप्रेस. रीजन है वो अपनी ताकत को आगे लाकर देंगे।. और इस बार भी 24 के चुनाव में भी कई. स्टेटों में देखा गया है। पंजाब में आम. आदमी पार्टी उठी। कोई नेशनल पार्टी के तौर. पर तो नहीं उठी।. हम. पंजाब के सांसद पहुंचे पार्लियामेंट में. तो लोगों ने जिताया। आंध्रा में टीडीपी. जीत के आई या एआईडीएम की जीत के आई वो.
रीजनलिज्म की वजह से जीत के आई। बीजेपी तो. वहां ज्यादा नंबर्स नहीं ले पाई। हम. तो रीजनल पार्टीज को लोग लाते हैं। मगर ये. एक पहिया है। एक बार ऊपर जाएगा नीचे. जाएगा। मगर उसके अंदर नेता और नेतृत्व पे. है कि वो संघर्ष कितना करें।. अभी करंट गवर्नमेंट मोदी सरकार गवर्नमेंट. जो है कैसे देख रहे हो इसे आप? देखिए बहुत. से विषय हैं जिसके अंदर फेल भी हुई है। हम. बात करें आज हमारे पड़ोस के साथ लगते हुए. आठ देश हैं।. हम. आप मेरे को दो दोस्त बता दो।.
अब ग्लोबल डिप्लोमेसी की बात करते हैं। अब. मुझे दो देश बताइए हु कैन स्टैंड विद. इंडिया ऑन एव्री पोडियम।. हम. मैं अगर मैं ग्लोबल पर्सपेक्टिव की बात. करूं। अमेरिका, कनाडा इनकी मैं बात ही. नहीं करता।. नहीं नहीं ठीक हां सही बात है।. अगर मैं बात करूं चाइना इज़ नॉट आवर. फ्रेंड।. पहले बांग्लादेश था वहां भी सत्ता चेंज।. बांग्लादेश इज़ नॉट आवर फ्रेंड। म्यानमार. इज़ नॉट आवर फ्रेंड आफ्टर मणिपुर।. हम. हमारा मालदीव्स दोस्त होता था वो नहीं है।.
श्रीलंका नहीं है। पाकिस्तान तो हो ही. नहीं सकता। आपके पास बचा कौन? भूटान. क्योंकि नेपाल भी आपसे खुश नहीं है। भूटान. इसकी मजबूरी एक है कि भूटान इसलिए आपका. एलआई है कि चाइना उसको तिब्बत की तरह ले. जाएगा।. आप ग्लोबल डिप्लोमेसी की बात करते हैं।. जरूर हम अपनी ताकत दुनिया में दिखा पाए. हैं।. क्योंकि हमारे यहां से चाहे स्पेस. प्रोग्राम्स हो, चाहे हमारे मेक इन इंडिया.
प्रोग्राम हो। हम अचीव कर पाए हैं कि वी. आर नॉट डिपेंडेंट ऑन सम अदर कंट्री। पर. क्या हम चाइना की तरह 140 करोड़ की आबादी. को यूटिलाइज कर पाए? नहीं कर पाए।. जितनी बातें ग्लोबली कही गई कि इंडिया हैज़. बिकम दिस। मुझे लगता है आज भी हमारे देश. में बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो हम इकट्ठे. डेवलपिंग से डेवलप की ओर चलने लगे थे।. चाइना हमसे बहुत आगे चली गई।. बट जैसे अभी सेंट्रल गवर्नमेंट के जो. लीडर्स हैं वो यह कहते हैं कि हमने पहली.
बार अपने लिए स्टैंड लिया। हम यूएस के. इन्फ्लुएंस में झुके नहीं। हमने ट्रंप. साहब की बात कर रहे हैं आप। अटल बिहारी. वाजपेयी जी ने पोखरण किया था। क्या यूएस. के आगे झुके थे? ट्रू. यही बीजेपी है। ये तो अपने पुराने लीडरशिप. को ही भूल जाती है।. इंदिरा जी ने हां. मैं इंदिरा कांग्रेस की बात नहीं करता है।. मनमोहन सिंह की बात नहीं करता कि मुंबई. अटैक के बाद उन्होंने क्या किया। मैं तो. सिर्फ आपको यह बोलता हूं कि क्या अटल. बिहारी वाजपेयी जी.
सही बात है दुनिया भर की उन्होंने. अरे नेता झुकना लड़ना पिटना इससे नहीं. बनता देश को कैसे आगे लेके गया है और किस. विज़न के. तो यू सी फॉरेन पॉलिसी इंडिया की कमजोर है. बिल्कुल अगर हम अपने नेबर्स की बात करें. तो बहुत कमजोर है. ओके और इंटरनल पॉलिटिक्स में गवर्नमेंट को. कैसे रेट कर रहे हो आप. देखिए बहुत विवादित चीजें हैं आज के दिन. भी जो हमें दिखता है और जो दिखाया जाता. है। देखो यह बहुत बड़ा.
मुद्दा है कि हमें दिखाया ही वो जाता है. जो शायद प्रो गवर्नमेंट हो। बहुत सी ऐसी. चीजें हैं जो दिखनी चाहिए मगर मेन स्ट्रीम. उसको आगे ला ही नहीं पाती।. हम जैसे अभी 11 साल उनके हो गए हैं। 11. साल में वो अपनी कई चीजों के तारीफों के. पुल बांध रहे हैं। कई चीज सामने रख रहे. हैं। आपको 11 साल में अगर दो चीजें बतानी. हो सक्सेस में दो चीजें फेलर में तो आप. कैसे बताओगे? सबसे बड़े तो एक प्रोग्राम. प्रधानमंत्री ने खुद की मॉनिटरिंग के से. शुरू किया था कि मैं ये प्रोग्राम्स जो. पीएम अनाउंसमेंट्स हैं उनको मॉनिटर.
करूंगा। हरियाणा का ये उदाहरण है। मेरे. ख्याल से आठ साल हो गए नांगल चौधरी के. अंदर एक गवर्नमेंट ऑफ इंडिया और स्टेट. गवर्नमेंट का जॉइंट प्रोग्राम था। आज तक. उसका कोर्ट केस नहीं जीत पाए।. 8 साल से 50 एकड़ का और वह प्रोग्राम ठप. पड़ा है। आप रेल इंफ्रा की बात करते. प्रधानमंत्री ने रिबन काटा है। गुजरात से. ले महाराष्ट्र तक ट्रेन ले जाऊंगा। बुलेट. चली।. कितने ऐसे मुद्दे हैं जो शायद मीडिया उसको.
दोबारा उठाना ही नहीं चाहता। जैसे दबाव. है।. हां आपने अच्छा किया कि ग्रीन फील्ड. हाईवेज बनाए। भारतमाला वन आया भारतमाला टू. आया आया 2000 19 तक हम 2019 से लेके और. 2024 तक भारतमाला 3 क्यों नहीं आया. क्या इस देश को और हाईवेज की जरूरत नहीं.
है. या आपने सड़कों पर इन्वेस्ट करना छोड़. दिया कि अब मैंने और सड़कें नहीं बनानी. आज भी हमारे यहां नंबर ऑफ हम एिएशन की बात. करते हैं। हम सुन मैं भी एिएशन मिनिस्टर. रहा हूं। मैंने भी हिसार एयरपोर्ट की बात. करी है। हम कहते हैं कि जी हमारे यहां. इतने नंबर ऑफ एयरपोर्ट्स बढ़ गए।. एयरपोर्ट्स के नंबर बढ़ाने गवर्नमेंट ऑफ. इंडिया की अचीवमेंट्स नहीं है क्योंकि. मेजॉरिटी वो एयरपोर्ट्स एयर स्ट्रिप्स थे।.
एयर स्ट्रिप्स को आपने एयरपोर्ट नाम दे. दिया। हिसार हवाई पट्टी थी। भजन लाल जी ने. 1992 के अंदर वहां से चंडीगढ़ की फ्लाइट. उड़ाई थी। वो 25 दिन बाद बंद हो गई थी।. अभी इस दिन बाद जो भी टाइम था बंद हो गई. थी। पर वो हवाई पट्टी तो हमेशा रही थी।. चीफ मिनिस्टर का जहाज तो वहीं उतरता था।. मगर हमने उस छोटे चंक ऑफ लैंड को 7200. एकड़ जमीन. जितने बड़े प्रोजेक्ट में ले जाकर उसमें.
रनवे बड़ा किया। इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के. इक्विपमेंट्स इंपोर्ट करवाए। और आज उसको. एक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर वेयर हाउस. क्लस्टर के साथ जोड़कर एक विज़न दिया है कि. हिसार 25 साल बाद. शायद दिल्ली जैसी उड़ान भरे. हम. और बिल्कुल बड़े प्रोजेक्ट्स में समय लगता. है एक रात में नहीं भरते मर कितने बड़े. प्रोजेक्ट हैं जो बीजेपी के फर्स्ट ईयर. में अनाउंस करें गए थे और आज तक नहीं पूरे. हुए.
मगर उनके ऊपर कोई चर्चा नहीं करना चाहता. ठीक ये आपने हाईलाइट किया कि यह इशज़ है. जिसमें काम. बैंक्स के एनपीए उठा लीजिए।. हम. कितनी बड़ी-बड़ी कंपनियां इस देश में बर्बाद. हो गई क्योंकि आपकी एजेंसीज उनके पीछे पड़ी. रही और कितनी ऐसी कंपनीज़ हैं जिनको आपने. रिबेट्स पे रिबेट्स दे दी और आज वो आबाद. हो गई। सारा. यूबी ग्रुप. मैं कितने उदाहरण दे सकता हूं जिसके अंदर.
आप अगर उस समय बैंक्स के साथ जो आप अब कर. रहे हैं उनके लिए करा देते तो आज देश पता. नहीं कहां से कहां पहुंच जाता. कोई ऐसी चीज जिसको आप एटॉलेज अच्छा ये. किया है. मैं कोई अच्छा बोलूंगा कल कहेंगे तू. बीजेपी की बढ़ाई कर रहा है फिर वो मेरे. नुकसान में जाएगा. अरे बट अपोजिशन के तौर पर जैसे आपने 10. कमियां गिराई दो चीज. दो चीज़ तो बता कि ये चीज़ जो लगता है कि. हां ये बेहतर हुई।. नहीं मैं तो उदाहरण अपना दे सकता हूं कि. जब मैं प्रधानमंत्री से मिलके आए.
और मैंने आकर उनसे ये मांग करी कि जैसे अब. हरियाणा ने फार्मर को पैसा दिया है।. तो मुझे बड़ी अच्छी चीज लगी कि विद इन 2. मंथ्स नोटिफिकेशन वाज़ इशूड कि पूरे इंडिया. में अब जहां भी सरकारी खरीद होगी उसका. पैसा फार्मर के खाते में जाएगा। जिसमें. पंजाब सबसे ज्यादा रिलेट कर रही थी। हम. पंजाब को भी देना पड़ा। हम. ठीक है। आपकी फैमिली पर कुछ क्वेश्चन सर. हैं। चौटाला खानदान का जो बिखराव है क्या. ये हरियाणा में क्षेत्रीय दलों को कमजोर.
करने की एक बड़ी वजह हो सकता है? दल की मेहनत है। दल के कार्यकर्ताओं की. मेहनत है। अगर उस दल के कार्यकर्ता. समर्पित हैं।. हम. कि वो कार्य कर कर अपने पार्टी को उभार. सकते तो कोई भी क्षेत्रीय दल कमजोर नहीं. होगा।. बट क्या इसने हरियाणा को डेंट दिया? मैं इस विषय के ऊपर जाऊं ना बेहतर है।. ठीक है। कोई सुलह की उम्मीद है आप में और. आपके चाचा जी में. मुझे नहीं लगता।. अब वो अप्रोच करें तो आप कोशिश करोगे।.
हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने. बड़े खुले तौर पर कह दिया कि दरवाजे बंद. है।. हम. हमेशा के लिए बट कहते हैं राजनीति में कुछ. भी परमानेंट नहीं होता।. और पार्टी के सारी लीडरशिप मिलकर फैसला. करें।. देवीलाल जी किसानों के मसीहा थे।. वो विरासत क्या मौजूदा दौर में थोड़ी. कमजोर पड़ी है? देखिए मैंने 4 साल तो बहुत अच्छा फार्मर्स. की अप्लिफमेंट के लिए काम किया है और आगे. भी करता रहूंगा। किसान आंदोलन में लोग.
मेरे से नाराज जरूर हुए कि मैं सरकार में. बैठ के काम कर रहा था ना कि उनके साथ धरने. पर बैठा था और धीरे-धीरे वो समझेंगे और. धीरे-धीरे वो चीज देखेंगे भी कि गवर्नमेंट. में रहकर काम हो सकते हैं। विपक्ष में. नारे लगाकर. आपके घर में क्या सलाह मिली आपको जब इस. चुनाव की हार हुई थी।. मेरे को एक सलाह जो मेरे फादर ने दी हम. घर मत बैठिए।.
काम करिए यही गले लगाएंगे और मेरे फादर ने. तो वह दौर देखे हैं क्योंकि वो उन्होंने. अपना जो यंग डेज थे वो चौधरी देवीलाल की. गाड़ी चलाकर व्यतीत करें तो उन्होंने अपने. एक्सपीरियंस के साथ कहा और मैं ये मानता. हूं अगर मैं घर बैठ जाता तो कहीं ना कहीं. मैं खुद ही टूट जाता।. मैंने सवाल अखिलेश यादव से पूछा था। मैं. आपसे पूछ रहा हूं। सियासत में ज्यादा. दिलचस्प कौन होता है? जनता या नेता? जनता.
नेता दिलचस्प नहीं होता।. क्यों? देखिए जनता हर रोज आपको नई चीज. सिखाती है। और हर रोज आपके दिन भर की. कार्यशैली को बदलती है। उससे ज्यादा. दिलशबी किस चीज में होगी? क्या मुद्दा हो. जाए आप इस ऑफिस से बाहर निकले? क्या आप डिसाइड कर सकते हैं? नहीं। तो मुझे लगता है कि नेता कभी. दिलचस्पी नहीं। नेता तो बहुत.
कैलकुलेटिव होता है।. हम. नहीं आपके पिताजी वाली बात समझा था। यही. लोग गले लगाएंगे।. मैं तो हमने किसी का कोई रेप मर्डर किया. है।. हमने जनता के मुद्दों को. सुलझाया है। समझने में देरी हो सकती है।. अपनाने में देरी हो सकती है। पर लोग. अपनाएंगे यही गले लगाएंगे।. बीजेपी से गठबंधन कर सकते थे। आप इस बार.
निकलना और बीजेपी से अलग होना।. नहीं जब हमारी. क्योंकि उनकी सरकार है।. लोकसभा के अंदर. आप साथ रहते तो शायद आज आज भी आप डिप्टी. सीएम होते।. होता ना होता किसको पता है हम. क्या पता वो रोश अकेले मेरे पे ही निकलता. साथ होके भी. क्या आप मैं ज्योतिष तो हूं नहीं. अंतर्यामी तो हूं नहीं मगर ये जो गुस्सा. था. हम. ये गुस्सा अगर साथ रह के निकलता तब मेरे. को और ज्यादा कोसते आप क्वेश्चंस के. माध्यम से कि क्या बीजेपी के साथ रहकर.
इतने. बट अभी भी लोग कह रहे हैं ना मिला खुदा ना. विसाले सनम ना इधर के रह ना उधर के हम. देखिए हम अपने संगठन के तो रहे ना अपनी. सोच के तो रहे. क्या आप परमानेंट. गवर्नमेंट में रह सकते हैं? नहीं मुझे नहीं लगता।. अच्छे-अच्छे नेता हारे भी हैं। उन्होंने. सीखा भी है और वो जीते भी हैं।. पहली बार सफल होना जरा टफ होता है या सफल. होकर जब उसके बाद सफल हो फिर ज्यादा.
मुश्किल होती है। क्योंकि मेरे लिए तो. सारे चैलेंजेस रहे।. जब मैं 25 साल का मैदान में उतरा हम. और पिताजी जेल के अंदर थे, दादाजी जेल के. अंदर थे और उस समय चुनाव लड़ा।. हम. तो वो भी मेरे लिए बहुत कठिन चुनाव था।. क्योंकि मेरी मदर एक्टिव पॉलिटिक्स में. नहीं थी। मैं 25 साल का था। लिमिटेड हमारे. पास मैन पावर थी। और एक किसार जैसी लोकसभा. जिसमें 426 गांव तक जाना। उन 426 गांव में. कैंपेन करना। हम सुबह 6:00 बजे माइक लेके.
गला बैठ जाता था और उसके बाद फिर. चलते-चलते चलते 5 साल में हिसार से पूरा. हरियाणा घूमना यूथ को खड़ा करना यूथ की. आवाज बनना एकदम आप पार्टी से बाहर हो जाते. हो और फिर वही एग्जाम दोबारा आ गया. हम. और ज्यादा टफ हो के आ गया और उस टफ. इलेक्शंस को भी आप लड़ लेते हो और मैं ये. मानता हूं कि जो ये चुनाव था ये उससे भी. कठिन था. मुझे वो दिन भी याद है रात को 2:30 बजे. बजे मैंने एक कैंडिडेट से बात कर कर कि.
यहां तेरे को चुनाव लड़ना पड़ेगा और वह. कहता है जैसा आपका आदेश मैं दाद देता हूं. उसकी. कि रात को 2:30 बजे भी उसने पार्टी की. जिम्मेवारी से पीछे हटने का काम नहीं. किया।. इस देश में अपने खानदान के अलावा कौन से. ऐसी पॉलिटिकल पार्टी कौन से ऐसे लीडर है. जिसने आपको इंस्पायर किया? देखिए अपनी. फैमिली के अलावा. अटल जी बहुत अच्छे लीडर थे और उनके संघर्ष. ने उनके कार्य ने मुझे लगता है देश के. बहुत लोगों को इंस्पायर किया है। अगर मैं.
बात करूं. साउथ की तो शरद पवार जी बहुत. एक करिज्मैटिक लीडर हैं। जिन्हने विदाउट ह. हेल्थ एंड एवरीथिंग. बहुत अच्छा काम कर कर दिखाया। चंद्रबाबू. नायडू अपने आप में एक उदाहरण है। अगर मैं. ममता दीदी बोलूं वो अपने आप में एक ऐसी. लीडरशिप है जो सब प्रज़ करते हैं कि वो डरी. नहीं। चाहे टाटा जैसी बड़ी कंपनी के सामने. लड़ाई लड़नी हो उससे लेकर आज तक लड़ती रही.
है। चाहे फारूक अब्दुल्ला साहब हैं। सारी. परिस्थितियां देखकर भी. आपकी ये आपने पॉलिटिकल जवाब दे दिया। मेरे. को एक होता है ना एक फेवरेट होता है कि. यार ये इस आदमी ने सबसे ज्यादा इंस्पायर. किया मुझे। इसका सबसे ज्यादा गहरा असर मुझ. पे रहा या इसकी तरह मैं पॉलिटिशियन बनूंगा. या. पॉलिटिशियन आप किसी की तरह नहीं बन. फिर भी एक होता है ना कि एक किसी से लगाव. ज्यादा होता. मैं शायद वो सोच का ही नहीं हूं कि मुझे. किसी को अपने आप में लाकर रेप्लिकेट करना. है हां आप उनकी वर्किंग देख. वर्किंग स्टाइल की बात कर रहा हूं मैं कोई. वर्किंग स्टाइल तो मैं आपको बता रहा हूं.
चंद्रबाबू नायडू. आपने देश के सारे पॉलिटिकल पार्टीज के. सारे नेताओं के नाम ले लिए. नहीं मैं. बस एक मुलायम जी लालू जी और रह गए थे अगर. आप. नहीं अगर आप मुलायम जी की बात करेंगे तो. मेरे साथ वो पार्लियामेंट में रहे हम. जब ये घर के पांच छ जीत के आए थे और वो. मेरे को. हां बुला के हाथ पकड़ के साथ बैठा के. चाइना वॉर से लेकर. हम. और यूपी के शासन तक की सारी बात बताया. करते थे. और अपने समय को शेयर करना और बताना आज जो. एलजी हैं जम्मू कश्मीर के वो मेरे साथ रेल.
एमओएस रेलवेेज थे. हम. वो बताया करते थे. मनोज सिन्हा जी. फारूक साहब मेरे साथ थे देवगोड़ा जी मेरे. साथ थे मुझे तो एलके के आडवाणी जी मुरली. मनोहर जोशी जी के साथ एज मुरली मनोहर जोशी. जी के साथ तो एज चेयरमैन हमारी कमेटी के. काम करने का काम किया और मुझे जब तक यह. पता ही नहीं था कि वो प्रोफेसर रहे मुरली. जी और मुरली मनोहर जोशी जी ने जब इसरो. वालों की क्लास लगानी शुरू करी और किस.
तरीके से एक हमारी न्यूक्लियर की ऑडिटिंग. थी उनकी क्लास लगाने का काम किया। तब मुझे. उस व्यक्ति का विज़न पता चला कि कितना वेल. थरो रेड पर्सन है। तो बहुत से ऐसे लीडर्स. हैं जिनको आप डे टू डे में मिलते हैं।. पीएम है, एचएम है, नड्डा जी हैं, अनुराग. जी हैं। मैं 200 आदमी बता सकता हूं बीजेपी. के भी जिनसे मिलता हूं। कांग्रेस के लोग. रहे।.
एक. अपने. क्या नाम है? सांसद थे हमारे साथ केरला के हम. वो एक पार्टी के एक ही सांसद जीत के आते. हैं और पता नहीं कितनी टर्म्स है। सबसे. पहले उस आदमी ने मेरे को यह सिखाया कि. तूने कोई बिल आता है तो उसमें अमेंडमेंट. के लिए कैसे नोटिस बना के डालना है। तो. मैं उसको कैसे भूल सकता हूं? चलो और इसको मैं रिफाइन कर देता हूं। योर. फेवरेट चीफ मिनिस्टर इंडिया में अब तो.
स्पेस कर दिया मैंने।. खुश करने के लिए विज़ के लिए डराने के लिए. फिर मैं बताऊं ना किसकी बात. ओवरऑल जिसको आपको लगता है ये अपने स्टेट. के लिए सबसे शानदार है या ऐसा विज़न हो तो. बढ़िया है शानदार है. देखिए स्टेट. वर्किंग स्टाइल पे. स्टेट को आगे ले जाने के लिए आज के दिन. चंद्रबाबू जी को मैं देखता हूं एज अ लीडर. कि उन्होंने हमेशा उस विज़न को क्लेरिटी के. साथ आगे ले जाने का काम किया कि मेरी. प्राथमिकता मेरी स्टेट की प्रगति है।.
ठीक है? देश का सबसे अच्छा प्रधानमंत्री कौन रहा? अटल जी सबसे अच्छे अगर आप मेरे से बात. करेंगे तो शायद 88 में मेरा जन्म हुआ है।. मैं इंदिरा जी की वर्किंग को तो ये आपकी. फिल्मों के माध्यम से या न्यूज़ के माध्यम. से देख पाया हूं। कभी मैं स्टडी नहीं कर. पाया हूं। पर मैं अगर कंपैरिजन करूं अटल. जी का मनमोहन जी का पीवी नरसिम्हा राव का. जितना मेरे को वर्किंग मैंने देखी है तो. एक विज़ के तौर पर इस देश को उस डेवलपमेंट.
फेस में आगे ले जाने के लिए जो कदम चाहिए. था अटल बिहारी वाजपेयी जी दे पाए चाहे वो. गोल्डन क्वाड्रीलैटरल की बात हो चाहे वो. परमाणु की बात हो कितने ऐसे कदम उनके शासन. में उठाए गए जिसने देश को एक नए दी बल्कि. आपको हैरानी होगी सुनकर मेरे फादर बताते. हैं कि पार्लियामेंट के अंदर यह मुद्दा उठ. गया कि एयरपोर्ट से आते हुए जाम लगता है।. तो उस समय मेरे फादर ने भी ये बात उठाई कि. क्यों ना हम पुल बना दे तो ये रेडिसन के.
सामने से जो एलिवेटेड है ये उस समय की. मंजूरी है।. तो अगर आप विज़न लीजिए एक छोटी सी समस्या. का हल ही निकालना था।. हम इंटरेस्टिंग हरियाणा का आज तक का सबसे. अच्छा चीफ मिनिस्टर कौन रहा? चौधरी ओम. प्रकाश चौकाला. बड़ी क्लेरिटी के साथ. इसलिए कि दादा जी हैं इसलिए काम के लिए. उन्होंने वट दिया इस देश को. हां ये बड़ा अच्छा किस्सा है वट वाला. अगर आप देखेंगे कि सेल टैक्स ये टैक्स वो. टैक्स चुंगी टैक्स ये इतनी चीजें थी उसके.
को सारे को अबॉलिश कर कर एक रिजीम में. लाना और देश के प्रधानमंत्री में दम नहीं. था तो एक स्टेट ने इंप्लीमेंट कर कर. दिखाया. बहुत बड़ा कदम था।. और देखिए जिन प्रधानमंत्री की आप तारीफ. करते व क्वेश्चन ने मार दिया।. नहीं उन्हीं ने कहा चौटाला साहब को कि आप. कर कर दिखा सकते हैं। चौटाला साहब ने कहा. कर कर दिखा सकता हूं। आप गुड़गांव को उठा. कर देखिए ना 2000 से पहले गांव था उसको इस. देश की सबसे महंगी सिटी रहने के लिए बनाने.
में उस नंबर तक पहुंचाने में वो विज़न देने. में जो चौटाला साहब का योगदान है कभी किसी. और का हो ही नहीं सकता।. इंटरेस्टिंग। मैं कुछ नाम लेने वाला हूं. सर। लास्ट सेगमेंट है। सेकंड लास्ट. सेगमेंट आपको इन नाम के बाद वन वर्ड में. इनको लेकर जो भी ख्याल आता है आप कुछ भी. कह सकते हो। भूपेंद्र सिंह हुड्डा. कांग्रेस की बर्बादी।. मनोहर लाल खट्टर.
स्टेबल. पॉलिटिशियन विजन. नायब सिंह सैनी. ज्यादा मेरा ताल्लुक है नहीं. अरे आपके राज्य के चीफ मिनिस्टर है भाई. ताल्लुक नहीं है मैं अगर मैं आपको वर्किंग. पे बोलूं तो आज भी यही सुनते हैं कि. ब्यूरोक्रेसी ज्यादा काम कर रही है. बड़े प्यार से टों्ट मारा आपने ओम प्रकाश. चौटाला जी. इंसाइटफुल विज़नफुल हार्ड वर्किंग मैन अभय. चौटाला ाला नॉन सीरियस पॉलिटिशियन.
ओके चंद्रशेखर आजाद. करिस्मैटिक यंग लीडर अरविंद केजरीवाल. हार्ड वर्किंग पॉलिटिशियन. डिरे्ल्ड नाउ. ओके योगी आदित्यनाथ. बोल्ड. स्टैंड टेकिंग पॉलिटिशियन. अखिलेश यादव.
या अब तो यंग नहीं रहेंगे।. ही सेड दैट जब हम यंग है तो हमारे से तो. बड़े हैं बट. ही. गव अ गुड विज़न टू उत्तर प्रदेश।. मैंने अखिलेश जी से पूछा था ये सवाल।. मैंने कहा अखिलेश जी राजनीति में आदमी कब. किस उम्र तक युवा रहता? हमको पहले ये समझा. दो।. यार राहुल गांधी 53 का हो के युवा है।. तो आप अखिलेश जी को कैसे युवा नहीं कह रहे. हो? नहीं अब मैं युवा आ गया ना तो मेरे से. तो बड़े हैं तब उनको थोड़ा तो सीनियर. कैटेगरी में.
आप खुद राहुल जी को युवा कह रहे हो अभी. नहीं मैं कह रहा हूं राहुल गांधी तो 53 का. भी युवा कहलाता है शर्म नहीं आती. बल्कि अभी राहुल गांधी का एक किस्सा है. हरियाणा आकर गए और अपनी पार्टी के लीडरशिप. को कह गए तुम बताओ कौन सी तरह के घोड़े हो. जंगी घोड़े हो बाराती घोड़े हो या लंगड़े. घोड़े हो कौन आदमी अपनी पार्टी के नेताओं. को घोड़ों की उपाधि देता है और वह भी. लंगड़े घोड़ों तक की हाउ यू से राहुल. गांधी एस अ पॉलिटिशियन. इमचोर.
व्हाई सो देखिए जो कांग्रेस के कल्चर को. ना समझकर और अपना कल्चर एक पार्टी की. फिलॉसफी में लाने का काम उन्होंने किया. उसने कांग्रेस का बट्टा बिठा दिया उस. कांग्रेस से शुरू हुआ और फिर आज जो. कांग्रेस के हाश्र है जो प्रधानमंत्री का. साइन किया हुआ बिल प्रेस क्लब ऑफ इंडिया. मिला के फाड़ सकता है। उस आदमी को आप. इमैच्योर नहीं कहोगे तो क्या कहोगे? आपको.
पार्टी स्टेज पर बात करनी थी। आप पार्टी. की मीटिंग बुलाते। आप पार्टी के लीडर थे।. पार्टी प्रेसिडेंट आपकी मदद थी। आप उसको. डिक्लाइन कराते। कितनी ऐसी चीजें हैं जो. आज भी हम एज एमपी सीखे कि मनमोहन सिंह जी. प्रधानमंत्री थे तो एक बिल आ रहा था कि. ल्यूटन दिल्ली का नक्शा ओपन कर दो। हम. आपको शायद पता ना हो कि ल्यूटन दिल्ली के. अंदर जितना आपका मकान बना हुआ है आज भी आप. तोड़ के उतना ही बना सकते हो। कवर्ड एरिया.
एफआर नहीं है जो अंग्रेज पास कर गए थे. उतना ही एरिया है जो लूटेंस के बनाए हुए. नक्शे में है।. तीन या दो बार प्रयास हुए 10 साल में और. मैं एमपीज की सुनी हुई बात है।. प्रैक्टिकली कितनी फ़क्चुअली करेक्ट है. नहीं है क्योंकि मैं अर्बन डेवलपमेंट. कमेटी में रहा। वो हमारे दौरान भी यह. मुद्दा चौथी बार आया। तो हमने तो कमेटी ने. डिक्लाइन कर दिया। उस समय तो कमेटी से पास. प्रधानमंत्री के ऑफिस में फाइल चलेगी। और.
मैंने सुना है कि किसी ने सोनिया जी को. जाकर बताया। सोनिया जी ने कहा कि नहीं और. उस समय डिक्लाइन हुई वो फाइल पीएमओ से कि. नई अमेंडमेंट नहीं आएगी। तो दैट इज समथिंग. वेयर यू हैव अ विदिन पार्टी आपके पास. पोडियम मिलता है। पर आप आपकी खुद की. पार्टी का बनाया हुआ बिल जाके प्रेस क्लब. में फाड़ देंगे तो इमैच्योरिटी है या नहीं. है? कागज था। हालांकि वो कहते हैं कागज था. लेकिन एक खास सिंबॉलिक तौर पर तो था ही. नहीं। कागज तो सारे बिल्स कागज में है.
सिंबॉलिक तौर पर जब राष्ट्रपति का साइन हो. जाए तो इस देश का एक गैजेट बनता है। आप. उसी को फाड़ देंगे। नेक्स्ट बिग थिंग इन. इंडियन पॉलिटिक्स जैसे प्रधानमंत्री मोदी. जी अब एक एज बैरियर पार कर रहे हैं।. धीरे-धीरे नेक्स्ट बिग थिंग इनके बाद कौन. होगा? स्पेशली अपोजिशन से अगर मैं बात. करूं मैं नाम भी ले लेता हूं। दुष्यंत. चौटाला, तेजस्वी यादव, चिराग पासवान, अखिलेश यादव, चंद्रशेखर आजाद नेक्स्ट बिग. थिंग ये जो नई लॉट है इनमें से कौन होगा. आप देखते हो? मैं तो यह मानता हूं सारे. मिलके और बीजेपी को हटाए बन कोई भी दे.
बट सारे मेंढक एक साथ एक इस थोड़ी ना आते. हैं छटक जाए कोई. अरे आप. सब एंबिशन वाले हो जाएंगे. अब आपको मैं टैग करके ना मैं ढूंढता हूं. इंडियन एक्सप्रेस में एक फोटो छपी थी. हां. जब. शायद 88 या 89 की है। आई विल फाइंड इट. आउट। वह फोटो अगर मेरे को मिलती है।. जैसे आपने कहा ना सारे मेंढक. तो एक आप जैसे ही किसी सीनियर पत्रकार ने. चौधरी देवीलाल से पूछ लिया कि जी. कांग्रेसी कह रहे हैं देवीलाल तो सारे.
मेंढक लिए घूम रहा है। तो चौधरी देवीलाल. ने एक बात कही थी। कहते मेरे में वो कला. है कि मैं सारे मेंढकों को साथ बिठा भी. सकता हूं, लड़ा भी सकता हूं, जिता भी सकता. हूं। और वही 89 के अंदर रिजल्ट आया। तो ये. एक समय की बात होती है। अगर आप आप आप हमें. अगर एक-एक एक-एक करके बटा हुआ देख रहे. हैं। अगर हमने ताकत एक कर ली तो फिर वही. बात है जो मैंने शुरू में कह थी। युवा और. युवा जब एक हो जाए और दो हिस्सों के उल्टे. भी. वायु कर देंगे.
तो फिर वायु का रुख नहीं ले सकते।. ठीक है। अब मैं कुछ फनी क्वेश्चन नई पीढ़ी. के हिसाब से लास्ट सेगमेंट है। रखा है. थोड़ा सा हाइपोथेटिकल क्वेश्चन है। लेकिन. मैंने कोशिश की कि कुछ नयापन लाया जाए।. अगर आपको किसी एक राजनेता के साथ एक दिन. कहीं जाकर रूम शेयर करना हो तो किसके साथ. शेयर करेंगे? मान लीजिए कहीं आप रैली में. गए या कहीं एक इवेंट हुआ और. एमपीज के दौरान हम जाते ही थे।. अरे एक फेवरेट चॉइस होता है ना कि यार. हमको ये वाला दे दो रूम पार्टनर के तौर. पर।. कोई भी मेरी उम्र का जो सा है चाहे. चंद्रशेखर हो, राम नायडू हो, श्रीकांत.
शिंद हो। आई डोंट माइंड।. कौन सा एक राजनेता के साथ रूम शेयर नहीं. करेंगे? भूपेंद्र हुड्डा।. क्यों आइडियोलॉजिकल डिफरेंस से लड़ाई हो. जाएगी।. तो तो बहुत सारे लोगों के साथ इन्हीं का. नाम क्यों लिया आपने? वो तो आपकी. आप आपके माध्यम से कह राम कुमार गौतम।. ठीक है। अगर राजनीति एक स्कूल होती तो. करंट पॉलिटिशियंस में कौन उसका प्रिंसिपल. होता? हां तो मोदी जी हैं।.
आपको लगता है वही प्रिंसिपल होते।. भाई जिस तरह का कैंपेन और वो मैनेज करते. क्यों ना बनते? ओके। अगर बिग बॉस हरियाणा होता तो कौन सा. पॉलिटिशियन जीत जाता? अभी तो नायब सैनी जीते बैठे हैं। हंसाते. भी हैं, नंबर्स भी हैं।. इंटरेस्टिंग।. ठीक है। अगर किसी एक नेता पर. डॉक्यूमेंट्री बननी हो, आपको लगता है किस.
पे बननी चाहिए? चौधरी देवीलाल जी कारण है चार स्कीम्स. गिना सकता हूं उनकी। जच्चा बच्चा इंडिया. के अंदर हरियाणा से शुरू हुई शायद आपको भी. नहीं पता होगी। वह सड़क पे जा रहे थे। एक. प्रेग्नेंट औरत पत्थर तोड़ रही थी। छ या. सात महीने प्रेग्नेंट हो गई। उन्हें पता. है तू क्यों कर रही? कहते जी मेरा पेट. कैसे पड़ेगा? उस समय जच्चा-बच्चा योजना. शुरू करी थी कि मैटरनिटी लीव जो आज हम. मानते हैं आपको तनख्वाह भी मिलेगी। आपको.
यह होगा उसकी नीव देश में वहां से शुरू।. एक ओल्ड एज पेंशन जो आज ये ₹100 ₹500. हरियाणा ₹3100 दे रहा है। हरियाणा से ₹100. की नीव शुरू हुई और फिर देश की. पार्लियामेंट में आकर उन्होंने देश में. लागू करी। तीसरी काम के बदले अनाज।. शायद आपको पता नहीं जब 1977 में वह चीफ. मिनिस्टर बने तो फ्लड्स आए और हमारे झज्जर. का बेल्ट जो थी इसके अंदर बांध बनाने के.
लिए मजदूर नहीं थे और लोगों के घर डूबे. हुए थे तो उस समय लोगों से उन्होंने आग्रह. किया कि आओ बांध बनाओ और बांध बनाओगे तो. मैं अनाज दूंगा आज वो काम के बदले पैसा है. मन्री का है. हम. अगर आप उनके ऊपर स्टडी करें तो वो अपने आप. में एक इंस्टिट्यूशन थे जिन जिनने अनपढ़. होकर भी ऐसे ऐसे निर्णय लिए जो शायद बहुत. पढ़े लिखे लोग भी ना ले पाए।. इंटरेस्टिंग.
इस बारे में मैं और पढ़ना पसंद करूंगा।. उनके ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री मैं खुद बनाना. पसंद करूंगा। बिल्कुल आपको बहुत से ऐसे. किस्से हरियाणा से मिलेंगे कि उन्होंने. अपनी प्रैक्टिकल लाइफ में ट्रैवल करतेकरते. समस्याओं को कैसे समझा और ट्रैवल करतेकरते. ही उनका उदाहरण दिया। बहुत से लोग तो यह. कहते हैं देखो आई वास थ्री इयर्स ओल्ड. थ्री भी नहीं वन ईयर ओल्ड 89 में जब. चंद्रशेखर जी ने खड़े होकर उनका नाम ले.
लिया कि आप देश का नेतृत्व करिए. प्रधानमंत्री बनिए तो उनके मन में अब उनके. मन की बात तो मैं तो जानता नहीं हूं कोई. बड़ा सीनियर उस समय का नेता भी आज जिंदा. नहीं बचा जो उस हॉल में था पर उनके मन में. यह था कि शायद मेरा इंग्लिश ना बोलना देश. की रिप्रेजेंटेशन का एक पार्ट ना बने तब. उन्होंने वीपी सिंह जी का नाम प्रस्तावित. किया।. लैंग्वेज मुझे कई सारे लोग याद आ गए जो.
लैंग्वेज चलते हैं उस कुर्सी पर नहीं बैठ. पाए देश में।. और यह इस देश की ब्यूटी है कि हम कितनी. भाषाएं, कितने कल्चर, कितने रिलीजन को. लेकर चल रहे हैं। कामत साहब का ही मैंने. पढ़ा था कि लाल बहादुर शास्त्री जी के समय. भी सेकंड प्राइम मिनिस्टर बनने का मौका. मिला था उन्हें। बट वहां से वो नहीं बने. क्योंकि उनकी उनको हिंदी नहीं आती थी।. हिंदी अंग्रेजी तो नहीं आती थी। और इस देश. में कई ऐसे नेता हैं जो बहुत. लैंग्वेज बैरियर के चलते रह। अब आप आप देख.
लीजिए सोनिया गांधी का एक विदेशी होना. उनको प्रधानमंत्री की कुर्सी से दूर कर. गया।. हालांकि वो तो डिबेटेबल टॉपिक है उसमें. आता है कई बार कि उनके पार्टी के लोग नहीं. थे। एक परसेप्शन था अंदर से कई लोग खींच. लेते हैं। शरद पवार जी पहले निकल गए. जो समय की बात वो चौटाला साहब चौटाला साहब. की एक बात याद आती है। एक दिन चंडीगढ़ हम. बादल साहब को मिलने चले गए। तो चौटाला. साहब ने बातोंबातों में कह दिया कि अब. आपकी भी उम्र हो चुकी है। बड़े भाई की तरह. मानते थे उनको कि सुखबीर जी को सीएम बना.
दो। तो चौटाला साहब की तरफ देख के बादल. साहब ने कहा के एक चीज कहवा चौटाला जी कहो. के राज और खाज तो खुद करे मजा आंद है।. हां तो यही बात आपके चाचा ने सोची तो क्या. गलत कर दिया फिर? मैं तो गलत मैं तो गलत. मानता ही नहीं हूं।. वो भी कह रहे होंगे राज काश खुद करो तो. मजा आता है।. मैं तो गलत मानता ही नहीं हूं। मगर मैं आज. भी इसी चीज को बोलता हूं कि मेरे को.
एविडेंस दिखा दीजिए कि हमने कोई पार्टी. विरोधी गतिविधि. आपके परिवार में किसी ने संभालने की कोशिश. नहीं की ये सबके बीच में। बड़े बुजुर्ग कई. थे। छोड़ दीजिए बीता हुआ इतिहास है।. ठीक है। अगर आपकी लाइफ पर एक फिल्म बनती. है। दुष्यंत चौटाला पर फिल्म बनती है। तो. दुष्यंत चौटाला किसे चाहेंगे कि ये मेरा. किरदार निभाए? आज के दिन रणदीप हुड्डा. रणदीप हुड्डा हां भाई आपको आपने शुरू में. कहा कि वो दे देसी ताऊ को भी समझ लेगा तो. अगर हरियाणवी बोली पर किसी की पकड़ है और. हरियाणा के कल्चर को कुछ समझता है तो सबसे.
बेस्ट किरदार तो वही है।. अभी रणवी रणधी हुड्डा आए थे। मैंने उनसे. पूछा कि जाट पिक्चर तुम्हारी आई है। तुम. जाट नहीं बने हो। तुम राणा तंगा बने हो।. आपको कौन सा एक्टर पसंद है? वैसे फिल्म. टाइम मिलता है देखने का? बिल्कुल मैं तो बहुत फैमिली के साथ समय. देता हूं। मेरे फादर पहले हमें दिखा लिया. करते थे। अब शादी हो गई, वाइफ के साथ चले. जाते हैं। और मैं ये मानता हूं आज के दिन. में जो सबसे अच्छे तरीके से देश की समस्या.
को किसी ना किसी तरीके से दिखाता है। देश. की प्रगति को देता है। आमिर खान जी बहुत. अच्छे एक्टर हैं।. कौन सी फिल्म आपको अच्छी लगी? लास्ट जो. देखी हो आपने आपके दिल पे असर कर गई हो।. देखिए दंगल बड़ा अच्छा एक उदाहरण है कि. हरियाणा की दो बेटियों को उन्होंने किस. तरीके से ग्लोबल प्लेटफार्म पे पोट्रे. किया कि उनके जो फादर का संघर्ष था कितना. बेहतरीन था फोगाट साहब का बिल्कुल ओके. इंटरेस्टिंग अगर आप रात को 2:00 बजे. मुसीबत में फंस जाए कौन सा एक पॉलिटिशियन. जिसे आप फोन कर सकते हैं. मैं तो अगर. किसी समस्या में फंसता हूं तो मुझे इतना.
विश्वास है मैं जिसको भी फोन करूंगा वो. मेरे साथ खड़ा मिलेगा. इंटरेस्टिंग अगर समय खराब चल रहा हो. तो क्या सबक लेते जीवन में? क्या सबक. बताएंगे लोगों को आप. कि निराश ना होइए, हौसला रखिए, क्राइसिस. को ओपोरर्चुनिटी बनाने का काम करिए। यू. विल सक्सीड।. ओके। ठीक है।. मैंने शुरुआत एक शेर शायरी कविता से की. थी। वहीं अंत भी कर देता हूं मैं। एक. हरवेंश राय बच्चन साहब ने लिखा था। बड़ा. अच्छा लिखा था और मुझे लगता है कि वो सभी.
के लिए कि गिरना भी जरूरी है। औकात का पता. चलता है।. बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को तब जाकर अपनों. का पता चलता है। जिन्हें गुस्सा आता है. अक्सर वो लोग सच्चे होते हैं। मैंने झूठों. को दिनरा मुस्कुराते देखा है। सीख रहा हूं. इंसानों को पढ़ने का हुनर। यह सुना है कि. चेहरे पर किताबों से ज्यादा लिखा होता है।. बिल्कुल सत्य वचन है। और मैं तो चाहूंगा. दुष्यंत कुमार जी के भी वो बात आप जरूर.
याद रखिएगा। वो चींटी बार-बार चढ़ती है, गिरती है।. नैया. पार होती है। मेरे शेरो शायरी का ज्यादा. शौक तो नहीं है। मेरे कई बार वो कविता. पढ़ी है कि कोशिश कर।. आपका नाम दुष्यंत सर रखा गया था? इसी. दुष्यंत कुमार जी के नाम पर? मेरे. पेरेंट्स. पूछा नहीं आपने कभी मुझे मेरा नाम बहुत. सुंदर लगता है क्योंकि लंबा नाम है और मैं. तो हमेशा चाहता. थोड़ा वजन लगता होगा. नहीं वजन भी नहीं हमारा कल्चर है आप.
इतिहास उठाइए आजकल जो नाम आ गए आप ये कोई. नाम है तीन-तीन चार-चार अल्फाबेट्स थे कि. मां-बाप का मुंह भी नहीं खुलता नाम खत्म. हो जाता है तो दुष्यंत कुमार जी की वह है. कि कोशिश करने वाले की हार नहीं होती. हम तो कितनी महत्वपूर्ण चीजें हैं कि. हमारे इतने अच्छे लेखकों ने इतनी अच्छी. बातें लिखी है जीवन पर।. इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग। एक कोई आखिरी. कोट जिसने आपको बहुत इंस्पायर किया हो।.
चौधरी देवीलाल जी का ही पढ़ देता हूं।. लोकराज से लोकराज चलता है कि जनता के बीच. में रहकर उनकी समस्या को समझकर, उनकी सेवा. कर कर ही आप शासन दे सकते हैं।. बेस्ट विशेस सर आपको। लंबा समय बाकी है।. मैं हमेशा से मानता आया हूं कि असफल होना. खराब नहीं है। असफल होने के बाद कोशिश ना. करना खराब होता है। और आपके पास बहुत लंबा. टाइम है। जैसा आपने शुरू में कहा था कि. बहुत लंबा समय और अटल जी क्योंकि आपके. फेवरेट पॉलिटिशियन है। मेरे भी फेवरेट रहे. और मुझे याद है जब वो चुनाव हारे थे तो.
उनका एक स्टेटमेंट आया था ना टायर्ड हूं. ना रिटायर्ड हूं। तो मुझे एटीट्यूड बड़ा. अच्छा लगा था कि इट्स ऑल अबाउट एटीट्यूड।. ही सेड टायर्ड ना टायर्ड हूं ना रिटायर्ड. हूं। सो एक लंबी उम्र है। अभी तो आप युवा. नेता हैं। शुभांकर जी यही मानता हूं कि एक. ओपोरर्चुनिटी है इस देश को आगे ले जाने की. उस देश की प्रगति का हिस्सा बनने की और. उसको बेखूबी निभाया भी है आगे भी. निभाएंगे।. चलिए बेस्ट विशेस सर बाकी उम्मीद है फिर. मुलाकात होगी आपसे जब आप चुनावों में.
जाएंगे मेहनत करेंगे तो हिसाब किताब करने. हम भी पहुंच जाएंगे। थैंक यू सर।. बहुत-ब धन्यवाद।.
