Unplugged ft. Ex DGP Prashant Kumar | Vikas Dubey | Atiq Ahmed | Mukhtar Ansari | UP Police
यूपी में आपको लोग एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. कहते हैं।. एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. एनकाउंटर स्पेशलिस्ट। [संगीत]. 300 प्लस एनकाउंटर किए हैं।. कानून के दायरे से बाहर जाकर आप लोग ये. करते थे।. आपको क्या ये लगता है कि इतने बड़े सिस्टम. में सब चीज गलत करके कोई ऐसे ही बच जाएगा? एनकाउंटर में तो पहली गोली पैर पे होती. है। फिर पुलिस वालों को लेकर एक ही.
स्टेटमेंट. उसने हमारे दरोगा से पिस्टल छीनी और पुलिस. के साथ मुठभेड़ हुई।. आत्मरक्षा की गई फायरिंग में बदमाश को. गोली लगी जिससे वो घायल हुआ।. जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।. आप उसका रिजल्ट देखें अपराध में क्या कमी. आई।. साल था 2020 घटना थी हाथरस की। ये कहा गया. कि बलात्कार नहीं हुआ।. सेक्सुअल असॉल्ट की बात पीड़िता ने कही।. डॉक्टरों ने उसको कंफर्म नहीं किया है।. जिसमें भी आप पर आरोप लगा कि पुलिस ने शव. जो देर रात गांव में जल्दी जाकर जला दिया।. सीबीआई पुलिस की भूमिका को लेकर बड़े सवाल.
उठे।. बहुत अच्छा कि जो आपने ये प्रश्न पूछ. लिया।. 3 जुलाई 2020 बिकरू गांव विकास दुबे. सबसे बड़ी खबर आ रही है उत्तर प्रदेश से. जहां एक मुंह कई पुलिस वालों की मौत हो. गई।. उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। 141. गैजेट ऑफिसर थे। 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी. थे। फिर कैसे पॉसिबल एक आदमी अकेला हथखड़ी. लगाया था। चार पुलिसकर्मी फायर किया और एक. भी सशस्त्र बल को खरोश तक नहीं आई। दुबे. जी. नहीं अब वो तो बारिश हो गई और. आप इतनी गंभीरता से बात कहते हैं कि गाड़ी.
पलट गई. ऐसा आरोप विपक्ष लगा. बृजेश सिंह धनंजय सिंह भूषण शरण सिंह. रघुरा प्रताप सिंह सिंह बिरादरी पर काम. नहीं हुआ है। सरकार जो है वो. योगी जी की है।. ये सरकार भेदभाव कर रही है। एसटीएफ है. स्पेशल ठाकुर फोर्स। वो तो बहुत कम ही लोग. हैं जो कहते हैं कि एक ही मर्डर किए।. मेरे जीवन में मेरे हाथ से एक हत्या हुई. है।. अरे [हंसी]. बहुत गहरा खेल गया। हमें तो जिगर चाहिए।. मुख्तार गए, अतीक गए, आजम खान जेल में गए।. लेकिन जो इस पार वाले थे वो रह गए। पुलिस. ने कारवाई की है लेकिन कारवाई एक आंख से.
की।. जो माफिया मारे गए। बिल्लू, आदित्य राणा, अनिल दुजाना, परवेज, अतीक, खान मुबारक। तो. इसमें कहां से आरो? और ये तो पूरब से लेकर. पश्चिम तक की बात।. ज्यादा टफ केस कौन सा था? अतीक का या. मुख्तार का? अतीक अहमद को पेशाब करते हुए. भी लाइव करवा दिया।. व्यक्तिगत तौर पर अतीक अहमद की हत्या आपको. न्याय लगी, दुर्भाग्यपूर्ण लगी या लगा कि. इंसाफ [संगीत] हो गया? नहीं ये तरीका बिल्कुल सही नहीं है। ऐसा. नहीं कि आज ही हो रहा है। मैं आपको बताऊं. अतीक ने फोन करवाया था।. का सोचेत जिंदगी में जेल में रहा।.
धमकी आई थी लेकिन बीवी तो नहीं खुश पाए आप. लोग शाहिस्ता को या पता था आप लोगों ने. छोड़ दिया कि अब हो गया बाप बेटा चला गया. बीवी।. कानून के गिरफ्त में आएंगे।. किसी घटना में आप अपने आप से डिसपॉइंट हुए. कभी? मैं मौनी अमावस के दिन क्यों नहीं. मौके पे था? सभी परिजनों के प्रति हमारी पूरी संवेदना. है।. किसका अफसोस रहता है? महाकुंभ को लेकर जो ये रिपोर्टिंग आई थी. कि ज्यादा लोगों की डेथ हो गई।. जब इतने बड़े-बड़े स्नान होते हैं तो लोग. कपड़े, जूते, चप्पल सब छोड़ देते हैं.
स्नान के बाद और सब चीज नया पहन के चले. जाते हैं। तो इस तरह से चीजें दिखाई गई. जैसे ये सारी चीजें भगदड़ की ही है।. आपका कहीं फेल नहीं था।. मैं यह नहीं कह रहा हूं।. कृष्णनंद राय की हत्या मुन्ना बजरंगी ने. की थी। हां। वो घटना कितना हिलाई थी आपको? एक इलेक्टेड विधायक की हत्या और 500. [संगीत] 600 राउंड गोलियां एक के 47 से. चलना।. मुख्तार अंसारी को लेकर सर. लोग. एक थ्योरी आती है कि स्लो पोइजन दिया गया. और मुख्तार ने कई बार कहा कि मुझे मारा जा.
रहा है। ये रियलिटी है कि मुख्तार की बहू. ने हनीमून डायरीज बना रखा था जेल में। हां. हां। तो ये कैसे पॉसिबल मतलब आप कह रहे हो. कि आप लोग इतने ईमानदार हो और जेल वाले जो. हैं वो जेल के अंदर हनीमून डायरी चलवा रहे. हैं। किसी एनकाउंटर में जाने से पहले मुझे. लगा कि आज शायद घर ना लौटे।. मैं सोनभद्र जिले में था एक मुखबिर की. हत्या नक्सलियों ने कर दी थी।. आपकी मूछों पे बड़ी चर्चा रही है। किससे. इंस्पायर हो के मूछ रखी थी आपने? कल्याण जी, मायावती जी, मुलायम अखिलेश जी. और योगी जी। सबसे ज्यादा सख्त कहां थे?
यूपी में सबसे बड़ा अपराधी कौन रहा? एक को तो बड़ा मुश्किल है कहना।. पॉलिटिक्स पे जाएंगे। आप अवध हो जाइए की. तरह हमें।. जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। मेरे. आशिक के मेहमान के भी दो पहलू है। यह. कहानी उस पुलिस वाले की है। उस अफसर की.
जिसे देखने का नजरिया दो तरीके से है।. समाज में एक बड़ा वर्ग है जो उन्हें निडर. समाज सुधारक के तौर पर देखता है। उत्तर. प्रदेश पुलिस में जो उनकी भूमिका है उसको. सलाम करता है।. जो ऑपरेशंस उन्होंने अंजाम दिए उसके लिए. उनको याद रखता है। लेकिन एक वर्ग ऐसा भी. है जो यह मानता है कि यूपी पुलिस में जो. ये बदलाव आया यह तानाशाही रवैया है। यह वो. रवैया नहीं है जो पुलिस से किताबों में. पढ़ाया जाता है। इनकी कहानी में बीच का.
रास्ता नहीं है। इन दो में से इनके चाहने. वाले या इनके हेटर्स एक होंगे। लेकिन 35. साले करियर में मेडिकल की तैयारी छोड़कर. आईपीएस बने प्रशांत कुमार जी ने जितने. मेडल पाए उससे कहीं ज्यादा किस्से. कहानियां अपने पीछे छोड़ गए। और आज उन्हीं. कहानियों को हम निकालने की कोशिश करेंगे।. वेलकम सर। कैसे हैं आप? बहुत अच्छे हैं और बड़ा सौभाग्य है और. मुझे काफी अच्छा लगा। मैंने आपके बहुत. सारे पॉडकास्ट देखे और आप क्योंकि यूपी से. रहने वाले हैं. जी. और.
हम लोग अवध क्षेत्र के ही निवासी हैं तो. इसका. इसकी खुशी दुगनी है जब हम लोग बात कर रहे. हैं।. जब आप पुलिस में अधिकारी रहे, उत्तर. प्रदेश पुलिस में सर्वोच्च पदों पर रहे, अपराधियों से डर तो नहीं लगता होगा। सवाल. से डर लगता है? [हंसी]. अपराधियों से जब निपटने की ही जिम्मेदारी. थी तो अपराधियों से डरने की तो कोई बात. नहीं है और जहां तक प्रश्न का सवाल है तो. मेरा अपना व्यक्तिगत मानना है कि मैं.
मीडिया से काफी. अगर आप मीडिया से सही बातें बताएंगे तो. मीडिया भी आपके साथ आपके कठिनाइयों को भी. जानती है और उन चीजों को कैसे जनता के. सामने प्रस्तुत करना है इन चीजों को भी वो. बखूबी जानती है। बट यह कहते हैं कि पुलिस. वाले की जिंदगी जो होती है सर वह तलवार की. नोक पर चलने जैसा होता है। बड़ा महीन फर्क. होता है कि थोड़ा इधर चले गए तो उसको. देखने का नजरिया बदल जाएगा। हां यह तो है. पुलिस की में नौकरी जो है तलवार के धार पर.
चलने के बराबर है. और जरा सा भी अगर गलती हो जाए तो उसमें. बीच का कोई रास्ता नहीं. या तो ग्लोरी है या फिर आप डूम्ड है तो वह. रिस्क ऐसे कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं जब. आपको लेने पड़ते हैं हम. लेकिन मैं उसको एक प्रोफेशनल. हज़ार्ड मानता हूं कि जो रिस्क लेता है फिर.
सफलता भी उसके कदम चूमती है और कम से कम. यह बात तो नहीं रहती कि मैंने यह अफसोस. नहीं रहता कि मैंने अगर यह किया होता तो. शायद अच्छे परिणाम आते।. बिहार से आपकी शुरुआत हुई थी।. सिवान. हां मैं सिवान. [हंसी] तो सिवान याद करते ही हमको प्रशांत. कुमार जी या फिर डॉ. राजेंद्र प्रसाद नहीं. याद आते। शाबुद्दीन हमको पता नहीं क्या. है।. हां नहीं हम लोग तो डॉ. राजेंद्र प्रसाद. को ही अपना वो मानते हैं और काफी.
अच्छे लोग वहां से हुए हैं हमारे. जन्मभूमि से और बिहार राज्य की तो कोई बात. ही नहीं है। काफी अच्छा गौरवशाली इतिहास. है।. बिहार से आपकी शुरुआत हुई। तमिलनाडु कैडर. आप गए यूपी में आकर यूपी पुलिस का सबसे. चर्चित जाना माना चेहरा बने। वो चेहरा. जिसके पास जो दिखने में शायद साधारण हो. लेकिन असाधारण कहानियां साधारण किस्से जो. है वो समेटे बैठा है। अब जब आप रिटायर हो. चुके हैं और आपकी किताब दर्शकों को बता. दें कि सर की किताब भी आई है अगर आप में.
से किसी ने किताब पढ़ी है तो कमेंट सेक्शन. में बताइएगा। नहीं पढ़ी है तो कोई बात. नहीं सारा किस्से कहानी हम यहीं सुन लेंगे. या दोबारा आप जाके पढ़ सकते हैं।. रिटायरमेंट लाइफ आपकी कैसी चल रही है? नहीं बहुत अच्छी है और रिटायरमेंट के बाद. से जो चीजें छूट गई थी सर्विस के दौरान वह. चीजें कर रहा हूं। घूमना फिरना. रिश्तेदारों से मिलना, दोस्तों से मिलना. अमूमन ये चीजें इतना समय नहीं मिलता।. विशेषकर अगर आप किसी टफ असाइनमेंट पर रह.
तो वहां समय की एक समय का अभाव रहता है।. जैसे आप लोग ही हैं तो आपके पास बड़ा. एक-एक मिनट काउंटेड रहता है। तो ऐसी. स्थिति में काफी स्ट्रेस फ्री और काफी. अच्छे माहौल में जिंदगी गुजर रही है।. तो ये मजा आ रहा है या बोरियत लगता है कई. बार कि यार. नहीं अच्छा लगता है। बोरियत क्या यह तो. सबको पता है। जिस दिन जॉब ज्वाइन किया था. कि फलाने तारीख को सेवानिवृत्त होना है।.
अगर रिटायरमेंट की ऐज जो रहती है वो तो. सबको पता रहता है और आदमी को मेंटली. प्रिपयर्ड भी होना चाहिए। ये टफ नहीं होता. रिटायरमेंट का क्योंकि मैंने कई. अधिकारियों के बारे में किस्से कहानियां. बचपन सुनी है कि फलान बहुत बड़े अधिकारी. थे। भीड़ लगा रहता था। अब अकेले बैठे हैं. और वह बोर हो रहे हैं या आदमी कई बार जॉब. चली आती है तो बड़ा अजीब सा महसूस करता है. कि यार वह रूटीन हमारा जो था हम उसको मिस. करते हैं। पहले लगता था कि छुट्टी मिल जाए.
टाइम मिल जाए। अब एक महीने बाद लगता है. यार ज्यादा समय है हमारे पास।. नहीं ऐसी बात नहीं है। ये तो आपको. उस तरह से इमोशनली तैयार भी रहना पड़ता. है। ऐसी चीजें तो हो नहीं सकती कि लगातार. आप इस तरह की चीज में रहें। या जॉब के. अंदर भी बहुत सारे जॉब रिक्वायरमेंट्स ऐसे. होते हैं जहां पब्लिक डीलिंग कम होती है।. कुछ. जॉब ऐसे होते हैं जिसमें पब्लिक डीलिंग. अधिक होती है। हम. तो वो अगर किसी के 35 36 साल का करियर.
होता है तो सभी चीजें लास्ट में लगता है. कि सभी लोग बराबर ही दौड़े थे।. एवरीबॉडी कवर्ड द सेम डिस्टेंस विद सेम. मिक्स्ड फीलिंग। वो तो सबके उतार-चढ़ाव. करियर में आता रहता है। नाइस। इससे पहले. कि मैं स्पेसिफिक केसेस से बात करूं। मैं. कुछ जनरल क्वेश्चंस आपसे समझना चाहता हूं।. अ आईपीएस के पहले साल में कौन सा ऐसा केस. है? शुरुआत किए थे आप जिसने आपकी रातों की. नींद उड़ा दी थी। पहला केस कौन सा था?
जब आदमी बहुत जूनियर स्केल पर रहता है तो. वह अपने सीमित दायरे में चीजों को सोचता. है तो साधारण घटनाएं जैसे. डकैती कम मर्डर हो जाए तो वही एक छोटे से. क्षेत्र में आप डिप्टी एसपी रैंक के. अधिकारी हैं और इतनी बड़ी घटना हो गई तो. वह भी एक बहुत बड़ी घटना लगती है कि इसको. हम कैसे जल्दी से जल्दी वर्कआउट करें ताकि.
मेरा मेरा एसएसपी या मेरा जो सुपरवाइजरी. ऑफिसर है वो समझे कि नहीं भाई यह एक. अच्छे अधिकारी हैं और रिजल्ट ओरिएंटेड. अधिकारी हैं। तो मेरा मानना है कि दायरा. कितना भी छोटा या बड़ा हो. टारगेट ओरिएंटेड वर्क करना चाहिए और एक. निश्चित समय में रिजल्ट देना चाहिए।. ओपन एंडेड चीजें नहीं होती और तमाम.
प्रयासों के बावजूद भी कभी-कभी रिजल्ट्स. नहीं आते हैं। लेकिन अगर एफर्ट्स सही हो. और सिंसियर हो तो सफलता अवश्य मिलती है।. आपने अपनी किताब का नाम द इनफोर्सर रखा. है। यूपी में आपको लोग एनकाउंटर. स्पेशलिस्ट कहते हैं। आपके बारे में. Google करो तो निकल कर आता है 300 प्लस. एनकाउंटर किए हैं। ये एनकाउंटर स्पेशलिस्ट. टैग कैसे देखते हैं? यह तो छाती मेडल जैसा. है या बोझ है या आपको लगता है नहीं वेल डन.
नहीं ऐसी मैं वो अतिशयोक्तियां हैं ऐसी. कोई बात नहीं है और किताब तो अनिरुद्ध. मित्र ने लिखी है उन्होंने अपने टाइटल्स. बनाए हैं। यह अवश्य है कि उन्होंने काफी. इस पर रिसर्च किया। फिर हमसे भी कांटेक्ट. किया कि मैं एक बुक लिख रहा हूं। तो. सूचनाएं तो जो पब्लिक डोमेन में है वही है. इसमें।. लेकिन जैसा कि मैंने कहा कि एक रिजल्ट. ओरिएंटेड.
वर्क का पक्षधर मैं रहा हूं और जहां भी. चाहे फील्ड में हो या फिर मैं. पैरामिलिट्री में भी था। तो जो. जिम्मेदारियां दी जाती हैं उसको मैं. बखूबी निभाने का प्रयास करता हूं। और जो. भी नीतियां या लक्ष्य होते हैं उसको मैं. अवश्य अभी तो जनरलाइज स्टेटमेंट आप दे. दीजिए। देखिए हमारे यहां हम थोड़ा ना. स्पेसिफिक पूछते हैं। हम. जो सरकारी आंकड़ों में कितना एनकाउंटर.
किया? नहीं डायरेक्ट तो मेरा अपना पर्सनल जिसमें. कि देखिए एक जो ऑपरेशंस होते हैं बहुत. सारे ऑपरेशन आप प्लान करते हैं। कुछ ऐसे. ऑपरेशंस होते हैं जहां आप खुद पार्टिसिपेट. करते हैं। तो जो खुद पार्टिसिपेट करने. वाली बातें हैं तो ऐसे करीब 10 केसेस. होंगे जहां आदमी खुद जाता है क्योंकि जब. वैसी स्थिति आती है. जब आपके सबोर्डिनेट यह देखना है आपके मेटल.
को भी टेस्ट करते हैं। आपकी फौज या आपकी. टीम देखना चाहती है कि मेरा लीडर कैसा है।. तो जब तक आप फ्रंट से नहीं लीड करेंगे तब. तक वो ना तो आपको अपना लीडर मानेंगे। जैसे. होता है ना कि घुड़सवार के बारे में है कि. घोड़े को पता होता है कि घुड़सवार कैसा. है। वह उस हिसाब से बिहेव करता है। तो जब. आप अपने प्रोफेशनलिज्म से अपने टीम को. मोटिवेट करेंगे, लीड करेंगे तब जाके लोग.
आपका लोहा मानते हैं।. तो वैसे क्षण आते हैं। हर एक पुलिस ऑफिसर. के लाइफ में आते हैं। और मेरा अपना मानना. है कि सभी को. वैसी स्थिति में लीड करना चाहिए अगर वो एक. अच्छे लीडर बनना चाहते हैं।. तो किसी एनकाउंटर में जाने से पहले सबसे. कठिन फैसला क्या होता है? कुछ नहीं। वो तो जब ऑपरेशन में गोलियां. चलती हैं तो उस समय सीनियर जूनियर और.
वरिष्ठ कनिष्ठ की कोई बात नहीं रहती। वो. तो आप फुल्ली प्रिपयर्ड रहते हैं। जो एक. सिपाही के साथ हो सकता है। वह लीडर के साथ. भी हो सकता है। यह फौज के ऑपरेशंस में भी. होता है। आपने देखा होगा तो उस समय सभी. तैयारियां की जाती हैं। जिस तरह का लक्ष्य. है उस तरह से घेराबंदी की जाती है।. प्रोटेक्शन लिया जाता हैकि हम लोग बेटर. ट्रेंड होते हैं और तब उस ऑपरेशन को अंजाम. दिया जाता है।. तो जिन 10 एनकाउंटर में आप गए थे कभी लगा.
कि आज शायद घर ना लौट पाए।. नहीं ऐसी चीजें होती हैं? कभी आपको लगा ऐसा? हां ऐसे ही ऐसी होती हैं। एक बहुत पहले की. बात है। मैं सोनभद जिले में था और एक. मुखबिर की हत्या नक्सलियों ने कर दी थी और. वो शाम का समय था और यह सूचना आई कि वो. पूरी टीम जो है वो जंगलों में है और ऐसे. चांसेस हैं कि वह हमारे पुलिस चौकी पे.
अटैक कर सकते।. तो इस सूचना के बाद से ऐसी रणनीति बनाई. गई। उसमें भी दो मत थे कि इस तरह की चीजें. ट्रैप करने के लिए भी लगाई जाती है कि अगर. इस पर पुलिस मूव करेगी तो पुलिस पर हम. अटैक करेंगे। लेकिन साथ ही साथ अगर पुलिस. बल ना जाए और हमारे थाने पे अटैक हो जाए. तो यह एक और काउंटर प्रोडक्टिव होता। तो. वैसी स्थिति में हम लोगों ने पूरी टीम को. लेके पैदल उस पहाड़ी इलाके में हमने चौकी.
पर हम लोग गए थे और काफी जब हम लोग वहां. पहुंचे और जब हमारे जवानों ने हम लोगों को. देखा तो वो जो क्षण है वो केवल. फील किया जा सकता उसको एक्सप्लेन नहीं. किया जा सकता मतलब शब्दों में बयान करना. बहुत मुश्किल है कि जिस तरह की खुशी या. रिलीफ उनको मिला कि नहीं अब हम लोग सेफ. हैं और हमारे वेपन नहीं कोई लूट सकता या. हमारे चौकी पे अटैक या हम इतना बल है कि.
हम किसी के साथ 4 घंटे 10 घंटे फायरिंग भी. अगर होगी तो हमारे पास इतना फायर पावर है. इतना जनशक्ति है या हमारे एसपी हमारे. सामने हैं तो वो इन चीजों का एक. कॉन्फिडेंस रहता है।. अच्छा कभी किसी ने आपसे कहा कि आपकी मूछों. की वजह से कि इंप्रेशन अलग पड़ता है? नहीं. ऐसी तो बात नहीं है।. आपकी मूछों बड़ी चर्चा रही है। जब बीडीजी. लॉ एंड ऑर्डर था तब भी नहीं ऐसी कोई बात. होती नहीं है।. किससे इंस्पायर हो के मूछ रखी थी आपने?
नहीं ये तो मैं तमिलनाडु में था। वहां. बहुत इसका रिवाज था।. तो बहुत उसी समय से मुझे लगता है कि कुछ. दिमाग में इस तरह की बातें थी।. कई साल से रख रहे हैं ये वाली मूछ।. ये तो 10 साल लगभग हो गए।. तो इसके बारे में कोई तो नोटिस कोई. कॉम्प्लीमेंट तो आया होगा। नहीं ये सब. चीजें तो व्यक्तिगत कॉम्प्लीमेंट्स आते. रहते हैं। इसका कोई वो नहीं है।. ओके अ. शुरू करते हैं। सर कई घटनाएं आपने लाइफ. में कवर की हैं। सबसे बड़ा अपराधी कौन है.
जिसके बारे में आप शुरू करना चाहेंगे? आपके कार्यकाल में अपराधियों की पूरी फौज. रही है। बहुत सारे अपराधी रहे हैं।. ऐसे अगर हम. कुछ तो. क्रिमिनल होते हैं, कुछ माफिया भी होते. हैं। तो हमने सभी तरह के अपराधियों से डील. किया है। और इस बात का मुझे सेटिस्फैक्शन. है कि ऐसे माफिया.
जिनकी 25-25 30-30 साल की क्रिमिनल. हिस्ट्री थी।. उनको सजा दिलाने में भी हम लोग सक्सीड. किए। हम. और वह इसलिए संभव हो पाया कि सरकार की एक. नीति रही कि अपराध और अपराधियों के प्रति. जीरो टॉलरेंस की नीति थी और हम लोगों ने. केवल अपने ऑपरेशनल पावर को ही नहीं ठीक. किया। हमने 360 डिग्री पुलिस की वर्किंग.
में सुधार लाए। जैसे इन्वेस्टिगेशन का है, एविडेंस का है, विटनेस प्रोटेक्शन का है, अपने प्रोकटर को सही करना है। और इस तरह. से एविडेंसेस हमने कोर्ट में प्रोड्यूस. किए कि ऐसे. माफिया जो कि बहुत लंबे समय तक कानून की. गिरफ्त से बाहर थे। उन सबको हम लोगों ने. आजीवन कारावास और लंबी सजाएं दिलाई और आज. के दिन में करीब ऐसे 120.
मुख्य माफिया या उनके गुर्गे हैं जो कि. जेल में हैं।. सर ये तो यूपी में काफी लोग कहते हैं कि. यूपी में कानून व्यवस्था पिछले समय के. मुकाबले बेहतर हुई है। लोग थोड़ा सेफ फील. करते हैं। लेकिन आप पर कई एलिगेशन भी आते. हैं। मैं केसेस जाने के पहले उन एलीगेशन. से बात कर लेता हूं। जैसे एक आरोप ये लगता. है कि 2017 से 22 के बीच में 150 प्लस. एनकाउंटर हुए। अब उसमें विपक्ष बार-बार ये. कहा कि ये दायरे कानून के दायरे से बाहर. जाकर आप लोग ये करते थे। मानव अधिकार. संगठन जो है आई श्योर आप यूज़्ड टू होंगे.
उन लोग के आरोपों को लेकर। वो कई बार कहते. थे कि यूपी में मॉडल कानून का नहीं और. इसके सबसे बड़े चेहरे आप ही को लोग रखते. थे। नहीं देखिए यह बातें. जो करते हैं. कोई भी ऑपरेशन होता है और खासकर वैसे. ऑपरेशन जिसमें कि बदमाश मर मरता है. तो उसका एक प्रोटोकॉल है कि उसकी. इन्वेस्टिगेशन कैसे होगी? उसकी जांच कैसे. होगी? माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उसके. गाइडलाइंस तय कर रखे हैं। ह्यूमन राइट.
कमीशन ने उन चीजों को तय कर रखा है। उसकी. समयबद्ध तरीके से रिपोर्टिंग होती है।. क्या-क्या चीजें जानी है और जो आदमी उस. ऑपरेशन में इनवॉल्व रहता है। उसको उस पूरी. प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। पुलिस के. इन्वेस्टिगेशन से जो कि एक सामान्य अपराधी. भी गुजरता है। तो वह अग्नि परीक्षा. प्रत्येक पुलिस वालों को देनी पड़ती है जो. कि शायद इन लोगों को नहीं पता या ऐसे लोग.
जो कि यह गैर जिम्मेदाराना बातें करते हैं. उनसे यह भी तो कोई पूछे कि इस आप यह बताइए. कि इस तरह के कार्य करने से पुलिस का. व्यक्तिगत क्या फायदा है? बदमाशों के विरुद्ध कारवाई करने से पुलिस. का व्यक्तिगत क्या फायदा है? एज अ विभाग. शासन ने एक नीति बनाई। कि हम अपराध और. अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति. रखें।.
मेरिट बेस्ड पोस्टिंग हुई। भर्तियां भी. बहुत साफ सुथरे तरीके से की गई। नए लोग. आए। एज प्रोफाइल कम हुआ और उस पर. कारवाईयां अपराधियों को चुन के उनके. विरुद्ध कारवाई शुरू हुई। उनको अभियुक्त. उनके केसेस की पैरवी सही गई। उनको उसमें. सजा दिलाई गई। कुछ ऑपरेशन हुए। उसकी जांचे. हुई। चाहे वह जुडिशियल जांचे हो, जुडिशियल. कमीशन हो, सभी जगह सभी चीजें तो पूरी की.
गई। आपको क्या यह लगता है कि इतने बड़े. सिस्टम में सब चीज गलत करके कोई ऐसे ही बच. जाएगा जहां इतने. इतने. वर्टिकल्स हैं जो हर एक चीजों को. माइक्रोस्कोप लगा के और मैग्नीिफाइंग. ग्लास से देख रहे हैं। यह बात अलग है कि. भाई आधा गिलास भरा है तो कोई कहता है कि. नहीं आधा गिलास खाली है। यह चीजें कह सकते. हैं और बाद में ड्राइंग रूम स्ट्रेटजी या.
कैमरे के अंदर स्टूडियो के अंदर इन चीजों. को कहना बहुत आसान होता है। लेकिन जब वहां. कोई घटना या कोई चीज या लाखों की संख्या. में लोगों को फेस करना पड़ता है या लॉ एंड. ऑर्डर को फेस करना पड़ता है। तो वो तो. पुलिस वाले ही फेस करते हैं या जो. मैजिस्ट्रेट होते हैं।. ये बिल्कुल सही बात है कि स्टूडियो में. बैठ के पूछना आसान होता है। लेकिन जो कॉमन. क्वेश्चन सर आता है वो ये आता है कि बहुत. सारे एनकाउंटर्स में एक ही कॉमन पैटर्न. आता है कि सामने से पहले गोली चलाई गई फिर.
हमने फायर किया उसके एनकाउंटर में जितना. हमने सुना कि पैर में गोली मारनी चाहिए. उसकी डेथ हो गई एक पुलिस वाले को बहुत ही. हल्की सी चोट लगी या चोट नहीं लगी और बच. गए. और ये रिपिटेटिव में आया तो ये लोगों ने. कहा कि एनकाउंटर में तो पहली गोली पैर पे. होती है। फिर पुलिस वालों को लेकर एक ही. स्टेटमेंट तो यह 100% एनकाउंटर सही है। तो. यह 20. मेरे हिसाब से 2025 पुलिस वाले भी इस. दौरान शहीद हुए हैं. और हजारों पुलिस वालों को भी गोलियां लगी.
हैं।. तो यह कहना. उनके द्वारा किए गए अच्छे कार्यों का मजाक. उड़ाने की तरह है। आप उसका रिजल्ट देखें।. अपराध में क्या कमी आई? प्रदेश की क्या प्रगति हुई? एक अच्छे. कानून व्यवस्था होने से प्रदेश का क्या. प्रोग्रेस हुआ? किस तरह से इकोनमिक. डेवलपमेंट हो रहा है? यह आप देखिए। कितना एफडीआई आया? आप बीमारू.
स्टेट के कैटेगरी से निकल कर हाईएस्ट. रेवेन्यू सरप्लस स्टेट्स में आप चले गए।. ये क्यों हो गया? आपके दो या तीन एक्सप्रेसवे थे। आज 22. एक्सप्रेसवे कैसे हो गए? आपने विश्व का सबसे बड़ा कॉन्ग्रगेशन. ह्यूमन कॉन्ग्रगेशन को मैनेज किया।.
जो 500 साल से चला हुआ विवाद अयोध्या जी. में चल रहा था। वो वो पीसफुली सेटल हुआ. ऑनरेबल कोर्ट के माध्यम से और उसके दौरान. जो चीजें हुई तो इन चीजों के बारे में भी. तो देखना चाहिए कि यह सभी चीजें इसलिए हो. पाई कि एक सरकार की नीति अच्छी है। सरकार. की नियत अच्छी है और. एक ऐसा पॉलिसीज उन्होंने बनाई जिससे कि अ.
प्रोग्रेस अब सिर्फ प्रोग्रेस की बात नहीं. है। फास्टर ग्रोथ की बात हो रही है।. तो आप ये कह रहे हो कि आपका 35 साल का जो. कार्यकाल रहा पूरा उसमें सबसे ज्यादा यूपी. को फायदा इन बीते 10 सालों में हुआ।. नहीं ये तो मैं नहीं कह रहा हूं। यह तो आप. किसी भी आंकड़ों को देखेंगे अगर. अब जैसे पिछले. जब एक बार बेटर कानून व्यवस्था स्टेबल.
सोशल सिक्योरिटी हो गई तो पिछले 4 साल में. जो जीडीपी का ग्रोथ है वो नेशनल एवरेज से. भी ज्यादा है। पिछले 5 साल में जितना. एफडीआई आया. वह उसके पहले 15 साल में जितना आया था. उससे 500 गुना ज्यादा है।. तो ये तो मैं नहीं कह रहा हूं।. यह सीएजी के.
आंकड़े कह रहे हैं कि भाई आपका हाईएस्ट. रेवेन्यू सरप्लस स्टेट आज की डेट में 16. ऐसे स्टेट हैं देश में जो रेवेन्यू सरप्लस. हैं और उसमें नंबर एक पे यूपी है और जो. नंबर टू पे है वो. 20000 करोड़ कम का है. आप काफी. कोई बराबरी नहीं है।. आप काफी इंस्पायर लग रहे हैं योगी जी से. मुझे।. नहीं मैं. बात व्यक्ति की नहीं है।. बात सिस्टम की है।. सिस्टम तो वही चला रहे हैं ना। अब सरकार.
उनकी है। कंट्रोल उनके पास है।. देखिए वो ये चीजें हम पॉलिटिकल की तरफ. नहीं लिया।. जी. अगर आप व्यवस्था परिवर्तन की बात करेंगे।. अल्टीमेटली पब्लिक डिलीवरी पब्लिक सेफ्टी. ही सभी गवर्नमेंट का धेय होता है। कि एक. अच्छा माहौल दें। लोग सुरक्षित रह और समाज. में चतुर्दिक विकास हो।. बिल्कुल सही। और मैं आम लोगों का एक. क्वेश्चन पूछ रहा हूं। बड़े पॉलिटिकल साइड. करके. हम.
35 साल का आपका लंबा कार्यकाल रहा। जैसे. मेरा अपना नजरिया है जब मैं यूपी में. पढ़ता था रहा सब कुछ देखा तो एक मायावती. का दौर आया था। मैंने कल्याण सिंह जी के. दौर के बारे में सुना है क्योंकि तब मैं. बहुत छोटा था तो मुझे उतना उसका ज्ञात. नहीं है। मैंने मायावती के दौर के बारे. में सुना कि पुलिस प्रशासन थोड़ा सख्त. रहती थी। स्कूल में हम आसपास गोंडा शहर. क्योंकि मेरा पढ़ता था उत्पाती जिला है।. काफी लोग वहां रहते थे। नेता, मंत्री, सांसद सब उधर सब वही लोग हैं रसूखदार लोग।. तो उस दौर में मैंने देखा योगी जी वाले. बड़ी बातें चलती हैं। अब मैं एक अधिकारी.
से जनता के पॉइंट ऑफ व्यू से पूछने जा रहा. हूं।. कल्याण जी, मायावती जी, मुलायम अखिलेश जी. और योगी जी। बाकी बीच में जो आए वो. छोड़े-छोटे कार्यकाल थे। इसलिए मैं राजनाथ. जी या रामप्रकाश गुप्ता जी का जिक्र नहीं. कर रहा हूं। क्या डिफरेंसेस थे इन दौर में. और एक पुलिस अधिकारी को कैसे छूट या कानून. व्यवस्था को अब जब आप रिटायर हो गए और. पीछे मुड़ के देखते हैं तो कैसे देखते हैं. सबसे असख्त कहां थे? देखिए सभी शासन में जैसे कल्याण सिंह जी. का के समय में भी मैं था। मायावती जी के.
समय में भी था। मैं मुलायम सिंह जी के समय. में भी फील्ड में रहा हूं। केवल अखिलेश जी. का एक ऐसा पीरियड था जब मैं फील्ड में. नहीं था। मैं भारत सरकार में था। वहां से. लौटा तो मैं एक अच्छे पद पर था। पीएससी का. हेड था। तो कुछ लोगों को तो उतना लंबा. कार्यकाल नहीं मिला।. इस गवर्नमेंट के साथ फायदा यह भी है कि एक. लंबा कार्यकाल है और उसमें एक सस्टेंड.
एफर्ट है। कंटीन्यूअस चीजों को कंटिन्यूटी. मिली हुई है। उस कंटिन्यूटी का लाभ. अल्टीमेटली आम जनता को मिल रहा है। एक. पॉलिसी निर्धारित हो गई। उन चीजों पर सभी. अधिकारी एक टीम वर्क के हिसाब से कार्य कर. रहे हैं। और उसके जो रिजल्ट्स आ रहे हैं. यह हो सकता है कि कुछ ऐसे पीरियड हो जब. कानून व्यवस्था पे काम हुआ और जब टेक ऑफ.
का स्टेज आया तब तक सरकार ही बदल गई।. जैसे किस में अब थोड़ा इसको इस पे थोड़ा. प्रकाश डालिए। ये तो पॉलिटिकल सवाल नहीं. है। नॉन पॉलिटिकल है।. ऐसा चीज क्योंकि. किसके दौर की बात करें? कल्याण जी के. मायावती जी के मुलायम जी के. नहीं नहीं यह तो जैसे कल्याण सिंह जी का. समय था।. तो उस समय भी पूरी छूट थी कार्य करने की. अपराध अपराधियों पे।. और मायावती जी के समय में भी पूरी छूट थी।. लेकिन हो सकता है कि अन्य विज क्योंकि हम.
लोग उस समय केवल कानून व्यवस्था से जुड़े. थे। आज के डेट में हमने बहुत ही बड़े. स्केल पर मैक स्केल पर स्टेट लेवल पर. चीजों को देखा है और स्ट्रेटेजिक डिसीजंस. जो होते हैं शासन स्तर से उसको इंप्लीमेंट. होते हुए देखा है। तो मुझे यह लगता है कि. आज का दौर बेस्ट दौर है।. जहां तक कि प्रोग्रेस और डेवलपमेंट की बात. है। और कानून व्यवस्था. कानून व्यवस्था तो है ही कानून व्यवस्था.
देखिए सभी चीज के बेसिक में कानून. व्यवस्था जब तक अच्छी कानून व्यवस्था नहीं. रहेगी. तब तक यहां कोई भी बाहर का व्यक्ति. इन्वेस्टमेंट नहीं करेगा. और इतना प्रोग्रेस लोकल रिसोर्स मैनेजमेंट. से नहीं होता जब तक कि बाहर से नहीं आए और. आप तो. गोंडा के ही रहने वाले हैं। पूरा. इंडोगेंजेटिक प्लेन है। उर्वरा धरती है।. जमीन भी उपजाऊ है। सब तरीके से.
हमारे ओझा जी कहे लोहा डालो कट्टा. निकलेगा।. हां तो वो तो है कि जिस तरह का आप. बीज रोपेंगे उस तरह का फसल तैयार होगा। तो. एक अच्छा माहौल बना है और इसमें. एंप्लॉयमेंट जनरेशन हो रहा है। नई. फैक्ट्रियां खुल रही हैं। एग्रीकल्चर में. के सारे जितने मापदंड हैं देश में गेहूं. में फर्स्ट, चावल प्रोडक्शन में फर्स्ट, दूध प्रोडक्शन में फर्स्ट।. तो ये सब चीजें तो प्रथम स्थान तो अब आने.
शुरू हुए हैं।. ठीक है? इस बीच में पुलिस बहुत एक्टिव नजर. आई। यूपी में पुलिस पिछले कुछ सालों में. बहुत ज्यादा एक्टिव है। बहुत सारे केसेस. हुए हैं। बहुत सारे दुरदांत माफिया जिनके. अनगिनत खौफनाक किस्से सुनकर हम बड़े हुए. थे। डरते थे समाज के लोग भी और किस्से. कहानियों में भी। कुछ दुनिया में नहीं. रहे, कुछ जेल के अंदर हैं। यह एक उत्तर. प्रदेश पुलिस की अचीवमेंट के तौर पर यह. आता है। लेकिन विपक्ष इसमें आरोप यह लगाता. है कि यह बड़े सेलेक्टिव हुए।.
मुख्तार गए, अतीक गए, आजम खान जेल में गए।. लेकिन जो इस पार वाले थे वह रह गए। तो. पुलिस ने कारवाई की है। यह विपक्ष भी कह. रहा है। लेकिन कारवाई एक आंख से की है।. दोनों आंख खुल।. नहीं ये तो मैंने आपको बताया ना कि वो. ग्लास।. आप कहेंगे कि आधा भरा है तो कहेगा आधा. खाली है।. अगर आप माफियाओं के जो कन्विक्शन की सूची. है. अगर मैं आपको नाम पढ़ दूं.
जी. तो आप जो माफिया मारे गए. बिल्लू आदित्य राणा अनिल दुजाना. विमल उपाध्याय. हरिकेश राकेश पांडे कन्हैया परवेज अतीक. संजीव जीवा, खान मुबारक, मुख्तार. यह तो मारने वाले हैं जो मरे तो इसमें.
कहां से आरोप लगा और यह तो पूरब से लेकर. पश्चिम तक की बात मैं बता रहा हूं।. और जो कन्विक्शन है मुख्तार के आठ. कन्विक्शन है। अतीक के भी लाइफ कन्विक्शन. है। विजय मिश्रा, सुंदर भाटी, अजीत हप्पू, कुंटू सिंह, योगेश भदौरिया भदौरा अमित. कसाना, रणदीप भाटी, उधम सिंह, अनुपम दुबे, जुगनू वालिया इत्यादि इत्यादि। तो अगर 120.
लोगों को मुख्य माफिया के लोग सजा हुई है. और इनकी 4000. से भी अधिक करोड़ की संपत्ति जब्त हुई।. इनके इन्होंने जो. सब चीजें कब्जा कर रखी थी उस पर घर बनाकर. गरीबों को बांटा गया। अब. कहने वाले तो कुछ कहेंगे।. आप तो गुंडा के रहने वाले हैं।.
उस त्रता काल में भी लोगों ने कहा।. तो आप ये कह रहे हो कि क्योंकि कुछ नाम. मीडिया में ज्यादा ग्लैमराइज थे। इसलिए. बाकी नामों को लोग नहीं जानते इसलिए आरोप. लगा दे रहे हैं। अगर पूरे नाम जाने तो. ऐसी बात नहीं है और देखिए कानून आइडियल. ऐसा कुछ नहीं है। कानून व्यवस्था या. डेवलपमेंट एक ऐसी चीज है. जिसके लिए यह नहीं हो सकता कि नहीं अब आज. के बाद से सुधार की गुंजाइश नहीं है।. सुधार की गुंजाइश तो अभी भी है और यह भी.
नहीं कि आज के बाद से अब माफियाओं पर. कारवाई बंद या इनके केसेस की पैरवी बंद. ऐसा भी तो नहीं है।. लगातार कारवाई हो रही है।. अब एक-एक केस शुरू करते हैं। पहला केस. अतीक से शुरू करते हैं। एक तो पहले आप. मुझे बताइए कि आपकी नजर में अतीक और. मुख्तार में आपको क्या अंतर दिखता था? यह सब ड्रेडेड माफिया हैं और जिन्होंने. पूरे. एक ही तरह के दोनों लगते हैं या दोनों में. कुछ आपको अंतर दिखता है। अतीक और मुख्तार. की बात कर रहा हूं मैं।.
नहीं अपराधिक इतिहास देखते हुए तो कोई कमी. कोई ये कहना कि कौन बड़ा और कौन छोटा ये. तो बड़ा मुश्किल है।. जैसे कुछ लोग. जो लोग तो ये लोग तो वैसे हैं जो कि. इलेक्टेड. एमएलए को भी मरवा देते हैं। अगर उनके. हिसाब से चीजें नहीं हुई।. दोनों ही कहानी ऑलमोस्ट सिमिलर सी कृष्णंद. राय हत्याकांड, उमेश पाल हत्याकांड. जी राजूपाल. राजूपाल हत्याकांड बाद में उमेशपाल. हत्याकांड. हां हां. तो उसमें किस तरह से और किस विभस तरीके से.
और पूरे व्यवस्था को धता बता के जैसे जिस. तरह की फायरिंग और वो चीजें हुई थी ये तो. पूरी दुनिया ने देखा है।. ज्यादा टफ केस कौन सा था? अतीक का या. मुख्तार का? नहीं कन्व्शन कराना।. नहीं वो तो दोनों केसेस है। जैसे मैंने. बताया मुख्तार को तो आठ सजाएं कराई गई. डेढ़ साल के अंदर. जिसमें से दो आजीवन कारावास की अतीक और. उसके भाई के भी एक आजीवन कारावास की सजा. हुई। दूसरी होने वाली थी तो उसने उमेश पाल.
की हत्या करा दी। जिसकी वाइफ राजूपाल जो. मुख्य व्यक्ति की हत्या हुई थी उसका. उसकी वाइफ खुद विधायक हैं आज के दिन में. और अनगिनत किस्से हैं अतीक अहमद के किस्से. में क्योंकि उमेश पाल राजू पाल की हत्या. कराई गई उस दौर के बाद भी अतीक खूब बढ़े.
फले फूले बड़े विधायक सांसद सब बने काफिला. चला. यही यूपी पुलिस थी। क्या अंतर हो गया कि. उस दौर में अतीक बढ़ते रहे, बढ़ते रहे, मर्डर तो बहुत पहले कराए थे। राजू पाल के. मर्डर के बाद अतीक बढ़े। उमेश पाल के. मर्डर के बाद खत्म हो गए। अंतर क्या था? क्योंकि आप ही लोग तो तब भी पुलिस में थे।. अभी भी पुलिस में आप लोग थे।. नहीं वही मैंने बताया ना कि एक तो जो. इच्छाशक्ति शासन की जो इच्छाशक्ति होती है. कि नहीं हम अपराधियों को किसी भी कीमत पे.
टोलरेट।. आप लोग इंडिपेंडेंट नहीं होते पुलिस वाले।. नहीं एक डेमोक्रेटिक सेटअप में किस तरह से. इंडिपेंडेंट होने की बात होती है? जैसे मैंने शबुद्दीन एक किस्से सुने उसमें. ऊपर से फोन आ गया था. ये फाइल जमा कर जाओ या एनकाउंटर नहीं. करोगे इसका. जब 20056 में जब भी या चार में जब भी. राजूपाल की हत्या हुई उस दौर में आप लोग. को मना किया गया होगा जो अधिकारी रहे. होंगे कि आप लोग कारवाई नहीं करेंगे।. अब इसके बारे में तो जिनको मना किया गया. वही बता पाएंगे। हमें तो कोई कारवाही करने.
के बारे में किसी ने नहीं कहा कि इसको. धीरे कर दीजिए इसको तेज कर दीजिए। बस सबको. एक निगाह से देखना है। तो फिर इस इसका. सवाल फिर क्या है कि जो राजू पाल के मारने. के बाद वो बढ़ गए। उमेश पाल के बाद वो मिट. गए। उनका खानदान मिट गया।. नहीं मैंने कहा ना कि एक उस तरह का. गवर्नमेंट के इंस्ट्रक्शंस हैं। किसी को. नहीं बख्शना है।. आप क्या कह रहे थे जब अतीक अहमद की हत्या. हुई थी? नहीं हम लोग तो.
मुख्यालय पर थे और मैं स्पेशल डीजी था।. सवा5 बजे रात को घटना आई थी। मैं तो आज तक. बेटा खबर. हां आपने ब्रेक किया था।. हां. हां वो तो हम लोग भी अपनी सभी मीटिंग. मीटिंग खत्म करके जा रहे थे। इस तरह की. सूचना आई थी और यह जरूर था कि बड़े अथक. प्रयास के बाद से उसको दूसरे प्रदेश से. लाया गया था और उमेश पाल की हत्या में. पुलिस कस्टडी रिमांड लेके उससे पूछताछ चल. रही थी। बट जिस हिसाब से दो सिपाही लेकर.
उसको घूम नहीं दो सिपाही नहीं आप आप फिर. से पुनः उस वीडियो को देखिए मैं मुझसे. जिसने भी पूछा मैं बता रहा हूं कि यह. मैंडेटरी है कि जब भी कोई व्यक्ति पुलिस. कस्टडी रिमांड में होता है तो शाम को उसको. जेल में वापस दाखिल करना होता है।. और उसके पहले उसका पूरा मेडिकल परीक्षण. कराया जाता है। इसलिए कि यह आरोप. प्रत्यारोप कि पुलिस ने मुझे मारा या कोई. टॉर्चर तो नहीं हुआ। इसका बजाप्ते अह.
हॉस्पिटल से सर्टिफिकेट लेके फिर उनको जेल. दाखिल उस अभियुक्त को किया जाता है। यहां. भी यही प्रक्रिया चल रही थी। बजाप्ते. अच्छी खासी संख्या में पुलिस वाले थे। और. जब वो मेडिकल परीक्षण के लिए जा रहा था।. अगर आप बहुत गौर से देखेंगे तो जैसे ही वह. प्रेस की तरफ आया था उसको मना किया पुलिस. वालों ने कि आप सीधे चलिए।.
लेकिन. उसका. वो तो भाई खुद ही सब कुछ चलाता था।. उसने पुलिस की बात नहीं मानी।. मेन बात यह है कि गुड्डू मुस्लिम. और फिर दो गोली।. हां और दोनों भाई. तो अब उसमें. उस पत्रकारों की टोली में. दो व्यक्ति ऐसे भी थे जो कि कैमरा और आईडी. ले खड़े थे। जिन्होंने उसको थ्रो किया फिर.
फायरिंग की। उस कुछ क्षण में एक मिनट भी. नहीं लगा होगा।. एक या डेढ़ मिनट हां. उतने मिनट में. उन्होंने फायरिंग की। पुलिस वाले को भी. गोली लग गई। उस. पुलिस को गोली लगी थी।. हां पुलिस को भी गोली लगी। क्योंकि जो. वीडियो मैंने देखा था उसमें था कि आते हैं. मारते हैं हम. और फिर सिपाही डंडा लेके उनको पकड़ लेता. है और मैं हैरान यह था कि. उसको आपने देखा नहीं उसको गिरा के पकड़ा. जाता है उसका वेतन भी रिकॉर्ड. छोड़ देते वो पुलिस वाले गोली नहीं चलाते. वो. नहीं वोकि इतनी संख्या में पुलिस वाले थे.
उसको पकड़ा गया और उसके बाद से उनको यह भी. है कि कोई दूसरा ना उसको कभी-कभी यह भी. होता है ना कि कोई मारने आया उसको भी कोई. कवर कर रहा है. हम. उसको तत्काल सुरक्षित किया जाए नहीं तो. अगर उसे कुछ हो जाता तो फिर ये दूसरे आरोप. से गिर जाते।. कौन लोग थे जो मारने आए थे लड़के? ये तो हमीरपुर के लड़के थे। उसका नाम पता. सभी चीजें प्रेस के साथ. हमने जितना पता किया था कि ₹9 की औकात. नहीं थी और 9 लाख की जिगना ले घूम रहे थे. लौंडे।. नहीं ये चीजें तो ग्रे मार्केट से आती थी।.
ये तो जो जिसकी मृत्यु हुई वो खुद ही. अक्रॉस द बॉर्डर उन चीजों के स्मगलिंग. कराता था।. वेपन इत्यादि।. अच्छा मैं चलिए इसको और मैं इसको वो नहीं. करता हूं। एक ओवरऑल आप अधिकारी थे। अतीक. ने बहुत सारी ऐसी घटनाओं को अंजाम दिया था. जो समाज में अच्छी नहीं थी या समाज में कई. लोग चाहते हैं कि इंसाफ हो जाए। क्योंकि. राजू पाल की जो हत्या करवाई गई थी उनकी. पत्नी की कहानियां हैं। अशरफ की अनगिनत.
कहानियां मैंने लड़कियों की सुनी है।. अनगिनत कहानियां कि कैसे लड़कियों को. उठाकर गंदी हरकतें की गई। मदरसा कांड. मैंने सुना है। क्योंकि मैं यूपी से तो और. इसी पॉडकास्ट में मनोज जी ने भी हमें 50. किस्से सुनाए थे। सो अतीक को लेकर किसी की. सिंपैथी नहीं रही। यह था कि जो घटना को. अंजाम दिया गया मैं आपसे पूछ रहा हूं।. क्या वो कानून का फेलर था? नहीं यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी. ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए। नहीं क्यों. हुई वो भी मैंने आपको बताया कि भाई कोई.
अगर मैं यहां बैठा हूं अभी और कोई आपके जो. ये शूट कर रहे हैं। इसमें से कोई एक. व्यक्ति हमें कर दे हमें नुकसान पहुंचा. दे। आपको नुकसान पहुंचा दे अचानक. तो क्या कर लेंगे यहां जो लोग बैठे हैं. लेकिन यहां हमको आपको अंदेशा नहीं है वहां. तो अतीक वहां इस चीज का कोई अंदेशा नहीं. था. वहां जब अतीक को लेके चल रहे थे तो जब वो. गाड़ी आ रही थी तो हर आदमी ये कह रहा था. कि भैया अब पलट गई गाड़ी अब पलट गई गाड़ी. ये तो देखिए वो तो जब दूसरे प्रदेश से. लाया जा रहा थाकि एक घटना इस तरह की पहले.
हो चुकी थी. अह कानपुर में तो उसका रेप्लिका और पूरे. लाइव टेलीकास्ट वहां से हो रहा हां उसका. पेशाब करते अतीक अहमद को पेशाब करते भी. लाइव करवा दिए लोग।. हां नहीं ऐसा नहीं कि यह आज ही हो रहा है।. मैं आपको बताऊं कि एक 2000 की बात है ये. जब नीतीश कटारा कांड हुआ था. गाजियाबाद में तो डीपी यादव के लड़के ने. यह घटना का अंजाम दिया था। तो उसको जब हम.
लोग भोपाल से पकड़ के ला रहे थे तो उस समय. भी एक टीवी पे यह चीज विदाउट कमर्शियल. ब्रेक चलती रही।. कि इस जो अभियुक्त को कोई डैमेज ना हो. जाए।. यह तो पीछे से करवा दिए होंगे कि भाई साहब. कैमरा रहेगा तो पुलिस वाले थोड़ा सा. नहीं नहीं बात ये नहीं है। पुलिस के लोगों. को क्या आप मैं तो आपको बता रहा हूं कि. जैसे अतीक हीरा पुलिस का उसमें क्या. इंटरेस्ट उसे ऑलरेडी आजीवन कारावास की सजा.
हो चुकी थी। दोनों भाइयों को. जेल में तो मौच काटते हैं ना सर। हां नहीं. वह बात अलग है। वो वो एक अलग इशू है।. हां आप लोग के यहां जेल मतलब सजा नहीं है।. जेल मतलब तो मजा है कि आप पुलिस. प्रोटेक्शन में बैठे हैं।. नहीं नहीं देखिए जेल एक ये भी बहुत बड़ा. लोगों को भ्रम है कि जेल पुलिस के अंडर. होता है।. हां। जेल एक अलग. हां विभाग है।. एक अलग विभाग है और जेल के अह को जो.
कर्मचारी होते हैं वो टोटली अलग होते हैं।. उनका पुलिस से कोई लेना देना। कुछ लोग यह. हो सकते हैं कि वो. यहां से ऑन डेपुटेशन वहां चले गए। वहां. जाते हैं। लेकिन जब जो जिस विभाग जैसे हम. लोग भी प्रतिनियुक्तियों पे जाते हैं तो. हम वहां के नियम कानून और कायदे से गवर्न. होते हैं ना कि हम अपने मूल चीजों से. गवर्न होने लगते हैं। तो वैसी स्थिति रहती. है तो पुलिस का उनसे उससे कुछ लेना उनका. कोई ऐसा पुलिस को कोई गेन नहीं हो रहा था।.
व्यक्तिगत तौर पर अतीक अहमद की हत्या आपको. न्याय लगी। दुर्भाग्यपूर्ण लगी या लगा कि. इंसाफ हो गया। नहीं नहीं आपका व्यक्तिगत. क्या था. क्योंकि इसका कंप्लीट कर लेता हूं। यूपी. में दो तरह की भावना थी। एक वर्ग था जो. कहता है कि बढ़िया वो मर गया।. बहुत उत्पाद मचाया था। एक वर्ग था जो कह. रहा था कि नहीं यह हिंदुस्तान नहीं है। यह. तालीबानी प्रथा है। यह नहीं होनी चाहिए।. नहीं ये ये तरीका बिल्कुल सही नहीं है और. मेरी जो व्यक्तिगत इच्छा थी कि जो उमेश.
पाल के. हत्या में भी पूरी तरीके से सजा हो. क्योंकि इसके एविडेंसेस हमारे पास मौजूद. है और सारे लोग जिसने उमेश पाल की हत्या. की वो छ सात दिन पहले बरेली जेल में गए. उसके फुटेजेस भी हमारे पास हैं। तो उसमें. से जो लोग भी बचे हैं कोई कानून के शिकंजे. से बच ही नहीं पाएगा। 100% कन्विक्शन का. केस था।. मुझे विधानसभा का एक सीन याद आ गया। अभी.
बैठे-बैठे अखिलेश जी और योगी जी में काफी. बहस हो गई थी और अखिलेश जी ने कहा योगी जी. ने कहा था मिट्टी में मिला देंगे. और उसके बाद यह घटना हुई। क्या आपको लगता. है इसीलिए लोग ज्यादा रिलेट कर रहे हैं कि. अतीक इस तरह मरे क्योंकि योगी जी का वो. स्टेटमेंट जो था बड़ा आक्रोश में गुस्से. में और लोग यह मान रहे थे कि जिस तरह से. उमेश पाल को मारा गया वो पूरी खाकी को. कानून को सरकार को चैलेंज करना था. नहीं वो जो स्टेटमेंट को बहुत लिटरल सेंस.
में लोग ले रहे हैं।. सर राजनीति में संकेत ही तो पूरा खेल होता. है।. नहीं मिट्टी में मिलाना मींस. उसी के चुनाव एक चुनाव और पड़ गया। हम. पूरे. ऐसे माफिया तंत्र को. समाप्त कर देंगे। उनके आर्थिक रीड की. हड्डी जो है उनका इकोनॉमिक एंपायर खत्म कर. देंगे। उनके सारे गुर्गों को कानूनी तरीके. से जेल भेजेंगे। वो कहने का मतलब यह था।.
यूपी बिहार में आदमी गुणा गणित अंग्रेजी. समझे ना समझे राजनीति समझता है।. हां नहीं वो चीजें लोग अपने तरह से उसको. इंटरप्रेटेट कर रहे हैं। लेकिन इस तरह के. कोई निर्देश नहीं थे और ना ही एक. डेमोक्रेटिक सेटअप में इस तरह की चीजें. होती हैं और पुलिस ने इन हत्यारों के. खिलाफ हत्या के मुकदमे में चार्जशीट लगाई. है और ट्रायल पे भी केस. एक थ्योरी सर हमको यहीं बैठे क्योंकि ऑन. को ऑन स्टेटमेंट है मनोज जी ने कोट किया.
था कसारी मसारी अगर आपने पढ़ी उनकी तो. उन्होंने हमको बताया कि अतीक ने फोन. करवाया था कि का सोचत हो जिंदगी भर जेलम. रहा जो उन दिन आए वह दिन बताए थे अतीक के. हैं। बेटे के मरने के बाद असद की मौत के. बाद अतीक बोरा गए थे और बदला लेने के मूड. में थे।. धमकी आई थी अतीक की तरफ से। नहीं ऐसी हमें. तो हमें तो किसी किसी तरह की कोई धमकी. नहीं।. ऑडियो नोट बड़ा वायरल की बात आती कि. हां वो हो सकता है। लेकिन मैंने आपको शुरू.
में बताया कि यह चीजें प्रोफेशनल हज़ार्ड. है। अगर आप इस तरह से डर के रहेंगे तो फिर. तो. अतिक थोड़ा खौफ के बारे में बताइए।. तो खौफ तो. क्योंकि हमने जो किस्से कहानी सुनाई. आपने तो सुना ही होगा कि हां आगे कि 2020. जजों ने रिक्यूज किया बेल सुनने से। और. फिर एक ने जमानत दे दी।. हां। फिर आपने सुना होगा कि जब काफिला. चलता था तो सभी के काफिले रोक दिए जाते. थे।. हमने तो ये भी सुना है सुप्रीम कोर्ट के. बाद में चीफ जस्टिस थे उनका भी रुक जाता. था।.
नहीं ये चीजें. बट ये इतना खौफ था। तो ये कैसे एक आदमी. इतना बड़ा कैसे बन जाता है? तो यही यही तो व्यवस्था. चांद चांद बाबा के साथ घूमने वाला आदमी।. भाई चांद बाबा का ही मर्डर कर दिया उसने।. तो यह तो. इस तरह से सिस्टम के द्वारा उसको बढ़ावा. मिला कि इतना दिमाग खराब हो गया।. लेकिन बीवी तो नहीं खोज पाए आप लोग. शाहस्ता को। 100 दिन गाड़ी घुमाए आप लोग।. हम लोग भी मीडिया वाले लगे पड़े थे. क्योंकि ये खबर मैंने कवर की इसलिए मुझे.
इसकी डिटेल पढ़ने लिखने की जरूरत नहीं।. याद रहती है मुझे।. नहीं मैं सभी. शाहिस्ता नहीं मिली। अभी भी नहीं मिली।. अभी कानून के गिरफ्त में आएंगे। या पता था. आप लोगों ने छोड़ दिया कि अब हो गया बाप. बेटा चला गया तो बीवी के क्यों. नहीं नहीं ऐसा नहीं है पुलिस उसे जरूर लगी. होगी और ये सब ऑपरेशनल डिटेल्स होते हैं. जो कि. इंचार्ज है वो उन चीजों को. जो घटनाएं हुई उस पे बात कर लेते हैं। असद. की हत्याकांड को लेकर असद का एनकाउंटर जो. था असद के एनकाउंटर को लेकर मनोज जी ने. बताया कि पुलिस को Netflix से पता लगा था।.
हम सिर्फ वेरीफाई करें कि उनकी वाली. थ्योरी सही है नहीं सही है।. क्या? उन्होंने एक थ्योरी दी थी हमारे यहां. पडकास्ट में कि सब कुछ नंबर चेंज कर लिया. थे उसने। Netflix का आईडी पासवर्ड वो कहीं. उसने लॉग इन किया। वहां से आप लोगों ने. ट्रैक कर लिया था। ये उन्होंने बताया ऑन. कोड इसलिए वेरीफाई करना चाह रहा हूं मैं।. नहीं हमारे हिसाब से तो उस समय अतीक का. मूवमेंट वहां से होना था। असद असद की बात. कर रहा हूं मैं।.
नहीं मैं वही बता रहा हूं कि उसी दौरान. अतीक का मूवमेंट गुजरात से यहां होना था।. पुलिस कस्टडी रिमांड के सुनवाई के लिए तो. यह उस नियत से आया था कि हम अटैक करके. काफिले पे. पुलिस के. हां और फादर को हम छुड़ा लेंगे।. इतना दिमाग खराब था. कि पुलिस के काफिले. इस तरह के इंटेलिजेंस इंपोर्ट थे और उसी. पे फिर कारवाई भी हुई थी और उसमें वो मारा. गया था। वो और उसका एक साथी जिसप कि इनाम.
था।. और जो इलाहाबाद बम फेंका था उस घटना के. बाद आप लोगों का क्या रिएक्शन था? क्योंकि. हम लोग के लिए बड़ी शॉकिंग चीज थी। एक. आदमी चेहरा दिखा कर आकर बम फेंक कर जा रहा. है।. तो वही तो मैं बता रहा हूं कि इन चीजों के. जो लोग पुलिस की कारवाइयों पे इतना प्रश्न. चिन्ह उठाते हैं कोई यह नहीं कहता कि समाज. में इतनी अराजकता हो गई कि साहब इस तरह से. मर्डर कर रहे हैं। बम ऐसे फेंक रहे हैं. जैसे कोई गुलाब का फूल फेंक रहे थे।. तो यह तो सामाजिक विडंबना है कि आप कुछ.
करिए भी नहीं और कोई कारवाई कर रहा है तो. उसमें 50 तरह के मीन मेक निकालिए और. वो तो बात सही है कि वो सभी चीजों से तो. पुलिस वाले जब जांच पड़ताल होती है तो. उससे गुजर ही रहे हैं।. सबसे मुश्किल क्या होता है पुलिस वाले के. तौर पर? क्योंकि जब असद ने बम फोड़ा तब भी. मीडिया वाले आपको गाली दे रहे थे। जब असद. का एनकाउंटर हुआ तब भी मीडिया वाले आपको. गाली दे रहे थे।. नहीं यह किसने कहा कि मीडिया वाले गाली दे.
रहे हैं।. अरे टीवी देखना चाहता था कि भाई आप गलत. तरीके से एनकाउंटर हो गया। नहीं नहीं मार. देते हैं।. जैसे वह तो प्रोफेशनल रिक्वायरमेंट्स होती. हैं। हमने वैसे भी ऑपरेशन देखे हैं जो अह. बड़ी कठिन कानून व्यवस्था की स्थिति लॉ. एंड ऑर्डर की स्थिति होती है। जिसमें. पत्रकारों ने बहुत. सहयोग किया है।. सहयोग किया।. मुझे लगता है ये वाला किस्सा इसमें मैं भी. शायद था। मेरठ वाली बात कर रहे होंगे आप।. नहीं [हंसी] नहीं ऐसा नहीं है। मैं तो.
बहुत सारी चीजों में और बहुत अच्छे फीडबैक. भी आते हैं और कंस्ट्रक्टिव रोल प्ले करते. हैं। तो अगर आपकी नियत सही है और आप सही. मंशा से काम करते हैं तो सबका सहयोग समाज. के हर एक व्यक्ति का सहयोग पुलिस को मिलता. है। हां पुलिस को भी अपने कार्यों का. इंट्रोस्पेक्शन करना चाहिए। आप जब गलत. करेंगे तो क्रिटिसिज्म होगा। लेकिन आप सही. नियति के साथ आगे बढ़ेंगे किसी भी कार्य. के लिए तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में. भी सभी लोग समाज के हर एक वर्ग उसमें.
सहयोग करें।. किसी घटना में आप अपने आप से डिसपॉइंट हुए. कभी कि मैं इससे और बेहतर कर सकता था।. वो तो कसर तो रह ही जाती है। कोई कहीं. किसी केस में आपको कुछ इसका जिक्र करना. चाहे आप कि यहां मैं अपने आप से. डिसपॉइंटेड था कि मैं और अच्छा कर सकता. था। नहीं मुझे दो चीजें हैं। एक बहुत पहले. की बात है कि मैं मौके पर नहीं गया था और. मुझे मुझे अपने सबोर्डिनेट्स ने सही चीजें.
नहीं बताई और उसका बड़ा मुझे अफसोस रहा और. एक चीज यह भी था कि मैं मौनी अमावस के दिन. क्यों नहीं मौके पर था।. इसका अफसोस रहता है महाकुंभ में कि उस दिन. घटना हो सकता मैं रहता तो भी हो जाता. लेकिन मुझे अफसोस तो नहीं रहता. महाकुंभ को लेकर जो ये रिपोर्टिंग आई थी. कि ज्यादा लोगों की डेथ हो गई. नहीं ऐसी कोई बात नहीं है जो बात सही थी. वो सभी को पता है और वहां.
सभी को बताई भी गई लेकिन कुछ चीजें इस तरह. से दिखाई गई आप तो रहने वाले हैं खुद. यूपी के आपको पता होगा कि जब इतने. बड़े-बड़े स्नान होते हैं तो लोग कपड़े, जूते, चप्पल सब छोड़ देते हैं स्नान के. बाद और सब चीज नया पहन के चले जाते हैं।. तो घाटों की सफाई होती है। तो इस तरह से. चीजें दिखाई गई जैसे घाटों की सफाई हो रही. कि सारी चीजें भगदड़ की ही है। जबकि.
तो आप लोगों ने उन पत्रकारों पर फिर केस. क्यों नहीं किया? उन रूमर्स को क्यों फैलने दिया? नहीं रूमर्स की बात नहीं। नहीं वो बार-बार. चीजें बताई गई कि साहब वो और अगर इतनी. देखिए आज के डेट में इतनी बड़े अगर कोई. बड़ी वो होती तो जो लोग गायब हैं उनके घर. वाले चुप रह जाते।. एक छोटी बात तक तो यहां छिपती नहीं।.
लोग भूसे में से सुई निकाल लेते।. तो झूठ के भी कितने चीज हो गए। ऐसे भी. केसेस आए जो तेरे ही के दिन ही पहुंच गया. प्रयागराज में अपना घर घूमते हुए बंदा।. घर वाले तेरे ही मना रहे थे।. तो ये चीजें नहीं है। बताई गई लेकिन अब. कुछ लोग इन चीजों को सुनना नहीं चाहते।. आपका कहीं फेलियर नहीं था वहां पे।. नहीं मैं यह नहीं कह रहा हूं।.
जैसे जो. देखिए जब इतना बड़ा कॉन्ग्रगेशन होगा. तो वहां के सारे कंटिंजेंसी अरेंजमेंट्स. भी रहते हैं। कंटिंजेंसी ने कार्य भी. किया। घटना नहीं होनी चाहिए थी। लेकिन. उसके कारण कोई चीज बाधित नहीं हुआ।. शाही स्नान बाधित नहीं हुआ। आपने कभी भी. जो टीवी कंटीन्यूअस लाइव टीवी चल रहा था।. कहीं भी आपने ऐसी स्थिति नहीं देखी होगी. कि अचानक सब कुछ स्टैंड स्टिल हो गया हो।. सब चीजें चलती रही। लेकिन उतनी ही देर में.
जो चीजें हुई हमारी ग्रीन कॉरिडोर के थ्रू. गाड़ियां गई निकाल के लाए उतने बड़े स्टेज. में जहां करोड़ों लोग खड़े हैं उस समय नाम. नंबर और सब कुछ बताया जाना तत्कालिक रूप. से संभव नहीं होता तो जो प्रशासनिक. अड़चनें हैं वह भी समझने की बात है और. समय-समय पर जब फर्स्ट प्रेस रिलीज दिया. गया बताया गया बताया गया कि इसके बाद भी. जो होगा वो बताया जाएगा और फाइनली कुछ. दिनों के बाद से डीएमएसपी ने सभी चीजें वो.
शेयर की।. नहीं यह सवाल सर मैं इसलिए पूछ ले रहा हूं. क्योंकि जिन दो लोगों ने इस घटना के बारे. में जिक्र किया उनमें एक थी तान्या मित्तल. जो आई थी प्रमोशन के लिए और एक रिपोर्टर. थे जो मेरे मित्र भी हैं। उन दो लोगों ने. दिखाया। अब उन दोनों ने उस घटना के बाद भी. कई बार इस बात को सार्वजनिक तौर पर कहा कि. हमने यह देखा पानी छींटे मार रहे थे। यह. कर रहे थे। यह आंखों देखिए हमारी कहानी. हुई। यह सच है जो आप भी लॉजिक दे रहे हैं।. मैं बांके बिहारी जाता हूं तो वहां पर.
1000 चप्पल बाहर पड़े होते हैं। अगर. रिकॉर्ड करेंगे तो प्रथम दृष्ट वो भी. डरावना मंजर लग सकता है कि भाई इतना चप्पल. किसका छूट के पड़ा है। वहां भी हो सकता. है। लेकिन जब ये क्लेम्स लगाए जा रहे थे।. लगातार लगाया जाओ और वो अभी भी उस क्लेम. पर हैं कि हमने जो देखा वो दिखाया यूपी. पुलिस ने खंडन नहीं किया या उनको काउंटर. नहीं किया उस चीज पे कि आप कैसे दावा कर. रहे हैं। है तो सबूत दीजिए। तो लोगों का. एक विश्वास गया कि पुलिस छिपा रही थी।. नहीं यह चीजें पूरी इसमें जांच पड़ताल. हुई। सभी जुडिशियल कमीशन भी बैठा।.
उन्होंने. महीने डेढ़ महीने तक सुनवाई की। इश्तहार. भी निकला कि कोई भी गायब है, कोई भी. व्यक्ति नहीं है। वो आके अपनी चीजें करा. सकता है। तो जो एक विधिक प्रक्रिया है. उसके हिसाब से सभी सारी चीजें की गई। अब. कोई नहीं है तो जबरदस्ती कहां से लेके. आएंगे? ठीक।. देखिए जिम्मेदारी जिसकी है वह तो पूरी. प्रक्रिया को फॉलो करेगा। आप गए आपने कहा.
आपकी कोई अगर ऐसी बात थी तो आप जाके गवाही. दे देते। हालांकि बड़ी संख्या में जिस तरह. आप लोगों ने काम किया जो पुलिस वालों की. हमने कार्यशैली देखी और जिनसे मैं मिला. बहुत मेहनत की पुलिस वालों ने वहां पे वो. गलती अगर. आप. इतना बड़ा कार्यक्रम. इतना बड़ा कार्यक्रम. पूरे वर्ल्ड में इतना कॉन्ग्रगेशन इतना. बड़ा आज तक कभी नहीं हुआ और मैंने कई. पुलिस वालों से मिला दो-दो तीन दिन सोए.
नहीं है वो लगे पड़े हैं हमें दर्शन करने. में डर लग रहा था कि इतनी भीड़ में जाएं. कैसे वो वहां मैनेज कर रहे थे तो एक सलाम. तो आप सब पुलिस वालों के लिए है ही. और आप देखिए कि किसी के पास आपने नहीं. देखा कि लाठी भी है. हम. केवल एक सीटी और एक रस्सी के सहारे 66. करोड़ लोगों को दर्शन कराए। एक भी पब्लिक. मिस बिहेवियर की शिकायत उतने दिन में कोई. भी बता दे।. यह चीजें भी.
रिसर्च के काबिल है। रिसर्च हो भी रहा है. कि इतने बड़े एरिया में ट्रैफिक मैनेज. करना, वहां पे उसकी स्वच्छता को मैनेज. करना, पानी का फ्लो मेंटेन करना, पानी का. भी प्यूरिटी मेंटेन करना, बिजली की तैयारी. हो। वहां आग ना लगे। वहां किसी तरह के और. एक्सीडेंट ना हो। इन सभी चीजों को इंश्योर. करना, साइबर अटैक ना होना, कोई बड़ी घटना.
ना होना हम. वरना छोटे कॉन्ग्रगेशन, छोटे कस्बे में. रोज घटनाएं होती हैं।. सही बात है।. सही बात है।. तो ये तो आने वाले. श्रद्धालुओं को भी सलूट है और व्यवस्था से. जुड़े हुए लोगों के लिए भी सैल्यूट है।. ये आपका लास्ट असाइनमेंट था।. हां, यह लास्ट असाइनमेंट था।. हां। और मैंने यह भी कहा कि कोई भी. व्यक्ति इससे बेटर पहले किया हो। हां, यह. अवश्य है कि इसकी जो लर्निंग्स हैं,
हम आगे जब हमारा नेक्स्ट जनरेशन यहां कुछ. कराएगा या अन्य प्रदेशों में होगा तो इससे. भी लेसन लोग लेंगे। इससे भी बेटर व्यवस्था. कराई जाएगी।. तो महाकुंभ के मैनेजमेंट पर आप प्राउड. हैं? नहीं, यह तो बहुत बड़ा कार्यक्रम है। यह. तो ऐसी चीजें तो होती नहीं है। यह तो किसी. किसी के लाइफ में एक बार ही होती है।. तो मतलब आप ये कह रहे हैं जैसे तेंदुलकर. को 2011 वर्ल्ड कप से रिटायरमेंट हुआ ऐसे. ही आपके लिए था। महाकुंभ. नहीं नहीं ये तो अच्छा है काफी ये तो मैं.
मैं मेरे लिए बड़ा सौभाग्य का विषय है कि. मैं उस समय इस पुलिस बल का नेतृत्व कर रहा. था जो कि दुनिया का सबसे बड़ा. सिविल पुलिस बल है। कितना सोने को मिलता. था आपको इस दौरान? नहीं इस समय जैसे आपने बताया कि तीन-चार. दिन तो हम लोग सोए ही नहीं थे।. वो कॉस्ट तो आपको बेयर करना पड़ेगा। पुलिस. की नौकरी आसान नहीं है ना? बहुत डिफिकल्ट है। थोड़ा बताइए ना क्योंकि.
कई बार पुलिस वाले जब हम लोग जाते हैं तो. रास्ते में हाथ पकड़ के कहते हैं हम लोग. से कि भैया कभी हमारे बारे में बात किया. कीजिए ना। पैसा कम मिलता है। छुट्टी चपाटी. नहीं मिलती है। टेंशन रहता है। फिर यहां. फ्रस्ट्रेशन घर भी लेके जाओ। नेता का भी. टेंशन है, अधिकारी का भी टेंशन है। जनता. भी फौज को ज्यादा सलू्यूट मारती है। पुलिस. को गाली देती है।. नहीं यह पुलिस जो पुलिस की जो फील्ड की. जॉब है वह काफी टफ है और स्ट्रेसफुल है और.
अधिकारियों के साथ-साथ कर्मचारियों के. साथ-साथ फैमिली को भी बहुत कोपरेट करना. पड़ता है और उनको अधिकारियों के बारे में. चीजों को समझना पड़ता है. और कोपरेट करके अगर जब तक प्रॉपर समन्वय. ना हो तो उससे भी काफी. आपने सुना होगा कि बहुत सारे लोग स्ट्रेस. के कारण भी या तो.
किसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं या बहुत. सारे केसेस में एक्सट्रीम केसेस में लोग. सुसाइड भी करते हैं।. ये तो हमारे मीडिया में होता है सर कि. हमारे मीडिया में एक जो बॉससेस है। कई बार. लोग कहते हैं कि जितना पैसा बढ़ता है उतनी. दवाई बढ़ती रहती है बगल में। तो आप तो. इतने बड़े पद पे रहे। [हंसी]. नहीं ऐसा भी नहीं है। बहुत अच्छा माहौल भी. रहता है।कि यह बड़ा बड़ा परिवार है। जैसा. मैंने आपको बताया कि 3.5 लाख की तो हमारी. फोर्स है। सभी रैंकों को मिला दिया जाए।. तो इतने बड़े परिवार में सबको ले चलना,
सबके वेलफेयर को देखना और छुट्टियां भी कम. मिलती हैं। पुलिस वाले छुट्टी भी सबसे कम. मांगते हैं। यह भी आप जान। पत्रकार. डॉक्टर और पुलिस यहां छुट्टी का कोई. प्रावधान नहीं। आप कुछ भी मांग लीजिए बॉस. से छुट्टी नहीं मांग सकते।. कोविड में तो हम ही आप खाली थे।. हां कोविड भी एक अपने आप में ऐसी चीज थी. जिसके बारे में कोई ट्रेनिंग किसी को नहीं. थी। लेकिन उस समय भी पुलिस ने बहुत ही.
अच्छा कार्य किया। सभी जगह किया।. कोई चेंजेस जो आपको लगता है पुलिस रिफॉर्म. में आने चाहिए या आप रिकमेंड करेंगे पुलिस. वालों की जिंदगी बेहतर करने के लिए? नहीं. बहुत सारी चेंजेस लगातार प्रदेश सरकार ने. किए हैं। चाहे उनके रहने के मामले हो, उनके बरेक्स के हो, उनके वेलफेयर हो और. तरह-तरह के जो. मोबाइल फोन और टेक्नोलॉजिकल अपग्रेडेशन हो. रहे हैं। जो नए कानून जो अभी इंप्लीमेंट. हुए हैं, उनकी एफिशिएंसी को बढ़ाने के लिए.
बहुत सारी टेक्नोलॉजिकल इंटरवेंशन भी किए. जा रहे हैं। तो इन सब चीजों से मुझे लगता. है कि आसान पुलिस वालों की लाइफ जो. स्ट्रेसफुल होता था वह थोड़ा कम होगा। फंड. बहुत ज्यादा अब सरकार के द्वारा जैसे. पुलिस का फंड जितना था उससे लगभग ढाई गुना. पुलिस का फंड बजट कर दिया गया और पुलिस के. वेलफेयर और उनके रहन-सहन के बारे में जो. टॉप मोस्ट प्रायोरिटी गवर्नमेंट की आज के.
दिन में तो उसके रिजल्ट्स भी सरकार को मिल. रहे हैं।. यूपी में सबसे बड़ा अपराधी कौन रहा आपकी. नजर में? पूरे कार्यकाल में बहुत सारे. रहे। है। हमने कई सारे किस्से सुने. अलग-अलग। पूर्वांचल तो पूरा बाहुबलियों. अपराधियों से भरा पड़ा है। कई सों का. एनकाउंटर हुआ। आप किसी एक को मानते हो कि. ये सबसे टफ या सबसे शरारती कैरेक्टर था या. सबसे बड़ा अपराधिक आदमी था।. भाई एक इतने बड़े टॉप थ्री तो टॉप बड़ा. मुश्किल है कहना। लेकिन हां अब तो.
सब खत्म।. तो फिर अभी लिस्ट में किसको लोगे? जैसे. श्री प्रकाश शुक्ला से लेकर अतीक से लेकर. या यहां आपके मुख्तार आ जाए या और भी. जितने थे. पाठक और जितने नाम आते थे. हां नहीं अब जैसे पाठक जी तो हमारे माफ़. कीजिएगा. डिप्टी सीएम है. हां शिव प्रकाश शुक्ला. अतीक मुख्तार. और मुन्ना बजरंगी संजीव जीवा कभी-कभी क्या. होता है कि नाम तो बड़े माफिया का रहता है.
लेकिन शूटर. बड़े अजीब टाइप के होते हैं।. काम उनका होता है।. हां। तो मुन्ना बजरंगी और संजीव जीवा. जीवा वही ना जैसे कोर्ट के बाहर. हां तो ऐसे लोग होते हैं जो कि. बड़े इत्तेफाक हुए हैं पिछले पांच सालों. में 10 सालों में। हां वो तो चीजें होती. हैं और जो होता है ना कि आप तलवार की धार. पे चलते हैं तो जिस तलवार से आप काटते हैं. वही तलवार आप पे भी चल सकती है।.
समय बदलता है जब. हां समय बदलता है तो इस तरह की बातें हैं. और. आज ये कम से कम है कि. बड़ा गैंग वार वाली स्थिति प्रदेश में. कहीं नहीं है और एक अच्छा माहौल है।. रंजिशन चीजें भले कहीं हो जाए।. कृष्णंद राय की हत्या मुन्ना बजरंगी ने की. थी।. हां. वो घटना कितना हिलाई थी आप लोग को उस दौर. में? क्योंकि हम अभी भी जब पढ़ते हैं भाई.
वो तो पूरा. एक इलेक्टेड विधायक की हत्या और 500 600. राउंड गोलियां A के 47 से चलना। उसके बाद. उसकी चुटिया काट लेना। वो चीजें. उसका भी ऑडियो जारी हो जाना। तो ये आप समझ. सकते हैं कि जिसने करा या कराया होगा उसको. उसका क्या रसूक होगा।. मरवाना और फिर चोटी काट लेना।.
तो सुना होगा हम मुन्ना बजरंगी के बहुत. किस्से सुने हैं। हालांकि अंत भी उनका. सुना है हमने कि जेल के अंदर. वहां भी इत्तेफाक था। मासूम इत्तेफाक की. हथियार नहीं मिला था ना मुन्ना बजरंगी. नहीं वो तो जिसने मारा वो तो जेल में ही. है सजा चल रही है कन्विक्शन भी होगा. मुन्ना बजरंगी कितना बड़ा अपराधी थोड़ा. नहीं बहुत बड़ा अपराधी शूटर था शुरुआती.
दिनों में और बहुत. मुख्तार का साथी. हां मुख्तार गैंग का था. बजरंगी के 18 में मरने से मुख्तार गैंग. कितना कमजोर हुआ होगा. वैसे तो गुरे उनके के उसके बहुत सारे थे. उस तरह के शूटर जैसे संजीव जीवा भी उसी. गैंग का था।. अच्छा तो सारे इत्तेफाक जो है एक ही तरफ. हुए हैं।. नहीं ऐसा नहीं है। ये लगता है लोग. प्रोजेक्ट करते हैं इन चीजों को।.
नहीं ये तीन चार आइकॉन थे। आइकंस की कहानी. अलग होती है। जो अपराध आपको नाम आता है।. जैसे आप सिवान से आते हैं तो एक नाम आता. है। मुकामा याद करेंगे तो एक नाम आपके ज़हन. में आता है। वो आपके सबकॉन्शियस में खबरें. पढ़तेपढ़ते चला गया है। डॉक्टर राजेंद्र. प्रसाद भी वहीं से हैं। मुझे पता है लेकिन. वह इतनी खबरें 101 साल बढ़े कि आपका. सबकॉन्शियस फिल्म वहीं पहुंचता है। ऐसे ही. यूपी में मुख्तार अतीक ये नाम आते थे।. बृजेश सिंह एक और नाम है अभी मैं जिक्र. करूंगा थोड़ी देर में। [हंसी].
मुख्तार अंसारी को लेकर सर एक थ्योरी आती. है कि स्लो पोइजन दिया गया। और मुख्तार ने. कई बार कहा कि मुझे मारा जा रहा है।. स्लोली स्लोली स्लोली अलग-अलग थ्योरीज. उनकी निकल कर सामने आई थी। कितना सच था? मुख्तार अंसारी एक तो वो जेल के जुडिशियल. कस्टडी में था। पुलिस विभाग से उसका कोई. लेना देना नहीं।. अगर कोई आरोप थे सभी चीजों की जांच हुई।.
जो. कागजात थे मिश्रा के रिपोर्ट्स थी। सभी. चीजें परिवार को ऑनरेबल कोर्ट के कहने के. बाद से मुहैया भी करा दी गई. और जो मृत्यु का स्पष्ट कारण था. पोस्टमार्टम पैनल ऑफ डॉक्टर्स के द्वारा. किया गया। सभी एक्सपर्ट्स थे उसमें. और सारे कागजात उनके पास अवेलेबल है। उनके. पास सारे.
एवन्यूस भी अवेलेबल है। वह. शांत बैठने वाले लोग नहीं है। नहीं नहीं. अफजाल जी बिल्कुल शांत हो गए हैं। वह कहीं. इंटरव्यू नहीं देते हैं। और एक थ्योरी. निकल कर आई कि उन्होंने मुख्तार की कब्र. पर कुछ ऐसा केमिकल छिड़वाया है। ये हमारे. यहां मनोज जी ने अगेन कहानी सुनाई हमें जो. एक किताब और लिख रहे हैं कि एक केमिकल. छिड़वाया गया है कि जब कभी निजाम बदलेगा. यूपी में तो वो उसका पोस्टमार्टम मुख्तार. अंसारी का फिर से करवाएंगे ताकि सच सामने.
आ सके।. अब यह तो कहानियां हैं। जब कोई ऐसी स्थिति. आएगी तो उस समय चीजें देखी जाएंगी।. ये रियलिटी है कि मुख्तार की बहू ने. हनीमून डायरीज बना रखा था जेल में? हां हां वो तो वो तो सभी जानते हैं। वो तो. गिरफ्तारी हुई बेल उसमें जेल भी गई वो।. तो ये कैसे पॉसिबल आप कह रहे हो कि आप लोग. इतने ईमानदार हो और जेल वाले जो हैं वो. जेल के अंदर हनीमून डायरी चलवा रहे हैं।. अब ये चीजें हुई और उसको फिर सबके सामने.
है। ये तो उसमें. बट ये कैसे हुई. एक ही सिस्टम में दो तरह काम कैसे चल रहा. है कि एक तरफ आप लोग कह रहे हो कि हम दिन. रात. ऐसा नहीं है कि वैसा था वो तो छिपा के ही. हो रहा था लेकिन चीजें आई थी और उस पे फिर. कठोर कारवाई भी हुई और उसको काफी. गवर्नमेंट के लेवल से एडवर्सली लिया गया।. जेल महकमे की जिम्मेदारी बहुत लोगों की. फिक्स की गई उसमें। तो ऐसा नहीं है कि ये. चीजें बाहर से पता चलती है। हमने तिहाड़.
के एक जेलर का इंटरव्यू किया था एक बार।. यहीं बैठे थे वो तो उन्होंने हमें बहुत. किस्सा सुनाया था। कहा अगर पैसा हो तो जेल. में जिंदगी अच्छी होती है। कोई ऐसी सुविधा. नहीं है जो मार्केट में मिल रही हो अंदर. ना मिल जाए। बट इज इट इजंट दिस. डिसपॉइंटिंग कि एक तरफ अगर आप लोग मेहनत. कर रहे हो। आप ये कह रहे हो कि हम. कन्विक्शन करवा रहे हैं। आप लोग के लिए. फ्रस्ट्रेशन नहीं होता कि यार जिसको हम. जेल भेज रहे हैं। मैंने शबुद्दीन कभी किसी. से सुना कि वो एड्स रूम था। उसने उसको. अपना पूरा हेड क्वार्टर बना रखा था। अतीक. के बारे में सुना कि उसने जेल में बुला. किसी को मारा था। अगर ये सच है तो.
हम. वो तो आपके देवरिया में ही मारा था।. जेल के अंदर बुला के मारा। हम. तो ये फिर ये आपके लिए फ्रस्ट्रेशन नहीं. होता कि यार एक आपराधिक पकड़ा हमने इतनी. मुश्किल से जान जोखिम में लगा के और फिर. वो हमारे दूसरे महकमे में गया और वहां पे. मौज कट रही है। वहां वो राजा बना बैठा है।. टीवी लड़की सब एंजॉय कर रहा है। दारू शराब. नहीं ये चीजें तो सिस्टम जो इतना डिटोरिएट. करता है तो समय तो लगता है उसको सही होने. में। तो धीरे-धीरे अब चीजें सही हो रही. हैं। और यह जहां तक इस वर्टिकल की बात है.
तो ऐसा नहीं है कि सारी कमियां यहीं पे. हैं।. ये तो सभी जगह की बात है।. जैसे वो तिहाड़ के बारे में बता रहे थे।. हो सकता है और जगहों पे भी यही हो। मैं. जानता नहीं हूं।. तिहाड़ पे तो उन्होंने वेब सीरीज ही बनवा. दी पूरी। [हंसी]. आपका मन नहीं है किताब-विताब लिख के आगे. वेब सीरीज को देने का? नहीं नहीं ये सब कोई ऐसी बात नहीं। वो तो. बुक किसी व्यक्ति ने अपना रिसर्च किया. उन्होंने कहा तो हमने उसका कंसेंट दे. रिटायरमेंट क्या सपना सोच रहे हैं अभी आगे.
आप. कुछ नहीं अब. पॉलिटिक्स में जाएंगे. नहीं पॉलिटिक्स में तो कतई नहीं जाएंगे. सरकार आप अवध होजा जी की तरह हमें. वो कर रहे हैं अपराधियों से नहीं डर लगता. सियासत से डर लगता है सबके बस का नहीं है. पॉलिटिक्स. आपके बस का. नहीं यार मुझे तो नहीं लगता. क्यों. मुझे नहीं लगता क्यों क्योंकि नहीं वैसे. तो पॉलिटिशियन भी बड़े अच्छे लोग होते हैं. ऐसा नहीं है। अगर आप क्लोजली आप तो.
इंटरेक्ट करते ही होंगे और आपके सांसद. विधायक सभी आपको जानते हैं। मैंने भी कुछ. रिसर्च किया है तो इसलिए ऐसी नहीं है और. वो. जैसे हम जनता जैसे हमको लगता है कि हम. नेता बने लायक आदमी नहीं है।. उतनी मोटी चमड़ी हमारी नहीं है। अभी. नहीं नहीं देखिए ऐसा नहीं होता। काफी. विशेषकर मैंनेकि ये बात चली है तो. पूर्वांचल के जो लखनऊ के और पूरब.
इतनी टफ लाइफ विधायक और सांसद की है जिसके. बारे में आप सोच भी नहीं सकते।. कितनी टफ लाइफ होती है? किस सेंस में? इन. इस सेंस में कि उसकी दिनचर्या 4:00 बजे. सुबह शुरू होती है। उनके यहां लोग. प्रार्थी 4:00 बजे आते हैं।. 4:00 बजे से बैठते हैं। उनको एंटरटेन. करना, उनको चाय पिलाना।.
उनकी बातों को. फोन पे अधिकारियों से कहना।. एक सांसद जी हैं। वह विधायक थे। तो. उन्होंने. वह फोन जब करते थे तो हम लोग कहते थे भाई. जल्दी बताइए. लेकिन वो बहुत देर तक बताते थे [हंसी]. तो आए तो मैंने कहा कि विधायक जी आप इतना. टाइम अकेले लेंगे इस जिले में आठ-आठ.
विधायक हैं तीन दो-तीन विधान परिषद सदस्य. हैं दो-दो सांसद जी हैं। सब लोग को कैसे. समय मिलेगा इतना? कहा साहब आप मेरी कठिनाई. नहीं जानते।. कहा साहब अगर हम एक मिनट में बात तो एक ही. मिनट के रहे। अगर एक मिनट में खत्म कर. देती तब तो वो वोटर. छटक जाए।. तो वह तो पूरी बात बताता है कि मैंने.
तुम्हारी पूरी पैरवी की।. यह भी बताया कि साहब. एक साल की बहू अगर कहीं बहू क्योंकि दूसरे. गांव से आती है या दूर से आती है। अगर 1. साल पुरानी बहू और 5 साल पुराना बच्चा अगर. हमारा नाम नहीं जाने तो मैं दोबारा चुनाव. नहीं लड़ सकता। जीत सकता वहां से।.
और अपने क्षेत्र का कोई भी कोई भी शादी, कोई भी. बर्थ, कोई भी डेथ, कोई भी एनिवर्सरी. आप मिस नहीं कर सकते।. इससे अच्छा ससुर काम कर लो। नहीं तो यह. बात थिक स्किन का नहीं है। यह बात है कि. मैनेजमेंट मतलब. आपका आप कितने दक्ष हैं कि आप इन सभी.
चीजों को करते हैं और. और कितना परसेंट लोग रिपीट होते हैं।. अब जैसे हमने रघुराज प्रताप सिंह के बारे. में सुना है कि उनके पिताजी वोट मांगने. जाते नहीं थे। जीत जाया करते थे। जलवा था।. देखिए यह उनके बाबूजी के समय की बात अलग. थी। वह खुद कितना प्रयत्न करते हैं, कितना. यह तो वही बता पाएंगे। मैंने तो एक बहुत. ही बुजुर्ग सांसद कम विधायक की बात बताई. जो आज भी सांसद हैं।.
आपसे इतना मेहनत हो पाएगा। जैसे अवध अवध. झा जी कहे कि कहे कि मनई, गाय, गोरू, बकरी, छगड़ी सबके पैर छू। हां वो कहे. हमारे बस का अब नहीं है।. नहीं नहीं ये चीजें देखिए कुछ चीजें ऐसी. होती हैं जो सबके लिए नहीं बनी और ना ही. सभी आदमी सभी कुछ कर सकते हैं।. सही बात है।. तो इन चीजों का बारे में डिस्कशन नहीं. करना लेकिन मैंनेकि आपने बात उठाई थी तो. मैं एक विधायक सांसद की जो व्यथा है वो. मैंने आपको बताई कि लाइफ इतना इजी नहीं.
होता जितना लोग समझते हैं।. हमने तो हमने सवाल इसलिए पूछे थे कि आपके. बिहार के एक गुप्तेश्वर पांडे जी थे। हम. वो पहले चुनाव में जा रहे थे बाद में बाबा. बन गए। [हंसी]. नहीं नहीं. आप ही के बिहार के हैं।. हां वो तो डीजीपी भी रहे हैं सर. और आजकल अयोध्या में निवास रहता है सर का. और प्रवचन भी हम लोग भी सुनते हैं और सर. की भी इच्छा थी वो भी स्वीकारा कि हमारी. इच्छा थी कि हम. सांसदी का चुनाव लड़े.
लेकिन किनहीं कारणों से जो भी रीजन रहा हो. वो चीज नहीं हो पाई।. तो कहने का मतलब यह है कि लाइफ कहीं भी. अगर आप कार्य कर रहे हैं तो आसान नहीं है।. जैसे आप ही के यहां है तो सभी लोग तो आपके. स्ट्रेचर के नहीं हो जाते।. कुछ. या कुछ ऐसे लोग नहीं हो जाते। कुछ ही लोग. की इतनी फॉलोइंग हो पाती है।. मेहनत. कुछ तो अलग होगा। मेहनत, प्रारब्ध, अपडेट,
स्मार्टनेस बहुत सारे फैक्टर्स आते हैं।. कुछ कहानियां है ना जैसे कहते हैं कि आप. चर्चिल ने एक बार कहा. कि. टाइटेनिक डूबा. तो टाइटेनिक. लोग कहते हैं ना कि मैं आपके अच्छे आपको. धन हो जाए। आपको अच्छा स्वास्थ्य हो इसकी. कामना करते हैं। तो चर्चिल ने कहा कि नहीं. हम सबको गुड लक विश करते हैं क्योंकि.
टाइटेनिक में जो भी चल रहा था सबके पास. पैसे थे सब स्वस्थ थे लेकिन लक तो कुछ ही. लोगों के पास था. जो बच गए. तो यही बात है कि आप. कैसे चीजों को लेते हैं तो किसी भी विधा. में किसी भी क्षेत्र में ऐसे लोग होते हैं. जो कि.
इन चीजों को लगातार करते रहते हैं। लेकिन. लकी कुछ लोग ही रहते हैं जो एकदम टॉप पर. पहुंचते हैं और उसके पीछे जो उनकी त्याग. और तपस्या होती है वो कम लोग ही समझ पाते।. अब ये गरम सवाल है सर उस घटना का जिसको. लेकर मीडिया बहुत गर्माई थी।. साल था 2020 घटना थी हाथरस की।. हाथरस की घटना जिसको लेकर. जो स्टेटमेंट पुलिस की तरफ से शुरू में.
आया क्योंकि यह कहा गया कि बलात्कार नहीं. हुआ है। शुरू में पुलिस से स्टेटमेंट आ. गया। सीबीआई पुलिस की भूमिका को लेकर बड़े. सवाल उठे।. और यह वो विषय था जिसमें जिस मीडिया को आप. सहयोगी बता रहे थे कई सारे विषयों में. उसने आप लोग पर सवाल उठाया। आम लोगों में. सवाल उठाया और अभी भी यह सवाल चाहे सरकार. हो या पुलिस हो उस पर एक दाग के तौर पर. आता है। क्या हुआ था? ये देखिए बहुत अच्छा किया जो आपने ये. प्रश्न ये पूछ लिया।.
एक घटना होती है।. और. उसके बारे में एक सूचना थाने को दी जाती. है। पुलिस ने उसमें एफआईआर भी दर्ज की।. फिर. इलाज के दौरान. विक्टिम का स्टेटमेंट बदलता जाता है।. जैसे-जैसे विक्टिम का स्टेटमेंट मैं इसलिए.
ये बात बता रहा हूं कि इसमें अब डिसीजन भी. आ चुका है।. तो. उसका स्टेटमेंट बदला।. पुलिस ने धाराएं भी बढ़ाई।. स्थानीय पुलिस ने उसमें गिरफ्तारी भी की।. पहले एक आदमी का नाम था। फिर में तीन. आदमियों के नाम बढ़ाए।. चार. पुलिस ने चारों की गिरफ्तारी की।. जो पहले धारा 307 थी वो भी पुलिस ने लगाई।.
पुराने आईपीसी की मैं बता रहा हूं।. उसके बाद से अन्य लोगों का नाम जुड़ा।. एससी एसटी एक्ट की धारा रही और बाद में. 376 की धारा रेप की बात हुई।. धारा बढ़ा दी गई।. फिर. इलाज के दौरान. घर वालों को कहा गया कि इसको बेटर जगह ले. जाइए। उन्होंने रिफ्यूज किया। लेकिन.
डॉक्टरी सलाह पर उसे फिर अलीगढ़ के मेडिकल. अस्पताल में ले आया गया।. वहां भी स्थिति डेटोरिएट हुई तो दिल्ली ले. जाया गया।. अब जब रेप की बात आई तो परीक्षण कराया. गया।. जो रिपोर्ट आई. वो मीडिया को वबेटम पढ़ के बताया गया। यह. नहीं कि कोई उसमें अपनी बात पुलिस ने अपनी.
तरफ से कुछ जोड़ दिया। कहा गया कि यह. रिपोर्ट आई है. और वह चीज भी मैंने खुद पढ़ी।. हम. यार इसलिए मैंने सवाल आपसे पूछा यह चीज. मैंने खुद पढ़ के बताई और हमने यह भी कहा. कि इसका मतलब यह नहीं है कि रेप की धाराएं. नहीं है। क्योंकि यह हमें भी पता है और. समय पर समय पे डिफरेंट कोर्स ने रेप की जो. परिभाषाएं बताई हैं उसमें कोई जरूरी नहीं.
है।. केस बाम का होना आवश्यक हो। लेकिन यह. रिपोर्ट आई है। उस पे. आप. यूपी के रहने वाले हैं। उत्तर प्रदेश में. सोसाइटी. किस तरीके से. जाति, धर्म. और राजनीतिक तरीके से वर्टिकली डिवाइड है।. आपसे ज्यादा कोई नहीं जानता।.
उन चीजों को लोगों ने एक बहुत बड़ा पहले. तो. वो हुआ फिर उसके बाद से उसकी डेथ हो गई. फिर उसकी अंत्यष्टि हुई. इसमें भी आप पर आरोप लगा कि पुलिस ने शव. जो था. हां जबरदस्ती. वो देर रात गांव में जल्दी जाकर जला दिया. परिवार की मर्जी के खिलाफ. हां जबकि सत्यता ये थी कि घर में जो. एक्सटेंडेड फैमिली है. कभी-कभी क्या होता है कि जो इमीडिएट. रिलेटिव्स होते हैं। वह बहुत ही शौक की.
स्थिति में रहते हैं। तो जो गांव घर के. लोग होते हैं अगर आप गांव के रहने वाले. हैं तो आपको पता होगा कि यह डिसाइड करते. हैं कि नहीं भाई ऐसे कर लिया जाए।. पर जैसे हमारे तो दिन में जलाया जाता है. सर हिंदुओं में।. आपके बनारस में 24 घंटे जलाया जाता है।. मैं तो आपको आपसे. 200 कि.मी. की बात कर रहा हूं। 24 घंटे. जलाया जाता है। वहां. बट गांव देहात में आमतौर पर सुबह जलाते. हैं।. रात को शव नहीं जलाते। रात दिन में भी.
जलाते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में अपने. खेतों में जलाते हैं। श्मशान घाट में नहीं. ले जाते। आप. अपने क्षेत्र में या बिहार में जाएं। आप. अपने खेत में जलाएंगे तो गांव वाले ही. बहिष्कार कर देंगे आप।. तो कुछ तो एक परिपाटी होती है। कुछ होती. है कि अब स्थानीय प्रशासन ने एक्सटेंडेड. फैमिली के उससे यह डिसाइड किया कि यह हो. जाए क्योंकि इस तरह की रिपोर्टिंग थी कि. बहुत बड़ी हिंसा करने की साजिश है।.
उस पे ये चीजें हुई। कोई पहले से ऐसा नहीं. है कि कोई रिटन रूल था कि नहीं रात में. होगा ही नहीं।. दिन में होगा ही नहीं। अभी भी जब कोर्ट ने. डिसाइड किया कि एक गाइडलाइन बनाया है। अभी. भी ऐसा नहीं है कि नहीं ही होगा। कुछ. चीजें तय की गई हैं। वो उन चीजों को करके. स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों के साथ. बैठ के चीजों को तय करेगा।. बट जैसे बलात्कार के उसमें धाराएं लगाई. गई। जो स्टेटमेंट आपने मुख्यता दे दिया था.
कि बलात्कार नहीं हुआ। नहीं नहीं बलात्कार. की पुष्टि मेडिकल रिपोर्ट से नहीं हो रही. है।. लेकिन मैंने यह भी कहा था कि धाराएं नहीं. हटाई गई है। अब आगे की भी बात सुनिए। तो. यह बात हो गई। उसमें कुछ ऐसे भी. जर्नलिस्ट आ गए। कुछ ऐसे टेक्निकल इनपुट्स. मिल गए जो एक राजनीतिक पार्टी से टच में. थे।. हम हम. कि इन चीजों को बढ़ाइए।.
फलाने आ रहे हैं, ढिकाने आ रहे हैं। फिर. एक. कप्पन नाम का व्यक्ति आने लगा. जो कि. विभिन्न संगठनों से जुड़ा था। उसके पास एक. टूलकिट मिल गया। उसकी जांच हुई। डेढ़ पौने. दो साल तक जेल में रहा। अब सुनिए वो घर. वालों ने कहा सीबीआई। सीबीआई को ट्रांसफर. हो गई।. सीबीआई ने उसमें सभी वही धाराएं में. चार्जशीट चार लोगों के खिलाफ की जो पुलिस.
ने किया था। ना तो उसमें धारा बढ़ाई ना तो. उसमें कोई व्यक्ति बढ़ाए गए और ना ही. उसमें कोई और एडिशन किया गया।. सीबीआई के कोर्ट ने. जब डिसीजन दिया. तो उसमें रेप की धारा किसी पर प्रूफ नहीं. हुई।. पहली बात।.
दूसरी बात. अन्य तीन लोगों पे से भी सारे चार्ज हट. गए। अब बचा सिर्फ मुख्य अभियुक्त।. मुख्य अभियुक्त पर केवल 304. कल्पेबल होमिसाइड नॉट अमाउंटिंग टू मर्डर. जिसकी सजा 10 साल है।. वह धारा में अपराध प्रूव हुए और एससी एसटी. एक्ट के.
तो और उसमें सीबीआई अपील में भी नहीं गई।. अपील की अवधि भी समाप्त हो गई।. तो. अब यह बताएं कि पुलिस कहां गलत थी? पुलिस. के सारे स्टैंड में इंडिकेटेड है। पुलिस. जो शुरू से कह रही थी. इसलिए कि पुलिस लगातार स्क्रूटनी में है।. आज कोई किसी से नहीं पूछ रहा कि निठारी. कांड में क्या हुआ?
क्योंकि एक एमॉफस बॉडी है। वह अब प्रेस के. सामने नहीं आते।. एक प्रेस विज्ञप्ति जारी होती है।. तो जो पुलिस ने कहा वह सभी चीजें सत्य. निकली।. उस व्यक्ति जो कन्विक्टेड है वो भी अपील. में गया हुआ है।. अब ऑनरेबल कोर्ट से क्या डिसीजन आएगा मैं. नहीं जानता।.
तो एक यह बहुत ही. आइडियल केस है जहां. मीडिया के द्वारा मीडिया के एक सेक्शन के. द्वारा इन चीजों को बढ़ाया गया।. अगर मान लिया कि बहुत बड़ी हिंसा हो जाती।. वहां रेल पटरी उखाड़ दी जाती।. गाड़ियों में आग लगा दी जाती।. तो उस समय कोई यह कहता कि आप लोग छोड़ दिए.
थे।. आज क्यों उस उसी ऑनरेबल हाई कोर्ट ने तो. कोई ऐसी यह नहीं लिख के दिया कि आज के बाद. से कोई भी अंत्यष्टि रात को नहीं होगी।. ऐसा कोई डिसीजन नहीं।. जो मौके पे आदमी रहता है वो चीजों केसेस. कुछ फैसले लेने पड़. चीजों को समझता है। हम ठीक बात है।.
किसी भी व्यक्ति का क्या इंटरेस्ट है? आप. आपने कहीं देखा उसमें वीडियो में कि पुलिस. वाले जला रहे हैं।. आरोप है. आरोप का तो कोई सिरपर नहीं है।. रेप हुआ था इसमें।. हैं? रेप हुआ था।. नहीं।. इन देखिए जिसके साथ भी इस तरह की कोई घटना. होती है प्रथम दृष्ट्या ही तुरंत बताता. एडल्ट लेडी थी उसको बताना चाहिए था जैसे.
ही उसने बताया यह भी तो हो सकता है कि. उसको सिखाया गया हो उसने फर्स्ट स्टेटमेंट. में रेप कर. नहीं एकदम नहीं जिस दिन मेरे पास डेट नहीं. है करीब घटना के पांच सात दिन के बाद से. यह बातें आई थी और जैसे ही उसने डॉक्टर को. बताया धारा उसी दिन बढ़ाई. उसी दिन उसको. उस धारा को बताकर उसमें बयान लिया गया।. फिर परीक्षण कराया गया.
जिसमें पुष्टि नहीं हुई। नहीं जिसमें उसकी. बात नहीं। अब उसमें बहुत तरह के वेरिएशंस. होते हैं। जो एक की बातें हैं कि अगर हुआ. होगा तो हो सकता है एविडेंस नहीं. डिस्ट्रॉय हो गए हो। इस तरह की बातें हैं।. मैं उस पे नहीं जा रहा। लेकिन ये चीजें तो. बिय्ड डाउट आपको कोर्ट में प्रूफ जब केस. डायरी कोई लिखता है तो हमसे आपसे तो कोई. नहीं पूछने जा रहा ना या जो एडिटोरियल लिख. रहा है उससे तो कोई पूछने नहीं जा रहा है।.
उसकी तो गवाही होनी नहीं है। गवाही तो. उसकी हो रही है जो केस डायरी काट रहा है।. चाहे वह स्थानीय पुलिस का आदमी हो चाहे वो. सीबीआई का आदमी।. तो हम लोगों ने तो लिखा चार्जशीट भी लगी।. कोर्ट ने क्यों नहीं मान लिया? अगर अगर. साक्ष्य इतना अकाट्य था तो कोर्ट मान. लेती।. कोर्ट ने तो मुख्य अभियुक्त पे भी नहीं. लगाया। मानने की तो बात ही छोड़ दीजिए।. तो इसलिए कभी-कभी.
यह भी देखना चाहिए कि पुलिस का क्या. इंटरेस्ट है। पुलिस का कोई इंटरेस्ट नहीं. है। ऐसे बहुत सारी घटनाएं रोज होती है।. जात देख के फर्क पड़ता है सर अपराधी का।. जैसे एक बड़ा कॉमन क्वेश्चन आता है। दो आते. हैं। एक एससी एसटी के दुरुपयोग का आता है. और एक आता है कि जो अखिलेश जी अक्सर कहते. हैं कि पीडीए के लोगों पर ज्यादा शोषण. होता है। पुलिस भी एक तरफफ़ा कारवाई करती. है। एक विकास दुबे वाला केस भी है। तो एक. तरफ ब्राह्मण अपराधी भी है। एक तरफ आपके.
दलित पिछड़े वाले भी आ रहे हैं। लोग. मुसलमान अपराधी है। ये चीज़ नहीं है। पर. कोई प्रेशर आता है सरकार अलग-अलग दौर में. जो सामाजिक चीज़ हैं। उसी तरीके से फोर्स. में भी लोग हैं।. फोर्स में भी उसी अनुपात में लोग. बिल्कुल सही बात है।. इस तरह की कोई बात होती नहीं। लेकिन अब. ये प्रदेश है, देश है। इसमें तो सब कुछ. आपके जन्म से निर्धारित होता है। आप कहां.
जन्म लिए हैं, उसके हिसाब से आपके धर्म और. आपकी जाति। अच्छा जैसे कई बार हम किस्सा. कहानी सुनते हैं फिल्मों में दिखा देते. हैं कि कोई छोटा भी सिपाही है ऊपर जात का. है जो अधिकारी है वो नीची जात का है साहब. के हाथ का पानी नहीं पिएंगे हम. नहीं आपके पास अभी प्रथा है या खत्म हो गई. है. ऐसी नहीं उत्तर प्रदेश पुलिस में इस तरह. की कोई प्रथा नहीं है और ना तो कोई भेदभाव. है मैंने तो कभी नहीं देखा. विकास दुबे इसी साल एक घटना और रही 3. जुलाई 2020 बिकरू गांव विकास दुबे.
एक व्यक्ति. इतना कैसे मानसिक तौर पर मजबूत हो है कि. उसे पुलिस वालों पर गोली चलाने से परहेज. नहीं होता।. क्योंकि. भाई उसने तो खाकी के इकबाल को सीधे चुनौती. देना था।. उसने तो थाने के अंदर एक व्यक्ति की हत्या. कर दी जिसे. मंत्री का दर्जा प्राप्त था। उसके बावजूद. भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। बच. गया था।.
तो मन तो धीरे-धीरे बढ़ता है ना।. या बढ़ाया जाता है।. वो तो बहुत कम ही लोग हैं जो कहते हैं कि. एक ही मर्डर किए हैं।. अरे [हंसी]. अरे बहुत गहरा खेल गया।. तो जिगर चाहिए ऑन क्या अब क्या बोले? अब. ऑन कैमरा काहे गड़ा मुर्दा उखाड़े वो। एक. तो कह दिया।. नहीं नहीं छोड़ दिया वो मैं उस. अब हो सकता है अगले इंटरव्यू वो भी ना. माने कि वो भी किए थे। [हंसी].
एक बार कह दिया बहुत दिन तक उसके लिए भी. गाली खाए वो. सही है सर सही है विकास दुबे. क्या हुआ था आप लोगों को जब पता चला कि. पुलिस वालों पर. नहीं ये तो बहुत ही दर्दनाक घटना थी और. कितना आपका सिस्टम हिल गया था. बहुत बहुत डिमोरलाइजिंग बहुत बड़ा सेटबैक. और इस तरह की चीजें अनहर्ड ऑफ मतलब कभी. सुनी नहीं जाने वाली बात थी और बाद में यह. पता चला कि हमारे विभाग के लोगों के.
मुखबरी के कारण वैसे तो शातिर था ही अगर. शायद मुखबरी नहीं होती तो हम लोग की इतनी. कैजुअलिटी नहीं होती और आठ हमारे अधिकारी. और जवान जिसमें एक डिप्टी एसपी रैंक का. अधिकारी था उसके साथ यह घटना हुई। वेपन. छीन लिए गए।. पूरी बिजली गांव के आसपास की काट के फिर. उनको उनके अप्रोच से ही फायर पावर ऐसी इस.
तरह से फायर किया कि उन पे उन लोगों को. डिफेंड करने का मौका नहीं मिला।. तो जब आप लोग को यह पता लगता है कि आपके. विभाग के ही लोगों ने अपने विभाग के लोगों. की मुखबरी करके मरवा दिया।. नहीं यह मुझे नहीं लगता कि जिसने किया. होगा उसने यह भी सोचा होगा कि इस तरह की. घटना हो जाएगी। मुखबरी वालों ने इतना आदमी. बहरा जाएगा कि पुलिस वालों को इस तरह मार. देगा।. बट जब घटना हुई तो सिस्टम में आपकी क्या.
हलचल थी? नहीं सिस्टम तो पूरा हिल गया था. और पूरे सभी अधिकारी वहां मौके पर गए और. बड़ी ही तीव्र गति से हम लोगों ने उसमें. फिर से. अपने वेपन रिकवर किए। कुछ लोग मारे भी गए।. और. उसमें बहुत सारे स्ट्रक्चरल चेंजेस भी आए।. लॉन्ग टर्म, शॉर्ट टर्म ये सभी चीजें.
विभाग के द्वारा, शासन के द्वारा किए गए. कि इस तरह की घटना या इस तरह से सिस्टम के. लूप होल्स का फायदा उठा के कोई ना बन जाए।. और जो अधिक जो पुलिस वाले आपके हाथ से. वो तो सब तो जेल गए जेल में अभी-अभी जेल. उनकी भी वैसे पिटाई होती है जैसे बाहर. बाहर वाला अगर पीटते हो आप लोग। नहीं. देखिए यह तो बाहर के घुटने उठने की बात. आती है। आज के जमाने में कोई उस तरह की. बात होती नहीं है। सभी चीजें साक्ष्य के. आधार पर चलती हैं। यह पुरानी बात हो गई कि. जेल के अंदर जाके.
डिग्री नहीं होता जेल के अंदर।. नहीं मुझे नहीं लगता। उसमें कोई सत्यता. नहीं है।. अरे हम तो नॉर्मल देखते हैं सड़क पे दो. घंटा आप लगा देते हैं। पुलिस वाले जोश में. रहते हैं। थोड़ा कैमरामरा बढ़ गया।. कोई पब्लिक के लोग भी एक दूसरे को कर देते. हैं। वो तो अबेशन हो सकता है कहीं और. लेकिन कानूनी तरीके से ये चीजें सही नहीं।. तो विकास दुबे का उस दिन ये तय था कि अब. इनका खेल खत्म हो जाएगा।. नहीं ऐसी कुछ बात नहीं थी। ऐसी. क्योंकि हमको वीडियो दो चीजें थी। एक तो. जो हम फिल्मों में देखते हैं क्योंकि हम. तो फिल्में देखकर बड़े हुए हैं जिससे.
ज्ञान नहीं लेना चाहिए लेकिन अब. साइकोलॉजिकली भर दिया गया है। तो उसमें ये. होता है कि एक अनसेड रूल है कि फोर्स को. अगर आपने हाथ लगाया. तो अब आप नहीं बच सकते। यह एक अनसेड रूल. है कि फ़ को नहीं छूना है। अब क्योंकि आठ. पुलिस वालों को इस बेरहमी से मारा गया था. जो बहुत खतरनाक था। एक जनता के अंदर हम. मतलब एज अ सिटीजन ऑफ यूपी हमको यह वाइब आ. गई थी कि अब ये खेल हो गया। अब इनका कुछ. ना कुछ तो इनके साथ होगा। क्या होगा वो. नहीं पता। जैसे अतीक में हम लोग को.
कॉन्फिडेंस था मीडिया की वाइब से कुछ ना. कुछ तो होगा और यह पूरे देश प्रदेश का. माहौल था और फिर वो गया मंदिर गया मंदिर. से निकला। सारे कैमरों को बुलाया। कैमरों. के सामने सरेंडर किया और फिर इतनी मासूम. सी कहानी आ गई। गाड़ी पलट गई। नहीं अब वो. तो बारिश हो गई और ऐसे ही अब वो कोई चीज. तो जब होती है तो पहली बारी हो जाती है।. अच्छा आपके अंदर हमको एक चीज बड़ी अच्छी. लगती है। आप इतनी गंभीरता से बात कहते. हैं। [हंसी].
उसके. बात ठीक है। इमोशंस को भी नहीं ले कैच कर. सकते।. नहीं नहीं गाड़ी पलट गई। बरसात हो है. क्योंकि इन चीजों के को की ग्रेविटी को. लोग नहीं समझते। ऐसी घटना हो जाती है।. अब जैसे आठ लोग मर गए ये तो कोई नहीं सोचा. था।. सोच रहे हैं अभी कितने. और आठ लोग मर गए या उमेश पाल में मर्डर. किया। हमारे दो जवान शहीद हो गए। और. अब अतीक का मर्डर हो गया। कैसा वो? अब. पत्रकारों को चेक करिए तो वह एक अलग बवाल.
है।. पत्रकार के चेक करें. और बट जैसे मैं विकास दुबे को. ये बुरा बने [हंसी]. इसीलिए तो मैं कह रहा हूं आप लोग की नौकरी. तलवार की धार पर है। दोनों साइड से गाली. जब वहां पे आठ पुलिस वाले गए तब भी. क्वेश्चन हुआ। तो खाकी कमजोर हो गई है। जब. खाकी मजबूत हुई तब भी क्वेश्चन हुआ कि भाई. अब आप लोग का ये तो ये कोई तरीका थोड़ी ना. है।. नहीं नहीं मजबूत की स्थिति ऐसा नहीं होना. चाहिए। ये तो एक जो सेटअप है डेमोक्रेटिक.
सेटअप में इस तरह की चीजें जो पुलिस को. नियमानुसार ही कारवाई करनी।. तो देखिए अब नियम अनुसार आप कह रहे हैं तो. मैं एक सवाल इसमें ऐड कर दे रहा हूं।. उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। 1415. गैजेट ऑफिसर थे। 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी. थे जो हथियार सहित थे। फिर कैसे पॉसिबल एक. आदमी अकेला हथखड़ी लगाया था। चार. पुलिसकर्मी फायर किया और एक भी सशस्त्र बल. को खरोच तक नहीं आई।. नहीं ये. दुबे जी थैंक यू सो मच टाटा गुड बाय हो.
गया।. ये जो आप पढ़ रहे हैं या बता रहे हैं ये. सत्यता से परे। एक तो उसमें कोई गस्टेड. ऑफिसर नहीं था।. क्या था थोड़ा हमको बताइए। कितने आदमी. लेने गए थे उसे उज्जैन? हां। एक टीम गई थी और वो लेके आ रही थी और. जब गाड़ी पलटी है तो पूरी पसली टूट गई. पुलिस वालों की. उसके वेट से. और यह भी कोई कह रहा था कि साहब इतने. लोगों को चोट लग गई लेकिन वो निकल के भागा. अब निकल के भागा यह तो अब इसके बारे में.
कैसे कहा जाए कि नहीं. वो क्यों भागेगा अगर वो खुद सरेंडर करने. आया था वो तो कैमरा ला के सरेंडर किया था. कि भाई हमको पकड़ लो मारो. ऐसा है कि वो तो जब वो तो इतना इमोल्ड. गोल्डन था।. उसको पता था कि उसको कुछ नहीं होना। जो. आदमी थाने के अंडर मर्डर करने के बाद से. उसको कुछ नहीं हो तो उस कानपुर देहात या. कानपुर धरती पर उसको कोई कुछ थोड़ी वो तो. उसका कॉन्फिडेंस लेवल था ना कि हम भाग. जाएंगे या फिर बच जाएंगे या फिर ये वही.
बता पाएगा या बता पाता।. उसके लिए तो हमको 60 साल वेट करना पड़ेगा।. फिर [हंसी]. जब जाके उनसे मिलेंगे तो पूछ लेंगे। ये तो. आप स्वामी वाला कह दिए. वो चीजें जो हुई उसकी बराबते उस स्पीड से. काफी टेक्निकल परीक्षण भी हुआ. उन गाड़ियों का वाहनों का तो जो चीजें. होती हैं वो उसको वि पिंच ऑफ साल्ट मानना. भी चाहिए कि ऐसा हुआ होगा बारिश का समय. नहीं था बारिश हो गई अचानक.
उसमें पशु आ गए अचानक स्लिप हो गया तो ऐसी. चीजें हो जाती हैं कभी मतलब. वही मैंने कहा ना एक रॉ इमोशन जो प्रदेश. का है मैं उस रॉ इमोशन के साथ ही आगे बढ़. रहा हूं।. हां हां नहीं वो तो ठीक है। वो तो हम. लोगों ने भी पढ़ा है सुना है और लगातार जब. भी होता है तो फेस करते हैं।. हालांकि उनकी पत्नी को लेकर कुछ लोगों को. थोड़ा था। उनके परिवार में एक महिला को. थोड़ा सा परेशान किया गया। नई-नई शादी हुई. थी। उसको लेकर एक शिकायतें लोगों को थी कि.
उनका कोई रोल नहीं था। खुशी दुबे शायद. उनका नाम था। नहीं नहीं वह तो ऐसा नहीं वह. तो जो सही बातें थी फोन की वो कोर्ट को. बनाया गया उसको बेल होने में भी हाई कोर्ट. से ही करीब साल साल से ज्यादा लग गया था. चीजें जैसे प्रोजेक्ट की जाती हैं और जो. होती हैं ऐसा दिखता कुछ और है होता कुछ और. है तो जब केस डायरी लिखी जाती है और. एविडेंस प्रोड्यूस किए जाते हैं और जब. ऑनरेबल कोर्ट उसको देखता है तो हाई कोर्ट.
से ही बेल होने में बहुत समय ले गया उसने. उकसाया था पत्नी ने।. नहीं उस लड़की ने।. ओके।. और उसके उसाने के प्रॉपर ऑडियो रिकॉर्डिंग. है।. वो चीज ऑनरेबल कोर्ट को बताई गई थी।. इतना आसान नहीं है।. खुशी दुबे की बात कर रहे हैं आप।. हां। खुशी दुबे की भूमिका थी। यानी वो. बेकसूर नहीं थी जो उनको जेल में रखा गया।. क्योंकि उनको लेकर अब हमारे एक तो सबसे.
बड़ी समस्या है जात की। जिस जात का आदमी. अपराधी होता है लोग सिंपथी आती है। तो जो. विकास दुबे पे बोल नहीं पाए तो वो. ब्राह्मण समाज में भी हमारे यहां कई लोग. थे जो जाके खुशी दे ले शुरू हो गए कि नहीं. नहीं इसको इसको जेल में क्यों डाला गया. परेशान किया गया. जो लोग मरे थे उसमें से मैक्सिमम लोग. ब्राह्मण समाज के ही थे. ऐसा तो कोई है नहीं कि. सही बात है तो कोई भी अपराधी हर अपराधी ने. अपनी जात वालों को भी मारा है। मैं श्री. प्रकाश शुक्लक पढ़ा था। पता लगा 35. ब्राह्मण मारे थे उसने।. और ब्राह्मण के लड़के कहते हैं वो हमारा. हीरो था। अतीक अतीक ने जो मदरसा कांड हुआ.
था मुसलमान की लड़कियां तो थी वह सारी. हम् नहीं वह तो चीज़ें. अपराधिक कोई जात नहीं होती. हां वो तो कोई जात भी नहीं होती कोई धर्म. भी नहीं होता ये तो है कि कैसे चीजों को. प्रोजेक्ट करें. लेकिन एक जात वाला केस आया था सर मंगेश. यादव का केस. उसमें बड़े आरोप लगे थे. नहीं अब मेरे हिसाब से वह भी टोटली तथ्य. ही नहीं है वो तो सबने देखा था कि किसने. डकैती डाली. ज्वेलर के यहां हम.
उसमें जब स्थानीय प्रशासन ने प्रेस. कॉन्फ्रेंस की तो दिखाया कि यही है वो. मंगेश यादव जिसने वो लूट रहा है. उसके पास से लूट का सामान भी मिला और क्या. चाहिए. इसमें था कि एनकाउंटर थोड़ा पॉलिटिकली. मोटिवेटेड था. नहीं ऐसा मुझे मुझे नहीं लगता लेकिन अब. लोग स्वतंत्र हैं स्वतंत्र. धनंजय सिंह को आप जानते हैं. नहीं नाम सुना हम. ओके अह धनंजय सिंह को लेकर एक स्टोरी एक.
बार आई थी कि. कई सारी कहानियां आती रहती है उनको लेके. चर्चित व्यक्ति हैं। जौनपुर से आते हैं कि. 1998 में आपकी पुलिस ने उनको मार गिराया. था।. नहीं वो तो भदोही की बात है। संत रविदास. नगर में. इस तरह की एक मिस्टेकन आइडेंटिटी से कुछ. कारवाई हुई थी।. यूपी में क्योंकि कई सारे लोग ऐसे हैं जो. ठाकुर बिरादरी से भी हैं। जैसे बृजेश सिंह.
का नाम था, धनंजय सिंह का नाम रहा।. मेरे इलाके से एक आते हैं बाहुबली हैं।. हालांकि अब तो बहुत सारा काम करते स्कूल. है। सब कुछ है जिन्होंने एक मर्डर कैमरे. पे जिक्र किया था। बृजभूषण शरण सिंह उनका. नाम रहा। रघुराज प्रताप सिंह का नाम रहा।. कई सारे जिन पे मुकदमे डाले गए। मायावती. परेशान किया गया। यह आता है कि यह सिंह. बिरादरी पर काम नहीं हुआ है। मतलब पुलिस. नहीं गई है क्योंकि सरकार जो है वो योगी. जी की है। ऐसा आरोप विपक्ष लगाता है।. इसमें कोई सत्ता है? नहीं मुझे तो इसमें कोई सत्ता नहीं है।.
बहुत सारे ऐसे हैं जिन पे कारवाई हुई है।. बहुत सारे बिरादरी के लोगों एक तो बिरादरी. देख के कारवाई होती थी।. यह गलत बातें हैं और जो अगर अपराध करेगा. एक्टिव तरीके से उस पर कारवाई होगी और जब. कभी जिसने भी किया है चाहे गवर्नमेंट किसी. की भी रहती है कारवाई तो करनी पड़ती है. कुछ जनरलाइज क्वेश्चन मैंने रखे हैं एंड. में आपके लिए कोई एक ऐसा ऑपरेशन जिसका. जिक्र आपके परिवार को आज भी डराता हो.
जिसका जिक्र आपने किया हो या आप आज भी. आपको थोड़ा सा घबराहट हो जाती हो कि ये. बड़ा खतरनाक था. नहीं मुझे परिवार के तरफ से कभी कोई इस. तरह. या आपने परिवार को बताने में संकोच किया. हो कोई एक ऐसा ऑपरेशन जो इतना खतरनाक था. आपको लगा बताएंगे ये लोग टेंशन ले लेंगे. वो. ये लोग कुंभ की घटना के बाद से थोड़ा सा. स्ट्रेस जरूर था क्योंकि इतनी करोड़ों की. संख्या में थी लेकिन वह भी चीजें ऐसी नहीं.
थी जो कि बियों्ड कंट्रोल हो लेकिन प्रेशर. तो घर वालों पर भी रहता है और ऐसे हाई. प्रेशर जॉब में कोई आप पे प्रेश बोलता. नहीं है। लेकिन आप सेंस कर सकते हैं कि. सभी लोग स्ट्रेसफुल। कितना कॉम्प्रोमाइज. करना पड़ता है आपकी वाइफ को बच्चों को जब. आप एक ऐसी नौकरी में होते हैं नहीं उनका. सहयोग उनके सहयोग के बिना. तो सक्सेस संभव नहीं है उनको बहुत स्ट्रेस. लेना पड़ता है और बहुत सहयोग लेना पड़ता.
है और लगातार इतने सालों तक ना कहीं आप. फैमिली के तौर पर कहीं जा सकते हैं ना. कहीं घूम सकते हैं ना आप 3 घंटे की मूवी. भी देख सकते हैं शांति से कुछ मिस करते. बच्चों के स्कूल में कभी नहीं जा पाए। हां. हां वो तो उसका टोल तो बच्चों पे ही आता. है और. अगर वैसी स्थिति में परिवार के अन्य. सदस्यों का सहयोग ना रहे तो बड़ा मुश्किल.
है चीजों को देखना।. आपको कई सारे अवार्ड्स मिले हैं। बहुत. सारे अवार्ड्स आपकी झोली में है। किस. ऑपरेशन के लिए कौन सा अवार्ड है जो सबसे. दिल के करीब है? वैसे तो अगर देखें तो गैलेंट्री अवार्ड भी. है।. चार चार. हां वो भी हैं और सीएनआरसी. का एक ऐसा. वो था जिसमें कि काफी इंजरी हो गई थी और.
मेरठ और मुजफ्फरनगर में हम लोगों ने काफी. उन चीजों को कंट्रोल किया और उसको उस समय. के हमारे डीजीपी ने उसको रिकॉग्नाइज किया. और उसके लिए मुझे एक अवार्ड दिया या फिर. लखीमपुर खीरी में एक बहुत बड़ा किसानों से. संबंधित विवाद चल रहा था। वहां मौके पर. जाके और उस डेड बॉडी को. जो थार वाली घटना. हां को डिस्पोज कराना और वार्ता करना और. सक्सेसफुली उस चीजों को डिॉल्व रिॉल्व.
कराना ये एक बहुत बड़ा. अजय मिश्रा टेनी तो वो सक्सेस मैं मुझे. लगता है कि वो एक अच्छा ऑपरेशन था या. गोंडा में ही एक बच्चे का अपहरण हो गया था. बिकरू के ठीक बाद. वो उसमें भी साहब वो 5 करोड़ की फिरौती आ. गई। खैर बच्चे को हम लोगों ने जीवित रिकवर. कर लिया। परिवार वालों को सौंप दिया। ये. सब कुछ चीजें हैं जो कि बहुत ही. सेटिस्फेक्शन देती है।. ओके।.
35 साल सबसे मुश्किल क्या था पुलिस की. नौकरी जब पीछे मुड़ के देखते हैं अब आप. मुझे लगता है जो एसपी शिप है वो काफी. चैलेंजिंग होती है. जितने दिन आप जिले के इंचार्ज रहते हैं वो. काफी टफ असाइनमेंट रहता है. मैच्योरिटी की भी कमी रहती है. हम. और. उस समय अगर आपके अच्छे सबोर्डिनेट या. अच्छे बॉसेस ना हो तो. भटकाव की स्थिति आ सकती है और वह काफी. स्ट्रेसफुल समय रहता है।.
तो एसपी या इंस्पेक्टर से डीजीपी बनने में. सोच में क्या फर्क आता है? दायरा बदल जाता है ना। एज एसपी आप केवल. आदेशों का अनुपालन कराते।. आप इंप्लीमेंट करते हैं आदेशों को और. डीजीपी मुख्यालय पर जब आप रहते हैं तब आप. स्ट्रेटजी डिसीजन लेते हैं जो जिसके. जो चीजें एसपी इंप्लीमेंट करता है तो शासन.
और आपके द्वारा विभाग को कैसे चलाया जाए. इसकी स्ट्रेटजी तय होती है और उसके आदेश. जारी होते हैं। उनको एसपी लेवल पे. इंप्लीमेंट किया जाता है और जो बीच की. कड़ी होती है वह उन चीजों को मॉनिटर करती. है। वह दायरा बदल जाता है।. ओके। कुछ ऐसा है जो किताब में नहीं लिखा. आपने।. कम से कम कह तो दीजिए बहुत सारा।. वो तो कुछ चीजें ऐसी है जो कि पुलिस वालों. के पुलिस वाले के साथ ही जाती है। वो तो.
किसी को पता नहीं होती।. कुछ. प्रोफेशनल सीक्रेट्स रहती हैं जो हमेशा. सीक्रेट ही रहती है।. पीछे मुड़ के अगर दोबारा नौकरी शुरू करनी. हो. फिर से ये पुलिस की नौकरी करेंगे।. हां या चेंज कर लेंगे। ये तो बहुत रॉयल और. बहुत अच्छी है और क्वाइट सेटिस्फाइंग और. इतना सेटिस्फैक्शन मुझे नहीं लगता कि अह. किसी को भी अपने उसमें मिलता क्योंकि आप.
जैसे मैंने शुरू में कहा कि एक रिजल्ट. ओरिएंटेड अगर वर्किंग आपकी है तो बहुत. सुकून मिलता है जब आप फील्ड पे अपने. द्वारा किए गए कार्यों से. लोगों को खुशी खुशी देखते हैं। अगर आप. किसी के बच्चे को आप लौटाएं जीवित तो जो. उसकी खुशी होती है या जब मैं. अपने जवानों से नक्सल एरिया के थाने में. जाकर मिला. तो वो जो खुशी उसके चेहरे की थी वो आपको.
अंत तक याद रहती है। और जो कॉन्फिडेंस और. जो टीम भावना जागृत होती है या आप कहीं लॉ. एंड ऑर्डर में आप सामने हैं। आपके. सबोर्डिनेट को चोट लग आपको चोट लग जाए. जवान भी घायल है फिर भी कहेगा कि साहब आप. को चोट लग गया आपको ले चलते हैं तो यह जो. कॉमोरेटरी बनती है यह बहुत. अह गजब की होती है क्या होता है एक अच्छा. लीडर सर.
नहीं जब आप इस तरह की चीजें होती हैं तो. आपको. सेटिस्फेक्शन मिलता है कि भाई एक हम एक. ऐसे ग्रुप के साथ हैं जो की एक दूसरे के. लिए जान देने के लिए तैयार है।. आप बहुत लंबे समय तक मेरठ में पोस्टेड थे।. हां।. मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली इन इलाकों में. क्या ऐसा है कि यहां पर अलग लेवल का अपराध. होता है? यहां थोड़ा फास्ट क्राइम होता है और. ट्रेडिशनली ये तो अ. महाभारत के समय से.
मतलब डिस्टर्ब ड्रम भी ड्रम में भी पैक. किया गया। [हंसी]. ये इस तरह की घटनाएं होती है वो तो. यहीं पर सीएनआरसी के दंगों में तो मुझे. खुद याद है कि काफिले पर हमला हो गया था. पुलिस के. हमारी मीडिया गाड़ियों पर हमला किया गया. नहीं तो जो बाहर से लोग आए थे ना वो भी हम. लोगों ने वीडियो फुटेजेस निकाल के दिखाए. थे कि हायड लोग आए थे जो माहौल खराब कर. रहे थे. जबकि अन्य सभी जगह पे हम लोगों ने. सक्सेसफुली हैंडल किया. खैर उसको भी कारवाई की गई थी काफी कठोर.
कारवाई हुई थी आपने खुद देखा होगा और. वेस्टर्न यूपी का असल में हर एक जगह का एक. क्राइम का पैटर्न होता है। पूरब का. क्या अंतर हमको थोड़ा समझाइए पूर्वांचल के. क्राइम में और यहां के क्राइम में क्या. अंतर है? मेरठ मुजफ्फरनगर वर्सेस. पूर्वांचल का क्राइम।. नहीं वहां तो माफिया बड़े-बड़े हो जाते. हैं। यहां पे. उतना बड़ा माफिया तंत्र नहीं रहता।. छोटे-छोटे छत्रप रहते हैं और उनकी अपनी.
रसूख रहता है गांव में अगर आपने उसको सही. समय पर चेक नहीं किया और. थोड़ा सा वायलेंट क्राइम भी इधर ज्यादा. होता है। फास्ट क्राइम रहता है इस पे।. तुरंत मार दो।. हां। काफी हत्याएं वगैरह. मार के ड्रामा पैक कर दो।. उधर. बुंदेलखंड का थोड़ा अलग रहता है। रूहिलखंड. का अलग रहता है। बनारस साइड का कुछ अलग.
रहता है। तो तो समय काल और देश के हिसाब. से चीजें बदलती रहती हैं। जैसे लैंग्वेज. बदल जाती है। खानपीने का तरीका बदल जाता. है। उसी तरह से क्राइम का पैटर्न भी बदल।. एंड में सर एक सवाल मेरे मन में आता है. क्योंकि यूपी में मैंने यूपी को काफी कवर. भी किया है। चाहे वह राम मंदिर जब बनने की. खबर आई या लाउडस्कर हटाने की बात आई थी. मंदिर और मस्जिद से।. विवाद नहीं हुआ। जबकि यूपी एक काफी. सेंसिटिव इलाका है। धर्म के मामले में.
खासतौर पर और अलग-अलग इलाकों में दोनों. समाज की आबादी बहुत ज्यादा है। यह टफ था।. लाउडस्कर हटाना एक बहुत अच्छी चीज जो. वर्तमान सरकार ने चलाया कि संवाद से. समाधान. नेगोशिएशन कंटीन्यूअस आप टॉक करें सभी. स्टेक होल्डर्स से. और यह बताएं कि यह किसी.
वर्ग विशेष किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं. है। यह आम जनता के. वेलफ़ेयर के लिए है। तो, 1 लाख से अधिक. लाउडस्पीकर उतारे गए।. उसमें यह कोई नहीं कह सकता कि सिर्फ एक ही. धर्म की तरफ से हटाए गए। सभी जगह से हटाए. गए।. सबसे पहले गोरखपुर के मंदिर से ही हटाए।.
तो और जबकि अन्य प्रदेशों में कुछ लोगों. ने इसको रेप्लिकेट करने की कोशिश की तो. वहां दंगे टाइप के होने लगे।. उसी तरीके से जैसे कोई भी रिलीजियस. एक्टिविटी रोड पे नहीं कराई जाएगी।. रोड बाधित नहीं होगा। मुख्य मार्ग बाधित. नहीं होगा। आपको अल्टरनेट व्यवस्था देनी. है।. इस पे भी इस लोगों को कन्विंस किया गया।. हम. कि ना तो इस तरह का कोई धार्मिक प्राविधान.
है कि हम रास्ता रोक के भजन कीर्तन करेंगे. या नमाज करेंगे।. पब्लिक. की जो है क्योंकि उसमें बहुत सारी ऐसी. चीजें होती हैं कि किसी के कोई बीमार पड़. गया। एंबुलेंस जाना है। किसी की जान भी जा. सकती है या लाउडस्कर के शोर से बूढ़े आदमी. बीमार पड़ रहे हैं। परीक्षाएं हो रही हैं।. तो इन सब चीजों से लोगों को. इसमें तो मैं बहुत खुश हुआ था क्योंकि. मुझे याद है मेरा 10थ का एग्जाम जब बोर्ड. एग्जाम था।. तो ये सभी चीजें लोगों ने मानी और जैसा.
आपने कहा कि कोई विवाद नहीं हुआ। किसानों. का जो विवाद चला बहुत बड़ा उस एजिटेशन. चला। उस समय भी कोई हिंसा उत्तर प्रदेश. में नहीं हुई। वह लोग कुछ सिंबॉलिक. प्रोटेस्ट करते थे। उनसे बात रहती थी।. लगातार संवादहीनता नहीं थी।. विलेज लेवल पे, चौ बीट लेवल पे, फिर सब. डिवीजन लेवल पे, थाने लेवल पे, जिले लेवल. पे जवाबदेही फिक्स। सभी इंपॉर्टेंट लोगों.
को बातचीत करके बताया जाता था। कोई पत्रक. देना है। आप छोटे स्तर पर दीजिए। ऐसा ना. हो कि आप भीड़ बढ़ा के लाएं और उसमें कुछ. उपद्रवी घुस जाए। जैसे सीएनआरसी में घुस. गए थे। कुछ जगहों पे सब जगहों पर नहीं कुछ. जगहों पे आके उन्होंने जानबूझ के किया।. तो ये एक बहुत बड़ा मॉडल रहा. जो कि सीखने योग्य है। वर्तमान जो. व्यवस्था है उससे। एक दो सवाल पर्सनल लाइफ.
पे सर प्रशांत जीरा अच्छे अधिकारी हैं या. मैडम. यह तो बड़ा टफ क्वेश्चन [हंसी]. मैं तो उनको ही बेटर मैनेजर मानता हूं. क्योंकि वो सभी चीजें झेल रही हैं। मुझे. भी झेल रही हैं।. कैसे अंतर होता है सर? जैसे आप भी अधिकारी. हैं। मैम भी वर्किंग है।. दोनों की जिंदगी में संघर्ष अलग कैसे फिर? जैसे आपने कहा सब कुछ मैनेज वो कर रही.
हैं।. नहीं हम कुछ चीजें अनिश्चितता रहती है ना. जैसे कानून व्यवस्था में कोई. प्रेडिक्टेबिलिटी नहीं है। बहुत सारी. चीजें ऐसी होती हैं। कुछ जॉब्स ऐसे होते. हैं जिसमें अनप्रिडिक्टेबिलिटी. का फैक्टर कम रहता है। लेकिन पुलिस एक ऐसा. सब्जेक्ट है। लॉ एंड ऑर्डर एक ऐसा. सब्जेक्ट है जिसमें कुछ भी निश्चिंत नहीं।. आप अभी घर से निकल रहे हैं कुछ सोच के। 5. मिनट के अंदर ही सारी चीजें जैसे आप सामान.
बंद बांध रहे थे घर जाने के लिए और अचानक. कोई ब्रेकिंग खबर आ गई थी आपको प्रयागराज. से। फिर पूरी रात आप जगे रहे होंगे।. अब लाइव करते रहे होंगे। तो पुलिस वालों. के साथ ही ऐसा है कि अभी पांच कदम ही चले. तब तक हमारे कुछ ऐसी चीजें सूचना आ गई कि. वो पूरा दिन भर की प्लानिंग. बता रहा था कि गाजियाबाद में जब आपकी.
पोस्टिंग हुई थोड़ा घबराए थे आप मैडम ने. कोई बात नहीं हम रह चुके हैं वहां पे. [हंसी]. हां वो टफ मैं मेरी पहली पोस्टिंग थी मैं. मुझे इसका अंदाजा भी नहीं था कि पश्चिमी. और मुझे मैं आपको बहुत आश्चर्य होगा कि एक. वहां हमारे जो डिवीजनल कमिश्नर थे जब मैं. उनसे मिलने गया तो उन्होंने मेरा हाल वाल. देखा पूछा फिर बोला कि मुझे नहीं लगता कि. आप. गाजियाबाद हैंडल कर पाएंगे।.
तो मुझे बड़ा बुरा भी लगा। बड़े वो वरिष्ठ. अधिकारी थे। अच्छे भी अधिकारी थे। फिर. धीरे-धीरे बात हुई। अचानक मैंने अपने. पूर्व नियुक्तियों के बारे में बताया। तो. मैंने बताया कि मैं जौनपुर का भी एएसपी. रहा हूं।. तो बोला आप कितने दिन रहे? तो एक साल तो. वो खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि तब तब आप. चला लेंगे।. तो मैंने कहा सर अभी तो आप कह रहे थे कि.
मैं चला नहीं पाऊंगा।. जौनपुर से सिंबॉलिक नाम याद है ना खट से. क्लिक हो गया उनको भी।. तो बोले कि नहीं मैं भी जौनपुर का डीएम एक. साल रहा हूं। [हंसी]. तो कभी-कभी. जो लुक्स होते हैं बड़े डिसेप्टिव होते. हैं।. इसीलिए आपने मूछ रखा था। [हंसी] ये 100%. वहीं से आया है सर। नहीं नहीं तो लुक्स जो. होता है कि ऐसा नहीं रहता लेकिन जब. केवल देख के हावभाव से चीजों का अंदाजा. नहीं लगाना चाहिए वो किस तरह से चीजों. ये आपका चेहरा है मासूम आपने रख दिया. खूंखार मूछ [हंसी] के बाद थोड़ा डरना.
चाहिए गंभीरता से लो भाई हमको. हां नहीं ऐसे. ये तमिलनाडु से नहीं लिया आपने ये आपने. उम्मीद गाजियाबाद में पोस्टिंग के बाद. लिया. तो ये चीजें ऐसे हो जाती हैं कभी-कभी जो. कि बड़ी ऐसे ही अचानक चीजें आती हैं तो. क्योंकि बात निकल गई थी तो मैंने आपको बता. दिया. बड़ा किस्सा सही था गाजियाबाद वाला उस दौर. में गाजियाबाद था भी. हां नहीं अगर आप कहीं एकदम नए ट्रेन में. जाएं तो थोड़ा सा एप्रिहेंशन रहता है और. आपको अपनी स्ट्रेटजी नए तरीके से बनानी.
पड़ती है जैसे मैंने कहा ना कि हर एक. क्षेत्र का एक अलग मिजाज होता है तो वहां. का लैंग्वेज वहां का स्टाइल वहां के. क्राइम का तरीका वहां के लोग. आपकी आपकी बेटी का मैंने सुना वो आपका गलत. बर्थडे पे बर्थडे मनाती थी। [हंसी] अब उसे. जब रियल बर्थडे पे तो समय मिलता नहीं था।. पुलिस में छुट्टी नहीं मिलती जन्मदिन के. दिन।. नहीं कोई समय नहीं होता ना। आप जिस दिन. कुछ डिसाइड करेंगे उसी दिन कोई बात ऐसी हो.
जाएगी जो आप उस चीजों को ऑनर नहीं कर. पाएंगे। तो धीरे-धीरे फैमिली भी यूज टू हो. जाती है।. बट वो. बच्चों की लाइफ तो टफ रही होगी।. हां वो टफ होता है काफी। परिवार के लिए और. उनको पहले तो शुरू में भी खुद के लिए भी. बहुत ये चीजें जैसे आप अपने गांव नहीं जा. सकते त्योहारों में नहीं जा सकते. जबकि आप स्टूडेंट रहते हैं तो ये होता है. कि अगर हमारी हम नौकरी करें तो हर एक.
दिवाली अपने गांव जाएंगे हम गांव जाएंगे. हां. हां. अब वो नहीं जा सकते. तो ये चीजें खराब भी लगती हैं और पेरेंट्स. को भी जरूर बुरा बुरा लगता होगा।. तो अब जैसे रिटायरमेंट एज आ गई है। अब. आपकी रिटायरमेंट चल रहा है। अब म्यूजिक का. क्रिकेट का जो शौक रह गया था या क्या शौक. क्या शौक है जो पूरा करेंगे अगले कुछ. सालों में अब आप? अब तो हम लोग खेल नहीं सकते। देख ही सकते. हैं। तो मैच देखते रहते हैं जो अच्छे. मैचेस आते हैं।.
म्यूजिक भी सुनते हैं। घूमने भी जाते हैं।. खेलते थे क्रिकेट आप? पहले खेलते इंडिया में कौन क्रिकेट नहीं. खेलता? क्या करते थे? बैटिंग बॉलिंग क्या करते थे? नहीं हम लोग तो वो इतना हम कोई एक्सपर्ट. नहीं थे। लेकिन वो तो क्योंकि बचपन में. सभी चीजें होती है।. थोड़ा-थोड़ा सब कर लेते हैं।. हां राम रहीम जैसे राम रहीम जी कह रहे थे. ओपनर [हंसी] बैटर थे। ओपनर बॉलर थे।. नहीं तो वो सभी चीजें थी तो अब आदमी एंजॉय. करता है।. म्यूजिक में क्या एंजॉय करते हैं? हम हिंदी गाने जो हैं. किसके? मुकेश जी के।.
नहीं मुकेश किशोर कुमार हमारे जो हम उम्र. जो हम लोगों के जमाने में गाने चलते थे।. कौन से दो गाने आपके फेवरेट हैं। अब तो. आपके परिवार भी दिखेगा इंटरव्यू हम भी. [हंसी] गाने।. चलिए ये चीजें तो बहुत. हम लोग के जमाने में केएल सहगल का जमाना. खत्म हो गया था. और नया लॉट अभी उदित नारायण और ये लोग आए. ही थे तो बीच के जितने लोग थे जैसे लता जी.
का था या किशोर कुमार जी का था या मोहम्मद. रफी जी का था मुकेश जी का था ये सब चीजें. उसके जो अच्छे गाने हैं. वन लास्ट क्वेश्चन सर. बहुत स्ट्रेसफुल जॉब आपकी है। मीडिया. वालों की भी होती है। इस देश में मेंटल. हेल्थ आज एक बहुत बड़ा इशू बन रहा है। बट. आई डोंट थिंक कि आप लोग जो जॉब कर रहे हैं. उससे ज्यादा मेंटल इश्यूज कहीं आते होंगे. उस एक्सट्रीम प्रेशर पे। दिमाग को शांत. कैसे रखते हैं आप? क्योंकि आपके पास तो. यूपी जैसा एक बड़ा स्टेट था। प्रेशर एमएस. रहा होगा। नए बच्चे जो सुन रहे होंगे अब.
तो 10 12 साल के बाद ही मेंटल हेल्थ की. चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हां ये एक बड़ा. प्रश्न है। यह मैंने प्रयास किया कि अगर. कोई बड़ी घटना हो जाती थी तो मैं किसी भी. सबोर्डिनेट को स्कूल नहीं करता था।. नाराजगी मैं व्यक्त कर सकता हूं कि यह. चीजें नहीं होनी चाहिए थी। और. लेकिन मैं उसको यह भी कहता था कि इसको किस.
तरह से आप टैकल करिए और उसके लिए आपको. क्या आवश्यकता है तो अगर कोई क्राइसिस हो. जाए तो कभी भी अपने सबोर्डिनेट को. रेडिक्यूल नहीं करना चाहिए क्योंकि ये. घटना घटनाएं होती हैं। इसी के लिए पुलिस. की व्यवस्था है। ऐसी कोई व्यवस्था नहीं हो. सकती जहां कोई घटना हो ही ना।. तो अगर हम भी उसकी जगह पर होते उस. सीन्योरिटी पे तो हम लोगों ने भी बहुत. सारी घटनाएं हमारे समय में भी हुई है और.
जो. हमारे अच्छे अधिकारी थे वो गाइड ही करते. थे तो कभी भी क्राइसिस में लोगों को और. अस्थिर नहीं करना चाहिए और वो विभागीय. डिसिप्लिन के लिए भी ठीक नहीं है। हो सकता. है टेंपरेरी आपसे वो कोई प्रश्न ना करे. लेकिन इंपैक्ट तो उसके दिमाग में रहता है. कि. जैसे इसको मैं अगर और एक्सटेंड करूं. आप एक अधिकारी के तो आपने नहीं डांटा बट. आप अपना स्ट्रेस कैसे कंट्रोल करते हैं वो.
मैं जानना चाह रहा हूं एक सीखने के तौर पर. भी और बहुत सारे बच्चे जानना चाहेंगे कि. अगर आपके ऊपर प्रेशर आ रहा है तनाव आ रहा. है एक्सट्रीम परफॉर्मेंस का प्रेशर है. हां ये. आपको अपनी इंटरनल मैकेनिज्म धीरे-धीरे. डेवलप करना होगा और. ये. जो आप जिस एनवायरमेंट में वर्क कर रहे हैं. वहां उस चीजों को भी सेंस करना पड़ता है. कि हमारे गवर्नमेंट की क्या एक्सपेक्टेशन.
है। हम कितना डिलीवर कर सकते हैं।. अनरीजनेबल चीजें होती हैं तो वो बताना भी. पड़ता है कि साहब ऐसे नहीं। इसमें इतनी. जल्दी ये चीजें नहीं हो सकती।. इसमें कुछ समय लगने की संभावना है। कुछ. चीजें तुरंत हो जाती हैं। कुछ चीजों में. समय लगता है। तो यह तो जिस इकोसिस्टम में. आप काम कर रहे हैं, उसके साथ आपका किस तरह. का रिलेशनशिप है, उस पर भी बहुत कुछ.
डिपेंड करता है।. थैंक यू सो मच सर। आपने समय दिया। बहुत. सारे सवालों के जवाब।. आपसे बात करने का बहुत मजा भी आया हमें।. और हम लोगों ने काफी चीजें शेयर की। मुझे. विश्वास है कि आम जनता को भी अच्छा लगेगा।. जी और आपको अपनी किताब के लिए एक बार फिर. से शुभकामनाएं।. धन्यवाद।. हम चाहेंगे लोग पढ़े। इसका हिंदी वर्जन भी. आया सर? नहीं हिंदी नहीं आया।. हिंदी लाएंगे? हां हिंदी वो प्रयास कर रहे हैं पब्लिशर.
और राइटर. जी।. कि इसकी हिंदी वर्शन भी जल्दी आए।. अनुरुद्ध जी के किताब पे हमने एक उनका. इंटरव्यू किया था।. जब उन्होंने श्रीलंका में जाके कवर किया. था एलटीटी।. हां जी।. उस पर एक वेब सीरीज बनी थी। हम. देखते हैं आप पर भी जब बनेगी तो हम फिर. बुलाएंगे आपको।. ये तो भविष्य की गर्त में है। देखिए क्या. होता है।. बेस्ट विशेस सर। थैंक यू सो मच।. थैंक यू।.
