Unplugged ft. Ex. Army Chief Gen. MM Naravane | Galwan Reality | Agniveer | Four Stars of Destiny
फोर स्टार ऑफ़ डेस्टिनी। उसे क्लासिफाइड. कहकर रिलीज़ नहीं किया। इस बार जो किताब का. नाम है वह क्लासिफाइड है। क्या कोई. क्रोनोलॉजी सर इसके पीछे है? बुक हैज़ नॉट बीन पब्लिश्ड।. बुक हैज़ नॉट यट बी रिलीज़ फोर स्टार ऑफ़. डेस्टिनी हैज़ नॉट बीन पब्लिश्ड।. दिस बुक रिमेंस अनप्लिश्ड। मेरे दोस्त भी. पूछते पूछते थे मुझे कि आपको हाई बीपी. वगैरह तो हो रहा है [हंसी]. काऊ साहब शुरुआत में रॉकी जी उन्होंने.
लाइफ में कोई इंटरव्यू नहीं लिया था ये. कहा कि क्योंकि मुझे लगता है कि मेरे राज. मेरे साथ जाने चाहिए कोई व्यक्ति जो इतने. बड़े पद पर रहा हो क्या उस पद पर बैठे. व्यक्ति को किताबों के जरिए बातें करनी. चाहिए बातें तो होनी चाहिए हम एक. डेमोक्रेसी है तो डेमोक्रेसी में हर चीज. के ऊपर बातें होती है। डिबेट होते हैं।. राहुल गांधी जी ने संसद में वो किताब. उठाई। कहा कि ये पीएमओ का विचार था सरकार. का नहीं। सवाल आज उठ रहा है वो दो सवाल सर. है। एक सवाल यह है कि क्या जब अग्निपथ. योजना लागू की गई क्या इंडियन आर्मी तैयार. थी उस वक्त? सेकंड क्वेश्चन जनरल नरवरे.
साहब की नजर में ये योजना इंडियन आर्मी के. हित में है या नहीं? मेरे यूनिट का सिपाही. कुलवीर सिंह 2 साल के सर्विस में उसमें. सेना में मेडल गैलेंट्री मिला है। अगर वह. 4 साल फौज में रहा है और 4 साल में हमने. देशभक्ति की भावना पैदा की है वो सारा अगर. हम 4 साल में उसमें नहीं डाल पाए हैं तो. वो फिर हमारी कमजोरी है। मुझे ऐसा लग रहा. है आप अग्निवीर को डिफेंस कर रहे हैं।. क्या राहुल गांधी साहब ने आपकी किताब के. कोर्ट्स को मिसट करके क्वेश्चन खड़ा कर. दिया।. 100% ऑथेंटिक.
लोग जो कहना चाह रहे हैं वो कहे। जब मैं. अपने एक्स आर्मी चीफ से पूछ रहा हूं।. उन्हें कैसा लगता है जब वह देखते हैं कि. नेता अपनी पेंशन का ख्याल रख रहे हैं।. लेकिन कटौती जो है वो सेना में करने की. बात कर रहे हैं। यह कहते हुए कि देश के. बजट पर भार बढ़ेगा।. हम ही अपने विधायक को चुनते हैं। अगर हमें. लगता है कि वह सही बात नहीं उनको ना चुने।. कई सारे जूनियर्स भी आप आए और वो उनका. कहना था कि जब आप पद पर थे उस वक्त आपने. वो बातें कोर्ट नहीं की।. यह तो रिटायरमेंट की बात हुई। व्हाई डिड. टॉक अबाउट इट? व्हेन यू सर्विस? आप. रिटायर्ड क्योंकि आपको कुछ मिलना नहीं है. अभी।. जब आप रिटायर हो गए तब आपने इन स्कीम्स को. या कई बातों को उठाया। एक किसी चीज के ऊपर. एक हद तक ही आप लड़ सकते थे। गलवान में उस.
रात क्या हुआ? 1979 में चीन और वियतनाम के बीच में युद्ध. हुआ था।. तब उनके कैजुएल्टी हुए। उसके बाद अभी. तो ये उसको बड़ा झटका मिला कि अरे ये. इंडिया जो है ऐसे चुपचाप नहीं बैठेगा।. उनके 40-50 जवान शहीद हो गए थे।. सर हमारे कैजुअल्टीज हुए हैं तो उनके भी. जरूर कैजुअल्टी हुए होंगे।.
एक थ्योरी आती है कि चीन ने हमारे कुछ. इलाकों में कब्जा कर लिया था। इज इट ट्रू? चाइना सिंग ऑन 4000 स्क्वायर कि.मी. जब आपने देखा है कि पीएलए वाले वापस जा. रहे हैं। इसमें डाउट क्यों आता है. उन्होंने कब्जा किया है या नहीं किया? सरल स्ट्राइक्स पहले भी होती थी।. कि हमारी एक पोस्ट के ऊपर लोग आके दो. जवानों की गर्दन फाड़ के निकल गए. [चीखने की आवाज़] थे। उसका तो हमने बदला. तो लिया ही लिया। पार जाके लेकिन किसी को. मालूम नहीं है।. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी का एक कोट. आपने कहा था कि उन्होंने आपसे कहा कि जो. आपको उचित लगे एक उन्होंने आपको खुली छूट.
दे दी। दूसरा अपनी जिम्मेदारी से पल्ला. झाड़ लेना।. मैं ये नहीं कहूंगा कि खुली छूट ये. दर्शाता है कि सरकार को जो है. अपने आर्मी के ऊपर अपने फौज के ऊपर पूरा. भरोसा है।. सैम मानिक शाह साहब ने 1971 में जब एक. पावरफुल गवर्नमेंट इंदिरा गांधी जी की थी. तो एक मसले पर उनको रियलिटी चेक दिया।. नेहरू जी के जमाने में जनरल थेमैया साहब. ने रक्षा मंत्री से मतभेदों के दौरान अपना. इस्तीफा दे दिया था।. ये अस्तीफा देना बहुत आसान चीज है।. ये अस्तीफा देना बहुत आसान चीज है।. कभी मतभेद इतने आए सर कि आपको लगा कि मैं.
रिजाइन कर दूं? इंडियन आर्मी में कर्नल. पाकिस्तान। [हंसी]. एक पद होता है कर्नल जनरल स्टाफ इन. ब्रैकेट पाकिस्तान। जब वो कॉल बुक करता है. या अपने आप को किसी से इंट्रोड्यूस करता. है कि मैं कर्नल जीएस पाकिस्तान।. पाकिस्तान वो घबरा जाता है कि अरे ये. पाकिस्तानी कहां से आ गया? सर ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन आर्मी के. साहस को आप कैसे देखते हैं? ऑपरेशन सिंदूर [संगीत]. एक ऐसा अचूक प्रहार था।. हमने बालाकोट से कुछ सबक सीखे क्योंकि. बालाकोट के बाद लोग पूछते रहे कि सबूत.
कहां है? सबूत कहां है? भारत कह रहा था यहां पे सर्जिकल स्ट्राइक. हुए हैं। यहां तो कुछ भी नहीं हुआ।. एक लाश नजर आई है। और वो लाश आई कब की।. तो हमें भी मतलब दिखाइए क्या हुआ। किसी को. विश्वास नहीं हुआ कि हमने कोई कारवाई की. है तो उससे सीख लेते हुए इस बार हमने सबूत. भी दिखाया है।. जो जवान होते हैं क्या वो भी मोबाइल फोन. के नशे में है रील्स बनाने के थोड़ा सा. इसके ऊपर हमें सावधान करने की जरूरत है. लोगों को जो रील बना रहे हैं उससे अनजाने. कोई सिक्योरिटी रिस्क ना हो।. जो महिला सैनिक सर हैं क्या उनको. इनफेंट्री जैसे डायरेक्ट कॉम्बैट में कभी. तैनाती हो सकती है? ये बहुत अच्छा सवाल है कि लेडीज वुमेन.
फाइटर पायलट भी है तो वो भी तो दुश्मन के. एरिया में गिर सकती है।. मेरे यहां फौज से यशिका त्यागी जी आई. ज्यादा मांगते मांगते अब हमारी तमन्ना है. कि हम एक आर्मी चीफ का हेड जो हो वो भी. कभी महिला हो. बनेंगे क्यों नहीं. 42 साल लगेंगे [हंसी]. कहीं पर ब्रेकडाउन हुआ आपका कोई आपका. दोस्त जिसके साथ आपने कभी काम किया हो जो. आज इस दुनिया में नहीं हो. कैप्टन बहुगुना एक बड़ा ऑपरेशन ल्च किया. उन्हीं के कहने पे ल्च किया पूरे उस. ऑपरेशन में एक ही कैजुअल्टी हुई है और वो. कैप्टन बहुगुना एक स्पिंटर कहीं से आके.
उनके गले में गया फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी. उससे कोई लक्षण है आने के अभी. कभी ना कभी आपका इरादा है पॉलिटिक्स में. जाने का? चुनाव नहीं चीनियों से लड़ता हूं। [हंसी]. टीवी पर अक्सर हम फौज की बहादुरी कहानियां. सुनते हैं। तिरंगा लहराता है, दुश्मन पीछे. हटता है और हम और आप गर्व से भर जाते हैं।.
लेकिन उस वर्दी के पीछे की असली कहानी. क्या है? वह कठिन फैसले क्या होते हैं जो. सरहदों पर लिए जाते हैं? वो सच्चाइयां जो. कभी हमारे पास आती किताबों के जरिए कभी. नहीं पहुंचती हैं। इसीलिए हमें लगा कि आज. एक पडकास्ट करते हैं जो स्पेशल हो। आज. सिर्फ बहादुरी के नहीं कुछ अनकहे राजों को. लाते हैं जो अक्सर फाइलों में क्लासिफाइड. हो जाते हैं। आज हमारे साथ वो शख्स हैं जो. गलवान की बर्फीली रात में चीन को सख्त. जवाब दे रहे थे। विपिन रावत साहब के बाद. देश की तीनों सेनाओं की कमान की. जिम्मेदारी संभाली। एक तरफ युद्धभूमि का.
अनुभव है, दूसरी तरफ उग्रवाद पर गहरी समझ. है। और अब उनकी एक नई किताब आई है। द. क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड। हमारे साथ हैं. जनरल मनोज नरवने साहब। बहुत-बहुत स्वागत. है सर। कैसे हैं आप? पहली बात तो बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने. ये मुझे मौका दिया कि मैं अपनी नई किताब. के बारे में बात करूं और इसके जरिए इस. पडकास्ट के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों. को इसके बारे में पता चले। मैंने जब आप एक. नई किताब का टाइटल पढ़ा सर तो मेरे ज़हन. में पहला सवाल जो आया वो ये आया कि आपकी.
जो पिछली किताब जिसका जिक्र चल रहा था वो. थी फोर स्टार ऑफ डेस्टिनी और उसे. क्लासिफाइड कहकर रिलीज नहीं किया गया। इस. बार जो किताब का नाम है वो अपने आप में. क्लासिफाइड है। तो [हंसी]. क्या कोई क्रोनोलॉजी सर इसके पीछे है? नहीं। [गला साफ़ करने की आवाज़]. ये जो किताब मैंने लिखी है इसमें ऐसे. दिलचस्प किस्से हैं फौज के बारे में। मतलब. आर्मी, नेवी, एयरफोर्स तीनों सेनाओं के. बारे में जो कि मुझे लगता है कि लोगों को. बहुत पसंद आएंगी। लेकिन जब मैं ये किस्से.
लिख रहा था, इसके ऊपर मैं बातचीत कर रहा. था अपने दोस्तों से वगैरह। तो मुझे यह. आश्चर्य हुआ कि उनमें से किसी को इसके. बारे में मालूम नहीं था। ना सिर्फ. सिविलियन मेरे दोस्त लेकिन जो मेरे साथ. फौज में रहे हैं जिन्होंने 2020 साल वर्दी. पहने उनको भी यह मालूम नहीं थे कई इनमें. से किस्से मानो कि ये गोपनीय थी मानो कि. ये क्लासिफाइड थी.
जबकि ऐसे कुछ नहीं है इसमें सभी को मतलब. अगर मुझे मालूम है ये अब थोड़ा भी Google. सर्च करो तो ये इसके बारे में तफसील से. आपको पता चल सकता है लेकिन फिर भी इसके. बारे में लोगों को मालूम नहीं मुझे कई. चीजें बड़ी दिलचस्प लगी।. उस उस दृश्य से जैसे कि इसके ऊपर एक चद्दर. फैली हुई हो। तो मेरे. कोशिश रही है कि इस व्हेल को इस घूंघट को. हटाए और जो अपनी सेनाओं के कहानियां हैं.
जिससे हमारे मोराल बढ़ता है। ये ज्यादा से. ज्यादा लोगों तक मैं पहुंचा सकूं।. देखिए मैं जानता हूं आपकी पिछली किताब को. लेकर बहुत सारे लोगों के मन बहुत सारे. सवाल हो गए। लेकिन पहले मैं ये जो नई. किताब है इसको लेकर कुछ सवाल कर लेता हूं।. जैसे मुझे एक बड़ा दिलचस्प किस्सा लगा सर. इसमें कि फौज में जो रैंक का गणित होता है. कि मेजर लेफ्टिनेंट से सीनियर है पर मेजर. जनरल जो है लेफ्टिनेंट जनरल से जूनियर है।. [हंसी]. इसकी क्या क्रोनोलॉजी है सर? तो. इससे पहले मैं एक और बात कहना चाहूंगा कि.
हम रैंक पर काफी भरोसा देते हैं।. हम्म। हम. लेकिन. जब फॉर्म भरे जाते हैं तो उसमें या तो. मिस्टर होता है या मिसेज होता है।. हम. आर्मी या नेवी एयरफोर्स रैंक तो होते नहीं. है।. हम. तो जब हम अपना नाम भरते हैं मान लो कि एक. होटल रिजर्वेशन में तो वो मिस्टर मेजर. जनरल या मिस्टर जनरल मनोज नरवने करके नाम. दिया जाएगा। जब हम होटल में जाएंगे तो वो.
हमें मिस्टर जनरल करके बुलाएंगे। तो उनको. पता ही नहीं है कि यह. नाम नहीं है बल्कि एक रैंक है। तो इतने जो. है. कहता हूं एक तरह से इग्नोरेंस है हमारे. हमारे बीच में कि फौज कैसे मतलब चलती है।. तो इसी रैंक के सिलसिले में जैसे आपने अभी. [गला साफ़ करने की आवाज़] कहा कि मेजर तो. लेफ्टिनेंट से सीनियर होता है। लेकिन मेजर. जनरल लेकिन जैसे भी गणित बढ़ता रहता है तो.
वह जूनियर मेजर जनरल लेफ्टिनेंट जनरल से. जूनियर रहता है।. तो इसके पीछे दो राज हैं या दो. कहानियां बताए जाते हैं। उसमें से कितनी. सच्चाई है कितनी नहीं कह नहीं सकते।. इसीलिए मिथ्स एंड मिस्ट्रीज. हम. एक और बड़ा अच्छा मुझे लगा सर कि जो नेवी. का कैप्टन होता है वो कर्नल के बराबर होता. है। लेकिन आर्मी आर्मी ऑपरेटर ने कैप्टन. सुनकर जूनियर समझ लिया था। हां तीनों. सेनाओं में भी अलग-अलग. अलग-अलग हां तो तीनों सेनाओं में अलग रैंक.
है और दो रैंक ऐसे हैं जो कि. एक है लेफ्टिनेंट का रैंक. हम. नेवी में जो कि. आर्मी के लेफ्टिनेंट से सीनियर है. हम. और एक है कैप्टन का रैंक नेवी में वो जो. फिर से आर्मी के रैंक से सीनियर है और. इसीलिए. नेवी में जब इन दो रैंक का इस्तेमाल. इस्तेमाल किया जाता तो हमेशा आगे ब्रैकेट. में इंडियन नेवी लिखते हैं ताकि इन लोगों.
को पता चले कि यह कैप्टन नेवी वाला जूनियर. जूनियर सीनियर है या ये कैप्टन आर्मी वाला. जूनियर है।. बट अब जैसे सीडीएस आ गए हैं और बड़ा पद आ. गया। आप खुद तीनों सेनाओं की जिम्मेदारी. आपने संभाली। तो ये रैंक्स को बराबर नहीं. करना चाहिए था क्योंकि कंफ्यूजन खत्म हो. जाए।. कई सेनाओं में ऐसे है।. जी।. कि एयरफोर्स और नेवी के रैंक उन्होंने एक. एक जैसे रखे हैं। और वह कहते हैं कर्नल. एयरफोर्स अलग से [गला साफ़ करने की आवाज़]. ग्रुप कैप्टन नहीं कहते हैं जो कि कर्नल.
का इक्विवेलेंट है। लेकिन उन फौजों में भी. जो नेवी के रैंक है वो फिर भी नेवी वाला. ही सिस्टम फॉलो करते हैं। क्योंकि वो. सिस्टम क्योंकि नेवी ज्यादातर. और दुनिया भर में घूमती है। तो इसलिए. प्रैक्टिकल चीज है कि सभी को एक रैंक का. मालूम हो। बट एक जो सबसे इंटरेस्टिंग मुझे. टॉपिक लगा आप अपनी किताब में वो था इंडियन. आर्मी में कर्नल पाकिस्तान।. [हंसी]. फिर वो किस्सा कि फोन गया और उसने फोन रख. दिया। उसे लगा पाकिस्तान से कॉल आ रहा है।. तो कर्नल पाकिस्तान तो एक एक चीज होती है.
रैंक।. हम. और एक होता है कि आप कौन से पद को संभाल. रहे हो। तो आप अगर एक कर्नल हो तो एक. यूनिट के कमान अधिकारी हो सकते हो। हम. लेकिन आप किसी हेड क्वार्टर में जाते हो. तो आप उसी रैंक में कर्नल के रैंक में. आपका अपॉइंटमेंट हो सकता है कर्नल. एडमिनिस्ट्रेशन जो कि सभी एडमिनिस्ट्रेशन. की चीजें देखते हैं। उसी तरह एक पद होता. है कर्नल जनरल स्टाफ इन ब्रैकेट. पाकिस्तान।. उसका काम है कि पाकिस्तान के बारे में.
जितनी जानकारी है, जितने न्यूज़पेपर कटिंग. है, इंटरनेट है, रिसर्च है, किताबें पढ़ते. रहो। पाकिस्तान के बारे में जानकारी हासिल. है। तो जब वह कॉल बुक करता है या अपने आप. को किसी से इंट्रोड्यूस करता है कि मैं. कर्नल जीएस पाकिस्तान तो वो घबरा जाता है. कि अरे ये पाकिस्तानी कहां से आ गया हमारे. बीच में? तो ये केवल पाकिस्तान का ही कर्नल होता है. या चाइना का भी हमने रखा है बाकी देशों का. भी।. कर्नल जीएस चाइना भी है क्योंकि ये दो देश. खास करके हम इनके ऊपर ध्यान रखते हैं।.
ओके। और बाकी भी हम ऑफ कोर्स पूरे नेबरहुड. को देखते हैं बाकी देशों के ऊपर लेकिन वो. एक जनरल ये है लेकिन ये दो अपॉइंटमेंट ऐसे. पद हैं जो कि फोकस इनका इन दोनों देशों के. ऊपर होता है।. तो ये सभी को आर्मी में भी कंफ्यूजन है इस. बात को लेके।. कई बार जिन लोगों को मालूम नहीं होता. क्योंकि एक बहुत स्पेशलाइज्ड अपॉइंटमेंट. है।. सभी को इनके बारे में शायद जानकारी ना हो।. हम्म।. मैं आपके फौज के सर और इस किताब के किस्से. पढ़ रहा था। एक बड़ा इंटरेस्टिंग जो मेरा. फेवरेट किस्सा आया वो था बदलाराम जी के.
राशन का किस्सा. कैसे वो नहीं रहे लेकिन उसके बावजूद. एक्स्ट्रा राशन. बदलूराम की कहानी एक्चुअली सबको दिलचस्प. लगती है. हम. ये बदलूराम एक सिपाही था आसाम रेजीमेंट का. और सेकंड वर्ल्ड वॉर में जब कोहिमा इंफाल. की लड़ाई हो रही थी. हम. और जापनीज फौजे धीरे-धीरे आगे बढ़ के पूरे. ब्रिटिश फौज को घेर रही थी जिसमें ये आसाम. राइफलल्स का भी टुकड़ी थी तो लड़ाई के. शुरुआती दिनों में ही इसकी मौत हो जाती है.
हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. और अमूमन ऐसे कुछ रोज एक. कितनी नफरी है उसका रिपोर्ट जाता है और उस. नफरी के बराबर जो है राशन आता रहता है. लेकिन लड़ाई के हालत में इतनी गोलाबारी के. बीच वो जो जिसकी जिम्मेदारी थी वो भूल. जाता है कि इसका नाम हम उस नफरी से निकाल. दें उस स्ट्रेंथ से निकाल दें तो इसीलिए. लिए अगले कुछ दिनों हफ्तों तक उसका भी.
राशन आता रहता है और एक वक्त ऐसे आता है. जब कि यह पूरी टोली घेरी जाती है और फिर. उनको जितना उनके पास राशन है उसी के ऊपर. अपना काम चलाना है और जिंदा रहना है तो इस. आदमी का जो एक्स्ट्रा राशन आया था उसके. बदौलत वो और चार-छ दिन लड़ पाते हैं और. इसके ऊपर फिर आगे जाके जब यह कहानी निकली. तब एक ब्रिटिश ऑफिसर ने एक. गाना बनाया उसके ऊपर.
बदलू राम जमीन के अंदर. कि बदलू राम का बदन. हां. और उसके बोल हैं कि बदलू राम का बदन जमीन. के नीचे है लेकिन उसका राशन हम खाते हैं. [हंसी]. तो एक मतलब मजेदार भी कहानी है. ब्लेसिंग इन दिस गाइस. ब्लेसिंग इन दिस गाइस एक एक मॉर्बिट भी है. कि बदन नीचे है और अब खाना खा रहे हो तो. मतलब दोनों चीजों के बीच में जो. हम. और ये असम रेजीमेंट का एक बहुत ही मशहूर. गाना है जो उनका एक किस्म का रेजिमेंटल. सॉन्ग बन गया है और जो भी इसको सुनता है.
वो जोश पैदा करने वाला गाना है।. ओके एक और बड़ा अच्छा किस्सा भी किताब का. था। इसके बाद मैं कुछ और सवाल पूछूंगा।. शहीद जसवंत सिंह और बाबा हरभजन का मैंने. सुना कि इनके लिए चीनी सेना भी कुर्सियां. खाली रखती है। इज इट ट्रू? वो इसलिए मिथ्स एंड मिस्ट्रीज [हंसी]. कितना कितनी सच्चाई शायद पहले पहले रखते. होंगे हम. जैसे [गला साफ़ करने की आवाज़] जमाना. बदलता गया कभी रिश्ते अच्छे होते हैं. फ्लैग मीटिंग होते हैं कभी टेंशन होते हैं.
तो ये अप एंड डाउन होते ही हैं लेकिन ये. दो जो उदाहरण दिए मैंने. हम. जसवंत सिंह जो 62 वॉर में उन्होंने बहुत. अच्छा काम किया और जहां उन्होंने ये एक्शन. किया वो बाद में उसका नाम जसवंतगढ़ पड़ा. 62 की लड़ाई में वो जसवंतगढ़ नहीं था। वो. कोई और नाम था नॉर्मल. और. उनको वो लड़ाई में शहीद हुए।. हरभजन सिंह नॉर्मल पेट्रोलिंग में शहीद. हुए और उनकी लाश मिली नहीं।.
बाद में एक जवान को सपने में बाबा हरभजन. आते हैं कि मैं मेरी लाश जो है ऐसे-से जगह. में है और जब वो फिर से तलाशी करते हैं तो. वो उनको हरभजन की लाश मिलती है। तब से ये. कहानी बनने लगी या ये विचार आने लगा कि. अगर वो ऐसे सपने में आ सकता है तो वाकई वो. बाबा होगा। तो ऐसे. बिकम बाबा हरभजन. बाबा बिकम बाबा. और मजेदार बात यह है कि बाबा हरभजन का.
बंकर वगैरह वैसे के वैसे रखा गया है इतने. सालों के बाद अभी भी. स्टिल स्टिल. लेकिन वो बंकर जो है वो. काफी ऊंचाई पे है सिक्किम के हाई. एल्टीट्यूड एरिया में और वहां रोड से भी. वो 50 कदम जाना वो आम टूरिस्ट वगैरह के. लिए काफी मुश्किल है। तो अभी एक न्यू बाबा. हरभजन मंदिर बनाया है। [हंसी]. रोड के ऊपर जहां पे सारे लोग मत्थ टेक. सकते हैं। बगैर वो एक्चुअल जगह जाके जो कि.
शायद सारे लोग उतने वो चढ़ाई ना कर पाए।. भारतीय फौज में भी टोने-टोटके होते हैं. सर।. हां होते हैं। सबसे आपको इंटरेस्टिंग को. टोना कौन सा लगा? ऐसे. कि कोई बिलीफ ऐसा हो जो. तो ऐसे बिलीफ तो होते ही हैं। लेकिन यह जो. बिलीफ है इसके ही बदौलत हम चलते हैं। इसी. के बदौलत ही हमें वो हिम्मत मिलती है कि. हम ऐसे दूरदराज इलाके में जब तैनात है. बर्फ बारी हो रही है, गोलाबारी हो रही है।.
तो ऐसे जो चीजें हैं इसी से हमें शक्ति. मिलती है कि हम अपनी ड्यूटी ठीक कर पाए।. आपने इंडियन आर्मी क्यों जॉइ किया? क्या इंस्पायर किया था आपको कि आप फौज में. गए और आपका चाइल्डहुड हीरो कौन था? मेरे ख्याल से देखिए मेरे पिताजी जो है वो. एक आर्मी कैडिडेट थे। वो आईएमए में उनका. ट्रेनिंग भी चल रहा था। लेकिन उस वक्त. मुकुंद सर. खेलकूद में उनके घुटने में चोट आई और उस.
वक्त ऐसे कोई मेडिकल फैसिलिटीज हुआ हुआ. नहीं करते थे तो आईएम में से उनको निकलना. पड़ा और बाद में जाके वो एयरफोर्स में गए. तो क्योंकि मेरे पिताजी एयरफोर्स में थे. तो आई वांटेड टू गो टू एयरफोर्स लेकिन. मेरा चश्मा लग गया तो चश्मे की वजह से. मुझे आर्मी जाना पड़ा. तो मुझे मेरे पिताजी जिनको आर्मी में होना. था वो एयरफोर्स में गए। [हंसी] हमें. एयरफोर्स में जाना था। मैं आर्मी में गया।.
लेकिन आर्मी में जाके मैं चीफ बना। दैट इज. डेस्टिनी।. तो वो कौन कौन था जिससे आप इंस्पायर बहुत. थे। अपार्ट फ्रॉम योर फादर जैसे हम बहुत. सारी कहानियां सुनते हैं। किस्से सुनते. हैं सैम मानक श साहब के और बहुत सारे. किस्से हैं।. कारगिल के बहुत सारे हीरोज़ हैं। आपका. चाइल्ड चाइल्डहुड हीरो कौन था? जिसकी. वीरताई कहानियां सुनकर आप. ऐसे कोई खास चाइल्डहुड हीरो तो नहीं कह. सकते लेकिन मेरे पिताजी को बहुत शौक था. मिलिट्री हिस्ट्री का. हम. तो उनके लाइब्रेरी में यही किताबें थी जो. बाद में मुझे एक्चुअल में पढ़नी पड़ी.
लेकिन वो किताबों में मैंने ऐसे ही मतलब. कहानी के तौर पर जब मैं स्कूल में था. तो मैंने ज्यादातर वो किताबें पहले ही पढ़. चुकी था।. पढ़ चुका था मैं।. तो गोइंग इंटू द आर्मी वास नेचुरल. प्रोग्रेशन।. ओके सर कारगिल वॉर में बहुत सारे हीरोज़ आए. जिनकी एक रोमांचिक कहानी हम सुनकर. इंस्पायर होते हैं। आपकी ड्यूटी सर्विस के. दौरान कोई एक ऐसा मार्ट्रेट जिसका आप. जिक्र करना चाहे जिसने आपको बहुत एक कहते.
हैं ना कि वीरता का एहसास करा दिया। आप. फौज में खुद हैं लेकिन आपको भी इंस्पायर. कर दिया कि दिस इज व्हाट इंडियन आर्मी. मीन्स। किसी का अगर आप जिक्र करना चाहे. जिसकी वीरता ने आपको अचंभित कर दिया।. सबकी वीरता तो. उस मौके पर जो दिखाते हैं वो. अलग एक किस्म का होता है। तो किसी एक को. कहना कि यह बेस्ट है या यह बेस्ट नहीं है।. वो शायद सही नहीं रहेगा।. लेकिन एक और बात मैं कहना चाहूंगा कि. वेताज और जो डिसीजन मेकिंग वगैरह है.
हम अपने जवानों को जोखिम में डालते हैं. हम. तो वो भी एक वीरता है. कि मालूम है हमें कि जब हम ये आर्डर देंगे. कि इनमें से कई लोग वापस नहीं आने वाले. तो एक ये बड़ा एक. कठिन. फैसला होता है। लेकिन फिर भी हमें वह लेना. पड़ता है। तो एक है फिजिकल ब्रेवरी और एक. है मोरल करज।.
तो दोनों जो है बहुत अहमियत रखते हैं। मैं. कारगिल के 20 साल होने पर सर द्रास गया. था। वहां पर बहुत सारे अनगिनत बहादुरी. किस्से सुने। मैं वो फोर्स पर गया। उस. टाइम आर्मी के एक रिटायर्ड थे लेफ्टिनेंट. जनरल गुरमीत सर।. वो हमारे साथ गए थे। तो उनकी वजह से हमें. ज्यादा एक्सेस मिला था। तो जब मैं बहुत. सारे ऑफिसर से बात कर रहा था तो उन्होंने. कहा कि कारगिल का युद्ध हमने इसलिए जीता. क्योंकि हमारे जवानों के हौसले का कोई. स्थानी नहीं था। मुशर्रफ की प्लानिंग बहुत. तगड़ी इसमें तो बिल्कुल कोई शक ही नहीं है.
कि हमारे जवान जो है दे आर दी बेस्ट और. उन्हीं को बदौलत हम इतनी अच्छी फौज है और. मैं इससे पहले भी कई जगह मैं बात कर चुका. हूं और मैं किसी से कोई किसी में मेरे से. पूछ रहा था कि आप अपने जवानों को जोश कैसे. दिलाते हो? मैंने कहा मैं जवानों को जोश. नहीं दिलाता हूं। उनके वजह से मुझे जोश. आता है।. वाओ दे आर द हीरोज़ एक्चुअल नॉट अस।. ओके। आपकी सर इस किताब से पहले एक किताब.
और बड़ी चर्चा में रही। देश के संसद से. लेकर सड़क तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी।. लेकिन वो किताब रिलीज नहीं हुई। अब देश के. मन में सवाल यह है कि सुरक्षा का नाम लेकर. एक तीनों आर्मी के चीफ की किताब को जो. उसने सोच समझ कर लिखी होगी उसे दबाना क्या. सही है? क्या लोकतंत्र में जनता को यह. जानने का हक नहीं है कि सेना प्रमुख ने. युद्ध के मुहाने पर खड़े होकर क्या फैसले. लिए? आपका टेक क्या रहा? देखिए जब पहली बात तो मेरा कभी इरादा नहीं. था कि मैं ऐसे कोई किताब लिखूं,
ऑटोबायोग्राफी या मेमोज लिखूं। लेकिन ऐसे. ही कभी एक किसी बुक रिलीज के फंक्शन में. किसी ने पूछा कि आप क्यों नहीं लिखते हो? हम. तो मैंने कहा मैं लिखूंगा लेकिन कौन. छापेगा? हम. तो वो पब्लिशर ने कहा नहीं नहीं जरूर हम. छापेंगे। आप लिखो तो सही।. हम. तो वहां से फिर यह आईडिया है कि मैं कुछ. लिख सकता हूं। तो जो मैंने लिखा है वो. टोटली अपने मेमोरी याददाश्त से लिखा है।. कोई नोट्स नहीं थे। कोई ऐसे डायरी नहीं.
रखी थी लिखी थी। तो इस किस्म के जब मेमोर. लिखे गए तो हो सकता है इसमें कोई गलतियां. हो। हो सकता है कि कुछ चीजें उसमें सही ना. हो। कोई फैक्ट्स एंड फिगर्स गलत हो। डेट. गलत हो। तो इसमें रिव्यू करने में कोई. हर्ज नहीं है ताकि बाद में जो भी निकले वो. सही निकले।. ओके? तो. और जब आपने कोई चीज लिखी है तो अपने वो. अपने नजरिए से लिखी है और अपने और हर लेवल. में नजरिया अलग-अलग होता है।.
हम. तो वही वही घटना अगर कोई एक. जूनियर ऑफिसर देखे वो उसके बारे में कुछ. और सोचेगा। मैं उसके बारे में और सोचूंगा।. मेरे से हायर लेवल में उसी को. उसमें कोई और पहलू हो सकते हैं कुछ जो. मेरे दिमाग में ना आए हो जो कि. ज्यादा लोगों को पता लगने से शायद आगे. जाके उसका असर हो सकता है तो रिव्यू करने.
में कोई ऐसे में का हर्ज नहीं है और हो. सकता है कि ऐसे एक आधी चीज हो जो. और चर्चा हम सिर्फ दो तीन बार चीजों के. बारे में कर रहे हैं। लेकिन उसमें कई सारे. चीजें हैं।. हो सकता है कि एक तो. इसमें एक कॉन्टेक्स्ट ये आया था कि कोई. व्यक्ति जो इतने बड़े पद पर रहा हो मतलब. ये मैं आपका नजरिया समझना चाहता हूं। चाहे. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस हो या आप. जैसे रहे एक बड़े पद पर सीओडीएस पर। क्या. उस पद पर बैठे व्यक्ति को किताबों के जरिए.
बातें करनी चाहिए क्योंकि हम जब काऊ साहब. के किस्से सुनते हैं। शुरुआत में रॉकी के. चीफ तो उन्होंने लाइफ में कोई इंटरव्यू. नहीं दिया था।. ये कहा कि मैं नहीं छपवाऊंगा क्योंकि मुझे. लगता है कि मेरे राज मेरे साथ जाने चाहिए।. क्या वो सीक्रेसी होनी चाहिए या इस बारे. में बात होनी चाहिए? कुछ बातें निकल कर. आनी चाहिए। आपका नजरिया क्या है इस पर? नहीं बातें [गला साफ़ करने की आवाज़] तो. होनी चाहिए और हम एक डेमोक्रेसी है तो. डेमोक्रेसी में हर चीज के ऊपर. बातें होती है डिबेट होते हैं और उसी.
डिबेट के जरिए हम और मजबूत हो जाते हैं तो. और कई सारी चीजें खास करके जो मैंने उस. किताब में लिखी है वो पब्लिक नॉलेज में थी. क्योंकि जैसे मैंने कहा कि मेरे कोई पास. कोई डायरी नहीं थी मेरे कोई नोट्स नहीं थे. तो मैंने जब वो इवेंट्स रिकक्रिएट किए किए. हैं तो मैंने नेट पर जाके ही रिकक्रिएट. किए। सारे न्यूज़पेपर आर्टिकल और जो भी. अलग-अलग लोगों ने रिपोर्टिंग की थी तो एक. किस्म से तो सभी चीजें जो है उसमें कोई.
क्लासिफाइड ऐसी चीज नहीं है।. नहीं लेकिन क्योंकि किताब वो सर मार्केट. में आई नहीं। राहुल गांधी जी ने संसद में. वो किताब उठाई। कहा मैंने पढ़ा सरकार ने. इसे दबा दिया है और उसमें कई दो बातें. स्पेशली निकल कर आई थी। एक अग्निपथ योजना. को लेकर कहा कि यह पीएमओ का विचार था. सरकार का नहीं। मेरे इसी कुर्सी पर जहां. बैठे हैं, एक एक आर्मी चीफ यहां आ चुके. हैं जो बाद में गाजियाबाद से सांसद भी. बने। उन्होंने मुझसे कहा कि यह तो बहुत. पुरानी मांग थी। हम चाहते थे ऐसा हो। जब.
आप ही किताब से कोट किया गया तो ये आया कि. ये पीएमओ का विचार था। फिर आपकी थोड़ी. चुप्पी रही। अब जनता जो है आप जानते हैं. इंडिया में हर चीज से पॉलिटिक्स होती है।. आप लाल कपड़ा रख दीजिए, नीला रख दीजिए, भगवा रख दीजिए। उस पे भी सियासत कर लेंगे. लोग। तो एक कंफ्यूजन पैदा हो गई आपकी. खामोशी को लेकर भी और इस फैसले को लेकर भी. जो इतना कंट्रोवर्शियल रहा कि यह सेना के. हक में था या सेना के हक में नहीं था. अग्निवीर. देखिए पहली बात तो एक खामोशी के ऊपर मैं. तो हर जगह जाता हूं हर जगह बात करता हूं. अग्निवीर के ऊपर भी.
50 बार मुझे लोगों ने पूछा होगा इस. अग्निवीर स्कीम के बारे में अग्निपथ स्कीम. के बारे में. इसके ऊपर मैंने. 20 22 या 23 में आर्टिकल भी लिखा है जो कि. हिंदू में छपा था।. तो ये नहीं है कि इसके ऊपर मैं टिप्पणियां. नहीं कर रहा हूं।. तो. लेकिन मेरा इससे बड़ा अगर आप यह देखें कि.
जो एचआर के पॉलिसी है ह्यूमन रिसोर्स के. पॉलिसी हैं वो हर ऑर्गेनाइजेशन के बदली. होते हैं।. हम. और कई लोगों को मालूम नहीं है ज्यादातर. इनफैक्ट लोगों को मालूम नहीं है कि 75 76. तक. 76 तक इनफैक्ट [गला साफ़ करने की आवाज़]. जवान सिर्फ सात साल सर्विस करता था। हम. और 7 साल सर्विस के बाद वह घर जाता था।. कोई पेंशन नहीं उसके ₹90 जो है ना तनख्वाह. होती थी उस समय और 7 साल के बाद कोई पेंशन.
नहीं। कोई दूसरी नौकरी नहीं। उसके बाद वो. जो करना चाहे वो करें।. लेकिन उस वक्त जो गवर्नमेंट थी उनको लगा. कि नहीं ये सही बात नहीं है। ऐसे इतने कम. उम्र में ऐसे ही छोड़ दे जबकि इसने अच्छे. काम किए। देश की सेवा किए. तो इस 7 साल को बढ़ा के 15 साल कर दिया और. 15 साल करने के बाद वह पेंशन लागू कर दी. तो पहले कुछ और सिस्टम था अभी तो नया.
सिस्टम चालू हुआ अभी एक नई पॉलिसी बनी है. तो पॉलिसी अगर बदली हो रही है उसमें हर्ज. क्या है. आपका इस पर टेक क्या है अग्निपथ योजना. इंडियन आर्मी के कॉन्टेक्स्ट में. कॉन्टेक्स्ट में सही है. तो अभी जो योजना बनी है वह दोनों का एक. सॉर्ट ऑफ मिश्रण है पहले 7 साल में वह घर. जाता था। बाद में वह 15 साल सारे रहते थे. और पेंशन यह दोनों का मिश्रण है कि 4 साल. सभी लोग करेंगे। 4 साल के बाद कुछ लोग. बाहर जाएंगे और कुछ लोग परमानेंटली रहेंगे. जिनको पेंशन मिलेगा। हम.
और 7 साल की जगह चार साल करने से वो अभी. भी कम उम्र में जा रहा है जाके कि वो एक. दूसरे करियर जो है और आसानी से. कर सकता है और 4 साल में जब वो घर. रिलीज होगा उसके जेब में 10-12 लाख होंगे।. नहीं मेरा सवाल ये हमने डिटेल्स इस पर. हमने बहुत चर्चा की है। अब क्योंकि जो. सवाल आज उठ रहा है वो दो सवाल सर हैं। एक. सवाल यह है कि क्या जब अग्निपथ योजना लागू. की गई, क्या इंडियन आर्मी तैयार थी उस. वक़्त? सेकंड क्वेश्चन.
जनरल नरवरे साहब की नजर में यह योजना. इंडियन आर्मी के हित में है या नहीं? मैं समझता हूं कि ये आर्मी के हित में ही. होगा क्योंकि ये जो यंग ब्लड है वो बहुत. अच्छा काम कर रहा है।. हम. और मेरे यूनिट का सिपाही कुलवीर सिंह दो. साल के सर्विस में उसमें सेना में मेडल. गैलेंट्री मिला है। तो ये कहना कि. अग्निवीर अच्छा काम नहीं कर सकते। यह 4. साल में क्या सीखेंगे क्या कर पाएंगे यह. बड़ी गलत बात है और इसने मेरा कहना नहीं.
उसने करके दिखाया है हम. तो अग्निवीर तो है वो अच्छा काम कर रहे. हैं. मतलब एक जैसे एक थ्योरी सर ये आ रही थी जो. मुझसे क्योंकि इसको लेकर बहुत सारे युवा. स्पेशली मैं यूपी से आता हूं यूपी बाहर. बहुत सारे बच्चे जो सुबह उठकर लगातार. तैयारी करते हैं तो मुझे कुछ बच्चों ने भी. सवाल भेजे क्योंकि उन्हें मौका शायद ना. मिलता आपसे उन्होंने कहा कि सेना की ताकत. नाम नमक निशान वाली रेजमेंट की विरासत है।. अब छोटे कार्यकाल में वो बॉन्डिंग कि मैं. अपने फौजी के लिए साथी के लिए जान दे. दूंगा या अफसर कभी सुनते थे वो शायद.
मुमकिन है। दूसरा एक ये था कि इतना ट्रेंड. व्यक्ति क्योंकि 75% हट जाएंगे। एक डर भी. रहेगा कि क्या लाइफ में वो कहीं गलत. रास्ते पे तो नहीं निकल जा रहे क्योंकि वो. बहुत वेल ट्रेंड इंसान है और अगर कहीं. गुमराह हुआ गलती से आर्थिक वजह से तो वो. देश का नुकसान कर सकता है। एक तीसरा इसमें. ये भी काउंटर सर आया जो नए बच्चों ने पूछा. मुझसे कि हम देश के लिए तैयारी कर रहे. हैं। हम मरने जीने को तैयार हैं। सरकार. परिसीमन कर रही है। 850 सांसद हो सकते. हैं। 10- 7000 विधायक हो जाएंगे। विधायक. सांसद को पैसा देने में दिक्कत नहीं है।.
वहां खजाना खर्च नहीं होगा। लेकिन जो फौजी. जान देने को तैयार है जो मां-बाप भूल बैठा. और ऐसे अनगिनत किस्से हैं। मैं अभी. नागालैंड के एक ऑफिसर थे उनका किस्सा सुन. रहा था। उन्होंने बर्फ की पहाड़ी पर खड़े. चढ़कर नंगे पैर जाकर जान दे दी थी। नींबू. साहब उनका कहते थे।. तो इसमें तो वो फौजी पूछता है कि हमारा. मोट आप नेता अपना जेब भर ले रहे हो। हमारा. मोटिवेशन हम प्राण दे रहे हैं। कम से कम. इतना तो इंश्योर कर दो कि मां-बाप हमारे. सुरक्षित रहेंगे।. इसमें आपके दो-तीन सवाल जो है जुड़े हुए.
हैं और इंटरकनेक्टेड है इमोशंस. इमोशन. जहां तक एस्प्रेरी द कोर होता है ना. वो अपने अपने यूनिट में आपस में जो है वो. बढ़ाना है. हम. ये कोई ये नहीं होता कि एक कानून के तौर. पर की कैमरे बढ़ेगी वो हर यूनिट का. अलग-अलग. मतलब तरीका होगा. हम.
अपने बात की. अभी आप कह रहे थे कि नेताओं की पेंशन बढ़. रही है।. नेता नहीं वो इससे पहले कि. नाम नमक निशान. हां कि गुमराह हो जाएंगे।. हां जब पहले वो 7 साल के बाद जाते थे तब. तो नहीं गुमराह हुए तो अब क्यों गुमराह. होंगे? तो हमें अपने अपने दिमाग में ऐसे. गलत विचार क्यों लाते कि वो गुमराह हो के. वो. गलत रास्ता माने। अगर वह 4 साल फौज में.
रहा है और 4 साल में हमने उसमें देशभक्ति. की भावना पैदा की है। एस्प द कोर जो आप कह. रहे हैं बॉडी सिस्टम कि कैसे काम करना है. रेजीमेंटल स्पिरिट वो सारा अगर हम 4 साल. में उसमें नहीं डाल पाए हैं तो वो फिर. हमारी कमजोरी है।. मैं आपकी बातों को अगर मैं कंक्लूड करने. की कोशिश कर मुझे ऐसा लग रहा है आप. अग्निवीर को डिफेंस कर रहे हैं। आज. बिल्कुल नहीं. आप उससे कह रहे हैं कि सही है। जितना मैं. आपको अगर मैं गलत हूं तो आप मुझे करेक्ट. कर सकते हैं।. अब.
जब 7 साल से 15 साल सर्विस बढ़ाई गई. जवानों का तब सोशल मीडिया वगैरह नहीं था।. हम. ठीक है ना? इसके ऊपर इतनी चर्चा नहीं हुई. थी। लेकिन उस वक्त इसके ऊपर भी बहुत. नेगेटिव कमेंट्स थे।. कि इतने ओल्ड जवानों के साथ हम लड़ाई कैसे. लड़ेंगे? हम. बिल्कुल उल्टा जो अभी कह रहे हैं कि इतने. बच्चों के साथ कैसे लड़ेंगे? तब उसके. एग्जैक्ट ऑोजिट था कि भाई 15-15 साल के.
बाद वो 15 साल तक रहेंगे। वो तो 35 40 साल. के बूढ़ों के साथ हम कैसे लड़ाई लड़. पाएंगे? तो हर एक स्कीम के कुछ फायदे होते. हैं। कुछ एडवांटेज होते हैं, डिसएडवांटेज. होते हैं। तो स्कीम को चलने दो।. अग्निपथ से सेना को नुकसान है।. बिल्कुल नहीं।. ठीक है।. वो स्कीम को चलने दो। स्कीम जब चलेगी तब. पता चलेगा इसमें नुक्स क्या-क्या हैं। मैं. यह नहीं कह रहा हूं कि वह 100% करेक्ट है।. रिफॉर्म्स तो आते रहते हैं। आते रहते हैं।.
पॉलिसीज भी बदली होते रहते हैं।. और अगर लगा कि उसमें नुक्स है कि 25% नहीं. 50% रखने चाहिए। वो बदली कर दिया जाएगा।. क्या राहुल गांधी साहब ने आपकी किताब के. कोर्ट्स को मिसकोट करके क्वेश्चन खड़ा कर. दिया? अब मैं आपको आपकी बातों को सुनने के बाद. ये सवाल फ्रेम कर रहा हूं।. सच बोलूं तो मैंने उन चीजों के ऊपर ध्यान. ही नहीं दिया क्योंकि वह मेरा उसमें कोई. कनेक्शन नहीं था। मेरा पूरे देश में तहलका. मचा था।. वो ठीक है लेकिन मैं तो आराम से अपनी.
जिंदगी जी रहा हूं। तब भी जी रहा था। अब. भी ये संसद में अंग. ये सवाल आपको परेशान करते हैं? बिल्कुल परेशान नहीं करते। मैं तो हमेशा. इन चीजों से दूर रहा हूं और मैं अपना. मेरे दोस्त भी पूछते पूछते थे मुझे कि. आपको ये नहीं हो रहा मतलब हाई बीपी वगैरह. तो नहीं हो रहा [हंसी]. मैं शांत स्वभाव का हूं। मुझे ऐसे. छोटे-मोटे चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता।. लोग जो कहना चाह रहे हैं वो कहे।. आपके कुछ जूनियर्स भी सर क्योंकि हम.
अलग-अलग विषयों पर इंटरव्यू करते हैं तो. अभी ईरान वॉर चल रही थी। तो कई सारे. जूनियर्स भी आपका आए। उनमें कुछ जूनियर्स. जो कर्नल रहे हैं या और बड़े पदों पर रहे. उनमें से कुछ लोगों की नाराजगी आपको लेकर. थी। वो उनका कहना था कि जब आप पद पर थे उस. वक्त आपने वो बातें कोट नहीं की। जब आप. रिटायर हो गए तब आपने इन स्कीम्स को या कई. बातों को उठाया जिनका अब शायद अब रेलेवेंस. उतना नहीं है या अब आपके हाथ में नहीं है।. तो वो इस बात से सेटिस्फाई नहीं थे।. उन्हें लग रहा था कि जब आप पद पर थे इतना. बड़ी जिम्मेदारी थी। उस वक्त आप चीजों को. बेहतर कर सकते थे। उन जूनियर्स को आप क्या.
कहेंगे? वो. [गला साफ़ करने की आवाज़]. जितना मैं कर सकता था उतना मैंने किया है।. मैं उस मुझे जो है मेरा कॉन्शियस जो है वो. क्लियर है।. नाइस।. और. एक किसी चीज के ऊपर एक हद तक ही आप लड़. सकते हो। और हर एक डेलीबेशंस में डिस्कशन. में तीन मैं हमेशा यह भी उदाहरण देता हूं. कि तीन स्टेप होते हैं। एक होता है. डिस्कशन। एक होता है डिसीजन और एक होता है.
डिलीवरी। तो डिस्कशन के टाइम पर अपने पूरा. खुलकर अपना अपनी बात कहनी है।. जी।. ठीक है ना? बगैर झिझक फ्री फ्रैंक फेयर।. फिर जिसने जिसने फैसला लेना है वो फैसला. लेगा। मैं भी तो अपने जूनियर से. राय मांगता था और डिसीजन लेता था।. हम. लेकिन एक बार जब डिसीजन ले लिया है सबकी. राय लेके। फिर आपकी जिम्मेदारी उतनी है कि. उस को आप अमल करो। चाहे वह जो आपके विचार.
थे. सहमत है आप नहीं है अगर अमल हो गया. हां लेकिन एक बार फैसला हो गया तो देन यू. हैव टू दैट इज लॉयल्टी. नाइस. ये कि नहीं ये मेरा प्लान नहीं था तो मैं. देखूंगा कैसे इसको मैं नाकामयाब करूं वो. सही नहीं है।. ठीक है गॉट इट। आपने एक बहुत अच्छी बात. शुरू में कही कि डेमोक्रेसी में हर चीज की. चर्चा होनी चाहिए। एक कॉमन सिटीजन के तौर. पर मेरे ज़हन में सवाल आता है कि जब मैं. अपने एक्स आर्मी चीफ से एक्स सीओडीएस से. पूछ रहा हूं कि उन्हें कैसा लगता है जब वह. देखते हैं कि नेता अपनी पेंशन का ख्याल रख.
रहे हैं। लेकिन कटौती जो है वो सेना में. करने की बात कर रहे हैं। यह कहते हुए कि. देश के बजट पर भार बढ़ेगा।. नहीं कटौती कहां हुई है? अग्निवीर को सर जितने भी लोगों ने. एनालिसिस किया मीडिया वालों ने या दुनिया. ने वो यही माना कि पेंशन भी एक बहुत बड़ी. वजह थी कि जिसमें नए बच्चों को लाना था।. सेना को युवा रखना था। लेकिन पेंशन भी एक. बहुत बड़ी योजना थी। सीआरपीएफ वाले कई बार. मुझसे मिलते हैं। वो मेरा हाथ पकड़े कहते. हैं कि आप लोग कभी हमारे लिए आवाज. उठाइएगा। अब मेरा फिर वही सवाल है। आप एक. बार विधायक बन गए आपको जीवन भर पेंशन.
मिलेगी। जितनी बार बनेंगे उतनी बार. अलग-अलग मिलती है। क्या एक्स आर्मी चीफ या. तीनों सेना के प्रमुख होने के नाते कभी. आपके ज़हन में आया कि यार पॉलिसी मेकर अपना. ख्याल कर ले रहे हैं। लेकिन जो ट्रू. सर्वेंट है देश का उसके हिस्से का हक. थोड़ा सा काट जा रहा है। शायद ये उल्टा. होना चाहिए था।. हां जरूर हो सकता है लेकिन हम ही अपने. विधायक को को चुनते हैं। अगर हमें लगता है. कि वह सही बात नहीं है। उनको ना चुने खुद. मैदान में उतरो। खुद विधायक बनो, खुद एमपी.
बनो और इस फैसले को मत आगे बढ़ने दो।. लेकिन बाहर रह के ऐसे तो कोई भी कुछ भी. बोल सकता है।. हम. मैदान में उतरो. और फिर ये चर्चा होनी चाहिए। लेकिन हमें. ही नहीं उनको चुना है।. आपका इरादा है क्या पॉलिटिक्स में जाने. का? नहीं बिल्कुल नहीं। [हंसी]. ये सवाल मुझे पिछले चुनाव से पहले भी एक. ऐसे ही एक कॉन्क्लेव में पूछा गया था हम. कि क्या आप चुनाव लड़ोगे? तो उसमें उस. वक्त मैंने ये जवाब दिया कि मैं चुनाव.
नहीं चीनियों से लड़ता हूं। [हंसी]. तो अब भी मेरा वही कहना है कि नहीं. पॉलिटिक्स जो है मेरा मैं उसमें दिलचस्पी. नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि फौजी. पॉलिटिक्स में नहीं जाए। सभी को अपनेप जो. इंटरेस्ट है उसके हिसाब से काम करना. चाहिए।. क्या एक्स आर्मी चीफ या सुप्रीम कोर्ट के. चीफ जस्टिस या सीओडीएस या सीडीएस ऐसे पदों. पर जो सर्वोच्च पद पर हैं। ऐसे पदों पर. बैठे व्यक्तियों को राजनीति में जाना. चाहिए।. वही मैं कह रहा हूं। अगर आपकी दिलचस्पी है.
तो इसमें कोई हर्ज नहीं है। हम चाहते हैं. ना कि राजनीति में अच्छे लोग जाए। अच्छे. लोग नहीं जाएंगे तो फिर. बाहर बैठ के फिर आप उंगली मत। चीनी नुक्ता. करेंगे हम।. फिर जैसे मैं कह रहा था कि खुद लड़ो फिर।. ठीक है। आपने चीनियों का जिक्र किया सर।. बहुत सारे लोगों के मन में सवाल है। गलवान. में उस रात क्या हुआ था? देखिए जो इंडिया और चाइना के बीच बॉर्डर. बाउंड्री है मैं बॉर्डर गलत शब्द इस.
बाउंड्री है वो किसी को वो एक काल्पनिक है. हम. हम मानते हैं कि बाउंड्री कहीं पर है वो. मानते हैं कि कहीं बाउंड्री कहीं और है और. इसीलिए जब हमारी पेट्रोलिंग होती है तो कई. कई अक्सर ऐसे होते हैं जब दोनों पेट्रोलें. आमने-सामने आ जाती है. 90%. हम. वो एक दूसरे से बात करके दोनों मान जाते. हैं कि ठीक है हम अलग-अलग पीछे हट जाएंगे. और इसको अमल करने के लिए कई हमारे बीच में.
समझौते भी है बॉर्डर पीस एंड ट्रकलिटी. एग्रीमेंट. कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स के ऊपर एक. एग्रीमेंट लेकिन कभी-कभी वहां गर्माहट भी. हो जाती है और यह पहली बार नहीं है कि ऐसे. हुआ है उसके बाद भी हुआ है आगे जाके भी. होता रहेगा और उस गर्माहट में कभी-कभी वो. आउट ऑफ कंट्रोल हो जाता है कभी सिर्फ. इंजरीज के के साथ और लेकिन इस बार. बीते कुछ सालों में शायद वो बहुत बड़ी. घटना थी।. हां ये लेकिन उसी साल और भी जगह और भी इस. किस्म की घटनाएं हुई थी।.
हम. लेकिन वहां किसी की मौत नहीं हुई।. यहां 20 जवानों की. यहां 20 [गला साफ़ करने की आवाज़] जवानों. की मौत हुई। इसीलिए वो एक बड़ी घटना बन गई. जिसके हमें जवाबी कारवाई भी. क्या हमारा Intel कमजोर था या हम. प्रिपयर्ड नहीं थे उस समय? नहीं यही नहीं कह सकते कि Intel कमजोर था. या प्रिपयर्ड नहीं था। लेकिन यह ऐसे चीज़. जैसे मैंने कहा कि अह. [गला साफ़ करने की आवाज़] पेट्रोलिंग के. टाइम पे ऐसे अक्सर होता है।. उस वक्त हमें हम. मान लो हमारी पेट्रोल 20 की है और उनकी.
पेट्रोल 50 की आ गई तो फिर उसमें समझदारी. यही है कि आप. उधर ही ईजी कर ईजी कर लो। तो थोड़ा वो. कमांडर ऑन द स्पॉट उसका भी डिसीजन मेकिंग. सही होना चाहिए। लेकिन. जैसे मैंने कहा कि उस एन मौके पर एकदम. कभी-कभी. इतने इतने सारे जब लोग हैं 2030 अपने साइड. 2030 उसके साइड उन 60 100 लोगों के बीच.
में से एक भी अगर कोई एक चिंगारी लगा दे. तो एकदम वो एक्सप्लोर हो सकता है। कहीं पर. लगा कि उस इंसिडेंट के बाद सर आरपार की. जंग हो सकती है उस वक्त. नहीं आरपार की जंग तक बात नहीं पहुंची थी. लेकिन हां दोनों साइड ने जरूर और ट्रूप्स. आगे बढ़ाए. अपने जो क्लेम्स हैं क्योंकि दोनों के. क्लेम्स अलग-अलग हैं तो अपने क्लेम्स पर. हक जमाने के लिए दोनों साइड ने आगे और. टुकड़े भेजी और. सर चाइना से तो कोई इनफेशन आती नहीं हमारे.
पास वो तो अपना ग्लोबल टाइम अपने हिसाब से. छापते रहते हैं। हमने कहीं पढ़ा था कि. शायद उनके 40-50 जवान शहीद हो गए थे चाइना. के। इज इट ट्रू? उस झड़प में. देखिए अगर हमारे कैजुअल्टीज हुए हैं तो. उनके भी जरूर कैजुअल्टी हुए होंगे।. ये कहना सही नहीं होगा कि उनका कोई भी. नुकसान नहीं हुआ और सिर्फ हमारा ही नुकसान. हुआ।. लेकिन जो नंबर्स है ना नंबर्स गेम. हम उसमें नहीं पड़ना चाहते कि हमारे 20.
हुए तो उसके 40 होने चाहिए।. हमने यह देखना है. कि चीन जो है अपने पड़ोसियों के साथ यही. गेम खेलता आ रहा है कि थोड़ा इधर उंगली. करो थोड़ा उधर आगे बढ़ो और किसी ने उसका. सामना नहीं किया और क्योंकि किसी ने उसका. सामना नहीं किया उसके मुकाबला नहीं किया. वो धीरे-धीरे बिना किसी नुकसान आगे बढ़. रहा है साउथ चाइना सी में एक-एक करके वो.
सारे आइलैंड पकड़ रहा है। कोई उसको रोक. नहीं रहा। वो एक आइलैंड पे चले जाता है।. वो कोई कुछ कहता नहीं है तो फिर दो नाव. खड़ी कर देता है। फिर भी कोई कुछ कहता. नहीं है तो एक एयर स्ट्रिप लगा देता है।. फिर कोई कहता नहीं है तो एक बिल्डिंग खड़ी. कर देता है। और ऐसे दो तीन चार साल में वो. एक उसका एक नया पोस्ट बन जाता है। बगैर एक. भी जानी नुकसान। यहां क्या हुआ? उसका जानी. नुकसान हुआ है। चाहे वह एक हो, चाहे वो 10.
हो, चाहे जो कि 20, 25, 30 साल में उसको. नहीं हुआ है।. 1979 में चीन और वियतनाम के बीच में युद्ध. हुआ है। तब उनके कैजुअल्टी हुए है। उसके. बाद अभी तो यह उसको बड़ा झटका मिला कि अरे. यह इंडिया जो है ऐसे चुपचाप नहीं बैठेगा।. अगर हम ऐसी कोई हरकत करेंगे तो हमें भी एक. नुकसान होगा। और इसीलिए जो है वह पूरी. परिस्थिति बदल गई और इसीलिए जो है युद्ध.
नहीं हुआ और इसीलिए हम ज्यादा मजबूत. पोजीशन में है।. सर आपके पूरे करियर में आपको क्या लगता. है? आपका सबसे साहसिक बहादुरी फैसला क्या. था? आपने किस फैसले पर जब आज आप रिटायर. हैं आपको वाकई में अपने आप पर प्राउड फील. होता है। ये एक मैंने बहुत अच्छा फैसला. किया था। अगर किसी एक दो का जिक्र करना. हो।. टफ टाइम। तो देखिए जब आप कमांड अधिकारी. होते हैं कमांडिंग ऑफिसर और मैंने एक टू. राष्ट्रीय राइफल्स की कमांड संभाली.
जो. श्रीनगर के बाहर काउंटर टेररिस्ट ऑपरेशन. हम करते थे तो तकरीबन. हर महीने एक ना एक ऑपरेशन होता था. और. वो ऑपरेशंस ल्च करना. कई. रूम एंट्री हाउस एंट्री करके वो टेरेस को. मार गिराना. तो हर वक्त जैसे मैं शुरू शुरू में कह रहा.
था कि आपको मालूम है कि ऑपरेशन कर रहे हो. तो सभी जो है सही सलामत नहीं निकलेंगे. हम. तो वो एक लगातार एक कारवाई दो ढाई साल आप. जिसको सस्टेंड. ऑपरेशंस कहते हैं. हम. तो वो तो एक तो वो रहा और दूसरा जब गलवान. के टाइम में जब हमने फैसला लिया कि हम जो. कैलाश रेंजेस पर जवाबी कारवाई करेंगे. उनके ऊपर दबाव डालने के लिए तो वो मेरे. ख्याल से एक बहुत ही अच्छी कारवाई की.
फैसला तो हमने लिया लेकिन उसका अंजाम देना. वो जवानों का काम था और वो वो एकदम सही. तरीके से स्पीड से कर पाए और उस बर्फीले. इलाके में छछ महीने रहे और अब भी तैनात थे. उस इलाके में इतना नहीं उन्होंने जो मनोबल. दिखाया है और बहादुरी दिखाई उसका तो कोई. कहना ही नहीं और उसी वजह से जो पूरे टीवी. स्क्रीन में सभी लोगों ने वो दृश्य देखा. है कि चीन वाले पीएलए वाले अपने मंकर तोड़.
के पीछे हट रहे हैं। वो सबसे बड़ी जीत है।. कभी नहीं हुआ कि पीएलए जो है पीछे हटी है।. और मैंने वो द्वीपों का उदाहरण दिया है।. एक भी द्वीप से वो हटी नहीं है कभी।. और ना कभी कैजुअल्टी हुई थी। और ना कभी. कैजुअल्टी दोनों चीजें इधर हुई। कैजुअल्टी. भी हुए चाहे एक हो चार हो 50 हो और पहली. बार आगे आने के बाद वो पीछे गए। सर इसी. में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी का एक.
कोट आपने कहा था कि उन्होंने आपसे कहा कि. जो आपको उचित लगे। अब इसको लेकर दो. थ्योरीज निकल कर आ रही है। एक उन्होंने. आपको खुली छूट दे दी क्योंकि आप उस पद पर. हैं। ऑन द स्पॉट आप बेहतर समझते हैं।. दूसरा अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेना. कि भाई लड़े तो जीते नाम सरदार का हारे तो. बिल नरवनी साहब फोड़ देंगे। ऐसे बिल्कुल. आपका आकलन क्या था इस क्योंकि ये बहुत. टॉकिंग पॉइंट बना है सर ये. ऐसे बिल्कुल नहीं है वो तो यही है कि खुली. मैं ये नहीं कहूंगा कि खुली छूट. हम. वो.
ये दर्शाता है कि सरकार को जो है. अपने आर्मी के ऊपर अपने फौज के ऊपर और. उनके जो ओदेदार हैं चाहे चीफ हो आर्मी. कमांडर हो उनके ऊपर पूरा भरोसा है। इसलिए. वो कह रहे हैं कि आपको मालूम है ग्राउंड. पर क्या स्थिति है। आपको मालूम है उस. स्थिति को निपटने के लिए एग्जैक्टली. क्या-क्या करना चाहिए। माइक्रो मैनेज तो. नहीं कर सकते ना। उस लेवल पर बैठ के मैंने. भी जब उन अपने जवानों को बोला कि क्या. कारवाई करनी है? माइक्रो मैनेज तो नहीं. किया कि अब इस टुकड़ी को यहां से ले लो।.
उस टुकड़ी को वहां मैंने तो एक ओवरऑल. आर्डर दिया है। उस ओवरऑल आर्डर के अंदर जो. भी कारवाई करनी है वो अपने. इसको कोर्ट ऐसे किया गया कि उन्होंने. पल्ला झाड़ लिया सरकार। तो इसलिए वो कहते. हैं कि यू शुड ऑलवेज टेल व्हाट इज टू बी. डन नॉट हाउ इट इज टू बी डन।. तो वो हाउ मेरे हाथ में वो खुली छोटू ही. है एक किस्म से. लेकिन खुली छूट का मतलब ये नहीं. कि आप. जाके बम फोड़ाओ।. हां एक बम फोड़ाओ या रमबो बन जाओ।.
तो इसका मतलब है खुली छूट में भी उनमें. इतना भरोसा था कि जो भी कारवाई की जाएगी. वो सोच समझ के ही की जाएगी। सबसे ज्यादा. कौन सा टफ टाइम था आपके पूरे कार्यकाल में. जो आपको लगा कि यह बहुत प्रेशर पॉइंट था।. मतलब जिसने आपको एक्चुअली आज आप कहते हैं. ना कि बीपी नहीं बढ़ा है आपका अभी काम. डाउन है। वैसे आप इजी इंसान है लेकिन जहां. आपका बीपी बढ़ गया हो कि बहुत प्रेशर लिया. आपने। वो गलवान या कुछ और. नहीं मेरे ख्याल से प्रेशर तो वो सीओ का. जो टेन्योर होता है. वो सबसे.
एंजॉयबल भी होता है लेकिन सबसे प्रेशर उसी. में होता है क्योंकि. जो कमांड अधिकारी होता है सीओ वो आखिरी. बार है जबकि एक्चुअली आप जवानों को कमांड. कर रहे हो ट्रूप्स को कमांड कर रहे हो. उसके बाद ब्रिगेड कमांडर वगैरह फिर स्टाफ. ज्यादा हो जाता है और उस वक्त जो है वो जो. जिम्मेदारी है आपके जवानों की वो पर्सनली. आपकी जिम्मेदारी है।. हम. कोई भी चीज हो, कोई भी हादसा हो, चाहे वो. एक्सीडेंट हो, चाहे वो लड़ाई में.
कैजुअल्टी हो वो एक बहुत पर्सनल लगता है. एज अ कमांडिंग ऑफिसर। तो वो मेरे ख्याल से. कहीं पर ब्रेकडाउन हुआ आपका किसी घटना के. बाद जैसे आपने कहा ना कि मोरल करज बहुत. इंपॉर्टेंट होता है। आपको पता है आप बहुत. सारे जवान भेज रहे हैं। उनमें शायद कुछ. लौटेंगे नहीं। तो नहीं ब्रेकडाउन तो नहीं. क्योंकि हमारी ट्रेनिंग हमें मजबूत बनाती. है। हमारी. फिर भी आर यू आर आल्सो ह्यूमन बीइंग. ट्रेनिंग नहीं ट्रेनिंग भी जानबूझकर हमें. ऐसे स्ट्रेसफुल सिचुएशन में डालती है।.
हम. और उसका फायदा यह है कि जब हम ऐसे. स्ट्रेसफुल सिचुएशन में होते हैं तो हम. कहते हैं यार ट्रेनिंग में इससे भी बड़ा. मैंने देख रखा है। इससे बड़े चीजें देखी. है मैंने ट्रेनिंग में। तो एक किस्म से. आपको प्रिपेयर करती है कि आगे वाले कई बार. चीजें ऑपरेशंस जैसे आप चाहते हो वैसे नहीं. होते हैं।. बट फिर भी कोई आपका दोस्त कोई साथी जिसके. साथ आपने कभी काम किया हो जो आज इस दुनिया. में नहीं हो क्योंकि आपका दशकों पुराना. एक्सपीरियंस है। जिसको आप मिस करते हो.
वो तो. या कोई घटना में जिसमें आपने अपना कोई. साथी खोया हो। जो घटना आज भी आपको बेचैन. करती हो। वह तो मिस तो जरूर करते हैं। एक. उदाहरण मैं दे सकता हूं और एक अगेन यूनिट. कमांड में कैप्टन बहुगुना. एक बड़ा ऑपरेशन लांच किया। उन्हीं के कहने. पर लांच किया और मैं चाहता था कि वह एक. बड़ा एक.
कैट ए टेररिस्ट मुस्तफा खान नाम था उसका।. उसके छह आठ महीने पीछे उसके पड़े थे। और. मैं चाह रहा था कि एक किसी दिन उस ऑपरेशन. को ल्च करूं। लेकिन कैप्टन बहुगना ने आकर. मुझे कहा कि सर प्लीज मेरी बात मानो। आज. मत करो यह ऑपरेशन। मैं आपको गारंटी देता. हूं कि आप दो-तीन दिन के बाद ऑपरेशन को. करोगे मेरे कहने पर तो जरूर हमें कामयाबी. मिलेगी। तो मैंने उनकी बात मानी। हालांकि. वह मेरे से काफी जूनियर थे.
और वाकई ऐसे ही हुआ। जिस दिन हमने वह. ऑपरेशन ल्च किया तो वह उस घेरे में आ गया. मुस्तफा खान के साथ जो कैटे टेररिस्ट था. हमने दो और आतंकवादियों को मारा और पूरे. उस ऑपरेशन में एक ही कैजुअल्टी हुआ. और वो कैप्टन बहुग बना थे। एक स्प्लिंटर. कहीं से आके उनके गले में गया। स्पाइन को. टच किया और वो वेस्ट से नीचे पैरालाइज हो. गए।.
लेकिन जब इवाकुएट कर रहे थे उनको. वह मुझे कह रहे थे कि सर आप फिक्र मत करो. आप मुस्तफा खान को [हंसी] करो मैं मैं जीत. जाऊंगा इवाकुएट होते वक्त भी ये कहना था. लेकिन आज अभी भी वो सर्विस में. तकरीबन डेढ़ साल हॉस्पिटल में लग रहे अभी. भी व्हीलचेयर पर जाते हैं व्हीलचेयर और. उन्होंने अपनी गाड़ी मॉडिफाई की.
अपनी गाड़ी चलाते हैं। पुणे में अभी इस. वक्त खड़की पुणे में उनका पोस्टिंग है। ने. शादी की। उनकी एक लड़की है जो एक साल पहले. उसका 10थ क्लास हुआ है।. तो ऐसे भी किस्से हैं फौज में और ये हमेशा. मैं कोट करता हूं कि एक तो अपने जूनियर का. भी सुनना चाहिए।. क्योंकि कभी-कभी उनको ज्यादा जानकारी होती. है। आप सीनियर हो इसका मतलब यह नहीं कि आप. ही को सारी दुनिया का हर का पता है। उनके.
बात मानी इसलिए हमें वो कामयाबी हुई लेकिन. उसमें वो कैजुअल्टी होने के बावजूद. उन्होंने अभी तक और हमने भी फौज ने भी. उनको ऐसे नहीं जाने दिया। हालांकि इतने. सीरियस इंजरी के बाद कई बार लोगों को हम. मेडिकलली भी बोर्ड आउट करते हैं। लेकिन. नहीं हमने उनको रखा और ये बात मैं 2003 की. कर रहा हूं। अभी 2026 मतलब 23 साल पहले की. बात है और वो अभी भी सर्विस में है।.
सर इंडियन आर्मी दुनिया में कहां स्टैंड. करती है आज के जमाने में? तो एस आर्मी चीफ तो एज अ या [हंसी] फॉर्मर. आर्मी चीफ है। तो मैं यही कहूंगा वी आर. नंबर वन। इसमें शक ही नहीं है।. जहां पर और लेकिन. हमारे पास सारे वर्ल्ड क्लास इक्विपमेंट्स. हैं।. नंबर वन लेकिन हम अगर नंबर वन है मैं फिर. से ये बात दोहराना चाहूंगा। हम नंबर वन है. क्योंकि हमारे जवानों का जज्बा ही कुछ अलग. है। जो कि मैं नहीं समझा सकता।. मैं इसी पे इसी पे कोट करता हूं क्योंकि.
मैंने कारगिल बाद में जाकर बहुत कहानियां. पढ़ी। बहुत सारे इंटरव्यूज किए। मैं खुद. ग्राउंड जीरो पर गया। मुझे बताया कारगिल. के वक्त हमारे पास जूते सही नहीं हमारे. पास लोहे वाली बुलेट प्रूफ आती थी जो बहुत. भारी होती थी पहन नहीं पाते थे।. इक्विपमेंट्स हमारे पास नहीं थे जो शायद. बड़ी शहादत की वजह बने उस दौर में। करज. सभी कहते हैं जो वहां पर थे कि इट वास ऑल. करज। हम जानते थे कि हमारा देश का एक. हिस्सा कट जाएगा। वो सड़क चली जाएगी।. इसलिए हमारे जवानों ने कुछ नहीं देखा और. असंभव जीत को संभव करके अपने हौसले जीता. दिया।.
लेकिन ये कहना कि इक्विपमेंट वगैरह नहीं. था। वो एकदम 100% सही नहीं होगा।. क्योंकि मिलिट्री मॉडर्नाइजेशन एक लगातार. एक प्रोसेस होता है। तो आप हमेशा लड़ाई. लड़ते हो कि उस वक्त आपके पास जो है आप. लड़ाई नहीं लग लड़ सकते कि काश मेरे पास. ये चीज होती।. हम. तो आज अगर मेरे पास ये गन है तो मैंने उसी. गन के साथ लड़ाई लड़नी है।. तो पहले जब हम जाते थे तब तक बुलेट प्रूफ. जैकेट ही नहीं होते थे। हम. जब बुलेट प्रूफ जैकेट आने लगे तो वह स्टील.
के आने लगे तो वह स्टील के साथ ही हम. जाएंगे या बिल्कुल ही मत पहनो जवान करते. भी थे कि सर आगे वाला पहनते थे पीछे वाला. छोड़ जाते थे कि इतना भारी कौन पहने मैंने. भी पहना है जब मैंने पहले बार वो बुलेट. प्रो पटका पहना तो तीन दिन तक मेरी गर्दन. जो है ना ऐसे के ऐसे अकड़ी रही इतना भारी. था वो लेकिन अभी सेरेमिक वाले आ गए हैं तो. इंप्रूवमेंट तो होता रहता है नहीं मैं. मेरा जो कॉन्टेक्स्ट है वो ये है कि. ग्लोबली जो बड़ी बड़ी देश है जैसे चाइना. हो गया, रशिया हो गया, अमेरिका हो गया। तो.
इनके कॉन्टेक्स्ट में हम. तो हमारा इक्विपमेंट जो है एट दैट पॉइंट. ऑफ टाइम एस द लेटेस्ट दैट वी कैन वी कैन. हैव।. ओके? बट जब तक कोई इक्विपमेंट आता है उसके. बाद और भी लेटेस्ट मार्केट में आ जाता है. तो उसको इंडक्ट करने में फिर चारप साल हो. जाते हैं। तो हम हमेशा एक तरह से कह सकते. हो कि आप हमेशा उस कर्व के पीछे ही हैं।. एक इक्विपमेंट.
मान लो मुझे मालूम है कि ये. नई राइफल मुझे चाहिए।. जब तक वो नई राइफल के सारे प्रोक्योरमेंट. प्रोसेस होगा। दो तीन साल और नई राइफल. आएगी फौज में तब तक उससे भी बेहतर राइफल. किसी ने बनाई होगी।. ओके. आप कह रहे हैं कि हम इक्विप्ड है।. हां इक्विप्ड है। एक मेरा बड़ा पर्सनल एक. मेरे माइंड में क्वेश्चन आता है सर. क्योंकि मैं फौज की कहानियां बहुत पढ़ता. रहता हूं। सैम मानिक शाह ने 1971 में जब. एक पावरफुल गवर्नमेंट इंदिरा गांधी जी की. थी तो एक फसले पर उनको रियलिटी चेक दिया.
कि नहीं मैं यह सोचता हूं आपका फैसला जो. है हमें टाइम चाहिए। उन्होंने अपना स्टैंड. लिया किया। नेहरू जी के जमाने में जनरल. थिमया साहब ने रक्षा मंत्री से मतभेदों के. दौरान अपना इस्तीफा दे दिया था।. आपके मसले पर यह सवाल बहुत बार आने लगा कि. अब जब करंट गवर्नमेंट बहुत पावरफुल है और. कई बार यह आरोप लगता है कि अपनी चॉइससेस. से लोगों को आगे बढ़ाया जा रहा है। क्या. आज फौज में अगर किसी विषय पर लगता है कि. नो कहना है तो वो नो जाता है या यस सर.
वाला फार्मूला बढ़ गया है। वो करें जो. जनरल सैम मानिकशाह साहब का आप जिक्र कर. रहे थे या जनरल मिथ्या साहब का. तो जैसे मैंने पहले जिक्र किया था कि एक. वो तीन जो स्टेप होते हैं डिस्कशन, डिसीजन. और डिलीवरी. तो ये डिस्कशन फज़ में उन्होंने ये बात कही. होगी कि नहीं हमें टाइम दो. और उनकी बात मान ली। ठीक है ना? हो सकता. था कि वो कहते कि नहीं हमें जल्दी-जल्दी. करना है और फिर नतीजा कुछ और हो सकता था।.
तो अभी हैंडसाइट में कहना कि कौन सा सही. था, कौन सा गलत था वो मुश्किल बात है।. ओके।. लेकिन एक और बात है इसमें कि इस्तीफा देना. बहुत आसान चीज है।. लेकिन सिस्टम में रह के उसको और अच्छा. करना वो मुश्किल बात है।. ऐसी कोई सिचुएशन आई जहां पर आपको लगा हो. कि. तो इसे शुड आई रिजाइन? तो इसीलिए जो है जब. डेलीबेशंस चलते हैं खास करके जब अग्निपथ. स्कीम पर डेलीबेशन चल रहे थे तो हमने.
तीनों सर्विज में ना सिर्फ आर्मी ने तीनों. सर्विज ने काफी पॉइंट दिए और उनमें से कई. पॉइंट में के वजह से वो मतलब अमल भी किया. उसमें. कभी मतभेद इतने आए सर कि आपको लगा कि मैं. रिजाइन कर दूं. कभी उस लेवल तक नहीं पहुंचा लेकिन जैसे. मैं कह रहा हूं कि रेिग्नेशन इज अ इजी वे. आउट. ट्रू. भागने हां हां मतलब ठीक है आप सही कह रहे. हैं। किसी भी काम से. उस वहां रहकर सिस्टम ठीक करना इस मोर. मोरज। हां ठीक है। सर भारत में सिर्फ दो.
फील्ड मार्शल हुए हैं। क्या वो रैंक अब. इतिहास की शोभा बनकर रह गई है? क्योंकि. फील्ड मार्शल उतने नहीं हुए इंडिया में।. हमारे पड़ोस में तो बिना जीते ही दे देते. हैं। सर. अभी आसिम मुनीर साहब ने बिना जीते हुए लगा. लिया।. नहीं जैसे मैं इस किताब में पहला चैप्टर. ही रैंक्स के बारे में है और उसमें मैं. दोनों फील्ड मार्शल्स का जिक्र करता हूं।. हम. और यह भी जिक्र करता हूं कि रैंक बने. क्यों? हम. रैंक बने क्योंकि उसकी एक ऑपरेशनल. रिक्वायरमेंट है।. हम. कि अगर आपके पास.
तीन बटालियन है तो तीन बटालियन का. कोऑर्डिनेशन करने के लिए आपको एक ब्रिगेड. कमांडर चाहिए। एक ब्रिगेड चाहिए।. इसी तरह वह हायरार्की बनता रहता है।. तो अभी. हम जैसे एक आर्मी है लेकिन दूसरे महायुद्ध. में कई देशों के आर्मी थे। तो दोनों. आर्मीज़ के जो जनरल हैं उनके ऊपर. कोऑर्डिनेट करने के लिए एक फील्ड मार्शल. भी चाहिए था।. हम. तो इट वाज़ अ फंक्शनल रिक्वायरमेंट।.
ओके? एक जरूरी था एक फील्ड मार्शल होना।. लेकिन अभी हम वी आर वन आर्मी ओनली। मैं. एंड के कुछ क्वेश्चंस में आंसर. जल्दी-जल्दी करता हूं मैं। एक जैसे सीडीएस. पद आया। अब सीडीएस पद तीनों आर्मी चीफ का. प्रमुख होता है। पहले जब मैं सुनता था तो. आर्मी चीफ जो थे उसका एक अपना रुतबा रहा. करता था। अब क्योंकि सीडीएस भी आ गया है. जो तीनों सेनाओं का है। तो क्या जो आर्मी. चीफ है उसकी भूमिका थोड़ी प्रशासक के तौर. पर हो गई है या वो पावर अभी भी उनके पास. है जैसी पहले रहा करती थी क्योंकि आप तो. दोनों पदों पर रहे हैं।.
देखिए. जो अभी सिस्टम है तो ऑपरेशनल कमांड जो है. वो सिर्फ अभी भी तीनों सर्विस चीफ्स के. पास ही है।. ओके? वो सीडीएस के पास नहीं है। सीडीएस इज मोर. अ कोऑर्डिनेटिंग एजेंसी एंड अ. एडमिनिस्ट्रेटिव कमांड।. लेकिन अगर आपको. खास करके एक जवाहर जब थिएटराइजेशन भी हो. जाएगा और आपको अगर सही तरीके से मिलिट्री. रिफॉर्म करने हैं. हम. तो मैं समझता हूं कि सीडीएस को भी ऑपरेशनल.
एक रोल मुख्य तौर पर मिलना चाहिए। नॉट. जस्ट एज चेयरमैन ऑफ चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी।. पहले चेयरमैन चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी तीनों. चीफ में से जो सीनियर होता था वह चेयरमैन. बन जाता था।. अब सीडीएस होने से वह परमानेंट चेयरमैन हो. गए और बाकी तीन चीफ वह इसी कमेटी के सदस्य. हैं। लेकिन इस कमेटी में सीडीएस के पास. ऑपरेशनल रोल नहीं है।. हम. हालांकि वो चेयरमैन है। वो सीडीएस एक भी.
टुकड़ी कहीं एक जगह से दूसरी जगह नहीं. हिला सकता। तो ये डकॉटमी नहीं है।. राष्ट्रपति जैसा पद है. कि एक तरफ से आप तीनों के ऊपर हो लेकिन. आपके पावर्स में एक भी जो ऑपरेशनल कोई यह. नहीं तो आगे जाके. खास करके जब थिएटराइजेशन बनेंगे और. इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड्स बनेंगे तो इस. डैकोटमी को भी मेरे ख्याल से दूर किया.
जाएगा। मैंने कई पॉडकास्ट किए सर जिसमें. हस्बैंड आर्मी में थे, वाइफ एयरफोर्स में. थी या और बहुत सारे लोग तो जब भी वो आपस. में बैठते हैं तो उनमें आपस में एक अनसेट. कंपटीशन सा होने लगता है। एयरफोर्स, नेवी. और आर्मी में। तीनों अपने आप को अलग-अलग. तरीके से. एक राइवलरी तो होनी चाहिए।. राइवलरी है। तो जब आप तीनों सेनाओं का पद. संभाल रहे थे। तीनों सेनाओं को सबसे. मुश्किल कोऑर्डिनेशन में क्या आ रहा था? आई एम श्योर कुछ ना कुछ तो होगा। कोई. किस्सा बताना चाहे जहां कोऑर्डिनेशन में. थोड़ा आपको जोर लगाना पड़ा।.
नहीं देखिए [गला साफ़ करने की आवाज़]. या आपको एक दूसरा प्रोस्पेक्टिव दिखा जो. आर्मी चीफ रहते आपने नहीं देखा होगा।. नहीं ये तो नहीं क्योंकि चीफ ऑफ स्टाफ. कमेटी के मीटिंग तो होते रहते हैं तो हम. हमेशा बातें कर ही रहे थे। हम्. और जयल रावत का जब एक्सीडेंट में वह गुजर. गए तो मेरे रिटायर होने तक दो तीन चार. महीने ही बाकी थे. हम. और एक तौर पे मैं एक टेंपरेरी हेड था. हम. काम चलाने के लिए तो इट वाज़ उस तीन-चार. महीने के दौरान हमने ऐसे कोई खास मुद्दों.
के ऊपर चर्चा नहीं की जहां पे हमें कोई. ऐसे डिसीजन लेने पड़े जो कि एयरफोर्स नेवी. बट इनके कोऑर्डिनेशन में कुछ इशूज़ होते. हैं सर क्योंकि जैसे कहा तीनों का एक. अनसेट अपना एक गरिमा है, एक अपना. हां कोऑर्डिनेशन के इशज़ होते हैं और. इसीलिए जो है. महसूस किया गया कि एक सीडीएस होना चाहिए।. कोऑर्डिनेशन एक बड़े. साधारण मैं एग्जांपल दे सकता हूं कि तीनों.
के पास कमांडोज़ हैं। आर्मी के पास, गरुड़. है एयरफोर्स के पास, मार्कोस है नेवी के. पास।. और तीनों कमांडोस के पास जो बेसिक हथियार. है वह अलग-अलग है। तो तीनों लोग अलग-अलग. वह हथियार इस्तेमाल करते हैं। अलग परचेस. करते हैं। अलग परचेस मतलब अलग मेंटेनेंस, अलग उसका एमुनेशन। तो अगर तीनों कमांडो ही. हैं तो तीनों के पास एक ही हथियार क्यों. नहीं हो सकता? एक ही किस्म का हथियार? ट्रू तो ऐसे चीजें जो है इसीलिए एक अगर एक.
कोऑर्डिनेटिंग एजेंसी हो तो एक वो सिनर्जी. ला सकता है और उस सिनर्जी के साथ वो. इकोनमी भी होगा क्योंकि जब अब छोटे नंबर्स. में तीन लोग खरीदेंगे और बड़े नंबर में. ज्यादा संख्या में तो अपने आप उस चीज की. कीमत भी कम हो जाएगी। बेहतर होगा। तो. इसीलिए वो हेड क्वार्टर आईडीएस जो है. इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और डीएमए।. सर आपकी किताब पढ़ते वक्त मुझे एक बड़ी. रोचक चीज पता लगी है। इस किताब में आपने.
चकदे फट्टे का बताया हमें।. जी हां।. मुझे लगता था ये कोई पंजाबी डायलॉग है।. [हंसी]. किताब पढ़कर मुझे पता लगा भाई ये तो. रणनीति का हिस्सा है।. जी हां।. चकदे फट्टे फट्टे उतारने का।. तो ये एक तरह से मेरा भी फेवरेट चैप्टर है. क्योंकि मैं भी सिख लाइट इनफेंट्री से. हूं। हम. और चकदे फट्टे तो हम भी आमतौर पर कहते थे. लेकिन एक बार मुझे भी लगा कि यह क्यों. कहते हैं तो इसलिए मैंने भी इसके ऊपर सोच. विचार करने लगा मैं. और फिर ये खुलासा हुआ कि तो एक तरफ से ये.
क्लासिफाइड आप कह सकते हो खुलासा हुआ कि. [हंसी] सारे चकदे फट्टे कहते हैं मूवी भी. होनी चाहिए. चकदे वो घोंसला का घोंसला में वो गाना भी. है. चकदे फट्टे. और अभी हम ऐसे ही एक दूसरे को उत्साह देने. के लिए भी कहते हैं। चक फट्टे. हां [हंसी]. लेकिन जैसे आप कह रहे थे कि और सारे. कहानियां जो इस किताब में इन सभी का जो. जड़ है वो सैन्य इतिहास में है मिलिट्री. हिस्ट्री में तो जब मुगलों और सिख के बीच.
में लड़ाई होती थी तो सिख घोड़े सवार मुगल. के कैंप पर अटैक करते थे और क्योंकि मुगल. आर्मी ज्यादा बड़ी थी तो उनके जो है. छोटे-छोटे रेड होते थे और वह रेड करके वह. फिर निकल जाते थे। लेकिन वापस जाते वक्त. मुगलों ने जो पुल बनाए थे क्योंकि उनको. बड़े पुल चाहिए थे अपने बड़ी फौज ले जाने. के लिए तो उन लकड़ी के पुल के फट्टे निकाल. देते थे ताकि वो मुगल उनका पीछा ना कर सके. और वो जाते वक्त एक दूसरे को.
दे प्रोत्साहन देते थे कि हां खिचक दे. पट्टो चक दे पट्टे कि अभी हम निकल गए हैं।. अभी आप पट्टे निकाल सकते हो ताकि इसके बाद. हमारा कोई जवान उस तरह नहीं रहा। एक और. बड़ा दिलचस्प किस्सा था सर दो बोतल तीन. ग्लास. तो वो भी एक किसी जमाने में. छुट्टी मंजूर हुई तो दो बोतल तीन ग्लास. तो आपस में ये लेकिन ये इसमें ये लिखने का. मकसद ये था. कि वो शेयरिंग है कि दो तीन लोग.
दो बोतल बियर शेयर करें तीनों एक-एक भी ले. सकते थे ये नहीं कि एक-एक क्यों ना हो. लेकिन तीन लोग दो बोतल क्यों क्योंकि वी. आर शेयरिंग कि हम एक ही परिवार का हिस्सा. है और हम आपस में शेयर करके यह कारवाई कर. रहे हैं।. सर जो जवान होते हैं क्या वह भी मोबाइल. फोन के नशे में है रील्स बनाने के या यह. सिस्टम बढ़ा है? नहीं मोबाइल फोन अभी. तकरीबन तकरीबन सभी के पास है. और हमारे एक. जैसे अभी रील्स की बीमारी दुनिया में सबको.
लग गई है। तो क्या ये इंडियन आर्मी में जो. जवान होते हैं. अभी तक. जवानों के बीच में तो नहीं आई लेकिन. धीरे-धीरे उनके फैमिलीज में तो आ रहा है।. उनके लेडीज बना रहे हैं। उनके बच्चे भी. थोड़ा-थोड़ा बनाने लगे हैं।. हम. और हमें थोड़ा सा इसके ऊपर हालांकि अभी. मैं रिटायर्ड हूं। लेकिन थोड़ा सा इसके. ऊपर हमें सावधानी भी. सावधान करने की जरूरत है लोगों को कि जो. रील बना रहे हैं उससे अनजाने.
कोई सिक्योरिटी रिस्क ना हो कि बैकग्राउंड. में कोई इक्विपमेंट नजर आए. क्योंकि बैकग्राउंड तो होता ही है या कहे. कि मैं फलाने फलाने इलाके में हूं या मेरे. मैं अपने पति के साथ भटिंडा में हूं तो. ऐसे थोड़ा सा हमें ध्यान रखना पड़ेगा। एंड. आल्सो हनी ट्रैप के बहुत सारे केसेस जो. आते थे. तो ऐसे ऐसे भी होने की आशंका तो हमेशा. रहेगी।. हनी ट्रैप भी तो होता होगा ना सर क्योंकि. मैं बहुत सारे मेरे मीडिया जो फ्रेंड हैं.
जो जिओपॉलिटिक्स पे रिपोर्टिंग करते हैं।. वो कहते हैं हमें तक कोशिश करते हैं वो. ट्रैप करने की कुछ इंफॉर्मेशन निकाल. क्योंकि हम फौज कवर करते हैं। तो आई एम. श्योर जवानों को भी करते होंगे। बहुत सारी. खबरें भी आती रहती है।. तो आते रहते हैं। तो ये. पहले मोबाइल फोन नहीं थे तब भी हनी. ट्रैपिंग तो होती थी। वो सेकंड वर्ल्ड वॉर. में भी लोगों को हनी ट्रैप किया गया।. जर्मंस ने ब्रिटिश पर वाइस वर्सा जैपनीज़. लेकिन अभी टेक्नोलॉजी के आने से शायद उसका. जो पहुंच जो है वो बढ़ गया है। तो इसलिए.
हमें सावध रहने की भी ज्यादा जरूरत है।. जो महिला सैनिक सर हैं क्या उनको. इनफेंट्री जैसे डायरेक्ट कॉम्बैट में कभी. तैनाती हो सकती है? मतलब इसको ले बहुत ही डिवाइडेड. बहुत अच्छा सवाल है हम. लेकिन इससे पहले मैंने एक और किताब लिखी. है. हम. जिसका नाम है कटोनमेंट कॉनस्परेसी. हम. वो एक मर्डर मिस्ट्री है. नाइस. और उस मर्डर मिस्ट्री के हीरो हीरोइन एक. रोहित और रेनुका है जो एक नए कमीशन होते.
हैं. हम. और रेनुका को मैंने इनफेंट्री में डाला. है। हम्म।. तो वो फ़िक्शन है तो मैं कुछ भी कर सकता. हूं।. बट जैसे मेरे यहां पर एक कर्नल आए थे।. उन्होंने मुझसे कहा कि इट इज़ नॉट पॉसिबल।. उनका लॉजिक ये था कि वो बहुत अच्छी हैं. महिलाएं, सशक्त हैं। लेकिन जैसे अभिनंदन. जी पाकिस्तान गए। अगर महिलाओं को लेकर हम. एक थोड़ा सेंसिटिव होते हैं। अगर उनके साथ. थोड़ी बदसलूकी करें तो देश का मोराल फौज. का मोराल डाउन हो जाएगा। तो उनको आप. यूटिलाइज़ कीजिए। दूसरे सेक्टर्स में. इनफेंट्री क्योंकि वहां पर कुछ डार्क.
ट्रुथ्स हैं। वहां पर उनकी आवश्यकता है।. ये उनका लॉजिक था। राजेश पवार जी हमारे आए. थे। कर्नल थे। इस पर आपका क्या लॉजिक है. कि इनफेंट्री में जाना चाहिए? अभिनय अभिनंदन के बाद कि वो फाइटर पायलट. है लेकिन लेडीज वुमेन फाइटर पायलट भी है. हम. तो वो भी तो दुश्मन के एरिया में गिर सकते. हैं. हम बिल्कुल सही बात. तो अगर वहां हो सकता है तो इनफेंट्री में. अगर महिला है तो वो भी उसी मतलब रिस्क. कैटेगरी में पड़ते हैं. तो यानी हो सकते हैं. हो सकते नंबर एक नंबर दो. जरूर इनफेंट्री सबसे सामने होती है लेकिन.
बैटल फील्ड एरिया में. हम [गला साफ़ करने की आवाज़]. इंजीनियर्स सिग्नल ईएमई उसमें महिलाएं हैं. वो वो तो कंबैड ज़ोन में है।. और जब एनिमी का एक्शन होता है 10 12. कि.मी. के एनिमी का एक्शन हो वो अपने. एरिया में घुस जाए तो इस एरिया में ये. नहीं कि सिर्फ इन्फेंट्री इनफेंट्री ही. तैनात है। सारे टुकड़े तैनात होंगे जिसमें. जवान होंगे। मेल ऑफिसर्स होंगे, फीमेल. ऑफिसर्स होंगे। तो किसी का पकड़े जाना ये. नहीं कि सिर्फ इन्वेंटरी वाले ऑफिसर्स ही.
पकड़े जाते हैं। या पीएडब्ल्यू होते हैं।. वो सभी लोग. मेरे यहां फौज से यशिका त्यागी जी आई तो. कहीं जब मैं नई-नई गई थी तो कई जवानों का. हाथ उठने में थोड़ा सा टाइम लग रहा था। वो. एक्सेप्टेंस में कि मैडम भी कैप्टन है।. कर्नल है।. तो उन्होंने कहा फिर वो धीरे-धीरे हुआ।. अभी हम उससे काफी आगे. मैडम सर नहीं उन्होंने बिल्कुल शुरुआत का।. 20 साल अभी हो गए वुमेन आर्मी में है।. तो शी सेड कि हम एंबिशियस हैं। हम. लड़कियां कभी संतुष्ट नहीं होता। हमने. हमेशा ज्यादा मांगा।. मांगा है।. ज्यादा मांगते मांगते। अब हमारी तमन्ना है. कि हम एक आर्मी चीफ का हेड जो हो वो भी.
कभी महिला हो।. बनेंगे। क्यों नहीं? तो. जब मैं आखिर में एनडीए में गया था लास्ट. पासिंग आउट परेड में रिटायर होने से पहले. तो उस मीडिया इंटरेक्शन में यही मेरे से. पूछा गया कि एक्स एनडीए पहले महिला चीफ कब. बन सकती है. तो मैंने क्विक कैलकुलेशन किया कि मैंने. कहा कुछ. भाई 40 42 साल लगेंगे [हंसी]. नाइस सर ऑपरेशन सिंदूर में इंडियन आर्मी.
के साहस को आप कैसे देखते हो. नहीं ऑपरेशन सिंदूर में तो हमने बहुत ही. बढ़िया काम किया है और एक बार यह दिखा. दिखाया कि तीनों सेनाओं के बीच में जो. कोऑर्डिनेशन है वह कितना अच्छा है और. इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि हमने. बहुत भारी जीत हासिल की है और हमने. बालाकोट से उस कुछ सबक सीखे क्योंकि. बालाकोट के बाद लोग पूछते रहे कि सबूत. कहां है? सबूत कहां है? किसी को विश्वास. नहीं हुआ कि हमने कोई कारवाई की है। तो.
उससे सीख लेते हुए इस बार हमने सबूत भी. दिखाए। हैंगरों में जो बड़े-बड़े डैमेज. हुए वगैरह-वगैरह तो कोई शक नहीं है कि. बहुत ही अच्छा ऑपरेशन था ये।. इंडियन आर्मी का पॉलिटिकल पार्टियां पॉलिट. उसका राजनीतीरण करती हैं।. जैसे सबूत वाली बात हुई। इंडियन आर्मी की. तरफ से कहा गया कि हमने हमला किया। सबूत. मांग गया या दोनों साइड से पूछ रहा हूं. मैं। क्या सरकार उनके काम को बढ़ा चढ़ाकर. राजनीतिक लाभ लेती है या विपक्ष आर्मी की. जो योग्यता है उसको लेकर क्वेश्चन करती.
है? क्या यह दोनों में से दोनों गलत है? एक तो मैं तो हमेशा यही कहता आ रहा हूं कि. राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। आर्म्ड. फोर्सेस को हमें पॉलिटिक्स से दूर ही रखना. चाहिए। क्योंकि वही हमारे देश की एक शक्ति. है। अगर आप पड़ोसी देश देखो जहां-जहां. आर्मी पॉलिटिक्स में घुसी है उनका नुकसान. नहीं हुआ है। तो ये टू वे ट्रैफिक होता. है। वो भी हमें बीच में ना लाए और हमारी. भी कोशिश होगी कि हम बीच में ना पड़े और. यही सबके लिए बेहतर होगा। लास्ट क्वेश्चन. सर आपने 40 साल से अधिक देश की सेवा की।.
हर्ष सफलता जो है वो कुर्बानियां लेकर आती. है। आई एम श्योर आपने बहुत सारा त्याग. परिवार के क्षेत्र में किया होगा।. कभी ऐसा कोई लम्हा जिसका आपको मलाल हो कि. आपको परिवार में होना चाहिए था। आप नहीं. रहे जब आप देश की सेवा कर रहे थे। एक. इंडिविजुअल इंस्टेंस तो नहीं लेकिन जरूर. ऐसे महसूस होता है कि जब बच्चे बड़े हो. रहे थे तो हर वक्त तो नहीं थे। हम.
और खास करके जो शुरुआती साल होते हैं मैं. कहूंगा 5 साल की उम्र तक जहां तकरीबन. रोजाना ही कुछ नया बच्चा करता है। पहले. पलटी पहला कदम पहले बार जब सॉलिड फूड खाने. लगता है तो ऐसे जो. इंपॉर्टेंट लैंडमार्क होते हैं वो हम मिस. कर जाते हैं। लेकिन अभी मेरा एक पोता है. और अभी मैं रिटायर्ड हूं। तो मैं पूरा समय. उसे उसके साथ गुजारता हूं। तो जो वो अपने.
बच्चों के साथ में नहीं देख पाया या कर. पाया वो अभी वो मैं कर पा कर सकता हूं और. उससे बड़ी खुशी होती है।. क्या करियर गोल्स अब आपके हैं सर? रिटायरमेंट [हंसी]. के बाद. तो करियर गोल्स होंगे।. करियर गोल्स. किताबें? किताबें मेरा टारगेट है हर साल एक किताब।. यानी हर साल एक पॉडकास्ट मेरा हो जाएगा।. एक तो पिछले साल कंटोनमेंट कॉनस्परेसी. निकली। इस साल यह क्यूरियस एंड क्लासिफाइड. और कैंटमैन [गला साफ़ करने की आवाज़]. कास्परेसी का सीक्वल हम.
सीक्वल मतलब जो हीरो हीरोइन वही है रोहित. और रेनू का लेकिन वो मिस्ट्री दूसरी है. हम. तो वो ऑलमोस्ट फिनिशिंग स्टेजेस. आपने नागालैंड में पीएचडी भी की है मैंने. सुना. हां. ये नागालैंड में पीएचडी करने का लॉजिक. क्या सर था और इससे कितना समझ मिलता है एक. इलाके के बारे में जो शायद वैसे समझ में. नहीं आता. नहीं जरूर मैंने पीएचडी. [गला साफ़ करने की आवाज़] करने का फैसला. किया था. और शुरू में मुझे लगा कि मैं चीन के ऊपर. ही पीएचडी करूं क्योंकि चीन.
का काफी उस उस वक्त में डिप्लॉयमेंट भी. था। जैसे कर्नल जीएस पाकिस्तान और चाइना. के जिक्र कर रहे थे तब आर्मी हेड क्वटर्स. में भी मैं चाइना डेस्क की संभाल रहा था।. लेकिन अपॉइंटमेंट का नाम अलग था। लेकिन. फिर जब सब्जेक्ट की बात आई तो फिर वो गाइड. ने कहा कि नहीं अब देखो आप चीन के ऊपर. क्या करोगे? ना आप चीन जा पाओगे ना आपको. मेंडरिन आता [नाक से की जाने वाली आवाज़]. है। आप रिसर्च सिर्फ कुर्सी में बैठ के.
इंटरनेट से ही करोगे। तो आपका ओरिजिनल थॉट. क्या है पीएचडी में? पीएचडी इज़. नोइंग. इन डेप्थ [गला साफ़ करने की आवाज़] अबाउट. अ स्मॉलर सब्जेक्ट।. हम. नॉट मोर अबाउट नॉट लिटिल बिट अबाउट लार्ज. थिंग। तो ऐसी कोई कौन सी चीज है जिसके. बारे में आप अपने पर्सनल टच ला पाओगे? पर्सनल एक्सपीरियंस ला पाओगे वगैरह-वगैरह।. तो उसके बारे में जब सोचा तब मैं दो साल. नागालैंड में था और नागालैंड में कई लोगों.
से मैंने बात की थी। कई अच्छी चीजें देखी. थी। कई चीजें देखी थी जहां पे सुधारण. सुधारना की जरूरत थी। और फिर जब मैंने ये. आईडिया दिया कि ठीक है भाई मैं नागालैंड. में करता हूं। जहां इंसर्जन सीएपी है और. मैं इंसर्जन ग्रुप के लीडर से भी मैं मिल. चुका हूं। वो चीफ मिनिस्टर गवर्नर से भी. मिल चुका हूं। वहां पर मैंने सारे मेरे. नीचे जो लोग थे उनके एरियाज देखे वहां के. सरपंचों से बात की आम आदमी से बात की। तब.
उन्होंने कहा कि देखो अब आप सही लाइन पे आ. रहे हो कि अभी आपका पर्सनल और ऑन फील्ड. रिसर्च होगा।. तो क्या निकला यूनिक? अगर कुछ शेयर करना. चाहे पीएचडी में जो आपको यूनिकनेस लगी हो. नागालैंड से. तो वो सब्जेक्ट ही इसको मतलब क्लियर कर. देता है कि सब्जेक्ट था हार्मोनाइजिंग. नागा कस्टम्स ट्रेडिशंस एंड इंस्टीटशंस. फॉर द मॉडर्न एरा टू अशर इन पीस एंड. डेवलपमेंट तो मेरा थीसिस यही था कि जो.
रीति रिवाज वो अभी भी फॉलो कर रहे हैं जो. सदियों से आ रहे हैं वो एक्चुअली. डेवलपमेंट के लिए पाबंदी है और जब जब तक. वह अपने आप को वो नहीं बदली करेंगे तब तक. जो है वो उनका डेवलपमेंट नहीं होगा और. डेवलपमेंट नहीं होगा तो इंसजेंसी रहेगी वो. सारा मतलब इंटरकनेक्टेड होता है पीस. डेवलपमेंट एंड लॉ एंड ऑर्डर तो उसका यही. मेन नतीजा ये था कि आपको अपने कुछ.
ट्रेडिशंस जो है उसको आपको चेंज करना. पड़ेगा अगर आपको सही आगे बढ़ना है। आखिरी. सवाल से जाते थे। 2014 में प्रधानमंत्री. मोदी जी आए। उसके बाद उरी हुआ, पहलगाम. हुआ, बालाकोट हुआ और बहुत सारी घटनाएं हुई. जहां पर कई बार पाकिस्तान समर्थित या. चाइना से हमारे देश पर अघोषित तौर पर हमला. किया गया। नरेंद्र मोदी के कार्यकाल को एक. एक्स आर्मी अध्यक्ष के तौर पर, एक. डेमोक्रेसी के पावरफुल वक्ता के तौर पर आप.
कैसे देखते हैं? जब कभी हमारे के ऊपर कोई हमला हुआ है खास. करके टेररिस्ट एक्शन एलसी के ऊपर पहले भी. हुए हैं तब भी हमें छोट दी गई थी कि आप. जाके आप एक्शन कर सकते हो। तो यह नहीं है. कि किसी एक साल के बाद ही ये. क्रॉस बॉर्डर एक्टिविटीज. होने लगे हैं। यह छोटू हमेशा थी बटालियन.
कमांडर्स को, ब्रिगेड कमांडर्स को कि. बॉर्डर एलसी पार करके आप अगर आप आपके. पोस्ट में कोई आता है. मतलब सर्किल स्ट्र्राइक्स पहले भी होती थी. लेकिन छोटे पैमाने पे लेकिन पहले भी होती. थी लेकिन जैसे मैं कह रहा हूं ना कल उस. वक्त सोशल मीडिया भी नहीं था. बॉलीवुड ने बॉलीवुड फिल्में नहीं बनाई थी. ये ये कारवाई मैं जो कह रहा हूं वो कारगिल. से पहले थे कारगिल वास फर्स्ट टेलीवाइज्ड. वॉर तो उसके बाद बहुत सारी चीजें बदल गई. हैं और ज्यादा लोगों को इसके बारे में.
जानकारी लेकिन पहले जब मैं कमांडिंग ऑफिसर. था, मुझे याद है कि हमारी एक पोस्ट के ऊपर. लोग आके अह दो जवानों के गर्दन काटके निकल. गए थे।. तो, उसका तो हमने बदला तो लिया ही लिया. सरहद पार जाके।. सरहद पार जाके, लेकिन, किसी को मालूम नहीं. है।. तो, अब इसको ज्यादा दिखाया जा रहा है।. दिखाया नहीं, यह. ये इनफार्मेशन बाहर कैसे आ रही? पहले. क्यों नहीं आती थी, अब क्यों आ ये नहीं कि. दिखाया जा रहा है लेकिन वो जो माहौल बदल. के है ना वो रीच डिजिटल एरा वो सारी चीजें.
बदले देश सुरक्षित हाथों में है. बिल्कुल 100% इसमें कोई किसी को शक नहीं. होना चाहिए. ओके थैंक यू सो मच सर एक आखिरी सवाल इसी. में समय देता हूं. नहीं आखिरी तीन सवाल हो गए. इसी में छोटा सा है हां या ना बोल दीजिएगा. एक थ्योरी और आती है कि आप आर्मी चीफ हैं. आप रोज आप मिलेंगे नहीं मुझे एक थ्योरी. आती है कि चीन ने हमारे कुछ इलाकों में. कब्जा कर लिया था इज इट ट्रू क्योंकि उस. वक्त आप ही थे। मैं पूछ सकता हूं ये सवाल. मैं. इसको मैं कितने बार इसका जवाब दे चुका. हूं। प्रधानमंत्री ने बोला है डिफेंस.
मिनिस्टर, फॉरेन मिनिस्टर, आर्मी चीफ फिर. भी अगर लोगों को भरोसा नहीं है तो और जैसे. मैं पहले क्या कहा था कि जब आपने देखा है. कि पीएलए वाले वापस जा रहे हैं तो इसमें. डाउट क्यों आता है कि उन्होंने कब्जा किया. है या नहीं किया? कोई डाउट नहीं सर। भारतीय जवानों के लिए. कुछ कहना चाहेंगे? यही कि डटे रहो और जैसे उन्होंने मेरा. पूरा साथ दिया है उसी तरह अपने अधिकारियों. का साथ देते रहो आगे जाकर भी।.
थैंक यू सो मच सर। और आपकी इस किताब के. लिए आपको बहुत सारी शुभकामनाएं।. थैंक यू।. इस किताब की कुछ यूनिक बातें हमने बताई।. बाकी हम अपने दर्शकों से चाहेंगे कि और. इंटीरियर जाएं, अंदर जाएं, खोदे, पढ़ें।. कुछ हमने ट्रेलर दे दिए हैं। बाकी जो. डिटेल जानकारियां है वो इससे लें। सर वो. तो फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी उससे कोई. लक्षण है आने के अभी? कभी ना कभी फिर भी इंटरव्यू करेंगे।. थैंक यू सो मच सर। सर लवली टॉकिंग टू यू. एंड बहुत बहुत गौरवान्वित लम्हा मेरे लिए।. थैंक यू।. थैंक यू।.
नहीं.
