Unplugged FT. Dr. Umer Ahmed Ilyasi | Eid ul Adha 2025 | Pakistan | Kashmir | Sharmistha
कि ईद और बकरी ईद में अंतर क्या है? इसका. नाम बकरा ईद नहीं है। लेकिन भारत के लोगों. ने इसे बकरा का ईद बना दिया। इसका नाम है. ईद उल अहा। कुर्बानी में बकरे को काटना. जरूरी है? क्या कुर्बानी का जरिया यही एक. है या इसके अल्टरनेटिव और हो सकते हैं।. बकरी ईद के मौके पर हिंदू मुस्लिम तनाव ना. हो। जी। इसके लिए आप मुसलमानों को क्या. संदेश देंगे? मुसलमानों को कहना चाहता हूं. कि आप कोई भी ऐसा काम ना करें। वीडियो. बनाएं कि जिससे दूसरों को तकलीफ पहुंचे।. कि जब सोसाइटी में दूसरों को तकलीफ पहुंच.
रही है, झगड़ा पैदा हो रहा है, तो ऐसी. कुर्बानी कैसे हो सकती है? एक ही अल्लाह. के अलग-अलग मानने वाले कैसे? हिंदुस्तान. में आप अलग नजरिए से देख रहे हो, वहां अलग. नजरिए से हमारी सेना ने जब वहां पर उनके. आतंकवादियों के अड्डों को निशाना बनाया, तो मसूद हसर चिल्ला रहा था। अभी एक लड़की. थी जिसने पाकिस्तान जिंदाबाद करके लिख. दिया। भारत के मुसलमान में कुछ लोग ऐसे. क्यों निकल आते हैं जो पाकिस्तान जिंदाबाद. कर दे। अगर ऐसा कोई भी है जो पाकिस्तान. जिंदाबाद के नारे लगा रहा है तो मुझे लगता. है उसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए।. पाकिस्तान आतंकवाद प्रोड्यूस कर रहा है और.
टर्की या अज़र भाईजान साथ दे रहे हैं। क्या. बॉयकॉट टर्की का आप लोग भी अपील करेंगे? करी हमने शर्मिष्ठा नाम है। वो पाकिस्तान. को क्रिटिसाइज कर रही थी। बोलते बोलते. उसने प्रॉफिट मोहम्मद पर टिप्पणी कर दी।. इस्लाम माफ़ करने का नाम है। अगर उस बच्ची. ने गलती कर दी और गलती करके उसने तस्लीम. कर लिया। मुझसे गलती हो गई तो मैं माफ़ कर. रहा हूं। चीफ इमाम हूं। मैं माफ़ कर रहा. हूं। इस्लाम. माफ करने का नाम है। मुझे उम्मीद है कि. आपकी बात जो आपके फॉलोअर्स हैं वो भी. सुनेंगे। मैं प्रॉफेट मोहम्मद साहब को जब. उनकी बातों को सुनता हूं तो मुझे पीस.
ह्यूमैनिटी की बातें समझ में आती है। वो. इसीलिए आए थे। लेकिन उनका उनका लक ही है. रहमतुल आलमीन। पूरी रहमत बनकर आए थे पूरी. कायनात की। तो उनके जो मानने वाले हैं वो. गला काटने में तुले रहते थे। तब भी गला. काटने पे तुले आज भी यह गुमराह लोग हैं।. वो अगर इस्लाम के मानने वाले मोहम्मद. सल्लल्ला वसल्लम को के की पैरवी करने वाले. अगर लोग होते तो यह ऐसे हो ही नहीं सकते. थे। ओवैसी साहब सुफिया कुरैशी जी या उमर. अब्दुल्लाह मैं दुआ करता हूं कि ये. राजनीति तो चलती रहेगी लेकिन ये ऐसे ही एक. रहें। एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। यकीनन यही.
यही मुझे लगता है कि इसी की जरूरत है। एक. रहने में ही खैर है।. [संगीत]. मजहब नहीं सिखाता हमें आपस में बैर. रखना। हमने सुना पढ़ा और ईद के मौके पर एक. पडकास्ट में इसका जिक्र भी किया दुनिया को. बताया। लेकिन फिर 22 अप्रैल को भारत के.
कश्मीर के पहलगाम में जो घटना हुई उसने. सबको झकझोर दिया। क्योंकि वहां पर कुछ लोग. आए जो अपने आप को मजहब का नुमाइंदा कह रहे. थे। अपने आप को जिहादी कह रहे थे। लेकिन. जो काम. किया उसने देश के अखंडता एकता पर सवाल. खड़ा कर दिया। लोगों ने कहा कि कोई धर्म. पूछकर कैसे मार सकता है? लोगों ने हम पर. भी सवाल खड़े किए कि आप ही के पडकास्ट में. तो हम सुन रहे थे कि मजहब नहीं सिखाता।. आपस में बैर रखना। फिर धर्म पूछकर, नाम. पूछकर, कलावा देखकर, पैंट उतारकर क्यों.
मार दिया गया? आपके सवालों को सुनकर हमें लगा कि हमारी. भी एक जिम्मेदारी है आपको दोबारा से जवाब. देने की और इसीलिए ईद के बाद बकरी ईद का. जब मौका है तो उन सवालों का जवाब जो बीते. कुछ दिनों से आप हमसे पूछ रहे थे पहलगाम. को लेकर। हमारे साथ एक बार फिर हैं डॉक्टर. इमाम उमेर अहमद इलियासी साहब। चीफ इमाम. हैं। ऑल इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन के। 5. लाख से अधिक इमाम जो हैं इनके. ऑर्गेनाइजेशन में हैं। इमाम साहब पहलगाम. में जो कुछ हुआ हमने आपने हिंदू मुस्लिम.
एकता की बात की थी लेकिन फिर लोगों ने हम. पर भी सवाल खड़ा किया। खुलकर हमसे कहा कि. आप एकता की बात कर रहे थे और देखिए वहां. धर्म पूछकर लोगों को मार दिया गया। मारा. इसलिए गया क्योंकि वो हिंदू थे। आज. हिंदुस्तान में एक बड़ा तबका है जो इस देश. के मुसलमानों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।. कुछ शक की निगाहों से देख रहा है। आपने. फतवा जारी किया। आपने स्टैंड लिया लेकिन. आज हम चाहते हैं कि हमारी आपकी भी. जवाबदेही हो। और आज वह सवाल हम लेकर आए. हैं जो जनता ने हमसे पूछे हैं और आपसे. पूछने गए हैं। और इसीलिए हम पहला सवाल पूछ. रहे हैं कि 22 तारीख को जब इस देश में एक.
ऐसी घटना होती है जिसमें नाम पूछकर मारा. जाता है। सबसे पहला सवाल तो आप पर क्या. बीती थी? पहली बात तो यह समझने की है कि. यह आतंकवादी. हमला भारत की आत्मा पर प्रहार था। जख्म. बड़ा हुआ। तकलीफ सबको हुई है।. ज्यादा तकलीफ हमको जब लगी, जब एहसास हुआ. कि जब उन आतंकवादियों ने एक मजहब.
पूछकर उनकी हत्याएं की, मासूमों की. हत्याएं की, वो घूमने के लिए गए थे।. टूरिस्ट थे और उनके साथ जिस तरह उन्होंने. मजहब पूछकर उनकी हत्याएं की बहुत निंदा, बहुत. दुखद, बहुत निंदनीय. जितने भी दुख प्रकट किया जाए उतना कम. है। हमने सबसे. पहले अपनी जिम्मेदारी हमारी क्या है? उसे.
निभाते हुए हमने फौरन 23 तारीख को तमाम. जितने भी भारत के जितने बड़े धर्म गुरु. हैं सभी धर्मों के धर्म गुरुओं को इमाम. हाउस दिल्ली में बुलाकर उनके साथ हमने एक. बैठक करी और बैठक करने के बाद हमने सबसे. पहले श्रद्धांजलि दी उन लोग उन शहीदों के. लिए जो इसमें मारे. गए। श्रद्धांजलि के साथ उनके लिए उनकी.
आत्मा की शांति के लिए सब ने दुआएं करी।. यह पहला मौका था कि जिसमें सारे मजहब के. सारे धर्म गुरु इकट्ठे हुए और एक होकर हम. सब ने मिलकर दुआएं करी। यह जिम्मेदारी. खाली मेरी नहीं थी। हमारी सबकी जिम्मेदारी. थी। क्योंकि यह प्रहार यह अटैक भारत की. आत्मा के ऊपर. था। पूरी दुख हर भारतीय को था। हर एक.
इंसान पूरी दुनिया में जिसने भी सुना उसका. इसका बहुत दुख था। नहीं मौलाना साहब देखिए. जो एक सवाल उठता है बार-बार आता है और आज. क्योंकि थोड़ा मैं ब्रूटल होकर सवाल. पूछूंगा क्योंकि आज विषय ऐसा है मैं चाहता. हूं लोगों के मन में जो सवाल है वो पूछे. जाए।. बीते कुछ सालों में कई ऐसे हमले हुए खास. तौर पर कश्मीर में जैसे यह हमला था यहां. पर यह क्लियर हिंदू मुस्लिम बढ़ाने वाला. था। मंशा क्या थी? अभी भी आतंकवादी पकड़े. नहीं गए हैं। पाकिस्तान को हमने जवाब दिया.
है। लेकिन वो जो सोच थी उस सोच को लेकर एक. बड़ा सवाल उठा कि ये मजहब के नाम पर हत्या. करने का ये शिगूफा क्या है? और ये कैसे. इस्लामिक हो सकते हैं? क्योंकि आपने जो. इस्लाम हमें बताया था उस दिन वो पीस का. रिलीजन था। हम इमाम साहब के साथ भी पीस की. बात कर रहे तो उनके नाम के आगे हम पीस का. जिक्र कर रहे थे। लेकिन जिस रिलीजन को ये. लोग मानने की बात करते हैं और इनके भी. सपोर्टर्स हैं दुनिया भर में।. यही तो बात. है। हमने इस.
पर इस्लाम बचाने का नाम है। इस्लाम मारने. का नाम नहीं है। और जिस तरह से. उन्होंने जो. किया वो एक मजहब के नाम के साथ किया. उन्होंने जो कि इस्लाम का नाम था।. उन्होंने अपने आप को. इस्लामिक नाम उनके थे।. हमें इस बात का समझना है. कि आतंकवादी का कोई मजहब नहीं होता है।. लेकिन फिर मौलाना साहब आतंकवादियों के जो.
संगठन होते हैं उनके सबके नाम तो इस्लामिक. ही है। आप देखिए जैश-ए-मोहम्मद या जितने. भी नाम आप उठा लीजिए। हर आतंकवादी संगठन. का नाम धर्म के नाम पर है। मजहब के नाम पर. है। इसीलिए हमने ये 27 तारीख को एक फतवा. जारी किया।. जेश मोहम्मद लश्कर. तबादी मुजाहदीन ये जितने भी जमात दावा ये. जितने भी ऑर्गेनाइजेशन है आतंकवादी हमने.
ये फतवा 27 तारीख को जारी किया है और यह. फतवा विश्व का पहला फतवा भारत से जारी हुआ. है। मैं चीफ इमाम होने के नाते हमारा ऑल. इंडिया इमाम ऑर्गेनाइजेशन ने जो हमारा. दारुल कजा है उसने यह फैसला लिया और यह. फैसला लेकर उसने ये फतवा जारी किया है और. इस फतवे के अंदर साफ तौर पर साफ तौर पर यह. बात बता दी गई है कि इस्लाम बचाने का नाम.
है मारने का नाम नहीं है। आप मोहम्मद का. नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। जेश मोहम्मद. लश्कर तबा इसका मायना है मोहम्मद की सेना. मोहम्मद का लश्कर और आप इनोसेंट लोगों को. मार रहे हैं। तो इसलिए मोहम्मद पीस बी. अपॉन हिम सल्लल्लाहहु अलैहि वसल्लम वो. रहमतुल आलमीन है। पूरी आलम के लिए रहमत. बनकर आए थे। आज जिस तरह से उन्होंने. मोहम्मद का नाम इस्तेमाल किया। इस्लाम का. नाम इस्तेमाल किया। तो ये विश्व का पहला.
फतवा जारी हुआ है 27 तारीख में जिसके अंदर. साफ तौर पे आज तक 57 देश हैं पूरे विश्व. के अंदर इस्लामिक लेकिन आज तक किसी ने ये. फतवे जारी नहीं किए और खासतौर पर हमने ये. फतवा जारी इसलिए किया क्योंकि आतंकवादी का. कोई मजहब नहीं होता है। आतंकवादी का जब. मजहब नहीं होता है आतंकवादी शैतान होता. है। तो उसका व्यवहार भी उसी तरह से होना. चाहिए। अब उसकी नमाज पढ़ाई जाएगी या उसकी. क्रिमेशन उसको ततफन क्या कब्रों में जगह.
दी जाएगी? उसके उसके तौर तरीकों को. इस्लामिक तरीके से किया जाएगा। ये नहीं हो. सकता क्योंकि जब हम ये कह रहे हैं कि. आतंकवादी का मजहब नहीं होता। वो शैतान. होता है तो शैतानों की तरह व्यवहार होना. चाहिए। दूसरी बात हमने जैश मोहम्मद लश्कर. तबा आईएसआई आईएसएसआई जितने भी इस्लाम के. और मोहम्मद के नाम से संगठन बने हैं उनके. खिलाफ ये फतवा जारी हो चुका है। उन तक ये. बात पहुंच चुकी है। ये फतवा जारी होकर ये. कह दिया गया है कि आज के बाद आप मोहम्मद.
का नाम पीएसबी अपॉन हिम आप इस्लाम का नाम. इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। आप आतंकवादी. हैं। आतंकवादी नाम रखिए। अपने संगठनों के. नाम आतंकवादी संगठन रखिए। लेकिन इस्लाम को. और मोहम्मद सल्लल्लाह वसल्लम को आप बदनाम. नहीं कर सकते। इसीलिए फतवा जारी हुआ। मेरे. मन में दो सवाल है इमाम साहब। एक सवाल तो. ये है कि इस फतवे की अहमियत क्या है? एक. सवाल यह जानना चाहता हूं मैं क्योंकि 57. देश हैं दुनिया में जो मुस्लिम संगठन है.
वो पाकिस्तान के साथ खड़े हुए हैं और अगर. 57. देश वाकई में इस्लाम के रिप्रेजेंटेटिव. हैं तो मेरे मन में यह सवाल आता है कि फिर. पाकिस्तान, टर्की समेत जो दुनिया के बड़े. इस्लामिक देश हैं उन्हें इस बात से क्यों. फर्क नहीं पड़ता कि आतंकवादी संगठनों के. नाम प्रॉफिट मोहम्मद साहब के नाम पर आते. हैं? क्या वह उनके नाम से आतंकवाद को. बढ़ावा देने वाले संगठनों को लेकर ऐतराज. नहीं कर सकते जो आपने किया और अगर नहीं. किया तो क्या वह प्रॉफेट मोहम्मद के नाम.
पर आतंकवाद को जायज मान रहे हैं? यही तो. यही तो सवाल हमारे सामने आया जब मैं. फ्रांस गया था प्रेसिडेंट सरकोजी जब के. प्रोग्राम में तो 2006 में मुझसे सबसे. पहले सवाल ही मुझसे यहां पर न्यूज़ 24. चैनल ने मुझसे किया था फ्रांस 24 न्यूज़. चैनल ने तो वहीं से हम यही कह रहे हैं कि. इस्लाम मारने के लिए नहीं है इस्लाम बचाने. के लिए होता है आज ये फतवे के अंदर आपने. जो सवाल किया कि फतवा क्या होता है फतवा.
कुरान और हदीस की रोशनी में लाया या जाता. है जिसमें जो मुफ्ती होते हैं बड़े वो सब. इस पर बैठते हैं। इस पर फतवा जारी होता. है। ये फतवा जारी हुआ है तमाम सारी उन. चीजों के लिए जिसमें कुरान क्या कहता है. और रसूल्लाह सल्लल्ला वसल्लम ने क्या हमें. बताया है। तो उनके नाम को आप इस्तेमाल. नहीं कर सकते। तो कुरान और हदीस की रोशनी. में ये फतवा जारी हुआ है। अब उनको ये उनके. ऊपर लागू हो चुका है। अब उनको ये नाम. हटाने ही होंगे। ये हमने अभी अपने.
प्रोग्राम में पहले भी और आज आपके इस. प्रोग्राम सेकि पाकिस्तान के बहुत सारे. लोग इस प्रोग्राम को हमारे देख देख रहे. हैं और हम उनको भी बताना चाहते हैं कि जो. वहां के जो चीफ इमाम है मैं चीफ इमाम भारत. और मैं वहां के चीफ इमाम को ये बात कहना. चाहता हूं ये बताना चाहता हूं कि अगर आप. इस्लाम के मानने वाले हैं मोहम्मद के. मानने वाले हैं तो आपको ये फतवा लागू करना. होगा क्योंकि ये मेरा फतवा नहीं है। कुरान. और और हदीस की रोशनी में ये फतवा जारी हुआ.
है। अब वहां पर लागू करना अब आपकी. जिम्मेदारी है। वहां के इमामों की. जिम्मेदारी है। वहां के उलमा की. जिम्मेदारी है। उनको करना पड़ेगा। अगर वो. नहीं करेंगे तो अल्लाह की पकड़ उनके यहां. आ जाएगी। ये बात यह वहां उनको कॉपी इसकी. चीफ इमाम वहां के पाकिस्तान को भी ऑलरेडी. हमने ये भेज दिया है। इमाम साहब एक बड़ा. अजीबोगरीब सवाल मेरे मन में आता है। ये एक. ही अल्लाह के अलग-अलग मानने वाले कैसे. हैं? अलग-अलग अल्लाह तो है नहीं है तो एक. ही तो यह ऐसा कैसे है कि हिंदुस्तान में.
आप अलग नजरिए से देख रहे हो वहां अलग. नजरिए से मैंने पाकिस्तान में देखा जश. मोहम्मद का अड्डा था मसूद अजहर के खानदान. वाले जो मसूद अहर आतंकवादी है ग्लोबल. टेररिस्ट है उसका संगठन ग्लोबल टेररिस्ट. है उसके मारे जाने पर पाकिस्तान की सरकार. ने ₹1 करोड़ का इनाम दिया है उनको इनाम. क्या है उसको दया याशका कह लीजिए या पैसा. दिया उनको एक एक करोड़ 14 लोग को ₹14. करोड़ एक आतंकवादी के परिवार परिवार में. या आतंकवादी के लोगों के मारे जाने पर ₹14.
करोड़ का मुआवजा सरकार दे रही है। आप कैसे. उम्मीद कर सकते हैं कि वह इस फतवे का. समर्थन करेंगे। वो तो अपने आप पालपस के. बैठे हैं। वो वो आतंकवादी मस्जिद खोले. बैठा है। इसीलिए हमने जब वो जब हमारे. हमारी सेना ने जब वहां पर उनके. आतंकवादियों के अड्डों को निशाना बनाया।. और उन उनके आतंकवादी अड्डों को उड़ा दिया. गया। आतंकवादियों 100 से ज्यादा. आतंकवादियों को नस्तोनाबूद कर दिया गया।. तो मसूद हसर चिल्ला रहा था। उसने कहा कि.
मेरे परिवार मेरा परिवार बर्बाद मर गया।. बर्बाद हो गया मैं तो सजा उसको मिली है।. तो मैं पाकिस्तान को खासतौर पेकि हम आज. भारत आज से नहीं लगातार काफी अरसे से आज. इस आतंकवाद को झेल रहा है और अब पाकिस्तान. के ओलमा की जिम्मेदारी है। उनको ये चाहिए. कि आतंकवाद का समर्थन वो नहीं कर सकते. क्योंकि कानून शरीयत इसकी इजाजत नहीं देती. है। मुझे पाकिस्तान से एक इमाम, एक.
मौलाना, एक मौलवी, कोई ऐसा व्यक्ति नहीं. मिला जिसने सामने आकर यह कहा हो कि हमारे. देश में आतंकवादी क्यों रह रहे थे? मसूद. हज़ार हमारे देश में क्यों रहे? मसूद की. मसूद को तो मस्जिद की आड़ में छिपा लिया. गया। यह तो और शर्मनाक था ना कि आप अल्लाह. की इबादत के नाम पर एक आतंकवादी छिपा के. रखा है। इसीलिए इसीलिए हमने यह फतवा जारी. किया है। इसीलिए पाकिस्तान बेचैन हो गया. है। इस फतवे को आने के बाद से पूरे पूरी. दुनिया के अंदर इस पर हलचल शुरू हो चुकी. है। हमने साफ तौर पे ये बात कह दी है और. हम ये बताना भी चाहते हैं कि आतंकवादी जो.
संगठन हैं वो आतंकवादी नाम रखें। इस्लाम. और मोहम्मद का नाम इस्तेमाल नहीं कर सकते।. और अगर वहां के चीफ इमाम ने तमाम जो. मुस्लिम संगठन जो वहां के हैं अब उनकी. जिम्मेदारी है कि इस फतवे को उनको मानना. पड़ेगा। ये कुरान और सुन्नत की रोशनी में. है। भारत के मुसलमानों में एक बड़े वर्ग. में नहीं लेकिन एक छोटे वर्ग में ऐसे. लोगों को लेकर सिंपैथी क्यों हो जाती है? या पाकिस्तान को लेकर प्रेम क्यों आता है? अभी एक लड़की थी जिसने पाकिस्तान जिंदाबाद.
करके लिख दिया। काफी विवादित रहा। कोर्ट. से बच गई वो। लेकिन यह जानते हुए कि. पाकिस्तान ने हमारे यहां बेगुनाहों को. मारा। भारत के मुसलमान में कुछ लोग ऐसे. क्यों निकल आते हैं जो पाकिस्तान जिंदाबाद. कर देते हैं? यही तो अफसोस की बात है। हम. हमेशा एक बात कहते हैं कि समाज के अंदर. अच्छे लोग ज्यादा हैं। चंद लोग खराब भी. होते हैं। चंद लोग की खराबी की वजह से. सारा समाज खराब है। ऐसा होता नहीं है। हां. हमें यह जरूर समझना चाहिए कि जो पाकिस्तान.
जिसका नाम पाक है, नाम उसका पाक है, इरादे. उसके नापाक हैं। हरकतें उसकी नापाक हैं।. सारे काम नापाक हैं। तो वो जो भी उसका. समर्थन करता है या जो भी समर्थन करेगा तो. वह भी मुझे लगता है कि वह भी आतंकवादी. होता है। क्योंकि राष्ट्र के विरोध में. अगर कोई भी आएगा क्योंकि राष्ट्र प्रथम. है। हमें इसका हमेशा ध्यान रखना चाहिए। तो. भारत में अगर भारत के विरोध में कोई भी या. पाकिस्तान का समर्थन करेगा वो भी आतंकवादी.
ही होगा और उसको भी आतंकवादी ही की तरह. देखा जाएगा। तो भारत में एक लड़की जिसने. पाकिस्तान जिंदाबाद कहा जो कोर्ट कचहरी से. तो बच गई। लेकिन कई सारे लोग तथाकथित. बुद्धिजीवी वर्ग जो था वो कह रहा था कि. इसमें क्या ऐसा कह दिया? आप मानते हैं कि. वो भी टेररिज्म के उस भाषा में आज के दौर. में यकीनन हम कैसे कह सकते हैं वो उस उस. पाकिस्तान को जो हमारे भारत के अंदर तबाही. मचाया हुआ है। आतंकवाद फैला रहा है। हमारे.
यहां इनोसेंट लोगों. को मरवा रहा है। आज जिस तरह से बलोच का. मामला सामने आया। हम् दरअसल यह मुझे जो. लगता है इसके पीछे जो 22 अप्रैल को जो. उसने यहां आतंकवादी हमला करा भारत के अंदर. भारत की आत्मा पर जो प्रहार था उसके पीछे. जो मुझे लगता है कि जो. बलोचिस्तान वो डायवर्ट करना चाहता था इन. सब चीजों को भारत के अंदर क्योंकि. बूचिस्तान अपनी आजादी की आवाज बुलंद कर.
रहा है। वहां बलोचों के ऊपर वो जो कबाइल. है बलोच बलोचिस्तान के कबाइलियों के ऊपर. जिस तरह से नौजवानों को जिस तरह से उनकी. सेना अत्याचार कर रही है उन नौजवानों को. मार रही है वो बलोच अपनी आजादी की लड़ाई. लड़ रहे हैं तो आजादी हक है उनको मांगना. चाहिए लेकिन उसने जब वहां देखा बलोच के. सारे मामलात को तो उसने यहां पर ये. आतंकवादी हमला करके इस तरह का हमला किया. क्योंकि आर्टिकल 370 के हटने के बाद से.
हमारा जो कश्मीर था कश्मीर जिस तरह से. विकास कर रहा था, जिस तरह से टूर पूरी. दुनिया से टूरिस्ट आ रहा था तो यह पड़ोसी. देश को पसंद नहीं आया। जिसकी वजह से ये. सारी उसने ये नापाक हरकतें करी और वहां पर. एक मजहब का नाम पूछ-पूछ के करी जिससे कि. वो चाहता था कि पूरे देश के अंदर दंगा. फसाद हो जाए। लेकिन पूरा देश का हर एक-एक. आदमी एक होकर मुकाबला किया। सबसे अच्छी. चीज इस पहलगाम के अंदर ये हुआ कि हर आदमी.
हिंदू-मुसलमान नहीं बना। सब भारतीय बने और. सबने एक होकर इस आतंकवाद के विरोध में और. पाकिस्तान के विरोध में इसका मुकाबला. किया। सेना ने अपना काम किया, सरकार ने. अपना काम किया, समाज ने अपना काम किया, धर्म के लोगों ने अपना काम किया। सबने. अपनी जिम्मेदारी निभाई। तो मुझे लगता है. कि इससे एक मजबूती एक स्ट्रेंथ पैदा हुआ. है और हम इसको इसी तरह से एक होके इसका. मुकाबला करना चाहते हैं। आप जो बात कह रहे. हैं कर्नल सुफिया कुरैशी हो या ओवैसी हो.
उन्होंने बहुत हद तक इस देश या दुनिया को. ये बताया कि. हिंदुस्तान एकजुट है। कश्मीर से लेकर. कन्याकुमारी तो लोगों ने बताया। लेकिन सर. एक यंग बच्चा मैं और वाइडर प्रोस्पेक्टिव. पे देख रहा हूं। मैं इधर सोफिया कुरैशी जी. पर और ओवैसी साहब पर आऊंगा। एक यंग बच्चा. पिछली बार भी ये सवाल मैंने आपसे पूछा था. कि कई बार इस्लामिक चीजों को लेकर या कुछ. ऐसी बातें आती है जिसको लेकर यंग मुस्लिम. बच्चा एंबरेस हो जाता है। मैंने ये सवाल. आपसे पूछा भी था कि मुझे एक पॉलिटिशियन ने. कहा था कि उनके यंग बच्चे जो हैं वो अपनी.
आइडेंटिटी को लेकर थोड़ा संकोच करते हैं. नई चीजों को लेकर। अब जब कोई ये कहता है. मान लीजिए स्कूल कॉलेजेस में कोई एक बच्चा. कि आतंकवादी मुस्लिम निकला या मजहब नहीं. सिखाता आतंकवाद करना लेकिन मजहब पूछ कर. मारा गया। ये भी सच है। आप लोग कैसे ये. स्पष्ट करोगे कि आतंकवाद और इस्लाम का. कनेक्शन नहीं है? यकीनन नहीं है। कैसे. करोगे? इसे किससे कैसे दृढ़ता से करोगे ये. परसेप्शन फैलाने के लिए? क्योंकि जब ये. बात मैंने कही अपने वीडियोस में कि एक. घटना को आप मुसलमानों से जोड़ के मत. देखिए। एक बड़ी सोसाइटी एक बड़ा वर्ग था.
जिसने मुझे भी गालियां दी। जबरदस्त तरीके. से दी। कहा आप जैसे लोग भी जिम्मेदार होते. हैं क्योंकि आप ही लोग सेकुलरिज्म का पाठ. पढ़ाते और फिर देखिए धर्म पुष्कर मारा. गया। जो मुस्लिम एक्टर सामने आए उनसे कहा. गया कि आप वहां होते तो भी बच जाते। आप. कभी भी वह नहीं समझते कि आपको आइडेंटिटी. के लिए मार दिया गया। अब एक बड़ा वर्ग यह. सवाल उठाता रहता है कि इस्लाम और आतंकवाद. को क्यों ना जोड़े और आप इसे कैसे पूरे. देश में स्पष्ट करोगे? नहीं देखिए आतंकवाद. और इस्लाम दोनों अपोजिट हैं। इस्लाम बचाने. का नाम है। आतंकवाद मारने का नाम है।.
आतंकवाद माने. शैतान। ये इसके साथ इसका जोड़ है ही नहीं।. इसीलिए ये फतवा जारी करना पड़ा हमको।. इसीलिए ये 57 देश अब तक नहीं कर पाए। हमने. भारत ने इसकी शुरुआत करी है। इसीलिए फतवा. लाना पड़ा हमको। इसीलिए हमको आगे आना. पड़ा। यही सबसे पहली बार जब पहलगाम का. होने के बाद से मैं आपको बताता हूं कि. भारत की हमने जब 5 लाख मस्जिदें जो हमारे. अंडर में आती हैं। 5 लाख मस्जिदों से. जुम्मे के दिन सबने उन श्रद्धांजलि दी। उन.
शहीदों के लिए जो जिनको मारा गया। उनकी. आत्मा की शांति के लिए दुआएं की गई। पूरा. भारत एक होकर इस आतंकवाद का मुकाबला किया।. तो लेकिन हां हमारी जिम्मेदारी ज्यादा. इसलिए बनती है क्योंकि इस्लाम के नाम के. मानने वाले लोग हैं जो आतंकवादी हैं। अगर. हम उनको हमको सबको एक होकर इन आतंकवादियों. का मुकाबला करना होगा। इस्लाम से मजहब से. इनका कोई संबंध नहीं है। ये आतंकवादी हैं।. ये ध्यान रख लीजिए आतंकवादी आतंकवादी है।. उसका इस्लाम से कोई संबंध नहीं है। इसीलिए.
हम सब एक होके इसका मुकाबला कर रहे हैं।. इसीलिए ये फतवा जारी हुआ है। इसीलिए हमने. कह दिया कि कोई आतंकवादी मारा जाएगा।. जनाजे की नमाज़ नहीं पढ़ाई जाएगी, ना ही. उसको दफना दिया जाएगा। इतना बड़ा फैसला. क्यों लिया गया? सिर्फ इसीलिए लिया गया कि. जो लोगों के अंदर एक बात जो चली गई है. उसको सही करने की जिम्मेदारी हमारी है।. यकीनन हमारी है। हम इसे करेंगे। तो क्या. वो 57 देशों को फर्क नहीं पड़ता इन बातों. से? यकीनन हमने अभी कहा जिस तरह से अभी. तुर्किए ने साथ दिया था पाकिस्तान का और.
जब ये हमले हो रहे थे। अज़रान ने साथ दिया।. हमने इस हमने तुर्कियों को और अज़रान को एक. बात कही थी कि आज अगर तुर्की या अज़हर. बैजान पाकिस्तान का अगर साथ दे रहे हैं तो. मुझे लग रहा है कि वो आतंकवाद का समर्थन. कर रहे हैं। और कोई भी पाकिस्तान के का. साथ देने का मतलब ये है कि हम उसे समझेंगे. कि वो आतंकवादी आतंकवादियों का समर्थक है।. तो अभय सबको पाकिस्तान आतंकवाद प्रोड्यूस. कर रहा है और टर्की या अज़रान साथ दे रहे. हैं। तो एक तरीके से वो भी आतंकवाद का ही. पालन पोषण कर रहे हैं। लेकिन हिंदुस्तान.
में जब कोई इंसान टर्की की मुखालफत करता. है तो उसको एक मुस्लिम वर्ग है जो गालियां. देने लगा कि अरे आप लोग बॉयकॉट टर्की से. प्यार हमें है जबकि वो देख रहे हैं कि. टर्की आतंकवाद का समर्थन कर रहा है तो. क्या बॉयकॉट टर्की का आप लोग भी अपील. करेंगे करी हमने हमने बिल्कुल पूरे तमाम. सब ने इसकी करी है मजम्मत कि आप टर्की ने. और अज़हर भाईजान ने ये अच्छा नहीं किया. देखिए उनके अपने पॉलिटिकल मसले जो भी. होंगे हमें नहीं मालूम है उनके क्या. मामलात है लेकिन आज की स्थिति में जिस तरह. से अगर वो पाकिस्तान का साथ दिया जिस तरह.
से तो वो आतंकवाद के समर्थक हैं। हमने साफ. तौर पे कहा है और हम ये कह रहे हैं कि अब. हम सबको ये फतवा इसीलिए जारी करके ऐलान. किया गया है कि हम एकजुट होकर इसका हम. इसके लिए मुकाबला करेंगे और हमने. पाकिस्तान के तमाम उलमा को ये बात कर दी. है कि अब ये आतंकवाद जो अब वहां पर जो. वहां पल रहा है जिसको वो जिनको समर्थन. दिया जा रहा है। जिनको ट्रेनिंग स्कैम बने. हुए हैं। अब उनको वह हटाने होंगे। या तो. इस्लाम को मानना होगा या आपको आतंकवाद को.
मानना होगा। अब ये दोनों चीजें साथ नहीं. चल सकती। या तो आतंकवाद होगा या इस्लाम. होगा। तो इसीलिए हमने बात वाज़ तौर पर ये. फतवा जारी हो चुका है। क्या भारत के. मस्जिदों में भारत के मदरसों में अब जो. बच्चे हैं या जो लोग इबादत करने आते हैं. उनको एजुकेशन के बाद या नमाज के बाद यह. बात बता देनी चाहिए कि आप लोग भी यह बात. समझे कि इस्लाम और आतंकवाद का कनेक्शन. नहीं है ताकि क्योंकि जिनको बहकाया जाता.
है उनको भी धर्म के नाम पर बहकाया जाता. है। चार फोटो दिखाई जाती हैं और वो. धार्मिक लोग ही होते हैं। उनकी धार्मिक. भावना प्रबल होती है। कोई एक कमजोरी को. पकड़ कर रेडिक्लाइज किया जाता है। आपको. लगता है क्या एक अच्छा स्टेप हो सकता है. कि अगर स्कूल और मदरसों में उन्हें बताया. जाए कि इस्लाम का नाम मारना नहीं है।. बचाना है और जो भी आपको इस्लाम के नाम पर. बहका मारने की बात कर रहा है वो इस्लामी. नहीं है। जो मदरसों के अंदर पढ़ाया जाता. है आपकी नॉलेज के लिए उसमें आतंकवाद है ही. नहीं। वो इस्लाम है। वो इस्लाम बचाने का.
इस्लाम है। ये मोहम्मद सल्ला वसल्लम पूरे. रहमतुल आलमीन है। वो वो पढ़ाया जाता है।. तो ये आतंकवाद का जो शब्द है वो कहीं. हमारे कुरान के अंदर कहीं हदीसों में कहीं. से आप साबित नहीं कर सकते। नहीं मैं ये कह. रहा हूं इसको एक एक और ऐड ऑन करना कि जो. आतंकवादी मार रहे हैं। ये इस्लामिक नहीं. है। ये ये इस्लामिक कैसे हो सकते हैं? ये. सर बुरहान वाणी का जनाजा निकाल ये सब लोग. पूरा कश्मीर उस जनाजे में था। हमने इस देश. में कितने सारे आतंकवादियों को देखा है कि. जब वो अपने यहां जाते हैं उनकी जनाजा.
निकलता है तो वो भीड़ आती है तो फिर वो. भीड़ कौन सी है? देखिए कश्मीर के जो. मामलात में उनके समर्थन में जो लोग आए वो. सेपरेटिस्ट थे या क्या मामलात थे उनके. लेकिन पूरी दुनिया के अंदर इस्लाम और. आतंकवाद दोनों अपोजिट हैं। आतंकवाद. आतंकवाद है। इस्लाम इस्लाम है। पाकिस्तान. में जिन आतंकवादियों को मारा गया था उनके. पीछे फौज खड़ी थी। हमने पाकिस्तान के लिए. हमने पाकिस्तान के झंडे देखे हैं जो. आतंकवादियों की कब्र पर पहनाए गए। इसीलिए.
हमने ये फतवा जारी किया जब वो फोटो जब. हमने देखा था कि आतंकवादी की जनाजे की. नमाज और आतंकवादी सरगना पढ़ रहा है और. आर्मी की फौज पीछे पढ़ नमाज पढ़ रही है. तभी तो ये फतवा जारी किया था मुल्क का. झंडा लगा इसीलिए हमने कहा था कि ये. आतंकवादियों के साथ जिस तरह का व्यवहार. पाकिस्तान कर रहा है इसीलिए भारत ने ये. फतवा जारी किया आपको क्या लगता है इसके. बाद क्या स्टेप होना चाहिए ताकि यूनिटी जो. है वापस आ जाए हालांकि कोशिशें सरकार ने. भी खूब की है। अच्छा मैसेज था। कर्नल. सोफिया कुरैशी को सामने लाना। अच्छा मैसेज.
था। डेलीगेशन जो अपोजिशन का शामिल किया. गया जिसमें उमर अब्दुल्लाह या फिर आपके. ओवैसी साहब हैं। शशि थरूर इन लोग को शामिल. करना। खासतौर पर उमर अब्दुल्लाह और ओवैसी. जैसे लोगों का आना बड़ा पॉजिटिव मैसेज. मुझे लग रहा था। आप कैसे देख रहे हैं? जिस. तरह से स्टैंड ओवैसी साहब या फिर उमर. अब्दुल्ला ने लिया। देखिए यह दरअसल क्या. है कि पहली मर्तबा ऐसा हुआ कि भारत ने. तमाम यह मेंबर पार्लियामेंट्स का एक. डेलीगेशन पूरे दुनिया में भेजा है। यह. बताने के लिए भेजा है कि भारत आतंकवाद से.
बहुत समय से जूझ रहा है और इस आतंकवाद को. खत्म करने का अब समय आ गया है क्योंकि. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने एक बात. साफ तौर पे कही थी कि मैं उस देश के साथ. जब तक बात नहीं करूंगा जब तक वो देश. आतंकवाद को हमेशा के लिए खत्म नहीं कर. देता है। अब भारत एक ऐसा देश है जब. यूनाइटेड नेशन में जाता है जिसने हमेशा. कहा कि आतंकवाद पूरे विश्व के लिए खतरा. है। तो भारत आज से नहीं लगातार इस आतंकवाद.
से जूझ रहा है। तो अब हमें ये वक्त आ गया. है कि हम सबको मिलकर इस हमेशा के लिए इस. आतंकवाद और आतंकवादियों को खत्म करने की. जरूरत है। और खासतौर पर पाकिस्तान को जिस. तरह से उसने वहां संरक्षण दिए हुए हैं।. अभी बहुत सारे कैंप्स बाकी हैं। ट्रेनिंग. स्कप बाकी हैं। आपने जो सवाल किया कि वो. इस्लाम के नाम पर हूरों के नाम पर वो अपने. आप को फिदायन हमले करते हैं और मारते हैं।. मुझे लगता है माफ़ कीजिएगा ऐसा मुझे लगता. नहीं वो शायद गुमराह लोग हो सकते हैं वो. लोग क्योंकि इस्लाम गुमराह हैं वो लोग.
जिनको ये बात इस्लाम इजाजत ही नहीं देता।. एक इंसान का कत्ल पूरी इंसानियत का कत्ल. है। इस्लाम इजाजत देता ही नहीं है किसी को. मारने की। तो ये कैसे पॉसिबल हो सकता है? कैसे मुमकिन है ये बात? तो इसीलिए हम साफ. तौर पर ये बात अब हमारी जिम्मेदारी इमामों. की जिम्मेदारी है जो उसको हमने ले लिया है. और हम उसको हर तरह से अपनी मस्जिदों से. तमाम अपने मदरसों से इस बात के लिए तय. करेंगे कि अब इसके विरोध में हमको आगे आना.
होगा क्योंकि पहले लोग डर के मारे आते. नहीं थे। ये फतवा अब तक क्यों नहीं आया? ये फतवा क्यों अब तक पहले भी तो कुरान था।. पहले भी इस्लाम था तो पहले भी आ सकता था।. तो क्यों? क्योंकि मुझे लगता है कि अब ये. वक्त आ गया है कि हम सब स्टैंड लेंगे और. आतंकवाद और आतंकवादियों के विरोध में और. पाकिस्तान के विरोध में हमको खुलकर आना. होगा। भारत का एक-एक मुसलमान पाकिस्तान के. हक में कभी नहीं रहता। लेकिन खामोशी उसकी. ये ठीक नहीं थी। अब हम खुल के आ चुके हैं।. अच्छा सवाल दिया मुझे। इस देश में जितने.
बड़े सितारे हैं इस देश में कई ऐसे लोग. हैं। चलिए मैं स्पेसिफिक आता हूं जो आपने. खामोशी की बात की। अगर इस देश का कोई. मुसलमान खामोश रहा इस पूरे घटनाक्रम में. और उसे लोगों ने पिंच किया कि तुम क्यों. नहीं बोल रहे हो? क्या इस वक्त खामोशी. नाजायज थी या बोलना चाहिए था? क्योंकि. खामोशी भी कई बार संदेह पैदा करती है कि. आप क्यों नहीं बोल रहे हो? यकीनत करना भी. कई बार जरूरी होता है। देशभक्ति दिखाना. जरूरी नहीं है। लेकिन कुछ मसलों पर देश के. साथ खड़ा होना भी जरूरी होता है। देखिए ये.
यही तो हम बात कर रहे हैं कि इस पहलगाम के. बाद से कोई भी भारतीय हम हिंदू मुसलमान की. बात नहीं कर रहे। यहां सब भारतीय बन गए. थे। सब एक होकर इसका मुकाबला किया है।. बहुत सारी जगहों से चूंकि पहले मस्जिदों. से इतना ऐलान नहीं हुआ। इस बार 5.5 लाख. मस्जिदों से हर जुम्मे के दिन आतंकवाद के. खिलाफ और पाकिस्तान के विरोध में नारे. लगाए गए। ये कभी नहीं हुआ। ये इस बार हुआ।. तो मुझे लगता है कि लोगों के अंदर एक. हिम्मत आ गई है और हमने जो हिम्मत दिखाई.
है फतवा जारी करके ये कोई छोटी बात नहीं. है। ये चैलेंज है हमारा पाकिस्तान के लिए. तमाम उन इस्लामिक देशों के लिए। भारत तो. इस्लामिक देश नहीं है। लेकिन उसके बावजूद. भारत ने ये फतवा जारी किया है।. आतंकवादियों के विरोध में किया है। उनके. तो ये बहुत बड़ी बात हो गई है। तो क्या. आपको लगता है कि ये जो फतवा आपने जारी. किया जिसमें आपने कहा कि प्रॉफेट मोहम्मद. का नाम आतंकवादी संगठनों के नाम पर ना ले. नहीं रख सकते। ये आपको लगता है पाकिस्तान. में मौलानाओं की हैसियत होगी कि इस फतवे. को वो मानना पड़ेगा। यह कुरान है। यह.
शरीयत है। यह कोई मेरा फत फतवा मेरा नहीं. है। यह कुरान की रोशनी में है। सुन्नत की. रोशनी में उनको फॉलो करना पड़ेगा। मानना. पड़ेगा ये। सर मुझे मुझे नहीं लगता कि. टर्की, पाकिस्तान, अज़रहर भाईजान जैसे जो. इस्लामिक देश हैं वो प्रोफेट मोहम्मद को. लेकर भी इतने वफादार हैं कि वो आतंकवादी. संगठनों के नाम रखने पर विरोध जता दें कि. उससे अल्लाह की बदनामी होती है। यकी अभी. भी लगता है उनकी हैसियत नहीं है। मुझे. मुझे मुझे भरोसा है कि भारत ने इसकी. शुरुआत करी है। अब आहिस्ता-आहिस्ता अब.
वहां के लोगों में भी हिम्मत है। आपको. लगता है कि इससे पाकिस्तान के मौलानाओं का. जमीर जगेगा। यकीनन जगेगा। क्योंकि कुरान. है नहीं तो अल्लाह के यहां उनकी पकड़. होगी। ये करना पड़ेगा। ये कुरान है। कुरान. में अल्लाह ताला ने जो फरमाया उसको उसका. उसका रसूल सल्ला वसल्लम का किरदार पूरा. शरीयत की रोशनी में कुरान ने क्या अल्लाह. ने क्या फरमाया उसकी रोशनी में तो फिर फिर. तो मौलवी फर्जी होंगे जो पाकिस्तान के जो. आतंकवादियों के जनाजे में बैठ के कलमा. पढ़ेंगे यकीनन नहीं पढ़ सकते और उनको दफन. भी नहीं कर सकते यकीनन तो वो तो अल्लाह के.
मानने वाले मौलवी नहीं होंगे। उनको मानना. पड़ेगा। अगर वो नहीं मानेंगे तो वो इस्लाम. से खारिज हो जाएंगे क्योंकि कुरान की की. रोशनी में है फतवा। मैं अभी भी चैलेंज कर. रहा हूं। मैं आपसे भी चैलेंज कर रहा हूं।. मैं आपने कहा ना आपको लगता है आपको उम्मीद. है। मैं नाउद हूं उन लोगों से। नहीं मैं. पूरा उम्मीद हूं। मैं ना उम्मीद मुझे नहीं. लगता कि पाकिस्तान इस्लाम इस्लाम है। मुझे. लगता है कि पाकिस्तान टर्की है। वो अल्लाह. को लेकर भी ईमानदार है। अगर होते तो इन. आतंकवादी संगठनों पहली बात इन आतंकवादियों. को जगह नहीं मिलती। जगह मस्जिद के अंदर.
बिल्कुल नहीं मिलती। और तीसरा इनके नामों. में आप अल्लाह का इस्तेमाल नहीं होता। ये. हिजबुल मुजाहिद्दीन जैश मोहम्मद लश्कर. तैबा ऐसे आतंकवादी संगठन अल्लाह के नाम पर. ये तो अल्लाह को बदनाम करना हो गया। एक. साबित नहीं कर सकते इस्लाम की तारीख में. कि किसी इनोसेंट को बम लगा के मार देना।. कहां एक साबित नहीं कर सकते आप पूरे कुरान. के अंदर? यह अल्लाह मियां 72 हुर. आतंकवादियों को देते हैं। यह सब फर्जी. इनहीं के नाम पर जाते हैं। यह सब फर्जी.
कहानी बनाएंगे। गला काटेंगे 72 हूर मिल. जाएंगे। ये सब गुमराह करके फर्जी बातें. करके लोगों को गुमराह किया जाए। मुझे नहीं. लगता कोई भगवान ऐसा होगा जो 72 कहेगा 72. हूर देंगे अगर तुम मार के आओगे। ये सब. फर्जी बातें उन लोगों को गुमराह किया जाए।. तो फिर वो मान कैसे जाते हैं? यकीनन मुझे. लगता है कि गुमराह हैं। हो सकता है कि. उनकी क्या मजबूरी है? गरीबी, बेरोजगारी या. उनके क्या हालात हैं? या किन बातों से वो. उनसे मुतासिर होकर इस तरह की बात फिर इस. देश के गरीब मुसलमान को समझाओगे कैसे आप. क्योंकि हमने देखा एक लड़की अभी भारत में. आई जिसने पाकिस्तान जिंदाबाद कर दिया वो.
बच गई उसप कोर्ट कचहरी का मामला नहीं हुआ. लेकिन पाकिस्तान जिंदाबाद करना ये जानते. हुए पहलगाम में जो कुछ हुआ हम ये आपकी नजर. में देशद्रोह है फिर यकीनन देशद्रोह है ना. मैं तो इसे आतंकवाद वो मैं उसको भी. आतंकवादी की उसमें देखता हूं उस लड़की को. यकीनन जो कोई भी आज के वक्त में जो. पाकिस्तान हमारे साथ हमारे देश के साथ जिस. तरह का व्यवहार कर रहा है, आतंकवाद फैला. रहा है, इनोसेंट लोगों को मरवा रहा है, उस.
पर भी पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे कैसे. लगाए जा सकते हैं? आपको बताएं मुंबई के. अंदर पुणे के अंदर जगह-जगह पाकिस्तान के. जो, जो जो उनका झंडा था उस पर लोगों ने. चलके अपना सर उसके भी वीडियोस आए हैं। कुछ. मुस्लिम महिलाएं थी जिन्हें उस बात से. ऐतराज था कि पाकिस्तान के झंडे को आप उससे. पैर क्यों रख रहे हो? या उस पे चल के नोच. क्यों रहे हो? और कुछ मुस्लिम महिलाओं ने. विरोध किया। दरअसल उसमें दो चीजें थी जो. समझने की हैं। उसमें किसी ने एक तो. पाकिस्तान का झंडा था और एक सऊदी अरब का.
झंडा था जिस पे ला इलाहा इल्लल्लाह. मोहम्मदुर रसूल्लाह लिखा था। तो उन्होंने. पाकिस्तान नाजायज। देखिए वो जो झंडा था जो. जिस पे कलमा लिखा हुआ था। दो झंडे देखिए. हमने भी देखे थे। वो वीडियोस आई थी। लेकिन. जिन औरतों ने उठाया वो भी हमने देखा कि. उन्होंने पाकिस्तान वाला चांद तारा नहीं. उठाया उसको पैरों की तरह रौंदा और जो कलमा. वाला था उसकोकि उठायाकि वो कलमा था वो. हमारे. लिए. सबसे अव्वल दर्जे में है तो इसीलिए हम.
उसकी बेहुरमती कोई भी इस बर्दाश्त नहीं कर. सकता इसलिए उसको उठाया गया। अच्छा अगर. पाकिस्तान ये जो घटना हुई देखिए हम भी. हिंदुस्तान पाकिस्तान एकता की बात करते. थे। बड़े लंबे समय तक हिंदुस्तान ने की भी. हमारे अलग-अलग प्रधानमंत्री ने की। लेकिन. इस बार जो कुछ हुआ उसके बाद हमारा रुख. बदला और मौजूदा दौर में अगर कोई. हिंदुस्तानी पाकिस्तान को क्रिटिसाइज कर. रहा है। पाकिस्तान को एक्सपोज कर रहा है. और इससे अगर किसी मुसलमान के पेट में दर्द. हो रहा है। आप उस व्यक्ति से क्या कहेंगे?
क्योंकि आप इमाम साहब हैं। आपको सुनेंगे. लोग। दरअसल मुझे मैंने कहा ना कि अगर ऐसा. कोई भी है जो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे. लगा रहा है तो मुझे लगता है उसे पाकिस्तान. चले जाना चाहिए। फिर उसमें भारत में रहने. की उसके लिए जगह नहीं है।. हां मतलब अगर इतनी हमदर्दी की यहां लोगों. को मारने के बाद भी आप हां, अगर उनका झंडे. से प्रेम है या पाकिस्तान जिंदाबाद के. नारे लगाने हैं, तो आपको पाकिस्तान चला. जाना चाहिए। और जो पाकिस्तानी प्रेम. दिखाना चाहता है उसके लिए पहले ही फौरन वो.
जाए यहां से और उसको यहां रहने की जरूरत. है। इस्लाम में कट्टरता है सर. या बड़ा दिल है? नहीं कट्टरता तो है ही. नहीं।. कटरता लफ्ज इस्लाम के साथ जुड़ता ही नहीं. है। आप प्यार का, मोहब्बत का, प्रेम का, करुणा का, दया का धर्म है ये। यहां माफ. करने का है। यहां रहम करने का है। यहां. बचाने का है। यहां प्यार का, प्रेम का.
धर्म है ये। कहां पर आया? ये कट्टरता की. बात है। एक 19 या 20 22 साल की लड़की उसकी. उम्र छोड़ने शर्मिष्ठा नाम है। वो. पाकिस्तान को क्रिटिसाइज कर रही थी। हम्।. उसका वीडियो सोशल मीडिया पर आया। उसकी. भाषा मुझे बिलकुल पसंद नहीं थी। गाली गलौज. कर रही थी। मैंने उसका विरोध किया। उसकी. भाषा से मुझे ऐतराज है। उसके लफ्जों से. ऐतराज है। पाकिस्तान को वो विरोध करती जा. रही थी। हो सकता है सोशल मीडिया पर फॉलोअर. के लिए विरोध कर रही हो वो। मुझे उसके. इंटेंशंस भी नहीं. पता। फिर बोलते बोलते कुछ लोगों ने उसके.
और उसमें आग में घी डालने का काम किया। और. बोलो और बोलो। जितनी गंदी भाषा बोल सकते. हैं बोलो। बोलते बोलते उसने प्रॉफेट. मोहम्मद पर टिप्पणी कर दी। वो टिप्पणी जो. स्वीकार्य नहीं थी जिसका विरोध हुआ। फिर. उसने माफी मांगी। सोशल मीडिया से वीडियो. डिलीट. किया और वो सिर्फ अभी 20 22 साल की लड़की. है। माफी मांग चुकी है। उसने कहा कि मेरे. इंटेंशन पाकिस्तान को सुनाने के थे।. गालियां उनको देने के थे। बोलते बोलते बात.
एक निकली जिसके लिए मैं ऐतराज करती हूं।. हिंदुस्तान मुसलमानों को या प्रॉफेट. मोहम्मद को बोलने का मेरा मन नहीं था।. उसके बाद से सोशल मीडिया पर पूरा एक. नैरेटिव चल रहा है। उसकी अश्लील फोटो, उसकी फोटो को नंगा करके, कपड़े उतार के, उसके लिए हर तरह के शब्दों का इस्तेमाल. करके फिर वो एक नारा जो नपुर शर्मा के दौर. में लगा था। गुस्ताख नबी की एक ही. सजा सर कलम करने की बात। और अब ममता. बनर्जी की सरकार ने उनकी पुलिस ने 1500. कि.मी. का सफर करके उसे दिल्ली से.
गिरफ्तार कर लिया। गुड़गांव से गिरफ्तार. कर लिया।. अब एक सवाल मेरे मन में आ रहा है जो मैंने. आपसे पिछला सवाल पूछा था कि क्या इस्लाम. माफी पीस है या फिर कट्टर धर्म है? आपने. कहा पीस माफ करने का शर्मिष्ठा को माफ. करना चाहिए था माफी मांगने के बाद उस 22. साल की 20 साल की लड़की को या फिर सजा. देनी चाहिए थी। मैं आपको एक वाक्या सुनाता. हूं। मोहम्मद साहब सल्लल्लाहु अलह वसल्लम. का। मोहम्मद सल्लल्लाह वसल्लम पीस बी अपॉन. हिम। वो अक्सर अपने एक जगह से गुजरते थे।.
जगह जाने के लिए रोजमर्रा तो एक बुढ़िया का. यह वाकया है और वह बुढ़िया जो थी वो. रसूल्लाह सल्ला वसल्लम पर ऊपर से कूड़ा. फेंकती थी जब वहां से गुजरते थे रोज. गुजरते थे रोज कूड़ा फेंकते थे तो उनके साथ. के जो उनके जो कंपैनियंस थे वो कहते थे कि. अगर आप हुकुम करें तो हम इसके सर कलम कर. दें उन्होंने कहा नहीं उसको पता नहीं है. उसको पता नहीं तो इस्लाम में होता उसके. बाद उसके. बाद रोज का यह मामूल कहा लेकिन एक दिन जब.
वो कूड़ा फेंकते जब जा रहे थे रसूल्लाह. सल्लल्ला वसल्लम गुजर रहे थे तो उनके ऊपर. कूड़ा जब नहीं फेंका गया तो उन्होंने पूछा. कि बुढ़िया कहां है जो अम्मा कहां है जो. हम पर कूड़ा फेंकती थी तो कहने लगे वो. बीमार है तो आप का किरदार भी मैं बताना. चाहता हूं कि रसूल्लाह सल्ला वसल्लम आप. उसके घर गए और उसकी तारदारी मतलब उनकी. तबीयत पूछी उनसे कहा कि मैं तुम्हें देखने. आया हूं मुझे आज पता चला कि आपकी तबीयत.
ठीक ठीक नहीं है। तो इस्लाम दया का अब. देखिए कितनी खूबसूरत बातें आपने कही। जो. रसूल्लाह सल्ला वसल्लम ने तो उनको जाके. उनकी तमारदारी की और उसने कहा कि मुझे. नहीं मालूम था। उसने अपनी गलती का एहसास. किया। वो बहुत उस बात से उनको शर्म महसूस. हुई कि मैं रोज इन पे कूड़ा फेंकती थी। ये. आज मेरी तबीयत के जा पूछने के लिए आए हैं।. तो मकसद कहने का ये है कि ये किरदार है. रसूल्लाह सल्लल्ला वसल्लम का। अगर उस. लड़की ने रसूल्लाह सल्ला वसल्लम पे अगर.
कुछ कह भी दिया था और कहने के बाद अगर उस. लड़की ने माफी मांग भी ली थी तो मुझे लगता. है कि. माफ करना चाहिए क्योंकि उसने अपने आप को. ये जाहिर भी तो किया कि मुझसे गलती से. निकल गया तो माफ माफी जो है वो सबसे. ज्यादा बड़ी इबादत है और माफ करने वाला. बड़ा ही होता है मेरे हमें माफ कर दिया. अगर उससे गलती हो गई उसने उसने तस्लीम कर. लिया तो माफी अब मेरे मन में यही सवाल आता. है आपने आपने प्रॉफेट मोहम्मद साहब का. जिक्र किया। आपने किस्सा सुनाया हमें कि.
एक कूड़ा डालती थी महिला। अब उस कूड़ा. डालने वाले दौर से लेकर आज के दौर में मैं. प्रॉफेट मोहम्मद साहब को जब उनकी बातों को. सुनता हूं तो मुझे पीस ह्यूमैनिटी की. बातें समझ में आती हैं। मुझे लगता है कि. वो भी इंसानियत के मुखर थे। माफी देने के. हकदार थे और चाहते थे कि लोग खुश रहे।. सबका भला हो। सबका खुशी ही चलता रहे। वो. इसीलिए आए थे। लेकिन उनका उनका लकाब ही है. रहमतुल आलमीन। पूरी रहमत बनकर आए थे पूरी. कायनात के तो उनके जो मानने वाले हैं वह. गला काटने काहे तुले रहते थे? तब भी गला. काटने तुले थे। आज भी गला काटने गुमराह.
लोग हैं। वह अगर इस्लाम के मानने वाले. मोहम्मद सल्ला वसल्लम को के की पैरवी करने. वाले अगर लोग होते तो ये ऐसे हो ही नहीं. सकते थे। ऐसा हो ही नहीं सकता। तो वो जो. 22 साल की लड़की गला काटने की बात कर रहे. हैं वो इस्लामिक लोग हैं। यकीनन नहीं करना. चाहिए। कि जब उसने माफी मांग ली और. माफ़ कर दिया गया है तो फिर हम मुझे लगता. है कि अब उसको इस पर ज्यादा अगर मुसलमानों. को ज्यादा चाहिए. कि अगर उस बच्ची को अगर उसको जो रसूल्लाह.
सल्ला वसल्लम मोहम्मद साहब की जो जीवनी. है उसको बच्ची को किताब पेश कर दी जाए।. बच्ची को कहा जाए कि देखो अगर आपने उनके. बारे में ऐसा बोला भी है तो ये बच्ची आप. इसको पढ़िए उनके जीवन को और उसके बाद फिर. आप तय करिए तो हमारा किरदार उसको बताने के. लिए होना चाहिए माफ करने के लिए होना. चाहिए सर कलम करने के लिए मुझे लगता है सर. आप लोगों को भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए आप. लोग के बंगाल में काफी लोग हैं यकीनन और.
एक 20 22 साल की लड़की को उठा के बंगाल की. जेल में डाल दिया गया उसके हालांकि उसके. वकील साहब जो है वो खुद मुसलमान है मुझे. इस बारे में जब पता पता लगा वो उसका केस. लड़ रहे हैं और मुझे लगता है इस्लाम का यह. भी एक चेहरा जो लोगों को देखना चाहिए। वही. हम बताना चाह रहे हैं कि बहुत सारी चीजें. ऐसी इस समय हो रही हैं कि जो. हमें करनी चाहिए। मिसाल के तौर पर अब ये. बच्ची का वाकया हुआ। अब इस बच्ची के वाक्य. में हमें अपना किरदार पेश करना चाहिए।. किरदार ये है कि एक वकील है जो मुसलमान है.
जो उसका केस लड़ रहा है। ये किरदार है। और. ये किरदार है कि हम उसे माफ़ करें। उसके. साथ जब उससे गलती हो गई उसने माफी मांग ली. इसको खत्म कर देना नहीं तो मुझे लगता है. इमाम साहब इसकी एक पहल आप करेंगे तो शायद. और सद्भावना जाएगी अगर आप उसको लेकर बंगाल. के इमामों से कहते हैं या आप लोग. इनिशिएटिव लेते हैं क्योंकि जो मोटा-मोटा. परसेप्शन आया वो ये है कि एक वोट बैंक को. खुश करने के लिए पॉलिटिकल मूव ले लिया गया. नहीं आमतौर पर क्या हो रहा है अगर आप लोग. इनिशिएटिव लेंगे और एक 22 साल की बच्ची को. सामने लाकर आप कहेंगे कि ठीक है हमने माफ. किया और उसको एक मैसेज आए उसकी बड़ी लंबी.
जिंदगी हम आज आपके पॉडकास्ट है हम उनको. माफ करते हैं इस्लाम माफ़ करने का नाम है।. अगर उस बच्ची ने गलती कर दी। अब गलती करके. उसने तस्लीम कर लिया। मुझसे गलती हो गई तो. मैं माफ़ कर रहा हूं। चीफ इमाम हूं। मैं. माफ़ करता हूं. उसको। इस्लाम माफ़ करने का नाम. है। मुझे उम्मीद है कि आपकी बात जो आपके. फॉलोअर्स हैं वो भी सुनेंगे। यकीनन उनको. भी सुनना चाहिए और इस पर जाना चाहिए। सर. अब क्योंकि एक त्यौहार आ रहा है। पिछली.
बार हम ईद पर मिले थे। अब बकरी ईद आ गई. है। मुझे एक तो पहले समझाइए आप कि ईद और. बकरी ईद में अंतर क्या है? देखिए बहुत. बहुत अच्छी सवाल आपने किया है जो मुझे. लगता है कि आज इसकी जरूरत भी है। ईद उलफित. है उसका नाम जो पहली ईद थी जिस पर हम पहली. मुलाकात आपसे हुई थी जो पडकास्ट किया था. जो रमजान के बाद आती है जिसको मीठी ईद. हमारे भारत में कह देते हैं ईद उलफितर. उसका नाम है। हम ईद के माने खुशियों के. होते हैं। हम इसी तरह से इसका नाम बकरा ईद.
नहीं है। ये बकरे की ईद नहीं है। लेकिन. भारत के लोगों ने इसे बकरा का ईद बना. दिया। इसका नाम है ईद उल अहा। ईदुल अहा जो. है यह सैक्रिफाइस मतलब बलिदान त्याग का. पर्व है। यह त्याग वो हजरत इब्राहिम की एक. सुन्नत है जो कि जो प्रॉफेट थे हजरत. इब्राहिम खलीलुल्लाह इब्राहिम खलीला जो. प्रॉफेट थे उनको सपने में जोकि उनके बहुत. समय के बाद एक बच्चा पैदा होता है जिसका. नाम इस्माइल है अब वो बच्चा बड़ा हो गया.
है। तो जब वो बच्चा बड़ा हो गया है तो. हजरत इब्राहिम खलीला को ईश्वर का खुदा का. जो रात को सपने में ये आता है कि तुम अपने. बच्चे की बलि दे दो और लगातार तीन दिन तक. इस तरह से उनको सपना आता है तो उसके लिए. उन्होंने कहा कि हजरत इब्राहिम खल्ला ने. कहा कि ठीक है ये तुमने दिया है मुझे ये. बच्चा अगर तुम्हारे नाम पे मुझे इसकी. कुर्बानी करनी होगी तो मैं इसे कुर्बान. करने के लिए तैयार हूं तो वो अपने बच्चे. को वो लेके चले गए हजरत इस्माइल सलाम को.
और चाकू लेके गए ये लेके गए उसको कुर्बान. कर देंगे लेकिन वो एक जिस तरह से वो लेके. गए और उसके बाद जब वो उस पर छुरी चलाने. लगे बच्चे के ऊपर तो वहां पर ईश्वर ने कहा. कि तुम्हारी ये जो बलिदान है जो तुम्हारा. त्याग है जो तुम्हारी तपस्या है जो ये. हमने कुबूल करी तो वो बच्चे की जगह एक. मेढा आ गया जिसको जिबा किया गया तो एक. परंपरा है इसे सुन्नते इब्राहिम कहते इस.
इस पर्व को इस त्यौहार को जिसका नाम ईद उल. अहा है। यह समर्पण है। यह त्याग है ईश्वर. की ईश्वर के के लिए जिसमें हम अपने आप को. ये कुर्बानी करते हैं। लेकिन इस बात पर आज. मैं आपके स्पॉटकास्ट से एक बात बता देना. चाहता हूं और बताना ये चाहता हूं कि लोगों. को सही मायने में कुर्बानी का मालूम नहीं. है। आज जिस तरह की कुर्बानी की जा रही है।. कुर्बानी देना यह आपका अपना जाती मामला. है। इसमें आप कुर्बानी कर रहे हैं। ईश्वर.
के नाम पे कर रहे हैं। ईश्वर को राजी करने. के लिए कर रहे हैं। करिए। लेकिन दूसरों को. तकलीफ दे कि आप नहीं कर सकते। अगर आपका. पड़ोसी हिंदू है। अभी मैं बेंगलुरु गया. था। चार दिन मैं बेंगलुरु में था। तो वहां. जिनके मैं गया था जयनगर के अंदर वो बहुत. पाश इलाका है उनके घर मेरे जिनके अजीज के. घर तो वो मुसलमान है तो उन्होंने कहा कि. जी हमने बकरे आने वाले हैं और हम यहां. बकरे लाएंगे फिर हम उसकी कुर्बानियां.
करेंगे तो मैंने कहा यहां मुसलमान कितने. हैं? उसने कहा एक भी नहीं है। एक पड़ोसी. उसका शर्मा जी हैं। एक पड़ोसी जैन साहब. हैं। तो मैंने कहा कि ये तो ये तो तुम. बहुत अन्याय कर रहे हो। ये तुम्हारी. कुर्बानी हो ही नहीं सकती। क्योंकि दूसरों. को तकलीफ देके नेबर आपका पड़ोसी अगर उसे. तकलीफ पहुंच रही है तो ये कैसी कुर्बानी. है? तो उस बच्चे ने मेरी बात को माना।. उसने कहा इमाम साहब आप जो कहेंगे हम वो. करेंगे। मैंने कहा आज से ये तय कर लो कि. ये सारे जहां आपके पड़ोसी जो नेबर्स हैं. वो जैन हैं हिंदू हैं उनको तकलीफ.
पहुंचेगी। इसलिए कुर्बानी आप कहीं और जाके. करेंगे। मतलब यहां नहीं करेंगे। तो मकसद. कहने का ये है कि दूसरों को तकलीफ नहीं. है। मेरी आस्था है ना उसकी आस्था थोड़ी. है। अगर किसी को तकलीफ पहुंच रही है तो. मेरी कुर्बानी से तो ये कुर्बानी नहीं हो. सकती है। तो कुर्बानी हमें वो करनी है कि. जिससे कि अल्लाह राजी हो। ये अल्लाह की. रजा के लिए आज लाख लाख दो लाख 5-पंच लाख. रुपए के बकरे खरीदे जाते हैं। ये सिर्फ. दिखावा ये दिखावा ईश्वर के सामने दिखावा. नहीं चलता। इसीलिए हमने कहा है कि कोई भी.
अभी रमजान अभी बकरा ईद मतलब ईद उल अहा आने. वाली है और मैं तमाम इस पडकास्ट के माध्यम. से तमाम उन मुसलमानों को ये भी बताना. चाहता हूं कि कुर्बानी करने का एक तरीका. है एक नियम है उसको फॉलो करना चाहिए आपने. पड़ोसी का ख्याल करना है आपने कोई भी. जानवर अगर आप करना चाहते हैं बकरा करना. चाहते हैं या या बड़े जानवर में भैंस करना. चाहते हैं जिसकी इजाजत है उस जानवर को. करिए जिस जिस जानवर की भारत में इजाजत. इजाजत नहीं है। उसकी तो कुर्बानी हो ही ना.
सकती। वो हराम है। तो इसलिए कुर्बानी करने. के नियम को फॉलो करें। जहां आपको एक जगह. दे दी गई है। स्लॉटर हाउस दिया है या कोई. एक जगह गवर्नमेंट ने सब सारी स्टेट ने दी. हुई है। आप वहां जाके कुर्बानी करें।. कुर्बानी के तरीके होते हैं कि जानवर को. कोई तकलीफ ना पहुंचे। उसका उसका उस कान से. उसको आंखों को ढकना है कि वो ना देखे उस. चीज को। तकलीफ ना पहुंचे। उसका जो खून है. वो गड्ढे में दबे। बाहर ना फैले, गंदगी ना. हो। इन सब चीजों का बहुत नियम है। इसलिए.
मैं सबसे कह रहा हूं कि गंदगी ना हो। इसका. ध्यान रहे। दूसरों को तकलीफ ना पहुंचे और. इसके अलावा कोई वीडियो ना बनाएं। पिछली. मर्तबा बहुत से लोगों ने जब कुर्बानी कर. रहे थे तो बहुत से बच्चों ने वीडियो बना. लिए थे और वो वीडियो बनाने के बाद वो. वायरल हो गए। तमाम पूरी दुनिया में जाते. हैं। तो मैं तमाम खासतौर पे इस पॉडकास्ट. से मुसलमानों को कहना चाहता हूं कि आप कोई. भी ऐसा काम ना करें। वीडियो बनाएं कि. जिससे दूसरों को तकलीफ पहुंचे। तो ये हम. इस्लाम राहत के लिए है। दूसरों को फायदा.
पहुंचाने के लिए है ना कि किसी को तकलीफ. देने के लिए। यह पर्व हमारे लिए है। इसको. हम मनाएं अच्छे से मनाएं। लेकिन दूसरों का. भी हमें ख्याल रखें। इसका हमें इसका ध्यान. रखना होगा। इस्लाम में जितने भी जैसे. इस्लाम सिया सुन्नी जितने भी हैं सभी बकरी. ईद मनाते हैं। यकीनन ये तो पर्व है।. सुन्नते इब्राहिम है। ये कुर्बानी का. त्याग का समर्पण का पर्व है। ये सब. कुर्बानियां करते हैं। लेकिन इस्लाम के. अंदर आपको समझने की जरूरत है। इस्लाम के. पांच स्तंभ हैं। हम पांच पिलर्स हैं। फाइव. पिलर्स हैं इस्लाम के अंदर। पहला शहादा.
मतलब जिसमें हम इकरार करते हैं कि एकम. ब्रह्मम द्वितीय ना एक ईश्वर है। उसके. अलावा कोई और नहीं है। दूसरा है नमाज। ये. फर्ज हैं। दूसरा रोजा जो फर्ज है। उसके. बाद जकात जो फर्ज है। हज जो फर्ज है। ये. सब उसी में इन फाइव पिलर्स में ही आते. हैं। लेकिन जो हज जो साहिब हैसियत है अगर. उसके पास इतना पैसा है कि उसके उसके हालात. बहुत अच्छे हैं तो वो हज पे जाएगा। उस पर. फर्ज है। जकात जिसके हालात अच्छे हैं वो.
दान करे। जकात दे। इस तरह से। तो इसी तरह. से ये कुर्बानी के भी मामले में अगर किसी. के पास साहिब हैसियत है उसके पास जानवर. खरीदने का है तो जानवर को लाए और उसकी. कुर्बानी कर अगर कोई गरीब मुसलमान है. जिसके पास पैसा नहीं है नहीं है तो उसकी. कुर्बानी का क्या होगा फिर नहीं उसकी. कुर्बानी का ये है कि उसके पास नहीं है तो. कोई बात नहीं है ये लाजिम और फर्ज में. नहीं है ये अगर उसको कंपशन नहीं है. कंपल्शन नहीं है कि जिसके पास पैसे हैं जो. साहिब हैसियत है वो कुर्बानी करेगा तो.
लेकिन उस कुर्बानी के गोश्त को उन गरीब. गरीबों तक पहुंचाना ये उसकी जिम्मेदारी. होगी। जो गरीब मुसलमान हैं जो जिनके पास. जो घर में खुशियां नहीं मना रहे तो उनको. कुर्बानी का जो गोश्त होता है वो गरीबों. में बांटा जाता है। तो ये इसके पीछे यही. एक क्वेश्चन मैं और इसे पूछ लेता हूं।. कुर्बानी में बकरे को काटना जरूरी है या. जैसे बहुत सारी हमारे हिंदुओं में प्रथाएं. बदली गई। हमारे यहां सती प्रथा थी और बहुत. सारी प्रथा थी जो टाइम के साथ इवॉल्व हो. गई। क्योंकि जिस जमाने में यह प्रथा शुरू. हुई होगी, वो जमाना वो दौर अलग रहा होगा।.
अब जमाना अब दौर अलग चल रहा है। ऐसे में. क्या कुर्बानी का जरिया यही एक है या इसके. अल्टरनेटिव और हो सकते हैं? नहीं कुर्बानी. जोकि उस ये सुन्नत इब्राहिम है और एक. परंपराएं चली आ रही हैं। ये मान्यताएं हैं. और ये परंपराएं हैं जो पहले से चली आ रही. हैं। ये इस्लाम का हिस्सा है। तो उसके. मुताबिक ये मान्यताएं हैं। लेकिन हां हमें. इसका ध्यान रखना जरूरी है कि हमें किसी को. तकलीफ ना पहुंचे। क्योंकि कुर्बानी यह.
आपके लिए और अल्लाह के बीच की है और इसमें. दिखावा किसी तरह से करना या दूसरों को. तकलीफ पहुंचे इसका ख्याल रखना चाहिए।. तरीका तो ये है कि जानवर को लेके पालना. चाहिए। जिस तरह से वो अपने बच्चे की. कुर्बानी देने के लिए हजरत इस्माइल. अलैहिस्सलाम की देने के लिए निकले थे. जिससे वो सबसे ज्यादा प्यार करते थे। तो. ये मकसद यहां यही है कि आपका जो त्याग है. आप अपने आपका जो समर्पण है उस उसके लिए ये. त्यौहार है तो मुझे लगता है मगर रीब के.
मौके पर हिंदू मुस्लिम तनाव ना हो जी इसके. लिए आप मुसलमानों को क्या संदेश देंगे? हां ये बहुत अच्छी बात है क्योंकि. मुसलमानों को अभी मैं देख रहा था कि बंबई. के अंदर एक सोसाइटी थी उस सोसाइटी में दो. या तीन घर मुसलमानों के थे एक ब्लॉक में. बाकी सब हिंदू थे तो वहां झगड़ा हो गया तो. मुझे लगता है कि उन मुसलमानों को ये चाहिए. था कि पहली बात तो उनको जब वो एक नियम है. कि वहां उनको जानवर को सोसाइटी में लाने. के लिए परमिशन लेनी चाहिए थी। अगर वो बकरे. लेके भी आए थे तो उनको प्यार से सॉर्ट आउट.
करना चाहिए था या उनको वहां से कहीं और. लेके जाना चाहिए था जहां उनका गांव था या. किसी मदरसों में या कहीं भी रख सकते थे जब. सोसाइटी में दूसरों को तकलीफ पहुंच रही है. झगड़ा पैदा हो रहा है तो ऐसी कुर्बानी. कैसे हो सकती है तो ये कुर्बानी के मामले. में हम मैं तमाम मुसलमानों से कहता हूं कि. दिल्ली में झगड़ा हो गया किसी के घर के. बाहर बकरे बांध दिए थे और वो उसकी वजह से. वो झगड़ा पैदा हो गया तो ये झगड़ा नहीं. होना चाहिए हमें ये मेरी आस्था है मैं. मुसलमान हूं हूं। मेरे लिए त्यौहार है।. दूसरे के लिए थोड़ी है। तो हम दूसरों को.
तकलीफ ना दें तो इसका हमें ख्याल रखना. होगा। किसी तरह से दिखावा ना किया जाए या. दूसरों को आप खासतौर पर अपने नेबर्स को को. तकलीफ देकर ये कुर्बानी नहीं हो सकती है।. कुर्बानी आप वो करिए कि जिससे ईश्वर राजी. हो। और ईश्वर को राजी करने के लिए आपको. इंसान को राजी करना होगा। आपको इसका ध्यान. रखना होगा कि हम सब यहां एक मिलके रहते. हैं कि दूसरों को ठेस ना पहुंचे। किसी को. तकलीफ ना पहुंचे। यह असली कुर्बानी में. शोरशराबा दिखावा सड़कों पर मांस का दिखना.
या वीडियोस का सामने आना ये सब ठीक है. बिल्कुल जायज नहीं है गलत है आजकि इस तरह. से चीजें अगर कहीं पर कोई गंदगी फैलती है. तो नुकसान सबको होगा बीमारी फैल जाएंगी तो. इसके लिए नियम अभी गवर्नमेंट ने भारत. सरकार ने हर राज्य ने नियम लागू कर दिए. हैं तो मैं तमाम मुसलमानों से कहना चाहता. हूं कि जहां जो जगहें दे दी गई स्लॉटरिंग. के लिए वो उसी नियम को पालन करें और किसी.
तरह से सड़कों पर इस तरह का कोई वाकया ना. करें कि जिससे कि किसी को तकलीफ पहुंचे।. कुर्बानी सर फिर मैं पूछ रहा हूं जैसे. हिंदुओं में खासतौर पर कई लोग हैं जो उसे. क्रूरता का विषय भी मानते हैं। हमारे यहां. जैसे हमारे फेस्टिवल हिंदुओं में फेस्टिवल. है। दिवाली होली तो दिवाली में आजकल बड़ा. कैंपेन चलता है. कि पॉल्यूशन फैल रहा है। होली में चलता है. सेव वाटर। इसी में कई सारे लोग हैं पढ़े. लिखे जो कहते हैं कि अब समय के साथ बदल. जाना चाहिए। कुछ एक नई चीजें लानी चाहिए.
जिससे खून खराबा कम हो या जो परसेप्शन. चेंज. करे कैसे इसे आप देख रहे हो या इसे. बिल्कुल अलग करे करना चाहिए ताकि ये जो. असहज है उनसे इन्वॉल्व ना हो ताकि ये. बातें ना आए क्योंकि आस्था से जुड़ी विषय. है ये ये परंपराएं हैं। ये मान्यताएं हैं।. ये हमारे लिए हैं। इसके नियम हैं। हमें उस. नियम को फॉलो करना चाहिए। हम कुर्बानी. करें। यह हमारा पर्व है। लेकिन दूसरों को. तकलीफ देके थोड़ी करेंगे हम। हम शोरशराबा.
करें ये गंदगी करें। ये तो ये कुर्बानी. थोड़ी हो सकती है। ये जायज नहीं है। तो. इसलिए हमें इसका ख्याल रखना है कि हम. दूसरों को तकलीफ ना देने। ये मेरा आस्था. है। मेरा पर्व है। तो हम उसे अपने हिसाब. जैसे मान लीजिए एक मोहल्ला है वहां पर 10. मुस्लिम परिवार है। 10 हिंदू परिवार है।. मैं तीनों कंसीडर केस करता हूं। एक एक. मोहल्ला है जहां पर हिंदू सोसाइटी है जहां. पर दो चार मुस्लिम लोग रहते हैं। एक. मोहल्ला है जहां पर 10-12 मुस्लिम लोग. रहते हैं। एक दो हिंदू परिवार रहते हैं और. एक मोहल्ला जहां बराबर रहते हैं। अब. कुर्बानी कैसे की जाए फिर? हां वही हमने.
कहा कि मोहल्लों में कुर्बानी का तरीका. नहीं है। घरों में मोहल्लों में नहीं करना. चाहिए। उसके लिए एक जगह तय कर दी जाती है. स्लॉटरिंग के लिए। वहां जाएं और वहां जाके. अपना करें। तो वहां से कर कुर्बानी करेंगे. तो किसी को तकलीफ होगी कि नहीं बट छोटे. शहरों में तो दिखाई पड़ता है नाली वाले. में खून खराब दिख जाता नहीं होना चाहिए. उसको मना किया गया है और मुझे लगता है कि. इस बार जो है लोग अब ज्यादा समझदार हो गए. हैं और हर चीज को समझने भी लगे हैं तो.
मुझे लगता है कि इस तरह की कोई शिकायतें. अब आएंगी नहीं क्योंकि एक बड़ा मौका है. त्यौहार आप लोग का है। इसमें हिंदुस्तान. में जो हिंदू मुस्लिम एकता कमजोर पड़ी है. इसको लेके भी कोई तैयारी आप लोग की है? देखिए हम हमारी जिम्मेदारी नहीं है। हम. सबकी जिम्मेदारी है। हम एकता के मामले में. हम जो बात करते हैं कि हम एक अक्सर कहता. हूं कि जो धर्म के जो लोग हैं जो उनकी. बड़ी जिम्मेदारी है। चाहे वो किसी भी धर्म. के हो। अभी मिसाल के तौर पर एक मैं वाक्य.
सुना के अपनी बात को खत्म करता हूं।. सीताराम बाजार दिल्ली के अंदर एक है। ये. एकता की बात से मुझे याद आया कि हमारी. एकता किस तरह की है। अगर किसी को भारत. बताना होता है तो मैं ये इस इस वाक्य से. बता सकता हूं। सीताराम बाजार में पहाड़गंज. सीताराम बाजार है। सीताराम बाजार के अंदर. एक मस्जिद है और मस्जिद के बगल में एक. मंदिर है। तो मस्जिद के जो इमाम साहब हैं. वो हमारे सेक्रेटरी हैं। बंगाल के रहने. वाले हैं इमाम साहब। और बगल में उनके. मंदिर है जो कि पुजारी साहब बिहार के रहने.
वाले हैं। तो जब इमाम साहब बंगाल चले जाते. हैं तो पुजारी जो वहां के पंडित जी हैं. मंदिर के उनका परिवार पूरी मस्जिद की सफाई. सुथराई करके और साफ सुथरा करके सारा ख्याल. और रखता है पूरी मस्जिद का ध्यान रखता है. और पूरा उसका जो भी उसको करना चाहिए उसकी. हिफाजत के लिए। इसी तरह से जब वो पंडित जी. बिहार चले जाते हैं तो मौलाना साहब जो हैं. वो पूरे मंदिर की सफाई सुथराई का और उसका.
ध्यान पूरा ये खुद रखते हैं मौलाना साहब।. तो ये भारत है। यही तो विशेषता है अनेकता. में एकता। हमें इसी पे तो काम करने की. जरूरत है। आपको ऐसे बहुत सारी मिसालें मिल. जाएंगी जहां हम सब मिलके रहते हैं और हमें. चाहिए कि कि धर्म के लोगों की बड़ी. जिम्मेदारी है। समाज अपना काम करता. है। सरकारें अपना काम करती हैं। तो धर्म. के जो लोग हैं उनकी बड़ी मान्यता होती है।. लोग उनको मानते हैं। तो मंदिरों से, मस्जिदों से, गुरुद्वारों से, मठों से,
चर्चों से, सेनागोगों से जब वहां के जो. रिलीजियस लीडर्स हैं अपने सेरेमस में एकता. की, प्यार की, मोहब्बत की बातें करेंगे तो. मुझे लगता है इसका एक बहुत बड़ा इंपैक्ट. होगा और जिससे हम सब एक हो जाएंगे। ठीक. है। अ मेरे एक फेवरेट टीचर है खान सर।. पटना में है। आप भी नहीं जा पाए, हम भी. नहीं जा पाए। उनके रिसेप्शन में नहीं जा. पाए। जी उन्होंने बुलाया था हमें। जी. लेकिन उनकी रिसेप्शन की तस्वीरें बड़ी. वायरल हो रही है। जहां पर उनकी जो बेगम है. वो हल्का सा घूंघट पर्दा जो भी आप कह. लीजिए उन्होंने कर रखा है। और उसको लेकर.
बड़ी चर्चाएं चल रही हैं कि कई अलग-अलग. चर्चाएं चल रही है। एक नजरिया चल रहा है. कि सोशल मीडिया आजकल सेफ नहीं रह गया. इसलिए शायद उन्होंने छिपा लिया हो। एक चल. रहा है कि आदमी कितना ही प्रोग्रेसिव हो. जाए लेकिन थोड़ा सा रूढ़वादी हो जाता है।. आप कैसे देख रहे हैं क्योंकि हम आप गए. नहीं। खान साहब को यहां से मुबारकबाद भी. दे सकते हैं हम और इस पर मैं चाहूंगा कि. उसे कैसे आप देख रहे हैं वो रूढ़िवादी है. या परंपरा है या नजाकत है जो शादियों में. होती है। कैसे आप देख रहे हैं उसे? देखिए. वो जो जो वायरल हो गई है वीडियो जो घूंघट.
वाली है। आप ये हमारे भारतीय संस्कार हैं।. ये हमारे संस्कृति का हिस्सा है। या आप. किसी भी शादियों में जाएंगे हमारी जो. दुल्हन होती हैं वो घूंघट में रहती हैं।. खासतौर पे राजस्थान, बिहार महाराष्ट्र आप. कहीं भी जाइए तो नई नवेली दुल्हन हमेशा. घूंघट में रहती है। ये हमारे यहां की. संस्कृति है। तो ये मुझे लगता है कि इससे. दुल्हन की जो जो उसकी शान है जो उसका. मर्तबा है जो उसकी नज़ाकत है तो वो उससे.
पूरी होती है। तो लोग इसको मेरे ख्याल से. इस पर कोई उस पर जो अलग-अलग टिप्पणी कर. रहे हैं सबकी अपनी-अपनी सोच है। लेकिन. मुझे लगता है कि ये ये भारतीय संस्कार हैं. जो उस बच्ची ने. घूंघट करा है। तो एक आप कैसे देखते हैं. खान सर पटना वाले को कि वो भी हिंदू. मुस्लिम एकता की बड़ी बात करते हैं और. उनको भी बड़ा वर्ग सुनता है और वो भी. देशभक्ति के कट्टर पैरोकार हैं जो अक्सर. हर मजबूत विषय पर आते हैं और मुझे बड़ी. खुशी होती है कि वो अलग-अलग विषयों पर.
बोलते हैं क्योंकि एक एक्ट्रेस थी।. उन्होंने कहा था इस देश के मुसलमानों को. लेकर कि अगर आप ऐसे समय में खामोश रहेंगे. तो शक पैदा होता है। एक मुस्लिम एक्टर है. टीवी की। उन्होंने एक टिप्पणी की थी कि. अगर आप ऐसे संवेदनशील मसलों पर खामोश. रहेंगे ये सोचते हुए कि पाकिस्तान में. आपका कोई फैन नाराज ना हो जाए। तो फिर आप. शक पैदा करते हैं। लेकिन खान सर जैसे लोग. या आप जैसे लोग जो हैं वो हर बार खुलकर. बोलते हैं। तो मैं चाहता हूं थोड़ा उनके. बारे में आप बताएं। शादी का मौका गया नहीं. है। इसी बहाने में और आप थोड़ा सा उनसे. माफी मांग। नहीं दरअसल क्या है कि उनकी.
फैंस फॉलोइंग बहुत है। बहुत सारे लोग. उनको फॉलो करते हैं। उनका अपना एक तरीका. है पढ़ाने का समझाने का जिसकी वजह से बड़े. फेमस हो गए हैं वो और उनका नाम खान सर के. नाम से वो जाने जाते हैं। उनको उन्होंने. हमको दावत दी थी क्योंकि मैं बेंगलुरु में. था। उन्होंने कहा कि मेरे दो तारीख को आप. रिसेप्शन है उसमें आप आए। उन्होंने मुझे. दावत दी जाती तौर पर तो खैर मैं नहीं. पहुंच पाया। लेकिन उनका तरीकाकार भी देखिए. बहुत से जो लोग हैं ना अपने-अपने तरीके से.
जिस बात को रखते हैं तो लोग मानते हैं। तो. आज राष्ट्रवाद की बात हो, राष्ट्रीयता की. बात हो ये हमको कॉमन एक करनी चाहिए जिससे. कि हमारे अंदर एक मजबूती पैदा होती है।. धर्म एक अलग चीज है। धर्म सब अपने-अपने. मनाते हैं। सबके मान्यताएं हैं। ठीक है।. लेकिन हम जहां एक हो जाते हैं राष्ट्र के. विषय पर क्योंकि राष्ट्र प्रथम है। हम. हमेशा एक बात कहते हैं देश हमें देता है. सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें। राष्ट्र. के प्रति भाव सबका आना चाहिए और राष्ट्र.
और राष्ट्रीयता की बात हम सबको करनी चाहिए. जिससे कि हमारे अंदर एक मजबूती पैदा होती. है भारतीयता की। आओ हम सब मिलकर हम भारत. को मजबूत करें। भारतीयता को मजबूत करें।. राष्ट्र सर्वोपरि है। सर आखिरी सवाल मुझे. लगता है इस देश के मुसलमानों को अपना. आइकॉन जैसा मौजूदा दौर में दिखाया ओवैसी. साहब, सुफिया कुरैशी जी या उमर अब्दुल्लाह. ये अपने आंतरिक मसले होंगे हम लड़ते. झगड़ते रहेंगे लेकिन जब देश का मसला आएगा. तो फिर समूचा भारत एक साथ खड़ा हो जाएगा।.
यकीनन यकीनन आप इन तीनों केसेस मैं चाहता. हूं इन तीनों पर भी आप टिप्पणी करें. क्योंकि इन ये तीनों इस इस बीच में इस. घटना में हीरो के तौर पर आए और मुझे भी. बड़ा ये कहने में आ खुशी भी हो रही है कि. ऐसे लोगों के सामने आने से देश में माहौल. बदलता है। यकीनन यह बिल्कुल बात सही है कि. जिस तरह से अभी चूंकि पहलगाम के वाक्य के. बाद से सारा देश अह एक हो गया और यहां. चूंकि सब ने अपनी राजनीति से हटकर यहां अह.
राष्ट्र का विषय बना लिया चूंकि राष्ट्रीय. विषय भी बन गया था ये कि जो पहलगाम में. आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के खिलाफ पूरा. भारत एक हो गया था तो मुझे लगता है कि. इससे फर्क पड़ेगा और यह एक अच्छी बात है. कि ये सब एक हो गए अपनी राजनी नीति एक तरफ. करके देश के प्रति आतंकवाद के के विरोध. में पाकिस्तान के विरोध में एक हो गए और. मैं दुआ करता हूं कि यह राजनीति तो चलती. रहेगी लेकिन ये ऐसे ही एक रहें और ये इसी.
तरह से और आगे बढ़े जिससे कि देश मजबूत हो. आपस में प्यार मोहब्बत बढ़े और मुझे लगता. है कि ये इसी तरह से और आगे लेके जाए। सही. बात अंदर जितना लड़ना है लड़ो लेकिन जब. बाहरी आदमी आए तो उसको उसकी हैसियत दिखा. के अलग कर दो। यकीनन यकीनन ये सब सबने. अपने-अपने तौर पे अपने अपने तौर पर सबने. अच्छा काम किया है। इस इसमें तो मुझे लगता. है कि सबका अपना-अपना रोल है। धर्म के. लोगों ने अपना रोल किया है। राजनीति के. लोगों ने अपना रोल अदा किया है। लेकिन सब. ने अच्छा रोल अदा किया है। सब एक हो गए और.
एक होकर पहलगाम के मामले में और भारत के. आतंकवाद और पाकिस्तान के विरोध में. मुकाबला किया और ये एक अच्छी बात है। इमाम. साहब ये मानते हैं जैसे कोरोना में. ब्लेसिंग एंड डिसगाइस हुआ था। बहुत खतरनाक. आपदा लेकिन उसके कुछ अच्छी भी चीजें हो गई. थी। नदियां साफ हो गई थी। स्वच्छ हवाएं. आने लगी. थी। ऐसे ही इस घटना के बाद कश्मीर से लेकर. समूचे हिंदुस्तान में एक एकता तो दिखाई. पड़ी है। कुछ चेहरे भी एक्सपोज हुए हैं. लेकिन कई बड़े पैमाने पर एक एकता नजर आई.
है कि कश्मीर में पहली बार विरोध हुआ। वो. भारत से शिकायतों में लेकर नहीं था। समूचा. भारत के साथ मिलकर पाकिस्तान को लेकर था।. आज कश्मीर भी कह रहा है कि तुम दफा हो। हम. तुम्हारे नहीं हैं। हम तुमसे अलग हैं। तुम. हमारा नाम लेकर दुनिया में गाना मत गाओ।. हम इंडिया के साथ खुश हैं। इंडिया कश्मीर. हम एक हैं। और हमारी सरकार ने भी कहा, लोगों ने भी कहा कि अब जितना बातचीत है जो. चर्चा है वो खाली पीओके को लेकर होगी या. आतंकवाद को लेकर होगी? हमने डोनल्ड चाचा. को भी चुप करवा दिया। तो कैसे आप देख रहे.
हैं इसे? नहीं बिल्कुल।कि कि मैं आपने. देखा होगा जी कि 22 तारीख को जैसे ही यह. पहलगाम का हुआ तो 23 तारीख से और 24 तारीख. से जो कश्मीर के जो लोग थे कश्मीर के जो. इमाम्स थे वो अपनी मस्जिदों से ऐलान. आतंकवादियों के विरोध में ऐलान करना शुरू. किया और सड़कों के ऊपर बड़ी तादाद में. सारी कश्मीरी बाहर निकल के आए आतंकवाद के. विरोध में। तो ये पहला मौका मुझे ऐसा लगा. जिसमें पूरा भारत एक हो गया। एक होकर सबने. इसमें आतंकवाद के विरोध में पाकिस्तान के.
विरोध में खड़े हो गए। मुझे लगता है कि अब. इसी तरह से एक बने रह जिससे कि देश हमारा. भारत विश्व गुरु बने। इसी तरह से हम एक हो. के मुकाबला कर पाएंगे। इसी की आज जरूरत. है। एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे। यकीनन यही. यही मुझे लगता है कि इसी की जरूरत है। एक. रहने में ही खैर है। हां मतलब ये नारा. किसी और कॉन्टेक्स्ट में दिया गया था।. लेकिन दुनिया के कॉन्टेक्स्ट में यही है. कि सारे भारतीय एक रहेंगे। हां तो 57 जो. देश हैं जो आतंकवाद को पालपस रहे हैं उनसे.
सेफ भी रहेंगे और डटकर रहेंगे। यकीनन. यकीनन बिल्कुल आपने सही फरमाया। हमको एक. रहना ही चाहिए। यही भारत की पहचान है।. इसीलिए मेरा भारत महान है। थैंक यू सर। आप. आए मुझे लगता है कि एक स्ट्रांग मैसेज की. जरूरत थी। वो आपने यहां से दिया। बकरा ईद. को लेकर जो आपने कहा मुझे उम्मीद है कि. लेकिन फिर आपने बकरा ईद का कहा। ये बकरा. ईद नहीं है। ये बकरे की ईद नहीं है। इसका. नाम ईदान पे रखा है। नहीं आप इसको हटा. दीजिए। आज से आप ही इसको बकरे की ईद मत. करिए। ये इसका नाम ईद उल अदा है। ये त्याग. की बलिदान की समर्पण का त्याग का पर्व है.
ये। चलिए आज से बकरी ईद नहीं कहा जाएगा।. ईदुल अधा ईदुल ईद उल अधा। हां ईदुल अधा।. ठीक है। आज से यही कहा जाएगा। त्याग का. पर्व कह दीजिए। आप कहिए ईद ईद त्याग वाली।. जी। बलिदान वाली। एक सेवई वाली एक त्याग. वाली। ऐसा कह सकते हैं। वैसे सेवई आपकी आई. नहीं थी हमारे पास। हां ये बात तो ठीक है।. लेकिन अब आप मेरे पास आएंगे तो आपको जरूर. सेवयां खिलाएंगे। ठीक है सर। लवली टॉकिंग. टू यू सर और आशा है कि फिर आपसे जल्दी. मुलाकात होगी। जी शुक्रिया।.
