Unplugged Ft. Dhirendra Krishna Shastri Aka Baba Bagheshwar | Bala Ji Dham | Sanatan | Mahakumbh2025
कुंभ में लोगों ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण. शास्त्री ने असंवेदनशील बयान दे दिया कि. जो यहां मृत्यु हुई व मोक्ष गया मृत्यु. सबकी आनी है एक दिन मरना सबको है पर कोई. गंगा के किनारे मरेगा तो वो मरेगा नहीं. मोक्ष पाएगा घटना तो हो गई तय अब आप ये तो. कह नहीं सकते कि मर गए तो अब ठीक मर गए अब. उनको स्तावना देने के लिए डांड देने के. लिए हम क्या कह सकते हैं शायद अगर यह. महाकुंभ सेना के हाथ में दे दिया जाता तो. इस घटना के कलंक से बचा जा सकता है पर तंस.
कस रहे थे कि अगर ऐसे मोक्ष मिलना है. धीरेंद्र शास्त्री जी को हम धक्का दे. देंगे हां बिल्कुल हमने वो सुना आप भाजपा. सरकार के प्रचारक के तौर पर काम करने लगे. साधु किसी एक का कैसे हो सकता है आपने जब. ये कह दिया कि जो नहीं आएगा वो देशद्रोही. है तब हर व्यक्ति को आना चाहिए जो नहीं. आएगा वो देशद्रोही कहलाएगा लोग कह रहे मान. लीजिए कोई जाै से कोई आदमी सिया चल में. नौकरी कर रहा हो या बॉर्डर पे हो या मेरे. जैसा पत्रकार जो दिल्ली इलेक्शन कवर कर. रहा था अब आपने हम लोग को देश बना दिया है. यही सबसे बड़ी इस देश की दिक्कत है. शंकराचार्य जी है अभी मुक्तेश्वरा नंद जी. वो आपसे बहुत प्यार करते हैं उनका बहुत.
आशीर्वाद है उनकी बहुत कृपा है और बनी. रहनी. चाहिए मक में भी उन्होंने कहा कि अगर आपको. भविष्य दिख जाता है तो कहे कुंभ की घटना. के बारे में आपने सबको सूचित कर दिया ऐसा. कभी नहीं कहा ट्रेन दुर्घटना प आपने कह. दिया था एक बार कि हमको ये दुर्घटना दिख. जाती है उड़ीसा में जो बालासौर का ट्रेन. का कांड हुआ बड़ी घटना भारत के बारे में. संकेत दे पाती है यस पहले से ऐसी घटना का. अंदेशा होता है राष् ते संकेतो का अनुभव. होता है रेंद्र शा कैसे आ गया या विराट.
कोहली की फर्म क वापस आ वड कप जो हारे हैं. बाबा ने क्यों नहीं बताया कि हार रहे. हमारे स में रुप चले गए हम तो इतने पके. हुए हैं हमने कभी ये नहीं कहा कि हम. भविष्यवक्ता है फिर ये भविष्यवक्ता और पचा. देखने में डिफरेंस क्या है थोड़ा समझाइए. तो आपको कब पता ल कि आपकी जय किशोरी शादी. होने वाली है तो बहुत बाद में कोई. इंटरव्यू वाले ही बताते थे शादी कौन तय. करेगा ीर कृष्ण शास्त्री जी की माता पिता. और मान लो आपको पसंद ना आई तोसे कोई म. मनमोजी हो आप तो पसंद नापसंद में माता. पिता की पसंद ही हमारी पस क्यों दो वन.
कन्याओ की शादी करवा र. बो की जय हिंदुओं के चढ़ावा से हिंदुओं की. बेटियों का घर बसाया जाने हम इस देश में. एक नई लकीर खींचना चाहे हम इस देश में ना. तो हमें सीएम बनना है ना एमपी बनना है ना. एमएलए बनना है कभी पॉलिटिक्स जाओ नेवा. सबसे बड़ी दिक्कत है कि यहां पर सबको. हिंदू हृदय सम्राट. बनना सही पकड़े है और ये हिंदुओं को एक. नहीं होने देता है जात पात खत्म करना एक. बहुत विचित्र मुद्दा है जो इस देश में गृह. युद्ध छड़ेगा फर इलाहाबाद समय रहना का एक.
सनातनी होना एक बनने का नाटक करना ये. दोनों में जमीन आसमान का उनको माफ कर देना. चाहिए साफ कर देना चाहिए मतलब जिससे सनातन. हिंदू धर्म को घाटा हो तो माफ की जगह साफ. कर देना चाहिए भूत प्रत होते बजक कितने. प्रकार के भूत होते हैं कभी किसी ने आपसे. कहा कि आप थोड़ा नॉन सीरियस हो भाड़ में. गई तुम्हारी ये सीरियसनेस हम तो ऐसे ही. ठीक है टरी. बरा मैं अगर तड़पू तो तड़पू अगर तुम ना.
मेरे लिए तड़प तुम अगर तड़पे तो फिर मशहूर. हो. जाऊंगा होए हैं सोई जो राम रच राखा अब ये. राम जी की तो कृपा है कि एक त्रिपाल में. बैठे भगवान की जगह आज भव्य राम मंदिर बना. है और जिस जगह पर हम बैठे हैं यहां पर कभी. पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर एक व्यक्ति. लोगों से मिलता था लेकिन आज यहां पर. जनसमूह इकट्ठा है यह राम जी की तो कृपा है.
कि अवध वासी शुभंकर फिलहाल धीरेंद्र कृष्ण. शास्त्री जी के साथ एक कमरे में बैठकर. इंटरव्यू ले रहा है बहुत बहुत धन्यवाद. आपका आप बालाजी के हम राम जी के जी दोनों. का पुराना ही नाता है और हमेशा का पुराना. नाता है ब बड़ा गजब लगा मुझे जब मैं आपके. लोगों से मिल रहा था क्योंकि जिस इलाके. में हम यहां पर हैं मुझे सबसे खुशी इस बात. की हुई कि अक्सर लोग जब अपना अंपायर बड़ा. करते हैं तो वो उस जगह जाते जहां भीड़. होती है आप प्रभु की लीला में रह क लोग.
अपने आप आ जाएंगे हमारी जिंदगी में लोगों. को बुलाना हमारा उद्देश्य नहीं है ना. हमारे गुरु का उद्देश्य था वह तो फक्कर थे. हमारे दादा गुरु जी फक्कर थे बड़े अवधूत. थे बड़े सिद्ध महा सिद्ध कोटि के महात्मा. थे हमारे गुरु ने हमें ये सिखाया है कि. हमें जो भी करना है जैसे भी करना है अपनी. मस्ती में करना है हमारी मस्ती जिंदा रहनी. चाहिए आदमी तभी जिंदा है जिसकी मस्ती. जिंदा है और हमें यह बहुत ज्यादा जरूरी. नहीं कि लोग हमें देखें यह बहुत ज्यादा. जरूरी है कि हम जिस आराध्य के प्रति.
समर्पित है व हमें देखता रहे और हम उसके. दर्शन करते रहे लेकिन यात्रा हमको बड़ी. खूबसूरत लगी क्योंकि यहां जब हम घूमे तो. किसी ने कहा कि यह वाला पीपल पेड़ है कभी. यहां बे थे फिर हमने यह बनाया फिर यह छोटा. पड़ गया फिर यह बनाया ये छोटा पड़ गया ये. बना ये भी छोटा पड़ गया फिर हम देखे आगे. और काम चल रहा है अन्नपूर्णा जी को लेकर य. कहा गया कि पहले यहां खिलाते थे फिर ये. छोटा पड़ा फिर यहां लगा छोटा तीन जगह बन. गई तीन अनन पुणा बनी तीन दरबार हॉल बने अब. ग्राउंड में खुले में मैदान में दरबार.
लगता है अनन पूर्णन जी चूंकि वहां अभी एक. 100 भा 300 का टीन सेड है उसमें चल पा रही. तो यह आशीर्वाद तो रहा आप गुरु कृपा है इस. जगह का ऐसा प्रभाव है जहां हम बैठे हैं. इसका बहुत अद्भुत प्रभाव है यहां एक तो ये. लाइटेड एरिया है दूसरी सबसे आत्म. साक्षात्कार गुरुजी को यही हुआ दूसरा सवा. करोड़ हनुमान चालीसा का पाठ हमारे सन्यासी. बाबा ने 84 वर्ष की आयु में किया 84 साल. तक करते रहे सवा करोड़ का पाठ का संकल्प. पूर्ण किया यहीं पर तीसरा दादा गुरु जी ने. यज्ञ की तो ये जो भूमि है चूंकि बुंदेलखंड.
ही हमारा बहुत अद्भुत है यहां बगल में. कालपी है कालपी में वेदव व्यास जी का जन्म. हुआ यहां राजापुर है यहां तुलसीदास जी का. जन्म हुआ रानी लक्ष्मीबाई जी हमारे यहां. बगल में ही बगल का एक जिला आचार्य रजनीश. ओशो महर्षी महेश योगी जबलपुर के मग्गा. बाबा खचर हो के कंदरिया महादेव वहां के. झाड़ू वाले बाबा बागेश्वर धाम के सन्यासी. बाबा दादा गुरुजी जटाशंकर वाले बगल में. दतिया है दतिया के स्वामी जी महाराज का. चमत्कार तो देश व्यापी है विश्वव्यापी है.
तो यह जो पूरा एरिया है बुंदेलखंड का ये. उर्वरा भूमि है यह संतों की भूमि है और. यहीं के वो बुंदेलखंड भूमि है जहां. सन्यासी बाबा भए दादा गुरुजी भए यही वो. भूमि है जहां से मलुक पीठ परम पूज्य श्री. राजन दास जी महाराज यही वो भूमि है जहां. से परम रस काचार्य के रूप में जिन्ह जाना. जाता गोरी लाल कुंज वाले श्री किशोर दास. जी महाराज जी तो ये जो पूरा एरिया है ना. ये संतों का एरिया है तो यहां ऐसी कोई. लीला अगर हो रही है तो हमें नहीं लगता कि. इसमें किसी व्यक्ति का व्यक्तित्व है सच. यह है कि.
परमात्मा की ही ऐसी कृपा है गुरु के तप बल. का ही ये व्यक्तित्व हमसे कहा कि सारे. सरकार मध्य प्रदेश में क्यों. है ना यूपी में है ना महाराष्ट्र में है. ना बिहार में सारे सरकार मध्य प्रदेश में. है हां ये बहुत अनूठा है उसके पीछे कारण. भी है क्योंकि ये उर्वरा भूमि है तो. सरकारें तो यही. होंगी मध्य प्रदेश का भारत के लिए बहुत. बड़ा योगदान रहा चमक उठी थी सन 57 वह. तलवार पुरानी थी बुंदेले हर बोलों के में. हमने सुनी कहानी थी खूब लड़ी मर्दानी वो. तो झांसी वाली.
हम लोग साधनों से हीन पर साधना से संपन्न. है इसलिए यहां ज्यादा. सरकार आपको कब एहसास हुआ जैसे एक होता है. ना कि एक मूवमेंट होता है हर इंसान की. जिंदगी का कि हमको अपना यही करियर चुनना. या इसी में आपको समर्पण रहना है या भगवान. को अपना जीवन दे देना है एक एहसास तो होता. है ना जैसे हमने आपके परिवार के बारे में. पढ़ा कि दादा जी के आपका खूब जिक्र होता. कि आपके ऊपर आपके दादाजी का प्रभाव है. पिताजी लेकिन हमने सुना वो अभी भी. खेतीबाड़ी करते हैं माताजी सामान महिला है.
अभी भी तो ये दादा जी पर कृपा पिताजी एक. सामान्य जीवन लेकिन फिर आपका जीवन जो है. वो ईश्वर को समर्पण ये एहसास कब हुआ ये तय. कब किया किस लमहे हमारा जीवन में खुद का. एहसास नहीं था ये तो गुरु कृपा ी बचपन से. ही यहां जो भागेश्वर धाम है गांव यही है. लगभग 300 400 मीटर दूरी पर घर है ये छोटा. जंगल है जंगल में यहां आउट ऑफ है गांव का. अंधेरा रहा करता था को आते ही ना तो सब. ऐसे ही अकेले में चल तो सब झोपड़ी बनी थी. झोपड़ी में रान पाद दादा जी वहां रहते थे.
धोनी रमी रहती थी पहले वो ग्रस्त थे फिर. उन्होंने निर्मोही अखाड़ा से साधु बने थे. हम. तो हमारी मां ने एक दिन कहा. कि दादा जी आपके बहुत जानते हैं हालत ठीक. नहीं थी परिवार की स्थिति पिताजी कुछ. ज्यादा ठीक कर नहीं पाते थे खेती के नाम. पर सवा एकड़ जमीन थी तो एक डेढ़ एकड़ लगभग. डेढ़ एकड़ जमीन थी उस उतना कुछ खास होता. नहीं था फिर पिताजी कर भी नहीं पाते थे तो. गांव में चकि जो धर्म कर्म है कर्तव्य के.
रूप में कर्मकांड तो करते ही थे बचपना तो. था ही बच्चे तो थे ही पर माता जी ने कहा. कि व्यवस्था तो चलानी है तो माता जी ने. शिक्षाया सिखाया कि अपन ब्राह्मण है तो घर. घर जाकर के विक्षा यापन भिक्षा यान कर. सकते हैं वक्षा याचना की तो लगभग 13 साल. तक की आयु तक यह जीवन में हमारे चला लेकिन. उसी बीच में एक दिन फिर एक घटना होती है. मां कहती है तुम्हारे दादा जी बहुत जानते. हैं जाओ जाकर प्रणाम कर आओ.
तो कुछ मांग लाओ तो हम आए पगडंडी थी तो. दोपहर का लगभग दो ढाई बजे के लगभग आए तो. कोई अधिकारी बैठे थे तो हमने प्रणाम किया. उन्होंने आशीर्वाद दिया बोलते कम थे. बड़ी-बड़ी आंख ये बड़ी दाढ़ी और फिलॉसफी. इतनी गजब की बहुत गजब की भय उठा के बात. करना बहुत कम बोलना अब बोलना भी तो बोलना. नहीं बोलना तो नहीं बोलना और बोलना भी तो. बड़ी ऊंची बात बोलना और क ठहा का लगा के. हंसना ऐसे पीट के हंसना ऐसे चुटकी बजा के. हंसना.
एंबेसडर का जमाना था उस जमाने में एंबेसडर. आती थ तो गांव के बाहर चकि यहां आ नहीं. पाती थी रोड तो था ही नहीं अब रोड डले तो. पता लग जाता था बाहर गाड़ी रखी हो गांव के. बाहर या ऊ करे तो समझ जाते थे कोई आया है. मिठाई की जुगाड़. है मिठाई के चक्कर में आते थे तो मां ने. कहा तब गए तो प्रणाम किया दो ढाई घंटे बाद. वो बोले तो बोले क बिटवा बुंदेलखंड में. बेटा को बिटवा कहते तो हमने प्रणाम किया क. कि सन्यास लेने के पूर्व में आपके हम आप.
ही के खून है आपके बेटा के बेटा है हालत. ठीक नहीं है भोजन की स्थिति भी नहीं है दो. तीन दिन से चावलों की रोटी बन रही है भोजन. की स्थिति नहीं है और लाइट तो चलती नहीं. तो पढना हो भी नहीं पाता है गांव के छोटे. से कोने में आप शायद अभी गए नहीं पुराने. मकान पर जन्मभूमि में जहां माता जी का तो. बहुत पीछे है अंधेरा रहता है कुछ कृपा कर. दो भोजन की ही व्यवस्था हो जाए. वो कुछ बोले.
नहीं फिर थोड़ी देर बाद कहते हैं कि बिटवा. रात को आना जाओ कोई सवाल जवाब होता नहीं. था तो चले गए हमने बाबू जी को पिताजी को. बताया मां को बताया हम लोगों को लगा गांव. के लोग कुछ देंगे या गड़ा हुआ धन बताएंगे. जानते हैं वो जकी तो गड़ा हुआ धन बताएंगे. अपना भला हो जाएगा तो रात शाम को ही तसला. फावड़े रख लिए पड़ोसियों. से बस फिर उसके बाद में.
एक इतनी टॉर्च चलती थी स्टील की हा याद. हमको बड़े. बड़े बड़े बड़े सेल लगते इतनी उसम अगर वो. कार्बन लग जाए तो ठोक दो जलने लगती ी वो. टॉर्च थी एक पुरानी तो बाबूजी ने हमारा. हमने बाबूजी की उंगली पकड़ी हमने कहा कि 9. बजे लगभग बुलाया है रात को आना चलो छोड़. दो हमें पिताजी छोड़ने आए पगडंडी में ऐसे. टॉर्च जलाते हु टिम टिम टिम टिम बूंदे बरस. रही थी बरसात का मौसम. था बरसात उतरती बरसात का मौसम था यह तालाब.
भरा हुआ था आपने देखा होगा एक बगल में. तालाब है तालाब भरा हुआ था इसी के ऊपर से. पगडंडी थी वहां पर चढ़ के आए झोपड़ी में. पहुंचे तो दीपक जल रहा था और वो तो. महापुरुष थे एक अचला पहने एक वो पहने लेटे. थे पिताजी का नाम लेकर बोले कृपाल जाओ घर. पिताजी के नाम श्री राम कृपाल है तो आधा. नाम ले देते जाओ घर बिटवा को छोड़ दो. पिताजी लोग सब जानते थे बोले ही नहीं कुछ. प्रणाम किया पिताजी चले गए हम रु.
गए स बजे के लगभग उन्होंने कहा धीरू जाओ. स्नान कर लो य नीचे हेड पंप है वहा हमने. स्नान किया ठंडी लगने लगी हल्की हल्की तो. फटी हुई एक तौलिया थी हमारे पास में वो. हमने पहन ली और ऐसी बाल्टी ली पानी भर के. पानी ऊपर चला जाएगा तो ऊपर पानी रखा स1. पने बजे के लगभग उन्होंने हमारी यहां पर. पकड़ा हमें आज भी याद है यहां पकड़ा वो ले. गए वहा मंदिर के पास. उनका जिंदगी में बैलेंस इतना अद्भुत था.
वोह पैर के अंगूठे के बल खड़े हो जाते थे. यह बैलेंस था जिंदगी में व ऐसे एक पैर. यहां लगाया ऐसे खड़े जो उन्होंने पढ़ा हम. तो बच्चे थे रात्रि का समय था अंधेरा था. मेढक बोल रहे थे बरसात का मौसम किच सब जगह. हो रहा था वभी खूब कीचड़ी मतो मंदिर. बालाजी का जहां है छोटी सी मंदिरिया थी. बालाजी की छोटी सी वहां खड़े हुए उसी रात. हमारे साथ वो घटना हुई एक छोटा सा कुछ.
मूमेंट हुआ हमें तो होस नहीं रहा हम डर गए. बच्चे थे तो ऐसी उन्होने थपकी मारी बोले. कह दे तुम हमारे और हम तुम्हारे हमने भी. आवेश में कह दिया तुम हमारे हम. तु बस पर सामान रहा कुछ खास नहीं रहा. हमारी जिंदगी में इतनी हुई सुबह हो गई. 8:30 बजे घर वापस गए मा ने पूछा उका कुछ. नहीं हुआ लाइट हाइट जली थी बस व बता. दिया फिर धीरे धीरे आभास होने. लगा ने दादा जी को बताया कि हम बड़े.
परेशान है ऐसा ऐसा आभास होता है कि अब यह. मास्टर आएगा ये मैथ की पुस्तक मंगाए का. अमुक आदमी से मंगाए और वैसे ही मंगाता था. यार ये तो अपन को पता था तो फिर वो. मुस्कुराए लेकिन फिर. वो ज्यादा दिन शरीर नहीं रहा गुरु जी का. लगभग डेढ़ दो साल ही हम सेवा कर पाए कुछ. चीजें बज 2010 में उनका फिर शरीर शांत हो. गया और हमारी जिंदगी में उसके बाद फिर. मोड़ हो ग उन्होंने कहा कि तुम यहां रहना.
और अपने वंश में एक ना एक यहां सेवा करते. ये हमारे वंशानुगत यहां सेवा करते हैं. दादाजी भी करते रहे उनके भी दादा जी करते. रहे और एक पीढ़ी छोड़ के ही करते रहे यह. भी रहा तो एक पीढ़ी छोड़ के ही करते रहे. इसीलिए हा तो पिताजी नहीं कर पाए चाचा ताऊ. में कोई बैठ नहीं पाया एक दो लोग आए हैं. तो वो टिक नहीं पाए यहां टिकना भी बहुत. कठिन था ऐसी एनर्जी है ठीक ना अब जो भी हो. भगवान जाने फिर हम अपनी जिंदगी में तो आप. दादा जी के ज्यादा करीब रहे हमारी जिंदगी. में सबसे ज्यादा आखरी आखरी के लम में आखरी.
के लमहे वो हमें आज भी अटैच करते जब मण कण. का घाट पर उन्होंने शरीर छोड़ा अच्छा वो. इतने ऊंचे थे कि हम काशी जाएंगे ले जाना. तुम तो सब लोग चाचा ताऊ लोगों ने कार की. मार्शल जीप चलती थी उस जमाने में 2010 की. जमाने अब उतना तो इतना समृद्ध नहीं था. हमारा क्षेत्र तो मार्शल कार की शायद. 12000 15000 में बुक की ले गए 12 दिन तक. वेट किया पितृ पक्ष का दादाजी ने और पितृ. पक्ष की परिवा को मण कण का घाट पर शरी. छोड़ा तो. वहां व काशी का घूमना उनके तलवे को मलना.
वो प्रणाम करके वापस आना वो यहां सेवा. करना अब उनकी एक एक तार्किक हमारी जिंदगी. में हमने पढ़ा थोड़ी इतना पढ़ा है ऐसा. नहीं है बहुत उल्लू भी नहीं है पढ़ते हैं. दार्शनिकों को. भी लेकिन हमने जीवन जीना प्रैक्टिकल उनसे. सीखा बहुत प्रैक्टिकल सिखाते थे कुछ काम. ही नहीं रहता था व प्रैक्टिकल करवाते थे. और जिंदगी उन्होंने हमको ना आस्तिक बनाया. ना नास्तिक बनाया हमको वास्तविक बनाया. प्रैक्टिकल लाइफ उनका ज्यादा रहता तो बोले. तुम जो हो आदमी वो परेशान है जो है नहीं.
वो दिखने का नोटंकी करे बोले बिटवा वो. व्यक्ति बहुत परेशान रहता जो है वो बने. रहो यह जरूरी नहीं है कि लोगों को क्या. प्रभाव पड़ रहा यह जरूरी होना चाहिए कि. तुम्हारे ऊपर क्या प्रभाव पड़ रहा. है मण करण का घाट का आपने जिक्र कर दिया. तो मेरे मन में सवाल आ गया आप वहां गए. अपने दादा गुरु को लेके मण करण के घाट पर. मन में क्या चलता है क्योंकि जीवन का सत्य. वही है कई बार जैसे मैं अपने बूढ़े होते. माबाप को लेकर सोचता हूं आपने वो जिया है.
दादाजी को लेकर वो. लम्हा जिंदगी में देखिए हम एक ऐसी जिंदगी. जी रहे हैं कि हमारी जिंदगी में बहुत कुछ. खास ठीक चलता नहीं हमारी जिंदगी इतनी क्या. कह दे आपको मनमोजी है कुछ खास फर्क नहीं. पड़ता लेकिन हम गए तो वहां यही चलता है कि. आप कितना भी दौड़ लो भाग लो अंतिम मंजिल. यही है और ये राख पड़ गई साब यही तुम्हारी. पड़ जानी है कहां यहां कितने राजा मिल गए.
मिट्टी में कितनी प्रजा मिट्टी में मिल गई. कितने यूट्यू यहां चले गए और कितने प्रोड. कास्ट वाले चले गए होंगे और कितने यहां. बाबा चले गए होंगे कोई नहीं बचा रियलिटी. तो यही है तब हमें समझ में आया कि जिंदगी. राख है जिंदगी भस्म है जिंदगी भस्मी भूत. है जिंदगी सव भी है तो जिंदगी शिव भी है. जिंदगी जो है जो जी रहे हैं बस इसी में. मस्ती आ जाए यही जिंदगी है बाकी जबरदस्ती. जिंदगी कभी किसी ने आपसे कहा कि आप थोड़ा.
नॉन सीरियस हो या जैसा आप हस जैसा आपने. कहा कि बाबा जी आंख कर उठाते थे चुटकी बजा. दी ताली पीट दी हमने अपने मन मौज में कभी. किसी ने कहा कि यार तुम पे सब शोभा नहीं. देता थोड़ा सीरियस हो जाओ बाबा बाबा को तो. ऐसे लोग देखते हैं हां बहुत लोगों ने बोला. एक तो बीच में हमारे शिष्य थे वो तो ऊपर. सिंहासन रखा हम आपको दिखाएंगे एक सिंहासन. लाए तो दो शेर बने हुए हैं सिंहासन है तो. वो लाए बोले अब आप आपको बहुत लाखों लोग. पहचानते हैं यह वो विदेशी आते हैं. फॉरेनर्स आते हैं थोड़ा दिखना चाहिए मैंने. कहा ठीक है हम देख देंगे दो लड़के तैयार.
किए गए चमर मंगाई गई अब वो जलने लगे हम. बढ़िया बैठे हैं हम बैठे हैं हमारी ये. दर्द करने लगा जबड़ा कहा बान में गई. तुम्हारी ये सीरियसनेस हम तो ऐसे ही ठीक. है टरी बढ़ाओ अपनी ये टरी बढ़ना क्या होता. है ये बहुत चलता है. [प्रशंसा]. [हंसी]. होती तो टरी बोल देती कटा री टेरी होती है.
कुछ ठीक है कट के सही कर कुछ नहीं. नहीं वो बता देंगे मामला गड़बड़ होगा. अच्छा एक सवाल और आता है जैसे आपने कहा कि. आपके गुरु जी ने जब आपको आशीर्वाद दिया उस. रात तो उसके बाद आपको एहसास होने लगा. अनुभव जब आपका राइज हुआ था तब ये बड़ी. चर्चा चली थी कि आप लोगों का मन पढ़ लेते. हैं लेकिन जैसे अभी आप कुंभ गए और कुंभ. में एक तो सबसे पहला सवाल वही था लोगों ने.
कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने. असंवेदनशील बयान दे दिया कि जो यहां. मृत्यु हुई वो मोक्ष क्या है फिर लोग आपको. व्यक्तिगत टारगेट ने लगे कि ऐसे तो आपको. ही मोक्ष मिल जाना चाहिए बहुत बहुत हर. लेवल प हर लेवल आपको लगता है वो. असंवेदनशील बयान था जो कुंभ पर आपने दिया. हमको ना कई बार बड़ा दुख होता है इस देश. के लोगों को साथ में क्या कह दे वो ना 30. मिनट की वीडियो के सार को एक मिनट का समझ. लेते हैं पूरी बात बिना जाने हुए आप सत्य. तक नहीं चाह सकते और जिन्होंने भी यह तथ्य.
बोला है यह तो था ना कि यहां गए हैं तो. मोक्ष मिल जाएगा यह तो बोला हुआ तर्क है. लेकिन उसके आगे पीछे क्या है किस संदर्भ. में मैं बोला यह तो किसीने क्या कह रहे थे. आप हम पूरा वो पूरा कार्यक्रम श्रद्धांजलि. समारोह था उन्हीं के निमित्त में था और. ठीक-ठीक बातों में यह चल रहा था बहुत. स्पष्ट मत के साथ में कि जो घटना हुई है. हृदय विदारक है दुखद है इस पर जांच होनी. चाहिए उसकी और भी रील्स हैं शायद लोगों ने. वायरल भी किए हैं इसमें हमें भरोसा है जिस.
दिन यह तथ्य निकल के आएगा बहुत से लोगों. का हाथ भी देखें दिखाई देगा और लापरवाही. भी दिखाई देगी वो भी है उसमें इन बातों को. बोलते बोलते अब घटना तो हुई है पर असमय. हुई है तो दुख बहुत है असमय हुई है कि. मृत्यु तो सबकी तय है हमारी हो या किसी की. भी हो मरना तो एक दिन है हीय पर ऐसी जगह. पर जाना इस जगह पर आना आए थे वहां पर कुछ. और के लिए उत्सव में महाकुंभ में डुबकी. लगाने और यह हृदय विदारक घटना होना यह तो. दुखद है लेकिन अब किसी को आप जैसे अब जो.
घटना तो हो गई है तय अब आप यह तो कह नहीं. सकते कि मर गए तो अब ठीक मर गए ऐसा तो. नहीं कह सकते ना कि ठीक मर गए नहीं ये तो. नहीं तो नहीं कह सकते कि ठीक मर गए तो अब. उनको स्तावना देने के लिए डांड देने के. लिए हम क्या कह सकते हैं कि भैया शरीर तो. शांत हो गया दुखत तो है ही है अब लेकिन. क्या कह दे तब वो बात फिर हमने अपनी रख. जैसे लोग वहां स्नान करने गए थे पुण्य. कमाने गए थे लेकिन शमशान पहुंच. गए जिसके घर वाले गए एहसास हुआ होगा देखिए.
किसी का भी 6 साल का बच्चा रोता रहा तो वो. हि दूख हम जानते हैं वो हमारे ही हिंदू है. हमारे ही परिवार है हमारे ही सज्जन है हम. इतने गिरे हुए तो नहीं हो सकते हमारी. विचारधारा या हमारे विवेक की बुद्धि इतनी. सूक्ष्म इतनी संकुचित नहीं हो सकती है कि. किसी मरने वाले व्यक्ति पर हम यह तर्क दे. दे कि नहीं नहीं ठीक है मोक्ष हो गया. क्योंकि मरने वाले परिवार की जिंदगी में. जो भी रहते हैं वहां पर ज्ञान की शून्यता. हो जाती सही बात है ज्ञान की शून्यता हो.
जाती है आप कितने भी तथ्य या तर्क दें हां. उन्हें क्या समझ में परन खो दिना अब हम. किसी गरीब को कहे कि पैसा सब कुछ नहीं. होता है तो वो कहेगा महाराज हमें पहले दे. दो फिर बताएंगे हम तो ये वहां तो ज्ञान की. शून्यता हो जाती है इतना तो हम भी समझते. हैं लेकिन समझाने के लिए आपको कुछ तो कहना. पड़ेगा तो हमारे अर्थ का अनर्थ कर दिया. लोगों ने इस बात का हमें बहुत कष्ट है इस. बात का हमें दुख है कि आप आपने जो बोला. ठीक बोला है आपने जो हमरे किसी ने कहा कि. हम आपको मोक्ष दिला देंगे वो सब अपनी अपनी. बात उनकी जगह ठीक है जिनकी जैसी श्रद्धा.
होगी वो अपने अपने हिसाब से वो ठीक कह रहे. हैं क्योंकि उस लोग आप पर तस कस रहे थे कि. अगर ऐसे मोक्ष मिलना धीरें शास्त्री जी को. हम धक्का दे द हां बिल्कुल हमने वो सुना. बहुत लोग बत वो सुना है तो उनका अपनी जगह. कहना ठीक है चूंकि वो समझ नहीं पाए हमारे. तथ्य को समझ अर्थ का अनर्थ निकाल दिया. इसलिए उनके शब्द मुंह से ऐसा निकल रहा है. हमारा किंचित मात्र भी ऐसा उद्देश्य नहीं. था कि हम उनको यह कहे कि भैया जो मरे हैं. वो मोक्ष भया है मोक्ष तो होता है कर्मों. से मोक्ष होता है प्रभु की स्वीकार उक्ति.
से मोक्ष होता है भगवान के प्रति सरेंडर. होने से लेकिन अब जब घटना घट गई आगे कोई. बड़ी भयावह ना हो जाए भीड़ भरी पड़ी है. लाखों लोग हैं और माहौल बिगड़ रहे ना तो. उसके लिए क्या कह सकते. हैं क्या कह सकते हैं मैं इसको एक और. इसमें कोट करता हूं एक शंकराचार्य. उन्होंने कहा कि आप भाजपा सरकार के. प्रचारक के तौर पर काम करने लगे वहां पर. कि सरकार पर सवाल कवर करने के लिए आपने वो. लाइन बोल दी नहीं नहीं ये तो पता नहीं.
उन्होंने क्यों इस बात को बोला है हम किसी. एक के प्रचारक कैसे हो सकते हैं साधु गंगा. किसी एक की कैसी हो सकती सूर्य किसी एक का. कैसे हो. सकता चंद्रमा किसी एक का कैसे हो सकता राम. मंदिर किसी एक का कैसे हो सकता उसी प्रकार. साधु किसी एक का कैसे हो सकता और साधु. परंपरा का निर्वाहन करने वाला या साधु का. सेवक किसी एक का हो जा तो वो साधु कैसे हो. सकता हम क्यों प्रचार करेंगे क्यों करेंगे. हमें उससे फायदा क्या जो सत्य है हमने उस.
बात को रखा हां सरकार ने अपने इंतजाम ठीक. किए पर लापरवाही तो हुई उस बात पर भी हमने. तर्क रखा कि भूल तो हुई है और इतना ही. नहीं ऑन कैमरा के साथ-साथ ऑफ कैमरा में हम. संतों के साथ बैठ कर के वहां के जो. प्रशासनिक अधिकारी थे उनसे भी चर्चा कर. रहे कि बहुत भूल हुई बहुत गलती हुई जब. आपके पास सीसीटीवी इतने कैमरा है जब आपके. पास इतने लोग हैं तो आपको पता नहीं था कि. इस जन में इतनी भीड़ हो रही. है और आपको वहा तक्षण कारवाई करनी चाहिए.
तुरंत कोई ऑप्शन करना चाहिए हमने यहां तक. बोला आप सुन कर के चौक कि पीछे दिनों में. परम पूज्य श्री हमारे बहुत ही प्रिय संतोष. दास जी महाराज जी का जगतगुरु का पट्टा. अभिषेक था उसमें हम गए थे बाबा जी भी आए. थे माननीय मुख्यमंत्री वहां हमने यह बोला. कि शायद अगर यह महाकुंभ सेना के हाथ में. दे दिया जाता तो इस घटना के कलंक से बचा. जा सकता था कलंक रहा है वो निश्चित रूप से. अब देखिए घटना तो हुई है और घटना हुई है. तो थोड़ा सा धब्बा तो लगा ही है इसमें तो.
कोई संदेह ही नहीं है अब यह लापरवाही. किसकी है यह तो जांच आयोग बैठा गठित हैब. लापरवाही सामने आएगी पर सबने अपनी अपनी. कौन चाहे ता कौन सरकार ऐसा चाहे थी कि. हमारे रहते हुए ऐसी घटना हो पर 12 में भी. हुई 13 में भी हुई 1954 की 3 फरवरी को भी. हुई घटनाएं तो हुई है तो एक निश्चित रूप. से यह भी दुखद तो हुआ ही है अब वो किसके. प्रति किसके खाते में जाएगा यह जनता का. निर्णय है ना कि हमारा पर ये आप आरोप नहीं. थोप सकते कि किसी के प्रचारक हम एक विचारक.
है प्रचारक नहीं है इसमें एक एलिगेशन आप. पर महाराज जी और आता कि 140 साल वाला जो. थ्योरी थी 140 साल बाद कुंभ हो रहा है यह. गलत फैलाया गया था यह नहीं है यह हर बार. फैला दिया जाता है देख 140 साल बाद फिर. आपने स्टेटमेंट एक दे दिया था कि जो कुंभ. नहीं आएगा वो. पा नहीं पापी नहीं हमने देशद्रोही कहा था. हमें अपना स्टेटमेंट याद है जो कुं नहीं. आएगा वो देशद्रोही है अब इस पर भी लोग कहे. कि आप लोगों ने ही भीड़ को मजबूर कर दिया. था कि लोग वहां सब जाए देखिए हमने लेकिन.
यह तो कहा कि आप महाकुंभ है पर हम ये नहीं. कह रहे थे कि आप एक ही दिन में पहुंचे ये. तो नहीं कह सकते ना ये भी तो नहीं हम कह. रहे हैं कि आप संयम ना बते मौनी अवस्था. बड़ा दिन होता है हर आदमी सोचता है कि वही. नहा ले वही सारा पुण्य है पांच पर्वों में. उत्सव था सब लगभग 45 दिन ये उत्सव चलना था. बहुत बड़ा उत्सव था हिंदुओं के लिए. सौभाग्य का विषय है सनातनी हों के लिए. सौभाग्य का पर्व है इसमें किंचित मात्र. संदेह नहीं हम सही बात बड़ा पर्व भी है और.
बड़े-बड़े अमलात मा विमला अपमा महात्माओं. के हम एक जगह दर्शन कर सकते हैं जिन तक. पहुंचना बहुत कठिन है अलग-अलग जाने में. पूरी जिंदगी निकल जाएगी एक ही जगह उन सब. महापुरुषों के दर्शन उस हमारी सनातन. संस्कृति प्राचीन विधा 13 अखाड़े 13 भाई. त्यागियो के अखाड़े संतों के मठ उनकी. परंपरा उनकी उदारता इसको देखने के लिए. जागते हुए भारत उगते हुए सूर्य की तरह. भारत अभी फिर से एक नई उड़ान पर है इस देश. में जो हिंदुत्व और हिंदू सनातन के प्रति.
उंगली उठाने वाले उनके लिए सबसे सुनारा हो. गोल्डन टाइम कि हमारी युवानो को देखना. चाहिए बिल्कुल मतलब मैं आपकी इस बात हमने. इस बात के लिए आकर्षित नहीं किया आपने जब. ये कह दिया कि जो नहीं आएगा वो देशद्रोही. है तब लोग कह रहे मान लीजिए कोई जा जैसे. कोई आदमी सियाचीन में नौकरी कर रहा हो या. बॉर्डर पे हो या मेरे जैसा पत्रकार जो. दिल्ली इलेक्शन कवर कर रहा था अब आपने हम. लोग को देशकर भैया यही सबसे बड़ी इस देश. की दिक्कत है तथ्य कब हमने ये बोला किसी. ने ये तर्क दिया कमिटमेंट किया है कि जो. कुंभ में जा रहे हैं वो.
पापी यह पूछा जाता है हमसे क्वेश्चन हमने. कहा जो कुंभ में जा रहे हैं तो भगवान की. बड़ी कृपा है कि पापी है पर वह यह प्रमाण. दे दे कि वह पापी नहीं है और जो नहीं आ. रहे हैं जिन्हें गंगा से प्यार नहीं गंगा. तो सबकी है सही बात है जीवन दनी तो जो. जिन्ह गंगा से प्यार नहीं जिन्ह जीवन दयनी. नदियों से प्यार नहीं जिन्ह प्रति भले ही. तोहे सनातन से नफरत हो पर गंगा से तो. प्यार होना चाहिए क्योंकि इस देश की जीवन. दयनी ना दी है इस देश की जी नदी नर्मदा है. सरस्वती है और तुम्हें त्रिवेणी से प्यार.
नहीं है तुम्हें गंगा से प्यार नहीं है तो. निश्चित रूप से तुम देशद्रोही हो तो आपने. यह नहीं कहा था अ कह रहे हो अरे हमने यह. कहा है कि भैया आपको अगर संगम से प्यार. नहीं है महाकुंभ से अगर प्यार नहीं है तो. आप देशद्रोही हो उसमें क्या संदेह क्योंकि. मैसेज य गया कि आपने कहा जो नहीं स्नान. करने आएगा वो देशद्रोही है. बजक ये भी कोई गलत नहीं बोला है लेकिन जो. आदमी मान लीजिए कोई नौकरी में फसा हो. बीमार हो तो फिर संयम का स्नान भी कर सकता. है ये तर्क अगर आप उस वक्त भी पूछते तो हम. कहते अच्छा आप कहते महाराज लो हम नहीं आ.
पाएंगे हम व्यास ऐसे लाखों लोग हैं जो. नहीं गए करोड़ों हैं जो जाना चाहते जाना. चा नहीं जा पाए परिस्थिति है मजबूरी है. काम है नहीं जा. पाए जरूरी नहीं है कि तन पहुंचे मन भी कई. लोगों के पहुंचे हां मन भी तो पहुंचे पर. वो विस्तार से पूछा. किसने वो विस्तार से पूछा किसने हां तो जो. मन से भी स्नान कर गए या जिके परिवार के. लोग गए और एक लोग अब एक पहुंच गया नहीं जा. सकते वहां से जल गंगा जल ले आए और घर पर.
छिड़क लिया तो उनको भी तो पुण्य मिलेगा ना. महाराज जी तो संयम का भी संगम स्नान तो है. संयम का भी तो स्नान कर सकते हैं संयमित. जीवन का भी तो संगम जी सकते हैं यहां. स्नान य हम आपके साथ से तो हमने केवल एक. वो एक क्वेश्चन आंसर चल रहा था पत्रकार से. अब वो कहता है कि ऐसे ऐसे लोग कमेंट कर. रहे हैं आप क्या कहना चाह हा लेकिन आप मौज. मज में क तो फिर उसका बहुत बड़ा बड़ा. हेडलाइन बनता है हां ये तो है खैर अब किसी. को क पहुचा हम सुधारें जब अ कुंभ की. शुरुआत हुई तो इतने सारे अखाड़े थे इतने.
सारे साधु महात्मा थे आपने स वर्णन भी. किया इतना बड़ा संयोग था लेकिन चर्चा जब. होनी शुरू हुई तो कोई आईटी एन बाबा कोई. मॉडल वाली साधवी आपको लगता है कि यह भी एक. गलत ट्रेंड है कि उसको लोगों ने शुरू में. इवेंट बना दिया था कि यह आईटीए बाबा कोई. नशेड़ी करके आ गया या कोई आंखों में लेंस. लगा के आई तो उनको साथ भी कह दिया गया और. कई सारे हीरोइन भी आई जिनसे एक दो सा आप. से भी पंगा. हुआ भगवान की क. पाए ये ट्रेंड सही है देखिए वो जो उत्सव.
था वो रील का नहीं रियल का उत्सव था वो. उत्सव किसी के वायरल का नहीं था वो. आत्मसात का उत्सव. था वो उत्सव कैमरे में संजोने वाला नहीं. था आंखों में समाहित करने वाला उत्सव था. वो उत्सव किसी को दिखाने के लिए नहीं. भगवान के दर पर और परमात्मा और महात्मा के. सन्मुख दिखने केन का उत्सव था वो महाकुंभ.
का उत्सव जो है वो हम किसी की निंदा या. स्तुति करने का नहीं है वहां केवल अपने आप. को डुबाने का उत्सव था भक्ति में श्रद्धा. में भरोसे में जो भी आध्यात्मिक के पर्याय. है उनमें डूबने का उत्सव था अब रही बात कि. कुछ दिनों के लिए तो महाकुंभ अपने मेन. मुद्दे से भटका हम उनके खिलाफ नहीं है अगर. हम ये बोल देंगे तो लोग कहेंगे वाह बाबा. जी तुम भी तो वायरल ही भए. हम कोई भी तथ्य देंगे तो लोग इतने विचित्र.
है भया इतना क्यों प्यार करते लोग आपसे. पता नहीं हमसे क्या इतनी मोहब्बत है अगर. हम यह कह दे नहीं नहीं वो सही नहीं था वो. तुरंत कहेगे वाह खुद वायरल हुए फीके पड़ने. लगे तो लोगों को तुम ज्ञान देने लगे हो जय. हो महाराज ऐसे बोलते. हैं शंकराचार्य. जीवनंद जी वो आपसे बहुत प्यार करते हैं. उनका बहुत आशीर्वाद है हम उनकी बहुत कृपा. है हम बनी रहनी. चाहिए ये लगाओ क्या विशेष वजह है वो हर हर. बड़े कार्यक्रम में एक बार आपको जरूर लपेट.
लेते हैं हमको तो हर जोशी मठ में भी आपको. लपेटा था महाकुंभ में भी उन्होंने कहा कि. अगर आपको भविष्य दिख जाता है तो काहे कुंभ. की घटना के बारे में आपने सबको सूचित कर. दिया हमने ऐसा कभी नहीं कहा आप हमने हम. भविष्यवक्ता है ही नहीं हमने ऐसा कहा नहीं. है कि हम भविष्यवक्ता है अरे भाई कोई. पूछने आए तो हमें कोई अनुवाद भरेगा कोई. भाव आएगा कोई वारता मन में आ बाला ट्रेन. दुर्घटना प आपने कह दिया था एक बार कि. हमको ये दुर्घटना दिख जाती. अगर कोई प्रश्न पूछे कोई प्रश्न पूछे तो.
निश्चित रूप से गुरु का काम क्या है उत्तर. देना जो भी जितनी की जिनकी जिनकी सामर्थ्य. होती वो अपने हिसाब से देते हमें जो. भागेश्वर वाला जी या सन्यासी बाबा का आवास. होगा मन में जो प्रेरणा लगी हम उत्तर दे. देते हैं हम भविष्यवक्ता नहीं है और हम इस. देश में भविष्यवक्ता स्वयं बनना भी नहीं. चाहते हम इस देश के लोगों को भविष्यवक्ता. बनाने भी नहीं चाहते तो ये ये क्यों आपकी. इमेज बनी है कि आप भविष्य देख लेते हो और. फिर अब अब देश में जो भी घटना होती है. उससे हमको जो जो बुरा होता है इस देश में. उसम उसमें धीरेंद्र शास्त्री को लोग पूछते.
हैं कि आपको क्यों नहीं पता हां ये जरूर. क्वेश्चन डालेंगे ये बताओ किस दिन कोरोना. आएगा धीरेंद्र के शास्त्री क्यों नहीं. कोरोना कैसे आ गया या भारत कब नंबर वन. बनेगा या विराट कोहली की फॉर्म कब वापस. आएगी एक वो आप वो बताओ न्यूज क्रिकेट वाला. वर्ल्ड कप जो हारे हैं बाबा ने क्यों नहीं. बताया कि हार रहे हमारे सट्टे में रुपए. चले. गए हम तो इतने पके हुए हैं हमने कभी यह. नहीं कहा कि हम भविष्यवक्ता है और ना हम. भविष्य वक्ता बनना चाहते अगर भगवान हमको.
मौका दे तो हम भविष्य निर्माता बनना चाहते. और लोगों को भी भविष्य निर्माता बनाना. चाहते वो भी अपने भविष्य का खुद निर्माण. तो फिर ये भविष्यवक्ता और पचा देखने में. डिफरेंस क्या है थोड़ा समझाइए देखिए. भविष्य देखना एक अलग है हां वर्तमान. सिचुएशन को बताना एक अलग है भविष्य कि. क्या घटित होने. वाला भविष्य का मतलब है कि क्या घटित होने. वाला तो अंदाजे से तो मौसम विभाग भी बताता. है वो भी तो भविष्य बताता है मौसम विभाग. कि तीन दिन बाद बारिश आने वाली है ओले आने.
वाले हैं और नहीं भी कई बार आते हैं यह भी. जरूरी नहीं है हवा चल जाए तो लोग ली भग. जाते जैसे आपके मंच पे हमने कई बार देखा. कि आप कहते हो कि तुम्हारा फलाना नाम है. तुम्हारे चाचा ये है तुमको बीमारी ये है. एक पत्रकार का भी आपने पर्चा खोल दिया था. वचा रा बड़ा गाली खाया बाद में देखिए एक. पर हमा आप पर भी आरोप लगा कि उसके फ से. आपने पढ़ लिया था हां एक वैदिक हां वो. पिछले समय में हां ऐसे तो बहुत दुनियादारी. के लोग हैं वो तो चलते ही रहते हैं कुछ ना. कुछ बोलते तो फिर ये क्या अंतर कैसे होता. है क्योंकि ये एलिगेशन आपके साथ चिपक गया. है कि आप अंधविश्वास फैलाते हैं और अपने.
मतलब को बता देते हैं कि ये हमको दिखता है. ये कहते नहीं दिखता है नहीं नेवर हमने कभी. ये नहीं कहा कि हमको क्या दिखता क्या नहीं. दिखता हमने ये कभी दावा नहीं किया कि हम. भविष्यवक्ता है हमने कभी यह दावा नहीं. किया है कि हम कुछ बता सकते हैं आज तक एक. भी इंटरव्यू में जो हो जाता है वो हमारी. परंपरा है गद्दी की एक महिमा है उसमें. बैठते हैं और हमें जो आभास लगता है और वो. उसकी खुली किताब केवल भारत में जो भी अब. जो घटित हो या जो भी होने वाला हो ये नहीं.
हम कह सकते कि हम भविष्य बता सकते हैं मान. लीजिए अगर मूड बना और वो परंपरा है गद्दी. है जो हमारे दरबार की परंपरा चल रही जो. हमारी प्राचीन संस्कृति की परंपरा है हमें. हनुमान जी महाराज का जो भी प्रसाद गुरु जी. ने दे रखा उसके भरोसे प कुछ अगर आभास. लगेगा तो हम कह देंगे मान लीजिए आप 2. किलोमीटर की रफ्तार की चाल प चल रहे हैं. तो अगर लगा के आप 2 किलोमीटर में इतना जो. है तय कर सकते हैं तो बता सकते हैं भाई आप. मतलब ऐसे हम अगर पूछे कि हमारा बयाह कब. होगा तो आप नहीं बता सकते को अर्जी. या हमारे कई बच्चे होंगे अगर ऐसे सीधे.
पूछे तो ये नहीं देखिए ये विषय अलग है ये. विषय अलग है हम पूछे तो बताएं तो अनुभव. में जब ज्योतिष क्या है एस्ट्रोलॉजी क्या. है अगेन य प्रेडिक्शन आपके बारे में हां. ज्योतिष में तो मैं विश्वास करता हूं. कैलकुलेशन कैलकुलेशन कैलकुलेशन वही हमारे. पास में गुरु प्रसाद है बस और कुछ खास. नहीं गुरु कृपा है और हमने कभी ये बताया. भी कहा भी नहीं कि हम भविष्यवक्ता है ठीक. है एक इस पे आखिरी सवाल फिर मैं अगले वि. अच्छा ये आपका समझ में आ गया मुझे तो. एस्ट्रोलॉजी तो मैं बिलीव खुद करता हूं. मैंने कई बार कंसल्ट भी करवाया कई बार सही.
निकली और मैं उस पर विश्वास करता हूं. मैंने आपको पर्चा नहीं दिखया कभी समय. मिलेगा तो भी दिवा दिवा लेना जी अभी मौका. बहुत बेहतरीन. है दाम पे है अपन मम्मी हमारी परेशान है. बियाह को लेके ब्याह करवाना है तुम्हारा. हालांकि बयाह तो आपका भी नहीं हुआ आपकी. मम्मी परेशान होंगी वो तो है तीन एक साल. से चलता रहता है एक अफवा ड़ी थी जया. किशोरी वाली वो तो बे फजली की थी अफवा. जिसने भी उड़ाई वो बहुत बे फजली की बातें. थी पता नहीं क्यों पॉडकास्ट में जया. किशोरी ने कहा कि उनको बड़ी परेशानी.
हुई किसी भी बच्ची के साथ में किसी का कोई. परिचय ना हो किसी भी बच्ची या बच्चा पुरुष. हमको भी बहुत असहजता महस आपको कब पता लगा. कि आपकी जय किशोरी शादी होने वाली है मैं. तो बहुत बाद में कोई इंटरव्यू वाले ही. बताते थे उस वक्त हम बहुत व्यस्त चल रहे. थे उसमें चल रहे थे लगातार कथाएं लगातार. चल रही थी यहां वहां आना जाना कभी गुजरात. कभी कहीं कभी कहीं बहुत ज्यादा इन सब पे. हम न देते हैं ध्यान पर उतना ज्यादा बाद. में पता लगा कि कुछ लवड़ा हो गया है पता. नहीं फिर हमने इंटरव्यू में बोला भी ये. इसलिए तो नहीं था क् आप दोनों लोग सुंदर.
दिखते हो फेमस हो अपनी अपनी फील्ड में ऐसा. भी कुछ क हम लोग तो कभी मिले नहीं कभी. नहीं मिले उनसे फोन पे कोई बातचीत बीच के. दिनों में शायद एक बार कोई चर्चा हुई है. अभी कुछ दिन पहले वो भी किसी ने क्या नाम. है उनका एक बहुत अच्छे सनातन के प्रति. प्रेजेंटेशन रखते हैं गौतम खट्टर जी गौतम. खट्टर है एक बहुत युवान है और बहुत अच्छे. सनातन के लिए तर्क रखते हैं तो उनके साथ. बैठे थे उन्होंने ही फोन लगा के हमको. चर्चा करवाई बाकी हमारी कभी वो भी बड़ी. ट्रोल हुई थी अभी अपने बैग को लेके कितना.
महंगा क्रिश्चियन र उसम की आरोप लगता है. कि बाबा लोग खुद तो कहते कि मु माया दूर. रहो और अपना लाखों लाखों का बैग लेते हैं. फोन लेते हैं. आई किसी की जिंदगी पर हम क्या कह दे हम. नहीं बोल सकते किसी की जिंदगी पर पर बाबाओ. पर हम यह कह सकते हैं कि देखिए भाई हम. अपनी जिंदगी के हम बहुत से बहुत पुराने आप. हमारे वीडियोस देखेंगे तो हम बोल देते हैं. कि हम माया छोड़ने के प्रवचन नहीं. सुनाते हम इसलिए माया छोड़ने के प्रवचन. नहीं सुनाते हैं कि हम खुद माया लेकर वचन. सुनाने जाते हैं और वो ज एक आपका वीडियो.
और वायरल होता है कि हा लेकिन ये है माया. लेना बुरा नहीं है माया प्रयोग कहां कर. रही है बहुत महत्त्वपूर्ण है दक्षिणा लेना. बुरा नहीं आप भी लेते ही है तब पॉडकास्ट. के लिए आप भग रहे हैं नहीं तो आप इतनी. मेहनत करके 1000 किलोमीटर क्यों भागेंगे. आप आप से तो. पैसा तो देगा ही. देगा तो खेल तो इसी का है जिंदगी. में तो ला कौन पागल होगा इस दुनिया में. लेकिन य महत्वपूर्ण नहीं है कि आप लेते. हैं लेते दुनिया दक्षिणा सब कोही लेती है.
ऐसे कोई नहीं दुनिया में आप आए हैं और आप. पहन रहे हैं तो आप दूध के धुले नहीं है. हमें पता है अपनी जिंदगी की जितनी. प्रैक्टिकल है आप दूध के दले हो ही नहीं स. जरूरत है आपको सही बात है हां लेकिन ये. महत्त्वपूर्ण है कि आप लेने के बाद में. प्रयोग या सदुपयोग कर रहे हैं या दुरुपयोग. कर रहे हैं ये बहुत महत्वपूर्ण है लेते हम. भी हैं लेकिन ठीक है कैंसर हॉस्पिटल है. कन्या विवाह है अन्न पूना है और गरीब. बेटियों की हमारा य एरिया बहुत बिछड़ा. पिछड़ा है हमें एरिया के डेवलपमेंट 17. जिले हैं बुंदेलखंड के इसके डेवलपमेंट का. बहुत हमारे अंदर थीम रहती है ड्रीम रहते.
हैं विचार हमको पहले आप ये बताओ ये कन्या. विवाह बड़ा चर्चा में है कि 250 लड़कियां. 251 लड़कियां 251 इस साल साल हां पिछले. साल शायद 150 थी या 151 थी इस साल 251. लड़कियों का विवाह करवा रहे हो फिर हमसे. किसीने हमने पूछा लोगों से क्योंकि आप तो. बिजी थे हम तो कोनम सबसे बैठे खबर निकाल. रहे थे तो किसी ने हमसे कहा कि महाराज जी. की बहन की जब शादी हुई थी तो बड़ी गरीबी. में हुई थी उसके दुख में व कर रहे थे बाहर. आपके विरोधी कहते हैं कि यह प्रचार प्रसार.
का तरीका है जैसे नेता लोग करते हैं क्यों. 251 कन्याओं की शादी करवा रहे हो आप देखिए. हमको राजनेता बनना नहीं है तो प्रचार. प्रसार की जरूरत नहीं जो महिमा लोगों तक. बालाजी ने पहुंच वाई वो पहुंच चुकी. है जितनी हो सकती है वो पहुंच चुकी है. जैसे हो सकती है वैसे पहुंच चुकी है देश. के क्या बड़े क्या छोटे सबकी निष्ठा और. श्रद्धा बालाजी के प्रति है और वो पहुंचते. हैं और आते भी है इसकी हमें लगता कि यह.
प्रयोग उसके लिए तो नहीं हो सकता साल भर. हम कमाई करके कथा करके दक्षिणा चढो तरी. लेकर बेटियों के विवाह में अगर खर्च करते. हैं इसके पीछे क्या हो सकता है क्या सोच. है इसके बीचे आपके वही हम दुनिया को बताना. चाह रहे हैं भारत. के मंदिरों की दान पेटियां से आने वाली. चढो तरी से गरीबों की बेटियों का अगर घर. बसाया जाने हिंदुओं के चढ़ावा से हिंदुओं.
की बेटियों का घर बसाया जाने लगे इस देश. की अराजकता मिटेगी इस देश का छुआछूत का. भेदभाव का एक सबसे बड़ा कलंक मिटेगा इस. देश का सबसे बड़ा तक्ता आध्यात्मिक और. स्पिरिचुअल हो जाएगा इस देश के प्रत्येक. वर्ग का व्यक्ति भगवान पर और दृढ़ता के. साथ भरोसा करेगा मंदिरों का चढ़ावा जो. चढ़ा रहे उनको ही तो दे. रहे हम इस देश में एक नई लकीर खींचना चाह. रहे हम इस ना तो हमें सीएम बनना है ना. एमपी बनना है ना एमएलए बनना है कभी.
पॉलिटिक्स जाओ क्या नेवा आप कैसी बात. कहते कई नेता लोग भी पहले. हमारे जिंदगी के सबसे मस्त मलंग जिंदगी है. हमारी अध्यात्म की और उस जिंदगी. से और हम जाएंगे क्यों क्यों जाना जरूरी. तोड़ी है कि आप पॉलिटिक्स में जाक ही हर. काम कर पाओ सही बात है पॉलिटिक्स में बिना. जा करर के भी सब कुछ कर तो जैसे 251 लड़के. इनके लिए बाकी लोग भी सहयोग कर रहे हैं. केवल आप अपने से कर रहे कुछ लोग सग कर. देते जो हमारे जुड़े हुए हैं जो हमें चढो. मिल जाते वो दान पेटी हम इस देश में नया.
मैसेज देना चाहते हैं कि मंदिरों की. पेटियां की चढो तरी से बेटियों का घर. बसाया जा सकता हम ये मैसेज देना चाहते हैं. तो ये इसकी तैयारी कैसे करते हो 21. लड़कियों के लिए दुलहा ढूंढना नहीं एक एक. महीने का समय होता है लगभग तीन महीने दो. महीने पहले तो फॉर्म जमा करते हैं लोग आते. हैं फिर हमारी लगभग 1660 लोगों की टीम है. पूरा क्षेत्र है इसमें सबसे अनूठी बात है. हमारे यहां कोई ये इन सब कामों को नहीं र. बना दिया हां त्यौहार ये पूरे जिलों का.
पांच जिले के लोग लगते हैं पांच जिले के. मंडल बने आपके आने के पहले एक वो मंडल आके. जो राम राम करके मंडल है वो आएंगे वो. फार्म जमा करवाएंगे फिर वो चेक करेंगे वो. पात्र अपात्र चयन करेंगे मात पित हीन कौन. है फिर उसके घर पर क्या नहीं है फिर वो. करती क्या है चयन करने के बाद फार्म पर. फिर सील मोहर लगेगी फिर कमेटी बताएगी इसके. बाद फिर उपहार खरीदने पूरी टीम पांचों. जिलों की जाएगी उपहार खरीदेगी डबल बेड है. सोफा है एलईडी टीवी है ड्रेसिंग टेबल है. अलमारी है सोने की नाक की कील पायल बिछिया.
किचन सेट गैस चूल्हा सिलेंडर रामचरित मानस. बाल मुकुंद बर की शेरवानी बेटियों के साथ. जो है साड़ियों का सेट बेटियों की लहंगा. चुनरी एक-एक मिक्सी मशीन एक-एक सिलाई मशीन. और इस पिछली साल एक-एक मोटरसाइकिल दी थी. इस बार एक-एक आटा चक्की दे रहे अब देखो ये. है तो बहुत सुंदर सुनने में लेकिन विरोधी. इसमें भी कह सकते हैं कि बाबा जी दहेज दे. रहे हैं उपहार दे रहे हैं. दीन हीन निराश्रित व्यक्ति को कुछ भी.
सहायता देना दहेज नहीं है उपहार. है दहेज तब है कि जब बच्चा बेटा खरीदा जाए. तब बेटा और बेटी जो चयन करते हैं वह ऐसी. परिस्थितियों के होते हैं कि उनकी ठीक-ठाक. परिस्थिति नहीं उनके घर पर जो जाएगा वो. उपहार जाएगा वो जिंदगी भर जय जयकार. करेंगे तो ये उपहार है ना कि दहेज दहेज. उनको होता है कि जिनके पास हो बेटा बेटी. का विक्रय किया जाए वो दहेज है उपहार देना. कोई पाप नहीं है इस देश में अगर इसको भी. पाप माना जाएगा तो अमीरों की जितनी भी. शादियां होती है उन पर रोक लगना चाहिए.
सबसे ज्यादा दहेज उनकी शादियों में होते. कल के दिन भविष्य में भगवान का ना करे. तुम्हारी भी शादी होगी और तुम्हारे घर अगर. सिंगल साइकिल भी आएगी तो वो भी दहेज माना. जाएगा आपकी भी होगी अपने दे ही. रहे हम तो दे ही रहे पहले किसकी होगी कह. नहीं सकते गुरु अपनी जिंदगी में कुछ फिक्स. नहीं है भाई मेरे कुछ भी फिक्स नहीं है वो. जाना है गुरु हमें जो आज्ञा देंगे हमारे. गुरु जी शादी कौन तय करेगा धीरें कृष्ण. शास्त्री जी की माता-पिता.
और मान लो आपको पसंद ना आई तो इससे कोई. मतलब मनमौजी हो आप तो पसंद और नापसंद में. माता-पिता की पसंद ही हमारी पसंद है ये. ऑलरेडी अपने ब्रेन को हमने समझा ब जैसे आप. दुनियादारी देख ली हो माता-पिता जी गांव. में रहते हैं आप ज्यादा लोगों से मिलते हो. ज्यादा एक्सपोजर है हो सकता है आपकी पसंद. बदल जाए बदल गई हो समय के साथ नेवर हम. मौसम नहीं है मेरे एक मित्र है मनोज. मुंतशिर अच्छे लेखक है राइटर है है. उन्होंने एक सवाल पूछा कि मनोज मुंतशिर. शुक्ल मनोज मुंतशिर.
शुक्ला हां तो उन्होंने मुझसे एक सवाल कहा. था आपसे पूछने के लिए. कि आप जैसे हिंदू इकट्ठा कर रहे हो कह रहे. हैं कि हिंदुओं के इकट्ठा होने में सबसे. बड़ी बाधा किस चीज की है मैंने इसको जो. सोचा वो मुझे लगा जात. पात ना फिर क्या है हिंदुओं के इकट्टा. होने में बाधा एक नहीं है अनेक है पहले ही. तो जो आप बोल रखे हैं वही जात पात ऊच नीच. भेदभाव छुआछूत घृणा सबसे बड़ी दिक्कत है.
कि यहां पर सबको हिंदू हृदय सम्राट. बनना सही पकड़े हैं यहां सबको हिंदुओं का. बब्बर शेर बनना है और सबको एक एक. हिंदुत्ववादी काम करने वाले के अंदर जो. सबसे गंदा कीड़ा है वह यह है कि वह अपने. छाता के नीचे सबको बैठाना चाहता. है और यह हिंदुओं को एक नहीं होने देता है. मेरा हिंदू तेरा हिंदू. हां ये मेरा कैडर है ये मेरा कैडर है ये.
मेरा एरिया है ये तेरा एरिया है मैं बात. बोलूंगा तो युवान सुनेंगे मैं बात बोलूंगा. तो इंटेलेक्चुअल लोग सुनेंगे हम बात. बोलेंगे तो फिर फिल्म इंडस्ट्री सुनेंगे. हम बात बोलेंगे तो संघ सुनेगा हम बात. बोलेंगे तो बीजेपी सुनेगी हम बात बोलेंगे. तो कांग्रेस भी एक्सेप्ट करेगी ये सबसे. बड़ी जड़ है कैसे दूर करोगे फिर से ये तो. बड़ा टास्क है अब आप विचार करो कि हमारी. मैंने बहुत बाबाओं का पॉडकास्ट किया है और. मैंने उसमें भी देखा कि आपस में रेवलरी तो. है. इशारो इशारो छे देते नहीं नहीं नहीं आप तो.
कई लोगों को आप देखेंगे चेहरे की शुकन बता. देती. हा हमने तो कयो साहब के बारे में पूछा है. कहा तो उन्होंने है लेकिन हम भाव समझ गए. थे क्या कह रहे हैं. वो क उनकी कृपा है इसके लिए जब तक इस देश. में लुटने वाला और मिटने वाला हिंदू नहीं. आएगा. आगे मुझे ना तुमसे सम्मान चाहिए ना मुझे. अपमान. चाहिए इस विचारधारा से परि पक्का आदमी तब. तक इस देश में हिंदू एक नहीं हो सकता.
है उस आदमी को ऐसा चाहिए हम अपने आप को. बनाने की कोशिश भी करते रहते हैं हम आपको. बताते हुए हमें खुशी है इस बात की कि हम. अपने आप को बनाने की ऐसी कोशिश भी करते. रहते हैं कि हमारे द्वारा किसी हिंदू का. अहित ना हो और कोई हिंदू अगर हमारा अहित. करे तो हमारे अंदर उसके प्रति घृणा या. नफरत ना हो ठीक बात जैसे कि आपका इलाका जो. है मैंने सुना कि आदिवासी समाज से काफी. लोगदा ट्रब काफी ट्राइबल लोग यहां पर रहते. हैं हिंदु में कास्ट सिस्टम बड़ा खराब है. अपर कास्ट लोअर कास्ट हमने अपने पुरखों को.
देखा भी कि उनका अलग हिसाब किताब होता था. हालांकि हमारी पीढ़ी में मुझे लगता है कम. है कम से कम मुझ में तो नहीं है अब एक. सवाल और आता है कि जात पात खत्म करने का. तब होगा जब हम उनके साथ मिलना जुलना बैठना. शुरू करेंगे शादी ब्याह शुरू करेंगे और. अगर हम ये करें जैसे आपकी शादी है मेरी. शादी है क्या ऐसा हो सकता है कि हिंदुओ एक. करने के लिए हम और आप कभी अंतर जातीय शादी. कर ले हम पहली बात तो जात पात खत्म करने. के पक्ष में नहीं क्यों उसी पर हम तथ्य. देना तो हम बोलना चाह रहे थे समझना चाह. रहे हैं हां जात पात खत्म करना एक बहुत.
विचित्र मुद्दा है जो इस देश में गृह. युद्ध छेड़े का क्योंकि इस देश में आरक्षण. है हम इस देश में बड़े छोटे हैं इस देश. में शंकराचार्य है इस देश में वर्ण. व्यवस्था है इस देश में गोत्र व्यवस्था है. पांच पांच टास्क है अगर आप जात पात खत्म. करेंगे उ जात पात के अंदर जो घृणा है वो. खत्म करनी रामानंदाचार्य ने किया है. ऑलरेडी ये कैसे करोगे फिर रामानंदाचार्य. जी ने कबीर को भी चेला बनाया सैन को भी.
चेला बनाया रदास को भी चेला. बनाया जो उसके अंदर का पार्टीशन है ठीक है. आपका सरनेम कुछ भी हो सकता है ये अलग है. लेकिन हम सरनेम के स्थिति में आपको बड़ा. या छोटा ना. माने सुंदर यह बहुत बारीक पॉइंट है जो इस. देश का हिंदू समझ नहीं पा रहा बल्कि लोगों. ने हमें जब हमने पदयात्रा की तो लोगों ने. हमें गालियां दी बड़े-बड़े संत कुछ संत आए. नहीं हम आपके प पास एक मजेदार बात खोलना.
चाहेंगे एक दो ऐसे महापुरुष है जिनसे बड़ा. हमारा अभिन्न अंग बड़ी दोस्ताना बड़ी कृपा. उनकी और हमने फोन लगाया कि आपको आना है. बोले बहुत अच्छा काम है हम आएंगे अब. प्रारंभ होने के पहले ही हमने फिर लगाया. आपको आना है जी और आना इसलिए है कि हमें. बल मिले हम कोई गलती ना कर जाए हम बच्चे. हैं बहुत चंचल स्वभाव है हमारा हम बहुत. मनमोजी आदमी है बहुत चंचल स्वभाव सच में. बहुत चंचल स्वभाव है हमने कहा कोई गलती ना. कर जाए गंभीरता रहनी चाहिए और आप लोग. रहेंगे तो हम गलती नहीं करेंगे क्योंकि. अक्सर ऐसा हमारी जिंदगी में होता है तो.
उन्होंने कहा नहीं नहीं नहीं दूसरे दिन. यहां तिरंगा या फहरा कर के चल पड़ते हैं. अपन तो अकेले निकल पड़ते हैं कार में. जुड़ता है लोग मिलते हैं बहुत सी चीजें. होती हैं पदयात्रा में घटनाएं अच्छी बुरी. सब होती हैं लोग गले मिलते हैं सामूहिक. भोज होता है लोग रोते हुए आते हैं बच्चे. रोते हुए आते हैं एक घटना अनमोल अहिरवार. की हमने जिक्र की थी एक बालक आता है कि. क्या मैं हम आपके पांव पढ़ ले तो हम भोजन. कर रहे थे क्यों पूछ क्यों रहा है पूरे. लोग तो अगल बगल के बिना पूछे ही सेल्फी.
खींच रहा हो पढ़ रहा उसने कहा कि नहीं हम. दरस. अरवार त हमने उसको कहा कि हमारी थाली में. एक जगह खाली है आज जरा भोजन हो जाए बड़ा. चला तो ऐसी भी मूमेंट आए छ दिन हो गए. संताना शुरू हुए तो हमने अपने एक परिकर के. पंडित जी है उनको कहा कि और सब अपने आए. हैं वो नहीं पाए तबीयत ठीक है उनकी कुशल. है तो बोले वो तो यही बगल में ही.
हैने कहा आए क्यों नहीं बोले फोन नहीं उठा. रहे ओके हम कहा आप परेशान हमारी एक बहुत. अच्छी आदत है दो या तीन कॉल हम अपनी. जिंदगी में अपनी तरफ से लगाते हैं और हमें. लगा कि आपको हमारी कॉल की जरूरत नहीं है. तो फिर हम इंतजार करते हैं कि अगर आपकी. तरफ से आएगा आई एम वेटिंग वच मेरा दर खुला. है खुला ही रहेगा तुम्हारे लिए फिर हम. आपको परेशान नहीं करेंगे ये जिंदगी का. हमारा उसूल वो इसलिए उसूल है कि हमारे. कारण किसी को बोझ ना लगे और तुम्हें लगे.
कि लगाना चाहिए जब तुम्हें लगे कि आप फ्री. हैंडलर महसूस कर रहे हो त आप लगा लीजिएगा. तब हमको उठाएंगे त हम आपके साथ वो धोखा. नहीं करेंगे जो आप कर चुके हैं तो नहीं दो. तीन बार उन्होने हम क कितनी बार लगाया. बोले तीन हो गई हम चौथी लगाना भी मत प्लीज. बाद में फिर रहस पता लगता है कि वो इस बात. से नहीं आए हैं कि जात पात वाला जो आपका. नारा है उसके कारण उनको आग लग रखी है. तो हमें बहुत बुरा लगता है कितना सम्मानीय.
पद व्यक्ति इतना बुद्धिमान व्यक्ति और. हमारे बड़े भाई जैसा हमारा मित्र और हमारा. व्यक्ति जात पात के नाम पर अगर नहीं. पहुंचा ये तो बड़ी बहुत प्राचीन कृति से. जकड़ा हुआ आदमी और हमने कहा कि फिर तो ठीक. है तो हम अपनी जिंदगी में यह बात आपको. बताना चाह र कि हमने बहुत झेला ये लोगों. ने फिर हमने उन्हें बताया फिर हमने उनको. सेटिस्फेक्शन भिजवाया. कि दरसन हमने यह नहीं कहा कि हमें जात पात.
मिटाना है जात पात के अंदर जो गुमान भरा. है हमें वो मिटाना है इसके लिए हम बाहर. निकले मतलब जैसे ब्राह्मणों में कुछ लोग. कहते कि हम श्रेष्ठ है यह हम श्रेष्ठ नहीं. बताना चाह रहे आप जेष्ठ है या श्रेष्ठ है. समान है नहीं आप सिर्फ हिंदुस्तानी इंसान. है हिंदुस्तानी आप इंसान है आप आप ही केवल. महान नहीं है इस देश में जन्म लेना जन्म. लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति अब हमको समझ. में आ रहा क्यों नहीं आए थे कुछ. लोग क्योंकि ये है अभी भी लोगों में जातीय.
श्रे लेकिन ये गलत है और फिर आप उद्बोधन. देते हो तो हमें बहुत बुरा लगता है आप. कहते हो कि हिंदू एक हो कैसे एक होगा. हिंदू तुम्हारे अंदर का कीड़ा मिटेगा नहीं. और आप हिंदू एक कर लोगे हम गोत्र नहीं. मिटाना चाहते आपका हम आपको वर्ण से नहीं. हटाना चाहते हम आपकी जाति या सरनम नहीं. मिटाना चाहते ना हम आपको यह कहना चाहते कि. आप फलाने से शादी करो या ढिका से ये. मूर्खतापूर्ण बात है आपकी स्वतंत्रता है. भारत 1947 में आजाद हो चुका यहां.
अंतरजातीय विवाह के लिए भारत सरकार. प्रोत्साहित करिए कर रही है और आप करिए. आपको मुबारक लेकिन उसके अंदर की घृणा तो. मिटा दीजिए तो अंतरजातीय विवाह के. प्रोत्साहन की जरूरत नहीं पड़ेगी सत चीज. आसान कर दिया आपने बहुत सलूशन हमने इतना. बारीक सलूशन गुरु ने दिया हमने तो नहीं. हमारे गुरु ने हमें जो बुद्धि दी हमने. बहुत बारीक सोल्यूशन दिया कि आपको कुछ भी. नहीं ना आरक्षण वालों की लड़ाई नहीं तो कल. आरक्षण वाले अरवार हमारे साथ खड़े हुई क. उनका आरक्षण छीन लोगे फिर आप हा वो क्यों.
खड़े होते वो हमारे साथ चले ही इसलिए आप. सुन केक चौक 6000 अरवार समाज के लोग हमारे. साथ चले 6000 और एक दो दिन नहीं न. दिन न दिन ठीक सुंदर अब आपने हिंदुओ को एक. कर दिया अब एक आरोप आप पर और लगता है कि. मुसलमानों से खास मोहब्बत है आपको दिन रात. उनको कोसते रहते हो आप नहीं मुसलमान से. नफरत करते हो बिल्कुल भी नहीं हम इस देश. क्या पू दुनिया के रहने वाले किसी भी जीव. से हम नफरत नहीं इंसान तो छोड़ो जीवों से.
भी हमें नफरत नहीं हमें उस व्यक्ति से. नफरत है जो सर तन से जुदा करने की बात. करता जो भारत तेरे टुकड़े होंगे जिन्ह. वंदे मातरम गाने में दिक्कत है जो राम की. यात्रा पर पत्थर फेंकते हैं जिन्हें सीता. पर कमेंट करने में मजा आता है वह. फारूकी हमें ऐसे लोगों से बहुत नफरत है जो. 15 मिनट की बात करते हैं कि 15 मिनट दो हम. बताएंगे जो गज हिंद की बात करते हैं हमें. उनसे बहुत नफरत है और ये नफरत बरकरार.
रहेगी हमारी जब तक हम जिंदा रहे लेकिन हम. उस परंपरा के भी है कि हम रसखान की भी. परंपरा को गाते हैं हम रहीम के दोहे भी. गाते हैं और हम मिसाइल मैन अब्दुल कलाम को. भी स्वीकार करते. हैं मुसलमान दोस्त है आपके बेजे जक और 500. डिवटी है जो हमको जान पाए वो हमारे 500. डिवटी जो हमें जान पाए जो खैर डिया पर. जुड़े हुए हैं वो तो शुद्ध गाली ही बकते. हैं ये तो यह भी तय है और आप छोड़िए यहां.
के तो कन्वर्टेड मुसलमान आईम नॉट. एक्सेप्टेड कि ये रियल मुसलमान इस बात से. हम सहमत नहीं है इस देश में रहने वाला. प्रत्येक व्यक्ति हिंदू है सिर्फ बात यह. है कन्वर्टेड मुसलमान है कन्वर्टेड ईसाई. है और कन्वर्टेड यहूदी है रियल मुसलमान तो. अरब में. है बताइए कुरान किस भाषा में अरबी अरबी. में वो कहां है यूएई यूएई गल्फ कंट्रीज. में वहां जा स्वागत करते हैं हमारी कथा के. लिए हमें इनविटेशन.
देते गर्ल कंट्री में नहीं होता आपके साथ. दिक्कत एक परसेंट नहीं उन्हें पता है कि य. आदमी बेबाक है उन्हें पता है य आदमी जो. बोलता सही बोलता है उन्हें भीय पता है कि. जो भारत वाले हैं वो दूसरे. हैं बवाल करवाओ महाराज आपके साथ हमको लपेट. लोग तो गल्फ कंट्री में आपके मुसलमान. दोस्त बन गए दोस्त नहीं. बने हेलो हाय जरूरी थोड़ी है कि दोस्ती ही. हो ठीक बात ये भी बात कोई जरूरी नहीं है.
मुस्कुराते रहना बताते रहना भी तो एक मजे. है सही बात है सहमत हूं मैं दुश्मनी भी. नहीं है पर याराना भी नहीं है मैसेज. क्लियर है जिसको आप देना चाह रहे हो नई. पीढ़ी को लेकर बड़ी चर्चा चलती है जैसे. अभी आपने मुनव्वर फारूकी का जिक्र कर दिया. कि सीता जी पर कमेंट हुआ उससे नाराज थे. अभी एक और बड़ा मामला चल रहा है रणवीर. लाबाद या समय रहना का कई लोग विरोध कर रहे. और उनके समर्थन करने वाले भी लोग हैं कि. डार्क कॉमेडी है यह आप लोग प्रोग्रेसिव.
नहीं है इसका मतलब यह थोड़ी ना है कि आदमी. करना बंद कर दे हाला कई जगह पर शिकायत हुई. एफ आईआर. हुई देखिए एक सनातनी होना और एक बनने का. नाटक करना यह दोनों में जमीन आसमान का. अंतर बाबा बनना सरल है बाबा हो जाना कठिन. आप बागेश्वर बाबा पर कमेंट कर सकते हो पर. बागेश्वर बाबा बन पाना बहुत कठिन है. बेटियों के विवाह करवा पाना कठिन है अन्न. पुणा चला पाना कठिन है हिंदुत्व की इतनी.
खुल के बात कर पाना आपके लिए कठिन हो सकती. है हो सकता है आप इससे बड़ा कर पाओ पर. कितना हम झेलते हैं यह आप नहीं झेल सकते. गालियां खाना यह सबसे बड़ा झेलना हिंदू. एंटी हिंदू सेकम इंटेलेक्चुअल के नाम पर. जो गालियां बगते हैं तो कुछ लोग ऐसे इस. देश में है जो सनातनी है नहीं सनातनी होने. का एक धारा के प्रवाह में नंबर बटोरने का. काम करते हैं तो यह जो भी आपने जो विषय. छेड़ा है थोड़ा-थोड़ा पता है बहुत व्यापक.
तो नहीं थोड़ा-थोड़ा पता है कि कोई. कॉमेडियन चलती है व गंदे गंदे बेवी और. गंदी गंदी बातों से प्रारंभ करते हैं और. उसमें जो यह इलाहाबाद और एक कोई. और इन लोगों का ये जो नाम है इन लोगों से. हमको अपेक्षा नहीं थी लाइन कैसे तय होगी. एक गलती पर उनको माफ कर देना चाहिए साफ कर. देना चाहिए मतलब आपसे ऐसी कोई गलती हो. जिससे सनातन हिंदू धर्म को घाटा हो तो माफ.
की जगह साफ कर देना चाहिए हम इसके पक्ष. में है बहुत गहरी बात बोल रहे हैं अभी हां. इसलिए कि आपकी एक गलती से करोड़ों हिंदुओं. का दिल टूटेगा करोड़ों सनातनी हों का दिल. टूटेगा और हमको अब ऐसा बोलना नहीं चाहिए. लोगों को हमारी विचारधारा के बारे में. बहुत उल्टा असहजता महसूस होगी लेख हमको कई. बार ना कोरोना समय प किंग जम बहुत अच्छा. लगा नॉर्थ कोरिया वाला हां वो आदमी बहुत. ऊंचा था वो कह रहा है जितने को कोरोना है.
उनको सीताराम बस हो गया बढ़ेगा ही नहीं. आगे खैर उसने वो निर्णय भी ठीक है इससे. कवि इस विषय पर क्या जोड़ रहा है हम यह. कहना चाह रहे हैं कि मान लीजिए कोई ऐसी. गलती कर दिया हो तो उसको इतने तरीके से. इसका जवाब मिलना चाहिए इतने तरीके से उसको. पता लगना चाहिए कि भविष्य में ऐसी गलती. करने के. पहले या सनातनी बनने के पहले लोग 10 बार. सोच नौटंकी वाले सनातनी बनने के इस पर. माफी मांगने के बाद माफ करना चाहिए नो.
नेवर यह माफी लायक शब्द है ही नहीं हमारी. आध्यात्मिक सनातन संस्कृति में मां-बाप के. लिए ऐसी बातें करना या हवस की बातों को. देखिए ठीक है संभव की अपनी सबकी मर्यादा. है आप इतने ओपनली इतने खुले मंच से बच्चों. को देना क्या चाह रहे पोचना क्या चाह रहे. और आप इस देश में नग्नता फैलाना चाहते हैं. आप इस देश में पन वेबसाइट का प्रचार कर. रहे हैं आप इस देश में सनातनी होने की वजह. सबको हबसी बनाने की तैयारी करवा रहे हैं.
इससे आपकी शुद्ध मानसिकता झलकती है क्या. आप सनातन ही नहीं है आप शुद्ध हफ्सी है और. लोगों को भी अपनी चीजों में आप लत रख कर. के लोगों को इतना सहज करना चाहते हैं कि. इस देश से सनातन संस्कृति का विनाश देखने. वाले बहुत लोग हैं और उनके यहां जाने वाले. बड़े लोग भी हैं कह नहीं सकते हैं जा भी. सकते हैं पर करी बाया ना व चेहरा नहीं. खुलता ना इसलिए हमारी एक बहुत अच्छी और. बहुत बुरी आदत है बेट इन. वच परख के परखिए भी नहीं होता आया था जी. आपको भी नहीं होता था भैया अभी चर्चा ही. कर रहे थे लेकिन हमारे अनु तो बहुत सरल है.
उनका उनकी क्या भूल है हां बहुत सरल है. बहुत सहज है बच्चा दिल हैना बहुत प्यारे. हैं उनको उनके वो तो भगवत कृपा के बहुत. गॉड गिफ्टेड है संतो के बहुत लाड़ले मेरे. बड़े करीबी तो वो सबके करीबी बन जाती है. उनके अंदर ये खासियत. [हंसी]. है ये उनके अंदर खासियत है यही बड़ी महान. आदमी के अंदर य खासियत होती कि वो सबका. करीबी बन जाता है हां वो इतने सरल सहज.
तरीके से लोगों से मिलते हैं आत्मसात होते. हैं कि हर आदमी को लगताय बस अपने ही है बस. अपने ही तुलसी हुआ तुलसीदास जी के साथ. घटना हुई ना रामायण का उन्होने जिस दिन. रामचरित मानस का उन्होंने वो दिखा दिया. चमत्कार और भगवान शंकर ने हस्ताक्षर कर. दिए काशी में सत्यम शिवम सुंदरम तो दूसरे. दिन सभा रखी गई ब्राह्मणों ने स्वीकार. किया तो सम्मान किया तो द्वाद तिलक लगाए. तुलसीदास जी बैठे गांव के दो लोग गए थे. काशी.
नहाने अप तुलसी बैठो एक ने हाथ लाओ. तुलसिया उठ के आए बोले साब तुलसीदास कह. रहे हैं तुम बेज्जती बिल्कुल ही कर रहे हो. तब मंच पर वापस चढ़ के गए तब उन्होंने कहा. तुलसी कब ना जाइए जन्मभूमि के गांव दास गई. तुलसी गई धरो तुलसी आ. नाव 27 साल की उम्र में इस तरह प्रसिद्धि. मिल जाती है. यह जिम्मेदारी बढ़ाती है या कभी परेशान. करती है क्योंकि आपके पीछे भीड़ बहुत.
जबरदस्त है बिहार आप गए शहर जाम हो गया. चंडीगढ़ में गया था विपरा के कार्यक्रम. उसी दिन जिस दिन आप गए थे आपके चक्कर में. दो घंटा मैं ट्रैफिक में फसा रहा तो आप. जहां जाते हो जाम लगवा देते हो लंदन भी गए. लंदन में भी सड़कों पर उपद्रव किया देखिए. प्रसिद्धि एक अलग विषय है यह सब हमारे. अपने ये पराय. नहीं ये जो समर्पित करके आते हैं हम इनको. इतना कुछ दे नहीं पाते सिवा प्रार्थना और. आशीर्वाद के सिवा अपनी जिंदगी के कुछ.
अनुभवों के अलावा हम कुछ देते भी नहीं और. गुरु कभी भी कुछ करता भी नहीं गुरु. परिस्थिति थोड़ी बदलता है गुरु तो मना. स्थिति बदलता. है तो कोशिश हमारी रहती है कि हम सबको मिल. पाए सबसे कुछ क्षण बात कर पाए सबसे अपनी. बात रख पाए और हमको इन लोगों में कभी भी. भक्त नजर नहीं आते घर के सदस्य नजर आ बट. लाखों लोग इस देश में बाबा है बहुत. बड़े-बड़े बाबा है बहुत बड़े पाई है कभी. मन में सवाल नहीं आता कि इतना विशेष. आशीर्वाद आप पर क्यों हो गया नहीं दिया.
उसने है खेल उसका हम तो एक निमित्त मात. डमरू बजन डराता नहीं कभी कि जिम्मेदारी. बढ़ गई लोग अपेक्षाएं बढ़ गई कि मेरी बात. को लाखों लोग सुन लेते हैं हा तो सहमे है. सहज. है नवाचार करते हैं सीखने की हर दिन कोशिश. करते हैं भूलों पर पछतावा करते. हैं अच्छा. की खोज करते हैं बुराइयों पर फोकस रखते.
हैं एक एक बात को बारीकी से मनन करते हैं. इतने भी मनमौजी नहीं है कि क्रूरता हो. अंदर इतने भी मनमौजी नहीं है किसी की. श्रद्धा टूट जाए इतने भी मनमौजी नहीं है. कोई हमसे दूर हो जाए इतने भी मनमौजी नहीं. है कि व आया है और हम मिल ना पाए इतने भी. मनमौजी नहीं है हम कि बड़े और छोटे का भेद. ना करें या बड़े या छोटे का भेद कर. दे या फिर किसी को बड़ा बना दे या छोटा. बना द इतने भी मनमौजी नहीं है हम कि किसी.
को रते हुए चले जाए इतने भी मनमोजी नहीं. है हम कि यह सब हमारे कारण हो रहा है इतना. भी हम मनमोजी नहीं है कि लोगों को यह लगे. कि ये सुपरस्टार है या स्टार है येन सबसे. हमारा कोई लेना देना नहीं हमारी जिंदगी एक. शुद्ध है कि हमारा जीवन इनके लिए है हमारा. जीवन हिंदुओं के लिए हमारा जीवन हिंदुत्व. के लिए है हमारा जीवन हिंदुस्तान के लिए. जिंदगी में संघर्ष बहुत है हमारे जीना. बहुत कठिन पहले की जिंदगी बहुत फक्कड़ थी. अब तो बहुत आप आप तो पहले आए नहीं अभी तक.
तो हम 20 25 बार ठ का लगा चुके होते आप. बहुत लेट आए हमारे पास अभी तक तो हम तीन. चार बार तो ठट बार चुके होते वो आप ही. की हां हम आपके मुंह पर कह रहे हम आपकी ठट. तीन चार बार बार चुके होते कि यार बहुत. ज्यादा गुरु ज्ञान मत दो ऐसे ही बोलते अग. तो ऐसे बहुत उल्टे आदमी क ऐसे ही कह दे. ज्यादा दूध के धले तो तुम भी नहीं हो ऐसी. बातें करते ऐसे मनमो जी तो बहुत ठहराव ला. रहे हैं सीख रहे.
हैं नित्य विद्यार्थी बने हुए हैं गुरु ने. जो संकल्प दे रखा है उनको पूर्ण करने की. कोशिश कर रहे हैं क्या महत्वाकांक्षा आपकी. यहां जैसे हते ना एक सपना होता है कुछ. नहीं 10 साल 15 साल में बागेश्वर धाम को. अपने आपको को कहां देख रहे हो आप कहीं भी. नहीं हम जहां है क्योंकि बीच में कई लोगों. को लग रहा था कि आपका जिस तरह उठान हुआ था. और फिर बीच में कुछ कंट्रोवर्सी लोगों को. लगा कि अब आप भी गिरे और खत्म हो गए लेकिन. आप सरवाइव कर गए हमारी जिंदगी में यही. सबसे बड़ी बात है कि हम कोई ड्रीम नहीं. देखते कि हमें यह बनना.
है हमारा कोई औचित्य नहीं है हमें इस देश. को हिंदू राष्ट्र बनाना है बस एक सपना है. कैसे बनाओगे और अगर बनाना है तो अभी जैसे. प्रधान हमने उड़ती उड़ती खबर सुनी कि. कन्या जब आप विवाह करवा रहे हो. प्रधानमंत्री जी आने वाले राष्ट्रपति जी. आने वाले हैं देश के गृहम मंत्री से आप. मिलते रहते हो आप क्यों नहीं उनसे फिर कह. रहे थे कि देश को हिंदू राष्ट्र करवा दो. नहीं वह हिंदुओं से होगा. कैसे हो गए वो तो अपनी जिम्मेवारी निभा. रहे हैं वो तो अपनी जिम्मेवारी यह मत कह.
देना कि हम उनका पक्ष ले रहे वो अपनी. जिम्मेवारी निभा रहे हैं जिस देश का राजा. इतना स्पिरिचुअल हो कि वह गंगा स्नान करता. हो और यह भी एक बहुत सी दूसरे पक्ष के भी. फैक्ट है वो तो गुणगुण समय अंदर होती है. अब आप जो उठाना चाहो लेकिन हमने अपनी. जिंदगी में इतना व्यापक विश्वामित्र का. भारत विश्वमित्र बना हैय हमने पहली बार. देखा कि कैसा प्रधानमंत्री. पुतिन की ट्रंप से बात नहीं होती चीन के. प्रधानमंत्री की ट्रंप से बात नहीं होती.
यूक्रेन के जेलस की ट्रंप पुतिन से बात. नहीं होती लेकिन एक हमारे देश का. प्रधानमंत्री है जो पुतिन से भी बात करता. जेलेंस्की से भी बात करता और ट्रंप से भी. बात. करता ऐसी बुद्धि का आदमी ऐसी भगवत कृपा. प्राप्त संतो की कृपा प्राप्त आदमी हमें. लगता है कि इस देश का राजा तो ऐसे ही होना. चाहिए हम पक्ष या विपक्ष वाली बात नहीं जो. है सो है और हमारे जीवन में तो सभी. पार्टियों के लोग तो कभी आपने बात की. हिंदू राष्ट्र की उनसे नहीं जरूरत ही नहीं.
हम कभी सरकार के भरोसे हिंदू राष्ट्र की. नहीं है एक बात और बड़ी विच कैसे बनेगा. मान लो आप हिंदू इस देश का हिंदू अपने आप. को पहले कट्टर हिंदू बनाए तब भारत हिंदू. राष्ट्र कट्टर हिंदु की जरूरत क्या है. बिल्कुल जरूरत है इसलिए जरूरत है कि. तुम्हारे सामने तुम्हारी रामचरित मारस. फाड़ी जा रही है तुम चुप बैठे. हो तुम्हारे सामने पालघर के संतों को मारा. गया तुम चुप बैठे हो तुम्हारे सामने. कोलकाता की बेटी का रेप किया गया तुम चुप. बैठे हो तुम्हारे ही सामने तुम नौ राज्यों.
में अल्पसंख्यक हो गए और तुम्हें पता नहीं. चला तुम्हारे सामने 1996 से मणिपुर जल रहा. तुम्हें पता नहीं चला तुम्हारे सामने. बैराज की घटना हो गई और तुम्हें पता ही. नहीं ना तुम्हारे सिर पर जू रंगते ना तुम. चर्चा करने हो तुम डरते हो उनके पास तो ना. जाने क्या-क्या है और तुम्हारे घर पर तो. आजकल लाठी भी नहीं बची माला तो ठीक है. भाला भी नहीं बचा और तुम कह दो हम हिंदू. हैं मस्तक का टी फीका हो गया उनकी टोपी. अभी तक नहीं उतरी और तुमने अपनी धोती कपकी.
उतार दी तुमने मालाएं कपकी उतार दी. तुम्हें हिंदू कहने में शर्म लगती है और. तुम कहते हो कि हम हिंदू हैं और नारेबाजी. करके कमेंट करके तुम चल पड़ते हिंदू हो तो. तुम्हारे बगल का हिंदू भूखा क्यों मर रहा. है हिंदू हो तो तुम्हारे बगल में हिंदू की. बेटी पर अत्याचार हो रहा और तुम चुप क्यों. बैठे हो और अपने बच्चों को अंदर क्यों ले. आते हो कि मत पढ़ो अगर तुम हिंदू हो तो तो. तुम्हारे अंदर का हिंदुत्व कहां गया कहां. गया वो महाराणा प्रताप जैसा.
तेज मैं आपकी सारी बातें सुन रहा हूं. उसमें कुछ बातों से मैं सहमत हूं कुछ से. मेरे सवाल होंगे कुछ से सवाल होंगे लेकिन. एक सवाल मेरे मन में जैसे दुनिया में. जितने भी देश हैं जो कट्टरपंथी देश हैं वो. प्रोग्रेसिव नजर नहीं आए जैसे अमेरिका है. या यूके रहा अ हमारा व्यक्ति वहां. प्रधानमंत्री बन गया या अमेरिका में भी. सरकार के र्ग हमारे व्यक्ति हैं अगर हम. कट्टर बनेंगे या मुस्लिम में भी जो कट्टर. मुस्लिम देश है कोई बहुत प्रोग्रेसिव देश. नहीं है वो आपस आपका फैक्ट गलत है दुबई. क्या है वो भी तो सहज हो रहा है मंदिर.
बनवा दिया आपका स्वागत कर रहा है हो रहा. है तो हम भी तो स्वागत करेंगे इसका मतलब. यह थोड़ी कि हम मुसलमानों के खिलाफ जाएंगे. या मुसलमानों को देश से निकाला करेंगे नो. नेवर हम यहूदियों के खिलाफ भी नहीं हमारे. इस देश में मुसलमानों को भी वही सम्मान आज. है वही कल हिंदू राष्ट्र में हमें इस देश. के हिंदुओं के अंदर हिंदुत्व भरना है और. संविधान संविधान तो 125 बार से ज्यादा समय. उसमें सुधार हो च एक बार अगर हिंदू. राष्ट्र के लिए हो जाता है तो कोई बुराई. नहीं तो ये तो बिना पॉलिटिकल मूव के होगा. नहीं आप क पॉलिटिक्स में जाओगे पॉलिटिक्स.
की हमें जाने की जरूरत ही नहीं है जब. हिंदूवादी विचारधारा के कट्टर लोग इस देश. में होंगे जब इस देश का 140 करोड़ की. जनसंख्या वाले देश में 100 करोड़ हिंदू एक. विचारधारा के साथ जिएंगे तो निश्चित रूप. से वहां पर संसद में रहने वाले भी तो. हिंदू हैं तो आप किंग मेकर बनोगे. नेवा तब तक हम रहेंगे भी कि नहीं रहेंगे. यह भी हमारा कोई ड्रीम थोड़ी है 500 साल. राम मंदिर को इस देश में लग गए हैं. हिंदुओं जैसा कोई बुझ दिल तुम्हें लगता है. कोई होगा 500 साल मैं राम मंदिर के लिए लग. गए हिंदू राष्ट्र के लिए तो हज साल तो. लेके ही चलो तब तक कितने जन्म होंगे ये.
अपन पर्ची पर बात. करेंगे अद्भुत अद्भुत अद्भुत. एक एक्ट्रेस थी ममता कुलकर्णी जी जिन्हें. महामंडलेश्वर बनाया गया आपने आपत्ति जताई. और वो कहती हैं कि देखो वो लंगोट धीरें. शास्त्री है 25 साल का है उतने तो मैंने. पूजा पाठ कर ली है वो नपी बाबा है नपी का. मतलब क्या बोला वो जो नपी पहनते हैं. छोटा बालक देखिए उम्र के हिसाब से ऐसा. तोलना ठीक और ये भी कहा कि अपने गुरु जी.
से उनसे कए पूछे कि मैं कौन हूं ये सारी. बातें उन्होने बहुत ज्यादा जरूरत नहीं है. सबको पता. है ठीक है थक हालांकि उनका वो पद चला गया. भगवान की कृपा के फ अब वो महामंडलेश्वर. नहीं है वो फिर से एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी. हो गई है भगवान जान सबकी अपनी अपनी जिंदगी. है हमने तो सत्य पर बोला है सत्य प हम. बोलते रहेंगे यह बात भी तय है जो उचित है. उचित कहेंगे अनुचित है अनुचित कहेंगे कोई. भी हो बट क्या महामंडलेश्वर पद पाना इतना.
आसान होता है हमें तो नहीं लगता है यह जो. फिर हुआ था यह अब वो तो पूरी देश दुनिया. ने ही देखा है उसका तो जवाब शायद किनर. खाड़ी ने दिया हो हां मतलब जिन्होंने. उन्हें बनाया था उन पर भी कारवाई हुई और. उन पर भी एक्शन हुआ बट ये दुर्भाग्यपूर्ण. था फिर कह सकते. हैं दुर्भाग्य अरे उन्होंने आपको लेकर. इतनी सारी बातें कही आप कुछ तो बोलो उन पे. आपको नपी बाबा बोली लंगोट धारी उन्होंने. छोटा वो जो बोला नेपी मतलब छोटा ही होता. है ना बच्चा ही जैसा हा वो लंगोट प छोटे. बच्चे जो पहनाते हैं ना हां तो बच्चे ही.
है ना बच्चा तरीके से सेवी और मन से भी. बच्चे हैं ये कोई बहुत बड़ी बात नहीं उन. पर टिप्पणी नहीं करोगे आप क्या टिप्पणी. करना साहब किस पर टिप्पणी करोगे किन किन. पे हम पर तो पूरा देश टिप्पणी करता है आप. किन किन को शंकराचार्य जी से क्योंकि. शंकराचार्य जी का तो पद बहुत बड़ा है. हालांकि राम भद्राचार्य जी ने शंकराचार्य. जी को लेकर काफी कुछ कहा इस बीच में काफी. टिप्पण आई आपने सुनी भी होगी हां कुछ कुछ. सुनी देखिए बट भी तो हिंदुओं को आपस में. डिवाइड करना हो गया दो अलग-अलग थॉट. प्रोसेस है दो अलग-अलग त चल रहा है एक. बिल्कुल ईर घाट सोचते हैं एक वीर घाट.
सोचते हैं मेरे जसा जो कॉमन आदमी है वो. डिसाइड नहीं कर पाता कि इधर जाए या इधर. जाए ये कैसे आप समझाओ ग आप ना इधर जाओ ना. उधर जाओ आप जिधर हो उधर ही रहो बस उधर ही. से ही हिंदुत्व का गोला फेंको हां ये. डिसाइड करना भी मूर्खतापूर्ण होगा क्या आप. बाबा बागेश्वर की बात का समर्थन करेंगे या. शंकराचार्य की बात का ये मतभेद आदि काल से. थे और रहे आएंगे दूसरी बात वो जो भी कह. रहे हैं अपनी जगह ठीक कह रहे हैं पर हम एक. बात कहना चाह रहे हैं इस बारे. में हम तो बच्चे हैं और उनका तो जो भी मुख.
से बयान निकल रहा है वो सब आशीर्वाद ही है. बालक ही है उनका तो जो भी वक्तव्य निकल. रहा है वो हमारे लिए तो आशीर्वाद ही है पर. बात इस बात पर आती है कि हमारी आयु तो. बहुत सहज है छोटी ही है आपका कद पद बहुत. बड़ा है कई बार ना पद की गरिमा जो होती है. ना उस पद की गरिमा के हिसाब से जीवन जीना. चाहिए अब हम कुछ भी बोलेंगे तो वहां से भी. कुछ बोलेंगे सनातन की ही हंसी होगी बयान.
तो हम भी दे सकते टिप्पणी तो हम भी कर. सकते भगवान ने मुह तो हमको भी दिया 47 में. आजादी मिली तो बोलने की आजादी संविधान ने. हमको भी दी तो टिप्पणी तो हम भी कर सकते. हम भी कुछ भी बोल सकते हैं आप हमारे खिलाफ. एक बोलेंगे हम दो बोलने की क्षमता रखते. लेकिन अगर हमने भी बोल दिया तो हिंदुत्व. का मजाक कितना. बनेगा सनातन का मजाक कितना बनेगा. इस देश के जितने भी महापुरुष हैं एक. प्रार्थना है हमारी आपके अंदर कोई भी बात.
है ना अपने लोगों के प्रति बुला के समझा. दो बातो से फर्क पड़ता है बहुत पड़ता है. क्यों नहीं पड़ता है बातों से फरक मुझे. प्रेमानंद जी महाराज का वो किस्सा याद आ. जो सुबह यात्रा करते थे बंद कर दी गई हमने. उसके खिलाफ बोला बातों के चलते ही नहीं. नहीं हमने बोला है वो देखिए वृंदावन उसपे. बोले उसपे बात रखें हां प्रेमानंद जी. महाराज क्योंकि वो बात बातों के सिलसिले.
में ही हुई वो वो सहज सरल व्यक्ति हैं. नहीं देखिए वो एक महापुरुष है बृज में कुछ. ही विभूतियां है जो दर्शनी है बर्षा ने. वाले विनोद बाबा के पास गए नहीं गए पागल. हो चला जाऊंगा जाति दर्शन कराऊंगा जाति. दर्शन कर बहुत ऊंची विभूति बरसाने वृंदावन. में कुछ विभूति ब्रिज में है जो दर्शनी है. बरसाने वाले विनोद बाबा एक टाटिया स्थान. अब मैं कह अब मुझे आप फीम मैं जाता हूं. सीधे मां के बिहारी के चरणों में जाके.
दर्शन सर पटक देता हूं चलगा नहीं देखा. तुमने ब्रिज में मजे नहीं दि भैया तुम अभी. अपना ब्रिज बहुत ऊंचा है एक टाटिया स्थान. एक भी आधुनिक व्यवस्था नहीं है लाइट तक. नहीं डिब्बी में अभी भी दीपक में मेरे को. बताओ कौन-कौन से बाबा पहले मिल के आऊ जो. अरे मेरे को बताओ कु कुछ कुछ ना कुछ दर्शन. जहां कंपलशन होना चाहिए कि इनके पास जाके. एक बार आशीर्वाद लेकर आ आपको बहुत ऊंचा. लगेगा भगवान करेगा जल्दी ब्याह हो जाएगा. कर आपका या मेरा दोनों. [हंसी].
का एक तो आप विनोद बाबा के दर्शन करो ठीक. है एक एक आप टाटिया स्थान वाले महाराज जी. के दर्शन करो एक आप मान मंदिर वाले पूज्य. श्री रमेश बाबा के दर्शन करो एक आप मलक. पीठ वाले महाराज जी के दर्शन करो और और भी. सब दर्शनी है हां पर अभी इन चार के तो. करके ही करके आ करना चाहिए पर पूज्य. प्रेमानंद बाबा. के तो यह महापुरुष वो है जो बृज की विभूति. है हम ऐसा बताना चाह रहे थे इसलिए ये वो. सिद्ध पुरुष है जो इस ब्रज की विभूति है.
ब्रज में भक्त और भगवान दो रहे थे भक्त सब. है पर विशेष भक्त भी तो होते हैं जैसे. ठाकुर जी के तो सब परिकर है पर उसमें. श्रीदामा विशेष है मधुमंगल विशेष था. श्रीदामा विशेष था सुदामा मित्र था ऐसे भी. तो होते हैं ना ऐसे ही परमानंद बाबा है वो. जो भी हैं महापुरुष है और उनकी बातों से. अगर किसी को दिक्कत है तो हमें एक बात. बहुत अच्छी याद आई त्रेता युग में जो है. राक्षसों को दिक्कत होती थी हवन.
से कुछ कहेंगे तो आपके पॉडकास्ट में. गालिया पड़ेगी कोई गाली नहीं पड़ेगी का. गाली पड़ेगी पड़ेगी भी तो आप झेलना हम तो. बहुत टर गाली प्रूफ महाराज के भक्त तो हम. भी है उनके नाम पर तो गाली सुन लेंगे हम. हा तो हम वही कना तो हमने तो खुल के बोला. है बाबा बाबा के परिकर से भी हम आपके. पॉडकास्ट के द्वारा प्रार्थना करेंगे कि. बंद नहीं होना चाहिए. इस बात पर तो नहीं होना चाहिए बाबा का. स्वास्थ्य ठीक नहीं है हम समझ सकते हैं. अनुकूलता शारीरिक अनुकूलता पर कुछ दिन तो.
जारी रहना चाहिए उनके कानों पर जू रते. रहना चाहिए हम यह कन्या विवाह उत्सव है 26. फरवरी का 23 फरवरी का कैंसर हॉस्पिटल का. भूमि पूजन वरना हम तो जाते हम तो कहते. बाबा निकलो इ जगाओ हम डीजो लेके ही जाते. एक नहीं दो और अगर भैया ऐसा जरूरत पड़ी तो. हम. जाएंगे हम बहुत उल्टे आदमी क्योंकि यजन. भवन दान पुण्य भजन कीर्तन से किसको. दिक्कत कृष्ण के धाम में श्री कृष्ण की.
भूमि में श्री राधा रानी ू के नाम लेने. वाले राधा नाम ले ना पाए कीर्तन ना कर पाए. गीत संगीत ना बजा पाए तो क्या यह लाहौर. में हो. पाएगा महापुरुष है सिद्ध पुरुष है ठीक है. हम समझ सकते हैं आपकी भी मजबूरी है आपको. इतनी दिक्कत है दिल्ली बस जा. मुंबई में चले जाओ जिसे राधे राधे से. दिक्कत है वो आधे आधे हो.
जाओ वहां तो राधा राधा ही चलेगा वहां के. हम कट्टर सनातनी हों से भी. कहेंगे आप टेंशन मत लो अब और बढ़िया एक. दिन एक एक दिन जलसा रखो हमको लग रहा आप. जाने वाले हो जाएंगे शर शहर जाम करवाने. वाले नहीं कुछ ऐसा नहीं हम प्रपंच नहीं. करना लेकिन हमें ऐसी बातों में बहुत बुरा. लगता है ऐसा कोई बहुत चैलेंजिंग वाली. बातें करते हैं ना तो हमारे मन में हमारे. सनातन के लिए सा ऐसा कर आप बिग बॉस बस. जाओगे पागल हो का का प्रेमानंद जी ने एक.
बाबा को समझा रहे थे कि नहीं जाना. चाहिए आर्थिक मदद करने के लिए भी ऐसे. मंचों का इस्तेमाल करो जहा से सनातन का. अपमान हो सके. देखिए हर वो मंच जो अब वो जो आप नाम ले. रहे हैं बिग बॉस व ऑलरेडी इतना पिटा गया. था विषयों में बातों में कि उसका एक मंच. अलग वो हो गया था. लेकिन जाना छोड़ो ना उस बातो को नहीं गलत.
था जाना तो गलत था देवकी नंदन ठाकुर जी. मेरे आए थे उन्होंने कहा कि व्यासपीठ पर. बैठा व्यक्ति जोकर नहीं हो. सकता बात सही है अगर अगर आपके केवल मीम्स. वायरल होते हैं धर्म की बातें कम वायरल. होती है या कोई जगाने की जगह पर केवल. देखिए हर व्यक्ति में गुण अवगुण है केवल. एक ही दृष्टिकोण को लेकर नहीं हम बैठ सकते. भागेश्वर बाबा की आप एक ही बातों को लेकर. मोक्ष वाले बयान को लेकर के उसकी जो 10.
चीजें अच्छी चल रही है आप उनको नहीं नकार. सकते जो कि आपने कहा आपके अंदर एक ये बहुत. अच्छी खूबी है कि आप किसी सनातनी व्यक्ति. कोई अच्छा करने वाले का सपोर्ट नहीं कर. सकते तो आप विरोध नहीं करते क्यों क्योंकि. अगर आप विरोध करेंगे तो बेचारा जो 10. अच्छी चीजों पर मेहनत कर रहा वो पानी फिर. जाएगी ठीक है गलती तो है गलती का पछतावा. हो. भूल हो जो हुई है उस भूल पर पस्तावा हो और. पुनरावृत्ति ना हो बिग बॉस जाना भूल तो है.
गलती तो है हमें ऐसी जगह अपने सनातन को. प्रेजेंट नहीं करना है जहां हमारे संतों. को नीचा देखना पड़े हम अक्सर अपने बच्चों. से एक बात बोलते हैं बच्चों हमसे या तुमसे. कोई भूल हुई तो 100 वर्षों तक कोई. महात्माओं पर भरोसा नहीं करेगा यही बात. हमने भी कही थीय विषय आया. था तो जस्टिफिकेशन थे. मैं फिर य कह रहा हूं जो आप कह रहे हो कि. कोई ऐसी जगह जाना जहां से सनातन का अपमान.
हो रहा है फिर व्यक्ति विशेष के अपमान को. सनातन के अपमान से जोड़ दोगे हां तो वो. स्थिति ना आए वो जिम्मेदारी हमारी सबकी भी. है क्योंकि अब आपके जो देखिए जो हम तिलक. हमने तिलक लगा रखा वह हमारा सिंबल नहीं. सनातन का सिंबल है यह धोती कुर्ता हमारा. सिंबल नहीं है सनातन का सिंबल है और बड़ा. पद बड़ी जिम्मेदारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी. ये हो गई हमारे अंदर बचपना. है बच्चा है पर क नहीं बच्चे तो है पर. कच्चे नहीं है हम इतने कच्चे नहीं कि धूर. तता कर दे हम इतने कच्चे नहीं कि अपना.
लहजा गिराते हम इतने कच्चे नहीं है कि हम. अपने संतों की अ मर्यादा होते देख ले हम. इतने कच्चे नहीं है कि हमारे हिंदुत्व पर. कोई उंगली उठा ले हम इतने भी कच्चे नहीं. है कि कोई हमारी ही मजाक बना के चला जाए. हां मौज में बोलने की तरीके हैं अंदाज है. अंदाज है अंदाज सबका अपना अपना होता है तो. हम अंदाज में बोल सकते हैं अच्छी पिक्चर. थी. पिछे पचर देखते हो आप नहीं कभी-कभार अपनी. जिंदगी में ऐसा कोई मोड़ ही नहीं आ पाता.
है कभी-कभार देखर फिल्म द फिल्म फाइल्स. देखी हमने कश्मीर फाइल्स हां द कश्मीर. फिल्म फाइल्स हम देखी हमने कभी प्यार. मोहब्बत हुआ आपको हमें नहीं हो पाता है. किसी से अरे आप भी जवान हो 27 साल उम्र है. कभी तो दिल धड़का होगा इतनी बड़े-बड़े. शायरी सुनाते हो. हमको बड़ी अच्छी लगी अगर मैं तड़प तो तड़प. मगर तुम मेरे लिए तड़ ये हमारी नहीं है. बिंदू जी की है लेकिन पढ़ा तो आप ही था ल.
आपकी ब पढ़ सुनाओ तुको. बड़ा एक रील हम भी काटेंगे रील क्या पता. नहीं आप ये भेज भेज के किस किस को आप जो. है क्या क्या मंगवा लो क्या. पता किस किस के रिटर्न में दिल मंगवा लोगे. हमारा हो जा अगर मैं तड़प भगवान कर मुरारी. बापू ला शायरी शेर शायरी शायरी में देखो. हमारा अंदाज नजरिया क्या क्या है. महत्त्वपूर्ण देखिए स्थान का बहुत. महत्त्वपूर्ण है बाहर पाया जाने वाला सांप. पीटा जाता है पर शिवलिंग में लिपटा हुआ.
सांप पूजा पूजा जाता है ये महत्त्वपूर्ण. है कि स्थान आपका क्या है हम जहां बैठते. हैं और जिनके लिए बोलते हैं वो हम अपने. आराध्य के लिए एक बार सुनाओ ना हमको हमको. आप सुनना था वो अपने आराध्य के लिए कहता. है एक भक्त भगवान से कहता है वो बिंदु जी. कह रहे हैं कभी बिंदु बहुत ऊंचे महापुरुष. वो कहते मैं अगर तड़पू तो तड़पू अगर तुम. ना मेरे लिए तड़पना तुम अगर तड़पे तो फिर. मशहूर हो जाऊंगा मजबूर हो जाऊंगा मैं मैं. अगर देखूं तो देखूं मगर तुम ना मुझको. देखना तुमने अगर मुझे देखा तो फिर मशहूर.
हो जाऊंगा मैं मैं अगर चाहूं तो चाहूं मगर. तुम ना मुझको चाहेना तुमने अगर चाहा तो. फिर तेरे प्यार में मगरूर हो जाऊंगा आय. हाय हाय हाय हाय. हाय संजय दत ने सही कहा था कि बाबा अगर. बॉलीवुड में आ गए सबका डब्बा पैक हो. जाएगा वो हमारा भैया है बहुत प्यारा है. अच्छा है भोलेनाथ का बहुत भगत है अवगुण स. में सब में फिर हम एक बात बोले गुण अवगुण. सब में सब में है सभी में होते ही है पर.
वो भोलेनाथ की भक्ति पर अभी उतर रहे हैं. बहुत अच्छा और दारू का एक ब्रांड खोले वो. लोग कहे कि बाबा कहते हैं कि शराब छोड़ दो. उनके भक्त कह रहे दारू ब्रांड खोलो नहीं. इन सब चीजों के हम खिलाफ टो के अे छक. हमारा भाई घर भैया है उसम कोई संदेह थोड़ी. है कुछ भी ऐसा उल्टा फुलटा करते हैं हम. बोलते हैं उनको कान पकड़ लेते हो नहीं कान. तो नहीं पकड़ते एक वो छोटी बच्ची वाली. वारल होता है बच्ची नहीं हम अयोध्या में म. क्या नाम था महंत है अरे आपकी ल बड़ी.
अच्छी वायरल होती है देखी आपने अच्छा मा. सूरज दास. [हंसी]. जी अरे वो तो आपकी किसी पत्रकार मदल है. लेकिन वो बच्ची नहीं है. हम अच्छा पता नहीं हमारी चीजों को मीम्स. लेते हैं क्या लोग नहीं नहीं ये तो. पॉजिटिव में था ये तो सनातनी दिखाते उसकी. आंखों से लेजर लाइट निकाल केय सनातन का. प्रकोप वो प्रका प्रताप है कि देखिए जलवा. जलाल है ये उसमें वो तो बड़ा पॉजिटिव गया.
कि उससे कहा गया छोटी बच्ची महाराज का. बच्ची नहीं है वो सही भी है हा वो एक तो. मात भी है दूसरी बात हाइट देख कर के और. डाइट देख कर के लोगों. में ये भरोसा नहीं करना चाहिए तो कई बार. ना लोग हमारी उम्र देख कितने साल 27. साल हम कह देते हैं भा उम्र 27 है अनुभव. हो सकता है 47 का हो आजा. स मत स मत कौन सा शहर पसंद है आपको. बागेश्वर चलो रैपिड फायर खेलो ओके बिहार.
वाले आपको बड़ा प्यार करते हैं क्यों करते. हैं इतना बिहारी आपको प्यार बिहार गए थे. पूरा जाम लगवा दिए थे एकदम आप नहीं अभी भी. कभी भी जाते हैं तो बहुत प्रेम बिहार के. पीछे हमारा सबसे बड़ा कारण एक तो. बुंदेलखंडी भाषा और बिहारी भाषा मिलती. जुलती भाषा है और दोनों लगे हुए वडर है. बिहार हमारे लिए और दूसरा कुछ बिहार के. संतों को हमने बहुत पढ़ा जैसे बक्सर वाले. नारायण दास भक्त माली जी महाराज उनके भजन. हम बहुत गाते हैं बिहार भाषा में तो बहुत. प्यारी लग बहारी बोलना आता आपको नहीं नहीं. भोजपुरी उतना तो नहीं पर थोड़ा थोड़ा काम. चलाले हल्का.
फुलका ठीक. बानी ऐसे तो थोड़ा थोड़ा बो गुजराती कम. नाम छ सु नाम छ कम मजा मा खूब सरस बन. कमसे थोड़ा थोड़ा सब बोल देते जबर अच्छा. ढोंगी बाबा कैसे पहचाने बाबा कोई जैसे. बाबा है जो भगवान की पूजा ना करवा के अपनी. पूजा करवाए वो. ढोंगी श सीधी. बात और बताओ तो कौन ढोंगी बाबा जैसे साई. जी को आपने कह हम किसी को नहीं कह सकते.
आपने साई जी को कह नहीं हमने ऐसा कुछ भी. नहीं बोला हमने भगवान ने नहीं ढोगी योगी. हमने नहीं बोला आप हमारा गलत प्रचार मत. साई भगवान है हमने भगवान मानने को हमारे. शंकराचार्य ने नहीं माना था पूर्व. शंकराचार्य परम पूज्य गोलोक वासी श्री. स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज जी ने कहा. था कि वो भगवान नहीं है तो हमने तो अपने. शंकराचार्य की बात को कोट किया था ठीक बात. जीवन का अंतिम उद्देश्य क्या है भगवत. प्राप्ति और जिंदगी को जिंदगी जिंदगी से. जिंदगी का राज पाना चाहिए जिंदगी को. जिंदगी में मुस्कुराना चाहिए जिंदगी में. जिंदगी की गर शर्त मंजूर ना हो तो जिंदगी.
को जिंदगी से रूठ जाना चाहिए कब तुकबंदी. करते हैं हाहा वहां वहा से यहा अंदर एक. शायर है नहीं शायर नहीं हमेशा से बचपन से. ही हमारे अंदर में यह तो है कोई क्वेश्चन. बोलेगा या उत्तर बोलेगा तो उसके पीछे से. वो आता है पता नहीं नहीं भी बोलेंगे तो. अगर कोई बोल भी रहा होगा ना चुप भी रहेंगे. तो अंदर ही अंदर आएगा जब बिया होगा भाभी. जी खुश रहेंगे रोज सुनाते रहो का को भैया. चमत्कार क्या है विज्ञान से परे नवा जान. लेना ज्ञान है प्रकट कर देना विज्ञान है.
धरन कृष्ण शास्त्री जी चमत्कारी है नेवा. चमत्कारी नहीं है बिल्कुल भी नहीं है वो. केवल जो है सनातन हिंदुत्व के प्रचार के. लिए हनुमान जी की जो अष्ट सिद्धियां है. उनके महिमा का खान करते हैं जो. अध्यात्मिकता पर विश्वास नहीं करते उन्हें. क्या संदेश देंगे आप कुछ भी नहीं यही. देंगे कि जिंदगी का एक मोड ये भी है आप. आइए लौट कर के कभी ना कभी तो आना ही. पड़ेगा मरते हुए स्टीफन मरते हुए अल्बर्ट. आइंस्टीन ने कहा था कि किसी ने पूछा कि आप. आपको दोबारा जन्म मिले तो ऐसी कोई रिसर्च.
या खोज बाकी रहे गई जिसको तुम पूर्ण करना. चाहते हो अधूरी रह गई हो तब उसने कहा था. कि यस मेरी एक खोज अधूरी रह गई है जिसको. मैं खोजना चाहता हूं वो यह रह गई जिस खोज. की दम पर मैंने इतनी खोजें की वो कौन सी. खोज थी उसके बारे में जानना. चाहिता अध्यात्म और अंधविश्वास में कैसे. अंतर रखे बारी की अंतर है अध्यात्म और. अंधविश्वास यह है कि अध्यात्म जीवन जीने. की कला है अध्यात्म जीवन जीने की कला है. मानव की आचार संगता मानवों की आचार संगता.
अध्यात्म लेकिन अंधविश्वास क्या है बिना. जाने हुए उसी की बातों को सब कुछ मान लेना. अंधविश्वास भूत प्रेत होते बेझिझक कितने. प्रकार के भूत होते हैं य तो नहीं कह सकते. अब आप हनुमान चालीसा पढ़ते हैं आप तो. पढ़ते ही होंगे भूत प उसमें वर्णन आया है. तो भूत संगता का भी वर्णन है रावण संगिता. में भी वर्णन बहुत जगह आया है भूत प्रेतों. के बारे में बहुत जगह वर्णन आत्मा और. परमात्मा के बारे में हमारे ग्रंथ में. वर्णन आया तो आत्मा ही भूत प्रेत है और. वैज्ञानिकों ने भी इसको सेटिस्फाइड किया. नेगेटिविटी पॉजिटिविटी सकारात्मकता और. नकारात्मकता तो इसको अब कोई शुगर कहता है.
कोई शक्कर कहता है कोई चीनी कहता है इसका. मतलब ये थोड़ी कि शक्कर नहीं होती बद भूत. होते हैं बे झिझक हमने देखे नहीं है कल के. दिन आप ये कह दो कि चलो दिखाओ तुम गुरु. नहीं कुछ लोग कहते हैं कि आपके यहां एक. पेड़ है उसको पकड़ लो भूत हा नेगेटिविटी. दूर होती है अब भूत जाते हैं नकारात्मकता. जाती है या मन का विचार जाता है या आपको. कोई बीमारी आपके अंदर मनोविकार की बीमारी. है वो ठीक होती है यह भगवान जान पर यहां. आते हैं तो नकारात्मक तंत्र से मंत्र से. मारण से मोहन से वशीकरण से स्तंभन से. उच्चाटन से ग्रसित लोग आते हैं उनके अंदर.
वाइब्रेशन होता है उस पेड़ को टच करने के. बाद में अब सबको नहीं होता तो इसका मतलब. यह भी कह सकते हैं कि सब में नेगेटिविटी. नहीं है कुछ लोगों में होती है अब वो. नेगेटिविटी है नकारात्मकता है तंत्र मंत्र. है क्या है ये हनुमान जी जाने ठीक बात है. रामायण महाभारत में आपको ज्यादा प्रेरणा. कहां से मिलती है रामचरित मनुष हमारे आवज. में लिखी गई. खैर आपसे कोई दूर हो भी सकता है अवद वालों. का प्यार ही इतना ऊंचा था भगवान जी खैर.
लेकिन एक बात बोले भैया बुरा ना मानना आप. तो जिस अवत से आते हैं ना मजाक की बात है. बेचारे राम जी को छोड़ दिया था 14 साल में. 12 साल हम ही लोग रखे हैं बुंदेलखंड में. चित्रकूट में हम आपको इससे बढ़कर बताते. हैं जब हम टीवी प एंकरिंग शुरू किए थे तो. हम कहते थे कि उत्तर प्रदेश सबसे खुशनसीब. और बदनसीब राज्य है कोई पूछा काहे हमके. हमारे यहां तीन चार भगवान पैदा हुए सब चले. गए छोड़ के श्री कृष्ण जी पैदा हुए चले गए. राम जी पैदा हुए बदमाश चले गए भोलेनाथ की.
नगरी काशी थी जिनको कहा था पहला शहर था वो. भी वहां से कैलाश चले गए एक और हमारे यहां. स्वामी नारायण भगवान की पूजा होती है वो. भी गुजरात चले गए तो हमने कहा पैदा सब. हमारे यहां होते हैं मुख्य हमारे यहां. होता है फिर यहां चले आते हैं अब हम समझ. नहीं पाते कि खुशनसीबी हमारी यूपी वालों. की है बदनसीबी दोनों ही है भूमि उबरा है. पर आदमी टिकाऊ नहीं है. लेकिन अब चीजें रिस्टोर हो रही है काशी. कॉरिडोर बन गया अयोध्या मंदिर बन गया. चित्रकूट भी बन रहा है काम हाथ मथुरा प.
लोग नजर लेकिन हम बुंदेलखंड वाले हैं तो. हम अपने बता रहे हैं कि आपने 14 साल के. लिए राम जीली को कहा था कि जाओ यहां से 12. साल अपने ही य रहे राम. जी 12 साल तभी तो हमारा आपका रिश्ता हो. गया जी सच्चा सुख क्या है सच्चा सुख क्या. है सच्चा सुख जिंदगी में अब हम अपनी अपने. हिसाब से बता सकते हैं लोगों के हिसाब से. नहीं जरूरी नहीं है सबके लिए सच्चा यही है. कि जो प्राप्त है वही. पर्याप्त बहुत सुंदर था थोड़ा सा.
एक्सप्लेन कर दीजिए बस सीधा सा है कि हमें. जो प्राप्त हुआ है वही जो मिला है वो कम. नहीं जो नहीं मिला उसका कोई गम नहीं जो. मिलेगा वो सिर्फ एक ख्वाब है जो मिला है. वही लाजवाब है बहुत सुंदर सालासर. मेहंदीपुर और बागेश्वर तीनों जगहों पर. बालाजी है समान है अलग है क्या-क्या इनमें. से सिमिलरिटीज है एक रूपता है. एक रूप था यूं मान के चलिए एक की तीन. फोटोकॉपी एकही प्रेतराज सरकार यहां भी है.
प्रेतराज सरकार मेहंदीपुर वाला जीी में. नकारात्मक शक्तियों वाले वहां भी जाते हैं. सालासर बाला जी में भी जाते हैं वहां भी. एक समाधि वाले बाबा की महिमा है यहां भी. सन्यासी वाले बाबा की महिमा है वहां भी हम. अलग अलग से बताए तो लोगों को समझ में आएगा. तीनों एक रूपता है मेहंदीपुर बालाजी तो. सालासर में भी बालाजी और बागेश्वर में भी. बालाजी मेहदीपुर बालाजी में एक संत है. समाधि वाले बाबा तो सालासर में एक संत हुए. मोहनदास बाबा तो बागेश्वर में एक संत हुए.
सन्यासी बाबा वहां भी प्रेतराज सरकार यहां. भी प्रेतराज सरकार और वहां भी प्रेतराज. सरकार वहां भी बालाजी का ही दिव्य रूप है. यहां भी बालाजी का ही दिव्य रूप है और. वहां भी मेहदीपुर में भी बालाजी का दिव्य. रूप है तो बागेश्वर शाला सर मेहंदीपुर. तीनों एक रूप है और हमें लगता है कि ये. कली काल के हनुमान जी के. प्रत्यक्ष रूप में बालाजी के रूप में जो. स्थान कहे जाएंगे तीनों की एकरूपता भक्तों.
के जन कल्याण करने के लिए हनुमान जी इस. रूप में प्रकट भए हैं हवा तो सब जगह पर. पंखे के नीचे ज्यादा लगती उसी प्रकार. हनुमान जी सब जगह हैं संत जहां तपस्या. करते हैं वहां विशेष रूप से कृपा करते. हमारे हनुमान गढ़ी में भी कहते हनुमान जी. ऊपर टीले वाले हनुमान जी जल पी सकते हैं. हारे सब आप ही का शो है आप ही के दर्शक है. जो देखने वाले इतना देर देखे होंगे आपको. पीते हसते बोलते सब सुनेंगे. कई आपके मित्र हैं जिनके बारे में चाहूंगा.
कि आप कुछ कुछ बताइए पहला नाम इंद्रेश. उपाध्याय जी अच्छे सरल है और सबसे बड़ी. बात है कि उनसे. हमको असहजता महसूस नहीं होती है मित्र भी. है भाई भी है और एक दूसरे को सीखने और. सिखाने की जो उनके अंदर वो भाव है महाराज. जी आप ऐसा करो महाराज जी आप इनको भी मिलो. महाराज जी आप इनको भी बात किया करो महाराज. जी आप ऐसे भी करया करो फिर हम अच्छा.
महाराज जी आपने ये कहा था हम ये करें. अच्छा हमने अब ऐसा किया अब हमने ठीक किया. ये सहज सरल व्यक्ति है हां खैर लेकिन हम. ये बता दें वो सबके लिए. ऐसे खैर इस देखने के बाद में कहीं हम. लोगों में बुराई ना हो जाए आपने तो उनको. नितीश कुमार बना दिया सब ना ना ऐसा मत कहो. हमारे लिए वो खैर सबसे ज्यादा प्रिय हमको. भी प्रिय यही तो बात आप कह रहे.
हो ठीक है अगला नाम पुंडरीक महाराज बहुत. अच्छे हैं उनसे भी हमने बहुत सीखा जीवन. में. हम परसों ही आए थे और उनके युवा कथा वाच. कों में शब्दों का भंडार. हम किसी के पास है तो आचार्य पुंडी. गोस्वामी जी के पास में एक तो परंपरा से. व्यास है 3 दूसरा 35 भी पीड़ और तीसरा. दूसरा बृजवासी ठेट बृजवासी अल्पन भी. है ये भी है तो जो है ना वो बहुत अच्छा है.
और जो शब्दों को बोलने प्रेजेंटेशन क्या. होनी चाहिए वो तो हमने बहुत सीखा है और. हमारी खूब बनती है आप दोनों एक मिजाज के. भी हो दोनों मुह बो वो गंभीर है आ नहीं. नहीं नहीं नहीं हम ज्यादा बोलते हैं हम तो. हो सकता है आपसे दोस्ती कब हमसे ज्यादा. होगी ऐसा. ये हो सकता नहीं ऐसा भी नहीं हो सकता हमें. भरोसा है अपने प्रेम.
प क आज तुम किसी ना किसी से हमारी लड़ाई. करवाने के मर में आए हो भाई नहीं चलो आगे. पूछो राम भद्राचार्य जी अब परम पूज्य राम. भद्राचार्य. जी वो तो गुरुदेव भगवान है हमारे जीवन में. छत्र छाया किसी की है जब जब हम विवादों. में. फसे कोई अगर सामने सबसे पहले आए गुरु आए. यही हमारे जीवन का सौभाग्य था यही हमारे. जीवन का चंद्रमा था यही हमारे जीवन का.
गोल्डन टाइम था कि हम पर विवाद आए पर. हमारे गुरु ने मंच से ललकार के कहा हा. धीरेंद्र मेरा चेला. है बस हो गया. काम हम उतनी सेवा नहीं कर पाते यह दुख है. हमें हमारे गुरु भाई आचार्य रामचंद्र दास. जय भैया वो तुलसी पीठ के उत्तराधिकारी है. वो खूब श हम कई बार उनसे जलते. कि तुम भाग्यशाली हो तुम्हारी प्रात काल. भी नमो राघवा से होती है गुरुदेव भगवान के. य विश्राम भी तुम्हारी नमो राग वाय से.
होती है और हम नहीं कर पाते ये हमें दुख. है हम अपनी चूंकि इतनी यहां माया फैल गई. इतने प्रपंच हो गए बहुत जिम्मेवारी बढ़ गई. बेटियों की जिम्मेवारी हिंदुओं की. जिम्मेवारी कैंसर हॉस्पिटल की जिम्मेवारी. कन्या विवाह की जिम्मेवारी अनन पूना की. जिम्मेवारी धाम की जिम्मेवारी दरबार की. जिम्मेवारी कथा की जिम्मेवारी और. हिंदुत्ववादी टीमों की जिम्मेवारी तो ये. जिम्मेदारियों के कारण फिर भी जब भी मौका. मिलता बहुत समय गुजारते गुरुदेव के पास और. जो भी गुजारते वो ऐसे गुजारते हैं आप वहां.
पहुंचने के बाद सन्मुख पहुंचने के बाद फिर. ऐसा लगने लगता है कि अब करना ही क्या है. जैसे होता है ना कि अब दूल्हा जो बना हो. टेंशन उसको होती है बाराती तो फुल नागन. डांस करते. हैं क्या उसे टेंशन नहीं दूले को बड़ी. टेंशन होती है कि कुछ एक्शन गलत ना हो जाए. कोई गलत ना कह दे कपड़े ऐसे ना हो जाए. फोटो गलत ना आ जाए कुछ पागल ना कह दे तो. बड़ा सहज महसूस रहता पर पूरे बारात रहते. हैं सहज चलो नागन नांस हो.
जाए आपसे मिलने का तरीका क्या है किसी. व्यक्ति को आपसे मिलना हो बहुत सरल है. लोगों ने बहुत कठिन बना रखा हमारा एक तो. दरबार लगते ही है जहां लगता है वहा आ जाइए. दूसरा धाम पर लगते ही है और रोज शाम को हम. लगभग एक से दो हजार लोगों को बबूती बांटते. आप सुनकर परेशान होंगे शायद बताया हो किसी. ने 18 आवर्स वर्क करते हैं मिनिमम कभी थक. जाए कुछ ऐसा हो जाए तो बात अलग हां जरूरी. नहीं कि कुछ ऐसी बैठकें हो जाती हैं धाम. की बैठक प्रशासन की बैठक मंडल की बैठक.
समिति की बैठक धाम व्यवस्था की बैठक तो. बात अलग है लेकिन प्रतिदिन 18 वर्स वर्क. करते जबरदस्त पुरुषार्थ वीआईपी कल्चर है य. पर भी वप वस् मिलना हो किसी को कुछ ले दे. के नहीं मिल सकते हैं बस आपके मान सम्मान. पद प्रतिष्ठा का ख्याल रखा जा सकता है ऐसा. नहीं कि ज्यादा पैसा तो जल्दी पैसा लेते. ही नहीं है दोगे क्या खाक आप. य पूछ लीजिएगा य भगवान खर भगवान की बड़ी. कृपा मुझे व्यक्तिगत तौर पर बड़ा लगता है.
कि हमारे धर्म में वीआईपी कल्चर के खिलाफ. तो हम भी बहुत ड दे रखा है बहुत खिलाफ है. हम और खासतौर पर जो पैसा वाला वीआईपी. कल्चर एक तो होता जरूरत वाला कोई बड़ा. प्रतिष्ठित व्यक्ति आ गया या कोई ऐसा. व्यक्ति सु सुरक्षा के लिहाज से प्रतिष्ठा. के लिहाज से सेहत के लिहाज से वो सम बस. हमारे लिए तीन ही महत्त्वपूर्ण है किसी की. तबीयत खराब है या बहुत मुसीबत में या कोई. देश का क्वेश्चन लेकर आया तो उसको हम अलग. से कमरे में टाइम देते जो देश के लिए.
हितकारी होगा दूसरा उसकी सुरक्षा और उसकी. सिक्योरिटी और उसकी पर्सनल डिटेल्स समाज. में ना जावे तो उसका सम्मान बचा रहे तो हम. पर्सनल टाइम देते हैं तीसरा जो भी हमारे. पास आंसर लेने आते हैं उत्तर लेने आते हैं. मार्गदर्शन लेने आते हैं अपनी बात पूछने. आते हैं वो बात जरूरी नहीं उसको अगर. असहजता महसूस हो शब और उसको उसके कारण कई. दुश्मन खड़े हो जाए इन तीन कारणों से हम. जरूर एकांतिक मिल लेते हैं पर उसमें ऐसा.
है कि केवल वही भरनी हमारे यहां तो सभी. मिल लेते हैं ऐसे आप लाखों फोटो ऐसी. देखेंगे कि जिसकी गांव का सरपंच भी हमारे. कक्ष में आके मिल लेता है सुंदर हमने. आसपास बहुत लोगों से पूछा क् कि यहां कई. लोग पर्चा बनाते हैं इस इलाके में आसपास. हमने सुना लेकिन आप पर विशेष कृपा रही. क्या लगता है क्यों ऐसा हुआ हमको ये कहना. नहीं चाहिए पता नहीं पर्चा वाली चर्चा हम. बहुत कम सुन पाए अ एक बड़ी धारणा है कि इस. इलाके में धीरेंद्र कसी जीसे सैकड़ों लोग.
हैं जो सेम पचा बनाते हैं लेकिन आप फेमस. हो गए नहीं यह बात शायद वो अब हम पता नहीं. ऐसा क्या है हम उन लोगों के बारे में बहुत. जान नहीं पाए समाज को भी पता नहीं लगा और. शायद पर्चा की चर्चा बहुत ज्यादा. दिनों पुरानी तो नहीं कह सकते ऐसी कुछ. बहु चर्चा में तो चार पाच साल असहज करती. है पचय वाली चर्चा.
आपको वो तो. देखिए हमको अपनी बात आप तक पहुंचा है और. आप कैसे प सुन पाएंगे बस इसका एक तरीका है. सुंदर खुल के बात बता रहे हैं हमें. हिंदुओं तक अपनी बात पहुंचा नहीं ईसाई. क्या करते हैं पोप का स्टेटमेंट चला गया. पूरी दुनिया में नहीं नहीं उन्होंने एक. नया ट्रेंड निकाला है चंगाई सभा करते. चंगाई सभा में करते क्या है वो जो लू ललू.
होता रता है हा देखा. हमने अब इसका तोड़ क्या. है जागरूकता न कितने लोगों ने नहीं की. इसका तोड़ एक ही है जहर को जहर काटता. है अपन ने सोचा कि हमारे पास चकि यह तो था. ही पद्धति तो थी ही शायद यह भविष्य में. कोई आपसे क्वेश्चन पूछेगा कि आपके दिमाग. मैं परिचय क्यों आया हम आपके दिमाग में. नहीं आया होगा पर कोई पूछे या किसी के. दिमाग में चलेगा तो उसका उत्तर हम देना. चाह रहे हैं हमारी जिंदगी में परिचय का.
दिमाग में एक तो गुरुजी हमारे स्लेट लिख. कर के चर्चा कर देते थे या कागज लिख के. देते थे कभी-कभी कभी-कभी बाकी वन टू वन. बातें होती थी जो एस्ट्रोलॉजी में होती है. हम ग्रह चक्र नक्षत्र जो होती है. सिद्धियों पे बातें होती है वो होती है. कोई इष्ट कृपा से बताता है एस्ट्रोलॉजी. में भी तो कृपा ई होती है हम सही बात है. पढ़ना भी होता है पर पढ़ाई के साथ-साथ अंक. गणित के साथ-साथ में वो क्या कहते हैं. हमने आराधना देवी की कर रखी है उनके ही. कृपा से हम अंक गणित हमारी सटीक जाती है. सही बात है एम आ राइट हा ट्र ऐसे ही हमारे.
पास तो अपन ने उसका तोड़. निकाला पर क्या जी तो गुरु जी तो करते ही. थे लिखते ही थे हमने कहा कि क्यों ना हम. धर्मांतरण करने वाले हिंदुओं को एक खुद. ऑप्शन दे कि अब आपको उनके यहां जाने की. जरूरत नहीं है अपनी भी शक्तियां कम नहीं. है. यह रियलिटी है हमारे दरबार लगाने की ना. हमको त्रिकाल बनना था नामको कोई चमत्कारी.
गुरु बनना है ना बनना था ना हमको पचा बना. बता कर के भविष्य निर्माता बनना इस देश की. धारणा गलत है हमारी प्रति यह देश अभी हमको. समझा ही नहीं समझ जाएगा इस पॉडकास्ट के. बाद जी हमारा उद्देश्य था इस देश के. हिंदुओं को वापसी. करवाना धर्मांतरण करने वाले लोगों पर रोक. ला. वो तभी हो सकता था कि जब आप उसके सेमलर. कोई अच्छी व्यवस्था दे और कुछ यूनिक.
दे तभी लोग वापस आ सकते बातों से नहीं. आएंगे तब हमने उनके सामने फिर य तैयारी की. गुरु से आज्ञा ली गुरु ने कहा उत्तम है. उचित है माहौल ठीक था और काम हमें. हिंदुत्व का करना था इस देश में हमें. इतिहास हिंदुत्व के लिए तो करके ही जाना. है तो हमारा उद्देश्य ना तो भविष्य बताना. है हमारा उद्देश्य ना भविष्य के बारे में. चर्चा करना है ना चमत्कार दिखाना है जो. गॉड गिफ्टेड है सो है वो तो कोई टालिया.
काट नहीं सकता अब जो है बहस कुछ भी हो. सकती है आप डिबेट कर सकते हैं हमारे बारे. में आप कमेंट कर सकते हैं हमारे बारे में. पर जो हमारे पास है आप उसको तो नहीं काट. सकते ना अब हम दरबार लगाते हैं तो लगाते. हैं अब वो नहीं कट सकती ये बात अच्छा एक. क्वेश्चन क्योंकि समय भी खत्म हो रहा. माइंड रीडिंग और सिद्धि में अंतर क्या. होता है बहुत जमीन आसमान माइंड रीडिंग में. अध्ययन और अध्ययन का खेल है आपको पढ़ना. पड़ेगा माइंड के बारे में पढ़ना पड़ेगा. माइंड रीडिंग जरूरी नहीं सही जाब है.
सिद्धि गॉड गिफ्टेड होती है जैसे आपका जब. विवाद हुआ था खूब सारे माइंड टीवी पे आए. थे आए थे बहुत लोगों ने लाए मोबाइल का. पासवर्ड बता दे रहे हैं आपके गर्लफ्रेंड. का नाम बता दे रहे थे उससे और सिद्धि में. अंतर क्या है बहुत जमीन आसमान का अंतर है. सिद्धि करके बताती है माइंड रीडिंग सिर्फ. बताती. [हंसी]. है सुंदर के बताने में और केवल बताने में. जमीन आसमान का अंतर है थोड़ा सा इसको. एक्सप्लेन कर दीजिए हमारा मतलब यह है कि.
ठीक है प्रश्न तो आपको भी पता है कि आपकी. परेशानी क्या है यह तो आपको भी पता है कि. आपके पिताजी का नाम क्या है ये जानने के. लिए भ अगर आप आए हैं तो आप उल्लू हो सही. बात है जिस बाप से आप पैदा हुए वो तो आपको. भी पता है यह महत्वपूर्ण आप आए किस लिए. हैं यह भी महत्त्वपूर्ण नहीं वो हो जाए. महत्वपूर्ण. है ये सिद्धि है. और केव पता लगे वो बागेश्वर धाम पर होता. है यह जो लाखों की जो आज हजारों की भीड़. है जो बाहर है ये पागल थोड़ी है.
इंटेलेक्चुअल भी है और यहां पर केवल वो. नहीं आप देख कर चौके फॉरेनर्स है एराई एक. दो उल्लू हो सकते और फिर लगभग 18 से तो. टीवी प हम आ ही गए थे आवाज शायद 24 2 चल. रही है अब टीवी का नाम ले तो आखरी सवाल. अध्यात्म और मनोज जी की क्या भूमिका आपके. जीवन में है देखिए जिंदगी में टीवी का तो. बहुत भूमिका तो रही है बातों अध्यात्म. संस्कार मनोज त्यागी ये तीन तीन नाम आपके. इ गिर जुड़ता है हमारी अध्यात्म तो. प्रारंभ से ही था फिर ये आए तो बोले.
हमको आपका लाइव करना है तो हम कहा हम पे. तो पैसे नहीं है और हम ऐसे वैसे भी नहीं. है पैसे भी नहीं ऐसे पैसे भी नहीं तो. उन्होंने कहा कि हमने कुछ अर्जी लगाई है. हमको कुछ चाहिए हम कहा मांगो क्या चाहते. हो अपन तो वैसे ही रहते थे पागल मांगो. क्या जाते आए थे त्यागी जी बैठे थे सामने. तो बोले हमें आपको चाहिए उन्हे पता लग गया. आदमी बहुत विचित्र. है हमको चाहिए तो झेलना कठिन है बड़ा बोले.
देखा जाएगा बस अपन हो गया अपन होने के बाद. में पहली जो लाइव चलाई उन्होने सु टीवी पर. चलाई फ्री ऑफ कॉस्ट चलाई अपन को भी खुद को. ही खुद को देख के मजा. आया तो अपन तीन घंटे पहले कथा करते थे. टीवी पर फिर वापस आके तीन घंटे खुद को. देखते थे. मजा आया भैया बहुत मजा आया सच में देख हम. जो है हां अरे हमको पता है ना हम टीवी ग.
कैसे देखते थे तो हमें बहुत मजा आया फिर. अपन दूसरे दिन से थोड़ा गंभीरता से बैठने. लगे कि यार टीवी में कल हाथ ज्यादा लंबे. फिक गए. थ बस वो वो तो उनकी लीला थी बालाजी की. उन्हें करना था कुछ बड़ा हमारी जिंदगी में. गुरु का बड़ा हाथ था गुरु का हाथ बहुत है. हर पल उन्होंने जो जो करवा ना चाहा अभी हम. आपके पॉडकास्ट प कह के कह के विराम कर रहे. हैं कि अभी हम रुकेंगे नहीं झुकेंगे नहीं. मुड़ भी नहीं हर कदम हमारा हिंदू हिंदुत्व.
हिंदू राष्ट्र के लिए चाहे जो हो जाए हमें. लाख गाली मिले चाहे तुम लाख कोशो चाहे. हमारे खिलाफ पचास नहीं लाखों वीडियो बनाओ. हम जब तक मर नहीं जाएंगे तब तक इस देश के. हिंदुओं को जगाते रहेंगे हिंदुओं के लिए. जिएंगे हिंदुओं के लिए मरेंगे और हिंदुत्व. का ही काम करके जाएंगे. हम यह नहीं कहते हैं पर कभी भविष्य में. अगर भगवान ना करे हिंदू उजड़े और आने वाली.
पीढ़ी पूछेगी तो कम से कम यह तो नहीं. कहेगी कि जब देश उजड़ रहा था हिंदू उजड़. रहा था तो हम झकनी मार रहे थे तो हम त. हाड़ रहे थे पुकार रहे थे ललकार रहे थे. जितनी क्षमता थी हमारी क्या आवश्यकता आप. बताओ हम साल भर 18 18 घंटे बिना. जागे बिना सोए 18 18 घंटे मेहनत करके कुछ. भी दो पाच 10 रप मिलता है या जो भी चढ़ी. दे देते हैं मांगते तो है नहीं कोई फीस तो. फिक्स है नहीं है दरबार की और उसको.
बेटियों के विवाह में लगाए हमें क्या पड़ी. है कि हम भंडारा निशुल्क करवाए तुम्हें. दरबार भी लगाए तुम्हें चमत्कार भी दिखाए. तुम्हें आशीर्वाद भी दे तुम्हें. मार्गदर्शन भी दे तुमसे फीस भी ना ले. पर्चा भी हम अपना दे भभूति भी हम अपनी दे. और भंडारा भी हम अपना दे हमें क्या जरूरत. पड़ी है अच्छी खासी कथा करते जिंदगी जीते. टाइम से सोते टाइम से उठते 6 किलो वजन. क्यों करते हम क्यों 190 किलोमीटर पैदल. चलते हमें क्या पड़ी क्या वायरल होने के.
लिए वायरल तो हो चुके हैं क्या पैसे कमाने. के लिए पैसे तो यहां पर खर्च हो रहे हैं. किसके. लिए किसके लिए जी रहे किसके लिए बेटियों. का विवाह कर रहे रातों भर तैयारी कर रहे. टेंट लगा रहे हैं लाइटें लगवा रहे हैं. सामान कहां से आना चाहिए किसके लिए कर रहे. हैं किसके लिए हम जी रहे हैं और हमारा. इससे फायदा क्या कैंसर हॉस्पिटल में. गरीबों को दीन हीन को कथा करके हमने प्रण. लिया है कि कथा करने से जो भी हो आएगा वो. हम हॉस्पिटल में दीन हीन गरीबों का. निशुल्क इलाज कराएंगे किसके लिए ना तो.
हमें नेता बनना है ना तो हमें राजा बनना. है ना तो हमें तुमसे सम्मान पाना है. कौन-कौन इराज करा जाएगा ये भी जरूरी थोड़ी. है हम उससे सम्मान लेने बैठे रहेंगे क्या. किसके लिए हम अपने लिए कर रहे हैं हमारी. इसमें पड़ी क्या है और हम चाहते ही क्या. है हम क्यों गालियां खा रहे हैं मुसलमानों. की हम क्यों गालियां खा रहे हैं सेकुलर. लोगों की. हम क्यों टारगेट पे हैं धमकियां दी जाती. है परिवार का निकलना मुश्किल हो जाता है. एक छोटी सी जवान फिसल जाए तो लाखों हिंदू.
ही हमारे गाली वग देते. हमें किसके लिए अपने लिए थोड़ी कर रहे कर. तो हिंदुत्व के लिए ही रहे और करेंगे भी. उनके लिए तो भैया लोगों को समझ में इसलिए. नहीं आ रहा क्योंकि लोगों को अपनी अपनी. भावनाओं से दिखाई पड़ता है उन्हें एक पक्ष. दिखाई देता है दोनों पक्ष थोड़ी दिखाई. देती आप सुन के चौक कि एक एक दोदो घंटे इस. बात पे हमारे चले जाते हैं कि कोई बच्ची. मुसलमान के साथ भग जाए तो उसको. सिर्फ वार्तालाप करने में समझाने में दो. दो घंटे लगते गुस्सा होना पड़ता चिल्लाना.
पड़ता खुद का माबाप को पैसा देना पड़ता कि. तुम यही रहो हम है किसके लिए घर वापसी. कराने के लिए कई लोगों को मकान बनवा के. देना पड़ता है किसके लिए क्या जरूरत है घर. वापसी की हमें क्या लेना देना हम क्यों ये. मोल कुछ ना कुछ तो होगा अंदर कुछ ना कुछ. तो ज्वार होगा किसके लिए हम ये गालियां सह. रहे क्यों सहेंगे. मंडलों की बैठक कर रहे उन्हें चाय पिला.
रहे उनको गाड़ियां लगाते हैं किसके. लिए क्यों आखिर क्या है वनांचल में. आदिवासियों के बीच में हम कथा करने अपना. टेंट लगा के जाते हैं खुद का भंडारा करते. व उनको यजमान बनाते हैं मंच पर बुलाते हैं. अभी 19 जनवरी को यहां पर आदिवासी जनजागृति. सम्मेलन रखा उन्हें बस लगवाई उन्हें. बुलाया उनकी कृतियों के बारे पर चर्चा की. उनकी समस्याओं पर चर्चा की समाधान पर. चर्चा की किसके लिए हमें क्या पड़ी हमारे.
तो अपने ही संत हमें गाली बकते फिर भी हम. जवाब नहीं देते क्यों अगर हमने जवाब दे. दिया तो सनातन पर लोग फिर मजाक बनाएंगे. मुसलमान कहेंगे पहले दोनों ही निपट लो फिर. हमसे. निपटना किसके लिए हमें क्या पड़ी हम आपसे. पॉडकास्ट पर इतनी बहस कर रहे हैं किसके. लिए आते अपनी मस्ती से देते अपनी बात रखते. जिनको प्रचारित करना होता वही प्रचार वाली. बातें भर बोलते निकल. चलते पर क्यों हम ये चर्चाएं कर रहे हैं.
क्यों हम आपके साथ में दोदो घंटे बैठे हैं. क्यों इंटरव्यू दे रहे हैं क्या सिर्फ. वायरल होने के लिए नो नेवर हम इस देश के. हिंदुओं को बचाना चाहते हम चाहते हैं कि. इस देश में हमने झड़ते हुए घर देखें कि एक. घर की बिटिया किसी मुसलमान के साथ चली जाए. पूरा घर टूट जाता है घर तो छोड़िए आने. वाली पीढ़ियों पर कलंक लग जाता है गांव. में कोई पानी नहीं पीता है अभी भी गांव. में जातियों के नाम पर बैठाया नहीं जाता. है पूछा नहीं जाता है अभी भी अंगड़े.
पिछड़े के नाम पर यहां घोड़ों पर नहीं. बैठने देते किसके लिए हम अपने लिए थोड़ी. कर रहे और हमें फायदा भी क्या नहीं हमें. फायदा है कि हम जब मरेंगे तिरंगे में लिपट. के मरेंगे एक बादशाहत की जिंदगी मरेंगे. मौत भी आएगी तो वो भी शर्माएगी कि मैं किस. बादशाह को लेने आई. शुभकामनाएं आपको बहुत सारे हमारी तरफ से. आप भावुक भी बीच में हो गए थे दो घंटे का. लगभग ये अनुभव रहा कमाल रहा आई होप लोगों.
को पसंद आए बाकी सब आपको है ही आशीर्वाद. ऊपर वाले का थोड़ा आशीर्वाद बालाजी का. बाकी देखने वालों पर बनाए रखिए और अपना. बियाह कीजिएगा तो हमको पूड़ी खाने बुलाएगा. हमारा होगा तो हम. बुलाए जय भोलेनाथ जय.
