
Unplugged ft. Devi Chitralekha2.O | Krishna Ji | Vrindavan |
जया किशोरी का क्रिस्टियानॉन ड्योर बैग, बागेश्वर जी का चश्मा, और चित्रलेखा जी की. गाड़ी, लाल रंग की गाड़ी? देवी चित्रलेखा ने खरीदी फरारी की।. यह कहते हैं कि मोह माया से दूर भागो।. माया के बंधन से छूटने के दो मार्ग. संसार में कुछ भी अपना नहीं है।. अपना सुकून परमात्मा के साथ-साथ इन. गाड़ियों में. पैसा ऐसा नहीं है कि बेकार है या पैसे में. सुख नहीं है। पैसे में सुख बहुत है। पैसे. वाली रील आप ही लोग कटती है। मेरा कोई. इसमें नुकसान नहीं [हंसी] है। जितने भी. कथावाचक हैं। ये सारे लव लाइफ रिलेशनशिप.
गुरु कैसे? मेरा ब्रेकअप हो गया। मैं मूव ऑन नहीं कर. पा रहा। आजकल का जो प्रेम है वो मुझे नहीं. लगता वो प्रेम है।. मैं अगर तड़पू तो तड़पू। अगर तुम ना मेरे. लिए तड़प। तुम अगर तड़पे तो फिर मशहूर हो. जाऊंगा।. प्रेम को ज्यादा प्रदर्शन कर दोगे तो. प्रेम नहीं वो आसक्ति है।. वृंदावन में हर कोई एक दूसरे को राधे-राधे. कहता है।. अगर आप राधा रानी का नाम लेते हो. ऑटोमेटिकली भगवान कृष्ण भी उससे रीझ जाते. हैं। प्रसन्न हो जाते हैं।.
हम राधे ही क्यों कहते हैं? श्री कृष्ण की. पत्नी तो रुक्मणी जी थी। श्री जी का जन्म. भी वृंदावन में होता और रुक्मणी जी का. जन्म यहां नहीं हुआ। क्या ये भी एक वजह हो. सकती है कि जो कहानियां बाद में प्रचलित. हुई क्योंकि ब्रिज वालों ने ही दुनिया तक. पहुंचाया। ये कह सकते हो आप. कहीं किसी पुराण में कहीं जिक्र नहीं रहा. कि श्री कृष्ण और राधा ने अपने प्रेम को. उस स्तर पर ले जाने की कोशिश की।. शास्त्रों में वर्णन है। वृंदावन में. भांडेरवन नाम का एक जगह है जहां पे राधा. कृष्ण की शादी ब्रह्मा जी ने कराई।. भगवान श्री कृष्ण की 16,000 रानियों के. बारे में अक्सर चर्चा।. ये वेदों की रिचाएं ही स्त्रियां बनके आई.
हैं। भोमासुर नामक एक दैत्य था।. क्या सबसे खतरनाक अहंकार का रूप. स्पिरिचुअल अहंकार. अच्छाई का। भक्ति मार्ग को ज्यादा श्रेष्ठ. इसलिए बताते हैं क्योंकि ज्ञान मार्ग में. चांसेस ज्यादा होते हैं अभिमान. [गला साफ़ करने की आवाज़] के पैदा होने. के।. किस उम्र में ईश्वर के प्रति समर्पण ईश्वर. के सबसे करीब लाता है? भक्ति की जर्नी बचपन से शुरू होती है।. क्योंकि भक्ति एक बहुत लंबी यात्रा है।. हमारे जीवन में जो गुस्सा या खराब बर्ताव. आता है ये ग्रह नक्षत्रों की वजह से होता. है या इंसान की चेतना इतनी ताकतवर है कि.
ये सब बदल सकते हैं? नहीं नहीं। हमारा अपना स्वभाव है। इसमें. ग्रह नक्षत्र कुछ [संगीत] नहीं करते।. प्रारब्ध से क्या-क्या तय होता है जीवन. में? जन्म माता-पिता स्वभाव का कुछ. परसेंटेज. शादी का आप एस्ट्रोलॉजी बिलीव करते हो. मेरी आज तक जन्म कुंडली नहीं. एक मशहूर यूट्यूबर है कहा कि राम जी जब. वनवास के दौरान थे तो वो मांस का सेवन. करते थे क्या कहीं पर इस बात का उल्लेख है. ऐसा कहीं भी किसी भी शास्त्र में कोई भी. वर्णन आपको नहीं मिला अपने भगवान के लिए. इतनी बड़ी बात कहना सुनना मानना यह बहुत.
बड़ा पाप है। अगर भगवान कोई हमारी प्रिय. चीज हमसे छीन लेते तो क्या वो हमें सजा दे. रहे होते हैं? कृष्ण की कृपा थोड़ी टेढ़ी है। वो पहले. तुमसे लूटेगा, पहले तुमसे छीनेगा, चोरी. करेगा और उसके बाद फिर अपने आप को देगा।. अगर सब कुछ भगवान तय करते हैं तो फिर. इंसान को मेहनत करने की क्या जरूरत है? ये बोलते बोलते कि जो करते भगवान करते. इसके चक्कर में कहीं कोई पुरुषार्थ करना. ना भूल जाए। इसीलिए भगवान ने भगवत गीता. सुनाई।. प्रारब्ध और पुरुषार्थ का क्या रिश्ता है? माता-पिता का चुनाव पहले से तय होता है?
हां।. और यह रिपीट नहीं होते।. हो सकते हैं। माता-पिता भी आपको हो सकता. [संगीत] है कई जन्मों में वही मिले। हो. सकता है कभी आप उनके माता-पिता बने, यह भी. संभव है।. मतलब ज्यादा मारा पीटा होगा उन्होंने।. अगली बार हमको मौका. बदला लेने के लिए।. तिलक क्यों लगाते हैं? जैसे आपने लगा रखा. है।. तिलक जो है ये भगवान का ही चरण है जो. हमारे माथे पे रहता है।. तो कितने प्रकार के तिलक होते हैं? और. उनके पीछे के विज्ञान क्या है? उध मतलब ये. यू वाला जो शेप है ये सबका सेम रहता है. थोड़ा-थोड़ा वैष्णव परंपरा में शैव्य. परंपरा में वो त्रिपुण हो जाता है।.
कथा सुनाते वक्त आंसू आना जरूरी है और वो. प्रेम में निकलते हैं ईश्वर के समर्पण में. निकलते हैं या कई बार दर्शकों की डिमांड. में निकल जाते हैं या सोशल मीडिया के गेम. ने थोड़ा सा करप्ट कर रखा है।. मोह और प्रेम में क्या अंतर है? संसार में वैसे मोह ही होता है। संसार में. प्रेम बहुत कम ही होता है। होता ही नहीं।. प्रेम भगवान से ही हो सकता है।. जैसे आपका ब्याह हुआ है तो आपको मोह है।. प्रेम नहीं है मेरी से।. क्या इंसान को जीते जी अपने मरने के बारे. में सोचना चाहिए और क्या मरना सोचना जीवन.
जीते सही है? आध्यात्मिक मार्ग में जो है मरने को अशुभ. नहीं माने।. तो मरने क्या कह. जब मैं गरुड़ पुराण को पढ़ रहा था और 28. प्रकार की सजाओं को पढ़ रहा था। तो मुझे. लगा या तो मैं तला जाऊंगा या भुना जाऊंगा।. कुछ ना कुछ तो होगा ही क्योंकि हर चीज पे. कुछ ना कुछ है।. डरने की जरूरत नहीं है। कुछ पाप है जो हम. ना चाहते हुए भी नहीं छोड़ सकते। उसका. समाधान शास्त्रों ने दिया नाम जापान।. क्या किसी खूंखार आदमी का दिमाग सत्संग या. सात्विक खाने से बदल सकता है? कलयुग में. गंगा नहाने से पाप धुलते हैं।. अनजाने में किए गए पापों। [संगीत] जानबूझ.
के आप पाप करो। फिर गंगा जी से कहो पाप धो. दो। तो वो संभव नहीं है। वो तो यमराज जी. के डंडी धूमि है।. दुनिया की आलोचना और ट्रोलिंग से बचने का. आध्यात्मिक तरीका क्या ओम इग्नोर नमः. [हंसी]. क्या कभी आपने गौर किया कि आज की भागदौड़. भरी जिंदगी में इंसान के पास सब कुछ है.
पैसा है संसाधन है लेकिन फिर भी इंसान. अकेला है खाली है वो करियर के पीछे भाग. रहा है वो जिंदगी के पीछे भाग रहा है व्या. व्यापनों के पीछे भाग रहा है लेकिन वो भाग. रहा है और उस भागने के बीच में उसे सुकून. नहीं मिल रहा। लेकिन क्या कभी आपने रुक कर. सोचा कि यह सुकून आखिर है कहां? आज का. पॉडकास्ट बड़ा इंटरेस्टिंग है।. इंटरेस्टिंग इसलिए है क्योंकि आज सिर्फ. भक्ति की मीठी-मीठी बातें हम नहीं करेंगे।. आज हम जिंदगी के उन कड़वे सच उलझनों की.
परतें खोलेंगे जो शायद आपको झझोड़ सकते. हैं। हम कृष्ण के बारे में बात करेंगे। हम. शिव के बारे में बात करेंगे। हम वृंदावन. के प्यार से लेकर गरुड़ पुराण के डर तक. बात करेंगे। निस्वार्थ प्रेम से लेकर. मोबाइल, इंटरनेट की गंदगी और जीवन की. जरूरतों के बारे में बात करेंगे। कई उन सच. के बारे में बात करेंगे जिनमें समाज को. शायद जानना समझना चाहिए और आज इसीलिए. हमारे साथ एक बेबाक आवाज है जो कलयुग के. शोर में राधा कृष्ण का सुकून आपके जीवन. में घोलती है। देवी चित्रलेखा जी कैसे. हैं? राधे-राधे मैं एकदम अच्छी हूं। आप कैसे.
हैं? बहुत अच्छे। कई साल बाद आपको देखकर और. अच्छा लग रहा है।. हां जी। ये हमारा दूसरा पॉडकास्ट है और. इससे पहले जो हुआ लोगों ने बहुत सुना बहुत. प्यार दिया और बहुत कुछ सीखा भी होगा शायद. यही रीजन है कि भगवान ने भी दोबारा मिलाया. ताकि हम फिर से कुछ बात करें जो लोगों को. कुछ दे सके कुछ बदलाव ला सके।. बट तब से लेकर अब तक आपके जीवन में काफी. उतार हमने चढ़ाव काफी हमने देखा।. बहुत सारे गाने आपके आए। बहुत सारे हमने. अभी कोलैबोरेशंस देखे।.
बीते दो सालों में लगता है कि श्री कृष्ण. का काफी आशीर्वाद रहा है आप पर। नहीं खैर. वो तो जन्म से ही रहा है। बचपन से ही जो. कुछ भी पाया उनकी कृपा से ही पाया है।. लेकिन हां हर दिन इंसान कुछ ना कुछ नया. सीखता है। आगे बढ़ता है, चलता है, गिरता. है, फिर उठता है। तो हां, जीवन बहुत अच्छा. चल रहा है। भगवान की कृपा से कुछ-कुछ. चीजें आती जाती हैं।. बॉल भगवान फेंकते हैं और हम उसे कैच कर. लेते हैं उस मौके को, उस अवसर को। तो दो. साल जब आपसे मिले थे तब से ले अब तक बहुत.
कुछ नया सीखा है। बहुत चीजों को अच्छा. किया है और इस यात्रा को ऐसे ही आगे चला. रहे हैं।. आज हमने एक लंबी चौड़ी लिस्ट बनाई है. सवालों की और जिसमें हम आपसे आपके जीवन के. नहीं लेकिन जीवन को लेकर जो आपने सीखा. समझाना क्योंकि मैंने इस विषयों के बहुत. सारे इंटरव्यूज देखे और एक और परिपक्वता. मुझे दिखाई पड़ी। तो मुझे लगा कि आज हम. आपसे जीवन में कुछ सीखते हैं जो शायद. दर्शक हमारे अपने जीवन में अमल करके अपनी. जिंदगी बेहतर कर सकते हैं और ईश्वर के. करीब ला सकते हैं।. तो शुरुआत बड़े एक साधारण सवाल से करते. हैं कि मैं जब वृंदावन जाता हूं तो वहां.
पर हर कोई नाम लेकर नहीं पुकारता। वृंदावन. में हर कोई एक दूसरे को राधे-राधे कहता. है।. जी।. राधे-राधे क्यों कहते हैं? क्या इस शब्द. में कोई ऐसी ताकत है जो मन को शांत करती. है? या ये ईश्वर के नाम लेने का तरीका है।. कितनी बार उच्चारण हो जाएगा? क्या सोच है. कि हर आदमी वृंदावन में एक दूसरे को. राधे-राधे कर रहा है? पहली बात तो वृंदावन की पहचान ही राधा नाम. से है। मतलब एक व्यक्ति अगर आपसे आकर जस्ट. राधे-राधे बोल दे तो आप बिना उसका एड्रेस.
जाने जान सकते हो कि यह वृंदावन से है। यह. ब्रजभूमि से है। और राधा नाम इसलिए है. क्योंकि. राधा नाम लेने से राधा और कृष्ण दोनों की. साथ में आप प्रसन्नता एक साथ पा लेते हो।. अगर आप राधा रानी का नाम लेते हो, राधे-राधे बोलते हो तो ऑटोमेटिकली भगवान. कृष्ण भी उससे रीझ जाते हैं, प्रसन्न हो. जाते हैं। और ऐसा भी हम मानते हैं कि जैसे. कभी आप वृंदावन में जाओ वहां जो रिक्शे. वाले टमटम वाले हैं वो कभी भी हॉर्न नहीं.
बजाते। वह राधे-राधे बोलते हैं कि मैया. राधे-राधे वो साइड अगले वाला साइड दे देता. है। तो इसका मतलब यह भी है कि जीवन में. हमारे बहुत सारी ट्रैफिक जाम रहता है यानी. परेशानियां दुख रहते हैं। लेकिन जैसे आप. राधे-राधे बोलते हो तो वह सारी परेशानियां. आपके लिए रास्ता छोड़ देती हैं। साइड हट. जाती है। क्योंकि हमारे ब्रज में कहते हैं. आधो नाम तारी है श्री राधा राके कहे रोग. सब मिटी हैं। धाके कहे मिटे सब बाधा मतलब.
पूरा भी ना लो आप आधा भी रा बोल देते हो. तो आपकी सारी परेशानियां सारे दिमाग की. टेंशन खत्म हो जाती है।. अब मेरे ज़हन में यहां एक सवाल आता है जो. आजकल के मॉडर्न बच्चों के ज़हन में भी आ. सकता है। जो आजकल जिनजी पीढ़ी है उसके ज़हन. में भी आ सकता है।. जी. कि हम राधे ही क्यों कहते हैं? श्री कृष्ण. की पत्नी तो रुक्मणी जी थी। जी. श्री कृष्ण ने राधा जी को इतना बड़ा दर्जा. क्यों दिया कि उनके नाम से पहले राधा का. जिक्र हम कर दें या आपने कहा रा भी कर. दोगे तो अपने आप में पूर्ण हो जाएगा।.
स्थान देने का कारण यही है क्योंकि दो. प्रकार के प्रेम होते हैं। एक होता है जो. किसी संबंध से जुड़ा होता है और एक प्रेम. होता है जो बियों्ड वर्ड्स बिय्ड किसी. संबंध के होता है। और राधा रानी का और. कृष्ण का संबंध वही था।. रुक्मणी जी की भी अपनी महत्वता है। उनकी. जो पत्नियां रही उनकी भी अपनी महत्वता है।. लेकिन राधा और कृष्ण को हम लोग अलग मानते.
ही नहीं है। मतलब कि अगर राधा है तो कृष्ण. है। कृष्ण है तो राधा है। दोनों को अलग. किया नहीं जा सकता। जैसे बहुत सारे लोग. कहते शादी क्यों नहीं हुई? तो शादी ना. होने का रीजन भी यह था कि शादी के लिए दो. लोग चाहिए। दो बॉडीज चाहिए जो मिलकर के. फिर शादी होती है, विवाह होता है। लेकिन. राधा कृष्ण अलग थे ही नहीं। तो उनकी शादी. का कोई प्रश्न नहीं उठता। तो हमारे. शास्त्र कहते कि राधा रानी कृष्ण की. अहलादनी शक्ति है और कृष्ण का निष्काम.
प्रेम है। निष्काम प्रेम इसलिए है क्योंकि. राधा रानी ने प्यार में कोई कंडीशन नहीं. रखी। अगर कृष्ण 11 साल उनके साथ रहे और. उसके बाद 11 साल के बाद 100 साल दूर रहे।. लेकिन उस 100 साल में क्या हुआ उस पर लोग. ध्यान नहीं देते। लेकिन 11 साल में जो. मिलन का जो उनका टाइम था 11 साल का उसकी. कथाएं सुनाई जाती हैं। तो आप सोचो कि वो. प्रेम कितने ऊंचे लेवल का होगा कि वो 100. साल को ढक रहा है केवल 11 साल श्री कृष्ण. के जीवन की।.
अब हम तो बॉलीवुड की फिल्मों को देखकर. बड़े हुए लोग हैं। हमारे यहां लोग कहते. हैं कि अधूरे प्रेम में कहानियां दूर तक. जाती है।. जी। जो पूर्ण हो जाता है उससे कहानियों. में लोगों की दिलचस्पी कम रहती है।. रुक्मणी जी के त्याग के बारे में मुझे. हमेशा में यह सवाल मेरे ज़हन में आता है कि. उतनी चर्चाएं क्यों नहीं होती है? त्याग. तो उन्होंने भी किया, जीवन समर्पण. उन्होंने भी किया, उनका धर्म भी था, उनका. हक भी था, अधिकार भी था। फिर इतनी. कहानियां हमें क्यों नहीं मिली? नहीं. रुक्मणी जी की भी अपनी जीवन शैली है। अपनी. कहानी हर स्टोरी का अपना टेस्ट होता है।. अपना स्वाद होता है। रुक्मणी जी के जीवन.
में भी अनेक शास्त्र हैं जहां उनके बारे. में लिखा हुआ है। लेकिन हां जब श्री कृष्ण. से भी पूछा गया एक समय ऐसा था कि एक छोटी. सी कहानी दृष्टांत देते हैं ब्रज में कि. रुक्मणी जी को एक बार थोड़ा सा ये फील हुआ. जैसे आप बोल रहे हैं कि कृष्ण रहते हमारे. साथ हैं। पर ये बोलते अब भी राधा है। रात. को दिन में तो उन्होंने यह शिकायत नारद जी. को रखी। तो देवर्षि नारद जी भगवान के पास. यह शिकायत ले गए। वह कुछ बोल पाते उससे.
पहले ही ठाकुर जी ने एक नाटक शुरू कर. दिया। नाटक मतलब एक लीला शुरू कर दी।. भगवान श्री कृष्ण सर पकड़ के बैठ गए कि. हमारे सर में बहुत जोर का दर्द हो रहा है।. नारद जी ने पूछा दवाई लाएं। तो कृष्ण ने. कहा कि दवाई वाला दर्द नहीं है। यह किसी. और चीज से ठीक होगा। बोले किससे होगा? तो. कृष्ण ने कहा मेरे भक्त के चरण की कहीं से. मिट्टी ले आओ रज ले आओ जो मेरा पक्का. प्रेमी हो प्रेमी भक्त हो तो नारद जी ने. कहा ठीक है मैं जाकर ले आता हूं तो भगवान. कृष्ण ने कहा किसी और की क्या जरूरत है आप.
हो हमारे भक्त आप दे दो थोड़ी सी नारद जी. ने कहा कि ना मैं तो कहां नीच अधम मेरे बस. की बात नहीं है मैं किसी और की ले आता हूं. बाहर आई रुक्मणी जी खड़ी है सब रानी खड़ी. है नारद जी ने उनसे कहा आप चरण रज दे दो. तो सब ने एक ही बात कही कि ना हमें पाप. लगेगा क्योंकि हमारी चरण की मिट्टी कृष्ण. के माथे पर रहेगी तो बहुत बड़ा पाप लगेगा।. नारद जी जिसके पास गए सब ने यही आंसर सेम. आंसर दिया कि नरक जाना पड़ेगा पाप लगेगा।. किसी ने चरण रज नहीं दिया। एट द एंड वो.
ब्रज गए। गोपियों के पास राधा रानी के पास. और जाकर उनसे पूछा कि कृष्ण के सर में. दर्द है। मिट्टी चाहिए क्या दोगी? तो. उन्होंने सब ने अपने पैर के नीचे से एक-एक. मुट्ठी भर के नारद जी की झोली में डाल दी. और कहा जल्दी जाकर कृष्ण के माथे पर लगा. दो। तो नारद जी ने उस समय पूछा क्या. तुम्हें डर नहीं लगता पाप से, नरक से, अपराध से? तो उस समय राधा रानी और गोपियों. ने कहा कि अगर कृष्ण को सुख देने के लिए.
हमें एक बार नहीं एक जन्म नहीं हजार जन्म. भी नरक जाना पड़े तो हम खुशी-खुशी तैयार. हैं। क्योंकि हमारे लिए वो नरक भी स्वर्ग. होगा क्योंकि वहां हम जाकर इस बात से सीना. तान के चलेंगे कि हमने कृष्ण को सुख दिया. तब हम नरक में आए। तो नारद जी ने फिर कहा. कि कृष्ण को यह मिट्टी बाद में लगाऊंगा।. पहले मैं अपने माथे पर लगाता हूं क्योंकि. वास्तविकता में प्रेम आपसे बेहतर कोई कर. नहीं सकता। तो यह जो डिफरेंस है कि तत. सुखे सुखित्वम ऐसा नहीं है कि रुक्मणी जी.
या बाकी रानियों में नहीं है। लेकिन ब्रज. में श्री राधा रानी और गोपी कृष्ण के लिए. ही जीती थी। यही कारण है कि उनकी. प्रसिद्धि प्रेम के लिए ज्यादा है।. बट जैसे भगवान श्री कृष्ण ने मानव रूप. लिया था। मानव रूप में प्रेम को सात फेरों. में बांधा जाता है। कहीं किसी पुराण में. कहीं जिक्र नहीं रहा कि श्री कृष्ण और. राधा ने अपने प्रेम को उस स्तर पर ले जाने. की कोशिश की। उसके पीछे क्या सोच रही? नहीं शास्त्रों में वर्णन है राधा कृष्ण. का विवाह हुआ है। गर्ग संहिता एक संहिता. लिखी है गर्गाचार्य जी ने। उसमें लिखा है.
कि राधा कृष्ण का गंधर्व विवाह हुआ है। और. वृंदावन में जगह भी है, स्थान भी है।. भांडेरवन नाम का एक जगह है। जहां पे राधा. कृष्ण की शादी ब्रह्मा जी ने कराई। मतलब. ब्रह्मा जी पंडित बने और तब उन्होंने शादी. कराई। तो विवाह के अभी भी आप देखिए. वृंदावन में राधावल्लभ जी है, राधा रमण जी. है। वहां कईयों बार होता है जब राधा कृष्ण. का बिहावला उत्सव होता है। मतलब शादी का. फंक्शन होता है। तो ऐसा नहीं कि विवाह का. वर्णन नहीं है। पर हां ऐसा मानना दो मतों.
में है। कुछ कहता हुआ है। कुछ कहता नहीं. हुआ है। पर हो या ना हो हम ब्रज वाले. मानते हैं कि ठाकुर जी और श्री जी जो हैं. वो एक युगल है। उन्हें ना कोई अलग कर सकता. है। युगों युगों से वो एक ही है। श्री जी. का जन्म भी वृंदावन में हुआ था।. हां वृंदावन में मतलब ब्रज में एक गांव. है। गोकुल के एकदम पास में उसका नाम है. रावल गांव।. रावल में श्री जी का हुआ। गर्भ से नहीं. आई। वो कमल पर बैठकर के आई थी यमुना जी. में और कृष्ण का गोकुल में। बाद में फिर.
दोनों ने जगह बदली उनके दोनों पिता ने।. श्री कृष्ण के पिताजी ने नंद गांव बसाया. और राधा रानी के पिताजी ने बरसाना बसाया।. तो श्री जी का जन्म भी ब्रज में ही हुआ।. और रुक्मिणी जी का जन्म यहां नहीं हुआ था।. रुक्मणी जी महाराष्ट्र में उनका प्रागट्य. महाराष्ट्र में. तो यह भी एक लगाव ब्रिज वालों का शायद. श्री जी से है क्योंकि वो हमारे घर की. बेटी है। [हंसी]. अपने तो अपने होते हैं।. हां वही मैं कह रहा हूं।. ये तो है ही लेकिन. क्योंकि श्री कृष्ण की कहानियां भी ब्रिज. वालों ने ही दुनिया तक पहुंचाई।.
हां।. ब्रिज की अपनी प्रेम कहानी थी।. ब्रिज की अलग ही कहानी है। ब्रज की कहानी. सबसे ऊपर है।. क्या ये भी एक वजह हो सकती है कि जो. कहानियां बाद में प्रचलित हुई।. दूरदराज तक पहुंची। उसमें श्री राधा की. कहानियां इसलिए भी ज्यादा प्रचलित हुई. क्योंकि ब्रिज वालों ने ही दुनिया तक. पहुंचाया और ब्रिज ने श्री राधा और श्री. कृष्ण के प्रेम को देखा था।. जो शायद द्वारिका जाकर उतना ना देखा हो या. द्वारिका वालों ने उतना ना फैलाया हो।. नहीं, यह कह सकते हो आप कि भावनात्मक रूप. से तो हम जुड़े ही हैं, लेकिन शास्त्र भी.
कोई चीज होती है। शास्त्रों में लिखा हुआ. है कि राधा रानी का क्या महत्व है।. शास्त्रों में उतना महत्व कंपेयर अगर हम. करें रुक्मणी जी का और उनका तो उतना वर्णन. नहीं है जितना श्री राधा रानी के तत्व को. गाया गया है कि महादेव भी जिनकी आराधना. करते हैं। महादेव ने एक स्तोत्र लिखा है. श्री राधा रानी के लिए राधा कृपा कटाक्ष. मतलब महादेव हुए नारद जी हुए सनकादी ऋषि. हुए ये सब श्री राधा रानी की आराधना. शास्त्रों में. करते हैं और यही रीजन है कि हम उन्हीं.
कथाओं पर आधारित राधा रानी की इतनी महिमा. गाते हैं।. आपने अभी शिव जी का जिक्र कर दिया। कुछ. लोग शिव जी को बड़ा मानते हैं। कुछ लोग. कृष्ण जी को बड़ा मानते हैं। शिव जी और. कृष्ण जी का रिश्ता क्या है? नहीं बड़ा छोटा कहना तो मुझे साफ लगेगा।. इंसान है इंसान जैसे एक जमाने में विष्णु. जी के भक्त और शिव जी के भक्त आपस में. थोड़ा विवाद करते थे। फिर हमारे यहां पर. एक परम जन्म हुआ और शंकराचार्य आदि. शंकराचार्य जी के जन्म की वजह से उन्होंने. बताया कि दोनों एक दूसरे के पूरक बिना. अधूरे हैं। हमने एक दूसरे की पूजा करनी.
शुरू कर दी। तो कई लोग शिव जी के भक्त. हैं। कई लोग कृष्ण जी के भक्त हैं। जैसे. हम नॉर्थ में जाएंगे आगे तो हमारी तरफ. अयोध्या की तरफ में शिव जी के भक्त बहुत. सारे हैं।. हम आज पूरी दुनिया में जाते हैं तो कृष्ण. जी के भक्त बढ़ गए हैं।. लेकिन शिव जी और कृष्ण जी के बीच में क्या. रिश्ता रहा? देखिए भगवान श्री कृष्ण और महादेव आपस में. कभी नहीं लड़ते। हां उनको फॉलो करने वाले. जो उनको अपना भक्त का नाम देते हैं वो. जरूर आपने लड़ते। जया जी के फॉलोअ आपस में. शायद हो सकता है कि फॉलोअर्स में जरूर.
कंपटीशन हो जाता है लेकिन जो सचमुच जो संत. होते हैं या जो कोई देवी देवता होते हैं. या जो कोई भगवान की कैटेगरी उनको आपस में. कोई प्रतिद्वंद नहीं होता कोई कंपटीशन. नहीं होता। महादेव के लिए श्री राम भगवान. ने कहा है राम रामचरितमानस में कि जो. महादेव को प्रिय होगा वह मुझे प्रिय होगा. और जो मुझे प्रिय होगा वो महादेव को प्रिय. होगा। यह अंतर करना ही एक बहुत बड़ा पाप. है।. ये रामचरितमानस में है।. हां जी। भगवान श्री.
तुलसीदास जी. तुलसीदास जी वाली में उसमें भगवान श्री. राम ने कहा है कि जो महादेव का प्रिय वो. मेरा प्रिय है। उनसे द्वेष करने वाला मेरा. दोषी है। तो अब अगर उनके भक्त इस बात को. ले कंपटीशन कर रहे तो सोचिए ना तो महादेव. ना तो यह मिला ना वो मिला। तो दोनों की. प्राप्ति उनके लिए मुश्किल है।. बट क्या हमारे बड़े बहुत स्मार्ट नहीं थे? मतलब कई बार मैं सोचता हूं जैसे मैं बाकी. धर्मों को देखता हूं तो मैं देखता हूं कि. इब्राहिम एक रिलीजन था जिससे जस भी निकले, क्रिश्चियन भी निकले, मुस्लिम्स भी निकले।. लेकिन आज दुनिया में तीनों लड़ मर रहे.
हैं। हमारे यहां पे भी कई भगवान हैं। एक. समय में शायद इनमें इनके फॉलोअर्स में. बड़ा विरोध भी था। लेकिन चाहे आदि. शंकराचार्य जी को मैं पढ़ता हूं।. जिन्होंने चारों मठ बनाए और चारों जगह. अलग-अलग पुजारी बिठा दिए ताकि कल्चरल. एक्सचेंज हो। या जैसे कि आपने बताया. गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में. कहा कि वो उनके भक्त हैं। वो उनके भक्त. हैं। हमारे बड़े क्या ज्यादा इंटेलिजेंट. थे जिन्होंने एक ऐसा माहौल बनाया कि आने. वाली पीढ़ियां जो थी वो घुल मिलकर रहे और. एक दूसरे का अपमान ना करें एक दूसरे का. सम्मान करती रहे और उस तरह से ढाल दिया।.
ये आप मानते हो? हां बिल्कुल। उन्होंने कोशिश प्रयास भरपूर. किया कि किसी भी तरह का धर्म को लेकर के. राजनीतीकरण ना हो। कोई झगड़ा ना हो।. क्योंकि जैसे अभी हम बात भी कर रहे थे. पडकास्ट से पहले कि इतना झगड़ा शायद. राजनीति में भी नहीं होगा जितना धर्म में. हो जाता है।. तो जबकि धर्म जोड़ता है। धर्म तोड़ता. नहीं। तोड़ने का नाम धर्म नहीं है। जोड़ने. का नाम धर्म है।. लेकिन जहां जहां गांधी जी आते हैं वहां. थोड़ा समस्या आती है।. हो सकता है। मैंने एक बहुत अच्छी लाइन.
कहीं पढ़ी थी कि गीता और कुराण आपस में. कभी नहीं लड़ते।. कहीं भी रखे होंगे वो नहीं लड़ते। और जो. उनके लिए लड़ते हैं वो उनको कभी नहीं. पढ़ते।. हम. मतलब गीता और कुरान वाला तभी लड़ेगा आपस. में जब उसका उसने अध्ययन नहीं किया होगा।. उसको पढ़ा नहीं होगा। तो यह लड़ाई झगड़ा. समाप्त करने के लिए गोस्वामी जी ने. रामचरितमानस लिखी। मैं जिसकी कथा कहती हूं. श्रीमद् भागवत उसमें भी उसकी शुरुआत में. व्यास जी ने मंगलाचरण किया। पहला श्लोक.
लिखा। तो पहले श्लोक में उन्होंने बहुत. सोचा कि अगर मैं इस भागवत को लिख दूंगा. कृष्णाम परम धीमई तो टैगलाइन हो जाएगी कि. ये कृष्ण की भागवत है। रामाम परम धीमई तो. रामानंदी बोलेंगे हमारी है। इस पर हमारा. नाम लिखा है। अगर शिवम परम धीमई लिखेंगे. तो महादेव वाले शैव्य बोलेंगे हम है। तो. वो सारी झगड़ा खत्म करते हुए व्यास जी ने. लिखा सत्यम परम धीम। मतलब जो सत्य को. मानता है क्योंकि कृष्ण भी सत्य. सच्चिदानंद रूपाय राम सत्य राम सच्चिदानंद.
दिनेशा महादेव सत्यम शिवम सुंदरम दुर्गा. देवी जयकारा लगाते हैं सांचे दरबार की जय. सिख धर्म की बात करें तो वहां वहां भी जब. मिलते हैं बोला जाता है सत श्री अकाल तो. यानी सब धर्म सत्य को तो डेफिनेटली. मानेंगे ही मानेंगे तो व्यास जी ने इतनी. समझदारी दिखाई और अपनी बुद्धि लगा के कि. कहीं यह बट ना जाए क्योंकि क्योंकि धर्म. एक प्रकार का मुझे लगता है जैसे सड़क. किनारे पहले प्याऊ होती थी ना जल पानी.
पिलाते थे तो उसमें जब कोई प्यासा आता है. तो उसका ना तो जाति पूछी जाती है ना धर्म. ना संप्रदाय ना गुरु वैसे ही जब आप किसी. मंदिर जाओ किसी सत्संग में जाओ किसी गुरु. के पास जाओ वहां आपकी जातियां नहीं पूछी. जाती वहां संप्रदाय नहीं पूछा आप किस गुरु. के फॉलोअ हो वो नहीं पूछा जाता तो मुझे. लगता है गुरु गुरु आपस में नहीं लड़ते. भगवान भगवान नहीं लड़ते लेकिन उनको जो. चाहने वाले वो बेकार में बस झंझट अपने सर. पे पाले रखते हैं।. अब इसमें भी एक नया सवाल हमारे ज़हन में.
आया। बहुत सारे लोगों ने हमसे कहा पूछिएगा. जब भी कोई धर्म के बिछड़ा व्यक्ति आए कि. अगर भगवान के भक्तों में कोई भेदभाव नहीं. है तो व्यास पीठ पर बैठे कौन इसको लेकर. भेदभाव क्यों है? क्योंकि कई लोग यह आरोप. लगाते हैं कि हमने इसे भी कैटेगरी डिवाइड. कर दिया है।. जी।. जैसे मैं शुभांकर मिश्रा। मैं जिस स्कूल. में पैदा हुआ हूं, मैं इस देश के सभी. मंदिरों पर बैठ सकता हूं। लेकिन हो सकता. है कोई ऐसा व्यक्ति हो जो शायद मेरी जाति. का ना हो लेकिन मुझसे ज्यादा सनातनी हो।.
मुझसे ज्यादा उसे ईश्वर की समझ हो। अपने. जीवन को उससे ज्यादा न्योछावर कर रखा हो।. तो क्या ये भेदभाव जो समाज ने बनाया ये. गलत नहीं है? क्योंकि बना तो है।. देखिए गलतियां तो समाज में बहुत कुछ की. है। लेकिन कितना उनको बदलाव हम ला सकते. हैं वो प्रश्न उठता है। हां व्यासपीठ पर. जरूर प्रश्न उठते आए हैं। हमेशा आए हैं।. मैं खुद एक स्त्री हूं। मुझ पे भी बहुत. प्रश्न उठते हैं कि नारी होके कथा वाचन. सही है या नहीं? व्यासपीठ पर बैठना चाहिए. या नहीं? जातियों को ले उठते हैं, वर्ण को.
ले उठते हैं। लेकिन शास्त्र आज्ञा यह कहती. है कि जहां भागवत जी को वाचन करने वाले के. लिए भी जो गुण बताएं, जो कैटेगरी बताई है, उसमें यही बताया कि तीव्र बुद्धि हो, अच्छा दृष्टांत कुशल हो, भगवान को समर्पित. हो। तो ये कुछ-कुछ क्वालिटीज है। अगर यह. है तो वो भगवान की कथा गा सकता है। पर हां. कुछ चीजें ऐसी हैं जो बहुत समय से चलती. हुई आ रही है और उनमें बदलाव लाना इज द. टफेस्ट थिंग। क्योंकि जब भी कोई बदलाव की.
बात आती है तो एक युद्ध छिड़ता है। एक जंग. छिड़ती है।. चर्चा करना भी अपने आप में युद्ध है।. चर्चा करना भी बिल्कुल। अगर आप चर्चा भी. करते हैं तो आप लोगों की नजरों में. आप टारगेट होंगे आपको बता दें। [हंसी]. जी वैसे डरना नहीं चाहिए। जब आप कोई सत्य. की बात बोलते हैं, लेकिन कुछ चीजें समय के. हिसाब से बदलती है। मुझे ऐसा लगता है।. तो मैं इसी को एक एक्सटेंडेड सवाल पूछ. लेता हूं कि ब्राह्मण कौन है? जिसके. माता-पिता ब्राह्मण थे या जिसने ब्राह्मण. वाले कर्म अपनाए। जन्म से ब्राह्मण या.
कर्म से ब्राह्मण या पुश्तैनी डीएनए वाला. ही ब्राह्मण। इसकी डेफिनेशन टाइम के हिसाब. से चेंज हुई है। पहले की जो व्याख्या थी. ब्राह्मण होने की वो कर्म से होती थी कि. आप भले ही ब्राह्मण घर में ना आपने जन्म. लिया हो लेकिन आपकी विद्वता आपका जो. सात्विकता है वो अगर श्रेष्ठ है तो आप. ब्राह्मण माने जाते थे। पर समय बदला, युग. बदला और कलयुग में उसकी व्याख्या जन्म. आधारित है, कर्म आधारित नहीं है। तो यह. युग के हिसाब से व्याख्याएं बदल दी गई.
हैं। जबकि पहले ऐसा बिल्कुल नहीं था। पहले. सारी वर्ण व्यवस्थाएं वर्ण व्यवस्थाएं तब. भी थी पर वो कर्म आधारित थी। जन्म आधारित. नहीं थी।. भगवान जब कोई अवतार लेते जैसे राम जी ने. अवतार लिया, कृष्ण जी ने अवतार लिया तो एक. आम इंसान से कितने अलग रहे होंगे या उनको. भी हमारी तरह ही भूख, प्यास, रोना. उनको. अंदर से ऐसा कोई इमोशन नहीं था। लेकिन जब. वह मानव बने तो उन्होंने पूरा 100% देने.
के लिए यह सारे इमोशंस अपने भीतर लेकर के. आए। जैसे भगवान राम माता जानकी के लिए. आंसू बहा के रोए कि कहां है जानकी। जबकि. माता जानकी और राम अलग नहीं है। और वहीं. भगवान कृष्ण और राधा रानी की बात करें। वह. जब अलग हुए तो विरह में श्री राधा रानी. खूब रोती थी। ठाकुर जी रोते थे। लेकिन वह. सब यह कह सकते हैं कि उनकी एक लीला थी।. जैसे एक मूवी वर्ल्ड में होता है कि एक. हीरो सारे रोल प्ले कर रहा है। अपनी. प्रेमिका के लिए रो रहा है। लेकिन बैक.
स्टेज जाके दोनों साथ में बैठ के कॉफी पी. रहे हैं। तो ये सेम जो है भगवान की लीला. है। भगवान जो आए हां उन्होंने यह जरूर. किया कि अगर मैं मनुष्य बना हूं तो मैं. सारे फीलिंग्स, सारे इमोशंस दिखाऊंगा।. जैसे पढ़ने गए फिर आगे चलकर के ब्रज. छोड़ना पड़ा। राम जी ने 14 साल इतने कष्ट. सहन किए। तो वो जो एक प्रोसेस है मानव. बनने का उन्होंने 100% पूरा सिर्फ नाटक. किया। एक लीला निभाई।.
भगवान श्री कृष्ण की 16,000 रानियों के. बारे में अक्सर चर्चा होती है।. यह स्त्रियां थी या वेदों की रिचाएं थी।. लिखा है शास्त्रों में कि यह वेदों की. रिछाएं ही स्त्रियां बन के आई हैं। श्री. कृष्ण से उनका मिलन हुआ है। भगवान ने तब. उनके साथ विवाह किया।. बट ये 16,000 नंबर आज के जमाने में लोग. पूछेंगे प्रैक्टिकली कैसे पॉसिबल है? क्या कहानी थी 16,000 शादियों के पीछे? ये 16 हजारों के रानियों के साथ भगवान ने.
एक साथ विवाह किया था। एक भोमासुर नामक एक. दैत्य था। उसने इन सबको अलग-अलग जगह से. कैद करके लाता था और इस उसने एक बहुत बड़ा. अपना टापू जैसा बना रखा था और वहां उनको. लाकर रखता था और उस पूरे की पूरे टापू के. चारों ओर सात उसने. आवरण बनाए थे मतलब अपनी सुरक्षा के लिए. अग्नि का शास्त्रों का को कोई आ ना सके. लेकिन भगवान कृष्ण ने उन सबको पार किया.
उसके पास गए और सब 16000 जो बालिकाएं हैं. कन्याएं हैं उनको मुक्त मुक्त करा के कहा. कि तुम अब अपने घर चली जाओ। कृष्ण ने. प्रस्ताव नहीं रखा शादी का। यह बहुत जरूरी. बात है क्योंकि लोगों को भगवान श्री कृष्ण. पर उंगली उठाना बहुत आसान लगता है। भगवान. ने कहा कि तुम घर जाओ। अब मैंने तुम्हें. मुक्त कराया। अब तुम अपना जीवन जियो। फिर. उन कन्याओं ने कृष्ण से प्रार्थना करी कि. हम अब समाज में स्वीकार हमें नहीं किया. जाएगा। क्योंकि माता जानकी अगर रावण के.
पास रही तो उन पर उंगली उठा दी गई तो हम. तो बहुत ही सिंपल सहज समाज की नारियां. हैं। तो अब हमारा कोई नहीं है। अब हमारे. आप हो। आप हमें स्वीकार करो। अब नेक्स्ट. क्वेश्चन था कि कृष्ण 16000 को घर लाकर. करें क्या? अगर उनको दासी भी बना लेते तो. लोग फिर उंगली उठाते कृष्ण पर कि उन्होंने. नारियों की मजबूरी का फायदा उठाया। समाज. में उन्हें सम्मान ना मिलता। तो भगवान. कृष्ण ने उनको सम्मान दिलाने के लिए कि जब.
यह कहीं से गुजरे कोई पूछे कौन जा रहा है. तो सब यह कहे कि द्वारिकाधीश की पत्नियां. जा रही तो वो गर्व से चल पाई ये अपना सर. ऊंचा करके चल पाई उसलिए भगवान ने 16108. रानियों से विवाह किया. कृष्ण पूर्ण अवतार है और हैं तो क्यों. भगवान तो कई सारे हुए जो मनुष्य पैदा हुए. कृष्ण इसलिए पूर्ण है क्योंकि वो सब कलाओं. से भरे हुए मतलब कृष्ण एक ऐसा पर्सनालिटी. व्यक्तित्व है जो पूरा कलरफुल है। अगर वह.
गा सकता है तो वह नाच पी सकता है। वह. ज्ञान की बातें कर सकता है तो इतना भी. भोला बन सकता है अपनी मैया के सामने कि. मैया दूध गम है। मैं तो फूंक-फूंक के. पूंगा। तो वो दोनों जो एक भोलेपन की एक. ज्ञानी की एक गृहस्ती की एक ब्रह्मचारी की. जितनी भी लीलाएं हो सकती थी कृष्ण ने वह. निभाई। एक तरफ वह इतने प्रेम में मोह में. डूबे हैं कि ब्रजवासियों के लिए मथुरा में. बैठकर रो रहे हैं और दूसरी तरफ जब उनकी.
आंखों के सामने उनका पूरा यदुवंश तबाह हो. रहा था वो शांत बैठकर के मुस्कुरा रहे थे।. तो दोनों इमोशन एक ही व्यक्ति में बहुत कम. देखने को मिलता है। तो वह जो सारे कला हैं. इसको कला कहते हैं आध्यात्म की भाषा में. कृष्ण के भीतर 64 कलाओं से कृष्ण परिपूर्ण. है। तो वो सारे रस सारे कलर सारे रंग श्री. कृष्ण में इसलिए उन्हें पूर्ण अवतार कहा. जाता है।. इसीलिए कलयुग में सबसे वायरल भगवान है. कृष्ण जी. वायरल भगवान [हंसी]. क्योंकि जिसको जो देखना होता है जो चाहिए.
होता है उसको मिल जाता है। कोई बालक देखता. है।. कोई उनमें मनमौजी देखता है।. कोई लीलाओं पर उनकी मोहित हो जाता है।. कृष्ण से लोग रिलेट रिलेट कर पाते हैं।. हां बच्चे को लगे अरे ये तो हमारे जैसा ही. माखन भी चुराता है। अगर कोई खैर कंपैरिजन. नहीं है लेकिन कोई प्रेमी भी देखता है तो. कृष्ण से बड़ा कोई प्रेमी नहीं है। तो वो. किसी को ज्ञान चाहिए।. ज्ञान चाहिए तो 17. लाइफ के एस्पेक्ट्स चाहिए तो कृष्ण से ले. लो।. तो भगवत गीता से ले लो। तो यह जो कृष्ण ने.
अपना ओवरऑल जो पर्सनालिटी बनाई अच्छा. कृष्ण अवतार का कारण भी यही था। कृष्ण. अवतार से पहले भगवान का नरसिंह अवतार हुआ. है। वामन अवतार, वरह अवतार, भगवान मछली. बने हैं। भगवान कछुआ बने। लेकिन उन सब. अवतारों में यह कैपेसिटी नहीं थी कि वो. किसी का मन अट्रैक्ट कर पाएं। किसी का. चित्त चुरा सके। फिर भगवान ने सोचा कि अब. तक लोग भगवान के नाम से सिर्फ डरते हैं कि. अरे अरे भगवान है। हाथ जोड़ो अपराध हो. जाएगा। पाप हो जाएगा। अब मैं एक ऐसा रूप.
लेता हूं जिसको कोई भी आए और गले लगा ले।. मतलब डर ना हो केवल प्रेम हो। और कृष्ण के. नाम का भी मतलब होता है कर्षति इति कृष्ण।. जो आपको आकर्षित करना जानता हो उसी को. कृष्ण कहते हैं। तो कृष्ण ने अपने स्वरूप, अपनी लीला, अपने स्वभाव से सबको आकर्षित. किया।. हमारे सनातन में जो हम मंत्रों का उच्चारण. करते हैं। उसे धीरे-धीरे पढ़ना चाहिए या. जोर-जोर से? मंत्र दो तरह के होते हैं। एक गुप्त मंत्र. होता है। उसको आप नहीं बोल सकते हैं।.
लेकिन कुछ मंत्र होते हैं जिनका आप खुल के. जाप कर सकते हो। कीर्तन कर सकते हो। भरे. बाजार में भी कर सकते हो। लेकिन कुछ वेदों. के मंत्र ऐसे होते हैं जो गुरु देता है और. वो आपको एक आसन पर शांत बैठ के ही जपे जा. सकते।. जैसे मैं हनुमान चालीसा के बारे में कहीं. पढ़ रहा था। तो उन्होंने कहा कि हनुमान. चालीसा जब आप जोर-जोर से पढ़ते हैं तो. उससे जो वाइब्रेशन आती है वो आप पर बहुत. असर करती है और इसीलिए कई जो पुराने जमाने. हम देखते थे कि मंत्र उच्चारण होते थे. जोरजोर से होते थे उनकी अपनी एक विशेष.
ध्वनि थी जो आप पर बहुत असर करती थी तो. क्या मंत्रों के जरिए वाइब्रेशन का कुछ. असर होता है हम पर. बिल्कुल होता है मंत्र का मतलब ही यह होता. है जो आपके मन को बांध करके रखे आपके. चित्त को बांध करके रखे और ध्वनि में इवन. साइंस भी कहती है कि साउंड का अपना एक ओरा. होता है। साउंड की अपनी एक वाइब्रेशन होती. है। तो अगर आप उसी मंत्र को जोरजोर से. जैसे हमारी जो संप्रदाय है उसमें महामंत्र. बोला जाता है। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण.
कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम. हरे। तो इसको हम सड़कों पर भी जाकर के. जोर-जोर से कीर्तन कर सकते हैं। लोग उसमें. नाच सकते हैं। वहां का वातावरण शुद्ध होता. है उस नाम से और वैसे भी आई थिंक सबसे. ज्यादा इस दुनिया में अगर कोई ताकत है तो. वो शब्द में ताकत होती है। मान लीजिए आप. दूर भी खड़े हो मुझसे पीठ करके खड़े हो।. लेकिन अगर मैं आपका नाम बोलूं भले वहां 10. नाम के शुभंकर खड़े हो लेकिन आप मुड़ के.
तो जरूर देखोगे एक बार कि मुझे बुलाया जा. रहा है। शब्द की ताकत है। तो वैसे ही जब. आप जोर-जोर से कृष्ण नाम बोलते हो, राम. नाम बोलते हो, शिव का कोई मंत्र बोलते हो. तो यह पक्का कंफर्म है कि एक बार भगवान. मुड़ के तो देखते हैं कोई मुझे बुला रहा. है। कोई मेरा आह्वान कर रहा है। तो यह. शब्दों की ताकत होती है। और इसी ताकत के. लिए ही कलयुग केवल नाम अधारा आप जितना जोर. से उच्चारण से मंत्र बोलोगे उतना आपका और. आसपास का वातावरण शुद्ध होगा।. क्या सबसे खतरनाक अहंकार का रूप.
स्पिरिचुअल अहंकार है? अच्छाई का। यस। मतलब मैं बहुत बड़ा भक्त. हूं। मैं बहुत आध्यात्मिक हूं। यह नहीं. है।. मैं एक्चुअली ओशो को पढ़ रहा था कहीं पर।. तो उन्होंने कहा कई प्रकार के अहंकार होते. हैं। लेकिन मुझे लगता है सबसे बड़ा अहंकार. जो है वो स्पिरिचुअल अहंकार है। जहां पर. मुझे इस बात का एहसास है कि मुझे पता है।. मैं ज्ञानी हूं क्योंकि यहां पर. कॉम्प्रोमाइज या संवाद का जगह नहीं बची।. जगह नहीं बचती।. उन्हें पता है कि मुझे पता है कि मैं.
जानता हूं।. हम. मैं श्रेष्ठ हो गया हूं। मैं तुमको जीवन. का रास्ता दिखा सकता हूं। कई बार हमारे कई. ऐसे गुरु हैं जिनको सुनकर बच्चों को भी. लगता है। स्पिरिचुअल अहंकार वाला व्यक्ति. क्या ईश्वर से कनेक्टेड है या वो दूर वो. भी दूर जा चुका है क्योंकि जब हम पुरानी. कहानियां देखते हैं पढ़ते हैं तो हमें उस. जमाने में भी कई ऐसे ऋषि मुनि नजर आते. हैं।. जी. जो बहुत ज्ञानी थे लेकिन शायद उनमें एक. स्पिरिचुअल अहंकार था। जी नहीं यही रीजन.
है यही कारण है कि भगवान के आध्यात्मिकता. के दो रास्ते ज्ञान मार्ग और एक भक्ति. मार्ग हम भक्ति मार्ग को ज्यादा श्रेष्ठ. इसलिए बताते हैं क्योंकि ज्ञान मार्ग में. चांसेस ज्यादा होते हैं अभिमान के पैदा. होने के कुछ जानने का कि मैंने यह पा लिया. मैंने भगवान को देख लिया मैंने यह साधन कर. लिया तो ज्ञान मार्ग थोड़ा ज्यादा कठिन. है। भक्ति मार्ग बहुत सहज है। भक्ति मार्ग. आपको वैसे भी विनम्र बनाता है। आप जितने.
डीप जाते जाओगे आप उतने ही विनम्र होते. चले जाओ। यह भक्ति मार्ग का फायदा है। और. जैसा आपने कहा कि हां इस दुनिया में सबसे. खतरनाक अभिमान अच्छाई का ही होता है। बुरे. को तो पता है कि भैया बुरा हूं। मैं शराब. पीता हूं। मैं बुरा हूं। पर जो नहीं पीता. उसे अहंकार होता है कि यह पीता है। मैं. नहीं पीता। यह गलत काम करता है। मैं नहीं. करता। अच्छा काम करना अच्छा है। लेकिन. उसको अपने मन में बोझ बनाकर चलना, अपने सर.
पर यह टैग लगा के चलना कि मेरी अच्छाई से. बड़ी कोई नहीं है। तो आप आध्यात्मिकता से. धीरे-धीरे नीचे गिरते चले जाते हो।. क्योंकि भगवान ने कहा है कि मैं सब कुछ. माफ कर सकता हूं। लेकिन अभिमान रूपी. दुर्गुण को मैं माफ नहीं करता।. सबसे बड़ा पाप क्या है? मुझे लगता है अगर यह बात चल रही है तो. अभिमान अभिमान के द्वारा ही हम भगवान से. और आध्यात्मिकता से दूर हो सकते हैं।.
जितना हम अभिमान के नजदीक जाएंगे भगवान से. उतनी हमारी कनेक्टिविटी खत्म होती चली. जाएगी।. चलो मैं इसको एक और इजी करता हूं। एक ऐसा. व्यक्ति जो जीवन में सरल है। पूजा पाठ. नहीं करता। सरल है, दयालु है, अभिमानी. नहीं है। किसी जरूरतमंद की मदद पड़े वह कर. देता है। लेकिन वह ईश्वर के करीब नहीं है।. वो पूजा पाठ नहीं कर रहा। और एक ऐसा. व्यक्ति जो दिन रात कंठी माला चला रहा है, पूजा पाठ कर रहा है। लेकिन उसके अंदर एक. अलग सिरे का अभिमान है कि मैं ईश्वर का.
सबसे प्रिय हूं और वह थोड़ा कनेक्टेड नहीं. लोगों से। अभिमान उसके अंदर है। ईश्वर किस. पर ज्यादा कृपा करता है या ईश्वर के करीब. कौन है? या ईश्वर की कृपा किस पर होगी? नहीं देखिए कृपा करने की डेफिनेशन तो. दोनों की अलग-अलग हो सकती है। लेकिन अगर. वह माला करता होगा और अगर वह भगवान के. करीब होगा सचमुच वाला तो उसके भीतर अभिमान. नहीं हो सकता। तो इसका अगर अभिमान है तो. इसका मतलब है कि उसकी जो भी चीजें अब चल. रही है वह बाहरी चल रही हैं। अभी तक अंदर.
उसके कुछ पहुंचा नहीं है।. कंठी खाली नाम चल रहा है।. हां वो बस उसको अभी उसका रस नहीं आया है।. भक्ति का रस नहीं आया है। और जो एक. व्यक्ति थोड़ा सा जिसके जीवन में यह सारे. गुण जो आपने बताए वो है लेकिन भगवान नहीं. है। तो वो गुण उसको धीरे-धीरे धीरे भगवान. के करीब एक दिन लेकर के जाएंगे। यह कंफर्म. है कि आज भले वह भगवान से ना जुड़ा हो. लेकिन उसकी यह क्वालिटीज भगवान को इतनी. पसंद आएंगी कि वह अब झटके में उसको अपना.
बना लेंगे और जब अपना बनाएंगे तो. धीरे-धीरे वो भी अब माला या भगवान से. जुड़ना मंदिर जाना शुरू कर देगा। तो ये. पहला स्टेप है। पहला स्टेप होते ही फिर. भगवान आपको दूसरे स्टेप पर लेकर के. जाएंगे।. अब ये सवाल मेरे ज़हन में बहुत दिन से आता. है। थोड़ा फनी भी सवाल है कि जितने भी. कथावाचक है. जी। ये सारे लव, लाइफ, रिलेशनशिप गुरु. कैसे बन गए? [हंसी]. जी।. मैं बहुत सारे कथावासों को देखता हूं जो. सोशल मीडिया पर लव, लाइफ, रिलेशनशिप. समझाते रहते हैं। हम.
तो मुझे लगता है आपने शुरुआत तो की थी. [हंसी] अपनी पूजा पाठ से।. जी।. सडनली ये कहां से हो गया? ये ट्रेंड है. इसलिए हो गया। [हंसी]. नहीं नहीं मुझे लगता है ये टैगलाइन. मतलब. इसमें इसमें सच्चाई तो है ना कुछ हद तक।. नहीं नहीं लोगों को आकर्षित करने के लिए. टैगलाइन दे दी है। पर देखो आध्यात्मिकता. क्या है? आध्यात्मिकता जैसे आपने कहा कि आपके जीवन. को पूरा एक एक शेप देती है। अब उस जीवन. में सब कुछ आता है कि भाई आपके रिश्ते.
कैसे चलते हैं? आप संसार में क्या. रिस्पांसिबिलिटी है आपकी? दुनिया कैसे. चलनी चाहिए? वो सारी चीजें आध्यात्मिकता. का ही एक पार्ट है। तो जब आप रिलेशनशिप की. बात करते हैं, प्रेम की बात करते हैं। अब. जैसे हम आए तो आपने सबसे पहले राधा कृष्ण. का प्रेम ही पूछा।. अब उस प्रेम को जब हम व्यक्त करते हैं, हम. प्रेम बता रहे राधा कृष्ण का। लेकिन लोग. उसको जोड़ लेते हैं आजकल वाले प्रेम से और. फिर टैगलाइन बन जाती है कि इन्होंने लव. लाइफ के बारे में बताया, पार्टनर के बारे.
में बताया। और दूसरी बात ये भी है कि. नहीं सारी देवियां और सारे बाबा जो हैं. अगर आप उनकी टाइमलाइन भी चेक करोगे. जी. तो निजी जिंदगी में प्रेम पर बड़ा फोकस है. [हंसी]. और कई बार मेरे मन में सवाल आता है. कि ये काम मोटिवेशनल स्पीकर कर ले लाइव. कोचेस कर ले समझ में आता है बट भक्ति वाले. पेज पे अगर 70% प्यार इश्क मोहब्बत चल रहा. है. जी. तो ये मतलब ये आकर्षण है या फिर वही है कि. नहीं मुझे लगता है अगर वो अपनी तरफ से ये. चीजें कर रहे हैं तो प्रेम की भी डेफिनेशन.
जैसे मैंने कहा दो है। अगर आप आध्यात्मिक. भगवत प्रेम की बात कर रहे हो तो ऑब्वियसली. अच्छा है क्योंकि आप भगवान से जुड़े हो. लेकिन वही केवल आप अपना व्यूज और अपना वो. बढ़ाने के लिए सिर्फ कुछ-कुछ टैगलाइन बना. करके बहुत बार ऐसा होता है और ये गलतियां. सब करते हैं। ये गलतियां शायद मैंने भी. कभी शुरुआती दौर में करी होगी कि व्यूज. बढ़ाने के लिए लोग कुछ ऐसा लाइन सोचते हैं. कि भाई एकदम धमाका हो जाए। मुझे याद है कि.
कोविड टाइम चल रहा था तो. बर्थडे. हां उस समय अब खैर ये तो सब टीम ही. संभालती है पर मैंने कथा में कोई एक. दृष्टांत ऐसा बोला था कि शराब के फायदे. वो वैसे फनी वे में बोला था कि शराब के. फायदे मतलब ऐसा होता है कि जो पीता है वह. कभी बूढ़ा नहीं होता जवानी में ही उसका. हार्ट फेल लिवर फेल वह सब चला जाता है तो. वही टैगलाइन किसी ने लेकर के एकदम हमारी. टीम में से उसको को छाप दिया, डाल दिया और.
बड़े अच्छे व्यूज आए। वो बड़े खुश हुए कि. अरे देखो हमने क्या टैगलाइन बनाई। शराब के. नुकसान डाले तो कौन देखेगा? पर जैसे फायदे. डाले तो व्यूज बढ़ने लग गए। लेकिन उसके. चक्कर में धीरे धीरे धीरे बढ़ते-बढ़ते वो. चीजें एक कंट्रोवर्सी में चली गई। लोगों. ने अगली लाइन नहीं पढ़ी। लोगों ने अगली. लाइन नहीं सुनी। सिर्फ इतनी सुनी कि एक. देवी प्रकट हुई है जो कहती है कि शराब के. फायदे बहुत सारे। इसको पकड़ो ये कहां से. आई है? इसकी कथा सुनो और मतलब.
बिय्ड नेगेटिविटी इतनी बढ़ गई, इतने गंदे. शब्द, इतने अभद्र शब्द भी उपयोग हुए। तो. फिर चीजें समझ आई कि नहीं ऐसा नहीं होता. कि आप टीम को भी बैठ के समझाया गया कि. व्यूज के चक्कर में आप सिर्फ यही टैगलाइन. डालो। लव लाइफ और यह सब। यह सब हमारा. उद्देश्य नहीं होता। प्रेम के विषय में. बातें जरूर करते हैं। हां, संबंधों पर भी. बातें करते हैं क्योंकि सामने वाला पूछता. है कि रिश्ते कैसे चलने चाहिए? तो उसमें. जो हमारे शास्त्र जो हमारे ऋषि संतों ने.
बताया उसका इनपुट हम जरूर थोड़ा दे देते. हैं।. आप चेक करते हो कि इस वाले रील पर कितने. व्यूज आए। इस पॉडकास्ट पे कितने व्यूज आए? उस फोटो पे किसने-कने कमेंट किया, लाइक्स. कितने आए? अ आई थिंक लाइक्स और कमेंट्स तो नहीं।. लेकिन हां कितने व्यूज आए यह तो हर आदमी. मुझे लगता है चेक तो करता ही है बट डीपली. नहीं है कि आप उसी में डूबे रहे क्योंकि. इसके लिए एक स्पेशल टीम रहती है वो अपने. आप उस पे काम करती है क्या करना है क्या. नहीं करना है वो अपने इनपुट्स दे देती है.
या कुछ वीडियोस बनानी होती है तो वो भेज. देते हैं कि यह शायद लोगों के लिए आज के. समय ठीक रहेगा तो वो जो बताते हैं सजेशन. देते हैं उस पे हम काम जरूर करते हैं। ठीक. है। हमने हालांकि हमने भी कुछ मन की शांति. करियर लाइफ स्टाइल को लेके सवाल रखे हैं. क्योंकि तजुर्बा बढ़ा है आपका।. अब बताओ आप ही क्वेश्चन करोगे तो आंसर. देना पड़ेगा।. हमने कृष्ण और जीवन से जुड़ के रखा है। हम. तो श्रीमद् भगवत गीता वाले जा रहे हैं।. हम जसी को प्यार नहीं सिखा रहे हैं।. फिर ठीक है।. बट एक्चुअली प्यार बहुत ज्यादा मतलब मैंने.
इस बीच में बहुत नोटिस किया।. जी।. एक होता है कि खाने में चटनी।. एक होता है सब्जी जहां चटनी।. तो यह मेरा अपना ऑब्जरवेशन था। उसमें कुछ. गलत नहीं है। लेकिन मुझे लगा कि सारे. कथावाचकों का झुकाव जो है प्रेम की तरफ. ज्यादा झुक गया है।. या तो जेंसी कनेक्ट कर रहा है कि वो बातें. कर रहे हैं प्रेम की तो अच्छी बातें हैं।. कुछ तो एक मुझे लगा कि हां क्योंकि इस बीच. में सोशल मीडिया पर आध्यात्मिक लोगों का. चढ़ाव बहुत तेज हुआ है। पिछले कुछ समय. सबके साथ हुआ है।. हर एक कैटेगरी में हुआ है। लेकिन क्योंकि.
यहां नजरिया पहले अलग था। पहले था कि साधु. संत महात्मा मतलब जिसके जरिए आवाजें सुनाई. कम पड़ती थी। बड़े गंभीर होते थे। अब जो. सबसे ज्यादा सुनाई पड़े [हंसी]. समय बदलता है। समय के हिसाब से मापदंड भी. बदलते हैं।. हर वायरल विषय पर आ रही है टिप्पणियां तो. लोगों की उत्सुकता ही बड़ी है।. व्हिच इज गुड आल्सो।. कुछ कुछ मांग भी होती है कभी-कभी समाज की. कि आज अगर देखा जाए तो भक्ति कहना कोई गलत. नहीं होगा। ट्रेंड में चल रही है। मतलब. ट्रेंडिंग.
अभी चल रहा है। पर अच्छा भी है। देखो हर. चीज के कुछ अच्छा कुछ बुरा होता ही है।. आजकल भजन क्लबिंग शुरू हो गई है। लोग मतलब. बहुत ज्यादा. एजेंसी भी इनवॉल्व हो रहा है। तो उसमें भी. कुछ अच्छा है, कुछ बुरा है। तो हमारा काम. है कि जो चीज हमें अच्छी मिल जाए वहां से. कि चलो एटलीस्ट ये जुड़ रहे हैं। जहां यह. क्लब में पड़े-पड़े शराब पी रहे थे। आज. भले ही ये दिखावे के लिए, नाचने के लिए आ. रहे हैं। एटलीस्ट अच्छी जगह पर आ रहे हैं।.
तो ये चीजें समय के हिसाब से मांग हो जाती. है और उसके हिसाब से हमें चलना पड़ता है।. देखिए भक्ति का ट्रेंड में आना ट्रेंड की. वजह से है या बदलाव की वजह से है कि लोगों. की सोच थोड़ी बदली है।. नहीं बदलाव. बिकता अच्छा है कि आप वृंदावन गए, माथे पे. राधा लिखवा लिए और एक अच्छे कपड़े पहन लिए. और एक रील डाली तो वो वाली रील जो है. थोड़ी ज्यादा चली। नहीं नहीं ऐसा नहीं है।. मेरे हिसाब से मैंने जितना फील किया है. एक्सपीरियंस किया है अपनी कथा की ऑडियंस. में भी फील किया है कि. जो यंग जनरेशन है उसकी परसेंटेज बढ़ी है.
और वो सचमुच ऐसा नहीं हो सकता है कुछ 510%. होंगे जो सिर्फ रील और उसके लिए करते. होंगे लेकिन ज्यादातर लोगों के बच्चों के. भीतर में बदलाव आ रहा है क्योंकि वो. ऑलरेडी एक ऐसी लाइफ जी के देख चुके हैं कि. जहां उनको कुछ मिला नहीं है। सिर्फ. डिप्रेशन है, परेशान है, सब चीजें करके. देख ली। और मैं खुद भी एक एक वीडियो भी. बनाई थी कि आज का जेंजी बोलता है कि एक ही.
तो लाइफ है। सब कुछ ट्राई करो। तो मैं फिर. रिक्वेस्ट करती हूं कि यह भी तो एक ही तो. लाइफ है। यह भी ट्राई करो। क्या पता यहां. आपकी जो जर्नी जो आप खोज चाह रहे हो वह. आपकी फुल स्टॉप हो जाए। कोशिश तो एक बार. करके देखना चाहिए। और शायद यही रीजन है कि. अब बच्चे इससे जुड़ रहे हैं क्योंकि यहां. उनको वो सुकून वो शांति मिल रही है और. इसके कारण वो ज्यादा से ज्यादा भक्ति से. जूझ रहे हैं।. किस उम्र में ईश्वर के प्रति समर्पण ईश्वर. के सबसे करीब लाता है। बचपन में जब आप.
अभोध बालक होते हो. जी. जवानी में जब आप समझदार हो जाते हो या. बुढ़ापे में जब आपको पता है कि अब कुछ दिन. में जाना ही है।. बचपन से भक्ति की जर्नी बचपन से शुरू होती. है। मतलब स्टार्टिंग पॉइंट से शुरू होती. है। अ क्योंकि भक्ति एक बहुत लंबी यात्रा. है। आप कहो कि बुढ़ापे में जाकर पूरी हो. जाएगी 5 10 साल में तो वो संभव नहीं है।. जवानी में हमारा दिमाग ऑलरेडी एक एक सोच. बना चुका होता है। वहां उसको मोड़ना उसको.
घुमाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। तो सबसे. बेस्ट जो शास्त्रों ने बताया कि भक्ति. बचपन से शुरू होनी चाहिए। बच्चे को जैसे ए. बी सी डी सिखा रहे हो उसी टाइम से अगर आप. भक्ति सिखाने लग जाओगे तो उनके दिमाग में. बैठ जाएगा और वो उनकी यात्रा एंडिंग तक जब. तक उनका जीवन है तब तक पूरी वो कर पाएंगे।. इतना लंबा समय उसे चाहिए भक्ति।. हालांकि मुझसे किसी साधु संत ने बहुत. अच्छी बात कही थी कि बचपन में की गई. भक्ति, जवानी की और बुढ़ापे की भक्ति से.
100 गुना ज्यादा असरदार होती है।. हां। ईश्वर की कृपा जो होती है आशीर्वाद. जो होता है वो ज्यादा होता है।. बच्चा वैसे भी कच्चा मन होता है।. क्योंकि बाकी टाइम आपके मन में कुछ मांगो. कहो ना कहो लेकिन कहीं ना कहीं कुछ लालच. तो होता है।. आ जाता है। बिल्कुल बिल्कुल और इसीलिए. मतलब शास्त्र के ध्रुव जी प्रहलाद जी ये. भगवान को इसलिए ज्यादा फेवरेट हैं। ज्यादा. करीबी हैं क्योंकि इन्होंने अपने बचपन से. भगवान को पाना शुरू किया।. हमको भी भगवान बचपन का ही सब दे रहे हैं।. अश्व मम्मी बहुत पूजा करवाई थी हमसे।. तो बस देखो उसका परिणाम देखो। तो अब आप आप.
सारी दुनिया में. बहुत बहुत. लोगों को जोड़ रहे हैं।. बहुत कंठी माला सरस्वती हमको बचपन में सब. पढ़ाया गया था।. जी और वो अंत तक आपके साथ ही रहता है। वो. कोई छुड़ा नहीं सकता। वो जो एक बार आपके. दिमाग में स्टोर हो गया बैठ गया वो आपके. पास पूरा जीवन है।. और अब मैं ये मानता हूं पहले नहीं मानता. था मैं। जैसे आज के टाइम में मैं उतनी. पूजा पाठ नहीं कर पाता। मेरा धार्मिक. जगहों से लगाव बहुत है। अब मेरा ईश्वर के. प्रति समर्पण अलग हो गया। लेकिन बचपन में. जो पूजा की थी जब कदम कदम पर कई बार. चमत्कार होता है आपको लगता है अरे इतना.
आसानी से हो गया सब कुछ. या चीजें हो रही है तो मुझे लगता है कि वो. जो बात की संत ने मुझसे कही थी क्योंकि. बचपन में पूजा भक्ति तब ज्यादा हमने की थी. हम. जब पता नहीं था कुछ और बड़ी निस्वार्थ. भक्ति थी वो. जी. कि सड़क पर भी चल रहे हैं चार पत्थर दिख. गए तो लगा कि ये तो शिवलिंग जैसे हैं तो. उनको भी लाए कटोरी में रख दिया और उनकी भी. पूजा करनी शुरू कर. तब कोई लोभ नहीं होता था अब तो आदमी भक्ति. भी करता है तो पहले डिमांड की लिस्ट रख. देता है भगवान से कि मनोकामना यह है मेरी. यह पूरी करो तो हम आपका भजन करेंगे तो हम.
आपकी माला. कर दो तो यह हम करवा देंगे. ये भंडारा करा देंगे [हंसी]. बंगला बनवा देंगे तो ये एक प्रकार की. डिमांड हो गई और भक्ति में डिमांड्स नहीं. होती भक्ति तो ना दे तो भी मर्जी और दे तो. भी उसकी मर्जी भक्ति का सही जो स्वरूप है. वो यही है। हमारे जीवन में जो गुस्सा या. खराब बर्ताव आता है यह ग्रह नक्षत्रों की. वजह से होता है या इंसान की चेतना इतनी. ताकतवर है कि ये सब बदल सकती है? नहीं नहीं हमारा अपना स्वभाव है। इसमें.
ग्रह नक्षत्र कुछ नहीं करते। ये. हमारा जीवन आप एस्ट्रोलॉजी हिसाब से देखें. तो आप पैदा होते हैं। आपके कर्म तय हो आते. हैं। कर्म के हिसाब से आपका मन बदलता. होगा। देखिए भगवत गीता में भी लिखा है. हमारे जो कर्म है वो कई कैटेगरीज में. डिवाइड किए गए हैं। कुछ हमारे प्रारब्िक. कर्म होते हैं। कुछ हमारे संचित कर्म होते. हैं और कुछ वर्तमान के कर्म होते हैं।. इनकी परसेंटेज है। मान लीजिए 20% हमारा तय. हो के आया तो 80% आज पे डिपेंड करता है।. कोई यह नहीं कह सकता कि आप सब कुछ पिछला.
ले आए। अब जो मर्जी है वो करो। तो फिर ये. कुंडली वाले कैसे बताते हैं फिर. कि आपके साथ कल ये होने वाला है और वो. होता भी है कई बार मतलब मैं उसको डिनाई भी. नहीं करूंगा।. मुझे 2016 में एक एस्ट्रोलॉजर थी उन्होंने. मुझसे तीन चार बातें बताई. जी. जो 19 आते-आते सच हुई और जब बताई तब मैंने. उनका खुद उपहास किया था। देखिए. एस्ट्रोलॉजी जो होती है वो एक प्रेडिक्शन. होती है। प्रेडिक्शन क्या है कि आप डॉक्टर. के पास गए। डॉक्टर ने आपका पूरा बॉडी. चेकअप किया और उन्होंने बताया कि आपकी.
शुगर लेवल बहुत एकदम बॉर्डर पर चल रही है।. तो या तो मीठा छोड़ दो और नहीं छोड़ोगे तो. आपको डायबिटीज हो जाएगी। तो अब यह एक. प्रेडिक्शन हो गई कि डायबिटीज हो जाएगी।. लेकिन अब वो आप पे डिपेंड है कि आप उसे. होने दोगे या नहीं होने दोगे। आप छोड़ दो. मीठा। आप अपने खाने की लाइफ स्टाइल को. चेंज कर दो। आप उससे बच सकते हो। तो आई. थिंक एस्ट्रोलॉजी भी वह सेम चीज है कि. आपको एक प्रेडिक्शन दे देती है कि ऐसा हो.
सकता है। पहले ही कंट्रोल कर लो। अब. कंट्रोल करना ना करना वो हमारे हाथ में. चेंज करना, बिहेवियर को, दिन को वो सब हम. अपने आप कर सकते हैं।. प्रारब्ध से क्या-क्या तय होता है जीवन. में? जन. ठीक है. माता-पिता. आपकी कुछ ऐसी जीवन की उपलब्धियां भी जो आप. अपने पूर्व जन्म में करके आए हो स्वभाव का. कुछ परसेंटेज जैसे कभी-कभी आप कोई बच्चा. नया जन्म लेता आप देखोगे बहुत ज्यादा. गुस्सैल होता है जिद्दी होता है तो उसके.
प्रारब्िक कर्म है लेकिन अब वो पूरी लाइफ. ऐसे ही चलेगा नहीं अब उसको चेंज किया जा. सकता है अपनी खुद की पहचान अपनी खुद की. समझ से तो ये दो तीन तीन चीजें हैं जो. आपके प्रारब्धिक कर्म तय करती है। विवाह. मृत्यु. अ. जन्म मृत्यु हानि लाभ और कितना यश कितना. हमें नाम मिलेगा फेम मिलेगा ये इसमें कुछ. परसेंटेज होता है हमारे प्रारब्ध का. शादी का. शादी का भी होता है मतलब विवाह भी.
हमारे तो लोग कहते हैं ना कि सब जोड़. जोड़ ऊपर से बनके आती है तो विवाह भी हां. निश्चित होता है प्रारब्धिक कर्म से कि. आपको कोई भी संबंध नॉट जस्ट शादी कोई भी. आपका संबंध होगा।. तो मतलब अगर मेरी मम्मी मुझे अगली बार. शादी के लिए परेशान करती है तो मैं कह दूं. कि अभी ऊपर वाला तय नहीं किया है।. वो तो शायद दो साल से ही परेशान कर रही. है। लास्ट टाइम भी यही हो रहा था।. मैं उनसे कह सकता हूं ये कि मेरी मर्जी तो. है लेकिन ऊपर वाला नहीं चाह रहा था।. [हंसी] तो आप उनसे शिकायत करो। मेरे पास.
मत करो।. नहीं ऐसा नहीं है। देखो भगवान ने भगवत. गीता पूरी इसी बेस पर सुनाई है। अगर कोई. भगवत गीता का लॉजिक समझे तो यही है कि. कर्म तो तुमको करना पड़ेगा। मतलब आप बैठ. के यह कहो कुर्सी पे कि खाना आजा खाना आजा. वो पॉसिबल नहीं है। आपको उठना पड़ेगा। उठ. के हाथ से खाना पड़ेगा। अब वो पचाना पचाना. उसको डाइजेस्ट करना। ठाकुर जी कहते हैं वो. मेरे हाथ में। खाना तेरे हाथ में पचाना. मेरे हाथ में।. आप एस्ट्रोलॉजी बिलीव करते हो?
टफ है। मतलब एस्ट्रोलॉजी व्यक्तिगत होता. उसमें कोई होती है। एस्ट्रोलॉजी एक. शास्त्र है। ज्योतिष एक शास्त्र है और. ज्योतिष को भगवान कृष्ण के नेत्र कहे गए. हैं। लेकिन मैं जिस जगह से आती हूं. वृंदावन से वहां सब कुछ उसकी मर्जी पे. छोड़ दिया जाता है। वहां जाना नहीं जाता. है। जैसे फॉर एन एग्जांपल अगर मैं बताऊं. तो शायद कई लोग इसको गलत या सही जो भी. लेना है। मैंने आज तक मेरी आज तक जन्म. कुंडली नहीं है। मैंने कभी हाथ नहीं.
दिखाया। मैंने कभी भविष्य नहीं जाना। मुझे. लगता है कि वह देता जा रहा है उसके हिसाब. से हम चलते जा रहे हैं। जो मानते हैं वह. बहुत अच्छा है। लेकिन मेरा मानना है कि. अगर भगवान ने यह तय किया है। प्रभु का एक. रूल है। नियम है। उन्होंने जैसी दुनिया. बनाई। तो उनके रूल में एक रूल यह भी है कि. तुम्हें भविष्य नहीं पता होगा। वह कुछ सोच. के ही उसने बनाया है कि आप ना भविष्य पता. हो तो आप बस चलते जाओ। बहते जाओ। अगर मुझे. पता लग जाए कि अगले 10 दिन में मेरी.
मृत्यु है एग्जांपल के लिए तो यह 10 दिन. भी खराब हो जाएंगे मेरे।. ठीक बात है।. मुझे कुछ बीमारी होने वाली है कुछ समय बाद. तो वो भी मेरा खराब हो जाएगा। तो ऐसा मेरा. मानना है कि भगवान पे विश्वास रख के बस. चलते रहना चाहिए। उस पे. आपकी मम्मी ने शादी में छत्तीसगढ़ नहीं. मिलवाए थे।. नहीं. मिलवाए थे। फिर भी [हंसी] ठीक चल रहा है।. कोई दिक्कत नहीं है। तो मुझे लगता है कि. यह कुछ अपने-अपने विचारों पर भी डिपेंड. करता है।. जैसे मैं कई एस्ट्रोलॉजर्स को बड़ा परेशान. करके मैंने पूछा। मैंने कहा भाई वो दो तीन.
चीजें तो बताओ।. मतलब दो मैं एस्ट्रोलॉजी पहले बिलीव नहीं. करता था। फिर बहुत सारी बातें उन्होंने. बताई। कुछ अच्छे ज्योतिषचार्य ने बताई।. उसमें कुछ बातें सही थी। कई लोग आपको समझ. भी लेते हैं।. जी। फिर मैंने उनसे ओवरऑल जब अच्छे लोगों. को समझा तो मैंने कहा कुछ चीजें होंगी जो. जाननी चाहिए क्योंकि सब कुछ जानूंगा तो. जीवन का जीना बेकार हो गया। मुझे पता है. कि मृत्यु कब होगी जैसा आपने कहा तो मैं. भी मानता हूं। तो उन्होंने कहा बाकी कुछ. करो ना करो दो जगह ज्योतिष से कंसल्ट कर. लो। एक करियर कहां बनाना है क्योंकि एक.
दिशा दिख जाती है और दूसरा शादी किससे. करने वाले हो क्योंकि उससे पूरा घर बार जो. है वो अच्छा भी हो सकता है। डैमेज हो सकता. है। आपकी किस्मत अच्छी थी।. जी. तो आपके घर वाले नहीं परेशान हो छत्तीसगढ़. में लाने।. नहीं कभी नहीं मिलवाए. और ये अपनी-अपनी. भरोसा था कि आप कंट्रोल करके रख लोगे. लड़के को। [हंसी]. अब आप कुछ भी बोल सकते हो। फिलहाल तो. आपके पतिदेव से मिला हूं ना मैं तो. हां आप मिले हो। ये अपनी-अपनी रुचि पे. डिपेंड है। आपको अगर लगता है कि आपके लिए. जरूरी है आप वो करा सकते हो। लेकिन भगवान.
भरोसे जीने के का भी एक अपना मजा होता है।. ऐसा मुझे लगता है कि वो मजा अपना होता है. कि जो होगा देखा जाएगा। जैसे मैं यकीन. रखता हूं। मतलब मैं भी आप वाले थ्योरी पे. ही हूं कि जब हम छोटे से बड़े होते हैं या. हम गरीब होते हैं तो हम बाकी चीजों पे. ध्यान कम देते हैं। हम सिर्फ कर्म पे. ध्यान देते हैं। जीवन का आनंद लेते हैं।. अक्सर जब पैसा आता है तो लोग बाकी चार. चीजें ज्यादा कंसल्ट करने लगते हैं। सो. मेरा मानना है गो बैक टू बेसिक्स। एंजॉय. दिस लाइफ क्योंकि जितना आपके जीवन में जो.
लिखा है उसका भी एक आनंद है। अगर पता है. कि जिस सड़क पर जा रहे हैं वो कहां खत्म. होगी. तो शायद वो मजा करके रहा लेकिन नहीं पता. है तो उसका आनंद अलग है।. आनंद अलग है।. आज कल डिप्रेशन एंजायटी बहुत ज्यादा हो. गया है। इंसान के पास सब कुछ है। पैसा है, सामान खरीद लिया है। लेकिन सुकून नहीं है. अंदर। ये क्यों बढ़ा है सडनली? क्योंकि. बचपन में जो चीजें चाहिए थी। अब वो मिल. जाती है लोगों को। बहुत सारे लोग मेरे. आसपास ऐसे हैं जिन्हें कोई सामान खरीदने. की अब उतनी जिज्ञासा नहीं है। पहले छोटी. चीज भी खुशी देती थी।.
अब बड़ी चीजें भी खुशियां नहीं देती। एक. खालीपन इंसान के अंदर है।. ये नेचर है। मतलब ये ह्यूमन नेचर है कि. अगर उसको एक सोने की तलवार भी मिल जाए. क्योंकि उसके पास है तो उसकी कीमत नहीं. होगी। लेकिन उसे चाहिए एक सुई ही जो उसके. पास नहीं है और उसी पर उसका ध्यान ज्यादा. जाएगा कि मुझे उस चीज की प्राप्ति या वह. चीज नहीं मिली है और यह मतलब देखा गया है. ह्यूमन नेचर में कि वो हमेशा अपने से बड़े. पर जाता है। अपने से ऊपर देखता जाता है कि.
अगर मेरे पास एक छोटी गाड़ी है तो उसके. पास लग्जरी है और उस वो अपनी लग्जरी के. चक्कर में छोटी गाड़ी का सुख लेना भूल. जाता है। वह बड़े घर के चक्कर में अपने. छोटे घर का सुख लेना भूल जाता है।. तुलसीदास जी ने लिखा है कि दीन कहे धनवान. सुखी धनवान कहे सुख राजा को भारी राजा कहे. महाराजा सुखी महाराजा कहे सुख इंद्र को. भारी इंद्र से पूछो तो इंद्र कहे चतुरानन. सुखी मतलब ब्रह्मा जी सुखी इंद्र कहे.
चतुरानन सुखी चतुरानन कहे सुख विष्णु को. भारी तुलसीदास विचार करे कर तुलसीदास. विचार कहे भजन बिना सब जगत दुखारी मतलब. मतलब जहां अगर आप भगवान से नहीं जुड़ेगे. तो आपको अच्छी चीज भी अच्छी नहीं लगेगी।. अच्छी चीज भी आपको सुख नहीं देगी। आपने जो. क्वेश्चन किया ना सब कुछ है। पर मेरा. मानना है कि हमारे भीतर एक आत्मा होती है. जिसको हम सोल कहते हैं और वह सोल भगवान का.
एक अंश है। ईश्वर अंश जीव अविनाशी। भगवान. के भीतर से निकला हमारे भीतर आ गया। अब. हमारे जीवन की जब शुरुआत होती है। हमें. लगता है कि अच्छे नंबर आ जाए पास हो जाऊं. तब जीवन सेटल हो जाएगा सुखी हो जाऊं वह भी. मिल गया नहीं हुए फिर लगा शादी बढ़िया हो. जाए वह भी हो गया भगवान से मांगा भगवान. चंद्रमुखी दे दे भगवान ने वह भी दे दिया. सपने पूरे कर दिए अब भी वह बेचैनी है. बच्चे हो जाए बच्चे पढ़ जाए वो बेचैनी किस.
चीज की है ना तो पैसे की है ना वह रुतबे. की है ना वह पद की है वह बेचैनी है कि जो. भीतर आत्मा है वह चाहती है अपने परमात्मा. से कैसे भी कनेक्ट हो, कैसे भी मिले, वह. उससे मिल नहीं पा रही इसलिए वह आत्मा. बेचैन रहती है। उसके भीतर की वह कभी शांति. खत्म नहीं होती। आदमी सोचता है कि शायद. कोई सामान मिल जाने से वो बेचैनी, पैसा. मिल जाने से बेचैनी खत्म हो जाएगी। लेकिन. वह तब तक नहीं होगी। तुलसीदास जी कहते हैं.
जब तक आत्मा परमात्मा से जुड़ेगी। क्योंकि. आप जब अपनों से बिछड़ते हो, आप जब अपनों. से दूर होते हो तो बेचैन होते हो। तो. आत्मा परमात्मा का ही अंश है। उससे दूर है. इसलिए बेचैन।. क्या नास्तिक आदमी खुश नहीं होगा? रास्ते ना. कोई नास्तिक नास्तिक आदमी खुश नहीं होगा।. नास्तिक आदमी अंदर से तो खुश नहीं होगा।. मतलब उसकी धीरे-धीरे एक समय आएगा उसे कुछ. समय के लिए बाहरी चीजें लग्जरी दे देंगी।.
पैसा ऐसा नहीं है कि बेकार है या पैसे में. सुख नहीं है। पैसे में सुख बहुत है पर. पैसे. वाली रील आप ही लोग कटती है। मेरा कोई. इसमें नुकसान नहीं है। [हंसी]. आप ही. नहीं नहीं मैं बिल्कुल खुलेआम बोलती हूं।. आपकी गाड़ी की फोटो लगाएंगे लोग और कहेंगे. देखो ये कह रही थी पैसे में सुख नहीं है।. नहीं नहीं बिल्कुल है। लग्जरी में सुख है।. पर देयर इज अ डिफरेंस बिटवीन सुख और आनंद।. सुख जो होता है वह बाहरी चीजों से मिलता।. आनंद भीतर से पैदा होता है। आनंद वह है. फकीरी का कि एक चवन्नी एक ढेला जेब में ना.
हो फिर भी वह पूछे तो बादशाह को खरीदने की. ताकत रखता हो। वो फकीरी होती है। तो वो. फकीरी वाला जो आनंद है वो पैसे से नहीं. मिल सकता। वो आपको तभी मिलेगा जब आप भगवान. से कनेक्ट हो। अब मेरे को देखो ये बड़ा. वायरल सवाल है। इस टॉपिक से आया जया. किशोरी का क्रिस्टियन डर बैग और चित्रलेखा. जी की गाड़ी. जी. ये समाज में सबसे ज्यादा वायरल होती है और. लोग ऊपर चिपकाते हैं कि भैया ये कहते हैं. कि मोह माया से दूर भागो. और अपना जीवन का आनंद जो है अपना सुकून.
परमात्मा के साथ-साथ इन गाड़ियों में भी. ले. नहीं लोग हमें सुनते नहीं ना पूरी तरह. मैंने तो. क्यों आप लोग को ट्रोल करते हैं? मैंने तो अब भी कहा पैसे में सुख तो बहुत. है। पैसे से ही आज मान लीजिए कि आप कहीं. ट्रैवल करते हो, कहीं जाते हो। अब आप कहो. कि आप यहां से मुंबई से शाम को आपको मुंबई. पहुंचना है, कथा करनी है, प्रोग्राम करना. है तो आप जहाज में तो बैठोगे ही। आप कहो. कि नहीं भैया ये तो जहाजों में घूमते हैं।. ये तो लग्जरी लाइफ जीते हैं। गाड़ी की. जहां तक बात है गाड़ी मेरी नहीं थी वो। बस.
उसके संग एक फोटो खींचा था और अचंभा देखो. उसमें नीचे कैप्शन भी लिख दिया था।. क्योंकि कहते हैं ना पहले. किसको देखना. कि ये सिर्फ चलाई है ऐसे करके कुछ लिखा था. बट लोगों को तो वो कहानियां बनाने में. बड़ा मजा आता है. मेरे को आप Twitter पे मिल जाते हो हर चार. छ महीने जैसा कुछ आता है [हंसी]. लाल रंग की गाड़ी. हां. देवी चित्रलेखा ने खरीदी फरारी [हंसी]. तो देखिए इसमें कोई शक नहीं है जिसको भरे.
मंच से हमसे स्वीकार करना. हम मजे की लाइफ जीते हैं। हमारी लाइफ बहुत. अच्छी है और हम अपने जीवन से बहुत खुश हैं. और भगवान ने हमें दिया है। भगवान कृपा. करते हैं और मैं कहती हूं कि मतलब क्यों. ना करें जिसका जिसका बॉस इतना बड़ा हो. जिसकी हम नौकरी करते हैं जिसकी हम खाते. हैं वो हमें मजे में रखता है तो हम तो मजे. में रहेंगे। और दुनिया की दुनिया की अच्छी.
चीजें दुनिया की लग्जरी दुनिया की सब. अच्छी चीजें मुझे लगता है अच्छे लोगों को. मिलनी ही चाहिए। मैं अपनी बात नहीं करती. लेकिन एक. साधु जिसने सब कुछ छोड़ा है। मुझे लगता है. समाज को उसे सब कुछ दे देना चाहिए।. सुख का मतलब केवल ये सामान से ही नहीं कि. उनको इतना अच्छे से रखा जाए। उनको इतनी. खुशी दी जाए कि उन्होंने समाज को कुछ दिया. है। उन्होंने समाज में अच्छी चीजें दी।. नकारात्मकता नहीं फैलाई। लेकिन इसके दोनों.
पहलू है। कुछ समाज इसे स्वीकार करता है।. कुछ नहीं करता है। लेकिन जैसा मैंने कहा. कि हां हम स्वीकार करते हैं।. मेरा इसी में सवाल आपका आता है। आप लोग. इतने लोगों से इंटैक्ट करते हो। जया ने भी. बहुत बार पब्लिकली कहा कि मैं कोई सन्यासी. नहीं हूं। जैसे बागेश्वर जी का चश्मा, चित्रलेखा जै गाड़ी, जया जी का बैग। समाज. इसे क्यों नहीं स्वीकार कर पा रहा? उसे. क्यों यह लग रहा है कि यह छलावा है, यह. दिखावा है, यह हमारा भरोसे तोड़ के यह. किया गया है। उसे क्यों ऐसा लगता है? जबकि. आप लोगों ने क्लेम नहीं किया। फिर भी इसका. कुछ तो आपने भी सोचा होगा ना कि यह क्यों.
समाज सहजता से ले नहीं पा रहा है।. पहली बात तो जैसा आपने कहा कि हम जो भी. आपने नाम लिए कभी कोई दावा करता ही नहीं. है कि हम वैरागी हैं। देखो त्याग और. वैराग्य वाला व्यक्ति खुल के बोलेगा कि. भाई मैं वैरागी हूं। मैं त्यागी हूं।. मैंने सब कुछ दुनिया त्यागी है। लेकिन जब. एक आदमी सामने आपको खुल खुल के बोल रहा है. कि नहीं हम ग्रस्त हैं। नहीं हमारा जीवन. एकदम साधारण है। तो इसका मतलब है एक ही. डिफरेंस है कि एक संसार का आदमी सिर्फ इस.
लग्जरी के लिए काम करता है। दिनरा फोकस. उसका रहता है। हमारा उस पे फोकस नहीं है।. यह हमारा कहते हैं ना एक साइड में जो आपको. भगवान एक एक्स्ट्रा दे देते हैं। कृपा. करके कोई भी अगर आप जया जी से पूछो आपने. महाराज जी का नाम लिया आप उनसे पूछोगे ना. उनके जीवन के कपड़े तक भी लोगों के द्वारा. दिए हुए होते हैं लोगों का प्यार होता है. लोगों को अच्छा लगता है कि वो कभी आते हैं. आकर के गिफ्ट दे दिया कोई सामान दे दिया. अब या तो आप ये आशा करो कि वो फेंक दिया.
जाए या बांट दिया जाए. मतलब एक कॉमन परसेप्शन बनाया जाता है कि. आप लोग की कथा में गरीब आदमी आता है वो. चंदा देता है और उसी से आप लोग ऐश करते हो. अब ये. कुछ आई नो कि शायद ये सही नहीं होगा. क्योंकि यजमान जो होंगे शायद वह कथा. करवाते होंगे।. बिल्कुल यह देखने का नजरिया है। कभी कथा. में आपकी कोई टिकट नहीं लगती। आप दुनिया. में देखो भले आप दूसरे कार्य करते उसमें. आपको टिकट देनी पड़ती है। लेकिन कथा का. नहीं है। आप फ्री आइए। आप उल्टा आइए कथा. सुनिए। जाते-जाते प्रसाद और मिलेगा बढ़िया. डब्बा में पैक हो के। तो आप तो लेके ही जा.
रहे हो वहां। हां जो व्यवस्था बना रहा है. उसने टेंट लगाया। उसने माइक लगाया। उसने. सारी अरेंजमेंट्स करी। उसको वक्ता को. ट्रैक्टर में बुलाना है, बैलगाड़ी में. बुलाना है कि उसको चार्टर में बुलाना है।. वो डिसाइड करता है। वो उसका क्योंकि हमारा. अपना कोई बिजनेस नहीं है। हम कोई जाकर के. 24 से की कोई जॉब नहीं करते। हमारा काम. सिर्फ 24 घंटे इसको देना है। तो अब सब कुछ. हमारी अरेंजमेंट्स व्यवस्थाओं का डिसीजन. वो आयोजक लेता है। वो उसकी अपनी खुशी है।.
अपनी मर्जी है। तो अच्छा अब जैसे आपने कहा. कि ये दान लेकर के सामानों का उपयोग करते. हैं।. पर अब उसी को समाज में बदलना भी चाहिए।. अगर आप यह सोचते हो कथा से हम दान लेते तो. आप यह भी सोचो हम उसका उपयोग भी कहां कर. रहे हैं। आप आए हो हमारे हॉस्पिटल में. वहां आपने देखा है हर महीने का वहां 30 से. 35 लाख का परमानेंट खर्चा है। एव्री मंथ. मतलब अब चाहे शरीर मेरा बीमार हो जाए चाहे. कुछ भी हो जाए। मुझे इतना पैसा हर महीने.
चाहिए ही चाहिए क्योंकि गाय भूखी मर. जाएंगी। वहां गायों का ट्रीटमेंट नहीं. होगा। इसको कोई नहीं देखता कि यह लोग अपनी. अपने अपने शरीर से जहां आप एक बिजनेसमैन. को देखो वह अपने लिए कमा रहा है। अपनी. फैक्ट्री बना रहा है। अपना घर बना रहा है।. एक कथा करने वाला जो दिन रात पसीने अपना. देकर के कमा रहा है। उसको किसी ना किसी. सेवा में लगाता है। गायों की सेवा कर रहा. है। वृद्धों की सेवा कर रहा है। भोजन खिला. रहा है। उस पर दुनिया की नजर नहीं जाती. है। तो यह समाज को मुझे लगता है कि बदलना.
चाहिए अपना नजरिया और सोचना चाहिए कि कहां. वह अपने जीवन का और धन का उपयोग कर रहे. हैं।. एक मशहूर यूट्यूबर हैं। उन्होंने हाल. फिलहाल में एक वीडियो बनाई और कहा कि राम. जी जब वनवास के दौरान थे तो वो मांस का. सेवन करते थे।. अच्छा. क्या कहीं पर वाल्मीकि रामायण में या फिर. तुलसीदास जी के रामचरितमानस में कहीं इस. बात का उल्लेख है? नहीं यह तो उनको देना चाहिए जब इतना बड़ा. उन्होंने कमेंट किया है तो इसका बिना कोई.
प्रूफ दिए ऐसा बोल देना क्योंकि जहां तक. मेरा या किसी भी महापुरुष से आप पूछोगे. कथावाचक से पूछोगे ऐसा कहीं भी किसी भी. शास्त्र में कोई भी वर्णन आपको नहीं. मिलेगा भगवान राम जिन जिनका जीवन लोगों के. सुख के लिए है प्राणियों के सुख के लिए है. वो मांस भक्षण करें यह तो एक बहुत बहुत. बड़ी बात बोल दी गई है और बोलने वाले को. भी समझना चाहिए कि पहले इसको टेली करो.
प्रूफ दो कहां ऐसा लिखा हुआ. उन्होंने कुछ कोट्स किए कुछ अपने. स्क्रीनशॉट दिखाए बातें आई बट फिर भी पूछो. आप तो तमाम लोगों से मिलते रहते हो जो राम. कथा के भी आप कृष्ण कथा करते हैं राम. कथाओं से भी आपका. मिलन होता रहता होगा कहीं बचपन से कहीं. किसी उल्लेख में आपने सुना कि वो क्या. भोजन करते थे और उसमें किसी प्रकार का ये. मांस जैसी चीजों का जिक्र. बिल्कुल भी नहीं ये जरूर लिखा है कि वो. कंदमूल फल खाते थे क्योंकि वनवास में कहां. छप्पन भोग मिलने वाले हैं। तो फल खाए जंगल. के वनस्पतियां खाई और ये भी लिखा है कि जब.
तक वो वनवास में रहे तो भरत जी ने भी. निर्णय किया कि मैं भी कोई ऐसा भोजन नहीं. खाऊंगा जो राजसी भोजन हो। वो गाय के गोबर. से उपले से भोजन बना करके उससे पाते थे।. तो यह कहीं भी वर्णन नहीं है और जो भी ऐसा. कर रहा है मुझे लगता है वो समाज को गलत. दिशा दे रहा है और समाज को ऐसी बात सुननी. भी नहीं चाहिए और माननी भी नहीं चाहिए और. खासकर अपने भगवान के लिए इतनी बड़ी बात. कहना सुनना मानना यह बहुत बड़ा पाप है।.
अगर भगवान कोई हमारी प्रिय चीज हमसे छीन. लेते हैं तो क्या वो हमें सजा दे रहे होते. हैं? नहीं। भगवत गीता में कहा है भगवान कृष्ण. ने कि जब मैं किसी प्रिय चीज को छीन रहा. होता हूं तो तुम्हें अपने करीब ला रहा. होता हूं सजा नहीं मतलब मैं चाहता हूं कि. तुम्हारा मन उस प्रिय चीज से हटकर मुझ में. ज्यादा लग जाए और इस पर पूरा एक भगवत गीता. में श्लोक है भगवान ने कहा है करोमि बंधु. विच्छेदम मतलब जब अपने को करीब लाने की.
मैं कोशिश करता हूं तो उसके प्रिय लोगों. से उसे दूर करता हूं क्योंकि जब वह उन. सबसे डिस्कनेक्ट हो जाता है तो मुझसे उससे. कनेक्ट हो जाता है। फिर उसे मैं ही मैं. दिखाई देता हूं कि प्रभु अब आप ही मेरे. हो। और कथा में मैं बोलती हूं कि और. देवताओं की कृपा बहुत स्ट्रेट है। सीधी. साधी है।. आप गए देवी मां मुझे यह दे दो। उन्होंने. दे दिया। आपने जिनसे जो मांगा मिल गया।. कृष्ण की कृपा थोड़ी टेढ़ी है। मतलब आप. कहोगे यह दे दो। वो उल्टा जो है वो भी छीन.
लेगा। [हंसी]. वो पहले तुमसे लूटेगा। पहले तुमसे छीनेगा, चोरी करेगा और उसके बाद फिर अपने आप को. देगा। कृष्ण कृपा ऐसी है और इसको भगवत. गीता में कृष्ण ने कहा है कि मैं अपना. बनाने के लिए कभी-कभी होता है ना बच्चा. चाकू से खेल रहा होता है। तो उसे नहीं पता. कि हाथ कटेगा। पर उसके मैया उससे चाकू छीन. लेती है। तो उसे लगता है कि चाकू मेरा खेल. है। लेकिन इसने छीन लिया। क्यों छीना?
क्योंकि उससे हाथ कट जाएगा। तो वैसे ही जब. भगवान को लगता है कि यह किसी चीज में इतना. डूब गया कि मुझे भूल गया है। अब इसे मेरी. स्मृति नहीं है। तो भगवान उस चीज को आपसे. दूर करते हैं।. दुख में सुमिरन सब करे सुख में करे ना. कोई।. जो सुख में सुमिरन करे. दुख काहे को. तो दुख काहे को हो।. तो जब सफलता होती है तो आदमी भगवान को भूल. क्या जाता है।. ये उसका अंधी अंधापन है।. और इसीलिए भगवान फिर कहते हैं बेटा वापस आ. जाओ।. हां वापस आ जाओ। पहले पहले धक्के खा लो और.
उसके बाद अब लौट करके आ जाओ। तो अगर पहले. ही कर लेता पहले समझदारी से तो फिर भगवान. ये रास्ता उसको चांस देते ही नहीं।. दिन भर में एक सामान्य व्यक्ति को कितना. देर पूजा पाठ करना चाहिए? मतलब एक सनातनी. होने के नाते क्या वो बुनियादी चीजें हैं. जो हर एक व्यक्ति को करनी चाहिए? या ऐसा. कोई कंपलशन हमारे यहां नहीं है? देखिए. पूजा का मैं बहुत ज्यादा फोकस बहुत ज्यादा. नहीं करती। एक बेसिक जो पूजा का हमारा दिन.
का मॉर्निंग रूटीन होता है कि आप सुबह उठो. एक बार भगवान को प्रणाम करो हाथ जोड़ो एक. थोड़ा आरती कर दी। बस इतना 510 मिनट आपने. निकाल लिया। पूजा का इतना नियम काफी है।. ज्यादा जरूरी क्या है? 510 मिनट में मतलब. हर एक भारतीय घर में मंदिर होता है। आप. सुबह उठते हो आप नहा करके सबसे पहले मंदिर. जाओ भगवान को प्रणाम करो। आरती करो। उनको. समय है तो थोड़ा अपने हाथ से भोग लगा दो।. जो भी घर में भोजन बना है उनको प्रणाम.
करो। लेकिन नेक्स्ट स्टेप सबसे ज्यादा. जरूरी है और वो है कि भगवान का नाम स्मरण. चलते रहना। मान लीजिए आप पूजा के लिए टाइम. नहीं भी दे पा रहे तो आप अपने डेली रूटीन. में नाम जाप करते रहना चाहिए। मान लीजिए. आपकी पूजा हो गई 5 मिनट 10 मिनट। अब आप जब. निकल के घर से जा रहे हो ऑफिस के टाइम वो. टाइम में भी भजन होना चाहिए। और वो टाइम. में भजन कैसे होगा? कंटिन्यू आप बस मन ही. मन में नाम जप शुरू करते। आपने शायद देखा. भी होगा आजकल एक बहुत हाथ में एक.
काउंटर रहता है जाप का। उससे वह कुछ ना. कुछ कुछ ना कुछ काउंट करते रहते हैं। वैसे. वो काउंटिंग के लिए नहीं है वो नाम जाप के. लिए। तो आप ऑफिस भी जा रहे हो आप गाड़ी. में भी बैठे हो। कभी भी आप भजन कर सकते. हो। यह जो लोग टाइम ना होने का एक्सक्यूज. निकालते हैं कि भजन के लिए टाइम नहीं है, जॉब बहुत है, [हंसी]. काम बहुत है। उनके लिए सिंपल स्टेप यही है. कि कंटिन्यू कभी भी कहीं भी भगवान से. जुड़े रहो। यहां भी बैठे हो एग्जांपल के.
लिए अगर मैं आंसर दे रही हूं और कोई यहां. बैठकर के सिर्फ सुन रहा है मन मन में. बोलते रहो जो भी आप सीताराम राधेश्याम हरे. कृष्णा राधा राधा जो भी आप जपते हो ये भी. डेली का आपका 24 से भजन हो सकता है. अगर सब कुछ भगवान तय कर रहे हैं जैसा आपने. कहा कि आपने माना कि सब भगवान ने तय कर. रखा है तो अगर सब कुछ भगवान तय कर रहे हैं. तो फिर इंसान को मेहनत करने की क्या जरूरत. प्रारब्ध और पुरुषार्थ का क्या रिश्ता है? नहीं नहीं नहीं भगवान सब कुछ तय नहीं.
करते। यह यह कांसेप्ट ही बहुत अलग चला आ. रहा है। मतलब मैंने कहा भगवान जो करते हैं. अच्छा करते हैं।. भगवान ने हमको एक बुद्धि दी है। हमें. माइंड दिया है। डिसीजन मेकिंग जो पावर है. वह भी हमें दी है कि आपको जैसे अपने जीवन. को बनाना है जो चलाना है वह करो। यह. सिखाते सिखाते आदमी कहीं यह बोलते बोलते. कि जो करते भगवान करते इसके चक्कर में.
कहीं कोई पुरुषार्थ करना ना भूल जाए।. इसीलिए भगवान ने भगवत गीता सुनाई। कृष्ण. चाहते तो अर्जुन को यह भी तो कह सकते थे. तू युद्ध करने की क्या जरूरत है? बैठ जा. बस मैं सुदर्शन चक्र हिलाऊंगा और सारी जीत. हमारी तय है। और किया भी। लास्ट में जब. बरबरीक महाराज ने देखा तो उन्होंने यही. बताया कि मैंने पूरे युद्ध में देखा एक. सुदर्शन ने सबको मारा। सबका कल्याण उसने. किया। लेकिन उससे पहले कृष्ण ने अर्जुन को. कहा उठ और युद्ध कर। भगवान कृष्ण कभी भी.
आपको पुरुषार्थ के मार्ग से हटाते नहीं।. भगवान ने कहा कर्मने वास्ते मा फलेशु. कदाचन कर्म प्रधान विश्व करी राखा समाज. में सबसे ज्यादा कर्म प्रधान तो इस भगवान. का काम आलसी बनाना नहीं है। और उनके नाम. का आड़ ले आलसी बनना भी नहीं चाहिए। अपनी. मेहनत खुद करो। हम. उसके बाद क्या अब इसका फल देना है वो उस. पर छोड़िए।. तिलक क्यों लगाते हैं जैसे आपने लगा रखा. है और क्या जो धर्म कर्म के क्षेत्र में.
हैं उन्हीं को लगाना चाहिए या जो नॉर्मल. लाइफ में लोग हैं उनको लगाना चाहिए और अगर. वो लगाते हैं तो अपनी वर्क लाइफ और. स्पिरिचुअल लाइफ को बैलेंस कैसे करेंगे? अकल तो जैसे मैंने कहा भक्ति ट्रेंड में. चल रही है तो थोड़ा इसको भी लोग समझने लग. गए। पहले हम एयरपोर्ट से जाते थे या कहीं. किसी कॉलेज यूनिवर्सिटी जाते थे तो. बिल्कुल कोई भी गले में कंठी माला तिलक. वाला नहीं मिलता था। अब धीरे-धीरे मिलने. लगे। लोगों को समझ आने लगा कि यह भी. नॉर्मल ही है। अब सबसे बड़ी बात हमारा.
जन्म हुआ है भारत देश में। हमारा जन्म हुआ. है सनातन धर्म में। वहां रहकर के भी अगर. हमको तिलक कंठी इसको पहनने में संकोच हो. रहा तो इससे बढ़िया तो अमेरिका में पैदा. हो जाते। किसी दूसरे पाकिस्तान में पैदा. हो जाते। भारत में अगर भगवान ने जन्म दिया. है तो इसका कारण यह है कि आप अपने धर्म को. या खुल के जी सकते हो और यह प्रदर्शन नहीं. है। ये आपकी पहचान है। मान लीजिए किसी के. गले में क्रॉस तो आप उससे पूछते थोड़ी है.
कि आप क्या हो? आप पहचानोगे क्रिश्चियन. है। सिख टोपी बाग बांधे हैं, टोपी पहना है. तो वो समझ आ जाता है। सनातनियों की भी तो. कोई पहचान होनी चाहिए। पहचान मतलब एक. यूनिफार्म और इसमें कोई कट्टरता नहीं। यह. एक यूनिफार्म होती है। जैसे हर एक फील्ड. की अपनी यूनिफार्म होती है। आप मीडिया में. हो तो यहां आके आप जींस में नहीं बैठोगे।. आप एक वेल मेंटेन ड्रेस लेकर के आते हो।. आप स्पोर्ट्स में जाओगे तो स्पोर्ट पर्सन. की अपनी एक यूनिफार्म होती है। भक्त की यह.
यूनिफार्म होती है कि उसके गले में कंठी. होगी। माथे पर तिलक होगा। और यह कोई भी. जनरल व्यक्ति भी जो धर्म से जुड़ना चाहता. है, उसकी पहचान उसको ऐसे ही रखनी चाहिए।. और तिलक जो है यह भगवान का ही चरण है जो. हमारे माथे पर रहता है। इसका मतलब है कि. दुनिया में कुछ भी नेगेटिविटी होगी, कोई. भी गलत चीज होगी उससे हमें ये बचा सकता. है।. जैसे बाकी धर्मों में है तो उनकी पहचान एक. तरीके की है। सिख है तो वो पगड़ी पहनता. है। सारे पगड़ी पहनते हैं।. जी।.
मुस्लिम्स हैं वो टोपी लगा रहे हैं।. क्रिश्चियन है क्रॉस पहन रहे हैं। हमारे. यहां तिलक भी कई तरह के हैं। जितने. अलग-अलग गुरुओं से मिलता हूं अलग-अलग तरह. तिलक होते हैं।. तो कितने प्रकार के तिलक होते हैं और उनके. पीछे के विज्ञान क्या है? इसमें जैसे एक वैष्णवता का तिलक होता है. जिसमें उर्ध्वपुंड होता है। बहुत ज्यादा. चेंजेस नहीं है। अगर आप डीपली इनको समझोगे. देखोगे तो बहुत ज्यादा चेंज नहीं है। जैसे. उर्ध्वपुंड मतलब ये यू वाला जो शेप है ये. सबका सेम रहता है थोड़ा-थोड़ा वैष्णव. परंपरा में। शैव्य परंपरा में वो त्रिपुण.
हो जाता है। महादेव के उसमें वैष्णव. परंपरा में तिलक का ऊपर वाला जो. उर्ध्वपुंड है वो सेम होगा। नीचे वाला शेप. बदलता जाएगा। किसी का ऐसा है, किसी का. लंबा हो जाएगा। किसी के बीच में काली एक. श्री होती है। वो हो जाती है। तो यह. डिफरेंस नहीं है बल्कि यह हमारे धर्म की. गंभीरता को दिखाता है कि आपका धर्म कितना. गहरा है कि आप एक माथे की शेप से बता दोगे.
कि यह कौन से गुरु का या कौन से संप्रदाय. का फॉलोअ है। अपनी-अपनी संप्रदाय के हिसाब. से। तो यह तिलक गुरु देता है। यह अपनी कोई. डिजाइन खुद की बनाई नहीं होती कि जो. मनमर्जी आया वो डिजाइन बना ली। यह अपनी. गुरु परंपरा से मिलता है। उसी के हिसाब से. फॉलो करना चाहिए।. सफलता असफलता भी ईश्वरीय मैनेजमेंट का. हिस्सा है।. 50-50 आई थिंक 50 तो है क्योंकि बहुत सारे. ऐसे भी लोग हमने देखे हैं जो दिन रात.
मेहनत कर रहे हैं लेकिन जो फल मिलना चाहिए. वो नहीं मिल रहा। तो उसका प्रारब्िक कर्म. होगा। कुछ भगवान की कृपा होगी लेकिन 50%. उसकी खुद की इनपुट्स है जो वह डाल रहा है।. हम. अच्छा माता-पिता को लेकर बहुत सारी बातें. आती हैं कि माता-पिता का चुनाव पहले से तय. होता है।. हां. कि अगले जन्म में हमारे माता-पिता कौन. होंगे? जी ये प्रारब्िक कर्म तय. ये रिपीट नहीं होते।. हो सकते उसमें कोई कोई. शास्त्र क्या कहते हैं? शास्त्र ये कहते. हैं कि आप.
जैसे पतिप में हम सुन लेते हैं कि भाई सात. जन्मों का रिश्ता है।. माता-पिता में हमें नहीं सुनाया गया. क्योंकि असली जीवन तो मातािता का. कहानी वो तो एक एक कहावत जैसी बन गई है।. लेकिन माता-पिता भी आपको हो सकता है कई. जन्मों में वही मिले। हो सकता है कभी आप. उनके माता-पिता बने यह भी संभव है।. मतलब ज्यादा मारा पीटा होगा उन्होंने।. [हंसी]. अगली बार हमको मौका. बदला लेने के लिए।. नहीं नहीं। वैसे ऐसा शास्त्र कहते हैं कि. कुछ आपके जो बहुत करीबी रिश्ते होते हैं.
ना वो उनके आसपास ही आप अगले जीवन में भी. घूमते रहते हो। हो सकता है थोड़ा बहुत. बदलाव आ जाता है क्योंकि आपका कुछ उन पर. रह जाता है। कुछ आपको उनका चुकाना होता. है। कुछ उनको चुकाना होता है। तो कुछ. रिश्ते या कुछ लोग जो आपके जीवन में मिलते. हैं वो बेसिकली आपके पिछले जन्म से उनका. कुछ ना कुछ कनेक्शन होता जरूर है। तभी वह. आपको किसी नए नाम नए रिश्ते नए संबंध के. रूप में मिलते हैं।. क्या सारी दुख परेशानियों का जो मूल कारण.
है वो अपेक्षा है? सबसे ज्यादा जो कारण है वह अपेक्षा है।. कारण तो और भी हो सकते।. आई थिंक भगवान से अपेक्षा करना चाहिए।. बाकी तो दुनिया से जितनी भी अपेक्षा करोगे. आंसू ही मिलेंगे। रोना ही मिलेगा।. यहां संसार जो जगत है कहते हैं कि. यह दुनिया गोल है। यहां सबकी नियत में झोल. है।.
सबकी मन के अलग-अलग विचार हैं। सबके मन की. अलग-अलग सोच है। तो अगर उनसे ज्यादा. उम्मीदें आप रखते हो तो फिर एक दिन उसके. लिए पछताना पड़ता है, रोना पड़ता है। तो. उम्मीद से दुनिया कायम है। यह भी एक बात. कही जाती है। तो उम्मीद खत्म भी नहीं करनी. लेकिन उतना ज्यादा नहीं रखनी कि अंत में. आपको ही उसके लिए पछताना पड़े। भगवान से. उम्मीद रखोगे तो कभी टूटेगी नहीं।. संसार से बहुत उम्मीद रखोगे तो वो कभी.
पूरी नहीं मिलेगी।. बट जैसे लोग कहते हैं ना कि अकेले आए थे. अकेले जाना है। आप जब पैदा हुए आपको पता. नहीं था। और जब मैं गरुड़ पुराण पढ़ता हूं. तो आत्मा 13 दिन बैठकर देखती है। सारे. अहंकार आपके छूटते हैं। रिश्ते टूटते हैं।. आपको रियलिटी का चेक होता है। आपको जो टैग. मिला पैदा होते कि इनके लड़के हैं। इनके. भतीजे हैं। इनके ये आप चाचा हैं। वो सब. खत्म हो जाता है। तो फिर अगर यही जीवन का. वास्तविक सच है तो तो फिर तो किसी अफेक्शन. की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि अल्टीमेटली. आपकी सोलो लाइन ट्रैवल है।. लेकिन ये मानता कौन है?
पता तो सबको है कि अकेले आए थे अकेले. जाएंगे लेकिन वह मानना भी तो बहुत बहुत. मुश्किल काम है। मुझे लगता है कि संसार. में जीने के लिए आपको कुछ ना कुछ सहयोग की. जरूरत पड़ती है। वह सहयोग आपको किसी भी. कलीग हो सकता है। आपका कोई संबंधी हो सकता. है। वह मदद आपको वहां से थोड़ी-थोड़ी लेनी. तो पड़ती है। क्योंकि भगवान ने शायद. दुनिया बनाई भी इसलिए कि कभी आप एक दूसरे. के काम आ जाए। कभी कोई कंधा ऐसा मिल जाए.
आप बहुत परेशान है तो थोड़ा अपना दुख. व्यक्त कर लें। लेकिन एट द एंड जर्नी खत्म. तो यही होनी है कि आप अपने अकेले की. यात्रा करते हुए कुछ जैसे एग्जांपल देते. हैं ना जैसे ट्रेन की आप यात्रा करते हो।. ट्रेन की यात्रा में आप बैठते हो अकेले।. लेकिन भारतीयों की आदत है कि जब ट्रेन में. बैठते हैं तो तू लड्डू खा ले। घर से हम. लड्डू लाएं तो दूसरा बोलेगा हम भी समोसे. लाएं। तुम भी खा लो। तो दोस्ती हो जाती. है। पर कुछ समय बाद जिनसे आपकी दोस्ती हुई.
उनका स्टेशन आता है और उनको उतरना पड़ता. है। फिर नया एक पैसेंजर आ जाता है आपकी. उससे दोस्ती करते करते. एंड में आपका स्टेशन आता है। तो वैसे ही. संसार में पहला यात्री हमें माता-पिता. मिले, भाई-बहन मिले, फिर पत्नी मिली, फिर. बच्चे मिले। ऐसे करते-करते वो यात्रा आती. जाएगी और एक टाइम आएगा जब हमारा स्टेशन. आएगा और हमें. मतलब संसार के सारे रिश्ते जीवन में समय. काटने के लिए।. कि वो जो एक प्रक्रिया है. प्रक्रिया को पूरी करने के लिए हां जी जब.
आपको जहां कुछ हद तक लगे कि सहयोग की. आवश्यकता है तो कोई आपके साथ खड़ा हो भले. वो आपका कोई भौतिक संबंध हो आध्यात्मिक भी. हो सकता है। जैसे आध्यात्मिक में गुरु का. एक संबंध बहुत बड़ा होता है कि जब आपको. नीड है कोई आपको चाहिए मार्गदर्शन तो गुरु. आपको मार्गदर्शित करता है। तो यह सब संबंध. आपके भगवान ने दिए हैं। एक भागवत. यात्रा के लिए. यात्रा के लिए उसको पूरी करने के लिए. तो उस यात्रा में फिर प्रायोरिटी मैं अपने.
आप को रखूं कि इन साथियों को रखूं जो. ट्रेन के डब्बे से उतर जाएंगे थोड़ी देर. बाद. मुझे लगता है अपने आप को रखना चाहिए अपने. आप को मतलब स्वार्थी नहीं बनना है उसका भी. लोग गलत मतलब निकाल लेंगे स्वार्थी नहीं. बनना है लेकिन आपका जो जीवन है वो आपका. अपना है। आपको जब आप जाकर के भगवान को जब. भगवान पूछेंगे तो जवाब आप ही को सारे देने. पड़ेंगे कि यह हुआ तो क्यों हुआ और यह गलत. क्यों हुआ ये सही वाल्मीकि ऋषि जी के जीवन. में भी तो यही हुआ कि वो सारा जीवन परिवार.
के लिए करते रहे गलत काम भी करते रहे और. फिर एक अंत में साधु ने पूछा कि तू पूछ तो. तेरा परिवार जब पाप मिलेगा तो क्या इसमें. आधा-आधा बांटेंगे? तो उन्होंने जाकर पूछा. तो सब ने कहा अरे पाप तुम करते हो आधा-आधा. क्यों बांटेंगे। जब तुम्हारे पाप है तो. तुम झेलगे और फिर धीरे-धीरे उनका जीवन. उनका मन बदलता चला गया। तो वैसे ही कि साथ. सब देंगे इस संसार में उसके आगे जो साथ. देगा वो आपका अपना होगा। इसलिए आज के लिए. उस आगे वाली जर्नी को आपको खराब नहीं करना.
चाहिए।. मुझ जैसे जो बहुत सारे प्रोफेशनल लोग हैं. उन्होंने ईश्वर की पूजा ना करने का एक. बहाना खोजा है कि कर्म ही पूजा है।. जी।. अब क्या यह आलस और साधना से हम जैसे लोग. बच रहे हैं? हमारा एक फार्मूला निकाल लिया हमने आलस्य. है हमारा कि हम साधना से बच रहे हैं यह. कहकर कि कर्म ही तो पूजा है क्योंकि मैं. अपने कर्म के प्रति बड़ा निष्ठावान हूं. और मैं भी कई बार ये कह देता हूं कि मैं. अगर कर्म ही भक्ति है तो मुझसे बड़ा तो. ईश्वर का कोई भक्त नहीं मैं तो रोज 17 18.
घंटे काम कर रहा हूं. जी. ईमानदार हूं इससे अपना 100% ज्यादा दे रहा. हूं तो क्या मैं एक सच्चा भक्त हूं या. मैंने अपने कर्म ही पूजा वाली लाइन के. जरिए अपने आलस को बहाना बना लिया।. आपका उद्देश्य ज्यादा जरूरी होता है कि आप. भगवान को पाना चाहते हो या आप आगे भी अगले. जन्म में स्वर्ग या एक अच्छी लाइफस्ट. अच्छा जीवन यह चाहते हो। अगर आप स्वर्ग की.
प्राप्ति चाहते हो अगर आप यह कि अगले जन्म. में भी मैं बढ़िया अच्छा जीवन जीू तो उसके. लिए कर्म करो। कर्म से क्या मिलेगा? पुण्य. मिलेगा। पुण्यों से कभी भगवान नहीं मिलते।. पुण्यों से आपका जीवन अच्छा चलता है।. भगवान को पाने के लिए अगर किसी का जीवन का. उद्देश्य है कि नहीं मुझे अब इस इस चक्कर. में इस सर्कल में आना ही नहीं। मुझे बस अब. उस अल्टीमेट आनंद को अल्टीमेट ट्रुथ जो. भगवान है उसको पाना है। उसके लिए भजन. जरूरी है। उसके लिए भक्ति जरूरी है। वो. भगवान बिना भजन के नहीं मिले। भगवान कभी.
भी पुण्यों से नहीं मिलता। भगवान मिलता है. भजन से। पुण्यों से अच्छा जीवन मिलता है।. पुण्य पुण्य से अच्छा भविष्य मिलता है। तो. आप डिसाइड करेंगे कि आपको सिर्फ एक अच्छा. जीवन चाहिए तो कर्म ही पूजा है। पर आपको. भगवान चाहिए तो उसके लिए आपको नाम जाप, भजन, सत्संग यह सब करना पड़ेगा।. तो मैं अगर देवी चित्रलेखा की बात करूं तो. देवी चित्रलेखा. कितना समर्पण ईश्वर को कर्म की वजह से. करती हैं। क्योंकि आपका प्रोफेशन भी यह. है। कथा वाचन उसकी रिहर्सल करना होता.
होगा। उसके बारे में पढ़ाई करनी होती. होगी। उसके बारे में जानना होता होगा।. या कितना आध्यात्मिक करती है।. नहीं मेरे ख्याल से मैं तो अपने आप को. कहूंगी आई एम द लकिएस्ट कि भगवान ने. एटलीस्ट मुझे ये चूज़ करने का मौका नहीं. दिया कि कर्म अलग है धर्म अलग है।. क्योंकि आपने एक ही बनाया तो नहीं मैं. जाना चाह रहा हूं क्योंकि आपका कर्म और. आपका धर्म दोनों एक ही हो गया। जी. हमारा जैसे कर्म अलग है, मेरा पेशा अलग. है, धर्म मेरा ईश्वर के प्रति मुझे अलग से. सोचना पड़ता है।. आपका कर्म और धर्म एक ही है।.
तो देवी चित्रलेखा जिनका कर्म और धर्म. दोनों ईश्वर के प्रति है। उसमें जब वो. ईश्वर की पूजा पाठ, गुणगान, भजन करती हैं. तो उसमें कर्म का प्रतिशत कितना होता है. और धर्म का प्रतिशत कितना होता है? मुझे लगता है ज्यादा प्रतिशत तो धर्म का. ही है। मैंने आज तक कभी अपने शब्द से यह. नहीं बोला होगा कि यह मेरा प्रोफेशन है।. क्योंकि. बट इनडायरेक्टली तो वो है वो आपको पैसा. देगा. लेकिन वो आपकी सोचने की आप दोनों में से. क्या प्रायोरिटी में रखते हो यह मेरा.
प्रोफेशन है या यह मेरा जीवन है जो मेरे. भीतर से प्रकट होता है जो मेरे अंदर से. मुझे अच्छा महसूस कराता है आनंदित महसू. महसूस कराता है तो मेरे लिए ज्यादा जो. परसेंटेज है वो धर्म की है। मान लीजिए मैं. कल को भगवान कभी ना करे लेकिन कथा ना भी. करूं. पैसा सबको अच्छा लगता है कभी कोई ना. नहीं नहीं नहीं नहीं कथा. देखो मैंने कहा एक्सेप्ट करने में कोई. बुराई नहीं है कि हम खाना भी इसी से खाते. हमारा परिवार इसी से चलता हमारा जीवन इसी.
से चलता है लेकिन अब इन दोनों में. उद्देश्य का बहुत अहम रोल होता है। एक आप. इस प्रोफ़ेशन में इसलिए आए थे कि पैसा. कमाना है। यह आप इसलिए आए थे क्योंकि आपको. यह अच्छा लगता था। आपको समाज को कुछ देना. था। उसका बाय प्रोडक्ट आपको मिल रहा है. पैसा। लेकिन 7 साल का बच्चा कथा की लाइन. में इसलिए तो सोच के नहीं आएगा कि भैया. पैसा बढ़िया मिल जाएगा।. या मेरा फ्यूचर सिक्योर हो जाएगा।. वो उसको अच्छा लगता था। उसको कथा करना. अच्छा लगता था। उसको.
प्रारब्ध था, कृपा थी, घर का माहौल वैसा. था। तो वहां से जर्नी शुरू हो गई। जर्नी. शुरू हो के अब भगवान ने कहा जब तूने. रास्ता चुन ही लिया है। अब मान लीजिए मैं. कथा करती हूं। मेरा ट्रैवलिंग है जाना है।. अब इसमें मैं चाह के भी दूसरे काम नहीं कर. सकती कि चलो मेरे मन में भी आए कि चलो मैं. पैसे कमाने के लिए एक जॉब ही कर लूं। तो. वो भी संभव नहीं। तो भगवान ने कहा चलो यह. कर्म तेरा हो गया। धर्म तेरा हो गया।. दोनों को साथ निभा करके चल। पर्सनली अगर.
मुझसे पूछोगे मेरा यह कर्म ना भी होता यह. फील्ड ना भी होती मैं तब भी किसी ना किसी. तरीके से भगवान से ही कनेक्टेड होती। इतना. मुझे भरोसा है। मान लो कथा नहीं भी होती. तो मैं भजन गाती या मैं घर में बैठती। घर. में बैठकर के भगवान को याद करती क्योंकि. वो मेरी आत्मा की शांति है। वो मुझे अच्छा. लगता है। वो कोई भी मुझसे छीन नहीं सकता।. ईश्वर की पूजा क्यों करते हैं आप? जैसे आपकी माता जी को मैंने देखा वो कंठी.
कर रही थी। मेरी माता जी करती रहती है।. क्यों करते हैं ईश्वर की पूजा? आंतरिक आनंद के लिए मुझे लगता है कि इसमें. किसी प्रकार का कोई यह नहीं है कि भाई. जैसा मैंने कहा कि अच्छा भविष्य हो जाए, अच्छा जन्म मिल जाए आगे। यह भी नहीं होती।. एक समय पर आकर आपको यह भी खत्म हो जाता. है। आपको बस अच्छा लगता है। अब किसी से. प्रेम करने का आप लॉजिक नहीं जान सकते ना. कि भ क्यों इसी से ही क्यों प्रेम है? है. तो है प्यार है तो प्यार है। मुझे भगवान. से प्यार है। मुझे अच्छा लगता है कि मैं.
बैठूं कृष्ण बोलूं तो अंदर से एक एक शरीर. में भी रोमांच होता है। एक एक आत्मा में. आंख आंखें भीग जाती है कृष्ण नाम लेके. राधा नाम लेकर के। तो मुझे लगता है एक समय. आता है जब आप स्वांततः सुख के लिए करते. हैं।. पैसा कितना जरूरी है जीवन में और पैसा. किस-किस प्रकार खुशियाल आता है? आई थिंक आंसर तो मैंने दे दिया। जरूरी तो. बहुत है। पैसा नहीं होगा तो हमारी कथा. कैसे कराओगे? [हंसी]. पैसे की आवश्यकता नीड है।. मैं कथा से इत बात कर रहा हूं मैं। कथा हम.
अलग रखते हैं। आप एक इंसान के तौर पर. समझना चाह रहा हूं मैं। आप एक कथा वाचक भी. हैं। एक परिवार भी आप चला रही हैं। पैसा. जीवन में कितना जरूरी है और पैसा किस-किस. प्रकार से खुशियां लाता है या जीवन कैसे. बदलता है और पैसा होना क्यों जरूरी है? देखिए पैसे. की आवश्यकता आज संसार में हर चीज में है।. आपको जिस तरह की महंगाई बढ़ रही है, जिस. तरीके का जीवन शैली लोगों की बनती जा रही. है। आप घर से एक बार कदम निकालो बाहर तो.
आपको पैसा ही चाहिए। चाहे वो किराया हो, चाहे वो आपका मोबाइल हो, हमारे पॉडकास्ट. को सुनने के लिए भी डाटा चाहिए। उसके लिए. भी पैसे की आवश्यकता है। तो मैं यह नहीं. कहूंगी और कोई भी यह लोग मानते हैं कि यह. जो कथा करने वाले बोलने वाले पैसे को बुरा. बताते हैं।. पैसा बुरा नहीं है। लेकिन अब डिपेंड ये. करता है कि आप अपने जीवन में सिर्फ पैसे. के लिए जीते हो। जैसे दो तरह के लोग होते. हैं। एक खाने के लिए जीते और एक जीने के. लिए खाते हैं। तो अगर आप पैसा इसलिए कमा.
रहे हो कि आपका घर घर परिवार बच्चे उनका. फ्यूचर ठीक चले। सिक्योर हो जाए सब चीजें. तो आप मेहनत करो अच्छी ईमानदारी से कमाओ. नौकरी करो बिजनेस करो जो करना है करो. लेकिन आपके रोम रोम में रगरग में अगर बस. एक ही इच्छा घुसी हुई है कि सिर्फ पैसा. सिर्फ पैसा तो आपको अंत में जाकर के समझ. में आएगा जो बड़े अच्छे लेवल क्योंकि. भगवान की कृपा से सब प्रकार के लोग हमें. मिलते हैं और ऐसे लोग भी देखें जिनके थाली.
भी सोने चांदी की है लेकिन वो जब अकेले. में एकांत में आके बैठते तो उनकी आंखों. में आंसू होते हैं कि जीवन में खुशी नहीं. है।. अमीर आदमी मैंने मैंने भी देखे हैं अक्सर. अकेले होते हैं।. बहुत परेशान होते हैं। बहुत अकेलापन होता. है। शायद पता नहीं क्या. इनसिक्योर भी होते हैं, अकेले भी होते. हैं। मुझे लगता है कि गरीब आदमी या मिडिल. क्लास और गरीब आदमी ज्यादा परेशानियां जो. अति अमीर आदमी होते हैं।. उनको होती है।. उनको होती है।. होती है। क्योंकि या तो कुछ चाह नहीं. बचती। जीवन में अब मतलब क्या सोचे? एक.
मिडिल क्लास तो एक लक्ष्य ले चलता है।. अगले साल इतना कमा लेना है। फिर यह कर. लेना है। और वहां एक लेवल पर पहुंचने के. बाद आदमी हताश हो जाता है। निराश हो जाता. क्योंकि अपने भी नहीं बचते। अपने लिए समय. नहीं बचता। कोई साथ देने वाला नहीं होता।. तो तब यह बात समझ में आती है कि पैसा बहुत. कुछ है पर सब कुछ नहीं। मतलब पैसे से आप. एसी खरीद सकते हो। लेकिन एसी में भी ठंडक. में भी वह लोग बैठे देखें जो भीतर से जल. रहे होते हैं। उनकी जलन नहीं खत्म होती।.
एसी भी नहीं खत्म कर पाता। लग्जरी गाड़ी. में करोड़ों की में बैठे हो। लेकिन दिमाग. दिमाग आपका ऐसे चक्कर खा रहा होता है कि. अब क्या करूं? आगे कहां जाऊं? क्या जीवन. में होना चाहिए। तो पैसे कमाइए, लेकिन. बावरे नहीं हो जाइए उसके पीछे। यह रखना है. कि एक पार्ट है जीवन का। जीवन नहीं। बस. इतना सा समझना है।. भौतिक सुख में आपको कौन-कौन से सुख हैं जो. पैसों से अच्छे लगते हैं? जैसे एक तो हमने. गाड़ी देखा। आपको गाड़ी अच्छी लगती है।. उसके अलावा.
जैसे जया जी ने कहा हमको हर साल iPhone. बदलना अच्छा लगता है।. नहीं ऐसा तो कुछ मेरी मुझे नहीं लगता कभी. ऐसी भगवान की कृपा से ऐसी कोई डिमांड रही।. हां मिल जरूर जाता है अपने आप।. फिर भी कुछ चीजें अच्छी तो लगती होंगी। आप. भी इंसान हो।. आप पूजा पाठ कर रहे हो। आप कर्म को ही. आपने अपना धर्म धर्म कर्म आपके एक ही हैं।. ऐसा नहीं है कि ये चाहिए ही मतलब मुझे. नहीं लगता मेरी लाइफ में कोई ऐसी चीज हो.
कि ये नहीं होगा तो नहीं होगा।. जो हर साल ही चाहिए कुछ या नहीं. कपड़ों के खाने के घूमने के. बिल्कुल भी नहीं। जो अगर बहुत सहजता से. मिल जाता है तो उसका कोई ठुकराव भी नहीं. है। उसका स्वागत है। लेकिन इसके बगैर नहीं. रहा जा सकता वैसा नहीं।. ओके। मोह अच्छा एक सवाल और कथावाचकों को. लेके था। फिर मैं कथा वाचकों के पर्सनल. सवाल से आगे बढूंगा। एक और बड़ी अच्छी. थ्योरी आती कि कथा सुनाते वक्त आंसू आना. जरूरी है [नाक से की जाने वाली आवाज़].
और वो प्रेम में निकलते हैं, ईश्वर के. समर्पण में निकलते हैं या कई बार दर्शकों. की डिमांड में निकल जाते हैं या सोशल. मीडिया के गेम ने थोड़ा सा करप्ट कर रखा. है।. नहीं नहीं ऐसा तो मुझे नहीं लगता बिल्कुल. भी कहना सही होगा क्योंकि. ये आप ही के डिपार्टमेंट के लोगों ने. फैलाई है सब बातें। ये बाहर से नहीं आई।. मैं. सबकी अपनी-अपनी. कई कई पुरुष कथावाचक हैं जिन्होंने. स्पेशली महिला कथावाचकों को लेके ये बातें. बहुत फैलाई है।. नहीं नहीं. महिला कथावाचक जो होती है वो रुमाल रखती.
हैं और रुमाल आंख पे लगाती हैं और फिर. भरभर आंसू बहते हैं।. नहीं मुझे लगता है कई बार चीजों को बदल भी. दिया जाता है। खैर वो मेरा उस पे वो नहीं. है। बस बात इतनी है कि. भावनाएं आपके अंदर से प्रकट होती। भावना. किसी की शर्त पर नहीं। भावनाओं को खरीदा. नहीं जा सकता। भावना दुनिया के लिए भी. नहीं होती। तो रोना. इसको नाटक कहना या झूठ कहना यह पागलपन है।. आपके भीतर जब आप व्यासपीठ पर बैठते हो या.
कभी आप अकेले में भी होते हो। जरूरी थोड़ी. है कि लोगों के सामने ही आंसू आते हैं।. क्या पता आपको कि वह कथावाचक अपने कमरे. में बैठकर के भी कभी भगवान के लिए रोता. होगा। आंख से आंसू बहाता होगा। क्योंकि. रोना एक ऐसा माध्यम है जो भगवान से आपको. सबसे जल्दी जुड़ता है। रोना जरूरी है जीवन. में। क्या रोने से? बहुत जरूरी है। क्योंकि आध्यात्मिकता में. तो बहुत जरूरी है। मुझे लगता है कि जब आप. रोते हैं तो एक तो जैसे कपड़ा धोने के लिए. पानी चाहिए होता है वैसे ही मन धोने के.
लिए आंख के आंसू जो होते हैं वो हमारे मन. के मैल को साफ करते हैं। और हमारी ब्रज की. वृंदावन की भक्ति तो पूरी रोने पे ही. डिपेंड करती है। वृंदावन में आप आज भी आप. चले जाओ। 100 में से 80 लोग तो आपको बस. रोते ही दिखाई देंगे। क्योंकि उनकी भक्ति. का तरीका यह है और यह एक बहुत अच्छे स्तर. पर पहुंचने के बाद आता है। यह कहने से. नहीं आता है। सबको पता है भगवान के लिए. आंसू आना बहुत अच्छी बात है। लेकिन एक समय. आता है जब आपको उनकी याद आती है। बिना.
किसी कारण के याद आती है। काश आज भगवान. मेरे साथ होते। मैं उनको गले लगा पाता, उनको देख देख पाता, उनसे बातें कर पाता और. वो नहीं है आपके साथ। तो अपने आप आपकी. आंखों से आंसू आएंगे। मीराबाई की भक्ति, सूरदास जी की भक्ति यह सब भक्ति जो है वह. आंसू पर ही निर्भर करती है।. दुनिया की आलोचना और ट्रोलिंग से बचने का. आध्यात्मिक तरीका क्या है? आजकल तो ट्रोलिंग बहुत कॉमन हो गई है।. इसका आध्यात्मिक तरीका क्या है? आपकी नजर.
में. आई थिंक. ओम इग्नोराय नमः। [हंसी]. इससे बेहतर तो कुछ भी नहीं हो सकता। जीवन. का यह सबसे अच्छा मंत्र है। [हंसी]. कोई शास्त्र का नहीं है। लेकिन है अच्छा. कि बस. ओम इग्नोर नमः. हां इग्नोर करो। जैसे कोई दूध में मक्खी. आती है तो आदमी उसको उठा के निकाल के फेंक. देता है। ठीक वैसे ही जीवन के कुछ लोग. होते हैं।.
कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना।. यू जस्ट बिकम बहरा। एंड स्माइल ऑन योर. चेहरा। बस ऐसे करके जीवन आगे बढ़ाते रहो।. कान से बहरे बन जाओ। चेहरे पर मुस्कुराहट. रहो।. जी के तीन. सबसे अच्छा रिटेलिएशन यही है। मतलब अगर आप. उन ट्रोलर्स को जवाब दोगे ना तो उनके इससे. बढ़िया जीवन के मजे कुछ नहीं है कि हमने. कुछ बोला और इन्होंने उसमें वापस आकर. रिवर्ट दिया। इससे अच्छा है कि उनको उत्तर. भी देना है तो अपनी हंसी से देकर के आगे.
बढ़ जा।. मोह अटैचमेंट मोह और प्रेम में क्या अंतर. है? कैसे तय करें? हमें कृष्ण से मोह है या. कृष्ण से प्रेम है? नहीं कृष्ण से मोह नहीं हो सकता। मोह. इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि मोह जो होता. है वो. हमारे अ शरीर से जुड़ा होता है और कृष्ण. से जो जुड़ा है वो हमारी आत्मा से जुड़ा. हुआ है। आत्मा से जो चीज जुड़ी होती है वो. प्रेम होता है और शरीर से जो जुड़ा होता.
है वो मोह होता है।. तो हुक ऑफ कल्चर के दौर में मोह और प्रेम. में अंतर कैसे समझाओगे आप? कैसे आदमी तय करें कि हमको इससे मोह है, इससे प्रेम है।. संसार में वैसे मोह ही होता है। संसार में. प्रेम बहुत कम ही होता है और होता ही नहीं. है। प्रेम भगवान से ही हो सकता है। संसार. से मोह होता है। क्योंकि वहां अपनी कुछ. मांगे होती है कि भाई जैसा हम चाह रहे हैं. वैसे बन जाओ। जो हम चाह रहे हैं वह कर दो।. जैसा हम चाह रहे हैं वह खाओ। जो जैसा हमें. पसंद है वैसा पहनो। तो यह जो चीजें यह मोह.
की कैटेगरी में आती हैं और संसार के. रिश्ते ज्यादातर मोह पर ही निर्भर करते. हैं। तो मुझे लगता है संसार से मोह भगवान. से प्रेम।. तो जैसे आपका ब्याह हुआ है तो आपको मोह. है।. मोह कह सकते हैं। बिल्कुल. प्रेम नहीं है पतिदेव से।. शुद्ध प्रेम निष्काम प्रेम दुनिया में. नहीं होता। आप दो दिन के लिए किसी की भी. बातें मानना बंद कर दो। उनकी इच्छा के. विरुद्ध काम करना कर दो। रिश्ते टूट. जाएंगे। सब रिश्ते टूट जाएंगे। मां-बाप का. रिश्ता टूट जाएगा। भाई बहन का, पतिप का तो.
लेकिन प्रेम में ऐसा नहीं है। प्रेम में. आप उनके उल्टा भी करो, कुचल भी डालो पैरों. से तब भी आपके मन में उनके प्रति एक. किंचित मात्र भी किसी प्रकार का द्वेष. नहीं आए। यह पॉसिबल नहीं है।. मां-बाप से भी मोह ही होता है।. मोह होता है। संसार के हर रिश्ते में मोह. होता है। आप दो आप दोप दिन के लिए या फिर. आप. जो वो पढ़ाई चाह रहे हैं या जैसी वो शादी. चाह रहे हैं या जो वो बिजनेस चाह रहे हैं. आप वो करना बंद करो। कुछ समय बाद पिताजी.
आपके अखबार में निकाल देंगे। अपने बेटा को. प्रॉपर्टी से दखल अंदाज करते हैं। तो यह. शास्त्र आज्ञा है। शास्त्र. पिताजी का पता है। लेकिन मम्मी को हमारे. हमसे प्रेम है। उन्होंने जीवन में हम उनसे. कोई अपेक्षा नहीं की। अपेक्षा हां अगर सब. खिलाफ भी गए तो भी वो हमसे निस्वार्थ. प्रेम करते. सब रिश्तों में अगर एक सबसे ऊपर लेवल का. आप पूछोगे कि सबसे ऊपर लेवल का तो उसमें. मां का प्यार बताया जाता है कि उसमें मां. का प्रेम है। उस प्रेम में अगर स्वार्थ की. बात करूं वो थोड़ा और रिश्तों से एकदम अलग. होता है। लेकिन.
बाकी रिश्तों में हम मान सकते हैं कि कुछ. ना कुछ लाभहानि रिश्ता उनके हिसाब से करना. मां वाले में मुझे जितना मेरे जीवन का. अनुभव मुझे लगता है कि निश्चल निष्काम रहा. है कि कोई अपेक्षाएं नहीं रही है।. बिल्कुल हो सकता है होता ही है। इससे. बढ़कर कोई संसार इसलिए तो कहता है मां से. बड़ा कोई शब्द भी नहीं होता क्योंकि उसने. जन्म से लेकर के 9 महीना से लेकर के अंतिम. समय तक आपका साथ दिया है। लेकिन साथ ही. में प्रेम और मोह की आप बात करोगे तो मेरे. लिए प्रेम शब्द केवल भगवान से जुड़ा है।.
ठीक है। मतलब वैलिड वेलफेयर पॉइंट है।. उसमें मैंने एक मां को जोड़ दिया जो मां. भी भगवान ने काफी करीब है।. हां भगवान का रूप एक एक कह सकते हैं कि जब. भगवान अह स्वयं नहीं आ सकते। तो उन्होंने. उस रूप में आपके पास अपने होने का एहसास. दिलाया।. क्योंकि कार्तिक जी ने तो चक्कर वहीं लगाए. थे। गणेश जी ने चक्कर वहीं लगा लिए थे।. माता-पिता को. कार्तिक जी दुनिया घूमते रहे। तो यानी. भगवान ने भी मां को उसी दर्जे पे रखा है।. तो हम और आप कौन होते हैं? अह सात्विकता का बड़ा जिक्र होता है।. जी।. अब मेरे मन में सवाल आता है सात्विक.
व्यक्ति कौन है? वो जो लहसुन प्याज नहीं. खाता वो और आज के डिजिटल दौर की अगर हम. बात करें तो इसमें सात्विकता कैसे मेंटेन. की जाए? सात्विकता कई चीजों की होती है। खाना भी. उसमें से एक तरीका है कि आप जो भोजन करते. हो उसमें सात्विक भोजन होगा तो आप. सात्विकता की कैटेगरी में गिने जाओगे।. बोलना भी सात्विकता में आता है कि आप जब. भाषा अपने शब्दों का कंट्रोल करते हो आप. कोई ऐसी वाणी गाली गलौज शब्दों का उपयोग.
नहीं करते तो वो वाणी की सात कपड़ों की भी. अपनी सात्विकता होती है कि आपके पहनावे. में भी सात्विकता होनी चाहिए। तो एक विशेष. चीज नहीं है। ओवरऑल एक पैकेज, एक. कॉम्बिनेशन मिलकर के आपको सात्विक व्यक्ति. बनाता है। और यह भले हम डिजिटल के दौर में. जी रहे हैं। भले हम कलयुग में जी रहे हैं. लेकिन सात्विक गुण लाना तो ये हमारा मोरल. हमारे जीवन का होना ही चाहिए।. बट जैसे आज की सात्विकता उस दौर के. सात्विक तो अंतर रहा होगा। आज जो कपड़े हम.
पहन रहे हैं उस जमाने में नहीं रहे होंगे।. आज जो हम खा रहे हैं उस जमाने में शायद. नहीं रहा होगा। बहुत सारी चीजों के. आविष्कार ही बाद में हुए। आज डिजिटल. दुनिया है तब नहीं रही होगी। तो सेम चीजें. आज कैसे फॉलो हो रही हैं? फिर. नहीं सेम चीज नहीं है। उस समय तो बहुत अलग. प्रकार की सात्विकता होती थी। उस समय तो. घर छोड़कर के गुफाओं में एक-एक साल तक कई. कई सालों तक वायु पर जिया जाता था। वह. सात्विक व्यक्ति माना जाता था। शरीर में. बिल चीटिया बना लेती थी। इतना साधु ऋषि. महात्मा भजन करते थे। आजकल तो कितनी. सहूलियत है। मतलब आप फोन भी चला रहे हो।.
साथ में आप थोड़ा देर बैठकर भगवान का नाम. भी ले रहे हो। आप बाहर भी चले जाते हो तो. सात्विकता के जो नियम है वो आज बदले हैं. और ये जो छोटी-छोटी चीजें आप बता रहे हो. खाने की पहनने की पहनने का मतलब यह नहीं. कि आप वेस्टर्न कपड़े नहीं पहन सकते लेकिन. उन कपड़ों में भी सात्विकता आपकी मर्यादा. ऐसी होनी चाहिए जिससे आप एक सात्विक. व्यक्ति जैसा आपका परिवेश लगे। खाने की. सात्विकता में भी मांसाहार नहीं खाना। कोई. ऐसी चीज नहीं खाना जिससे आपकी जो.
नेगेटिविटी है वह आपके भीतर बढ़े। क्योंकि. खाना सबसे ज्यादा आपको भीतर नेगेटिव. एनर्जी लेकर के आता है। तो ये तो बहुत. छोटी-छोटी चीजें जो आज के दौर में. सात्विकता की डेफिनेशन है।. अब मेरा एक बड़ा फेवरेट टॉपिक आजकल चलता. है क्योंकि एंड सेगमेंट धीरे-धीरे आ रहे. हैं हम। गरुड़ पुराण को लेकर। जब से थोड़ा. बहुत मैंने पढ़ना शुरू किया हमारे चैनल. भक्ति बुक के लिए तो मुझे बड़ा. इंटरेस्टिंग लगने लगा वो। तो क्या इंसान. को जीते जी अपने मरने के बारे में सोचना. चाहिए और क्या मरना सोचना जीवन जीते सही.
है क्योंकि अगर मरने के बारे में सोचने. लगेंगे तो फिर शायद जीवन का रस खत्म हो. जाए अगर मरने को सोच के कर्म करेंगे तो. शायद फिर जीवन का आनंद खत्म हो जाएगा और. नहीं करेंगे तो आखिर में सत्य तो वही है. जी. कि पीछे मुड़ के तो वही पिक्चर दिखाई. जाएगी बाबू तुम किए क्या थे. बिल्कुल मरने के बारे में सोचना चाहिए मैं. जो भागवत कथा कहती हूं वो पूरी इसी इसी. बात पर डिपेंड है कि मरने की प्रिपरेशन. कैसे करनी चाहिए। जब राजा परीक्षित 7 दिन.
में उनकी मृत्यु होने वाली थी तब उनको यह. भागवत सुनाई गई कि अब 7 दिन में यह कोर्स. है। यह तैयारी करो कि मरना कैसे चाहिए।. क्योंकि जीना फिर भी बहुत लोग सीखते हैं. पर मरना किसी को नहीं पता कैसे मरना. चाहिए। और जिन ओशो की आपने बात करी उनकी. एक किताब है मृत्यु के ऊपर और उन्होंने. बहुत सुंदर-सुंदर बातें उसमें लिखी है कि. मरने के शब्द को ही लोग अशुभ मानते हैं।. हम. घर में कोई बच्चा बोल दे मरने की बात तो.
एकदम माता-पिता डांट के बोले अरे बेटा शुभ. शुभ बोलो। मतलब हमने दिमाग में उनके फिट. कर दिया। मरना मतलब अशुभ।. अशुभ।. लेकिन आध्यात्मिक मार्ग में जो है मरने को. अशुभ नहीं माना जाता।. मरने को कबीर दास जी कहते हैं मरने से सब. जग डरे मेरे मन आनंद कब मरी हो कब भेटी हो. पूर्ण परमानंद मतलब आध्यात्मिकता में मरण. का मतलब है अपने उस परमात्मा से मिलन हो. जाना जब तक यह चीज हमें नहीं पता होगी तब.
तक हम मरने से डरेंगे या एक और भी. एग्जांपल मैं देती हूं कि जब आपका होमवर्क. कंप्लीट नहीं होता तब आप स्कूल जाने से. डरते हो क्योंकि आपको पता है कि हिसाब. पूछा जाएगा कि पूरी छुट्टियों में क्या. मजे उड़ाए बच्चों मामामी के घर घूमे किया. क्या लेकिन जिसका होमवर्क कंप्लीट है वह. एकदम बैग टांग के और बड़ा खुश होके कि आज. पहले ही दिन कॉपी खोल के बैठेगा कि मैम. चेक करो हमारा होमवर्क कंप्लीट है तो. भगवान ने हमें दुनिया में भेजा एक.
उद्देश्य ले भेजा कि तुझे अच्छे कर्म करने. तुझे दुनिया में अच्छाई बांटनी है और अंत. में भजन करके मुझ तक आना है। अगर वह. होमवर्क कंप्लीट नहीं होगा तो हमें मरने. से डर लगेगा क्योंकि हमें पता है अभी काम. पूरा हुआ नहीं। अगर काम पूरा हो गया हमने. अपने जीवन को वैसे जिया जैसे जीना चाहिए. तो कबीर दास जी कहते मरना फिर डर नहीं है. मरना एक प्रकार का भगवान की कृपा है कि. आपको भगवान से मिलने का एक मौका मिल रहा. है तो मरण की तैयारी जरूरी है। गरुड़.
पुराण का अगर आपने जिक्र किया वह पढ़ना भी. जरूरी है। सबको जानना जरूरी है ताकि आपको. पता लग जाए जीवन से पहले क्या था। मरने के. बाद क्या होगा और जो होगा उसके लिए आज. क्या तैयारी करें? तो मरने की क्या तैयारी करें? मरने की तैयारी मतलब लाइफ के अपने. उद्देश्यों को पूरा करो। भगवान ने अगर इस. दुनिया में भेजा है तो मैं एक बात कहती. हूं कि जब भगवान के पास लौटेंगे तो हमसे. दो प्रश्न किए जाएंगे। पहला प्रश्न पूछा. जाएगा क्या तू जीवन में जो मैंने तुझे.
इतना कीमती जीवन दिया क्या तू खुश रहा? आप. कहोगे हां प्रभु खुश रहा। तो भगवान उसके. 50 नंबर देंगे आपको। 50 नंबर सेकंड. क्वेश्चन के देंगे। जब आप कहोगे कि मैं. खुश रहा तो भगवान पूछेंगे क्या तूने उस. खुशी को दुनिया में बांटा? अगर वो बांटा. होगा तो आपको 100 मार्क्स मिलेंगे और आप. उस. वाले सवाल में आशिक कलयुग में उसी में 90%. लोग कहेंगे नहीं। उसी में फेल हो जाएंगे।. ये तैयारी. लड़का हमारा बहुत बदमाश निकला। बीवी हमारी.
[हंसी] लड़ रही थी हमसे।. पैसा हमारे पास था नहीं। जीवन भर मेहनत. करते चले गए। तभी तो यही तो तैयारी है कि. यह मरने की तैयारी यह है कि आप इन दो. क्वेश्चन के लिए प्रिपेयर रहो।. मतलब खुश रहे हम एक. प्रसन्नता।. प्रसन्नता. भगवान की भक्ति का एक मतलब प्रसन्नता भी. है। क्योंकि कृष्ण को कहते हैं सदा. प्रसन्न माधव।. प्रसन्नता में आदमी स्वार्थी हो जाएगा।. फिर तो कि तुम रोते हो हमको क्या फर्क. पड़ता है। हम खुश हैं। हमको इतना मतलब है. यार।. नहीं नहीं। प्रसन्नता का मतलब यह नहीं है।. प्रसन्नता का मतलब है कि आप अपने भीतर से.
जो चीज पाए हो, जो आपको भगवान ने दिया है, जितना जीवन आपका भगवान ने बनाया है आपने. बनाया अपने पुरुषार्थ से जो मिल गया जो पा. लिया उसकी संतुष्टि में आनंद से रहना।. मतलब अगर चार रोटी की जगह दो मिली तो दो. में खुश होकर कहना कम से कम दो तो मिली।. कम से कम मुझे यह तो मिला। वो खुशी होना. बहुत जरूरी है और वो बहुत कम लोगों के पास. होती है तो वो प्रसन्नता और फिर उसको उसी. प्रसन्नता को लोगों में बांटना. अच्छा गरुड़ पुराण को किस समय पढ़ना चाहिए.
जीवन किस जीवन काल में. टाइम कुछ नहीं होता मतलब जब जागो तभी. सवेरा वैसे तो आज ही पढ़ लो तो भी अच्छा. है क्योंकि आप उसके लिए सतर्क हो जाओगे. वैसे परंपरा यह चलती आई है कि घर में जब. किसी की मृत्यु हो जाती है उसके बाद वो. पंडित जी आके करते हैं कथा गरुड़ पुराण की. लेकिन वो एक सिर्फ एक रिचुअल है। पर इसका. मतलब ये नहीं कि आप अपने जीवन के किसी काल. में उसे नहीं पढ़ सकती। ये एक प्रकार की.
एक ऐसी चीज है जो आपको बहुत सतर्क बनाती. है। अवेयर करती है।. बट जैसे अगर हम मृत्यु के बारे में बहुत. बात करेंगे या जो सजाएं मिलती है उनके. बारे में बात करेंगे। हमदूत बात करेंगे।. लोग कहेंगे बड़े नकारात्मक व्यक्ति हो आप।. जी. तुम सकारात्मक व्यक्ति नहीं हो। तुम जीवन. के प्रकाश को नहीं देख रहे हो। तुम उस. अंधेरे की तरफ ज्यादा फोकस कर रहे हो।. नहीं नहीं आप जैसे कहीं कहीं घूमने जाते. हैं तो आप प्रिपरेशन क्या करते हैं? सिर्फ. वहां की सिर्फ अच्छी साइट्स देखेंगे।.
सिर्फ वो नहीं देखते। चाहे खाना नहीं मिला. तो. दवा रख लेते हैं। सब. दवा रख लेते हैं। तो ये तैयारी ही तो है।. इसमें कुछ भी गलत या नेगेटिव नहीं है। आप. इतने तैयार रहो कि कल को वहां कुछ ऐसी. सिचुएशन इमरजेंसी आ जाए तो हमें पता हो कि. यह भी हो सकता है। ऐसी भी तैयारी होनी. चाहिए।. मृत्यु नेगेटिव नहीं है। सबसे बड़ी बात यह. हमें सोचना होगा। आपने जैसे शब्द कहा ना. कि लोग सोचेंगे कि नेगेटिव ज़्यादा सोचता. है। यह यही चीज हमें हटानी है कि मृत्यु. नेगेटिव बिल्कुल भी नहीं होती। यह जीवन का.
एक पड़ाव होता है। उसके बाद एक नए पड़ाव. पर आप जाते हो। मतलब एक नई जर्नी आपकी. शुरू हो रही है। खत्म नहीं हो रही। आप एक. नए यात्रा पर निकले हो। इस चीज को बदलोगे. तो आप फिर मृत्यु की तैयारी करोगे। बट जब. मैं गरुण पुराण को पढ़ रहा था और 28. प्रकार की सजाओं को पढ़ रहा था. तो मुझे लगा या तो मैं तला जाऊंगा या भुना. जाऊंगा कुछ ना कुछ तो होगा ही क्योंकि हर. चीज पे कुछ ना कुछ है [हंसी]. तो मुझे लगा कितना भी मच जाऊंगा मैं अगर. थोड़ा भी साधारण जीवन जीना चाहूंगा मैं. तो या तो पकौड़ा बनाया जाऊंगा मैं या.
डूबाया जाऊंगा मैं तो कैसे बचे भाई 2800. और बड़ी खतरनाक खतरनाक. खतरनाक बड़े खतरनाक है मतलब देखो ये तो. पक्का है कि एकदम तो कोई वैसा साधु बन. नहीं सकता कि वो एकदम एकदम से ही सब चीजों. को खत्म कर दे। इसका समाधान शास्त्रों ने. दिया है कि डरने की जरूरत नहीं है। कुछ. पाप हैं जो हम ना चाहते हुए भी नहीं छोड़. सकते। वो होंगे ही. अनजाने में होंगे या जानबूझ के होंगे।. उसका समाधान शास्त्रों ने दिया नाम जाप।.
मान लीजिए कोई अपराध हमसे हो भी रहा है।. हो गया है। तो शास्त्र कहते भागवत जी कहती. है कि आप नाम जाप करो भगवान का। नाम में. इतनी शक्ति है कृष्ण का एक नाम। श्री. चैतन्य महाप्रभु कहते हैं कि जैसे एक रुई. का पूरा पहाड़ हो लेकिन आप उसमें एक जरा. सी इतनी सी माचिस की तीली से आग का एक कण. लगा दो पूरा की पूरा एक क्षण में जल के. खाक हो जाए तो पाप चाहे हो भी रहे हैं. जीवन में हो गए कृष्ण नाम एक ऐसी तीली है.
भगवान नाम एक ऐसी अग्नि की वो ज्वाला है. जो सब पापों को नष्ट कर देगी तो डरने की. बिल्कुल आवश्यकता नहीं है अगर साथसा साथ. साथ में हम भगवान का नाम लेते जा रहे हैं. तो वो उन पापों का क्षय करती यानी नष्ट. करती. तो मान लीजिए हम एक जमाने में बहुत पापी. रहे हो. जी. और फिर पूजा पाठ करने लगे तो वो 28 पाप से. 28 सजाओं से हम बच जाएंगे. अगर आप यह निश्चित कर लेते कि अब वो. दोबारा नहीं करेंगे अब उन पापों से आप उबर. चुके हैं और अब आप अपने जीवन को भगवन नाम.
से धोएंगे इसका एग्जांपल बहुत बड़ा. श्रीमद् भागवत जी में शायद नाम आपने सुना. हो अजामिल उसकी पूरी कथा यह नरको पर ही. डिपेंड करती है कि उसने जीवन में बहुत पाप. किए। फिर एक दिन आया कि उसने अपने बेटे का. नाम संतों के कहने से नारायण रख दिया और. फिर उसके जीवन में इस तरह से नारायण नाम आ. गया। अब वो कंटिन्यू नारायण नारायण नारायण. नारायण करता करता एक दिन अंत समय उसका आया. और उस समय भी उसने नारायण नाम बुलाया और.
भगवान के दूत आ गए उसको ले जाने के लिए।. तो यह एग्जांपल इस बात को दिखाता है कि. आपने अगर पाप किए हैं लेकिन एक समय आता है. कि जब आप उन पापों को ना करने का प्रण ले. भगवान का नाम शुरू करते हो तो आप बच सकते. हैं।. क्या पुराने जमाने में लोग अपने बच्चों का. नाम भगवान के नाम पर इसलिए रखते थे ताकि. उनका नाम पुकारने से अप्रत्यक्ष तौर पर ही. हमें लाभ हो सके। बिल्कुल बिल्कुल उसका. मुख्य कारण यही था कि चलो वैसे ना भजन हो. तो कम से कम ऐसे नाम. तो ये जजी माता-पिता जो हैं जिनजी के ये.
सब नरक जाने वाले हैं क्योंकि उन्होंने. बड़े कूल-कूल नाम रखे [हंसी] हैं।. पिछले वाले में पुण्य आते थे राम प्रकाश. हां. शिव प्रसाद भगवान का नाम आता था। भगवान. दास. अब तो मतलब मुझे लगता है भविष्य में मैं. कई बार कथा में बोलती हूं कि ऐसा भविष्य. आएगा लोग नाम रखेंगे कु मुंह मतलब शॉर्ट. नाम के चक्कर में अच्छा एक और नया ट्रेंड. आया पहले तो पंडित जी आते थे वो नामकरण का. यज्ञ होता था वो होता था. अब तो मां-बाप अपना मिलाते हैं.
अब नाम मिला देते हैं. गिव मी 10 सजेशंस. हां जी. पापा मम्मी को मिला क्या-क्या नाम. अच्छे 10 लड़कों के नाम और उसमें आधा नाम. उनका और आधा. दोनों पेरेंट्स का। अच्छा उसका कोई मीनिंग. भी नहीं होता। आप पूरी डिक्शनरी खोज. डालोगे। आपको उस शब्द का उत्तर कहीं भी. कोई मीनिंग नहीं मिलेगा। तो मतलब मॉडर्न. बनो सब हम भी इसी जमाने में जी रहे हैं।. लेकिन इतना भी ना बनो कि आपको बच्चों के. नाम का अर्थ भी नहीं पता। आप उनके जीवन. में उनसे ही कोई पूछ ले कि भाई तेरा नाम.
ये किस किस चीज से रखा गया है। तो उनके. पास भी उत्तर नहीं।. पापा मम्मी पहचान छोड़ना चाह रहे पहचान. अपनी पहचान उन्होंने दी [हंसी]. तो ऐसा नहीं होना। इसीलिए शास्त्र कहते. हैं कि भगवान के नाम और अच्छा भगवान के. नाम भी बहुत अच्छे-अच्छे हैं। मतलब मॉडर्न. नाम भी हैं। ये ना सोचो कि रामदास ही रखना. है। भगवान दास ही रख भगवान के इतने. अच्छे-अच्छे नाम हैं। गोपाल सहस्त्र नाम, विष्णु सहस्त्र नाम. मेरा नाम वहीं से आया।.
हां महादेव।. हां। तो ये ये लोग अगर खोजेंगे पता करेंगे. तो भगवान के भी बहुत प्यारेप्यारे मॉडर्न. नाम भी हैं जो अपने बच्चों के रखे जा सकते. हैं।. ओके इसमें एक सवाल था जो मेरे ज़हन से निकल. गया। अब हम बात करते हैं। लेकिन ये अनजाने. में नाम का फायदा होता है जो आपने बताया।. अजामिल वाली कहानी नारायण वाली. हां होता है शास्त्र कहते हैं कि भाई कुभा. खालशु नाम जपत मंगल दशु फायदा होता है. जरूर होता है और भगवान का नाम बिना मन.
लगाए भी लोगे तो भी उसका प्रभाव आपके जीवन. में आएगा भगवान आप पर उस कृपा करेंगे. डिफरेंस इतना ही है एक होता है जैसे मैंने. बोला एक होता है सिर्फ खाना खाना एक होता. है स्वाद लेके खाना. स्वाद लेके खाने का मजा अलग है तो अगर आप. डूब के भगवान का नाम लोगे उससे आपको आनंद. ज्यादा आएगा और अगर डूब के नहीं भी ले रहे. हो तो भी आपके जीवन में भगवान का नाम कभी. खाली नहीं जाता।. अब आप से हमको अधिक सीख मिली कि घर में. जितने नौकर चाकर काम कर रहे हो सबको एक.
नेम दे दो भगवान का. दे दो बिल्कुल दे दो। यह तो सबसे बेस्ट है. क्योंकि आदमी आज के जमाने में सबसे ज्यादा. नारायण. पहले के टाइम में यही तो नाम होते थे रामू. श्यामू वो इसलिए होते थे कि ज्यादा से. ज्यादा लोग. तो जिस आदमी को आप सबसे ज्यादा बुलाते हो. दिन भर में. पुकारते हो. चाहे वो आपका असिस्टेंट हो ड्राइवर हो काम. करने वाला हो. उसका नाम. उसका नाम एक ईश्वर के नाम का निकनेम दे दो. बिल्कुल बिल्कुल. ये भक्ति में गिना जाएगा पक्का. गिना जाएगा आपका भगवान के नाम जो है वो उस. अकाउंट में डिपॉजिट होता चला जाएगा.
क्या किसी खूंखार आदमी का दिमाग सत्संग या. सात्विक खाने से बदल सकता है।. सत्संग से बदल सकता है। सत्संग अगर उसके. जीवन में जो सुनाने वाला देने वाला अच्छा. हो बहुत सारे ऐसे अपने भक्तमाल में. एग्जांपल कथाएं हैं जहां कोई डाकू कथा. सत्संग सुनने चला गया। एक लाइन ने उसका. जीवन बदल दिया। गोवर्धन नाम के एक डाकू. थे। उनका जीवन बदला। अ सत्संग से सब कुछ. बदला जा सकता है। अगर आपके दिमाग में बहुत.
सारी राक्षस प्रवृत्ति भी है। उसको भी. सुनकर के अच्छी बातें सुनकर के बदला जा. सकता है।. कलयुग में गंगा नहाने से पाप धुलते हैं।. थोड़ा मुश्किल है। मतलब हां गंगा पापों का. नाश तो करती है लेकिन अनजाने में किए गए. पापों को जानबूझ के आप पाप करो और फिर. गंगा जी से कहो पाप धो दो तो वो संभव नहीं. है वो तो यमराज जी के डंडे ही धोएंगे. ईश्वरी कहानियां डराने के लिए होती है या.
जगाने के लिए. जगाने के लिए ईश्वर डराने का विषय नहीं. क्योंकि जब हम पढ़ते हैं कई बार और डीप. में जाता हूं जब मैं स्पिरिचुअलिटी रिलजन. को पढ़ता हूं तो अंत में समझ में आता है. कि शायद सब एक ही था सबके भक्त अलग-अलग थे. अलग-अलग परंपराएं निकलती कहीं बढ़ते चले. गए बट है वो कोई एक शक्ति जिसको हम रूप. देते चले गए. और कई सेक्शंस में डिवाइड कर गए और नीचे. आते थे जैसे कांतारा फिल्म में दिखाई पड़ा. वो भी एक देव आए जिनको और ग्रामीण स्तर पर. माना गया उसके ऊपर स्तर माना गया रीजनल.
भगवान हुए फिर स्टेट वाले भगवान हुए. कंट्री वाले भगवान हुए सबके अलग-अलग गए तो. ये सारे भगवान थे या ये अलग-अलग रूप थे. जैसे आप अलग तिलक लगाते हो किसी ने अलग. लगाया हम मान सबको एक ही रहे. जी. लेकिन क्या ये वही अलग-अलग अलग. डिस्ट्रीब्यूशन है कि है एक शक्ति जिसको. हमने अपनी भक्ति के हिसाब से अपना अपना. रूप दे दिया है।. बिल्कुल मूल में तो देखिए एक ही एक ही. शक्ति है। कबीरा कुआ एक है पनिहारी है. अनेक बर्तन सबके अलग-अलग पर पानी सब में. एक पानी का कोई रूप कोई रंग नहीं होता।.
लेकिन अगर उसको आप किसी शेप में डाल दोगे. तो वो उसकी शेप ले लेता है।. जिन लोगों को भगवान. बहुत मस्ती में आनंद में देखना था. उन्होंने कृष्ण रूप में देखा। जिनको बहुत. मर्यादा में देखना था। उन्होंने राम रूप. में देखा। जिनको बहुत धीर गंभीर शांत रूप. में देखना था। उन्होंने महादेव के रूप में. देखा। तो पानी जल तो वही है। मूलधारा तो. वही है। लेकिन सबके स्वरूप अलग-अलग है।.
जिसका जैसा रस है उसने भगवान को वो रूप. दिया, वह नाम दिया और कोई भी भेद इसमें. करना भी नहीं चाहिए। क्योंकि एट द एंड. जर्नी सबकी जानी वही परम सत्य तक है। खोज. सबकी सत्य ही है। घूमते-घूमते सबके रास्ते. जाकर के नदियों को मिलना समुद्र में ही. है। तो वही हमारे जीवन की आध्यात्मिकता. है। पिता सबके अलग-अलग होते हैं। पिताजी. रूप अलग होगा, किसी के हाइट अलग होगी।.
लेकिन पिता के पिता. किसी के पॉप्स होंगे, डैडी होंगे।. डैडी होंगे। तो वैसे ही भगवान सबके. अपने-अपने पिता ने अपना-अपना स्वरूप दिया. है कि मेरा ऐसा दिखता है, मेरा वैसा दिखता. है। अंतर कोई भी नहीं है।. सेकंड लास्ट क्वेश्चन शास्त्रों में नारी. को पूजनीय बताया गया है। लेकिन अब आप जैसी. जब कोई नारी व्यास पीठ पर बैठी तो उसे. इतना संघर्ष क्यों करना पड़ा? नारी के व्यास पीठ पर बैठने को लेकर अभी. भी उतनी सहजता नहीं है। जितने किसी पुरुष. को लेकर है। ये क्यों? जबकि हर जगह तो.
देवी का दर्जा दिया गया है। भगवान से पहले. स्त्री का नाम लिया गया है।. जी यह समाज की जैसे मैंने कहा कुछ पुरानी. परंपराएं हैं जो चलती आ रही हैं और वो समय. के हिसाब से बदलना आवश्यक है। नारी किसी. भी क्षेत्र में हो संघर्ष उसे करना ही. पड़ता है। लड़ना ही पड़ता है। तब जाकर के. वह आगे बढ़ पाती है। क्योंकि कहीं मैंने. लाइन पढ़ी थी कि नारी का हक कहीं भी नहीं. होता। फर्ज हर जगह होता है। उसे फर्ज अदा. करना पड़ता है। हक की बात आती है तो हक.
शायद दूसरे संबंधों को ज्यादा दिया जाता. है। उसे अपना हक स्वयं लेना पड़ता है।. समाज में उसको अपनी जगह स्वयं बनानी पड़ती. है। अपने टैलेंट से, अपने समर्पण से, अपने. त्याग से, अपने परिश्रम से। तो आध्यात्मिक. भी मुझे लगता है एक रास्ता है। जबकि यह. पहले नहीं था। हमारे देश में गार्गी हुई, अहिल्या हुई, माता देहती हुई जिन्होंने. अपने जीवन में खूब आध्यात्मिकता जानी,
उसका प्रचार प्रसार किया। तो वैसे ही आज. के समय में अगर कोई कन्या, कोई बेटी अगर. इस मार्ग में आगे बढ़ती है तो मुझे लगता. है समाज को उसे सराहना चाहिए। आगे बढ़ाना. चाहिए। प्रयास करना चाहिए कि आपके समाज की. एक नारी इस क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकती. है। चैलेंजेस तो आएंगे। बिल्कुल आएंगे. क्योंकि मैंने स्वयं अनुभव किया है।. पुरुष समाज को स्त्री को देवी बनाने में. दिक्कत नहीं है। बराबरी का हक देने में. दिक्कत है।. अ बराबरी का हक देने में दिक्कत है लेकिन.
महिला अपना अधिकार शायद अपने परिश्रम से. बना ही लेती है। उसे पता है कि संसार होता. ही नहीं अगर नारी ना होती। संसार जब. ब्रह्मा जी ने संसार बनाया पहली बार तो. उन्होंने 10 पुरुष बनाए। 10 मानस पुत्र. बनाए नारद जी सनकादी 10 बनाए और सबको कहा. सृष्टि आगे बढ़ाओ सब छोड़कर के चले गए हम. तो भजन करेंगे और हमें सृष्टि को आगे नहीं. बढ़ाना तब फिर ब्रह्मा जी ने मनु और.
शत्रूपा बनाए एक स्त्री और एक पुरुष तब. उनसे सृष्टि आगे बढ़ी तो यानी नारी आई तब. जाकर के सृष्टि का आगे सृजन हुआ तो इस बात. को समाज जितना जल्दी समझ जाए मुझे लगता है. उतना बेहतर. खुशी के मायने क्या रह गए हैं आपकी लाइफ. में आज. क्या सुख है? मुझसे अगर पर्सनली पूछ रहे हैं तो. जहांजहां भगवान और भगवान के लोग उनसे. जुड़े लोग हैं मेरे लिए खुशी वही है।. एक आम इंसान की धारणा बता रहा हूं।. आम इंसान की धारणा में आप जब संतुष्ट हो.
संतुष्टि से बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती।. आप अगर दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति भी हो. पर भीतर से आप सेटिस्फाइड नहीं हो तो आप. सबसे दुखी हो।. सोशल मीडिया के दौर में संतुष्ट कैसे हो? क्योंकि अब ऑप्शंस बहुत ज्यादा हो गए।. चाहे वो खाना हो, चाहे वो इंसान हो, रहना. हो, कपड़ा हो। इतने ज्यादा ऑप्शंस दिख रहे. हैं कि हर दूसरी चीज आकर्षित कर रही है।. नहीं आपको अपने संतुष्टि कैसे? आपको अपने जीवन को अपने कंट्रोल में खुद. ही लेना पड़ेगा। आप अपने जीवन को सोशल. मीडिया पर थोप नहीं सकते कि अब तुम ही.
मुझे जीना सिखाओ। अब तुम ही मुझे जीवन का. सत्संग किस लिए है? सत्संग का रीजन ही यह. है। अच्छी चीजें सुनना, अच्छे पॉजिटिव. पॉडकास्ट सुनना, बातें सुनना। उसका कारण. ही यह है कि आप अपने लाइफ के कंट्रोलर खुद. हो। आप किसी बहकावे में आप बहाव में बस. ट्रेंड में ना बहते चले जाओ। आप खुद. निर्णय कर पाओ कि मेरा जीवन मुझे ऐसे. चलाना है, ऐसे बनाना है। तो अगर आप. संतुष्ट नहीं है तो आप सब कुछ पाने के बाद. भी खुश तो नहीं हो सकते।.
हम संतुष्ट हैं सारे सवाल जवाब से।. हमारी कोशिश थी कि बहुत सारे सवाल पूछे. जाए। कोशिश किया जाए सब कुछ समेटने का।. जी। अच्छा लगा कि हर बार की तरह आपने. हमारे हर सवाल को बेबाकी से सुना और अपने. तर्कों से जो सबसे अच्छी बात है उन तर्कों. से संतुष्ट करने की कोशिश की जो मुझे लगता. है कि आज के दौर में नई पीढ़ी की सबसे. जरूरत है।. क्योंकि सिर्फ मान लो ये जरूरी नहीं है।. हां और मेरा मानना है कि अपने धर्म में. मानने से ज्यादा जानने की जरूरत है और. जानने के लिए बहुत कुछ भरा पड़ा है। इतने.
सारे ग्रंथ सब बनाए गए हैं कि आप जानो। तो. उनको पढ़ो कुछ हम जैसे लोग जो थोड़ा बहुत. पढ़े हैं वह अपना नॉलेज अपना ज्ञान आप तक. पहुंचाएंगे। बाकी खुद सेल्फ स्टडी भी करो. ताकि अगर हम कहीं गलत बोले तो आप रोक सको. कि नहीं यह गलत है।. बहुत-बहुत शुक्रिया।. राधेधे राधेधे।.