Unplugged ft. Chandrashekhar Azad | A New Era for Dalit Politics| Mayawati | Akash Anand | BSP
घंटी तो जा रही. [संगीत]. है हेलो हां जय. भीम मैं चंद्रशेखर आजाद बोल रहा हूं. लोकसभा सांसद बीएसपी ऑफिस का नंबर है मैं. बहन जीी से मिलना चाहता था क्या संभव हो. सकता है जी सर मैं नोट ले रहा सर ले लो जो. भी आप समय दोगे मैं आ. जाऊंगा मैं चाहता हूं कि उनका आशीर्वाद. मुझे एक बार मिले आपको बहन जी का आशीर्वाद. चाहिए आकाश आनंद की कुर्सी.
मायावती से मिले हो आप नहीं कोशिश की आपने. बहुत कोशिश की जैसे आरएसएस बीजेपी के लिए. काम करती है ठीक है वैसे आप क्यों नहीं. काम करते थे बीएसपी के लिए मैंने बहुत. प्रयास किया बीएसपी में कि हम बीएसपी के. लिए मिलकर काम करें शेखर की लड़ाई जो है. वो किस बात की सोशल डिस्क्रिमिनेशन को. लेकर है या रिलीजस लड़ाई है आपका रिलीजन. क्या है आप हिंदू हो बुद्धिस्ट हो. एथिस्टरॉन मैं इंसान हूं मैं सभी धर्मों.
का सम्मान कर फिर भी कुछ तो टिक मारते. होंगे ना जातीय चमार हिंदू अब हां वो भी. उसमें ही है हिंदू उसमें कहने में क्या. अफसोस है आपके पिता जी का नाम गोवर्धन दास. जी है ठीक है वृंदावन का एक बड़ा प्रसिद्ध. पर्वत है गोवर्धन यस है ठीक है आपकी माता. जी का नाम कमलेश जी है और कमलेश जी का. मतलब होता है कमल के भगवान ठीक है मैंने. थोड़ा और आपके बारे में पढ़ा आपकी वाइफ का. नाम वंदना है ठीक है जिसका मतलब होता. स्तुति पूजन आपका नाम चंद्रशेखर है जो. भगवान भोलेनाथ से जुड़ा हुआ है जि जिनके. नाम पर आपने मुश थोड़ा स्टाइल चंद्रशेखर.
जी के जो हमारे स्वतंत्रता सेनानी थे वो. भी एक ब्राह्मण समाज जन में थे जब आपके. परिवार में सभी कुछ हिंदू धर्म से जुड़ा. हुआ है चंद्रशेखर जो है वो इतना एंटी. हिंदू या एंटी ब्राह्मण क्यों हो. गए यह सवाल तो आना चाहिए था ये फोटो आती. है एकदम जवानी एकदम यस कॉलेज की कॉलेज की. हां इस पर मैं बहुत रोल हुआ हूं पहले. चंद्रशेखर टीका लगाते थे अब नहीं लगाते. बदल गए हैं ये आपकी मोटरसाइकिल में दुर्गा. माता की चुंडरी लगी हुई है ये मेरी. मोटरसाइकिल नहीं है बस मैं यही कह रहा था. ये तस्वीर इसलिए चर्चा केंद्र बनती है.
क्योंकि चंद्रशेखर पर य आरोप लगता है कि. चंद्रशेखर संभल पहुंच जाते हैं हाथरस को. एकदम जोर शोर से लगा लेते हैं शाहीन बाग. में एकदम चढ़ जाते हैं जामा मस्जिद के. सामने छाती चौड़ी करके एक नेता दिखता है. लेकिन जब अयोध्या में किसी दलित बेटी के. साथ कुछ गलत होता है तो एक वर्ग कहता है. कि यार वह भी जात देख लेते हैं कि जो. दलितों पर अत्याचार कर रहा है वह हिंदू है. तो आवास लगा दो मुसलमान है तो यह एक. एलिगेशन आप पर आता है वो बेटी दलित समाज. की नहीं थी यह आप क्रॉस चक कर लो इसलिए कह.
रहा हूं क्योंकि आपका रिसर्च कमजोर नहीं. होना चाहिए जो आपने एजाज खान को टिकट दिया. था वो भी पार्टी की थी 150 वोट उनको मिले. लोगों ने कहा 55 मिलियन फॉलोअर थे 150 वोट. मुश्किल क्या था नेता बनना मुश्किल था लॉ. की पढ़ाई करना मुश्किल था या इस देश में. दलित होना ये बड़ा गंभीर सवाल है मैं. समझता हूं दलित होना एक ल लॉ की पढ़ाई. करने से और एक नेता होने से ज्यादा. मुश्किल है मुश्किल है से डरते हो आप भूत. है सबसे जदा तस्वीर ये वायरल होती है ठीक. है कवि इसके जरिए क्या संदेश देना चाह रहा.
अंबेडकर जी की ज्यादा. डिसरेटर एसएस जनसंघ के जुड़े लोगों ने या. कांग्रेस के लोगों ने पंडित नेहरू राजीव. जी को भारत रत्न अंबेडकर जी से पहले देना. सही था या गलत था इस देश में बच्चे दो ही. अच्छे यस या नो आरएसएस के बड़े नेता कह. रहे हैं कि साहब ज्यादा बच्चे पैदा करलो. अब मैं आपका पूछ रहा हूं महाराज अरविंद. केजरीवाल चंद्रशेखर से बड़े अंबेडकरवादी. हैं देश संविधान से चलना चाहिए शरीयत से. नहीं यस या नो वाह भारत का नायक कौन. शिवाजी या औरंगजेब जिन्ना या सावरकर किसकी.
आइडल जीी ने देश को ज्यादा नुकसान पहुंचा. बेहतर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन. रहा बलायम सिंह यादव बहन जी कुछ सोचने की. जरूरत ही नहीं है आपको लगर है इस बार फोन. आ ही जाएगा तो पॉडकास्ट डकास्ट खत्म होते. हु जो फोन मिलाया था आपने मन की मुराद. पूरी हो. जाएगी नमस्कार माफी चाहता हूं आपके. पॉडकास्ट के अनुभव के बीच में मैं आ गया. लेकिन मैं आया हूं आपको बताने के लिए कि. आप चंद्रशेखर आजाद का पॉडकास्ट क्यों.
देखिए दलित समुदाय के मुद्दों की राजनीति. कर संसद तक पहुंचने वाले आजाद समाज पार्टी. के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की. पूरी कहानी इस पॉडकास्ट में आपको दिखाई. पड़ेगी बागी युवा से मंझे हुए राजनेता तक. का सफर जो है वह आपको समझने का मौका. मिलेगा रावण से आजाद बननी कहानी क्या उनका. असली नाम रावण है बहुत सारे सवाल बहुत. सारे तस्वीरें जो सोशल मीडिया पर. चंद्रशेखर आजाद को लेकर वायरल होती हैं. उनके पीछे की कहानी चंद्रशेखर आजाद जिन.
मुद्दों की लड़ाई लड़ रहे हैं उसके पीछे. क्या उनकी सोच है चंद्रशेखर की आइडल क्या. है चंद्रशेखर आजाद को अगर आपको समझना है. तो आपको यह पॉडकास्ट देखना होगा जरूर. देखिएगा और हमें सब्सक्राइब भी कीजिएगा. क्योंकि यही आपकी ताकत होगी जो हमें हौसला. देगी और हम चाहते हैं कि आपका हमारा साथ. बना रहे ताकि भविष्य में ऐसे और दिग्गज. पर्सनालिटी को हम आपके पास लाते रहे और. उनसे हर तीखे और सीधे सवाल पूछते रहे बाकी. जाइए एंजॉय कीजिए उम्मीद करते हैं कि आपका.
अनुभव इस पॉडकास्ट का बहुत अच्छा रहेगा. क्रिकेट खेलते हो आप खेलता हूं बैटिंग या. बॉलिंग. बहुत ज्यादा क्या पसंद है बैटिंग बैटिंग. कैसी गेंदे पसंद है शुरू में टफ पसंद है. रकर या मजा आता है कुछ हल्की गेंदों पर. चौका मारने में शुरू में त सुदा. करके क्रिकेट नहीं खेलता पहली गेंद से. मारना शुरू करते. हो पहले पहली गेंद से मारते थे अब थोड़ा. सा क्योंकि जब प्रैक्टिस नहीं है तो एक दो. बॉल तो देखनी पड़ती बाउंस कैसा है चलो.
शुरू में हम भी थोड़ा मीठा मीठा दे देते. हैं उसके बाद फिर रकर मारेंगे कौन है. चंद्रशेखर पॉलिटिशियन है सोशल एक्टिविस्ट. है लॉयर है अंबेडकरवादी है कौन है बड़ी. चर्चा रहती चारों तरफ हर तरफ से खबरें आ. रही है इंसान है जो मानवता को धर्म मान के. और अपने कांस्टिट्यूशन में ड्यूटी दी गई. उनको पूरी कर रहा. है और मुझे लगता है कि यह भारत के हर. नागरिक को करना चाहिए सिर्फ हमारे अधिकार.
ही नहीं है हमारे कर्तव्य भी अपने देश को. आगे बढ़ाना जिनको मेरी जरूरत है या. वास्तविकता जिनको जरूरत है उनको उनकी उन. तक वो चीजें पहुंचाना जो उनकी जरूरत है और. एक जो लंबे समय से जो सपने देखे. थे जिन्होंने कुर्बानिया द आजादी के लिए. फाउंडिंग जो कशन के जो फाउंडिंग फादर थे. उन्होंने ऐसा देश बने उसी को लेकर ड्यूटी. कर रहा हूं पिताजी आपके प्रिंसिपल थे हां.
प्राइमरी स्कूल में हेड मास्टर थे सरकारी. स्कूल में. यस कभी पीट टे. गए पिताजी से मैं हां बहुत बार किस बात प. खेलने के ऊपर वो चाहते थे कि. मैं उनके जीवन में एक इंसीडेंट. हुआ तो उससे उनके ऊपर बड़ा गहरा असर था व. चाहते थे मैं जज बन ओ क्या हुआ था. उन्होंने किसी को पैसे दिए जिस आदमी को. दिए मुकर गया फिर बस तो जब मेहनत की कमाई.
का पैसा होता तो आदमी को तकलीफ होती है हम. फिर वह कोर्ट गए 15 साल कोर्ट में केस. चलता रहा 15 साल बाद जैसे सा आप ने कहा कि. इसको आपस में बैठ के निपटा लो फैसला कर लो. तो फैसले का जो अमाउंट था वह इतना कम था. कि उससे चार गुना तो मेरे फादर ने पैसा. दिया था मेरे फादर ने कहा कि ऐसे न्याय से. तो फिर किसी का भला नहीं हो सकता तो मेरे. फादर चाहते थे मैं जज बनू हम उनको लगता था. 15 साल एक केस में घूमने से और इतना पैसा. खर्च करने ने से कोई फायदा नहीं तो जल्दी.
न्याय हो और उनमें भी गरीबों को न्याय. मिले तो इसलिए वह चाहते थे कि मैं पढ़ूं. तो जब मैं पढ़ाई छोड़ के खेलने जाता था. उदंड थे. आप नहीं यार ऐसा मत करो देखो जब हम छोटे. होते उदंड बच्चों की मां बाप पीटते हैं. देखो ऐसा. है जो अपने बच्चों को कुछ कामयाब बनाना. चाहते हैं वो पूरी कोशिश करते हैं किसी भी. तरह से उसको. समझाए तो वो अपनी तरफ से पूरी कोशिश करते. थे वो चीजों को समझते थे तब तक हम लोग.
इतने मैचोर नहीं थे हम लोग नहीं समझते थे. आज भी अगर कोई मां या पिता अपने बच्चे को. पढ़ने के लिए कहते हैं छोटे बच्चे को तो. वो उसका बुरा नहीं चाहते हैं या किसी बुरी. चीज से रोकते हैं गलत जगह से रोकते हैं. गलत काम से रोकते हैं तो वो उसका बुरा. नहीं चाहते हैं सही बात है उसमें जानकारी. का भाव होता है उनके पास अनुभव होता है तो. वो कोशिश करते हैं कि ये चीजों को समझ जाए. तो समझाने के लिए कई तरीके होते हैं पहले. डांटते भी हैं फिर डराते भी हैं और फिर. उससे भी काम नहीं चलता तो फिर पिटाई का. नंबर भी आता है मैं मुझे खूब पिटाई क्यों. मेरे फादर टीचर थे तो वो अपने स्कूल में.
भी फेमस थे इस बात के लिए पीटने के लिए. हां कि बच्चे उनसे बहुत डरते थे और उनके. जाने के बाद एक लेटर मेरे पास आया एक. साइंटिस्ट है मुंबई में वो मेरे फादर के. स्टूडेंट थे एक दिन फादर ने उनको इतना. पीटा कि वो घर ना जाके हमारे गांव में वो. होते हैं कूप होते हैं कूप बोलते हैं उनको. उसमें उपले रखते हैं हम हम तो उपले वाले. कूप में जाकर बैठ गया पूरी रात मिला ही. नहीं तो स्कूल के जो उसके जो गार्डियन थे. वो वो पापा के पास आए कि सर बच्चा घर नहीं.
गया क्या कोई बात हुई है क्या तो उन्होंने. कहा कि हां मैंने उसको डांटा तो शक्ति तो. की थी तो अगले दिन सुबह ढूंढा था उस कूप. में बैठे हुए थे तो उन्होंने ये बात मुझे. बताई जब फादर चले गए तो उन्होंने लेटर. लिखा था एक पेन भेजा था पापा के लिए उस. समय पार्कर का पैन तो फिर उन्होंने मुझसे. फोन पर बताया कि आपके फादर अगर मेरे ऊपर. शक्ति नहीं करते तो आज मैं साइंटिस्ट नहीं. होता ब्यूटीफुल तो ठीक है मां-बाप की. शक्ति अच्छी है पिटाई कैसे कैसे हुई थी.
जैसे हमारे हम लोग छोटे थे तो कई पिटाई थी. एक टीचर बीच में पेंसिल या पेन रखते थे. दबाते थे ये स्कूल के टीचर करते थे हां एक. पीछे मारते थे ताकि दिखाई ना पड़े. अच्छा नहीं मैंने बहुत अच्छे कारनामे किए. हैं स्कूल टाइमिंग में. तो उस तरह से तो यह क्लास फिफ सिक्स तक. हमारे य यूज होता था लेकिन पिताजी तो डंडे. से या जिस चीज से पिताजी मारना चाहे तो. पिताजी बड़े सख्त थे पढ़ाई को लेके और कोई. उनका सब्जेक्ट नहीं था सिर्फ पढ़ाई को.
लेकर सखत है उन्होंने संस्कार दिए आज. उन्हीं की वजह से मैं यहां बैठा हूं लेकिन. आप तो बन गए नेता उस बिरादरी में चले गए. जहां करप्शन सबसे ज्यादा ठीक है अब देखिए. प्रकृति ने संतुलन बनाया है अगर सब लोग. बुरे हो जाएंगे तो फिर तो सब खराब हो. जाएगा तो अच्छे भी है बुरे भी हैं एक लाइन. से सबको करप्शन की बात कहना किस किस फील्ड. में करप्शन नहीं आप मीडिया में कहोगे तो. मैं अब पता नहीं आपको अच्छा लगे ना लगे. लेकिन मीडिया में कितना करप्शन हैय से. छिपा हुआ नहीं सही बात है तो इसलिए आप ही.
लोग देते हो नहीं हम पे तो नहीं है देने. आप मैं झूठ आपसे कह दूं ये खबर चलवा दो. सर्वे करवा दो बता दो कि हम जीत रहे हैं. चुनाव के पहले माहौल बना दो बाद में हम गए. थे जहां प्रचार किया हमने यहां यहां. जहां-जहां हम गए वहां वहां जीत. गए ऐसा होता है यह आपने अच्छी जानकारी. मुझे दी तो आपके जरिए हमारे पास आया था ना. मना कर आपके जरिए हमारे. वर्कर और हमारे जो लीडर्स हैं वो देख. लेंगे समझ लेंगे ये सब चीजें भी राज होती. हम राजनीति में नए लोग हैं हमें राजनीति.
की इतनी गहराई से जानकारी नहीं है कि. क्याक होता है तो क्या ज्यादा मुश्किल था. लॉ की पढ़ाई करना लॉ की पढ़ाई की है ना. मुश्किल क्या था नेता बनना मुश्किल था लॉ. की पढ़ाई करना मुश्किल था या इस देश में. दलित. होना यह बड़ा गंभीर सवाल है लो की पढ़ाई. को क्योंकि आपके पिताजी वाली बात सुनकर. मुझे कहीं वो उपेक्षित और बाकी बातों का. एहसास नहीं हो रहा था मुझे लगा कि एक. सामान्य शिक्षक की कहानी सुन रहा हूं मैं. जिसने अपने बच्चों को एक तरह से पढ़ाया. लिखाया और जिसके बच्चे उसका एक ही तरह.
सम्मान कर रहे हैं देखिए ऐसा है लॉ की. पढ़ाई उस समय के समय बहुत कठिन थी हम हम. हिंदी मीडियम के लोग हैं मुझे कहने में. कोई परहेज नहीं है कि हमारी अंग्रेजी बहुत. अच्छी पकड़ नहीं है सच कहने में कोई परहेज. नहीं है तो हम हिंदी मीडियम के हैं और फिर. लॉ की पढ़ाई उस समय एक बड़ा सवाल था लेकिन. पिताजी चाहते थे अब पिताजी के सम्मान की. भी रक्षा करनी थी उनकी भावनाओं की भी तो. की रही बात राजनीति की तो ये एक अल अलग. फील्ड है यहां भारत में राजनीति में हम. आपको 24 घंटे ड्यूटी करनी है रात को 2 बजे.
अगर कोई आपसे बात करना चाहता है और आप. नहीं कर रहे हैं चाहे आप बीमार. हैं चाहे आप डिस्टर्ब है या कहीं भी. ट्रेवल कर रहे हैं तो एकदम से काउंटर. क्वेश्चन य होता है कि भाई बताइए मुझे. मेरी जरूरत प तो नहीं थे तो राजनीति भी एक. तरह का यह बड़ा कठिन दौर है अब समझिए कि. आज कुछ चीज हुई है और उस परे तवरत आपको जो. है रिएक्शन देना है और आप उस समय अवेलेबल. नहीं है सोचे मैं फ्लाइट में हूं कोई बड़ी. घटना घटी और सब लोग उस पर अपनी बात रख रहे. मैं नहीं तो आपको इस से अपना पूरा जो.
स्ट्रक्चर बनाना पड़ेगा कि हर चीज की. इंफॉर्मेशन आपके पास हो और नेता को हमारे. यहां तो नेता कहां होते हैं हमारे यहां तो. नायक होते हैं नेता नहीं होते हमारे य. नायक होते हैं और नेता में भगवान ढूंढता. है आदमी कि यह आ गया है अब यह सब कुछ ठीक. कर देगा और लंबे समय से हमारे नायक पूजा. डॉक्टर अंबेडकर इसके खिलाफ थे उन्होंने. कहा धर्म में नायक पूजा अच्छी बात है. मुक्ति की तरफ आदमी जाता है राजनीति में. नायक पूजा तानाशाही को जन्म देती.
है अभी हम अपने नेताओं को भगवान ही मानते. हैं मैं स्टडी करता हूं दुनिया भर की. पॉलिटिक्स को कहीं आठ घंटे की ड्यूटी के. आधार पर आदमी करता है तो करप्शन नहीं होता. है जब आप 24 घंटे की करते हैं तो आपको. उसका अपना खर्च भी वहीं से चलाना है बहुत. कुछ जो करना है तो फिर आदमी गलत उसमें. जाता ही है तो फिर उसके आपको रास्ते बनाने. पड़ते हैं मैंने आपकी तस्वीर देखी जिसमें. एक तस्वीर थी कि अंबेडकर जी की प्रतिमा. लगी है उनको माल अर्पण है और आप भी ऐसा लग. रहा था कि भगवान की जगह रख दिया गया और आप. पूजा कर रहे हो नहीं डॉक्टर अंबेडकर के. स्थान को मेरे पिछले चीजों का जवाब मैं.
अभी कंप्लीट नहीं कर पाया था मैं इस सवाल. का भी जवाब दे देता हूं मैं कोई काम अधूरा. नहीं छोड़ता तो डॉक्टर अंबेडकर ने जो दिया. है तो वह मैं समझता हूं कि शायद कोई और. नहीं कर पाता अगर कांस्टिट्यूशन में इस. तरह के अवसर नहीं होते और यह देने के लिए. उनको क्या-क्या करना पड़ा है उनके चारचार. बच्चे लड़ाई में जो है इस जंग में चले गए. उन्होंने अपनी पत्नी भी खो दी और किस तरह. की परिस्थितियों में चाहिए देश को डॉक्टर.
अंबेडकर को 22 2 घंटे जाग के उन्होंने जो. है यह इतना सब कुछ स्ट्रक्चर जो है. महिलाओं के लिए कमजोर वर्गों के लिए बना. है यह आसान काम नहीं तो इसलिए डॉक्टर. अंबेडकर को हम उसी तरह नमन करते हैं जिस. तरह मुक्तिदाता को नमन किया जाता है मैंने. कांग्रेस से कई नेताओं से बातचीत की आपके. आने के पहले मैं एक सेकंड लास्ट वाला व कर. दू आपने कहा दलित. होना तो भारत में जाति व्यवस्था है और. यहां पैदा होते आदमी हो जाता है और पैदा.
होते ही नीच हो जाता है य कर्म प्रधान. नहीं है धर्म प्रधान देश है यहां जाति. व्यवस्था उससे पहले वर्ण व्यवस्था इसका. प्रिविलेज भी है और इसका खामियाजा भुगतना. पड़ता है तो जब हम पर किसी का कोई जोड़. नहीं चलता तो वह फिर यही कहता कि आपको तो. यह मिलता है वह मिलता है यह आसान है आपकी. किसी की काबिलियत को सिर्फ उसकी जाति के. आधार पर उसको डैमेज करना उसके करैक्टर को. उसके चरित्र को ये आसान है और क्या सहता. है. वो मैं इसको शब्दों में बन कर सता आज की. घटना के आधार पर मैं बता सकता हूं मैं आज.
बागपत गया. था जितेंद्र नाम के लड़के. ने सुसाइड किया पार्लियामेंट के. सामने हाउस चलेगा तो मैं इसम अपनी पूरी. ताकत लगा दूंगा कि इस पर चर्चा हो क्योंकि. 2021 से उसके साथ एट्रोसिटी हुई और 2024 आ. गया उसको न्याय नहीं मिला उल्टा उसके. खिलाफ दो मुकदमे लिख के उसको जेल भेज दिया. गया उसके पिता की पिटाई हुई एक पिता बेटे.
के लिए हीरोही होता है सही बात है सहमत हो. तो अपने पिता की पिटाई कौन देख सकता है. उसके पिता को पीटा गया उसके पिता को न्याय. मिलने की जगह उसके पिता को ही जो है. दोबारा से जान से मारने की नियत से गाड़ी. उसके ऊपर चढ़ा दी गई तो यहां सत्ता का जिस. तरह का हस्तक्षेप. एडमिनिस्ट्रेशन पुलिस और जुडिशरी में हो. गया वो बड़ा खतरनाक है. तो. यहां मैं समझता हूं दलित होना.
एक ल लॉ की पढ़ाई करने से और एक नेता होने. से ज्यादा मुश्किल है मुश्किल है आदमी मैं. तो मैं तो जाति व्यवस्था का समर्थक नहीं. हूं मैं तो जाति विन समाज का समर्थक हूं. हम अब जब यह सब चीजें चल रही थी अभी. पार्लियामेंट में तो मेरा मेरा एक ही सवाल. था कि अगर सब लोग डॉक्टर अंबेडकर को फॉलो. कर रहे हैं पक्ष और विपक्ष तो मिलके मैं. मेंबर ऑफ पार्लियामेंट होने के नाते हम एक. प्राइवेट मेंबर बिल लेके आता हूं. पार्लियामेंट में ह.
एनिलेशन ऑफ कास्ट के रिगार्डिंग जो बाबा. साहब की किताब है कि अब इस देश में जाति. व्यवस्था समाप्त कर देनी चाहिए उम्मीद है. कि दोनों पार्टियों के सारे मेंबर इस पर. सहमत होंगे इसके प्राइम मिनिस्टर भी और. विपक्ष के नेता भी तो यह बिल पास कर देना. चाहिए अब समय आ गया भारत में जाति के आधार. पर ना किसी को प्रिविलेज मिले ना किसी का. अपमान हो ये दोनों चीजें खत्म करने का समय. आ गया देखते हैं कितने लोग समर्थन करते. हैं चंद्रशेखर दलितों की आवाज बनने की तरफ. कदम बढ़ अब कई लोग ये कहते हैं कि.
चंद्रशेखर ने कहा कि काशीराम जी मायावती. जी ने अच्छा काम किया फिर एक साइडलाइन से. रास्ता निकाल लिया ठीक है अब बहुत लोग ये. सवाल पूछते हैं कि जैसे आरएसएस बीजेपी के. लिए काम करती है ठीक है वैसे आप क्यों. नहीं काम करते थे बीएसपी के लिए या. काशीराम जी की जो पार्टी थी उस सोच के लिए. आपने अपनी अलग लाइन बनाई जो उनको डेंट कर. रही है या बहुजन समाज के वोट को बांट रही. है आप बहुजन समाज की परिभाषा समझते हैं. हां किसे कहते बहुजन समाज हर वो व्यक्ति.
जो उपेक्षित है नहीं ऐसा नहीं उसको हम. लोग शोषित वंचित समाज कह सकते हैं बहुजन. समाज. एक एक समीकरण है जो मान्यवर काशीराम साहब. ने बनाया कमजोर वर्गों के लोगों का हम. संगठन का जिसमें वो दलितों को जोड़ते हैं. पिछड़ों को जोड़ते हैं आदिवासियों को. जोड़ते हैं मुसलमानों को जोड़ते हैं जो. अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक हैं हम कन्वर्टेड. उनको जोड़ते हैं और उनको जोड़ के वो यह. कहते हैं कि 85 पर लोग हैं जो भारत में.
अन्याय का अत्याचार का जुल्म जाति का. सामना कर रहे हैं और जिनके साथ रिसोर्स. में भेदभाव हुआ. है और यह बात फैक्ट भी है फैक्ट इसलिए. है कि 14 अगस्त 1947 को हम लोग अंग्रेजों. के अधीन थे 15 अगस्त 1947 को हम लोग आजाद. हुए तब देश में कांस्टिट्यूशन नहीं था. हमारा उससे पहले जो जो भी ग्रंथ रहे हो.
जिस तरह जो भी उस समय का कांस्टिट्यूशन. रहा उसके हिसाब से देश चलता था उसमें बहुत. सारी पाबंदियां थी जिनमें अंग्रेजों ने भी. बहुत कुछ सुधार करने का प्रयास किया जिनको. हम लोग डिनायर सकते तो सूरत क्या थी आजादी. की 16 अगस्त 1947 को क्या बदला सोचे मेरी. जेब में 14 तारीख को रप थे तो क्या 16. तारीख को मेरे रुपए बढ़ के 1000 हो गए. नहीं सोचे 14 तारीख को मेरे पास एक गज. जमीन नहीं थी तो 16 अगस्त को मुझे क्या. मिला क्या मेरे पास एक बिघा जमीन आ गई. नहीं सोचे 14 तारीख को मेरे पास रोजगार.
नहीं था तो क्या 16 तारीख को मेरे पास. रोजगार आ गया सोचे 14 तारीख को मेरे पास. उद्योग नहीं था तो क्या 16 तारीख को मेरे. उद्योग आ गया तो आजादी के साथ जो साधन. संसाधन उनमें भी बंटवारा होना चाहिए था और. एक ऐसा सभ्य समाज बनता जिसमें आर्थ. सामाजिक तौर के साथ-साथ संविधान ने तो. सामाजिक तौर पर बराबरी की बात की है लेकिन. आर्थिक तौर पर. भी एक बराबरी की का प्रयास होता जिसका. डॉक्टर अंबेडकर ने जिक्र किया संविधान ते. हुए कि आज हम 26 जनवरी 1950 को विरोधाभास.
की जिंदगी में कदम. रखेंगे. राजनीत संविधान की वजह से राजनीति में ट. वन वोट वन वैल्यू तो राजनीति में तो हम. लोग बराबर होंगे लेकिन सामाजिक और आर्थिक. रूप से जो गैर बराबरी जब तक हम लोग इसको. दूर करने का प्रयास नहीं करेंगे यही बात. तो मायावती जी भी कह रही है यही बात तो. काशीराम जी भी कह र थे यही बात तो आनंद भी. कह रहे हैं तो फिर ये अलग अलग क्यों हां. तो उन्होंने कहा हा कि हम सबको मिलके. प्रयास करना चाहिए कि देश में सामाजिक और.
आर्थिक गैर बराबरी दूर हो तो बाबा साहब ने. अपनी लास्ट टाइम जो पार्टी बनाई यडी का. पार्ट है उन्होंने कई पार्टियां बनाई जैसे. उन्होंने शेडल कास्ट फेडरेशन बनाई. उन्होंने लेबर पार्टी ऑफ इंडिया बनाई फिर. उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया. बनाई तो उनकी पार्टी तो रिपब्लिकन पार्टी. ऑफ इंडिया थी फिर मान्यवर काशीराम साहब. क्या उनके विरोधी थे जो उन्होंने अलग से. बनकर बीएसपी. बनाई यह समझना पड़ेगा. आरपीआई के लोगों ने तय किया कि हम काशीराम.
साहब के जरिए कोई काम नहीं चाहते और हम. काशीराम साहब से ज्यादा समझदार हैं या हम. ज्यादा अच्छी तरह से मूवमेंट को चला सकते. हैं काशीराम बे फालतू में बे फजूल में. अपना दिमाग उलझा रहे है उनको कोई अनुभव. नहीं तो इनके जरिए नहीं करेंगे निराश होके. काशीराम साहब दिल्ली आए दिल्ली में आकर. अपनी जेब से जो पैसा था उस पैसे से एमसीडी. का चुनाव लड़ाया 25 सीटों पे सबकी जमान. जप्त हो गई हार नहीं मानी. फिर बाम से. डीएस फर डू यू नो डीएस फ सुना है हा दलित.
शोषित समाज संघर्ष समिति इसके बैनर पर. चुनाव लड़े फिर उसके बाद लगा कि नहीं. सिर्फ दलितों से काम नहीं चलेगा फिर बहुजन. समाज बनाया फिर बहुजन समाज पार्टी बनाई. फिर 85 पर लोगों को जोड़ा तो काशीराम साहब. से जोने किया जो उन्होंने किया वही मैंने. सीखा मैंने बहुत प्रयास किया बीएसपी में. कि हम बीएसपी के लिए मिलकर काम करें आप. 2017 से पहले पता कर लेंगे 2017 में भी. इलेक्शन में आप पता कर लेंगे मैं हाथी. वाला झंडा लेकर घूम रहा हूं बीएसपी नेताओं.
के साथ आप कभी आओ मेरे यहां पे रिसर्च. करना चाहिए हर व्यक्ति के बारे में तो वह. बता देंगे कि मैंने आखिरी समय पर बीएसपी. का झंडा घर से कब उतारा हम लोगों ने बिना. किसी स्वार्थ के काम किया लेकिन जब अब फिर. यह भी समझो मैं आज आपके सामने स्पष्ट तौर. पर कह रहा हूं हम कोई भी सामाजिक मूवमेंट. तब तक आसानी से कामयाब नहीं हो सकती जब तक. कि उसके पीछे कोई पॉलिटिकल सपोर्ट ना हो. हम आज आरएसएस को ही के पीछे से आप बीजेपी. का बैक सपोर्ट हटा दो तो आरएसएस के लोग.
जिस विचारधारा को लेकर जाते हैं तो उनके. विरोध में बहुत सारे लोग होंगे तो उनको. मार पड़ेगी सड़क पे उन परे मुकदमे होंगे. जहां उनके विरोधी विचारधारा के लोग उनको. भेज देंगे जेल कुछ लोग मर जाएंगे कुछ लोग. जेल में सड़ जाएंगे कोई पूछने वाला भी. नहीं होगा जब भीम आर्मी के लोग यही काम कर. रहे थे जो आप चाहते थे जो आपने कहा तो. हमसे ये सवाल पूछा गया आप ही के हिताशी. लोगों ने पूछा उसको वो कर मैं उसी की बात. कर रहा हूं उ अब मैं आप में उन्हीं का. जवाब दूंगा ना तो जब हमने ये काम किया. किया तो हमें भी बैक सपोर्ट की जरूरत थी.
हम 17 में जेल में गए 16 महीने जेल में. रहे एक आदमी हमारे साथ नहीं खड़ा था मैं. मेरे कले की बात होती तो मैं सह लेता ऐसे. बहुत सारे बच्चे थे जिनको पीटा गया करंट. तक लगाया गया पुलिस ने बहुत जुल्म किए और. हमारे नेताओं ने कहा कि इनका हमारा कोई. मतलब नहीं तो एजेंट है फलानी पार्टी के इस. तरह के एक लाइन कहके खत्म कर. दिया बहुत दिनों तक 2019 में मैं बाहर आया. 18 में बाहर आया 2019 में लोकसभा का चुनाव. हुआ मैं आज आपको ऑन रिकॉर्ड आप ग पर सर्च. कर लो 13 जनवरी 2019 को हमने रैली की.
बीएसपी समाजवादी आरएलडी अलायंस डिक्लेयर. हो गया था हमने रैली करके कहा कि हम पूरे. देश में इस अलायंस के लिए प्रचार करेंगे. हम इनको समर्थन मैं 2019 तक की बात कर रहा. हूं आप चेक कर सकते हैं मेरी एक अच्छी बात. यह है कि मैं झूठ नहीं बोलता हूं जो कहना. होगा कह दूंगा तो 2019 में जब इनको सपोर्ट. कर दिया तो फिर हमारे लोगों ने कहा कि. आपको भी लड़ना चाहिए मैंने कहा कि मैं. प्राइम मिनिस्टर के खिलाफ लडूंगा तो मैंने. यही 15 मार्च को घोषणा की कि मैं प्राइम.
मिनिस्टर के खिलाफ ल जनवरी में हमने इनके. फेवर में कर दी और 15 मार्च को हमने यहां. काशीराम साहब की जन्म जयंती के अवसर पर. जंतर मंतर पर ऐलान किया तो बेंजी ने एक. ट्वीट किया कहा कि. चंद्रशेखर यह फलानी पार्टी से जो है. रिलेटेड है देखिए मोदी जी को जिताने के. लिए चले गए क्योंकि ये कुछ वोट काटेंगे. उससे मोदी जी को फायदा होगा ये बहुजन समाज. के वोट काटेंगे तो मैंने कहा चलो भाई इसको. भी छोड़ो यार काई को मोदी जी को फायदा. करना तो मैंने उसको चुनाव को विड्रॉ कर. दिया फिर भी लगातार और उनके लोग और वो.
लगातार जैसे मैं दिल्ली में पकड़ा गया तब. पार्टी में नहीं थी एनआरसी का आंदोलन था. कोई पूछने वाला नहीं था सारे मुस्लिम भाई. परेशान थे तो मैं आंदोलन में चला गया तो. बीजेपी मेरे खिलाफ नहीं कुछ कर पाई बन जीी. ने ट्वीट किया कि चंद्रशेखर चले जाते हैं. चंदे के लिए अब य यूपी में तो प्रोटेस्ट. करने दिल्ली में जाके कर रहे हैं तो मैंने. सोचा कि यार मैं मैं तो उनसे लड़ नहीं रहा. हूं वो तो मुझसे लगातार लड़ रही हैं फिर. हमारे लोगों ने तय किया और यह बात चर्चा. हुई दो-तीन दिन चार दिन पांच दिन की बोस. ये जो लोग लड़ रहे हैं आज जमीन पे पाठशाला. खोल रहे हैं. अन्याय होता है जाकर आंदोलन करते मुकदमे.
लगते कोई नहीं सुनता है तो हमें अब. राजनीतिक दल बना लेना चाहिए मैती से मिले. हो नहीं कभी मुलाकात नहीं नहीं कोशिश की. आपने बहुत कोशिश की एक कोशिश कहोगे तो. आपके यहां भी कर लेंगे मैं आप कहोगे तो. मैं फोन उठा लूंगा अभी मुझे कई लोग कहते. हैं कि आप अखिलेश जी से मिलने जा सकते हो. राल जी से हा ये बहुत सवाल आया था कि. ओवैसी से लेकर आप सबसे मिल सकते हो. मायावती से क्यों नहीं मिलते आपने मुझसे. कैसे टच किया सोशल मीडिया टीम के जरिए फोन. के जरिए के ज तो मैं अपना फोन मंगाता.
हूं हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे. को फारसी क्या मैं मंगा देता हूं अभी उनके. नंबर पर कॉल करता हूं और अभी आपके सामने. कहूंगा हम मेरे पास रिकॉर्डेड है बहुत. सारी चीजें हम आपके जो दर्शक है उनको पता. लग जाए मैं कहूंगा कि मैं चंद शेखर आजाद. बोल रहा हूं मेंबर ऑफ पार्लियामेंट और मैं. आपसे मिलना चाहता हूं आप मुझे समय बता दो. एक दिन दो दिन 10 दिन महीना दो महीने आप. बता दो बुलाओ फोन म मेरा फोन दे दो आप. अपने ऑफिस से एक नंबर निकलवा दो आप कहो कि. और नंबर मिला दिया होगा आप ही निकाल दो ग.
प उनके ऑफिस का नंबर और मुझे फोन दे दो. मेरा कोई भी एक फोन दे दो मैं भी आप अपने. फोन से करूंगा आपको यह भी ना रहे यह देखो. प्रैक्टिकल है अभी मुझसे किसने 6 दिसंबर. को य कहा आप में से कोई निकाल देना ग प. बीएसपी पार्टी के जो ऑफिस है वहां का नंबर. तो उसने कहा कि बॉस आप क्यों नहीं जाकर. मिलते मैंने कहा बस वो लीडर है मैं बिना. परमिशन के कैसे जा सकता हूं मैं मैं फोन. करता हूं उधर से कोई रिप्लाई नहीं आएगा तो. मैं क्या कर सकता हूं मैंने इस पर भी जब. लोगों से पढ़ना शुरू किया और बीएसपी के.
लोगों से बातचीत हाला फोन आ गया है तो फोन. मिलाने के बाद ये वाली मैं आपको बात. बताऊंगा कि बीएसपी के लोग आपके बारे में. क्या सोचते हैं ठीक है या जो बीएसपी के. हार्डकोर वोटर है वो नंबर भी दे दो अपने. आप से ही कहोगे किसी का ऐसा ई नंबर मैंने. मिला दिया जी जी यह मेरे नेचर को सूट नहीं. करता मैं वही नंबर मिलाऊंगा जो आप. दोगे यही एक तरीका है बात करने का हां. हां इस बहाने कम से कम बात तो पहुंची. जाएगी मायावती जी तक कई बार पहुंची है एक. बार तो लास्ट टाइम उनके उनके आ से इसने. फोन उठाया मैंने उसको डांट.
[संगीत]. दिया कि मुझे दे. दो यह आप इन्हीं की तरफ से हो ना कभी ऐसा. हो कि मेरे ही लोग खड़े होकर कह रहे हैं. तो मैंने उनसे कहा कि बस मुझे ऐसा लगता है. कि आप नहीं चाहते कि मेरी और बहन जी की. बात हो जाए तो आप ऐसा कर रहे हो तो. उन्होंने एक लाइन मुझसे कही वो बस लास्ट. फोन था मेरी तरफ से उस तरह से कि हम बहन. जी के यहां काम करते हम वही करते हैं जो. बहन जी कहती है हम अपनी तरफ से कुछ नहीं.
करते कोई नहीं कोशिश हम भी ट्वीट के ज. डालेंगे मायावती जी को भी टैग. मारेंगे घंटी तो जा रही. है हेलो हां जय. भीम मैं चंद्रशेखर आजाद बोल रहा हूं. लोकसभा. सांसद मैं चंद्रशेखर आजाद बोल रहा हूं. लोकसभा सांसद नगीन. जी सर आप ठीक हैं जी सर बीएसपी ऑफिस का.
नंबर है जी सर मैं बैन जीी से मिलना चाहता. था क्या संभव हो सकता है आप मेरी बात. पहुंचा दो उन तक जी सर मैं नोट ले रहा सर. ले लो ठीक सर मैं आपकी बात नोट की ले रहा. सर चंद्रशेखर आजाद जी नंबर सर यही है हा. यही नंबर है मेरा पर्सनल है जी सर जो भी. आप दोगे मैं आ जाऊंगा ठीक सर ठीक मैं.
दोबारा फोन करके पूछूं या आप लोग खुद कॉल. कर. देंगे नहीं सर हम बताएंगे सर अच्छा ठीक जी. सर जयर जय. भीम ठीक है आपने कॉल किया दुनिया ने देखा. सोशल मीडिया के जरिए बात पहुंच जाएगी इससे. बड़ा उदाहरण तो कुछ नहीं हो सकता नहीं अब. इसमें एक दूसरा वर्जन बता हूं मैं जो. बीएसपी के लोगों से मैंने बात की आपके आने. के पहले थोड़ी बहुत रिसर्च हमने भी मैं. चाहता हूं कि उनका आशीर्वाद मुझे एक बार. मिले और और मेरी एज के साथ जो मेरा अनुभव. है मुझे वो काम करके दिखाने का मौका मिले.
क्योंकि मैं जब उस जुल्म को देखता हूं मैं. परभनी से लौटा हूं कल रात वहां सोमनाथ. सूर्यवंशी नाम के लड़के को पुलिस ने पीट. पीट के मार दिया हम और वहां मैं जिन. महिलाओं से मिला आप नहीं देख पाओगे उनकी. बॉडी पर कोई फाट नहीं है महिला होने के. बाद जहां जूतों से पुलिस ने और मेल पुलिस. कर्मियों ने नहीं पीटा 14 साल की बच्चियों. को एक डेढ़ साल की डिलीवरी वाली महिलाओं. को इतना पीटा है बहुत सारे लड़के मिले हाथ. टूटा हुआ है पैर टूटा हुआ है पैर की हड्डी.
तोड़ दी है मैंने पूछा कि जेल जाकर डर लगा. क्या तो बोलते कि नहीं अपनी मैंने कहा. हिम्मत है बोले दोबारा लड़ लोगे बोले हां. आप समझो ना इतना जुल्म तकलीफें देखता हूं. तो मैं सोचता हूं मैं अगर मैं अपने लिए. काम कर रहा होता तो आप सोचो आज कि पार्टी. क्यों बना था कितना आसान था कि मैं किसी. और पार्टी का मेंबर बन जाता और वहां से. चुनाव लड़ने का मौका अब नहीं तो 10 साल मि. अच्छा सवाल पूछता आपको बहन जी का आशीर्वाद. चाहिए या आकाश आनंद की कुर्सी. आकास किस कुर्सी पर है आज क्योंकि लोग मान.
रहे सक्सेसर वही है मायावती जी के बाद आगे. वही संभालेंगे देखो फिर मैं आपको बता और. आपके और मायावती जी के विरोध की भी जो. चर्चाएं चलती है उसमें भी यही बात आती है. कि आप अगले अंबेडकर जी बनना चाहते हैं या. नेक्स्ट मायावती काशीराम मायावती अब बीच. में सब हटा दो जिंदगी भर की उनकी मेहनत. पूरी आपको समर्पित कर दो अच्छा यह बताओ आज. वो. किस पायदान प है बताओ वोट बैंक तो उनका है. ना भले ही हार रही है लेकिन मैं इसको ना. नहीं कर रहा हूं वोट तो पाती है सत्ता में.
तो नहीं है ना हां सत्ता में नहीं है तो. जो भी आएगा उसको काम करना है ना हम जब वो. अपने 102 साल लगाएगा तभी तो कुछ आगे बनेगा. हम एक बात रही बात दूसरी बात फिर यह सोचो. कि जैसा आपने कहा कि साहब मुझे कुर्सी. चाहिए तो आप बताओ मैं अपने यहां कुर्सी पर. बैठा ही तो हूं हम नहीं ये कुर्सी अलग. उसका जनाधार अलग उसकी लेग अलग है हां ये. बात मैं आपके मुंह से सुनना चाह रहा हूं. मैं भी तो इंतजार कर रहा था कि आप बोलो तो. लगसी आप समझते हो हां डॉक्टर अंबेडकर की.
ने जिनको गुरु कहा उनका नाम था. राष्ट्रपिता ज्योतिबा फूले हम वो. महाराष्ट्र में पैदा हुए हम बाबा साहब. मध्य प्रदेश में पैदा हुए हम उनकी मूवमेंट. को आगे बढ़ाने वाले बीपी मौर्य यहां. गाजियाबाद से उन्होंने काम किया हम और. बहुत बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने वाले. मान्यवर काशीराम साहब वो पंजाब में पैदा. हुए हम और फिर उसको आगे बढ़ाने वाली बहन. जीी गौतम बुद्ध नगर में पैदा हु इनमें कोई. रिलेशन बताओ आप मुझे पारिवारिक.
रिलेशन प्रदेश का भी सि प्रदेश में भी वो. नहीं डिस्ट्रिक्ट एक डिस्ट्रिक्ट के रहे. हो हम तो आप ये समझो कि ये लगसी है आप. जबरदस्ती इस आंदोलन को जो बढ़ रहा था उसको. रोकना चाहते हो सिर्फ. इसलिए कि आपके परिवार में आप किसी को. कुर्सी सौंपना चाहते. हो या यह तरीका हो सकता है कि आपका स्टाइल. अलग. है स्टाइल में क्यों कह रहा हूं स्टाइल. में क्यों कह रहा हूं बोलन मैं बोलो मुझसे. बहुत सारे बीएसपी वालों ने कहा कि.
चंद्रशेखर का स्टाइल अलग है जो बाकी बहुजन. समाज के लोग हैं हम वो संविधान को सब कुछ. मानते हैं ठीक है अगर कहीं पुलिस प्रशासन. ने कोई नियम कायदा कानून तय कर दिया वो. हिंसक आंदोलन कभी नहीं करते हैं आप अगर. लेगासी पुरानी देखोगे चंद्रशेखर की शुरुआत. बिल्कुल उल्टा होती है वो जहां जाते हैं. वहां उत्पात मच जाता है जहां जाते हैं. वहां बवाल मच जाता है फिल्मी स्टाइल के. एकदम हीरो की तरह इनकी एंट्री होती है और. एकदम माहौल बना के कि एकदम बॉलीवुड की. फिल्म है वो आंदोलन से ज्यादा तड़क भड़क. वाला मिजाज लगता है अच्छा अब मुझे यहां.
डिफरेंसेस आते हैं मकसद भले एक हो लेकिन. स्टाइल बड़ा अलग है वो गर्म दल नरम दल. वाला हिसाब किताब हो चलो ठीक है मुझे फर य. मुझे सब आप यह बता दो अपने शब्दों. में कि मैंने कौन सा एंटी कॉन्स्टिट्यूशन. काम किया. है मैंने ऐसा क्या किया है जिसको आप कह. सकते हो कि यह संविधान की मर्यादा में. नहीं था आपने रिसर्च किया होगा अगर मैंने. कुछ भी ऐसा किया है प्रोटेस्ट करना क्या.
कांस्टिट्यूशन राइट नहीं देता है देता है. पुलिस कहां कहेगी आपको कि आप प्रोटेस्ट कर. लो और सरकार के खिलाफ कर लो और हम करने. देंगे तो आपके जो पीछे जितने लोग थे उनका. स्टाइल आपसे जुदा क्यों हो गया फिर कैसे. हो गया मायावती जी से लेकर काशीराम जी से. लेकर बाकी सबका जो स्टाइल था प्रोटेस्ट. करने का वो आपसे इतना अलग कैसे है चलो चलो. आप ये बताओ आज जो बीजेपी सत्ता में है. उनके एक बड़े नेता ने कहा कि हमें आरएसएस. की जरूरत नहीं है इसी लोकसभा चुनाव से. पहले कहा नहीं. कहा उनके पूरे पीछे की लगसी आरएसएस को सर.
माथे रखती रही वो भी दबे सौर में उनके. बड़े से बड़े नेता भी आरएसएस की बात को. मानते हैं आप मुझे बताओ सोचो समय क्या है. आज का दौर क्या है आज जनता यह चाहती है कि. अगर उनके साथ कोई बात हुई है तो उनका नेता. उनके बीच में आए उनको सुने उनके लिए आवाज. उठाए आज मेरे आने के बाद अंबेडकर जी. काशीराम जी जी आवाज एक. सेकंड मेरे आने के बाद यह हुआ है जो कोई.
नहीं करता था वो आज होता है हर आदमी किसी. पीड़ित परिवार से मिलने जाता आप इसको चेक. कर लो मैं ऑन रिकॉर्ड कह रहा हूं जब से. हमने ये स्टार्ट किया है तब से हमसे. बड़े-बड़े नेताओं ने सीख लेक किया है पहले. तो घर से बैठ के मीडिया के जरिए कह देते. अब जाते हैं अब दो अब मैं उसका उदाहरण. बताता हूं हम मैं संभल गया. हम तो सब लोगों ने कहा कि हमें भी संभल. जाना है संभल जाना है संभल जाना. है मैं हाथ रस गया तो सब लोगों ने कहा. हमें भी हाथरस जाना है हाथरस जाना है. हाथरस जाना है मैं जिस जगह जाता हूं वहां.
फिर बाकी पार्टियों के लोग भी जाते हैं और. अब हमारे हमसे सीख लेके जिस पार्टी की बात. उन्होंने ट्रेंड बदला है पिछले 10 साल का. में उनके दो कोई दो आंदोलन आप बताइए न. रिकॉर्ड कह रहा हूं और पिछले एक साल में. उनके दो आंदोलन मैं आपको अभी बता दूंगा एक. अभी किया उन्होंने और एक दिन कुछ दिन पहले. जब वर्गीकरण का वो आया था ऑर्डर तब. उन्होंने किया वो तो कभी नहीं करते थे तो. आप क्यों ट्रैक बदल के चंदक के पीछे आके. खड़े हो रहे हैं आप तो कभी आंदोलन नहीं. करते थे आपके लोग सड़कों पर निकलते थे अब. क्यों किया पिछले दो साल में क्योंकि जिस.
फॉर्मूले से हम काम कर रहे हैं उस. फॉर्मूले से लोगों के अंदर विश्वास बढ़. रहा है और हम वो काम कर रहे हैं जिससे. लोगों का विश्वास बढ़ा लोकतंत्र में जब. लोगों का विश्वास बढ़ेगा लोग आपसे उम्मीद. करेंगे तभी तो आप ताकतवर होंगे देखिए आपने. अपने शब्दों में बता दिया कि मायावती जी. आप में क्या अंतर है और क्यों आपको साथ. नहीं ले रही है आपने अब बात कही एक सवाल. में कि बाबा साहब और काशीराम जी देखो काशी. आपको नहीं पता क्या आपको नहीं पता रिसर्च. आप मुझ पर किया हो काशीराम साहब जेल गए. हैं. काशीराम साहब जेल गए हैं उन्होंने आंदोलन.
किए उन्होंने मंडल कमीशन के लिए यहां वोट. क्लब प 40 दिन से ज्यादा धरना किया था मैं. तो उनसे सीख ले रहा हूं हम उन्होंने शराप. भट्टी बंद कराने के लिए उन्होंने आंदोलन. किया जेल में रहे मैं तो उनसे सीख ले रहा. हूं उनके नेता अगर भूल गए तो मैं क्या. करूं कि उन्होंने तो कहा कि सत्ता संघर्ष. से मिलती है और संघर्ष घर में बैठ के. थोड़ा सड़कों प होता है तो मैं तो उनसे. सीख लेख कर रहा हूं मेरे नए साल का पहला. दिन कहां शुरू हुआ भीमा कोरे गांव में हम. परिवार के साथ नहीं समाज के साथ 10 लाख. लोगों की भीड़ में नमन करते हुए अपने. इतिहास को. दो तारीख कहां शुरू हुई परभनी में जहां.
सोमनाथ के परिवार को मार दिया और विवेक वो. काडे जी जो हैं वह इस पीड़ा से शहीद हो गए. तीसरे दिन की शुरुआत कहां हुई अब मैं शाम. के समय आपके पास बैठा हूं लेकिन मैं गया. बागपत के परिवार से मिलने के लिए जहा एक. परिवार पर हमला हुआ जहा महिलाओं को चोट. लगी जो मेरा इंतजार देख रही थी और जहां एक. लड़के ने पार्लियामेंट के सामने सुसाइड कर. लिया क्योंकि उसको न्याय नहीं मिल रहा था. चौथे दिन की शुरुआत कहां होगी मैं कानपुर. जाऊंगा उरई आप समझो ना मैं अपनी ड्यूटी कर. रहा हूं और मैं कि किसी का कोई नुकसान. नहीं कर रहा हूं मैं अपना किस बात की.
लड़ाई चंद्रशेखर की लड़ाई जो है वो किस. बात की सोशल डिस्क्रिमिनेशन को लेकर है या. रिलीजस लड़ाई है नहीं रिलीजस पर मेरा कोई. कोई लड़ाई किससे है ही नहीं है मैं इस पर. कोई बहुत कभी सुन ना मैं मीडिया पर बात. करता हूं और मैं एक लाइन इसको नकार देता. हूं मैं कहता हूं कि यह आदमी का व्यक्तिगत. है कोई किसी जाति में पैदा हो किसी धर्म. पैदा हो के अपना धर्म बाद में बदल सकता है. तो रिलीजस पर मैं कभी कोई बहस नहीं करता. हां सोशल. डिस्क्रिमिनेशन ये अब तो बंद होना चाहिए. देखो संविधान क्या कहता है संविधान का. आर्टिक कल 14 15 16 177 19 और 51 तक जहां.
तक आपकी ड्यूटिया स्टार्ट नहीं होती वो. आपको वो हर तरह की गैर बराबरी को नकारते. हैं तो आपका आपका रिलीजन क्या है आप हिंदू. हो बुद्धिस्ट हो. एथिस्टरॉन टिक कर देता हूं बट प्रैक्टिकल. लाइफ में कुछ तो लिखते होंगे ना आप एक्टर. में और वर्कर में फर्क होता है आपका. स्टाइल पॉलिटिक्स का एक्टर वाला ही है अवि. के आपके देखने के चश्मा है मैं क्या कर. सकता हमने देखी है ये अलग बात है कि उसम. हीरो मर गया था आप जिंदा हो गोली तो मैंने.
भी खाई आर्टिकल 15 मैं आपसे य कह रहा हूं. देखो मैं जाति के आधार पर सेडल कास्ट में. क्योंकि हमने तो बना एक जाति है चमार. जिसको हम यहां वेस्ट में जाटव कहते हैं. मैं उसमें पैदा हुआ हूं एक बात हिंदू अब. हां वो भी उसमें ही दूसरी बात हिंदू उसम. कहने में क्या अफसोस है जिसम पैदा हु एक. मिनट पूरी कर. दूं दूसरी हमारे यहां शुरू से सतगुरु. रविदास जी महाराज जो.
हैं वह जो कल्चर है वह एक बहुत बड़ी लगसी. है उसको हम लोग फॉलो करते हैं हमारे उनका. गुरु घर. है और हम उन्हीं की वाणि के आधार पर जो. गुरु ग्रंथ साहिब में भी हैं हम उन्हीं के. आधार पर अपनी परंपराओं का निर्वाहन करते. हैं हमने बचपन से ही सीखा है ठीक है हम. भगवान बुद्ध को भी मानते हैं और हम किसी. धर्म का तिरस्कार नहीं करते लेकिन जो धर्म. हिंदुस्तानी ऐसे ही करते हैं जो धर्म गैर. बराबरी की बात करता हूं जिस धर्म में ऊंच. नीच हो जो.
धर्म लोगों के अंदर कमिया ढूंढता. हो जिस धर्म में कुरीतियां हो मैं उससे. खुद से उसको रिले रिलेट करूं यह मैं इससे. मैं सहमत नहीं किस धर्म में भेदभाव नहीं. है किस धर्म में कुरीतिया नहीं है नहीं. हमारे य नहीं मैं पूछना चाह रहा हूं आपसे. क्योंकि आप आप कह रहे हो कि मैं सोशल. जस्टिस की बात कर रहा हूं ऑफ क्यूरिसिटी. हं किस धर्म में भेदभाव नहीं है जातिगत. आधार पर नहीं हमारे यहां नहीं है. रविदासिया उसमें नहीं है आप पढ़ लेना देखो.
मैं उनकी एक वाणी आपको बता देता हूं वो. कहते हैं ऐसा चाहूं राज में जहां मिले सब. अन्नु अन्न हम और छोट बड़े सब संभ से. रविदास रहे प्रसन्न हम ये उनकी एक ऐसी. वाणी है साकार जो निराकार लंबे समय से चली. आ रही है इसका अर्थ यह है कि मैं ऐसे राज. की कल्पना करता हूं जहां कोई ऊंचा नीचा ना. हो जहां कोई छोटा बड़ा ना हो जहां कोई. भेदभाव ना हो किसी के को कोई डर ना हो. किसी की हत्या ना हो किसी का लूटपाट ना हो. किसी बहन बेटी का अपमान ना हो. और खाने के लिए सबको अन्न की तन ढकने के.
लिए कपड़े की सर ढकने के लिए छत की. व्यवस्था मैं ऐसे राज व्यवस्था उसको. उन्होंने नाम दिया बेगमपुरा राज में अपने. ट्वीट में लिखता हूं नए साल प कि बेगमपुरा. राष्ट्र मनाएंगे बेगमपुरा का मतलब होता है. वो हिंदू राष्ट्र मुस्लिम राष्ट्र उस जैसा. नहीं है ठीक है वो है बेगम का मतलब होता. है बिना गम का राज जहां किसी की जिंदगी. में कोई गम ना अब आप मुझे बताओ इसमें कौन. सी गैर बराबरी है नहीं ठीक अच्छी बात है. मेरा आगे के सवाल में आता हूं तो आपने कभी. हिंदू धर्म की रीति रिवाज फॉलो किए देखो. हमने कहा ना बचपन से हमारे यहां नहीं बचपन. एक तो होता स्कूल लाइफ का एक होता थो जवान.
थोड़ा जवान हो किया कभी आप सुनिए 2006 में. मेरे फादर ने मुझे बुलाया कि बस ये अपने. साथियों को लेकर यहां आ जाओ मैंने क्या. हुआ तो बोले य य बताऊंगा आओ जल्दी तो घर. से एक लाठी थी वो लेके आया. मैं तो मेरे फादर ने कहा कि आज हमारी शभ. यात्रा है सतगुरु रविदास जी महाराज की. लेकिन पुलिस के लोग कह रहे हैं कि ये पहली. बार निकल रही है हम इसको परमिट नहीं. करेंगे तो आज इसको निकलवाने की जिम्मेदारी. आपकी है यह लाठी पकड़ो ये समाज की सुरक्षा. की लाठी है. तो मैंने कहा कि अगर कोई चूक होगी तो बोले.
आज के बाद नहीं निकलेगी पुलिस उसमें लिख. देगी कि शोभा यात्रा निकली और कोई परेशानी. हुई इसलिए यह दोबारा नहीं निकलनी चाहिए तो. आज आपकी जिम्मेदारी कि जब तक गुरुघर ना. पहुंच जाए तब तक आप अपने साथियों के साथ. यहां से हिलंग नहीं क्योंकि हमारी माता. बहने सब लोग हैं वो दिन है और आज का दिन. है मैं 2006 की बात आपको कर रहा हूं 24 चल. रहा है आज तक उस परंपरा को हम लोग. निर्वाहन कर रहे और 2006 में मैं मेरा. मेरा 12थ हुआ था 12थ को पास कर आउट हो गया. था मैं मेरे याद अच्छी तरह से 12 के बाद. से आपने हिंदू धर्म फॉलो नहीं किया हां.
नहीं मैंने फिर मैं आपसे कह रहा हूं क्यों. फॉलो करना किसी चीज को नहीं बड़ा. इंटरेस्टिंग चीज मुझे दिखा बताता हू क्या. आपके पिताजी का नाम गोवर्धन दास जी है ठीक. है वृंदावन का एक बड़ा प्रसिद्ध पर्वत है. गोवर्धन यस है ठीक है आपकी माता जी का नाम. कमलेश जी है कमलेश जी का मतलब होता है कमल. के भगवान ठीक है मैंने थोड़ा और आपके बारे. में पढ़ा आपकी वाइफ का नाम वंदना है ठीक. है जिसका मतलब होता है स्तुति पूजन फिर. हिंदू धर्म से जुड़ा हुआ आपका नाम. चंद्रशेखर है जो भगवान नाथ से जुड़ा हुआ. है. ठीक जिनके नाम पर आपने मुश थोड़ा स्टाइल.
चंद्रशेखर जी के जो हमारे स्वतंत्रता. सेनानी थे ठीक है वो भी एक ब्राह्मण समाज. जन में थे तो बहुत सारे लोग मुझसे सवाल. लिख के भी भेजा लोगों ने और पूछा भी कि जब. आपके परिवार में सभी कुछ हिंदू धर्म से. जुड़ा हुआ है आपका खुद का नाम या जिन. लोगों से आप इंस्पायर्ड हुए चाहे वो मुछ. रखने का ता हो या आपका नाम वो भी नाम जो. आपने छोड़ दिया ठीक है तो फिर चंद्रशेखर. जो है वो इतना एंटी हिंदू या एंटी. ब्राह्मण क्यों हो गए. यह सवाल तो आना चाहिए था बट ये है ना ये.
अच्छी रिस्ता ची माताजी पिताजी बहन पनी जी. देखो पिताजी क्योंकि उस समय मेरे फादर की. पैदाइश वो आजादी से लगभग पहली रही होगी और. मैंने कहा कि उस समय संविधान लागू नहीं. हुआ था तो गांव में किसने किसका क्या नाम. रख. दिया तो गोवर्धन पूजा वाले दिन मेरे फादर. पैदा हुए हम आज भी उनका बर्थडे उस दिन. सेलिब्रेट करते हैं इसलिए गांव के हिसाब. से उन्हें गोरधन नाम उनका रख दिया गया ठीक. है. माता जी मेरी उन क्योंकि नाना नानी ने रखा.
होगा उन परे मैं कोई टिप्पणी तब तो शायद. कमल भी नहीं होगा हां नहीं ये वाला कमल. नहीं हिंदू धर्म का कमल तो हमेशा से था ना. ये कमल नहीं रहा होगा बीजेपी वाला ठीक है. अच्छी बात है दो तीसरा मेरी पत्नी के बारे. में आप विपक्ष को मौका मिल जाए कई लोग. बीजेपी जोड़ते हैं आपको ठीक है नहीं नहीं. ऐसा देखो कोई क्या जोड़ता है उसका ठेका. लेके नहीं मैं बैठा अब पत्नी का भी नाम. मैंने रखा वो आपके हाथ में था भी नहीं रही. बात. आपका नाम जो भोले शंकर के नाम पर रखा वो. मेरे पिताजी ने रखा और मेरे भाई का नाम.
पता है क्या है क्या भगत सिंह जबरदस्त अब. क्या. कहोगे मेरे पिताजी ने शायद क्रांतिकारियों. से इंस्पायर होकर हम लोगों के नाम रखे. मुझसे जो बड़े भाई है उनका नाम भगत सिंह. है मेरा नाम. चंद्रशेखर तो यह दो करैक्टर हैं जिन्होंने. देश की आजादी के लिए बलिदान दिया सही बात. है इसको आप नाई धर्म के आधार पर नहीं कर. सकते क्योंकि इनमें से एक करेक्टर ऐसा है. जिसने धर्म के ऊपर बहुत सख्त टिप्पणियां.
जेल जाने के बाद की जिनको हम शहीद आजम. सरदार भगत सिंह कहते हैं कि मैं नास्तिक. सम्मान करती हा आप समझते हो ना जी जी. बिल्कुल तो मेरे पिताजी ने क्यों रखा नाम. मैंने आपको बता दिया जबरदस्ती और ये जो. मुछो को टने का स्टाइल था ये चंद्रशेखर. आजाद जी से अब कहोगे तो मैं फिर फोन दिखाऊ. मेरे फादर इससे बड़ी मुछे रखते थे लेकिन अ. अभी आपकी मुछे थोड़ा नीचे लटक गई है ऊपर. नहीं है वो जो ऊपर वाली आती थी ऐसे करके. ऐसे वाली नहीं नहीं अभी अभी थोड़ा सा ताव. वाली नहीं सरकार को गिरा दे फिर ताव दे. देंगे कुछ तस्वीरें निकाली हमने आपके लिए.
एक सेगमेंट रखा हमने उसके बाद फिर हम आपको. जाएंगे कुछ तस्वीरें आप ही की है हम चाहते. हैं इन तस्वीरों की कहानियां जो है वो आप. हमें सुनाए ठीक है कि इनकी क्या कहानियां. है सबसे पहले तो यह तस्वीर ये तस्वीर यह. कहां की तस्वीर. आपकी यह मैं जेल में था किस साल की है. 2017 की. 17 17 लास्ट या 18 फर्स्ट में मैं 16. महीने जेल में रहा एक बार में हम तो मुझे.
दिक्कत हुई थी. हम मेरा मानना है कि मुझे जहर दिया गया. था उसकी जांच हुई मैं आठ दिन हॉस्पिटल में. भी. रहा फिर मैं सरकारी सिस्टम को समझता हूं. कि उसका खामियाजा मैं आज भी भगत रहा हूं. तो मैं जेल से हॉस्पिटल आया था और मैं जब. गया था जेल में तो मैं बहुत तंदुरुस्त था. आप तब की मेरी फोटो देखोगे और यह फोटो आप. देखोगे. क्योंकि मैं जेल में बीमार हुआ पर बैठ हां.
जेल में बीमार हुआ तो आठ महीने मेरा. ट्रीटमेंट नहीं होने दिया सरकार ने मैं जब. कोर्ट्स के सामने मैंने तारीख पर कहा तो. उसके बाद मेरा कोर्ट जाना बंद कर दिया. मैंने वीडियो कान्फ्रेंस में कहा तो. उन्होंने वीडियो कान्फ्रेंस बंद कर दी और. फिर एक बार जब जज साहब व भ्रमण पर आए तो. मैंने उनसे कहा तो उन्होंने मेरे कान में. कहा कि हम मजबूर है क्योंकि हमें सरकार के. हिसाब से काम करना है सरकार का हम पर. प्रेशर है आप कह रहे हो कोर्ट देश में. सरकार के साथ चलती है मैंने जो हुआ वह. बताया फिर वो कहेंगे कि आप छूटे कैसे फिर.
छूटे भी तो आप कोर्ट से ही हो गए आपको तो. लगा था मैं मुझे बेल उससे पहले मिल गई थी. मैं मुझे चार महीने बाद बेल आउट हो गया था. बेल ऑर्डर आप पढ़ना उसमें लिखा है कि यह. सब राजनीति से प्रेरित है और चंद्रशेखर को. झूठे मुकदमे में फसा गया वो भी तो किसी जज. ने कि होगा ना मगर मैं इसको कंप्लीट कर द. ये उसके बाद की घटना है जो मैं आपसे बता. रहा हूं फिर मुझे बेल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट. से नहीं मिली मुझे हाई कोर्ट से बेल मिली. इलाहाबाद से जब बेल मिल गई तो मेरे ऊपर. एनएसए लगा दिया नेशनल सिक्योरिटी रात को.
3:00 बजे ताकि आप छूट ना पाओ ऐसा उसके बाद. की ये घटना है जो मैं आपसे डिस्कस कर रहा. हूं कभी लगा था जेल में. कि र जीवन को लेकर लगा कभी पहले 30. दिन 29 दिन लगा 30 दिन तय किया कि जीवन के. हर पहलू को स्वीकार करना है इससे भाग नहीं. सकते हैं यही घर है इसी में रहना है जब तक. बेल आउट नहीं होते जब तक बाहर नहीं जाते. वही रहा बहुत कठिन होती है जेल की जिंदगी. क्योंकि वहां जो आपके जो राइट्स हैं वो सब.
ले वायलेट होते हैं वहां उनका वायलेशन. होता है सरकारी तंत्र के तौर पर ही होता. है तो ठीक है अभी वो मेमोरीज आती है कभी. हंट करती है नहीं नहीं उससे भी बड़ी-बड़ी. मेमोरीज है गोली खाई है बहुत करीब से मार. खाई है पुलिस की लाठिया खाई है तो अब. कौन-कौन से मेमोरी याद रख शरीर ठीक है अभी. पूरा ठीक है हमारे जो लोग सुनेंगे उनको. नहीं लगना चाहिए कि उनके नेता में कहीं भी. कोई दिक्कत है जो विपक्ष वाले सुनेंगे. उनको भी नहीं लगना चाहिए कि इस आदमी से. खतरा कम हो रहा है मायावती जी को भी नहीं. लगना चाहिए वो हमारी नेता.
है आप नहीं जानते मैं उनका कितना सम्मान. करता हूं शायद मेरे बारे में किसी. ने उनको गलत फीड किया है जिस दिन मुझसे. मिलेंगी तो अपने आप से मेरे सर पर आद रख. के कहेंगे कि तुझे काम करना. चाहिए मैंने साबित भी कर दिया ना अपने आप. को तो ये ये दिल से निकल र है इसलिए क्क. कोर वोटर एकही है गलत बात तो यह है कि हम. क्योंकि जातीय व्यवस्था जहां पैदा हुए हैं. हम हमेशा उसी की जाति के नेता के आधार पर.
तोले जाएंगे ये इस देश की जातीय व्यवस्था. फैक्ट है अच्छा मोदी जी को कैसे तोलो ग. बताओ हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं नहीं. तो किस जाति के नेता है अब वैसे वो. प्रधानमंत्री बैठ ग उस कुर्सी की वैल्यू. करो उसके बाद जाती क्या वो अपनी जाती तो. बता स तो फिर बन जीी तो चार बार चीफ. मिनिस्टर रह गई तो एक बार हिम्मत जटाओ ना. कहने की कि भाई वो सबके नेता है क्यों कह. रहे हो सब तो रही है तभी सरकार फिर क्य क. ीी फिर ये क्यों कह रहे हो कि भाई कोर वोट. जो है कोर वोट को आपकी बात कर रहा आप आपकी. जो आप आप तो अच्छा मैं जेल एनआरसी में गया.
मेरे अलावा कोई नॉन मुस्लिम जेल रहा हो तो. क्या मुसलमानों के लिए नहीं लड़ता मैं. किसानों के आंदोलन में 13 महीने रहा बड़े. सवाल रखे उसके लिए मैंने मैं आगे आऊंगा. पहले ये फोटो क्या है ये हमें इस देश का. शासक बनना है ये मेरे घर की तस्वीर है. मेरे घर की दीवार का पेंट वो प्रिंट आउट. प्रिंट है वो जो मैंने लिखवाया था मैंने. इसकी बकायदा घोषणा की थी कि हमें सबको. अपने घर के ये मैंने नहीं कहा बाबा साहब. ने कहा है कि जाओ अपने घर की दीवारों पर. लिख दो जब उन्होंने अपनी अपने साथियों से. कहा जाओ अपने घर की दीवारों पर लिख दो कि. हमें इस देश का शासक बनना है तो लोग हसने. लगे बोले बाबा साहब हम पर तो दीवार घर ही.
नहीं है दीवार कौन सी दीवार पर. लिखे तो बाबा साहब ने कहा संविधान में. मैंने सारे राइट्स दिए हैं खूब पढ़ो. शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो वो दिन. आएगा कि आपके घर भी होंगे लेकिन मन में. अभी छाप लो कि हमें इस देश का शासक बनना. ठीक सबसे जदा तस्वीर ये वायरल होती है ठीक. है कवि इसके जरिए क्या संदेश देना चाह रहा. था हां कवि किसी की दूर से प्रेजेंटेशन के. पास खड़ा होकर बता रहा है. कि जो प्रेजेंटेशन है बहुत शानदार है आप.
इसके बारे में कुछ जानते नहीं है हम मैं. आपकी आपके भी और आपके ऑडियंस हां आपके और. आपके ऑडियंस के बारे में को बता देता हूं. इस बारे में भारत में जाति के आधार पर. रेजीमेंट बननी शुरू हुई. है तो एक रेजीमेंट बनी है चमार. रेजीमेंट अब क्योंकि किसी का मनोबल गिराना. हो तो उसका आप कुछ भी कह दो हिस्ट्री बहुत. वो करती. है तो जैसे आपने कहा कि चंद्रशेखर जी. जिन्होंने जो फ्रीडम फाइटर थे और और बहुत.
सब चीजों प आपने डिस्कशन किया बाबा साहब प. हम लोग ने डिस्कशन किया तो वो रेजीमेंट जब. बनी तो सेकंड वर्ल्ड वॉर में उसने. परफॉर्मेंस किया और बहुत शानदार. परफॉर्मेंस किया बैटल ऑफ ओनर का जो है. रिवर्ड उनको मिला फिर वो इंडिया चले आए. वापस अब इंडिया में आके उनको कहा गया कि. आप आजा आजाद हिंद फौज के खिलाफ लड़ो जो. सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में देश की. आजादी की लड़ाई लड़ रही थी.
इस स्ट्रक्चर के इस विचार के लोग इतने. समर्पित थे देश के लिए कि उन्होंने मना कर. दिया कि हम आजाद हिंद फौज के खिलाफ नहीं. लड़ेंगे क्योंकि वह देश के लिए लड़ रहे. हैं तो उन्होंने कहा कि आपकी रेजीमेंट. खत्म कर दी जाएगी मैं आज दर्शकों को. चैलेंज करके कहता हूं आपके यहां कि उनको. हिस्ट्री को पढ़ना चाहिए क ऐसा तो नहीं. चंद्रशेखर झूठ बोल रहे हैं इतिहास के. पन्नों में सब कुछ लिखा हुआ है तो. उन्होंने कहा कि हम की जॉब्स छीन लेंगे. आपके रिवार्ड्स छीन.
लेंगे आपके आपकी बटा इसको रेजीमेंट को. खत्म कर देंगे उन्होंने कहा खत्म कर दो. लेकिन देश के खिलाफ नहीं जाएंगे और देन उन. सब लोगों ने मैक्सिमम आजाद हिंद फौज जवाइन. करके देश की आजादी की लड़ाई लड़ी तो इस पर. किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए नहीं ये. आपत्ति किसी को वैसे है भी नहीं तस्वीर का. मैंने बहुत आपत्ति है मेरा सय क्योंकि इस. तरह से कभी किसी ने प्रेजेंट नहीं किया. बहुत आपत्ति है आप नहीं समझते आप. ऐसा चुभा है लोगों को लोगों को लग दि कि. यह कैसे ग्रेट हो सकते हैं मैं कह रहा हूं.
हर व्यक्ति ग्रेट है जो मेहनत करता है सही. बात है आप अपने काम में मेहनत करते हैं तो. आप ग्रेट नहीं है क्या मैं अपने काम में. करता हूं तो शायद किसी को लगता है कि जाति. के आधार पर ग्रेट नहीं होना चाहिए लेकिन. मैं कहता हूं देश का हर व्यक्ति या देश की. हर क्योंकि जाति व्यवस्था हर वो व्यक्ति. जो देश के लिए योगदान कर हर व्यक्ति अपने. परिवार पर अपनी जात पर अपने देश पर गर्व. महसूस कर सकता है इसमें कोई गलत बात नहीं. है ठीक है तो मैं फिर आपसे कह रहा हूं यह. बोर्ड हमारे मुझसे ये मेरा गांव नहीं है. मीडिया की उस पर कभी-कभी मैं हंसता हूं कि. हमारे यहां मेन स्ट्रीम मीडिया के लोग जो.
लिखते हैं मैंने कोई आर्टिकल पढ़े. उन्होंने मेरा गांव घटको लिखा मुझसे 12. किलोमीटर दूर है हम उस उन गांव वालों ने. बोर्ड लगाया बोर्ड लगाया इसके इनॉगरेशन. में मुझे बला मारा था जा के नहीं नहीं. उनके इनग्रेन में मुझे बुलाया अच्छा कि बस. हमने बोर्ड लगाया आपको आना है मैंने उनसे. पूछा क्यों लगा रहे हो बोले जब सब जातियों. के लोग लगाते हैं तो हम क्यों लगाए अच्छा. इसके ऊपर भी मेरा एक वो रिसर्च है इस पर. भी बड़ा विवाद हुआ तो यह भी मैंने डॉक्टर. अंबेडकर से वो किया डॉक्टर अंबेडकर ने. सत्याग्रह किया 10000 से ज्यादा लोगों का. मोर्चा लेकर वो तालाब में पानी पीने के.
लिए गए जहां किसी को आजादी नहीं थी जहां. सबको आजादी थी लेकिन अछूतों को नहीं थी जब. वो चले गए तो प्रोटेस्ट खत्म हुआ तो. उन्होंने लोगों को इकट्ठा करके कहा कि जब. भी हम इकट्ठा होंगे तो हम कोई ना कोई. बुराई छोड़ेंगे उस दिन उन्होंने तीन. बुराइयों को छोड़ने कहा पहली मरे जानवरों. का मास्क नहीं खाएंगे कोई गंदा व्यवसाय. नहीं करेंगे और क्योंकि देश में जाति. व्यवस्था इसलिए अपनी जाति. पर संकोच करके अपने आप को जैसा दूसरे ने. कह कि आप छोटी जाति हो छोटी जाति का मान. के अपना मनोबल नहीं गिराए जब तक जाती.
व्यवस्था हम इसको स्वीकार करेंगे और कोशिश. करेंगे जातीय व्यवस्था खत्म हो जाए तो. इसलिए ये बाबा साहेब अंबेडकर ने कहा लोग. पढ़ते हैं नहीं बस बोलते रहते हैं तो लोग. लोग अब लोगों क्या अब वो फिर स मुझे याद. आएंगे वो एक एक्टर थे वो राजेश खन्ना कि. कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना. ब्यूटीफुल ब्यूटीफुल हालांकि क्योंकि और. किसी दलित नेता ने कभी ऐसे कहा नहीं तो. शायद ये पहली बार था यही आपकी स्टाइल मैं. कह रहा हूं देश का हर मेहनतकश आदमी वो. ग्रेट है सही बात है बसा और हर व्यक्ति जो. इस देश में पैदा हु वो भी ग्रेट हैसी धर्म.
किसी जात मैं अकेला आदमी जिसने. पार्लियामेंट में खड़े कहा कि भारत की. महान जनता जिंदाबाद सब अपनी पार्टियों का. जिंदाबाद बोल रहे थे मैंने. कहा यह शायद मेरी रिहाई के लिए प्रोटेस्ट. हुआ इसमें मैं नहीं हं तसवीर की बात कर. रहा हूं मैं हां यह मेरे मेरे मित्र हैं. जिनके घर पर मैंने तस्वीर खींची रेबन ने. ग्लास पहन के मुंह छुपता देते हुए अब रेबन. है या क्या यह तो मुझे नहीं पता है मगर है. तो यय ये पोस्ट भी उसी लिए था जो उसी तब. तो सोशल मीडिया का जमाना उस तरह से था कि. आदमी अपनी जो है वो पिक्चर्स लगाता था हम.
और मुझे क्या आपता कि ये पिक्चर बाद में. जाके इतनी फेमस हो जाएगी आपने भी बहुत स. रैंडम क्लिक कराई थी ऐसे ही नहीं घर पे. बैठ के मेरा एक मित्र है जो अभी रेलवे में. है उसने उसने फोन लिया नया हम हम लोग गए. थे मैं किसी काम से गया था तो मैं बैठा. कुर से मैंने कहा कि अपने फोन में मेरा एक. फोटो खींच दो लेकि प्रॉपर पोज है ऐसे ऐसे. बैठ के ये थोड़ा सा हमको लगता है कि. बॉलीवुड वाला फ्लेवर आता है आपके अंदर. फिल्म में या तो बचपन सा कितने साल पुराना. है आप आईडिया लगाओ हम आज के मेरे फेस कट.
को देख के आईडिया लगाओ कितने साल हां है. पुराना है कम से कम होगा 12 15 12 20101. के आसपास के पिक्चर होगई हां तब का ही है. हा तब मेरे भाई साप साब देखते मैं. एक्सरसाइज करता था तो कौन सा हीरो पसंद. संजय. दत नहीं अब मैं इस पर चर्चा नहीं करना. चाहता क्योंकि अब तो जो हमारी लोग हैं हां. अब उनको हीरो वरशिप छोड़ के उनको मिशन. मूवमेंट का काम में लगाना है तो ठीक है अब. यही सही है बट बॉलीवुड का इंपैक्ट रहा है. आप पे वो आपकी स्टाइल से थोड़ा हमको लगता. है गांव में आदमी टीवी देख के बड़ा होता. है भाई मैं गांव का आदमी या तो मिथुन.
चक्रवर्ती होंगे या अजय देगन होंगे या. संजय दत्त ये तीन दावा लगा सकते आप अपने. टाइम के हीरो की बात कर रहे हैं आप आपकी. पसंद के हीरो की बात कर रहे हैं मैं फिर. आपसे कह रहा हूं स सी पसंद है लेकिन जब वो. हीरो अब मैं नहीं कहना चाहता लोगों को. भावनाओं को ठेस पहुच भारत में भावनाए बड़ी. जई है मैं उनको हीरो इसलिए नहीं मानता कि. वो वाइन का भी ड करते हैं वो गुटको का जो. तमाकू उसका भी ऐड करते हैं वो हीरो कैसे.
हो सकते हैं जो अपने निजी फायदे के लिए और. हर वो सीमा लांग जाता है जिसका जिसका. दूसरे को नुकसान होगा आम आदमी गांव में. क्या पता है कि कोई किस चीज का ऐड कर रहा. है वो तो उसको हीरो मानता है तो उसके. हिसाब से अगर गुटका खाना शुरू कर दे. सिगरेट पीना शुरू कर दे शराब बियर पीना. शुरू कर दे तो इसको क्या हीरो कहेंगे वो. तो अपना पैसा कमाते हैं लोगो ये फोटो आती. है एकदम जवानी एकदम यस कॉलेज की कॉलेज की. हां इस पे मैं बहुत रोल हुआ हूं मेरे मेरे. जो मुझसे जो कम प्रेम करते हैं स्पेशली. जिनके लिए आप कह रहे हैं वो कहते हैं पहले. जो है चंद्रशेखर पहले चंद्रशेखर टीका.
लगाते थे अब नहीं लगाते अब मुझे ये बताओ. बदल गए हैं आपकी एक सामने वाले की भावनाओं. का सम्मान अच्छा इस टीके में खराबी क्या. है मुझे कोई खराबी नहीं है पहली बात तो. मैं इसमें खराबी नहीं कॉमन है कि हर जाति. ग्रेट है हर मजहब ग्रेट है पहली बात तो. मैं इस तरह के स्ट्रक्चर का हिस्सा उस समय. तक नहीं था दूसरा मैं नहीं मानता आपको. सबकी भावनाओं का सम्मान करना है हुआ यह है. मैं लॉ का मेरा फाइनल ईयर था मेरी मां ने. मुझे सिखाया कि किसी की बेटी का का अपमान. नहीं होना चाहिए तो हमारे यहां जो फर्स्ट. ईयर की बच्ची आथ बहने हमारी उन्होंने.
पार्टी रखी फबल पार्टी उन्होंने कहा कि. भाई आपको आना है लास्ट पेपर था तो हम लोग. अवेलेबल थे हम मैं गया तो वो गेट पे लेकर. खड़े थे तो उन्होंने ये टीका लगाने शुरू. किए हम हम लोग अंदर जाके बैठे फिर उनका. कार्यक्रम रहा और आप गजब की बात मैं नहीं. बता सकता क्योंकि वो पेपर्स की सिचुएशन. में हुए थे और मैंने मुझे कहा गया कोई कुछ. कहना चाहता तो मैंने आके क्या कहा मेरे उस. समय का पूरा ग्रुप्स कहता कि भाई मैंने. धन्यवाद किया उन टीचरों का जिन्होंने मदद. की हमें कि हम पास हो जाए नगल खूब करवा यह.
आपकी बात है इस पर मैं हामी नहीं बना यूपी. में तो नकल खुला रही है मैं मैंने मेरी. पढ़ाई लॉ उत्तराखंड की है बस आप उस टाइम. यूपी उतराखंड अलग थे यूपी उत्तराखंड अच्छा. ये यूपी तो 2000 2000 2000 में अलग हो गया. ना ये 20089 के करीब की बात है एक बात मैं. आपको और कह दूं आप यूपी पे यूपी की. सरकारों में जो कुछ हुआ हो लेकिन अगर इस. तरह से हम योग्यता के आधार पर यूपी को. डिनायर क्योंकि बहुत सारे प्राइम मिनिस्टर. जो हैं और बहुत सबको दिया देश को यूपी को.
नाई नहीं किया हां लेकिन यूपी में नकल. करके लोग पास होते हैं यह सच्चाई है और ये. हमने बड़े करीब से देखा माता जी हमारी भी. शिक्षिका है हमारे खानदान में आधा आदमी. शिक्षक है स्कूल कॉलेज हम भी देखे हैं. पढ़े हैं और हमारे भी 40 दोस्त ऐसे हैं जो. बिना पढ़े पास हो गए हैं और तय होता है. किस रेट प पास हो गए देख के लिखोगे ब्लैक. बोर्ड से लिख लोगे ये अच्छा है ये हमने भी. देखा है ये अच्छा है आपके यहां इस तरह का. स्ट्रक्चर होगा मेरे यहां इस तरह का. स्ट्रक्चर नहीं और हम तो जिस जिले से आते. हैं वहां तो मोदी जी जाए खुद कह दि दिया. था कि नकल माफिया कम बंद होना चाहिए ठीक. अच्छा है सरकार इस बात को जानती है बस इस.
इसको रोकने का प्रयास भी कर आप तिलाल. लवाते हो अभी भी कल भी कहीं था उन्होंने. लगाया मैं दे दूंगा फो फोटो क्यों नहीं. आती आप कहीं तिलक वाली फोटो तो नहीं आती. मैं अभी दिखा दूंगा आपको कल की फोटो आप. कहोगे तो चलो एक और बढ़िया फोटो दिखाते. हैं आपको एक ये फोटो है हां ठीक है जैसे. तिलक वैसे टोपी मैंने क्या कहा मैं यहां. एनआरसी के प्रोटेस्ट में था मैं एक. मुस्लिम धार्मिक स्थल पर गया उन लोगों ने. यह कैप मेरे सर पे क्योंकि वो अंदर जाने. के लिए जैसे गुरुद्वारे में जाने के लिए. वो बांधते हैं रुमाल की जरूरत होती है सर. ढकने की जरूरत होती है उन्होंने मुझसे कहा.
कि अंदर जाओ सली भी हमने तस्वीरें देख हा. सर ढकना है तो सर ढकने कुछ था नहीं. उन्होंने एक साथी ने अपने सर से उतार के. दे दी मैं उसका धन्यवाद करता हूं लेकिन. मैं आपको यह भी स्पष्ट कर. दूं बहुत जिम्मेदारी से इस बात को कह रहा. हूं उसके बाद एक बहुत बड़े मुस्लिम लीडर. से इंटेलेक्चुअल्स हैं वो धार्मिक गुरु. उनसे मेरी बात थी उन्होंने कहा कभी मत. पहनना क्यों कहा कि मुसलमानों को यह टोपी. पहना के बेवकूफ बना काम बहुत लंबे समय से. चल रहा है तुम उस तरह का स्ट्रक्चर का. हिस्सा मत बनना हां मतलब एक मुसलमानों में.
धारणा है कि जो नेता टोपी पहन लेता है वो. टोपी पहना आता है हां तो उन्होंने मुझसे. कहा और उस दिन के बाद मैंने आज तक कभी इस. काम को नहीं दोहराया मुझे किसने कहा मैंने. उनसे कहा हाथ जोड़ के कहा और एक आखिरी. तस्वीर और बड़ी वायरल होती है ये आपकी. मोटरसाइकिल में दुर्गा माता की चुंडरी लगी. हुई है ये मेरी मोटरसाइकिल नहीं है बस मैं. यही कह रहा था अब मैं आपके सोफी पर बैठा. हूं हां और इस अच्छा देखो मैं फिर कह रहा. हूं भारत मान्यताओं का देश है ना हां तो. अब मेरे बहुत सारे दोस्त है जिनकी हिंदू. धर्म हां बुलेट है ये हिंदू धर्म में. जिनकी बहुत सारी वो है हां ये मेरे उसी.
साथी की मोटरसाइकिल है रेलवे वाले की. जिसकी मैं जिक्र कर रहा हूं हां मेरे फादर. ने मुझे तो लेकिन पोस्ट देखो फिर वही वाली. है अब इस पज से किसी को जलना नहीं चाहिए. तो अब उसने नहीं बुलेट खरीदी हां वो लेके. आया तो मैंने कहा कि जब बुलेट लाए तो किस. साल की फोटो ये चुंडरी वाली ये उस ये. 20078 के आसपास की होगी 910 की भी हो सकती. है तो मैंने उनसे कहा कि जब बुलेट लाए तो. मेरा एक फोटो खींच दो. तो अच्छा मुझे ये बता फिर मैं आपसे कह रहा. हूं अब मैं ट्रेवल करता हूं मैं आपको.
बताता हूं मैं कहीं गया. हम तो जैसे अब सब वर्कर तो बहुत मजबूत. नहीं है किसी जिले में किसी इंसिडेंट में. जाना पड़ा हम तो जैसे मैं बिहार गया तो. यहां से गाड़ी तो नहीं ले जा सकता अपनी तो. वहां जो भी वर्कर होगा और वो कि क्योंकि. सारी हर धर्म को मानने वाले हिंदू धर्म को. मानने वाले सिख धर्म को मानने वाले जैन. धर्म को मानने वाले ईसाई धर्म को मानने. वाले मुस्लिम धर्म को मानने वाले और जो. किसी धर्म को नहीं मानते वह भी सब लोग. हमारी पार्टी में तो अब वह गाड़ी लेके आए.
अपनी तरफ से बहुत अच्छी करके हम अब वह जिस. भी धर्म की मान्यता के अनुसार किसने चुनरी. मान दी है. किसने कोई और धार्मिक वो रखा है तो मैं. उसको क्या कहूं कि मुझे खुशी नहीं हो रही. तो तू इसको ह नहीं ठीक है मैं इस इस पॉइंट. पे मैं सहमत हूं भले ही कितना सच है कितना. फंसाना वो आप जानो जनता जाने नहीं आप फिर. समझो क्योंकि इसका कोई प्रूफ तो है नहीं. आप कह रहे हो हम मान ले रहे हैं दर्शक को. हम तय करने दे देंगे मैं आपसे फिर कह रहा. हूं मैं इस पे बहस भी नहीं कोई चाहता. मैं वो कह रहा हूं जो फैक्ट है देखो आप. यहां से अगर ट्रेवल करोगे मैं आप ही के.
ऊपर छोड़ देता हूं प्रैक्टिकली आपको पता. लग जाएगा आप गए हैं बिहार में समझ गया आप. आप जो लॉजिक दे रहे हो होटल आपको आपने. होटल किया है और आपने क्योंकि आपका कोई. जानकार नहीं आपने उससे कहा कि उस गाड़ी. भेज देना अब उस गाड़ी को चलाने वाला किस. धर्म को मानने वाला है वो किस तरह की वो. आप उसमें बैठे आप उसमें क्या कर सकते हो. और मैं कह रहा हूं क्या इस देश में हिंदुओ. की धार्मिक आस्था का सम्मान नहीं अब आ. क्यों क्यों ये तस्वीरें क्यों चर्चा. केंद्र बन रही है इसकी वजह बताता हूं मैं. आपको ये तो तस्वीर बड़ी नॉर्मल सी है कोई.
और नेता हो तो शायद सवाल भी ना उठते ये. तस्वीर इसलिए चर्चा केंद्र बनती है. क्योंकि चंद्रशेखर पर ये आरोप लगता है कि. चंद्रशेखर संभल पहुंच जाते हैं हाथरस को. एकदम जोर शोर से लगा लेते हैं शाहीन बाग. में एकदम चढ़ जाते हैं जामा मस्जिद के. सामने छाती चौड़ी करके एक नेता दिखता है. लेकिन जब अयोध्या में किसी दलित बेटी के. साथ कुछ गलत होता है तो एक वर्ग कहता है. कि यार वो भी जात देख लेते हैं कि जो. दलितों पर अत्याचार कर रहा है वह हिंदू है. तो आरस लगा दो पले. आप पर आता है पहले आप एक अच्छे साथी हैं.
वो अगर आप कास्ट के बाद केंगे वो बेटी. दलित समाज की नहीं थी पहली देश के सारे. अखबारों में तो यही छापा है चेक करलो. दोबारा से चेक कर लो मैं तो ग्राउंड लेवल. प वो करता हूं मैं अयोध्या उसी परिवार के. लिए गया आप चेक करलो उन्हीं डेट में मैं. अयोध्या में हूं मेरी एक सभा भी थी मैं. उसी डेट में गया जबक किसी और को वो सभा. करनी थी मैं खुद गया कि मैं जाऊंगा उस. परिवार से मिलने के लिए जब मैं गया बीजेपी. के बहुत सारे नेता एक से एक बड़े नेता. वहां बैठे हुए थे तो उस परिवार की तरफ से. जो हमारी टीम क्योंकि ऑलरेडी मिल के आ.
चुकी थी उन्होंने कहा कि अभी उन नेताओं ने. कलवा या वो जो महान नेता वहां थे उन्होंने. कहा कि भाई अभी हमें और किसी की जरूरत. नहीं आप उनको मना कर दो हम तो फिर मैं चला. आया कि ठीक है क्योंकि हमारी पार्टी के. लोग वहां गए थे हम तो इसलिए मैं फिर उसमें. उस तरह से एक्टिवेट एक्टिवली जो है पार्ट. जब जब सरकार जिस चीज में सहमत हो जाए. सरकार जिस चीज जिसमें खड़ी हो जाए देश के. सारे अखबारों ने दलित लड़की का ही जिक्र. किया है हां मैं आपसे फिर कह रहा हूं हो. ना जो देखो मैं आप मैं आप इसको और वो कर. देता हूं आपको याद है वहां एक मंत्री जी.
रोहित है अगर आपको याद हो हम मतलब मैं. आपको बता रहा हूं जो आपने दलित शब् लिख. मैंने कि सारे देश के बड़े अखबारों ने ठीक. है अब तो देश के सारे अखबार गलत होंगे. अच्छा मैं इस इसको और वो कर प्रैक्टिकली. साबित कर देता हूं ना वहां एक बड़े नेता. रोए थे जो मंत्री हैं अभी बीजेपी में. अलायंस में डू यू नो और नॉट मसला उनका. नहीं है मसला एक सेकंड एक सेकंड मैं बताता. हूं ना एक मिनट सुन लो मैं सच को सच कहने. की हिम्मत रखनी चाहिए संजय निसाद जी वहां. रोए कि मेरी समाज की बच्चे प बहुत हो गया. है और मैं इसकी रक्षा नहीं कर पा रहा हूं. अगर आपको नहीं पता तो इसी में देख लो मिल. जाएंगे आपको संजय इसी घटना पे तो निषद.
समाज यहां पिछड़े वर्ग में आता है इसलिए. मैं आपसे कह रहा हूं और वो मांग कर रहे. हैं कि इसको शेडल कास्ट में होना चाहिए. मैं आपको फैक्ट की बात कर रहा हूं फिर मैं. आपको कह रहा हूं कि मैं गया हूं हमारी टीम. गई है और मैंने आपको बता दिया उस दिन क्या. कंडीशन थी हम और मैंने अभी राजपूत लड़कों. का मर्डर हुआ हम यही पूर्वांचल में मैंने. उसकी आवाज. उठाई जब एक व्यापारी की लखनऊ यहां गोरखपुर. में हम उसको जो है मार दिया पुलिस ने. मैंने उसकी आवाज उठाई जो वैसे समाज में थे.
लखनऊ में जिनको गोली मारी गई थी मैंने. उनकी आवाज उठाई जो ब्राह्मण समाज के थे. कानपुर में जिनका घर जला और वो मां बेटी. वहीं जल के जिनकी जान चली गई वो ब्राह्मण. समाज के मैंने उनकी आवाज उठाई हम पहलवान. बेटिया जो हैं वह किसान समाज की थी मैंने. उनकी आवाज उठाई किसान हर जाति के हैं. मुस्लिमों को लेके आपका इंक्लिनेशन नहीं. है एक सेकंड अब मेरा ट्वीटर अकाउंट है टी. में चेक करा लो अगर आपको कहीं मिल जाए ये. मैं फिर आपसे कह रहा हूं कोई क्या करता है. और मैं फिर कह रहा हूं देखो मुसलमान का ही. नहीं किसी का भी हम किसी पे भी अत्याचार.
होगा और उसकी आवाज उठाने के लिए मुझे. जरूरत होगी हम मैं पहली बात तो मैं वहां. जाता हूं जहां मुझे लगता है कि पूरी सरकार. और पुलिस आरोपी के पक्ष में खड़ी होगी. क्योंकि घटनाएं तो रोज होती है एनसीआरबी. का डाटा उठा के देखोगे तो पता लग जाएगा. मैं सब जगह नहीं जाता लेकिन जहां मैं वहां. मैं वहां जाता हूं जैसे मैं आज कहां गया. हम बागपत क्यों गया हम क्योंकि बागपत में. वो लड़का अगर पुलिस में अच्छा काम कर रही. होती है सरकार हम और एडमिनिस्ट्रेशन तो वो. बागपत का लड़का पार्लियामेंट के सामने आके.
क्यों सुसाइड करता क्यों खुद को मार लेता. उसके ऊपर कितनी पीड़ा हुई होगी और निराश. सुसाइड कब करता है आदमी मतलब खुद को क्यों. मार देता है आग लगा लेता है तब जब वो. निराश हो जाता है मैं इसलिए गया मैं परभनी. क्यों गया क्योंकि पुलिस ने ही पुलिस. कस्टडी में पीट पीट के सोमनाथ को मार दिया. और महिलाओं को पीटा जब एडमिनिस्ट्रेशन में. पुलिस जिनकी ड्यूटी है लोगों का कि रक्षा. करना लोगों को न्याय देना वही रक्षक की. भक्षक हो जाए तो फिर मेरे जैसे आदमी को. जिसकी जो ड्यूटी है कि उस मामले में नए हो. फिर उसको जाना चाहिए मैं सब मामलो में.
नहीं जा पाता आप कास्ट धर्म देख के नहीं. जाते हो मैं आपसे मैंने आपसे फिर कहा मतलब. क्योंकि आपकी जब बातें मैंने ओवरऑल सुनी. मैंने आपसे पहला सवाल पूछा था चंद्रशेखर. कौन है आपने कहा इंसान है तो इंसान सबके. लिए बराबर होता है. र जा धर्म से ऊपर होता है मेरठ में पाल. समार के बेटे को मार दिया मैं अकेला आदमी. था बीजेपी के नेता नहीं गए जब मैं गया. होड़ लग गई बीजेपी के नेता और पार्टियों. सब भागे भागे गए हम मैं वहां गया आपको. चंदौली में जहां एक यादव समाज की बेटी को.
मार दिया था हम उनके उनकी जो जिनको वोट. देते उनकी पार्टी के नेता नहीं कि मैं गया. तो मैं आपको 50 घटनाएं गिनवाला जिसमें मैं. गया हूं मदद करने के किसी अप प्रकाश में. कभी गए हां गया हूं ना और ऐसा तो अप. प्रकाश मेरे दोस्त नहीं तो फिर अप प्रकाश. को क्यों लगता है कि आप उनको ना पसंद करते. हो ब्राह्मण ठाकुरों को आप ना पसंद करते. देखो ऐसा है जब मैं हिस्सेदारी की बात. करता हूं करते हो पसद मैं इंसान को बुरा. नहीं मानता हूं. अनुराग ठाकुर के साथ मैं क्रिकेट खेला यार. वो अब तुम उनको जाति के आधार पर करोगे.
मेंबर ऑफ पार्लियामेंट है मेरे साथी हैं. तो खेलना नहीं चाहिए था मुझे मैं आपसे फिर. ये कह रहा हूं मनो तिवारी हमारी टीम में. बॉलिंग कर नेता आपस में तो दोस्त होते ही. है वो तो हमने टीवी खूब देखा है कि टीवी प. आके लड़ते हैं पीछे बैठ के और बताओ क्या. हाल चाल समोसा खाओगे पकड़ी वो तो हमने खूब. देखा सारे नेताओं को हर जात धर्म के अच्छी. बात है मगर मुझे आप यह बता दो मैं आपसे ये. कहना चाहता. हूं किस तरह तय करोगे मैं आपसे पूछ रहा. हूं आप आपका नजरिया लेने के लिए लिए ये जो. सवाल था था आप इस पर बता दोगे आपकी राय. दर्शक पास जो एक परसेप्शन बना है अभी जैसे.
जब मैं आपको लेके तकरीबन 4200 कमेंट मेरे. पास आए उसमें 4200 कमेंट में बहुत सारे. लोगों ने कहा कि चंद्रशेखर कई बार इंसानी. तौर बड़ी अच्छी बात करते हैं मैं अपने. किसी ब्राह्मण मित्र को यहां से फोन करूं. जो उधर से जय भीम बोले एक और प्रैक्टिकल. देखना चाहते हो कहो तो करो नहीं इसमें कोई. बहुत बड़ी बात नहीं होगी हमारे मित्र सारे. हैं तो आप नापसंद नहीं करते हो अच्छा. इंसानों को नापसंद प्रूफ करने की जरूरत. नहीं है अच्छा ये बताओ मुझे इंसानों को ना. पसंद करने का कोई सवाल ही नहीं उठता है. लेकिन सवाल यह है राजनीति में बात कर.
हमारा जो राइट्स है जैसे आरक्षण. है उसको अगर कोई यह कहे कि साहब 10 साल के. लिए एक तो मैं तो बड़े हंसता. हूं कि पढ़ते हैं नहीं और आ जाते हैं. मैदान में ताल ठोकने के लिए पहली बात. तो पॉलिटिकल रिजर्वेशन 10 साल के लिए था. देश को जाना. चाहिए नियुक्तियों में. रिजर्वेशन जो और जो रिजर्वेशन मिला है वो. 10 साल के लिए नहीं था वो तब तक था जब तक. देश से सामाजिक और आर्थिक गैर आप जाति का.
जनगणना करा के चेक कर लो कहां है हम लोग. कहां खड़े एक्स करा चाहिए सब लोगों को मैं. तो बहुत दिन से कह रहा हूं हम तो मांग उठा. रहे हैं तो लोगों को यही नहीं पता मैंने. बड़े-बड़े नेताओं को सुना एक तो बहुत बड़ी. नेता थी उन्होंने कहते 10 ही साल के लिए. था उनको पता तो है नहीं तो जो लोग हमारे. अधिकारों पर कुठाराघात करते हैं हमारे. अधिकारों के खिलाफ बोलते हैं मैं उन पर. गुस्सा होता हूं और गुस्सा भी यह है कि. मैं उनसे कहता हूं कि भाई मैं आपकी उसको. आपकी सलाह को क्या स्वीकार. [संगीत]. करूं आपके आपने अपना एक बार वो जो आपने.
कमेंट वो किया शायद पोस्ट किया है ना उस. परे अपर कास्ट के लोग मुझसे कितना प्यार. प्यार करते हैं एक बार वो भी पढ़ लेना. शायद आपको एहसास हो जाए मेरे किसी साथी ने. शायद बुरा देखो फिर मैं कह रहा हूं मैं आज. आपके यहां बैठक कह रहा हूं अपने जो लोग. हैं जो लोग मुझे पसंद करते हैं उनसे कि. उनको किसी जाति धर्म के ला पस करता हू. किसी जाति धर्म के खिलाफ किसी जाति धर्म. के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए ना जाति के ना. धर्म के और उनको अपनी जो हिस्सेदारी की. लड़ाई है उसको लड़ना चाहिए वो किसी को. अच्छी लगे या बुरी लगे चाहे परका को लगे.
जैसे मैंने कहा ईडब्ल्यूएस क्या. है अपर कास्ट का 10 पर कोटा ठीक है क्या. कांस्टिट्यूशन में उसका प्रयोजन है नहीं. था नहीं था लेकिन किया सरकार ने मेरा उस. पर विरोध है मैं कहता हूं कि आप पहले जाति. का जंड गना करा दो क्या अपका की मेजोरिटी. कम है क्या सरकारी विभागों में तो आप दे. दो क्योंकि आरक्षण का तो फार्मूला ये था. आरक्षण एक बहुत बड़ा विषय उसको मैंने आगे. एक सेगमेंट रखा उसका ठीक है अभी वुमेन. रिजर्वेशन लागू वुमेन रिजर्वेशन पे डिबेट. हुई मैं उस समय हाउस का हिस्सा नहीं था सब.
लोगों ने समर्थन किया मैं उस परे डिसएग्री. था मुझे लगता था कि सेडल कास्ट और बैकवर्ड. की महिलाओं को और मुस्लिम महिलाओं को भी. अलग से उसमें हिस्सेदारी मिलनी चाहिए तो. मेरे अपने भाई चीजों को लेकर मेरे अपने. विचार हैं और उस परे आप मेरे से एग्री और. डिसएग्री मुझे क्या फर्क पड़ता है लेकिन. जहां मुझे लगता है कि गलत हो रहा है जैसे. मैं सुप्रीम कोर्ट हायर जुडिशरी में. रिजर्वेशन की मांग कर रहा हूं अब ये सबको. अच्छी नहीं लगेगी. लेकिन मैं मानता हूं कि क्या 250 परिवारों. को कब्जा होना चाहिए उस परे और लोगों को. मौका नहीं क्या प्रकाश के और और लोगों में.
मौका नहीं है कि जिसका बाप बन गया उसका. बेटा बन गया उसका दामाद बन गया उसकी बेटी. बन गई उ उसका भतीजा बन गया क्या न्याय. चरित्र और अप्र काश के लोगों में भी नहीं. तो फिर जब सुप्रीम कोर्ट कहता है कि एससी. एसटी में भी और हमें देखना पड़ेगा तो आप. उसका विरोध क्यों करते हो आपने देखा विरोध. आपको सुप्रीम कोर्ट की अगर मेरे भाइयों. मेरे भाइयों को कुछ मिलेगा तो मुझे कोई. आपत्ति नहीं है लेकिन मैं फिर य कह रहा. हूं हा उसको देने के पीछे जो सरकार के निय. अब आप इस तो गुड़ खा के गुलगुले से परहेज. वाली बात है अब मैं आपकी तकलीफ पर क्या कह.
सकता हूं मैं आप फिर मेरा कोई एक. स्टेटमेंट बता दो उस जिस मुझे कोराज नहीं. मुझे इस बात से तराज है कि जब आप. ईडब्ल्यूएस. आपको मैं बता रहा हूं एक स्पष्ट कर दे रहा. हूं जब आप ईडब्ल्यूएस लागू कर सकते हैं 10. पर तो आप उन वर्गों में जो भाष्य प लोग. उनके लिए अलग से आप क्यों नहीं कर सकते. क्या आपकी इच्छा नहीं क्या आप उनमें झगड़ा. करना चाहते फिर भी हमने झगड़ा ना हो तो हम. उस हम ठीक है हमारे भाइयों को कुछ मिलता. हो तो हमें तकलीफ नहीं. है मिलना चाहिए ऐसा ना हो जो सदियों से.
होता रहा अभ भी वो हो जाए कि उनके पास. खाली प्लेट रह जाए और खा कोई और जाए. क्योंकि जब निजीकरण हो रहा है ना जितने. बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरी रहेगी तो. आरक्षण के झुनझुनी का हम लोग क्या करेंगे. एक बड़ा अच्छा शेर हमको याद आ गया सियासत. इस कदर आवाम पर एहसान करती है पहले आंखें. छीन फिर चश्मा दान करती है अच्छी बात आगे. बढ़ते. हैं क्या चल रहा है और आपकी लाइफ में चढ़. कैसे डील करते हो. प्रेशर क्योंकि हरियाणा से लेकर.
महाराष्ट्र तक जोर तो पूरा लगाया रिजल्ट. उस तरह के आए नहीं रिजल्ट नहीं आए तो ये. कैसे निकलते हो इस डिप्रेशन से या परेशानी. से नहीं डिप्रेशन इसलिए नहीं होता है. स्टेट को पावर दए अरे आप इतनी बड़ी बड़ी. बात कहे गए आपको साब से रिस्प नहीं मिला. ना भीड़ थी लोगों ने कहा कि यार चंद्रशेखर. ने इतने लोगों को इकट्ठा कर दिया रिजल्ट. आया तो लगा कि टाय टा फस देखो आप इस तरह. कह सकते हो लेकिन मेरा सोचना इसमें इस तरह. है लोग वोट जो है ना वो. से कीमती है तो जब आप वोट करते हैं तो. बहुत सोच समझ के करते हैं आपकी अपनी.
भावनाएं होती हैं तो लोगों ने जब वोट किया. तो इसका मतलब हम उनका विश्वास जीतने में. कामयाब नहीं हो सकते हमने पूरी कोशिश की. फिर हमें लगता कि हमारे प्रत में प्रयत. में कुछ कमी है तो और ज्यादा कोशिश करेंगे. मैं आपको पिछला कुछ हिस्ट्री बताता. हूं हम लोग 23 में चुनाव लड़े राजस्थान. में मध्य प्रदेश में. मध्य प्रदेश में हम एक सीट पर 11000 वोट. से हारे जीत जाते सारी मीडिया चलाती कि.
आजाद समाज पार्टी का खाता खुला एक एमएलए. आजाद समाज पार्टी का जीत गया आजाद समाज. पार्टी तेजी से भर रही है हार गए तो किसी. ने उस बात को कंसीडर नहीं किया राजस्थान. में हम एक सीट 5000 वोट से आ रहे ऑन. रिकॉर्ड एक 7000 से आ 11000 से आ र जीत. जाते तो मीडिया चलाता कि चंद्रशेखर ने. कमाल कर दिया क्या स्ट्रेटजी थी बताइए कल. की पार्टी तीन एमएलए जीता दिए कई जो है 10. 12 मेंबर 20 हज से ज्यादा वोट लेकर गए. मीडिया के लिए वो भी सब्जेक्ट नहीं.
था हरियाणा लड़े उसके बाद 2024 लड़े दो. सीटों पर लड़े किसी का नुकसान नहीं किया. एक सीट खुद जीते दूसरी 80000 से ज्यादा. वोट प्राप्त किए हरियाणा लड़े कड़वा अनुभव. हुआ घर बाद में एनालिसिस किया तो एहसास. हुआ कि संगठन कमजोर था महाराष्ट्र लड़े और. झारखंड लड़े झारखंड में कई सीटों पर 10000. से ज्यादा वोट मिले छोटी बात नहीं है. उत्तर प्रदेश के लोगों पर और झारखंड के. लोगों का भरोसा.
बनाना मध्य महाराष्ट्र में एक सीट प पहले. राउंड से आगे चलते रहे और 22 राउंड तक. 177000 की लीड तक चलते रहे फिर जब एसोट. मेजोरिटी की सरकार बनती दिखी तो. एडमिनिस्ट्रेशन का खेल हुआ 4000 वोट से. हार. गए इस वोट को आप काउंट नहीं करेंगे लेकिन. मैं आपसे फिर कहता हूं जब 500 वोट मिलता. है 200 हज वोट मिलता 10000 वोट मिलता है. तो यह भी एक उपलब्धि है सिर्फ हार जीत. मायने नहीं रखती है यानी कि इतने लोगों का. विश्वास आपने हासिल कर लिया है और क्योंकि. य गणित है सामाजिक और मैं वहां ज्यादा.
नहीं रहता है तो स्टेट के ऊपर बहुत कु. डिपर उस राज्य में जा रहे हैं जहां कभी. मायावती जीता करती थी नहीं जहां संगठन. राजस्थान में यहां सब यहां सब बही की. नाराजी की वजह मुझे समझ में आ रही है अब. मैं महाराष्ट्र की बात आपको बताता हूं मैं. चाहता था महाराष्ट्र में हम लोग सात आठ. सीटें लड़े ऑन रिकॉर्ड बोल रहा हूं स्टेट. चाहता था कि हमें ज्यादा सीटें लड़नी है. मैंने स्टेट को पावर दी कि आप लोग जो. चाहते हो कर लो मगर यह ध्यान रहे कि अच्छे. प्रत्याशी लड़ाना क्योंकि बीच में को कोई. बैठ जाएगा किसी के समर्थन में तो उससे. पार्टी की छवि जो आपने इजाज खान को टिकट. दिया था वो भी पार्टी की हो थी 150 वोट.
उनको मिले लोगों ने कहा 55 मिलियन फॉलोअर. थे 150 वोट अब आप यही आप आईडिया लगाओ कि. वो तो हमारी पार्टी में नहीं थे हमारी. पार्टी में ऐसा तो नहीं बहुत पुराने वर्कर. चले आ रहे हैं अब उन्होंने आके चुनाव. लड़ने की इच्छा की स्टेट के लोगों ने अपनी. उनकी जो है छवि के आधार पर सोचा आपको. उम्मीद थी उनसे कि थोड़ा और निकलेगा मुझे. उम्मीद थी कि कुछ और अच्छे वोट मिलेंगे. मैंने उनको बताया था एक दिन मैंने उनको. समझाया जिस दिन मुझसे मिले किसी दूसरे. प्रत्याशी की सभा मैंने उनको कहा ऑन. रिकॉर्ड बोल रहा हूं अजाज भी सुनेंगे ऐसा. नहीं तो मैंने उनको कहा कि.
एजाज राजनीति अलग. है रैली अलग है और वोट अलग है वोट आदमी. बहुत सोच समझ के देता है जब वो बिल्कुल. श्यर हो जाता है कि जिसको वोट दे रहा है. वो खराब नहीं होगी तो उन्होने कहा कि आपके. साथ रहकर समझ जाएंगे वह सीखना चाहते हैं. मुझे उसम बड़ी खुशी है उनको भले ही इस बार. वोट कम मिले लेकिन मुझे खुशी है कि उनके. अंदर सीखने की इच्छा है अभी पार्टी में. आपके हैं या थैंक यू सो मच टाटा गुड बाय. नहीं ऐसा नहीं है मतलब महाराष्ट्र की टीम. के साथ तो शायद अभी लेट होके काम कर रहे. हैं मुझे मेरी उसके बाद आपको नहीं पता. मेरी उसके बाद बात नहीं स्टेट की टीम की.
उसमें नॉलेज में मेरी उसमें बात नहीं हुई. ठीक है चलो अ अगले टॉपिक बढ़ते हैं समय कम. है मुस्लिम वर्क बोर्ड सही है मुस्लिम. वर्क बोर्ड सही है हां उनके राइट्स है मैं. इस पर सहमत हूं उनके राइट्स हैं वो अपने. राइट्स को किस तरह से प्रोटेक्ट करते हैं. किस तरह यूज करते हैं ये कॉन्स्टिट्यूशन. ने उनको राइट दिया है सरकार सनातन बोर्ड. की मांग चल रही है उसको भी सपोर्ट करोगे. सनातन बोर्ड तो है ही ऑलरेडी कहां है सारे. मंदिरों पर कब्जा है हिंदू अप प्रकाश के. लोगों का कहते हैं सब सरकार के कंट्रोल. में है कौन से सरकार का कंट्रोल सारा. मंदिर सरकार ने कंट्रोल कर रखा है सारा. पैसा कोड़ी हिसाब किताब सब वो देखते हैं.
धर्म क्या आप फिर समझिए ना सिर्फ पैसे के. क्यों देखते हैं कि पैसा ही है मंदिर तो. आस्था केंद्र है ना सनातन बोर्ड अगर बनता. है तो आप समर्थन करोगे उस मैं फिर आपसे कह. रहा हूं मेरा उस बोर्ड अच्छा उस बोर्ड का. हेड कौन होगा मैं हूंगा क्या अब वो आपने. मुस्लिम तो नहीं पूछा कि उसका मैं हूंगा. वो आज का बना हुआ है क्या नया बनने वाला. मुझसे फिर वो कह रहे ये सवाल इसलिए पूछ. रहा हू मैंने कहा अगर मैं पार्लिमेंट में. होता ईडब्ल्यूएस पे जोरदार विरोध करता. नहीं था तो जब बक बोर्ट बना मैं नहीं था. चलो पार्लियामेंट की बात कर लेते. यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट की बात चल रही है. उसी से जुड़े दोनों सवाल थे उसका समर्थन. करोगे यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड इस देश के.
साथ बहुत सब चीजें जुड़ी हुई है जैसे आपने. कहा कि आपके नाम के साथ अभी मुझे. चंद्रशेखर कह रहे थे कि मैं यह बिल लाने. वाला हूं कि हर आदमी एक जात का जात पात. खत्म कर दिया जाए सब बराबर कर दिया जाए अब. इस देश में दंड विधान अगर एक है ठीक है तो. फिर बाकी चीजें क्यों समान ना की जाए बहुत. अच्छी बात है मगर आप आप ही की बात तो कर. रहा हूं ये तो आप ही के थॉट्स में जा रहा. है फिर वही बात मीठा मीठा गप गप तीखा तीखा. थूक थूक बोल लो. बोल लो और कुछ कहना है फिर कह दे जवाब दे. देता ह बताओ हां देखो ऐसा है.
कांस्टिट्यूशन ने कहा है कि सब लोग बराबर. हैं हम मानते नहीं हो ना आप लोग क्यों. नहीं मानते मैं मुझसे क्या क रहे मैं तो. मानता हूं कमाल है आपके ऑडियंस के अब आप. आप मेरी वही ऑडियंस है जो आपको भी वोट. देती है और जो दुनिया को देती अा ठीक अब. सुन लो जहां आप बैठे हो संविधान ने तो. बहुत दिन पहले कह दिया कि जाति के आधार पर. डिस्क्रिमिनेशन नहीं होगा लेकिन हो तो रहा. है ना नाई कर दो इसको कि नहीं होता. संविधान ने तो कहा कि महिलाओं के साथ. हिंसा नहीं होगी. संविधान ने कहा तो क्राइम करने वाले को. सजा मिलेगी लेकिन क्राइम करने वाले बहुत. सारे लोग खुले घूम रहे हैं हमने तो रे रेप.
के आरोपियों को देखा जो उनको पॉलिटिकल. पावर की वजह से जो है गुजरात में उनको और. हमने खुल के वीडियोस बनाए दहाड़ के विरो. मिट मैं आपको आपको ये नहीं कह रहा ना कि. आप राइट लेफ्ट मैं आपको बता रहा हूं. बिल्किस बानू के जो आरोपी थे उनको माला. पहनाई गई थी माला पहनाई गई हां और वो बहुत. शर्मनाक घटना थी थी ना दुखद थी श तो मैं. ये कह रहा हूं कि सब कुछ है लेकिन मानता. कौन है हां तो गलत गलत गलत से जस्टिफाई. देखो मैं फिर आपसे यह कह रहा हूं अब. आदिवासी हैं आदिवासियों का अपना धार्मिक.
स्ट्रक्चर है हम अब उसको ओवरलैप नहीं कर. सकते भारत क्या है भारत को समझ भारत को. समझने के लिए करते हो अभी की वोटर नाराज. ना हो जाए मुस्लिम वोटर बोल लो बोल लो और. कुछ बोलो फिर मुझे बताओ कि हर मंदिर के. नीचे जो मस्जिद खोजा जा रहा है उधर की बात. की तो यहां से कहां से आ ग मैं तो कह रहा. हूं जो गलत ू धर्म जो गलत है वो गलत है. मैं तो खुल ही कह रहा हूं कहो कि यह सब. गलत हो रहा है किस क्या चीज कि यह जो आज. जो है स्ट्रक्चर जब हमारे पास जो है 91 का. जो है पार्लिमेंट का कानून बना हुआ है.
वशिप एक्ट बना फिर क्यों करकुल सही बात है. जब तक इस देश में प्लेसेस ऑफ. वशिप जब तक प्लेसेस ऑफ वशिप एक्ट है इस. देश में ये हरकत नहीं होनी चाहिए मैं तो. खुल कर कह रहा हूं ठीक है मुझे इस बात का. तराज है तो यही क मैं कौन सा अपना वोटर. टारगेट करना अब अब अब आप मुझसे कहो क्या क. बता कि इस देश में हिंदू मुसलमान के लिए. एक नियम कायदा कानून होना चाहिए एक्स्ट्रा. प्रिविलेज नहीं मिलना चाहिए ठीक मैं कांशन. से बाहर हूं क्या कांस्टिट्यूशन नहीं तो. हिंदू मैरिज एक्ट को वो दिए और. कांस्टिट्यूशन मुस्लिम मैरिज एक्ट को उसी. जो बात चली यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट की मैं.
आप नहीं समझे क्या मैं आपको समझा रहा हूं. मैं कॉन्स्टिट्यूशन के आधार पर बात कर रहा. हूं मैं भी वही बात कर रहा कशन सभी देखो. एक मिनट सुन लो मेरे भाई कांस्टिट्यूशन. सभी को धार्मिक आजादी देता है आप उसको. छिनना चाहते हैं बस यही तो बात है कैसे. भाई यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड के जरिए आप. उसको छीनना चाहते हैं मतलब अगर मैं मेरा. नाम शुभंकर है मैं से सवाल पूछ रहा हूं जो. इसको लेक राइट आते हैं आपको कैसे लग रहा. छीनना चाहते हैं दंड विधान तो एक ही है. अगर जीवन जीने की पद्धति भी एक तरह से कर. दी जाए मतलब जो नियम काय आप अपने अपने. हिसाब से लोगों की जीवन प.
करने क्या कौन सी सर फिर फिर आप मेरी बात. सुन तो अगर आप इस देश को धर्म के आधार पर. नहीं जोड़ पा रहे हो कि सारे धार्मिक. लोगों के लिए एक नियम कायदे कानून हो तो. फिर आप कैसे ये उम्मीद कर रहे हो कि जो आप. प्रपोजल दे रहे थे कि सभी जातियों को गायब. कर दिया जाए क्योंकि ये आपका प्रपोजल है. चंद्रशेखर ने इसी शो पे कहा कि मैं ये. प्रपोजल दे रहा हूं कि सारी जातियां खत्म. कर दी जाए अगर आप धार्मिक आधार पर डाइजन. नहीं कर पा रहे हो तो जातिगत आधार पर कैसे. करोगे फिर मैं आपको फिर यही कह रहा हूं. मैं मुसलमानों की जाति खत्म करने को आपसे. नहीं कह रहा हूं मैं सिखों में अगर कोई का. स्ट्रक्चर है उसको खत्म करने को नहीं कह.
रहा हूं जिस व्यवस्था में खामिया उसी को. दूर करने की बात कर रहे हैं तो यूनिफॉर्म. सिविल कोर्ट जरूरी नहीं आप ये बताओ क्या. हिंदू धर्म में ऊच नीच की भावना है या. नहीं है मुस्लिमों में भी है हमारे भी. धर्म में है बिल्कुल है है ना बिल्कुल है. मैं उसको दूर करने की बात कर रहा हूं. मुसलमानों में भी है मैं क्या कह रहा हूं. मैं उसको दूर करने की बात कर रहा हूं बल. करना चाहिए कि ये जो प्रिविलेज है ये खत्म. हो जाएगा बकुल आपकी बात से मैं 200 पर. सहमत. हूं रहा मान रहा हूं इस देश में जातिगत. आधार पर भेदभाव है और बहुत लंबे समय तक. रहा है कब तक चलाते रहोगे कब तक चलता.
रहेगा इसको ठीक होना चाहिए हर आदमी को. बराबर होना चाहिए आपके नाम के आधार पर. आपको प्रिविलेज नहीं मिलना चाहिए ये मैं. समर्थन हूं लेकिन जो दूसरी बात हिंदू हैं. आप सिख इजम की धार्मिक मान्यताओं को समझते. हैं हां किन-किन को समझते हैं थोड़ा बहुत. जो भी हमने समझा है कि जातिगत आधार पर हां. जिस जगह में पैदा हुआ हूं जिस कल्चर में. मैं हूं जिस चीजों को मैंने देखा और जहां. मैंने जो फील किया उसमें जो. डिस्क्रिमिनेशन है उसको दूर करने के लिए. मैं प्रयास कर रहा हम जहां जिस धर्म को. मैंने देखा नहीं जिस जिसकी बहुत सार चीजों. से मैं अवगत नहीं मैं अपने सिर्फ वोट बैंक.
के आधार पर उसके ऊपर टिप्पणी करने लग जाऊ. उनके लीडर्स है ना बात रखने के लिए शेखर. इंसान की जगह नेता वाला बोली बोलने लगे. नेता हूं यार तो आपको क्यों कमाल है मेंबर. ऑफ पार्लिमेंट नेता नहीं क्या तो फिर खुल. के कहो अभी आपने कहा मैं झूठ नहीं बोलता. हूं बेबाक हूं इंसान हूं अब कह दो कि ठीक. है मुसलमानों को लेक नहीं बोल रहा मेरा. वोट बैंक है नाराज हो जाएगा वो ज्यादा. सेंसिटिव होते हैं तो उनकी आवाज उठाने. वाला है ही कौन दो चार तो बचे हुए लोग हैं. जो उनकी आवाज उठा रहे हैं उनको भी उनको भी. अगर किसी को दिक्कत है तो होने दो मुझे. क्या फर पड़ता जी कहेंगे वो संभाल रहे हैं. आप ठीक है अब मैं तो दो चार में मैंने तो.
दो चार का अकेला थोड़ी कहा हूं भाई तो एक. सेकंड एक नहीं सराइज करने से पहले एक बात. बताओ वन नेशन वन इलेक्शन सरकार की तो मनसा. नेशन नेशन इज डिफरेंट थिंग सेकंड एक सेकंड. सुन लो ना. भाई जब ये गवर्नमेंट उसको ला रही है देखो. हम किसानों के पक्ष में कानून लाई सरकार. किसान सहमत नहीं थे लेकिन आपने बना दिया. आपने किसानों से बात नहीं की. मैं अब इसको सराइज कर रहा हूं आप चाहते थे. ना आप जीएसटी के लिए कानून लाए जीटी आपने.
लागू किया व्यापारियों से बात नहीं की. आपने उनके ऊपर थोप. दिया मेरा यह मानना है किसी के ऊपर कानून. थोपने से अच्छा है उनसे बैठ के बात करो कि. हम यह करना चाहते हैं उससे आपको यह आपको. जहां प्रॉब्लम लग रही है हम हमको बताओ. थोपोंग के ऊपर थोपोंग. करने को मजबूर हो गया मुसलमान वहां से. क्योंकि व यह कहते हैं कि. यहां कोई मुसलमान जो है दुकान नहीं लगाया.
क्योंकि वो उनको आपत्ति है इस बात से नहीं. ये तो फिर गलत चीज है आप चेक कर लो ऑन. रिकॉर्ड चेक कर लो इसलिए मैं आपसे कह रहा. हूं अवैध को कहा होगा वहां के लोकल रि. अवैध नहीं उन्होंने कहा ये यहां रहेंगे ही. नहीं मुसलमान नहीं. रहेगा अरे चेक करो आप दिखाओ मुझे आपके पास. भी मोबाइल है अगर दिखा दिया ये किसने कहा. कि मुसलमान नहीं रहेगा उत्तराखंड में बताओ. क्या शर्त है चलो छोड़ो ये हमारी भाषा है. पॉलिटिकल शर्त मैं आपको कह रहा हूं अगर. मैं आपको दिखा दिया उन्होने मोर्चा निकाल. शर्त ये है कि अगर ऐसा कहा होगा तो ये. बहुत शर्मनाक है य मैं खुल तो मैं कैमरा.
कहूंगा शर्मनाक है य आप लेकिन य दिखाओ. स्टेटमेंट पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने. पुष्कर सिंह धामी सरकार की बात नहीं कर. रहा हूं मैं लोगों की बात कर रहा हूं जो. लोग तो कुछ भी कह सकते चार लोग नहीं जब. पूरा एक जत्था बनके हजारों लोगों का और वो. जाकर मोर्चा निकाल के कहे कि हम इनको यहां. रहने. देंगे इस देश में हर आदमी अपनी जात की. अपने देश की अलग-अलग स्टेट में लोग कहते. हैं हमारा अलग देश बना दो उसकी बात नहीं. कर रहा हूं मैं सरकार की कानून की या. कोर्ट की बात करो जो जायज वाली बात है चार. आदमी की बात हम नहीं करेंगे सरकार अब. सरकार बहुमत में हो तो कुछ भी कर सकते.
सरकार क्या किसान खुश थे बिल से नहीं नहीं. थे तभी तो वापस सरकार ने लिए लिए आप लोगों. ने विरोध किया सरकार को दबाव बना सरकार. कितने महीने कितने लोगों की जान चली गई वो. बात सही है अभ एक वो दलेवाल जी जो हैं उस. पर बैठे हुए हैं अरसन पे सर देखो आप जो कह. रहे हो अलग-अलग विषय है कुछ विषयों पर. आपका समर्थन है कुछ विषयों पर सवाल है. सवाल ये है यूनिफॉर्म सिविल कोर्ट पर क्या. देश में लागू होना चाहिए य सिविल. यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड पे मैं जेपीसी का. हिस्सा बनना चाहता था जब वन नेशन वन.
इलेक्शन आया लेकिन मुझे अवसर नहीं मिला. आपकी दीदी को बनाया गया आपकी दीदी को. अच्छी बात है मुझे उम्मीद है कि वह उस तरह. से बात रखेंगे जिस तरह मैं रखना चाहता था. लेकिन मैं आपसे यह कह रहा हूं तो मैं. चाहता हूं गवर्नमेंट को सब लोगों से बात. करनी चाहिए उनका पक्ष भी सुनना चाहिए. थोपना नहीं चाहिए और मैं नहीं चाहता कि. मैं नहीं मानता कि कोई इस बात से डिसएग्री. होगा अगर कुछ भी देश के लिए अच्छा हो रहा. होगा. कुछ भी देश के लिए अच्छा हो रहा होगा तो. कोई धर्म इस पर डिसएग्री नहीं होगा लेकिन. उनकी जो बात है उनके सामने जो प्रॉब्लम्स.
वो फेस कर रहे हैं वो सुननी चाहिए सरकार. को एक बैठ के हल निकालना चाहिए मि इसक. हमारे देश के एक भूतपूर्व प्रधानमंत्री थे. अभी हाल ही में उनका स्वर्गवास हुआ है एक. बड़ा अच्छा शेर उन्होंने कहा था मेरी. खामोशी ने हजारों जवाबों की लाज रख ली मैं. भी यही कहते हुए आगे बढ़ता. हूं मगर वो प्राइम मिनिस्टर थे जिन्होंने. जो जिन्होंने देश को बहुत कुछ दिया है देश. को कहां से. निकाला सही बात है इसको सन होना चाए हा. होना चाहिए लाजवाब व्यक्ति रहे हा लाजवाब. व्यक्ति भारत के आर्थिक मैं उस पार्टी में.
नहीं हूं जिस पार्टी से वो वो रहे प्रा. लेकिन उस पार्टी बड़ी नेता आपको बहुत पसंद. करती है आप कामकाज करने के तरीके. को मैं इस बात से डिसएग्री हूं कि आप मेरी. बात को पूरा रखने से पहले ही अपनी बात. कहने लग जाते मैं आपसे यह कह रहा हूं कि. मैं मनमोहन सिंह जी की भले उनके पार्टी के. लोगों ने उनका सम्मान नहीं किया लेकिन जो. उन्होंने दिया और ऐसे समय में जब सब कहते. थे कि देश नहीं बच देश डूब जाएगा उन्होंने. अपनी प्रतिभा के आधार पर देश को कहां से. वित्त मंत्री रह के उन्होंने प्राइम.
मिनिस्टर रहकर कहां से निकाल के वो लेकर. आए और जो जहां से निकाल के उसको हम संभाल. नहीं पाए इस बात का मुझे दुख है लेकिन जिस. तरह का आलोचना और अपमान जैसे आप मुझसे. सवाल कर रहे हैं इतने बेहतरीन. प्रधानमंत्री उनके जाने के बाद आज हम सब. लोग उनको याद कर रहे हैं लेकिन उनके. प्राइम मिनिस्टर रहते रहते किस तरह की. आलोचना का शिकार उनको होना पड़ा यह भी ये. भी राजनीतिक ऐसा इसलिए आप आपको जो आपने. कहा ना कि मैं चुपचाप निकल लेता हूं ये जो. आप कह रहे हैं उसी का हिस्सा. है मतलब मेरा एक मैंने बहुत पहले कहा था.
कि पाप जल्दी माथे चढ़ता है पुण्य मरने के. बाद लोग याद रखते हैं यह बहुत पहले कहीं. सुना था मैंने लेकिन क्योंकि एक सिक्के के. दो पहलू होते हैं जब आप एक्टिव राजनीति. में होते हो हो सकता है आज कोई राजनेता. बीजेपी के वजह से आप बहुत पसंद करते हो. कामकाज ठीक है लेकिन आज उसकी तारीफ नहीं. करते होगे आप ठीक है अटल जी के जाने के. बाद दुनिया ने उनकी तारीफ की जीते जी उन. पर कटाक्ष हुए तो यह पॉलिटिक्स का आई थिंक. पार्ट है इस वजह से मैं कर सकता हूं ना. मैं नितिन गडकर जी के काम के के ना कर. सकता क्यों वो आपको मौका दे देते हैं ना. सर किस चीज का आप लोग को विपक्ष को मौका. देते रहते हैं वो किस चीज का गटरी जी नहीं.
मौके के आधार पर नहीं सच कहने की हिम्मत. है उनमें भाई उन्होंने एक्सेप्ट किया कि. हम यहां फेल हो रहे हैं यह कोई छोटी बात. नहीं होती जब आप एक पोस्ट पर होते हैं और. फिर वहां आके अपने आप को सच स्वीकार करना. मैं उनके मैं उनका समान करता स को देखने. तो कई नजरिया होता है जैसे एक नजरिया आपके. लोगों ने कहा कि अंबेडकर जी को ले मेरे. कौन से लोग जो आपकी फॉलो करने वाले लोग आ. नहीं नहीं अरे सवाल सुन लीजिए आप भी सवाल. सुनिए लोगों ने कहा कि अम अमित शाह जी ने. जो अंबेडकर जी को लेकर कहा उसका विरोध. चंद्रशेखर ने उस तरह से नहीं किया जैसे. बाकी विषयों पर वो करते थे अमित शाह जी के.
मसले पर वो थोड़ा सा नरम मिजाज होके धीरे. से कह के निकल गए नहीं नहीं ऐसा नहीं है. देखो वो उनके सोचने का तरीका एज ए लीडर. मेरे कंधों पर जिम्मेदारी है मैं आपको दो. किस्से बताता हूं उसी समय कांग्रेस ने. प्रोटेस्ट किया यूपी में जिसमें दो लोगों. की जान. गई और उसी समय परभनी का इंसीडेंट हुआ. जिसमें. बहुत उस तरह के हालात बने और सोमनाथ की. जान चली गई. हम बहुत लोग सा मार मेरे पास सिर्फ एक. जिम्मेदारी नहीं है.
हम उसी समय अमित शाह जी ने यह बयान दिया. हम मैं अमित शाह जी से कभी इस बात के साथ. सहमत ही नहीं हूं या आरएसएस के किसी. व्यक्ति से कि व डॉक्टर अंबेडकर का सम्मान. करेंगे मैं स्पष्ट रूप से समझता हूं अगर. मैं आपसे किसी बात को लेकर डिसएग्री हूं. मैं असहमत हूं शुरू पहली लाइन से किस बात. पे सुभाकर का एक ही रुख है मैं उससे बहुत. उम्मीद नहीं. करता जैसे आपने कहा कि मैं जात पात नहीं. मानता तो इस पे मेरा कोई सवाल आपसे नहीं. बनता नहीं बनता आरएसएस ने बीजेपी ने कभी. बाबा साब अंबेडकर का सम्मान नहीं.
किया बीजेपी तो अब कि लेकिन जनसंघ ने. आरएसएस ने कभी सम्मान नहीं किया उनके जीते. जी सब यात्रा निकाली तो मैं अमित शाह जी. से अगर उनके सम्मान में कोई बात सुनूंगा. तो मैं ये मानूंगा कि वो झूट बोने दौर में. पहले मैं बात पूरी करूंगा फिर आप अपनी बात. ना तो उनसे मैं उम्मीद करूं कि वो अच्छा. मैं यह कहता हूं कि अगर आज बीजेपी सत्ता. में वो मुसलमानों के लिए अच्छा काम करे. दलितों के लिए अच्छा काम कर पिछड़ों के. लिए अच्छा काम करे आदिवासियों के लिए. अच्छा काम कर तो अपवाद तो है तो मेरा. देखने का चश्मा य कि उनका अपना कोई.
स्वार्थ हो सकता अगर मोदी जी या अमित शाह. जी या उनका कोई भी बड़ा नेता और वह कहे कि. किसी बात में बाबा साहब कोट करे बाबा साहब. यह चाहते थे हमने यह किया वो कि तो मैं. मानूंगा कि वह सिर्फ वोट के आधार पर य चीज. कर रहे क्योंकि उनका चरित्र इस बात के. लेकर अलग रहा है तो मैंने अपना विरोध दर्ज. कराया मैंने उनसे कहा जब जहां भी सवाल आया. पार्लियामेंट में भी क्योंकि बड़ी-बड़ी. पार्टिया कर रही थी तो हमें कौन दिखा रहा. था तो मैं अपना ने विरोध दर्ज किया और. हमने पार्टी में तय किया कि हम इसके खिलाफ. एक बड़ा प्रोटेस्ट करेंगे बड़ा जैसे हमने.
पहले अमित शाह के बहन के खिलाफ हां बड़ा. प्रोटेस्ट करेंगे अब उसी समय मैंने आपको. बताया कि सोमनाथ की जान चली गई 15 तारीख. में और यहां अब सारी पार्टियां कर रही थी. तो मैंने कहा आप किसी के पीछे नहीं खड़े. होना है अब हम करेंगे समय आने पर और मजबूत. करेंगे और हम उसकी तैयारी भी कर रहे हैं. और उस दिन मैंने एक संकल्प भी लिया मेरी. सिचुएशन ऐसी थी कि मैं सो नहीं. पाया तो मैंने उसी दिन अपने साथियों के. साथ कोर मीटिंग बुलाई और हमने तय किया कि. जिस सत्ता के दम पर बैठ के अमित शाह जी आज. ये काम कर रहे हैं वो सत्ता ही हम उनसे.
छीन लेंगे संकल्प होना चाहिए एक दिन के. विरोध से कुछ नहीं हो रहा है एक दिन का. विरोध हम बहुत कामों प करके देख लिए और वो. भी जानते हैं कि एक दिन विरोध करेंगे फिर. अगले दिन घर बैठ जाएंगे फिर उनको अपना काम. करना है तो हम अपने टाइम को किसी भी कीमत. पर और फिर आप सोचो सिचुएशन क्या आती है अब. आप सुनो मुझसे एक चीज और बीजेपी इस मामले. में इस तरह से फंसी हुई थी कि अमित शाह जी. को पीसी करनी पड़ी और उन्होंने कहा कि मैं. तो डॉक्टर हमारी पूरी पार्टी को बाबा साहब. का अपमान नहीं कर सकती. यह एक बहुत बड़ी उनको एहसास था कि विरोध. के स्तर का और देश के प्रधानमंत्री ने छट.
पांच छ ट्वीट किए लेकिन मैं इस तरह सोच. रहा था कि इस समय पर जब बीजेपी फंसी हुई. है अगर कोई भी कहीं प्रोटेस्ट करने आया. तत्कालिक और वहां इस बात से ध्यान हटाने. के लिए जहां कांग्रेस के बड़े नेता जिस. जाल में फस गए अगर हमने वह इसको जिस घटना. से ध्यान हटाने क्यों मैंने मेरा आंदोलन. को अनुभव है एक बहुत बड़ा एक घटना से. ध्यान हटाने के लिए दूसरी घटना कराई जाती. है तो किसी घटना में अगर कहीं हिंसा हो. जाती है तो सारा यह पूरा यह हट के इधर से. सारा ध्यान उधर चला जाएगा क्योंकि मीडिया.
को दिखाना है तो मीडिया किस तरह की स्थिति. में आज देश में चिपा हमेशा से डरते हो आप. भूत है. वो कई विपक्षी नेता ऑफ द रिकॉर्ड कहते हैं. थोड़ा बचते हैं क्यों बचू मैं तो अभी उनसे. मिलना चाहता हूं एक विषय है पुलिस का. मॉडर्नाइजेशन को लेके और होमगार्ड का मैं. उनसे मिलना चाहता हूं मैंने उनके ऑफिस में. फोन भी किया कि मुझे क्योंकि वो देश के. होम मिनिस्टर हैं उनसे डर के हम लोग को. काम कैसे कराएंगे और क्यों डरे वो तो आपको. को भूत टाइप लगते हैं क्या वो देश के गृह. मंत्री.
हैं मैं जल्द उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री. से मिलना चाहता हूं एक सब्जेक्ट को लेकर. जो उत्तर प्रदेश का है हम मेरी खुद की सोच. है जो पावर में है उसके सामने विषय रख के. दो चीजें होंगी क्या तो वह उस काम को. करेगा करेगा तो अच्छी बात है लोगों काम हो. जाएगा नहीं करेगा तो वो बेनकाब होगा कि इस. बात पे इस आदमी की सोच क्या है तो हम जनता. के सामने रख सकते कि हम आपके विषय को लेके. गए थे ठीक बात तो मेरा सोचने का अपना. तरीका है बिल्कुल सही बात है अंबेडकर जी. की ज्यादा डिसरेटर की उनके जीते जी जी.
आरएसएस बीजेपी से जुड़े लोगों ने या. कांग्रेस के तब बीजेपी नहीं थी आरएसएस. जनसंघ के जुड़े लोगों ने दोनों ने बराबर. या कांग्रेस के लोगों ने कांग्रेस और. बीजेपी मैंने जब टीवी पर मुझसे पूछा गया. तो मैंने कहा कि मैं किसी पार्टी को. डिफेंड करने के लिए हां नहीं बैठा जिसने. जो किया मैंने वही कहा कांग्रेस ने अपने. समय में बाबा साहेब अंबेडकर के विचार को. रोकने के लिए बहुत प्रया. किया जिस एनिलेशन ऑफ कास्ट की बात बाबा. साहब करते हैं जिसका मैंने आपको कहा कि. मैं बिल लेकर आने की बात कर रहा हूं उस.
परे वो कभी कांग्रेस के एजेंडे में नहीं. रहा क्योंकि वो भी वर्ण व्यवस्था को और. इवन गांधी जी भी और नेहरू जी भी वर्ण. व्यवस्था को जाति व्यवस्था को स्वीकार. करते हैं ठीक है तो उनके कार्यकाल में कई. ऐसी चीजें हुई हैं जब वो कांग्रेस से लड़. रहे थे तो इसलिए मैं ये कह दूं कि. कांग्रेस बहुत दूध की धुली हुई तो ये तो. सच नहीं है कांग्रेस ने भी अपनी तरफ से. बहुत अवसरों पर बाबा साहेब अंबेडकर को. रोकने का गिराने का प्रयास किया लेकिन. उनमें काबिलियत इतनी थी कि कांग्रेस उनसे.
ज्यादा दिन दूरी बना के नहीं रख पाई यह एक. हमने आपके लिए मंगाया यस या नो आपको जो. सही लगेगा उसको पकड़िए आप अच्छा जो आपको. सही लगेगा वो दिखा दीजिए अगर सही ना लगे. तो इसको ऐसे रख हा नीचे रख सकते ठीक. है पंडित नेहरू राजीव जी को भारत रत्न. अंबेडकर जी से पहले देना सही था या गलत था. बाबा साहब को पहले मिलना चाहिए था तो गलत. था सही था व यस या. नो गलत था तो यस है उठाना पड़ेगा आपको मैं.
कंफ्यूजन ना हो जाऊ इसमें तो मुझे एक. स्पष्ट कर दो आपका सवाल हा तो यही बाबा. साहब को पहले देना चाहिए था तो यानी कि. आपको यस दिखाना पड़ेगा ठीक है हां यही कभी. आंसर के साथ वो हो जाए खेल हो जाए ठीक है. रिजर्वेशन इंडिया से कभी खत्म होगा. आरक्षण यस या नो जब तक सामाजिक गैर बराबरी. रहेगी जब तक लोग आर्थिक रूप से बराबर नहीं. होंगे तब तक और वैसे बीजेपी तो खत्म करने. का प्रयास कर ही रही है ठीक है इस देश में. बच्चे दो ही अच्छे हर जात हर धर्म को यस.
या नो अब आरएसएस के बड़े नेता कह रहे हैं. कि साहब ज्यादा बच्चे पैदा करलो मैं आपका. पूछ रहा हूं महाराज मैं सोच नहीं अच्छा. मैं एक चीज इस पर मेरी एक बात निकल के आ. गई हां आप हिंदू धर्म पर चर्चा कर रहे थे. मुझे. बताओ देश की टोटल आबादी क्या है 140 करोड़. के आसपास वेरी. गुड इस पर आपको 10 में से 10 मार्क मिल. सकते. हैं मेरे उसमें मेरा योगदान नहीं है लेकिन. अभी. ठीक नहीं आप भी उसमें इंक्लूड होते हो.
मतलब आगे का योगदान नहीं है हां ठीक. है इसमें मुसलमान कितने. हैं 15 से 18 पर होंगे शायद ठीक है सिख. कितने मैं डाटा लेके तो नहीं बैठा हूं. आईडी चलो इतना रिसर्च कर ओवरऑल कितने. परसेंट होंगे अल्पसंख्यक जिनको कहते हैं. जिसमें मुसलमान है जैन है सिख है एक तो. मुसलमान इस देश में अख नहीं हो सकते नहीं. मैं मैंने इस इसलिए मैंने कहा इसमें. मुसलमान है अब ये ये इसमें आता है ना.
इसलिए मैं आपसे कह रहा हूं मुसलमान है. जिसमें जैन है सिख है बौद्ध. ईसाई कितने पर टोटल कितने परसेंट होंगे. मतलब सब मिला लो बाकी सब तो 10 पर तो सारा. नहीं पड़ता होगा मुसलमान तक मिला के हम. इनको 25 पर काउंट कर लेते तो 100 करोड़. लोग बचे अब ये इनको आरएसएस बीजेपी के लोग. हिंदू कहते हैं इसमें तो कोई शक नहीं है. नहीं इसमें अपर कास्ट भी है इसमें आदिवासी. भी है इसमें बैकवर्ड भी है स मैं भी हूं. ठीक है तो जब 100 करोड़ ऑलरेडी है हां.
बीजेपी की भाषा के आरएसएस की भाषा के. रिगार्डिंग. तो वह खतरा उनको किससे है और वह अगर मोहन. भागवत जी सभी को हिंदू मानते हैं तो वही. क्यों कह रहे हैं कि मैं ज्यादा बच्चे. पैदा करूं जब ऑलरेडी 100 करोड़ है मोहन. भागवत को इंटरव्यू हो ही नहीं रहा यहां पे. मैं एक मिनट सुन लो ना आपने उनसे उनसे. रिलेटेड मुझसे बहुत सारे सवाल पूछे मैं ये. बात इसलिए बता रहा हूं आरएसएस और बीजेपी. सिर्फ अपर कास्ट के लोगों को हिंदू मानती. है हम क्योंकि जब ये लोग अपने अधिकारों के. लिए बैकवर्ड और आदिवासी सलका सड़कों पे.
आते हैं तो फिर वो इनको शेड्यूल कास्ट. बैकवर्ड और आदिवासी कह के ही फिर इनको लट. से पीटने का काम करती है इसलिए मैं आपसे. यह बता रहा था मेरे भाई कि अगर वह सबको. हिंदू मानते तो जब ऑलरेडी 100 करोड़ है तो. फिर ज्यादा बच्चे पैदा करने को किसको कह. रहे थे इसलिए मैं आपसे कह रहा हूं. कि जनसंख्या एक बड़ा विषय है और मैंने फिर. कहा आप कोई भी जैसे कानून है हमारे यहां. कि भाई हेलमेट सबको लगाना है हम लेकिन हम. लगाते क्यों कि जेब ना कट. जाए हमारे अंदर वो सोच नहीं डेवलप हुई कि. इससे मेरी सुरक्षा होगी इसलिए तो बाल खराब.
ना हो जा चक्कर में. लगाते थोड़ा हीरो बन के जाना होता है ठीक. है तो मैं मगर आपसे यह कह रहा हूं मेरे. भाई कि इसलिए मैं आपको कह रहा हूं कि यह. कुछ विषय हम थोपने की बजाय समझाकर आसानी. से करा सकते हैं क्योंकि हर आदमी किसी भी. जाति धर्म का देश से तो अपने प्यार करता. है यार ट्रू ठीक है तो दो हो एक हो और. चाइना की तरह अगर कुछ साल के लिए रोक भी. लग जाए चीजें संभालने के लिए तो मगर देश. की सरकार में जो बैठे वो तो कह रहे बच्चे.
ज्यादा पैदा करो अब उनको संभालो किस तरह. समझाओ किस तरह के बयान मत दे उनके प्रशंसक. ज्यादा बच्चे पैदा करने पड़ेंगे लगेंगे तो. इससे फिर आबादी और बढ़ेगी ठीक है हालांकि. हम यस या नो में थे आप पूरा 200 वर्ड का. लिख वकील अंदर से निकल आता है मायावती को. अपना नेता मानते हैं चंद्रशेखर यस या नो. जब तक जीवित हूं उठाना उसको उठाना है जब. तक जीवित इसके साथ एक वो भी कर रहा हा कोट. कर सकते हैं तक जीवित हू वो हमारी नेता है. और मैं उनका हमेशा सम्मान करता रहूंगा. मैंने आपके सामने आज य साबित भी किया ठीक. है दलित हिंदू होते हैं बहुत सारे दलित.
अपने आप को हिंदू स्ट्रक्चर का हिस्सा. मानते हैं बहुत सारे हैं जो बौद्धि हो गए. हैं बहुत सारे क्रिश्चन हो गए हैं बहुत. सारे सिख धर्म में भी चले गए बहुत सारे. बड़े पैमाने पर रविदास धर्म के भी लोग हैं. सबकी अलग-अलग मान्यताएं धर्म आदमी का. व्यक्तिगत अधिकार है वो क्या सोचते हैं. उनको पता है ठीक अरविंद केजरीवाल. चंद्रशेखर से बड़े अंबेडकरवादी हैं. क्यों वो तो कह रहे हैं कि दलित के बच्चों. को हम स्कूल में ले जाएंगे मैंने 10 मांगे.
मैंने इसी उस पर देश के प्राइम मिनिस्टर. को 10 मांगों का 12 मांगों पत्र लिखा था. उनमें से एक मांग उन्होंने अगले ही दिन. लेटर से पढ़ के और वो उन्होंने कहा मैं कल. बड़ी घोषणा करने वाला अ चेक कर लो टाइमिंग. के हिसाब चेक कर लो उन्होंने कहा कल बड़ी. घोषणा उन्होंने वो मांग जो मैंने कहा कि. उस जो है शिक्षा में और विदेश शिक्षा के. लिए स्कॉलरशिप मिलनी चाहिए उन्होंने उसकी. घोषणा कर दी देखो मैं मैंने कल ही किसी का. इंटरव्यू सुना तो वो कह रहे थे कि जो पूरा. आंदोलन था अन्ना जी का वो आरएसएस के लोगों. ने. कराया यह मैंने कल ही सुना किसी के.
इंटरव्यू में कोई आरएसएस का आदमी को. इंटरव्यू में हां ये आता रहता है कि बैक. एंड से सपोर्ट तो मैं अरविंद केजरीवाल जी. को बुरा नहीं कह रहा हूं लेकिन मैं ये कह. रहा हूं कि अंबेडकराइट के तौर पर वो बहुत. पीछे हैं क्योंकि डॉक्टर अंबेडकर के सिर्फ. पूजने से काम नहीं चलता उनके विचारों पर. भी चल लेकिन डॉक्टर अंबेडकर का जो सबसे. इंपोर्टेंट लाइन जो सबसे ज्यादा मुझे. फेसिनेट करती है लाइन वो यही लगती है कि. वो आपको सब कुछ फ्री में देंगे शिक्षा. छोड़ के क्योंकि शिक्षा सवाल पूछने का. अधिकार देती है इसलिए तो मैं उनको मना कर. रहा हूं बट नहीं लेकिन वो तो कह रहे हैं. कि हम सारे दलित बच्चों को स्कूल देंगे और. पढ़ाएंगे एजुकेशन का पूरा खर्चा उठाएंगे.
सुनना चाहते हो हां 12वीं तक पढ़ के करेगा. क्या डॉक्टर बन जाएगा इंजीनियर बन जाएगा. वकील बन जाएगा जज बन जाएगा न्यू तो लग. जाएगी लेकिन कमाल ये तो सरकार राइट टू. एजुकेशन में बहुत पहले कर चुकी है मैं. आपसे फिर ये कह रहा हूं उच्च शिक्षा में. अब उनको याद आया 10 12 साल करने के बाद. हमारे उसके बाद कि भाई उस शिक्षा में भी. देना है मैं आपको यही कह रहा हूं डॉक्टर. अंबेडकर को समझना इतना आसान होता तो बहुत. लोग जो है इस काम को बहुत पहले कर ले. धीरे-धीरे लोग पढ़ रहे हैं और समझ रहे हैं. जिन्होंने शवयात्रा निकाली वो भी.
बड़ा-बड़ा फोटो लगा रहे हैं और जिन्होंने. जीते जी जो है सम्मान नहीं दिया हराने का. प्रयास किया वो भी कह रहे हैं हम बड़े. वाले भक्त हैं ठीक है हम अनुयाई हैं बस. ठीक है प्रियंका गांधी राहुल गांधी से. बड़ी नेता बनेंगी यस या नो उनकी पार्टी का. स्ट्रक्चर तय करेगा आपसे तो अच्छे संबंध. है प्रियंका जी के मेरे तो आपसे भी है मैं. कहूं कि आप सबसे बड़े पत्रकार बनेंगे नहीं. बनेंगे इसमें क्या लॉजिक हुआ तो उस. टिप्पणी नहीं करेंगे से मेरी ना मैं उ. पार्टी में का को करूं अरे आपका भी तो एक. एनालिस होगा एक इंसान है आप मैं आजाद समाज. पार्टी के प्रति समर्पित हूं उनके. कार्यकर्ता नेताओं के प्रति तो मैं अब.
अपना काम छोड़ के दूसरा काम करोगे ठीक है. एक दलित नेता के कंपट के तौर पर प्रियंका. जी बड़ी कंपट राहुल जी बड़े कंपट. है एक दलित नेता के हां क्योंकि वो भी. दलितों की बात करती है अगर जनता को तय. करना हो तो आपको क्या लगता है कौन ज्यादा. टफ है राहुल जी प्रियंका जी जनता तय करेगी. आपने कहा ना जनता को तय करना हमें लगा था. आप चौका लगाओगे अटैक कट खेलोगे आप. तो डिफेंसिव खेल रहे हो आप पुजारा बन रहे. हो हम आपको सूर्य कुमार यादव सोचे थे मेरा. क्रिकेट का इतिहास देख लेना अभी नया नया.
है. पार्लियामेंट देश संविधान से चलना चाहिए. शरीयत से नहीं यस या नो वाह शरीयत से नहीं. चलना चाहिए देश तो संविधान से चलेगा. बस देश ना देश संविधान चलेगा मनुस्मृति से. या किसी और धार्मिक उस से नहीं चलेगा. संविधान से. चलेगा संविधान सर्वोपरि है इसमें कोई. ऑब्जेक्शन नहीं है हम. संविधान सर्वोपरि है हम ठीक है आदर्श. विचारधारा किसकी थी गांधी जी की अंबेडकर.
जी की यह हो गया यह हो गया हां देखो आदर्श. के की परिभाषा गांधी जी की नजर में अलग हो. सकती है लेकिन मैंने आपसे क मेरी नजर में. डॉक्टर अंबेडकर उस समय के सबसे बड़े नेता. थे और उनकी सोच जो है आज भी अगर सारी. पार्टियों को उनको कोट करना पड़ रहा है. जैसे मोदी जी. ने नोटबंदी की तो कहा कि बाबा साहब किताब. थी प्रॉब्लम ी उससे अपने लिया है तो उनका. जो विजन था इकोनॉमिक्स में जिसको जब. नोबल्स मिला तो उन्होंने कहा कि अमृत सेन. ने कि वो मेरे गुरु हैं इकोनॉमिक्स में तो. बाबा साहब का विचार बहुत बड़ा था बाबा.
साहब की सोच बहुत बड़ी थी तो बाबा साहब उस. समय के सबसे बड़े नेता तो उनसे आदर्शवादी. कोई नहीं हो गांधी जी से बड़े नेता यस आई. एग्रीड ठीक है ज्यादा बड़ा इंपैक्ट किसका. था पेरियार जी का या अंबेडकर जी का. अंबेडकर जी पेरियार जी का इंपैक्ट उस समय. में बहुत था लेकिन पेरियार जी जहां वो जो. पूरा स्ट्रक्चर है वो तमिलनाडु वाली बेल्ट. वो साउथ तक था डॉक्टर अंबेडकर का जो वो है. वो वर्ल्ड वाइड आज भी आप देखो बहुत सारे. कंट्री में शायद किसी धार्मिक आयोजन ना.
होता हो कोई धार्मिक कोई जयंति का लेकिन. बाबा साहब को सब जगह और दुनिया ने बाबा. साहब को सम्मान दिया कई कंट्री ने सम्मान. दिया तो बाबा साहब को धीरे धीरे लोगों ने. उनके जो वॉल्यूम उनको पढ़ा उसके लिए मैं. सभी स सरकार को धन्यवाद करूंगा कि. उन्होंने बाबा साहब के एक्चुअल वॉल्यूम्स. को जनता के सामने दर्शन को लाने काम किया. और जिसका फायदा देश को मिल रहा है भारत का. नायक कौन शिवाजी या औरंगजेब. शिवाजी हमेशा सर्वोपरि रहे हैं लेकिन आप. औरंगजेब से क्यों जोड़ना चाहते हैं. औरंगजेब अपने समय में थे कई लोग औरंगजेब.
को बड़ा नायक मानते कहते उस जमाने में. जीडीपी सबसे बड़ी थी बड़े उसकी भी कथा प. पाती है चलो मैं आपको और समझाता शिवाजी जी. की सेना में 50 पर लोग मुस्लिम थे ये तो. हम जानते हैं और औरंगजेब की सेना में भी. थे तो फिर हा मैं तो आपसे इसलिए पूछा तो. एक वर्ड पूछा आप इस वाले डिटेल में क्यों. चले गए जिन्ना या सावरकर किसकी डोलजी ने. देश को ज्यादा नुकसान पहुंचाया दोनों से. सहमत नहीं हूं ज्यादा नुकसान किसने. पहुंचाया मैं दोनों से सहमत नहीं टू नेशन. थरी के किसी भी व्यक्ति सहमत नहीं हूं ठीक. है अ बेहतर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री. कौन रहा मुलायम सिंह यादव बहन जी कुछ.
सोचने की जरूरत ही नहीं है कुछ चीजों में. मैं बिल्कुल स्ट्रेट फॉरवर्ड हूं बहन जी. जैसा कार्यकाल किसी का नहीं रहा है खुले. में सांस लेना सीखे हैं लोग. और एक महिला के तौर पे और महिलाओं में भी. उस वर्ग से आकर काम करना ये कोई आसान माती. की तीन क्वालिटीज क्या थी जो आपको बहुत. फेसिनेट करती है तीन हो तो बताऊ जो भी टॉप. थ्री क्योंकि वैसे तो एजुकेशन पर बड़ा काम. किया उन्होंने हम जीरो बैलेंस पर एडमिशन. हमारे यहां तभी स्टार्ट हुए पढ़ने का मौका.
मिला कानून व्यवस्था बहुत शानदार थी हम और. जिस तरह से अधिकारियों से व ट्रीट करती थी. कि अगर कोई अधिकारी काम नहीं करता था उस. समय सुबह अर्ली मॉर्निंग आ जाते थे. अधिकारी टाइम से हम और जब हमें अवसर. मिलेगा तो उनके काम के साथ और स्क्वायर. करके हम लोग और ज्यादा काम करके दिखाएंगे. बड़ी कशिश है आपके अंदर कि एक बार मैं बस. टीम में ले ले मैंने यह कहा कि अगर हमें. सरकार में आने का सरकार चलाने का मौका. मिला हमको लग रहा इस बार फोन आ ही जाएगा.
तो पॉडकास्ट डकास्ट खत्म होते हु जो फोन. मिलाया था आपने मन की मुराद पूरी हो जाएगी. तो मैं आशीर्वाद लेने जरूर जाऊंगा मैं भी. आपसे वादा करता हूं दूसरी बात मैं आपसे यह. कह रहा था हम. कि उनका जो काम है वो उस समय के. रिगार्डिंग शानदार है तो अब अगर हमें आने. वाले समय में मौका मिला सरकार में आने का. सरकार चलाने का तो हम उनसे भी सीख के और. उससे बेहतर काम करके दिखाएंगे यह बात मैं. आपसे कहना चाह रहा था क्योंकि एडवांस हो.
गया बहुत सारी. चीजें पहले की अपेक्षा बहुत चीजें बदल गई. है एक एक मतलब जैसे पहले तो अधिकारियों से. बुलाकर मीटिंग करनी पड़ अब जूम पर मीटिंग. हो जाती है आप पर सारा डाटा रहता है कहां. क्या हो रहा है कितने रिकॉर्ड ऑनलाइन सब. चीजें अब जो हमें मौका मिलने पर जो हम काम. करेंगे बहुत शानदार होगा चंद शेखर आजाद को. लेकर सबसे बड़ा मिसकनसेप्शन क्या है जो आप. बनाना चाहो अपने दिल में आपके पास से क्या. आया कुछ तो आया कुछ नहीं मैं कमाल है मैं. अगर यह काम मैं करूंगा तो मेरा काम कौन. करेगा भाई आसपास वाले खबर तो लाते होंगे.
ना कि भै आपके बारे में बात हो रही है तब. से यहां हो आप किसी ने कोई खबर दी बता आज. तक आज तक 10 12 साल की पॉलिटिक्स में मैं. फिर ये कह रहा हूं कोई कुछ भी कहे कोई कुछ. भी चलाए मेरा काम है कि मैं अपने काम को. जिम्मेदारी से करूं और फिर मैं आपको कह. रहा हूं जब कोई काम करेगा तो उसके खिलाफ. सब चीजें. होंगी कई चीजें हैं जो मैं क्लियर कर चुका. जैसे कुछ झूठ इस तरह के फैला जाते हैं कि. भाई यह हुआ वो हुआ चंद्रशेखर की व से बहुत. सारे लोग जेल में है फैक्ट ये है कि कोई. जेल में नहीं है मैं जितनी बार जेल गया.
मैंने सबसे आखिरी में बेल कराई सबको सबसे. मुझसे अपने से पहले बेल कराई हम मैं समझता. जी लीडर मेरी जिम्मेदारी है कि कोई अगर. परेशान है तो उसके उसका हाथ पकड़ना मेरी. जिम्मेदारी है. हम होना चाहिए ये एक परिवार है उस परिवार. को साथ लेकर चलना रिस्पांसिबिलिटी है. किताब लिखने का भी शौक नहीं हुआ क्योंकि. ज्यादातर दलित चिंतकों को पढ़ रहा था मैं. अधिकतर ने किताब लिखी है दलित दलित दलित. दलित दलित नहीं यूज करना चाहिए वर्ड मैं. फिर कह रहा हूं मैं फिर आपसे पूछ रहा हूं. नहीं यूज करना चाहिए कि आप चिंतक हो या.
कॉमन नहीं रखना चाहिए मैं आपसे पूछना चाह. रहा हूं मैं पत्रकारों की बहुत चिंता करता. हूं तो पत्रकार चिंतक हो जाऊंगा क्या मैं. मैं फिर कह रहा हूं मैं तो मानवता का की. चिंता करता हूं जब मैंने हेलमेट वाली बात. की तो क्या मैंने सिर्फ दलितों के लिए की. लोग वही सामाजिक विषय था तो मैं फिर यही. कह रहा हूं तो आदमी सामाजिक होता ही है ना. भाई तो ये तो आप लोग तो सिर्फ मायावती जी. से आप क्यों इंस्पायर हुए फिर किससे जैसे. आपको अगर इस वर्ड से तराज था तो सिर्फ आप. इस पॉडकास्ट में भी आपने मायावती जी. काशीराम जी पेरियार जी या अंबेडकर जी इनको.
ज्यादा जिक्र क्यों फिर अगर यह दलित मेरे. यह कहने प कि दलित. चिंत ये रोल मॉडल है इनसे हमने सीखा है. मैंने तो आप मेरे इंटरव्यू सुन लेना जब. मुझसे पूछा जाता है कि देश के शानदार. प्राइम मिनिस्टर में आप किनको देखते हैं. तो मैं चौधरी चरण सिंह जी का जिक्र करता. हूं वीपी सिंह जी का जिक्र करता हूं मैं. जिनको मैं बहुत से करीब जिनके भाषण पसंद. करता हूं जिनके व्यक्तित्व को चंद्रशेखर. जी मेरे नाम राश थे और मनमोहन सिंह जी. इनमें से कोई भी शल कास्ट का नहीं है और.
मेरा इंटरव्यू आप आज से पहला आपको अपने. नाम के आगे दलित चिंतक लगाने से एतराज. एतराज है दलित नेता आप मुझे सीमित करना. चाहते हैं जिसको मैं होना नहीं चाहता. मैंने अपने नाम के पीछे आजाद लगाया मेरे. डॉक्यूमेंट में नहीं है आपकी पार्टी की. क्या एक सेकंड मैंने आजाद लगाया है यह. मेरे नाम के साथ जुड़ा हुआ नहीं है. डॉक्यूमेंट मेरा नाम चंद्रशेखर है मैंने. आजाद लगाया मैंने एक्सेप्ट किया सीमित. नहीं रहना है असीमित होना है आप मुझे. सीमित करना चाहते हैं इस बात का मुझे मैं. इस ठीक है आपने अच्छा किया ना क्लेरिटी की. आपको लोग नहीं बुलाएंगे भविष्य में बहुत.
बार कह चुका हूं कई बार लेकिन कहां उनकी. रीच कम होगी ना हमा अभी तो मैंने एक. इंटरव्यू में कहा एक मेरे माथे पर लिख दो. दलित दलित दलित दलित लिख दो कि हर आदमी को. पता लगेगी आपने अपने नाम से रावण शब्द. क्यों हटा दिया मैंने लगाया नहीं था तो वो. फिर आपके नाम से जुड़ गया था वो क्या. मीडिया के की देन है आपने कभी उस नाम को. लगाया नहीं था कहां लगाया बता दो कोई. मैंने कहा ना आप कहो तो आधार कार्ड भी. दिखाऊ यही एक मिसकनसेप्शन आ गया देखो आप. कह रहे थे कि नहीं मैं क्या कह रहा हूं आप. मैं फिर आपसे कह रहा हूं मैं अपना आधार. कार्ड मंगा देता हूं इस बात को प्रूफ करने.
के लिए कि मेरा नाम क्या है कहो तो मंग. मगाऊ नहीं क्योंकि. और को ज्यादा उम्मीद भी नहीं कर सकता. हूं ठीक है तीन किताबें जो सबको पढ़नी. चाहिए आपके हिसाब से सबको पढ़नी चाहिए तीन.
किताबें कोई अगर आप रिकमेंड करना चाहो. पहले भारत का संविधान सब लोगों को पढ़ना. चाहिए या आपने कहा था स्कूल में पढ़ाया. जाना चाहिए हां जरूरी है इसका मैं मेरे. जीवन में इसका गहरा असर इसलिए है कि जब. मैं इटली और ऑस्ट्रिया गया हम तो मैंने. वहां के एजुकेशन सिस्टम को देखने का. प्रयास किया कि वहां लोग करप्शन पे क्यों. इतने ज्यादा जो है करप्शन वानी है क्यों. मैंने देखा कि जो रोड साइड में जो गाड़िया. है व ऑटोमेटिक वो लोग अपनी सही जगह पर. खड़ी कर रहे हैं बहुत सारा कचरा क्यों. नहीं फैला हुआ है तो लोग इतने जागरूक कैसे.
तो मुझे पता लगा कि वहां स्कूल में उनके. राइट और ड्यूटी पढ़ाई जा रही है और उनको. इंसान बनाया जा रहा उनको य कहा जा रहा कि. उतना ही कमाना जितना जीस क्योंकि जिंदगी. ऐसा नहीं कि 60 साल तक कमाते रहे उसके बाद. 20 साल 30 साल अच्छी जिंदगी फिर तो शरीर. जवाब दे जाएगा तो जीना है सरवाइव नहीं. करना है तो इसलिए जो जहां व तैयार हो रहा. है ब्रेन स्कूल में वहां पढ़ाया जा रहा है. कि इस तरह अपराध नहीं करने इस तरह की. चीजें नहीं करनी और आपके ये अधिकार है देश. में क पर मैं ऑस्ट्रेलिया और इटली. ऑस्ट्रिया और इटली की बात कर रहा हूं तीन.
दिन के लिए गया था मैंने एक संकल्प किया. था कुदरत ने पूरा करा दिया हमारे एक धर्म. गुरु है उनकी डेथ हुई थी वहां हत्या हुई. थी उस जगह को नमन करने का मैंने संकल्प. किया था कि मेंबर ऑफ पार्लियामेंट बनने के. बाद मैं. जाऊंगा तो मैं वहां गया था तो वहां मैंने. जब तीन दिन में रहा तो मैंने इसको रिसर्च. किया काफी लोगों से बात की दो तीन तीन चार. चार घंटे तो यह निकल के आया कि वहां उनके. राइट्स और ड्यूटी को बचपन में ही. उनको इतना उनको जो है उसके आसपास रखा जाता.
तैयार किया जाता स्कूल में ही जब वह उनका. ब्रेन विकसित हो रहा होता है बौद्धिक. विकास हो रहा था कि वह अपने आप अपने. राइट्स के प्रति और अपनी ड्यूटी के प्रति. ब्यूटीफुली कोटेड और मुझे भी लगता है ये. स्कूल में पढ़ाना चाहिए बहुत जरूरी है. दूसरा अगर पॉलिटिकली कोई युवा कोई आगे. बढ़ना चाहता है तो उनको जीवन पढ़ना चाहिए. मान्यवर काशीराम साहब. का वई ओनली काशीराम यू रिकमेंड हां. क्योंकि मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा आपने. मुझसे पूछा ना कि भाई आप क्या सजेस्ट वजह. उसकी वजह भी होग उसके पीछे कोई वो.
साइंटिस्ट थे क्लास वन के अधिकारी थे. डीआरडीओ में जॉब छोड़ी और समाज के प्रति. जो उनका त्याग था वोह सरानी. था और फिर मैं बात करूंगा तीसरी तीसरी. डॉक्टर बाबा सा अंबेडकर को स्टडी करने की. आज देश को जरूरत है जाति के आधार पर. क्योंकि जाति व्यवस्था है उनको लंबे समय. नकारा गया लेकिन आज वो ब्रांड है और सबको. उनकी जरूरत है तो एक बार उनका जो कांसेप्ट. था उनके जो वॉल्यूम्स है उनको लोगों को. पढ़ना चाहिए पढ़ने से क्या होगा.
जैसे उनकी जो किताब है पाकिस्तान पार्टीशन. को लेके उनका ये मानना था देखो बहुत. शानदार बात बता रहा हूं कभी किसीने चर्चा. नहीं की होगी वो कहते बाबा साहब ये कहते. थे कि भाई ये होना चाहिए सारे मुसलमान. उनका उसके पीछे उनका थोट ये था वो कहते थे. कि जब हम यहां इस देश में अपने राइट्स की. बात करेंगे तो गवर्नमेंट जो भी गवर्नमेंट. होगी वह हिंदू मुसलमान करके हमारी राइट्स. की जो बात है व उसको बैक कर देगी और यही. विषय चर्चा पर आ जाएगा उस तरह से हमारे. विषयों पर चर्चा नहीं होगी कि हमारी नीडेड. क्या है आज भी वही हो रहा है उसका. खामियाजा हम लोग भगत रहे देखिए जब भी कुछ.
होता है तो सरकार हिंदू मुसलमान को ले आती. है हिंदू मुसलमान कॉन्फ्लेट को ले आती है. कहीं दंगा हो जाता है तो वो जो बेसिक जैसे. हम बात करते हैं कि भाई कहां तक जो 80. करोड़ लोगों को सस्ता राशन मिल रहा है कौन. है इसकी जानकारी होनी चाहिए महिलाओं पर. इतनी हिंसा हो रही है महिला कौन किस जाति. धर्म की इसकी एनसीआरबी का डाटा लाखों लोग. महिलाओ के साथ हो रहा है इसकी जांच होनी. चाहिए तो जब यह बात करते हैं कौन लोग हैं. जिनके पास मकान नहीं है जिनको प्राइम. मिनिस्टर 4 करोड़ मकान दिए हैं कौन लोग. हैं जिनको जो है पेंशन का नाम नहीं मिल तो.
इसके इसको य डाटा होना चाहिए तो यह सब. मुद्दे पीछे हो जाते हैं जब नौजवानों के. रोजगार की बात करते हैं देखिए यूपीएससी के. बच्चे बैठे हैं बिहार में बारिश में लाठी. पड़ रही है जो पुलिस वा लाठी मांग कभी वो. भी कंपटीशन देके आए बहुत शर्मनाक था कि. बारिश सर्दी में पीठ को पायदान बना के. मारा गया अब आप समझो ना कि क्यों नहीं. महसूस हो रहा कि इंसानियत कहां मर गई है. तो यहां मुझे महसूस होता है कि बहुत कुछ. चीजें हैं जिन पर चर्चा होनी चाहिए और जब. एक एंगल आ जाता है तो वह सब चीजें पीछे हो. जाती है तो ये जो पार्टीशन वाली पाकिस्तान.
वाली किताब थी इसमें क्योंकि और बहुत सारी. बातें हैं जिसको अलग-अलग तरीके से कोट. किया जाता है तो अंबेडकर साहब की सारी. बातों सहमत हो जो पाकिस्तान के पार्टीशन. किताब है मैं फिर कह रहा हूं उन्होंने. क्यों कहा उनका य कहना था अगर अलग देश बन. रहा है तो सभी लोगों को उधर जाना चाहिए. क्योंकि बाद में य इशू ना बने और आज वही. इशू बन रहा है ठीक है लेकिन अब आप समझिए. ना उस समय के बहुत बड़े-बड़े नेता चाहते. थे कि पार्टीशन ना हो पार्टीशन हुआ और फिर. मेजॉरिटी में बहुत सारे लोग यहां रह गए और. वो लोग भी आज अपने आप को पीड़ा महसूस करते. हैं वो बार-बार उन जब वो बोलते हैं कहते.
हैं कि भाई हमने इस देश को इसलिए चुना था. कि इस देश में कांस्टिट्यूशन है डॉक्टर. अंबेडकर का वो कांस्टिट्यूशन जो है हमें. बराबर के अधिकार हमने इसलिए चुना था लेकिन. आज हमारे साथ क्या हो रहा है तो यह तकलीफ. जो है यह रहेगी लंबे समय रहेगी शोषित. वंचित समाज को अपलिफ्ट करने के लिए क्या. चीज की जरूरत है देखो इकोनॉमिक जो है ये. सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि 47 से. लेकर अब तक हां आदमी बात करता. है गरीब गरीबी की शशि की व सरकार के पास. कोई पॉलिसी नहीं है उनके आर्थिक सुधारने. की मुझे आज ही पता लगा मैं चर्चा कर रहा.
था किससे कि भाई गांव में इतना बजट आ रहा. है इतने करोड़ रुपए का तो मैं कह रहा हूं. फिर विकास क्यों नहीं हो रहा है देखो इन. वर्गों को जब तक आर्थिक रूप से आप मजबूत. नहीं. करोगे तब तक इक्वलिटी बनी रहेगी इनको. आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए आपको. इनको अवसर देने चाहिए 2 पर सरकारी नौकरी. है 98 पर प्राइवेट सेक्टर सरकारी नौकरियों. में रिजर्वेशन है 98 पर प्राइवेट सेक्टर. में रिजर्वेशन नहीं है उन 2 पर नौकरियों. में इसलिए रिजर्वेशन दिया गया.
है कि जिन वर्गों को अवसर नहीं मिले थे उन. वर्गों के लोग भी आए वो पॉलिसी का हिसा हो. आप समझिए ना सिर्फ एडमिनिस्ट्रेशन. सिर्फ कुर्सी नहीं है गवर्नमेंट जो स्कीम. ला रही है उसको लागू धरातल पर कराने का. काम एडमिनिस्ट्रेशन का है न्याय जनम से. अधिकार लेकिन न्याय दिलाने में हेल्प करने. का काम पुलिस का है अगर य सोशल स्ट्रक्चर. नहीं. होगा सोचो इस कमरे में सब शेड्यूल कास्ट. के लोग ही होते तो आपका आप भी शेडल कास्ट. के होते मैं तो आपका सवाल क्या होता.
है शेडल कास्ट को कैसे अपलिफ्ट करें लेकिन. हम यहां अलग-अलग उससे बैठे हैं ग्रुप्स. में और भी लोग तो बहुत सार सवाल जैसे आप. कॉमन कर देते सिर्फ शेडल कास्ट के लोग. सवाल पूछे तो उनके सवाल अपने ही होते एक. सीमित दायरे में आप कहते सिर्फ अपर का के. लोग सवाल पूछे तो उनके सवाल सीमित होते तो. यह जो सोशल स्ट्रक्चर ये नहीं बन पाता. सबके अपने अपने व्य आते इसलिए उसका आधार. था सामाजिक पिछड़ापन शैक्षिक पिछड़ापन. प्रति की कमी उन तीनों को आधार बनाकर दिया.
गया कि यह लोग भी आ और पॉलिसी का हिसा बने. और जब इनको मौका मिले कुछ करने का इन. वर्गों के लिए तो यह करे यह उसका आधार था. पूरा इसलिए मैं कह रहा हूं बहुत कुछ होना. बाकी है तो अगर चंद्रशेखर के हाथ में आखरी. सवाल अगर ताकत नहीं वेट तो यह आर्थिक गैर. बराबरी दूर होनी चाहिए मैंने आप मैं. रिजर्वेशन पर बोल रहा था कि 98 पर. प्राइवेट सेक्टर फिर भी हम लंबे समय से. पहले दिन से इस बात को लेकर गाली खा रहे. हैं कि हम इस देश में मुफ्त में बहुत कुछ. लेते हैं हमें नौकरी मिलती है जबकि वहां.
भी अब ईडब्ल्यूएस के बाद ईडब्ल्यूएस 2019. में आ गया तो मैं ये मान लूं कि. ईडब्ल्यूएस के प्रकाश के सिर्फ वही बच्चे. जा में काबिलियत नहीं है या मैं ये मानू. कि जिन लोगों के का पास जरूरत थी वो जिनका. प्रति कम था वो जा रहे हैं इसको जस्टिफाई. नहीं कर सकती कोई पार्टी इसलिए मैं आपसे. कह रहा हूं कि 98 पर प्राइवेट सेक्टर में. भी हमें उनको अवसर देना चाहिए क्योंकि यह. प्राइवेट सेक्टर अपने आप नहीं बना है इसको. गवर्नमेंट ड दे गवर्नमेंट उनको जमीन देती. है कोड़ियं के दाम पर गवर्नमेंट उनका. टैक्स माफ करती है गवर्नमेंट उनको और. टैक्स में छूट देती है अगर वह डूब रहे हो.
तो उनको जो है लोन भी देती है और ये सारा. पैसा जनता का है तो जनता जो मेजोरिटी है. उनके हितों का ध्यान रखना चाहिए तब जब हम. उनको अपलिफ्ट करने की बात कर रहे हो तो जब. तक आर्थिक आधार. पर उनको मजबूत नहीं किया जाएगा तब तक नहीं. मुझे लगता समाज विकास विकसित हो सकता मैं. इस सवाल को जब कोई उस पक्ष का नेता आएगा. कुरसी परछ तो उससे ये सवाल जरूर पूछूंगा. और मुझे लगता है शायद वो उसका ज्यादा. बेहतर फिर तुलनात्मक दर्शक को करने का. मौका मिलेगा वेट एक चीज और 00 पेंशन देती.
है. गवर्नमेंट महिलाओं को वृद्धों को आप मुझे. आज के टाइम पर बताओ आप और मैं यंग एज के. हैं 00 में क्या एक महीने घर चल सकता है. सवाल ही नहीं पदा होता तो सरकारी स्कूलो. में जो मिडडे मील का पैसा मिलता है अगर. उसको आप देख लोगे किस आधार प दे. गवर्नमेंट कि वह महिलाओं को किस आधार पर. देती है यह या पुरुषों को बुजुर्गों को कि. भाई इससे क्या हो जाएगा विकलांगों को व 00.
पेंशन देते हैं कई हजार रप देते हैं किस. आधार पर देते हैं उनके पास कौन से आकड़े. हैं कि 000 में 00 में 30 दिन तक रोटी. कपड़ा मकान पानी की व्यवस्था हो सकती. है इस देश में जब तक. एजुकेशन फ्री नहीं. होगी या इतने कम दामों पर नहीं होगी कि हर. आदमी को अवसर मिल सके. तब तक रिफॉर्म नहीं हो सकता है एजुकेशन एक. बहुत बड़ा स्ट्रक्चर है मैं इस यहां पर. मैं टिप्पणी कर सकता हूं मेरी समझ से भी. यह है कि एजुकेशन और हेल्थ दो चीज या तो.
फ्री हो या इतनी चीप हो कि हर आदमी अफर्ड. कर मैंने पार्लियामेंट में इस बात को कहा. और मैंने इसको वैसे नहीं कहा थोड़ा सा. विस्तृत है मगर इंपोर्टेंट है जब हम चर्चा. कर रहे हैं सिर्फ ये ब्रॉडकास्ट सिर्फ. इसलिए ना हो कि इस लाइक और व्यू आने इसलिए. भी लोग इसको समझे इसके पीछे व्यू क्या है. हो सकता है मेरी पिछली बात तो सब लोग सहमत. लेकिन हो सकता है मेरी इस बात से बहुत. सारे लोग सहमत हो मेरा स्ट्रक्चर ये है कि. जब जो गवर्नमेंट चला रही है प्रदेश चला र. देश चला रही वो कहती है कि हम हमने अच्छे. स्कूल बनाए गरीबों के. लिए तो बॉस इसकी इसका प्रैक्टिकल अपने आप.
प करो ना अपने बच्चों को पढ़ाओ ना व सही. बात है सहमत हो अपने बच्चों को विदेश में. पढ़ाते हो और गरीब के बच्चों कहते इसमें. पढ़ो सही बिल्कुल सही तो मैं यह कह रहा. हूं जब तक सरकारी जितनी मशीनरी है चाहे वो. गांव में फोर्थ क्लास का कर्मचारी हो और. चाहे वो क्लास वन का अधिकारी जो यहां बैठा. है सेंटर में सेंट सेक्रेटरी सेक्रेट में. बैठा हुआ वो यहां बैठा देश चलाने वाला. चाहे वह स्टेट में बैठे हुए हो मैं पोस्ट. कोस्ट करके कहता हूं कि जब तक और जब तक. नेता नेता आप मुझे भी उन्हीं में आको अब.
जब तक गांव में आने वाली इस शाखा के यानी. कि गांव के पंचायत के मेंबर से लेकर और. राष्ट्रपति तक का बच्चा जब तक सरकारी. स्कूल में नहीं पढ़ेगा उनको किसी सुविधा. का लाभ नहीं मिलना चाहिए सरकारी नौकरी. करने वाले के बच्चे को सरकारी स्कूल में. पढ़ने का अवसर मिलना चाहिए आप देखना. प्राइवेट स्कूलों की रेड लग जाएगी सका. स्कूलों में बच्चों की भरमार हो जाएगी और. कम दामों पर अच्छी शिक्षा मिलेगी क्यों. क्योंकि जब एक ही टेबल पर प्रधानमंत्री. मुख्यमंत्री राज्यपाल विधायक सांसद और.
उसके पीछे उसके बराबर में किसान मजदूरों. के बच्चे बैठेंगे तो गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई. मिलेगी देश को सहमत हूं और हमारे देश में. सबसे खराब चीज यही हुई है कि एजुकेशन और. हेल्थ हमें बता दिया गया जितना महंगा. जाओगे उतनी बढ़िया मिलेगी और जितनी सस्ती. होगी उतनी कूड़ा होगी अच्छा हेल्थ में भी. मेरा यही वो मैंने अपने पिता को खोया बस. क्योंकि मेरे पास पैसे नहीं थे उनका कैंसर. का ऑपरेशन कराने के वो दिन था मेरी लाइफ. में जो बहुत जिसने चेंजेज कर दिया मैंने य. तय किया कि मैं किसी के बाप को मरने नहीं. दूंगा किसी की बेटी को पत्नी को बहन.
को किसी भी एक्स वाई जड को नहीं मरने. दूंगा सिर्फ पैसों की कमी के कारण इसलिए. हम लोग इस मैं इस स्ट्रक्चर में घुसा तो. मैं मानता हूं हमने एजुकेशन के लिए. पाठशाला चलाई भीम आर्मी की और इसके लिए भी. हम लोगों को जागरूक किया मैं कहता हूं. सबका इलाज मुफ्त होना चाहिए या इतनी इतने. कम पैसे प होना चाहिए कि पैसे कमी कांड. किसी की जान ना जाए यह मैंने प ट में भी. गई कब होगा जब इन सरकारी सिस्टम को जो लोग. बना रहे हैं जो पॉलिसी बना रहे हैं और जो. पॉलिसी को लागू कर र दोनों लोग सरकारी. अस्पताल का इलाज कराए राष्ट्रपति से लेके.
और गांव के जो संवैधानिक पद. है ग्राम पंचायत के सदस्य मेंबर तक और. वैसे ही क्लास वन के अधिकारी सेंट्रल के. सेक्रेटरी से लेकर चीफ सेक्रेटरी से लेकर. और गांव के सेक्रेटरी तक जब तक इनके. बच्चों का और इनका इलाज सरकारी अस्पताल. में नहीं होगा ना डॉक्टर मिलेगा ना दवाई. मिलेगी ना इलाज मिलेगा ना टेस्ट होगा आज. ये ये करप्शन का अड है टेस्ट लिखेंगे बाहर. से जहां कमीशन है दवाई लिखेंगे बाहर से. कमीशन है कोई मशीन नहीं मिलेगी आपको ना.
ईसीजी ना एक्स ना कुछ और व्यवहार ऐसा है. जैसे ये गुलाम हो जनता को गुलाम समझते खुद. को मालि सम डेड बॉडी नहीं देंगे अभी देखा. मैंने मैंने एक अपने डीएम से कहा ₹ लाख रप. उन्होंने कहा तब जमा करो तब डेड बॉडी. मिलेगी वो रोते फिर रहे हैं तो उन्होंने. मुझसे कहा मेरी लोकसभा के बो करा दो तो. मैंने डीएम से कहा यार ये लूट पटाई बंद कर. दो यार ये लोग कहां से लाए क्या बेचे. अच्छा मैंने कहा आप बताओ तो उन्होंने. अच्छे अधिकारी मेरे मुझसे बोला कि नहीं सर. मैं दिखता हूं उन्होंने उनसे कहा यार सब. लोगों से पैसे ले लो गरीब कहां जाएंगे तो. इस पर मेरा यह बहुत मैं आपसे 200 पर सहमत.
हूं तो मैं कोशिश कर रहा हूं कि ये चीजें. हो और उसके लिए मुझे पावर की जरूरत है. इसको लागू कराने की और ये विषय जब भी आप. पार्लियामेंट में उठाओगे उठाया मैंने मैं. कह रहा हूं आप भी जब उठाओगे तो मैं पहला. व्यक्ति हूं जो ट्वीट मारना शुरू कर अच्छा. होगा क्या हुआ क्या जब मैंने उठाया तो. मैंने महसूस किया कि हो नहीं सकता है जब. तक हम पावर में नहीं आते अब पूछो उसके. पीछे कारण क्या है क्योंकि सारे नेताओं के. तो हॉस्पिटल स नेताओं के स्कूल है जितने. कॉलेज और स्कूल है इसका डाटा निकलवा लो. हस्पिटल सब नेताओं के हैं तो इनका धंधा जो. लोग देश चला रहे हैं प्रदेश चला रहे.
उन्हीं का धंधा चौपट वो क्यों करेंगे भाई. अपना धंधा चौपट किस में वो पार्टनर है तो. फिर जो आदमी जिसको खोने का डरना वही कर. सकता है जिसको अपना स्वार्थ ना हो इसलिए. मैं मानता हूं कि हमारे जैसे लोगों को. पावर में आना चाहिए अब अगर आपकी चीजें. लगभग कंप्लीट होने वाली हो तो मैंने दो. तीन चीजें जिन पर आपसे बात करनी है जो. मेरे लिए बहुत इंपोर्टेंट है क्योंकि बहुत. एक अच्छी रीच है आपकी पहला कि मैं. आपके इस ब्रॉडकास्ट के माध्यम से लोगों से. अपील करता हूं जब वो टू व्हीलर पर चले तो. हेलमेट लगाए ज फो वर फोर व्हीलर पर चले तो.
सीट बैट लगाए और वह ड्रिंक करके ड्राइविंग. ना करें क्योंकि उनकी जान की वैल्यू है. अगर वह नहीं समझते तो उनके मां-बाप उनकी. बहन उनकी पत्नी उनके बच्चों के लिए वह. बहुत कीमती है वह उनका सब कुछ है तो उनकी. परवाह करते हुए कृपया इसमें सुधार करें. नौजवानों से स्पेशली कह रहा हूं मेरी. रिक्वेस्ट है दूसरा हमारे यहां एक सबसे. बड़ी कुरता दे की होगी. वैसे तो कहते हैं कि जोड़िया ऊपर वाला. बनाता बनाता बनाता तो नहीं है तो हम ही तय. करते हैं किस जाति में होगा किस धर्म में. होगा कहां नहीं होगा कहां होगा और उसके. पास क्या क्या नहीं होता तो मैं मेरा इस.
पर यह है कि जो. बाप जब मेरी बात हुई ना कि सुभंकर के. प्रोड कास्ट में जाना तो मेरे एक ही वही. था कि जिस दिन मैं जाऊंगा इस बात पर चर्चा. नहीं करूंगा तो मेरी बात नहीं पूरी होगी. बाकी सु सारे सवाल ठीक जो बाप बेटे की तरह. बेटी को पालता है पढ़ाता है उसकी देख. सुरक्षा करता है अच्छे कपड़ कड़े खाने की. व्यवस्था कराता है सब कुछ करता है और फिर. वह बेटी भी देता है दहेज भी देता है मैं. इसके खिलाफ हूं अब इस देश में स्ट्रक्चर. को बदलने की आवश्यकता आ गई है अब जितना.
बाप ने खर्च किया क्या तो यह बंद हो या. जितना बाप ने खर्च किया है वह एक लिस्टेड. हो जाए और जिस लड़के के शादी है उनको दे. दे साहब यह बेटी जिसको आपको सौप रहे य. इसके ऊपर खर्च य हम लौटा. दो जिस दिन यह हो गया ना सुभंकर. भाई दहेज के आधार पर जो हत्याएं होती है. जलाना मारना फांसी प लट आना अपमानित. करना उस दिन लिख के देता हूं कि बंद हो. जाएगा जिस दिन इस पर डर पैदा हो ग कानून.
तो है कि दे लेना नहीं है तो कहते हैं भाई. अपनी मर्जी दे रहे अपनी मर्जी से ले रहे. हैं और जितना बड़ा आदमी उसको उतना ही बड़ा. देश चाहिए या तो गरीबों में तो और परेशानी. आ गई है कि वो अगर नौकरी पर लग गए या कई. कामयाब हो गए तो उनको सोने की अंगूठी. चाहिए अब अच्छी लगेगी बहुत लोगों को उनको. मां के लिए भी चाहिए बहन के लिए भाई कमा. के पहनो ना यार कम पहन लो क्या हो गया. काहे के दिखावे में जी रहे हो लेकिन अब. उनको गाड़ी भी चाहिए अब इससे क्या होना. सोसाइटी में जो अपलिफ्ट में भी यहां भी एक. स्ट्रक्चर था ग्राम में बंद हो गया कैसे. कि जब अमीर अमीर से शादी करेगा तो वह गरीब.
के तो पास नहीं. जाएगा तो अगर अमीर आदमी गरीब का हाथ थामे. तो थोड़ा सा उसके उसमें बदलाव आएगा उसको. बहुत कुछ जानने का सीखने का मौका मिलेगा. उसको गाइडेंस मिलेगी तो इससे बदलाव होगा. जो नहीं हो रहा है और तीसरा जो सबसे. इंपॉर्टेंट है भारत पुरुष प्रधान देश. है महिलाए और उनमें भी सिंगल मदर जिनके. हस्बैंड की डेथ होगी जैसे एट्रोसिटी होती. बत सारी हम लोग जाते.
हैं इस आज के समाज में उस महिला को सरवाइव. करना बहुत मुश्किल है क्योंकि जब वह महिला. की तरफ जब कोई देखेगा तो अगर वह किसीकी. मदद भी करना चाहेगा कोई करेगा तो उसके. पीछे अगर 99 पर स्वार्थ होता. है तो सिंगल मदर किस तरह से अपने घर को. चलाती है सरकार को इस पर कोई पॉलिसी बनाकर. करना चाहिए कि इसमें बदलाव हो और जो सिंगल. मदर्स है उनका सम्मान जो. है वह बना रहे एक महिला के तौर पर इस मेरी.
तीन चिंताए मैंने मुझे आपके से रखनी थी. आपने रखा इसमें दो बातें मैं ड करूंगा एक. गाड़ी अगर आप फोर व्हीलर चला रहे तो पीछे. भी सीट बेल्ड लगाए मेरे मित्र है सरफराज. खान इंडियन टीम में खेलते हैं उनके पिताजी. की गाड़ी एक्सीडेंट हुआ था उन्होंने हमसे. कहा अगर पीछे सीट बेल्ट ना लगाई होती तो. गाड़ी डब्बा बन गई थी और उन्होंने हमें. सिखाया था कि हाईवे पर चलो क क से कम 100. की स्पीड होती पीछे भी सीट बेल्ट जरूर. लगाए लोग नहीं लगाते बहुत इंपोर्टेंट चीज. है आपको नहीं पता कब आप सामने वाली गलती. से बट जाए बिल्कुल दूसरा औरतों वाली सारी.
बात ठीक है लेकिन एक हमारी भी गुजारिश है. कि मर्दों को भी बराबरी का हक मिले इस देश. में इस बीच में बड़ी घटनाएं हुई है और इस. देश का मर्द भी कह रहा है. कि यह सच है कि महिलाओं के साथ अत्याचार. ज्यादा होते हैं लेकिन मर्दों के साथ भी. अत्याचार होते हैं और उनकी भी भावनाओं को. समझा जाए पहले से एक मानसिक लेकर उन पर. कठोर कारवाई ना की जाए ताकि अतुल सुभाष. जैसे जो मामले आए थे वो देश में और ना आए. मैं सहमत हूं मैं आपकी बात से बिल्कुल. सहमत.
हूं जब अतुल सुभाष जैसे मामले सामने आते. हैं तभी तो इन बातों की जानकारी होती है. लेकिन मैंने महिलाओं के लिए नहीं कहा. मैंने सिंगल मदर के लिए कहा नहीं नहीं आप. तीसरे पे गया ही नहीं मैं सेक सेकंड प रुक. गया था थर्ड वाला तो उसपे तो चर्चा वो तो. आपकी बिल्कुल जायज बात है सेकंड वाले प. इसलिए मैंने कहा क्योंकि जो बात जिन. महिलाओं का जिक्र आपने किया शोषित वाला वो. छोटे शहरों में बड़े शहरों में पुरुषों का. भी होहा बड़े शहरों में हम लोग गांव के. लोग हैं ना अभी बड़े शहरों के बारे में. सोच नहीं रहे हैं हम छोटे अभी मेरा गांव. भी कस्बा हुआ है तो अब हम बड़े शहरों में.
आ जाएंगे तो बड़े शहरों के बारे और तीसरी. बात आपकी दहेज में नहीं लूंगा शादी करते. मेरा आपसे कांग्रेचुलेशन नौजवानों के लिए. रोजगार के लिए सरकार सोचे क्योंकि वो बहुत. पीड़ित है मां बाप ने सब कुछ लगा दिया. सुभंकर भाई मेरे आप सोचो मेरे पापा ने. अपनी सारी पूंजी लगा दी कि मैं पढ़ लिख के. कुछ कामयाब हो जाऊ और अब मैं पढ़ लिख के. बहुत अच्छा बनकर घूम रहा हूं मगर जब्स. नहीं आ रही क्या करें अब लोन नहीं मिल रहा. गरीबों को लोन कौन दे बड़ी समस्या है. एग्जाम हो रहा पी डंडा पढ रहा है वहां. पेपर लीक हो जा रहे हैं घोटाले हो जा रहे. हैं दुखद है ये बहुत दुखद है यहां मैं.
सहमत हूं कि जो जायज मसले वहां सहमत है जो. सियासी मसले हैं वहां पर जनता तय करे बाकी. आपसे बात करके आनंद आया मुझे उमी करते. दर्शको को भी आएगा मुझे मुझे उम्मीद है कि. जो नजरिया जिन लोगों ने मेरा पहले से बना. लिया था आज वो शायद मुझे जानने के बाद. आपके इस ब्रॉडकास्ट के माध्यम शायद उसमें. कुछ बदलाव और जिनको नहीं बदलना उनका भी. स्वागत है अगर समर्थन और विरोध नहीं होगा. तो फिर लोकतंत्र कैसा लोकतंत्र खूबसूरती. यही है कि समर्थक भी रहे और विरोधी लेकिन.
विरोधी ऐसे ना हो जाए कि वो गोली मारने लग. जाए क्योंकि आप समझो ना कि हर आदमी की जान. की वैल्यू मैं तो दूसरों के लिए कह रहा. हूं ट्र लेकिन सोचो कि यह इस तरह का अस्तर. का विरोध यह कितना खतरनाक है कि आप किसी. की जान और यहां तो देश के बहुत बड़े-बड़े. नेताओ के प्राइम मिनिस्टर की जान गई है. दोदो प्राइम मिनिस्टर जो है अब वो यह. विरोध का कौन सा स्तर है इसको थोड़ा सा. इसको सीमित करना चाहिए और वह विरोध उस तरह. से ही हो अच्छा है क्योंकि इसके बाद. खामिया भुगतने पड़ते हैं बहुत नुकसान होता. है थैंक यू सो मच आपके लिए मंगल कामनाए और.
आपने कहा कि दहेज के बगैर आप शादी करोगे. आपको बुलाएंगे हम ठीक मैं आऊ ना आऊ मगर. आपकी शादी जो है आपकी शादी के लिए अभी से. मुबारकबाद आपका भी योगदान होना चाहिए आप. मना कर रहे थे आपका योगदान भी होना चाहिए. हा मगर आपने अपने स्टाफ का भी आपको. धन्यवाद कम से कम दो तोक रहेगा योगदान. हमारा के पीछे जो लोग हैं जिनकी वजह से यह. सब कुछ ब्रॉडकास्ट हो पाएगा मैं उनका भी. बहुत धन्यवाद करता हूं आपकी पूरी टीम का. जिनकी मेहनत से क्योंकि दिखते तो हम ही.
लोग हैं मेहनत तो सभी नहीं हम कहते हमारी. टीम बहुत कमाल की है य शायद हिंदुस्तान की. पहली टीम होगी जिसमें ऑफिस में बॉस को. भगाना पड़ता है घर जाओ ये लोग भागते नहीं. है कहते नहीं यही बैठे मैं भारत की इस टीम. का धन्यवाद करता हूं क्योंकि मैं संविधान. को मानता हूं तो संविधान में कंसल के. कांस्टिट्यूशन के फर्स्ट आर्टिकल में लिखा. है इंडिया दैट इज भारत ये हिंदुस्तान नहीं. है भारत. थैंक यू.
