Unplugged ft. Capt Yashika Tyagi | India’s 1st Pregnant Soldier | Indian Army| Republic Day Special
कारगिल में आप प्रेग्नेंट थे।. द मदर वॉरियर. कैप्टन यशिका त्यागी कारगिल वॉर में. मेरा बड़ा बेटा था वो ऑपरेशन राइनो के. दौरान हुआ था।. और मेरा दूसरा बेटा ऑपरेशन विजय की पैदाइश. है।. जब कारगिल की लड़ाई शुरू हुई वो मेरे. फोर्थ, फिफ्थ और सिक्स्थ मंथ थे. प्रेगनेंसी के और हमारी यूनिट की जो.
रिस्पांसिबिलिटी थी वो सियाचिन ग्लेशियर. थी।. एक फौजी के तौर पर आपको डर नहीं लगा।. लेकिन एक मां को तो डर होता होगा। एक छोटा. बच्चा साथ में भी है। एक बच्चा पेट में भी. है।. वो मेरी ड्यूटी थी। वो मेरा वर्दी थी और. यह ऑप्शनल नहीं है। उसको सोचने का सॉरी. बॉस। टाइम नहीं था। 1947 कश्मीर में लड़ाई. 65 71 99 और अभी ऑपरेशन सिंदूर सबसे. मुश्किल लड़ाई कौन सी थी? जो सबसे मुश्किल लड़ाई रही होगी वो 47 48. रही होगी। ना तो हमारे जवानों के पास उस. तरीके के गर्म कपड़े होंगे ना उस तरीके के. जूते होंगे। इतनी कटौती में वो लड़ाई लड़ी.
गई होगी।. बाकी समय कम से कम आर्मी चीफ ऑफ हेड मारा. था।. बहुत दुखद कहानी है सौरभ कालिया की जो. सुनके रुख कांप जाती थी।. सौरभ कालिया से।. कैप्टन सौरभ कालिया।. सौरभ कालिया। 22 साल का बच्चा पहली सैलरी. तक नहीं आई थी। जब उनका शरीर मिला तो वो. उनके चेहरे पर आइब्रोस के अलावा और कुछ. नहीं था और शरीर छोटा हो गया था क्योंकि. इतनी हड्डियां तोड़ दी थी। आंखें फोड़ दी. गई और फिर निकाल दी गई। पूरा शरीर उनके. सिगरेट बट से जला हुआ था और सोचो उतनी ठंड. में उन्हें बाहर छोड़ा हुआ था।.
हिंदुस्तान की फौज और पाकिस्तान की फौज. में अंतर क्या है? पाकिस्तान के जवान जब हमारी ओर मरे तो. उन्होंने अपने जवानों के शरीर वापस लेने. से मना कर दिया। हमारे भारतीय सेना ने. उन्हें उनके धर्म के हिसाब से दफनाया और. आखिरी फातिहा पढ़ा। ये फर्क है।. कारगिल की कहानियों में बहुत सारे किस्से. ऐसे हैं जो आपके रोंगटे खड़े कर देते हैं।. ये कहानी है नीखे जाखू कगू से। उनको यह. टास्क दिया गया था कि एक ऊंची पहाड़ी है।. उसके ऊपर दुश्मन की एक पोस्ट है। एकदम एक.
खाड़ी चट्टान है। टेंपरेचर माइनस 10।. उन्होंने अपने जूते उतार दिए और अपने. सॉक्स उतार दिए और वो आगे बढ़ते गए। और जब. यह ऊपर पहुंचा, उन्होंने अपना रॉकेट लांचर. निकाला और एक के बाद एक उन्होंने दुश्मन. के बंकर बर्बाद करने शुरू किए। दुश्मन ने. वहां से अपने ऑटोमेटिक गन का फायर किया और. कैप्टन कंग्रूसे का शरीर ऊपर से नीचे तक।. वो इंपैक्ट इतना स्ट्रांग था कि कैप्टन. कंगूसे का शरीर यूं उठा और वो पीछे खंड. में नीचे गिर गए। नींबू साहब ये आपकी जीत. है। दिस इज द स्टफ लेजेंड्स आर मेड ऑफ।. 1992 में महिलाएं फौज में आई थी। उस वक्त.
पुरुष फौजियों की तरफ से कैसा रिएक्शन था? लड़कियों को लिया गया 5 साल के लिए। लेकिन. हमें नंबर क्या दिया गया? डब्ल्यू एस ई. एस। सबसे पहला डिस्क्रिमिनेशन वीमेन. स्पिरिट। एक लड़की के सामने आप हारना नहीं. चाहते। लेकिन लड़कियां मेरा ना कफ़न बांध के. आई थी सर पे। एक बार तो एंट्री मिले।. लड़कों के साथ सेम पैरामीटर्स में है।. ओह अमिताभ बच्चन। जिंदा रहेंगे तो जीतेंगे. ना जंग। आप हमको भी जज करिए। लड़कियों ने. बोला, इतने से भी नहीं चलेगा।". शॉर्ट सर्विस के बाद परमानेंट कमीशन मिलने.
की बजाय हमको शुरू से परमानेंट कमीशन. चाहिए। एंड नेशनल डिफेंस एकेडमी ओपन. स्केट्स।. तो क्या हम यह एक्सपेक्ट कर सकते हैं कि. क्या अगले कुछ सालों में इंडियन आर्मी के. चीफ कोई महिला भी हो सकती है? बिल्कुल। व्हाट इज द डाउट? महिलाओं की कुछ जरूरतें होती है। जैसे. वाशरूम का हो गया या कुछ बेसिक नीड्स होती. है।. अलग बाथरूम की क्या जरूरत है? अगर एक ही. बाथरूम है और उसमें जेंट्स के लिए यूरिनल. भी है और एक डब्ल्यूसी भी है तो उसमें. मुझे क्या प्रॉब्लम है? पीरियड्स। मेरे को. तो इसकी आदत है बॉस। आई एम नॉट स्केर्ड ऑफ़. पीरियड्स। एंड सो आई ऑलवेज से वन सेंटेंस।.
नो यूट्रस, नो ओपिनियन। कभी किसी पुरुष. ऑफिसर को थोड़ी असहजता हुई सैल्यूट मारने. में? मैं आपको इसका बड़ा एक इंटरेस्टिंग. वाक्या सुनाऊंगी आपको। जब लड़कियां जाती. हैं फौज में तो उनमें आपस में कॉम्पटीशन. होता है या बहनचारा भी होता है।. ओह यस आई एम अ फीमेल। यस, आई एम अ. फेमिनिस्ट बिकॉज़ आई विल बी स्टूपिड नॉट. टू स्टैंड विद माय ओन।. अच्छा पतिदेव डरते हैं आपके पहले मुझे ये. बता दो।. मैं आपको एक बहुत प्यारी चीज बताती हूं।. 25 साल बाद भी आपकी आंखों में आंसू आएंगे।. क्यों? आई हैव सीन द बेस्ट वर्जन ऑफ. मसेल्फ, बट आई विल आल्सो गिव इट अ नेम। आई. हैव सीन द बीस्ट वर्जन ऑफ मसेल्फ।.
हम रोजमर्रा की जिंदगी में अक्सर ये भूल. जाते हैं कि जो हमें ये आजादी मिली है या. आज जो हमें सुकून है ये जो हम चैन की सांस. ले रहे हैं ये किसी और की वजह से है वो जो. सरहदों पर खड़ा है वो जो सियाचिन की बर्फ. में देश की सुरक्षा रक्षा कर रहा है वो जो.
कारगिल की पहाड़ियों में तैनात है और आज. ऐसी एक शख्सियत से हम आपको मिलवाने वाले. हैं। एक ऐसी शख्सियत जिन्होंने परिवार में. फौज का माहौल देखा जो जंग के मैदान में. रही एक मां एक योद्धा एक कारगिल वॉरवेटन. कैप्टन यशिका जी बहुत-बहुत स्वागत है. आपका।. थैंक यू। जय हिंद शुभाकर जी।. जय हिंद।. थैंक यू वेरी मच। आपने अपने शो में बुलाया. और मैं आई एम रियली लुकिंग फॉरवर्ड आज की. एक बहुत अच्छी कॉन्वर्सेशन के लिए। मैंने.
जब आपका इंट्रोडक्शन किया तो मैंने यह बात. कही कि जो आजादी हमें मिलती है वो हम भूल. जाते हैं अक्सर कि वो फ्री में नहीं है।. उसके लिए कोई ऐसा है जो त्याग कर रहा है।. सुकून का त्याग, परिवार का त्याग, कोई. रेगिस्तान में है, कोई सियाचिन में खड़ा. है, कोई दस करगिल में है। उन परिस्थितियों. में जहां पर शायद रहना एक आम इंसान के लिए. दुभ है। लेकिन जब मैं आपकी बात करता हूं. तो मुझे एक बेटी नजर आती है जिसने फौज को. और एक नजरिए से देखा होगा। एक मां नजर आती. है जिसका एक अपना संघर्ष है। एक पत्नी नजर.
आती है जिसका अपना एक संघर्ष है और फिर एक. फौजी। इन सारे किरदारों में सबसे अच्छा. फौज को आपने कहां किससे समझा? एक फौजी के रूप में। और अगर इन सारी चीजों. को यह तो एक ना एक भूखे जैसा है एक. गुलदस्ते जैसा है जिसमें आप बोले कि कौन. सा फूल आपको ज्यादा सुंदर लग रहा है तो. शायद अ फूल तो आप रंग अलग-अलग बता सकेंगे. लेकिन जब वो एक सी खुशबू आती है तो आप. खुशबू को अलग-अलग डिफरेंशिएट नहीं कर सकते.
कि किस फूल की कौन सी खुशबू आपको ज्यादा. पसंद आ रही है। तो शायद यही जीवन मेरा भी. रहा। अ मेरे फादर आसाम रेजीमेंट के ऑफिसर. थे कर्नल सुशील कुमार हटवाल और मेरे को. बड़ा एक प्राइड की फीलिंग होती है शुभांकर. जी कि वो 1962 1965 और 1971 की लड़ाईयां. लड़े हुए वो योद्धा थे और फिर 1979 में.
हमने उनको एक. हादसे में खो दिया. मैं उसमें खाली सात साल की. तो मेरे जीवन में मेरे फादर की जो एक्टिव. प्रेजेंस थी वो शायद सिर्फ 7 साल तक थी।. लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती है जो जिंदगी भर. आपको अपने एब्सेंस में प्रेजेंस होती है।. यू नो यू आर नोन बाय दैट फॉर एवर प्रेजेंस. अराउंड।. मां ने हमेशा यही सिखाया कि हर वो काम.
करना जिससे पापा का नाम ऊंचा हो। तो. जिंदगी बस उसी तरीके से आगे बढ़ती गई।. और फौज एक ऐसा ऑर्गेनाइजेशन है जो आपको. अकेला कभी नहीं छोड़ता। स्पेशली तब जब. आपके घर का वो फौजी सदस्य जिंदा नहीं है।. तो आई ग्र्यू अप. अराउंड ऑलिव यूनिफार्म। हमारे फैमिली. फ्रेंड्स, हमारे.
फिलॉसोफर्स, गाइड्स. वो. एंज्स थे ऑलिव ग्रीन यूनिफार्म में।. तो मुझे हमेशा ये लगा कि मैं आगे जाके. वर्दी पहनूंगी।. ऑलिव ग्रीन पहनूंगी कि नहीं यह नहीं पता. था। पर मैं वर्दी पहनूंगी क्योंकि. उन्होंने हमें. जिंदगी के उस कठिन दौर से आगे ले ले गए जब.
तीन बहनें हैं मदर है और नौ सात और पांच. साल की तीन लड़कियां 33 ईयर ओल्ड यंग विडो. डजंट नो एनीथिंग दुनिया के क्या तौर तरीके. हैं उन्हें पता नहीं बड़ी शेल्टर्ड लाइफ. थी उनकी फिर ओवरनाइट. उनको अपने बच्चे बड़े करने थे तो एक मैंने. फौज को बहुत छोटी थी तो फादर के साथ देखा. जो शायद मुझे याद भी नहीं है। एक आध यादें. हैं बड़ी मीठी सी वो कभी और बताऊंगी आपको. या शायद आगे कन्वर्सेशन में होगा।.
फिर जीवन में जो ये ऑलिव ग्रीन यूनिफार्म. का साथ रहा ये बहुत इंस्पिरेशनल था।. सिक्यर्ड था। सेफ्टी नेट के जैसा था। और. फिर लगा कि शादी करूंगी तो फौजी से ही. करूंगी।. तो आगे जाके जब मैं अपने हस्बैंड से मिली, होने वाले हस्बैंड से मिली तो मैं उन्हें. आज तक कहती हूं कि आप इंसान बहुत अच्छे हो. लेकिन अगर आप फौजी नहीं होते ना तो मैं.
आपसे शादी नहीं करती। मुझे तो फौजी से ही. शादी करनी थी।. और अगर मैं वर्दी नहीं पहनती तो मुझे नहीं. पता मैं क्या करती। दैट वाज़ द ओनली थॉट इन. माय माइंड। मेरे को एक सवाल एक कॉमनर. इंसान के तौर पर लगता है जो मैं पूछूं. आपसे।. फौज में जाना प्रेरणा होता है।. हम. लेकिन दूर से कई बार फौजियों की जिंदगी. देखकर घबराहट भी होती है।. अब जब मैं आपकी बात सुन रहा हूं और आप बता. रहे हो कि 33 साल की उम्र में आपकी मां.
विडो हो गई। 33 साल की विधवा जिसके तीन. बच्चे हैं। बहुत मुश्किलों भरा जीवन उनका. रहा होगा। अपने यंग पति होना। कैसे यह. प्रेरणा मिलती है कि जिस परिवार से एक. शख्स शहीद हो गया, कुर्बान हो गया, उस. परिवार में एक और बच्चे को हिम्मत मिल रही. है कि मैं भी फौज में जाऊंगा। और उससे. बड़ा सवाल कैसे वो मां इजाजत दे रही है. जिसने अपने पति को खोया है कि जा बेटा तू. भी फौज में चला जा या बेटी तू भी फौज में. चला जा। ये जानते हुए कि हो सकता है शायद. इसको भी एक रोख खोना पड़े। ये क्या. माइंडसेट होता है? कैसे यह हो पाता है ये?
शुभांकर जी आज मैं आपके सामने बैठी हूं और. यह कहानी सुना रही हूं। लेकिन मुझे यह. यकीन है कि आपने इससे पहले भी या तो. स्टेटमेंट सुने होंगे या टीवी पर न्यूज़. में देखा होगा कि जब कोई एक फौजी मां अपने. बच्चे को खोती है या कोई एक बीवी अपने. फौजी पति को खोती है तो वो उसके बाद भी यह. कहती है कि मेरे घर में जो है मैं उसको. फिर फौज में ही डालूंगी।. यह मन में.
जो एक सेंस ऑफ ग्लोरी है, एक सेंस ऑफ बिलोंगिंग है। जैसे मैंने अभी. कहा कि फौजी पति को खोने के बाद. चाहे परिवार आपके साथ खड़ा है या नहीं. खड़ा है। फौज आपके साथ हमेशा खड़ी है। तो. यह एक ऐसा ऑर्गेनाइजेशन है जो आपको कभी. अकेला महसूस नहीं होने देता।. थोड़ा बताइए ना इस बारे में।. ओके।.
जैसे आपके पिताजी की जब आपके पिताजी का. दिन. उसके बाद फौज कैसे आपका साथ निभाती है? देखिए मैं बहुत एक छोटे से एक दायरे से. शुरू करती हूं। तो जिस स्टेशन में मेरे. फादर पोस्टेड थे, वहां के जितने ऑफिसर्स थे, वहां के जितने. अदर रैंक्स थे, सब अपनीप तरफ से. हर समय यह पूछना कि.
आपको कहां तकलीफ हो रही है। आप कहां अटक. रहे हो? और कई बारी आपसे यह पूछना भी नहीं. कि आपको क्या तकलीफ है। सिर्फ वो सेंस कर. लेना। मैं अपनी मदर की बात कर रही हूं कि. जब मेरे फादर की डेथ हुई तो उससे पहले. उन्होंने कभी अपना अकाउंट ऑपरेट भी नहीं. किया था। उन्हें साइन भी नहीं करने आते. थे।. यानी शी डिड नॉट नो एनीथिंग अबाउट हर. फाइनेंसियल मैटर्स आल्सो डॉक्यूमेंटेड किस.
तरीके से आगे बढ़ना है। वर्ल्डली वेज़. दुनिया के तौर तरीके उन्हें कुछ नहीं पता. था। और उस समय यह फौजी लेडीज हमेशा मां के. साथ रहती थी। अपने घर के काम खत्म करके वह. आकर मेरी मां के साथ बैठी हैं। उन्होंने. उन्हें अकेला छोड़ा ही नहीं कि वह अपने. दुख में पीछे जाएं कि वो अकेला महसूस. करें। मेरी मां के हर छोटे बड़े सवालों के. जवाब। अब हम इस दायरे को और थोड़ा बड़ा. करते हैं। वी हैव एन ऑर्गेनाइजेशन कॉल्ड.
आवा आर्मी वाइफ्स वेलफेयर एसोसिएशन।. जो हर फौजी लेडी. के. ग्रोथ में उसके सपोर्ट में हमेशा एक साथ. खड़ा है। और स्पेशली जब इस तरीके की कोई. घटना हो जाती है तो आवा जो है आर्मी वाइज. वेलफेयर एसोसिएशन वो उन्हें सपोर्ट करने. के लिए. और.
हेल्प के लिए हमेशा आगे आती है। जिसकी हेड. होती है चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ की वाइफ। और. पूरे हिंदुस्तान में हर स्टेशन में छोटा. स्टेशन है तो एक छोटा ऑर्गेनाइजेशन है आवा. का बड़ा स्टेशन है तो बड़ा ऑर्गेनाइज बड़े. तरीके से वो ऑर्गेनाइजेशन है लेकिन हर. फौजी ऑफिसर हर फौजी जवान की पत्नी आवा का. हिस्सा है और यह वो ताकत है जो कभी उस. लेडी को अकेला नहीं महसूस हो रहा. शहीद होने के बाद भी.
शहीद होने के बाद ज्यादा. शहीद होने के बाद तो आप आप फौज की. जिम्मेदारी हो गए। फौज आपको यूं भर लेती. है अपने हाथ में और कहती है नहीं हम नहीं. तुम्हें छोड़ेंगे।. तुम एक कदम भी लोगे. तो कहीं तुम्हारे कदम ना डगमगाए। चाहे. बच्चों की एजुकेशन, चाहे. लेडी का.
बैंक अकाउंट ऑपरेट करना, पेंशन अकाउंट. ऑपरेट करना। आप कोई भी चीज देखिए उनके. रिहबिलिटेशन के लिए बहुत तरीके की स्कीम्स. और बहुत तरीके से मदद दी जाती है और यह तो. एक बड़ा कट एंड ड्राई चीज हो गई कि हेल्प. दी जाती है। सबसे बड़ी चीज है यह उस लेडी. को कभी महसूस नहीं कराना कि तुम अकेली हो।. आई थिंक सबसे बड़ी बात यही होती है।. तुम्हारा पति नहीं है। नहीं हम हैं।.
हम हैं।. ओनली दैट फिजिकल. फिजिकल प्रेजेंस इज नॉट देयर। बाकी उस. शहीद फौजी की. कमी. कभी उस फौजी परिवार को महसूस नहीं किया।. एक हाइपोथेटिकल सवाल मैं और पूछ लेता हूं।. फिर मैं आपकी जिंदगी पे आऊंगा। आपने बहुत. कम उम्र में अपने फादर को खो दिया था।. अपनी मां के दुख को देखा था। फिर आपको. फौजी से शादी करने का क्यों मन था? कभी यह. घबराहट नहीं हुई कि जो दुख बच्चे के तौर. पर आपने कभी शायद किया हो क्योंकि पिता का.
ना होना एक दुख तो है। हर लम्हे पर एक. पिता का ना होना वो छाया ना होना। कभी ये. डर नहीं आया क्योंकि आम जिंदगी में लोग हम. डरते हैं।. देखिए बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है कि आपका घर. का माहौल जैसा होता है ना आप वैसे बन जाते. हैं।. मेरी मदर ने कभी यह नहीं बोला।. कि. अब यह हादसा हमारे साथ हो गया। अब हमें. ज्यादा केयरफुल रहना है या अ फौज में यह.
जिंदगी का डर है? नहीं। मेरी मदर ने हमेशा. यह बोला कि टेक ग्लोरी इन योर फादर।. तुम कर्नल हटवाल की बेटी हो। और कर्नल. हटवाल की बेटी होना. तुम किस्मत वाली हो।. और फिर मुझे कर्नल हटवाल की बेटी ही बनना. था और मुझे भी अपने नाम के आगे वो रैंक. लगाना ही था।. तो वो अ और वो इतना इंटरेस्टिंग है कि.
जीवन आगे कैसे लेके जाता है और यह मैंने. आपसे शेयर करती हूं। तो हम तीन बहने हैं।. फादर की डेथ के टाइम पे हम नौ, सात और. पांच साल के थे।. आज की तारीख में मेरी बड़ी बहन शी इज एन. एमबीबीएस एमडी और उन्होंने अपने शुरुआती. करियर के टाइम पर बहुत नेवल हॉस्पिटल्स के. साथ काम किया एंड देन शी गॉट मैरिड टू अ. नेवल ऑफिसर.
मैं फौज में आई. और मेरी शादी एक पैराट्रूपर से हुई फौजी. तो नेवी हो गया आर्मी हो गया क्या बचा. शुभांकर जी. एयरफोर्स तो मेरी छोटी बहन जो है वो एक. सर्विंग एयरफोर्स ऑफिसर है जिनकी शादी एक. एयरफोर्स ऑफिसर से है। तो अब आप बताइए. तीन बच्चे हैं उनके आर्मी, नेवी, एयरफोर्स. और ये.
ब्यूटीफुल।. और ये. जो हमारे घर के डाइनिंग टेबल के डिस्कशंस. होते हैं. वो वो तो अनपैरेलल्लड है। लेकिन उन सारी. जब तीन अलग-अलग फौज क्योंकि तीनों भारतीय. सेना के लिए काम कर रहे हैं।. बिलकुल। बट तीनों फौज के अपने प्राइड. होंगे। तीनों फौज की अपनी कहानियां होंगी।. एंड आई एम श्योर देयर मस्ट बी अ हेल्दी. गसिप कंपटीशन आल्सो।. क्या चर्चा करते हो आप तीनों बहनें? तीनों नहीं आप अकेले अकेले नहीं कर सकते. हैं। तीनों बहनें हैं. हस्बैंड हैं।.
और तीनों हस्बैंड्स हैं।. और जब ये छह लोग मिलते हैं. तो आर्मी, नेवी, एयरफोर्स की जो. ये जगह हमने जिताई थी।. मतलब एवरीबडी वांट्स टू बी वन अप।. भाई ये एयरफोर्स ने किया। कहता है अरे भाई. बिना नेवी के ये पॉसिबल ही नहीं था। अरे. तुम छोड़ो आर्मी देखो कैसे आई थी। तो और. मेरी मदर सिर्फ बैठ के मुस्कुराते हुए कोई. एक किस्सा सुनाओ ना जहां पे थोड़ा सा हिट. अप हो गया। नहीं हीट अप क्या? फिर भी एक. हेल्दी-हेव हेल्दी होता होता नहीं किया.
हमने किया था। इसमें रियल विनर कौन था? मुझे पता है आप मुझे ट्रैप में लेने की. कोशिश कर रहे हैं। मुझे सिर्फ वो हेल्दी. कंपटीशन सुनना है क्योंकि वो ये ऐसे. इमेजिन करके बड़ा इंटरेस्टिंग लगता है।. आपको और एक बड़ी इंटरेस्टिंग सी चीज बताती. हूं।. हम्म. तीन सर्विज के तीन अलग-अलग सैल्यूट्स हैं।. ओके।. तो हमारे यहां यही है। भाई तुम नेवी वाले. तो यूं हो। अरे तुम एयरफोर्स वाले तो यूं. हो। अरे हम आर्मी वाले तो यूं हैं। तुम. ऐसेसे भी हो। तो हम मजाक करते हैं और.
इंटरेस्टिंग चीज यह है कि मेरे हस्बैंड और. मेरी बड़ी सिस्टर के जो हस्बैंड हैं वो. नेशनल डिफेंस एकेडमी के एलुमिनाइस हैं।. तो उनके पास इतने कॉमन फ्रेंड्स हैं। तो. आप देखिए सर्विसेस अलग-अलग होती है। लेकिन. अ आपका जो अल्मा मैटर है जो आप नेशनल. डिफेंस एकेडमी से आते हैं। तो शुरुआती दौर. में जो सेम ट्रेनिंग हो रही है, फिर चाहे. वह एयरफोर्स में जा रहे हैं, नेवी में जा.
रहे हैं या आर्मी में आ रहे हैं। आपकी जड़. एक है और वहां से आप ब्रांच आउट होते हो।. तो आप अलग-अलग तो जीवन भर काम करते हैं. लेकिन जो आपका एक कोर है और एक टाइम पर. बहुत इंटरेस्टिंग था। हमारे आर्मी, नेवी, एयरफोर्स तीनों चीफ्स नेशनल डिफेंस एकेडमी. के सेम कोर्स के थे। तो आप देखिए मजा तो. आता है इस तरीके की कॉन्वर्सेशंस में।. आपकी मॉम को सीडीएस का रोल प्ले करना. पड़ता होगा।. आप क्या बात कर रहे हैं? वो तो सुप्रीम. कमांडर ऑफ़ आर्म्ड फोर्सेस है भाई। वो तो.
ऐसा लगेगा कि. कि सबको देखते रह। हां हां ठीक है।. ठीक है। लेकिन उनका विशेष प्रेय मेरी तरफ. है क्योंकि उनके हस्बैंड आर्मी में थे और. मैं आर्मी वाली हूं।. नाइस इंटरेस्टिंग। करगिल में आप एक किस्से. बड़े मशहूर हैं।. क्योंकि उस वक्त आप प्रेग्नेंट थी। द मदर. वॉरियर के तौर पर आपको जानते हैं। अब एक. कॉमनर के तौर पर मेरे ज़हन में सबसे पहला. ख्याल जो आया वो ये आया कि आपको डॉक्टर ने. अलऊ कैसे किया? और डॉक्टर ने कहा नहीं कि. मैम इतनी हाइट पर क्योंकि मैं द्रास गया. हूं। मैं द्रास में रहा हूं। आप वो पूरा. क्षेत्र कश्मीर से लेकर कारगिल जाना विषम.
परिस्थितियों वाली जगह है। अगर आप श्रीनगर. यहां से यहां से आप नॉर्मल जाए श्रीनगर. जाए अगर आप तो आपको रियलाइज होता है कि ये. इलाके अलग हैं जो दिल्ली देहरादून में. आपको वैसे नहीं मिलते हैं। उन विषम. परिस्थितियों में प्रेगनेंसी के दौरान. आपको किसी ने रोका नहीं डॉक्टर्स ने कि आप. इट कैन बी रिस्की फॉर यू एंड योर. चिल्ड्रन।. आप बोल रहे हैं ना मेरे दिमाग में एक शेर. आ रहा है कि. मुश्किल तरीन इंतखाबाबत के लिए मजबूत तरीन.
इरादों की जरूरत होती है।. मैं हाई एटीट्यूड और एक्सट्रीम कोल्ड. क्लाइमेट में पोस्ट होने वाली लॉजिस्टिक. स्विंग की फर्स्ट वूमन ऑफिसर थी। तो इससे. आप समझ सकते हैं कि उस समय हमारे मिलिट्री. हॉस्पिटल में कोई गायनेकोलॉजिस्ट नहीं था।. यह 1997 की बात है। व्हेन आई गॉट पोस्टेड. टू हाई एल्टीट्यूड ऑफ लेह और हमारी यूनिट.
की जो रिस्पांसिबिलिटी थी वो सियाचिन. ग्लेशियर तक थी. और वहां का जो काम है वो जो प्लेन एरियाज. में यूनिट्स होती हैं उनके काम से काफी. अलग होता है। प्रोफेशनली काफी अलग होता. है।. 97 में जब मैं पोस्ट हुई. हम. तो मैं ऑलरेडी एक मां थी। मैं अपना एक. बड़ा बेटा लेकर वहां पहुंची थी।.
और इससे भी अगर और पीछे जाएं तो मेरा जो. पहली प्रेगनेंसी थी जो मेरा बड़ा बेटा था. वो ऑपरेशन राइनो के दौरान हुआ था। नॉर्थ. ईस्ट में ऑपरेशन राइनो के लिए मैं पोस्टेड. थी और मेरा बड़ा बेटा ऑपरेशन राइनो की. पैदाइश है। और मेरा दूसरा बेटा ऑपरेशन. विजय की पैदाइश है और यह दोनों जगह में. वालंटियर करके पोस्टिंग आई थी।. तो आपने पूछा कि डॉक्टर ने मना नहीं किया।. दोनों में से किसी का नाम अभिमन्यु रखा.
आपने? नहीं। जरूरत नहीं थी क्योंकि वो ट्रैप में. फंसे नहीं थे।. नहीं।. अभिमन्यु की तरह वो चक्रव्यूह में फंस. नहीं गए।. मैं पेट में सीखने की बात कॉन्टेक्स्ट. में।. अपनी मां की कोख में बहुत कुछ वो वीरता. सीख कर पैदा हुए थे। एक क्योंकि ये पब्लिक. प्लेटफार्म है तो आई विल विद देयर. प्राइवेसीज पर अ. एक का नाम कृष्ण के ऊपर है कि रास्ता. दिखाइए एक का नाम उस तारे की तरह है जो.
अटल है।. वाओ. और. मुश्किल ऐसे था कि जो आपका सवाल है मैं. इसको और थोड़ी दूसरी तरीके से बोलती हूं।. हाई एटीट्यूड की प्रेगनेंसी के बारे में. जानना जरूरी है। तब हम इस चीज को समझ सकते. हैं। है ना? क्योंकि प्रेग्नेंट तो. प्रेग्नेंट होना अपने में कोई बहुत खास. बात नहीं है। ये सबसे नॉर्मल बॉडीली. फंक्शन है एक अ स्त्री के लिए। लेकिन हाई.
एल्टीट्यूड में क्योंकि मैं लद्दाखी नहीं. हूं। मेरी बॉडी जेनेटिकली. हाई एटीट्यूड के लिए नहीं बनी है। है ना? और उसमें जब आप प्रेग्नेंट होते हैं तो. आपके शरीर को जिस मात्रा में ऑक्सीजन. चाहिए उस मात्रा में ऑक्सीजन आपको मिल. नहीं रहा।. आपको जैसी डाइट चाहिए प्लेेंस के हिसाब से. वैसी डाइट आपको वहां और स्पेशली जंग के. टाइम पे तो बिल्कुल भी नहीं मिल रही थी।.
और अगर लड़ाई का मैदान नहीं होता तो भी. वहां की प्रेगनेंसी अलग इसलिए थी कि हम. कहते हैं प्लेन एरियाज में आप. आयरन फोलिक एसिड टैबलेट्स खाइए। आप आयरन. रिच डाइट खाइए। बच्चे की ग्रोथ के लिए यह. बहुत अच्छा है। लेकिन हाई एटीट्यूड में. कहा गया कि आप बिल्कुल भी. आयरन रिच डाइट नहीं लीजिए। नो आयरन फोलिक. एसिड टैबलेट्स आल्सो फॉर यू। क्योंकि उसे. आपके शरीर में अब्सॉर्ब करने के लिए आपके. हीमोग्लोबिन के लिए शरीर को ऑक्सीजन चाहिए.
जो वहां नहीं है। तो तीन चीजें हो सकती. हैं। इसमें से कुछ भी एक पहला. आपका बच्चा स्पेशली एबल्ड हो सकता है।. क्योंकि फीिटस को पूरा ऑक्सीजन नहीं मिल. रहा। अच्छा कई बार लोगों को यह भी समझ में. नहीं आता कि ऑक्सीजन कम मतलब क्या? तो आप. मैं एक बार इसमें टिप्पणी कर देता हूं. क्योंकि मैं द्रास गया हूं।. हां। और दराज में उस जगह रहा हूं मैं और. मेरा सिर्फ एक छोटा सा अनुभव रहा 15 दिनों. का. जहां पर कुछ फौजी सजाने को मिला।.
तो जब मैं वहां गया किसी ने मुझसे कहा. वहां पे इंस्ट्रक्शन दिए गए थे कि आप गर्म. पानी पीते रहिएगा।. बहुत तेज मत चलिएगा। आराम आराम चलिएगा।. मुझे लगा मैं नौजवान इंसान मुझे क्या फर्क. पड़ता है। ऊपर खाना खाने आना था। हम नीचे. थे और थोड़ा सा ही ऊपर चढ़े खाना खाने आता. था।. मैं तेज भागते हुए चला गया। हम्म।. असर ये रहा. हम. कि सांसे थमने लगी. और आपको ऊपर जाकर उन्होंने ऑक्सीजन दी। जब. आपने ऑक्सीजन इन्हेल की तब आपका शरीर. नॉर्मल हुआ।. ये.
19 2019 की बात है आज से पांच छ साल पहले. और अगर मुझे एक नॉर्मल परिस्थितियों में. हो रहा है सो एक प्रेग्नेंट औरत के लिए वो. कितना ज्यादा खतरनाक होगा और जिसको रोज. वहां रहना है. रोज वहां रहना है और अगर हम और इसको थोड़ा. और आसान करें इमेजिन करने के लिए ऑडियंस. को तो हमने कोविड टाइम में देखा जब लोगों. को सांस नहीं आ रही है किस तरीके से वो. सांस के लिए ऐसे. है ना नीचे सांस उतर उतर ही नहीं रही है।. और ये कंडीशन.
हाई एटीट्यूड में सबसे पहली चीज आती है कि. आपकी बॉडी को उसके एक्लेममेटाइज होना. पड़ता है कम ऑक्सीजन के। लेकिन जो फीिटस. अंदर बड़ा हो रहा है उसको तो पूरी चाहिए. ना। उसको तो पूरी ऑक्सीजन चाहिए। तो पहली. कॉम्प्लिकेशन यह हो सकती थी कि ऑक्सीजन की. कमी से आपका बच्चा. स्पेशली एबल्ड हो सकता है। दूसरी चीज. आप सेल्फ अबोर्ट्ट कर सकते हैं आपके बेबी. को। आपका अबॉर्शन हो जाएगा। अपने आप आपका. बच्चा गिर जाएगा। और तीसरी सबसे रेयर.
कंडीशन यह कि आपका बच्चा नॉर्मल पैदा. होगा।. और इसके बावजूद भी जब कारगिल की लड़ाई. शुरू हुई तो मैं जो मई, जून, जुलाई तीन. महीने थे वो मेरे फोर्थ, फिफ्थ और सिक्स्थ. मंथ थे प्रेगनेंसी के। मैंने ये नहीं था. कि मैं प्रेग्नेंट हूं और मुझे पता ही. नहीं है। एंड देन आई से आई वास प्रेग्नेंट. देयर। नहीं फोर्थ, फिफ्थ और सिक्स्थ मंथ. था. और.
सात से आठ दिन मुझे याद है. लगातार हम अपनी यूनिट में खड़े थे। जब. लड़ाई का शुरुआती दौर था. लेह की जो हवाई पट्टी थी उसके ऊपर. एयरक्राफ्ट एयरक्राफ्ट भर-भर के अलग-अलग. देश के कोनों से सेना आ रही थी।. रेजीमेंट्स आ रही थी और मैं लॉजिस्टिक्स. ऑफिसर थी। तो हमारी यूनिट का काम था फौज. को हर उस चीज से लैस करना जो उसे इफेक्टिव. बैटल के लिए तैयार करे। इफेक्टिव बैटल.
यानी दुश्मन के साथ आंख से आंख मिलाकर. लड़ाई करने के लिए उसे क्या चाहिए? उसे. हथियार चाहिए। उसे गोला बारूद चाहिए। वहां. ठंड इतनी है उसको स्पेशल क्लोथिंग चाहिए।. रेडियो सेट्स चाहिए। जीपीएसएस चाहिए।. बूट्स चाहिए जो अलग टाइप के बूट्स होते. हैं। क्योंकि आपने तो देखा है लेह। आपको. पता है कि ठंड हमारा सबसे बड़ा दुश्मन. एटीट्यूड हमारा दूसरा दुश्मन और तीसरा. दुश्मन पाकिस्तानी. जो ऊपर बैठा है. जो ऊपर बैठा है हमें उसको एक दुश्मन के. लिए तैयार नहीं करना हमें उसे तीन दुश्मन.
के लिए तैयार करना है और ये काम. सबसे खतरनाक ठंड. सबसे खतरनाक ठंड उस इलाके में तो -50 60. तक जाता है टेंपरेचर. दराज सेक्टर में -60 इज द रिकॉर्डेड. टेंपरेचर जो दुनिया का सेकंड कोल्डेस्ट. इनहबिट प्लेस है उसी दुनिया. उसी के बगल में युद्ध था टाइगर. द्रास सेक्टर की अगर आप कहानियां पढ़े तो. सबसे ज्यादा भीषण युद्ध द्रास में लड़ा. गया और लॉजिस्टिक्स.
ऑफिसर होने के नाते मैंने इस लड़ाई को. तैयारी. फौज को लड़ाई के लिए तैयार करना जब हम जंग. की बात करते हैं तो हम अ सिर्फ वो सोचते. हैं कि सिपाही बंदूक लेके दुश्मन को मार. मार रहा है। ये हमारे या गंस धधक रही है।. वो दिख रहा है। वो दिख रहा है।. पर जो भी दिख रहा है उसके पीछे की एक बहुत. लंबी है।. उसके पीछे जो पूरी यंत्रणा है उसके पीछे.
जो पूरी साइकिल चल रही है उसके बारे में. और बड़ा इंटरेस्टिंग यह है कि जब तक कोई. प्रॉब्लम नहीं हुई तब तक आप दिखाई नहीं दे. रहे हैं। और आपका दिखाई ना देना ही आपके. लिए शाबाशी है। क्योंकि आपने उस सिपाही को. इतना तैयार किया है कि वो यूं हाथ करे।. जंग के मैदान में जब वो आईबॉल टू आईबॉल. कांटेक्ट में है एनिमी के। वो हाथ यूं करे. और यहां वो सामान होए।. दैट इज द विक्ट्री ऑफ़ लॉजिस्टिक्स।.
और यह वो यह वो. ब्रांच है फौज की जिसके बिना फौज में. पत्ता भी नहीं हिलता है। बट वी आर. प्रेजेंट इन आवर बैकग्राउंड वर्क।. तो आप देखिए. कारगिल की लड़ाई. एक सरप्राइज़ थी। पाकिस्तान का हमारे ऊपर. एक सरप्राइज़ था।. मुशर्रफ की ओवर स्मार्टनेस।. ओवर स्मार्टनेस कहेंगे लेकिन हमारे लिए.
या वादा खिलाफी धोखेबाजी कह ले कि. उन्होंने ठंड का फायदा उठाकर यह जानते हुए. कि ठंड में सेनाएं नहीं होती ऊपर उन्होंने. अपने लोग वहां पर लगा दिए। देखिए दुश्मन. दुश्मन से तो आप उम्मीद ही नहीं कर सकते. हैं ना। बेवफाई तो उसका ही काम है ना? और वो भी पाकिस्तान जैसा. वो भी पाकिस्तान जैसा पड़ोसी। हमारी चूक. तो रही होगी। मतलब. हमने उनके ऊपर अ कि हमारे लिए ये. सरप्राइज़ था।. हमने शायद बहुत समय तक माना भी नहीं था कि.
वहां पर इतना सीरियस कुछ है।. हां क्योंकि शुरुआती दौर में क्योंकि मैं. तो वहां शुरू से ही थी।. मैं तो 1997 से. लेह में पोस्टेड थी। मैंने जब कहा गया कि. मई में लड़ाई शुरू हुई तो मई में ही लड़ाई. थोड़ी शुरू हो गई थी।. दो महीने पहले. या जब बोला गया कि जुलाई में लड़ाई खत्म. हो गई तो जुलाई में ही थोड़ी ना हमारा काम. तो उससे पहले से चल रहा था और लड़ाई को. पूरा वाइंड अप करने में जुलाई क्यों आगे. भी समय गया है। लेकिन हमने यह कहा कि अब.
हमने यहां से सारे पाकिस्तानियों को जुलाई. तक निकाल दिया। लेकिन हमारी फौज को वापस. आने में तो समय लगा वहां से तो एज. लॉजिस्टिक्स ऑफिसर तो हमारा काम शुरू और. बाद में तो. दोनों समय. आप लोगों को कब करगल में आपका लॉजिस्टिक. डिपार्टमेंट एक्टिव हुआ था क्योंकि जो. कहानियां हमने पढ़ी है वो ये थी कि शुरुआत. माना गया कुछ लोकल लोग हैं। फिर कहानी कुछ. गड़िया आए हैं। फिर कहानी आई कुछ आतंकवादी. हैं। इंडिविजुअल आतंकवादी हैं जो छिपे हुए.
हैं।. हम. फिर जब सौरभ कालिया वाली घटना हुई जिसने. देश को झकझोर कर रख दिया था। कुछ हमारे एक. बटालियन गई और उनके साथ बहुत ही आंखें. निकाल दी गई थी जो सौरभ क्योंकि वो बहुत. दुखद कहानी है सौरभ कालिया की जो सुन के. रुख कांप जाती है मेरी उसके बाद हमारी. गवर्नमेंट ने सीरियस लेना शुरू किया फौज. फिर वहां डिप्लॉय हुई वरना शुरू में तो. टाला जा रहा था कि ऐसा कुछ नहीं है जो. खबरें आ रही है। आप लोग लेकिन लॉजिस्टिक. में जो थे वो कितने समय पहले एक्टिव हुए. थे जब देश को नहीं सुनाई पड़ रहा था।. देखिए जब गवर्नमेंट ने कहा कि ऑपरेशन विजय.
शुरू हो चुका. तो फौज की तैयारी उससे पहले से शुरू थी।. मैं आपको तारीख नहीं दे सकती।. मैं एक अंदाजन समझना चाह अंदाजन आप मान. लीजिए उससे और 20 से 25 दिन पहले से या. शायद और पहले से हम जो है आपने ये ठीक. बोला कि शुरुआत में हमने वो. गंभीरता से. वार्निंग्स को जो हमें एक एनवायरमेंट बता. रहा था उसको. एक्सेप्ट करने में हमें देरी हुई उसमें भी.
वो कहानियां हैं कि जो. लद्दाखी गढ़िय लिए थे। उन्होंने वहां पर. कुछ ऑब्जर्व किया कि अलग तरीके के कपड़ों. में कुछ लोग दिख रहे हैं। कुछ बर्फ के ऊपर. मूवमेंट ज्यादा दिख रही है। कहीं पर कुछ अ. हरकतें दिख रही हैं। और उन्होंने फौज को. बताया।. लेकिन फौज ने यह जितने लोकल लोग होते हैं,
यह हमारे आइज एंड इयर्स माने जाते हैं।. और यह जब खबर आती है, कहीं पे भी जब फौज. को लोकल एरिया से कोई खबर आती है, फौज. उसको बहुत सीरियसली लेती है। और ऐसा नहीं. हुआ कि फौज ने बोला कि नहीं नहीं नहीं आप. वापस जाइए ऐसा कुछ नहीं है। नो द लोकल. एरिया कमांडर्स वर वेरी वेरीरी सीरियस. टुवर्ड्स इट। और तब से हमने देखना शुरू. किया जो हमारे.
रेजीमेंट्स थी उधर पोस्टेड जो हमारी. ब्रिगेड्स थी उधर उन सबके काम शुरू हो गए. एरियल सर्वेज शुरू हो गए एंड देन वी. रियलाइज्ड दैट थिंग्स आर. नॉट नॉर्मल हियर देयर इज. समथिंग दैट इज सो मच बिगर. और फिर. ये टाइम भी इस तरीके से चूज़ किया गया अ. नेशनल हाईवे वन अल्फा के ऊपर.
पाकिस्तानियों ने उन जगह पोस्ट बनाई जहां. से वो पॉट शॉट ले सकते थे। यानी डायरेक्ट. लाइन ऑफ विज़ पे सड़क उन्हें दिखाई दे रही. थी। देखिए पहाड़ी एरिया में सड़क ऐसे. मुड़ती हुई आती है।. सड़क टूटी तो आपका कम्युनिकेशन. कहीं से वो सड़क. डायरेक्ट देख पा रहे हैं और उनका ऐ यह था. कि नेशनल हाईवे वन अल्फा को चोक कर दें. और इस चोक करने से क्या होगा? सारा लॉजिस्टिक आना बंद आपको सपोर्ट मिलना.
बंद।. लेह लद्दाख का एरिया देश से कट जाएगा।. सियाचिन को सप्लाई करने वाला रूट पूरा. कॉम्प्रोमाइज हो जाएगा। बहुत होशियारी से. मुशर्रफ ने यह प्लान किया था। आप देखिए. महीना क्या था।. अप्रैल में जब हमें पता चला. अब मैंने आपको बताया कि वहां पर. अलग तरीके का प्रोफेशन कैसे यूज किया? प्रोफेशनल कॉम्पिटेंस क्या होती है? तो.
लॉजिस्टिक्स यूज करता है एक. पेडेग जिसे कहा जाता है एडवांस विंटर. स्टॉकिंग।. यानी. सर्दियों में तकरीबन 8 महीने यह रास्ते. बंद हैं। पाससेस बंद हैं। बर्फ पड़ी हुई. है। रोड का रास्ता बंद है।. इस टाइम पर लॉजिस्टिक्स यूनिट का काम होता. है जितनी हमारी फौज वहां है। उसके. रिक्वायरमेंट के हिसाब से पूरी.
अपनी डिमांड्स रेडी करना। इनवॉइसेस अह. इनवॉइसेस नहीं बोलेंगे। डिमांड्स रेडी. करना और उसको पीछे बड़े-बड़े डिपोस पर. बेचना। पूरी विंटर्स के दौरान हम यह काम. करते हैं. कि आने वाले साल में हमारी फौज को कितने. सामान की जरूरत है और इसमें हर चीज आती. है। नट बोल्ट से लेकर. स्पेयर पार्ट से लेकर हमारी गाड़ियां जो. फौजी ट्रक घूम रहे हैं उनके त्रपाल बैटरीज.
टायर से लेकर कौन सा एमुनेशन चाहिए? फौज को जब आप इमेजिन करते हैं तो हेलमेट. से लेकर बूट तक इमेजिन करते हैं। बुलेट. प्रूफ से ले उसके हथियार तक इमेजिन करते. हैं। उसके पेट में आने वाले राशन और गाड़ी. के पेट में जाने वाले पेट्रोल और डीजल तक. सब कुछ लॉजिस्टिक का काम है।. बट इसमें एक जो ह्यूमर कह सकते हैं हम जो. बीच में हमें सुनाई पड़ता था कारगिल को. लेकर कि उस वक्त हम संसाधन के तौर पर इतने.
ज्यादा मजबूत नहीं थे जो फौजियों को. संसाधन दिए गए। क्योंकि जब मैं कारगिल गया. था मेरा फर्स्ट हैंड एक्सपीरियंस है।. मैंने वहां बहुत सारे ऑफिसर से बात की तो. मैंने कहा कारगिल हमारी जीत थी या नाकामी. भी थी क्योंकि बहुत नुकसान हमें हुआ था।. तो उन्होंने कहा एक फौजी ने मुझसे कहा था. कि ये हमारे सैनिकों की विल पावर थी जिसने. असंभव को संभव करके दिखा दिया। वरना जो. तैयारी मुशर्रफ ने की थी जो प्लानिंग थी. वो बहुत बड़े नुकसान की थी। हमने लापरवाही.
बहुत सारी की थी। हमारी गलतियां बहुत सारी. थी जिसकी वजह से नुकसान हुआ। लेकिन. क्योंकि देश की अस्मिता की सवाल थी इसलिए. हमारे फौजियों ने वो पराक्रम दिखाया जिसके. शब्दों में बयान नहीं कर सकते।. आप बिल्कुल सही बोल रहे हैं और मैं पहले. ये वाला बात एक कंप्लीट करती हूं फिर मैं. आपके इस वाले पे आऊंगी। अ पाकिस्तान को. पूरा पता था कि हमारे डिपोज़. बर्फ. के थॉ होने का वेट कर रहे हैं।.
हम. बर्फ के पिघलने का इंतजार कर रहे हैं।. श्रीनगर के उस तरफ. हजारों की संख्या में ट्रक्स खड़े हैं। जो. अब जैसे ही यह पाससेस के ऊपर से बर्फ. हटेगी हमारे ट्रक्स आना शुरू हो जाएंगे।. यही टाइम पर पाकिस्तान ने कारगिल का युद्ध. शुरू किया कि हमारे जो डिपोस है उसमें. सामान ही ना आ पाए।. शुरुआत में हमारे फौजी ट्रक्स को निशाना. बनाया गया। इट वास सो डिफिकल्ट कि आप ऐसे.
मानिए कि आपके घर में 10 लोगों का राशन है. और आपके पास हजार लोग आ जाए। हमारे डिपोस. में हम साल के जो अ. स्टोर्स हैं उसको हम एग्जॉस्ट कर चुके. हैं।. ऑफ कोर्स वी हैव रिजर्व्स। लेकिन रिजर्व. अगेन एक परसेंटेज पे होता है। लेकिन जब. लड़ाई छिड़ी तो हमारे पास जहां हम लड़ाई. से पहले कुछ हजार सैनिक थे। ऑल ऑफ अ सडन.
कुछ ही दिनों में हमारे पास लाखों की. संख्या में सैनिक आ गए। सड़क मार्ग से. सामान आ नहीं पा रहा। सारा सामान बाय एयर. आ नहीं सकता। तो चैलेंज देखिए हमारे पास. कितना बड़ा था। लॉजिस्टिक चैलेंज।. उस समय हमको. बहुत सारी चीजें समझ में आई। अब मैं आपके. पॉइंट पे आती हूं कि जब आपको ऑफिसर्स ने. वहां इन्फॉर्म किया कि.
क्या ये सच है जो मैंने कहा? आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। वो आप ये वहां. तक सही कह रहे हैं कि हमारा नुकसान बहुत. हुआ और उस समय. हमने शुरू में लापरवाही बहुत बढ़ती। अगर. हम गंभीरता से शुरू में लेते तो शायद. नुकसान कम होता। हम जीते इसलिए क्योंकि. नहीं. सैनिकों का विल पावर ज्यादा बड़ा था।. सैनिकों का विल पावर को सलू्यूट है।. सैनिकों के विल पावर के बिना कारगिल. तोलोलिंग तुरतुक द्रास खालबर.
वो तो गॉड्स ऑफ वॉर थे। वो सैनिक तो गॉड्स. ऑफ वॉर थे। आप सोचिए खड़ी चढ़ाई में चढ़े. जा रहे हैं। जब पहाड़ों में लड़ाई होती है. तो 9:1 की रेश्यो होती है। यानी ऊपर अगर. एक दुश्मन बैठा है तो उसको न्यूट्रलाइज. करने के लिए नीचे से नौ लोग चलेंगे। तब. शायद एक जिंदा ऊपर पहुंचेगा। क्योंकि उसका. विज़न इतना क्लियर है। और आपने देखी भी है. वो पहाड़ियां वहां कोई कवर नहीं है। तो यह. भारतीय सेना के सैनिक की ग्स ग्लोरी.
उसका. सेंस ऑफ ड्यूटी और एक. नाम नमक निशान. पलटन का नाम पलटन का जो नमक खाया है. और निशान उस फ्लैग के लिए हम अपनी जान दे. देंगे और किस किसके भरोसे? देश के भरोसे.
कि मेरे पीछे मेरे परिवार का ध्यान मेरी. फौज रखेगी। जब आपने पूछा ना कि शहीद होने. के बाद क्या करते हैं? परिवार किस तरीके से वापस से उस. फौज के लिए अपने और बच्चे न्योछावर कर. सकता है। वो इसीलिए क्योंकि एक फौजी को यह. यकीन होता है कि मेरे बाद मेरे परिवार का. ध्यान मेरी पलटन रखेगी, मेरी फौज रखेगी और. मेरा देश रखेगा। बस इतना याद रहे एक साथी. और भी था।. बस इतना याद रहे एक साथी और भी था और.
सिर्फ उस पलटन के फ्लैग के लिए और उस. तिरंगे के लिए वो सिपाही जान दे देता है।. लेकिन आपने बोला कि बहुत लापरवाही बरती. गई। नहीं मैं इस चीज से इत्तेफाक नहीं. रखती।. शुरुआती दिनों में यस. जो हमसे. अर्ली वार्निंग को पकड़ने में चूक हुई।. लेकिन आप उसके बाद देखिए आपको क्या लग रहा.
है कि मुशर्रफ ने यह प्लानिंग एक साल दो. साल की की होगी? यह उसकी सालों की. प्रिपरेशन थी व्हिच केम टुगेदर देन. फरवरी में तो अटल बिहारी वाजपेयी जी बस. यात्रा लेकर गए थे. शरीफ से. और वहां पर. मुशर्रफ. ने उन्हें. मतलब वो मिले उनसे और उसके बाद वहां से. सीधे वो कारगिल आए. टू ओवरसी मुशर्रफ. यानी उस समय सिर्फ.
चेहरे पर एक मुखौटा था लेकिन असली एजेंडा. कुछ और ही चल रहा था। तो आप यह मानिए कि. पाकिस्तान के पास समय भी उसकी पसंद का था।. कितना समय लेना है वो भी उसकी पसंद का था।. समय भी उसकी पसंद का, जगह उसकी पसंद की, फोर्सेस उसकी पसंद की।. जिस तरीके से उसने अटैक किया वो तरीका भी. उसकी पसंद का लेकिन अंत में जीत किसकी.
होती है? इन जस्ट थ्री मंथ्स. हिंदुस्तान की।. क्यों होती है? सैनिकों की हमारे सैनिकों की जो साहस. बलिदान था उसकी वजह से।. और. हमारी ट्रेनिंग की।. हां।. मतलब आप जंग छिड़ती है तब आप तैयारी नहीं. करते हैं।. लोगों को यह बहुत सवाल होते हैं कि फौज. सारे साल क्या कर रही है? लड़ाई नहीं चल. रही है।. ये मेरे को एक किस्सा याद आ गया। तो व्हेन. आई वेंट द्रास. हां।. तो वहां पर कमरे के अंदर आप जाओ तो जिस.
रूम में हम रुके थे वहां बाहर एक लिस्ट. लगी हुई थी। उसमें इस रूम में दो मग्गे. हैं, एक पेन है, एक कंघी है, एक ये है, वो. है। फिर वो ईंट कलर कर रहे थे और बहुत. सारे छोटे ऐसे-ऐसे काम कर रहे थे जो मुझे. लगा बड़े रेपिटेटिव काम है। तो मैंने एक. सीनियर ऑफिसर को बुलाया। मैंने कहा कि भाई. साहब ये काम मतलब क्यों है? तो ही सेड सर. एक फौजी के जीवन में जंग एक या दो बार आती. है लेकिन उसको तैयारी रोज करनी पड़ती है।. वो रोज उस अनुशासन में ढलता है कि जिस दिन.
जंग आएगी उस दिन ये अनुशासन काम आ जाएगा।. और वो उसकी मसल मेमोरी बन जाएगी। यानी. आप मुझे फौज छोड़े कितने साल हो गए? लेकिन मसल मेमोरी की बात करें। आप मेरे. सामने एक हथियार रखिए और मेरी आंख में. पट्टी बांध दीजिए। मैं वह हथियार खोल सकती. हूं और जोड़ सकती हूं।. दिस इज मसल मेमोरी।. यह आपको तैयार किया जाता है।.
क्योंकि. जंग बता के नहीं आएगी। और जब जंग होगी तो. आपने सिर्फ परफॉर्म करना है। दिस इज द. टाइम ट्रेनिंग ट्रेनिंग रीट्रेनिंग री. रीिट्रेनिंग आप रात में नींद में भी उठा. के किसी को बोलिए. तो वो परफॉर्म करेगा।. मैं तो सोच के डर जाता हूं। कारगिल में. अगर फैसला उधर जाता अगर हमारे सैनिकों ने. ये जंग ना जीती होती। मुशर्रफ का प्लान. कितना खतरनाक था। उस को नाकाम कर देना।.
मैं तो कह रहा हूं कोटि-कोटि नमन करना. चाहिए हर उस जवान को। और यह जो आजादी हमें. मिली है, आज बैठ के हम टीवी पर बहसबाजी. करते हैं। दुनिया भर की बातें करते हैं।. शुभांकर जी, इतिहास गवाह है और मैं. इस चीज को बहुत. हमंबली. बट विद अ ग्रेट सेंस ऑफ ड्यूटी, ऑनर एंड. करज। मैं इस चीज को कह सकती हूं कि आप कोई. जंग उठा के देखिए। 1947,48.
कश्मीर ने मारा था।. पाकिस्तान से कितनी जंगे हैं? हर बार मार खाई।. हर हर बार. पाकिस्तान का इनिशिएटिव था।. हमने कभी पाकिस्तान पे अटैक नहीं किया। हर. बार पाकिस्तान की तरफ से पहल हुई। यानी हर. बार उन्होंने तैयारी के साथ वो आए। लेकिन. हर बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी। मतलब. समय, जगह, तरीका पाकिस्तान चुनते हैं।.
नतीजा हम चुनते हैं।. नतीजा हम चुनते हैं। और इसके लिए हमको कभी. ओवर कॉन्फिडेंट आप लेटेस्ट बात करिए. ऑपरेशन सिंदूर।. हम जब ऑपरेशन सिंदूर को देखते हैं तो. दिस इज़ दिस इज़ अ वॉर ऑफ द न्यू एज। और उस. समय इन वन ऑफ़ द ब्रीफिंग्स अ. एयरफोर्स. के जो. डीजी एयरफोर्स ऑपरेशंस थे एयर मार्शल.
भारती। उन्होंने एक चीज बड़े. रिस्पांसिबिलिटी से एक चीज कही थी एक. ब्रीफिंग में कि. हम यह विशफुल थिंकिंग नहीं कर सकते कि. लड़ाई नहीं होगी इसके बाद।. हम ये नहीं बोल सकते। हम चाहते हैं कि कभी. जंग ना हो।. लेकिन हम इस चीज को होप कर सकते हैं जंग. ना हो। लेकिन लड़ाई ना हो ऐसा होगा नहीं।. कभी ना कभी जब लड़ाई होगी तो आप पीछे से.
इतिहास उठा के देखिए। हर लड़ाई एक अलग. तरीके से लड़ी गई है। जो लड़ाई 47 में. लड़ी गई वो शायद 65 में वैसी नहीं लड़ी. गई। शायद वैसी 71 में नहीं लड़ी गई। हर. टाइम पर हमने आगे उसमें चेंजेस देखे।. 1999 में कारगिल में जैसी लड़ाई लड़ी गई. वैसी ऑपरेशन सिंदूर के टाइम नहीं लड़ी गई. और हो सकता है कि इसके बाद जो हो.
वो ऐसी भी ना हो वो कुछ और तरीके से हो. तो फौज एक इतना डायनामिकली इवॉल्व्ड. ऑर्गेनाइजेशन है कि हम तो जीपीएस वगैरह आज. देख रहे हैं. सिविलियन वर्ल्ड में फौज तो कब जीपीएस. इस्तेमाल कर चुकी।. पूरी दुनिया में कहीं भी एक नया वेपन. सिस्टम आता है तो पूरे दुनिया की आर्मीज. अपग्रेड होती हैं। दैट इज हाउ इवॉल्व्ड वी.
आर। तो आप सोचिए वो सिपाही जो गांव से आ. रहा है उसकी ट्रेनिंग कितने अवल दर्जे की. है. जो हमारा पूल है रिकवरी का वो गांव से आ. रहा है. सही बात है. और वहां से एक सिंपल सा जवान आता है लेकिन. जब आप उसको एक एडवांस्ड गन सिस्टम के ऊपर. बिठाते हैं चाहे वो आज का S400 है चाहे. ब्रह्मोस है. वो उसको यू ऑपरेट कर देता है.
यह सलाम है हमारे देश को।. हमारे देश की जो आर्मी है, जज्बा, जुनून, सैक्रिफाइस वो तो है ही। मैं तो मेंटल. लेवल की बात कर रही हूं कि कितने हम. ओपनली नई चीजों को सीख रहे हैं और नई. चीजों को परफॉर्म कर रहे हैं।. आपने अलग-अलग वॉर की बात की तो मैं एक. क्वेश्चन आपके एक्सपीरियंस से पूछ लेता. हूं। 1947 कश्मीर में लड़ाई 65 71 99 और.
अभी ऑपरेशन सिंदूर सबसे मुश्किल लड़ाई कौन. सी थी? मेरे ख्याल से जो सबसे मुश्किल लड़ाई रही. होगी वो 47 48 रही होगी।. पहली. पहली. जब कश्मीर पर हमला किया था उन्होंने। हां. मुझे ऐसा लगता है क्योंकि उस समय. हमारी जो एक तो हमारा देश किस तरीके से. जूझ रहा था पार्टीशन का वो जो एक माहौल था. वो बहुत पेनफुल रहा होगा तो देश अपने में.
भी एक ट्रॉमा से जूझ रहा है। उसके बाद. पाकिस्तान ने जिस तरीके से कबाइली हमारे. देश में भेजे. श्रीनगर भी हमारे पास नहीं था। कश्मीर. हमारे पास था नहीं।. हम फौज वहां भेज नहीं सकते जब तक मना कर. रखा है जब तक महाराजा हरी सिंह वो साइन. नहीं करेंगे. तो एक. कूटनीति रण फौज यहां तैयार है लेकिन जा. नहीं सकती कबाईली अंदर आते जा रहे हैं.
उसके बाद अंग्रेजों के ही जो सीनियर. ऑफिसर्स थे वो दोनों तरफ थे. उधर भी उधर भी. इधर भी उधर भी यानी फौज भी हमारी पूरे. हाथ में नहीं थी। हम जब आर्मी डे मनाते. हैं तो हम क्या बोलते हैं? 15 जनवरी आर्मी. डे के तौर पर मनाया जाता है। क्यों? जब. हमारे पहले इंडियन ने चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ. का पद लिया।.
तो. पूरी फौज की जो. एक टैक्टिक्स और स्ट्रेटजी है वो भी. अंग्रेजों के हाथ में है। दे आर प्लेइंग. देयर ओन गेम्स।. लेकिन जैसे ही हमें हुकुम मिलता है, हमारे जो जहाज हैं, वह वहां लेकर जवानों. को क्योंकि सड़कें इतनी मजबूत थी नहीं उस. समय चीजें पहुंची। लेकिन उसके लिए. धीरे-धीरे. लकड़ी के ब्रिजेस हैं। टैंक्स नहीं जा.
सकते हैं।. पतली-पतली छोटी-छोटी सड़कें हैं। जहाज. हमारे पास पुराने टाइप के थे। बहुत ज्यादा. फौज नहीं पहुंच सकती थी। तो चैलेंजज़ तो. बहुत सारे रहे होंगे उस समय। और दूसरा एक. सबसे बड़ा चैलेंज क्योंकि मैं लॉजिस्टिक्स. ऑफिसर हूं तो मैं लॉजिस्टिक की बात करूंगी. कि ना तो हमारे जवानों के पास अ उस तरीके. के गर्म कपड़े होंगे ना उस तरीके के जूते. होंगे ना उतने मात्रा में हमारे पास. एमुनेशन होगा। कितने कटौती में वो लड़ाई. लड़ी गई होगी।.
यानी आप यह देखिए पहला परमवीर चक्र मेजर. सोमनाथ शर्मा. मतलब हाउ ही इज फाइटिंग दैट बैटल वो कह. रहे हैं कि अपना प्लास्टर लगा हुआ है उनके. हाथ में और वो कह रहे हैं मैं तो फिर भी. इस जंग को लडूंगा. और जब तक मेरे पास आखिरी गोली है तब तक. मैं लडूंगा कबाइली उसी एरिया से आ रहे थे. उन्हें वहां का पत्ता पत्ता पता था हमारी. फौज उससे पहले वहां पहुंची नहीं थी वो.
सेक्टर हमारे लिए नया था तो बहुत सारे. चैलेंजेस रहे होंगे मुझे लगता है इन माय. ओपिनियन. पहली लड़ाई. हालांकि सारी बहुत मुश्किल है. सारी 71 की बड़ी मुश्किल थी 99 की बड़ी. मुश्किल थी ये भी मुश्किल थी बट आप सही कह. रहे हो कि. उन चैलेंजेस को अगर देखें तो 47. बाकी समय कम से कम सेना के पास संसाधन थे. और हमारे पास कम से कम मैप थे. उस समय तो हमारे पास मैप्स भी नहीं थे. और कम से कम हमारा आर्मी चीफ ऑफ हेडम आ. रहा था. बिल्कुल. जो बहुत फर्क पड़ता है लीडर आपका है।.
नीतियां आप तय कर रहे हो।. नीतियां आप तय कर रहे हैं। कूटनीति आप तय. कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि अंग्रेज पीछे. से कोई गेम खेलेंगे। तो उस तरीके से यस 47. 48 कैन बी अ मोस्ट चैलेंजिंग बैट।. आप लॉजिस्टिक डिपार्टमेंट में रहे हो।. मैंने सियाचिन को लेकर एक कहानी सुनी थी. कि सियाचिन में पाकिस्तानियों ने कहीं. अपने कपड़े आर्डर किए थे। हमें वहां से. पता लगा था जिसके बाद हमने उन्हें मारा. पीटा भगा दिया था। ये सच है।.
बिल्कुल।. और लॉजिस्टिक में उस टाइम हम थोड़ा ये. वाला किस ना हमें ये क्योंकि आप सियाचिन. भी आप एक्टिवली आप लोग वहां पे देखते थे।. हां ये जो आप कहानी बोल रहे हैं ये ऑपरेशन. मेघदूत की कहानी है। 198. आई श्योर ये आप लोग के लिए बड़ी वो रही. होगी सुनने में कि आप लोग इंस्पायर बहुत. हुए होगे उस कहानी से।. नहीं अब आप लोग क्यों बोल रहे हैं? आप भी. तो कितने इंस्पायर हो गए। तभी तो आपको. कहानी याद है।. आप लॉजिस्टिक आप थोड़ा पर्सनल टच है।. हां। मैं आपको यह कहानी ऐसे बताती हूं कि. अ सियाचिन ग्लेशियर.
एक लॉजिस्टिक चैलेंज है।. सियाचिन ग्लेशियर एक ऐसे दानव की तरह है. जिसको आप समझ नहीं सकते। उसके अंदर अपने. क्रेविसेस हैं। उसकी अपनी ट्रैप्स हैं। वो. ग्लेशियर है। उसकी बर्फ मूव करती है।. ग्लेशियर जिंदा है।. ग्लेशियर जिंदा है।.
उसके बीच में जो दरारें हैं वो कई बारी. बहुत पतली भी हैं, कई बारी बहुत चौड़ी भी. हैं। वहां कुछ जगह ऐसी हैं जहां सूरज कभी. पड़ता ही नहीं है। वहां कुछ जगह ऐसी हैं. जहां बर्फ की खाड़ी चढ़ाई है और अगर सूरज. बहुत देर तक वहां रहे तो एलन जा सकते हैं।. इट इज अ. इट इज लाइक अ ट्रैप।. टेंपरेचर डिपिंग डाउन टू -50। आमतौर पर.
अंग्रेजों ने जब. हमारे देश का बंटवारा किया तो उन्होंने. खाली एक पॉइंट तक मैप बनाया. और उसके बाद उसको वेग छोड़ दिया।. पाकिस्तान ने कहा यह हमारा है। इंडिया ने. कहा यह हमारा है। इट वास वेग।.
उसके बाद. नदन कमांड हेड क्वार्टर में. इंफॉर्मेशन आई कि. पाकिस्तान की तरफ से एक रिपोर्ट थी कि. पाकिस्तान कुछ. एक्सट्रीम कोल्ड क्लाइमेट के कपड़े ऑर्डर. कर रहा है। जिसकी डेडलाइन है।. तो अब पाकिस्तान एक्सट्रीम कोल्ड क्लाइमेट. में कहां जाएगा? नदर्न कमांड का जो हेड क्वार्टर था दैट.
वास बजिंग विद एक्टिविटी।. आप इमेजिन करिए एवरीबडी ऑन मैप्स. और समझने की कोशिश कर रहे हैं कि. पाकिस्तान का दिमाग कैसे सोचेगा।. एंड इट वास क्लियर कि यह सियाचिन ग्लेशियर. के ऊपर ही कुछ शरारत है। नाउ इट वाज़ अ रेस. फॉर द टाइम।. क्या हम पूरी सीक्रेसी रखते हुए पाकिस्तान.
को उसके गेम में हरा सकते हैं? इंडिया की तरफ से. भेजा गया। एक जनरल साहब उनका काम था कि. आपने. कम से कम टाइम पे वो सारा विंटर गियर और. उस एलटीट्यूड के लिए जो सामान चाहिए। हमें. तो पता भी नहीं था कि हमें क्या-क्या. सामान चाहिए क्योंकि उससे पहले फौज वहां. नहीं थी।. हम खाली वर्ल्ड आर्मीज़ को देखकर एक कयास.
लगा सकते थे।. ही. एनश्योरर्ड. दैट वी गॉट एवरीथिंग. सीक्रेसी।. कितना बड़ा रोल होगा उस लॉजिस्टिक ऑफिसर. का। बड़ा. वो लड़ाई।. अब आप सोचिए कुमाऊं रेजीमेंट को तैयार. किया गया क्योंकि कुमाऊं रेजीमेंट के जो. सोल्जर्स हैं वो अ पहाड़ी हैं। तो एक वो.
लगा कि यह सबसे पहले इस ट्रूप को हमें. भेजा जाना चाहिए।. उन्हें लीड कर रहे थे उस समय मेजर संजय. कुलकर्णी।. नाउ जनरल संजय कुलकर्णी. उन्हें पैराड्रॉप किया गया चौपर से ले. जाया गया और वहां नीचे दे वर. पुट देयर जहां से अब उन्होंने चढ़ाई चढ़नी. शुरू करनी है।. अनदर टीम वाज़ देयर। तो दो टीम्स हमारी चल.
रही थी।. सियाचिन का जो ग्लेशियर है दैट हैस. अनइमिनेबल. हाइट्स।. उससे पहले हमें इस तरीके के बर्फ से भरे. पहाड़ों पर चढ़ने की ट्रेनिंग भी नहीं थी।. यह एकदम एक नया डोमेन था। बट मेजर संजय. कुलकर्णी टूक ह बैटल रेडी जवांस।.
एंड दे वेंट ऑन अ हेड।. उन्होंने वहां जाकर एस्टैब्लिश किया। एंड. बाय द टाइम पाकिस्तान रियलाइज्ड. क्योंकि हमने पाकिस्तान को उसके गेम में. बीट कर दिया। जब तक पाकिस्तान को समझ में. आता इंडिया वाज़ ऑलरेडी देयर। नाउ बिगेन द. बैटल।. अब आप देखिए. ऊपर हमने पोस्ट ले ली पाकिस्तान की एक और.
पोस्ट थी जिसको वो कहते थे कैद पोस्ट क्यू. यूए आई डी अगर आप जिनाह को देखिए तो वो. उन्हें बुलाते हैं कायदे आजम तो ये थी कैद. पोस्ट माने पाकिस्तान के लिए एक सबसे. इंपॉर्टेंट पोस्ट थी वो सियाचन में. लेकिन फिर यहां से आते हैं बाना सिंह. बाना सिंह. अगेन एक छोटे से जवानों की टुकड़ी को लेकर.
जब आगे बढ़ते हैं। स्ट्रेट चढ़ाई।. स्ट्रेट चढ़ाई मतलब बिल्कुल चाकू जैसी. खड़ी चढ़ाई।. इट हैस टू बी डन इन सीक्रेसी।. मेंटेनिंग. रेडियो साइलेंस एवरीथिंग।. ऊपर पहुंचते हैं।. अ ग्लोरियस बैटल टेक्स प्लेस। ग्लोरियस.
बैटल नॉट अ सिंगल पाकिस्तानी वास अलाइव।. वो बर्फ खून से लाल हो गई।. और उस पोस्ट के ऊपर हमने कब्जा कर लिया।. आज उस पोस्ट का नाम है बाना पोस्ट। परमवीर. चक्र बाना सिंह। जब 26 जनवरी की परेड होती. है और परमवीर चक्रों की वो अ. तीन. ओपन जीप्स में परमवीर चक्र निकलते हैं। वी. हैव गॉट ओनली थ्री अलाइव परमवीर चक्रस.
बाना सिंह जी ऑनरेरी कैप्टन योगेंद्र यादव. एंड सूबेदार मेजर संजय सिंह। जब ये तीन. निकलते हैं आप सोचिए वो क्या कहानियां. लेकर निकल रहे हैं।. बाना सिंह जो यह 1984 ऑपरेशन मेघदूत. इट टर्न. द. बैटल सिनेरियो फॉर अस।. आज की तारीख में.
सियाचन ग्लेशियर के ऊपर रेजीमेंट्स हर. रेजीमेंट हर इनफेंट्री रेजीमेंट. का ऑन रोटेशन सियाचिन टेन्योर आता है और. सियाचिन का. अ. वो. एलटीट्यूड ऐसा है कि छ महीने से ज्यादा एक. ह्यूमन बॉडी छ महीने भी बहुत ज्यादा है।. एक ह्यूमन बॉडी उसे बर्दाश्त नहीं कर. सकती।.
वहां की जो जिंदगी है वह खाली केरोसिन ऑयल. के ऊपर टिकी है।. बर्फ पिघलाएंगे, पानी पिएंगे।. केरोसिन ऑयल इन योर स्नो इग्लूस।. आपके आंख में केरोसिन. आपको यू कैन फील दैट आपके चेहरे पर पूरा. केरोसिन लगा हुआ है। आप मतलब उसकी जो. फ्यूम्स हैं आपके नाक के अंदर भी आपके कान.
के अंदर भी, आपके गले के अंदर भी शायद. आपके लंग्स के अंदर भी है। लेकिन सियाचिन. ग्लेशियर में जिंदा रख रहा है हमको. केरोसिन ऑयल। और मैं आपको एक चीज और बताना. चाहूंगी कि जब. जवान अपनी वहां तो जवान ड्यूटी पर तैनात. है ना। उसका काम है कि उसको. पेट्रोलिंग करनी है। यानी हर एक का एरिया. डिसाइडेड है। शॉर्ट पेट्रोल होती है छोटे.
समय की, लॉन्ग पेट्रोल होती है लंबे समय. की। अब उसमें जब जवान जाते हैं तो देयर इज़. अ वेरी ब्यूटीफुल कांसेप्ट। एंड इट इज. कॉल्ड रोप। आप रोप से क्या समझते हैं? शिवाकर सी. यहां पर रोप का मतलब है सात से आठ जवान जो. एक रस्से से बंधे हैं। वो जवान रोप है।. रोप का मतलब सिर्फ वो रस्सी नहीं है। रोप. का मतलब है यह जो सात से आठ जवान चल रहे.
हैं। यह सब एक रस्सी से बंधे हैं। हर एक. के बीच में 8 से 10 मीटर की रस्सी है।. और वो इसलिए बंधे हैं कि अगर एकदम से मौसम. खराब हो जाए। एकदम से ब्लिजर्ड आ जाए।. वाइट आउट। आपको इतना भी नजर नहीं आएगा।. हाउलिंग विंड्स कोई उड़ सकता है उस हवा. में या कोई एकदम से क्रेवस में गिर जाए।. क्रेवेस यानी दो पहाड़ियों के बीच में. दरार।. अब आप देखिए अब लगातार बर्फ गिर रही है।. छोटे-छोटे बर्फ के जो वो क्रिस्टल्स हैं.
वो मिलके धीरे धीरे धीरे करके एक ब्रिज. जैसा ही बना सकते हैं। जो हो सकता है एक. टाइम के बाद हार्ड हो जाए। लेकिन एक पैर. पड़ा, दूसरा पैर पड़ा। हो सकता है पांचव. छठे आठवें पैर तक वो टूट जाए और हो सकता. है वह आखिरी वाला नीचे जाने लगे. एक बार क्रेवेस के अंदर गिर गए तो वहां तो. -75 -80 कितना कितना टेंपरेचर कम है हम तो. बता ही नहीं सकते. हाइपोथर्मिया.
हाइपोक्सिया. लंग्स में पानी भर जाना, आपका दिमाग डलजनल हो जाना, एनीथिंग कैन. हैपन देयर। तो यह जो जवान एक दूसरे से. बंधे होते हैं, दे सेव ईच अदर। एकता में बल है वाली बात. है। एक साथ हैं। अगर एक नीचे गिर रहा है. या एक गिर गया तो इमीडिएटली द अदर वन इज़. पुटिंग आइस एक्स। कि भ ग्रिप बनाया जिससे.
कि उसके फॉल को भी रोका जा सके। दीज़ आर. वेरी चैलेंजिंग सिचुएशंस। हम उसे इमेजिन. भी नहीं कर सकते हैं। खाना तो आप यू नो. यूज़. तो लॉजिस्टिक में जैसे आपने हमें शुरू में. बताया कि आप लॉजिस्टिक डिपार्टमेंट में. रहे। हर चीज का ख्याल रखना पड़ता था।. सियाचिन के लिए लॉजिस्टिक में आप लोग क्या. करते थे? खाना पीना उनका क्या रखते थे? फिर. देखिए ऐसा है कि जब जवान रोटेशन पे जाते. हैं तो. दे आर कैरिंग ऑलमोस्ट 30 केg ऑन देयर बैक।.
अब आप सोचो सांस भी नहीं आ रही है। वहां. जाने से पहले बेस कैंप में उनकी ट्रेनिंग. कराई जाती है। अ. बर्फ में कैसे चढ़ना है? बर्फ में कैसे. सर्वाइव करना है। एलंच को कैसे पहचानना है. कि अब एवंच एवं की वो आवाज भी एक समझनी. जरूरी है। मानो आप एलांच में फंस गए तो. किस तरीके से एयर पॉकेट बना के कोशिश करनी. है कि आप ब्रीथ कर सको।.
आपने हनुमंत थप्पा जी की कहानी सुनी होगी।. 144. आवर्स 35 फीट बर्फ के नीचे. एलेंच आया 800 मीटर लंबा 1 कि.मी. ऊंचा. बर्फ का पूरा पहाड़ सोनम पोस्ट के ऊपर गिर. गया। हनुमंत थाप्पा और 10 जवान नीचे दब. गए। इमीडिएटली स्नो कटर्स आ रहे हैं।. इमीडिएटली हीट सेंसिंग. इक्विपमेंट्स आ रहे हैं। स्निफर डॉग्स ला.
रहे हैं। 150 लोग नॉनस्टॉप काम कर रहे. हैं। और वो 35 फुट नीचे से इन लोगों को. निकाल के लाते हैं। मैंने फौज कहती है. दोस्त हम तुम्हें अकेला नहीं छोड़ेंगे।. तुम्हें घर लेकर आएंगे।. 144 डेज के बाद भी हनुमान थप्पा निकलते. हैं जिनकी सांस चल रही है।. यह भी एक तरीके से ट्रेनिंग का हिस्सा है।. किस तरीके से उन्होंने अपने दिमाग को कूल. रखा होगा। काम रखा होगा।.
आपने पूछा लॉजिस्टिक चैलेंज तो एक तो यह. जवान अपने पीठ पर सामान लेकर जाते हैं।. दूसरा. जो. पोस्ट्स हैं काफी ऊंचाई पर पोस्ट हैं।. बहुत सारा सामान नहीं ले जाया जा सकता है।. तो बाय चॉपर फिक्स्ड विंग तो जा नहीं सकता. इतना ऊंचे। तो चॉपर के जरिए जो छोटे-छोटे. हमारे चीताज़ या और दूसरे हेलीकॉप्टर्स हैं. वो सामान लेकर जाते हैं। यह जो सामान रखा.
है यह स्किट बोर्ड्स के ऊपर स्किट बोर्ड. यानी अ. लकड़ी के और फाइबर के ऐसे बड़े बोर्ड्स. जैसे होते हैं। उसके ऊपर यह सामान रखा. जाता है। जो भी चाहे राशन है, चाहे उनको. जो भी सामान केरोसिन है और इसको अच्छे से. बांध दिया जाता है। चॉपर से इनको पैराशूट. लगा के नीचे रिलीज करते हैं। मतलब जरा सी. भी अगर कैलकुलेशन में चूक हो गई तो हो.
सकता है वो इतना दूर गिर जाए कि वो. रिट्रीव ही ना हो पाए। क्योंकि जो जवान इस. सामान को लेने जा रहे हैं। आज तो कई जगह. स्नो स्कूटर्स हैं। लेकिन कई जगह पैदल भी. जाते हैं जवान। तो इस तरीके से उन जवानों. के पास यह सामान अच्छा और खाली राशन नहीं. है शुभांकर जी घरों से आई हुई चिट्ठियां. भी. राशन दोबारा भी आ सकता है. राशन दोबारा आ सकता है सोचिए वो एक वो. चिट्ठी के ऊपर.
वो. कितनी हिम्मत हौसला. कितना हिम्मत और हौसला मिलता है. और कई बार जब किसी की तबीयत खराब हो जाती. है और मेडिकल इमरजेंसी है और रेस्क्यू. करना है तो तो फिर वही चौपर आता है. रेस्क्यू करने के लिए। लेकिन अगर मौसम. पैक्ड है, अगर चॉपर लैंड नहीं कर पा रहा. तो कई बार वो रेस्क्यू भी नहीं हो पाता।. एंड देयर इज अ कैजुअल्टी।. तो ये सिर्फ राशन की बात नहीं है। यह जान.
बचाने के लिए भी वो चॉपर इज द लाइफलाइन. देयर।. आपने बहुत क्योंकि आप इस युद्ध को आपने. पिताजी कहानियां सुनी। कारगिल में आप खुद. थे। एक सवाल मेरे ज़हन में आया था कि हर. युद्ध की अपनी एक गंध होती है। जब आप किसी. जंगी जैसे आपने कहा कि आप सियाचिन में है. तो वो केरोसिन की स्मेल आ रही है जो आपके. शरीर पर भी है। आपके आत्मा. सियाचिन. सियाचिन में तो आपकी आत्मा तक घुस चुकी. है। कारगिल में भी उस वक्त बारूद चारों. तरफ था। अब जब कई साल बीत गए हैं। कारगिल.
खत्म हो चुका है। उसकी कहानियां हम सुनते. हैं। क्या वो बारूद या वो एहसास कभी आता. है ज़हन में? उस वक्त जो देखा सब कुछ? देखिए. मैं. लॉजिस्टिक्स ऑफिसर थी। मेरा रोल था इस जंग. में फौज को लड़ाई के लिए तैयार करना।. मैंने. असंख्य जवान देखे। क्योंकि उन जवानों को.
हमने जंग के लिए तैयार करके आगे भेजना था।. आई हैव सीन. व्हाट इज दैट थॉट? जब आप जंग से जब आप. लड़ाई के लिए जा रहे हैं. वो जवान कैसा दिखता है जब वो लड़ाई पर जा. रहा है? क्या उसके मन में और उसके दिमाग. में चल रहा है? लड़ाई में जाने से पहले आई रिमेंबर.
हमारे. यूनिट में. कुछ ऑफिसर्स आए थे।. और ऐसी बात हो रही थी। और उन्होंने जो एक. सेंटेंस बोला वो मैं वो मैं कभी नहीं भूल. पाती हूं। इंसिडेंटली वन ऑफ़ देम वाज़ माय. कोर्समेट जिन्होंने यह मुझसे कहा था। मिले. बहुत सालों के बाद मिले एकेडमी में हमने. ट्रेनिंग साथ करी थी और फिर उन्हें वहां. देखा।. और उन्होंने कहा कि.
हाथ मिला ले दोस्त।. अब तो हम एक्सपेंडेबल हैं। आए आए नहीं आए. तो याद रखना।. वी शुक हैंड्स वी हग्ड एंड से. टेक केयर एंड दैट्स ऑल यू कैन डू एट दैट. टाइम. आई रिमेंबर मीटिंग सौरभ कालिया सौरव. कालिया हैड लंच एट माय प्लेस हमने उनके. साथ खाना खाया वो मेरे बच्चे के साथ खेले. थे. और.
फिर यह सुना सौरव कालिया की वो कहानी हमें. हमें याद रखनी चाहिए तो मेरे यह ऑपरेशन. विजय जीत की गूंज से पहले सौरव कालिया की. वह चीख भी मुझे सुनाता है।. 22 साल का बच्चा पहली तनख्वाह पहली सैलरी. तक नहीं आई थी।. मतलब आप यह देखिए कि जो वो अपनी पेट्रोल. लेकर जा रहे हैं. उस एक खबर को देखने के लिए कि यहां दुश्मन. है और यदि है तो कहां है और कितने लोग हैं.
और जब उनका एंबुश होता है. और जब वो दिनोंदिन पाकिस्तान के. एंबुश में आ गए और कई दिनों तक वो उनका. टॉर्चर झेलते रहे।. जब उनका शरीर मिला तो वो पोस्टमार्टम. रिपोर्ट तो अभी भी इंटरनेट पर है। आप. Google कर सकते हैं पोस्टमार्टम रिपोर्ट. ऑफ सौरव कालिया। उनके चेहरे पर आइब्रोस के. अलावा और कुछ नहीं था।.
और शरीर छोटा हो गया था क्योंकि इतनी. हड्डियां तोड़ दी थी और सिर्फ सौरव कालिया. नहीं जाट रेजीमेंट के वो बहादुर पांच जवान. आंखें फोड़ दी गई और फिर निकाल दी गई. कान. पियर्स कर दिया फोड़ दिया कान पूरा शरीर. उनके सिगरेट बट से जला हुआ था कि नाक टूटी. हुई थी उनके दांत टूटे हुए थे. द जेाइटल्स वर कट।.
उनके हाथों से नाखून निकले हुए हैं। कुछ. उंगलियां कटी हुई हैं।. बट मार मार के उनके रिब्स तोड़ दिए।. मतलब ऐसा क्या था उस इंसान में जो वो. इंफॉर्मेशन मांग ही रहे होंगे ना। दुश्मन. तो इंफॉर्मेशन ही चाह रहा होगा ना उनसे. जो वो नहीं दे रहे होंगे।. और सोचो उतनी ठंड में उन्हें बाहर छोड़ा.
हुआ था।. उतने दिन उतनी रातें. वो माइनस डिग्री टेंपरेचर में बाहर पड़े. रहे और फिर वो मार का दौर चलता होगा जब. उनके टॉर्चर उनको किया जा रहा है. अगेंस्ट जेनेवा कन्वेंशन. लेकिन पाकिस्तान कभी जेनेवा कन्वेंशन को. ना समझा है ना शायद कभी समझना चाहेगा. स्क्वाडन लीडर अजय अहूजा की कहानी.
प्लेन से आ रहे थे इजेक्ट करते हुए. हवा में थे। जेनेवा कन्वेंशन बहुत. क्लियरली कहता है कि आप कोई भी इंसान जो. पैराशूट से नीचे आ रहा है ही डजंट हैव अ. फेयर फाइट। आप उसे नहीं मार सकते।. लेकिन पाकिस्तान की फर्सेस ने उन्हें हवा. में ही मारा। और जब वो नीचे गिरे तो उनकी. हड्डियां भी तोड़ी।. सौरव कालिया की चीखों को मैंने कितनी.
रातों सुना है। शुभांकर मैं आपको बता नहीं. सकती हूं।. आई हैव लिव्ड इट. इट इज. ऑपरेशन विजय. मेरे लिए. बहुत मायनों में. मुझे चेंज करके गया आपने पूछा एक ऐसी चीज. जो आपको याद याद रही. मुझे वो ग्लोरी याद है.
जब वो जवान जीत के वापस आए. मुझे वह भी याद है कि ले एयर फील्ड के ऊपर. हमारे जो कैजुअल्टीज आ रही थी जिनके कॉफिस. के लिए सामान मैं दे रही थी। मेरे पति. लड़ाई लड़ रहे हैं। मुझे नहीं पता है कि. जो कॉफिन के लिए मैं सामान यहां से इशू कर. रही हूं। क्या उसने मेरे पति का नाम लिखा. होगा? एक वाइफ के तौर पर वो कितना चैलेंजिंग. टाइम है।.
मेरा बच्चा मेरे साथ है। मुझे नहीं पता है. कि क्या दुश्मन के फाइटर्स यहां आकर हमारे. लॉजिस्टिक इंस्टॉलेशन को बॉम्ब कर सकते. हैं। और अगर कर सकते हैं तो अगर मैं मर गई. तो और अगर मेरे हस्बैंड नहीं रहे तो तो. फिर यह बच्चे का क्या होगा? लेह एयर फील्ड के ऊपर कॉफिस हैं। उनके ऊपर. तिरंगा झंडा है।. और मैं एयर फील्ड पर खड़ी हूं और बाकी.
लोगों के साथ और उस लास्ट सैल्यूट अब दे. रहे हैं उस फौजी को जिसका पार्थिव शरीर. उसके घर जा रहा है।. मैंने न जाने कितने. फ्यूनरल्स अटेंड किए हैं।. ऑफ लद्दाखी सोल्जर्स जो लद्दाख स्काउट के. सोल्जर्स थे जो वही लद्दाख के लेह के. आसपास के गांव से आते थे और जब उनके मर्टल. रिमेंस को उनके गांव ले जाया जाता था.
उनके लास्ट राइट्स के लिए आपने पूछा ना. फौज साथ कैसे देती है? मतलब उसकी अंतिम. यात्रा में भी जब तक फौजी खड़ा होकर. सलू्यूट नहीं देगा. तो इसका मतलब. वी आर नॉट वर्थ आवर साल्ट।. एक फौजी की जब शव यात्रा निकलेगी तो फौजी. खड़ा होकर उसे सलू्यूट करेगा।. प्लेेंस में कहते हैं या हमारे घरों में. कहा जाता था ट्रेडिशनली कि जो लेडीज.
प्रेग्नेंट हैं वो. अ किसी की अंतिम यात्रा पे नहीं या किसी. का लास्ट राइट्स नहीं देख सकते।. ये ये बड़े बूढ़े कहते थे।. मैंने न जाने कितने लद्दाख स्काउट के. जवानों के फ्यूनरल्स अटेंड किए।. खड़े होकर सल्यूट किया जब तक हमने वह वो. पार्थिव शरीर. विलीन नहीं हो गया।. आप इमेजिन करिए हम पेट लेकर खड़े हैं। आप.
अपनी टीम को लेकर गए हैं क्योंकि यह आपकी. ड्यूटी है. कि बाकी जो जो लड़ाई लड़ रहे हैं वो तो. लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन जो शहीद होकर. आया है उसे सलू्यूट मिलना चाहिए।. हिंदुस्तान की फौज और पाकिस्तान की फौज. में अंतर क्या है? आपने क्योंकि सौरव. कालिया का. हम इसी पे ही आगे जाते हैं। शुभांकर जी. पाकिस्तान. के जवान.
जब हमारी ओर मरे तो पाकिस्तान ने उनके. बॉडीज को देखिए मैं शब्द क्या लगा रही. हूं। मैं बॉडी बोल रही हूं उनको और हमारे. वालों को क्या बोल रही हूं? मल रिमेंस।. यही फर्क है। उन्होंने अपने जवानों के. शरीर वापस लेने से मना कर दिया। पाकिस्तान. ने कहा यह हमारे हैं ही नहीं।. जबकि उनकी चिट्ठियां, उनके सारे कपड़े, उनके खत. उनके डॉक्यूमेंट्स मिल रहे हैं।.
डॉक्यूमेंट्स, आईडी कार्ड. तो इंडिया ने क्या किया? हमारे. भारतीय सेना ने उन्हें उनके धर्म के हिसाब. से दफनाया और आखिरी फातिहा पढ़ा।. यह फर्क है इंडियन आर्मी में और पाकिस्तान. की आर्मी में और आंखें नोच रहे थे।. उन्होंने अपने शहीदों को लेने से मना कर. दिया। क्या मुंह दिखाते होंगे वो लोग अपने. घरों में वापस जाकर कि हम किस तरीका की.
सेना में काम कर रहे हैं।. कि जो हमें पहचानने से भी इंकार कर दे। और. यहां इंडियन आर्मी है। पूरा देश उठ खड़ा. हुआ। ऑपरेशन विजय पहली बार हुआ कि जब. शहीदों के पार्थिव शरीर घर भेजे गए। इससे. पहले 1971 की आखिरी जो लड़ाई लड़ी गई थी. उसमें. दाह संस्कार वही किया जाता था और घरों में. इंफॉर्मेशन जाती थी।.
लेकिन कारगिल के युद्ध में पहली बार हुआ. जब शहीदों के पार्थिव शरीर घर भेजे गए और. आप वो देखिए वो विजुअल्स हमारी यादों से. निकलते नहीं है कि जब वो फौजी ट्रक्स. गेंदे के फूल से लदे हुए और अमर रहे अमर. रहे के नारे लग रहे हैं। पूरा देश एक साथ. उठ खड़ा हुआ। मुझे मेरे पिताजी की अंतिम. यात्रा भी ऐसे ही याद है। तो आई वास वेरी. पर्सनली कनेक्टिंग विद ऑल दिस दैट इज. हैपनिंग। एंड आई थिंक उसने देश के बहुत.
सारे बच्चों को मोटिवेट किया कि ये जो गए. थे ये आपके लिए गए थे और ये देश आपका है।. इसके लिए आप. कई जवान. कई जवान मेरे बच्चे को प्यार कर रहे हैं।. हम. जो उस समय मेरे साथ यूनिट में ही है. क्योंकि मैं उसे कहीं नहीं छोड़ सकती हूं।. और मैं उनकी आंखों में देख रही हूं कि यह. अपने बच्चे को आखिरी बाय-ब बोल रहे हैं. यहां से. कि हम वापस आए तो अच्छा है। नहीं तो इसको. जो हम आशीर्वाद दे रहे हैं यह इसके थ्रू. मेरे बच्चों को लगे.
और मैं देख रही हूं उनको ऑफिस से क्योंकि. सामान हम इशू कर रहे हैं। बहुत जवान है और. मेरा बच्चा वहीं पे ही कूद रहा है। भैया. आप लड़ाई में जा रहे हो। भैया आप लड़ाई. में जा रहे हो। कोई इसको गले से लगा रहा. है। कोई इसको गोद में उठा रहा है। कोई. उसके बाल ऐसेसे कर रहा है।. तो जैसे एक फौजी के तौर पर आपको डर नहीं. लगा क्योंकि आप एक लेकिन मेरे ज़हन में एक. ख्याल आ रहा है कि ये सच है कि एक फौजी. कभी नहीं डरेगा। उससे मौत का डर नहीं है।. लेकिन एक मां को तो डर होता होगा। जब.
भूमिका दोनों निभाई जा रही है एक साथ। एक. छोटा बच्चा साथ में भी है, एक बच्चा पेट. में भी है। वो पेट वाला स्पेशली एबल्ड भी. हो सकता है। क्योंकि इतने हालात हैं शोर, शराबा, भाग, दौड़, प्रेशर, टेंशन जिन. चीजों से प्रेगनेंसी में मना किया जाता. है। कभी लगा कि एक मां के तौर पर आप अपने. बच्चे की लाइफ पर रिस्क ले रहे हो? एक. फौजी के तौर पर तो आप उसको सलू्यूट है जो. आपने किया।. देखिए. जो पेट में था ना उसके बारे में सोचने का.
तो मुझे समय ही नहीं था। एक्चुअली. एक्चुअली मैं सिर्फ हाइड साइड पर सोच सकती. हूं। लेकिन उस समय. ना खाने का टाइम था, ना लेटने का टाइम था, ना रेस्ट का टाइम था, ना कुछ अच्छा सोचने. का टाइम था।. वो सिर्फ काम करने का टाइम था। और. सेवा करने का. नहीं सेवा नहीं करने का टाइम था। वो काम.
करने का टाइम था। वो सेवा नहीं वो मेरी. ड्यूटी थी। वो मेरा वर्दी थी। वो मेरी. वर्दी थी। और आप. आप किसी भी फौजी से बात करेंगे तो आपको. यही थॉट सुनने को मिलेगा। दिस इज नॉट अ. मेलो ड्रामा।. दिस इज. ड्यूटी।. ड्यूटी।. और यह ऑप्शनल नहीं है।. मैं कल अपने मिलिट्री कंटोनमेंट में देख.
रही कि वहां पर एक बोर्ड लगा था. जिसमें लिखा था सुरक्षा में सहयोग करना. अनिवार्य है। यानी जो अंदर आएंगे सुरक्षा. में सहयोग करना अनिवार्य है। यानी दिस इज. नॉट डिजायरेबल। दिस इज कंपलसरी।. वैसे ही तो आपने पूछा सवाल तो पेट में जो. था उसको सोचने का सॉरी बॉस टाइम नहीं था।. ऊपर वाले तुम देख लो।.
मेरे पास इसका समय नहीं है। मेरे पैर इतने. इतने मोटे हो रहे थे सूझ के। मेरे पास. टाइम नहीं था। मैंने कब पिछला खाना खाया. मुझे पता नहीं। मैं क्या खा रही हूं मुझे. पता नहीं।. मुझे चिंता थी. उस बच्चे की जो मेरे साथ था।. जो दिख रहा था. जो दिख रहा था।. जब मेरे हस्बैंड द्रास सेक्टर के लिए मूव. कर रहे थे। हम. तो मेरे आंख से आंसू आया। मैंने उनको.
गले से लगाया। उन्होंने मुझे बहुत जोर से. पकड़ लिया। वो एक तरीके का एक फाइनल गुड. बाय था कि अगर हम फिर मिले तो वो एक दूसरी. जिंदगी मिली हमें। लेकिन रेडी रहना है।. रेडी रहना है।. और. बेटे को उन्होंने उठाया। उसको प्यार किया. और जब वो निकले तो.
मेरे आंख से आंसू निकल आए।. तो मेरे बच्चे ने मुझे देखा और कहा कि. मम्मा रो रहे हो। मम्मा रो रहे हो. और फिर मुझे. फिर मैंने वो आंसू पोंछ दिया।. और फिर मेरी आंख से आंसू नहीं आए।. क्योंकि बच्चा.
वो वो उस समय. एक ऐसे माहौल में था जहां वो सिर्फ हर एक. से यही बोल रहा था. हम जीतेंगे। वो छोटा सा बच्चा भैया आप. लड़ने जा रहे हो हम जीतेंगे।. फिर मुझे लगा कि इसमें अब चिंता करने की. कोई जरूरत नहीं है क्योंकि आपके हाथ में. है सिर्फ काम करना और आप सिर्फ अपना काम.
कर सकते हो।. अगर कुछ होना होगा तो वो आपके हाथ में. नहीं है।. चलिए यह बात ठीक है कि आपके हाथ में नहीं. है। बट एक पत्नी की भी भूमिका है। आप एक. आप एक फौजी हो। जैसे मैंने मां को लेकर. सवाल पूछा। एक फौजी हो। लॉजिस्टिक. डिपार्टमेंट तैयार कर रहे हो। आपने सामान. भेजा। आपने यह भी सुना होगा कि इतने सारे. लोगों की कैजुअल्टी हुई। इतने शहीद हुए।. इतने ऐसे जिनकी हालत इतनी बीमार है जो. अस्पतालों में भर्ती हैं। ये खबरें तो आप. तक भी आ रही होंगी हर वक्त। वो जो एक.
पत्नी वाला एहसास था कि पति भी मेरा जंग. लड़ रहा है। या अगला ताबूत उसका भी हो. सकता है।. मैं शुभांकर जी. जब लड़ाई चलती है ना तो. सारी इंफॉर्मेशनेशंस हेड क्वार्टर में आती. हैं। हम जैसे अ सेंट्रल नोडल एक जगह होगी. जहां पर सारी इंफॉर्मेशन आएगी. और क्योंकि उस समय. ज्यादातर ऑफिसर्स सब बाहर हैं। तो जो भी.
पीछे ऑफिसर्स हैं उन सबकी ड्यूटीज लग रही. हैं। सो वेरी ऑफन आई वास गिविंग नाइट. ड्यूटी इन आवर अह. डिव हेड क्वार्टर जो हमारा डिवीज़न का हेड. क्वार्टर था।. और बहुत ही. चैलेंजिंग काम होता है वह कि आप रात को. रेडियो पर बैठे हैं और आपने लगा रखा है और. आपके साथ बाकी जवान भी बैठे हैं। सब. रेडियो ऑपरेटर्स बैठे हैं और इंफॉर्मेशन आ.
रही है और कहां क्या सामान चाहिए वह भी. बताया जा रहा है। कहां कौन सी कैजुअल्टी. हुई वह भी बताया जा रहा है। कहां किसका. इवाकुएशन हो रहा है वह भी बताया जा रहा. है। क्योंकि यह सारी इंफॉर्मेशन हमने. कलेक्ट करनी है और हायर हेड क्वार्टर. भेजनी है। ठीक है? मतलब सरहद से सीधे खबर. हम तक आ रही है और यहां से हमने हायर हेड. क्वार्टर भेजना है।. जब मैं वहां बैठी हूं. और रिपोर्ट्स आ रही है.
कोई भी खबर आ सकती है। सबसे पहले तो. किसी के हताहत होने किसी के लॉस की खबर. आनी नहीं चाहिए।. कोई शहीद ना हो यह तो सबसे पहली थॉट है।. लेकिन यह बहुत विशफुल थिंकिंग है। हम सबको. असलियत पता है। वी आर ऑल प्रैक्टिकल पीपल।. हमें पता है कि इसमें जो वहां का एटीट्यूड. है, जो वहां का जिस तरीके से लड़ाई चल रही. है, एनीथिंग इज पॉसिबल।.
फिर एक पत्नी का दिल कहता है कि इसमें. मेरे हस्बैंड का नाम ना हो।. और आप सिर्फ प्रे कर सकते हो कि किसी को. कुछ ना हो और भगवान उसको कुछ ना हो।. दैट इज दैट इज ऑल यू कैन प्रे।. और वहां से कोई डायरेक्ट रेडियो नहीं है।. मोबाइल का जमाना नहीं है कि मोबाइल उठाया. और हेलो मैं ठीक हूं।.
आप फोन उठा के बात नहीं कर सकते। आप उस. खबर पर डिपेंडेंट हो जो खबर हेड. क्वार्टर्स से आ रही है।. फ्रंट लाइन से आ रही है और आप सिर्फ प्रे. कर सकते हो।. और सबसे मुश्किल यह है कि एज ऑफिसर जैसे. आपने कहा मुझे तो पता है ना कि क्या क्या. सिचुएशन है। अगर मैं किसी और ऑफिसर वाइफ. से या किसी और जवान की वाइफ से किसी और. फौजी की वाइफ से बात करती तो उनको शायद वो.
पूरी इंफॉर्मेशन ना हो। लेकिन मुझे तो. पूरी इंफॉर्मेशन है ना. और रियलिटी पता है. और रियलिटी पता है. और मैं फिर वर्स्ट केस सिनेरियो सोचती हूं. कि हम भी तो बड़े हुए ना. हम भी तो बड़े हुए ना. तो ये बच्चा भी बड़ा हो जाएगा।. इफ एनीथिंग हैपेंस। सो आई. 25 साल बाद भी आपकी आंखों में आंसू है।. क्योंकि वो वो बहुत.
कारगिल. हर रिश्ते को टेस्ट करके गया। हर रिश्ते. को टेस्ट करके गया।. कारगिल गव मी द. बेस्ट वर्जन ऑफ़ मसेल्फ।. कारगिल गव मी द बेस्ट वर्जन ऑफ मसेल्फ।. आई थिंक दैट इज अ पर्सनल टेक अवे फ्रॉम. कारगिल।. क्या बदला?
मैं कुछ भी कर सकती हूं। आई कैन डू. एनीथिंग।. मैं घबराऊंगी नहीं।. अगर मैंने ठान लिया. तो मैं कुछ भी कर सकूंगी।. आई एम कैपेबल ऑफ गिविंग. माय बेस्ट बिकॉज़ आई हैव सीन माय बेस्ट. वर्जन।. जो दायरे दुनिया ने मेरे ऊपर लगाए.
प्रेग्नेंट है यह नहीं कर सकती. यंग मदर है यंग मदर ये ये नहीं कर सकती. तुम्हारा हस्बैंड जंग लड़ रहा है तो शायद. तुम इतनी बहादुर नहीं हो सकती तुम्हारे मन. में डर आएगा लेकिन वो डर आया लेकिन मेरे. अंदर की ही. मेरे अंदर से ही किसी चीज ने मुझे मुझे. उसको ओवरकम करना सिखा दिया।.
एंड देन आई रियलाइज दैट. ये सारे लॉसेस. हमने. रोज होते हुए जो वहां देखे. ये हमें बहुत कुछ सिखा के गया। वो शहादत. किसी की भी वेस्ट नहीं गई।. 527 जवान हमारे मरे। लेकिन आप देखिए उसके. बाद हमारे देश ने कितना कुछ सीखा। जो यह. पर्सनल चैलेंजेस हुए इससे मेरे अंदर कितना.
कुछ बदला। आई हैव सीन. द बेस्ट वर्जन ऑफ़ मसेल्फ बट आई विल आल्सो. गिव इट अ नेम। आई हैव सीन द बीस्ट वर्जन. ऑफ़ मसेल्फ।. मैं नहीं घबराती किसी से।. ना सिचुएशन से. ना. किसी चीज से नहीं।. कारगिल की कहानियों में बहुत सारे किस्से. ऐसे हैं जो आपके रोंगटे खड़े कर देते हैं।.
सबने. वो साहस और शक्ति का प्रदर्शन किया जो. शायद शब्दों में बयां नहीं हो सकता। बट. कोई एक कहानी हमारे दिल के करीब रह जाती. है। बहुत सारे वॉर हीरोज़ हमारे हैं। किसी. एक का अगर आप जिक्र करना चाहे जिन जिनकी. कहानी सुनकर आपके उस वक्त रोंगटे खड़े हो. गए थे या वो कहानी गौरवान्वित करती है कि. देश पर कोई कैसे मर मिट सकता है। जैसे. मुझे विक्रम बत्रा की कहानी बहुत घुसबम. देती है हमेशा। जब भी मैं सुनता हूं कि. उन्हें उस असाइनमेंट में नहीं भेजा जा रहा. था।. या.
वो जीत चुके थे।. बट कहा यह दिल मांगे मोर।. सारी कहानियां ऐसी है। कैप्टन मनोज पांडे. से लेकर जितनी भी कहानियां है बट कोई एक. कहानी मैं चाहता हूं आप जिक्र करें। मैं. आपको एक कहानी सुनाती हूं. और ये कहानी. पर्सनली मुझे बहुत मोटिवेट करती है।. ये कहानी है कैप्टन नीखे जाखू कगू से। एक.
नागालैंड के ऑफिसर थे।. नागालैंड से आते थे और. एक. छोटे से परिवार से आते थे। उनके परिवार. में कोई फौज में भी नहीं था और हेड हंटर्स. की फैमिली से आते थे। नागालैंड में हेड. हंटर मतलब. पहले के जमाने में अभी तो नहीं। लेकिन हेड. हंटर्स की वो ग्लोरी होती थी कि वह अपने. दुश्मनों के सिर काट के लाते थे और अपने.
गांव के एंट्री पर लगाते थे कि यहां वो. लोग रहते हैं जो दुश्मनों के सिर काट के. लाते हैं।. तो वो हेड हंटर्स के कबीले से उनकी. एनसेेस्टर्स आते थे।. कारगिल के टाइम पर वो. उनकी कमिशनिंग तो हुई थी आर्मी सर्विस. स्कोर में लेकिन उस समय वो अटैचमेंट. पीरियड कर रहे थे टू राजफ के साथ।.
यह जो अफसर थे वेरी गुड इन अब क्योंकि. नागालैंड से आ रहे हैं और वहां के लोगों. की फिजिकल फिटनेस तो बहुत मजबूत होती है. और हैं वो राजरीफ के साथ जहां बिल्कुल वो. राजस्थान के रण बाकरे. तो हर इनफेंट्री की यूनिट में एक घातक. प्लटून होती है। यानी शार्पेस्ट एज ऑफ. नाइफ। फर्स्ट रेस्पॉन्डर्स. सबसे पहले यही जाएंगे।. उसमें गिने मतलब मुट्ठी भर सैनिक होते हैं.
जो हर पैरामीटर पर बेस्ट है रेजीमेंट के. इट कैन बी फील्ड क्राफ्ट इट कैन बी वेपन्स. इट कैन बी फिजिकल फिटनेस सर्वाइवल. टैक्टिक्स किसी भी चीज को आप ले लीजिए. बहुत सारे पैराटर्स पे जो बेस्ट होते हैं. उनकी एक मुट्ठी भर लोगों की एक टुकड़ी. होती है उसे कहा जाता है घातक प्लटून और. यह वाकई में अपने नाम के हिसाब से घातक. होते हैं।. उस समय नीखिया जाकू कंगूसे उस घातक प्लटून.
के कमांडर थे और उनको यह टास्क दिया गया. था कि एक ऊंची पहाड़ी है क्लेफ ब्लैक रॉक. उसके ऊपर दुश्मन की एक अ. पोस्ट है. जो हमारे नेशनल हाईवे वन अल्फा नीचे से. निकल रहा है उसके ऊपर डायरेक्ट हिट कर रहे. हैं और अगर हमें उस एरिया को अपनी फौज के. लिए सिक्योर करना है तो उस पोस्ट का कब्जा. करना हमें बहुत जरूरी है। तो यह उनको.
टास्क दिया गया।. कैप्टन कंगू से अपने जवानों के साथ निकल. पड़ते हैं।. जैसे-जैसे वो उस. चट्टान के पास पहुंच रहे हैं। उस पहाड़ी. के नीचे पहुंच रहे हैं। एटीट्यूड और बढ़ते. जा रहा है। आपने तो देखी भी है वह. पहाड़ियां। कोई कवर नहीं है, कोई पेड़. नहीं है, कोई झाड़ियां नहीं है। और यह रात. के अंधेरे में यह पूरी टुकड़ी आगे बढ़ती.
जा रही है। है कौन? नागालैंड का हेड हंटर. लीड कर रहा है। और उसके पीछे राजस्थान के. रणभा आगे बढ़ रहे हैं। पर पाकिस्तान की. कोई उस दिन चांस ही नहीं था।. अब जैसे-जैसे यह आगे बढ़ रहे हैं, जंग का समय था।. तो दुश्मन भी चौकन्ना था। यह सोचना तो गलत. है कि दुश्मन सो रहा है। दुश्मन तो बहुत. अलर्ट है।. कोई पत्थर सरका होगा, कोई आवाज हुई होगी।.
जो दुश्मन का गार्ड था उधर से उसने. एक जनरल डायरेक्शन में एक डक करके एक बस्ट. ओपन कर दिया अपने गन का।. बस्ट का मतलब बहुत सारी गोलियां एक साथ. चला दी। ठीक है। अब उसमें से कोई एक गोली. का स्प्लिंटर. आके कंगूसे के पेट पर लगा।.
अब जब उनके पेट पर लगा तो स्प्लिंटर की. इंजरी तो अंदर तक फाड़ के जाती है। खून. निकलने लगा।. अब उनके जो यूनिट के जवान थे अब उनके लिए. नीखे जाखू कंगू से बोलना बड़ा मुश्किल नाम. है भाई। कुछ आसान नाम तो उन्होंने एक आसान. नाम उन्हें दिया हुआ था नींबू सांप।. एक जवान ने कहा नींबू साहब पेट से खून बह. रहा है।. उन्होंने कहा फिक्र नहीं बेल्ट जरा कस के.
बांधता हूं।. और उन्होंने उस खून को रोकने के लिए बेल्ट. को और टाइट बांधा।. यह प्लटून आगे बढ़ती जा रही है। आगे आके. एकदम एक खड़ी चट्टान आई। चिकनी. टेंपरेचर माइनस 10. वो इतनी चिकनी चट्टान थी जिसके ऊपर अ जो. बर्फ की चिकनाई होती है।. कैप्टन कंग्रूसेस ने अपनी टीम को बोला कि.
अब. यह तरीका हम अपनाएंगे कि मैं आगे बढूंगा।. और मैं इस चट्टान के ऊपर पहुंचूंगा।. ऊपर पहुंचकर मैं. रस्सी सिक्योर करूंगा और फिर पूरी प्लेटून. ऊपर आ जाएगी और हम दुश्मन की जो ये ऊपर. टुकड़ी जो बसी हुई है यहां पे इसको हम. खत्म करेंगे।.
जवान ने बोला साहब आपके पेट से खून बह रहा. है। उन्होंने कहा कोई बात नहीं इसीलिए. मुझे आगे जाना है।. कितना हाई एड्रनलन लगा हुआ होगा। अभी आगे. चले।. एक तरफ रॉकेट लांचर लगाया, एक तरफ. अपना राइफल लगाया, पीछे कमांडो नाइफ. लगाया।. अब वो ऊपर बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।.
लेकिन वो बर्फ इतनी खड़ी और इतनी चिकनी है. कि यहां हाथ रखें तो स्लिपों के नीचे। पैर. को कोई फुटहोल्ड नहीं मिल रहा। बूट को कोई. फुट होल्ड नहीं मिल रहा। थोड़ी देर यह. चला। लेकिन पता था कि अगर रात बीत गई तो. दिन में अटैक नहीं हो सकता। वी हैव दिस. विंडो।. मुश्किल वक्त था। प्रॉब्लम सॉल्विंग करनी. थी। डिसीजन लेने का समय था।.
कैप्टन कंग्रूसे को वह समय याद आया जब वह. अपने नागालैंड के गांव में किसी चिकने. पेड़ पर चढ़ने के लिए नंगे पैर चढ़ा करते. थे।. कैप्टन कंगूसे ने वही तरीका उस रात. अपनाया। -10 डिग्री के टेंपरेचर में. उन्होंने अपने जूते उतार दिए और अपने. सॉक्स उतार दिए कि अब मुझे नंगे पैर इस. बर्फ भरी चट्टान में ग्रिप मिलेगा.
और वह आगे बढ़ते गए।. जैसे-जैसे वो आगे बढ़ते गए उन्होंने अपना. आइसक्स भी लगाया होगा। उन्होंने ग्रिप भी. लिया होगा। उन्होंने किस तरीके से आगे. बढ़े। अब आप. ये देख रहे हैं ना यह माइक कितना है।. बस चट्टान ऐसी थी। अब जब आप आगे बढ़ रहे. हैं तो आपके कोहनियां भी छिल रही हैं।. आपके नाखून भी टूटते जा रहे हैं। आपके. हाथों से खून निकल रहा है। आपकी नाक रगड़. खा रही है। आपकी चिन रगड़ खा रही है। पेट. से आपके खून बह रहा है। लेकिन यह बंदा ऊपर.
बढ़ता गया।. और जब यह ऊपर पहुंचा. जवान ऊपर आने लगे। लेकिन इस बीच में. कैप्टन कंग्रूसे ने उस पोस्ट में हरकत देख. ली। अब इतना टाइम नहीं था कि सबके आने का. वेट करते। उन्होंने अपना रॉकेट लांचर. निकाला एंड ही स्टार्टेड फायरिंग। डम डम. और एक के बाद एक उन्होंने दुश्मन के बंकर.
बर्बाद करने शुरू किए।. पर दुश्मन भी कमजोर नहीं था। दुश्मन ने. वहां से अपने ऑटोमेटिक गन का फायर किया।. कैप्टन कंगूसे ने यहां से अपनी राइफल. निकाली और जो दुश्मन पास आ रहे थे उनके. ऊपर फायर किया। दो को उन्होंने ढेर किया।. अब उनको गोलियां लग रही हैं। कंधे पर गोली. लग रही है। ही कुड नॉट होल्ड ह राइफल।. उनके घुटने पर गोली लग रही है।. फाइनली. पाकिस्तानी ने सोचा कि चोटिल हो गया। अब.
हम इसको पकड़ लेंगे और जिंदा पकड़ेंगे।. जैसे ही वह पास आए। यह हेड हंटर की कौम का. आदमी था। इसने अपना कमांडो नाइफ निकाला और. यूं गर्दनें उड़ाई। एक की गर्दन यहां गई।. एक की गर्दन वहां गई।. लेकिन तब तक पाकिस्तानी ने ऑटोमेटिक गंस. का फायर खोल दिया. और कैप्टन कंगूसे का शरीर ऊपर से नीचे तक. फ दिया। वो इंपैक्ट इतना स्ट्रांग था कि. कैप्टन कंग्रूसे का शरीर यूं उठा.
और वो नीचे खड्ड में नीचे गिर गए। डीप. नीचे तब तक जवान ऊपर आ गए। उन्होंने बाकी. बचे हुए पाकिस्तानियों को और उनके बंकर्स. को वहीं तबाह कर दिया।. यूं लगाया तिरंगा. और उन्हें बर्फीली हवाओं में सल्यूट करके. कहा नींबू साहब यह आपकी जीत है।. दिस इज द स्टफ लेजेंड्स आर मेड ऑफ। दिस इज.
द स्टफ दैट ग्लोरियस स्टोरीज आर मेड ऑफ।. ये है भारतीय सेना।. तो इसके आगे कोई भी आ जाए। और यह नागालैंड. के वो जवान. यह नागालैंड का वो हेड हंटर कबीले से आने. वाला नीखे जाखू कैगू से. ऐसी कहानियां और आनी चाहिए लोगों को पता. चलना चाहिए अपने रियल हीरो के बारे में. तो मेरी कोशिश है मेरा एक YouTube चैनल है. शौर्य टेल्स उसमें मैं बहादुरों की. कहानियां सुनाती हूं.
और मेरी ये. तमन्ना है कि ये कहानियां ज्यादा से. ज्यादा शेयर हो. हम. क्योंकि कि ये. बहादुर फौजी. डेयर डेविल मिलिट्री ऑपरेशंस. आप जान हथेली पे आकर निकल जाते हो। वो. क्या जज्बा रहता होगा वो क्या सोच रहती. होगी कि आपको उसके आगे मिशन के आगे कुछ.
नजर नहीं आ रहा। कुछ नजर नहीं आ रहा। मां. बाप, भाई, बहन, बच्चे, बीवी आपको कुछ नजर. नहीं आ रहा। एंड देयर इज नो हेजिटेशन।. सो कि क्या माइंडसेट होता है कि आप जैसे. अभी आपने नहीं कहानी सुनाई नींबू साहब की. उनको पता है कि अब वो जिंदा नहीं बचेंगे।. जिस हिसाब से उन्होंने ओपन फायर खोल दी।. रॉकेट लांचर खोल दिया।. लेकिन फिर भी लगे पड़े हैं। पता है अभी. थोड़ी देर प्राण चले जाएंगे।.
तो इसके लिए एक पोयम है कि जीत की खातिर. बस जुनून चाहिए।. जिसमें उबाल हो ऐसा खून चाहिए।. यह आसमान भी आएगा जमीन पर। बस इरादों में. जीत की गूंज चाहिए।. जब हम एकेडमी पहुंचते हैं. हम. तो एकेडमी के कुछ कलर्स होते हैं। फौज में. कलर पेडागोगी को बड़ाेंस दिया जाता है।.
एकेडमी के जो हमारे कलर्स हैं वो है ग्रे. और रेड।. और वह आपको हर जगह दिखाई देता है। एकेडमी. में आप एंटर करते हैं। चाहे आप आईएमए में. एंटर करें, चाहे आप ऑफिस ट्रेनिंग एकेडमी. में एंटर करें। चेन्नई, फ्लैग्स में, अ. बिल्डिंग्स में। यहां तक कि आपके लिविंग. क्वटर्स के बेडशीट्स और पर्दों में भी. ग्रे एंड रेड कलर।. और ग्रे और रेड कलर एक फिलॉसफी है।.
यह फिलॉसफी है इंडियन आर्मी के ऑफिसर की।. ग्रे कलर सिग्निफाई करता है. नर्व्स ऑफ स्टील।. हर समय तुम्हारा दिमाग कूल काम कंपोज्ड. होना चाहिए। नो क्राइसिस हियर।. क्योंकि तुम अपने लिए डिसीजन नहीं ले रहे. हो। तुम अपनी टुकड़ी के लिए डिसीजन ले रहे.
हो। तुम अपनी टीम के लिए डिसीजन ले रहे. हो। इसलिए तुम्हारा कोई भी डिसीजन. हड़बड़ाहट में नहीं हो सकता। इट हैज़ टू बी. कूल। तो विवेक बहुत जरूरी है। हमेशा अपने. विवेक को जागृत रखना।. और रेड कलर सिग्निफाई करता है बलिदान।. कि अगर उसके उपरांत भी कभी यह मां भारती. तुमसे तुम्हारा बलिदान मांगे। तो तुम. दोबारा मत सोचना।. तो यह थॉट हमारे अंदर डाल दिया जाता है।.
वी आर वियरिंग दीज़ कलर्स।. हमारे यूनिफार्म में ये दो रंग बहुत जगह. दिखाई देते हैं। शोल्डर्स में, कमर बंस. में, नेक्स्ट स्कार्स में।. ग्रे एंड रेड इज पार्ट ऑफ आवर बॉडी।. कि आपने विवेक से काम लेना है. तो विवेक और वीरता इनफैक्ट एकेडमी में जो. हमारा कैप बैज है जो हमारा लोगो है उसके.
नीचे भी यही लिखा है वीरता और विवेक. नर्व्स ऑफ स्टील एंड सैक्रिफाइस तो कैप्टन. नीजाकू कग्रूसे की कहानी वीरता और विवेक. का एग्जांपल है. ऑफ 1992 में महिलाएं फौज में आई थी।. उस वक्त पुरुष फौजियों की तरफ से कैसा. रिएक्शन था? ओ. जब लड़कियां फौज में आनी शुरू हुई तो.
शुरुआती दौर में तो यह एक एक्सपेरिमेंट के. तौर पे ही था। देखिए इंडियन आर्मी एक. कितना बड़ा ऑर्गेनाइजेशन है कि वो बार-बार. रोल बैक नहीं करते कोई डिसीजन को। एक बार. डिसीजन लेंगे, एक्सपेरिमेंट करेंगे, ट्राई. करेंगे।. देखेंगे, परखेंगे, चैलेंज करेंगे उस. डिसीजन को और जब वह सभी पैराटर्स पर वह. डिसीजन सही हो जाएगा, देन दे विल. फॉर्मलाइज इट। तो हम तो उस जमाने से आते.
हैं जब शुरुआती चैलेंजिंग दौर था।. आई एम 77 नंबर लेडी ऑफिसर ऑफ इंडियन. आर्मी। पहली 100 भी नहीं।. और उस समय. मेल डोमिनेटेड हाई टेस्टोस्टेरोन एकदम ये. तो ये तो हमारी. वो जिन्हें मूछे रखने के पैसे मिलते हैं।. ये तो हमारी डोमेन है।. यस.
जब लड़कियों के लिए रास्ते खुले. मुट्ठी भर लड़कियां 25 लड़कियों का बैच. बनाया जाता था।. ट्रेनिंग 6 महीने. और यह भी पूरी एक जर्नी थी।. यह तो आपको पता है कि फौज में हर एक का एक. नंबर होता है। है ना? जो परमानेंट कमीशन. होते हैं यानी जो अपनी पूरी नौकरी करके. बाद में पेंशन के लिए एलिजिबल होते हैं.
उनके. उन्हें हर एक को एक नंबर मिलता है और उनका. नंबर प्रेफिक्स्ड होता है आईसी दैट इज. इंडिया कमीशन। ठीक है? इंडिया कमीशन फिर. उनका नंबर और फिर उनका अपना नेम। तो यह. कहा जाता है कि अगर आपके नाम की स्पेलिंग. भी गलत हो गई लेकिन अगर आपका नंबर सही. लिखा है तो आपका नंबर ही सही माना जाएगा।. दैट इज दैट इज वी ऑल हैव अ नंबर। दो तरीके. के कमीशन होते हैं। एक होता है परमानेंट. कमीशन। एक होता है शॉर्ट सर्विस कमीशन।.
परमानेंट कमीशन के नंबर के आगे लिखा जाता. है आईसी इंडिया कमीशन। शॉर्ट सर्विस कमीशन. के नंबर के आगे लिखा जाता है एसएस यानी. शॉर्ट सर्विस। लड़कियों को लिया गया 5 साल. के लिए।. टेक्निकली शॉर्ट सर्विस लेकिन हमें नंबर. क्या दिया गया जो ना आईसी था ना एसएस था. यह नंबर था डब्ल्यू एस ई एस. दैट इज वुमेन.
स्पेशल एंट्री स्कीम. सबसे पहला डिस्क्रिमिनेशन वुमेन आदि के. आगे क्या तो आप मेन नहीं लगाते. तो मेरे नंबर के आगे आपने वीमेन क्यों लगा. दिया? हम्म।. आपने मुझे स्पेशल क्यों बोला? क्या मैं. नॉर्मल ऑफिसर नहीं थी? तो वीमेन स्पेशल एंट्री क्यों बोला? और स्कीम यानी चली चली नहीं तो डब्बा गुल।.
दैट इज हाउ टेंपरेरी इज द वर्ल्ड स्कीम।. ट्रू। लेकिन ये एक हिस्ट्री है वुमेन. ऑफिसर्स की जो हमारे नंबर को प्रीफिक्स. किया गया। डब्ल्यू एस ई एस. लेकिन लड़कियां भी ना कफन बांध के आई थी. सिर पे बॉस एक मौका तो दो दरवाजे पे पैर. अड़ाने का एक बार तो एंट्री मिले बस उसके. बाद हमारी परफॉर्मेंस बोलेगी.
शुरुआती दौर में डब्ल्यूएसईएस. कारगिल ने एक बहुत बड़ा रोल प्ले किया. जिससे लोगों को यह समझ में आया कि. लड़कियां अलग-अलग तरीके से कैसे-कैसे कैसे. डिप्लॉय की जा सकती है। एंड दे आर अ बेट. वर्थ टेकिंग। यह वाकई में एक बहुत बढ़िया. हमारा एसेट है।. उसके बाद दौर आया एसएस का जब लड़कियों को. शॉर्ट सर्विस कमीशन नंबर मिलने लगा।.
स्कीम से हट गए।. स्कीम से हट गए। पहले सिर्फ 5 साल। 5 साल. पूरा करिए तब और 5 साल। अच्छा वो भी पूरा. करेंगे तब और 4 साल। लेकिन फिर आया जब. लड़कियों को बोला गया आप शुरू में ही. आएंगे 10 साल के लिए. शॉर्ट सर्विस. लेकिन लड़कियों ने बोला बॉस इतने से भी. नहीं चलेगा वी आर वर्थ मोर. अब क्या. नाउ इट इज परमानेंट कमीशन तो शॉर्ट सर्विस.
में जो लड़कियां आई लड़कों के साथ सेम. पैराटर्स में जो शॉर्ट सर्विस कमीशन में. भी जो लड़के आते हैं उनके भी कुछ. पैरामीटर्स होते हैं जिससे वो वो लेटर इन. लाइफ परमानेंट कमीशन हो जाते हैं।. लड़कियों ने बोला ऑन द सेम मेरिट आप हमको. भी जज करिए। बहुत कोर्ट केसेस हुए, बहुत. उसके ऊपर दलीलें हुई। फाइनली सुप्रीम. कोर्ट सेड गर्ल्स शुड बी एलिजिबल फॉर. परमानेंट कमीशन। अगर वो लड़कों के तरीके. से सेम पैरामीटर्स पर खरी उतरती हैं।.
गर्ल्स स्टार्टेड गेटिंग परमानेंट कमीशन।. आई सी। लड़कियों ने बोला इतने से भी नहीं. चलेगा. हमें और चाहिए वी आर वर्थ मोर देन व्हाट. हैपेंड दे सेड जब लड़के सीनियर नौकरी में. सीनियर होते हैं. और दे आर रेडी एंड एलिजिबल एंड क्वालिफाइड. इनफ कि वो अपनी यूनिट्स को कमांड कर सके.
तो हम भी अपनी यूनिट्स को कमांड करेंगे. टोटल शिफ्ट जहां कहा गया था कि हमारे जवान. गांव से आते हैं। यह लेडीज की कमांड को. बर्दाश्त नहीं कर सकते। कहा सॉरी बॉस. सुप्रीम कोर्ट के पास फिर दलील लगी। एंड. सुप्रीम कोर्ट सेड यस। अगर लड़कियां सेम. पैरामीटर्स पे खरी उतरती हैं।. तो दे शुड बी गिवन कमांड ऑफ देयर. रेजिमेंट। नो जेंडर हियर।.
लड़के ने बोला इतने से भी नहीं चलेगा।. शॉर्ट सर्विस के बाद परमानेंट कमीशन मिलने. की बजाय हमको शुरू से परमानेंट कमीशन. चाहिए। एंड नेशनल डिफेंस एकेडमी ओपन. स्टेट्स नेशनल डिफेंस एकेडमी पुणे जिसकी. बात हम लोग थोड़ी देर पहले कर रहे थे। अब. कोई एक साल की ट्रेनिंग में नहीं आएंगे।. तीन साल की ट्रेनिंग एनडीए में है और उसके. बाद एक साल की ट्रेनिंग अपनेप सर्विसेस.
में एयरफोर्स वाले अपनी आर्मी वाले अपनी. नेवी वाले अपनी एक-ए साल की स्पेशल. ट्रेनिंग जो अपने सर्विस के हिसाब से होती. है नाउ वी विल कम एस इंडिया कमीशन. तो क्या हम ये एक्सपेक्ट कर सकते हैं कि. क्या अगले कुछ सालों में इंडियन आर्मी के. चीफ कोई महिला भी हो सकती है. बिल्कुल व्हाट इज द डाउट. क्योंकि वो कदम एक ऐतिहासिक कदम होगा. व्हाट इज द डाउट इनफ इनफैक्ट जनरल नरवा ने. जो हमारे चीफ थे फॉर्मर चीफ ऑफ आर्मी. स्टाफ उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी की.
पासिंग आउट परेड को एड्रेस करते हुए यही. कहा था. कि हो सकता है कि कुछ सालों में इस पोजीशन. पे एक लेडी ऑफिसर हो. और मैं शुभाकर जी यह मेरी. प्रार्थना है भगवान से. कि मुझे बस उतनी इतनी उम्र देना. हां ये देख ले. कि मैं यह देखूं कि सियाचिन ग्लेशियर की. एक पूरी पोस्ट जिसको कमांड भी एक लेडी कर.
रही है और उसकी ट्रूप्स भी लेडी है और जो. वो रोप की हम बात कर रहे थे वो भी पूरी. लेडी ऑफिसर और उसकी वुमेन सिपाहियों की. है। भगवान मुझे उतनी उम्र देना कि मैं. देखूं कि. राफेल एक दो नहीं एक पूरा स्क्वाड्रन. राफेल का वुमेन फाइटर पायलट से उड़ा रही. हो। भगवान उतनी उम्र देना कि इंडिया की. न्यूक्लियर सबमरीन को एक वुमेन नेवल ऑफिसर.
के हाथों कमांड करते हुए देख सको।. राजस्थान के डेजर्ट में धड़धड़ाते हुए जब वो. टैंक चले उसे कमांड भी एक लेडी ऑफिसर कर. रही हो. और उन टैंक्स में सिपाहियों के तौर पर भी. लड़कियां बैठी हो. जब वो ब्रह्मोस और वो पिनाका और वो S400. जब लड़कियां गार्ड गाइड करें उन्हें जो. दुश्मन की हाड़ खपा दे बस उतना देना भगवान. उमर बस उतना जिंदा रखना कि यह देख सको.
क्योंकि एक पुरानी पिक्चर का गाना है कि. हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के इस. देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के. ये मेरी प्रार्थना है भगवान से कि बस उतनी. उम्र देना. आपने फिल्मों का जिक्र किया एक सवाल मेरे. मन में आ गया हमने बॉर्डर देखी अभी बॉर्डर. टू आई है।. हां जी हां जी. अब उसमें दिखाते हैं सनी देओल साहब गए और. दुश्मन को मार दिया.
अगर सनी देओल को सामान ना मिले जो आप. लॉजिस्टिक वाले. क्या सनी देओल जीत सकते हैं? नहीं हम ये क्यों मान रहे हैं कि सनी देओल. जो रोल कर रहे हैं उसमें लॉजिस्टिक काम. नहीं कर रही थी।. नहीं नहीं मैं लॉजिस्टिक कीेंस की उससे. पूछो कि वो जो सामान लॉजिस्टिक पकड़ाती. है।. बिल्कुल. क्योंकि वो वो फिल्म नहीं दिखाया जाता।. वो नहीं दिखाया जाता।. सनी देओल दिखते हैं।. हम लोग क्योंकि ये ग्लैमरस नहीं है. शुभांकर जी। लेकिन अगर आप अगर अगर आप फौज. को ऐसे समझे. कि एक फौजी को.
लड़ाई लड़ने के लिए. क्या चीज प्रिपेयर कर रही है? तो दो चीजें. मेरे दिमाग में आती है।. एक तो उसके पेट में रोटी होनी चाहिए और एक. उसके बंदूक में गोली होनी चाहिए।. और यह दोनों ही काम लॉजिस्टिक्स करती है।. इसके बिना. सिपाही लड़ेगा लेकिन वह बहुत अनफेयर फाइट.
होगी। तो अगर हमें इफेक्टिव बैटल फाइट. करनी है तो उसके लिए लॉजिस्टिक्स इज द. बैकबोन।. ओके। आपके बाल मैं देख रहा हूं। ये बाल. कटे हुए हैं। ये ट्रेनिंग के टाइम काटे गए. थे या ये आपकी बाय चॉइस स्टाइल है? मेरे को तो कोई टाइम ही नहीं याद आता है. शुभांकर जी जब मेरे बाल लंबे रहे हो। रादर. जब मेरी शादी हुई थी तब भी मेरे इतने ही. बाल थे और इसमें भी मैंने गजरा और जुड़े.
लगा लिए थे। सो आई डोंट नो वो शायद. ये फौजी बैकग्राउंड होने का असर है।. नहीं आई थिंक ये एक एटीट्यूड है. हम. और मेरा एक सेंस ऑफ कंफर्ट है। मैं बहुत. आइडेंटिफाई करती हूं अपने आपको इस नो. नॉनसेंस हेयर स्टाइल के साथ क्योंकि इसमें. मैं कई बार बाल बनाती भी नहीं हूं। सिर्फ. मेरे अ. आसान होता है। लाइफ. बहुत बहुत लाइफ इजी होती है। लेकिन हां जो. आपने बोला एक चीज लोगों के बहुत दिमाग में. आती है। मुझे कई बच्चे बात करते हैं मेरे. से और कहते हैं कि मैम मेरी मदर बोल रही.
हैं कि क्या फौज में तुम आओगी तो क्या. तुम्हारे लंबे-लंबे बाल कट जाएंगे? तो अगर ऐसा होगा तो तुम मत जाना फौज में।. तो मैं उनको कहती हूं बस फिर तो बहुत ही. अच्छा है। अगर तुम्हें तुम्हारे बालों से. इतना मोह है तो तुम बिल्कुल मत आओ फौज. में।. फिर तुम क्या ही परिवार क्या ही त्याग. अगर तुम इतना नहीं त्याग सकते लेकिन हां. ये ट्रेनिंग के दौरान बहुत कन्वीनिएंट. होता है कि बाल छोटे हो क्योंकि ट्रेनिंग. इज अ स्वेटी डर्टी ग्राइमी बिजनेस। आप.
रोलिंग भी कर रहे हैं। कई बार आप कीचड़. में भी हैं। आप पसीने में हैं। आप. आप कैसे अपने बालों को मैनेज करेंगे? अच्छा फौज में ऐसा नहीं है कि आपने चोटी. बना ली या बाल खुले रख दिए। देयर इज अ वे. इन व्हिच यू हैव टू टाई योर हेयर जो बाल. बनाने का भी तरीका है। जो जिनके रिलजन. कहता है कि उन्हें बाल नहीं काटने। जैसे. सिख.
सिख कैडेट्स हैं चाहे वो लड़की है चाहे वो. लड़का है उन्हें बाल काटने के लिए कोई. नहीं बोलता। लेकिन उन्हें अपने बालों को. बिल्कुल वेल ग्रूम्ड रखना है। लेकिन उसके. अलावा जो बाकी लोग हैं अ दे. प्योरली बिकॉज़ ऑफ़ कन्वीनियंस लेकिन मेरे. बाल तो छोटे से ही ऐसे थे और कांस्टेंट ही. है।. महिलाओं की कुछ जरूरतें होती हैं। जैसे. वाशरूम का हो गया या कुछ बेसिक नीड्स होती. हैं। तो फौज में ये मेल फीमेल दोनों के. लिए कॉमन होता है या महिलाओं को यहां पर. थोड़ा स्पेशल ट्रीटमेंट दिया जाता है।.
किस चीज के लिए? जैसे अ कॉमन वाशरूम ना हो, सेपरेट वाशरूम. सब लोग के हो।. मतलब आप क्या कहना चाह रहे हैं कि अगर. आदमी को अलग बाथरूम मिल रहा है तो उसको. ट्रीटमेंट अलग मिल रहा है।. नहीं मैं सिर्फ ये कहना चाह रहा हूं कि. क्या कॉमन वाशरूम होते? मेरा जानने का. सिर्फ यह क्वेश्चन है कि एक फौजी है। क्या. वो सिर्फ फौजी की तरह ट्रीटमेंट है कि यह. फौजियों का वाशरूम है या पुरुष महिला के. लिए वो अलग-अलग व्यवस्था की गई जैसे आम. घरों में की जाती है। फौज में कैसे मतलब. बुनियादी चीजों का ध्यान रखा जाता है या.
जैसे पीरियड्स आए हो उसमें क्या स्पेशल. कुछ ध्यान रखने की चीजें होती हैं? जो महिलाओं की बुनियादी चीजें होती है. उनको लेकर फौज में क्या कुछ है अलग से या. सेम नियम कानून मर्दों. मैं आपको दो तरीके से इसका जवाब दूंगी। एक. तो मैं आपको आपने वाशरूम्स का मेरे से. पूछा हम सो आई विल गिव यू माय ओन एग्जांपल. कि आपके पास अगर अलग बाथरूम नहीं भी है तो. भी उस शुरुआती समय में जब यह थॉट ही नहीं. था कि लड़कियों ने भी यूनिट में आना है तो. फिर कैसे किया गया?
सो देयर इज अ कॉमन वाशरूम। देयर इज अ. वाशरूम। ठीक है? उसमें एक डब्ल्यूसी भी है. और एक यूरिनल भी है।. है ना? मैं बाथरूम में जाती थी। जब मैं पहले गई. तो मैंने देखा उसकी चिटकनी जो है वह थोड़ा. हिल रही है। मैंने कारपेंटर को बुलाया।. मैंने कहा चिटकनी सही करो। उन्होंने. चिटकनी सही करी प्रॉब्लम हल हो गई। बाथरूम. के अंदर जाओ बाथरूम बंद करो और डब्ल्यूसी. यूज़ करो बाहर निकलो। व्हाट इज द. प्रॉब्लम?
सो. अलग बाथरूम की क्या जरूरत है? अगर एक ही. बाथरूम है और उसमें जेंट्स के लिए यूरिनल. भी है और एक डब्ल्यूसी भी है तो. उसमें मुझे क्या प्रॉब्लम है? चिटकनी होनी. चाहिए। वो मैंने लगवा दी और यूज किया। तो. ये इंफ्रास्ट्रक्चर कोई इतना. हववा नहीं है जो हम लोग छोटी चीज को इतना. बड़ा एक बातचीत करके एक मुद्दा बना देते.
हैं कि लोगों के मन में फौज में आने से डर. लगने लगता है।. हां मतलब एक कॉमन परसेप्शन ये आता होगा. इसलिए. आता होगा। बिल्कुल आता होगा। लेकिन यह मैं. उस समय की बता रही हूं जब अच्छा अब मेरी. यूनिट के अंदर मैं एक बार डिपो में. पोस्टेड थी तो वहां लेडीज का भी टॉयलेट. था। ठीक है? उस पे लेडीज लिखा था। और. हमारे डिपो की जो क्लर्क्स थी, लेडी. क्लर्क थी वो उसमें जाती थी।. तो मैंने वहां बोल दिया था मैं लेडीज वाले.
टॉयलेट में नहीं जाऊंगी। मैं उसमें जाऊंगी. जिसके ऊपर ऑफिसर्स लिखा है।. आई एम एन ऑफिसर। आई विल गो टू द वाशरूम. जहां पर ऑफिसर्स लिखा है. और मैं यूज़ करूंगी।. आपकी तो पहले लड़ाई उसी बात की थी। डब्ल्यू. मतलब मैं आपको ये बता रही हूं कि आपको. मेंटल बैरियर ब्रेक करना पड़ेगा। हम. और धीरे-धीरे करके अगर यूनिट में बहुत.
सारी लेडी ऑफिसर्स हो गई हैं।. हम. अगर हम आज की बात लें बहुत सारी तो होती. नहीं है क्योंकि लिमिटेड ही है लेडी. ऑफिसर्स और अगर कहीं अ इस चीज की. गुंजाइश है तो देयर कैन बी अनदर वन। लेकिन. अगर नहीं भी है तो मुझे नहीं लगता वाशरूम. इज़ सच अ बिग प्रॉब्लम। क्योंकि हमने अगर. उस समय इसका एक सिंपल सा सॉल्यूशन निकाल. लिया तो आज तो बहुत बदल चुका है। लेकिन. आपका दूसरा सवाल जो था पीरियड्स का.
आपने बोला पीरियड्स के समय उनको कुछ अलग. होता है कि नहीं? लेट मी टेल यू दैट इन अ. एकेडमी. जैसे ही आप फौज. ट्रेनिंग के लिए पहुंचते हैं।. इट इज मतलब पहले आपको यूं तोड़ा जाता है।. दे विल ब्रेक यू डाउन। ब्रेक यू इन मेंटली. मेंटली दे विल ब्रेक यू। फिजिकली दे विल. ब्रेक यू एंड देन दे विल जो आपने सीखा है.
वो सब तोड़ देंगे। तभी तो सारे फौजी एक से. नजर आते हैं। एक सी बात करते हैं। एक जैसे. खड़े होते हैं, एक जैसे कपड़े पहनते हैं।. वो हमको एक जैसी ट्रेनिंग दी जाती है।. बड़ी-बड़ी बातें छोड़ दीजिए। सॉक्स को. कैसे फोल्ड करना है पीटी के टाइम पर और. जूते की लेस कैसे बांधनी है वहां तक. सिखाया जाता है। तो आप जो भी सीख के आ रहे. हैं. वैसे ही रखना पड़ेगा।. वैसे ही रखना है नहीं तो पनिशमेंट है।. नाइस। वहां से ट्रेनिंग शुरू होती है।.
तो यह जो पूरी फौजी ट्रेनिंग है जिसमें आप. लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़. रहे हैं। कंधे से कंधा मिलाकर ट्रेनिंग ले. रहे हैं।. वहां. यह बहुत अनफेयर है कई बार. कि आप लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग कर रहे हैं, पीटी कर रहे हैं, कैंप्स में हैं।. और आपको पीरियड्स हो रहे हैं।.
सामने वाला सोचेगा शायद आप कमजोर हैं जो. आप हम उस हिसाब से परफॉर्मेंस नहीं कर पा. रहे।. लेकिन मेरे शरीर के अंदर क्या चल रहा है. वो तुम्हें कैसे पता? डू यू नो दैट देयर आर कंडीशंस लाइक. एमनोरिया एंड डिस्मेनोरिया।. एक कंडीशन में आपके पीरियड्स रुकते ही. नहीं है। नॉनस्टॉप. रात दिन हफ्तों आप ब्लीड कर रहे हैं।.
ट्रेनिंग आपके लिए नहीं रुकेगी। ट्रेनिंग. विल कंटिन्यू।. कोई शॉर्टकट नहीं है। कोई रेस्ट नहीं है।. यू हैव टू पार्ट ऑफ इट।. यू हैव टू बी नहीं तो आपकी ट्रेनिंग कैसे. होगी? ट्रेनिंग के दिन लिमिटेड है। आपको. एक समय रेस्ट मिल सकता है। एक पीरियड की. छुट्टी मिल सकती है। आपको पूरे दिन की तो. छुट्टी कोई नहीं देगा। और दिन भर दिन. और एक दूसरी कंडीशन है. एमिनोरिया डिस्मनोरिया। एक में है जिसमें. पीरियड्स रुक नहीं रहे। एक में है आपकी.
बॉडी शट डाउन हो गई। नो पीरियड्स।. दैट इज आल्सो अ बॉडी गोइंग इंटू अ. क्राइसिस मोड। क्योंकि आपको इतना. एक्सट्रीम फिजिकल फिटनेस में आप. एक्सपोज्ड हैं। स्ट्रेस इंड्यूस्ड. एनवायरमेंट में आप एक्सपोज्ड हैं कि आपकी. बॉडी सबसे पहले इस रूटीन को ब्रेक कर देती. है। ऑफकोर्स उसके बाद जब आप ट्रेनिंग के.
बाद आप अपनी यूनिट में जाते हैं या जब. आपका रूटीन उतना अ डिमांडिंग नहीं होता तो. आपकी बॉडी वापस से अपने क्लॉक को पकड़. लेती है। लेकिन. अह अब आप इमेजिन करिए इट हैपेंड विद मी।. सो आई आई कैन शेयर विद यू. लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग हो रही थी।. अपना डांगरी पहनी हुई है। बैटल फटीग्स. पिट्ठू लगा हुआ है।. टोपी पहनी है। बाहरी जूते हैं। आगे पाउचेस.
हैं जिसमें एमिनेशन है। पीछे अ मिलिट्री. इशू वाटर बॉटल लगी है। हथियार है। रेडियो. सेट भी था मेरे पास। एंड आई एम रनिंग।. और. पूरा एकेडमी दौड़ रही है। बॉयज भी हैं, गर्ल्स भी हैं। एंड आई वास अ वेरी गुड. रनर। मैं अपने आगे किसी को नहीं निकलने दे. रही हूं।. एंड स्लोली ग्रेजुअली अ रेड पैच स्टार्ट्स. टू अपीयर ऑन द ट्राउचर।.
बिकॉज़ आई हैव पीरियड्स।. और मेरा जो सैनेटरी नैपकिन है वो साइड हो. जाता है। इट लीक्स।. पीछे से जो दूसरा क्रेडिट आ रहा है. जस्ट स्मोकिंग एट यू कि यह तुम्हारा वीक. पॉइंट है। एंड यू से मेरे को तो इसकी आदत. है बॉस। ये हर महीने का काम है। आई एम नॉट. स्केर्ड ऑफ पीरियड्स।.
रन। और मुझे हराके दिखाओ। आई विल रन एंड. कंप्लीट दिस होल लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग. डिस्पाइट आई हैव पीरियड्स और नॉट। यह है. जुनून लड़कियों का। एंड सो आई ऑलवेज से वन. सेंटेंस।. नो यूट्रस, नो ओपिनियन।. यू गो। ग्रो अ यूट्रस। एंड देन टेल अ गर्ल. कि वो क्या कर सकती है, क्या नहीं कर. सकती। तो बॉस, मेरे को मत बताओ।.
नो यूट्रस, नो ओपिनियन। एक लड़की को पता. है वह क्या कर सकती है। लड़का नहीं बताएगा. उसको कि वो क्या कर सकती है या क्या उसकी. कैपेबिलिटी है। सब कुछ कर सकती है। दैट इज. व्हाट आई मीन बाय द बेस्ट वर्जन एंड द. बीस्ट वर्जन आल्सो। घबराना नहीं है किसी. से।. वो महिलाएं जो आर्मी में जा रही है वो. अपने बीस्ट वर्जन में है।. अरे वो वो किस एनर्जी पे परफॉर्म कर रही. हैं? आपको कंधे से कंधा मिलाना है। लेकिन आप.
देख रहे हो कि मेरा शरीर ही मुझे कई बार. पीछे खींचता है।. यह सवाल मैं इसलिए पूछा क्योंकि हम जिस. फील्ड में काम करते हैं मीडिया इंडस्ट्री. ये भी बहुत. इंडस्ट्री डिबंटिंग इंडस्ट्री आपको दिन भर. काम करना होता है।. बट यहां भी बड़े संस्थानों में या कई बार. महिलाएं बोल के छुट्टियां लेती हैं और. अक्सर लेती हैं कि पीरियड्स हमारे और पीपल. आर कंफर्टेबल कि आप जा सकते हैं घर अपना. ख्याल रखिए या थोड़ा सा एक्स्ट्रा. प्रिविलेज आप हालचाल पूछते हैं आज काम कम. कर दो। ऐसा होता है इस इंडस्ट्री में। बट. आप ये कह रहे हो कि आपके फौज में इससे कोई. फर्क नहीं पड़ता।.
अगर आपको. आप पढ़ने नहीं दे रहे हो।. आपको अगर. सी मैं मेडिकल कॉम्प्लिकेशन की बात नहीं. कर रही हूं। मैं एक नॉर्मल पीरियड की बात।. आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट पीसीओएस, पीसीओडी. और आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट दैट।. आई एम टॉकिंग अबाउट नॉर्मल में साइकिल।. एग्जैक्टली उसी तरीके से बात कर रही हूं।. नॉर्मल प्रेगनेंसी इन कारगिल। अगर मुझे लो. प्लेसेंटा होता या मेरी कोई और मेडिकल. कॉम्प्लिकेशन होती तो शायद मेरा रिस्पांस.
दूसरा होता। लेकिन अगर नॉर्मल है तो दिस. इज द मोस्ट रूटीन थिंग। दिस इज द मोस्ट. रूटीन थिंग। अगर आपको वाकई में कोई इस. तरीके से मेडिकल अ रेस्ट चाहिए या आप. ऑफकोर्स देयर विल बी. एन इजी टाइम गिवन टू यू।. ट्रेनिंग के टाइम पर हो सकता है आपको एक. पीरियड या दो पीरियड का रेस्ट मिल जाए।. लेकिन अगर आप बोले हर महीने मेरे को चार.
से पांच दिन तो मैं ट्रेनिंग ही नहीं. करूंगी। तो सॉरी बॉस दिस डस नॉट हैपन।. और एक चीज एक चीज आप देखिए लड़कियों का. जुनून उसके बाद दैट इज व्हाट दैट इज व्हाट. अ वूमन इज शक्ति। हम ऐसे ही नहीं बुलाते. शक्ति। उसे किसी को बताने की जरूरत नहीं. है। वो इंटरनली लड़ रही है। मैं आपको एक. एग्जांपल देती हूं. और मैं चाहूंगी कि यह आपका जो यह एपिसोड. है इससे इस चीज के बारे में अवेयरनेस हो.
और अगर आपको लगता है कि मैं इस प्लेटफार्म. पे इस टॉपिक के साथ दोबारा बात कर सकती. हूं तो आई विल बी वेरी ग्लैड। एग्जांपल यह. है कि एकडमी में स्विमिंग इज अ मैंडेटरी. टेस्ट। यानी एकेडमी में बहुत सारे टेस्ट. और बहुत सारी चीजें सिखाई जाती हैं। उसमें. कुछ चीजें मैंडेटरी होती हैं कि अगर आपने. वह टेस्ट पास नहीं किया तो आपको पूरी. ट्रेनिंग रिपीट करनी पड़ेगी।. उसमें से यह टेस्ट होता है स्विमिंग का।.
अब हमारे टाइम पे सिक्स मंथ्स की ट्रेनिंग. थी गर्ल्स की।. अगर आप. तीन हफ्ते. काम कर रहे हैं और एक हफ्ता आप स्विमिंग. नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि आपको पीरियड्स. हैं. और आपके स्विमिंग पीरियड्स मिस होते जा. रहे हैं। कोई जल्दी स्विमिंग सीख लेता है, कोई लेट से स्विमिंग सीखता है। और मुझे. याद है एकेडमी में सब लड़कियां ऐसे बाहर.
बैठी रहती थी जिनको पीरियड्स हो रहे हैं।. आप उनकी सोचिए जिनके पीरियड्स ही नहीं रुक. रहे।. वो कैसे स्विमिंग करती हैं उस समय।. क्योंकि हमारे टाइम पे उतनी उस चीज के. बारे में बात नहीं हो रही थी।. हां।. सहज नहीं थे लोग।. सहज नहीं थे। हमें यह भी नहीं पता था कि. एमिनोरिया क्या होता है या डिस्मनोरिया. क्या होता है। हमें किसी ने उस चीज के लिए. तैयार ही नहीं किया।. और आज मुझे ऐसा लगता है मैं इन फैक्ट इस. टॉपिक पे भी बहुत काम करती हूं। वुमेन.
मिलिट्री ट्रेनिंग एंड पीरियड्स। और इसमें. सिर्फ मिलिट्री ट्रेनिंग ही नहीं है।. इसमें पुलिस की भी लेडीज हैं। इसमें. होमगार्ड्स की भी लेडीज हैं। इसमें. सीआरपीएफ की भी लेडीज हैं। इसमें वो लेडी. भी है जो ट्रैफिक के ऊपर पूरे दिन खड़ी है. उस सिग्नल के ऊपर।. जिसको हो सकता है पता नहीं कितनी हैवी. ब्लीडिंग हो रही हो। लेकिन वो वहां खड़ी. है। यानी हर वो लेडी. जिसकी ड्रेस में टक इन शर्ट है। शी इज़.
ऑलवेज अनकंफर्टेबल व्हेन शी हैज़ पीरियड्स।. ऑलवेज. और अगर कोई दूसरी मिलेगी तो हमेशा बोलेगी. जरा पीछे देखना इसमें स्पॉटिंग तो नहीं हो. गई।. क्यों हमारे टाइम पे यह बातचीत नहीं होती. थी? और आज जब हमारे पास में कप्स हैं तो. हम क्यों. कई प्लेटफॉर्म्स के ऊपर इसके बारे में बात.
नहीं करते जिससे वो लड़कियां जो एथलीट्स. हैं वो लड़कियां जो कत्थक भरनाट्यम. डांसर्स हैं। वो लेडी डॉक्टर्स जो सारे. टाइम पैर पर खड़ी हैं और मेडिकल कॉलेजेस. में ट्रेनिंग ले रही है वो लड़कियां।. समबडी हैज़ टू थिंक अबाउट दैट। तो मेंुअल. कप्स तो आ गए लेकिन हम उसके बारे में बात. ही नहीं करते। तो मुझे ऐसा लगता है कि आज. अगर मेरी उम्र में आकर 53 की हूं मैं। अगर. आज आके मैं यह बात.
बिंदास नहीं बोलूंगी. बेबाक. बेबाक तरीके से नहीं बोलूंगी तो हम तो. शर्म शर्म शर्म में ही रह जाएंगे।. ट्रू।. सो. ए नो यूट्रस, नो ओपिनियन। क्योंकि तुम्हें. नहीं पता है कि वो जो सामने लड़की खड़ी है. वो किस चीज से जूझ रही है। और दूसरा वो जो. जूझ रही है उसकी जिंदगी को आसान करने के. लिए यह सारे टैबूस अ हटाओ। कॉन्वर्सेशन को.
सरल करो और जीवन आगे बढ़ाओ। क्योंकि सिर्फ. शुरुआती दौर में पीरियड से ही प्रॉब्लम. नहीं होती है। इस साइकिल के एंड में जब. मेनोपॉज आता है, आई एम इन द स्टेज ऑफ़ मेनोपॉज। व्हाट इज द. प्रॉब्लम फेस्ड बाय लेडीज़? नाउ आई एम. अंडरस्टैंडिंग. हैविएस्ट ऑफ़ द हैवी ब्लीडिंग। टेंपरेचर. कहां जा रहे हैं लेफ्ट, राइट? हमें पता. नहीं। एंड दिस इज़ द एज व्हेन वी हैव द. सीईओस, द डायरेक्टर्स ऑफ़ द कंपनीज़, दे आर.
बैटलिंग अनदर थिंग इन देयर लाइफ। नोबडी इज. स्पीकिंग अबाउट दैट। व्हाई? सहज करो. कन्वर्सेशन को। सहज करो। बात करो इसके. बारे में।. बात करो।. एक सवाल मैं और पूछता हूं इसी पे क्योंकि. महिलाओं का पूरा सेगमेंट रखा था मैंने।. आपने शुरू में कहा ना कि बहुत सारे लोग. हैं जो गांव से जाते हैं।. आप उनको ट्रेन करते हो।. हम. अब ये बात सच है कि हमारा जो सैल्यूट होता. है वो वर्दी को देखकर होता है।. बिल्कुल।. लेकिन है तो अंदर इंसान ही। हम. पीढ़ियों से परंपरा आ रही है।.
हम. फौज मर्दों की दुनिया रही है। आप ऑफिसर. बने।. कभी किसी पुरुष ऑफिसर को थोड़ी असहजता हुई. सलू्यूट मारने में हाथ पहुंचा। लेकिन आप. ये महसूस कर पाए कि ये महिला ऑफिसर देखकर. वो तेज नहीं था जो शायद एक पुरुष ऑफिसर को. देखकर चौड़ा हो गया था। किया लेकिन वर्दी. का सम्मान होकर हो गया। महिला को देखकर. थोड़ी सा थी।. मैं आपको इसका बड़ा एक इंटरेस्टिंग वाक्या. सुनाऊंगी आपको। ये उस समय की बात है जब. मैं अपनी फर्स्ट यूनिट में पहुंची। ठीक.
है? 1994 सितंबर की ये बात मैं आपको बता. रही हूं। अगस्त में पासिंग आउट हुई और फिर. उसके बाद बीच में थोड़ी छुट्टी थी और फिर. यूनिट पहुंचे। तो पहले उस टाइम पर किसी. लेडी ऑफिसर को अकेली पोस्टिंग भी नहीं. देते थे। दो-दो लड़कियां साथ भेजते थे कि. यूनिट में ये अकेली होंगी तो किससे बात. करेंगी? तो एक सपोर्ट सिस्टम होना चाहिए।. तो मैं अपने यूनिट से यूं चलकर आ रही हूं. और सामने इनफेंट्री के किसी यूनिट के दो.
सिख जवान थे टू सरदार और वैसे ही वो लंबे. पगड़ी लग के और लंबे. और मैं जो सामने से चल के आ रही हूं तो. उन्होंने सलूट नहीं किया। क्यों? क्योंकि उन्हें पता ही नहीं था कि. लड़कियां फौज में आने लगी हैं। वो जिसको. हिंदी में वर्ड है ना अपलक यानी बिना पलक.
झपकाए वो यूं ही मुझे देखते रहे कि क्या. यह कोई फैंसी ड्रेस है? ये छोटी सी लड़की चलती हुई आ रही है। इसने. वर्दी पहनी है। पर वर्दी क्यों पहनी है. लड़की ने? ये वो टाइम है जब. शुरुआत हुई थी। फौज में लोगों को पूरा पता. भी नहीं था और इन्फेंट्री जहां आज तक. लड़कियां नहीं है। तो अम. मैं उनके सामने खड़ी हुई.
और मैंने. यूं अपना स्टार दिखाया और मैंने कहा जय. हिंद. और एकदम से यूं लगा जैसे कि उनको किसी ने. ऐसे जोड़ हां ओ जय मैडम जी जय जय हिंद जय. हिंद जय हिंद सो. एक और बड़ा इंटरेस्टिंग किस्सा है कि. फौज में. ज्यादा फेमिनिज्म के पीछे हम भागते नहीं. है। हम इस चीज के ऊपर भागते हैं कि हमें.
बराबरी चाहिए।. दैट इज व्हाट रियल फेमिनिज्म इज।. नो फेमिनिज्म किधर है? आप मुझे मैडम मत. बुलाओ। आप मुझे सांप बुलाओ।. जब आपका जवान क्योंकि फौज में एड्रेस इज. वेरी क्लियर। सांप वो आपको सांप बुला रहा. है। लेकिन वह अपने माइंड में जब तक आपको. साहब नहीं रख लेगा ना एंड यू हैव टू एक.
बड़ा एक हम सेइंग कहते हैं फौज में दैट. रिस्पेक्ट इज नॉट डिमांडेड. इट इज अर्न. और ये फौज ही नहीं मेरे ख्याल से हर जगह. यही है।. तो फौज में वो आपको. परखेगा भी. हम. आप ही नहीं ट्रेन कर रहे हो उस जवान को या. आप ही नहीं उसको परख रहे हो। वो आपको. बराबर परख रहा है कि भाई जिसके पीछे कल को. यह हुकुम देगी तो मेरे को जान भी देनी. पड़ेगी। तो यह उस लायक है भी कि नहीं? और.
यह सिर्फ वुमेन ऑफिसर के साथ नहीं है। जो. यंग ऑफिसर आता है जवान उसको अपने तरीके से. परखता जरूर है।. आपके कंधों पर स्टार लगा लेने से आपको. रिस्पेक्ट मिल जाए। यह जरूरी नहीं।. लेकिन फिर वह क्या होता होगा कि 212 साल. का वो विक्रम बत्रा कहता है फॉलो मी और. जवान जान दे देता है।. तो यह है जब आपका जवान आपको परख लेता है।.
सो इट हैपन विद मी इन कारगिल इन ले। यह. कारगिल की लड़ाई की बात है।. जब मेरी टीम ने मेरे को कहा. साहब आप किसी हिसाब से कम नहीं हो।. साहब आप किसी हिसाब से कम नहीं हो। आई. फेल्ट आई हैव अराइव्ड। मैं आपको बता नहीं. सकती हूं। उस दिन मेरे को इतना.
आई हैड दैट सेंस ऑफ सेटिस्फेक्शन कि अब ये. वर्दी और ये तारे वाकई में चमके हैं।. आई एम एक्सेप्टेड ऑन इक्वल मेरिट्स।. और. कारगिल के मेडल मिले मुझे। कारगिल की बैटल. रिपोर्ट लिखी गई। अ रादर आई एम आई थिंक वन. ऑफ द फर्स्ट लेडी ऑफिसर्स जिनकी बैटल. रिपोर्ट लिखी गई। तो लड़ाई के समय आपकी. परफॉर्मेंस के ऊपर आपके कमांडिंग ऑफिसर.
आपको रिपोर्ट देते हैं। तो मेरी बैटल. रिपोर्ट लिखी गई और मुझे लगता है वो मेरे. कई शायद कई और मेल काउंटर पार्ट से अच्छी. थी।. साहब आप किसी साहब से कम नहीं है।. बिल्कुल बट अब मैं थोड़ा. तो मेरे पास ये सीन नहीं हुआ कि किसी ने. मुझे रिस्पेक्ट करना सैल्यूट करना था और. नहीं किया और ये इंडियन आर्मी के एथॉर्स. में भी नहीं है।. डिसिप्लिन में भी नहीं है।. यू आर यू आर एन ऑफिसर।.
और यू आर अ जवान। हर एक की अपनी. अ हर एक की अपनी बाउंड्रीज है। हर एक की. अपनी मर्यादा है। और ऐसा तो मुझे नहीं. लगता कि कभी भी होता होगा कि जवान बोले. मैं सलूट। नो नो नो नो नो डिसिप्लिन इज आर. आवर बेडरॉक फाउंडेशन।. लेकिन वो रिस्पेक्ट आपको अर्न करनी पड़ेगी. ऑपरेशनली।. अब ये तो पुरुषों के साथ. प्रोफेशनली।. एक दो मैं हल्के-फुल्के सवाल भी हम रख.
लेते हैं हमेशा दर्शकों के लिए।. अच्छा। जैसे एक सवाल मेरे ज़हन में आया कि. जब लड़कियां जाती हैं फौज में हम. तो उनमें आपस में कंपटीशन होता है या. बहनचारा भी होता है? ओ भाई देखो एट द एंड ऑफ द डे दोनों चीजें. प्रोफेशनलली कंपटीशन भी होगा. और होना भी चाहिए।. होना भी चाहिए क्योंकि हम कोई. यहां पर. बेमन से काम नहीं कर रहे हैं कि भाई चलो.
ठीक है आज का दिन निकालो लंच करो चाय पियो. बस चार ईमेल करो उसके बाद घर चलो नो वी आर. ट्रेनिंग फॉर बैटल. वी आर. ट्रेंड टिल द टाइम टिल द टाइम. वी आर अह बैटल वर्दी। तो, कंपटीशन होना भी. चाहिए और होता भी होगा प्रोफेशनलली। और वह.
बहुत वेलकम किया जाना चाहिए कि हर आदमी. अपने को प्रूफ कर रहा है। और बहनचारा तो. ऐसा है कि. एक सेइंग है जिसको माया एंग्लू का सेंटेंस. है जो. कहा भी जाना चाहिए बार-बार और ऐसे नगाड़ों. के साथ बोले जाना चाहिए और वो है यस आई एम. अ फीमेल. यस आई एम अ फेमिनिस्ट बिकॉज़ आई विल बी. स्टूपिड नॉट टू स्टैंड विद माय ओन.
तू वो बिल्कुल फेमिनिस्ट है क्योंकि फीमेल. है और मैं बेवकूफ होंगी अगर मैं अपने. जेंडर के साथ नहीं खड़ी होंगी।. ये अल्फा मेल अल्फा फीमेल कभी क्लैशेस. होते हैं।. ऑफकोर्स आई एम अल्फा फीमेल। ऑफकोर्स आई एम. एन अल्फा फीमेल।. आई कैन सेंस दैट दैट्स आई एम आस्किंग. बिकॉज़ फौजियों में जो मर्द होते हैं उनमें. अल्फा मेल भी डोमिनेंस बहुत होता है।. बिल्कुल।. मैं बहुत सारे फौजियों से मिला हूं जिनके. अंदर वो कूट कूट के होता है।.
और आपके अंदर अल्फा फीमेल है।. आई एम अल्फा फीमेल? अल्फा मेल अल्फा फीमेल. कभी आपस में टकराए ऐसे ही विचारों में. वैसे नहीं कहीं क्यों नहीं वो फिर अल्फा. ही किस बात का अगर मैं अगर मैं यस वूमन बन. जाऊं मैं यस मैन नहीं बोलूंगी. कि यस मैन यस मैन नहीं अगर मैं यस यस. बोलूं हर चीज में. तो किस बात की. मेरी अपनी आईडियोलॉजी है. आप. अपने तर्क वितर्क आपको करने भी चाहिए.
फौज में हम तर्क वितर्क नहीं करते हैं. क्योंकि फौज में हमारा एक बहुत सेट सिस्टम. होता है। आपको जो हुकुम मिलता है आप उसके. ऊपर काम करते हैं। जब आपसे पूछा जाता है. आप बोलते हैं आवर्स इज नॉट टू आस्क व्हाई. आवर्स इज टू डू एंड डाई। क्योंकि अगर हर. आदमी अपना दिमाग लगाने लगेगा तो फिर मिशन. कभी सक्सेसफुल नहीं हो पाएगा। वी डू नॉट. बिलीव इन डेमोक्रेसी दैट वे। एंड दैट इज. व्हाई वी वी परफॉर्म क्योंकि हम एक दिमाग. से चलते हैं। लेकिन जब आप मेरे से पूछेंगे.
कोई सवाल मेरा ओपिनियन पूछेंगे तो मैं. अपना ओपिनियन दूंगी।. ये कहते हैं एक एक मैन में दो तलवारें. नहीं रहती है।. हम. लेकिन एक घर में दो लोग तो हैं।. बिल्कुल है।. दोनों फौज में है।. बिल्कुल है।. एक अल्फा मेल है।. हां।. एक अल्फा फीमेल है।. हां।. तो क्या फीमेल वाला थोड़ा ज्यादा था? इसलिए पतिदेव ने कहा तुम्हारा नाम मैं लगा. लेता हूं।. मैं आपको इसकी एक बहुत प्यारी चीज बताती. हूं। मैं आपको एक बहुत प्यारी चीज बताती. हूं।. अच्छा पतिदेव डरते हैं आपके पहले मुझे ये.
बता दो।. भाई फौजी दोनों हो तो वहां मैं उसको. नॉर्मल कर दे रहा हूं।. इसको कहा जाता है इसको कहा जाता है. पीसफुल को एक्जिस्टेंस।. इसी को इसी को डर कहते हैं। पीसफुल को. एक्जिस्टेंस।. की भाषा में इसी को डर कहते हैं।. नहीं मैं डर नहीं बोलूंगी इसको। उस आदमी. ने मुझे जीत लिया है। उस आदमी ने मुझे. जी. जीत लिया है। उसने मुझे और उसने मुझे मुझे.
वो कहते हैं ना कि मैंने तो खिलौना मांगा. था। उसने तो पूरा बाजार ही लाके दे दिया।. जब मेरा बड़ा बेटा हुआ उससे पहले जब मेरी. शादी हुई तो क्योंकि मेरे सारे. डॉक्यूमेंट्स में मेरा नाम याशिका हटवाल. था। तो मेरे लिए यह ज्यादा इजी था कि मैं. उसके आगे ही अपने हस्बैंड का सरनेम लगाऊं. त्यागी। तो मेरा नाम हो गया याशिका हटवाल. त्यागी। हमारे टाइम तक यह कांसेप्ट नहीं. था। वैसे.
जो आजकल हम इस कांसेप्ट को आजकल बहुत देख. रहे हैं। ये उस समय इतना कांसेप्ट नहीं. होता था। लेकिन आई डिसाइडेड दैट आई वांट. टू कीप बोथ द नेम्स।. फिर मेरा बेटा हुआ। तो हम लोग नाम के ऊपर. डिस्कशन कर रहे जैसे हर घर में होता है कि. बच्चे का क्या नाम रखा जाएगा, क्या नाम. रखा जाएगा? और फौज में एक कैजुअल्टी. पब्लिश होती है। यानी फौज के. डॉक्यूमेंटेशंस में बच्चे का नाम एंटर. किया जाता है। मान लीजिए कल को फौजी शहीद. हो गया तो उस उसका नेक्स्ट ऑफ किन कौन. होगा? इसलिए फौज में डॉक्यूमेंटेशन को.
बहुत सीरियसली लिया जाता है।. तो मैं उस समय मैटरनिटी लीव में ही थी।. मेरे हस्बैंड अपने यूनिट में गए और घर आकर. उन्होंने कहा कि मैंने डॉक्यूमेंट में. बच्चे का नाम लिखवा दिया।. तो मैंने उनसे यही बोला उन्होंने बोला. पूछोगे नहीं क्या नाम रखा? तो मैंने उनसे. कहा कि ओहो आपने अपनी पसंद का नाम रख दिया. बच्चे का। मतलब जो हमने डिसाइड किया था. आपस में वो नहीं रखा। जो आप चाह रहे थे. आपने वो रख दिया।.
तो उन्होंने कहा कि हंसने लगे। कहते नहीं. ये बात नहीं है। उन्होंने कहा उसका नाम है. मैं बेटे का नाम नहीं लेना चाहती हूं इस. पे तो उसका फर्स्ट नेम उसके आगे हटवाल और. फिर त्यागी।. उस दिन मैं जो इतना बोलती हूं उस दिन मैं. स्पीचलेस थी।. मैंने कहा आपने ऐसा क्यों किया? तो उन्होंने कहा कि बच्चा भी दोनों का है. तो नाना का नाम भी वही चलाएगा और दादा का.
नाम भी वही चलाएगा। इसमें तो कोई चर्चा ही. नहीं है।. तो उस दिन उस आदमी ने मुझे जीत लिया।. नाइस ब्यूटीफुल।. और फिर जब दूसरा बेटा हुआ तो उसके नाम के. साथ भी उसका फर्स्ट नेम और फिर हटवाल और. फिर त्यागी।. तो मुझे लगता है जब ऐसा इंसान आपके जीवन. में आता है तो वह और मैं जिसने बचपन में. अपने फादर को खो दिया.
मेरे लिए एक ऐसा आदमी मेरे जीवन में आना. जो और मेरा कोई भाई नहीं है मेरा मेरे. फादर नहीं थे तो वो मेरे लिए ही इज़. रोलोल्ड इंटू वन समटाइम्स आई टेक एडवाइस. फ्रॉम हिम एज ही इज़ माय फादर आई शेयर विथ. हिम लाइक ही इज़ माय ब्रदर आई फाइट वि हिम. लाइक ही इज़ माय हस्बैंड एंड. ही इज़ एवरीथिंग रोल इंटू वन। तो आई एम. रियली ब्लेस्ड कि मुझे एक ऐसा इंसान लाइफ.
पार्टनर के रूप में मिला है जो अ. जो मुझे कहता है तुम उड़ो।. यू यू योर्स इज द स्काई। योर्स इज द. ग्लोरी। इसका मतलब अगर 53 को. अगर 53 साल की उम्र में बताते हुए आपके. गाल पिंक हो जा रहे हैं. यस सो आई थिंक ये मेरे जीवन की सबसे बड़ी. कमाई है. नाइस. सबसे बड़ी कमाई है. मैंने एक रैपिड फायर सेगमेंट रखा है आपके.
लिए. ओह खतरनाक. बॉलीवुड की वो कौन सी फिल्म है जो फौजी. जीवन के सबसे करीब है. मैं एक वर्ड मैं बोलूंगी लक्ष्य और इसके. आगे दूसरी चीज बोलूंगी कि मैं बॉलीवुड की. मूवीज देखती नहीं जो फौज के ऊपर बनी हैं. क्योंकि मुझे लगता है कि हर एक में मेरा. लॉजिकल माइंड ऑन हो जाता है और मुझे लगता. है कि यह ठीक नहीं बनी। इसने सेंटीमेंट. नहीं पकड़ा। बट आई थिंक दैट वेरी नियर टू. इट इज लक्ष्य। मैं अभी कुछ टाइम पहले. जावेद अख्तर जी से मिल रही थी और हम बात.
कर रहे थे कि उन्होंने कैसे कारगिल गए और. कैसे उन्होंने उस पूरी टेरेन को देखा समझा. लोगों से बात करी और कैसे लक्ष्य लिखना. उनके लिए कितना मुश्किल था एंड ही कुड नॉट. इमेजिन दैट पीपल हैव डन थिंग्स लाइक दैट. सो वी वर एक्सचेंजिंग लॉट ऑफ़ कारगिल. स्टोरीज एंड दैट आई फील वो आज की यूथ को. भी दिखाता है. बहुत ज्यादा मोटिवेट करने वाली मूवी है और. मुझे लगता है कि जो जो भी बच्चे तैयारी. करते हैं उनके घर में अगर कोई एक गाना. बजता है तो लक्ष्य का टाइटल ट्रैक.
लक्ष्य का टाइटल और इनफैक्ट. एक दूसरा जो मुझे. एंड दिस आई एम ओनली शेयरिंग विद यू ये. लक्ष्य से कनेक्टेड नहीं है। लेकिन. व्हनेवर आई एम गोइंग टू गिव अ क्योंकि मैं. की नोट स्पीकर हूं। मैं मिलिट्री. इंस्पायर्ड लीडरशिप कोच हूं। बहुत स्टेज. शोज़ करती हूं। बहुत ट्रेनिंग्स देती हूं. कॉर्पोरेट्स को। बट व्हेन आई गो ऑन द. स्टेज. द ओनली सॉन्ग दैट इज प्लेइंग इन माय माइंड. इज.
आरंभ है प्रचंड. पीयूष मिश्रा. पीयूष मिश्रा मतलब आई वॉक आई वॉक ऑन दैट. म्यूजिक जब मैं स्टेज पे जाती हूं मेरा एक. अपना म्यूजिक चल रहा होता है माइंड में. क्या म्यूजिक दिया पीयूष मिश्रा जी ने. मतलब. तो ये है ये गाना और ये मूवी. उसमें जो शुरू में तगड़ तिट आनी शुरू होती. है एंड देन हाई नोट्स पे हाय नोट्स जाते. हैं। मुझे लगता है ऐसा एक गाना हर एक का. होना चाहिए कि जब आप कहीं एक जो गाना आपके. आपको एकदम टैप अप कर दे.
के युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है।. है. है प्रचंड मुझे ऐसा लगता है कि मेरे कदम. भी उसी बीट पे चल रहे होते हैं।. ब्यूटीफुल आई विल टेल दिस टू पीयूष मिश्रा. ही इस कमिंग. प्लीज मेरी तरफ से उनको जय हिंद जरूर. कहिएगा। हां. ओके सिविलियंस की फौज के बारे में सबसे. बड़ी गलतफहमी. ओ. कि सिविलियंस को ये लगता है कि फौजी. अ. सुपर ह्यूमन होते हैं.
और उनको ना दर्द होता है ना वो सॉफ्ट होते. हैं। वो अंदर से बहुत हार्ड होते हैं। ऐसा. लगता है सिविलियंस को।. लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि फौजी से ज्यादा. मुलायम दिल. नारियल होते हैं वो।. नारियल होते हैं। और उसका बड़ा एक एक रीजन. है। रीजन है।. बाहर की शक्ति जरूरी है।. नहीं नहीं नहीं नॉट रिक्वायर्ड।. वो इंसान अपने. बीवी बच्चों से, अपने घर परिवार से, अपने.
गांव खेत से दूर है।. वो इतना मुलायम है अंदर से। कि उसको अ. अपने घर वाले नजर आ रहे हैं। वो. जहां देखता है लेकिन ऊपर से उसकी ड्यूटी. ऐसी है कि उसका जो एक. परसोना है जो उसका कड़कपन है कई बार उसके.
हाथ में हथियार है। अगर वो कोई ड्यूटी दे. रहा है तो लोगों को लगता है कि यह बाहर से. दिख रहा है तो शायद अंदर से भी यह इतना ही. पत्थर होएगा। लेकिन जस्ट स्क्रैच द सरफेस. एंड सी सबसे. जोवियल. सबसे जिंदगी को जीने वाले लोग फौजी होते. हैं।. आप म्यूजिक चला दीजिए। देखिए सबसे पहले. फौजी डांस कर रहा होगा। तो यह जो एक अंदर. से जिंदगी को हर पल जीने का जो एक जुनून.
है ना. वो फौजी का है।. आज के टाइम में अगर किसी का ब्रेकअप हो या. नौकरी चली जाए तो इंसान टूट जाता है।. मेंटली जो है डिस्टर्ब होते हैं। आजकल. मेंटल फिटनेस की बहुत बातें चलती है। आप. पेट में चार से छ महीने का बच्चा लेके एक. छोटा बच्चा साथ में लेके पति फौज में ऑन. ड्यूटी और आप खुद सर्विस दे रहे थे। कैसे. ये मेंटली इतना टफ होते हैं? कैसे ये. मेंटली इतना फिट होते हैं? और आज की पीढ़ी. को मेंटल टफनेस के बारे में क्या बताओगे.
आप? देखिए फौजी को मेंटल मेंटली टफ होना उसके. लिए एक रिक्वायरमेंट है। इसीलिए ट्रेनिंग. के दौरान. हम. उसको इतनी क्राइसिस सिचुएशंस के अंदर डाला. जाता है और इतना जीरो आवर में परफॉर्म. करना पड़ता है कि उसके दिमाग से वो अ. रिएक्ट करना यह कांसेप्ट खत्म हो जाता है।. देयर इज अ डिफरेंस रिएक्शन एंड रिस्पांस।.
रिएक्शन हमेशा नीज जर होएगा हड़बड़ाहट. में। अगर एक फौजी हड़बड़ाहट में डिसीजन. लेगा, हड़बड़ाहट में काम करेगा तो उसका. डिसीजन सही हो ही नहीं सकता। और क्योंकि. उसके हाथ में हथियार है। प्रोबेब्ली इट इज़. अ वेरी डेंजरस सिचुएशन। इसीलिए शुरू से. सिखाया जाता है वीरता और विवेक काम. कंपोज्ड। और यह कैसे होगा? जब आपको. बार-बार क्राइसिस में डालेंगे। बार-बार. क्राइसिस में डालेंगे तो आपका दिमाग.
धीरे-धीरे करके अपने आप पकड़ बना लेता है।. तो हम तो ये ट्रेनिंग के साथ में करते. हैं। लेकिन बाहर की जो दुनिया है उसको यह. ट्रेनिंग नहीं है।. हम. उसको यह ट्रेनिंग नहीं है जो फौजी. ट्रेनिंग करते हैं। लेकिन मैं मेंटल टफनेस. के बारे में सिर्फ यह बोलना चाहूंगी कि. फौज में एक कांसेप्ट होता है जिसको हम. कहते हैं बडी सिस्टम।. जहां फौजी कभी अकेला नहीं है। उसके साथ.
हमेशा एक जोड़ीदार है।. हमेशा पेयर में है। चाहे वो कैंप्स में गए. हैं, चाहे वो लड़ाई के लिए गया है। और वह. एक दूसरे का ध्यान रख रहे हैं। अगर ठंड. बहुत है तो शायद वह आधा-आधा कंबल ओढ़ रहे. हैं। राइट? मैं आगे हूं तू मेरे को कवर दे. रहा है। कवर फायर कर रहा है. और वो आपस में एक दूसरे से सब बातें शेयर. करते हैं।.
अगर अगर. बडी में से एक की कोई तकलीफ है तो यह हो. नहीं सकता कि उसके बडी को ना पता हो।. दूसरे को ना पता हो। और अगर नहीं पता है. तो फिर देन दिस इज समथिंग एक्सट्रीमली. सीरियस।. कम्युनिकेशन. फौजी अपने घर से इतना टाइम दूर है।. घर में 50 चीजें चल रही हैं। उसके मन में. 50 चीजें चल रही हैं।.
लेकिन वो एक कम्युनिकेशन है जो हमेशा ओपन. है। एक तो बडी सिस्टम यानी एक फ्रेंड है. जिससे बात कर रहा है। उसके बाद उससे ऊपर. निकल के यूनिट में हर लेवल के ऊपर आपकी. रिड्रेसल है या आपके पास अपने पॉइंट बोलने. की जगह है। यह सीख अगर हम कॉर्पोरेट. हाउसेस में लाते हैं। यह चीज हम स्कूल. कॉलेजेस में लेके जाते हैं। कम्यनिकेट. कम्युनिकेट मेंटल हेल्थ का सबसे बड़ा.
प्रॉब्लम है जब लोग बात करना बंद कर देते. हैं। और धीरे धीरे धीरे धीरे करके वह आपको. एक ऐसे अंधेरे गलियारों में ले जाता है कि. उससे फिर बाहर नहीं निकला जाता। तो फौज जो. इतने कोविड के टाइम पर लोगों को परेशानी. हुई कि सोशल डिस्टेंसिंग हो गई, फिजिकल. डिस्टेंसिंग हो गई। हम मिल नहीं पा रहे. हैं लोगों से। हम अपना यूजुअल रूटीन नहीं. कर पा रहे हैं। फौजी तो हमेशा ही सोशल.
डिस्टेंसिंग में है।. ऐसीऐसी जगह पोस्ट्स हैं जहां कोई इंटरनेट. नहीं है। जहां कोई मोबाइल नहीं आज भी नहीं. है। वहां पर वो घर से आने वाली एक चिट्ठी. के ऊपर है और वो उसके पॉकेट में रहती है।. एक छुट्टी से दूसरी छुट्टी जीता है। मैं. आपको एक एग्जांपल देती हूं। फौज की जो. कंटोनमेंट्स होते हैं वो बहुत कंटेंड होते. हैं। यानी उसके अंदर सब कुछ होता है। आपको. बाहर कुछ खरीदने जाने की जरूरत भी नहीं. पड़ती क्योंकि एवरीथिंग इज अवेलेबल इनसाइड.
अ मिलिट्री कंटोनमेंट।. तो एक ऐसी ही एक शॉप थी जिसमें बच्चों के. कपड़े थे। एक मैनिक लगा था। उसमें एक. बच्चे को एक वूलन ड्रेस पहनाई हुई थी। हाथ. की ऊन की बनी हुई एक वूलन ड्रेस।. अब यह जवान था।. मैंने फोटो भी खींची थी उसकी। वो अपने. वीडियो कॉल लगा के अपनी वाइफ को वो.
ड्रेस दिखा रहा है और कह रहा है कि मैं यह. जो है वो घर में बच्चे के लिए खरीद के. लाना चाह रहा हूं। वाइफ कह रही है नहीं यह. कलर अच्छा नहीं लग रहा। लेकिन उसने बोला. नहीं मैं तो यही कलर लाऊंगा। लेकिन एक काम. करो तुम जरा नाप के लाओ कि हमारा बच्चा. कितना लंबा है। वो बच्ची की हाइट कितनी. है? जरा नाप के लेकर आओ। तो मैं इसके ऊपर. नापता हूं कि वो कितनी बड़ी है। और. उसे पता ही नहीं है कि उसका बच्चा कितना. बड़ा हो गया। उसे पता ही नहीं है।.
वो वीडियो में बच्चे की शक्ल देख रहा है. लेकिन उसको सेंस ऑफ जजमेंट ही नहीं है कि. वो इतना है। कि इतना है। कितना है? ये है. फौजी।. तो कितना मजबूत है वो और कितने मजबूत है. उसके घर वाले। इसीलिए इंडियन आर्मी इज वन. ऑफ द बेस्ट आर्मीज़ ऑफ द वर्ल्ड। और जो. हमारे पास क्वालिटी ऑफ आर्मी पर्सनल है।.
जो मेंटल लेवल है उनका जो मन की सोच है. उनकी मतलब फिजिकली साइकोलॉजिकली. वी आर सो टफ एंड वी आर सो गुड।. एंड इंडियन आर्मी इज आल्सो कॉल्ड पीपल्स. आर्मी। आप देखिए हम जब ऐसी जगह डिप्लॉयड. होते हैं जहां पर हम सिविलियन एरिया के. अंदर हैं।. तो हाउ पीपल लुक आफ्टर फौजीस? हाउ पीपल. अप्रोच फौजीस विदाउट एनी फियर विदाउट एनी.
यू नो. मार्क। हेज़िटेशन। सो दिस इज़ क्वालिटी ऑफ़. नाइस। अ ये सवाल मेरे बजह में बहुत था. क्योंकि मैंने शुरुआत इस सवाल से की थी कि. एक बेटी जो उसके पिता फौजी थे एक मां. जिसने अपने पेट में बच्चा रखकर एक बच्चे. को साथ लेकर लॉजिस्टिक डिपार्टमेंट में. कारगिल में भूमिका निभाई। एक पत्नी जिसका. पति फौज में है। इतिहास जब भी लिखा जाएगा.
आज से कई सालों बाद जब हम और आप नहीं. होंगे।. ओह माय गॉड।. हम और आप नहीं होंगे।. उस दौर में आप क्या चाहती हैं? कि आपको. कैसे याद किया जाए? किस भूमिका में आप. गौरवान्वित होंगे कि यह भूमिका मेरी रहे।. शुभाकर जी. पहली महिला ऑफिसर जो वहां डिप्लॉय की गई. कैसे? बहुत सारे रोल्स, बहुत सारे किरदार. हैं।. बहुत सारे रोल्स हैं। बहुत सारे किरदार. हैं। मैं ऐसी. ऐसी इंसान के तौर पे जाना जाना.
पसंद करूंगी. जिसने अपने काम से बेईमानी नहीं करी।. नाइस।. जिसने अपने हर काम को जो उसके सामने. चैलेंज आया. उसने सबको साथ लेकर वो काम किया।. ना मैंने पति छोड़ा ना मैंने बच्चे छोड़े।. मैंने वो हिम्मत ढूंढने की कोशिश की कि.
मैं सब कुछ साथ लेकर. अपने काम को कैसा करूं। जो मेरे बचपन का. ख्वाब था।. और अब तो मेरे रोल में एक रोल और जुड़ गया. है। अब तो मैं सास पी हूं।. वो बच्चा बड़ा हो गया है।. वो बच्चा बड़ा हो गया है। और मेरे बेटे की. शादी हुई है। और मैं अपनी. बहू के अंदर वो स्ट्रांग वूमन देखती हूं।. जो.
मेरी बेटी तो नहीं है।. लेकिन मेरी बहू है जो अब मैं चाह रही हूं. कि वो मेरी वो बेटी हो जिसको मैंने पेट से. तो जन्म नहीं दिया। लेकिन अपने अपने मन से. उसके अंदर मैं वो सब चीजें. अ. मुझे यकीन है कि उसके अंदर वो सब चीजें. हैं। तभी वो अंडर. ऐसे तारे से तारे बनाए भगवान ने।. आप अंडरस्टैंडिंग सासू या खडूस वाली? ओह, मैं आपको बहुत इंटरेस्टिंग चीज बताती. हूं। आई डोंट नो वेदर वी हैव टाइम फॉर ऑल.
दैट ऑर नॉट।. लास्ट सेगमेंट है।. मेरे बेटे की शादी से पहले आई वेंट ऑन अ. रोड ट्रिप विद माय डॉटर इन लॉ।. ओके। हम रोड ट्रिप पे गए. अकेले या बेटे को लेके? नहीं नहीं बेटे को क्यों ले जाना था? ये तो खाली गर्ल्स ओनली ट्रिप थी।. खाली शी इज़ अ वेरी गुड पर्सन ऑन व्हील्स. एंड आई एम अ गुड नेविगेटर।. नाइस।. तो हम पांच छह दिन हमने बहुत लंबा सर्किट. हम बोर से निकले और हमने कुर्ग और मदिकरी.
और हालेलीबडू और बैलूर करते हुए हम वापस. आए। और हम गए अजनबियों की तरह। और हम वापस. आए दोस्तों की तरह। अब कोई ऑकवर्ड पॉजिस. नहीं है किसी कन्वर्सेशन में। और मैं. चाहती हूं कि जैसे जिंदगी मैंने अपने. शर्तों पे जी है, वो भी जिंदगी अपने. शर्तों पे जिए। और मैं अगर उसे मेरे. सपोर्ट की जहां जरूरत लगेगी। तो मैं चाहती. हूं कि मैं वैसी मदर इन लॉ बनूं जो उसे एक.
वूमन के तौर पर रिस्पेक्ट करे पहले।. नाइस। सो ये मेरी जिंदगी का एक नया फेस. है।. नाइस।. बिफोर आई समराइज एक हाइपोथेटिकल सा और. मेरे ज़हन में।. हां जी। हां जी।. कौन सी वो एक एक्ट्रेस है जिसे आप फौश की. वर्दी में देखोगे क्या कमाल लग रही है।. जिसप फौश की वर्दी सूट करेगी।. ओ गॉड बहुत मुश्किल है। बहुत मुश्किल है।. लेकिन.
आई थिंक इफ आई कैन जस्ट गिव वन नेम आई. थिंक यामी गौतम विल लुक गुड।. नाइस चॉइस।. आई थिंक यामी गौतम।. बहुत जबरदस्त उन्होंने अभी कश्मीर में जो. आर्टिकल 370 को लेकर फिल्म बनाई गई थी।. बहुत जबरदस्त उन्होंने उसमें रोल निभाया।. रोल किया। मैं वही वही रोल के बैकग्राउंड. में आपसे बोल रही हूं।. और वो काफी ओरिजिनल लगती हैं। जब वो ऐसे. किरदार निभाती हैं। चाहे वो हक में हो।. हां। वुमेन का या. क्योंकि आप जब कोई रोल कर रहे होते हो तो. आपको उस रोल में फोकस्ड रहना है।. केवल हां आप उसमें इमेजिन कर सको।.
हां आप कोई फौजी लेडी ऑफिसर को नहीं. देखेंगे भारी काजल और लिपस्टिक और झुमकों. में। इट्स अ वेरी नो नॉनसेंस टू द पॉइंट।. तो. आई एम श्योर यामी गौतम इसे कॉम्प्लीमेंट. के तौर पर ले।. बिल्कुल बिल्कुल यामी गौतम। आई एम श्योर. दैट एंड आई विश हर. गुड लक। उनकी मूवी आई है अभी हक। बहुत. कमाल की एक्टिंग की है।. हां, मैंने देखी नहीं है बट आई वांट टू. वाच।. आप देखिएगा उसे और. मतलब मुझे लगता है कि महिलाओं के लिए तो.
फिल्म है। हर महिला को हर पुरुष को भी. देखनी चाहिए।. बट खुद के लिए खड़े कैसे होते हैं? हम. उस फिल्म ने वो सिखाया है। मुझे भी. पर वो लेडीज को ही क्यों देखनी चाहिए? नहीं। इसलिए मैंने बाद में एक्टर्न करेक्ट. करते हुए ऐड किया मैंने कि हर महिला हर. पुरुष को देखनी चाहिए।. एक पुरुष के नाते भी आपको ये एहसास होता. है कि कई चीजें जिसे आप स्वाभाविक मान. लेते हो वहां आप गलत होते हो। वो फिल्म. आपको कई जगह पर अंदर झझोरती है।. स्टीरियोटाइप पे मत चलो। बायस पे मत चलो।. हां। तो वो फिल्म आपके अंदर कुछ टच करती. है जो वो फिल्म देखते वक्त मुझे भी टच हो.
रहा था। क्योंकि कई सीन है जहां पर आप. इमरान हाशमी की जब बातें सुनते हो तो आपको. लगता है कि ऐसा भी हो सकता है।. हम. और फिर जब यामी की वर्जन आता है फिर आपको. एहसास होता है कि नहीं ये इसलिए है. क्योंकि हमें ऐसा बचपन से हम इस धरने पे. चलते हैं।. हमारी कर दी। जैसे महिलाओं को लेकर शायद. फ़ौज में आप कमजोर होती है।. हां।. एक धारणा आपकी बना दी है। बातें या बहुत. सी चीज़। अब जब उसका दूसरा आ रहा है तो. सहजता स्वीकार करने में थोड़ा समय लगता है।. सो आई थिंक वो रहा। लास्ट मेल एक एक मेल. जो आपको फौजी के ड्रेस में.
अच्छा लगेगा।. हां।. एक मेल जो फौजी के ड्रेस में अच्छा लगेगा।. कोई ऐसा पुरुष कलाकार मेल एक्टर जो फौजी. के ड्रेस में एकदम हॉट लेगा।. नहीं मैं हॉट नहीं बोलूंगी। उसको फौजी. वर्दी को जस्टिस देना चाहिए। अगेन आई विल. गो बैक टू अ. आई विल गो बैक टू लक्ष्य मूवी. ऋतिक रोशन. वेयर ऋतिक रोशन व्हेन ही. व्हेन ही वास डूइंग द ट्रेनिंग सीरियसली.
जब वो वापस लौट के आते हैं सेकंड पार्ट. में जब वो भाग जाते हैं और उसके बाद जब. वापस वो आते हैं और वो अपने मन में एक आग. लेकर आते हैं।. आई थिंक उन्होंने काफी हद तक वो. फौजी की एक बड़ा डिस्टिंक्ट बॉडी लैंग्वेज. होती है।. एक बड़ी डिस्टिंक्ट बॉडी लैंग्वेज होती. है। आप अगर चार लोग खड़े हैं तो आप उसमें. आप एक फौजी को बता सकते हैं कि ये फौजी. है।. तो उन्होंने काफी हद तक उस बॉडी लैंग्वेज. को. सेकंड हाफ में. सेकंड हाफ में सेकंड हाफ. हां वो खामोशी जो उनके चेहरे पर थी वो.
साइलेंस वो डिसिप्लिन. हां और वो बड़ा उन्होंने ऑब्जर्व किया. होगा और उसको तब अपने अंदर उतारा होगा।. जजब किया. इवन फोन कॉल्स में जब वो जाते हैं जिस तरह. से बात करते हैं मुझे सारे सीन याद आ रहे. होंगे. हां वो. सो या आई थिंक दैट इज. मोर देन हीरोइज्म वो जो उन्होंने वो एक. अंदाज पकड़ा था।. हां हां तो. थैंक यू यशिका जी। मुझे लगता है कि. दर्शकों को आज समझ में आया होगा कि रियल. हीरोज़ जो है वो सिर्फ रील पर नहीं मिलते।.
थैंक यू वेरी मच।. रील से आगे भी मिलते हैं। एंड आई होप कि. जो लोग हमें देख रहे थे वो सिर्फ इतना. समझे कि ठीक है हर इंसान सरहद पर जाकर देश. की सेवा नहीं कर सकता। लेकिन आप भी. सुनिश्चित कीजिए कि 26 जनवरी 15 अगस्त के. आगे भी आपकी देशभक्ति जिंदा रहे। क्योंकि. इन दो दिन तो हम सब मनाते हैं। बट सच्ची. सर्विस वही कि इनके आगे हम अपनी देशभक्ति. दिखाएं और वह व्यवहार रखें ताकि जब सरहद. पर कोई फौजी हमारे लिए जो संघर्ष कर रहा. है उसे ये एहसास हो कि यार इनके लिए हम कर.
रहे हैं।. ये हमारे लोग हैं। वो आचरण. ये आपने जो इस नोट पे इस प्रोग्राम को एंड. किया दिस इज द बेस्ट कि फौजी तो शहादत. देने से दो बार भी नहीं सोचेगा।. अगर उसे उस. सिचुएशन में आया कि जान देनी पड़े तो वो. जान भी देगा। लेकिन देश के नागरिकों को बस. इतना ध्यान रखना है कि आप वैसे सिटीजन. बनिए जिसके लिए वो शहादत. जो उसकी शहादत को वर्थ कर. जो हां जो उस शहाद शहादत के लायक है.
हां कि उसको ही एहसास हो. जस्टिफाई कर. इनके लिए मैंने मैंने किया और वो हमको. एहसास करना है. और आई थिंक एंड में फिर वही एक लाइन. कहूंगा मैं कि बस इतना याद रहे एक साथी और. भी था. यस यस. ये हमारे लिए बहुत इंपॉर्टेंट है कि हम. अपनी फौज को फौजी आपसे कुछ नहीं चाहता।. फौजी को आपसे कुछ नहीं चाहिए।. फौजी को सिर्फ चाहिए प्यार, रिस्पेक्ट और अंडरस्टैंडिंग।.
इसके आगे तो वह जंग खुद ही जीत कर ले. आएगा। तो सिटीजंस का एक बहुत बड़ा रोल है. फौज का मोराल बनाने में। हमें चाहिए कि हम. देश में एक एक ऐसा हमेशा एक ऐसा माहौल. रखें कि हमारी फौज का मनोबल कभी कम ना पड़. पाए।. आई थिंक हिंदुस्तान में भारतीय फौज को. लेकर बहुत प्रेम है।. बहुत प्रेम है और ये प्रेम इतना पप्पेबल. है कि मैं जहां जहां जाती हूं मैं मुझे. हमेशा फौज के लिए इतना प्यार भर-भर के. दिखता है और मिलता है।. प्यार अंडरस्टैंडिंग.
एक फौज एक फौजी आ गया ट्रेन में खड़ा है।. आप देखिएगा कितने भी खडूस लोग उठ जाएंगे।. आप बैठिए।. आप बैठिए।. आई थिंक वो सम्मान इस देश में लोग फौज को. लेके दल से बहुत भावुक भी हैं और सम्मान. बहुत ज्यादा है।. लेकिन इनके साथ-साथ हमें सुनिश्चित करना. है कि जैसे वो अपनी सर्विस अच्छे से कर. रहे हैं। हमें भी देश की सर्विस अच्छे से. करनी है।. एंड आई थिंक यही शायद 26 जनवरी और 15. अगस्त का सबसे बड़ा मैसेज है।. थैंक यू सो मच मैम। लव यू।. थैंक यू। जय हिंद।. जय हिंद। जय हिंद।.
