Unplugged ft. Ashok Sajjanhar | India-China Relations | Narendra Modi | Xi Jinping | Pakistan| Trump
चाइना इंडिया का दोस्त है, दुश्मन है या. किसी दिन दोस्त है, किसी दिन दुश्मन है।. दोस्त तो नहीं है। किसी भी तरह नहीं है।. कहता है कि आप चाइना पर कभी आंख मूंद के. भरोसा नहीं कर सकते।. नहीं, आंख खोल के भी भरोसा नहीं कर सकते।. आपको आंख खोल कर रखनी पड़ेगी, दिमाग खोल. कर रखना पड़ेगा। आपके कान खोल कर रखने. पड़ेंगे। क्या हम चाइना से दुश्मनी नहीं.
चाहते? या चाइना से दुश्मनी मोल लेने की. स्थिति में नहीं है।. होली की पिचकारी से लेकर दिवाली की. फुलझड़ी तक चाइना से आती है। हर साल 100. अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार है। तो अगर. हमें यह पता है कि वो हमारा दुश्मन है। अब. एक भारत का बच्चा वो देख रहा है कि वो. चाइना को पसंद नहीं करता। आपने उसका ऑप्शन. नहीं छोड़ा। अब वो समझ नहीं पा रहा कि ये. फोन खरीदना मेरी मजबूरी है। देशद्रोही है. क्या जरूरत है। शी जिनपिंग सात साल से. इंडिया नहीं आए थे। वो इस बार वो इंडिया. आए। मोदी जी ने जो उनके लिए डिनर रखा था. उस डिनर को उन्होंने अवॉइड कर दिया। इसमें.
भी कोई मैसेजिंग होती है? शी जिनपिंग के यहां आने का मकसद क्या था? क्या कहीं और वो मैसेज दे रहे थे? भारत का मार्केट है. उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि अब. अमेरिका इतना ज्यादा उनका बड़ा मार्केट. था। अमेरिका में कमी आती जा रही है। उनको. यह मैसेज अमेरिका को भी देना है।. मोदी शी जिनपिंग पुतिन हाथ में डालकर चलते. हुए वो तस्वीर जो प्रधानमंत्री मोदी ने. डाली। क्या वो कैंडिडेट थी? या वो वेल. प्लंड थी। इट वास इन द इंटरेस्ट ऑफ ऑल. थ्री ऑफ़ देम। अगले 5 साल में चाइना गलवान. जैसी हिमाकत फिर कर सकता है।.
कर सकता है बट आई थिंक वी आर मच बेटर. प्रिपयर्ड। हमारे दिमाग में एक डर डाल. दिया गया कि चाइना हमसे बड़ा है। हम उससे. हार गए थे और वो फिर आएगा तो हमें हरा. सकता है। हमने 1967 में उनके 340 सैनिक. मारे थे। हमारे 88 शहीद हुए थे। 1986 जहां. पर जनरल सुंदर जी ने रातोंरात चीन को पीछे. धकेल दिया था। नैरेटिव्स बनाने में चीन. काफी माहिर है और वही उन्होंने ऑपरेशन. सिंदूर में किया है।. अगस्त 2020 में इंडियंस आर्मी ने कैलाश. रेंज की चोटियों पर कब्जा किया। बाद में. इंडिया ने वो ऊंचाई वाली जमीनें वापस कर. दी। हमने क्या वहां पर एक अपॉर्चुनिटी लूज.
की? मैंने बहुत सीनियर मिलिट्री ऑफिसर्स से. उनसे बात की। वाज़ इट अ पॉलिटिकल डिसिशन? ओवरऑल अगर आप हम देखें. चीन आज के समय भी अरुणाचल प्रदेश को अपना. बताता है। लद्दाख के अक्साई चीन पर सदियों. से कब्जा कर रखा है। क्या हम अक्साई चीन. को भूल चुके हैं? हमको तो यह भी नहीं पता. चला जो जब उन्होंने रेलवे लाइन बना ली. अमेरिका और चाइना में दुश्मनी है। लेकिन. जब पाकिस्तान की बारी आती है, दो दुश्मन. पाकिस्तान के दोस्त कैसे आते हैं इंडिया. के? अमेरिका चीन का दुश्मन नहीं है। इतनी. ज्यादा डिपेंडेंस है। एक आपने तस्वीर देखी.
होगी। राष्ट्रपति ट्रंप अपना हाथ बढ़ाते. हैं और शीजन पिंग बिना देखे अपना गाड़ी. में बैठकर चले जाते हैं।. सिंदूर में कि भारत का साथ ऑफिशियली देने. के लिए दुनिया के मुल्कों ने आवाज नहीं. उठाई। ये इंडियन फॉरेन पॉलिसी की कमजोरी. है। यू कैन टेक केयर ऑफ इट्स ओन इंटरेस्ट।. भारत के आसपास के देशों में क्या चाइना की. बढ़ती दखल अंदाजी इंडिया के लिए परेशानी. का सबब हो सकता है? नहीं नहीं बिल्कुल है।. 70% दवाइयों का कच्चा माल चाइना से। रेयर. अर्थ मटेरियल जो गाड़ी फोन सब में जा रहे. हैं चाइना से। चाइना तो बिना लड़े भी हमें.
घुटनों पे ला सकता है। हम TikTok बैन के. बैठे हैं। तो बॉयकॉट चाइना फिर क्या. रहेगा? वो आप बिल्कुल ठीक करें। बॉयकॉट. वही करें जो कि आप अपने यहां पर बना सकते. हैं। ताइवान जिसे चाइना अपना हिस्सा मानता. है। चाइना उस ताइवान पर हमला क्यों नहीं. करता? किस बात का डर है? अमेरिका इन देयर. व्यू वो डिक्लाइन हो रहा है उसका। रूस भी. ये समझता है, चीन भी यही समझता है। हम और. शक्तिशाली बन रहे हैं। पीसफुली दैट इज द. फर्स्ट प्रेफरेंस। प्लान ए नहीं चलता है।. मे बी बाय 2030 2035 दैट इज द.
ताइवान चाइना का। क्या पाकिस्तान अगले 10. साल में पहलगाम जैसा गंदा काम करने की. हिमाकत कर सकता है? बिल्कुल कर सकता है।. वो थोड़ा डिप्लोमेटिकली अपने को एंबोल्डन. फील कर रहा है क्योंकि यहां पर उसने मक्का. डिफेंस पैक कर लिया है। उसने सऊदी अरेबिया. के साथ पैट कर लिया है। ही इज़ इन द गुड. बुक्स ऑफ डोनल्ड ट्रंप। वो उसको फेवरेट. फील्ड मार्शल बोलते हैं।. आई हैव टू से माय फेवरेट फील्ड मार्शल. फ्रॉम पाकिस्तान।. और वो वैसे ही जिहादी उसका माइंडसेट है।. इंडिया पाकिस्तान की लड़ाई में क्या सऊदी. इंडिया से लड़ने आएगा? नेवर।.
बलूचिस्तान, खैबर पख्तून खवा, उदर. अफगानिस्तान हर तरफ से खबरें आ रही हैं।. पाकिस्तान से एक और बांग्लादेश निकल सकता. है। अगर नेचुरल प्रोसेस हो तो यकीनन टूट. सकता है। परंतु मेरे ख्याल से ये जो बड़ी. शक्तियां हैं ये उसको टूटने नहीं देती है।. डॉन्ड ट्रंप इंडिया के दोस्त हैं, दुश्मन. है या खाटी बिजनेसमैन है।. 2017 से लेकर 2021 तक भारत और अमेरिका के. संबंधों का स्वर्णिम मुकाबला। ऑपरेशन. सिंदूर के बाद. इंग्लैंड टूटेगा सर। वेल, स्कॉटलैंड और. नॉर्थ आइलैंड। स्कॉटलैंड तो बहुत समय से.
चाह रहा है जो अलग हो जाए। रेफरेंडम भी. हुआ था 2014 में।. आप वाशिंगटन में रहे। यूएस में बंद कमरे. में लोग इंडिया के बारे में क्या सोचते. हैं? गवर्नमेंट लेवल तो आपको याद है जो यहां पर. उनके डिप्टी सेक्रेटरी आए थे और उन्होंने. कहा था जो हम भारत को ऐसे नहीं डेवलप होने. देंगे जैसे चीन डेवलप होकर हमारा एडवर्सरी. बन गया है।. इंडिया का सबसे सच्चा दोस्त कौन है? इजराइल या फिर रूस? मुस्तबाने जिंदा है या. अभी ये बात से पूछी गई थी। उन्होंने कहा. वो जिंदा है. तो क्या चांसेस होंगे कि शायद वो ना भी. बचे हो. हां नहीं बिल्कुल शी जिनपिंग पुतिन डॉन्ड.
ट्रंप सबसे खतरनाक कौन है सबसे समझदार कौन. है. सबसे डेंजरस तो मैं कहूंगा डेफिनेटली शी. जिनपिंग है. बांग्लादेश में जो कुछ हुआ पाकिस्तान में. इमरान खान का जेल जाना नेपाल में सरकार. गिरना ये कहीं दूर से प्लान हुआ था. यकीनन इसमें कोई ना कोई तो फॉरेन हैंड. जरूर रहा होगा. क्या ब्रिक्स कभी अपनी कोई करेंसी बना. पाएगा डॉलर का दबदबा क्या आने वाले समय. में खत्म होगा कोई और bricks की करेंसी बन. ही नहीं सकती कोई देश ये मानने को तैयार. नहीं होगा जो ये चीन की करेंसी को. एक्सेप्ट कर लिया जाए एस दी रिजर्व.
करेंसी। इंडिया तो बिल्कुल ही नहीं. एक्सेप्ट करेगा।. इंडिया की नेक्स्ट वॉर किससे? पाकिस्तान, चाइना या कुछ और कोई. हम कोशिश करेंगे किसी से भी युद्ध नहीं हो. क्योंकि अगर हम चाहते जो युद्ध हो तो हम. ऑपरेशन सिंदूर को चार दिन के बाद रोकते. नहीं। जो आप युद्ध शुरू तो कर सकते हैं. परंतु कभी-कभी युद्ध बंद करना वो आपके हाथ. में नहीं रहता।.
चीन भारत का दोस्त है या दुश्मन? या ऐसा. है कि वो एक दिन हमारा दोस्त है, एक दिन. दुश्मन? यह सवाल इसलिए क्योंकि ब्रिक्स. समिट में जब राष्ट्रपति श्री जिनपिंग आते. हैं, प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन. दिखते हैं तो कई तरह की चर्चाएं चलती है।. एक चर्चा कि अमेरिका को डराने आए हैं। एक. चर्चा अमेरिका से डर कर आए हैं। लेकिन इन. सबके बीच में हम यह भूल जाते हैं कि यह. वही चीन है जिसने गलवान में हमारे 20 जवान. मारे थे। यह वही चीन है जो ऑपरेशन सिंदूर.
में पाकिस्तान का साथ दे रहा था। यह वही. चीन है जो आज भी अरुणांचल पर दावा करता. है। अब सवाल कि फिर इन मुलाकातों से इन. तस्वीरों से क्या दोस्ती होती है? इस सवाल. का जवाब शायद उन बंद कमरों में होता है और. उसे समझने के लिए हमें उन लोगों से मिलना. समझना होगा जो इन बंद कमरों की मीटिंग का. हिस्सा रहे हैं लंबे समय तक। एक ऐसे ही. शख्स हमारे साथ हैं। अशोक सज्जनहार साहब. 30 साल से अधिक भारत की विदेश सेवा में. कजाकिस्तान, स्वीडन लाद्विया में भारत के.
राजदूत रहे। चीन को पड़ोस से देखा, रूस को. अंदर से देखा और अमेरिका को सामने बैठकर. देखा। और आज इन्हीं से हम यह सारे सवाल. समझेंगे। अशोक सजनहार साहब बहुत-बहुत. स्वागत है आपका।. बहुत धन्यवाद।. कैसे हैं सर आप? हम एकदम अच्छे हैं।. सेहत कैसी है आपकी? एकदम ठीक।. मुस्कुराते हुए चेहरे से आज कई सारे सवाल. हैं। हमें लगा कि आपसे बेहतर इंसान हमें. मिलेगा नहीं।. बहुत शुक्रिया।. तो बिना डिप्लोमेट वाली भाषा के सर। आई नो. आपका प्रोफेशन डिप्लोमेसी का रहा है।. चाइना इंडिया का दोस्त है, दुश्मन है या. किसी दिन दोस्त है, किसी दिन दुश्मन है?
देखिए बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। फर्स्ट. ऑफ ऑल बहुत धन्यवाद मुझे आमंत्रित करने के. लिए अपने शो में। बहुत इंटरेस्टिंग. क्वेश्चन है। तो मैं इसको दो तरीके से. कहूंगा। आई विल नॉट आंसर इट इन यस और नो।. कभी यह कभी वो।. दोस्त तो नहीं है। यह समझकर किसी भी दिन. नहीं है। यह आप कहते हैं ना किसी दिन. दोस्त है, किसी दिन किसी भी दिन दोस्त. नहीं है।. अब दुश्मन हमको यह देखना है जो दुश्मन.
नहीं बने।. क्योंकि हमारा दोनों देश बिल्कुल पड़ोस के. हैं। 3500 कि.मी. की हमारी सरहद है, बाउंड्री है। तो हमें पीसफुल रिलेशंस. अच्छे सामान्य संबंध चाहिए। शांतिपूर्ण. संबंध चाहिए। हम लड़ाई नहीं करना चाहते।. अगर आप दुश्मन है तो आप लड़ाई करेंगे।. हम. तो हम दुश्मनी ही नहीं चाहते। परंतु यकीनन. हमें यह मानकर चलेगा जो यह दोस्त तो नहीं.
है। तो इसके साथ हम किस प्रकार के संबंध. रखें हम. जिससे कि आपकी बाउंड्री पर सीमा पर शांति. बनी रहे और फिर जो कुछ आप काम कर सकते हैं. जो म्यूचुअल बेनिफिट के लिए है और उसके. बारे में हम बात कर सकते हैं वो आपके. संबंध ऐसे बने रहे। अब इसमें मेरे मन में. सवाल आता है सर जी. हम चाइना से दुश्मन नहीं हम चाइना से. दुश्मनी नहीं चाहते या चाइना से दुश्मनी.
मोल लेने की स्थिति में नहीं है इसलिए. हमें सावधान रहना है।. देखिए अगर मुझे अपने. हम. हितों की रक्षा करनी पड़े. हम. अगर मेरी अपनी टेरिटोरियल इंटेग्रिटी. सोवनिटी पर आंच आए तो तब तो जो हो वो हम. करेंगे। उसमें तो कोई दिक्कत की बात है. नहीं। ऐसा नहीं है जो हम नहीं कर. पहले भी किया है।. हां पहले भी किया है। परंतु हम प्रोवोक. नहीं करना चाहते. जिससे कि हालात ऐसे बन जाए. जिससे कि वो हमारे ऊपर हमला करने को आमदा.
हो जाए। पग परंतु अगर वो अपनी कैलकुलेशन. से वो कुछ करना चाहता है जैसे उसने किया. गलवान में जैसे वो उसने किया डोकलाम में. जैसे उसने किया चुमर में 2014 में जब शी. जिंगपिंग यहां पर आए थे तो अगर वो ये करने. की हिमाकत करेगा तो उसका मुंहत जवाब. देंगे। अब एक सवाल फिर मेरे मन में आता है. सर इंडिया में आप किसी भी घर में देख लें. चाइना का सामान है। होली की पिचकारी से. लेकर दिवाली की फुलझड़ी तक चाइना से आती. है। हर साल 100 अरब डॉलर से ज्यादा का.
व्यापार है और ज्यादातर पैसा हमारी जेब से. चाइना में जाता है। तो अगर हमें यह पता है. कि वो हमारा दुश्मन है। हम यह जानते हैं. कि वो हमको परेशान करेगा। हम यह जानते हैं. कि पाकिस्तान से भी लड़ाई होगी तो वो. सेटेलाइट के जरिए उसको हेल्प करेगा। सामान. देगा। नेपाल के जरिए, श्रीलंका के जरिए वो. हमको परेशान करेगा। फिर इतना बड़ा आर्थिक. साझेदारी ये हमारी मजबूरी है या हमने. कोशिश नहीं की? देखिए कोशिश तो यकीनन मेरे. विचार से की गई है। डोकलाम के बाद.
पर्टिकुलरली. क्योंकि देखिए जो हम उनसे आयात करते हैं. उसको आप दो-तीन. कैटेगरीज में बांध सकते हैं।. एक तो ऐसी मशीनरी है जो कि आपके लिए बहुत. जरूरी है। अगर आप अपना मैन्युफैक्चरिंग. करना चाहते हैं। मैन्युफैक्चरिंग क्योंकि. हम यह सोचते हैं जो हमारा 17 18%. मैन्युफैक्चरिंग है उसको हमने 25% करना. है। क्योंकि अगर आप मैन्युफैक्चरिंग. करेंगे तभी आपका जो युवा है उसको जॉब्स. मिलेंगे।. सर्विज जॉब्स नहीं दे पाती है। एग्रीकल्चर.
जॉब्स नहीं दे पाता है। जॉब्स अगर आपको. देने हैं तो मैन्युफैक्चरिंग चाहिए।. मैन्युफैक्चरिंग के लिए अगर आपको मशीनरी. चाहिए जो कि चीन से आती है और चीन के. अलावा कम देशों के पास है। वो आपको लेनी. पड़ेगी। फिर जो आप बनाते हैं जैसे अब हम. कहते हैं जो कितने सारे वी आर द सेकंड. लार्जेस्ट एक्सपोर्टर्स ऑफ सेलफोनस तो. वहां से आपके जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स. आते हैं रॉ मटेरियल्स आते हैं और वो ऐसी. मात्रा में आते हैं क्योंकि देखिए चाइना.
हैज़ बिकम अ मैन्युफैक्चरिंग हब पूरे विश्व. का केवल हम नहीं है पूरे विश्व का. मैन्युफैक्चरिंग हब बन गया है तो वो आपको. चाहिए परंतु जो आप ये पिचकारी लेते हैं जो. आप ये गुलाल लेते हैं जो आप ये मूर्तियां. लेते हैं वो सब चीजें हैं जो आप फैंस लेते. हैं जो आप बल्ब लेते हैं वो कोई ऐसा रॉकेट. साइंस नहीं है जिसकी जरूरत आपको चीन से ही. है उसको आप यकीनन काट सकते हैं तो जो एक. पोर्शन है जो आपका आयात होता है वहां से.
उसको आप काट सकते हैं और मेरे विचार से. इसके ऊपर काम अच्छा हुआ है क्योंकि यहां. पर ऐसी संस्थाएं हैं जिन्होंने बड़ी अच्छी. तरीके से ये इकोनॉमिक इन्वेस्टिगेशन किया. है जो कौन से ऐसी चीजें हैं, कौन सी वो. सामान है जो कि हम वहां से मंगाते हैं या. फिर किसी को हम डवर्सिफाई कर सकते हैं। हम. चीन से नहीं लें, थोड़े से ज्यादा दाम में. हम वियतनाम से ले लें, हम मलेशिया से ले. लें जिससे कि आपकी निर्भरता जो है,
डिपेंडेंसी वो आप चीन के ऊपर से कम. ये जनता के लेवल पे होगा या सरकार को उसके. लिए मोटिवेट करना होगा। क्योंकि अगर मैं. एक छोटा एग्जांपल लूं फोन का. भारत में एक कंपनी थी Micromax आई हम सब. ने उसका इस्तेमाल किया फिर चाइनीस फोन. बहुत सस्ते हो गए और आज के समय अगर आप. भारत में Apple या Samsung नहीं यूज करते. हैं तो मेरे हिसाब से हर आदमी चाइना का ही. फोन यूज़ कर रहा है जो 60 70% बड़ा मार्केट. है। अलग-अलग नाम है वो एक ही बड़ी कंपनी.
चाइना में है जो पांच छह अलग-अलग नामों से. फोन बेचती है। अब एक भारत का बच्चा जो देख. रहा है कि चाइना हमारे खिलाफ साजिशें रच. रहा है। वो देख रहा है कि मैं चाइना को. पसंद नहीं करता। आपने उसका ऑप्शन नहीं. छोड़ा। अब वो समझ नहीं पा रहा कि ये फोन. खरीदना मेरी मजबूरी है। देशद्रोही है या. जरूरत है। जी देखिए बात ऐसी है। इसमें एक. और भी इसमें मैं ऐड कर देता हूं। आपने फोन. की बात बताई है। एक फार्मासटिकल्स की बात. है। दवाइयों की बात है। हम इतनी मात्रा.
में एपीआई वहां से इंपोर्ट करते हैं।. जो भी वो इंग्रेडिएंट्स होते हैं।. फार्मासटिकल इंग्रेडिएंट्स हैं जो कि. दवाइयों में जाते हैं उनको बनाने के लिए।. चाहे वो एंटीबायोटिक्स हो या और किसी. प्रकार की दवा हो। पहले भारत में बनते थे. एपीआई काफी मात्रा में बनते थे। आईडीपीएल. इंडियन ड्रग फार्मासटिकल्स लिमिटेड बनते. थे। परंतु जब वहां से सस्ते आने शुरू हो. गए तो फिर हमारे यहां पर जो प्रोडक्शन था. वो एकदम खत्म हो गया। तो अब जरूरत है और.
ऐसे ही जो आप कह रहे हैं कॉमोनेंट्स की. कुछ तो कॉमोनेंट्स शायद आप और जगह से ले. सकते हैं हम. और ये वाली जो चीनी कंपनीज़ हैं अब उधर से. हमारे कॉम्पोनेंट्स आते हैं असेंबल यहां. पर होते हैं।. असेंबल यहां पर होते हैं।. परंतु इससे भी थोड़ा सा कुछ ये फायदा है. क्योंकि आपके यहां पर जॉब क्रिएशन हो जाता. है।. तो देयर माइट बी ऑल द कॉम्पोनेंट्स दैट आर. कमिंग फ्रॉम देयर और उसी को आप एक्सपोर्ट. कर पाते हैं।. तो आपकी जो एक्सपोर्ट अर्निंग्स हैं अगर.
आप देखिए अभी आपके कितना है 780 बिलियन. आपका फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व हो गया है।. आपको याद है 1990 में क्या हालात थे आपके. पास 10 दिन के वो नहीं थे। अभी आपके पास. डेढ़ साल से ऊपर के लिए इंपोर्ट कवर है।. तो ये कुछ इनके फायदे हैं। कुछ इनके. नुकसान है। तो आपको सभी चीजें यह बैलेंस. करनी है। क्योंकि जॉब्स भी क्रिएट करना. आपके लिए बहुत आवश्यक है और केवल इसको.
ट्रेड डेफिसिट के हिसाब से बहुत. इंपॉर्टेंट एलिमेंट है। परंतु केवल ट्रेड. डेफिसिट के हिसाब से आप संबंधों को नहीं. देखिए और देखिए इसको जो ओवरऑल हमारी. इकॉनमी में चाहे हमारे यहां पर जॉब. क्रिएशन में चाहे हमारे एक्सपोर्ट्स में. उनका क्या इसका योगदान है? क्या फायदा है? क्या नुकसान है? और उस पर आपको यह. बैलेंस्ड असेसमेंट करनी पड़ेगी और बैलेंस. तरीके से इसके ऊपर निर्णय लेना पड़ेगा।.
सर 1960 में आपकी क्या एज रही होगी? या मीनिंग आई थिंक इन बिलो 10 बिलो 10. यस लेट मी प्लीज।. मैंने अभी सर ये सवाल इसलिए पूछा क्योंकि. मैंने अभी तिब्बत और दलाई लामा साहब को. लेकर एक पडकास्ट किया था। जी और बचपन से. जो किस्से कहानियां हम सुनते आए हैं उसमें. ये था कि शुरुआत में था हिंदी चीनी. भाई-भाई फिर चाइना ने हम पर अटैक कर दिया।. मुझे कभी समझ नहीं आया ये क्यों किया। फिर. जब वो तिब्बत की कहानी में पढ़ रहा था। सो.
1955 में दलाई लामा साहब इंडिया आए।. उन्होंने नेहरू जी से कहा कि मुझे आप शरण. दे दीजिए। नेहरू जी ने कहा नहीं आप चाइना. से जाकर जो समझौता है उसे एग्री कर लीजिए।. 1958 में वो तिब्बत से निकल कर चले आए।. भागकर फौजी वर्दी पहनकर हिंदुस्तान चले. आए। हिंदुस्तान जो हमेशा से आए हुए लोगों. को शरण देने के लिए जाना जाता है। उसने. शरण दी और उसके कुछ सालों बाद चाइना ने हम. पर अटैक कर दिया। ऐसा जर्नलिस्ट मेरे मन. में ये सवाल आया क्योंकि आप फॉरेन अफेयर्स. बहुत अच्छे से कवर करते हैं। डिप्लोमेट.
रहे हैं। क्या इनमें कोई कनेक्शन हो सकता. है? कि जो हमने तिब्बत या दलाई लामा साहब. को अपने यहां शरण दी और उनके लिए वो एक. सेंसिटिव मामला उनका था इंटरनल पॉलिटिक्स. जिसे वो कहते हैं उसकी वजह से उन्होंने. हमें अटैक किया और उसके बाद से हमारे उनके. रिश्तों में कॉम्प्लिकेशंस आए जो आज तक. नहीं शायद सुधर पाए या ये रिश्ते पहले भी. ऐसे ही थे इंडिया चाइना के। नहीं नहीं कभी. ऐसे नहीं थे। पहले तो देखिए दिस इज़ वही वो. कहते हैं दिस इज़ अ ब्लिप। 1950 के बाद 54. का हमने जो एग्रीमेंट साइन किया उनके पास.
तिबेट का और यह हमने कहा जो वो ऑटोनॉमस. टेरिटरी है बट इट इज बीइंग एडमिनिस्टर्ड. बाय चाइना. उनके कंट्रोल में है बट ऑटोनॉमस टेरिटरी. होना चाहिए परंतु चाइना की जो कमिटमेंट. होती है वो उसके पीछे चला जाता है तिब्बेट. वाज़ नेवर अ पार्ट ऑफ़ चाइना कभी नहीं था और. यह जो उसने लिया है जब हमारा एग्रीमेंट. साइन हुआ 1954 में वो उसके बेसिस पर हुआ. था दैट इट वुड स्टे एस एन ऑटोनमस टेरिटरी.
पर उन्होंने उसके ऊपर कार्वित नहीं किया।. उन्होंने उसको हथिया लिया और हथिया लिया. उसको आप कहते हैं जो वो तिब्बे इज़ अ पार्ट. ऑफ़ चाइना और अब तो यहां तक भी क्लेम करते. हैं आपका अरुणाचल का 93,000 स्क्वायर. कि.मी. एरिया है उसको वो बताते हैं सदर्न. तिबेट। तो मतलब उनका जो गोल पोस्ट है हर. बारी आगे बढ़ता जाता है। उनके डिमांड्स. आगे बढ़ते जाते हैं। क्योंकि जबजब वो. देखते हैं जो उनकी इकोनॉमिक कंडीशन आर्थिक.
स्थिति ज्यादा बेहतर होती जा रही है।. देखिए 1980 में 1990 के दशक में जो भारत. की और चीन की जो अर्थव्यवस्था थी. करीब-करीब जैसी थी। हम्. पर कैपिटा क्योंकि हमारे पॉपुलेशंस भी. काफ़ी एकदम समांतर है तो पर कैपिटा. जीडीबीपी थी। आजकल वह देखिए तो वह पांच. गुना बढ़कर हमसे ज्यादा बढ़कर हो गई।. 1980 में भारत में प्रति व्यक्ति आय जो थी. चीन से ज्यादा हां थोड़ी सी मार्जिनली आई. एम नॉट सॉर्ट ऑफ़ यू नो मतलब हां बॉल पाथ.
फिगर वही है. कंपैरिजन हां जी बॉल पार्क फिगर वही है. परंतु बेसिकली अभी अगर आप देखें तो वो. कहते हैं जो नॉमिनल जीडीपी उनकी पांच गुना. ज्यादा है परंतु अगर आप परचेजिंग पावर. पैरिटी देखिए क्योंकि वो एक बहुत अच्छी. मापदंड है। मेरे विचार से नॉर्मल नॉमिनल. जीडीपी है वो इतना ठीक मापदंड नहीं है। इट. इज द परचेसिंग पावर पैरिटी और उसमें. क्योंकि अभी भी आजकल अगर आप ब्रिक्स की. बात करते हैं हम कहते हैं वो 40% जीडीपी.
है पूरे विश्व की वो परचेसिंग पावर पैरिटी. में है और अगर आप परचेजिंग पावर पैरिटी. में देखेंगे तो भारत की है करीब 167. ट्रिलियन डॉलर और चीन की है करीब 35. ट्रिलियन डॉलर तो मतलब हमारी आधी है परंतु. फिर भी ज्यादा है और और बहुत सारे. क्षेत्रों में चाहे साइंस टेक्नोलॉजी. मिलिट्री पावर पावर नेवल पावर वो उन सब. में चीन ने काफी बढ़ोतरी हासिल वो जो सवाल. सर मैंने पूछा था आपसे कि वो जो एक घटना.
थी क्या उसका एक बड़ा रोल रहा इंडिया. चाइना रिलेशनशिप में. नहीं वो मेरे विचार से. या ये चीन की नियत ही है जिसने ये करवाया. मतलब आज जो रिलेशन खराब हुए हैं. देखिए तिबेट तो एक है मसला है दोनों देशों. के बीच में और क्योंकि भारत ने पनाह दी. हुई है शरण दी हुई है दलाई लामा को तो वो. समझते हैं वो उनको बोलते हैं सेपरेटिस्ट. है स्प्लिटिस्ट है जो वो उनको चीन को. स्प्लिट करना चाहते हैं तिब्बत को अलग. करना चाहते हैं परंतु उन्होंने दलाई लामा.
ने बिल्कुल ठीक साफ शब्दों में कहा है जो. हम इसको स्प्लिट नहीं करना चाहते हम चाहते. हैं जो हमारा कल्चर हमारा लैंग्वेज हमारे. कस्टम्स हमारे ट्रेडिशंस ये सब प्रिजर्व. हो. उनको ऑटोनोमी मिले और वो ऑटोनोमी उनको मिल. नहीं रही है वो उसको सब जिसे कहते हैं. हफिकेशन वहां पर ह जो उनकी अपनी वो है. एथेनिक आइडेंटिटी है उसको यहां पर ले आना. चाहते हैं। जैसे उन्होंने शिनजियांग में. लेकर गए हैं। वीगुर्स है वहां पर मुसलमान.
है। उनको डिस्प्लेस करके हंस को वहां पर. इस्टैब्लिश करना चाहते हैं। ऐसे ही. तिबेटंस को यहां से हटाकर वो अपने आप. इस्टैब्लिश करना चाहते हैं। देखिए चीन का. एक हालांकि उनकी 9 मिलियन स्क्वायर कि.मी. उनका एरिया है। परंतु फिर भी उनका जो. एक्सपेंशनिस्ट माइंडसेट है तो हर जगह हमको. एक्सपेंशन चाहिए। एक उनको इनसिक्योरिटी. है। इनसिक्योरिटी होनी नहीं चाहिए। परंतु.
इनसिक्योरिटी है।. किसकी? जो भी उनके पड़ोसी हैं जो वो दे आर. कंस्पायरिंग अगेंस्ट देम। दे कैन पोज़ अ. थ्रेट अगेंस्ट देम। तो ये और इसीलिए हमको. एक्सपेंड करते जाना चाहिए।. ओके। अभी सर आपने जिक्र किया ब्रिक्स का।. हमने देखा कि प्रधानमंत्री मोदी, रूस के. राष्ट्रपति शिजनपिंग साहब सबकी तस्वीरें. निकल कर आती हैं। अब क्योंकि आप डिप्लोमेट. है तो थोड़े हम इनसाइड भी कहानियां निकाल. सकते हैं जो टीवी में शायद नहीं निकाली. जाती हैं। हमने देखा मीटिंग की तस्वीरें.
आई। कैमरा आया, कैमरा बाहर चला गया। आप. ऐसे कई मीटिंग्स में बैठे होंगे। अंदर. मीटिंग्स में क्या होता है? जब इस कद के. दो-तीन नेता मिलते हैं। कौन पहले बात करता. है? कैसे बातें होती हैं? क्या सब कुछ. पहले से डिसाइडेड होता है? जैसे ब्रिक्स. की मुलाकात हमने देखी या पुतिन मोदी जी. मिले या शजनपिंग मोदी जी मिले तो अंदर. क्या होता है? थोड़ा सा इनसाइड हमें. बताइए। आई थिंक ये लोगों को आकर्षित. करेगा। जी देखिए जब बात शुरुआत होती है. तो पहले तो ओपनिंग स्टेटमेंट तो जो होस्ट.
है वो हमेशा देते हैं।. और फिर वो इनवाइट करते हैं अपने जो गेस्ट. हैं जो भी विजिटिंग डिग्नेटरी हैं उनको. बताने के लिए। तो ये तो एक सेट प्रोटोकॉल. है। ऐसी बात नहीं है जो कोई कभी कोई बोले. कभी कोई बोले ऐसी बात नहीं जो होस्ट है वो. पहले अपने ओपनिंग स्टेटमेंट देंगे और. उसमें नॉर्मली मीडिया रहता है और उसके बाद. वो चले जाते हैं।. मुझे इसके बाद वाली कहानी में ज्यादा जी. तो इसके बाद जो होती है तो देन डिपेंडिंग. अपॉन द इशूज़ दे कैन बी वेरी.
नॉर्मली इट इज़ इन वेरी कोडियल टर्म्स। आप. एड्रेस कर रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं।. बाय एंड लार्ज सभी चीजों पर सहमति बनी गई. होती है। आपके जो सीनियर ऑफिशियल्स हैं, आपके जो मिनिस्टर्स हैं। पर कोई दो चार. पांच छह ऐसे पेचीदा मसले होते हैं जिनके. ऊपर एग्रीमेंट नहीं है। दैट इज़ यू नो दैट. इज़ उसमें पॉलिटिकल इनपुट चाहिए। तो वो जो. लीडर्स हैं वो वो बात करते हैं और उसके.
ऊपर वो अ उसका समाधान निकालने का प्रयास. करते हैं। आपने ब्रिक्स के बारे में बात. की जो ये वाली जो एग्रीमेंट्स वगैरह हैं. जो अब ये तो आप कहेंगे 140 पैराग्राफ्स 45. पेजेस किसके पास इतना समय है वो तो आए. वगैरह। तो ये सब दीज़ आर ऑल डन वेल इन. एडवांस अनलेस देयर आर वन और टू क्रिटिकल. इश्यूज जिसके ऊपर सहमति नहीं बन पाई है और.
तब वो उसको अ. बैठकर जिसे कहा जाए रिट्रीट किया जाए या. कुछ उसमें बैठकर. कभी हाइपर होते हैं जैसे दो राष्ट्रपति. बैठे हैं आपस में या एक डिसेंसी हमेशा. मेंटेन रहती है. नहीं बाय एंड लार्ज कोडियलिटी मेंटेन रहती. है बट इफ यू हैव अ पर्सन लाइक अह सॉरी आई. होप आई एम नॉट बीइंग अनडिप्लोमेटिक जो इफ. यू हैव अ पर्सन लाइक मिस्टर ट्रंप इन द. रूम ही के. हां वो तो वो तो कुछ भी कर सकते हैं. वी हैव सीन दैट वीडियो यूक्रेन गव. हां 28 फरवरी को जो उन्होंने कहा जो यू.
हैव नो कार्ड्स एसेट्राइंग इट डजंट टेक. एनीथिंग टू रफल हस फेदर्स परंतु अदरवाइज. दे ट्राई टू मेंटेन डेकोरम प्रोपराइटी बट. देन इफ आई कैन यूज़ दैट एक्सप्रेशन अगर कुछ. करना है यू हैव टू डिलीवर अ टफ मैसेज। द. मैसेजेस आर डिलीिवर्ड। इफ यू हैव टू सर्ट. ऑफ़ यू नो गिव अ रैप ऑन द नकल। और जैसे आप. कहा जाता है यू नो रीड आउट द राइट अटैक टू. दी अदर पार्टी। मतलब आप अपनी रेड लाइंस.
बताना चाहते हैं। तो आप रेडलाइंस बिल्कुल. बताते हैं विदाउट किसी बिना किसी हिचक के।. शी जिनपिंग 10 साल से इंडिया नहीं आए थे।. सात साल सात साल से इंडिया नहीं आए थे। वो. बाहर ही बहुत कम जाते हैं। रूस गए थे हाल. फिलहाल में। इस बार वो इंडिया आए। हालांकि. मोदी जी ने जो उनके लिए डिनर रखा था उस. डिनर को उन्होंने अवॉइड कर दिया। जबकि. वहां पर बाकी लोग थे पुतिन साहब गए थे. बाकी लोग गए थे। क्या यह थकान की वजह से. वाकई में अवॉयड किया जाता है या इसमें भी. कोई मैसेजिंग होती है शामिल। वन सेकंड.
शी जिनपिंग के यहां आने का मकसद क्या था? क्या कहीं और वो मैसेज दे रहे थे या कुछ. अपने लिए सिक्योर कर रहे थे? देखिए जो. पहला आपका प्रश्न है तो उसमें तो देखिए और. कुछ कारण जो रहे हो तो उसको आपको. स्पेकुलेट करना पड़ेगा। परंतु अदरवाइज़ ना. चीन की तरफ़ से कोई ऐसा मैसेजिंग आई है बट. अदरवाइज़ जो ऑर्गेनाइज़र्स की तरफ से है जो. वो थके हुए थे। आई कैन वेल अंडरस्टैंड यू. नो बिकॉज़ दीज़ आर पीपल हु आर.
रीज़नेबली एडवांस्ड इन इयर्स। वो उसी दिन. आए थे। उसके साथ सीधे ही आते हुए वो भारत. मंडलप चले गए। बिल्कुल भी उनको आराम करने. का मौका नहीं मिला और फिर मीटिंग्स वगैरह. चलती रही पूरी दोपहर को पूरी शाम को. तो इसीलिए यू नो दैट इज बिलीवबल जो वो थके. हुए रहे होंगे परंतु. मैसेजिंग देने की भी.
अगर मैसेजिंग देंगे तो क्यों देंगे क्या. देंगे आफ्टर ऑल यहां पर वो आए हैं। दैट इज. अ बिग इनफ मैसेज. जो हम यू नो आपके इनविटेशन पर G20 पर वो. नहीं आए थे। 2023 में जब हम. भेजा था उन्होंने अपना. हां तब वो भेजा था। हालांकि ये देखा जाए. तो पहले के G20 में भी बाली में वो गए थे।. हम. परंतु उसके बाद जो हुए हैं उसमें साउथ. अफ्रीका में नहीं गए थे। हम.
तो इसीलिए वो भी इतना अफ्रंट नहीं लिया. जाना चाहिए जो भाई आपने स्नब किया है या. कुछ किया है। मेरे विचार से जो उन्होंने. मैसेजिंग देना था भारत के लिए. हम. वो उन्होंने यहां पर आकर दे दिया और मैं. एंड दैट इज दैट आई वांट टू रीच आउट टू यू. दैट आई वांट टू नॉर्मलाइज रिलेशंस। अब. आपने पूछा आपका दूसरा प्रश्न है जो वो. क्यों आए थे? किसके लिए मैसेज था? देखिए. एक तो है भारत के साथ जो संबंध है।.
2020 से लेकर 204 तक इतने अच्छे नहीं थे।. 2024 में कजान में बातचीत होनी शुरू हुई. और उन्होंने कहा इन संबंधों को हम आगे. लेकर जाएंगे। नॉर्मलाइज करेंगे और. नॉर्मलाइजेशन का प्रोसेस शुरू भी हो गया।. और उसके बाद हमने देखा है जो रियो में तो. वो नहीं गए थे। पिछले साल ब्रिक्स में तो. वहां पर मुलाकात की बात भी नहीं थी। परंतु. कज़ान में वो आए थे। और फिर चाहे डायरेक्ट. फ्लाइट्स हो, वीजाज हो, कैलाश मानसरोवर हो. वगैरह-वगैरह ये थोड़ा सा नॉर्मलाइजेशन.
प्रोसेस शुरू हो गया। तो आई थिंक बेसिकली. जो उनका आना था वो इसको कंसोलिडेट करना. नॉर्मलाइजेशन क्योंकि आपको यह भी देखना. पड़ेगा जो उनके लिए इकॉनमी के लिए बहुत. महत्वपूर्ण है। भारत बहुत महत्वपूर्ण है।. भारत को वो अपना पीियर नहीं समझे। अपना. बराबर का नहीं समझे। बहुत नीचे का समझे।. दैट्स अनदर थिंग इफ यू वांट वी कैन स्पीक. अबाउट इट। परंतु जो भारत का मार्केट है. उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है।. क्योंकि अब अमेरिका इतना ज्यादा उनका बड़ा.
मार्केट था। अमेरिका में कमी आती जा रही. है। और इंडिया एक स्टेबल और ग्रोइंग. मार्केट है। तो वो महत्वपूर्ण है उनके. लिए। तो यहां पर उसके लिए भी आना जरूरी था. जो ठीक है। बॉर्डर में जो कुछ हो रहा है।. सो इस नॉर्मलाइजेशन को आपको आगे चलते देना. है। चाइना ने सर बीते कुछ सालों में. कोशिशें भी की है। मैं कई सारे अपने. दोस्तों को जानता हूं। कई सारे जर्नलिस्ट. को, कई सारे इन्फ्लुएंसर्स को जिन्हें. बुला बुलाकर वो चाइना ले जाते हैं। घुमाते. हैं, दिखाते हैं। फिर चाहते हैं कि आप.
इंडिया में हमारे बारे में थोड़ी तारीफ. करें। ये बीते कुछ सालों में मैंने कई. सारे इन्फ्लुएंसर्स को, जर्नलिस्ट को ये. करते हुए देखा है। चाइना को इसकी जरूरत. क्या है? नहीं बड़ी जरूरत है। दे वांट अ. यू नो दे वांट टू इमर्ज एज अ बेनवलेंट. पावर। परंतु अगर आप मुझे इजाजत दें मैं. पहले प्रश्न का आपका उत्तर पूरा कर दूं और. उनके लिए केवल भारत का नहीं था। उनको यह. मैसेज अमेरिका को भी देना है। जो आर. रिलेशंस विद इंडिया आप हमारे ऊपर इतना. प्रेशराइज कर रहे हैं। मेरे पास और ऑप्शंस.
हैं।. मोर ऑप्शन. हां। तो मैं हैज कर रहा हूं अपने. रिलेशनशिप को। तो इसीलिए वो जो मैसेजिंग. है और जो आप उस पर भी आ सकते हैं। उनकी जो. वायरल इमेज हुई तीनों की नेक्स्ट क्वेश्चन. मेरा यही था कि वो जो तस्वीर आई कैन रीड. योर माइंड जी वो जो तस्वीर बिकॉज़ वो. तस्वीर. दो सवाल मन में आएगी।. क्या वो कैंडिडेट थी या इतने बड़े लेवल पे. चीजें कैंडिडेट नहीं होती। वो प्रीप्लंड. होती हैं। वो चाहते हैं कि ये तस्वीर. दुनिया में जाए और इसका मैसेज जाए। तो.
मोदी शी जिनपिंग पुतिन हाथ में डालकर चलते. हुए वो तस्वीर जो प्रधानमंत्री मोदी ने. डाली क्या वो कैंडिडेट थी या वो वेल प्लंड. थी जो आप जैसे लोग प्लान करते हैं ताकि. मैसेज कहीं जाए। नहीं वेल प्लंड नहीं थी. बट इट वाज़ इन द इंटरेस्ट ऑफ ऑल थ्री ऑफ़. देम टू अपीयर दैट वे। अब इसकी शुरुआत हुई. तजन में और शुरुआत हुई उसके बाद वो जो कार. राइड भी हुई हम. 45 मिनट की कार राइड वो जो अपनी बटरल. मीटिंग के लिए वहां पर से गए होटल में गए.
उसी को रिपीट किया गया बिशकेक में भी. बिशकेक में भी मुलाकात हुई एंड दे आर. सॉर्ट ऑफ यू नो बहुत ही अच्छा कंफर्ट लेवल. लगा. हम्म. और उस वहां पर भी कार राइड हुई तो यहां पर. भी था टू रिकक्रिएट अ सिस्टम इट वाज़ नॉट. प्लांड इन दैट सेंस परंतु जैसे जब बिकेक. में वो दोनों आ रहे थे और प्रधानमंत्री. मोदी यहां पर खड़े थे और वो आए और दोनों. से उन्होंने हाथ मिलाया। तो बट इट वाज़ इन. द इंटरेस्ट ऑफ ऑल थ्री ऑफ देम। और वो हम.
बात कर सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी के लिए. भी टू सेंड आउट अ मैसेज अगेन टू अमेरिका. जिसकी तरफ से इतना ज्यादा टेरिफ के ऊपर. प्रेशर दिया जा रहा है और जो आप रूस से. तेल लेंगे तो इसके ऊपर इतना प्रेशर. टैक्स लगा देंगे।. 100% टैक्स लगा देंगे। पहले पिछले साल 25%. टैक्स लगा दिया तो कितना पाकिस्तान के साथ. उनके कितने वो संबंध हो रहे हैं। सो, ऑल. दिस इज़ अ प्रेशर अगेंस्ट इंडिया। और अगर. है तो ठीक है, यू नो वी आर ऑल्सो हेजिंग. आवर बेड्स। वी आर आल्सो नॉट डेफिनेटली नॉट.
पुटिंग ऑल आवर एग्स इन दैट बास्केट।. इंडिया, इंडिया, चाइना, रशिया।. इन तीनों के अपने इंटरेस्ट थे। ये बिल्कुल. ठीक बात है। रशिया का उसने पैसा रोक रखा. है। यूक्रेन की पूरी वॉर में दुनिया का. उसका तेल सस्ता कर रखा है। ऊपर से वो भी. खरीदने नहीं दे रहा। चाइना के ऊपर सेंशंस. लगा रहे हैं। इंडिया के साथ टेरिफ टेरिफ. खेल रहे हैं। इन तीनों में सबसे ज्यादा. स्टेक पर किसका है? किसका फायदा सबसे. ज्यादा इस मुलाकात से? ये वाली जो दिल्ली. में मुलाकात. ब्रिक्स वाली।. ब्रिक्स वाली मेरे ख्याल से.
चीन का भी और रूस का भी। रूस क्योंकि वो. चाहता है गुड ऑफिसिसेस ऑफ द यूनाइटेड. स्टेट्स एंड पर्टिकुलरली प्रेसिडेंट ट्रंप. जिससे कि यूक्रेन के साथ हमारी जो बातचीत. हो रही है तो उसमें हमारा हमारी तरफ आप. लेते रह। जैसे कि पिछले एक डेढ़ साल से आप. लेते रहे हैं। प्रेशराइज करते रहे हैं. यूक्रेन के ऊपर। प्रेशराइज करते रहे हैं. यूरोप के ऊपर। जो आप ये टेरिटरी मान जाइए. दे दीजिएगा। सो दिस इज द बेस्ट बेट बिकॉज़. ऑन लैंड जो युद्ध चल रहा है उसमें रूस को.
अभी इतनी कुछ ज्यादा सफलता नहीं मिल रही. है। सो दे नीड द गुड ऑफिसिसेस ऑफ. प्रेसिडेंट ट्रंप। इनके लिए क्योंकि ये. अभी 23 तारीख को वहां पर जा रहे हैं। सो. ही वांट्स अ गुड एटमॉस्फियर। ही डजंट वांट. जो मैं उनको ज्यादा ऑफेंड कर दूं। परंतु. फिर भी उनके पास यह मैसेज जरूर जाना चाहिए. जो मेरे पास मैं औरों के साथ मेरे संबंध. बड़े अच्छे हैं। एंड यू नो आई हैव कार्ड्स.
इन माय हैंड। कार्ड्स इन माय हैंड जो मैं. ईरान को भी दे रहा हूं। टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस वगैरह-वगैरह मैं दे रहा हूं।. और भारत के साथ भी मेरे अच्छे संबंध हैं।. सो डोंट थिंक दैट इंडिया इज ओनली इन योर. कैंप। इंडिया इज इक्वली हैज्ड एस फार एस. आई एम कंसर्न। तो उन दोनों के तो महत्वेंस. है उनके लिए। परंतु हमारे लिए भी बहुतेंस. है। बिकॉज़ आई थिंक हमारी पॉलिसी क्या है? स्ट्रेटेजिक ऑटोनमी की है। हमारी पॉलिसी. है मल्टी एलाइनमेंट की। एंड आई आई डोंट.
थिंक वी वांट टू बी सीन जो हम एक ही उसके. उस कैंप में हैं। और दूसरी बात मेरे लिए. बहुत ये आपके सबसे पहले प्रश्न पर आ जाते. हैं। बहुत महत्वपूर्ण है जो मैं अपने. संबंध चीन के साथ नॉर्मलाइज करके रखूं।. ऐसे कोई प्रोवोकेटिव नहीं होना चाहिए। मैं. पूरी अपनी तरीके अपने जो सोवनिटी है, टेरिटोरियल इंटेग्रिटी है उसको मैं. प्रोटेक्ट करूंगा। बट अदरवाइज आई विल सी.
हाउ आई कैन टेक एडवांटेज ऑफ अ ग्रोइंग. चाइनीस इकॉनमी। खैर ब्रिक्स की तस्वीरों. ने मैसेजिंग कर दी। लेकिन जैसा कह रहे हो. कहता है कि आप चाइना पर कभी आंख मूंद के. भरोसा नहीं कर सकते। नहीं आंख खोल के भी. भरोसा नहीं कर सकते। आपको आंख खोल कर रखनी. पड़ेगी। दिमाग खोल कर रखना पड़ेगा। आपके. कान खोल कर रखने पड़ेंगे। एवरीवेयर यू हैव. टू बी सर्क एंड चौकन्ना। अगले 5 साल में. चाइना गलवान जैसी हिमाकत फिर कर सकता है।.
आप के तजुर्ब से कर सकता है। बट आई थिंक. वी आर मच बेटर प्रिपयर्ड और चीन ने देख. लिया है दैट इंडिया इज नॉट गोइंग टू बी अ. रोल ओवर। हम. इंडिया ने गलवान में भी दिखा दिया और अभी. जो हम अपना इंफ्रास्ट्रक्चर वहां पर कर. रहे हैं और जो हमारी मिलिट्री. प्रिपयर्डनेस है वो मेरे विचार से काफी. बेहतर हो गई है और हमने ऑब सिंदूर में अब.
जो कुछ भी पाकिस्तान कहे जो कुछ भी चीन. कहे जो उनकी ये इवक सिस्टम्स और उनके. जेट्स वगैरह ने बड़ा अच्छा काम किया पर. उनको अंदरूनी तरीके से मालूम है दैट दे वर. अ बिग फ्लॉप दैट दे कुड रियली वि स्टैंड. खाली वो केवल S400 और ब्रह्मोस की बात. नहीं थी पर हमारे जो अपने इंडीजीनसली. डेवलप्ड सिस्टम्स हैं आकाश तीर. वगैरह-वगैरह तो वो भी उसका भी सामना वो. नहीं कर पाए और उनकी तरफ से जो भी मिसाइल.
आते रहे हम सब उनको रोकते रहे। तो इसीलिए. उनको पता है दैट बट ऑफ कोर्स उनके पास. फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट है। अब सिक्स्थ. जनरेशन की तरफ वो जा रहे हैं। तो. ऑब्वियसली दे हैव एडवांटेजेस परंतु अगर हम. एक लिमिटेड स्कर्मिश करना चाहते हैं। नॉट. एन ऑल आउट वॉर बिकॉज़ वॉलेज तो आपकी. इक्विपमेंट एसेट्स इन एन ऑल आउट. कॉन्फ्लिक्ट जाता है ना। तो मेरे ख्याल से. ऑल आउट कॉन्फ्लिक्ट की तो संभावना तो अगर. बहुत कम. अगर हम बात करें तो चाइना इंडिया टेंशन की.
नेक्स्ट टेंशन लद्दाख में हो सकती है या. अरुणांचल जिस पर चीन बार-बार दावा करता है. मेरे विचार से लद्दाख में ही होगी क्योंकि. उनकी जो स्ट्रेटेजिक इंटरेस्ट है. हम. शुभांकर वो वहां पर है ज्यादा. हम. वो है वेस्टर्न सेक्टर में ईस्टर्न लद्दाख. में वो उनका वहां पर है तो यहां पर अगर वो. लेंगे यहां पर वो लैंड ले लेंगे आपको याद. है 1962 में भी वो आए थे. लैंड काफी लिया. परंतु फिर वापस चले गए बिकॉज़ दे वर नॉट एट. दैट टाइम दे वर नॉट एबल टू होल्ड ऑन टू.
इट।. तो अभी भी जो स्ट्रेटेजिक वैल्यू है. वो उनके लिए जो लद्दाख का सेक्टर है मेरे. विचार से वहीं पर है।. सर 1962 का आपने जिक्र किया। बहुत सारे. लोग ये कहते हैं कि हमें बचपन से पढ़ाया. गया कि हम हार गए थे। हमें उसके आगे कहानी. नहीं सुनाई गई। 1967 में नाथूला में भारत. ने चीन ने करीब 340 सैनिक मारे थे। 1986. में भी हमारे जनरल जो थे सुंदर जी. उन्होंने काफी परेशान किया था. सुंदरंगच में. जी. उसके बाद गलवान हमने देखा और बहुत सारे.
भारतीय वीरता के भी किस्से हैं हमारे. दिमाग में एक डर डाल दिया गया कि चाइना. हमसे बड़ा है हम उससे हार गए थे और वो फिर. आएगा तो हमें हरा सकता है और ये इंडिया. में अगर मैं एक रैंडम बच्चे से पूछूं तो. उसके दिमाग में परसेप्शन है। ये क्यों है? ये बाकी जो किस्से हमने बताए वो क्यों. नहीं? हमने 1967 में उनके 340 सैनिक मारे. थे। हमारे 88 शहीद हुए थे। 1986 का मैंने. एग्जांपल दिया कि जहां पर जनरल सुंदर जी. ने रातोंरात हेलीकॉप्टर से पूरी ब्रिगेड. उतार कर चीन को पीछे धकेल दिया था और ये.
सात साल तक. हम. फेस ऑफ चलता रहा उसमें। देखिए ये नैरेटिव. की बात है और यही जो हम बात कर रहे हैं ना. अबाउट ऑप्टिक्स की. तो उसी से नैरेटिव्स बनते हैं. हम. और इसीलिए नैरेटिव्स बनाने में चीन काफी. माहिर है और वही उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर. में किया है जो उनका सीसीटीवी ये अपना. चाइनीस टीवी है उनका सीजीटीए है. वगैरह-वगैरह वो सभी वो मिलकर पाकिस्तान. मिलकर अ टर्की के टीआरटी मिलकर अज़रबजान का.
तो वो उसको एकदम एंपलीफाई कर देते हैं।. सो एवरीवन स्टार्ट्स बिलीविंग और फिर बाद. में अगर आप कोई इसको हिस्ट्री में देखेगा. उसको. यू नो दे विल ट्राई टू फाइंड आउट क्या. एक्चुअली हुआ तो यही वाली रिपोर्ट्स बाहर. आएंगी। तो एवरीवन स्टार्ट बिलीविंग जो ये. है। तो इसीलिए. मीडिया का और जो कुछ आता है उसको हमेशा. उसको देखते रहना और ठीक करते रहना। दैट्स. वेरीेंट। बट जैसे एक किस्सा और आता है।.
अगस्त 2020 में इंडियंस आर्मी ने कैलाश. रेंज की चोटियों पर कब्जा किया था। फिर. हमने एक रिपोर्ट पढ़ी कि बाद में इंडिया ने. वो ऊंचाई वाली जमीनें वापस कर दी और उनसे. रिक्वेस्ट की कि फिंगर फोर से फिंगर एट तक. पीछे हट जाए। अब बहुत सारे लोग ये मानते. हैं कि इंडिया के पास नेगोशिएशन पावर उस. वक्त ज्यादा थी। आप चाहते तो थोड़ा सा. अपनी और चीजें कस सकते थे। पुराने इश्यूज. थोड़े कर सकते थे। हमने क्या वहां पर अपने. को इजी कर दिया? एक अपॉर्चुनिटी लूज़ की।. देखिए बात ऐसी है शुभांकर मेरे ज़हन में भी.
यह बातें आई थी उस समय जो हम तो हमारे पास. एक डिसाइडेड एडवांटेज है तो उसका हम पूरा. फायदा क्यों नहीं उठा रहे हैं. पर मैंने बहुत सीनियर ऑफिसर्स से मिलिट्री. ऑफिसर्स से उनसे बात की जो भाई वाज़ इट अ. पॉलिटिकल डिसिशन जो ये सरकार ने आपको कहा. जो हमने करना है बिकॉज़ आई विल नॉट से इजी. वे आउट पर उन्हों तो उन्होंने ओवरऑल स्कीम. ऑफ़ थिंग्स में ये सोचा. पर दे. यू नो पर्सुएडेड दे कन्विंस मी. क्या समझा रहे थे उन्होंने क्या वजह दी.
जो भाई वो ओवरऑल अगर आप हम देखें हम. तो हमारे लिए फायदा था क्योंकि फिंगर फोर. टू एट में बिकॉज़ दे वर आल्सो अर्लियर एबल. टू कम एंड पेट्रोल अप टू फिंगर फोर. हम. अब वो फिंगर फोर और एट में अब वो एट से. आगे नहीं आ सकते हैं।. यू नो हमारे आगे हम नहीं वो जाने और अगर. हम कैलाश की चोटियों पर अगर ऐसा कुछ. वो होता है, आक्रमण होता है। वी कैन अगेन.
गो एंड ऑक्युपाई देम। दैट वाज़ द आर्गुमेंट. दैट वाज़ गिवन। बट जैसे ये डिप्लोमेटिक. मीटिंग्स होती है। जैसे ब्रिक्स की मीटिंग. हुई या जब फौजियों की मीटिंग होती होगी।. जैसे कैलाश स्ट्रेंज का हमने जिक्र किया।. क्या हम इस चीज को लेके स्टैंड नहीं लेते? चीन आज के समय भी अरुणाचल प्रदेश को अपना. बताता है। बार-बार मैप रिलीज़ होता है।. खबरें स्टोरीज प्लांट की जाती हैं। लद्दाख. के अक्साई चीन पर सदियों से कब्जा कर रखा. है। उसको लेकर तो हमें भी लगता है हम भूल. चुके हैं। क्या ये सारी बातें डिप्लोमेटिक. टॉक्स में नहीं आती या आती हैं हम तक पता. नहीं चलती हैं। या इनको लेकर भारत कोशिश.
नहीं कर रहा कि ठीक है अभी और टेंशन है।. जो आपने कहा कि हम चीन को प्रवोक करना. नहीं चाहते। इसलिए इन टॉपिक्स को हम नहीं. उठाते। देखिए मिलिट्री कमांडर्स के कोर. कमांडर्स की जब टॉक्स होती हैं. डिपेंडिंग अपॉन जो उसका एजेंडा क्या है. उसके ऊपर आप बात करेंगे बट अदरवाइज जो. जवाब दिया जाता है अरुणाचल प्रदेश का 93. थाउजेंड. स्क्वायर किमी का अब वो आपने देखा है जो. उन्होंने 27 जगहों के नाम बदल दिए हैं।. टिबटन नाम को हटाकर उन्होंने वो अपने नाम.
बदल दिए हैं। अपने चाइनीस नाम दे दिए।. हमने भी उसको फिर अपने नाम दे दिए हैं। यू. नो मेनी ऑफ़ दी प्लेसेस।. तो वो इतना ज्यादा वो उसमें जब अ. एलएसी डिमार्केशन की बात आती है देन दीज़. इशूज़ आर टेकन अप। परंतु जब ये मिलिट्री. कोर कमांडर्स की आती है तब स्पेसिफिक. एरियाज की क्योंकि जो उनके. दे आर नॉट टॉकिंग अबाउट दी इंडियन. हम. पॉलिसी डिफेंस पॉलिसी आपके साथ क्या जो हो.
रही है वो तो एट दी सेंट्रल लेवल जब बात. होगी जब सेंट्रल गवर्नमेंट्स आर स्पीकिंग. विद ईच अदर आइदर एट द मिलिट्री लेवल और एट. द डिप्लोमेटिक लेवल तब ये वाली सारी बातें. आएंगी क्या हम अक्साइज चेन को भूल चुके. हैं चुके हैं कि छोड़ चुके हैं हम जैसे. पीओके को अगर हमारी सेंसिटिविटी ज्यादा. आती है। हमारे पॉलिटिकल लीडरशिप की तरफ से. एग्रेसिवनेस ज्यादा आती है। वो कई बार. कहते हैं कि हम पीओके को वापस लेके आएंगे।. हम अक्साई चीन को लेके मैंने ये बयान बहुत.
कम सुने या ना के बराबर सुने हैं या दबी. जुबान में सुने दाएं बाएं करते हुए सुन. लिए। क्या भारत ने मन ही मन में अक्साई. चीन को छोड़ दिया है? नहीं मेरे विचार से. तो नहीं छोड़ा है बट यू नो एक बात होती है. पॉलिसी की एक बात होती है प्रैक्टिकिटी की. और मेरे विचार से प्रैक्टिकिटी अब कितने. 1962 से अक्साई चीन उनके उसमें है. हमको तो ये भी नहीं पता चला जो जब. उन्होंने रेलवे लाइन बना ली अक्साई चीन के. बीच में से तो यू नो एट दैट टाइम इट वाज़.
हार्डली अंडर आवर कंट्रोल नॉमिनली नोशनली. इट वाज़ अंडर आवर कंट्रोल इट इट वाज़ अ. पार्ट ऑफ़ द इंडियन टेरिटरी। बट अदरवाइज वी. हैड नो कंट्रोल ओवर इट फिजिकली। तो हमारे. कोई लोग नहीं थे। आपको जब रेलवे लाइन लेके. गए तब भी आपको उसके बारे में पता नहीं. चला। परंतु आई थिंक एट दी पॉलिटिकल लेवल. ये बिल्कुल भारत का अंग है। आप उसमें मैप. में देखिए जो हम हमेशा अक्साई चिन्ह को भी.
अपना वो पार्ट दिखाते हैं। तो. 38,000 कि.मी. 38000 वर्ग किलोमीटर. हां 38500 नहीं पर उसके साथ अगर आप वो. देखिए शक्सगाम वैली भी है. हम. 6000 स्क्वायर किमी 1963 में पाकिस्तान ने. वो चीन को दे दिया तो यू सी देयर आर मेनी. ऑफ़ दीज़. आउटस्टैंडिंग इशूज़ तो केवल अक्साई चीन. नहीं है। शख्सगाम है। अब मोर रिसेंटली. उन्होंने अरुणाचल का उसको कहा है जो ये.
साउथ तिबेट है। सो यू हैव टू पर्स एट. एव्री लेवल डिप्लोमेटिक लेवल एट मिलिट्री. लेवल इंक्रीस योर प्रिपयर्डनेस पहले तो. आपको याद है जो तब के रक्षा मंत्री ए के. एंटनी साहब ने क्या कहा था जो हम फॉरवर्ड. एरियाज में इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनाएंगे. अगर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएंगे दैट विल बी. यूज्ड बाय आवर एडवर्सरी बाय आवर एनिमी वो. हमारी तरफ वो आ जाएगा तो इसीलिए हम. बिल्कुल उसको अनडवप्ड रखेंगे अब तो. बिल्कुल ही इसका 180° हमने कर दिया है जो.
उसको हम डेवलप करेंगे और वहां पर अपने. लोगों को भी स्थापित करेंगे जिससे कि वो. निगरानी भी बनी रहे और उसका उसकी जो क्या. वैल्यू है बिकॉज़ वैल्यू इज नॉट जो भाई. जमीन है हमारे पास है।. सही बात है।. सर मेरे मन में हमेशा एक सवाल आता है कि. अमेरिका और चाइना में दुश्मनी है।. लेकिन जब पाकिस्तान की बारी आती है तो. पाकिस्तान का साथ अमेरिका भी देता है।. हमने जितनी वॉर देखी हर बार सारी वॉर में.
अमेरिका एट द एंड ऑफ द डे पाकिस्तान के. आसपास खड़ा होता है या वो स्टैंड लेता है. जो हिंदुस्तान को चुभने वाला या इरिटेट. करने वाला होता है। चाइना का हमने देखा भी. ऑपरेशन सिंदूर में जिसको आपने आपने भी कहा. कि सारे बेकार हथियार उनको पकड़ा दिए थे।. दो दुश्मन पाकिस्तान के दोस्त कैसे आते. हैं इंडिया के खिलाफ? अच्छा देखिए पहली. बात तो मैं यह कहूंगा जो मेरे विचार से. अमेरिका चीन का दुश्मन नहीं है। यह आपका. पहला कमेंट था जो वो उसका दुश्मन है। नहीं. मेरे विचार से दुश्मन नहीं है। इतनी. ज़्यादा डिपेंडेंस है क्योंकि अगर आप देखें.
करीब जो आखिरी स्टैटिस्टिक्स थे करीब 500. बिलियन डॉलर का सामान इंपोर्ट होता है चीन. से अमेरिका में और 100 बिलियन डॉलर के. आसपास अमेरिका एक्सपोर्ट करता है। मतलब. 400 बिलियन डॉलर का ट्रेड डेफिसिट है. अमेरिका का। तो डिपेंडेंस एक दूसरे के ऊपर. बहुत ज्यादा है और अब तो डिपेंडेंस इतनी. ज्यादा हो गई है वो रेयर अर्थ मिनरल्स.
इन्होंने कहा था हम आपको एनवीडिया चिप्स. नहीं देंगे। उन्होंने कहा हम आपका रेयर. अर्थ मिनरल्स नहीं देंगे। सो अमेरिका हैड. रियली टू सॉर्ट ऑफ यू नो क्लाइम डाउन। तो. इसीलिए वो दुश्मनी मोल नहीं ले सकते हैं।. वो भी बातचीत करते रहेंगे और तभी आपने. देखा होगा चाहे उनकी मुलाकात हुई हो साउथ. कोरिया में और कैसे राष्ट्रपति ट्रंप कैसे. डिफरेंशियल थे शी जिनपिंग के सामने। मतलब. एक आपने तस्वीर देखी होगी। वो दोनों. मीटिंग से बाहर निकल कर आए हैं और.
राष्ट्रपति ट्रंप अपना हाथ बढ़ाते हैं. बिकॉज़ दे आर डिपार्टिंग और शीजन पिंग बिना. देखे अपना गाड़ी में बैठकर चले जाते हैं।. तो दोनों का की जरूरत एक दूसरे में है और. इसीलिए वो इतने एक्साइटेड थे जब अभी चीन. गए थे कुछ महीने पहले। अभी वह कितने. एक्साइटेड हैं जो शी जिनपिंग आ रहे हैं।. परंतु शी जिनपिंग को भी वहां से वहां का. मार्केट चाहिए। हम. और वह नहीं चाहते जो ताइवान के लिए वो.
अमेरिका. इतनी कुछ सहायता करे क्योंकि वो कहते हैं. ताइवान तो हमको लेना ही है।. तो चाइना अमेरिका शुड नॉट गेट इनवॉल्वड इन. इट इन एनी कॉन्फ्रंटेशनल काइनेटिक. मिलिट्री मैनर। तो इसीलिए वो भी चाहते हैं. जो हम संबंधों को ऐसा रखें एडवर्सियल नहीं. बनाएं। परंतु वो दुश्मन नहीं है। परंतु. दूसरा आपका सवाल था जो पाकिस्तान. पाकिस्तान केक्स्ट में. देखिए पाकिस्तान की जो ज्योग्राफिकल.
पोजीशन है एक चीज वो है। दूसरा है. पाकिस्तान ने हमेशा अपने को अवेलेबल किया. है। जिसे कहा जाए टू द हाईएस्ट बडर।. जब भी जरूरत पड़ी अमेरिका को. यू पे वी मोर हैव मी।. हां तो अपना ठीक है। हम अपने यू नो वी विल. ऑफर आवर सर्विसेस टू यू। और वो ऑफर करते. हैं। तो उधर जब अफगानिस्तान में थे सोवियत. यूनियन के ट्रूप्स थे। तो ठीक है हमने. दिया। आप उनको वही तो इन्होंने कहा था ये.
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने। हम. जो जब तालिबान भी थी वहां पर जो हमने आपको. 33 बिलियन डॉलर दिए हैं पिछले कुछ सालों. में जिससे कि आप आतंकवाद से लड़ पाए लड़े. हमारे जो आतंकी हैं वहां पर परंतु आप. उन्हीं को पनाह दे रहे हैं और आपने यह. सोचा हुआ आप देखिए उसमें सीन फर्स्ट जनवरी. 2018 का उनका जो ट्वीट है और यह वाले जो. है आप हमको बेवकूफ बना रहे हैं और अब ऐसी. बेवकूफी हमको आप नहीं बनाए कि ये अब और.
आगे नहीं चलेगा। तो उनको मालूम है। परंतु. अभी राष्ट्रपति ट्रंप के बारे में तो. देखिए उनके लिए मेरे विचार से कुछ और भी. चीजें इसमें आ गई हैं। एक तो यूटिलिटी ऑफ. पाकिस्तान अगर वो ईरान के विरुद्ध कुछ. करना चाहते हैं या कुछ और तो उनको वहां पर. उन्होंने कहा है क्रिप्टो करेंसी के लिए।. उनकी अपनी फैमिली है थोड़ी वो उनके साथ. बिजनेस डील्स कर लेंगे। कुछ क्रिटिकल.
मिनरल्स हैं वो वहां से उनको मिल जाएंगे।. सो आई थिंक दीज़ आर कैरेट्स. दैट पाकिस्तान इज डेंगलिंग इन फ्रंट ऑफ. मिस्टर ट्रंप जिससे कि वो उनकी तरफ थोड़ा. वो करें। और फिर दूसरा यहां पर अह ईरान के. मामले में दे आर विलिंग टू डू देयर. बिटिंग। एस फार ऐज़ चाइना इज़ कंसर्न। देखिए. चाइना के लिए इट इज अ वेरी गुड पपेट जो वो.
भारत को विरुद्ध कुछ भी करवाना चाहता है. तो वो पाकिस्तान के थ्रू करवा सकता है।. इट्स अ वेरी कन्वीनिएंट इंस्ट्रूमेंट उसके. पास अवेलेबल है। और दूसरा स्ट्रेटेजिकली. आपको वार्मर्स ऑफ अरेबियन सी चाहिए। तो आप. वहां से सीपक कर रहे हैं। वहां से आप ला. रहे हैं। ग्वादर तक आप पहुंच रहे हैं वहां. पर। अर्थ मिनरल भी पाकिस्तान से निकाल रहे. हैं वो।. वही मैं कह रहा हूं बलूचिस्तान में। तो द.
पॉइंट इज जो अगर आपके चोक पॉइंट्स स्ट्रेट. ऑफ मलाका वहां से आपका जो ऑयल जाता है अगर. उधर से जाना बंद हो जाता है तो ये वाला. आपका एक लाइफ लाइन बन सकता है। तो इसीलिए. हर एक के अपने-अपने. मतलब है अपना-अपना हित है। ये नहीं है जो. पाकिस्तान की डिप्लोमेसी इतनी वो. अच्छी है, मैच्योर है। बट इट ऑफर्स इट्स. सर्विसेस टू दी अह दोज़ हु आर इन द.
मार्केट। और वह और फिर आखिर में अमेरिका. के लिए तो बड़ा देश है, मुस्लिम देश है, न्यूक्लियर वेपन्स हैं। सो हमको कुछ ना. कुछ वर्किंग रिलेशनशिप, पॉजिटिव. रिलेशनशिप। बट जैसे ऑपरेशन सिंदूर की बात. करें सर। ऑपरेशन सिंदूर में एक चीज जो. बहुत सारे एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाया. कि भारत का साथ ऑफिशियली देने के लिए. दुनिया के मुल्कों ने आवाज नहीं उठाई।. पाकिस्तान के लिए फिर भी उनके चार पांच छह. दोस्त टर्की आ गया, चाइना था और कई मुल्क.
थे जो हमेशा पाकिस्तान के लिए ओपनली खड़े. रहते हैं कि यह हमारा दोस्त है।. भारत सबसे रिश्ते बना रहा है। हम किसी की. साइड नहीं है। बट वो जो ओपन वॉइसेस आती. हैं युद्ध के समय, टेंशन के समय कि हम. भारत की तरफ खड़े हुए हैं। रूस के अलावा. हमें कोई दिखाई नहीं पड़ता। या इजराइल अप. टू सम एक्सटेंट अगर हम कह लें कि उनके. अलावा हमें कोई दिखाई नहीं पड़ता। यह. इंडियन फॉरेन पॉलिसी की कमजोरी है या वो. जो न्यूट्रल स्टैंड हमारा है यह उसी का.
रिजल्ट है? देखिए मैं समझता हूं यह न्यूट्रल स्टैंड. नहीं है क्योंकि न्यूट्रल तब था जबकि आप. नॉन एलाइनमेंट करते थे। अभी आपकी पॉलिसी. जैसे हम बात कर रहे थे मल्टी एलाइनमेंट की. है। स्ट्रेटेजिक ऑटोनमी की है। मैं नहीं. समझता हूं जो ये कोई वीकनेस है। क्योंकि. जब बड़ी पावर्स ऐसे होती हैं यू नो आई. थिंक इंडिया इज़ नाउ अ मैच्योर स्ट्रांग. पावर। इट कैन टेक केयर ऑफ इट्स ओन. इंटरेस्ट। हमें और देशों की इतने यू नो अ. अगर वो कहें जो हम आपके साथ हैं। अगर वो.
कहें जो हम आपके साथ नहीं हैं। इट विल नॉट. मेक मच ऑफ अ डिफरेंस जो हम कौन सी नीति. फॉलो करेंगे। कौन सी पॉलिसी हम फॉलो. करेंगे। अपने हितों की हमने रक्षा करनी है. तो वो हम करेंगे। तो ठीक है। ये वाले जो. देश. टेक्नोलॉजी शेयरिंग जैसे टर्की की हम बात. करें। टर्की ने ड्रोन भेज दिए। चाइना ने. अपनी टेक्नोलॉजी दी जिसकी वजह से लोग कहते. हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान. सर्वाइव कर पाया बिकॉज़ ऑफ टर्की एंड चाइना. वो ओपन साथ थे। अपनी फाइनेंसियल सपोर्ट कर.
रहे थे। मिलिट्री सपोर्ट कर रहे थे। हमारे. साथ शायद इजराइल का जिक्र आया था कि उसने. हमें आयरन डोम दिए थे जो हमारे बाद में. बहुत काम आए। हां नहीं तो इसीलिए तो मैं. कह रहा हूं जो अगर यू नो या पाकिस्तान हो. या चीन हो हमको अपनी मिलिट्री. प्रिपयर्डनेस और जो बॉर्डर में. इंफ्रास्ट्रक्चर है उसको ते ठीक करना होगा. उसको बहुत इंप्रूव करना होगा क्योंकि जो. हम. सफलता हासिल कर पाए ऑपरेशन सिंदूर में आगे. चलते हुए तो हमें ये देखना होगा जो उनकी.
कैपेबिलिटीज और ज्यादा बढ़ेंगी पाकिस्तान. की भी और चीन की भी क्योंकि उनके पास पास. जैसे हम बात कर रहे थे फिफ्थ जनरेशन. एयरक्राफ्ट है। अब सिक्स्थ जनरेशन भी बन. जाएगा। हमारे पास तो फोर फोर एंड हाफ. जनरेशन अभी तक है। फिफ्थ जनरेशन की तो अभी. बात ही नहीं हो रही है। और स्क्वाड्स भी. बड़े कम है। आजकल तो हमने देखा है इट इज़. ड्रोंस एंड मिसाइल्स एंड एयरक्राफ्ट्स. व्हिच विल सॉर्ट ऑफ यू नो आपकी सहायता. करेंगे। तो इसीलिए हमको अपनी प्रिपयर्डनेस.
को और ज्यादा बढ़ाना पड़ेगा। प्रिपयर्डनेस. अगर आपको बढ़ानी है तो आपकी इकोनॉमिक. हेफ्ट को बढ़ाना पड़ेगा। तो अभी तक तो ठीक. चल रहा है।. परंतु आई थिंक आगे चलते हुए ये इकोनॉमिक. खाली जीडीपी ग्रोथ को हमें नहीं देखना है।. और हमें अपनी. जॉब अपोरर्चुनिटीज डिसेंट जॉब्स दे हैव टू. बी प्रोवाइडेड। वो प्रोवाइड हम कर सकते. हैं मैन्युफैक्चरिंग से। और वही हम पीछे आ. जाते हैं जो हम मैन्युफैक्चरिंग को कैसे.
बढ़ावा दे सकते हैं। यहां पर इन्वेस्टमेंट. लाएंगे। यहां पर ज्यादा प्रोडक्शन लाएंगे।. आपने तैयारी की बात की। चीन चाइना जो है. वो अरुणांचल की सीमा से 30 कि.मी. पहले. दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है।. जिसे लोग पानी का बम भी कह रहे हैं। कई. लोग कह रहे हैं कि अगर कल को चीन ने बाढ़. के वक्त पानी छोड़ दिया या सूखे में रोक. लिया तो भारत को बहुत समस्याएं हो जाएंगी।. बिजली उत्पादन जो है उनका तीन गुना बढ़. जाएगा। इससे यह अरुणाचल का पानी है। भारत.
का पानी है। चाइना इस्तेमाल कर रहा है। इन. तैयारियों की तैयारियां भारत कर रहा है।. जी बिल्कुल देखिए ये वाला जो आप बता रहे. हैं मिडग डैम है जो कि वो पिछले साल. उन्होंने बनाना शुरू किया है। मेरे विचार. से भारत को और बांग्लादेश को भी. और ये वाले जो बातें हैं केवल बटरल लेवल. पर नहीं परंतु इंटरनेशनल ग्लोबल लेवल पर. इन बातों को उठाना चाहिए जो यह अह और अभी.
जो नेपाल में हुआ है वहां पर जो इतना. ज्यादा सैलाब आया है इतना ज्यादा वहां पर. ग्लेशियर. टूट गया उसकी वजह से इतनी बाढ़ आई और इतने. लोगों की वहां पर जाने गई हैं। तो ऐसे ये. भी सिस्मिक रीजन में है। यह वाला जो बांध. एक स्टडी आई थी जिसमें चाइना के. वैज्ञानिकों ने माना भू वैज्ञानिकों ने कि. इसके नीचे एक सक्रिय भूकंपीय फ़ौल्ट लाइन. है।. जी यही मैं कह रहा हूं जो ये सिस्मिक. फौल्ट लाइन के ऊपर है। तो इसीलिए बहुत ही.
वो अह. असम के लिए खतरनाक हो जाएगा। असम के लिए. खतरनाक मेरे ख्याल से उनके अपने लिए भी. खतरनाक है। परंतु फिर भी वो बिल्कुल ही. इनडिनेटली ऐसी जो डेवलपमेंट्स हैं. इनडिसक्रिमिनेटली वो इसके ऊपर कर रहे हैं।. तो हमको ये वाला मुद्दा उठाना चाहिए केवल. एज आई सेड बटरल लेवल पर नहीं परंतु ग्लोबल. लेवल पर। क्योंकि अब एक चीज और है जो. देखिए अपर राइपेरियन और लोअर राइपेरियन. में कैसे वाटर डिस्ट्रीब्यूशन हो। अभी. उसमें इतनी कोई इंटरनेशनल रूल ज्यादा नहीं.
है। यू नो डेफिनेटली जो इतना प्रोपोर्शन. इनको होना चाहिए। हमने तो देखा है जो. इंडसॉटर्स में 1960 में ट्रीटी हुई साइन. हमने 80% दे दिया था। पाकिस्तान को दे. दिया।. जिसको अभी हमने कहा था कि हम अब. हां अब्स में उसको कर दिया है आफ्टर. पैलगाम एंड ऑल दैट।. तो उसको हमने अब्स में कर दिया है और अपने. यहां पर जो हम पहले काम करना चाहते थे और. नहीं कर पा रहे थे। क्योंकि पाकिस्तान. हमेशा उसमें रोड़े अटकाता अटकाता था, अड़ंगे.
लगाता था। तो अब हमने उसको करना शुरू कर. दिया है। परंतु इनका जो है ये जो डैम्स. वहां पर बन रहे हैं थ्री गॉर्जियस डैम है।. अब ये मेडॉग डैम है वगैरह। तो इसमें. बिल्कुल हमारे लिए बहुत मुश्किल है। ये. मीकंग पर भी जो कि साउथ ईस्ट एशिया में. जाती है वो नदी उसमें भी उन्होंने बहुत. डैम्स बनाए हैं। जिनसे कि ये सब जो देश. हैं लाओस है, कंबोडिया है, वियतनाम है।.
इनके लिए बहुत मुश्किल हो गई है। परंतु ये. छोटे देश हैं। अपनी आवाज भी नहीं उठा पाते. हैं। और चीन तो इनको कुछ. जैसे बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव में कुछ ऐसे. प्रोजेक्ट्स बना दिए या कुछ और कर दिया. समथिंग एल्स इन कंसीडरेशन टू द इलिटेटिस्ट. लीडरशिप तो उनके लिए वो कुछ काम कर देते।. हमारे यहां पर सर प्रधानमंत्री अटल बिहारी. वाजपेयी साहब जो थे तो हमेशा कहते थे कि. अपने पड़ोसियों से रिश्ते बना कर रखिए.
क्योंकि आप पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं। अब. जब ये सारी जिओपॉलिटिकल खबरें हम पढ़ते. हैं तो हम देखते हैं कि हमारे पड़ोस में. एक तरफ पाकिस्तान है जिसका बस चले तो क्या. ना कर दे हमारे साथ। श्रीलंका है जो. बर्बाद है और चाइना की गोद में बैठ गया।. चाइना ने इन्वेस्टमेंट कर रखा है। नेपाल. है। अगेन चाइना से रिश्ते बहुत अच्छे हो. गए हैं। एक बांग्लादेश हमारे पास था। उस. पे भी हमने देखे हालात क्या हो गए। भारत. के आसपास के देशों में क्या चाइना की. बढ़ती दखल अंदाजी या चाइना कंट्रोल इंडिया.
के लिए परेशानी का सबब हो सकता है? नहीं नहीं बिल्कुल है। बिल्कुल है जो कि. और ये क्या चाइना ने इंटेंशनली किया है. ये? हां। तो उनका फुटप्रिंट बढ़ता जा रहा है. जिससे कि वो भारत के ऊपर प्रेशर बनाए रखें. जिससे कि भारत पूरे विश्व में जो वो रोल. अदा कर सकता है जो अपना जो कंट्रीब्यूशन. है पूरे ग्लोबल अफेयर्स में वो दे सकता है. वो नहीं देने पाए और यहीं पर सिमट कर रह. जाए। परंतु जो आपने कहा जो श्रीलंका के.
बारे में मैं कहता हूं श्रीलंका के साथ. हमारे संबंध बहुत मधुर हैं। बहुत अच्छे. हैं। ठीक है चीन के साथ भी चीन अब देशों. को पैसा चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए. पैसा चाहिए। चीन की पॉकेट्स बड़ी डीप है।. परंतु फिर भी अगर आप देखें उनके जो अनुराध. सनायक के जो राष्ट्रपति बनकर आए उनकी जो. पहली यात्रा थी वो भारत में थी। उनकी जो. प्रधानमंत्री हरिनी उनकी जो पहली यात्रा. थी वो भारत में थी। उनके जो जिस विदेशी.
नेता को उन्होंने सबसे पहले बुलाया अपने. देश में वो भारत को बुलाया। अभी भी जब. हमारे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वहां पर. गए तो उन्होंने कहा हम अपनी जमीन को भारत. के विरुद्ध नहीं इस्तेमाल करने देंगे।. भारत के विरुद्ध नहीं प्रयोग करने देंगे।. हमको देखिए यही चाहिए बेसिकली जो ये रेड. लाइंस हैं उसको आप पार मत करिएगा और ये. जेवीपी जो उनकी पार्टी है और एेडी जो कि.
राष्ट्रपति हैं. उनके बिल्कुल ही भारत के विरुद्ध थे उनके. स्टंस. हम. अगर आप उनकी जो पार्टी का फिलॉसफी या. आईडियोलॉजी देखिए उनको हमने 180 डिग्री. टर्न किया है। आप मोल्डव्स को देखिए वो भी. जब मोइजू आए थे. मोहम्मद मोइजू वहां के राष्ट्रपति बनकर आए. थे तो वह किस उस पर आए थे कॉल पर आए थे. थ्रो इंडिया आउट इंडिया आउट के कैंपेन पर. उन्होंने लड़ा था अपना इलेक्शन.
और इंडिया आउट के कैंपेन पर वो आए थे बट. टुडे ही हैज़ बिकम वन ऑफ द वैरी गुड. फ्रेंड्स ऑफ इंडिया. बिकॉज़ हमने उनको बता दिया था इंडिया. बॉयकॉट करेगा तो क्या होगा. हां बिल्कुल वी हैव डन गुड कैंपेन आई. रिमेंबर वी आल्सो मेड थ्री फोर वीडियोस. हां नहीं बिलकुल और नहीं बट वी. ऐसा कुछ नहीं कहा हमने बड़ी मैच्योरली. लिया और उनको बुलाया वहां पर प्रधानमंत्री. के जो स्वेरिंग इन सेरेमनी थी और किसी उस. चीज में भी ही टूक हिज ओन टाइम टू विजिट.
इंडिया जैसे अभी हम बता रहे हैं जो. ए के दसन आया कि यहां पर अनुराधा दिसनाय. के हिज फर्स्ट पोर्ट ऑफ कॉल वाज़ दिल्ली. मोहम्मद मेयूजू आई थिंक सातवां या आठवां. देश जो उन्होंने विजिट किया दैट वास. दिल्ली सातवां या आठवां उससे पहले वो अबू. धाबी गए, टर्की गए, चीन गए, सब जगह गए।. बिकॉज़ द मैसेज वाज़ जो हम इंडिया के साथ. रिलेशंस नहीं रखने। वी डिडट गेट ऑफेंडेड।. हमने वी टूक इट इन अ स्ट्राइड। बट टुडे अब.
हालात ऐसे हो गए हैं दैट दे हैव रियलाइज्ड. जो भारत के बिना चारा नहीं है उनका। वही. आप देखिए तालिबान का भी अफगानिस्तान। द. पॉइंट आई एम मेकिंग इज़ जो. नेबर्स के अंदर. जो पॉलिटिक्स है जो पॉलिसीज हैं उसको आप. कंट्रोल नहीं कर सकते हैं। अगर आप कंट्रोल. करने का प्रयास करेंगे तो आपके ऊपर उंगली. उठेगी जो आप तो इंटरफेयर कर रहे हैं वहां. पर।. तो इसीलिए जो बांग्लादेश में है हमने सभी.
कुछ किया। सो दैट यू नो संबंध अच्छे बने. रहे। ऐसा नहीं है जो कोई हमने उन्होंने. हमें फेवरेटिज्म दिखाया। जो कुछ भी काम. हुआ उनके लिए चाहे वो पावर जाति हो चाहे. कनेक्टिविटी हो चाहे पाइप लाइंस हो चाहे. एनर्जी जाति हो सब भारत से गया है उनके. लोगों के फायदे के लिए गया है तो ऐसा नहीं. है दैट दे हैव शोन अस सम फेवर बट जैसे. चाइना ने हमें घेरने की कोशिश की क्या हम. भी कोई ऐसा प्लान करते हैं चाइना को ट्रैप. करने के लिए क्योंकि आपने ये नाम दिया था.
स्ट्रिंग ऑफ पल्स. हम. कि श्रीलंका पाकिस्तान बांग्लादेश. म्यांमार में बंदरगाह बनाकर भारत को घेरना. डर तो लोगों में ये भी है कि हम टोटा या. ग्वादर का भी इस्तेमाल ना हो जाए। बट क्या. इंडिया भी काउंटर के लिए कुछ करता है? देखिए इंडिया ये करेगा जो हमारे संबंध जो. हैं. हम. आई डोंट थिंक वी विल से जो हम उनको काउंटर. कर रहे हैं बिकॉज़ यू नो इट्स वेरी. डिफिकल्ट वो 9 मिलियन स्क्वायर किलोमीटर्स. का एरिया है।. हम. इकॉनमी इतनी बड़ी है वगैरह। इट इज़ डिफिकल्ट. टू कंटेन और एन सर्कल यू नो दैट सॉर्ट ऑफ़.
अ परंतु फिर भी जो पेरिफेरी में उनके देश. हैं. वियतनाम हो, फिलीपींस हो, इंडोनेशिया हो, मलेशिया टू. एन एक्सटेंट वगैरह उनके साथ हम अपने संबंध. बड़े अच्छे बना रहे हैं। मंगोलिया में. आपको याद होगा जो जब प्रधानमंत्री गए थे. 2015 में मेरे ख्याल से गए थे। दैट वाज़ दी. फर्स्ट विजिट बाय एनी इंडियन प्राइम. मिनिस्टर। ओके? फर्स्ट विजिट। तो इसीलिए.
हम जा रहे हैं वहां पर और जब भी. प्रधानमंत्री चीन जाते हैं तो ही नेवर गोज़. एज अ सिंगल विजिट जो अकेले चीन गए और आ गए. वहां से जाएंगे वियतनाम जाएंगे। मैसेजिंग. आल्सो जो हमारे संबंध जो चीन के साथ हैं. वो ऐसा नहीं है दैट दे स्टैंड दे आर सो. वेरी इंपॉर्टेंट सिग्निफिकेंट। हम और. देशों के साथ वो वाली विजिट को कंबाइन. करते हैं। एक बारी जब गए थे तो मेरे ख्याल. से साउथ कोरिया गए थे वहां पर। तो इसीलिए.
और इनके साथ आपने देखा है फिलीपींस को. हमने ब्रह्मोस सप्लाई कर रहे हैं। अब. इंडोनेशिया को भी वियतनाम को भी शायद हो. जाएगा। तो इसीलिए हमारे ये जो संबंध है ये. बन रहे हैं. और दूसरा है आप का क्वाड फॉरमेशन है यू नो. व्हिच इज़ अगेन टू क्रिएट पीस टू इंश्योर. पीस स्टेबिलिटी ट्रंकलिटी इन साउथ चाइना. सी एंड इन दैट एटलीस्ट इन दैट मैरिटाइम. ज़ोन. बट सर अगर जैसे आपने कहा कि हमें आंख खुली.
रखकर चाइना पे नजर रखनी चाहिए क्योंकि. खुली आंख से भी धोखा हो सकता है। हम. 70% दवाइयों का कच्चा माल चाइना से रेयर. अर्थ मटेरियल जो गाड़ी फोन सब में जा रहे. हैं चाइना से चाइना तो बिना लड़े भी हमें. घुटनों पे ला सकता है।. हम TikTok बैन किए बैठे हैं। चाइनीस ऐप के. बैन किए बैठे हैं। कोई मायने हैं उनके. चाइनीस ऐप बैन करने के क्योंकि जो एक्स. इंपोर्ट हमारा है वो भी हमने बढ़ा दिया।. एंड दिस इज़ आफ्टर गलवान। चाइनीस ऐप हमने.
बैन की। यह बढ़ा दिया हमने। आज सबसे बड़ा. व्यापारी साझेदार है। तो बॉयकॉट चाइना फिर. क्या रहेगा? नहीं देखिए बॉयकॉट वही करें. जो कि आप अपने यहां पर बना सकते हैं। जब. आप चीन से खरीदते हैं तो इसका मतलब है जो. आपके एक्सपोर्ट्स भी बढ़ते हैं।. हम. बिकॉज़ जो भी आपकी आती है मशीनरी आती है या. तो आप अपने इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए. उसका इस्तेमाल करते हैं।. हम. या फिर एज रॉ मटेरियल या इंटरमीडिएट्स या.
कॉमोनेंट्स वो बनते हैं जो कि आपके. एक्सपोर्ट में जाते हैं। जब आपके निर्यात. में जाते हैं तो वहां से आपको फायदा होता. है। तो इसीलिए स्मॉल इनपुट हियर गिव्स यू. बेटर एडवांटेज, बेटर बेनिफिट देयर। वो आप. बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। देखिए एपीआई का. भी उस समय कहा गया था जो हम यहां पर और. ज्यादा एपीआई बना सकते हैं और हमको बनाने. चाहिए। आई डोंट नो वहां पर हम कितनी अभी. आगे तक पहुंच पाए हैं। बिकॉज़ आई एम श्योर. इट इज़ नॉट जो आप आज निर्णय ले तो कल आपकी.
प्रोडक्शन शुरू हो जाएगी। परंतु यकीनन. इसके ऊपर काम करना चाहिए। आई एग्री विद यू. ऑन दैट जो हमको यह आइडेंटिफाई करना चाहिए. जो क्या-क्या चीज हम रिप्लेस कर सकते हैं. मे बी एट अ स्लाइटली हायर प्राइस आइदर. मैन्युफैक्चरिंग आवरसेल्व्स और मे बी गेट. डवर्सिफाइंग. कहीं और डिपेंडेंट. कहीं और से आप वियतनाम से ले लीजिए मैंने. उसका उदाहरण दिया वियतनाम से ले लीजिए. फिलीपीन से ले लीजिएगा इंडोनेशिया से. मेक्सिको से ले लीजिएगा अभी जैसे हमको. यहां से मिडिल ईस्ट से वेस्ट एशिया से तेल.
नहीं मिल रहा है. रशिया से ले लिया. हम रशिया से ले हम अमेरिका से ले रहे हैं।. देखिए. वाला तेल. नहीं अमेरिका का अपना तेल भी अपना तेल भी. देखिए बात ऐसी है जो अगर हम अभी 67% ऑफ. माय ऑयल रिक्वायरमेंट्स आर मेट फ्रॉम. रशिया आई अंडरस्टैंड दैट 67%. ऑफ माय एलपीजी रिक्वायरमेंट जो मैं पहले. इंपोर्ट करता था वो अमेरिका से आ रही है।. एलपीजी और एलएनजी उनके पास बहुत अधिक. मात्रा में है। तो वो हम वहां से मंगवा.
रहे हैं। तो इसीलिए थोड़ा सा डिस्टेंस है।. परंतु मेरे मुझे क्या जरूरत है? अभी मुझे. चाहिए जो रिलायबल सप्लाई होनी चाहिए। आई. शुड हैव एक्सेसिबिलिटी। थोड़ा प्राइस मैं. ज्यादा देने के लिए तैयार हूं। बट आई कैन. नॉट अलाउ जो मेरे लोगों की 1.4 बिलियन. पीपल उनकी एनर्जी सिक्योरिटी पर आंच आए।. आपने देखा है जो हमारे यहां दाम इतने कुछ. खास नहीं बढ़े हैं। आपने देखा है जो कोई. ऐसी शॉर्टेजेस नहीं हो पेट्रोल पंप पर.
चाहे वो डीजल की रही हो या पेट्रोल की रही. हो नहीं रही हो और देशों में बहुत ऐसा हुआ. है। बट इंडिया हैज़ बीन एबल टू विस्टैंड. दैट शॉक। और वो इसीलिए तो मैं कह रहा हूं. जो अगर चीन से भी जो हम सामान लेते हैं. थोड़ा अगर महंगा पड़े अपना डोमेस्टिक. प्रोडक्शन या कहीं और से रिसोर्स करना तो. आई थिंक वी शुड डेफिनेटली. सरकारों को इसके लिए जागरूक करना चाहिए. जैसे आप कह रहे हो सोना ना खरीदो. जी. अगर आप इसके लिए भी कहोगे तो आई एम श्योर. देश आपकी बात सुनेगा। बिलकुल। हमने तो.
थालियां बजाई हैं।. नहीं नहीं बिल्कुल बिल्कुल आई थिंक उनका. ये अ. यू नो द राइट इंटेंशन इज़ देयर और ट्रस्ट. लेवल बड़ा हाई है। दैट व्हाटएवर इज़ बीइंग. डन इज़ बीइंग डन फॉर द बेनिफिट ऑफ़ द पीपल।. मतलब ये नहीं सोचते हैं जो. सरकार या प्रधानमंत्री अपने लिए कुछ कर. रहे हैं और देश की जनता की उसमें भलाई. नहीं है तो जो वो कहेंगे उसको. मतलब जो कुछ भी कहते हैं हर घर तिरंगा है. तो वो लग जाता है सब जगह लग जाता है.
हमने कहते हैं हमने थालियां तक बजाई है तो. अगर ये बात भी आएगी तो शायद इस पे हम अमल. करेंगे और बढ़-चढ़ के करेंगे. लेकिन एक सवाल सर एक आम इंडियन के नाते. आता है क्योंकि इस वक्त तो आप 1980 में तो. आप जवान हो गए थे हमारी उम्र के थे. 1980 में भारत की प्रति व्यक्ति आए चीन की. प्रति व्यक्ति आय से ज्यादा थी। दोनों. देशों की अर्थव्यवस्था का साइज लगभग बराबर. था। आज चीन हमसे पांच गुना आगे बढ़ गया।. 45 सालों के अंदर चाइना इतना क्यों डेवलप. कर गया? क्या रीज़ंस थे? और हम क्यों पीछे. रह गए? इसके क्या रीज़न आपके अपने एनालिसिस.
में है। देखिए मेरे एनालिसिस में एक तो. उनका जो इकोनॉमिक सिस्टम है। और एक. क्लोज्ड सिस्टम है बिल्कुल। तो उसकी वजह. से काफी उनके यू नो बड़े स्केल में. उन्होंने प्रोडक्शन शुरू किए और जो. उन्होंने अपने मार्केट को ओपन रखा. इन्वेस्टमेंट के लिए. 1978 में. हां 1978 में उनका शुरुआत हुई डंग जाऊपिंग. के समय से और उन्होंने बिल्कुल अपने को. ओपन रखा इन्वेस्टमेंट भी आया टेक्नोलॉजी.
भी आई मशीनरी भी आई और वहां पर उन्होंने. प्रोड्यूस करना शुरू किया और फिर. प्रोडक्शन क्योंकि मैथ स्केल सेल पर था तो. वहां पर आपने. प्रोडक्शन भी होता गया और आपको मार्केट्स. भी मिलते गए बाहर क्योंकि यू आर एबल टू. प्रोड्यूस एट मच लेसर मोर कंपेटिटिव. प्राइसेस भारत की जो था वहां पर अभी भी. लाइसेंस परमिट राज अगर आप थोड़ा सा ज्यादा. प्रोड्यूस करते हैं आपको पीनलाइज किया. जाएगा तो यू नो दैट कंटिन्यूड टिल दे हैड.
मोर देन 13 इयर्स ऑफ एडवांटेज ओवर अस नंबर. वन. नंबर टू. द होल वर्ल्ड मार्केट वास ओपन एट दैट. टाइम। जब हमने ओपन अप करना शुरू किया. हेटेंटली. टेंटेटिवली इन 1991 तब तक क्लैंप हो गया. था मार्केट्स। तब तक सोवियत यूनियन का. खात्मा हो गया था। सब जगह रेवोलशंस हो रही. थी। एंड यू हैड यूरोपियन यूनियन का वो आ.
गए थे। दैट हैड बिकम फोर्ट्रेस यूरोप जिसे. कहा जाता था। तो इसीलिए आपके पास दे हैव. ग्रोन थ्रू एक्सपोर्ट्स. चाइना दे हैव ग्रोन थ्रू एक्सपोर्ट्स जब. उनके एक्सपोर्ट्स इतने नहीं होने थे 2010. में 2011 में तो तब उनका आप देख रहे हैं. जो इकोनमिक ग्रोथ काफी कम हो गया है। भारत. ने कभी एक्सपोर्ट से अपने को डेवलप नहीं. किया। हमारा हमेशा डोमेस्टिक कंसमशन से.
रहा है। सो हमारी इकोनॉमिक पॉलिसीज जो हैं. वो उसके लिए रही है, जिम्मेदार रही हैं।. एंड आल्सो द टाइमिंग हैज़ आल्सो प्लेड अ. वेरीेंट।. वो जो 1978 में मार्केट खोला उस समय का. समय ग्लोबल दुनिया का और हमने जब खोला तो. दुनिया का समय 13 साल. उसने इतना डिफरेंस क्रिएट कर दिया।. दे वर कॉन्सक्वेंशियल।. हम जिस तरह बढ़ रहे हैं चाइना से कभी आगे. निकल पाएंगे सर।. डिफिकल्ट. या आसपास या आसपास पहुंचेंगे? देखिए मैं. अगले 100 50 सालों में. देखिए मैं ये समझता हूं शुभांग जो हमको.
देखना चाहिए जो व्हाट इज द सॉर्ट ऑफ. क्वालिटी ऑफ़ लाइफ दैट आई कैन गिव टू माय. पीपल और वो प्रधानमंत्री ने कहा है विकसित. भारत. अभी हमारी करीब 4.2 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी. है। 2028 तक हम 5 ट्रिलियन डॉलर हो. जाएंगे।. हम. 2035 तक 10 ट्रिलियन हो जाएंगे। और फिर. आगे चलते हुए अगर बड़ी एस्पिरेशनल है तो. 2047 तक मेरी करीब 30 ट्रिलियन डॉलर या 25.
30 25 तो हो जाएगी। 30 ट्रिलियन डॉलर भी. हम करने का प्रयास कर सकते हैं। तब तक मैं. अपने देश की जनता के लिए एक मिडिल पावर. स्टेटस हो जाएगा। सो आई डोंट थिंक जो हम. चीन की तरह बनेंगे, हम स्वीडन की तरह. बनेंगे, हम स्विट्जरलैंड की तरह बनेंगे या. कैसे बनेंगे। आई थिंक चीन की अपनी बहुत. ज्यादा खामियां हैं। उनकी आप डेमोग्राफिक. डेफिसिट देखिएगा कितना ज्यादा है। आप उनके.
यहां पर देखिए एक सिंगल पॉइंट ऑफ डिसीजन. मेकिंग है। तो उसमें कुछ एडवांटेजेस हैं।. परंतु कुछ चैलेंजेस भी बहुत हैं। और मैं. तो यह देख रहा हूं अपने इंटरेक्शंस में जो. चाइना में एोगेंस बहुत ज्यादा आ गया है।. जब एोगेंस आ जाता है ना लोगों में या. सोसाइटीज में या स्टेट्स में तो वो फिर. उनके फायदे के लिए नहीं होता है। सो आई. थिंक देयर आर लॉट्स ऑफ बिल्कुल आयरन कर्टन.
है। आप बात कर रहे थे वहां पर अंदरूनी. क्या हो रहा है। किसी को नहीं मालूम है।. दैट मींस दैट देयर इज़ अ सेंस ऑफ़. इनसिक्योरिटी. वहां की लीडरशिप में। और अगर एक लीडरशिप. फाउंडर करती है तो यू नो जो उनके पॉलिसीज. हैं उसको कैसे आगे लिया जाएगा। सो आई थिंक. दे हैव लॉट ऑफ वनरेबिलिटीज। दे हैव लॉट ऑफ. बहुत वीक पॉइंट्स हैं और इंडिया की जो.
सोसाइटी है और जो सिस्टम है उसमें ज्यादा. रोबस्टनेस है। सो ऑलदो इन पर कैपिटा. जीडीपी टर्म्स वी माइट नॉट बी एबल टू रीच. वेयरवर दे आर और व्हाटएवर इट इज़ बट अंतु. अगर हम अपने लोगों को वी कैन गिव देम. डिसेंट लिविंग डिसेंट हाउसिंग डिसेंट. एजुकेशन डिसेंट हेल्थ डिसेंट. इंफ्रास्ट्रक्चर फिजिकल सोशल आई थिंक दैट. वुड बी समथिंग दैट वी शुड एस्पायर फॉर.
बट जैसे हमारे यहां पर सर स्टार्टअप की. शुरुआत हुई पिछले कुछ सालों में स्टार्टअप. बहुत हुआ अब भारत के मैक्सिमम जितने. स्टार्टअप है उनमें चीनी कंपनियों का पैसा. लगा हुआ है। आप एटीएम की बात कर लीजिए।. Ola की बात कर लीजिए। BJUS था तो खत्म हो. गया। उसमें पैसा लगा हुआ है। ये फ्यूचर के. हिसाब से ठीक है। नहीं देखिए मेरे ख्याल. से खाली जो मैंने देखा है. ये. व्हाटएवर देयर कंपनीज़ आर बाइट डांस एंड ऑल. दिस अदर्स। मतलब उसमें है बट आपने ये भी.
देखा था जो नोट थ्री प्रेस नोट थ्री आया. था उसमें काफी उसके ऊपर रिस्ट्रिकशंस भी. लगा दी गई हैं। सो वी वांट टू इंश्योर जो. सेंसिटिव सेक्टर्स में उनका इतना ज्यादा. वो नहीं होना चाहिए। इन्वॉल्वमेंट नहीं. होना चाहिए। इन्वेस्टमेंट आता है आने. दीजिएगा। इन्वेस्टमेंट की तो हमें जरूरत. है। इन्वेस्टमेंट जब आएगा पर अगर ऐसे. कंज्यूमर सेक्टर्स में आता है तो उसमें. हमें कोई दिक्कत नहीं है। परंतु.
जगहों पर. हां परंतु जो हमारे लिए स्ट्रेटेजिक. एरियाज हैं सामरिक. वो है स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट्स हैं।. उसमें हमको देखभाल करके वहां से. इन्वेस्टमेंट लाना पड़ेगा। एंड आई थिंक द. गवर्नमेंट इज़ क्वाइट. कॉन्शियस एंड कंसेंशियस। अब एक हिस्ट्री. का क्वेश्चन सर मेरे को बड़ा ये क्वेश्चन. मुझे अच्छा लगता है और हमेशा मेरे मन में. आता है।. जी. ताइवान जिसे चाइना अपना हिस्सा मानता है।. वो ताइवान जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें.
हैं। चाइना उस ताइवान पर हमला क्यों नहीं. करता? किस बात का डर है चाइना को ताइवान. पर कब्जा करने में? मुझे वो कह रहा है कि. यह मेरा ही है। अमेरिका का डर है, जापान. का डर है या ताइवान इतना मजबूत हो गया. अपने आप में कि वो इनसे पंगा ले सकता है।. क्यों नहीं अटैक किया चाइना ने ताइवान पर? देखिए अमेरिका की जो पॉलिसी रही है बड़ी. वो कंस्ट्रक्टिव ए्बिगुटी की रही है। जो. भाई हम अगर ताइवान के ऊपर हमला होगा तो. क्या हम उसकी सहायता के लिए जाएंगे या. नहीं जाएंगे? उनको अस्त्र-शस्त्र तो बड़ी.
मात्रा में दे रहे हैं। बड़े. सोफेस्टिकेटेड. इक्विपमेंट वगैरह दिया जा रहा है। परंतु. ये खुलकर नहीं बोलते हैं जो हम उनकी. सहायता के लिए जाएंगे या नहीं जाएंगे। तो. ये चाइना वो. ऐसा मोल नहीं लेना चाहता जो अगर वो अटैक. करता है तो चीन आ जाए और जापान आ जाए। अब. जापान में मैडम सनाई तकायची आई हैं और. उन्होंने कहा है जो अगर ताइवान के ऊपर. हमला होगा तो हम को बिल्कुल इनवॉल्व होना.
पड़ेगा इसमें। सो दैट क्रिएट्स प्रॉब्लम्स. फॉर देम क्योंकि जापान इज़ नॉट अ पुश ओवर।. ताइवान इज़ आल्सो नॉट अ पुश ओवर। हालांकि. वो बड़ा छोटा वो है। अब उसको वो आप. ब्लॉकेड ही कर दें। मैरिटाइम ब्लॉकेड ही. कर दें तो आप उसको चोक ऑफ कर सकते हैं। सो. ताइवान माइट नॉट प्रेजेंट सच अ अ मेजर. अ यू नो ऑब्सकल एस सच सच क्यों नहीं लेना. चाहते परंतु दूसरी चीज है मेरे विचार से. एक तो पहले ये भी कहा गया था जो दे आर.
एप्रिहेंसिव अबाउट देयर इंटरनेशनल इमेज जो. भाई यू नो हम तो रूल अबाइडिंग है हम तो वो. यूएन चार्टर को ऑलदो दिस इज आवर ओन. टेरिटरी तो हम किसी और देश के ऊपर उसकी. संप्रभता पर हम हमला नहीं बोल रहे हैं। यह. तो अपना वो है हिस्सा है जिसको हम वापस ले. रहे हैं। परंतु फिर भी हम वायलेंस का और. मिलिट्री एक्शन का हम वो नहीं देना चाहते.
हैं। हालांकि मैंने देखा है जो जिस प्रकार. से उन्होंने हांगकांग को अपने साथ मिलाया. है। ड डोंट बोदर अबाउट इंटरनेशनल ओपिनियन।. जो हमें करना है वो हम करेंगे। दैट इज. चाइनास दिस थिंग। परंतु फिर भी मैं समझता. हूं वो चाहते हैं वो अपने ही लोग हैं। हम. तो उनके ऊपर मैं बमबारी करके उनको मैं. क्यों लूं? आई शुड टेक देम पीसफुली।. हालांकि मोर रीसेंटली दे हैव नॉट गिवन अप. दी आईडिया.
जो अगर जरूरत पड़ती है. तो मैं आई कैन यूज़ फॉर क्यों वेट कर रहे. हैं? क्या इंश्योर करना चाह रहे हैं कि. मतलब जापान को टैकल कर लें, अमेरिका को. टैकल कर लें, फिर करें या सही समय या अभी. अपने आपको ग्लोबली अच्छा दिखाना चाह रहे. हैं। गुड बॉय इमेज।. नहीं नहीं वो तो देखिए मेरे ख्याल से वो. चाहते हैं जो अमेरिका इन देयर व्यू इज इन. अ प्रोसेस ऑफ़ टर्मिनल डिक्लाइन। वो. डिक्लाइन हो रहा है उसका। रूस भी यही. समझता है, चीन भी यही समझता है। तो उसको.
और कम होने दो। हम और शक्तिशाली बन रहे. हैं तो हमारा जो डिफरेंस है वह और बढ़ता. जाएगा तो देन इट विल बी मच सिंपलर हमें. पता चल जाएगा दे विल नॉट बी इन अ पोजीशन. टू कम टू दी एड एंड असिस्टेंट. बट देर से सवेरे वो कब्जा कर लेगा ताइवान. पे. हां हां पीसफुली. दैट इज द फर्स्ट प्रेफरेंस प्लान ए अगर वो. प्लान ए नहीं चलता है तो देन आई थिंक बाय. अब 2026 है मे बी बाय 2030 2035 दैट इज द.
टाइम ताइवान चाइना का. हां तो वो कर लेंगे। दैट इज दैट इज देयर. गेम प्लान। अब आगे कुछ और वो होता है।. वैसे यही थॉट रूस को भी था यूक्रेन में सर. हम. कि हम ले आएंगे अपने पास. बट ला नहीं पाए। कई साल हो गया। मे बी दैट. माइट बी अ 2%. यू नो कंट्रीब्यूटर टू देयर थिंकिंग जो. आपको पता ही नहीं चलता है यू नो ये तो. छोटा सा देश है बट देयर दे वुड थिंक ये तो. सभी जो नेटो के देश हैं उसको सहायता कर.
रहे हैं उसको सप्लाई कर रहे हैं और ताइवान. तो इतना दूर है उनसे और भी देशों से मतलब. अमेरिका से भी तो वो क्या सहायता करेंगे. आप जब क्योंकि आप कजाकिस्तान में तीन साल. साल तक राजदूत थे। रूस को आप बहुत अच्छे. से समझते हैं। आपने रूस को देखा समझा जाना. है। जब रूस यूक्रेन वॉर हुई थी। क्या. ईमानदारी से आपको लगा था इतनी लंबी. खींचेगी? ना ना बिल्कुल नहीं। मेरे विचार से देखिए. मुझे नहीं लगता था। मुझे नहीं मालूम था.
परंतु रूस को खुद नहीं मालूम होगा।. क्या एक्सपेक्टेशन था आपका? कितने दिन में. खत्म हो जाएगी उस टाइम? आई थिंक बेसिकली टू वीक्स और 20 डेज. मैक्सिमम। आपको याद होगा जो उस समय 2022. में जब ये शुरुआत हुई थी तो दे एक कतार थी. टैंक्स की 64 कि.मी. आउटसाइड केव और कह थे बस अभी अटैक शुरू हो. रहा है और अभी केव के केव विल फॉल और उधर. से बेलारूस से सब उनके आ जाएंगे। टैंक्स. रोल आउट कर देंगे। उन्होंने वहां पर.
न्यूक्लियर मिसाइल्स भी अपनी तैनात कर दी. हैं वगैरह-वगैरह। पर मेरे विचार से इट इज. क्रेडिट टू दी ब्रेवरी एंड. जी रेिलियंस ऑफ जेलस्की एंड ह पीपल. यूक्रेनियन पीपल क्योंकि आप देखिए जितने. भी थोड़ा बहुत ऑपोजिशन. यू नो रशिया इस आल्सो इन दैट सेंस अ. क्लोज्ड सोसाइटी वहां पर इतनी जो कुछ हो. रहा है बातें नहीं आती हैं और मुझे मालूम.
है जो रूस से बहुत लोग यंगस्टर्स जो कि. टेक्निकली क्वालिफाइड थे वो यहां पर भाग. कर आ गए थे आर्मीनिया में उज़्बेकिस्तान. में जॉर्जिया में कजाकिस्तान में जो वहां. पर कंसक्रिप्शन शुरू हुआ था सितंबर 2022. में परंतु आपको ये कोई इतनी खास आवाजें. यूक्रेन में नहीं सुनाई देती हैं जो यह. युद्ध को बंद कर दिया जाए जिलस्की ने इसको. ठीक डिसीजन नहीं लिया है वगैरह वगैरह आपको.
यह भी याद होगा जो पहले या दूसरे दिन पहले. बोरिस जॉनसन ने और फिर जो बाइडन ने इनको. कहा था जेलिंस्की को आप आइए हम आपको इसालम. दे रहे हैं और उन्होंने कहा था मुझे इसालम. नहीं चाहिए मुझे वेपन्स चाहिए सो ही हैज़. स्टुड बाय दैट और अब तो हालात ऐसे हो गए. हैं पहले तो ऐसे था दैट यू नो रशिया विल. जस्ट रन ओवर वो ईस्टर्न यूक्रेन लेकर. डॉनबास रीजन लेकर इट विल रन ओवर परंतु अब.
तो बिल्कुल स्टेलमेट का हालात हो गया।. रशिया की छवि कमजोर हुई है। इस विचार से. मेरे विचार से. जी बिल्कुल. एक आम माइंडसेट जो था कि रशिया रूथलेस है. कब्जा कर सकता है। ताकतवर है. हम. ये कमजोर हुआ है।. बिल्कुल बिल्कुल और. छवि आपको मालूम है आर्मीनिया जो कि. बिल्कुल इसका सीएसटीओ का मेंबर भी है।. हम. ये.
सिक्योरिटी ट्रेड. ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन का तो वो उधर से बाहर. निकल कर यूरोप की तरफ उसका झुकाव हो रहा. है। यह वाले जो मध्य एशिया के देश थे, सेंट्रल एशिया के जो देश थे, उनके संबंध. ठीक है, अच्छे हैं रूस के साथ। बट स्टिल. दे आर लुकिंग आल्सो फॉर अदर ऑप्शंस। वो भी. अपना डायवर्सिफाई करना चाहते हैं अपने. रिलेशंस को। खाली रूस और चीन के ऊपर. निर्भर नहीं रहना चाहते वो।. ओके। अब सर पाकिस्तान क्योंकि हमारा एक.
पड़ोसी और है और रिसेंट वॉर हुई थी जो हम. लोगों ने देखी। 1999 में हम तो छोटे थे।. ये वाली वॉर हम सब ने अपनी आंखों से देखी।. एक समय तो लग रहा था क्या न्यूक्लियर भी. हो जाएगी। फिर सीज फायर हो गया। ट्रंप. साहब कहते हैं हमने कराया। मोदी साहब हम. लोग यह मानते हैं कि भाई उनको क्रेडिट. लेने का शौक है। लेकिन पहलगाम से भारत ने. क्या सीखा? और अगर अगला पहलगाम होता है. तो क्या होगा? क्योंकि भारत ने जाकर हमला तो कर दिया।.
ओपन फ्रंट वॉर खोल दी। हर जगह पर तबाही. दिखी। तस्वीरें निकल कर आ गई। नूर खान बेस. तबाह हो रहा है। यह तबाह हो रहा है। क्या. पाकिस्तान अगले 10 साल में पहलगाम जैसा. कोई भी गंदा काम करने की हिमाकत कर सकता. है? बिल्कुल कर सकता है। बिल्कुल कर सकता. है। बिकॉज़ आई थिंक वो थोड़ा डिप्लोमेटिकली. अपने को यू नो एंबोल्डन फील कर रहा है।. क्योंकि यहां पर उसने मक्का डिफेंस पैक कर. लिया है। उसने सऊदी अरेबिया के साथ पैक कर.
लिया है। ही इज़ इन द गुड बुक्स ऑफ डोनल्ड. ट्रंप। वो उसको फेवरेट फील्ड मार्शल बोलते. हैं और वो वैसे ही जिहादी उसका माइंडसेट. है और वो कहता है जो हिंदू एंड मुस्लिम्स. कैन नॉट लिव टुगेदर। सो ये तो बिल्कुल ठीक. था जो टू नेशन थ्योरी बिल्कुल ठीक थी बट. टू नेशन थ्योरी तो बिल्कुल एकदम वाज़ पुट. ऑन इट्स हेड जब बांग्लादेश वहां से अलग हो. गया। तो इसीलिए वो यकीनन कर सकता है और. उसके लिए अंदरूनी हालात जो हैं बहुत खराब. हो रहे हैं। आप देखिए वहां पर बलचिस्तान.
में खैबर पख्तून ख्वाह में पीओके में. अफगानिस्तान के साथ ड्यूरेंट लाइन पर सब. जगह उसके लिए दिक्कत हो रही है।. हां सब जगह उसके लिए दिक्कतें हो रही हैं।. और ये वाला जो है मक्का पैक्ट है दैट्स. ओनली ऑन पेपर। आपके. ये सवाल सर हमारे इंडिया बहुत बहुत वायरल. हुआ थे ये सवाल कि सऊदी सऊदी और पाकिस्तान. ने करार कर लिया है। इंडिया पाकिस्तान की. लड़ाई में क्या सऊदी इंडिया से लड़ने. आएगा? नेवर नेवर. तो फिर मक्का पैक का मतलब क्या हुआ?
हां नहीं वो वो वाला देखिए मक्का पैक का. है। मेरे ख्याल से उसका फोकस इज वेस्ट. एशिया। दैट इज आई थिंक व्हाट यू खाली. पाकिस्तान इसको इंडिया सेंट्रिक बताकर देख. रहा है। परंतु बात ऐसी है उसको पैसा मिल. जाएगा सऊदी अरेबिया से थोड़ा अपने को. डेवलप करने के लिए। उसको अपनी डिफेंस. प्रिपयर्डनेस को मिलिट्री हार्डवेयर. एसेट्स को और बढ़ाने के लिए। उसको वेपनरी. मिल जाएगी।. ड्रोंस वगैरह कुछ और बरख्ता ड्रोंस ये वो.
वगैरह टर्की से मिल जाएंगे। परंतु वो पहले. भी मिल रहे थे। ऐसा नहीं है जो वो मक्का. पैक के बाद मिलेंगे उसे उसे पहले भी मिल. रहे थे। सो मे बी थोड़ा सा टेक्नोलॉजी और. आ जाएगी थोड़ा सा वो आ जाएगा। बट अदरवाइज. नीदर मैसेजिंग में परसेप्शन में तो गया ना. कि देखिए सऊदी जो है सऊदी जैसा देश जो. आर्थिक संपन्न है जो यूएस का बड़ा अच्छा. दोस्त है वो इनके साथ खड़ा है। उसने एक. करार कर लिया है कि तुम्हारी लड़ाई हमारी।. पाकिस्तान ने अपना एक नैटो बना लिया है।. जैसे यूक्रेन में देखने को मिला। तो ये सब.
बड़ी बातें मतलब चलती है वो एक मैसेजिंग के. लिए कॉमन इंडिया के मन में जो गांव में. बैठा है उसको लगता है कि अगर हिंदुस्तान. से फिर लड़ाई हुई पाकिस्तान की तो आपकी. सऊदी भी लड़ने आ जाएगा। टर्की तो आ ही रहा. था, चाइना तो आ ही रहा था।. देखिए सऊदी अपनी सिक्योरिटी के लिए. पाकिस्तान के सैनिकों को रखता है। अपनी. रॉयल फैमिली की सिक्योरिटी के लिए वो. पाकिस्तानी. उनके रिश्ते बहुत पुराने हैं। 1950-60 से. हैं। जबकि उनके दत्ते वहां पर दस्ते वहां. पर अह उनकी सिक्योरिटी के लिए हैं। जो.
रॉयल फ़ की सिक्योरिटी के लिए वहां पर दिए. दिए गए उन्होंने। तो इसीलिए वह अह उसके. पास ना तो कोई ऐसी. फौज है. वेयर विद ऑल होंगी पर वो अपने लिए ही है।. अमेरिकन बेसिस में वो वाली लगी हुई है। सो. डेफिनेटली सऊदी अरेबिया इज़ नॉट गोइंग टू. कम।. पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए इंडिया को. या जैसे क्रिकेट हम खेलते हैं। अभी एशिया. कप महिलाओं का जीता तो हाथ नहीं मिलाया।. पुरुषों का वह हाथ नहीं मिलाया हमने। क्या.
पाकिस्तान से बातचीत करनी चाहिए या. पाकिस्तान की अस्थिरता को देखते हुए कि. इमरान खान जेल में पड़े हुए हैं। कोई पूछ. नहीं रहा है। शबाज शरीफ के पास ताकत नहीं. है। आसिम मुनीर के ख्याल अलग रहते हैं। तो. हालात को देखते हुए पाकिस्तान से बात ना. करना ही बेहतर है।. हां मेरे विचार से तो देखिए आपको ऐसे. सोचना चाहिए। हैव वी लॉस्ट एनीथिंग बाय. नॉट टॉकिंग टू पाकिस्तान फॉर द लास्ट कब. से है हमारे एंबेसडर्स वर विड्रॉन इन 2019.
जब ये आर्टिकल 370 खत्म हुआ तो तब. उन्होंने अपने एंबेसडर को विड्रॉ कर लिया।. हमने अपने एंबेसडर को विड्रॉ कर लिया और. उसके पहले ही अ. फरवरी. 2019 में जब बालाकोट हुआ था और पुलवामा तो. उसके बाद से हमारे ताल्लुकात नहीं है. बातचीत नहीं चल रही है. तो आप मुझे बताइए हैव वी लॉस्ट एनीथिंग जो. कुछ हमें नुकसान हुआ है जो हम उससे बात.
नहीं कर रहे हैं अगर उससे पहले हम बात कर. रहे थे 2008 में जो उन्होंने हमला किया था. हमने पहले वो कहा अपना अपना पराक्रम वगैरह. वगैरह वो सब तैयारी की जो हम इसका बदला. लेंगे पर कुछ नहीं किया उसके बाद तो उसके. बाद बातचीत शुरू हो गई उसका कुछ फायदा हुआ. हमें तो मैं तो इसका प्रश्न आपसे पूछूंगा. जो हमें क्या नुकसान हुआ जिससे कि हम. तभी तो कुछ नहीं हमारा अब तो कश्मीर पहले. था कश्मीर के लिए बातचीत करो.
अब वहां भी हमें कोई जरूरत आपकी नहीं है. कोई जरूरत नहीं है खाली उन्हीं की तरफ से. है जो कश्मीर इज स्टिल अ डिस्प्यूटेड. टेरिटरी। अब तो सर्ग्यू गौर वहां पर कहे. गए और उसने कहा इट्स अ वेरीेंट पार्ट ऑफ़. इंडिया। तो यू नो एस फार एस दैट इज. कंसर्न। ऑलदो जो सर्ग गौर कहते हैं उसका. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि हमें. तो मालूम है असलियत क्या है और उसके ऊपर. हम मेंटेन करके रखेंगे। परंतु फिर भी मैं. तो यह कहूंगा जो हमें कोई नुकसान नहीं हुआ. है उनसे नहीं बात करने का। पर.
अगर और अगर अभी इस समय बात करनी शुरू कर. देंगे तो ये समझेंगे कि जो भारत जा रही है. जो भारत दबाव में आ गया जो हम इतने. पावरफुल हो गए हैं हम इतने इन्फ्लुएंशियल. हो गए हैं जो भारत दबाव में आकर हमसे. बातचीत करने लगा है क्या पाकिस्तान टूट. सकता है सर क्योंकि बलूचिस्तान खैबर. पख्तून खवा उदर अफगानिस्तान. हर तरफ से खबरें आ रही है मतलब बार-बार चल. रहा है यहां पे लड़ाई चल रही है यहां. लड़ाई चल रही है यमन में भी सुनाई पड़ने.
क्या आने वाले टाइम में पाकिस्तान से एक. और बांग्लादेश निकल सकता है? देखिए अगर. नेचुरल प्रोसेस हो तो यकीनन टूट सकता है।. परंतु मेरे ख्याल से यह जो बड़ी शक्तियां. हैं यह उसको टूटने नहीं देती हैं। क्योंकि. उसके पास न्यूक्लियर वेपंस हैं। और वहां. पर आतंकी बड़ी मात्रा में हैं। चाहे मसूद. अज़र है, हाफिज सईद है, जैश है, लश्कर है, उनके सारे इतने हैं। तो पता नहीं वहां पर. वो जो न्यूक्लियर मटेरियल है या. न्यूक्लियर एसेट्स हैं वो कहां पर हैं वो.
उनके हाथ पड़ जाए। तो ये जो बड़ी अमेरिका. है और चीन है वगैरह वो उसको टूटने नहीं. देंगे अपने फायदे के लिए पाकिस्तान के. फायदे के लिए नहीं. पर अपने फायदे के लिए वो उसको टूटने नहीं. देंगे. ओके आप सर जब आप लोग की पोस्टिंग होती. होगी अलग-अलग मुल्कों में. आपकी ड्रीम कोई ख्वाहिश थी कि इस मुल्क. में पोस्टिंग हो थोड़ा सा किक ज्यादा है. आनंद ज्यादा आएगा. या आप एंबेसडर जो बहुत सारे आपके कलीग्स. होंगे आप लोग किस मुल्क में पोस्टिंग को.
लेकर सबसे ज्यादा एक्साइटेड होते थे कि. यार यहां जाना चाहिए मुझे।. आई थिंक. पाकिस्तान एक चैलेंज भी है और एक. ओपोरर्चुनिटी भी है। तो मैंने तो नेबर्स. में किया है बांग्लादेश में। जबकि हमारे. संबंध बांग्लादेश के साथ बिल्कुल अच्छे. नहीं थे जब बेगम खालिदा जिया थी वहां पर. और हमारा एक्सेस बड़ा कम था उनके सर्कल्स. में तो वो बड़ा चैलेंजिंग था। तो ये जो जो. भी नेबर्स हैं वो बड़े चैलेंजिंग.
असाइनमेंट्स हैं। तो इसीलिए आप हमेशा. चाहते हैं जो एक नेबर में तो. हम. और भूटान है एक खाली जो कि बहुत ही अच्छी. जगह है। अच्छी पोस्टिंग है। उसमें कोई ऐसा. चुनौती भरी बात नहीं है। परंतु उसमें भी. लोग चाहते हैं क्योंकि नेबर्स आर स्पेशल।. तो नेबर्स तो लोग चाहते हैं और फिर कुछ. अपने. पर्सनल उसके लिए जो.
अगर संबंध अच्छे हैं तो उसमें और आगे ले. जाने के लिए थोड़ा और इंटेंसिटी. और पैशन और एनर्जी देने के लिए आप वहां पर. जाना चाहते हैं जैसे शुरुआत में तो हमारे. यहां पर लैंग्वेज दी जाती है। अभी भी दी. जाती है। उस समय भी दी जाती थी। और उस समय. 1980 में जब मैंने 1978 में ज्वाइन किया. तो उस समय. हमारे संबंध आपको पता है रूस के साथ. सोवियत संघ के साथ सबसे ऊपर थे तो अगर आप.
ऊंचे श्रेणी में हैं तो आप अपनी चॉइस की. लैंग्वेज ले सकते हैं। तो मैंने राशन चूज़. की थी और दो-तीन वैकेंसीज थी राशन के लिए. तो हम वहां पर गए थे जो सब ऊपर के दो-तीन. हमारे कोलीग्स थे फ्रेंड्स थे उन्होंने वो. लिया था तो ये होता है जो जिसके साथ संबंध. अच्छे हैं तो उसमें आपको और ज्यादा. ओपोरर्चुनिटीज मिलेंगे काम करने की और. कंट्रीब्यूट करने की। हम Netflix की सीरीज. देखते हैं तो वहां पर दिखाते हैं कि जो.
एंबेसीज होती हैं उसमें स्पाई का भी एक. रैकेट चलता रहता है। बड़ी कहानियां आती. रहती हैं। ये जिस तरह से दिखाते हैं. एम्बेसीस को फिल्मों में ये रियलिटी के. आसपास होती है।. नहीं नहीं नहीं कोई ऐसा नहीं। मतलब देयर. आर अ डिफरेंट. एजेंसीज आर एंड डब्ल्यू आईबी वगैरह के वो. होते हैं रिप्रेजेंटेटिव्स होते हैं। अभी. मिशंस में नहीं कुछ मिशंस में जो कि. सेंसिटिव मिशंस होती हैं। बट दे बिहेव अह.
मतलब कोई एक्स्ट्रा लीगल या एक्स्ट्रा. जुडिशियल अह ऐसे. मामलों में ज्यादा वो नहीं इन्वॉल्व होते. हैं ज्यादा इंगेज। अभी अफगानिस्तान. क्रिकेट टीम सर इंडिया आई. इंडिया क्रिकेट खेलने के लिए। पहले वो आए. थे इंडिया से खेलने के लिए। अब वो. होस्टिंग नेशन है इंडिया में क्रिकेट. खेलने के लिए। अभी अफगानिस्तान जहां. तालिबान का शासन है। तालिबान जिसने कंधार.
में जहां हमारा जहाज छुड़वाया। तीन. आतंकवादी हमने छोड़े थे। आज वो पाकिस्तान. से लड़ रहा है। ये जो सिनेरियोस बदले हैं।. मैं खुद अफगानिस्तान गया। वहां पर सड़क पर. भी जो आपको लोग मिलेंगे वो इंडिया से. प्यार करते हैं।. उनकी जुबान पर पाकिस्तान से नफरत है और. इंडिया से मोहब्बत है। और ये इसलिए नहीं. कि मुझे वीआईपी ट्रीटमेंट मिला था। मैं जो. रैंडम लोगों से बात कर रहा था। उनके दिल. में इंडिया को लेके एक सॉफ्टनेस है। ये. कैसे परिवर्तन हो गया? और ये पूरा कैसे आप. देख रहे हो? ना ये परिवर्तन नहीं हुआ। देखिए अफगान.
लोगों के दिल में तो भारत हमेशा से बसा. हुआ है। आपको तो याद है काबुलीवाला की. कहानी. जो गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने लिखी थी।. तो हमारे अफगान लोगों के साथ हमारे संबंध. हमेशा अच्छे रहे हैं।. हमेशा और इसीलिए अभी जब वहां पर तालिबान. सरकार भी आई 2021 में तब भी हमने कहा जो. हम वहां पर दवाइयां भेजते जाएंगे। हम. कोविड-19 पेंडेमिक के विरुद्ध जो.
वैक्सीनंस हैं वो भेजते जाएंगे। हमने तो. यहां तक कहा जो 5000 टन गेहूं हम वहां पर. अफगान लोगों के लिए भेजेंगे। तो इसीलिए. भारत के साथ अफगान लोगों का संबंध बड़ा. अच्छा रहा है। तालिबान का नहीं रहा हो।. परंतु अब तालिबान का भी खरीदा परिवर्तन हो. गया है। वो तो जिओपॉलिटिक्स है। वो तो. रियल पॉलिटिक्स है। जो आपको अपने हितों को. आप देखते हैं और हित आपके जहां पर हैं.
उन्हीं के साथ आप अपने संबंधों को. बढ़ाएंगे। अगर आपको याद होगा जो 15 अगस्त. 2021 में जब तालिबान यहां पर आए थे तो. इनके वही जो पाकिस्तान के जो आईएसआई चीफ. थे वो वहां पर गए थे 15 अगस्त को मुझे अभी. तक याद है और होटल में अपना बैठ खड़े होकर. वो चाय पी रहे थे उनसे पूछा आप किस लिए आए. हो हम ट्रेड और कॉमर्स बढ़ाने आए हैं। सो. यू नो मतलब और इतना एोगेंस था जो यह तो.
हमारे अपने ही हैं। दे विल डू आवर बडिंग।. हम जो कुछ उन्हें कहेंगे वही मानेंगे. क्योंकि हमने 20 21 साल इनका साथ दिया है. इनको यहां पर और इमरान खान ने क्या कहा था. वी हैव ब्रोकन द शकल्स ऑफ़ स्लेवरी. गुलाम की गुलामी की जंजीरें हमने तोड़ दी. हैं ये उन्होंने कहा था तो और अब हालात आप. देखिएगा. वो खुद गुलाम बने बैठे हैं. इतना इतना समय नहीं लगता है ये सब मीनिंग. आप सोच आप ये सोच सकते हैं 1945.
में अमेरिका अमेरिका ने हिरशिमा नागासाकी. पर वो बम फेंके एटम बम फेंके और अब सबसे. बड़ा सिक्योरिटी पार्टनर जापान के लिए. अमेरिका है। अगर आप ये जो क्वाड भी अगर आप. कहें जो भई इसको बैलेंस करना है चाइना को. तो क्वाड में द बिगेस्ट पार्टनर इन एक्टर. इन दैट सेंस इज द यूनाइटेड स्टेट्स।. यूनाइटेड स्टेट डोनाल्ड ट्रंप। डॉन्ड. ट्रंप इंडिया के दोस्त हैं, दुश्मन हैं या.
खाटी बिजनेसमैन हैं। आपकी नजर में ट्रंप. साहब के हैं क्योंकि मैं उनकी पर्सनालिटी. के इतने रंग देख चुका हूं। इतने रंगीले. इंसान मुझे कोई और नजर नहीं आता। और एक्स. डिप्लोमेट होने के नाते आप डोनल्ड ट्रंप. को कैसे देखते हैं? उनकी हरकतों को, उनके. उठने बैठने को, उनके स्टेटमेंट को, अपनी. ही बात को पलटने को, फिर मान जाने को, फिर. रूठ जाने को।. देखिए एक तो मैं समझता हूं जो वह अपने. पर्सनल इंटरेस्ट को बड़ा देखते हैं। नेशनल. इंटरेस्ट को भी देखते हैं परंतु अपना.
पर्सनल इंटरेस्ट भी उनके लिए बहुत. महत्वपूर्ण है।. हम. दूसरा अ. जब उनका पहला कार्यकाल था 2017 से लेकर. 2021 तक मैं कहूंगा जो वो भारत और अमेरिका. के संबंधों का. हम. स्वर्णिम काल था। दैट वाज़ अ गोल्डन पीरियड. इन माय व्यू।. और बात कर सकते हैं जो हमारे संबंध जो हैं. बहुत तेजी से आगे बढ़े हैं।. जब ये नमस्ते ट्रंप हाउडी मोदी हो रहा था।. हां नमस्ते ट्रंप हाउडी मोदी.
हग डिप्लोमेसी. हां नहीं हग डिप्लोमेसी तो प्रधानमंत्री. की सभी के साथ रहती है जो भी मतलब वो इवन. विद पुतिन रहती है और लोगों के साथ भी. रहती है। ऐसी बात नहीं है। परंतु इनके साथ. भी थी। पर मेरे विचार से वो हग डिप्लोमेसी. इज़ नॉट ओनली फॉर दैट पर्पस। प्रधानमंत्री. देखते हैं हमारे राष्ट्रीय हित किसके साथ. हैं और हमें अपने पर्सनल संबंधों को किसके. साथ बढ़ाना चाहिए जिससे कि हम हमारे. राष्ट्रीय. व्हाट वेंट रोंग? नहीं आई डोंट थिंक एनीथिंग वेंट रोंग वी.
हैड फुल कॉन्फिडेंस जो जब वो सेकंड टर्म. में आए हैं तो फिर हमारे संबंध अच्छे. होंगे। इसीलिए आपने देखा होगा 13 फरवरी को. पिछले साल हमारे प्रधानमंत्री वहां पर गए।. 21 जनवरी को इन्होंने शपथ ग्रहण की थी और. एक महीने के अंदर-अंदर वहां पर चले गए और. बड़ी अच्छी मुलाकात हुई। तो मेरे ख्याल से. दो-तीन चीजें हुई। एक तो जो ऑपरेशन सिंदूर. के बाद वो ये कहते रहे जो मैंने ये युद्ध.
रुकवाया है।. पीस फायर करवाया था। और उनका ये मानना था, सोचना था जो अगर भारत भी ये मान लेता और. उनको नॉमिनेट करता नोबेल पीस प्राइज के. लिए तो उनको मिल जाता।. तो भारत है जो कि रास्ते का रोड़ा बना है. जो कि उनको नोबेल पीस प्राइज नहीं मिला।. ये उनके फील्ड मार्शल, फेवरेट फील्ड. मार्शल और शहबाज शरीफ ने तो उनको नॉमिनेट. कर दिया। परंतु भारत नहीं माना। तो इसीलिए. उनको नोबेल पीस प्राइज उनके हाथ से चला. गया। दूसरी बात है जो जब उन्होंने फर्स्ट.
अप्रैल लास्ट ईयर अपने लिबरेशन डे टेरिफ्स. लगाए तो सभी जो देश थे चाहे ये उ्सला. वंडरलैंड हो चाहे यूरोपियन यूनियन हो यूके. हो जापान हो साउथ कोरिया हो इंडोनेशिया हो. फिलीपींस हो वियतनाम हो सब ने वो मान लिया. जो मिस्टर ट्रंप उनको डिक्टेट कर रहे थे. जो हमारे प्रोडक्ट्स एक्सेस करेंगे आपके.
मार्केट में ड्यूटी फ्री और आप यहां पर. आएंगे मेरे मार्केट में आएंगे तो मैं 19%. लगाऊंगा मैं 15% लगाऊंगा मैं 21% लगाऊंगा. भारत के साथ भी वो यही चाहते थे भारत ने. मना कर दिया भारत वांटेड अ बैलेंस डील. जिससे कि आप हमारे यहां जो एग्रीकल्चर. प्रोडक्ट्स हैं उसके ऊपर हम अंकुश. लगा कर रखेंगे हमारे जो डेयरी प्रोडक्ट्स. हैं एमएसएमईस हैं हम अपने सेक्टर्स को जो.
हमारे. सेंसिटिव सेक्टर्स हैं, स्ट्रेटेजिक. सेक्टर्स हैं उनको हम प्रोटेक्ट करके. रखेंगे।. वो उनको पसंद नहीं आया जो पूरी दुनिया. मेरे सामने झुकी हुई है और ये झुक नहीं. रहे हैं। बट ये उनका जो एक. ये है एक जो हम हिंदी में कहते हैं कि ना. खाता ना वही जो हमने सोचा वही सही। ये. एटीट्यूड जो उनका है. क्या ये धीरे-धीरे प्रॉब्लमैटिक नहीं होता. जा रहा है? अरे बहुत बहुत जबरदस्त हो रहा है।. जैसे वो. जैसे वो सॉरी जैसे वो ह्यूमिलिएट करते. हैं, इंसल्ट करते हैं। अपनी सारी जो एलाइज.
हैं, अपने सभी जो पार्टनर्स हैं सभी को. उन्होंने अपने विरुद्ध कर दिया है। जी आप. कह जैसे ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति. को उठा दिया। आंख के नीचे एक निशान आया।. वाइफ को उठा ले गए। ग्रीनलैंड पर कब्जे की. बात कही जिससे पूरा यूरोपियन यूनियन. परेशान हो गया। अब कई बार एज अ इंडियन. ख्याल आता है कि अगर डॉन्ड ट्रंप लोग कह. दे कि मैं कश्मीर सॉल्व करूंगा। मान लो. नहीं तो टेरिफ लगा दूंगा। तो ऐसे आई शुड.
नॉट यूज़ दिस वर्ड बट ऐसे साइको बिहेवियर. फॉर फिर एक भारत जैसा देश जिसे अमेरिका से. दोस्ती भी रखनी है। रिश्ता भी बनाना है वो. सुपर पावर देखते हुए वो क्या करेगा? नो. देयर आर लिमिट्स टू कीपिंग अ रिलेशनशिप।. आपको याद होगा जो जब पिछली बार फर्स्ट. टर्म में. उनको जरूरत पड़ी पाकिस्तान की इमरान खान. की तो पहले तो उन्होंने ये वाला ट्वीट. लिखा था जो मैंने आपको बताया फर्स्ट जनवरी. 2018 परंतु फिर 2019 में उन्होंने बुला.
लिया इमरान खान को ओवल ऑफिस में और. क्योंकि वो चाहते थे जो भाई तालिबान से. बात करना उन्होंने कहा पाकिस्तान अच्छा. कडुएट होगा अच्छा. वाया मीडिया होगा तालबान से बात करने का. उन्हीं के थ्रू हम बात करेंगे और फिर ओवल. ऑफिस में बैठकर ऐसे बैठकर उन्होंने कहा जो. मुझे प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है जो आप. कश्मीर के ऊपर मीडिएट करिए और मैं मीडिएट. करने के लिए राजी हूं। तो ये उन्होंने कहा. आप देखिएगा सुन सकते हैं आप उसको। तो.
इसीलिए वो तो ऐसा कहेंगे और हमने कहा यह. तो बटरल मैटर है और इसमें कोई नहीं आएगा।. उनकी स्टेट डिपार्टमेंट ने उनको करेक्ट कर. दिया जो यह बट वो इतने नॉन सीरियस आदमी. हैं। मतलब जिस पद पर वो हैं एक बात कहना. फिर पलट जाना या उनका कहना उनकी टीम में. कुछ और कहना इतनी नॉन सीरियसनेस दुनिया के. सबसे ताकतवर व्यक्ति के उस पद से. ये हंसी ये उनके मुल्क के लोग नहीं. समझाते। उनकी टीम नहीं समझाती जैसे आप लोग.
डिप्लोमेट रहे होंगे। आप भी प्राइम. मिनिस्टर को समझाते होंगे, बताते होंगे।. उनकी टीम रहती होगी। एक प्रॉपर प्लानिंग. होती होगी जो बाकी मुल्कों में नजर आती. है। डॉन्ड ट्रंप के केस में चीजें बड़ी. कैजुअल नजर आती हैं। जो मन किया पोस्ट कर. दिया। मेरा मन नहीं कर रहा मैंने अपना एक. पेज खोल रखा है। वहां का स्क्रीनशॉट मैक्स. पे डाल दूंगा। आज मैं लड़ाई कर रहा हूं. एलॉन मस्क से। वो मुझे बुरा बोल दे रहे. हैं। एक दिन मोदी टफ नेगोशिएटर हैं। एक. दिन मोदी की बुराई कर दी। एक दिन शबाज. शरीफ को महान बना दिया। आसिम मुनीर को उठा. दिया।.
देखिए दो चीजें हैं इसमें। एक तो मेरे. ख्याल से प्रधानमंत्री मोदी के लिए. पर्सनली उन्होंने कभी कोई बुरी बात नहीं. की। उनको हमेशा कहते हैं माय गुड फ्रेंड, ग्रेट लीडर दिस दैट एंड द अदर। कभी वो. मिमिक्री की हो दैट इज़ अनदर थिंग। पर. अदरवाइज कोई ऐसा इंसल्टिंग ह्यूमिलिएटिंग. जैसे उन्होंने मार्कनी के बारे में कहा या. जस्टिन ट्रूडो के बारे में कहा या और. लीडर्स के बारे में कहा। ऐसा प्रधानमंत्री. मोदी के लिए उन्होंने नहीं कहा है। दूसरी. बात उनका जो मागा क्राउड है वो उनका इतना.
कमिटेड सपोर्ट बेस है जो वह और उसमें अह. आई डोंट थिंक दे कैन सी एनीथिंग रॉन्ग एज़. फार एज़ मिस्टर ट्रंप इस इज़ कंसर्न और. तीसरी बात जो वो कहते हैं ही कंसीडर्स. हिमसेल्फ टू बी अ ग्रेट नेगोशिएटर आउट ऑफ. द डील तो ये जो सब है थ्रेटन करना और. बिल्कुल ही अग्रेसिव पोश्चर या स्टांस. लेना और फिर रिट्रीट करना दैट इज सपोज टू.
बी अ पार्ट ऑफ ऑफ ह. स्टाइल. हां स्टाइल तरीका है ये इसमें और ही इज़. एबल टू गेट रिजल्ट्स वही लोग कहते हैं. मैंने तो आपकी बिरादरी से भारत में और और. बहुत जगह सुना है. जो जब उन्होंने वो कहते हैं 38 टाइम्स. उन्होंने कहा दैट ईरान वांट्स टू डू अ डील. विद अस और हम नहीं मान रहे हैं वगैरह एंड. एक्चुअल सिचुएशन लगती है एक्सैक्टली द. रिवर्स तो परंतु वो यही अपना कहते हैं दैट. ही इज़ डूइंग दिस और आप देखते रहिए दो साल.
साल में ही विल हैव कंट्रोल ओवर ईरान। यह. उनका तरीका है बात करने का।. काम करने का। उन्होंने सेम कहानी. ग्रीनलैंड में की। अब ग्रीनलैंड डेनमार्क. का हिस्सा है। डेनमार्क नाटो का हिस्सा. है। नाटो में अमेरिका भी है। क्या नाटो. टूट जाएगा? नहीं हालत है। नहीं मेरे ख्याल से नेटो. नहीं।. तो फिर ग्रीनलैंड पे हमला नहीं होगा।. ना बिल्कुल नहीं। मेरे भी. क्योंकि ट्रंप तो कह रहे थे मुझे दे दो।. नहीं दोगे तो फिर मैं. नहीं वो तो वो उसको भी बता रहे थे जो. कनाडा को 51 स्टेट ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स.
परंतु वो बहुत ही रिट्रीट कर जाते हैं ऐसी. बात नहीं है ही इज़ तो फिर ये स्टेटमेंट. आते क्यों है जैसे कनाडा को 51 स्टेट कहा. ये काफी कंट्रोवर्शियल ट्रूडो के बारे में. तो क्या-क्या उन्होंने कहा वो तो छोड़ ही. देते हैं. ये क्यों कहते हैं फिर वो. नहीं मे बी ये सोचते हैं जो लेट मी ये. काइट फ्लाइंग है. जो मे बी शायद इसका कुछ वो हो जाए. हम. शायद शायद यू नो आई एम एबल टू गेट अ सम. फिनोमिनल एडवांटेज आउट ऑफ इट. या एक थॉट डाल दो कम से थॉट डाल दो।.
कुछ लोगों के मन में चलने लगे।. हां कुछ चलने लगे और शायद इसका कुछ ये पनप. कर हो जाए। अगर नहीं होता तो कोई बात नहीं. छोड़ देंगे इसे। ऐसे ही इन्होंने अब कह. दिया है जो आयरलैंड को यूनिफाई कर दिया. जाना चाहिए। नॉर्थ आयरलैंड और रिपब्लिक ऑफ़. आयरलैंड को इसको यूनिफाई कर दीजिए।. इंग्लैंड टूटेगा सर। आज मैं कहीं पढ़ रहा. था। एक खबर आई थी कि इंग्लैंड में भी. वेल्स और बाकी सब मिल रहे हैं। स्कॉटलैंड. और नॉर्थ आयरलैंड जो वहां पर है कि हम. चाहते हैं एक बार डिस्कशन कम से कम हो कि. हमको इंग्लैंड साथ रहना है या नहीं रहना.
है। एंड देन आई रियलाइज कि अंग्रेजों ने. दुनिया भर को बांटा तोड़ा अब उनके अपने. मुल्क पर आ गया है।. नहीं देखिए स्कॉटलैंड तो बहुत समय से चाह. रहा है जो हम अलग हो जाएं और उनके वहां पर. वो रेफरेंडम भी हुआ था 2014 में। काफी. क्लोज रेफरेंडम था और परंतु उसके बाद अ. कहा कि लंदन के वि परमिशन के बगैर आप नहीं. करोगे रेफरेंडम. हां हां नहीं वो उनको वो तो उनकी. कॉन्स्टिट्यूशन में है जो अगर आप चाहते.
हैं रेफरेंडम करना देन दी सेंट्रल. गवर्नमेंट फेडरल गवर्नमेंट इन लंदन हैज़ टू. परमिट इट और वो अब परमिट नहीं कर रहे हैं. और वो कहते हैं जो क्योंकि इसके बाद राइट. 2014 में इतना अच्छा रिजल्ट नहीं था उनके. लिए परंतु तो 2016 में जब ब्रेक्सिट का. हुआ तो देन दे वोटेड हेवली इन फेवर ऑफ़. स्टेइंग वि द यूरोपियन यूनियन. हम. और. और ओवरऑल ये उनका ब्रेक्सिट हुआ 49 51% तो.
फिर उन्होंने कहा देखिए आप तो बाहर निकल. रहे हैं पर हम रहना चाहते हैं यूरोपियन. यूनियन सो वी नीड अनदर रेफ्रेंडम शैल वी. स्टे विद द यूनाइटेड किंगडम ऑ नॉट तो वो. लंदन ने उनको परमिशन नहीं दी है मेरे. विचार से ये अ ठीक है कुछ बातचीत होती रहे. पर ये हो नहीं पाएगा और हम बात कर सकते. हैं हर एक वेल्स की भी और नॉर्दन आइलैंड. की भी। आई थिंक देयर इज मच ग्रेटर लॉजिक. फॉर देम टू स्टे एस अ पार्ट ऑफ द यूनाइटेड. किंगडम विद इंग्लैंड रादर देन गेट.
सेपरेटेड। आप वाशिंगटन में रहे। यूएस में. बंद कमरे में लोग इंडिया के बारे में क्या. सोचते हैं? पार्टनर या एक बड़ा बाजार और. बीते कुछ सालों में क्या यह नजरिया कुछ. बदला है? इंडिया को देखने का, इंडियंस को देखने का।. आई थिंक जो इमेज है भारत की हम. वो इंक्रीजिंगली पॉजिटिव होती जा रही है।. हम. एक तो हमारा डायस्पोरा जो वहां पर है वो. बड़ा पॉजिटिव रोल प्ले कर रहा है। करीब.
चारप मिलियन है लोग वहां पर. और वहां पर सभी प्रोफेशनल्स हैं। कोई ऐसे. नहीं गए हैं यू नो सेमी स्केल्ड अनस्किल्ड. लेबर नहीं है। सो दे हैव डन वेरी वेल फॉर. देमसेल्व्स। आप जानते हैं ये सभी. मल्टीीनेशनल्स भी जो हैं मेटा Google. Facebook ये वो एडoबे इन सबके जो सीईओस. हैं वो इंडियंस हैं और फिर मेडिकल. प्रोफेशन में और एकेडेमिक्स में तो. इंडियंस आर देयर उन्होंने बड़ा अच्छा वो.
किया है और फिर इंडियन. आई थिंक. इकोनमी का परफॉर्मेंस उन्होंने देखा है जो. जब पूरी दुनिया की इकोनमिक परफॉर्मेंस. ऑलदो दे आर नॉट वेरी हैप्पी जो इंडिया रूस. को सपोर्ट कर रहा है यूक्रेन के अगेंस्ट. दैट इज व्हाट दे थिंक जो हम तेल खरीद रहे. हैं तो यह अच्छी बात नहीं है दैट इज देयर. परसेप्शन और फिर एट दी गवर्नमेंट लेवल तो. आपको याद है जो यहां पर उनके डिप्टी.
सेक्रेटरी आए थे और उन्होंने कहा था जो हम. भारत को ऐसे नहीं डेवलप होने देंगे जैसे. चीन डेवलप होकर हमारा एडवर्सरी बन गया है।. तो हमने कहा जो यह आपके ऊपर निर्भर नहीं. करता है जो भारत कैसे डेवलप करेगा। इट. डिपेंड्स अपॉन इंडिया एंड इंडियन. देमसेल्व्स और हम वी विल कंटिन्यू टू ऑलदो. मीनिंग दे हैव अ कंट्रीब्यूशन टू मेक. जो हमारी क्योंकि चीन को इतना बड़ा बनाना.
इतना ऊंचा बनाना हम बात कर रहे थे उसकी. उसके बारे में मैं नहीं बता पाया वो सभी. कुछ अमेरिका का योगदान है अमेरिका का. कंट्रीब्यूशन है जो चीन. चाइना बड़ा हो गया. हां चीन इतना बड़ा हुआ है इकोनॉमिकली. उन्होंने अपना मार्केट दे दिया पूरा. मार्केट दे दिया और हर हर तरीके से उनको. सपोर्ट किया। टेक्नोलॉजी वगैरह दी और अ. फंडिंग सपोर्ट किया। फाइनेंसियल सपोर्ट. किया। हर तरीके से. उन्हीं की जान के दुश्मन बन गए।. बिल्कुल और तभी वो कह रहे हैं यहां पर इसी.
साल रायसेना डायलॉग में उनके एक सीनियर. ऑफिसर आए थे और उन्होंने ओपनली कहा जो हम. भारत को वैसा डेवलप नहीं होने देंगे। इतने. सहायता नहीं करेंगे। तो वी हैव टू. डवर्सिफाई जो कि हम कर ही रहे हैं।. इंडिया का सबसे सच्चा दोस्त कौन है? इजराइल या फिर रूस? आई थिंक मैं कहूंगा इजराइल भारत का सबसे. अच्छा दोस्त तो अपने आप ही भारत को होना. चाहिए। अपने आप अपने हितों के लिए. और जो कहा जाता है जो अ.
दूसरे देशों के साथ जो संबंध होते हैं तो. वो हितों पर निर्भर करते हैं। वो ये. फ्रेंडशिप पर इतना नहीं निर्भर करते हैं।. तो हमें. बहुत देशों से बहुत. म्यूचुअल बेनिफिट्स के लिए अपना हमें काम. करना है। रूस के साथ एक उसमें हमें काम. करना है।. फ्रांस के साथ एक हमें काम करना है। जापान.
के साथ एक, अमेरिका के साथ एक। तो हर एक. के साथ हमको ऐसे काम करना होगा और अपने. संबंधों को आगे मजबूत करके और आगे बढ़ाना. होगा।. बट सऊदी और यूएई ने भी सर इजराइल से. रिश्ते बेहतर कर लिए। मतलब हम. ये थोड़ा सरप्राइजिंग था।. नहीं यूएई ने तो कर लिया इब्राहिम. अकॉर्ड्स में. और उन्होंने आई टू यू2 में भी कर लिया।. इंडिया इजराइल. यूएई यूएसए उनका है। सऊदी का नहीं हुआ।. सऊदी का आपको याद होगा जो वो बिल्कुल उस.
कगार पर थे जो उनके फॉर्मलाइज हो जाए. डिप्लोमेटिक रिलेशंस जब ये 7 अक्टूबर 2023. का हादसा हुआ। उसके बाद तो सब उसके बाद तो. परंतु. दे वर आल्सो लुकिंग एट इट। क्योंकि आपको. याद होगा जो 9 10 सितंबर को जब यहां पर. G20 की मुलाकात हुई थी तो हमने आईक. कॉरिडोर किया था। इंडिया, मिडिल ईस्ट, यूरोप, इकोनमिक कॉरिडोर और वो जो मिडिल.
ईस्ट का है वो यूएई, सऊदी अरेबिया, इजराइल. और जॉर्डन के थ्रू जाता है। तो मतलब ऑल. दीज़ कंट्रीज वर विलिंग टू कोऑपरेट एंड. कोलैबोरेट विद इजराइल। सर इजराइल एक छोटा. सा देश है जिसने पैलेस्तीन से थोड़ी जमीन. ली फिर लड़ाई थोड़ी जमीन ली थोड़ी जमीन ली. थोड़ी जमीन ली चारों तरफ गल्फ कंट्रीज हैं. चाइना 1950 तक हम पढ़ते हैं कि मां-बाप जो. है वो अपने ही बच्चों को मारे खाने इतनी. इतनी गंदी नौबत भूख की आ गई थी वहां पर.
जापान वहां पर परमाणु बम हो गया ये सारे. मुल्क बड़े हो गए क्या इनके पीछे अमेरिका. है या इन्होंने भी कुछ अपना ऐसा किया. जिससे भारत को सीखने की जरूरत है इनसे।. नहीं बिल्कुल भारत को सीखने की तो जरूर. जरूरत है हर जगह से क्योंकि आपको देखना है. अच्छाइयां कहां पर हैं और देशों में और हर. देश की हम अलग-अलग बात कर सकते हैं। परंतु. उनमें एक नेशनलिज्म, पेट्रियटिज्म वो. भावना, अपने को प्रिजर्व करने की भावना,
अपने को सिक्योर बनाने की भावना, डिवप. करने की भावना, ग्रो करने की भावना। और जब. यू हैव योर बैक टू द वॉल एडवर्सिटी है तो. तब उससे जूझना तो ये बहुत ही तो. तो इन तीन देशों से क्या सीखा क्या सीखना. चाहिए भारत को जापान जहां पर परमाणु बम. गिरा. इजराइल जिसका अस्तित्व ही नहीं था कुछ 100. साल पहले 150 साल पहले और चाइना जो भारत. से भी नीचे था और एक समय भुखमरी कगार पर. था।. अ देखिए तीनों में अमेरिका का तो बहुत.
बड़ा योगदान रहा है क्योंकि यहां पर तो. जापान में तो इक्विवेलेंट ऑफ मार्शल प्लान. मार्शल प्लान तो यूरोप में लगाया गया. परंतु जापान को भी बहुत सहायता की गई और. इसीलिए उनके इतने अच्छे संबंध हैं और जो. उनका कल्चर है हार्ड वर्किंग कल्चर और वो. कभी भी कॉलोनाइज नहीं हुए हैं। जापान कभी. कॉलोनाइज वैसे नहीं हुआ है। चीन भी वैसे. कॉलोनाइज नहीं हुआ है और उसने भी. उसको सहायता मिली रूस से जो अपने जो.
इनिशियल इयर्स थे क्योंकि कम्युनिस्ट. ब्रदर्स थे तो उन्होंने वहां से पर ये भी. इसमें क्लोज सिस्टम है। क्लोज सोसाइटी है।. आप डिसीजन ले सकते हैं। एकदम इंप्लीमेंट. कर सकते हैं। कोई इतना ऑोजिशन वगैरह नहीं. होता है। डेमोक्रेसी में कहते हैं वो ठीक. है भाई लॉन्ग स्टैंडिंग उसका इंपैक्ट होता. है क्योंकि सब कुछ बातचीत करके आप डिसीजन. लेते हैं। परंतु. वहां भी नेशनलिज्म की भावना को बहुत ही.
पनपा गया। अब यहां पर भी हमारे यहां पर भी. अगर आप देखें तो हम कहते हैं विकास भी. विरासत भी। तो अपने जो पास्ट है उसको हमें. नहीं भूलना चाहिए। तो मेरे विचार से इन. सभी देशों में इस भावना को तो पनपाया ही. गया है। इसको तो जोर दिया ही गया है जो आप. अपने जो आपका हेरिटेज है उसको आप पूरी. तरीके से पकड़ के रखिए और उसको आप संजो के. रखिए।. आप तैहरान में भी थे।. जी।.
अभी पूरी दुनिया की निगाहें ईरान वॉर पर. रही हैं। मुस्तबा खामने जिंदा है या. अभी ये बात इनसे पजियान से पूछी गई थी।. राष्ट्रपति पशियान से उन्होंने कहा जिंदा. है और बिल्कुल ठीक है और बिल्कुल अच्छा कर. रहे हैं। फिर सामने क्यों नहीं आया? कहीं कुछ भी नहीं आ रहा। मतलब. कुछ तो आना चाहिए था इतने इतने महीनों. में।. हां नहीं उन्होंने कहा वो उनकी सिक्योरिटी. के लिए क्योंकि ये अगर सामने आते हैं तो. अमेरिका और इजराइल पता कर लेते हैं। उनके. पास ऐसे.
टेक्नोलॉजी है। वो सुलेमानी को कैसे मारा? वो उन्होंने अलकायदा ये सॉरी इसके. हमास का जो लीडर हैं उनको कैसे वहां पर. मारा जब यहां पर थे और. इनके जो मिलिट्री लीडरशिप थी इनके जो. सुप्रीम लीडर थे अली खान मैं नहीं अली खान. का मना सबको मार दिया तो उनको पता चल जाता. है तो इसकी उनकी सिक्योरिटी के लिए हमने. उनको सामने नहीं लाया है बट ही इज़ वेल एंड.
एंड ही इज कंटिन्यूइंग हंस। दुनिया के. बाकी मुल्कों में क्या चर्चा होती है कि. वो जिंदा है या यह एक स्ट्रेटजी का पार्ट. हो सकता है कि नहीं भी है तो कम से कम हां. टू मेंटेन दिस फसाद तो ये भी है आई थिंक. बोथ दी अ क्योंकि कुछ ना कुछ तो यकीनन वो. सामने आते अगर सामने नहीं भी आते हैं तो. कुछ. तस्वीरें कुछ वीडियो कुछ इस प्रकार के.
परंतु ऐसा भी कुछ नहीं आया. पिता के जनाजे पे भी नहीं आए जिसको. इतना लंबा चौड़ा फंक्शन किया गया।. कोई फोटो नहीं, कोई वीडियो नहीं।. तो क्या चांसेस होंगे कि शायद वो ना भी. बचे हो? हां नहीं बिल्कुल। और उनकी जो हालत ऐसी है. जो. हां ये भी खबर आई थी छोटे हुए थे वो।. हां जो डिसफिगरर्ड हो गए हो या कुछ ऐसे हो. गए हो तो उस टाइप का वो हो सकता है।. पुतिन कैसे हैं सर? आप मॉस्को में क्योंकि. बहुत लंबा समय रहे हैं। रशिया समझते हैं।. रशिया में इंडिया को कैसे देखते हैं? और.
व्लादमीर पुतिन. हम. कुछ उनके बारे में थोड़ा यूनिक बताइए हमें. कुछ।. नहीं वो तो. एक तो भारतीय खाने को बड़ा पसंद करते हैं. जो वो मेयर थे सेंट पीटर्सबर्ग के तो बड़ा. वो इंडियन रेस्टोरेंट में जाया करते थे. अपने आप अपनी पत्नी के साथ लरिसा के साथ. वहां पर वो जाते थे और आई थिंक वहां तो. भारतीयों के बारे में बहुत ही अच्छी बहुत. अच्छा विचार है।. राज कपूर साहब के गानों को तुमने सुना है।.
हां नहीं वो तो है परंतु अब मॉडर्नाइज. थोड़ा सा करंट हो गया है। अब तो मिथुन. चक्रवर्ती के और अ ऋषि कपूर और अमिताभ. बच्चन ये सब भी बहुत ही पॉपुलर है। बट आई. थिंक वी हैव मूव्ड बिय्ड जस्ट बॉलीवुड अभी. भी पर कल्चर अभी भी सॉफ्ट पावर काफी अधिक. है वहां पर। इसकी पकड़ काफी अधिक है। बट. आई थिंक चाइना का वहां पर बड़ा दबदबा हो. गया है। और चाइना तो अब स्ट्रेटेजिक. पार्टनर है उनका। तो इसीलिए यह.
ध्यान में रखना. एक जमाने में रूस ने चाइना को उठाया था. चाइना रूस हम. उनके ऊपर डिपेंडेंट हो गया टोटली. रशिया चाइना नॉर्थ कोरिया ये तीनों काफी. क्लोज कंट्रीज है जहां की खबरें बाहर कम. निकलती हैं. हम. इन तीनों मुल्क में अगर आप कुछ बता पाए. कॉमन चीजें या अलग चीजें उनके माइंडसेट के. बारे में जैसे नॉर्थ कोरिया भी हमारे लिए. एक मिस्ट्री है टीवी में चल जाता है किम. जोंग उनका ये कुम जोंग उनका वो हमें पता. नहीं होता रशिया के बारे में अगेन सेम.
कहानी है। चीन चाइना के बारे में सेम. कहानी है। जो उनके डेली अखबार ने बता. दिया। बस उतना ही पता है। कुछ अगर आप बता. पाए अंदर की कहानियां. देखिए रशियन मेरे ख्याल से रशिया इज समवट. मोर ओपन. हम. देन चाइना और नॉर्थ कोरिया। नॉर्थ कोरिया. सबसे ज्यादा क्लोज्ड है। उसके संबंध चीन. के साथ बहुत अच्छे थे। बिकॉज़ इट वाज़. सर्वाइविंग ऑन दी बेनेवलेंस ऑफ़ चाइना।. चाइना जो उसको देता चाहे ऑयल हो, टेक्सटाइल्स हो, ग्रेंस हो, फूड हो,
मेडिसिंस हो उस पर। परंतु अभी रिसेंटली. नॉर्थ कोरिया और रूस के संबंध बड़े अच्छे. हो गए हैं। यहां तक कि उन्होंने तो उनको. 10,000 120,000 सैनिक भी दिए थे।. ये यूक्रेन के साथ। वो कुर्स्क में जो. लड़ाई हो रही थी, कुर्स्क में 15,000. स्क्वायर कि.मी. का एरिया उन्होंने ले. लिया था।. अह यूक्रेन ने ले लिया था। तो उसमें लड़ाई. करने के लिए 101,000 सैनिक वहां से आए थे. और यह कह रखा था कि अगर पकड़े जाओ तो अपने. को मार लेना।.
हां, मार देना।. तो अब उनके संबंध बड़े अच्छे हो गए हैं और. उससे चीन को थोड़ी दिक्कत हो रही है।. इसीलिए आपने देखा होगा जो शीजनपिंग जो कि. इतना ज्यादा इधर-उधर जाते नहीं है।. उन्होंने यात्रा की थी नॉर्थ कोरिया की. क्योंकि वो चाहते थे जो वो बिल्कुल भी।. हालांकि ये तीनों साथ में मिले हुए हैं।. परंतु फिर भी दोनों में होड़ है जो ये तो. मेरे वो थे प्रोटजे थे और ये कहां से वो. हमारे हाथ से निकल रहे हैं। तो इसीलिए.
उनको उनको पकड़ना भी बहुत जरूरी था।. शी जिनपिंग पुतिन डॉनल्ड ट्रंप अगर इनमें. आपको बताना हो सबसे खतरनाक कौन है? सबसे. समझदार कौन है? और भारत को किससे रिश्ता. बना के रखना चाहिए? देखिए भारत को अलग-अलग. कारणों से सभी से रिश्ता बनाकर रखने की. जरूरत है. फॉर डिफरेंट रीज़ंस।. ये तो. चीन तो जैसे हम बात कर चुके हैं हमारा. स्ट्रेटेजिक कंपिटिट है। स्ट्रेटेजिक. राइवल है. हम. और रूस तो हमारी मित्रता के लिए और.
अमेरिका संभावनाओं के लिए। तो सबसे डेंजरस. तो मैं कहूंगा डेफिनेटली. शीजनपिंग है। बिकॉज़ उनकी लॉन्ग टर्म विज़. है और बड़े रूथलेस हैं। बड़े ब्रूटल हैं. उसमें। तो और बिल्कुल हमारा. उनके साथ. सीमा मिलती है। 3500 कि.मी. की सीमा मिलती. है। सो उससे रिस्क भी है और थ्रेट भी है।.
तो वो तो सबसे डेंजरस हुए। 204 में. बांग्लादेश में आप क्योंकि वहां रहे भी. हैं। बांग्लादेश में शेख शेख हसीना की. सरकार गिरती है।. अब बहुत सारे लोग ये सवाल पूछ रहे थे कि. इंडिया और बांग्लादेश के रिश्ते बहुत. अच्छे थे उस वक्त जब तक मैडम हसीना यहां. पर थी। आज वो इंडिया में है। भारत सो रहा. था उस वक्त। क्या ऐसा हुआ कि भारत देख. नहीं पाया या जो वहां हुआ वो कहीं और से. प्लान हुआ था। क्योंकि एक थ्योरी ये भी. चलती है कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ.
पाकिस्तान में इमरान खान का जेल जाना, नेपाल में सरकार गिरना ये कहीं दूर से. प्लान हुआ था। एग्जीक्यूशन इनका हुआ था।. इसकी कोशिशें इंडिया में भी की गई थी।. देखिए मुझे तो यह लगता है यकीनन इसमें कोई. ना कोई तो फॉरेन हैंड जरूर रहा होगा हम. क्योंकि इतनी जल्दी वहां पर ऐसा वो हो. नहीं सकता है. और उसका प्रिपेयर किया होगा उन्होंने चाहे. पाकिस्तान की आईएसआई ने किया हो या फिर. अमेरिका की डीप स्टेट ने किया हो सोरस. इंस्टट्यूट ने किया हो वगैरह-वगैरह। सो आई.
थिंक काफी उधर से वो हुआ।. परंतु भारत ने मुझे. ये भी पता चला है जो हमने कौशन करने का. प्रयास किया शेख हसीना को जो. आपके विरुद्ध बड़ी बड़ा डिसफेक्शन हो गया. है और आपके विरुद्ध लोग बड़े आ गए हैं. क्योंकि अब एंटी इनकंबेंसी भी एक होती है. और फिर आपके जो कंट्रोल्स वगैरह हैं. मीडिया के ऊपर सभी के ऊपर सो दैट इज.
प्रूविंग टू बी वेरी अनहेल्पफुल तो इसीलिए. थोड़ा आपको चेंज चेंज करना चाहिए। बट यू. नो व्हेन यू आर हेड ऑफ़ गवर्नमेंट तो फिर. ओनली यू कैन से अप टू अ पॉइंट यू कांट. सॉर्ट ऑफ़ यू नो डिक्टेट टू अ फॉरेन हेड ऑफ़. गवर्नमेंट फॉरेन लीडर एंड ऑल दैट। परंतु. शी साउंड सीम वेरी कॉन्फिडेंट जो नहीं. मेरे विरुद्ध कोई नहीं होगा। जो पावर में. होते हैं ना 10-15 साल तक होते हैं तो वो. उनको अपनी इनविंसिबिलिटी का कुछ वो एक ऐसा.
ऐसा एहसास हो जाता है। ओके सर एंड में हम. है एक बड़ा इंपॉर्टेंट सवाल जो भारत में. विपक्ष अक्सर पूछता है कि मोदी जी पिछले. 11 सालों में 100 से अधिक विदेश दौरे गए।. 80 से अधिक देश घूम चुके। हर देश में गए. गले मिले सिस्टम भर गया। हर देश से आवाज. आई मोदी मोदी मोदी मोदी वो कहते हैं पीआर. में बड़ा अच्छा है तस्वीरों में बड़ा. अच्छा है पर भारत को क्या मिला हम चाहते. हैं आप बताएं क्योंकि आप एंबेसडर रह चुके. हैं ये जो प्रधानमंत्री मोदी के 100 सदा.
विदेश दौरे रहे हैं 80 से अधिक देश घूमे. हुए हैं इससे भारत को क्या मिला? देखिए. अगर आप देखते हैं भारत कहां पर था 2014. में और भारत कहां पर है 2026 में तो भारत. उस समय था करीब 10वें 11वें स्थान पर. अव्यवस्था के हिसाब से अभी जो आप देखते. हैं जिस प्रकार की अ. दर जिस प्रकार की गति से भारत की. अर्थव्यवस्था आगे गई है वो हमारे फॉरेन.
पार्टनरशिप्स की वजह से बहुत हुआ है इसमें. ठीक है जो सरकार की नीतियां हैं उनका बड़ा. बहुत बड़ा योगदान रहा है। परंतु फिर भी जो. हम जो इतनी सारी चुनौतियां आई हैं पिछले. कुछ सालों में चाहे वो कोविड की चुनौती आई. हो। अब कोविड में आप जब वैक्सीन बना रहे. थे तो आपको सभी देशों के साथ इसमें जो. होते हैं सप्लाई चेन्स करीब 32 34 देशों. से आपको जो रॉ मटेरियल जो इनपुट्स हैं.
क्योंकि यह पहली बार था जो भारत ने एक. अपनी वैक्सीन बनाई। एक तो हमने. एस्ट्रोजेनिका के साथ हम कोलबोरेट कर रहे. थे जो कि हमने कोवि शील्ड को जी. और एक हमारी कोवैक्सीन. जो हमने कोवैक्सीन बनाई और और भी चीजें. बनाई तो उसके लिए हमको सब देशों के साथ. आपको याद होगा अमेरिका से हमें कितने वो. चाहिए थे कॉमोनेंट चाहिए थे इंटरमीडिएट. चाहिए थे और उसके लिए एक बारी मुझे याद है. डॉक्टर जयशंकर खुद गए थे और वहां पर उनके.
उसमें बैन लगा हुआ था तो उसको वहां से. निकाल डालने के लिए। तो मैं यह कहना चाहता. हूं जो आपकी जो अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है. उस समय हम थे 10वें 11वें नंबर पर आज हैं. चौथे पांचवें नंबर पर और अब हम बहुत ही. जल्दी तीसरे नंबर पर पहुंच जाएंगे। तो एक. तो ये अर्थव्यवस्था आपकी अच्छी हुई है।. दूसरा आप. आपके जो संबंध हैं दूसरे देशों के साथ जो.
आपके. आपने चाहे वो रक्षा के क्षेत्र में हो या. फिर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में हो।. तो जो आपके पास चुनौतियां आई हैं। चाहे वो. गलवान में रही हो। आपको तब अमेरिका से. बड़ी इंटेलिजेंस का बहुत सहारा मिला और. आपने जो. डायवर्सिफाई किया पहले आप केवल रूस से. लेते थे परंतु अब आपको दूसरी टेक्नोलॉजी.
चाहिए। आपने और देशों से लिया, फ्रांस से. लिया, आपने अमेरिका से लिया, आपने इजराइल. से लिया। तो ये आपके. बाहर जो आप जाते हैं अपने संबंधों को. बढ़ाते हैं उससे यह बहुत फायदा रहा है।. दूसरा अगर आप चाहते हैं जो आपने देखा है. जो इसी अरसे में डोकलाम भी हुआ, इसी अरसे. में गलवान भी हुआ। और अगर आपको अपने को. सशक्त करना है.
तो जिसे कहा जाता है एक्सटर्नल बैलेंसिंग।. जो आपकी पार्टनरशिप्स हैं वो बहुत. महत्वपूर्ण है। तो इसीलिए आप देखिए आपके. जो अ संबंध हैं अ पश्चिम एशिया के देशों. के साथ. पश्चिम एशिया के देश इससे पहले हमेशा. भारत को पाकिस्तान के नजरिए से देखते थे।. पाकिस्तान के प्रिज्म से देखते थे। जो वो. एक इस्लामिक देश है, मुस्लिम देश है। ये. उसके साथ हमारे संबंध अच्छे होंगे। परंतु.
अब ऐसे हालात हो गए हैं जो ओआईसी ने भारत. की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को 2019 में. इनवाइट किया एस अ चीफ गेस्ट और पाकिस्तान. के विदेश मंत्री कहते हैं आप मत बुलाइए. अगर आप बुलाएंगे तो हम नहीं आएंगे मीटिंग. में और इन्होंने यूएई ने कहा ठीक है आप मत. आइएगा पर हम उनको बुलाएंगे और वो गई और. उन्होंने उनको संबोधित किया तो हमारे. संबंध इन सभी देशों के साथ बहुत अच्छे हो.
गए है और जब हम चाहते हैं जो अगर पूरे. वैश्विक स्तर पर हमारा. अ. कंट्रीब्यूशन रोल जो है वो ज्यादा हम. अच्छी तरीके से प्ले कर पाए। यूएन. सिक्योरिटी काउंसिल में अगर हम चाहते हैं. जो हमारे. सदस्यता हो परमानेंट मेंबरशिप हो तो तब. आपको और देशों सभी देशों की सहायता चाहिए।.
आपको. दूसरे देशों से रॉ मटेरियल चाहिए।. क्रिटिकल मिनरल्स चाहिए। आपको अर्जेंटीना. से चाहिए। आपको ब्राज़ल से चाहिए। तो आपको. जाकर वहां पर अपने संबंधों को अच्छा करना. है। भारत का कद बड़ा है इससे और यह जो आप. कहें जो प्रधानमंत्री मोदी को 36 37 देशों. से सबसे उनके बड़े अवार्ड्स मिले हैं तो. वो उनको अपने लिए नहीं मिले हैं। वो भारत.
के लिए क्योंकि भारत का कद बड़ा है पूरे. दुनिया में इन सभी देशों में अगर उनको. निमंत्रित किया गया है जो आप 17 18. पार्लियामेंट्स को आप एड्रेस करिए तो वो. केवल प्रधानमंत्री मोदी को यह ऑनर नहीं. दिया गया है ये जो भारत रिप्रेजेंट करता. है तो मैं समझता हूं जो उनकी विदेश नीति. जब वो बाहर गए हैं तो उससे आप हर प्रकार.
की विदेश नीति. अगर मैं इसको थोड़ा स्पेसिफिक कर दूं जी. आपकी नजर में कौन सी एक यात्रा है. प्रधानमंत्री मोदी के 80 देशों में 100 से. अधिक यात्राओं में जो सबसे ज्यादा. फायदेमंद रही भारत के लिए इस यात्रा से. बेनिफिट हुआ और एक कौन सी जिसमें आपको. लगता है कि इस इस वाली यात्रा से हम शायद. वो पॉजिटिविटी नहीं ला पाए अगर दोनों आपको. देना हो. जी ये आई थिंक दैट्स अ वेरी चैलेंजिंग. क्वेश्चन द फर्स्ट मैं कह सकता हूं जो जो. उनकी सबसे ज्यादा यात्राएं रही हैं वो. उनकी अमेरिका में रही हैं। ये बात है जो.
पिछले डेढ़ साल में बस वो फरवरी में गए थे. वहां पर उसके बाद नहीं गए हैं। अदरवाइज. बाय एंड लार्ज हर साल वह गए हैं अमेरिका. और उससे मैं कहूंगा जो अमेरिका के साथ. हमारे संबंध बड़े अच्छे हुए हैं और वह. हमारा जिसे हम कहते हैं कॉम्प्रिहेंसिव. ग्लोबल स्ट्रेटेजिक पार्टनर है वो बनकर. आया है और वो संभावनाएं अपने ग्रोथ के लिए. जो हमें चाहिए वो अमेरिका से मिल सकती हैं. और इसीलिए उसके ऊपर उन्होंने बहुत ध्यान.
दिया है। उस. संबंध पर बहुत ध्यान दिया है। दूसरा आप. अगर कहते हैं जो कौन सी यात्रा है जो कि. जिसका और फायदा हो सकता है। आई डोंट नो. मेरे ख्याल से सभी यात्राएं अपने. मापदंड पर मेरे विचार से ठीक गुजरी हैं।. क्योंकि उन्होंने जैसे जब वो ऑस्ट्रेलिया. गए थे। मुझे लगता है पाकिस्तान वाली. यात्रा को हम कह सकते हैं जिसमें. प्रधानमंत्री साहब आ रहे थे.
और नवाज शरीफ. से मिलकर आ गए उस उम्मीद में कि शायद. रिश्ते बेहतर हो जाए. हम. लेकिन पाकिस्तान बीइंग पाकिस्तान अटल जी. गए तब भी डिसपॉइंट किया उसने. हम. यहां भी कुछ खास उसका मतलब रिश्ते हमारे. बेहतर हुए नहीं. हां लेट मी हो सकते थे. देखिए लेट मी पुट इट दिस वे इट वास नॉट. बिकॉज वी डिड डू एनीथिंग राइट रोंग. रोंग. हमने कोई नहीं गलत किया हमारे विचार से. देखिए उस समय था। मुझे याद है बिल्कुल यह. 25 दिसंबर का दिन था जो 2000.
15 में जब वो आ रहे थे पहले मॉस्को में. थे। फिर काबुल आए। काबुल से वो यहां पर आ. रहे थे। भारत आ रहे थे। तो उन्होंने 25. दिसंबर को नवाज शरीफ को टेलीफोन किया और. तब आपको याद है जो 1 जनवरी 2016 को. पठानकोट पर अटैक हो गया। और उससे पहले. हमने बात की थी 8 दिसंबर 2015 को बैंकॉक. में मुलाकात हुई थी हम.
तब सुषमा स्वराज हमारी विदेश मंत्री थी और. जयशंकर फॉरेन सेक्रेटरी थे और उनसे. मुलाकात हुई थी और कॉम्प्रहेंसिव बटरल. डायलॉग को स्टार्ट करने की बात हुई थी तो. माहौल अच्छा था और इसको और अच्छा बनाने का. प्रयास था तो यह ये सभी हमारे नेताओं ने. प्रयास किया है जो पाकिस्तान के साथ हमारे. संबंध अच्छे हो. पाकिस्तान परंतु पाकिस्तान. हां. और वहां पर उनके जो ये टेररिस्ट.
गुट हैं आतंकी गुट हैं वो नहीं चाहते जो. संबंध भारत के साथ बेहतर हो. उनकी दुकान बंद हो जाएगी. बिल्कुल बिल्कुल लास्ट क्वेश्चन सर. क्योंकि हमने शुरुआत चाइना से की थी. ब्रिक्स की बैठक में ऑफिशियली तो नहीं कहा. गया डीडोलराइजेशन को लेकर हालांकि भारत ने. स्टैंड दिया कि हम ऐसा कुछ नहीं सोच रहे. हैं इससे पहले भी कई कई कंट्रीज ने कहा. है। लेकिन दबी जुबान में चर्चा यह खूब रही. कि डॉलर का दबदबा खत्म करने की जरूरत आ गई. है। अमेरिका को फायदा दे रहा है। लेकिन.
दुनिया को ये कमजोर कर रहा है। रूस का. एग्जांपल हम सबके सामने है। कैसे उनके. सारे पैसे रोक दिए गए। रूस अपना 99%. बिज़नेस आज बिना डॉलर कर रहा है। इंडिया से. रुपए में कर रहा है जो उसके लिए कोई काम. नहीं आ रहे हैं क्योंकि करेंसी का नुकसान. हो रहा है। क्या brिक्स कभी अपनी कोई. करेंसी बना पाएगा? नहीं बना पाएगा तो डॉलर. का दबदबा क्या आने वाले समय में खत्म होगा. या उस स्टेज पे हम पहुंच गए हैं जहां पर. अब डीडोलराइजेशन पॉसिबल नहीं है? देखिए. मेरे विचार से आपका जो पहला प्रश्न है. क्या ब्रिक्स अपनी करेंसी बना पाएगा? मेरे.
ख्याल से इनफोर्सिएबल फ्यूचर तो इसके कोई. आसार नजर नहीं आते हैं क्योंकि इसमें. देखिए भारत क्यों हमेशा डीडोलराइजेशन के. विरुद्ध खड़ा रहा है क्योंकि एक तो. प्रैक्टिकल एक पॉलिटिकल एक स्ट्रेटेजिक एक. इकोनॉमिक ये चारों कारणों से कोई और. ब्रिक्स की करेंसी बन ही नहीं सकती है. क्योंकि रूबल की तो कोई मान्यता है ही. नहीं इंडियन रूपी भी इतना ग्लोबली ट्रेडेड.
करेंसी नहीं है। रेनमिन भी है दो-ती% है. जो ग्लोबल ट्रेडिंग होती है। परंतु वो ना. तो उसकी इतनी ज्यादा मात्रा में है। सो. इकोनॉमिकली कोई नहीं है। परंतु कौन सा देश. उसको एक्सेप्ट करेगा? हालांकि बेल्टन रोड. इनिशिएटिव वगैरह करके चीन का काफी. इकोनॉमिक स्फीयर में काफी दबदबा है। परंतु. फिर भी. कोई देश ये मानने को तैयार नहीं होगा जो. ये चीन की करेंसी को एक्सेप्ट कर लिया जाए.
एज दी रिजर्व करेंसी। इंडिया तो बिल्कुल. ही नहीं एक्सेप्ट करेगा। तो हमारी 22. देशों के साथ एग्रीमेंट्स हैं जो नेशनल. करेंसीज में हम ट्रेड करते हैं। पर चीन के. साथ नहीं है। चीन के साथ हमारे 120 130. बिलियन डॉलर का व्यापार हो या जितना. अमेरिका का है उसके आसपास चीन के साथ भी. हो पर वो हम डॉलर में ही करते हैं। हम. युवान में नहीं उनसे ट्रेड करना चाहते और.
रूस के साथ भी जो हुआ था तो उन्होंने कहा. था आप हमको रुपए में नहीं दीजिएगा। आप. हमको रूबल में मत दीजिएगा। आप हमको युवान. में दीजिएगा। हमने कहा युवान में हम नहीं. देंगे।. बिकॉज़ दैट इज अगेन जैसे हम बात कर रहे हैं. स्ट्रेटेजिक थ्रेट है भारत के लिए। तो वो. पॉलिटिकली भी और स्ट्रेटेजिकली भी. वो उसको कोई नहीं लेगा। तो और कौन सी. करेंसी है? कोई और करेंसी नहीं है ब्रिक्स. में। तो इसीलिए मैं नहीं समझता हूं जो. ब्रिक्स की करेंसी। देखिए जो नेशनल.
करेंसीज में. ट्रेड करने की बात है। उसके और बहुत फायदे. हैं। डीडोलराइजेशन केवर नहीं है। उसमें. आपका जितनी तेजी से ट्रांजैक्शन हो सकते. हैं और जितना आपके ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम. हो सकते हैं। बिकॉज़ यू डोंट हैव टू हैव अ. मिडिल मैन। अदरवाइज ऑलवेज डॉलर इज़ द मिडिल. करेंसी। पहले आपको उसको ट्रांसफर करना है।. मार्कअप फीस है उसमें वोलेटिलिटी इतनी है।.
अगर आप डॉलर में वो करते हैं तो आपको. करेंसी रेट फ्लक्चुएशंस में आपको देखना. अगर आप नेशनल करेंसीज में करते हैं तो. उसमें कोई दिक्कत नहीं है। तो इसीलिए मैं. समझता हूं नेशनल करेंसीज को इसीलिए. ब्रिक्स पेमेंट सिस्टम उसके ऊपर ज्यादा. जोर दिया जा रहा है और डीडोलराइजेशन की. कोई बात ही नहीं कर रहा है। ब्रिक्स. करेंसी की कोई बात ही नहीं कर रहा है और. मेरे विचार से नॉट ओनली फोर्सिएबल फ्यूचर. बट फॉर अ लॉन्ग टाइम टू कम इसका कोई.
भविष्य नहीं है।. जाने से पहले सर आप साईं बाबा से जुड़े. हुए हैं? जी. कोई खास वजह आप एक ट्रस्ट से जुड़े हुए. हैं। पुटपथी ट्रस्ट. हां वो साईं बाबा के ही ट्रस्ट है।. एक डिप्लोमेट एक भक्त. दोनों एक इंसान के अंदर।. जी जी बिल्कुल।. कहां से ये साईं बाबा के प्रति आपका झुकाव. बढ़ा? देखिए मैं जब अब कजाकिस्तान में जब था. तो और उससे पहले भी बहुत सुना था और. बहुत पढ़ा था उनके बारे में और बहुत विचार.
किया था।. परंतु जब कजाकिस्तान में गया मैं तो तब. मैंने देखा वहां पर अब वो मुस्लिम देश है।. सुन्नी मुसलमान देश है।. पर उस समय जो राष्ट्रपति थे नूर सुल्तान. नजरबाए. उनकी पत्नी सारा नजरबा वो इनकी साईं बाबा. की भक्ति जो पुट्टा भारती के साईं बाबा. हैं और वो हर साल वहां पर आती थी तो मैं. यहां पर आया मैंने कहा मैम मुझे भी जाकर.
देखना चाहिए पहली बार मैं गया वहां पर और. मुझे मैंने उनको. आई वेंट जस्ट लाइक एन ऑर्डिनरी पर्सन. परंतु मैंने उनको बताया मैं आ रहा हूं. उनकी जो ऑर्गेनाइजेशन थी तो वहां पर ले गए. और फिर मुझे बिल्कुल ही. बाबा के शाम को जब दर्शन हुए सो देन आई. वास गिवन अ प्लेस क्वाइट क्लोज टू बाबा. मतलब नॉर्मली नहीं होता है उनके चारों तरफ. होता है सरकम्फ्रेंस अभी तो उनका निधन हो.
गया तो परंतु जब मैं गया था तो फिर. उन्होंने. जो मैंने उनकी आंखों में भाव देखे जो उनका. प्रेजेंस देखा तो मुझे यही प्रतीत हुआ जो. उनमें बहुत ओरा है और इसी इसीलिए. मैं. उनकी. सेवा में और भक्ति में मैंने बहुत. जी से दिल से समय भी दिया और.
मैंने एक चीज और नोटिस की सर. जी. दक्षिण अमेरिका में इंडियन गुरु जो हैं. बड़े लोकप्रिय हैं।. हम. अर्जेंटीना ब्राजील में रजनीश यूएस में. रजनीश ओशो कितने लंबे रहे। आनंदमय मा. ब्रह्मकुमारी के बड़े अनुयाई हम. इसकी क्या वजह हो सकती है सर वेनेजुला में. भी भारतीय भक्ति के बड़े किस्से मिलते हैं. हम नहीं अभी ये जो है अभी डेलसी रड्रगस है. हम. वो उस समय उपराष्ट्रपति थी और ये पिछले.
साल की बात है फरवरी में. हम. यहां पर इंडियन एनर्जी वीक का आयोजन था और. वो आई थी यहां पर और वो भी सत साईं बाबा. की बड़ी भक्त हैं तो यहां पर जो हमारा. लोधी रोड पर एक मंदिर है तो उसमें वह आई. थी वेनेजुला के एंबेसडर के साथ वो आई थी. और उन्होंने वहां पर पूजा की. हम. और कुछ समय बिताया तो आप ठीक कह रहे हैं।. वहां पर बहुत ही स्पिरिचुअली इंक्लाइंड.
है।. रवंद्र नाथ टैगोर के लिए भी, गुरुदेव के. लिए भी, अर्जेंटीना में बहुत ज्यादा वहां. पर उनके फॉलोअर्स हैं, अनुयाई हैं। आई. थिंक स्पिरिचुअलिटी में बहुत वो विश्वास. करते हैं। तो उनके इन सभी के परंतु आप. यूरोप में भी देखिएगा। यूरोप में भी. आनंदमय वहां के बहुत आश्रम है। तो हम तो. रहे हैं वहां पर यूरोप में हर जगह आपको. मिलेंगे। आश्रम मिलेंगे उनके। तो भारत की.
स्पिरिचुअलिटी. इतना ज्यादा उसके बारे में बोला नहीं जाता. है परंतु अपने आप उसने बहुत ही यहां पर. फैलाव कर लिया है। जाने के पहले सर जिसने. भी पडकास्ट देखा हो उसको जाते-जाते चाइना. के बारे में कोई एक बात जो आप चाहे वो याद. रखें।. जैसे हमने बात शुरुआत की थी चीन के साथ. दोस्ती कभी नहीं हो सकती है। तो जो भी. संबंध रखने हैं बिल्कुल आंख खोल कर रखने.
पड़ेंगे। आंख मूंद कर कभी नहीं चीन के साथ. हम अपने संबंधों को आगे ले जा सकते हैं।. परंतु फिर भी एट द पीपल टू पीपल लेवल अपने. संबंधों को आगे ले जाने का प्रयास करना. चाहिए। क्योंकि पीपल टू पीपल कनेक्ट से. काफी असर हो सकता है अपने. और सभी संबंधों का। परंतु अ हमेशा चौकन्ना. रहना पड़ेगा चीन के साथ क्योंकि.
अ. चीन बहुत तेज रफ्तार से उसका प्रगति हुई. है। उसका उत्थान हुआ है। परंतु आगे चलकर. क्या होता है? यह मुझे लगता है जो कभी भी. कुछ भी बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव हो सकता है. वहां पर।. इंडिया की नेक्स्ट वॉर किससे? पाकिस्तान, चाइना या कुछ और कोई. हम कोशिश करेंगे किसी से भी युद्ध नहीं.
हो। क्योंकि अगर हम चाहते जो युद्ध हो तो. हम ऑपरेशन सिंदूर को 4 दिन के बाद रोकते. नहीं क्योंकि हमें मालूम है हमने देख लिया. है जो आप युद्ध शुरू तो कर सकते हैं।. परंतु कभी-कभी युद्ध बंद करना खत्म करना. वो आपके हाथ में नहीं रहता है। आपके यह. पिछले दो युद्ध जो रूस और यूक्रेन का है. जैसे हम बात कर रहे थे उन्होंने कहा 15 20. दिन में खत्म हो जाएगा। 4 साल हो गए हैं।. इसका भी उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप ने.
सोचा था जैसे मैंने वेनेजुला में किया है. वैसे मैं यहां पर भी कर लूंगा। परंतु आप. देखिएगा छ सात महीने होने को आ गए। अभी तक. कुछ उसका नतीजा नहीं निकल रहा है और उनकी. बहुत ही हालात खराब हो गए हैं। तो इसीलिए. हमने तो बहुत ही लोग यहां पर कहते हैं जो. आपने चार दिन में क्यों रोक दिया युद्ध. मेरे विचार से तो बड़ा अच्छा किया क्योंकि. आप जब आगे चलते हैं आपके मिलिट्री. ऑब्जेक्टिव्स होने चाहिए और ऑपरेशन सिंदूर. में थे हमारे मिलिट्री ऑब्जेक्टिव्स जब.
हमने अचीव कर दिया हमने कहा ठीक है हम. इसके आगे नहीं चलेंगे तो अब लोग कुछ भी. कहते रहे परंतु भारत तो हमेशा यही प्रयास. करेगा जो वो अपनी इंटरनल डेवलपमेंट पर. इकोनॉमिक डेवलपमेंट पर पीस ट्रेंकिलिटी पर. वो ध्यान देगा और युद्ध में कभी जाने की. वो प्रयास नहीं होगा। थैंक यू सो मच सर।. चाइना से लेकर दुनिया भर पर हमने चर्चा. की। कोशिश हमारी थी कि आपके तजुर्ब का. पूरा फायदा उठाया जाए और जब सारी दुनिया.
इन तस्वीरों को देख रही है तो उन तस्वीरों. के पीछे आपके तजुर्बे से कुछ कहानियां कुछ. एनालिसिस निकाले जाए ताकि जिन लोगों को भी. जिओपॉलिटिक्स में इंटरेस्ट है भारत की. तरक्की में इंटरेस्ट है भारत को देखने का. नजरिया और व्यापक तरीके से जानते हैं. उन्हें आप विज्ञान का लाभ मिले। सो थैंक. यू सो मच सर।. बहुत धन्यवाद। मुझे बहुत ही अच्छा लगा।. बहुत आनंद आया और बहुत ही वाइड रेंजिंग. डिस्कशन था। परंतु आई थिंक. मैंने प्रयास किया है जो जितनी.
कैंडेडली मैं आपके प्रश्नों का उत्तर दे. सकूं।. नहीं नहीं बहुत आनंद आया सर।. उम्मीद है कि सवाल भी ठीक-ठाक रहे होंगे।. जी बहुत अच्छा बहुत अच्छा।. थैंक यू सो मच सर।. थैंक यू।.
