Unplugged ft. Ashok Mittal | LPU | Education | Vinesh Phogat | Neeraj Chopra | Shehnaaz gill
जहां कभी जलेबियां तली जाती थी, आज वहां. ज्ञान की लौ जलती है। यह कहानी उस जुनून. की जिसने मिठास से मिलाया मिशन और बना दी. देश की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी। अशोक. मित्तल जी बिजनेसमैन है, मिठाई वाले हैं, राज्यसभा के सांसद है, लवली प्रोफेशनल. यूनिवर्सिटी वाले हैं, लवली बजाज वाले. हैं। कौन है अशोक मित्तल? मैं कहूंगा मैं. हलवाई। हलवाई क्यों कह रहे हैं? जो. मोतीचूर के लड्डू हम सब खाते हैं। वो मेरे. फादर साहब ने 61 में इजाद किए थे। इजाद. किए थे मतलब उसके पहले नहीं बने थे देश. में? उससे पहले मोटी बूंदी के लड्डू होते. थे। बारीक बूंदी के लड्डू जिसको मोतीचूर.
लड्डू कहते हैं उससे पहले इस देश में या. दुनिया में नहीं हुआ करते। कभी किसी ने. आपसे कहा कि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी. का नाम चेंज कर दो यार। मुझे बहुत लोगों. ने कहा सीएम साहब ने कहा कैप्टन साहब. जिन्होंने यूनिवर्सिटी बनाई कि आप ये क्या. कर रहे हो? नाम डिफरेंट रखो। अरुण जेटली. जी मुझे बोले अशोक ये नाम ठीक नहीं है।. बदली करो। हमने नहीं बदली किया। अगली. यूनिवर्सिटी लकी या रोजी यूनिवर्सिटी भी. हो सकती है। नहीं वो इसलिए नहीं हो सकती. कि वो हमारी कोई ब्रांड नेम नहीं है। क्या. आपने किया पॉलिटिक्स को? मुंबई की रेलवे. की टिकट बुक कराता हूं राजधानी में तो वह. ₹4300 की आती है। एयर की टिकट बुक कराता.
हूं तो ₹4200 की। यदि मैं राजधानी फर्स्ट. क्लास की कराता हूं तो वो ₹5500 की है।. मींस एयर सस्ता है और ट्रेन महंगी है। जो. रेलवे की बुकिंग करानी होती है ना उसमें. बुकिंग कराना शायद मुश्किल होगा। जेईई का. एग्जाम पास करना आसान होगा क्योंकि मंत्री. जी हमारे वैष्णव साहब हैं। वो आईआईटी पास. आउट भी हैं और आईएएस भी हैं। बहुत लिया।. आपको यही रिक्वेस्ट कि मंत्री जी आपने. शायद जेई में इतनी मेहनत नहीं करनी जितना. एक टिकट बुक कराने के लिए करनी पड़ती है. लोगों को आज भी एलपीयू में नशे की समस्या. कभी सुनाई पड़ी? देखिए मैं कहूं 100% नहीं. है तो कोई भी नहीं हो सके। आप स्टूडेंट बन.
जाते हैं लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के।. हां। तो एक कौन सा नियम होता है जो बदल. देते आप? एज अ स्टूडेंट तो मैं कहूंगा. अटेंडेंस नहीं होनी चाहिए। ये 75% क्यों. अटेंडेंस लगाते हो? लड़के लोग कहते हैं कि. डिवाइड कर देते हैं। फिर दोबारा फॉर्म भरो. बड़ा पैसा जाता है। एक बिल्डिंग और खड़ी. हो जाती है। किन-किन बच्चों पर आपको नाज़. है? एक हमारा बच्चा है विष्णु। वो कोयंबूर. के गांव का बच्चा है। उसको हिंदुस्तान का. सबसे बड़ा सैलरी पैकेज दिया। ढाई करोड़।. 2.5 करोड़। हॉकी पे भारत की ओलंपिक टीम. में आठ बच्चे मेरे थे। नीरज चोपड़ा गोल्ड. मेडलिस्ट जो पिछले वो भी मेरा बच्चा है।. गोल्डन बॉय क्रिकेट लविंग कंट्री में उस.
इंसान ने अपनी अलग पहचान बनाई है और आज. लोग रात को जग के मैच देख रहे थे। वो. जैवलिन थ्रो हमने रात को जग के देखा था।. विनेश भी यहीं से पड़ी हुई है। विनेश भी. यहीं के स्टूडेंट हैं। मैंने सुना आपने. उनको भी रिवॉर्ड दिया था। जो सिल्वर. मेडल्स को 25 लाख का अवार्ड देते हैं। तो. हमने विनेश फगुड को बुलाकर ये दिया। शहनाज. गिल भी आपके यहां से ही हैं। शहनाज गिल भी. हमारे य से ही रही है। मैं खाना नहीं. खाऊंगी तो पंजाब कहां से दिखेगा? मैं मोटी. ना हूं तो फिर पंजाब कहां से दिखेगा? बिल्कुल ठीक बात है। आप ही की मिठाई तो. नहीं खाती थी पहले। नहीं मिठाई नहीं खाती. थी वो। वहां पे कॉलेज के कुछ शरारती. बच्चों ने एक सवाल लिख के भेजा। कहा सर से.
पूछिएगा कोई सीक्रेट स्पॉट है लवली. प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में। मैं बच्चों को. कहूंगा कि वो बताएं कि ऐसा कौन सा सीक्रेट. स्पॉट है ताकि वहां भी मैं कैमरा लगा. सकूं।. जहाजों को जो डूबा दे उसे तूफान कहते हैं।. तूफानों से जो टक्कर ले उसे इंसान कहते. हैं। और किसी ने खूब कहा है कि वो कौन सा. आपदा है जो हो नहीं सकता। तेरा जीना चाहे.
तो क्या कुछ नहीं। देखिए ना समाज में. हमारे आसपास ही कई सारे हीरोज़ हैं। जिन. कहानियां आपको इंस्पायर कर सकती। एक ऐसी. कहानी है अशोक कुमार मित्तल जी।. जिनके नमस्कार। बड़े बूढ़ों ने 1961 में. ₹500 लेकर कर्ज लिया और एक मिठाई की दुकान. खोली और वो मिठाई की दुकान का नाम आज देश. की जानीमानी यूनिवर्सिटी में से एक है। वो. यूनिवर्सिटी जहां पर तकरीबन 50 देशों के. 35,000 बच्चे पढ़ते हैं। अशोक कुमार.
मित्तल जी बहुत-बहुत स्वागत है आपका।. धन्यवाद। सही कहा मैंने। नहीं बिल्कुल सही. कहा आपने। लगता है आपने अच्छी रिसर्च की. हुई है पहले। लेकिन पूरी रिसर्च मुझे एक. बात समझ में नहीं आ रही कि अशोक मित्तल जी. कौन है? अशोक मित्तल जी बिजनेसमैन है।. अशोक मित्तल जी मिठाई वाले हैं। अशोक. मित्तल जी राज्यसभा के सांसद हैं। अशोक. मित्तल जी लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी. वाले हैं। अशोक मित्तल जी लवली बजाज वाले. हैं। कौन है अशोक मित्तल जी? सबसे पहले तो अशोक मित्तल जी एक इंसान है।.
हां।. और यदि आप दूसरी बात पूछेंगे तो मैं. कहूंगा मैं हलवाई हूं।. हलवाई क्यों कह रहे हैं आप? क्योंकि यह वो. पहला मेरा चरण था प्रोफेशनल लाइफ में, बिजनेस लाइफ में जिससे मैंने अपनी यात्रा. शुरू की। किस साल में? जब मैं स्टूडेंट था थर्ड, फोर्थ में तब से. ही जाना शुरू कर दिया था। ऑफ कोर्स. छोटे-छोटे काम किया करते थे। तो ये स्टोरी. सही है जो मैंने बताई कि 1961 में आपके.
फादर ने ₹500 कर्ज लेकर शुरुआत की नहीं. बिल्कुल सही है कि मेरे फादर साहब ने एक. कर्नल साहब होते थे कर्नल करतार सिंह. उन्होंने ₹500 का कर्ज लेके हलवाई का या. मिठाई का काम जालंधर कंटोनमेंट में शुरू. किया था 61 मेरा बर्थ 64 का है। जी. मोतीचूर के लड्डू जी जी हां ये मुझे ये. बात बताते हुए खुशी होगी कि जो मोतीचूर के. लड्डू हम सब खाते हैं वो मेरे फादर साहब. ने 61 में इजाद किए थे। इजाद किए थे मतलब.
उसके पहले नहीं बंदे थे देश में। उससे. पहले मोटी बूंदी के लड्डू होते थे। ओके? बारीक बूंदी के लड्डू जिसको मोतीचूर लड्डू. कहते हैं। उससे पहले इस देश में या दुनिया. में नहीं हुआ करते।. ब्यूटीफुल लड्डू जो हम स्वाद ले ले जिसको. खा के कि मेरा वजन बढ़ा है ये आप ही के. यहां की पैदाइश है। बिल्कुल हमारी ही. पैदाइश है और हम पंजाबी जो होते हैं पंजाब. वाले वजन बढ़ाने में एक्सपर्ट आई। उसमें. हमारी एक्सपर्टीज अच्छी है। तो आपने अपना. कैसे कंट्रोल करके रखा है? क्योंकि हमें. पता है ना क्या खाना है क्या नहीं खाना? मतलब हलवाई की दुकान पे आदमी मिठाई नहीं.
खाता। नहीं मैं मिठाई बहुत खूब खाता हूं. मैं। हां। अपने यहां नहीं की भी खाता हूं।. अपने यहां की भी खाता हूं। और घर में कोई. शादी की मिठाई कहीं से भी आई हो वो भी. पूरी हम खाते हैं। कहीं बाहर जाते हैं।. सबसे पहले हम मिठाई का स्वाद जरूर चक पूरी. मिठाई खाते हैं। जैसे आपने कहा कि आप. हलवाई वाली आइडेंटिटी को कैरी करो। बट कई. लोग होते हैं वो अपनी पुरानी पहचान से. थोड़ा शर्माते हैं। असहज होते हैं कि जैसे. अब आपकी बड़ी यूनिवर्सिटी हो गई है। नाम.
बड़ा है आप राज्यसभा सांसद हो तो हलवाई. कहने में शर्म नहीं आती। नहीं शर्म किस. बात की है? मतलब कई लोग असहज हो जाते हैं. कि छोटा काम रहा होगा या उसको उस तरीके. लेते हैं। नहीं काम तो देखिए कोई भी छोटा. नहीं होता। जी और हलवाई का काम भी छोटा. नहीं है। जाहिर सी बात है बिल्कुल सही बात. है। इसी काम से हम ऑटोमोबाइल में गए। इसी. काम से पैसा कमा के वो पैसा हमने. यूनिवर्सिटी में लगाया।. और वहां पहचान बनी और यूनिवर्सिटी की. पहचान बनी तो आज मैं संसद में पहुंच पाया।.
हम तो शुरुआत तो हलवाई से ही थी। अभी भी. दुकानें आपकी है पंजाब में? बिल्कुल है।. जो ओरिजिनल दुकान है वो भी है और उसके बाद. जो हमने फर्दर एक्सपेंशन की है मिठाई से. फूड डिफरेंट फूड प्रोडक्ट्स में। तो दुकान. भी है, होलसेल का बिज़नेस भी है, रिटेल का. भी है, सारा है। वो। तो कौन सी मिठाई आपके. यहां की जो आपको लगता है यार यह वाली. हमारी बड़ी अच्छी है? अह देखिए क्योंकि. मोतीचूर के लड्डू जैसे मैंने बोला मेरे. फादर मिठाई ब्रांडिंग आपके दुकान ने ही कर. दिया। थैंक यू। मेरे फादर साहब ने याद किए. थे तो वही हमारी सबसे बड़ी ब्रांड वहीं से. शुरू होती है मोतीचूर के लड्डू से ही।.
मेंशन वन क्वालिटी ऑफ योर फादर। क्योंकि. शुरुआत कहते हैं कि जिस पीढ़ी से शुरुआत. होती है उस आदमी को ज्यादा संघर्ष करना. पड़ता है। सेकंड पीढ़ी उसको एक्सपैंड करती. है। नहीं आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। वो. एक तो बहुत ज्यादा क्रिएटिव थे। दूरदर्शी. थे बहुत ज्यादा। अलग सोचते थे हमेशा आउट. ऑफ बॉक्स सोचा करते थे। जैसे कोई भी हलवाई. का काम करता तो रूटीन में जैसे काम होता. वही करता वो कि एक थड़ा होता वहां पर. जलेबियां तली जा रही होती। छोटा सा काउंटर. होता मिठाई बिक रही होती। पर उन्होंने.
पहले ही दिन से हम मिठाई की दुकान 61 में. बंद दरवाजे के अंदर की। ओके। उस टाइम सब. ने कहा तो ये तो चलेगी नहीं। पर उन्होंने. उसको पहले दिन से ही कामयाब हो के भी. दिखाया। तो ये उनकी आउट ऑफ बॉक्स सोचने की. जो क्षमता थी वह बहुत ही बड़ी थी। बहुत ही. बड़ी थी। आपको सारी चीजें बनी बनाई मिली।. आपका संघर्ष क्या था? मतलब आज जिस एंपायर. पे हम खड़े हैं या आप आपके संघर्ष का. नतीजा है, पिताजी के नतीजा है या आप आप भी. नेपोटिज्म वाला प्रोडक्ट हैं। क्या है.
इसमें? थोड़ा अपना बताइए कहानी। नहीं. देखिए मैं इस मामले में तो खुशकिस्मत रहा. हूं कि मेरे फादर साहब ने बिज़नेस शुरू. किया था। हम मिठाई का। तो लेकिन उसको. डायवर्सिफाई करने में मेरा रोल जरूर रहा. है हम के मिठाई से हम ऑटोमोबाइल डीलरशिप. बाजार में Maruti में डवर्सिफाई हुए तो वो. मैंने फैमिली से लड़ के किया फैमिली तैयार. नहीं थी हम मैं अच्छा स्टूडेंट था और हायर. एजुकेशन में कॉलेज में जाना चाहता था वो. मुझे फैमिली भेजने के लिए तैयार नहीं थी. वो मैं लड़ के गया हूं कितने कितने परसेंट.
आपके मार्क्स हैं 12th में मैं 10थ के बाद. जाया करते थे उस जमाने में तो 10थ में मैं. पूरे पंजाब के 3 लाख स्टूडेंट्स में 20वें. नंबर घर पे था। ओके ग्रेट। हां। तो. मार्क्स तो 87 89% थे। समथिंग लाइक यानी. आपके बच्चे जो आपके बच्चे हैं वो शिकायत. नहीं करेंगे। हां नहीं उस मामले में तो. नहीं करेंगे। ये बजाज वाली भी एक सर कहानी. सुनी थी हमने कि इनिशियली शायद मना कर. दिया गया था। हां ऐसे था जी हम लोग. क्योंकि मिठाई का हलवाई का धंधा करते थे।. हम तो मुझे लगी एक ओपोरर्चुनिटी आई है.
बजाज की डीलरशिप लेने की। हम तो मैंने. अपने मिठाई का कोई लेटर हेड तो होता नहीं. था। से एक लेटर हेड छपवाया वो बना के उस. पे अप्लाई कर दिया। हम तो ये बाद भी बात. पता लगी कि जब वहां के जीएम साहब के पास. गया तो उन्होंने हमारी एप्लीकेशन उठा के. ऐसे फेंकी कि बजाज के इतने बुरे दिन आ गए. हैं कि अब लड्डू पेड़े वाले अप्लाई करने. लग गए। तो ये उनका पहला कमेंट था और हमें. शॉर्टलिस्ट नहीं किया गया। सम हाउ हमें. पता लगा हमने दोबारा अप्रोच किया किसी के. थ्रू वो आए विजिट किया देखा उनको हमारा.
पसंद आया और अल्टीमेट मिस्टर राहुल बजाज. जी ने इंटरव्यू लिया और उन्होंने 60. एपिकेंट्स में जो बड़े-बड़े आर्ट डीलर थे. छोड़ के उन्होंने हमें डीलरशिप दी फिर. राहुल बजाज को आपने कैसे मना है कि मिठाई. लड्डू पीने वाला मान जाए उसमें शायद उनको. हमारी कई बातें पसंद आई होंगी लेकिन उसमें. दो बातें मुझे ध्यान आती हैं एक तो. उन्होंने पूछा उस टाइम टू व्हीलर बिकते थे. थ्री व्हीलर उनके नहीं बिका करते थे. स्कूटर स्कूटर बिकते से थ्री व्हीलर में. बिका करते थे। तो उन्होंने बोला ये आप. कैसे.
बेचोगे? तो फिर नुकसान होगा आपको ये। तो. मैंने उनको कहा जी हम जब मिठाई बेचते हैं. तो उसमें एक समोसा बेचते हैं। वो उस जमाने. में शायद 50 पैसे का था कि वो 50 पैसे का. होता है। पूरा दिन लगे रहते हैं। 200 500. बेचते हैं तो ₹250 इकट्ठा होता है। हम और. वो लॉस में बेचते हैं हम लोग। पर वो क्यों. बेचते हैं? क्योंकि उसकी वजह से कस्टमर. वॉक इन करता है और वह दो चीजें और ले जाता. है। उसमें हम पैसा बना लेते हैं। तो ऐसे. ही थ्री व्हीलर है। हम इसको नुकसान में भी. बेच लेंगे। बेटर प्रमोशंस करेंगे। बेटर.
अच्छी सर्विस देंगे। तो कस्टमर आएगा वो आज. थ्री व्हीलर लेगा। कल टू व्हीलर भी लेगा।. तो एक तो शायद बात तो उनको ये पसंद आई।. दूसरा फिर उन्होंने कहा अच्छा ठीक है मैं. आपको दे देता हूं। लेकिन मेरी एक दुविधा. है कि मैं किसी और को पहले हां कर चुका. हूं। वो बहुत बड़े डीलर थे उस टाइम। हम. और मैं यदि आपको देता हूं तो ये तीसरी. होगी क्योंकि एक पहले भी था एक पहले एक. मैं कमिट कर चुका हूं मैं दूंगा आपको. तीसरी होगी तो आप तीसरी.
लेंगे तो जनरली आदमी सोचता है कंपटीशन. होगा ये होगा वो होगा तो हमें तो धुन थी. हमने कहा जी आप हमें चौथी दीजिए हम वो भी. लेंगे और हम अपनी पहचान अलग से बना के. दिखाएंगे और आपके पास मैं 2 साल के बाद. फिर आऊंगा और फिर आपसे से लुधियाना की. डीलरशिप मांगूंगा। ये जालंधर की वो. लुधियाना की मांग होगा। तो आई थिंक ही फ्ट. इंप्रेस्ड एंड और उन्होंने हमें दे दी।. गजब कहानी अच्छी है। अच्छा आपकी लवली. प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी एक तो पहले सबसे.
पहले हमको ये बताइए कि ये लवली नाम क्यों. है? क्योंकि मतलब बुरा मत मानिएगा। नाम से भी. कई लोगों ने कहा कि अ थोड़ा अलग सा नाम. है। आमतौर पर यूनिवर्सिटीज के नाम जो होते. हैं वो थोड़े ऐसे होते हैं कि बहुत. सीरियसनेस आती है। यह बड़ा प्यारा सा नाम. है। ऐसा लगता है कोई अपने प्यार से अपनी. बीवी को या किसी को नाम दे दिया कि लवली।. किसी के नाम पर रखा है क्या है ये लव लवली. प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी की कहानी। और कभी. किसी ने आपसे कहा कि यार लवली का नाम चेंज. कर दो।. देखिए जो लवली था वो हमारा बिजनेस ब्रांड.
था। लवली स्वीट्स। लवली स्वीट से लवली. ऑटोस बना। फिर जब एजुकेशन में हम आए 2001. में तो हमें समझ आई कि लवली एजुकेशन के. लिए सही नाम नहीं है। तो हमने नाम बदल. दिया। हमने रखा इंटरनेशनल इंस्टट्यूट ऑफ. मैनेजमेंट शुरू किया। उस टाइम काफी. इंस्टीटशंस आ रहे थे एक साथ। तो हम भी. उनमें से एक हो गए। हमारे एडमिशन ना हो।. एक हफ्ता हम ऐसे ही संघर्ष करते रहे। ऐड. दें ये कुछ ना हो। फिर एक बार फ्रस्ट्रेशन.
हमने कहा चलो ऐसा करते हैं। इंटरनेशनल. इंस्टट्यूट ऑफ मैनेजमेंट प्रमोटेड बाय. लवली ग्रुप ट्राई करके देखते हैं। वो हमने. ऐड दिया हमारा आधा दिन में सारी सीट्स भर. गई। तो फिर हमने आगे रेगुलेटरी बॉडीज को. जाके अगले साल नाम चेंज कराया लवली. इंस्टट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट। अब इसमें भी दो. सवाल है। पहला पिताजी ने लवली मिठाई की. शॉप रखा था। क्यों रखा था? वो एक अलग स्टोरी है। वो उनकी स्टोरी है. के वो जब नाम सोच रहे थे क्या रखा जाए तो.
हम पुराने डिफेंस कांट्रेक्टर थे मेरे. फादर साहब तो वो एक जनरल साहब के पास गए. जो उनके पुराने मित्र थे या शुभचिंतक थे. जनरल चौधरी तो उन्होंने पूछा मैं क्या नाम. रखूं तो बाय चांस शायद उनकी पोती गुजर रही. थी वहां से तो उन्होंने उसको रूटीन में. पुकारा. लवली तो फिर उन्होंने बोला मेरे फादर साहब. को के आप लवली रख लीजिए। तो वहां से वो. नाम पड़ा है। पक्का यही स्टोरी ना सर।.
बिल्कुल यही है। जी। अच्छा कभी किसी ने. आपसे कहा कि लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी. का नाम चेंज कर दो यार और मतलब थोड़ा नॉन. सीरियस है किसी बड़े पॉलिटिशियन ने या. किसी बड़े व्यक्ति ने कभी क्योंकि लोग कई. बार थोड़ा सा सोचते हैं इस बारे में। नहीं. आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मुझे बहुत. लोगों ने कहा।. इवन हमारे चीफ सेक्रेटरी साहब ने कहा. पंजाब के जब हम सीएम साहब ने कहा कैप्टन. साहब जिन्होंने यूनिवर्सिटी बनाई थी कि आप. यह क्या कर रहे हो नाम डिफरेंट रखो तो पर. उन्होंने हमारी बात मान ली लेकिन जब बन गई. तो मुझे ध्यान है कि एक बार श्री अरुण.
जेतली जी जब वो वित्त मंत्री थे हमारे. कैंपस में आए बड़ा देखा बहुत इंप्रेस हुए. तो एंड में जाते हुए मुझे बोले अशोक ये. नाम ठीक नहीं है बदली करो. तो फिर उन्होंने एक स्टोरी सुनाई मुझे अभी. तक याद है के उनके कोई मित्र थे। उनके. पोता ने शायद लॉ फॉर्म खोली गुड़गांव में।. उन नाम रखा रमेश्वर दास प्रह्लाद. चंद। तो जेतली साहब बोलते हैं मैंने उसको. बोला कि यार आपके परिवार में मैं सबको.
जानता हूं। आपके फादर साहब को आपके दादा. जी को भी आपके परदादा जी का नाम भी मैं. जानता हूं। ये आपने नाम कैसे रखा? हम ये. तो कोई भी नहीं है आपके इस नाम का। हम वो. बोलते इसीलिए रखा कि ऐसे नाम हो तो लोगों. को लगता है लाफ बहुत पुरानी चली आ रही है. और हमें क्लाइंट्स मिल जाएंगे। तो अरुण. जेतली जी ने कहा कि एक वो सोच एक आपकी सोच. कितना फर्क है? तो इसको आप बदली करें। तो. खैर हमारी कुछ मजबूरियां थी कि बॉय लॉ. बनती है। बदली कराना एक बहुत कमर्स.
प्रोसेस होता है। वो हमें लगता था कि लवली. हमारे लिए एक लकी लकी नेम है और पब्लिक को. भी एक्सेप्टेंस आ गई है। हम तो हमने नहीं. बदली किया बट तो अगली यूनिवर्सिटी लकी या. रोजी यूनिवर्सिटी भी हो सकती है। नहीं वो. इसलिए नहीं हो सकती कि वो हमारी कोई. ब्रांड नेम नहीं है।. मैंने सुना कहीं पर कि 1999 तक पंजाब में. इतना यूनिवर्सिटी का प्रोफेशनल. यूनिवर्सिटीज का प्रचलन नहीं था। इज इट. ट्रू? 90 पंजाब में प्रोफेशनल यूनिवर्सिटीज का.
प्रचलन बहुत था। प्राइवेट सेक्टर सेक्टर. में पंजाब में प्राइवेट सेक्टर हायर. एजुकेशन में काफी लेट आया है। तकरीबन 97. के बाद आया ये हम और फिर 2001 से एकदम. ग्रो ग्रो किया जिसमें हम भी आए 2001 में. हम तो 2005 में आपने स्टार्ट किया 2001. में हम कॉलेज बने और एफिलिएटेड टू सम. गवर्नमेंट यूनिवर्सिटी और 2006 में हम लोग. यूनिवर्सिटी बने बाय स्टेट लॉ। तो अभी जब. हम और आप 2025 में बैठे हैं तो इस. यूनिवर्सिटी में कितने बच्चे पढ़ते हैं?
अभी जो ये कैंपस में जहां हम बैठे हुए हैं. इसमें 400 बच्चा पढ़ता है और 25,000 हमारे. हॉस्टल के अंदर रहता है। अच्छा हमने गिना. उससे भी 5000 बढ़ गए। जब हम डाटा निकाला. तो 35,000 हमारे पास है। हां वो थोड़ा. पुराना डाटा होगा शायद जो आपने देखा।. कितने देशों के बच्चे हैं? तकरीबन 50. देशों के बच्चे हैं। सबसे ज्यादा किस देश. से बच्चे आते हैं यहां पर? इंडिया के अगर. अलावा सोचना हो तो। इंडिया के अलावा जो. हमारे पड़ोसी देश हैं वहां से सबसे बच्चा. आता है हमें। फिर अफ्रीकन कंट्री से आता. है।.
यदि नंबर वन में लेंगे तो मेरे ख्याल. भूटान, नेपाल, श्रीलंका ही आएंगे जिनमें. 500 से ऊपर बच्चा है हर कंट्री का। सुपर्ब. सुपर्ब। अ जब क्योंकि आपकी यूनिवर्सिटी. इतनी चल रही है। आप कह रहे हो 40 साल से. ऊपर बच्चे हैं और आपकी एक लेगसी क्रिएट हो. गई है। लवली भी अब ब्रांड बन गया है।. एलपीयू हाउ यू सी सक्सेस नाउ? देखिए जब हम एजुकेशन की बात करें और. खासतौर पर क्योंकि मैं अपना ज्यादा समय.
यहीं लगाता हूं।. सक्सेस जो मुझे लगता है आज के दिन मेरे. लिए यह है कि यदि मैं. किसी बच्चे को. देखूं और वो अपनी लाइफ में कुछ नहीं कर पा. रहा है फाइनेंसियल कंस्ट्रेंट्स की वजह से. या कुछ और वजह से उसको प्रभु ने आज प्रभु. ने आज मुझे यह मौका दिया है। यह कैपेसिटी. दी है कि मैं उसको शिक्षा देके उसकी लाइफ. को सुधारने का प्रयत्न कर सकूं। मतलब कैसे.
प्राइवेट यूनिवर्सिटी तो पैसा लेती हैं आप. कह रहे हो नहीं देखो बिल्कुल लेते हैं. हमारे. पास फीस स्टूडेंट की फीस ही हमारे पास. रेवेन्यू सोर्स है बाकी तो कोई है नहीं. सरकार तो हमें देती नहीं है कोई भी तो. उसके बिना तो हम लोग सर्वाइव ही नहीं कर. सकते हम. लेकिन इतना तो हम कर सकते हैं जो बच्चे. डिर्विंग हैं और वो अफोर्ड नहीं कर पा रहे. जेनुइनली अफोर्ड नहीं कर पा रहे और. जेन्युइनली डिर्विंग है उनकी तो हम मदद कर. सकते हैं उनकी लाइफ सुधारने की तो कोशिश. कर सकते हैं और वह हम करते एलपीयू में कोई.
बच्चा है जो फ्री में पढ़ रहा है? काफी 100्स में होंगे। फ्री में पढ़ा रहे. हो। स्पोर्ट्स के बच्चे 7 8000 बच्चा फ्री. में पढ़ रहा है। पढ़ ही नहीं रहा है। रह. रहा है। फूड भी है। इक्विपमेंट भी देते. हैं। सारा कुछ देते हैं। ऐसे ही एकेडमिक. साइट्स पे भी जो बच्चे अच्छे बहुत टॉपर. होते हैं। अच्छे पढ़े लिखे पढ़ना चाहते. हैं। लेकिन फंड्स का इशू है तो हम उनको. फुल तो जैसे मान लो कोई बच्चा आपको देख. रहा हो अभी और बहुत टैलेंटेड हो। किसी में. स्किल अच्छी हो। बिल्कुल करते हैं तो कैसे.
उसको मौका मिल सकता है कि नहीं उसके पैसे. नहीं है हां हमारे तो लगातार. एडवर्टाइजमेंट्स में या पब्लिक. प्लेटफॉर्म्स पे या हम अनाउंस करते रहते. हैं ये अलग-अलग तरीके से और काफी बच्चा. आता है हमारे पास इस तरीके से लोग कहते. हैं घोड़ा घास से दोस्ती करेगा तो खाएगा. क्या हां वही मैंने बोला जी हम कुछ तो. अफोर्ड कर सकते हैं सभी को तो मैं नहीं कर. सकता ट्रू लेकिन उसमें से कुछ हिस्सा. निकाल के अगर सभी को अफोर्ड करोगे तो फिर. आपको अफोर्ड कौन करेगा हमें कौन अफोर्ड. करेगा हमें सरकार तो करेगी नहीं अब तो आप. तो आप आप भी सरकार का हिस्सा हो। सरकार का.
हिस्सा तो हम टेक्निकली नहीं है। हम मैं. तो सांसद हूं। हम ठीक है सरकार तो पंजाब. सरकार से टेक्निकली डायरेक्टली हमारा ऐसा. नहीं होता और हो भी मान लो किसी और का हो. भी सकता है। हो भी तो सरकार को किसी को. फंड करती है तो उनके अपने मापदंड है। वो. मुझे तो नहीं करेगी कि सरकारी यूनिवर्सिटी. को करेगी। सरकारी कॉलेजेस को करेगी। नेता. क्यों बने आप? और सीरियस नेता हो कि नॉन सीरियस नेता हो. आप क्योंकि एक परसेप्शन होता है। कोई आदमी. बड़ा बन जाता है फिर उसको कोई पॉलिटिकल.
पार्टी राज्यसभा भेज देती है। अब जनता के. मन में यही थॉट आता है कि भाई ये बड़ा. आदमी है इसलिए इसको भेज दिया। हो सकता है. कुछ काम आ जाए। हो सकता है पैसा मिल जाए।. ये एक परसेप्शन ही होता है। तो ऐसे जाने. वालों को जनता नॉन सीरियस देखती है। आर यू. अ सीरियस पॉलिटिशियन और नॉन सीरियस. पॉलिटिशियन? देखिए आप मुझसे पूछेंगे। है. ना? या आप किसी से पूछेंगे क्वेश्चन वो तो. यही बोलेगा मैं सीरियस हूं। तो कैसे मैं. उसके बाद क्रॉस क्वेश्चन करूंगा ना इसलिए. पूछ रहा हूं मैं। मैं छोडूंगा थोड़ी ना।. छोड़ेंगे तो आप नहीं। देखिए पहले तो आपका. क्वेश्चन था कि बने क्यों? हां। क्यों. पॉलिटिक्स? पॉलिटिक्स में क्यों आए? देखिए.
इसलिए कि लाइफ का पड़ाव होता है। कोई. परेशान ना करे। हां ये बात भी सही है के. नेता बन गए तो कम से कम नेता तो परेशान. करना आपको बंद कर देंगे। ये तो ये. मजाक-वज़ाक में आपने गहरी बात कही है। सच. बात है वैसे ये। नहीं सच बात है। हां सही. बात है। मैंने मजाक में नहीं बोली।. सीरियसनेस में बोली।. एक फर्क पड़ता है। जी डेफिनेटली पड़ता है।. पर आजकल उल्टा भी है। पॉलिटिक्स में इतना. ईमानदारी से नहीं बोलते सर।.
अच्छा तो मैं उस लेवल का पॉलिटिशियन नहीं. हूं कि मैं अपनी ईमानदारी को छोड़ता हूं।. अ. देखिए लाइफ की जर्नी होती है। जैसे आपने. पहला क्वेश्चन किया कि मैं हलवाई था।. हलवाई. से ऑटोमोबाइल डीलरशिप एजुकेशन एजुकेशन में. भी चलो यूनिवर्सिटी बन. गई। अब उसके बाद क्या हम. कि प्रभु ने आपको इस मुकाम पर पहुंचाया है. कि आपने यदि मेरे यहां 400 बच्चा है.
रेगुलर 50 से 60 से डिस्टेंस एंड ऑनलाइन. का तकरीबन 1 लाख बच्चा है तो उनकी लाइफ को. इन्फ्लुएंस करने की प्रभु ने थोड़ी सी. हमें क्षमता दी है और कर भी रहे हैं. पॉजिटिव वे से लेकिन यदि आपने ज्यादा की. लाइफ इन्फ्लुएंस करनी हो हम पूरे स्टेट के. बच्चों की करनी हो पूरे देश के बच्चों की. करनी हो या देश के और सेगमेंट्स हैं।. बुजुर्गों की, किसानों की, मजदूरों की, बिजनेसमैन की, दुकानदारों की करनी हो तो. आपके पास क्या ऑप्शन है? आपके पास एक ही.
ऑप्शन है कि आप पॉलिटिक्स में. आए। पॉलिटिक्स को हम बुरा मानते हैं कि. पॉलिटिक्स मींस गलत, गलत, गलत। यदि सभी. लोग यह सोचने लग गए कि पॉलिटिक्स गलत है. तो उसमें कौन. जाएगा? अच्छे लोग नहीं. जाएंगे, पढ़े लिखे लोग नहीं जाएंगे। तो. बुरे लोग जाएंगे। पढ़े लिख जैसे आप जैसे. आप पढ़े लिखे हो। आपने अच्छा किया। आपके. बुरे लोग जाएंगे। आपके 500 बच्चे यहां पर. हैं। आप पॉलिटिक्स में आए आपको. अपॉर्चुनिटी मिल गई आपके काम की वजह से।.
क्या आपने किया पॉलिटिक्स में? जिससे लोग. ये माने कि पढ़े लिखे लोग आते हैं तो कुछ. इंप्रेशन पड़ता है या क्या आपके मन में है. कि ये करना चाहिए। देखिए पॉलिटिक्स में. जहां तक आप मेरे बारे में पूछना चाहेंगे।. पार्लियामेंट एक ऐसा मंच है हम। भारत का. भी पूरे हर देशों में पार्लियामेंट या जो. भी मेन उनकी असेंबली रहती है जिसमें आप. सरकार को हम अपनी बात कह सकते हैं.
डायरेक्ट कह सकते हैं हम तो जब आप सांसद. के तौर पे एक बात सरकार को कहते हैं या. अपने बाकी साथियों को कहते हैं तो वो. आमतौर पे ज्यादा सीरियसली ली जाती है। हम. और सरकार को उस बात पर जवाब भी देना होता. है।. तो अब चांसेस हैं आप जो सरकार की पॉलिसीज. बनने हैं, लॉ बनने हैं और चीजें बननी है, आप उसको इन्फ्लुएंस कर सकें पॉजिटिव तरीके. से। तो वो काम मैं बखूबी करने की कोशिश. करता हूं। क्या किया आपने? राज्यसभा सांसद. के तौर पर कौन सा मुद्दा उठाया आपने जो.
आपको लगता है कि ये मैंने जनता का मुद्दा. उठाया। देखो पढ़े लिखे लोग आते तो ऐसा. होता है। नहीं मैं एक बात थोड़ी करेक्ट. करना चाहूंगा कि पढ़े लिखे लोग आएंगे ऐसा. होगा। ये तो एक पार्ट है। लेकिन जो लोग. पढ़े लिखे नहीं भी होते लेकिन देश के लिए. करना चाहते वो भी अच्छा करते हैं लाइफ में. और पॉलिटिक्स में भी हर जगह करते हैं।. पॉलिटिक्स में भी करते हैं। ये तो एक. एग्जांपल के तौर पे मैंने बोला. था। मेरे ख्याल कोई जहां तक मेरी जर्नी का. सवाल है पार्लियामेंट में मुझे तकरीबन 3. साल हो गए. हैं। शायद कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं होगा जो.
मैंने 3 साल में ना उठाया. हो। कल ही मैंने रेल पे का रेलवे पर. मुद्दा उठाया।. उससे पहले जो बाहर कई लोग आते हैं गलत. तरीके से इमीग्रेशंस करते हैं वह मुद्दा. उठाया। फाइनेंस पे मुद्दा उठाया, इंश्योरेंस पे उठाया, बैंकिंग पे. उठाया, सेल्फ हेल्प ग्रुप पे उठाया, मजदूरों पे उठाया, दुकानदारों पे उठाया, डिफेंस पर उठाया, इंटरनेशनल रिलेशंस पर.
उठाया। मेरे ख्याल कोई भी ऐसा सेगमेंट. नहीं होगा हमारी सोसाइटी का हमारी. गवर्नेंस का जिस पे मैंने राघव चड्डा ने. एिएशन उठाया था आपने रेलवे उठाया रेलवे. में क्या उठाया आपने क्योंकि चड्डा जी का. तो हमको याद है उन्होंने कहा भाई साहब. थोड़ी सस्ती करवाइए चाय कॉफी बड़ी महंगी. मिलती है एयरपोर्ट पे यदि आप सस्ती महंगी. की बात करेंगे तो जो मैंने कल एक बात बोली. है कि यदि आज मैं मुंबई की रेलवे की टिकट. बुक कराता हूं राजधानी में तो वह ₹4300 की. आती है और मैं एयर की टिकट बुक कराता हूं.
तो ₹4200 की है और यदि मैं राजधानी फर्स्ट. क्लास की कराता हूं तो वह ₹5500 की है।. मींस एयर सस्ता है और ट्रेन महंगी है तो. ये तो नहीं होना चाहिए।. तो जो कीमत की बात तो करें तो यह है। फिर. मैंने मुद्दा उठाया के जितनी बड़ी राजधानी. होती है ना उससे बड़ी वेटिंग लिस्ट होती. है।. फिर मैंने मुद्दा. उठाया कि हमें जो रेलवे की बुकिंग करानी.
होती है ना हम. उसमें बुकिंग कराना शायद मुश्किल होगा।. जेई का एग्जाम पास करना आसान होगा क्योंकि. मंत्री जी हमारे जो वैष्णव साहब हैं वह. आईआईटी पास आउट भी हैं और आईएएस भी हैं।. तो उनसे मोछ काट लिया आपने तो नहीं मैंने. उनको यही रिक्वेस्ट की मंत्री जी आपने. शायद जेई में इतनी मेहनत नहीं करनी की. होगी जितना एक टिकट बुक कराने के लिए करनी. पड़ती है लोगों को आज भी हम दैट्स ट्रू. मतलब दैट इज वै स्ट्रेंज हम डिजिटल इंडिया.
की बात करते हैं और आज भी इतनी हमें मेहनत. क्यों करनी पड़ती है व्हाई कांट यू सिंपल. है सुबह सुबह हैक वो 10 मिनट जो खुलता है. वो हैक हो रहा है नहीं है दलाल लोग उस पे. बुक कर देते हैं यही होता है सर नहीं. मैंने तो यह बोला उनको कि किसी हैकर की. हिम्मत ही नहीं है इसको हैक करें नहीं. नहीं रेलवे की वेबसाइट अगर आप सुबह तत्काल. करते हैं तो रुक जाती है। स्लो आती है।. एजेंट हैक कर सकते हैं। एजेंट हैक करता. है। पर हैकर हैक नहीं कर सकते। हां।. क्योंकि वो इतनी खतरनाक है एंटर करना ही।. हैकर के अगर मैं कुछ चोरी ही कर लेता हूं।. मतलब कुछ उसमें कुछ टेक्निकल लोचा होता है. जिससे आम आदमी का टिकट नहीं होता 10 मिनट.
तक। फिर जब सारी सीट्स गायब होती है तो. वेबसाइट नॉर्मल चलेगा। हां मैंने यही बोला. कि इतनी बार ससेक्स क्रैश नहीं होता जितनी. बार आपकी वेबसाइट क्रैश हो जाती है। तो. क्या कहा? उन्होंने कुछ कहा आपसे? जवाब. देंगे मंडे को वो। आई होप नाराज तो नहीं. हुए आपसे वो कि आपने इतने मजे मुझे लगता. है वैष्णव जी बहुत मैच्योर मंत्री हैं हम. और वो जनता की भावनाओं को समझते हैं और. जिसको मैं रिप्रेजेंट कर रहा था हम. अपने जिम्मेवारी के तौर पे तो वो समझेंगे. इस बात को और इंप्रूव करेंगे जो मैं समझता.
हूं और मैंने और भी चीज देखी है जैसे आपने. बोला कि मैंने क्या कंट्रीब्यूट किया. कुछ टाइम पहले मैंने एक मुद्दा उठाया. कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट का हम कि एक आदमी आदमी. को 20 साल, 30 साल, 40 साल के संघर्ष के. बाद जाके न्याय मिलता है सुप्रीम कोर्ट से. कि यह इसकी लैंड है। एग्जांपल के तौर पे. यह दिलवा दो।. लेकिन फिर भी नहीं दी जाती। मान लीजिए. सरकार ने देनी है वापस। वो फिर कंटेंप्ट. ऑफ कोर्ट के लिए चल पड़ता है। वो फिर अगले.
2 साल 5 साल उसी में लगा रहता है। तो ये. और सरकारी कंटेंप्ट ऑफ़ कोर्ट आमतौर पे. सरकार के खिलाफ ज्यादा होती है। तो ये तो. ठीक नहीं है। तो इस पे कुछ किया जाए तो. मुझे मंत्री लॉ मिनिस्टर साहब का लेटर. मिला और उन्होंने इस बात का संज्ञान लेते. हुए सभी मंत्रालयों के डिपार्टमेंट्स को. आदेश जारी किया कि कोई भी केस कंटेंप्ट ऑफ. कोर्ट में ना जाने दिया जाए। जो भी कोर्ट. ने यदि फैसला दे दिया है और आप फाइनल. फैसला है वो तो उसको लागू किया जाए। तो इस.
तरीके से आप इन्फ्लुएंस कर सकते हैं। अब. पॉलिटिक्स में असली लड़ाई होती है जनता के. बीच वाली। लोकसभा विधानसभा का ही मन है या. राज्यसभा नहीं हम वहां भी पूरी लड़ाई होती. है। क्यों नहीं होगी? मन है कि जनता के. बीच में जाएंगे। अपना आईडिया रखेंगे।. अच्छा आप मुझे कह रहे हैं। हां पूछ रहा. हूं मैं। यदि देखिए क्योंकि रियल. पॉलिटिक्स तो वही है। असली खेल रियल दंगल. तो वही है। असली दंगल तो जनता में जाके. लड़ने का ही है। आज आप मुझसे पूछेंगे तो. शायद मैं उसके लिए तैयार नहीं हूं। बाकी.
लाइफ बदलती है। आप कल क्या सोचते हैं? आपकी भावनाएं हैं मन में ऐसी? वही मैंने. बोला ना लाइफ बदलती है। आप आगे क्या सोचते. हैं? कैसे करते हैं? आज एकदम पूछेंगे तो. मैं ना करूंगा पर टाइम बदलता है। आज से हो. सकता है 5 साल पहले मैंने राज्यसभा में. जाने का भी ना सोचा हो। हम लेकिन सिचुएशन. ऐसी बनी होगी। आम आदमी पार्टी ने आपको. क्यों राज्यसभा भेजा? ये तो ज्यादा वो बता पाएंगे लेकिन जो मेरी. अंडरस्टैंडिंग है. कि मैं पंजाब में हूं और आम आदमी पार्टी.
के पास पंजाब में राज्यसभा की सात सीटें. एक साथ आ गई। हम 21 मार्च को फैसला आया 22. को रिजल्ट डिक्लेअ हुए और 31 सॉरी 11. मार्च को रिजल्ट डिक्लेअ हुए और 21 मार्च. को लास्ट डेट थी नॉमिनेशन फाइल करने की. राज्यसभा के हम तो वो लोग अच्छे जो भी. ढूंढ रहे थे हर सेगमेंट के लोगों को के एक. स्पोर्ट से ले लिया जाए एक सोशल कॉज से ले. लिया जाए ऐसे अलग-अलग सेगमेंट से तो वो. शायद एक एजुकेशन से भी ढूंढ रहे थे हम और.
नेचुरली क्योंकि पंजाब में इलेक्शन लड़. रही थी। जान पहचान तो आपकी सभी पार्टियों. से रहती है। तो उनसे भी थी मेरी जान. पहचान। फिर उनको शायद यह लगा होगा कि मैं. उनके इस कार्य में फिट बैठता हूं कि मैं. एजुकेशन सेक्टर से भी हूं। तो मेरा एरिया. ऑफ इनफ्लुएंस अच्छा है स्टूडेंट्स. कम्युनिटी में यूथ में हम हलवाई भी हैं और. मेरे ब्रदर पंजाब के प्रेसिडेंट हैं तो. उनका एरिया ऑफ इनफ्लुएंस भी अच्छा है।. जैसे हलवाई मीठा बनाते हैं। मीठे में दम. बहुत होता है। तो कुछ.
देखिए ये एक बड़ा कॉमन परसेप्शन जनता में. है राज्यसभा को लेकर कि बड़ा आदमी. राज्यसभा आता है तो उससे कुछ मीठा मान ले. आता है।. देखो परसेप्शन तो कुछ भी हो सकता है। पर. इस बात में कहीं भी कोई सच्चाई ना है ना. ही थी।. हमारे सात सांसद गए हैं एक साथ जैसे मैंने. बताया सातों मेरिट पर गए हैं। यह तो आपने. बताया हरजन सिंह का भी नाम मेरे दिमाग में. खट हरभजन जी है बाबे सिचावाल जी है साहब. थे पाठक थे राघव जी थे तो सभी अपने-अपने. फील्ड के एक्सपर्ट थे और उन्होंने हर.
फील्ड का डिवाइड करके लिया है और आप. देखेंगे संसद में संसद में कि अपोजिशन में. हम 10 हैं। और किसी पार्टी के पास 30 भी. हैं 14 भी हैं, 11 भी हैं। लेकिन सबसे. ज्यादा मुद्दे कौन उठाता आम आदमी पार्टी. की सांसदी उठाते हैं। सबसे ज्यादा वहां. इंप्रेसिव कौन बात करता है? आम आदमी. पार्टी की संसदीय करते हैं। उठा के बाहर. कौन लेके आते? वो अलग बात है। जब आप कुछ. करोगे तो ये रिएक्शन हो सकता है। मुझे.
संजय सिंह जी की आवाज सुनाई पड़ती रहती है. कि जो वो कहते हैं और राघव का जैसे मैंने. जिक्र किया। यह सारे विशेष सराह ही पड़े. हैं और हर मुद्दे पे हमारे सारे सांसद. उठाते हैं और जोर शोर से उठाते हैं और इस. मामले में ट्रेजरी बेंच भी तारीफ करता है. कि आम आदमी पार्टी के सांसद दम रखते हैं. बात करने का और अच्छी बात करते हैं और. लॉजिकल बात करते हैं। मोदी जी से मिले आप? देखो देश के प्रधानमंत्री जी हैं तो. नेचुरली उनसे मिलने की कोशिश तो करते हैं. और मैं मिला भी हूं। हाउ यू सीन नरेंद्र.
मोदी जी एस प्राइम मिनिस्टर? अह. पहली बात तो यह है कि 2019 में मोदी जी. इसी कैंपस में आए थे। ओके। शायद एक ही. प्राइवेट यूनिवर्सिटी होगी जिसमें मोदी जी. आए हैं अभी. तक। और जब वो आए ये बात मुझे बाद में बताई. गई तो वो आने में बहुत ज्यादा इंटरेस्टेड. नहीं थे कि प्राइवेट यूनिवर्सिटी जाएं ना. जाएं। क्या है? लवली नाम है जो मुझे बाद. में बताया। बाद में बताया गया ये सारा.
कुछ।. अ. लेकिन आए वो और अच्छा उन्होंने समय व्यतीत. किया हम पूरा बढ़िया भाषण दिया इंडियन. साइंस कांग्रेस की इनोगेशन थी और वो इतने. खुश हुए यहां पर आके जब उन्होंने आके देखा. ये भी बाद में बताया गया कि देन ही वाज़. वेरी हैप्पी एंड इंप्रेस्ड कि ऐसा इंडियन. साइंस कांग्रेस शायद उन्होंने बाकी किसी. सरकारी यूनिवर्सिटी में नहीं देखा था और. इतना अच्छा कैंपस भी शायद नहीं देखा था.
उन्होंने और इतने इंप्रेस हुए कि वह देश. को एक नया नारा देके गए यहां से। जैसे कि. हम जानते. हैं शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का. नारा दिया था। वाजपेई साहब ने उसमें जय. विज्ञान जोड़ा।. और मोदी जी ने हमारे कैंपस में जय. अनुसंधान जोड़ा।. ओके।. जो देश को आज तक एक ही नारा दिया भारत के.
तीन प्रधानमंत्रींत्रियों ने मिलके एक ही. जय जवान जय किसान जय विज्ञान जय अनुसंधान. और तीसरा पार्ट है जो वो इस प्रांगण में. माननीय मोदी जी ने जोड़ा. तो इससे ज्यादा मेरे लिए या एलपीयू के लिए. ज्यादा खुशी की बात नहीं हो सकती। जब. राज्यसभा में आप लोग उनके खिलाफ दहाड़ते. हो लड़ाई करते हो तो मोदी जी घूरते नहीं. कभी ऐसे देखिए मैं आपकी यूनिवर्सिटी में. वो बहुत बड़े हैं। बहुत बड़े हैं। उनके. लिए हम लोगों का या किसी का भी बोलना बहुत.
छोटी बात है।. लेकिन मैंने देखा है कि जब हम कोई भी बात. करते हैं और लॉजिक से करते हैं डाटा के. साथ करते हैं तो सरकार उसका संज्ञान लेती. है। जैसे मैंने बताया कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट. का या और भी चीजें मैंने कई मुद्दे उठाए. जिसमें तकरीबन 25% चीजों पे सरकार ने. संज्ञान लिया और उनको हल किया।. तो वो क्यों नाराज होंगे ना? यू हैव यू.
हैव मेट हिम पर्सनली एंड प्रोफेशनली. दोनों। हां जी। अ क्योंकि वो फिर जीत कर. आए हैं तीसरी बार। जी जी। ठीक है आप. अपोजिशन में हो। उनके विरोधी हो। बट आप. क्योंकि आप एक एजुकेशन हो। आप आपने देखा. उनकी जर्नी आपके कॉलेज आए। आपको क्या लगता. है? क्या उनमें एक्स फैक्टर है जो बार-बार. बार-बार वो निकल जा रहे हैं, जीत जा रहे. हैं। क्योंकि आमतौर पर तीसरे टाइम तक लोग. फेड हो जाते हैं। देखिए यह तो कुछ तो. बेहतर करते होंगे कि वो तीसरी बार चुने गए. हैं। वो जनता ने चुना है। तो वो देश के.
प्रधानमंत्री बने हैं। चुन के बने तो कुछ. तो बेहतर करते होंगे या जनता उनको समर्थन. देती है। तो कुछ तो उनमें है। लेकिन मैं. पर्सनल लेवल पर कहूं तो मुझे याद है जब. मैं अपने परिवार सहित उनसे मिलने गया हूं. हम तो मेरी वाइफ थी मेरा बेटा था मेरी. बिटिया थी मेरे सनी लाल थे तो जैसे हम. एंटर किए उनसे मिलने के लिए वो एकदम खड़े. हो गए.
देश का. प्रधानमंत्री आपके परिवार को ग्रीट करने. के लिए खड़ा हो. अब इससे ज्यादा नम्रता क्या. होगी और उन्होंने हम सबको इतना कंफर्टेबल. फील कराया और ऐसे जोक्स क्रैक किए. उन्होंने मतलब हम प्रधानमंत्री जी को. पार्लियामेंट में भी सुनते हैं मौका मिलता. है बाहर भी देखते हैं कि वो इतने जुबिलेंट. होंगे ये आप इमेजिन नहीं करते रूटीन में. बैठे जैसे मेरी बिटिया से पूछा आप कहां.
पढ़े हो उसने बताया एनवाईयू न्यूयॉर्क. यूनिवर्सिटी मेरे सन लॉ से पूछा आप कहां. पढ़े हो न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी फिर बोलते. हैं अच्छा आपका सेम बैच था। हां जी सेम. बैच था। अच्छा मतलब ऐसे मजाक में और बड़े. प्यार से देखते हुए कि अच्छा मतलब आपकी. फिर वही दोस्ती हुई होगी। तो वो तो सही भी. था। तो नर्व्स पकड़ लेते हुए। हां हां हां. और फिर फदर कंफर्ट किया उन्होंने।. कंफर्टेबल किया हमें कि मैं भी न्यूयॉर्क.
यूनिवर्सिटी में जाके कुछ टाइम पढ़ा था।. तो मतलब ही वास सो नाइस काइंड एंड. जुबिलिटेंट। तो यही कला है मोदी जी में कि. अपोजिशन वालों को खट से पकड़ लेते हो।. मुझे लगता है दिलजीत के साथ देखा था आपने. वह टेबल पे ऐसे सैफ अली खान को बुला लिया।. आप आम आदमी पार्टी के सांसद हैं। आपको भी. देखिए इंप्रेस कर दिया। नहीं देखिए।. प्रधानमंत्री तो प्रधानमंत्री होंगे जी।. वो देश के प्रधानमंत्री हैं। वो नहीं बट. ये ये कला उनके ये कला उनके अंदर है कि. विरोधियों को अपना बना लेते हैं। तभी तो.
प्रधानमंत्री हैं। विरोधी तो देखिए मैं तो. किसी का विरोधी नहीं हूं। हम्। यदि कोई. बात अच्छी है तो मैं तारीफ करता हूं। बुरी. है तो मैं बोलता हूं। संसद में भी, संसद. से बाहर. भी। और हमारी पार्टी भी इस बात को. एप्रिशिएट करती है कि आप सही बात. रखिए। हम सभी देश के लिए काम कर रहे हैं।. वो सरकार में हम अपोजिशन में हैं। इसका. मतलब यह तो नहीं के हम देश के विरुद्ध चल.
रहे हैं। हम विरुद्ध चल रहे हैं। वो. विरुद्ध चल रहे हैं। ना सरकार विरुद्ध. चलेगी ना हम लोग चलेंगे। हम मिलके देश के. लिए काम कर रहे हैं। वो तरीका अलग हो सकता. है कि वो नीतियां रखते हैं। हम उनकी. आलोचना करते हैं। तो उनको मौका देते हैं. उसको करेक्ट करने का, ठीक करने का और वो. करते भी हैं। अच्छा वो क्यों नहीं करेंगे. बताइए मुझे। आप जो कह रहे हैं यदि वो कोई. चीज गलत कर रहे हैं हम और हम संसद में बोल. रहे हैं या बाहर बोल रहे हैं और उनको समझ. आता है यार ये बात तो ठीक कह रहा है। कोई. भी मैं या कोई भी नहीं हम भी खराब विषयों. पर जमकर ठोक के बजाते हैं सरकार की। तो. सवाल पूछते हैं तगड़े। उनको तो एक मौका.
मिल रहा है टू करेक्ट द सिचुएशन। उन्होंने. दोबारा भी तो इलेक्शन जीतना है ना हम ये. तो नहीं है कि आखिरी बार है दोबारा वो तभी. जीतेंगे कि जब नीतियां उनकी पॉलिसीज. प्रोसेससेस लॉ सही होंगे लॉ एंड ऑर्डर सही. होगा तो उनको तो फीडबैक मिल रहा है तो. करेक्ट इट वो क्यों नहीं अेल करेंगे कोई. भी क्यों नहीं अेल करेगा हम भी. यूनिवर्सिटी में अपने स्टूडेंट से फीडबैक. लेते हैं यदि बच्चा कुछ हमारे खिलाफ बोल. रहा है पॉलिसीज के खिलाफ तो हमारे लिए. लर्निंग है वो और हमको इंप्रूव करते हैं. तो ऐसे सरकार भी करती है कोई भी हम पंजाब.
में पंजाब सरकार में हमारी पार्टी की है।. हम जनता से आलोचना सुनते हैं। उनको देखते. हैं और सरकार इंप्रूव करने की कोशिश करती. है। ये तो पार्ट ऑफ सिस्टम है। पंजाब में. सबसे बड़ी समस्या क्या है? क्योंकि आप. जैसे हम दिल्ली में बैठ के सुनते हैं तो. हमको बड़ा ड्रग्स वग सुनाई पड़ता है कि. नशा बड़ा कारोबार यहां बहुत फैला। आपकी. यूनिवर्सिटी में भी सुनाई पड़ता है आपको. आसपास इलाके में क्योंकि जो समस्या होती. है वह कॉमन होती है। देखिए नशा जो है. ना वो किसी एक प्रदेश की समस्या नहीं है।.
मैं चलो फिर से मैं उसको ईजीली ईजी करता. हूं मैं छोटा करता हूं सवाल। एलपीओ में. नशे की समस्या कभी सुनाई पड़ी? देखिए मैं. कहूं 100% नहीं है तो कोई भी नहीं हो. सकता। लेकिन हम मैं इतना पूरे तरी. स्ट्रांग वे से कह सकता हूं जो हमारा. कैंपस है कैंपस के अंदर ये समस्या. नेगिजिबल है।. कैंपस के अंदर बाहर कुछ एलिमेंट ऐसे हो. सकते हैं ऐसा करते हो या बदनाम करने की. कोशिश करते हो वो हर जगह होता है यहां भी. होगा ठीक है लेकिन यदि मैं दिल्ली.
यूनिवर्सिटी की बात करूं या किसी और भी. यूनिवर्सिटी की बात करें आईआईटीस की बात. करें इवन स्कूल्स की बात करें सब जगह नशा. तो ठीक है कम या ज्यादा लेकिन उसको. कंट्रोल पे रखना और उसको फैलने ना देना ये. हमारी जिम्मेवारी है और वो हम बखूबी. निभाते हैं। ठीक है। आपके यूनिवर्सिटी कई. लड़कों ने हमको सवाल भेजे थे लवली. प्रोफेशनल वाले। अच्छा क्या बात है। अच्छा. उनको भी पता लग गया आप आ रहे हैं।. उन्होंने कहा कि अगर आप स्टूडेंट बन जाते. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के हां हां तो. एक कौन सा नियम होता जो बदल देते आप? मैं.
स्टूडेंट बन जाता तो कौन सा नियम. बदलते? एज अ स्टूडेंट तो मैं कहूंगा यार. अटेंडेंस नहीं होनी. चाहिए। ये बड़ा खतरनाक है। तंग करती है. 75% अटेंडेंस।. यह 75% क्यों अटेंडेंस लगाते हो आप लोग? डिबार्ड करके जैसे कई कई लड़के लोग कहते. हैं कि डिबार्ड कर देते हैं। फिर दोबारा. फॉर्म भरो बड़ा पैसा जाता है। एक बिल्डिंग. और खड़ी हो जाती है। ये हर यूनिवर्सिटी. प्राइवेट यूनिवर्सिटी को ले लड़के कहते. हैं ये व्हाई 75% अटेंडेंस? यह मेरा नॉर्म. नहीं है। यूजीसी का नॉर्म है। यह जो भारत.
सरकार की 17 रेगुलेटरी बॉडीज है। जैसे. मैंने भी अपने कॉलेज में डिबार्ड फॉर्म. भरे इसलिए ये दुख मेरा भी है। ये ये सभी. उनके नॉर्म्स हैं। ये हमारे नॉर्म्स नहीं. है ये। और एक बड़ी सिंपल सी बात है ना।. स्टूडेंट हमें फीस क्यों देता है? पढ़ने. के लिए। प्लेसमेंट के लिए प्लेसमेंट के. लिए। सबसे पहले तो पढ़ेगा तो प्लेसमेंट. होगी। तभी होगी ना? तो वो जो पैसा दे रहा. है मुझे पढ़ने के लिए दे रहा है। तो मैं. उसको यह तो कह रहा हूं पढ़ो. आके और मान लो उसकी कुछ बीमारी है कुछ.
उसको घर जाना है कुछ समस्या है तो 25% छूट. है उसमें ना अच्छा ऐसा नहीं है कि 74.5 है. तो भी डिवाइड कर दोगे नहीं देखिए उसमें. हमारी यूनिवर्सिटी में थोड़ा फ्लेक्सी. सिस्टम है कि यदि बच्चा हमें पता है इस. बार इसके अटेंडेंस कम हो गई लेकिन अदरवाइज. पिछले सालों में ठीक काम कर रहा था ये तो. हम उसको पिछले टाइम का बोनस दे देते हैं. तो वो टेक केयर करते हैं कि वही बच्चा. फंसे जो जेनुइनली मिसयूज़ कर रहा. हो नॉट जनरली स्ट्रोंगली मिसयूज़ कर रहा हो.
वही बच्चा फंसे लेकिन जो बच्चा जेन्युइन. है उसको प्रॉब्लम ना आए। आप क्या टीचर से. जुगाड़ वगाड़ के निकल जाते हैं लड़के? ना. जैसे हम लोग अपनी यूनिवर्सिटी में करते. थे। नहीं हमारे टीचर को पटा के धीरे से. नहीं हमारे यहां वो हो ही नहीं 975 में. नहीं रहता। हमारे यहां इसलिए नहीं हो सकता. वो कि हमारी अटेंडेंस होती है वो रजिस्टर. पे नहीं होती। हम ऑनलाइन ऑनलाइन होती है. और लाइव अपलोड होती है और लाइव पूरी. दुनिया को दिख रही होती है।. ओके।. लैपटॉप में होती है और अपलोड होती है।. लेकिन हैविंग सेड दैट अभी हमने एक एजुकेशन.
रेवोल्यूशन के नाम से एक शिक्षा में. क्रांति लाने की मुहिम शुरू की है। हम. उसमें हम बच्चों को कहते हैं कि हम आपको. ऑप्शन दे रहे हैं हम।. कि आप मान लीजिएगा मूक कोर्स ऑनलाइन. कोर्सेस होते हैं आप वो कर लीजिए और हमारा. एग्जाम पास कर लीजिए अप टू सर्टेन. एक्सटेंट तो हम आपको अटेंडेंस वो उतनी माफ. कर देंगे. आप 6 महीना इंटर्नशिप पे चले जाएं.
इंडस्ट्री में काम करें लाइव काम करें. रियल लाइफ में काम करें हम जो हम अरेंज. करके देंगे आपको हम और हम आपकी अटेंडेंस. ऑफ कर देंगे ताकि आप वहां जाके सीखें भी. रियल लाइफ में सीखें, किताबों में नहीं, लेबोरेटरी में नहीं, रियल लाइफ में जाके. सीखें। रियल इंडस्ट्री की वर्किंग करें और. वहां से भी इंटर्नशिप में उनको पैसा मिलता. है, सैलरीज मिलती है। कुछ बच्चे तो ऐसे. हैं जो Amazon में गए हैं और जगह गए हैं।. ₹1वा लाख महीने का उनका सैलरी मिल रहा है।. आज के दिन इंटर्नशिप मिल रही है स्टूडेंट.
के तौर. पे। तो वो सीखें आप और आपको अटेंडेंस और. रिलैक्स हो जाएगी क्योंकि आपने वहां काम. कर. लिया। ऐसे ही यदि आप. सेठ फिल्म प्रोडक्शन के स्टूडेंट हैं और. आपने एक शॉर्ट फिल्म बनाई या कुछ बनाई और. आपने नेट पर डाली हम उसमें आपने कोई. कंपटीशन जीता, कोई हैकतन जीता उसको हम. इवैलुएट करेंगे। उसके बदले आपको हम ग्रेड. भी बेहतर देंगे। आपको अटेंडेंस भी उतनी. रिलैक्स हो.
जाएगी। आप बिजनेस के स्टूडेंट हैं। हम. उनको पैसा देते हैं कि ये लो ₹20,000 आप. स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करें।. ओके।. आप एमबीए में आए हैं। 2 साल के लिए मेरे. पास है। आते ही हम देते हैं कि 2 साल जब. आप पास आउट करने लगो यदि आपने उस 20,000. को 1 लाख बना. दिया तो आपको ग्रेड उस हिसाब से मिल. जाएगा। व्हाई? क्योंकि जब उसने स्टॉक.
मार्केट में पैसा लगाया और उसको बढ़ाना है. तो उन कंपनियों के बारे में पढ़ना. पड़ेगा। मैंने उसको गेमिफाइड वे से. लर्निंग करवा दी। हम मैं उसको कहूं जी 10. कंपनियों के स्टडी करो उसका एनालिसिस करके. लाओ यह उसका मन नहीं करेगा उसको मन नहीं. करेगा इसमें उसको मजा आ रहा है उसको मजा आ. रहा है साथ में पैसा कौन है सीख भी गया. सीख भी आगे और पैसा छापेगा वो छापेगा और. लाइफ के लिए उसको लर्निंग भी आ गई नाइस. भाई दिस आईडिया ऐसे ही हर फील्ड में फैशन. के बच्चे हैं उनको कहते हैं अच्छा आप.
अपेरियल्स गारमेंट्स बनाना चाहते हैं ना. लाइफ. में तो आप गारमेंट्स बनाइए और उसको बेचिए. मार्केट में ऑनलाइन प्लेटफार्म पे जाके. हमारी यूनिवर्सिटी में मॉल वहां हमने उनको. शॉप दी है। वहां बेचिए आप ऐसा बनाइए।. मीडिया वालों को हमारा मीडिया वालों को तो. बहुत आसान है। मीडिया वालों में तो आप. ब्लॉग्स लिखें। आप राइट अप लिखें। आप. डिफरेंट प्लेटफॉर्म्स पे डालिए। उसमें. कितने व्यूज आते हैं आपके? उस व्यूज के. बेस पे हम आपको इवैलुएट करेंगे। ग्रेड. देंगे। अटेंडेंसी माफ कर देंगे उतनी।. हमारे पास भेजिएगा। हम सवाल पूछना.
सिखाएंगे। बिल्कुल भेजते हैं आपको। तो ये. हम एजुकेशन रेवोल्यूशन ला के गुड। इट्स. गुड थिंग। कि बच्चों को देखिए बच्चा. यूनिवर्सिटी में क्यों आ रहा. है? वो एक डिग्री लेने नहीं आ रहा। ये बात. हम सबको मालूम है या मुझे तो मालूम है. एटलीस्ट। हां मतलब आज के टाइम में तो आप. ये कह सकते एक जमाना था जब लोग केवल केवल. डिग्री देते थे। लेकिन अब डिग्री नहीं. आती। या ट्रू मेरे पास केरला का बच्चा आ. रहा है। मेरे पास तमिलनाडु का बच्चा आ रहा. है। आंध्रा का आ रहा है। हिमा हिमाचल तो.
चलो नजदीक हो गया। गुवाहाटी से बच्चा आ. रहा है। विदेशों से आ रहे हैं। वहां. कॉलेजेस कम है।. बहुत है। वहां यूनिवर्सिटी कम है। आसपास. भरी पड़ी हैं। इतनी दूर से बच्चा 3000. कि.मी. सफर करके आए। हॉस्टल की फीस भी दे, बाकी फीस भी दे, ट्रांसपोर्ट पे भी खर्च. करे। क्यों करेगा वो? डिग्री क्लीन। ठीक. बात है। तो पड़ोस में भी मिल रही है उसको।. वो इसलिए आ रहा है मेरे पास कि वह करियर. बनाना चाहता है और हम उसको करियर देकर.
भेजते हैं ना कि डिग्री दे के भेजते हैं।. डिग्री तो मिल ही जानी है।. तो उसके लिए एजुकेशन में अलग तरीके से. पढ़ाते हैं। अलग तरीके आपको लगता है कि. अगले 10 सालों में यूनिवर्सिटी क्रेज कम. हो जाएगा।. यदि हम स्कूलिंग का क्रेज कम हो जाएगा।. देखिए जैसे एक जमाना था लोग कहते हैं ना. पढ़ोगे लिखोगे बनोगे महान। अब लोग कई लोग. यह मानने लगे कि पढ़ाई से करियर उतना ग्रो. नहीं कर रहा और बहुत सारी चीजें जहां पर. आप इजीली करियर बना लेते हो या चीजें बदल. रही हैं। कई लोगों का मानना है कि अब.
एजुकेशन जो है शायद वो पूरी तरह से ऑनलाइन. हो जाएगी। घर पे बैठ के पढ़ेंगे। कॉलेज. कल्चर, कैंपस कल्चर आने वाले टाइम में. खतरे में पड़ जाएगा।. देखिए यह बात बिल्कुल स्पष्ट है। यदि हम. कॉलेजेस ने हम यूनिवर्सिटीज ने अपने आप को. नहीं बदला. नए जमाने के साथ नहीं बदला तो ये बिल्कुल. खतरे में पड़ जाएगा। हमें भी बदलना होगा. ना। हर चीज बदल रही है। कंप्यूटर. पहले 286 होता था। अब कहां से कहां पहुंच.
गए? जिस कंप्यूटर ने चंद्रमा पर लैंड करवा. दिया था सेटेलाइट. को. उससे 1 मिलियन स्ट्रांग कंप्यूटर हमारे. लैपटॉप मोबाइल फोन में है 10 लाख गुना. ज्यादा पावरफुल हमारे लैपटॉप में मोबाइल. फोन पे है लैपटॉप पे है तो चीजें इतनी बदल. रही है तो एजुकेशन में भी क्यों नहीं. बदलेंगी ना यहां भी बदलेंगी तो क्या लगता. है आपको 10 साल बाद एजुकेशन क्या होगी 10. साल 20 साल मान लीजिए जो 10 साल बाद भी. उसी की हमने एक्सपेरिमेंट अभी शुरू कर.
दिया है हम कि जो 10 साल बाद होनी चाहिए. हम आज शुरू करेंगे 10 साल तक परफेक्शन. उसमें कर पाएंगे। जैसे मैंने आपको बताया. कि हम ये चाह रहे हैं कि जो बच्चा कैंपस. में आए हम. नंबर वन वो 100% बच्चे करियर लेके साथ. जाए। हम नंबर टू हम ये चाहते हैं जो बच्चा. कैंपस में जब है वो एजुकेशन पे जो पैसा. खर्च रहे हैं। हम वो स्टूडेंटशिप के दौरान. ही उसको वापस मिले।. उसकी कमाई करके वापस लेके जाए जितना फीस.
में दे रहा है उससे भी ज्यादा ले जाए कम. से कम उतना जरूर ले जाए ये अच्छा है हमारे. पिताजी बहुत ताने मारे हमको कि तुम पे. इतना पैसा खर्च कर दिए हैं नहीं उनका ठीक. है अपनी जगह पर तो उस तरीके से हम एजुकेशन. डिलीवर कर रहे हैं आज तो ये कैसे पॉसिबल. होगा कि जितनी मैंने फीस दी आपको 4 साल. में उतनी मैं लेके चल बहुत मुश्किल नहीं. है जैसे पहली बात तो इंटर्नशिप पे बच्चा. कमा सकता है जैसे मैंने बोला ₹15 लाख. इंटर्नशिप है और मेरी ₹1वा लाख फीस है. सेमेस्टर वो तो रेयर ऑफ़ द रेयर कैसे होगा. ना सर रेयर नहीं है जी बहुत होते हैं।.
सिर्फ हमें उस तरीके से ओरिएंट करना है।. इंडस्ट्री को जरूरत है। हम एक बड़ी बात. अच्छी है हमारे देश में हमारा देश में. इंडस्ट्री ग्रो कर रही है। हम. मैन्युफैक्चरिंग ग्रो कर रही है। इकॉनमी 3. ट्रिलियन हो गई। 5 ट्रिलियन होने वाली है।. सारा कुछ ग्रो कर रहा है। तो वो कौन. चलाएगा? लोग ही चलाएंगे ना।. यही जो स्टूडेंट्स निकल के जाएंगे वो लोग. ही चलाएंगे। हमारे देश में जरूरत. है। काबिल लोगों की जरूरत है। सिर्फ उनको. सही तरीके से रिटेन करने की जरूरत है।. जैसे एक बीटेक का लड़का है। 10-12 लाख.
आपको 4 साल में देता होगा वो या और फीस. कितने देता था? 12-15 लाख जो भी फीस हो. आपके यहां की। कैसे उसे ₹15 लाख वापस कर. दोगे आप? मैंने बोला ना ₹1.5 लाख. इंटर्नशिप मिली बच्चे को। हम तो एक साल. में ₹15 लाख हो गया।. सारे बच्चों को ₹1 लाख की इंटर्नशिप मिल. सकती है। एग्जांपल दे रहा हूं। एक एक. तरीका तो ये हो गया। हम दूसरा. हम यूनिवर्सिटी के अंदर बहुत. ओपोरर्चुनिटीज अेल कराते हैं बच्चों को।. तकरीबन 10 कैटेगरी की अपोरर्चुनिटी है. जिसमें बच्चा पैसा बना सकता है। हम अपने. अंदर भी जॉब देते हैं। पार्ट टाइम जॉब्स.
देते हैं। फिर बच्चों को अलग-अलग तरीके से. कहते हैं आप मदद करें। आप हमारे लिए ब्लॉग. लिखें। उसमें जितने व्यूज होंगे मैं पे. करूंगा आपको उस हिसाब से। आप यूनिवर्सिटी. के लिए डिजाइनिंग करें। जैसे हमारा फाइन. आर्ट्स डिपार्टमेंट है। एडवर्टाइजमेंट. प्रमोशन डिजाइन करें। वी विल पे टू यू।. मतलब हम डायरेक्टली बहुत ऐसी चीजें हैं जो. हम डायरेक्टली पे करते हैं। आने वाला टाइम. यही है। इसके अलावा हम ओपोरर्चुनिटीज. क्रिएट करते हैं। आप हैकाथों्स होते हैं।. वहां कंपटीिशंस में बहुत बड़ी-बड़ी अवार्ड. मनी मिलती है।. फिर कंसलटेंसी अब आर्किटेक्चर स्टूडेंट.
है। उनको हम जब स्टूडेंट होता है उसको. अपने कंसलटेंसी प्रोजेक्ट्स एलपीयू के. अंदर भी देते हैं और बाहर भी दिलाने की. कोशिश करते हैं ताकि उसमें पैसा बना हो।. वो अपनी फीस बहुत आराम से निकाल सकता है. बच्चा यदि चाहे तो दिल. से फैशन का मैंने पहले एग्जांपल दिया. जर्नलिज्म में आप YouTube से पैसा कमा. सकते हैं और मैं उसको क्रेडिट भी. दूंगा क्योंकि अल्टीमेटली तो यही है. आप किसी भी फील्ड का नाम लें हर जगह ये.
पॉसिबल है। सिर्फ हम यूनिवर्सिटी को. ओरिएंट करना है अपने को जो कि हम कोशिश कर. रहे हैं और हमने मॉडल पेश किया है और अभी. जनवरी से ही किया और दो महीने में बहुत. बढ़िया रिजल्ट्स आए हैं उसके और मुझे लगता. है मैच्योर होने में एक डेढ़ साल लगेगा. ठीक है मतलब लेकिन जिस दिशा में आप सोच. रहे हो ये एक अच्छी चीज सोच नहीं रहे कर. रहे हैं करना शुरू कर दिया आपने. एग्जीक्यूट कर रहे हैं सोचना तो अलग की. बात है स्टूडेंट्स को हम डिसीजन मेकर बना. रहे हैं हम कि मान लीजिए इंडस्ट्री से. प्रोजेक्ट्स लाने हैं जिसमें आप पैसा कमा. सकते हो आप बताइए हमें हम करिकुलम में उसी.
को इंबाइप करने की कोशिश करेंगे।. ठीक है? आप बताइए करिकुलम आपको क्या. पढ़ाएं? हमें पता है। वो हमने दे दिया आपको. बना के। लेकिन आप इसमें चेंजेस क्या करनी. है वो बताइए। हां। ठीक है। जिस ओर जवानी. चलती है उस ओर और जमाना चलता है। जिस ओर. जवानी चलती है उस ओर जमाना चलता है। तो वो. तो मेरे लड़कों से मिलकर आप चल रहे हैं तो. उनकी सोच से कदम ताल तभी हम 20 साल बाद. सर्वाइव कर पाएंगे। जो आपने बात की है ना।. हां। हां वरना क्योंकि जो यूनिवर्सिटी का. एक एनवायरमेंट होता है बच्चे आपस में. मिलते हैं। पीियर लर्निंग होती है। बाहर. के लोग आते हैं, इंडस्ट्री के लोग आते.
हैं। डिफरेंट फील्ड के एक्सपर्ट्स आते. हैं। वो जो बच्चे को चीज लर्निंग मिलती. है। अलग-अलग मुल्क के बच्चे को रहना सीख. के साथ रहना सीख सीखते हैं। अलग-अलग. प्रदेशों के बच्चे साथ रहते हैं। वो सीखते. हैं। वो जो लर्निंग मिलती है, वह लर्निंग. तो रहेगी। वो ऑनलाइन मोड में नहीं आ सकते।. ट्रू। हालांकि ऑनलाइन मोड में आपको बेस्ट. प्रोफेसर ऑफ़ द वर्ल्ड कैन डिलीवर अ. लेक्चर। यू कैन हियर दैट लेकिन ये चीजें. नहीं आएंगी। अलोंग विद पैसा कमाने की कला. हम देते हैं। हम देंगे वो दे रहे हैं हम. सक्सेसफुली।.
तो जो ऐसा करेंगे जो मैं समझता हूं। ये. अच्छी आपने कही कि बच्चे मिल सकते हैं। अब. आपके कॉलेज को शरारती बच्चों ने एक सवाल. लिख के भेजा हमें। हम कहा सर से पूछिएगा. कोई सीक्रेट स्पॉट है लवली प्रोफेशनल. यूनिवर्सिटी में? ऐसे मुझे लगता है मिलने में दिक्कत होती. है। हमने शायद इतने ज्यादा कैमरास लगाए. हुए हैं तकरीबन 4 5000 हम तो शायद कोई. सीक्रेट स्पॉट नहीं होगा। लेकिन मैं. बच्चों को कहूंगा कि वो बताएं कि ऐसा कौन. सा सीक्रेट स्पॉट है ताकि वहां भी मैं.
कैमरा लगा सकूं।. भाई लड़के लड़कियां जो आपस में कहीं कोना. ढूंढ रहे हैं। प्लीज कमेंट करके सर को. बताइए ताकि एक कैमरा और. लगे। अरे हां यहां पे सिंगल लड़के काम. करेंगे सर। वो ढूंढ-ढूंढ के बताएंगे आपको. कि ये चीजें रही। नहीं हमारे बच्चे देखिए. बहुत हेल्दी रिलेशनशिप में रहते हैं। हम. और मुझे नहीं लगता कि छोड़िए ये हमारे. किसी बच्चे का ये क्वेश्चन आपको आया होगा।. बच्चों का छोड़ देते हैं। आगे बढ़ते हैं।. पॉलिटिशियन बनने का क्या फायदा है? सबसे.
ज्यादा फायदा ये होता है कि बाकी. पॉलिटिशियन आपको तंग करना कम कर देते हैं।. ओके ग्रेट। ये तो आपने कहा था। अच्छा. पॉलिटिक्स में लोग युवा कब तक रहते हैं? मुझे लगता है पॉलिटिक्स की सबसे बड़ी खूबी. यह है कि जब तक आप पॉलिटिक्स में आप युवा. रहते तो मित्तल जी अभी युवा पॉलिटिशियन है. वो तो है ही अभी तो मैं तीन साल पुराना ही. हूं मैंने तो पार्लियामेंट में ही बोला था. कि मैं तो अभी इनफेंसी में हूं पॉलिटिक्स. में. इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग ये पॉलिटिक्स में.
लोग इतनी देर तक युवा कैसे रह लेते हैं. हमको थोड़ा समझाइए ना जो जैसे क्रिकेट में. 36 साल में बुजुर्ग हो लोग वहां फिजिकल. स्ट्रेंथ की ज्यादा ज्यादा जरूरत होती है।. तो यहां मेंटल स्ट्रेंथ की ज्यादा जरूरत. होती है। फिजिकल तो चाहिए ही लेकिन मेंटल. स्ट्रेंथ डोमिनेट करती है। युवा लोग ऐसे. रहते हैं कि वो हमेशा जनता के बीच में. रहते हैं या जनता के लिए काम करते हैं। तो. उनको हमेशा जागरूक रहना पड़ता है। हमेशा. चुौकन्ना रहना पड़ता है। तो मेरे ख्याल.
शायद जो हमारी फिजियोलॉजी भी है या. एनाटॉमी भी है वह भी यही कहती है कि अपने. माइंड को आप जितना इस्तेमाल करते रहेंगे. टू फेस न्यू चैलेंजेस तो आप जवान रहेंगे. मतलब आपका माइंड भी जवान रहेगा आप. पॉलिटिशियन बन गए अच्छे वाले नहीं देखो ये. तो जनता बताएगी हमको लगा जनता बताएगी के. मैं अच्छे वाला हूं या अच्छे वाला नहीं. हूं हमको लेकिन ये मैं अपने को बुरे वाला. नहीं बोलता हूं ये हमने देखा कि आप आपके. मित्र जया बच्चन जी भी हैं धनकड़ जी भी. हमने कहा अरे अगर दोनों साइड से इतने. अच्छे रिश्ते चल रहे तो राजनेता तो आप बन.
गए हैं। नहीं मैं खुशकिस्मत हूं के मुझे. देश के जितने बड़े नेता हैं और बहुत शंकर. जी ने बड़ी तारीफ की थी आपकी। मैं. खुशकिस्मत हूं कि वो मुझे इस काबिल समझते. हैं। हमने सुना जय बच्चन जी आई भी थी।. नहीं जय बच्चन जी तो नहीं आई मेरे। आपसे. कहीं मुलाकात की हमने कहीं कहीं कुछ हमने. सुना है। तस्वीरें कहीं देखी थी। हां. नहीं। पार्लियामेंट में हम लोग साथ बैठते. हैं। ऑलमोस्ट साथ नजदीक बैठते हैं। तो बात. होती है उनसे। हम्म। तो दोनों से आपने. गठबंधन बना रखा है। नहीं मैंने सभी से.
गठबंधन बना रखा है। ये ये कैसे ये कैसे हो. जाता है कि आप दोनों के साथ सरल सहज हो. गए। लाइक दोनों साइड से नहीं देखिए ऐसा है. कि जब आपको देश के लिए काम करना हम. और अच्छा काम करने की आप कोशिश करते हैं. तो आपसे कोई क्यों नाराज होगा? कोई भी. पॉलिटिशियन है वो जूनियर है, सीनियर है, ट्रेजरी बैंक से है, अपोजिशन से है।. अल्टीमेटली हर कोई देश का भला चाहता है।. ठीक है। पर्सनल एंबिशन हो सकती है कि मुझे. चुनाव जीतना है। वो एक बात सब में कॉमन. होगी। हम लेकिन देश तरक्की करे ये ये भी.
बात सबके लिए कॉमन है। और मैंने ये बात. वहां महसूस की है। मैं बात वैसे नहीं कह. रहा हूं। शायद जब तक मैं नहीं गया था। मैं. भी ये सोचता था लोग देश के लिए नहीं. सोचते। आप देखिए कि सारे पॉलिटिशियंस देश. के लिए इंटेंशन अच्छे हैं। देश के लिए. इंटेंशन अच्छे हैं। इलेक्शन जीतने के लिए. आप गलत इंटेंशन हो सकती है। वो मैं नहीं. बोलूंगा। ट्रू पर वो भी हर एक की नहीं कुछ. लोगों की लेकिन देश के हित में काम हो. इसके लिए सबकी इंटेंशन अच्छी है। व्हाट इज. वन थिंग यू यू यू यू यू यू यू डोंट लाइक. अबाउट.
पॉलिटिक्स? कोई एक चीज जो अंदर जाकर आपको. लगी हो कि. यार इससे थोड़ा बेहतर होना चाहिए था। ये. परेशान करती है। अ शायद हम जब परेशान तो. नहीं करती मैं स्ट्रेंथ ही कहूंगा हम कि. जब हम आपस में हम बात करते हैं हम बिल्कुल. ईमानदारी से बात करते हैं। हम.
आपस में चाहे वो ट्रेजरी बेंच है या जोक्स. भी करते हैं यार आपने वो क्यों किया या ये. क्यों किया? हम बिल्कुल ईमानदारी से बात. करते हैं। कैमरा ऑन होते ही कैमरा ऑन होते. ही हम एक्टर बन जाते हैं।. तो हालांकि मुझे कहना नहीं चाहिए। कई बार. मुझे ऐसा लगता है टीवी रिबेट्स क्या दिला. दी आपने मुझे। हां नहीं ऐसा लगता है कि. कहते हैं ना वो मैच फिक्सिंग होती.
है। मैचेस में क्रिकेट में खासतौर पे कहा. जाता है होती है नहीं होती मालूम नहीं है।. कहा जाता है कि मैच फिक्सिंग होती है। या. जो मूवी की स्क्रिप्ट होती है वो अच्छी. तरह से लिखी जाती है। रिहर्स की जाती है।. फिर वो की जाती है। रीटेक्स होते हैं जो. भी. तो मुझे वो लगता है कि कई चीजें ऐसी हैं. जो हम हम दोनों साइड्स को पता होता है कि. यह होना है ये नहीं होना लेकिन फिर भी हम. करते हैं। हमारे टीवी डिबेट में ऐसे होता. है सर कि जब शुरू नहीं होता है तो भाई. साहब लड़की कैसी है? अच्छी हो गई कहां पढ़.
रही है? बच्चा क्या कर रहा है? कोई दिक्कत. समस्या और जैसे टीवी शुरू होती थी तू तू. तू तू तू मैं मैं मैं एंड आई एम लाइक डूड. यू गाइस सच अ गुड फ्रेंड थोड़ी देर पहले. और जैसे ही खत्म होता है आइए भाई साहब चाय. पीने चलते हैं नीचे हां बस यही होता. पर ये स्ट्रेंथ भी है के ठीक है जब मुद्दा. है आपका हम अ तो मैंने अपने मुद्दे पर. बोलना है उन्होंने अपने मुद्दे पर बोलना. है लेकिन हम अपने आप में कड़वाहट ना रखें. ओके लेकिन मैं उस बात को नहीं कह रहा था.
ये तो एक मुद्दे की बात है ना मैं इस चीज. के हक में हूं वो उस चीज के हक में वो तो. हम बोलेंगे ही हम लेकिन वो चीज पहले फिक्स. हो जाती है हम. मैं उस फिक्सिंग की बात कर रहा हूं के. फिक्स नहीं होनी चाहिए। ट्रू वो फिर. बेईमानी है जनता से। वो मुझे लगता है जनता. से गलत कर रहे हैं हम लोग। आप रिलीजियस. हैं।. अब रिलीज की डेफिनेशन क्या है? यदि. चलिए इसको और घुमा देता हूं। धर्म जरूरी.
है। कितना जरूरी है आपके लिए? क्या है. रिलीजन को लेकर आपका टेक? देखिए एक सुप्रीम पावर है कोई। इसमें तो. मैं विश्वास रखता हूं। सभी रखते हैं। मैं. भी रखता हूं। हम. लेकिन जो धर्म के रीति. रिवाज उसमें मेरा ज्यादा विश्वास नहीं है।. हम और यह मुझे देन मुझे अपने माताजी और. पिताजी से मिली। हम. वो भी आडंबर ये वो बिल्कुल नहीं पढ़ते थे।. तो हमारे परिवार में भी वो नहीं है। मेरे.
में भी नहीं। हमारे परिवार में मतलब कोई. पूजा पाठ नहीं करते आप लोग? हमको भी ऐसा. नहीं है कि हमने मंदिर जाना है, इधर जाना, सवेरे उठ के नहाना, भगवान सामने आना। हम. ये मान के चलते हैं असली धर्म है मानवता. की सेवा।. असली धर्म है कि जो भी आप काम कर रहे हैं, जो भी आप काम कर रहे हैं, चाहे बिजनेस कर. रहे हैं, चाहे नौकरी कर रहे हैं, चाहे. पॉलिटिशियन है, चाहे डॉक्टर है, वो आप. ईमानदारी से कर। बिना पूजा पाठ के भी. लक्ष्मी जी आप पर मेहरबान है।. मुझे लगता है लक्ष्मी जी जो लोग मेहनत दिल.
से करते. हैं. और सोसाइटी को या अपने कस्टमर को या. क्लाइंट. को जितना देना चाहिए उनकी कीमत के बदले जो. वो देते हैं वसूल हम लेते हैं पैसा उनसे. लेते हैं उससे ज्यादा देते. हैं तो आप ग्रो करेंगे और वो लक्ष्मी भी. आप पे मेहरबान हमने अभी देखा आप कह रहे हो. आप रिलीजियस नहीं हो लेकिन हमने देखा अभी. आप कुंभ गए थे तिरुपति बालाजी आप के दर्शन. आपने किए तो अगर आप रिलीजियस नहीं हो आप.
पूजा पाठ नहीं करते आप कहते हो बाबा आप. मेरे पूजा पाठ नहीं करते थे तो कुंभ काहे. गए थे आप बड़ा अच्छा क्वेश्चन किया. आपने कुंभ और तिरुपति बालाजी मैं बिल्कुल. गया हूं दोनों जगह और मैं शायद बताना. चाहूंगा आपको के ये पिछले चारप महीने में. ही मैंने शायद किसी यात्रा पे गया हूं. उससे पहले मैं कभी भी नहीं गया इवन यहां. हमारे बहुत मशहूर तीर्थना है वैष्णो देवी. जी मैं अभी अभी तक वहां भी नहीं गया।. यहां मेरा मेरा जो मकसद था मेरा परिवार.
जाना चाहता था मेरे फादर इन लॉ साहब। पर. मेरा मकसद था मैं जाके देखूं कि जिस कुंभ. में 60 करोड़ लोग आएंगे मतलब मैं बीच में. गया था। हम्म उसमें अरेंजमेंट कैसे हुआ. इतना बड़ा? खाली ये देखने के लिए आपने. गंगाम में डुबकी लगा ली। नहीं चलिए फिर गए. थे डुबकी तो लगानी बनती थी। अह पाप सबको. धोने होते हैं।. नहीं वो भी तो देखना था। डुबकी में होता. क्या है? बट मैं देखना चाहता था कि इतना बड़ा. अरेंजमेंट कैसे होता है। क्या देखा?
क्योंकि मैं भी यूनिवर्सिटी चलाता हूं।. हमारी तो छोटी सी है। लेकिन मैं सोच रहा. था कुछ मैं सीख के आऊं उससे कि वो इतना. बड़ा कर सकते हैं। हम क्यों कई बार घबरा. जाते हैं? अरे ये ठीक नहीं हो रहा वो ठीक. नहीं हो रहा। तो हमें लर्न करना चाहिए। उस. लर्निंग को लेने के लिए मैं गया था। ऐसे. ही त्रिपुति बालाजी हमारा पार्लियामेंट का. टूर गया था। तो वो वहां लेके गए फिर मेरी. जिज्ञासा ज्यादा ही यही देखने की थी कि जो. इतना बड़ा धर्म स्थान है इतने लाखों लोग. रोज आते हैं और अपनी मुराद जो भी मांगते.
हैं और करके जाते हैं उसमें इतना. अरेंजमेंट कैसे होता है? तो जैसे कुंभ भाप. गए 60 करोड़ लोगों ने लगभग डुबकी लगाई।. उनके रिलीजियस फेथ को देखकर, मैनेजमेंट को. देखकर आपके मन में क्या थॉट आया? मुझे मैनेजमेंट दोनों जगह तृप्ति बालाजी. और कुंभ दोनों जगह देख के यह है कि हमारे. देश ही है भारत देश ही ऐसा है जो इस लेवल. पर अरेंजमेंट कर सकता है। इस तरीके से. बढ़िया अरेंजमेंट इंप्रेस्ड जिस तरह से. कुंभ मैनेजमेंट हुआ था। आई एम रियली. इंप्रेस्ड के और ठीक है। इतना बड़ा रश था।.
लोग आए थे। कुछ हादसा हो गया जो कि दुखदय. नहीं होना चाहिए। लेकिन अरेंजमेंट्स तो. जनरली अच्छे थे। क्या अच्छा लगा आपको अगर. मैं स्पेसिफिक हूं कुंभ में? लोगों के रहने के लिए अरेंजमेंट्स किया।. लोगों के जब डुबकी लगाने जाना है वो जो. अरेंजमेंट्स से दो की चीजें मेरे ख्याल. आती हैं आमतौर पे और ट्रैफिक मैनेजमेंट. तीन चीजें जो मालूम तो मैं फर्स्ट को गया. था फर्स्ट फरवरी को तो मुझे कहीं कोई.
प्रॉब्लम नहीं लगी तीनों जगह ही। तो क्या. सीखा वहां से? बिल्कुल सीखा मैंने। क्या. सीखा जो जैसा आपने कहा ना कि हम 500. बच्चों की यूनिवर्सिटी है। 400 बच्चों की. 60 करोड़ देखने गए। सीखने गए थे क्योंकि. आप एग्जामिन करने तो गए नहीं थे मार्क्स. देने। क्या सीखा? सीखा क्या आपने? यही. सीखा कि यदि आपको छोटे टाइम में और कम. ड्यूरेशन के लिए 2 महीना, डेढ़ महीना के. लिए यदि बच्चों के स्टे का अरेंजमेंट करना. पड़े कल को बच्चों के फूड का अरेंजमेंट. करना पड़े, बच्चों की मूवमेंट का. अरेंजमेंट करना पड़े तो आप कैसे कर.
पाएंगे? कैसे आप रोड बिछा पाएंगे? कैसे. टेंपरेरी सीवरेज बिठा बिछा पाएंगे? क्योंकि वो नदी की जो साइड रहती है उस पे. वो सारा कुछ बनाते हैं। कैसे आप पानी की. लाइनें बिछा पाएंगे? हां जी। और जैसे रोड. थे वो मेटल के रोड थे। शीट थी मेटल की वो. रखी थी रेता के ऊपर उन्होंने जो बढ़िया. काम कर रही थी। प्लस स्टे के अरेंजमेंट्स. कैसे कर पाएंगे? तो वो जो सारे. अरेंजमेंट्स थे वो एक लर्निंग थी और जब भी.
मौका होगा यूनिवर्सिटी में ऐसा मैं. करूंगा। लवली देखिए लवली यूनिवर्सिटी में. कह रहा हूं मैं लवली। जो बात आप कह रहे. हैं नहीं जो चीज देखिए अच्छी है वह कोई भी. करे उसकी तारीफ की जानी चाहिए जो बुरी है. वो भी कोई तारीफ करे उसकी बुराई की जानी. चाहिए तो मैं इसमें विश्वास रख नहीं हमने. भी बहुत सारे वीडियोस जब घटनाएं हुई थी. सरकार की आलोचना बनाए थे लेकिन जब वहां गए. तो कई चीजों से हम भी इंप्रेस हुए. थे। तो ये बात आप ठीक कह रहे हैं कि जो.
अच्छी चीज है उसकी तारीफ कर दीजिए। जहां. सवाल हो वहां पर तीखे सवाल पूछती दोनों. भूमिका निभानी चाहिए। बिल्कुल एक जैसे हम. जैसे मैं हिंदू धर्म को बिलोंग करता हूं. तो हमारे हम सिख धर्म के किसी गुरुद्वारा. में जाते हैं। मैं जाता रहता हूं। अभी मैं. करतारपुर साहब पाकिस्तान भी गया अपने 200. लोगों को लेके अपने टीचर्स को ले। वहां. क्यों गए थे आप? एक देखिए एक हमारे गुरु नानक देव जी का. स्थान है वो जहां उन्होंने जिंदगी के काफी.
वर्ष गुजारे। तो मैं उसको नतमस्तक करने. गया था कि ऐसा इंसान जो इस लेवल पर. पहुंचा वो कैसे रहता था उधर कैसे खेती. करते थे वो टू एक्सपीरियंस इट टू. एक्सपीरियंस इट नॉट रिलीजियस पॉइंट ऑफ. व्यू. देखिए आस्था एक अलग बात है लेकिन लर्निंग. एक अलग बात हां वही वही मैं कह रहा हूं कि. टू एक्सपीरियंस इट कि एक व्यक्ति जो यहां. से निकल कर सिख धर्म का इतना प्रचार. प्रसार किया धर्म का एक पूरी दुनिया में. उसको लोग पूछते और वो कैसे वो कहां रहते. थे क्या करते थे शुरुआत एक्सपीरियंस उनकी.
लाइफ कैसी थी? कैसे करते थे? हां, इट्स अ. गुड थिंग। वी ऑल शुड लर्न। क्या सीखा आपने. गुरु नानक जी से? फिर वहां जब आप गए उनकी. जो वहां जाके लोगों से बात की और समझ आया. कि इतने सिंपल थे। वो छोटी सी कुटिया में. रहते थे। वहीं खेती करते थे। वो पुराने. जमाने में तो वही बैलबूल होते थे। तो वो. सारी उन्होंने काफी डिटेल में बातें बताई।. तो वो सारी समझ में आई कि कितनी सिंपल. लाइफ थी इन लोगों की। कितनी शानदार चीज है. ना इंडिया पाकिस्तान के रिश्तेदार अच्छे. होते। अच्छे होते तो बहुत ही अच्छा होता।.
लेकिन इसके बावजूद भी वहां बट ये अच्छा. स्टेप था करतारपुर अच्छा स्टेप था और. उन्होंने अच्छा हमें वेलकम किया और अच्छी. हॉस्पिटिटी की। आज जब मैं आपसे मिलने आया. तो मैंने देखा कुछ आपके पुराने स्टूडेंट. आए थे। मनप्रीत आए थे आपसे मिले। अब मेरे. मन में सवाल आया कि बहुत सारे बच्चे होंगे. जो लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पढ़कर. अलग-अलग क्षेत्र में काम कर रहे होंगे।. किन-किन बच्चों पर आपको नाज है? अगर कुछ. बच्चों के नाम आपको याद हो या बताना चाहे? देखिए नाज तो मुझे अपनी सभी बच्चों पर है. कि जो भी बच्चे एलपीयू से गए हैं और लाइफ.
में अच्छा कर रहे हैं तो वह सभी एलपीयू के. लिए सम्माननीय है मान का विषय है। लेकिन. आप पूछ रहे हैं तो एकदम जो मुझे ध्यान आ. रहा है कि अभी लास्ट वीक एक हमारा बच्चा. है. विष्णु। वो कोयंबूर के गांव का बच्चा. है। अनफॉर्चूनेटली बचपन में ही उसके. माता-पिताजी का देहांत हो गया। उसको दादी. ने पाला। वह गांव के सरकारी स्कूल में. गया। इंग्लिश लैंग्वेज नहीं थी।. पॉलिटेक्निक में गया। फिर घूम के हमारे.
पास आकर उसने बीटेक की। अभी बीटेक कर रहा. है। फाइनल ईयर का स्टूडेंट है। और बीटेक. करते हुए ही उसने इंटर्नशिप पे गया। जैसे. मैं बता रहा था आपको। और इंटर्नशिप पे. उसने इतना बढ़िया काम किया एक साल में. वहां पे। पहले तो. उसने तकरीबन ₹ करोड़ कंसलटेंसी में कमाया।. रोबोटिक का स्टूडेंट है। इलेक्ट्रॉनिक्स. में रोबोटिक का ₹ करोड़ तो उसने कंसलटेंसी.
में. कमाया। और उसके बाद उनका मैनेजमेंट इतना. इंप्रेस हुआ उससे। उसको आज तक उसने. हिंदुस्तान. का सबसे बड़ा सैलरी पैकेज दिया। क्या. पैकेज है? ढाई करोड़ 2.5 करोड़ बीटेक करने वाले. लड़के को बीटेक का भी स्टूडेंट है वो नहीं. लगभग चलते हैं हम लोग जिंदगी भर ताने. सुनते हैं बट वी आर ऑल प्राउड ऑन हिम और.
जो ढाई करोड़ है वो ईशॉप नहीं है कोई भी. उसमें बट शेयर नहीं है कोई कैश सारा कैश. पेमेंट. है जनरली ईशॉप दे देती है ना कंपनियां कि. 10 साल बाद कैश क्रॉप ऐसा कुछ नहीं है एंड. अभी भी वो पढ़ रहा अभी भी मेरा स्टूडेंट. हूं।. इट्स अ गुड स्टोरी। इट्स इंस्पिरेशनल. स्टोरी कि अगर आप में दम है तो आप कर सकते. हैं। दम है कर सकते हैं। कोयतूर का बच्चा. दादी ने.
पढ़ाया। मां-बाप थे नहीं बेचारे के। बट ही. इज़ डूइंग सो वेल फॉर हिज लाइफ एंड फॉर. एलपीयू एंड फॉर द कंट्री।. आई एम श्योर ऐसे बच्चे देश का भी नाम रोशन. करेंगे। देश यह वही बच्चे हैं जो हमारे. मुझे उम्मीद है कि बच्चा कल को लाइफ में. बहुत ऊपर शाइन करने वाला हो। नहीं मुझे. ज्यादा खुशी इस बात की है क्योंकि आपके. यहां से कई फिल्मी कलाकार और कई और भी. निकले लेकिन आपने पहला नाम ऐसे बच्चे का. लिया जिसने कोयंबटूर के गांव से निकल कर. नाम रोशन किया। सो इस चीज के लिए भी मैं.
आपकी तारीफ करता हूं। नहीं थैंक यू वेरी. मच। नहीं वी आर प्राउड ऑफ़ दैट चाइल्ड।. नहीं एंटायर रादर पूरे देश को उस पे मान. होना चाहिए। और इसमें एक और बड़ी बात है. एक तो चलो एलपीयू की स्टोरी होगी ना कि. हमें अच्छा लग रहा है हमारा बच्चा एक देश. की स्टोरी है इसमें सही बात है देखिए हम. बात कर रहे हैं विकसित भारत की 2047. तक विकसित भारत कैसे बनेगा देश में. इंडस्ट्री बढ़ेगी जीडीपी बढ़ेगी जीडीपी.
कैसे बढ़ेगी इंडस्ट्री बढ़ेगी और आज हम. क्या मान के चलते हैं इंडिया में. सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री है बाहर से सॉफ्टवेयर. का पैसा आ रहा है। ये है वो है। ये लेके. चलते हैं। हम मैन्युफैक्चरिंग की तो बात. ही नहीं करते। हम मेरे ख्याल सॉफ्टवेयर. कैटेगरी में जो हमने ग्रो करना था कर. लिया। अब जो ग्रोथ आएगी नॉर्मल आएगी। जंप. नहीं करेगी। लेकिन मैन्युफैक्चरिंग ऐसा. सेक्टर है जिसमें अभी ग्रोथ जंप करेगी।. क्योंकि फॉर्चूनेटली जो भी दुनिया की.
चाइना से प्रॉब्लम है वो भी हमारे पास. आएंगे।. यह जो एक एग्जांपल है कि यह इंडिया की. कंपनी ने पैसा दिया उसको. ढाई करोड़ का. पैकेज इंडियन कंपनी ने. यूएस में काम करने के लिए नहीं इंडिया के. अंदर काम करने के लिए दिया ट्रू. तीसरा आईटी इंडस्ट्री नहीं है सॉफ्टवेयर. इंडस्ट्री नहीं है ये मैन्युफैक्चरिंग. इंडस्ट्री है जिसने पैसा दिया और. मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में.
भी एग्रीकल्चर बेस्ड इंडस्ट्री. है। मींस किसान को कहीं ना फायदा और वो है. कौन सी? मैं कंपनी का नाम नहीं बता. पाऊंगा। डेरी. ओके। मिल्क प्लांट है।. इंटरेस्टिंग।. एक मिल्क प्लांट अपने प्लांट को अपग्रेड. करने के लिए रोबोटिक सिस्टम उसमें लाने के. लिए ढाई करोड़ का पैकेज दे रहा है। तो. हमारा देश तो कहीं भी जा सकता है। फोर्थ.
ईयर के बच्चे को। फोर्थ ईयर के बच्चे।. तो देश में हमारे इतना पोटेंशियल है ट्रू. कि हम विकसित भारत बन सकते हैं। मुझे उस. उस बात के बाद इतनी कन्विक्शन हो गई है।. नहीं इट्स अ वेरी इंस्पिरेशनल स्टोरी कि. भारत की इंडस्ट्री ढाई करोड़ का पैकेज. मैन्युफैक्चरिंग में डेयरी प्लांट चलाने. वाली कंपनी दे रही है तो तभी दे रही होगी. ना उनको कुछ एडवांटेज हो रहा होगा। बहुत. हां जाहिर सी बात है। जाहिर सी बात है। तो. इसका मतलब ऐसी कितनी इंडस्ट्री है. हिंदुस्तान में? एक्सेप्शन लिखा होगा उस. लड़के में उन्होंने। लिखा होगा। लेकिन फिर.
भी दिया ना फिर भी नहीं दे पाते ना। हां, हम नए बच्चों पे लोग इतने इजीली यह यह भी. दर्शाता है कि नए बच्चों पे लोग भरोसा कर. रहे हैं। भरोसा कर रहे हैं। कंपनी की भी. तारीफ होनी चाहिए। आईआईटी का बच्चा नहीं. हूं। एलपी का बच्चा है। एक्जेक्टली उसने. बेचारे ने 10th तक इंग्लिश सिर्फ सब्जेक्ट. के तौर पे पढ़ी है। इंग्लिश मीडियम में. नहीं पढ़ी है उसने। पॉलिटेक्निक भी लोकल. भाषा में किया उसने।. मतलब हमारे बच्चों में कितना पोटेंशियल. है? हमारे देश में कितना पोटेंशियल है, हमारी अपनी इंडस्ट्री में कितना पोटेंशियल.
है? हमारी एग्रीकल्चर बेस्ड इंडस्ट्री में. कितना पोटेंशियल है? तो हम क्यों नहीं. विकसित भारत बन सकते? इट्स अ वैरी गुड. स्टोरी। बाकी आपके यहां से और भी बहुत. सारे फेमस लोग भी निकले। हम देखिए आपको. कितने नाम याद कौन-कौन से फेमस लोग आपके. यहां से निकले जिनको लोग जानते हैं। अभी. आप हम इसकी बात करें। ऐसे एक बच्चे को 1. करोड़ का पैकेज मिला।. अभी 1700 बच्चों को 1 लाख 10 लाख से 1. करोड़ के पैकेज मिले हैं। तो ये तो होगा. हमारा प्लेसमेंट साइड पे। आप दूसरे बच्चों. की बात करें। हम स्पोर्ट्स पर आ जाते हैं।. स्पोर्ट्स किसी भी देश के लिए मान होता.
है। क्रिकेट तो एक है ही। हॉकी पे तो आपने. कब्जा कर रखा है। हॉकी पे भारत की ओलंपिक. टीम में आठ बच्चे मेरे थे। पिछले साल की. ओलंपिक टीम में जो पहले गई थी उसमें. टोक्यो में उसमें सात बच्चे मेरे थे।. इंक्लूडिंग कैप्टन पहले भी कैप्टन मेरा. था। अभी कैप्टन मेरा था।. नीरज चोपड़ा गोल्ड मेडलिस्ट जो पिछले वो. भी मेरा बच्चा है। गोल्डन बॉय गोल्डन बॉय. इस पर सिल्वर वो भी. मेरा फिर आप आ जाइए.
नीरज चोपड़ा आई मीन व्हाट एन एसेट फॉर. इंडिया हम कितने उनप प्राउड फील करते हैं।. कितना प्राउड पहला गोल्ड मेडल प्रैक्टिकली. क्रिकेट लविंग कंट्री में उस इंसान ने. अपनी अलग पहचान बनाई है और आज लोग रात को. जग के मैच देख रहे थे। वो जैवलिन थ्रो. हमने रात को जग के देखा था। जग के देखा. था। फिर इस जैवलिन थ्रो में इस बार पैरा. ओलंपिक में मेरे दो बच्चे सिल्वर लेके आए. हैं। कौन-कौन? सर दो बच्चे मतलब लिस्ट. आपके वहां लंबी है। स्पोर्ट्स में तो बहुत. लंबी लिस्ट आपके पास है। हिंदुस्तान में.
117 बच्चे ओलंपिक में गए थे इस बार। हम. पूरे हिंदुस्तान में। उसमें से 24 बच्चे. एलपी ने भेजे 20%. विनेश भी यहीं से पढ़ी हुई है। विनेश भी. यहीं की स्टूडेंट है।. मैंने सुना आपने उनको भी रिवॉर्ड दिया था।. हां विनेश क्योंकि एक बार तो सिल्वर मेडल. जीत चुकी थी हम लेकिन बाद में विड्रॉ कर. लिया गया तो जो सिल्वर मेडल मेडलिस्ट को. 25 लाख का अवार्ड देते हैं तो हमने विनेश. फगुड को बुलाकर ये दिया कि बच्ची तू तो.
जीत गई थी तो यह तेरा अवार्ड है। ये तेरा. इस पे हक है। लवली. हॉकी में पिछली बार भी ब्रोंज जीता हमारे. बच्चों ने। ओलंपिक में इस बार भी ब्रोंज. जीता। बैक टू बैक टोक्यो ओलंपिक में एशियन. में गोल्ड. जीता तो हम लोगों ने ऑल इंडिया रनरशिप. ट्रॉफी जीती मीराबाई चानू भी यहीं की है. मीराबाई चानू भी हमारी हमारी.
है चेक कर ले मेरे ख्याल हमारी है. हरमनप्रीत कैप्टन. वो भी यहीं से थे वो भी यहीं से है आज भी. है आज भी स्टूडेंट है हमारे हरमनप्रीत. अरे वाह मनप्रीत को तो मैंने देखा अभी. हरमनप्रीत मनप्रीत सबमि मतलब आपको आपको तो. हॉकी के टिकट्स फ्री मिल जाते होंगे फिर. तो सारे बच्चे ही आते होंगे सर आके देख. लीजिए बट इट्स सच अ गुड फील टिकट की कीमत. तो मैटर नहीं करती मैटर करती है कि मेरा. नहीं नहीं मैं भावना की बात कर रहा हूं कि.
बच्चे मेरे बच्चे वहां खेल रहे हैं। ट्रू. सात बच्चे अगर आपकी टीम से जा रहे हैं।. आपके कॉलेज से जा रहे हैं। देश का नाम. रोशन कर रहे हैं। इस बार तो हॉकी के मैचेस. भी हम सब ने उतने ही चाव से देखे थे।. बिल्कुल लेकिन. कमाल है। कमाल की कहानी है। शहनाज ग भी. आपके यहां से ही हैं। शहनाज ग भी हमारे य. से रही है। मैं खाना नहीं खाऊंगी तो पंजाब. कहां से दिखेगा? हां नहीं बिल्कुल ठीक बात. है। वो भी हमारी स्टूडेंट रही है। आप ही. की मिठाई तो नहीं खाती थी पहले वो। नहीं. मिठाई नहीं खाती थी वो। जहां तक मुझे. ध्यान है। हालांकि मैं मिल नहीं पाया कभी. जब वो स्टूडेंट थी। तो कैसी फीलिंग होती.
है जब इतने सारे नाम आप सुनते हो। जब भी. सुनते हैं अच्छा लगता है। प्राउड लगता है. कि हम एलपीयू उन बच्चों की लाइफ में कुछ. कंट्रीब्यूट कर पा रही है। कुछ. कंट्रीब्यूट किया है। हम ये जो भगवान ने. हमें मौका दिया है ये सबसे ज्यादा. सेटिस्फेक्शन देता है। हम ये मुझे पर्सनली. तौर पे सक्सेस की फीलिंग देता है कि मेरे. बच्चे सक्सेसफुल हो रहे हैं लाइफ में।. सैकड़ों हजारों बच्चे तो मैं भी ठीक है।. अब एक सवाल इसके बिल्कुल विपरीत सक्सेस की. तो बात हमने कर ली। बट बहुत सारे बच्चे. कॉलेज में निराश हो जाते हैं। सक्सेस नहीं.
मिलती है।. उनको आप क्या बताओगे? हाउ टू हैंडल. फेलियर? देखिए जहां तक एलपीयू है हमारे यहां एक. फुल फ्लेज्ड 50 लोगों का सेल है जो इसी पर. काम करते हैं। हम इसमें साइकोलॉजिस्ट भी. हैं, कंसलटेंट्स भी हैं, मेडिकल सपोर्ट भी. है, मेडिटेशन भी है। सब चीजें हम उनको. उनकी जरूरत के मुताबिक सिखाते हैं। टू. हैंडल ऑल दिस काइंड ऑफ़ फेलर्स और वो हमारा. अच्छा जा रहा है काफी।.
बाकी मैं उनको यह कहूंगा अदर देन दिस कि. देखिए जब भी आप कोई काम करेंगे सक्सेस और. फेलियर तो रहने वाली है। हम. ओलंपिक में 150 देश पार्टिसिपेट करते हैं।. मेडल तो एक ही को आना है। हम तो बाकी तो. 149 नहीं जीतेंगे तो वो निराश हो के बैठ. जाए तो ऐसा तो नहीं होना चाहिए। हम. सिविल सर्विज एग्जाम में आप बैठते हैं। हम. सभी तो नहीं सक्सेसफुल होते। हम हर एक को. पता होता है आई मे सक्सीड आई मे नॉट.
सक्सीड जेई में किसी में भी आप देखें लाइफ. में आप बिजनेस करते हैं सारे बिज़नेस तो. सक्सेसफुल नहीं होते हम तो ये चीज तो आनी. ही है लाइफ में सक्सेसफुल आप हो भी सकते. हैं नहीं भी हो सकते. लेकिन उससे निराश होने की बजाय उससे सीखते. हुए आगे और जोर से काम करें और पैशन से. काम करें और दिल से काम करें आज नहीं तो. कल आप जरूर कामयाब होंगे कोई फिल्म जो. आपने देखी आपको देखनी चाहिए जैसे एक फिल्म. मैं हमेशा कहता हूं थ्री इडियट्स हां हां. देखिए यदि आप एंटरटेनमेंट के हिसाब से. बोलेंगे हम तो थ्री डिट एंटरटेनमेंट एंड.
लर्निंग का कॉम्बिनेशन ट्रू. पुरानी मूवीस पे जाएं जागृति मूवी जैसे. हमारे स्कूल टाइम में हम लोगों ने देखी थी. तो मुझे लगता है वो देखनी चाहिए वो आपको. एंटरटेन भी करती है उससे ज्यादा लर्निंग. देती है लाइफ में. थ्री डेट आपको लगा दोबारा बननी चाहिए. बिल्कुल बननी चाहिए और जब भी बने मैं. चाहूंगा कि एलपी शुड बी पार्ट ऑफ़ दैट.
स्क्रिप्ट और बदलेंगे वो वो स्क्रिप्ट. नहीं चलेगी अब जो पुरानी वाली थी क्यों वो. उस टाइम के लिए रेलेवेंट थी ना 20 साल. पहले जब मूवी बनी थी हम 2009 में तो रिलीज. हुई थी हम लेकिन आज के लिए बच्चों की. एक्सपेक्टेशंस बदल गई है। सोशल मीडिया आ. गया है। कोविड आ गया। उसने बड़ा कुछ. सिखाया।. डिजिटल रेवोल्यूशन आ गया है। उसके बाद. कुमार हिरानी आपको सुन रहे हो तो आप. उन्हें क्या बताओगे कि अगर थ्री डिट्स. पार्ट टू बने सीक्वल बनाए तो कैसी. स्क्रिप्ट होनी चाहिए कॉलेज के हिसाब से?
वो ये होनी चाहिए कि बच्चे ने लर्निंग में. प्रोजेक्ट तो हो लेकिन उस प्रोजेक्ट से. उसने कमाना भी है एज अ स्टूडेंट के तौर. पे। केवल दिखाना नहीं है। केवल दिखाना. नहीं है, कमाना भी है उसको।. उसको अपनी फीस स्टूडेंटशिप के दौरान खुद. निकालनी है। हम. थर्ड ग्रेड काम करके नहीं मैं इसमें थोड़ा. क्लेरिफाई करना चाहूंगा। कई बार आप फीस. निकालते हैं। अच्छा ठीक है आपने कहीं. पार्ट टाइम जॉब ले ली। उस तरीके से नहीं. बोल रहा मैं। उसी स्किल पे उसी स्किल से. जो आप सीख रहे हो। जो आप स्किल सीख रहे. हैं। हां। जो स्किल पे आपने करियर बनाना.
है। हम उस स्किल को यूज करते हुए उससे. पैसा कमाना है। मैं वो चीज बोल रहा हूं।. वेटर पेंट्री बॉय या गार्ड बन के नहीं। वो. नहीं। जो एजुकेशन आप पर्स्यू कर रहे हैं. उस एजुकेशन जो आपने करियर बनाना है बाद. में आपने पास आउट करने के बाद क्या बनना. है वो ड्यूरिंग स्टूडेंटशिप बनना है और. उसमें पैसा कमा के आपको अपनी फीस निकालनी. है। ग्रेट अच्छा थॉट है ये। राजकुमार सर. को मैं टैग कर दूंगा। बिल्कुल कीजिए जी।. आप और उनको कहना यदि इस पे मूवी बनाते हैं.
तो मेरी कट मुझे भेज दें।. अंदर से मित्तल जी गए नहीं पुराने वाले. इतना बड़ा कैंपस हो गया है 1000 करोड़ का. टर्नओवर है आपका मैंने कहीं पढ़ा था आप. उसके बाद भी क्रेडिट देके अरे पैसा दे दो. नहीं ठीक है इट्स अ गुड आईडिया आपका बनता. है इनोवेटिव आईडिया आपने दिया है ठीक है. तो पडकास्ट का हमारा भी आप भिजवा दीजिएगा. फिर उसमें से कि हमारे पॉडकास्ट में चर्चा. हुई थी बिल्कुल आपका हक बनता है क्यों. नहीं बनता.
हमने कॉलेज बेस्ड कई फिल्में देखी हैं. जैसे कि स्टूडेंट ऑफ द ईयर आई थी बड़ा कूल. कॉलेज था स्टूडेंट स्टूडेंट ऑफ द ईयर और. लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी मतलब कुछ. समानताएं कैसा कूल कॉलेज है आपका नहीं. बिल्कुल बिल्कुल कोई समानता नहीं है वैसे. कॉलेज नहीं पसंद आपको जैसे उसमें दिखाया. था कॉम्पिटिटिव आप मुझे नहीं बिल्कुल. कंपिटिटिव होना अलग बात है लेकिन वो जो. मूवी बनी थी वो जैसे थ्री इडियट्स में. कहीं ना कहीं एजुकेशन की रिफॉर्म्स की बात. की गई थी ट्रू मैं उस मूवी को क्रिटिसाइज. नहीं कर रहा वो एंटरटेनमेंट के लिए बनी थी.
और एंटरटेनमेंट के लिए शायद अच्छी मूवी. बनी थी हम लेकिन लेकिन उस मूवी से कुछ. स्टूडेंट सीखेंगे ऐसा उसमें कुछ नहीं था।. ओके वेल नोटेड जो स्टूडेंट ऑफ अ ईयर में. था ऐसी मूवी और भी बनी है जो जीता भाई. सिकंदर उसमें क्या वो साइकिल रेस है जीत. गए अल्टीमेटली वो क्या स्टोरीज. हैं वो एजुकेशन को रिफॉर्म करने की. स्टोरीज नहीं है कोई भी वो सिंपल एक. एंटरटेनमेंट स्टोरीज है तो मैं तो उस चीज. के लिए एंडोर्स नहीं करता उसको वैसा कॉलेज.
नहीं है आपका मेरा कॉलेज ऐसा नहीं है और. मैं बनाना भी नहीं चाहूंगा कभी भी हम. चाहते हैं बच्चे कंपटीशन में पास. पार्टिसिपेट करें हम करवाते हैं उनको. नेशनल इंटरनेशनल. और इंडस्ट्री ओरिएंटेड कंपटीशन वहां करें. और अपना स्किल दिखाएं पर किसी को इंप्रेस. करने के लिए नहीं परंपरा प्रतिष्ठा. अनुशासन. नहीं देखिए वो हर जगह ही होना चाहिए अकेले. एजुकेशन में नहीं हम बिनेस चला रहे हैं.
वहां भी होना चाहिए इंडस्ट्रीज चला रहे. हैं वहां भी होना चाहिए पार्लियामेंट में. भी होना चाहिए हम डांड खाते हैं हर रोज के. हम सबसे बदमा बदमाश बच्चे तो वहीं बैठते. हैं। नहीं इसमें तो कोई दो राय है ही. नहीं। वो तो एक स्टोरी भी है ना के।. हालांकि मुझे कहना नहीं चाहिए। मेरे साथी. नाराज हो जाएंगे. के छोड़िए उसको।. अब देखिए राजनेता वाली आदतें आप में आने. लगी। छोड़ दीजिए।. नहीं वो मासूमियत जा रही है आपकी।.
चलो कभी और सुनाएंगे वो फिर। अगले. पॉडकास्ट में। कभी लो फेस आया आपका लाइफ. में? बिल्कुल आया लाइफ में। लगा कि यार. यूनिवर्सिटी नहीं चल पाएगी या कुछ भी ऐसा. लगा आपको लाइफ में कि नहीं हो पाएगा। अब. क्या करें? देखिए यह तो लाइफ में आता है।. जैसे हम पहले की बात कर रहे हैं कि बजाज. की डीलरशिप में हमारा एप्लीकेशन उठा के. फेंक दिया उन्होंने और हम शॉर्टलिस्ट भी. नहीं हुए।. अ वो लो फेस एक बार आया लेकिन फिर ट्राई. किया. कि नहीं यार शॉर्टलिस्ट तो नहीं हुए निकल. गए हैं सिस्टम से पर ट्राई तो करें। ट्राई.
किया दोबारा अप्रोच किया किसी के थ्रू।. उनको कहा अच्छा आप हमारे ना एक दिन विजिट. करने आ जाओ आप और वह दिल रखने के लिए किसी. का आ गए लेकिन दे फ्ट सून प्रेस टू. अल्टीमेटली हमें मिल गई सबसे बड़ा मैं. एग्जांपल इसमें दूंगा जब हमारी. यूनिवर्सिटी बनने के लिए बिल पंजाब. विधानसभा में गया. दिसंबर नवंबर 2005. बिल पेश हुआ.
रूलिंग पार्टी कांग्रेस थीम कैप्टन. अमरिंदर सिंह जी सीएम साहब थे तो रूलिंग. पार्टी के एक एमएलए ने उसका विरोध करना. शुरू कर दिया। ऑोजिशन वाले हमारे साथ थे।. उनको कहा अच्छा काम हो रहा है। कांग्रेस. भी, अकाली दल भी, बीजेपी तीनों ने कहा. अच्छा काम हो रहा है। ये करना चाहिए।. लेकिन रूलिंग पार्टी के एक एमएलए साहब. साहबान ने वो विरोध करना शुरू कर दिया कि. ये यूनिवर्सिटी. बनेगी। यह लड्डू पेड़े बेचने वाले अब. यूनिवर्सिटी बनाएंगे। यह जैसे बर्फियां.
बेचते हैं, वैसे डिग्रियां बेचेंगे।. यह ऐसा होगा। मंत्री जी को इशारा करते हुए. बोला उन्होंने आपको तो शायद चांदी के वर्क. लगी हुई बर्फी पहुंच गई. होगी। यह सब कुछ अच्छी बहस की ओर हमें लगा. अब हमारा बिल पास नहीं. होगा। मतलब हम यूनिवर्सिटी बनाने का सपना. खत्म हो गया। तो वह 45 मिनट तो हम दर्शक. दीर्घा में बैठे देख रहे थे। और यह मान के. चले थे ऐसा नहीं होगा। तो लो हो रहे थे,
लेकिन कुछ ऑप्शन नहीं थी। कुछ कर नहीं. सकते थे। एक्सेप्ट टू वॉच। लेकिन एंड में. कैप्टन अमरिंदर सिंह जी ने स्टैंड लिया।. बोलते नहीं मुझे स्टेट की भलाई के लिए. एक्सपेरिमेंट करना. है। नहीं चलेगी बंद कर देंगे।. एक्सपेरिमेंट तो मैं. करूंगा। तो विद ऑल अपोजिशन उन्होंने वो. बिल पास. करवाया। चलो वी वर हैप्पी। फिर वो बिल. गवर्नर साहब के पास गया सेंट के लिए। अब.
वही एमएलए साहब गवर्नर साहब के पास पहुंच. गए। मीडिया में न्यूज़ तो आनी शुरू हो ही. गई थी। यह हुआ, वह हुआ असेंबली में। तो. गवर्नर साहब रुक के बैठ. गए। ये तो मैं नहीं पास करूंगा। मैं तो. साइन नहीं. करूंगा। तो फिर क्या करें? फिर हम गवर्नर. साहब से अपॉइंटमेंट लेके उनके पास पहुंचे।. उन्होंने बताया सर आपको हमसे क्या इसमें. लगता है? तो उन्होंने अपनी शंकाएं रखी।. फिर हमने उनका समाधान किया और. उन्होंने अल्टीमेटली असेंड दे दी। तो वह. जो फेस था असेंबली में होना फिर गवर्नर.
साहब के पास होना तो वो डेफिनेटली हमारे. लिए था।. बट जो एफर्ट्स हम कर सकते थे वी कंटिन्यू. टू डू दोज़ एफर्ट्स और अल्टीमेटली बन गई और. आज वो यूनिवर्सिटी आपके सामने है।. आप कैसे देखते हैं लोग पंजाब में. यूनिवर्सिटी को? अमरिंदर साहब या बाकी सब. जो आप कहीं मिलते हो। तो अमरिंदर साहब तो. बहुत एप्रिशिएटिव है क्योंकि उन्होंने तो. बनाई थी और उनको इस बात से खुशी है कि जो. मैंने एक्सपेरिमेंट किया था आपने उसको. मेरे एक्सपेरिमेंट को सही साबित कर दिया. और मेरी जो मैंने कमिटमेंट की थी असेंबली.
में या पंजाब की पब्लिक से आपने उसका मान. रखा तो ही इज़ वेरी. हैप्पी और बाकी सब लोग पंजाब के लोगों को. भी अच्छा लगता है कि पंजाब की यूनिवर्सिटी. ने पंजाब के अंदर ही नहीं देश के अंदर ही. नहीं पूरी दुनिया में नाम कमाया है। ओके. सेकंड लास्ट क्वेश्चन सर अ एलपीयू में. क्या ऐसा है जो बाकी यूनिवर्सिटी से अलग. करता है? कुछ तो होगा ना आपका भी एक्स. फैक्टर। देखिए हर यूनिवर्सिटी चाहे वो.
प्राइवेट है सरकारी अपने लिए बढ़िया करने. की कोशिश करती है। मैं मान के चलता हूं हर. एक यूनिवर्सिटी का. मैनेजमेंट अपने काम के प्रति सीरियस है और. वो दिल से काम करते. हैं और आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। करना. भी चाहिए। हमारा शायद जो मैं थोड़ा जो कर. रहा हूं मैं वह बताऊंगा कि हम थोड़ा सा. लगातार डिफरेंट करने की कोशिश करते हैं।. आउट ऑफ बॉक्स सोचने की कोशिश करते हैं. कि आज के 10 साल बाद एजुकेशन की क्या.
जरूरत होगी। उसको मैं आज लाऊं अपने सिस्टम. में। सो दैट मैं सर्वाइव भी कर पाऊं और. ग्रो भी कर. पाऊं। क्योंकि हम प्राइवेट यूनिवर्सिटी. हैं। तो हमारे अपने चैलेंजेस आते हैं।. हमें अपनी ब्रांड अपने नाम से बनानी पड़ती. है। अपने काम से बनानी पड़ती. है। तो उसके लिए लगातार इनोवेट करना. एजुकेशन सिस्टम को, एजुकेशन डिलीवरी को वो.
हमें शायद दूसरों से थोड़ा अलग करता है।. जैसे मैंने बात की कि हम एजुकेशन. रेवोल्यूशन के माध्यम से नई एजुकेशन ला. रहे हैं। जिसमें बच्चों को स्टूडेंटशिप के. दौरान ही अलग तरीके से पढ़ाया जाएगा। रियल. लाइफ काम कराया जा रहा है। उनको इंटर्नशिप. के माध्यम से और माध्यम से उनको हम पैसा. कमाने का मौका दे रहे हैं। अपनी फीस भरने. का मौका दे रहे हैं। तो ये सब चीजें हम.
डिफरेंट कर रहे हैं। लास्ट क्वेश्चन टू. यू। हर इंसान ने सोचा होता है कि दुनिया. मुझे कैसे याद रखें? ख्याल तो आपके मन में भी आता होगा एक. लेगसी लेके आए हो आप। लेगसी आई बना लिया।. अधूरी तमन्नाएं क्या है जिसे आगे करना. चाहते हो? और क्या चाहते हो? कैसे लोग. आपको याद. रखें के दुनिया ऐसी है कि मैं शायद कुछ. लोगों की लाइफ. में कुछ बच्चों की लाइफ में कुछ नागरिकों.
की लाइफ में कुछ बदलाव ला पाया हूं। उसको. कुछ बेहतर बना पाया हूं।. मैं उस तौर पर जाना चाहूं जाना चाहूं कि. शायद मैंने एजुकेशन सेक्टर में कुछ ऐसे. बदलाव लाए जिसने देश की दुनिया की एजुकेशन. को हमेशा के लिए बेहतर बना दिया। नाइस। और. क्या अधूरे सपने हैं भाई? मैं लॉन्ग टर्म सपने नहीं लेता कभी। शॉर्ट. टर्म सपने कुछ तो होगा ना जो अगली बकेट. लिस्ट में होगा। नहीं ऐसा देखिए बहुत.
ज्यादा मुझे लगता है इस बारे में नहीं. सोचना चाहिए। एस्पेशली एट दिस डे।. जो अभी मैं कर रहा हूं उसको और बेहतर कर. पाऊं। चाहे वह एजुकेशन सेक्टर में है, चाहे वो देश के लिए सांसद के तौर पे वही. मेरा एक सपना. होगा। उसको मैं कैसे बेहतर बना पाऊं जो. हमारा. भारतवर्ष 2047 में नहीं उससे पहले ही. विकसित भारत बन पाए उसमें जो मैं अपना. योगदान दे पाऊं चाहे वो 01% ही हो वो मैं.
जरूर दूं। चलिए बेस्ट विशेस सर। हमारी. कोशिश थी कि हल्के-फुल्के अंदाज में आपसे. गंभीर सवाल पूछे जाए। आपकी सोच लोगों तक. पहुंचाई जाए। आपकी कहानी पहुंचाई जाए। हर. कहानी में कुछ ना कुछ होता है जो लोगों को. इंस्पायर करता है। आशा करते हैं कि आपसे. भी लोग इंस्पायर होंगे और आप ही से सीखकर. कभी किसी और अशोक मित्तल से हम मुलाकात. करेंगे। फिलहाल अगली मुलाकात के लिए थैंक. यू। धन्यवाद। थैंक यू।.
