Unplugged ft. Anubhav Sinha | Kangana Ranaut | Article15 | Thappad | Mulk | Assi | Anurag Kashyap
हम कैसे माने एक दर्शक के तौर पर कि ये. फिल्म प्रोपेगेंडा है या ये फिल्म. प्रोपेगेंडा नहीं. मैम इस अपराध वाले दिन देश भर में 80 रेप. कंप्लेंट्स हुई थी।. रात तक कश्मीर छोड़कर जाने को कहा है।. हमारे लोग मर रहे हैं सर।. अगर शुद्ध रूप से प्रोपेगेंडा शब्द की. परिभाषा में जाएं तो मुल्क भी प्रोपेगेंडा. फिल्म है। आर्टिकल 15 भी प्रोपगेंडा फिल्म. है।. विवेक अग्निहोत्री बना रहे हैं कश्मीर. फाइल, बंगाल फाइल्स इनको आप कैसे देखते. हैं? विवेक को पूरा हक है वह बनाने का जो. वो बनाना चाहता है।. आर्टिकल 15 थप्पड़ मुल्क इनमें सबसे. ज्यादा करीब कौन सी फिल्म है आपके?
थप्पड़ बहुत मुश्किल फिल्म थी क्योंकि. कहानी नहीं थी उसमें कोई। रावण के बारे. में सबको मालूम है लेकिन उतनी बड़ी नहीं. हुई जितनी उम्मीद थी जितनी हम चाहते थे।. फिल्म की बुराई बहुत हुई उस समय। मैं टूट. गया। मुझे लगा मैं शायद डायरेक्टर ही नहीं. हूं।. आर्टिकल 15 में आपका फेवरेट सीन कौन सा? मतलब इन लड़कों की और आपकी सेम जाती है।. नहीं नहीं सर मैं चमार हूं। ये पासी हैं।. हम लोग इनसे काफी ऊपर आते हैं सर एससी. एसटी में। हमारा इनसे कोई लेना देना। इनका. तो तुम खाते भी नहीं है साला।. वो एक मजाक था और मैं भी थोड़ा ज्यादा. एक्टिविस्ट हो गया था। मुझे भी लगा कि ना. मैं क्या कर रहा हूं।.
क्या किसी भी क्रिएटिव आदमी का टू मच. पॉलिटिकली इंक्लाइंड होना उसके आर्ट के. लिए ठीक है? सिनेमा या कविता या पेंटिंग की कोई. परिभाषा तो नहीं है? वो चाहे क्राइस्ट बना. दे, वो चाहे प्रेमिका [संगीत] बना दे।. अगर मान लीजिए रिलेशनशिप में कोई एक गलती. कर देता है। थप्पड़ जैसी गलती। माफ कर. देना चाहिए या जो स्टैंड आपने फिल्म में. दिखाया।. कोई भी फिल्म अगर किसी समस्या पर आधारित. फिल्म है तो वो एक यूनिवर्सल सलूशन ऑफर. नहीं कर सकती। कोई व्यक्ति जिसकी. विचारधारा आपसे कंप्लीट डिसए्रीमेंट वाला. हो।. कितने लोग हैं? मेरे घर में मेरा भाई है।. सगा भाई खून वाला भाई।.
क्या कभी ऐसा हो सकता है अनुभव सिन्हा. कंगना के साथ काम करेंगे? जैसे मैंने. मोहित सूरी से पूछा था। जब फिल्में फ्लॉप. हो जाती है तो क्या रिश्ते बदल जाते हैं? तो घर में ही फ्लॉप होने का नजरिया बदल. जाता है।. आई थिंक सो. मैं भी हां कहता हूं। कुमुद मिश्रा और. मनोज पावा से ऐसा कौन सा उधार ले रखा है. आपने [हंसी] कि आपके हर पिक्चर में लोग. आते हैं।. ये दोनों बहुत बदमाश है। सीमा पावा के. थ्रू मैं मनोज पावा को मिला और मनोज पावा. मेरी हर फिल्म में सीमा जी को कास्ट करके. टाइम हो गया है। [हंसी]. आप किसी एक्टर को साइन कर रहे हैं।.
और वो एक्टर ये डिमांड रख दे कि 8 या 9. घंटे की शिफ्ट मैं करूंगा या करूंगी। विल. यू बी ओके? प्रकाश झा बोलते हैं अगर के मैं रात को. शूट नहीं करूंगा 1:00 बजे के बाद। मैंने. सुना है। उनको अलाउड है। एक्टर को अलाउड. नहीं है। यह क्या बात है? जंगल राज को प्रकाश झा ने बड़ा हाईलाइट. करके बदनाम कर दिया।. डीएसपी शुक्ला का नंबर गाड़ी।. आपकी गाड़ी चेक करने के लिए हमें किसी. ऑर्डर की जरूरत नहीं।. विधायक. हमरा गाड़ी चेक करेंगे आप।. क्या सिनेमा का वाकई इतना बड़ा इंपैक्ट. होता है? क्या लगता है आपको 2019 के बाद.
कास्टिज्म कम हो गया हिंदुस्तान में? 70 के दशक में जब इमरजेंसी का दौर था, सलीम जावेद ने जो फिल्में लिखी, कहते हैं. कि बड़ी इनडायरेक्टली चोट देने वाली. फिल्में थी। आज के दौर में ये हिम्मत है. डायरेक्टर्स में इस लेवल पे जाकर? मैं तो बनाता हूं।. बेटा अभी नहीं आ सकेंगे हम। लड़ाई है. गरीब अनुराग कश्यप में क्या स्पेशलिटी है? पिक्चर बनानी शुरू की थी तब बजट नहीं था।. कौन बोला आपको गैंग्स ऑफ़ बासीपुर का बजट. कम था? आपको अनुराग कश्यप एक्ट्रेस में. कैसे लगते हैं? अनुराग कश्यप मुझे नहीं अच्छा एक्टर लगता।.
शौक बहुत नहीं है। बेचारा मजबूरी में कर. रहा है वो।. और फिर आते हैं हालात। मजबूरी, जिम्मेदारी. और स्वार्थ।. पीछे वो बेटी की शादी करनी थी।. Twitter पे जब खोलता हूं तो आता है. अनबॉक्स एंड एक्सप्लोरिंग दिस। [हंसी]. एक्सप्लोरिंग दैट।. ये इसीलिए कर रहे हो आप कि नए मिजाज को. समझो।. एक अपने अंदर ये एरोगेंस हमेशा रहा कि यार. हम तो बनारस के हैं। हमको पता है. हिंदुस्तान कैसा है, छोटा शहर कैसा है, पाली हिल वालों को क्या मालूम। फिर मैं. पीछे बनारस गया और मुझे लगा कि सिन्हा. साहब बदल गया है। ये बनारस में लगा अपने. घर में। जिसको मैं अपनी बपोती समझता हूं.
कि मेरे बाप का घर है। एोगेंस है। मैं हम. बताओ ना तो बनारस का हो। तुम मेरा फेवरेट. सॉन्ग कौन सा है आपका? उस गाने की डबिंग में मैं रो रहा था।. सदियों से लंबी है रातें।. सदियों से लंबे हुए दिल. आ जाओ लौट कर तुम। ये दिल कह रहा है. कुछ अधूरा रहा आपकी जिंदगी में? आई डोंट लाइक द फैक्ट कि मेरी मां चली गई।. आई हैवेंट एक्सेप्टेड इट टिल डेट। इट्स. बीन 14 इयर्स।. क्या ख्वाहिशें हैं अनुभव सिन्हा की? मुझे 40 फिल्में और बनानी है।. मतलब 40 इंटरव्यू मेरे भी और पड़े हैं।. हां। खाना-वाना कंट्रोल करना होगा, वर्कआउट करना होगा और कोशिश करनी होगी कि.
आपका प्लेन क्रैश ना हो।. [हंसी]. ह. [संगीत]. इज्जतें, शोहरतें, उल्फतें, चाहतें सब कुछ. इस जहां में रहता नहीं। आज जहां मैं हूं. यह एक दौर है। पर वो भी एक दौर था। वो एक. दौर था जब मेरे मेहमान सीरियल बना रहे थे, गाने बना रहे थे, कमर्शियल फिल्में बना.
रहे थे। वो फिल्में जिन्हें हम परिवार के. साथ बैठकर देखते थे, एंजॉय करते थे।. लेकिन फिर आज एक समय है जिनमें वह फिल्में. बना रहे हैं जिन्हें परिवार के साथ बैठकर. हमने सोचने पर मजबूर कर दिया है।. वाकई में जिन्होंने हमारे ऊपर एक छाप. छोड़ी है जिनका असर फिल्म देखने के बाद भी. है। वो कितना सही कितना गलत इस पर चर्चा. हो सकती है। लेकिन जो बड़े बूढ़े कहते हैं. कि वक्त के साथ अनुभव आता है। हमें लगा कि.
पडकास्ट में अनुभव जी को बुला लेते हैं।. [हंसी]. क्या बात है। क्या इंट्रोडक्शन है।. सही कहा मैंने।. हां मुझे लगता है ज्यादातर तो सही कहा।. मैंने सोचने पर मजबूर किया नहीं मुझे. मालूम नहीं है।. लेकिन ये सच है वक्त के साथ अनुभव आता है. जो बड़े बूढ़े कहते हैं।. हां हां अगर वक्त के साथ अनुभव नहीं आया. तो फिर आप वक्त जी ही नहीं रहे थे शायद।. तो हर आदमी आप मानते हैं कि एक उम्र के. साथ मैच्योर हो आता है।. होना चाहिए। नहीं भी होते।. और कोई जरूरी नहीं है कि मैच्योर होना.
दुनिया की सबसे जरूरी चीज नहीं है। कुछ. लोग ऐसे खिलंद रहते हैं जिंदगी भर और वो. मेरा यह मानना है कि हर जीवन का अपना. अंदाज होता है और हर अंदाज वैलिड है।. अनुभव सिन्हा को जब हम पढ़ते हैं, देखते. हैं, समझते हैं तो मुझे कई सारे अलग-अलग. पैचेस नजर आते हैं। शुरू में काम कुछ भी. मिल जाए फिर पसंद काम फिर जो सब कर रहे थे. फिर वह फिल्में तुमिन जैसी फिल्में जिसे.
हम कल्ट मानते हैं हमने एंजॉय किया फिर. बहुत सारे एक्सपेरिमेंट और फिर ऐसा लगता. है कि एक बड़ा स्पीड ब्रेकर आया एक बड़ा. बैरियर आया और फिर उसके पार करने के बाद. एक बिल्कुल नया इंसान निकला. हम. ये थोड़ा यात्रा बताई ना हमें मतलब. इलाहाबाद बनारस तो हम कर लेंगे बात लेकिन. अपना फिल्मी यात्रा जो आपकी है ऐसा नहीं. है कि मेरे पास जो आया मैंने एक्चुअली मैं. शुरू से बहुत चूजी था. तुमिन मुझे ऑफर हुई.
तुमिन के पहले से भी अगर जाएं तो सीहॉक्स. नाम का मैंने एक शो किया था वो मुझे जब. ऑफर हुआ यू टीवी उस वक्त गेम शोज़ वगैरह. बनाता था पहला बड़ा शो करने जा रहे थे वो. डीडी मेट्रो के लिए. तो मुझे जब ऑफर किया तो स्क्रिप्ट लिखी जा. चुकी थी कास्टिंग हो चुकी थी. और मुझे ऑफर किया गया बहुत बड़ा शो। मेरे. लिए बहुत बड़ी बात थी। मैंने पढ़ा और. मैंने कास्टिंग देखी और मैंने कहा यह.
आईडिया बहुत कमाल है। बाकी सब रॉन्ग है।. [हंसी]. तो वो लोग थोड़े सदमे में चले गए। तो. मैंने कहा आप मुझे वक्त दें तो मैं आपको. इसका एक एपिसोड लिख के दिखाता हूं। फिर. मैंने एक नया एपिसोड लिखा। फिर मैंने उसको. नरेट किया। और मेरे जाने के बाद मीटिंग. में जो डिस्कस हुआ मुझे बाद में पता चला. कि दिस इज द मैन वी वांट।. इसने हमारे पूरी डेढ़ साल की मेहनत को. रिजेक्ट कर दिया। लेकिन जो लेके आया है.
उसी आईडिया के साथ वो हमसे बेटर है और. जितना बड़ा हम सोच रहे थे उससे ज्यादा. बड़ा है।. उसके बाद तुम मिलती है मुझे। उसके बाद. म्यूजिक वीडियोस हैं। सोनू निगम से शुरू. करके ज्यादातर लोगों को मालूम नहीं है कि. सोनू के मेरा ख्याल है 80% उस जमाने के. वीडियोस मैंने किए हैं। एल्बम वाले. हां लेट 90ज के जितने भी दीवाना और जान और. याद. सबके जितने लोग उस समय गाते थे उन सबके. साथ मैंने वीडियो बनाया। करीब 100 150.
म्यूजिक वीडियोस बनाए जिसको एल्बम कहा. जाता था। उसके वीडियोस मैं बनाता था। फिर. तुमिन मिलती है।. भूषण कुमार पहली फिल्म पिताजी के देहांत. के बाद काम संभाला। मेरे साथ दो-ती साल. वीडियोस बनाए और फिर एक दिन बोला फिल्म. बनाते हैं। और भूषण के इतने रिश्ते थे उस. समय कि मैं किसी भी स्टार के पास जा सकता. था। वो मना कर देता एक अलग बात थी।. लेकिन मैंने कहा नहीं मैं नए लोगों के साथ. रहूंगा। मुझे मेरे साथ के दोस्तों ने जो.
उस वक्त निर्देशक बन रहे थे, बन गए थे।. उन्होंने कहा तू पागल हो गया है। भूषण. प्रोड्यूसर है। स्टार्स के साथ बना। मैंने. नहीं बनाया।. तुम बिन देख के सबको ऐसा लगा कि हां इसके. साथ काम किया जा सकता है। स्टार्स को संजू. का फोन आया। संजू से मिला 10 बनी। अचानक. म्यूजिक लव स्टोरी से एक एक्शन फिल्म पे. गए।. उसके बाद.
10 रिलीज होते ही मैंने शाहरुख को फोन. किया था। 2005 की बात है तो फिर शाहरुख को. कहानी बहुत पसंद आई। उसने कहा बनाते हैं।. मैंने कहा चलो बनाते हैं पहली मुलाकात. में।. फिर रावण बनी. और रावण के बारे में सबको मालूम है कि वो. मतलब 10010 करोड़ का बिजनेस किया था तब भी. लेकिन उतनी बड़ी नहीं हुई जितनी उम्मीद थी. जितनी हम चाहते थे।. गाने बड़े सुपरहिट हुए.
और वो फिल्म की बुराई बहुत हुई। उस समय. क्रिटिक्स ने बहुत बुराई की और लोगों ने. बहुत बुराई की। एक खास वर्ग ने. मैं टूट गया। मुझे लगा मैं शायद डायरेक्टर. ही नहीं हूं।. छह सात साल निकल गए।. और फिर मुल्क की कहानी आई दिमाग में. और कुछ एक ऐसी जरूरत महसूस हुई कि नहीं यह. तो बनानी है और.
[नाक से की जाने वाली आवाज़] हर मुश्किल. के अगेंस्ट जाके मैंने वो फिल्म बनाई. और वो चली और लोगों को अच्छी लगी बहुत. तारीफ मिली और वहां से एक नए निर्देशक का. जन्म हुआ जिसे अपनी आवाज सुनाई दी अपनी. फिल्म में. ब्यूटीफुल और मैं इसमें ही एक शुरू से. शुरू शुरू करूं। उससे पहले एक सेल्फ डाउट. क्योंकि बीच में एक आया।. हां बोलिए ना।. सेल्फ डाउट होना ये अच्छी चीज है या खराब. चीज है? जैसे आपने कहा कि आपने एक लंबा. समय काम किया। गाने हिट थे। पहली फिल्म.
हिट गई। बड़े स्टार्स मिल गए। फिर एक फजा. है जहां आप टूट गए।. यह सेल्फ डाउट सही होता है जब क्योंकि. स्टार्ट में बहुत एनर्जी होती है और यह हर. पैशन में हर जगह पर आता है। कई बार वो एक. मिड का डिफाइनिंग पार्ट जो होता है जो. आपको एक नया डायरेक्शन देता है जिसमें. आपको बाद में बहुत सारी फिल्में जो अब. आपकी आ रही हैं जिसमें उसकी झलक दिखती है. हमें और वो एक अलग दिशा है। ये जो बीच का. पार्ट होता है ये सेट डाउट अच्छा होता है. या बुरा होता है? एसेंशियल है। अच्छा बुरा. नहीं है। मैं सबको बोलता हूं कि हर.
डायरेक्टर को. हम. ये भय हमेशा रहना चाहिए कि मैं खराब तो. नहीं कर दूंगा ये फिल्म वो और ये. कॉन्फिडेंस कि ये मैं माइंड ब्लोइंग फिल्म. बनाऊंगा। यह दोनों को साथ-साथ कोिस्ट करना. होता है। अगर आपने इन दोनों में से एक को. भी छोड़ दिया तो आप तकलीफ में हैं। यह. मेरा अपना अनुभव जो कि अब अच्छा खासा हो. गया है। माशा्लाह 25 साल का फिल्मों का और. 30 साल का निर्देशन का सेल्फ डाउट.
एसेंशियल है। अच्छा बुरा नहीं है।. नाइस। दोनों चीजें होनी चाहिए।. बिल्कुल। क्योंकि आप क्या होता है? मैं. आपको एक एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूं।. आर्टिकल 15 जब रिलीज हुई. [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो मुझे इतने. फोन आते थे तारीफ के कि लोग देख के ना. फिल्म मुझे मैसेज नहीं करना चाहते थे. मुझसे बात करना चाहते थे और ये बड़े लोग. थे सेलिब्रिटीज थे तो मैं एक से बात कर. रहा होता था दूसरे का कॉल वेटिंग पे रिंग. कर रहा होता था और आमतौर पे लोग लगभग सेम.
बातें करते थे सेम तारीफें करते थे तो. मेरा सारा सारा दिन ऐसे बीतता था तो जब. चारप दिन ऐसे बीत गए गए तो एक दिन मैंने. कहा कि मैं भाग जाता हूं कहीं बिकॉज़ मुझे. यह महसूस होने लग गया था कि मुझे तो सब. आता है। आई एम सो गुड। मतलब कोई ऐसा नहीं. था जिसने मुझे फोन नहीं किया।. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. मैं भाग गया कश्मीर में गुलम्ग भाग गया।. मैंने कहा वहां इंटरनेट नहीं है। मुझे पता. चला इंटरनेट नहीं सॉरी वो नेटवर्क की. प्रॉब्लम है। तो मैंने कहा वहां चला जाता. हूं। मुझे सुनना ही नहीं है कि मैं बहुत.
अच्छा हूं क्योंकि फिर मैं पागल हो. जाऊंगा।. तो. यह मैं अपने जूनियर्स से अपने छोटों को. हमेशा यह बोलता हूं कि यार. मतलब इस चीज को साथ लेके चलो कि ये फिल्म. मैं खराब करने वाला हूं।. इस फिल्म की डेस्टिनी खराब होने वाली है।. और अगली सुबह या अगले घंटे कि ये मुझसे. अच्छी कोई बना ही नहीं सकता। देखो मैं.
क्या बनाऊंगा।. ये दोनों जिंदा रहने चाहिए। तो मैं जब भी. उस आर्टिकल 15 की रिलीज़ के बाद मेरा दिमाग. सटक रहा था और मैं अह क्योंकि मेरी उम्र. हो गई थी अच्छी खासी मुझे समझदारी इतनी थी. कि भाग जाओ यहां से मैं भाग गया था।. सेकंड हाफ में जो आपकी फिल्में आ रही हैं. इसमें. सेकंड हाफ. सेकंड हाफ हां मैं दो दो हिस्सों में बांट. के मैं देख रहा हूं। हम. जो सेकंड हाफ का हिस्सा है उसमें वो. फिल्में हैं जो समाज से जुड़ी हुई है।. जी. क्या आप यह मान रहे हो कि अब जो रियलिटी.
के करीब है. हम. और जो बहुत एक ऐसी चीज है जो हम सब रोज. देख रहे हैं हर चीज में चाहे वो अनेक हो. या नॉर्थ ईस्ट को लेकर या आर्टिकल 15 हो. मुल्क हो ये कोई ऐसा सब्जेक्ट नहीं है जो. हमें पता नहीं है। हमने सबको पता है। हम. सब ने देखा है। लेकिन जब एक डायरेक्टर ने. उसे उसी गहराई से दिखा दिया तो क्या हमें. अच्छा लग रहा है या 2000 जो इधर पॉलिटिकल. सिनेरियो चेंज हुआ 2010 के बाद से देश में. एक अलग तरीके से लोग एक्टिव हुए इंटरनेट. का उदय हुआ हर आदमी आज रायचंद बना बैठा है.
थोड़ा इनसेंसिव भी हम हुए या बहुत वोकल हम. है इन फिल्मों को लोग क्यों पसंद करने लगे. आपकी. मुझे [नाक से की जाने वाली आवाज़] बिल्कुल. पता नहीं काश कि मुझे ये एक्चुअली कभी पता. नहीं होता कि जैसे मुझे आर्टिकल 15 ये पता. था कि अच्छी फिल्म बन रही है और जब एडिट. एडिट हो गई तो मुझे पता था कि अच्छी फिल्म. बनी है। वो हिट फिल्म है। मुझे नहीं पता. था। मुझे आज तक नहीं पता कि वो हिट क्यों. है। उसने ₹65 करोड़ का बिजनेस किया 2019. में।.
बहुत बड़ी बात है। आज का 100 करोड़ है वो।. आज आप बहुत सारी हिट फिल्मों की तथाकथित. हिट फिल्मों की आप बिजनेस देखें तो 65. करोड़ नहीं है।. मुझे नहीं पता क्यों।. और मुझे जानना भी नहीं है क्योंकि जिस दिन. मैं यह जानने लगूंगा उस दिन मैं यह उसके. गिर्द ताना-बाना बुनने लगूंगा।. तो मुझे सिर्फ यह जानना है कि मुझे यह. कहानी कहनी है। उस कहानी से मुझे यह बात. कहनी है। और वो मेरे लिए एक नई फिल्म है।.
वो मेरे लिए एक नया करियर है। मैं अपनी. पुरानी सक्सेस या फेलियर को मेरे साथ लेकर. नहीं चलता। फेलियर को फिर भी साथ लेकर. चलता हूं। मैं सक्सेस को साथ लेकर नहीं. चलता। अब इसमें एक नजरिया सर यह था कि. जैसे आपको लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर आता. है कि आप थोड़ा सा राइट से एंटी हैं। एक. नजरिया परसेप्शन बनाने की कोशिश करते हैं।. कितना सच और गलत पे मैं नहीं जाऊंगा।. प्रोपेगेंडा फिल्मों की बहुत बात होती है।. आजकल एक्टर्स ये बहुत वोकल हो गए हैं। जॉन. अब्राहम ने एक स्टेटमेंट दिया कि मैं. प्रोपेगेंडा फिल्मों का पार्ट नहीं. बनूंगा। बहुत सारे डायरेक्टर्स कहते हैं.
और कोई भी एक डायरेक्टर एक फिल्म लेकर आता. है तो उसको लेकर हमेशा सवाल शुरू होता है. कि आप ये बना रहे हैं ये क्यों नहीं. बनाएंगे? विवेक अग्निहोत्री हमारे आए थे। जब वो. मेरे पास आए तो सबसे ज्यादा सवाल यह आए थे. कि भाई मणिपुर फाइल क्यों नहीं बनाएंगे. आप? या आप वो फिल्में बना रहे हैं जो. सरकार को सूट कर रही हैं। आप पर या आता है. कि आप वो फिल्में बना रहे हैं जो समाज को. चोट दे रही है या जो हल्का सा जहां पर. कमजोरनेस होती है जातपात या धर्म वहां पर. आप चोट दे रहे हैं। जो सरकार को थोड़ा सा. असाज है सरकार के लोग की जो आइडियोलॉजी है. थोड़ा सा असाज करती है। कितना करती है.
प्रत्यक्ष तौर पर पता नहीं लेकिन एक हल्का. डेंट देने की कोशिश होती है। प्रोपेगेंडा. फिल्मों को लेकर जब बात चल रही है और. उसमें रियलिटी की बात भी चल रही है। हम. कैसे माने एक दर्शक के तौर पर कि यह फिल्म. प्रोपेगेंडा है। इसे देखी ना देखी जाए या. यह फिल्म प्रोपेगेंडा नहीं है। समाज हकीकत. है। यह देखी जाए क्योंकि दोनों बनाने वाले. चाहे वह बंगाल फाइल बना रहे हो कश्मीर. फाइल्स बना रहे हो या मुल्क हम देख रहे हो. आर्टिकल 15 देख रहे हो वो ये कह रहे हैं. कि ये समाज का एक हिस्सा है जो विज़िबल है. और यही सच है और उसको एक कंडेम कर रहा है.
एक पूरा सपोर्ट कर रहा है।. सबसे पहले ना हमें प्रोपेगेंडा शब्द का. अर्थ समझना पड़ेगा। यह शब्द आया कहां से? प्रोपगेंडा शब्द आया है प्रोपगेट से. और प्रोपगेंडा फिल्म्स या प्रोपगेंडा. मटेरियल की शुरुआत हुई जब रोमन. साम्राज्य ने क्रिश्चियनिटी को एक्सेप्ट. किया और उन्होंने तय किया कि इस धर्म के. प्रचार के लिए नाटक गीत इस प्रकार की एक.
कमेटी बनी और यह हुआ कि प्रोपगेंडा. मटेरियल इस धर्म को आगे बढ़ाने के लिए. इस्तेमाल किया जाए।. किसी भी आईडिया को प्रोपगेट करना. प्रोपगेंडा है। प्रोपगेंडा कोई नेगेटिव. शब्द नहीं है।. किसी भी आईडिया को अगर आप प्रोपगेट करते. हैं तो वो प्रोपगेंडा है। हुआ क्या है कि. कालांतर में. जब आइडिया प्रोपगेटिंग फिल्म्स को या नाटक. को उसमें अगर आप झूठ का मिश्रण कर देते.
हैं तो वो नेगेटिव हो जाता है। हम. तो अगर शुद्ध रूप से प्रोपगेंडा शब्द की. परिभाषा में जाएं तो मुल्क भी प्रोपगेंडा. फिल्म है। आर्टिकल 15 भी प्रोपगेंडा फिल्म. है। एक आईडिया को प्रोपगेट करती है। एंड. देयर इज़ नथिंग रोंग विथ इट।. तो ये ये जो स्टेटमेंट जैसे जॉन ने कहा कि. मैं प्रोपेगेंडा फिल्मों का हिस्सा नहीं. बनूंगा। या बहुत सारे लोग कहते हैं कि यह. फिल्म आ रही है प्रोपेगेंडा है या जैसे भी.
एक फिल्म हक आ रही है।. इसको लेकर भी कहा कि निजाम अलग है तो इस. तरह की फिल्में बन रही हैं। मैं दर्शक के. तौर पर समझना चाह रहा हूं कि जब हम. पॉलिटिक्स को देखते हैं पॉलिटिक्स बहुत. हाईली डिवाइडेड है। आज आप देश में किसी के. सामने माइक लगाइए वो आपको एक राय देगा और. वो राय स्पष्ट है। या तो इस तरफ की या इस. तरफ की है। क्या फिल्मों को लेकर भी वैसे. ही राय बन गई है. कि हां बट गया।. संभव है मतलब विवेक को पूरा हक है वो. बनाने का जो वो बनाना चाहता है।.
मुझे अनफॉर्चूनेटली हक के डायरेक्टर का. नाम नहीं मालूम है। उनको पूरा हक है जो वो. बनाना चाहते हैं और दर्शक को पूरा हक है. कि उसको जो देखना है वो तय करे कि उसे. क्या देखना है और क्या नहीं देखना है? मुझे समझ नहीं आता इसमें कॉन्फ्लिक्ट कहां. है? आपका नजरिया क्या है जो विवेक अग्निहोत्री. बना रहे हैं कश्मीर फाइल, बंगाल फाइल्स या. हक फिल्म आ रही है। इनको आप कैसे देखते. हो? मैंने देखी नहीं है फिल्में। मैंने पीछे. बहुत कम फिल्में देखी हैं।. फिर भी एक सोच एक सोच तो होगी ना ट्रेलर. देखकर या सुना होगा जो आपने लोगों से. आसपास के.
उसको सही लगता है उसने बनाया उसका अधिकार. है। जो लोग उसको पसंद करते हैं जो लोग. उसको देखते हैं वो उनका अधिकार है। उस पे. कोई बातचीत ही नहीं है। हर फिल्म बननी. चाहिए और हर फिल्म रिलीज होनी चाहिए।. बट फिल्मों का जैसे एक सर ये होता है कि. इंपैक्ट बहुत बड़ा होता है। 80 के दशक में. हीरो हीरोइन के पीछे भागता था।. हम्म।. नई जनरेशन जो आई उन्हें लगा लड़की पटाने. का यही तरीका होता है कि आप लड़की चस करो. भागो कॉलेज में स्टॉक करो जो फिल्मों में. हमने देखा ये इतना एक तरफा नहीं है थोड़ा.
सा समाज से सिनेमा में आता है थोड़ा सा. सिनेमा से समाज में जाता है. हम. और उसकी जड़ को पकड़ना बड़ा मुश्किल है कि. ये वाला जो जैसे मान लेते हैं कि रिक्शे. के पीछे साइकिल पे जाने का सिस्टम. हम. ये सिनेमा से शुरू हुआ कि समाज से शुरू. हुआ मुझे पता नहीं. हो सकता है समाज के हिस्से में रहा हो बट. सिनेमा में जब कोई चीज दिखाई पड़ती है तो. उसका इंपैक्ट बड़ा होता है। सलमान खान ने. बीच में से मांग का तो आधा हिंदुस्तान जो. था एक दौर में तेरे नाम बन के घूम रहा था।. वो हेयर स्टाइल और फैशन का एस्पिरेशन होता.
है। वो कभी बार एटीट्यूड का भी एस्पिरेशन. होता है कि भाई ये एटीट्यूड बहुत पसंद आता. है। तो फिर जब संजय दत्त बॉडी बना रहा था. पहला हीरो जो था जो बॉडी बना रहा था तो वो. बॉडी बनाना पूरी दुनिया ने क्यों नहीं सीख. लिया? ऐसा होता नहीं है। वह कुछ एक वर्ग होता है. जो उस चीजों से इतना मुतासिर होता है कि. वह उस तरह के कपड़े पहनने लगता है। हमने. नहीं पहने कभी मेरे किसी दोस्त ने नहीं. पहने कभी वैसे ना बाल रखे किसी हीरो को. देख के हम हमारा अलग ही करते थे। पर कुछ.
लोग वैसा भी करते हैं।. आप हीरो को रखवा रहे थे ना।. नहीं नहीं मैं उसके पहले की बात कर रहा. हूं। [हंसी]. नहीं कभी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हम जब. बड़े हो रहे थे तो अमित जी सुपरस्टार थे।. तो अमित जी जैसे बाल कभी रखने का सोचा ही. नहीं। और हमारे मुझे अपना मेरा कोई दोस्त. भी याद नहीं जो बच्चन साहब की तरह बाल. रखता हो। अच्छा ये भी देखिए अमित जी अभी. भी सुपरस्टार हैं।. हां।. इतना लंबा समय रेलेवेंट रहना भी अपने आप. में एक इंस्पिरेशनल कहानी है।. अरे बाप रे बाप स्टार हैं और मतलब बहुत. बड़े स्टार हैं।. हां।. वो उनको सही महानायक उनको मतलब है।.
एक छोटे से बच्चे के साथ भी केबीसी में. इंटरेक्ट कर रहे हैं। तो वहां पर भी जो. उनका है वो पूरा देश को सम्मोहित कर दे. रहा है।. मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना ये है कि. इंसान का जो स्टारडम होता है ना वो उसकी. जाती जिंदगी से होता है। उसकी फिल्मों से. कम होता है।. कैसे थोड़ा बताइए? उसकी पर्सनल लाइफ इतनी. एस्पिरेशनल होती है। उसका पर्सनल कंडक्ट. इतना एस्पिरेशनल होता है। आप यकीन नहीं. मानेंगे। मुझे नहीं याद पड़ता कि शाहरुख. खान के आने के पहले लड़की को हाथ पकड़ के. हीरोइन को हाथ पकड़ के कोई स्टेज पे ले.
जाता था। लड़की का आंचल उठा लेना। वो वो. शिवलरी शाहरुख खान लेके आया। एस्पिरेशनल. था वो। मैंने सीखा उससे। मैं शाहरुख खान. को मिलने के पहले लोगों के लिए दरवाजा. नहीं खोलता था। मैं आज सबके लिए खोलता. हूं।. नाइस।. तो वो भी एस्पिरेशनल है। और फिर यह भी. एस्पिरेशनल है कि बाल ऐसे कर लिए और जैसे. आपने बताए तेरे नाम वाले बाल और उसके पहले. भी राजेश खन्ना के बालों का ट्रेंड रहा. है। अमित जी के बालों का ट्रेंड रहा है।.
बट अमिताभ जी का जिक्र आपने कर दिया। मैं. पूछ देता हूं फिर से। अमिताभ जी के पहले. भी कई सारे स्टार रहे। बहुत बड़े-बड़े. स्टार हैं। राजेश खन्ना, देवांद साहब थे. और बहुत सारे रहे। अमिताभ जी में क्या अलग. था जो तब भी जब आप छोटे थे तब भी वो. सुपरस्टार थे और अब जब हम या हमारे आबाद. जनरेशन दिख रही है अभी भी वो स्टार ही. हैं। उतने बड़े स्टार हैं। वो पाक करते. हैं तो वो कुछ अलग ही कर रहे हैं। क्या. ऐसा उन्होंने अलग किया बाकी लोगों से जो. उनके जैसा कोई नहीं है। एक तो समय के साथ.
चलना बहुत जरूरी चीज है।. दौर बदलते हैं। समाज में परिवर्तन आते हैं. बहुत भयंकर।. उन सबको जानना, उनको समझना, एक्सेप्ट करना. और आत्मसात करना यह सबके बस की बात नहीं. होती है।. कुछ किरदार ऐसे होते हैं जीवन में कि भाई. मैं तो ऐसा ही हूं।. अमित जी क्या कभी इतने. रंगीन कपड़े पहनते थे? अपने पुराने समय.
में नहीं पहनते थे। जैसी जैकेट पहनते हैं. जैसा बड़ा चश्मा लगाते हैं। उन्होंने अपने. आप को लगातार अप्ट करते चले गए। शाहरुख को. देखिए।. अभी एक हीरो आया है जिसके सारे बाल सफेद. हैं। जो अभी टीज़ किंग का रिलीज हुआ है। हम. ये पहले कभी किसी ने नहीं किया। उसने सफेद. बालों को सेक्सीी बना दिया।. ये सब वक्त के साथ आगे चलने की, अपनी. हकीकत को एक्सेप्ट करने की कि मैं अब 60.
साल का हुआ। 60वें बर्थडे पे पिक्चर का. ट्रेलर आया है जिसमें पहली बार शाहरुख खान. के बाल सफेद हैं और वो हीरो है।. जबकि सारी दुनिया शाहरुख के बालों में. भरती थी। जवार में टकला भी हो गया था।. इतने लंबे बाल इतने खूबसूरत बाल हैं उसके. जलन होती है। मैंने कई बार पूछ लिया है कि. कुछ कराया? बोला नहीं है यार यही है मेरे. बाल हैं। [गहरी सांस लेने की आवाज़]. जब मैं जवान के सेट पे मिलने गया था उसको. तो उसके बड़े यहां तक के बाल थे।. तो मैंने पूछा यह क्या कुछ क्या एक्सटेंशन.
क्या नहीं है मेरे हैं पढ़ाए हैं [हंसी]. तो कुछ लोग होता है जैसे धर्म जी हैं धर्म. जी पंजाब के हैं अब वो एक प्रकार के इंसान. है वो जैसे थे वैसे हैं आज तक लोगों को. इतना प्यार है सब धर्म जी से कि वो आज भी. पर्दे पे आते हैं तो अच्छे लगते हैं बट. उन्होंने अपने आप को बदला नहीं वो जैसे थे. वैसे रहे अलावा इसके कि शायद उन्होंने. शराब छोड़ दी या उम्र भी हो गई उनकी काफी. माशा्लाह. गोविंदा. हां कुछ लोग नहीं चेंज हुए.
तो उसकी यह समस्या होती है कि जब नई. जनरेशन आती है जिसको एक नया हीरो चाहिए. होता है। इसको एक नया स्टार चाहिए होता. है। फिर आप उसकी अपेक्षाओं में पूरे नहीं. उतरते। फिर वो आपको सीनियर मान लेता है।. तो जैसे आजकल आप पूरे देश में ट्रेवल कर. रहे हो।. मैं Twitter पे जब खोलता हूं तो आता है. अनबस्ट एंड एक्सप्लोरिंग दिस। एंड [हंसी]. एक्सप्लोरिंग दैट।. ये इसीलिए कर रहे हो आप कि नए मिजाज को. समझो तीसरी पारी के लिए 3.2.
क्या मकसद है आपका ये जो ट्रैवलिंग है. क्योंकि कहानियां तो आपको बहुत सारी होंगी. आपके पास. नहीं नहीं नहीं कहानियां नहीं ढूंढ रहा. हूं दर्शक नहीं ढूंढ रहा हूं अ दर्शक तो. हैं. मुझे ना क्या हुआ आप समझिए मैं 90 25 साल. का था जब मैं बंबई गया. हम. और अब मैं 60 साल का हूं. हम. 35 साल हो गए. जाते ही काम सीखने की जद्दोजहद, फिर काम. पाने की जद्दोजहद, फिर उसको सफल बनाने की.
जद्दोजहद, फिर कभी हार गए तो वापस खड़े. होने की जद्दोजहद। और एक लंबी लड़ाई चलती. रही। 30 35 साल निकल गए।. और अपने अंदर एक ये एोगेंस ऐसा रहा। जब भी. इस किस्म की बातें हुई कि बॉलीवुड ने यह. बॉलीवुड वो तो एक अपने अंदर ये एगेंस. हमेशा रहा कि यार हम तो बनारस के हैं।. हमको पता है हिंदुस्तान कैसा है छोटा शहर. कैसा है या पाली हिल वालों को क्या मालूम।. फिर मैं पीछे. बनारस गया।.
तो इस बार बनारस गया तो मैंने कुछ ऐसा. किया कि मैं जिसको मुझसे मिलना है आ जाओ।. आमतौर पे यह होता है कि मैं जब शहर से. निकल जाता हूं तब मैं लिखता हूं सोशल. मीडिया पे कि मैं आया था. क्योंकि खुद को आइसोलेट करके एक ग्लास. कैप्सूल में डाल लेने की उसके अंदर रहने. की आदत पड़ गई थी इस बार गया तो मैंने ऐसा. लिख दिया कि मैं आया हूं जिसको मिलना है आ. जाओ तो मैं कुछ 100 150 लोगों से मिला फिर. एक एक फिल्म क्लब था कुछ लोकल. इन्फ्लुएंसर्स थे जो वीडियोस बनाते हैं.
कंटेंट जिसको वो बोलते हैं जिससे मैं. डिसए्री करता हूं अच्छे-अच्छे अच्छे. ब्यूटीफुल वीडियोस बनाते हैं। म्यूजिशियंस. थे, नाटक वाले थे। सबसे मिला मैं. और मुझे लगा कि सिन्हा साहब आपको जो लगता. है कि मैं जानता हूं हिंदुस्तान को बदल. गया है। [गहरी सांस लेने की आवाज़] अब ये. ये बनारस से लग रहा था आपको? ये बनारस में लगा अपने घर में जिसको मैं. अपनी बपोती समझता हूं कि मेरे बाप का घर. है वो।. और जिसको लगे बहुत. एोगेंस है। एोगेंस है।.
ये है बनारस।. एोगेंस है। हम बताओ ना तो बनारस का वाला।. हां।. तो वहां गया तो लगा गुरु यह तो बदल गया. है। तो फिर मुझे लगा कि यह अब बनारस अगर. तुम्हें पहचान नहीं आ रहा है. देश घंटा तुमको जानता है. तो तुम जानते ही नहीं हो और फिर मैंने ये. तय किया कि मैं अब जाऊंगा बहुत सारे शहरों. में दूसरे ऊपर से हम लोग क्या करते हैं और. जब मैं हम लोग बोलूंगा उस पे ज्यादातर मैं. सुनिएगा. हम. के.
हम वहां बैठ के इस किस्म की कोई ये पिक्चर. चलती है तो हम ऐसा बना लेते हैं कि हां. हां ये टाइप की पिक्चर हम उसको उसको. आर्टिकुलेट करने की कोशिश करते हैं।. नहीं चली तो हम उसको भी आर्टिकुलेट कर. लेते हैं। टू आवर कन्वीनियंस।. मुझे किसी ने बोला कि अनुभव जी आपकी. पिक्चर है ना छोटे शहर में नहीं देखते. लोग।. तो मैंने कहा क्या बात कर रहे हो? मैं तो. छोटे शहर का हूं और छोटे शहर वालों को.
मेरी बात समझ नहीं आ रही है और मुंबई, दिल्ली, बोर इसको मेरी बात समझ में आ रही. है। यह कैसे हुआ? यह क्या हुआ? मुझे लगा नहीं यह गलत है। कुछ और है।. तो मैंने सोचा कि मैं जाऊंगा उन शहरों में. और यह पढ़ के नहीं होगा। यह डॉक्यूमेंट्री. देख के नहीं होगा। यह मैं जाके और गलियों. में चाट की दुकान पर खड़े होकर लोगों से. बात करके होगा।. तो फिर मैंने कुछ दो-तीन सहयोगियों को. पकड़ा। मैंने कहा यार मैं ऐसा करने जा रहा.
हूं। मेरी मदद करो।. तो फिर यूं भी हुआ कि भाई इन्होंने कहा. अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो यह शूट भी होना. चाहिए। हमको डॉक्यूमेंट करके रख लेना. चाहिए। इस काम कुछ करें ना करें। तो. बाकायदा अब तीन चार लोगों की टीम बन गई।. अब मैं जाता हूं शहर में पहले से अनाउंस. करके कि आज मैं फला शहर पहुंच रहा हूं।. जिसको मिलना हो वहां आ जाए। उस पे एक फोन. नंबर होता है। लोग फोन करते हैं। मैं फाइन. डाइनिंग नहीं लोकल ढाबों पे चाट की. दुकानों पे, चाय की टपरियों पे जाता हूं।.
एक सिनेमा हॉल जाता हूं। उस सिनेमा हॉल के. ओनर से मिलता हूं। उस सिनेमा हॉल के. मैनेजर से मिलता हूं। पूछता हूं क्या चल. रहा है? यह क्या बात सच है कि लोग नहीं आ. रहे हैं थिएटर में? क्या यह सच है कि मेरी. प्रकार की फिल्में इस शहर में नहीं देखी. जाएंगी? तो उनसे बातें करता हूं और कोशिश करता हूं. यंगस्टर्स से मिलूं। बहुत सारी जो जो आने. वाला भारत है उनसे मिलूं। तो इनमें जो. मिलने आते हैं वो वो लोग हैं जो आपसे काम. चाहते हैं। नहीं वो लोग नहीं क्योंकि एक.
तो फैन मोमेंट होगा जाएंगे सर के पास. थोड़ा सा शायद फिल्म में रोल मिल जाए काम. मिल जाए गाना सुन लीजिए हमारा. कुछ नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं अभी तक. मुझसे. रियल फीडबैक यहां से नहीं हो सकता अगर अगर. ऐसे लोगों. नहीं नहीं नहीं मुझसे अगर किसी ने अभी तक. तो मैं आठवां ये दिल्ली को अगर फिर दिल्ली. मुझे चार पांच बार आना पड़ेगा ये दूसरी. बार आया हूं तो दिल्ली को भी अगर एक शहर. इस बार गिन लूं तो अब तक नौ शहर जा चुका. हूं मुझे आज तक किसी ने एक स्क्रिप्ट नहीं. दी मुझे आज तक किसी ने कोई गाना नहीं. सुनाया. अ बस मतलब अभी पीछे एक मैं यमुनानगर में.
था तो एक बच्चा है वो बीट बॉक्सिंग करता. है तो उसने वो बीट बॉक्सिंग सुनाई मुझे. उसने मुझसे ये नहीं कहा कि मुझे कुछ दो. उसने बताया कि मैंने पूछा तुम क्या करते. हो तो बोला बीट बॉक्सिंग करता हूं तो. मैंने कहा यमुनानगर में बीट बॉक्सिंग हो. रही है तो मुझे लगा सुनता हूं तो मैंने. कहा सुना मुझे तेरी बीट बॉक्सिंग ही वाज़. एक्सीलेंट. ही वाज़ आउटस्टैंडिंग. एंड तो यह मेरे लिए तो ये इकलौता आदमी था. जिसने मुझे कुछ सुनाया। मुझसे किसी ने काम.
नहीं मांगा। फोटो खिंचा लेते हैं। पर. नॉर्मली बैठ के बातें करते हैं और अच्छी. बात आज के यूथ की है कि वो आपसे ज्यादा. देर तक आपके ओ में नहीं रहता।. डायरेक्टर आया है तो वहां तक ठीक है। एक. बार बैठ गया मैक्सिमम 5 मिनट में वो सहज. हो जाता है और आपको क्वेश्चन भी कर देता. है।. तो इन संवाद में आठ शहर आप घूम चुके। आर्ट. शहर में कोई ऐसी कहानी कोई ऐसी बात जो. आपके दिल पे छाप छोड़ गई हो कि इसको आप. लेके चल रहे हो भाई यहां से आगे होता है. ना कुछ रह जाता है मैं अभी नहीं कर रहा.
हूं इसको असेस मुझसे लोगों ने पूछा. दोस्तों ने डायरेक्टर दोस्तों ने पूछा तू. क्या कर रहा है क्या चाहता क्या है ढूंढ. क्या रहा है तो मैंने कहा नहीं यार कोई. उद्देश्य से नहीं जा रहा हूं मैं बस जा. रहा हूं और अगर मैं जाऊंगा इतनी जगह और हर. शहर में 100-100 डे-150 लोगों से मिलूंगा. अलग-अलग प्रकार के मतलब आमतौर पे मेरा. एटीट्यूड यह होता है कि जो बुला लेगा उससे. मिल लूंगा। कुछ कभी कोई हर शहर में कोई ना. कोई घर बुला लेता है खाने के लिए। हालांकि. मैं घर जाना पसंद नहीं करता। मैं कोशिश.
करता हूं बाहर किसी बाजार में जहां मैं. लगातार धोख को लोगों को देखता रह सकूं।. तो ये मैं अभी भी समझ नहीं पा रहा हूं।. अनुभव सिन्हा ये फिल्मों को खोज रहे हैं. या अपने आप को खोज रहे हैं।. अपने आप को खोज रहे हैं।. इसकी जरूरत क्यों पड़ती है? कट गया। बताएं ना 35 साल।. 35 साल लखनऊ गए जितनी बार अपनी पिक्चर शूट. करने गए। एक होटल के स्वीट रूम में रहते. थे। नीचे आते थे। गाड़ी का दरवाजा खुला।. गाड़ी में बैठे लोकेशन पर पहुंचे। वहां पर. आपका इकोसिस्टम है। आपके टेक्नशियंस हैं।.
आपका कैमरामैन है। आपके एक्टर्स हैं। कुछ. एक्स्ट्रा हैं जिनसे आधों से बात करते. हैं। आधे क्या? 10% से आप बात करते हैं।. 90% से असिस्टेंट बात करता है। और फिर वो. बनाया। फिर वापस गाड़ी में बैठे। फिर कमरे. पे आए नहाए धोए। कि कोई दोस्त कमरे में आ. गया तो आ गया। नहीं तो आप सो गए। वो भी. लिमिटेड होते होंगे।. हां, उसमें भी लिमिटेड है। यू आर राइट। यू. गॉट मी राइट। कि ऐसा नहीं है कि हर एक्टर. मेरे कमरे में आ जाएगा।. और बाकी जो रैंडम है वो इतना सहज नहीं है. कि आपसे कुछ भी कह सके।. ना। तो आप एक कैप्सूल में हैं। मैं अपनी.
बात कर रहा हूं।. हां।. मैं नहीं कह रहा कि ये सारे डायरेक्टर ऐसे. हैं।. ठीक है। ये. मैं एक कैप्सूल में हूं। और हम 35 साल से. और अगर मुझे अपने समाज पर अपने समाज की. अपने समाज के लिए फिल्में बनानी है तो. मुझे यह वक्त आ गया है कि मुझे एक बार और. उनके बीच में से गुजरना पड़ेगा। उनके बीच. रहना पड़ेगा और इन आठ शहरों में कम से कम. चार बार दिमाग में ख्याल आया कि किसी छोटे. घर शहर में एक घर ले लेता हूं। आधे टाइम. वहां रहा करूंगा।.
क्योंकि मैं मैं जानता नहीं. बदल गया। सब बदल गया। यंगस्टर मुझे पता. नहीं था।. हां, बनारस इसलिए गया था। एक फिल्म लिखने. की कोशिश कर रहा था। तो मैंने कहा यार वो. यंगस्टर्स के बारे में थी कुछ।. मैंने कहा बनारस में यंगस्टर्स शाम को. क्या करते हैं? सूरज ढले बनारस का यंगस्टर क्या करता है? मुझे पता ही नहीं। तो मैंने कहा बनारस. जाता हूं। इसलिए बनारस गया था। इसलिए. मैंने सबको आमंत्रित किया था कि मैं आई.
वांटेड टू मीट द यंगस्टर्स एंड वांट टू. आस्क देम कि आप लोग शाम को क्या करते हो।. आजकल प्रेम किस उम्र में होता है? प्रेम. करते हो तो क्या घर पे फौरन बता देते हो. या छुपाना पड़ता है। हमारे समय में छुपाना. पड़ता था।. हमारे टाइम में भी. हमारे समय में प्रेम होता ही नहीं था।. हमारे समय तो बस लड़की को देख लिया। उसने. हमको देख लिया। वहां पे हमारी प्रेम कहानी. खत्म हो जाती थी। कि लड़की ने देख लिया और. मुस्कुरा भी दी।. तो आज भी वैसा ही है क्या बनारस में? मैं. यह मान के चल रहा था कि आज भी वैसा ही है।. मैं गया तो मुझे पता चला नहीं ऐसा नहीं.
है। बहुत कुछ बदल गया है। तब यह मुझे लगा. कि नहीं मुझे शहर घूमने के अपना देश घूमने. की जरूरत है। और कम से कम वो लार्जर हिंदी. बेल्ट जहां पे हमारी फिल्में देखी जाती. हैं।. तो मुझे पता नहीं कि मैं क्या ढूंढ रहा. हूं।. मुझे पता नहीं कि मुझे क्या मिलेगा।. लेकिन मेरा यह विश्वास है कि कुछ नहीं. मिलेगा ऐसा नहीं है।. ऐसा नहीं है कि आप 30-40 शहर घूमने के बाद.
आप एक अलग इंसान नहीं हो जाएंगे। ये संभव. ही नहीं।. बट जैसे ये जो आप बता रहे हो ये आइसोलेशन. की दुनिया या कैप्सूल के अंदर रहना इसमें. तो हर वो बड़ा इंसान है जो फेमस हो गया।. वो कट जाता है लोगों से।. मुझे नहीं पता।. सब मैक्सिमम यही होता है क्योंकि आप आपका. ही इकोसिस्टम होता है। आप काम कर रहे हो. एक्टर हो। क्या पता वो ऐसी कुछ जो मैं अब. कर रहा हूं वो पिछले 10 साल से लगातार कर. रहे हो।. बट इसकी आवश्यकता फिर मैं समझना चाह रहा. हूं। इसकी आवश्यकता आपकी फिल्में चल रही. थी। आपको लोग पसंद कर रहे थे। आई एम श्योर. आगे भी चार कहानियां होंगी आपके पास।.
हां पर वो कहानी कैसे बनाऊं? उसमें क्या. नया करूं? एक मेरे अंदर वो भी है कि अ. आर्टिकल 15 इतनी अच्छी है कि मतलब मुझे आज. तक एक आदमी नहीं मिला जिसने मुझसे बुराई. की उसकी। हर फिल्म के आर्टिकल 15 थप्पड़. और मुल्क तीन फिल्में ऐसी हैं जिसका बुराई. करने वाला कोई नहीं मिलता मुझे. और बाकी फिल्मों की करने वाले मिलते हैं. तो ऐसा नहीं है कि मेरा इकोसिस्टम बहुत. मेरा चाटुकार है।.
हम. भीड़ की बुराई करते हैं। अनेक की बुराई. करते हैं।. तो लेकिन उसके बावजूद कि मतलब 9 साल हो गए. आर्टिकल 15 रिलीज़ हो के। 10 साल हो गए. सात सॉरी 9 साल नहीं छ साल हो गए आर्टिकल. 15 रिलीज हो के 7 साल हो गए मुल्क रिलीज. हो के पांच साल हो गए थप्पड़ रिलीज हो के. लेकिन. ये फिल्में उतना बिनेस क्यों नहीं करती ये. 200 करोड़ क्यों नहीं करती ये 500 करोड़.
क्यों नहीं करती ये 1000 करोड़ क्यों नहीं. करती एक मेरी अंदर यह भी छटपटाहट है कि. मतलब आप अगर समझदार बात करेंगे तो सुनने. वाले कम लोग हैं अगर आप सिर्फ गाना बजाना. थोड़ी सी कॉमेडी थोड़ा सा एक्शन कर देंगे. तो उसके ज्यादा लोग हैं। मैं जितना मेरे. देश को जानता था और अब हूं थोड़ा बहुत मैं. इसको मानने से इंकार करता हूं। मुझे लगता. है कि कहीं. शायद परोसने में भी कुछ खामी है।. बट जैसे इस पे मेरा एक नजरिया है। मैं. फिल्म क्योंकि मैं भी फिल्म बहुत देखना. पसंद करता हूं।. तो मेरा एक नजरिया ये है कि ये फिल्म.
हमारे बीच में एक धारणा होती है कि हम. ओटीटी पर देख लेंगे।. अगर प्रभास एक पिक्चर आ रही है सालार या. एक पिक्चर आ रही है ओजी अभी आई है ऐसी. फिल्में आती हैं जिस पर आपको स्क्रीन पर. बहुत कुछ देखने को मिल रहा है तो वहां मैं. दिमाग अपना घर रख के जाऊंगा जैसे ओजी. फिल्म आई थी अभी पवन कल्याण की मेरे भाई. से मैंने पूछा क्या रिव्यु हैव उसने किसी. को बहुत अच्छी लग रही है किसी को विकास लग. रही है मैं देख कर आया उसने मुझसे पूछा. कैसी लगी आपको मैं कहा दिमाग घर पे रख. दोगे मजा आ जाएगा ढाई ती घंटा पैसा वसूल.
ले बुद्धि लगाओगे तो लॉजिक ला के मजा नहीं. आएगा बट जो दूसरी वाली फिल्में वो शायद. मैं ओटीटी पर देख ले रहा हूं। जिनको मैं. देख रहा हूं सारी फिल्में देख रहा हूं. मैं। कोई फिल्म नहीं छोड़ रहा हूं मैं। बट. उनकी गहराई को मैं अकेले बैठ के समझ ले. रहा हूं। लेकिन सिनेमा हॉल जाने का मकसद. मेरा हुआ है कि मैं रिफ्रेशमेंट मांग रहा. था। काम कर रहा हूं। थका हूं बीच में गया।. या तो कोई सब्जेक्ट बहुत बड़ा हिट हो गया।. जैसे 12th फेल थी। बड़ी चर्चा हो गई। माउथ. पब्लिसिटी इतनी हो गई। चारों तरफ बात हो. गई। सो एक ट्रेंड निकल आया कि एवरीबॉडी इस. गोइंग टू वॉच। बट आमतौर पर मुझे लग रहा है.
वि द राइज ऑफ ओटीटी लोगों ने ज्यादा समय. यह रहा कि रुक जाते हैं आके यहां देख ही. लेंगे अनलेस एंड अंटिल समथिंग लार्जर देन. लाइफ दिख रही है और अगर आप देखो भी जो. बड़ी फिल्में चली हैं पिछले तीन चार पांच. सालों में वो वही फिल्में हैं जो लार्जर. देन लाइफ है लॉजिक का पता नहीं बट ऐसा. नहीं है आपने खुद ही एक फिल्म का नाम लिया. जो लार्जर लाइफ नहीं है. हां. 12th फिल्म लार्जर दैन लाइफ नहीं है. ये और एक फिल्म और आई थी आमिर खान. प्रोडक्शन की बड़ी अच्छी. लापता लेडीज. लाफटा लेडीज तो इसमें में भी मेरा एक.
अंडरस्टैंडिंग इसको लेकर भी मेरी एक. अंडरस्टैंडिंग थी कि जब बड़ा आदमी कोई. बहुत बड़ा जिसे हम टीवी की दुनिया के लोग. हैं। एक बड़ा एंकर जिस दिन सड़क पर निकलता. है रिपोर्टिंग करने के लिए उसकी चर्चा. ज्यादा होती है। ऐसा नहीं कि वो. रिपोर्टिंग कोई और रिपोर्टर नहीं कर रहा. था या उससे अच्छी रिपोर्ट किसी और. रिपोर्टर ने नहीं दी। देयर आर थाउजेंड्स. ऑफ रिपोर्टर जो शायद उसी रिपोर्ट को दे. चुके होंगे। बट आपने नहीं देखा। लेकिन. क्योंकि वो बड़ा आदमी था। उसका नाम था।. उसकी रीच अच्छी थी। उसने Twitter पर डाला, उसने इंस्टा पर डाला, उसने YouTube पर. डाला तो उसका दर्शक बड़ा हो गया। कंटेंट.
भी अच्छा था तो वाइडली स्प्रेड हो गया।. आप आमिर की बात कर रहे हैं।. मैं उन दोनों फिल्मों का जो मेरा एनालाइज. था कि क्योंकि एक तो विधु विनोद चोपड़ा की. पिक्चर थी। एक आमिर खान प्रोडक्शन की. फिल्म थी। दोनों की मार्केटिंग अच्छी हुई, प्रमोशन अच्छा हुआ। कंटेंट बहुत अच्छा था।. ऑफ कोर्स बहुत अच्छा कंटेंट था। बट देयर. आर मेनी अदर गुड फिल्म्स जो मैंने इसके. आसपास भी देखी है। जिनमें बहुत अच्छा. कंटेंट था और मुझे लगा इसके बारे में. चर्चा क्यों नहीं हुई। लेकिन शायद उसे वो. फैला नहीं पाए। इनकी मसल पावर अच्छी थी।. मैंने वही तो कहा शायद परोसने में. हां. परोसने में खामी है।. तो मसल पावर का बहुत इंपैक्ट पड़ता है।.
हमेशा मसल से परोसना नहीं होता।. मसल कभी-कभी काम आती है। उसी मसल ने अब. मैं नाम नहीं लूंगा। आप खुद समझें। उन्हीं. मसल्स ने बहुत सी और भी फिल्मों के पीछे. अपनी ताकत लगाई। लेकिन वो फिल्में नहीं. चली।. हो सकता है शायद ईमानदारी कमी रही हो।. थोड़ी सी. क्यों होगी? क्यों होगी? जैसे 12th फेल एक आम इंसान को टच कर गई।. या आपके दिल में करे कि अरे पर 12th फेल. ने भी ₹200 करोड़ ने नहीं किया बिजनेस।. हम. मेरी समस्या वो है और मैं इस इस बात को.
मानने से इंकार करता हूं कि छोटे शहर का. आदमी 12th फेल देखने नहीं जाएगा।. बी सेंटर सी सेंटर जिसको हम बोलते हैं वो. 12th फेल देखने नहीं जाएगा। मैं इस बात को. मानने से इंकार करता हूं। वो बड़े शहर से. कम समझदार नहीं है। ज्यादा समझदार है। बट. शायद वहां कहानियां ऐसी बहुत सारी हैं। सर. नहीं परोस नहीं रहे हैं हम उनको। यह मेरा. विश्वास है। यह अभी तक के आठ शहरों के की. मेरी यात्रा का मेरा जो लबो लबाब निकला. है, वह यह निकला है कि हम परोस नहीं रहे. उनको ठीक से।. ओके।. ठीक है।. एक चीज होती है ना कि आप शादी हो रही है.
घर में। पूरा घर सजा हुआ है। मोहल्ले के. सड़क के अंत तक झालर लगी हुई है। एक शादी. हो रही है। पता चला इसमें पैसा खर्च होता. है। तो पता चलता है कि भाई शुभांकर के. यहां शादी हो रही है। और एक शादी ऐसी होती. है कि आपके घर में हो रही है और शायद ये. शादी ज्यादा लंबी चले. हम. और वो शादी कम लंबी चले। हम. वह किसी को पता नहीं है। लेकिन इसकी एक. अपनी सादगी होती है। मुझे लगता है कि यह.
बात लोगों तक बताना लोगों को बताना लोगों. तक पहुंचाना कि एक ये फिल्म आ रही है जो. आपके मतलब की फिल्म है जो आपके पड़ोस की. आपके घर की फिल्म है। हम इसको परोसने में. शायद कुछ खामी कर रहे हैं। वरना जो मुझे. सिनेमा हॉल जैसे मैंने बताया हर शहर में. मिलता हूं लोगों से। लोगों का यह कहना है. कि नहीं लोगों का आना कम तो नहीं हुआ है।. लोग तो आ रहे हैं पिक्चर देखने।. और जहां तक ओटीटी का सवाल है जब टीवी आया. था तो भी एक चर्चा थी। जब वीसीआर आया था. तो भी यह चर्चा थी कि अब थिएटर जाने की.
क्या जरूरत है? अब तो वीसीआर पे घर में. देख लेंगे। सेम चर्चा ओटीटी पर है। ओटीटी. खुद चाहता है कि फिल्में. थिएटर में अच्छा बिजनेस करें।. अगर जो फिल्में ओटीटी थिएटर में अच्छा. बिजनेस करती है वह ओटीटी पर अच्छा बिजनेस. करती है। पुष्पा वन एक ऐसी फिल्म थी जो. अपेक्षा से ज्यादा चल गई और ओटीटी पर आ गई. और अभी थिएटर में थी उसके थिएट्रिकल. बिज़नेस पे कोई असर नहीं पड़ा।. ये सारे वो कन्वीनिएंट.
नहीं बट जैसे पुष्पा आपने किया।. हां।. अब पुष्पा अगली भी आएगी। मैं फिल्म मैं एक. ऐसा आदमी हूं जो मैं फिल्म देखने नहीं. आया।. आएगी क्या? आई. अभी भी आएगी। तीन. तीसरी आएगी।. तो मैं एक ऐसा आदमी हूं जो समय ममारी नहीं. यार बहुत सारा काम है। यह है वो है। बट. पुष्पा देखने मुझे पता है मैं चला जाऊंगा।. मैं सालार नहीं देख पाया प्रभास की। मुझे. अफसोस रहा बाद में कि मैं क्यों नहीं गया।. मुझे जाना चाहिए था।. हो सकता है शायद यह मेरा एक वर्जन. वक्त की कमी भी हो गई है लोगों के पास और. अब जाना और पार्किंग ढूंढना भी थोड़ा असहज.
हो गया है। अंदर का पॉपकर्न भी महंगा हो. गया है। बहुत ये सारे बहुत डिटरेंट्स हैं।. लेकिन उसके बावजूद भी दर्शक सिनेमा हॉल. में सिनेमा देखने जाना चाहता है और जा रहा. है। बिकॉज़ सिनेमा हॉल में फिल्म देखना और. घर पे फिल्म देखना दो अलग चीज है।. फर्क है।. अगर आप इस बात को इग्नोर भी कर दें कि. डोसा पैक के हो के घर पर आएगा तो उतना. क्रिस्पी नहीं रह जाएगा। इस बात को इग्नोर.
कर देते हैं कि हम डोसा घर मंगा के खा. लेंगे।. आप इस बात को इग्नोर नहीं कर सकते कि वह. जो पूरा अनुभव था रेस्टोरेंट तक जाने का, पार्किंग ढूंढने का एक आदमी आपको अच्छे से. पार्किंग करा देता है। उस बात को याद रखना. कि बड़ा नेक आदमी था या एक आदमी आपसे लड़. लेता है कि हां आप नहीं कर सकते। वो ये. पूरा अनुभव होता है।. फिर आप 200 250 अजनबियों के साथ बैठ के. फिल्म देखते हैं। उसके साथ हंसते हैं।. उसके साथ खामोश हो जाते हैं। उसके साथ रो.
लेते हैं। सिनेमा हॉल में फिल्म देखना और. घर पे फिल्म देखना दो अलग चीजें हैं और. दोनों में से कोई गलत. नहीं है। सिनेमा बना था सिनेमा हॉल में. देखने के लिए। तो उसमें कुछ तो ऐसा है जो. सिनेमा हॉल में अलग अनुभव आपको देगा। और. दर्शक को ये बात समझाने की जरूरत नहीं है।. उसको ये बात मालूम है। वो जा रहे हैं।. फिल्में हर आए दिन बिजनेस कर रही हैं। कुछ. का बजट ज्यादा होता है तो ऐसा लगता है कि. यह बिजनेस कम रह गया। वो एक अलग बहस है।.
लेकिन अ फिल्में सही से परोस के सही. निमंत्रण पहुंचाना और उनको इस बात के लिए. कन्विंस करना कि यह फिल्म आपको देखनी. चाहिए। यह एक कला है जिस पर काम की. आवश्यकता है और फिल्में तो बेहतर करने की. जरूरत है ही।. आर्टिकल 15 थप्पड़ मुल्क तीन फिल्में आपने. जिक्र किया जिससे मुझे लगा कि आपके दिल के. बड़े करीब तीनों फिल्में हैं।. अनेक भी एक्चुअली सबसे ज्यादा करीब भीड़. है।. ओके. हम. बट ये तीन फिल्में जिनका मैंने पहले नाम.
लिया। इनमें सबसे ज्यादा करीब कौन सी. फिल्म है आपके? थप्पड़।. क्यों? थप्पड़ बहुत मुश्किल फिल्म थी। मैं वो एक. निर्देशक के तौर तौर पे बता रहा हूं। बहुत. मुश्किल फिल्म थी क्योंकि कहानी नहीं थी।. उसमें कोई. ड्रामेटिक कहानी नहीं थी। एक अच्छा पति. अपनी पत्नी को जिंदगी में पहली बार एक. थप्पड़ मार देता है। वो कहती है मैं जा. रही हूं। कहानी खत्म हो गई ना? इतनी सी. कहानी है। और बहुत टेलीविजन कहानी है।.
टेलीविजन में सीरियल्स में इस प्रकार के. बहुत सारे एपिसोड के एक एपिसोड के अंदर ही. यह काम निपट जाता। तो उसकी लिखाई बहुत. मुश्किल थी। उसको शूट करना बहुत मुश्किल. था कि यह टेलीविजन ना रह जाए। टेलीविजन की. शूटिंग का एक अलग तरीका होता है और फिल्म. की शूटिंग का एक अलग तरीका होता है। तो. उसको फिल्म कैसे बनाए रखना है और उसको एक. कहानी जो आपको 2 घंटे सवा दो घंटा 20 मिनट. आपको इंगेज करे वो बड़ा मुश्किल काम था।.
वो अच्छा हुआ मुझे उस इसलिए मुझे बहुत. करीब है।. थप्पड़ बहुत सारे लोग अप्रिशिएट करते हैं।. मैक्सिमम लोग अप्रिशिएट करते हैं।. [गला साफ़ करने की आवाज़]. लेकिन मैं छोटे शहर से आता हूं। मैं उस. जगह से आता हूं जहां पर अक्सर मैंने देखा. है कि लोग रिश्तों में एडजस्टमेंट की बात. करते हैं। शादी के दिन जब लड़की विदाई. होती है तो कहते हैं कि थोड़ा एडजस्ट करके. रहना घर एडजस्ट करके चलते हैं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़] एक थप्पड़. थप्पड़ में पड़ता है। फिर लड़का कोशिश भी. करता है। कई बार झुझुलाहट भी करता है कि. माफ कर दो।. नहीं।.
एक बार भी नहीं।. बट अगर मान लीजिए रिलेशनशिप में कोई एक. गलती कर देता है।. हां।. थप्पड़ जैसी गलती।. हां।. अलग-अलग स्टेट ऑफ माइंड बहुत सारे बहाने. हो सकते हैं। बहानों पर नहीं जा रहा हूं. मैं। सिर्फ समझना चाह रहा हूं मैं क्योंकि. आप छोटे शहरों में गए किसी ने आपसे कहा भी. कि छोटे शहर के लोग कनेक्ट नहीं कर पा रहे. आपसे या नहीं देख रहे थे। वो सही सही गलत. [गला साफ़ करने की आवाज़]. मैंने नहीं कहा कि मुझसे नहीं देखूंगा. कनेक्ट कर पा रहे हैं। ऐसी एक धारणा है. हां कि सीरियस [गला साफ़ करने की आवाज़]. फिल्में. छोटा शहर नहीं देख. मैं एक स्टेटमेंट लेता हूं कि किसी ने. आपसे कहा वो कितना सही गलत नहीं आ रहा हूं.
मैं। आपको लगता है सब्जेक्ट हिट गया या सब. कुछ रहा माफ कर देना चाहिए या जो स्टैंड. आपने फिल्म में दिखाया. [गला साफ़ करने की आवाज़] कि थप्पड़ था. और कई चीजों को पहली बार रोक देना चाहिए. पहली गाली पहला थप्पड़ इसके बाद अगर आपने. सह लिया तो वो आगे कंटीन्यूएशन में बढ़ता. है रुकता नहीं है या स्टेट ऑफ माइंड. रिश्ता परिवार घर शादी बिकॉज़ शादी समथिंग. बिग आई जस्ट वांट टू टेक अ व्यू ऑन दैट. देखिए कोई भी फिल्म अगर किसी समस्या पर. आधारित फिल्म है तो वो एक यूनिवर्सल.
स्यूशन ऑफर नहीं कर सकती। वो बेस्ट यह कर. सकती है कि आप उस विषय पर बात करिए।. ये. एक्सेप्टेबल बात नहीं है।. हम. किसी महिला को ये एक्सेप्टेबल होगा कि ठीक. है एक बार किया किया दोबारा करोगे तो. छोड़े।. हां।. कोई महिला कहेगी नहीं नहीं तीन बार मार. सकते हो। उसके बाद नहीं मार सकते। कोई. महिला कहेगी एक बार भी नहीं मार सकते। मैं. यह कह रहा हूं कि मारना अलाउड नहीं है। बस.
उसके बाद आप उस नायिका के स्टैंड से. डिसए्री कर सकते हैं। कर नहीं कर सकते। वो. आपकी चॉइस है। हर इंसान की जैसा मैंने कहा. हर जीवन का अपना अंदाज होता है। तो इस मैं. कह रहा हूं बात करो इस बारे में। ये आप. नहीं कर सकते।. बस. मैंने अभी एक टॉक शो देखा क्योंकि अब हम. बात कर रहे हैं दो अलग-अलग जनरेशन की. इंडिया कैसे ट्रांसफॉर्म हो रहा है।. जी. भारत की दो मशहूर अभिनेत्रियां. हम. दो बड़े एक्टर्स की वाइफ एक टॉक शो होस्ट. कर रही थी उसमें एक नई एक्ट्रेस आती हैं.
और उसमें चीटिंग की बात शुरू होती है. रिलेशनशिप से अलग होने की और उसमें आता है. कि इमोशनल चीटिंग ज्यादा बड़ी है फिजिकल. चीटिंग से मैं इसमें इमोशनल चीटिंग ज्यादा. बड़ी है लॉयल्टीनेस से मैं उसमें कि. फिजिकल भी जोड़ दे रहा हूं. और उन एक्टर्स का ये कहना था कि नहीं नहीं. एक रात बहक सकते हैं। वो नॉर्मल है। हमारी. उम्र तक आओगे समझ में आ जाएगा तुम्हें।. इमोशनल अगर आप चीट कर रहे हो तो वो रिश्ते. का ब्रेक डील पॉइंट है। अब मैं इसमें तीन. चीजें जोड़ दे रहा हूं उन दोनों एक्टर्स. के स्टेटमेंट को लेके। एक फिजिकल एक.
सेक्सुअल चीटिंग, इमोशनल चीटिंग और एक. फिजिकल हिट। ब्रेक पॉइंट क्या है? क्योंकि. उन एक्टर्स के हिसाब से फिजिकल पॉइंट नहीं. था। नए भारत जितना आपने इवॉल्व किया समझा. उस मानसिकता को देखते हुए समझना चाह रहा. हूं मैं।. देखिए यह बिल्कुल व्यक्तिगत चॉइस है।. मुझे नहीं लगता कि इसका कोई एक सार्वभौमिक. सत्य है। मेरे से पूछ रहे हैं अनुभव. सिन्हा से नहीं पहला थप्पड़ भी मारा तो. चले जाओ।. ओके अनुभव सिन्हा ये कहता है इसलिए उसने. वो फिल्म बनाई.
वरना. कोई अगर कहता है कि नहीं अनुभव एक बार. मारा था हम. फिर उसके बाद नहीं मारा उसने मुझे मैंने. उसको बहुत बुरा मैंने बोला उसको कि ऐसा. नहीं हो सकता उसने नहीं मारा तुम्हारी. चॉइस है।. क्या रेड फ्लैग्स है आपके रिलेशनशिप में. [गहरी सांस लेने की आवाज़]. इक्वलिटी. वुमेन हैव बीन सबज्जगेटेड फॉर टू लॉन्ग. वी हैव डेल्ट विथ देम वेरी. इनएप्रोप्रियटली नॉट ओनली आवर स्पाउसेस.
आवर मदर्स आवर सिस्टर्स फॉर वे टू लॉन्ग. दिस टाइम टू टॉक अबाउट इट टाइम टू करेक्ट. इट. ओके जैसे मैंने अपने घर में कई बार आवाज. उठाई बट कई बार चीजें ऐसी होती हैं कि. लगता है कि यही नॉर्मल है। पिछली जनरेशन. में खास तौर पर. दैट्स द प्रॉब्लम। द नॉर्मलाइजेशन ऑफ इट. इज द प्रॉब्लम।. नॉर्मलाइजेशन इज द इट हैज़ बीन. नॉर्मलाइज्ड।.
आप अगर पड़ोस के लिए का एक कहानी सुने कि. कल राकेश ने सविता को थप्पड़ मार दिया।. आपका ऐसा होगा और फिर आप बोलेंगे अच्छा. लेकिन अगर आपको यह बताया आपकी पत्नी ने कि. या आपकी मां ने के सविता ने राकेश को. थप्पड़ मार दिया. एब्सोलुटली अनबिलीवेबल. हां. राइट. हां. आपका ये जो टर्न था ये टीवी सीरीज की तरह. तीन बार होगा. सविता. सविता ने राकेश को मारा और राकेश ने क्या.
किया फिर. औरत से मार खा गया. हां ये नॉर्मलाइजेशन एक्सेप्टेबल नहीं है. मुझे. और यह वो फिल्म कहती है आप उसमें से कितना. अंश अपने जीवन में ले जाना चाहते हैं वो. आपकी चॉइस है वो आपका जीवन है उसमें मेरा. कोई दखल उसमें मेरी कोई दखल अंदाजी नहीं. है और उसमें मेरी कोई ओपिनियन नहीं है. आपका जीवन है मेरी ऐसा मेरी ऐसी राय है. एव्री पीस ऑफ़ एन आर्ट ऑफ आर्ट इज़ एन. ओपिनियन. हम.
इट्स जस्ट एन ओपिनियन माय ओपिनियन. ऑन दिस सब्जेक्ट मैटर आर्टिकल 15 में आपका. फेवरेट सीन कौन सा था? [गहरी सांस लेने की आवाज़]. अरे यार वो बड़ा मुश्किल है। तो वो बच्चों. से चुन एक बच्चा चुनने को कौन कहता है. यार? फिर एक सीन होता था जैसे जैसे मुझे वो सीन. था कि ये फलाने जात अच्छा तो ये कौन से. हैं? वो एक मजाक था वो गहरा था।. मैं और गौरव बैठ के कमरे में लिख रहे थे।. हां।. और अचानक मैं हंसने लगा बहुत जोर से। तो. गौरव ऐसा हो गया कि क्या हुआ? तो इतनी.
सीरियस पिक्चर लिख रहे हो। उसमें हंसी की. क्या बात आ गई? तो मैंने कहा नहीं मेरे. दिमाग में एक स्पूफ आया। तो बोला क्या? तो. मैंने इसके आसपास की चीज सुनाई। तो बोले. आप पागल हो ये सीन है पिक्चर का? मैंने. कहा शट अप। एक मिनट बैठो मैं लिख के देता. हूं। फिर वो बैठा और उसने 20 मिनट में वो. सीन लिख के मुझे दे दिया। तो वो ऐसा था और. फिर वो हम जिसको भी सुनाते थे वो बुरी तरह. हंसता रहता था। और मैं थिएटर में फिर. देखने गया। आठवें हफ्ते में फिल्म में. बड़ा परेशान था कि कौन लोग हैं जो आर्टिकल.
15 देख रहे हैं। आठ हफ्ते चल रही थी. पिक्चर।. तो मैं गया देखने मुझे जब मैं थिएटर वाले. जब आप जाहिर है सब दोस्त लोग हैं तो मैंने. पूछा तो बोले यह शायद लास्ट वीक होगा तो. मैं एक बार थिएटर में वापस देखना चाहता था. लोगों के साथ तो. [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं गया. देखने. तो इस बात से तो मैंने शुरू में ही समझौता. कर लिया. हम. कि मेरे दिल ने मुझसे कहा कि भाई है. सिन्हा साहब. हम. ये लोग देख रहे हैं ना टिकट खरीद के. तुम्हारी क्या प्रॉब्लम है व्हाई आर यू. क्वेश्चनिंग देर चॉइस देख रहे हैं उनको.
अच्छी लग रही है देखने दो बट जब यह सीन. आया. तो जो ठाका गूंजा है थिएटर में मुझे उसकी. कभी उम्मीद ही नहीं थी। मुझे कोई आईडिया. नहीं था कि इतना फनी सीन है। मुझे नहीं. पता था कि ये सीन वो है क्या बोलते हैं. उसको जो वायरल हो जाते हैं सीन जो भी होते. हैं उसको जो. मीम या जो भी कहते हैं वो बन गया वो व्हाट. द इज़ गोइंग ऑन। एंड दैट इज ओनली डायलॉग आई. रोट इन द सीन बिकॉज़ जब मैंने उसको वो. स्पूफ जो मेरे मन में आया था मेरे दिमाग.
से ये स्पूफ था।. बट ये सच्चाई है।. हां।. जैसे [हंसी] मैं कई बार कहता हूं कि जब तक. मुसलमान है तब तक हम हिंदू मुसलमान करते. हैं। नहीं तो हम जात लड़ रहे होते। फिर. अगर जात भी खत्म हो जाती केवल एक ही कास्ट. के लोग बचते तो उस कास्ट में भी तय होता. कि तुम फलाना हो तुम धमाका हो तुम ये हो. तुम वो हो।. तुम इलाहाबाद के कायस्त हो कि तुम. गोरखपुर के कायस्त हो? जैसे हमसे कई बार लोग पूछते हैं तुम नाम. क्या है? शुभांकर मिश्रा ब्राह्मण हो।. अच्छा कौन से वाले? [हंसी]. आर यू सीरियस? हां हां ये आ जाता है कई बार। सो आपको.
लगता है अच्छा ठीक है। एक बार. वो कौन से वाले आप? [हंसी]. फिर स्पेशली जैसे हमारी शादी की उम्र हो. गई है तो उसमें बड़ा आता है कि नहीं नहीं. इधर वालों से तो नहीं करते ये छोटे वाले. होते हैं ये वाले ये वाले ब्राह्मण तो नीच. होते हैं. तो ब्राह्मण नीच भी होते हां हां मैंने वो. ये वाले ब्राह्मण नीच होते. देखा. और ये ऊपर उच्च कोटि के ब्राह्मण है अच्छा. ब्राह्मणों में भी एक एक सरनेम है जिसमें. ओबीसी भी आते हैं. शर्मा. शर्मा ओबीसी है.
हां उसमें उसमें भी ओबीसी की भी कैटेगरी. है बट शर्मा शर्मा हमारे संविधान में. उसमें ओबीसी हैं।. सो आई हैड एंटायर नॉलेज कि शर्मा ब्राह्मण. होते हैं।. मुझे यही पता है।. हां बट इस बीच में बहुत सारे शर्मा मिले. हैं मुझे जो ओबीसी हैं। और इनफैक्ट अब. Twitter पे जो [हंसी]. इधर वाले लोग हैं मतलब जो. जातिगत लड़ाई खूब लड़ते हैं। उन्होंने. आजकल सारे शर्माओं को क्योंकि क्रिकेट में. शर्मा खूब निकल रहे हैं। देयर वाज़ रोहित. शर्मा, अभिषेक शर्मा भी कल रिचा शर्मा, रिचा शर्मा किसी ने रन बनाए। सो उसमें भी. हमारी ओबीसी समाज की महिला है। [हंसी] सो.
दे आर फाइटिंग एक्चुअली ओवर दिस कि ये. वाला शर्मा ओबीसी है या ये वाला शर्मा. ब्राह्मण है। एंड देयर इज़ अ क्रिकेटर. अभिषेक शर्मा जिनकी वाइफ जिनकी बहन ने. एक्चुअली में एक गाना लगाया [हंसी]. छोरा ब्राह्मण का टू इनडायरेक्टली. क्लेरिफाई कि नहीं नहीं ये ब्राह्मण वाला. ही शर्मा है।. ये ब्राह्मण है। [हंसी]. ये रियलिटी बता रहा हूं मैं आपको मैं।. फिर छोटी जातियों में भी मतलब जो छोटी. जाती क्या हमारा दिमाग खराब है हम लोग का. छोटी जाति कहते हैं क्योंकि आपको दिमाग.
में फीड वैसे किया गया है। उनमें भी है सब. कैटेगरीज में कि हम इनके यहां नहीं. हां वो मुझे पता है. और वो अपर वालों ज्यादा स्ट्रांग है।. हां वो मुझे उस सीन में है भी ना वो कि. कहता है कि मैं उन्हें अनंत तो हम खाना भी. नहीं खाते।. [हंसी]. सर वो और वो ज्यादा स्ट्रांग है। वो लड़ाई. जो चलती है वो बहुत स्ट्रांग लड़ाई है।. नहीं नहीं आउटस्टैंडिंग है। ऐसी कितनी. चीजें हैं जो मेरे जीवन का हिस्सा है।. मतलब मैं सबको बोलता हूं कि मैंने थप्पड़. बनाई है। इसका मतलब नहीं है कि मैं. मिसोजनी से आजाद हो गया हूं। रोज लड़ रहा.
हूं। रोज लड़ रहा हूं इस चीज से कि गलत. थॉट है। पर वो आ जाता है भाई। 50 साल 52. साल जिया गया है उस थॉट के साथ।. मेरे जो ड्राइवर हैं वो जैसे ही गाड़ी. रुकेगी. मैं उतरूंगा इससे पहले उतर जाते हैं। तो. मुझे लगा कि इनको क्यों उतरना है? उतर. खड़े हो जाते हैं वहां पे। तो मैं जब भी. दिल्ली आता हूं यही गाड़ी रहती है मेरे. साथ। यही आदमी यही ड्राइवर रहते हैं मेरे.
साथ। तो मैंने मुझे खटका पहली बार मुझे. लगा कि शायद किसी वजह से उतरे होंगे। फिर. लगा के पता नहीं क्या है। फिर क्रैक हुआ. मुझसे कि अगर मैं उतर रहा हूं तो वह गाड़ी. में बैठे नहीं रह सकते।. यह उनको सिखाया गया है कि साहब उतर रहे. हैं। अब इसमें कोई जाति नहीं है। कुछ नहीं. है। इसमें सिर्फ वर्ग है। अब मैंने उनको. बोला उनको समझाया वो नहीं मानेंगे। तो दिन. में 12 बार मैं अगर गाड़ी से उतरूंगा तो. वह मुझसे पहले उतर.
मुझे बेल्टवेल्ट खोलनी होती है। उनको भी. खोलनी होती है। पता नहीं कैसे मुझसे पहले. उतर जाते हैं। मैं जवान हूं उनसे नहीं मैं. जवान नहीं हूं। वो जवान है मुझसे बट मोटे. हैं वो। मुझे जल्दी उतर जाना चाहिए। वो. मेरे उतरने से पहले उतर चुके होते हैं वो।. अब यह सब हमारे समाज का अब ऐसा नहीं है कि. एक सिनेमा से या एक बातचीत से यह तो पीढ़ी. दर पीढ़ी हम लोगों ने जिया है। इसको कैरी. किया है। इसको उतारने में भी वक्त लगेगा।. लेकिन मैं कह रहा हूं कि शुरू तो करो।.
मुझसे किसी ने एक बड़ी अच्छी लाइन कही थी. कि केवल दो जगह ऐसी है जहां पर किसी. प्रकार का [गला साफ़ करने की आवाज़]. भेदभाव नहीं होता। ना जातिगत ना धर्म के. आधार पर, ना लिंग के आधार पर।. कहां-कहां कहां-कहां? [हंसी]. एक इलाज में दूसरा अवैध संबंध में।. हां। हां।. दोनों जगह आदमी नहीं सोचता।. और चिता पर भी नहीं होता।. तीसरा दारू पीने भी कह सकते हो।. हां। और चिता पे भी नहीं होता ना।. वहां भी होता होगा। यहां नहीं जला सकते. हो। शायद कभी जमाने में रहा हो कि आप जहां. नहीं जलाए जाएंगे। जब पानी पीने का रहा तो. जलाने का भी शायद रहा हो।.
हां, कभी तो रहा ही होगा। मेरे ख्याल से. अब नहीं है।. हां। मेरी जानकारी में. चार चार चीज़ें हम मान लेते हैं।. कि चार चीज़ों में भेदभाव नहीं होता। अवैध. संबंध करते वक़्त वहां केवल ठरक मैटर करती. है। इलाज करवाते वक़्त खून चाहिए। नहीं. फर्क पड़ता मिल जाए खाली ब्लड ग्रुप चाहिए. चेता और दारू तो इस विषय पर. बात करना जरूरी है। मैंने जो बोला मेरी. फिल्म के जरिए वो शाश्वत सत्य नहीं है।. हम. वो सार्वभौमिक सत्य नहीं है।.
वो सिर्फ इतनी कोशिश कर रहा है कि भाई ये. नॉर्मलाइज हो गया है। ये नॉर्मल नहीं है।. समझिए आपका ड्राइवर गाड़ी से आपसे पहले. कूद के उतर रहा है। ये क्या है? ये नॉर्मल. नहीं है।. इसको सब कुछ लोग सम्मान में भी कह देंगे. कि उसकी रोजी-रोटी अब चल रही है तो शायद. वो एक ग्रेटट्यूड शो करने का तरीका है।. भाई सारी दुनिया में ड्राइवर गाड़ी चलाता. है ना हमारी. खाली हिंदुस्तान थोड़ी चलाता है।. सही बात है।. तो वो तो नहीं कूद के उतरता।. हे ओके थैंक यू। Uber वाला तो नहीं उतरता।.
हां।. लंदन में. तो और ठीक करने की जरूरत है। और उस पर. बातचीत करो। दो समझदार आदमी बात करेंगे।. हो सकता है हमारी आपकी इस बातचीत को सुनके. 15 20 और समझदार आपका पडकास्ट है तो 40-50. पता नहीं कितने आपके व्यू आते हैं। बहुत. बड़े पॉडकास्टर हैं मुझे मालूम है। तो. मुझे ये नहीं पता कि नंबर्स क्या होते. हैं। ये सोशल मीडिया का जो गेम है उसमें. नंबर्स नहीं. सारी चीजें नंबर के लिए नहीं करता मैं।. नहीं नहीं आप ना करते हो पर लोग देखते हैं. ना. तो छह आदमी और बात करेंगे।.
हां बट ये सच है कि अगर आपका ड्राइवर जा. रहा है ऐसे पे खड़ा जा रहा है।. हां।. तो ये सोचने वाली बात है।. इट्स ऑड ना? हां।. इट्स वैरी ऑड। वो जो खड़े होते हैं वो. दरवाजा खोलते हैं आपके लिए होटल पे। सारी. दुनिया में कोई दरवाजा नहीं खोलता आपके. लिए। पूरी दुनिया के किसी होटल में आप. मुझसे कम नहीं घूमे होंगे। ज्यादा ही घूमे. होंगे। मैंने कभी होटल में नहीं देखा कि. एक आदमी बाहर खड़ा हो के दरवाजा खोल रहा. है। कभी नहीं होता। खोल लीजिए दरवाजा। अबे. हैं आप? तो कोई आ जाएगा? किसी से बोल. दीजिए। कोई. एक घर में दो हस्बैंड वाइफ जॉब कर रहे हो।.
दोनों साथ लौटते हों। अभी भी छोटे शहरों. में वाइफ किचन में जाती हैं ऑफिस के बाद।. हां। पुरुष आके बैठेंगे और जाएंगे।. वाइफ तो छोड़ दीजिए। बहनें आ जाती हैं घर. पे। ए जीजी क्या बना रही हो? उनकी मां जा. चुकी हैं।. तो अब मां वाला खाना तो जीजी खिलाएगी या. छोटी बहन खिलाएगी? तो कभी पूछा उससे कि जीजी तुम्हारे लिए. क्या मंगा दें? क्या खाओगी? क्या कुछ बना. दूं? कुछ चीजें तो मैं भी बना लेता हूं।. जीजी तेरे लिए आज वो बनाता हूं। हैप्पी आ.
तेरे लिए वो बनाता हूं। मैंने तो कभी नहीं. बोला।. सर मैंने अभी एक पॉडकास्ट किया। गुजरात के. बिजनेसमैन है। चाय पत्ती की कंपनी और. हजारों करोड़ की है। तो उन्होंने अपनी. तारीफ में कहा कि हमारे यहां जो कस्टमर. आता है मैं सुबहेरे जाता हूं 100 गुलाब. उठा लेता हूं और जो आता है उसको मैं गुलाब. दे देता हूं। थैंक यू। अच्छा लगा ये रहा. हमारा कस्टमर है। मैंने कहा आखिरी बार. वाइफ को कब दिया था? और वो एक्चुअली सकबका. गए। उनको लगा वाइफ को क्यों देना? तो. मैंने कहा इसके पीछे डीप थॉट सोचा है.
आपने। आप कस्टमर को स्पेशल फील करा रहे हो. करेक्ट. कि तुम मेरा सामान लेते हो मेरे. [नाक से की जाने वाली आवाज़] से जुड़े रहो. इसलिए गुलाब तुम्हारे लिए थैंक यू लेकिन. उसी के पीछे जो तुम्हारी पूरी वाइफ ने. पूरी जिंदगी खपा दी तो उसको कभी थैंक यू. थैंक यू नो बिकॉज़ वी डोंट फील लाइक. एक्चुअली अच्छी चीजें करते रहने के बहुत. सारे फायदे आने वाले भविष्य एक बड़ी अच्छी. कहानी है आपको सुनाता हूं कि दो छोटे भाई. बहन समंदर के किनारे खेलने गए. हम. तो बहन जो है भाई जो है वो छोटे-छोटे.
शेल्स कौड़ी जिसको बोलते हैं ना वो चुन. रहा था और इकट्ठी कर रहा था।. तो उसने 10 20 कौड़ियां चुन ली। बहन खेलती. रही। फिर दोनों भाई बहन वहां से निकले। घर. जा रहे थे तो रास्ते में किसी चीज की. दुकान पड़ी। टॉफी होगी लॉलीपॉप होगा। तो. बहन ने कहा कि मुझे लॉलीपॉप चाहिए। तो. उसने कहा चल। तो वो गया बहन को लेके अंदर।. उसने कहा लॉलीपॉप दे दीजिए बहन को। तो. उसने एक लॉलीपॉप दे दिया। तो पूछा कितने. का हुआ? तो उसने कहा ₹2 का।. तो उसके पास पैसे तो थे नहीं और दुकानदार.
को दिखाई दिया। बुजुर्ग आदमी थे। तो उसकी. मुट्ठी में कौड़ियां दिखाई दी। तो उसने. कहा अच्छा ₹2 नहीं है तो एक काम करो चार. कौड़ी दे दो। तो उसने अपनी 20 में से चार. कौड़ियां निकाल के उनको दे दी। उसने कहा. हो गया चला गया। दुकानदार का जो सहायक था. उसने उससे पूछा कि भाई साहब यह क्या किया. आपने? तो बोले नहीं कुछ नहीं। जब बड़ा होगा तो. उसको पता चलेगा कि उसके साथ किसी ने ऐसा. किया था। अच्छाई में बिलीव करेगा। वह भी.
दूसरों के साथ अच्छा करेगा। अपना क्या. हुआ? ₹2 गए ना।. दिस इज हाउ आई थिंक वी कैन एंड शुड. प्रोपगेट गुडनेस। वी शुड डू द प्रोपगेंडा. ऑफ़ गुडनेस।. नाइस। मतलब ये सच है।. अगर आपके साथ अच्छा हुआ है तो आप याद रखते. हैं कि यार वो कमाल आदमी था यार। मैंने जब. ड्राइवर को सिखाना शुरू किया कि महिला या. बच्चा सड़क क्रॉस कर रहा है गाड़ी रुकेगी.
तो लोग सदमे में आ जाते थे उनको लगता था. यह गाड़ी क्यों रुक गई तो फिर मैं उनको. इशारा करता था जाइए तो वो दूर तक गौर से. देखते हुए जाते थे कि यह आदमी पागल है ऐसा. तो होता नहीं. फिर मैं उससे पूछता था मैं बार-बार पूछता. था ड्राइवर से अकेले में भी करता था वही. तो मैंने कहा उससे कि तेरे को थैंक यू. बोलता है कोई तो हंसने लगा बोला नहीं वो. भी मेरा ड्राइवर भी सोच रहा था कि मैं. पागल हूं तो उसने कहा हंसने लगा नहीं कोई.
नहीं बोलता ऑफ लेट ही स्टार्टेड टेलिंग मी. कि भैया 80% लोग थैंक यू बोल के आते हैं. अगर बुजुर्ग महिला बच्चा इन तीन लोगों ने. सड़क क्रॉस करना आपको दिख गए गाड़ी रोक दी. गई. और वो निकल गए 80% लोग थैंक यू बोल के आते. यह मैंने विदेश से सीखा|. अब हम. ये ये मेरे अपने जीवन में पिछले 810 सालों.
में ये हुआ।. ये ये सच है। मैंने भी फील किया ये. सर लास्ट टाइम जब मैंने आपका इंटरव्यू. किया था. जी. एक फिल्म को लेके वेब सीरीज को लेके तो. मैंने एक सवाल पूछा था कि पॉलिटिकल या. एपॉलिटिकल क्रिएटिव आदमी को क्या क्रिएटिव. आदमी या पॉलिटिकल हो सकता है? और आपने कहा था देयर इज़ नथिंग एप. पॉलिटिकल।. मैं अभी भी यही कहने जा रहा था। मनोज. वाजपेई साहब ने भी हाल फिलहाल में एक. इंटरव्यू दिया और उन्होंने कहा कि आर्ट की. बड़ी जिम्मेदारी होती है कि वो ए पॉलिटिकल. रहे। मेरी जिम्मेदारी केवल ह्यूमैनिटी. लेवल पे है। इससे आगे मेरा कोई लेना देना. नहीं है।.
क्या किसी भी क्रिएटिव आदमी का. टू मच पॉलिटिकली इंक्लाइंड होना और उसका. एक्सप्रेस करना उसके आर्ट के लिए ठीक है।. उसकी आर्ट है।. मैं और आप तय करने वाले कोई नहीं होते।. उसके आर्ट है।. सिनेमा या कविता या पेंटिंग की कोई. परिभाषा तो नहीं है?
रंग है, ब्रश है, कैनवस है, वो चाहे क्राइस्ट बना दे, वो चाहे. प्रेमिका बना दे।. उसकी चॉइस है। तो मेरा सिद्धांत आप मनोज. पे लागू नहीं कर सकते। मनोज का सिद्धांत. मेरे पे लागू नहीं कर सकते।. बट जैसे मैं पडकास्ट करता हूं तो 99% जब. एक्टर्स आते हैं और ये मैं किसी एक की बात. नहीं कर रहा हूं। तो उनको इस बात का डर. होता है कि उनसे राजनीतिक सवाल ना पूछ लिए. जाए।. हम. उनको डर होता है किसी देश के.
कंट्रोवर्शियल मसले पर राय ना पूछ ली जाए।. या किसी भी ऐसे विषय पर जहां पर समाज दो. हिस्सों में बटा हो या जिससे विवाद हो. सकता हो या जिसमें स्पष्ट राय देनी हो वो. बचते हैं।. क्यों ऐसा? ये सिर्फ आप अभिनेताओं के लिए कह रहे हैं।. उनमें ये कैटेगरी ज्यादा होती है जो राय. देने से बहुत बचती है।. अभिनेत्रियां. दोनों मैं अभिनेता अभिनेत्री जब अभिनेता. बात कर रहा हूं। दोनों की बात दोनों की. बात कर रहा हूं।. निर्देशक. सारे फिल्म क्रिएटिव मतलब फिल्म इंडस्ट्री. से जुड़े लोगों की। अच्छा.
वो बहुत बचते हैं कि प्लीज और अगर गलती से. अप्रत्यक्ष बातचीत में भी कोई बात निकल आई. तो अक्सर उसे कहते हैं उसे कटवा देना. रिक्वेस्ट करते हैं।. हम भी कई बार उनकी बातों का सम्मान करें. कर देते हैं। बट एक तरफ वो पूरी लॉबी जो ए. पॉलिटिकल की बात करती है और एक तरफ आप. स्पष्टवाद कहते हैं कि नहीं नहीं दे नथिंग. ए पॉलिटिकल।. तो ये क्यों बचते हैं एक्टर्स? कई बार. क्या होता है हम पॉलिटिकल शब्द को ना. हम. थोड़ा पार्टी पॉलिटिक्स से जोड़ के देखते.
हैं. हम. तो तब ज्यादा लोगों को गुरेज होता है कि. मुझे किसी पार्टी की साइड नहीं लेनी. हम. पर मैं जब पॉलिटिक्स शब्द की बात करता हूं. तो मैं सामाजिक राजनीति की बात करता हूं।. मैं किसी भी राजनीति की बात करता हूं। मैं. आई डोंट थिंक कि उनमें से कोई भी सोशल. पॉलिटिक्स पर बात करने से जैसे मैन वुमन. इक्वलिटी इज सोशल पॉलिटिक्स। आई डोंट थिंक. कि इस पर बात करने से लोगों को कोई गुरेज. होगा।.
शहर को साफ रखने की पॉलिटिक्स। हमारा उस. सफाई में क्या योग? हम सिर्फ सरकार पर और. म्यनिसिपल कॉरपोरेशंस पर सारा बोझ डालते. रहते हैं। लेकिन. हम क्या करते हैं हमारी सड़कों का? हमारे. सिगरेट के पैकेट और हमारे गुटखे के रैपर्स. हम यह भी तो राजनीति है।. नहीं ये तो सामाजिक चेतना जगाने वाली बात. है।. सामाजिक राजनीति है। ये पॉलिटिक्स है।. ये भी पॉलिटिक्स है। मेरा ख्याल है. ज्यादातर लोग पार्टी पॉलिटिक्स से. पार्टी पॉलिटिक्स या देश पॉलिटिक्स जैसे.
अभी ऑपरेशन सिंदूर हुआ। पहलगाम का विषय. था।. जी. एक तरफ पाकिस्तान था। उनमें से बहुत सारे. लोग वोकल थे। उनके एक्टर्स वोकल हमारे देश. में कई सारे लोगों ने इनडायरेक्टली कहा कि. हमारे देश में लोगों को डर होता है कि हम. बोलेंगे तो कुछ फॉलोअर्स उधर से कम हो. जाएंगे या बचना चाहते हैं। वो जो स्पष्टता. आती है जैसे विदेशों में कई बार हम. एक्टर्स को देखते हैं या पड़ोस में भी देख. लेते हैं। हालांकि पड़ोस के हालात खराब. है। उनके शायद फोर्स भी किया होगा। वो. हालात अलग है। मैं उस दृष्टिकोण में नहीं. आ रहा। बट हमारे देश में बहुत बचते हैं।. शाहरुख खान को मैं देखता हूं। कई बार.
ट्रोल किया था बीते कुछ सालों में कि वो. प्रधानमंत्री के हर इवेंट को Twitter पर. डालते हैं, तारीफ करते हैं। लेकिन कभी. लोगों ने कहा कि 80 के 90ज के एक्टर्स को. दिखाते वो कि वो सड़कों पर उतरते थे। बहुत. सारे ऐसे प्रोटेस्ट हैं जहां पर उन्होंने. प्रोटेस्ट किया। फिल्म इंडस्ट्री के लिए. प्रोटेस्ट किया। बातें रखी। लेकिन आज के. एक्टर्स सिर्फ तारीफ करते हैं। वीडियो आते. हैं। ये है तो मुमकिन है और उसको ले टाक्ष. होता है कि चापलूसी में उन्हें गुरेज नहीं. है। तारीफ करने में गुरज नहीं है। बट इट्स. नॉट अबाउट पर्टिकुलर मोदी जी ओनली। ओवरऑल.
भी। वो बचते हैं या केवल तारीफ करते हैं।. दौर आते हैं शुभांकर। मतलब एक वो दौर था. जब देश का यूथ प्रभात पेरिया निकालता था।. एक वो दौर था जब 23 साल की उम्र में लोगों. को लटका दिया गया फांसी से।. लोगों की. एंबिशंस के साथ इकोनॉमिक इनसिक्योरिटीज. सोशल इनसिक्योरिटीज बढ़ती हैं। ये सब दौर. होते हैं। ये भी एक दौर है।.
बट जो लिखते भी थे वो भी चुप हो गए। जैसे. आप हुए अनुराग कश्यप हुए। अब आपने Twitter. से तौबा कर नहीं मैंने तो यूं तौबा कर ली. कि Twitter पे सिर्फ बकवास हो रही थी।. राजनीतिक बकवास।. उसका सच्चाई से राजनीति से कोई लेना देना. नहीं था। और मैं भी थोड़ा ज्यादा. एक्टिविस्ट हो गया था। मुझे भी लगा कि ना. मैं क्या कर रहा हूं? फिल्म मेकर हूं। तो. मतलब मेरे सिनेमा में आपको इस किस्म की. कोई चुप्पी नजर नहीं आएगी। और.
मैं जो था वही हूं।. लेकिन मैं उस वो प्लेटफार्म ही मेरी समझ. के बाहर हो गया।. बट जैसे विचारधारा एक्सप्रेस करने का एक. जो मैंने ऑब्जरवेशन किया वो ये पिछली बार. भी सवाल मैंने आपसे पूछा था कि जब आप. विचारधारा रखते हैं तो आपको आपकी तरह के. लोग अच्छे लगने लगते हैं या जो या जो चुप. हैं या जो आपकी विचारधारा की तरह हैं? बिल्कुल नहीं। यकीन मानिए मेरे साथ ऐसा. नहीं है।. मैं फिर ये सवाल पूछ रहा हूं। क्या कभी. ऐसा हो सकता है अनुभव सिन्हा कंगन साहब. काम करेंगे? मैंने कब मना किया? क्योंकि जैसे पिछली बार आपने ये लाइट कही. थी कि अगर इंसान ही बर्दाश्त ना हो। नहीं. नहीं एक्चुअली तो मुझसे ये मुझे शिकायत भी.
थी आपसे वो थोड़ा एडिट हो गया था कि मैंने. ये कहा था कि कंगना बहुत कमाल की एक्ट्रेस. है. और आई वुड लव टू वर्क विद हर मैंने किसी. और. नहीं आप मैं मुझे याद है आपने कहा था कि. कमाल की एक्ट्रेस है सब कुछ है हां हां. मुझे चर्चा याद है क्योंकि चर्चा मुझ पे. इम्पैक्ट वो सवाल मेरे मन में हमेशा रहा. कि. कास्टिंग में कैसे सोचते होंगे. हां. सोचने में तो आपने कहा कि देखो शुभांकर. होता क्या है कि आप जब एक फिल्म बनाते हो.
तो आपको एक व्यक्ति के साथ बहुत समय रहना. होता है।. साथ में खाना होता है, पीना होता है, उठना, बैठना सब कुछ रहता है।. तो अगर कोई इंसान ही आपको बर्दाश्त नहीं. है।. करेक्ट।. तो फिर आप उसे कैसे काम कर पाओगे? प्रोफेशनल होकर भी।. करेक्ट।. सो ये इंसान बर्दाश्त ना होना इट इज़ ऑल. अबाउट बिकॉज़ दो बिल्कुल अलग-अलग तरह के. लोग हो गए। पॉलिटिकल नहीं है।. बट वो एक्ट्रेस के तौर पर आपको परहेज नहीं. है उनसे।. अप्रिशिएट हिम। ये आपने अप्रिशिएट किया. था। शी इज़ अ वै गुड एक्ट्रेस। मतलब जो. उसने क्वीन में काम किया है और तनु एड्स. मनु में काम किया है वो आउटस्टैंडिंग है।.
ये अभी फिलहाल मुझे. जलता वाली फिल्म. फिलहाल ये दो ही वो देखी नहीं मैंने. वो बहुत कमाल की. फिलहाल ये दो ही फिल्में मुझे याद आ रही. है। मैंने देखी और भी हैं।. मैंने ये उनके संबंध में नहीं बोला। ये. जनरली आप जिनके साथ काम करते हैं ना. क्योंकि इतना समय बिताना होता है। आप. कोशिश ऐसी करते हैं कि एक सौहार्दपूर्ण. माहौल तो रहे ही। और बस मेरा एक सिर्फ आप. अच्छे एक्टर हो और मैं आपके साथ समय. व्यतीत कर सकूं। इसके अलावा. ये पसंद नापसंद जो डेवलप हुई सर मैं समझना. चाह रहा हूं. किस पसंद नापसंद.
जैसे कोई भी चीज आप एक सौहार्दपूर्ण. एनवायरमेंट चाह रहे हैं. करेक्ट. और जो आप कह रहे हैं कि मान लीजिए नापसंद. कोई रहा कोई व्यक्ति नापसंद है तो नापसंद. क्योंकि आप पर्सनली तो मिले नहीं या इतना. इन्वॉल्वमेंट नहीं रहा. वो एक हमने एक. तो मेरे मेरे मेरे दिमाग में कंगना के लिए. वो. मैं मैं केवल कंगना की बात नहीं कर रहा. हूं मैं व्यक्ति विशेष नहीं रख रहा हूं. मैं. चलिए ए. हां मैं ये समझ के कह रहा हूं कि कोई. व्यक्ति जिसकी विचारधारा आपसे कंप्लीट. डिसए्रीमेंट वाला।. कितने लोग हैं? मेरे घर में मेरा भाई है।. सगा भाई खून वाला भाई।.
[हंसी] हम राजनीतिक बात नहीं करते।. ओके।. सो इनका असर फिल्मो कास्ट पे नहीं होता।. ऑफकोर्स नॉट। क्या बात कर रहे हैं हम? फिर तो मैं डेमोक्रेट हूं ही नहीं। फिर तो. मैं डेमोक्रेसी में विश्वास ही नहीं रखता।. ये तो फास्टेस्ट बात हो गई।. कि मुझे तुम्हारी विचारधारा पसंद नहीं है।. मैं तुमसे मिलूंगा भी नहीं। यह क्या बात. हुई?
कितने लोग हैं मेरे जीवन में जो राजनीति. में उनसे मेरा कोई सरोकार ही नहीं है।. हम मेरे दोस्त हैं। खाना बनाता हूं, खाना. खिलाता हूं।. ओके। और उनके यहां जाता हूं, खाना खाता. हूं। ठीक है। इसी में एक आगे इवॉल्व करके. सवाल पूछता हूं। बहुत सारे लोग ऐसे हैं सर. जिनकी विचारधारा बीते कुछ समय में बहुत. एक्सट्रीम चेंज हुई है। जैसे एक तो होता. है कि हमने थोड़ा देश दुनिया देखी इवॉल्व. हो गए हम। सबकी हर आदमी समय इवॉल्व होता. है। एक होता है कंप्लीट यूटर्न लेना।.
बॉलीवुड में इस दौर में बहुत सारे ऐसे. एक्टर्स हैं जिनके थोड़ा पुराने स्टेटमेंट. नए स्टेटमेंट लगा दें तो जमीन आसमान का. फर्क है।. जी जी. ये उनसे मैंने सवाल नहीं पूछे तो उन्होंने. कहा हमने देश देख लिया।. यह देश देखना इवॉल्व होना आपके नजरिए से. है या यह होता है कि निजाम या सुविधा ऐसी. है तो जिधर वजन. दोनों होगा. दोनों होगा. आपके आसपास से कोई लोग हैं जो वेल नोन में. जो कंप्लीट ट्रांसफॉर्मेशन इनका हुआ. नहीं. कुछ लोग ऐसे हैं जो मुझे नहीं पता था कि.
मुझसे राजनीतिक रूप से इतने जुदा हैं और. मुझे पता चला कि हैं तो ठीक है. व्यक्तिगत दृष्ट तनाव आता है इसके नहीं. क्यों आएगा? मैं जब वोट देने जा रहा हूं और आप जब वोट. देने जा रहे हैं मान लीजिए मैं और आप दो. अलग हैं।. हम. विचारधाराएं राजनीतिक लेफ्ट राइट सेंटर. छोड़ देते हैं।. हम. वो हमारे मताधिकार हैं।. हम. ना आप मुझे चेंज कर सकते हैं ना मैं आपको. चेंज।. बिल्कुल सही बात है।. समस्या सिर्फ तब होगी जब मैं और आप बहस.
में इंगेज करेंगे।. कि मेरा वाला सही तुम्हारा वाला सही।. वहां पे भी समस्या होने की आधी गुंजाइश. है। पूरी गुंजाइश नहीं है। हम दोनों अगर. दो समझदार लोगों की तरह दो विचारधाराओं के. बारे में बात करेंगे तो फिर बातचीत हो. सकती है। दूसरा 50% यह है कि नहीं हम. दोनों रैबिट हैं या हम में से एक रैबिट. है। तो फिर वो बातचीत सौहार्दपूर्ण नहीं. होगी और उससे कोई निष्कर्ष भी नहीं. निकलेगा और ना हम मान लीजिए पिछले वाले. केस में भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला लेकिन. हम एक दूसरे को एनरच कर पाएंगे। आप मुझे.
कुछ एक नया पहलू दिखा देंगे और मुझे एक. आपका नया पहलू दिखा दूंगा लेकिन फिर भी हम. डिसए्री करेंगे। लेकिन दूसरा वाला जो होता. है उसमें ना कोई निष्कर्ष निकलेगा ना हम. एक दूसरे को कुछ दे पाएंगे। उसमें एंगेज. नहीं करता मैं। कभी विचारधारा का नुकसान. हुआ आपको? विचारधारा का नुकसान मतलब. मतलब टू मच एक्सप्रेस करने का कभी नुकसान. हुआ? आई डोंट थिंक सो. मुझे नहीं।. किसी व्यक्ति से रिश्ते में आपके जो आपके. करीब थोड़ा दूर हटे हो।. नहीं नहीं। जैसे हम उस देश में रहते हैं.
जहां लोग रोहित शर्मा विराट कोहली के नाम. पे लड़ जाते हैं। हमारा शाहरुख है. तुम्हारा सलमान है। हम उस पे भी लड़ जाते. हैं।. हां।. मतलब ये बात छोटी बता रहा था।. हां होता है। होता है।. रोहित विराट के नाम पर उधर. मुकेश मोहम्मद रफी किशोर कुमार मोहम्मद. रफी. किशोर कुमार मोहम्मद रफी पे लड़ाई आती है।. [हंसी]. तो आई एम श्योर पॉलिटिकल तो होती ही होगी।. तो कभी ऐसा नहीं हुआ कि डिफरेंस आए।. नहीं बहसें हुई है लेकिन रिश्ते खराब नहीं. हुए। किसी से. ओके। बॉलीवुड में रिश्ते किस चीज पर खराब.
होते हैं? जैसे मैंने मोहित सूरी से पूछा. था। मैंने पूछा था उनसे कि उनकी बहुत सारी. फिल्में फ्लॉप हुई थी और कई सारी फिल्मों. से उन्हें निकाल दिया गया। कई ऐसी फिल्में. जिनके बाद में रीमेक बन रहे हैं 18-1 साल. बाद। तो मैंने उनसे एक सवाल पूछा था कि जब. फिल्में फ्लॉप हो जाती हैं तो क्या रिश्ते. बदल जाते हैं? परिवार में, दोस्तों में, अपनों में भी एंड उनका यह नजरिया था कि. हां. बदल जाते हैं।. मैं भी हां कहता हूं। लेकिन आपको इसको. थोड़ा सा डिफरेंटली आजकल बॉलीवुड पर बहुत.
बातचीत हो रही है कि बॉलीवुड में ये और. बॉलीवुड के लोग ही बात कर रहे हैं और जो. लोग बात कर रहे हैं उनमें से बहुत सारे. लोगों के बारे में मैं अगर आपको बात बातें. करना शुरू करूं तो वो एक अलग कहानी है. कि हिंदी नहीं लिख सकते हिंदी नहीं पढ़. सकते कि पता नहीं क्या-क्या बातें होती. हैं। इसको थोड़ा ऐसे देखिए मैं और आप. दोस्त हैं।. ठीक है? आप प्रोड्यूसर हैं। मैं एक्टर. हूं। ऐसा मानते हैं। आपने मेरे साथ एक. फिल्म बनाई जिसमें आपने ₹50 करोड़ लगाए.
और उस वक्त ऐसा लग रहा था कि अनुभव. फिल्में हैं तो कम से कम ₹5 करोड़ का तो. फ्राइडे आएगा ही। ₹1.5 करोड़ का आया।. आपके ₹27 करोड़ का नुकसान हो गया।. ठीक है। आप अगली फिल्म में मुझे कास्ट. करेंगे? नहीं।. है ना? रिश्ते खराब हो गए।. आप समझिए आप भी एक इंडस्ट्री हैं। मैं भी. एक इंडस्ट्री हूं। एक्टर भी इंडस्ट्री. होता है। प्रोड्यूसर भी इंडस्ट्री होता.
है। डायरेक्टर भी इंडस्ट्री होता है।. इसको हम लोग बहुत ज्यादा ब्लर कर देते. हैं।. एक प्रोड्यूसर के लिए एक फिल्म बनाना एक. बहुत बड़ा आर्थिक समीकरण होता है। बहुत. सारे पैसे लगते हैं। उन पैसों का वापस आना. होता है। उसका पैसा नुकसान होता है। वो. दूसरे रास्ते ढूंढता है कि मैं इन इस. नुकसान को कैसे भरपाई करूं और चार पैसे. कैसे कमाऊं घर। सर आपको पता नहीं है लोगों. के घर बिक जाते हैं। लोगों की गाड़ियां.
बिक जाती हैं। 2017 16 में 17 में मेरे. पास मेरे नाम पे जितना कुछ है वो सब. मॉर्गेज था। इंक्लूडिंग माय कार।. आसान बिज़नेस नहीं है ये। बहुत मुश्किल. बिजनेस है. और. हैं। ऑफ कोर्स खराब लोग भी होंगे ना हर हर. हर इंडस्ट्री में खराब लोग होते हैं।. हम. 19 20 15 से 20 के बीच में होते हैं लोग।.
बाकी मैं उसके नीचे की बात नहीं कर रहा. हूं। हर तरह के लोग होते हैं। आप. एक लंबा अह एक लंबी सूची है एक्टरों की जो. मैं जानता हूं कि वो कोई भी दोस्त. निर्देशक तकलीफ में होगा। सबसे पहले वो. जाके खड़े हो जाएंगे। चल पिक्चर शुरू कर।. क्या कर रहा है? यह भी है।. मतलब जो 90 के दशक के स्टार्स थे ना संजय. दत्त, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, जैकी.
श्रॉफ, अनिल कपूर ये सब जो स्टार्स थे उस. समय के बॉस यह खड़े रहते थे अपने. प्रोड्यूसर के पीछे। और आज भी इनके जो. कंडक्ट है ना, वो यह है। और यही. निर्देशकों का था कि अरे यार वो उसकी. पिक्चर फ्लॉप हो गई। उसको बुला बुला बुला. बुला उससे बात कर। यह मैंने मेरी आंखों से. देखा है। उसको बुला बुला उसके साथ पिक्चर. बनाते बनाते शुरू कर दे। मैंने भट्ट साहब. को यह करते देखा है। मैंने बहुत लोगों को.
यह करते देखा है।. मैं बार-बार कई बार बोल चुका हूं कि कोई. बहुत इंडस्ट्री जैसे हमारा फ्रेटरनिटी. इंडस्ट्री उतना भी नहीं है लेकिन इतना भी. नहीं है कि एक पिक्चर फ्लॉप हो गई तो बेटा. रिश्ते खराब हो जाते हैं। रिश्ते नहीं. खराब होते। वो भी मर गया है। उसको भी. जिंदा रहना है।. तुम खड़े हो मैं भी खड़ा होता हूं। फिर. मिलेंगे। ठीक है। तो मैं कभी इस चीज को. ऐसे नहीं देखता। बहुत रिस्की बिनेस है।.
कुमुद मिश्रा और मनोज पावा से ऐसा कौन सा. उधार ले रखा है आपने [हंसी] कि आपके हर. पिक्चर में लोग आते हैं और इनके बिना. पिक्चर अधूरी है।. ये दोनों बहुत बदमाश हैं। [हंसी]. ये इतने अच्छे इंसान हैं दोनों। इतने. अच्छे एक्टर हैं। मनोज पावा को जानने से. पहले मैं सीमा पावा को जानता था। सीमा. पावा के थ्रू मैं मनोज पावा को मिला।. और मनोज पावा मेरी हर फिल्में हैं। सीमा. जी को कास्ट करके टाइम हो गया है। [हंसी].
[अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] मनोज. अकुमत मिश्रा मेरी हर फिल्में यार मुझे ये. ना मैं जब लिख रहा होता हूं ना तो ये. दोनों कमबख्त जो हैं ये जैसे ही कैरेक्टर. का नाम लिखा जाता है के शुभांकर मिश्रा 55. गेट्स आउट ऑफ द कार। अचानक या तो मनोज. पावर नजर आ जाता है। 55 जैसे ही होता है. कैरेक्टर की ऐज दोनों में से एक खुद आकर. खड़ा हो जाता है वहां पे। अब मैं क्या. करूं? फिर मैं क्या करता हूं? मैं ना. स्क्रिप्ट लिख के इन लोगों को कई बार रोल.
अच्छा होता है। कई बार रोल छोटा भी होता. है। तो अब मेरे को छोटा रोल है तो मुझे. ऑफर करने में बुरा लगता है। तो मैं बोलता. हूं बाबा जी एक स्क्रिप्ट भेज रहा हूं।. पढ़ लीजिए।. तो वह पढ़ लेते हैं। कुमत के साथ भी यह. होता है। कुछ नहीं बताता हूं कि इसमें. आपका रोल कौन सा है। फिर वह पढ़ेंगे. स्क्रिप्ट। फिर वो ऑफिस आएंगे। तो कौन सा. वाला करना है? [हंसी]. ये वाला प्लीज कर दो यार। दो दिन का काम. है। प्लीज कर दो। करेंगे ना तो प्लीज क्या. बोल रहे हो? तो कर देते हैं। कभी मेरे पास. पैसे होते हैं, कभी नहीं होते हैं। तो मैं.
उनको बोल देता हूं एक बार पैसे नहीं है।. थोड़े कम ले लो। दे देना जितने होंगे. तुम्हारे पास। तो भाई हैं दोनों। अब मैं. क्या करूं? इनके बिना वैसे भी मुझे सेट पर ऐसे पिक्चर. में नहीं होते तो मैं थोड़ा इनसिक्योर हो. जाता हूं। [हंसी]. फ्रेंडशिप क्या है दोस्ती आपकी नजर में? यार ओल्ड स्कूल दोस्ती है अपनी।. कौन-कौन से दोस्त हैं आपके बॉलीवुड में? जो दोस्त हैं बहुत हैं।. बहुत है। फिर दोस्त कैसे हैं सर? नहीं नहीं। यू विल बी सरप्राइज्ड। एक दिन.
मैंने मेरे बेटे से पूछा जब वो 17 18 साल. का हुआ।. मैंने कहा तेरे बाप की सबसे बड़ी कमाई. क्या है? कहता है आपके दोस्त. यू हैव अ रिडिकुलस नंबर ऑफ आई हैव नो लेस. देन अ 100 फ्रेंड्स. जिनको कभी भी उठाकर कॉल कर सकते हो।. कभी मतलब करता हूं और वो करते हैं।. हमें एक दूसरे के 100 लोगों को एक दूसरे. के ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर मालूम है. रेगुलर लेवल पे।.
ऐसे 100 लोग हैं। लगभग सारे मुल्क में. एयरपोर्ट से बाहर निकलूं और मैं चाहूं तो. गाड़ी बाहर खड़ी होगी और बंदा बाहर खड़ा. होगा। ड्राइवर नहीं बंदा खुद दोस्त।. तो श्लोक ने देखा मेरे बेटे ने कई जगह देख. लिया। कई देशों में देख लिया। बोला कोई. शहर ऐसा है जहां आपका दोस्त नहीं है।. मैंने कहा नहीं है यार मैं क्या करूं? बहुत सारे दोस्त हैं बॉलीवुड में। मेरे घर. पे जो जमावड़ा लगता है मेरे घर का खाना.
लोगों को पसंद है।. तो वो जमावड़ा देखिए आप वो सब दोस्त हैं।. आप सब बिजी लोग हैं, बड़े लोग हैं।. डायरेक्टर्स में कौन-कौन से अच्छे दोस्त. हैं आपके? अभी आजकल क्या हुआ कि मेरा मेरा करियर. ड्रिफ्ट हुआ ना? हम. 19 93 95 में मैं ड्रिफ्ट हो गया अपने कोर. ग्रुप से। ये कश्यप, सुधीर भाई, हंसल. ये लोग हम लोग एक एक दुनिया के थे। फिर.
मैं ड्रिफ्ट हो के ग्लैमर की दुनिया में. गया। तो मेरा कुछ दिनों तक. स्टार्स के पास आप गए।. हां नहीं वो दुनिया ही अलग थी।. मतलब सुपरस्टार्स. दीवांशु, धुलिया ये हम लोग सब एक साथ के. लोग हैं। सौरभ शुक्ला, मनोज वाजपेई. किसी का नाम भूल रहा हूं। नाम लेना मैं. शुरू नहीं करता हूं।. देसी वॉइस का ग्रुप। ये सब और ये सब दोस्त. हैं जो आप बोले थे ना बहुत सारे ये सब. दोस्त हैं। इनमें से किसी को कुछ बोलूं कि. मैं. पीयूष मिश्रा भी होंगे फिर. नहीं पीयूष भाई से मेरा रिश्ता कभी नहीं.
रहा मतलब दूर पहचान रही पर मेरी कभी. दोस्ती नहीं रही उनसे अ और भी है बहुत. सारे. तो क्योंकि इस गैंग के वो भी कॉमन आदमी है. ना. हां लेकिन मैं ये पीयूष भाई जो हैं वो. दिल्ली. हम. के से दोस्त हैं इन लोगों के और मैं. दिल्ली में इन लोगों का दोस्त नहीं था मैं. बॉम्बे पहुंच के दोस्त बना हूं तो मैं उस. खेमे में नहीं हूं. तो ये तो मैं अभी इतने अभी तो एक्टरों में. पहुंचा भी नहीं, राइटर से पहुंचा नहीं, उस. पे पहुंचा। बहुत सारे दोस्त हैं। तो मैं.
ड्रिफ्ट हुआ और फिर मैं वापस आया तो फिर. मैं इस गैंग में आया तो मेरे दोनों दुनिया. में दोस्त हैं. और. बहुत सारे दोस्त हैं। मतलब. जो कभी भी मेरी किसी भी मुश्किल में खड़े. हुए हैं साथ खड़े होंगे। भूषण है मतलब. भूषण जब जितना बड़ा आदमी है उसको दोस्त. बोलना अच्छी बात नहीं है। अ लेकिन मतलब. मुझे कभी भी कोई तकलीफ होगी वो मेरे साथ. खड़ा होगा। मेरी. मां गई मुझे पता नहीं कैसे.
मां के सामने खड़ा हुआ था। अभी गई है 5. मिनट पहले। पहला फोन शाहरुख खान का आया. है। पता नहीं कहां से।. तो हमारे जो ओल्ड स्कूल था उसमें इसको. दोस्ती बोलते हैं कि कोई जरूरी नहीं है कि. आप रोज मेरा खाना खा रहे हो। काम कर रहे. हो एक हां एक दूसरे का पता होना चाहिए खुश. है मैं Instagram पे गया ही इसलिए मेरा.
कोई लेना देना नहीं था Instagram से. Facebook पे मैं गया था इसलिए मैं भागा. हूं Twitter से भागा फिर Facebook से भागा. फिर आजकल Instagram पे हूं दोस्तों को. फॉलो करता हूं कि भाई ठीक है ना अच्छा. ऑस्ट्रिया गया हुआ है ओह वेरी गुड मैसेज. कर दिया तू ऑस्ट्रिया में क्या कर रहा है. ऐसा. तो मेरी मेरे जीवन में 100 लोग दोस्त हैं. और आपने ने फिर शाहरुख़ खान का नाम लिया. अभी शाहरुख खान की हर कोई तारीफ करता है. और मैंने आपके मुंह से भी कई बार तारीफ. शाहरुख खान की सुनी है। अभी ने इसी. पॉडकास्ट में बताया कि.
दरवाजा खोलना या छोड़ दिया ना किसी को. घेरता. शाहरुख के साथ रावण बनाना मेरा उतना बड़ा. अचीवमेंट नहीं है जितना उसको जानना है।. और ये बात उसको मैं रावण बनाते हुए बोल. दिया था।. अब जैसे एक कॉमन इंसान होता है। मैं. शाहरुख खान से नहीं मिला हूं।. मिले ही नहीं हूं। मैं नहीं मिला शाहरुख़. ख़ान. गलत बात है।. तो मैंने शाहरुख खान वाली इतनी बातें सुनी. है और मैं अब हर चीज में मुझे द्वेष नजर. आता है। [हंसी]. कि मैं ही नहीं मिला. कि नहीं मैं जर्नलिस्ट हूं तो मुझे लगता. है कोई चीज बहुत अच्छी बात की जा रही है।. तो इट कैन बी पार्ट ऑफ़ वेरी ग्रेट पीआर.
आल्सो। ऐसा मुझे अब हर चीज में द्वेष लगता. है कि कोई चीज जो बहुत दिख रही है। बिकॉज़. जो मिलकर आ रहा है विनीत सिंह अभी आए थे।. जो आता है कहता है शाहरुख खान जानते नहीं. थे। मुझे मैं बैठा आधे घंटे बात की, 40. मिनट बात की। अननोन होकर भी गेट तक छोड़ने. गए। एंड एवरीबॉडी इस टॉकिंग सेम थिंग. अबाउट शाहरुख खान कंटीन्यूअसली हर पडकास्ट. हर दुनिया हर इंटरव्यू. तो अच्छे में विश्वास करना शुरू कर दो ना. अच्छे में विश्वास मैं तुम्हें एक थर्ड. पार्टी स्टोरी सुनाता हूं।. हां सुनो इसके बाद तुम्हें विश्वास हो.
जाना चाहिए। मैंने नया-नया यह तय हुआ था. कि हम रावण बनाते हैं। शाहरुख ने मुझे. किसी वजह से एलए बुलाया हुआ था। शाहरुख. माय नेम इज खान शूट कर रहा था यू यूसीएलए. में। तो मैं शॉर्ट पर खड़ा हुआ था। शॉर्ट. वर्ड देख रहा था। फिर बहुत सारे. हिंदुस्तानी बच्चे 200 150 इकट्ठे हो गए. थे। शाहरुख खान शाहरुख खान. तो पैकअप होने वाला था। उसके बाद मुझे और. शाहरुख को साथ में ड्राइव करके कहीं जाना. था। तो पैकअप हुआ। फिर शाहरुख खान अपने.
दोस्तों से मिले। उन लोगों से फैन से. मिलने गए। तो मैं खड़ा रहा. फिर मैं देखता रहा।. फिर मैं देखता रहा।. फिर मैं बोर होने लगा।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. फिर मैं चला गया शाहरुख की वैन में कि अब. जब आएगा तो आएगा। मैं क्या देखूं? तो आया. शाहरुख करीब सवा घंटे बाद। तो मैंने कहा. शाहरुख यू हैव ट्रेमेंडस अमाउंट ऑफ़ पेशेंस. मैन।. एंड ही सेड अनुभव.
दिस इज प्रॉबब्ली द लास्ट टाइम दे आर. मीटिंग मी। दे विल नेवर मीट मी अगेन।. इट्स माय ड्यूटी टू मेक दिस इंटरेक्शन ऑफ. 3 सेकंड्स ईच स्पेशल।. सो दैट मैन थिंक्स लाइक दैट अबाउट हिज. फैंस।. और तब रील का जमाना नहीं था। रील नहीं बन. रही थी। कोई शूट नहीं कर रहा था। ये ये. दृश्य किसी ने देखा नहीं है। मैंने देखा. है क्योंकि मैं था वहां पे।.
तो अगर आप उसकी बाकी सब चीजों को. पब्लिसिटी स्टंट भी मान लें। यह वाला. इंसिडेंट पब्लिसिटी इंस्टेंट नहीं है।. मेरी मां की मृत्यु के बाद मेरे घर आया।. पूजा के दिन फिर वो जा रहा था। जब मैं. उसको नीचे छोड़ने गया तो लिफ्ट का दरवाजा. खोला तो कुछ 200 बच्चे खड़े हुए थे बाहर।. सबको मालूम था शाहरुख खान आया है। गमी में. आया है। पर उनको कोई फर्क नहीं पड़ता था।. शाहरुख खान आया है। सो ही टर्न अराउंड ही. गव मी हग एंड ही सेड तू जा मैं डील कर. लूंगा।.
फिर मुझे बाद में पता चला कि वहां से भी. वह कुछ 45 मिनट बाद गया।. नाउ दिस इज अ जेनुइनली नाइस मैन एक्सेप्ट. इट नो सो मेनी पीपल हैव टोल्ड यू. मतलब मैंने [हंसी]. क्योंकि मैं नेताओं में डील करता हूं ना. तो जो चीज़ अच्छी दिखती है तो मुझे उसमें. संदेह दिखता है. तो क्या है कि वो जो आदमी ने. चार कौड़ी के बदले लॉलीपॉप दे दिया था. [हंसी]. वो किसी वजह से दिया था।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. मतलब मैं एक छोटा सा किस्सा सुना रहा हूं।. जब पहली बार लखनऊ गया सर मैं मेरा घर.
गोंडा पड़ता है। तो पहली बार मैं लखनऊ गया. और लोग हाथ में हाथ डाल के घूमते लड़के. लड़की तो मेरी मानसिकता थी कि लड़के लड़की. लड़के लड़की अगर लखनऊ में मैं. लड़के लड़के. लड़के लड़की. अच्छा. तो मैं हजरतगंज में रहता था पीछे हजरतगंज. के पीछे ही तो शाम को हम गंजिंग करने ऐसे. ही आके बैठे थे खाली बकैती करने के लिए या. चलो वॉक करके आते हैं हनुमान मंदिर दर्शन. करके तो अगर लड़का लड़की हाथ पकड़े घूम. रहे हो तो मैं गोंडा से गया था तो आई. यूज्ड टू से कि ये भाई बहन है और मेरे. दोस्त कहे कि नहीं वे पागल है साले तू. क्या सोचता है.
2 साल बाद जब मैं वहां से गोंडा अपने शहर. गया और कोई भाई-बहन भी घूम रहा होता था।. तो मैं उनको गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड समझता. था।. तो मेरे को थपक [हंसी]. तो नेता लोग भी होंगे बहुत अच्छे-अच्छे. ना। मुझे एक आध दो उदाहरण दे दीजिए कि कौन. से आपको ऐसे वाले नेता मिले कि कमाल का. आदमी है यार।. सर मेरे लिए तो अच्छा नेता वही जो ये ना. पूछे क्या पूछने वाले हो।. अच्छा. मैं उन उनसे बहुत खुश रहता हूं कि ये. मुझसे नहीं पूछ रहे कि क्या पूछने वाले. हैं आप। और गडकरी जी ने नहीं पूछा था.
मुझसे। अखिलेश यादव से बहुत इंप्रेस हुआ. था मैं।. ही हैज़ गॉट अ ग्रेट सेंस ऑफ़ ह्यूमर।. आई वेगली मेट हिम वंस इतना बातचीत नहीं।. बट ऑन टीवी आई सी ही हैज़ इज इट इज़ दैट. ह्यूमरस? ही इज़ अ नाइस ह्यूमन बीइंग। अगर आप इंसान. अच्छे बात कर रहे हो. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. तो उसमें मुझे अखिलेश जी अच्छे लगे। उसका. रीज़न छोटा सा किस्सा सुनाता हूं मैं। ही. आस्क मी कि मुझे अभी भी याद है कि हम. [नाक से की जाने वाली आवाज़] हमारा. इंटरव्यू खत्म हुआ। तो उन्होंने मुझसे. पूछा कि.
क्या यूपी को लेकर आपका थॉट प्रोसेस है? क्या नजरिया है? ऐसा ऐसा अपनी पार्टी को. लेकर उन्होंने बात की। काफी देर हमारी. बातचीत हुई। तो उन्होंने पूछा कि किसको. वोट देते हो आप? तो मैंने कहा मेरे घर से. 2012 में आपको वोट गया था। [हंसी]. तो ही गॉट टू नो कि मेरे घर से लोग वोट. नहीं दे रहे। पा रहे उन्हें अभी तो मैंने. कहा 2012 में आपको वोट गया था। तो बोले 12. में गया फिर 17 में क्यों नहीं गया? तो हम. बात कर रहे थे कि उन्होंने बहुत सारा काम. किया। या फिर भी वो हार गए।. तो [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़] वो.
जो एक्सेप्टेंस थी मैंने उनको एक फीडबैक. दिया अपनी साइड से। वो मेरा फीडबैक था कि. मैं तो वोट देने आता नहीं बट मेरी फैमिली. में दो बार वोट शिफ्ट हुए। जिस एक. पॉलिटिकल पार्टी को वोट देते एक बार 2007. में एक बार 2012 में। सात में उनका ये. रीज़न था। 12 में ये रीज़न था और 17 में ना. देने का आपको ये रीज़न था। [हंसी]. सो उसे सहजता से लेना और उसका असर. इंटरव्यू में ना पड़ने देना।. प्रीपान बाद में भी बाद में भी जो रिश्ते. रहे और अभी भी वह मुझे कॉल कर देते हैं कि. तुम्हारे उस इंटरव्यू में या उस स्टोरी.
में मैंने यह देखा था जैसे मैंने अतीक पे. की स्टोरी की तो ही कॉल्ड मी कि वहां पर. वो था एक तुमने किस्सा मिस कर दिया उसमें।. सो वो एक इंसान के तौर पर अच्छा रहा।. चर्चा बड़ी सहज रही। उनसे कई सख्त सवाल ही. पूछे मैंने। उनके पिताजी वाला सवाल था जो. अपने बाप का नहीं हुआ। वो सवाल उनसे पूछा. गया। चोर को लेकर सवाल था। उस पे. उनकी मैंने राय समझने की कोशिश की और. उन्होंने उसको विस्तार समझाया तो मेरे लिए. अच्छे नेता वही हैं जो इंटरव्यू में काटने. छांटने को ना बोले और ऐसे कई नेता हैं हर.
पॉलिटिकल पार्टी में शिवराज जी का. इंटरव्यू बड़ा अच्छा था अभी शिवराज सिंह. चौहान के साथ मैंने किया था मुझे मजा आया. था गडकरी जी की टीम से कहा गया था कि. थोड़े सख्त सवाल लाइएगा सो आई वास क्वाइट. इंप्रेस्ड कि यह अच्छा रहा कई नेता हैं जो. आपको रुला देते हैं। [हंसी]. कई ऐसे हैं जो इंटरव्यू के पहले पैसे ऑफर. कर देते हैं। तो हर तरह के लोग. भिन्न-भिन्न तरह के लोग हैं। कई ऐसे भी. हैं जो आपको इंटरव्यू इसलिए नहीं देते. क्योंकि आप उनकी जात के नहीं हैं।. और ये बहुत बड़े नेता हैं। एक बड़े स्टेट.
के हैं।. फिर बनाना चाहिए ना आर्टिकल 15? हां हां। मुझे मेरे एक मेरे एक फ्रेंड ने. उनका एक एक बड़े नेता हैं। उन्होंने. इंटरव्यू दिया किसी मेरे एक फ्रेंड को। तो. उस फ्रेंड ने कॉल करते मुझसे कहा कि पता. है ये इंटरव्यू। मैंने उससे पूछा। मैंने. कहा यार मैं भी लाइन अप करना चाह रहा हूं।. तो उसने कहा यार इन्होंने मुझे दिया इसलिए. क्योंकि मैं इनके गांव का था। इन्हें पता. लग गया था कि मैं इस जात का हूं।. सो ये अभी बहुत है। अभी अपना एंकर अपना ये. तो ठीक है वो भी एक दुनिया है। बट देयर आर. मेनी पीपल जो अक्रॉस भी आते हैं कि हम. चाहते हैं अच्छे सवाल आए अच्छी बातें हो।.
स्पेशली नए लड़कों में तो जितने भी आए हैं. सांसद बने हैं या जो नेता हैं वो अच्छे. हैं। वो बात करने की कोशिश करते हैं। थॉट. प्रोसेस अच्छे हैं। जब आप मिलते हो तो. आपको इंसाइडल कहानियां अलग मिलती हैं।. आपको क्या लगता है फिल्में क्यों नहीं. देखने जा रहे हैं लोग अगर ऐसा सच है तो? एक तो वही पैसे वाला सीन है कि अभी बहुत. टू मच ऑफ़ ऑप्शन। प्लस टू मच ऑफ़ ऑप्शन भी. हो गया है। 90ज में क्रिकेट मैच को लेके. बहुत एक्साइटमेंट थी। लिमिटेड मैच होते. थे। अब पूरे साल मैच होते हैं।.
वो टीआरपी नहीं आती है। अब. आती होगी बट हर मैच को ले उतना पागलपन. नहीं है।. हां मुझे. अब वो मैच उतना इंपैक्ट नहीं कर. मेरा एक्चुअली क्रिकेट का वही खत्म हो. गया।. अब मुझे पूरी टीम पूछो तो मैं नहीं बता. सकता।. 2003 में इंडिया हारी थी। मैं रोया था. फाइनल में। अभी भी शायद फाइनल मुझे तकलीफ. होती है। 23 के फाइनल में तकलीफ हुई।. लेकिन क्या हर मैच में तकलीफ होती है? नहीं। मैं बहुत बड़ा पैशनेट हूं। मुझे. बड़ी इंटरेस्टिंग बात बोली और अब मैं आपके. पॉडकास्ट पे बैठा हूं तो मैं यह बोलूं यह. जरूरी है। मुझे एक एक फिल्म फिल्म थिएटर.
के ओनर ने बोला. सर आजकल आप लोग ना कारपेट बॉम्बिंग कर. देते हैं सिनेमा की पिक्चर की कि 12 शो. उसमें चल रहे हैं, छह शो उसमें चल रहे. हैं, आठ शो उसमें चल रहे हैं, चार शो मेरे. यहां चल रहे हैं। यू स्टार्ट सीमिंग टू. डेस्पिरेट एंड इट इज़ टू ईजीली अवेलेबल।. पीपल लूज रिस्पेक्ट।. दैट्स दैट [नाक से की जाने वाली आवाज़]. कैन बी ट्रू। इट मेड अ लॉट ऑफ़ सेंस टू मी।. कि भाई वो पिक्चर देखनी है वो तीन से छह. के शो में है और छह से नौ के शो में है।. और उस सिनेमा हॉल में है।.
अनचीवेबल है।. लाइक iPhone? हां।. बन के रखा रहता है बट रिलीज़ नहीं करते. हैं।. करेक्ट।. दो महीना आपको टहलाते हैं।. हां। परेशान करते रहते हैं कि इस जून में. आएगा कि सेप्टेंबर में आएगा। फिर. और जिसको मिल जाता है वो डालता रहता है।. हां। मैं गया लेकिन अभी सिर्फ ऑस्ट्रेलिया. में आया है। अगले महीने लंदन में आएगा। तो. लोग लंदन से मंगा रहे होते हैं। एक वो भी. हुआ है कि फिल्मों के शोज़ इतने सारे होते. हैं कि एक अ सेंस ऑफ.
यू नो यू हैव टू मुझे ऐसा हमेशा लगता है. कि पिक्चर हमेशा मुंह ऊपर करके देखी जाती. है।. हम. ऐसे. हम. मैं जाता हूं सिनेमा हॉल्स में ना तो मैं. सिनेमा हॉल में अंदर खड़े हो के लोगों के. चेहरे देखता हूं।. वो एक अलग दुनिया में होते हैं। अपने से. ऊपर देख रहे होते हैं।. वो. ओ और ओरा अगर वो फिल्म कैरी नहीं करेगी तो. उसके सम्मान में थोड़ी कमी रहेगी। मतलब वो. दुनिया की वो महिला जो जिसके लिए आप मरते.
थे कि मेरे को एक बार कहीं देखने मिल जाए. वो आपके पड़ोस में आके रहने लगे तो. तीन-चार दिन में मोह भंग हो जाएगा। तो. क्या आप यह भी मानते हो कि टू मच ऑफ सोशल. मीडिया एक्टर्स का खा रहे हैं, पी रहे. हैं।. आई थिंक सो. नहा रहे हैं, घूम रहे हैं। सब कुछ हमने. यहीं देख लिया। पहले फिल्म का एक सीन. देखने के लोग चले आया करते थे।. करेक्ट।. आज सब Instagram पे देख रखा है।. बॉस त्रिशूल देखने नौवीं बार इसलिए गए थे. कि आर के गुप्ता नाम भूल गए थे संजीव. कुमार का। अचानक साइकिलें उठी फटाफट और.
पहुंच गए थिएटर में। जब तक आर के गुप्ता. अमिताभ बच्चन ने बोल नहीं दिया तब तक सांस. में सांस नहीं आई।. मेरी जेब में 5 फूटी कौड़ी नहीं है और मैं. आपसे 5 लाख का सौदा करने आया हूं। मिस्टर. आर के गुप्ता। [हंसी]. बस बात खत्म।. सांस आ गई।. तो सोशल मीडिया इंपैक्ट मानते हो? आई थिंक. सो आई थिंक आई थिंक द एनिग्मा ऑफ अ स्टार. ऑफ अ मूवी स्टार.
इज टू मच फन।. जैसे मैंने राजकुमार साहब का एक इंटरव्यू. सुना था। जानी जो जानी साहब तो उन्होंने. कहा कोई वो सुबह 4:00 बजे जा रहे तो किसी. ने पूछा कि आप इतनी जल्दी क्यों जा रहे. हो? तो बोला अगर सब मुझको यहीं देख लेंगे. एयरपोर्ट पे तो मेरी फिल्म कौन देखेगा? तो इसलिए मैं छिप-छिपा के निकल जाता हूं।. आई डोंट डू लॉट ऑफ़ पब्लिक अपीरेंसेस। अब. Instagram पर सब बहुत एक्टिव है।. हां।. सीनियर एक्टर थोड़ा बचते भी हैं। मैं रोज. सुबह जिम जाता हूं। इतनी मेहनत करता हूं. जिम में जाके और मैं डरा रहता हूं कि यार.
मैं इंस्टा पे नहीं डाल रहा हूं। मेरा ऐसा. तो नहीं मेरी बॉडी नहीं बनेगी।. [हंसी]. मुझे लगता है कि बॉडी लोगों की इसलिए बन. जाती है क्योंकि वो Instagram पे फोटो. डालते रहते हैं और मैं नहीं डाल रहा हूं।. तो मुझे कभी-कभी इनसिक्योरिटी होती है. सुबह-सुबह।. बट आई हैव मेड पीपल जो कहते हैं कि उनकी. फिल्म में कास्टिंग इसलिए क्योंकि. Instagram पे नंबर अच्छे थे।. हां तो ठीक है। आप ट्वीट. मतलब एक एक प्रायोरिटी एक वो भी चेक लिस्ट. होती है कि आपके कितने फॉलोवर्स हैं।. जी नहीं।. बेकार की बातें बॉलीवुड के बारे में इतना.
मिथ्या फैला हुआ कहीं हो गया होगा किसी एक. शख्स ने ऐसा कर लिया होगा बट दैट्स नॉट द. रूल द ओनली टाइम वी गो टू चेक एन एक्टर ऑन. Instagram इज व्हेन तुमने मुझे नाम बोला. कि अनुभव उसको खास करो इस रोल में राकेश. सक्सेना को तो मैंने कहा कौन राकेश. सक्सेना तो मैं Instagram पे जाऊंगा अच्छा. अच्छा हां इसका नाम नहीं पता था मुझे फिर. मैं उसके 10 फोटो और देखूंगा और उस फोटो. में मैं कोशिश करूंगा करूंगा कि मेरा. कैरेक्टर दिखाई दे। बस इतनी वैल्यू है।.
मुझे मेरी तो नजर भी नहीं जाएगी कभी कि. उसके फॉलोवर्स कितने हैं। फॉलोअर्स से अगर. पब्लिक आती होती थिएटर में तो कितनी सारी. फिल्मों के भाग्य बदल गए होते।. मैं तो बाकी कैरेक्टर्स की बात नहीं। मैं. लीड हीरो हीरोइन की बात कर रहा हूं।. सुपरस्टार्स की बात कर रहा हूं।. अगर उनके नंबर ऑफ फॉलोअर्स से ऑडियंस आती. होती।. तो फिल्मों का भविष्य क्या होता? अलग.
होता। हम. लेट्स टॉक अबाउट सम गुड एक्टर्स। किसी. एक्टर का इवोल्यूशन आपको इंस्पायर कर गया. या बड़ा इंप्रेसिव लगा. या आपकी अपेक्षा से वो ज्यादा बेहतर कर. गया? इवोल्यूशन. मुझे वाजपेयी की ग्रोथ. मतलब. एट आउट ऑफ 10 टाइम्स आई फील प्राउड दैट आई. नो हिम। ही इज माय फ्रेंड।. 8 आउट ऑफ 10 टाइम्स इरफान।. और आजकल के आने वाले जो एक्टर्स हैं ना दे.
आर सो गुड एंड दे आर सो प्रिपयर्ड एंड दे. आर सो फैंटास्टिक. कि आप सरप्राइज कर देते हैं। कई बार क्या. होता है कि एक छोटा सा सीन है लेकिन उसमें. कुछ चाहिए बात और कास्टिंग डायरेक्टर. एक्टर भेजता है। ऑडिशन देखता हूं। अच्छा. लगता है।. मुझे लगता है कि कर लेगा. हम. और फिर वो आदमी आता है। फिर आप उससे सेट. पे बात करते हैं। उसको शॉट समझाते हैं और.
वो मैजिक करके आता है। और ऐसे मतलब. दर्जनों एक्टर्स हैं। बट कोई होता है ना. एक एक छाप आप आप और रह गए। जैसे जयदीप. अलावत है। मैंने गैंगस्टर वासीपुर में. देखा था।. मुझे अच्छे लगे थे। बट फिर एक करीना कपूर. सर की फिल्म आई उसमें जो उन्होंने एक्टिंग. की जाने जाने कुछ ऐसा नाम था हम. मेरा दिमाग से धुआं निकल गया मैंने कहा. यार ये क्या है उनका डांस मूव देखा मैंने. कहा ये क्या है कई जगहों पर वो मुझे मतलब.
बहुत सरप्राइज कर गए कई बार क्या होता है. मतलब ये सवाल का जवाब ज्यादातर उन लोगों. के पास होता है निर्देशकों के पास होता है. या उन लोगों के पास होता है जो मीडियम को. समझते हैं कई बार दर्शक. कैरेक्टर में और एक्टर में फर्क नहीं कर. पाता।. वो कि वो कैरेक्टर कमाल था उस मोमेंट में. या वो एक्टर कमाल था उस मोमेंट में।. हम्म थोड़ा डीप है बट अच्छा है। हां।.
मैं एग्जांपल देता हूं के. मेरे पास बंगला है, बैंक बैलेंस है, गाड़ी. है। डरे डरे क्या है तुम्हारे पास? मेरे पास मा. मेरे पास मा है। मतलब शशि कपूर थे कि ये. डायलॉग में बात है।. ये थोड़ी सी 19 भी एक्टिंग कर दी होती ना. शशि कपूर ने तो भी इतनी इंपैक्टफुल होती।. यह राइटिंग की गेम थी। कई बार एक्टर का के.
पास मोमेंट नहीं होता है। एक सीन खत्म हो. गया। वो जा रहा था और जाते-जाते उसने मुड़. के देख लिया बस एक बार। यह लिखा हुआ भी. नहीं था।. वो एक्टर होता है। मकबूल इमरान इरफान खान।. मतलब ये ये फर्क है और कई बार किसी को पता. नहीं चलेगा कि ये एक्टर का मोमेंट था कि. ये कैरेक्टर का मोमेंट था।. लेकिन निर्देशकों को सेट पर हमेशा यह पता. चलता है कि यह सीन यह कहीं और लेकर चला.
गया।. आपने इसे मनोज वाजपेयी का नाम लिया कि. उनकी जर्नी इंस्पायरिंग हुई। मनोज वाजपेयी. ने कहा पर आपको ऑल हर बार. कोई एक सीन एक पर्टिकुलर सीन विचार. सत्य तो बहुत पुरानी कहानी हो गई तब तो तब. से काफी समय गंगा में बहुत पानी बह गया. नहीं नहीं बॉस वो परफॉर्मेंस है वो पिक्चर. सबके सबके हाथ से चुरा के लेके चला गया. हां दीपिका एंड पिकू. शी वास डीलिंग विद इरफान खान एंड अमिताभ. बच्चन. अराउंड हर ऑल द टाइम.
ट्रू. एंड शी वॉक्स वॉक्स अवे वि 10 ऑन 10. ट्रू 100% 100% ये. नाउ दैट इज एन एक्टर. आई थिंक शी इज़ अ फैंटास्टिक एक्ट्रेस. बट फिर सक्सेस के लिए फिर केवल एक्टिंग. जरूरी होती है बिकॉज़ जैसे अभी दीपिका की. खबरें आ रही हैं। बैक टू बैक फिल्मों से. गायब हो रही हैं। एक नई चर्चा शुरू हो गई. है टाइम शेड्यूल को लेकर।. मैं कहानियां नहीं मैं मानता इन बातों को।.
मैं ये क्या है आजकल प्रेस बहुत एक्टिव है. और प्रेस को बहुत मजा आता है क्योंकि वो. कंज्यूम भी होता है कंट्रोवर्शियल बातें. लिखने में बहुत मैंने दीपिका के बारे में. बहुत सारी मैंने दीपक मैं मिला भी नहीं. हूं शायद कभी एक बार किसी पार्टी में हेलो. हाय लॉन्ग बैक. उसके बाद मैं मिला भी नहीं हूं. तो. हमारी इंडस्ट्री में के बारे में बहुत. सारी ऐसी मैंने मुझे बहुत लोगों से मैंने.
पूछा क्या बात है ये क्या चल है कि. दोस्तों ने जिन्होंने काम किया है, डील. किया है, बोले यार शी इज़ अ डिलाइटफुल. एक्ट्रेस टू वर्क विद। तो मैंने कहा ओके।. किसी से मैंने पूछा तो उसने कुछ बोला भी. तो इसमें कितना सत्य है, कितना असत्य है. ये. बट चलिए आप आप एक डायरेक्टर हैं। अगर आप. किसी एक्टर को साइन कर रहा है. और वो एक्टर ये डिमांड रख दे कि 8 या 9. घंटे की शिफ्ट मैं करूंगा या करूंगी।. हां. और ये ये चीज चाहिए।. हां।. विल यू बी ओके? वर्किंग वि दैट एक्टर या.
वो एक्टर जो आपके प्रति कंप्लीट समर्पण. दिया बैठा है। चिंटू जी ने मुझे बोल दिया. चिंटू जी ऋषि कपूर. मुल्क. हां मुल्क नाइट शूट नहीं करूंगा स्क्रिप्ट. पढ़ने के बाद नाइट शूट नहीं करूंगा. तो मैंने कहा अब समझा करो ना यार नाइट इज. रिच चिटू जी आप क्या बात कर रहे हो. मिनिमम कर लेते हैं नाइट सौदा किया उनसे. तो उन्होंने कहा चार नाइट करूंगा मैं नाइट. शूट नहीं कर सकता चार नाइट करूंगा तो. मैंने कहा ठीक है फिर शूटिंग होते शुरू. होते मैंने उनको बोल दिया कि सर वो पांच.
हो गई है. ठीक है।. क्या हो गया. एक्टर्स? सर यू हैव टू अंडरस्टैंड एक्टिंग. इज दी टफेस्ट आर्ट इन द हिस्ट्री ऑफ. आर्टिस्ट्री।. हर आर्ट फॉर्म किसी हार्डवेयर से डील करती. है।. हर आर्ट फॉर्म एक्टिंग एकलौती आर्ट फॉर्म. है जो किसी हार्डवेयर से डील नहीं करती।.
मतलब सिंगिंग में भी गला लगता है।. इसमें तो भाई कुछ नहीं है। तो एक्टर्स आर. डिफरेंट गुड एक्टर्स आर डिफरेंट पीपल एंड. इट्स फाइन इफ एन एक्टर वांट्स टू वर्क. सिक्स आवर्स अ डोंट वर्क विथ द एक्टर। नो. आई वर्क विद हिम। आई बैडली वांटेड ऋषि. कपूर। एंड आई हैड नो प्रॉब्लम्स मेकिंग. दैट फिल्म विद हिम। आई डिलाइटेड आई वास. डिलाइटेड टू वर्क विथ हिम।. आई हैव वंडरफुल हैड अ वंडरफुल एक्सपीरियंस.
वर्किंग विद हिम एंड ही हैड अ गुड टाइम. वर्किंग वि मी ही केम बैक फ्रॉम न्यूयॉर्क. आफ्टर ह ट्रीटमेंट एंड आई रन इंटू हिम एंड. फिनिश शूटिंग थप्पड़ एंड आई रन इंटू हिम. एट अमिताभ बच्चनस दिवाली पार्टी एंड ही. सेड क्या हुआ आपकी पिक्चर शूटिंग खत्म हो. गई तो मैंने कहा हां बोले एक दिन की. शूटिंग और रखिए अच्छा थप्पड़ में क्या एक. दिन की शूट आपको क्या मालूम है तो मैं. थोड़ा सरप्राइज़ हो गया तो मैंने कहा क्या. रखूं शूटिंग सर बोला नहीं आप एक काम कीजिए. जी आप तापसी का एक सीन शूट कीजिए। मैं. पीछे से निकल जाऊंगा।.
तो मैंने कहा ठीक है सर करते हैं। आप ठीक. हो जाइए। फुल्ली ठीक हो जाइए। करते हैं।. दैट वास माय लास्ट मीटिंग विथ हिम। बट. आई आई फाउंड अ फ्रेंड इन हिम।. जस्ट बिकॉज़ ही डजंट वांट टू शूट नाइट्स।. प्रकाश झा डजंट लाइक टू शूट नाइट्स। इज ही. अलाउड दैट? मेरे को ज़हर टॉपिक दे दिया। प्रकाश झा. twitter क्योंकि आई एम अ पॉलिटिकल. जर्नलिस्ट ऑफ.
नहीं नहीं इसको पहले क्लोज करेंगे इस. चैप्टर को हम [हंसी] करेंगे अब जहर जहर भी. डिस्कस करेंगे. प्रकाश झा बोलते हैं अगर के मैं रात को. शूट नहीं करूंगा 1:00 बजे के बाद उनका ऐसा. कुछ है 12 1:00 बजे के बाद शूट नहीं करते. वो मैंने सुना है उनको अलाउड है एक्टर को. अलाउड नहीं है ये क्या बात हुई एक्टर को. रहमान साहब रात को ही करते हैं. रहमान साहब रात भर काम करते हैं. और सब जाते हैं. सब जाते हैं एक्टर को कैमरे के सामने खड़ा. होता है, होना होता है। उसको सुंदर भी. दिखना होता है।.
उसकी आंख के नीचे आई बैग आते हैं, तो 100. फुट के स्क्रीन पे, 50 60 फुट के स्क्रीन. पे आई बैग इतने बड़े-बड़े दिखते हैं। तो. मतलब इसको ज्यादा बड़ा बना दिया लोगों ने।. सर क्या है? इजीली इसको टाल सकते थे।. आप बिल्कुल ऐसी कोई बहुत बड़ी बात नहीं. थी। और अगर उसकी डिमांड्स किसी भी एक्टर. की डिमांड्स इतनी अनरीजनेबल हैं तो उसके. साथ काम मत कीजिए।. क्या प्रॉब्लम है? बट जैसे अनुराग ने भी. आपके दोस्त ने भी कहा कि आजकल एक्टर एक्टर. एक्टर्स आते हैं। फिर वो कहते हैं हमको यह. वैनिटी चाहिए। यह हमारा स्टाफ है। स्टाफ. का खर्चा भी आप देंगे। ये कुक है जिसकी.
सैलरी हमारे आधे स्टाफ से ज्यादा है। और. ये पूरा आपको उठाना है। तुम मत करना उसके. साथ काम।. तो ये स्टेटमेंट देना गलत है।. तो नहीं ये उसकी मर्जी है। मैं नहीं. दूंगा।. मतलब ऐसे जितने भी टॉपिक आते हैं ये अवॉइड. क्या सकते? आप काम छोड़ सकते हैं।. क्या होता है सर? हर घर में बर्तन टकराते. हैं। हम. शोर होता है लेकिन घर की एक मर्यादा होती. है। उसको अपन बचा के रखते हैं।.
हम थोड़ी जाके छत पे चिल्लाने लगते हैं कि. मेरे पापा ने मुझे थप्पड़ मार दिया। ऐसा. थोड़ी करते हैं।. बट दीपिका को लेके तो ऐसे ही चल रहा है. अभी।. हां।. एवरीबडी इस टॉकिंग आई थिंक हर फिल्म से कि. आई थिंक इट्स ऑफली अनफेयर। इफ यू डोंट. लाइक हर प्लीज फायर हर। सो मेनी टाइम्स आई. हैव नोन एंड आई हैव सीन एक्टर्स हैव बीन. फायर्ड डायरेक्टर्स हैव बीन फायर्ड नोबडी. टॉक्स अबाउट इट इट वास बिटवीन टू पीपल इन. अ रूम. एंड इट शुड हैव रिमेन दैट वे.
तो पोस्ट डाल दी गई थी [हंसी]. नहीं नहीं पोस्ट बहुत रिस्पेक्टफुल थी. हां उसके बाद मतलब फिर पूरा पीआर सिस्टम. एक्टिव हुआ नहीं पोस्ट में था रीज़नेबल टॉक. किया था फिर हमने नई हायर की एंड देन पूरी. कंट्रोवर्सी आई. सर क्या है दिस इज इज़ वेरी कॉम्प्लेक्स।. दे हैव मेड अ फिल्म फॉर वंस। दे आर. ट्राइंग टू मेक अ फिल्म अगेन। इफ दे हैव अ. रिलेशनशिप। आई एम श्योर देयर आर ग्रवेंसेस. फ्रॉम वन साइड, टू साइड्स। वी डोंट नो। आई. डोंट फील ऑथराइज. बट आई एग्री मैं आपकी बात से अगर आप नहीं. सहमत हैं, आप मत काम कीजिए।. आई डोंट फील ऑथराइज्ड टू टॉक अबाउट दैट. पर्टिकुलर मैटर।.
ठीक है? बट. यू नो पीपल कैन हैव वर्किंग कंडीशंस।. बिहार में सर चुनाव भी चल रहे थे। तो जंगल. राज जंगल राज का बड़ा जिक्र हो रहा था।. उसमें Twitter पर एक खास वर्ग ने बहुत. एक्टिवली लिखना शुरू किया कि बिहार के. जंगल राज को प्रकाश झा ने बड़ा हाईलाइट. करके बदनाम कर दिया लालू जी के शासनकाल. को। ये जो भी पिक्चर बनाते थे उसमें गुंडा. एक पर्टिकुलर जात का ये जात का। अब प्रकाश. झा वैसी फिल्में नहीं बनाते हैं। और इसके. जरिए लोग बताने की कोशिश कर रहे थे कि.
सिनेमा का इंपैक्ट कितना बड़ा होता है कि. बिहार का इमेज आज पूरे देश में यह हो गया।. यह प्रकाश जी को लेकर आरोप प्रत्यारोप. लगते रहते हैं। राइट विंग भी लगाता है कि. आश्रम बनाकर उन्होंने साधु संतों को बदनाम. कर दिया। एलगेशन से इत हट के क्योंकि. पत्थर भी उसमें मारे थे। सिर्फ फल लगे. होते हैं। पिक्चरें अच्छी बनाई उन्होंने. देखा हम सब ने हैं। इसलिए आज नजरिया बदल. रहा है। क्या सिनेमा का वाकई इतना बड़ा. इंपैक्ट होता है कि आपने एक जो काम किया. उससे पूरे देश में एक धारणा बन गई। जैसे.
बिहार को लेकर जंगल राजकीय है और क्योंकि. आप बनारस में रहे हैं। यू आर वै क्लोज और. प्रकाश जी की फिल्में अब हम याद करते हैं. तो उसमें कैरेक्टर्स इनडायरेक्टली तो. थोड़ा करते थे जो उस समय की परिस्थिति भी. थी. मुझे प्रकाश जी की राजनीतिक झुकाव मालूम. नहीं है।. मुझे भी नहीं मालूम है।. हां बट ये फिल्में उनकी चर्चा में है।. सारी राजनीतिक फिल्म. मुझे पता नहीं उनकी फिल्में सारी लालू जी. के शासन की फिल्में हैं। शासन काल. राजनीतिक मतलब. मुझे ये सब. मतलब जो अपहरण आई ये रियल स्टोरीज बहुत. ज्यादा है बिहार से जुड़ी हुई उस दौर में.
रही हैं जैसे तबरेज आलम में कैरेक्टर था. उसे लोग मानते हैं कि शबुद्दीन के आसपास. रख दिया साधु यादव उनकी फिल्म में. कैरेक्टर का नाम था जो अ. मुझे एक सवाल का आप जवाब दीजिए मुझे एक. ऐसी फिल्म का नाम बताइए पूरी दुनिया में. सन 1900 से लेकर के सन 2025 तक जिसने किसी. भी समाज पर. हम्म. इतना गहरा असर डाला हो एक फिल्म का नाम. बताइए. दिलवाले दुल्हने ले जाएंगे. क्या असर डाला. सब करवा चौथ कर रही है बैठ के इतना करवा.
चौथ. करवा चौथ हिंदुस्तान में नहीं होता था. होता था बट. हां तो गोंडा कह है ना भाई. घरघर तक पहुंचा दिया सर एकदम. हर घर में इससे ज्यादा घरों में करवा चौथ. होता था अब जो नई चीज आई है वो किसी. सिनेमा में नहीं थी कि मर्द लोग भी रख रहे. हैं [हंसी]. जो कि अच्छी चीज है। पहली बात तो यह कि. मतलब लड़की क्यों रखे लेकिन चलिए वो एक. अलग बहस है सॉरी दूसरा ज़हर टॉपिक नहीं. दूंगा आपको [हंसी]. तो सिनेमा इतना सीरियसली मत लीजिए सिनेमा. बहुत से बहुत एक थॉट को इग्नाइट कर सकता.
है उससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता और हेयर. स्टाइल दे सकता है [हंसी]. या कपड़े. हेयर स्टाइल या वही या फैशन दे सकता है. उससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. फर्क नहीं जैसे आपने मुल्क बनाई या. कुछ नहीं. आर्टिकल 15 बनाई इससे कोई असर नहीं है।. क्या लगता है आपको 2019 के बाद कास्टिज्म. कम हो गया हिंदुस्तान में. या. जैसे लोगों ने अपनी बीवियों को मारना बंद. कर दिया 2020 के बाद।. जैसे जो नई पीढ़ी के बच्चे होंगे जो आपको. देख रहे हैं जिन्होंने देखा.
अब जैसे मैं कॉलेज में पढ़ता था तो मेरे. कॉलेज में कास्टिज्म मैंने फील नहीं किया।. क्यों नहीं किया? क्योंकि आप प्रिविलेज. थे।. हां ये मुझे बाद में बताया गया कि आप. प्रिविलेज थे इसलिए आपको नहीं पता लगा। बट. स्कूल में, कॉलेज में रहे मेरे दोस्त जो. दूसरी कास्ट से भी रहे हैं और बाद में. हमारे अभी भी हमारे हम उतने अच्छे दोस्त. हैं जो मेरे फादर के दौर में रहा होगा या. ग्रैंडफादर के दौर में रहा होगा। मेरी. जनरेशन में उतरा नहीं था। उन्होंने मुझसे. कहा बाद में जब उनसे मैंने बात की तो. उन्होंने कहा कि शुभांकर आप प्रिविलेज. हैं। आपको रियलाइज. हम लोग अच्छे स्कूलों में गए हैं।.
जो छोटे वाले स्कूल है ना कानपुर देहात जो. था एक मतलब उस समझ रहा हूं मैं।. उस शहर को बदनाम नहीं कर रहा हूं। वाओ उस. तरह में जब जो स्कूल होते हैं, गांव के. स्कूल होते हैं, वहां कौन टॉयलेट साफ करता. है, कौन खाना बनाता है यह आप भी जानते. हैं, मैं भी जानता हूं आज भी।. ओके। बट जैसे मेरा एक्सपीरियंस है। मैंने. पहली बार मीडिया में आकर और Twitter पे. आकर ये रियलाइज किया कि. एक बात और याद रखिएगा हर कम्युनल आदमी का.
हम. एक बेस्ट फ्रेंड होता है दूसरी कम्युनिटी. का।. जिसको एग्जांपल देता है वो। [हंसी]. कि देखिए ना हमारा. हमारा बेस्ट फ्रेंड है वो. कैसे कह सकते हैं हम तो. तो तो [हंसी]. सिनेमा की बिल्कुल ऐसी ताकत है. जैसे हर हर बाहुबली रॉबिनहुड बन जाता है. हम शादी करवाते देखे अच्छा काम करते हैं. समाज में हम. सिनेमा की इतनी ताकत नहीं है एक आर्ट. फॉर्म है.
और अभी इवॉल्व हो रही है हिंदुस्तान में. तो और भी पीछे है सिनेमा अमेरिका में और. यूरोप में 1902 2, 1901, 1904 में शुरू हो. गया था। हिंदुस्तान में ठीक से सिनेमा. बनना 40 के या 50 के दशक में है। बीच में. पुणे में हैं फिल्में कुछ साइलेंट फिल्में. हैं। वो फुल लेंथ फिल्में नहीं थी।. बट जैसे 70 के दशक में जब इमरजेंसी का दौर. था. सलीम जावेद ने जो फिल्में लिखी कहते हैं. कि बड़ी इनडायरेक्टली चोट देने वाली. फिल्में थी। चेतना जगाने वाली फिल्में।. प्रकाश झा जी की बात कर लूं मैं। उनकी.
फिल्में भी चेतना जगाई आज के दौर में ये. हिम्मत है डायरेक्टर्स में इस लेवल पर. जाकर डायरेक्टली टोंट करने की, डायरेक्टली. हिट करने की।. मैं तो बनाता हूं।. उसके अलावा कहीं दिख रहा है कोई आपको. आसपास? साउथ में बनती है।. मैं नॉर्थ की बात कर रहा हूं। हिंदी. बॉलीवुड फिल्मों की।. बना ही रहे हैं लोग। ऐसा नहीं है।. कौन सी फिल्म आपने देखी जिसमें आपको लगा. कि गहरा छाप छोड़ा है, गहरी चोट देने की. कोशिश की या एक ज्वलन मुद्दे को ऐसे उठाया. जो कुछ लोगों का साहस कर सकता था।. धड़क थी फिल्म। अभी आई थी। करण जौहर ने.
प्रोड्यूस की थी। होम बाउंड है। करण जौहर. ने प्रोड्यूस की है। अ. हैं।. मैं ऐसा कोई फनेखा नहीं हूं।. [नाक से की जाने वाली आवाज़]. ओके। कोई एक डायरेक्टर जिसको कभी को. डायरेक्टर बनाना हो।. को डायरेक्टर. मतलब एक उसका काम करना हो। एक ऐसी मजबूरी. है कि एक डायरेक्टर सा काम करना आपको। एक. कोई डायरेक्टर आपको चूज़ करना अपने साथ।. किसी. मैं अपने से किसी बहुत मतलब जिसका मैं बड़ा. फैन हूं उसको ले लूंगा।. किसके फैन है? कुछ सीख ही लूं। सुधीर मिश्रा का बड़ा फैन.
हूं। अनुराग कश्यप मुझे बहुत पसंद है। अ. हां मतलब मैं इन दोनों में से किसी एक को. ले लूंगा।. गरीब अनुराग कश्यप में क्या स्पेशलिटी है? गरीब अनुराग कश्यप मतलब [हंसी] जब अनुराग. कश्यप का बजट कम होता है तो एज अ फैन. हमारी ये धारणा उनकी पिक्चर बड़ी गजब की. आती है। गुलाल गैंग्स ऑफ़ वासेपुर। ये. अनुराग भी कहते हैं जब थोड़ा बजट. कौन बोला आपको? गैंग्स ऑफ़ वासेपुर का बजट. कम था।. अभी हुमा कुरेशी आई थी तीन दिन पहले।. [हंसी]. कह रही थी कुछ नहीं था। खाली मनोज जी को.
छोड़ के किसी के पास कुछ नहीं था।. प्रोड्यूसर थी क्या वो पिक्चर के लिए? नहीं एक्ट्रेस थी उसे डेब्यू हुआ था उनका।. नहीं बट हम लोग हमारी फिल्मों में कितना. भी पैसा होता है हमारी कोशिश ये रहती है. कि ज्यादातर पैसा कैमरे के सामने खर्च. किया जाए।. कैमरे के सामने मतलब. जो कुछ भी कैमरे. अच्छा जो कुछ कैमरे के सामने है नहीं पीपल. सेट क्लोथ्स व्हाटएवर इट टेक्स. हम. तो. फाइव स्टार नहीं है कोई बात नहीं। मैंने. आज तक कोई भी फिल्म फाइव स्टार में रह के.
नहीं बनाई। मैं अफोर्ड ही नहीं कर पाया आज. तक।. एक भी फिल्म फाइव स्टार में मैंने रह के. नहीं बनाई है।. रावण ज्यादातर मुंबई में शुरू हुई थी।. लंदन में हम लोग अपार्टमेंट्स में थे।. रावण मेरे जीवन की सबसे बड़ी फिल्म है।. वहां तो खर्चा किया था आपने इंटरनेशनल. सिंगर।. मैंने नहीं किया था। वो जो खान साहब थे ना. उनको पैसा बहुत ज्यादा खर्चा करने का शौक. है। मैं [हंसी] उनको बोलता रहता था।. सारा बजट आप ही उनसे खाली करवा लिया आपने. उसमें। हां बेचारा बर्बाद हो गया। [हंसी]. नहीं नहीं वो खान साहब एक्चुअली वो राजा.
है।. चमक छल्लो गवा दिया आपने।. हां वो राजा आदमी है। उसको लग पैसा खर्च. करने में उसको समझ नहीं आता यार। खर्चा. करो। मुझे डांट देता था। क्या है यार? तू. पैसा पैसा बात करता रहता है। मेरा पैसा. है।. किसी से उधार भी नहीं ले रहा हूं। तो. मैंने कहा ठीक है करो फिर। एक पॉइंट के. बाद फिर मैंने छोड़ दिया।. आपको एक्टर नहीं बनना कश्यप की तरह। मैं. इतना जलील एक्टर हूं।. इतना जलील एक्टर हूं। पीछे दो तीन. इन्फ्लुएंसर्स ने ना मेरे से कुछ एक्टिंग.
सी करा ली। और इतने क्यूट क्यूट बच्चे थे।. वो ऐसा इतने प्यार से आए तो मुझसे ना नहीं. बोला गया।. इस बात से जो मेरी अपने में जो. आत्मविश्वास है मेरे बुरे एक्टर होने का. वो इतना बढ़ गया कि मैंने कहा कि अब जीवन. में मैंने बोल दिया कि मैंने कहा दोबारा. कोई इन्फ्लुएंसरर मुझसे नहीं बोलेगा कि. मेरे साथ रील बनाइए। मेरे बस का ही नहीं. है।. आपको अनुराग कश्यप एक्टर कैसे लगते हैं? कश्यप मुझे नहीं अच्छा लगता [हंसी]. बट उनको शौक बहुत है।. शौक बहुत नहीं बेचारा मजबूरी में कर रहा.
है वो। मजबूरी मतलब पैसे कमाने होते हैं. ना इंसान को।. तो डायरेक्टर तो पैसे नहीं खाते।. पीछे आते हैं वो पीछे वो बेटी की शादी. करनी थी। उसको अपने स्टाइल से करनी थी तो. उसके लिए काम कर रहा था। फिर उसकी पिक्चर. हिट हो गई। तो उसको और ऑफर आ गए। तो धन. आता है तो अच्छा ही लगता है ना। तो वो धन. कमा रहा है।. ओके। म्यूजिक आप वापस जा रहे हैं, सीख रहे. हैं। मैंने सुना विशाल भारद्वाज ने कुछ. गिफ्ट किया आपको।. जमाना हो गया। दो साल दिए उस पहले उसने. सीख लिया आपने।. सीख गए मतलब [हंसी].
दो साल में कोई म्यूजिक सीखता है।. अरे आपने तो म्यूजिक से स्टार्ट किया था. ना आपके सारे गाने।. हां तो मैं वो बनाता नहीं था। मैं उसमें. कुछ बजाता नहीं था। मैं गाता भी नहीं था।. लेकिन. मेरा शौक है म्यूजिक। मुझे मतलब मैं जान. देता हूं म्यूजिक के लिए। तो मुझे बचपन. में मेरे मन में ना एक ड्रीम था कि मैं. मैं मैं पियानो बजा रहा हूं और मेरे. पियानो के ऊपर सिंगल मोल्ट का एक ग्लास. रखा है। तो सिंगल मोल्ट का ग्लास तो मैंने. कमा लिया।.
पियानो का बजाना नहीं कमा पाया। तो वो. विशाल ने मुझे एक पियानो गिफ्ट कर दिया और. एक टीचर गिफ्ट कर दिया। तो हफ्ते में दो. बार आते हैं। मैं सीखता हूं। आई एम गेटिंग. देयर। आई एम आई एम गेटिंग समवेयर। आई एम. नॉट गेटिंग देयर। आई एम गेटिंग समवेयर। बट. या लाइक इन से 10 इयर्स फ्रॉम नाउ आई विल. बी गुड इनफ टू प्ले समथिंग टू यू बट नॉट. फॉर. प्ले समथिंग इन फ्रंट ऑफ कैमरा. एनीवेयर बट विल टेक मी एट मोर इयर्स.
तो फिर ये जो आपका म्यूजिकल सेंस रहा तुम. मेरे लिए आज भी एक म्यूजिक कल्ट है. या यहां है बस सिर्फ यहां है।. सुन के मुझे पता होता है ऐसा मुझे कंपोजर. कहते हैं कि ये गाना हिट है। मैंने जितने. भी कंपोजर्स के साथ काम किया वो कहते हैं. आपके कान बहुत अच्छे हैं। जबकि इधर आपकी. फिल्मों में गाने नहीं आते? हां, निक्कों की जरूरत नहीं होती।. बट उधर मैं तुम देखता हूं। तुम फेवरेट. सॉन्ग कौन सा है आपका? उस गाने की डबिंग में मैं रो रहा था। तुम.
बिन जिया जाए कैसे? चित्रा जी गा रही थी।. मैं लेके मुझे आई वास एक्सपेक्टिंग आप कोई. फरियाद कहोगे। मैं तुम कहूंगा।. तो वो गा रही थी उधर। हम लोग चेन्नई गए थे. रिकॉर्ड करने। वो गा रही थी। जब सिंगर. गाता है तो अलग बूथ में होता है। आपने. देखा होगा। हम बाहर बैठे हुए थे और मेरे. आंसू निकल रहे थे और मैं आसानी से रोता. नहीं हूं।. सर वो कुछ अलग गाना है। चित्रा जी ने कुछ. अलग गाया है।. वो चित्रा जी ने जादू किया है। मैं ता. उम्र उनका शुक्रगुजार रहूंगा कि उन्होंने. मेरी पहली फिल्म में ऐसा गाना दिया जिसके.
लिए मैं जीवन भर प्राउड रह सकूं।. बहुत सुंदर गाया है।. जी।. सदियों से लंबी है रातें।. सदियों सी लंबी है रात। फैज भाई ने कमाल. किया है। सदियों सी लंबी है रातें। सदियों. से लंबे हुए. दिन आ जाओ लौट कर तुम. ये दिल कह रहा है. तुम बिन जी आ जाए कैसे और आज भी गाना उतना. ही फ्रेश है. हां. मुझे भी बहुत अच्छे लगते हैं. इस इस फिल्म में गाने पुराने नहीं लगते. नहीं. जैसे कोई फरियाद भी है वो पुराना नहीं. लगता आज भी प्ले कर दो उतना ही सूदिंग है.
हां लोग मतलब वो वो फेड आउट नहीं हुआ. उसके बाद जगजीत सिंह जी के गाने और भी हिट. हुए लेकिन लेकिन ये आर्ट का एक दूसरा. एकम्प्लिशमेंट होता है।. द एज ऑफ़ आर्ट।. आर्ट इज लाइक वाइन।. इट एजेस विद टाइम एंड इट बिकम्स मोर फन. एंड टेस्टीियर।. सो दैट सॉन्ग कोई फरियाद तुम बिन.
छोटी-छोटी रातें. ये सब वो गाने हैं। दैट हैव. थोड़ा सारे गाने चले। दारू विश का भीक था।. कॉलेज के लड़कों में खूब चला था वो। हमारे. एनुअल फंक्शन खूब निपटाए लड़कों ने।. अच्छा। [हंसी]. तो वो म्यूजिक मुझे कुछ सिर्फ इतना रिश्ता. है कि मैं सुनता बहुत हूं और ऐसा मेरे. कंपोजर्स कहते हैं कि मैं जो गाने धुने. चुनता हूं उनमें बात होती है।. राइटिंग में भी रोल प्ले करते हो आप गानों. की?
नहीं नहीं।. मैं आई एम सच अ फ्रस्ट्रेटेड पोएट। बट. जैसे एक किस्सा आया था कि 80 शेर सुनने के. बाद लिखा गया था फैज अनवर ने।. ऑफ कोर्स मुझे अप्रूव करना होता है ना।. हां।. तो ओनली इन टर्म्स ऑफ़ अप्रूवल।. तो ये तय हुआ कि ये आठ सीन थे।. इन आठों सीनों में से डायलॉग निकाल दूंगा. अगर आपने शेर लिख दिए तो।. हम. अच्छे शेर लिख दिए तो मैं आठों सीन विदाउट. डायलॉग कर दूंगा। गाना बजेगा।. [गला साफ़ करने की आवाज़][खांसने की आवाज़]. तो उन्होंने कहा कि मैं ट्राई करता हूं।.
हम. फिर उन्होंने शेर सुनाने शुरू किए। और वह. 80वां शेर मुझे एक लम्हे में सिमटाया है. सदियों का सफर जिंदगी तेज बहुत तेज चली हो. जैसे मैंने कहा डन. फिर उन्होंने सात और लिखे चलो एक टफ टॉय. देता हूं तुम में जिया जाए कैसे कोई. फरियाद [नाक से की जाने वाली आवाज़]. एक ही प्ले कर सकता ड्राइव कर रहे हो. कहां से कहां जा रहा हूं. ट्रैफिक है कि नहीं है. नहीं है तुम में जिया जाए कैसे.
फ्लोट करता है वो गाना. तैरता है. चित्रा जी बहुत अंडररेटेड सिंगर है. नहीं नहीं. हमारे यहां पर हिंदी में साउथ में तो बहुत. बड़ी है वो. हिंदी में. हां हिंदी में शायद उन्होंने बहुत ज्यादा. गाने गाए नहीं है. जितने गाए और कल्ट है बट. वो उनके बारे में और बातें होनी चाहिए थी. नई पीढ़ी में स्पेशली. मेरे ख्याल से वो कभी-कभी आर्टिस्ट का भी. होता है कि द आर्टिस्ट डजंट वांट टू.
ट्रैवल. ट्रैवल नॉट नॉट फिजिकली. समझ रहा हूं मैं समझ रहा हूं. कि मैं मेरी दुनिया में खुश हूं तो वो. ट्राई नहीं करते जैसे कमल हसन साहब थे. उनको हिंदी करना था तो 80 से हिंदी कर रहे. थे रजनीकांत साहब 80 से हिंदी कर रहे थे. फिर बाद में और भी एक्टर्स आए हैं और तो. एक्चुअली तो शुरू से बैजंती माला जी और. कौन कौन-कौन लोग. तीन किताबें जो सबको पढ़नी चाहिए आपके. हिसाब से हम सबको मतलब कौन. ये लोग नए बच्चे मैं तो नए बच्चों के साथ.
सोच रहा हूं हमारी उम्र के लोग जो थोड़ा. ऑफ़ इंडिया माय एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ. एंड. व्हाई आई एम एन एथिस्ट।. पहली दोनों किताबें राजनीतिक किताबें एंड. यू आर नॉन पॉलिटिकल पर्सन।. तीसरी भी राजनीतिक है।. एंड यू आर नॉन पॉलिटिकल पर्सन।. आई डोंट से आई एम नॉट व्हेन डिड आई से आई. एम नॉन।. अभी दरवाजे पे हम आए थे। मैंने कहा आप. पॉलिटिकल आदमी। आपने कहा अरे यार ये मेरे. को सब ने चमका दिया है।. इट वािक इट वास अ रेड। ऑफ कोर्स आई एम एन.
एक्सट्रीमली पिटिकल मैन।. एक्सट्रीमली पिटिकल. शेरो शायरी पसंद है सर आपको कुछ लिखते हो. कभी. लिखता नहीं हूं लिखना चाहता हूं कोशिश कर. रहा हूं दोती साल हो गए बहर सीख ली शकील. भाई से शकील आजमी साहब से कि बहर दो बहरे. सिखा दी उन्होंने मुझे बहर इज द मीटर. हम. बट मैं कोई भी एक अच्छा शेर कह नहीं पाया. कोई शेर जो आपको अच्छा लगता हो. अरे बाप रे बाप. एक तो सुना दो कम से कम. बहुत सारे फिराग साहब का शेर है.
तुम मुखातिब भी हो, करीब भी हो। तुमको. देखूं कि तुमसे बात करूं।. नाइस।. छोटे से कितना सारा है। गालिब है, फैज. हैं।. अरे फैज की वो शायरी कि जो नज़्म उनकी वो. लोग बड़े खुशकिस्मत थे।. जो इश्क को काम समझते थे या काम से आशिकी. करते थे। हम जीते जी मशरूफ रहे। कुछ इश्क. किया, कुछ काम किया। उनकी एक नज़्म है।. पढ़िएगा के. दश्ते तन्हाई में लरजा है।.
पढ़िएगा।. कमाल है।. कुछ अधूरा रहा आपकी जिंदगी में मोहब्बत. में या सब पूरा रहा? नहीं। आई हैव बीन अ लकी मैन। आई जस्ट अ. डोंट लाइक द फैक्ट कि मेरी मां अह. चली गई। दैट इज़ वन थिंग दैट आई कांट।. आई हैवंट एक्सेप्टेड इट टिल डेट। इट्स बीन. 14 इयर्स 13.
बट जैसे आपका उम्र का इतना तजुर्बा है।. क्यों ये एक्सेप्टेंस नहीं आया अब तक? [गहरी सांस लेने की आवाज़]. आई वांटेड टू गिव हर मोर।. अपने आप से शिकायत आ गई।. हां।. कि नहीं कर पाए पूरा। हां मतलब अभी वह और. बड़ा एक घर लेने वाला था। उसको थोड़ा सा. और वो देखती कि मुझे अवार्ड्स मिल रहे. हैं। आई वांटेड टू मेक हर शी वास वेरी.
हैप्पी विद व्हाटएवर आई हैड अचीव्ड बाय. देन. बट. पिताजी को मैंने कहीं सुना था कि आपने कुछ. पैसों के बदले एक बड़ी रकम जब दी थी. [हंसी]. तो आप बहुत खुश हुए थे। हां यार बाप के. हाथ में पैसा रखने का तजुर्बा नहीं था।. पहली बार ₹00 उसके हाथ में रख रहा था मैं।. जान निकल गई थी।. जान निकल गई थी।. मां का होना क्या होता है? कितना खुशनसीब.
इंसान होता है जिसकी दुनिया में मां होती. है।. रात को देर से घर में घुसता था तो उसके. कमरे से आवाज मेरे साथ ही रहती थी। मैंने. बुला लिया था बॉम्बे दोनों को। तो रात को. देर से कमरे में घुसता था तो उसके कमरे से. आवाज आती आ गए और मैं कहता नहीं अभी आऊंगा. थोड़ी देर में तो यह हमारा रात का संवाद. था और वहां उनके अंदर से आवाज आती थी कि. मतलब जोक मार रहे हैं ये. तो यही बात मतलब वो औरत के कान दरवाजे पर.
लगे हुए थे। बेटा आया नहीं है। बेटा 40. साल का था। 45 साल का था। बच्चा नहीं था।. ड्राइवर गाड़ी चला रहा था।. यह कैरेक्टर कहां होता है जीवन में? एक ही. होता है. जो हक से हक दिखा लेता है।. तब जब हम वो एोगेंट हो कि नहीं हमें सवाल. जवाब नहीं पसंद इतना।. आ गए।. [हंसी]. या दैट इज वन अधूरापन।.
हाउ इज यू बोर्न वि द सन? कॉल्स मी ब्रो। समटाइ्स. [हंसी]. डांटता है मुझे।. पिछली पीढ़ी के माता-पिता और इस पीढ़ी के. माता-पिता में क्या फर्क हो गया? आई मेड ह फर्स्ट ड्रिंक व्हेन ही वास 18।. आई आस्क हिम व्हाट यू वांट टू डू?
इन लाइफ।. पिताजी यह तो हमारे मध्यम वर्गीय उनका यह. बात है बेटे को सेट करो इससे पहले कि मेरी. हैसियत कम हो जाए. बेटे को सेट करो आगे बढ़ाओ. पिछली पीढ़ी में संवाद लेकिन कम था. बहुत कम था मैंने बाप को हग किया है पहली. बार छह सात साल पहले. पहली बार मैंने बाप को छह सात साल पहले हग. किया बाप को छूने का तो नहीं होता था ना.
मां को होता था. हम. बाप को कहां छूते थे हम लोग थप्पड़ पड़ता. था तभी भी कांटेक्ट होता था फिजिकल. वरना नहीं होता था।. हमारे तो हग करने का कल्चर भी कम रहा है।. पैर छूने का ज्यादा रहा है।. हां लेकिन होना चाहिए। अब जब मैं बाप को. हग करता हूं, बाहर निकल रहा हूं, जा रहा. हूं, रोज सुबह करता हूं तो. फिर वो तो बड़ा ऑकवर्ड रहा होगा उनके लिए।. हां। [हंसी]. कि ये क्या है? ये क्या हुआ? क्यों मतलब? हां।. ये सीमाएं क्यों पार की जा [हंसी] रही है?
इस उम्र में. तो हमने बताया कि भाई अब हमारी चलेगी. आपने चलाई ना अब हमारी चलेगी।. ब्यूटीफुल लास्ट क्वेश्चन सर एक बड़ा. अच्छा शेर था। इंसान की ख्वाहिश से कोई. इंतहा नहीं होती। दो गज जमीन चाहिए दो गज. कफन के बाद। ख्वाहिशें सबकी होती हैं।. क्या ख्वाहिशें हैं अनुभव सिन्हा की यहां. से? फिल्में बनाता रहूं। मुझे 40 फिल्में और. बनानी है। ऐसा मेरा मानना है।.
40 फिल्म तो काफी ज्यादा होती है अभी।. 40 साल लगेंगे। 60 का हूं। 100. अनप्रेसिटेड थोड़ी है।. [हंसी]. पुर्तगाल के एक डायरेक्टर थे। 105 साल जिए. और जिस साल मरे उस साल भी उनकी एक पिक्चर. रिलीज हुई।. मतलब 40 इंटरव्यू मेरे भी और पड़े हैं।. हां। [हंसी]. तो 40 साल के लिए फिटनेस चाहिए होगी।. खानावाना कंट्रोल करना होगा। वर्कआउट करना. होगा।. और कोशिश करनी होगी कि आपका प्लेन क्रैश.
ना हो। [हंसी]. और अगर टिकट ले तो 11 11 ए पे ले।. [हंसी]. अच्छा 11 ए है वो नंबर।. [अचानक ज़ोर से सांस लेने की आवाज़]. हां एक नंबर. कि वो अलग तरह का दुख है। वो आदमी का कल. ही इंटरव्यू आया था अभी कि वहां मैं बच. गया। मैं रोज मरता हूं।. हां उसको कहां अच्छा लगता होगा? [नाक से की जाने वाली आवाज़]. इतना दुखी।. मौत से डरते हो आप? डर नहीं बिल्कुल नहीं।. जैसे सब घटनाएं होती हैं।. नहीं नहीं मुझे नहीं डर लगता।.
जैसे मैं अभी रामेश्वरम गया था। मैं प्लेन. में बैठा 3 घंटे की फ्लाइट थी। तो अब मेरे. मन में हर बार ख्याल आता है कि मैं लैंड. करूंगा।. फिर मेरे मन में इतनी भागदौड़ बड़ी जिंदगी. है। रात आप रात को कभी ट्रेवल करो रात को. आते वक्त। तो मुझे रियलाइज होता है कई बार. कि अगर इसमें से कोई इंसान ना रहे जिसको. मैं जानता हूं मैं या कोई और कुछ भी हो. जाए। ये सब कुछ ऐसे चलता रहेगा।. हां।. कुछ भी नहीं बदलेगा।. कुछ नहीं बदलता। और हम सब पागल हैं।. हम लोग अपने आप को टू सीरियसली लेते हैं।.
हमको चिल मारना चाहिए। खुश रहना चाहिए।. देन व्हाट इज आइडल लाइफ? अगर मेरे काम आज. मैं मर जाऊं तो मेरे से किसी को फर्क नहीं. पड़ने वाला।. नहीं ऐसा नहीं है। लेकिन ये कि दुनिया. नहीं बदल।. वैसे नहीं मतलब आपके दो चार पांच 10 15. लोग जो आपके करीबी 100 मान लीजिए मैक्सिमम. उनको फर्क पड़ेगा। दुनिया में कोई फर्क. नहीं पड़ेगा। बट हमारी पूरी जिंदगी दुनिया. के हिसाब से चली है। सो व्हाट शुड बी आइडल. लाइफ? मतलब मुझे कई बार यह सवाल मेरे मन. में आता है कि भगवान ने हमें धरती पर. क्यों भेजा काम करने के लिए? मेरा लॉजिक यह है कि मरेंगे तो आंख बंद.
होगी।. आंख बंद होते समय. अगर ये थॉट रहा वेल डन।. तो गेम बढ़िया है।. बट कैसे डिसाइड होगा वेल डन? पर्पस ऑफ. लाइफ क्या है? आपको पता चलेगा ना पर्पस ये तो. जैसा आप आपकी लाइफ का पर्पस क्या है? मेरी. लाइफ का पर्पस हैप्पीनेस है फॉर मसेल्फ. एंड फॉर पीपल अराउंड मी. एंड फिल्म मेकिंग इज हैप्पीनेस सो यू. मेकिंग इट्स इट. या हैप्पीनेस आई डोंट वर्क फॉर मनी आई.
डोंट वर्क फॉर एनीथिंग एल्स. पीपल से ना कि हम इस दुनिया में आए थे. बच्चों के साथ समय स्पेंड करने के लिए. परिवार बढ़ाने के लिए और बात करने के लिए. बट जो लोग काम करते हैं वो थोड़ा परिवार. में समझौता करते हैं जैसे अभी आपने कहा कि. अपनी मां को आप और दे सकते थे। सो. मैक्सिमम जो लोग काम बहुत करते हैं उनसे. मैंने यह समझाया कि उनकी लाइफ में एक. वैक्यूम है कि परिवार को थोड़ा कम दिया या. और दे सकते थे। वो तो हमेशा ही कम रहेगा।. शुभांकर. आप कितना भी कर लो वो कम रहेगा।.
मेरा. क्या है कि आप काम कितना करोगे और कितना. दोगे यह इस बात से तय होगा कि आपके जो. अपनी एंबिशंस की खुशी है उसकी डेफिनेशन. क्या है और अगर आपके एंबिशंस ही से आपको. सारी खुशी मिलती है तो फिर यह जो आपको घर. पर देने वाला है उसका उसका अफसोस होगा. नहीं कभी अगर आपको यह अफसोस हो रहा है. इसका मतलब आपकी एंबिशन आपकी खुशी से आगे. निकल गई है.
जो लोग वर्कोहलिक्स होते हैं ना हम. उनको इस बात का कभी दुख नहीं रहता कि. मैंने घर पे टाइम नहीं दिया।. ओके. कभी नहीं रहता।. जैसे मैंने पिछले 10 साल में लगातार काम. किया। बीटेक करने में काम किया। बट नाउ जब. मेरे आसपास के लोग सेटल डाउन हो गए, बच्चे. हो रहे हैं उनके वो उसमें इनवॉल्व हैं। दे. आर नॉट एज सक्सेसफुल एज आई एम। मेरे आसपास. के जो हमारा एक ग्रुप था मैं उनसे ज्यादा. सक्सेसफुल हूं। ज्यादा पैसे हैं, नाम है, सब कुछ है। बट वो फैमिली नहीं जो उनके पास.
है। सो उनका एक पॉइंट ऑफ व्यू है, मेरा एक. पॉइंट ऑफ व्यू जिसको लेकर सोचना शुरू. किया। दो मुझे लगता है अगर फिर पीछे. जाऊंगा।. सर आपकी सक्सेस की डेफिनेशन डिस्प्लेस्ड. है।. हम. अपनी खुशी डिसाइड कीजिए ना भाई।. मेरी खुशी मेरे काम थी। यही मैं कह रहा. हूं कि अगर मैं आज भी पीछे वापस जाऊं टाइम. पैरामीटर में तो शायद फिर मैं यही लाइफ. सुनता।. कितना काम और कितना पैसा? मनी इज़ नेवर इनफ।. इट्स नॉट फॉर मनी।. मुझे ये करना था।. नहीं नहीं ये तो करिए आप।. हां। पर अब अगर आपको इस बात की कमी महसूस. होती है जो समय आप अपने घर पे देते हैं.
तो इसका मतलब यह है कि आप अपने समय को सही. तरीके से विभाजित नहीं कर रहे. हम. घर का समय बढ़ाने की जरूरत है. और अगर घर का समय बढ़ाया जाएगा तो एंबिशन. को कम करने की जरूरत है. हम. तो वो बैलेंस ढूंढना पड़ेगा. और उस बैलेंस में अगर आपको लगा कि इधर कम. हो गया पीस ऑफ माइंड. पीस ऑफ़ माइंड. वो अदर नहीं करेगा वो. बिल्कुल नहीं करेगा. जैसे आप मान लीजिए आपने अपने परिवार. परिवार समय दिया हो। उस बीच में आपका कोई. दोस्त छोड़ उसकी चार फिल्में और चल गई।.
तो क्या हुआ? वो आपको परेशान नहीं करता? बिल्कुल नहीं। मैं तो दुआ करता हूं उसकी. चार फिल्में और चले।. या आप कहीं पीछे रह गए जैसे. देखो दोस्त नंबर वन और नंबर टू होता नहीं. कोई।. हम. मैं भी किसी से पूछूं नंबर वन पॉडकास्टर. कौन है? तो कोई कोई एक नाम देगा, कोई. दूसरा नाम देगा।. तो सब की फिल्में हिट होनी चाहिए। हम. सब खुश रहने चाहिए और मेरी पिक्चर भी उठनी. चाहिए। मैं भी खुश रहना चाहिए। इतनी सिंपल.
है लाइफ।. तो हाउ यू डिफाइन लाइफ? लाइए आखिरी. क्वेश्चन रखता हूं। मैं जिंदगी. को जीने का या जिंदगी का पर्पस या जिंदगी. की हैप्पीनेस, सैडनेस हाउ यू सी दिस लाइफ. थिंग? आई सेड नो आई शुड फील हैप्पी।. डूइंग व्हाट आई एम डूइंग? इज ऑल दैट आई केयर अबाउट? नथिंग मोर नथिंग लेस।. आई शुड नॉट हैव समथिंग नैगिंग कि मैं यह. नहीं कर रहा हूं। देन आई विल डू इट।.
जैसे आप कर रहे हो देश में ट्रेवल करके।. हां, बहुत टायरिंग है। आई एम नॉट वेरी. यंग। बट इट्स वेरी टायरिंग व्हाट आई एम. डूइंग। बट इट्स ग्रेट प्लेजर। आई लुक. फॉरवर्ड टू एव्री ड्राइव ऑफ फाइव आवर्स टू. गेट टू अनदर सिटी। एंड देन मीट 150. स्ट्रेंजर्स टायरिंग टू टॉक टू 150. स्ट्रेंजर्स अ डे. एंड देन आई डोंट लाइक गेटिंग क्लिक आई एम.
वेरी अनकंफर्टेबल इन फ्रंट ऑफ द कैमरा आई. एम डूइंग दिस बिकॉज़ आई हैव सॉर्ट ऑफ़. फॉरगॉटन दीज़ फेलोज़. बट आई डू ऑल ऑफ़ दैट बिकॉज़ इट गिव्स मी. हैप्पीनेस बिकॉज़ यह मैं करने निकला था. और ये मैं कर रहा हूं।. आई थिंक ये ब क्या होता है वो. आई डोंट थिंक वी आर इन अ रेस. नो इट वास नेवर अबाउट रेस इट इट्स अबाउट. कॉन्फ्लिक्ट बिटवीन योर चॉइससेस. नो यू जस्ट सेड कि मेरे दोस्त की चार. फिल्में हिट हो गई.
हां वो इसलिए शायद क्योंकि आसपास जो जैसे. कुछ कहानियां सुनी आपने. हां. उस कहानी में आपने सुना कि जो रुका उसको. शायद फिर सेकंड चांस नहीं मिला. यू आर द स्टोरी मैन. यू आर द स्टोरी यू विल राइट योर स्टोरी. स्टोरी एंड मेक श्योर इट्स एक्स्पेंरी।. सो इट वास नॉट नेवर अबाउट कि कोई और क्या. कर रहा है। वो तो कभी नहीं था।. योर स्टोरी हैज़ टू बी ब्यूटीफुल।. ट्रू. 40 इयर्स आफ्टर यू आर डेड पीपल शुड से. व्हाट अ लाइफली ही लिव्ड मैन।.
ही डीड दिस फॉर हिज़ वाइफ, ही डिड दिस फॉर. हिज़ पेरेंट्स, ही डिड फॉर हिज़ फ्रेंड्स, एंड ही डिड अ वंडरफुल जॉब, एंड ही डाइड. वेरी हैप्पी, ही वाज़ ऑलमोस्ट स्माइलिंग. व्हेन ही डाइड।. 70 इयर्स।. व्हाट 70 इयर्स? 70 साल बाद? नो 40 इयर्स आफ्टर योर डेथ आई एम सेइंग. अच्छा ओके. हां. डन हां ठीक है. मौत के 40 साल बाद लोग ये कहानी सुनाने. चाहिए कि मुस्कुराता वो मरा था यार वो ऐसा. लग रहा था मुस्कुरा रहा है एक्चुअली. मुस्कुरा रहे थे वो लोग जिनका चेहरा देख. के लगता है मरे हुए कि ये मुस्कुरा रहा है.
किसी की जिंदगी आपको लगती है ऐसी जिसको. देख के आप कहते हो यार व्हाट अ लाइफ ही. हैड लॉट ऑफ़ पीपल अराउंड मी. जैसे कोई माय फ्रेंड. नोन में कोई ऐसा जिसको देख के आपने गलत हो. क्या जिंदगी थी ऐसी ऐसी जिंदगी ऐसी मौत. चाहिए. आई थिंक. आउटसाइड ऑफ शाहरुख सक्सेस।. शाहरुख की सक्सेस को निकाल के बात करते. हैं। ऐसा मानते हैं शाहरुख एक एवरेज हिट. एक्टर है। द लाइफ दैट ही लीड्स गिव्स टाइम. टू हिज फैमिली वर्क्स लाइक अ डॉग वर्क्स. आउट ईट्स वेल इज़ नाइस टू पीपल पीपल आर.
नाइस टू हिम व्हेन ही गेट्स एंग्री। यू नो. ही इज़ एंग्री एंड ही मैनिफेस्ट्स इट।. वेरी गुड। राउंडेड वेल राउंडेड इवन. आउटसाइड ऑफ ह स्टारडम एंड ह मनी एंड ह. आईपीएल टेक इट आउट इवन देन नाइस सो मच टू. लर्न फ्रॉम इट. लवली टॉकिंग टू यू सर. सेम यस सर. बहुत सारी बातें हुई किसको कितना आनंद. आएगा वो उन पे छोड़ देता हूं मैं मुझे. आनंद आया आपसे संवाद करके.
अपने को ही आना चाहिए बॉस अगर अपने को आता. है ना तो सामने वाले को भी आता है ऐसा. मैंने देखा है. हां [हंसी] तो बहुत-बहुत शुक्रिया आपका और. बाकी आपकी 40 फिल्मों में 40 बार आपका. इंतजार रहेगा जी सर मैं आऊंगा। थैंक यू सो. मच।.
